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कुछ एक घंटे बाद रौशनी थोड़ी शांत होती हैं . उसे रोनित से ऐसे बात करने में अच्छा नहीं लता इसलिए उसे मानाने वह कमरे में जाती हैं .. रौशनी बहुत दिनों से रोनित के साथ इरोटिक पल भी बितायी नहीं थी .. वह मिस लार रही थी अपने पति से रोमांटिक पल .. और खासकर से उनकी चुदाई . वह काफी हॉट मूड में थी इसलिए वह सोची की वह रोनित को मन कर रात में उनसे सेक्स करेगी ..
लेकिन रोनित बिस्तर पर पड़े लेते थे … रौशनी उसके पास गयी और उसे हिलने लगी .. “रोनित, रोनित उठिये न .. रोनित ी ऍम सॉरी … आप से ऐसी नहीं बात करनी चाहिए थी.. उठिये न”
रोनित कुछ मं के बाद उठ बैठ जाता हैं..
“बोलो रौशनी क्या हुआ .. मुझे क्यों उठाया … बहार जोट ुम बोली उससे जी नहीं भरा तुम्हारा ..”
“रोनित ी ऍम सोर्री … प्लीज में इतने दी ो बाद आयी हूँ… आप नाराज़ न होना..”
“हम्म ठीक हैं , बोलो क्या चाहिए”
रौशनी अब रोनित के करीब जाती हैं .. वह उसके गले में अपने हाथ डालती हैं और रोनित को गालों पर चूमती हैं :.. रोनित कुछ रिएक्शन नहीं देता ..
“रोनित … बहुत दिनों से हम कुछ सेक्सी नहीं आकर हैं .. प्लीज मुझे भी चूमिए ..”
रोनित रिएक्शन hi माहि देता ..
रौशनी उसके गालीन को और चूमती हैं … और उसके होठों पर चूमने बढ़ती हैं ..
रोनित फिर रौशनी के हाथों को हटा देता हैं ..
“रोनित क्या हुआ … डिअर प्लीज अभी भी नाराज़ हो”
“रौशनी मुझे नहीं बात करनी तुमसे .. जतूम जाओ उस ंगो के उन बुद्धों से करो जो चाहिए … वहां 4 दिन रहकर गुल खिलाये होंगे तुमने उन् बुद्धों को. अब वहां जी जाओ मज़्ज़े करो उनके साथ. मुझे नहीं बात करनी तुमसे”
रौशनी बहुत नाराज़ होती हैं .. वह उनके लिए इतना कुछ कर रही थी और रोनित उस पर hi इलज़ाम लगा रही हैं .. बस अपने पति का प्यार hi तोह चाहिए .. अब वह भी नहीं मिलेगा ..
“रोनित ये क्या बक रहे हो तुम … वहां में बस अपने काम के लिए गयी थी .. बड़ी इवेंट थी इसलिए .. तिम्हे तोह परवाह hi नहीं इवेंट कैसी गयी क्या हुआ कुछ पूछा नहीं बस चिलाना शुरू .. जब कोई लेडीज जाती हैं कोई मर्द दोस्त बनते हैं तोह क्या उसके करैक्टर पर हमेशा सवाल पूछोगे आप जैसे मर्द ..”
“रोनित तुम्हारी असली फीलिंग्स अब जाकर बहार आयी हैं मेरे बारे में ..”
रोनित फिर अपना पिलो और ब्लैंकेट लेकर कमरे के बहार जाता हैं सोफे पर सोने..
वहां कमरे में रौशनी बहुत नाराज़ बैठी रहती हैं.. (आज तोह रोनित ने हद कर दी .. मेरे करैक्टर पर शक कर रहे हैं .. यहाँ एक ाची बीवी के नाते में हमारे लिए इतना कुछ कर रही हूँ … उसकी परवाह तोह चोर , मुझे पर hi ऐसे गंदे इलज़ाम लगा रहे है. … वहां उन बुद्धों को मेरी जोसम चाहिए मुझे दीखता हैं और मैंने तोह कभी उनसे ऐसी …यहाँ में कितने दिनों से प्यासी हूँ और रोनित को मेरी प्यास की कोई परवाह नहीं .. अब रोनित मेरी अंदर की प्यास नहीं बुझाएंगे तोह और कोई सही) इतना सोचते हुए वह बिस्तर पर लेट गयी ..
(कल से रोशिनी अपनी ऐटिटूड बदलने वाली थी .. वह अब उन तीन बुद्धों के साथ मस्तियाँ करने से ज्यादा कतराने नहीं वाली थी .. अब तीन बुड्ढे और इस हसीं महिला के बीच बहुत आगे तक बातें जानी वाली थी)
रौशनी ने एक दिन छुट्टी ली .. वह ोारकौर गयी और अपने बदन पर पूरी वैक्सिंग करा ली .. उसकी छूट के ऊपर भी वैक्सिंग करि बस एक बालों का स्ट्रिप चोर कर.. .. वह एक स्लीवेल्स ब्लाउज जो की डीप बैक कट तोह थी hi लेकिन आगे से भी डीप कट वाली पहनी थी. ट्रांसपेरेंट साड़ी जो उसके नाभि और कमर साफ़ साफ़ दर्शाती .. कानों में लम्बे ेआरींग्स, होठों पर रेड लिपस्टिक .. बालों को ओपन चोरे हुए .. माथे पर लाल बिंदी .. कलाई में चूड़ियां .. आज तोह रौशनी सब मर्दों के लुन्डों को खड़ा करने वाली दिख रहे थी .. आज से तीनो बुद्धों के बहुत मज़्ज़े होने वाले थे ..
निचे अपने रिक्शा के पास रौशनी को आते देख रमेश तोह दांग रह गए .. आज रौशनी पहले से भी काफी सेक्सी साड़ी और ब्लाउज पहने हुयी थी .. उसमें एक अलग hi आकर्षण था आज . रमेश का तोह कुंड रौशनी को देख hi आज खड़ा होने लगा था पूरा का पूरा..
रौशनी अब रमेश को अपने बदन को घूरते देखि और अंदर मुस्कुरायी.. उसे पता था बुद्धा उसे ऐसे गरमी की नज़र से देख रहा था .. उसके पास जाकर वह मुस्कुरायी
“रमेश जी क्या घर रहे हो आज … इतनी पसंद आयी हूँ आपको …” और रौशनी एक वाइड स्माइल दी
रमेश का लुंड तोह उसकी ोान्त में खटके मार रहा था ..
“रौशनी जी आज तोह आप…”
“रमेश जी बोलिये .. जरा खुल कर बोलिये ..”
“रौशनी जी आज आप तोह सही में बहुत hi अस्त लग रही हो .. आअज की साड़ी तोह आप पर खूब जांच रही हैं”
“अच्छा रमेश जी क्यों … आपको ज्यादा सेक्सी लग रही हूँ में …” और रौशनी मुस्कुराने लगी.
“रमेश अब रौशनी को खुद से सेक्सी शब्द इस्तेमाल करते देख सरप्राइज था.. उसे रौशनी को खुल कर बात करते देख ख़ुशी हुयी थी.
“रौशनी जी हाँ आप काफी सेक्सी लग रही हो .. आप से तोह किसी लेडीज की टक्कर बी नहीं..”
“अच्छा रमेश जी ऐसे हैं … ाचा चलिए काम पर जाना हैं नहीं तोह यहाँ पर hi बैठे बस तारीफ करते रहोगे आप .. काफी नोट्टी बुड्ढे हो आप ..” रौशनी फिर हसने लगी हैं..
