Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 4 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

कुछ एक घंटे बाद रौशनी थोड़ी शांत होती हैं . उसे रोनित से ऐसे बात करने में अच्छा नहीं लता इसलिए उसे मानाने वह कमरे में जाती हैं .. रौशनी बहुत दिनों से रोनित के साथ इरोटिक पल भी बितायी नहीं थी .. वह मिस लार रही थी अपने पति से रोमांटिक पल .. और खासकर से उनकी चुदाई . वह काफी हॉट मूड में थी इसलिए वह सोची की वह रोनित को मन कर रात में उनसे सेक्स करेगी ..

लेकिन रोनित बिस्तर पर पड़े लेते थे … रौशनी उसके पास गयी और उसे हिलने लगी .. “रोनित, रोनित उठिये न .. रोनित ी ऍम सॉरी … आप से ऐसी नहीं बात करनी चाहिए थी.. उठिये न”

रोनित कुछ मं के बाद उठ बैठ जाता हैं..

“बोलो रौशनी क्या हुआ .. मुझे क्यों उठाया … बहार जोट ुम बोली उससे जी नहीं भरा तुम्हारा ..”

“रोनित ी ऍम सोर्री … प्लीज में इतने दी ो बाद आयी हूँ… आप नाराज़ न होना..”

“हम्म ठीक हैं , बोलो क्या चाहिए”

रौशनी अब रोनित के करीब जाती हैं .. वह उसके गले में अपने हाथ डालती हैं और रोनित को गालों पर चूमती हैं :.. रोनित कुछ रिएक्शन नहीं देता ..

“रोनित … बहुत दिनों से हम कुछ सेक्सी नहीं आकर हैं .. प्लीज मुझे भी चूमिए ..”

रोनित रिएक्शन hi माहि देता ..

रौशनी उसके गालीन को और चूमती हैं … और उसके होठों पर चूमने बढ़ती हैं ..

रोनित फिर रौशनी के हाथों को हटा देता हैं ..

“रोनित क्या हुआ … डिअर प्लीज अभी भी नाराज़ हो”

“रौशनी मुझे नहीं बात करनी तुमसे .. जतूम जाओ उस ंगो के उन बुद्धों से करो जो चाहिए … वहां 4 दिन रहकर गुल खिलाये होंगे तुमने उन् बुद्धों को. अब वहां जी जाओ मज़्ज़े करो उनके साथ. मुझे नहीं बात करनी तुमसे”

रौशनी बहुत नाराज़ होती हैं .. वह उनके लिए इतना कुछ कर रही थी और रोनित उस पर hi इलज़ाम लगा रही हैं .. बस अपने पति का प्यार hi तोह चाहिए .. अब वह भी नहीं मिलेगा ..

“रोनित ये क्या बक रहे हो तुम … वहां में बस अपने काम के लिए गयी थी .. बड़ी इवेंट थी इसलिए .. तिम्हे तोह परवाह hi नहीं इवेंट कैसी गयी क्या हुआ कुछ पूछा नहीं बस चिलाना शुरू .. जब कोई लेडीज जाती हैं कोई मर्द दोस्त बनते हैं तोह क्या उसके करैक्टर पर हमेशा सवाल पूछोगे आप जैसे मर्द ..”

“रोनित तुम्हारी असली फीलिंग्स अब जाकर बहार आयी हैं मेरे बारे में ..”

रोनित फिर अपना पिलो और ब्लैंकेट लेकर कमरे के बहार जाता हैं सोफे पर सोने..

वहां कमरे में रौशनी बहुत नाराज़ बैठी रहती हैं.. (आज तोह रोनित ने हद कर दी .. मेरे करैक्टर पर शक कर रहे हैं .. यहाँ एक ाची बीवी के नाते में हमारे लिए इतना कुछ कर रही हूँ … उसकी परवाह तोह चोर , मुझे पर hi ऐसे गंदे इलज़ाम लगा रहे है. … वहां उन बुद्धों को मेरी जोसम चाहिए मुझे दीखता हैं और मैंने तोह कभी उनसे ऐसी …यहाँ में कितने दिनों से प्यासी हूँ और रोनित को मेरी प्यास की कोई परवाह नहीं .. अब रोनित मेरी अंदर की प्यास नहीं बुझाएंगे तोह और कोई सही) इतना सोचते हुए वह बिस्तर पर लेट गयी ..

(कल से रोशिनी अपनी ऐटिटूड बदलने वाली थी .. वह अब उन तीन बुद्धों के साथ मस्तियाँ करने से ज्यादा कतराने नहीं वाली थी .. अब तीन बुड्ढे और इस हसीं महिला के बीच बहुत आगे तक बातें जानी वाली थी)

रौशनी ने एक दिन छुट्टी ली .. वह ोारकौर गयी और अपने बदन पर पूरी वैक्सिंग करा ली .. उसकी छूट के ऊपर भी वैक्सिंग करि बस एक बालों का स्ट्रिप चोर कर.. .. वह एक स्लीवेल्स ब्लाउज जो की डीप बैक कट तोह थी hi लेकिन आगे से भी डीप कट वाली पहनी थी. ट्रांसपेरेंट साड़ी जो उसके नाभि और कमर साफ़ साफ़ दर्शाती .. कानों में लम्बे ेआरींग्स, होठों पर रेड लिपस्टिक .. बालों को ओपन चोरे हुए .. माथे पर लाल बिंदी .. कलाई में चूड़ियां .. आज तोह रौशनी सब मर्दों के लुन्डों को खड़ा करने वाली दिख रहे थी .. आज से तीनो बुद्धों के बहुत मज़्ज़े होने वाले थे ..

निचे अपने रिक्शा के पास रौशनी को आते देख रमेश तोह दांग रह गए .. आज रौशनी पहले से भी काफी सेक्सी साड़ी और ब्लाउज पहने हुयी थी .. उसमें एक अलग hi आकर्षण था आज . रमेश का तोह कुंड रौशनी को देख hi आज खड़ा होने लगा था पूरा का पूरा..

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रौशनी अब रमेश को अपने बदन को घूरते देखि और अंदर मुस्कुरायी.. उसे पता था बुद्धा उसे ऐसे गरमी की नज़र से देख रहा था .. उसके पास जाकर वह मुस्कुरायी

“रमेश जी क्या घर रहे हो आज … इतनी पसंद आयी हूँ आपको …” और रौशनी एक वाइड स्माइल दी

रमेश का लुंड तोह उसकी ोान्त में खटके मार रहा था ..

“रौशनी जी आज तोह आप…”

“रमेश जी बोलिये .. जरा खुल कर बोलिये ..”

“रौशनी जी आज आप तोह सही में बहुत hi अस्त लग रही हो .. आअज की साड़ी तोह आप पर खूब जांच रही हैं”

“अच्छा रमेश जी क्यों … आपको ज्यादा सेक्सी लग रही हूँ में …” और रौशनी मुस्कुराने लगी.

“रमेश अब रौशनी को खुद से सेक्सी शब्द इस्तेमाल करते देख सरप्राइज था.. उसे रौशनी को खुल कर बात करते देख ख़ुशी हुयी थी.

“रौशनी जी हाँ आप काफी सेक्सी लग रही हो .. आप से तोह किसी लेडीज की टक्कर बी नहीं..”

“अच्छा रमेश जी ऐसे हैं … ाचा चलिए काम पर जाना हैं नहीं तोह यहाँ पर hi बैठे बस तारीफ करते रहोगे आप .. काफी नोट्टी बुड्ढे हो आप ..” रौशनी फिर हसने लगी हैं..

“रौशनी जी काम छोड़िये … आप आज हुनर साथ hi घूमिये न .. अलग अलग चीज़ें दिखाऊंगा शहर के .. आइये मेरे साथ”

“रमेश जी आप तोह चोर hi दीजिये .. आप तोह पार्क्स में hi मुझे घुमागोई उस दिन जैसे उन कपल्स पार्क में वैसे .. आप से तोह दूर hi रहूंगी ..”

“रौशनी जी नहीं दूर न जाइये , अभी तोह पास आयी हो इतने दिनों बाद .. अब तोह आपको दूर जाने hi नहीं दूंगा …”

अच्छा रमेश जी पास hi रखोगे .. क्यों क्या इरादा हैं .. आप कुछ जयादा hi नोट्टी न सोचो मेरे बारे में रमेश जी .. आप के बीवी को बोलूंगी आपकी करतुते ..” रौशनी अब हलके से रमेश के कन्धों पर मुट्ठी मरती हैं .. “अब चलिए नहीं तोह ंगो जाने को लेट होगा मुझे”

अब रिक्शा शुरू कर वह सवारी कर रहे हैं.. रमेश आईने में से ोीचे रौशनी को देखता हैं .. आज रौशनी ने कुछ और डीप फ्रंट चइत ब्लाउज ोेहनी थी .. आज तोह वह मस्त कमाल की आइटम लग रही थी .. रमेश का कुंड तोह उसकी ोान्त में लगातार झटके मार रहा था .. उफ्फ्फ क्या क्लीवेज होगी ममम थोड़ा झुकिए न रौशनी जी … अपने चूचियों की दरार का दृश्य तोह दिखाइए .. रमेश फिर अपने पंत के ऊपर से अपने लोडे को खुजलाता हैं.

वहां रौशनी को एहसास हुआ था की रमेश उसे आईने ऐ घर रहे है. .. वह कुछ सोची फिर थोड़ा आगे झुकी मनो अपने सैंडल्स को ठीक कर रही हो. रमेश तोह अब आईने से बस देखता रहा .. उफ्फ्फ रौशनी की गोरी सी मुलायम चूचियों की दरार का नज़ारा बहुत hi हॉट था .. उसका लुंड अब उस दृश्य से बुरी तरह से झटके मार रहा था .. ही उफ्फ्फ क्या चूचियां होंगी मैडम की … ममममम मुँह से तोह ोानी आ रहा हैं एबीएस उनकी चूचियों की दरार देख .. उनकी नंगी चूचियां देखेगा तोह सीधा उसे होने मुँह में लेकर चूसूंगा ममम काश रौशनी की चूचियों को चूस सकू मममम..

रमेश अब एक हाथ से रिक्शा चला रहा था और दूसरे हाथ से अपने लोडे को मसल रहा था .. जो अब बुरी तरह से झटके मार रहा था ..

अचानक से रिक्शा एक खड़े से गुज़रता हैं ..

“ोूई माँ रमेश जी जरा ध्यान रस्ते पर भी दीजिये , न की यहाँ वहां … इधर उधर नज़र न डालिये .. बस रस्ते पर डालिये ..”

“रौशनी जी माफ़ कीजिये .. ऐसे नज़ारे देख रहा था की ध्यान रस्ते पर नहीं रही .. आक्न्हों के सामने तोह दो बड़े चीज़ देखे .. की यह छोटा सा खड़ा देखना भूल गए ..”

“रमेश जी बड़े बड़े आइटम्स को न देखो … वैसे भी जो चीज़ हाथ नहीं आएँगे तोह खली पिली वहां नज़र दाल कर कुछ फायदा नहीं हैं..”

“अच्छा रौशनी जी .. अरे रौशनी जी हमें बड़े hi पस्न्द हैं .. वैसे आप को भी पसंद हैं न बड़े बड़े चीज़ें..”

रौशनी अब शर्मायी … बातें हद से बहार जा रही थी … उसे अभी शर्म आ रही थी रमेश जी के बातों से ..

“रौशनी जी आज शाम को आइये न थोड़ा घूम लेंगे .. उस पर में आओगी फिर से ..”

“रमेश जी आप को मुझे उस पार्क में ले जाकर

क्या करना हैं मुझे अच्छी तरह से ोाता हैं … अआप बहुत नोट्टी हो .. आप के साथ नहीं आउंगी .. आप तोह मुझे वहां से छोड़ोगे नहीं ..”

“रौशनी जी क्यों छोड़ूंगा आपको .. आप की कंपनी में बहुत अच्छा लगता हैं .. मुझे तोह मन करतभाईन उस पार्क में लेजाकर वहां आपके साथ 2-3 घंटे बितौ .. वहां पार्क में और बहुत हैं करने के लिए , आपने बस ट्रेलर hi देखा था..”

“ अच्छा रमेश जी उस पार्क में उस दिन आपने बस ट्रेलर दिखाया था .. अगली बार पूरी फिल्म दिखाओगे क्या … बड़े आये डायरेक्टर साहब ..”

रमेश तोह काफी गरम हो रहा था रौशनी की ऐसी बातें सुन .. उसका लोढ़ा तोह पूरा औकात में आ चुक्का था … उफ्फ्फ आज तोह रौशनी जी खुल कर बातें कर रही हैं .. बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं .. यार अब तोह उन्हें पार्क ले जाऊंगा और खूब मस्ती करना चाहूंगा मम.

अब वह ंगो पहुँच गए .. रौशनी अब रिक्शा के बहार निकल गयी ..

रमेश भी रिक्शा से उतर गया … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे ..

“रौशनी जी आज आप शाम को मेरे साथ थोड़ा टाइम बिताइए न .. आपसे बहुत बात करनी हैं .. मुझे आप की कंपनी चाहिए आज शाम को …”

“रमेश जी उफ्फ्फ आप भी न .. देखिये शाम का बाद में देखेंगे .. अभी लेट हुआ हैं मुझे … शाम को घर ड्राप करोगे तब देखेंगे .. अच्छा में जाती हूँ.”

रौशनी जी एक मं रुकिए … रमेश अब बोल्ड होकर रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेता हैं .. रौशनी बस उसे देखती हैं .. फिर रमेश उसके हाथों को ऊपर उठाते हुए उसकी हाथों को चूमता हैं …

“रौशनी जी आप की दोस्ती फिर से पाकर बहुत खुश हूँ .. सच अब आपकी दोस्ती हमेशा के लिए चाहिए मुझे”

“रमेश जी … मुझे भी चाहिए आपसे दोस्ती .. आप अच्छे हो .. आपकी कंपनी में मुझे अच्छा लगता हैं .. आज शाम को आप मुझे और घुमा सकते हो… लेकिन अब थोड़ा हाथ छोड़िये .. काम पर जाना हैं.. “ रौशनी को दिख रहा था की रमेश का लुंड अब उसकी पंत में एक तम्बू बनाये हुए था ..

रमेश फिर से रौशनी एक हाथों को चूमता हैं .. फिर रौशनी मुद कर चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती चूतड़ों को देख अपने खड़े लोडे को मसलता हैं.

वहां रौशनी आज के रमेश के साथ बातों के बारे में सोचते हुए अंदर मन में मुस्कराते हुए ंगो के अंदर चली जाती हैं.

ंगो में अपना काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के वहां जाती हैं .. अंदर असलम सोफे पर बैठा हुआ था ..

आज रौशनी ने जो साड़ी और ब्लाउज पहनी थी उससे तोह रमेश जैसे असलम का लोढ़ा भी झटके मारने लगा था .. उफ़ फहाय क्या माल लग रही हैं आज रौशनी जी .. आज तोह इसे ऐसे मसलूंगा उफ्फ्फ क्या बदन हैं यार ….

“रौशनी जी आप आ गयी .. छुट्टी कैसी थी ..”

“अच्छी थी असलम जी … अब वापस काम पर .., वैसे असलम जी में सोच लिया की में अब बस आपके घर आउंगी तोह आप मुझे रुकसाना hi समझ कर बातें करिये .. आप की इलाज के लिए में 100% आपका साथ दूंगी.”

असलम इस बात से बहुत खुश होता हैं ..

“रुकसाना बेगम .. फिर आइये गले लागिये ..”

अब असलम रौशनी को अपने बाँहों में लेकर पूरा मसलता हैं .. “रुकसाना बेगम चलिए अब मस्त गरम खाना बनाइये ..”

“असलम मियां जरूर .. जरा हलके से फ्रेश होने दीजिये …”

रौशनी थोड़ा फ्रेश होकर लंच बनाने लग जाती हैं

पीछे से असलम उसे जकड लेता हैं.. रुकसाना बेगम ही … आपके बदन का दीवाना हूँ में उफ्फ्फ”

“असलम मियां आप भी न .. बस मेरे बदन से hi प्यार हैं आपको ..,”

“रुकसाना बेगम अब हैं hi आइटम जैसे बदन आपकी “

“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न “

असलम अब अपने हाथों को रौशनी के पेट पर फेरता हैं … फिर वहां हलके से दबाता हैं.. “उफ़ असलम मियां धीरे से .. उफ्फ्फ आपके कठोर हाथों से इतना मत मसलो उफ्फ्फ.”

रुकसाना बेगम अब आप हैं hi ऐसी … मसलने दो न .. बहुत मिस किया अपनी बेगम को.”

रौशनी कुछ नहीं कहती .. उसकी ख़ामोशी से और बोल्ड होते हुए असलम अब पीछे से अपने खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबाता हैं .. और आगे से उसके पेट को मसलता हैं.. “उफ़ असलम जी आपका पीछे से बहुत चुभ रहा हैं .. लगता हैं आज बहुत hi मस्ती में हो आप और आपका शैतान”

“हाँ रुकसाना बेगम .. अब क्या कहु आप जैसी चूतड़ों का जादू हैं जो मेरे शैतान पर चा चुक्का हैं.”

“अच्छा असलम मियां अब आप हमारे सामने ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल करोगे .. आज कुछ जयादा hi मूड में हो.”

“रुकसाना बेगम आप आती हो तोह गर्मी बढ़ती हैं .. अब आप को तोह देख मूड खुद बा खुद बनता हैं .. वैसे आप आज मस्त साड़ी पहनी हो … “

“असलम जी आपको अच्छा लगा .. उफ्फ्फ थैंक यू .. हाँ नयी हैं लेकिन आज hi मिली मुझे .. सोचा पेहेन लू.”

“रुकसाना बेगम ऐसे hi पहनिए .. बहुत कमाल की लग रही हो …”

असलम माल शब्द पर जोर देता हैं .. रौशनी समझ जाती हैं और हस्ती हैं…

“असलम जी इतनी कमाल की लगती हूँ आज सच में .. उफ्फ्फ आप आज बहुत टैरिफ कर रहे हो.”

“रुकसाना बेगम जब ऐसी कमाल की बेगम हो तोह क्या करे … “ फिर असलम और एक पीछे से धक्का देता हैं और बी उसका सख्त लोढ़ा और अंदर रौशनी की चूतड़ों में घुसता हैं ..”

अहह असलम जी उफ्फफ्फ्फ़ … आपका पीछे से .. उफ्फ्फ्फ़.”

असलम बहुत गर्मी में था और वह और एक झटका मारता हैं अपने लुंड से … रौशनी की चूतड़ों के अंदर और घुसता हैं उसकी साड़ी के ऊपर से …

“असलम मियां धीरे से .. आपका बहुत बड़ा हैं निचे उफ्फ्फ्फ़. और जोर न दीजिये मममम बहुत अंदर घुस चुक्का हैं अह्ह्ह्ह”

“रुकसाना बेगम अब तोह बस साड़ी के ऊपर से hi घुसा हैं .. कभी मौका दीजिये .. साड़ी बिना अंदर घुसूंगा … मेरी बेगम …”

रौशनी असलम की ऐसी बातों से और गरम होती हैं .. आज उसे उनकी ऐसी बातों से बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. उसकी छूट थोड़ी से गीली हो चुकी थी .. उसे असलम के नंगे लुंड का ख्याल आता हैं और वह और गरम हो जाती हैं …

“असलम फिर रौशनी को अपनी तरफ कर उसकी होठों को चूमता हैं .. इस बार रौशनी कुछ ऑब्जेक्ट नहीं करती और दोनों गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. सामने से असलम एक झटका मारता हैं … अहह असलम जी धीरे से आपका बहुत hi बड़ा हैं उफ्फफ्फ्फ़.

असलम अब अपने हाथों से रौशनी की बाँहों को बुरी तरह से मसलता हैं और उसे फिर से चूमने लगता हैं .. अब रौशनी की छूट गीली हो चुकी थी .. इतने दिन से वह प्यासी थी … आज वह अपनी इन्हिबिशंस खो चुकी थी और स्लैम के मस्ती का साथ दे रही थी …

फिर असलम अपने हाथों से रौशनी के पीठ को मसलता हैं … फिर उसकी चूतड़ों को … उस पुरे समय दोनों एक गहरी चुम्बन में लगे हुए थे … माहौल काफी गरम हो चुक्का था ….

असलम ने तोह पूरी तरह से आज रौशनी को मसलने लगा था … दोनों के दूसरे से चिपके हुए थे ..असलम का सख्त लोढ़ा अब रौशनी के मुलायम पेट पर डाब रहा था … उफ्फ्फ्फ़ रौशनी की तोह अब छूट गीली हो चुकी थी .. आज वह असलम को मन नहीं कर रही थी .. बल्कि उसका पूरा साथ दे रही थी .. उसकी प्यास सच में बढ़ रही थी … असलम को वहां बस रौशनी की प्यास बुझाने और खुद की प्यास बुझानी थी … दोनों चिपके हुए एक दूसरे के बाँहों में खो गए थे ….

असलम और बोल्ड होकर अब रौशनी के आहतों को अपने सख्त उभर पर दाल उसे वहां खुद दबाने लगा … रौशनी फिर कुछ मं बाद खुद से उसके मोठे लोडे को पंत के ऊपर दबा रही थी .. फिर दोनों की चुम्बन टूटी तोह रौशनी अब कामुक भरी नज़रों से असलम की आँखों में देख रही थी … असलम भी हवस की नज़र से रौशनी को देख रहा था .. दोनों के बीच सेक्सुअल टेंशन बहुत हाई हो चुक्का था …

“उफ़ असलम मियां आपका तोह शैतान बहुत hi मोटा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ आप मममम”

“रुकसाना बेगम हाँ मोटा हैं और कला भी . तुमने तोह देख hi लिया हैंउसे .. जब आज़माना हो बताओ … “

“उफ़ असलम मियां .. अब खाना बनाना दीजिये उफ्फ्फ्फ़”

“रुकसाना बेगम बोलिये न … मेरे बड़े हथ्यार को आज़माना चाहती हो .. उफ्फ्फ बहुत टाइम हुआ मेरी रुकसाना बेगम की प्यास बुझा कर …

रौशनी पूरी मदहोशी में थी .. वह भूल गयी थी असलम एक बुद्धा था … बस उसकी प्यास .. उसके हवस को उकसा रही थी .. वह असलम के लोडे को मसलती रही .. असलम भी रौशनी के कमर को मसलता रहा …

अचानक से उन्हें सलीम की आवाज़ सुनाई देती हैं .. सलीम की आवाज़ सुन रौशनी असलम से अलग होती हैं .. उसे अब एहसास होता हैं की वह क्या कर रही थी अभी असलम के साथ .. वह फिर बहार सलीम को मिलने जाती हैं…

“उफ़ साले कमीने को अभी आना था .. रौशनी मस्त हाथ लगी थी यार .. बहुत हवस बढ़ रही थी दोनों में .. कमाइना साला .. उफ्फ्फ मेरे खड़े लोडे का क्या करू … उफ्फ्फ रौशनी .. और कब तक बचेगी तुम मुझ से .. अब तोह तुझे बिस्तर पर लजाकर तेरी कुटाई करने में देर नहीं हैं ..

सलीम रौशनी को देख खुश होता हैं .. वह भी रमेश और असलम जैसे रौशनी को इस साड़ी और ब्लाउज में देख मस्त होता हैं और उसका लोढ़ा भी सख्त होने लगता हैं .. (है आज क्या मस्त लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ ज़रा झुकेगी तोह साली की चूचियों की दरार साफ़ साफ़ दिखेगी … आज तोह बड़ी माल बन कर आयी हैं .. लगता हैं उसके पति ने उसे प्यासा hi चोर दिया हैं .. उफ्फ्फ रौशनी जी में प्यास बुझाऊंगा तुम्हारी ..)

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रौशनी सलीम के गले मिलती हैं .. सलीम उसे मसलता हैं .. उसकी पीठ को मसलता हैं …

“रौशनी जी आप आ गए …. रौशनी जी आप से एक दिन भी जुड़ा नहीं रह सकता .. आपको बहुत मिस किया ..”

“अच्छा सलीम जी इतना क्यों मिस किया”

“रौशनी जी अब आप जैसी खूबसूरत दोस्त को कौन पागल मिस नहीं करेगा ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं “अच्छा ऐसे हैं सलीम जी … वैसे सलीम जी मैंने भी आपको मिस किया.”

“ओह सच्ची रौशनी जी आपने हमें मिस किया … कैसी खुश नसीबी हैं मेरी …”

“रौशनी जी फिर तोह आप अब वापस नहीं जाना .. यही पर रहिये … आपकी कंपनी अच्छी लगेगी…”

दोनों अब सोफे पर बैठ जाते हैं .. रौशनी इस बार सलीम के काफी करीब बैठ जाती हैं ..

“रौशनी जी वैसे आपने मेरी उस बात पर सोची”

“किश बात पर सलीम जी”

“वही मेरे दोस्त के बेटी की शादी हैं और मुझे इन्विते किया था .. में सोचा अगर आप भी आ जाये तोह मेरे दोस्त को आपकी इंट्रोडक्शन करवाऊंगा .. उसे बोलै था आप नयी मैनेजर हो.”

“हाँ सलीम जी हम्म्म , हाँ में आउंगी आपके साथ .. लेकिन बस एक रात रहेंगे , फिर वापस आएँगे … ंगो में काम काफी हैं बाकी”

रौशनी जी जरूरर बस आप आइये तोह सही … वैसे आप आओगी तोह शादी को चार चाँद लग जाएंगे ….”

“शुक्रिया सलीम जी .. आप बहुत तारीफ़ करते हैं.”

“रौशनी जी वैसे एक बात हैं .. आप आओगी तोह दुल्हन आपको देख जलनि नहीं चाहिए .. कहते हैं न शादी में दुल्हन hi सबसे खूबसूरत लगनी चाहिए .. आप आओगी तोह उसे कड़ा मुक़ाबला होगा .. ः”

“सलीम जी आप भी न .. उफ्फ्फ्फ़ कुछ भी .. वह कितनी जवान और खूबसूरत होगी .. में तोह अब जवान नहीं उतनी …”

“रौशनी जी आप जवान हो .. और आपकी जवानी के जलवे तोह मुझे बेहत पसंद हैं ..”

रौशनी अब अपना हाथ साली के तइस पर रखती हैं .. उससे सलीम का लुंड झटके मारने लगता हैं … “वैसे आप भी न सलीम जी … मीनल हैं न .. उसकी जैसी जवान दोस्त हैं न आपके पास.”

