Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 5 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

सलीम ने डीडे को किया था की 4-5 गोलियां मिलेगा ड्रिंक में लेकिन वह नहीं चाहता था की रौशनी पूरी नाशी में धुत सब कर बैठे .. उसे पसंद था जब हु खुद किसी लेडीज को सडके कर सके , और गोलियां तोह बस उसके काम को आसान करने के लिए hi थे … इसलिए सलीम बस एक hi गोली मिक्स करता हैं ताकि बस रौशनी ज़रा झूम उठे .. और फिर बाकी का सेडक्टिव दोनों के बीच हो जाये …

सलीम फिर रौशनी की आँखों में देख कहता हैं .... रौशनी जी चलिए एक गेम खेलते हैं.... समय गुज़रने के लिए.... वह आप लोग क्या कहते hain.....jisme सच या कोई शर्त करनी होती है....

रौशनी कुछ सोचकर उफ़ सलीम जी उसे न मममम ट्रुथ और डरे गेम कहलाते हैं…..... स

“हाँ रौशनी जी हाँ वही बिलकुल सही ...... में एक बोतल गुमाऊँगा और जिसपे रुकेगी....”

“वह ट्रुथ और डरे चूसे करेगा .. हाँ सही हैं सलीम जी ठीक हैं .”

रौशनी ...जी.... लेकिन अगर आपकी बारी हैं तोह क्या आप डरे पूरा कर पाएंगी.... मममम मुझे तोह नहीं लगता आप में इतना डैम या डेरिंग है....”

सलीम जी … अरे आप ऐसे कैसे मुझे कमज़ोर समझ सकते हैं.... आपको दिखती हूँ रुकिए.. गेम शुरू करिये”

सलीम मन में मुस्कुराता हैं .. एक प्लास्टिक बोतल निकल कर उसे टेबल पररह घूमता हैं …

पहली बार के राउंड में सलीम पर आता हैं बोतल का एआईएम.

“ः आप की hi बारी सलीम जी … चलिए सच या शर्त .. चूसे करिये”

“रौशनी जी नहीं इस गेम में थोड़ा सा ट्विस्ट … जिसपर निशाना आएगा हु नहीं चूसे करेगा … सामने वाले को चूसे करना पड़ेगा सच या शर्त …”

“ओह ममम अच्छा ठीक हैं .. सलीम जी आपको डरे करना होगा … “

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी बताइये कौनसी डरे ..”

सलीम जी आपको एक रोमांटिक गण सींग करना पड़ेगा “

“उफ़ नौई रौशनी जी … मुझे नहीं पता …”

“अरे ऐसे कैसे न पता .. आप मुझ पर डाउट कर रहे थे .. और आप खुद डरे करने से घबरा रहे हो … की क्या फायदा आपकी मर्दानगी का अगर आप इतना छोटा सा डरे नन्ही करोगे ..”

“अच्छा ऐसे हैं …. दखिये रौशनी जी हम मर्दों को न उकसाना … अच्छा रुकिए

सलीम फिर गण गाने लगता हैं ...style='font-size:11.5pt;font-family:Roboto;color:#424242'>

" ऐसे न मुझे तुम देखो , सीने से लगा लूँगा …

तुम को मैं चुरा लूँगा तुमसे , दिल में छुपा लूँगा

ऐसे न मुझे तुम देखो सीने से लगा लूँगा,

तुम को मैं चुरा लूँगा तुमसे , दिल में छुपा लूँगा …..”

“गण तोह पता हैं लेकिन न फीलिंग न एक्सप्रेशंस .. उफ्फ्फ्फ़ यह कैसे गए रहे हो आप सलीम जी …”

सलीम फिर से गाने लगता हैं और इस बार सीधे रौशनी के आँखन में देख कर ….

रौशनी थोड़ी इम्प्रेस होती हैं और ऐसे गाने को सुन शर्मा जाती हैं .. काफी रोमांटिक गण चूसे किया था सलीम जी ने .. उसे थोड़ा नशा चढ़ा था और उस गाने की गर्मी लग रही थी …

सलीम फिर पूरा गण सींग करता हैं .. रौशनी की आँखों में आँखें डाले हुए .. इससे रौशनी की अंदर एक गर्मी सी बढ़ती रहती हैं … वह तोह शर्मा कर चेहरा मोड़ लेती हैं .. लेकिन सलीम फिर से उसके चेहरे को अपने सामने कर गाना कम्पलीट करता हैं..

“कैसे लगा गण रौशनी जी … अच्छा लगा …”

“सलीम जी साहस आप बहुत अच्छे गाना गाये हो .. उफ्फ्फ लेकिन आप ऐसी रोमांटिक गाने को चूसे .. उफ्फफ्फ्फ़ …”

सलीम स्माइल देता हैं … “चलो अब फिर से स्पिन करूँगा बोतल. “

इस बार फिर से एआईएम सलीम पर hi आता हैं .. इस बार रौशनी ट्रुथ चूसे करती हैं.

रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी .. वह अपने ऊपर के कण्ट्रोल को थोड़ा खोर यही थी .. वह पूछती हैं

“अच्छा तोह सलीम जी सच बताओ .. आपको में पहले दिन से hi पसंद थी .. क्या ख्याल थे आपके मुझ पर जब आपपहली बार मुझे देखे थे..”

“रौशनी जी आप पहले दिन से hi मेरे दिल में बस चुकी थी .. आपकी आदयें , बातों का तरीका .. सब मुझे बेहत पसदं आया था .. और आपकी फिगर .. लुक्स उफ्फ्फ्फ़. आपका तोह पहले दिन से दीवाना हूँ … कहते हैं न पहली झलक में प्रेम … उफ्फ्फ वैसे hi बिलकुल ..”

रौशनी यह सुन शर्माती हैं .. उफ्फ्फ्फ़ सलीम जी अआप … प्यार करते हो उफ्फ्फ कुछ ज्यादा hi नहीं हैं ..मममम”

“अब जो सच हैं हु बता दिया रौशनी जी .. आपको अपना बनाए का सपना रोज़ देखता हूँ … मुझे आपसे प्यार हैं रौशनी जी .. आप को मेरी बनाना हैं मुझे … “

रौशनी बहुत hi शर्माने लगती हैं , उसके गाल लाल होते हाँ.. एक तोह माहौल था गरम .. और नाशी से और गर्मी उसमें बढ़ रही थी … सब इमोशंस बहार आ रहे थे …

“और पूछिए रौशनी जी …”

“उफ़ नहीं बस .. मममम और नहीं पूछना उफ्फ्फ.”

“रौशनी जी गर्मी बहुत बढ़ रही हैं उफ्फ्फ्फ़ कुछ चेंज कर लूँ कपडे .. “

“उफ़ सलीम जी यहाँ.. उफ़ मेरे सामने कैसे उफ़ नहीं प्ल्ज़ …”

“सलीम कुछ सनटैन नहीं अपनी शर्ट उतर लेता हैं … अब बस वेस्ट में hi बैठा रहता हैं …

रौशनी सलीम को ऐसे देख उसे टॉपलेस इमेजिन करती हैं

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पंत भी निकलने लगता हैं …

“सलीम जी यह क्या कर रहे हो उफ्फ्फ पलज़्ज़ज़…”

“राशि जी अरे ऐसे शर्मा रही हो जैसे पहले कभी मुझे मेरी अंडरवियर नहीं देखि हो ः… कुछ नहीं होगा …”

और सलीम अपनी पंत उतर लेता हैं और पजामा पहनता हैं…

रौशनी पर तोह उस गोली का असर हो रहा था .. साली के बालों वाले चौड़े साइन को देख वह गर्मी होती हैं .. (उफ्फ्फ सलीम जी इतने तगड़े मर्द हैं इस उम्र में भी उफ्फ्फ्फ़ …)

“चलो अब अगली बारी … “और सलीम बोतल घूमता हैं फिर से …

इस बार बोतल का एआईएम रौशनी पर होता हैं ….

“रौशनी जी अब आप की बारी .. में डरे चूसे करता हूँ …”

“उफ़ नहीं सलीम जी प्लीज ममम ..”

“रौशनी जी चिंता न करिये कुछ ाहलील नहीं बोलूंगा .. हाहाहा”

रौशनी कुछ नहीं कहती बस चुप बैठी रहती हैं..

“रौशनी जी आपको डांस करना होगा … मेरे गाने के चॉइस पर .. बस इतना hi..”

“अच्छा ठीक हैं”…( इतना भी बुरा डरे नहीं है वह मन में सोचती हैं)

“रौशनी जी उस गाने में जैसे डांस करते हैं वैसे hi नाचना होगा आपको … “

“उफ़ ठीक हैं सलीम जी जल्दी बताइये ..”

“अच्छा ठीक हैं पहले गाना सुनिए .. फिर नाचना होगा उसपर …”

रौशनी बस सर हाँ में हिलती हैं.

“गाना हैं दिलबर दिलबर …”

रौशनी गाने का नाम सुन शर्माती हैं .., (उफ्फ्फ हु गण सुष्मिता सेन का हैं .. और उसमें तोह वह काफी सेक्सी नाचती हैं .. उफ्फ्फ यह कहाँ में फस गयी उफ्फ्फ ) रौशनी सोचने लगती हैं.

उस गोली के नाशी से वह काफी एक्साइट भी हो रही थी.

“सलीम जी ठीक हैं .. जैसे आप केहते हो .. आखिर कार गेम खेलने में राज़ी हुयी थी..”

रौशनी केबिन दूर पे जाती है और कर्टेन लगा देती hai...door तो सलीम ने पहले से hi लॉक किया होता है

सांग की शुरवात होती हैं और रौशनी उठा कर अपनी कमर हिलाते हुए नाचने लगती हैं ..

चढ़ा जो मुझपे सुरूर है

असर तेरा ये ज़रूर है

तेरी नज़र का क़सूर है

दिलबर दिलबर

रौशनी नाचती रहती हैं की सलीम गाने को स्टॉप करता हैं..

“उफ़ सलीम जी गाना क्यों रोक दिया …”

“कोई इमोशन एक्सप्रेशन है hi नहीं रौशनी जी … आपने ंगो इवेंट में बोहोत अछि परफॉरमेंस दी.... और असलम के साथ प्रैक्टिस में बोहोत दम लगाया होगा लेकिन मेरे साथ तो आप न इंसाफ़ी कर रही हैं.... वह भी एक डरे पे, जो की आप ने खुद कहा आप पूरी तरह कोशिश करेंगी”

रौशनी कहती “मममम सलीम जी मैं बेहतर करूंगी..... इस बार..... आप प्ले कीजिये....

रौशनी अब अपने पुरे बदन को गाने पर हिलने लगी … झूम उठने लगी …

“हलकी सी सीटी बजता हैं जिससे रौशनी और शर्माती हैं.

रौशनी फिर उठ गर गाने पर नाचने लगी .. हलके से अपने कमर को हिलाते हुए … दिल बार दिलबर कहते हुए वह नाचने लगी ..

आ पास आ तू क्यों दूर है

यह इश्क़ का जो फितूर है

नशे में दिल तेरे चूर है

दिलबर दिलबर..

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इस बार रौशनी और लटके झटके मारती है..... लेकिन रौशनी को कुछ उलझन सी होरही होती है अपने पल्लू se.....salim यह नोट करता है यह सलीम तो मस्ती के मूड में होता है वह गण फिर स्टॉप करता हैं ..

“उफ़ सलीम जी अब क्या हुआ ….”

“रौशनी जी.... बेहतर है लेकिन आपके एक्सप्रेशन और ऐडा नहीं मिल रही गाने के बोल से

एक दिलबर अपने दिलबर को पुकार रही है.... आमंत्रित कर रही है उसके क़रीब आये.... और आप है के मुझसे इतना दूर अकेले में डांस कर रही hain....aapko मुझे भी लाना है इस डांस में. आपको तो मुझसे बेहतर आता है गाने के लिरिक्स के अनुसार डांस करना...”

रौशनी की अंदर गर्मी बढ़ती हैं .. सलीम को ऐसे बात करते सुन ..”

रौशनी जी और शायद आपको कुछ मुसीबत से होरही है , मैं कुछ सुझाव दूँ इससे आपको भी एक अनोखी फील आएगी डांस करते हुए....”

रौशनी कंफ्यूज होकय बोलती hain...”Haan सलीम जी शेयर कीजिये....

सलीम उसके पास जाता हैं और.... रौशनी का पल्लू उसके कंधे पे था....

फिर सलीम कहता हैं “ आप आंखे बंद कीजिये.....

रौशनी जो अब गलियों के असर के और पकड़ में आयी हुयी थी वह आँख बंद करती है..... इधर सलीम उसका पल्लू सरका देता है और रौशनी से ेहता हैं ...

“ रौशनी जी अब गहरी सांस lijiye.....aur पेट अंदर khechiye....roshni इतने में आँख खोलती हैं .....पहले की हु कुछ बोल सकती उतने में सलीम पल्लू को उसके कन्धों से हटा कर उसके नाभि के 3 इंच नीचे.... खास देता है..... इसमें उसकी उँगलियों रौशनी की पंतय को छु जाती है उसकी पंतय के ऊपर से.... जिससे रौशनी के एक लम्बी सिसक निकलती है और आँख फिर से बंद होती है.....

रौशनी कुछ होश में hi नहीं थी की उसके साथ अभी क्या hua...lekin उसकी सानाएं तेज़ होती हैं ….... सलीम के ऐसे स्पर्श से उसकी गर्मी में एक नयी चिंगारी लगी. थी ..

फिर सलीम कहता हैं “चलिए फिर शुरू करते हैं..”

रौशनी शर्माती hain....apni खुली कमर और पेट के दर्शन सलीम के और देखते hi वह बोलती हैं..... “सलीम जी मज्झे अजीब सा लग रहा है...”

...”अरे रौशनी जी आप कर सकती hai....aur मुझे अपनी तरफ रुझाइये...... वर्ण फिर डरे किश बात की... डांस तो आप कर hi लेती है... इस बार आप महसूस कीजिये के रौशनी अपने दिलबर सलीम को क़रीब लाना चाहती है.”

रौशनी को अब खुमारी चार चुकी थी.....

गाना स्टार्ट होता hai.....roshnj एक बार आंख बंद करके इमेजिन करती है के सलीम hi उसका दिलबर है.... और अब बोहोत सेडक्टिव अंदाज़ में नाचने लगती है

सलीम तोह इस सब के मज़े ले रहा था .. गोली का असर पूरा हो hi रहा था …

ट्रैन हिल रही थी अपनी राफ्तेर पर और रौशनी भी अपनी hi धुन में नाच रही थी , कमर मटकते हुए … उसका गोरा गदराया बदन सलीम के आँखों के सामने गाने पर नाचते हुए .. सलीम का लोढ़ा टाइट होने लगा था … उसे रौशनी की मटकती चूतड़ों को देख गर्मी हो रही थी .. वह बस रौशनी को नाचते देख रहा था ..

रौशनी सलीम के सुझाव अनुसार.... उसको अपनी और अत्त्रक्ट करने लगती है इशार्रों से आमंत्रित करती है....

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मदहोशी के माहौल में रौशनी इधर उधर सर हियति है गाने के बोल के anusaar....jisse उसकी ज़ुल्फ़ें बिलकुल बिखरती है

गाने का लाइन हैं अब

<होश न खबर है

यह कैसा असर है

तुमसे मिलने के बाद दिलबर>

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सलीम थोड़ा ऐसा एक्टिंग करता है जैसे उससे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता..... रौशनी इस िग्नोरिंग ऐडा से सच में हैरान होती है के सलीम के चेहरे पे कोई रिएक्शन नहीं... और अब वह फैसला करती है के वह सलीम के बोहोत क़रीब जाएगी... और अपनी और खींचती है हाथों से.... सलीम थोड़ा साथ देता hai....iss समय रौशनी सलीम के राइट एआरएम को पकड़ती है... और फिर इतने क़रीब से उसके बाइसेप्स को देखती है.... और कुछ दांग होजाती है उसके साइज par....uske शोल्डर बाइसेप्स पे अपने hàath फेरते है.... पीछह लाइन्स चल रही होती है

<दिलबर दिलबर हाँ दिलबर दिलबर>

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इत्नाह में वह खुद को सलीम के सामने ले आती है.... फिर वह नशे में और मदहोशी होने लगती जब उसे सलीम के चौराय सीने का एहसास होता है.... और सलीम इतने में वह उसे हुग करलेता है.... जिससे रोशनज चौंकती है अजीब फील करती है.... उसे हिचकिचाहट होती है और तब उसे एक नकली चीज़ नीचे एहसास होती hai...apni पेट पे... (सलीम का टाइट लोढ़ा वहां उसे नाभि पर प्रेस कर रहा था उसके पाजामे के अंदर से.

इतने में लाइन्स आजाती है....

दर्द है चुभन है

क्या दीवानापन है

तुमसे मिलने के बाद दिलबर

हाँ तुमसे मिलने के बाद दिलबर

इस्पे रौशनी और गर्मी फील करके दो स्टेप पीछे होकर कमर लटका झटका कर नाचती है

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सलीम बोहोत खुश होता है ऐसी सेडक्टिव परफॉरमेंस से.... अब वसाय एहसा होजाता परफेक्ट समय है.... लोहा गरम hai....ab वार करना है

इधर रौशनी अब बिलकुल मगन होगयी थी गाने में परफॉरमेंस में .... रौशनी अब सलीम के पीछे आकर उसके ुंडेरर्मः से हाथ डालकर सलीम को हुग करलेती है....

उसके मर्दानगी भरे जिस्म से वह आकर्षित होचुकी थी.... उसमे गर्मी और उत्तेजना का नया अनुभव खुल गया था.

अगली लाइन्स ककतु है .... रोशनज अब नाच नहीं रही होती.... पर एक किस्म से खुला आमंत्रण देती है सलीम को.... एक हाथ देते हुए.... केबिन दूर और बर्थ के बीच दीवार के तरफ एक कदम पीछे लेते huay....lipsync करती है

तू मेरा ख्वाब है

तू मेरे दिल का क़रार

देख ले जानेमन

देख ले बस एक बार

चूम ले जिस्म को

हम नशीन पास आ आ

सलीम अपनी जगह से हल्के क़दम ृष्णि की और बढ़ाते हुए रौशनी पलट जाती है दीवार की तरफ....

सलीम ने रौशनी का अगला स्टेप एक्सपेक्ट नहीं किया था...

रौशनी अपनी ज़ुल्फ़ें अपनी लेफ्ट साइड पे गिरा देती है

जिससे उसकी चिकनी पीठ पूरी एक्सपोज़ होजाती है सिर्फ ब्लाउज की लत्ती के सिवाए

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सलीम को समझ agaya...drug, डांस मिलकर रौशनी पे हावज होगये हैं.... और सलीम

रोशनज की पीठ पे चुम्बन जणेंलागता है....

रौशनी को करेंट भी लगता है लेकिन वह एहसास बल्कि मीठा सा उठा है जिससे उसे बोहोत आनंद आता है......

रौशनी बस ड्रंक ऐसे नाचती रही .. सलीम के हाथों के स्पर्श से और झूम उठी ..

सलीम को अब रहा नहीं जार अहा था और वह आगे झुक कर रौशनी की एक्सपोज़ नाभि को चुने लगा .. उसका लोढ़ा झटका मार रहा था …रौशनी बस अपनी hi धुन में नाचती रही काफी ेरॉटिक्ली.. फिर सलीम ने मौके का फायदा उठाते रौशनी को कमर पर चुम लिया ..

“उफ़ सलीम जी मम क्या कर रहे हो .. उफ्फ्फ उफ्फफ्फ्फ़”

सलीम अब पूरी तरह से अपने होठों से रौशनी की नाभि पर hi चुम लिया .. पुरे होठों को उसकी नाज़ुक सी गोरी नाभि पर दबाने लगा .. इस एहसास से रौशनी और झूम उठी और मस्ती में नाचती रही …

सलीम अब खड़े हॉग ए और रौशनी के बाँहों को हलके से पकड़ लय .. वहां चूमने लगे ..

“उफ़ सलीम जी मम क्या कर रहे हो उफ्फ्फ ममम बस भी उफ्फ्फ..”

सलीम बस रौशनी के बाँहों को बेतहाशा चूमने लगा .. अपने हाथों से उसकी कमर को पकड़ने लगा … अपने काळा मज़बूत हाथों को रौशनी की कोमल बदन पर गाड़ने लगे … वहां पर लाल निशाँ चोर्ने लगे …

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रौशनी अब पूरी मस्ती में नाच रही थी … सलीम ने गण फिर से लगाया और रौशनी और झूम उठी ..

सलीम अब रौशनी के पीछे जाकर उसके पीठ को चूमने लगा … वहां दबोचने लगा ..

“ममम सलीम जी उफ्फ्फ मममम न करिये उफ्फ्फ मममम सलीम जी ..मममम”

अब पीछे से सलीम ने रौशनी को जकड hi लिया .. अपने खड़े लोडे को रौशनी की साड़ी में घुसा दिए …और उसके साथ नाचने लगे … रौशनी ने उनके लोडे को अपनी चूतड़ों के बीच जाते hi महसूस कर अहह की आवाज़ निकली .. “उफ्फ्फ सलीम जी क्या कर रहे हो ममम आपका तोह हु चुभ रहा हैं उफ़ हटिये न ..ममम”

सलीम तोह नहीं सुनने वाला था ... वह बस रौशनी को चूमते रहा .. पुरे बदन पर गीली चुम्मों के निशाँ चोर्ने लगा ...

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“अरे जानेमन नाचती रह न .. उफ़ क्या मेढक नाच हैं तुम्हारी उफ़ मममम मज़्ज़ा आरहा हैं ममम”

“उफ़ सलीम जी छोड़िये न ममम प्ल्ज़ उफ्फ्फ बहुत चुंबन हैं उफ्फ्फ ममम”

सलीम ने फिर रौशनी को पकड़ अपनी तरफ घुमाया … उसके काळा होठं अब रोशन की गुलाबी होठों के बिल्कु करीब थे … उसने रौशनी को कमर से जकड लिया था …

आगे बढ़ते हुए वह रौशनी को चूमने के करीब आये तब रौशनी ने अपना चेहरा मोड़ लिया और सलीम के होठं उसके गालों से टकराये ..

आएगी से अब उसका टाइट लोढ़ा रौशनी की छूट के वहां जा टकराया …

“आउच उफ्फ्फ सलीम जी … आपका अब आगे से चूब .. उफ्फ्फ ममम चिरयते न ममम सलीम जीई ममम प्ल्ज़्ज़ मममम”

सलीम तोह सुनने के मूड में नहीं था .. उसने अपने होठों को रौशनी के होठों से चिपका दिए … दोनों अब एक दूसरे को चूमने लगे … सलीम ने अपने लोडे को और कसकर रौशनी की छूट पर टिकने लगा …

गण चल रहा था बैकग्राउंड में और दोनों एक गहरी चुम्बन में लगे हुए थे …

रौशनी की चूचियां अब सलीम के चौड़े साइन से डाब गए थे … वह भी मूड में आ चुकी थी और अपने आहतों को सलीम के कन्धों पर दाल उसे और गहराई से चूमने लगी …उसकी जीभ अब सलीम के जीब ह से खेलने लगी .. दोनों एक दूसरे क ेरस को पिने लगे … सलीम भी निचे से एक झटका मारते हुए रौशनी की छूट पर एक जोर का झटका दिया .. इसी रौशनी के मुँह से अह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ की आवाज़ निकली … एकदम से रौशनी जुड़ा हुयी सलीम से … “उफ़ सलीम जी मममम आप उफ्फ्फ मममम प्ल्ज़ निचे उफ्फ्फ्फ़….

सलीम ने अब रौशनी को ट्रैन की स्लीपर सीट पर लिटा दिया और ऊपर चढ़ कर फिरसे उसे चूमने लगा … ऊपर से जहटके मारते रहा मनो चुदाई कर रहे हो … निचे रौशनी छटपटाती रही … सलीम के कमर पर अपने हाथों से उसे पकड़ कर उसके वजन को अपने ऊपर लेते हुए उसे चूमती रही … सलीम मनो रौशनी को ऊपर से ड्राई हंप कर रहा हो .. ऐसे चला रहा था दोनों के बच्च …

"सलीम जी छोड़िये उफ़ ममम पलज़्ज़ज़ नहीं प्ल्ज़ दुःख रहा हैं .. आपका वजन बहुत हैं प्लीज नाहीईई"

सलीम पुरे हवस में चला गया था .. लेकिन रौशनी की आवाज़ मधुर नहीं बल्कि थोड़ी दरी हुयी सुनाई दी उसे .. वह था पागल भूका मर्द .. लेकिन जानवर नहीं था .. वह रौशनी पर खुद को फाॅर्स नहीं करना चाहता था ... सलीम ने अपनी गृप चोरी और बस रौशनी को पलटा कर उसकी नग्न गोरी सी मुलायम पीठ को चूमने लगा ...

