Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 7 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 56

प्रिंस : ये क्या कोमल तुम रो रही हो.....?

कोमल : तुम्हारी बात सुन के और तुम्हारा ये हाल देख के जाने क्यों मेरा दिल तड़प उठा.... मुझे बेहद तकलीफ सी होने लगी.... और न चाहते हुए भी मेरी आँखों से आंसू बहने लगे....

प्रिंस : मगर क्यों.....????

कोमल जो कहती है उसे सुन के प्रिंस कुछ कह नहीं पाटा बस उसे देखता रह जाता है....

कोमल : जिस तरह मेरे सवालों के जवाब तुम्हारे पास नहीं हैं ठीक उसी तरह तुम्हारे इस क्यों का जवाब मुझे नहीं पता....

इधर घर में अचानक रूही की चीख सुन के सब बुरी तरह से घबरा जाते हैं....????

अब आगे....

इधर रात में जब रूही की आँख खुलती है तब जिब्रान के घर हुई बात याद आते hi उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं और वो प्रिंस का नाम ले के चीख उठती है और रोने लगती है.....

रूही की चीख सुन के सब दौर के उसके कमरे की तरफ जाते हैं.....

रहना : क्या हुआ मेरी बच्ची तू इस तरह क्यों चीखी और तू रो क्यों रही है....? बता न क्या हुआ....?

रूही : माँ वो P.....rin....ce.....

अभी रूही ने इतना hi कहा था की तभी बुआ पीछे से आ के प्रिंस की बुराई करने लगती है.... बुआ के मुँह से प्रिंस की बुराई सुन के रूही को गुस्सा आ जाता है..... वो जाने क्या क्या बुआ को सुनाने लग जाती है.....

बुआ : तू उस कमीने के लिए मुझे इतना कुछ सुना रही है..... भूल गयी उसने क्या किया तेरे साथ..... तेरे इस्तेमाल कर के तुझे चोर दिया.... जब उसका मतलब निकल गया तब उसने तुझे तलाक़ दे दिया..... और तू उस कमीने.....

अभी बुआ इतना hi कह पायी थी की रूही बेहद गुस्से में उसके करीब जाती है और बुआ का गाला दबोच के कहती है...

रूही : नहीं है वो कमीना.... सुना तू ने... वो कमीना नहीं जान है मेरी.... Jaaaaaaaaaaaaannnn.... और रही बात मुझे तलाक़ देने की तो प्रिंस मुझे तलाक़ दे ये मुमकिन नहीं.... देख गौर से देख इन तलाक़ के पेपर्स को इस के हर एक पैन पे प्रिंस ने सिग्न करने के बजाये ी लव यू लिखा है.... इस जनम में तो क्या अगले हर जनम में मैं उसकी हूँ और वो मेरा है..... हम को कोई जुड़ा नहीं कर सकता.... कोई नहीं.... मौत भी हम को जुड़ा नहीं कर सकती.... समझी.... अब अगर तू ने एक और गलत लफ्ज़ मेरी जान के बारे अपने मुँह से निकाला तो मैं इसी वक़्त तेरे हलक़ में हाट दाल के तेरी जान निकाल लुंगी....

ये कह के रूही बहार की तरफ जाने लगती है.... रूही को यूँ जाते देख उसकी माँ हैरत से पूछती है....

रहना : रूही इतनी रात गए तू कहाँ जा रही है.....?

रूही : वो क्या है न माँ की इस वक़्त मेरी जान मुझसे ज़रा सा नाराज़ है.... उसे मानाने जा रही हूँ....

रहना : मगर वो तो हॉस्पिटल में है....

रूही : तब तो मेरा इसी वक़्त वहां जाना और भी ज़्यादा ज़रूरी है.... मैं अपनी जान को तकलीफ में कैसे चोर सकती हूँ.... और सब से बड़ी बात ये की एक बीवी से अच्छा अपने शौहर का ख़याल कोई नर्स नहीं रख सकती....

रहना : मगर इतनी रात गए अकेले बहार जाना ठीक नहीं....

रूही : माँ आप फ़िक्र मत करो.... प्रिंस के रहते कोई मुझे छू भी नहीं सकता.... वो मेरे पास न होते हुए भी हर वक़्त हर लम्हा मेरे पास hi रहता है....

रहना : मगर वो तो हॉस्पिटल में है.... वो तेरी हिफाज़त कैसे कर सकता है....?

रहना की बात सुनते hi ज़ोर से प्रिंस का नाम ले के चीखती है....

रूही : परिंणणणनसीईई......

रूही की चीख सुनते hi फ़ौरन high-tech सिक्योरिटी गार्ड्स वहां आ के रूही को कवर कर लेते हैं..... जिसे देख सब को बेहद हैरानी होती है.... रूही के चेहरे पे स्माइल आ जाती है.... वो मुस्कुराती हुई अपनी माँ को देखती है फिर मुद के बहार की तरफ चल देती है....

अगली सुबह सब नाश्ता कर रहे होते हैं की तभी रुखसाना का मोबाइल बजने लगता है....

रुखसाना : kyaaaaaaaaaa....? कैसीईईई....?

ये कह के रुखसाना रट हुए बहार की तरफ दौरने लगती है.....

रुखसाना की इस हरकत को देख सब चौंक जाते हैं.... सब उसे आवाज़ दे के रोकने की कोशिश करने लगते हैं..... मगर रुखसाना है की रुक hi नहीं रही....

रहना : अरे क्या हुआ....? बता न ऐसे कहाँ भागी जा रही है.....? और तू रो क्यों रही है.....?

रुखसाना : वो.... वो हॉस्पिटल से फ़ोन था किसी ने F.....Firoz और Sal....man को बहुत बुरी तरह से पीटा है.... उन के जिस्म की साड़ी हड्डियां तोड़ दी हैं..... जल्द से जल्द उनका ऑपरेशन करवाना होगा....

रुखसाना की बात सुन के सब चौंक जाते हैं.... और फ़ौरन हॉस्पिटल पहुँचते हैं....

रुखसाना : डॉ ये हुआ कैसे....? कौन है वो जिसने मेरे बेटे को इतनी बेदर्दी से मारा....?

डॉ कुछ कहने hi वाले होते हैं की तभी बुआ जो कहती है उसे सुन के रुखसाना को बेहद गुस्सा आ जाता है....

बुआ : और किसने.... उसी कमीने प्रिंस ने मारा है हमारे मासूम बच्चों को.... उस कमीने ने इतनी बेदर्दी से मारा की.....

बुआ इस से आगे और कुछ नहीं कह पाती.... रोने लगती है....

बुआ की बात सुन के रुखसाना बेहद गुस्से में प्रिंस के रूम में जाती है और उसे जाने क्या क्या सुनाने लग जाती है....

प्रिंस को रुखसाना की बात अच्छी नहीं लगती वो गुस्से में कुछ कहने hi वाला होता है की तभी वहां ैप शाइना आ जाती है..... शाइना को देख

रुखसाना : गिरफ्तार कर लीजिये इस कमीने को.... इस ने मेरे बेटे की जान ले ने की कोशिश की है....

अभी रुखसाना ने इतना hi कहा था की शाइना बेहद गुस्से में कहती है....

शाइना : खबरदार जो आपने एक और गलत लफ्ज़ प्रिंस के लिए अपने मुँह से निकला तो मुझसे बुरा कोई न होगा....

रुखसाना : आप पुलिस वाली हो के इस मुजरिम का साथ दे रही हैं....

शाइना : मुजरिम प्रिंस नहीं बल्कि आप का बीटा फ़िरोज़ और सलमान है.... उन दोनों कमीनो की हिम्मत कैसे हुई प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला करने की..... उन दोनों को तो मैं ऐसी सजा दिलवाऊंगी की वो साड़ी ज़िन्दगी जेल की सलाखों के पीछे सड़ेंगे.....

रुखसाना : ये झूट है.... न hi मेरे बेटे ने कुछ है और न hi सलमान ने.... वो दोनों तो मासूम हैं.... आप प्रिंस के साथ मिल के मेरे बच्चों को झूठे इलज़ाम में फंसा रही हैं.....

शाइना : ये झूट नहीं सच है....

रुखसाना : क्या सबूत है आपके पास....?

शाइना वहां की कक्तव फुटेज सब को दिखती है.... जिसमे देर रात फ़िरोज़ और सलमान चाक़ू ले के प्रिंस के रूम में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं..... दोनों प्रिंस के करीब जा के उसपे चाक़ू से वार करते हैं..... चाकू प्रिंस की पीठ में घुस जाता है.... और तेज़ी से खून निकलने लगता है.... प्रिंस के मुँह से दर्द भरी चीक निकल जाती है जिसे देख दोनों ज़हरीली हंसी हसने लगते हैं.... प्रिंस उस वार से संभल hi नहीं पाया था की तभी दोनों उसपे एक और वार करते हैं.... ठीक तभी रूही वहां आ जाती है इस से पहले की दोबारा प्रिंस को चाक़ू लगता वो प्रिंस को अपनी तरफ खींच लेती है.... प्रिंस की चीख सुन के उसके सिक्योरिटी गार्ड्स फ़ौरन वहां आ जाते हैं और दोनों को मारने hi वाले होते हैं की तभी प्रिंस उन्हें रोक देता है.... और बेहद गुस्से में एक घायल शेर की तरह दहाड़ते हुए आगे बढ़ता है और एक ज़ोरदार पंच सलमान के मुँह पे मारता है.... सलमान उड़ता हुआ दूर जा गिरता है उसका जबड़ा पहात चूका है और मुँह से खून बह रहा है.... ये देख फ़िरोज़ टेबल पे पड़े पानी के जग को उठा के गुस्से में प्रिंस को मारता है.... मगर रूही हाथ आगे बढ़ा के उस वार को रोकती है फिर घूम के एक रिवर्स किक फ़िरोज़ को मारती है.... फ़िरोज़ उड़ता हुआ सामने चेयर पे गिरता है.... रूही बेहद गुस्से में आगे बढ़ती है और पागलों की तरह फ़िरोज़ को पीटने लगती है.... प्रिंस भी सलमान की धुलाई करने लग जाता है.... प्रिंस और रूही मिल के दोनों को पीट रहे हैं.... जो चीज़ हाथ में आ रही है वो उस से उस दोनों की जैम के धुलाई कर रहे हैं.... प्रिंस के हर एक वार पे फ़िरोज़ और सलमान की हड्डियों के टूटने की आवाज़ आ रही है साथ hi उनके चीखों की आवाज़ भी गूंजने लगती है.... देखते hi देखते दोनों के जिस्म की साड़ी हड्डियां टूट जाती हैं.... दोनों का जिस्म बुरी तरह से ज़ख़्मी हो जाता है.... दोनों बेहोश हो जाते हैं....

प्रिंस : इस से पहले की मैं इन दोनों को जान से मार दूँ.... ले जाओ इन कमीनो को यहाँ से.....

प्रिंस की बात सुन के उसके सिक्योरिटी Guard's फ़ौरन उन दोनों को उठा के वहां से बहार ले जाते हैं....

बुआ : इस में साफ़ नज़र आ रहा है की प्रिंस ने hi हमारे बच्चों को मारा है....

शाइना : हाँ उसने उन कमीनो को बस मारा है.... उसकी जगह अगर मैं होती तो इन दोनों कमीनो को जान से मार देती.... प्रिंस ने जो भी किया अपनी जान बचने के लिए किया.... इन कमीनो की तरह नहीं जो सिर्फ और सिर्फ पीठ पे वार करना और धोका देना जानते हैं.....

बुआ : मगर....

शाइना : अब बस.... अब कोई अगर मगर नहीं.... अब अगर किसी ने प्रिंस के खिलाफ एक भी लफ्ज़ अपनी जुबां से निकला तो मैं उसे भी इन कमीनो का साथी बना के जेल में दाल दूंगी.... इस से पहले की मेरा दिमाग घूमे और मैं कुछ गलत करूँ चले जाओ यहाँ से.....

शाइना की बात सुन के और उसे गुस्से में देख सब दर के वहां से चले जाते हैं....

शाइना वहां से सीधे प्रिंस के पास जाती है....

शाइना : अब कैसी तबीयत है प्रिंस....?

शाइना को देख के प्रिंस चौंक जाता है....

प्रिंस : अरे शाइना तुम यहाँ कैसे.....?

शाइना : मेरी चोरो अपनी बताओ... अब तुम्हारी तबीयत कैसी है....? तुम ठीक तो हो न.....

प्रिंस : दर्द कुछ काम है.... मगर घाव गहरा है तो भरने में वक़्त लगेगा....

शाइना : अवनि कहाँ है.....? वो नज़र नहीं आ रही.....?

प्रिंस : अवनि यहाँ कहाँ से आएगी....? वो तो मुंबई में है.....

शाइना : मुंबई में..... मगर कुछ घंटे पहले तो वो यहीं तुम्हारे साथ hi थी न जब तुम पे जान लेवा हुम्ला हुआ था.....

प्रिंस : वो अवनि नहीं थी....

शाइना : अवनि नहीं तो क्या उसका भूत था.... तुम भी न प्रिंस कुछ भी कहते हो....

प्रिंस : सच में वो अवनि नहीं थी बल्कि रूही थी....

शाइना : रूही....!!! मगर वो तो हूबहू अवनि जैसी hi थी.... क्या वाकई में वो अवनि नहीं थी....

प्रिंस : नहीं....

फिर प्रिंस शाइना को पूरी बात बताता है जिसे सुन के शाइना बुरी तरह से चौंक जाती है....

सच जान ने के बाद शाइना क्या करती है ये अगले अपडेट में पता चल जाएगा....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 57

प्रिंस : वो अवनि नहीं थी....

शाइना : अवनि नहीं तो क्या उसका भूत था.... तुम भी न प्रिंस कुछ भी कहते हो....

प्रिंस : सच में वो अवनि नहीं थी बल्कि रूही थी....

शाइना : रूही....!!! मगर वो तो हूबहू अवनि जैसी hi थी.... क्या वाकई में वो अवनि नहीं थी....

प्रिंस : नहीं....

फिर प्रिंस शाइना को पूरी बात बताता है जिसे सुन के शाइना बुरी तरह से चौंक जाती है....

सच जान ने के बाद शाइना क्या करती है ये अगले अपडेट में पता चल जाएगा....????

अब आगे......

शाइना : क्या कहा निकाह....? तुमने रूही से निकाह कर लिया..... इस का तो यही मतलब हुआ की तुमने अवनि को धोका दिया....

प्रिंस : नहीं मैंने अवनि को कोई धोका नहीं दिया है.... उस वक़्त हालत hi ऐसे थे की मैं छह के भी कुछ नहीं कर सकता था....

शाइना : ये धोका नहीं तो और क्या है....? तुम उस निकाह से इंकार भी तो कर सकते थे.....? मगर तुम ने जान बूच के उस सो कॉल्ड रूही से निकाह कर लिया.... कह दो की ये भी गलत है.....

प्रिंस : नहीं ये सच है मैंने रूही से निकाह जान के किया..... उसकी वजह "....................." अब तुम hi बताओ जो मैंने किया क्या वो गलत था....

शाइना : तुम क्या समझते हो.... तुम कुछ भी कहोगे.... कोई भी कहानी सुनाओगे और मैं उसे मान लुंगी.... जी नहीं....

प्रिंस : ये कोई कहानी नहीं है बल्कि वो हक़ीक़त है जिसे छह के भी झुटलाया नहीं जा सकता और न hi बदला जा सकता है.... अगर फिर भी तुम्हे मेरी बात पे यकीन नहीं आ रहा है तो ये देखो....

प्रिंस शाइना को कुछ ऐसी चीज़ें दिखता है जिसे देख शाइना प्रिंस की बातों को सच मान ने पे मजबूर हो जाती है...

प्रिंस : शाइना हमारे बीच जो बात हुई प्लीज वो अवनि को मत बताना.... तुम तो जानती हो उसे.... मुझे ले के वो कितनी पोस्सेस्सिवे है..... अगर उसे ये पता चला की मैं हॉस्पिटल में हूँ तो सब चोर चार के यहाँ आ जायेगी.... और कहीं उसे गलती से भी ये पता चल गया की मुझपे जान लेवा हुम्ला हुआ है तब तो समझ लो क़यामत hi आ jaayegi....Use शांत करना नामुमकिन हो जाएगा.... वो गुस्से से पागल हो जायेगी और किसी को ज़िंदा नहीं छोड़ेगी....

शाइना : तुम उसकी फ़िक्र मत करो मैं उसे कुछ नहीं बताउंगी.... न hi रूही के बारे में और न hi तुम्हारी मौजूदा हालत के बारे में.... मगर क्या तुमने ये सोचा है की अपने और रूही के निकाह के बारे में अवनि को कैसे बताओगे....?

प्रिंस : नहीं.... अभी कुछ सोचा नहीं है.... मगर जल्द hi इस बारे कुछ न कुछ सोचना hi पड़ेगा.... अवनि मेरी जान है और अपनी जान से इतनी बड़ी बात छुपाना ठीक नहीं.... मैं जल्द hi उसे सब बता दूंगा....

अभी शाइना कुछ कहने hi वाली होती है की तभी डॉ वहां आ जाता है और प्रिंस का चेक उप करके उसे आराम करने को कहता है....

शाइना : प्रिंस तुम आराम करो मैं चलती हूँ...

शाइना के जाने के कुछ देर बाद रूही धीरे धीरे प्रिंस के रूम की तरफ बढ़ती है दरवाज़े के पास पहुँच के वो धीरे से रूम में झाँक के देखती है.... प्रिंस पे नज़र पड़ते hi उसके होंठों पे स्माइल आ जाती है वहीँ प्रिंस के जिस्म के घाव पे लगी पत्तियों को देख रूही का दिल तड़प जाता है और उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो छह के भी खुद को प्रिंस के पास जाने से नहीं रोक पाती.... उसके कदम अपने आप प्रिंस की तरफ बढ़ जाते हैं.... वो प्रिंस के बेहद करीब जा के कड़ी हो जाती है और आँखों में आंसू लिए प्यार से उसके चेहरे को देखने लगती है.... प्रिंस आँखें बंद किये लेता हुआ है.... उसे पता hi नहीं की इस वक़्त उसके पास कोई मौजूद है....

रूही आगे बढ़ के अपनी जान को अपने सीने से लगा के अपने प्यार का इज़हार करने के लिए तड़प रही है मगर छह के भी वो ऐसा कर नहीं पा रही है.... उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं..... वो हिम्मत जूता के प्रिंस के बेहद करीब जाती है और उसे ी लव यू कहने hi वाली होती है की तभी उसकी आँखों से आंसू की बूँद बह के प्रिंस के चेहरे पे गिरती है... जिस से प्रिंस की आँख खुल जाती है....