“रौशनी जी काम छोड़िये … आप आज हुनर साथ hi घूमिये न .. अलग अलग चीज़ें दिखाऊंगा शहर के .. आइये मेरे साथ”
“रमेश जी आप तोह चोर hi दीजिये .. आप तोह पार्क्स में hi मुझे घुमागोई उस दिन जैसे उन कपल्स पार्क में वैसे .. आप से तोह दूर hi रहूंगी ..”
“रौशनी जी नहीं दूर न जाइये , अभी तोह पास आयी हो इतने दिनों बाद .. अब तोह आपको दूर जाने hi नहीं दूंगा …”
अच्छा रमेश जी पास hi रखोगे .. क्यों क्या इरादा हैं .. आप कुछ जयादा hi नोट्टी न सोचो मेरे बारे में रमेश जी .. आप के बीवी को बोलूंगी आपकी करतुते ..” रौशनी अब हलके से रमेश के कन्धों पर मुट्ठी मरती हैं .. “अब चलिए नहीं तोह ंगो जाने को लेट होगा मुझे”
अब रिक्शा शुरू कर वह सवारी कर रहे हैं.. रमेश आईने में से ोीचे रौशनी को देखता हैं .. आज रौशनी ने कुछ और डीप फ्रंट चइत ब्लाउज ोेहनी थी .. आज तोह वह मस्त कमाल की आइटम लग रही थी .. रमेश का कुंड तोह उसकी ोान्त में लगातार झटके मार रहा था .. उफ्फ्फ क्या क्लीवेज होगी ममम थोड़ा झुकिए न रौशनी जी … अपने चूचियों की दरार का दृश्य तोह दिखाइए .. रमेश फिर अपने पंत के ऊपर से अपने लोडे को खुजलाता हैं.
वहां रौशनी को एहसास हुआ था की रमेश उसे आईने ऐ घर रहे है. .. वह कुछ सोची फिर थोड़ा आगे झुकी मनो अपने सैंडल्स को ठीक कर रही हो. रमेश तोह अब आईने से बस देखता रहा .. उफ्फ्फ रौशनी की गोरी सी मुलायम चूचियों की दरार का नज़ारा बहुत hi हॉट था .. उसका लुंड अब उस दृश्य से बुरी तरह से झटके मार रहा था .. ही उफ्फ्फ क्या चूचियां होंगी मैडम की … ममममम मुँह से तोह ोानी आ रहा हैं एबीएस उनकी चूचियों की दरार देख .. उनकी नंगी चूचियां देखेगा तोह सीधा उसे होने मुँह में लेकर चूसूंगा ममम काश रौशनी की चूचियों को चूस सकू मममम..
रमेश अब एक हाथ से रिक्शा चला रहा था और दूसरे हाथ से अपने लोडे को मसल रहा था .. जो अब बुरी तरह से झटके मार रहा था ..
अचानक से रिक्शा एक खड़े से गुज़रता हैं ..
“ोूई माँ रमेश जी जरा ध्यान रस्ते पर भी दीजिये , न की यहाँ वहां … इधर उधर नज़र न डालिये .. बस रस्ते पर डालिये ..”
“रौशनी जी माफ़ कीजिये .. ऐसे नज़ारे देख रहा था की ध्यान रस्ते पर नहीं रही .. आक्न्हों के सामने तोह दो बड़े चीज़ देखे .. की यह छोटा सा खड़ा देखना भूल गए ..”
“रमेश जी बड़े बड़े आइटम्स को न देखो … वैसे भी जो चीज़ हाथ नहीं आएँगे तोह खली पिली वहां नज़र दाल कर कुछ फायदा नहीं हैं..”
“अच्छा रौशनी जी .. अरे रौशनी जी हमें बड़े hi पस्न्द हैं .. वैसे आप को भी पसंद हैं न बड़े बड़े चीज़ें..”
रौशनी अब शर्मायी … बातें हद से बहार जा रही थी … उसे अभी शर्म आ रही थी रमेश जी के बातों से ..
“रौशनी जी आज शाम को आइये न थोड़ा घूम लेंगे .. उस पर में आओगी फिर से ..”
“रमेश जी आप को मुझे उस पार्क में ले जाकर
क्या करना हैं मुझे अच्छी तरह से ोाता हैं … अआप बहुत नोट्टी हो .. आप के साथ नहीं आउंगी .. आप तोह मुझे वहां से छोड़ोगे नहीं ..”
“रौशनी जी क्यों छोड़ूंगा आपको .. आप की कंपनी में बहुत अच्छा लगता हैं .. मुझे तोह मन करतभाईन उस पार्क में लेजाकर वहां आपके साथ 2-3 घंटे बितौ .. वहां पार्क में और बहुत हैं करने के लिए , आपने बस ट्रेलर hi देखा था..”
“ अच्छा रमेश जी उस पार्क में उस दिन आपने बस ट्रेलर दिखाया था .. अगली बार पूरी फिल्म दिखाओगे क्या … बड़े आये डायरेक्टर साहब ..”
रमेश तोह काफी गरम हो रहा था रौशनी की ऐसी बातें सुन .. उसका लोढ़ा तोह पूरा औकात में आ चुक्का था … उफ्फ्फ आज तोह रौशनी जी खुल कर बातें कर रही हैं .. बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं .. यार अब तोह उन्हें पार्क ले जाऊंगा और खूब मस्ती करना चाहूंगा मम.
अब वह ंगो पहुँच गए .. रौशनी अब रिक्शा के बहार निकल गयी ..
रमेश भी रिक्शा से उतर गया … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे ..
“रौशनी जी आज आप शाम को मेरे साथ थोड़ा टाइम बिताइए न .. आपसे बहुत बात करनी हैं .. मुझे आप की कंपनी चाहिए आज शाम को …”
“रमेश जी उफ्फ्फ आप भी न .. देखिये शाम का बाद में देखेंगे .. अभी लेट हुआ हैं मुझे … शाम को घर ड्राप करोगे तब देखेंगे .. अच्छा में जाती हूँ.”
रौशनी जी एक मं रुकिए … रमेश अब बोल्ड होकर रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेता हैं .. रौशनी बस उसे देखती हैं .. फिर रमेश उसके हाथों को ऊपर उठाते हुए उसकी हाथों को चूमता हैं …
“रौशनी जी आप की दोस्ती फिर से पाकर बहुत खुश हूँ .. सच अब आपकी दोस्ती हमेशा के लिए चाहिए मुझे”
“रमेश जी … मुझे भी चाहिए आपसे दोस्ती .. आप अच्छे हो .. आपकी कंपनी में मुझे अच्छा लगता हैं .. आज शाम को आप मुझे और घुमा सकते हो… लेकिन अब थोड़ा हाथ छोड़िये .. काम पर जाना हैं.. “ रौशनी को दिख रहा था की रमेश का लुंड अब उसकी पंत में एक तम्बू बनाये हुए था ..
रमेश फिर से रौशनी एक हाथों को चूमता हैं .. फिर रौशनी मुद कर चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती चूतड़ों को देख अपने खड़े लोडे को मसलता हैं.
वहां रौशनी आज के रमेश के साथ बातों के बारे में सोचते हुए अंदर मन में मुस्कराते हुए ंगो के अंदर चली जाती हैं.
ंगो में अपना काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के वहां जाती हैं .. अंदर असलम सोफे पर बैठा हुआ था ..
आज रौशनी ने जो साड़ी और ब्लाउज पहनी थी उससे तोह रमेश जैसे असलम का लोढ़ा भी झटके मारने लगा था .. उफ़ फहाय क्या माल लग रही हैं आज रौशनी जी .. आज तोह इसे ऐसे मसलूंगा उफ्फ्फ क्या बदन हैं यार ….