“रौशनी जी आप की जवानी पसंद हैं मुझे .. मीनल तोह हैं खूबसूरत लेकिन आप ाजीसी बात कहाँ उसमें.”

“ओह सलीम जी मुझे में क्या बात हैं …”

सलीम अब रौशनी की चूचियों के तरफ देखता हैं …

“रौशनी जी आप में सब कुछ बेस्ट हैं.”

“सलीम जी अच्छा .. क्या बेस्ट हैं जरा बताइये …”

सलीम काफी एक्सपेरिएंस्ड था .. उसे पता था कब कौनसे महिला प्यासी होती हैं .. वह सोचा की अभी मौका हैं रौशनी के और करीबी बनाना के लिए”

“रौशनी जी … मममम आपका गोरापन .. आपकी फिगर .. आपकी नशीली आँखें .. आपके रैसले होठं .. आपकी नाज़ुक कमर .. … आपकी …”

“उफ़ सलीम जी .. बस .. आप तोह .. उफ्फ्फ्फ़ शुरू hi हो गए ..”

“रौशनी जी शुरुवात कहाँ की हैं अब तक … आप शुरवात करने दीजिये .. “

“सलीम जी .. कैसी शुरवात करनी हैं आपको …”

“रौशनी जी .. अपने प्यार की शुरुवात .. आपसे बहुत प्यार करना चाहता हूँ … आप से पूरी मस्ती …”

“उफ्फ्फ सलीम जी .. बहुत हुआ .. यह प्यार छोड़िये .. उफ्फ्फ में रही जवान .. आप रहे बुड्ढे .. यह प्यार चोर दीजिये . आपकी उम्र नहीं हैं प्यार की.”

“रौशनी जी प्यार के लिए कहाँ उम्र देखि जाती हैं .. प्यार कभी भी हो सकता हैं .. किसी के साथ भी .. अब मुझे तोह आपसे प्यार हैं .. एक तरफ़ा hi सही लेकिन हैं .. अब आप को मेरे प्यार को स्वीकारना हैं वह आपके हाथों में हैं ..”

“ओह गॉड तू मच ु अरे … उफ्फ्फ आप भी न .. सलीम जी आप …”

रौशनी फिर दूसरी तरफ देखती हैं .. सलीम अपने हाथों से रौशनी के चेहरे को पाने तरफ करते हुए …”रौशनी जी आप शरमाते हुए और भी मस्त लगती हो …”

सलीम अब रौशनी के तरफ अपने चेहरे को करता हैं .. उसके हॉट नाब रौशनी के होठों के काफी करीब थे .. रौशनी ने ानकेहिं बंद करि थी … सलीम अब मौका गवाने वाला नहीं था .. वह रौशनी के होठों को चूमने लगा ….

रौशनी आज दूसरी बार किसी को चुम रही थी .. इस बार सलीम को … दोनों गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी आज तोह सब हाडे पार कर रही थी … रौशनी इन बुद्धों के जाल में फस रही थी .. उसकी प्यास भी उसे उनके तरफ धकेल रही थी …

कुछ 5 मं किश के बाद रौशनी उठा कर घर के बहार भगति हुयी गयी ..उसके हिलती चूतड़ों को देख सलीम अपने लोडे को मसलने लगा … उफ्फ्फ रौशनी कहाँ भागोजी .. मेरे पास hi आओगी तुम .. तुम्हारी प्यास बढ़ रही हैं .. और यह बुद्धा तेरी प्यास बुझाएगा .. मेरे मोठे लोडे से तेरी मस्त छूट की चुदाई करूँगा .. बहुत देर नहीं अब मेरे लुंड की रानी रौशनी ….

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रौशनी पुरे दिन बस असलम और सलीम के साथ हुयी मस्ती भरी पलों के बारे में hi सोचती हैं .. उसका लकाम पर ध्यान भी नहीं लग रहा था … आज तोह वह दोनों के साथ बहुत hi घुल मिल कर हरकतें कर रही थी .. रौशनी सुर्पीसे थी खुद पर की क्तिनी हु आज उन दोनों के साथ मस्तियाँ कर रही थी .. अब शाम को तोह रमेश भी उसे घूमने ले जाने वाला था .. अब न जाने वह क्या करेगा.. उस दिन जैसे पार्क में ले गए तोह हु क्या करेगी .. इस बता में वह सोचती रही.

ऐसे दिन बीत गया .. रौशनी अब अपने पर्स को लेकर ंगो के बहार चली गयी .. वहां रमेश उसके इंतेज़्ज़र में था .. आज रमेश जी ने सफ़ेद शर्ट पहनी थी और ट्राउज़र्स.. नयी वाली लग रही थी रौशनी को .. आज तोह स्मार्ट बन कर आये थे रमेश जी .. रौशनी उन्हें ऐसे देख मुस्कुरा रही थी मन में … वह भी थोड़ी फ्रेश होकर आइये थी ऑफिस से .. आअज रमेश जी उसे कहाँ घूमने वाले हैं उसी के सोच में वह उसके पास चलती गयी..

रमेश रौशनी को अपने पास आते देख खुश था .. आज सच में रौशनी जी बहुत hi मस्त साड़ी में बहुत हॉट लग रही थी .. आज का ब्लाउज उसने पहना हुआ सबसे सेक्सी था .. स्लीवलेस तो था hi और डीप बैक कट भी लेकिन आगे से भी कट गहरा था … और उसकी कमर तो हफ़ वह उसकी गोरी मुलायम कमर का तोह दीवाना hi हुआ था .. उसका लुंड उसकी पंत में अपने औकात में ाँ शुरू भी हुआ था ..

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“नमस्ते रौशनी जी .. आज आप सुबह से और खिल उठ रहहि हो..”

“उफ़ रमेश जी जूठे कही के .. में दिन भर काम कर के आयी हूँ , कैसे आप बोल रहे हो खिल उठ रही हूँ .. आप भी न .. झूटी टैरिफ करते हो बस.”

“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत खिल उठ रही हैं… (है तेरी कमर , तेरी ब्लाउज उफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह सफर में बहुत मज़े से गुरुंगा तेरे इस गदरायी बदन को …)

आइये रौशनी जी बैठिये …” रमेश रौशनी को रिक्शा में बैठे देख रहा था .. जब रौशनी बैठने झूखी तोह उसकी चूतड़ों का गोल अकार रमेश देख रहा था .. (है क्या चूतड़ हैं रौशनी के .. मन करता हैं इन्हे दबोच लू .. उफ्फ्फ क्या गदरायी माल पायी हैं मैंने)

रौशनी को समझ आ रहा था की रमेश उसे घर रहे हैं .. वह मुस्कुरा रही थी मन hi मन … उसे रमेश जी के ऐसे नज़रों से अब इतनी आपत्ति नहीं होती थी …जब से वह दोनों पार्क में चुम्बन … उफ्फ्फ उसके बारे में सोचते hi रौशनी शर्मा जा रही थी.)

“अच्छा रमेश जी आज कहाँ ले जा रहे हो मुझे …”

“रौशनी जी यहाँ पास में एक फोर्ट हैं … वहां काफी लोग जाते हैं , काफी आप जैसे शहर में नए आये लोग जाते हैं .. बहार से भी कई कम सवारी कर भी लोग आते हैं इस फोर्ट ..”

“ववव रमेश जी मैनेसुना था इस फोर्ट के बारे में .. शहर से दूर हैं इसलिए वहां कभी जाना नहीं हुआ … वैसे काफी दूर हैं न .. कितना टाइम लगेगा सब कुछ देख कर मुझे घर वापस आने में.?

रौशनी जी 3 घंटे तोह लगेंगे .. देखो अब 6 बजे हैं .. 9 बजे तक घर पहुंचा दूंगा आपको.. चलेगा न …”

(उफ़ 9 बजे … इतनी लेट जाएगी तोह रोनित पूछेगा कहाँ गयी थी … उफ्फ्फ लेकिन वह भी तोह जाते हैं दोस्तों से मिलने देर रात तक .. में तोह बस 9 नबाजे तक घर पहुँच hi जाउंगी…)

“अच्छा रमेश जी 9 बजे तक घर चोर देना प्लीज.”

“हाँ रौशनी जी जरूर”

(उफ़ रौशनी जी अब 3 घंटे तोह मेरी हो तुम … मेरी कहते हैं न आज कल .. मेरी गर्ल फ्रेंड हो आप 3 घंटों के लिए …_)

फोर्ट कुछ 40 मं दुरी पर था …दोनों इधर उधर की बातें करते हुए फोर्ट तक पहुँच गए …

(उफ़ कितना बड़ा फोर्ट हैं … और काफी सारे टूरिस्ट्स भी हैं यहाँ .. सच कहा रमेश जी ने , बहुत hi पॉपुलर जगह हैं … बहुत मज़्ज़ा आएगा फोर्ट देखने )

“रौशनी जी जरा दूर हैं रिक्शा पार्किंग की जगह .. में वहां रक्षा लगा कर आता हूँ. “

रौशनी सर हिला कर वहां कड़ी रही फोर्ट के एंट्रेंस के बहार. रौशनी के तरफ सब मर्द घूरे जा रहे थे … वहां फोर्ट में लाइट से रौशनी सच में मस्त लग रही थी .. उसका गोरा बदन .. उसकी गदरायी फिगर देख मर्दों के लुंड खड़े हो रहे थे .. एक दो मर्दों के बीवियों ने तोह अपने पतियों के कान मरोड़े क्यूंकि वह रौशनी को घूरे जा रहे थे …

एक गाइड आया वहां रौशनी के paas.”Madam आपको गाइड की जरूरत हैं .. में बहुत अच्छा गाइड हूँ .. आसमा कर देखिये ..”वह जवान लड़का होगा और वह रौशनी के बदन को घूरे जार अहा था .. रौशनी समझ सकीय की जवानी के जोश का लड़का उसे देख घर रहा था .. वह उसे देख मुस्कुरायी ..”डिअर में कसी के सतह आयी हूँ , वह मुझे फोर्ट दिखाएंगे.”

“वह जवान लड़का बोलै “है मैडम .. कौन हैं वह लकी आदमी … आप जैसी पारी को फोर्ट ककी सैर करवाएगा … मैडम जी उन्हें छोड़िये में आपको दिखाऊंगा फोर्ट … और वह लड़का बेशरमी से रौशनी को देख आँख मारा … रौशनी उसकी बोल्डनेस देख चँउक उठी … लेकिन फिर मन में मुस्कुरायी .. ऐसे ओपनली बोल्ड जवान लड़के hi होते हैं … जवान खून हैं ः.

“वह उसे मुस्कुरायी और बोली “शुर्किया , लेकिन में जिसके साथ आयी हूँ वह आ hi रहे हैं …”

रमेश फिर आ गया और रौशनी के पास आया ..”रौशनी चले फोर्ट देखने ..”

वह जवान लड़का रौशनी और रमेश की बातें देख दांग रह गया .. इतना कला बुद्धा , हु भी ऐसी गोरी मेम के साथ … क्या जादू चलाया हैं बुड्ढे ने …. इतनी गदरायी माल पायी हैं इस बुड्ढे ने.”)

“मैडम अच्छा यह हैं आपके बॉयफ्रेंड … वह इस बुढ़ापे में भी ऐसी जवान गर्लफ्रेंड कहाँ से पटाया बुड्ढे …”

“बेशरम .. चुप कर ऐसे मत कहो रौशनी के बारे में .. मेरी ख़ास दोस्त हैं ठीक हैं .. चल जा अपने काम से काम रख.”

फिर रमेश ने उस जवान लड़के को जलने रप्शनि के हाथों को पकड़ लिया फिर रौशनी के कमर को भी …. चलिए रौशनी … फोर्ट की सैर करवाऊंगा ..”

रौशनी ऐसे हरकत से पहले तोह दांग रह गयी … रमेश बिना कुछ कहे सीधे उसकी कमर को जकड लिया था … लेकिन रौशनी को न जाने क्यों ऐसे बोल्डनेस रमेश जी की पसंद आने लगी… वह फिर उस लड़के को देखि की वह लड़का मन में कुछ बुदबुदा रहा था …

अब दोनों फोर्ट के अंदर चले गए .. रमेश ने अभी भी रौशनी की कमर जकड कर रखे था … उसकी उँगलियाँ रौशनी की मुलायम पेट के क्षेत्र में लाल निशाँ बनाये था .. इतनी गोरी थी रौशनी … वह अब ऐसे चल रहे थे मनो कपल हो .. वहां रौशनी भी कुछ बोल नहीं रही थी तोह इसलिए रमेश ऐसे hi उसके कमर पर हाथ डेल उसके साथ चल रहा था .. फिर से आस पास के सब मर्द उन दोनों को देख रहे थे … जलन से की ऐसे काळा बुड्ढे के साथ ऐसी गोरी मलाईदार माल कैसे हैं … वाहन के लेडीज तोह मन में बुदबुदा रहे थे उफ़ कैसे इस काळा बुड्ढे के सतह यह महिला जा रह हैं .. जरूर दोनों में चक्कर हैं .. साला बुद्धा मस्त मज़े लेता होगा इस जवान महिला के साथ…

रौशनी को सब की नज़र दिख रही थी और वह शर्मा रही थी .. वह धीरे से रमेश जी के कान में फुसफुसाई. “रमेश जी छोड़िये न मेरी कमर , सब लोग देख रहे हैं …”

“रौशनी जी क्या बता हैं फिर .. बस कमर पर हाथ hi तोह राखी हैं … चलिए न आप बस फोर्ट देखिये .. इस शहर की फेमस टूरिस्ट स्पॉट हैं .. आप इसके मज़े लीजिये.

(और में तुम्हारे साथ ऐसे मज़्ज़े लेता रहूँगा रौशनी डार्लिंग)

“हाँ रमेश जी हैं तोह बहुत hi खूबसूरत ये फोर्ट .. शुक्रिया आप मुझे यहाँ ले आये .. मुझे बहुत पसंद हैं आपकी चॉइस.”

“रमेश ने रौशनी के कमर को और कास कर पकड़ लिया … फिर रौशनी को देख बोले “हाँ रौशनी जी बहुत hi मस्त चॉइस रहती हैं मेरी हमेशा … “

रौशनी सोची की क्या रमेश उसे देख उसकी … नहीं नहीं फोर्ट की hi बात कर रहे होंगे रमेश ज.”

“रौशनी जी आप भी तोह मेरी चॉइस हो …”

“मतलब रमेश .. क्या मतलब आपका.”

“रौशनी जी आपकी साथ दोस्ती का चॉइस जो मैंने लिया उसकी बात कर रहा थूं … और रमेश फिर से रौशनी के कमर को और थोड़ा कास कर दबाता हैं …

“उफ़ रमेश जी धीरे से … आप तोह मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड सोच रहे हो क्या ..”

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“रौशनी जी में कब बोलै गर्लफ्रेंड हो आप मेरी .. और रही बात उसकी .. क्यों में आप जैसी जवान लेडीज को गर्लफ्रेंड नहीं बना सकता …”

“रमेश जी आप भी न , आप शादी शुदा हो .. आप कैसे गर्लफ्रेंड बनाओगे..”

“रौशनी जी क्यों नहीं अब इंग्लिश में अगर किसी महिला को फ्रेंड बनाऊ .. तोह महिला मतलब गर्ल और फ्रेंड मतलब दोस्त हैं न .. तोह अगर आप मेरी दोस्त हो और एक महिला हो तोह आप मेरी गर्ल .. और फ्रेंड .. मतलब गर्लफ्रेंड न बानी … और रमेश रौशनी को देख मुस्कुराता हैं. फ्रेंड हो तोह गर्ल फ्रेंड hi कहते है न …

“उफ़ रमेश जी इंग्लिश में ऐसे बस दो शब्द जोड़ने से उसका मीनिंग वही नहीं होता… गर्लफ्रेंड मतलब होता हैं …..”

“रौशनी जी रुक क्यों गयी बताइये न … गर्लफ्रेंड किसको बुलाते हैं… बताइये ..”

“उफ़ रमेश ज ऐकोर दीजिये .. में नहीं कह सकती ..”

“ओह हो शरमाते हुए कितनी खूबसूरत लग रही हो रौशनी जी … काश में सिंगल होता तोह आपको गर्ल फ्रेंड बनता .. फिर हम करते जो बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड करते हैं.”

“रमेश जी उफ़ आप भी न .. चलिए फोर्ट दिखाइए .. फिरत दिखने hi लाये थे न”

(फोर्ट गया तेल लेने .. तेरे साथ मज़े करने लाया हूँ तुझे रौशनी … इस फोर्ट में ऐसी जगह ले जाऊंगा जहाँ अपनी बेगू को ले गया था और बहुत मज़्ज़ाए किये थे उसके साथ)

रमेश तोह रौशनी की कमर पर अपनी पकड़ तोह चोर नहीं रहा था .. वहां रौशनी भी अब उन्हें ऐसे उसके कमर को पकडे रखने दे रही थी …. रौशनी को रमेश फोर्ट की लग अलग हिस्सों के बारे में थोड़ी जानकारी भी दे रहा था …

“रमेश जी आपको इस फोर्ट के बारे में इतना कैसे पता हैं.”

“रौशनी जी अब क्या कहु … रिक्शा चलने के साथ में शुरुवात में यहाँ गाइड का काम करता था ..”

“ओह अच्छा बिलकुल उस जवान गाइड की तरह रमेश जी ..”

“हाँ में अच्छा भी था .. लेकिन इसमें पैसे काम हैं .. बस टिप से काम चलता हैं और वह भी घर चलने में नहीं चलता रौशनी जी”

“अच्छा तोह आप ने गाइड बन कर काफी साड़ी महिलाओं को टूर दिया होगा .. यहाँ बहार के देश की गोरियां भी आती होगी न ..”

“रौशनी जी अब झूट नहीं बोलूंगा .. हाँ बहार के देश की गोरी लडीएसको गाइड करता था .. इसलिए तोह थोड़ी टूटी फूटी इंग्लिश आती हैं .. और समझ भी आती हैं .. में 2 साल गाइड का काम करा हूँ. और हाँ उसमें कई महिलाओं को दिखाया हूँ फोर्ट … लेकिन किसी को दोस्त या गर्लफ्रेंड की तरह नहीं घुमाया हूँ फोर्ट “ और रमेश रौशनी के तरफ सीधा देख मुक्सुराता हैं.

रौशनी तोह शर्मा hi रही थी . रमेश आज बार बार गर्लफ्रेंड का शब् इस्तेमाल कर रहे थे … उसे वह सुन शर्माहट महसूस हो रही थी.. और तोह और फोर्ट घूम कर 30 मं हुए थे और पूरा टाइम रमेश ने उसकी कमर पकड़े हुए hi उसे गाइड किया था …

अब रमेश रौशनी को एक थोड़ी सी सुनसान जगह ले गया .. “रौशनी जी गाइड होने का फायदा हैं की मुझे यहाँ के ऐसे चीज़ पता हैं जो टूरिस्ट को भी नहीं दिखता कोई … चलो देखते हैं ..

पहले की रौशनी कुछ बोलती रमेश उसे कमर से पकड़े हुए एक काम पॉपुलटेड एरिया में लेकर गया …

“रमेश जी कहाँ ले जा रहे हो मुझे उफ्फ्फ्फ़ … वाहन कोई नहीं हैं रमेश जी .. वहां नहीं चलते हैं.”

रमेश तोह सुन नहीं रहा था बस रौशनी केकमर को जकड़े उसे वहां उस जगह लगाया ..

रौशनी अब रमेश पर ग़ुस्सा होने hi वाली थी की उसे एक वह के तालाब के पास ले गया रमेश. तालाब की अस पास काफी सुन्दर फूल थे … तालाब तोह छोटा था लेकिन वहां आस पास ग्रास था और काफी सरे रंग बिरंगी फूल..

“रौशनी जी यह देखिये .. ख़ास आपके लिए … यह इस फोर्ट का तालाब हैं .. वैसे तोह प्यूरीन ज़माने से इसका कुछ तलूक तोह नहीं लेकिन फिर भी यहाँ के फूल अलग रंग के हैं .. काफी रंग बिरंगी .. इस स्पॉट की यहाँ के किसी भी गाइड बुक में ज़िकर नहीं हैं.”

“उफ़ इतस सो ब्यूटीफुल रमेश जी .. बहुत hi खूबसूरत …”

रमेश जी आपको पता हैं मुझे फूल इतने पसंद हैं .. आप बहुत अच्छे हो .. रौशनी फिर रमेश को गले लगाती हैं .. रमेश इस का मौका लेकर अपने हाथों को रौशनी की मुलायम पीठ पर और बाँहों पर फेरने लगा … रौशनी को वह महसूस हुआ और वह कुछ नहीं बोली … रमेश अब और बोल्ड होकर उसकी बाँहों को दबाने लगा फिर उसकी पीठ को दबोचने लगा … रौशनी फिर अपने हुग कोह तोड़ रमेश की आँखों में देखने लगी … रमेश भी उसकी आँखों में देख रहा था .. वहां पास की हलकी सी रौशनी अब दोनों पर दर्शा रही थी … रमेश और रौशनी एक दूसरे को देखते रहे .. फिर रौशनी अपने चेहरे को आगे की तरफ करि .. रमेश भी आगे अपनी होठोनो को कर फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे .. रमेश फिर से रौशनी को गले लगा कर इस बार जोरों से उसे चूमने लगा … उसे बाँहों में लेकर उसे मसलते हुए वह रौशनी की गुलाबी होठों को जोरों से चुम रहा था … रौशनी के हाथ रमेश के सर पर उसके बालों कोप हेर रहे थे और दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. निचे रमेश का लुंड अब पूरी औकात में आ चुक्का था और उसने रौशनी को गले से कसकर लगाया और उसका खड़ा लौड़ा रौशनी के नाभि से टकराया … रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों चुम्बन में लगे रहे .. रमेश अब अपने लोडे को रौशनी के पेट से कसकर दबाने लगा .. रौशनी के मुँह से आह निकली लेकिन फिर भी दोनों चुम्बन में लगे हुए थे .. रमेश अब रौशनी को कसकर दबोचा रखा था और बी अपनी जीभ को रौशनी के मुँह में डालने की कोषसिंह करने लगा .. पहले तोह रौशनी रेसिस्ट कर रही थी लेकिन धीरे से उसका मुँह खुल गया और रमेश के जीभ को अपने मुँह में स्वीकार करने दी … धीरे से रमेश की जीभ अब रौशनी की जीभ को ढूंढने लगी और उसे मिलते hi उसके जीभ से वह रौशनी के जीभ से उसकी अनादर का रास पिने लगा …. रमेश के हाथ अब रौशनी की चूतड़ों पर थे और वाहन उसे हलके से वह दबाने लगा ..

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रौशनी की मुँह से फिर से आह निकलने वह अपने मुँह को खोलने लगी लेकिन रमेश ने अपनी मुँह से उसके मुँह पर फिर से चुम्बन गाडी राखी …

अब दोनों की जीभ एक दूसरे क ेरस को पिने लगी थी …. रमेश ने रौशनी की चूतड़ों को और जोर से दबाया …

रौशनी भी काफी गरम हो चुकी थी .. वह भी रमेश को कास कर पकड़ राखी थी … उसे महसूस हुआ की रमेश का मोटा लुंड उसकी नाभि से टकरा रहा था … उससे उसकी छूट में हलचल होने लगी और हलके से छूट से पानी निकलने लगा .. वह भूल गयी थी की वह एक बुड्ढे से चिपकी हुयी थी अँधेरे में और उससे चुम्बन में लगी हुयी थी और बस आहें भर रही थी.

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रमेश अब आगे पीछे अपने लोडे को हिलने लगा और वह रौशनी की गरम और नरम पेट से दबता गया … उसके लुंड से भी थोड़ा प्रेकम निकला रहा था …

अब रमेश ने अपनी उँगलियों से रौशनी की पीठ पर एक चिमटी मारी. उससे रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों का चुम्बन टूटा … रौशनी अब काफी शर्मा गयी .. वह रमेश जी को एक गहरी चम्बां दी थी और उसकी जीभ से भी रास पिलाई थी … वह मुद कर दूसरी तरफ देखने लगी .. रमेश फिर पीछे से उसे जकड लिया और उसके लोडे को अब रौशनी की चूतड़ों में

“उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. ममम प्लीज मुझे छोड़िये …”

“रौशनी जी क्या सही क्या गलत … आप और में बस अपना प्यार जाता रहे हैं …”

“रमेश जी में आपसे प्यार नहीं करती उफ्फ्फ में शादी शुदा हूँ और आप भी .. और तोह और आप तोह ….”

“बुद्धा हूँ , रिक्शा ड्राइवर हूँ … हाँ बताइये .. दीजिये गालियां मुझे …. रौशनी जी मुझे आप बहुत पसंद हो .. मुझे आप hi चाहिए ..”

रमेश पीछे से अपने लोडे को अब जोरों से रौशनी की चूतड़ों पर दबाने लगा … रौशनी कुछ समय उस एहसास को महसूस करती रही और उसकी छूट गीली होती रही .. लेकिन फिर उसे याद आया वह क्या कर रही थी .. वह मुद गयी और उसने रमेश को एक जोरों का छाता मारा ..

“रमेश जी यह ज़बरदस्ती हैं .. मुझे नहीं चाहिए .. आप बहुत बुरे हो …”

रमेश उस थप्पड़ से थोड़ा ग़ुस्सा हुआ लेकिन वह अपने चेहरे पर वह ग़ुस्से को झलकने नहीं दिया…

“रौशनी जी आप को भी पसंद हैं यह सब .. आपने मुझे ऐसी गहरी चुम्बन दी .. और बी मुझे थप्पड़ मार दिया . आप के मुलायम हाथ ऐसे थप्पड़ मारने नहीं बने हैं डिअर ... उन्हें तोह प्यार hi करना चाहिए."

रमेश ने फिर रौशनी के हाथ क पकड़ कर उसे चूमने लगा … “रौशनी जी इन सच में हाथों को बस प्यार करना चाहिए और कुछ नहीं."

रौशनी हैरान थी की थप्पड़ मारने के बाद भी रमेश फिर से उसके हाथों को लेकर उसे चुम रहे थे …

“रमेश जी प्लीज चोरए .. में ऐसे नहीं कर सकती .. प्लीज आप फाॅर्स न करिये …”

“रौशनी जी फोरे कैसी .. मैंने आपको चुम्बन देने में कोई फाॅर्स नहीं करि .. आप खुद भी चाहती थी .. में बस आप के चुम्बन का साथ hi दिया ..”

