- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 143,692
अब अगले दिन की बात हैं .. रौशनी सुबह ब्रेकफास्ट बना कर नहाने चली गयी .. आज उसने रोनित को नास्ते पर बुलाने की कोई कोशिश न करि ..
फिर वह नहाने चली गयी … रौशनी नहाते वक़्त उसे कल शाम की बात याद आयी. उस रिक्शा में , रमेश के साथ उसके होठों के इतने करीब , वह ानकेहिं बंद करके उनके टच का एहसास करने लगी … रमेश ने उसे कास कर पलड़ा था एयर अपना हाथ उसके शरीर पर दौड़ा रहा था ..
एक हफ्ते से उसके और रोनित के बीच कुछ भी फिजिकल न होने के कारन वह एक मर्द के टच से अच्छा फील कर रही थी .. लेकिन रमेश एक बुद्धा था और हु भी एक रिक्शा ड्राइवर … वह उनके बारे में ऐसे कैसे सोच सकती थी ..
फिर अपनी ख्यालों से निकल कर रौशनी कपडे बदलने चली गयी ..
रौशनी का मूड काफी अच्छा था , उसके जॉब की शुरुवात बहुत अच्छी हुयी थी. सब लोग वहां उसे बेहत रेस्पेक्ट करते थे और प्यार भी दे रहे थे ..
आज उसने एक डीप बैक कट ब्लाउज पहनी जो बस 1 स्ट्रिंग और एक स्ट्राप से पीछे से बंधी हुयी थी ..
ब्लाउज स्लीवलेस थी . बाल आज उसने एक बन में बंधे थे जैसे उसकी पूरी मखमली पीठ दर्शा रही थी … वह फिर मिरर में खुद को देखने लगी .. उसने सच में लाफ़ी मेन्टेन राखी थी फिगर ज़ज़. फिर उसने हाथों में चूड़ियां और कानो में बलि पहनी ..
आज उसने डार्क रेड लिपस्टिक पहनी थी … हल्का सा मेक जैसे वह हमेशा पहनती थी ..
साड़ी थोड़ी और ट्रांसपेरेंट थी जिससे उसकी नाभि का गोल आकर साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था ..
खुद को एक बार आईने में देख वह खुद के खूबसूरती पर मुस्कुरायी .. उसे रमेश के तारीफे याद आने लगे थे ..
अब वह बिना रोनित से कुछ बोले घर के बहार रिक्शा स्टैंड निकल गयी ..
आज उसने देख की रमेश उसका इंतज़ार नहीं कर रहे थे .. वह कही भी नहीं दिख रहे थे .. रौशनी निराश हुयी … वह सोची की क्या कल के इंसिडेंट के वजह से आज रमेश जी उसे लेने नहीं आये थे ??
वहां फिर उसने एक दूसरी रिक्शा ली और वहां से निकल पड़ी…
रौशनी रमेश से बातें मिस कर रही थी ..उसे रमेश की कंपनी अच्छी लगती थी .. वह बुड्ढे जरूर थे लेकिन बातें किसी युवा जैसे करते थे .. खैर फिर रौशनी ंगो पहुँच गयी ..
ऑफिस में वह काम करने लगी .. फिर वहां के लोगों ने कहा की एक एक्टिविटी उन्हें रखनी थी कुछ 1 हफ्ते बाद .. उसके लिए उसे असलम जी और सलीम जी की मदद लेनी होगी
रौशनी असलम और सलीम के घर आकर उसे बुलाती हैं “असलम जी ,, असलम जी में रौशनी .. आपसे मिलने आयी हूँ कुछ काम था …”
तीन बार बुलाने पर भी असलम नहीं आये .. रौशनी को लगा की वह बहार गए होंगे ..फिर भी उनका थोड़ी और देर इंतज़ार करने की सोची.
वहां असलम को सब सुनाई दिया था … वह जान बुझ कर जल्द से रौशनी से मिलने नहीं आ रहा था .. आज वह अपनी ‘बिमारी’ का फायदा उठाने की सोच रहा था ..
वह धीमे क़दमों से रौशनी के पास आ गया और फिर रौशनी को पीछे से लप्पेट लिया “अरे जानेमन तू आ गयी ,, कितनी इंतज़ार करवाएगी जान ु उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी खुसबू मममम”
रौशनी इस हरकत से चौंक उठी ..
“असलम जी छोड़िये मुझे उफ्फ्फ में रौशनी हूँ का की आपकी बेगम .. िसष्ठ छोड़िये प्लीसीईए..”
“रुकसाना मेरी जान तू बहुत दिनों बाद आयी हैं मेरे पास ममम सूंघ लेने दो तुम्हारी खुशबु …”
असलम ने अपने बाँहों को रौशनी के इर्द गिर्द लपेटा था और वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था … असलम की सांसें रौशनी के नैक के वहां उसे महसूस हुयी..
“ममम रुकसाना मेरी जान मममम तुम अभी भी इतनी मस्त बदन वाली हो उफ्फ्फ क्या बदन हैं तेरा अह्ह्ह्ह”
“असलम जी , प्लीज छोड़िये हमें , में रौशनी हूँ रौशनी …”
लेकिन असलम आज नहीं सुनने वाला था .. वह अब रौशनी को और कास कर पकड़ने लगा …. उसके हाथ अब रौशनी के कमर को पकडे हुए था और से वह दबाने लगा .. रौशनी बहुत दिनों से अपने पति से ऐसे कुछ करि नहीं थी , उसे ऐसे एक मर्द का फिजिकल एहसास पाकर कंफ्यूज हुयी.
