- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 143,692
अब तीनो बहार बैठे थे गार्डन में .. एक वेटर आया .. वह रौशनी को उन काळा बुद्धों के साथ देख चंक गया .. ऐसी मस्त बदन वाली गोरी से महिला इन बुद्धों के साथ यहाँ कैसे वह सोचता हुआ उनका आर्डर लेने लगा …
अब रौशनी आर्डर देना शुरू हुयी .. उसने दो कबाब और एक टंगड़ी कबाब आर्डर दी ..
“सलीम जी आपको टंगड़ी कबाब पसंद हैं न .. मुझे याद हैं ..”
“हाँ रौशनी जी मुझे भी टंगड़ी कबाब बहुत पसंद हैं .. बहुत टेस्टी और रसीले कबाब होते हैं …”
असलम भी बोलै “हाँ मुझे भी बहुत hi पसंद हैं मलाई टंगड़ी कबाब …”
रौशनी “अरे अच्छा ऐसे हे क्या .. वेटर फिर आप दो टंगड़ी कबाब आर्डर कीजिये … “
“और कुछ मैडम .. ड्रिंक्स में कुछ चाहिए आपको …”
“नहीं no ड्रिंक्स .. आज no ड्रिंक्स इनके लिए … और रौशनी सलीम को देख मुस्कुरायी ..
“हाँ आज no ड्रिंक्स जैसे आ कहे रौशनी जी .. आज सलीम ड्रिंक नहीं पिएगा ..”
वह वेटर वही खड़ा था रौशनी के पास और उसके बदन को देखे जार अहा था ..उसकी गोरी मुलायम पीठ, बाँहों को और उसके गुलाबी होठों को …
“बस आर्डर हुआ भैया जल्दी लाओ ..”
लेकिन वह वेटर वही खड़ा रहा रौशनी को देखे जार अहा था …
“अबे मैडम ने बोलै न जा आर्डर दे कर आ .. रुका क्यों हैं जा “ सलीम जोर से बोलै … जब वह वेटर चला गया तोह रौशनी सलीम को ग़ुस्से की नज़र से देखि “सलीम जी आप को ऐसे नहीं कहना चाहिए था उससे … गलत हैं , मुझे नहीं पसंद यह सब”
“रौशनी जी लेकिन वह आपको घूरे जार अहा था .. इसलिए उसे बोलै की आर्डर देने जा..”
“सलीम जी ऐसे बर्ताव नहीं करना चाहिए आपने , बस वह अपना काम hi कर रहा था .. कुछ सेकंड रुका हुआ था बस .. ऐसे नहीं पॉलिटेली उसे कह सकते थे आप”
“माफ़ कीजिये रौशनी जी , आइंदा ऐसे नहीं करूँगा .. लेकिन क्या करे कोई था hi नहीं ऐसे सब सीखने .. मेरी बीवी भी नहीं कहती थी और बचपन से तोह बिलकुल कोई नहीं .. हम ऐसे hi जीते आ रहे हैं”
“हम्म अच्छा लेकिन अब में बोली न की ऐसे नहीं करना चाहिए आपने .. अब जब आएगा तोह उस वेटर को सॉरी बोलना …”
“रौशनी जी सॉरी किसलिए , इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी ..”
“गलती थी या नहीं फिर भी आप को उसे सॉरी बोलना पड़ेगा फिर hi में आपसे बात करुँगी”
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे …”
असलम अब सलीम को देख मुस्कुरा रहा था … (मस्त दांत पड़ी हैं इसे … रौशनी मैडम से)
सलीम अब असलम को देख “अरे तुझे क्या हुआ तू क्यों स्माइल दे रहा हैं ..
कुछ नहीं सलीम बस ऐसे hi”
असलम फिर बोलै “वैसे रौशनी जी आप को यह गार्डन रेस्टो कैसे लगी …”
“हाँ काफी ाची हैं , खुली हवा हैं , पेड़ हैं .. मुझे ऐसे नेचर में रहना पसंद हैं.”