“रौशनी जी आप आ गयी .. छुट्टी कैसी थी ..”
“अच्छी थी असलम जी … अब वापस काम पर .., वैसे असलम जी में सोच लिया की में अब बस आपके घर आउंगी तोह आप मुझे रुकसाना hi समझ कर बातें करिये .. आप की इलाज के लिए में 100% आपका साथ दूंगी.”
असलम इस बात से बहुत खुश होता हैं ..
“रुकसाना बेगम .. फिर आइये गले लागिये ..”
अब असलम रौशनी को अपने बाँहों में लेकर पूरा मसलता हैं .. “रुकसाना बेगम चलिए अब मस्त गरम खाना बनाइये ..”
“असलम मियां जरूर .. जरा हलके से फ्रेश होने दीजिये …”
रौशनी थोड़ा फ्रेश होकर लंच बनाने लग जाती हैं
पीछे से असलम उसे जकड लेता हैं.. रुकसाना बेगम ही … आपके बदन का दीवाना हूँ में उफ्फ्फ”
“असलम मियां आप भी न .. बस मेरे बदन से hi प्यार हैं आपको ..,”
“रुकसाना बेगम अब हैं hi आइटम जैसे बदन आपकी “
“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न “
असलम अब अपने हाथों को रौशनी के पेट पर फेरता हैं … फिर वहां हलके से दबाता हैं.. “उफ़ असलम मियां धीरे से .. उफ्फ्फ आपके कठोर हाथों से इतना मत मसलो उफ्फ्फ.”
रुकसाना बेगम अब आप हैं hi ऐसी … मसलने दो न .. बहुत मिस किया अपनी बेगम को.”
रौशनी कुछ नहीं कहती .. उसकी ख़ामोशी से और बोल्ड होते हुए असलम अब पीछे से अपने खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबाता हैं .. और आगे से उसके पेट को मसलता हैं.. “उफ़ असलम जी आपका पीछे से बहुत चुभ रहा हैं .. लगता हैं आज बहुत hi मस्ती में हो आप और आपका शैतान”
“हाँ रुकसाना बेगम .. अब क्या कहु आप जैसी चूतड़ों का जादू हैं जो मेरे शैतान पर चा चुक्का हैं.”
“अच्छा असलम मियां अब आप हमारे सामने ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल करोगे .. आज कुछ जयादा hi मूड में हो.”
“रुकसाना बेगम आप आती हो तोह गर्मी बढ़ती हैं .. अब आप को तोह देख मूड खुद बा खुद बनता हैं .. वैसे आप आज मस्त साड़ी पहनी हो … “
“असलम जी आपको अच्छा लगा .. उफ्फ्फ थैंक यू .. हाँ नयी हैं लेकिन आज hi मिली मुझे .. सोचा पेहेन लू.”
“रुकसाना बेगम ऐसे hi पहनिए .. बहुत कमाल की लग रही हो …”
असलम माल शब्द पर जोर देता हैं .. रौशनी समझ जाती हैं और हस्ती हैं…
“असलम जी इतनी कमाल की लगती हूँ आज सच में .. उफ्फ्फ आप आज बहुत टैरिफ कर रहे हो.”
“रुकसाना बेगम जब ऐसी कमाल की बेगम हो तोह क्या करे … “ फिर असलम और एक पीछे से धक्का देता हैं और बी उसका सख्त लोढ़ा और अंदर रौशनी की चूतड़ों में घुसता हैं ..”
अहह असलम जी उफ्फफ्फ्फ़ … आपका पीछे से .. उफ्फ्फ्फ़.”
असलम बहुत गर्मी में था और वह और एक झटका मारता हैं अपने लुंड से … रौशनी की चूतड़ों के अंदर और घुसता हैं उसकी साड़ी के ऊपर से …
“असलम मियां धीरे से .. आपका बहुत बड़ा हैं निचे उफ्फ्फ्फ़. और जोर न दीजिये मममम बहुत अंदर घुस चुक्का हैं अह्ह्ह्ह”
“रुकसाना बेगम अब तोह बस साड़ी के ऊपर से hi घुसा हैं .. कभी मौका दीजिये .. साड़ी बिना अंदर घुसूंगा … मेरी बेगम …”
रौशनी असलम की ऐसी बातों से और गरम होती हैं .. आज उसे उनकी ऐसी बातों से बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. उसकी छूट थोड़ी से गीली हो चुकी थी .. उसे असलम के नंगे लुंड का ख्याल आता हैं और वह और गरम हो जाती हैं …
“असलम फिर रौशनी को अपनी तरफ कर उसकी होठों को चूमता हैं .. इस बार रौशनी कुछ ऑब्जेक्ट नहीं करती और दोनों गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. सामने से असलम एक झटका मारता हैं … अहह असलम जी धीरे से आपका बहुत hi बड़ा हैं उफ्फफ्फ्फ़.
असलम अब अपने हाथों से रौशनी की बाँहों को बुरी तरह से मसलता हैं और उसे फिर से चूमने लगता हैं .. अब रौशनी की छूट गीली हो चुकी थी .. इतने दिन से वह प्यासी थी … आज वह अपनी इन्हिबिशंस खो चुकी थी और स्लैम के मस्ती का साथ दे रही थी …
फिर असलम अपने हाथों से रौशनी के पीठ को मसलता हैं … फिर उसकी चूतड़ों को … उस पुरे समय दोनों एक गहरी चुम्बन में लगे हुए थे … माहौल काफी गरम हो चुक्का था ….
असलम ने तोह पूरी तरह से आज रौशनी को मसलने लगा था … दोनों के दूसरे से चिपके हुए थे ..असलम का सख्त लोढ़ा अब रौशनी के मुलायम पेट पर डाब रहा था … उफ्फ्फ्फ़ रौशनी की तोह अब छूट गीली हो चुकी थी .. आज वह असलम को मन नहीं कर रही थी .. बल्कि उसका पूरा साथ दे रही थी .. उसकी प्यास सच में बढ़ रही थी … असलम को वहां बस रौशनी की प्यास बुझाने और खुद की प्यास बुझानी थी … दोनों चिपके हुए एक दूसरे के बाँहों में खो गए थे ….
असलम और बोल्ड होकर अब रौशनी के आहतों को अपने सख्त उभर पर दाल उसे वहां खुद दबाने लगा … रौशनी फिर कुछ मं बाद खुद से उसके मोठे लोडे को पंत के ऊपर दबा रही थी .. फिर दोनों की चुम्बन टूटी तोह रौशनी अब कामुक भरी नज़रों से असलम की आँखों में देख रही थी … असलम भी हवस की नज़र से रौशनी को देख रहा था .. दोनों के बीच सेक्सुअल टेंशन बहुत हाई हो चुक्का था …
“उफ़ असलम मियां आपका तोह शैतान बहुत hi मोटा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ आप मममम”
“रुकसाना बेगम हाँ मोटा हैं और कला भी . तुमने तोह देख hi लिया हैंउसे .. जब आज़माना हो बताओ … “
“उफ़ असलम मियां .. अब खाना बनाना दीजिये उफ्फ्फ्फ़”
“रुकसाना बेगम बोलिये न … मेरे बड़े हथ्यार को आज़माना चाहती हो .. उफ्फ्फ बहुत टाइम हुआ मेरी रुकसाना बेगम की प्यास बुझा कर …
रौशनी पूरी मदहोशी में थी .. वह भूल गयी थी असलम एक बुद्धा था … बस उसकी प्यास .. उसके हवस को उकसा रही थी .. वह असलम के लोडे को मसलती रही .. असलम भी रौशनी के कमर को मसलता रहा …
अचानक से उन्हें सलीम की आवाज़ सुनाई देती हैं .. सलीम की आवाज़ सुन रौशनी असलम से अलग होती हैं .. उसे अब एहसास होता हैं की वह क्या कर रही थी अभी असलम के साथ .. वह फिर बहार सलीम को मिलने जाती हैं…
“उफ़ साले कमीने को अभी आना था .. रौशनी मस्त हाथ लगी थी यार .. बहुत हवस बढ़ रही थी दोनों में .. कमाइना साला .. उफ्फ्फ मेरे खड़े लोडे का क्या करू … उफ्फ्फ रौशनी .. और कब तक बचेगी तुम मुझ से .. अब तोह तुझे बिस्तर पर लजाकर तेरी कुटाई करने में देर नहीं हैं ..
