Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 11 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 96

मेहता : घबराओ मत बेटी.... मैं यहाँ तुम्हे कोई नुक्सान पहुँचाने नहीं आया हूँ.... मैं एक गरीब टैक्सी ड्राइवर हूँ.... तुम्हारी तरह मेरी भी एक बेटी है... जो की ठीक उसी तरह बीमार है जिस तरह तुम हो.... वो ठीक हो सकती है मगर डॉ बिना पैसे के उसका इलाज नहीं कर रहे.... मैंने डॉ की बहुत मिन्नत की उनके हाथ पेअर जोड़े मगर उन कमीनो ने मेरी एक न सुनी मुझे गरीब भिकारी कह के हॉस्पिटल से बहार कर दिया.... मैं ऊपर वाले से अपनी बेटी के इलाज के लिए दुआ मांग रहा था की तभी शायद उसने मेरी दुआ सुन ली और ठीक उसी वक़्त तुम यहाँ आ गयी.... अब मेरी बेटी का इलाज होगा.... वो ठीक हो जायेगी.... बस उसके लिए तुम्हे मेरी मदत करनी होगी....

महक हैरत और दर से मेहता को देख रही है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर मेहता कह क्या रहा है.... जब उसके पास पैसे नहीं है तो कैसे उसकी बेटी का इलाज होगा... और इस में मैं जो खुद सहारे के लिए दूसरों पे निर्भर हूँ उसकी कैसे मदत कर सकती हूँ....?????

अब आगे....

महक अभी ये सोच hi रही होती है की तभी मेहता उसे उठा के सामने पड़ी व्हीलचेयर पे बैठा देता है.... और उसकी जगह अपनी बेटी को लेता देता है.... फिर महक की फाइल में से उसके रिपोर्ट्स और पेपर्स निकाल के उस जगह अपनी बेटी के रिपोर्ट्स और पेपर्स रख देता है.... सिर्फ कवर पे उसके नाम को चोर के वो बाकी सारे पेपर्स को बदल देता है....

मेहता महक से : बेटी मैं जो कर रहा वो गलत है मगर फिर भी मुझे ये करना होगा.... अपनी बेटी के इलाज के लिए मुझे ये करना होगा.... मगर फ़िक्र मत करो बस 6 महीने की बात है.... 6 महीने बाद जब मेरी बेटी ठीक हो जायेगी तब मैं तुम्हे यहाँ ला के तुम्हारा इलाज करवाऊंगा.... तब तक तुम्हे अपनी बेटी की तरह अपने घर में रखूँगा.... तुम्हे कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा....

उसकी बात सुन के महक बेहद दर जाती है और रोने लगती है.... मगर मेहता पे महक के रोने का कोई असर नहीं हो रहा है.... वो महक को लेजा के हॉस्पिटल के एक रूम में छुपा देता है और सुबह होने का इंतज़ार करने लगता है....

वो ये तसाली कर लेना चाहता है की वो लोग उसकी बेटी को महक समझ के इलाज के लिए वहां से ले जाए.... सुबह ठीक वैसा hi होता है जैसा की उसने सोचा था.... किसी को कुछ पता नहीं चलता की जिस महक को हॉस्पिटल से इलाज करवाने ले जा रहे हैं वो असली महक नहीं बल्कि मेहता की बेटी है....

जब वो लोग बाकी 5 पेशेंट्स के साथ मेहता की बेटी को भी गाडी में बैठा देते हैं तब मेहता सब से नज़रें बचा के महक को अपनी टैक्सी में दाल के उनके पीछे चल देता है.... वो उनका तब तक पीछे करता रहता है वो लोग स्पेशल हॉस्पिटल में मेहता की बेटी के साथ बाकी पेशेंट्स को एडमिट नहीं कर देते.... जब उसे इस बात की तसाली हो जाती है तब वो मुस्कान को साथ लेके वहां से अपने घर की तरफ चल देता है....

इधर प्रिंस अपने ऑफिस से काम पूरा करके सुनील उसके दिल्ली ऑफिस का मैनेजर को आगे का काम समझा के कुछ देर बाद सब फाइल्स ले के घर आने को कहता है.... फिर वहां से अपने दिल्ली वाले बंगलो की तरफ चल देता है.... रास्ते में उसे एक एंटीक की शॉप नज़र आती है....

प्रिंस : यार क्यों न सुल्तानगढ के घर की सजावट के लिए यहाँ से कुछ एंटीक चीज़ें खरीद लून....

ये सोच के वो कार को उस शॉप के पास रोक देता है और अंडर जा के वहां की चीज़ें देखने लगता है.... वहां उसे काफी चीज़ें पसंद आती हैं... वो बारीकी से हर एक चीज़ को देखता है और उसे घर के हिसाब से सेलेक्ट करने लगता है की किस जगह पे कौनसी चीज़ अच्छी लगेगी.... वो वहां से काफी चीज़ें पसंद करता है और उसकी पेमेंट कर के अपने बंगलो का एड्रेस दे के उसे वहां पहुँचाने का कह के वहां से अपने बंगलो की तरफ चल देता है....

इधर मेहता महक को लेके अपने घर की तरफ जा रहा होता है की तभी रास्ते में उसे कुछ पुलिस वाले आती जाती हर कार को रोक के चेकिंग करते नज़र आते हैं.... ये देख मेहता की हालत खराब हो जाती है वो बुरी तरह से दर जाता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की क्या करे....? पहले वो सोचता है की आगे बढ़ा जाए अगर किसी ने रोका तो कह दूंगा की ये मेरी बेटी है.... लेकिन अगर उन्हें शक हो गया तो....? कहीं ऐसा न हो की साड़ी बात सामने आ जाए और ये लोग मेरी बेटी को वहां से निकाल के इसे वहां एडमिट करवा दे.... और मुझे इसको किडनैप करने के जुर्म में जेल में दाल दे.... अगर ऐसा हुआ तो मेरी बेटी का क्या होगा.... मेरे सिवाए उसका है hi कौन.... अगर मुझे जेल हो गयी तो मेरी बेटी मर जायेगी.... नहीं ऐसा नहीं होगा... मैं ऐसा नहीं होने दूंगा... मुझे कुछ भी करके इसे कहीं छुपाना होगा.... फिर जब पुलिस वाले यहाँ से चले जाएंगे तब मैं इसे यहाँ से ले जाऊँगा.... हाँ यही ठीक रहेगा... मगर इसे छुपाऊं कहाँ... ये कोई माचिस की डिब्बी नहीं जीती जागती लड़की है.... इसे छुपाने के लिए ऐसी जगह चाहिए जो सब की नज़र से दूर रहे.... कहाँ मिलेगी ऐसी जगह....? कहाँ...? सोच जल्दी मेहता इस से पहले की वो पुलिस वाले तुझ तक पहुँच जाए.... कुछ सोच....

मेहता इधर उधर देखने लगता है इस उम्मीद से की उसे कहीं न कहीं कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ वो महक को छुपा सके... तभी उसे कुछ नज़र आता है और उसकी आँखों में चमक और होंठों पे मुस्कान आ जाती है....

वो फ़ौरन कार को साइड लगा के महक को बहार निकाल के उस तरफ जाता है... ये एक एंटीक शॉप है.... वहां कुछ लोग बॉक्स में मैनेक्विन को पैक करने के बाद अंडर जा रहे थे.... मेहता चुपके से उनमे से एक बॉक्स को खोलता है और उसमे से एक मैनेक्विन को निकाल के उसकी जगह महक को लेटने लगता है... मगर हरबड़ी में महक उसके हाथ से छूट के बॉक्स में गिर जाती है.... जिस से उसके सर पे चोट लग जाती है.... और वो बेहोश हो जाती है.... ये देख मेहता बुरी तरह से दर जाता है.... वो इधर उधर देखता है की कहीं उसे किसी ने देखा तो नहीं तभी उसे कुछ पुलिस वाले उसकी तरफ आते हुए नज़र आते हैं.... वो फ़ौरन बॉक्स को बंद कर के दूसरी तरफ निकल जाता है.... पुलिस वाले तेज़ी से उसकी तरफ आते हैं वो उसे आवाज़ दे के रुकने को कहते हैं मगर मेहता दर के मारे और तेज़ी से चलने लगता है... पुलिस वाले आगे बढ़ के उसे रोक ते हैं....

हवलदार : अबे तू बहरा है क्या...? साले कब से तुझे आवाज़ लगा रहा हूँ मगर तू है की सुनता hi नहीं....

मेहता बुरी तरह से डरा हुआ है... वो ये अच्छे से जानता है की अगर वो पकड़ा गया तो क्या हो सकता है.... मगर उसे जो करना था वो उसने कर दिया है.... अपनी बेटी को इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंचा दिया और महक को उस बॉक्स में दाल के खुद से दूर कर दिया.... उसे ऐसा करते किसी ने नहीं देखा.... उसे ऐसा कुछ नहीं करना और कहना चाहिए जिस से इन पुलिस वालों को उस पे शक हो.... वो फ़ौरन खुद को नार्मल करता है और घूम के उन पुलिस वालों को देख के कहता है....

मेहता : साहब मैंने आपकी आवाज़ सुनी तो थी मगर मैं रुका नहीं.... मैं मजबूर था वो क्या है की पुलिस की आवाज़ सुन के सब कुछ तो रुक जाता है मगर पेशाब ऐसी चीज़ है जो यामयाज के रोके भी नहीं रूकती.... बस वही करने जा रहा था.... अगर आप की इजाज़त हो तो कर आऊं.... बड़ी ज़ोर की लगी है... अगर एक पल भी मैं यहाँ और रुका तो देर हो जायेगी... और साथ hi यहाँ बार आने से कोई नहीं रोक पायेगा....

हवलदार : नहीं बे यहाँ नहीं करना.... जा जल्दी से जा के कर आ....

मेहता फ़ौरन आगे बढ़ के शौचालय में घुस जाता है... और पिशाब करने लगता है.... दर के मारे उसे सच में ज़ोर की पेशाब लग गयी थी....

हल्का होने के बाद न चाहते हुए भी वो हवलदार के पास जाता है...

मेहता : जी कहिये जनाब.... मुझे क्यों आवाज़ दे रहे थे... कुछ काम था क्या...?

हवलदार : हाँ वो वहां हमारी गाडी खराब हो गयी है और साहब को अर्जेंट कहीं जाना है.... तू साहब को वहां चोर दे....

मेहता मरता क्या न करता उसे हवलदार की बात मान नई पड़ती है.... वो उन्हें न नहीं कह पाटा.... न चाहते हुए भी वो इंस्पेक्टर को ले के वहां से ये सोच के चल देता है की इंस्पेक्टर को चोर के जल्द से जल्द यहाँ आ के महक को यहाँ से ले जाऊँगा....

मगर उसे आने में काफी वक़्त लग जाता है.... जब वो यहाँ आता है तब उसे वहां एक भी बॉक्स नहीं नज़र आता.... बॉक्स को वहां न पा के उसकी हालत खराब हो जाती है.... वो फ़ौरन उस एंटीक शॉप में जाता है और उन बॉक्स के बारे में पूछता है... वहां से उसे पाटा चलता है की बहार पड़े सारे बॉक्सेस की डिलीवरी हो गयी है.... उनमे से कुछ कार्गो से दूसरे शहर भेज दिए गए hain....aur कुछ को किसी दूसरी जगह भेजवा दिया गया है.... ये सुन ते hi उसके होश उड़द जाते हैं.... उसे समझ नहीं आता की वो क्या करे....

मेहता मन में : हे ऊपर वाले ये क्या हो गया....? ये मैंने क्या कर दिया....? अपनी बेटी का इलाज करवाने के चक्कर में मैंने उस मासूम के साथ क्या कर दिया....? कहाँ होगी वो....? क्या होगा उसके साथ....? कहीं उस बॉक्स में ज़्यादा देर रहने से वो मर गयी तो...? नहीं नहीं वो मर नहीं सकती.... ऊपर वाला इतना निर्दयी नहीं हो सकता... वो उस मासूम के साथ ऐसा नहीं कर सकता.... वो ज़रूर बच जायेगी... उसे कुछ नहीं होगा.... लेकिन अगर उसे किसी ने देख लिया और उसके साथ कुछ गलत किया तो.... वो मासूम इस हाल में है की न किसी से अपना बचाव कर सकती है और न hi अपने बचाव के लिए किसी को बुला सकती है.... जाने अब क्या होगा उसके साथ.... हे ऊपर वाले अब एक तेरा hi सहारा है उस मासूम की रक्षा करना... उसे कुछ नहीं होने देना....

ये सोचते हुए मेहता खुद को महक का दोषी मान के भारी मन से आँखों में आंसू लिए वहां से चल देता है... वो छह के भी कुछ नहीं कर सकता.... अब सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है.... जाने महक की किस्मत उसके साथ क्या करने वाली है...? ये आगे पता चलेगा.... फिलहाल चलते हैं प्रिंस के पास और देखते हैं की इस वक़्त वो क्या कर रहा है....?

प्रिंस घर पहुँच के एक एक कर के अपने सभी दोस्तों को कॉल करके उनका हाल चाल पूछता है फिर सुनील को जल्दी आने का कह के फ्रेश होने बाथरूम में चला जाता है... फिर कुछ देर बाद नेमत को कॉल करता है....

नेमत : तो जनाब सुल्तानगढ आ गए....

प्रिंस : नहीं अभी नहीं.... अभी मैं दिल्ली में हूँ....

नेमत : दिल्ली में मगर क्यों....?

प्रिंस : वो क्या है की अभी काम पूरा नहीं हुआ है.... यहाँ मुझे 2 दिन और लग जाएंगे.... 2 दिन बाद मैं यहाँ से सुल्तानगढ के लिए निकलूंगा....

नेमत : हाय ये 2 दिन तुम्हारे बिना कैसे गुज़रेंगे....?

प्रिंस : यार उदास मत हो... बस 2 दिन की hi तो बात है यूँ गुज़र जाएंगे.... 2 दिन में मैं वहां आ जाऊँगा....

नेमत : तू बस हाँ कह दे.... मैं अभी वहां पहुँच जाउंगी....

प्रिंस : जी नहीं कोई ज़रुरत नहीं है यहाँ आने की.... तुझे मैंने जो काम दिया था उसपे ध्यान दे.... जल्द से जल्द मेरे परिवार के बारे में पता कर....

नेमत : हाँ यार मैं उसी में लगी हुई हूँ.... मगर क्या करूँ कुछ पता hi नहीं चल रहा.... जाने तेरे परिवार के लोगों को आसमान खा गया या ज़मीन निगल गयी.... उनके बारे में कुछ पता hi नहीं चल पा रहा है.... समझ नहीं आ रहा है की तेरे परिवार के लोगों को ढूंढें तो कैसे ढूंढें.... खुल के किसी से पूछ भी नहीं सकते.... तेरे नाम (प्रिंस) से हर जगह पता करने की कोशिश की मगर किसी को कुछ नहीं पता.... कुछ का तो ये तक कहना है की प्रिंस नाम का कोई बच्चा कभी यहाँ किसी स्कूल में था hi नहीं.... समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ....?

प्रिंस : यार हम ऐसे हिम्मत नहीं हार सकते... हम को कुछ न कुछ करके मेरे परिवार को ढूंढना hi होगा....

नेमत : ठीक है यार सोचती हूँ कुछ और....

प्रिंस : चल अब फ़ोन रखता हूँ....

नेमत : Bye स्वीटीपीए...

प्रिंस : अबे ये स्वीटीपीए का क्या मतलब है....?

नेमत : स्वीटीपीए उसे कहते हैं जो दिल के करीब हो.... जैसे की तू....

प्रिंस : यार पहले hi मेरी किस्मत में लडकियां क्या काम है जो तू भी उनमे शामिल होना छह रही है....

नेमत : अबे कितनी बार मैं बताऊँ तुझे की मैं तुझसे जुड़ा नहीं हूँ... मगर तू है की भूल जाता है.... अब अगर फिर कभी ये कहा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी...

प्रिंस : चल चल ठीक है... अब ज़्यादा नाटक मत कर और फ़ोन रख....

नेमत : अरे रुक पहले ये बता की तू योग साधना और वर्कआउट तो कर रहा है न... ऐसा तो नहीं की वहां जाने के बाद तू ने ये सब चोर दिया हो....

प्रिंस : सब कर रहा हूँ मेरी माँ.... अब फ़ोन रख....

नेमत : मैं तेरी माँ नहीं हूँ समझा... मैं नमः हूँ नेमत....

प्रिंस : हाँ हाँ पता है तू नेमत है.... छोटी सी पीली चड्डी वाली नेमत....

नेमत : छोटी पीली चड्डी मतलब....?

प्रिंस : सामने देख तुझे सब पता चल जाएगा....

प्रिंस की बात सुन के जब नेमत सामने देखती है तो खुद को आईने में देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... सामने वो खुद को छोटी सी पीली पंतय पहने पाती है.... वो फ़ौरन बीएड पे पड़ी चादर से खुद को धक् लेती है....

नेमत : साले कमीने.... तुझे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए....? अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल करते हुए....?

प्रिंस हस्ते हुए : हहहहहहह.... ये बात तेरे मुँह से अच्छी नहीं लगती.... तू भी तो अपनी पावर्स से कुछ भी करती रहती है... भूल गयी कैसे उस दिन तू पावर्स के ज़रिये मुझे वहां से ड्रीमवोर्ल्ड ले गयी थी और मुझे पानी में डुबो रही थी....

नेमत : वो मैं तेरे भले के लिए कर रही थी.... मगर यहाँ तू अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल कर रहा है... एक शरीफ और खूबसूरत लड़की को इस हालत में देखना क्या अच्छी बात है....?

प्रिंस : अबे तुझे देखूं या खुद को देखूं एक hi बात है.... तू कौन सा मुझसे जुड़ा है.... न hi तू कोई गैर है... तू मेरा hi एक हिस्सा है और अपने हिस्से को देखने में कैसी शर्म....

प्रिंस की बात सुन के नेमत खामोश हो जाती है.... उसे समझ नहीं आ ता की वो प्रिंस की बात का क्या जवाब दे.... क्यों की वो जो कह रहा है वो एक तरह से ठीक hi है.... मगर फिर भी नेमत तो नेमत है वो कहाँ किसी के आगे चुप रहने वाली है.... भले hi वो प्रिंस hi क्यों न हो....

नेमत : अबे कमीने तुझे न सही मगर एक लड़की होने के नाते मुझे शर्म तो आणि hi है न.... और अपने हिस्से को कोई भला ऐसी नज़र से देखता है क्या....?

प्रिंस : नज़र तो नज़र होती है उसमे ऐसा वैसा कुछ नहीं होता और तू मेरा hi हिस्सा है तुझे मैं जैसे चाहे देखूं इसमें मुझे कोई नहीं रोक सकता... तू भी नहीं समझी...

नेमत : तू बस यहाँ आ जा फिर देख मैं तेरे साथ क्या करती हूँ...

प्रिंस : चल अब फ़ोन रख मुझे बहुत काम है जिसे जल्द hi पूरा करना है.... ताकि मैं जल्द से जल्द वहां आ सकूँ.... और तुझे देख सकूँ....

नेमत : तू बस एक बार यहाँ आ जा फिर बताती हूँ मैं तुझे....

प्रिंस : क्या बताएगी....?

नेमत : जब तू यहाँ आएगा तब खुद जान जाएगा.... चल Bye....

इस से पहले की प्रिंस उस से कुछ पूछता... नेमत कॉल कट कर देती है....

ठीक तभी किसी की चीख सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????

अगला अपडेट इस से 3 गुना बड़ा है और साथ hi काफी मज़ेदार भी....

अभी के लिए अलविदा दोस्तों.....

फिर मुलाक़ात होगी अगले महा मेगा अपडेट पे....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 97 महा मेगा अपडेट

प्रिंस : हाँ हाँ पता है तू नेमत है.... चल अब फ़ोन रख मुझे बहुत काम है जिसे जल्द hi पूरा करना है.... ताकि मैं जल्द से जल्द वहां आ सकूँ....

नेमत : तू बस एक बार यहाँ आ जा फिर बताती हूँ मैं तुझे....

प्रिंस : क्या बताएगी....?

नेमत : जब तू यहाँ आएगा तब खुद जान जाएगा.... चल Bye....

इस से पहले की प्रिंस उस से कुछ पूछता... नेमत कॉल कट कर देती है....

ठीक तभी किसी की चीख सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????

अब आगे....

वो फ़ौरन भाग के वहां जाता है.... वहां सुनील "दिल्ली ऑफिस का मैनेजर" को देख के उसे बड़ी हैरानी होती है... जो दर के मारे थार थार कांप रहा है.... प्रिंस उसे आवाज़ देता है.... मगर सुनील को जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा है.... इस वक़्त वो बुरी तरह से डरा हुआ जो है.... प्रिंस के हिलने से उसके होश आता है और वो एक बार फिर से चीख उठता है....

सुनील : ल.... ल.... Laaaaaaaaaaaaashhhhhh.....

प्रिंस : क्या बक रहा है...?

सुनील : मैं बक नहीं रहा हूँ... सच में वो लाश है....

प्रिंस : अच्छा तो बता कहाँ है लाश....?

सुनील सामने पड़े लम्बे से बॉक्स की तरफ इशारा करके के कहता है....

सुनील : W....w....wo रही लाश.....

प्रिंस : अबे पागल वो लाश नहीं बल्कि पुतला है....

सुनील : नहीं सर जी... वो.... वो.... कोई पुतला नहीं बल्कि इंसानी लाश है....

प्रिंस : कैसी पागलों जैसी बात कर रहा है.... ये वो मार्बल का पुतला ( मैनेक्विन ) है जिसे मैंने एंटीक शॉप से मंगवाया है.... सुल्तानगढ के घर को सजाने के लिए.... ऐसे दो और हैं उन बॉक्स में....

सुनील : ये कोई पुतला नहीं बल्कि इंसानी लड़की की लाश है.... आप चाहो तो खुद देख लो....

सुनील की बात सुन के प्रिंस उस पुतले के बेहद करीब जा के उसकी तरफ देखता है वो बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : ये तो मैनेक्विन नहीं बल्कि...

सुनील : लाश है...

प्रिंस : हाँ... मेरा मतलब है नहीं.... मगर ये कैसे हो सकता है.... मैं तो पुतला hi लाया था.... ये लाश में कैसे बदल गयी... ज़रा देखूं तो....

सुनील : ये आप क्या कर रहे हैं.... लाश को भी भला कोई छू के देखता है क्या....?

प्रिंस इसकी बात को इग्नोर कर के उस लाश ी मैं लड़की को देखता है....

प्रिंस : अबे ये कोई लाश नहीं बल्कि ज़िंदा लड़की है.... शायद बेहोश है....

जे हाँ दोस्तों ये लड़की और कोई नहीं बल्कि महक है....

फिर प्रिंस उसके सर पे लगे खून को देख के कहता है....

प्रिंस : जल्दी से डॉ को बुला के ला.... जा जल्दी....

प्रिंस की बात सुन के सुनील फ़ौरन डॉ को बुलाने चला जाता है....

कुछ देर बाद डॉ वहां आ के महक का चेक उप करते हैं....

प्रिंस : डॉ ये ज़िंदा है न....

डॉ : हाँ मगर इस वक़्त बेहोश है... शायद सर में चोट लगने की वजह से ये बेहोश हो गयी है.... मैंने इसकी ड्रेसिंग करके इसे इंजेक्शन लगा दिया है... कुछ hi देर में इसे होश आ जाएगा.... वैसे ये है कौन और यहाँ इस ताबूत ( लकड़ी का बॉक्स जिसमे मैनेक्विन को पैक कर के लेजाया जाता है ) में क्या कर रही है....? और इसकी ये हालत कैसे हो गयी....?

प्रिंस : नहीं पता डॉ.... वो क्या है की आज लाइफ में पहली बार मैंने इसे देखा है.... मैं तो इसे जानता तक नहीं.... ये कौन है....? कहाँ से आयी है....? मुझे कुछ नहीं पता.... मैंने तो उस दूकान में मैनेक्विन को पसंद कर के घर भेजवाने को कहा था न की किसी लड़की को....

डॉ : ये आप क्या कह रहे हैं...?

प्रिंस : वो hi जो सच है.....

डॉ : इसके होश में आने के बाद hi पता चलेगा की ये कौन है.... और यहाँ आयी कहाँ से....?

कुछ देर बाद महक को होश आ जाता है..... वो सामने खड़े दो अनजान शख्स ( प्रिंस और डॉ ) को देख बुरी तरह से चौंक जाती है.... दर के मारे उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

प्रिंस : डॉ इसे होश आ गया....

प्रिंस की बात सुन के सुनील फ़ौरन आगे बढ़ के उसके पास जाता है और उसे से पूछता है....

सुनील : ा लड़की..... कौन है तू और यहाँ क्या कर रही है....?

सुनील को करीब आते देख और उसकी तेज़ आवाज़ सुन के महक का रोना तेज़ हो जाता है....

जिसे देख प्रिंस सुनील को उस से दूर हटा के कहता है....

प्रिंस : सुनील तू पागल तो नहीं हो गया....? ये क्या कर रहा है....? दूर हैट उस से तू उसे डरा रहा है....

प्रिंस उसके करीब जा के उस से पूछता है....

प्रिंस : देखो डरो नहीं.... हम तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचाएंगे.... बस ये बता दो की तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रही हो....? और तुम्हारी ये हालत कैसे हुई....?

महक प्रिंस की बात का कोई जवाब नहीं दे रही है बस चुप चाप रोये जा रही है....

प्रिंस बार बार उस से एक hi सवाल कर रहा है और वो जवाब देने के बजाये बस उसे देख के रोये जा रही है... उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं....

डॉ काफी देर से महक को देख रहा है... उसे उसमे कुछ अजीब सा महसूस होता है.... वो आगे बढ़ के उस को चेक करता है.... फिर जो कहता है उसे सुन के प्रिंस के साथ साथ सुनील भी बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : ये आप क्या कह रहे हैं डॉ....?

डॉ : वो hi जो सच है.... ये लड़की बोल नहीं सकती.... न hi ये अपने दम पे हिल सकती है... इसके शरीर में जान तो है मगर फिर भी ये बेजान है...

प्रिंस : मतलब....

सुनील : मतलब ये की डॉ साहब सठिया गए हैं.... तभी पागलों जैसी बात कर रहे हैं....

डॉ : जी नहीं.... मैं पागल नहीं हुआ हूँ बल्कि वो hi कह रहा हूँ जो सच है.... और सच ये है की ये लड़की ज़िंदा तो है मगर फिर भी ज़िंदा नहीं.... ये एक लाश की तरह है... ये सब सुन सकती है समझ सकती है.... महसूस भी कर सकती है.... मगर न तो ये अपने दम पे हिल सकती है और न hi कुछ बोल सकती है....

प्रिंस : ये कैसे हो सकता है....?

डॉ : हो सकता है.... सर में गहरी चोट लगने की वजह से ऐसा हो सकता है... और इसे देख के यही लग रहा है जैसे की इसके सर में कभी बेहद गहरी चोट लगी होगी जिसकी वजह से इसके साथ ऐसा हुआ है....

प्रिंस : मगर इसे सर में जो चोट लगी है उसे देख ऐसा तो नहीं लगता की चोट इतनी गहरी है.... जिस से इसके साथ ये हो जाए....

डॉ : ये वो चोट नहीं है... और अगर मैं गलत नहीं हूँ तो इसके सर में जो चोट लगी है वो काफी साल पहले लगी थी... जब ये बहुत छोटी थी...

प्रिंस : मतलब इसके बचपन में इसके सर में चोट लगने की वजह से इसके साथ ऐसा हुआ है....

डॉ : हाँ शायद....

सुनील : ये तो मुसीबत हो गयी.... अब ये कैसे पता चलेगा की ये कौन है और कहाँ से आयी है....?

प्रिंस : हाँ यार बात तो सही है... अब हम क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा है....

डॉ : एक काम करो पुलिस के इसकी खबर दे दो.... वो इसके घर वालों का पता लगा लेंगे....

सुनील : हाँ ये ठीक रहेगा.... मैं अभी पुलिस को कॉल करके बुला लेता हूँ....

पुलिस का नाम सुन के महक दर के मारे और तेज़ रोने लगती है.... प्रिंस से उसका रोना देखा नहीं जाता वो उसके करीब जा के उसके पास बैठ जाता है और प्यार से उसे कहता है....

प्रिंस : डरो नहीं... हम तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचाएंगे.... हम को अपना हमदर्द समझो....

प्रिंस उसे समझने की बहुत कोशिश करता है मगर वो सुन hi नहीं रही... न hi उसका रोना बंद हो रहा है....

प्रिंस उसका हाथ अपने हाथों में ले के प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहता है....

प्रिंस : देखो.... डरो मत.... मुझे अपना दोस्त समझो.... यकीन मानो मेरे साथ तुम मेहफ़ूज़ हो.... मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा.....

प्रिंस के हाथ को अपने हाथों में महसूस करके और उसकी बात सुन के महक को उसपे जाने क्यों यकीन होने लगता है.... उसका दिल उसे कहता है की ये बुरा नहीं है.... इसकी बात मान ले... देख इसकी आँखों में सच्चाई और अपनापन साफ़ नज़र आ रहा है.... ये गैर हो भी अपना सा लगता है.... दर मत इस से ये कभी तुझे कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकता.... वो अपने दिल की बात मान लेती है... उसका रोना बंद हो जाता है....

प्रिंस उसके आंसू पॉच के कहता है...

प्रिंस : That's लिखे ा गुड गर्ल....

तभी वहां पुलिस आ जाती है.... इंस्पेक्टर सब का बयान लेता है और उस एंटीक शॉप के ओनर बाबूभाई वो फ़ौरन वहां आने को कहती है....

बाबूभाई : जी सर आपने मुझे यहाँ क्यों बुलवाया है....?

इंस्पेक्टर : क्या बात है बाबूभाई आज कल बड़ी तैराकी कर रहे हो... एंटीक चीज़ें और पुतले को बेचते बेचते अब लडकियां भी बेचने लगे....

बाबूभाई : इंस्पेक्टर साहब ये कैसा घटिया और वाहियात इलज़ाम आप मुझपे लगा रहे हैं.... मैं एक इज़्ज़तदार इंसान हूँ.... ऐसे घिनोने और नीच काम मैं नहीं करता ये आप भी अच्छे से जानते हैं.... फिर भी ऐसा कह रहे हैं....

प्रिंस : ये अगर आपने नहीं किया तो फिर किसने किया....? अब ये लड़की अपने आप तो इस बॉक्स में नहीं आ सकती न....

बाबूभाई : ये बात तो मेरी भी समझ में नहीं आ रही है की ये लड़की इस बॉक्स में आयी कहाँ से....? क्यों की इस बॉक्स में मैंने खुद अपने हाथों से मैनेक्विन को दाल के पैक किया था.... फिर इसमें लड़की कहाँ से आ गयी....?

इंस्पेक्टर : फिर तो रास्ते में कुछ हुआ है.... इसे यहाँ ले के कौन आया था....?

बाबूभाई : जी वो क्या है की आज डिलीवरी ज़्यादा थी तो मेरे बेटे और बेटी ने आज की कुछ डिलीवरी की थी... जिसमे से ये एक है... इसे मेरी बेटी दीपा ने यहाँ डिलीवर किया था.... जो की निहायत hi शरीफ है वो ऐसा कभी नहीं कर सकती....

इंस्पेक्टर : आप अपनी बेटी को यहाँ बुलवाइए अब वो hi कुछ बता सकती है....

बाबूभाई अपनी बेटी को वहां बुलवाते हैं....

दीपा : जी बाबा आपने बुलाया कुछ काम था क्या....?

इंस्पेक्टर : जी मुझे आपसे काम था... आप से उस लड़की के बारे में पूछना था जिसे बॉक्स में पैक करके आपने यहाँ डिलीवर किया था....

दीपा : ये आप क्या कह रहे हैं....? आप होश में तो हैं.... हम मैनेक्विन बैचते और डिलीवर करते हैं लड़कियों को नहीं.... और ये कौन है मैं तो इसे जानती तक नहीं.... तो भला मैं इसे यहाँ क्यों laaungi....wo भी बॉक्स में पैक कर के....

प्रिंस : यही बात तो हम सब जान न चाहते हैं की आखिर ये कौन है और यहाँ क्यों और कैसे आयी...?

इंस्पेक्टर : जो भी है ये आयी तो इस बॉक्स में hi है....

दीपा : तो आप क्यों नहीं इस लड़की से पूछ लेते आपके सामने है... इस से पूछिए ये आप को सब बता देगी की ये कौन है और यहाँ कैसे आयी....?

डॉ : ये कुछ नहीं बता सकती... न hi ये बोल सकती है और न hi अपना जिस्म का कोई हिस्सा हिला सकती है.... ये ज़िंदा तो है मगर फिर भी ज़िंदा नहीं है....

दीपा : तो ये पता करना आपका काम है की ये यहाँ कैसे आयी.... कहीं ऐसा तो नहीं की ये सब इनका ( प्रिंस की तरफ इशारा करके ) किया धरा है और खुद को बचने के चक्कर में ये अपना किया हम पे दाल रहे हैं....

प्रिंस : ये क्या बकवास कर रही हो....? तुम जानती भी हो की किसपे क्या इलज़ाम लगा रही हो.... मैं भला ऐसा क्यों करूँगा....?

दीपा : तो हम भला ऐसा क्यों करेंगे.... आप hi बताइये....?

इंस्पेक्टर : ये भी सही है और आप भी सही हैं मगर बात अब भी वहीँ है की ये कौन है और यहाँ कैसे आयी...?

दीपा : ये पता करना आपका काम है हमारा नहीं.... बिना बात पे कुछ कहने से पहले सबूत जमा कीजिये जब मिल जाए तब बात कीजियेगा... चलिए बाबा....

ये कह के दीपा अपने बाबा को साथ लेके वहां से चली जाती है....

उनके जाने के बाद....