“अच्छा फिर आइये हमारे साथ किसी गार्डन या पार्क में …”
पार्क सुनते hi रौशनी को रमेश के साथ उन पलों की याद आयी .. मन में अब उसे वह पल सोचकर अच्छा लग रहा था … “
“नहीं बस बहुत पार्क घूमी हूँ .. आप को बस पार्क में hi घूमना होता हैं क्या …”
“अरे रौशनी जी हमने तोह पहली बार पूछा आप से …”
“हाँ सॉरी बस पार्क में नहीं घूमना मुझे”
“ठीक हैं वैसे यहाँ एक नया पार्क खुला हैं ..”(असलम उसी पार्क का नाम लेता हैं जहाँ रमेश लेकर गया था और उसे सुन कर रौशनी थड़ा सेहम जाती हैं)
रौशनी बोल पड़ती हैं “नहीं वह पार्क तोह बस कपल्स के लिए …..” फिर अपने आप को संभालती हैं …
“रौशनी जी कपल्स पार्क ??, आप को ऐसे क्यों लगता हैं “
“कुछ नहीं बस नाम से लगा मुझे .. में जहाँ पहले रहती थी वहां ऐसे पार्क्स हुआ करते थे …”
“अच्छा रौशनी जी आपके पति वहां कभी ले गए थे आपको …” अब सलीम मुस्करातेब हुए पूछता हैं …
“सलीम जी आप को उससे क्या …”
“रौशनी जी अगर आप हर बात पर ग़ुस्सा करेगी तोह बातें करनी मुश्किल हैं..”
“ओह सॉरी … सलीम जी .. तोडा सा निजी मामला हैं मेरे और पति के बीच इसलिए .. सॉरी”
“No प्रोब्लेम्स … वैसे हम सब दोस्त हैं , दोस्ती में आप कह सकती हो , हम किसी से बताएंगे नहीं और हम आपको जज तो बुल्कुल नहीं करेंगे ..”
असलम बोलै “वैसे में गया था रुकसाना के साथ ऐसे पार्क्स में … थोड़ा एक्ससिटेमेंट होता हैं न ऐसे खुले में अपने पार्टनर के साथ … “
“हाँ असलम में भी अपनी बेगम को ले गया हूँ ऐसे पार्क्स में … हम काफी जवान थे तब .. “
रौशनी थोड़ी से रिलैक्स होती हैं ..
“रौशनी जी मेरी बेगम पहली बार आयी थी तब वह चौंक गयी थी .. पूछती थी .. असलम मियां क्या पार्क हैं यह ,, ऐसे कपल्स कैसे पास रहकर चुम रहे हैं .. उफ्फ्फ मुझे शर्म आ रही हैं .. मुझे अभी भी याद हैं ” और असलम मुस्कुराता हैं ..
“लेकिन बाद में उसे भी पसंद आने लगा पार्क में घूमना मेरे साथ … हमने बहुत मस्तियाँ की ऐसे पार्क्स में .. काफी मिस करता हूँ ऐसे सब चीज़ें ..” और स्लैम मायूसी का चेहरा बनाये बैठा रहता हैं ..
रौशनी को थोड़ा बुरा लग रहा था … असलम के हाथों पर अपना रख वह बोली “असलम जी आप बहुत याद करते हो न अपनी बेगम को .. आप उनसे इतना प्यार करते थे .. ी ऍम टोक्यूहेद>”
असलम अब रौशनी के हाथों को अपने हाथ पर महसूस कर अच्छा लगता हैं … वहां सलीम देख सोचता हैं (कमीना कितने नखरे करता हैं … )
तब खाना आ गया और सब खाने लग गए …
“रौशनी जी आप को भी कबाब पसंद हैं ….”
“हाँ सलीम जी बहुत पसंद हैं कबाब… में बहुत कहती थी पहले.. अभी थोड़ा काम हुआ हैं”
“रौशनी जी अब और खाइये न कबाब हमारे साथ .. हम आपको कबाब खिलाना चाहते हैं”
असलम को समझ आया सलीम का मतलब क्यात है लेकिन रौशनी उस मतलब को समझी नहीं थी ..
“हाँ सलीम जी आप के साथ रहकर बहुत कबाब खाउंगी … कबाब की टास्ते आप की वजह से और डेवेलोप होगी …”
“रौशनी जी हम तोह बस बड़े कबाब hi खिलाएंगे आपको , छोटे कबाब बिलकुल नहीं ..”