असलम ने अब अपने मुँह से रौशनी के मुलायम पीठ पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. उफ्फ्फ रुकसाना तुम्हारी यह पीठ ममम बहुत hi मुलायम हैं , दूध से नहाती हो न मममम और उसने फिर एक गीली से चुम्मी दी रौशनी के पीठ पर …
रौशनी को उस चुम्मी से अउ रेज एक मर्द के फिजिकल टच से थोड़ी सी आह निकल गयी … “छोड़िये न असलम जी “ और वह अपने आप को चुराने की कोशिश करि लेकिन असफल रही .. असलम था बुद्धा लेकिन काफी मज़बूत बदन वाला था .. आसानी से रौशनी नही जुड़ा हो पाएगी उसके बाँहों से …
ऐसे कर असलम ने और दो पुप्पियाँ दी रौशनी की पीठ पर .. उसके चूमियाँ सब गीले थे और वह ऐसे hi रौशनी के पीठ पर अपनी गीली चूमियों की निशानी चोरे जार अहा था …. करीबन 5 ऐसे चुम्मों के बाद असलम ने रौशनी को पलटा कर उसका चेरा अपने तरफ करवाया .. वह रौशनी की गुलाबी होठों को देखे जार अहा था … अब उसके हाथ रौशनी के पीठ पर थे और वह उसकी पीठ पर अपने हाथों को फेरने लगा
“रुकसाना मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ तुझे देख तेरा यार बहुत गरम हो रहा हैं मममम क्या आइटम हैं तू उफ्फ्फ्फ़”
असलम का लुंड अब उसकी पंत में उभरने लगा था … उसका लुंड ाजिसे hi और सख्त होता , वह रौशनी की क्रॉत्च पर जा टकराने लगता .. रौशनी को उसकी चुभन महसूस हुयी … “असलम जी मम प्लीज छोड़िये उफ्फ्फ यह गलत हैं , में आपकी बेगम रुकसाना नहीं हूँ , में रौशनी हूँ प्लीज याद करिये यह सब असलम जीईई
असलम रौशनी की बात न सुनने का नाटक कर रहा था और रौशनी के पीठ पर अपने गंदे कठोर हाथों को पहरने लगा .. ृष्णि की मुलायम पीठ अब असलम के कठोर हाथों द्वारा मसली जा रही थी .. उसके पीठ पर लाल निशाँ चोर रहे थे ….
“रुकसाना मेरी बेगम में आज तुम्हे हर हाल में पाना चाहता हूँ ,,, आज तुझे दुनिया की सैर करवाऊंगा .. उफ्फ्फ चलो न मज़्ज़ज़ करते हैं मममम”
रौशनी के अंदर मिक्स्ड फीलिंग थी , एक तरफ उसे ऐसे एक मर्दाने हुग का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और दूसरी तरह यह किसी बुड्ढे के बाँहों में थी .. कला सा गन्दा बुद्धा..
असलम अब निचे झुक कर रौशनी के नाभि को चूमने लगा , वहां पर भी गीली चूमियाँ वह देने लगा … रौशनी को अपनी नाभि पर चुम्मियाँ पा कर वह थोड़ा हसने लगी .. वह वहां बहुत hi सेंसिटिव थी .. उफ्फ्फ असलम वही पर क्यों चुम्मियाँ दे रहा हैं उफ्फ्फ वह तोह मेरी वीक स्पॉट हैं .. रौशनी के मुँह से हलकी सी आठ निकल गयी और रौशनी की आँखें अब बंद हो गयी .. वह असलम से कुछ बोल नहीं रही थी बस हलकी सी सिकरियाँ मार रही थी …
असलम ने और थोड़े चुम्मों के साथ फिर से रौशनी के मुँह की तरफ अपने मुँह को करवा लिया ..
“डार्लिंग मेरी बेगम, मेरी रुकसाना , मेरी जान उफ्फ्फ तुम बहुत hi स्पेशल हो मेरे लिए ममम आज तुम हाथ आयी अब तुम्हे छोड़ूंगा नहीं ममम चलो अब हम बिस्तर पर जा कर पूरी मस्ती कर लेते हैं ममममम”
बिस्तर का नाम सुन कर रौशनी की आँखें खुली , अब उसे पूरी तरह से एहसास हुआ की वह असलम बुड्ढे के बाँहों में थी ..” चिरये असलम जी अब बहुत हुआ छोड़िये मुझे असलम जीई”
असलम अब पूरी तरह से बहक गया था , अब तोह वह बस रौशनी की चुदाई hi करना चाहता था …. ौसे रौशनी को और दबोचा और उसे और मसलने लगा …
फिर एकदम से दोनों को सलीम की आएवज़ सुनाई दी ..
“असलम अरे तू क्या कर रहा हैं , यह रौशनी मैडम हैं तेरी बेगम रुकसाना नहीं .. अरे चोर इसे ….”
असलम रौशनी को अभी भी अपने बाँहों में लपेटे हुए था .. रौशनी फिर पीछे मुद कर सलीम को देखि .. उसे असलम के बाँहों से चुराने के लिए इशारा करने लगी … विनंती करने लगी .. सलीम थोड़ी और देर असलम को रौशनी को मसलने दिया
“असलम अरे रौशनी मैडम को चोर .. तेरी बेगम जैसे दिखती होगी और उसके जैसे गदरायी सेक्सी औरत होगी लेकिन यह तेरी बेगम नहीं हैं …”
रौशनी को सलीम से ऐसी बातें सुन शर्मा गयी .. क्या वह रुकसाना को ऐसे कह रहा था या उसे .. वह सोच रही थी ..
सलीम ने दोनों के पास जाकर असलम को एक तमाचा मारा.
“असलम तू क्या कर रहा था .. अरे रौशनी मैडम हैं यह .. पागल हैं क्या .. तेरी इस बिमारी की वजह से बहुत प्रोब्लेम्स हो रहे हैं …
रौशनी साइड में कड़ी थी .. उसके बाल बिखरे हुए थे , वह बन आधा खुल चुक्का था ..
