Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 2 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

अब अगले दिन की बात हैं .. रौशनी सुबह ब्रेकफास्ट बना कर नहाने चली गयी .. आज उसने रोनित को नास्ते पर बुलाने की कोई कोशिश न करि ..

फिर वह नहाने चली गयी … रौशनी नहाते वक़्त उसे कल शाम की बात याद आयी. उस रिक्शा में , रमेश के साथ उसके होठों के इतने करीब , वह ानकेहिं बंद करके उनके टच का एहसास करने लगी … रमेश ने उसे कास कर पलड़ा था एयर अपना हाथ उसके शरीर पर दौड़ा रहा था ..

एक हफ्ते से उसके और रोनित के बीच कुछ भी फिजिकल न होने के कारन वह एक मर्द के टच से अच्छा फील कर रही थी .. लेकिन रमेश एक बुद्धा था और हु भी एक रिक्शा ड्राइवर … वह उनके बारे में ऐसे कैसे सोच सकती थी ..

फिर अपनी ख्यालों से निकल कर रौशनी कपडे बदलने चली गयी ..

रौशनी का मूड काफी अच्छा था , उसके जॉब की शुरुवात बहुत अच्छी हुयी थी. सब लोग वहां उसे बेहत रेस्पेक्ट करते थे और प्यार भी दे रहे थे ..

आज उसने एक डीप बैक कट ब्लाउज पहनी जो बस 1 स्ट्रिंग और एक स्ट्राप से पीछे से बंधी हुयी थी ..

ब्लाउज स्लीवलेस थी . बाल आज उसने एक बन में बंधे थे जैसे उसकी पूरी मखमली पीठ दर्शा रही थी … वह फिर मिरर में खुद को देखने लगी .. उसने सच में लाफ़ी मेन्टेन राखी थी फिगर ज़ज़. फिर उसने हाथों में चूड़ियां और कानो में बलि पहनी ..

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आज उसने डार्क रेड लिपस्टिक पहनी थी … हल्का सा मेक जैसे वह हमेशा पहनती थी ..

साड़ी थोड़ी और ट्रांसपेरेंट थी जिससे उसकी नाभि का गोल आकर साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था ..

खुद को एक बार आईने में देख वह खुद के खूबसूरती पर मुस्कुरायी .. उसे रमेश के तारीफे याद आने लगे थे ..

अब वह बिना रोनित से कुछ बोले घर के बहार रिक्शा स्टैंड निकल गयी ..

आज उसने देख की रमेश उसका इंतज़ार नहीं कर रहे थे .. वह कही भी नहीं दिख रहे थे .. रौशनी निराश हुयी … वह सोची की क्या कल के इंसिडेंट के वजह से आज रमेश जी उसे लेने नहीं आये थे ??

वहां फिर उसने एक दूसरी रिक्शा ली और वहां से निकल पड़ी…

रौशनी रमेश से बातें मिस कर रही थी ..उसे रमेश की कंपनी अच्छी लगती थी .. वह बुड्ढे जरूर थे लेकिन बातें किसी युवा जैसे करते थे .. खैर फिर रौशनी ंगो पहुँच गयी ..

ऑफिस में वह काम करने लगी .. फिर वहां के लोगों ने कहा की एक एक्टिविटी उन्हें रखनी थी कुछ 1 हफ्ते बाद .. उसके लिए उसे असलम जी और सलीम जी की मदद लेनी होगी

रौशनी असलम और सलीम के घर आकर उसे बुलाती हैं “असलम जी ,, असलम जी में रौशनी .. आपसे मिलने आयी हूँ कुछ काम था …”

तीन बार बुलाने पर भी असलम नहीं आये .. रौशनी को लगा की वह बहार गए होंगे ..फिर भी उनका थोड़ी और देर इंतज़ार करने की सोची.

वहां असलम को सब सुनाई दिया था … वह जान बुझ कर जल्द से रौशनी से मिलने नहीं आ रहा था .. आज वह अपनी ‘बिमारी’ का फायदा उठाने की सोच रहा था ..

वह धीमे क़दमों से रौशनी के पास आ गया और फिर रौशनी को पीछे से लप्पेट लिया “अरे जानेमन तू आ गयी ,, कितनी इंतज़ार करवाएगी जान ु उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी खुसबू मममम”

रौशनी इस हरकत से चौंक उठी ..

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“असलम जी छोड़िये मुझे उफ्फ्फ में रौशनी हूँ का की आपकी बेगम .. िसष्ठ छोड़िये प्लीसीईए..”

“रुकसाना मेरी जान तू बहुत दिनों बाद आयी हैं मेरे पास ममम सूंघ लेने दो तुम्हारी खुशबु …”

असलम ने अपने बाँहों को रौशनी के इर्द गिर्द लपेटा था और वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था … असलम की सांसें रौशनी के नैक के वहां उसे महसूस हुयी..

“ममम रुकसाना मेरी जान मममम तुम अभी भी इतनी मस्त बदन वाली हो उफ्फ्फ क्या बदन हैं तेरा अह्ह्ह्ह”

“असलम जी , प्लीज छोड़िये हमें , में रौशनी हूँ रौशनी …”

लेकिन असलम आज नहीं सुनने वाला था .. वह अब रौशनी को और कास कर पकड़ने लगा …. उसके हाथ अब रौशनी के कमर को पकडे हुए था और से वह दबाने लगा .. रौशनी बहुत दिनों से अपने पति से ऐसे कुछ करि नहीं थी , उसे ऐसे एक मर्द का फिजिकल एहसास पाकर कंफ्यूज हुयी.

असलम ने अब अपने मुँह से रौशनी के मुलायम पीठ पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. उफ्फ्फ रुकसाना तुम्हारी यह पीठ ममम बहुत hi मुलायम हैं , दूध से नहाती हो न मममम और उसने फिर एक गीली से चुम्मी दी रौशनी के पीठ पर …

रौशनी को उस चुम्मी से अउ रेज एक मर्द के फिजिकल टच से थोड़ी सी आह निकल गयी … “छोड़िये न असलम जी “ और वह अपने आप को चुराने की कोशिश करि लेकिन असफल रही .. असलम था बुद्धा लेकिन काफी मज़बूत बदन वाला था .. आसानी से रौशनी नही जुड़ा हो पाएगी उसके बाँहों से …

ऐसे कर असलम ने और दो पुप्पियाँ दी रौशनी की पीठ पर .. उसके चूमियाँ सब गीले थे और वह ऐसे hi रौशनी के पीठ पर अपनी गीली चूमियों की निशानी चोरे जार अहा था …. करीबन 5 ऐसे चुम्मों के बाद असलम ने रौशनी को पलटा कर उसका चेरा अपने तरफ करवाया .. वह रौशनी की गुलाबी होठों को देखे जार अहा था … अब उसके हाथ रौशनी के पीठ पर थे और वह उसकी पीठ पर अपने हाथों को फेरने लगा

“रुकसाना मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ तुझे देख तेरा यार बहुत गरम हो रहा हैं मममम क्या आइटम हैं तू उफ्फ्फ्फ़”

असलम का लुंड अब उसकी पंत में उभरने लगा था … उसका लुंड ाजिसे hi और सख्त होता , वह रौशनी की क्रॉत्च पर जा टकराने लगता .. रौशनी को उसकी चुभन महसूस हुयी … “असलम जी मम प्लीज छोड़िये उफ्फ्फ यह गलत हैं , में आपकी बेगम रुकसाना नहीं हूँ , में रौशनी हूँ प्लीज याद करिये यह सब असलम जीईई

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असलम रौशनी की बात न सुनने का नाटक कर रहा था और रौशनी के पीठ पर अपने गंदे कठोर हाथों को पहरने लगा .. ृष्णि की मुलायम पीठ अब असलम के कठोर हाथों द्वारा मसली जा रही थी .. उसके पीठ पर लाल निशाँ चोर रहे थे ….

“रुकसाना मेरी बेगम में आज तुम्हे हर हाल में पाना चाहता हूँ ,,, आज तुझे दुनिया की सैर करवाऊंगा .. उफ्फ्फ चलो न मज़्ज़ज़ करते हैं मममम”

रौशनी के अंदर मिक्स्ड फीलिंग थी , एक तरफ उसे ऐसे एक मर्दाने हुग का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और दूसरी तरह यह किसी बुड्ढे के बाँहों में थी .. कला सा गन्दा बुद्धा..

असलम अब निचे झुक कर रौशनी के नाभि को चूमने लगा , वहां पर भी गीली चूमियाँ वह देने लगा … रौशनी को अपनी नाभि पर चुम्मियाँ पा कर वह थोड़ा हसने लगी .. वह वहां बहुत hi सेंसिटिव थी .. उफ्फ्फ असलम वही पर क्यों चुम्मियाँ दे रहा हैं उफ्फ्फ वह तोह मेरी वीक स्पॉट हैं .. रौशनी के मुँह से हलकी सी आठ निकल गयी और रौशनी की आँखें अब बंद हो गयी .. वह असलम से कुछ बोल नहीं रही थी बस हलकी सी सिकरियाँ मार रही थी …

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असलम ने और थोड़े चुम्मों के साथ फिर से रौशनी के मुँह की तरफ अपने मुँह को करवा लिया ..

“डार्लिंग मेरी बेगम, मेरी रुकसाना , मेरी जान उफ्फ्फ तुम बहुत hi स्पेशल हो मेरे लिए ममम आज तुम हाथ आयी अब तुम्हे छोड़ूंगा नहीं ममम चलो अब हम बिस्तर पर जा कर पूरी मस्ती कर लेते हैं ममममम”

बिस्तर का नाम सुन कर रौशनी की आँखें खुली , अब उसे पूरी तरह से एहसास हुआ की वह असलम बुड्ढे के बाँहों में थी ..” चिरये असलम जी अब बहुत हुआ छोड़िये मुझे असलम जीई”

असलम अब पूरी तरह से बहक गया था , अब तोह वह बस रौशनी की चुदाई hi करना चाहता था …. ौसे रौशनी को और दबोचा और उसे और मसलने लगा …

फिर एकदम से दोनों को सलीम की आएवज़ सुनाई दी ..

“असलम अरे तू क्या कर रहा हैं , यह रौशनी मैडम हैं तेरी बेगम रुकसाना नहीं .. अरे चोर इसे ….”

असलम रौशनी को अभी भी अपने बाँहों में लपेटे हुए था .. रौशनी फिर पीछे मुद कर सलीम को देखि .. उसे असलम के बाँहों से चुराने के लिए इशारा करने लगी … विनंती करने लगी .. सलीम थोड़ी और देर असलम को रौशनी को मसलने दिया

“असलम अरे रौशनी मैडम को चोर .. तेरी बेगम जैसे दिखती होगी और उसके जैसे गदरायी सेक्सी औरत होगी लेकिन यह तेरी बेगम नहीं हैं …”

रौशनी को सलीम से ऐसी बातें सुन शर्मा गयी .. क्या वह रुकसाना को ऐसे कह रहा था या उसे .. वह सोच रही थी ..

सलीम ने दोनों के पास जाकर असलम को एक तमाचा मारा.

“असलम तू क्या कर रहा था .. अरे रौशनी मैडम हैं यह .. पागल हैं क्या .. तेरी इस बिमारी की वजह से बहुत प्रोब्लेम्स हो रहे हैं …

रौशनी साइड में कड़ी थी .. उसके बाल बिखरे हुए थे , वह बन आधा खुल चुक्का था ..

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उसकी मुलायम पीठ पर लाल रंग के निशाँ बने थे , उसकी नाभि और कमर पर भी लाल निशाँ थे … उसकी पीठ और कमर पर असलम की सुखी हुयी सलीवा भी थी …

सलीम “असलम तू पागल हैं , इस बिमारी ने तुम पर हावी बोल दिया हैं .. कल भी तुम मीनल को अपनी बेगम समझ कर उसे भी मसलने लगा था .. उसे तोह तूने उसके होठों पर चूमा भी …. वह तोह में आ ता नहीं तोह उसे तोह तुह पूरा निचोड़ hi लेता …”

मुझे माफ़ करिये रौशनी मैडम , में .. में खुद पर काबू भूल गया उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … मुझे माफ़ कीजिये …”

रौशनी को अभी भी असलम पर थोड़ा ग़ुस्सा था … वह उसे घर रही थी …

असलम फिर एक दो बार और माफ़ मांग कर रोने hi लग गया “उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … इसके वजह से मैंने अपनी फूल जैसी मैडम से ऐसी गन्दी हरकत की .. मुझे सजा दीजिये रौशनी जी .. में आपके दोस्ती के लायक नहीं हूँ .. मुझे मार hi दीजिये आप “ और असलम वही घुटनो के बल जाकर रोने लगा …

रौशनी को असलम की रोने से बुरा लगा … हाँ उसने एक बहुत hi गन्दी हरकत किट hi लेकिन बिचारा उस बिमारी का शक्कर भी तोह हैं … वह उस बिमारी में ऐसे कर बैठा … अब उसे इतना पछतावा हो रहा हैं… उफ्फ्फ्फ़ और रौशनी बोली

“असलम जी आप प्लीज रोइये मत .. आप की बिमारी की वजह से आपने ऐसे किया होगा … आप प्लीज न रोइये … प्लीज में आपको माफ़ कर दूंगी प्लीज न रोइये …

वहां साइड में खड़ा सलीम मन में मुस्कुरा रहा था – साला असलम भी न क्या ज़बरदस्त एक्टिंग करता हैं .. साला कमीना पूरी तरह से बिमारी का फायदा उठा कर रौशनी को नोचोद लिया .. उफ़ उसके बदन पर भी लाल निशाँ हैं . फिर सलीम रौशनी को देखने लगा –उफ्फ्फ क्या मखमली गोरी सी पीठ हैं इसकी . उफ्फ्फ इतने नोचोड़ने से hi इतनी लाल हुयी हैं ममम असलम साला लकी हैं ..

असलम कुछ और रोने की नाटक कर के फिर खड़ा हुआ और मुँह लटकाये खड़ा रहा …

सलीम बोलै “रौशनी जी वैसे आप यहाँ आयी क्यों थी ?”

रौशनी बातों के मुद में नहीं थी .. वह स्पच रही थी की क्या उसे असलम के ऐसे करने से हल्का सा मज़्ज़ा आया था .. क्या वह ऐसे इस बुड्ढे की बाँहों में खुद को पाकर उसे अच्छा लगा था .. उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं उसे …

“कुछ नहीं बाद में बताउंगी … बाद में . मुझे वाशरूम कहा हैं बताइये वहां थोड़ा फ्रेश उप होकर में जाती हूँ.”

सलीम ने रौशनी को वाशरूम कहा हैं वहां गाइड किया ..

रौशनी वाशरूम का दरवाज़ा खोला तोह वह देखि की एक डोरी पर उन दोनों के कच्चे और बनियान लटक रहे थे … वह धोये हुए थे इसलिए रौशनी को उनसे बदबू नहीं आयी लेकिन वह देख रौशनी सेहम सी गयी .. उफ्फ्फ्फ़ यह मर्द भी न , सब एक जैसे हैं अगर अकेला चोरो तोह वाशरूम तोह ेस्पेशलय कैसे भी रखते हैं … हमेशा रोनित को भी बताना पड़ता हैं कैसे घर की चीज़ें रखनी चाहिए उफ्फ्फ.

रौशनी उनके कच्चों को देख एक बात उसे काफी अजीब लगी .. उनके सब कच्चे बड़े थे … और कई कई तोह बोसेर्स hi थे .. सब साइज सल वाले … रोनित तोह उनसे और हत्ता कटा हैं लेकिन उसके बोसेर्स या कच्चियाँ भी ल साइज के hi हैं … क्या उनके अंदर वह .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह में क्या सोच रही हूँ … जल्दी से फ्रेश उप होकर निकलना चाहिए .. आज का दिन पूरा अजीब hi हैं उफ्फ्फ्फ़.

और रौशनी फ्रेश उप होकर वहां से निकल गयी…

अब रौशनी के जाते हैं असलम बोलै सलीम से “कमीने तूने ऐसे जोर से तमाचा क्यों मारा मुझे “

“अरे चूतिये तू कैसे मसल रहा था रौशनी को … तू पूरा बेकाबू हुआ था .. बोल्ट ु उसे छोड़ने का इरादा बना लिया था …”

“सलीम उफ़ क्या बताऊ रौशनी का बदन इतना मस्त हैं .. इतनी मुलायम पारी हैं वह … इतनी गोरी … उसके बदन को मसलते मेरा लोढ़ा तोह पूरा टाइट हो गया था .. मममम माल हैं माल “

“असलम तू भी न मेरे hi आईडिया को उसे करके रौशनी को निचोड़ा तुमने … उफ्फ्फ्फ़ मज़्ज़ा आ या होगा न … साली वैसे थोड़े मज़े ले रही थी .. में हलकी सी आह सुन रहा था … तुमने तोह उसे चुम भी लिया पीठ पर और नाभि पर … साले तू बहुत लकी हैं”

सलीम यार इसकी चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ्फ़ लोढ़ा सख्त होता हैं उसके बारे में सोचता हंट यह ,, उसकी गुलाबी होठं, चिकनी कमर, हिलते डुलते चूतड़ .. गोरी बाहें और उसकी नशीली आँखें उफ्फ्फ्फ़.”

“असलम दिख रहा हैं तेरा लोढ़ा कैसे टाइट हुआ हैं .. हाँ तू सही कहता हैं , रौशनी को देख मेरा भी लोढ़ा इतना टाइट होता हैं क्या कहूं … उसके नाम मर एक बार मुठ भी मार चुक्का हूँ उफ्फ्फ्फ़, मुझे भी उसकी चुदाई करनी हैं “

असलम मन में सोचते हुए (साला कमीना , तेरी तोह एक आइटम हैं न वह मीनल लड़की , साली को पता कर कितनी बार छोड़ा हैं तूने .. साला अब तेरी नज़र मेरी आइटम पर हैं .. रौशनी की चुदाई तोह में hi पहले करूँगा ….)

दोनों फिर अपने कमरों में जाकर रौशनी की ख्यालों में खो गए.

वहां ऑफिस में रौशनी असलम से हुयी चीज़ों के बारे में सोच रही थी … उस काळा बुड्ढे ने उसे बहुत मसला था … उसकी बिमारी तोह ज्यादा hi ओरसे होते जा रही हैं … पहले की कुछ कर बैठे उसके इलाज के बारे में कुछ करना होगा .. लेकिन कम्बक्त ंगो का डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएगा .. और अगले हफ्ते तोह वह इवेंट हैं जिसमें मुझ असलम जी मदत तोह लगेगी हैं … मम जाने से पहले एक बार शाम को उनसे मिल लेती हूँ फिर से .. इस बार सलीम को भी बुलाऊंगी ..

सलीम नहीं आते तोह आज असलम और मेरे बीच कुछ हो hi जाता .. असलम बुद्धा होकर बहुत मज़बूत हैं .. उससे तोह खुद को चुरा hi नहीं पाती … सलीम बहुत अच्छे इंसान हैं उन्होंने मुझे बचाया आज.

रौशनी अपने कुछ मीटिंग ख़तम करती हैं और जाने से पहले शाम को सलीम और असलम से मिलने जाती हैं .. इस बार वह पहले से hi कॉल करती हैं सलीम को की वह आ रही हैं और असलम को काबू में रखने के लिए उसे भी आना होगा.

सलीम तोह बहुत खुश होता हैं .. सोचता हैं की इस असलम का इस्तेमाल करके रौशनी से मज़े ले पाउँगा … सेल को भी मज़े करने देना hi पड़ेगा …

रौशनी अब उनके घर जाती हैं तोह सलीम और असलम दोनों उसका इंतेज़्ज़र कर रहे होते हैं .. असलम एक कुर्सी पर बैठा हुआ हैं और सलीम सोफे पर ..

रौशनी भी सोफे पर बैठ जाती हैं ..

रौशनी को फिर से देख दोनों के कच्छियों में हलचल होने लगती हैं …. वह बस रौशनी के बदन को hi देखे जा रहे थे …

“असलम जी अगले हाफत ीक इवेंट हैं , सुना हैं इसमें आप का योगदान बहुत होता हैं.. इसलिए इस बार भी आप hi मैं मदत करेंगे हमें.”

“ज़रूर रौशनी जी में आपकी और ंगो की मदत करूँगा ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं ..”सलीम जी आप भी हेल्प कीजिये .. इस बारे में इवेंट और बड़ा रखना चाहती हूँ .. आपकी भी मदत लगेगी..”

सलीम बोलता हैं “रौशनी जी आपके लिए शह हमारी जान हाज़िर , फिर यह इवेंट क्या चीज़ हैं और अपने काळा होठों पर मुस्कराहट लाता हैं .

रौशनी सलीम के बातों को सुन है पड़ती हैं “सलीम जी आप भी न .. ुर तू मच” और रौशनी बड़ी स्माइल देती हैं .

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सलीम सोचते हुए (उफ्फ्फ रौशनी तेरे गुलाबी होठं तोह मेरे लोडे पर चुम्मे देने लायक हैं.. ऐसे गुलाबी होठों को तोह मेरे लोडे का सलाम)

तीनो इवेंट के बारे में कुछ देर बातें करते हैं. फिर रौशनी बोलती hain”accha तोह इवेंट की तोह बातें होती रहेगी .. आप दोनों से एक इम्पोर्टेन्ट बात करनी हैं.” आज जॉब hi हुआ वह और नहीं होना चाहिए .. असलम जी आप की बिमारी का कुछ इलाज जल्द से जल्द ढूँढना होगा, लेकिन ंगो के डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएँगे.”

असलम बोलता हैं “रौशनी जी दुपहर के लिए में माफ़ी फिर से मांगता हूँ .. हाँ इस बिमारी का इलाज होना hi चाहिए … मेरे पास एक उपाय हैं”

रौशनी ,असलम की बातें सुनने उत्सुक थी.

“मैंने …..” फिर सलीम बीच में बोलता हैं “हमनें”

“हाँ हाँ हमनें एक डॉक्टर धुंध लिया हैं … थोड़ी सी दुरी पर हैं उनका क्लिनिक. वह भी दिमागी बिमारी का इलाज करते हैं. चाहे तोह कल वहां जा पाएंगे . उनका क्लिनिक दुपहर को ओपन होता हैं.”

रौशनी कहती हैं “वाओ गुड न्यूज़ दिया हैं आपने .. हाँ कल सुबह जरूर जाएंगे वहां.”

असलम बोलता हैं “लेकिन रौशनी जी वह थोड़ी सी दुरी पर हैं , यही कुछ 7-8 कम .. वहां हम तीनो कैसे जाएंगे .. न आपके पास न हमारे पास गाडी भी हैं.”

सलीम बोलता हैं “हम तोह दो बाइक अर्रंगे कर पाएंगे … बस वहां जाने के लिए आपको हमारे साथ बाइक पर आना पड़ेगा …”

रौशनी अब सोचने लगती हैं .. बात तोह सही थी .. गाडी तोह नहीं थी अब उसके पास. रमेश जी का क्या पता वह वापस आएँगे या नहीं .. और आए भी तोह दुपहर को उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहूंगी उनके काम के वक़्त. फिर कुछ सोचती हैं “अच्छा ठीक हैं में आउंगी बाइक पर .. असलम जी का इलाज करना बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं ..में एक बाइक पर बैठूंगी कोई और दूसरी बाइक लेकर आइये.

सलीम बोलता हैं “ठीक हैं रौशनी जी हम बाइक अर्रंगे करेंगे .. फिर दुपहर जाकर उस डॉक्टर से मिलकर असलम जी के इलाज का सलूशन निकालेंगे …”

रौशनी खुश हो जाती हैं … असलम जी की बिमारी का हल निकलेगा तोह फिर असलम जी की दोस्ती को भी नहीं तोड़नी पड़ेगी .. और वह भी आराम से अभी ज़िन्दगी बिता पाएंगे.

दोनों को अलविदा कहते हुए रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसकी हिलती चूतड़ों और कमर को देख .. दोनों अपने लोडे मसलने लगते हैं ..

उन लोगों ने ऐसे सेटिंग की थी की असलम की जूठी बिमारी का वह अपने फायदे के लिए पूरी तरह से उस डॉक्टर के वजह से इस्तेमाल करने वाले थे .. यह कैसे आगे उपदटेस में देखिये !!!!
 
शाम को भी रमेश जी नहीं आये रौशनी को पिक उप करने .. रौशनी इस बात से निराश थी. वह फिर से कोई और रिक्शा कर घर पहुँच गयी :.

अगले दिन सुबह सब काम निपटा कर रौशनी ंगो के लिए रावण हुयी. आज फिर से रमेश नहीं आये थे. रौशनी की निराशा और हुयी. क्या सच में अब रमेश जी उससे पिक उप करने नहीं आएँगे , क्या वह उनसे नहीं मिलेगी .. ? इन सब ख्यालों से वह ंगो पहुँच गयी.

आज वह एक बात से खुश थी की असलम जी की इलाज आजाए शुरू होने वाली थी. सुबह का काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के घर पहुंची . असलम और सलीम तोह पहले से hi तैयार थे …

वह रौशनी को आते देख उनके लुन्डों में हलचल होने लगी .. रौशनी थी hi इतनी मस्त और सेक्सी किआ एते hi दोनों के लुंड उभरने लगे थे ..

आज रौशनी ने आज फिर से बहुत अच्छी एक साड़ी पहनी थी.. इस बार भी स्लीवलेस ब्लाउज थी .. डीप बैक कट भी .. असलम के कल के दबोचने के लाल निशाँ अभी भी उसकी मुलायम पीठ पर झलक रहे थे ..

रौशनी ने आज एक लाल रंग की लिपस्टिक पहनी थी .. असलम की नज़र सीधे रौशनी की लिपस्टिक पर गयी … (उफ्फ्फ्फ़ क्या होठं हैं रौशनी के .. ममम मन लरता हैं उन्हें चुम कर चूस लूँ … ऐसे होठं तोह बस एक गहरी चुम्बन के लिए hi बने हैं )

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सलीम मन में (आज से शुरुवात हैं रौशनी को हमारी बेगम बनाने की )

रौशनी “नमस्ते सलीम और असलम जी कैसे हो आप .. आज के लिए तैयार हो …

हाँ रौशनी जी हम तोह तैयार हैं … चलिए जाना होगा डॉक्टर के क्लिनिक की तरफ.

हाँ जरूर चलिए न ..

फिर असलम बोले “लेडीज फर्स्ट मोहतरमा”

रौशनी मुस्कुरायी … “ओह आप बड़े जेंटलमैन बने हो आज असलम जी ः”

अब रौशनी आगे चल रही थी और दोनों बुड्ढे उसके पीछे .. उसकी कमर, चूतड़, पीठ सब देख दोनों अपने लुन्डों को ऊपर से मसल रहे थे .. दोनों अब रोज़ रौशनी के आने किआ ुर उसकी फिगर देखने के hi इंतज़ार में गुज़रते थे … वह रौशनी के मनो दीवाने hi हुए थे ..

सलीम ने असलम को देख उसके कानों में फिसफुसाया “असलम आज तोह रौशनी जी और भी खिल उठा रही हैं … आज तोह उसकी चाल और भी मेढक हैं यार … तूने किया न जो मैंने कहा था ..?”

सलीम बेफिक्र रहिये सब सेट किया हैं मैंने …”

अब बहार आते hi सलीम बोलै “रौशनी मैडम आपको बताना हम भूल गए .. एक hi दिक्कत हैं आज ..”

कैसी दिक्कत सलीम जी बराइये न.”

वह .. वह .. ऐसी बात हैं की …

बोलिये न सलीम जी .. क्या दिक्कत हैं बताइये न” रौशनी मधुर स्वर में बोली ..

रौशनी जी हु हम बस एक hi बाइक अर्रंगे कर पाए हैं आज डॉक्टर के पास जान ेके लिए

“अरे यह तोह दिक्कत है. .. अब हम तीनो वहां कैसे जाएंगे”

“वही तोह दिक्कत हैं रौशनी जी … तीनो एक साथ वहां कैसे जाएंगे ..”

रौशनी कुछ सोचने के बाद “अच्छा बाइक छोड़िये हूँ रिक्शा से जा सकते हैं न ..”

असलम बोलै “मैडम जी हु डॉ का क्लिनिक ऐसे एरिया में हैं जहाँ रिक्शा नहीं जा पाएंगे … रस्ते छोटे हैं . 4 कम पर मैं रोड हैं वहां तक तोह ठीक हैं लेकिन उसके बाद अंदर और 3 कम हैं जहाँ बाइक hi जा पाएगी .. रिक्शा नहीं जा पाएंगे …”

रौशनी “उफ्फ्फ यह तोह बड़ी दिक्कत हैं … अब क्या करे .. आप दोनों hi इस समस्या का समाधान करे”

असलम बोलै “मैडम एक काम हैं लेकिन पता नहीं आप इस बात को मानोगी या नहीं ..

“बताइये न असलम जी आज आपको वहां उस डॉक्टर को दिखाना काफी इम्पोर्टेन्ट हैं .. आज मुझे यह कार्य करना hi हैं..”

सलीम बोलै “रौशनी मैडम आपको हमारे साथ बाइक पर ट्रिपल सीट से जाना होगा वहां .. यही उपाय हैं अगर आज वहां जाना हैं तोह.”

रौशनी सोच में पद जाती हैं.. पहले तोह उसने कभी ऐसे ट्रिपल सीट नहीं राइड करि बाइक ..दूसरी बाद इन दोनों के साथ वह कैसे जा पाएगी .. क्या तीनो ेल साथ बैठ पाएंगे और सबसे महत्वपुर्ण बात थी की उसे इन दो ो के साथ एक टाइट स्पेस में सवारी करनी होगी और इस बात से वह उनकंफर्टबले फील कर रही थी.

“पता नहीं सलीम जी कैसे हम तीनो जा पेंगे एक hi बाइक पर ..

“रौशनी जी हमने ट्रिपल सीट बाइक चलायी है. .. बस आपको हमारे साथ एक hi बाइक पर बैठना पड़ेगा ..

रौशनी “न न मुझसे नहीं होगा कल जाएंगे न कोई प्रॉब्लम नहीं बस एक hi दिन की बात हैं..”

प्लान को हाथ से निकलते देख सलीम बोलै “रौशनी जी आपको बतानी नहीं थी बात लेकिन कर फिर से असलम जी ने उस बिमारी के वजह से एक और लड़की को अपनी बेगम समझ बैठे ज़.. इनका इलाज करना hi होगा ..”

असलम मन में मुस्कुरा रहा था (साला बहुत कमीना हैं सलीम … दिम्माग तेज़ चलता हैं साला)

रौशनी कहती हैं “असलम जी फिर से आपने ऐसे किया … असलम जी सच में बिमारी हैं या नखरे कर रहे हो ..” रौशनी असलम तरफ देख बोली सीरियस अंदाज़ में.

असलम और सलीम दोनों डर गए .. क्या उनके नाटक की भनक लगी होगी रौशनी को .. अब क्या करे …

फिर रौशनी मुस्कुरा पड़ी और हसी ..

उसे ऐसे कर देख दोनों ने रहत की सांस ली …

सलीम अब असलम को देख “असलम मैंने न कहा था की रौशनी जी नहीं मानेगी ऐसी ट्रिपल सीट की मांग से .. तुझे बोलै था अर्रंगे करने बाइक .. अब तेरा hi नुकसान हैं .. रौशनी जी नहीं आएगी और तेरे इलाज की शुरुवात नहीं होगी.”

असलम “अब में क्या करू सलीम , मेरी किस्मत hi फूटी हैं .. यहाँ रौशनी जी को मेरी इलाज करनी हैं और वहां मेरी इलाज होने से रह जाएगी ..”