“अच्छा सलीम जी बस बड़े कबाब hi खिलाओ आप …”
असलम सब सुन मुस्कुरा रहा था …
“रौशनी जी मुझे भी कबाब खिलाना हैं आपको … आप मेरे से भी खाओगी न कबाब बड़ा वाला ..”
असलम जी आप रुकसाना जी को भी खिलाए थे कबाब ….”
“रौशनी जी रुकसाना बेगम को तोह मेरे कबाब बहुत पसंद थे .. रोज़ कहती थी .. मेरा भी मन करता था उसे रोज़ कबाब खिलाना .. बड़े बड़े कबाब बस “
“चलो रौशनी जी अब मुझे आपको खिलने दो … असलम एक फोर्क में कबाब लेता हैं .. रौशनी जी मेरे हाथ से खिलने दो मुझे ..”
रौशनी बस थोड़ा आगे झुकती हैं .. और असलम उसे कबाब खिला था हैं … फिर सलीम भी उसे एक कबाब खिलता हैं फोर्क से … (दोनों मन में सोचते हुए – उफ्फ्फ रौशनी हमारा असली में पंत के अंदर का कबाब भी आपको खिलाना हैं … हु कबाब कब खाओगी ममम)
रौशनी मन में खुश थी की आज दोनों उससे अच्छी तरह से बिना छुए या तंग किये समय बिताए थे .. उसे वह बात अच्छी लगी.
अब उनका मैं कोर्स भी अत हैं और तीनो खाना खा कर अब रेस्टो से बहार निकल रहे थे.. उन्ह ीक रिक्शा मिलती हैं और तीनो उसमें बैठ जाते हैं … अब कुछ 5 मं बाद रक्षा में ठंडी हवा चलती हैं और रौशनी को बहुत ठण्ड लगने लगती हैं ..वह अपने बाँहों पर हाथ फेरती हैं खुद को वार्म रखने .. यही बात सलीम देखता हैं ..
“रौशनी जी आपको ठण्ड बहुत लग रही हैं … आप एक काम कर पाओगे .. आप हम दोनों के बीच बैठ जाइये … आपको ठण्ड काम लगेगी .. “
रौशनी कुछ सोचती हैं .. “नहीं सलीम जी रहने दो थोड़ा सेहेन कर लुंगी..”
लेकिन रौशनी को बहुत hi ठण्ड लग रही होती है .. अब वह सलीम से कहती हैं ..”सलीम जी बहुत ठण्ड हैं .. में बैठूंगी आप दोनों के बीच”
“सलीम तोह बहुतखुश होता हैं , और स्लैम भी .. दोनों उसे बीच में बिठाकर उससे मज़े लेने वाले थे..”
अब रिक्शा एक साइड रुक गयी और बी रौशनी दोनों के बीच बैठ गयी .. रिक्शा ड्राइवर देख सकता था की यह गोरी सी हुस्न की पारी दो काळा बुद्धों के बीच बैठने वाली थी .. वह सोचा की इन दो बुद्धों को ऐसी खूबसूरत महिला मिली hi कैसे …?)
अब जैसे रिक्शा चलती दोनों असलम और सलीम मौका धुंध रहे थे रौशनी को टच करने के लिए .. जब भी रिक्शा थोड़ा सा हिलती तोह दोनों के तइस रौशनी की तइस से टकराने लगते हैं … दोनों रौशनी के इतने करीब बैठे थे उस एहसास से hi उनके लुंड उभरने लगते हैं …
अब रास्ता थोड़ा ख़राब था इसलिए सलीम और असलम के तइस रौशनी के तइस से और टकराने लगते हैं .. रौशनी को ठण्ड तोह नहीं लग रही थी लेकिन उसे एहसास हो रहा था सलीम और असलम के तइस के टॉचेस का .. वह उन्हें देखि तोह दोनों बहार देख रहे थे .. रौशनी अब उनकी गलती से टॉचेस मानकर शांत बैठ गयी ..
एकदम से एक बड़ा स्पीड ब्रेकर आता हैं और रौशनी थोड़ा उछाल कर जैसे hi निचे खुद को सँभालने बैठने जाती हैं उसका देना हाथ असलम के झंघों पर आता हैं और बया हाथ सलीम के जहांग पर.