रमेश ने फिर से रौशनी को जकड लिया .. और उसके गालों को चूमने लगा .. उसका लोढ़ा अभी भी टाइट था … रौशनी को अपनी अंदर गर्मी महसूस हो रह थी .. वह अपनी छूट को गीली महसूस करि .. उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे … क्या वह सच में रामश के साथ यह सब मस्तियाँ चाहती थी .. उसकी छूट क्यों गीली थी .. और उसे रमेश का खड़ा लोडे के उभर को अपने चूतड़ों पर , नाभि पर पसंद क्यों आने लगा था …

रमेश फिर से रौशनी के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर उसे चूमने आगे बढ़ा .. रौशनी भी किसी ट्रांस में थी वैसे आग झुक कर फिर से रमेश को चूमने लगी …

रमेश ने चुम्बन तोड़ दिया .. फिर रौशनी के बाँहों को चूमने लगा … उसे हलके से चाटने लगा .. रौशनी को ऐसी रमेश की हरकतों से और गर्मी मह्सुश हुयी .. बहुत दिनों बाद वह किसी मर्द के इतने करीब थी .. रमेश धीर धीरे से उसके बाँहों को चूमते हुए फिर निचे घुटनो पर जाकर रौशनी की नाभि को चूमने लगा .. फिर अपनी जीभ से उसकी नाभि में दाल वहां चाटने लगा …

“उफ़ रमेश जी मममम प्लीज न चूमिए .. उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. रमेश जी पलज़्ज़ज़्ज़ज़”

रमेश बस उसकी नाभि को चूमते रहा वहां अंदर चाटने लगा .. रौशनी अपनी नाभि में रमेश जी की चाटने से उसके सलीवा को महसूस कर रही थी .. न जाने क्यों इससे उसकी छूट और भी फुदकने लगी …. रमेश फिर खड़ा हुआ और रौशनी के मुलायम हाथों को अपने पंत के उभर पर रख दिया

“रौशनी जी देखिये न आपके वजह से मेरे अंदर इतनी गर्मी बढ़ गयी हैं की में पूरा हार्ड हुआ हूँ .. रौशनी जी यह आपके लिए सलामी दे रहा हैं .. इसे मेहसूस करिये .. इसे सहलाइये …”

“रमेश नहीं प्लीज में ऐसे उसे नहीं छू सकती .. उफ्फ्फ्फ़… रौशनी अब हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी .. लेकिन रमेश ने उसके हाथों को कास कर जकड़े रखा था और अपने लुंड के उभर पर रख दिया …

रौशनी न चाहते हुए भी अब उस लोडे के उभर से आकर्षित होते हुए वहां सहलाने लगी .. वह निचे देखि तोह सच में रमेश का मोटा लुंड पूरी तरह से खड़ा होकर बड़ा सा उभर बनाये हुए था … (उफ़ इस बुढ़ापे में भी रमेश जी का लुंड कितना बड़ा उभर दिखा रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ सच में बहुत मोटा होगा .. क्या वह असलम जी और सलीम जी के लुंड ाजिसे मोटा और बड़ा होगा उफ्फ्फ यह में ऐसे कसीस गैर मर्द के उभर को ऐसे सेहला रही थी उफ्फ्फ्फ़..)

रमेश ने अब रौशनी के हाथोंको पानी पंत के अंदर दाल अपनी अंडर वियर के अंदर भी डालने लगा .. रौशनी हाथ हटाने की कोशिश करती रही लेकिन रमेश काफी स्ट्रांग गृप रखे हुए थे .. उसका हाथ वह उसके हड्डी के अंडर जाते महसूस करि .. उफ्फ्फ बहुत गर्माहट थी उनके चड्डी के अंदर .. आखिर कर उसके हाथों में अब रमेश जी का मोटा लुंड था … उनका लुंड असलम जैसे कट नहीं था .. ऊपर अभी भी लुंड की चमड़ी थी … अब वह खुद से रमेश के लुंड की चमड़ी को निचे धकेल उसके मोठे लुंड के टोपे को सहलाने लगी ….

“अहह रौशनी जी आपकी नरम हाथ मेरे सख्त लोडे पर उफ्फ्फ्फ़ … ममम सेहलिये उसे और सहलाइये रौशनी जी .. मुझे पता हैं आपको मेरा मोटा लोढ़ा पसंद आया हैं .. और सहलाइये इसे ममममम”

“नहीं रमेश जी प्लीज … नहीं …” रौशनी नहीं तोह कह रही थी लेकिन फिर भी प्यार से रमेश के लोडे के टोपे को सेहला रही थी .. उसके अनादर गर्मी बहुत बढ़ गयी थी … उसकी छूट काफी गीली हो चुकी थी .. इतना मोटा लोढ़ा .. रमेश जैसे बुड्ढे का भी हो सकता हैं .. उसी के बार में सोचती हुयी उसके लुंड को सहलाने लगी ….

रमेश देख सकता था की रौशनी के अंदर गर्मी बढ़ रही थी .. वह फिर से रौशनी के गुलाबी होठों को चूमने लगा … इस बार रौशनी अब रमेश के लोडे को सेहला रही थी और ऊपर दोनों फिर से गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. इस बार रौशनी की आँखें बंद थी .. उसे अब इस सब का थोड़ा मज़्ज़ा आ रहा था … वह अब सोच नहीं रही थी बस अपनी गर्मी की गुलाम बन चुकी थी .. ऊपर रमेश जी के काळा होठों को वह चुम रही थी और निचे उसके काळा मोठे लोडे को सेहला रही थी .. वह काफी गरम हो चुकी थी .. बहुत दिनों बाद किसी के लोडे को ऐसे सेहला रही थी …

सर्दी का मौसम था लेकिन दोनों के बीच काफी गर्मी थी …

अब रमेश फिर से रौशनी की चूतड़ों को दबाने लगा … वह अपने हाथों को ऊपर की और उठा कर पीछे से रौशनी की ब्लाउज में डालने लगा … अपने दो उँगलियों को अब वह रौशनी की ब्लाउज में दाल चुक्का था … फिर वहां से निकलकर वह अपने हाथों को आगे की तरफ से रौशनी की ब्लाउज पर रख वहां दबाने लगा … रौशनी ए.बी.ए. यह भर रही थी … वह खुद को खो चुकी थी .. उसे कुछ ध्यान नहीं था वह कहाँ हैं , किसके साथ कैसी अश्लील हरकतें कर रही थी …

अब सन ऐसा था की रौशनी रमेश के मोठे लोडे को सेहला रही थी और रमेश ऊपर से , आगे से रौशनी की ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाते रहा …

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फिर उन्ह ीक विस्सल की आवाज़ सुनाई दी .. कोई वॉचमन वहां सीटी बजा रहा था ..

दोनों घबराते हुए वहां से निकल गए … रौशनी के हाथों को रमेश पकड़ के वहां से वह भागते गए .. रौशनी की चूचियां अपने ब्लाउज में ऊपर निचे हिल रहे थे और दोनों एग्जिट तक भागते गए ..

फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर वहां से निकल गए …

रौशनी रिसकशव में बैठे गुइली फील कर रही थी .. (उफ्फ्फ्फ़ यह में क्या कर रही थी .. उफ्फ्फ हम दोनों पकड़े जाते तोह .. उफ़ और वह आज रमेश जैसे बुड्ढे से ऐसी अश्लील हरकतें कैसे कर रहे थी .. वह काफी ऐम्बर्रास फील कर रही थी …)

पुरे रस्ते तक दोनों बात नहीं कर रहे थे … ऐसे hi बिना कुछ बातें किये अब वह रौशनी के घर पहुँच गए …. रौशनी अब रिक्शा के बहार उतर कर अपने घर की तरफ जाने लगी …

रमेश पीछे से रौशनी की हिलती चूतड़ों को देख (उफ़ आज तोह ज्यादा hi मस्ती करि .. उफ्फ्फ क्या कल रौशनी जी मुझसे बातें करेगी … उफ्फ्फ आज तोह उसको अपने लोडे को सहलाने दिया .. ए.बी.ए. आगे जाकर इस लोडे से इसकी चुदाई करनी दूर नहीं … उफ्फ्फ्फ़ और रमेश अपने लोडे को मसलते हुए वहां से निकल गया…

10 बज गए थे .. रोनित अब रौशनी के इंतेज़्ज़र में सोफे पर बैठा था…. काफी ग़ुस्से में उसके इंतेज़्ज़र में.
 
रौशनी अब घर पहुँच गयी .. अंदर आते hi वह देखि की रोनित उसका इंतज़ार कर रहे थे ..

“रौशनी कहाँ थी तुम , तुम्हारी इवेंट शाम को 7 बजे ख़तम हुयी थी न ..”

रौशनी अब क्या बताती की वह कहाँ थी अब तक .. कैसे बताती की वह रमेश जी के साथ थी इतनी रात तक और जो कुछ हुआ था वहां ..

रौशनी फिर झूट बोलने लगी

“डिअर में वहां उस इवेंट के बॉस उसी ंगो के मेरे लोगों के साथ थी … इवेंट की कामयाबी को सेलिब्रेट करना था उन्हें .. इसलिए लेट हुआ”

“रौशनी बताना तोह चाहिए था न में यहाँ तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ .. वहां के किसी का नंबर भी नहीं हैं मेरे पास ..”

“ी ऍम सॉरी डिअर अगली बार बताउंगी तुम्हे ..”

फिर रोनित कुछ बोले नहीं बस मुझे देखे कुछ पल .. मुझे बहुत दुःख जो रहा था की में उनसे झूट बोली … बहुत गिलटी फील कर रही थी में … पहले की में कुछ और बोलती वह मुद कर बैडरूम जाने लगे .. में वहां बहार गुइली फील करते हुए कड़ी रही ..

मुझे रमेश के साथ पल बिताये हुए याद आने लगे .. में कैसे उनके साथ वह सब कर रही थी .. उफ्फ्फ यह मुझे ऐसे क्या हो रहा था .. किसी गैर मर्द के औज़ार को में कैसे अपने हाथों में ले सकीय … उनके बड़े लुंड के बारे में सोचते हुए वैसे में गरम भी हो रही थी … उफ़ इतना बड़ा हैं उनका बुड्ढे होकर भी … उफ्फ्फ्फ़ यह मुझे उनके बारे में सोच ऐसी ागर्मी क्यों लग रही हैं उफ्फ्फ्फ़ .. कम्बक्त मेरे पति भी मेरी प्यास बुझा नहीं रहे हैं इतने दिनों से उफ्फ्फ्फ़ मुझे hi अब कुछ करना होगा ..

में वाशरूम चली गयी .. गरम पानी से नहाने के बाद में खुद को आईने में देख रही थी ..

“रौशनी तू इतनी मस्त फिगर वाली हैं … बहुत फिट .. लेकिन तेरे hi पति से ज्यादा गैर मर्द तेरे बदन के लिए तड़प रहे हैं .. उफ्फ्फ यह रोनित भी मेरी प्यास क्यों नहीं बुझा रहे हैं .. मुझे hi कुछ करना होगा ..

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रौशनी अपने बदन पर एक परफ्यूम लगायी .. फिर एक अच्छी से नेट वाली ब्रा पहनी और एक सिल्क पंतय .. बालों को स्ट्राइटें करके .. लिप्स पर स्टामेअव्वरर्य कलर की लिप बाम लगा कर वह आज रोनित को सडके करने और अपनी प्यास बुझाने तैयार हो गयी थी ..

फिर वाशरूम का दरवाज़ा खोल वह रोनित के तरफ देखि .. रोनित अब रौशनी को देखे जा रहा था .. रौशनी को अपने पति की ऐसी नज़र से शर्म आ रही थी .. वह अपनी चूतड़ों को मतलाते हुए अपने पति के पास चली गयी …

“रंजीत कैसी लग रही हूँ में …” और रौशनी अब एक कामुक मुस्कान से रोनित को देखने लगी ..

रोनित बस रौशनी को देखे hi जा रहा था .. बहुत दिनों बाद रौशनी मूड में आ रही हैं सोच कर उसका भी लुंड खड़ा होने लगा … वह अब धीरे से रौशनी के नग्न कमर को अपने हाथों से पकड़ने लगा .. उसका लुंड भी अब खड़ा हो hi रहा था ..

उसने रौशनी को अपने तरफ खींच लिया और ओने बाँहों में उसे भर लिया .. रौशनी शरमाते हुए अब रोनित के आँखों में देख रही थी … वह अंदर से बहुत गरम हो गयी थी .. वह चाहती थी की रोनित उसे आज रात भर प्यार करे और सोने न दे .. दोनों फिर एक दूसरे को चूमने लगे … गहरी फ्रेंच किश में दोनों पति पत्नी लग गए .. रोशिनी महसूस कर सकीय की रोनित का लुंड अब सख्त होने लगा था .. वह अपनी निचली होठों को कामुकता से काटने लगी …

उसके हाथ अब रोनित के पंत पर उसके उभर पर थे और वह उसे वहां रगड़ने लगी … उसकी आँखें बंद हो गयी … जैसे उसके आँखें बंद हो गयी कुछ सेकंड बाद उसे अचानक सलीम के साथ ऐसे जो किया था उसकी याद आने लगी … उसके बड़े उभर को सहलाने की सोचने लगी .. उसकी छूट और बी गीली हो स रही थी उस सोच से ..

लेकिन कुछ और सेकंड बाद उसे होश आया और याद आया की वह रोनित के साथ थी न की सलीम के साथ … (उफ़ यह में रोनित के साथ होकर भी सलीम की क्यों याद कर रही थी .. उफ्फ्फ ये क्या हो रहा हैं मुझे उफ्फ्फ) ऐसे सोचते हुए रौशनी अपना हाथ रोनित के उभर के ऊपर से हटाने लगी..

“रौशनी उफ्फ्फ मम क्या हुआ हाथ क्यों निकल रही हो ममममम उफ्फ्फ्फ़ और करो न ममम”

रौशनी गिलटी फील कर रही थी … “रोनित .. ऐसी कोई बात नहीं” … और वह फिर से रोनित एक उभर को महसूस करने लगी अपनी नाज़ुक हाथों को वहां फेरने लगी …

रोनित ने अब रौशनी को पकड़ लिया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया .. वह अपनी पंत निकलने लगा .. रौशनी रोनित को अपनी पंत निकलते देखने लगी .. वह बहुत गर्म हो चुकी थी .. उसकी पंतय पूरी गीली हो चुकी थी और उसकी छूट के रास से भीगी हुयी थी ..

रोनित ने अपनी पंत और शर्ट उतरी .. वह बस अपने चड्डी में hi अब रौशनी के सामने खड़ा था ..

रौशनी अब रोनित के उभर को देखती रही … लेकिन उसे वहां रोनित की चड्डी की उभर नहीं बल्कि असलम किले चड्डी से उसके बड़े से उभर की याद आयी … रौशनी की छूट उस याद से और भी गीकी हो रही थी .. उसकी वासना और भी बढ़ रही थी .. न की अपने पति के लुंड की उभर देख बल्कि असलम के लुंड के बड़े उभर के बारे में सोचते हुए उसकी वासना बढ़ रही थी.

उसने अपनी आँखें बंद कर लिए ुर बस असलम के बड़े लुंड के उभर की hi सोचती रही … उसकी छूट और भी गीली हो रही थी और उसकी वासना बहुत बढ़ रही थी ..

कुछ पल बाद उसने अपनी आँखें खोली तोह रोनित को सामने पायी .. मन में सोचती रही (उफ़ रौशनी ये तुझे क्या हो रहा है. .. उफ्फ्फ तुम असलम के बड़े लोडे की उभर के बार में क्यों इमेजिन कर रही हो उफ़ यह तुझे क्या हो रहा हैं. .. खुद पर काबू प् ले रौशनी उफ्फ्फ

अब रोनित अपनी चड्डी निचे करने लगा .. उसका लुंड अब रौशनी के सामने लटक रहा तह ा .. पूरा सख्त था और उसके लुंड से प्रेकम भी निकल रहा था .. रौशनी तोह बहुत गरम हो चुकी थी ..

वह अपने हाथों से रोनित के सख्त लुंड को रगड़ने लगी थी … उसके लुंड को रगड़ते उसकी आँखें फिर से बंद हो गयी ..

अब इस बार वह आँखें बंद कर रमेश के लूज़ के बारे में सोचने लगी .. उफ़ इतना बड़ा कला साल ुण्ड था … इतना बड़ा मनो उसकी छूट में घुस जाए तोह अंदर तबै मचा दे … आज उसने रमेश के मोठे लोडे को सहलाया था पार्क में … उसी के बारे में सोचते हुए वह और भी गरम हो रही थी .. वह बस रमेश के लोडे को सहलाने की सोच रही थी … उसकी छूट बहुत गीली हो चुकी थी .. रमेश के मोठे लुंड की सोच से …

रौशनी की आँखें खुली तोह वह फिर से रोनित को सामने देख सोचती रही .. (उफ्फ्फ रौशनी यह तोह हद हो गयी .. पहले सलीम जी फिर असलम जी और अब रमेश जी .. अपने पति के साथ होते हुए भी तू उनके बारे में कैसे सोच रही हो उफ्फ्फ्फ़ .. यह तुज्झे क्या हो रहा हैं .. तू अपने पति को चोर उन गैर मर्दों के लुंड के साथ किये मस्तियों के बारे में क्यों सोच रही हैं उफ्फ्फ ये क्या कर रही हैं तू उफ्फ्फ्फ़ अपने पति से मस्ती करने पर ध्यान दे .. उफ्फ्फ्फ़)

अब रौशनी उठ कर रोनित के लुंड को मुँह में लेकर चूसने लगी …

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उसका लुंड बहुत सख्त हुआ था .. रौशनी खुश थी की आज बहुत दिन बाद उसकी प्यास बुझने वाली हैं … अपने पति से आज वह जी भर कर चुदाई करेगी …

वह रोनित के लुंड को चुस्ती रही .. रोनित उसके बालों को पकड़ कर उसकी मुँह की चुदाई करने लगा .. उफ्फ्फ अहह मम की आवाज़ें निकलते हुए अब वह रौशनी से अपने लुंड की चूसै कर रहा था .. रौशनी की छूट से बहुत पानी बहने लगा था .. वह आज बहुत दिन बाद छोड़ने वाली थी ..

कुछ 10 मं रोनित का लुंड चूसने के बाद अचानक उसे महसूस हुआ की रोनित उसके सर को जोरों से जकड रहा था ..

रोनित आह उफ़ की जोरों से आवाज़ें करने लगा … उनकी ऐसी आवाज़ें सुन रौशनी सोची (उफ्फ्फ क्या रोनित अभी से hi झड़ने वाले हैं उफ्फ्फ वह ऐसी आवाज़ें झड़ने के पहले hi करते हैं .. उफ्फ्फ नहीं रोनित मुझे तोह छोड़ना हैं तुमसे .. उफ्फ्फ नहीं ..)

लेकिन रौशनी कुछ कर न पायी .. रोनित अब झरने के करीब था .. रोनित ने अपने लुंड को रौशनी के मुँह से निकल कर वह फिर उसके चेहरे पर झरने लगा .. “अह्ह्ह रौशनी उफ्फ्फ मममम आह्हः में जहर रहा हूँ रौशनी उफ्फ्फ्फ़..” रोनित हाफने लगा

रोनित कुछ सेकंड बाद पूरा जहर चूका था .. उसके लुंड का पानी अब रौशनी के चहेरे पर था .. और रोनित साइड में थके हुए लेट गया ..

रौशनी पूरी असंतुष्ट अब रोनित के बगल में लेती हुयी थी .. उसके अंदर की गर्मी अभी भी थी .. वह अभी भी चुदाई के लिए तरप रही थी .. लेकिन उसके ोाती चुदाई से ोेहले hi जहर चुके थे … उफ्फ्फ क्या आज भी उसकी प्यास अधूरी रह जाएगी … रौशनी का मूड पूरा ख़राब हो चूका था ..

रोनित तोह कुछ 10 मं सो भी चुके थे .. रौशनी बस बिस्तर पर लेती थी .. उसकी प्यास अभी भी अधूरी सी ..

रौशनी अब आँखें बंद करती हैं और उसे आज रात को हुए रमेश के साथ इंसिडेंट की याद आती हैं .. रमेश का बड़ा लुंड जो वह प्यार से सेहला रही थी उसकी याद आती हैं और वह गरम होने लगती हैं .. उसकी उँगलियाँ उसकी छूट की तरफ चली जाती हैं अउ रमेश के बड़े लुंड के बारे में सोचते हुए अपनी छूट को सहलाने लग जाती हैं … (उफ़ क्या मोटा लोढ़ा था रमेश जी का .. बुड्ढे होकर भी रोनित से भी बड़ा और कला सा. उफ्फ्फ्फ़ में एक बुड्ढे के मोठे लुंड से खेल रही थी .. )रौशनी अब थोड़ी और तेज़ी से अपनी छूट से कहने लगती हैं …. रमेश का कला लुंड उसके आँखों के सामने झूल रहा होता हैं और वह अपनी छूट से खेलती रहती हैं … उसके मुँह से एक चोट सी आह निकलती हैं तब उसे एहसास होता हैं की रोनित उसके तरफ मुद लिया हैं … रौशनी सेहम जाती हैं और अपनी छूट सेउंगलियों को निकलकर बाथरूम में चली जाती हैं …

बाथरूम में वह अंगी होकर अपने बदन को आईने में देखती हैं ..(रौशनी तू इतनी सेक्सी हैं और तेरे पीछे तोह तीन बुड्ढे पड़े हैं .. तीनो ेके तोह इतने बड़े लुंड हैं उफ्फ्फ्फ़ .. और रहे तीरे पति उन्हें तोह तेरी कदर hi नहीं… उफ्फ्फ्फ़ ये गैर मर्द मेरे पति से ज्यादा hi हवस भरी नज़र से मुझे देखते हैं उफ्फ्फ्फ़ … रौशनी फिर से अपनी छूट से खेलने लगतीहैं .. अब उसकी आँखें बंद करती हैं और उसके सामने कभी असलम का लोड, तोह कभी सलीम का लोढ़ा तोह कभी रमेश का लोढ़ा hi घूमता हैं और वह अपनी छूट से खलती रहती हैं .. उफ्फ्फ क्या बड़े लुंड हैं तीनो के उफ़ मममम अगर मेरी चुदाई करे तोह उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह .. रौशनी के मुँह से हलकी सी आवाज़ें निकलती यहीं .. और वह अपनी छूट से खलती रहती हैं … कुछ मिनट बाद उसकी छूट से पानी बहने लगता हैं .. रौशनी तीनो बुद्धों के लुंड के बारे में सोचते हुए आज पहली बार जहर चुकी थी …

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फिर अपनी ानकेहिं खोल कर अब उसे उस बात पर शर्मिंदगी महसूस होती हैं ..

रौशनी अब बिस्तर पर चली जाती हैं … वहां लेट कर अपनी ानकेहिं बंद कर वह सोचने लगती हैं (उफ़ रौशनी आज तूने ये क्या किया .. तीन बुद्धों के लुंड के बारे में सोचते हुए मुठ मार ली उफ्फ्फ्फ़ … लेकिन दोष मेरे पति का hi हैं .. मेरी प्यास बुझाते तोह में ऐसे गैर मर्दों की बारे में अश्लील बातें नहीं सोचित …. उफ्फ्फ अब मेंक्या करू … क्या मुझे उन बुद्धों को बढ़ावा देना चाहिए .. क्या मुझे उनसे hi अपनी प्यास बुझानी चाहिए … उफ्फ्फ्फ़ कोई तोह मेरी प्यास बुझाओ उफ्फ्फ्फ़..)

और रौशनी को नींद लग जाती हैं…

सुबह रौशनी बाथरूम में कल रात की बातों के बारे मेंसोचते हुए मन hi मन शर्माती हैं .. वह नहाने लगती हैं और फिर से उसकी आँखों के सामने तीनो के बड़े लोडे घूमने लगते हैं .. उसकी उँगलियाँ फिर से उसकी छूट से कहने लगती हैं … अहह उफ्फ्फ मम की आवाज़ें निकलती हुयी रौशनी अपनी छूट से खेल रही होती हैं .. की अचानक उसे रोनित उसके पति की आवाज़ सुनाई देती हैं और उसकी आँखें खुल जाती हैं .. फिर से अपने आप को उन तीन बुद्धके लुंड के बारे में सोचते हुए पाकर रौशनी फिर से शर्मिंदगी से उसके गाल लाल हो जाते हैं …

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नाहा कर वह बहार आती हैं तोह रोनित नाश्ते के लिए हॉल से बोलने लगता हैं .. रौशनी नाश्ता बनती हैं और फिर अपने जॉब के लिए तैयार होने रूम में आती हैं .. आज पता नहीं क्यों लेकिन रौशनी का मूड काफी अच्छा था .. वह आज रमेश से मिलने कुछ ज्यादा hi उतावली थी .. आज वह कुछ ज्यादा मेक उप लगाती हैं .. एकस्लीव्लेस काफी डीप बैक ब्लाउज पहनती हैं .. अपनी ऊपर परफ्यूम लग एते हुए .. लाल लिपस्टिक और लम्बी बालियान पहने हुए वह कमरे के बहार आती हैं …

उसे ऐसे देख रोनित बस उसे देखते hi रहता हैं .. उसका लुंड खड़ा होने लगता हैं .. वह अब रौशनी को अपने करीब खींचता हैं … “उफ़ रौशनी . आज किस को घायल करने जा रही हो ….”

“रजत कुछ भी बोल रहे हो , चलो चोरो मुझे , लेट हो रहा हैं काम के लिए …”

“अरे डिअर होने दो लेट .. ऐसी गज़ब लग रही हो .. जरा मुझे तोह प्यार करने दो …”

“रोनित कल दिया थान ा मौका .. आप तोह से क्ससे पहले hi फ़िराक हो गए .. अब मुझे जाने दो लेट हो रहा हैं मुझे.”

“सॉरी डार्लिंग बस थक गया था .. उफ्फ्फ नाराज़ न होना .. “

“अच्छा ठीक हैं रोनित अब मुझे चोर दो , काम पर जाना हैं मुझे ..”