सलीम रौशनी को देख खुश होता हैं .. वह भी रमेश और असलम जैसे रौशनी को इस साड़ी और ब्लाउज में देख मस्त होता हैं और उसका लोढ़ा भी सख्त होने लगता हैं .. (है आज क्या मस्त लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ ज़रा झुकेगी तोह साली की चूचियों की दरार साफ़ साफ़ दिखेगी … आज तोह बड़ी माल बन कर आयी हैं .. लगता हैं उसके पति ने उसे प्यासा hi चोर दिया हैं .. उफ्फ्फ रौशनी जी में प्यास बुझाऊंगा तुम्हारी ..)
रौशनी सलीम के गले मिलती हैं .. सलीम उसे मसलता हैं .. उसकी पीठ को मसलता हैं …
“रौशनी जी आप आ गए …. रौशनी जी आप से एक दिन भी जुड़ा नहीं रह सकता .. आपको बहुत मिस किया ..”
“अच्छा सलीम जी इतना क्यों मिस किया”
“रौशनी जी अब आप जैसी खूबसूरत दोस्त को कौन पागल मिस नहीं करेगा ..”
रौशनी मुस्कुराती हैं “अच्छा ऐसे हैं सलीम जी … वैसे सलीम जी मैंने भी आपको मिस किया.”
“ओह सच्ची रौशनी जी आपने हमें मिस किया … कैसी खुश नसीबी हैं मेरी …”
“रौशनी जी फिर तोह आप अब वापस नहीं जाना .. यही पर रहिये … आपकी कंपनी अच्छी लगेगी…”
दोनों अब सोफे पर बैठ जाते हैं .. रौशनी इस बार सलीम के काफी करीब बैठ जाती हैं ..
“रौशनी जी वैसे आपने मेरी उस बात पर सोची”
“किश बात पर सलीम जी”
“वही मेरे दोस्त के बेटी की शादी हैं और मुझे इन्विते किया था .. में सोचा अगर आप भी आ जाये तोह मेरे दोस्त को आपकी इंट्रोडक्शन करवाऊंगा .. उसे बोलै था आप नयी मैनेजर हो.”
“हाँ सलीम जी हम्म्म , हाँ में आउंगी आपके साथ .. लेकिन बस एक रात रहेंगे , फिर वापस आएँगे … ंगो में काम काफी हैं बाकी”
रौशनी जी जरूरर बस आप आइये तोह सही … वैसे आप आओगी तोह शादी को चार चाँद लग जाएंगे ….”
“शुक्रिया सलीम जी .. आप बहुत तारीफ़ करते हैं.”
“रौशनी जी वैसे एक बात हैं .. आप आओगी तोह दुल्हन आपको देख जलनि नहीं चाहिए .. कहते हैं न शादी में दुल्हन hi सबसे खूबसूरत लगनी चाहिए .. आप आओगी तोह उसे कड़ा मुक़ाबला होगा .. ः”
“सलीम जी आप भी न .. उफ्फ्फ्फ़ कुछ भी .. वह कितनी जवान और खूबसूरत होगी .. में तोह अब जवान नहीं उतनी …”
“रौशनी जी आप जवान हो .. और आपकी जवानी के जलवे तोह मुझे बेहत पसंद हैं ..”
रौशनी अब अपना हाथ साली के तइस पर रखती हैं .. उससे सलीम का लुंड झटके मारने लगता हैं … “वैसे आप भी न सलीम जी … मीनल हैं न .. उसकी जैसी जवान दोस्त हैं न आपके पास.”
“रौशनी जी आप की जवानी पसंद हैं मुझे .. मीनल तोह हैं खूबसूरत लेकिन आप ाजीसी बात कहाँ उसमें.”
“ओह सलीम जी मुझे में क्या बात हैं …”
सलीम अब रौशनी की चूचियों के तरफ देखता हैं …
“रौशनी जी आप में सब कुछ बेस्ट हैं.”
“सलीम जी अच्छा .. क्या बेस्ट हैं जरा बताइये …”
सलीम काफी एक्सपेरिएंस्ड था .. उसे पता था कब कौनसे महिला प्यासी होती हैं .. वह सोचा की अभी मौका हैं रौशनी के और करीबी बनाना के लिए”
“रौशनी जी … मममम आपका गोरापन .. आपकी फिगर .. आपकी नशीली आँखें .. आपके रैसले होठं .. आपकी नाज़ुक कमर .. … आपकी …”
“उफ़ सलीम जी .. बस .. आप तोह .. उफ्फ्फ्फ़ शुरू hi हो गए ..”
“रौशनी जी शुरुवात कहाँ की हैं अब तक … आप शुरवात करने दीजिये .. “
“सलीम जी .. कैसी शुरवात करनी हैं आपको …”
“रौशनी जी .. अपने प्यार की शुरुवात .. आपसे बहुत प्यार करना चाहता हूँ … आप से पूरी मस्ती …”
“उफ्फ्फ सलीम जी .. बहुत हुआ .. यह प्यार छोड़िये .. उफ्फ्फ में रही जवान .. आप रहे बुड्ढे .. यह प्यार चोर दीजिये . आपकी उम्र नहीं हैं प्यार की.”
“रौशनी जी प्यार के लिए कहाँ उम्र देखि जाती हैं .. प्यार कभी भी हो सकता हैं .. किसी के साथ भी .. अब मुझे तोह आपसे प्यार हैं .. एक तरफ़ा hi सही लेकिन हैं .. अब आप को मेरे प्यार को स्वीकारना हैं वह आपके हाथों में हैं ..”
“ओह गॉड तू मच ु अरे … उफ्फ्फ आप भी न .. सलीम जी आप …”
रौशनी फिर दूसरी तरफ देखती हैं .. सलीम अपने हाथों से रौशनी के चेहरे को पाने तरफ करते हुए …”रौशनी जी आप शरमाते हुए और भी मस्त लगती हो …”
सलीम अब रौशनी के तरफ अपने चेहरे को करता हैं .. उसके हॉट नाब रौशनी के होठों के काफी करीब थे .. रौशनी ने ानकेहिं बंद करि थी … सलीम अब मौका गवाने वाला नहीं था .. वह रौशनी के होठों को चूमने लगा ….
रौशनी आज दूसरी बार किसी को चुम रही थी .. इस बार सलीम को … दोनों गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी आज तोह सब हाडे पार कर रही थी … रौशनी इन बुद्धों के जाल में फस रही थी .. उसकी प्यास भी उसे उनके तरफ धकेल रही थी …
कुछ 5 मं किश के बाद रौशनी उठा कर घर के बहार भगति हुयी गयी ..उसके हिलती चूतड़ों को देख सलीम अपने लोडे को मसलने लगा … उफ्फ्फ रौशनी कहाँ भागोजी .. मेरे पास hi आओगी तुम .. तुम्हारी प्यास बढ़ रही हैं .. और यह बुद्धा तेरी प्यास बुझाएगा .. मेरे मोठे लोडे से तेरी मस्त छूट की चुदाई करूँगा .. बहुत देर नहीं अब मेरे लुंड की रानी रौशनी ….