प्रिंस : तो इंस्पेक्टर साहब अब आप hi बताइये की हम क्या करें....?

इंस्पेक्टर : करना क्या है...? जब तक इसके बारे में कुछ पता नहीं चल जाता इसे आपको अपने पास रखना होगा....

फिर महक की फोटो खींच के....

इंस्पेक्टर : हम ने इसकी फोटो ले ली है... इस के या इसके परिवार के बारे में जैसे hi कुछ पता चलेगा हम आपको बता देंगे.... तब तक के लिए इसे आप अपने पास रखिये....

सुनील : ये क्या बात हुई इंस्पेक्टर साहब... मान न मान मैं तेरा मेहमान.... इसे अपने साथ ले जाने के बजाये आप इसे हमारे गले में क्यों दाल रहे हैं....?

इंस्पेक्टर : इसकी दो वजह है.... जैसी इसकी हालत है इसे न hi किसी आश्रम और न hi किसी हॉस्पिटल में अकेला छोरा जा सकता है.... वहां इस मासूम के साथ कुछ भी गलत हो सकता है.... ये इतनी लाचार है की अपना बचाव भी नहीं कर सकती... अरे ये तो अपने बचाव में चिल्ला भी नहीं सकती....

सुनील : तो आपने ये कैसे सोच लिया की ये हमारे साथ सेफ रहेगी... यहाँ भी तो इसके साथ कुछ भी हो सकता है....

इंस्पेक्टर : नहीं ये मुमकिन नहीं.... (प्रिंस को देखते हुए) इसके साथ अगर कुछ भी गलत करना होता तो आप कर चुके होते.... हम पुलिस वालों को यहाँ नहीं बुलाते....

सुनील : ये आप ने कैसे समझ लिया की हम ने इस के साथ कुछ गलत नहीं किया....?

इंस्पेक्टर : इसकी आँखें और इसका चेहरा साफ़ बता रही है की इसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ है... वर्ण इस वक़्त ये रो रही होती....

सुनील : हाँ माना की आपने जो कहा वो सच है... मगर आपने ये कैसे सोच लिया की हम शरीफ हैं और इसके साथ कुछ गलत नहीं करेंगे....

इंस्पेक्टर : शरीफ और बदमाश की परख करना मुझे अच्छे से आता है... ( प्रिंस की तरफ इशारा कर के) ये कभी इसके साथ न खुद कुछ गलत करेंगे और न hi किसी और को कुछ गलत करने देंगे....

सुनील : और मेरे बारे में आपका क्या ख़याल है....?

इंस्पेक्टर : न hi पूछो तो बेहतर है.... वैसे तुम ने पूछ लिया है तो बता दूँ.... शकल से तुम एक नंबर के कमीने लगते हो.... तुम्हारा कोई भरोसा नहीं कब क्या कमीनापन करो... मगर गलती से भी इस लड़की को हाथ लगाने के बारे में या इसके साथ कुछ गलत करने के बारे में सोचा भी तो ये ( प्रिंस ) तो तुम्हे बाद में मारेंगे.... मैं तुझे जहन्नुम पहुनकहाने में पल भर की भी देर नहीं करूँगा.... समझा....

सुनील डरते हुए : समझ गया....

प्रिंस : मगर मैं तो कुछ दिन में अपने घर निकल जाऊँगा....

इंस्पेक्टर : आप जहाँ भी जाए... हम को बता के जाइएगा... और इसे साथ ले जाइएगा.... अब जब तक इसके घर वाले नहीं मिल जाते ये आपकी ज़िम्मेदारी है....

फिर पुलिस वहां से चली जाती है....

सुनील : लो जी सिरजी ऊपर वाले ने बड़ा hi हसीं तोहफा आप को दिया है सम्भालो इसे...

प्रिंस : अबे पागल है क्या मैं अकेले इसे कैसे सम्भालूंगा....?

सुनील : इसे आपको hi संभालना है... मैं तो इस से दूर hi रहूँगा... वो क्या है की मुझे भरी जवानी में जहन्नुम जाने का कोई शौक नहीं.... यहाँ मुझसे कुछ गलत हुआ नहीं की आप और वो इंस्पेक्टर मिल के मेरी बंद बजा डोगा.... और फिलहाल मेरा अपनी बंद बजवाने का ऐसा कोई मूड नहीं है....

प्रिंस : साले तुझसे मुझे वैसे भी कोई उम्मीद नहीं है... डॉ क्या आप किसी नर्स का इंतज़ाम करवा सकते हैं....?

डॉ : हाँ क्यों नहीं मैं अभी एक नर्स को कॉल करके यहाँ बुलवा लेता हूँ....

कुछ देर में नर्स वहां आ जाती है... वो जैसे hi महक के करीब जाती है... महक रोने लगती है.... नर्स के हाथ लगते hi उसका रोना और तेज़ हो जाता है.... उसके रट hi प्रिंस फ़ौरन उसके पास आ जाट है...

प्रिंस : क्या हुआ इसे ये अचानक से यूँ रोने क्यों लगी....?

नर्स : पता नहीं... जैसे hi इसे बीएड बाथ देने के लिए मैंने इसे हाथ लगाया ये रोने लगी...

प्रिंस महक के बेहद करीब जा के कहता है....

प्रिंस : डरो मत ये तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचाएगी.... ये तो बस तुम्हे बीएड बाथ देने आयी है.... जब तक हम यहाँ हैं तुम्हारा सब काम ये hi करेगी.... प्लीज मान जाओ.... प्लीज....

प्रिंस की बात सुन के उसका रोना बंद हो जाता है....

प्रिंस : That's लिखे ा गुड गर्ल....

फिर नर्स से....

प्रिंस : मैं बहार वेट कर रहा हूँ... तब तक आप अपना काम पूरा कीजिये... मगर हाँ एक बात का ख़ास ख़याल रखियेगा की इसे ज़रा सी भी तकलीफ न आये....

ये कह एक वो वहां से बाहर जाने वाला होता है की तभी नर्स उसे रोक के कहती है...

नर्स : इसकी ड्रेस और टॉवल तो देते जाइये...

नर्स की बात सुन के प्रिंस रुक जाता है... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो करे तो क्या करे.....? अब वो हर किसी को वो नहीं बता सकता जो उसने डॉ और इंस्पेक्टर को बताया था.... वो फ़ौरन बात को घुमा के कहता है.....

प्रिंस : इसके कपडे तो हैं नहीं.... वो क्या है की इसका बैग गम हो गया है... जिसमे इसके कपडे थे.... आप एक काम कीजिये... सामने कप्बोर्ड में मेरे कुछ कपडे हैं आप वो मैं आपको दे देता हूँ इसे नहलाने के बाद पहना दीजियेगा.... जब हम बहार जाएंगे तब इसके लिए नए कपडे खरीद लेंगे....

ये कह के प्रिंस अपना एक शर्ट और ट्रैक नर्स को दे के बैडरूम से बहार चला जाता है....

नर्स महक को नेहला के प्रिंस के कपडे पहना देती है.... और प्रिंस को आवाज़ दे के बुलाती है.....

नर्स : काम हो गया है अब आप इसे नाश्ता करवा सकते हैं.... और ये कुछ सामन की लिस्ट है जो इस लड़की के लिए ज़रूरी है आप इसे मंगवा लीजिये....

प्रिंस : ठीक है.... अच्छा आप से एक बात पूछनी थी.... इसे खाने में क्या दूँ....?

नर्स : जो इस का दिल चाहे इसे खिला सकते हैं....

प्रिंस : वो hi तो प्रॉब्लम है.... ये बोल नहीं सकती... तो कैसे पता चलेगा की इसे क्या पसंद है और क्या न पसंद....?

नर्स : बोल नहीं सकती तो क्या आँखों के इशारे से बता तो सकती है न की इसे क्या पसंद है और क्या नहीं.... आप खाने की लिस्ट यानि मेनू कार्ड इसे दिखा के इस से पता कर सकते हैं की इसे क्या पसंद है....

प्रिंस : वाओ यार क्या मस्त आईडिया दिया है तुम ने इस तरह से तो मैं इस से हर चीज़ के बारे में पता कर सकता हूँ की इसे क्या पसंद है और क्या नहीं....

नर्स : वैसे इसका नाम क्या है....?

प्रिंस : पता नहीं....

सुनील : जब आप इसकी इतनी मदत कर hi रहे हैं तो क्यों न लगे हाथ इसे एक नया नाम भी दे दीजिये....

प्रिंस : आज पहली बार तू ने अकाल की बात की है... मगर क्या नाम दूँ इस मासूम पारी को.... कितनी प्यारी और मासूम है ये... इसके गोर गुलाबी गाल झील सी गहरी आँखें.... गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ.... ये इतनी खूबसूरत है जन्नत की पारी भी इसकी खूबसूरती को देख के जल उठे.... और इसके चेहरे की ये मासूमियत इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही है....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के महक के चेहरे पे शर्म और ख़ुशी की लाली च जाती है.... उसके होंठों पे प्यारी सी स्माइल आ जाती है....

नर्स : वाओ यार.... तुम तो लाजवाब हो... क्या बयान किया है इसकी खूबसूरती का...

प्रिंस : मैंने तो वो hi कहा जो सच है.... और सच ये है की ये बेहद खूबसूरत और मासूम है...

नर्स : तो क्या नाम सोचा है इसका....?

प्रिंस : इसकी प्यारी सी दिल को छू जाने वाली मुस्कान ये कह रही है की इसका बस एक hi नाम हो सकता है और वो है मुस्कान....

नर्स : मुस्कान.... बड़ा hi अच्छा नाम है.... मुस्कान....

प्रिंस : हाँ और इसकी तरह प्यारा भी जिसे देख सब के होंठों पे मुस्कान आ जाए....

प्रिंस की बात सुन के महक के होंठों पे अपने नए नाम की लाली छ जाती है यानी मुस्कान फैल जाती है....

प्रिंस सुनील को लिस्ट दे के सामान लाने को भेज देता है... और खुद महक यानी मुस्कान के पास बैठ जाता है.... और प्यार से उसके सर पे हाथ फेर के उसकी आँखों में देखते हुए कहता है....

प्रिंस : यार तुम कौन हो कहाँ से आयी हो मैं नहीं जानता.... न hi तुम मेरे बारे में कुछ जानती हो.... हम अनजाने में मिले हैं.... ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की किस्मत ने हम को मिलवाया है.... और किस्मत कोई काम बिना वजह के नहीं करती.... किस्मत से जो होता है वो किसी न किसी वजह से होता है.... वो क्या वजह है मैं नहीं जानता.... हाँ मगर इतना ज़रूर जानता हूँ की अब से जब तक तुम्हारे घर वाले नहीं मिल जाते तुम मेरे साथ hi रहोगी.... वो क्या है न की बहार तुम सेफ नहीं रहोगी.... सेफ तो तुम मेरे साथ भी नहीं हो... यही सोच रही हो न.... मत सोचो क्यों की ऐसा कभी नहीं होगा मेरे साथ तुम एक डैम सेफ रहोगी... वैसे जैसे अपने घर में रहती थी.... जब तक तुम मेरे साथ हो मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा.... यहाँ तुम सेफ हो.... ये मेरा वादा है तुमसे.... प्रिंस सब कुछ कर सकता है मगर कभी अपना वादा नहीं तोड़ सकता.... तुम जो चाहे करो... तुम्हे हर चीज़ की इजाज़त है....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान की आँखों में आंसू आ जाते हैं....

मुस्कान मन में : इतना प्यार तो मुझे मेरे अपनों ने भी नहीं दिया.... जितना मुझे इस नेक अनजान फ़रिश्ते से मिल रहा है.... वहां घर में सब मुझे बोझ के अलावा कुछ नहीं समझते.... बस सोना को चोर के.... सोना मेरी बहिन मेरे लिए सब कुछ है... उसे खुद से ज़्यादा मेरी परवाह है.... ठीक वैसी परवाह मुझे इस की आँखों में नज़र आ रही है.... इसकी आँखों में सच्चाई है और दिल में प्यार और अपनापन.... ऐसे सच्चे और दिलवाले इंसान बड़ी मुश्किल से मिलते हैं.... आज मैं अपनी किस्मत से नाराज़ नहीं बल्कि उसकी शुक्रगुज़ार हूँ की उसने मुझे इस जैसे नेक इंसान से मिलवाया.... काश इसी तरह मैं उस से भी मिल पाती... जिस से मिलने की आस में मैं जी रही हूँ.... जाने कहाँ होगा वो....? जाने कैसा होगा वो....? जाने कब मिलेगा मुझे वो....? कहाँ हो तुम....? प्लीज मेरे पास आ जाओ..... अब तुम से जुड़ा हो के मैं और नहीं जी सकती..... प्लीज मेरे पास जाओ.... सुलतान....

तभी अचानक से प्रिंस चौंक जाता है.... वो इधर उधर देखता है वहां उसे कोई नज़र नहीं आता.... वो हैरत से मुस्कान की तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : तुमने अभी कुछ कहा क्या....?

फिर अपनी hi बात पे अपने सर पे चपत मार के कहता है....

प्रिंस : मैं भी कितना पागल हूँ... तुम बोल नहीं सकती और मैंने सोचा की तुमने अभी कुछ कहा.... मगर यार आवाज़ तो आयी थी.... वो भी किसी लड़की की.... जैसे वो दिल की गहराइयों से किसी को पुकार रही हो.... उस पुकार में एक दर्द था... एक तड़प थी... और साथ hi बेइन्तेहाँ मोहब्बत भी थी.... उसने किसी का नाम ले के आवाज़ दी थी.... सुलतान.... हाँ यही नाम लिया था उसने..... सुलतान....

प्रिंस की बातें और उसके मुँह से सुलतान का नाम सुन के मुस्कान की आँखों से आंसू चालक जाते हैं.... जिसे देख प्रिंस को अच्छा नहीं लगता.... वो फ़ौरन उसके आंसुओं को पॉच के कहता है....

प्रिंस : तुम्हे अपने घर वालों की याद आ रही है न.... इसी वजह से रो रही हो न... प्लीज चुप हो जाओ.... मैं उन्हें जल्द hi ढूंढने की कोशिश करूँगा.... जल्द hi तुम उनके पास होगी.... तुम्हे पता है... इस वक़्त हम दोनों बिलकुल एक hi जैसे हैं.... हमारे हालात भी वैसे hi हैं... जैसे तुम अपने घर वालों से जुड़ा हो और उनसे मिलने के लिए बेचैन बानी हुई हो.... ठीक वैसा hi हाल मेरा भी है... मैं भी अपने घर वालों को ढूंढ रहा हूँ.... जाने वो कहाँ हैं और कब मिलेंगे... मगर मुझे इस बात का यकीन है की जल्द hi मैं उन लोगों को ढूंढ लूंगा साथ hi तुम्हारे घर वालों को भी.... तब तक के लिए No मोरे रोना वादा करो मुझसे.... चलो.... अब से बस तुम्हे खुश रहना है और कभी अपनी आँखों में आंसू नहीं आने देना..... वादा करो चलो.... ये कह के प्रिंस उसकी आँखों में देखने लगता है.... मुस्कान अपनी पलकें झुका के उसे हाँ का इशारा कर देती है साथ hi ये भी बता देती है की उसे प्रिंस पे और उसकी बात पे यकीन है....

प्रिंस : यार आज से हम दोनों को साथ रहना है तो क्यों न इस की शुरुवात हम दोस्ती से करें क्या कहती हो....?

मुस्कान प्रिंस की आँखों में देखती रहती है.... प्रिंस अपना हाथ आगे बढ़ा के कहता है....

प्रिंस : जी मेरा नाम प्रिंस है... प्रिंस अली खान.... क्या आप मुझसे दोस्ती करेंगी...?

मुस्कान को समझ नहीं आ रहा की प्रिंस ये क्या कर रहा है ये जानते हुए भी की न वो कुछ बोल सकती है और न hi उस से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा सकती है.... फिर भी.... अभी वो ये सोच hi रही होती है की तभी प्रिंस अपने दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ के अपने हाथ की तरफ लाता है और फिर कुछ सोच के पीछे हटा लेता है....

प्रिंस : अरे ये क्या....? तुमने अपना हाथ पीछे क्यों कर लिया....?

फिर प्रिंस खुद hi अपनी बात का जवाब बेहद स्टाइल से मुस्कान बन के देता है....

पमुस्कान : मैं किसी अनजान से दोस्ती नहीं करती....

प्रिंस : यार हम अनजान कहाँ है.... अब से तो हम साथ रहने वाले हैं न....

पमुस्कान : हाँ तो क्या इसका ये मतलब थोड़े hi है की मैं बिना तुम्हे जाने पहचाने तुमसे दोस्ती कर लून.... पहले ये जान ने तो दो की तुम दोस्ती के काबिल हो भी या नहीं....

प्रिंस : हाँ यार ये बात भी ठीक है.... मगर मैं सिर्फ दोस्ती के लिए कह रहा हूँ.... दोस्ती करने में कोई बुराई नहीं है....

पमुस्कान : ये भी सही है... मगर हम सिर्फ दोस्त रहेंगे... और कुछ नहीं.... इस से ज़्यादा और कुछ सोचना भी मत....

प्रिंस : वैसे तुम इतनी प्यारी और खूबसूरत हो की तुम्हे देखते hi तुम पे प्यार आने लगता है.... तो सिर्फ दोस्ती...

पमुस्कान : क्या कहा तुमने....?

प्रिंस : नहीं नहीं मैंने कहाँ कुछ कहा मैं तो बस दोस्ती की hi बात कर रहा था... और कुछ नहीं... हाँ हाँ बस दोस्ती....

फिर धीरे से कहता है....

प्रिंस : अबे ये क्या कर रहा है पागल हो गया है क्या....? दोस्ती के आगे कुछ सोचा भी न तो ये नाराज़ हो जायेगी.... आगे का तो बहुत दूर है ये तुझसे दोस्ती भी न करे....

मुस्कान लेते लेते प्रिंस की साड़ी बातों को सुन भी रही है और उसकी हरकतों को देख भी रही है.... उसे प्रिंस की बातें और हरकतें अच्छी लग रही हैं.... वो प्यार से प्रिंस की तरफ देख के मुस्कुराये जा रही है....

पमुस्कान : अब यूँ खुद से hi बातें करते रहोगे या फिर मेरी बात का जवाब भी डोज.....

प्रिंस हड़बड़ा के : नहीं नहीं मैं कहाँ... नहीं तो.... मैं तो बस दोस्ती की बात कर रहा हूँ और कुछ नहीं सच में....

प्रिंस को ऐसे हड़बड़ाते और उसकी बातें सुन के मुस्कान की मुस्कान और गहरी हो जाती है.... वो भले hi बहार सिर्फ मुस्कुरा रही है मगर अंडर से वो अपना पेट पकड़ के ज़ोर ज़ोर से हंस रही है....

पमुस्कान : चलो ठीक है तुम इतना ज़ोर दे रहे हो तो मैं तुमसे दोस्ती कर लेती हूँ.... तुम भी क्या याद करोगे की किस दिलदार से पाला पड़ा था....

ये कह के प्रिंस मुस्कान का हाथ आगे बढ़ा के अपने हाथ में दे देता है....

प्रिंस अपने दूसरे हाथ से उसका हाथ थाम के कहता है....

प्रिंस : मेरी दोस्ती क़ुबूल करने का बहुत बहुत शुक्रिया.... आज मैं बहुत खुश हूँ....

पमुस्कान : वो क्यों भला....?

प्रिंस : मेरी दोस्ती इस दुनिया की सबसे खूबसूरत प्यारी पारी से जो हो गयी है.... यार इस बात पे तो पार्टी होनी चाहिए.... क्या कहती हो....?

पमुस्कान : पार्टी तो बनती है.... अब सब की ऐसी किस्मत कहाँ की इस दुनिया की सब से खूबसूरत और प्यारी पारी से दोस्ती हो जाए....

प्रिंस : सही कहा तुम ने और वो किस्मत वाला और कोई नहीं मैं हूँ.... याअहूऊऊऊओ....

ये कह के प्रिंस ख़ुशी से नाचने लगता है.... फिर मुस्कान के पास आ के...

पमुस्कान : बस बस अब यूँ बंदर जैसे उछलना बंद कर और पार्टी की तैयारी कर.... कहीं ऐसा न हो की मेरा मूड चेंज हो जाए....

प्रिंस : नहीं यार देख आज जैम के धमाल होगा... दोनों दोस्त मिल के खूब मज़े करेंगे.... आज शाम ज़बरदस्त पार्टी होगी...

पमुस्कान : शाम की शाम को देखेंगे ... अभी नाश्ते का कुछ कर मेरे पेट में चूहों की जगह हाथी उछाल कूद मचा रहे हैं.... अगर जल्द hi तूने नाश्ते का इंतज़ाम न किया न तो इन हाथियों को शेर बनने में ज़्यादा वक़्त न लगेगा.... और फिर वो तुझे बिना मसाला लगाए कच्चा hi न खा जाएंगे.... फिर मुझे दोष न देना.....

प्रिंस : नहीं यार ऐसा मत करना... अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है.... पहले शादी हो जाने दे.... फिर बच्चे होंगे फिर उनके बच्चे होंगे फिर उनके बच्चे होंगे....

पमुस्कान : अबे ोये शेखचिल्ली.... बाटने hi बनता रहेगा या फिर नाश्ते का इंतज़ाम भी करेगा....

फिर प्रिंस उसे अपने मोबाइल में खाने की चीज़ें दिखा दिखा के उस से पूछता है जिसका जवाब मुस्कान अपनी पलकें झुका के देती है.... नाश्ते की चीज़ें सेलेक्ट करवाने के बाद प्रिंस नर्स को मुस्कान का ख़याल रखने को कह के नाश्ते का सामान लेने के लिए चल देता है....

नर्स : तुम बड़ी किस्मत वाली हो जो तुम्हे इस जैसा इंसान मिला.... वर्ण आज के ज़माने में कोई किसी अपने का नहीं होता ये तो फिर भी एक गैर है.... मगर ये गैर हो के भी अपनों से भी ज़्यादा अपना है.... इसने जो तुम्हारे लिए किया है वो कोई किसी अपने के लिए भी न करे.... जब तुम्हारे घर वाले मिल जाए और तुम उनके साथ जाओ तो इसे मत भूलना.... न hi इसे कभी चूर्ण... इस जैसा इंसान पूरी दुनिया में चिराग ले के ढूंढने से भी नहीं मिलेगा.... ये कोई मामूली इंसान नहीं बल्कि एक फरिश्ता है.... जिसके दिल में सब के लिए बेइन्तेहाँ प्यार है....

नर्स की बात पे मुस्कान अपनी पलकें झुका के हाँ का इशारा कर देती है....

कुछ देर बाद प्रिंस मुस्कान की पसंद का नाश्ता ला के उसे अपने हाथों से खिलता है और खुद भी खता है.... फिर सुनील के आने के बाद मुस्कान और नर्स को साथ लेके शॉपिंग के लिए चल देता है....

वहां वो मुस्कान को कपडे दिखा के उसे पसंद करने को कहता है मगर मुस्कान उन कपड़ों में से किसी भी कपडे को नहीं देख रही..... प्रिंस जब भी उसे कोई कपडा दिखता है वो फ़ौरन अपनी नज़रें दूसरी तरफ घुमा लेती है.... प्रिंस को समझ नहीं आ रहा है की आखिर मुस्कान ऐसा क्यों कर रही है....?

प्रिंस : यार समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ....? इसे कोई भी कपडा पसंद नहीं आ रहा है....

नर्स : बात वो नहीं है जो तुम समझ रहे हो बल्कि बात ये है की मुस्कान चाहती है की उसके लिए कपडे उसका दोस्त पसंद करे....

प्रिंस : अच्छा तो ये बात है....

नर्स : हाँ यही बात है....

फिर प्रिंस मुस्कान के करीब जा के उसकी आँखों में देख के प्यार से कहता है...

प्रिंस : देखना आज कैसे मैं अपनी दोस्त को सच की पारी बनता हूँ.... बस देखती जाओ....

फिर प्रिंस अपनी पसंद के महंगे से महंगे कपडे उसके लिए पसंद करता है.... फिर उसे ले के ब्यूटी सलून और स्पा जाता है.... वहां वो उसका पूरा मेकओवर करवाता है.... करीब 4 घंटे बाद नर्स मुस्कान को व्हीलचेयर पे बैठा के बहार लाती है.... प्रिंस उसे एक तक देखता hi रह जाता है....

प्रिंस को खुद को इस तरह देखते मुस्कान बुरी तरह से शर्मा जाती है... शर्म से उसके गोर गुलाबी गाल लाल हो जाते हैं.....

नर्स : अब बस देखते hi रहोगे या फिर कुछ कहोगे भी....

प्रिंस : कहूंगा मगर यहाँ नहीं.... बल्कि उस जगह पे जहाँ पहुंच के मुस्कान के होंठों की मुस्कान ग़हरी हो जायेगी....

नर्स : ठीक है तो फिर मुझे इजाज़त दो.... रात होने वाली है मुह्हे घर जाना है..... मेरे छोटे छोटे बच्चे हैं वो मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे....

प्रिंस : अगर आप चली जाएंगी तो मुस्कान का ख़याल कौन रखेगा....?

नर्स : तुम हो न इस का ख़याल रखने के लिए.... जब तुम इसके पास हो तो किसी और की ज़रुरत hi क्या है.... क्यों मुस्कान मैं सही कह रही हूँ न.....

नर्स की बात सुन के मुस्कान अपनी पलकें झुका के हाँ का इशारा कर देती है....

इस से पहले की प्रिंस कुछ कहता नर्स कल सुबह आने का कह के टैक्सी ले के वहां से चली जाती है....

प्रिंस : ये भी क्या बात हुई भला ऐसा भी कोई करता है क्या....? एक मासूम सी प्यारी सी खूबसूरत सी लड़की को किसी अनजान लड़के के साथ अकेली चोर के कोई जाता है भला....

पमुस्कान : किसने कहा की मैं अकेली हूँ और तुम अनजान हो.... मैं तो तुम्हारे साथ हूँ और तुम अनजान नहीं बल्कि मेरे दोस्त हो....

प्रिंस : हाँ माना की हम दोस्त हैं मगर फिर भी तुम मेरे बारे में कुछ नहीं जानती.... अगर मैंने तुम्हारा गकत फायदा उठा लिया तो....?

पमुस्कान : मुझे इस बात पे पूरा यकीन है की तुम कभी मेरा गलत फायदा नहीं उठाओगे....

प्रिंस मुस्कान की आँखों में देख के उस से पूछता है....

प्रिंस : क्या सच में तुम्हे मुझपे इतना यकीन है....?

प्रिंस की बात पे मुस्कान अपनी पलकें झुका के हाँ का इशारा करती है....

प्रिंस : तो फिर चलें....

मुस्कान एक बार फिर से अपनी पलकें झुका देती है....

प्रिंस उसे अपने साथ कार में बैठा के चल देता है.... फिर कुछ दूर जा के वो कार रोक के मुस्कान की आँखों में देख के उस से पूछता है....

प्रिंस क्या मैं कुछ देर के लिए तुम्हारी आँखें बंद कर सकता हूँ....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान अपनी आँखें बंद कर लेती है...

प्रिंस : जब तक मैं न कहूं प्लीज अपनी आँखें मत खोलना....

ये कह के प्रिंस उसे अपनी गॉड में उठा के एक तरफ ले जा के चेयर पे बैठा देता है... और उसे आँखें खोलने को कहता है...

सामने का नज़ारा देख के मुस्कान हैरान हो जाती है.... उसे यकीन hi नहीं होता की जो वो देख रही है वो सच है.... कहीं ये कोई सपना तो नहीं....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 98

प्रिंस उसे अपने साथ कार में बैठा के चल देता है.... फिर कुछ दूर जा के वो कार रोक के मुस्कान की आँखों में देख के उस से पूछता है....

प्रिंस क्या मैं कुछ देर के लिए तुम्हारी आँखें बंद कर सकता हूँ....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान अपनी आँखें बंद कर लेती है...

प्रिंस : जब तक मैं न कहूं प्लीज अपनी आँखें मत खोलना....

ये कह के प्रिंस उसे अपनी गॉड में उठा के एक तरफ ले जा के चेयर पे बैठा देता है... और उसे आँखें खोलने को कहता है...

सामने का नज़ारा देख के मुस्कान हैरान हो जाती है.... उसे यकीन hi नहीं होता की जो वो देख रही है वो सच है.... कहीं ये कोई सपना तो नहीं....??????

अब आगे....

सामने का नज़ारा बेहद हसीं है.... दूर दूर तक पहिला समुन्दर ऊंचे ऊंचे पहाड़.... गुलाब के फूलों से सजा हुआ टेबल..... पास hi करतब दिखते जोकर्स.... नाचते गाते नन्हे बच्चे.... दिल लुभाने वाला म्यूजिक.... चारो तरफ मेहेह्ती फूलों की खुशबु..... मौसम को और भी ज़्यादा खुशनुमा कर रही थी.... जोकर्स एक एक कर के मुस्कान के पास आते हैं और उसकी तारीफ़ कर के उसे एक एक गुलाब दे के वहां से जाने लगते हैं.... ठीक वैसा hi वो बच्चे भी करते है... वो सब मुस्कान के करीब आ के पहले तो उसका हाथ पकड़ के खूब डांस करते हैं फिर उसके गाल पे किश कर के वहां से चले जाते हैं....

मुस्कान हैरत और ख़ुशी से ये सब देख रही है.... आज वो बेहद खुश है.... उसकी लाइफ में ऐसा पहली बार हुआ है..... जितनी खुश वो आज है पिछले 10 साल में उसे इतनी ख़ुशी कभी नहीं मिली.... लाइफ के वो कीमती 10 साल उसने न चाहते हुए भी एक रूम में कैद हो के गुज़ारे हैं.... आज सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से वो बेहद खुश है.... ये ख़ुशी उसे प्रिंस की वजह से hi हासिल हुई है.... ख़ुशी के मारे उसकी आँखों से आंसू चालक जाते हैं... वो एक तक प्रिंस को देखने लगती है....

प्रिंस जब मुस्कान की आँखों में आंसू देखता है तो फ़ौरन उसके पास जा के उसके आंसू पॉच के कहता है....

प्रिंस : क्या हुआ अचानक से तुम रोने क्यों लगी....? मुझसे कोई गलती हो गयी क्या....? बताओ न.... आखिर ऐसी क्या बात हो गयी जिसने तुम्हारी खूबसूरत आँखों को आंसू बहाने ले मजबूर कर दिया.... कहीं वो मैं तो नहीं.... हाँ यकीनन मेरी hi कोई गलती होगी जिसकी वजह से तुम्हे तकलीफ हुई..... मगर मैंने ऐसी क्या गलती कर दी....?

प्रिंस को यूँ परेशान देख के मुस्कान को अच्छा नहीं लगता.... वो छह के भी उसे ये नहीं समझा पा रही है की ये आंसू गम के नहीं बल्कि ख़ुशी के हैं.... जो ख़ुशी प्रिंस ने उसे आज दी है ऐसी ख़ुशी मुस्कान ने आज से पहले कभी महसूस नहीं की.... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो ये बात प्रिंस को बताये भी तो कैसे....? वो ऊपर वाले से दुआ करने लगती है की प्रिंस उसकी उनकाही बात को समझ जाए.... और यूँ परेशान न हो..... अभी वो दुआ कर hi रही होती है की तभी वो होता है जिसे सुन के और साथ hi महसूस कर के उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता..... उसे ऐसा लगता है जैसे की ऊपर वाले ने उसकी दुआ क़ुबूल कर ली हो....

प्रिंस कुछ सोच कर..... मुस्कान की तरफ बढ़ता है और उसके करीब जा के उस से कहता है....

प्रिंस : हे कहीं तुम इस बात से नाराज़ तो नहीं की सब ने तुम्हारी तारीफ़ की मगर मैंने अभी तक तुम्हारी तारीफ में एक लफ्ज़ तक नहीं कहा....

पमुस्कान : और नहीं तो क्या....? कैसे दोस्त हो तुम..... जिसे अपने दोस्त की सबसे पहले तारीफ करनी चाहिए थी.... उसने उसकी तारीफ में एक लफ्ज़ तक नहीं कहा.... बताओ इस बात पे मुझे तुमसे नाज़ायज़ नहीं होना चाहिए क्या...?

प्रिंस अपना सर झुका के कहता है.....

प्रिंस : हाँ होना तो चाहिए.... मैंने गलती की है... मगर प्लीज मुझसे ज़्यादा देर के लिए नाराज़ मत होना....

पमुस्कान : वो क्यों भला....? नाराज़ होने का भी कोई टाइम पीरियड होता है क्या....? देखो बस 10 मिनट के लिए नाराज़ होना.... नहीं नहीं बस 5 मिनट के लिए hi नाराज़ होना....

प्रिंस : नहीं वो बात नहीं है... आज ऐसा पहली बार हुआ है की मेरा अपना मुझसे नाराज़ हुआ है.... आज से पहले मैं hi सब पे नाराज़ हुआ करता था.... वो क्या है की मुझे मानना नहीं आता... इस लिए कह रहा हूँ की मुझसे ज़्यादा देर के लिए नाराज़ न होना....

पमुस्कान : वो सब मुझे नहीं पता.... अगर तुम चाहते हो की मेरी नाराज़गी जल्द से जल्द दूर हो जाए.... तो जल्दी से मुझे मनाओ.... तुम नहीं जानते की जो मुझे नाराज़ करता है अगर वो जल्द hi मुझे नहीं मन लेता तब मैं हमेशा के लिए उस से नाराज़ हो जाती हूँ.... फिर उस से कभी बात नहीं करती....