उसे हाथों को पाकर दोनों के लुंड झटके मरने लगे … यह बात रौशनी को समझ आयी तोह वह शर्मा कर वहां से हाथ निकले .. उसकी नज़र दोनों के उभर पर गयी .. और उसके गाल शर्म से लाल हुए … ुसफ्फ दोनों के मोठे लुंड फिर से उभरते देख और खुद को उनके बीच बैठे पाकर वह कुछ कर भी नहीं सकती थी ..
दोनों ने रौशनी के हाथों को अपने झांघों पर पाकर कोई रिएक्शन दिया नहीं था .. लेकिन मन में बहुत खुश थे और वह ख़ुशी उनके झटके मारते हुए लोडे से hi पता चल सकती थी …
वहां अब रौशनी की नज़र उन के उभर से वह पूरी तरह से निकल नहीं प् रही थी .. बीच बीच में चोरी चुपके से वह उन दोनों के लुंड के उभर को देखती रहती .. उसे अब अंदर थोड़ा सा करंट जैसे लगा .. इतने बड़े मोठे लुंड दोनों के उभरते हुए उसे दिख रहे थे और वह दोनों के बीच बैठी थी ..
सलीम फिर रौशनी की तरफ मुद कर बोलै “रौशनी जी आपको तकलीफ तोह नहीं हो रही हैं न … अब रौशनी कैसे बोलती की वह क्या फील कर रही थी दोनों के बड़े लोंद के उभर को अपने इतने नज़दीक पाकर.. इस बार तोह ऐसे भी नहीं था की वह दोनों कुछ कर रहे थे ..
रौशनी ने रहत की सनस ली जब वह देखि की रिक्शा अब ंगो तक पहुँच hi गयी थी .. वह झट से रिक्शा से उतर गयी … सलीम जी प्लीज आप ड्राइवर को पाय करिये में आगे जाती हूँ …
रौशनी जल्द से आगे जाने लगती हैं की उसके पेअर एक पत्थर से टकरा कर वह गिर जाती हैं .. “अह्ह्ह्ह ोीिमा.
“रौशनी जी उफ़ क्या हुआ .. आप तोह गिर गयी .. मम रुकिए हम आते हैं”
दोनों उसके तरफ भाग कर गए … रौशनी अब निचे बैठी थी .. उसके पैरों को पकडे हुए जहाँ पत्थर लगा था ..
रौशनी जी वैसे खून तोह नहीं आ रहा हैं .. लेकिन आप चल नहीं पाओगी .. तरय करिये .”
रौशनी चलने तरय करती हैं लेकिन उसके पेअर में मोच आयी थी और वह चल नहीं प् रही थी.
“रौशनी जी अब आपको हमें hi अंदर ले जाना पड़ेगा … आप चल नहीं पा रही हो…”
“रौशनी जी हाथ दीजिये …”
रौशनी फिर एक हाथ सलीम को देती हैं और दूसरा असलम को … फिर दोनों के गले पर अपने दाए और बाएं आर्म्स को रख वह दोनों उसे अब ले जाने लगते हैं …
रौशनी के नाज़ुक मुलायम गोर बाहें अब असलम और सलीम के गार्डन पर थे .. और तीनो साथ चल रहे थे…
रौशनी फिर भी ठीक से चल नहीं प् रही थी ..
रौशनी जी आपको और सपोर्ट की जरूरत हैं .. हमें आपके कमर को पकड़ कर hi ले जाना पड़ेगा ..”
अब रौशनी भी कुछ कह नहीं सकती थी .. उसे चलने में मुश्किल हो रहा था .. वह बस हाँ में सर हिलायी ..
अब दोनों बुड्ढे खुश होकर उसके कमर को पकड़े रखे .. सलीम बाएं और से और असलम दाईं और से … उसके कमर पर अपने हाथों का एहसास होते hi उनके लुंड झटके मारने लगे … उफ्फ्फ उसकी मुलायम सी नाज़ुक कमर उनके हाथों में थी … उसके बाहें उनकी गार्डन के ऊपर … उसकी सुगंध से भी उनके लोडे झटके मार रहे थे …
दोनों के उसके कमर को पकड़ने से वहां हल्का सा लाल निशाँ हुआ था .. इतनी गोरी और नाज़ुक थी रौशनी …
(उफ्फ्फ मैडम की कमर इतनी नाज़ुक हैं .. और उनकी सुगंध उफ्फ्फ मममम रौशनी जी आप को तोह बिस्तर पर ले जाकर जमकर चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ क्या माल हो तुम तोह)
वह दोनों यही सोचते हुए रौशनी को घर के अंदर ले जाते हैं …
अब रौशनी आर्डर देना शुरू हुयी .. उसने दो कबाब और एक टंगड़ी कबाब आर्डर दी ..