लेकिन रोनित बिस्तर पर पड़े लेते थे … रौशनी उसके पास गयी और उसे हिलने लगी .. “रोनित, रोनित उठिये न .. रोनित ी ऍम सॉरी … आप से ऐसी नहीं बात करनी चाहिए थी.. उठिये न”
रोनित कुछ मं के बाद उठ बैठ जाता हैं..
“बोलो रौशनी क्या हुआ .. मुझे क्यों उठाया … बहार जोट ुम बोली उससे जी नहीं भरा तुम्हारा ..”
“रोनित ी ऍम सोर्री … प्लीज में इतने दी ो बाद आयी हूँ… आप नाराज़ न होना..”
“हम्म ठीक हैं , बोलो क्या चाहिए”
रौशनी अब रोनित के करीब जाती हैं .. वह उसके गले में अपने हाथ डालती हैं और रोनित को गालों पर चूमती हैं :.. रोनित कुछ रिएक्शन नहीं देता ..
“रोनित … बहुत दिनों से हम कुछ सेक्सी नहीं आकर हैं .. प्लीज मुझे भी चूमिए ..”
रोनित रिएक्शन hi माहि देता ..
रौशनी उसके गालीन को और चूमती हैं … और उसके होठों पर चूमने बढ़ती हैं ..
रोनित फिर रौशनी के हाथों को हटा देता हैं ..
“रोनित क्या हुआ … डिअर प्लीज अभी भी नाराज़ हो”
“रौशनी मुझे नहीं बात करनी तुमसे .. जतूम जाओ उस ंगो के उन बुद्धों से करो जो चाहिए … वहां 4 दिन रहकर गुल खिलाये होंगे तुमने उन् बुद्धों को. अब वहां जी जाओ मज़्ज़े करो उनके साथ. मुझे नहीं बात करनी तुमसे”
रौशनी बहुत नाराज़ होती हैं .. वह उनके लिए इतना कुछ कर रही थी और रोनित उस पर hi इलज़ाम लगा रही हैं .. बस अपने पति का प्यार hi तोह चाहिए .. अब वह भी नहीं मिलेगा ..
“रोनित ये क्या बक रहे हो तुम … वहां में बस अपने काम के लिए गयी थी .. बड़ी इवेंट थी इसलिए .. तिम्हे तोह परवाह hi नहीं इवेंट कैसी गयी क्या हुआ कुछ पूछा नहीं बस चिलाना शुरू .. जब कोई लेडीज जाती हैं कोई मर्द दोस्त बनते हैं तोह क्या उसके करैक्टर पर हमेशा सवाल पूछोगे आप जैसे मर्द ..”
“रोनित तुम्हारी असली फीलिंग्स अब जाकर बहार आयी हैं मेरे बारे में ..”
रोनित फिर अपना पिलो और ब्लैंकेट लेकर कमरे के बहार जाता हैं सोफे पर सोने..
वहां कमरे में रौशनी बहुत नाराज़ बैठी रहती हैं.. (आज तोह रोनित ने हद कर दी .. मेरे करैक्टर पर शक कर रहे हैं .. यहाँ एक ाची बीवी के नाते में हमारे लिए इतना कुछ कर रही हूँ … उसकी परवाह तोह चोर , मुझे पर hi ऐसे गंदे इलज़ाम लगा रहे है. … वहां उन बुद्धों को मेरी जोसम चाहिए मुझे दीखता हैं और मैंने तोह कभी उनसे ऐसी …यहाँ में कितने दिनों से प्यासी हूँ और रोनित को मेरी प्यास की कोई परवाह नहीं .. अब रोनित मेरी अंदर की प्यास नहीं बुझाएंगे तोह और कोई सही) इतना सोचते हुए वह बिस्तर पर लेट गयी ..
(कल से रोशिनी अपनी ऐटिटूड बदलने वाली थी .. वह अब उन तीन बुद्धों के साथ मस्तियाँ करने से ज्यादा कतराने नहीं वाली थी .. अब तीन बुड्ढे और इस हसीं महिला के बीच बहुत आगे तक बातें जानी वाली थी)
रौशनी ने एक दिन छुट्टी ली .. वह ोारकौर गयी और अपने बदन पर पूरी वैक्सिंग करा ली .. उसकी छूट के ऊपर भी वैक्सिंग करि बस एक बालों का स्ट्रिप चोर कर.. .. वह एक स्लीवेल्स ब्लाउज जो की डीप बैक कट तोह थी hi लेकिन आगे से भी डीप कट वाली पहनी थी. ट्रांसपेरेंट साड़ी जो उसके नाभि और कमर साफ़ साफ़ दर्शाती .. कानों में लम्बे ेआरींग्स, होठों पर रेड लिपस्टिक .. बालों को ओपन चोरे हुए .. माथे पर लाल बिंदी .. कलाई में चूड़ियां .. आज तोह रौशनी सब मर्दों के लुन्डों को खड़ा करने वाली दिख रहे थी .. आज से तीनो बुद्धों के बहुत मज़्ज़े होने वाले थे ..
निचे अपने रिक्शा के पास रौशनी को आते देख रमेश तोह दांग रह गए .. आज रौशनी पहले से भी काफी सेक्सी साड़ी और ब्लाउज पहने हुयी थी .. उसमें एक अलग hi आकर्षण था आज . रमेश का तोह कुंड रौशनी को देख hi आज खड़ा होने लगा था पूरा का पूरा..
रौशनी अब रमेश को अपने बदन को घूरते देखि और अंदर मुस्कुरायी.. उसे पता था बुद्धा उसे ऐसे गरमी की नज़र से देख रहा था .. उसके पास जाकर वह मुस्कुरायी
“रमेश जी क्या घर रहे हो आज … इतनी पसंद आयी हूँ आपको …” और रौशनी एक वाइड स्माइल दी
रमेश का लुंड तोह उसकी ोान्त में खटके मार रहा था ..
“रौशनी जी आज तोह आप…”
“रमेश जी बोलिये .. जरा खुल कर बोलिये ..”
“रौशनी जी आज आप तोह सही में बहुत hi अस्त लग रही हो .. आअज की साड़ी तोह आप पर खूब जांच रही हैं”
“अच्छा रमेश जी क्यों … आपको ज्यादा सेक्सी लग रही हूँ में …” और रौशनी मुस्कुराने लगी.
“रमेश अब रौशनी को खुद से सेक्सी शब्द इस्तेमाल करते देख सरप्राइज था.. उसे रौशनी को खुल कर बात करते देख ख़ुशी हुयी थी.
“रौशनी जी हाँ आप काफी सेक्सी लग रही हो .. आप से तोह किसी लेडीज की टक्कर बी नहीं..”
“अच्छा रमेश जी ऐसे हैं … ाचा चलिए काम पर जाना हैं नहीं तोह यहाँ पर hi बैठे बस तारीफ करते रहोगे आप .. काफी नोट्टी बुड्ढे हो आप ..” रौशनी फिर हसने लगी हैं..
“रौशनी जी काम छोड़िये … आप आज हुनर साथ hi घूमिये न .. अलग अलग चीज़ें दिखाऊंगा शहर के .. आइये मेरे साथ”
“रमेश जी आप तोह चोर hi दीजिये .. आप तोह पार्क्स में hi मुझे घुमागोई उस दिन जैसे उन कपल्स पार्क में वैसे .. आप से तोह दूर hi रहूंगी ..”