प्रिंस : ऐसा मत कह यार.... जाने क्यों तेरी नाराज़गी मुझसे सही नहीं जा रही है... जाने क्यों तुझे देख के ऐसा लग रहा है जैसे की तू कोई गैर नहीं बल्कि मेरी अपनी hi है.... तेरा ज़रूर मुझसे कोई रिश्ता है... वो रिश्ता क्या है मुझे नहीं पता.... जब भी मैं तुझे देखता हूँ तू मुझे अपनी सी लगती है.... तेरी ये झील सी गहरी आँखें मुझे जानी पहचानी सी लगती है.... मुझे ऐसा लगता है जैसे की तेरे इस हसीं खूबसूरत और मासूम चेहरे को मैंने पहले भी कहीं देखा है... एक बार नहीं बल्कि कई बार.... मुझे ऐसा महसूस होता है की मैं तुझे न जानते हुए भी जानता हूँ..... तुझे न पेहचाहते हुए भी पहचानता हूँ....

पमुस्कान : ये बेकार की बातें चोर और मुझे मानाने के बारे में सोच.... वक़्त बीत ता जा रहा है और साथ hi मेरी नाराज़गी को भी बढ़ता जा रहा है... जल्दी से मुझे मानाने के बारे में सोच...

फिर कुछ सोच के प्रिंस के होंठों पे मुस्कान फैल जाती है.... वो मुस्कान के बेहद करीब जा के उसकी आँखों में देखते हुए प्यार से ये गाना गाने लगता है....

********************************

तुमको पाया है तो जैसे खोया हूँ

कहना चाहूँ भी तो तुमसे क्या कहां

किसी ज़बान में भी वह लफ्ज़ Hi नहीं

की जिनमे तुम हो क्या तुम्हे मैं बता सकूँ

मैं अगर कहूँ तुमसे हसीं

कायनात में नहीं है कहीं

तारीफ यह भी तो सच है कुछ भी नहीं

तुमको पाया है तो जैसे खोया हूँ..

शोखियों में डुबी यह आदयें

चेहरे से झलकी हुई हैं

ज़ुल्फ़ की घनी घनी घटाएं

शान से ढलकी हुई हैं

लहराता आँचल है जैसे बदल

भाहों में भरी है जैसे चांदनी

रूप की चांदनी

मैं अगर कहूँ यह दिलकशी

है नहीं कहीं न होगी कभी

तारीफ यह भी तो सच है कुछ भी नहीं

तुमको पाया है तो जैसे खोया हूँ..

तुम हुए मेहरबान

तो है यह दास्ताँ

हूँ तुम हुए मेहरबान

तो है यह दास्ताँ

अब्ब तुम्हारा मेरा एक है कारवां

तुम जहाँ में वहां

मैं अगर कहूँ

हमसफ़र मेरी

अप्सरा हो तुम या कोई पारी

तारीफ यह भी तो सच है कुछ भी नहीं

तुमको पाया है तो जैसे खोया हूँ..

कहना चाहूँ भी तो तुमसे क्या कहां

किसी जबाव में भी वह लबाज़ Hi नहीं

की जीन में तुम हो क्या तुम्हें में बता सकूँ

मैं अगर कहूँ तुमसे हसीं

कायनात में नै है कहीं

तारीफ यह भी तो सच है कुछ भी नहीं

तुमको पाया है तो जैसे खोया हूँ...

***********************************

प्रिंस की मदहोश कर देने वाली आवाज़ और इस गाने को सुन के मुस्कान मदहोश सी हो जाती है.... उसके होंठों पे प्यारी सी मुस्कान च जाती है.... उसका दिल ख़ुशी से झूम उठता है... वो बस एक तक प्रिंस को देखने लगती है....

गाने के पूरा होते hi प्रिंस उसके बेहद करीब जा के उसकी आँखों में आँखें दाल के उस से पूछता है....

प्रिंस : क्या अब मैं ये समझूँ की मैं अपनी सब से प्यारी दोस्त और एक बेहद हसीं और खूबसूरत पारी की नाराज़गी दूर करने कामियाब हुआ हूँ....?

मुस्कान मुस्कुराते हुए उसे देखती रहती है और फिर अपनी पलकें झुका के हाँ का इशारा करती है....

मुस्कान की हाँ सुन के प्रिंस ख़ुशी से उछलते हुए नाचने लगता है....

प्रिंस : याअहूऊऊऊओ.... आज मैं बहुत खुश हूँ... बहुत... बहुत hi ज़्यादा खुश....

ये ख़ुशी उसे क्यों हो रही है ये वो खुद भी नहीं जानता.... वो बस इतना जानता है की मुस्कान को ख़ुशी दे के उसे ख़ुशी होती है.... बस इस लिए वो सारे जहाँ की ख़ुशी उसके कदमो में बिछाना चाहता है....

उसे यूँ हस्ते नाचते देख मुस्कान भी बेहद खुश हो जाती है....

फिर प्रिंस मुस्कान का फव खाना मंगवाता है और बड़े hi प्यार से उसे खिलता है और साथ hi खुद भी खता है....

फिर उसे साथ ले के घर आ जाता है.... अगला दिन भी ऐसे hi मज़ाक मस्ती और काम में बीत जाता है.... रात तक प्रिंस का काम पूरा हो जाता है और अगली सुबह वो मुस्कान को साथ ले के सुल्तानगढ के लिए निकल जाता है.....

जैसे hi कार सुल्तानगढ में एंटर करती है.... मुस्कान की आँखें हैरत से बड़ी हो जाती हैं.... उसे ये समझते देर नहीं लगती की इस ये जगह सुल्तानगढ है.... वो हैरत से कभी सुल्तानगढ के रास्तों को देखती है तो कभी प्रिंस के चेहरे को....

और जब प्रिंस कार को मुस्कान के घर के रास्ते की तरफ मोड़ता है तो मुस्कान की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.... उसकी आँखें ख़ुशी से चमक उठती हैं और साथ hi उसके होंठों पे मुस्कान फैल जाती है....

प्रिंस उसे सामने वाला घर दिखा के कहता है....

प्रिंस : हम अपने घर आ गए.... वेलकम होम माय स्वीट स्वीट फेयरी....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान को बेहद हैरानी होती है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की प्रिंस उसके घर को अपना घर क्यों कह रहा है....? वो छह के भी प्रिंस से कुछ पूछ नहीं पा रही है....

वो कभी अपने घर को देखती है तो कभी प्रिंस को..... प्रिंस कार को पार्क करके मुस्कान को गॉड में उठा के व्हीलचेयर पे बैठा देता है.... मुस्कान अपने घर की तरफ देख रही है....

प्रिंस उसे घर का दूसरा हिस्सा जिसे उसने रेंट पे लिया है दिखा के कहता है.....

प्रिंस : अरे अपना घर वो नहीं ये है.... और फिर उसे साथ ले के घर के उस हिस्से की तरफ चल देता है.... मुस्कान अभी भी अपने घर की तरफ देख रही है....

घर की तरफ जाते हुए प्रिंस मुस्कान को अपने बारे में बताने लगता है.... की वो यहाँ अपने परिवार को ढूंढने आया है.... और कुछ दिन पहले hi उसने इस घर को रेंट पे लिया है.... वो नेमत गुरूजी और पावर्स की बात चोर के उसे साड़ी बात बताने लगता है.... जिसे सुन के मुस्कान को एक झटका सा लगता है.... उसके दिमाग में एक साथ कई सवाल उठने लगते हैं.... वो छह के भी प्रिंस से अपने सवाल नहीं पूछ पाती.... वो अपने दिमाग में अनेकों सवाल लिए प्रिंस को देखते हुए गहरी सोच में डूब जाती है.....

नेमत को सरप्राइज करने के लिए प्रिंस धीरे से दरवाज़ा खोलता है मुस्कान को साथ ले के घर में जाता है.... फिर आगे बढ़ के धीरे से नेमत के रूम का गेट ओपन कर के अंडर देखता है..... नेमत उसे वहां नहीं नज़र आती.... वो शायद बाथरूम में हो... ये सोच के प्रिंस बाथरूम की तरफ जाता है..... मगर नेमत वहां भी नहीं है....

प्रिंस : ये नेमत कहाँ चली गयी...? उसे पता था की मैं आने वाला हूँ.... फिर भी वो चली गयी.... हैरत है.... चल कोई नहीं अभी पता करता हूँ की ये नेमत की बच्ची है कहाँ.....?

ये सोच के प्रिंस अपनी आँखें बंद कर के नेमत को याद करता है.... फिर जैसे hi वो अपनी आँखें खोलता है.... नेमत उसे कॉलेज के कैंटीन में बैठी नज़र आती है.... अच्छा तो मैडम कॉलेज गयी है.... उसे यहाँ घर पे होना चाहिए था मगर नहीं उसे मुझसे ज़्यादा अपने कॉलेज की पड़ी है..... आने दो उसे फिर बताता हूँ....

फिर मुस्कान को रूम में जाता के बीएड पे लेता देता है....

प्रिंस : तुम यहाँ आराम करो जब तक मैं खाने का इंतज़ाम कर ता हूँ.... फिर वो खुद भी खता है और साथ hi मुस्कान को अपने हाथों से खिलता है.... उसके बाद दोनों आराम करने लगते हैं....

शाम 4 बजे किसी की चीख सुन के प्रिंस की आँख खुलती है..... सामने नेमत को देख प्रिंस को बड़ा अजीब लगता है....

प्रिंस : अबे तुझे क्या हुआ.....? तू इस तरह के एक्सप्रेशन क्यों दे रही है जैसे की तू ने कोई भूत देख लिया हो.....? और हाँ पहले तू मुझे ये बता की जब तुझे मैंने ये बताया था की मैं वापिस आ रहा हूँ तो फिर तू कॉलेज क्यों गयी....? यहाँ घर पे रुक नहीं सकती थी क्या....?

नेमत को जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा है.... वो हैरत और दर से खिड़की से घर के बाहर की तरफ देख रही है.....

प्रिंस के बार बार कहने से जब नेमत उसके सवाल का कोई जवाब नहीं देती तो प्रिंस उसे होता है....

प्रिंस : अबे क्या हुआ....? तू कुछ बोलती क्यों नहीं.....?

प्रिंस के हिलने से नेमत की तंत्र टूट टी है.... वो फ़ौरन प्रिंस के सीने से लिपट जाती है.....

प्रिंस : ये अचानक से तुझे क्या हुआ.....? तू तो ऐसे दर रही है जैसे की तू ने भूत देख लिया हो....? बता न क्या हुआ....? तू इतनी दरी हुई क्यों है....

नेमत : वो.... वो.... क.... क.... काल Cha....kra....

प्रिंस : क्या....? क्या कहा....?

नेमत बड़ी मुश्किल से बस इतना hi कह पाती है.....

नेमत : काल चक्र....

प्रिंस : काल चक्र....? अब ये क्या है....?

इस से पहले की नेमत कुछ कहती.... किसी की आवाज़ सुन के दोनों चौंक जाते हैं....

नेमत : बंगारू बाबा आप यहाँ....?

बाबा : हाँ न चाहते हुए भी मुझे यहाँ आना पड़ा....

नेमत : मगर आपने तो कहा था की आप यहाँ सिर्फ झूटी सुबह के वक़्त hi आ सकते हैं.... तो फिर....?

बाबा : सही कहा.... मैं सिर्फ उसी वक़्त यहाँ आ सकता हूँ....

नेमत : तो फिर आप यहाँ इस वक़्त अचानक से क्यों आये हैं....?

प्रिंस : कोई तो बात जारूर है जो बाबा इस वक़्त यहाँ आने पे मजबूर हुए....

बाबा : मैं यहाँ आया तो हूँ मगर पूरी तरह से नहीं.....

नेमत : मतलब....

प्रिंस : मतलब ये की ये बाबा नहीं बल्कि उनका अक्स है....

नेमत : ये तुम्हे कैसे पता....?

प्रिंस : वो ऐसे की कोई भी खुद के अक्स को आईने में नज़र आने से नहीं रोक सकता.... वो किसी न किसी तरह नज़र आ hi जाता है.... मगर अक्स कभी आईने में नज़र नहीं आता.... अक्स को नज़र आने के लिए जिस्म की ज़रुरत होती है.... और बाबा हम को अपने पावर्स की वजह से नज़र आ रहे हैं.... हमारे अलावा और कोई इन्हे नहीं देख सकता....

प्रिंस की बात सुन के बाबा मुस्कुराते हुए कहते हैं....

बाबा : अब लगा रहा है की प्रिंस वाकई में लौट आया है.... अब बस इंतज़ार है उसके लौटने का.... प्रिंस आ गया है तो वो भी जल्द hi लौट आएगा....

प्रिंस : बाबा आप ये किसकी बात कर रहे हैं....? मैं कुछ समझा नहीं....?

बाबा : समझ जाओगे... वक़्त आने पे सब समझ जाओगे....

प्रिंस : वैसे आप ने बताया नहीं की आपके इस वक़्त यहाँ आने की वजह क्या है....?

बाबा चारो तरफ अपनी नज़रें घुमा के देखते हैं फिर कुछ सोच के जवाब देते हैं....

बाबा : मेरे यहाँ आने की एक नहीं बल्कि 2 वजह है....

प्रिंस : 2 वजह....!!!

बाबा : हाँ 2 वजह.... पहली ये की जो लड़की इस वक़्त तुम्हारे साथ है तुम्हे उसका हर तरह से ख़याल रखना है.... साथ hi उसकी पूरी हिफाज़त भी करनी है.... ये कहना ज़्यादा बेहतर होगा की तुम्हे अपनी जान से बढ़ के उसकी हिफाज़त करनी है.... तुम्हारे रहते उसे एक खरोच भी नहीं आणि चाहिए....

नेमत : बाबा ये कहने की ज़रुरत नहीं है.... प्रिंस मेरा पूरी तरह से ख़याल रख रहा है....

बाबा : मैं तुम्हारी नहीं बल्कि उस लड़की ( महक उर्फ़ मुस्कान ) की बात कर रहा हूँ जो इस वक़्त अंडर रूम में सो रही है.....

बाबा की बात सुन के नेमत बुरी तरह से चौंक जाती है....

नेमत : लड़की.... कौन है वो....?

बाबा : अभी वो बताने का वक़्त नहीं आया है बस इतना जान लो की चाहे जो हो जाए उसे एक खरोच तक नहीं आणि चाहिए....

प्रिंस : बाबा आप उसकी फ़िक्र मत कीजिये.... मेरे रहते मेरी दोस्त को कुछ नहीं हो सकता....

बाबा : दोस्त....!!!!

प्रिंस : हाँ बाबा वो मेरी दोस्त है.... सच्ची और प्यारी दोस्त....

बाबा : ठीक है मगर याद रहे अपनी दोस्त की तुम्हे हर तरह से हिफाज़त करनी है उसका पूरा ख़याल रखना है....

प्रिंस : वो तो मैं कर hi रहा हूँ....

बाबा : हाँ मगर इतना काफी नहीं है.... अभी तुम इतने ताक़तवर नहीं हुए हो की उसका पूरी तरह से ख़याल रख सको... अगर होते तो तुम्हरी दोस्त की हिफाज़त के लिए उसे यहाँ आने की ज़रुरत नहीं पड़ती....

प्रिंस : उसे किसे....?

बाबा : सुलतान के जिगरी दोस्त शेरा को यहाँ आने की ज़रुरत नहीं पड़ती....

प्रिंस : कहीं आप उस शेर की बात तो नहीं कर रहे....?

बाबा : हाँ वो hi शेर....

नेमत : मगर वो दोबारा यहाँ क्यों आया है....?

बाबा : वो उस लड़की की जो प्रिंस की दोस्त है.... उस की हिफाज़त करने आया है....

प्रिंस : हिफाज़त....!!! मगर किस से....?

बाबा : काल चक्र की काली शक्तियों से.... जब उसने तुम दोनों को साथ देखा तो वो काली सकती यहाँ आ गयी... ताकि वो उस लड़की पे पूरी तरह से हावी हो सके.... और तुम्हे एक बार फिर से उस से दूर कर सके....

प्रिंस : एक बार फिर से मतलब....?

बाबा : फिलहाल के लिए इतना समझ लो की वो लड़की इस वक़्त जिस हाल में है.... वो उस काली शक्ति की वजह से है.... वो ज़िंदा हो के भी एक ज़िंदा लाश बन के रह गयी है.... मौत से भी बत्तर ज़िन्दगी जी रही है....

प्रिंस : बाबा ये आप क्या कह रहे हैं....? उसका ये हाल तो सर में चोट लगने की वजह से हुआ था न....

बाबा : उसके सर में चोट लगी तो थी मगर उसकी ऐसा हालत उस चोट की वजह से नहीं हुई बल्कि उन काली शक्तियों की वजह से हुई है जिसने उसके जिस्म को अपने कब्ज़े में किया हुआ है....

प्रिंस : क्याआआआआ....?

बाबा : हाँ ये सच है....

प्रिंस : तो फिर आप क्यों नहीं उन काली शक्तियों को उसके जिस्म से निकाल के उसे ठीक कर देते....?

बाबा : वो इस लिए क्यों की उन शक्तियों का सामना मैं नहीं कर सकता.... बल्कि तुम कर सकते हो....

बाबा की बात सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : आप ये क्या कह रहे हैं.... मैं एक मामूली इंसान उन काली शक्तियों का मुकाबला कैसे कर सकता हूँ.....?

बाबा : तुम भले hi एक इंसान हो मगर मामूली नहीं.... इस वक़्त तुम्हारे अंडर जीनी की नीलम पावर्स के साथ साथ मेरी भी बहुत सी पावर्स हैं.... जिनके ज़रिये तुम उन काली शाक्तों का कुछ हद तक सामना कर सकते हो..... मगर पूरी तरह से नहीं.... तुम्हे सब से पहले अपने अभेद्य कवच को हासिल करना होगा... जो कैरो प्लेनेट के दानव के अंडर है.... कैरो प्लेनेट के दानव को मारते hi तुम्हे तुम्हारा अभेद्य कवच वापिस मिल जाएगा.... मगर उस दानव को मारना इतना आसान नहीं है.... उसके पास ऐसी पावर्स है की जो भी उस से लड़ने और उसे मारने उसके पास जाता है उस की आधी पावर्स वो दानव अपने अंडर खींच लेता है.... जी से वो दोगुना पावरफुल हो जाता है और सामने वाला बेहद कमज़ोर.... तुम उसे उस हाल में कभी नहीं हरा सकते.... तुम्हारी पावर्स का भी उस वक़्त उस पे कुछ ख़ास असर नहीं होगा....

प्रिंस : तो फिर.... उसे मारा कैसे जाए...?

बाबा : ये तुम्हे तुम्हारे अंडर की पावर्स बताएगी... उसके लिए तुम्हे योग साधना के ज़रिये अपनी उन पावर्स को जगाना होगा... जो एक त्रिकोण के रूप में तुम्हारे जिस्म में मौजूद है.... उसे मैंने hi तुम्हारे जिस्म में डाला था.... उस वक़्त जब तुम्हे नीलम जीनी ने जादुई खंजर मारा था.... उस वक़्त तुम्हारी जान सिर्फ उसी त्रिकोण पावर्स की वजह से बची थी.... और ये सब तुम्हे अगले दो दिन के अंडर करना होगा.... तुम्हारे पास सिर्फ और सिर्फ 2 hi दिन है त्रिकोण पावर्स को जागृत करके उस दानव को मार के अपने अभेद्य कवच को हासिल कर के लिए.... और इस सब में तुम्हे स्पीड की सब से ज़्यादा ज़रुरत पड़ेगी.... बिना स्पीड के तुम कुछ नहीं कर पाओगे.... तुम्हारा वार जितनी स्पीड से होगा उस वार की असर उतना hi गहरा और खतरनाक होगा.... और एक बात याद रखना जब तक तुम्हे तुम्हारा अभेद्य कवच नहीं मिल जाता.... तब तक तुम्हे हर पल हर लम्हा मुस्कान के साथ रहना होगा.... तुम्हारी उस से ज़रा सी भी दूरी उसे काली शक्तियों के साथ साथ मौत के भी करीब ले जायेगी.... मुस्कान के मरते hi सब कुछ तबाह हो जाएगा.... बाकी के जन्मो की तरह तुम्हारा ये जनम भी बेकार हो जाएगा.... समझे....

प्रिंस : समझ गया बाबा.... और ये तो अच्छे से समझ गया की आप मुझे सिर्फ उतना hi बताएँगे.... जितना इस वक़्त मुझे जान ने की ज़रुरत है.... बाकी वक़्त आने पे पता चलता रहेगा.... क्यों मैंने सही कहा न....?

बाबा हाँ में अपनी गर्दन हिला देते हैं...

प्रिंस : अच्छा आप ने सब बताया मगर ये नहीं की आपके यहाँ आने की दूसरी वजह क्या है.....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 99

बाबा : ये तुम्हे तुम्हारे अंडर की पावर्स बताएगी... उसके लिए तुम्हे योग साधना के ज़रिये अपनी उन पावर्स को जगाना होगा... जो एक त्रिकोण के रूप में तुम्हारे जिस्म में मौजूद है.... उसे मैंने hi तुम्हारे जिस्म में डाला था.... उस वक़्त जब तुम्हे नीलम जीनी ने जादुई खंजर मारा था.... उस वक़्त तुम्हारी जान सिर्फ उसी त्रिकोण पावर्स की वजह से बची थी.... और ये सब तुम्हे अगले दो दिन के अंडर करना होगा.... तुम्हारे पास सिर्फ और सिर्फ 2 hi दिन है त्रिकोण पावर्स को जागृत करके उस दानव को मार के अपने अभेद्य कवच को हासिल करने के लिए.... और इस सब में तुम्हे स्पीड की सब से ज़्यादा ज़रुरत पड़ेगी.... बिना स्पीड के तुम कुछ नहीं कर पाओगे.... तुम्हारा वार जितनी स्पीड से होगा उस वार का असर उतना hi गहरा और खतरनाक होगा.... और एक बात याद रखना जब तक तुम्हे तुम्हारा अभेद्य कवच नहीं मिल जाता.... तब तक तुम्हे हर पल हर लम्हा मुस्कान के साथ रहना होगा.... तुम्हारी उस से ज़रा सी भी दूरी उसे काली शक्तियों के साथ साथ मौत के भी करीब ले जायेगी.... मुस्कान के मरते hi सब कुछ तबाह हो जाएगा.... बाकी के जन्मो की तरह तुम्हारा ये जनम भी बेकार हो जाएगा.... समझे....

प्रिंस : समझ गया बाबा.... और ये तो अच्छे से समझ गया की आप मुझे सिर्फ उतना hi बताएँगे.... जितना इस वक़्त मुझे जान ने की ज़रुरत है.... बाकी वक़्त आने पे पता चलता रहेगा.... क्यों मैंने सही कहा न....?

बाबा हाँ में अपनी गर्दन हिला देते हैं...

प्रिंस : अच्छा आप ने सब बताया मगर ये नहीं की आपके यहाँ आने की दूसरी वजह क्या है.....??????

अब आगे....

इधर आज पूरे 10 दिन बीत चुके हैं.... प्रिंस न तो कॉलेज आया है और न hi उसकी कोई खबर.... उस बात को ले के शनाया बेहद परेशान बानी हुई है..... उसकी आखरी मुलाक़ात प्रिंस से बेहद खराब रही थी.... अनजाने में hi सही उसने प्रिंस पे हाथ उठा दिया था.... इतना hi नहीं आयुष ने भी प्रिंस के सर पे जान लेवा वार किया था.... फिर उनकी लड़ाई हुई और तब से ले के अब तक न hi प्रिंस आया और न hi उसकी कोई खबर....

शनाया खुद को शांत रखने की बहुत कोशिश कर रही है मगर रह रह के उसे प्रिंस की याद सत्ता रही है.... प्रिंस से मिलने के लिए उसका दिल बेचैन बना हुआ है..... उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं..... उसे बेहद गुस्सा आ रहा है खुद पे भी और बाकी सब पे भी.... गुस्से में वो किसी न किसी से बिना बात के झगड़ रही है.... साथ hi मार पीट भी कर रही है.... फिर जब उसे प्रिंस की कही हुई बात याद आती है की वो ऐसे किसी के साथ कोई रिश्ता नहीं रखता न hi उसे देखना पसंद करता है जो बिना बात के दूसरों को तकलीफ पहुँचाने से बाज़ नहीं आते.... ये सोच के वो सब से माफ़ी भी मांगने लगती.... वो क्या थी और क्या होती जा रही है उसे समझ नहीं आ रहा....

वो एक अलग hi शनाया बनती जा रही है.... वो शनाया जो किसी से नहीं डर्टी थी... जो दिल में आये करती थी.... जिसे जब चाहे मारती पीट टी थी.... ऐयाशी करना तेज़ रफ़्तार से गाडी चलना उसके चाँद शौक में से एक थे.... वो सब करना उसे अब बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था.... इस सब से उसे अब नफरत सी हो गयी थी.... दिन भर वो दिल में एक उम्मीद लिए कॉलेज में प्रिंस के आने का इंतज़ार करती और जब वो नहीं आता.... तो उदास मन से वो घर चली जाती.... घर पे वो ज़रुरत के हिसाब से hi किसी से बात करती.... फिर जा के अपने रूम में खुद को बंद कर के प्रिंस की यादों में खो जाती.... कभी उसकी याद में आंसू बहती तो कभी उसकी स्माइल याद कर के मुस्कुराने लगती.... हर गुज़रते पल के साथ वो प्रिंस की दीवानी बनती जा रही थी.... उसे प्रिंस से प्यार हो गया था.... और वक़्त के साथ साथ वो और भी शिद्दत के साथ बढ़ता hi जा रहा है.... उसने अपने कुछ आदमियों को प्रिंस का पता लगाने के लिए कहा था.... जब वो खाली हाथ वापिस आते तो शनाया गुस्से से पागल हो जाती....

शनाया : मुझे कुछ नहीं सुन न... मुझे बस अपना प्रिंस चाहिए.... जा के पता लगाओ की मेरा प्रिंस कहाँ है....? जाओ इस से पहले की गुस्से में मैं तुम्हारी जान ले लूँ.... ढूंढो मेरे प्रिंस को....

शनाया को इतने गुस्से में देख सब दर जाते हैं.... वो फ़ौरन प्रिंस को ढूंढने के लिए निकल जाते हैं.... मगर प्रिंस उन्हें कहीं नहीं मिलता.... प्रिंस शहर में हो तब न उन्हें मिले.... उसे कोई जानता तक नहीं.... अभी कुछ दिन पहले hi तो वो यहाँ आया hai....aur शहर से दूर अरबाज़ के घर का एक हिस्सा रेंट पे लेके रह रहा है....

जब तक शनाया को प्रिंस के बारे में पता चलता है चल के देखते हैं की बाबा अपने आने की वो कौनसी दूसरी वजह प्रिंस को बताने वाले हैं....?

बाबा : दूसरी वजह तुम्हे इस बात से आगाह करना था की जिस पल तुम्हारे जिस्म में त्रिकोण पावर्स जागृत होगी.... उसी पल तुम्हारे जिस्म में काफी बदलाव आएंगे.... नील ज़हर के कुछ अंश जो अब भी तुम्हारे जिस्म में हैं उनके और तुम्हारी त्रिकोण पावर्स के मिलने से आएंगे.... वो बदलाव थोड़ा.... नहीं नहीं उसे थोड़ा कहना खीक न होगा.... वो बदलाव बहुत अजीब होगा.... जिस से तुम्हे जन्नत का मज़ा भी मिलेगा और साथ hi जहन्नुम जैसी सजा भी.....

प्रिंस : ये आप क्या कह रहे हैं मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा है.... ज़रा खुल के बताएँगे की अब ये बदलाव का क्या चक्कर है.... अब ये मत कहियेगा की ये भी मुझे वक़्त आने पे hi पता चलेगा....

बाबा : नहीं बात वो नहीं है बल्कि बात कुछ और hi है.... वो क्या है की नेमत यहाँ मौजूद है.... इसके सामने मैं वो बात तुम्हे नहीं बता सकता.....?

प्रिंस : क्यों नहीं बता सकते....?

बाबा : वो बात hi कुछ ऐसी है....

प्रिंस नेमत की तरफ देख के कुछ सोचता है.....

प्रिंस मन में : अगर इसे सीधे सीधे यहाँ से जाने को कहूंगा तो ये मानेगी नहीं.... तो अब क्या करूँ....? क्याआआ....? ीडायआ.... हाँ ये सही रहेगा....

प्रिंस नेमत को प्यार भरी नज़रों से देखते हुए कहता है....

प्रिंस : नेमत मेरी स्वीटीपीए ज़रा कुछ देर के लिए तू उस रूम में जायेगी....

प्रिंस के मुँह से अपने लिए स्वीटीपीए सुन के नेमत ख़ुशी से उछाल पड़ती है लेकिन फिर जैसे hi प्रिंस उसे दूसरे रूम में जाने को कहता है.... नेमत फ़ौरन इंकार कर देती है.....

नेमत : नहीं मुझे भी वो बात जान नई है....

प्रिंस : यार अभी तू जा मैं बाद में तुझे सब बता दूंगा....

नेमत : जब बताना hi है तो बाद में क्यों....? अभी क्यों नहीं....?

प्रिंस : यार प्लीज बात को समझ कुछ बात ज़रूर है जो बाबा तेरे सामने नहीं कह पा रहे हैं.... एक बार मैं वो बात जान लून फिर बाबा के जाते hi मैं पक्का तुझे वो बात बता दूंगा.... अब प्लीज मेरी बात मान ले....

नेमत : नहीं पहले वादा कर की बाबा के जाते hi वो बात तू मुझे बताएगा....

इस से पहले की बाबा प्रिंस को रोकते प्रिंस नेमत से बात बताने के वादा कर देता है....

नेमत के दूसरे रूम में जाते hi बाबा प्रिंस पे भड़क जाते हैं....

बाबा : तू पागल तो नहीं हो गया ये क्या किया तू ने.....?

प्रिंस : मैंने क्या किया....? मैंने वो hi किया जो मुझे करना चाहिए था.... वो यहाँ से जा hi नहीं रही थी और आप वो बात उसके सामने बता hi नहीं रहे थे.... मैं क्या करता....? मुझे जो ठीक लगा वो मैंने कह दिया....

प्रिंस की बात सुन के बाबा अपना सर पीट लेते हैं.....

बाबा : तुझे नहीं पता तू ने उसे क्या बताने का वादा किया है.... सुन न चाहता है तो सुन....

बाबा उसे जो बात बताते हैं उसे सुन के प्रिंस के होश उड़द जाते हैं.... वो बुरी तरह से चौंक जाता है.... उसके मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है.....

प्रिंस : kyaaaaaaaaaaa.....? मगर क्यूँउउउउउउनंनं....?

बाबा : ये सब शैतान के राजा अघोरा का किया धरा है.... तेरी पावर्स को हासिल करने के लिए ये उसकी एक चाल थी.... उसने उस खंजर के ज़रिये उस नील ज़हर को तेरे जिस्म में पहुँचाया था... उसे ये पता था की अपने अभेद्य कवच को हासिल करने के लिए तू अपनी त्रिकोण पावर्स को जागृत करेगा.... और उनके जागृत होते hi वो पावर्स नील ज़हर से मिलेंगी जिसकी वजह से वो .................. होगा....

प्रिंस : मगर....

बाबा : अब किसी अगर मगर की गुंजाइश नहीं है.... जो होना है वो हो के hi रहेगा....

प्रिंस : मगर बाबा अगर वैसा हुआ तो मेरी बंद बजने से कोई नहीं रोक पायेगा....

बाबा : हाँ मगर उसमे भी तो तुझे मज़ा hi आएगा न....

प्रिंस : पहले मज़ा फिर बाद में सजा... क्या फायदा ऐसे मज़े का.... और वैसे भी वो भी तो सही नहीं होगा न....

बाबा : जो भी हो.... अब जो होना है उसे बदला नहीं जा सकता....

प्रिंस : हाँ मगर रोका तो जा सकता है न....

बाबा : ये मुमकिन नहीं..... क्यों की उसे रोकने की तू जितनी कोशिश करेगा.... तेरी कोशिशें उतनी hi तेज़ी से नाकाम होगी.... उसे रोकने पे तुझे इतनी तकलीफ होगी की तू सेह नहीं पायेगा.... अब ये तेरे ऊपर है की तू क्या करता है.... खैर आगे जो भी हो..... इस से पहले की देर हो जाए तुम लोगों को अभी के अभी कैरो प्लेनेट जाना होगा.... जहाँ 2 दिन तक तू अपनी योग साधना और स्पीड का अभ्यास करेगा... फिर नेमत और मुस्कान को ले के तुझे पैंडोरा जाना होगा.... वहां काली झील के पास तुझे वो दानव मिलेगा.... तुझे उसे हरा के अभेद्य कवच को हासिल करना होगा....

प्रिंस : वो कोई इंसान नहीं बल्कि जादुई दानव है मैं उसे हराऊंगा कैसे...?

बाबा : अपनी पावर्स और दिमाग के दम पे तू उसे हरा सकता है.... हर किसी की कोई न कोई कमज़ोरी होती है.... उसकी भी होगी.... तुझे उसकी कमज़ोरी ढूंढ के उस पे वार करना होगा.... और अपने अभेद्य कवच को हासिल करना होगा.... अब मुझे जाना होगा.... फिर मिलेंगे.... अभी के लिए अलविदा.....

ये कह के बाबा वहां से चले जाते हैं....

प्रिंस : नेमत हम को अभी के अभी कैरो प्लेनेट जाना होगा....

नेमत : वो सब तो ठीक है मगर पहले ये बता की बाबा ने तुझे क्या बताया.....?

प्रिंस : नहीं वो कुछ ख़ास नहीं.... वो बस ऐसे hi....

नेमत : देख छुपा मत सच सच बता की बाबा ने तुझे क्या बताया.....? ऐसी क्या बात थी जो वो मेरे सामने नहीं कह सकते थे....? देख तू ने वादा किया है.... तू अपने वादे से नहीं मुकर सकता....

प्रिंस : यार वो बात तेरे जान ने की नहीं है.... प्लीज उस बारे में मुझ से कुछ मत पूछ.....

नेमत : अब तो तुझे वो बात बतानी hi होगी.... जब तक तू मुझे वो बात नहीं बता देता.... मैं यहाँ से हिलने वाली नहीं.....