रौशनी फिर से हलके से सिसकारियां मारनी लगी ... रौशनी साली के होठों का और जीभ के एहसास को अपने पीठ कर महसूस कर सिसक मारती रही...

सलीम ने फिरसे रौशनी को अपने तरह कर उसकी नाभि को चूमने लगा .... उसकी नाभि की गोलाई में अपनी जीभ दाल वहां चाटने लगा .. पूरी गीली कर दी रौशनी की नाभि ...

फिर से सलीम ऊपर हलके से क्लीवेज को चूमते हुए .. एक आखरी लम्बी चुम्बन में लग गया .. उसके काळा होतं रौशनी के गुलाबी होठों में समाये हुए .. उसे गहराई से चूमते हुए ... .

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गण तोह बैक्ग्रौउंद में चल hi रहा था क्यूंकि सलीम ने उसे लूप पर रखा था ... उसके फ़ोन की बैटरी चली गयी और गाना रुक गया ...

जैसे hi गण रुक गया .. रौशनी की आँखें खुली और खुद को ऐसे सलीम के होठों से चुम्बन में लगे हुए देख .. उसे आगे थोड़ा पुश क्या और उठ कड़ी हुयी ...

रौशनी अपने पल्लू को एडजस्ट करते हुए .. , केबिन का दरवाज़ा अनलॉक कर बहार चली गयी ...

सलीम भी रौशनी को बहा बाथरूम के तरफ जाते हुए देख मुस्कुराया .. और अपनी चड्डी में देखा की एक बड़ा सा गीला स्पॉट हुआ था .. इस सब के गर्मी से उसके मोठे काळा लोडे से काफी सारा प्रेकम निकल चूका था ... और वह मन में मुस्कुरा कर केबिन में रौशनी के वापस आने का इंतेज़्ज़र करने लगा ...

अभी तोह सफर और काफी बाकी थी ...
 
रौशनी अब ट्रैन के टॉयलेट में खुद को आईने में देखती हैं.. उसे काफी शर्म आ रही थी .. उसने आज सलीम के साथ कुछ ज्यादा hi रोमांस कर लिया था .. (उफ्फ्फ्फ़ आज सलीम जी के साथ अच्छा लगा .. मज़्ज़ा आया .. ओह गॉड उस गाने पर उनके सामने नाचना और उनके चुम्मियाँ उफ्फ्फ .. अभी भी पुरे बदन पर गीली निशाने हैं उनकी चुम्मियों के उफ्फ्फ… बहुत गर्मी फीलिंग आ रहे हैं रौशनी आज उफ्फ्फ्फ़.. अब क्या होगा कैसे उन्हें फेस करू …)

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इस सोच में hi रौशनी फिर से केबिन की और चली जाती हैं … सलीम ने जान बुझ कर अपनी पजामा नहीं चेंज करि थी .. उसपर उसके लुंड से निकले प्रेकम के दाग अभी भी थे और अभी भी वह दाग वेट थे ..

रौशनी अब केबिन में आयी और दरवाज़ा बंद कर दिया .. सलीम ने फिर लॉक लगा दी …

“उफ़ सलीम जी लॉक क्यों …”

“अरे कोई डिस्टर नहीं करेगा नहीं तोह लोग बिना कुछ कहे अंदर आ जाते हैं .. प्राइवेसी नाम की कोई चीज़ होती हैं क नहीं रौशनी जी..”

रौशनी कुछ नहीं बोली .. उसके दिमाग में तोह अभी हुए नाच गाने औरसालिम के साथ मस्ती की hi चल रही थी सोच. सलीम अब ऐसे बैठा था उसका वह पाजामे पर गीला स्पॉट रौशनी को दिखाई दे .. और रौशनी की ाज़ार वहां चली hi गयी .. उसे वह दाग दिखा और उसे समझ आया उस दाग का कारन क्या होगा .. अब तोह वह मन hi मन काफी शर्मा रही थी..

“रौशनी जी कैसा लगा गेम .. उफ़ क्या नाची आप .. दिलबर दिलबर उफ्फ्फ्फ़ मनो में hi आपका दिलबर था ः”

“उफ़ सलीम जी अब हो गया नाच गाना .. अब बस गेम और नहीं ..”

“रौशनी जी उफ़ क्यों .. मज़्ज़ा अभी तोह आ रहा था … ऐसे न करिये .. गेम कंटिन्यू करते हैं न प्लीज.. सफर नहीं तोह काफी बोरिंग हो जाएगी .. उफ़ चलिए शुरू करते हैं.

रौशनी भी गेम पसंद आने लगी थी .. वह अभी भी थोड़ी सी उन गोलियों के असर में hi थी …

“अच्छा ठीक हैं उफ्फ्फ्फ़ आप जैसे कहे सलीम जी”

“यह हुयी न बात “

सलीम फिर से बोतल स्पिन करता हैं .. इस बार फिर से एआईएम आता हैं रौशनी पर…

“अच्छा रौशनी जी इस बार डरे करना नहीं, बल्कि सच बोलना हैं आपको

“अच्छा सलीम जी पूछिए” 9उफ़ अब ये सलीम जी क्या पूछेंगे उफ्फ्फ्फ़ )

“अच्छा तोह रौशनी जी सच बताओ .. आपको मेरी बॉडी कैसे लगती हैं …”

“उफ़ सलीम जी … ममम मुझे आपकी बॉडी अच्छी लगती हैं.. इस उम्र में भी आप की बॉडी काफी वेल बिल्ट ..मतलब हटती कटती हैं .. आपकी मसल्स भी काफी ….

“मम काफी क्या रौशनी जी .. आपको खुल कर सच कहना होगा चलिए बोलिये.”

“ममम सलीम जी आपके मसल्स कफ बड़े हैं … मुझे बड़े मसल्स पसंद हैं …. “ रौशनी से यह बात उसके गोली कैंसर के वजह से निकल जाते हैं … सलीम वहां खुश होकर मुस्कुराता हैं .. फिर उन्हें फल करने लगता हैं ..

“देखिये रौशनी जी दूध और देसी घी से बनाए मसल्स हैं …आजकल के लौंडो जैसे यह गयम और स्टेरॉइड्स केन यही … देखिये .. ज्यादा नसे नहीं हैं .. जब ज्यादा नसे होते हैं मतलब हु स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं …”

रौशनी बस सलीम के मसल्स को देखती रहित हैं .. उसके अंदर की गर्मी फिर से थोड़ी बढ़ने लगती हैं …

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“वैसे रौशनी जी मेरे तोह सब मसल्स बड़े हैं … आपको तोह पता hi हैं कौनसे ः”

(ओह गॉड सलीम अपने लोडे की बात कर रहे हैं उफ्फ्फ्फ़ … सलीम जी भी न …)

रौशनी शर्माती हैं और नज़रे झुका लेती हैं ..

“रौशनी जी .. आप कितना शर्माती हो उफ्फ्फ… अवैसे मेरे वहां के बड़े मसल्स का क्या ख्याल हैं .. जरा बताइये …. “ और फ़िरोज़ रौशनी के नज़रे ऊपर कर उसे देख आँख मारता हैं …

“सलीम जी एक hi में दो दो सवाल .. गलत हैं , गेम के नियमों के खिलाफ…”

“अच्छा रौशनी जी .. वैसे बस गेम hi क्यों .. आप उत्तर वैसे भी दे सकते हैं .. इसमें क्या शर्माना .. उस मुस्कले को तोह आप देख hi चुके हैं … “

“उफ़ सलीम जी आप भी न … कुछ भी …”

“रौशनी जी अरे … ः .. चलो ठीक हैं .. गेम शुर करते हैं फिर से …”

“नहीं सलीम जी बस …..”

लेकिन सलीम सनटैन नहीं और बोतल फिरसे स्पिन करता हैं …

बोतल फिर से स्पिन होती हैं और फिर से वह रौशनी पर एआईएम होती हैं ..

“अब डरे करना हैं आपको रौशनी जी …”

“नहीं सलीम जी में बोली थी मुझे नहीं खेलना फिर भी आपने …”

“देखिये आखरी बार .. बस .. आ पैसे मूड न ख़राब करिये प्ल्ज़ रौशनी जी …”

नहीं सलीम जी उफ्फ्फ..”

“चलो खेलना hi होगा आपको अब रौशनी जी .. एक लास्ट”

“ओह गॉड .. अच्छा ok बताइये क्या करना होगा ..”

“सलीम एक कामिनी स्माइल देते हुए ..

“रौशनी जी आपको मेरे उस मुस्कले को अपने हाथों में लेना हैं …”

“ओह नहीं नहीं ऐसे नहीं सलीम जी कुछ और उफ्फ्फ नहीं …”

“यह खेल हैं रौशनी जी डरे का खेल .. करना hi होगा आपको…”

रौशनी के मन में तोह था की सलीम के मोठे लोडे को देख कर उसे टच करने का .. वह अभी भी गर्म थी .. उसकी गर्मी बढ़ रही थी …

सलीम रौशनी का न सुने अपने पाजामे को लूसे कर उसे उतर दिया .. अब वह बस उसे चड्डी में hi था .. उसकी चड्डी पर भी वह उसके प्रेकम के निशाँ थे.. रौशनी की नज़र वहां गयी उसके कसकहत होते लोडे पर और उसकी चड्डी मेंबने दाग पर …

सलीम का लोढ़ा टाइट होता गया और रौशनी की आँखें बड़ी होती गयी और गर्मी बढ़ती गयी.. सलीम अब खड़ा हुआ और रौशनी के नज़दीक जा खड़ा हुआ ..

सलीम को सुखिबरेफ्स में देख और उसके टाइट लोडे के उभर को देख रौशनी अपने होठों पर अपनी जीभ फेर ली …

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“रौशनी जी अब अंदर हाथ दाल कर मेरे मुस्कले को टच करो …”

रौशनी हवस की आग में थी .. लेकिन वह कुछ नहीं करि …

सलीम ने फिर उसके हाथों को पकड़ लिया और उसकी चड्डी में डालने लगा .. रौशनी हवस की गर्मी में बिना कुछ सोचे बस सलीम के चड्डी के अनादर अपने हाथों को डालते हुए उसके गरम लोडे को पकड़ लिया ..

“अहह उफ्फ्फ मम रौशनी मममम क्या गरम हतः हैं उफ़ और मेरा गरम लड़ा उफ्फ्फ ,मम जरा हिलाओ उसे ममम क्या स्पर्श हैं आपके नाज़ुक मखमली हाथों का उफ़ मममम”

फिर सलीम ने अपनी चड्डी निचे कर ली ुर उसका सख्त लोढ़ा अब रौशनी के नाक से जा टकराया .. उसका लुंड का प्रेकम भी जाकर रौशनी के नाकों को चुने लगा…. सन काफी गरम था .. रौशनी भी गर्मी ी आग में जल रही थी…

अब वह खुद से सलीम के लोडे को मसलने लगी …

“उफ़ सलीम जी आपके उसका प्रेकम उफ़ मेरी नाक पर ….ममम”

“रौशनी जी उसकी न फ़िक्र करो बस लोडे को सेहलाओ और उफ्फ्फ मम आपकी नाज़ुक हतेहली से दबाओ उसे उफ़ मम रौशनी मममममम”

रौशनी अब गर्मी की आग में सलीम के लोडे को मसलने लगी .. उसके लुंड के सुपडे के बड़े साइज को देखती रही .. उफ्फ्फ क्या मोटा लुंड हैं सलीम जी का उफ्फ्फ मममम बिलकुल सांप जैसे उफ्फफ्फ्फ़.. ऐसे लुंड तोह कभी नहीं देखि उफ्फ्फ ,मममम

सलीम समझ चूका था की रौशनी हवस की आग में जल रही हाँ .. उसने अपने कमर को थोड़ा आगे सरकाया और उसका लोढ़ा जाकर रौशनी केमुह से चुने लगा .. सलीम का प्रेकम अब जाकर रौशनी के मुँह पर लग गया ….

रौशनी ने बिना कुछ सोचे फिर अपने हटोहों पर अपनी जीभ फेर ली और सलीम के लोडे के प्रेकम को टास्ते करि .. उससे उसकी गर्मी और बढ़ी ..

“उफ़ रौशनी जी मम अब अपने मुँह में डालिये मममम कैसे सख्त हैं आपके रसीले हटोहों केलिए .. उफ्फ्फ ममम डालिये न अपनी मुँह में …”

रौशनी पूरी हवस और उस गोली की असर में धुत सलीम के लोडे के टॉप को अपने मुँह में ले ली … उसे वहां चूसने लगी …

सलीम आह करते हुए अपने हाथों को रौशनी के सर के पीछे दाल उसे और आगे धकेला .. और उसका लोढ़ा अब आधा रौशनी के मुँह में hi चला गया …

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Ahhhhhhhhhhh रौशनी उफ्फ्फ मममम चूसिये मेरा लोढ़ा अह्ह्ह …

रौशनी की ानकेहिं खुली और वह सलीम के लोडे को निकलने की कोशिश करने hi लगी की सलीम ने एक झटका दिया और उसका लोढ़ा रौशनी के मुँह की और गहराई में चला गया .. अहह चूसिये इसे मेरी जान ममम रौशनी ममममम”

सलीम अब आगे पीछे हिलते हुए रौशनी के मुँह को हलके से छोड़ने लगा .. रौशनी की ानकेहिं फिर से बंग हो गयी .. और सलीम के लोडे को चुस्ती रही ..मनो उसके हवस ने उसपर कब्ज़ा कर लिया था …

माहौल बहुत गरम था .. रौशनी साड़ी में hi सलीम के लोडे को आँखें बंद कर चूस रही थी … सलीम आगे पीछे कमर हिला रहा था और रौशनी के मुँह की मानो चुदाई कर रहा था …

“अहह ले लो और ले लो रौशनी ममम उफ्फ्फ क्या चुस्ती हो तुम उफ्फ्फ म सलीम के लोडे को चुसो मेरी जान अह्ह्ह मममम “

सलीम की रफ़्तार थोड़ी बढ़ गयी .. रौशनी थोड़ी झेल नहीं प् रही थी .. उसके हाथ अब सलीम के तइस को जकड़ने लगे … उसके तइस को पकड़ते हुए अब वह सलीम के लोडे को चुस्ती रही… उसकी आँखें बंद वह अब मस्ती से उसे चूसने लगी .. सब भूलते हुए रौशनी अब सलीम के लोडे को चोस रही थी … सलीम ने फ्रीर रौशनी का पल्लू गिर दिया .. उसकी गोरी सी चूचियों का नाज़ा देख और जोर से अब रौशनी की मुँह की चुदाई करने लगा ..



“अहह रौशनी क्या चूचियां हैं अहह मलाईदार मम उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह रौशनी मम क्या आइटम हो तुम उफ्फ्फ मममम”

सलीम अब पर से रौशनी की चूचियों को दबाने लगा … फिर कास कर दबाने लगा …

रौशनी की ानकेहिं खुली .. वह आखिर कर सलीम के लोडे को मुँह से निकल पायी ..

“उफ़ सलीम जी क्या कर रहे हो उफ़ मम छोड़िये ..”

“आज नहीं जानेमन . आज तोह पूरी चूसै करनी हैं तुम्हे उफ्फ्फ… फिर सलीम ने रौशनी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. फिर हाथों को ब्लाउज में दाल कर रौशनी की ब्रा के ऊपर से दबाने लगा …

रौशनी को इस हरकत से मनो बदन में करंट लगा .. आज बहुत दिनों बाद किसी मर्द ने उसकी चूचियों को और निप्पल्स को छुआ था … ऊपर से वह सलीम के लुंड की चूसै कर रही थी और निचे सलीम उसकी चूचियों को मसल रहा था और उसके निप्पलों को छू रहा था …

सलीम ने फिर से अपने लोडे को रौशनी के इंतज़ार करते हुए मुँह में दाल अपने लोडे को रौशनी की गरम यह के अंदर और बहार धकेलने लगा ,…

निचे के एहसास से रौशनी की आँखें फिर से बंद हुयी और वह सलीम के लोडे को चुस्ती रही ..

ममुफफ्फ ममम की आवाज़ें उसके मुहसे निकलती जैसे hi सलीम उसके मुँह के अंदर और बहार उसके लोडे को सरकता …

सलीम ने अपनी धकेलने की स्पीड बधाई और सलीम की राफ्तेर को कण्ट्रोल करने रौशनी को फिर से उसकी झंघों को पकड़ना पड़ा …

सलीम तोह सातवे आसमान में था .. उसकी दिल की मुराद परुई हो रही थी .. रौशनी उसके लोडे को मस्ती से चूस रही थी … उसके गुलाबी होठं उसकी लोडे को छू रहे थे जिससे उसके लुंड से काफी प्रेकम निकल रहा था जो सीधा रौशनी के मुँह में hi उगल रहा था…

रौशनी की पल्लू निचे गिरी थी .. उसकी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले थे और उसके ब्लाउज के अंदर सलीम के मज़बूत हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे … पूरा सेक्सुअल माहौल था उस केबिन में …दो गर्मी में मग्न इंसान मस्ती में उलझे हुए थे …. बहार न किसी को पता था अंदर केबिन में क्या गुल खिल रहे हैं ….

रौशनी पुरे मूड में सलीम के लोडे की चूसै करती रही … ममम ुफममम मममम की आवाज़ें निकलती रही उसके मुँह से और सलीम बस अपने लोडे को अनादर और बहार रौशनी के मुँह में धकेलते रहे … रौशनी अंदर सलीम के लोडे पर अपनी जीभ फेरने लगी .. ऐसी हरकत से सलीम को और मस्त लग रहा था … रौशनी की सोर को पीछे से पकड़ कर वह अपनी स्पीड बढ़ने लगा … अंदर रौशनी की ीभ को अपने लोडे पर पाकर अब सलीम को और रहा नहीं जार अहा था … मनो उसके लुंड से रास छूटने hi वाला हो .. अहह उफ़ मम क ी आवज़ करते हुए वह अपने लोडे से रास चोर्ने के कगार पर था .. रौशनी को भी समझ आ रहा था की सलीम का रास छूटने वाला हैं .. सलीम के लोडे को अपने मुँह से रौशनी ने निकल hi लिया की सलीम अह्ह्ह उफ्फ्फ की आवाज़ देते हुए झरने लगा … सलीम माँ गधा सफ़ेद माल सिद्ध जाकर रौशनी के चेहरे पर सपोर्ट होने लगा ..

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एक सपोर्ट फिर दूसरा .. ऐसे करते हुए ढेर सारा सफ़ेद गधा रास रौशनी के चेहरे पर सलीम जहर चुके … रौशनी के मुँह के इर्द गिर्द सलीम के लोडे का रास चमक रहा था …

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“उफ्फ्फ सलीम जी यह आपने क्या किया .. आपका सारा सफ़ेद .. उफ्फफ्फ्फ़”

“ओह्ह्ह ममम रौशनी उफ्फ्फ्फ़ मम जहर गया उफ्फ्फ आपकी चूसै जादू हैं जादू उफ्फ्फ मममम.”

रौशनी का चेहरा सलीम के वीर्य से भरा हुआ वह सलीम को ग़ुस्से की नज़र से देखने लागि …

“उफ़ आपने तोह सब मेक उप उफ्फ्फ.. अआप भी न ओह गॉड ….”

रौशनी को अब शर्म आ रही थी .. उसका चेरा सलीम के गधे सफ़ेद माल से भरा हुआ था .. वह अपने पर्स में से कुछ नैपकिन निकल कर चेहरे को साफ़ करने लगी …

“सलीम जी जो हुआ उसे भूल जाइये .. बड़ी गलती की मैंने आज .. उफ्फ्फ्फ़ नहीं और नहीं …” और रौशनी ब्लाउज के बटन लगाने लगी ..

फिर निचे सलीम के खड़े लोडे को देख बोली “उफ़ सलीम जी उसे अंदर डालिये उफ्फ्फ यह मैंने क्या किआ .. बहक गयी थी में .. प्ल्ज़ जो हुआ उसे भूल जाइये .. फिर से नहीं होगा .. बस ..”

.. रौशनी वहां अपने साड़ी को ठीक करने लगी …

सलीम अपनी चड्डी और पजामा डालकर अपनी एक शर्ट भी पहने लगा .

रौशनी फिर दरवज़ा खोल कर बहार चली गयी टॉयलेट…

बहार एक लड़का खड़ा था … रौशनी को बहार जाते देख और फिर अंदर सलीम को देख

दांग था .. फिर सलीम को देख सोच में पद गया ( साला क्या यह बुद्धा और यह गोरी मेम अंदर .. उफ्फ्फ्फ़ .. क्या मसीब वाला हैं यार ऐसी माल के साथ ..) फिर हु लड़का सलीम को देख मुस्कुराया …

“ऐबी क्या दांत दिखा कर मुस्कुरा रहा हैं ..चल फुट अब”

फिर वह लड़का वहां से चला गया.

सलीम केबिन में मन hi मन मुस्कुरा रहा था … आज तोह उसने रौशनी को अपने लोडे का चस्का दिया था उसने रौशनी को .. उसे पता था की अब देर नहीं जब वह रौशनी को पूरी तरह से बिस्तर पर लिटा कर उससे मस्ती कर पाएगा .. बस थोड़ा और इंतज़ार करना पड़गे उसी ..
 
रौशनी अब टॉयलेट के छोटे से आईने में खुद को देखती हैं .. उफ्फ्फ आज तोह ज्यादा hi हद हो गयी सलीम जी के साथ .. लेकिन कही पर उसे भी बहुत पसंद आयी थी आज जो भी हुआ उससे…

वह सोच में पद hi गयी की उसे दोनों थॉट्स शुरू हुए .. एंजेल रौशनी (ार) और डेविल रौशनी (डॉ).

डॉ – <अहह रौशनी .. आखिर मज़े कर hi लिए सलीम जी के साथ … उफ्फ्फ क्या माहौल बना था..>

ार <उफ़ रौशनी तुम ऐसे कैसे कर सर्किट हो .. तुमने आअज उनके साथ उफ्फ्फ… यह गलत हैं>

<क्या गलत हैं रौशनी .. तुम्हारी बदन में आग बढ़ रही थी .. उन्हें बस शांत कर रहे थे सलीम जी उसमें क्या हैं..>

<नहीं सब कुछ गलत हैं .. ऐसे कैसे आग शांत करने किसी से भी ..>

<तू इसकी न सुन .. तूने तोहि स्की सुन कर अपने पति के साथ बहुत तरय करि .. लेकिन अब रोनित को hi मूड नहीं तोह तू क्या कर सकती हैं… बता.>

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<अरे और कोशिश करनी चाहिए… पति हैं तुम्हारे .. उन्ही से ऐसी सब अश्लील चीज़ें करनी चाहिए .. किसी गैर से नहीं..>

<सलीम जी कहाँ गैर हैं .. तुम्हारे अच्छे दोस्त हैं, अब तक कभी कुछ फाॅर्स किया हैं.. अब आज तोह तू खुद hi बहक गयी थी … तेरी जवानी चली जार यही हैं माय डिअर .. अभी मौका हैं लोहा गरम हैं … सच में मोटा और गरम लोहा हैं न उनका मममम..>

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<“अरे की ऐसी क्या बातें करती हो .. उफ़ किसी गैर मर्द के लोहे की उफ्फ्फ तू सुधरेगी नहीं .. क्यों आयी हैं तू , अब तक ज़िन्दगी अच्छी से काट रही थी .. तू आयी और सब बिगड़ दिया …”>

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एयर दोनों सोच चल रहे थे रौशनी के दिमाग में …

मज़्ज़े तोह आये थे . आअज बहुत दिनों बाद .. ऐसे मस्ती का माहौल तोह रोणितके साथ भी नहीं हुयी थी … उफ्फ्फ उनका मोटा तगड़ा लोढ़ा .. उफ्फ्फ्फ़ क्या आकर हैं उफ्फ्फ क्या मज़बूत हैं …. चीयर कर मुँह की चुदाई करि .. उफ्फ्फ अगर छूट में घुस जाए तोह ….) रौशनी ऐसी सोच से खुद बा खुद अपनी उँगलियों को साड़ी के अंदर सरकते हुए अपनी पंतय के ऊपर से अपनी छूट मसल रही थी … सलीम का मोटा कला लोढ़ा उसके सामने मन में लहरा रहा था और वह्निचे से अपनी छूट से खेल रही थी … आँखें बंद बस सलीम के चौड़े साइन की और उनके बड़े लोडे की सोच से वह और गरम हो रही थी .. अपनी छूट के लिप्स से खेल रही थी .. अभी भी काफी गीली थी रौशनी की बुर … मम अह्ह्ह की धीमी आवाज़ देते हुए रौशनी अपनी छूट के साथ खेल रही थी ..