“रौशनी जी नहीं दूर न जाइये , अभी तोह पास आयी हो इतने दिनों बाद .. अब तोह आपको दूर जाने hi नहीं दूंगा …”
अच्छा रमेश जी पास hi रखोगे .. क्यों क्या इरादा हैं .. आप कुछ जयादा hi नोट्टी न सोचो मेरे बारे में रमेश जी .. आप के बीवी को बोलूंगी आपकी करतुते ..” रौशनी अब हलके से रमेश के कन्धों पर मुट्ठी मरती हैं .. “अब चलिए नहीं तोह ंगो जाने को लेट होगा मुझे”
अब रिक्शा शुरू कर वह सवारी कर रहे हैं.. रमेश आईने में से ोीचे रौशनी को देखता हैं .. आज रौशनी ने कुछ और डीप फ्रंट चइत ब्लाउज ोेहनी थी .. आज तोह वह मस्त कमाल की आइटम लग रही थी .. रमेश का कुंड तोह उसकी ोान्त में लगातार झटके मार रहा था .. उफ्फ्फ क्या क्लीवेज होगी ममम थोड़ा झुकिए न रौशनी जी … अपने चूचियों की दरार का दृश्य तोह दिखाइए .. रमेश फिर अपने पंत के ऊपर से अपने लोडे को खुजलाता हैं.
वहां रौशनी को एहसास हुआ था की रमेश उसे आईने ऐ घर रहे है. .. वह कुछ सोची फिर थोड़ा आगे झुकी मनो अपने सैंडल्स को ठीक कर रही हो. रमेश तोह अब आईने से बस देखता रहा .. उफ्फ्फ रौशनी की गोरी सी मुलायम चूचियों की दरार का नज़ारा बहुत hi हॉट था .. उसका लुंड अब उस दृश्य से बुरी तरह से झटके मार रहा था .. ही उफ्फ्फ क्या चूचियां होंगी मैडम की … ममममम मुँह से तोह ोानी आ रहा हैं एबीएस उनकी चूचियों की दरार देख .. उनकी नंगी चूचियां देखेगा तोह सीधा उसे होने मुँह में लेकर चूसूंगा ममम काश रौशनी की चूचियों को चूस सकू मममम..
रमेश अब एक हाथ से रिक्शा चला रहा था और दूसरे हाथ से अपने लोडे को मसल रहा था .. जो अब बुरी तरह से झटके मार रहा था ..
अचानक से रिक्शा एक खड़े से गुज़रता हैं ..
“ोूई माँ रमेश जी जरा ध्यान रस्ते पर भी दीजिये , न की यहाँ वहां … इधर उधर नज़र न डालिये .. बस रस्ते पर डालिये ..”
“रौशनी जी माफ़ कीजिये .. ऐसे नज़ारे देख रहा था की ध्यान रस्ते पर नहीं रही .. आक्न्हों के सामने तोह दो बड़े चीज़ देखे .. की यह छोटा सा खड़ा देखना भूल गए ..”
“रमेश जी बड़े बड़े आइटम्स को न देखो … वैसे भी जो चीज़ हाथ नहीं आएँगे तोह खली पिली वहां नज़र दाल कर कुछ फायदा नहीं हैं..”
“अच्छा रौशनी जी .. अरे रौशनी जी हमें बड़े hi पस्न्द हैं .. वैसे आप को भी पसंद हैं न बड़े बड़े चीज़ें..”
रौशनी अब शर्मायी … बातें हद से बहार जा रही थी … उसे अभी शर्म आ रही थी रमेश जी के बातों से ..
“रौशनी जी आज शाम को आइये न थोड़ा घूम लेंगे .. उस पर में आओगी फिर से ..”
“रमेश जी आप को मुझे उस पार्क में ले जाकर
क्या करना हैं मुझे अच्छी तरह से ोाता हैं … अआप बहुत नोट्टी हो .. आप के साथ नहीं आउंगी .. आप तोह मुझे वहां से छोड़ोगे नहीं ..”
“रौशनी जी क्यों छोड़ूंगा आपको .. आप की कंपनी में बहुत अच्छा लगता हैं .. मुझे तोह मन करतभाईन उस पार्क में लेजाकर वहां आपके साथ 2-3 घंटे बितौ .. वहां पार्क में और बहुत हैं करने के लिए , आपने बस ट्रेलर hi देखा था..”
“ अच्छा रमेश जी उस पार्क में उस दिन आपने बस ट्रेलर दिखाया था .. अगली बार पूरी फिल्म दिखाओगे क्या … बड़े आये डायरेक्टर साहब ..”
रमेश तोह काफी गरम हो रहा था रौशनी की ऐसी बातें सुन .. उसका लोढ़ा तोह पूरा औकात में आ चुक्का था … उफ्फ्फ आज तोह रौशनी जी खुल कर बातें कर रही हैं .. बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं .. यार अब तोह उन्हें पार्क ले जाऊंगा और खूब मस्ती करना चाहूंगा मम.
अब वह ंगो पहुँच गए .. रौशनी अब रिक्शा के बहार निकल गयी ..
रमेश भी रिक्शा से उतर गया … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे ..
“रौशनी जी आज आप शाम को मेरे साथ थोड़ा टाइम बिताइए न .. आपसे बहुत बात करनी हैं .. मुझे आप की कंपनी चाहिए आज शाम को …”
“रमेश जी उफ्फ्फ आप भी न .. देखिये शाम का बाद में देखेंगे .. अभी लेट हुआ हैं मुझे … शाम को घर ड्राप करोगे तब देखेंगे .. अच्छा में जाती हूँ.”
रौशनी जी एक मं रुकिए … रमेश अब बोल्ड होकर रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेता हैं .. रौशनी बस उसे देखती हैं .. फिर रमेश उसके हाथों को ऊपर उठाते हुए उसकी हाथों को चूमता हैं …
“रौशनी जी आप की दोस्ती फिर से पाकर बहुत खुश हूँ .. सच अब आपकी दोस्ती हमेशा के लिए चाहिए मुझे”
“रमेश जी … मुझे भी चाहिए आपसे दोस्ती .. आप अच्छे हो .. आपकी कंपनी में मुझे अच्छा लगता हैं .. आज शाम को आप मुझे और घुमा सकते हो… लेकिन अब थोड़ा हाथ छोड़िये .. काम पर जाना हैं.. “ रौशनी को दिख रहा था की रमेश का लुंड अब उसकी पंत में एक तम्बू बनाये हुए था ..
रमेश फिर से रौशनी एक हाथों को चूमता हैं .. फिर रौशनी मुद कर चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती चूतड़ों को देख अपने खड़े लोडे को मसलता हैं.
वहां रौशनी आज के रमेश के साथ बातों के बारे में सोचते हुए अंदर मन में मुस्कराते हुए ंगो के अंदर चली जाती हैं.
ंगो में अपना काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के वहां जाती हैं .. अंदर असलम सोफे पर बैठा हुआ था ..
आज रौशनी ने जो साड़ी और ब्लाउज पहनी थी उससे तोह रमेश जैसे असलम का लोढ़ा भी झटके मारने लगा था .. उफ़ फहाय क्या माल लग रही हैं आज रौशनी जी .. आज तोह इसे ऐसे मसलूंगा उफ्फ्फ क्या बदन हैं यार ….
“रौशनी जी आप आ गयी .. छुट्टी कैसी थी ..”
“अच्छी थी असलम जी … अब वापस काम पर .., वैसे असलम जी में सोच लिया की में अब बस आपके घर आउंगी तोह आप मुझे रुकसाना hi समझ कर बातें करिये .. आप की इलाज के लिए में 100% आपका साथ दूंगी.”