रूही को यूँ अपने इतने करीब देख प्रिंस चौंक जाता है..... वो उसे कुछ कहने hi वाला होता है की तभी रूही की आँखों से बहते आंसू देख के उसका दिल तड़प जाता है..... वो बेचैन सा हो जाता है....

प्रिंस : क्या हुआ तुम्हे....? तुम रो क्यों रही हो.....? बताओ मुझे.....

रूही बस ख़ामोशी से रोटी हुई प्रिंस को देखती रहती है.... उसे कुछ न कहते देख प्रिंस बेचैन हो जाता है.....

प्रिंस : बोलो न तुम बोलती क्यों नहीं....? क्या बात है....? तुम रो क्यों रही हो....?

रूही अब भी कुछ नहीं कहती बस आँखों में आंसू लिए प्रिंस के चेहरे को देखती रहती है.... अपने लिए उसे इतनी फ़िक्र करते देख रूही का दिल खुश हो जाता है वहीँ ये बात सोच के उस का दिल तड़प उठता है की कहीं वो उसे अवनि समझ के तो नहीं उसकी फ़िक्र कर रहा है....

अभी रूही ये सोच hi रही होती है की तभी प्रिंस उसका नाम ले के उस से पूछता है.....

प्रिंस : क्या हुआ रूही बताओ मुझे तुम इस तरह क्यों रो रही हो.....?

प्रिंस के मुँह से अपना नाम सुन के रूही को यकीन हो जाता है की प्रिंस उसे अवनि नहीं बल्कि रूही समझ के उसकी फ़िक्र कर रहा है.... वो इस वक़्त अवनि के लिए नहीं बल्कि रूही के लिए परेशान है..... ये जान के रूही की आँखों से खुश के आंसू चालक जाते हैं..... उस का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वो आगे बढ़ के प्रिंस को अपने सीने से लगाने hi वाली होती है की तभी..... प्रिंस की नज़र जैसे hi रूही के हाथ पे लगे घाव और उस से बह रहे खून पे पड़ती है वो फ़ौरन उठ के बाथ जाता है और डॉ कह के ज़ोर से चीखता है.....

प्रिंस जैसे hi बीएड से उठता है उसे अपने घाव में तेज़ दर्द सा महसूस होता है.... जिस से उसके मुँह से दर्द भरी आआआआह्ह्ह्ह निकल जाती है.... जिसे सुन के रूही का दिल तड़प जाता है.... मगर प्रिंस अपने दर्द को दबा के उठता है और रूही के करीब जा के उसके ज़ख़्मी हाथ को अपने हाथ में ले के उसे देख के पूछता है....

प्रिंस : तुम भी न कभी नहीं सुधर सकती.... जब देखो तब कुछ न कुछ करती hi रहती हो..... क्या ज़रुरत थी तुम्हे बीच में आने की....? न तुम बीच में आती और hi ये हुआ होता..... देखो क्या हाल हो गया है.... कितनी चोट आयी है.... कितना खून निकल रहा है.... तुम्हे न हमेशा hi मुझे परेशान करने में मज़ा आता है न..... बोलो न अब बोलती क्यों नहीं....

रूही कुछ कहने hi वाली होती है की तभी प्रिंस उसे चुप करा देता है....

प्रिंस : मैं भी न बिलकुल पागल हूँ.... तुम्हे कितनी चोट लगी है... कितना दर्द हो रहा होगा न.... और मैं हूँ की इसका इलाज करवाने के बजाये उल्टा तुम्हे hi सुनाये जा रहा हूँ..... पर इसमें मेरी गलती नहीं है.... मैं भी क्या करूँ.... तुम्हे ज़रा सी भी तकलीफ होती है तो मेरा दिल तड़प जाता है.... मुझे ऐसा लगता है जैसे की किसी ने तुम्हे नहीं बल्कि मुझे तकलीफ पहुंचाई हो.... जानती हो इस वक़्त जितना दर्द तुम्हे नहीं हो रहा उस कई ज़्यादा दर्द मुझे तुम्हे दर्द में देख के हो रहा है.... आओ यहाँ बीएड पे बैठो....

ये कह के प्रिंस उसे बीएड पे बैठा देता है और एक बार फिर से डॉ कह के ज़ोर से चीखता है....

प्रिंस की आवाज़ सुन के डॉ और नर्स फ़ौरन वहां आ जाते हैं....

डॉ : क्या हुआ कोई प्रॉब्लम हो गयी क्या.....? आप खड़े क्यों है....? जल्दी से बीएड पे लेटिए मैं आपका चेक उप करता हूँ.....

प्रिंस : डॉ इलाज़ की मुझे नहीं बल्कि रूही को ज़रुरत है....

डॉ : उसे हम बाद में देख लेंगे पहले आप लेटिए तो सही....

दे की बात सुन के प्रिंस को उसपे बेहद गुस्सा आ जाता है...

प्रिंस बेहद गुस्से में : डॉ लगता है तुम्हारे दिमाग के साथ साथ तुम्हारी नज़रें भी कमज़ोर हो गयी हैं.... तुम्हे दिखाई नहीं दे रहा की रूही का हाथ ज़ख़्मी है उसमे से खून निकल रहा है.... जल्दी से उसका इलाज करो....

डॉ : मगर आप....

अभी डॉ ने इतना hi कहा था की तभी प्रिंस बेहद गुस्से में आगे बढ़ के उसका गिरेबान पकड़ के कहता है.....

प्रिंस : अब अगर तुमने रूही का इलाज करने में एक पल की भी देरी की तो मैं तुम्हारा वो हाल करूँगा की पूरी दुनिया के डॉ मिल के भी तुम्हारा इलाज नहीं कर पाएंगे....

प्रिंस की बात सुन के डॉ बुरी तरह से दर जाता है और फ़ौरन रूही का इलाज करने लगता है....

रूही प्यार भरी नज़रों से प्रिंस को देख रही है..... उसे प्रिंस की आँखों में अपने लिए जितनी फ़िक्र नज़र आ रही है उस से कई ज़्यादा प्यार चालक रहा है..... तभी अचानक से रूही के मुँह से दर्द भरी आह निकल जाती है.....

Aaaaaaaaaaaaahhhhhh.....

जिसे सुनके प्रिंस तड़प जाता है और बेहद गुस्से में खींच के एक थपड डॉ को रसीद करता है.....

Chataaaaaaaaaaaaak.....

डॉ उड़ता हुआ दूर जा गिरता है..... और अपने गाल सहलाते हुए प्रिंस की तरफ डरते डरते ऐसे देखता है जैसे की पूछ रहा हो....

भाई मैंने क्या किया जो तू ने मुझे थप्पड़ मारा.....?

प्रिंस : आराम से डॉ..... रूही को ज़रा भी दर्द नहीं होनी चाहिए.... तुझे मैंने यहाँ उसके दर्द को काम करने के लिए बुलाया है न की उसे और बढ़ने के लिए....

डॉ डरते डरते जवाब देता है....

डॉ : टी.... Taa....nke लगाऊंगा तो दर्द तो होगा hi न.....

प्रिंस : वो मुझे नहीं पता..... तू जो चाहे कर मगर रूही को ज़रा सा भी दर्द हुआ तो समझ लेना की तेरी खैर नहीं..... जितना दर्द उसे होगा उस से हज़ार गुना दर्द मैं तुझे दूंगा....

प्रिंस की बात सुन के जहाँ डॉ बुरी तरह से दर जाता है वहीँ रूही को हंसी आ जाती hai....badi मुश्किल से वो अपनी हंसी रोकती है.....

दर के मारे डॉ की हालत खराब बानी हुई है वो न रूही को टाँके लगा पा रहा है न उसे चोर पा रहा है..... टाँके लगाने से दर्द होगा और रूही को दर्द होते hi प्रिंस डॉ की जैम के धुलाई करेगा..... डॉ की समझ में नहीं आ रहा है की वो करे तो क्या करे.....? वो अभी ये सोच hi रहा है की तभी प्रिंस बेहद गुस्से में उसपे छीकता है.....

प्रिंस : डॉ...... वहां बैठे क्या कर रहे हो..... जल्दी से रूही का इलाज करो....

न चाहते हुए भी डॉ आगे बढ़ता है और कांपते हाथों से रूही को टाँके लगाने लगता है..... अभी उसने दूसरा टांका लगाया hi था की रूही के मुँह से दर्द भरी आह निकल जाती है.... साथ hi एक झन्नाटेदार थप्पड़ डॉ के गाल पे रसीद हो जाता है....

Chataaaaaaaaaaaaak.....

प्रिंस बेहद गुस्से में : तुझे मैंने कहा था न रूही को ज़रा सा भी दर्द नहीं होना चाहिए.... फिर भी तू बाज़ नहीं आया तू ने फिर उसे तकलीफ दी.... अब देख मैं तेरे साथ क्या करता हूँ.....

ये कह के प्रिंस बेहद गुस्से में डॉ को मारने के लिए आगे बढ़ा hi था की तभी किसी की आवाज़ सुन के वो वहीँ रुक जाता है.....?????

ऐसे तो हो चूका रूही का इलाज.....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 58

न चाहते हुए भी डॉ आगे बढ़ता है और कांपते हाथों से रूही को टाँके लगाने लगता है..... अभी उसने दूसरा टांका लगाया hi था की रूही के मुँह से दर्द भरी आह निकल जाती है.... साथ hi एक झन्नाटेदार थप्पड़ डॉ के गाल पे रसीद हो जाता है....

Chataaaaaaaaaaaaak.....

प्रिंस बेहद गुस्से में : तुझे मैंने कहा था न रूही को ज़रा सा भी दर्द नहीं होना चाहिए.... फिर भी तू बाज़ नहीं आया तू ने फिर उसे तकलीफ दी.... अब देख मैं तेरे साथ क्या करता हूँ.....

ये कह के प्रिंस बेहद गुस्से में डॉ को मारने के लिए आगे बढ़ा hi था की तभी किसी की आवाज़ सुन के वो वहीँ रुक जाता है.....?????

ऐसे तो हो चूका रूही का इलाज.....

अब आगे.....

आवाज़ सुन के प्रिंस मुद के दरवाज़े की तरफ देखता है.... वहां रहना कड़ी सब देख रही है....

प्रिंस : जी आप यहाँ....

रहना : हाँ मैं..... मैं यहाँ अपने बेटे प्रिंस और बहु को देखने आयी थी.... मगर यहाँ आ के जो मैंने देखा उसे देख के मुझे ख़ुशी भी हुई और गम भी.... ख़ुशी इस बात की की इतना सब होने के बाद भी तुम्हे रूही की इतनी परवाह है.... और गम इस बात का की तुम्हारे साथ जो भी कुछ हुआ उसके ज़िम्मेदार कहीं न कहीं हम (रूही और मैं) भी हैं.....

प्रिंस : इस वक़्त मुझे उस बात की फ़िक्र नहीं की जो हुआ उसका ज़िम्मेदार कौन है बल्कि इस वक़्त सब से ज़्यादा ज़रूरी जो काम है वो है रूही का इलाज करके उसकी तकलीफ को दूर करना.... जो ये डॉ नहीं कर पा रहा है.... वो रूही की तकलीफ को काम करने के बजाये और बढ़ा रहा है.....

रहना : तुम उसे रूही का इलाज करने दो तब न वो करेगा.....

प्रिंस : मैं कहाँ उसे रूही का इलाज करने से रोक रहा हूँ..... मैं तो बस इतना चाहता हूँ की ये रूही को बिना कोई तकलीफ पहुंचाए उसका इलाज करे....

रहना : जो की मुमकिन नहीं....

प्रिंस : क्यों मुमकिन नहीं....?

रहना : टाँके लगने पे दर्द होना तो लाज़मी है.....

प्रिंस : वो hi तो मैं कह रहा हूँ की उसे दर्द हो रहा है.... अब आप hi बताइये की मैं उसे दर्द में कैसे देख सकता हूँ.....

रहना : तू क्या चाहता है मेरी समझ में नहीं आ रहा..... एक तरफ तू चाहता है की उसका इलाज हो और दूसरी तरफ तू खुद उसका इलाज नहीं होने दे रहा.... तू अगर चाहता है की रूही का इलाज हो तो एक hi रास्ता है तू बस कुछ देर के लिए दूसरी तरफ घूम के बैठ जा.... बस 2 मिनट्स लगेंगे और इलाज हो जाएगा....

न चाहते हुए भी प्रिंस को रहना की बात मान नई पड़ती है इसी बीच डॉ रूही को टाँके लगा के उसकी ड्रेसिंग कर के वहां से निकल जाता है.....

अगले 2 दिन तक प्रिंस वहां एडमिट रहता है..... इन दो दिनों में उसने सब से बात की मगर रूही से एक लफ्ज़ भी नहीं कहा.... इन दो दिनों में रूही भी ख़ामोशी से उसे देखती रही है..... वो ये अच्छे से जानती है की प्रिंस उस से नाराज़ है बेहद नाराज़.... मगर जितना वो उस से नाराज़ है उस से कई ज़्यादा प्यार वो उस से करता है.... उसे ज़रा सी भी तकलीफ आ जाए तो प्रिंस तड़प उठता है....

दोनों को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिल चूका है और दोनों घर की तरफ जाने hi वाले होते हैं की तभी वहां बेहद परेशान हालत में विजय आता है....

प्रिंस : क्या हुआ यार तेरे चेहरे पे 12 क्यों बजे हुए हैं....?

सैम : और क्या होगा वही जो हमेशा से होता आया है.... इसने किसी लड़की को प्रोपोज़ किया होगा और उस ने इसे रिजेक्ट कर दिया होगा.... बस जनाब अपना मुँह लटका के यहाँ चले आये.... अब हर किसी की किस्मत तेरे जैसी तो होती नहीं.... एक बार जो लड़की तुझे देख ले वो तेरी दीवानी हुए बिना रह नहीं सकती....

सैर : ठीक कहा तुमने... प्रिंस है hi ऐसा.... स्मार्ट डैशिंग हैंडसम और दिलवाला.... अब ऐसे शख्स पे कोई लड़की फ़िदा न हो ये कैसे मुमकिन है....

प्रिंस : यार मुझे लगता है बात कुछ और hi है.... क्या बात है विजय....?

विजय : यार वो क्या है की आज साइट पे कोई भी मज़दूर काम पे नहीं आया.... सब का एक साथ काम पे न आना मुझे कुछ अजीब लगा.... मैं सीधे उनकी बस्ती चला गया वहां जा के जो बात पता चली उसी बात को ले के मैं बेहद परेशान हूँ....

प्रिंस : ऐसी क्या बात हो गयी....?

विजय : यार वो बात ऐसी है की बस्ती के लोगों को घर खली करने का नोटिस मिला है.... या तो वो 7 दिन के अंडर उधार ली हुई रकम चूका दें या फिर अपना घर खली कर के चले जाए....

प्रिंस : उधार से घर का क्या लेना देना....?

विजय : उन्होंने घर को गिरवी रख के उधार लिया था.....

प्रिंस : चलो माना..... मगर वहां से सभी लोगों ने उधार लिए..... ये बात समझ नहीं आयी....

अभी विजय कुछ कहने hi वाला होता है की तभी.....

कोमल : वो बात ऐसी है की 2 साल पहले उस बस्ती के लोगों को एक जानलेवा बीमारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था.... बस्ती के गरीब लोग बड़े और महंगे हॉस्पिटल में अपना इलाज नहीं करवा पाने की वजह से एक एक कर के सब बीमारी से मरने लगे.... जिब्रान के कहने पे यहाँ की गवर्नमेंट ने भी मदत करने से मन कर दिया.... अपनी और अपने अपनों की जान बचने के लिए न चाहते हुए भी मजबूरन सब को अपना घर जिब्रान के पास गिरवी रखना पड़ा....

मैक्स : और अब तुम्हे (प्रिंस को) हारने के लिए और उस प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए जिब्रान उन गरीबों पे जुल्म ध रहा है.... वो उन सब को यहाँ से भागना चाहता है.... जब यहाँ मज़दूर hi नहीं होंगे तो प्रोजेक्ट का काम कैसे होगा.... और आखिर मजबूरन तुम इस प्रोजेक्ट को चोर डोज.... और ये प्रोजेक्ट जिब्रान के हाथों में चला जाएगा....

मैक्स और कोमल की बात सुन के प्रिंस को बेहद गुस्सा आ जाता है.....

प्रिंस : ये कमीना मुझसे बदला लेने के उन मासूम बस्ती वालों की ज़िन्दगी से खेल रहा है.... इसका कुछ न कुछ इलाज तो करना hi होगा.... मैक्स मुझे एक घंटे के अंडर उसकी पूरी जन्मकुंडली चाहिए....

विजय : उसकी जन्मकुंडली का तू क्या करेगा.....?

सैर : तुझे शादी की बड़ी जल्दी है न.... तो चल आज उस से तेरा निकाह करवा देते हैं....

विजय : जी नहीं मुझे इतनी भी जल्दी नहीं है की मैं किसी आदमी से निकाह कर लून....

प्रिंस : ये फ़ालतू की बकवास बंद कर और मैं जो कह रहा हूँ उस काम को जल्द से जल्द पूरा कर.... ज़रा रूही को अपनी हिफाज़त में घर ले जाओ.... और जब तक मैं न आ जाऊं साये की तरह तुम इसके साथ रहोगी.... याद रहे इसे एक खरोच भी नहीं आणि चाहिए....

फिर उन्हें कुछ बातें बता के प्रिंस कोमल को साथ ले के वहां से जाने लगता है.... रूही उसे रोकना चाहती है मगर रोक नहीं पाती ख़ामोशी से आँखों में नमी लिए बस उसे जाते हुए देखती रहती है....

प्रिंस अपनी कार के पास जाता है फिर जाने क्यों पलट के रूही की तरफ देखता है.... और उसके करीब आ के उसे अपने सीने से लगा लेता है.... फिर उसकी आँखों से बहते आंसुओं को पॉच के कहता है....

प्रिंस : तू एक शेर की शेरनी है.... शेरनी डरा नहीं करती बल्कि डराया करती है.... मैं बस यूँ गया और यूँ आया.... और हाँ जब तक मैं वापिस न आ जाऊं मेरी शेरनी का ख़ास ख़याल रखना इसे ज़रा सी भी तकलीफ नहीं होने देना.... वो क्या है न इसकी तकलीफ मुझसे सही नहीं जाती....

रूही गौर से प्रिंस की हरकतों को देख भी रही है और उसकी बातें सुन भी रही है....

रूही : क्या मैं पूछ सकती हूँ क्यों....?

रूही की बात सुन के प्रिंस मुस्कुरा के उसकी आँखों में प्यार से देखते हुए कहता है....

प्रिंस : इस क्यों का जवाब मैं लौट के दूंगा.... फिलहाल मेरी शेरनी का ख़ास ख़याल रखना....

ये कह के प्रिंस कोमल के साथ कार में बैठ के चल देता है.....