<उफ़ रौशनी .. ममम देखा न कितनी गरम हैं तू .. देख खुद की छूट से खेल रही हैं सलीम जी के लोडे के बारे में सोचते हुए हैं न …>

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रौशनी तोह अब ख्यालों में खो चुकी थी .. धीरे से अपनी उँगलियों को ऊपर उठाते हुए उन्हें अपने नाक के m=paas लेकर उसे सूंघने लगी … उस सुगंध से उसकी बदन में करंट सा दौड़ने लगा .. धीरे से हलके से वह अपनी ऊँगलियों को अपने होठों पर रगड़ने लगी .. फिर धीर से अपने मुँह में दाल अपनी hi छूट के रास को चाटने लगी …

<ओह गॉड रौशनी बस भी करो .. हवस की शिकार न बनो .. उस पर काबू करलो .. अपने पति की सोचो roshniiiiiiiiiiiiiiiii>

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एकदम से रौशनी की अनकहीं खुली .. उसके मुँह में एपीआई उँगलियों को देख और अपनी hi छूट क ेरस को चाटने के एहसास से वह काफी शर्मिंदा हुयी .. उँगलियों को मुँह से निकल वह उन्हें साफ़ करने लगी … फिर अपने चेहरे को अच्छी तरफ से वाश करने लगी … हलकी सी लिपस्टिक लगा कर फ्रेश होकर और साड़ी एडजस्ट कर वह इस बार अपने पुरे थॉट्स को जीतकर वहां से चली गयी..

वहां केबिन में सलीम कीखुशी ख़तम hi नहीं हो रही थी .. ाःह उफ्फ्फ आज तोह अपने लोडे का सारा माल चोर दिया रौशनी के चेहरे पर उफ़ क्या मस्त कामुक लग रही थी … ीतिनि गोरी बदन वाली महिला के साथ ऐसे सब कर सलीम काफी खुश था… बस अब चुदाई करनी बाकी थी .. और सलीम को यकीन था की वह भी सच होने वाला hi हैं ..

इतना सोचते हुए उसने अपने फ़ोन पर एक नंबर लगाया…

सलीम बोले “हाँ हम पहुँच रहे हैं और 1 घंटे में … सब तैयारी करि हैं न तूने ..

दूसरे लाइन पर एक आवाज़ आयी “हाँ सलीम भैया सब तैयार कर चुकी हूँ … आप बस गोरी मेम को लेकर आइयेगा .. सब तैयार हैं..”

“यह हुयी न बात .. अच्छा फ़ोन रखता हूँ हु आ रही हैं .. चल खुदा हाफिज..” स्लम बोले

“खुदा हाफिज भाईजान “ फ़ोन से उस शख्स ने कहते हुए फ़ोन रख दिया ..

सलीम भी यहाँ मन में मुस्कुराते हुए अपने फ़ोन को अपनी बैग में रख दिया.

रौशनी केबिन में आयी और सामने बैठ गयी .. दोनों के बीच कुछ बातचीत नहीं हुयी ..

सालिम कोशिश कर रहा था लेकिन रौशनी जवाब नहीं दे रही थी…

सलीम मन में (कमीनी , अभी तोह पूरी मस्ती कर रही थी और अब यह नाटक … तुझे तोह बस अभी ट्रेलर दिया हैं मेरी जान .. जल्द से hi पूरी फिल्म दिखाऊंगा तुझे मेरी चमक चलो)

अब ट्रैन फाइनल स्टेशन पहुँच hi गयी..

दोनों बहार निकल गए तोह तक बहार hi खड़ा था तुनके डिब्बे के बहार. खालिद , रौशनी को देख मुस्कुराया .. रौशनी भी मुस्कुरई हलके से .. सलीम यह देख जलन महसूस कर रहा था .. उसने झट से रौशनी की कनज़ुक गोरी कमर पकड़ ली और रौशनी को अपने पास खींच लिया…

रौशनी इससे सेहम उठी .. .. सलीम के ऐसे डोमिनेटिंग नेचर से रौशनी को सुर्प्रिसिंगलय काफी अच्छा लग रहा था .. इसीलिए वह कुछ नहीं बोली ..

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वहां खालिद के चेहरे पर थोड़ी नाराज़गी दिखी .. सलीम यह देख खुश हुआ

वहां कहलीद उन्हें जाते देख (उफ्फ्फ्फ़ लगता हैं साला ट्रैन में बाज़ी मार लिया हैं .. उफ्फ्फ क्या माल थी यार … काश मेरी बाँहों में होती उफ्फ्फ्फ़ मौका हाथ से चला गया )

खालिद भी वहां से चला गया …

अब दोनों सलीम और रौशनी रिक्शा में बैठे उसके दोस्त के शादी के वेन्यू पर पहुँच गए ..

दोनों का स्वागत करने सलीम का दोस्त और उसका परिवार रुका था … दोनों रिक्शा से उतर गए तोह वहां खड़े सब मर्द रौशनी को देख उनके पंत में हलचल मैने लगी ..

रौशनी देखि की वहां बहुत काम महिलाऐं साड़ी में थी .. लेकिन ज्यादातर महिलाऐं बुर्खों में थी… अपने आप को ऐसे साड़ी में देख … स्लीवलेस डीप बैक ब्लाउज , पूरी मेक उप लगाए हुए उसे थोड़ा सा अजीब लगा .. लेकिन रौशनी सरप्राइज थी की वहां के महिलों को कुछ ख़ास फरक नहीं पड़ा उसे ऐसे देख..

“सलाम भाईजान , सफर कैसा रहा ..” सैम का दोस्त बोलै ..

“बहुत अच्छा सफर था .. काफी मज़ेदार हैं न रौशनी जी…” सलीम रौशनी को देख बोलै.

रौशनी अभी हुए ट्रैन में काण्ड की सोच कर शरमाते हुए बस आँखें झुका ली.

“वैसे सब लोग यह हैं रौशनी मैडम … हमारी ंगो की नयी मैनेजर …”

रौशनी ने सब को नमस्ते किया..

“हाँ सलीम भाईजान .. आप ने काफी बताया हैं मैडम के बारे में .. वेलकम रौशनी मैडम …”

रौशनी स्माइल दी और सलीम के दोस्त को नमस्ते करि..

फिर एक लेडीज आयी .. वह कुछ 45-50 वर्ष की लग रही थी … “सलीम भाईजान तुमने बताया नहीं ऐसी हसीं .. इतनी खूबसूरत हैं तुम्हारी रौशनी … मैडम …

रौशनी जी सलाम .. आप इस महफ़िल में स्वागत हैं … में हूँ हसीना .. सलीम की बेहेन …”

रौशनी को नहीं पता था की सलीम की बेहेन भी हैं .. सलीम ने कुछ बताया hi नहीं था .. वैसे उसने भी कभी पूछा नहीं था सलीम के फॅमिली के बारे में..

“नमस्ते हसीना जी … आप से मिलकर ख़ुशी हुयी..”

“कितनी सोनी कुड़ी हैं तू रौशनी … ऐसी हसीं कुदरत में काम होती हैं…”

रौशनी को यह सब सुन अच्छा लगा .. सब काफी वेलकमिंग थे …

हसीना बोली “में सलीम भाईजान और रौशनी जी को उनका कमरा दिखती हूँ..”

रौशनी , हसीना से बस कमरा सुन सरप्राइज थी .. क्या उसे और सलीम को एक hi कमरे में …”

कुछ 5 मं चलने के बाद रौशनी पूछी ..”हसीना जी आपने कहाँ एक कमरा हैं …???”

“हाँ लेकिन एक प्रॉब्लम हुयी हैं..”

हसीना बोली “हाँ हु यह हैं की रहने के लिए बस एक hi कमरा बचा हैं … यहाँ सब कपल्स हैं .. जितने सिंगल हैं उनके जितने रूम थे फुल हॉग गए हैं … “

“लेकिन हसीना जी में और सलीम जी एक hi कमरे में.. उफ्फ्फ ऐसे कैसे हो सकता हैं …”

“माफ़ करिये लेकिन अब जो हैं सो हैं … अगर आपको अलग रूम चाहिए तोह यहाँ पर नहीं .. यहाँ से 1 घंटे की दुरी पर एक होटल हैं वहां मिलेगा ..”

रौशनी तोह दुविधा में hi पद गयी. फिर सलीम बोलै “रौशनी जी इसमें क्या .. आप बिस्तर पर सोई और में निचे पलंग लगा कर सुंगा .. वैसे भी हमारी ंगो के घर पर हम एक दिन रात को ऐसे hi सोये थे एक hi कमरे में..

“हाँ सही हैं लेकिन वहां वाशरूम तोह अलग था न .. इस कमरे में तोह …”

सलीम मन में मुस्कुरा रहा था .. उसका प्लान यही तोह था .. की दोनों एक hi कमरे में रहेंगे .. उसी ने ट्रैन पर हसीना से यह प्लान किया था ..

“रौशनी जी .. आप चिंता न करिये .. सलीम भाईजान आपको कोई तकलीफ नहीं देंगे …”

रौशनी मन में (उफ़ आप नहीं जानते आपके सलीम भाईजान को .. इतने भी सीधे साढ़े नहीं हैं .. लेकिन उफ्फ्फ और कोई चारा भी नहीं अब )

फिर तीनो रूम तक पहुँच जाते हैं ..

“अच्छा रौशनी जी , सलीम भाईजान सफर से काफी थके हुए होंगे .. थोड़ा फ्रेश हो जाइये फिर आप रात का खाना खाने करने आइये..”

रौशनी अंदर चली जाती हैं … बहार सलीम , हसीना को देख मुस्कुराता हैं ..

“सलीम भाईजान क्या हुस्न की पारी हैं रौशनी … अब पता चला आप इनके पीछे क्यों हैं .. आप कभी सुधरोगे नहीं … मैंने अपना काम किया हैं ..”

“हसीना बहना .. अभी तोह आपका काम शुरू हुआ हैं .. आपका काफी महत्वपूर्ण काम हैं .. ः . चलो आते हैं खुदा हाफिज.”

“खुदा हाफिज भाईजान” और हसीना वहां से चली जाती हैं और सलीम भी रूम के अंदर चला जाता हैं.

“सैम जी होना बीएड निचे बनाइयेगा..”

“हाँ ठीक हैं बनाऊंगा .. आप फ्रेश होने जाइये फिर डिनर के लिए जाएंगे साथ.”

रौशनी फिर वाशरूम चली जाती हैं …

रौशनी नाहा लेती हैं .. लेकिन वह अपना टॉवल hi बहार भूल जाती हैं …

(उफ़ टॉवल तोह बहार hi भूल गयी हूँ … अब क्या करे .. ओह रौशनी टब hi न कैसे कर सकती हैं .. सलीम जी भी इसी कमरे में हैं न उफ्फ्फ अब उनसे hi माँगना पड़ेगा.

“सलीम जी मेरी टॉवल बहार hi रह गयी .. मुझे दीजिये न … आप यहाँ बहार रखिये .. फिर में लुंगी वहां से .. और आप प्ल्ज़ बहार जाइये मुझे कपडे बदलने भी हैं”

सलीम यह सुन बड़ा खुश होता हैं .. उफ़ रौशनी अंदर नग्न होगी .. ममम काश उसके नग्न बदन को देख पता .. उफ्फ्फ्फ़ ..)

“रौशनी जी टाइम नहीं हैं .. जल्दी से टॉवल दूंगा .. आप टॉवल hi बदन पर लिप्त कर आइये . मुझे भी जाना हैं फ्रेश होने ..”

सलीम रौशनी को टॉवल देने वाशरूम के तरफ बढ़ता हैं. “लीजिये रौशनी जी रख दी टॉवल दरवाज़े के हैंडल पर...”

रौशनी झट से टॉवल लेती हैं और अपने बदन को उसमें व्रैप करती हैं …

“रौशनी जी हो गया .. अब आप बहार आइये …”

“नहीं सलीम जी कुछ और टाइम चाहिए .. और आप बहार जाइये में ऐसे कैसे बस टॉवल में बहार औ आपके सामने …”

“जल्दी करिये .. टाइम नहीं हैं डिनर का हॉल बंद हो जाएगा ,,”

“सलीम जी आपको बहार जाना hi होगा फिर hi में चेंज करुँगी .. देखिये आप बात मानिये मेरी.”

“ठीक हैं बड़ा जाता ुहुँ .. लेकिन जल्दी से तैयार होना रौशनी जी.

“सलीम बहार जाता हैं…

अब अंदर रौशनी चेंज कर लेती हैं ..

“रौशनी जी हुआ क्या औ अंदर ..?”

"नहीं सलीम जी अभी तोह बस अंदर के कपडे पहनी हूँ .. साड़ी तोह बा....." रौशनी ह्कुद को पकड़ लेती हैं .. उफ्फ्फ तूने तोह बोलते बोलते बता दिया तू बस ब्रा पंतय में हैं .. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी अब सलीम जी क्या सोचेंगे उफ्फ्फ)

रौशनी की सोच सही थी .. सलीम को समझ आया की वह बस ब्रा पैंटी में होगी .. मन में सलीम अब सोचा रहा था की काश वह अंदर रौशनी को बस ब्रा पंतय में देख सके...

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कुछ देर बार साड़ी पहनकर रौशनी कहती हैं

“सलीम जी हो गयी में तैयार आइये “ और वह कमरे का दरवाज़ा खोलती हैं.

सलीम अंदर जाता हैं और रौशनी को साड़ी में देख फिर से उसकी हवस बढ़ने लगती हैं, पंत में हलचल होने लगती हैं ..

“उफ़ रोशनीजी क्या लग रही हो .. सच में आप हसीं हो इतनी .. उफ्फ्फ”

“अब बस भी करिये सलीम जी …. उफ्फ्फ मेकअप लगाना भूल गयी … “ और रौशनी वाशरूम में चली जाती हैं.

“उफ़ रौशनी जी अब टाइम नहीं हैं …. “ और सलीम कपडे उतर कर बस अंडरवियर में hi अंदर वाशरूम चला जाता हैं.

रौशनी सलीम को बबस अपनी चड्डी में देख “उफ़ सलीम जी क्या कर रहे हो .. मुझे टाइम हैं मेकअप लगाना ..”

“बस हुआ डिनर हॉल बंद हो जाएगा .. आप मेक उप लगाइये में नाहा लेता हूँ.”

“सलीम जी आप मेरे समें कैसे उफ्फ्फ्फ़”

“रौशनी जी अब कैसी शर्म .. सब तोह देख hi लिया हैं आपने .. अब क्या छिपाना ..”

सलीम अपनी चड्डी भी उतार देता हैं …

रौशनी की नज़र सीधे उसके लोडे पर जाती हैं ..

(आधा सख्त होकर भी इतना मोटा और बड़ा हैं उनका लुंड उफ्फ्फ्फ़.. रौशनी इस लुंड ने तोह तुझ पर अलग hi नशा चढ़ाया हैं उफ्फ्फ्फ़)

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रौशनी की गर्मी बढ़नी शुरू हटाई हैं .. उसकी नज़र बस सलीम के अर्ध सख्त लोडे पर hi रहती हैं.. सलीम यह देख मुसकुराता हैं..

“रौशनी जी बस देखती रहोगी या मेकअप लगाओगी खुद ः ..”

रौशनी शर्माती हुयी मुश्किल से वहां से नज़र हटा लेती हैं..

सलीम नहाने लगता हैं .. रौशनी की नज़र साइड से सलीम के लोडे पर hi जाती हैं .. उफ्फ्फ कितना मोटा हैं है रब्बा .. उसकी नज़र सलीम के मज़बूत बदन .. बालों वाली छाती पर जाती हैं .. उसकी छूट गीली होने लगती हैं उफ्फ्फ क्या मज़बूत मर्द हैं इस उम्र में भी सलीम जी .. और अपनी ख्यालों में खो जाती हैं जहाँ वह सलीम के लोडे को हाथ में लिए सेहला रही हैं ....

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(उफ़ रौशनी अब तोह सपनों में भी तू .. उफ्फ्फ बास..)

रौशनी फिर अपनी मेक उप लगाने में लग जाती हैं..

नहाते हुए सलीम उसे लिपस्टिक लगते देखता हैं .._(उफ्फ्फ्फ़ क्या गुलाबी होठं हैं ममममम ट्रैन में तोह इन होठों के बीच जाकर मस्त चूसै करवाई थी ….) सलीम का लोढ़ा फिर से टाइट होने लगता हैं .. और धीरे धीरे रौशनी की नाज़ुक गोरी बाँहों को, कमर को , गोल नाभि , गुलाबी होठों को देख पूरा सख्त होता हैं …

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रौशनी की नज़र फिर से सलीम के लोडे पर जाती हैं ..(उफ़ इनका तोह फिर से खड़ा हुएहैं उफ्फ्फ इतना मोटा लुंड उफ्फ्फ्फ़ यह सलीम जी के लुंड को देख मेरी गर्मी कितनी बढ़ती हैं उफ्फ्फ्फ़ साहस क्या लुंड हैं उफ़ ममम… ओह गॉड रौशनी कण्ट्रोल करो उफ्फ्फ उन लोढ़ा हैं मोटा और मस्त लेकिन उफ्फ्फ तुम शादी शुदा हो……..)

सलीम , रौशनी की नज़र देखता हैं अपने लोडे पर और उसके सामने hi अपने लोडे पर साबुन लगते हुए उसकी मालिश करने लगता हैं .. आगे पीछे अपने लोडे को हिलने लगता हैं..

रौशनी बस सलीम को अपने लुंड को हिलाते देखती रहती हैं .. उसके लुंड के पिंक टॉप को देखते हुए गर्मी बढ़ती महसूस करती हैं .. उफ्फ्फ क्या लोढ़ा हैं उफ्फ्फ)

“रौशनी जी हुआ मेक उप लगाना … या कुछ और hi काम चल रहा हैं ः>”

रौशनी बस सलीम के शब्दों को सुन शर्माती हुयी फिर वाशरूम से चली जाती हैं . लेकिन जाते जाते एक आखरी बार सलीम के लोडे को देखती हैं …मन में उसके तोह काफी छुरियां चल रही होती हैं….

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दोनों पुरे तैयार होकर डिनर हॉल में चले जाते हैं ..

हसीना “अच्छा आ गए आप दोनों .. बहुत देर लगा दी .. डिनर हॉल बंद hi होने वाला हैं कुछ 20 मं में … हम सब इंतज़ार कर रहे थे आप दोनों की ..”

“हाँ हसीना देरी हुयी .. हु रौशनी जी तोह तैयार hi थुइ , मेरे वजह से hi देरी हुयी हैं…”

रौशनी कुछ नहीं कही .. वह खुश थी की सलीम ने इलज़ाम खुद पर लिया थान ा की उस पर जो सच में उसकी खुद के वजह से उन्हें लेट हुआ था .. वह सलीम को देख मुस्कुरायी .. और हलके से बोली “ठनक यू सलीम जी ..”

सलीम हलके स्वर में रौशनी के कानों के पास “रौशनी जी कोई बात नहीं .. आपके लिए इतना झूट तोह कह hi सकता हूँ .. आप पर कोई दोष कभी नहीं दे सकेगा ..”

हसीना वहां से बोली “अरे दोनों में क्या बातें चल रही हैं .. साथ में इतने घुल मिल गए होड़ वो .. रौशनी जी सलीम जी पसंद आये न .. और हसीना मुस्कुराने लगी ..

सब के सामने हसीना के ऐसे कहने से रौशनी शर्मायी .. (उफ्फ्फ हसीना जी भी न कुछ भी कहती हैं उफ्फ्फ)

हसीना अब दोनों के पास जाती हैं .. फिर सलीम से कहती हैं..

“अच्छा तुम दोनों ज़रा दूर hi बैठना .. सलीम ज़रा हमें भी बातें करने दीजिये रौशनी से .. या खुद hi बातें करोगे उन्हें अपने पास hi रख .. रात भर बातें करिये उनसे सलीम भाईजान … ात पूरी बाकी हैं ” और हसीना फिर से हस्ती हैं.

रौशनी यह सब सुनते हुए शर्माने लगती हैं ..

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हसीना जी तोह कुछ ज्यादा hi बोलती हैं उफ्फ्फ …

“हसीना जी आप भी ा कुछ भी कहती हो .. चलिए भोजन कर लेंगे … मुझे भी भूक लगी हैं.”

हसीना स्माइल देते हुए रौशनी के बाँहों को पकड़ कर सीट पर ले जाती हैं और हसीना भी उसके बगल में बैठ जाती हैं.

सब रात का भोजन करने लगते हैं ..

“बहुत स्वादिष्ट हैं हसीना जी .. बहुत लज़ीज़ … बहुत अच्छी non-veg हैं … “

“शुर्किया रौशनी … आपको पसंद आया न .. काफ़ीख़ुश हैं हम सब.. वैसे सलीम बोल रहे थे की वह कोशिश कर्जा आपको लेन .. लेकिन में बोली अरे रौशनी ठैरी बड़े अच्छे परिवार से .. हु हम गरीब लोगों के यहाँ क्यों आएगी …

“हसीना जी प्ल्ज़ ऐसे न कहिये .. कितना प्यारा सेटअप हैं .. और कमरा भी अच्छा हैं .. आप सब भी बहुत अच्छे लोग हैं..”

“शुक्रिया रौशनी जी .. वैसे सब सलीम भाईजान की खैरियत से .. उन्होंने बहुत मदत की हैं अपने दोस्त को ज़िन्दगी में इसलिए उसके दोस्त इस मुकाम पर पहुँच पाए हैं.. हम सब सलीम भाईजान को बहुत मानते हैं …”

“ओह ऐसे हैं .. सो नीस .. ..”

रौशनी फिर नज़रे उठा कर सलीम को देखती हैं .. (सलीम जी इतने भी बुरे नहीं हैं.. इतनी रेस्पेक्ट करते हैं सब उनकी यहाँ पर.)

“रौशनी जी एक बात कहु आपसे ..?”

सलीम भाईजान को आप बहुत पसंद हो .. उन्हें आपकी दोस्ती बहुत कीमती हैं .. पाया हैं आपकी कितनी तारीफ करते हैं .. रौशनी जी ने ंगो के लिए यह किया हैं , हु किया हैं .. ऐसे धुआंधार इवेंट रखे हैं .. जो ंगो में अब तक का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा इवेंट था … बोलते हैं रौशनी जी ंगो में आयी तोह चार चाँद लगा दी हैं …”

“ाचा यह सब बोलते हैं सलीम जी .. “(और रौशनी अपनी ऐसी तारीफ सुन बहुत खुश होती हैं..

रौशनी देखती हैं की सब सलीम जी को इतनी रेस्पेक्ट दे रहे थे .. उनकी इतनी अच्छे से सेवा कर रहे हैं … रौशनी के मन में सलीम के प्रति थोड़ी सी भावनाएं बदलने लगती हैं …

“रौशनी जी पता हैं और एक बात … मैंने उनकी बीवी उन्हें चोर देने के बाद पहली बार उन्हें इतना खुश देखा हैं .. और पहली बार किसी लेडीज को इतनी करीबी दोस्त मन लिया हैं … उनकी बीवी ने तोह … उफ़ माफ़ करिये चोर दीजिये बात. भोजन का आनंद लीजिये.

रौशनी उस बात पर पूछती हैं..

“क्या बात हैं हसीना जी. बताइये न ”

“नहीं नहीं सलीम भाईजान मुझ पर नाराज़ होंगे .. आप खाना खा लीजिये रौशनी.”

“बताइये न हसीना जी”

“रौशनी आप भोजन का आनंद लीजिये बाद में बताउंगी .. अब आप भोजन करिये..”

रौशनी के मन में ढेर सरे सवाल रहते हैं.. उन पर सोचते हुए वह भोजन पूरा कर लेती हैं.