सलीम जी आप न दातिए असलम जी को .. बेचारे उन्होंने बहुत तरय किया होगा बाइक अर्रन्हे करने .. नहीं हुआ होगा … और इस बीमारी का इलाज जल्द से जल्द शुरू करना hi होगा .. हम्म ठीक हैं में आउंगी आपके साथ ट्रिपल सीट लेकिन में कभी ट्रिपल सीट राइड नहीं करि हूँ”

सलीम मुस्कुराता हैं “अरे मैडम उसकी चिंता न करो हम एक्सपर्ट हैं ट्रिपल सीट राइड में .. बस आपको हमारे बीच बैठना होगा , अक्सर फर्स्ट टाइम ट्रिपल सीट करने वाले कभी कबर लास्ट में बैठते हैं तोह उनके गिरने के चान्सेस हैं .. हमें पता हैं लास्ट में बैठ कर कैसे अच्छी से राइड हो सकती हैं.. इसलिए हम में से एक पीछे बैठेगा और आप हमारे बीच”

रौशनी (उफ्फ्फ दोनों के बीच बैठना पड़ेगा .. दोनों बुद्धों के अंग से हलकी सी बदबू आती रहती हैं .. उसे झेलना पड़ेगा .. लेकिन असलम जी के इलाज के सामने वह कुछ भी नहीं.)

“चलो ठीक हैं जाते हैं जल्दी से .. फिर वापस आकर इवेंट की तैयारी करनी हैं ..”

असलम और सलीम दोनों खुश की रौशनी बात मान गयी .. सब प्लान के हिसाब से hi चल रहा हैं ..

“रौशनी बस थोड़ा ंगो से दूर शुरू करते हैं .. मुझे यहाँ के लोगों के सामने नहीं करनी ट्रिपल सीट .. प्ल्ज़ समझिये बात.

जरूर मैडम जी .. चलो थोड़ी दूर 500 मत्र तक हम चलते हुए जाएंगे और फिर वहां से बाइक पर .. चलिए ..”

500 मत्र की दुरी पर असलम बाइक पर बैठ जाता हैं .. फिर रौशनी बैठ जाती हैं ..

रौशनी जी आपको और करीब होकर बैठना पड़ेगा असलम जी के तरफ .. थोड़ा और आगे सरकिये प्लीज .. रौशनी अंदर सरकती हैं और अब उसके और असलम के बीच बस 1-2 इंच की hi दुरी हैं . अब पीछे से सलीम बैठ जाता हैं …

सलीम के सामने रौशनी की मुलायम सी गोरी पीठ हैं और उसे देखते रह जाता हैं.. फिर कुछ सेकंड बाद हु भी पीछे से थोड़ा आगे सरक जाता है और अब रौशनी और उसके बीच भी बस1-2 इंच का hi अंतर था ..

रौशनी उनकंफर्टबले फील कर रही थी … पहली बार वह ऐसे दो मर्दों के बीच थी .. वह भी दो काळा बुद्धों के बीच ..

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रौशनी जी ठीक हैं न , आराम से बैठी हो न आप ..”

रौशनी मन में सोचती हुयी (क्या आराम सलीम जी .. आप दोनों के बीच बैठी हूँ और इंच की hi दुरी हैं .. उफ़ ऐसे में कभी नहीं बैठी हूँ … अब इन्हे क्या बताऊ )

“ठीक हैं सलीम जी अब ऐसी hi सवारी करनी होगी , में एडजस्ट कर लुंगी .. असलम जी आप बाइक चलना शुरू कीजिये”

असलम बाइक शुरू करता हैं और तीनो रस्ते लग जाते हैं ..

सलीम के सामने रौशनी की मुलायम पीठ और उसकी कमर और बाहें सं साफ साफ बस 1-2 इंच की hi दुरी पर थी .. उसका मन लार रहा था रौशनी के पीठ को चूमने का .. उसके बाँहों को हाथों में लेकर मसलने का .. उसकी कमर को पकड़ कर उसकी चिमटी लेने की .. लेकिन वह यह सब नहीं कर सकेगा .. बस इस सोच से hi उसका लुंड अब धीरे से झटके मारने लगता हैं उसकी पंत में.

असलम ने जानबूझ कर एक पॉटहोल में से अपनी बाइक ले चला .: इससे अब रौशनी थोड़ी सी सीट में उछाल गयी ..

“अहह असलम जी धीरे चलाइये ने … उफ्फ्फ्फ़”

माफ़ कीजिये लेकिन रास्ता hi कुछ ऐसे हैं क्या करू … आप एक काम करिये आप के हाथों को मेरी कमर पर रखिये , थोड़ा सपोर्ट मिलेगा ..

“नहीं नहीं में ठीक हूँ ऐसे बैठे रहूंगी असलम जी”

पीछे से सलीम रौशनी के कानों में फीस फसाने लगता हैं.. “रौशनी जी वहां नाह तोह उनके कन्धों पर तोह रखिये जैसे आप रखती होंगी आपके पति के साथ बाइक पर जाते हुए ..”

रौशनी सोचती हैं (उफ्फ्फ हाँ लेकिन वह मेरे पति थे इसलिए … अब यह तोह असलम जो हैं .. में कैसे उनके कन्धों पर हाथ राखु)

“मैडम आपको ऐसे hi करना होगा प्लीज बात मानिये .. बस कन्धों पर सपोर्ट के लिए रखिये न”

रौशनी हाँ में सर हिला कर अपने हाथों को असलम जी के कन्धों पर रखती हैं. असलम को रौशनी की मुलायम टच पसंद आ रही हैं .. लेकिन वह तोह चाहता था की रौशनी उसके कमर पर अपने हाथों को बाँध ले ..

इसीलिए वह फिर से एक खड़े में बाइक चलता हैं .. रौशनी फिर से थोड़ी सी बैलेंस आउट होती हैं ..

उसे समझ आता हैं की ऐसे अपने हाथों को असलम जी के कन्धों पर रखने से यह रस्ते पर नहीं चलेगा. वह फिर अपने हाथों को असलम के कमर पर डालती हैं ..

पीछे से सलीम तोह बस रौशनी की मुलायम नाज़ुक गोरी सी पीठ को hi देखे जा रहा था ..उसे तोह वहां चूमना था … वहां जीभ से चेतना था … उफ्फ्फ रौशनी जैसी माल उसके सामने इतने करीब थी .. उसका लुंड निचे से अब और जोर से झटके मारने लगा ..

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अब रास्ता और भी ख़राब हो चूका था .. हर सेकंड पर खड़े थे .. रौशनी उछलती रहती ऑलमोस्ट बैलेंस शार्ट के वजह से उसे गिरने का दर होता हैं ..

अब वह असलम के कमर को कास कर पकड़ती हैं ..

इससे तोह असलम को और भी मज़्ज़े आने लगे .. अब उसका कुंडा ुर भी बुरी तरह से झटके मार रहा था और अब उसका लोढ़ा टाइट भी होने लगा था ..

अब ऐसे हुआ की एक बड़ा सा खड़ा था जो न असलम को दिखा न किसी और को .. उसपर बाइक चलते hi तीनो को बुरा झटका लगा ..

अब ऐसे हुआ की झटके से रौशनी पूरी तरह से असलम के पीठ से चिपक जाती हैं और उसकी चूचियां अब असलम की पीठ से डाब जाती हैं .. रौशनी की आह निकलती हैं सीधे असलम के कानों में .. इससे असलम का लुंड एक जोरदार झटका मरता हैं और वह जा कर रौशनी के हाथों से हलके से टकराता हैं ..

रौशनी को अब असलम के बड़े लोडे का एहसास होता हैं .. उसके मुँह से फिर एक यह निकलती हैं .. अब पीछे से ऐसे हुआ होता हैं की सलीम अब पूरी तरह से चिपका हुआ हैं रौशनी से और उस झटके से सलीम के होठं रौशनी की मुलायम पीठ से टकराते हैं और रौशनी को उसके हटोहों का एहसास होने पीठ पर होते hi .. उस वजह से भी उसकी अहह निकलती हैं .. सलीम का लुंड भी इस हरकत से बुरी तरह से झटके मरता हैं और उसका लुंड भी टाइट होने लगता हैं …

अब कुलमिला कर सन ऐसे था कुछ सेकंड के लिए की सलीम के होठं रौशनी के मुलायम नाज़ुक पीठ से चिपके हुए थे , पीछे से सलीम का लुंड अब रौशनी की कमर के निचे की हिस्से से जा टकराता हैं , आगे से वह असलम की पीठ से चिपकी हुयी अपनी चूचियों को असलम के पीठ से दबायी हुयी हैं और असलम का लुंड निचे झटके मारते हुए रौशनी के हाथों से टकराया था .. – ऐसे मेढक सन से रौशनी किट ओह दो बार आह निकल जाती हैं…

रौशनी के मन में (उफ्फ्फ यह क्या हुआ मममम सलीम के होठं मेरी पीठ पर अउ रेज लगता हैं असलम का लुंड था जो मेरी कलाई से टकराया था .. उफ़ और तोह और मेरी चूचियां भी मम यह क्या हो गया उफ्फ्फ्फ़)

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असलम और सलीम के तोह मज़े hi थे , भीना कुछ किये यह सब हुआ था और सलीम को ख़ुशी थी की वह रौशनी के पीठ को चुम पाया था .. अब सलीम भी कमीना था उसने उस चुम्मे के साथ साथ रौशनी की पीठ को हलके से जीभ से लीक भी किया था .. और उसने उसके सलीवा को रौशनी के पीठ से वाइप करने की भी कोशिश न करि .

“माफ़ कीजिये रौशनी जी वह खड्डा नहीं दिखा , ी ऍम सो सॉरी … बस और 1 कम बस ..

रौशनी को कुछ समझ नहीं आ रहा था .. वह बस सोच रही थी की क्या वह सच में असलम के लुंड से उसकी हाथों से टकराई थी .. उफ्फ्फ्फ़ बहुत hi बड़ा लग रहा था .. मममम नहीं रौशनी कुछ और hi होगा .. ऐसे रौशनी खुद को तसली दे रही थी , लेकिन मन hi मन उसे समझ थी की वह गलत सोच थी उसकी..

सलीम भी माफ़ी मांगने लगा .. .

रौशनी बोली “असलम जी आप खड़े को अच्छे से देखिये अगली बार . ऐसे नहीं चलनी चाहिए आपको बाइक .. सलीम जी आपकी कोई गलती नहीं हैं , असलम जी ने hi धीरे से बाइक चलनी चाहिए थी …”

असलम जी अब चलिए 1 कम hi तोह हैं .. लेकिन आराम से चलाइये ..

अब उस एरिया के मर्द और औरतें देख प् रहे थे की एक कमसिन नुवा महिला दो काळा भद्दे बुद्धों के बीच बैठी थी बाइक पर एकदम से बिना कुछ स्पेस चोरे …

उसे देख सब मर्द वहां के उन्हें उन बुद्धों से जलन होने लगी थी .. और औरतें तोह बस सोचती हुयी “की ऐसी मैडम कैसे इन दो बुद्धों से ऐसे सत्ता कर बैठ सकती हैं ..

रौशनी को भी उन सब की नज़ारे दिखी और उसके मन में एक मिक्सचर ऑफ़ गिल्ट और शर्माहट थी .. लेकिन वह अब कुछ नहीं कर पा रही थी

आख़िरकार उस डॉक्टर के क्लिनिक के पास वह तीनो पहुँच hi गए ..

चलो अब बस असलम के बिमारी का इलाज होना चाहिए बस .. उतनी hi सोच चल रही था रौशनी के दिमाग में. .

वह डॉक्टर का नाम था कमलेश .. रौशनी को उम्मीद थी की यह डॉक्टर मदत कर पाएंगे …

रौशनी बोली “नमस्ते डॉक्टर .. में हूँ रौशनी . में इनके ंगो की मैनेजर हूँ .. अभी ज्वाइन हुयी हूँ कुछ 3 दिन पहले.”

“अच्छी बात हैं रौशनी जी .. अच्छा बताइये क्या आप पेशेंट हो …?

नहीं नहीं में नहीं , हमें असलम जी का इलाज करना हैं … उन्हें बिमारी हैं .. उनकी बीवी की मौत हुयी थी कुछ साल पहले .. कुछ महीनों से वह कभी कबर किसी लेडीज को अपनी बेगम रुकसाना समझते हैं .. कुछ hi देर के लिए होता हैं और फिर उन्हें होश आ जाता हैं..

“अच्छा ऐसे हैं .. हम्म उनकी बिमारी तोह रियल हैं … क्या होता हैं की अक्सर ऐसी बिमारी में आदमी रियलिटी भल कर अतीत के चीज़ें याद करते हैं .. एक तोह कोई इंसिडेंट के बारे में उन्हें सदमे के वजह से वह याद आती हैं .. या कुछ पर्सनल खोने पर .. ऐसे होता हैं विडोस में .. जब दोनों पति पत्नी में बहुत प्यार था जब वह ज़िंदा थे तब जो विडो होते हैं वह आसानी से अपनी पत्नी को भूल नहीं पाते और उन्हें ऐसी दिमागी बिमारी हो जाती हैं ..

“ओह अच्छा .. और एक बात , उनकी बीवी की मौत तोह 3 साल पहले हुयी थी लेकिन उन्हें यह सब बस 3-4 महीनों से हो रहा हैं …”

हाँ हो सकता हैं न , उसे एक टर्म देते हैं रेट्रोग्रेड .. पहले कभी हुआ होगा वह हादसा लेकिन कुछ सैलून बाद अचानक से उन्हें वह चीज़ याद आती हैं और यह बिमारी शुरू हो जाती हैं … मैंने ऐसे केसेस दो बार सोल्वे किये हैं .. सेंसिटिव केसेस होते हैं .. सावधानी से इसे एप्रोच करना होता हैं ..

रौशनी थोड़ी सी डर जाती हैं .. असलम भी वहां नाटक करता हैं

“डॉक्टर साहिब सच में , सडोक्टर साहिब प्लीज आप कुछ करिये .. मुझे ऐसे इस बिमारी के साथ नहीं जीना हैं .. प्लीज ..” और असलम रोने का नाटक करता हैं

रौशनी को बहुत बुरा लग रहा होता हैं असलम को ऐसे रट हुए देख ..”डॉक्टर लेकिन यह सीरियसनेस कैसे पता चलेगा .. कुछ टेस्ट्स होंगे न दिमागी टेस्ट्स ..”

“हाँ हैं न .. लेकिन काफी एक्सपेंसिव हैं – असलम जी उन्हें अफ़्फोर्ड नहीं कर पाएंगे .. आप कर पाओगी तोह बताइये .. करीबन 10-15 हज़ार का खर्चा आएगा ..”

रौशनी के पति का बिज़नेस अभी भी होता तोह ऐसी रकम वह स्पेंड कर पाती लेकिन अब उनके हालत अच्छे नहीं थे .. इसलिए वह भी यह खर्चा नहीं उठा पाएगी ..

“हाँ थोड़ा फण्ड का इशू हैं .. में कुछ इंतज़ाम करती हूँ ..तब तक कुछ सलूशन दीजिये .. असलम जी हमारे ंगो के इम्पोर्टेन्ट सदस्य हैं और उनकी मदत मुझे लगेगी .. क्या करे आप hi बताइये डॉक्टर जी.”

हाँ एक उपाय हैं जो में एक बार करके देख पाया हूँ और सफल भी हुआ था .. लेकिन उसके लिए … पता नहीं आप वह कर पाएंगी या नहीं …”

“डॉक्टर जी मतलब मुझे कुछ करना होगा ? में कैसी मदत कर पाऊँगी?”

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रुकिए पहले आप थोड़ा बहार जाओगी तोह में दो तीन सिंपल टेस्ट्स करूँगा असलम जी पर .. फिर थोड़ा सा आईडिया तोह आएगा उनकी बिमारी कितनी सीरियस हैं .. फिर एक हफ्ते बाद फंड्स होंगे तोह टेस्ट करके साइंटिफिक जवाब मिलेंगे.

“Ok डॉ .. में जाती हूँ , आप टेस्ट्स करिये ..”

फिर सलीम और रौशनी दोनों बहार जाते हैं.

कुछ 15 मं बाद उन्हें अंदर बुलाया जाता हैं . लेकिन बस उसे बुलाते हैं डॉक्टर.

“रौशनी जी इनिशियल एग्जामिनेशन से तोह उनकी बिमारी इतनी सीरियस नहीं लगती हैं.”

“देखिये रौशनी जी , असलम की बिमारी ऐसी हैं की. वह कुछ हद तक बहुत सोल्वे हो सकेगी लेकिन उसके लिए. आपको कुछ दिन असलम जी कह साथ रहना पड़ेगा .. उनकी बेगम रुकसाना जॉब hi करती थी उसे आपको करना होगा … जैसे उनका नाश्ता बनाना , खाना बनाना, उनकी देखभाल करना, घर की देख बाल करना .. उन्हें ऐसे एहसास होते रहना चाहिए की आप रुकसाना हो .. इस एहसास से उन्हें दिमागी दौरा नहीं पड़ेगा जिससे वह पूरा संतुलन खो बैठ ते हैं”

रौशनी अब सोच में पद गयी .. वह एक शादी शुदा महिला होकर अनजान मर्द के घर कैसे रह पाएगी वह भी 3 दिन से ज्यादा देर … अपने पति को वह क्या बोलेगी .. और तोह और अगर वह असलम की बेगम का नाटक करेगी तोह असलम उसे अपनी सच की बीवी समझ कर्त ओह कुछ भी कर सकते हैं .. वह उस दिन तोह उसे चुम्मे भी दिए थे और कितने दोबाचे थे उन्होंने मेरे बदन को), (लेकिन उसे असलम की बिमारी का इलाज करना hi था .. और तोह और सलीम जइब hi होंगे घर पर .. अगर असलम ने ज्यादा ज़बरदस्ती की मुझे अपनी बेगम समझ कर तोह वह मेरा ख्याल रखेंगे ..)

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डॉक्टर जी ठीक हैं में उन टेस्ट्स के लिए पैसों का इंतेज़ाम करुँगी तब तक में करुँगी हो आप कहते हो ..

“अच्छा रौशनी जी आप सच में बहुत नेक दिल हो … आप उनके इलाज के लिए यह सब करने तैयार हो .. आप बहुत अच्छी हो .. लेकिन इससे असलम जी की बिमारी काफी हद तक कण्ट्रोल में रहेगी.

रौशनी सब सुन रही थी .. “यह सब कैसे .. और एक हफ्ते तक उनके साथ कैसे रह सकती हूँ, में तोह मैरिड हूँ, मेरे पति हैं .. ऐसे नहीं कर पाऊँगी .. और रही बात रुकसाना जैसे उन्हें एहसास दिलाने की .. लेकिन रात का .. डॉ उसका कैसे … यह मुमकिन नहीं हैं डॉ.”

“रौशनी जी यही इलाज हैं उन टेस्ट्स करने तक … अब में और क्या कहु आपसे .. आपके hi हाथ में हैं अब .. आपको उनकी मदत करनी हैं तोह .. यह बस आपको तब तक करना हैं जब तक आप उनके टेस्ट्स करने का इंतज़ाम नहीं करते.. उस रिपोर्ट से में बता पाउँगा आगे कैसे मेडिसिन्स से कुछ हो पाएगा या नहीं .. अभी मेडीसीनिएस दिए तोह रिएक्शन बुरा हो सकता हैं”

अगर आप तैयार हो तोह अब उन दोनों को भी एहि बात बतानी होगी .." फिर डॉ ने सब बोल दिया दोनों को , और दोनों बस हाँ में हाँ मिलते रहे ..”

फिर डॉक्टर को अलविदा कर तीनो चले गए …

रौशनी सोच में थी और वहां असलम और सलीम एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे .. उनके प्लान का फर्स्ट स्टेप कम्पलीट हुआ था ..
 
असलम बाइक चलने लगे और पहले जैसे तीनो बाइक पर बैठ गए ..

रौशनी बोली “असलम जी इस बार थोड़ा धीरे चलाइये बाइक ..: खड़े देख कर”

हाँ रौशनी जी बस रास्ता ख़राब हैं आप को मेरे कमर को कास कर पकड़ना होगा ..

सलीम बोलै “मैडम आप बुरा न मनो लेकिन आप को अगर बाइक राइड पहले जैसी नहीं चाहिए तोह मुझे भी थोड़ा आपको पीछे से सपोर्ट देना होगा .. अगर पीछे से सपोर्ट दूंगा तोह अगर खड़े भी आये तोह भी में आपको संभल पाउँगा और खुद को भी ताकि लास्ट टाइम जैसे कोई प्रॉब्लम न हो ..

रौशनी सोच में पद गयी ( आते वक़्त जो भी हुआ था वह उसे फिर से रिपीट नहीं कर ा था .. रस्ते पर खड़े तोह आते hi रहेंगे और अगर खड्डों से बचना हैं तोह उसे सपोर्ट लेना hi पड़ेगा .. लेकिन वह कैसे सलीम कोई से चुने दे सकेगी .. इसलिए वह मन करती हैं.

सलीम ठीक हैं कहता हैं “आपकी मर्ज़ी रौशनी जी .. बबस संभल कर बैठिये ..

राइड शुरू हुयी .. पहले जैसे खड्डो से रौशनी को तकलीफ हो रही थी .. वह महसूस करती रही की वह गिरेगी .. एक ऐसा खड़ा आया जिससे तोह वह गिरने से बच भी गई .. अब उसे लगा की उसे सलीम का सपोर्ट लेना hi चाहिए.

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सलीम जी अच्छे हैं वह मुझे नहीं तकलीफ में डालेंगे इतना सोचते हुए वह बोली “ठीक हैं सलीम जी आप सपोर्ट दे सकते हैं ..

सलीम बोलै “हम आपके कमर को पकड़ कर सपोर्ट दे सकते हैं या आपके कन्धों को .. कमर से सपोर्ट मज़बूत होगा और कन्धों को पकड़ कर थोड़ा काम.. अब आप hi बताइये .. सब आप पर चोरता हूँ.

अब और क्या कर सकती थी रौशनी .. उसे गिरने का डर था इसलिए वह सलीम के सपोर्ट के लिए मान गयी. ..

सलीम तोह बहुत खुश हुआ … रौशनी ने यह भी ok कर ली की उसे असलम के कमर को भी सपोर्ट के लिए कास कर पकड़ कर रखना पड़ेगा …

सलीम जी आप मेरी कमर पकड़ सकते हैं सपोर्ट के लिए …

सलीम तोह बहुत hi खुश हुआ .. वह आज रौशनी की कमर को पकड़ने का मौका मिला था … उसकी गोरी मखमली नाज़ुक कमर को पकड़ने का मौका .. उसके हाथ थोड़े काँप रहे थे .. उसने अपने हाथों को रौशनी के कमर पर टिका दी ..

सलीम के मर्दाने और कठोर हाथों को अपनी नाज़ुक कमर पर महसूस करि ..

सलीम जैसे बुड्ढे के टच से रौशनी को कुछ अजीब hi फेलिंग आ रही थी .. उसके हाथ काफी कठोर थे और उसका नाज़ुक कमर उसके हाथों डाब गया था … उसे पता नहीं क्यों एक अच्छी सी अजीब वाली फीलिंग आयी ..

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उधर सलीम तोह सब का मज़्ज़ा ले रहा था .. सपोर्ट के बहाने वह रौशनी के कमर को पकड़ रहा था .. उसने जान बुझ कर हर बाइक के धक्कों पर उसने रौशनी के कमर को और कास कर दबाया ..

सलीम का लुंड तोह अब झटके मार रहा था उसके पंत में .. रौशनी की नाज़ुक कमर उसके हाथों में थी .. और उसका लुंड झटकों पर झटके मार रहा था ..

आगे असलम का लुंड भी झटके मार रहा था … रौशनी के हाथ उसके कमर को पकड़े थे और उसके हतः कुछ इंच दुरी पर थे उसके उभरते लुंड के …

तीनो अब ऐसे hi चिपके हुए बाइक पर राइड कर रहे थे .. आस पास के सब जाने वाले लोग इन तीनो को देख रहे थे .. एक गोरी खूबसूरत महिला दो काळा बुद्धेन लेकिन मज़बूत मर्दों के बीच बैठी थी …

उफ्फ्फ क्या नज़ारा था ..

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रौशनी को पूरी राइड में अजीब सी लेकिन अच्छी फीलिंग hi लग रही थी .. ाकहीरकर वह सब ंगो के कुछ 500 मत्स्य दूर पहुँच गए. असलम ने बाइक जहाँ से ली थी उसे दे दी और रौशनी ऑफिस चली गयी और असलम और सलीम अपने घर,

अब रौशनी को घर जाकर रोनित से बात करनी होगी , की उसे यहाँ ंगो में 3 दिन से ऊपर रहना पड़ेगा .. वह क्या कहेगा उसके बारे में वह सोचती रही.

दूसरी बात रही वहां रहने की .. अब उनके पास तोह दो hi कमरे थे और उसे अब असलम की बीवी बनने का नाटक भी करना पड़ेगा .. अब हु सोयेगी कहाँ, कैसे सब मैनेज करेगी उसी के बारे मं सोचती रही.

अपना काम ख़तम कर वह घर चली गयी.

घर पर रोनित नहीं थे , वह नोट चोरे थे की वह 2 घंटे बाद आएँगे. रौशनी अपने कपड़ों को बदल कर नहाने जा रही थी तब उसने अपनी नाज़ुक कमर पर लाल निशाँ देखे .. सलीम के कठोर हाथों की निशानी थी .. उन्होंने उसके कामर को कास कर पकड़ लिया था .. रौशनी को उनके स्पर्श के बारे में सोचते हुए एक अजीब सी फीलिंग आ रही थी .. एक मर्द के कठोर हाथ हु भी एक बुड्ढे के ..

रौशनी नहाने चली गयी और गरम पानी के अंदर सुकून से अच्छी तरह से नाहा कर निघ्त्य पेहेन ली.

रोनित अब घर पर आये थे … रौशनी उसके पास जाकर “रोनित एक बात करनी थी तुमसे”

रोनित ने हम्म से जवाब दिया

“रोनित हु ंगो में एक बहुत इम्पोर्टेन्ट इवेंट हैं तोह मुझे कुछ 3 दिन के ऊपर वहां hi रहना पड़ेगा .. 3 दिन से लेकर एक हफ्ता भी लग सकता हैं… में क्या करू ?

रोनित अब रौशनी को देख बोलै “डार्लिंग चलेगा न .. आप वहां रहिये , आपका काम बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं .. में यहाँ संभल लूंगा.

“लेकिन रोनित तुमने पूछा नहीं में कहाँ रहूंगी वहां और अकेली रहूंगी या किसी के साथ .. तुम्हे कुछ परवाह नहीं.”

“अरे तुमने बोलै न काम के सिलसिले हैं , और वहां रहेगी कोई क्वार्टर रहने के लिए , काफी अच्छा ंगो हैं न.”

रौशनी मन में सोची “में वहां दो बुद्धों के साथ रहने वाली हूँ जिस में से एक की बेगम का नाटक करना हैं मुझे , न जाने वह उस बिम्मरि के वजह से कुछ कर बैठा तोह .. उफ्फ्फ अब यह सब रोनित को कैसे बताऊ .. उसे तोह कोई परवाह नहीं हैं मेरी.

रौशनी फिर चुप बैठी और अपना खाना खा कर रूम चली गयी और असलम और सलीम के साथ रहने के लिए अपनी बैग पैक कर ली.

वहां रोनित खुश था की रौशनी नहीं रहेगी फिर न उसके तने सुनने पड़ेंगे , और वह रात को अपने दोस्तों के साथ be-jhijhak मस्ती करने जा पाएगा …

अब सुबह हुयी … आज से तकरीबन एक हफ्ते तक रौशनी को सलीम और असलम के साथ रहना था. रोनित वहां खुश था की एक हाफत ेके लिए वह अकेले रह कर मज़्ज़े करेगा.. उसे न उसकी बीवी के तने सुनने पड़ेंगे न कुछ करना होगा ..

“रोनित में जा रही हूँ … 3 दिन तक तोह वही रहूंगी और अगर लगे तोह और कुछ दिनों तक. अपना ख्याल रखना , कोई जॉब धुंध लो तब तक और चाहिए तोह घर पर एक कुकिंग माइड का इंतज़ाम में कर लुंगी..”

“ठीक हैं रौशनी , अपना ख्याल रखना , में जैसे बोल रही हूँ वैसे hi करूँगा .. बस कुछ दिक्कत हुयी तोह मुझे कॉल करना ..”

रौशनी फिर वहां से चलो जाती हैं … अब एक हफ्ते ले लिए उसकी ज़िन्दगी अलग hi मोड़ लेने वाली थी ..उसे तोह नहीं पता था की दो ठरकी बुद्धों के साथ वह रहने जाने वाली हैं .. एक शादी शुदा गडाई जिस्म वाली औरत दो ठरकी मुस्टंडे बुद्धों के साथ …

रमेश का तोह कुछ अत पता hi नहीं था .. वह उसे थोड़ा मिस कर रही थी .. उसे चिंता थी की कुछ हुआ तोह नहीं होगा रमेश जी को

रौशनी अब ंगो पहुँच गयी … उसने सलीम को कॉल किया था उसके सामान लेने में मदत के लिए .. सलीम तोह तैयार hi खड़ा था ..

वह रौशनी को देख खुश था , आज से एक हफ्ते तक वास् उसके साथ रहने वाली थी .. सलीम तोह उसको अपनी बना कर hi रहने वाला था .. वही उसके दिमाग में चल रहा था ..

रौशनी इस से बेखबर सलीम को देख मुस्कुरायी.

“गुड मॉर्निंग रौशनी जी , रोज़ की तरह आज भी आप बहुत फ्रेश लग रही हो …

“गुड मॉर्निंग, शुक्रिया सलीम जी … प्लीज सामान ले जाने में मेरी मदद कीजिये .. रौशनी ने दो बैग लाये थे ..

सलीम पास आकर दोनों बैग उठा लिए

“सलीम जी बस एक बैग लीजिये , में दूसरी बैग लुंगी”

“अरे नहीं रौशनी जी आप मेहमान हैं हमारे घर की .. में लेता हूँ न बैग्स कोई प्रॉब्लम नहीं.”

रौशनी देख रही थी की दो बड़े बैग सलीम ने काफी आराम से उठाये थे … वह थोड़ी इम्प्रेस थी.. सलीम 60 के थे लेकिन अभी भी काफी स्ट्रांग थे .. आज कल के मर्द तोह 40 मकई उम्र में भी इतने आसानी से यह बैग नहीं उठा पाते.. कितने अच्छे आदमी हैं सलीम जी ..

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अब ऐसे रौशनी के दिनों का बेसिक सचेडूले होने वाला था ..

सुबह 7 बजे उठ कर असलम और सलीम के लिए नाश्ता बनाना और लंच भी क्यूंकि . खाना ऐसा जो असलम की बीवी रुकसाना बनती थी , रुकसाना जो डिशेस बनती थी उसकी लिस्ट उसे असलम ने दे दी.

फिर उनका नाश्ता होने के बाद वह खुद नाश्ता करेगी और फिर ऑफिस जाएगी. दुपहर 2-4 उनकी मीटिंग थी उस इवेंट के बारे में .. वह सब डिस्कशन ऑफिस में hi होने वाला था.

फिर शाम को सब काम ख़तम कर वह वापस सलीम और असलम के घर जाएगी और फिर रात का नाश्ता और सब उसके बाद सोना. उन तीनो ने डीडे किया था की रौशनी के कमरे में रहेगी और सलीम और असलम दोनों साथ में दूसरे कमरे में.

यह था उसका बेसिक सचेडूले.