नेमत की बात पे प्रिंस अपना सर पीट लेता है.... वो मरता क्या न करता.... अपने वादे के आगे मजबूर होक वो नेमत को सब सच बताने को तैयार हो जाता है....

प्रिंस : बाबा ने कहा की शैतान ने मेरी पावर्स को हासिल करने के लिए धोके से नीलम जीनी के हाथों जादुई खंजर का वार मुझपे करवाया ताकि उस खंजर के ज़रिये वो मेरे जिस्म में नील ज़हर को पहुंचा सके..... बाबा उस ज़हर को मेरे जिस्म से पूरी तरह से निकालने में कामियाब नहीं हो पाए थे.... उस ज़हर के कुछ अंश अब भी मेरे जिस्म में मौजूद हैं... और जैसे hi मेरी त्रिकोण पावर्स जागृत होगी वो नील ज़हर से मिल जायेगी.... जिस की वजह से मेरे जिस्म और ख़ास करके दिमाग में कुछ बदलाव होंगे.....

ये कह के प्रिंस खामोश हो जाता है वो आगे कुछ कह hi नहीं पाटा....

नेमत : कैसे बदलाव....?

प्रिंस :यार अब भी वक़्त है मेरी बात मान ले और उस बात को भूल जा.... उस बात को जान के मुझे जितना बड़ा झटका नहीं लगा है उसे कई बड़ा झटका तुझे लगेगा....

नेमत : वो सब मुझे मत बता बल्कि वो बता जो बाबा ने तुझे बताया है.... तेरी जिस्म में वो कैसे बढ़ाव आएंगे....? वो क्या बात है जो तू मुझ से छुपा रहा है.... बता जल्दी....

प्रिंस : तू जान न hi चाहती है तो सुन.... जिस किसी के पास मेरी साड़ी पावर्स होगी वो इस पूरे ब्रह्माण्ड पे राज कर पायेगा..... इस पूरे ब्रह्माण्ड में उसे हारने वाला कोई नहीं होगा..... मेरी पूरी पावर्स को हासिल करने के बाद वो न सिर्फ बेहद शक्तिशाली हो जाएगा बल्कि साथ hi वो अमर भी हो जाएगा..... खुद के अलावा उसे कोई नहीं मार पायेगा....

नेमत : ये तो मुझे पता है.... तू वो बता जो बाबा ने तुझे बताया है....

प्रिंस : वो hi बता रहा हूँ.... हाँ तो सुन.... मेरी पूरी पावर्स को शैतान दो hi तरीके से हासिल कर पाएंगे... पहला तरीका ये की मेरे जिस्म में मेरी पूरी पावर्स के आ जाने के बाद मुझे मार के वो मेरी पावर्स को हासिल कर सकते हैं जो की नामुमकिन है.... एक ऐसी उन्होनी जिसे होनी में कोई नहीं बदल सकता.... वो मुझे मजबूर कर के मुझसे मेरी मर्ज़ी से पावर्स को हासिल करना चाहेंगे जो की वो कर नहीं पाएंगे.... मुझे मजबूर कर सके ऐसा आज तक कोई पैदा नहीं हुआ.... और दूसरा रास्ता ये की मुझे मेरा बीटा hi जान से मार सकता है... वो बीटा जिसने एक शैतान की कमसिन ( वर्जिन ) लड़की की कोख से जनम लिया हो.... और उसमे मेरे पवित्र पावर्स के साथ साथ काली शक्तियां भी हो.... ये भी मुमकिन नहीं की मैं किसी शैतान की कमसिन बेटी के साथ सम्भोग करूँ.... तो मुझे सम्भोग करने पे मजबूर करने के लिए शैतान ने इतना बड़ा खेल खेला.... जैसे hi त्रिकोण पावर्स का मिलान नील ज़हर से होगा.... मेरा जिस्म बदलने लगेगा.... मुझे बहुत सी पावर्स हासिल हो जाएंगी साथ hi.... मेरा जिस्म और भी ज़्यादा मज़बूत हो जाएगा... ख़ास कर के मेरा लू.... मेरा मतलब है की मेरे जिस्म का वो हिस्सा जिसे सम्भोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है वो बड़ा और मज़बूत हो जाएगा.... इतना hi नहीं वो मुझे बार बार सम्भोग करने को मजबूर भी करेगा.... मैं कब कहाँ किसे पटक के सम्भोग क्रीड़ा में लग जाऊं मुझे पता hi नहीं चलेगा.... अगर मैंने उसे रोकने की कोशिश की तो मेरे जिस्म में असीम न काबिले बर्दाश्त दर्द होगा.... जिसे सहना मेरे लिए आसान नहीं होगा....

ये कह के प्रिंस खामोश हो जाता है.... लम्बी ख़ामोशी के बाद वो पलट के नेमत की तरफ देखता है.... नेमत के साथ किसी और को वहां देख के उसे एक बड़ा झटका सा लगता है....

ये और कोई नहीं बल्कि मुस्कान है.... प्रिंस और नेमत इस वक़्त उस रूम में हैं जिस रूम में प्रिंस ने मुस्कान को बीएड पे लेटाया था.....

नेमत और मुस्कान हैरत से प्रिंस को देख रहे हैं.... मुस्कान तो वैसे भी प्रिंस से कुछ पूछ नहीं सकती.... मगर नेमत उस से बहुत कुछ पूछना चाहती है मगर इस से पहले की वो कुछ कहती....

प्रिंस : मुझे पता है तुम दोनों के दिमाग में इस वक़्त बहुत से सवाल उभर रहे हैं..... ख़ास कर के मुस्कान तुम्हारे दिमाग में..... उन सब सवालों के जवाब मेरे पास हैं.... मैं सब तुम्हे बताना चाहता हूँ.... मगर अभी वक़्त की कमी की वजह से मैं तुम्हे कुछ नहीं बता सकता.... बस इतना जान लो की तुम्हारी ये हालत बचपन में सर में चोट लगने की वजह से नहीं हुई थी.... बल्कि काली शक्तियों ने तुम्हारे दिमाग के साथ साथ तुम्हारे पूरे जिस्म को भी बाँध दिया था.... ये काली शक्तियां किसकी हैं मैं नहीं जानता.... और उसने तुम्हे अपने कब्ज़े में क्यों किया नहीं पता... इन सब सवालों के जवाब पाने और तुम्हे जल्द से जल्द उन काली शक्तियों की गिरफ्त से आज़ाद करने के लिए मुझे तुम्हे साथ ले के कैरो प्लेनेट जाना होगा....

ये कह के प्रिंस मुस्कान के करीब जा के बैठ जाता है और उसका हाथ अपने हाथों में ले के प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहता है.....

प्रिंस : जब तक मैं ज़िंदा हूँ तुम्हारे साथ न खुद कुछ गलत करूँगा और न hi किसी और को कुछ गलत करने दूंगा.... मेरे साथ तुम मेहफ़ूज़ हो.... ये वादा है मेरा तुमसे....

ये कह के वो खामोश हो जाता है और एक तक बस मुस्कान की आँखों में देखने लगता है..... जैसे की उस से पूछना छह रहा हो.... की क्या तुम मुह्पे भरोसा करती हो....?

मुस्कान भी उसकी आँखों में देख रही है.... उसे प्रिंस की कही उनकाही साड़ी बातें सुनाई दे रही है.... वो अपनी पलकें झुका के प्रिंस को ये बता देती है की....

मुस्कान मन में : हाँ प्रिंस मुझे तुम पे पूरा भरोसा है....

मुस्कान का इशारा पाते hi प्रिंस नेमत को कैरो प्लेनेट चलने को कहता है....

पालक झपकते hi तीनो कैरो प्लेनेट पहुँच जाते हैं.... और फिर नेमत और मुस्कान को एक जगह बैठा के प्रिंस अपनी योग साधना में लग जाता है....

धीरे धीरे प्रिंस अपने दिल को दिमाग से जोड़ के अपनी इन्द्रियों को जगाने लगता है एक एक कर के उसकी साड़ी इन्द्रियां जागने लगती हैं.... फिर वो त्रिकोण पावर्स की तरफ बढ़ जाता है.... काफी तलाश करने के बाद प्रिंस को अपनी त्रिकोण पावर्स नज़र आ जाती हैं.... वो जैसे hi उसके करीब जाता है..... उसे एक ज़ोर का झटका सा लगता hai....aur वो उड़ते हुए दूर जा गिरता है.... प्रिंस के जिस्म में इस वक़्त नील ज़हर के कुछ अंश होने की वजह से प्रिंस त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुँच पा रहा है...

वो बार बार कोशिश करता है और बार बार उसे हार का सामना करना पद रहा है.... ये सोच के वो बेहद परेशान हो जाता है.... उसे समझ hi नहीं आ रहा है की वो त्रिकोण पावर्स तक क्यों नहीं पहुँच पा रहा है.... वो अभी ये सोच hi रहा होता है की तभी....

नेमत : प्रिंस आखिर क्या वजह है की तुम त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुँच पा रहे हो.....???????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 100

धीरे धीरे प्रिंस अपने दिल को दिमाग से जोड़ के अपनी इन्द्रियों को जगाने लगता है एक एक कर के उसकी साड़ी इन्द्रियां जागने लगती हैं.... फिर वो त्रिकोण पावर्स की तरफ बढ़ जाता है.... काफी तलाश करने के बाद प्रिंस को अपनी त्रिकोण पावर्स नज़र आ जाती हैं.... वो जैसे hi उसके करीब जाता है..... उसे एक ज़ोर का झटका सा लगता hai....aur वो उड़ते हुए दूर जा गिरता है.... प्रिंस के जिस्म में इस वक़्त नील ज़हर के कुछ अंश होने की वजह से प्रिंस त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुँच पा रहा है...

वो बार बार कोशिश करता है और बार बार उसे हार का सामना करना पद रहा है.... ये सोच के वो बेहद परेशान हो जाता है.... उसे समझ hi नहीं आ रहा है की वो त्रिकोण पावर्स तक क्यों नहीं पहुँच पा रहा है.... वो अभी ये सोच hi रहा होता है की तभी....

नेमत : प्रिंस आखिर क्या वजह है की तुम त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुँच पा रहे हो.....???????

अब आगे....

प्रिंस : पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा है की आखिर वो क्या वजह है की मैं त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुँच पा रहा हूँ....? जब भी मैं उसके पास जाने की कोशिश करता हूँ.... वो मुझे खुद से दूर कर देती है....

अभी नेमत कुछ कहने hi वाली होती है की तभी वहां बाबा आ जाते हैं.... बाबा को देख के मुस्कान बुरी तरह से चौंक जाती है.... उसे लगने लगता है की बाबा यहाँ उनको नुक्सान पहुँचाने आये हैं....

बाबा : नील ज़हर की वजह से वो त्रिकोण पावर्स के पास नहीं जा प् रहा है....

प्रिंस : नील ज़हर.....!!!!

बाबा : हाँ नील ज़हर.... जब तक वो तुम्हारे जिस्म में एक्टिव रहेगी.... तुम त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुंच पाओगे... उन्हें हासिल कारन तो बहुत दूर की बात है....

प्रिंस : तो फिर आप hi बताइये की कैसे मैं उस नील ज़हर को अपने जिस्म से निकालूँ....?

बाबा : उसे तुम्हारे जिस्म से पूरी तरह से नहीं निकाला जा सकता....

प्रिंस : तो फिर....?

बाबा : उसे बस सिर्फ कुछ देर के लिए निष्क्रिय किया जा सकता है.... वो भी सिर्फ 10 मिनट के लिए .... और जैसे hi वो निष्क्रिय हो जाएंगी.... ठीक तभी अगले 10 मिनट के अंडर तुम्हे अपनी त्रिकोण पावर्स को हासिल करना होगा.... अगर इस में ज़रा भी देर हुई तो फिर तुम कभी अपनी त्रिकोण पावर्स को हासिल नहीं कर पाओगे.... उसके लिए तुम्हे अगले 10 साल तक इंतज़ार करना होगा.... और तब तक नील ज़हर तुम्हारे जिस्म पे पूरी तरह से कब्ज़ा कर चूका होगा....

प्रिंस : वो सब तो ठीक है मगर नील ज़हर को निष्क्रिय कैसे किया जाए....?

बाबा : इसके लिए तुझे अपने हाथों से बनायीं हुई प्यार की नगरी यानी ड्रीम वर्ल्ड प्लेनेट जाना होगा.... वहां के पवित्र झील में डुबकी लगाने से नील ज़हर बस 10 मिनट के लिए निष्क्रिय हो जाएगा और फिर वक़्त रहते तुझे यहाँ वापिस आना होगा और अपनी त्रिकोण पावर्स को हासिल करना होगा.... मगर याद रखना इस के लिए तेरे पास सिर्फ और सिर्फ 10 मिनट्स का वक़्त होगा....

प्रिंस : ये काम मुश्किल है मगर नामुमकिन नहीं.... और जो काम आसानी से हो जाए उसमे मज़ा कैसा....? और मुस्कियों के आगे हार के जो अपना सर झुका दे वो प्रिंस नहीं....

प्रिंस की बात सुन के बाबा खुश हो जाते हैं.....

बाबा : ये की न शेरो वाली बात.... जा के अपना काम पूरा कर के आ जब तक मैं यहाँ मुस्कान के पास रुकता हूँ...

बाबा को हाँ कह के प्रिंस मुस्कान के पास जा के कहता है....

प्रिंस : मुस्कान मुझे कुछ देर के लिए यहाँ से जाना होगा.... तुम ज़रा भी मत घबराना यहाँ बाबा तुम्हारे साथ रहेंगे.... उनके रहते तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा.... मैं बस यूँ गया और यूँ आया.....

मुस्कान नहीं चाहती की प्रिंस एक पल के लिए भी उस से दूर जाए.... मगर वो ये बात भी अच्छे से जानती है की उसका वहां जान भी ज़रूरी है इस लिए वो अपनी पलकें झुका के प्रिंस को हाँ का इशारा कर देती है.....

बस फिर क्या था प्रिंस नेमत के साथ ड्रीम वर्ल्ड के लिए निकल जाता है..... और वहां के झील में डुबकी लगा के फ़ौरन वापिस कैरो प्लेनेट आ जाता है और आते के साथ hi बिना वक़्त गवाए योग साधना के ज़रिये त्रिकोण पावर्स को हासिल करने में लग जाता है.... प्रिंस की पहली कोशिश नाकाम हो जाती है... फिर वो दूसरी कोशिश करता है वो भी नाकाम हो जाती है.... ये देख प्रिंस परेशान हो जाता है.... वो अपनी आँखें खोल के बाबा से कहता है....

प्रिंस : बाबा अब तो मैंने अपने जिस्म में जो नील ज़हर है उसे निष्क्रिय कर दिया है फिर क्यों मैं त्रिकोण पावर्स तक नहीं पहुंच पा रहा हूँ....?

बाबा : वो इस लिए की इस वक़्त तुम्हारा दिमाग शांत नहीं है.... तुम्हे पहले अपने दिमाग और दिल से साड़ी बात निकाल के उन्हें शांत करना होगा तब जा के तुम अपनी त्रिकोण पावर्स तक पहुंच पाओगे और उसे पा सकोगे....

वक़्त तेज़ी से बीत ता जा रहा है.... और प्रिंस है की त्रिकोण पावर्स को हासिल नहीं कर पा रहा है.... ये देख सब घबराने लगते हैं.....

बाबा : प्रिंस ये तुम्हारे पास आखरी मौका है अगर अब तुम कामियाब नहीं हुआ तो फिर.....

बाबा की बात सुन के प्रिंस कुछ सोचता है फिर अपनी आँखें बंद करके अपने दिल और दिमाग को शांत करने लगता है.... धीरे धीरे उसे कामियाबी मिल जाती है.... और वो त्रिकोण पावर्स की तरफ बढ़ जाता है वो त्रिकोण पावर्स को हासिल करने hi वाला होता है की तभी वक़्त ख़तम हो जाता है और नील ज़हर जागृत होने लगता है.... ये महसूस होते hi बाबा और नेमत बुरी तरह से घबरा जाते हैं..... उन्हें ऐसा लगने लगता है जैसे की इस बार भी प्रिंस हार गया.... मगर तभी अचानक से वो होता है जिसे देख सब चौंक जाते हैं..... उन्हें अपनी आँखों पे यकीन नहीं होता..... वो हैरत से सामने देखने लग जाते हैं.....

अचानक से प्रिंस के जिस्म से तेज़ रौशनी निकलने लगती है और उसका जिस्म तेज़ रौशनी से चमकने लगता है.... वो रौशनी इतनी तेज़ हो जाती है की सब को अपनी आँखें बंद करनी पड़ती हैं.... कोई भी उस रौशनी को सेह नहीं पाटा.... पूरा पैंडोरा प्लेनेट उस रौशनी से रोशन हो जाता है.... फिर धीरे धीरे वो रौशनी काम होती जाती है और प्रिंस के जिस्म में समां जाती है....

सब जब आअंखें खोल के प्रिंस को द्केहते हैं तो चौंके बिना नहीं रह पाते.... प्रिंस का जिस्म पहले से काफी आकर्षक और मज़बूत हो गया है.... उसे अपने जिस्म में काफी बदलाव महसूस होने लगते हैं.... साथ hi उसका दिमाग भी बहुत सी नयी चीज़ों से और ज्ञान के भण्डार से रोशन हो जाता है.... उसे अपने अंडर बहुत सी पावर्स महसूस होने लगती है.... वो ख़ुशी से झूम उठता है और नाचने लग जाता है.... प्रिंस को इस तरह ख़ुशी से डांस करते देख सब खुश हो जाते हैं....

प्रिंस : बाबा मैंने मैं कामियाब होगा.. मैंने त्रिकोण पावर्स को पा लिया....

ये कह के प्रिंस ख़ुशी में आगे बढ़ के बाबा के गले लग जाता है....

बाबा : अब तुझे अगला पड़ाव पूरा करना है..... यहाँ तुझे बिना पावर्स का इस्तेमाल किया सिर्फ अपने जिस्म की ताक़त के ज़रिये ये काम पूरा करना है.....

प्रिंस : बाबा जब त्रिकोण को पा लिया है तो ये कौनसी बड़ी बात है.... आप बताइये की मुझे क्या करना है.... मैं जल्द hi उसे भी पूरा कर लूंगा.....

बाबा : ये इतना भी आसान नहीं है.... जितना तू सोच रहा है.... जानता है की आगे तुझे क्या करना है....?

प्रिंस न में अपनी गर्दन हिला देता है...

बाबा : अगले पड़ाव में तुझे सिर्फ अपने हाथ की ताक़त से सामने वाले पहाड़ की उस चट्टान को तोडना है....

बाबा की बात सुन के प्रिंस और मुस्कान के साथ साथ नेमत भी बुरी तरह से चौंक जाती है.....

नेमत : बाबा ये कैसे मुमकिन है.....? भला कोई इंसान अपनी जिस्मानी ताक़त से कैसे उस चट्टान को तोड़ सकता है.....? वो कोई कागज़ की चट्टान नहीं है बल्कि पठार की मज़बूत चट्टान है....

बाबा : हाँ मुझे पता है मगर फिर भी मुस्कान के लिए प्रिंस को उसे तोडना hi होगा..... उस चट्टान के बीच में चक्र फूल के जादुई बीज हैं.... जिन से मुस्कान के जिस्म से काली शक्तियों को निकाला जा सकता है.... अगर प्रिंस मुस्कान को ठीक करना चाहता है तो उसे ये करना hi होगा....

प्रिंस : हाँ मैं दिल से चाहता हूँ की मुस्कान ठीक हो जाए....

नेमत : हाँ मगर उसे पावर्स के ज़रिये भी तो निकाला जा सकता है न.....

बाबा : नहीं गलती से भी अगर उस चट्टान पे प्रिंस ने अपनी पावर्स का इस्तेमाल किया तो उस चट्टान के साथ साथ वो बीज भी नष्ट हो जाएंगे.... फिर मुस्कान को काली शक्तियों के पंजे से आज़ाद कर के ठीक करना नामुमकिन हो जाएगा..... अब ये प्रिंस पे है की वो क्या करना चाहता है....

नेमत : मगर बाबा अगर प्रिंस ने ऐसा किया तो जानते हैं क्या होगा.....? उसका हाथ उस चट्टान पे वार करने से टूट जाएगा....

नेमत और बाबा की बात सुन के मुस्कान का जिस्म कांप जाता है उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं वो प्रिंस को देखते हुए रोने लगती है... जैसे की कहना चाहती हो.... नहीं प्रिंस प्लीज ऐसा मत करना.... मैं जैसी हूँ ठीक हूँ... मुझे काली शक्तियों के कैद में रहना मंज़ूर है मगर मुझे उस से निजात दिलाने के लिए तुम्हे बेइन्तेहाँ दर्द सहना पड़े यहाँ तक की तुम्हारा हाथ टूट जाए ये मुझे मंज़ूर नहीं प्लीज ऐसा मत करना.... प्लीज....

प्रिंस को जैसे मुस्कान की बात समझ आ जाती है... वो उसके पास जा के उसके आंसुओं को पॉच के कहता है....

प्रिंस : मैंने तुम्हे मन किया था न रोने से.... मगर तुम मेरी बात सुनती hi कहाँ हो... जब देखो तब बस रोने लग जाती हो.... सोचता हूँ तुम्हारा नाम मुस्कान से बदल के रोंदू रख दूँ... क्या कहती हो....? हहहहहहहह.... वाओ अच्छा नाम है रोंदू.... क्यों ठीक है न.... रोंदू जी....

मुस्कान प्रिंस की बात सुन के चीड़ जाती है.... और गुस्से से दूसरी तरफ देखने लगती है....

प्रिंस : अच्छा बाबा नाराज़ मत हो मैं तो मज़ाक कर रहा था..... बस एक बार तू ठीक हो जा फिर तुझे न कभी कोई तकलीफ होने दूंगा और न hi कभी रोने दूंगा.... सारे जहाँ की ख़ुशी तेरे क़दमों में ला के रख दूंगा....

ये कह के प्रिंस वहां से जाने लगता है.... प्रिंस को जाते देख और आगे क्या होने वाला है ये सोच के मुस्कान का दिल कांप जाता है वो प्रिंस को रोकने की कोशिश करना चाहती है मगर कर नहीं पाती वो मजबूर है..... न hi वो उसे आवाज़ दे के रोक सकती है और न hi वो हाथ हिला के.... बस प्रिंस को जाते हुए देखती रहती है....

प्रिंस आगे बढ़ के उस चट्टान के पास जाता है फिर अपने दोनों हाथों पे कपडा बाँध के एक गहरी सांस ले के उस चट्टान पे मुक्का मारता है.... जैसे hi उसके हाथ उस चट्टान से टकराते हैं.... दर्द की तेज़ लेहेर प्रिंस के हाथ स होती हुई उसके पूरे जिस्म में फैल जाती है और दर्द से तड़प के वो चीख उठता है....

Aaaaaaaaagggggghhhhhhhhhh.....

प्रिंस की चीख सुन के नेमत के साथ साथ मुस्कान का दिल भी तड़प जाता है दोनों की आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

फिर कुछ देर रुक के वो एक बार फिर से उस चट्टान पे मुक्का मारता है.... एक बार फिर से उसे उसी असहनीय दर्द का एहसास होता है..... और उसकी चीख फिर से हवा में गूँज उठती है.... बार बार ऐसा hi होता है..... प्रिंस दर्द से तड़पते हुए वहीँ बैठ जाता है....

प्रिंस : नहीं बाबा ये मुझसे नहीं होगा..... इस चट्टान को तोडना मेरे तो क्या किसी के लिए भी मुमकिन नहीं.... कोई और रास्ता है तो बताइये.....

प्रिंस की बात सुन के बाबा कहते हैं....

बाबा : सीधे सीधे ये क्यों नहीं कहता की तू मुस्कान को ठीक करना नहीं चाहता.... तू बस कहने के लिए कह रहा था.... अगर तुझे उसकी ज़रा भी फ़िक्र होती तो तू ऐसा बिलकुल भी नहीं कहता.... बल्कि अब तक तो तू उस चट्टान को तोड़ चूका होता..... झूट कहा था तू ने की तू हमेशा अपना वादा निभाता है.... आज तू ने इस चट्टान को न तोड़ के ये साबित कर दिया की तू झोटे वादे करता है.... प्रिंस भी औरों की तरह झूट hi कहता है.... मुस्कान उन काली शक्तियों के कब्ज़े में रह के तड़प तड़प के मरे इस से तो अच्छा है की मैं इस तलवार से उसे अभी मार के उन काली शक्तियों से आज़ाद कर दूँ.....

ये कह के बाबा तलवार ले के मुस्कान की तरफ बढ़ने लगते हैं.... बाबा की बात सुन के और उन्हें मुस्कान की तरफ बढ़ते देख प्रिंस का दिल बुरी तरह से कांप जाता है वो फ़ौरन आगे बढ़ के बाबा के पास जाके उन्हें रोकता है और उनके हाथ से तलवार चीन के गुस्से में चीख उठता है.....

प्रिंस गुस्से में : बाबा.....!!!! आप पागल तो नहीं हो गए.....? ये क्या कह रहे हैं....?

बाबा : वो hi कह रहा हूँ जो मुझे कहना चाहिए..... उन काली शक्तियों के कब्ज़े में रह के टिल टिल करते हुए मरने से तो अच्छा है की इसे एक बार में hi मार दूँ.... काम से काम इस तरह ये उन काली शक्तियों के बस में रह के चैन से जी न सकीय मगर चैन से मर तो सकती है न.....

प्रिंस बेहद गुस्से में : न hi मैं झोटा हूँ और न hi मेरा वादा.... रही बात मुस्कान की तो जब मैं ज़िंदा हूँ उसे कोई छू भी नहीं सकता.... मारना तो बहुत दूर की बात है.... उसके लिए ये चट्टान क्या चीज़ है मैं पूरी दुनिया से लड़ जाऊं... यहाँ के हर बड़े से बड़े पहाड़ को तोड़ दूँ.... बस देखते जाइये....

प्रिंस की बात सुन के बाबा ज़ोर से हसने लगते हैं.....

हहहहहहहहह....

प्रिंस : मैंने क्या कोई जोके मारा है जो आप इस तरह हंस रहे हैं....?

बाबा : जोके hi तो है.... तू उन काली शक्तियों से इसे बचाएगा..... तू एक मामूली इंसान जिस से ये छोटा सा पहाड़ नहीं टूट रहा है वो उन काली शक्तियों का सामना करेगा.... नहीं ये मुमकिन नहीं.... अरे तू तो उस दानव को भी न हरा सकेगा.... बात करता है.... चल ये बेकार का ड्रामा बंद कर और जल्दी से मुस्कान को मार के उसे काली शक्तियों से आज़ाद कर ताकि वो चैन से मर सके और हम यहाँ से जा सकें.... यहाँ हम तेरा ये बेकार का ड्रामा देखने के लिए नहीं आये हैं....

बाबा की बात सुन के प्रिंस बेहद गुस्से में आ जाता है और तलवार को एक तरफ फ़ेंक के अपने हाथों में कपडा बाँध के बेहद गुस्से में उस पहाड़ की चट्टान पे ज़ोर ज़ोर से मुक्का मारने लगता है.... तीन चार मुक्के में hi उसका हाथ ज़ख़्मी होने लगता है.... प्रिंस को अपने हाथ में बेइन्तेहाँ दर्द होने लगता है.... साथ hi उसके हाथों से खून भी बहने लगता है मगर वो उस चट्टान पे मुक्का मारना नहीं चोरता.... जितना तेज़ उसे दर्द होता है उतनी hi तेज़ी से वो उस चट्टान पे मुक्का माता रहता है.....

प्रिंस की ऐसी हालत देख के मुस्कान के साथ साथ नेमत का दिल भी तड़प जाता है..... उनकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं..... मुस्कान प्रिंस को ऐसा करने स्व रोकना चाहती है.... मगर वो छह के भी ऐसा कर नहीं पाती न hi वो बोल सकती है और न hi वो हिल सकती है.... अपनी बेबसी पे उसे आज बेहद गुस्सा आने लगता है.... प्रिंस की हालत उस से सही नहीं जाती उसकी आन्ह्कों से बेतहाशा आंसू बहने लगते हैं..... मगर नेमत के साथ एशिया नहीं है वो मजबूर नहीं है.... वो आगे बढ़ के प्रिंस को रोकना चाहती है मगर बाबा उसे ऐसा करने से रोक देते हैं.....

नेमत : बाबा क्या आप को दिखाई नहीं दे रहा है की प्रिंस के साथ क्या हो रहा है....? उसके हाथ से खून निकल रहा है.... अगर उसे रोका न गया तो कहीं उसका हाथ hi न टूट जाए.... वो कोई मामूली पंचिंग बैग नहीं बल्कि पठार की चट्टान है..... जिसे बिना पावर्स के सिर्फ मुक्का मार के तोडना नामुमकिन है.....

नेमत ने अभी ये कहा hi था की तभी अचानक से एक धमाका होता है और दो आवाज़ पूरी फ़िज़ा में गूँज उठती है.... एक प्रिंस की और दूसरी उस चट्टान के टूट के डुकड़ों में बदलने की आवाज़....

प्रिंस : आआआग्गगहःहःहःहः.....

Dharaaaaaaaaaaaaaaammm....

उस चट्टान के टूटे hi नेमत और मुस्कान हैरत से कभी प्रिंस के देखते है तो कभी उस टूटी हुई चट्टान के टुकड़ों को....

नेमत शॉकेड : बाबा ये कैसे मुमकिन हैं....? कोई इंसान सिर्फ मुक्का मार के किसी चट्टान को कैसे तोड़ सकता है....?

बाबा मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं.....

बाबा : अगर बात किसी अपने की हो तो इंसान के इरादे मज़बूत हो जाते हैं.... फिर उसे नज़र नहीं आता की सामने पंचिंग बैग है या फिर पत्थर की कोई बड़ी सी चट्टान.... उस के इरादों और हौसलों के आगे सब मामूली से बन जाते हैं.... वो बड़े से बड़े पहाड़ को अपने मुक्के के वार से गिरा सकता है.... ये तो बस एक मामूली से पहाड़ की चट्टान है.... और सब से बड़ी बात ये की ये और कोई नहीं बल्कि प्रिंस है.... जिसके लिए उसके अपनों से बढ़ के और कुछ नहीं.... जब बात उसके किसी अपने की जान की हो तो फिर उसे न hi कुछ नज़र आता है और न hi कुछ समझ आता है.... उस के दिमाग में बस एक hi बात घूमती रहते है की चाहे जैसे भी हो उसे कुछ भी क्यों न करना पड़े वो अपने अपनों पे एक खरोच भी नहीं आने देगा.... भले hi उसकी जान बचने के लिए प्रिंस को अपनी हस्ती hi क्यों न मिटानी पड़े.... वो अपनी जान की बाज़ी लगा के अपनों की हिफाज़त करता आया है और हमेशा करेगा....

इधर उस चट्टान को तोड़ने के बाद प्रिंस चक्र के बीज ला के बाबा को देता है और कहता है.....

प्रिंस : बाबा क्या अब भी आपको ऐसा hi लगता है की मैं और मेरा वादा झूठा है.....?

प्रिंस को देख और उसकी बातें सुन के बाबा की आँखें नाम हो जाती हैं वो न में अपनी गर्दन हिला देते हैं.... फिर प्रिंस मुस्कान के पास जा के प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहता है....

प्रिंस : बस सिर्फ एक और दिन की बात है.... फिर मैं तुम्हे इन काली शक्तियों के साथ साथ उन सब तकलीफों से आज़ादी दिलवा दूंगा जो न चाहते हुए भी तुम सेह रही हो....

प्रिंस इस वक़्त बुरी तरह से ज़ख़्मी है उसके हाथों से बेतहाशा खून निकल रहा है मगर उसे इस हाल में भी अपनी नहीं बल्कि मुस्कान की फ़िक्र है.... ये देख मुस्कान की आँखों में आंसू आ जाते है और वो रोने लगती है.... उस का रोना प्रिंस से देखा नहीं जाता.... वो फ़ौरन उसके आंसू पॉच के कहता है....

प्रिंस : ये क्या मुस्कान तुम रो रही हो....? क्या तुम्हे मेरी बात पे यकीन नहीं है.... मैं सच कह रहा हूँ.... बस एक दिन और फिर तुम हे हर तकलीफ से निजात मिल जायेगी.... ये मेरा वादा है तुमसे....

बाबा : हाँ मुस्कान जब प्रिंस ने कहा है तो वो ऐसा कर के hi दम लेगा.... आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ की प्रिंस ने अपना वादा तोडा हो.... क्यों की प्रिंस अपनी जान तो दे सकता है मगर अपना वादा नहीं तोड़ सकता.... तो रोना बंद करो और ठीक होने की तैयारी करो.... जल्द hi तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी....

मुस्कान मन में : अब मैं आप लोगों को कैसे समझाऊं की इस वक़्त मुझे अपनी नहीं बल्कि प्रिंस की तकलीफ देख के रोना आ रहा है.... उसके ज़ख़्मी हाथों से बहते खून को देख के मेरा दिल तड़प के खून के आंसू रो रहा है.... प्लीज कोई तो कुछ करो.... इस मासूम को इस तकलीफ से निजात दिलाओ.... हे ऊपर वाले इस मासूम की मदत कर.... प्रिंस की मदत कर.... उसकी इस तकलीफ को दूर कर दे... मैं उसे इस हाल में नहीं देख सकती.... प्लीज प्रिंस को ठीक कर दे....

अभी मुस्कान ये सोच hi रही थी की तभी सामने का नज़ारा देख उसे ये लगा की ऊपर वाले ने उसके दिल की बात सुन ली हो....

बाबा आगे बढ़ के प्रिंस के करीब जाते हैं और अपनी आँखें बंद कर के कुछ पड़ते हैं फिर अपना हाथ प्रिंस के सर पे रख देते हैं.... उनके हाथ से नीली रौशनी निकल के प्रिंस के जिस्म में जाने लगती है.... जिस से उसकी हीलिंग पावर्स जागृत हो जाती है और देखते hi देखते उसके घाव भरने लगते हैं.... कुछ hi देर में प्रिंस पूरी तरह से ठीक हो जाता है...