इधर गुलिस्तां में सब बेहद परेशान बने हुए हैं.... ख़ास कर के बेगम शैब्या और शलाका..... आज सालों की तपस्या के बाद बंगारू बाबा लौट रहे हैं.... सब को इस बात का दर सत्ता रहा है की जब बंगारू बाबा और पारी का आमना सामना होगा तब क्या होगा.....?

बेगम साहिबा : हम को कुछ न कुछ कर के पारी को बंगारू बाबा से मिलने से रोकना होगा....

शलाका : हाँ बेगम साहिबा.... मैं भी यही सोच रही हूँ.... मगर कुछ समझ नहीं आ रहा है की ाअखिर पारी को उनसे मिलने से रोका कैसे जाए....

अभी दोनों बात कर hi रहे थे की वहां पारी आ जाती है.....

पारी : क्या बात है नानी आज आप बेहद परेशान लग रही हैं....?

बेगम साहिबा : न... Na...hi तो ऐसी कोई बात नहीं है....

बेगम साहिबा को यूँ हड़बड़ाते देख शलाका फ़ौरन बात को संभाल लेती है....

शलाका : क्या बात है पारी तुम तो आज ऐसे खुश नज़र आ रही हो जैसे की तुम्हे बहुत बड़ा खज़ाना मिल गया हो.....?

पारी : अभी मिला नहीं है मगर जल hi मिलने वाला है....

शलाका : ऐसा क्या मिलने वाला है मुझे भी तो बताओ....

पारी : मैं जल्द hi अपनी जान प्रिंस से मिलने वाली हूँ....

पारी की बात सुन के बेगम साहिबा के साथ साथ शलाका भी बुरी तरह से चौंक जाती है....

शलाका : kyaaaaaaaaaaaaa.....?

पारी : हाँ जल्द hi मेरी जान प्रिंस मेरे पास होगा....

अभी शलाका कुछ कहने hi वाली होती है की तभी बंगारू बाबा वहां आ जाते हैं.....

पारी को देख के पहले तो वो बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... उनके चेहरे के भाव बदलने लगते हैं.... उन्हें बेहद गुस्सा आ ने लगता है.... उन्हें बीती बातें याद आने लगती हैं की जिस प्रिंस को वो अपने बेटे से भी बढ़ के मानते थे उसे चाहते थे उसकी जान पारी की वजह से गयी थी.... कैसे प्रिंस ने पारी और गुलिस्तां को बचने के लिए अपनी जान की क़ुर्बानी दी थी.... ये बात याद आते hi वो बेहद गुस्से पारी की तरफ बढ़ते हैं मगर फिर कुछ सोच के वहीँ रुक जाते हैं....

धीरे धीरे उनका गुस्सा शांत होने लगता है और उनके चेहरे पे परेशानी के भाव उभरने लगते हैं....

बेगम साहिबा धीरे से शलाका से कहती है.....

बेगम साहिबा : शलाका मुझे बड़ा दर लग रहा है.... जाने अब यहाँ क्या होने वाला है....? कहीं ऐसा न हो की दोनों एक दूसरे की जान ले ले....

शलाका : दर तो मुझे भी लग रहा है.... समझ नहीं आ रहा है की आगे क्या होने वाला है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 59

बंगारू बाबा बेहद गुस्से में पारी की तरफ बढ़ते हैं मगर फिर कुछ सोच के वहीँ रुक जाते हैं....

धीरे धीरे उनका गुस्सा शांत होने लगता है और उनके चेहरे पे परेशानी के भाव उभरने लगते हैं....

बेगम साहिबा धीरे से शलाका से कहती है.....

बेगम साहिबा : शलाका मुझे बड़ा दर लग रहा है.... जाने अब यहाँ क्या होने वाला है....? कहीं ऐसा न हो की दोनों एक दूसरे की जान ले ले....

शलाका : दर तो मुझे भी लग रहा है.... समझ नहीं आ रहा है की आगे क्या होने वाला है....?????

अब आगे.....

बंगारू बाबा : तो आखिर अन्धकार की शुरुवात हो hi गयी....

बेगम साहिबा : अन्धकार.... कैसा अन्धकार बाबा....?

बंगारू बाबा : हाँ अन्धकार.... धीरे धीरे पूरे गुलिस्तां पे अन्धकार छाने लगेगा.... फिर शुरू होगा तबाही का खौफनाक तांडव..... मौत का काला साया एक एक कर के गुलिस्तां के हर एक जीव जंतु के प्राण लेने लगेगा.... यहाँ कोई जीवित नहीं बचेगा.... एक एक कर के सब मरेंगे.... शैतान किसी को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे.... जो गुलिस्तां सुकून की सांस लेता आया है.... उस गुलिस्तां से आग की लपटें निकलेंगी.... वो यहाँ की हर एक चीज़ को जलने लगेगी.... तबाही सिर्फ गुलिस्तां की hi नहीं होगी बल्कि उसकी रूह की भी होगी.... Us....ki रउऊउउउउउह.... की भी....

ये कहते hi बंगारू बाबा की आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... उनका दिल तड़प जाता है और वो घुटनो के बल ज़मीन पे गिर जाते है और रोने लगते हैं....

बंगारू बाबा की हालत देख के सब को जितनी हैरानी होती है उस से कई ज़्यादा दर उनकी बात सुन के लगता है.... उनका डरना लाज़मी भी है.... आज पहली बार ऐसा हुआ है की बंगारू बाबा ने गुलिस्तां की तबाही की बात की है.... और सब से बड़ी बात ये की आज पहली बार उनकी आँखों से आंसू बहे है.... इतना तो वो उस वक़्त भी नहीं तड़पे थे जब प्रिंस की मौत हुई थी.... तो फिर आज ऐसा क्या हो गया की बंगारू बाबा इस तरह तड़प के रो रहे हैं....? क्यों वो गुलिस्तां की तबाही की बात कर रहे हैं....? और वो किसकी रूह की बात कर रहे हैं....? किसकी है वो रूह....?

ये और इस जैसे न जाने कितने सवाल वहां मौजूद हर एक के दिल ो दिमाग में उठ रहे हैं.... मगर किसी की हिम्मत नहीं हो रही की आगे बढ़ के बंगारू बाबा से सवाल करे....

तभी बेगम साहिबा हिम्मत कर के आगे बढ़ती है.....

बेगम साहिबा : बाबा आप अचानक से इस तरह रोने क्यों लगे और ये आप क्या कह रहे हैं....? कैसी तबाही....? और वो रूह किसकी है....? और शैतान हम पे हुम्ला कैसे कर सकते हैं....? हमपे हुम्ला करना तो दूर वो गुलिस्तां के करीब भी नहीं आ सकते.... मरने से पहले प्रिंस ने अपनी Power's से इस गुलिस्तां को पूरी तरह से सुरखित कर दिया था.... उस सुरक्षा कवच को तोड़ पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं शैतानों के लिए भी नहीं.....

बेगम साहिबा की बात सुन के बंगारू बाबा बेहद गुस्से में लग भाग दहाड़ते हुए उठते हैं....

बंगारू बाबा : मुमकिन है.... सब कुछ मुमकिन है....

बंगारू बाबा को गुस्से में देख सब की हालत खराब हो जाती है.... दर के मारे सब कांपने लगते हैं..... बेगम साहिबा भी दर जाती है उनकी हिम्मत नहीं होती आगे कुछ भी पूछने ki....magar एक शख्स है जो हिम्मत करके बाबा से पूछती है और वो है पारी....

पारी : ये कैसे मुमकिन है बाबा....? प्रिंस के होते ये कैसे मुमकिन है की शैतान गुलिस्तां को छू भी सके.... इसे बर्बाद करना तो बहुत दूर की बात है....

बंगारू बाबा : सब मुमकिन है.... जानती हो क्यों....? क्यों की ये विधि का विधान है.... लिखे हुए को कोई नहीं बदल सकता....

पारी : मगर ये कैसे मुमकिन है.... प्रिंस के रहते ये कभी नहीं हो सकता....

बंगारू बाबा : उसके मरने के बाद तो हो सकता है न....

बाबा के मुँह से प्रिंस के मरने की बात सुन के पारी बेहद गुस्से में आ जाती है.... उसका गोरा गुलाबी चेहरा और नीली नीली आँखें गुस्से से लाल हो जाती हैं.... और वो चीख उठती है....

पारी : बबाआआआआ.... आज कह दिया दोबारा ऐसा मत कहना.... किसकी इतनी हिम्मत की वो मेरे रहते मेरे प्रिंस को छू भी सके....? उसकी जान लेना तो बहुत दूर की बात है....

बाबा : जान न चाहती है वो कौन है जो प्रिंस की जान लेगा....? तो सुन.... वो कोई और न बल्कि तू है....

क्या बंगारू बाबा जो कह रहे हैं वो सच होगा....? क्या वाकई में पारी प्रिंस की जान लेगी....? या फिर....? जो भी है उस बात पे अभी राज़ है.... फिलहाल शिमला चल के पता करते हैं की प्रिंस कोमल के साथ कहाँ जा रहा है....? और वो आगे क्या करने वाला है....?

****************************

इधर प्रिंस कोमल के साथ कार में बैठ के चल देता है.....

कोमल : प्रिंस हम कहाँ जा रहे हैं....?

प्रिंस : बस्ती....

कोमल : तुम अभी अभी हॉस्पिटल से निकले हो.... तुम्हे आराम की ज़रुरत है....

प्रिंस : ठीक कहा तुमने आराम की ज़रुरत है मगर मुझे नहीं बल्कि बस्ती वालो को.... जो जिब्रान की वजह से परेशानी में घिरे हुए हैं.... अगर मैंने और देर की तो बहुत देर हो जायेगी....

ये कह के प्रिंस कार को स्पीड से बस्ती की तरफ मोड़ देता है..... जल्द hi वो दोनों बस्ती पहुँच जाते हैं..... वहां सब बेहद परेशान बने हुए हैं....

कोमल को देखते hi नज़मा उसके पास आके उसे अपने गले से लगा के रोने लगती है..... कोमल उसे चुप करने की बहुत कोशिश करती है मगर नज़मा चुप होने का नाम hi नहीं लेती.....

प्रिंस : रोने से कुछ हासिल नहीं होगा.... मुश्किलें तभी दूर होती हैं जब डट उनका सामना किया जाए.....

नज़मा : कुछ परेशानियां इतनी बड़ी होती हैं की उनका सामना करना नामुमकिन हो जाता है.....

प्रिंस : जी नहीं ऐसी कोई परेशानी नहीं जिसे दूर न किया जा सके....

नज़मा : कहना बहुत आसान है मगर करना उतना hi मुश्किल है.... जिसपे बीत टी है वो hi जानता है.....

प्रिंस : फ़िक्र मत करो जल्द hi ये परेशानी दूर हो जायेगी....

नज़मा अभी कुछ कहने hi वाली होती है की तभी मैक्स वहां आ जाता है और प्रिंस को एक फाइल देता है.... फाइल पढ़ने के बाद प्रिंस को बेहद गुस्सा आने लगता है.... फिर अचानक से उसके होंठों पे मुस्कराहट सी फैल जाती है.....

प्रिंस मैक्स को कुछ समझा के कहता है....

प्रिंस : 30 मिनट्स में सब हो जाना चाहिए.... सिर्फ 30 मिनट्स समझे....

मैक्स ok बोल के वहां से चल देता है.... फिर प्रिंस मुद के कोमल की तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : यार बड़ी भूक लगी है.... चलो चल के खाना कहते हैं....

प्रिंस की बात सुन के नज़मा के साथ साथ कोमल को भी बेहद हैरानी होती है....

नज़मा : यहाँ टेंशन के मारे हमारी जान जा रही है.... और तुम हो की तुम्हे खाने की पड़ी है.....

प्रिंस : भूके रहने से अगर प्रॉब्लम सोल्वे होगी तो मैं शौक से भूका रहने को तैयार हूँ.... मगर ऐसा होगा नहीं.... तो इस से बेहतर है की चल के खाना खाया जाए....

नज़मा : तुम लोग जाओ मुझे नहीं जाना कहीं....

प्रिंस : यार तुम बेकार में टेंशन ले रही हो.... मेरी बात मानो और चल के खाना खाओ.... बात सिर्फ 30 मिनट्स की है उसके बाद सब ठीक हो जाएगा....

नज़मा : तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे की 30 मिनट्स के बाद जिब्रान खुद यहाँ आ के हम को हमारे घर के पेपर्स वापिस करेगा....

प्रिंस : हाँ....

कोमल : क्या हाँ....? कुछ भी.... तुम भी न प्रिंस कुछ भी कहते हो.... ऐसा कुछ नहीं होगा.... तुम जिब्रान को जानते नहीं हो.... वो बेरहम और ज़ालिम इंसान है....

नज़मा : और उस से भी बड़ा ज़ालिम इंसान है उसका बीटा मनीष.... वो इंसान नहीं बल्कि शैतान है.... खून पीने वाला शैतान.... वो शैतान का पुजारी है.... बेहद hi खौफनाक और ज़ालिम....

प्रिंस : यार यहाँ भूक से मेरी जान जा रही है और तुम दोनों हो की उन बाप बेटे की तारीफ़ करने में लगी हो..... इस से पहले की भूम के मारे चूहों के साथ साथ मेरे पेट में हठी भी कबड्डी खेला शुरू कर दें खाना खाने चलो.....

नज़मा : मगर....

प्रिंस : यार अब कोई अगर मगर नहीं.... एक बार कहा न 30 मिनट्स में सब ठीक हो जाएगा तो हो जाएगा.... अब चलो....

प्रिंस की बात मान के न चाहते हुए भी कोमल और नज़मा उसके साथ खाना खाने चली जाती हैं.... इधर 30 मिनट्स में मैक्स अपना काम पूरा कर के प्रिंस को मश्ग कर देता है....

नज़मा : तुम 30 मिनट्स का कह रहे थे.... यहाँ एक घंटा गुज़र गया है.... मगर अभी तक कुछ भी ठीक नहीं हुआ.....

प्रिंस : तुम लडकियां भी न बड़ी बेसब्री होती हो.... थोड़ा सब्र रखो जल्द hi सब पता चल जाएगा.... चलो मेरे साथ....

कोमल : चलो....!!!! कहाँ चलो....????

नज़मा : हमारी बर्बादी का तमाशा देखने और क्या....

कोमल : हाँ तू ठीक कह रही है... प्रिंस पे भरोसा करके हम ने बहुत बड़ी गलती कर दी.... यहाँ खाना खाने के बजाये अगर किसी वकील के पास गए होते तो अच्छा होता.... काम से काम वो हम को कर्ज़ा चुकाने के लिए कुछ वक़्त hi दिलवा देता....

प्रिंस : यार कोमल हद है.... अबे कभी तो मुझपे यकीन कर लिया करो.... मैं न hi तुम्हारा दुश्मन हूँ और न hi जिब्रान और उसके बेटे की तरह कोई शैतान.... बल्कि तुम्हारा अपना हूँ....

कोमल : ये सिर्फ बातें hi हैं.... और बातों से ज़िन्दगी नहीं चलती.... अगर अपने होते तो हमारी मदत करते न की हम को अपने hi घर से दूर ला के यूँ बर्बाद करते....

प्रिंस : कौन बर्बाद हुआ है और कौन आबाद ये अभी पता चल जाएगा....

अभी कोमल कुछ कहने hi वाली होती है की तभी उस का फ़ोन बजने लगता है.....

कोमल : हाँ बाबा बोलिये....

बाबा : बीटा मालिक तुम्हारे साथ हैं क्या....?

कोमल : हाँ बाबा मगर आप क्यों पूछ रहे हैं....?

बाबा : वो मैं तुम्हे बाद में बताऊंगा पहले जल्दी से मालिक को साथ लेके बस्ती आ जाओ....

इस से पहले की कोमल बाबा से कुछ पूछती कॉल कट हो जाता है.... इस बात से वो बेहद परेशान हो जाती है.... कोमल को परेशान देख जहाँ नज़मा को टेंशन होने लगती है वहीँ प्रिंस के चेहरे पे स्माइल आ जाती है.... जिसे देख कोमल के साथ साथ नज़मा को भी उस पे गुस्सा आने लगता है.... दोनों गुस्से में कुछ कहने hi वाली होती है की तभी.....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 60

अभी कोमल कुछ कहने hi वाली होती है की तभी उस का फ़ोन बजने लगता है.....

कोमल : हाँ बाबा बोलिये....

बाबा : बीटा मालिक तुम्हारे साथ हैं क्या....?

कोमल : हाँ बाबा मगर आप क्यों पूछ रहे हैं....?

बाबा : वो मैं तुम्हे बाद में बताऊंगा पहले जल्दी से मालिक को साथ लेके बस्ती आ जाओ....

इस से पहले की कोमल बाबा से कुछ पूछती कॉल कट हो जाता है.... इस बात से वो बेहद परेशान हो जाती है.... कोमल को परेशान देख जहाँ नज़मा को टेंशन होने लगती है वहीँ प्रिंस के चेहरे पे स्माइल आ जाती है.... जिसे देख कोमल के साथ साथ नज़मा को भी उस पे गुस्सा आने लगता है.... दोनों गुस्से में कुछ कहने hi वाली होती है की तभी.....????

अब आगे....

तभी वहां ज़रा आ जाती है....

ज़रा : प्रिंस सब रेडी है बस तुम्हारा hi इंतज़ार हो रहा है....

प्रिंस : तो फिर चलो देर किस बात की है....

प्रिंस सब के साथ बस्ती की तरफ चल देता है..... वहां सब बेसब्री से प्रिंस का इंतज़ार कर रहे हैं..... जल्द hi वो बस्ती पहुँच जाते हैं.... वहां प्रिंस को आते देख जिब्रान बेहद गुस्से में आ जाता है और प्रिंस को मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ता है.... मगर प्रिंस के सिक्योरिटी Guard's उसे बीच में hi रोक देते हैं....

जिब्रान : साले कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ऐसा करने की.....?

जिब्रान के मुँह से प्रिंस के लिए गाली सुन के ज़रा गुस्से से पागल हो जाती है और आगे बढ़ के एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके मुँह पे मारी है....

Chataaaaaaaaaaaaak....

ज़रा : साले एक और गलत लफ्ज़ प्रिंस के लिए तू ने अपने मुँह से निकाला तो याद रख तेरे हलक़ में हाथ दाल के मैं तेरी जान निकाल लुंगी....

ये कह के ज़रा उसे मारने hi वाली होती है की तभी प्रिंस उसे रोक देता है....

प्रिंस : रिलैक्स ज़रा उसका अभी वक़्त नहीं आया है.... ये पहले से hi मर चूका है.... मरे हुए को और क्या मारना....

फिर मैक्स की तरफ इशारा करता है.... मैक्स जिब्रान को Paper's देता है और उसे सिग्न करने को कहता है....

जिब्रान : मैं इनपे हरगिज़ सिग्न नहीं करूँगा.....