उसकी मुलायम पीठ पर लाल रंग के निशाँ बने थे , उसकी नाभि और कमर पर भी लाल निशाँ थे … उसकी पीठ और कमर पर असलम की सुखी हुयी सलीवा भी थी …
सलीम “असलम तू पागल हैं , इस बिमारी ने तुम पर हावी बोल दिया हैं .. कल भी तुम मीनल को अपनी बेगम समझ कर उसे भी मसलने लगा था .. उसे तोह तूने उसके होठों पर चूमा भी …. वह तोह में आ ता नहीं तोह उसे तोह तुह पूरा निचोड़ hi लेता …”
मुझे माफ़ करिये रौशनी मैडम , में .. में खुद पर काबू भूल गया उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … मुझे माफ़ कीजिये …”
रौशनी को अभी भी असलम पर थोड़ा ग़ुस्सा था … वह उसे घर रही थी …
असलम फिर एक दो बार और माफ़ मांग कर रोने hi लग गया “उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … इसके वजह से मैंने अपनी फूल जैसी मैडम से ऐसी गन्दी हरकत की .. मुझे सजा दीजिये रौशनी जी .. में आपके दोस्ती के लायक नहीं हूँ .. मुझे मार hi दीजिये आप “ और असलम वही घुटनो के बल जाकर रोने लगा …
रौशनी को असलम की रोने से बुरा लगा … हाँ उसने एक बहुत hi गन्दी हरकत किट hi लेकिन बिचारा उस बिमारी का शक्कर भी तोह हैं … वह उस बिमारी में ऐसे कर बैठा … अब उसे इतना पछतावा हो रहा हैं… उफ्फ्फ्फ़ और रौशनी बोली
“असलम जी आप प्लीज रोइये मत .. आप की बिमारी की वजह से आपने ऐसे किया होगा … आप प्लीज न रोइये … प्लीज में आपको माफ़ कर दूंगी प्लीज न रोइये …
वहां साइड में खड़ा सलीम मन में मुस्कुरा रहा था – साला असलम भी न क्या ज़बरदस्त एक्टिंग करता हैं .. साला कमीना पूरी तरह से बिमारी का फायदा उठा कर रौशनी को नोचोद लिया .. उफ़ उसके बदन पर भी लाल निशाँ हैं . फिर सलीम रौशनी को देखने लगा –उफ्फ्फ क्या मखमली गोरी सी पीठ हैं इसकी . उफ्फ्फ इतने नोचोड़ने से hi इतनी लाल हुयी हैं ममम असलम साला लकी हैं ..
असलम कुछ और रोने की नाटक कर के फिर खड़ा हुआ और मुँह लटकाये खड़ा रहा …
सलीम बोलै “रौशनी जी वैसे आप यहाँ आयी क्यों थी ?”
रौशनी बातों के मुद में नहीं थी .. वह स्पच रही थी की क्या उसे असलम के ऐसे करने से हल्का सा मज़्ज़ा आया था .. क्या वह ऐसे इस बुड्ढे की बाँहों में खुद को पाकर उसे अच्छा लगा था .. उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं उसे …
“कुछ नहीं बाद में बताउंगी … बाद में . मुझे वाशरूम कहा हैं बताइये वहां थोड़ा फ्रेश उप होकर में जाती हूँ.”
सलीम ने रौशनी को वाशरूम कहा हैं वहां गाइड किया ..
रौशनी वाशरूम का दरवाज़ा खोला तोह वह देखि की एक डोरी पर उन दोनों के कच्चे और बनियान लटक रहे थे … वह धोये हुए थे इसलिए रौशनी को उनसे बदबू नहीं आयी लेकिन वह देख रौशनी सेहम सी गयी .. उफ्फ्फ्फ़ यह मर्द भी न , सब एक जैसे हैं अगर अकेला चोरो तोह वाशरूम तोह ेस्पेशलय कैसे भी रखते हैं … हमेशा रोनित को भी बताना पड़ता हैं कैसे घर की चीज़ें रखनी चाहिए उफ्फ्फ.
रौशनी उनके कच्चों को देख एक बात उसे काफी अजीब लगी .. उनके सब कच्चे बड़े थे … और कई कई तोह बोसेर्स hi थे .. सब साइज सल वाले … रोनित तोह उनसे और हत्ता कटा हैं लेकिन उसके बोसेर्स या कच्चियाँ भी ल साइज के hi हैं … क्या उनके अंदर वह .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह में क्या सोच रही हूँ … जल्दी से फ्रेश उप होकर निकलना चाहिए .. आज का दिन पूरा अजीब hi हैं उफ्फ्फ्फ़.
और रौशनी फ्रेश उप होकर वहां से निकल गयी…
अब रौशनी के जाते हैं असलम बोलै सलीम से “कमीने तूने ऐसे जोर से तमाचा क्यों मारा मुझे “
“अरे चूतिये तू कैसे मसल रहा था रौशनी को … तू पूरा बेकाबू हुआ था .. बोल्ट ु उसे छोड़ने का इरादा बना लिया था …”
“सलीम उफ़ क्या बताऊ रौशनी का बदन इतना मस्त हैं .. इतनी मुलायम पारी हैं वह … इतनी गोरी … उसके बदन को मसलते मेरा लोढ़ा तोह पूरा टाइट हो गया था .. मममम माल हैं माल “
“असलम तू भी न मेरे hi आईडिया को उसे करके रौशनी को निचोड़ा तुमने … उफ्फ्फ्फ़ मज़्ज़ा आ या होगा न … साली वैसे थोड़े मज़े ले रही थी .. में हलकी सी आह सुन रहा था … तुमने तोह उसे चुम भी लिया पीठ पर और नाभि पर … साले तू बहुत लकी हैं”
सलीम यार इसकी चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ्फ़ लोढ़ा सख्त होता हैं उसके बारे में सोचता हंट यह ,, उसकी गुलाबी होठं, चिकनी कमर, हिलते डुलते चूतड़ .. गोरी बाहें और उसकी नशीली आँखें उफ्फ्फ्फ़.”
“असलम दिख रहा हैं तेरा लोढ़ा कैसे टाइट हुआ हैं .. हाँ तू सही कहता हैं , रौशनी को देख मेरा भी लोढ़ा इतना टाइट होता हैं क्या कहूं … उसके नाम मर एक बार मुठ भी मार चुक्का हूँ उफ्फ्फ्फ़, मुझे भी उसकी चुदाई करनी हैं “
असलम मन में सोचते हुए (साला कमीना , तेरी तोह एक आइटम हैं न वह मीनल लड़की , साली को पता कर कितनी बार छोड़ा हैं तूने .. साला अब तेरी नज़र मेरी आइटम पर हैं .. रौशनी की चुदाई तोह में hi पहले करूँगा ….)
दोनों फिर अपने कमरों में जाकर रौशनी की ख्यालों में खो गए.