“अब बताइये हसीना बेगम.”

“रौशनी तुम आओ मेरे इस कमरे में हम बैठ कर बात कहूँगी..”

रौशनी फिर हसीना के साथ उसकी कमरे में जाने लगती हैं.. पीछे हसीना मुद कर सलीम को देख मुस्कुराती हैं … सलीम भी उसे देख मुस्कुराता हैं .. उन दोनों के प्लान के मुताबिक सब चल रहा था.

अब दोनों एक रूम में बैठ जाते हैं और हसीना शुरू हो जाती हैं.

“हाँ रौशनी जी अब ऐसे हैं की … और हसीना पूरी कहानी बता देती हैं ..

सलीम एक नार्मल बिजनेसमैन थे .. और उनके बिज़नेस से वह अपने घर के एरिया के लोगों की बहुत मदत करते थे .. वहां उनका बड़ा नाम था .. बहुत इज़्ज़त थी..

सब कुछ ाचा चल रहा था .. शादी शुदा थे , उनकी बेगम थी और एक लौटा बीटा..

लेकिन सलीम की बेगम एक नंबर की बेवफा निकली .. उसका अफेयर था एक बड़े बिजनेसमैन के साथ .. और जब सलीम को उनके बारे में पता चला तोह उल्टा उसकी बेगम ने hi सलीम पर अफेयर का झूठा इलज़ाम लगाया .. उसके बेगम और उसके प्रेमी ने सलीम को बहुत तंग किया .. उसने सलीम के बेटे को भी सलीम से दूर ले गयी … बहुत तंग किया सलीम को उसकी बेगम और उसके प्रेमी ने… इतना तंग की सलीम को वह शहर चोरडेणा पड़ा.

सलीम फिर इस शहर के उस ंगो में बस गए थे जहाँ अब रौशनी आयी हुयी थी. मैनेजर बन कर..

रौशनी यह सब सुनकर सेहम उठी … सलीम की हकीकत सुन उसे अफ़सोस होने लगा सलीम पर … इतना सब झेल लिया था उन्होंने … उसे तोह पता hi नहीं था ..

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“उफ़ हसीना जी मुझे तोह सलीम जी के बारे में यह कुछ भी पता नहीं था … कुछ बोलते hi नहीं थे अपने अतीत के बारे में… उफ्फ्फ बहुत बुरा हुआ उनके साथ .. फिर भी लगता हैं हैं उन्हें देख की यह सब हुआ हैं ..”

“मेरे भाईजान बहुत अच्छे हाँ , अपनी दुःख किसी को नही बट्टे . बस ऊपरी दिखावट हैं सब मस्ती भरा उनका .. इसलिए बुरा ज्यादा न मानिये उनकी बातों और हरकतों का .. दुनिये के ढकों ने उन्हें ज्यादा कठोर बना दिया हैं … ”

“हाँ हसीना जी सही हैं.. वैसे हैं काफिमास्ति भरे लेकिन वैसे अच्छे हैं .. कभी मुहे तकलीफ में नहीं डेल हैं .. मदत काफी करते हैं ..”

“मेरे भाईजान हैं hi ऐसे … में खुश हूँ उन्हें आप जैसी प्यारी दोस्त मिली हैं … आप दोनों की दोस्ती और बढे ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं और फिर वहां से अपने कमरे में जाने लगती हैं..

कमरे के अंदर सलीम पहले से hi निचे बिस्तर लगाए लेते हुए थे ..

“रौशनी जी क्या बातें चल रही थी … हसीना ने कुछ भला बुरा कहा होगा मेरे बारे में.”

“नहीं सलीम जी हसीना जी बहुत अच्छे हैं .. आपकी तारीफ कर रहे थे ..”

“अच्छा सच .. बढ़िया हैं यह तोह आपकी उनसे दोस्ती हो गयी.”

“हैं.”

“अच्छा रौशनी जी सो जाइये . कल लम्बा दिन प्लान किया हैं मैंने . कल एक जगह ले जाना चाहता हूँ आपको .. जल्दी सुबह उठ कर जाएंगे .. और शाम को तोह शादी हैं…

“अच्छा ठीक हैं … (रौशनी, हसीना की बातों को सोचती हैं … वह कल के बहार जाने के प्लान को स्वीकार लेती हैं.)

“हाँ और रौशनी जी कल के ट्रेडिशनल फंक्शन पर वहां थोड़े बुज़ुर्ग होंगे इसलिए

“रौशनी जी आप चेंज कर लीजिये में बहार रुकता हूँ. जब चेंज कर लोगी तब बुलाना मुझे.”

“Ok सलीम जी ..”

फिर रौशनी अंदर चेंज कर लेती हैं .. एक स्लीवलेस काली निघ्त्य पहनती हैं लम्बी वाली .. और फिर सलीम को अंदर बुलाती हैं.

सलीम तोह रौशनी को देख फिर से गरम होता हैं … लेकिन कल उसने काफी कुछ प्लान किया था .. इसलिए चुप के से वह सोने लेट जाता हैं …

फिर दोनों सो जाते हैं.

अगली सुबह दोनों तैयार होकर बहार निकल पड़ते है.

रौशनी ने स्लीव वाली ब्लाउज और येलो कलर की साड़ी पहनी हुयी थी .. ब्लाउज काफी डीप बैकलेस थी और थोड़ी आगे से डीप कट भी.. उसे देख तोह सलीम का लोढ़ा झटकों पर्झटके hi मरेगा … हल्का सा मेक उप … कानो में बालियान .. हाथों में बँगलेस.. सलीम हैं एक वाइट शर्ट और पंत में काफी स्मार्ट ड्रेस्ड ..

सलीम रौशनी को देख “रौशनी जी आप बेहत खूबसूरत लग रही हो … आपका तोह जवाब hi नहीं…”

रौशनी मुस्कुराते हुए ..”शुक्रिया सलीम जी .. आपकी तारीफ सुन अच्छा लगता हैं..”

कल के सलीम की कहानी सुन रौशनी आज सलीम के प्रति और ओपन हो जाती हैं.

“सलीम जी आप भी स्मार्ट लग रहे हो..”

“शुर्किया .. आप जैसी हसीं के साथ स्मार्ट hi रहना चाहिए …”

दोनों फिर एक अर्रंगे की हुयी गाडी में चले जाते हैं..

सलीम ने पास की एक नेचर वाली इलाके में ले जाने का प्लान किया था .. वहां पर वॉटरफॉल भी था .. ज्यादा विसिटोर्स नहीं घूमते ऐसी hi जगह उन्होंने चूसे करि थी. ताकि वह रौशनी के साथ वहां नेचर में समय बिता सके अकेले में.

वह फिर 30 मं में वहां पहुँच जाते हैं और गाडी से वॉटरफॉल की और निकल पड़ते हैं.

रौशनी को तोह नेचर वैसे भी बेहत hi पसंद था … उसे तोह वह जगह बहुत अच्छी lagi.”Salim जीकीतनी हसीं जगह हैं .. मुझे नेचर बेहत पसंद हैं”

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“हाँ रौशनी जी इसलिए यहाँ ले आया हूँ .. चलिए ज़हारणों के तरफ जाएंगे.

रौशनी आगे की और चलने लगती हैं चूतड़ों को मटकते .. पीछे से सलीम बस उसकीकमार, गोरी पीठ और हिलती चूतड़ को देख गरम होने लगता हैं .. उसके लोडे में जान आने लगती हैं .. उनके आने से पहले hi थोड़ी बारिश हुयी थी इसलिए ट्रेस पर अभी भी पानी की बोंडे थी जो हलके से निचे आती हुयी रौशनी की साड़ी पर गिरती .. और वहां थोड़ा सा वेट स्पॉट बनती … सलीम बस रौशनी के बदन को इस कामुक साड़ी और ब्लाउज में देख hi मस्त हो रहा था .. उसका लोढ़ा टाइट हो रहा था ..

“ववव इतना खूबसूरत समां हैं सलीम जी …”

“हाँ रौशनी जी बिलकुल रोमांटिक हैं न ..”

रौशनी पीछे मुद कर सलीम को देख मुस्कुराती हैं ..

“रौशनी जी ऐसा समां तोह प्रेमियों को और मस्त लगती होगी … “

रौशनी मन hi मन शर्माने लगती हैं…

"सलीम जी जल्दी करिये न मुझे जहरने के पास जाना हैं ..... उफ़ आप बहुत धीरे से चल रहे हैं”

“रौशनी जी जरा हाथ दीजिये .. यहाँ आगे पत्थर थोड़े ज्यादा हैं .. मुझे जरा इतनी सी जगह को पार करने मदत कीजिये …”

रौशनी पीछे मुद कर सलीम को हेल्प करने हाथ बढाती हैं .. सलीम रौशनी के नाज़ुक हाथों को छू कर उसका लोढ़ा झटका मारने लगता हैं …

रौशनी थोड़ा और आगे झुकती हैं मदत करने की उसका पल्लू सरक जाता हैं … सलीम को अब रौशनी की चूचियों के बेच की गोरी दरार साफ़ दिखती हैं ..

रौशनी भी कुछ नहीं कर सकती थी .. उसने सलीम का हाथ चोर दिया तोह वह गिर सकते थे..

सलीम अस रौशनी की चूचियों के क्लीवेज को दखता रहा.. उसका लोढ़ा उसकी पंत मेंटिगत होते हुए …

(उफ्फ्फ क्या मस्त चूचियों हैं यार .., क्या दरार हैं . मममम एकदम दूध जैसे सफ़ेद उफ्फफ्फ्फ़…)

“रौशनी जी बस ज़रा और … रौशनी थोड़ी और सलीम को खींचती हैं … और सलीम एकदम से आगे जाकर अब दोनों एक दूसरे से चिपक जाते हैं …

सलीम के हाथ रौशनी की डीप बैक ब्लाउज परउसकीनंग पीठ पर वह फेरने लगता हैं .. रौशनी को इस समां और ऐसे सलीम के मर्दाने हाथों के स्पर्श से अच्छा लगता हैं … उसकी गर्मी इस माहौल ने अच्छी राखी थी . सलीम माँ टाइट लोढ़ा बह अब निचे रौशनी की छूट के ऊपर दबने लगा था .. रौशनी के मुँह से हलके से आह निकली

सलीम कुछ और समय रौशनी को ऐसे दबोचे रखा … रौशनी भी उसे चुराने कोषसिंह नहीं कर रही थी … दोनों इस रोमांटिक पोज़ में कुछ सेकंड एक दूसरे के बदन से चिपके रहे …

फिर रौशनी ने खुद को सलीम से जुड़ा कर लिए और उन्हें देख शरमाते हुए मुद कार आगे चलने लगी.

आखिर कार वह उस एरिया को पार कर लेते हैं ..

“सलीम जी उफ्फ्फ क्या जहरना हैं .. ओह माय गॉड .. .. सलीम जी मुझे यहाँ इस जगह लेन के लिए शुक्रिया …”

चलिए सलीम जी जरा पास जाते हैं और .. चलिए न…”

सलीम तोह ख़ुशी से चल देता हैं .. उसकी नज़र रोशनीकी चूतड़ों पर और गोरी सी कमर और पीठ पर थी .. लोढ़ा टाइट इस नज़ारे से..

अब निचे फ्लैट सरफेस था लेकिन पानी की वजह से स्लिपरी..

“रोशनीजी ज़रा संभल कर ….”

“सलीम जी आप भइआएए न .. एक दूसरे को सपोर्ट denge..na ”रौशनी सलीम को कहती हैं ..

सलीम यह सुन खुश होता हैं और अब रौशनी के काफी करीब पीछे आ जाता हैं.

उसे तोह अब रहा नहीं जारहा था .. रौशनी की गदरायी बदन वाली नंगी पीठ को देख उसे वहां उसे चूमने का मन करता हैं..

फिर सलीम गिरने का नाटक करते हुए रौशनी के कन्धों को पकड़ कर अपने यह को उसककी गोरी पीठ पर रख वहां चूमता हैं .. रौशनी आगे से जरा शॉक होती हैं .. लेकिन सलीम के होठों के स्पर्श से वह झूम उठी थी.. उसे यह माहौल सब काफी मस्त लग रहा था …

अह्ह्ह सलीम जी उफ्फ्फ मममम”

रौशनी की मधु आवाज़ सुन सलीम और बोल्ड होकर अब रौशनी की कमर चूमता हैं… वहां अपने होतोहं से गीला निशाँ चरते हुए ..

ममम अहह सलीम जी .. उफ़ मेरी कमर पर अह्ह्ह…”

सलीम फिर और 4 पुप्पियाँ देता हैं .. सब गीली वाली… रौशनी की गर्मी बढ़ती हैं उसके मुँह से ाःह उफ्फ्फ आवाज़ निकलती हैं…

रौशनी एकदम से ज़रा बैलेंस खो कर अग्गे झक जाती हैं …

गिरने से पहले hi सलीम रौशनी को पकड़ लेता हैं .. लेकिन पकड़ते सपय सलीम का एक मज़बूत हाथ रौशनी की कमर पर लपेटे हुए होता हैं और दूर रौशनी की ब्लाउज पर उसकी चूचियों पर .. उन्हें दबाते हुए …

“रौशनी जी … पकड़ लिया आपको …”

रौशनी बस सलीम के हाथों को अपनी नाज़ुक कमर पर और अपनी चूचियों के ऊपर पाकर सिहर उठी … ुफुफ्फमम की आवज़ निकलते हुए .. सलीम उसे और पास खींच लेता हैं … रौशनी फिर से सलीम से चिपक जाती हैं .. उसे पीछे से कुछ चुंबन मह्सुश होती हैं .. उफ्फ्फ ममम यह तोह फिर से सलीम जी ा लुंड का उभर हैं ुफममममम शतान हैं उनका तोह …)

रौशनी उसी कामुक सोच में थी की सलीम उसे घुमा कर अब दोनों एक दूसरे को देखने लगते हैं ..

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“रौशनी जी लगता हैं झटका ज़ोर से लग गया आपको.”

रौशनी अब सलीम की आँखों में देखते हुए कामुक अंदाज़ में “हाँ सलीम जी उफ्फ्फ अचानक आपने मज्झे चूम लिए पीछे से. मेरी पीठ पर उफ्फ्फ्फ़ आप भी न …. “

सलीम अब साइड से रौशनी की कमर को जोर से दबाता हैं .. रौशनी ममममम करती हई आँखें बंद कर लेती हैं ….

आंखें बंग कर रौशनी ट्रैन के सफर में जो हुआ उसपर सोचने लगती हैं .. कैसे डांस के वक़्त सलीम ने उसे चूमा था बदन पर .. फिर कैसे उसने वहां सलीम के मोठे लोडे को मुँह में लिए चूसा था … उफ्फ्फ्फ़ इतना कला और मोटा था उनका तोह उफ्फ्फ…. फिर उसे हसीना की बातें याद आती हैं सलीम के दुखद लाइफ की , इस साब की वजह से वह सलीम के इन हरकतों का अब आनंद लेने लगती हैं …. उसे सलीम से एक लगाव सा हो गया था शायद …

रौशनी अपने आँखों को खोलती हैं तोह सलीम के होठों को अपने नज़दीक पाती हैं …

धीरे से दोनों के होठं एक दूसरे के करीब आते हुए अब.. बस कुछ hi मम का फैसला था और फिर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखे हुए अब धीरे से आगे चूमने बढ़ने लगते हैं … फिर धीरे से रौशनी के गुलाबी होठ सलीम के होठों से चिपक जाते हैं … धीरे धीरे दोनों की गहरी चुम्बन शुरू होने लगती हैं… इस बार तोह रौशनी पूरा साथ देर यही थी … जहरने से थोड़ा पानी उनके चेहरों पर गिरने लगता हैं .. दोनों एक दूसरे को गहरी तरीके से चूमते हुए .. सलीम अपने जीभ से रौशनी के होठों को जुड़ा करते हुए अब रौशनी को डीप किश देने लगता हैं .. रौशनी भी सलीम के जीभ को अपने जीभ से मिलकर उसे उन्हें चूसने देती हैं….

उफ्फ्फ क्या सन था … रौशनी और सलीम एक डीप किश में .. दोनों के जीभ एक दूसरे से खेलते हुए .. अंदर का सलीवा चूसते हुए … .. सलीम अपने हाथों को कसकर रौशनी की नंग पीठ पर दबाने लगता हैं . वहां पर लाल निशाँ चोर्ने लगता हैं . दोनों का कॉमर्स वाला किश ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा था .. दोनों बह चुके थे गर्मी से…

चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी हलकी सी आवाजमें कहती हैं ..

“उफ़ सलीम जी आप बहुत जोरों से मसल रहे हो उफ्फ्फफ्फ्फ़”

सलीम बोलता हैं “ माफ़ कीजिये रौशनी बस .... अब आहिस्ता से hi हु भी आप hi के नज़रों के सामने से आपके बदन को चूमता हूँ”

“उफ़ सलीम जी मेरा कहना ……...”

रौशनी शब्द ख़तम करने से पहले hi सलीम अब रौशनी के गर्दन को चूमने लगता हैं .. ुऔर फिर धीरे से निचे रौशनी की चूचियों के दरार के बस ऊपर hi चुम लेता हैं …

सलीम चूमते हुए मन में (ाः क्या सराही चिकनी गर्दन है...... इसकी उफ्फ्फ मम और यह नाज़ुक सा बदन .. उफ्फ्फ बस चूमते hi लोढ़ा टाइट होता हैं यार .. क्या माल हैं सच में उफ्फ्फ्फ़ रौशनी माय डार्लिंग मममम.)

उफ़ रौशनी जी इतनी नाज़ुक हो तुम .. क्या मखमल बदन हैं … उफ्फ्फ्फ़ “ और सलीम वहां गीली पुप्पियाँ देने लगता हैं .. इस सब को मह्सुश करते हुए रौशनी सिसकियाँ मारती हैं और खिलखिला उठती हैं ..

“उफ्फ्फ सलीम जी आप भी न बस .. उफ्फफ्फ्फ़ छोड़िये ….”

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फिर रौशनी सलीम को हलके सा धक्का देती हुयी खुद को अलग करती हैं और फिर से पलट जाती हैं और आगे जाने लगती हैं … …

लेकिन सलीम उसे इतनी आसानी से नहीं चोर्ने वाला था .. वह रौशनी के पल्लू को कास के पकड़ लेता हैं और खींचता हैं …….....जिससे रौशनी फिर से थोड़ा घूम जाती हैं .. उसका बैलेंस फिर से बिगड़ने लगता हैं इसलिए सलीम फिर से रौशनी को उसके पल्लू से अपनी तरफ खींच लेता हैं..

फिर से सलीम से चिपक जाने से रौशनी शर्माती हुई सलीम को देखने लगती हैं.

सलीम रौशनी के पेट पे हाथ फेरने लगता हैं …

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सलीम वैसे hi आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगा था

तो वह अब रौशनी के एक्सपोज्ड कंधे और गर्दन बेतहाशा चूमने लग जाता हैं .. मुःह मुआह करतेहुए वहां रौशनी उम् आह्हः उम् ाः करते हुए

कुछ 2 मं और रौशनी के बदन को चूम कर सलीम अपनी सांसें संभालता है..... रौशनी, सलीम के अचानक रूकावट से उसकी तरफ नाराज़गी के अंदाज़ से देखती है..... यह देख सलीम अश्लील मुस्कान देता है रौशनी को देख …

“सलीम ji.ufff इतना इतना तंग कर आप रुक क्यों गए उफ्फ्फ मममम”

सलीम बस मुसकुराता हुआ अब रौशनी की गांड को दबोचता हैं ज़ोर से .. रौशनी के मुँह से उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह की आवाज़ निकलती हैं … इस सब से ..... रोशनज सिहर जाती हैं और अपना सर पीछे करलेगी....

जिसपे सलीम बिना मौका गवाए उसकी चीन को पहात से चूम लेता है जिससे रौशनी और सिहर उठती हैं.....

“सलीम जी उफ्फ्फ मम आप आज ऐसे मूड में उफ्फ्फ्फ़”

सलीम फीर कहता है बिंदास होकर ... “रौशनी डार्लिंग अब तू है hi इतनी रसीली.. हर बार मूड मेरा बनती हो उफ्फ्फ ऐसी मस्त हो यार तुम .. तुझे देख साला नियत ख़राब होने लगती हैं .. मेरी बुलबुल…”

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रौशनी पूरी गर्मी में कुछ नहीं कहती … फिर सलीम रौशनी का पल्लू लेके उसे झरने के पास hi कुछ रॉक्स के पास ले जाता हैं .... और रौशनी को इशारा करता है आंख्यों से फिर कहता हैं

“इधर आए रौशनी माय जानेमानन

रौशनी तोह आअज बोहोत उत्तेजित होगयी थी, ऐसा रोमांस कभी उसने महसूस नहीं किया था ,

(रोनित तो पब्लिक में कभी ऐसे नहीं किये थे … यहाँ सलीम जी तो मुझे काफी मसल रहे हैं उफ्फ्फ आज मुझे उनकी यह हरकतें इतनी क्यों पसंद आने लगी हैं uffffffffffffffffff)

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दोनों गर्मी में लुफ्त … थे …

सलीम से और रहा नहीं गया.... और वह रोशनज के नाभि पे वार करने लगा ...जिससे रौशनी एक अलग hi दुन्या में चली गयी उत्तेजना और मदहोशी. की दुनिया में..

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सलीम बेतहाशा रौशनी की नाभि और कमर को चूमता रहा और इस बार वहां चाटने भी लगा …..... , हु काफी वह जंगली होता gaya....k

उसने खुद की नज़र ऊपर डाली तो रौशनी को आँखें बंद इस सब की मस्ती सहते हुए देख वह रौशनी की चूचियों को गौर से देखने लगा .....और वह टूट पारा रोशनज के सीने पे

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और फिर बिलकुल वाइल्ड किस्सेस देने लगा रौशनी की चूचियों कैद अगर पर … उसकी ब्लूज़ को हाथों से दबोचने लगा .. ऊपर से रौशनी के चूचियों को दबोचता रहा …

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रौशनी बेहाल थी.... उसे बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. भूल चुकी थी की सलीम के साथ थी वह …

Salim...aur बोल्ड होते हुए रौशनी के ब्लाउज की आगे के बटन खोलने लगा .. पहले एक बटन फिर दो … रौशनी उसे रोक नहीं रही थी .. इससे देख सलीम अब तीसरा भी बटन खोलने लगा .. और अब रौशनी की ब्रा दिखी .. उसमें हाथ दाल वह अब रौशनी की चूचियों को दबाने लगा .. उन्हें मसलने लगा …

वह रौशनी की चूची को मसलने लगा… अब 4तह बटन भी लूसे हुआ .. फिर फिफ्थ .. अब ब्लाउज के सब बटन ओपन थे…

रौशनी गर्मी में सब भूल चुकी थी .. हवस का शिकार होते हुए वह भी अपने हाथों को सलीम के बड़े लुंड वाले उभर पर दलाई … और खुद उसकी ज़िप उतारकर उसके लोडे को उनके चड्डी के ऊपर hi मसलने लगी…

“अहह रौशनी माय डिअर .. मम उफ्फफ्फ्फ़ तुम्हे अपना बनाना का सोच लिया हूँ . मुझे तुम चाहिए मेरी डार्लिंग मुझे तुमसे प्यार करना हैं और ढेर सारा प्यार ……”

रौशनी की आँखें खुलती हैं .. वह कामुक निगहाओं से सलीम को देखती हैं . कुछ नहीं कहती ..

सलीम उसका हाथ पकड़ कर उसे जहरने से और उन रॉक्स से थोड़ी दुरी पर ले जाता हैं और अब रौशनी का पूरा ब्लाउज उतर कर ज़मीन पर जहाँ भी ड्राई जगह हैं वहां फेक देता हैं ..