बाबा : कुछ देर आराम कर ले फिर तुझे अपनी त्रिकोण पावर्स को कैसे इस्तेमाल करना है उसकी प्रैक्टिस करनी है....

फिर कुछ देर बाद बाबा उस कैसे और क्या करना है वो बताते जाते हैं साथ hi ये भी की उसे अपनी त्रिकोण पावर्स का कैसे इस्तेमाल करना है वो भी बताते हैं....

बाबा : त्रिकोण पावर्स बहुत सी पावर्स का एक झुण्ड है... इसमें ये तुझे बेइन्तेहाँ स्पीड प्रदान कर सकती है.... जिस से तू सेकंड के सौवे हिस्से से भी काम वक़्त में जो चाहे कर सकता है.... सेकंड के सौवे हिस्से का मतलब है समय का रुकना.... उस वक़्त तेरे अलावा सब के लिए समय रोक जाएगा.... उस वक़्त तू किसी पे भी आसानी से वार कर सकता है.... इस पावर्स के ज़रिये तू आग पानी धरती और हवा को साथ मिला के किसी पे जान लेवा वार भी कर सकता है... तुझपे इन चारों में से किसी का कोई असर न होगा.. उल्टा अगर कोई इन चारो पावर्स से तुझपे वार करेगा तो उस से तेरी पावर्स और बढ़ती जायेगी... साथ hi तेरे पास ऐसी पावर्स है जिसके ज़रिये तू जब चाहे जहाँ चाहे पल भर में पहुंच सकता है.... जैसा की नेमत करती है.... और साथ hi और भी बहुत कुछ है जो तुझे वक़्त रहते पता चलता जाएगा....

फिर बाबा उसे ट्रैन करने लग जाते हैं.... पूरा दिन प्रिंस आज पानी हवा धरी और स्पीड की पावर्स की प्रैक्टिस करने लगता है..... रात होने पे सब वहीँ एक टेंट बना के आराम करते हैं फिर सुबह सुबह प्रिंस की ट्रैंनिंग शुरू हो जाती है....

प्रिंस धीरे धीरे सब पे काबू पाने लगता है.... और जल्द hi सब में परफेक्ट हो जाता है.... अब बारी आती है उसके इम्तेहान की....

बाबा अपनी आँखें बंद कर के अपना हाथ हवा में घूमते हैं.... जिस से वह अचानक से धुँवे का एक घेरा बन जाता है... और उसमे से कुछ विशालकाय दानव जादुई भेड़िये शेर और साथ साथ ड्रैगन्स भी बहार निकलने लगते हैं.... उन सब को देख मुस्कान के साथ साथ नेमत भी बेहद घबरा जाती है....

बाबा : प्रिंस तुझे इनसे मुकाबला करना है.... इनको हराना है.... चल तैयार हो जा....

प्रिंस आगे बढ़ के उनके करीब जाता है.... पहले 2 विशालकाय शेर एक साथ उसपे हुम्ला कर देते हैं.... उनकी दहाड़ सुन की सभी का दिल देहल जाता है.... वो प्रिंस को मारने के लिए वो उसपे छलांग लगा देते हैं.... प्रिंस फुर्ती से उनसे बचते हुए एक तरफ चालान लगा देता है.... शेर घूम के फिर से उसे मारने के लिए उसपे छलांग लगते हैं.... इस बार प्रिंस उनसे बचने के बजाये उनपे छलांग लगा के उनमे से एक के ऊपर चढ़ जाता है और दोनों हाथों से उसके जबड़े को पकड़ के अपनी पूरी ताकत लगा के चीरने लगता है देखते hi देकते वो शेर के जबड़े को दो टुकड़ों में पहाड़ के रख देता है.... तभी अचानक से उसके पीठ पे दूसरा शेर अपनी तलवार जैसे नुकीले पंजे से वार करता है.... जिस से प्रिंस घायल हो जाता है उसकी पीठ से खून निकलने लगता है... प्रिंस लड़खड़ा के एक तरफ गिर जाता है.... फिर अपने दर्द को दबा के फ़ौरन उठ के उस शेर पे अपनी पूरी ताकत से वार करता है.... मगर शेर एक तरफ हो के उस वार से बच जाता है.... और पलट के प्रिंस पे वार करता है इस से पहले की प्रिंस उस वार से खुद को बचता पीछे से भेड़िये प्रिंस पे हुम्ला बोल देते हैं.... वो अपनी मुँह से नीली रौशनी प्रिंस के ऊपर चोर्ने लगते हैं.... उनके साथ साथ ड्रैगन भी अपने मुँह से आग प्रिंस के ऊपर चोर्ने लगते हैं.... तीन तरफ से प्रिंस पे हुम्ला शुरू हो जाता है.... प्रिंस अपनी पावर्स से उनके वार को रोकने लगता है.... ड्रैगन की आग प्रिंस के जिस्म से टकरा के उसके अंडर सामने लगती है साथ hi उसकी पावर्स को और भी बढ़ने लगती है.... प्रिंस पानी और आग की पावर्स को मिला के शेर और भेड़ों पे हुम्ला करने लगता है.... तभी दानव उस पे पीछे से हुम्ला बोल देते हैं.... वो प्रिंस को उठा के पटकने लेट हैं.... फिर उसे घुमा के दूर फ़ेंक देता हैं.... प्रिंस उड़ता हुआ दूर जा गिरता है उसके मुँह से खून निकलने लगता है.... अपना खून देख के प्रिंस गुस्से से पागल हो जाता है फिर वो अपनी आँख बंद कर के कुछ पढता है जिस से उसका जिस्म धीरे धीरे बड़ा होने लगता है.... देखते hi देखते वो उन दानवों और ड्रैगन जितना बड़ा हो जाता है.... गुस्से में आगे बढ़ के ड्रैगन की पूछ पकड़ के उसे हवा में घूमता है और चाबुक की तरह उस ड्रैगन से शेर भेड़िये और दानव को पीटने लगता है.... फिर अपने दूसरे हाथ से आसमान की तरफ इशारा करता है जिस से तेज़ बिजली कड़कने लगती है और प्रिंस के हाथ में बिजली की तलवार से बन जाती है जिस से वो उन सब को काटने लगता है.... पूरा पैंडोरा उनकी चीखों से गूंजने लगता है.... चारो तरफ उन सब के खून और जिस्म के टुकड़े फैल जाते हैं..... मगर अब भी प्रिंस का गुस्सा शांत नहीं होता.... उसका पूरा जिस्म खून से सना हुआ है.... तभी उसकी नज़र मुस्कान पे पड़ती है.... मुस्कान बेहद दरी हुई हालत में उसे देख रही है.... मुस्कान को देखते hi प्रिंस का गुस्सा काम होने लगता वो फ़ौरन उसके पास जाता है और प्यार से उसके चेहरे को दकह के कहता है.....

प्रिंस : डरो मत मुस्कान कुछ नहीं हुआ देखो मैंने सब को मार दिया... कोई भी तुम्हे कुछ नहीं करेगा.... मैं हूँ न तुम्हे डरने की ज़रुरत नहीं है....

नेमत : अबे बेवक़ूफ़ वो उनसे नहीं बल्कि तुझसे दर रही है... अपनी हालत देखि है तू इस वक़्त किसी शैतान से काम नहीं लग रहा.... तेरा पूरा जिस्म खून से नहाया हुआ है.... जा के पहले नाहा के आ....

नेमत की बात सुन के प्रिंस खुद को देखता है तो हैरत से उसकी आँखें बड़ी हो जाती हैं वो सच में इस वक़्त खून से नहाया हुआ लग रहा है....

बाबा : वाह मेरे शेर तू ने कमाल कर दिया.... जानता है जिनको तू ने मौत के घात उतरा है वो इस ब्रह्माण्ड के सब से ताकतवर हैवानो में से एक थे.... उन्हें हराना तो शैतान के बस में भी नहीं था... अब मुझे पूरा यकीन है की तू उस दानव को हरा के उस से अपना सुरक्षा कवच ज़रूर हासिल कर लेगा.... और फिर मुस्कान को भी उन काली शक्तियों से आज़ाद कर देगा....

बाबा की बात सुन के प्रिंस ख़ुशी से उछाल पड़ता है.... और पास कड़ी नेमत को गले लगा लेता है.... उसके जिस्म पे लगा खून नेमत के जिस्म पे लग जाता है और वो भी इस खून में जैसे नाहा सी जाती है....

नेमत : कमीने क्या कर रहा है दूर हैट मुझसे.... गंदे देख तू ने क्या किया.... अपने साथ साथ मुझे भी गन्दा कर दिया...

प्रिंस नेमत के करीब जा के कहता है....

प्रिंस : वैसे तू खून में नहायी चंडी से काम नहीं लग रही है.... चल अब ज़्यादा नाटक मत कर मैंने तुझे गन्दा किया है न तो अब मैं hi तुझे साफ़ भी करूँगा....

नेमत : देख मेरे पास भी मत आना नहीं तो मैं तेरी टाँगे तोड़ दूंगी...

प्रिंस : अब तू टाँगे तोड़ या कुछ और तोड़ अब तो मैं तुझे साफ़ कर के रहूँगा....

इस से पहले की नेमत कुछ कहती प्रिंस उसका हाथ पकड़ के वहां से गायब हो जाता है और फिर छपाक की आवाज़ के साथ दोनों ड्रीम वर्ल्ड की पवित्र झील में गिर जाते हैं.... फिर प्रिंस जो करता है उसे महसूस करके नेमत बुरी तरह से चौंक जाती है....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 101

नेमत : कमीने क्या कर रहा है दूर हैट मुझसे.... गंदे देख तू ने क्या किया.... अपने साथ साथ मुझे भी गन्दा कर दिया...

प्रिंस नेमत के करीब जा के कहता है....

प्रिंस : वैसे तू खून में नहायी चंडी से काम नहीं लग रही है.... चल अब ज़्यादा नाटक मत कर मैंने तुझे गन्दा किया है न तो अब मैं hi तुझे साफ़ भी करूँगा....

नेमत : देख मेरे पास भी मत आना नहीं तो मैं तेरी टाँगे तोड़ दूंगी...

प्रिंस : अब तू टाँगे तोड़ या कुछ और तोड़ अब तो मैं तुझे साफ़ कर के रहूँगा....

इस से पहले की नेमत कुछ कहती प्रिंस उसका हाथ पकड़ के वहां से गायब हो जाता है और फिर छपाक की आवाज़ के साथ दोनों ड्रीम वर्ल्ड की पवित्र झील में गिर जाते हैं.... फिर प्रिंस जो करता है उसे महसूस करके नेमत बुरी तरह से चौंक जाती है....??????

अब आगे....

नेमत को इस बात की उम्मीद नहीं थी की प्रिंस ऐसा कुछ करेगा.... इस वक़्त ये सब उसके लिए किसी सदमे से काम नहीं था... वो अभी इस से उभर hi नहीं पायी थी की तभी प्रिंस वो करता है जिसे महसूस करके नेमत बुरी तरह से चौंक जाती है....

प्रिंस उसके जिस्म को रगड़ रगाह के उसपे लगे खून को साफ़ करने लगता है.... पहले वो नेमत के चेहरे पे लगे को खून को साफ़ करता है फिर वहां से होते हुए नीचे की तरफ जाने लगता है.... वो उसके गले को साफ़ करते हुए उसके सीने के पास आ जाता है फिर उसके सीने पे हाथ रख के उसके बूब्स को कास के मसलते हुए उसपे लगे खून को साफ़ करने लगता है.... प्रिंस की हरकत पे नेमत चौंक जाती है.....

फ़ौरन उसे खुद से दूर हटा के कहती है....

नेमत : अबे कमीने तुझे शर्म भी है की नहीं.... ये क्या हरकत किये जा रहा है....?

प्रिंस : अबे पहले तो खुद कहती है की मैंने तुझे गन्दा किया और अब जब साफ़ कर रहा हूँ तो तू मुझे कमीना कह रही है....

नेमत शॉकेड : अबे मैंने कब तुझे वो करने को कहा....? साले एक तो ऐसी हरकत करता है और ऊपर से ऐसे बन रहा है जैसे की तू ने कुछ किया hi नहीं....

प्रिंस : वो hi तो मुझे समझ नहीं आ रहा है की मैंने ऐसा क्या कर दिया जो तू मुझपे इतना नाराज़ हो रही है....?

नेमत : मैं तेरे जैसे बेशर्म नहीं हूँ.... जो वो बात अपने मुँह से बताऊँ....

प्रिंस : अबे जब तक तू मुझे बताएगी नहीं मुझे पता कैसे चलेगा की तू किस बात पे नाराज़ हो रही है....? चल मत बता मैं खुद पता लगता हूँ.... हाँ तो क्या हुआ था शुरू से देखते हैं.... ख़ुशी में मैंने जब तुझे गले लगाया तब मेरे जिस्म पे लगा खून तेरे जिस्म पे भी लग गया और तू नाराज़ हो गयी.... तेरी नाराज़गी दूर करने और तेरे जिस्म पे लगे खून को साफ़ करने के लिए मैं तुझे यहाँ इस झील में ले आया... फिर मैंने पहले तेरे सर पे लगे खून को साफ़ किया फिर तेरे चेहरे को फिर तेरे सीने और तेरे बूब्स को.....

इतना बोलते hi प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

नेमत : कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे वहां हाथ लगाने की....?

प्रिंस शॉकेड : सॉरी यार..... कसम से मुझे पता hi नहीं चला की मैंने कैसे तेरे वहां हाथ लगाया....? मैंने जो किया वो जान के नहीं किया अनजाने में हो गया....

नेमत : साले कमीने झूट मत बोल....

प्रिंस : नेमत मैं कभी झूट नहीं बोलता.... सच कह रहा हूँ.... कसम से मुझे नहीं पता की वो कैसे हो गया.... ऐसा तो मैं कभी कर hi नहीं सकता....

नेमत : चल मान ली की तेरी बात सच है तू कभी झूट नहीं बोलता मगर जो किया उसे भी नाकारा नहीं जा सकता.... जो किया तू ने hi किया है जान के हो या अनजाने में....

प्रिंस : वो hi तो मेरी समझ में नहीं आ रहा है की मैंने ऐसा किया तो किया कैसे....?

ये कहते कहते प्रिंस पानी से बहार आता है.... उसके बहार आते hi नेमत की नज़र जब प्रिंस के कमर के नीचे की तरफ जाती है तो वहां का हाल देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... वो एक तक बस वहां देखने लग जाती है....

प्रिंस के पंत में बने बड़े से उबार की तरफ इशारा कर के......

नेमत शॉकेड : प.... प..... Pri....nceeeeeee.... W....w...wo क्या है.....!!!!!!?????

प्रिंस : कहाँ....?

नेमत : व.... व.... वो तेरे पंत में....

नेमत की बात सुन के प्रिंस जैसे hi अपनी पंत की तरफ देखता है अपने पंत में बने बेहद बड़े उभार को देख हैरत से उसकी आँखें भी बड़ी हो जाती हैं.... वो हैरत से कभी अपने पंत की तरफ देखता है तो कभी नेमत की तरफ... फिर वो धीरे धीरे अपना हाथ नीचे ले जा के अपने पंत के ऊपरी हिस्से को थोड़ा आगे करके पंत के अंडर देखता है.... अंडर का नज़ारा देख के हैरत से उसकी आँखें बड़ी हो जाती है.... उसका लुंड जो पहले से hi काफी बड़ा था वो अब और भी ज़्यादा बड़ा और मोटा हो गया है.... ये देख प्रिंस हैरान हो जाता है.... वो नेमत की तरफ देख के पूछता है....

प्रिंस : अबे य.... य.... ये..... kai....se हुआ....?

नेमत : अबे कमीने मुझसे क्या पूछ रहा है.... मैंने थोड़े hi कुछ किया है....?

प्रिंस : मैं इसका क्या करूँ बता मुझे....?

नेमत : अबे कमीने मुझसे क्या पूछ रहा है....? साले तुझे कुछ शर्म है की नहीं.... ये भी कोई लड़की से पूछने वाली बात है क्या....?

प्रिंस : अबे तू मेरा hi हिस्सा है न तो तुझसे नहीं तो किस से पूछूं....?

नेमत : तेरा हिस्सा होना का ये मतलब तो नहीं की तू मुझसे ये गन्दी गन्दी बात पूछेगा....

प्रिंस : यार अब तू ये लड़की वाले नाटक मत कर और बता की इसका मैं क्या करूँ....?

नेमत : क्यों तुझे नहीं पता की इसका क्या किया जाता है....?

प्रिंस : पता है मगर ये नहीं पता की इतने बड़े का क्या किया जाता है.... तुझे कुछ पता है तू hi बता दे....

नेमत : साले दोबारा मुझसे इस के बारे में कुछ पुछा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....

प्रिंस : कमीनी यहाँ मेरी बंद बजी हुई है और तुझे मेरी टांग तोड़ने की पड़ी है....

नेमत : ये सब बकवास करना चोर और बाबा के पास चल....

प्रिंस : अबे इस हालत में कैसे उनके पास जाऊं... मुझे बड़ी शर्म आ रही है...

नेमत : तू तो ऐसे कह रहा है जैसे ऐसा तेरे साथ पहली बार हुआ है....?

प्रिंस : नहीं बात वो नहीं है बल्कि ये है की न तो पहले कभी ये इतना बड़ा हुआ है और मैं इस हाल में वो भी तेरे सामने वो कैसे कर सकता हूँ....? मुझे बड़ी शर्म आ रही है....

नेमत : साले इतनी hi शर्म आ रही है तो ऐसा करने से पहले सोचना चाहिए था....

प्रिंस : ये मैं नहीं किया बल्कि तू ने किया है....

नेमत : अबे कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझ मासूम पे ऐसा इलज़ाम लगाने की....? साले मुझे कोई शौक नहीं ऐसा कुछ भी करने का... और न hi मैंने वैसा कुछ किया है....

प्रिंस : हाँ माना की ये तू ने नहीं किया मगर हुआ तो तेरी hi वजह से है न.... न मैं तेरे बूब्स दबाता न hi तेरे हसीं और सेक्सी बूब्स का एहसास पा के ये ऐसे विकराल रूप ले के खड़ा होता....

प्रिंस की बात सुन के नेमत गुस्से में आ जाती है और आगे बढ़ के उसका गिरेबान पकड़ के गुस्से में उस से कहती है....

नेमत : कमीने सब तू ने किया....? मुझे पानी में तू ने डुबाया.... मेरे बूब्स तू ने दबाये और इलज़ाम मुझपे लगा रहा है....

गुस्से में नेमत प्रिंस के कुछ ज़्यादा hi करीब आ जाती है जिस से प्रिंस का विकराल एनाकोंडा रुपी लुंड ठीक उसकी छूट के ऊपरी हिस्से से टकरा जाता है.... जिस से वो उछाल पड़ती है.... और पीछे हटने लगती है मगर उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वो गिरने लगती है.... गिरने से खुद को बचने के लिए वो प्रिंस को पकड़ के खींचती है.... प्रिंस नेमत के इस अचानक हुए खिचाव को झेल नहीं पाटा और पीछे की तरफ गिरता है..... नेमत उसके ऊपर गिरती है.... नीचे गिरते hi प्रिंस का एनाकोंडा सर उठा के सीधे आसमान की तरफ खड़ा हो जाता है.... नेमत ठीक उसके ऊपर गिरती है.... उसकी छूट सीधे प्रिंस के एनाकोंडा से जा टकराती है... जिस से नेमत के मुँह से दर्द भरी आआआअह्ह्ह्हह.... निकल जाती है... उसके बूब्स प्रिंस के मज़बूत सीने से रगड़ जाते हैं.... प्रिंस के जिस्म और लुंड में मस्ती की तेज़ लेहेर सी दौर जाती है.... ठीक तभी नील ज़हर प्रिंस के लुंड के साथ साथ उसके जिस्म में अपना असर दिखाना शुरू कर देता है.... प्रिंस मस्ती में नेमत को अपनी मज़बूत बाहों में समेत लेता है.... और नीच उसका एनाकोंडा नेमत की छूट का स्पर्श पा के मस्ती में उछाल कूद मचने लगता है.... एक तरफ उसके जिस्म में नील ज़हर का असर और ऊपर से उसके लुंड पे नेमत की छूट की रगड़ पा के उसकी मस्ती सातवे आसमान में पहुँच जाती है.... वो नेमत को अपनी मज़बूत बाहों में जकड लेता है... नेमत भी अपनी छूट पे उसके मज़बूत लुंड के स्पर्श को महसूस करके बहकने लगती है..... मगर जैसे hi उसे इस बात का एहसास होता है वो फ़ौरन प्रिंस बाहों से निकल के दूर हैट जाती है....

नेमत : अबे कमीने पागल तो नहीं हो गया ये क्या कर रहा है....?

नेमत के अचानक से प्रिंस से दूर हटने से प्रिंस तड़प उठता है..... सेक्स की एक तेज़ लेहेर सी उसके जिस्म में दौर जाती है और उसे नेमत के करीब जाने को मजबूर करने लगती है.... बड़ी मुश्किल से वो खुद को आगे बढ़ने से रोकता है.... मगर नील ज़हर का जादू उसके जिस्म के साथ साथ उसके दिमाग पे भी हावी होने लगता है....

प्रिंस अपने जिस्म में सेक्स की अगन को रोकने के लिए पूरी ताक़त लगा के चीखता है और खुद पे काबू करने की कोशिश करता है.... प्रिंस की ऐसी हालत देख के वो हैरान हो जाती है वो उसके करीब आने लगती है.... प्रिंस फ़ौरन नेमत को आवाज़ दे के पास आने से रोकता है..... और बड़ी मुश्किल से उसे ये कहता है....

प्रिंस : न.... ने.... नेमत जाआआआ यहाआआ से....

नेमत : ये तू क्या कह रहा है....? तुझे क्या हो रहा है...?

प्रिंस बेहद गुस्से में : तुझे समझ नहीं आ रहा मैंने कहा जा यहाँ से.... इस से पहले की कुछ गलत हो जाए.... जल्दी जा...

मगर नेमत है की उसकी कोई बात सुन ने को तैयार hi नहीं.... नेमत को वहां से न जाते देख प्रिंस अपनी पूरी ताक़त लगा के चीखता है....

प्रिंस बेहद गुस्से में : तूने सुना नहीं मैंने क्या कहा....? जा यहाँ से.... अभीइइइइइइइ....

प्रिंस को इतने गुस्से में देख नेमत बेहद दर जाती है और न चाहते हुए भी रट हुए वहां से चली जाती है....

नेमत को अकेले देख मुस्कान के साथ साथ बाबा को भी बड़ी हैरानी होती है...

बाबा : नेमत तू अकेली आयी है....!!!!! प्रिंस कहाँ है....? और ये तू रो क्यों रही है....?

नेमत बाबा की किसी बात का कोई जवाब नहीं देती बस रोटी रहती है....

नेमत को यूँ रट देख और प्रिंस को वहां न पा के बाबा परेशान हो जाते हैं... नेमत भी उनकी किसी बात का कोई जवाब नहीं दे रही.... वो नेमत के करीब जा के प्यार से उसे चुप करते हैं फिर उस से पूछते हैं....

बाबा : नेमत मेरी बच्ची.... क्या हुआ तू रो क्यों रही थी....? और प्रिंस कहाँ है....?

नेमत बड़ी मुश्किल से बाबा के सवालों के जवाब में बस इतना hi कह पाती है....

नेमत : व.... व.... वो Pri...nce पे नील ज़हर का असर हुआ है....

ये कह के वो अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है.... इस से आगे वो कुछ कह hi नहीं पाती... शर्म और दर की वजह से उसके लैब सील से जाते हैं.... नेमत की बात सुन के बाबा चौंक जाते हैं....

बाबा : क्या....? नील ज़हर... मतलब इस वक़्त वो.... कहीं उसने तेरे साथ कुछ किया तो नहीं....?

नेमत न में अपनी गर्दन हिला देती है.... बेमत की न सुन के बाबा के दिल को कुछ हद तक सुकून मिलता है... मगर प्रिंस के बारे में जान के वो परेशान हो जाते हैं....

इधर प्रिंस पे नील ज़हर का असर पूरी तरह से हावी हो जाता है.... उसके जिस्म में सेक्स की भूक पूरी तरह से हावी हो जाती है.... उस के बर्दाश्त की हद पार हो जाती है.... और वो पागलों की तरह चीखने लगता है....

अअअअअअअगगगगगठ्हहह....

इस वक़्त अगर कोई लड़की वहां होती तो प्रिंस उसे वहीँ पटक के अपने एनाकोंडा रुपी लुंड से छोड़ देता..... मगर यहाँ इस वक़्त कोई नहीं है... नेमत जो कुछ देर पहले यहाँ थी उसे प्रिंस ने खुद वहां से भगा दिया.... ताकि वो उसके साथ कुछ गलत न कर बैठे.... नील ज़हर प्रिंस के दिमाग पे पूरी तरह से हावी हो जाता है और उसे पैंडोरा जाने पे मजबूर करने लगता है..... दिमाग और नील ज़हर के हाथों मजबूर होक प्रिंस न चाहते हुए भी वहां से पैंडोरा चला जाता है..... प्रिंस के वहां आते hi सब के चेहरे पे ख़ुशी आ जाती है... सब फ़ौरन उसके पास जाने लगते हैं मगर प्रिंस उन्हें रोक देता है.... इस वक़्त प्रिंस के दिमाग और उसके दिल के बीच जुंग छिड़ी हुई है.... प्रिंस का दिमाग नील ज़हर के कब्ज़े में है.... मगर उस ज़हर का असर प्रिंस के सच्चे और पाक दिल पे नहीं हो पाया है.... एक तरफ उसका दिमाग उसे कह रहा है....

प्रिंस का दिमाग : प्रिंस देख सामने एक नहीं बल्कि दो दो जवान कमसिन लड़की है.... जा जाके छोड़ उन्हें और बुझा ले अपनी प्यास....

वहीँ प्रिंस का दिल उसे ऐसा करने से रोक रहा है....

प्रिंस का दिल : नहीं प्रिंस गलती से भी अपने दिमाग की बात मान के ऐसी गलती न करना.... न hi ये दोनों लडकियां कोई गैर हैं और न hi तू कोई हवस का पुजारी है.... तू तो सिर्फ और सिर्फ प्यार करना जानता है.... जहाँ प्यार होता है वहां हवस का नामो निशाँ तक नहीं होता....

प्रिंस का दिमाग : ये सब प्यार मोहोब्बत सब बेकार की बात है... इस दुनिया में प्यार जैसी कोई चीज़ नहीं है... जो है वो बस हवस है.... और कुछ नहीं... प्यार एक धोका और चलवा है.... जो लोग अक्सर दूसरे को दिया करते हैं.... सच्चाई तो सिर्फ और सिर्फ हवस है जो वक़्त के साथ साथ बढ़ती hi जाती है.... प्यार से न तो पेट भरता है न hi जिस्म की भूक मिट टी है... मगर हवस जिस्म के साथ साथ दिल और दिमाग को भी सुकून पहुंचता है.... मेरी बात मान तो इस सुनहरे मौके को हाथ से न जाने de....Dekh तेरे सामने इस ब्रह्माण्ड की दो दो हसीं और सेक्सी लड़की अपनी जवानी के जलवे बिखेरे हुआ है.... देर मत कर जल्दी से जा और दोनों को पटक के जैम के छोड़ उन्हें.....

इस वक़्त प्रिंस के दिल और दिमाग के बीच जो बातें हो रही थी वो उसके होंठों के ज़रिये बाहर साफ़ सुनाई दे रही थी.... जिसे सुन के मुस्कान और नेमत के साथ साथ बाबा भी सुन रहे थे.... उनको प्रिंस के दिमाग की बात सुन के जितना गुस्सा आ रहा था उतना hi प्यार उसके दिल की बातों पे आ रहा था.... वो ये समझ रही थी की जहाँ प्रिंस का दिमाग नील ज़हर के कब्ज़े में होने की वजह से उसे गलत काम करने पे मजबूर कर रहा है वहीँ उसका दिल उसे सच्चे प्यार की परिभाषा सीखा रहा है.... प्रिंस के दिल की बात सुन के नेमत बेहद खुश हो जाती है और प्रिंस को गले लगाने के लिए आगे बढ़ती है... वो जैसे hi मुस्कान के पास से हो के प्रिंस की तरफ आने लगती है.... प्रिंस उसे वहीँ रोक देता है....

प्रिंस : Nahiiiiiiiiiiii.... नेमत मेरे पास मत आना..... इस वक़्त मैं अपने आप में नहीं हूँ.... मुझपे नील ज़हर का कब्ज़ा है.... जो मुझे ज़बरदस्ती सेक्स करने पे मजबूर कर रहा है.... जो की मैं नहीं करना चाहता... इस से पहले की देर हो जाए और मैं नील ज़हर के हाथों मजबूर हो के कुछ अनर्थ कर बैठूं.... जाओ.... जल्दी से दूर बहुत दूर चली जाओ मुझसे.... और मुस्कान को भी अपने साथ ले जाओ.....

मगर नेमत है की प्रिंस को इस हाल में चोर के वहां से जाने को तैयार hi नहीं.... मुस्कान भी प्रिंस को चोर के वहां से नहीं जाना चाहती.... दोनों को न जाते देख प्रिंस नेमत और मुस्कान के इर्द गिर्द त्रिकोण पावर्स से एक मज़बूत सुरक्षा कवच बना देता है... वो कवच इतना मज़बूत है की उसे इस दुनिया की कोई ताक़त नहीं तोड़ सकती...

फिर प्रिंस अपने अंडर नील ज़हर के साथ साथ अपने दिमाग से भी लड़ने लगता है.... अपने दिमाग की बात से इंकार करते hi प्रिंस के जिस्म में असहनीय दर्द शुरू हो जाता है... जब वो दर्द बर्दाश्त की हद पार कर जाता है और प्रिंस मजबूर होक नेमत और मुस्कान की तरफ आगे बढ़ता है तब प्रिंस अपने जिस्म को आगे बढ़ने से रोकने की जी तोड़ कोशिश करता है जब उसकी कोशिशें डैम तोड़ देती हैं तब वो अपनी पावर्स के ज़रिये अपने जिस्म को जादुई ज़ंजीर से बाँध के उसे आगे जाने से रोकता है.... प्रिंस का दिमाग जल्द hi उस ज़ंजीर को तोड़ देता है और एक बार फिर से प्रिंस को आगे बढ़ने पे मजबूर कर देता है.... प्रिंस जैसे hi अपना कदम आगे बढ़ता है.... प्रिंस का दिल एक जादुई हंटर को याद करता है जिस से फ़ौरन प्रिंस के हाथों में वो हंटर आ जाता है... और वो उस हंटर को अपने जिस्म पे बुरी तरह से मारे लगता है और तब तक मारता जाता है जब तक प्रिंस गिर के बेहोश नहीं हो जाता.... हर वार पे प्रिंस के जिस्म से दो चीज़ निकलती है... एक उसके गले से हर चोट पे दर्दनाक चीख और दूसरे खून जो उसके ज़ख्मों से रिस रिस बहार गिर रहा है....

प्रिंस की ऐसी हालत देख के बाबा के साथ साथ नेमत और मुस्कान की आँखों से hi नहीं उसके दिल से भी खून के आंसू निकलने लगते हैं.... वो प्रिंस के पास जा के उसे अपने सीने से लगाने के लिए तड़प जाती हैं.... मगर दर की वजह से वो उसके पास नहीं जा पाती... बस दूर कड़ी प्रिंस की हालत को देख के रोने लगती हैं....

कुछ देर बेहोश रहने के बाद जब उसपे से नील ज़हर का असर कुछ काम होता है तब वो अपनी आँखें खोल के डरते डरते अपने चारो तरफ देखता है.... उसे इस तरह डरते देख बाबा फ़ौरन उसके पास आके उसके डरने की वजह पूछते हैं.....

बाबा : क्या बात है प्रिंस तू ठीक तो है न.... तेरे चेहरे पे इतना दर क्यों है....?

प्रिंस : हाँ बाबा मैं दर रहा हूँ.... मुझे इस वक़्त बेहद दर लग रहा है... सब से बड़ा दर इस बात से लग रहा है की कहीं मैंने नील ज़हर के वश में आ के उन दोनों मासूम नेमत और मुस्कान के साथ कुछ गलत तो नहीं कर दिया.... कहीं उनकी िज़ात तो नहीं लूट ली.... मुझे दर है की कहीं ऐसा हुआ तो क्या होगा....? बाबा मैं क्या था और क्या बना दिया है उस नील ज़हर ने मुझे.... एक सच्चे इंसान से जिसके सीने में प्यार भरा सच्चा दिल था उसे हवस का पुजारी बना दिया.... जो किसी भी लड़की को देखते hi उसके साथ सेक्स करने को मजबूर हो रहा है.... और कहीं मैंने वैसा hi मुस्कान और नेमत के साथ तो नहीं कर दिया.... इस बात का दर मुझे इस वक़्त सत्ता रहा है की कहीं मेरे हाथों से कुछ अनर्थ तो नहीं हो गया....? एक तरफ नेमत जो मेरा hi एक हिस्सा है तो दूसरी तरफ मुस्कान जो मेरी सब से गहरी मासूम और प्यारी दोस्त है जिसे खुद से ज़्यादा मुझपे यकीन हैं.... कहीं मैंने उन दोनों के यकीन को तार तार तो नहीं कर दिया....

ये कह के प्रिंस ज़ोर ज़ोर से रोने लगता है.....

प्रिंस की बात सुन के बाबा के साथ साथ नेमत और मुस्कान भी रोने लगती हैं...

बाबा : नहीं प्रिंस तू ऐसा कभी नहीं कर सकता.... उनके साथ तो क्या तू किसी भी लड़की की इज़्ज़त के साथ नहीं खेल सकता.... कभी नहीं किसी हाल में नहीं तू ऐसा नहीं कर सकता.... मुझे तुझपे पूरा यकीन है....