प्रिंस : तू क्या तेरा बाप भी सिग्न करेगा.... और वैसे भी मैं तुझसे मुफ्त में सिग्न नहीं करवा रहा हूँ बल्कि पूरी कीमत दे रहा हूँ.... ये रहा 25 करोड़ का चेक.... इन पेपर्स पे सिग्न कर पैसे ले और चलता बन....

जिब्रान : और अगर मैंने इनपे सिग्न नहीं किया तो....?

प्रिंस : तो अपनी बर्बादी का ज़िम्मेदार तू खुद होगा.... अभी तो मैंने सिर्फ तेरी एक फैक्ट्री बंद करवाई है.... लेकिन अगर तू ने सिग्न करने में एक पल की भी देरी की तो तेरी बाकी की तीनो इललीगल फैक्ट्री को भी गवर्नमेंट अपने कब्ज़े में ले लेगी.... और तू पल भर में क्रोरेपति से भिकारी बन जाएगा.... अब ये तेरे ऊपर है की तू क्या चाहता है..... भिकारी बनना या फिर समझदारी दिखा के इन Paper's पे सिग्न करना....

जिब्रान : तू ज़िंदा रहेगा तब न मुझे भिकारी बनाएगा.... अगर मैंने तुझे जान से मार दिया तो इस बस्ती के साथ साथ तेरा सब कुछ भी मेरा हो जाएगा.... (फिर अपने गुंडों से कहता है) देख क्या रहे हो.... मारो साले को....

जिब्रान की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : यार मैं भी कहाँ कुत्ते की दम को सीधा करने चला था.... ज़रा तुम क्या करती हो कैसे करती हो... मुझे नहीं पता मगर हाँ 15 मिनट्स के अंडर मुझे इन सारे Paper's पे जिब्रान के सिग्न चाहिए....

ज़रा : 15 मिनट्स बहुत ज़्यादा है... बस 10 मिनट्स में इन सारे Paper's पे सिग्न हो जाएंगे...

ये कह के ज़रा सिक्योरिटी Guard's के साथ मिल के उन गोंडों की बंद बजने उनकी तरफ बढ़ जाती है.....

कोमल जो हैरत से उनकी बात सुन रही है और सब देख रही है वो गुस्से में प्रिंस से कहती है....

कोमल : तुम पागल तो नहीं हो गए.... ये क्या किया तुमने अपने फायदे के लिए उस मासूम कमज़ोर लड़की को उन वेह्शी बेरहम गुंडों के पास मरने के लिए भेज दिया.... इस से पहले की वो उस लड़की की जान ले ले.... रोक लो उसे....

कोमल की बात सुन के प्रिंस को हंसी आ जाती है....

हहहहहहहहह....

प्रिंस को यूँ हस्ते देख कोमल को गुस्सा आ जाता है....

कोमल : मैंने क्या कोई जोके मारा है जो तुम इस तरह हंस रहे हो....?

प्रिंस : जोके hi तो है.... ज़रा और कमज़ोर.... इस से बड़ा जोके मैंने आज तक नहीं सुना....

कोमल : सुनोगे.... जल्द hi सुनोगे.... उस कमज़ोर लड़की की दर्द भरी चीख.... इस से पहले की कुछ अनर्थ हो जाए रोक लो उस मासूम को....

अभी कोमल ने इतना hi कहा था की तभी एक दर्दनाक चीख गूँज उठती है और साथ hi गूंजती है हड्डियों के टूटने के आवाज़.... जिसे सुन के कोमल के साथ साथ वहां मौजूद बस्ती के हर शख्स का पूरा जिस्म दर से कांप जाता है....

प्रिंस इशारे से कोमल को पीछे मुद के देखने को कहता है.... कोमल डरते डरते जैसे hi पीछे मुड़ती है.... कोई भारी भरकम चीज़ उसके पैरों के पास आके धड़ाम से गिरती है..... दर के मारे कोमल अपनी आँखें बंद कर के अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है.... फिर डरते डरते मुद के उस तरफ देखती है.... उसे ऐसा लग रहा है जैसे की जो उसके पैरों के पास पड़ी है वो और कोई नहीं बल्कि ज़रा है.... मगर जैसे hi वो उसे देखती है हैरत से उसकी आँखें बड़ी हो जाती और मुँह खुल जाता है.... ये ज़रा नहीं बल्कि जिब्रान का ख़ास गुंडा राका है.... ज़रा तो जैम के जिब्रान के गुंडों की धुलाई कर रही है....

कोमल की ऐसी हालत देख के प्रिंस से रहा नहीं जाता वो उसके करीब जा के उस से पूछता है.....

प्रिंस : क्या हुआ.... शॉक लगा क्या....?

कोमल : हाँ वो.... वो कमज़ोर लड़की कैसे.... अकेले इन गुंडों को मार रही है.....?

प्रिंस : जिस ज़रा को तुम कमज़ोर कह रही हो वो दुनिया की टॉप क्लास हार्डकोर फाइटर है.... वो बड़े से बड़े पहलवान को पल भर में धूल छठा सकती है.... बस देखती जाओ ज़रा कैसे इन सब गुंडों को मार के उन Paper's पे जिब्रान की सिग्न लेती है....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी गुंडों के साथ साथ जिब्रान की चीखें भी गूंजने लगती है.... ज़रा उन गुंडों को ऐसे पीट रही है जैसे की वो बेरहम गुंडे न हो के मामूली इंसान हो.... एक एक कर के सब बुरी तरह से ज़ख़्मी हो के ज़मीन पे बेहोश नज़र आने लगते हैं.... और कुछ तो दर के मारे वहां से भाग गए.... ज़रा जिब्रान को मार मार के अधमरा बना देती है फिर उसे घसीट ते हुए प्रिंस के पास लात के पटक देती है और उसके हाथ में Paper's थमा के उनपे सिग्न करने को कहती है....

दर के मारे जिब्रान उनपे सिग्न कर देता है....

प्रिंस : अब इस से पहले की मैं तुझे पूरी तरह से बर्बाद कर दूँ..... फ़ौरन निकल ले यहाँ से और हाँ एक बात याद रखना... आइंदा गलती से भी इस बस्ती या फिर बस्ती वालों की तरफ आँख उठा के भी देखा या गलती से भी कुछ गलत करने के बारे सोचा भी तो फिर तुझे बर्बाद होने से कोई नहीं बचा पायेगा.... मैं खुद भी नहीं.... चल अब जल्दी से निकल ले यहाँ से....

प्रिंस की बात सुन के जिब्रान दर के मारे चेक ले के वहां से फ़ौरन निकल लेता है.....

फिर प्रिंस कोमल को वो Paper's थमा के बिना कुछ कहे चुप चाप वहां से चल देता है....

कोमल छह के भी न उसे रोक पाती है और न hi कुछ कह पाती है.... शर्मिंदगी से उसकी नज़रें झुक जाती हैं....

प्रिंस को यूँ चुप चाप वहां से जाते देख बाबा उसे रोकने के लिए आवाज़ देते हैं मगर प्रिंस उनकी बात का न तो जवाब देता है और न hi वहां रुकता है..... इस बात से बाबा को बड़ी हैरानी होती है.....

बाबा : कोमल ये Paper's किस चीज़ के हैं....?

कोमल : ये बस्ती में रहने वाले लोगों के घर के Paper's हैं.... प्रिंस ने कर्ज़े की रकम चूका के इन्हे उनके नाम करवा दिया है..... आज से बस्ती वालों के घर उनके नाम हो गए हैं.....

बाबा : क्या ये सच है.....?

कोमल : हाँ बाबा.... ये लीजिये Paper's और सब को बाँट दीजिये....

कोमल की बात सुन के वहां मौजूद सभी बेहद खुश हो जाते हैं.... सब दिल से प्रिंस को दवाएं देने लगते हैं....

बाबा : मगर एक बात समझ नहीं आयी.... मालिक अचानक से यहाँ से क्यों चले गए.....? मैंने उन्हें आवाज़ भी दी मगर वो रुके नहीं.... उन्हें देख के ऐसा लगा जैसे की वो नाराज़ हो के यहाँ से गए हैं.....

कोमल : शायद आप ठीक कह रहे हैं.... वो नाराज़ हो के hi यहाँ से गए हैं....

बाबा : मगर क्यों....? आखिर उनकी नाराज़गी की वजह क्या है....?

कोमल : वो मुझसे नाराज़ हो के यहाँ से गए हैं.....

बाबा : तुझसे....!!!!

कोमल बाबा को होटल में हुई पूरी बात बताती है जिसे सुन के बाबा अपना सर पीट लेते हैं....

बाबा : ये तू ने क्या किया कोमल.... जिस नेक फ़रिश्ते ने बिना किसी मतलब के हमारी इतनी मदत की तू ने उसपे शक किया.... उसे जाने क्या कुछ नहीं सुना दिया.... जिस इंसान की पूजा करनी चाहिए थी तू ने उसे गलत कह के ज़लील किया.... अब तू बता गलत कौन है वो या फिर तू..... उस ने बस्ती वालों के hi नहीं बल्कि हमारे घर और ज़मीन को भी हमारे नाम करवा दिया....

कोमल : ये आप क्या कह रहे हैं बाबा....

बाबा : वो hi जो सच है.... हमारे जिस घर और ज़मीन को जिब्रान ने धोके से हम से अपने नाम करवा लिया था मालिक ने उसे फिर से हम को दिलवा दिया.... जानती है वो घर अब किस के नाम है....

कोमल : k....k....kiske....?

बाबा : वो घर और ज़मीन अब तेरे नाम है.... और ये रहे उसके Paper's....

बाबा के मुँह से सच जान के कोमल को खुद पे बेहद गुस्सा आने लगता है साथ hi उसकी आँखों से पछतावे के आंसू बहने लगते हैं.... वो अपने सर पीट के रोने लगती है....

कोमल : बाबा ये मैंने क्या कर दिया.... ये कैसा गुनाह हो गया मुझसे.... मैंने कैसे उस नेक फ़रिश्ते पे बिना किसी मतलब के शक किया.... उसे क्या कुछ नहीं कहा.... मगर वो है की इतना सब होने के बाद भी उसने हमारी मदत की..... हम को अपना समझा.... वो जुबां से hi नहीं बल्कि दिल से हम को अपना मानता है और मैंने उस पे शक कर के उसे बेगाना बना दिया.... मैंने खुद उसे हम से दूर कर दिया....

बाबा आगे बढ़ के कोमल को संभालते हैं....

बाबा : बीटा ये वक़्त रोने का नहीं बल्कि रूठे हुए को मानाने का है....

कोमल : आप ठीक कह रहे हैं बाबा.... मगर क्या वो मान जाएगा....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 61

बाबा के मुँह से सच जान के कोमल को खुद पे बेहद गुस्सा आने लगता है साथ hi उसकी आँखों से पछतावे के आंसू बहने लगते हैं.... वो अपने सर पीट के रोने लगती है....

कोमल : बाबा ये मैंने क्या कर दिया.... ये कैसा गुनाह हो गया मुझसे.... मैंने कैसे उस नेक फ़रिश्ते पे बिना किसी मतलब के शक किया.... उसे क्या कुछ नहीं कहा.... मगर वो है की इतना सब होने के बाद भी उसने हमारी मदत की..... हम को अपना समझा.... वो जुबां से hi नहीं बल्कि दिल से हम को अपना मानता है और मैंने उस पे शक कर के उसे बेगाना बना दिया.... मैंने खुद उसे हम से दूर कर दिया....

बाबा आगे बढ़ के कोमल को संभालते हैं....

बाबा : बीटा ये वक़्त रोने का नहीं बल्कि रूठे हुए को मानाने का है....

कोमल : आप ठीक कह रहे हैं बाबा.... मगर क्या वो मान जाएगा....??????

अब आगे.....

इधर गुलिस्तां में बंगारू बाबा की बात सुन के सब चौंक जाते हैं.....

बाबा : जान न चाहती है वो कौन है जो प्रिंस की जान लेगा....? तो सुन.... वो कोई और न बल्कि तू (पारी) है....

पारी : ये आप क्या कह रहे हैं.... प्रिंस मेरी जान है और मैं अपनी जान को मारूंगी..... ये मुमकिन नहीं.... मैं अपनी जान दे सकती हूँ मगर अपनी जान की जान हरगिज़ नहीं ले सकती....

बाबा : तू hi उसकी जान लेगी..... वक़्त एक बार फिर खुद को दोहराने वाला है.... पिछली बार की तरह इस बार भी प्रिंस की जान जायेगी....

ये कहते कहते बाबा की आँखों से आंसुओं का सैलाब सा बहने लगता है.... फिर एक लम्बी ख़ामोशी के बाद वो कहते हैं....

बाबा : फर्क सिर्फ इतना है की पिछली बार प्रिंस की जान तेरी वजह से गयी थी और इस बार तू खुद उस पे जान लेवा हुम्ला करेगी.... ये नियति है जिसे कोई नहीं बदल सकता..... कोई भी नहीं....

बाबा की बात सुन के जहाँ दर्द से सबकी आँखें नाम हो जाती हैं वहीँ पारी गुस्से और दर्द से तड़प के चीख उठती है....

पारी : वो जान है मेरी सुना आपने.... जान है वो मेरी.... मैं अपनी जान की जान लून ये हो नहीं सकता.... और अगर नियति में ये hi लिखा है तो मैं नियति को बदल दूंगी.... क्या कहा आप ने की मैं पारी अपने प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला करुँगी.....

बाबा : हाँ ये सच है.... तू ऐसा hi करेगी..... ऐसा करने से तुझे कोई नहीं रोक पायेगा.... तू खुद भी नहीं.....

बाबा की बात सुनके पारी तड़प उठती है.... उसकी आँखों से hi नहीं बल्कि दिल से भी खून के आंसू बहने लगते हैं.... वो घुटनो के बल ज़मीन पे बैठ के रोने लगती है..... प्रिंस का नाम ले के ज़ोर ज़ोर से चीखने लगती है.....

पारी : Princeeeeeeeeeee.... Princeeeeeeeeee..... कहाँ हो तुम प्रिंस.... प्लीज आ जाओ अपनी पारी के पास.... प्लीज आ जाओ... एक बार आ जाओ.... मरने से पहले मैं एक बार तुम्हे अपने सीने से लगा के जी भर के प्यार करना चाहती हूँ..... जान कहा करते थे न तुम मुझे..... क्या अपनी जान की ये आखरी छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं करोगे..... क्या अपनी जान का दीदार किये बिना hi मैं मर जाउंगी..... प्लीज आ जाओ... एक बार आ जाओ.... अपनी जान की आखरी इच्छा को पूरी कर दो..... Princeeeeeeeeeeee.....

पारी की दर्द भरी पुकार सुन के उसके तड़पते दिल से निकल रहे दर्द को महसूस करके और उसकी बात सुन के गुलिस्तां के साथ साथ वहां मौजूद सभी का दिल तड़प जाता है..... सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.....

प्रिंस का दिल भी इस तड़प को महसूस कर के तड़प उठता है..... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं..... प्रिंस को समझ नहीं आ रहा की अचानक से उसके साथ ये क्या हो रहा है.....? ये कैसी तड़प है जो उसे तड़पा रही है.....? क्यों उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.....? क्यों उसका दिल तड़प के रो रहा है.....? क्यों....? ऐसा आज से पहले तो कभी नहीं हुआ.... तो फिर आज क्यों.....? आखिर वो किसका दिल है जिसकी तड़प को महसूस करके प्रिंस का दिल तड़प रहा है....? कौन है वो.....? जब प्रिंस से दर्द ये तड़प बर्दाश्त नहीं होती तब वो कार को घर के बजाये बार की तरफ मोड़ देता है....

फिर बार में जा के शराब पीने लगता है..... शराब पीने पे भी उसके दिल का दर्द काम नहीं हो रहा है बल्कि हर गुज़रते पल और शराब के हर एक पेग के साथ वो बढ़ता hi जा रहा है.....

कोमल प्रिंस को कॉल कर रही है मगर प्रिंस उसका कॉल नहीं उठा रहा... वो कोमल का क्या सैर.... ज़रा.... यहाँ तक की रूही.... का भी कॉल नहीं ले रहा.... इस बात से सब परेशान हो जाती हैं.... उन्हें इस बात का दर सताने लगता है की कहीं प्रिंस को कुछ हो तो नहीं गया....

इधर ज़रा तो उधर रूही परेशान हो के प्रिंस को हर जगह ढूंढने लगती हैं.... मगर प्रिंस उन्हें कहीं नहीं मिल रहा.... इस बात से दोनों को और भी ज़्यादा टेंशन होने लगती है.... उन्हें समझ नहीं आ रहा है की आखिर प्रिंस को क्या हुआ है....? वो उनका फ़ोन क्यों नहीं रइवे कर रहा....? और सब से बड़ी बात ये की प्रिंस इस वक़्त है कहाँ....?

तभी अचानक से रूही के दिमाग में एक बात आती है और वो फ़ौरन मैक्स को कॉल करके प्रिंस के बारे में पूछती है....

मैक्स : हैरत है.... तुम प्रिंस के बारे में पूछ रही हो.... तुम उस से प्यार नहीं करती.... तुमने उस से तलाक़ ले लिया है फिर उसकी इतनी फ़िक्र क्यों कर रही हो....? वो जिए या मरे तुम्हे इस से क्या....?

मैक्स के मुँह से प्रिंस के मरने की बात सुन के रूही बेहद गुस्से में आ जाती है... और ज़ोर से चीखती है.....

रूही : Maxxxxxxxxxxx.... तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे प्रिंस के बारे में ऐसी बात कहने की.... खबरदार जो तू ने दोबारा मेरी जान के बारे में ऐसी वैसी बात कही तो....

मैक्स : हहहहहहहह.... प्रिंस और तेरी जान.... अच्छा मज़ाक कर लेती हो तुम....

रूही : ये मज़ाक नहीं बल्कि वो सच है जिसे तू तो क्या दुनिया की कोई ताक़त नहीं बदल सकती.... मौत भी उसे मुझसे जुड़ा नहीं कर सकती... वो मेरी जान था है और हमेशा rahega....Suna तू ने अब बता मेरी जान इस वक़्त है कहाँ....? मुझे उसकी बेहद फर्क हो रही है.... मैं जल्द से अपनी जान के पास पहुंचना चाहती हूँ....

मैक्स : प्रिंस कहाँ है ये मुझे भी नहीं पता....

रूही : तो जल्दी से पता कर.... 5 मिनट के अंडर मुझे उसका पता चाहिए.... बस 5 मिनट.... अगर इन 5 मिनट में तू ने मुझे प्रिंस का पता नहीं बताया तो मैं तेरे साथ साथ इस पूरी दुनिया को आग लगा दूंगी.... मेरा प्रिंस नहीं तो कोई नहीं.... समझा....