अब तीनो घर पर थे .. असलम bola”Roshni जी शुक्रिया आप मेरे लिए यह करने के लिए तैयार हो .. आप बहुत अच्छी हैं.”

“असलम जी आपकी मदत करने के लिए में जो चाहे वही करुँगी .. बस आपकी इस बिमारी का पूरा इलाज करना हैं मुझे”

“हाँ शुर्किये आप इतनी नेक दिल की हो .. “

रौशनी मुस्कुरायी “ठीक हैं असलम जी अब से आपकी बिमारी का इलाज मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट हैं, अभी में काम पर जाती हूँ फिर शाम को मिलेंगे .. “

असलम मुस्कुराया (रौशनी जी आइये शाम को .. में इंतेज़्ज़र में रहूँगा )

अब रौशनी काम करने ऑफिस चली गयी .. आज पूरा दिन उसने बहुत काम किया था .. वह खुश थी आज के दिन से .. अब शाम को वह फिरसे असलम और सलीम के घर चली गयी.

जब तक वह उनके घर रहने वाली थी उसे रुकसाना जैसे hi बर्ताव करना था .. उसे असलम भी रुकसाना या रुकसाना बेगम से hi बुलाने वाला था .. सलीम को भी उसे रुकसाना hi बुलाना था.

अब असलम के हिसाब से रुकसाना हमेशा घर पर साड़ी hi पहनती थी .. हु भी स्लीवलेस और डीप बैक कट्स वाली .. इसे सुन रौशनी को थोड़ा अजीब लगा.. ऐसे कपडे हु भी घर पर रुकसाना पहनती थी ?? .. लेकिन अब वह असलम की बात से इंकार भी नहीं कर पाएगी.

रौशनी ने अपने अच्छे ख़ास सरिस hi लाये थे … वह अपने कमरे में जाकर एक साड़ी चूसे करि .. साड़ी स्लीवलेस थी और पीछे से काफी डीप बैक कट .. साड़ी उसने अपने नाभि से 2 इन निचे बंधी थी .. इससे उसकी कमर और उसके कमर के दो छोटे फोल्ड्स दिख सकते थे साफ़ साफ़ … फिर जैसे असलम ने कहा था उसने रुकसाना जैसे काजल डाली और हल्का सा मेक उप .. लिपस्टिक था क्रीम कलर का ..

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हाथों में उसे रुकसाना के प्यूरीन बँगलेस पहने थे… असलम ने उसके प्यूरीन बँगलेस अपने पास रखे थे वही सब रौशनी को दे दिए.

रौशनी पूरी तैयार हुयी .. एक बात थी , दोनों ने घर की सफाई नहीं करि थी .. सब वैसे के वैसा hi था .. कमरे में असलम की कच्चियाँ बीएड पर, उसके कपडे भी बिखरे हुए, कप्बोर्ड पूरा बिखरा हुआ .. सब जगह गन्दगी.. उसे पहले तोह सब सफाई करनी होगी , वह ऐसे नहीं रह सकती उनके घर पर , उसे घर साफ़ सूत्र hi पसंद था … चीज़ें अपनी अपनी जगहों पर अच्छी तरह से राखी हुयी.

वह फिर काम में लग गयी .. अब रौशनी पहले जब उसके पति का बिज़नेस था तब नौकरानियां रखती थी घर के कामों के लिए. जब से उसके पति का बिज़नेस दुब गया था यह खुद hi साफ़ सफाई करती थी इसलिए उसे अब यह सब थोड़ा नार्मल लग रहा था.

वह साफ़ सफाई कर रही थी की उसे आवाज़ सुनाई दी “रुकसाना मेरी बेगम , कहाँ हो तुम .. देखो में घर आ गया हूँ, मेरे लिए चाय बनाना.”

रौशनी सोची की अब उसे रुकसाना hi बनना था .. सब असलम की बिमारी के इलाज के खातिर.

“हाँ असलम मियां में आ रही हूँ जरा रुकिए , घर के काम कर रही हूँ .. रूम की सफाई .”

“रुकसाना बेगम आजा चाय बना पहले , देखो तुम्हारा पति थक कर आया हुआ हैं .. चलो पहले आकर चाय बनाओ.”

रौशनी ने सब काम चोर बहार चली गयी .. वहां असलम सोफे पर पेअर ऊपर किये बैठा था .. उसके जुटे पास में थे और सॉक्स भी बहार पड़े हुए ..

“असलम मियां आप भी न , ऐसे जूतों को और सॉक्स को कोई रखता हैं .. सॉक्स को धोने केलिए डालो और जुटें वहां उस रैक में”

“देख रुकसाना , यह सब में नहीं करूँगा , तुझे करना हैं तोह कर नहीं तोह यही पर रख .. अब तू बस मेरे लिए चाय बनाना”

“रौशनी अपने पति रोनित को बहुत दांत लेती अगर वह ऐसे बोलते तोह , लेकिन वह रुकसाना बानी हैं इसीलिए अब वह असलम से वैसे बातें नहीं कर सकती. “हाँ ठीक हैं असलम मियां , लेकिन मुझे थोड़ा ये काम करने दो ..”

असलम कुछ नहीं बोलता बस हम्म करता हैं.

रौशनी अब असलम के बगल में उसके सॉक्स और जूतों को इखट्टा करते हुए झुकती हैं .. तब असलम को रौशनी की चूतड़ों का शेप दिखाई देता हैं .. उसका तोह मन अकर्ता हैं उसे दबोचने का .. मसलने का .. उसके लोडे में भी हलचल होने लगती हैं … फिर वह कुछ सोचते हुए , अपने हाथों से रौशनी की चूतड़ों को हलके से दबाता हैं ..”अह्ह्ह रुकसाना मेरी बेगम उफ्फ्फ तुम्हारे यह चूतड़ मममम क्या शेप हैं .. मार hi डालोगी “.. और वह फिर से उसे मसलता हैं

रौशनी इससे से चौंक उठ टी हैं .. फिर ग़ुस्से से असलम को देखती हैं ..”असलम जी आप से कहाँ था न ऐसी हरकतें न करे … आप अपने आप को कण्ट्रोल करिये नहीं तोह में निकलती हूँ ..

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“माफ़ कीजिये रौशनी जी बस में ऐसे मेरी रुकसाना बेगम से मस्ती मज़ाक करते रहता था .. माफकीजिये ..में उन्हें बहुत याद कर रहा हूँ … में खुद को बहुत कण्ट्रोल कर रहा हूँ रौशनी जी प्लीज बात मानिये .. गलती हुयी बस अपने इमोशंस को कण्ट्रोल नहीं कर पाया …

“असलम जी यह गलत हैं , में बस रुकसाना जैसे घर के काम करुँगी आपकी सेवा करुँगी लेकिन यह फिजिकल होना बड़ी गलत बात हैं .. आप की बीमारी हैं में जानती हूँ लेकिन आप ऐसे नहीं कर सकते ..”

असलम कुछ सोचता हैं “रौशनी जी ठीक हैं अब क्या करे .. चोर दीजिये , में अपनी बिमारी संभल लूंगा .. आपको मेरी दोस्ती नहीं रखनी उस वजह से तोह मत रखिये .. आप से पहले भी ऐसे hi गुज़ारे हैं दिन मैंने .. आगे भी करता रहूँगा .. आपकी मदत के लिए शुक्रिया ..”

और असलम वहां से उठ कर अपने कमरे में चले जाता हैं …

वहां रौशनी को समझ नहीं आता हैं की वह क्या करे .. असलम जी तोह नाराज़ हुए हैं .. उफ्फ्फ उनकी बिमारी और ख़राब होते जाएगी डॉक्टर ने बोलै था .. उनकी मदत नहीं करि तोह सब रियलिटी भूल जाएंगे और बड़े प्रोब्लेम्स होंगे उनके दिमाग में.. उफ्फ्फ क्या करे .. यह फिजिकल रहना उनके साथ मुश्किल होगी .. लेकिन ऐसे उन्हें इस हालत में नहीं रख सकती हूँ.

रौशनी सोफे पर बैठ गयी सोचती हुयी की क्या करे.

वहां असलम ने यह सब तोह किया था .. लेकिन 10 मं रौशनी से कुछ रिस्पांस न आते देख वह भी सोचने लगा की क्या वह चली गयी होगी .. उसने क्या सब प्लान पर खुद hi पानी फेर दिया हैं .. वह अब बहार जाकर देखने hi वाला था की रौशनी हैं या नहीं तब उसे रौशनी की मीठी आवाज़ सुनाई दी.

“असलम जी .. असलम जी प्लीज बहार आइये , प्लीज आप नाराज़ न होना .. में आपकी बिमारी की इलाज 100% करना चाहती हूँ .. प्लीज बहार आइये कुछ सलूशन निकलते हैं.”

असलम 2-3 मं कुछ न बोलै .. रौशनी उसे और 2 बार आवज़ देती हैं .. फिर असलम चेहरे पर नाराज़गी का एक्सप्रेशन लाकर बहार आता हैं,

“हाँ बताइये रौशनी जी … “

प्लीज बैठए सोफे पर असलम जी ..

असलम कुछ सेकंड बाद सोफे पर बैठ जाता हैं.

“हां तोह असलम जी में तोह आपका इलाज करके hi रहूंगी .. बस थोड़े से रूल्स बनाते हैं .. “

असलम हाँ में सर हिलता हैं.

“हाँ तोह बाकी सब ठीक हैं बस इस फिजिकल के चीज़ों से hi दिक्कत हैं मुझे .. में शादी शुदा हूँ और किसी गैर मर्द के ऐसे चुने से अजीब लगता हैं .. गलत लगता हैं मुझे .. इसिलए में ऐसी रिएक्शन दी.”

“रौशनी जी में और रुकसाना अक्सर ऐसी मस्ती मज़्ज़ाक़ करते हैं .. अगर आप रुकसाना बनोगी तोह अगर ऐसी मस्ती मज़्ज़ाक़ नहीं करूँगा तोह आप रुकसाना होने का फायदा काम होगा न.”

“असलम जी में सब समझती हूँ आपके भावनाओं को लेकिन यह गलत हैं ..”

“रौशनी जी में वडा करता हूँ की बस मस्ती माज़क करूँगा , इस चीज़ को आगे नहीं बढ़ने दूंगा … प्लीज थोड़ी मस्ती मज़्ज़ाक़ करने दीजिये न… इससे मुझे सच में लगेगा मेरी बेगम रुकसाना मेरे पास hi हैं. फिर इस बिमारी का भी इलाज होगा .. फिर एक हफ्ते बाद क्या पता मुझे रुकसाना की ऐसी याद नहीं आती रहेगी अचानक से”

“असलम जी … हम्म अब कैसे करे … अच्छा ठीक हैं आप मस्ती माज़क कीजिये .. लेकिन प्लीज कण्ट्रोल रखिये आप वैसे अच्छे इंसान हैं मुझे पता हैं .. आप कण्ट्रोल रखोगे ी ट्रस्ट .. बस मुझे भी थोड़ा टाइम दो एकदम से ऐसे न करिये ..”

“ठीक हैं रौशनी जी ..” - और मन में सोचते हुए (एकदम से न करिये .. मतलब बाद में पूरा करू क्या .. उफ़ रौशनी तू hi मेरी बेगम हैं .. तेरे साथ तोह पूरी मस्ती करने का मन हैं उफ्फ्फ्फ़)

“अच्छा फिर से शुरू करते हैं .. असलम मियां में सॉक्स और शूज रख चाय बनती हूँ..”

“अच्छा ठीक हैं लेकिन चाय जल्दी से बनाओ रुकसाना मेरी बेगम..”

अब रौशनी किचन की तरफ जाती हैं चाय बनाना के लिए .. तब तक सलीम भी आ जाता हैं ..

“रुकसाना भाभी आप मेरे लिए भी चाय बनाओ ..” सलीम कहता हैं ..

रौशनी मुस्कुराती हैं , वह खुश होती हैं की सलीम भी आये हैं .. वह रखेंगे असलम को कण्ट्रोल में.

हाँ सलीम जी जरूर में आपके लिए भी चाय बनती हूँ ..

रौशनी दोनों के लिए चाय बनाकर बहार आती हैं … सलीम तोह बड़ा खुश था की असलम के बिमारी के नाटक से रौशनी उनके साथ रहने वाली हैं .. अब हु रोज़ उसके बदन को निहार पाएगा , ऐसी गदरायी माल जैसे महिला के करीब रहेगा.

अब रौशनी चाय टेबल पर रख hi रही थी सोफे के सामने की झुकते हुए उसका पल्लू सरक गया … अब असलम को और सलीम , दोनों उसकी गोरी चूचियों के दरार को देख रहे थे .. उनका लुंड तोह इस नज़ारे से एक दम से टाइट होने लगा …

रौशनी खुद को संभालती हुयी झट से पल्लू को ठीक करि .. और शरमाते हुए वहां से चली जाने लगी.

“रुकसाना बेगम कहाँ चली जा रही हो .. आओ न हमारे साथ चाय पीने .. मेरी बेगम आजा न … साथ में चाय पिएंगे ….

रौशनी उस पल्लू के गिरने से अब शर्मा रही थी .. लेकिन उसे तोह रुकसाना बना था .. फिर वह मुद कर वापस उनके तरफ चली आयी.

“असलम मियां मैंने तोह बस 2 कप hi बनाए थे चाय के .. और नहीं हैं चाय …”

“अरे रुकसाना टूट ओह भूल गयी .. हम एक hi कप से चाय पिटे थे याद हैं तुझे .. चलो आओ एक कप में hi पिएंगे. “

रौशनी शर्मा रही थी .. उफ्फ्फ एक hi कप से कैसे .. उसे याद था की शादी हुयी थी तब रोनित भी ऐसे कुछ छठा था लेकिन रौशनी ने उसे मन किया था .. अब वह असलम को कैसे मन करे .. अगर रुकसाना और स्लैम एक hi कप से चाय पिटे थे , और वह रुकसाना बन हुयी थी तोह उसे भी वही करना होगा ..

“असलम मियां आप पीओ चाय में और एक चाय बनाउंगी मेरे लिए “

“नहीं रुकसाना बेगम तुम्हे एक साथ hi चाय पीनी हैं इसी कप से .. नहीं तोह में भी चाय नहीं पिऊंगा …”

सलीम यह सब देख मुस्कुरा रहा था .. रौशनी क्या करेगी उसी के बारे में सोचता रहा.

“असलम जी आप बहुत ज़िद्दी हैं … मैंने बनाउंगी न खुद के लिए चाय 2 मं में”

“नहीं तुम्हे मेरे साथ पीनी हैं .. चलो इतनी सीट ओह बात हैं .. तुम इतना नहीं करोगी “

अब रौशनी को कुछ और रास्ता नहीं दिख रहा था .. उसे अगर रुकसाना बनना हैं तोह उसे यह सब करना होगा जिसे असलम और उसकी पूर्व पत्नी रुकसाना करते थे वैसे hi

ठीक हैं असलम जी .. पहले आप पीजिये , फिर बाकी का में पिऊँगी..”

“नहीं रुकसाना मेरी बेगम मेरी जान .. एक सिप में लूंगा फिर एक सिप तुम लोगी .. बस ऐसे HI करेंगे .. चलिए ..”

अब असलम और रौशनी सोफे पर थोड़े करीब बैठे हुए एक कप से चाय पिने जा रहे थे .. वहां सलीम बड़ी उत्सुकता से देख रहा था ..

असलम ने एक सिप ली और फिर रौशनी ने ..

असलम दूसरा सिप लेते hi “अह्ह्ह और मीठी हुयी हैं चाय … रुकसाना बेगम आपके पिने से और मीठी हैं मज़्ज़ा आगया ….”

रौशनी अब मुस्कुरा रही थी .. और उसने और एक सिप ली .. फिर तीसरी सिप लेते वक़्त फिर से असलम बोले “मममम शहद जैसे मीठी हैं चाय .. बहुत अच्छी हैं रुकसाना बेगम आपका जवाब नहीं .. इससे भेटेर चाय में नहीं पि हैं तुम्हारे हाथों…

“शुक्रिया असलम मियां .. रौशनी खुश थी की असलम को अच्छी लगी चाय ..

सलीम बोलै “असलम तुम्हारा और तुम्हारी बेगम रुकसाना में इतना प्यार हैं … तुम्हारी जोड़ी बहुत मस्त लग रही हैं .. एकदम मस्त. मिया बीवी की जोड़ी मस्त हैं..

रौशनी इस बात को सुन शर्मा गयी ..

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सलीम दोनों को मिया बीवी कह रहा था ..

अरे भाभी जान आप तोह शर्माने लगी .. बस चाय hi तोह पिलाई हैं अपने .. इसी में इतना शर्माना ..”

रौशनी समझ सकीय की सलीम क्या बोलना चाहता था…

ऐसे एक के बाद एक सिप से दोनों ने चाय ख़तम करि. रुकसाना बेगम वैसे आज खाने में क्या बनाओगी … बेशक बहुत hi टेस्टी खाना होग़ाज रात ..

सलीम आज रुकसाना बेगम के हाथ का खाना खाओगे तुम … बहुत लाजवाब बनती हैं मेरी बेगम.

असलम कहता हैं “चलो में अब थोड़ा आराम करने जार अहा हूँ .. रुकसाना बेगम खाना बनाकर मुझे बताओ फिर हम तीनो डिनर करेंगे.. रौशनी सर हाँ में हिलती हैं ..

असलम अब कमरे में जाता हैं .. बहार बस सलीम और रौशनी बैठे हुए हैं

रौशनी जी आप को असलम ने तंग नहीं किया हैं न …

रौशनी अभी कुछ पल सलीम आने से पहले हुयी पलों के बारे में सोचती हैं .. लेकिन सलीम को नहीं बताना hi ठीक समझती हैं.

“नहीं असलम जी बहुत अच्छे हैं .. कोई प्रॉब्लम नहीं ..वैसे सलीम जी आप कहाँ गए थे ..”

“सलीम कुछ नहीं बास्ते क दोस्त से मिलने गया था .. रौशनी जी आप इस साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही हो .. आपके साड़ी का कलेक्शन का जवाब नहीं .. एक से बढ़कर एक .”

शुक्रिया सलीम जी ..

रौशनी जी एक बात केहनी हैं ाआपसे.

हाँ बताइये न सलीम जी

आप इस ब्लाउज में क़यामत दिख रही हो , सच कहता हूँ झूट नहीं बोलंगा .. आप ने टेलर से ऐसी बनवायी हैं साड़ी?

“हाँ सलीम जी … कस्टम मेड हैं ..

“उफ़ रौशनी जी क्या सही का ब्लाउज बनवाया हैं आपने .. आपके बदन पर बहुत अच्छे से फिट होती हैं ..”

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रौशनी ऐसे बातों से शर्मा रही थी ..

सलीम बोले “आप की फिगर भी मस्त हैं .. कितना मेन्टेन करती होगी आप .. काश मेरी भी आप जैसे hi बीवी होती .. आपके पति तोह बहुत लकी हैं”

सलीम जी कुछ भी .. ज्यादा टैरिफ न करिये मेरी .. आप की बेगम जरूर मुहसे अच्छी हुयी होगी”

अरे कुछ नहीं आपके सामने .. आप तोह इतनी मस्त , गोरी सी और खूबसूरत हो .. उसका तोह आपके सामने कोई कम्पलीशन नहीं .. आप बड़ी मस्त हो रौशनी जी आपसे दोस्ती कर बहुत खुश हूँ”

रौशनी को सलीम की तारीफें और बातें पसंद आ रही थी ..

माँ कसम आप जैसी बीवी होती न तोह आपकी सेवा hi करता .. दिन रात …”

रौशनी मुस्कुरायी .. ऐसी बातें उसने पहली बार सुनी थी अपने बारे में वह भी एक बुड्ढे से .. अच्छा लगा उसे ..

रौशनी जी क्या हम एक वाक के लिए जा सकते हैं अभी .. वापस आकर खाना बनाओ …

रौशनी कहती हैं .. अच्छा सलीम जी ठीक हैं , आप भी यहाँ की अस पास क्या हैं दिखाइए … में थोड़ा तैयार होती हूँ ..”

सलीम रौशनी की कमर देखता रहा .. उसके हिलते चूतड़ों से उसका लोढ़ा टाइट होने लगा .. वह ऊपर से उसके लोडे को खुजलाने लगा “है क्या माल हैं यार … ऐसे कमर मटकती हैं .. पीछे से लूंगा तोह उफ्फ्फ कैसे हिलेंगे … मेरी माल रौशनी.

रौशनी थोड़ा फ्रेश होती हैं और फिर दोनों बहार वाक जाते हैं. बारिश हुयी थी कुछ टाइम पहले इसलिए रास्ते पर थोड़ी गन्दगी थी .. बस एक छोटा सा रास्ता था जहाँ थोड़ा ड्राई था और वह दोनों चल पाते .. बाकी आस पास पानी था और थोड़ी सी गन्दगी.

अब दोनों इस वजह से काफी करीबी से चलने लगे … सलीम थोड़ा पीछे था और रौशनी की मुलायम पीठ के नज़ारे से लुंड टाइट होते महसूस करने लगा ..

हु अब चल रहे थे की एक बाइक थोड़ी तेज़ी से आ रहा था और वह साइड में एक पड़ले पर से जाने वाला था .. जैसे hi वह बाइक उस पर से चलने लगा सलीम एक दम से आगे बढ़ कर रौशनी को जकड लिया .. और निचे उस बाइक से उछाले हुए मिटटी से सलीम की पंत ख़राब हुयी .

“ोी माँ सलीम जी क्या कर रहे हो … “ रौशनी अब सलीम के बाँहों में थी .. सलीम के हाथ उसकी कमर को पकडे था और उसका चेरा रौशनी के काफी करीब था .. वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था और उसका लोढ़ा तगत हो रहा था ..

“उफ़ सलीम जी छोड़िये न .. क्या कर रहे हो आप “

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“माफ़ कीजिये रौशनी जी उस आदमी ने मिटटी उछली बाइक से तोह आप पर गिरने से रोक रहा था ..”रौशनी फिर निचे देखि की सलीम का पंत मिटटी से ख़राब हुआ था .. और उसकी साड़ी पर एक भी मिटटी के निशाँ नहीं थे ..

रौशनी अभी भी उनके बाँहों में थी लेकिन सलीम के पंत पर मिटत देख वह फिर सलीम को देखि … “सलीम जी आप ने मेरे लिए … सलीम जी आप बहुत अच्छे हो..”

सलीम अभी भी रौशनी को जकड़े हुए hi था ..

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“रौशनी जी पहले से hi आप से बोलै हूँ की आपके लिए जान हाज़िर हैं”

“शुक्रिया सलीम जी .. लेकिन आप मुझे अब अपने बाँहों से चोर सकते हो ः”

सलीम मुस्कुराया “हाँ रौशनी जी माफ़ कीजिये …”

रौशनी को सलीम की बाहें काफी मज़बूत लगी .. उसे उनके चुने से एक अजीब सी फीलिंग हुयी ..

रौशनी जी थोड़ी ज्यादा hi मिटटी हैं आस पास .. हमें फिर से जाना होगा ..

“नहीं सलीम जी और चलिए न.. इतनी मस्त खुशबु हैं बारिश के बाद की ..”

रौशनी जी आगे रास्ता थोड़ा और ख़राब हो सकता हैं .. ऐसे हम नहीं चल पाएंगे थोड़ा और पास रह कर hi चल पाएंगे..”

रौशनी “सलीम जी ठीक हैं कोई प्रॉब्लम नहीं आप पर भरोसा हैं ..”

सलीम ने फिर बिना पूछे रौशनी के कमर पर हाथ दाल उसे पास खिंच लिया .. सलीम के मज़बूत हाथों को अपनी नाज़ुक कमर पर पाकर रौशनी शर्मायी … सलीम बोले “रौशनी जी ऐसे hi चलना पड़ेगा …”

ठीक यहीं सलीम जी …

रौशनी को सलीम का अपने कमर पर हाथ रखना एक ेजीब सी लेकिन अच्छी फीलिंग हुयी ..

फिर दूसरी तरफ से कोई लोग जा रहे थे .. वह दोनों को देख बोले .. क्या खूब जोड़ी हैं .. मियां बीवी की .. कैसे सटक कर चल रहे हैं दोनों”

रौशनी शर्माने लगी .. उसे पता नहीं क्यों ऐसे सुन कर बुरा नहीं लगा …

सलीम और कास कर रौशनी की कमर को पकड़ रखे ..

उफ्फ्फ आउच … सलीम जी थोड़ा ज्यादा hi दबाव लग रहा हैं उफ्फ्फ थोड़ा लूसे करिये गीरप.”

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रौशनी जी आप से कहा था रास्ता ख़राब हैं आपको hi चलना था .. अब ऐसे hi चल पाएंगे नहीं तोह वापस चलिए”

रौशनी बहुत दिनों से रोनित से फिजिकल नहीं हुयी थी .. उसे सलीम के ऐसे अपने कमर को पकडे हुए उसके नज़दीक होना कही अच्छा लग रहा था ..

सलीम तोह मस्ती में था .. उसका लोढ़ा अब पूरा टाइट हुआ था .. वह रौशनी की नाज़ुक पतली गोरी कमर को हलके से मसल रहा था .. रौशनी भी उससे दूर होने की कोई कोषसिंह नहीं कर रही थी .. ऐसे hi दोनों कुछ मं चलते रहे ..

अब अँधेरा भी होने लगा था .. “सलीम जी वापस जाते हैं .. आज खाना बना न हैं आप दोनों के लिए .. चलिए न “

सलीम रौशनी को पकड़ते हुए उसकी तरफ देखता हैं .. “जरूर रौशनी जी जैसे आप कहे .. चलिए फिर से घर जाते हैं .. आपको वाक अच्छी लगी न ..”

हाँ सलीम जी अच्छी वाक थी ..

अब सलीम ऐसे hi उसके कमर को पकड़े हुए वापस घर जाने लगे .. रौशनी भी उनके साथ चलती रही .. एक कला बुद्धा और एक गोरी सी गदरायी महिला एक दम करीब सटक कर चल रहे थे ..

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दोनों घर पहुँच गए और फिर रौशनी रात का डिनर बनाना किचन चली गयी.

सलीम अपने लोडे को मसलते हुए अपने कमरे में चला गया .. (है आज तोह रोशनीजी की कमर कास कर पकड़ने का मौका मिला था .. और मसलना हैं इस गदरायी आइटम को .. उफ्फ्फ्फ़) सलीम अपने लोडे को खुजलाते हुए कमरे में चला गया.
 
अब रौशनी खाना बनाने गयी किचन में .. आज उसे खाने के साथ स्वीट डिश में खीर बनाना था.. वह उसकी तैयारी में लग गयी .. तभी उसे असलम कोई आवाज़ सुनाई दी.

“रुकसाना बेगम खाना बन गया हैं क्या , पेट में चूहे दौड़ रहे हैं”

“असलम मियां हाँ बन रहा हैं बस खीर बनानी रह गयी हैं ..”

“आई है मस्त सुगंध आ रही हैं खाने से .. चलो में आता हूँ.”

असलम फिर रसोई घर में आ गए .. वह सीधे जाकर रौशनी को पीछे से लपेट लिए ..

“उफ़ मेरी बेगम मस्त स्वादिष्ट पकवान बन रहे हैं आज …” फिर रौशनी की गोरी सी मुलायम पीठ देख बोले “मन कर रहा हैं उन्हें चख लूँ … इतनी मस्त दिख रही हैं उफ्फ्फ्फ़

रौशनी “असलम मियां आप फिर शुरू हो गए उफ्फ्फ्फ़ …”

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रुकसाना बेगम प्लीज आज मन न करो .. बहुत दिनों बाद आयी हो , आज तुम्हारी बात नहीं सुनूंगा ..

रौशनी अब कर भी क्या सकती थी , ऐसे hi खड़े असलम के बाँहों में वह खीर में अब शकर मिज़ कर उसे हिला रही थी ..

असलम मियां आप भी न उफ्फ्फ्फ़ … थोड़ा तोह लूसे छोड़िये .. खीर जल्द से बनानी हैं की नहीं , आपको भूख लगी हैं न”

असलम सोचते हुए (उफ्फ्फ भूक तोह लगी हैं लेकिन तेरे इस मलाईदार बदन के लिए मेरी जान , उफ्फ्फ्फ़ क्या नाज़ुक बदन हैं … पूरी तरह से मसलने का मन हो रहा हैं उफ्फ्फ)

“रुकसाना बेगम आप बनाओ न खीर तुमसे पहले कभी मेरी बाँहों में होने के वजह से खीर बानी नहीं ऐसे हुआ hi नहीं हैं … मुझे भी देखने दो मेरी बेगम

मस्त स्वादिष्ट खाना बनती कैसे हैं ..”

फिर असलम रौशनी के पीछे से उसके बालों को एक साइड में कर उसकी गर्दन के ऊपर अपने चीन को रख खीर को देखने लगे ..

रौशनी को असलम की टच अपने गर्दन की साइड पर होने से एक अजीब सी फीलिंग हुयी … वह असलम के गरम साँसों को महसूस कर रही थी .. उसके मुँह से थोड़ी बदबू भी आ रही थी .. लेकिन वह बस खीर बनाने में लगी रही. जल्द से खीर बनेगी तोह वह उन्हें खाने को परोसेगी ..

रुकसाना बेगम आप ने हमें इसकी टास्ते नहीं करवाई.. असलम अब रौशनी को देख रहा था और रौशनी मुद कर उसे .. असलम तोह रौशनी की गुलाबी होठों को देख बोलै “उफ्फ्फ ऐसी रसीली टास्ते के लिए hi तोह रुका हूँ रुकसाना मेरी बेगम …”

रौशनी “मतलब क्या हैं आपका?” रौशनी पूछताछ की नज़र से देखती हुयी.

… असलम बोले “में खीर की बात कर रहा हूँ मेरी जान देखो कैसी रसीली टेस्टी दिख रही हैं … तुम मुझे खीर का टास्ते तोह करवाओ …” असलम खीर शब्द का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन देख रहा था बिलकुल रौशनी की गुलाबी होठों को ..

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“हाँ अच्छा समझी असलम जी .. प्लीज काफी गर्मी हैं .. आप थोड़ा साइड हो जाइये न.”

असलम ने एक आखरी बार रौशनी के कमर को कास कर दबोचा … रौशनी के मुँह से .. आठ hi निकल गयी ..

असलम इस बात मर मुस्कुराता हुआ अलग हो गया . हाँ अब टास्ते करवाओ इस रसीली चीज़ की … यानि खीर की मेरी बेगम.

“ असलम जी यहाँ टेस्टिंग स्पून नहीं हैं …”

“रौशनी जी यह टेस्टिंग स्पून क्या होती हैं चीज़ हमनें तोह कभी उसके बारे में सुना hi नहीं हैं.”

रौशनी भूल गयी की वह इन गरीब बुद्धों के घर पर हैं … “असलम मियां मतलब छोटा सा स्पून नहीं दिख रहा हैं”

“रुकसाना बेगम स्पून देता हुआ रुकिए लेकिन मुझे सोऊँ से टास्ते नहीं करनी.”

फिर कैसे टास्ते करोगे खीर असलम मियां.

अरे रुकसाना बेगम स्पून की क्या जरुरत खिलने को .. आप स्पून से गरम खीर को ठंडा करिये फिर अपनी ूँगी को दिबोगे मुझे वह पिलाइये .. रुकसाना तू भूल गयी तू ऐसे hi टास्ते करवटो थी मुझे खाना ताकि नमक या शकर का अनुमान आ सके.”