असलम इस बात से बहुत खुश होता हैं ..
“रुकसाना बेगम .. फिर आइये गले लागिये ..”
अब असलम रौशनी को अपने बाँहों में लेकर पूरा मसलता हैं .. “रुकसाना बेगम चलिए अब मस्त गरम खाना बनाइये ..”
“असलम मियां जरूर .. जरा हलके से फ्रेश होने दीजिये …”
रौशनी थोड़ा फ्रेश होकर लंच बनाने लग जाती हैं
पीछे से असलम उसे जकड लेता हैं.. रुकसाना बेगम ही … आपके बदन का दीवाना हूँ में उफ्फ्फ”
“असलम मियां आप भी न .. बस मेरे बदन से hi प्यार हैं आपको ..,”
“रुकसाना बेगम अब हैं hi आइटम जैसे बदन आपकी “
“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न “
असलम अब अपने हाथों को रौशनी के पेट पर फेरता हैं … फिर वहां हलके से दबाता हैं.. “उफ़ असलम मियां धीरे से .. उफ्फ्फ आपके कठोर हाथों से इतना मत मसलो उफ्फ्फ.”
रुकसाना बेगम अब आप हैं hi ऐसी … मसलने दो न .. बहुत मिस किया अपनी बेगम को.”
रौशनी कुछ नहीं कहती .. उसकी ख़ामोशी से और बोल्ड होते हुए असलम अब पीछे से अपने खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबाता हैं .. और आगे से उसके पेट को मसलता हैं.. “उफ़ असलम जी आपका पीछे से बहुत चुभ रहा हैं .. लगता हैं आज बहुत hi मस्ती में हो आप और आपका शैतान”
“हाँ रुकसाना बेगम .. अब क्या कहु आप जैसी चूतड़ों का जादू हैं जो मेरे शैतान पर चा चुक्का हैं.”
“अच्छा असलम मियां अब आप हमारे सामने ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल करोगे .. आज कुछ जयादा hi मूड में हो.”
“रुकसाना बेगम आप आती हो तोह गर्मी बढ़ती हैं .. अब आप को तोह देख मूड खुद बा खुद बनता हैं .. वैसे आप आज मस्त साड़ी पहनी हो … “
“असलम जी आपको अच्छा लगा .. उफ्फ्फ थैंक यू .. हाँ नयी हैं लेकिन आज hi मिली मुझे .. सोचा पेहेन लू.”
“रुकसाना बेगम ऐसे hi पहनिए .. बहुत कमाल की लग रही हो …”
असलम माल शब्द पर जोर देता हैं .. रौशनी समझ जाती हैं और हस्ती हैं…
“असलम जी इतनी कमाल की लगती हूँ आज सच में .. उफ्फ्फ आप आज बहुत टैरिफ कर रहे हो.”
“रुकसाना बेगम जब ऐसी कमाल की बेगम हो तोह क्या करे … “ फिर असलम और एक पीछे से धक्का देता हैं और बी उसका सख्त लोढ़ा और अंदर रौशनी की चूतड़ों में घुसता हैं ..”
अहह असलम जी उफ्फफ्फ्फ़ … आपका पीछे से .. उफ्फ्फ्फ़.”
असलम बहुत गर्मी में था और वह और एक झटका मारता हैं अपने लुंड से … रौशनी की चूतड़ों के अंदर और घुसता हैं उसकी साड़ी के ऊपर से …
“असलम मियां धीरे से .. आपका बहुत बड़ा हैं निचे उफ्फ्फ्फ़. और जोर न दीजिये मममम बहुत अंदर घुस चुक्का हैं अह्ह्ह्ह”
“रुकसाना बेगम अब तोह बस साड़ी के ऊपर से hi घुसा हैं .. कभी मौका दीजिये .. साड़ी बिना अंदर घुसूंगा … मेरी बेगम …”
रौशनी असलम की ऐसी बातों से और गरम होती हैं .. आज उसे उनकी ऐसी बातों से बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. उसकी छूट थोड़ी से गीली हो चुकी थी .. उसे असलम के नंगे लुंड का ख्याल आता हैं और वह और गरम हो जाती हैं …
“असलम फिर रौशनी को अपनी तरफ कर उसकी होठों को चूमता हैं .. इस बार रौशनी कुछ ऑब्जेक्ट नहीं करती और दोनों गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. सामने से असलम एक झटका मारता हैं … अहह असलम जी धीरे से आपका बहुत hi बड़ा हैं उफ्फफ्फ्फ़.
असलम अब अपने हाथों से रौशनी की बाँहों को बुरी तरह से मसलता हैं और उसे फिर से चूमने लगता हैं .. अब रौशनी की छूट गीली हो चुकी थी .. इतने दिन से वह प्यासी थी … आज वह अपनी इन्हिबिशंस खो चुकी थी और स्लैम के मस्ती का साथ दे रही थी …
फिर असलम अपने हाथों से रौशनी के पीठ को मसलता हैं … फिर उसकी चूतड़ों को … उस पुरे समय दोनों एक गहरी चुम्बन में लगे हुए थे … माहौल काफी गरम हो चुक्का था ….
असलम ने तोह पूरी तरह से आज रौशनी को मसलने लगा था … दोनों के दूसरे से चिपके हुए थे ..असलम का सख्त लोढ़ा अब रौशनी के मुलायम पेट पर डाब रहा था … उफ्फ्फ्फ़ रौशनी की तोह अब छूट गीली हो चुकी थी .. आज वह असलम को मन नहीं कर रही थी .. बल्कि उसका पूरा साथ दे रही थी .. उसकी प्यास सच में बढ़ रही थी … असलम को वहां बस रौशनी की प्यास बुझाने और खुद की प्यास बुझानी थी … दोनों चिपके हुए एक दूसरे के बाँहों में खो गए थे ….
असलम और बोल्ड होकर अब रौशनी के आहतों को अपने सख्त उभर पर दाल उसे वहां खुद दबाने लगा … रौशनी फिर कुछ मं बाद खुद से उसके मोठे लोडे को पंत के ऊपर दबा रही थी .. फिर दोनों की चुम्बन टूटी तोह रौशनी अब कामुक भरी नज़रों से असलम की आँखों में देख रही थी … असलम भी हवस की नज़र से रौशनी को देख रहा था .. दोनों के बीच सेक्सुअल टेंशन बहुत हाई हो चुक्का था …
“उफ़ असलम मियां आपका तोह शैतान बहुत hi मोटा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ आप मममम”
“रुकसाना बेगम हाँ मोटा हैं और कला भी . तुमने तोह देख hi लिया हैंउसे .. जब आज़माना हो बताओ … “
“उफ़ असलम मियां .. अब खाना बनाना दीजिये उफ्फ्फ्फ़”
“रुकसाना बेगम बोलिये न … मेरे बड़े हथ्यार को आज़माना चाहती हो .. उफ्फ्फ बहुत टाइम हुआ मेरी रुकसाना बेगम की प्यास बुझा कर …
रौशनी पूरी मदहोशी में थी .. वह भूल गयी थी असलम एक बुद्धा था … बस उसकी प्यास .. उसके हवस को उकसा रही थी .. वह असलम के लोडे को मसलती रही .. असलम भी रौशनी के कमर को मसलता रहा …
अचानक से उन्हें सलीम की आवाज़ सुनाई देती हैं .. सलीम की आवाज़ सुन रौशनी असलम से अलग होती हैं .. उसे अब एहसास होता हैं की वह क्या कर रही थी अभी असलम के साथ .. वह फिर बहार सलीम को मिलने जाती हैं…
“उफ़ साले कमीने को अभी आना था .. रौशनी मस्त हाथ लगी थी यार .. बहुत हवस बढ़ रही थी दोनों में .. कमाइना साला .. उफ्फ्फ मेरे खड़े लोडे का क्या करू … उफ्फ्फ रौशनी .. और कब तक बचेगी तुम मुझ से .. अब तोह तुझे बिस्तर पर लजाकर तेरी कुटाई करने में देर नहीं हैं ..