उसके ब्रा के अंदर हाथ दाल उसकी चूचियों को मसलने लगता हैं .. फिर ब्रा को भी फ़ेंक कर उसकी चूचियों को चूसने लगता हैं … जोरोनो से …

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रौशनी पूरी हवस में धुत अब सलीम के पंत को खोल उसके लोडे को उसकी चड्डी में से मसलने लगती हैं .. उसके लोडे को आगे पीछे करने लगती हैं … आज हु सब कुछ भूल गयी थी .. आज उसकी हवस जीत hi रही थी …

रौशनी अब सलीम के बड़े लुंड को देख पूरी हवस से भरपूर .. उसकी छूट से रास छूट कर उसकी पंतय गीली करती हुयी ... उफ्फ्फ क्या लोढ़ा हैं .. हर बार देख तोह पहली बार से और मोटा और बड़ा लगता हैं उफ्फ्फ ममम क्या में सलीम के लोडे की दीवानी बन चुकी उफ्फ्फ.. क्या शानदार लोढ़ा हैं उफ्फ्फ्ममममम)

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अब उसे रहा नहीं जार अहा था .. घुटनो के बल जाकर वह अब सलीम के लोडे को चूमने लगती हैं .. उसे प्रेकम को भी चाटने लगती हैं … प्यार से उसके लोडे के सर को चाटने लगती हैं .. सलीम बस रौशनी की चूचियों के साथ खेलता हैं और अपने लोडे को रौशनी के मुँह के अंदर बहार करने लगता हैं …

वहां हु रौशनी की खुली चूचियों को मसल रहा था और रौशनी उसके लोडे को चूस रही थी .. पहली बार रौशनी खुद hi सलीम के लोडे को चूस रही थी.. पहली बार अपने पति को चोर किसी मर्द के सामने और मर्द के हाथों में उसकी नंगी चूचियां थी ..

सलीम को आज यकीन hi नहीं हो रहा था की वह रौशनी की नंगी चूचियों को देख कर दबोच रहा हैं … क्या सुडोल चूचियां थी .. ममम इतनी गोरी सी … और हलके ब्राउन रंग की निप्पल्स हु भी एक दम मस्त साइज की .. न बड़ी न छोटी … इस नज़ारे से उसका लोढ़ा और रौशनी के मुँह में उछलने लगा .. ढेर सारा प्रेकम निकल रहा था जो रौशनी चूस भी रही थी… रौशनी के सर को पीछे से पकड़ कर अब उसके मुँह में वह अपने लोडे को पेल रहा था .. रौशनी भी मस्ती में चुस्ती रही … सलीम और रौशनी आज इस नेचर की जगह पर हवस में खो चुके थे …

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कुछ और मं बाद सलीम को रहा नहीं गया और वह फिर से रौशनी के मुँह पर अपने लोडे के माल को चोर्ने लगा … और उसके पुरे चेहरे को अपने माल से भर दिया …

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आअज रौशनी और सलीम ने काफी हाडे पार की थी .. अब बस बाकी था दोनों के बीच सम्भोग
 
अब रौशनी उठ कड़ी हुयी .. वह टॉपलेस थी

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“उफ़ सलीम जी मुझे ठण्ड लग रही हैं.. में तोह उफ्फ्फ आपके सामने ऊपर से तोह नंगी hi हूँ .. उफ़ मेरी ब्लाउज दीजिये …. पलज़्ज़ज़”

सलीम रौशनी की ब्रा और ब्लाउज उठा ता हैं …

“उफ़ सलीम जी दोनों वेट हो गए हैं उफ्फ्फ अब में क्या पेहेनू …”

सलीम कुछ बोलने से पहले hi उसे एक कॉल आता हैं.

“हाँ , हाँ अच्छा अभी आना हैं .. अच्छा ठीक हैं हमारा काम हुआ हैं आते hi हैं..” सलीम रौशनी को पकड़े हुए hi बात कर रहा था …

“कौन था सलीम जी ..?”

“कुछ नहीं बस वापस जाना हैं एक छोटा सा फंक्शन हैं ..”

“ओह अच्छा अब में ऐसे कैसे उफ्फ्फ्फ़”

“हम्म्म एक काम कर लो .. अभी तोह यह पेहेन लो हमें वैसे भी एक छोटे से फंक्शन जाना हैं और तोह तुम बुर्का पेहेन लोगी .. तब ब्रा और ब्लाउज नहीं पहनी हो फिर भी सही सब ढाका hi होगा ..”

“लेकिन सलीम जी बुर्क़े के अंदर भी , बिना ब्रा और ब्लाउज के कैसे जाउंगी उफ्फ्फ शर्म आएगी मुझे . अंदर से तोह ऊपर से नग्न hi हूँगी न..”

“रौशनी जी यह बात हमें पता हैं .. उन लोगों को थोड़े hi .. अब यही रास्ता हैं .. गाडी में एक बुर्का देखा था मैंने अब उसे आप पेहेन लो..”

अब रौशनी भी कुछ नहीं पाएगी .. इसलिए वह सलीम की बुर्क़े वाली बात मान लेती हैं.

अब बात यह भी थी की सलीम के लोडे से निकला माल को रौशनी के चेहरे पर क्रीम जैसे दिख रहा था …

“उफ़ सलीम जी और के बात .. आपने फिर से यह सब किया हैं .. … उफ्फ्फ्फ़ यह आप बहकते हो मुझे और यह सब करते हो उफ्फ्फ्फ़… आप बड़े शैतान हैं…”

“सलीम फॉर रौशनी के कमर को पकड़ कर मुस्कुराता हुआ ..

“अहह तू हैं hi मस्त रौशनी … उफ्फ्फ देख चेहरे पर कैसे क्रीम लगाया हैं ः …”

रौशनी मुँह फेर लेती हैं … उफ्फ्फ अब उसे कैसे पोचू सलीम जी .. आप भी न .. कुछ करिये पलज़्ज़ज़.

सलीम फिर रौशनी के कमर को कास कर पकड़ता हैं … उसके मज़बूत हाथों को कमर पर पाकर रौशनी फिर से शर्माती हैं ;यकीन उनके हाथों को हटाने की कोई कोशिश नहीं करती .. बस उनके साथ hi झरने के पास चली जाती हैं..

“रोशनी जी यहाँ झरने के पानी से मुँह धोलो .. फिर रौशनी जहरने से बने तालाब के पानी को हाथो में लेकर

“उफ्फ्फ इतनी ठंडक हैं इस पानी में सलीम जी … इतना कहते हुए वह अपने चेहरे को क्लीन करती हैं..

“रौशनी जी ज़रा हमारे वहां भी क्लीन करिये ….”

रौशनी अब सलीम के अर्ध सख्त लुंड को देखती हैं (उफ्फ्फ अभी भी इतना मोटा हैं … उफ्फ्फ क्या लुंड हैं …)

रौशनी फिर पानी लेकर सलीम के लोडे को भी क्लीन कर लेती हैं…. पहले तोह सलीम के लोडे के टिप को धोती हैं , फिर उसके शाफ़्ट को … आखिर कार उसके लोडे के इर्द गिर्द उसके बालों को और फिर उसके लोडे के बड़े गेंदों को … बड़ी कोमलता से और प्यार से रौशनी अब सलीम के लोडे को साफ़ कर देती हैं..

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सलीम इसे देख काफी खुश होता हैं (उफ्फ्फ आ गयी न लाइन पर .. अब बिना ज़हिज़हाक कर मेरे लोडे को हाथ लगाने लगी हैं रौशनी .. उफ्फ्फ अब तोह देर नहीं जब उसकी पूरी तरह से उसे निचोड़ निचोड़ कर चुदाई करूँगा अह्ह्ह)

सलीम फिरसे रप्शनि की कमर को पकड़ते हुए वहां से दोनों चले जाते हैं .. रौशनी सलीम के साथ टॉपलेस थी इसका रौशनी को अब फरक hi नहीं पद रहा था , उसकी चूचियां ऊपर निचे हिलते हुए सलीम के नज़रों के साफ़ साफ़ सामने देख सलीम की गर्मी फिर से बढ़ने लगी थी ..

“रौशनी आस पास कोई नहीं हैं .. बस अब साड़ी के पल्लू से अपनी चूचियों को धक् लो और गाडी के पास जाएंगे..” सलीम बस रौशनी की चूचियों को घूरे hi जार अहा था ..

(उफ्फ्फ्फ़ यहाँ में टॉपलेस हूँ और सलीम की आंखें मेरी चूचियों परुफ्फ्फ्फ़ यह कहाँ में फास गयी आज … आज तोह मेरी नग्न चुहियों का भी प्रदर्शन कर चुकी हूँ सलीम जी के सामने .. उफ्फ्फ्फ़ मुझे तोह अब उन्हें देख काफी शर्म आ रही हैं .. उफ्फ्फ)

दोनों अब गाडी के पास पहुँच जाते हैं … सलीम फिर गाडी से एक बुर्का निकल कर रौशनी को पहनता हैं.. रौशनी को बुर्का पेहेन कर काफी अजीब लगता हैं … पहली बार उसने बुर्का पहना था.. बुर्क़े में आँखों के वहां एक स्लिट था .. जहाँ से रौशनी की नशीली आँखें सलीम को दिखाई दे रही थी .. उफ्फ्फ्फ़ बुर्क़े में भी माल लग रही हैं रौशनी .. बदन hi इतना गदराया हुआ हैं .. उफ्फ्फ आज रात को तोह पूरी मस्ती करनी चाहिए … गरमी भी बढ़ी हैं इसके अनादर .. अभी बुझानी होगी आज रात को hi..

फिर दोनों गाडी में बैठ कर वहां से निकल गए ..रास्ते में रौशनी कुछ नहीं बोली .. उसक शर्म बढ़ गयी थी .. वह अभी हुए सब अश्लील चीज़ों के बारे में सोच रही थी…

40 मं में दोनों एक अलग वेन्यू पहुँच गए.

अब दोनों वेन्यू के पास जा रहे थे … जैसे hi वह पास पहुंचे रौशनी देख सकीय की वहां काफी महिलाऐं थी .. सब बुर्क़े में …

वहां से एक महिला उन्हें देख बोली “ओह हो सलीम भाईजान आपने एक नयी बेगम पा ली हैं क्या …”

“रौशनी इसे सुन शर्मा उठी ..

दूसरी महिला बोली “वह सलीम भाईजान ऐसी बेगम कब पायी आपने … इसकी आँखें इतनी नशीली हैं … “ और हु हसने लगी … ा

और एक बोली “ओह हो भाईजान भाभी जी को कहाँ घुमा कर लाये हो .. या कुछ और कर चुके हो इनके साथ … इस बात पर वहां 3-4 महिलाऐं हसने लगी ..

रौशनी सब सुन काफी शर्मा रहीथी … उफ्फ्फ यह सब महिलाऐं मुझे सलीम जी की बेगम समझ रहे हैं उफ्फ्फ्फ़…

हसीना भी तब तक वहां आ गयी ..”अरे ऐसे hi चिढ़ाते रहोगे सलीम जी और उनकी बेगम को ..”

रौशनी फिर हसीना को बोली धीमे स्वर में “उफ्फ्फ हसीना जी आप भी न , में रौशनी हूँ ..आप तोह उफ्फ्फ्फ़.”

“हाँ पता हैं .. बस मज़ाक hi कर रही थी .. वैसे आपकी और सलीम जी की जोड़ी बड़ी मस्त लग रही हैं … मानों सच में आप और हु पति पत्नी हो ः.. अब क्या करे..”

“हसीना जी प्ल्ज़ उफ्फ्फ्फ़ मत कहिये ऐसे ..”

“अच्छा तोह बताओ भाईजान कहाँ घुमा कर लाई आपको .. और वैसे बुर्क़े में क्यों हो .. क्या हुआ ..”

“कुछ नहीं बस एक झरने के वहां ले गए थे और ब्लाउज थोड़ी सी गीली हुयी तोह बुर्का पेहेन लिया .. और एक फंक्शन भी हैं न ..”

“अच्छा .. हम्म्म हाँ चलिए . और कुछ 20 मं चलेगा फंक्शन ..”

रौशनी बुर्क़े में तोह थी hi लेकिन अंदर बिना ब्लाउज और ब्रा के भी थी.. उसे काफी अजीब लग रहा था उस बात से.. नंगी चुकियाँ बुर्क़े के अंदर और इस बात क खबर किसी को नहीं थी..”

“वैसे रौशनी जी सलीम भाईजान के साथ घूमना पसंद आया या नहीं ….

रौशनी शरमाते हुए उन अश्लील घटनाओं का सोचते हुए ..”उफ़ मम हाँ अच्छा लगा सलीम जी के साथ.”

“हाँ रौशनी जी आपकी जोड़ी बहुत अच्छी हैं .. कैशा आप hi बेगम होती उनकी .. में तोह बड़ी खुश होती आप जैसी हसीं उनकी बेगम होती तोह..”

रौशनी सी बात पर शरमाते हुए उसके गाल लाल हो जाते हैं … उफ्फ्फ यह हसीना जी भी न …

“रौशनी जी … सोचिये आप उनकी बेगम होती तोह .. बहुत प्यार देते सलीम भाईजान .. उन्हें उनकी पुराणी बीवी से बहुत इश्क़ था .. आप से और दस गुना इश्क़ लड़ते …”

“हसीना जी में पहले से hi शादी शुदा हूँ .. ऐसी बातें न करिये उफ्फ्फ्फ़….”

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“रौशनी जी .. अरे उनसे ज्यादा इश्क़ मेरे भाईजान आप से करेंगे … आप उनकी बीवी होती तोह पता चलता .. बहुत इश्क़ लड़ते सलीम भाईजान … आप बहुत खुश होती उनके साथ”

रौशनी शर्माती हुयी उन बातों पर सोचने लगती हैं .. (अगर वह सलीम की बेगम होती तोह उनका बड़ा लोढ़ा .. उससे तोह हु हर रोज़ ………… मेरी तोह आग शांत करते हर रात सलीम जी .. . उफ्फ्फ्फ़ रौशनी तू भी न . किस सोच में पद जाती हो ..

रौशनी लेकिन खुद को गर्म होने से रोक नहीं प् रही थी .. साली ने तोह अपना माल चोर दिया था लेकिन अब तक वह तृप्त नहीं हुयी थी .. उसकी छूट से ओर्गास्म नहीं हुआ था .. बहुत दिनों से अपनी प्यास की सोचती तोह रौशनी के दिमाग में सलीम का मोटा लोढ़ा घूमने लगता ..

फिर सलीम अब रौशनी के पास आता हैं ..”रौशनी जी चलिए अब वापस वेन्यू जाएंगे .. थोड़ा फ्रेश होंगे फिर हमें शादी के वेन्यू में जाना हैं.. 2 घंटों में शादी हैं.

“हाँ सलीम जी चलिए ..”

हसीना हम जा रहे हैं आगे .. सीधे शादी के वहां आएँगे हम”

“ठीक हैं सलीम भाईजान … चलिए रौशनी कुछ देर में मिलते हैं..

सलीम आगे जाता हैं .. रौशनी पीछे हसीना को देखती हैं जो उसे इशारा करती हैं की उनकी मस्त जोड़ी हैं … रौशनी उन इशारों से शरमाते हुए फिर सलीम को देखती हैं .. फिर उनके साथ चली जाती हैं.

दोनों फ्रेश होकर रेडी हो जाते हैं..

रौशनी एक फुल स्लीव वाली ब्लाउज पहनी थी .. लइकन पीछे से काफी डीप बैक साड़ी थी जिसे उसकी ोग्र्री से मुलायम सी पीठ साफ़ साफ़ मनो परुई तरह से दिख रही थी.. .. होठों पर लाइट ब्राउन लिपस्टिक.. सलीम रौशनी को देख गर महो जाता हैं … वह अब बे झिझक रौशनी की पीठ को चूमने लगता हैं ..

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“उफ़ सलीम जी क्या कर रहे हो उफ्फ्फ्मममम”

सलीम बस गीली पुप्पियाँ देते रहता हैं … “उफ़ सलीम जी अब जाना हैं उफ्फ्फ बस उफ्फ्फ्फ़ ममम सलीम जीईईईई.”

सलीम पागलों जैसे चूमता हैं उसकी पीठ फिर कमर .. फिर आगे से उसकी नाभि को भी चुम लेता हैं..

“उफ़ सलीम जी .. उफ़ कण्ट्रोल करिये…”

सलीम कहाँ कण्ट्रोल करने वाला थाखुद को .. वह फिर रौशनी की नाभि के अंदर अपनी जीभ दाल वहां चाट लेता हैं …

“उफ्फ्फ सलीम जी ममम और करिये मम अच्छा लग रहा हैं …”

रौशनी अब सलीम को ेन्सॉरगे कर रही थी .. सलीम तोह बस अब पागलों जैसे उसकी नाभि को चाटने लगता हैं .. कमर को चूमने लगता हैं और फुएर रौशनी की पीठ पर फिर से गीली चूमियाँ देने लगता हैं ..

उफ्फ्फ सलीम जी मममम उफ्फ्फ्फ़ मम एस उफ्फ्फ्फ़”

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सलीम फिर रौशनी की आँखों में देखता हैं .. रौशनी की आँखें कौंकता से सलीम की आँखों में गम हो जाती हैं … और सलीम उसे अब जोरों से चूमने लगता हैं …. कुछ 5 मं बाद चुम्बन ख़तम होते hi .. रौशनी शरमते हुए निचे देखने लगती हैं

“उफ़ सलीम जी आपने मेरी लिपस्टिक ख़राब कर दी उफ्फ्फ्फ़. अब फिर से लगनी होगी .. आप बड़े शैतान बन चुके हैं .. “ और रौशनी अपने नाज़ुक हथेलियों को सलीम के चौड़े साइन पर मारती हैं …

सलीम मुस्कुराता हैं ..”रौशनी जी असली शैतान तोह अभी तक पूरी तरह से जगा नहीं हैं ..” और सलीम अपने लोडे की तरफ इशारा करता हैं .. रौशनी की नज़र वहां जाती हैं .. और फिर वहां से हटा लेती हैं शरमाते हुए ..

“उफ्फ्फ सलीम जी आपका हु तोह .. उफ़ छोड़िये ..”

सलीम मुस्कुराता हैं .. “अच्छा चलिए रौशनी जी ..” सलीम रौशनी की कमर पकड़ते हुए उसे ले जाता हैं.. रौशनी अब बिना कुछ झिझक के सलीम के करीब उनके साथ चली जाती हैं..

दोनों गाडी से वेन्यू पहुँच जाते हैं जो बस 15 मं की दुरी पर hi था..

वहां उन्हें सलीम का दोस्त और उनके रिलेटिव्स उनकी वेलकम करते हैं..

उन्होंने सलीम और रौशनी को सबसे आगे की सीट दी थी ..

“सलीम .. यह तुम्हारे लिए और रौशनी जी के लिए .. आप हमारे ख़ास मेहमान हो . आइये..”

सलीम को इन सब लोगों ने इतना रेस्पेक्ट देते हुए देख रौशनी इम्प्रेस होती hain..(salim जी सच में काफी यहाँ पर रेस्पेक्टेड हैं .. मुहे नहीं पता था सलीम जी का इस रूप.. में उन्हें गलत समझी थी अब तक..

शादी का फंक्शन शुरू हुआ … फंक्शन ट्रेडिशनल था .. दोनों ब्राइड और ग्रूम काफी खुश नज़र आ रहे थे रौशनी को ..

रौशनी फिर महसूस करि की सलीम के हाथ अब उसके हाथों पर थे .. वह उन्हें देख मुस्कुरायी .. उसे सलीम जी पसंद आने लगे थे , उसकी सलीम जी के प्रति फीलिंग्स क्या रोमांटिक फीलिंग्स में डेवेलोप हो रहे थे ...??? ) इस सब सोच में पड़ी थी रौशनी.

वहां रोनित और रौशनी के बीच दूरियां थी और यहाँ सलीम और रौशनी के बीच नज़दीकियां बढ़ रही थी … … ..

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शादी का फंक्शन ख़तम हुआ ..

“रौशनी जी अब दोनों जा रहे हैं अपनी सुहागरात मानाने ः”

“सलीम जी .. सुहागरात ?? , आप लोगों में भी होता हैं ऐसे ..?

“रौशनी जी अब क्या बताऊ आज कल के जवान लड़की लड़के .. उन्हें यह सब पसंद हैं .. अब हम उनकी ख़ुशी के लिए उन्हें नहीं कैसे कह सकते हैं आप hi बताइये …”

“हाँ सही बात हैं आपकी सलीम जी.”

रौशनी जी आप हसीना के पास जाइये .. उन्हें में कह चूका था की आप मदत करेगी ब्राइड और ग्रूम की सुहागरात वाली बीएड तैयार करने.. देखिये आप लोगों के यहाँ यह सुहागरात होता हैं काफी .. आप को पता होगा ाकैसे करना हैं बिस्तर तैयार .. इसलिए आप मदत करेगी तोह अच्छे से बिस्तर और कमरा तैयार हम कर पाएंगे दूल्हा – दुल्हन की सुहागरात के लिए ”

रौशनी सर हाँ में हिलाते हुए वहां से जाती हैं

रौशनी जाने के बाद सलीम अब हसीना को कॉल करता हैं..

“हसीना.. तुम्हे पता हैं न क्या करना हैं … रौशनी आ रही हैं आपके पास .. अपना प्लान जैसे था वैसे आप करियेगा ..”

“हाँ ज़रूर भाईजान जैसे आपने कहा था वैसे hi बिलकुल.”

रौशनी को नहीं पता था सलीम ने हसीना के साथ मिलकर कुछ और hi प्लान किया था .. वह सलीम के बिछाए जाल में फस्ती जा रही थी.

“हसीना जी सलीम जी ने भेजा था .. हु दूल्हा – दुल्हन के सुहागरात वाला बिस्तर तैयार करना हैं..”

“हाँ रौशनी आओ …”

रौशनी अब हसीना के साथ चली जाती हैं .. रौशनी सरप्राइज होती हैं जब हसीना उसे अपने hi कमरे के तरह ले जा रही थी..

“हसीना जी यह तोह मेरा hi रूम हैं..?”

“हाँ रौशनी जी बात यह हैं की दूल्हा – दुल्हन का रूम हैं न, वहां काफी पानी का लीकेज शुरू हुआ था … और यह कमरा हैं हु उनके कमरे के बाद सबसे बड़ा हैं … इसलिए उन्हें हमने सोचा यह कमरा देंगे .. . बस आपको कही और रात बितानी पड़ेगी .. कोई आपत्ति हैं आपको इसमें.”

“हसीना जी अब अगर लीकेज हैं और यही सबसे बड़ा कमरा हैं उसके बाद तोह अब क्या करे .. dulha-dulhan की शाग्रात काफी महत्वपूर्ण हॉट हैं . उनकी ख़ुशी के लिए में तैयार हूँ कोई आपत्ति नहीं.”

“रौशनी जी सच तुम दिल की इतनी साफ़ हो … सलीम भेंजान जितनी आपकी तारीफ़ करते हैं .. उतनी काम हैं सच में..”

रौशनी मुस्कुराती हैं .. “चैलये शुरू करे ,,?, वैसे और कोई नहीं मदत करने ..”

“रौशनी में सोच रही थी .. टाइम इतना नहीं हैं .. अलग अलग महिलाओं की लग अलग विचार होंगे तोह काफी टाइम लगेगा .. वैसे भी आप को हम सब से अच्छा पता हैं सुहागरात का कमरा और बिस्तर कैसे तैयार करते हैं..”

“हम्म बात तोह सही हैं .. लेकिन सिर्फ हम दो होंगे तोह बहुत आलीशान नहीं होगा सुहागरात वाला कमरा .”

“कोई बात नहीं बस उन दोनों की ख़ुशी के लिए हम कर रहे हैं, सच कहु सब इस के लिए तैयार नहीं थे .. लेकिन उन दोनों की ख़ुशी के लिए सलीम भाईजान बोले हम यह सब करेंगे , इसलिए दुल्हन के पिता मान गए इस बात को.. चलिए अब शुरू करते हैं ..

रौशनी और हसीना फिर बिस्तर पर फूल बिछाने लगे .. कमरा सजाने लगे …

“रौशनी जी आपकी सुहागरात तोह बढ़िया हुयी होगी .. आपके पति ने तोह बहुत मज़े किये होंगे ..”

“उफ़ हसीना जी आप भी न .. रौशनी शर्माती हैं.

“बताइये न इसमें क्या छिपाना .. आपके पति की hi पूछी हूँ और कोई नहीं ः”

“उफ़ हसीना जी आप तोह … हाँ बहुत अच्छे से सुहागरात मनाई मैंने और रोनित ने ..”

“अच्छा फिर रात भर मस्ती की आप दोनों ने ..”

रौशनी शर्मायी …”उफ्फ्फ हाँ कह सकते हो हसीना जी.”

“अच्छा रौशनी जी .. फिर सुबह तोह तकलीफ काफी हुयी होगी आपको..”