रूही की बात सुन के मैक्स को प्रिंस की याद आ जाती है..... प्रिंस भी जब गुस्से में आता है तो ठीक इसी तरह गुस्से में एक शेर की तरह दहाड़ता है.... प्रिंस के फ़ोन को ट्रैक करने से मैक्स को पता चल जाता है की प्रिंस इस वक़्त है कहाँ.... वो जल्दी से प्रिंस का एड्रेस रूही को मश्ग कर देता है... और रूही अपनी जान के पास पहुँच जाती है....

प्रिंस को यूँ शराब पीते देख और उसकी आँखों से बहते आंसुओं को देख रूही का दिल तड़प जाता है वो परेशान हो जाती है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की ये अचानक से प्रिंस को क्या हो गया.....? वो क्यों इस तरह रो रहा है और साथ hi इतनी शराब क्यों पी रहा है....? वो प्रिंस के करीब जा के उस से पूछती है....

रूही : प्रिंस.... क्या हुआ तुम्हे...? और तुम ये क्या कर रहे हो....?

रूही की बात सुन के प्रिंस उसकी तरफ देखता है.... अभी प्रिंस इतने नशे में है की वो रूही के देख के भी उसे पहचान नहीं पा रहा है....

प्रिंस : तुम कौन हो....? चली जाओ यहाँ से... मुझे मेरे हाल पे चोर दो....

रूही : कैसे चली जाऊं....? कहाँ चली जाऊं अपनी जान को इस हाल में चोर के....?

प्रिंस : क्या कहा तुमने....? देखो तुम जो भी हो इस वक़्त मैं किसी से बात करने के मूड में नहीं हूँ.... जिसका साथ मैं चाहता हूँ वो तो साथ नहीं है.... जाने कौन हो तुम और कहाँ से चली आयी हो... प्लीज जाओ यहाँ से और मुझे मेरे हाल पे चोर दो....

रूही : मैं रूही हूँ प्रिंस.... तुम्हारी रूही... क्या अपनी रूही को भी नहीं पहचानते.....

रूही की बात सुन के प्रिंस उसकी तरफ देख के उसे पहचान ने की कोशिश करता है... मगर उसे रूही का चेहरा साफ़ नज़र नहीं आ रहा....

प्रिंस : तुम मेरी रूही नहीं हो सकती.... मेरी रूही तो बहुत प्यारी है मसऊओऊम है हसीं है kho......obsurat है.... एक P....P....Pari की तरह.... उसे मैं दिल ो जान से चाहता हूँ..... हाँ चाहाहता हूँ.... मगर....

रूही : मगर क्या.....?

प्रिंस : मगर वो मुझे नहीं चाहती.... वो किसी और से प्यार करती है.... उस कमीबीएनए S....ssss... सलमान से प्यार है उसे....

प्रिंस की बात सुन के रूही का दिल करता है की वो उसे बता दे की वो उस से कितना प्यार करती है... मगर वो कह नहीं पाती.... सलमान का नाम सुनते hi उसे वो सब याद आ जाता है जो प्रिंस के साथ हुआ है.... माना की वो रूही न नहीं किया मगर फिर भी कहीं न कहीं वो भी इस सब में शामिल थी.... ये बात याद आते hi उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... इस वक़्त भी प्रिंस जिस हाल में है वो भी उसी की वजह से है.... ये बात रूही के दिल को बेहद तड़पाने लगती है....

रूही : हो सकता है वो भी तुम्हे उतना hi चाहती हो जितना की तुम उसे चाहते हो....

प्रिंस : क्या सच में....?

रूही : हाँ....

रूही की बात सुन के पहले तो प्रिंस बेहद खुश हो जाता है मगर फिर कुछ सोच के उसके चेहरे की वो ख़ुशी फ़ौरन उदासी में तब्दील हो जाती है....

प्रिंस : नहीं यार ऐसा नहीं है.... ऐसा होता तो मैं यहाँ बैठा शराब नहीं पी रहा होता बल्कि अपनी जान के पास होता न की एक अनजान लड़की से बात कर रहा होता.... हे तुम जो भी हो जाओ यहाँ से.... मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी....

रूही : मैं चली जाऊं.... कहाँ चली जाऊं....? तुम मेरी जान हो.... और अपनी जान को चोर के मैं कहाँ जान सकती हूँ.... मैं कहीं नहीं जाउंगी... यहीं रहूंगी अपनी जान के पास....

प्रिंस : हे.... ये क्या जान जान लगा रखा है.... मैं किसी का जान वान नहीं हूँ.... जान न पहचान यार तुम तो पीछे hi पद गयी.... चुप चाप चली जाओ यहाँ से....

रूही : मैं यहाँ से तभी जाउंगी जब तुम मुझे ी लव यू कहोगे....

प्रिंस : यार कमाल है... पी मैं रहा हूँ और नशा तुम्हे हो रहा है.... तुम हो कौन और मैं तुम्हे क्यों ी लव यू कहूं....?

रूही : मुझे न सही मगर अपनी रूही को तो कहोगे न....

प्रिंस : आआआआआ.... कहना तो मैं चाहता हूँ मगर वो सुन न hi नहीं चाहती....

रूही : हो सकता है वो तुम्हारे मुँह से ी लव यू सुन ने को तड़प रही हो....

प्रिंस : तुम्हे कैसे पता....? तुम तो उसे जानती भी नहीं....

रूही : भले मैं उसे नहीं जानती मगर तुम्हे देख के इस बात का यकीन है की जब तुम उसे ी लव कहोगे तो वो इंकार नहीं करेगी....

प्रिंस : एक बार पहले मैंने कोशिश की थी उसे सरप्राइज देने की मगर उसने मुझे hi झटका दे दिया.... जानती हो मैं उसे अपने दिल की बात बताने वाला था मगर उसने उस कमीने सलमान से प्यार होने वाली बात बता के मेरे दिल को hi चीयर के रख दिया....

रूही : क्या तुम्हे वाकई में लगता है की वो सलमान को चाहती है....

प्रिंस : लगता तो नहीं है... मगर हो भी सकता है.....

रूही : होने को तो ये भी हो सकता है की वो बात उसने किसी मजबूरी में कही हो.... और अब जब तुम उस से अपने प्यार का इज़हार करे तो हाँ कह दे....

प्रिंस : अगर ऐसा है तो फिर वो क्यों नहीं ये कह देती की वो मुझे चाहती है....?

रूही : हो सकता है की जो भी कुछ हुआ उसके बाद से वो छह के भी तुमसे अपने दिल की बात नहीं कर पा रही है.... मेरी मानो तो तुम उसे ी लव यू कह दो.... फिर देखना वो भी फ़ौरन हाँ कह देगी....

प्रिंस : हाँ ये ठीक रहेगा.... कल hi मैं उस से अपने प्यार का इज़हार करूँगा.... मगर ये बात किसी से कहना नहीं.... वो क्या है न की मैं उसे सरप्राइज देना चाहता हूँ....

प्रिंस की बात सुन के रूही ख़ुशी से उछाल पड़ती है....

रूही : वाओ.... तब तो मज़ा आ जाएगा....

प्रिंस : हे ी लव यू मैं अपनी जान से कहने वाला हूँ.... तुम्हे नहीं.... तुम क्यों इस तरह उछाल रही हो....

रूही : ख़ुशी से.... तुम्हारी ख़ुशी में मुझे भी ख़ुशी हो रही है... आफ्टर आल हम दोस्त हैं....

प्रिंस : अभी तो हम ठीक से मिले भी नहीं हैं और तुम दोस्ती की बात कर रही हो.... कहीं ऐसा न हो की कुछ देर बाद तुम मुझे अपनी जान कहने लगो.... यार तुम लड़कियों का न कोई भरोसा नहीं... जहाँ कोई हैंडसम स्मार्ट डैशिंग लड़का देखा नहीं की चली लाइन मारने.... मगर यहाँ तुम्हारी दाल नहीं गलने वाली.... मैं तुम्हे पहले hi बता देता हूँ.... रूही के साथ साथ मेरी एक और जान है और वो है अवनि.... स्वीट सी प्यारी सी.... बेहद हसीं और खूबसूरत सी.... उस जैसा कोई नहीं इस पूरी दुनिया में.... वो जान है मेरी.... मैं उसे बेइंतेहा चाहता हूँ....

प्रिंस के मुँह से अवनि का नाम सुन के रूही.....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 62

प्रिंस : हे ी लव यू मैं अपनी जान से कहने वाला हूँ.... तुम्हे नहीं.... तुम क्यों इस तरह उछाल रही हो....

रूही : ख़ुशी से.... तुम्हारी ख़ुशी में मुझे भी ख़ुशी हो रही है... आफ्टर आल हम दोस्त हैं....

प्रिंस : अभी तो हम ठीक से मिले भी नहीं हैं और तुम दोस्ती की बात कर रही हो.... कहीं ऐसा न हो की कुछ देर बाद तुम मुझे अपनी जान कहने लगो.... यार तुम लड़कियों का न कोई भरोसा नहीं... जहाँ कोई हैंडसम स्मार्ट डैशिंग लड़का देखा नहीं की चली लाइन मारने.... मगर यहाँ तुम्हारी दाल नहीं गलने वाली.... मैं तुम्हे पहले hi बता देता हूँ.... रूही के साथ साथ मेरी एक और जान है और वो है अवनि.... स्वीट सी प्यारी सी.... बेहद हसीं और खूबसूरत सी.... उस जैसा कोई नहीं इस पूरी दुनिया में.... वो जान है मेरी.... मैं उसे बेइंतेहा चाहता हूँ....

प्रिंस के मुँह से अवनि का नाम सुन के रूही.....??????

अब आगे....

प्रिंस के मुँह से अवनि का नाम सुन के रूही को गुस्से के साथ साथ जलन भी होने लगती है..... वो प्रिंस से कुछ कह नहीं पाती अपने गुस्से और जलन को काम करने के लिए सामने पड़ी शराब उठा के पीने लगती है....

प्रिंस : अबे ये क्या कर रही हो....?

रूही : अब दोस्त हूँ तो दोस्ती के नाते तुम्हारा साथ दे रही हूँ.....

प्रिंस : यार तुम तो पीछे hi पद गयी.... वो रूही और अवनि क्या काम थी जो तुम भी आ गयी.....

रूही : क्या मतलब....? रूही और अवनि क्या ज़बरदस्ती तुम्हारे पीछे पड़ी हुई हैं....? कहो तो उन दोनों का पत्ता साफ़ कर देती हूँ.....

प्रिंस : अबे पागल है क्या....? कुछ भी....

रूही : अभी तो तुम ने कहा की वो दोनों तुम्हारे पीछे पड़ी हुई हैं....

प्रिंस : जी नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा.... वो दोनों तो मेरी जान हैं.... मैंने तो ये कहा की दो जान होने की वजह से पहले hi मेरी बंद बजी पड़ी है.... तीसरी के आते hi पूरा ऑर्केस्ट्रा बजने लगेगा....

रूही : एक तरफ तुम कह रहे हो वो दोनों तुम्हारी जान हैं और दूसरी तरफ ये कह रहे हो की उन दोनों की वजह से तुम्हारी बंद बजी पड़ी है.... बात कुछ समझ नहीं आयी....

प्रिंस : अरे यार तुम न दोनों को जानती नहीं हो.... दोनों जितनी प्यारी और मासूम है उतनी hi खतरनाक भी..... दोनों का गुस्सा नाक पे सवार रहता है.... रूही को तो अवनि के बारे में पता है मगर अवनि नहीं जानती की उसकी तरह रूही भी मेरी जान है.... और सब से बड़ी बात ये की रूही के साथ मेरा निकाह हो चूका है.... डरता हूँ जब अवनि को इस निकाह के बारे में पता चलेगा तब क्या होगा....?

प्रिंस की बात सुन के रूही को बेहद तकलीफ सी होती है.... उसे ऐसा लगता है की प्रिंस उस से ज़्यादा अवनि को चाहता है.... उसके लिए अवनि ज़्यादा मायने रखती है.... क्या वाकई में ये सच है....? ये जान ने के लिए रूही प्रिंस से कहती है....

रूही : तुम्हारी बात से तो ऐसा लगता है की तुम्हे रूही से ज़्यादा अवनि की फ़िक्र है.... अगर ऐसा है तो तुम उसे तलाक़ दे के चोर क्यों नहीं देते....

रूही के मुँह से तलाक़ की बात सुन के प्रिंस को बेहद गुस्सा आ जाता है.... वो सामने पड़ी बोतल तोड़ के उसे रूही के गले पे लगा के बेहद गुस्से में कहता है....

प्रिंस : खबरदार जो तुमने दोबारा ये बात अपनी जुबां से निकली तो मैं तुम्हारी जान ले लूंगा....

प्रिंस की इस हरकत पे रूही बेहद दर जाती है.... वो प्रिंस के गुस्से को शांत करने के लिए उसे सॉरी कहती है और अपने कान पकड़ के माफ़ी मांगती है....

रूही : सॉरी यार.... मेरे कहने का वो मतलब नहीं था.... तुम्हारी बात सुन के जो मुझे महसूस हुआ वो मैंने कह दिया.... तुम्हारा दिल दुखने का मेरा कोई इरादा नहीं था.... मुझे लगा की रूही तुम्हारे लिए उतना मायने नहीं रखती जितना की अवनि रखती है....

प्रिंस : तुम जानती क्या हो मेरे रूही और अवनि के बारे में.....? जो ये सब कह रही हो..... दोनों जान है मेरी.... मैं अवनि को जितना चाहता हूँ उतना hi रूही को भी.... अवनि मेरा दिल है तो रूही मेरी रूह है.... और रूह कभी जिस्म से जुड़ा नहीं हो सकती.... दोनों में से किसी को एक खरोच भी आ जाती है तो मेरा दिल तड़प जाता है.... मैं अपनी जान तो दे सकता हूँ मगर दोनों को खुद से जुड़ा नहीं होने दे सकता.... समझी....

प्रिंस की बात सुन के रूही ख़ुशी के उछाल पड़ती है.... वो सामने पड़े गिलास को उठा के एक सांस में पूरी शराब पी जाती है फिर आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों को कास के चूम लेती है....

रूही की इस हरकत पे प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.... वो फ़ौरन उसे खुद से दूर कर के कहता है....

प्रिंस : अबे पागल है क्या....? ऐसा भी कोई करता है क्या....? कोई लड़की किसी अनजान लड़के को किश करती है क्या....?

रूही : यार वो क्या है की तुमने जो कहा उसे सुन के दिल ख़ुशी से झूम उठा और और ख़ुशी के मारे वो हो गया....

प्रिंस : बात मेरी और मेरी दोने जान की है इसमें तुम्हे इतनी ख़ुशी क्यों हो रही है....? जो तुम उलटी सीढ़ी हरकतें कर रही हो....?

रूही : अब से तुम्हारी दो नहीं बल्कि तीन जान हैं....

प्रिंस के साथ साथ रूही को भी नहीं पता की ख़ुशी और शराब के नशे में वो वो कह गयी जो सच है.... प्रिंस की 2 (रूही और अवनि) नहीं बल्कि तीन (पारी भी) जान है.... जिस बात से ये अभी अनजान है....

प्रिंस : मेरी तो दो hi जान थी ये तीसरी कहाँ से आ गयी.....?

रूही : मैं हूँ न....

प्रिंस : यार तुम तो पीछे hi पद गयी....

रूही : तुम एक बार हाँ कह के तो देखो फिर मैं क्या करती हूँ....

प्रिंस : जी नहीं कोई ज़रुरत नहीं मेरी दोनों जान hi काफी है....

इस तरह दोनों बातें भी किये जा रहे हैं और साथ hi शराब भी पी रहे हैं.... रूही के आने से और उसके साथ बात करने से प्रिंस का दर्द कुछ काम हो जाता है.... मगर दिल में कसक और तड़प अभी भी बाकी है.....

तभी वहां मैक्स सैम विजय और सैर आ जाते हैं....

विजय : ये देखो हम सब का सुख चैन हराम कर के दोनों कैसे मज़े से शराब पी रहे हैं....

विजय की बात सुन के प्रिंस मुद के उसकी तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : अबे तो तू भी आ जा तुझे किसने रोका है.....?

प्रिंस की बात सुन के विजय खुश हो के चेयर पे बैठने hi वाला होता है की तभी सैर उसे रोक के कहती है......

सैर : अबे तू कहाँ बैठ रहा है.... लड़की और शराब देखि नहीं की लगी तेरी लार टपकने.... हम यहाँ इन दोनों को साथ ले जाने आये हैं.... न की इनके साथ बैठ के शराब पीने... चल उठ....

विजय : अबे यार पूरी बोतल न सही काम से काम एक दो पेग से गाला तो गीला कर लेने दे....

सैर : एक पेग क्या एक बूँद भी नहीं... इन दोनों का हाल देखा है.... दोनों फुल टल्ली हैं.... अगर हम पीने लगे तो इन को घर कौन ले जाएगा....

सैर की बात सुन के जहाँ विजय का चेहरा उतर जाता है.... वहीँ प्रिंस की बात पे वो बेहद खुश हो जाता है....

प्रिंस : यार तुम दोनों क्यों झगड़ रहे हो..... आओ बैठो साथ में पीते हैं....

सैर : जी नहीं.... न hi हम पिएंगे और न hi तुम्हे पीने देंगे.... चलो उठो....

प्रिंस : क्या उठो....? अभी यहाँ तुम्हारी जगह मेरी दोस्त स... स.... सैर होती न तो मुझे नहीं रोकती उलटे मेरा साथ देती....

सैर : मैं तुम्हारी दोस्त सैर hi हूँ....

प्रिंस : अरे सैर तुम.... आओ बैठो न.... तुम्हारा फव ड्रिंक आर्डर करता हूँ....

सैर : जी नहीं.... कोई ज़रुरत नहीं है.... न मुझे कुछ पीना है और न hi तुम दोनों कुछ पियोगे.... अब बस करो और चलो...

प्रिंस : अरे रुक न यार.... अभी तो शुरुवात hi की है.... देख सिर्फ दो hi बोतल पी है....

सैर : झूट मत कहो.... तुम्हारी हालत देख के साफ़ पता चल रहा है की तुमने काम से काम 5 - 6 बोतल पी राखी है....

प्रिंस : यार मैंने सच में सिर्फ दो hi बोतल पी है.... वो भी पूरी कहाँ पी है आधी तो इस लड़की (रूही की तरफ इशारा कर के) ने पी है.... ये कह के प्रिंस सामने पड़ा गिलास उठा के पीने लगता है....

प्रिंस की बात सुन के और उस को फिर से शराब पीते देख सैर उसे रोक के कुछ कहने hi वाली होती है की तभी.... मैक्स उसे रोक देता है....

मैक्स : हैरत है....

सैर : हैरत....!!!!

मैक्स : हाँ हैरत... वो भी एक नहीं बल्कि कई बातों की हैरत....