प्रिंस : मगर मुझे अब खुद पे यकीन नहीं रहा बाबा.... न hi अब मैं वो रहा जो मैं था.... एक सच्चा और प्यार से भरा इंसान.... अब मैं सिर्फ और सिर्फ हवस का पुजारी बन बैठा हूँ.... मुझे अब किसी लड़की के पास जान से भी दर लगता है.... कहीं मैं उसके साथ कुछ गलत न कर बैठूं....

बाबा : नहीं प्रिंस ऐसा मत कह.... तू आज भी उतना hi नेक और प्यारा इंसान है जो पहले था.... बस तेरी जिस्म और दिमाग में नील ज़हर की वजह से ये हो रहा है.... और ये सब तेरी नहीं बल्कि उस कमीने शैतान अघोरा की वजह से हुआ है.... तेरी पावर्स को हासिल करने के लिए उसी ने ये सब किया है.... ये सब उसी का किया धरा है....

प्रिंस : जो भी हो बाबा मगर अब जो होगा वो करूँगा तो मैं hi न.... न की वो... मैं hi अब लड़कियों की इज़्ज़त के साथ खेलूंगा.... उनके साथ ज़बरदस्ती सेक्स करूँगा.... चींईईई..... मुझे ये सोचते हुए भी खुद से गईं आ रही है.... इस वक़्त मेरा दिल छह रहा है की ऐसा घिनोना काम करने से तो अच्छा है की मैं अपनी जान दे दूँ....

बाबा : नहीं प्रिंस ऐसा मत कह.... और मेरी कसम खा अपनी जान देने के बारे में तो गलती से भी नहीं सोचेगा... अगर तूने ऐसा सोचा भी तो मेरा मारा हुआ मुँह देखेगा.... तुझे कुछ हो उस से पहले मैं इस पूरी दुनिया को आग लगा दूंगा...

प्रिंस शॉकेड : बाबा ये आप क्या कह रहे हैं.....?

बाबा : वो hi जो तू सुन रहा है....

प्रिंस : मगर बाबा ये सब मेरी वजह से हो रहा है.... और आप सब की जान लेने की बात कर रहे हैं.... मुझ अकेले को बचने के लिए सब की जान को कुर्बान करना कहाँ की समझदारी है....?

बाबा : तो तू भी तो समझदारी की बात करने के बजाये गलत बात hi कह रहा है.... ये काम तू अपनी मर्ज़ी से नहीं करना छह रहा है बल्कि तुझसे करवाया जा रहा है.... तो इस हिसाब से मरना तो उसे चाहिए जो ये चाहता है की तू वो गलत काम करे.... न की तुझे.... अगर तू सच में चाहता है की तू कुछ गलत न करे तो मरने की बात अपने दिमाग से निकाल दे और इस नील ज़हर को काबू करने और उस शैतान अघोरा को मारने के बारे में सोच.... न की अपनी जान देने के बारे में....

प्रिंस : मगर बाबा ये कैसे मुमकिन है....?

बाबा : मुमकिन है त्रिकोण पावर्स के ज़रिये ये मुमकिन है.... त्रिकोण पावर्स के ज़रिये तू अपनी सेक्स की इच्छाओं को काबू कर सकता है.... मगर....

बाबा की बात सुन के प्रिंस के दिल में एक उम्मीद सी जागती है....

प्रिंस : मगर क्या बाबा....?

बाबा : मगर ये की तेरी सेक्स करने की इच्छा सिर्फ तब तक दबी रह सकती है... जब तक कोई लड़की या औरत खुद आ के तेरे साथ सेक्स करने को राज़ी न हो जाए.... उनकी मर्ज़ी के बिना तू खुद पे काबू कर के सेक्स में पहल नहीं करेगा.... लेकिन अगर कोई लड़की या औरत खुद सामने से आ के तेरे साथ सेक्स करना चाहेगी तो तू उसे मन नहीं कर पायेगा.... तू उस के साथ सेक्स ज़रूर करेगा....

प्रिंस : ये आप क्या कह रहे हैं बाबा....? आप जानते हैं की जब से मुझे मेरी ये त्रिकोण पावर्स मिली हैं मेरी आकर्षण पावर्स बेइन्तेहाँ बढ़ गयी है.... जिसे देख के कोई भी लड़की और औरत मुझे देखते hi मेरी तरफ आकर्षित होने लगेगी.... और मुझसे सेक्स करना चाहेगी.... इस हाल में मैं कैसे उन्हें रोकूंगा....?

बाबा : योग साधना के ज़रिये तू अपने आकर्षण को कुछ हद तक काम कर सकता है... मगर उन्हें पूरी तरह से रोक नहीं सकता....

प्रिंस : तब तो बाबा मेरी परेशानी वहीँ की वहीँ रह गयी.... इस आकर्षण की वजह से मैं हर एक लड़की जो मुझे देखेगी मैं उसके साथ सेक्स करूँगा.... इस तरह मैं एक सच्चे आशिक़ की जगह हवस का पुजारी बन के रह जाऊँगा....

बाबा : प्रिंस जो हुआ नहीं उसे सोच के रोने से कोई फायदा नहीं.... फायदा तो तब होगा जब तू अपनी इच्छा और अंदरूहणी शक्ति से उसे होने से रोके....

प्रिंस : बाबा आप जो कह रहे हैं वो ठीक है मगर....

बाबा : प्रिंस अभी हमारे पास किसी अगर मगर के बारे में सोचने का वक़्त नहीं है.... अभी बहुत से ऐसे ज़रूरी काम हैं जो तुझे पूरे करने हैं.... जैसे की उस दानव को मार के उस से अपने अभेद्य कवच को हासिल करना.... मुस्कान को उन काली शक्तियों की क़ैद से आज़ाद करवाना.... ये दोनों hi काम इस वक़्त बेहद ज़रूरी हैं.... पहले उन्हें पूरा कर बाकी की बातें बाद में सोचेंगे....

प्रिंस को बाबा की बात सही लगती है और वो चल देता है.... उस दानव के मार के उस से अपने अभेद्य कवच को हासिल करने.....

कुछ hi देर में प्रिंस उस दानव के करीब पहुँच जाता है.... प्रिंस को देखते hi....

दानव : कौन है तू लड़के और यहाँ क्या कर रहा है....?

प्रिंस : मेरा नाम प्रिंस है और मैं तुझे मार के अपने अभेद्य कवच को हासिल करने आया हूँ....

प्रिंकद की बात सुन के दानव ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है.....

दानव : हहहहहहहह....

बड़ी मुश्किल से वो दानव अपनी हंसी रोक के कहता है....

दानव : तू एक मामूली इंसान मुझे इस ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े और ताकतवर दानव को मारने आया है.... इस से अच्छा मज़ाक मैंने आज तक नहीं सुना.... इस से पहले की मैं तेरे जिस्म को पहाड़ के तेरी जान निकाल लून... तुझे एक मौका देता हूँ अपनी जान बचने का.... जा चला जा यहाँ से....

प्रिंस मुस्कुराते हुए : मैं यहाँ से जाऊँगा और ज़रूर जाऊँगा मगर तुझे मार के अपने अभेद्य कवच को हासिल करने के बाद....

दानव : तुझे अगर मरने का इतना hi शौक है तो मैं उसे पूरा करने में तेरी मदत ज़रूर करूँगा.... तुझे मार के मैं बड़े मज़े ले के खाऊंगा.... चल आ और लड़ मेरे साथ....

दानव की बात सुन के प्रिंस उसे मारने के लिए जैसे hi आगे बढ़ता है.... तभी अचानक से वो होता है जिसे देख के प्रिंस बुरे तरह से चौंक जाता है...??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 102

दानव : तू एक मामूली इंसान मुझे इस ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े और ताकतवर दानव को मारने आया है.... इस से अच्छा मज़ाक मैंने आज तक नहीं सुना.... इस से पहले की मैं तेरे जिस्म को पहाड़ के तेरी जान निकाल लून... तुझे एक मौका देता हूँ अपनी जान बचने का.... जा चला जा यहाँ से....

प्रिंस मुस्कुराते हुए : मैं यहाँ से जाऊँगा और ज़रूर जाऊँगा मगर तुझे मार के अपने अभेद्य कवच को हासिल करने के बाद....

दानव : तुझे अगर मरने का इतना hi शौक है तो मैं उसे पूरा करने में तेरी मदत ज़रूर करूँगा.... तुझे मार के मैं बड़े मज़े ले के तुझे खाऊंगा.... चल आ और लड़ मेरे साथ....

दानव की बात सुन के प्रिंस उसे मारने के लिए जैसे hi आगे बढ़ता है.... तभी अचानक से वो होता है जिसे देख के प्रिंस बुरे तरह से चौंक जाता है...??????

अब आगे....

दानव अपनी आँखें बंद कर के कुछ मंत्र पढता है फिर अपना हाथ प्रिंस की तरफ बढ़ा देता है.... उसके ऐसा करते hi प्रिंस के जिस्म से पावर्स निकल के उस दानव के अंडर सामने लगती हैं... जिसे देख प्रिंस चौंक जाता है.... इस से पहले की प्रिंस कुछ कर पाटा दानव प्रिंस की आधी पावर्स अपने अंडर खींच लेता है.... मगर त्रिकोण पावर्स को नहीं खींच पाटा....

दानव : मैं तो तुझे मामूली इंसान समझ रहा था... मगर तेरे अंडर तो काफी पावर्स भी हैं.... अब मज़ा आएगा... तुझे मारने में.... तुझे मार के मेरे दो फायदे होंगे.... एक तो बहुत दिन बाद इंसानी मांस खाने को मिलेगा और दूसरा तेरी पावर्स मुझे हासिल होंगी....

प्रिंस : अबे तू सिर्फ बातें hi बनता है या फिर लड़ना भी जानता है.... कब से देख रहा हूँ... बस बकर बकर किये जा रहा है....

प्रिंस की बात सुन के दानव को उस पे बेहद गुस्सा आ जाता है....

दानव : कमीने मेरी तौहीन करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई....? मेरे सामने तेरी औकाद hi क्या है....? बस एक चूंटी के बराबर.... इस से ज़्यादा कुछ नहीं....

प्रिंस : खुद पे इतना घामड़ करना ठीक नहीं.... और रही बात चूंटी की तो वो भले hi कद काठी में छोटी होती है मगर वो बड़े से बड़े हाथी को भी मार गिराने का दम रखती है....

दानव : चल आ जा आज तेरा भी दम देख लेते हैं..... ये ले संभाल मेरा पहला वार....

ये कह के दानव एक आग का गोला प्रिंस पे चोर देता है.... प्रिंस फ़ौरन उसे निष्क्रिय करने के लिए पानी का गोला उसकी तरफ चोरता है..... पानी से आग बुझ जाती है.... ये देख दानव दोनों तरफ से प्रिंस पे वार करता है एक तरफ से आग और दूसरी तरफ से पानी.... असल में वो इस वक़्त प्रिंस की पावर्स को hi उस पे इस्तेमाल कर रहा है.... दोनों तरफ के हमले से प्रिंस खुद को बचा नहीं पाटा.... वो आग को तो पानी से बुझा देता है मगर दूसरी तरफ से हुए पानी के हमले से खुद को बचा नहीं पाटा और उड़ता हुआ दूर जा गीता है.... अभी वो उस हमले से संभल hi नहीं पाया था की तभी दानव हवा का एक तेज़ बवंडर उसपे चोर देता है.... वो बवंडर प्रिंस को अपने अंडर ले के घुमा के दूर फ़ेंक देता है.... दानव के इस वार से प्रिंस काफी हद तक ज़ख़्मी हो जाता है.... प्रिंस की हालत देख के दानव ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है....

दानव : हहहहहहहह.... क्या हुआ बच्चे....? इतने में hi तेरी हवा निकल गयी....? क्यों मारेगा नहीं मुझे....? आ मार न.... मार मुझे.... हाहाहाःहाहा.... तू एक मामूली इंसान मुझे maarega.....Hahahahahahaha... एक दानव को.... जो इस ब्रह्माण्ड का सब से ताकतवर दानव है.... जिसे आज तक शैतान का राजा अघोरा भी नहीं हरा सका उसे तू एक मामूली इंसान मरेगा.... हहहहहहह....

अभी दानव अपनी बड़ाई करने और साथ hi प्रिंस पे हसने में मस्त था की तभी अचानक से उसके मुँह से एक दर्दभरी चीख निकल जाती है और वो उड़ता हुआ दूर जा गिरता है.....

अअअअअअअअअगगगगगठ्हहहह.....

वो हुआ ये था की जब वो दानव अपनी शान बिखेरने में लगा हुआ था तभी प्रिंस उठता है और अपनी आँखें बंद करके आसमान की तरफ अपना हाथ कर देता है.... आसमान से बिजली की का एक हंटर जैसा उसके हाथ में आ जाता है.... जिसे वो घुमा के पूरी ताक़त के साथ उस दानव पे वार करता है.... दानव उस वार के लिए तैयार नहीं था इस से पहले की उसे कुछ पता चलता उसके जिस्म पे बिजली का हंटर पड़ता है और वो एक तेज़ झटके के साथ उड़ता हुआ दूर जा गिरता है.... उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकल जाती है.... वो बुरी तरह से ज़ख़्मी हो जाता है.... गुस्से में वो भी प्रिंस की तरह आसमान की तरफ इशारा करता है उसके हाथ में भी ठीक वैसा hi हंटर आ जाता है जैसा की प्रिंस के हाथ में है.... वो एक ज़ोरदार वार प्रिंस पे करता है.... प्रिंस एक तरफ उछाल के उस वार से खुद को बचता है.... इस बार दानव प्रिंस को बचने का मौका नहीं देता.... इस से पहले की प्रिंस संभल के उसपे वार कर पाटा दानव प्रिंस पे दूसरा वार करता है..... जिस से प्रिंस बच नहीं पाटा एक तेज़ झटका उसे लगता है.... और वो दर्दनाक चीख के साथ उड़ता हुआ दूर जा गिरता है....

आआआग्गगहःहःहःहः....

दानव को इस से सब्र नहीं होता वो आगे बढ़ के दो तीन वार और प्रिंस पे करता है..... प्रिंस बुरी तरह से ज़ख़्मी हो जाता है उसके जिस्म के कई हिस्से से खून बहने लगता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो दानव से खुद को बचाये या फिर उस पे वार कर के उसे मारे.... एक तो दानव ने उसकी आधी पावर्स खींच ली है जिस से प्रिंस पहले hi आधा कमज़ोर हो गया है और दूसरे दानव प्रिंस की पावर्स को hi उसे मारने के लिए उसपे इस्तेमाल कर रहा है.... जिस से प्रिंस खुद को बचा नहीं पा रहा है..... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर वो करे तो क्या करे....

वो अभी ये सोच hi रहा होता है की तभी दानव एक बार फिर से प्रिंस पे वार करने के लिए आगे बढ़ता है.... मगर इस से पहले की वो प्रिंस पे हमला करता प्रिंस अपनी चारो पावर्स आग पानी धरती और हवा को एक साथ उस दानव पे चोरता है.... चारो पावर्स चारो तरफ से दिवार बना के उस दानव को घेर लेते हैं.... दानव ऊपर की तरफ से बहार निकलने की कोशिश करता है मगर प्रिंस वहां से भी बिजली की पावर्स के ज़रिये उसे रोक देता है.... दानव उस चक्रव्यूह में फस जाता है वो छह के भी उस से निकल नहीं पा रहा है..... इधर प्रिंस को सोचने का वक़्त मिल जाता है वो फ़ौरन अपने दिल और दिमाग को जोड़ के अपनी इन्द्रियों को जगाता है और त्रिकोण पावर्स के ज़रिये उस दानव को मारने का उपाए ढूंढने लगता है.... काफी तलाश करने के बाद अचहनक से उसे कुछ ऐसा नज़र आता जिसे देख के उसके होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है....

ठीक तभी दानव अपनी और साथ साथ प्रिंस की पावर्स को जोड़ ता है और अपना हाथ आगे बढ़ता है उसके हाथ से लाल और नीली रौशनी निकलने लगती hai....wo दोनों रौशनी को एक साथ जोड़ के अपने चारो तरफ घूमता है.... उसके ऐसा करते hi एक तेज़ धमाके के साथ उसके अगल बगल की चारो दिवार टूट जाता है साथ hi ऊपर बिजली की दिवार भी टुकड़े टुकड़े हो जाती है....

Dharaaaaaaaaaaaaaaammm....

वो धमाका इतना तेज़ और ज़ोरदार होता है उसकी आवाज़ पूरे पैंडोरा प्लेनेट में गूँज उठती है साथ hi उस धमाके से पैंडोरा प्लेनेट कांप भी जाता है.... दानव इस वक़्त बेहद गुस्से में प्रिंस पे वार करता है.... मगर इस बार उसका वार खाली जाट है.... प्रिंस फ़ौरन अपनी स्पीड की पावर्स का इस्तेमाल कर के एक तरफ हैट के उस वार से खुद को बचता और अपने हाथ से नीली रे का वार उस दानव पे करने लगता है.... दानव फ़ौरन लाल रेज़ के ज़रिये प्रिंस की नीली रेज़ को रोकता है.... दोनों की पावर्स के टकराने से धमाके होने लगते हैं....

Dharaaaaaaaaaaaaaaammm.... Dharaaaaaaaaaaaaaaammm.... से पूरा पैंडोरा गूंजने लगता है.... नेमत के साथ साथ मुस्कान भी बुरी तरह से दर जाती है.... दोनों के साथ साथ बाबा को भी प्रिंस की फ़िक्र सताने लगती है.... उन्हें इस बात का यकीन है की प्रिंस ज़रूर उस दानव को हरा देगा.... मगर फिर भी उनकी फ़िक्र बिना मतलब नहीं है.... वो दानव वाकई में इतना ताक़तवर है की उसे आज तक कोई नहीं हरा सका.... यहाँ तक की शैतानो का राजा अघोरा भी नहीं... रही बात प्रिंस की तो उसके पास इस वक़्त इतनी पावर्स नहीं है की वो ज़्यादा देर तक उस दानव का सामना कर सके.... ये सोच के सब घबराने लगते हैं...

मगर यहाँ हर वार के साथ प्रिंस के चेहरे की मुस्कराहट के साथ साथ उसका हौसला भी बढ़ता जा रहा है.... उसकी स्पीड के आगे दानव कमज़ोर पद रहा है.... दानव जब भी प्रिंस पे वार करता तब प्रिंस अपनी स्पीड से फ़ौरन खुद को बचा के उसपे पलट वार करता जिस से दानव धीरे धीरे बेहद परेशान भी होने लगा है और घायल भी.... काफी देर तक ऐसा चलता रहता है.... फिर प्रिंस इसे जल्द ख़तम करने का सोच के दानव पे जिस्म पे हर तरफ से वार कर के उसकी कमज़ोर नस को ढूंढने लगता है.... और वो उसे जल्द hi मिल भी जाती है.... दानव के जिस्म का सब से कमज़ोर हिस्सा जो है वो है उसकी गर्दन के पीछे का हिस्सा.... जैसे hi उसे वहां चोट लगती है वो दर्द के मारे बुरी तरह तड़प के चीख उठता.... प्रिंस एक हाथ से बिजली की चाबुक और दूसरे हाथ से नीली रेज़ एक साथ दानव की गर्दन पे बरसाने लगता है.... दानव उस वार से खुद को बचा नहीं पाटा... उसका सर उसकी गर्दन की तरफ से उसके धड़ से अलग हो जाता है और वो ज़मीन पे गिर के मर जाता है.... नीचे गिरते hi एक तेज़ धमाके के साथ उसका सर उड़द जाता है.... उसके जिस्म से प्रिंस के साथ साथ उसकी अपनी पावर्स भी निकल के प्रिंस के जिस्म में सामने लगती है.... और फिर देखते hi देखते उसका जिस्म धुँवे में बदल जाता है.... उस धुँवे के हैट ते hi सामने गुलाबी रौशनी में अभेद्य कवच चमकता हुआ नज़र आता है.... जिसे देख प्रिंस के होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है.... वो आगे बढ़ के उस अभेद्य कवच को छूटा है... उसके छूटे hi अभेद्य कवच प्रिंस के जिस्म पे लिपट जाता है.... उसके अंडर से तेज़ गुलाबी रौशनी निकलने लगती है.... धीरे धीरे वो इतनी तेज़ हो जाती है की उस से पूरा पैंडोरा प्लेनेट गुलाबी रौशनी में नाहा जाता है.... धीरे धीरे उस कवच के साथ साथ वो गुलाबी रौशनी भी प्रिंस के जिस्म में समां जाती है.... प्रिंस के जिस्म में अभेद्य कवच के समाते hi उसके जिस्म के सरे ज़ख्म देखते hi देखते ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे की वो कभी थे hi नहीं....

प्रिंस वहां से मुस्कुराते हुए सब के पास आ जाता है... प्रिंस की मुस्कराहट देख के बाबा को ये समझते देर नहीं लगती की वो जीत के लौटा है.... उसने दानव को मार के अभेद्य कवच को हासिल कर लिया है....

जैसे hi मुस्कान और नेमत की नज़र प्रिंस पे पड़ती है उसे ठीक देख के दोनों के बेचैन दिल को करार आ जाता है... मुस्कान आगे बढ़ के प्रिंस को गले लगाना चाहती है मगर लाचार होने की वजह से अपना मन मासूस के रह जाती है... मगर नेमत के साथ ऐसी कोई बंदिश नहीं है.... वो दौरति हुई प्रिंस के करीब जाती है और ख़ुशी में उछाल के प्रिंस के सीने से कास के लिपट जाती है....

प्रिंस इस अचानक हुए हमले से खुद को बचा नहीं पाटा और नेमत को साथ ले के पीछे की तरफ गिरता है.... नीचे प्रिंस और उसके जिस्म से कास के लिपटी नेमत.... नेमत प्रिंस के पूरे चेहरे को चूमते हुए अपनी ख़ुशी का इज़हार करने लगती है.. वो ख़ुशी में इस बात को भूल जाती है की उसके ऐसा करते hi प्रिंस के जिस्म में नील ज़हर अपना असर दिखाना शुरू कर देगा... और होता भी ठीक वैसा hi है.... प्रिंस के सीने पे नेमत के नरम ठोस बूब्स दबे हुए उसे मस्ती के आसमान में उदा रहे है और दूसरी तरफ नेमत के नरम और गर्म होंठों को अपने चेहरे पे महसूस करके प्रिंस का लुंड अपना सर उठाने लगता है... जैसे hi प्रिंस को इस बात का एहसास होता है वो फ़ौरन नेमत को खुद से दूर करने की कोशिश करता है.... मगर नेमत है की उसे चोर्ने का नाम hi नहीं ले रही प्रिंस के जिस्म से कास के लिपट के वो उसके पूरे चेहरे को चूम रही है.... प्रिंस का लुंड मस्ती में खड़ा होक झटके लेने लगता है.... वो सीधे नेमत की छूट पे दस्तक देने लगता है.... जैसे hi नेमत को इस बात का एहसास होता है वो फ़ौरन प्रिंस के जिस्म से अलग हो के दूर कड़ी हो जाती है... और गुस्से में उस को देखते हुए कहती है....

नेमत : अबे कमीने तुझे ज़रा भी शर्म है की नहीं....? कभी भी कहीं भी शुरू हो जाता है....? कुछ तो शर्म कर लिया कर....

प्रिंस : लो जी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.... जो किया वो तू ने किया और उलटे मुझपे इलज़ाम लगा रही है.... मैं कहा था की मुझे कास के गले लगा के किश कर.... नहीं न.... और जब तुझे ये अच्छे से पता है की मेरे अंडर नील ज़हर का असर है जो तेरे वो सब करते hi मुझे बेकाबू करने लगेगा तो तू ने वो किया hi क्यों....? गलती खुद करती है और इलज़ाम मुझपे लगाती है..... हाँ नहीं तो....

नेमत : हाँ हाँ ठीक है ठीक है.... तेरी तरह गलती मुझसे भी हो गयी.... तुझे सही सलामत देख के मैं खुद को ख़ुशी का इज़हार करने से रोक नहीं पायी और मुझसे वो हो गया....

प्रिंस : हाँ तो सीधे सीधे बोल न की ये सब तू ने किया है मैंने नहीं.... करती खुद है और इलज़ाम मुझ मासूम पे लगाने लगती है.... हाँ नहीं तो....

बात को आगे बढ़ते देख बाबा बीच में आके दोनों को चुप करा देते हैं....

बाबा : क्या तुम दोनों बच्चों की तरह झगड़ने लगे.....? अभी काम पूरा नहीं हुआ है अभी मुस्कान को काली शक्तियों से आज़ाद करवाना बाकी है.... एक बार वो पूरा हो जाए फिर जितना चाहे लड़ झगड़ लेना.....

प्रिंस : बाबा मैं कहाँ लड़ता हूँ.... लड़ती तो हमेशा ये है.... जब देखो तब मेरे पीछे पड़ी रहती है.... हाँ नहीं तो....

नेमत : देखो तो कितना झूट बोलता है....

प्रिंस : मैं झूट नहीं बोलता ये सब जानते हैं.....

नेमत : जब देखो तब मेरे पीछे पड़ा रहता है और कह रहा है मैं तेरे पीछे लगी रहती हूँ....

बस फिर क्या थे दोनों एक बार फिर से लड़ने लग जाते हैं.... बड़ी मुश्किल से बाबा उनको रोकते हैं.....

प्रिंस मुस्कान की तरफ प्यार से देखते हुए कहता है....

प्रिंस : बस कुछ देर और एक बार मैं उन काली शक्तियों को तुम्हारे जिस्म में से निकाल दूँ फिर तुम बिलकुल ठीक हो जाओगी... ( फिर बाबा की तरफ देख के पूछता है....) बाबा मुस्कान के अंडर से उन काली शक्तियों को कैसे निकाला जाए...?

बाबा : उन काली शक्तियों को निकालने का एक hi रास्ता है और वो ये है की पहले उसे चक्र के बीज का रास पिलाना है जिस से काली शक्तियां अगले 2 मिनट के लिए निष्क्रिय हो जाएंगी.... उन 2 मिनट्स के अंडर hi तुझे उसके मुँह से अपने मुँह के ज़रिये उन काली शक्तियों को उसके अंडर से खींच के बहार निकालना है.... अगर इस में ज़रा सी भी देर हो गयी तो फिर ये कभी उन काली शक्तियों से आज़ाद नहीं हो पाएगी...

बाबा की बात सुन के सब शॉकेड हो जाते हैं.....

प्रिंस शॉकेड : चक्र के बीज का रास तो समझ आता है मगर मुँह से मुँह लगाना क्या ठीक होगा.....? मेरे ऐसा करते hi नील ज़हर मुझपे हावी होने लगेगा और फिर आगे क्या होगा वो आप जानते हैं.....

बाबा : तू ने जो कहा वो ठीक है.... जैसे hi तू वो करेगा नील ज़हर तुझपे फ़ौरन हावी हो जाएगा... और आगे का काम वो खुद कर देगा.... उसके असर की वजह से hi तू उन काली शक्तियों को मुस्कान के अंडर से खींच पायेगा..... उसके बिना ऐसा करना मुमकिन hi नहीं.... ये ले चक्र के बीज का रास....

बाबा की बात सुन के प्रिंस चक्र के बीज का रास ले के मुस्कान के पास जाता है और प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए आगे बढ़ने की उस से इजाज़त मांगता है.... आगे क्या होने वाला है ये जान के शर्म से मुस्कान के गोर गाल गुलाबी हो जाते हैं.... ये सोच के की प्रिंस अपना मुँह उसके मुँह से जोड़ के उसे किश करने वाला है.... हाँ माना की ये किश नहीं है.... मगर फिर भी दोनों के होंठ कुछ पल के लिए hi सही आपस में जुड़ने वाले हैं.... और लड़के और लड़की के होंठों के जुड़ने को किश hi कहते हैं.... ये सोच के मुस्कान की पलकें शर्म से झुक जाती हैं.... जिसे प्रिंस उसकी हाँ समझ के उसके बेहद करीब जा के एक गहरी सांस लेता है और पहले उसे चक्र के बीज का रास पिलाता है फिर उसका चेहरा अपने हाथों में ले के उसके मुँह से अपने मुँह को जोड़ देता है..... दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं.... इस एहसास को महसूस करते hi दोनों के जिस्म में मस्ती की एक तेज़ लेहेर सी दौर जाती है..... ऐसा होते hi नील ज़हर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है.... प्रिंस अपनी त्रिकोण और नील ज़हर की पावर्स के ज़रिये मुस्कान के मुँह से काली शक्तियों को खींच के निकालने लगता है.... काली शक्तियां मुस्कान के मुँह से निकल के प्रिंस के मुँह से होते हुए उसके जिस्म के अंडर जाने लगती हैं.... धीरे धीरे प्रिंस पूरी काली शक्तियों को मुस्कान के जिस्म से चूस के निकाल लेता है....

मुस्कान के जिस्म से जैसे hi उन काली शक्तियों को अपने अंडर खींच के प्रिंस उस से अलग होता है.... बाबा फ़ौरन मुस्कान के आस पास एक सुरक्षा घेरा बना देते हैं ताकि वो काली शक्ति वापिस लौट के मुस्कान के जिस्म में न जा सके....

इधर काली शक्तियों की वजह से प्रिंस को असहनीय दर्द महसूस होने लगता है.... दर्द से तड़पते हुए वो बुरी तरह से चीखने लगता है....

Aaaaaaaaaaggggghhhhhhh.....

उस का पूरा जिस्म काला पद चूका है.... उसके नाक कान और मुँह से खून निकलने लगता है.... उसकी ऐसी हालत देख के वहां मौजूद सभी का दिल तरप जाता है.... उनकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

प्रिंस अपनी पूरी पावर्स उस काली शक्ति को रोकने पे लगा देता है और वो काली शक्तियां प्रिंस को अपने कब्ज़े में लेने के लिए उसके पूरे जिस्म में फैल जाती हैं मगर वो छह के भी प्रिंस को काबू नहीं कर पा रही हैं.... प्रिंस की त्रिकोण शक्ति उन काली शक्तियों को प्रिंस को काबू करने से रोक रही हैं.... जब वो काली शक्तियां प्रिंस के जिस्म पे काबू नहीं कर पाती तब वो प्रिंस के जिस्म से निकलने की कोशिश करती हैं.... मगर प्रिंस उन्हें अपने जिस्म से निकलने नहीं देता.... वो उन्हें अंडर hi दबाने लगता है.... काली शक्तियां प्रिंस के जिस्म से आज़ाद होने के लिए प्रिंस को अंडर से तकलीफ पहुँचाने लगती हैं.... जब प्रिंस के बर्दाश्त की हद पार हो जाती है तब वो पागलों की तरह दर्द से चीखने लगता है.... प्रिंस की दर्द भरी चीखें सुन के वहां मौजूद सभी का दिल देहल जाता है.... साथ hi पूरा पैंडोरा प्लेनेट प्रिंस की उस तड़प को महसूस कर के कांपने लगता है....

नेमत तड़प के : बाबा आप खड़े खड़े देख क्या रहे हैं....? रोकिये उसे.... वो पागल हो गया है.... अपनी जान देने पे तुला हुआ है.... उस से कहिये की उन काली शक्तियों को चोर दे.... अभी वो इतना पावरफुल नहीं हुआ है की उन काली शक्तियों को कैद कर सके.... अगर कुछ देर यूँ hi चला तो उसका जिस्म पहात जाएगा.... प्लीज बाबा रोकिये उसको इस से पहले की उसकी जान चली जाए....

बाबा : रोकना तो मैं भी उसे चाहता हूँ.... मगर मैं ये अच्छे से जानता हूँ की वो रुकेगा नहीं.... वो अपने वादे से कभी मुकर नहीं सकता.... और यहाँ तो बात उसकी सब से प्यारी दोस्त (मुस्कान ) की जान की है.... वो अपनी जान दे देगा मगर मुस्कान पे कोई आंच आये ये वो कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.... वो ये अच्छे से जानता है की अगर उस ने उन काली शक्तियों को आज़ाद किया तो वो फिर से मुस्कान के जिस्म में घुसने की कोशिश करेंगी.... मेरी सुरक्षा शैलद उन्हें ज़्यादा देर तक मुस्कान के जिस्म में जाने से नहीं रोक पाएगी.... और इस बार अगर वो मुस्कान के जिस्म में गयी तो फिर मुस्कान को कभी ठीक नहीं किया जा सकेगा.... वो उसकी जान लेके उसके जिस्म को अपनी काली शक्तियों का गुलाम बना लेगी.... और फिर होगी तबाही जिसे कोई नहीं रोक पायेगा.... प्रिंस भी नहीं....

नेमत रट हुए : मगर बाबा इस तरह तो वो मर जाएगा....

बाबा और नेमत की बात सुन के मुस्कान का रोना और भी तेज़ हो जाता है.... वो आवाज़ दे के प्रिंस को ऐसा करने से रोकना चाहती है मगर रोक नहीं पा रही है.... उसके मुँह से आवाज़ निकल hi नहीं रही.... वो दिल की गहराइयों से प्रिंस का नाम ले के उसे पुकारती है....

मुस्कान : Princeeeeeeeeeeee....