“मतलब कैसी तकलीफ हसीना जी.”

“अरे रौशनी जी .. मतलब रात भर चुदाई की होगी तोह सुबह तोह चलने में आपको ..”

हसीना से चुदाई का शब्द सुन रौशनी सहरमयी ..”उफ़ हसीना जी आप भी न …कुछ भी कहते हो..”

“अरे बताओ न क्यों शर्मा रही हो.. सुबह चलने में तकलीफ तोह हुयी होगी .. आप जैसी हसीं को तोह कोई भी मर्द रात भर भोगेगा तोह सुबह आपको चलने में दिक्कत hi होगी न.”

“हसीना जी उफ्फ्फ्फ़ आप भी न .. “

“रौशनी जी यह सब हमारे में नहीं हॉट न .. और मेरे पति तोह कभी ऐसे रोमांटिक नहीं थे ....”

“रौशनी जी एक बात तोह हैं .. इन मर्दों को अगर हम औरतें बिस्तर पर खुश रखेगी तोह हम पत्नियों की तोह रात भर सम्भोग करते रहेंगे हर रोज़ज .. “

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“हसीना जी मुझे न आपसे ऐसी बातों से उफ्फ्फ.”

“अरे इतनी शर्मीली न बनो.. रोशनीजी मुझे पता हैं आप की अंदर की आग हैं काफी … आपके पति बुझा पते हैं न ठीक से ..”

रौशनी सोच में पद जातीहैं (रोनित तोह शुरुवात में तीनि चुदाई करते थे ,, उफ्फ्फ्फ़ मेरी गर्मी इतनी बधाई उन्होंने .. और अब तोह कुछ नहीं ..मेरी आग बुझाने ला नाम hi नहीं लेते …)

“क्या सोच रही हो रौशनी जी … आपके पति के बारे में और उनके साथ सुहागरात के बारे में “

“उफ्फ्फ नहीं ऐसे कुछ नहीं हसीना जी”

“अच्छा फिर और क्या सोच रही हो .. कोई और हैं क्या “

“उफ़ हसीना जी क्या बोल रही हैं आप उफ्फ्फ्फ़ और कोई कैसे . में अपने पति से बेहत प्यार करती हूँ.”

“रौशनी जी अरे आप बुरा मान गयी .. बस तुम हो इतनी हसीं की कई मर्द आपके पीछे पड़ेंगे .. तोह लगा कोई और हैं क्या आपका.”

“उफ़ हसीना जी .. प्ल्ज़ कुछ और बातें करिये”

“ठीक हैं , वैसे मैंने सलीम की बीवी से एक बार बात कर ली थी .. हु बोली की सलीम भाईजान तोह उन्हें पहली बार रात भर चुदाई करे थे …… ऐसे मर्द मुझे लगा आपके पीछे होंगे ः”

रौशनी अब पूरी शर्मा रही थी … सलीम के बारे में ऐसे सुन ,, हु भी हसीना जी से ....

(उफ़ हसीना जी भी .. लेकिन सलीम जी का मोटा लोढ़ा तोह सच में चुदाई करेगा उसकी तोह फिर हु भी .. उफ्फ्फ्फ़ यह सब बातें गर्मी बढ़ा रही हैं उफ्फ्फ्फ़.)

“रौशनी जी इस उम्र में भी सलीम भाईजान किसी भी युवा को टक्कर दे सकते हैं… बहुत hi दयावान हैं हु . उनकी हवस तोह इतनी होगी उफ्फ्फ पति छोर जाने के बाद उन्होंने तोह किसी महिला से भी नहीं चुदाई करि होगी … कोई अब मिलेगी चुदाई करने सलीम भाईजान को ... तोह ....”

रौशनी , हसीना से ऐसी सलीम के बारे में बातें सुन कर .. अपने मन में बस सलीम के लुंड की सोच में hi पद गयी . उनका कला मोटा ताक़तवर लोढ़ा .. अगर उसकी छूट में जाएगा तोह तभी मचेगी उफ्फ्फ्फ़… क्या लोढ़ा हैं ममम )

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रौशनी गर महो रही थी .. उसकी छूट बस सलीम के लोडे की सोचते hi पानी चूर्ण शुरू कर रही थी…

अब सुहागरात वाला बिस्तर और कमरा तैयार हो चूका था .. सुहागरात के लिए पूरी तरह से तैयार … अब बॉस बात रही की सुहागरात किसकी होगी उस बिस्तर पर ……….

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सब तैयारी हुई थी और रौशनी सब देख खुश हुयी ..

“हसीना जी सब तैयार हैं …”

“रौशनी अरे हु वहां साइड पर कुछ रह गया हैं”

“हसीना जी हाँ सही हैं चलिए में हु ख़तम करती हूँ और आप .. अब दूल्हा – दुल्हन को बुलाने की तयारी करिये … चलिए”

“हसीना बोली “हाँ जरूर रौशनी .. तुम यहाँ काम ख़तम करो में इंतेज़ाम करुँगी , और दूल्हे को बुलाऊंगी…”

रौशनी सिर्फ दूल्हा शब्द सुन आश्चर्य हुयी .. वह दुल्हन शब्द भी बताने मुड़ी hi की हसीना कमरे से बहार चली गयी थी.. “उफ़ हसीना जी दुल्हन को तोह भूल hi गयी आप ..” इस बात पर हस्ते हुए वह आखरी की तैयारी करने लगी…

अब हसीना थोड़ी दूर जाकर सलीम जी को देख बोली “भाईजान सब तैयारी हो गयी हैं , में तोह अपना काम करि हूँ. अब आप बाकी सब करलो..”

“शुक्रिया हसीना …”

सलीम फिर सुहागरात वाले कमरे की तरह चलने लगे .

सलीम कमरे के अंदर आये तोह रौशनी अभी भी तैयारी कर रही थी.. रौशनी क़दमों की आवाज़ें सुनी लेकिन उसे लगा की वह हसीना hi होगी … और अपना काम करते बैठी.”

“हसीना जी दुल्हन के बारे में आप भूल hi गयी थी ..क्या Dulha-Dulhan आने के लिए तैयार हैं ??…”

रौशनी की पीठ सलीम के तरफ थी और झुकते हुए आखरी फूल बिस्तर पर बिछा रही थी.

सलीम रौशनी की चूतड़ों को देख और उसकी गोरी सी कमर और पीठ देख गर्म हो रहे थे .. उसके लोडे में जान आने लगी थी .. (है क्या मस्त गदरायी माल हैं रौशनी उफ्फ्फ.. आज तोह इसे यही पर लिटा कर बहुत मस्त करूँगा .. उफ्फ्फ क्या बदन हैं… क्या कमर मममम) और सलीम अपने लोडे को मसलने लगे.

सलीम से रहा नहीं गया .. वह पीछे जाकर रौशनी से चिपक hi गया …

“उफ्फ्फ यह क्या .. कौन हैं उफ्फ्फ… रौशनी फिर पीछे मुड़ी तोह सलीम को अपने आँखों के सामने देख सेहम गयी..”

“उफ़ सलीम जी आप .. यहाँ .. यह क्या कर रहे हो .. उफ्फ्फ छोड़िये न …”

सलीम बस रौशनी की कमर को जकड़े हुए मसलते हुए ..”रौशनी मेरी जान उफ्फ्फ रहा नहीं गया मुझे से .. उफ्फ्फ क्या मस्त खुशबु हैं तुम्हारी …

सलीम अब रौशनी के कानों के पास अपनी नाक लेजाकर उसे सूंघने लगा .. उफ्फ्फ क्या मेढक खुशबु हैं आपकी रौशनी…”

“सलीम जी उफ्फ्फ क्या कर रहे हो .. उफ्फ्फ्फ़ ममम यह दूल्हा और दुल्हन के लिए सब तैयारी हैं उफ़ उन्हें बुलाइये ..”

"रौशनी ममम उफ्फ्फ इतनी भी क्या जल्दी हैं .. और सलीम ने रोशनिको और कसकर जकड़े हुए अब उसकी गालों को चूमने लगे …

“ममम सलीम जी उफ्फ्फ आप भी न जब देखो अब शुरू हो जाते हो … मममम”

“रौशनी आ फ़ो hi ऐसी मस्त .. क्या करे .. खुल गरम हटा हैं और गर्मी बढ़ती हैं … और मेरा शैतान भी ….”

रौशनी को सलीम के उभरते लोडे को अपनी साड़ी के ऊपर सीधे अपनी छूट के वहां महसूस होती हैं … (उफ्फ्फ इनका हु शैतान भी जहाँ देखो वहां उफ्फ्फ्फ़.)

“सलीम जी छोड़िये ममम..”

सलीम बस रौशनी की गालों को , माथे को, चीन को .. सब जगह चूमने लगा … “उफ्फ्फ रौशनी ममम क्या मखमली सी बदन हैं तुम्हारी .. मम मन करता हैं बस चूमते hi राहु…”

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“सलीम जी बस अब दूल्हा – दुल्हन को बोलो..”

“रौशनी जी आपको पता नहीं .. उफ़ उनका कमरे का लीकेज ठीक हुआ तहत ओह वहां पर hi सब तैयारी कर चुके हैं …”

“सलीम जी क्या कह रहे हो .. में और हसीना जी यहाँ पर उनकी सुहागरात की तैयारी कर रहे थे .. उफ्फ्फ”

“ओह धत टी… आपको बताना भूल गए सब .. हसीना को भी बताना भूल गए लगता हैं…”

“सलीम जी उफ्फ्फ्फ़ इतनी साड़ी तैयारी .. वैसे इतने जल्दी कैसे उनका सुहागरात वाला रूम तैयार हुआ हैं .. हमें hi कुछ 45 मं लगे …”

“ओह वहां और 4 महिलाऐं थी उन्होंने सब रेडी करि बस 15 मं में… अब आपने किये जैसे खूबसूरत तोह नहीं करि उन्होंने वह सुहागरात का कमरा.”

“उफ़ सलीम जी फिर उन्हें यही पर बुलाइये .. यहाँ तैयारी बहुत अच्छी करिहउँ”

अब सलीम और रौशनी एक दूसरे के बाँहों में hi बातें कर रहे थे .. रौशनी भी सलीम के बाँहों में से निकलने की कोषसिंह नहीं कर रही थी .. दोनों चिपके हुए hi बातें करने लगे थे .. सलीम का हाथ अब रौशनी की मुलायम गोरी सी कमर पर था .. वहां उसे मसलते हुए बातें कर रहा था …निचे उसका लोढ़ा भी उभरता हुआ रौशनी को चुभ रहा था…

“रौशनी अब रहने दो .. उनकी सुहागरात शुरू भी हुयी hi होगी ….”

“अब्ब्ब .. इस का क्या करे .. मेरी साड़ी म्हणत…”

“रौशनी जी वैसे एक काम कर सकते हैं..” सलीम ने रौशनी की कमर को जोरों से मस्तालते हुए कहा…

“उफ़ सलीम जी क्या हैं ममम आपकी निचे से मुझे चुभन महसूस हो रही हैं उफ्फ्फ्फ़ ममम”

“रौशनी जी इतनी मस्त सुहागरात की तयारी कर चुकी हो .. इसे ख़राब नहीं जाने देंगे .. चलिए यहाँ पर ……” सलीम रौशनी की अब पीठ मसलने लगा .. रौशनी के मुँह से अहह निकल hi गयी ….

“उफ़ सलीम जी आप का मतलब हैं की हम दोनों यहाँ सुहागरात मनाएंगे ..” रौशनी के मुँह से निकल hi जाता हैं.

“उफ़ रसोहनी जी मैंने तोह नहीं कहा लेकिन अगर आप hi यही चाहती हो तोह फिर …”

सलीम अब रौशनी के कुछ बोलने से पहले उसे चूमने लगा … ऊंखोथों के मिलते hi रौशनी सिहर उठी .. उसकी आँखें बंद हुयी और वह सलीम की चुम्बन में साथ देने लगी ..

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रौशनी की बदन की गर्मी काफी बढ़ चुकी थी … सुबह के सन का सोच रही थी … सलीम को चूमती रही … सलीम ने फर निचे से रौशनी की चूतड़ों को दबोचा … जिससे रौशनी की चुम्मी टूट गयी और उसके मुँह से हलकी सी सिसकी निकल गयी… अह्ह्ह्हह mmmmmmmmmm

“उफ़ सलीम जी मेरा मतलब नहीं था की .. उफ्फ्फ सलीम जी अआप छोड़िये मुझे ममम”

रौशनी के मुँह से छोड़िये बात तोह निकल रही थी लेकिन वह खुद को सलीम के बाँहों से चुराने की कोई भी कोशिश नहीं कर रह थी .. अभी hi सलीम से काफी चिपकी हुयी hi कड़ी थी उनकी बाँहों में.”

“रौशनी जी ….. देखिये न िस्तनी तैयारी करि हो आप … उफ्फ्फ आपके साथ सुहागरात मानाने में तोह … ममम” सलीम इतना कहते हुए फिर से रौशनी के गैलन को चूमने लगा …

ममम सलीम जी आप .. उफ्फ्फ मममम …”

सलीम ने रौशनी को पलटा दिया और उसके गोरी सी पीठ को चूमने लगे … ढेर सारे गीली चुम्मियाँ देने लगे .. रौशनी की मुँह से बस ममम उफ्फ्फ निकलती रही .. उसे मज़ा आ रहा था .. उसे सलीम के साथ रोमांटिक फील हो रहा था ..(उफ़ रौशनी इस बुड्ढे के साथ तुम्हे ऐसी फीलिंग उफ्फ्फ्फ़ ममम क्या हो रहा हैं तुम्हे .. उफ्फ्फ उनकी चूमियाँ पीठ पर अह्ह्ह उफ्फ्फ इतनी गीली चुम्मियाँ .. ममममम

रौशनी फील करि उसकी छूट से हल्का सा रास छूटने लगा था .. उफ्फ्फ मम सलीम जी के साथ यह सब उफ्फ्फ्फ़

पीछे से सलीम के लोडे की चुंबन से भी रौशनी की छूट पे असर पद रहा था … उसकी गर्मी बढ़ रही थी .. वह सलीम के लोडे की सोची उससे और गर्मी बढ़ी उसके शरीर में … उसकी बुर में .. “

“ओह सलीम जी प्लीज उफ्फ्फ ममम आपका.. नीची .. चुभ .. रहा .. हैं .. अह्ह्ह मममममम स्लिममममम jiiiiiiiiii”

सलीम बेतहाशा चूमते रहा रौशनी की पीठ.. अब उसके पूरी सी गोरी पीठ पर उसकी गीली पुप्पियों के निशाँ थे .. कही जगहों पर हलके से से लाल निशाँ थे … काफी मस्त लग रही थी रौशनी … इसे दख सलीम के लोडे ने निचे से एक जोर का झटका दिया .. जो रौशनी की चूतड़ों से टकराया .. और रौशनी के मुँह से काफी सिसकियाँ निकलने लगी…

“हे भगवान् सलीम जी छोड़िये हमें .. अहह उफ्फ्फ आपकी निचे से आपके वहां से उफ्फ्फ. ममम”

“रौशनी जी क्या निचे से .. कहाँ से .. उफ़ क्या हो रहा हैं आपको मम बताइये खुलकर उफ्फ्फ्फ़”

“ममम सलीम जी आप जानते हैं न आपका निचे क्या हैं उफ्फ्फ वही चुभन उफ्फ्फ मममम”

“हमें नहीं पता रौशनी जी क्या हैं … “ सलीम इस सब से काफी मज़े ले रहे थे

रौशनी की हालत बेहाल हुयी थी .. उसकी बुर से रास टपक रही थी .. पीछे से सलीम का लोढ़ा उसकी चूतड़ों पर डाब रहा था और वह सामने एक सुहागरात वाली बिस्तर देख रही थी .. जो उसने खुद सजाई थी .. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़…

"सलीम जी मममम छोड़िये मुझे … “ आखिर कर रौशनी को मौका मिला और वह सलीम के पकड़ से छूटने hi वाली थी … की उसे अपने पल्लू को सलीम ने पकडे हुए का एहसास होने लगा ..

रौशनी फिर पीछे मुद देखि तोह सलीम के हाथों में उसका पल्लू था … उसकी ब्लाउज पूरी एक्सपोज़ थी और उसकी चूचियों की बीच की गोरी सी दरार अब सलीम के सामने थी …

सलीम अब धीरे से पल्लू को खींचने लगा … रौशनी की साड़ी अब खुलती रही .. फिर सलीम ने जोर से उसके पल्लू को खींच लिया और अब रौशनी घूमती हुयी अपने साड़ी को अपने बदन से स्लाइड होती हुयी महसूस करने लगी …

“उफ्फ्फ सलीम जी आपने तोह मेरी साड़ी का वस्त्रहरण करि हैं उफ्फ्फ्फ़”

सलीम के नज़रों को अपनी गोरी बड़ी चूचियों के डरा के बीच पाकर रौशनी सिहर उठी और उसने अपने हाथों से अपने ब्लाउज को धक् लिया …

“रौशनी जी क्या शरमामा .. उफ़ मैंने तोह आपकी नागि चूचियों का भी दर्शन किया हैं ..”

बात तोह सच थी रौशनी सोचने लगी .. सलीम जी ने सुबह hi उसकी चूचियों को पूरी तरह से देख लिया था … फिर भी उसे काफी शर्म आ रही थी ..

“सलीम जी सुबह गलती हुयी थी .. उफ़ दोबारा नाहीइइइइइइइ”

“रौशनी जी कैसी गलती .. आपने खुद hi मस्ती का साथ दिया था .. अब कौनसी गलती उसमें..”

“उफ़ सलीम जी .. प्ल्ज़ यहाँ नहीं उफ्फ्फ मममम छोड़िये …”

“अरे कहाँ पकड़ा हुआ हैं तुम्हे रौशनी … तुम तोह आज़ाद हो …”

“उफ़ सलीम जी लेकिन बस ब्लाउज और पेटीकोट में hi कैसे उफ्फ्फ मेरी साड़ी दे दीजिये हमें..”

“रौशनी जी .. अब छोड़िये न .. आइये हमारे साथ … रात अभी बहुत बाकी हैं .. आइये मेरी बाँहों में …”

रौशनी की नज़र निचे सलीम के उभर पर चली गयी … वह देख सकती थी की सलीम जी का लोढ़ा काफी सख्त था .. उसे वह उनके पंत में हिलते हुए वह देख ा रही थी .. (उफ्फ्फ उनका लोढ़ा तोह पूरा तैयार हैं .. उफ्फ्फ उनका कला मोटा लोढ़ा .. मममम) सलीम अब रौशनी के तरह बढ़ने लगा हतः में साड़ी hi लिए … रौशनी अब सलीम को अपने पास आते देख रही थी .. लेकिन वही कड़ी रही .. उसकी नज़र सलीम के लोडे के उभर पर तिकी हुयी … उसकी बुर से हलके से रास टपकती हुयी…

रौशनी अब बस सलीम को उसे उनकी बाँहों मैंने लेने के इंतेज़्ज़र में कड़ी rahi…Lekin सलीम जी ने जो किया उसे देख वह सरप्राइज हुयी..

सलीम अब रौशनी को साड़ी देने लगा … उसके हाथों में उसकी साड़ी थमा कर सलीम ने रौशनी को जकड लिया और उसके होठों के पास जाते हुए धीमी आवाज़ में कहने लगा ..

“रौशनी जी…. में आपकी पूरी हाँ सुने बिना आपके साथ कुछ नहीं करूँगा … मुझे आप सच में काफी पसंद हो .. मुझे आप से इश्क़ करना हैं … में आपको बस हवस के लिए नहीं इस्तेमाल करना चाहता .. रौशनी जी आप एक हसीं हो जिससे निहारते हुए, इश्क़ लड़ते हुए hi पाना चाहिए …”

रौशनी यह बिना कुछ बोले बस सुनते जा रही थी … उसने एक्सपेक्ट नहीं किया था सलीम से यह सब …. वह सलीम जी की आँखों में आँखें दाल उन्हें देखने लगी …

सलीम बोले “रौशनी जी मुझे आप से इश्क़ हुआ हैं … मुझे बस आप hi चाहिए .. बस आप और सिर्फ आप.”

रौशनी की सांसें तेज़ होने लगी .. सलीम जी के काळा भद्दे होठों को देखती रही … क्या वह भी सलीम जी को चाहने लगी थी .. उसे यह सब क्या हो रहा हैं .. वह कैसे एक बुड्ढे को चाहने लगी हैं .. इस सब सोच में वह पड़ी थी … सलीम के होठों के बीच और उसके होठों के बीच बहुत काम hi फैसला रहा था.. सलीम ने अब अपने हाथों को रौशनी की कमर पर स्लाइड करते हुए उसकी मखमली कमर को हाथों में जकड लिया था .. वह दोनों फिर से एक दूसरे से चिपके हुए थे ..

सलीम बोले “रौशनी जी मुझे सच में आप से इस …..”

रौशनी ने अपनी उँगलियों को सलीम के होठों पर राखी… उसके गोरी सी उँगलियाँ अब सलीम के काळा भद्दे होठों पर थे..

“सलीम जी और कुछ न कहना … सलीम जी … अआप …….”

सलीम ने फिर रौशनी की उँगलियों को हटा कर अपने काळा होठों को रौशनी के गुलाबी होठों के करीब लेट हुए धीरे से उन्हें टच करने लगे … दोनों के होठं एक दूसरे से धीरे से दबते हुए चुम्बन में लग गए … अब दोनों के होठं एक दूसरे में समां गए … और दोनों चूमने लगे … सलीम की होठों ने रौशनी की होठों को और जुड़ा करते हुए अब अपनी जीभ से उसकी जीभ ढूंढते हुए .. फिर उसे मिलते हुए उसे गहरी चुम्मी देने लगे.

रौशनी अपने हाथों को सलीम के सर के पीछे रख उनकी होठों को और कसकर अपने होठों से दबाते हुए उन्हें चूमने लगी.. दोनों की असीसी चुम्मी चलती रही मनो दोनों प्रेमी हो… रौशनी भूल चुकी थी की वह कहाँ हैं .. किसके साथ हैं .. की हु मर्द उसके पति नहीं बल्कि एक बुड्ढे हैं. अब बस उसकी बाँहों में उनके अघोष में उन्हें चुम रही थी .. उसकी बुर से रास टपक रही थी … बहुत दिनों बाद उसे ऐसी गर्मी की एहसास हो चुकी थी …

वहां सलीम तोह खुश था रौशनी जैसी महिला उसके बाँहों में हैं, उसे बड़े नम्रता और प्यार से उसके होठों को चुम रही हैं.

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सलीम अब चूमते हुए रौशनी को बिस्तर की तरह गाइड करने लगे .. एक लम्बी सी गहरी सी चुम्बन के टूटने से रौशनी की गुलाबी होठं अब सलीम के काळा होठों की रास से भर चुके थे ..

सलीम अब बिस्तर पर बैठ गए .. रष्णि की कमर पकड़ते हुए उसकी कमर और नाभि चूमने लगे …

रौशनी पूरी मदहोश हो चुकी थी .. उसने अपनी साड़ी ज़मीन पर राखी … और सलीम के गीले पुप्पियों को अपनी कमर और नाभि पर पाकर घूम उठने लगी … अह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ ममम की सिसकियाँ निकलते हुए रौशनी मदहोश हो चुकी थी…

“सलीम जी अआप उफ्फ्फ्फ़ इतना .. मममम इतने … चुम्मियाँ देते हो उफ्फ्फ ममम …”

“रौशनी जी तुम ऋ कमर हैं hi ऐसी मुलायम .. उफ्फ्फ्फ़ चूमने का मन करता हैं .. ढेर साड़ी चूमियों को देने का मन करता है..”

रौशनी अपने हाथों को सलीम के सर पर फेरने लगी … अहह उफ़ की सिसकियाँ निकलती रही…

सलीम ने फिर से रौशनी की नाभि और कमर पर अपनी गीली चूमियों के निषान चोरड िये .. हलके से लाल निशाँ भी , क्यूंकि रौशनी इतनी दूध जैसी गोरी थी की हलके से भी निशाँ लाल रंग के हो जाते..

ऐसे कुछ 5 मं की पुप्पियों के बाद सलीम खड़े हुए … रौशनी के ब्लाउज की बटन निकलने लगे … पहले एक बटन फिर दूसरा … टस्सरे बटन को खोने में उन्हें दिक्कत हो रही थी .. इसे देख रौशनी है पड़ी ..