वहां ऑफिस में रौशनी असलम से हुयी चीज़ों के बारे में सोच रही थी … उस काळा बुड्ढे ने उसे बहुत मसला था … उसकी बिमारी तोह ज्यादा hi ओरसे होते जा रही हैं … पहले की कुछ कर बैठे उसके इलाज के बारे में कुछ करना होगा .. लेकिन कम्बक्त ंगो का डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएगा .. और अगले हफ्ते तोह वह इवेंट हैं जिसमें मुझ असलम जी मदत तोह लगेगी हैं … मम जाने से पहले एक बार शाम को उनसे मिल लेती हूँ फिर से .. इस बार सलीम को भी बुलाऊंगी ..
सलीम नहीं आते तोह आज असलम और मेरे बीच कुछ हो hi जाता .. असलम बुद्धा होकर बहुत मज़बूत हैं .. उससे तोह खुद को चुरा hi नहीं पाती … सलीम बहुत अच्छे इंसान हैं उन्होंने मुझे बचाया आज.
रौशनी अपने कुछ मीटिंग ख़तम करती हैं और जाने से पहले शाम को सलीम और असलम से मिलने जाती हैं .. इस बार वह पहले से hi कॉल करती हैं सलीम को की वह आ रही हैं और असलम को काबू में रखने के लिए उसे भी आना होगा.
सलीम तोह बहुत खुश होता हैं .. सोचता हैं की इस असलम का इस्तेमाल करके रौशनी से मज़े ले पाउँगा … सेल को भी मज़े करने देना hi पड़ेगा …
रौशनी अब उनके घर जाती हैं तोह सलीम और असलम दोनों उसका इंतेज़्ज़र कर रहे होते हैं .. असलम एक कुर्सी पर बैठा हुआ हैं और सलीम सोफे पर ..
रौशनी भी सोफे पर बैठ जाती हैं ..
रौशनी को फिर से देख दोनों के कच्छियों में हलचल होने लगती हैं …. वह बस रौशनी के बदन को hi देखे जा रहे थे …
“असलम जी अगले हाफत ीक इवेंट हैं , सुना हैं इसमें आप का योगदान बहुत होता हैं.. इसलिए इस बार भी आप hi मैं मदत करेंगे हमें.”
“ज़रूर रौशनी जी में आपकी और ंगो की मदत करूँगा ..”
रौशनी मुस्कुराती हैं ..”सलीम जी आप भी हेल्प कीजिये .. इस बारे में इवेंट और बड़ा रखना चाहती हूँ .. आपकी भी मदत लगेगी..”
सलीम बोलता हैं “रौशनी जी आपके लिए शह हमारी जान हाज़िर , फिर यह इवेंट क्या चीज़ हैं और अपने काळा होठों पर मुस्कराहट लाता हैं .
रौशनी सलीम के बातों को सुन है पड़ती हैं “सलीम जी आप भी न .. ुर तू मच” और रौशनी बड़ी स्माइल देती हैं .
सलीम सोचते हुए (उफ्फ्फ रौशनी तेरे गुलाबी होठं तोह मेरे लोडे पर चुम्मे देने लायक हैं.. ऐसे गुलाबी होठों को तोह मेरे लोडे का सलाम)
तीनो इवेंट के बारे में कुछ देर बातें करते हैं. फिर रौशनी बोलती hain”accha तोह इवेंट की तोह बातें होती रहेगी .. आप दोनों से एक इम्पोर्टेन्ट बात करनी हैं.” आज जॉब hi हुआ वह और नहीं होना चाहिए .. असलम जी आप की बिमारी का कुछ इलाज जल्द से जल्द ढूँढना होगा, लेकिन ंगो के डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएँगे.”
असलम बोलता हैं “रौशनी जी दुपहर के लिए में माफ़ी फिर से मांगता हूँ .. हाँ इस बिमारी का इलाज होना hi चाहिए … मेरे पास एक उपाय हैं”
रौशनी ,असलम की बातें सुनने उत्सुक थी.
“मैंने …..” फिर सलीम बीच में बोलता हैं “हमनें”
“हाँ हाँ हमनें एक डॉक्टर धुंध लिया हैं … थोड़ी सी दुरी पर हैं उनका क्लिनिक. वह भी दिमागी बिमारी का इलाज करते हैं. चाहे तोह कल वहां जा पाएंगे . उनका क्लिनिक दुपहर को ओपन होता हैं.”
रौशनी कहती हैं “वाओ गुड न्यूज़ दिया हैं आपने .. हाँ कल सुबह जरूर जाएंगे वहां.”
असलम बोलता हैं “लेकिन रौशनी जी वह थोड़ी सी दुरी पर हैं , यही कुछ 7-8 कम .. वहां हम तीनो कैसे जाएंगे .. न आपके पास न हमारे पास गाडी भी हैं.”
सलीम बोलता हैं “हम तोह दो बाइक अर्रंगे कर पाएंगे … बस वहां जाने के लिए आपको हमारे साथ बाइक पर आना पड़ेगा …”
रौशनी अब सोचने लगती हैं .. बात तोह सही थी .. गाडी तोह नहीं थी अब उसके पास. रमेश जी का क्या पता वह वापस आएँगे या नहीं .. और आए भी तोह दुपहर को उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहूंगी उनके काम के वक़्त. फिर कुछ सोचती हैं “अच्छा ठीक हैं में आउंगी बाइक पर .. असलम जी का इलाज करना बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं ..में एक बाइक पर बैठूंगी कोई और दूसरी बाइक लेकर आइये.
सलीम बोलता हैं “ठीक हैं रौशनी जी हम बाइक अर्रंगे करेंगे .. फिर दुपहर जाकर उस डॉक्टर से मिलकर असलम जी के इलाज का सलूशन निकालेंगे …”
रौशनी खुश हो जाती हैं … असलम जी की बिमारी का हल निकलेगा तोह फिर असलम जी की दोस्ती को भी नहीं तोड़नी पड़ेगी .. और वह भी आराम से अभी ज़िन्दगी बिता पाएंगे.
दोनों को अलविदा कहते हुए रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसकी हिलती चूतड़ों और कमर को देख .. दोनों अपने लोडे मसलने लगते हैं ..
उन लोगों ने ऐसे सेटिंग की थी की असलम की जूठी बिमारी का वह अपने फायदे के लिए पूरी तरह से उस डॉक्टर के वजह से इस्तेमाल करने वाले थे .. यह कैसे आगे उपदटेस में देखिये !!!!