रोनित रौशनी को चूमता हैं और फिर उसकी पकड़ लूसे करता हैं … अज्ज रौशनी का मूड बिलकुल नहीं था रोनित के लिए .. वह तोह आज रमेश से मिलने hi ज्यादा उतावली थी..

रौशनी फिर निचे चली जाती हैं जहाँ रमेश उसका इंतज़ार कर रहा हैं … रौशनी को देख रमेश का ोडा फिर से झटका मारने लगता हैं .. यह सोचता हैं की आज तोह रौशनी और भी क़यामत बन कर आ रही हैं .. रौशनी भी रमेश को देख मुस्कुराती हैं ..

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“रौशनी जी आज तोह आप धमाका लग रही हो .. उफ्फ्फ बहुत अच्छी लग रही हो आज आप”

“रौशनी मुस्कुराती हैं ..”रमेश जी बहुत हुआ आपकी इन झूटी तारीफों से . चलिए जाते हैं , मुझे लेट हो रहा हैं …”

रमेश थोड़ा बोल्ड होता हैं .. वह रौशनी के पास आता हैं और उसकी कलाई पकड़ लेता हैं ..

“रमेश जी क्या कर रहे हो छोड़िये न ,, कोई देख लेगा .. उफ्फ्फ्फ़ आप ज्यादा hi नटखट बन रहे हो …”

“रौशनी जी आप ने hi तोह इस बुड्ढे को जवानी का शॉट दिया हैं … कल तोह बहुत मस्ती में आप एन्जॉय कर रही थी .. और आज हैं की ..”

“रमेश जी कल गलती हुयी , फिर से ऐसे नहीं बहक जाउंगी .. आप तोह हैं hi शैतान .. आप से तोह बच कर hi रहना चाहिए.”

रमेश थोड़ा और बोल्ड होता हैं और उसके हाथों से रौशनी के कमर को चुने लगता हैं..

“रमेश जी कुछ ज्यादा hi नहीं बोल्ड हो रहे हो आप …”

“बोल्ड मतलब रौशनी जी .. में बोल्ड हो रहा हूँ मतलब ..?”

“रमेश जी मतलब ज्यादा उतावले हो रहे हो .. बस अब छोड़िये मुझे लेट होगा काम पर …”

“रौशनी जी छोड़िये न आज मेरे साथ वक़्त बिताइए .. कल रात जैसे और मस्ती करेंगे ..”

“फणेष जी कल हो हुआ उसे भूल जाओ , फिर से ऐसा कभी नहीं होगा”

रमेश इस खेल में माहिर खिलाडी था … फिर झट से रौशनी को चोरड एटा हैं .. “चलिए फिर नहीं करेंगे … में आपको ड्राप करता हूँ ंगो .. आप कोई और hi रिक्शा अला ढूंढ लो…”

रौशनी इस अचानक से बदलाव से थोड़ी सेहम जाती हैं ..

“रमेश जी आप तोह नाराज़ हॉग ए हो ..आप ने बस दोस्ती बोली थी … अब आप कुछ ज्यादा hi मांग रहे हो .. प्लीज आप नाराज़ न होना … बस आज मुझे काम पर काफी लेट हो रहा हैं .. चलिए न प्लीज रमेश जी ..”

रौशनी रमेश को देख मुस्कुराती हैं ,,,

“रौशनी जी चलिए .. हमारी वजह से आपको लेट नहीं होना चाहिए … आप को अमीषा टाइम पर पहुँचाने का वाद आलिया हु …”

“ॉव रमेशः जी आप बहुत स्वीट हो”

रमेश मन में (अभी स्वीट हूँ जानेमन … और दिन रुको फिर गर्मी और बढ़ाऊंगा तेरे अंदर … तू अब मेरी बन कर hi रहेगी मेरी चमक चलो…”

फिर दोनों रिक्शा में बैठ ंगो के लिए निकल जाते हैं.

अब ंगो में रौशनी काम पर लग जाती हैं .. दुपहर के टाइम सलीम वहां ऑफिस आता हैं..

“रौशनी जी नमस्ते .. कैसी हो आप आज.”

“सलीम जी वेलकम .. आइये न .. में बहुत छी हूँ सलीम जी .. कल का इवेंट बहुत अच्छा रहा …”

“हाँ रौशनी जी बहुत मस्त रहा … सलीम अब रौशनी के कमर पर नज़र डालता हैं .. उसकी गोरी चिकनी कमर देख उसका लोढ़ा टाइट होने लगता हैं .. फिर उसकी नज़र रौशनी के गुलाबी होठों पर जाती हैं .. उसकी पतली सी होठों पर .. जिसे वह बेतहाशा चूमना चाहता हैं..)

रौशनी यह सब नोटिस कर रही थी .. वह कल रात के इंसिडेंट की सोचने लगती हैं. वह सलीम के चेहरे को शर्मिंदगी से देख नहीं प् रही हैं अब …

“रौशनी जी वैसे मैंने आप से कुछ दिन पहले पूछा था की क्या आप मेरे यार के बेटी की शादी में आने वाली हो मेरे साथ .. आपने कोई जवाब नहीं दिया अब तक ..”

“उफ़ सलीम जी बहुत काम हैं यहाँ .. ऐसे 3-4 दिन छुट्टी नहीं निकलपाउंगी .. आप कसी और के साथ जाइय.. मीनल हैं न वह तोह आपके साथ जाने के लिए तैयार hi होगी..”

“रौशनी जी मुझे बस आपके साथ जाना हैं .. मेरे दोस्त को मेरी नयी मैडम से मुलाक़ात करवानी हैं … आप आओगी तोह उस फंक्शन पर चार चाँद लग जाएंगे .. आप आइये न.”

“सलीम जी प्लीज बात समझिये .. में नहीं आ सकती …”

“रौशनी जी इसका मतलब हैं आपको मेरी दोस्ती पसंद नहीं .. आप मुझे दोस्त नहीं मानती ..”

“सलीम जी ऐसे कुछ नहीं .. आप मेरे दोस्त हो .. लेकिन .. काम भी तोह इम्पोर्टेन्ट हैं न ..”

“रौशनी जी दोस्तों के लिए तोह जान हाज़िर करते हैं … आप से तोह बस 3 दिन के लिए एक इवेंट पर आने की hi मांग कर रहा हूँ .. आप हमारी दोस्ती के खातिर इतना भी नहीं कर पाओगी…”

रौशनी कुछ पल शांत रहती हैं … कुछ बोलती नहीं

“रौशनी जी आपकी शान्ति को ना समझ लूंगा … आपक और हमारी कोई दोस्ती नहीं हैं .. आप दोस्ती के खातिर इतना भी नहीं कर सकती .. में hi पागल था की में सोच रहा था आप जैसी महिला मेरे जैसे गरीब बुड्ढे की दोस्त बनेगी ..”

(रौशनी के मन में तोह बस कल रात की थॉट्स आने लगी .. कल उसने सलीम के लुंड को िमग्ने कर मुठ मारी थी .. उफ्फ्फ अगर वह उनके साथ जाएगी तोह सलीम जी के प्रति उसके उभरते भावनाओं पर वह कण्ट्रोल कैसे करेगी .. रौशनी की नज़र सलीम के लोडे के क्षेत्र पर जाती हैं .. उफ्फ्फ उनका बड़ा लुंड .. अगर उनके साथ गयी तोह कुछ भी .. उफ्फफ्फ्फ़ .. क्या करे ….)

“सलीम जी आज का दिन दीजिये .. प्लीज .. कल तक बता दूंगी आपको .. प्लीज एक दिन और दीजिये …”

सलीम खुश था की रौशनी ने फिर से मन तोह नहीं करा हैं … “ठीक हैं रौशनी जी .. लेकिन कल तक आप बता दीजिये .. में आपकी हाँ का इंतेज़्ज़र करूँगा … में जाता हूँ अब खुदा हाफ़िज़.”

सलीम उठ खड़ा हुआ तोह रौशनी की नज़र साली के उभर पर गयी .. (उफ्फ्फ उनका मोटा लुंड सख्त हो रहा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ ..)

सलीम को महसूस होता हैं की रौशनी उसके उभर को देख रही हैं .. वह जान बुझ कर थोड़ा आगे सरकता हैं … अब रौशनी के काफी करीब सलीम का उभर हैं… रौशनी के अंदर गर्मी बढ़ रही थी .. वाहदेख प् रही थी की सलीम का लोढ़ा उसकी पंत में झटका मर रहा हैं .. शर्मा कर वह अपनी आँखों को फेर लेती हैं …

सलीम मुस्कुराता हुआ … फिर वहां से चला जाता हैं ..

रौशनी अपने टेबल पर बैठे बस सलीम के उभर की सोचने लगती हैं .. उफ्फ्फ इतना मोटा हैं सलीम जी का ..मममम और वह महसूस कर रही हैं की उसकी पंतय थोड़ी गीली हो चुकी हैं .. उफ्फ्फ रौशनी खुद पर काबू पा ले .. कुछ ज्यादा hi हो रहा हैं अब …

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मुश्किल से रौशनी फिर अपने कामों में लग जाती हैं.
 
शाम का वक़्त हुआ होता हैं और रौशनी अपनी आखरी काम निपटा लेती हैं .. उसे असलम से भी जाकर मिल ा था .. रौशनी फिर असलम के वहां चली जाती हैं .. सलीम गया हैं मीनल की चुदाई करने .. रौशनी को इसकी कोई भनक भी नहीं हैं ..

वह घर के अंदर जाती हैं और अस्काम मियां असलम मियां कर के मधुर स्वर से पुकारती हैं .

असलम तोह रौशनी के hi इंतज़ार में था ..

“रुकसाना बेगुन रुकिए में आ रहा हु. …

रौशनी को देख असलम के लुंड में हलचल होने लगती हैं .. िफ्फ़ आज तोह और भी क़यामत लग रही थी रौशनी .. उसके गुलाबी होठं और उसका मेक उप .. असलम का मन करता हैं उसे बाँहों में लेकर चुम ले :.

जैसे hi रौशनी उसके करीब आती हैं वह उसे जकड लेता हैं और उसके गलों पर चूमता है. ..

असलम के ऐसे बोल्डनेस से रौशनी सरप्राइज होती हैं.

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“उफ़ असलम मियां क्या कर रहे हो उफ़ मम छोड़िये न ममम”

“रुकसाना बेगम बहुत मिस किया तुम्हे .. उफ्फ्फ करने दो न तुमसे थोड़ा प्यार ..”

“छोड़िये न उफ्फ्फ सलीम जी देख लेंगे ..”

“अरे देखने दो न उसे … तू मेरी बेगम हैं .. में तुम्हे प्यार करू तोह उसे क्या .. वैसे भी हु कही बहार चले गए है. .. “

“असलम मियां उफ्फ्फ आप बड़े hi नटखट हैं उफ्फ्फ ममम मुझे ठीक से अंदर तोह आने दीजिये न उफ्फ्फ्फ़ “

“हाँ जरूर आओ न अंदर बेगम …” फिर असलम जोरों से काकड़े हुए रौशनी को सोफे की तरफ ले जाते हैं … जाते वक़्त वास् अपने हाथों से रौशनी की नाज़ुक गोरी कमर को पकडे हुए अपनी उँगलियों को उसकी नाज़ुक कमर पर दबाये हुए रखते हैं .. रौशनी को भी ऐसे मर्द के स्पर्श से मस्ती च रही होती हैं … असलम बहुत मज़बूत पकड़ लगाए हुए थे उसकी कमर पर ..

फिर दोनों सोफे ओर बैठ गए … इसका मौका देखते hi रौशनी ने अस्काम कक थोड़ा दूर धक्का दे आकर खुद को उसकी ओलाद से चुरा लिया .

“उफ्फ्फ रुकसाना बेगम मम आओ न फिर से बाँहों के .. बहुत मिस किया तुम्हे ..”

असलम फिर से रौशनी के हाथों को पकड़ कर अपने तरफ खींचने लगता है. … रौशनी रेसिस्ट करती हुयी सोफे से उठ जाती हैं .. लेकिन असलम झट से उसकी कलाई पलडा हैं और एक hi झटके में इसे अपने करीब खींचता हैं .. रौशनी भी अब असलम के बाँहों में जा गिरती हैं .. उसकी ज़ुल्फ़े अब असलम के चेहरे पर लहरा रही होती हैं और उसका मुँह सीधा असलम के चौड़े साइन पर जा चिपकती हैं .. असलम उसे फिर से जकड लेता जय. .. इतनी जोर से की रौशनी की गुलाबी होठं अब असलम के कठोर साइन से चिपक जाती हैं ..

रौशनी को असलम के ऐसे मज़बूत तरीकों से न जाने क्यों अच्छा लगने लगतभाईन .. ऐसे किसी मज़बूत मर्द के ऐसे जकड़ने से उसकी साँसे तेज़ होने लगती हैं ..

“अह्ह्ह रुक्सना बजुम उफ्फ्फ तुम्हे ोास पाकर कितना अस्त लग रहा हैं मेरी बेगम ममम अब तोह तुम्हे छोड़ूंगा नहीं मेरी जान …”

रौशनी खुद को चुराने कोषसिंह करती हैं लेकिन उसकी मज़बूत पकड़ के वजह से उस काम में ानकाम होती हैं ..

असलम अब अपने हाथों को उसकी नाज़ुक सी गोरी ोीठ पर फेर लेता हैं ऑफर उसकी बाँहों पर फेरता हैं और अपनी जंगलियाँ रौशनी कक नाज़ुक सी दुद्ध जैसी बदन पर लाल निशाँ चोरटी हैं …

“उफ्फ्फ असलम मियां आप भी न मममम सांस नहीं ले प् रही हूँ उफ्फ्फ”

असलम फिर अपनी पकड़ थोड़ी सी ढीली करता हैं और अब रौशनी के चेहरे को अपने चेहरे के सामने लता हैं ..

“उफ़ रुकसाना बेगम तुम इतनी खूबसूरत हो … उफ्फ्फ्फ़ में ऐसी तुम जैसी बेगम पाकर में बहुत खुश हु ..”

“उफ्फ्फ असलम जी अब तर्रीफ़ें बंद कीजिये .. आप भी न … उफ्फ्फ”

रौशनी अब शर्मा कर मुँह फेर लेती हैं .. आज उसे असलम के ऐसे बातों से और ऐसी हरकतों से अच्छा लगने लगता हैं .. वह फिर रात में. अस्काम के लोडे के बारे में सोचते हुए इंसिडेंट की सोचती हैं और रौशनी के गाल शर्म से और लाल होते हैं … उफ्फ्फ्फ़ क्या उसके वजह से आज उसे असलम का ऐसे बर्ताव करना उसे पसंद आ रहा हैं .. उफ्फ्फ्फ़

वहां असलम का लोढ़ा उसकी पंत में बुरी तरह से फनफना रहा था … झटकों पर झटके मार रहा था … उफ्फ्फ आज तोह वह रौशनी को पूरा दबा दबा कर hi छोड़ेगा .. यह बात सोचते रहता हैं ..

असलम रौशनी के चेहरे को पकड़ कर अपने तरफ कर लेता हैं ..

“रुकसाना बेगम , क्या आप ने मुझे मिस नहीं करि हैं …”

अब रौशनी क्या बोलती उसे अब पूरी तरह रुकसाना के करैक्टर में ाँ चाहिए बस उतना hi सोच रही थी.

“हाँ असलम जी में मिस करि आपको लेकिन अपने आप पर कण्ट्रोल लाइए उफ्फ्फ आप तोह दबा दबा कर निचोड़ रहे हो मेरे इस नाज़ुक से बदन को उफ्फ्फ्फ़”

अरे जानू चलो धीरे से hi मसलूंगा ठीक हैं न …

रौशनी अब मन hi मन मुस्कुरा रही थी , उसे ऐसे पल असलम के साथ पसंद आने लगे थे … कल रात के असलम के लोडे की सोच पर झरने की याद उसे आ रही थी ..

रौशनी असलम को डिस्ट्रक्टेड प् कर झट से उठ जाती हैं सोफे से … वह आगे जाने लगती हैं की असलंम फॉर से रौशनी को ोीचे से जकड लेता हैं … उसका लोढ़ा तोह अब उसकी चड्डी में काफी टाइट हुआ होता हैं …

“कहाँ भाग रही हो मेरी बेगम .. अभी तोह पुआर जी शुरुवात हैं उफ्फफ्फ्फ़ कही न जाओ ..”

“असलम मियां उफ्फ्फ चोर भी दीजिये उफ्फ्फ …”

“आज नहीं छोड़ूंगा रुकसाना बेगम . आज तोह बहुत प्यार करना हैं … सलीम भाई भी नहीं हैं .. आज तोह आपको जाने नहीं दूंगा …”

रौशनी खुद की चुराने की ज्यादा कोषसिंह भी नहीं कर रहे थी .. बस यही असलम के बाँहों में चटटा रही थी ..

“रुकसाना बेगम तुन्हे देख और भी कोई हैं जो बहुत खुश हुआ हैं ….”

“असलम मियां और कौन हैं यहाँ भला उफ्फ्फ क्या कह रहे हो आप.”

“अरे हैं न रुकसाना बेगम लेकिन तुम उसकी तरफ नहीं देखोगी तोह कैसे दिखेगा तुंहारा दूसरा आशिक़ ..”

फिर असलम रौशनी को अपने तरफ मोड़ लेता हैं …

“रुकसाना बेगम ऊपर नहीं ज़रा निचे अपनी आँखें करिये .. फिर hi आपको आपका दूसरा आशिक़ दिखेगा ..”

रौशनी मुँह निचे करती हैं तोह सीधे असलम के बड़े बने उभर पर उसकी नज़र जाती हैं .. और उसके गाल लाल होते है. .. वह देख रही थी कैसे असलम का लोढ़ा उसकी ोान्त में झटके मार रहा था .. (उफ्फ्फ इनका तोह बड़ा खड़ा हुआ हैं लुंड उफ्फ्फ्फ़ कैसे झटक रहा हैं उफ्फ्फ .. इतना मोटा कल हैं इनका ुफ्फ्द)

असलम अब थोड़ा बोल्ड जो जाता हैना ुर रौशनी का हाथ पकड़ कर पाने उभर पर टिका देफ्ता हैं ..

“उफ़ असलम मियां यह क्या कर रहे हो उफ्फ्फ मेरी ककई छोड़िये उफ्फ्फ..”

“नहीं रुकसाना बेगम आज तोह तुम्हे तुम्हारे दूसरे आशिक़ को ोयार देना hi होगा .. आज तोह हु तुम्हारे साथ मस्ती किये बिना तोह नहीं जाएगा ः …”

ृष्णि ऐसी बातों से शर्मा जाती हैं .. वह अपने हाथों को असलम के लोडे के उभर से निकलती नहीं .. बस वही रखती हैं … और अपनी निचले होठों को काट लेती हैं .. (उफ्फ्फ आज तोह मेरी कल का सोना हकीकत में बदलने वाला है. .. उनका मोटा लोढ़ा जो मेरी सपनों में आ रहा था आज तोह मेरे सामने बड़े खटके मार रहा हैं .. उफ्फ्फ मेरी गर्मी अगर कल रोनित शांत कर देते तोह आज ऐसे नहीं होता उफ़ मेरी गर्माहट असलंम के मोठे लोडे को छू कर्त ओह और भी बढ़ रही हैं उफ्फ्फ में अब क्या करू मममम)

“अरे बेगम . जरा सेहलाओ इस उफ्फ्फ देखो न कैसे अटेंशन में आपकी खूबसूरती को सलाम दे रहा हैं ..”

रौशनी के हाथ मनो हलुए जैसे असलम के मोठे लोडे के उभर से चिपके हुए hi थे .. अब तोह असलम का हाथ भी नहीं था उसके हाथों को वहां पकडे राजू .. फिर भी उसके नाज़ुक हाथ असलम के लोडे से चुपके हुए hi थे .. और उसे वह सेहल भी रही थी .. जिससे असलम का लोढ़ा बुरी तरह से और भी झटके मार रहा था ..

रौशनी की छूट अब ौरी गीली हो चुकी थी .. वह अपनी पंतय में गीलापन महसूस कर रही थी ..

अब असलम रौशनी के कन्धों को पकड़ कर उसे निचे करता हैं .. रौशनी भी किसी आज्ञाकारी महिला जैसे निचे अपने घुटनो पर बैठ जाती हैं … अब उसके सामने असलम के लोडे का ु हार्ट है जो वह डेल्ह सालती थी सलामी दे रहा था और थोड़े झटके भी मार रहा था .. रौशनी तोह मंत्र मुग्ध असलम के उभर को देखि है रही थी ..

असलम ने फिर अपनी पंत निचे करि और अब वह बस चड्डी में hi रौशनी के सामने खड़ा था .. रौशनी देख प् रही थी की असलम के चड्डी में एक बड़ा सा गीला स्पॉट बन चूका था .. उसे कुछ सेकंड लगे बात समझनेममें .. की वह जीवपन तोह असलम के लोडे से निकलती प्रेकम के वजह से hi था .. उफ़ वह मन में सोचती रही ( उफ्फ्फ इनका तोह गीलापन वहां ऐसे लगतभाईन मनो जहर hi चुके हैं उफ़ बस प्रेकम में hi इतना गीलापन … अगर उनके लड़े से सच में पिचकारी होगी तोह उफ्फ्फ कितना माल चोरे गए उफ्फ्फ उसके पुरे चेहरे को भर देगा उनका माल उफ्फ्फ्फ़ )

“रुकसाना बेगम उफ़ बस देख क्यों रही हो वहां चुनो भी तोह उफ्फ्फ्फ़ देखो न कैसर अस चोर रहा हैं उफ्फ्फ्फ़”

“असलम मियां नहीं उफ़ में नहीं कर सकती उफ्फ्फ ओक्ज़ ..”

अरे डरिये नहीं बेगम आप hi का हैं … चलो ..”

और असलम थोड़ा आगे थ्रस्ट कर्त है की उसके लुंड का गीला टिप चड्डी में से रौशनी के हट्फोन को छूटा हैं ..

असलम के चड्डी के अंदर उनके लोडे के गीलापन को अपने होठों पर महसूस कर रौशनी की छूट फुदकने लगती हैं .. उसकी छूट से और भी रास बहने लगता हैं.. असलम फिर अपने चड्डी को रौशनी के मुँह से और नाक से रगड़ता हैं … रौशनी को असलम के लुंड की खुशबु से और गर्मी लगती हैं .. है इतना बड़ा मोटा लोढ़ा आज क्या वह चूसने वाली थी … उफ्फ्फ ..

असलम भी बोल्ड होते जा रहा था .. उसने अपनी चड्डी को निचे करि तब उसका मोठे लोढ़ा बहार आकर रौशनी के मुँह से टकराता हैं … जैसे hi उसका मोटा लोढ़ा रौशनी के नाज़ुक होठों से टकराता हैं तब वह और एक झटका मारता हैं .. और अब उसके लोडे से निकले प्रेकम जाकर रौशनी के होठों पर लग जाती है. ..

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ाभः उफ्फ्फ रुकसाना बेगम ममम क्या मस्त होठं हैं तेरे उफ्फ्फ ममम अब मेरे लोडे को चूस न उफ्फ्फ बहुत दिनों से नहीं चूसै करि हम तुमाए अहह उफ्फ्फ रुकसाना बेगम ममम चूसिये मेरे लोडे को मममम.”

रौशनी की गर्मी इतनी बढ़ चुकी हैं की वह कुछ नहीं बोलती .. जैसे hi असलम अपने लोडे को फॉर से रौशनी के मुँह को चुने लगतभाईन अब रौशनी अपने मुँह कोह खिलती हैं और असलम अब धीरे से होना लोढ़ा रौशनी के मुँह में डालने लगता है. ..

“उफ्फ्फ रुकसाना बेगुन ममम आज तोह धन्य पाया मैंने आह ममम चूसिये मेरे लोडे को उफ्फ्फ बहुत दिनों से तुम्हारे होठों से चूसै च रहा हूँ उफ्फ्फ मममम मेरी बेगम चूसिये इसे अहह ममम”

रौशनी मुश्किल से असलम के लोडे के सर को hi अपने मुँह में ले रही थी .. (उफ्फ्फ इतना मोटा लोढ़ा और उतना hi मोटा उनके लोडे का सुर उफ्फ्फ्फ़ … आज तोह वह सब शर्म सब भूल चुकी थी .. आज तोह उसे बस असलम के मोठे लोडे की चूसै hi करनी थी .. )

धीरे से अब रौशनी भी मुद में आकर असलम के लोडे को अपने मुँह में आगे पीछे करती है और उसे चूसने लगती हैं … असलम के लोडे को चूसते हुए उसके उँगलियाँ उसकी छूट के क्षेत्र पर जाती हैं … और वह अपने साड़ी से वहां ऊपर चुने लगती हैं ..

असलम बड़े मूड में था और अपने हाथों को रौशनी के सर के पीछे रख अपने लोडे को रौशनी की मुँह की और गेहै में पेलने लगता हैं … अब सन इतना गरम हो चूका था … हॉल में hi रौशनी अब असलम के मोठे लोडे को मस्ती से चूसने लगी थी .. वह भूल चुकी थी की वह कहाँ हैं और क्या अश्लील हरकतें कर रही हैं और किसके साथ कर रही हैं .. उसकी अधूरी प्यास उसे यह सब सोचने नहीं दे रही थी .. अब उसका मकसत बस एक था और हु था अस्काम के मोठे लोडे की चूसै ..

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असलम अब ऊपर से उम् आह उफ़ की आवाज़ें कर रहा था और निचे रौशनी उसके लोडे को चूसे जा रही थी … उसकी मुँह से अब लार भी टपकने लगा था …

असलम अब अपने हाथों को रौशनी की साड़ी के पल्लू के अंदर उसके चूचियों पर अटैक करने लगतावहियँ .. अहह उफ़ रुकसाना बेगुन इतनी सॉफ्ट चूचियां हैं तेरी उफ्फ्फ ममम क्या मस्त हैं यार .. एक बाद उन्हें भी चूसने दे उफ्फ्फ अहह मेरी बेगम ..

असलम अब अपने उँगलियों को रौशनी की ब्लाउज के अंदर सकरकाने लगतावहिं … ऊपर से रौशनी की असलम के लोडे की चूसै जारी रेहतिभाईं .. जैसे hi रौशनी महसूस करती हैं असलम के उँगलियों को होनी चूचियों पर .. वह असलम के लोडे को मुँह से निकलती हैं ..