सैर : तू कहना क्या चाहता है ज़रा खुल के बताएगा.....

मैक्स : सब से पहली बात ये की हम सब को ये अच्छे से पता है की प्रिंस कभी झूट नहीं बोलता.... तो अगर वो कह रहा है की उसने सिर्फ एक बोतल शराब पी है तो वो सच है....

सैर : हाँ मगर ये भी सच है की जिस प्रिंस को 6 बोतल पीने के बाद नशा चढ़ना शुरू होता है वो एक बोतल में इतना टल्ली हो जाए की वो किसी को पहचान hi न पाए.... इस बात पे यकीन करना मुश्किल हो रहा है....

मैक्स : हाँ ये बात तो मेरी भी समझ में नहीं आ रही है की जिस रूही को प्रिंस दिल ो जान से चाहता है वो उसे नहीं पहचान पा रहा ये बात समझ नहीं आ रही.... इस सब के पीछे कोई तो वजह ज़रूर है....

अभी दोनों बात कर hi रहे होते हैं की तभी विजय मौका देख सामने पड़ी बोतल उठा के शराब पीने लगता है.... अभी उसने एक घुट पिया hi था की मैक्स उसके हाथ से शराब की बोतल चीन लेता है....

मैक्स : अबे साले ये क्या कर रहा है.....?

विजय : शराब पी रहा हूँ.... अबे थोड़ी तो पीने दे....

मैक्स को कुछ शक होता है वो बोतल को सूंघता है....

विजय : अबे शराब को पिया जाता है सूंघा नहीं जाता....

मैक्स : ये शराब नहीं कुछ और hi है....

मैक्स की बात सुन के वहां मौजूद सभी चौंक जाते हैं....

विजय : क्या पागलों जैसी बात कर रहा है... शराब की बोतल में शराब नहीं तो और क्या होगा.....?

मैक्स : ये जो भी कुछ है मगर शराब नहीं.... ज़रूर इसमें किसी ने कुछ मिलाया है.... वर्ण तुम hi सोचो की एक बोतल में प्रिंस का टल्ली होना क्या मुमकिन है....? नहीं... कुछ तो बात ज़रूर है पता लगाना पड़ेगा.....

सैर : वो सब बाद में पहले इन दोनों को घर ले चलो....

ये कह के सैर प्रिंस को साथ ले के आगे बढ़ती है.... प्रिंस को यूँ दूर जाते देख रूही फ़ौरन आगे बढ़ के सैर को प्रिंस से दूर हटा के फ़ौरन प्रिंस के जिस्म से लिपट जाती है....

रूही : हे कौन है तू और मेरी जान को भगा के कहाँ ले जा रही है....?

सैर : है काश मैं ऐसा कर सकती....

रूही : क्या कहा तू ने....?

सैर : W....wo.... मेरा मतलब है.... मैं तुम्हारी जान को कहीं भगा के नहीं ले जा रही बल्कि हम सब घर जा रहे हैं....

सैर की बात सुन के रूही और कास के प्रिंस के जिस्म से लिपट के कहती है.....

रूही : हाँ चलो मगर प्रिंस मेरे साथ hi जाएगा.....

फिर वो लोग वहां से घर आ जाते हैं.... यहाँ भी रूही प्रिंस को चोर्ने को तैयार hi नहीं.... न प्रिंस उसे खुद से दूर होने दे रहा है.... नशे में दोनों से ठीक से चला भी नहीं जा रहा....

रहना : ये इन दोनों को क्या हुआ है... ये ऐसे क्यों कर रहे हैं जैसे नशे में हो....?

सैर दोनों को उनके रूम तक चोर आती है और रहना को पूरी बात बताती है.... जिसे सुन के रहना को ख़ुशी भी होती है और दुःख भी..... ख़ुशी इस बात को जान के की प्रिंस रूही को दिल ो जान से चाहता है.... और दुःख इस बात का की जो भी गलत हुआ उसकी कहीं न कहीं रूही भी ज़िम्मेदार है....

रूम में प्रिंस और रूही एक दूसरे के जिस्म से लिपट के सो जाते हैं....

अगली सुबह जब दोनों की आँख खुलेगी और वो खुद को एक दूसरे की बाहों में लिपटे पाएंगे तब क्या होगा....? ये देखना है....

इधर गुलिस्तां में.....

पारी की दर्द भरी पुकार और उसकी जान देने की बात सुन के वहां मौजूद सभी की आँखें नाम हो जाती हैं..... यहाँ तक की बंगारू बाबा की भी आँखों से आंसू चालक जाते हैं.....

जब पारी प्रिंस को आवाज़ देते देते थक जाती है तब कुछ सोच के आगे बढ़ती है और पास पड़ा खंजर उठा के अपने सीने में मरती है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 63

रूम में प्रिंस और रूही एक दूसरे के जिस्म से लिपट के सो जाते हैं....

अगली सुबह जब दोनों की आँख खुलेगी और वो खुद को एक दूसरे की बाहों में लिपटे पाएंगे तब क्या होगा....? ये देखना है....

इधर गुलिस्तां में.....

पारी की दर्द भरी पुकार और उसकी जान देने की बात सुन के वहां मौजूद सभी की आँखें नाम हो जाती हैं..... यहाँ तक की बंगारू बाबा की भी आँखों से आंसू चालक जाते हैं.....

जब पारी प्रिंस को आवाज़ देते देते थक जाती है तब कुछ सोच के आगे बढ़ती है और पास पड़ा खंजर उठा अपने सीने में मरती है....?????

अब आगे....

पारी की इस हरकत पे सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... बेगम साहिबा के मुँह से दर्द भरी चीख निकल जाती है....

बेगम साहिबा : पारी Nahiiiiiiiiiiiiiiii....

इस से पहले की खंजर पारी के सीने में घुसता बाबा वक़्त रहते आगे बढ़ के पारी का हाथ पकड़ लेते हैं है और उसके हाथ से खंजर चीन के दूर फ़ेंक देते हैं....

बाबा : पारी तू पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या करने जा रही थी.....?

पारी : वो hi जो मुझे करना चाहिए.... प्रिंस मेरी जान है.... मेरे रहते मेरी जान को कुछ नहीं हो सकता.... मैं उसे कुछ होने नहीं दूंगी.... अगर कोई मेरी जान को मारने की कोशिश करेगा तो मैं उसे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी.... उसकी जान ले लुंगी.... चाहे फिर वो कोई भी क्यों न हो.... किस्मत या फिर मैं खुद.... आप ने hi कहा था न की मैं पारी अपने प्रिंस की जान लुंगी.... ये hi नियति है.... ये hi हमारी किस्मत में लिखा है.... जिसे कोई नहीं बदल सकता.... मगर मैं किस्मत के लिखे को बदल दूंगी.... मैं अपनी जान पे कोई आंच नहीं आने दूंगी.... मेरी जान की जान तो तब जायेगी न जब मैं ज़िंदा रहूंगी.... मेरे मरने के बाद भी मेरा प्रिंस ज़िंदा रहेगा.... मेरा प्यार ज़िंदा रहेगा.... ी लव यू Princeeeeeeeeeee....

ये कह के पारी मुस्कुराने लगती है साथ hi उसकी आँखों से बेतहाशा आंसू बहने लगते हैं.... उसका दिल अपनी जान से जुड़ा होने की बात को सोच के तड़प रहा है वहीँ उसके चेहरे पे अपनी जान के ज़िंदा रहने की ख़ुशी झलक रही है....

बाबा : तुझे क्या लगता है तू किस्मत को बदल देगी.... तेरे मर जाने से प्रिंस बच जाएगा.... नहीं ऐसा नहीं होगा... तेरे मरते hi वो भी मर जाएगा.... तेरे मरते hi उसका दिल भी धड़कना बंद कर देगा.... वो दुनिया में दोबारा आया hi इस लिए है की तेरा प्यार पा सके.... याद रख जब तक तू ज़िंदा रहेगी वो ज़िंदा रहेगा तेरे मरते hi वो भी मर जाएगा.... क्या अब भी तू अपनी जान लेगी....? बता मुझे.... जवाब दे.... क्या तू यही चाहती है की प्रिंस मर जाए....?

पारी : नहीं बाबा मैं भला ऐसा क्यों चाहूंगी.... मैं तो अपनी जान के साथ प्यार भरी दुनिया में जीना चाहती हूँ.... मगर किस्मत को ये मंज़ूर नहीं.... अब आप hi बताइये की मैं क्या करूँ....?

ये कह के पारी रोने लगती है.... उसके दिल का दर्द आंसुओं के ज़रिये बहार आने लगता है....

बाबा : पारी संभाल खुद को.... तुझे ऐसे टूट के बिखरते हुए मैं नहीं देख सकता..... तेरी ये तड़प यकीनन प्रिंस को भी तड़पा रही होगी.... वो भी तड़प रहा होगा....

पारी : बाबा अब तड़पने के सिवाए हमारे पास बचा hi क्या है.... न hi हम अपना प्यार पा सकते हैं और न hi अपने प्यार के बिना ज़िंदा रह सकते हैं.... हम तो बस इसी उम्मीद में जी रहे थे की अपनी जान का प्यार पा सके.... मगर अब तो वो भी मुमकिन नहीं.... अपनी जान के बगैर ये ज़िन्दगी तो वैसे hi किसी श्राप से काम नहीं.... अपनी जान के बगैर टिल टिल कर के मरने से तो अच्छा है की एक बार में hi मैं अपनी जान दे दूँ....

पारी की बात सुन के और उसका दर्द देख के बाबा उसे सच बताने पे मजबूर हो जाते हैं.... वो सच जो उनके अलावा कोई नहीं जानता.... वो राज़ जिसे उन्होंने बरसो से अपने सीने दफ़न कर रखा है....

बाबा : बस कर पारी.... बस कर.... तेरा ये दर्द.... तेरी ये तड़प.... अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होती.... न चाहते हुए भी अब मुझे सच बताना hi होगा....

क्या है वो सच.....?????

इधर शिमला में प्रिंस और रूही एक दूसरे की बाहों में लिपटे दुनिया से बेखबर मज़े से सो रहे हैं..... तभी अचानक से दरवाज़े पे हुई दस्तक से रूही की नींद टूट जाती है..... खुद को किसी के जिस्म के साथ लिपटे देख वो बुरी तरह स्व चौंक जाती है.... उसे बेहद गुस्सा आने लगता है..... वो गुस्से में कुछ करने hi वाली होती है की तभी उसकी नज़र उसके चेहरे पे पड़ती है..... प्रिंस को देखते hi रूही का गुस्सा फ़ौरन हवा हो जाता है और उसकी जगह प्यार ले लेता है..... रूही प्यार भरी नज़रों से प्रिंस को देखती रहती है.... की तभी दोबारा से दरवाज़े पे दस्तक होती है जिसे सुन के रूही उठने की कोशिश करती है मगर उठ नहीं पाती.... वो जैसे hi उठने के लिए प्रिंस से अलग होने लगती है.... प्रिंस फ़ौरन उसे अपनी बाहों में कास लेता है....

प्रिंस की इस हरकत पे रूही चौंक के उसकी तरफ देखती है.... उसे ऐसा लगता है जैसे की प्रिंस उठ चूका है.... मगर नहीं प्रिंस तो अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ है.... ये देख रूही के चेहरे पे मुस्कराहट फैल जाती है....

रूही : चलो होश में न सही नींद में hi सही मेरी जान ने मुझे अपने सीने से तो लगाया.... है कितना सुकून मिल रहा है अपनी जान से जिस्म से लिपट के....

अभी रूही ये सोच hi रही होती है की तभी दरवाज़े पे इस तेज़ दस्तक होती है.... जिसे सुन के रूही की तंत्र टूट टी है... उसके चेहरे की मुस्कराहट गायब हो जाती है.... वो चीड़ के उठने लगती है मगर उठ नहीं पाती.... प्रिंस उसे अपनी बाहों से अलग होने hi नहीं दे रहा.... वो जैसे hi उठने के लिए उस से अलग होने लगती है.... प्रिंस और कास के उसे अपनी बाहों में समेत लेता है....

फिर अचानक से वो होता है जिसे महसूस करते hi रूही शर्म से पानी पानी हो जाती है साथ hi उसका दिल ख़ुशी से नाचने लगता है....

प्रिंस नींद में रूही को अपनी बाहों के कास लेता है और अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब ले जाता है और उसके नाज़ुक मुलायम शहद से मीठे होंठों को अपने मुँह में ले के उनका रास चूसने लगता है.... रूही भी किश में उसका साथ देने लगती है.... ऐसा एहसास उसे पहली बार महसूस हो रहा है..... उसे जितनी ख़ुशी हो रही है उतना hi मज़ा भी आ रहा है..... मगर ज़्यादा देर तक ये ख़ुशी ये एहसास उसे साथ नहीं रहता.....

टेबल पे पड़ा पानी से भरा जग अचानक से नीचे गिरके टूट जाता है जिसकी तेज़ आवाज़ hi प्रिंस की नींद टूट जाती है.... उसे अपने होंठों पे किसी के होंठों का एहसास होता है..... उसे समझते देर नहीं लगती की कोई लड़की उसके होंठों को मज़े से चूस रही है.... वो आँख खोल के देखता है.... रूही को देखते hi बुरी तरह से चौंक जाता है और उस से दूर हो जाता है....

प्रिंस : ये क्या कर रही थी तुम.....?

रूही : Wo....wo.... वो....

प्रिंस : ये वो वो क्या कर रही हो.... बोलती क्यों नहीं ये क्या कर रही थी तुम....?

रूही : मैं नहीं बल्कि तुम कर रहे थे....

प्रिंस अभी कुछ कहने hi वाला होता है की तभी कोई दरवाज़े को ज़ोर ज़ोर से पीटने लगता है.....

प्रिंस फ़ौरन उठ के दरवाज़ा खोलता है....

प्रिंस : मैक्स.....

रूही गुस्से में चीड़ के कहती है : इसे भी अभी आना था.... कुछ देर बाद नहीं आ सकता था क्या....?

रूही की बात सुन के प्रिंस मुद के उसकी तरफ देख के कहते है....

प्रिंस : क्या कहा.....?

रूही : मैंने कहा.... क्या कहा.....? हाँ वो क्या बात है ये इतनी सुबह सुबह यहाँ....?

प्रिंस : हाँ मैक्स..... इतनी सुबह सुबह तू यहाँ क्या कर रहा है....? और तू इतनी ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा क्यों पीट रहा था....? कोई प्रॉब्लम हो गयी है क्या....?

मैक्स : हाँ वो वो बात hi कुछ ऐसी है....

प्रिंस : क्या बात है बता मुझे....? ऐसी क्या बात हो गयी जो तू इतना परेशान हो गया.....?

मैक्स : वो कोई इम्पोर्टेन्ट बात है..... (रूही की तरफ देख के प्रिंस से कहता है) प्रिंस क्या मैं तुझसे अकेले में बात कर सकता हूँ....?

मैक्स की बात सुन के रूही वाशरूम की तरफ चल देती है....

रूही : मैं फ्रेश हो के आती हूँ....

रूही वाशरूम की तरफ जा hi रही होती है की तभी कुछ देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... वो रुक के कुछ सोचने लगती है....

रूही को यूँ देख के प्रिंस.....

प्रिंस : अब तुम्हे क्या हुआ.....? तुम तो वाशरूम जा रही थी न....?

रूही : हाँ वो.... क्या है की.... बड़ी हैरत है.... अभी कुछ देर पहले ये पानी से भरा का जग नीचे गिर के टूट गया था न..... और अब देखो ये सही सलामत वापिस टेबल पे पड़ा है.... यहाँ तक की इस में पानी भी है.... समझ नहीं आ रहा की क्या और कैसे हुआ....?

रूही की बात सुन के और उस जग को देख प्रिंस को भी बड़ी हैरानी सी होती है....

रूही अभी कुछ कहने hi वाली होती है की तभी मैक्स मुद के बहार की तरफ जाने लगता है.... मैक्स को यूँ बिना कुछ कहे वापिस जाते देख प्रिंस उसे रोक के पूछता है....

प्रिंस : अबे अब तुझे क्या हुआ....? तू कुछ इम्पोर्टेन्ट बात कहने आया था न.... और बिना बात बताये hi जा रहा है....

मैक्स : यहाँ नहीं.... तू बहार चल मैं तुझे सब बताता हूँ.....

प्रिंस मैक्स के साथ बहार आ जाता है....

प्रिंस : हाँ अब बोल ऐसी क्या बात है जो तुझे इतना परेशान कर रही है....? जिसे बताने के लिए तू सुबह सुबह मेरे रूम का दरवाज़ा पीट रहा था.... कहीं तू ने फिर से कोई भूत तो नहीं देख लिया....

मैक्स : हाँ देखा एक बार फिर से देखा.... उस से पहले वो सुन जो होटल में हुआ....

मैक्स प्रिंस को रात हुई पूरी बात बताता है.... जिसे सुन के प्रिंस चौंक जाता है....

प्रिंस : क्या बात कर रहा है.....? शराब की बोतल में शराब नहीं थी तो और क्या था....?

मैक्स : उसमे जो भी कुछ था वो शराब तो बिलकुल नहीं थी....

प्रिंस : क्या बक रहा है....? शराब की बोतल में शराब hi थी कुछ और नहीं....

मैक्स : यार मेरी बात मान.... वो यकीनन शराब नहीं थी.... अगर तुझे यकीन न हो तो ले इस बोतल को सूंघ के देख ले.... तुझे मेरी बात पे यकीन आ जाएगा....

बोतल को सूंघते hi प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : तू ठीक कह रहा है ये वाकई में शराब नहीं है.... तो फिर ये है क्या...?

मैक्स : ये कोई अलग सी नशीली चीज़ है.... ऐसी चीज़ जो इस पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती....

प्रिंस : तो फिर क्या ये आसमान से आयी है.....?

मैक्स : नहीं.... मुझे शक है की ये वो hi लाये थे.... और रात जो भी कुछ हुआ उसमे भी उनका hi हाथ था....

प्रिंस : उनका किनका....? ये तू किसकी बात कर रहा है....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 64

बोतल को सूंघते hi प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : तू ठीक कह रहा है ये वाकई में शराब नहीं है.... तो फिर ये है क्या...?

मैक्स : ये कोई अलग सी नशीली चीज़ है.... ऐसी चीज़ जो इस पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती....

प्रिंस : तो फिर क्या ये आसमान से आयी है.....?

मैक्स : नहीं.... मुझे शक है की ये वो hi लाये थे.... और रात जो भी कुछ हुआ उसमे भी उनका hi हाथ था....

प्रिंस : उनका किनका....? ये तू किसकी बात कर रहा है....??????

अब आगे.....