फिर वह नहाने चली गयी … रौशनी नहाते वक़्त उसे कल शाम की बात याद आयी. उस रिक्शा में , रमेश के साथ उसके होठों के इतने करीब , वह ानकेहिं बंद करके उनके टच का एहसास करने लगी … रमेश ने उसे कास कर पलड़ा था एयर अपना हाथ उसके शरीर पर दौड़ा रहा था ..
एक हफ्ते से उसके और रोनित के बीच कुछ भी फिजिकल न होने के कारन वह एक मर्द के टच से अच्छा फील कर रही थी .. लेकिन रमेश एक बुद्धा था और हु भी एक रिक्शा ड्राइवर … वह उनके बारे में ऐसे कैसे सोच सकती थी ..
फिर अपनी ख्यालों से निकल कर रौशनी कपडे बदलने चली गयी ..
रौशनी का मूड काफी अच्छा था , उसके जॉब की शुरुवात बहुत अच्छी हुयी थी. सब लोग वहां उसे बेहत रेस्पेक्ट करते थे और प्यार भी दे रहे थे ..
आज उसने एक डीप बैक कट ब्लाउज पहनी जो बस 1 स्ट्रिंग और एक स्ट्राप से पीछे से बंधी हुयी थी ..
ब्लाउज स्लीवलेस थी . बाल आज उसने एक बन में बंधे थे जैसे उसकी पूरी मखमली पीठ दर्शा रही थी … वह फिर मिरर में खुद को देखने लगी .. उसने सच में लाफ़ी मेन्टेन राखी थी फिगर ज़ज़. फिर उसने हाथों में चूड़ियां और कानो में बलि पहनी ..
आज उसने डार्क रेड लिपस्टिक पहनी थी … हल्का सा मेक जैसे वह हमेशा पहनती थी ..
साड़ी थोड़ी और ट्रांसपेरेंट थी जिससे उसकी नाभि का गोल आकर साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था ..
खुद को एक बार आईने में देख वह खुद के खूबसूरती पर मुस्कुरायी .. उसे रमेश के तारीफे याद आने लगे थे ..
अब वह बिना रोनित से कुछ बोले घर के बहार रिक्शा स्टैंड निकल गयी ..
आज उसने देख की रमेश उसका इंतज़ार नहीं कर रहे थे .. वह कही भी नहीं दिख रहे थे .. रौशनी निराश हुयी … वह सोची की क्या कल के इंसिडेंट के वजह से आज रमेश जी उसे लेने नहीं आये थे ??
वहां फिर उसने एक दूसरी रिक्शा ली और वहां से निकल पड़ी…
रौशनी रमेश से बातें मिस कर रही थी ..उसे रमेश की कंपनी अच्छी लगती थी .. वह बुड्ढे जरूर थे लेकिन बातें किसी युवा जैसे करते थे .. खैर फिर रौशनी ंगो पहुँच गयी ..
ऑफिस में वह काम करने लगी .. फिर वहां के लोगों ने कहा की एक एक्टिविटी उन्हें रखनी थी कुछ 1 हफ्ते बाद .. उसके लिए उसे असलम जी और सलीम जी की मदद लेनी होगी
रौशनी असलम और सलीम के घर आकर उसे बुलाती हैं “असलम जी ,, असलम जी में रौशनी .. आपसे मिलने आयी हूँ कुछ काम था …”
तीन बार बुलाने पर भी असलम नहीं आये .. रौशनी को लगा की वह बहार गए होंगे ..फिर भी उनका थोड़ी और देर इंतज़ार करने की सोची.
वहां असलम को सब सुनाई दिया था … वह जान बुझ कर जल्द से रौशनी से मिलने नहीं आ रहा था .. आज वह अपनी ‘बिमारी’ का फायदा उठाने की सोच रहा था ..
वह धीमे क़दमों से रौशनी के पास आ गया और फिर रौशनी को पीछे से लप्पेट लिया “अरे जानेमन तू आ गयी ,, कितनी इंतज़ार करवाएगी जान ु उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी खुसबू मममम”
रौशनी इस हरकत से चौंक उठी ..
“असलम जी छोड़िये मुझे उफ्फ्फ में रौशनी हूँ का की आपकी बेगम .. िसष्ठ छोड़िये प्लीसीईए..”
“रुकसाना मेरी जान तू बहुत दिनों बाद आयी हैं मेरे पास ममम सूंघ लेने दो तुम्हारी खुशबु …”
असलम ने अपने बाँहों को रौशनी के इर्द गिर्द लपेटा था और वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था … असलम की सांसें रौशनी के नैक के वहां उसे महसूस हुयी..
“ममम रुकसाना मेरी जान मममम तुम अभी भी इतनी मस्त बदन वाली हो उफ्फ्फ क्या बदन हैं तेरा अह्ह्ह्ह”
“असलम जी , प्लीज छोड़िये हमें , में रौशनी हूँ रौशनी …”
लेकिन असलम आज नहीं सुनने वाला था .. वह अब रौशनी को और कास कर पकड़ने लगा …. उसके हाथ अब रौशनी के कमर को पकडे हुए था और से वह दबाने लगा .. रौशनी बहुत दिनों से अपने पति से ऐसे कुछ करि नहीं थी , उसे ऐसे एक मर्द का फिजिकल एहसास पाकर कंफ्यूज हुयी.