“उफ़ असलम जी मम क्या आकर रहे हो ममम ऐसे मत करिये … ..”

“उफ़ रुकसाना बेगम तू चुस्ती रह न ममम और मुझे तेरी इन चूचियों को महसूस करने दो उफ्फ्फ बहुत दिनों से मिस करा हूँ इन नाज़ुक सी गोरी चूचियों को…”

असलम फिर से अपने लोडे को रौशनी के मुँह में डालता हैं और उसकी चूसै करवाता हैं … निचे से वह अपनी उँगलियों से अब रौशनी की निप्पल्स को चुने लगता हैं … असलम के ऐसी हरकत से रौशनी की छूट और फुदकने लगती हैं …. उफ्फ्फ आज तोह असलम पुरे बोल्ड हो चुके हैं उफ्फ्फ आज मनो उसकी खैर नहीं ..

उसे भी असलम के मोठे लोडे की चूसै और अपनी निप्पल्स को असलम से खिलवाने में बहुत मज़्ज़ा आ रहा था … उसकी अधूरी प्यास उसे यह सब करने पर मजबूर कर रही थी …

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रौशनी , असलम के लोडे को चुस्ती रही और उस दौरान उसके दिमाग में एक ख्याल आया .. (लगता हैं आज तोह उसकी चुदाई होकर hi रहेगी अगर वह इस बात को और बढ़ावा देगी तोह ) इस सोच से घबरा कर वह … असलम के लोडे को मुँह से निकल कर कड़ी होती हैं और बाथरूम के तरफ भाग जाती हैं .. असलम उसके पीछे पीछे दौड़ता हैं लेकिन रौशनी फुर्ती से बाथरूम के अंदर जाकर लॉक लगवाती हैं …
 
रौशनी अब बाथरूम में थी … उसे वहां पिशाब और मुठ की hi सुगंध आ रही थी … रस्सियों पर फिर से उन्होंने अपनी बनियान और चड्डियाँ देखी थी :. उनके सब आदतें उसके जानेके बाद सुरु हुए थे

“रुकसाना बेगम , क्याभूअ कहाँ बाथरूम में भाग चली आयी… बहार आओ न और प्यार करना हैं तुमसे”

“नहीं असलम मियां में नहीं बहार आउंगी , मुझे न करना आपसे और प्यार :.. उफ्फ्फ्फ़ आपने तोह…”

“अरे बेगम क्या किया मैंने , किया तोह टुन्ने खुद… अब इसमें क्या शर्माना… प्रेमियों में यह सब नहीं होगा तोह क्या होगा .. .”

रौशनी सोचती रही (उफ्फ्फ्फ़ असलम जो तोह पुरे करैक्टर में hi घुस गए हैं , क्या वह भूल गए हैं में उनकी बेगम नहीं रौशनी हूँ उफ्फ्फ अब इनको कैसे मनौ ..)

असलम मियां प्लीज उफ्फ्फ्फ़ और नहीं प्ल्ज़ , मेरी बात मानिये … फाॅर्स न करिये पलज़्ज़ज़”

असलम का अब बहार मूड ख़राब हो रहा था .. आज ोेहली बार उसके लोडे को वह रौशनी के मुँह में दाल चूका था .. उफ्फ्फ क्या चूस रही थी साली ..”

“रुकसाना बेगम आइये न … और मस्ती करेंगे .. वैसे आपको भी तोह पसंद आ रहा था सब कुछ … आपकी चूचियों की निप्पल्स तोह वही कह रही थी …”

रौशनी बाथरूम में काफी शर्मा रही थी … वह सोच में पद गयी (उसने अभी असलम के मोठे लोडे को चूसा था और तोह और ु होने उसकी चूचियों को भी दबाया था और उसकी निप्पल्स को भी तोह छुआ था … असलम के मोठे लोडे के ख्याल से उसकी छूट गीली हो चुकी थी .. इतना मोटा .. उफ्फ्फ्फ़ उनके लुंड का सर भी मुश्किल से मुँह में ले पायी थी .. उफ़ इतना मोटा लुंड उफ्फ्फ . अगर वह बहार आएगी तोह असलम फिर से अपने मोठे लुंड को उससे चुसवाएगा उफ्फ्फ अब क्या करे .. बाथरूम में भी तोह बाउट देर नहीं रह सकती यहाँ पर भी उनके पिशाब और मुठ की स्मेल आ रही हैं … उफ्फ्फ्फ़)

“असलम मियां में एक शर्त अपर hi बहार आउंगी .. और हु हैं की आप अब अपना हु मोटा कला लुंड अपनी चड्डी में डालोगे और हम कुछ नहीं करेंगे .. तभी hi में बहार आउंगी ..”

असलम भी सोच में पद गया ( उफ्फ्फ ये रौशनी तोह बहुत नाटक कर रही हैं यार उफ्फ्फ्फ़ झूट बोल कर बहार निकलूंगा फिर जकड कर फिर से मुँह की चुदाई करूँगा मेरे मोठे लोडे से अहह …)

“नहीं आप पर भरोसा नहीं .. अगर आपने आपके चीज़ को धक् नहीं लिया तोह में आपसे कभी बायत नहीं करुँगी …”

“उफ्फ्फ इसके तोह बहुत नखरे हैं यार … लोढ़ा तोह इतना टाइट हुआ हैं उफ्फ्फ्फ़ ..”

फिर असलम पास में पड़े एक शॉर्ट्स को हाथ में लेकर पहने लगता हैं .. अब शॉर्ट्स भी ऐसी थी सफ़ेद और काफी हलके मटेरियल वाली और थोड़ी ट्रांसपेरेंट भी … असलम ने जान बुझ कर वैसी शॉर्ट्स पेहेन ली थी.

“अच्छा आइये रुकसाना बेगम , मैंने अपने उसको धक् लिया हैं .. अब तोह बहार आओ..”

रौशनी कुछ मं बाद बाथरूम का दरवाज़ा खोलती हैं … उसे दीखता हैं की असलम ने उसका लुंड कवर तोह कर लिया था लेकिन वह शॉर्ट्स काफी ट्रांसपेरेंट थी और उससे उसके लुंड का नज़ारा आधा hi छुपा हुआ था .. और अभी भी असलम का लोढ़ा खड़ा था और झटके मार रहा था … रौशनी की नज़र असलम की शॉर्ट्स के अंदर खड़े लोडे पर hi थी ..

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फिर असलम बोलने लगे

“ठीक हैं न रुकसाना बेगम देखो इसे मैंने धक् लिया हैं .. अब तोह मेरे पास आओ मेरी बेगम …. आओ न ..”

रौशनी वही कड़ी रही .. उसकी नज़र अभी भी असलम के खड़े लोडे पर hi थी … उसकी छूट में फिर से हलचल होने लगती है. .. (उफ्फ्फ क्या लुंड हैं … उस शॉर्ट्स में भी कमीना फनफनाता हुआ दिख रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ यह में कहाँ फस गयी .. उफ्फ्फ्फ़)

“चलिए अब सोफे पर तोह बैठ लीजिये रुकसाना बेगम .. उफ्फ्फ तुम तोह बहुत hi तड़पा रही हो … जरा पास आओ न …”

“असलम मियां सोफे पर बैठेंगे लेकिन आप दुरी hi रखिये प्ल्ज़ ..”

“अच्छा बाबा ठीक हैं आओ तोह सोफे पर बैठेंगे ..

फॉर दोनों सोफे पर बैठ जातेभें ..

असलम सोफे पर अपने पैरों लो अलग करके hi बैठा था जिससे शॉर्ट्समें से भी उसका लोढ़ा रौशनी को खड़ा दिख सकता था .. और जानबूझ कर अपने लोडे को झटके दे रहा था असलम ..

रौशनी की भी निगाहें बीच बीच में असलम की लुंगी के अंदर के बड़े मोठे काळा लोडे पर जाने लगती हैं … उसकी छूट से रास बेहटा रहता हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ ये तोह बड़ा सा अज़गर हैं उफ्फ्फ्फ़ मेरी नज़र उनके लुंड से हैट क्यों नहीं रही हूँ उफ्फ्फ्फ़ इतना मोटा कला लोढ़ा तीसरी बार देखि हूँ .. रमेश और सलीम के मोठे लोडे जैसे hi हैं .. उफ्फ्फ )

असलम को दिख रहा था की न कहते हुए भी रौशनी उसके लोडे पर नज़र टिकाए हुए थी .. अभी मौका था लोहा अभी भी गरम hi था ..

वह फिर से रौशनी के पास बैठ जाता हैं .. इस बार रौशनी कुछ नहीं बोलती .. उसे तोह अब बहुत शर्म आ रही थी .. एक तोह वह असलम के मोठे लुंड को चूसी बी थी और अब उसका खड़ा लुंड फिर से उसके पास था बस एक पतली सी लुंगी में …

असलम फिर रौशनी के आहतों को अपने हाथों में लेता हैं “उफ़ रुकसाना बेगम आपके हाथों में इतनी कोमलता हैं. .. इतने गोर हैं उफ्फ्फ … कौनसी क्रीम लगाती हो तुम …”

“असलम मियां बस एक क्रीम हैं वही लगाती हो …लेकिन हु बात छोड़िये उफ्फ्फ आपका हु अभी भी दिख रहा हैं उफ्फ्फ उसे पूरी तरह से धकिये न ..”

“रुकसाना बेगम इतना प्यारा हैं … देखो न .. तुम्हे देख सलामी भी दे रहा हैं और इतना रास चोर रहा हैं … और तुम हो की उसे बुरे नाम देकर शर्मिंदा कर रही हो .. गलत हैं रुकसाना बेगम”

रौशनी की नज़र फिर से निचे चली जाती हैं ( उफ्फ्फ इतना रास चोर रहा हैं … अभी तोह कुछ करि भी नहीं हूँ … ममम अगर निकल जाए तोह कितना गधा माल होगा …. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी ये क्या सोच रही हो तुम चीई ..)

असलम रौशनी की नज़र अपने लोडे पर देख फिर से बोल्ड हो जाता हैं और अब रौशनी के नाज़ुक हाथों को उसके लुंगी के पर से खड़े लोडे पर रख देता हैं ..

रौशनी की दिल की धड़कन फिर से ठेस होने लगती हैं … बिना कुछ सोचे वह उसे सहलाने लगती हैं .. सहलाते हुए वह असलम के लोडे के झटकों को महसूस कर रहे थी …

“उफ्फ्फ रूल्सना बेगम ज़रा नादर हाथ दाल तोह लो .. उफ्फ्फ आपके प्यारे कोमल हाथों से उसे सेहलाओ उफ्फ्फ मेरी जान मेरी बेगम ..”

अब असलम को कण्ट्रोल नहीं होता और वह रौशनी को चूमने लगतभाईन .. रोशनही भी गर्मी के आग में असलम के चुम्मों का साथ देती हैं … और दोनों गहरी चुम्बन में लग जाते हैं ..

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अब रौशनी भूल चुकी थी की वह किसके साथ हैं और क्या कर रही हैं .. अब उसके हवस की वह शिकार हुयी थी और असलम के साथ चुम्बन में लगी रही … अब असलम ने उसका हाथ अपनी लुन्गिनके अंदर दाल अपने खड़े लोडे पर राखी … रौशनी अब निचे से असलम का लोढ़ा सेहला रही थी और ऊपर उसकी चुम्बन में खोयी हुयी थी …वहां काफी गर्मी का माहौल बना हुआ था …

एक कला सा बुद्धा और एक जवान शादीशुदा महिला एक दूसरे के बाँहों में एक दूसरे को चिम रहे थे .. असलम ने सपने में भी नहीं सोचा था की रौशनी जैसी खूबसूरत महिला कभी उसे ऐसी मिलेगी … और अब तोह वह उसे चुम रहा था और अपने लोडे को उसकी हाथों से सेहल रहा था .. उफ्फ्फ आज तोह वह मनो सातवें आसमान में पहुँच चुका था ..

फिर असलम ने रौशनी को सोफे पर लिटाया और उसके हाथों से उसकी पल्लू हटा दिया … रौशनी के गोर मुम्मों के क्लीवेज को देख मनो असलम पागल हो गया … उसका लुंड बुरी तरह से फनफना रहा था .. निचे रौशनी अब आँखें बंद करि हियी हवस में पूरी डूबी हुयी थी …

असलम ने फिर रौशनी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा .. ऐसे करने से रौशनी की आँखें खुल गयी और …

“उफ्फ्फ असलमन मियां मम नहीं प्ल्ज़ ऐसे न एक्रोये उफ्फ्फ छोड़िये मुझे .. “

रौशनी अब असलम को होने ऊपर से निकलने उसे धक्का देती हैं लेकिन वह असलम के भरी बदन को अपने ऊपर से नहीं हटा प् रही थी .. वहां असलम तोह अब ौरे हवस में था ..

ओने बटन , फिर दो बटन उसने खोले .. अब रौशनी की अधेड़ चूचियां उसके सामने आ रही थी … उफ्फ्फ क्या माल हैं यार आईटी ी गोरी सी चूचियां उफ्फ्फ मम आज तोह आम चूसने में बहुत मज़्ज़ा आएगा .. ममम”

“असलम मियां छोड़िये न उफ्फ्फ नहीं प्ल्ज़ उफ़ … रौशनी महसूस कर रही थी की असलम का लोढ़ा उसकी छूट के ऊपर उसकी साड़ी से टकरा रही थी … उसके लुंड की चुंबन से उसे अच्छा तोह लग रहा था लेकिन अब होश में थी इसीलिए वह और आगे नहीं बढ़ना चाहती थी ..

असलम तोह रौशनी को चोर्ने के मुद में नहीं था .. अब उसके होठं रौशनी की चूचियों को छू रहे थे … अब धीरे से वह अपनी जीभ से रौशनी की चूचियों को ऊपर से लीक करने लगा … अब यह तोह रौशनी के लिए बहुत हो रहा था . एक आखरी का चांस आज़माने का वह सोची ..

“असलम जी उफ़ में रुकसाना नहीं हूँ .. रौशनी हूँ उफ़ अआप अपने आप को खो चुके हैं उफ्फ्फ्फ़ देखिये न में आपकी रुकसाना नहीं बल्कि रौशनी हूँ उफ्फ्फ्फ़ छोड़िये न मुझे ..”

(उफ़ साली कम्बख्त अभी ऐसी बात करनी थी … उफ़ नहीं छोड़ूंगा तोह मुझे फिर से नहीं मिलेगी .. वैसे भी आज तोह ऐसे ट्रेलर दिया हूँ .. साली खुद वापस मेरे पास आएगी और उस बार तोह उसकी बिना सुने छोड़ डालूंगा उफ्फ्फ क्या माल हैं यार .. उफ्फ्फ्फ़)

असलम फिर नाटक करने लगता हैं .. उफ्फ्फ हाँ सही हौं उफ्फ्फ माफ़ कीजिये में तोह ोुरा भूल गया था .. उफ्फ्फ्फ़ सॉरी रौशनी जी ..

रौशनी कुछ नहीं बोली बस अपनी ब्लाउज की बटन लगा कर और अपनी साड़ी ठीक कर वहां से जाने लगी … जाते जाते उसकी नज़र असलम के खड़े लोडे पर पड़ी और फिर वह मुँह फेर कर वह से चली गयी .. असलम के मोठे काळा लोडे को देख वह काफी शर्माती हुयी वहां से चली गयी ..

असलम फिर बाथरूम में जाकर रौशनी के नाम को लेकर मुठ मारता हैं और अपना सारा सफ़ेद माल चोर देता हैं … (उफ़ काश आज इस माल को रौशनी के मुँह पर hi चोर देता उफ्फ्फ्फ़.)

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रौशनी चलते चलते आज की हुयी घटनाओं के बारे में सोचती रहती हैं .. उफ्फ्फ आज तोह असलम जी की लुंड की चूसै करि और वह तोह मेरे चूचियों पर भी अटैक कर रहे थे .. आज में खुद कैसे अपने हवस की शिकार होने वाली थी उफ्फ्फ यह सब रोनित की hi गलती हैं .. मेरी प्यास कल बुझाते तोह में आज अपनी प्यास बुझाने ऐसे असलम जी को यह सब नहीं करने देती उफ्फ्फ्फ़ … कब बुझाएंगे प्यास मेरी .. रोनित उफ्फ्फ्फ़)

रौशनी आज रमेश से बात नहीं करना छाती थी .. कल रमेश जी के साथ हु सब और आज असलम जी के साथ उफ्फ्फ … क्या मुझे यह सब अच्छा लगने लगा हैं … उफ्फ्फ क्या में चाहती हूँ इन बुद्धों से अपनी प्यास बुझाउ उफ्फ्फ यह मुझे क्या हो रहा हैं कुछ समझ नहीं रही हूँ उफ्फ्फ)

इसीलिए रौशनी आज रमेश के साथ नहीं जाती बल्कि दूसरी रिक्शा में बैठ घर जाती हैं .. आज तोह वह रोनित को अपनी प्यास बुझाने पर मजबूर hi करुँगी .. ऐसे सोचते हुए वह घर के अंदर चली गयी…

वहां रोनित बेडरूम में था .. रौशनी उसके पास आयी तोह उसे बाँहों में चली gayi..”Uff रोनित बहुत दिन हुए हैं तुम से प्यार करे .. उफ्फ्फ आज चलिए न मस्ती करते हैं .. मेरी प्यास बुझाओ रोनित …”

“नहीं रौशनी आज नहीं थक गया हूँ .. उफ़ आज में जॉब के सर्च पर गया था .. आज बहुत थकन हो रही हैं कल करेंगे मेरी जान”

“नहीं रोनित आज करिये न .. बहुत दिनों से आप मुझसे प्यार नहीं करे हो .. आए मेरी आग बुझाओ न रोनित ..”

“रौशनी क्या बातें कर रही हो .. मैंने कहा न आज मूड नहीं हैं .अब चोरो … खाना बनाओ बहुत भूक लगी हैं..”

रौशनी को अब ग़ुस्सा आजाता हैं … “रोनित महीना हो गया और तुम आज भी … उफ्फ्फ तुम्हे बीवी चाहिए नहीं तोह शादी क्यों की .. मेरी भी प्यास होती हैं .. और आप हो की … जाओ नहीं बनाउंगी खाना ..”

“रौशनी कहा आज मुझे मूड नहीं हैं तोह नहीं हैं.. बात ख़तम.”

रौशनी इस बात पर ग़ुस्सा होकर सोफे पर चली जाती हैं … सोफे पर वह सोचने लगती हैं (यहाँ मेरे पति को मेरी प्यास बुझानी नहीं हैं और वहां तीन बुड्ढे मेरी जवानी को लूटने के पीछे hi पड़े हैं … उफ्फ्फ …. फिर उसे याद आता हैं सलीम का इनविटेशन … वह सोचती हैं की वह चली जाएगी .. 3 दिन ब्रेक मिलेगा तोह रोनित खुद उसके पास आएगा …) इतना सोच कर वह कल सलीम का इनविटेशन एक्सेप्ट करने को तैयार होती हैं.
 
अगली सुबह .. रौशनी की आँखें खुली .. वह पायिनकी रोनित घर पर नहीं थे … उसने फ़ोन करि लेकिन फिर भी उसने कोई रिस्पांस नहीं दी.. रौशनी फिर सोची की अगर रोनित उसे बिना बताए जा सकता हैं और रिस्पांस नहीं दे रहा हैं तोह हु भी रोनित को अपने कामों के बारे में भी कुछ नहीं बताएगी ..

रौशनी अब नहाने चली जाती हैं … उसने आज बड़ी ोेर्फुमे वाली बाथ करि थी … आज उसमें अलग hi ऐटिटूड झलक रहा था …

उसने अपने आप को आईने में देखि और सोची (है रौशनी तू इस उनर में भी इतने फोट हैं … इतनी गोरी और मुलायम हैं .. रोनित पहले का तोह उसपर सुबह सुबह hi टूट पड़ता था … और आज कल उसे चोर तीन बुड्ढे उस पर टूट पद रहे थे .. उफ्फ्फ हु भी इतने काळा मोठे लुंड के बुड्ढे उफ्फ्फ्फ़ . कल तोह असलम के लोडे को भी चूस ली थी उफ्फ्फ्फ़ ये क्या हो रहा हैं .. अब तक तोह लुंड चूसने पर उतर आयी हो अब और क्या करोगी उफ्फ्फ्फ़ … )

फिर रौशनी अपने अलमारी के पास जाती हैं … उसके सामने उसके ब्लाउज हैं और सरिस हैं … उसके दिमाग में फिर से सोच आती हैं . इस बार मनो दो अलग अलग सोच हो रहे थे .. एक थी एंजेल रौशनी और दूसरी डेविल रौशनी ..

एंजेल रौशनी – रौशनी .. तू बहक मत जाना … कुछ कन्सेर्वटिवे साड़ी hi पेहेन लो .. नहीं तोह वह बुड्ढे तुझ पर फिर से टूट पड़ेंगे ..

उसी समय डेविल रौशनी – रौशनी इस की बात न सुन … देख न तेरे पति से ज्यादा उन बुद्धों को तेरे बदन पर नाज़ हैं … चल आज कुछ ऐसी ब्लाउज यह जिससे उन्हें और भी गर्मी हो .. चल न

एंजेल रौशनी – अरे तू उसकी बात न सुन , तुम एक अच्छी शादी शुदा लेडी हैं .. ऐसे बहक न जाना .. चलो हु स्लीव वाली बैक कवर करने वाली ब्लाउज पेहेन लो चलो ..

डेविल रौशनी – अरे तू इसकी बात न सुन , शादी के बाद अच्छी बन कर तुझे क्या मिला .. बस पति की बिज़नेस में फ़ैल और पति भी ऐसे निकम्मा.. चल तू हु डीप कर वाली स्लीवलेस ब्लाउज पेहेन … बड़ी मस्त और सेक्सी लगेगी तू .. जरा उन बुद्धों को और तड़पाओ ..

एंजेल रौशनी – रौशनी तुझे मेरी कसम उसकी बातों में मत आना .. चलो हु वाली ब्लाउज hi पेहेन लो ..

डेविल रौशनी – अरे डिअर पहनो उसे … तरय तोह करो और देखो कितनी मस्त खूबसूरत और सेक्सी लगती हो … जरा को तरय …

रौशनी अपने डेविल थॉट्स को तरय करने की सोचती हैं और वही ब्लाउज चूसे करती हैं .. वह ब्लाउज एक दम से डीप फ्रंट कट और बैक कट किट hi मनो ब्रा hi हो और स्लीवलेस … उसमें तोह उसकी चूचियों की दरार बजी साफ़ साफ़ दिखाई देती हैं .. मेक उप भी आज कुछ अच्छा लगा कर .. होठों पर लाल लिपस्टिक लगा कर .. रौशनी बहार निकल पड़ती हैं ..:

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रमेश वही रोज़ की तरह उसका इंतज़ार कर रहा था .. रौशनी उसके पास जाती हैं और गुड मॉर्निंग कहती हैं ..

रमेश तोह रौशनी को उस ब्लाउज मेजन देख उसका लौड़ा पूरा टाइट हो जाता है. …

वह खुद को रोक नहीं पता और अपने हाथों से रौशनी के सामने hi अपने लोडे को मसलता हैं .. रौशनी हु बात देखती हैं और शर्मा जाती हैं …(उफ्फ्फ रमेश ने तोह मेरे सामने hi अपने लोडे को एडजस्ट करा हैं उफ्फफ्फ्फ़ बहुत बोल्ड हो गए हैं रमेश जी ..)

-पहली वाली रौशनी होती तोह उसे रमेश के खुले में ऐसे ोारने से ऐतराज़ होता .. लेकिन अब तोह उसे उनकी ऐसी हरकतें अच्छी लग रही थी … काफी दिलजस्प लग रही थी-

“रौशनी जी आज तोह सच कहता हूँ आप कमल की लग रही हो .. उफ़ क्या ब्लाउज हैं , नया स्टाइल हैं न .. मेरी बीवी तो ऐसे कभी पहनेगी hi नहीं ..”

“हाँ रमेश जी नयी स्टाइल वाली ब्लाउज हैं .. इसे नूडल स्ट्राप ब्लाउज लेहते हैं ..”

“यह नूडल स्ट्राप मार्लब रौशनी जी ?”

“नूडल जैसी पतली और स्ट्राप मतलब जो ब्लाउज हैं जिससे हमारे कन्धों पर अटकातिभाईं उसे स्ट्राप केहतेभें .”

(उफ़ रौशनी जी हमें तोह आपके बदन पर कुछ hi नहीं चाहिए ..: बस तुम्हारी नंगी चूचियों को देखना चाहतेभें …) ऐसे सोचते हुए रमेश का लोढ़ा और टाइट होने लगा और उसने फिर से वहां एडजस्ट करा..

थे भी रौशनी देखि .. अब थोड़ा सा रमेश नई को चिढ़ाने वह बोली “रमेश जी यह बार बार आप वहां एडजस्ट क्यों करते हो … क्या हुआ..”

“रौशनी जी बस कुछ नहीं वहां टोघट होने लगभाइं … आपको तोह पता hi हैं वहां इतना बड़ा चीज़ हैं जो कम्बक्त चड्डी के अंदर रहता hi नहीं ..”

रौशनी को अब उस दिन के रमेश जो के साथ मस्ती भरी पलों की सोचती हैं और शर्माती हैं..”

(उफ़ सच तोह हैं इनका तोह इतना मोतबहिं .. लांब अभी .. उफ्फ्फ उस चड्डी में से तोह हनेशा तम्बू hi बना रेहताबहैं … हु भी मेरे लिए hi होता होगा उफ्फ्फ्फ़.)

“चलिए आप से तोह बात करते रहूंगी तोह आप तोह ऐसी बातें hi करोगे .. चलिए मुझे काम पर जाना भी तोह बैन रमेश जी.

रमेश एक आखरी बार रौशनी की ब्रा स्टाइल ब्लाउज को देखता हैं .. उसका लोढ़ा एक जोर का झटका देता बुइ हैं …. फिर रमेश रिक्शा में बैठ जाता हैं और दोनों वहां से चले जाते हैं.

अब रिक्शा चल रही होती हैं और आईने से रमेश बार बार रौशनी को पीछे देखता हैं … (वह क्या गोरी सी हैं उफ्फ्फ एयर आज जो ब्लाउज ोेहनी हैं उफ़ मर्दों को घायल hi लड़ेगी .. मेरे लोडे क ोटोः टोघट hi कर दिया हैं .. बैठने का नाम hi नहीं लेता उफ्फ्फ.)