रौशनी को रोनित की याद आयी .. उसके पति भी ऐसी बचकाना हरकतें करते थे .. और वह मन में मुस्कुरायी (सब मर्द एक जैसे hi होते हैं िष)

ठीक हैं असलम मियां .. रौशनी स्पून में खीर लेती हैं और उसे थोड़ा ठण्ड कर अपनी ऊँगली खीर में डूबती हैं और फिर असलम के मुँह के तरफ ले जाती है. …

असलम झट से अपने मुँह को रौशनी की उँगलियों पर पकड़ते हुए उसकी उँगलियों को चूसने लगता हैं ..

रौशनी को अजीब सी फीलिंग आती हैं .. एकदम एक गुदगुदी सी .. उसकी उँगलियों को एक कला बुड्ढे चाट रहा था … उफ्फ्फ्फ़ यह असलम भी न वह सोचती रही .

ममममम क्या स्वादिष्ट हैं … लेकिन थोड़ी सी शकर काम पद गयी.. आप को टास्ते करवौ”

“में टास्ते खुद करुँगी असलम मियां”

“रुकसाना बेगम को में अपने उँगलियों से टास्ते करवाऊंगा जैसे तुमने मुझे करवाया ..”

असलम ने स्पून से खीर ली और थोड़ा ठंडा कर अपनी उँगलियों को डुबोकर रौशनी के मुँह के पास ले गया ..

रौशनी असलम की आँखों में देखि .. उसे अब कोई और चारा नहीं था .. उसने असलम की उँगलियों को अपने मुँह में लेते हुए उसे चूसने लगी …

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“हैं न थोड़ी सी शकर काम उसमें रुकसाना बेगम”

रौशनी के गुलाबी होठं अब असलम के उँगलियों पर लपेटे हुए थे … वह ऊपर असलम को तरफ ान्हकेँ दाल देख रही थी…

असलम का लुंड ने इस एहसास और दृश्य से अब टाइट होने लगा … उसका लुंड झटके मारने लगा .. .. एक काळा बुड्ढे की उँगलियों को एक गोरी सी महिला अपने मुँह में लिए थी उफ्फ्फ ऐसा नज़ारा तोह असलम ने सोचा hi नहीं था ..

ऐसे बस कुछ सेकंड रहा और फिर असलम ने अपनी उँगलियों को रौशनी के मुँह से निकल लिया लेकिन उसे साफ़ नहीं करा ..

“हाँ असलम मियां थोड़ी सी काम हैं शकर.”

“ कोई नहीं रुकसाना बेगम तुम जब अपने हाथों से खिलाओगी तोह मीठी खुद बा खुद बन जाएगी खीर ..”

रौशनी इस बात पर मुस्कुरायी .. असलम जी भी न …

अब ऐसे हुआ की जैसे रौशनी खीर को देखने अपनी आँखें फेर रही थी उसकी नज़र असलम के ोान्त में बनाये तम्बू पर चली गयी .. क्या वह , वही देख रही थी जो उसे लग रहा था .. क्या असलम जी का लुंड का उभर हैं …

उफ्फ्फ्फ़ .. उसने झट से अपनी आँखें फेर ली

“रुकसाना बेगम पसंद आया क्या”

… और असलम हसने लगे

रौशनी हड़बड़ाती हुयी , क्या पसंद आया मुझे असलम मियां ..”

“असलम जनता था की रौशनी ने उसके लुंड के उभर को hi देख था ..”

वही जो अभी हुआ .. खीर के बारे में पूछ रहा हूँ रुकसाना बेगम .. और असलम मुस्कुराया अपने दांतों को दिखते हुए..

रौशनी के गाल तोह लाल hi हो गए …

“उफ़ असलम मियां आप जैसए जल्द से खीर बनाने दो मुझे आप बहुत डिस्ट्रक्ट कर रहे हो”

“रुकसाना बेगम यह डिस्ट्रशन .. मतलब ..”

रौशनी है पड़ी “उफ़ असलम मियां डिस्ट्रशन नहीं .. उसे तोह ……. उफ्फ्फ असलम मियां मतलब आप मुझे यहाँ पर खीर बनाने पर ध्यान नहीं देने दे रहे हो …”

“रुस्काना जी में समझा … वैसे और क्या डिस्ट्रशन आपको लग रहा था” … और वह मुस्कुराया..

अब रौशनी को असलम के उभरे हुए लुंड का दृश्य यद् आया और वह शर्मायी .. “लुक नहीं और बस आप जाइये में आती हूँ खाना लेकर .. जरा सलीम जी को भी बुलाइये …. वह भी हैं न डिनर के लिए ..”

"हाँ हैं , बुलाता हूँ उसे , जल्द से आना रुकसाना बेगम” और असलम ने धीमे से रौशनी की चूतड़ों पर हाथ फेरा और एक छोटा सा चमत मार वहां से चला गया ..

रौशनी तोह चौंक hi गयी.

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रौशनी कुछ समझती और बोलती उससे पहले hi असलम वहां से चला गया था ..

“उफ्फ्फ असलम जी कुछ ज्यादा hi मुझे रुकसाना समझ रहे हैं … ये डॉक्टर का इलाज सही होगा या नहीं उफ्फ्फ .. असलम जी को में रुकसाना जितनी लगूंगी वह तोह उतने hi खुल कर मुझे से ऐसी छेद की कर पाएंगे ..

फिर कुछ सोचती ह्युई (धत .. रौशनी तू खुद थोड़े hi डॉक्टर हैं .. जैसे डॉ बोले थे वही करो .. उन्हें इलाज के बारे में ज्यादा पता हैं..)

रौशनी अब खाने को परोसने लगी …

(रौशनी अब असलम की तरफ देखती हैं … जैसे वह उससे कुछ इशारा मिले की क्या वह खाना खा पाएगी .. उसे लगा की शायद असलम पुराने ख्यालों के हैं तोह क्या उसे उनकी बीवी होने के वजह से उनके होने के बाद खाना होगा)

“रुकसाना बेगम क्या हुआ आइये खाना खाइये न हूयमर साथ..”

असलम मियां मुझे लगा की में बाद में …”

“रुकसाना बेगम क्या बोल रही हो आप , आप हमारी बेगम हैं , आप हमारे साथ hi खाना खाएंगी .. चलिए ..

अब वहां डाइनिंग टेबल मतलब बस एक छोटा सा पुराण टेबल था और तीन कुर्सियां थी.

रौशनी एक साइड बैठने गयी ..

“रुकसाना बेगम वहां नहीं आपको हमारे बगल में hi बैठना हैं … आपको हमें खीर खिलानी हैं याद हैं न ..”

रौशनी अपनी कुर्सी असलम के साइड पर रखती हैं और बैठ जाती हैं .. टेबल छोटी थिस इसलिए उसे असलम के काफी करीब बैठना पड़ा ..

सलीम यह सब देख रहा था …

अब तीनो खाना खाने लगे .. असलम और रौशनी इतने करीब बैठे थे की कभी कबर उनके तइस टच करते एक दूसरे से.

रौशनी को यह एहसास होता था लेकिन कुछ कर नहीं पा सकती थी ..

“रुकसाना भाभी उफ्फ्फ आप तोह उँगलियों को चटवाओगी .. ऐसी स्वादिष्ट खान ेके लिए तोह हम तरस गए थे .. क्यों असलम .. सही हैं न”

“हाँ सलीम तुम सच कहता हैं .. अभी रुकसाना बेगम ने मुझे खीर अपनी उँगलियों से टास्ते करवाई थी .. बड़ी स्वादिस्ट चीज़ हैं … यह खीर”

“ाचा ऐसे क्या .. ओह भाभी जी आप में और असलम में इतना प्यार हैं.. क्या मस्त जोड़ी हैं आपकी ..”

सलीम ने दूसरी बार वह बात कही थी - जोड़ी वाली बात -

"भाभीजी बस खीर hi टास्ते करवावी आपने .."

रौशनी को सलीम की बातें समझ आयी .. वह उन्हें टेबल के निचे अपने पैरों से उनके पैरों पर मारी ...

सलीम और रौशनी फिर एक दूसरे को देखने लगे ... रौशनी उससे तीखी नज़रों से देख सलीम चुप बैठ गए.

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असलम बीच में बोल पड़े “रुकसाना बेगम खीर से याद आया , चलो अब खीर ख्यालो मुझे … “

रौशनी एक स्पून में खीर लेती हैं और असलम को पिलाने लगती हैं ..

“मममम बड़ी स्वादिष्ट हैं … सलीम मेरी बेगम ने इतनी मस्त खीर बनायीं हैं … तू भी खा ले …”

खीर टास्ते करते हुए “उफ़ सच हैं असलम , रुकसाना भाभी ने सबसे अच्छी खीर बनायीं हैं… बहुत hi टेस्टी हैं, उनके हाथों में तोह जादू हैं”

“अरे सलीम , रुकसाना मेरी प्यारी बेगम तोह खुद hi जादूगरनी हैं .. हाथों में तोह जादू होगा ी इनके, मेरी रुकसाना जैसी कोई नहीं ..”और असलम फिर रप्शनि के बाँहों को साइड से कास कर पकड़ लेता हैं “मेरी सबसे अच्छी बेगम मेरी जान रुकसाना ..” इतना कह कर असलम रौशनी के दिए बाहें को चुम लेता हैं …

रौशनी उस चुम्मे से शर्मा उठ टी हैं .. पता नहीं क्यों उसे असलम की बातें पसंद आ रही थी और इस हरकत से भी वह कुछ बोली नहीं …

“असलम मियां अब चोर भी दो भाभी जी को , यह सब सुकून से कमरे में करो मेरे सामने नहीं”.. और सलीम हसने लगता हैं

सलीम के ऐसे बात से रौशनी शर्मा जाती हैं … उसे समझ आता हैं सलीम क्या कहना चाहता हैं .. वह तोह बस निचे देख शर्माती हैं

“सलीम में तोह मेरी बेगम से जहाँ चाहे प्यार करू .. मेरी बेगम हैं न … में देखो यहाँ बहार भी उन्हें चूमूंगा .. और असलम बोल्डनेस दिखते हुए रौशनी के गालों को एक चुम्मा देता हैं मुआहहहह>

फिर से और एक चुम्मा देता हैं … रौशनी इस सब से एकदम स्टन होती हैं ..

वहां सामने सलीम हस्ता हैं “अरे अरे ठीक हैं असलम जहाँ चाहे प्यार करो अपनी बेगम से … यहाँ पर या फिर कमरे में ले काजर मुझे क्या …

रात तोह पूरी बाकी हैं तेरे लिए …

रौशनी इस बात को सुन सलीम को घूरती हैं .. उफ़ यह सलीम जी थोड़े ज्यादा hi बहक रहे हैं .. उफ्फ्फ रात की बात कर रहे हैं …

असलम कहता हैं “हाँ रात पूरी बाकी हैं बस बेगम मेरी माननी चाहिए … में तोह उनके कहने पर करूँगा जो चाहिए उन्हें …”

“हाँ असलम जरूर .. रुकसाना बेगम को भी तोह आपसे बहुत प्यार हैं .. क्यों हैं न रुकसाना भाभी जी”

अब रौशनी और क्या कह सकती थी “असलम को देख मुस्कुरा कर कहती hain”haan ज़रूर बहुत प्यार करती हूँ असलम मियां से …”

अच्छा भाभी जी फिर प्रोवे करिये .. आप असलम को अभी उनके गालों पर किश कीजिये .. अपना प्यार दर्शाइए”

रौशनी फिर से सलीम को घूरती हैं .. उफ्फ्फ अब हु खुद कैसे असलम को चुम सकती हैं .. उफ़ क्या मुसीबत हैं

दीजिये न चुम्मी , श्रमो मत भाभी जी …”

असलम बस रौशनी को देखता हैं और मुस्कुराता हैं ..”रुकसाना बेगम क्या आपको नहीं प्यार हमसे .. बस एक गालों पर चुम्मी तोह देनी हैं”

रौशनी फिर अपने होठों से असलम के गालों को चूमती हैं …

“मेरी बेगम और एक चाहिए .. मैंने आपको दो दी थी या नहीं ..”

रौशनी फिर से एक चुम्मी देती हैं असलम को ..

इससे असलम का लुंड बुरी तरह से झटके मारने लगता हैं … रौशनी ने अभी उसे चूमा था .. अब देर नहीं जब वह उसके होठों पर एक लम्बी किश देगा …

सलीम भी इस सब का मज़्ज़ा ले रहा था ..(अभी तोह बस चुम्मी दी हैं , अभी तोह हम दोनों को बहुत कुछ करना हैं तुम्हारे साथ मेरी रानी) सलीम बस यही सोच रहा था.

रौशनी तोह काफी शर्मा रही थी .. दोनों सलीम और स्लैम हसने लगे .. भाभीजी को सच में तुमसे प्यार हैं असलम .. तुम काफी लकी हो तुम्हारी भाभी अभी भी तुमसे उतना hi प्यार करती हैं ..

असलम “2 मं रुकिए थोड़ा हल्का होकर अत हूँ ..”

असलम जाने के बाद रौशनी सलीम को देख घूरती हैं ..”सलीम ये क्या आपने मुझे उन्हें चूमने क्यों कहा”

“रौशनी जी देखो कैसे खुश हुए थे असलम .. पहली बार देखा हैं रुकसाना की याद में ऐसे भूके शिकारियों जैसे बर्ताव नहीं कर रहे हैं असलम “

“आपको पसंद नहीं आयी बात तोह माफ़ी मानूंगा लेकिन मुझे लग रहा हैं की इस नाटक से असलम का इलाज शुरू हुआ हैं”

रौशनी मुस्कुराती हैं “सच आपको ऐसे लगता हैं सलीम जी …”

“हाँ में तोह उसे महीनों से देख रहा हूँ न रौशनी जी .. मुझे पता हैं. एक दो चुम्मी से क्या होता हैं अगर असलम का इलाज हो रहा हैं तोह”

रौशनी भी सोचती हैं “एक दो चुम्मों से वह भी गाल पर उससे क्या फरक पड़ता हैं .. अगर असलम की बिमारी का इलाज शुरू हो रहा हैं तोह चलेगा ..”

असलम वापस आ जाता हैं .. अब वह फिर से नार्मल जैसे बातें करने लगता हैं ..

रौशनी जी चलिए हम सब सोने जाते हैं … शुक्रिया आप ने आज रुकसाना की सच में याद बहुत दिलाई .. आप का हमेशा के लिए इस मदत के लिए शुक्रिया कहता रहूँगा …

“असलम जी आप भी न , प्लीज आप की इलाज में , में कोई भी कसार नहीं छोड़ूंगी आप बेफिक्र रहिये ..”

सलीम कहता हैं “अरे रौशनी जी सबसे प्यारी हैं … उनके जैसी कोई नहीं .. नेक दिल की और खूबसूरत .. उनके कॉम्बिनेशन का जवाब नहीं”

रौशनी मुस्कुराती हैं ..

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“शुक्रिया सलीम जी आप कुछ ज्यादा hi बोल गए .. चलिए अब हम सोने जाएंगे .. कल सुबह जल्दी उठ कर फिर से सब शुरू करना हैं …”

(जब असलम और रौशनी खीर बनाते वक़्त रसोई घर में थे तब सलीम ने चुप के से रौशनी के कमरे में दो छिपकली राखी थी क्यूंकि उसे याद था एक बार बातों बातों में रौशनी ने कहा था की उसे छिपकली बिलकुल पसंद नहीं हैं और उससे डर्टी भी हैं.)

अब क्या होगा रात में !!!
 
अब रौशनी कपडे बदलती हैं … गर्मी का मौसम था और इस घर में तोह उसे और भी गर्मी लग रही थी इसलिए वह सोची की आज वह एक स्लीवलेस निघ्त्य पहनेगी जो बस घुटनो तक कवर कर रही थी .. किसी दूसरे के घर होने के कारन वह आज ब्रा पंतय पेहेन कर hi सोई थी. घर पर होती तोह वह ब्रा कभी नहीं पहनती थी निघ्त्य के अंदर रात के वक़्त . निघ्त्य के अंदर ब्रा वाइट रंग की और पंतय थी क्रीम कलर की..

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वह अपना बिस्तर बना कर फिर सोने गयी …

रात का वक़्त था .. रौशनी सो रही थी की ेलदुम से उसे अपने कानों के पास कुछ एहसास हुआ .. पहले तोह उसे लगा था की कोई मचार होगा .. लेकिन बाद में उसे कुछ भरी पैन का एहसास हुआ उसके कान के पास ..

उसकी आँखें खुली और वह अचानक डर गयी .. उसके कानों ले पास एक छिपकली आयी हुयी थी ..

“अह्ह्ह्ह छिपकली अह्ह्ह” आवाज़ें निकलती हुयी रौशनी उठा गयी अपने बिस्तर से .. वह बिस्तर पर कड़ी थी और उसके ोैरों के बॉस बिस्तर पर एक छिपकली थी :.. दर कर वह अपने साइड में देखि तोह उसे और एक छिपकली नज़र आयी ..

“अह्ह्ह्हह असलम जी , सलीम जी प्लीज आइये छिपकली हैं मेरे कमरे में अह्ह्ह”

कुछ मं बाद सलीम कमरे में आ गए

“क्या हुआ रौशनी जी … यह छिपकली क्यों चीला रही हो कहा हैं छिपकली ..”

रौशनी अपनी नज़रों से बिस्तर पर इशारा करि .. और फिर साइड के सीलिंग पर भी..

“वववव वहां हैं सलीम जी .. छी मुझे छिपकली बिल्लुल पसंद नहीं … उफ्फ्फ उसे हटा दीजिये न …”

सलीम मन में मुस्कुराया .. उसी ने बिस्तर के साइड पर एक छिपकली राखी थी ..

अब वह छिपकली रौशनी के पैरों के पास थी …

सलीम डेल्ह सकता था की रौशनी ने माइटी बस अपने घुटनो तक आने वाली ोेहनी थी .. उसकी गोरी सी नाज़ुक पेअर दिख रहे थे … उसकी छोटी सी उँगलियाँ लाल नेल पोलिश वाली भी उसे दिखी .. उफ्फ्फ इतनी चिकनी आइटम हैं रौशनी .. सब जगह बस गोरापन और नाज़ुक उफ्फ्फ्फ़ …

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सलीम ने अब जान बुझ कर छिपकली उठाने के बहाने उसे थोड़ा पुश किया और छिपकली अब रौशनी के पैरों पर थी ..

“उफ्फ्फ सलीम जी चीई छिपकली मेरे पैरों पर हैं प्ल्ज़ उसे हटा दीजिये प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़”

सलीम मज़्ज़े ले रहा था .. उसने कुछ सेकंड बाद हाथ में एक नैपकिन से उस छिपकली को उसमें उठा लिया … उस छिपकली को उठाते वक़्त उसने रौशनी के पैरों को टच किया .. उफ्फ्फ बहुत hi नाज़ुक थे रौशनी के पेअर .. क्या ोेरफेक्ट सोजे की उँगलियाँ थी रौशनी के पास … उफ्फ्फ.

उसने फिर छिपकली को कमरे के खिड़की से बहार फ़ेंक दिया ..

“रौशनी जी रुकिए दूसरी छिपकली भी फ़ेंक देता हूँ .. और वह बिस्तर पर चढ़ गया .. अब रौशनी बिस्तर पर hi कड़ी थी ..

रौशनी तोह वही कड़ी थी और पास में छिपकली .. वह डर से हिल नहीं रही थी .. वह छिपकली को डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी .. क्या पता हलचल किट ओह छिपकली उसके अंग पर भी आएगी इसलिए वह चुप से कड़ी रही.

सलीम को छिपकली निकालनी थी तोह उसे रौशनी के पास hi जाना पड़ा .. वह फिर थोड़े आगे झुक कर नैपकिन से उस छिपकली को उठाने की कोशिश करि .. उसने फिर से जान बुझ कर ऐसे किया की छिपकली उठाने के बाद वह जान बुझ कर नैपकिन को ड्राप करा .. नैपकिन से वह छिपकली जाकर रौशनी के निघ्त्य पर गिर पड़ा ..

“चीई सलीम जी वह मेरे निघ्त्य पर हैं …”

इतना कह कर वह सीधे सलीम की बाँहों में गयी … प्लीज उसे हटा दीजिये सलीम जी प्लीज..

सलीम तोह निघ्त्य वाली रौशनी को बाँहों में पाकर खुश हुआ … उफ्फ्फ उसकी गोरी मुलायम सी बाँहों को वह फिर से चुने लगा .. अपने हाथों को उसपर से चलने लगा ..

“रौशनी जी बिलकुल न मूव करे .. नहीं तोह छिपकली वहां से सरक जाएगी ..”

रौशनी एकदम बिना मूवमेंट के कड़ी रही .. सलीम ने एक हाथ से उसके दाईं बाहें को पकडे हुए थे .. छिपकली अब रौशनी के नाभि के वहां उसके निघ्त्य पर थी ..

सलीम ने नैपकिन से वह छिपकली पकड़ने झुक गया … उसने छिपकली फिर उठा ली … और खिड़की के बहार जाकर उसे भी फ़ेंक दिया ..

“शुक्रिया सलीम जी … आप नहीं होते तोह वह छिपकली … चीई … और हैं क्या यहाँ छिपकली.. मुझे बिलकुल घिन्न आती हैं उनसे …”

सलीम नाटक करते हुए .. रौशनी जी क्या पता हो भी सकते हैं … हमें तोह कोई ऐतराज़ नहीं .. ऐसे होते रहता हैं यहाँ .. छिपकली या फिर कॉकरोच या चूहे भी .. ंगो को बहुत बार बोलै हैं कुछ करिये इन चीज़ों का लेकिन वह कुछ करते hi नहीं .. क्या करे ..

“सलीम जी कल hi में इसका कुछ करती हूँ, आपको भी मदत करनी होगी . कल वैसे संडे हैं इसलिए में फ्री हूँ. में ंगो से सैंक्शन कर लुंगी पेस्ट कण्ट्रोल का काम मंडे को. हम दोनों कल जाएंगे किसी पेस्ट कण्ट्रोल वाले के पास और कल सब काम कर लेंगे.”

“ठीक है रौशनी जी जैसे आप कहे , शुक्रिया , वैसे कल वह जगह मेरे एक दोस्त की हैं जो थोड़ा दूर उसका दूकान हैं. हमें बस से जाना होगा वहां.”

“ठीकभें सलीम जी कल हम जाएंगे. अब हम सो जाते हैं”

सलीम जाते जाते एक बार फिर से पलट कर रौशनी को उस मस्त स्लीवलेस निघ्त्य में देख आपके लोडे को खुजलाते हुए जाता हैं

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अब सुबह का दिन .. रौशनी ब्रेकफास्ट बनती हैं .. दोनों सलीम और असलम सोये हुए हैं.

“सलीम जी , असलम जी खाना तैयार हैं .. ब्रेकफास्ट कीजिये”

रौशनी फिर उनके कमरे में झांकती हैं .. दोनों अभी भी सोये हुए थे … लेकिन असलम ने ऊपर कोई शर्ट नहीं पहनी थी ..

रौशनी उसके शरीर को देखने लगती हैं, बुड्ढे होकर भी काफी हट्टे काटते थे असलम .. उसके सीने पर से सफ़ेद बाल दिख रहे थे .. चौड़ी छाती और उसपर बाल .. रौशनी ऐसे उन्हें देख शर्मा जाती हैं , अपने पति को चोर उसने पहले किसी मर्द को टॉपलेस लाइव देखा था ..

सलीम भी सोये थे लेकिन उनपर चद्दर ोधी हुयी थी.

रौशनी ने दरवाज़ा बंद किया और फिर नॉक करने लगी. “असलम मियां और सलीम जी उठिये ब्रेकफास्ट तैयार हैं, दोनों से कुछ आवाज़ नहीं निकलती तभी फिर से वह दरवाज़ा खोल उन्हें बुलाती हैं

“असलम की आँखें खुलती हैं , “ ुहह्म्म कौन हैं .. उफ्फ्फ आज संडे हैं सोने दो …”

“असलम मियां उठिये आपके लिए नाश्ता बनायीं हूँ .. उठिये न प्लीज ब्रश करके आइए न”

असलम रौशनी को देख मुस्कुराता हैं “रुकसाना बेगम तुमने नाश्ता बनाया हैं .. कितनी अच्छी हो .. असलम अब बिना शर्ट के बस एक पंत में आता हैं रौशनी ने पास.

“रुकसाना बेगम हमें एक मॉर्निंग किश नहीं डौगी हमेशा की तरह … चलो एक किश दो”

रौशनी मुस्कुराती हैं “असलम मियां धत्त चलो आओ नाश्ता करने चलो.”

“रुकसाना बेगम में नाश्ता नहीं करने आऊंगा जब तक आप मुझे किश नहींकरती हो .. “

उफ्फ्फ बाबा ठीक हैं … फिर रौशनी असलम के गालों पर किश करती हैं.

“रुकसाना बेगम गालों पर नहीं होठों पर जानू”

“असलम मियां वक तोह ब्रश नहीं करे हो जाओ ब्रश करो”

“रुकसाना बेगम अच्छा ठीक हैं , फिर ब्रश करने बाद तोह डौगी न किश”

रौशनी शर्मा जाती हैं .. “अरे असलम मियां नहीं होठों पर नहीं”

रुकसाना बेगम अभी तोह आप बोली की ब्रश करके आओ .. इसका मतलब ब्रश के बाद तोह डौगी न चुम्मी मुझे होठों पर”

“नहीं नहीं मेरा ऐसे नहीं था कहना , उफ्फ्फ नहीं आप जाइये और नाश्ता करने आइये. और अपने दोस्त सलीम जी को भी उठाओ न”

“उसे चोर दो बेगम, मुझे खिलाओ .. नाश्ता पहले .. में आका षौहर हूँ नहीं की सलीम” और असलम मुस्कुराता हैं अपने काळा दायीं को दिखते हुए

उसके मुँह से सच मच बदबू आ रही थी .. (उफ्फ्फ बहुत बदबू हैं इनके मुँह से , इतनी बदबू छी)

“असलम मियां पहले जाओ ब्रश करो चलो चलो.

“अच्छा ब्रश कर आता हूँ फिर तोह होठों पर चुम्मी लेकर hi रहूँगा बेगम”

रौशनी शर्मा जाती हैं ,,, असलम तोह अब होठों पर चुम्मे की ज़िद्द कर रहे हैं उफ्फ्फ”

असलम ब्रश कर आता हैं टेबल पर ..

“ हाँ चलो नाश्ता दीजिये लेकिन पहले मुझे यहाँ चुम्मी दो रुकसाना बेगम”

असलम अपने होठों पर इशारा करता हैं ..

“नहीं असलम मियां बस गालों पर , होठों पर नहीं ..”

“अच्छा ठीक हैं दे दो गालों पर”

रौशनी अब उसे गालों पर चूमने बढ़ती हैं तोह लास्ट सेक् में असलम अपना मुँह फेरता हैं और रौशनी की चुम्मी जाती हैं उसके होठों पर .. मुआहहह करके …

रौशनी इससे तोह सरप्राइज होती हैं ..

अब उसके गुलाबी रसीले होठं असलम के काले भद्दे होठों पर तिकी हुयी हैं .. असलम थोड़ा जोर देता हैं अपनी तरफ से .. रौशनी को कुछ समझ नहीं आता कुछ सेकंड .. फिर अपने होठों को अलग करती हैं

“बद्तमीज़ हो आप असलम मियां, कहा था न गालों पर दूंगी आपने तोह आपकी होठों पर hi … उफ़ और वह अपनी नाज़ुक हाथों को असलम के कठोर साइन पर मारती हैं.. अब जाओ नाश्ता करिये हमसे बातें न करिये.”

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“उफ़ रुकसाना गुस्सा न होना .. वैसे मेरी बेगम में तुम्हारी यही गुस्से वाली ादाएँ पर फ़िदा हूँ .. अब एक दी हैं चुम्मी तोह और एक दो बड़ी वाली …”

“नहीं बस अभी एक मिली न चुम्मी अब नाश्ता करो चलो” रौशनी फिरमली असलम को कहती हैं.

असलम मुँह मायूसी का

बना कर कुर्सी पर बैठ जाता हैं ..

“ ममम स्वादिस्ट हैं नाश्ता .. तुम्हारे हाथों में वही जादू हैं रुकसाना बेगम .. ममम खूब बढ़िया बनायीं हो”

रौशनी कुछ एक्सप्रेशंस नहीं देती हैं वह असलम के ऐसे धोके से उसके किश करना पसंद नहीं आया था. “हम्म ठीक हैं असलम मियां.”

रौशनी देखती हैं की असलम पूरी प्लेट खा लेता हैं और एक प्लेट माँगा कर वह भी ख़तम करते हैं. रौशनी उन्हें देकब सोचती हैं की उसके पति तोह आजकल जो भी खाना वह बनती थी , उस पर नेगेटिव कमेंट करते थे और यहाँ असलम मज़्ज़े से दो प्लेट नाश्ता कर रहे थे .. वह इस बात से तोह खुश थी की उसका बनाया नाश्ता असलम को बहुत पसंद आ रहा था.

बस उसे उस असलम के चुम्मे की हरकत का सन अभी भी नाराज़ कर रहा था .

नाश्ते के बाद असलम - “रुकसाना बेगम अब नहाने जाता हूँ और आप सलीम को भी खिलाओ नाश्ता.”

रौशनी बस देखती हैं असलम को और बिना कोई एक्सप्रेशंस के प्लेट सिंक में रखती हैं.

-.. अब घर पर नहाने के लिए एक hi जगह थी.. हु भी बहार दोनों बैडरूम के बहार कॉमन एरिया में. ंगो ने उनके रहने वालों के लिए नए वाटर हीटर लगवाए थे. रौशनी ने हीटर ों hi रखा था . वह अब तक नहायी नहीं थी. वह नाश्ता बनाने में hi बिजी थी सुबह से.-

असलम नहाने गए तोह वह सलीम को उठाने गयी ..

अब इस बार वह दरवाज़े को खोली तोह उसने देखा की सलीम के ऊपर चद्दर नहीं थी और वह बस एक शर्ट और बोसेर्स में hi लेते थे बीएड पर ..

रौशनी की उनके बॉक्सर पर नज़र गयी तोह उसके मुँह से ाःह निकल गयी .. सलीम का बॉक्सर एक बड़ा सा तम्बू बनाये हुए था … रौशनी समझ सकीय की वह उनके लुंड ने बनाया उभर होगा .. वह तोह उस नज़ारे से आँखें अलग करना चाहती थी लेकिन अपनी नज़र वहां से हटा नहीं पायी .. इतना बड़ा उभर देख वह चौंकी हुयी वहां देखती रही .. (करीबन 9 इन का लुंड था सलीम बुड्ढे के बॉक्सर में) .. उसने ऐसे अपने पति रोनित के बोसेर्स में भी नहीं देखा था इतना बड़ा उभर..

सलीम अब वहां खुजलाने लगा .. उसकी आँखें बंद थी वह अनजाने में वहां खुजला रहा था .. खुजलाते खुजलाते उसका बॉक्सर वह निचे साइड में सरकने लगा .. और उसका लुंड कभी भी बहार निकल सकता था…

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रौशनी समझ गयी की उसे किसी भी सेकंड सलीम का लुंड दिख सकता हैं तोह उसने शर्माकर अपना मुँह फेर लिया और दरवाज़ा हलके से बंद किया..