असलम ने अब अपने मुँह से रौशनी के मुलायम पीठ पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. उफ्फ्फ रुकसाना तुम्हारी यह पीठ ममम बहुत hi मुलायम हैं , दूध से नहाती हो न मममम और उसने फिर एक गीली से चुम्मी दी रौशनी के पीठ पर …
रौशनी को उस चुम्मी से अउ रेज एक मर्द के फिजिकल टच से थोड़ी सी आह निकल गयी … “छोड़िये न असलम जी “ और वह अपने आप को चुराने की कोशिश करि लेकिन असफल रही .. असलम था बुद्धा लेकिन काफी मज़बूत बदन वाला था .. आसानी से रौशनी नही जुड़ा हो पाएगी उसके बाँहों से …
ऐसे कर असलम ने और दो पुप्पियाँ दी रौशनी की पीठ पर .. उसके चूमियाँ सब गीले थे और वह ऐसे hi रौशनी के पीठ पर अपनी गीली चूमियों की निशानी चोरे जार अहा था …. करीबन 5 ऐसे चुम्मों के बाद असलम ने रौशनी को पलटा कर उसका चेरा अपने तरफ करवाया .. वह रौशनी की गुलाबी होठों को देखे जार अहा था … अब उसके हाथ रौशनी के पीठ पर थे और वह उसकी पीठ पर अपने हाथों को फेरने लगा
“रुकसाना मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ तुझे देख तेरा यार बहुत गरम हो रहा हैं मममम क्या आइटम हैं तू उफ्फ्फ्फ़”
असलम का लुंड अब उसकी पंत में उभरने लगा था … उसका लुंड ाजिसे hi और सख्त होता , वह रौशनी की क्रॉत्च पर जा टकराने लगता .. रौशनी को उसकी चुभन महसूस हुयी … “असलम जी मम प्लीज छोड़िये उफ्फ्फ यह गलत हैं , में आपकी बेगम रुकसाना नहीं हूँ , में रौशनी हूँ प्लीज याद करिये यह सब असलम जीईई
असलम रौशनी की बात न सुनने का नाटक कर रहा था और रौशनी के पीठ पर अपने गंदे कठोर हाथों को पहरने लगा .. ृष्णि की मुलायम पीठ अब असलम के कठोर हाथों द्वारा मसली जा रही थी .. उसके पीठ पर लाल निशाँ चोर रहे थे ….
“रुकसाना मेरी बेगम में आज तुम्हे हर हाल में पाना चाहता हूँ ,,, आज तुझे दुनिया की सैर करवाऊंगा .. उफ्फ्फ चलो न मज़्ज़ज़ करते हैं मममम”
रौशनी के अंदर मिक्स्ड फीलिंग थी , एक तरफ उसे ऐसे एक मर्दाने हुग का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और दूसरी तरह यह किसी बुड्ढे के बाँहों में थी .. कला सा गन्दा बुद्धा..
असलम अब निचे झुक कर रौशनी के नाभि को चूमने लगा , वहां पर भी गीली चूमियाँ वह देने लगा … रौशनी को अपनी नाभि पर चुम्मियाँ पा कर वह थोड़ा हसने लगी .. वह वहां बहुत hi सेंसिटिव थी .. उफ्फ्फ असलम वही पर क्यों चुम्मियाँ दे रहा हैं उफ्फ्फ वह तोह मेरी वीक स्पॉट हैं .. रौशनी के मुँह से हलकी सी आठ निकल गयी और रौशनी की आँखें अब बंद हो गयी .. वह असलम से कुछ बोल नहीं रही थी बस हलकी सी सिकरियाँ मार रही थी …
असलम ने और थोड़े चुम्मों के साथ फिर से रौशनी के मुँह की तरफ अपने मुँह को करवा लिया ..
“डार्लिंग मेरी बेगम, मेरी रुकसाना , मेरी जान उफ्फ्फ तुम बहुत hi स्पेशल हो मेरे लिए ममम आज तुम हाथ आयी अब तुम्हे छोड़ूंगा नहीं ममम चलो अब हम बिस्तर पर जा कर पूरी मस्ती कर लेते हैं ममममम”
बिस्तर का नाम सुन कर रौशनी की आँखें खुली , अब उसे पूरी तरह से एहसास हुआ की वह असलम बुड्ढे के बाँहों में थी ..” चिरये असलम जी अब बहुत हुआ छोड़िये मुझे असलम जीई”
असलम अब पूरी तरह से बहक गया था , अब तोह वह बस रौशनी की चुदाई hi करना चाहता था …. ौसे रौशनी को और दबोचा और उसे और मसलने लगा …
फिर एकदम से दोनों को सलीम की आएवज़ सुनाई दी ..
“असलम अरे तू क्या कर रहा हैं , यह रौशनी मैडम हैं तेरी बेगम रुकसाना नहीं .. अरे चोर इसे ….”
असलम रौशनी को अभी भी अपने बाँहों में लपेटे हुए था .. रौशनी फिर पीछे मुद कर सलीम को देखि .. उसे असलम के बाँहों से चुराने के लिए इशारा करने लगी … विनंती करने लगी .. सलीम थोड़ी और देर असलम को रौशनी को मसलने दिया
“असलम अरे रौशनी मैडम को चोर .. तेरी बेगम जैसे दिखती होगी और उसके जैसे गदरायी सेक्सी औरत होगी लेकिन यह तेरी बेगम नहीं हैं …”
रौशनी को सलीम से ऐसी बातें सुन शर्मा गयी .. क्या वह रुकसाना को ऐसे कह रहा था या उसे .. वह सोच रही थी ..
सलीम ने दोनों के पास जाकर असलम को एक तमाचा मारा.
“असलम तू क्या कर रहा था .. अरे रौशनी मैडम हैं यह .. पागल हैं क्या .. तेरी इस बिमारी की वजह से बहुत प्रोब्लेम्स हो रहे हैं …
रौशनी साइड में कड़ी थी .. उसके बाल बिखरे हुए थे , वह बन आधा खुल चुक्का था ..