सलीम रौशनी को देख खुश होता हैं .. वह भी रमेश और असलम जैसे रौशनी को इस साड़ी और ब्लाउज में देख मस्त होता हैं और उसका लोढ़ा भी सख्त होने लगता हैं .. (है आज क्या मस्त लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ ज़रा झुकेगी तोह साली की चूचियों की दरार साफ़ साफ़ दिखेगी … आज तोह बड़ी माल बन कर आयी हैं .. लगता हैं उसके पति ने उसे प्यासा hi चोर दिया हैं .. उफ्फ्फ रौशनी जी में प्यास बुझाऊंगा तुम्हारी ..)
रौशनी सलीम के गले मिलती हैं .. सलीम उसे मसलता हैं .. उसकी पीठ को मसलता हैं …
“रौशनी जी आप आ गए …. रौशनी जी आप से एक दिन भी जुड़ा नहीं रह सकता .. आपको बहुत मिस किया ..”
“अच्छा सलीम जी इतना क्यों मिस किया”
“रौशनी जी अब आप जैसी खूबसूरत दोस्त को कौन पागल मिस नहीं करेगा ..”
रौशनी मुस्कुराती हैं “अच्छा ऐसे हैं सलीम जी … वैसे सलीम जी मैंने भी आपको मिस किया.”
“ओह सच्ची रौशनी जी आपने हमें मिस किया … कैसी खुश नसीबी हैं मेरी …”
“रौशनी जी फिर तोह आप अब वापस नहीं जाना .. यही पर रहिये … आपकी कंपनी अच्छी लगेगी…”
दोनों अब सोफे पर बैठ जाते हैं .. रौशनी इस बार सलीम के काफी करीब बैठ जाती हैं ..
“रौशनी जी वैसे आपने मेरी उस बात पर सोची”
“किश बात पर सलीम जी”
“वही मेरे दोस्त के बेटी की शादी हैं और मुझे इन्विते किया था .. में सोचा अगर आप भी आ जाये तोह मेरे दोस्त को आपकी इंट्रोडक्शन करवाऊंगा .. उसे बोलै था आप नयी मैनेजर हो.”
“हाँ सलीम जी हम्म्म , हाँ में आउंगी आपके साथ .. लेकिन बस एक रात रहेंगे , फिर वापस आएँगे … ंगो में काम काफी हैं बाकी”
रौशनी जी जरूरर बस आप आइये तोह सही … वैसे आप आओगी तोह शादी को चार चाँद लग जाएंगे ….”
“शुक्रिया सलीम जी .. आप बहुत तारीफ़ करते हैं.”
“रौशनी जी वैसे एक बात हैं .. आप आओगी तोह दुल्हन आपको देख जलनि नहीं चाहिए .. कहते हैं न शादी में दुल्हन hi सबसे खूबसूरत लगनी चाहिए .. आप आओगी तोह उसे कड़ा मुक़ाबला होगा .. ः”
“सलीम जी आप भी न .. उफ्फ्फ्फ़ कुछ भी .. वह कितनी जवान और खूबसूरत होगी .. में तोह अब जवान नहीं उतनी …”
“रौशनी जी आप जवान हो .. और आपकी जवानी के जलवे तोह मुझे बेहत पसंद हैं ..”
रौशनी अब अपना हाथ साली के तइस पर रखती हैं .. उससे सलीम का लुंड झटके मारने लगता हैं … “वैसे आप भी न सलीम जी … मीनल हैं न .. उसकी जैसी जवान दोस्त हैं न आपके पास.”
“रौशनी जी आप की जवानी पसंद हैं मुझे .. मीनल तोह हैं खूबसूरत लेकिन आप ाजीसी बात कहाँ उसमें.”
“ओह सलीम जी मुझे में क्या बात हैं …”
सलीम अब रौशनी की चूचियों के तरफ देखता हैं …
“रौशनी जी आप में सब कुछ बेस्ट हैं.”
“सलीम जी अच्छा .. क्या बेस्ट हैं जरा बताइये …”
सलीम काफी एक्सपेरिएंस्ड था .. उसे पता था कब कौनसे महिला प्यासी होती हैं .. वह सोचा की अभी मौका हैं रौशनी के और करीबी बनाना के लिए”
“रौशनी जी … मममम आपका गोरापन .. आपकी फिगर .. आपकी नशीली आँखें .. आपके रैसले होठं .. आपकी नाज़ुक कमर .. … आपकी …”
“उफ़ सलीम जी .. बस .. आप तोह .. उफ्फ्फ्फ़ शुरू hi हो गए ..”
“रौशनी जी शुरुवात कहाँ की हैं अब तक … आप शुरवात करने दीजिये .. “
“सलीम जी .. कैसी शुरवात करनी हैं आपको …”
“रौशनी जी .. अपने प्यार की शुरुवात .. आपसे बहुत प्यार करना चाहता हूँ … आप से पूरी मस्ती …”
“उफ्फ्फ सलीम जी .. बहुत हुआ .. यह प्यार छोड़िये .. उफ्फ्फ में रही जवान .. आप रहे बुड्ढे .. यह प्यार चोर दीजिये . आपकी उम्र नहीं हैं प्यार की.”
“रौशनी जी प्यार के लिए कहाँ उम्र देखि जाती हैं .. प्यार कभी भी हो सकता हैं .. किसी के साथ भी .. अब मुझे तोह आपसे प्यार हैं .. एक तरफ़ा hi सही लेकिन हैं .. अब आप को मेरे प्यार को स्वीकारना हैं वह आपके हाथों में हैं ..”
“ओह गॉड तू मच ु अरे … उफ्फ्फ आप भी न .. सलीम जी आप …”
रौशनी फिर दूसरी तरफ देखती हैं .. सलीम अपने हाथों से रौशनी के चेहरे को पाने तरफ करते हुए …”रौशनी जी आप शरमाते हुए और भी मस्त लगती हो …”
सलीम अब रौशनी के तरफ अपने चेहरे को करता हैं .. उसके हॉट नाब रौशनी के होठों के काफी करीब थे .. रौशनी ने ानकेहिं बंद करि थी … सलीम अब मौका गवाने वाला नहीं था .. वह रौशनी के होठों को चूमने लगा ….
रौशनी आज दूसरी बार किसी को चुम रही थी .. इस बार सलीम को … दोनों गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी आज तोह सब हाडे पार कर रही थी … रौशनी इन बुद्धों के जाल में फस रही थी .. उसकी प्यास भी उसे उनके तरफ धकेल रही थी …
कुछ 5 मं किश के बाद रौशनी उठा कर घर के बहार भगति हुयी गयी ..उसके हिलती चूतड़ों को देख सलीम अपने लोडे को मसलने लगा … उफ्फ्फ रौशनी कहाँ भागोजी .. मेरे पास hi आओगी तुम .. तुम्हारी प्यास बढ़ रही हैं .. और यह बुद्धा तेरी प्यास बुझाएगा .. मेरे मोठे लोडे से तेरी मस्त छूट की चुदाई करूँगा .. बहुत देर नहीं अब मेरे लुंड की रानी रौशनी ….