मैक्स : और कौन हो सकते हैं....? ये वो hi थे.... Sh.....Sh.....Shaitaan.... जिन्होंने पहले भी तेरे साथ वो सब किया था.... और कल रात भी वो यहाँ वो hi मतलब तेरे साथ सेक्स करने आये थे....

प्रिंस : क्या बक रहा है.....?

मैक्स : मैं बक नहीं रहा बल्कि वो कह रहा हूँ जो सच है....

मैक्स : ये देख कल रात तेरे रूम के बहार की कक्तव रिकॉर्डिंग..... इस में साफ़ नज़र आ रहा है जो भी कुछ हुआ....

प्रिंस : मगर यार रात ऐसा तो कुछ हुआ नहीं....

मैक्स : हाँ क्यों की किसी ने वो होने नहीं दिया..... देख रात उन शैतानो ने क्या किया.....? ये देख दरवाज़े के बहार की तरफ ये नाखुनो के निशाँ.... इसे देख के साफ़ पता चलता है की उन शैतानो ने बेहद गुस्से में इन्हे खरोंचा है और ये देख कई जगह पे तो क्रैक के भी निशाँ हैं.... इन्हे देख के ऐसा लगता है की उन्होंने इस दरवाज़े को खोलने के लिए पूरी ताक़त लगायी हो.... साथ hi इसे तोड़ने की भी जी तोड़ कोशिश की है..... मगर फिर भी ये दरवाज़ा नहीं खुला.... और न hi वो अंडर जा पायी.... अंडर कोई तो था जो उसे दरवाज़ा खोल के अंडर आने से रोक रहा था..... वो कौन था ये मुझे नहीं पता.... मगर जो भी था वो तेरा बहुत ख़ास था.... जिसे खुद से ज़्यादा तेरी फ़िक्र है.... वो तेरे लिए किसी की जान ले भी सकता है और अपनी जान दे भी सकता है....

प्रिंस : तू ने जो कहा उस हिसाब से ये सिर्फ ज़रा hi कर सकती है....

मैक्स : नहीं ये काम ज़रा का नहीं हो सकता....

प्रिंस : क्यों नहीं.... ज़रा तो वर्ल्ड की टॉप हार्डकोर फिघ्टर्स में से एक है.... और वो मुझे दिल ो जान से चाहती भी है.....

मैक्स : हाँ मगर फिर भी वो ज़रा नहीं हो सकती क्यों की.... ज़रा कितनी भी ताक़तवर क्यों न हो..... उन जादुई शक्ति वाले शैतानो का मुक़ाबला करना ज़रा के बस की बात नहीं.... वो ज़रा नहीं बल्कि कोई और hi था जिसमे बेइन्तेहाँ ताक़त भी थी और जादुई शक्ति भी..... जिस के ज़रिये उस ने उन शैतानो को अंडर आने से रोका..... इसके लिए उसे अपना खून तक बहाना पड़ा....

मैक्स की बात सुन के प्रिंस चौंक जाता है....

प्रिंस : Kyaaaaaaaaaaaaaa.....?

मैक्स : हाँ वो देख दरवाज़े के अंडर की तरफ खून लगा हुआ है.....

प्रिंस आगे बढ़ के दरवाज़े पे लगे खून को छू के देखता है..... उसे छूटे hi प्रिंस को एक झटका सा लगता है.... उसे कुछ धुंधला धुंधला सा दिखाई देने लगता है..... साथ hi उसकी आँखों से आंसू भी बहने लगते हैं..... और होंठों पे मुस्कराहट सी फैल जाती है.... फिर प्रिंस जो कहता है उसे सुन के मैक्स को बड़ी हैरानी सी होती है.....

प्रिंस : तो आखिर पारी तुम आ hi गयी अपने प्रिंस के पास..... देखा मैंने ठीक कहा था न की तुम्हे मेरे लिए हमारे प्यार के लिए फिर से आना hi होगा.... और देखो तुम आ गयी अपने जानू के पास.... आज मैं बेहद खुश हूँ.... आज मेरी जान मेरी रूह मेरे दिल की धड़कन पारी जो मेरे पास लौट आयी.....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी मैक्स की आवाज़ सुन के और उसके हिलने से प्रिंस की तंत्र टूट टी है..... और वो होश में आता है.....

प्रिंस : क्या हुआ....?

मैक्स : मुझे नहीं बल्कि तुझे क्या हुआ.....? ये तू क्या कह रहा है.....? और ये पारी कौन है.....?

प्रिंस : ये पारी कौन है मैं नहीं जानता..... बस इतना जानता हूँ की जब भी उसका जिक्र आता है दिल उसे देखने के लिए उस से मिलने के लिए तड़प जाता है.... जाने कैसी है वो....? कहाँ है वो....? उस से मिलने की चाहत है.... उसे देखने को प्यार करने को दिल तड़प रहा है.... जाने कब मिलेगी वो....

मैक्स : मुझे लगता है.... शायद वो यहीं है....

प्रिंस : यहीं है.... मगर कहाँ....? अगर वो यहीं है तो सामने क्यों नहीं आती....? क्यों मुझे तड़पा रही है....? क्यों....?

"मैक्स ने ठीक कहा इस वक़्त पारी वहीँ मौजूद है.... प्रिंस के बेहद करीब.... वो प्रिंस को अपने सीने से लग्न चाहती है.... उसे ये बताना चाहती है की वो उस से बेइन्तेहाँ प्यार करती है.... उस के सीने से लिपट के प्यार करना चाहती है.... मगर वो मजबूर है.... वो चाहे तब भी ऐसा हो नहीं सकता.... इस वक़्त उसे बेहद गुस्सा आने लगता है.... एक अपनी किस्मत पे और दूसरा बंगारू बाबा पे.... जी हाँ ये सब बंगारू बाबा का किया धरा है.... चलिए बाबा के मुँह से hi सुनते हैं की आखिर असल बात क्या है....? क्यों प्रिंस के पास होने पे भी पारी उसे अपने सीने से लगा के अपने प्यार का इज़हार नहीं कर पा रही है....?"

पारी की ये तड़प बाबा से देखि नहीं जाती.... अब उनसे और बर्दाश्त नहीं होता.... न चाहते हुए भी वो सच बताने पे मजबूर हो जाते हैं....

बाबा : बात तब की है जब गुलिस्तां और तुम्हे बचने के लिए मेरे लाख मन करने पे भी प्रिंस ने अपनी जान की क़ुर्बानी दी.... प्रिंस की मौत ने मुझे तोड़ जे रख दिया..... जहाँ गुलिस्तां के सुरखित होने की ख़ुशी थी वहीँ प्रिंस की मौत का गम भी था.... जो मुझसे सहा नहीं जा रहा था.... प्रिंस की मौत का ज़िम्मेदार मैं गुलिस्तां को यहाँ के रहने वाले हर एक शख्स को और सब से बढ़ के प्रिंस की जान यानी तुम्हे मान रहा था.... दर्द और गुस्से से मेरा दिमाग पहात रहा था.... और गुस्से में मैं वो कर गया जो लोग हमेशा करते आये हैं.... गलत काम.... जिसका बाद में पछतावे के सिवाए और कुछ नहीं रहता.... मेरा भी कुछ ऐसा hi हाल था.... गुस्से में मैंने भी वो किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था....

पारी : ऐसा क्या किया आपने....?

बाबा : मैंने जो किया उसे जान के तुम्हे गुस्सा आएगा और मुझे शर्मिंदगी होगी....

पारी : मैं कुछ समझी नहीं....

बाबा : बात ऐसी है की मुझे ये अच्छे से पता था की तुमसे मिलने के लिए.... ख़ास कर के तुम्हारा प्यार पाने के लिए प्रिंस लौट के ज़रूर आएगा.... वो 4तह जनम ज़रूर लेगा....

पारी : 4तह जनम....!!!!

बाबा : हाँ ये प्रिंस का 4तह जनम है.... पिछले तीन जनम में वो तुम्हारा प्यार पा तो सका मगर तुम्हारे साथ प्यार भरी ज़िन्दगी नहीं गुज़ार सका.... हर जनम में किसी न किसी वजह से तुम दोनों अलग हो जाते थे.... हर जनम में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह से प्रिंस को अपनी जान की क़ुर्बानी देनी पड़ती थी.... और इस बार भी यही होने वाला था.... जिसे रोकने के लिए मैंने वो किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था.... प्रिंस मेरे लिए मेरे बेटे से भी बढ़ के था है और रहेगा.... हर जनम की तरह इस जनम में भी उसे उस की वजह से बेइन्तेहाँ दर्द सहना था... जिसे वो अपनी जान समझता है वो hi उसकी जान की दुश्मन है.... उसकी जान hi उसपे जान लेवा हुम्ला करेगी.... ये बात तय थी.... जिसे बदलने के लिए मैंने वो किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था.... प्रिंस के मरते hi मैं गुस्से से पागल हो उठा.... मैंने तुम्हे श्राप दिया की जो दर्द तुम्हारी वजह से हर जनम में प्रिंस ने सहा है वो तुम भी सहोगी.... उस से कई ज़्यादा दर्द अगले जनम में तुम सहोगी.... तीनो जन्मों की सजा तुम इस 4तह जनम में भुगतेगी.... अगले जनम में तुम 7 हिस्सों में जनम लोगी..... 6 हिस्से तुम्हारे जिस्म के होंगे और 7तह हिस्सा तुम्हारा दिल होगा.... यानी की इस जनम में एक नहीं बल्कि 7 पारी ने जनम लिया है.... तुमको मिला के 6 और हैं जो तुम्हारे जिस्म का हिस्सा है और 7तह में तुम्हारा दिल है....

बाबा की बात सुन के पारी बुरी तरह से चौंक जाती है साथ hi उसे बाबा पे बेहद गुस्सा भी आने लगता है....

पारी : ये आप क्या कह रहे हैं.....?

बाबा : वो hi जो सच है.....

पारी : बाबा ये आपने क्या किया....? किस बात की सजा दी मुझे.....? क्या प्रिंस को चाहना गलत है....? क्या अपनी जान को अपनी जान समझना गलत है....? क्या सच्चा प्यार करना गलत है....?

बाबा : नहीं.... मगर जिसे तुम अपनी जान कहती हो उसकी जान लेना गलत है.... सरासर गलत.... हर जनम में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह से प्रिंस को अपनी जान देने पड़ी.... क्या मिला उसे तुम्हे छह के तकलीफ.... बेइन्तेहाँ दर्द.... इस जनम में भी उस मासूम के साथ वैसा hi होने वाला है जैसा की पिछले 3 जन्मों से होता आया है.... प्यार के लिए तड़पना और जब उसका प्यार उसके सामने आये तब उसकी जान जाना.... इस जनम में भी वो तुम्हारी वजह से दर्द hi सेहत आया है.... और आगे भी सहेगा जब तक उसकी मौत नहीं हो जाती....

बाबा के मुँह से प्रिंस की जान जाने की बात सुनके पारी का दिल तड़प जाता है और वो दर्द से तड़प के चीख उठती है....

पारी : Babaaaaaaaaaa..... ये आप क्या कह रहे हैं.....

बाबा : वो hi जो सच है.....

पारी कुछ कहने hi वाली होती है की तभी बेगम साहिबा बीच में बोल पड़ती है....

बेगम साहिबा : प्रिंस से मिलना तो बहुत दूर की बात है इस जनम में पारी ने प्रिंस को देखा तक नहीं... और आप कह रहे हैं की प्रिंस ने पारी की वजह से दर्द सहा है....? ये कैसे हो सकता है बाबा....?

बाबा : हो सकता नहीं बल्कि हो चूका है.... चाहो तो अपने जादू से खुद देख लो की कैसे इस जनम में पारी ने प्रिंस को तकलीफ पहुंचाई है....

बेगम साहिबा : हम सब कुछ देख पा रहे हैं मगर प्रिंस को नहीं.... जाने क्यों हमारा जादू प्रिंस पे काम नहीं कर रहा.....? कहीं ऐसा तो नहीं की हमारा जादू कमज़ोर पद गया है.....

बाबा : नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है....

बेगम साहिबा : तो फिर ऐसी क्या वजह है की हम में से कोई भी ये नहीं पता कर पा रहा है की प्रिंस इस वक़्त कहाँ है और क्या कर रहा hai....kyun हमारी पावर्स प्रिंस पे आ के कमज़ोर पद रही है.... आखिर क्यों....? कहीं इस सब के पीछे शैतानो का हाथ तो नहीं....

बाबा : नहीं शैतानो में वो पावर्स नहीं की वो ये कर सके.... ये सब मैंने किया है.... ताकि तुम में से कोई भी प्रिंस तक नहीं पहुँच सके....

बेगम साहिबा : ये सब आप ने किया मगर क्यूँउउउउउउउनंनंन....?

बाबा : वो इस लिए क्यों की मैं नहीं चाहता था की पारी प्रिंस तक पहुंचे.... पारी का प्रिंस के पास होने का मतलब है प्रिंस की जान को खतरा होना.... जो मुझे कतई मंज़ूर नहीं था.... इस लिए मैंने सिर्फ पारी की hi नहीं बल्कि गुलिस्तां के में रहने वाले हर एक शख्स की पावर्स को बाँध दिया.... यहाँ तक की प्रिंस की नानी रानी की पावर्स को भी.... ताकि कोई भी प्रिंस तक न पहुँच सके....

बेगम साहिबा : ये सब करने से पहले क्या आपने एक बार भी ये नहीं सोचा की बिना पावर्स से प्रिंस का क्या होगा.... आप ने हम को तो रोक लिया प्रिंस तक जाने से मगर शैतानो को कैसे रोकेंगे.... इस वक़्त प्रिंस के पास पावर्स नहीं है... वो एक आम इंसान है.... शैतान उसे बड़ी आसानी से नुक्सान पहुंचा सकते हैं....

बाबा : जी नहीं वो ऐसा कभी नहीं करेंगे.... जब तक उन्हें प्रिंस की पावर्स नहीं मिल जाती तब तक वो प्रिंस को न तो खुद कोई नुक्सान पहुंचाएंगे और न hi किसी और को पहुंचने देंगे....

शैतान की 2 बेटियों और प्रिंस के बीच सेक्स की बात बाबा छुपा लेते हैं....

फिर वो शुरू से ले के अब तक प्रिंस के साथ क्या हुआ वो सब अपने जादू के ज़रिये सब को दिखने लगते हैं की कैसे अवनि और रूही ने प्रिंस को तकलीफ पहुंचाई.... फिर भी प्रिंस ने उफ़ तक नहीं किया.... दोनों को जी जान से चाहा.... उनपे अपना प्यार लुटाता रहा....

अवनि और रूही को देख पारी के साथ साथ वहां मौजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... साथ hi उन्हें दोनों पे बेहद गुस्सा भी आने लगता है....

बेगम साहिबा : बाबा एक बात समझ नहीं आयी.... आप ने अभी कहा की इस जनम में पारी 7 हिस्सों में जनम लेगी.... रूही अवनि और पारी ये तीनो एक जैसे हैं.... मतलब तीनो एक hi जिस्म के तीन हिस्से हैं.... अब बच गया पारी का दिल वो कहाँ है....? वो कौन है जिसके सीने में पारी का दिल धड़क रहा है.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 65

शैतान की 2 बेटियों और प्रिंस के बीच सेक्स की बात बाबा छुपा लेते हैं....

फिर वो शुरू से ले के अब तक प्रिंस के साथ क्या हुआ वो सब अपने जादू के ज़रिये सब को दिखने लगते हैं की कैसे अवनि और रूही ने प्रिंस को तकलीफ पहुंचाई.... फिर भी प्रिंस ने उफ़ तक नहीं किया.... दोनों को जी जान से चाहा.... उनपे अपना प्यार लुटाता रहा....

अवनि और रूही को देख पारी के साथ साथ वहां मौजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... साथ hi उन्हें दोनों पे बेहद गुस्सा भी आने लगता है....

बेगम साहिबा : बाबा एक बात समझ नहीं आयी.... आप ने अभी कहा की इस जनम में पारी 4 हिस्सों में जनम लेगी.... रूही अवनि और पारी ये तीनो एक जैसे हैं.... मतलब तीनो एक hi जिस्म के तीन हिस्से हैं.... अब बच गया पारी का दिल वो कहाँ है....? वो कौन है जिसके सीने में पारी का दिल धड़क रहा है.....??????

अब आगे.....

बाबा : इस बात का पता जल्द hi चल जाएगा....

पारी बेहद गुस्से में : इन दोनों कामिनियों की हिम्मत कैसे हुई मेरे प्रिंस के साथ ऐसा करने की..... मैं इन्हे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी.... इनकी जान ले लुंगी....

बाबा : गलती से भी ऐसा करने के बारे में मत सोचना.... अगर गलती से भी तुमने उन्हें नुक्सान पहुँचाया तो वो तकलीफ तुम्हे भी होगी.... क्यों की वो दोनों तुम्हारे जिस्म का hi हिस्सा हैं.... तुम तीनो में से किसी को कुछ भी हुआ तो बाकी दोनों को भी वैसी hi तकलीफ होगी.... ये दोनों और कोई नहीं बल्कि खुद तुम hi हो.... तो जो भी प्रिंस के साथ हुआ है वो तुमने hi किया है.... ये तुम्हारी hi भावनाएं हैं जो प्रिंस को तकलीफ पहुंचा रही हैं.... तुम चाहो या न चाहो मगर प्रिंस की हर तकलीफ की ज़िम्मेदार उसकी अपनी hi जान है.... जो तुम हो.... ये तो बस शुरुवात है.... प्रिंस को न जाने अब और कितना दर्द सहना है.... वो दर्द जो उसका प्यार उसे देगा....

पारी : जी नहीं ऐसा कभी नहीं होगा.... मैं अपनी जान को दर्द दूँ ये मुमकिन नहीं.... मैं उसे प्यार दूंगी इतना प्यार जितना शायद hi कभी किसी ने किसी को दिया हो और शायद hi कोई किसी को दे पाए.... आप बस मुझे ये बता दीजिये की इस वक़्त मेरा प्रिंस कहाँ है....? मैं जल्द से जल्द अपनी जान के पास जाना चाहती हूँ....

बाबा पारी के सर पे हाथ रख के कुछ मंत्र पढ़ते हैं.... बाबा के हाथों से नीले रंग की रोशनी निकल के पारी के जिस्म में जाने लगती है....

बाबा : जैसे hi तुम प्रिंस के पास पहुँचोगी तुम्हारे उसके सर पे हाथ फेरते hi ये पावर्स जो मैंने तुम्हारे जिस्म में डाली हैं वो उसे मिल जायेगी.... इन पावर्स के ज़रिये वो शैतानो को देख पायेगा और उनसे अपना बचाव कर पायेगा.... ये पावर्स काफी नहीं हैं मगर शुरुवात के लिए बोहोत है.... और हाँ सब से ज़रूरी बात ये की कुछ करना मगर भूल के भी प्रिंस के साथ ज़बरदस्ती मत करना.... वर्ण उसकी जान को खतरा हो सकता है....