“उफ्फ्फ सलीम जी आप भी न .. उफ्फफ्फ्फ़”

"उफ़ रोशनीजी बड़ी दिक्कत होती हैं … उफ्फ्फ हु आजकल आते हैं न ज़िप वाले ब्लाउज … आप उन्हें hi पहनिए … आसानी होगी …आपकी ब्लाउज उतरने में..”

रौशनी अब सलीम के सख्त चौड़े से साइन पर अपनी नाज़ुक हथेली मारते हुए …

“उफ़ सलीम जी आप भी न … “

रौशनी को एहसास हुआ की उसकी अपनी ब्लाउज सलीम जी के हाथों उतर रही थी की वह शर्मा गयी और फिर झट से मुड़ी की सलीम के तरह उसकी पीठ चली गयी.

सलीम बटन खोलने लगे रहे और फिर आखरी बटन खोलकर अंदर उसकी ब्रा में कैद चूचियों को वह ऊपर से दबाने लगे … पीछे से रौशनी की नैक को चूमते रहे ..

“उफ्फ्फ्फ़ ,मममम सलीम जी mmmmmmmmmmm”

पीछे से सलीम का सख्त लोढ़ा रौशनी की चूतड़ों पर डाब रहा था और रौशनी की बुर से रास टपक टपक गिरने लगा था उसकी पंतय में. सलीम उसकी चूचियों को दबा रहा था .. पीछे से अपने लोडे को और कसकर रौशनी की पट्टी के ऊपर दबाने लगे थे .. रौशनी की मुँह से सिसकियाँ निकलती रही .. ममम उफ़ सलीम jiiiiiiiiii मममममममम”

सलीम ने रौशनी की ब्लाउज उतर दी …. और फिर से रौशनी को अपने तरह कर लिया और अब सीधे रौशनी की ब्रा के ऊपर उसकी चुकियों में अपने जीभ को चलने लगा ..

“उफ्फफ्फ्फ़ मम सलीम जी क्याकर रहे हो उफ्फ्फ ममम मफ़ वहां क्यों चाट रहे हो आह मममम”

सलीम पीछे से रौशनी की चूतड़ों को दबोचने लगे और ऊपर से अपनी जीभ से रौशनी की ब्रा के ऊपर से वहां लीक करने लगे. रौशनी के हाथ सलीम के शर्ट पर गए और वह उनके बटन खोले लगी . और फिर शर्ट उतर निचे गिरा दिया.. उनके चौड़े साइन को .. उनके बालों वाले साइन को देख रौशनी सिहर उठी … और उन्हें वहां चूमने लगी और फिर से होठों पर चुम्मे देती रही..…

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सलीम ने पानी पंत खोल कर उसे निचे गिरा दिया … फिर पैरों को निकलते हुए पंत को साइड में कर दिया. अब वह रौशनी की पेटीकोट निकलने अपने हाथों को रौशनी की पट्टी की स्ट्रिंग्स को लूसे करने लगे … लूसे करते hi रौशनी की पट्टी निचे फर्श पर गिर गयी.

रौशनी और सलीम दोनों चोम्मों में लगे हुए थे और रौशनी प्यार से सलीम जी के सख्त लोडे को मसल रही थी ...

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रौशनी अब बस अपनी ब्रा और पंतय में कड़ी थी और सलीम बस अपनी चड्डी में..

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उनके पीछे सुहागरात के लिए सजाया हुआ बिस्तर था .. दोनों की सुहागरात स्टाइल से रात में रासलीला शुरू होने वाली थी.
 
दोनों बस अब उस सुहागरात वाली सजाये कमरे में, उस बिस्तर के पास खड़े रहे .. रौशनी की आँखें अब सलीम की चड्डी की उभर से नहीं हैट रहे थे .. सलीम के मोठे लोढ़ा उसकी चड्डी में पूरी तरह से औकात में आ चुके हुए खड़ा था , रौशनी उस लोडे को देख उसकी दिल की धड़कने तेज़ होने लगी और उसकी छूट से रास निकलने लगा ..दूसरी और सलीम को अभी यकीन नहीं हो रहा था की रौशनी उसके सामने केवल एक थीं स्ट्राप वाली ब्रा – जिसमें से उसकी गोरी चूचियां मनो बहार hi निकल रही हो, उसकी छोटी से पंतय … उसके गोर से मलाईदार झांघें और टांगें … सब देख उसका लोढ़ा बुरी तरह से एपीआई चड्डी में झटकों पर झटका मार रहा था.

“रौशनी जी पसंद आया आपको … “?

“उफ़ क्या मममम सलीम जी ?.”

“अरे जानू मेरा चड्डी में मेरे औज़ार की बात कर रहा हूँ .. पसंद आया …”

रौशनी बस कुछ न बोली , शरमाते हुए मुद गयी. इसका मौका लेते हुए सलीम अब पीछे से जाकर रौशनी की नाज़ुक कमर पर हाथ दाल उसे अपने पास खींच लिया .. उफ्फ्फ ोीी की आवाज़ करते हुए अब रौशनी की पीठ सलीम से चिपक चुकी थी. निचे से सलीम का लोढ़ा उसकी चूतड़ों को छूटे हुए वहां झटका मारने लगा जो रौशनी अपनी सुडोल गांड पर महसूस करने लगी और उसकी छूट से और रास बहने लगा था…

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“उफ़ सलीम जी ममम प्ल्ज़ छोड़िये .. आप और में इस तरह उफ्फ्फ नहीं पलज़्ज़ज़.”

“उफ़ जानू अब तोह नाटक बंद करो न .. हमारे बदन एक दूसरे से चिपके हुए हैं … गर्मी का माहौल हैं और तुम हो की अभी भी .. उफ़ तुम औरतों का होता hi हैं .. न चाहते हुए भी बहुत कुछ चाहने लगती हो ..”

रौशनी मन में सोच रही थी (उफ़ सच भी हैं इनकी बात , उनके मोठे लोडे को कौन नहीं चाहेगा उफ्फ्फ लेकिन में शादी शुदा हूँ , अपने पति से कभी बेवफाई नहीं करि .. उफ़ लेकिन मेरी गर्मी कुछ और hi कह रही हैं उफ्फ्फ क्या करू ,…)

“सलीम जी उफ्फ्फ हु अब .. ममम प्ल्ज़ मुझे छोड़िये … “

“रौशनी तुम आसानी से नहीं मानोगी न .. “ और सलीम पपची उसकी गोरी पीठ पर एक चुम्मा देता हैं , अपनी चुंबन की गीली निशानी वहां चोरे देता हैं .. फिर रौशनी की गर्दन की साइड में चूमने लगता हैं … चूमते हुए अपनी ऊँगली अब वह रौशनी की गहरी नाभि में डाला वहां खेलने लगता हैं …

बहुत दिनों से ऐसी गर्म स्तिथि में रौशनी खुद को पायी थी .. रोनित से तोह प्यार किये कई हफ्ते हो चुके थे .. उसकी गर्मी , उसकी हवस अभी भी काफी थी .. बस अंदर छुपाई हुयी जो अब सलीम के साथ बहार आना चाहती थी .. लेकिन वह ऐसे आसानी से रोनित से नहीं बेवफाई करने वाली थी…

“उफ़ स्लैम जी मममम प्ल्ज़ प्ल्ज़ छोड़िये उफ्फ्फ नहीं और कुछ नहीं करे उफ्फ्फ मममम”

“ओह रौशनी तुम इतनी क्यों .. उफ्फ्फ्फ़.. तुम्हे पता हैं न जितनी दूर भागने की कोशिश करोगी ी , उतने hi करीब में आऊंगा .. तुम को में अपना बना hi लूंगा .. तुम कितनी भी नखरे करो..”

“ममम सलीम जी उफ्फ्फ आप मेरा पीछा चोर दीजिये न ..”

“उफ़ रौशनी अब तोह पचे से चिपका hi हुआ हूँ , अब क्यों भला छोर दूंगा तुम्हे .. उफ़ तुम भी चाहती हो मेरे से मस्तियाँ .. तुम भी अब नखरे बंद कर ोू.. उफ़ मेरे तरफ पलट कर देखो मेरी आँखों में , तुम्हारे लिए मेरा तड़पता हुआ प्यार देखोगी.. …

“मम नहीं में नहीं करुँगी ऐसे उफ्फ्फ सलीम जी..”

सलीम फिर से रोशनीकी पीठ पर चूमियाँ देता रहा .. अब इस बार उसकी कमर कास कर पकड़ते हुए … रौशनी की कमर कसकर पकड़ते हुए उसका लोढ़ा सिद्ध जाकर रौशनी की चूतड़ों के बेच पंतय के बीच फस गया .. अब रौशनी सलीम के लोडे को अपनी बुर के काफी करीब [aayi … Salim ke lode ko bhi Roshni ki chut se nikalti raspan se huyi geelapan mehsush huyi aur wah ek jor ka jhatka maara .. jo aur jakar Roshni ki chut ke paas ja takraya jisse Roshni ki muh se ek lambi ahhhhhhhh mmmmmm siski nikal hi gayi ..

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रौशनी एक तरह से सलीम के मोठे लोडे को चाहती थी , की उससे वह और प्यार करे .. लेकिन दूसरी और रोनित की सोच ने उसे रोक लिया था …

“अच्छा रौशनी जी ठीक हैं ..अब माहौल गरम हैं .. रात बाकी हैं .. आप चाहे तोह मेरी मालिश करिये … उफ्फ्फ आपके हाथों से मालिश करवाऊंगा तुह बढ़िया लगेगा .. फिर और कुछ न करो .. बस इतनी सी बता करो..”

“रौशनी सोची (अगर मालिश करू तोह स्लैम जी और कुछ नहीं मांगेंगे .. लेकिन क्या उन पर भरोसा …) बस यही बता रौशनी सोचती रही..

“उफ़ सलीम जी ठेके हैं लेकिन फिर भी आपने .. उफ्फ्फ्फ़ आप पर यकीन कैसे करू..”

“उफ्फ्फ रौशनी आप भी न .. अब मालिश से भी ऐतराज़ .. रौशनी जी आपने तोह काफी कुछ मेरे और मेरे लोडे के साथ किया तोह हैं.. आज सुबह hi तोह आपने मेरे लोडे को अपने म….”

रौशनी सुबह की बातें सुन शर्माती हुयी ”उफ्फ्फ सलीम जी हु गलती थी , उफ्फ्फ आपने मुझे बहकाया था …”

“लो करलो बात , हर बार में hi बहकता हूँ , लगता हैं आप कोई कुंवारी लड़की हो जो बहते जारही हो … मैंने ज़बरदस्ती तोह नहीं करि आपको .. और आप तोह होशियार स्मार्ट और लड़की नहीं औरत हो .. फिर भी आ पैसे कैसे कह सकती हैं हर बार … गलत हैं.”

रौशनी सोचती हैं (उफ्फ्फ बात तोह सही हैं में भी बहक जाती हूँ .. उफ्फ्फ इस सलीम जैसे बुड्ढे में हैं क्या की में बहक जाती हूँ .. उफ्फ्फ हैं मोटा लोढ़ा लेकिन उफ्फ्फ मेरे न पति हैं , न बर्फ .. फिर भी हमेशा उनके साथ रहते हुए बहक जाती हूँ .. उनके साथ मस्ती करती हूँ .. उफ्फ्फ)

“रौशनी जी इतना मत सोचिये बस मालिश कीजिये .. वैसे भी मेरा औज़ार तोह आपको पता hi हैं तैयार खड़ा हैं … और इस बात से सलीम फिर रौशनी की पीठ चूमता हैं और उसकी बाँहों को .. फिर गर्दन पर फिर से एक चुम्मी देती हैं.. रौशनी की मुँह से तोह फिर से एक लम्बी अह्ह्ह मममम सिसकी निकल टी है…

“उफ़ सलीम जी मालिश के लिए तेल कहाँ हैं …”

“रौशनी जी मेरे बैग में hi हैं … में कभी कभी बदन पर तेल माल्टा हूँ . इससे hi तोह देखिये मेरे बाजुएं और बदन इतने गठीले रहते हैं इस उम्र में भी…

रौशनी अब सलीम की तरफ फिर से मुद कड़ी थी .. (सच सलीम जी ने अपने बदन को इतना मरदाना और गठीला रखा हैं ..) रौशनी फिर से सलीम के बदन को निहारने लगती हैं ..

रोशनी मनो भूल चुकी थी की वह सलीम के सामने बस ब्रा और पंतय में हैं .. इसी तरह वह बैग की तरफ जाने लगती हैं.. पीछे से सलीम रौशनी की चूतड़ों को देख अपने लोडे को मसलता रहता हैं … उफ्फ्फ आअज तोह मालिश करवा करवा कर रौशनी की चुदाई करूँगा रात भर …

सलीम को पता था मालिश से कैसे लड़कियों को रिझाना होता हैं .. कई बार कर चूका था .. आज तोह रौशनी जैसी एक शादी शुदा माल से मालिश करवाएगा और उसकी भी करूँगा और फिर बहुत छोडूंगा …

रौशनी अब तेल लेकर आयी … सलीम जी के लोडे से बने उभर पर एक नज़र दाल बोली “सलीम जी उफ्फ्फ आप कहाँ लेटेंगे .. बिस्तर तोह ख़राब होगा …”

“क्यों रौशनी जी बिस्तर पर मालिश के बाद कुछ और इरादा हैं …” और सलीम हसने लगा

रौशनी मुस्कुराती हुयी शर्माती हुयी आगे कुछ नहीं बोली.

“अच्छा एक काम करता हूँ , में खड़ा hi रहता हूँ .. तुम बस निचे दो टॉवेल्स रखो और फिर मालिश करो .. जितना भी तेल गिरेगा वह उन टॉवेल्स पर गिरेगा और फिर उन्हें हम वाशिंग को दे सकेंगे.”

“हाँ यह ठीक रहेगा ..” और रौशनी उन टॉवेल्स को लका निचे बिछा देता हैं और फिर सलीम और हु उन पर खड़े हो जाते हैं.

अब रौशनी तेल को सलीम के पीठ पर लगाती हैं और मालिश करने लगती hain…Salim को बहुत अच्चल लग रहा था .. रौशनी के हाथों का मुलायम स्पर्श . उसका लोढ़ा तोह काफी सारा प्रेकम चोर रहा था चड्डी में.

फिर रौशनी सलीम के पैरों की मालिश करती हैं .. पैरों की मालिश के बाद बारी आती हैं ऊपर उन्हें झंघों की .. ोषनी अब तेल वहां लगा कर मलने लगती हैं पहले पीछे से .. फिर धीरे से अपनी हाथों को आगे लेट हुए सलीम के झंघों की मालिश करने लगती हैं… रौशनी झंघों की मालिश करते हुए ..हाथों को उअप्र की तरह ले जाती हैं ..

“उफ़ रौशनी जी ऐसे पीछे से मालिश नहीं जमेगी .. अआप्को आगे अकार hi वहां मालिश करना होगा …. और वैसे भी वहां आखरी बार करिये .. पहले ऊपर मेरे बदन पर मालिश करिये .. सलीम को ख़ास पता था की उसने ऐसे क्यों कहा था .. वह अपने बदन की मालिश , महिलाओं से करवाने में मांजा हुआ खिलाडी था..

रौशनी ने अब सलीम के छाती पर तेल दाल कर वहां मालिश करने लगी .. अब वहां मालिश करने उसे आगे आना पड़ा … सलीम की ानकेहिं तोह बस उसकी गोरी चुचुईयों पर थी जो मनो रौशनी की ब्रा की क़ैद से आज़ाद होने के लिए उतावले हो रहे थे .. इतनी गबड़ी और गोरी चूचियां देख सलीम का लोढ़ा बुरी तरह से फनफना रहा था .. ढेर सारा प्रेकम चोर रहा था.

रौशनी अब सलीम के साइन पर मालिश करती हुयी .. सलीम के चौड़े साइन को देख रही थी .. उसकी मन में छुरियां चल रही थी .. (उफ्फ्फ इनका सीना तोह इतना छुड़ा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ इतना मस्त हैं …)

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वहां पर तेल मालिश करते हुए रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी .. उसे इतने गठीले बदन वाले मर्द की मालिश करने में मज़्ज़ा आ रहा था … रोनित भी मालिश उससे करवा लेता था लेकिन क्यों उसे आज स्लिम जी की मालिष करते हुए hi गर्मी च रही थी … ऐसे उसे रोनित के साथ फीलिंग हुयी नहीं थी…

साइन पर तेल मलते हुए वह अब उनके बाज़ुओं पर तेल मालिश करने वहां तेल पुर करि .. फिर वहां मालिश करने लगी ..

उनकी बाज़ुओं को मालिश करते हुए सलीम उन्हें फ्लेक्स कर रहा है … उनके बाइसेप्स फ्लेक्स होते देख रौशनी की दिल की धड़कने और तेज़ होने लगी .. सलीम ने बाइसेप्स फ्लेक्स भी तब किया जब रौशनी का चेरा उसे बाज़ुओं के करीब था .. बाइसेप्स फ्लेक्स करने से उसे पता था की महिलाओं की गर्मी और बढ़ती हैं… रौशनी भी अपने आँखों के सामने उनके बाइसेप्स के फ्लेक्स को देख ममम की सिसकी मार ली … सलीम ने हु सिसकी सुन ली और फिर से जयादा फ्लेक्स करने लगा … रौशनी की छूट का काफी बुरा हाल था .. उसकी छूट काफिर अस चोर रही थी .. उफ्फ्फ अब टॉक तोह वह उनके लोडे को बी देख नहीं … (उफ्फ्फ्फ़ यह क्या सोच रही हो उफ्फ्फ उनके लोडे के बारे में उफ्फ्फ रौशनी तुम भी न .. उफ़ बस मालिश करले और ख़तम कर …)

पुरे बाज़ुओं पर मालिश के बाद ….. अब बाकी था सलीम के झंघों की मालिश …

“रौशनी जी अब आपको घुटनो के बल जाकर वहां मालिश करना होगा .. चलिए करिये .. बस उतना hi रह गया हैं”

रौशनी की नज़र सलीम के लोडे पर गयी जो उसकी चांदी में खटके मार रहा था और उसकी चड्डी आगे से गीली हो चुकी थी.. रौशनी की गर्मी पूरी बढ़ चुकी थी .. अब उसे भी मस्ती च रही थी .. फिर भी वह खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश करती रही.

घुटनो के बल जाकर वह फिर तेल से झंघों की मालिश करने लगी..

जैसे hi रौशनी के हाथों ने सलीम के जाँघों को छुआ, उनका लोढ़ा उत्तेजना में और झटका मारने लगा और भी अधिक धड़कने लगा.

रौशनी देख सकीय की सलीम का लोढ़ा पूरी आकार में पहले से भी बड़ा होता जा रहा था और वह सलीम की चड्डी उस वजह से और उठ रही थी. रौशनी भी गर्म हो रही थी और उसकी साँसें तेज़ हो गई थी. रौशनी ने अपने दोनों हाथ सलीम की दोनों जाँघों पर रख दिए और अपनी हथेलियों पर दबाव देते हुए अपने हाथों को अब उनके झांगों की ऊपरी हिस्से की तरफ ले जाने लगी.

अब रौशनी के हाथ सलीम के लोडे के करीब पहुँच रहे थे. रौशनी की नज़रें सलीम के पूरी तरह से खड़े हुए लोडे पर तिकी थी और सलीम की नज़रें रौशनी के bade-bade ब्रा से अद्धे बहार निकले हुए चूचियों पर तिकी थी. रौशनी अपने हाथों को सलीम की जाँघों पर upar-neeche घुमाती रही और थोड़ा सा दबाव दिया जिससे सलीम का खड़ा लोढ़ा और भी उछलने लगा ..सलीम का लोढ़ा इतना उछाल रहा था की लगभग रौशनी की नाक पर जा लगे.

सलीम ने एक ढीली चड्डी पहनी हुई थी, और उसका मोटा लोढ़ा पूरी तरह से सख्त था, इससे उनका चड्डी का कपडा काफी ऊपर उठ गया था और वह जाँघों पर अब मनो ढीला हो गया, जिससे सलीम के लोडे का किनारा अब रौशनी को उसके चड्डी के किनारों से दिखाई दे रहा था. यह सब होते हुए भी रौशनी अभी भी अपने घुटनों पर बैठी सलीम के झंघों की तेल मालिश कर रही थी.

रौशनी की फीलिंग्स बहुत ज्यादा कामुक हो रही थी.. उसकी छूट से सच में बहुत सारा रास निकल रहा था. वह अब वासना में डूब चुकी थी. रौशनी , सलीम के कठोर उभार को देखे जा रही थी और अब मन से उनके लोडे को अब पूरा देखना चाहती थी... फिर भी उसके मन से थोड़ी अनिश्चित थी..

माहौल बहुत गरम हो चूका था .. दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे , बस मालिश के मज़े ले रहे थे … रौशनी की गर्मी अब बेशक काफी बढ़ गयी थी …

रौशनी ने एक आह भरी और अपने एक अंगूठे को सलीम की जाँघों पर रख अब उसके चड्डी के तरफ और पास लेकर आयी की अब रौशनी का अंगूठा अब सलीम के चड्डी को छूने लगा hi था

रौशनी के हाथ सलीम की चड्डी को अब छू रहे थे, जिससे वह और अधिक कामातुर हो गई.. उसकी सांसें काफी तेज़ हो गई... और वह dheere-dheere अपने वासना पर नियंत्रण खो रही थी.

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सलीम ने भी कभी खुद को मालिश से इतना कामुक महसूस नहीं किया था.. मालिश के दौरान रौशनी की उंगलियानं उसकी चड्डी को छूने से hi सलीम की वासना इतनी बढ़ रही थी. सलीम वासना में इतना डूब गया था की सलीम के मुंह से हलकी सी अह्ह्ह निकल गई.

रौशनी भी वहां अपनी कामुकता की स्थिति पर खुद नियंत्रण में नहीं थी

... अब उसके दोनों अंगूठे सलीम की चड्डी के अंदर चले गए थे .. और. हालांकि रौशनी अभी भी सलीम जी के खड़े लोडे को छू नहीं रही थी, लेकिन वो उनके लोडे के इतने करीब थी..

अब दोनों सलीम और रौशनी मानो एक साथ halke-halke से अह्ह्ह भर रहे थे.

दोनों की नज़र एक दूसरे पर पड़ी … दोनों में अब हवस की आग बहुत सारी बढ़ रही थी …

रौशनी अब बड़ी बेशर्मी से सलीम जी के लोडे को देख रही थी. और सलीम बिना झीखक के रौशनी की चुहकियों को देख रहे थे.

रौशनी के लिए अब ऐसा दृश्य था की वह अब सलीम के ढीली चड्डी के किनारे से उनके आधे लोडे कको देख सकती थी.

रौशनी अब पूरी वासना में अपने अंगूठों को ऊपर की और ले जाती रही और आखिरकार उन्होंने सलीम जी की चड्डी के अंदर से सलीम जी के लोडे के निचली हिस्से को छू लिया था.

रौशनी की सांसें तेज़ होते जा रही थी .. सलीम के लोडे और उसके मुँह के बीच का अंतर बस एक चड्डी के पड़े से hi दूर था. रौशनी की गुलाबी होठं अब सलीम के चड्डी के करीब थे … सलीम का लोढ़ा झटकों पर झटका मार रहा था …

“उफ्फ्फ्फ़ रौशनी ममम क्या मालिश कर रही हो उफ्फ्फ.. मममम रौशनी अब बस मेरे लोडे की मालिश भी कर hi लो .. उफ्फ्फ तुम्हारे लिए कैसे झटका मार रहा हैं उफ्फ्फ देखिये मममम”

“उफ़ सलीम जी वहां पर कैसे मालिश करुँगी वहां पर तोह उफ्फ्फ… आप का हु बड़ा सा उफ्फ्फ्फ़.”