वहां रौशनी सब कुछ देख रही थी , कैसे रमेश आईने से उसे पीछे की और घूरे जा रहा था .. बेशक उसकी चूचियों की दरार पर hi नज़र होगी उफ्फ्फ.)

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अब रौशनी के दिमाग में फिर से एंजेल रौशनी और डेविल रौशनी के अलग थॉट्स चलते हैं ..

ार- “उफ़ रौशनी ध्यान न दे उस बुड्ढे पर .. ऐसे ठरकी बुद्धों से दूर hi रह ..

डॉ- “उसकी न सुन .. देख न बुद्धा होकर बुइ काफी दमदार दीखता हियँ … तेरे पर फ़िदा हैं यह बुड्ढे ठरकी ः…

ार – रौशनी तुम ऐसे ठरकी बुद्धों के उस चीज़ से दूर hi रहना … कमीना हैं .. पूरा कमीना..

डॉ – रौशनी देख न कितना मोटा लोढ़ा हैं उसका .. एडजस्ट hi नहीं हो प् रहा हैं छडिद में .. तेरे इस बदन को देख झटके मार रहा होगा … देख न अब मौका हैं उस मस्त मोठे लोडे से मज़्ज़े ले यार ..


फॉर से रौशनी अपनी डेविल थॉट्स के बारे में hi सोचती रेहतिभाईं .. (सच बुद्धा होकर भी रमेश जी का कितना बड़ा लुंड कैसे उफ़ और उनका लुंड तोह उसे देखते hi खड़ा होता हैं .. वह भी बस साड़ी ब्लाउज में .. उफ़ अगर उनके बिना देखेगा तोह क्या हाल होगा उनके लुंड का .. उफ्फ्फ बहुत पास छोड़ेगा उफ्फ्फ्फ़ क्या लोढ़ा हैं उनका …)

लेकिन वह अपनी एंजेल थॉट्स को भी सोचती हैं .

ार. उफ्फ्फ ज्यादा नहीं करना नहीं तोह बुद्धा तुझे पटक कर छोड़ hi डालेगा .. फिर क्या मुँह दिखाएगी तू रोनित को … )

डॉ. लेकिन हैं बड़ा मस्त लुंड उफ्फ्फ … अंदर जाएगा तोह उफ़ तूफ़ान मचेगी .. अहह ..

ार. रौशनी यह क्या सोच रही हैं उफ्फ्फ …

डॉ. रौशनी देख तेरी छूट में उनके लुंड की सोचते hi हलचल होती हैं .. देख गीली हो चुकी हैं तेरी छूट …


रौशनी को एहसास होता हैं की उसके डेविल थॉट्स सही कह रहे हैं .. उसकी छूट में तोय रमेश जी के लुंड को सोचते hi हलचल होती हैं और छूट से रास भी टपकने लगता हैं … क्या डेविल सही लेह रही हैं .. उसे रमेश जी के साथ और मस्ती करनी चाहिए .. या उसने अपनी एंजेल की सोच कर रमेश जी को और बढ़ावा नहीं देना चाहिए .. उफ्फ्फ करे तोह क्या करे .. इसी दुविधा में रौशनी पूरी सफर काट लेती हैं ..

अब वह ंगो पहुँच जाते हैं … रौशनी जब रिक्शा से उतरने जाती हैं तोह उसकी पल्लू निचे सरक जाती हैं जिससे उसकी बाद चूचियों का व्यू मिलता हैं रमेश को .. उसका लुंड उस दृश्य से बड़े झटके मारने भी लगता हैं .. (आय है क्या चूचियां हैं रौशनी की उफ्फ्फ आईटी ी दूध जैसी गोरी उफ्फ्फ्फ़ आज तोह बड़े मज़्ज़े से मुठ मरूंगा .. साली आज क्या माल दिख रहे हैं यार उफ़ मन करता हैं रिक्शा में लेजाकर अपने घर रौशनी की चुदाई ळरु .. इसके गोर बदन से दिन भर खेलु उफ्फ्फ क्या माल हैं यार .. ऐसी माल मिला जाए तोह है गर्मी उफ्फ्फ्फ़ . )

रौशनी अपने पल्लू को एडजस्ट करती हैं और ऊपर देखती हैं तोह उसकी नज़र रमेश की नज़र से मल्टी हैं … फिर बड़े कामुकता से वह और मुस्कुराती हैं … (अब उसके दिमाग के डेविल थॉट्स उसे कह रहे थे की वह पल्लू फिर से गिराए …. और एंजेल थॉट्स कह रही थी ऐसे न करे … इस बार रौशनी ने अपनी एंजेल थॉट्स पर अमल करि और पल्लू एडजस्ट कर रमेश को कामुक स्माइल देते हुए वहां से चली गयी .. रमेश अपने लोडे को पकड़ते हुए रौशनी की हिलती चूतड़ों को देखते रहता हैं …आज तोह रमेश घर पर जाकर मस्ती में रौशनी के नाम से मुठ मारने वाला था ..

रौशनी सुबह के सब चीज़ों को सोचती रहती हैं ऑफिस में .. की फिर से सलीम पहुँच जाते हैं ऑफिस ..

“रौशनी जी फिर क्या सोच लिया आपने … मेरी दोस्त की बेटी के शादी पर आओगी?”

“सलीम जी हाँ में आउंगी … कब जाना हैं ?”

सलीम तोह यह सुन बड़ा खुश होता हैं और उसके लोडे में जान आ जाती हैं …. (उफ्फ्फ तोह आखिर में मान hi गयी रौशनी .. उफ़ बहुत मज़े करेंगे हम रौशनी …)

“”यह तोह बढ़िया बता हैं रौशनी जी … चलो में मेरे दोस्त को कहूंगा की आप आ रही हो …”

सलीम बोलते बोलते रौशनी की साड़ी और ब्लाउज को देखे जार अहा था .. रमेश की तरह रौशनी की ब्रा स्टाइल ब्लाउज देख उसके लोडे से पानी थोड़ा निकलने लगा … वह बस रौशनी की ब्लाउज को hi घूरे जार अहा था … रौशनी भी यह सब देखि और उसके दिमाग में थॉट्स शुरू हुए

“अरे देख कैसे कमीना मुँह सेलार टपकते हुए देख रहा हैं छी रौशनी इसके साथ मत जाना …”

“रौशनी अरे देख कैसे तेरे बड़ा पर फ़िदा हैं कमीना .. तेरे पति से ज्यादा इसे hi तेरे बदन की प्यास हैं … जा इसके साथ क्या पता बहुत मज़े मिले ः”

“इसका न सुन रौशनी देख न साड़ी और ब्लाउज में hi कैसे ठरकी जैसे घर रहा हैं … सेल को बस तुझे नंग्न hi करना हैं …”

“रौशनी अरे तेरी प्यास ऐसा hi तगड़ा मर्द बुझा पाएगा .. बुद्धा हो तोह भी सही .. तेरे पर फ़िदा हैं .. तेरी अपने मोठे लोडे से बहुत मस्ती देगा .. जा इसके साथ मज़े कर ले ज़िंदगी में”


रोशन डेविल रौशनी के थॉट्स को सुन बहुत गरम महसूस कर रही थी .. उसकी नज़र सलीम के अब औकात में आते लोडे के उभर पर गयी … सच में टीना मोटा लोढ़ा हैं .. प्यास भुझनी हैं तोह ऐसे hi लोडे से … उफ्फ्फ लेकिन.. में नहीं कर सकती ऐसे उफ़ में शादी शुदा हूँ .. ऐसे किसी गैर मर्द हु भी एक बुड्ढे से कैसे उफ्फ्फ्फ़ रौशनी …

अपने थॉट्स से निकलते हुए रौशनी बोली

“अच्छा सलीम जी हम जा कैसे रहे हैं .. हु तोह बताइये …”

“रौशनी जी हम ट्रैन से जाएंगे .. वैसे 8-10 घंटे की जर्नी हैं ..”

“ओह इतनी दूर .. उफ्फ्फ लेकिन ट्रैन से तोह में बस फर्स्ट क्लास एक डिब्बे में hi ट्रेवल करि हूँ अब आपको बुकिंग करनी होगी…”

“रौशनी जी मैंने आपकी हाँ समझ कर पहले से hi बुकिंग करा लिया हैं . वैसे जाते वक़्त एक डिब्बा hi मिला हैं … आते काट अभी तोह फिलिअल एक डिब्बा वेटिंग लिस्ट पर हैं . लेकिन उस दिन तक हमें सीट मिल सकेगी ..”

रौशनी को तोह अब सलीम के साथ जाना hi था उसने तैर कर लिया था .. रौशनी के डेविल थॉट्स अब उस पर हावी हो रहे थे … वह फिर बोली “अच्छा ठीक लेकिन कितना हुआ टिकट , में पैसे दूंगी मेरी टिकट की …”

“अरे हो hi नहीं सकता .. में एयर आपसे पैसे लूंगा (मुझे तोह तेरा यह रसीला गोरा सा नाज़ुक बदन चाहिए रौशनी जी …उफ्फ्फ . तुम्हारी चुदाई करने का मन हैं मेरी जानू)

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.. आप मेहमान हो .. आप से नहीं लूंगा पैसे रौशनी जी …”

“ओह आप बहुत अच्छे हो सलीम जी ठीक हैं … वैसे कब निकलना हैं …”

“रौशनी जी कल सुबह निकलना पड़ेगा तकरीबन 7 बजे, आप डायरेक्ट स्टेशन आइये . आपके एरिया से काफी नज़दीक हैं , में वहां आऊंगा ....”

(अब यह बात की रौशनी सलीम के साथ आ रही हैं न रमेश को पता होगी न की असलम को या रोनित को .. उनके लिए कुछ और बहाना बना कर कहेगी रौशनी.)
 
अब रौशनी का सलीम के साथ उसके दोस्त की बेटी के शादी पर जाना तैर हुआ .. रौशनी अब कल से लेकर 3 सिन तक ऑफिस नहीं आने वाली थी इसीलिए वह सब कामों को निपटने लग जाती हैं … सब काम ख़तम करते और लग अलग मीटिंग्स रखते हुए उसे लेट हो जाता हैं .. 6.30 बजे हिये होते हैं जब वह वापस घर जाने रेडी होती हैं .. वह बहार जाती हैं ंगो के की उसे रमेश अभी भी उसके इंतज़ार में वहां दीखता हैं ..

रौशनी इस बात से काफी सरप्राइज होती हैं और उसे यह बात भी पसंद आती हैं की रमेश उसके लिए इतना वक़्त रुके हुए थे..

रमेश भी वहां रौशनी को डेल्ह बड़ा खुश होता हैं .. उसे लगा था शायद वहां से रौशनी चली गयी होगी… रौशनी अब रमेश के पास चूतड़ों को मटकते हुए चली जाती हैं .. रमेश अब रौशनी की मटकती चाक ो देख उसके लोडे को खुजलाता हैं .. यह सब रौशनी देख बुइ लेती हैं और उसके दिमाग मज्नुहोह दो अलग ख्याल आने लगते है

अरे देख तोह सही फिर से हु बुद्धा उसके वहां खुजला रहा हैं .. उफ़ कितना गन्दा हैं ..

रौशनी तू मेरी सुन .. इसका मतलब हैं वह शाम को भी तेरे जलवे से मस्त हो रहा हैं … काफी बूद मर्द हैं …

अरे कैसे बोल्ड … गंदे हैं गंदे . भला ऐसे भी कोई किसी महिला को देख करते हैं .. ऐसे खुले में वहां खुजलाना छी

“रौशनी देख .. ऐसे सब हरकतें बोल्ड मर्द hi करते हैं .. तेरी प्यास बुझानी हैं न तोह ऐसे hi लोडे की तलाश हैं तुझे .: बुद्धा होलार भी मस्ती से मज़्ज़े देगा ..

“रौशनी नहीं तू अच्छी हैं शादीशुदा हैं , पति से प्यार करती हो .. बस अपनी प्यास बुझाने ऐसे इन मर्दों से मत पैट जाना .. संभल कर रहना ..

“रौशनी तुझे झुंड को संभल कर मिला hi क्या हैं .. अपने पति से तने .. वह तुम्हरी प्यास भी नहीं बुझाते .. और यहाँ तोह एक आम्र्ड तैयारवही हैं तेरी पुआस बुझाने .. उफ़ देख कैसे हवस की नज़र से देख रहा हैं तेरे बदन को …


रौशनी भी उसकी डेविल थॉट्स से सहमत होती हैं .. सच मेंरामेश उसे काफी घर रहे थे .. पिरे हवस की नज़रों से .. बहुत दिनों बाद किसी मर्द ने उसे इतनी हवस की नज़र से देखा था .. रमेश की नज़र देख उसकी छूट में भी हलचल होने लगी थी … थोड़ा सा रास भी टपक रहा था उसकी छूट से .. वह आज सोची की थोड़ी छेड़खानी करे रमेश से ..

“अहह रमेश जी आप मेरे लिए इतनी देर रुके हैं सो स्वीट … “

“अरे रोशिनी जी आप हमारी ख़ास दोस्त हैं .. आपके लिए इतना रुक तोह सकता hi हूँ ..

“अच्छा बस ख़ास दोस्त हूँ इसीलिए .. ?”

“रौशनी जी अब ख़ास दोस्त तोह आप hi बनाये हो मुझे .. मुझे तोह दोस्ती से बढ़ कर कुछ और भी चाहिए ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं और रमेश से कहती हैं –“अच्छा रमेश जी ऐसे हैं .. अच्छा तोह बताओ ख़ास दोस्त के आगे भी आपको कुआ चाहिए ..”

(रौशनी जी मुझे तोह आप hi चाहिए .. उफ्फ्फ ऐसी गरम माल कभी नहीं मिली हैं .. उफ्फ्फ इतनी बड़ी मस्त चूचियों वाली और फिट महिला के साथ तोह रातें रंगीन करनी चाहिए ..) ऐसे रमेश मन में सोचने लगता हैं ..

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“रौशनी जी बस आप पर hi हैं सब कुछ .. आप hi ख़ास दोस्त से ज्यादा बन कर दिखाइए .. वैसे एक बात कहु .. ख़ास दोस्त उस दिन जैसे फोर्ट के पार्क में जो हरकतें करि .. वह नहीं करते .. वह हटकतें तोह बस ….

“रमेश जी खुल कर बताइये न .. वह हरकतें कोण करता हैं … आप आज तोह खुल कर hi बातें करिये …

रौशनी का दिल तेज़ी से धधकने लगता हैं .. वह पूरा हिंट दे रही थी की उसे रमेश से और नॉटी बातें सुन्नी थी …

”रमेश जी आज तोह खुल कर hi बातें हो जाए .. बताइये . आपको इस ख़ास दोस्त में सबसे अच्छा क्या लगता हैं .. सच बताइये झूटी तारीफ न करिये ….”

“रमेश का लोढ़ा तोह पूरा टाइट हुआ आता हैं .. वह तोह आज रौशनी को पूरी दिल की बता बताने वाला था .. आज वह एक बड़ा स्टेप लेने वाला था .. जो होगा वह देखा जाएगा .. ऐसे सोच से रमेश बोलता हैं

“मेरी ख़ास दोस्त हैं न .. वह बहुत hi सेक्सी हैं .. उसके बदन की खुशबु जो हैं मुझे वह पसंद हैं .. मुझे उसके ादाएँ पसंद हैं , उसकी सरिस के स्टाइल और अलग अलग ब्लौसेस पसंद हैं .. मुझे उसके गुलाबी होठं बहुत पसंद हैं.. उसकी चाल ढल है है .. मनो कोई अप्सरा चल रही हो … मुझे मेरी ख़ास दोस्त के नशीली आँखें भी पसंद हैं … उसकी कमर पर जो चैन हैं वह भी काफी पसंद हैं .. दिल करता हैं मेरी ख़ास दोस्त को बाँहों में भर लूँ और पूरी तरह से चुम्लूं … उसे अपनी बाँहों से न जाने दू .. यह सब मुझे मेरी ख़ास दोस्त के बारे में पसंद हैं और मुझे ऐसे hi मेरी ख़ास दोस्त चाहिए ..”

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रौशनी यह सब सुन कर शर्मा जाती हैं .. अब उसके दिमाग में बस एक hi ख्याल हैं हु हैं उसकी डेविल थॉट्स की …

“देख रौशनी कहा था न ऐसे hi मर्द की तलाश हैं … देख उसका मोटा लोढ़ा टाइट हैं .. तेरी फुदकती छूट में गहसेगा तोह कितना मज़्ज़ा देखा .. उफ़ देख तोह सही …

रौशनी फिर रिक्शा के एक साइड जाती हैं और अपनी नज़र रमेश को उभर पर डालती हैं .. रमेश भी इस बात को पहचानता हैं क्यूंकि आईने से पीछे के सीट पर उसे सब दिख रहा था … वह अब जान बुझ कर अपनी पंत की ज़िप खोता हैं … ऐसे करने से अब रौशनी को उसकी चड्डी दिख जाती हैं जहाँ एक बड़ा सा तम्बू बनाया हुआ दीखता हैं उसे .. उसकी छूट से रास और बहने लगता हैं .. दिल की धड़कन तेज़ होती हैं …

“वैसे रौशनी जी आप क्यों शांत हो .. कुछ बोलिये तोह सही या बस देखती hi रहोगी ः …”

रौशनी अब हड़बड़ा जाती हैं और अपनी नज़र रमेश के तम्बू से हटा लेती हैं …

रमेश अब इसका फायदा उठा ता हैं और अपने लोडे को अपनी चड्डी से बहार निकल लेता हैं ..

“रौशनी जी अरे देखिये न .. देखने में कोई तकलीफ नहीं हैं न.. देखिए देखिये ..

रौशनी की दिलों की धधकने तेज़ होती हैं .. और वह फिर से रमेश के पंत के उभर क देखने जाती hi हैं की उसे रमेश का मोटा टाइट लोढ़ा ऐसे खुले में देख सरप्राइज होती हैं .. उसकी मंकी डेविल थॉट्स चलने शुरू होते हैं..

उफ्फ्फ देख रौशनी कैसे तेरी बातों से फनफना रहा हैं रमेश जी का लोढ़ा … तेरे लिए hi हैं अब तुझे hi तैर करना हैं ऐसे दमदार लोडे से अपनी प्यास भुजाओगी यान यही … पूरी तरह से थोक थोक कर तुझे तृप्त कर देगा रमेश का लोढ़ा ….

रौशनी अपनी से ऐसी थॉट्स से काफी शर्माती हैं … लेकिन वह अपनी नज़र रमेश के मोठे लोडे से हटा नहीं प् रही थी… अब रमेश एक हाथ से रिक्शा चला रहा था और दूसरे से एप लोडे को हिला रहा था … उसने जान बुझ कर रिक्शा के साइड के परदे गिर्द िये थे ताकि कोई न देख सके अंदर .. बस एक लाल बत्ती चल रही थी और वह रौशनी के नज़रों के समन अपने नग्न लोडे को हिला रहा था …

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रौशनी की चूचियों की निप्पल्स पूरी टाइट होती हैं .. छूट से रास और बहने लगता हैं .. आज तोह वह सब कुछ खुल कर एन्जॉय कर रही थी .. उसकी शर्म .. हाय सब निकल रही थी …

(रौशनी जी .. को लगता हैं बहुत पसंद आया हैं मेरा लोढ़ा …. ानकेहिं हैट नहीं रही हैं न .. उफ्फ्फ मेरी ख़ास दोस्त को तोह वह सलामी दे रहा हैं … एक दिन आज़मा कर ओह देख लो … रात भर ठोकूंगा तेरी छूट ..)

इतना गरम माहौल हो रहा हैं रिक्शा में .. वहां रमेश के लोडे से हलके से रास की बूँदें निकल रही थी और रौशनी की छूट से तोह रास बहने लगा था ….

रौशनी लेकिन खुद को संभल लेती हैं …”उफ़ रमेश जी अब घर ड्राप करिये जल्दी से .. कल मुझे दोस्त के शादी पर जाना हैं आपको बता थान ा .. रौशनी जूथ बोलती हैं

“उफ़ रौशनी जी आप अकेली जार यही हो तोह मुझे भी साथ ले चलिए … “

“नहीं में अपने पति के साथ जार यही हूँ…” रौशनी फिर से झूठ बोलती हैं ..

“अच्छा फिर कब आओगी वापस … बहुत दिन दूर न रहो हमसे मेरी ख़ास दोस्त जो हो आप …”

“हाँ बाबा बस 2 दिन में वापस आ जाउंगी …. फिर अपनी ख़ास दोस्त से फिर मिल लेना …”

“रौशनी जी इस बार बस रिक्शा में नहीं मिलना आप से .. आपको मेरे घर भी आना होगा .. मेरी ख़ास दोस्त होकर आप मेरे घर पर कभी आयी hi नहीं .. यह तोह गलत बात हैं न ….”

“हाँ हाँ आउंगी उफ्फ्फ अब घर ले चलो .. पैकिंग भी करनी हैं उफ़ चलिए अब उस चीज़ को भी दाल hi दीजिये अंदर .. उफ्फ्फ आप कितने गंदे हो … उफ्फ्फ्फ़”

रस्ते पर ट्रैफिक के कारन वह अपने लोडे को चड्डी में दाल कर ज़िप लगा कर रक्षा चलने लगता हैं .. फॉर फिर कुछ मिनटों के बाद वह रोशन को घर ड्राप कर देता हैं… रौशनी को अब रिक्शा में जो भी हुआ था उसका एहसास उसे शर्मिंदा कर देता हैं और वह बिना कुछ बोले वहां से चली जाती हैं .. पीछे से रमेश रौशनी की चूतड़ों को देख फिर से सोचता हैं की आज फिर से उसे मुठ मार कर hi अपनी हवस मिटानी पड़ेगी …
 
रौशनी घर जाते हुए बस रिक्शा में हुयी घटनाओं को सोचती रही .. आज उसने खुले नज़ारे में रमेश जी का मोटा लुंड देखा था .. सच में काफी मोटा था उनका लुंड .. अब असलम के जैसे तोह कट लुंड नहीं था न hi उतना लम्बा लेकिन था असलम से और मोटा लुंड

.. रमेश के लुंड के सर पर चमड़ी थी बिलकुल उसके पति जैसी ..

उसके नज़र के सामने वह अपने लुंड को ऐसे मसालेगा और उसके साथ खेलेगा उसकी उम्मीद नहीं थी रौशनी को .. वह तोह मन में काफी गर्माहट महसूस कर रही थी ..

(उफ़ रौशनी क्या मोटा लुंड हैं उफ्फ्फ और इतने बोल्ड हो गए हैं रमेश जी की तुम्हारे सामने hi उसे हिला रहे थे .. उफ्फ्फ और इतना सफ़ेद माल तोह बिना शॉट मारे hi उगल रहा था उनके लुंड से .. अगर पहात जाए तोह कितना गधा माल निकलेगा उनके लुंड से ) इतना सोचते हुए hi रौशनी की छूट काफी गीली हो चुकी थी और हॉन्टी मून उसके छूट क िरस टपकने लगी थी …

वहां घर पर अब वह रोनित को किस मुँह से देखेगी वही सोच रही थी रौशनी .. लेकिन फिर उसे कल रात की फोगट याद आयी रोनित के साथ वलै और ओछी की अब ोयास तोह वह बुझा नहीं रहे हैं इसलिए ऐसे किसी गैर मर्द के लुंड के बारे में सोच उसकी छूट गीली हो रही हैं .. अब वह भी औरत थी और इसकी ज़रूरतें थी तोह हु क्या करती …) ऐसी तसली खुद को देते हुए रौशनी घर एंटर हुयी ..

घर पर लेकिन रोनित नहीं थे .. उसने एक नोट छोरा था की वह आज रात लेट आएँगे .. रौशनी उस नोट को देख सर पर हाट मार ली … (उफ़ अगर रोनित मुझे नहीं बताएंगे की रात को कहाँ काटे हैं तोह में भी उनको बस नोट hi रखूंगी की में कल से 2 दिन कही बहार जा रही थी .. उसे में कुछ नहीं बताउंगी ) ऐसे सोचते हुए रौशनी ट्रिप की पैकिंग में लग गयी ..

अब ट्रिप में कौनसे कपडे लेने चाहिए उसी के बारे में वह सोचती रही … आखिर में उसने डीडे कर लिया की वह कुछ सरिस लेगी और फिर कुछ डिज़ाइनर ब्लौसेस वगेरा … उसे इस वेकेशन की सख्त ज़रुरत थी .. लेकिन मन में कही इसे यह भी ख़ुशी थी की वह सलीम के साथ कुछ टाइम सोएन्ड करेगी उनकी फ़्लर्ट की मस्ती का मज़्ज़ा लेगी … उसके दिमाग में सलीम का लोढ़ा घूमने लगा … उनका कला मोटा सांप जैसा लुंड , जो असलम से भी बड़ा और रमेश से भी मोटा था .. उनके कुंड की सोच रौशनी के छूट से रास फिर से टपकने लगी … ट्रिप में क्या होगा उसकी वह कल्पना करने लगी … रौशनी जल्दी सो गयी क्यूंकि उसे जल्दी 6 बजे hi वेक उप करना था ..

अगली सुबह रौशनी नहाने चली गयी और गरम पानी के निचे शावर लड़ने लगी तब उसका मन सलीम पर चला गया .. वह सलीम के बारे में सोचने लगी .. आज वह 12 घंटे की सफर सलीम के साथ बिताने वाकई थी … उसे सलीम के लोडे की याद आयी और आँखें बंद किये उसकी उँगलियाँ उसकी छूट की लिप्स पर चली गयी .. वह सलीम के मोठे काळा लुंड के सोने देखने लगी … उसकी उँगलियाँ उसकी छूट पर चलने लगी … वह सलीम के कट लोडे के बड़े सर की सोची .. (उफ्फ्फ उनके लुंड का टॉप hi इतना मोटा हैं .. बिलकुल पहाड़ी ालो जैसे … उफ्फ्फ्फ़ इतना मोटा लुंड का सर तोह बहुत काम मर्दों में hi होता होगा उफ्फ्फ्फ़ , क्या वह सफर में उनके लुंड के दर्शन देगा … क्या मस्ती करेंगे सलीम जी उफ्फ्फ , मुझे भी कुआ उनकी मस्तियाँ पस्न्द आएगी .. उफ्फ्फ्फ़ मेरी पुआस बुझनी चाहिए थी रोनित ने उफ़ ऐसे ख्याल तोह नहीं आते .. ममम) और रौशनी अपनी छूट पर उँगलियों को एयर तेज़ी से चलने लगी … ऊपर से गरम शावर का पानी उसकी छूट पर बह रहा था . और वह सलीम के मोठे लोडे की सोचती हुयी उसकी छूट से खेल रही थी … उसके आँखों के सामने सलीम का झूलता हुआ मोटा लोढ़ा … उसकी लुंड के सर से उसके रास का टपकना … उफ़ सब उसकी सोच पर हावी पड़ने लगी थी … और कुछ एक्सोन्द अपनी छूट से खेलते हुए .. रौशनी अहह की आवाज़ें निकल रही थी … फिर उसका फ़ोन बजने लगा . और उसकी आँखें खुल गयी … खुद को अपनी छूट पर अपनी उँगलियों को पा कर वह शर्मिंदा महसूस करने लगी ..फ़ोन पर उसके पति के दो मिस्ड कॉल्स थे ..