फिर वह वैसे hi कड़ी काफी शर्मा रही थी , उफ्फ्फ अनजाने में वह सलीम के लुंड का दृश्य देखने वाली थी ..: उफ्फ्फ्फ़ ये क्या हुआ …

रौशनी लेकिन उस बने उभर के बारे में भूल नहीं प् रही थी .. सच में बड़ा सा उभर था .. क्या सच में सलीम जी का लुंड इतना बड़ा होगा , या उसे ऐसे लग रहा था .. उफ्फ्फ इतना बड़ा उभर तोह फिर उनका लुंड भी बड़ा और मोटा … उफ्फ्फ अपने आप के सोच को रोकते हुए मन में रौशनी

(उफ्फ्फ रौशनी यह क्या सोच रही हैं तू .. उफ़ निकल दे दिमाग से यह सब ) लेकिन एक महिला होते हुए वह यह बात कैसे मन से निकलती , इतना बड़ा उभर कोई भी महिला देखती तोह सोचती hi न की उस मर्द का लुंड भी कितना बड़ा होगा .. अब वह कैसे सलीम को नज़रे उठा कर देख पाएगी उफ्फ्फ .. अब क्या करे ..)

( वहां सलीम ने यह जान बुझ कर किया था .. उसने देखा था जब रौशनी ने असलम के गालों पर चुम्मा दिया था .. उसे लगा की फिर से आएगी रौशनी उसे भी उठाने इसलिए उसने चद्दर साइड में करि थी .. अपने लोडे से खेलते हुए और रौशनी के फिगर और कर्व्स और मलाईदार रंग को इमेजिन करते हुए उसका लोढ़ा टाइट हुआ था उन्स्की बोसेर्स में. उसने तिरछी नज़रों से देखा था रौशनी को उसके उभर पर नज़र डालते हुए इसलिए वहां वह अनजाने में खुजलाने लगा था और चाहता था की उसका बड़ा मोटा सख्त लोढ़ा रौशनी को दिखाई दे .. लेकिन रौशनी नेट अभी अपनी नज़रें हटा कर दरवाज़ा बंद करि थी. )
 
रौशनी कुर्सी पर बैठी hi थी की सलीम बहार आ जाता हैं. उसने अभी पंत पहनी थी. लेकिन उसका लोढ़ा अभी भी सख्त था ..

“रौशनी जी गुड मॉर्निंग.. आप संडे को भी जल्दी उठती हो .. हमें इसकी आदत नहीं हैं”

रौशनी अब ऊपर सलीम को देखने अपनी नज़रें उठती hi हैं की उसकी नज़र फिर से सलीम के क्रॉत्च पर चली जाती हैं.. अब भी वहां रौशनी एक उभर देख पाती हैं , पंत थीं मटेरियल होने के कारन सलीम के लुंड का आकर भी उसे थोड़ा दिखाई देता हैं … फिर से उसकी नज़र वहां पर कुछ पल रहती हैं.

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“रौशनी जी कहाँ खो गयी आप , ऊपर देखिये हमारी तरफ..”

रौशनी फिर शर्माती हैं … फिर नज़रें ऊपर उठा लेती हैं..

“सलीम जी आप नाश्ता करिये न … में अपने कमरे में जाती हूँ … कुछ काम हैं”

“रौशनी जी नहीं ऐसे नहीं चलेगा .. आपको हमारे साथ बैठना पड़ेगा और थोड़ा नाश्ता करना hi पड़ेगा”

रौशनी कुछ नहीं बोलती फिर जाकर प्लेट लती हैं और सलीम को परोसती हैं.

“लीजिये सलीम जी .. नाश्ता करिये” .. रौशनी मुद कर जाने लगती हैं तोह सलीम उसकी कलाई पलाद लेता हैं

“रौशनी जी प्लीज बैठिये … कंपनी दीजिये न हमें … कल रात को उस छिपकली को मैंने hi फ़ेंक दी थी .. अब आप भी बैठिये न हमारे साथ रिक्वेस्ट कर रहा हूँ.”

रौशनी सोचती हैं (हाँ उन्होंने मदत तोह किट hi .. वैसे भी सुबह जो हुआ उनकी गलती नहीं थी वह तोह सोये थे बस में hi गलत टाइम उनके कमरे में झांकी थी. वैसे भी उसे वह बात भूलनी चाहिए थी. आज उन्हें जाना था पेस्ट कण्ट्रोल के उस शॉप पर.)

अच्छा ठीक हैं सलीम जी .. और रौशनी बैठ जाती हैं..

असलम जैसे सलीम भी नाश्ते की तारीफ करने लगे और दो प्लेट खाये .. रौशनी खुश थिन्की दोनों को उसने बनाया नाश्ता इतना पसंद आया था.

“रौशनी जी आप नहायी नहीं …?

“नहीं सलीम जी नाश्ता बनाने में hi टाइम लगा था”

तभी असलम नाहा कर बहार आता हैं…

“रुकसाना बेगम में कपडे बदलने जा रहा हूँ , आज एक दोस्त से मिलना था , उसे मिलने जाऊंगा और अब दुपहर को hi आऊंगा लंच के लिए.. तुम क्या करने वाली हो”

रौशनी अभी भी उस इंसिडेंट से खुश नहीं थी असलम से .. “हम्म असलम मियां में घर रहूंगी , थोड़ा आराम करुँगी फिर लंच बनाउंगी .. आप जाइये”

“रुकसाना बेगम लव यू माय जान”

रौशनी कुछ नहीं बोलती बस सलीम का प्लेट सिंक में रखती है .

सलीम दोनों को देख रहा होता हैं.. कुछ तोह हुआ हैं इनके बीच .. और रौशनी ने असलम को बताया भी नहीं था की वह अभी नहाने के बाद उस पेस्ट कण्ट्रोल शॉप जाने वाले थे. कुछ तोह हैं — वही बात सोचते सोचते सलीम नहाने जाते हैं.

रौशनी अपने कमरे में जाती हैं और अपनी ब्लाउज और साड़ी जो पहने वाली थी वह अपने बैग से निकल कर रखती हैं बिस्तर पर.

सलीम भी नहाकर अपने कमरे में जाता हैं. वह अस्काम से पूछता हैं की क्या हुआ था उसके और रौशनी के बीच .. असलम कुछ नहीं कह कर वहां से निकल जाता हैं. सलीम फिर सोचता हैं की वह रौशनी को hi पूछेगा.

अब रौशनी नहाने जाती हैं…

वाशूम में जाते hi उसने पाया की वहां पर भी दोनों के कच्चियाँ ऐसे hi पड़े हुए थे .. यह कचियाँ तोह अभी की थी , धोये हुए नहीं थे अभी भी गंदे थे और उससे स्मेल आ रही थी. काफी स्ट्रांग स्मेल आ रही थी दोनों कच्छियों से .. उफ्फ्फ एक अलग hi स्मेल थी .. रोनित के कच्छियों से भी ऐसी स्ट्रांग स्मेल नहीं आती थी..

अब एक बात थी की रौशनी नहीं जानती थी. अभी नहाने से पहले असलम ने मुठ मारी थी , रौशनी के किश के बारे में सोचते हुए .. और सब मुठ जाकर असलम की कच्ची पर लगी थी इसीलिए इतनी स्ट्रांग स्मेल आ रही थी ..

सलीम जी की भी कच्ची उसके प्रेकम से थोड़ी भीगी थी.. सुबह जब वह इंसिडेंट हुआ था तब उसके लोडे से प्रेकम निकल कर उसकी कच्ची थोड़ी भीग गयी थी..

बहुत स्ट्रांग स्मेल थी … रौशनी को बहुत hi स्ट्रांग लगी.. उसे और कोई चारा नहीं था .. उसने दोनों कच्छियों को हाथों में लेकर एक बकेट में दाल दी और बकेट पानी से भर दी और थोड़ी सी डिटर्जेंट डाली बकेट में.

और एक बात थी की आज रौशनी आज बालों को वाश करने वाली थी. लेकिन वह शैम्पू लेकर जाना भूल गयी थी. अब रौशनी अपने नंग्न मुलायम बदन पर साबुन लगाने लगी.

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साबुन लगाने के बाद वह फिर शैम्पू लगाने सोची तब उसे पता चला की शैम्पू तोह हु लायी hi नहीं थी. उसे आज किसी भी हाल में बालों को वाश करना था..

अब उसे सलीम को hi बताना पड़ेगा उसके कमरे से शैम्पू लाने के लिए. वाशरूम का दरवाज़ा थोड़ा ओपन कर “सलीम जी , सलीम जी …. ज़रा सुनिए न”

“रौशनी जी हाँ बताइये ..

सलीम तोह काफी खुश था .. रौशनी नाहा रही हैं , नंगी होगी .. उफ्फ्फ उसका गोरा सा मखमल बदन ममम , सोचते hi उसका लुंड टाइट होने लगा … “रौशनी जी बताइये न क्या छाइये .. सलीम अब वाशरूम के बहार hi खड़ा था … “सलीम जी मुझे मेरी शैम्पू चाहिए .. यहाँ बहार रखिये न में लेती हूँ.”

सलीम झट से कमरे में चला गया .. वह उसने बिस्तर पर रौशनी ने निकले हुए साड़ी और ब्लाउज और ब्रा पंतय देखने लगा .. उफ्फ्फ रौशनी की ब्रा देख सलीम का लुंड सच में टाइट हुआ .. उसने वह ब्रा ली और अपने पंत के अंदर अपने लुंड से रगड़ने लगा.. फिर उसने ब्रा फिर से साड़ी पर रख दी.

फिर शैम्पू ढूंढ कर वह शैम्पू देने चला गया.. “रौशनी जी शैम्पू लाया हूँ”

“शुक्रिया सलीम जी प्लीज उसे बहार नकिहे रखिये में लेती हूँ.”

“रौशनी जी निचे सब गन्दा हैं … शैम्पू निचे से गन्दा हो जाएगा .. आप को आपके हाथों में देता हूँ आप बस हाथ बहार करिये.”

रौशनी ने हाथ बहार किये तब सलीम उसके गोर मखमली हाथों को देख पाया .. उफ्फ्फ क्या गोरी मैडम थी रौशनी ममम उसका लुंड अब पूरा टोघट हुआ था … मन लार रहा था की वह दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गए और रौशनी के साथ नंग नाहा सके .. उफ्फ्फ वहां पर hi अपने सख्त लुंड को चुसवागा ..

“सलीम जी जल्दी दीजिये नाहा कर हमें जाना हैं लेट हो जाएगा ..”

सलीम ने शैम्पू रौशनी के हाथों में देकर वहां से चला गया .. – है मैडम जी आप के साथ कब नहाने का मौका मिलेगा उफ्फ्फ …. रोज़ नहलाना चाहूंगा तेरे मस्त से गोर और मुलायम बदन को .. टिहरी चूचियां दबाऊंगा .. चूतड़ भी मसलूंगा उफ्फ्फ्फ़ मेरी आइटम बन जा रौशनी जी.

सलीम अब बहक कर अपने लोडे को जोरों से हिलने लगा .. (है मैडम मेरा लोढ़ा तेरे से hi चुसवाना चाहता हूँ … और तेरी चुदाई करूँगा अहह मेरी जानू ..)

वहां रौशनी अब बालों पर शैम्पू लगा कर नहाने लगी और फिर नहाने के बाद एक लम्बी निघ्त्य जैसी ड्रेस पेहेन कर अपने कमरे में चली गयी.

अब रौशनी तैयार होने लगी … उसने एक वाइट साड़ी पहनी थी .. स्लीवलेस वाइट ब्लाउज … टॉवल से फिर वह अपने बालों को ड्राई करने लगी … बालों को वैसे ड्राई करके वह बहार आयी कमरे से ताकि वह टॉवल वाश बकेट में दाल सके …. तभी सलीम बहार आता हैं और रौशनी की सुंदरता देखते hi रह जाता हैं .. (उफ्फ्फ क्या मस्त लग रही हैं रौशनी ममममम क्या कमर हैं , क्या हसीं हैं उफ्फ्फ , लम्बे घने बाल .. गोल सिन अभी उफ्फ्फ और वह ऐसी लग रहे थी फ्रेश नाहा कर उफ्फ्फ्फ़ उसका लोढ़ा टाइट हो गया … मममम यार आज तोह और मज़्ज़े लूंगा रौशनी के साथ)

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“रौशनी जी आप तोह हुस्न की पारी हो … आप पर यह साड़ी मस्त जजती हैं ..”

रौशनी मुस्कुरायी “आप भी न सलीम जी जब देख बस मीठी तारीफ hi करते हो ..”

रौशनी शर्मा कर फिर मुद जाती हैं .. तब सलीम को उसकी गोरी सी पीठ फिर से दिख जाती हैं और उसकी कमर .. उसके पीठ पर एक लाइन से बानी हुयी थी उफ्फ्फ क्या नज़ारा था … सलीम हेय में मर जावा बोल दिया

“सलीम जी आप कुछ बोले मुझसे …”रौशनी मीठी स्वर में पीछे मुद कर बोली सलीम से ..

सलीम ने अपने दोनों हाथों को दिल पर रख लिया … और रौशनी को देख स्माइल देने लगा ..

“सलीम जी आप भी न तोह उफ्फ्फ चलो अब आती हूँ तैयार होकर जाना हैं हमें.” फॉर रौशनी मुस्कुराती हैं और मुद कर कमरे में वापस जाती हैं.

अब रौशनी को नहीं पता था की उसने जो ब्रा पहनी थी वह अभी कुछ समय पहले सलीम के लोडे पर थी और वह उसे वहां रगड़ लिया था .. उसने वही ब्रा पहनी थी .. सलीम के लुंड से रागादि हुयी ब्रा ..

अब तैयार होकर दोनों बहार निकलते हैं ..

“मैडम आज रिक्शा का स्ट्राइक हैं इसलिए हमें बस से hi जाना पड़ेगा ..”

“उफ़ सलीम जी सच कहु तोह में बस से कॉलेज के बाद कभी नहीं गयी हूँ. जब गयी थी तब भी बस दोस्तों के साथ.”

“यहाँ बस में बहुत भीड़ होती हैं मैंने देखि हैं यहाँ के स्टॉप की बुस्सेस.”

सलीम मन में खुश था .. आज मौका था वह बस में रौशनी को मसल पाएगा .. उसे पता था भीड़ वाली बुस्सेस में कैसे लेडीज को छेड़ा जाता हैं ..

“रौशनी जी में हूँ न आपके साथ, में पूरी लाइफ बुस्सेस में सवारी की हैं .. भीड़ में कैसे जाना हैं मुझे पता हैं .. मेरे साथ आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी में आपका ख्याल रखूँगा.”

“शुक्रिया सलीम जी .. आप प्लीज मेरा ख्याल रखिये .. इतनी भीड़ में पहली बार जा रही हूँ न”

“फ़िक्र न करिये में संभल लूंगा सब , अब चलिए रौशनी जी.”

“हाँ चलिए ..” रौशनी खुश थी की सलीम इतने अच्छे हैं .. उनकी मदत करने हमेशा तैयार हैं. उन्हें सलीम अच्छे लगने लगे थे ..

अब बस आयी .. हमेशा की तरह भीड़ थी , लेकिन आज कुछ ज्यादा hi, क्यूंकि रिक्शा स्ट्राइक था इसलिए.

पहले बस में तोह बहु भीड़ थी .. बिलकुल जगह नहीं थी.. फिर एक बुसस आयी कुछ मं बाद .. भीड़ थोड़ी कंठी ..

“रौशनी जी आप पहले चढ़ जाइये .. में आपके पीछे hi हूँ” .. आगे से तोह फुल थी बस , पीछे थोड़ी जगह थी..

रौशनी अब बस में चढ़ गयी .. लेकिन आगे का एक आदमी वहां खड़ा था और वह पीछे हटा .. रौशनी पीछे गिर पाती उससे ोेहले सलीम ने उसके कमर को पीछे से पकड़ किया … और थोड़ा आगे पुश करने लगा.. और वह भी पीछे से चढ़ गया बस में..

रौशनी की कमर पर अपने हाथों को पलर सलीम के लुंड में हलचल होने लगी .. सलीम के हाथ उसके कमर पर थे और जब वह देखि तोह रौशनी कुछ नहीं बोली .. उसने तोह उसे गिरने से बचाया था.

अब दोनों बस में चढ़ गए थे .. भीड़ थी इसलिए हिलने की जगह नहीं थी.. रौशनी उनकंफर्टबले फील कर रही थी , गर्मी काफी थी.. पसीना आ रहा था .. सलीम की नज़र तोह रौशनी किले कमर पर , उसकी मुलायम पीठ पर बाँहों पर hi थी .. वह उसे चुना छठा था .. मसलना चाहता था ..

साइड से एक आदमी रौशनी को छू रहा था .. रौशनी को वह बहुत उनकंफर्टबले लगी बात लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी … लेकिन बुसस के एक ढ़ाके से उस आदमी ने रौशनी की कमर को साइड से थोड़ा और दबोचा .. तब रौशनी पीछे सलीम की तरफ मुद वहां इशारा किया..

सलीम उस आदमी को देख बोलै

“कमीने , अपनी औकात में रह, मैडम को क्यों छू रहा हैं … जरा स्पेस दे , दिख नहीं रहा है की यह एक महिला है. … टच नहीं करने का.”

“अबे सेल में ने जान बुझ कर नहीं छू लिया .. अब भीड़ हैं में क्या करू .. इतनी प्रॉब्लम हैं तोह उतर जाओ.”

“में क्या चुटिया लगता हूँ तुझे .. मुझे पता हैं तेरे जैसे मर्द … महिला देखि नहीं भीड़ में शुरू हो जाते हो .. अब साइड में सरक.”

वह आदमी फिर साइड में सरक गए..

रौशनी सब सुन रही थी .. सलीम को ऐसे गाली देते हुए देख रौशनी चौंक गयी थी ..

उसने यह सुना नहीं था उनसे .. लेकिन एक बात थी वह उसके लिए उस आदमी से झगड़ने लगे थे .. उसे वह बात अच्छी लगी ..

सलीम को मुद कर वह थैंक यू बोली. सलीम मुस्कुराया (रौशनी जी बस में भीड़ में बस में hi आपको चुने वाला हूँ .. और कोई आदमी नहीं कर सकता)

अब भीड़ थोड़ी और बढ़ गयी .. रौशनी अब बिलकुल सलीम से सटक कर कड़ी थी .. सलीम रौशनी से एक इंच शार्ट था .. इसलिए उसकी नज़र पीछे से उसकी गर्दन तक आती थी. उसकी सुंगंध से और इतनी पास होने से उसका लुंड निचे टाइट होने लगा था . अब भीड़ की वजह से रौशनी पीछे सर्कि और इसकी चूतड़ अब सलीम के क्रॉत्च से टकराई .. उससे सलीम का लुंड और टाइट होने लगा .. अब रौशनी पीछे से कुछ चुंबन महसूस करि अपनी चूतड़ों पर .. वह पीछे देखने मुड़ी तब सलीम ने अपनी कमर थोड़े पीछे करि ..

फिर रौशनी आगे देखने लगी.. बस एक स्पीड ब्रेकर के ऊपर से चली तब सलीम जाकर रौशनी से एकदम से चिपक गया … उसका टाइट लोढ़ा अब रौशनी की चूतड़ों पर और दबने लगा .. रौशनी की मुँह से आह निकल पड़ी .. “सलीम जी यह क्या कर रहे ho”wah फुसफुसाई

“माफ़ कीजिये में क्या करू , बस hi ऐसे ब्रेक मर्री …”

रौशनी थोड़ी सेहम गयी थी ..

अब उनके साइड में बैठे हुए एक आदमी बोतल से पानी पि रहा था .. उस ब्रेक से उसके हाथों से बोतल डगमगाया था और पानी निचे गिरा था ..

भीड़ के वजह से आगे वाला आदमी पीछे पुश करने लगा और रौशनी भी पीछे हटी .. उसके पेअर पानी पर से चले और वह और पीछे स्लिप कर गिरने hi वाली थी और सलीम ने उसके कमर को पूरी तरह से कास कर पकड़ किआ ुर वह गिरने से रुक गयी.

सलीम ने इस मौके का फायदा उठाया और रौशनी की कमर को और दबोचा … उसकी गोरी नाज़ुक सी कमर सलीम के काळा हाथों से डाब गयी .. उसकी मुँह से आह निकली ..

रौशनी फिर सीधे कड़ी हुयी ..

ऊपर बस के बनाये प्लास्टिक हैंडल्स पर कोई जगह नहीं थी … सब मर्दों के हाथ hi थे उसपर ..

सलीम फिर एक आदमी से बोले

“भैया थोड़ा अपना हाथ हटाइये न मैडम को वहां पकड़ने दीजिये”

“भाई साहब में हैंडल पहले पकड़ ली थी .. मैडम को कोई और पकड़ने दो हैंडल”

सलीम अब ग़ुस्से से “अबे बोलै न हैंडल से हाथ हटा और मैडम को रखने दे .. सीधी बात समझते नहीं हो क्या ..”

“साला पागल बुद्धा …” और उस आदमी बे अपने हाथों को हैंडल से निकल दिया .

रौशनी सब सुन रही थी .. आज सलीम के मुँह से ऐसी बातें सुन उसे अजीब लगा. लेकिन सलीम उसकी मदत के लिए सब कर रहा था उस बात से उसे अच्छा लगा.

सलीम साइड से रौशनी के कानों में “रौशनी आप प्लीज यहाँ. ऊपर हैंडल पकड़िए .. फिर आपको सपोर्ट मिलेगा यहाँ हैंडल फ्री हुआ हैं.. यहाँ पकड़ लीजिये और आपको बस के धक्कों से सपोर्ट मिलेगा.”

“हाँ सही हैं सलीम जी शुक्रिया”

अब रौशनी हैंडल पकड़ कर कड़ी रही .. उसे अब अच्छा सुप्परत मिलने लगा.

अब बात फिर से वही हुयी उसके हाथों को बाकी के मर्द रख उसे वहां चुने लगे.. रौशनी सलीम को देखि

“सलीम जी आप भी हैंडल पकड़िए न .. आप को भी सपोर्ट मिलेगा..”

“लेकिन रौशनी जी वहां हैंडल पर जगह नहीं..

“सलीम जी आप मेरे हाथों पर रखिये हाथ और पकड़िए .. मुझे कोई ऐतराज़ नहीं.”

सलीम बहुत खुश हुआ … रौशनी खुद hi उसे उसके हाथों को टच करने को अल्लोव कर रही थी .. सलीम को वापस बोलना नहीं पड़ा , वह रौशनी के हाथों के ऊपर अपने हाथ रखे .. उफ्फ्फ वह अब रौशनी की नाज़ुक सी नेल पोलिश वाली हाथों पर अपने हाथ रखे थे .. उसके हाथ इतने बड़े थे की वह रौशनी ले हाथों को उसमें धक् लिए ..

रौशनी को सलीम के मज़बूत हाथों का सोष एक सुर सूरी सी लगी .. उसके हाथ सच में बहुत मज़बूत थे .. सलीम वहां अपने हाथों से रौशनी के हाथों को मसलने लगा .. रौशनी ने हाथ ऊपर किये थे इसीलिए उसकी आर्मपिट्स भी सलीम देख रहा था .. वहां से पसीने की बदबू और उसके परफ्यूम को सुगंध के मिश्रण को वह सूंघ प् रहे थे … इस सुगंध से उसके लुंड ने झटके मारना शुरू करा .. अब दोनों काफी सटक आकर खड़े थे इसीलिए पीछे से उसके लुंड के झटके रौशनी की चूतड़ों को डाब रहे थे ..

आगे रौशनी अहह की सिसकी भरी .. उसे सुन सलीम और बोल्ड हो गया और उसने ऊपर से रौशनी के हाथों को दबाया और पीछे से अपनी कमर को और आगे बढ़ाते उसके खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबा दिए . रौशनी किट ओह फिर से यह निकली .. इस बार वह पीछे जोर से चुंबन महसूस करि ..

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वह निचे देखि तब उसे पता चला की वह चुंबन तोह सलीम के लोडे में वजह से हैं ..

वह ग़ुस्सा होने के बजाय शर्माने लगी .. उसे सलीम के बॉक्सर में उसके सख्त उभर की सोच रही थी .. उफ़ अब इनको कैसे बताऊ की उन्ही का वहां का .. मुझे पीछे से चुभ रहा हैं .. उफ्फ्फ

तभी और एक ब्रेक से बस रुक गयी तब सलीम का सख्त लोढ़ा अब और भी जोर से रौशनी की छटड़ों पर डाब गया .. इस बार इससे रौशनी के मुँह से थोड़ी और अहह निकली .. (उफ्फ्फ है यह उनका वहां उफ्फ्फ कुछ बोलना पड़ेगा उन्हें लेकिन कैसे बोलू उफ्फ्फ )

वह सलीम को पीछे मुद देखि .. सलीम अनजान बनते हुए रौशनी को देखने लगे .. रौशनी अपने आँखों से निचे इशारा कर रही थी लेकिन सलीम अनजान बन के उसे क्या हुआ सर हिला कर पूछने लगे ..

रौशनी सलीम के कानों में बुदबुदायी “सलीम जी निचे से आपका कुछ चुभ रहा हैं मुझे … प्लीज उसे हटाइये न .. बहुत hi चुभ रहा हैं जब ब्रेक लग रहा हैं तब .. प्लीज ..”

सलीम मन में मुस्कुराया .. “क्या चुभ रहा हैं आपको रौशनी जी .. साफ़ साफ़ बताइये समझ नहीं आ रहा हैं मुझे”

रौशनी अब शर्मा रही थी, सलीम को वह कैसे बोलती उफ्फ्फ..

“सलीम आपके निचे जो हैं न बड़ा सा अह्ह्ह चुभ रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ प्लीज हटाइये उसे ..”

“रौशनी जी उफ्फ्फ्फ़ माफ़ कीजिये .. वैसे बड़ा सा हैं आपको कैसे पता ..”

रौशनी तोह अब पूरी तरह से शर्माने लगी .. उसके गाल लाल हुए शर्म से .. अब वह कैसे बताती की सुबह वह उनके सख्त लुंड के उभर को देखि थी .. वह देखि थी की वह कैसे खुद के लुंड को खुजला रहे थे और उनका बड़ा लुंड ऑलमोस्ट उसे दिखाई भी दिया था ..

रौशनी चुप रही .. फिर बोली “सलीम जी बस आप उसे हटाइये .. प्लीज काफी उनकंफर्टबले फील हो रहा हैं ..”

सलीम अब पीछे हैट जाता हैं .. अब ज्यादा पीछे से दबाना नहीं चाहिए वह समझ गया .. और अभी भी उसके हाथ थे रौशनी के हाथों पर थे और उस बात से तोह रौशनी को कुछ ऐतराज़ नहीं था इसलिए सलीम खुश थे .

कुछ मं ऐसे hi अपने नाज़ुक हाथों पर सलीम के कठोर मज़बूत हाथों के स्पर्श का आनंद रौशनी लेने लगी .. वह भी सरप्राइज थी की उसे यह बात अच्छी लगने लगी थी .

फिर आख़िरकार उनका स्टैंड आ hi गया .. भीड़ में से उन्हें जल्द hi उतरना था .. पीछे से सलीम रौशनी की पुश करने लगा .. उसका हाथ अब रौशनी की कमर को पुश कर रहा था फिर रौशनी को उसके हाथों का स्पर्श अपने चूतड़ों पर भी महसूस हुयी .. लेकिन निचे उतरने की जल्दबाज़ी में वह कुछ बोली नहीं .. वहां सलीम उस मौके का फायदा उठाते हुए वह रौशनी के चूतड़ों को धीरे से मसलने लगा ..

फिर दोनों बस के निचे उतर गए .. और पेस्ट कण्ट्रोल के शॉप तक चलने लगे.
 
अब दोनों सलीम के पहचान के पेस्ट कण्ट्रोल के पास पहुँच गए ..

“बोलिये सलीम जी कैसे आना हुआ”

वह आदमी रौशनी को देखने लगा.. उफ़ कितनी खूबसूरत महिला थी .. एकसूम से गोरी और गदराये बदन वाली … वह उसके गुलाबी होठों को ; गोरी बाँहों और चूचियों के वहां अपनी नज़र घुमाई ..

“अफ़ज़ल यह हैं रौशनी जी .. हमारे ंगो की नयी मैनेजर..”

“सलाम वालैकुम रौशनी जी…”

“नमस्ते अफ़ज़ल जी ..”

“बोलिये सलीम भाई कैसी मदत करू में आपकी ..” वह मर्द कुछ 40 के उम्र का होगा .. वह बस रौशनी की बदन को घूरे है रहा था ..

“अरे अफ़ज़ल , हमें न घर पर पेस्ट कण्ट्रोल कवनि हैं … इसलिए तुम्हारे पास आये हैं .. हमारी मां बहुत नेक दिल की हैं .. वह चाहती हैं की घर की पेस्ट कण्ट्रोल हो जाए ..”

“अच्छी बात है. सलीम में तोह कहता hi था तुम्हे करा लो पेस्ट कण्ट्रोल.”

“अफ़ज़ल पता हैं यार लेकिन वह पहले वाला पागल मैनेजर बात मानता hi नहीं था.. अब रौशनी जी जैसी मैडम आयी हैं तोह अब पेस्ट कण्ट्रोल करवा पाएंगे”

“अच्छा सलीम भाई .. वैसे सॉरी बूत आप दोनों अंदर प्लीज आइये .: रौशनी जी कुछ ठंडा मंगाई आपके लिए.”

रौशनी नहीं बोली ..

“आत्रेय मैडम जी आप सलीम भाई के वहां मि नयी मैनेजर हो और हुनरी सिमोले शॉप पर पहली बार आयी हो, कुछ तोह ठंडा पीजिये.”

रौशनी अब सलीम के तरफ देखती हैं.

“रौशनी जी आप पीजिये , अफ़ज़ल मेरा दोस्त हैं एकदम से मस्त एक जूस लाएगा पास के दूकान से .”

“सलीम भाई आप आपके नेरे साथ कुछ बात करनी हैं”

“चलो ठीक हैं. रौशनी जी आप आराम से अंदर बैठिये हम जूस लेट हैं आपके लिए.”

रौशनी अंदर कुर्सी पर एक पंखे के सामने बैठ गयी.

सलीम और अफ़ज़ल चले गए बहार.

“अरे सलीम भाई क्या मस्त माल हैं यार … इतनी सेक्सी लेडी हैं उफ्फ्फ्फ़”

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“हाँ यार कड़क माल हैं न … यार मैनेजर बन गयी हैं क्या खुश किस्मत हैं यार सच में बहुत मस्त माल हैं”

“सलीम भाई आपका जवाब नहीं , ऐसी एक से एक आइटम तेरे नसीब में hi कैसे आती हैं यार .. हु मीनल भी थी मस्त युवा कड़क माल… साली जैसे इसे भी अपने लौड़े के निचे सुलाया हैं क्या ..”

“नहीं अफ़ज़ल अभी तोह मिली हैं कुछ दिनों पहले ..”

“अच्छा सलीम भाई मतलब आगे जा कर इसको अपने हवस के जाल में फ़साने का पूरा इरादा हैं तुम्हे .. उफ्फ्फ कड़क माल रात में मिले तोह रातें रंगीन हो हाय उफ्फ्फ्फ़ … क्या कर्व्स हैं , क्या बदन हैं , गोरा मखमल और गदरायी जिस्म वाली उफ्फ्फ मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया रे”

“ हाँ यार साड़ी में भी मालदार हैं न … सोच साड़ी उतरेगी तोह कितनी मस्त दिखेगी नंगी … यार मन करता हैं दबोच hi लूँ हमेशा ः.”

“वैसे अफ़ज़ल टब hi तोह उस एक औरत को अपनी आइटम बनाये था .. उसका क्या अभी भी लेता हैं उसकी .. बता न”

“हाँ भाई हु तोह आइटम हैं hi लेकिन आइटम अब ोुरानी हो गयी हैं .. नयी आइटम चाहिए यार उफ्फ्फ्फ़ लौड़ा तोह नयी छूट ढूंढ़ने लगा हैं.”