उसकी मुलायम पीठ पर लाल रंग के निशाँ बने थे , उसकी नाभि और कमर पर भी लाल निशाँ थे … उसकी पीठ और कमर पर असलम की सुखी हुयी सलीवा भी थी …
सलीम “असलम तू पागल हैं , इस बिमारी ने तुम पर हावी बोल दिया हैं .. कल भी तुम मीनल को अपनी बेगम समझ कर उसे भी मसलने लगा था .. उसे तोह तूने उसके होठों पर चूमा भी …. वह तोह में आ ता नहीं तोह उसे तोह तुह पूरा निचोड़ hi लेता …”
मुझे माफ़ करिये रौशनी मैडम , में .. में खुद पर काबू भूल गया उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … मुझे माफ़ कीजिये …”
रौशनी को अभी भी असलम पर थोड़ा ग़ुस्सा था … वह उसे घर रही थी …
असलम फिर एक दो बार और माफ़ मांग कर रोने hi लग गया “उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … इसके वजह से मैंने अपनी फूल जैसी मैडम से ऐसी गन्दी हरकत की .. मुझे सजा दीजिये रौशनी जी .. में आपके दोस्ती के लायक नहीं हूँ .. मुझे मार hi दीजिये आप “ और असलम वही घुटनो के बल जाकर रोने लगा …
रौशनी को असलम की रोने से बुरा लगा … हाँ उसने एक बहुत hi गन्दी हरकत किट hi लेकिन बिचारा उस बिमारी का शक्कर भी तोह हैं … वह उस बिमारी में ऐसे कर बैठा … अब उसे इतना पछतावा हो रहा हैं… उफ्फ्फ्फ़ और रौशनी बोली
“असलम जी आप प्लीज रोइये मत .. आप की बिमारी की वजह से आपने ऐसे किया होगा … आप प्लीज न रोइये … प्लीज में आपको माफ़ कर दूंगी प्लीज न रोइये …
वहां साइड में खड़ा सलीम मन में मुस्कुरा रहा था – साला असलम भी न क्या ज़बरदस्त एक्टिंग करता हैं .. साला कमीना पूरी तरह से बिमारी का फायदा उठा कर रौशनी को नोचोद लिया .. उफ़ उसके बदन पर भी लाल निशाँ हैं . फिर सलीम रौशनी को देखने लगा –उफ्फ्फ क्या मखमली गोरी सी पीठ हैं इसकी . उफ्फ्फ इतने नोचोड़ने से hi इतनी लाल हुयी हैं ममम असलम साला लकी हैं ..
असलम कुछ और रोने की नाटक कर के फिर खड़ा हुआ और मुँह लटकाये खड़ा रहा …
सलीम बोलै “रौशनी जी वैसे आप यहाँ आयी क्यों थी ?”
रौशनी बातों के मुद में नहीं थी .. वह स्पच रही थी की क्या उसे असलम के ऐसे करने से हल्का सा मज़्ज़ा आया था .. क्या वह ऐसे इस बुड्ढे की बाँहों में खुद को पाकर उसे अच्छा लगा था .. उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं उसे …
“कुछ नहीं बाद में बताउंगी … बाद में . मुझे वाशरूम कहा हैं बताइये वहां थोड़ा फ्रेश उप होकर में जाती हूँ.”
सलीम ने रौशनी को वाशरूम कहा हैं वहां गाइड किया ..
रौशनी वाशरूम का दरवाज़ा खोला तोह वह देखि की एक डोरी पर उन दोनों के कच्चे और बनियान लटक रहे थे … वह धोये हुए थे इसलिए रौशनी को उनसे बदबू नहीं आयी लेकिन वह देख रौशनी सेहम सी गयी .. उफ्फ्फ्फ़ यह मर्द भी न , सब एक जैसे हैं अगर अकेला चोरो तोह वाशरूम तोह ेस्पेशलय कैसे भी रखते हैं … हमेशा रोनित को भी बताना पड़ता हैं कैसे घर की चीज़ें रखनी चाहिए उफ्फ्फ.
रौशनी उनके कच्चों को देख एक बात उसे काफी अजीब लगी .. उनके सब कच्चे बड़े थे … और कई कई तोह बोसेर्स hi थे .. सब साइज सल वाले … रोनित तोह उनसे और हत्ता कटा हैं लेकिन उसके बोसेर्स या कच्चियाँ भी ल साइज के hi हैं … क्या उनके अंदर वह .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह में क्या सोच रही हूँ … जल्दी से फ्रेश उप होकर निकलना चाहिए .. आज का दिन पूरा अजीब hi हैं उफ्फ्फ्फ़.
और रौशनी फ्रेश उप होकर वहां से निकल गयी…
अब रौशनी के जाते हैं असलम बोलै सलीम से “कमीने तूने ऐसे जोर से तमाचा क्यों मारा मुझे “
“अरे चूतिये तू कैसे मसल रहा था रौशनी को … तू पूरा बेकाबू हुआ था .. बोल्ट ु उसे छोड़ने का इरादा बना लिया था …”
“सलीम उफ़ क्या बताऊ रौशनी का बदन इतना मस्त हैं .. इतनी मुलायम पारी हैं वह … इतनी गोरी … उसके बदन को मसलते मेरा लोढ़ा तोह पूरा टाइट हो गया था .. मममम माल हैं माल “
“असलम तू भी न मेरे hi आईडिया को उसे करके रौशनी को निचोड़ा तुमने … उफ्फ्फ्फ़ मज़्ज़ा आ या होगा न … साली वैसे थोड़े मज़े ले रही थी .. में हलकी सी आह सुन रहा था … तुमने तोह उसे चुम भी लिया पीठ पर और नाभि पर … साले तू बहुत लकी हैं”
सलीम यार इसकी चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ्फ़ लोढ़ा सख्त होता हैं उसके बारे में सोचता हंट यह ,, उसकी गुलाबी होठं, चिकनी कमर, हिलते डुलते चूतड़ .. गोरी बाहें और उसकी नशीली आँखें उफ्फ्फ्फ़.”
“असलम दिख रहा हैं तेरा लोढ़ा कैसे टाइट हुआ हैं .. हाँ तू सही कहता हैं , रौशनी को देख मेरा भी लोढ़ा इतना टाइट होता हैं क्या कहूं … उसके नाम मर एक बार मुठ भी मार चुक्का हूँ उफ्फ्फ्फ़, मुझे भी उसकी चुदाई करनी हैं “
असलम मन में सोचते हुए (साला कमीना , तेरी तोह एक आइटम हैं न वह मीनल लड़की , साली को पता कर कितनी बार छोड़ा हैं तूने .. साला अब तेरी नज़र मेरी आइटम पर हैं .. रौशनी की चुदाई तोह में hi पहले करूँगा ….)
दोनों फिर अपने कमरों में जाकर रौशनी की ख्यालों में खो गए.