कहते है की सच्चे दिल की गहराइयों से निकली आवाज़ दिल सुन लेता है वो hi इस वक़्त प्रिंस के साथ हो रहा है.... उसे मुस्कान की आवाज़ सुनाई देने लगती है..... उसे ऐसा लगने लगता जय जैसे की इस वक़्त मुस्कान मुसीबत में है और उसे उसकी ज़रुरत है.... वो जल्द से जल्द मुस्कान तक पहुँचने के लिए तड़प जाता है.... वो अपनी आँखें बंद करके अपनी पूरी ताक़त लगा के ज़ोर से चीखता है.... फिर अपनी पूरी पावर्स को एक जगह इकठ्ठा कर के उसे उन काली शक्तियों पे वार करने लगता है.... उसकी उन पावर्स से उन काली शक्तियों पे जितना असर होता है उतना hi असर प्रिंस पे भी होता है.... वो अंडर hi अंडर बुरी तरह से घायल हो जाता है..... काली शक्तियां जो प्रिंस की पावर्स से कमज़ोर पद गयी थी वो फिर से उठने लगती है.... ये महसूस होते प्रिंस अपनी पूरी पावर्स से एक मज़बूत घेरा बना उन काली शक्तियों को बाँध देता है फिर अपनी त्रिकोण पावर्स से एक जादुई डिब्बा बना के उन काली शक्तियों को उस में कैद कर के उसे अपनी त्रिकोण पावर्स के ज़रिये बंद कर के उस डिब्बे को पैंडोरा प्लेनेट की ज़मीन की गहराइयों में दफ़न कर देता है.... ताकि वो कभी बहार न निकल पाए....

फिर प्रिंस बड़ी मुश्किल से उठता है और मुस्कान के पास जाता है वो आगे बढ़ के उसे छूने hi वाला होता है की तभी मुस्कान के इर्द गिर्द बाबा ने जो सुरक्षा शैलद बनाया था प्रिंस उस से टकरा जाता है उसे एक ज़ोर का झटका लगता है और वो उड़ता हुआ दूर जा गिरता है.... एक तो वो पहले से hi घायल है और ऊपर से ये ज़बरदस्त झटका वो झेल नहीं पाटा और गिरते hi बेहोश हो जाता है.... उसका जिस्म इस वक़्त बुरी तरह से ज़ख़्मी है और उसके ज़ख्मों से खून भी निकल रहा है.... प्रिंस की ऐसी हालत देख के तीनो बुरी तरह से तड़प जाते हैं.... बाबा और नेमत फ़ौरन भाग के प्रिंस के पास जाते हैं.... प्रिंस की ऐसी हालत देख के उनकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... बाबा तड़प के ऊपर देख के चीख उठते हैं....

बाबा : Kyunnnnnnnnnn....? आखिर क्यों तुझे इस मासूम पे ज़रा भी रेहम नहीं आता....? आखिर क्या गलती है इस मासूम की जो तू हर जनम में इसे इतनी तकलीफ पहुंचता है....? बता मुझे.... इस ने हर जनम से सब को सिर्फ प्यार hi दिया है और बदले में इसे क्या मिला सिर्फ और सिर्फ तकलीफ.... हर बार दूसरों को ख़ुशी दे के इसे सिर्फ तकलीफ hi मिली है... इतना hi नहीं इस ने जिसे टूट के चाहा उसने भी इसे तकलीफ के सिवाए कुछ न दिया.... " एक ने इसको अपने सीने से दिल निकालने पे मजबूर कर दिया तो दूसरी ने उसी दिल को ज़मीन की गहराइयों में दफ़न कर दिया... क्या कसूर था इस मासूम का....? क्या सच्चा प्यार करना गलत है....? अगर हाँ तो इसके साथ बिलकुल सही हुआ.... और अगर नहीं तो फिर इस मासूम को क्यों ऐसी सजा मिली....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन...? क्यों इस के अपनों ने hi इसे हर बार जीते जी मार दिया....? क्यों इसे हर जनम में एक ज़िंदा लाश बना के चोर दिया....? और आज भी इसकी क्या गलती थी जो इसकी ऐसी हालत हुई....? आज भी ये मौत में मुँह में पहुँच के अपनी ज़िन्दगी के लिए लड़ रहा है.... आज भी इसे किसी की जान बचने की सजा मिली है.... बिना किसी स्वार्थ के इसने अपनी जान पे खेल के बेइन्तेहाँ दर्द सेह के उस मासूम लड़की की जान बचायी.... और बदले में इसे क्या मिला....? दर्द.... तकलीफ.... क्युन्न्न्नन्न्न्नन....? आखिर क्युन्न्न्नन्नन्न....? क्यों हर बार ये hi क़ुर्बानी देता आया है....? क्यों हर बार इसी से क़ुर्बानी ली जाती है....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन.....? क्यों हर बार इसे hi अपने सच्चे प्यार का सबूत देना पड़ता है....? क्युन्न्न्नन्नन्न....? क्यों हर बार इसे अपनी जान देके अपने प्यार की सच्चाई को साबित करना पड़ता है kyunnnnnnnnnnn....? आखिर क्यूँउउउउउउनंनं....? कब तक ये इसी तरह तकलीफ सेह के दूसरों को अपने हिस्से की खुशियां बांटा रहेगा....? क्यों इस के हिस्से में एक भी ख़ुशी नहीं लिखी तू ने kyunnnnnnnnnnn.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 103

बाबा : Kyunnnnnnnnnn....? आखिर क्यों तुझे इस मासूम पे ज़रा भी रेहम नहीं आता....? आखिर क्या गलती है इस मासूम की जो तू हर जनम में इसे इतनी तकलीफ पहुंचता है....? बता मुझे.... इस ने हर जनम से सब को सिर्फ प्यार hi दिया है और बदले में इसे क्या मिला सिर्फ और सिर्फ तकलीफ.... हर बार दूसरों को ख़ुशी दे के इसे सिर्फ तकलीफ hi मिली है... इतना hi नहीं इस ने जिसे टूट के चाहा उसने भी इसे तकलीफ के सिवाए कुछ न दिया.... " एक ने इसको अपने सीने से दिल निकालने पे मजबूर कर दिया तो दूसरी ने उसी दिल को ज़मीन की गहराइयों में दफ़न कर दिया... क्या कसूर था इस मासूम का....? क्या सच्चा प्यार करना गलत है....? अगर हाँ तो इसके साथ बिलकुल सही हुआ.... और अगर नहीं तो फिर इस मासूम को क्यों ऐसी सजा मिली....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन...? क्यों इस के अपनों ने hi इसे हर बार जीते जी मार दिया....? क्यों इसे हर जनम में एक ज़िंदा लाश बना के चोर दिया....? और आज भी इसकी क्या गलती थी जो इसकी ऐसी हालत हुई....? आज भी ये मौत में मुँह में पहुँच के अपनी ज़िन्दगी के लिए लड़ रहा है.... आज भी इसे किसी की जान बचने की सजा मिली है.... बिना किसी स्वार्थ के इसने अपनी जान पे खेल के बेइन्तेहाँ दर्द सेह के उस मासूम लड़की की जान बचायी.... और बदले में इसे क्या मिला....? दर्द.... तकलीफ.... क्युन्न्न्नन्न्न्नन....? आखिर क्युन्न्न्नन्नन्न....? क्यों हर बार ये hi क़ुर्बानी देता आया है....? क्यों हर बार इसी से क़ुर्बानी ली जाती है....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन.....? क्यों हर बार इसे hi अपने सच्चे प्यार का सबूत देना पड़ता है....? क्युन्न्न्नन्नन्न....? क्यों हर बार इसे अपनी जान देके अपने प्यार की सच्चाई को साबित करना पड़ता है kyunnnnnnnnnnn....? आखिर क्यूँउउउउउउनंनं....? कब तक ये इसी तरह तकलीफ सेह के दूसरों को अपने हिस्से की खुशियां बांटा रहेगा....? क्यों इस के हिस्से में एक भी ख़ुशी नहीं लिखी तू ने kyunnnnnnnnnnn.....?????

अब आगे.....

बाबा बेहद गुस्से में : अब बस.... बहुत हो गया.... अब ये और कुछ नहीं सहेगा....? सुना तू ने..... ये अब न hi अपने प्यार की सच्चाई को साबित करेगा और न hi किसी के लिए अपनी जान देगा...? ये अब चाहे भी तो मैं इसे ऐसा करने नहीं दूंगा.... अब इसकी ज़िन्दगी में सिर्फ और सिर्फ खुशियां hi होंगी गम नहीं.... मैं इसकी ज़िन्दगी को एक बार फिर से गम में डूबने नहीं दूंगा.... इसे इतना मज़बूत बना दूंगा की गम इसके पास आने से भी डरेगा.... अब इसे न कोई तकलीफ पहुंचा पायेगा और न hi इसे अपनी जान दे के अपने सच्चे प्यार को साबित करने को कहेगा.... अब इसकी मौत और इसके बेच मैं ऐसी ढाल बना दूंगा की इस की मौत छह के भी इस तक नहीं पहुँच पाएगी.... ये छह के भी अपनी जान किसी के लिए क़ुर्बान नहीं कर पायेगा... आज भी मैं इसे मरने नहीं दूंगा.... जब तक मेरे जिस्म में जान है मैं इसके लिए लड़ता रहूँगा....

ये कह के बाबा आगे बढ़ते हैं और प्रिंस के सर पे प्यार से हाथ फेरते हुए कुछ पढ़ने लगते हैं.... उनके जिस्म से पावर्स निकल के प्रिंस के जिस्म में जाने लगती है.... और देखते hi देखते प्रिंस के जिस्म पे लगे घाव भरने लगते हैं.... वो ठीक होने लगता है.... साथ hi उसका जिस्म पहले से भी कई ज़्यादा मज़बूत हो जाता है.... कुछ देर बाद प्रिंस मुस्कान का नाम ले के चीख उठता है... वो अपनी आँखें खोल इधर उधर मुस्कान को ढूढ़ने लगता है.... जैसे hi उसकी नज़र मुस्कान पे पड़ती है वो दौरता हुआ उसके पास जाता है.... वो जैसे hi मुस्कान को चुने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ता है उसे एक तेज़ झटका सा लगता है और वो उड़ता हुआ पीछे जा गिरता है....

प्रिंस : Aaaaaaaaaaggggghhhhh....

फिर मुद के बाबा की तरफ देखता है....

बाबा : यार मैंने कुछ नहीं किया वो तो उसकी हिफाज़त के लिए सुरक्षा घेरा बनाया था.... बस और कुछ नहीं.... अब तेरे पास इतनी पावर्स तो है की तू उसे तोड़ के अंडर जा सकता है.... फिर इतना नाराज़ क्यों हो रहा है....?

प्रिंस : नाराज़ न होऊं तो और क्या करूँ....? जब आपने देखा की मैं मुस्कान के पास जा रहा हूँ तो आप उस सुरक्षा घेरे को हटा सकते थे... या मुझे बता सकते थे.... मगर नहीं न आपने वो सुरक्षा घेरा हटाया और न hi उस बारे में मुझे कुछ बताया.... जान सकता हूँ क्यों....?

बाबा : यार मैं तुझे बताने hi वाला था मगर उस से पहले hi तू उस तक पहुंच गया.... चल चोर और सुरक्षा घेरा को तोड़ के अंडर चला जा.... इस में इतना सोचने वाली क्या बात है...?

प्रिंस : आप मेरे गुरु हैं साथ hi बाबा भी.... आपकी पावर्स को तोड़ के मैं आपकी तोहीं नहीं करना चाहता.... अगर ये आपकी जगह किसी और ने किया होता तो इस वक़्त न वो घेरा रहता और न hi घेरा बनाने वाला....

बाबा : किसने कहा की मेरी पावर्स तुझसे जुड़ा है.... मेरी साड़ी पावर्स पे सिर्फ और सिर्फ तेरा hi हक़ है... तू जैसे चाहे उसका इस्तेमाल करे.... इसमें मेरी शान में कोई गुस्ताखी नहीं आ सकती.... और तू वो है जो कभी किसी गैर के साथ कुछ गलत न करे तो मेरे साथ क्या गलत करेगा.... चल अब बातें hi बनता रहेगा की सीने से लग के अपने बाबा के दिल को सुकून भी पहुंचाएगा....

ये कह के बाबा अपनी बाहें फैला देते हैं... प्रिंस उनके पास जा के उनके गले लग जाता है.... जिस से दोनों के दिल को बड़ा सुकून मिलता है.... तभी नेमत जो की कब से उन्हें देख रही थी दौरति हुई उनके पास आती है और मासूम सी सकल बना के कहती है....

नेमत : मुझे भी प्रिंस के गले लग्न है....

नेमत की बात सुन के दोनों पलट के उसकी तरफ देखते हैं... नेमत का मासूम और आंसुओं से भरा चेहरा देख के प्रिंस का दिल तड़प जाता है... वो आगे बढ़ के उसके आंसुओं को पोछता है फिर कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है.... नेमत भी उसे अपनी बाहों में कास लेती है ऐसे जैसे की अगर उसने प्रिंस को छोरा तो वो उस से कहीं दूर चला जाएगा.... कुछ देर नेमत को बाहों में लिए प्रिंस उसके सर पे प्यार से हाथ फेरता रह्या है.... फिर उस से अलग होक एक बार फिर से मुस्कान के पास जाता है.... इस बार वो अपने हाथ आगे कर के उस सुरक्षा घेरे की तरफ इशारा करता है.... प्रिंस के इशारे से वो सुरक्षा घेरा फ़ौरन वहां से हैट के मुस्कान के जिस्म में समां जाता है.... प्रिंस आगे बढ़ के उसके करीब जाता है.... मुस्कान की आँखों से बहते आंसुओं को देख प्रिंस का दिल तड़प जाता है.... वो फ़ौरन उन्हें पॉच के कहता है....

प्रिंस : मैंने मन किया था न मगर तुम हो की सुनती hi नहीं.... मौका मिला नहीं की लगी आंसू बहाने.... तुम्हारी ाँहों में टंकी लगी हुई है क्या की बस नल खोला और आंसू बहने लगे....? बोलो न बोलती क्यों नहीं....?

ये कह के प्रिंस उसके बोलने का इंतज़ार करने लगता है मगर जब वो कुछ नहीं बोलती तब.....

प्रिंस : अब तो तुम ठीक हो गयी हो न फिर बोलती क्यों नहीं....?

बाबा : प्रिंस माना की उसके जिस्म से काली शक्तियां निकल चुकी हैं मगर अभी भी वो पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है...

प्रिंस : ठीक नहीं हुई मतलब....!!!! अभी भी कोई परेशानी है क्या....? आप बताइये मैं उसे अभी दूर कर देता है.... जब तक मैं अपनी प्यारी दोस्त को ठीक नहीं कर देता मुझे चैन नहीं आएगा....

बाबा : नहीं बात वो नहीं है.... बल्कि बात ये है की काफी साल से उन काली शक्तियों के कैद में रहने की वजह से इसके दिमाग ुर जिस्म के साथ साथ इसकी आवाज़ भी बेहद कमज़ोर पद गयी है.... अभी उसे ठीक होने में वक़्त लगेगा.... धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा और ये फिर से बोल सकेगी और आम लड़कियों की तरह चल फिर भी सकेगी साथ hi अपने जिस्म के हर हिस्से का खुल के इस्तेमाल भी कर सकेगी.... मगर उसके लिए इसे तुझे अभी तुझे बहुत कुछ करना होगा....

प्रिंस : हाँ वो hi तो मैं पूछ रहा हूँ की बताइये मुझे क्या करना होगा....? इसे ठीक देखने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ.... आप बताइये की मुझे क्या करना होगा....?

बाबा : कुछ बातें ऐसी है जो मैं तुम्हे नहीं बता सकता.... वो तुम्हे नेमत बता देगी.... अब तुम तीनो को यहाँ से जाना चाहिए.... कुछ दिन बाद मैं फिर आ के तुमसे मिलूंगा.... तुम्हे तुम्हारे अगले सफर पे ले जाने के लिए.... तब तक के लिए अलविदा.....

बाबा क्व मुँह से जाने की बात सुन के प्रिंस की आँखें नाम हो जाती हैं....

प्रिंस : बाबा अगर मुझे आपकी याद आयी और आपसे मिलने का दिल किया तो....?

बाबा : बस मुझे याद कर लेना मैं तुम्हारे पास आ जाऊँगा.... अभी मैं चलता हूँ और तुम तीनो भी जाओ....

फिर इस से पहले की प्रिंस बाबा से कुछ कहता या उन्हें जाने से रोक पाटा.... बाबा वहां से चले जाते हैं....

बाबा के जाने के बाद प्रिंस दोनों को लेके वापिस सुल्तानगढ आ जाता है....

प्रिंस : हाँ तो नेमत अब बता की मुस्कान को ठीक कैसे किया जाए....?

नेमत : काली शक्तियों के आज़ाद होने के बाद वो पूरी तरह से ठीक हो गयी है.... अब बस उसके जिस्म की ताक़त को वापिस लाना बाकी है.... एक बार उसके जिस्म की ताक़त वापिस आ गयी फिर वो पूरी तरह से ठीक हो जायेगी....

प्रिंस : अबे वो hi तो मैं पूछ रहा हूँ की इसे ठीक कैसे किया जाए....?

नेमत : वो बात hi ऐसी है की समझ नहीं आ रहा है की तुझे कैसे बताऊँ....? वो कुछ ऐसा है की तू उसे नहीं कर पायेगा.... कोई और होता तो शायद वो कर लेता मगर तेरे लिए वो करना मुमकिन नहीं....

प्रिंस : ऐसा क्या है जो कोई और कर सकता है मगर मैं नहीं....? जो भी है बता मुझे... मुस्कान को ठीक करने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.... कुछ भी.... समझी.... अब बता वो क्या बात है....?

नेमत : ठीक है तू जान न hi चाहता हिअ तो सुन....

नेमत जो कहती है उसे सुनके प्रिंस गुस्से में उसका नाम लेके के चीखता है....

प्रिंस बेहद गुस्से में : नेमाहाआआत.... तू पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या बेहूदा बात कह रही है.... दोबारा मुस्कान के बारे में ऐसा कहा तो अच्छा नहीं होगा.... तेरी जगह ये बात किसी और ने कही होती तो अब तक मैं उसकी जान ले चूका होता.....

नेमत : तू चाहे तो शौक से मेरी जान ले ले.... मगर जो सच है मैंने वो hi कहा... इसे तेरे अलावा और कोई ठीक नहीं कर सकता.... इस पूरी दुनिया में ऐसा कोई डॉ या ऐसा कोई इलाज नहीं जिस से ये ठीक हो सके.... इस का डॉ भी तू है और इसका इलाज भी तू hi है....

प्रिंस : तू पागल हो गयी है....? तू जानती है की किसके बारे में क्या कह रही है....?

नेमत : मैं पागल नहीं हुई बल्कि पूरे होश में रह के कह रही हूँ.... उसे बस तू hi ठीक कर सकता है... अब ये तेरे ऊपर है की तू क्या चाहता है.... उसका इलाज करके उसे ठीक करना या फिर उसे इसी तरह लाचार चोर के मौत से भी बत्तर ज़िन्दगी जीने देना..... पहले तो उसे उन काली शक्तियों ने अपने कब्ज़े में किया हुआ था... मगर अब वो तेरी न का शिकार बानी हुई है.... उसका इलाज न कर के एक तरह से तू उस मासूम के साथ ठीक वैसा hi सलूक कर रहा है जैसा की उन काली शक्तियों ने किया था.... तेरे और उन काली शक्तियों में फर्क hi क्या है.... बस इतना की वो जो कर रही थी वो खुल के कर रही थी.... मगर तू जो इस मासूम के साथ कर रहा है वो इसके साथ धोका है.... दोस्त कहता हैं तू इसे.... क्या दोस्त को ठीक करना एक दोस्त का फ़र्ज़ नहीं....? क्या अपने दोस्त को जो की तेरे इलाज से ठीक हो सकती है उसका इलाज न करना उसके साथ धोका नहीं है.... तू तो ऐसा नहीं था.... हर लम्हा हर पल हर किसी की मदत किया करता था.... चाहे वो दोस्त हो या फिर दुश्मन.... तो फिर आज तुझे क्या हो गया....? आज जब तेरी दोस्त को तेरी सब से ज़्यादा ज़रुरत है तब तू उनका इलाज करने से इंकार कर रहा है.... इस के इस तरह ज़िंदा लाश बन के साड़ी ज़िन्दगी जीने से तो अच्छा है की तू इसे जान से मार दे....

नेमत के मुँह से मुस्कान को जान से मारने की बात सुन प्रिंस गुस्से से पागल हो जाता है और आगे बढ़ के खींच के एक थप्पड़ नेमत के गाल पे रसीद करता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

प्रिंस गुस्से में : जब तक मैं ज़िंदा हूँ इसे कुछ नहीं हो सकता.... मौत को भी इस तक पहुँचने से पहले मुझसे हो के गुज़ारना पड़ेगा....

नेमत : मुझे मारने से कुछ नहीं होगा.... बल्कि मुस्कान का इलाज करने से वो ठीक होगी.... अब ये तुझे सोचना है की तू क्या करना चाहता है इसे ठीक करना या फिर इसे मौत से बत्तर ज़िन्दगी जीते हुए देखना....

ये कह के नेमत वहां से जाने लगती है मगर तभी प्रिंस जो करता है उसे देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है....

प्रिंस अपने घुटनो पे बैठ के ज़ोर से छीकता है.... और साथ hi रोने भी लगता है....

प्रिंस : हे ऊपर वाले ये मेरा तू कैसा इम्तेहान ले रहा है....? क्यों हर बार मुझसे hi तू ऐसे काम करवाता है जो मैं नहीं करना चाहता.... कैसे मैं उस मासूम के साथ.... नहीं मैं उसके साथ वो नहीं कर सकता.... ये मुझसे नहीं होगा.... बता मुझे मैं अब क्या करूँ....? न मैं उसे इस हाल में मर मर के जीते हुए देख सकता हूँ और न hi वो कर सकता हूँ जिस से वो ठीक हो सकती है....

ये कब के प्रिंस ज़ोर ज़ोर से रोने लगता है.... उसकी आँखों से hi नहीं उसके दिल से भी आंसू निकलने लगते हैं....

नेमत से प्रिंस का ऐसा हाल देखा नहीं जाता वो उसके पास जा के प्यार से उसके सर पे हाथ फेरते हुए कहती है...

नेमत : प्रिंस तू क्यों ये सोच रहा है की तू उसके साथ कुछ गलत कर रहा है...? ये बस तू उसके इलाज के लिए hi कर रहा है... जो की तेरे अलावा और कोई नहीं कर सकता.... इसे नियति समझ या फिर काली शक्तियों का कमीनापन.... तुझे न चाहते हुए भी वो करना hi होगा.... उन काली शक्तियों की वजह से मुस्कान के जिस्म पे जो असर हुआ है उसे सिर्फ और सिर्फ वो hi ठीक कर सकता है जिसने उसे उन काली शक्तियों से आज़ाद करवाया हो.... इसके अलावा और कोई उसे ठीक नहीं कर सकता... तुझे वो करना hi होगा.... इस लिए अपने दिल को मज़बूत कर और वो कर जो उसके लिए ज़रूरी है....

प्रिंस नाम आँखों से : मगर....

नेमत : अब किसी अगर मगर की कोई गुंजाइश नहीं है.... ये तुझे करना hi होगा वो भी सिर्फ आज से अगले 7 दिन के अंडर.... 7 दिन गुज़र जाने के बाद तू तो क्या कोई भी उसे छह के भी नहीं ठीक कर पायेगा.... चल अब उठ और वो कर जो उसके लिए ज़रूरी hai....Har एक दिन पे इसके जिस्म का एक हिस्सा ठीक होता जाएगा.... 1सत डे इसके दोनों पेअर की उँगलियों से लेके दोनों घुटनो तक तक का हिस्सा ठीक होगा.... 2ंद डे इसके घुटनो से ऊपर कमर तक का हिस्सा.... 3रद डे इसके कमर से ले के गले तक का हिस्सा... 4तह डे इसके दोनों हाथ.... 5तह डे इस के गले से सर तक का हिस्सा.... 6तह डे इसका पूरा दिमाग और 7तह डे इसकी आवाज़ लौट आएगी.... और तब ये पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... अब बता क्या तू तैयार है ये करने के लिए....?

नेमत की बात सुन के प्रिंस आगे बढ़ के मुस्कान के पास जाता है और उसके करीब बैठ जाता है.... वो छह के भी उस से नज़रें नहीं मिला पा रहा है.... इस वक़्त उसका सर झुका हुआ है.... और आँखों से आंसू बह रहे हैं.... उसका जिस्म कांप रहा है... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो मुस्कान से ये कैसे पूछे की उसे ठीक करने के लिए वो उसका वैसा इलाज करना चाहता है जैसा की नेमत ने उसे बताया है....? उसके होंठ सील से गए हैं.... उस से कुछ कहते नहीं बन रहा है.... बड़ी मुश्किल से वो हिम्मत जूता के लड़खड़ाती आवाज़ में मुस्कान का नाम लेता है....

प्रिंस : M....M....Mus....kaan.....

इतना कह के वो खामोश हो जाता है वो आगे कुछ कह नहीं पाटा.... उसके दिल की धड़कन तेज़ चलने लगती है.... उसका जिस्म और भी तेज़ी से कांपने लगता है... उसकी जुबां सील सी जाती है... उस से आगे कुछ कहा hi नहीं जाता.... मगर कहना भी ज़रूरी है.... बड़ी मुश्किल से वो एक बार फिर से हिम्मत जूता के मुस्कान से पूछता है....

प्रिंस : टी.... टी.... Tu...mha...ra ila...aj करने के लिए mu...jhe तुम्हारी ी.... ी... Ija...zat चाहिए.... मैं ये जानता हूँ की मैं जो कह रहा हूँ वो गलत है.... मगर तुम्हे ठीक करने का और कोई दूसरा रास्ता नहीं है... मुझे न चाहते हुए भी ये करना hi होगा.... ये जानते हुए की तुम्हारा इलाज मैं कर सकता होइन.... तुम्हे इस तरह मौत से बत्तर ज़िन्दगी जीते हुए मैं नहीं देख सकता.... प्लीज मेरी बात मान के मुझे तुम्हारा इलाज करने की इजाज़त दे दो.... प्लीज.... मेरी बात मान लो प्लीज.... मैं तुम्हे इस हाल में नहीं देख सकता.... तुम्हे ऐसे लाचार देख के मेरा कलेजा पहात है.... मुझे बेहद तकलीफ होती है.... प्लीज अपनी नहीं तो मेरी खातिर मुझे तुम्हारा इलाज कर के तुम्हारे साथ साथ मुझे भी इस तकलीफ से निजाद पाने दो.... प्लीज....

ये कह के प्रिंस अपनी गर्दन उठा के मुस्कान की आँखों में देखता है.... मुस्कान से प्रिंस का रोना उसकी ये तड़प देखि नहीं जाती.... उसकी आँखों से भी आंसू बहने लगते हैं.... वो अपनी पलकें झुका के प्रिंस को उसका इलाज करने की इजाज़त दे देती है....

फिर नेमत एक बार फिर से प्रिंस को बताती है की मुस्कान का इलाज उसे कैसे करना है....

प्रिंस नेमत और मुस्कान को साथ लेके ड्रीम वर्ल्ड जाता है.... वहां की जादुई झील के किनारे पहुंच के वो झील के किनारे लगे जादुई पौधे हसीना को अपनी पावर्स से निकालता है फिर उन्हें पीस के उनका रास निकाल के उसमे अपना खून मिलता है और फिर उसे ले के मुस्कान के पास जाता है.... और उसकी आँखों में प्यार और शर्मिंदगी से देखने लगता है.... जैसे की वो उस से आगे बढ़ने की इजाज़त मान रहा हो....

मुस्कान अपनी पलकें झुका के उसे आगे बढ़ने का इशारा कर देती है....

प्रिंस मुस्कान के बेहद करीब जा के खड़ा हो जाता है.... फिर पीछे मुद के नेमत की तरफ देखता है जैसे की कहना छह रहा हो की प्लीज मैं आगे नहीं बढ़ना चाहता....

नेमत प्रिंस की बेबसी समझ रही है और साथ hi ये भी की इस वक़्त मुस्कान को ठीक करना बेहद ज़रूरी है.... इस लिए वो गुस्से में प्रिंस को आँखें दिखा के आगे बढ़ने का इशारा करती है.... प्रिंस आगे बढ़ता है.... और वो करता है जिसे करने के बारे में तीनो ने कभी सोचा न था.....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 104

मुस्कान अपनी पलकें झुका के उसे आगे बढ़ने का इशारा कर देती है....

प्रिंस मुस्कान के बेहद करीब जा के खड़ा हो जाता है.... फिर पीछे मुद के नेमत की तरफ देखता है जैसे की कहना छह रहा हो की प्लीज मैं आगे नहीं बढ़ना चाहता....

नेमत प्रिंस की बेबसी समझ रही है और साथ hi ये भी की इस वक़्त मुस्कान को ठीक करना बेहद ज़रूरी है.... इस लिए वो गुस्से में प्रिंस को आँखें दिखा के आगे बढ़ने का इशारा करती है.... प्रिंस आगे बढ़ता है और वो करता है जिसे करने के बारे में तीनो ने कभी सोचा न था...???

अब आगे.....

प्रिंस मुस्कान का इलाज करने के लिए उसकी तरफ बढ़ने लगता है..... वो अभी मुस्कान के करीब पंहुचा hi था की तभी नेमत की आवाज़ सुन के वो रुक जाता है....

नेमत : प्रिंस आगे बढ़ने से पहले मेरी बात एक बार फिर से ध्यान सुन ले की तुझे क्या और कैसे करना है....? ( फिर नेमत एक बार फिर से प्रिंस को वो बताने लगती है...) और सब से ज़रूरी बात ये की एक बार तू ने मुस्कान का इलाज शुरू किया तो चाहे जो हो जाए.... क़यामत hi क्यों न आ जाए तू उसके इलाज को बीच में नहीं चोर सकता.... अगले 7 दिन तक तुझे यहीं रह के रोज़ाना उसका इलाज करना होगा.... न तू यहाँ से जा सकता है और न hi उसका इलाज बीच में रोक सकता है.... अगर कहीं तू इन 7 दिनों में यहाँ से गया या फिर तू ने इलाज बीच में रोका तो फिर तू तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में कोई उसे कभी ठीक नहीं कर पायेगा.....

प्रिंस : तू फ़िक्र मत कर मैं उसका इलाज भींच में नहीं छोड़ूंगा.... जब इलाज करना hi है और मुझे hi करना है तो मैं उसे पूरा कर के hi उसके ठीक होने के बाद यहाँ से अपने साथ ले जाऊँगा....

नेमत : हाँ मगर उसका इलाज इतना आसान नहीं होगा.... कोई और होता तो कोई मुश्किल की बात नहीं थी.... मगर तेरे होते हुए ये आसान नहीं बल्कि बेहद मुश्किल है....

प्रिंस : मेरे लिए भला ये काम मुश्किल कैसे हो सकता है....? जो कोई और कर सकता है वो मैं क्यों नहीं....? अब तो मेरे पास पावर्स भी हैं....

नेमत : वो hi पावर्स तो तेरी सब से बड़ी दुश्मन है.... वो कहते हैं न की जब पावर्स मिलती है तो उसके साथ ज़िम्मेदारी.... परेशानी और तकलीफ भी साथ आ जाती है....

प्रिंस : मैं कुछ समझा नहीं... तू क्या कहना छह रही है.... खुल के बता....

नेमत : जब तू मुस्कान का इलाज शुरू करेगा तब तेरे अंडर नील ज़हर अपना असर करना शुरू कर देता.... और साथ hi तेरे जिस्म में जागृत होने लगेगी काम वासना.... जो तुझे मुस्कान के साथ सेक्स करने को मजबूर करेगी.... जो तू करना नहीं चाहेगा.... सेक्स की इच्छाओं को रोकने से तुझे बेइन्तेहाँ तकलीफ होने लगेगी.... और तू छह के भी मुस्कान का इलाज पूरी तरह से नहीं कर पायेगा.... उसे करने में तुझे काम से काम रोज़ाना 30 मिनट्स का वक़्त लगेगा.... इन 30 मिनट्स तक उन तकलीफों को सहना तेरे लिए आसान न होगा.... हो सकता है तेरे नाक कान और मुँह से खून भी निकलने लगे.... या फिर तू बेहोश भी हो जाए.... तुझे सब सहते हुए बिना रुके उसका इलाज 30 मिनट्स तक करना होगा.... जब तक मुस्कान का पूरा जिस्म उस जादुई पौधे हसीना के रास और तेरे खून के मिले द्रव से तर हो के गुलाबी रौशनी से चमकने नहीं लग जाता.... और अगर कहीं तू ने वासना की आग में जलते हुए या फिर उस बेइन्तेहाँ दर्द से खुद को बचने के लिए मुस्कान के साथ सेक्स किया तब भी उसके साथ वैसा hi होगा.... न फिर वो किसी पे यकीन कर पाएगी और न hi फिर कोई उसका इलाज कर पायेगा.... उसे साड़ी ज़िन्दगी ऐसे hi ज़िंदा लाश की तरह उस धोके को बर्दाश्त करके मर मर के जीनी होगी जो उसे वो साक्ष देगा जिसे उसने अपना सच्चा दोस्त माना था....

प्रिंस : ऐसा कभी नहीं होगा.... प्रिंस अपनी जान दे देगा मगर कभी अपनी दोस्त पे कोई आंच नहीं आने देगा.... मुझे चाहे जितना भी दर्द क्यों न सहना पड़े मैं मुस्कान तो ठीक कर के hi रहूँगा.... फिर कुछ सोच के प्रिंस अपनी आँखें बंद करता है और कुछ पढ़ने के बाद नेमत की तरफ अपने हाथ का इशारा करता है.... उसके हाथ से सफ़ेद रंग की रेज़ निकल के नेमत के जिस्म से कास के लिपट जाती है.... नेमत से हिला भी नहीं जा रहा.... प्रिंस की इस हरकत पे नेमत के साथ साथ मुस्कान भी चौंक जाती है..... दोनों को ये समझ नहीं आ रहा है की आखिर प्रिंस ने ऐसा क्यों किया....? इस से पहले की नेमत प्रिंस से कुछ पूछती...

प्रिंस : घबरा मत... ये तुझे नुक्सान पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि तुझे मुझ तक पहुँचने से रोकने के लिए है.....

नेमत : मगर क्यों....?