“सलीम जी आपको टंगड़ी कबाब पसंद हैं न .. मुझे याद हैं ..”
“हाँ रौशनी जी मुझे भी टंगड़ी कबाब बहुत पसंद हैं .. बहुत टेस्टी और रसीले कबाब होते हैं …”
असलम भी बोलै “हाँ मुझे भी बहुत hi पसंद हैं मलाई टंगड़ी कबाब …”
रौशनी “अरे अच्छा ऐसे हे क्या .. वेटर फिर आप दो टंगड़ी कबाब आर्डर कीजिये … “
“और कुछ मैडम .. ड्रिंक्स में कुछ चाहिए आपको …”
“नहीं no ड्रिंक्स .. आज no ड्रिंक्स इनके लिए … और रौशनी सलीम को देख मुस्कुरायी ..
“हाँ आज no ड्रिंक्स जैसे आ कहे रौशनी जी .. आज सलीम ड्रिंक नहीं पिएगा ..”
वह वेटर वही खड़ा था रौशनी के पास और उसके बदन को देखे जार अहा था ..उसकी गोरी मुलायम पीठ, बाँहों को और उसके गुलाबी होठों को …
“बस आर्डर हुआ भैया जल्दी लाओ ..”
लेकिन वह वेटर वही खड़ा रहा रौशनी को देखे जार अहा था …
“अबे मैडम ने बोलै न जा आर्डर दे कर आ .. रुका क्यों हैं जा “ सलीम जोर से बोलै … जब वह वेटर चला गया तोह रौशनी सलीम को ग़ुस्से की नज़र से देखि “सलीम जी आप को ऐसे नहीं कहना चाहिए था उससे … गलत हैं , मुझे नहीं पसंद यह सब”
“रौशनी जी लेकिन वह आपको घूरे जार अहा था .. इसलिए उसे बोलै की आर्डर देने जा..”
“सलीम जी ऐसे बर्ताव नहीं करना चाहिए आपने , बस वह अपना काम hi कर रहा था .. कुछ सेकंड रुका हुआ था बस .. ऐसे नहीं पॉलिटेली उसे कह सकते थे आप”
“माफ़ कीजिये रौशनी जी , आइंदा ऐसे नहीं करूँगा .. लेकिन क्या करे कोई था hi नहीं ऐसे सब सीखने .. मेरी बीवी भी नहीं कहती थी और बचपन से तोह बिलकुल कोई नहीं .. हम ऐसे hi जीते आ रहे हैं”
“हम्म अच्छा लेकिन अब में बोली न की ऐसे नहीं करना चाहिए आपने .. अब जब आएगा तोह उस वेटर को सॉरी बोलना …”
“रौशनी जी सॉरी किसलिए , इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी ..”
“गलती थी या नहीं फिर भी आप को उसे सॉरी बोलना पड़ेगा फिर hi में आपसे बात करुँगी”
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे …”
असलम अब सलीम को देख मुस्कुरा रहा था … (मस्त दांत पड़ी हैं इसे … रौशनी मैडम से)
सलीम अब असलम को देख “अरे तुझे क्या हुआ तू क्यों स्माइल दे रहा हैं ..
कुछ नहीं सलीम बस ऐसे hi”
असलम फिर बोलै “वैसे रौशनी जी आप को यह गार्डन रेस्टो कैसे लगी …”
“हाँ काफी ाची हैं , खुली हवा हैं , पेड़ हैं .. मुझे ऐसे नेचर में रहना पसंद हैं.”