पारी : ज़बरदस्ती मतलब.....? मैं भला अपनी जान के साथ किस लिए और क्यों ज़बरदस्ती करने लगी....?

बाबा : जब तुम प्रिंस के करीब रह के भी उसका प्यार न पा सकोगी तब तुम उसके साथ ज़बरदस्ती करना चाहोगी.... और तुम्हारी उस ज़बरदस्ती से hi प्रिंस की जान को खतरा होगा....

पारी : मैं कुछ समझी नहीं.... जब मैं अपनी जान के पास रहूंगी तो उसका प्यार क्यों नहीं प् सकुंगी....?

बाबा : वो इसलिए क्यों की तुम तो उसे देख पाओगी मगर वो तुम्हे नहीं देख पायेगा.... और न hi तुम्हे छु पायेगा.... बस तुम्हे सुन पायेगा और तुम्हारे पास होने का एहसास उसे होता रहेगा..... जिस पल तुम उसपे जान लेवा हुम्ला करोगी ठीक उसी पल से तुम उसे नज़र आने लगोगी....

पारी : Kyaaaaaaaaaaa....???? मगर क्यों....?

बाबा : ये hi विधि का विधान है और साथ hi तुम दोनों की किस्मत भी....

पारी कुछ कहने hi वाली होती है की तभी....

बाबा : तुम्हारे जाने का वक़्त हो गया है....

पारी : मगर प्रिंस है कहाँ ये मुझे नहीं पता..... तो मैं कहाँ जाऊं....?

बाबा : अपनी आँखें बंद करो तुम्हे प्रिंस के बारे में सब पता चल जाएगा....

बाबा की बात सुन के पारी अपनी आँखें बंद करती है.... उसे प्रिंस नज़र आने लगता है.... प्रिंस को देख उसके होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है.... वो फ़ौरन अपनी जान से मिलने के लिए निकल जाती है....

अपनी जान के पास पहुँच के वो बस उसे देखती रह जाती है..... प्रिंस उसके ख़्वाबों और खयायों से भी कई ज़्यादा स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम है.... ये देख पारी ख़ुशी से नाच उठती है... वो आगे बढ़ के प्रिंस को अपने सीने से लगाना चाहती है मगर वो ऐसा कर नहीं पाती.... वो वहां की हर एक चीज़ को छु पा रही है मगर प्रिंस को नहीं..... प्रिंस भी पारी को नहीं देख पा रहा है.... वो उसके बगल से होक गुज़र जाता है.... इस वक़्त प्रिंस अकेला नहीं है रूही भी उसके साथ hi है.... दोनों पूरे नशे में हैं.... रूही प्रिंस के सीने से लिपटी उसके साथ चल रही है.... अपनी जान को किसी और लड़के के सीने से लिपटे देख पारी गुस्से और जलन से पागल हो जाती है.... वो उसे मारने के लिए गुस्से में अपना हाथ उठती है.... मगर जैसे hi उसकी नज़र रूही पे पड़ती है.... उसे बाबा की कही हुई बात याद आ जाती है.... और वो अपना हाथ हवा में hi रोक लेती है....

पारी : क्या किस्मत है मेरी.... मेरा hi एक हिस्सा मेरी जान से लिप्त हुआ है और मैं हूँ की छह के भी अपनी जान को सीने से लगा के प्यार नहीं कर सकती....

ये सोच के पारी की आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... उसकी आँख से आंसू बह के प्रिंस के चेहरे पे गिरता है जिसे प्रिंस का जिस्म उसका दिल फ़ौरन महसूस कर लेता है.... प्रिंस गहरे नशे में भी अपनी आँखें खोल के पारी की तरफ देखता है.... साथ hi उसका नाम ले के उसे पुकारता है.... प्रिंस इधर उधर नज़रें घुमा के पारी को ढूंढने की कोशिश करता है....

प्रिंस के मुँह से अपना नाम सुनते hi पारी का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... उसके होंठों पे मुस्कराहट सी फैल जाती है... वो बेहद ख़ुशी में आगे बढ़ के प्रिंस के सीने से लिपटना चाहती है मगर वो छह के भी ऐसा नहीं कर पाती.... वो प्रिंस से कुछ कहने hi वाली होती है की तभी उसे कमरे के बहार किसी के होने का एहसास होता है.... पारी अपनी पावर्स से दरवाज़े के पार देखती है.... ये और कोई नहीं बल्कि शैतान की बेटियां है.... जिन्हे देखते hi पारी के होश उड़द जाते हैं.... उसे ऐसा लगने लगता है जैसे की वो यहाँ प्रिंस की जान लेने आये हैं.... इस वक़्त प्रिंस एक आम इंसान है जिसके अंडर कोई पावर्स नहीं वो भला इन शैतानो का मुक़ाबला कैसे करेगा.... इस बात से पारी बेहद दर जाती है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर वो क्या करे....? कैसे वो प्रिंस की हिफाज़त करे....? ऐसा नहीं है की पारी के पास power's नहीं है.... पारी के जिस्म में इतनी पावर्स है की वो चाहे तो इन शैतानो को तो क्या बल्कि पूरे शैतान लोक को पल में बर्बाद कर के रख दे.... मगर वो छह के भी ऐसा नहीं कर सकती.... क्यों की ये पावर्स उसकी अपनी नहीं है बल्कि प्रिंस की है.... जिनका इस्तेमाल करना पारी को नहीं आता.... पारी के जिस्म में भी पावर्स हैं मगर उतनी नहीं की अकेले इतने शैतानो का मुक़ाबला कर सके.... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो आखिर करे तो क्या करे.....? तभी उसे बाबा की बात याद आती है.... वो फ़ौरन अपनी आँखें बंद करके कुछ मंत्र पढ़ती है और फिर अपना हाथ प्रिंस के सर पे अपना हाथ फेरती है.... पारी के हाथ से नीले रंग की रोशनी प्रिंस के जिस्म में जाने लगती है.... जिस से प्रिंस के जिस्म में काफी बदलाव आने लगते हैं.... उसका जिस्म और भी ज़्यादा मज़बूत हो जाता है साथ hi उसका रंग और भी ज़्यादा निखार जाता है वो और भी ज़्यादा स्मार्ट लगने लगता है.... उसके बाल और थोड़े लम्बे हो जाते हैं.... उसे देख के पारी उसमे खो सी जाती है.... वो सब कुछ भूल के बस उसे प्यार से निहारने लगती है..... वो आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों को चूमना चाहती है मगर तभी पीछे से आ रही आवाज़ सुन के पारी की तंत्र टूट टी है.... वो फ़ौरन अपनी पावर्स से पूरे रूम को सील कर देती है ताकि शैतान अंडर न आ सके....

जो दरवाज़ा बड़ी आसानी से खुल जाता था उसे न खुलते देख शैतानो को बड़ी हैरानी होती है.... उसे खोलने के लिए वो जी तोड़ कोशिश करते हैं.... मगर पारी उन्हें अंडर नहीं आने देती.... वो पूरी ताक़त लगा के दरवाज़े को खुलने से रोकती है.... तभी शैतानो में से एक कहता है....

शैतान 1 : ये अचानक से क्या हो गया....? इतना मामूली सा दरवाज़ा क्यों नहीं खुल रहा है....? कोई तो बात ज़रूर है... कहीं ऐसा तो नहीं की प्रिंस की पावर्स वापिस आ गयी हो.....

शैतान 1 की बात सुन के सब बेहद घबरा जाते हैं..... उन्हें ये अच्छे से पता है की प्रिंस की पावर्स का वापिस आना मतलब उन सब की मौत.....

शैतान 2 : k...k....kuch भी मत बोल.... ऐसा नहीं है..... अगर ऐसा हुआ तो समझ ले हम में से कोई ज़िंदा नहीं बचेगा.... P....Prince की पावर्स ऐसे hi वापिस नहीं आएगी बल्कि उसकी पिछले जनम की यादों को भी साथ लाएगी.... जिसका साफ़ मतलब है हम शैतानो की मौत....

अभी शैतान 1 कुछ कहने hi वाला होता है की तभी शैतान की बेटी रेहबा बीच में बोल पड़ती है....

रेहबा : ये बेकार की बकवास चोरो और दरवाज़े को खोलने में मेरा साथ दो....

शैतान 2 : ये बेकार की बात नहीं है बल्कि वो हक़ीक़त है जिसे कोई नहीं बदल सकता.... प्रिंस हम सब को जान से मार देगा....

रेहबा बेहद गुस्से में : अगर तुमने अपनी बकवास बंद न की तो प्रिंस तो तुम्हे बाद में मारेगा उस से पहले मैं hi तुम्हे जान से मार दूंगी....

रेहबा को गुस्से में देख दोनों शैतान फ़ौरन उसकी मदत करने में लग जाते हैं.... मगर वो छह के भी दरवाज़े को खोल नहीं पा रहे हैं..... वक़्त बीत ता जा रहा है.... पारी अपनी पूरी ताक़त लगा के उन शैतानो को अंडर आने से रोकती है.... शैतान पारी की पावर्स के आगे कमज़ोर पद जाते हैं.... और रेहबा को बिना काम (प्रिंस के साथ सेक्स) किये hi वहां से लौटना पड़ता है.....

आगे सुबह क्या हुआ वो आप सब ने पिछले अपडेट में पढ़ा है....

प्रिंस पारी से मिलने के लिए तड़प रहा है.... उसे देखने के लिए तड़प रहा है.... पारी का हाल भी कुछ ऐसा hi है.... वो भी अपनी जान प्रिंस के सीने से लिपट के उस से प्यार करने को तड़प रही है मगर कर नहीं पा रही.... उसका दिल रो रहा है उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.... इस तड़प को रूही भी महसूस कर रही है... वो फ़ौरन बाथरूम से बहार निकलती है और प्रिंस के करीब जा के कास के उसके सीने से लिपट जाती है....

प्रिंस जो इस वक़्त पारी के ख्यालों में खोया हुआ था.... वो रूही को पारी कह के अपनी बाहों में कास लेता है.... प्रिंस के मुँह से पारी सुन के रूही चौंक के उस से अलग होती है और सवालिया नज़रों से प्रिंस को देखने लगती है....

प्रिंस तो अभी भी पारी के hi ख्यालों में खोया हुआ है..... रूही उस से पूछने hi वाली होती है की तभी मैक्स जो कहता हिअ उसे सुन के रूही शर्मा जाती है....

मैक्स : तो मेरा यार आप को प्यार से पारी कहके बुलाता है.... वैसे ठीक भी है प्रिंस की वाइफ तो पारी hi हो सकती है....

मैक्स की बात सुन के जहाँ रूही बेहद खुश हो जाती है वहीँ पारी का चेहरा गुस्से और जलन से लाल हो जाता है....

रूही शरमाते हुए वहां से बहार की तरफ चली जाती है.... रूही के जाते hi कमरा एक नहीं बल्कि 2 झन्नाटेदार थप्पड़ की आवाज़ से गूँज उठता है.....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

मैक्स अपने दोनों गाल सहलाते हुए प्रिंस से पूछता है.....

मैक्स : अबे मैंने ऐसी क्या गलती कर दी जो तूने मुझे एक साथ 2 थप्पड़ मार दिए.....

प्रिंस : अबे कमीने तुझे ये किसने था झूट कहने को..... तुझे पता है न की मुझे झूट से सख्त नफरत है....

मैक्स : हाँ पता है और साथ में ये भी पता है की सच बात कहते hi तेरी लाइफ में फिर से प्रॉब्लम शुरू हो जाती.... मैं अगर उस से झूट नहीं कहता तो और क्या कहता....? ये की पारी उस लड़की का नाम है जिसे प्रिंस चाहता है.... मगर वो दिखाई नहीं देती.... जो है भी की नहीं पता नहीं.... मगर फिर भी प्रिंस उसे चाहता है दिल ो जान से चाहता है और ये बात उसे कल रात गहरे नशे में पता चली है..... ये बात सुन ते hi रूही तो क्या कोई भी तुझे पागल hi समझे....

अभी मैक्स ने इतना hi कहा था की तभी एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पे पड़ता है और वो उड़ता हुआ दूर जा गिरता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

प्रिंस : अबे तुझे क्या हुआ....? तू अचानक से उड़द के वहां कैसे गिर गया.....?

मैक्स : साले खुद मारता के पूछ रहा है मैं उड़द के यहाँ कैसे गिर गया....

मैक्स के मुँह से प्रिंस के लिए गाली सुन के पारी गुस्से में आ जाती है और एक साथ 2 और थप्पड़ उसके गाल पे रसीद करती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.... Chataaaaaaaaaaaaaak....

थप्पड़ खा के मैक्स उड़ता हुआ दूसरी तरफ गिरता है....

प्रिंस : अबे क्या हुआ जवाब देने के बजाये तू यूँ बंदर की तरह कलाबाज़ियां क्यों खा रहा है....?

मैक्स : अबे खुद मार के पूछ रहा है की कलाबाज़ियां क्यों खा रहा है.... अबे इतनी ज़ोर से तो कोई अपने दुश्मन को भी नहीं मारता जितनी ज़ोर से तू ने मुझे मारा है....

मैक्स की बात सुन के प्रिंस को बड़ी हैरत सी होती है....

प्रिंस : अबे क्या बक रहा है होश में तो है.... मैंने कब तुझे मारा....?

मैक्स : अभी तू मारा.... वो भी इतना झन्नाटेदार थप्पड़ की मेरा पूरी दिमाग झनझना गया....

प्रिंस : अबे कसम से मैंने तुझे नहीं मारा....

मैक्स : तू ने नहीं मारा तू फिर किसने मारा..... यहाँ तेरे और मेरे सिवाए है hi कौन.....?

प्रिंस : कहीं तुझे उन शैतानो में से किसी ने तो नहीं मारा....

मैक्स : नहीं ये शैतान नहीं हो सकते.... ये कोई और hi है....

तभी अचानक से दोनों की जुबां से एक hi नाम निकलता है....

Pariiiiiiiiiiiiiiiiiii....

दोनों फ़ौरन इधर उधर रूम में देखने लगते हैं.... मगर उन्हें वहां कोई नज़र नहीं आता....

मैक्स बेहद डरते हुए : य.... य.... ये काम पक्का तेरी पारी का hi है....

प्रिंस : पागल है क्या....? कुछ भी... हाँ.... पारी तुझे क्यों मारेगी....?

मैक्स कुछ सोच के कहता है....

मैक्स : शायद रूही की बात और तेरे लिए मेरे मुँह से गाली सुन के तेरी पारी को गुस्सा आ गया होगा.... और मेरी शामत आ गयी.... जैसे तू है तेरी पारी भी बिलकुल वैसी hi है.... दोनों की नाक पे गुस्सा रहता है... तुम दोनों में फर्क सिर्फ इतना है की तू दिखाई देता है मगर वो नहीं....

ये कहते hi मैक्स के गाल पे एक और थप्पड़ पड़ता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

मैक्स फ़ौरन प्रिंस के पीछे चुप जाता है और अपनी जान बचने की दुहाई करने लगता है....

मैक्स : यार मेरी तौबा.... मेरे बाप की तौबा.... मैं आइंदा भूले से भी तेरी पारी के बारे में कुछ नहीं कहूंगा... प्लीज मुझे बचा ले.... प्लीज अपनी पारी के कह की मुझे और न मारे.... प्लीज यार... बचा ले मुझे.... उस से कह की मुझे और न मारे प्लीज....

प्रिंस : अबे किस से कहूं....? कोई दिखाई दे तब न....

मैक्स : देखना ज़रूरी नहीं है कहना ज़रूरी है... इस से पहले की तेरी पारी मार मार के मेरी बंद बजा दे.... प्लीज उसे रोक ले.... उस से कह की मैं तेरा दोस्त हूँ दुश्मन नहीं.... और अभी मैंने जो भी कुछ कहा उस के लिए मैं दिल से माफ़ी मांगता हूँ....

प्रिंस : अच्छा बाबा कहता हूँ.... मुझे चोर तो सही.....

मैक्स : नहीं मैंने तुझे छोरा तो वो मुझे नहीं छोड़ेगी.... पहले तू उसे बोल की मुझे और न मारे प्लीज.... जल्दी बोल....

मैक्स की बात सुन के प्रिंस इधर उधर देख के कहता है....

प्रिंस : पारी....

प्रिंस के मुँह से अपना नाम सुन के पारी का गुस्सा हवा हो जाता है और उसकी जगह प्यार ले लेता है....

प्रिंस एक बार फिर पारी कहता है....

प्रिंस : पारी.... तुम हो न यहाँ.....

प्रिंस की बात सुन के पारी हाँ कहना चाहती है मगर कह नहीं पाती.... बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है....

इधर कोई जवाब न पा के प्रिंस मैक्स से कहता है.....

प्रिंस : यार यहाँ तो कोई नहीं है.... अगर पारी होती तो जवाब तो देती... शायद ये मेरा वेहम था....

मैक्स : यार बात को समझ.... यहाँ उसके जवाब की बात नहीं है बल्कि उसके गुस्से की बात है जिसे शांत करना ज़रूरी है.... चाहे कोई जवाब आये या न आये तू प्लीज उस से कह दे की वो मुझे न मारे प्लीज.... बोल मेरे यार बस एक बार उसे बोल दे..... प्लीज.... मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ....

प्रिंस : अच्छा बाबा कहता हूँ रुक.....

फिर प्रिंस एक बार फिर से पूरे रूम में अपनी नज़र दौड़ा के कहता है....

प्रिंस : पारी मैक्स ने जो भी कुछ कहा उसके लिए प्लीज इसे माफ़ कर दो..... मेरी खातिर इसे माफ़ कर दो..... ये कोई दुश्मन नहीं बल्कि मेरा सच्चा दोस्त है.... प्लेस्से इसे माफ़ कर दो....

ठीक तभी दरवाज़ा खुलता है और ज़रा रूम में आती है.... ज़रा के आते hi मैक्स फ़ौरन वहां से निकल लेता है.... मैक्स की इस हरकत को देख ज़रा को बड़ी हैरानी सी होती है.... उतना hi हैरान प्रिंस ज़रा को देख के होता है...

ज़रा : इसे क्या हुआ ये इस तरह अचानक से दर के रूम से क्यों भाग गया....? ऐसे जैसे की इसने कोई भूत देख लिया हो....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस भी फ़ौरन रूम से बहार निकल जाता है.... उसे ये अच्छे से पता है की ज़रा उसे गले लगाए बिना मानेगी नहीं और ये पारी कभी बर्दाश्त करेगी नहीं की उसके प्रिंस को कोई और लड़की अपने सीने से लगाए....

प्रिंस को देख ज़रा को और भी हैरत सी होती है..... उसे समझ नहीं आता की उसके रूम में आते hi अचानक से ये दोनों रूम से बहार क्यों भाग गए....??????
 
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