वहां ऑफिस में रौशनी असलम से हुयी चीज़ों के बारे में सोच रही थी … उस काळा बुड्ढे ने उसे बहुत मसला था … उसकी बिमारी तोह ज्यादा hi ओरसे होते जा रही हैं … पहले की कुछ कर बैठे उसके इलाज के बारे में कुछ करना होगा .. लेकिन कम्बक्त ंगो का डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएगा .. और अगले हफ्ते तोह वह इवेंट हैं जिसमें मुझ असलम जी मदत तोह लगेगी हैं … मम जाने से पहले एक बार शाम को उनसे मिल लेती हूँ फिर से .. इस बार सलीम को भी बुलाऊंगी ..
सलीम नहीं आते तोह आज असलम और मेरे बीच कुछ हो hi जाता .. असलम बुद्धा होकर बहुत मज़बूत हैं .. उससे तोह खुद को चुरा hi नहीं पाती … सलीम बहुत अच्छे इंसान हैं उन्होंने मुझे बचाया आज.
रौशनी अपने कुछ मीटिंग ख़तम करती हैं और जाने से पहले शाम को सलीम और असलम से मिलने जाती हैं .. इस बार वह पहले से hi कॉल करती हैं सलीम को की वह आ रही हैं और असलम को काबू में रखने के लिए उसे भी आना होगा.
सलीम तोह बहुत खुश होता हैं .. सोचता हैं की इस असलम का इस्तेमाल करके रौशनी से मज़े ले पाउँगा … सेल को भी मज़े करने देना hi पड़ेगा …
रौशनी अब उनके घर जाती हैं तोह सलीम और असलम दोनों उसका इंतेज़्ज़र कर रहे होते हैं .. असलम एक कुर्सी पर बैठा हुआ हैं और सलीम सोफे पर ..
रौशनी भी सोफे पर बैठ जाती हैं ..
रौशनी को फिर से देख दोनों के कच्छियों में हलचल होने लगती हैं …. वह बस रौशनी के बदन को hi देखे जा रहे थे …
“असलम जी अगले हाफत ीक इवेंट हैं , सुना हैं इसमें आप का योगदान बहुत होता हैं.. इसलिए इस बार भी आप hi मैं मदत करेंगे हमें.”
“ज़रूर रौशनी जी में आपकी और ंगो की मदत करूँगा ..”
रौशनी मुस्कुराती हैं ..”सलीम जी आप भी हेल्प कीजिये .. इस बारे में इवेंट और बड़ा रखना चाहती हूँ .. आपकी भी मदत लगेगी..”
सलीम बोलता हैं “रौशनी जी आपके लिए शह हमारी जान हाज़िर , फिर यह इवेंट क्या चीज़ हैं और अपने काळा होठों पर मुस्कराहट लाता हैं .
रौशनी सलीम के बातों को सुन है पड़ती हैं “सलीम जी आप भी न .. ुर तू मच” और रौशनी बड़ी स्माइल देती हैं .
सलीम सोचते हुए (उफ्फ्फ रौशनी तेरे गुलाबी होठं तोह मेरे लोडे पर चुम्मे देने लायक हैं.. ऐसे गुलाबी होठों को तोह मेरे लोडे का सलाम)
तीनो इवेंट के बारे में कुछ देर बातें करते हैं. फिर रौशनी बोलती hain”accha तोह इवेंट की तोह बातें होती रहेगी .. आप दोनों से एक इम्पोर्टेन्ट बात करनी हैं.” आज जॉब hi हुआ वह और नहीं होना चाहिए .. असलम जी आप की बिमारी का कुछ इलाज जल्द से जल्द ढूँढना होगा, लेकिन ंगो के डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएँगे.”
असलम बोलता हैं “रौशनी जी दुपहर के लिए में माफ़ी फिर से मांगता हूँ .. हाँ इस बिमारी का इलाज होना hi चाहिए … मेरे पास एक उपाय हैं”
रौशनी ,असलम की बातें सुनने उत्सुक थी.
“मैंने …..” फिर सलीम बीच में बोलता हैं “हमनें”
“हाँ हाँ हमनें एक डॉक्टर धुंध लिया हैं … थोड़ी सी दुरी पर हैं उनका क्लिनिक. वह भी दिमागी बिमारी का इलाज करते हैं. चाहे तोह कल वहां जा पाएंगे . उनका क्लिनिक दुपहर को ओपन होता हैं.”
रौशनी कहती हैं “वाओ गुड न्यूज़ दिया हैं आपने .. हाँ कल सुबह जरूर जाएंगे वहां.”
असलम बोलता हैं “लेकिन रौशनी जी वह थोड़ी सी दुरी पर हैं , यही कुछ 7-8 कम .. वहां हम तीनो कैसे जाएंगे .. न आपके पास न हमारे पास गाडी भी हैं.”
सलीम बोलता हैं “हम तोह दो बाइक अर्रंगे कर पाएंगे … बस वहां जाने के लिए आपको हमारे साथ बाइक पर आना पड़ेगा …”
रौशनी अब सोचने लगती हैं .. बात तोह सही थी .. गाडी तोह नहीं थी अब उसके पास. रमेश जी का क्या पता वह वापस आएँगे या नहीं .. और आए भी तोह दुपहर को उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहूंगी उनके काम के वक़्त. फिर कुछ सोचती हैं “अच्छा ठीक हैं में आउंगी बाइक पर .. असलम जी का इलाज करना बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं ..में एक बाइक पर बैठूंगी कोई और दूसरी बाइक लेकर आइये.
सलीम बोलता हैं “ठीक हैं रौशनी जी हम बाइक अर्रंगे करेंगे .. फिर दुपहर जाकर उस डॉक्टर से मिलकर असलम जी के इलाज का सलूशन निकालेंगे …”
रौशनी खुश हो जाती हैं … असलम जी की बिमारी का हल निकलेगा तोह फिर असलम जी की दोस्ती को भी नहीं तोड़नी पड़ेगी .. और वह भी आराम से अभी ज़िन्दगी बिता पाएंगे.
दोनों को अलविदा कहते हुए रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसकी हिलती चूतड़ों और कमर को देख .. दोनों अपने लोडे मसलने लगते हैं ..
उन लोगों ने ऐसे सेटिंग की थी की असलम की जूठी बिमारी का वह अपने फायदे के लिए पूरी तरह से उस डॉक्टर के वजह से इस्तेमाल करने वाले थे .. यह कैसे आगे उपदटेस में देखिये !!!!