रौशनी शावर से बहार निकली और रोनित को फ़ोन लगायी.

“हाँ रोनित बोलो क्या हुआ ?

“रौशनी कल तुम कुछ बहार जाने की बोल रही थी ..?”

“हाँ में अपनी सहेली की बेहेन के शादी पर जाने वाली हूँ .. मेरी सहेली भी आएगी मेरे साथ ..”

“कौनसी सहेली , वही अर्चना .. या फिर शांति

“तुम्हे क्या रोनित .. तुम बताते हो कौनसे दोस्त के साथ कहाँ जाते हो … मुझे इतनी पूछताछ क्यूब?”

“रौशनी में बस कौनसी सहेली के साथ व्है आउच लिया हूँ … वैसे तुम्हे तोह पता हैं मेरे दोस्त लॉन हैं .. उनके साथ hi रेहताबहुन..”

“अच्छा तुम अभी भी उनके साथ hi हो … अच्छा स्पीकर पर रखो उनसे बातें करती हूँ ..”

“रौशनी क्या तुम मुझ पर शक कर रही हो .. क्या में पूछता हूँ तुम ंगो से लेट क्यों आती हो .. या वहां किसके साथ उन दिनों रही थी ..

“रोनित फिर से वही बात .. लगता हैं तुम्हे बस घर में रहने वाली बिवो hi चाहिए थी … तुम्हारे ख़यालात भी वही हैं छोटे गाँव के मर्दों के ..”

ऐसे उन दोनों में फिर से झगड़ा होता हैं .. दोनों ग़ुस्से में फिर फ़ोन रख देते हैं .. रौशनी का मूड अब बिलकुल ख़राब हो चूका था … वह नाश्ता बनाने चली जाती हैं फिर नाश्ता कर थोड़ा सा शांत होती हैं .. (उफ्फ्फ आज फिर से रोनित के साथ लड़ाई … यह हमारी मैरिड लाइफ में इतनी लड़ाई .. )

रौशनी फिर अपने कमरे में जाती हैं .. बीएड पर एक अदि ब्लाउज पहनती हैं .. अब ब्लाउज स्लीवलेस था और डीप बैक भी लेकिन आगे से पूरी कवर्ड .. लेकिन उसकी नंगी ोीठ बिलकुल चमक रही थी .. इतनी स्मूथ बिना कोई बालों वाली .. ऐसी पीठ जहाँ बस मर्दों को चूमने और चाटने का मन करता हो वैसे वाली ..

बालों को वह एक बन में टाई करती हैं जिससे उसकी गोरी पीठ साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी … होठों पर गुलाबी लिपस्टिक और उँगलियों पर लाइट ब्राउन नेल पोलिश … रौशनी बिलकुल गज़ब की आइटम लग रही थी जो जल्द hi सलीम के लोडे में जान और दिल पर जहखां देने वाली थी ..

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अपनी बैग को लेते हुए वह ट्रैन स्टेशन निकल पड़ी ..

स्टेशन अपर सब मर्दों की नज़र रौशनी पर hi थी … वहां सब मर्दों के लोडे टाइट हो रहे थे .. वाशरूम में जाते मर्दों की संख्या बढ़ रही थी .. क्या सब मुठ मारने जा रहे थे .. मनो ऐसे hi हो ..

सलीम ट्रैन के पास hi रुका हुआ था . रौशनी को आते देख उसके लोडे में जान आने लगी .. फिर रौशनी की पीठ देख तोह उसका लोढ़ा पुरस टाइट हुआ था ..

अब बात ऐसे थी की सलीम ने एक 4 सीट वाली एक केबिन की बुकिंग की थी .. उसने अपने दोस्तों को और दो सीट की बुकिंग करवाई थी .. इसलिए अब केबिन में बस हु और रौशनी hi रहने वाले थे पूरी दफर .. इस बात की भनक रौशनी क ोटोः बिलकुल नहीं थी ..

“नमस्ते रौशनी जी .. गुड मॉर्निंग , टाइम पर आयी आप … शुक्र हैं आई हो , मिझे तोह लगा आओगी hi नहीं”

“कैसी बात करते हो सलीम hi , एक बार ज़ुबान दित ओह मुकरती नहीं में ..

रौशनी भी सलीम को ऊपर से निचे देखने लगी .. आज वह काफी स्मार्ट लग रहे थे क्यों की आज वह सफ़ेद शर्ट और पंत में थे और बालों को भी बनाए हुए थे .. रौशनी की नज़र तोह सलीम के लोडे के वहां भी गयी .. वह देख सकती थी की वहां एक उभर हुआ हैं … उसे देख वह शरमाई .. वह सोची की उनका लोढ़ा तोह इसे देख hi ऐसे टाइट हुआ होगा उफ्फ्फ ..

“रौशनी जी .. अरे आप क्यों बैग उठाने की तकलीफ लार रही हो … रुको”

सलीम ने फिर सीटी बजे और एक बुद्धा आदमी आया वह एक कुली था .. उसने दोनों के बैग अपने सर पर ुटहाए …

“अरे बाबा आपसे दो बैग संभाले जाएंगे क्या … “

“बिटिया हाँ बहुत सालों से करते आ या हूँ कुली का काम ..”

“हाँ बाबा लेकिन अब आपकी इस उम्र में आप ..?”

“बिटिया अरे मेरी उम्र की आप न खैर करिये .. इस उम्र में बुइ काफी दमदार हैं हम .. हमारी जोरू को hi पूछ लीजिये .. ः “

रौशनी उस बुड्ढे की बात समझी और शर्मायी .. वहां सलीम भी उस बुड्ढे का ऐसे बात करने से मुस्कुराया ..

“वैसे बिटिया तुमने तोह बैग उठानी hi नहीं छाइये आपनजैसी नाज़ुक महिला .. आप जैसी मस्त महिला क ोटोः ीासे काम हम बुद्धो से hi करने चाहिए .. मज़दूरी वाले.. हम में भी काफी दम रहता हैं.”

“अच्छा जी आप भी न .. कितनी तारीफ करोगे ..”

“अरे बिटिया आप हो hi तारीफ करने वाली … आप जैसी आइटम .. मतलब आप जैसी लेडीज किट ओह तारीफ hi तारीफ कर ी चाहिए भले hi और कुछ न करे .. और उस कुली ने बेझिझक रौशनी को आंक मारी …

रौशनी तोह पूरी शर्म से लाल हुयी थी .. सलीम भी वहां रौशनी और उस बुड्ढे की बातें सुन मुस्कुरा रहा था . उसे पता था की रौशनी को तर्रीफ़ें बहुत पसंद हैं .. बुड्ढे की तारीफ सुन वह खुश होगी और उसके साथ भी सफर मस्त कटेगी ..

“रौशनी जी आप ऊपर चढ़िये पहले फिर हम आएँगे ..”

रौशनी ट्रैन में चढ़ गयी औरपीछे से दोनों कुली और सलीम रौशनी की हिलती चूतड़ों को देख रहे थे .. दोनों के लोडे अपनी होनी चड्डी में टाइट हुए थे ..

अब कुली भी सामान रख जा रहा था तब सलीम ने उसे कुछ पैसे दिए ज़ज़

कुली अब सलीम को देख बोलै “साहब ऐसी आइटम कैसे पटायी आपने .. कोई राज़ हैं तोह बताइये .. क्या माल हैं यार इस उम्र में भी लोढ़ा गरम कर देती हैं …”

“बाबा ऐसी आइटम बहुत शिकवों के बाद पैट जाती हैं … आप की बस की बात नहीं .. कब पता आप ऊपर स्वर्ग पहुंचोगे पता नहीं ः .. “

कुली एक गन्दी नज़र सलीम को दाल वहां से जाता हैं और मन में सलीम को गालियां देता हैं …

सलीम फिर रौशनी के पास केबिन के अंदर चला जाता हैं …

वहां रौशनी अब एक डिब्बे में बैठी हुयी सलीम को आते देखती हैं ..

“सलीम जी अभी कितना टाइम हैं ट्रैन को निकलने मेजन..”

“रौशनी जी यही कुछ 5 मं.”

“सलीम जी डिब्बे में तोह कोई नहीं है.. हम दोनों के सिवाय”

“हाँ रौशनी जी लगतभाईन इस केबिन के पैसेंजर्स का प्लान कैंसल हुआ होगा .. लगतभाईन बस आप और में hi यह सफर करेंगे …”

और सलीम रौशनी को देख मुस्कुराता हैं .. वह रौशनी के बदन को देख उसका दिल गार्डन गार्डन होतावहिं ..

रौशनी भी सोच में पद जाती हैं (उफ़ पूरी सफर बस में और सलीम जी hi इस केबिन में उफ्फ्फ … ) और उसकी नज़र चोरी छुपकर सलीम के क्रॉत्च के तरफ जाती हैं और वह एक उभर पहले से hi देख लेती हैं …

और फिर नज़रे फेर लेती हैं …

सलीम का लोढ़ा एक डिब्बे में बस रौशनी की बदन की खुसबू से hi झटके मार लेता हैं .. वह रौशनी की गोरी गोरी बाँहों को देखताभयं .. फॉर उसकी कमर को … और रसीले होठों को .. (उफ़ सलीम माल लग रही हैं रौशनी उफ्फ्फ … पूरी सफर हैं इसके साथ … कुछ मस्ती हो जाए तोह मज़्ज़ा आएगा …)

अब ट्रैन चलने लागतिभाईं. रौशनी अब सलीम के सामने सीट पर बैठी थी ..

रौशनी जी सफर शुरू हो गयी हैं , आपको कैसे लग रहा हैं..”

“सलीम जी काफी अच्छा लग रहा हैं .. एक के डब्बे में काफी जगह हैं , लगता हैं यहाँ अपर जो आने वाले थे उनकी ट्रैन मिस हुयी हैं”

सलीम मन में सोचते हुए (आत्रेय मेरी जान , मेरे दोस्त hi थे जिन्होंने रिजर्वेशन करि थी.. अब वह नहीं आएँगे और हम दोनों hi इस सफर को एक साथ काटने वाले हैं ..) इस सोच से सलीम का लोढ़ा अपनी चड्डी में झटके मारने लगा …

“हाँ रौशनी जी अब उनकी ट्रैन निकल गोई .. बस अब आप और में hi सफर एक साथ गुज़रेंगे.:

“हाँ सलीम जी .. वैसे आज आप काफी स्मार्ट ड्रीस्स करे हो …”

“आपको में अच्छा लगा न .. नए खरीदे हैं , आखिर कार आपके साथ जाना था न .. आप तोह हमेशा की तरह बाहर अच्छे मस्त साड़ी ब्लाउज पेहेन कर आयी हो … काफी सेक्सी लग रही हो आप.”

“उफ़ सलीम जी आप भी न .. बस झूटी तारीफ ..” और रौशनी सर शरमाते हुए फेर लेती हैं …”

वहां सलीम रौशनी की नंगी बाँहों को देख .. उसके मखमली गोर बदन को देख काफी गरम हो रहता .. उसका लोढ़ा पूरा टाइट था … (काश रौशनी जी आप पास आती , फिर सफर भर ढेर सारा प्यार करता में जाएं…)

फिर रौशनी कुछ लेने उठी और बैग को सीट पर रख अंदर से कुछ निकलने झुकी.. सलीम के सामने ापब उसके चूतड़ लहरा रहे थे .. सलीम तोह रौशनी की डीप ब्लोइसे वाली बैक को देख रहा था … मन कर रहा था उसे सहु की ुर उसे पीछे पीढ़ पाए चुन ले .. वह अपनी पंत के ऊपर से अपने लोडे को जोरों से मसल रहा रहा … मन कर रहा था की वह रौशनी की चूतड़ों को दबोच ले और उसे चुम ले .. अपने लोडे को उसपर रगड़ ले … उसके लोडे से काफी रोएक्युम निकल रहा भी था ..

रौशनी ने बैग से एक परफ्यूम निकल अपने बाँहों पर छिड़कने लगी … सलीम को उसकी खुशु से और मस्ती च रही थी और उसका लोढ़ा और झटके मारता रहा ..

फिर रौशनी बैठ गयी … सलीम उसे घूरे जा रहा था .. रौशनी सलीम की नज़र से अपनी अक्सर मिले .. उन्हें उसे घूरते देख वह शर्मा रही थी ..

“उफ़ सलीम जी क्या देख रहे हो …. शर्म आ रहीभाईब उफ्फ्फ”

“रौशनी जी बस आपकी खूबसूरती देख रहा हब .. आज सच में कमल की लग रही हो .. एकदम कड़क …”

सलीम के मुँह से ऐसी बात सुन रौशनी के गाल और लाल हो गए … उफ्फ्फ सलीम जी आप बुइ न .. बस भी करिये

सलीम मुस्कुराया … “क्यों रौशनी जी आपको तारीफ सुन्नी पसंद नहीं ..

“सलीम जी ये कड़क क्या कह रहे हो .. उफ्फ्फ आप जरा ज्यादा hi खुल कर बातें रहे हैं ..”

“रौशनी जी बस कड़क तोह बोलै .. में ठोस hi बोलै आप कड़क माल लग रही हो …”

रौशनी और शर्मायी .. “उफ्फ्फ सलीम जी आप तोह रहने hi दीजिये .”

रौशनी ने उसके माल कहने पर ग़ुस्सा न ाकरने से सलीम खुशभुआ .. सोचा साली लाइन पर आ रही हैं .. दो दिन ख़तम होने तक तोह पूरा अपना बना लूंगा रौशनी को ..

सलीम जी उठ कर बहार जाने लगे ..

“सलीम जो कहाँ जा रहे हो आप” रौशनी पूछी

“रौशनी जी जरा पिशाब करने जा रहे हैं ..”

रौशनी पिशाब शब्द सुन कर शर्मायी .. “उफ्फ्फ जाइये जाइये …”

रौशनी की नज़र सलीम के लोडे पर गयी जो उसे दिख रहा था अपने hi औकात में आ चूका था … वह आल्टो गौर शर्मायी और मुँह फेर ली …”

सलीम स्माइल देते हुए वहां से निकल गया .

सलीम चले गए थे उतने में hi ट्रैन का तक आया रोषनिनके केबिन में..

रौशनी को डेल्ह वह उसे देखते hi रह गया … तक कीनुमार तकरीबन 50 की थी .. वह रौशनी जैसी गोरी बदन वाली मखमली महिला को देख गरम होने लगा …

“मैडम जी .. टिकट प्ल्ज़”

रौशनी ऊपर देखि तक को .. तक की नज़र उसे अपने बदन पर देख वह सेहम गयी .. अब तक तोग वह समझ गयी थिन्की ाईस नज़र कब होती हैं अमरदों की … बिना कुछ सोचे उसकी भी नज़र की एक झलक तक के क्रॉत्च एरिया पर गयी …

तक फिर बिना कुछ बोले एकदम से रौशनी के बगल मेजन बैठ गया .. टिकट प्ल्ज़ मैडम…

रौशनी उसे अपने पास बैठे देख थोड़ी सेनेम गये .. जल्दी से अपनी टिकट निकलने लगी .. टिकट निकलते हुए तक बस रौशनी के बदन को घूरे जा रहा था .. उसकी नंगी बाँहों को , नंगी पीठ पर … उसके गालीन पर और गुलाबी होठों पर .. उसका लोढ़ा टाइट होने लगा था .. ऐसी सुंदरी ट्रैन में बहुत दिनों से देखि नहीं थी तक ने … क्या गदरायी बदन वाली हैं यार उफ्फ्फ मममम पति के तोग मज़्ज़े hi हैं … वही सोचते हुए वह रौशनी को घूरते रहा.

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आखिर कर रौशनी ने टिकट निकली और एक को दिखाई.. टिकट को लेते हुए तक बे रौशनी के हाथों का स्पर्श किया … और उसका लोढ़ा उसकी पंत में उभरने लगा.

रौशनी थोड़ी सी उनकंफर्टबले फील करने लगी … तक टिकट देख बोलै “मैडम वैलिड टिकट हैं..”

व्विअस आप अकेली सफर तैर कर रही हो …”

“नहीं तक जी में किसी के साथ हूँ …”

“अच्छा कौन हैं वह खुशनसीब जो आपके साथ सफर तैर कर रहा हैं …”

“वह ….”

रौशनी कुछ बोलती आगे तब तक सलीम आ चुके थे … वह तक को रौशनी के सीट पर बैठे देख सोचा (साला बीएः तक भी लाइन मारने लगा होगा रौशनी पर …”

सलीम अपनी टिकट निकल कर्त स को दिखने लगा ..

“आपकी भी टिकट वैलिड hain..waise आप और मैडम …”

“क्यों तक .. क्या हुआ”

“रौशनी जी यह आपके क्या लगते …”

“तक उन्हें क्यों पूछ रहे हो .. हु मेरी बेगम हैं .. आपको कोई ऐतराज़ …”

सलीम को उसे बेगम कहते सुन रौशनी बस सलीम को देखते रही .. वहां तक भी काफी स्तनद हुआ था …”

रौशनी अपनी नज़रों से सलीम को कह रही थी मनो .. यह क्या कह दिया आपने .. सलीम बस मुस्कुराया …

“अआप और मैडम .. आपकी बेगम … “ तक अब रौशनी को देखते रहा फिर सलीम को .. और फिर से रौशनी को …

“मैडम आप उनकी बेगम ….???”

रौशनी को समझ नहीं आया की वह क्या करे … वह फिर से सलीम पर नज़र डाली …

फिर बस तक को देख सर को हाँ में हिलने लगी …

वहां तक तोह काफी स्टन था ..

“बेगम पास तोह आओ . दूर क्यों बैठी हो …”

रौशनी बिलकुल एक आज्ञाकारी महिलाजिसे उठा कर सलीम के बगल में बैठ गयी .. सलीम ने अब रौशनी की नाज़ुक मलाईदार हाथों को अपने हाथों में लिया .. और रौशनी की लैप में दोनों के साथ रखे …

“तक , देखिये यह मेरी बेगम हैं …

तक बस रौशनी को सलीम के हाथों में हाथ डेल देख स्तब्ध था … उसके मुँह से कुछ शब्द नहीं निकल रहे थे .. सलीम मन में काफी मुस्कुरा रह था .. तक को जलने उसने रौशनी के गालों को चूमा भी … रौशनी तोह इस सब से स्तब्ध बैठी hi रही … तक तोह और भी पुज़्ज़लेड था …

फिर सलीम ने अपने pc=iche रखे एक हाथ से रौशनी की नंग्न पीठ सहलाने भी लगा … रौशनी को थोड़ी गर्मी खुद के अंदर महसूस हुयी इस सब हरकतों से …

“ठीक हैं तक जी .. अब पता चला .. चलिए अब जाइये हमें वक़्त बिताने दीजिये .. हमारी टिकट्स भी सही हैं .. अब प्ल्ज़ जाइये …”

तक वहां से उठ कर जाने लगा .. एक आखरी बार पीछे मुद कर एक बकले बुड्ढे मर्द को एक हसीं युवा लेडीज के साथ ऐसे नज़दीक बैठे देख वहां से स्तब्ध होता हुआ चला गया और दरवाज़ा बंद कर दिया ..

जीएस ेट्स चला गया , रौशनी न अपने हाथों को चुराया …”सलीम जी यह क्या e=keh दिया आपने .. में और आपकी बेगम .. आप जयदा कर दिए ..”

“अरे रौशनी जी मुझे पता हैं ये तक लोग .. आपको और तंग करते ऐसे नहीं कहता तोह … बुरा क्यों मान रही हो आप , सच में थोड़े hi आप मेरी बेगम हो .. और सलीम रौशनी को देख मुस्कुराने लगा …

“उफ़ फिर भी अब वह क्या सकेंगे .. उफ्फ्फ्फ़ सलीम जी आप तोह कुछ ज्यादा hi करते हो कभीकभार.”

अब रौशनी उठ कर जाने hi वाली थी की अचानक उसे सीट पर एक कुइपकली दिखी .. वह अहह छिपकली कह कर पीछे साली के बाँहों में जा गिर पड़ी … उसके चहरे को सलीम के चूड़े साइन में दबती हुयी .. सलीम भी अब रौशनी की पीठ को सिखलाने लगा … “उफ़ रौशनी जी छिपकली से फिर से दर गयी आप ….”

सलीम बस रष्णि की अनंगी बाँहों को और पीठ को जोरो से मसलता रहा …

रौशनी वैसे hi कुछ मं सलीम से चिपकी हुयी बैठी थी .. सलीम को मज़्ज़ा आ रहा था और सुका लोढ़ा तोह काफी झटका मार रहा था … फिर रौशनी ने सर ऊपर किया तोह उसकी आँखें और सलीम की आँखें मिली .. कुछ पल वह एक दूसरे को देखते रहे … सलीम ने फिर एक ऊँगली से रौशनी की बालों के एक लत को साइड में कर लिया .. लेकिन दोनों के नज़ारे एक दूसरे से जुड़ा न हुए … काफी गरम माहौल बन चूका था …

रौशनी उठने लगी की सलीम बोलै “उफ़ रौशनी जी .. बैठे रहिये न .. अच्छा लग रहा हैं ….”

रौशनी की गुलाबी होठं सलीम के काळा भद्दे होटों के काफी करीब थे .. रौशनी की अंदर काफी गर्मी महसूस हो रही थी ..

धीरे से उसकी आँखें सीट पर वह डाली लेकिन छिपकली वहीह ओने से वह फिर से सलीम के कन्धों को जकड़ने लगी … सलीम का लोढ़ा काफी फनफना रहा था पंत में .. रौशनी की को अब सलीम के लोडे के झटके निचे महसूस करने लगी .. (उफ़ सलीम जी अभी से hi .. पुरे सख्त उफ्फ्फ्फ़… वहां छिपकली और यहाँ उफ्फ्फ्फ़ अब क्या kare..)roshni सोचते रही.

तब hi दरवाज़े पर किसीने दस्तक दी .. रौशनी झट से उठ कर सलीम के बगल बैठ गयी …

“ऐबी अब कौन हैं यार .. सलीम जो से बोलै ..

सलीम फिर उठ कर दरवाज़ा खोला तोह देख एक आदमी लंच लिए खड़ा था ..

रौशनी उसे देख बोली .. “बाद में लाना अभी यहाँ एक छिपकली हैं .. मुझे ज़रा तक से बात करनी है …

“रौशनी जी काफी भूक लगी हैं , पहले खाना खा लेते हे फिर …”

“नहीं छिपकली की कंप्लेंट करनी चाहिए … आप नहीं करोगे तोह में करुँगी .. आप खाइये लंच …>”

“रौशनी बाद में ..”

नहीं आप जाओ बाद में मुझे अभी कम्प्लेन करनी हैं.”

फिर वह आदमी बोलै .. मैडम जी तक सर लंच कर रहे हैं .. एक काम करिये .एक डिब्बे यात्रियों को एक डाइनिंग कार हैं .. आप वहां इत्मीनान से लंच करिये .. तब ताकत स सर फिरी हो जाएंगे तोह उन्हें भेज दूंगा आपके केबिन…”

रौशनी को भी भूक तोह लगी थी … वह इस बता से सहमत थी .. फिर सलीम और रौशनी डाइनिंग कार गए लंच करने ..

अब लंच ख़तम होते hi .. रौशनी फिर से उस आदमी को देख बोली .. “भेज दीजिये तक को डिब्बे में .. जल्दी करना …”

अब रौशनी और सलीम डिब्बे में चले गए … दोनों को दुपहर की नींद आने लगी .. एक hi साइड के दो स्लीपर में दोनों सो गए .. रौशनी निचे वाली स्लीपर पर और सलीम ऊपर वाले.

कुछ 1 घंटे बाद रौशनी की आँख खुली … वह कुछ टाइम तक का इंतज़ार करि .. लेकिन तक नहीं आया तोह वह उसे hi जाकर मिलने सोची और कंप्लेंट करने वाली थी.. सलीम को अभी तक सोते देख वहां चुपके से डिब्बे के बहार तक को ढूंढने चली गयी.

कुछ 2 ट्रैन के कम्पार्टमेंट चोर उसे तक दिखा … और उसके पास चली गयी ..

“रौशनी को पास आते देख तक के लोडे में जान आनेलगी ..

रौशनी अब उसके करीब आकर कड़ी हुयी …

“तक जी कंप्लेंट करनी हैं ….”

“कौनसी .. ओह हाँ सॉरी माफ़ करिये .. वह छिपकली वाली न … “

“हाँ .. आपको तोह कब का बोलै था आने .. आप आये नहीं .. इतनी hi कदर हैं पैसेंजर्स की आपको , हु भी एक डिब्बे वालों की .. आप की hi कंप्लेंट करुँगी..”

रौशनी तोह तक को बोलने का चांस न देते हुए बोलती रही और थोड़ी ुचि आवाज़ में बोलने लगी .. ….

“अरे मैडम जी.. अरे प्ल्ज़ प्ल्ज़ … आप ग़ुस्सा न होना … में आया था .. अभी कुछ टाइम पेहलेलेकिन आप सोई थी …..”

रौशनी इस बात को सुन चुप बैठी …

“उफ़ सॉरी में आपको इतना कुछ बोल गयी .. रियली सॉरी …”

तक बस रौशनी की गुलाबी होठों को hi देखते रहा .. ऎसी सेक्सी महिला उसके साथ बात कर रही हैं उसी से hi वह खुश था … चीला रही थित ओह hi सही …

“रौशनी मैडम आप चिंता न करिये .. छिपकली निकलने लोगों को भेज दूंगा बस अगला एसटीपी आने दीजिये .. कुछ 20 मं में …”

रौशनी अब शांत हुयी थी … “अच्छा ठीक हैं … तक जी ..”