“तेरी तोह निकल पड़ेगी .. तू तोह इसको पता कर hi रहेगा .. फिर तेरे फौलादी लोडे के निचे पटक कर तू उसकी लेगा …”

“अफ़ज़ल वैसे मैडम हमारे साथ hi रह रही हैं ः.. इसलिए तोह वेस्ट कण्ट्रोल करवाना हैं आज ..”

“ओह तेरी सच हैं क्या सलीम भाई , अरे घर पर रहती हैं तोह अब ज़रूर जल्द से जल्द तेरे से छुड़ेगी ये मलाईदार माल”

“अफ़ज़ल ऐसी आइटम को पटना आसान नहीं हैं .. बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं , लेकिन हाँ यार एक बार पैट जाए तोह ऐसी औरतें तोह बड़ी मस्ती में चुदती हैं जब चाहो तब”

“अच्छा यह तेरे घर पर कैसर यह रही हैं और तेरे वहां हु ासकाममभी रहता हैं न , फिर कैसे?”

“अरे उसकी तोह अलग hi कहानी हैं लेकिन उससे तेरा क्या लेना देना, चल जूस लेकर जाते हैं.. यहाँ के कमीने सब उसे देखेंगे तोह लाइन बना कर घूरते रहेंगे उसे ..”

अफ़ज़ल मन में सोचते हुए ( उफ़ यह हरामी सलीम हैं साला बहुत लकी .. क्या जादू चलता हैं औरतों पर क्या पता .. साला बुद्धा होकर भी इतने औरतों को पटाया हैं और छोड़ा हैं, लेकिन यह सबसे से रापचिक छोड़ू माल हैं… इसको भी छोड़ेगा तोह सेल से क्लासेज लेने पड़ेंगे औरतों को पटाने के उफ्फ्फ)

अब दोनों उसके शॉप पहुँचते हैं और अफ़ज़ल रौशनी को जूस देता हैं ..

“रौशनी जी पुरे घर का करना हैं तोह 500 रा लूंगा .. पुरे ंगो के घरों के करने हैं तोह … 20 घरों के कुल मिलकर रस.9000.”

“अफ़ज़ल जी ोेहले आप सलीम जी के घर का कीजिये .. उसके दूंगी 500. उस काम को देख आगे के घरों के बारे में सोचूंगी.”

अफ़ज़ल सोचता हैं की काम मिले या न मिले थोड़ा वक़्त रौशनी के साथ बिताएगा तोह उसके बदन को निहारने का मौका मिलेगा … ऐसी मलाईदार महिला रोज़ रोज़ नहीं मिलता ..

“अच्छा मैडम ठीक हैं लेकिन आप काम देखोगी तोह सब घरों का कॉन्ट्रैक्ट आप हमें hi डौगी.”

“आज शाम को आ 4 बजे तब करिये तुम्हारा काम ठीक हैं अफ़ज़ल ..?”

“चलो ठीक हैं सलीम भाई..” फिर सब जुइ पिटे हैं इधर उधर की बातें लरते हैं . रौशनी टाइम देखती हैं .. अब उन्हें घर जाकर उसे लंच बनाना था असलम और सलीम के लिए.

“सलीम जी हमें जाना चाहिए , मुझे लंच बनाना हैं”

अफ़ज़ल मन में (उफ्फ्फ यह तोह इनके लिए लंच भी बनाएगी .. ये क्या हो रहा हैं .. ऐसी महिला उन बुद्धों के लिए लंच बनाएगी ..)

रौशनी बहार जाती हैं तोह सलीम अफ़ज़ल को देख आँख मात्रा हैं.

अब दोनों फिर से बस स्टैंड जाते हैं. इस बार दुपहर की वजह से थोड़ा काम भीड़ होने के कारन रौशनी को सीट मिल जाती है. सलीम उसके पीछे खड़ा रहता हैं.

विंडो सीट पर बैठी महिला ने विंडो ओपन और करि तब हवे जे झोके से रौशनी का पल्लू सरक गया … उस वजह से पीछे खड़े सलीम की नज़ारे जब निचे चली गयी तोह वह रौशनी की चूचियों की दरार डेल्ह पाया … उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हुआ … अब जिस तरह वह खड़ा था उसका लोढ़ा बिलकुल रौशनी के गलों के पास था .. रौशनी आगे देख रही थी इसीलिए उसे नहीं पता था की सलीम का पंत में उसका टाइट होता हुआ लोढ़ा अब उसके काफी करीब था ..

उसे यह भी नहीं पता चला की ऊपर से सलीम इससके गोरी गोरी मुलायम चूचियों के बीच के दरार को देख प् रहा था …

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सलीम उस नज़ारे को कई सेकंड एन्जॉय करने लगा ..

जब तक की रौशनी ने अपने पल्लू को फिर से एडजस्ट नहीं करि.

सलीम ला लोढ़ा तोह काफी टोघट हुआ था अब तक ..

अब एक स्टॉप पर रौशनी की बाजु में बैठी महिला उठा कर जाने लगी .. रौशनी साइड में सरक गयी विंडो सीट पर.. सलीम निचे बैठने hi वाला था की अचानक एक आदमी रौशनी की बगल वाली सीट में बैठ गया.

सलीम को ग़ुस्सा आया की वह बैठने hi वाला था की यह साला आदमी बैत गया.

रौशनी को भी एक अनजान मर्द के पास में बैठने से उनकंफर्टबले फीलिंग आयी..

वह ऊपर सलीम को देखि .. आँखों से इशारा करते हुए की वह छाती थिन्की सलीम बैठे इस आदमी की जगह पर..

रौशनी फिर उस आदमी से बोली की वह चाहती थी की सलीम जो उसके साथ था वह बैठ जाये.

उस आदमी ने उठने से इंकार किया..

सलीम फिर उस आदमी के कन्धों पर तप करा..

“भाईसाहब मैडम के साथ में आया हूँ .. तुम मुझे बैठने दो यहाँ .”

“ऐबी बुड्ढे तू खड़ा रह अब में बैठा हूँ न तेरे मैडम के साथ.”

भाईसाहब प्लीज उठिये मुझे वहां बैठने दो, मैडम ने आप से कहा था न.”

“अबे बुड्ढे नहीं उठूंगा .. अब तंग न कर.”

सलीम क ोटोः ग़ुस्सा आया “अबे लोदु तेरे को बोलै न की मैडम के साथ आया हूँ बैठने दो मुझे. चल उठ”

“अबे बुड्ढे औकात में रह .. ज्यादा मत उड़ .. में उठूंगा नहीं.”

“आ चूतिये बार बार बुद्धा मत बोल .. तेरे को दिखता हूँ बुद्धा होगा तेरा बाप .. अब उठ मैडम ने रिक्वेस्ट किट hi न … चल अब अच्छे से उठ जा और मुझे बैठने दे”

वह आदमी उठ कर सलीम का कालर ोाकड़ने लगा..

“कालर छोड़ चूतिये … तेरे को प्यार से बोलै तोह सुना नहीं .. फिर से बोलै तोह भी सुना नहीं .. फिस्शल न हो .. ज्यादा मत उड़ ..”

“अरे क्या हो रहा हैं यहाँ … कंडक्टर वहां आ गया”

“साहब देखो बैठा तहत ओह यह बुद्धा तंग करते रहा ..”

“कंडक्टर साहब देखो अब में मैडम के साथ आया हूँ , मैडम ने उसे रिक्वेस्ट किया की वह मुझे बैठने दे .. अब देखो इस उम्र में भी मुझे बैठने से इंकार कर रहा हैं.. आज कल के लौंडे , उनको बुज़ुर्गों से बात करने की तमीज नहीं हैं”

“अरे तू जवान हैं , इस बुज़ुर्ग को बैठने दे .. एक तोह उसके साथ आयी थी मैडम .. चल तू बाद में किसी और सीट में बैठ.. और यह उनका कालर चोर..”

उस आदमी ने कालर छोरा और कंडक्टर वहां से चला गया.

सलीम उस आदमी को घूरने लगा .. “चल अब जा नहीं तोह मेरे अंदर की बुराई न निकल .. बहुत तेरे जैसे लौंडो की पिटाई करा हूँ … अब जा ..”

रौशनी यह सब सन देख रही थी.. एक तरफ से वह सलीम के ऐसे बर्ताव से थोड़ी दरी हुयी थी .. लेकिन दूसरी तरफ वह सोचिन्की बुड्ढे होकर भी काफी स्ट्रांग और बोल्ड हैं सलीम… उसकी ख़ुशी के लिए झगड़ने पर भी आ सकते हैं … रौशनी को कही न कही यह बात इम्प्रेस करि.

अब दोनों बगल में बैठे हुए थे ..

सलीम का लोढ़ा अभी भी थोड़ा टाइट था .. अब रौशनी विंडो के बहार देखने लगी..

सलीम अब रौशनी के साइड में बैठा हुआ रौशनी की गोरी नाज़ुक बाँहों पर नज़र बीच बीच में डालते रहता..

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“रौशनी जी … आप इतनी धुप में भी इतनी फ्रेश कैसी लगती हो … में तोह इस धुप में ढल जाता हु…”

“ऐसे कैच नहीं सलीम जी … बस अब शायद में मॉइस्चराइजर लगाती हूँ इसीलिए स्किन अभी भी इस धुप में भी ज्यादा ड्राई नहीं होतीहैं ..”

“रौशनी जी बुरा न मानिये लेकिन क्या में आपके हाथों की मुलायमता फील कर सकता हूँ ..?”

रौशनी इस रिक्वेस्ट से सलीम को देखती रही ..

“क्यों सलीम जी फील कर क्या मिलेगा आपको ः”

“बस ऐसे hi आपकी मुलायम त्वचा , मेरे इस काळा रफ़ त्वचा से तोह काफी अलग हैं न … सच आप बहुत hi अच्छी लगती हो इस साड़ी में … आपकी सुंदरता खिल उठ टी हैं.”

“ः सलीम जी आप भी न … अच्छा दो सेकंड टच कर सकते हो आप … वैसे आप मर्दो .. आपकी त्वचा तोह रफ़ एंड टफ चाहिए hi”

सलीम को अब रौशनी की बाँहों को चुने का सिग्नल मिल गया था .. वह हलके से उसके मुलायम बाँहों को टच करने लगा … उफ्फ्फ क्या फीलिंग थी .. उसका लोढ़ा अब झटके मारने लगा .. “उफ्फ्फ रौशनी जी इतनी मुलायम हो आप तोह … ववव यह मॉइस्चराइजर से ज्यादा आपकी नेचुरल त्वचा hi ऐसे हैं मुझे तोह लगता है ”

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“सलीम जी हाँ अब औरत होकर हमारी त्वचा नटुरालय बहुत सॉफ्ट होती hi हैं”

“अच्छा फिर भी आपकी कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट हैं .. रौशनी जी सच कहता हूँ मेरी बीवी की भी इतनी मुलायम नहीं थी..”

कुछ सेकंड टच करने की बात हुयी थी लेकिन अब 2 मं हुए थे की सलीम ने रौशनी के बाँहों को अपने हाथों से hi फील करता .. निचे पंत में उसका लुंड झटके मारते रहा.. रौशनी को सलीम के टच से अंदर एक अच्छी फीलिंग महसूस होने लगी …”

उसकी नज़र अब निचे चली गयी तोह सीधे सलीम के पंत के ऊपर hi गयी .. वह अंदाज़ा लगा पायी की सलीम के वहां एक उभर बन गया था .. उफ्फ्फ्फ़ उसी के लुंड का उभर होने का एहसास होते hi रौशनी ने शर्मा कर बोली “बस सलीम जी बहुत फील करा आवे … प्लीज अब छोड़िये मेरी बाँहों को.”

“क्यों रौशनी जी आपको अच्छा नहीं लगा .. अभी तोह आप कुछ नहीं बोल रही थी अब अचानक”

प्लीज सलीम जी छोड़िये न .. प्लीज

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे .. और सलीम ने उसका हाथ चोर दिया..”

रौशनी फिर एक आखरी नज़र सलीम के उभर पर डाली और फिर शर्म से बहार देखने लगी ..

वहां सलीम को पता चला था की रौशनी ने उसके लोडे के उभर को देखि थी .. वह खुश था की धीरे धीरे रौशनी की नज़र उसने अपनी लोडे के वहां केंद्रित करि थी …

दोनों अपने स्टॉप पर पहुँच गए थे . रौशनी उतर गयी और सलीम उतरने hi वाला था की , जो आदमी , जिसके साथ झगड़ा हुआ था वह सलीम को देखने लगा .. और सलीम उसे .. कुछ पल में दोनों के चेहरे पर मुस्कान आयी ..

वह आदमी सलीम के पहचान का hi था .. वह जो हुआ था सब दोनों ने एक्टिंग किया था.. सलीम की चल थी … वह चाहता था की रौशनी देखे की सलीम उसके लिए लड़ाई कर सकता हैं .. उसके लिए एक स्टैंड ले सकता हैं..
 
सलीम जी अब मुझे खाना बनाना हैं .. में रसोई घर में हूँगी”

“हाँ जरूर रौशनी जी आप खाना बनाइये में भी थोड़ा बहार जाकर आता हूँ…”

अब सलीम चला गया बहार कही पर .. रौशनी खाना बनाना में लग गयी .. कुछ 20 मं बाद असलम घर पर आ गया.

“रुकसाना बेगम में आ गया हूँ .. कब तक खाना तैयार होगा”

रौशनी सुबह के इंसिडेंट से अभी भी असलम पर नाखुश थी इसीलिए वह कुछ नहीं बोली.

असलम रसोई घर में आ गया .. “रुकसाना बेगम अभी भी नाराज़ हो मुझे से .. उफ्फफ्फ्फ़ गलती माफ़ कीजिये बेगम.”

“डेल्हिये असलम जी आप बार बार ऐसी गलतियां कर माफ़ी न मांगे .. आप गलतियां hi न करो इससे बेहतर होगा”

“मुझे आपसे नहीं बात करनी .. आप जाइये ..”

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“आखरी बार हैं रुकसाना बेगम , आखरी बार गलती करूँगा .. प्लीज इस बार माफ़ कीजिये …”

रौशनी जवाब नहीं देती बस खाना पकने में लग जाती हैं.

असलम को अब लगता हैं की सुबह की बात रौशनी जल्द से नहीं भूलेगी … वह कुछ सोचता हैं और फिर अपने घुटनो पर जाकर रौशनी को कहता हैं “ीा ऍम सॉरी मेरी रुकसाना बेगम , मुझे माफ़ कर दो , में आप से कभी ऐसे बिना बताइये कुछ नहीं करूँगा, इस बार मेरी बात मान लो”

रौशनी ऐसे असलम को देखती hi रहती हैं .. उफ्फ्फ अब यह क्या कर रहे हैं ..

“असलम जी आप यह क्या कर रहे हो . प्ल्ज़ उठिये …”

“नहीं रौशनी जी मेरी गलती की सजा हैं .. में नहीं उठूंगा .. प्लीज आप मुझे माफ़ कीजिये .. गलती दोहराऊंगा नहीं. “

“असलम जी प्लीज उठिये , मुझे खाना बनाना हैं , बस यह बचकाने हरकतें न करे आप”

“नहीं में नहीं उठूंगा .. मुझे माफ़ करो रुकसाना बेगम”

“अआप्को सजा hi चाहिए न ठीक हैं , ऐसे hi रहिये .. जब तक में खाना नहीं बनती हूँ तब तक आप रहिये ऐसे hi कोई प्रॉब्लम नहीं मुझे”

और रौशनी खाना बनाना में फिर से लग जाती हैं.

अब असलम वैसे hi घुटनो पर था .. अब हु क्या करेगा , रौशनी पर इस से कुछ फरक hi नहीं पड़ा ..

वह चुप चाप घुटनो पर रहा .. वहां रौशनी खाना बनती रही..

असलम ऐसे घुटनो पर था और उसे रौशनी की कमर दिखाई दी .. उसकी चुकनी गोरी कमर … वह उसकी कमर देखता रहा .. उफ्फ्फ क्या कमर थी .. रौशनी जी के बड़े सूचियां और गदरायी बदन पर उसके पतले कमर का तोह वह दीवाना बन चुक्का था .. वह चाहता था की वह कमर छुए और उसे कास कर दबोचे … रौशनी की कमर पर पसीने के कुछ बूँद दिख रहे थे … (अहह मन कर रहा हैं इसे चाट लूँ उफ्फ्फ क्या माल हैं यार …. आज चुम्मा भी लिया था उसके होठों पर .. उफ्फ्फ गुलाबी होठं हैं नाज़ुक से ममम)

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कुछ 15 मं बाद अभी भी असलम घुटनो के बल था .. उसे देख रौशनी की थोड़ा बुरा लगा .. वह सच में वहां से उठ hi नहीं रहा था ..

“असलम जी आप को में नहीं माफ़ करने वाली .. आपको ऐसे hi रहना पड़ेगा …”

“ठीक हैं रुकसाना बेगम , अब गलती की थी तोह सज़्ज़ा भुगतूँगा .. “

रौशनी को अब बुरा लग रहा था … असलम ने गलती तोह की थी लेकिन उसके चेहरे को देख उसे लग रहा था की असलम सच में सॉरी थे … कुछ और 5 मं बाद रौशनी, असलम को देख बोली “असलम जी आप उठिये .. आपको माफ़ नहीं किया लेकिन आप पर ग़ुस्सा भी नहीं हूँ .. बस आप ऐसे फिर से ऐसी चीज़ें करोगे तोह फिर में चली जाउंगी ..

असलम बोलै “रुकसाना बेगम में फिर से नहीं करूँगा .. आपके पेर्मिशन बिना कुछ नहीं करूँगा”

“अच्छा ठीक हैं .. आप अब जाकर फ्रेश हो जाओ और फिर खाना परोसती हूँ .. वैसे आज 4 बजे एक पेस्ट कण्ट्रोल वाला आएगा और घर का पेस्ट कण्ट्रोल का काम करेगा ठीक हैं”

“ओह सच .. शुक्रिया रुकसाना बेगम , घर पर कितने दिनों से पेस्ट कण्ट्रोल करवाना था .. तुम बहुत अच्छी हो ..

“असलम जी जाओ फ्रेश हो जाओ खाना तैयार हैं परोसूँगी.

असलम चला जाता हैं .. रौशनी मन में सचति हुयी (लगता हैं असलम जी को पता चला की वह ऐसे चीज़ें नहीं कर सकते … लगता हैं अब उनका बर्ताव बेहतर होगा”

असलम फ्रेश होकर बहार आता हैं और रौशनी टेबल पर खाना परोस रही हैं .. सलीम अब तक नहीं आये हुए थे.

“रुकसाना बेगम बहुत भूक लगी हैं मुझे .. उफ्फ्फ्फ़ बहुत hi स्वादिस्ट खाना लगता हैं आज भी .. प्लीज तुम भी बैठो और साथ में खाना खाएंगे हम”

“लेकिन सलीम जी का क्या .. वह कब आएँगे”

असलम को थोड़ी सी जलन होते हुए “रुकसाना बेगम में हूँ न , हम दोनों खाना खाएंगे , सलीम आइए तब तुम फिरसे उन्हें परोसना .. मेरी बेगम मेरे साथ hi खाना खा लेना.

रौशनी चाहती थी की सलीम भी आये .. “असलम मियां आप शुरू करिये में रूकती हूँ उनके लिए”

“रुकसाना बेगम आप के साथ लंच करनी हैं , में भी रुकूंगा उसके लिए फिर”

दोनों रुकते हैं लेकिन 15 मं तक सलीम नहीं आता ..

“रुकसाना बेगम उन्हें लेट हो रहा होगा .. आप हमारे साथ लंच करिये न ..”

“ठीक हैं चलिए”

दोनों खाना ख़तम करते हैं .. उस दौरान सलीम भी आ जाते हैं .. फिर वह बैठ उसे रौशनी खाना परोसती हैं .. सब का खाना होते hi तीनो आराम करने कमरों में जाते हैं ..

अब शाम के 4 बज चुके हैं .. अफ़ज़ल और एक आदमी उनके वहां आता हैं और पेस्ट कण्ट्रोल का काम शुरू करते हैं ..

धीरे धीर सब घर का पेस्ट कण्ट्रोल होता हैं … फिर अफ़ज़ल बोलता हैं “हु कर्मा हैं न वहां थोड़ा और स्ट्रांग पेस्ट कण्ट्रोल करना पड़ा .. “

हु कमरा था जहाँ रौशनी सोइ थी रात में..

वहां पर आज का दिन वह स्मेल बहुत स्ट्रांग रहेगा इसलिए वहां आज रात कोई नहीं रह सकता .. कल सुबह से हु कमरे में रह सकोगे ..

(यह सब जान बुझ कर सलीम ने कहा था अफ़ज़ल को बोलने .. उस मदत के बदले वह उसे 500 रस देने वाला था)

रौशनी अब दुविधा में पद गयी .. अब अगर वहां हु नहीं सो पाएगी तोह फिर एक हिम कर्मा था सोन ेके लिए रात में .. अब वहां तोह सलीम और असलान दोनों सोते हैं .. अब क्या करे..

अफ़ज़ल वहां से चला जाता हैं …

रौशनी अब सलीम से कहती हैं “सलीम जी लेकिन वहां पर तोह में hi सोती हूँ , अब किऐसे करे .. सोन ेके लिए एक hi कर्मा हैं. “

रौशनी जी क्या करे , अफ़ज़ल ने hi बोलै हैं न आप के सोन ेके कमरे में आज रात कोई नहीं रह पाएगा … अब आपको तोह हमारे कमरे में hi सोना पड़ेगा .

“लेकिन कैसे … आप दोनों तोह उस एक बिस्तर पर सोते हो .. वहां कमरे में , में कहाँ सोऊंगी.”

असलम बोलै “रुकसाना बेगम आप और में सोएंगे न बिस्तर पर .. सलीम निचे सोएगा ..”

असलम मियां. आप तोह बात हो न करिये” रौशनी बोली. असलम को तीखी नज़र से देख.

सलीम बोलै “रौशनी जी ठीक हैं आप ऊपर सोइये और हम दोनों निचे सो जाएंगे”

“सलीम जी बहार हॉल में भी आप सो सकते हो न ..”

“रौशनी जी बहार बहुत मच्चर होते हैं . काट काट कर बदन लाल कर देंगे .. प्लीज हम निचे सोएंगे न आपको बिलकुल डिसट्रब नहीं करेंगे क्यों असलम”?”

“हाँ रुकसाना बेगम आप ऊपर सो जाइये में और सलीम निचे सो जाएंगे .. हम आपको कोई तकलीफ नहीं देंगे ..”

रौशनी कुछ सोचती हैं .. अच्छा ठीक हैं लेकिन असलम जी आप सो जाओ रात में तकलीफ न देना”

रुकसाना बेगम नहीं दूंगा , आपसे कहा न गलतियां नहीं करूँगा , आपके कहे बिना कुछ भी नहीं.”

फिर तैर हो जाता हैं की रौशनी उस कमरे में बिस्तर पर सोएगी और निचे दोनों .

सलीम अपने दोस्तों के साथ बहार गए थे .. जब से रौशनी आयी थी वह दारृ पिए नहीं थे .. उन्हें दारु पिलाने उसके दोस्त उसे बहार कही ले गए थे .. (यह सब रौशनी की नहीं पता था)

अब घर पर बस असलम और रौशनी hi थी. अब रौशनी खाना बनाए के लिए रसोई घर में चली गयी थी.

कुछ देर बाद असलम आये .. और वह सूधे जाकर ोीचे से रौशनी से चिपक गया “रुकसाना बेगम आज क्या हैं खाने में ?..

“असलम मियां आज में पुलाओ बना रही हूँ… आपको पुलाओ पसंद हैं न … उसके साथ में सब्ज़ी और चपाती बनाउंगी. ”

“वह बढ़िया रुकसाना बेगम” असलम के हाथ अब रौशनी की कमर पर थे .. “

“उफ़ असलम जी आप फिर से शुरू हुए … ममम छोड़िये न …”

“रुकसाना बेगम प्लीज हुग तोह करने दो न .. उतना तोह मेरा हक़ हैं न मेरी बेगम पर … बस हुग hi तोह हैं”

“अच्छा ठीक हैं …” रौशनी सोचती हैं 9 बस एक हुग से क्या होगा .. (उन्हें ऐसी चीजिएं करने दूंगी तोह शायद ज्यादा कुछ न करे .. )

असलम अब उसे कास कर पकडे हुए थे , रौशनी के चूतड़ अब असलम के झंघों पर ठीके हुए थे … असलम पीछे से और थोड़ा सा आगे दबाते हुए “रुकसाना बेगम वैसे तुम पुलाओ कितनी अच्छी बनती हो .. आज भी बड़ी स्वादिष्ट होगी ..”

“हाँ बनाउंगी … आपको अच्छी लगेगी …”

“रुकसाना बेगम वैसे एक बात कहु .. आप की सुगंध बहुत अच्छी हैं .. फूलों जैसी आपकी परफ्यूम बहुत hi अच्छी होगी.”

“शुक्रिया असलम जी .. “

रौशनी को असलम की गरम साँसे अपनी गर्दन पर महसूस होने लगी … “

“असलम तोह पीछे से उसकी खुशबु सिंह रहा था .. खूब सूंघते हुए उसका लोढ़ा टाइट होने लगा .. अब उसका लोढ़ा रौशनी की चूतड़ों पर टच करने लगा .. रौशनी को चुंबन मेहुस

“हाँ रुकसाना बेगम , ाचा बताये में कैसी मदत करू..”

“असलम जी मुझे खाना बनाने दीजिये न, बहुत टाइम हुआ हैं , जल्द से मुझे खाना बनाना दीजिये”

“उफ़ रुकसाना बेगम हर बार कुछ न कुछ आ hi जाता हैं हमारे ऐसे पलों के बीच …..” असलम एक आखिर बार रौशनी की कमर को मसलते हुए और अपने उभरते लोडे को रौशनी की चूतड़ों पर दबाते हुए उसे अलग हो जाता हैं .. उस आखरी दबाव से तोह रौशनी की अहह hi निकल जाती हैं …

रौशनी के बाल बिखरे हुए थे .. उसके माथे पर फ्लौर लगा हुआ था … कमर पर पसीना और उसकी बाँहों पर भी … असलम तोह रौशनी को ऐसे देख उसका लोढ़ा झटके मरने लगा .. उफ्फ्फ्फ़ ऐसी भी मस्त दिख रही थी रौशनी .. एक मुलायम नाज़ुक सी गोरी डॉल जैसे.

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रुकसाना बेगम आप खाना बनाते वक़्त बेहद पसंद हो .. आप मेरा कितना ख्याल रखती हो. तुम दुनिया से सबसे खूबसूरत बेगम हो” ..

“असलम जी आप तोह बस मेरी कसीस भी छोटी चीज़ की भी तारीफ करते हो … इतना प्यार करते हो अपनी बेगम से”

“रुकसाना बेगम आप हो hi ऐसी , आप को जीतनेय टैरिफ दे उतने काम हैं”

और रही बात प्यार की , रुकसाना मेरी बेगम तुम प्यार करने डौगी तब न … प्यार करने डौगी तोह उफ्फ्फ्फ़ तुम मेरी hi हो जाओगी हमेशा के लिए …

“अच्छा ऐसे हैं क्या , देखते हैं आप कितना प्यार करोगे अपने बेगम के साथ.

“ओह रुकसाना बेगम तुम मुझे पूरी तरह से तुम्हारे साथ प्यार करने डौगी उफ्फ्फ , बाद में न नहीं कहो … में इतना प्यार करूँगा मेरी बेगुमसे .. उसे कास कर गले लगाऊंगा . किस्सेस भी दूंगा .. मेरी बेगम मेरी जान तुम मुझे होठों पर किस करोगी न ममम”

असलम जी फिर से किश वाली बात …”

“रुकसाना बेगम तुम चाहती हो में प्यार करू आपसे और आप हैं की होठों पर चूमने भी नहीं देती या डौगी .. ये तोह न इंसाफ़ी हैं”

रौशनी समझ गयी की असलम जी ने बातों बातों में उसे उलझाया था … बहुत स्मार्ट हैं असलम .. बहुत hi समेत .. यह सोचकर रौशनी मन में hi मुस्कुरायी …

“असलम जी आपसे तोह बातें करना hi … उफ्फ्फ्फ़ अब मुझे खाना बनाना हैं .. ..”

असलम का लोढ़ा काफी टाइट हो रहा था … उसे तोह रौशनी अपने पलग पर .. उसके बाँहों में चाहिए थी … वह रौशनी को अपना बनाना चाहता था , उसके गदरायी बदन के साथ खेलना चाहता था … रौशनी जब खाना बनाए में मग्न थी तब असलम ने अपने उभरते लोडे को पंत के ऊपर से खुजलाया .. (अह्ह्ह तेरी आदाओं से hi मेरा लोढ़ा खड़ा होयता हैं जानू , सच में इस लोडे से चुड़ोगी तोह उफ्फ्फ तेरे छूट का सारा रास निकल दूंगा मेरी जान ) असलम यही ख्यालों में खोया वहां से चलाया गया .

अब खाना बनाकर रौशनी ने उसे बुलाया … सलीम रात के वक़्त फिर से नहीं दिख रहे थे रौशनी को … अब असलम और रौशनी साथ खाना खाने लगे.

डिनर ख़तम होते hi असलम अपना हाथ धो कर वाशरूम चला गया और रौशनी वहां प्लेट सिंक में रख साफ़ करने लगी.. सब होने के बाद सलीम आ गया … वह पूरी तरह से दारु के नशे में था …

रौशनी सलीम को इतने दारु के नशे में धुत खुश नहीं थी

“सलीम जी आप इतनी दारु पि कर आये हो उफ्फ्फ “

“रौशनी जी पिने दो न , उससे hi रातों का माहौल बनता हैं … मेरिट ओह बेगम भी नहीं , न असलम जैसे मुझे आप में मेरी बेगम दिखती हैं .. मुझे पिने दो …”

“सलीम जी नहीं में घर पर हूँ न अब आप इतनी नहीं पि सकते .. हाँ थोड़ी सी चलेगी लेकिन देखो आपको अच्छी तरह से चलना भी नहीं आ रहा हैं ..”

“चोर न रौशनी .. तेरे को क्या में जब चाहे पिऊंगा …”

तब असलम आ जाता हैं .. “सलीम जी आप सच में बहुत पि रखे हो चलो अब कमरे में जाओ चलो .. आअज रात मेरी बेगम रुकसाना हमारे कमरे में रहने वाली हैं न आपको पता था फिर भी आप पि कर आये हो. “

“असलम रहने दे न , यह तेरी बेगम थोड़े hi हैं .. पता हैं न हम …. …. “ पहले की सलीम कुछ बोलता असलम उसे पकड़ कर कमरे में ले जाता हैं … वहां रौशनी सोच में पद गयी की यह सलीम जी क्या कहना चाहते थे .. लेकिन यह सोच कर की वह नशे में धुत बुदबुदा रहे होंगे वह उस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देती.

अज्ज रात को वह साड़ी में hi सोने वाली थी क्यूंकि उसे उन दोनों के कमरे में hi सोना था .. अब उसे थोड़ा डर था की सलीम ऐसे नशे में रात को कुछ कर बैठे तोह , ये जब मर्द इतना पिटे हैं उन्हें कुछ बौंडरीएस नहीं पता होती .. वैसे असलम जी का एक अच्छी बात हैं की वह यह दारु पिटे नहीं (असलम को सलीम जैसे दारु पिने की आदत वैसे नहीं थी .. थोड़ा एक दो पेग पिटे थे लेकिन कभी ऐसे इतनी पीकर नहीं आते थे या घर पर भी इतनी नहीं पिटे थे )

रौशनी अभी भी थोड़ी सेहमी थी की दारु के नशे में सलीम कुछ कर न बैठे इसलिए वह असलम के पास गयी.