“अच्छा फिर आइये हमारे साथ किसी गार्डन या पार्क में …”
पार्क सुनते hi रौशनी को रमेश के साथ उन पलों की याद आयी .. मन में अब उसे वह पल सोचकर अच्छा लग रहा था … “
“नहीं बस बहुत पार्क घूमी हूँ .. आप को बस पार्क में hi घूमना होता हैं क्या …”
“अरे रौशनी जी हमने तोह पहली बार पूछा आप से …”
“हाँ सॉरी बस पार्क में नहीं घूमना मुझे”
“ठीक हैं वैसे यहाँ एक नया पार्क खुला हैं ..”(असलम उसी पार्क का नाम लेता हैं जहाँ रमेश लेकर गया था और उसे सुन कर रौशनी थड़ा सेहम जाती हैं)
रौशनी बोल पड़ती हैं “नहीं वह पार्क तोह बस कपल्स के लिए …..” फिर अपने आप को संभालती हैं …
“रौशनी जी कपल्स पार्क ??, आप को ऐसे क्यों लगता हैं “
“कुछ नहीं बस नाम से लगा मुझे .. में जहाँ पहले रहती थी वहां ऐसे पार्क्स हुआ करते थे …”
“अच्छा रौशनी जी आपके पति वहां कभी ले गए थे आपको …” अब सलीम मुस्करातेब हुए पूछता हैं …
“सलीम जी आप को उससे क्या …”
“रौशनी जी अगर आप हर बात पर ग़ुस्सा करेगी तोह बातें करनी मुश्किल हैं..”
“ओह सॉरी … सलीम जी .. तोडा सा निजी मामला हैं मेरे और पति के बीच इसलिए .. सॉरी”
“No प्रोब्लेम्स … वैसे हम सब दोस्त हैं , दोस्ती में आप कह सकती हो , हम किसी से बताएंगे नहीं और हम आपको जज तो बुल्कुल नहीं करेंगे ..”
असलम बोलै “वैसे में गया था रुकसाना के साथ ऐसे पार्क्स में … थोड़ा एक्ससिटेमेंट होता हैं न ऐसे खुले में अपने पार्टनर के साथ … “
“हाँ असलम में भी अपनी बेगम को ले गया हूँ ऐसे पार्क्स में … हम काफी जवान थे तब .. “
रौशनी थोड़ी से रिलैक्स होती हैं ..
“रौशनी जी मेरी बेगम पहली बार आयी थी तब वह चौंक गयी थी .. पूछती थी .. असलम मियां क्या पार्क हैं यह ,, ऐसे कपल्स कैसे पास रहकर चुम रहे हैं .. उफ्फ्फ मुझे शर्म आ रही हैं .. मुझे अभी भी याद हैं ” और असलम मुस्कुराता हैं ..
“लेकिन बाद में उसे भी पसंद आने लगा पार्क में घूमना मेरे साथ … हमने बहुत मस्तियाँ की ऐसे पार्क्स में .. काफी मिस करता हूँ ऐसे सब चीज़ें ..” और स्लैम मायूसी का चेहरा बनाये बैठा रहता हैं ..
रौशनी को थोड़ा बुरा लग रहा था … असलम के हाथों पर अपना रख वह बोली “असलम जी आप बहुत याद करते हो न अपनी बेगम को .. आप उनसे इतना प्यार करते थे .. ी ऍम टोक्यूहेद>”
असलम अब रौशनी के हाथों को अपने हाथ पर महसूस कर अच्छा लगता हैं … वहां सलीम देख सोचता हैं (कमीना कितने नखरे करता हैं … )
तब खाना आ गया और सब खाने लग गए …
“रौशनी जी आप को भी कबाब पसंद हैं ….”
“हाँ सलीम जी बहुत पसंद हैं कबाब… में बहुत कहती थी पहले.. अभी थोड़ा काम हुआ हैं”
“रौशनी जी अब और खाइये न कबाब हमारे साथ .. हम आपको कबाब खिलाना चाहते हैं”
असलम को समझ आया सलीम का मतलब क्यात है लेकिन रौशनी उस मतलब को समझी नहीं थी ..
“हाँ सलीम जी आप के साथ रहकर बहुत कबाब खाउंगी … कबाब की टास्ते आप की वजह से और डेवेलोप होगी …”
“रौशनी जी हम तोह बस बड़े कबाब hi खिलाएंगे आपको , छोटे कबाब बिलकुल नहीं ..”
“अच्छा सलीम जी बस बड़े कबाब hi खिलाओ आप …”
असलम सब सुन मुस्कुरा रहा था …
“रौशनी जी मुझे भी कबाब खिलाना हैं आपको … आप मेरे से भी खाओगी न कबाब बड़ा वाला ..”