“मैडम जी जनाब का नाम हैं खालिद … .. आप खालिद नाम से बुला सकती हो हमें…”

“ओह खालिद जी .. अच्छा , देखिये न बहुत hi बड़ी सी छिपकली थी .. ऐसे कैसे एक डिब्बे में छिपकली …”

“सॉरी रौशनी जी .. ी ा सो सॉरी .. में भी कापकी कम्प्लेन हेड ऑफिस रेज करूँगा आप चिंता न करिये .. तब कर आपके डिब्बे की पूरी जांच कर लेंगे हम और छिपकली निकल लेंगे ..”

“थैंक्स … आपको उच्च ज्यादा hi बोल दी मैंने तोह .. ी ऍम सॉरी खालिद”

“ओह मैडम कैसी बात कर रही हो .. आप जैसी खूबसूरत मॉडर्न लेडीज से सॉरी सुन्ना .. उफ़ नहीं .. और छिपकली की बात .. आप जैसी लेडीज इतने क्लीनलीनेस को इम्पोर्टेंस रखती हो .. आप को तोह ऐसे .. उफ्फ्फ ी ऍम सॉरी ों बेहल्फ़ ऑफ़ इंडियन रेलवेज ..”

“खालिद जी एक्सेप्टेड …” और रौशनी मुस्कुराने लगी …

कहलीद तक तोह रौशनी की गुलाबी होठों की मुस्कराहट देख उसका लोढ़ा औकात में आने लगा था ..

“रौशनी जी आपका डिब्बा काफी दूर हैं और स्टेशन आता hi होगा 20 मं में.. आप मेरे ऑफिस आइए यही इस कम्पार्टमेंट के पीछे हैं.. तब तक बैठिये चाय पि जिए फिर स्टेशन आने के बाद आपके डिब्बे में जाएंगे छिपकली निकलने और वहां पूरा क्लीनिंग करने.”

रौशनी सर हाँ में हिलाते हुए आगे चली रही .. कहलीद पीछे से रौशनी की मटकी चूतड़ों और लौ बैक ब्लाउज में मखमली पीठ को देख अपने लोडे को मसलते हुए उसके पीछे पीछे चलते रहा..

फिर दोनों उसकी ऑफिस पहुँच गए … रौशनी अंदर चली गयी और तक बहार जो एक हेल्पर था उसे बोलै .. “चाय लाना दो कप लेकिन कुछ 15 मं बाद .. तब तक डिस्टर्ब नक् करना ..”

हेल्पर मन में सोचते हुए (साला ठरकी बुद्धा … पता नहीं क्या गुल खिलाएगा अंदर गोरी मां के साथ.

रौशनी अंदर चेयर पर बैठ गयी और खालिद भी बगल के चेयर पर बैठ गया ..

रौशनी छोटे से ऑफिस में इधर उधर देखने लगी … उसे टेबल पर एक दो सर्टिफिकेट देखे .. खालिद काफी पढ़े लिखे थे .

“खालिद जी वैसे आप काफी पढ़े लिखे हैं .. कब से तक का काम कर रहे हो आप..

खालिद अपनी हिस्ट्री बताने लगा … रौशनी फिर मुस्कुरायी ..

खालिद तोह बस रौशनी के बड़ा को hi बीच बीच में घुटरा रहा .. उसके अंदर काफी गर्मी थी … अपने छोटे से ऑफिस में रौशनी जैसी सेक्सी महिला का पास होना .. उसके लोडे में जान आयी थी …

“रौशनी जी आप बहुत hi खूबसूरत हो .. बस आप और हु ….”

“रौशनी समझ गयी .. कहिलड को सलीम का उसे बेगम कहना हज़म नहीं हो रहा था ..

“नहीं बस ऐसे hi .. उफ्फ्फ सैम जी भी न कुछ भी बोलते हैं ..”

“इसका मतलब आप नहीं हो उनकी बेगम …?”

“नहीं .. बस अच्छे दोस्त हैं हम दोनों … हु आज कल के ज़माने में लगों का भरोसा नहीं न इसलिए हम बेगम हैं ऐसे हम बोलते हैं .. बस .

खालिद बात सुन तोह काफी खुश हुआ (मतलब मैडम जी पर लाइन मार सकते हैं खुलकर)

“रौशनी जी आप तोह बहुत खूबसूरत हो .. सच आप जैसी ब्यूटी आज तक नहीं देखि ..”

“उफ़ खालिद जी आप भी न”

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“अब क्या कहु आपसे .. रौशनी जी .. आप वैसे उनके साथ कैसे .. कहाँ जा रहे हो ..

रौशनी ने बता दिया की वह एक शादी जा रहे हैं और वह ंगो में काम करती थी और सलीम वहां के एक निवासी हैं .. और वह सलीम के दोस्त के बेटी की शादी थी ..

“अच्छा और आपके शौहर ..?”

“वह घर पर हैं उनको कुछ और काम तथा .. नहीं आ पाए ..”

कहलीद मन में सोचते हुए ..(उफ़ क्या इस सलीम और रौशनी जी का चक्कर तोह नहीं ..साला बुद्धा कितना लकी हैं पूरी सफर तैर करेगा ऐसी सेक्सी हसीना के साथ .. ज़रूरर साला ठरकी हैं और मस्ती करेगा इस के साथ .. क्या बदन हैं गदराया माल हैं … ुसफ्फफ्फ मन करता हैं घर ले जाकर बड़ी मस्ती से इत्मीनान से इसकी चुदाई करू … )वहां खालिद का लोढ़ा पूरा टाइट हो चूका तह ा.. रौशनी की नज़र भी वहां पड़ी .. आज कर रौशनी की नज़र काफी बार मर्दों के क्रॉत्च पर पड़ती थी … और अभ भी कहलीद के उभर को देख प् रही थी ..

वहां रौशनी मन में (यह सब बुड्ढे , इनके लोडे ऐसे सख्त कैसे होते हैं उफ़ क्या उन्हें सब को मुझे देख ऐसे असर होता हैं उफ्फ्फ्फ़)

ट्रैन रुक जाती हैं … स्टेशन आ चूका था ..

खालिद नोट में अपना फ़ोन नंबर लिख कर रौशनी के हाथों में थमा देता हैं ..”रौशनी जी जब चाहो कॉल करिये गए .. आपकी मदत करूँगा …”

रौशनी बस मुस्कुराती हैं और नोट अपनी पर्स में रहती हैं .. उफ्फ्फ यह बुड्ढे ाकाफ़ी बोल्ड होते हैं … सीधा नंबर hi दे दिए .. उफ्फ्फ्फ़ ... यह सब बुड्ढे मर्द भी न .... फिर रौशनी वहां से केबिन की तरफ चली जाती हैं.
 
अब ट्रैन स्टेशन पर रुक जाता हैं …

“रौशनी जी स्टेशन आ चूका हैं .. मुझे अब स्टेशन पर आपके केबिन में छिपकली और उसकी थड़ी साफ़ सफाई करने जिनको बुलाया हैं वह आते hi होंगे .. आप केबिन चलिए मेरे साथ वह आएँगे वहां पर.”

“ठीक हैं खालिद जी चलिए”

“रौशनी जी पहले आप चलिए..”

रौशनी अब अपनी गांड मटकते हुए आगे चली जाती हैं ,

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पीछे से खालिद अब रौशनी की मटकती चाल देख अपने उभरते लोडे को खुजलाता हैं ..(है क्या चूतड़ हैं इसकी उफ्फ्फ्फ़ … अगर पकड़ कर दबा लूँ तोह अह्ह्ह कितना मजा आएगा )… इस सोच से उसका लोढ़ा एक जोरदार झटका मारता हैं …

खालिद की नज़र फिर उसकी गोरी से बाँहों पर , डीप ब्लाउज वाली मुलायम मखमली पीठ पर जाती हैं .. उसका लोढ़ा तोह उसकी पंत में बिना कण्ट्रोल के जहटकोण पर झटका मारता हैं … उफ्फ्फ्फ़ इस लोडे को दबा लूँ पुरे बदन पर इसके अहह उफ्फ्फ क्या कड़क माल हैं यार …. )

ऐसे सब खालिद तक के दिमाग में बातें चलती रहती हैं और वह दोनों केबिन पहुँच जाते हैं …

“सलीम जी उठिये .. यहाँ क्लीनिंग करने तक सर ने किसको बुलाया हैं .. छिपकली भी निकालेंगे ..”

सलीम अब खालिद को देखता हैं और समझ जाता हैं ठरकी साला रौशनी पर ानकेहिं टिकाये हुए हैं …

खालिद भी सलीम को देख मुस्कुराता हैं …(साला ऐसी मस्त माल को पटाया होगा कमीने ने .. मज़े लेता होगा साला बुद्धा …)

फिर कुछ 5 मं बाद दो लोग आते हैं केबिन की क्लीनिंग और छिपकली को निकलने …

“रौशनी जी मुझे जाना होगा .. इस स्टॉप का लोग करना पड़ेगा .. इस स्टेशन पर इतना बड़ा एसटीपी नहीं होता हैं .. इसलिए अब इसके बारे में नोट डॉन करना पड़ेगा … में अब जाता हूँ …”

सलीम कही और देख रहा होता हैं तोह खालिद रौशनी के कानों में कहता हैं

“रौशनी जी अगर कुछ तकलीफ हो तोह आपके पास तोह मेरा नंबर हैं hi .. कॉल कर लीजिए .. आपका इंतज़ार करूँगा … “ और खालिद रौशनी को देख मुस्कुराता हैं ..

“हाँ खालिद जी ठीक हैं .. आप जाइये”. फिर खालिद तक वहां से चला जाता हैं.

कुछ 10 मं बाद सब काम ख़तम होता हैं और वह आदमी वहां सेचले जाते हैं.. और ट्रैन अपनी सफर पर फिर से निकल जाती हैं.

“रौशनी जी अच्छा काम किया आपने ..”

“सलीम जी आप तोह सो चुके थे मस्त … अब करना तोह पड़ा hi न .. आपको पता हैं मुझे छिपकली से कितना दर और घिन्न होती हैं … चलो अब सब क्लीन हो चूका हैं …”

फिर एक लड़का चाय लेकर आता हैं और कुछ स्नैक्स .. और दोनों सलीम और रौशनी चाय पीते पीते स्नैक्स ख़तम कर देते हैं.

“सलीम जी आप रुकिए में जरा तक सर को शुक्रिया करके आती हूँ.”

“रौशनी जी अरे क्यों , उसने काम किया न अपना .. अब चोर दीजिये ..”

“अरे .. बहुत मदत की हैं .. काफी जल्दी से मदत करि हैं , ऐसे यह ट्रैन वाले नहीं करते काम .. उन्हें शुक्रिया तोह कहना hi होगा..”

“अच्छा में भी अत हूँ … रौशनी जी”

“अरे क्या आप मेरे बॉडी गार्ड हो .. ः …” रौशनी हस्ती हैं.. “मुझे पता हैं उनका ऑफिस में जाकर शुक्रिया कर आती हूँ तब तक आप आराम कीजिये ..

सलीम अब क्या बोलता .. छुपकर से वही बैठे रहता हैं और रौशनी चली जाती हैं

(साला तक .. सफर में 3 घंटे हुए हैं और अब तक में hi न ले पाया और वहां हु तक तोह खुद hi मज़े ले रहा हैं रौशनी के कंपनी का .. कुछ करना होगा यार नहीं तोह सफर ख़तम होगी और रौशनी से कुछ मस्ती और बातें भी नहीं हो पाएगी … सलीम कुछ प्लान की सोचता हैं.)

दूसरी और रौशनी तक के ऑफिस चली जाती हैं .. वहां हु तक को उनकी चेयर में देखती हैं .. तक कुछ मोबाइल पर देख रहा होहिं और कुछ टेबल के निचे हरकतें करते रौशनी को दीखता हैं .. (दरअसल तक रौशनी को देख इतना गरम हो चूका था हु अपनी मोबाइल पर कुछ पोर्न देख रहा था और अपने मोठे लोडे को हिला रहा था

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.. लेकिन रौशनी यह देख नहीं पाती टेबल की वजह से. )

“खालिद जी ,…. आप बिजी लगते हो …”

रौशनी की अचानक आवाज़ सुन वह हड़बड़ा जाता हैं … उफ्फ्फ यह तोह वापस आ गयी … इतना सोचते hi वह अपने लोडे को झट से पंत में दाल ता हैं .. लेकिन ज़िप लगाना भूल जाता हैं ..

“अरे रौशनी जी आप आ गयी .. “

“हाँ खालिद जी आपको शुक्रिया करने आयी हूँ .. आप बिजी तोह नहीं थे …?”

(उफ़ अब क्या बताऊ तूने इतना गरम कर दिया हैं पोर्न देख रहा था और तेरे बारे में सोच मुठ मार रहा था ….)

“नहीं नहीं कुछ नहीं बैठिये न..”

रौशनी बैठ जाती हैं … तक फिर अपनी चेयर को टेबल के पीछे से निकल करा आगे लता हैं …

रौशनी उसे देखती हैं और उसकी नज़र खालिद के क्रॉत्च एरिया पर जाती हैं .. और उसका ज़िप खुला देख चौंक जाती हैं लेकिन चेहरे पर कोई भाव नहीं बदलती …

(उफ्फ्फ खालिद जी की तोह ज़िप खुली हैं .. उफ्फ्फ्क्या हु मोबाइल पर … उफ्फ्फ्फ़ और क्या हु म…. उफ्फ्फ्फ़ )

खालिद इस बता से बेखबर चेयर एडजस्ट करता हैं .. वहां रौशनी उसकी खुली ज़िप पर फिर से नज़र डालती है .. उसे अंदर कुछ हिलते हुए भी दीखता हैं .. लेकिन अपनी नज़र हटाए हुयी बैठी रहती हैं.

“रौशनी जी कैसी शुक्रिया की बातें कर रही हो आप .. फ़र्ज़ हैं मेरा …”

रौशनी खालिद को देख नहीं प् रही थी .. बस उसके खुले ज़िप की सोचती रहती हैं..

“रौशनी जी क्या हुआ .. ज़रा यहाँ देखिये …”

रौशनी धीरे से चेहरा खालिद के तरफ करती हैं .. कण्ट्रोल करते हुए की उसकी नज़र उसके खुले ज़िप पर न जाए..

“नहीं बस शुक्रिया करने आयी थी .. में जाती हूँ”

“अरे रौशनी जी न जाइये रुकिए न … फिर खालिद आगे अपनी बैठे की ोस्तिओं एडजस्ट करता hi हैं की रौशनी की नज़र उसके खुले ज़िप पर जाती हैं और रौशनी उसके लोडे के कुछ हिस्से को देख पति हैं ..

(उफ्फ्फ उनका लोढ़ा का हिस्सा दिख रहा हैं उफ्फ्फ में क्या करू ….)

खालिद कुछ और एडजस्ट करता हैं सीट और रौशनी को अब उसका लोढ़ा और साफ़ दीखता हैं .. उसके गाल तोह पुरे लाल हो जाते हैं …

खालिद भी आखिर कर देख hi लेता हैं रौशनी की नज़र उसके क्रॉत्च के वहां पहले की रौशनी उसकी नज़र वहां से हटा लेती हैं तब तक… .. फिर खालिद खुद निचे देखता हैं तोह उसे समझ आता हैं की उसकी ज़िप्खुली हैं और रौशनी की नज़र वही पर थी … लेकिन इस बात से बेखबर होते का नाटक कर वह बोलता हैं

“रौशनी जी फिर से आप कही और देख रही हो .. देखिये न यहाँ ..”

खालिद कमीना था .. वह अब जान बुझ का रेज बैठा हुआ था की उसका लोढ़ा ज़िप में से रौशनी को और दिखे ..

रौशनी मुड़ती हैं और नज़र फिर से ज़िप पर जाती हैं … खालिद मज़े लेता हैं इस सब का … रौशनी जी कहाँ नज़र हैं आपकी ..

रौशनी शर्माती हैं पूरी लाल गालों की शर्माहट से …

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खालिद अब “रौशनी जी जरा मुझे टॉयलेट जाना हैं .. आप कही न जाइये रुकिए ..प्ल्ज़”

रौशनी कुछ नहीं बोलती … फिर खलीदूत जाता हैं तोह अब उसका लोढ़ा थोड़ा बहार hi आता हैं ज़िप के .. रौशनी की तोह शर्माहट और बढ़ती हैं .. (उफ्फ्फ इन्हे पता हैं क्या ज़िप खुला हैं और में इनके लुंड को उफ्फ्फ फ… अब में क्या कहु इनसे उफ्फ्फ्फ़ )

खालिद इस सब का मज़्ज़ा लेते हुए जाता हैं उसी के ऑफिस के बहार टॉयलेट में .. और जान बुझ कर दरवाज़ा ज़रा खुला चोरता हैं …

वहां रौशनी से रहा नहीं जार अहा था .. वह अब खालिद के लोडे को देखने उत्सुक थी ..

उसकी डेविल थॉट्स फिर से आती हैं

“रौशनी जा कर देखो कितना मोटा लोढ़ा होगा तक का .. जाओ …”

“अरे रौशनी पागल हो क्या .. ऐसे न करो .. क्या हुआ हैं तुम्हे”

“अरे ज आना देख .. ऐसे मौके नहीं मिलते .. मर्दों के लुन्डों को देखने .. जा .. मन की मुराद पूरी कर .. मुझे पता हैं तुझे उसका लुंड देखना हैं..”

“नहीं मत करना ऐसे रौशनी तुम अच्छी लेडी हो प्ल्ज़ न करो…”

लेकिन रौशनी अपने डेविल थॉट्स को अपने ऊपर हावी होने देती हैं और उठ कर टॉयलेट के पास जाती हैं.

वहां कहलीद अपने लोडे को पिचसाब करते हुए वह देखती हैं .. उसकी दिल में छुरियां चलने लगती हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ काफी मोटा हैं … अब सलीम और असलम और रमेश से तोह मोटा नहीं लेकिन उफ्फफ्फ्फ़ काफी मस्त हैं .. ओह गॉड रौशनी यह तुम क्या सोच रही हो उफ्फ्फ्फ़..)

खालिद भी अपने लोडे को हिलता हैं .. उसकी आक्न्हों के कोने से वह देख पता हैं रौशनी की नज़रें.. और अपने लोडे को और हिलता हैं .. और पूरा सख्त करता हैं अपने लोडे को..

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वहां रौशनी के अनादर क गर्मी और एक लोडे को देख बढ़ती हैं ..उसकी नज़र बस खलीलड़ के मोठे लोडे पर hi टिके रहती हैं … उफ्फ्फ्फ़ कितना अच्छा हैं .. मुँह में तोह …)

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(उफ्फ्फ रौशनी क्या सोचती रहती हो ऐसे गन्दी चीज़ें उफ्फ्फ …उफ्फफ्फ्फ़ उनका मूतना ख़तम हो रहा हैं .. यहाँ से जाना चाहिए उफ्फ्फ्फ़…)

और एक आखरी नज़र दाल रौशनी वहां से जाकर ऑफिस में बैठ जाती हैं.

खालिद अब वहां आता हैं इस बार ज़िप बंद किये .. वह तोह खुश था की रौशनी उसके लोडे को देख चुकती थी … ऐसी गोरी गदरायी बदन वाली महिला उसके लोडे को देख चुकी थी .. इस बात से उसका लोढ़ा तोह सख्त hi रहता हैं पंत में.

वह ऑफिस आता हैं तोह रौशनी की नज़र सीधे वहां जाती हैं और उसके सख्त उभर को देख पति हैं.. लेकिन उसकी नज़र वहां से हटने का नाम hi नहीं लेती … उसकी छूट में हलचल होनी शुरू हुयी थी …

“रौशनी जी … कैसा लगा …”

“खालिद जी मतलब …” रौशनी हड़बड़ा कर बोलती हैं .. अपने नज़रों को वहां से निकलती हुयी.

“रौशनी जी .. ट्रैन कैसा लगा …. बस वही पूछ रहा हूँ ..”

“हम.. हम्म.. हाँ अच्छा हैं .. बहुत अच्छा …”

सवाल यह था की रौशनी लोडे की बाटकर रही थी .. या ट्रैन की ???….

“खुश हूँ आपको बहुत अच्छा लगा .. ट्रैन …”

“रौशनी फिर खालिद को देख हड़बड़ाती हुयी ..

“हाँ ट्रैन .. हाँ ट्रैन बहुत अच्छी हैं …”

“रौशनी जी काफी क्लीन हैं न …. में बहुत क्लीन रखता हूँ यहाँ …”

“हाँ खालिद जी काफी क्लीन हैं .. ट्रैन …”

“अच्छा और क्या अच्छा लगा .. वैसे बड़ी ट्रैन हैं न …”

“हाँ काफी बड़ी हैं … ट्रैन ..”

रौशनी कितनी भी तरय करे उसकी नज़र खालिद के लोडे के वहां चली hi जाती हैं .. उसके सख्त लोडे के उभर पर..

फिर खालिद उठ खड़ा होता हैं और कुछ पेपर अपनी टेबल से उठाने रौशनी ेके ज़रा नज़दीक जाता hi हैं .. और रौशनी की आँखों के सामने अब खालिद का सख्त उभर था … काफी करीब उसके लिप्स के ..

खेद जान बुझ कर कुछ ढूंढ़ने का नाटक करता हैं .. रौशनी की नज़र भी उसके लोडे के सख्त उभर पर hi थी.. वहां से हटा नहीं रही थी नज़र और उसकी आँखें भी हलके से बंद हो रही थी …

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सन ऐसे ता की अगर ट्रैन थोड़ा भी बड़ा झटका देता तोह खालिद का सख्त उभर जाकर सीधे रौशनी के मुँह से टकराता …

फिर खालिद कुछ पेपर निकलता हैं … और बैठ जाता हैं कुर्सी पर…

“रौशनी जी … ..

रौशनी इस सब से काफी सेहम चुकी थी .. उसकी छूट में गर्माहट बढ़ रही थी … गर्मी च रही थी … पहले की कुछ और होता वह उठ जाती हैं..

“खालिद जी मुझे जाना होगा .. फिर से शुक्रिया आपका ..”

“अरे रौशनी जी कहाँ जार यही हो …” और खालिद रौशनी के हाथों को थम लेता हैं ..

रौशनी की बदन में मनो छुरियां चलने लगती हैं…

“खालिद जी .. क्या कर रहे हो आप … मेरा हाथ छोड़िये न..”

खालिद एक हल्का सस्क्वीज़ देता हैं ..”ओह सॉरी रौशनी जी .. “ और अपना हाथ निकलता हैं ..

“ी ऍम सो सॉरी रौशनी . ी didn’t मैं तो..”

“इतस फाइन खालिद जी … बूत ी नीड तो जो.. मुझे जाना होगा …”

“हाँ रौशनी जी ज़रूर में कौन हूँ आपको रोकने वाला .. ु मई जो..”

रौशनी इम्परसस थी खालिद के इंग्लिश से .. काफी फ़्लूएंट थे .. “खालिद जी बस सलीम जी इंतज़ार कर रहे होने ..”

“No प्रोब्लेम्स जाइये .. बस हमें न भूलिए रौशनी जी … हमारा नंबर भी दिया हैं आपको .. जब कोई तरीन की बुकिंग होय ा और कुछ काम , मुझे कॉल करिये …”

“हाँ खालिद जी ठीक हैं …”

फिर रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसके दिमाग में खालिद का मोटा लोढ़ा घूमते रहता हैं .. छूट की गर्माहट भी उसे महसूस होते हुए रौशनी अब वहां से केबिन के तरफ चली जाती हैं.

अब दूसरी और इस सब के डरुअन सलीम अपने प्लान को अमल करने में लगा हुआ था …

वह इस सफर में किसी भी हाल में रौशनी के साथ पूरी मस्ती करना चाहता था … अगर सीधे तरीके से रौशनी उससे पैट नहीं जाती तोह वह घी टेडी ऊँगली से भी निकलना जनता था …

उसने एक सेक्सुअल फीलिंग्स बढ़ने वाली गोली लायी थी .. उसने उसे रौशनी पर उसे करने का प्लान बनाया था अगर वह सीधे तरीके से उससे मस्ती नक् आरती तोह.. सलीम अब काफी डेस्पेरेट हो चुके थे और उसे अभी इस्तेमाल करने का सोच लिया था उसने.

ट्रैन में सॉफ्ट ड्रिंक्स बेचते हुए एक आदमी को पकड़ कर उसने दो सॉफ्ट ड्रिंक्स ले ली थी .. और वह उसे कोक में मिलाने वाला था और उसे रौशनी को देने वाला था पीने.

रौशनी केबिन में आ गयी ..

“रौशनी जी सब ठीक हैं न .. “

“हाँ सलीम जी ठेके हैं सब .. क्यों नहीं होगा .. ठीक हूँ “

रौशनी के दिमाग में खालिद तक का लोढ़ा घूम रहा था और उस कामुक सोच की वजह से रौशनी के बदन के अंदर की गर्मी बढ़ी हुयी थी.

“रौशनी जी मैंने सॉफ्ट ड्रिंक्स खरीदी हैं .. हम दोनों पिएंगे उसे अभी ठीक हैं न …”

“हाँ ठीक हैं .. लेकिन जरा रुकिए बैग से थोड़ा वाइप निकलने दीजिये .. मेरे हाथ थोड़े गंदे हैं,,,”

रौशनी उठ कर बैग से वाइप निकलने लग जाती हैं .. और सलीम उसी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सॉफ्ट ड्रिंक में वह नशीली गर्मी बढ़ने वाली गोली मिलता हैं…

रौशनी अपने हाथों को क्लीन करती हैं .. फिर सलीम एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल रौशनी को देता हैं .. जिस में नशीली गोलियां मिलायी हुयी थी.

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रौशनी इस सब से बेखबर सॉफ्ट ड्रिंक पिने , बोतल को अपने होठों से लगाती हैं…

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6 लाख व्यूज रीछेड !!! थैंक्स एवरीवन फॉर वेटिंग फॉर में पटिएनटलय तो शेयर उपदटेस .. मोरे विल कीप किंग !!

थैंक्स वन्स अगेन तो एवरीवन !!



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