“असलम जी मुझे थोड़ी सी टेंशन हैं , सलीम जी इतने पिए हैं की नियंत्रण खो कर कुछ उलटी सीधी हरकत करे तोह .. क्या करे फिर”

असलम का दिमाग दौड़ने लगता हैं ..”रुकसाना बेगम एक काम कर सकते हैं .. में आपके साथ बिस्तर पर सोऊंगा .. अगर सलीम नशे में उलटी सीधी हरकत करते हैं तोह में आपकी तुरंत मदत कर पाउँगा …”

रौशनी अब दुविधा में पड़ी थी .. वह कैसे असलम को अपने साथ सोने दे सकती हैं .. लेकिन अगर सलीम ने नशे में कुछ किया तोह फिर …??

“असलम जी आप कैसे सो सकते हैं ऊपर ेरे साथ बिस्तर में .. ?”

“नहीं असलम जी आप निचे hi सोइये .. अगर सलीम जी कुछ करते हैं तोह आपको कहूँगी वैसे भी अआप निचे hi सोये होंगे न “

“ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप ठीक समझे”

अब सलीम तोह तुरंत सो जाता हैं .. अब असलम और रौशनी भी सो जाते हैं.

अब रात के कुछ 2 बजे हुए थे … रौशनी की आँखें खुलती हैं .. उसे टॉयलेट जाना होता हैं .. वह आधे नींद में hi वहां तक जाती हैं .. अब टॉयलेट का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था … और अंदर असलम टॉयलेट कर रहा होता हैं.. रौशनी दरवाज़े को पुश करती हैं की एकदम से वह असलम को अंदर देखती हैं .. अब असलम टॉयलेट में पिशाब करने गया था और उसका मोटा लुंड उसके हाथ में लिए वह पिशाब कर रहा होता हैं ..

दरवाज़ा खुलते hi दोनों की नज़र एक दूसरे पर जाती हैं .. दोनों चँउके हुए एक दूसरे को देखते हैं .. तब रौशनी की नज़र निचे चली जाती हैं सीधे असलम के लुंड पर .. उसका आधा सख्त लुंड अभी भी 5 इन का लटक रहा था … रौशनी वही देखे जा रही हैं .. उसके मोठे लोडे को देखते रहती हैं …

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अब ऐसी स्तिथि थिन्की असलम अपने लोडे को हाथ में लिए खड़ा था और रौशनी की नज़र असलम के लोडे पर थी …

रौशनी को ऐसे अपने लोडे को देखते हुए पाकर , असलम ला लोढ़ा और सख्त होने लगा था. रौशनी अब अपने आँखों के सामने उनके लुंड को और सख्त होते देख रही थी .. अब उसका लुंड पूरी ोुकत में आ चूका था .. पूरा 8 इन का मोटा लुंड था उसका ..

रौशनी की नज़र वहां से हैट hi नहीं रही थी … बहुत दिनों बाद लुंड देखा था उसने .. वह भी अब उसके सामने के मोटा कला लुंड था .. असलम का कट लुंड था इसलिए उसके लुंड का सर एक पहाड़ी ालो जैसे फुला हुआ था .. रौशनी को अपनी अंग में कुछ करंट जैसे महसूस हुआ .. फिर वह ऊपर असलम के तरफ देखि .. और फिर चेरा पीछे मोड़ लिया ..

अब बिना कुछ बोले असलम ने अपना लोढ़ा अपनी पंत में दाल वहां से निकल गया ..

रौशनी वही बहार कड़ी थी … असलम को जाते देख वह तुरंत टॉयलेट में चली गयी. उसे भी जोर से पिशाब लगी थी.

ोिशाब के बाद वह सोचने लगी (उफ़ अब में कैसे जाओ बहार , उनका लुंड का नज़ारा देखने के बाद उनसे कैसे बात कर पाऊँगी .. उफ्फ्फ कैसी मुसीबत हैं .. रौशनी के दिमाग में वह कल मोटा लुंड फिर से आ गया .. असलम इतने बुड्ढे होकर भी उनका इतना मोटा और बड़ा कैसे था … उफ्फफ्फ्फ़ इतना मोटा और बड़ा लोढ़ा उफ्फ्फ्फ़ …)

रौशनी की छूट में उस लोडे को देख कुछ होने लगा था .. ऐसे फौलादी लुंड देख की औरत की छूट में हलचल नहीं होगी .. अब रौशनी टॉयलेट के बहार गयी.

असलम बहार hi खड़ा था

“रुकसाना बेगम तुमने नॉक करना चाहिए था न .. ऐसे hi चली आयी अंदर.”

“असलम जी आपने भी तोग टॉयलेट का दरवज़ा लॉक नहीं करा था अंदर से …” रौशनी असलम को देख नहीं प् रही थी शर्म के मारे .. वह साइड में hi देख उनसे बात कर रही थी.”

“रुकसाना बेगम तुम मेरे तरफ देखो न .. आपने तोह बहुत बार देखा हैं मेरा लोढ़ा आज ऐसे क्यों”

(रौशनी मन में सोचती हुयी .. असलम जी में रौशनी हूँ तुम्हारी बेगम रुकसाना नहीं … )

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“नहीं आपका लुंड .. मतलब आपका वह चीज़ उफ्फ्फ अस्काम जी आप अंदर से दरवाज़ा लॉक करना चाहिए थे”

“रुकसाना बेगम मुझे जोरों से पिशाब लगी थी … मुझे क्या पता आप को भी उसी समय पिशाब लगे गई ..”

अब ये पिशाब वाली बातों से तोह रौशनी और शर्मा रही थी .. लुंड .. पिषाब जैसी बातें वह एक काळा बुड्ढे के साथ कर रही थी …

“असलम जी बस अब मुझे सोने दीजिये कल सुबह जल्दी उठना हैं.”

“रुकसाना बेगम ठीक हैं .. कल बात करेंगे .. चलो अभी हम सो जाते हैं”

रौशनी चुप के से एक आखरी नज़र असलम के लुंड के वहां डालित हैं और फिर बिस्तर पर चली जाती हैं.

असलम सोचने लगा (अबे क बार तोह देख hi लिया हैं मेरे लोडे को रौशनी ने .. अब वह इमेज तोह फिट कर दी इसके दिमाग में .. अब आएगा मज़्ज़ा रौशनी मेरी जान)

असलम अपने लोडे को मसलते हुए रौशनी की तंग चूतड़ों को हिलते देखता हैं ..

रौशनी अपने आँखें बंद करती हैं तब उसे बस असलम के मोठे लुंड का दृश्य hi दिखने लगता हैं .. है राम ऐसे मोठे लुंड को तोह हु पहली बार देखि थी उफ्फ्फ. अनजाने में उस सपने के दौरान रौशनी का हाथ उसकी छूट की वहां जाता हैं और उसकी छूट को चुने लगती हैं …..

निचे सोया असलम भी सो नहीं प् रहा था .. उसे तोह बस रौशनी की नज़र उसके लोडे पर थी उसी की याद में था.. अपने लुंड को मसल रहा था …

अब कुछ मं बाद असलम जिसे अभी भी नींद नहीं आ रही थी वह उठ कर रौशनी को सोते देखने लगा .. उसके होठों पर , उसके बड़े चूतड़ों पर , उसके मुलायम से पीठ पर जो साड़ी के ब्लाउज से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे .. और रष्णि की ज़ुल्फ़ों पर … (अहह मेरी रानी तेरी लूंगा तब बहुत मज़े करूँगा ममममम)

उसका कमीना दिमाग अब तेज़ी से चलने लगा .. वह उठ गया और धीमे पाँव से रौशनी के चेहरे तक जा खड़ा हुआ .. उसने अपनी पंत निचे करि और अपने मोठे लोडे को बहार निकल कर रौशनी के चेहरे के सामने हिलने लगा …. मन में (रौशनी मेरी जान ये ले मेरा लोढ़ा .. तेरे लिए hi तोह टाइट हो जाता हैं … उफ्फ्फ काश अभी इन होठों के बीच दाल मेरे लुंड को चुसवा लूँ ममममम..)

थोड़ा और बोल्ड होते हुए वह अपने अब सख्त लोडे को रौशनी के होठों के बिलकुल करीब लेकर गया …. इतना करीब की बस 1 इंच की दुरी hi थी … और उसके लुंड को हिलने लगा धीरे से … उसके लुंड से उसका प्रेकम निकलने लगा …. असलम अब और बोल्ड हो गया … वह अपने लोडे के प्रेकम को रौशनी के मुँह से टच करवाया … उसका थोड़ा प्रेकम जाकर रौशनी के होठों पर फ़ैल गया …

थोड़ी देर वैसे खड़े रह कर उसे महसूस हुआ की रौशनी कुछ हलचल करने वाली हैं .. झट से अपने पंत में अपने लोडे को दाल वह अपनी जगह पर जाकर लेट गया .. उसका दिल थोड़ा धधकने लगा .. उफ्फ्फ्फ़ अगर रौशनी जग जाती तोह फिर …..

वहां रौशनी नींद में थी लेकिन उसे महसूस हुआ की उसके होठों पर कुछ गीला सा हैं .. वह नींद में hi अपनी जीभ से उसे चाट ली .. (वह और कुछ नहीं बल्कि असलम के प्रेकम को चाट रही थी जी उसे पता नहीं था)… उस प्रेकम को उसने जीभ से पूरा चाट लिया था अनजाने में…

असलम उसकी हरकत से मन में मुस्कुरा रहा था .. (ममम मेरी जान तूने असलम के लोडे के निकलते प्रेकम को छठा लिया हैं .. अब देरी नहीं जब तुझे मेरे मोठे काळा लोडे से निकला हुआ पूरा सफ़ेद माल पिलाऊंगा ,

)

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अब सुबह हो गयी .. रौशनी हमेशा की तरह 7 बजे hi उठ गयी थी … आज उसने पहले hi नहाने का डीडे किया था .. दोनों सलीम और असलम सोये थे .. असलम को देख उसे फिर से कल रात की इंसिडेंट याद आयी .. वह यह भी सोच रही थी की उसके मुँह से ये थोड़ी सी स्मेल क्यों आ रही हैं (ालसम के प्रेकम की स्मेल थी)

खैर फिर वह नहाने चली गयी … हीटर ों कर वह कुछ देर सोफे पर पानी को गरम होने तक बैठी रही. फिर 10 मं बाद वह अंदर गयी तोह उसने देखा की फिर से दोनों ने अपनी कच्छियों को वहां hi रखा था .. उसे देख लेकिन इस बार उस असलम के लोडे की याद आयी और सलीम के उस दिन के लुंड के उभर की .. उफ्फ्फ इसीलिए इनकी चड्डियाँ और बोसेर्स साइज में बड़े थे .. दोनों के बड़े मोठे लुंड थे उसमें .. ऐसे सोच रौशनी सिहर उठी .. )उफ्फ्फ यह क्या सोच रही हूँ में )..

फिर रौशनी नहाने लगी … उसकी आँखें बंद होती और असलम का मोटा कला लुंड उसके ख्यालों में आता .. (उफ्फ्फ ऐसे बुड्ढे की इतनी बड़ी कैसी हो सकती हैं .. इतना कला और इतना मोटा था उनका लुंड .. लुंड की अस पास काफी बाल भी थे .. उफ्फ्फ्फ़ )

रौशनी भी आख़िरकार औरत थी .. ऐसे मोठे लुंड को देख उसकी छूट में भी हलचल होने लगी … .. उसकी ऊँगली ढीरे से वहां चली गयी और उसकी क्लीट को चुने लगी … थोड़ी सी वहां पर वह अपनी उँगलियों से अपनी छूट की क्लीट दबाने लगी .. असलम का लुंड उसके दिमाग में घूम रहा था … कुछ सेकंड ऐसे कर एकदम से उसे एहसास हुआ की वह क्या कर रही थी ..(उफ़ रौशनी तू यह क्या कर रही हैं यह सब निकल अपने दिमाग से की)

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अब नाहा कर वह अपने कमरे में गयी .. अब वहां पेस्ट कण्ट्रोल की स्मेल नहीं आ रही थी .. वह सोची की अब आज से तोह वह अकेले यहाँ सो सकेगी …

रौशनी ने आज स्लीवलेस ब्लाउज पहना .. पीछे से बस एक स्ट्राप से बंधा हुआ … अंदर कॉटन की ब्रा और पंतय … अपने बालों को वह ऊपर बाँध कर फिर रसोई घर में चली गयी.

रौशनी नाश्ता बना hi रही थी की पीछे से असलम ने उसे जकड लिया “गुड मॉर्निंग रुकसाना बेगम … कल रात कैसे कटी ….”

रौशनी मन में सोचते हुए (अरे कल तोह आपका लुंड देखा था .. उफ्फ्फ और पूछ रहे हैं कैसी कटी रात )

“असलम जी आपको पता हैं न कल रात क्या हुआ ,….”

“रुकसाना बेगम अरे उसे भूल भी जाओ .. गलती हुयी थी .. अब कहाँ उस पर इतना सोच रही हो .. क्यों राटा को उसके बारे में तुम सोच रही थी क्या?”

“नहीं नहीं ऐसे कुछ नहीं बस … आप प्लीज मुझे छोड़िये ….”

“अरे रुकसाना बेगम सुबह सुबह प्यार करने दो न …” पीछे से असलम अपने हिप्स को आगे दबाकर अपने लोडे को रौशनी की चूतड़ों पर दबाता हैं..”

“असलम जी यह क्या कर रहे हो छोड़िये न .. प्लीज ..”

असलम का लोढ़ा उसकी चटादो पर दबकर सख्त होने लगा … उसका लुंड एक झटका मार सीधे रौशनी की चूतड़ों से टकराया ..

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“आउच .. असलम जी आपका हु पीछे .. उफ्फ्फ प्लीज आप जाइये न … छोड़िये मुझे …”

असलम अब रुकने नहीं वाला था वह काफी हॉर्नी था कल रात के इंसिडेंट से और उसने जो अपने प्रेकम को रौशनी की होठों पर लगाया था उससे ..वह और एक बार रौशनी को दबोच कर अपने सख्त लोडे को फिर से उसकी चूतड़ों पर दबाया…

पहले भी असलम के लुंड का चुंबन वह महसूस करि थी लेकिन अब जब उसे पता चला था की उसका लुंड इतना कला और मोटा हैं .. अब उसे उस चुंबन से और भी शर्म आने लगी थी …. इतना मोटा कला लोढ़ा उसकी चूतड़ों पर डाब रहा था .. बिना उसके जाने उसकी छूट में भी हलचल होने लगी थी ..

“मेरी बेगम .. मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ क्या बदन हैं तुम्हारा … मममम मन करता हैं ऐसे hi लपेटे राहु ममम”

“असलम जी प्लीज हटिये न .. आप का हु पीछे से डाब रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ प्लीज हटिये …”

“अरे रुकसाना बेगम क्या डाब रहा हैं खुल कर बताओ न मेरी जान”

“असलम जी आपका .. हु आपका …. अप्पके लुंड असलम जी वह डाब रहा हैं पीछे से प्लीज हटिये उनकंफर्टबले फील हो रहा हैं ..”

असलम आज तोह इसे जितना हो सके उतना खींचने वाला था .. आज वह रौशनी की सुनने नहीं वाला था ..

“ारीय रुकसाना बेगम तुम जैसी जान होगी तोह किसका नहीं खड़ा होगा लोढ़ा .. मममम क्या चूतड़ हैं तेरी मममम, रहने दो न मज़्ज़ा आ रहा हैं उफ्फ्फ क्या मस्त हो तुम उफ्फ्फ्फ़”

रौशनी ने अपने दम से असलम से खुद को चुरा ली … फिर असलम को देख उसे डाटने लगी “देखिये असलम जी आप ऐसे नहीं कर सकते .. आप… रौशनी की नज़रें बात करते करते असलम की बी सख्त लोडे पर जाता हाँ .. उफ्फ्फ्फ़ उसे उस काळा लोडे का उभर इतना बड़ा सा … मममम

“रुकसाना बेगम क्या देख रही हो , लगता हैं बहुत पसंद आने लगा हैं मेरा लोढ़ा … तेरा hi तोह हैं न तू hi मेरी बेगम हैं ..”

“असलम जी ऐसी बातें न करिये .. आपको पता हैं न … हमनें कल बात किट hi …”

“कौनसी बात .. मुझे कुछ याद नहीं . रुकसाना बेगम तुम मेरी हो … ऐसे चीज़ों पर इतना ग़ुस्सा न करो .. बस हुग तोह कुया था और क्या .. अब निचे मेरा लोढ़ा टाइट हुआ तोह में क्या करू … तुम हो hi इतनी हॉट और हुस्न की पारी जैसे ..”

रौशनी फिर से असलम को देखती हैं “असलम जी ऐसे करते रहोगे तोह में जाउंगी “

“अच्छा चली जाना … पहले भी चोर के गयी हो .. अब फिर से चोर कर जाओ मुझे … मेरी किस्मत hi ख़राब हैं .. क्या करे मेरी बेगम दो बार मुझे चोर कर चली जाएगी …” असलम फिर वहां से चला जाता हैं … और रौशनी वही रसोई घर में कड़ी उसे जाते देखती हैं जाते हुए.

रौशनी को समझ नहीं आ रहा था की अब हु क्या करे … कुछ सेकंड बाद वह फिर से नाश्ता बनाना में लग गयी और नाश्ता टेबल पर रख दोनों को नाश्ता करने बुलाई.

कुछ देर बाद पहले सलीम आये ..

“रौशनी जी माफ़ी चाहता हूँ , कल थोड़ा ज्यादा hi पि ली थी मैंने …. आपको ज्यादा तकलीफ नहीं दी न .. ी ऍम सॉरी”

“सलीम जी आपके ऐसे पीना अच्छा नहीं हैं सेहत के लिए .. आप को दारू काम hi करनी होगी .. और अगर करनी हैं तोह मुझे बता कर जाओ .. हु आपके दोस्त बस आपको पिलाने ले जाते हैं .. ऐसे दोस्त अचे नहीं होते हैं.”

“रौशनी जी अब क्या करे … आदत सी हो गयी हैं .. उसे बंद एक ऍम करना भी काफी मुश्किल हैं ..”

“सलीम जी देखते हैं आपकी मदत करुँगी में , अब आप प्लीज नाश्ता करिये मुझे अब ंगो जाना हैं .. 4 दिन में इवेंट हैं .. तैयारी बहुत करनी हैं …”

“रौशनी जी आज आप तोह जलवा लग रही हो … सच में आज सबसे खूबसूरत लग रही हो तुम .. कोई देखेगा आपका दीवाना होगा …”

“सलीम जी बस कीजिये .. आप इतने टैरिफ करते हो .. शर्मा देते हो कभी कभी .. चलो नाश्ता करिये मुझे जाना हैं.”

सलीम रौशनी की गदरायी बदन को देखते रहता हैं , रौशनी मुद कर जाने लगती हैं तब वह उसके हिलते चूतड़ों को देखे जाता हैं .. आज उसने अपने बालों को ऊपर बंधा था इसलिए उसकी पूरी गोरी मखमली पीठ दिख रही थी .. ऐसे नज़ारे से तोह उसका लोढ़ा बहुत टाइट होने लगा था .. (रौशनी मेरी कब बनोगी जान … तुझे देख हमेशा लोढ़ा टाइट होता हैं … जल्द से इस लोडे का दीवाना बनाऊंगा तुझे ममम)

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रौशनी अब काम पर लग जाती हैं , उसे बहुत काम था आज .. इवेंट भी 4 दिन में hi आने वाला था .. अब उसे इस इवेंट के लिए असलम की मदत भी लेनी थी लेकिन कल रात और आज सुबह के बाद वह कैसे उनके साथ इस इवेंट का डिस्कशन करेगी .. उन्हें देल्हती हैं तोह उनके मोठे लुंड का hi दृश्य उसके नज़रों के सामने आता हैं .. उफ्फफ्फ्फ़ ..

आअज रौशनी को चार बजे इवेंट के स्पॉन्सरशिप के लिए एक कंपनी जाना था … वह एक रिक्शा पकड़ कर वहां चली गयी .. मीटिंग अच्छी हुयी और वहां से वह निकलने वाली थी की उसने रास्ते के बिलकुल सामने एक जाना पहचाना दृश्य देखा …

वह और कोई नहीं बल्कि रिक्शा वाले रमेश थे … रौशनी उन्हें देख खुश हुयी .. आखिर में इतने दिनों बाद वह दिखे थे …

रौशनी रोड क्रॉस करके उस रिक्शा स्टैंड चली गयी ..

पीछे से रमेश के कन्धों पर तप करते हुए “रमेश जी बहुत दिनों बाद …”

रमेश भी रौशनी को देख बहुत खुश होता हैं … “रौशनी जी कैसी हो आप .. हाँ बहुत दिन हो गए मिले हुए”

“रमेश जी अब आप hi गायब हुए थे .. उस दिन बाद दो दिन आपका सुबह इंतेज़्ज़र करि थी लेकिन आप आये नहीं “

“रौशनी जी उस शाम के बाद में आपसे कैसे मिलु बात करू सोचते रहा .. कैसे आपको अपना चेहरा दिखाऊ .. हमने जो किया हु गलत था .. मेरी hi गलती थी..”

“नहीं रमेश जी में आप पर इल्ज़ाम कभी नहीं दी .. उस शाम को जो कुछ हुआ मैंने कहा था की एक गलती मान कर चैलेंज”

“रौशनी जी आप बहुत अच्छे साफ़ दिल की हो .. सच कहु तोह उन दो दिनों बाद में फिर से आपके सोसाइटी के बहार के स्टैंड पर आया था .. लेकिन आप hi थी की दो दिन आयी hi नहीं .. ंगो के वहां भी आया था लेकिन आप आयी नहीं .. अंदर ंगो में भी एंट्री नहीं दे रहे थे इसलिए मुझे लगा आप भी नाराज़ हो.”

“नहीं हु ंगो में बहुत काम था तोह अब थोड़े दिन में वही रहूंगी , वहां एक घर में रह रही हूँ … बस वहां का काम ख़तम होते hi घर वापस जाउंगी … (रौशनी ने बाकी के कुछ डिटेल्स नहीं दिए की वह किसके साथ रह रही थी)

“ओह अच्छा फिर तोह और दिन मुलाक़ात नहीं होगी … हम्म वैसे अभी आपको चोर दू ंगो”

“हाँ रमेश जी ज़रूर”

रौशनी रिक्शा में बैठ रही थी .. रमेश की नज़र उसकी मुलायम से पीठ पर थी (उफ्फ्फ बहुत मिस किया तुम्हे रौशनी … तुम्हारे इस गदरायी बदन और गोरी सी त्वचा को … अब तोह तुझे कही नहीं जाने दूंगा ..)

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रौशनी , रमेश से मिल सच में खुश थी … रमेश जी बहुत अच्छे हैं .. उस दिन जॉब hi हुआ उसपर उन्हें बहुत पछतावा लग रहा हैं .. उनसे अच्छी दोस्ती बानी हैं..

“रौशनी जी एक बात कहु .. “

“हाँ कहिये रमेश जी”

‘”रौशनी जी मैंने आपको बहुत मिस किया .. आप नहीं थे तोह ऐसे लग रहा था कुछ खो चुक्का हूँ में …”

“रमेश जी यह मेरा काम हुआ इस हफ्ते फिर रोज़ ंगो आप hi आओगे मुझे ड्राप करने ठीक हैं .. आप अब अच्छे दोस्त बन चुके हो..”

“शुक्रिया रौशनी जी , हाँ में आप को कभी नहीं छोड़ूंगा .. मतलब आप की सवारी में हमेशा हजार रहूँगा .. वैसे रौशनी जी अब आप और हम दोस्त बन hi गए हो तोह आज क्या आप शाम को मेरे साथ आओगे , यहाँ पास में hi एक गार्डन हैं अभी एक महीने पहले ओपन हुयी हैं, बहुत खूबसूरत हैं , में चाहता हूँ आपको वहां ले चालू.. प्लीज आइये”

“रमेश जी पता नहीं आज कैसे .. आज थोड़ा काम था … सोच कर बताउंगी …”

“ठीक हैं मैडम जैसे आप कहे”

रौशनी सफर में सोचने लगती हैं ( कल रात को और आज सुबह जॉब hi हुआ .. उसे वह आज असलम से आँखें मिला hi नहीं पाएगी … आज उस सब से ब्रेक लेना चाहिए .. क्यों न रमेश जी के साथ वह गार्डन चली जाऊ .. थोड़ी आउटिंग होगी , वैसे भी मुझे फूल और ग्रीनरी बहुत hi पसंद हैं .. रोनित तोह कभी ले hi नहीं जाते ऐसी जगहों पर.)

“रमेश जी ठीक हैं में पूरी गारंटी नहीं दे पाऊँगी लेकिन में कोशिश जरूर करुँगी आपके साथ उस गार्डन आने की”

“ओह बेहत शुक्रिया रौशनी जी .. में आपका इंतेज़्ज़र करूँगा 5.30 बजे .. बस 1-2 घंटों में आपको फिर से ड्राप करूँगा…” (है मेरी रानी आज तू सैर करेगी गार्डन में मेरे साथ … तेरे कंपनी में 2 घटने बिताऊंगा .. मेरी जान)

वह अपने लुंड को दबाते हुए शाम के बारे में सोचने लगा ….

वहां रौशनी भी खुश थी की वह आज थोड़ा गार्डन की फूलों और ग्रीनरी की सैर करेगी. उसे नहीं पता था की रमेश वहां इस एक डेट सम्जह्कर प्लानिंग कर रहा था .

रौशनी अब ंगो पहुँच गयी.

“रौशनी जी आपका में इंतेज़्ज़र करूँगा 5.30 बजे यहाँ .. प्लीज आप आइये.”

“रमेश जी बिलकुल में कोशिश करुँगी hi यहाँ आने की,”

रौशनी ंगो के अंदर चली जाती हैं और रमेश अपने रस्ते निकल जाता हैं.

रौशनी ंगो में काम ख़तम कर असलम और सलीम के घर जाती हैं …

असलम जी , सलीम जी कहाँ हो आप दोनों …. रौशनी वहां आवाज़ लगाती रही

लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा था .. वहां कोई था hi नहीं. दोनों असलम और सलीम गए थे कही बहार … रौशनी अपने कमरे में जाकर थोड़ी फ्रेश हुयी .. अपने बाल कोंब किये और उन्हें खुल चोर दिया .. थोड़ी मेक उप और हलकी सी लिपस्टिक लगा कर वह निकल पड़ी रमेश से मिलने. रौशनी खुश थी की रमेश फिर से मिले थे और वह आज एक गार्डन की सैर करेगी थोड़ा सा नेचर में रहेगी तोह उससे अच्छा लगेगा.

ंगो के बहार टाइम अनुसार रमेश वहां रिक्शा लिए खड़ा था .. रौशनी को आते देख उसका लुंड टाइट होने लगा … उफ्फ्फ सच में ऐसी माल उसकी दोस्त बनेगी उसे सपने में भी नहीं सोचा था.. दोस्त से उस तोह रौशनी को अपनी प्रेमिका बनाना था. रौशनी की मटकती चल देख, उसके गुलाबी होठों पर मुस्कान , गोरी त्वचा को देख रमेश का लुंड उसकी पंत में झटके मारने लगा था ..( उफ्फ्फ क्या खूबसूरती की बाला हैं रौशनी …. )

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“Hi रमेश जी आप टाइम पर आये “

“आप भी तोह टाइम पर आयी हो रौशनी जी , आपने इस बुड्ढे को खुश करा हैं”

“उफ़ रमेश जी आप खुद को बुड्ढे न बुलाओ .. अभी भी आप जवान हो ः”

“रौशनी जी आप हमसे मज़्ज़ाक़ कर रही हो या सच में तारीफ… “

“रमेश जी मज़्ज़ाक़ नहीं कर रही हूँ .. आप ऐसे न सोचिये “

“रौशनी जी जैसे आप कहे .. अब चले गार्डन “

“हाँ रमेश जी चलिए .. दिखाए इस गार्डन को जिसके बारे में आप टैरिफ कर रहे थे. “

“हाँ जरूर वैसे रौशनी जी आप आओगी तोह उस गार्डन में और चार चाँद लग जाएंगे .. आप hi हो फूल जैसी हुस्न की पारी … “

“उफ़ रमेश जी आप भी न … थैंक्स .. आपकी तारीफ सुन अच्छा लगता हैं .. दिल से आती हैं आपकी तारीफ.”

“रौशनी जी हम झूट कभी नहीं बोलते हैं .. जो हैं वही कहते हैं .. अब्चलिये नहीं तोह अँधेरा हो जाएगा ..”

“हाँ रमेश जी चलिए ..”

दोनों रिक्शा में बैठ वहां निकल पड़ते हैं … गार्डन ंगो से दुरी पर था कुछ 30 मं …

रमेश जी आप को भी गार्डन्स .. मतलब बाग़ बहुत पसंद हैं ?”

(रौशनी जी बाग़ तोह पसंद नहीं लेकिन आप बेहत पसंद हो … आपको वहां इसीलिए ले जा रहा हूँ ताकि कुछ समय बितौ आपके साथ .. वैसे भी आपको पता नहीं वहां काफी कपल्स के लिए मशहूर हैं)

“रौशनी जी हाँ अच्छे लगते हैं मुझे भी , आप जैसे ोयार नहीं हैं उनसे लेकिन मुझे अच्छे लगते हैं”

“रमेश जी आपकी पसदं मेरे से थोड़ी तोह मिलती हैं.”

(रौशनी जी मुझे तोह आपका बदन , आपके होठं, कमर, गोरी त्वचा, बाहें, चूतड़ , चूचियां सब पसंद हैं .. आप भी मेरे लुंड को पसंद करोगी एक दिन )

“हाँ अच्छी बात हैं न”

अब ऐसे बातें करते हुए वह गार्डन पहुँच गए …

रौशनी अब रिक्शा से उतर गयी … रमेश रिक्शा को स्टैंड पर लगा कर रौशनी के पास आ गए .. अब दोनों गार्डन के अंदर जाने लगे..

बहार के सब उन दोनों को उस गार्डन में जाते हुए देख रहे थे .. वहां काफी कपल्स थे .. ऐसे बुड्ढे के साथ इतनी खूबसूरत महिला इस गार्डन में कैसे जा रही हैं सब सोचते रहे .. क्या दोनों कपल्स हैं उफ्फ्फ आज कल कुछ भी होता हैं”

रौशनी भी देख रही थी की लोग उन्हें घूरे जा रहे थे .. और काफी कपल्स भी थे वहां बहार ..

अब अंदर गार्डन तोह बहुत खूबसूरत था .. नया गार्डन था इसीलिए सब नया था .. फूलों से रंगीन थी गार्डन और पेड़ पौधों से भरपूर.. वहां के आस पास एक छोटा सा जॉगिंग ट्रैक था .. गार्डन के बीच और एक पत्थरों का वाकिंग ट्रैक भी था .. उस ट्रैक के साइड में बैठने के लिए जगह थी .. वहां पर सब कपल्स बैठे हुए थे … वह उस गार्डन के बहुत पेड़ पौधों हैवी इलाके में था और वहां अँधेरा सात है .. रौशनी पहले तोह कुछ देख नहीं पायी अंदर क्या हैं,..

अब गार्डन की एंट्री के लिए रस 1 देना था … रमेश ने दो सिक्के निकले और वहां के एंट्री पर दिए ..

“दो पासेज देना , मेरे लिए और मैडम के लिए”

वह आदमी दोनों को देखता रहा .. एक काळा बुड्ढे के साथ वह गोरी सी गदरायी बदन वाली माल क्या कर रही थी वह सोचने लगा .. साला बुद्धा लकी हैं ऐसी मम के साथ आया हैं.. दोनों में कुछ चक्कर तोह नहीं .. वह आदमी रमेश को देख रहा था ..