प्रिंस : क्यों की मैं ये अच्छे से जानता हूँ की जब मैं मुस्कान का इलाज शुरू करूँगा तब नील ज़हर के असर की वजह से मुझे अपनी सेक्स की इच्छा को दबाना पड़ेगा.... जिस से मुझे बेइन्तेहाँ दर्द होगा धीरे धीरे जब वो दर्द अपनी हद पार कर जाएगा तब मेरे साथ जो होगा वो तुझसे देखा नहीं जाएगा और तू न चाहते हुए भी मुझे रोकने के लिए मेरे पास आना चाहेगी.... जो मुस्कान के लिए ठीक न होगा.... बस इसी लिए तुझे मेरे पास आने से रोकने के लिए मैंने तुझे जादुई रेज़ से बाँध दिया है....

प्रिंस की बात सुन के नेमत के साथ साथ मुस्कान की आँखों से भी आंसू चालक जाते हैं....

नेमत रट हुए : सही कहा था बाबा ने.... तेरे जैसे इस पूरे ब्रह्माण्ड में दूसरा न कोई कभी हुआ है और न कभी होगा... जिसके दिल में सिर्फ दूसरों के लिए प्यार hi प्यार भरा है... तू जिसे एक बार अपना मान ले उसकी जान बचने के लिए मौत से भी लड़ने से पीछे नहीं हैट ता.... अपनी जान दे के भी उसकी जान बचता है.... तू एक सच्चा दिलवाला है.... एक नेक फरिश्ता....

अभी नेमत ने इतना hi कहा था की तभी प्रिंस उसे आगे कुछ भी कहने से रोक देता है.... वो जादू से उसके होंठों को बंद कर देता है....

प्रिंस : इतना भी महान नहीं हूँ मैं.... न hi कोई फरिश्ता.... बस एक आम इंसान हूँ.... जिसका दिल सिर्फ प्यार करना जानता है.... और हाँ ये तू ने सही कहा की मैं मेरे अपनों के लिए hi जीता हूँ.... जब अपनों के लिए जिया जा सकता है तो उन्हें तकलीफ और मुसीबत से बचने के लिए अपनी जान भी देनी पड़े तो क्या फर्क पड़ता है.... मेरे अपनों में मेरी जान बस्ती है.... तो मैं भला उन्हें तकलीफ में कैसे देख सकता हूँ.... नहीं ये मेरे लिए मुमकिन नहीं.... और अभी मेरी दोस्त को मेरी ज़रुरत है... मैं हर हालत में उसकी मदत करूँगा... चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े.... चाहे कितना भी दर्द क्यों न सहना पड़े... मैं सब करूँगा... सब सहूंगा... उसे ठीक कर के अपने साथ ले जाऊँगा....

ये कह के प्रिंस मुस्कान की तरफ बढ़ता है और उसके करीब जा के खड़ा हो जाता है फिर ऊपर आसमान की तरफ देख के दुआ करता है...

प्रिंस : हे ऊपर वाले मेरी मदत कर ताकि मैं अपनी दोस्त को ठीक कर सकूँ.... चाहे कितनी भी तकलीफ मुझे क्यों न हो मैं पीछे न हतुं....

प्रिंस की बात सुन के और आगे का हाल जान के मुस्कान का दिल तड़पा जाता है.... उसे ये समझ में आ जाता है की आगे क्या होने वाला है....? आगे प्रिंस को बेइन्तेहाँ दर्द का सामना करना है.... जिस वजह से उसके साथ कुछ भी हो सकता है... ये सोच के मुस्कान का दिल दर से कांप जाता है... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते है.... वो छह के भी प्रिंस को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाती बस रट हुए उपरवाले से उसकी सलामती की दुआ करने लगती है....

मुस्कान : हे ऊपर वाले मेरे दोस्त की हिफाज़त करना उसे वो दर्द मत सहने देना.... उसकी जान की हिफाज़त करना...

प्रिंस एक बार मुस्कान की आँखों में देखता है.....

प्रिंस : मुस्कान मैं जो करने वाला हूँ वो मजबूरी की वजह से करूँगा.... बस तुम्हारा इलाज करने के लिए.... प्लीज मुझे गलत मत समझना.... और हाँ अगर इस बीच मुझसे कोई गलती हो जाए तो प्लीज मुझे माफ़ कर देना....

ये कह के प्रिंस अपने हाथ मुस्कान की तरफ बढ़ता है.... और उसे उठा के झील के किनारे नरम मुलायम घास की चादर पे लेता देता है.... आगे उसे क्या करना है ये सोच के उसके हाथ कांपने लगते हैं.... वो कांपते हाथों से एक एक करके मुस्कान की कमीज के बटन खोले लगता है.... प्रिंस के साथ साथ शर्म के मारे मुस्कान की साँसे भी तेज़ी से चलने लगती हैं.... साथ hi उसका जिस्म कांपने लगता है... 10 साल में ऐसा पहली बार हुआ है की उसके जिस्म में कोई हरकत हुई है... ये देख के उसे बड़ी हैरानी सी होती है....

प्रिंस मुस्कान की कमीज उतार देता है... मुस्कान के जिस्म के ऊपरी हिस्से पे इस वक़्त ब्लैक नेट वाली ब्रा है जो उकसे 34 के नरम मुलायम गोर गुलाबी बूब्स को कैद किये हुए है.... उसे देख के प्रिंस को एक झटका सा लगता है उसके जिस्म में एक सिरहन सी दौर जाती है.... जिसका असर नील ज़हर पे भी होता है और वो अपना असर दिखाना शुरू कर देता है...

प्रिंस फ़ौरन अपनी नज़रें वहां से हाथ के अपने हाथ नेमत के पाजामे की तरफ ले जाता है और उसके पाजामे का नाडा खोल देता है.... फिर उसे धीरे धीरे उसके जिस्म से निकालने लगता है.... जैसे जैसे मुस्कान का पजामा उतरता जाता है मुस्कान की ब्लैक जाली वाली पंतय के साथ साथ उसकी गोरी जांघें भी नज़र आने लगती हैं.... उसकी पंतय छूट की तरफ काफी पहली हुई है... ये देखते hi प्रिंस का लुंड एक जतका लेता है... और अपना सर उठाने लगता है.... प्रिंस मुस्कान के पाजामे को उसके जिस्म से अलग करने के बाद उसकी ब्रा की तरफ बढ़ता है... शर्म के मारे मुस्कान के चेहरे के साथ साथ उसके गाल भी लाल हो जाते हैं और साथ hi उसकी आँखें भी बंद हो जाती हैं.... आज ऐसा पहली बार हुआ है की किसी गैर मर्द ने उसके जिस्म को छुआ है.. उसके कपडे उतरे हैं और उसे नंगी हालत में देखा है... ये और कोई नहीं बल्कि उसका अपना सब से प्यारा दोस्त प्रिंस है.... प्रिंस कांपते हाथों से मुस्कान की ब्रा का हुक खोल देता है और धीरे धीरे उसकी ब्रा को उसके जिस्म से अलग कर देता है.... मुस्कान के दोनों गोर गुलाबी बूब्स बेपर्दा हो जाते हैं... उन्हें देख के प्रिंस एक पल के लिए उनमे खो सा जाता है.... वो एक तक प्यार और काम वासना से उन्हें देखने लगता है.... उसका दिल चाहने लगता है की वो आगे बढे और उन्हें कास कास के दबाये और उन्हें मुँह में ले के जी भर के चूसे... मुस्कान के गुलाबी निप्पल को अपनी उँगलियों के बेच पकड़ के मसले... कुछ देर तक उन्हें यूँ hi घूरने के बाद बड़ी मुश्किल से प्रिंस मुस्कान के बूब्स को दबाने और उन्हें चूसने से खुद को रोकता है... फिर उसके कमर की तरफ अपने कांपते हुए हाथ बढ़ता है... जैसे hi उसकी उंगलियां मुस्कान की पंतय के पास उसके कमर के हिस्से को चुटी है... मुस्कान के साथ साथ प्रिंस के जिस्म में भी मस्ती की तेज़ लेहेर सी दौर जाती है... दोनों का जिस्म मस्ती में झनझना जाता है.... बड़ी मुश्किल से प्रिंस खुद पे काबू करता है और मुस्कान की पंतय के इलास्टिक में अपनी उंगलियां फसा के उन्हें नीचे की तरफ सरकाने लगता है... धीरे धीरे प्रिंस मुस्कान की पंतय को सरकाता जाता है... और सामने उसे मुस्कान की छूट की झांटे नज़र आने लगती है... उन झांटों के बीच गुलाबी रंग की छूट की लकीर के नज़र आते hi प्रिंस का लुंड एक जटके के साथ खड़ा हो जाता है जैसे की वो खड़े हो के मुस्कान की छूट को सलामी दे रह हो.... प्रिंस मुस्कान की पंतय को उतार के एक तरफ रख देता है.... और उसके पूरे जिस्म को प्यार से निहारने लगता है.... मुस्कान के झांटों भरी पहली हुई छूट और मस्त बूब्स देख के प्रिंस का लुंड मस्ती में झटके लेने लगता है.... एक तरफ जवान कमसिन पारी से भी ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत लड़की नंगी उसके सामने लेती हुई है और दूसरे उसके जिस्म में नील ज़हर पूरी तरह से अपना असर दिखते हुए उसे मुस्कान के साथ सेक्स करने को उकसाने लगता है.....

प्रिंस फ़ौरन अपनी आँखें बंद करके बड़ी मुश्किल से खुद को ऐसा करने से रोकता है.... फिर एक गहरी सांस लेके पास पड़े प्याले जिसमे उसके खून के साथ साथ जादुई पौधा हसीना का रास मिला हुआ है उसमे अपनी उंगलियां डुबोता है और फिर मुस्कान के जिस्म की मालिश शुरू कर देता है... वो उसकी पेअर की उँगलियों से होते हुए उसके घुटनो तक अच्छे से मसाज करने लगता है.... ये अलग बात है की मुस्कान का नरम मुलायम सेक्सी जिस्म उसे बार बार बहकने पे मजबूर कर रहा है.... प्रिंस अपनी आँखें बंद करके उसे मस्सगे देने में लगा हुआ है.. इस वक़्त प्रिंस बड़ी मुश्किल से अपने दिमाग से सेक्स की भावनाओं को हटा के पूरे दिल से मुस्कान का इलाज कर रहा है.... मुस्कान के पैरों की मालिश करके के बाद वो ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है... जैसे जैसे उसके हाथ मुस्कान की जाँघों की तरफ बढ़ते हैं.... मुस्कान के जिस्म में मस्ती की लेहेर और तेज़ी से दौरने लगती है..... इधर प्रिंस की भी हालत खराब होने लगती है... वो अपनी अंडर उठ रही सेक्स की आग को दबाने लगता है... जिस से उसे दर्द होना शुरू हो जाता है.... प्रिंस उस दर्द को सहते हुए मुस्कान की दोनों जाँघों की मालिश करने लगता है.... उसकी जानतों भरी कमसिन गुलाबी टाइट छूट और मदमस्त चूतड़ों को चोर के प्रिंस ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है और इसकी कमर के साथ साथ उसके पेट की मालिश शुरू कर देता है.... प्रिंस की उंगलियां मुस्कान उसके नरम मुलायम पेट पे फिसलते हुए कभी उसकी नाभि में घुस जाते है तो कभी उसके नरम मुलायम गोर गुलाबी बूब्स के निचले हिस्से से टकरा जाते हैं.... जिस से मुस्कान के साथ साथ प्रिंस के जिस्म में भी मस्ती की तेज़ लेहेर सी दौर जाती है... बड़ी मुश्किल से प्रिंस सेक्स की भावनाओं और दर्द को सहते हुए मुस्कान के कमर और पेट की मालिश करने लगता है.... फिर कुछ देर बाद वो उसे पलट देता है.... उसके ऐसा करते hi मुस्कान के मदमस्त मखमली पहले हुए चूतड़ प्रिंस की आँखों के सामने आ जाते हैं जिन्हे देख उसके मुँह से मस्ती भरी सिसकारी के साथ दर्द भरी आह भी निकल जाती है..... जिसे सुन के मुस्कान के साथ साथ नेमत को भी एक झटका सा लगता है.... दोनों को ये समझते देर नहीं लगती की प्रिंस के ऊपर नील ज़हर का असर हावी होना शुरू हो गया है और वो उसे दबाने भी लगा है जिसकी वजह से प्रिंस को और भी तेज़ दर्द हो रहा है.... ये दर्द अब धीरे धीरे बढ़ने वाला है....

और इस वक़्त हो भी ठीक वैसा hi रहा है.... प्रिंस जैसे जैसे मुस्कान के मखमली चूतड़ों के साथ साथ उसके नरम मुलायम पीठ की मालिश करने लगता है.... प्रिंस के अंडर सेक्स की भावना बढ़ने लगती हैं और साथ hi बढ़ने लगता है उसका दर्द....

मुस्कान के कमर और चूतड़ों के मसाज करने के बाद प्रिंस उसे सीधा लेता के उसके दोनों हाथों की मालिश करता है.... फिर उसके सर गर्दन गले और चेहरे की मालिश करने के बाद.... न चाहते हुए भी प्रिंस के हाथ मुस्कान की चूची की तरफ जा रहे हैं और वो उन्हें अपना हाथों में ले के मस्सगे करने लग जाता है.... जैसे hi प्रिंस के हाथ मुस्कान की चूचियों के छूटे हैं... मुस्कान की कमसिन कुंवारी छूट जो मस्ती में रास बहा रही थी उसमे से तेज़ी से पानी आने लगता है और वो झड़ने लगती है... उसकी छूट से एक सैलाब सा निकलते हुए नीचे बिछी घास की चादर को भिगोने लगता है.... प्रिंस का दर्द अब बढ़ते बढ़ते अपनी हद पार करने की कगार पे पहुंच जाता है.... मुस्कान के बूब्स की मसाज करने के बाद प्रिंस अब अंतिम पड़ाव यानी मुस्कान की रास भरी छूट की तरफ बढ़ जाता है.... और उसकी जानतों भरी कमसिन गोरी गुलाबी अनछुई छूट की मालिश करने लगता है....

जैसे hi प्रिंस के हाथ मुस्कान की छूट को छूटे हैं नील ज़हर का असर प्रिंस पे पूरी तरह से हावी हो जाता है और वो प्रिंस को मुस्कान के साथ सेक्स करने को पूरी तरह से मजबूर का देता है.... प्रिंस वासना की आग में जलते हुए एक बार मुस्कान के चेहरे की तरफ देखता है और फिर.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 105

जैसे hi प्रिंस के हाथ मुस्कान की चूचियों को छूटे हैं... मुस्कान की कमसिन कुंवारी छूट जो मस्ती में रास बहा रही थी उसमे से तेज़ी से पानी आने लगता है और वो झड़ने लगती है... उसकी छूट से एक सैलाब सा निकलते हुए नीचे बिछी घास की चादर को भिगोने लगता है.... प्रिंस का दर्द अब बढ़ते बढ़ते अपनी हद पार करने की कगार पे पहुंच जाता है.... मुस्कान के बूब्स की मसाज करने के बाद प्रिंस अब अंतिम पड़ाव यानी मुस्कान की रास भरी छूट की तरफ बढ़ जाता है.... और उसकी जानतों भरी कमसिन गोरी गुलाबी अनछुई छूट की मालिश करने लगता है....

जैसे hi प्रिंस के हाथ मुस्कान की छूट को छूटे हैं नील ज़हर का असर प्रिंस पे पूरी तरह से हावी हो जाता है और वो प्रिंस को मुस्कान के साथ सेक्स करने को पूरी तरह से मजबूर कर देता है.... प्रिंस वासना की आग में जलते हुए एक बार मुस्कान के चेहरे की तरफ देखता है और फिर.....?????

अब आगे.....

प्रिंस वासने की आग में जलते हुए एक बार मुस्कान के चेहरे की तरफ देखता है और फिर मस्ती में अपना हाथ उसकी कमसिन छूट के दाने पे रगड़ने लगता है.... साथ hi उसकी आँखों से आंसू भी बहने लगते हैं.....

जैसे hi मुस्कान को प्रिंस की उँगलियों का एहसास अपनी छूट के दाने पे होता है वो मस्ती में तड़प उठती है.... उसका जिस्म मस्ती में पूरी तरह से झनझना जाता है.... साथ hi वो बुरी तरह से चौंक भी जाती है... उसे प्रिंस से इस बात की उम्मीद नहीं थी... वो फ़ौरन प्रिंस की आँखों में देखती है.... दोनों की नज़र जैसे hi आपस में टकराती है.... प्रिंस को शर्मिंदगी सी महसूस होने लगती है.... शर्म से उसकी नज़रें झुक जाती हैं....

उसको ऐसा लगने लगता है जैसे की वो मुस्कान का इलाज नहीं बल्कि उसकी मजबूरी का फायदा उठा रहा है.... ये सोच के उसे खुद बे बेहद गुस्सा आने लगता है.... वो अपना हाथ मुस्कान की छूट से हटाना चाहता है मगर हटा नहीं पा रहा है.... मुस्कान का इलाज वो बीच में नहीं चोर सकता.... वो गुस्से में अपना दूसरा हाथ ऊपर आसमान की तरफ उठता है.... अचानक से आसमान में बिजली सी काढ़ने लगती है.... और बिजली का एक हंटर उसके हाथ में आ जाता है.... जिसे देखते hi मुस्कान के साथ साथ नेमत को भी ये समझते देर नहीं लगती की आगे क्या होने वाला है.... दर के मारे उनका जिस्म कांपने लगता है.... और वो प्रिंस को वो करने से रोकना चाहती हैं.... मगर छह के भी रोक नहीं पा रही हैं..... तभी अचानक से वो हंटर चलता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

साथ hi दर्दनाक चीख से पूरा ड्रीम वर्ल्ड कांप जाता है.....

अअअअअअअअअगगगगगठ्हहहह....

ये चीख प्रिंस के मुँह से निकल रही है... एक हाथ से मुस्कान का मसाज करते हुए दूसरे हाथ से खुद पे उन हंटर को बरसाने लगता है.... ताकि नील ज़हर का असर काम हो सके.... वो नील ज़हर के असर को काम करने में कामियाब तो हो जाता है.... मगर उस बेइन्तेहाँ दर्द से खुद को बचा नहीं पाटा.... उसका पूरा जिस्म दर्द से तड़पने लगता है... रह रह के वो दर्द से चीख उठता है.... जब उसके दर्द की हद पार हो जाती है तब वो होता है जिसे देख नेमत और मुस्कान की आँखों से hi नहीं बल्कि दिल से भी खून के आंसू निकलने लगते हैं.....

प्रिंस के नाक मुँह और कान से खून निकलने लगता है.... हर गुज़रते पल के साथ प्रिंस की हालत बाद से बत्तर होने लगती है..... वो हर दर्द बर्दाश्त करता जाता है और साथ hi मुस्कान का मसाज भी करता जाता है..... प्रिंस की ऐसी हालत नेमत से देखि नहीं जाती वो अपनी पूरी ताक़त लगा के अपने जिस्म से लिपटी वाइट रेज़ को तोड़ने की कोशिश करती है मगर वो न तो उसे तोड़ पा रही है और न hi प्रिंस की कोई मदत कर पा रही है.... बस दूर कड़ी रट हुए प्रिंस को उस बेइन्तेहाँ दर्द में तड़पते हुए देख रही है.... उसे इस वक़्त बेहद गुस्सा आ रहा है प्रिंस पे मुस्कान पे साथ hi खुद पे भी... उसने आज तक कभी खुद को इतना मजबूर और बेबस नहीं महसूस किया था जितना वो इस वक़्त महसूस कर रही है....

प्रिंस के बर्दाश्त की हद पार हो जाती है उसका जिस्म कमज़ोर पड़ने लगता है उसपे बेहोशी छाने लगती है.... मगर इस हाल में भी वो मुस्कान का इलाज करने में लगा हुआ है.... 30 मिनट्स पूरे होने में अभी 2 मिनट्स बाकी हैं.... प्रिंस से अब एक पल भी खुद को संभालना मुश्किल हो रहा है वो अपनी पूरी ताकत लगा के ज़ोर से चीखता है और दर्द से तड़पते हुए बड़ी मुश्किल से खुद को बेहोश होने से रोकता है.... साथ hi खुद से कहता है....

प्रिंस : नहीं प्रिंस कमज़ोर मत पद.... मुस्कान को तेरी ज़रुरत है... तू उसका इलाज बीच में नहीं चोर सकता.... बस 2 मिनट्स की बात है.... बस 2 मिनट्स के लिए खुद को संभाल ले.... तू इतना खुदगर्ज़ नहीं हो सकता.... देख उस मासूम को.... उसे तेरी ज़रुरत है.... तू ने उसे ठीक करने का वादा किया है.... तू अपना वादा नहीं तोड़ सकता.... उस ने तुझ पे भरोसा किया है तू उसके भरोसे को नहीं तोड़ सकता.... बस 2 मिनट्स तक खुद को संभाल ले बस दो मिनट्स की hi तो बात है.... जहाँ तू ने इतना सहा है वहां 2 मिनट्स और सही....

ये कहते कहते प्रिंस दर्द से तड़प के चीखता जा रहा है साथ hi मुस्कान का इलाज भी कर रहा है.... नेमत के साथ साथ मुस्कान भी रट हुए ऊपर वाले से प्रिंस के लिए दुआ कर रहे हैं....

हे ऊपर वाले इस मासूम पे रेहम कर उसे इस दर्द से निजात दिला दे....

प्रिंस की दर्दनाक चीखें सुन के पूरा ड्रीम वर्ल्ड तड़प के कांपने लगता है.... प्रिंस से अब एक भी पल और बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.... उसकी आँखें बंद होने लगती है वो पूरी तरह से कमज़ोर पद जाता है.... वो बेहोश हो के गिरने hi वाला होता है की तभी मुस्कान का पूरा जिस्म गुलाबी रौशनी से चमक उठता है.... जिस से ये पता चल रहा है की 30 मिनट्स पूरे हो चुके हैं.... और तभी प्रिंस बेहोश हो के एक तरफ गिर जाता है.....

प्रिंस के गिरते hi नेमत और मुस्कान का दिल देहल जाता है दोनों दर के मारे चीख उठती हैं.... ये अलग बात है की उनकी चीख उनके अंडर डाब के रह जाती है.... दोनों प्रिंस के पास जा के उसे संभालना छह रही है मगर वो छह के भी ऐसा कर नहीं पा रही है.... बस रट हुए उसे दूर से देख रही हैं.... साथ hi ऊपर वाले से उसके ठीक होने की दुआ करने लगती हैं....

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इधर हर गुज़रते पल के साथ प्रिंस से मिलने की तड़प शनाया के दिल को और भी ज़्यादा तड़पाने लगती है.... वो पूरी तरह से उसकी दीवानी बन चुकी है.... उसे हर तरफ प्रिंस hi नज़र आता है... प्रिंस के मुस्कुराते चेहरे को देख वो उसमे खो सी जाती है और आगे बढ़ के उसे गले लगाने जाती है..... मगर जब उसे इस बात का एहसास होता है की प्रिंस तो यहाँ है hi नहीं ये सिर्फ उसका भ्रम है तब वो पागलों की तरह प्रिंस का नाम ले के चीखने लगती है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो खुद प्रिंस को ढूंढने निकल जाती है.... हर जगह वो प्रिंस को तलाश करने लगती है.... मगर प्रिंस उसे कहीं नहीं मिलता..... आज पूरे 15 दिन हो चुके हैं उसे प्रिंस से आखरी बार मिले हुए.... उसे देखे हुए.... ठीक यही हाल रूही और ज़रा का भी है.... वो भी प्रिंस से मिलने के लिए तड़प रही हैं....

इधर जैसे hi प्रिंस दर्द से तड़प के बेहोश होता है.... उधर उसकी दीवाणियों का भी दिल उसे महसूस कर के तड़प उठता है.... उन्हें ऐसा लगने लगता है जैसे की प्रिंस किसी बड़ी मुसीबत में है उसे उनकी ज़रुरत है.... उन्हें जल्द से जल्द उसके पास जाना चाहिए.... मगर वो छह के भी ऐसा नहीं कर पा रही हैं.... उन्हें पता hi नहीं की इस वक़्त प्रिंस कहाँ है....?

ज़रा फ़ौरन मैक्स के पास जा के उस से प्रिंस का पता पूछती है.....

मैक्स : तुझे प्रिंस का पता क्यों चाहिए....?

ज़रा : मुझे अभी उस से मिलना है.... 3 दिन हो गए हैं उस से बात किये हुए..... वो कैसा है.....? कहाँ है....? कुछ पता नहीं.... मुझे उसकी बड़ी फ़िक्र हो रही है.... मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की वो किसी तकलीफ में है..... मुझे जल्द से जल्द उसके पास जाना है.... तू जल्दी से मुझे उसका एड्रेस दे....

मैक्स : वो मैं तुझे नहीं दे सकता.... प्रिंस ने मन किया है.... उसकी इजाज़त के बिना मैं उसका पता किसी को नहीं बता सकता.... वो नहीं चाहता की इस वक़्त हम में से कोई वहां जाए.... वर्ण कब का उसने हम को वहां बुलवा लिया होता.... हो सकता है की हमारे वहां जाने से कुछ प्रॉब्लम हो जाए.....

ज़रा : वो सब मैं देख लुंगी तू बस मुझे उसका पता दे जल्दी.... मुझे जल्द से जल्द उसके पास जाना है.... मैं चुप के से उस से मिल लुंगी.... और किसी को कुछ पता नहीं चलेगा....

मैक्स : जो भी हो बिना उसकी इजाज़त के मैं उसका पता तुझे तो क्या किसी को नहीं दे सकता.....

मैक्स की बात सुन के ज़रा गुस्से में आ जाती है....

ज़रा गुस्से में : देख मैक्स इस वक़्त मैं किसी बेहेस के मूड में नहीं हूँ.... इस से पहले की मेरा दिमाग पूरी तरह से घूम जाए और मैं मार मार के तेरी हालत खराब कर दूँ.... जल्दी से मुझे प्रिंस का एड्रेस बता....

मैक्स : तू चाहे तो मेरी जान ले ले मगर बिना उसकी इजाज़त के मैं तुझे उसका पता नहीं बता सकता....

ज़रा गुस्से में आगे बढ़ के मैक्स का गिरेबान पकड़ लेती है और उसे मारने hi वाली होती है की तभी सैर उसे रोक टी है....

सैर : ज़रा तू पागल तो नहीं हो गयी....? ये क्या कर रही है....?

ज़रा : अगर तू चाहती है की मैं इसे न मारुं तो कह इस से की ये जल्दी से मुझे प्रिंस का पता दे.... मुझे अभी के अभी प्रिंस से मिलना है....

ज़रा की बात सुन के सैर मैक्स की तरफ देखती है....

मैक्स : मुझे प्रिंस ने सख्ती से मन किया था.... चाहे जो हो जाए न तो मैं उसका पता किसी को दूँ और न hi बिना उसकी इजाज़त के खुद या किसी और को वहां जाने दूँ....

सैर : ज़रा जब मैक्स कह रहा है तो उसकी बात मान क्यों नहीं लेती...

ज़रा : मैंने कहा न मुझे प्रिंस से अभी मिलना है.... मुझे उसकी बड़ी फ़िक्र हो रही है.... मुझे उसका पता चाहिए मतलब चाहिए... तुम दोनों को बात समझ क्यों नहीं आ रही.... इस से पहले की मैं मार मार के इसकी हालत खराब कर दूँ.... इस से कह की मुझे प्रिंस का पता दे दे....

मैक्स : तू चाहे तो मेरी जान ले ले... मगर बिना उसकी इजाज़त के मैं तुझे तो क्या किसी को भी उसका पता नहीं दूंगा....

ज़रा जब ये समझ जाती है की मैक्स उसे प्रिंस का पता नहीं देगा तो वो बेहद गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ के कहती है....

ज़रा गुस्से में : तुझे क्या लगता है तू मुझे उसका पता नहीं देगा तो मैं उसे नहीं ढूंढ पाउंगी.... वो जान है मेरी उसे ढूंढने के लिए मुझे न तो एड्रेस की ज़रुरत है और न hi किसी और की.... मेरा दिल खुद बता देगा की मेरी जान कहाँ है.... मैं जा रही हूँ सुल्तानगढ अपनी जान के पास.... वहां पहनते hi मेरा दिल मुझे मेरी जान के पास अपने आप पहुंचा देगा...

ये कह के ज़रा बहार की तरफ चल देती है.... मैक्स और सैर उसे रोकने की बहुत कोशिश करते हैं मगर ज़रा कहाँ किसी की कुछ सुन ने वाली है.... अपनी जान से मिलने के लिए वो कार में बैठ के तेज़ी से चल देती है सुल्तानगढ की तरफ....

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जाने क्यों आज सोना (मुस्कान की बेहेन) का दिल काफी बेचैन बना हुआ है उसे रह रह के सुलतान की याद सत्ता रही है.... उसे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे की सुलतान तकलीफ में है और मदत के लिए उसे पुकार रहा है.... वो फ़ौरन पास पड़ी सुलतान की तस्वीर को उठती है और कास के अपने सीने से लगा लेती है.... सुलतान की तस्वीर को सीने से लगते hi उसके दिल को हमेशा सुकून आ जाता था.... मगर आज उसका दिल और बेचैन हो जाता है.... वो परेशान सी हो जाती है.... उसे समझ नहीं आता की वो क्या करे.... वो अपने रूम से बहार आ जाती है अपने परिवार के लोगों के पास ताकि उनके साथ बात करके उकसे बेचैन दिल को कुछ सुकून आ जाए मगर यहाँ वो और भी ज़्यादा बेचैन हो जाती है.... वो बाहर गार्डन की तरफ चल देती है.... मगर वहां भी वो परेशान hi रहती है..... उसे हर जगह बस सुलतान hi नज़र आने लगता है.... साथ hi उसकी यादें.... वो तेज़ी से एक तरफ बढ़ जाती है तभी उसकी नज़र अपने घर के उस हिस्से पे पड़ती है जिसे प्रिंस ने रेंट पे लिया हुआ है..... वो एक पल के लिए उसे देखती है फिर जाने उसे क्या होता है वो उस घर की तरफ खींचती चली जाती है.... दरवाज़ा खोल के वो अंडर जाती है.... अंडर का नज़ारा देख उसके होश उड़द जाते हैं.... जो घर कुछ दिन पहले तक आम घर जैसा था.... वो आज किसी शाही महल से काम नहीं लग रहा है.... वो उस घर की खूबसूरती में खो सी जाती है.... उसे यकीन hi नहीं होता की ये घर उसके घर का hi एक हिस्सा है... बल्कि उसे ये किसी जन्नत से काम नहीं लग रहा.... वो हैरत से हर एक चीज़ को देख रही है.... और साथ hi बेहद खुश भी हो रही है.... तभी अचानक से किसी की आवाज़ सुन के वो चौंक जाती है....

श्रुति : तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रही हो....?

लड़की की आवाज़ सुन के सोना पलट के उसकी तरफ देखती है.....

सोना : जो सवाल मुझे तुमसे करना चाहिए वो तुम मुझसे कर रही हो....? ये घर मेरा है.... अब तुम बताओ की तुम कौन हो यहाँ क्या कर रही हो.....?

श्रुति : ये घर आप का था मगर अब ये 2 साल के लिए प्रिंस का है... और रही बात मेरी तो मेरा नाम श्रुति है और प्रिंस ने मुझे इस घर को रेनोवेट करने को कहा था जो की पूरा हो चूका है.... मैं यहाँ से जा hi रही थी की तुम आ गयी....

सोना घर को देखते हुए : वैसे मान न पड़ेगा तुम्हे काफी अच्छे तरीके से तुम इसे रेनोवेट किया है.... ी ऍम रियली इम्प्रेस्सेड.... इसे देख के लग रहा है जैसे की मैं इस वक़्त मैं किसी घर में नहीं बल्कि जन्नत में कड़ी हूँ....

श्रुति : तारीफ का बहुत बहुत शुक्रिया.... मगर सच कहूं तो आपकी इस तारीफ की असली हक़दार मैं नहीं बल्कि प्रिंस है.... मुझे तो उसने बस नाम के लिए hi यहाँ रखा था... जबकि इस घर को उसने खुद अपने हाथों से रेनोवेट किया है.... दिन भर मैं जो करती वो रात में उसे अपने हिसाब से बदल देता... रोज़ाना यहाँ ऐसा hi होता.... जब मैंने इस की वजह पूछी तब उसने मुझसे बस इतना कहा की... सोना को ये घर जैसा पसंद है मैं इसे ठीक वैसे hi सजा रहा हूँ....

श्रुति की बात सुन के सोना को बड़ी हैरानी सी होती है....

सोना : वो तो मुझे जानता भी नहीं न hi मैं उसे जानती हूँ... फिर उसने ऐसा क्यों कहा और किया....?

श्रुति : हो सकता है की वो तुम्हारी नहीं बल्कि किसी और सोना की बात कर रहा हो.....

सोना : क्या मैं प्रिंस से मिल सकती हूँ....?

श्रुति : वो घर पे नहीं है कहीं बहार गया है.... उसे आने में शायद 6 दिन और लग जाएंगे.... जब वो आ जाए तब उस से मिल लेना....

सोना : ठीक है....

ये कह के सोना वहां से जाने hi वाली होती है की तभी किसी की तस्वीर देख के उसके पेअर वहीँ रुक जाते हैं.... वो गौर से उस तस्वीर को देखने लगती है.... फिर पलट से श्रुति से पूछती है....

सोना : ये तस्वीर किसकी है....?

श्रुति : ये प्रिंस की फोटो है... देखने में कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लगता है.. हैं न....

श्रुति की बात पे सोना बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है... बस फिर क्या था श्रुति प्रिंस की तारीफ के पल बाँधने लग जाती है.... फिर आखरी में जो कहती है उसे सुन के सोनो चौंक के प्रिंस की फोटो के बेहद करीब जा के उसे गौर से देखने लगती है.... वहां उसे कुछ ऐसा नज़र आता है जिसे देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है???????
 
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