असलम जी आप रुकसाना जी को भी खिलाए थे कबाब ….”
“रौशनी जी रुकसाना बेगम को तोह मेरे कबाब बहुत पसंद थे .. रोज़ कहती थी .. मेरा भी मन करता था उसे रोज़ कबाब खिलाना .. बड़े बड़े कबाब बस “
“चलो रौशनी जी अब मुझे आपको खिलने दो … असलम एक फोर्क में कबाब लेता हैं .. रौशनी जी मेरे हाथ से खिलने दो मुझे ..”
रौशनी बस थोड़ा आगे झुकती हैं .. और असलम उसे कबाब खिला था हैं … फिर सलीम भी उसे एक कबाब खिलता हैं फोर्क से … (दोनों मन में सोचते हुए – उफ्फ्फ रौशनी हमारा असली में पंत के अंदर का कबाब भी आपको खिलाना हैं … हु कबाब कब खाओगी ममम)
रौशनी मन में खुश थी की आज दोनों उससे अच्छी तरह से बिना छुए या तंग किये समय बिताए थे .. उसे वह बात अच्छी लगी.
अब उनका मैं कोर्स भी अत हैं और तीनो खाना खा कर अब रेस्टो से बहार निकल रहे थे.. उन्ह ीक रिक्शा मिलती हैं और तीनो उसमें बैठ जाते हैं … अब कुछ 5 मं बाद रक्षा में ठंडी हवा चलती हैं और रौशनी को बहुत ठण्ड लगने लगती हैं ..वह अपने बाँहों पर हाथ फेरती हैं खुद को वार्म रखने .. यही बात सलीम देखता हैं ..
“रौशनी जी आपको ठण्ड बहुत लग रही हैं … आप एक काम कर पाओगे .. आप हम दोनों के बीच बैठ जाइये … आपको ठण्ड काम लगेगी .. “
रौशनी कुछ सोचती हैं .. “नहीं सलीम जी रहने दो थोड़ा सेहेन कर लुंगी..”
लेकिन रौशनी को बहुत hi ठण्ड लग रही होती है .. अब वह सलीम से कहती हैं ..”सलीम जी बहुत ठण्ड हैं .. में बैठूंगी आप दोनों के बीच”
“सलीम तोह बहुतखुश होता हैं , और स्लैम भी .. दोनों उसे बीच में बिठाकर उससे मज़े लेने वाले थे..”
अब रिक्शा एक साइड रुक गयी और बी रौशनी दोनों के बीच बैठ गयी .. रिक्शा ड्राइवर देख सकता था की यह गोरी सी हुस्न की पारी दो काळा बुद्धों के बीच बैठने वाली थी .. वह सोचा की इन दो बुद्धों को ऐसी खूबसूरत महिला मिली hi कैसे …?)
अब जैसे रिक्शा चलती दोनों असलम और सलीम मौका धुंध रहे थे रौशनी को टच करने के लिए .. जब भी रिक्शा थोड़ा सा हिलती तोह दोनों के तइस रौशनी की तइस से टकराने लगते हैं … दोनों रौशनी के इतने करीब बैठे थे उस एहसास से hi उनके लुंड उभरने लगते हैं …
अब रास्ता थोड़ा ख़राब था इसलिए सलीम और असलम के तइस रौशनी के तइस से और टकराने लगते हैं .. रौशनी को ठण्ड तोह नहीं लग रही थी लेकिन उसे एहसास हो रहा था सलीम और असलम के तइस के टॉचेस का .. वह उन्हें देखि तोह दोनों बहार देख रहे थे .. रौशनी अब उनकी गलती से टॉचेस मानकर शांत बैठ गयी ..
एकदम से एक बड़ा स्पीड ब्रेकर आता हैं और रौशनी थोड़ा उछाल कर जैसे hi निचे खुद को सँभालने बैठने जाती हैं उसका देना हाथ असलम के झंघों पर आता हैं और बया हाथ सलीम के जहांग पर.
उसे हाथों को पाकर दोनों के लुंड झटके मरने लगे … यह बात रौशनी को समझ आयी तोह वह शर्मा कर वहां से हाथ निकले .. उसकी नज़र दोनों के उभर पर गयी .. और उसके गाल शर्म से लाल हुए … ुसफ्फ दोनों के मोठे लुंड फिर से उभरते देख और खुद को उनके बीच बैठे पाकर वह कुछ कर भी नहीं सकती थी ..