“देख क्या रहे हो … मेरी दोस्त हैं मेरी आइटम .. इतना मत घर उसे … च लैब पासेज दे और हमें अंदर जाने दो. “

वह आदमी पासेज दे दिया रमेश को और दोनों रमेश और रौशनी गार्डन के और अंदर चले गए.

“रौशनी जी कैसी हैं गार्डन .. जैसे तारीफ करि थी वैसे hi हैं न”

“हाँ रमेश जी बहुत hi मस्त गार्डन हैं .. एकदम मस्त. आप सच कह रहे थे”

‘रौशनी जी बोलै थान ा में झूट नहीं बोलता .. “

“हाँ रमेश जी .. चलो थोड़ा घूमते हैं”

रमेश और रौशनी अनादर षाले रहे साइड के ट्रैक पर … रौशनी इधर उधर देखि तोह पायी की काफी सारे कपल्स आये थे यहाँ … कोई कोई बीच के रस्ते के साइड में जो बैठने की जगह थी वहां बैठे थे .. एकदम पास में .. कोई लड़की अपने लवर के कन्धों पर सर रखे हुए , कोई कोई हाथों को पकड़े हुए … लगता था कपल्स hi यहाँ आते थे .

रौशनी बोली “रमेश जी यहाँ तोह कपल्स हो ज्यादा आते हैं …”

“ओह हाँ में भी देख रहा हूँ … कपल्स का पार्क लगता हैं .”

“हाँ रमेश जी “

अब थोड़ी और दूर चलते हुए रौशनी ने देखा की एक कपल तोह किश कर रहे थे … उफ्फ्फ्फ़ ये दोनों तोह किश कर रहे हैं…. फिर और एक कपल था यह तोह और भी गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. उन्हें देख तोह रौशनी शर्मा hi गयी … अब वह रमेश जी से कैसे कहती की एक कपल वहां पर चुम्मा छाती कर रहा था…

(रमेश को तोह सब पता था … वह यहाँ पहले भी आ चूका था , वह जो दो दिन रौशनी को स्टैंड पर नहीं देखा था यह एक्चुअली अपनी दूसरी जवान पत्नी को शहर लेन गया था .. वह अभी कल अपने बीवी को वापस गाँव चोर कर hi आया था ..उसने अपनी बीवी को यहाँ लाया था .. उससे बहुत मस्ती करि थी , चूमा था .. )

“रौशनी जी मुझे नहीं पता था .. मुझे लगा पार्क हैं वहां फॅमिली भी होंगे ..”

“कोई बात नहीं रमेश जी , वैसे गार्डन हैं बहुत hi सुन्दर .. देखो हु जस्मिने के फूल कैसे हैं …”

रौशनी वहां जाती हैं .. रमेश जी वह फूलों तक पहुँच नहीं प् रहे हूँ आप डोज मेरे लिए वहां से जस्मिने के फूल.”

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“जरूर रौशनी जी .. और रमेश फूलों को निकलकर रौशनी को देता हैं … “रौशनी जी क्या आप इस दोस्त के लिए एक मार करोगी ..”

रौशनी सेवाओं के एक्सप्रेशंस से रमेश को देखती हैं.

“अप्प एक फूल अपने बलोंग में लगाओ न …. बहुत अच्छी लगेगी जस्मिने के फूल आप पर.”

रौशनी मुस्कुराती हुयी “उफ़ रमेश जी इतनी सी बात , लो दीजिये लगाती हूँ.”

“रौशनी जी मुझे लगनी हैं आपके बालों पर”

रौशनी मुस्कुराती हैं , बालों को बांधती हैं ऊपर …. “अच्छा रमेश जी लगाइये आप …”

रमेश फूलों को लगाने अपने हाथों के रौशनी की रेशमी बालों को छू लेता हैं .. और आराम से फूलों को वहां लगता हैं …

“रौशनी जी आप इन फूलों में और खिल रही हो …”

“शुर्किया रमेश जी.”

“कुछ और फूल देखने जाते हैं रौशनी जी ,,, चलिए”

रमेश अब बिना रौशनी को बोले उसके हाथों को पकड़ लेता हैं … और उसे आगे ले जाता हैं .. रौशनी बस रमेश को फॉलो करती हैं …

“उफ़ रमेश जी … “

“क्या हुआ रौशनी जी”

रौशनी कुछ नहीं बोलती बस हाथों में हाथ दिए रमेश के साथ चलती रहती हैं .. अब हाथों में हाथ डेल षाले देख सब लोगों को लगता हैं सच में यह कपल hi हैं .. रौशनी जैसी खूबसूरत , जवान , गोरी महिला उस काळा बुड्ढे मर्द के साथ …

रौशनी को न जाने क्यों रमेश का ऐसे उसके हाथों को पकडे रखना पसंद आता हैं … रमेश के हतः काफी रफ़ थे और उसके इतने मुलायम …

रमेश का लुंड तोह रौशनी के हाथों के स्पर्श से hi झटके मारने लगता हैं … रौशनी की ख़ामोशी का मतलब उसे इस बात से ऐतराज़ नहीं था .. रमेश फिर और कास कर उसके हाथों को पकड़ लेता हैं .. अब जॉगिंग ट्रैक पर एक दो लोग जॉगिंग भी कर रहे थे … अब ट्रैक इतना बड़ा तोह नहीं था .. कभी कबर रौशनी उन लोगों को साइड देने रमेश के और करीब जाती थी … रमेश भी इसका फायदा उठाते उसके और करीब जाते रहता हैं … दोनों काफी पास रह कर चल रहे थे .. रौशनी तोह बस साइड में सब कपल्स को मस्तियाँ करते देख शर्मा रही थी .. वह एक कपल्स के गार्डन में आयी थी .. अपने पति के साथ नहीं बल्कि एक रिक्शा ड्राइवर बुड्ढे के साथ …

“रौशनी जी देखिये वह फूल इतना अच्छा हैं .. बहुत मस्त हैं उसे देखने जाएं.”

अब वह फूल उस एरिया में था जहाँ कपल्स बैठे थे ..

“रमेश जी वहां तोह सब कपल्स hi हैं, नहीं वहां नहीं जाएंगे”

“रौशनी जी हम भी तोह कपल hi हैं और रौशनी को देख उसने आंक मारी.

“रैश जी आप भी न .. धत .. हम कपल कैसे उफ्फ्फ….”

“रौशनी जी दो लोग साथ होते हैं उन्हें कपल hi कहते हैं न , न की सिंगल ः …”

“रमेश जी कपल का मतलब वह नहीं हैं उफ्फ्फ्फ़”

रौशनी जी आप hi बताइये कपल्स किसे बुलाते हैं”

रौशनी शर्मा रही थी .. “उफ्फ्फ रमेश जी कैसे सवाल कर रहे हो आप. कपल्स उनको बुलाते हैं हैं जो लवर्स होते हैं.. जो एक दूसरे के करीब होते हैं उन्हें .”

“रौशनी जी ये लवर्स क्या होता हैं , इंग्लिश इतनी नहीं समझ आती हमें”

”उफ्फ्फ रमेश जी …. लवर्स मतलब … प्रेमिका और प्रेमी .. जो एक दूसरे से प्यार करते हैं हु …”

“अच्छा ऐसे हैं कपल्स का मतलब और रमेश रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में दबाता हैं .. वैसे वहां जाने में क्या बुराई हैं बस फूल देखने hi जा रहे हैं न .. मुझे आपको वह फूल देने हैं .”

“रमेश जी प्लीज “

रौशनी जी आपने हमें दोस्त मन हैं न .. दोस्त की बात को ना मत कहो .. बस 5 मं वहां जाएंगे आप फूल देख लो और उसे निकल कर में aapki]o दूंगा बस”

“अच्छा ठीक हैं रमेश जी चलिए”

दोनों वहां जाते हैं .. अब गार्डन में थोड़ा और अँधेरा छाया हुआ था, फूलों के पास , वहां एक कपल बैठे हैं वह एक दूसरे को जोरों से छुमने लगे जैसे hi रौशनी और रमेश उनके करीब आये .. उन्हें चूमते देख रौशनी तोह पूरी तरह से शर्मायी .. रमेश उन्हें देख मुस्कुराया … उफ्फ्फ सही टाइम पर इन प्रेमियों ने एक दूसरे को चूमा हैं … काश एक दिन ऐसे रौशनी को बाँहों में भर जोरों से चुम लूंण.. वह देखता हैं रौशनी शर्म के मारे निचे देख रही हैं ..

“रौशनी जी क्या हुआ , अरे यह कपल्स हैं न अब यहाँ नहीं करेंगे कपल्स पार्क में मस्ती तोह कहाँ करेंगे .. बताइये आप.”

रौशनी कुछ नहीं बोलती … माहौल सच में काफी गरम हो रहा था .. वह कपल्स तोह एक दूसरे को चूमते hi रहे एकदम फ्रेंच किसिंग … रमेश का लुंड टाइट होने लगा … वहां रौशनी उन्हें देख उस शाम के रमेश और उसके चुम्मे के बारे में सोचने लगी … (उफ्फ्फ उस दिन अगर कण्ट्रोल नहीं करते तोह रमेश जी भी मुझे ऐसे hi चूमते .. उफ्फफ्फ्फ़.)

रौशनी उस शाम के बारे में सोच ौरी तरह से उसके गाल लाल हुए …

रौशनी ने अपने पति रोनित से भी बहुत दिनों पहले ऐसे चुम लिया था .. आज कल उनके ज़िन्दगी में रोमांस मनो ख़तम hi हुआ हैं …. और आज यहाँ ऐसे कपल्स पार्क में वह एक बुड्ढे रिक्शा चलने वाले के साथ युवा प्रेमियों को एक दूसरे को फ्रेंच किश करते देख रही थी..

उसके ऐसे थॉट्स के बिच रमेश बोले “रौशनी जी कहाँ खो गयी हो , अपने किसी प्रेमी के बारे में सोच रही हो क्या”

“धत बदमाश कही के , ऐसे कुछ नहीं .. आप बस हु फूल दे दीजिये हमें .. मुझे सच में इन कपल्स को ऐसे किश करते देख शर्म आ रही हैं.”

“रौशनी जी करने दीजिये न उन्हें , कहाँ में और हम ऐसे गहरी चुम्बन में लगे हुए हैं…”

“रमेश जी फिर भी ….. “ कुछ कहने से पहले hi एक और कपल वहां से चला जाता हैं .. रमेश उन्हें जाते देख दिमाग चलने लगता हैं .. वह फूल लेते वक़्त जान बुझ कर फूल के काँटों को पकड़ लेता हैं .. अब फूल के सब कांटे उसे चुभते हैं और वह अहह करके आवाज़ करता हैं …

“रमेश जी क्या हहआ .. उफ्फ्फ उस फूलों के कांटें बहुत होते हैं …”

“रौशनी जी हाँ देखो पूरा हाट काँटों से चुबा हुआ हैं उफ़ दर्द कर रहा हैं..”

“रमेश जी यहाँ बैठिये में उन काँटों को निकलती हूँ.”

अब दोनों उस सीट पर बैठ जाते हैं … रमेश के हाथों से रौशनी कांटें निकलने लगती हैं …

रमेश मन में मुस्कुरा रहा था .. रौशनी की मुलायम पीठ उसके आँखों के सामने थी .. उसके नाज़ु हाथों में उसके हतः थे और वह प्यार से काँटों को निकल रही थी

“उफ्फ्फ्फ़ ममम मस्त गोरी सी डॉल हैं रौशनी जी .मन कर रहा हैं उनके पीठ को चुमू वहां चाट लूँ उन्हें .. ममम क्या माल हैं यार .. …)

सब कांटे निकलने के बाद रौशनी ऊपर होकर रमेश को द्केहि .. “रमेश जी सब कांटे निकल दिए मैंने …”

“शुक्रिया रौशनी जी आप बहुत अच्छी हो ..”

अब रमेश अपनी आँखों से रौशनी की आँखों में देखने लगा .. रौशनी भी उन्हें देख रही थी … माहौल गरम था .. वह ान सब कपल्स मस्ती में लगे हुए थे … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे … धीरे से रमेश अपने काळा होठों को रौशनी की गुलाबी होठों के पास लेन लगे .. रौशनी भी वहां से अपने होठों को हटा नहीं रही थी .. रमेश के होठं अब रौशनी के बिलकुल करीब थे … रौशनी की आँखें बंद हुयी जैसे hi रमेश के होठं उसके होठों से मिले ….

रमेश अब अपने होठों को रौशनी की गुलाबी होठों के प्रति दबा कर उसे अब चूमने लगे .. रौशनी भी आँखें बंद रमेश को चुम रही थी … रमेश अब अपने हाथों से रौशनी के चेरे को पकड़े उसे और गहरी चुम्बन देने लगे .. उसका लुंड निचे झटके मार रहा था .. वह बोल्ड होकर रौशनी के बाएं हाथ को पकड़ अपने उभरते लुंड पर रख दी .. रौशनी भी उस चुम्बन के अघोष में ..

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अपने हाथों से रमेश के पंत पर उसके उभरते लुंड पर हाथ फेरने लगी

रमेश का लुंड टाइट होता गया

ऐसे कुछ पलों के लिए दोनों चूमते रहे … रौशनी उस चुम्बन में खो चुकी थी …

रमेश का लुंड पूरा टाइट हो चुक्का था और झटके मारने लगा जोरों से .. एकदम से रौशनी उन झटकों से उसकी आँखें खुली .. वह रमेश को चुम रही थी उसका हाथ उसके लुंड पर था … वह एकदम से अपने होठों को उनकी होठों से जुड़ा करि और अपने हाथों को रमेश के लुंड के ऊपर से हटा कर वहां से उठ कर जाने लगी …

सब कुछ इतना फ़ास्ट हुआ की रमेश बस बैठे रौशनी को जाते देखते रहा …

वह फिर उठ कर रौशनी के पीछे दौड़ने लगा ..

“रौशनी जी प्लीज रुकिए ..” लेकिन रौशनी रुक नहीं रही थी.. रमेश दौड़ के उसके पास गया और उसकी कलाइयों को पकड़ लिया ..

“रौशनी जी प्लीज रुकिए ..”

रौशनी रुक गयी और रमेश के तरफ देखि … “रमेश जी जो भी हुआ उसे भूल जाओ … “

“रौशनी जी कैसे भूलू … आपके गुलाबी होठों का स्पर्श अब में कैसे भूल जाऊ … रौशनी जी आप भी भूल जाओगी आज जो हुआ हमारे बीच.”

“रमेश जी यह गलत हैं .. में शादी शुदा महिला हूँ और आप भी .. और तोह और आप एक रिक्शा ड्राइवर हो और में …..”

“रौशनी जी आखिर कार आपने दिखा hi दिया मेरी औकात .. मामूली सा रिक्शा ड्राइवर हूँ में और आप एक हुस्न की पारी ..”

“रमेश जी चलिए यहाँ से .. मुझे ंगो ड्राप कीजिये प्लीज”

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी चलिए ..” और दोनों रिक्शा में जा बैठ जाते हैं .

(रौशनी अभी भी हैरान थी की उसने रमेश जी को ऐसे कैसे चुम लिया था .. वह भी उसके चुम्बन को साथ दे रही थी .. उफ़ क्यों .. यह तोह एक मामूली रिक्शा ड्राइवर हैं उनसे में कैसे किश करि .. और तोह और उनके लुंड के उभर को छू ली .. उनके मोठे बड़े लुंड को .. उफ्फ्फ यह में क्या सोच रही हूँ.. रौशनी तू तोह पागल हो चुकी हैं .. वहां असलम के मोठे लुंड को देखा तूने , सलीम के मोठे लुंड के उभर को भी .. और आज तोह हद हो गयी थी …रमेश जी जैसे एक बुड्ढे रिक्शा ड्राइवर के चुम्बन का साथ देने लगी थी और उसके भी मोठे लुंड के उभर पर अपने हाथों को फेरने लगी थी … उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं …)

रमेश भी वहां बैठे सोच रहा था क्या आज कुछ ज्यादा नहीं हुआ था .. क्या यह आखरी बार हैं वह रौशनी से मिलेगा . …

आएगी क्या होने वाला हैं .. रौशनी और हु तीन काले सांड जैसे बुड्ढे और उनके अंदर गर्मी बढ़ती हुयी.. आगे और क्या होगा …

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रौशनी वापस असलम के घर आयी .. वह अभी भी शीश में थी की उसने रमेश , एक बुड्ढे रिक्शा ड्राइवर के साथ एक कपल्स पार्क में चुम्बन करि थी .. और तोह और वह खुद उसके चुम्बन का साथ देने लगी थी और उसके उभरते लुंड पर भी खुद हाथ राखी थी .. वाहन षिक और शर्म लेमारे अपने कमरे में चली गयी.. कुछ देर बाद उसके दरवज़े पर नॉक सुनाई दी उसे..

“रुकसाना बेगम, रुकसाना बेगम तुम आ गयी .. जानू तू कहाँ चली गयी थी …?”

रौशनी ने कुछ उतर नहीं दिया तब असलम ने और दो बार दरवाज़ा नॉक करा ..”रुकसाना बेगम, रुकसाना बेगम .. बात तोह करिये …”

रौशनी अब किसी से बातें करने के मूड में नहीं थी , न असलम से न सलीम से … कल राटा से अब तक के घटनाओं के बारे में hi सोचती हुयी वह बिस्तर पर लेती थी..

उसे बस असलम का नग्न लुंड , सलीम के चांदी का बढ़ा उभर और रमेश के उभर पर अपना हाथ फेरना वही दिमाग में चलता रहा ..(वह कसिए बहक के ऐसे कर सकीय रमेश से .. और असलम का भी लुंड देखि थी .. कला सा इतना मोटा उफ्फ्फ और सलीम भी मोठे लुंड का hi बुद्धा था .. वह कैसे इन बुद्धों के बीच हैं उफ्फ्फ्फ़)

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उसे क्या सच में रमेश के चुम्बन से कुछ असर हुआ था .. क्या वह उस चुम्मे को पसंद करि थी .. या फिर रोनित से बहुत दिनों तक फिजिकल न होने का नतीजा था .. उफ्फ्फ वह अपने शादी के पहले एक साल की सोचने लगी.. (वह रोनित के साथ सुहागरात में चुदाई से पहले बिलकुल वर्जिन थी .. फिर रोनित ने उसे चुदाई का सुच दिया और उसके बाद वह अपने पति के साथ चुदाई का आनंद लेती रही … अभी 2 महीने तक सब मस्त चल रहा था उनके सेक्स लाइफ में खासकर .. लेकिन अब .. उफ्फ्फ क्या वह उस कमी को महसूस कर रही थी .. ) ऐसे सब चीज़ें वह सोचती रही ..

बहार असलम बेचैन था की रप्शनि उसके सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही हैं.. क्या वह अभी भी रात के सन और सुबह के बातों से उससे नाराज़ थी .. उफ्फ्फ्फ़ रात को तोह वह जनता hi नहीं था ऐसे कुछ होने वाला था .. वह तोह बस पिशाब करने गया था .. उसी वक़्त रौशनी चली आयी थी . वह यह बात भी सोचने लगा की रौशनी कैसे उसके लोडे को देखे जा रही थी .. उसकी नज़र उसके मोठे लोडे से हाथ नहीं रही थी… क्या उसे उसका लोढ़ा पसंद आया था .. या बस शॉक से hi वह उस्ले लोडे को देख रही थी रात में … उफ़ और उसके चूतड़ मम आज सुबह अपने खाद ेलोडे को उसकी चूतड़ों में जब वह दबाने लगा था अपने लोडे को तोह क्या मस्त फेलिंग थी .. उसकी नाज़ुक गोल गोल चूतड़ ममम उसका लुंड तोह उससे महसूस कर कितना सख्त हुआ था उफ्फ्फ्फ़.

दोनों उसी ख्याल में अपने अपने कमरे के बिस्तर पर लेते थे ..

वहां रमेश अब अपने घर पहुंचा था .. वह बस रौशनी की चुम्बन के hi सन अपने मन में दौड़ा रहा था … उसके नाज़ुक गुलाबी होठं जिसे वह कुछ 5 मं तक चूमे थे … उसके पंत के ऊपर से उसके लुंड पर रौशनी के हाथों का स्पर्श .. उफ्फ्फ्फ़ .. लेकिन फिर रौशनी नाराज़ दिखी उसे .. क्या वह आखरी बार मिलेगा इस हुस्न की पारी से वह सोचते रहा …क्या कुछ जदबाज़ी में hi वह कुछ कर बैठा था .. उसे तोह लगा hi नहीं रौशनी जैसी गोरी अच्छे घर की महिला उस जैसे कमीने बुड्ढे को प्यार से ऐसे चुम्बन देगी … उसका लुंड झटके मारने लगा … रौशनी का नाम लेते हुए वह मुठ मारने लगा ..

(अहह रौशनी ममम क्या मस्त गुलाबी होठं थे तेरे ममम, और तेरे चूतड़ उफ्फ्फ उस साड़ी में तुम्हारा स्लीवलेस डीप कट ब्लाउज और तुम्हारी गोरी मुलायम पीठ मममम तू मेरी हो जा फिर रात भर तेरे से मस्ती करता रहूँगा जानू ) यह सोचते हुए और रौशनी का नाम लेते हुए रमेश झाड़ गया …

अब तीसरा बुद्धा सलीम फिर से पाने दोस्तों के साथ पिने चला गया था …

वहां पर .. उसका एक दोस्त बोलै “सलीम मियां तुम्हारी तोह लाटरी हैं , उस मैडम के साथ जो घर में रह रहा हैं .. साले कमीनेकुछ किया या नहीं उसके साथ .. तेरे से तोह इतनी छमिया पैट जाती हैं .. इसे भी पत्ता”

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“अरे उस जैसी गोरी महिला को प्यार से पैट एते हैं .. ऐसे जल्दबाज़ी नहीं करते … जल्दबाज़ी से हाथ से चली जाती हैं .. “

“हाँ लेकिन हैं तोह मस्त माल , उस जैसी हमें भी दिला दे न … घर पर रखेंगे और नेत्र सुख तोह लेंगे … यार कितनी गोरी हैं , गदरायी बदन वाली … आँखों में नशा हैं बस नशा मममम उसे देख हमारा भी लोढ़ा टाइट होता हैं ..”

“हु सिर्फ मेरी हैं समझे कमीनो .. रौशनी को बस में पतङ्गा .. उसके बदन के सतह बस में मज़े लूंगा …”

“लेकिन सलीम मियां तेरा हु असलम बुद्धा दोस्त भी तोह रहता हैं अगर वह बाज़ी मारे तोह. …”

“उसका बस इस्तेमाल कर रहा हूँ … वह चाहिए मेरे रौशनी जैसी मैडम को पटाने के प्लान के लिए … एक बार पता लूँ तोह उसका काम ख़तम हाहाहा”

“सही हैं …. सलीम मियां … वैसे तेरे उस बुलबुल … मीनल का क्या हाल हैं , उसे भी छोड़ते हो क्या …”

“हाँ हैं न मेरी hi हैं हु भी .. उसकी लेता हूँ न. साली आजकल और भी मस्ती में हैं .. रौशनी को देख उसे जलन होती हैं .. जब रौशनी की टैरिफ करता हूँ तोह जलती बहुत हैं, लेकिन फिर और मस्ती से चुदती हैं … बस रौशनी का नाम लेकर जलाता हूँ फिर .. उससे बेहतर हैं यह दिखने मुझे से बहुत चुदती भी हैं … मस्त पटक पटक कर ठोकता हूँ .. मेरे लोडे की दीवानी सी बन गयी हैं”

“हाँ यार सही हैं … एक हाथ में हु और जल्द HI दूसरे हाथ में रौशनी मैडम .. टूट ओह बारी बारी जल्द hi दोनों की चुदाई करेगा ः …”

“हाँ हु तोह हैं .. अब चल जल्दी से और एक पेग लगा … अब जाना हैं वापस …”

“क्यों सलीम मियां , रौशनी मैडम डाँटेगी क्या ः … इसलिए बस 3 पेग के बाद जार अहा हैं घर हाहाहा”

“तुम लोगों को क्या पता .. ऐसी मैडम की बात पहले सुन्नी पड़ती हैं . फिर बाद में बस तुम्हारी hi सुनती हैं … फिर तुम जो बोलगे वही करेगी .. थोड़ा पहले सैक्रिफाइस करना पड़ता हैं”

ऐसे मस्ती मज़्ज़ाक़ में सलीम और एक पेग लगता हैं और फिर घर चले जाता हैं.

अब तीनो घर पर हैं .. असलम और सलीम अपने कमरे में और रौशनी अपने.

शाम के 8 बज चुके हैं , और बी असलम और सलीम दोनों को बहुत भूक लगी होती है. लेकिन रौशनी न कमरे से बहार आ रही हैं न कुछ बोल रही थी अगर वह बुलाते तोह भी ..

आख़िरकार रौशनी बहार चली आयी … सुनिए .. असलम जी और सलीम जी , आज खाना बनाना का मूड नहीं हैं … आप को बहुत भूक लगी हैं तोह बहार खा कर आइये.

दोनों बहार आ जाते हैं … “रुकसाना बेगम क्या हुआ ?” असलम बोलता हैं ..

“आज नहीं प्लीज .. अब नहीं होगा मुझसे यह सब.. मुझे न अपनी रुकसाना बेगम बन कर रहना हैं न आपके यहाँ रहना हैं .. में वापस घर जाना चाहती हूँ”

“रौशनी जी क्या हुआ .. में माफ़ी मांग ली न , में बहुत पिऊंगा नहीं .. न जाइये आप , असलम टब hi अगर कुछ करा हैं तोह सॉरी बोल…”

“नहीं अब नहीं .. प्लीज में घर जाउंगी कल .. आज रात रुकूंगी क्यूंकि बहुत लेट हुआ हैं ..”

“रौशनी जी प्लीज न जाइये .. आप जब से आयी हो , हमसे गलती हुयी हैं तोह माफ़ की जिए .. आप जब से आई हो , माहौल घर का अच्छा हुआ हैं .. हम बुद्धों का हैं hi कौन अब इस दुनिया में .. आप hi थे जो हमें अपना मान कर हमसे दोस्ती करि हो..

बहुत सालों से कभी किसी महिला के सतह हम रहे नहीं हैं.. भूल गए थे हम .. ये बैचलर लाइफ हैं hi ऐसी हम मर्दों की .. “

रौशनी बस सुनती रही असलम की बातें.

“रौशनी जी जबसे आप रुकसाना बनने के लिए तैयार हुयी हो मुझे जब उसकी याद आती हैं तब आपसे बात करता हूँ फिर आप रुकसाना बन कर बातें करती हैं तोह दिल को सुकून मिलता हैं , जैसे मेरी बेगम फिर से वापस आयी हो ..इसलिए कभी कभी कुछ ज्यादा फीलिंग्स आते हैं .. आप प्लीज न जाइये”

रौशनी असलम को ऐसे दिल से बातें करते हुए सुन उसका थोड़ा मूड बदलता हैं …

“रौशनी जी आप मनो या न मनो लेकिन आप जब से रुकसाना बनने के लिए हाँ करि हो और यहाँ रहने लगी हो तोह असलम में काफी चंगेस आये हैं , उसे अब रुकसाना के दौरे काम पड़ते हैं .. वह अब किसी भी महिला को रुकसाना समझता नहीं .. बस आप को इसलिए जो हु फीलिंग्स उन्हें आती थी अब बस आप पर वह रुकसाना समझ कर वही करता हैं , आपको जाना हैं तोह आप जा सकती हो हम रोकेंगे नहीं ….”

रौशनी अब सोच में पद जाती हैं .. वह तोह उसे नहीं रोक रहे हैं लेकिन क्या उसे इस इलाज को ऐसे बीच में हो चोर कर जाना चाहिए .. आख़िरकार उसने खुद यह डिसिशन लिया था … “

असलम और सलीम फिर बोते हैं “रौशनी जी आपको जाना हैं तोह बताइये हम आपकी पैकिंग में मदत करेंगे .. कल आपको ड्राप भी करेंगे आपके घर .. आप की इतने दिन की मदत के लिए हम आपसे थैंक यू कहना चाहते हैं.”

रौशनी को अब बुरा लग रहा था .. यह दोनों बहुत अच्छे से पेश आ रहे थे .. न ग़ुस्सा न कुछ .. उनको एक मौका देना चाहिए … उसे भी थोड़ा और एडजस्ट होना पड़ेगा .. आख़िरकार उसी केन जो के हैं तोह उनकी मदत करेगी तोह ंगो की भी मदत होगी hi .. इवेंट भी हैं कुछ दिनों में .. बहुत काम हैं .. यहाँ रहेगी तोह असलम सलीम के सात शाम को भी इवेंट की तैयारी कर पाएंगे. लेकिन वह कल सुबह hi फाइनल डिसिशन लेगी.

असलम जी , सलीम जी कल में डिसिशन बताउंगी .. अब एक काम करते हैं .. रात का डिनर कही बहार करे.. आज सच में खाना बनानेका मेरा मूड बिलकुल नहीं हैं. एक अच्छा सा रेस्टोरेंट बोलिये न वहां जाएंगे , में करुँगी खर्चा .. अगर आज मेरी लास्ट दिन हैं यहाँ आपके साथ तोह थोड़ा बहार रेस्टोरेंट में खा कर शाम बिताएंगे .. चलेगा आपको?”

दोनों ख़ुशी से हाँ बोलते हैं .. उन्हें एक रेस्टोरेंट का पता था , गार्डन रेस्टो था , वह दोनों तोह वहां कभी नहीं गए थे क्यूंकि वह रेस्टो उनके जैसों के लिए नहीं था लेकिन आज रौशनी के साथ वह जाने का प्लान बनाये ..

रौशनी अब अपने कमरे में गयी तैयार होने .. कुछ मं बाद सब तैयार थे .. रौशनी ने स्लीवलेस डीप बैक का ब्लाउज पहना था .. शिफॉन साड़ी थी .. माथे पर बिंदी, कानो में झुमके और हाथिन में चुडिया .. हल्का सा मेकअप और पिंक कलर की लिपस्टिक…

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असलम बोलै “रौशनी जी एक बात माननी पड़ेगी आपकी .. आप सजती सवारती बहुत hi ाचे से हो .. हमेशा एक दम बेस्ट लगती हो आप …

“हाँ रौशनी जी सच कहता हैं असलम , आप के साथ घूमते हैं तोह लगता हैं हम सातवें असलमन पर हैं .. आप जैसी हुस्न की पारी के साथ घूमना नहुत अच्छा लगता हैं ..”

“हाँ आप दोनों तारीफ़ करना तोह काम नहीं करते .. हर बार इतनी टैरिफ करते हो फिर इतना क्यों तंग करते हो मुझे ..”

“मैडम अब आपको तंग न करे तोह किसको , आप जैसी दोस्त मिली हैं मन करता हैं मस्ती मज़्ज़ाक़ का .. वैसे आप को हु बात भी बुरी लगती हैं तोह न करेंगे दोनों .”

“उफ्फ्फ आप दोनों भी न , आप जब ऐसे तारीफ़ करते हो , तब अच्छा लगता हैं .. क्यों न लगे . हर औरत को तारीफ़ पसंद hi होती हैं .. “

हाँ हु तोह हैं hi आपकी बात सही रौशनी जी चलिए .. हमें रिक्शा लेना पड़ेगा ..”

तीनो उसमें बैठ रेस्टो पहुँच जाते हैं.

सलीम और असलम पीछे से बस रौशनी की मुलायम गोरी पीठ को देख अपने लुंड मसलते हैं...

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