दोनों ने रौशनी के हाथों को अपने झांघों पर पाकर कोई रिएक्शन दिया नहीं था .. लेकिन मन में बहुत खुश थे और वह ख़ुशी उनके झटके मारते हुए लोडे से hi पता चल सकती थी …
वहां अब रौशनी की नज़र उन के उभर से वह पूरी तरह से निकल नहीं प् रही थी .. बीच बीच में चोरी चुपके से वह उन दोनों के लुंड के उभर को देखती रहती .. उसे अब अंदर थोड़ा सा करंट जैसे लगा .. इतने बड़े मोठे लुंड दोनों के उभरते हुए उसे दिख रहे थे और वह दोनों के बीच बैठी थी ..
सलीम फिर रौशनी की तरफ मुद कर बोलै “रौशनी जी आपको तकलीफ तोह नहीं हो रही हैं न … अब रौशनी कैसे बोलती की वह क्या फील कर रही थी दोनों के बड़े लोंद के उभर को अपने इतने नज़दीक पाकर.. इस बार तोह ऐसे भी नहीं था की वह दोनों कुछ कर रहे थे ..
रौशनी ने रहत की सनस ली जब वह देखि की रिक्शा अब ंगो तक पहुँच hi गयी थी .. वह झट से रिक्शा से उतर गयी … सलीम जी प्लीज आप ड्राइवर को पाय करिये में आगे जाती हूँ …
रौशनी जल्द से आगे जाने लगती हैं की उसके पेअर एक पत्थर से टकरा कर वह गिर जाती हैं .. “अह्ह्ह्ह ोीिमा.
“रौशनी जी उफ़ क्या हुआ .. आप तोह गिर गयी .. मम रुकिए हम आते हैं”
दोनों उसके तरफ भाग कर गए … रौशनी अब निचे बैठी थी .. उसके पैरों को पकडे हुए जहाँ पत्थर लगा था ..
रौशनी जी वैसे खून तोह नहीं आ रहा हैं .. लेकिन आप चल नहीं पाओगी .. तरय करिये .”
रौशनी चलने तरय करती हैं लेकिन उसके पेअर में मोच आयी थी और वह चल नहीं प् रही थी.
“रौशनी जी अब आपको हमें hi अंदर ले जाना पड़ेगा … आप चल नहीं पा रही हो…”
“रौशनी जी हाथ दीजिये …”
रौशनी फिर एक हाथ सलीम को देती हैं और दूसरा असलम को … फिर दोनों के गले पर अपने दाए और बाएं आर्म्स को रख वह दोनों उसे अब ले जाने लगते हैं …
रौशनी के नाज़ुक मुलायम गोर बाहें अब असलम और सलीम के गार्डन पर थे .. और तीनो साथ चल रहे थे…
रौशनी फिर भी ठीक से चल नहीं प् रही थी ..
रौशनी जी आपको और सपोर्ट की जरूरत हैं .. हमें आपके कमर को पकड़ कर hi ले जाना पड़ेगा ..”
अब रौशनी भी कुछ कह नहीं सकती थी .. उसे चलने में मुश्किल हो रहा था .. वह बस हाँ में सर हिलायी ..
अब दोनों बुड्ढे खुश होकर उसके कमर को पकड़े रखे .. सलीम बाएं और से और असलम दाईं और से … उसके कमर पर अपने हाथों का एहसास होते hi उनके लुंड झटके मारने लगे … उफ्फ्फ उसकी मुलायम सी नाज़ुक कमर उनके हाथों में थी … उसके बाहें उनकी गार्डन के ऊपर … उसकी सुगंध से भी उनके लोडे झटके मार रहे थे …
दोनों के उसके कमर को पकड़ने से वहां हल्का सा लाल निशाँ हुआ था .. इतनी गोरी और नाज़ुक थी रौशनी …
(उफ्फ्फ मैडम की कमर इतनी नाज़ुक हैं .. और उनकी सुगंध उफ्फ्फ मममम रौशनी जी आप को तोह बिस्तर पर ले जाकर जमकर चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ क्या माल हो तुम तोह)
वह दोनों यही सोचते हुए रौशनी को घर के अंदर ले जाते हैं …