“हाँ तोह क्या हुआ .. मेरे बदन का hi हिस्सा हैं न .. रौशनी जी आप बोलिथि मालिश तोह पूरा करोगी .. और अब आप मुकर रही हो अपनी बातों से”

“उफ़ सलीम जी .. आपका हु तोह इतना मोटा .. उसकी मालिश उफ्फ्फ “

(उफ़ कहाँ फस गौयी .. उफ़ मालिश को हाँ बोली लेकिन कम्बक्त भूल hi गयी उनका हु लोढ़ा ..उफ्फ्फ अब तोह इतने पास हैं.. मन कर रहा हैं उसे देखने का .. मममम थोड़ी मालिश करुँगी कुछ हर्ज़ तोह नहीं उफ्फ्फ ममम मोटा लोढ़ा उनका इतना मस्त हैं उफ्फ्फ्फ़)

“ठीक हैं बस मालिश एक बारे और नहीं ममम”

“हाँ एक बार तोह करिये”

सलीम फिर अपनी चड्डी निचे करने लगा … धीर से मनो रौशनी को तैसे कर रहा हो … रौशनी भी बस उसके लोडे को देखने के लिए तरसे जार यही थी.. उसके लोडे को धीर धीरे देखते हुए उसकी सांसें तेज़ होती गयी … सलीम माँ अब पूरा सख्त लोडे को देख रौशनी की होठों से एक फुसफुसाहट और कामुक अह्ह्ह्ह निकल गयी….

“ममम मालिश करो वहां डार्लिंग ममम”

रौशनी पूरी कामुकता से सलीम को देख मुस्कुरायी .. अपने निचली होठों को कान्त कर बिना सोचे अपने होठों पर अपनी जीभ फेरने लगी .. इतना मोटा लोढ़ा फिर से उसके सामने उफ्फ्फ….

अब रौशनी ने सलीम के लोडे पर तेल पुर करि … फिर अपने हाथों से वहां उसके लोडे को हिलने लगी .. तेल पूरी तरह से मलने लगी .. पहले तोह सलीम के लोडे की टमाटर जैसे बड़े और लाल सर को … प्यार से वहां उनलगियों को मलते हुए … ऊपर सलीम के आँखें बंद वह अह्ह्ह करते रहे..

रौशनी अब प्यार से वहां उसके लोडे को अपने तेल से भरे हाथों से मालिश करने लगी .. धीर से .. बड़े प्यार से… रौशनी की हवस पूरी बढ़ चुकी थी .. वह अब सलीम के लोडे को तोह अपने पति के लोडे जैसे hi प्यार करने लगी .. वहां मलने लगी … हर जगह .. ऊपर से निचे तक पूरी तेल से मालिश के बाद सलीम का मोटा लोढ़ा चमक रहा था .. उछाल रहा था ..

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रौशनी यह देख पायी की सलीम के मोठे लड़ाए से सफ़ेद प्रेकम भी निकलते जा रहा था … प्रेकम होकर भी इतना सफ़ेद और थिक . उफ्फ्फ मममममम

सलीम को इस सब से रहा नहीं जार अहा था .. उसने निचे झुक कर रौशनी की ब्रा की हॉक्स ओपन कर hi लिए .. रौशनी भी उन्हें रोक नहीं रही थी .. उसकी हवस बढ़ती हुयी बस सलीम के मोठे लोडे पर नज़रें तिकी हुयी ///

सलीम ने रौशनी की ब्रा खोल उसे साइड में पहक दिया .. रौशनी ऊपर से उसके लोडे की मालिश करती और सलीम अपने हाथों से रौशनी की नग्न चूचियों को मसल रहा था …

सलीम का लोढ़ा अब रौशनी के हटोहों के करीब था .. रौशनी हवस की आग में जलती हुयी अपने होठों को सलीम के लोडे के पास लगाई .. उसकी तेल से चमकते लोडे के सर को वह अपने होठों से चूमने लगी .. निचे सलीम उसकी चूचियों के सतह खेल रहा था ..

रौशनी फिर सलीम के लोडे को चूमने लगी … सलीम की गर्मी इतनी बढ़ गयी की उसने अपने लोडे को आगे धकेला और रौशनी के होठों से बीच साइड से उसके मुँह में उसका लोढ़ा चला गया ..

सलीम का लोढ़ा अब रौशनी की मोह में चला गया था .. रौशनी इससे सरप्राइज हो गयी थी.. लेकिन उसकी हवस इतनी बढ़ चुकी थी की वह सलीम के लोडे को चूसने hi लग गयी….

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सलीम मानो सातवें आसमान में .. उसका लोढ़ा रौशनी की मुँह में और रौशनी की चकहियाँ उसके हाथों में उसे मसलते हुए .., उफ्फ्फ आज तोह उसके सारे इच्छाएं वह रौशनी के साथ पूर्ण करने वाला था…

रौशनी पर हवस ने काबू प् लिया था .. वह सलीम के लोडे को पूरी मस्ती से चूसने लगी … सलीम का लोढ़ा आगे पीछे , आगे पीछे करता हुस रौशनी की मुँह में चले जा रहा था …

रौशनी अब सलीम के झागों को पकड़ते हुए उसके लोडे को चूसने लगी …

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ऐसी से चूसै के बाद.. सलीम ने रौशनी को ऊपर कर उसे अपने बाँहों में उठा लिया … रौशनी भी बिना शिकायत किये सलीम के बाँहों में उसके गले में अपने हाथों को दाल उन्हें पकड़ लिया..

सलीम ऐसे hi रौशनी की अपने बाँहों में उठाये उसे चूमने लगा .. रौशनी भी पूरी साथ देने लगी .. बेतहाशा अब दोनों एक दूसरे को चूमने लगे..

सलीम ने अब रौशनी को बिस्तर पर लिटा दिया ..

आज सलीम पहली बार .. रौशनी की छूट भी चाटने वाला था सलीम .. आज रौशनी की रसीली बुर से निकलते रास को सलीम चाट चाट कर साफ़ करने वाला था…
 
रौशनी बिस्तर पर लेती सलीम के मर्दाने बदन को देख रही थी … बुड्ढे होकर भी काफी भरी भरकम और बहुत नजबुत था उनका बदन … पता नहीं क्यों लेकिन उन्हें देख रौशनी में बहुत गर्मी बढ़ रही थी .. अब तोह वह बस अपनी ोांत्य में hi थी. वही पंतय जो एक hi वस्त्र था जो उसके बुर को सलीम की नज़रों से छिपाये हुए था.

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सलीम भी वहां बहुत खुश था .. उसने सपनों में नहीं सोचा था की रौशनी बस उसके सामने एक सुहागरात जैसे सजाये बिस्तर पर बस अपनी पंतय मेजन hi होगी … उसका लोढ़ा इस दृश्य को देख झटकों पर झटके मार रहा था … बहुत सारा प्रेकम उसके लुंड से निकल रहा था … उसका अब एक मकसत था और ेओह था रौशनी की ोांत्य निकल कर उसकी पाकी हुयी छूट के दर्शन करना … उसकी रसीली बुर हु बहुत दिनों से , हफ़्तों से चुना चाहता था , उसे लीक करना चाहता था, रौशनी की बुर का रास पीना चाहता था ..

अब वह होने हाथों से रौशनी की ोांत्य निकलने लगे … धीरे से … उसकी झंघों पर चुम्मियाँ देते हुए .. एक चुम्मी फिर दूसरी , फिर तीसरी.. साड़ी गई चुम्मियाँ थी … धीरे से वह उसकी ोांत्य उसके कोमल पैरों से निकलते हुए अब उसकी पंतय निचे हम्जमीन पर फ़ेंक दी.. ओह उफ्फ्फ ऐसी पाकी हियी फुकी हुयी छूट थी रौशनी की ..

रौशनी को भी अब अपने नग्न पैन का एहसास हुआ और शर्मिंदगी से वह अपनी छूट पर अपने हाथों से उसे ढकने लगी ..

“उफ्फ्फ नहीं सलीम जी प्ल्ज़ …. मेरी ोांत्य दीजिये मुझे .. पलज़्ज़ज़ सलीम जी ..”

“अरे रौशनी जी … अब क्या प्ल्ज़ .. सब कुछ तोह देख hi लिया हैं मैंने … अब बस उससे ोयार करने का मौका दीजिये ..”

“सलीम जी नहीं प्ल्ज़ मैं शादी शुदा हूँ .. मेरे पति को धोका नहीं दे सकती ..”

“अरे धिका कैसा … बस वहां मालिश तोह करूँगा … इसमें क्या चिंता …”

रौशनी चाहती थिन्की अब सलीम उसकी छूट की मालिश करे .. उसे चूमे, छाते .. लेकिन बहुत शर्मा रही थी और घबरा रही थी .. सलीम का फनफनाता हुआ लुंड उसके नज़रों के सामने था. उफ्फ्फ उसके लुंड से इतना सारा प्रेकम उगल रहा था … इतना सारा की वह अब उसकी छूट के ठीक निचे बिस्तर पर hi टपक रहा था … ओह गॉड यह उसे आज क्या हुआ हैं … सलीम का मोटा लोढ़ा देख उसकी गर्मी इतनी क्यों बढ़ रही हैं .. उफ्फ्फ्फ़ यह सब मेरे पति का दोष हैं … न वह मुझसे सेक्स नहीं करते , न मेरी गर्मी ऐसे hi भड़कती रहती … उफ्फ्फ्फ़ सलीम का लोढ़ा .. उनका मोटा , सख्त, फौलादी लोढ़ा … क्या उसे सलीम के लोडे से hi ोयार हैं … वही लोढ़ा क्या उसकी हफ़्तों की गर्मी शांत करने वाला था …

रौशनी अब अपनी आँखें बंद करि लेती रही … सलीम ने इसका अच्छा मौका देख अपने हाथों से रौशनी की झंघों को रगड़ने लगा .. मसलने लगा .. रौशनी अब आँखें बंद कर हलके से उफ्फ्फ अहह की आवाज़ें निकल ताहि थी .. उसकी लस्ट भरी आवाज़ें सुन सलीम का लोढ़ा अब और जोरों से झटके मारने लगा था ..

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फिर सलीम ने तेल की बोतल ली और तेल रौशनी की झंघों पर पौर करने लगा.. उसकी झागों और ापीरों पर तेल डालते हुए वह रौशनी की मस्सगे करने लगा अपनी बड़ी रफ़ हाथों से … रौशनी को बहुत अच्छा लग रहा था … सलीम धीरे से मालिश करते हुए अब उसकी झंघों तक पहुँच गया .. अब वह रौशनी की झंघों के अंदरूनी हिस्से पर तेल मालिश ाकरने लगा .. जान बुझ कर वह रौशनी की बुर तक अपने हाथों को नहीं ले जा रहा था .. बस बुर की ट्रायंगल के बस ठीक निचे हिज मालिश लरते रहा .. इससे रौशनी की आ गौर बढ़ गयी .. वह और चटपटा रही थी.. सलीम तोह ऐसे महिलाओं को मालिश दिलाने में माहिर था .. इसी प्रकार तोह हु मीनल को सडके करा था .. आज तोह वह रौशनी जैसी शादी शुदा गरम माल की मालिश कर उसकी चुदाई के सपने देख रहा था ..

रौशनी वहां अपनी आँखें बंद करे हुए मस्ती से चटपटा रही थी .. (उफ़ ओह गॉड क्या मस्त मालिश करते हैं सलीम जी … उफ़ उनके हु बड़े हाथ … ओह गॉड वह मेरी छूट के इतने कर्रेब हैं उफ्फ्फ ममम वहां छूटे क्यों नहीं मममम उफ्फफ्फ्फ़ एस्सस )

सलीम अब अपनी उँगलियों से रौशनी की बुर की पास hi मलने लगा … इसके एहसास ने रौशनी की छूट से तोह रास निकल hi दोय था .. अब सलीम महसूस कर सका की रौशनी की बुर से पानी निकल रहा हैं .. इससे खुश वह उसकी छूट ले पास और मलने लगा..

“ममममम उफ्फ्फ सलीम hi उफ़ मममम कितना मस्त मालिश करते हो आप उफ्फ्फ्फ़… ममम सलीम जी …”

सलीम बस मालिश करतेबहुये अब ौंज उँगलियों को रौशनी की बुर की ुर करीब लाया की अब थोड़े हलके से वह रौशनी की छूट की लिप्स पर चलने लगा … रौशनी बस ममम उफ्फ्फ अहह से चटपटा रही थी .. सलीम के रफ़ उँगलियों को अपनी चिकनी बुर पर पाके … रौशनी की आह hi निकल गयी …

“ओह उफ़ सलीम जी मम हाँ एस उफ़ ऐसे hi मालिश करिये अहह एस ममम”

सलीम अब और दबाव दाल रौशनी की छूट मलने लगा … एक अंगूठा अब रौशनी की छूट के डेन पर वह हलके से ऊपर और निचे करने लगा … रौशनी बस मम अहह चटपटा रही थी बिस्तर पर .. ऐसी मालिश तोह किसनी ने नहीं करि थी .. और अभी तोह मालिश की बस शुरुवात hi थी..

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सलीम ने अब अपने ान्दुथे को और जोरों से रौशनी की छूट के दाने पर दबाने लगा .. तेल के साथ रौशनी क िरस की मेल हुयी थी और वह अब सलीम के उँगलियों पर थी … सलीम का लोढ़ा बुरी तरह से फनफना रहा था .. रौशनी की रोटी हुयी छूट को देख उसका लोढ़ा भी रोने लगा था .. ढेर सारा प्रेकम चोर रहा था उसका लोढ़ा .. इस प्रेकम से अब बिस्तर थोड़ी भीग भी चुकी तहज ..

अब सलीम को समझ आया की लोहा गरम हैं ज़… उसने फॉर अपनी जीभ से रौशनी की बूत के डेन को हलके से चाटने लगा ..

सलीम के होठों और जीभ की स्पर्श अपनी छूट के दाने पर पाकर रौशनी अह्ह्ह मममम सिसकी मारी ..

अब सलीम रौशनी की बुर हलके से चाटने लगा .. बस उसके छूट के दाने को और कही नहीं .. उसकी उँगलियाँ अब रौशनी की छूट के लिप्स को थोड़ा सा फैला रही थी और उसकी जीभ बस रौशनी की छूट के दाने पर वह रगड़ने लगा .. फॉर थोड़ी तेज़ी पकड़ कर एक hi ले पायी और रौशनी की बुर वह अब पूरी मस्ती में चाट रहा था .. रौशनी ने अपने हाथों को सलीम के सर पर रख उसके सर को अपनी बुर पर दबाने लगी .. अपनी छूट को ऊपरी और झटकते हुए वह सलीम के मुँह से अपनी छूट चटवा रही थी ..

“अहह उफ्फ्फ मम सलीम जी आप इतने उफ्फ्फ ममममस्तट्ठत चाट रहे हो मेरी बुर अह्ह्ह मममसलिम जीईई”

अब रौशनी अपने छूट को ऊपरी और धकेलते हुए मनो अपनी छूट को सलीम के मुँह पर मार hi रही थी … अहह ऐसी चटाई उसकी कभी नहीं हुयी थी न hi रोनित ने की थी .. अहह उफ्फ्फ क्या मस्त हैं सलीम जी का चटाई ओह गॉड मम उफ्फ्फ में कभी भी जहर सकुंगी उफ्फ्फ ममम ऐसे सोचती रही रौशनी …

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सलीम अब अपनी जीभ से रौशनी की छूट के अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा … कभी छूट के दाने क ोटोः कभी छूट के अस्स पास … इस सभ से अब रौशनी को रहा नहीं जा रहा था .. उसके कुछ सख्त और मोटा चाहिए तकमः अपनी बुर के बीच में .. उसकी गर्मी और आग इतनी बढ़ चुकी थी की वह अब सलीम के लोडे को लेकर अपने पति पर चीट भी करने रेडी थी ..

उफ्फ्फ सलीम जी मम अब कुछ सख्त डालिये उफ्फ्फ मेरी छूट में अहह ममम मेरी गर्मी , मेरी आग आप बढ़ा रहे हो डिअर ममम पलज़्ज़ज़ कुछ लारो इसका ममम अब में आपकी हूँ मममम मेरी छुडाईइइइ……”

सलीम केट ओह मन में लड्डू hi फुट गए .. उफ्फ्फ अब वह कर सकता था जिसके बारे में वह सपने देख चुके थे .. जिस पर वह कई बार मस्टुर्बते कर भी चुके थे उफ़ मममम… उसका लोढ़ा तोह तैयार hi था रौशनी की बुर में जाने के लिए …

अब सलीम मालिश और चटाई चोर कर अपने मोठे लोडे पर तेल दाल उसे भी चिकना बना दिया .. अब आखिर में उसका मोटा लोढ़ा रौशनी की पाकी हुयी फूली हुयी बुर में जाने hi वाला था …

उसने अपने तेल से साणे लोडे को रौशनी की बुर के ऊपर रख उसकी छूट के दाने पर इसे हलके से पीटने लगा और फिर रगड़ने लगा .. रौशनी अब आँखें बंद सर एक तरफ किये hi लेती थी.. उसकी हवस की आ गौर गर्नी में कैद उसे अब किसी का ध्यान नहीं था .. की वह कहा हैं , किसके साथ हैं .. उसे बस एक सख्त लोडे की ज़रूरत थी … और अब सलीम ने जो उसकी इतनी अच्छी मालिश किट hi .. उसकी के लोडे की बारी थी …

सलीम अपने लोडे को रौशनी की बुर पर हलके से मारने लगा..

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उसके लोडे का सर अब रौशनी की छूट में जाने hi वाला था की दरवाज़े पर एक दस्तक उसे सुनाई दी …
 
“कौन हैं अंदर …. कौन हैं …”

रौशनी अपनी आँखें खोल लेती हैं … वह सलीम को दलहन लगती हैं उसकी आँखों में अभी भी कामुकता झलकते हुए .. वह आँखों से इशारा करती हैं सलीम को की वह कुछ करे …लेकिन खुद को बिस्तर से न उठती हैं न अपने बदन को ढकती हैं .. इसे देख सलीम खुश हो जाता हैं की रौशनी अभी भी हवस में hi डूबी हुयी हैं ..

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फिर वह दरवाज़े के पास जाता हैं ..”अरे में सलीम हूँ .. रौशनी जी की तबियत थोड़ी ख़राब हैं वह सोई हैं .. में बस उनके साथ हूँ .. चिंता की बात नहीं .. वह अब सो जाएगी और आप सुबह hi आना अब ..”

इस बात को सुन हु शख्स दरवाज़े के वहां से चला जाट अहइँ .. अब सलीम को पूरी रात मिलने वाली थी रौशनी के साथ मस्ती भरे पल बिताने के लिए .

वह फिर रौशनी के करीब मुस्कुराते हुए आता हैं … उसके सामने रौशनी पूरी नंग्न बीएड पर लेती थी .. उसके बदन पर तेल से सहमति हुयी सी … आज तोह वह पूरी रात रौशनी के साथ मस्ती करने वाला था ..

सलीम फिर रौशनी के पास आया तोह रौशनी बोली

“सलीम जी … आपका तेल मालिश हुआ .. अब में उठ जाती हूँ …

“अरे नहीं अभी तोह बाई हैं सलीम ने झूट का कहा .. चलिए अब आपकी अच्छी से मालिश जारी रखूँगा ..”

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और सलीम रौशनी के ऊपर चढ़ जाता हैं … अपने लोडे पर तेल लगता हैं …

“सलीम जी यह कैसी मालिश हैं उफ्फ्फ … “

“रौशनी जी यह ख़ास मालिश हैं … इससे आपके बदन में रोम रोम खिल उठेगा .. आपके चूचियों के लिए मस्त मस्सगे हैं यह …”

“सलीम जी लेकिन आपका लुंड मेरे चूचियों अपर .. ऐसी कौनसी मालिश हैं उफ़ ..

“अरे रौशनी जी आप चिंता न करिये मस्त मालिश होगी ..

रौशनी अभी भी हवस के जाल में फांसी हुयी यही ..

फिर सलीम अपने नग्न फड़फड़ाते तेल से लथपथ लोडे को रौशनी के चिचयों के बेच रख उन्हें ऊपर निचे करने लगता हैं .. .. उसकी चूचियों को पकड़ते हुए उन्हें अपने लोडे के चारों और दाल अब उसकी चूचियों की चुदाई करने लगता हैं .. दोनों के तेल से लथपथ .. रौशनी की चूचियां और सलीम का लोडे .. दोनों अब एक दूसरे से घिस रहे थे .. रौशनी इस एहसास से निचे लेती चटपटा रही थी .. ऊपर से सलीम मस्ती में अपने लोडे को रगड़ता हैं रौशनी की चूचियों पर ..

“ममम उफ़ सलीम जी मम मस्त मालिश है ऐसी पहली बार करि हूँ उफ़ मम और करिये …”

सलीम यह बातें सुन बड़े मस्ती से और अपने लोडे को चूचियों के बीच से रगड़ता हैं ..

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“रौशनी जी अब आप अपनी चूचियों को पकड़ लीजिये और मालिश करवाइये .. इससे आपको और मज़्ज़ा मिलेगा ..

रौशनी हवस में डूबी हुई सलीम की हर बात मानने को तैयार थी .. और वह बुइ अपने चूचियों को पकड़ते हुए सलीम के मोठे काळा लोडे के इर्द गिर्द रगड़ने लगी …. सलीम की अब तेज़ी बढ़ गयी और वह साटदत अब रौशनी की चूचियों के बीच अपने लोडे को रगड़ने लगा … और जरवटेल डालकर और रगड़ने लगा … सलीम ने बस सपनो में सोचा था यह ऐसे रौशनी जी की कुछ की कुड़सी करेगा .. मस्ती से वह और रगड़ते हुए रौशनी और मममम उफ्फ्फ करती हुयी चटपटी हुयी दोनों की ऐसी मालिश जारी रही … कुछ और 10 मीन्स ऐसे करने के बाद सलीम अब रौशनी के ऊपर से उतर गया ..

“रौशनी अब पलट लीजिये .. पीछे से आपकी चूतड़ों की मालिश ऐसे hi करूँगा …”

रौशनी की अंदर बहुत गर्मी बढ़ रही थी … वह अब पलट कर लेती रही .. बहुत दिनों बाद किसी मर्द के ऐसे सेक्सुअल स्पर्श से उसकी गर्मी और उत्तेजित हो रही थी .. वह अब सलीम के मालिश का पूरा आनंद लेने लगी थी .. उसकी जितनी भी झिझक थी वह सब धीरे धीरे ख़त्म हो रही थी .

रौशनी अब पलट कर लेट गयी. उसकी चूतड़ अब सलीम के आँखों के सामने थी जैसे देख उसका लोढ़ा एक जोर का झटका मारने लगा .. वह फिर से रौशनी के ऊपर चढ़ अब अपने लोडे को उसकी चूतड़ों पर पटक दिया ..

“उफ़ सलीम जी यह क्या आकर रहे हो … अब यह कौनसी मालिश ..”

“रौशनी जी बस आपकी चूतड़ों की मालिश hi तोह कर रहा हूँ …”

बस और क्या सलीम अब होने लोडे को रोशनीकी चूतड़ों के बीच रख रगड़ने लगतभाईन जिससे रौशनी की छूट से ढेर सारा रास बहने लगता हैं और वह सिसकियाँ मारती रहती हैं .. अहह उफ्फ्फ मम सलीम आपका मोटा लुंड मेरी वहां उफ्फ्फ ममम हाँ क्या मालिश हैं सलीम .. मममम”

सलीम बस रौशनी को निचे दबोचते रख अपने लोडे को रौशनी की तेल से सनी चूतड़ों के बीच रगड़ता हैं .. उसके लुंड से भी पानी निकलने लगता है और निचे से रौशनी की छूट से भी रास टपकने लगता है. ..

अभी कहा गरम हैं सलीम .. मन में सलीम ऐसे कहते हए अब अपने मोठे लोडे को रौशनी की मुँह के पास ले जाता हैं .. रौशनी सलीम के लोडे को अपने करीब देखती हैं .. उसकी हवस अब बहुत hi बढ़ चुकी थी .. वह चाहती थी की सलीम के लोडे से वह पूरी मस्ती करे .. वह अपनी हफ़्तों की प्यास उसके तगड़े लुंड से बुझाने के लिए अब तैयार थी .. वह भूल जाना चाहती थी की वह शासी शुदा हैं .. बस अब सलीम के लुंड से चुदाई hi चाहिए उसे …

सलीम ने अपने मोठे लैंड को रौशनी के हांथो मैं दे दिया और रौशनी अब सलीम के मोठे लुंड .. अपने हांथों मैं आते hi रौशनी की छूट फड़कने लगी और वह रौशनी के ऊपर अपने शरीर का भर देकर उसके मोठे लुंड और उसकी badi-badi गोटियों को अपने दोनों हांथो मैं bhar-bhar कर दबाने लगी तब सलीम ने रौशनी की दोनों मोती झंघों को खूब फैला कर जब रौशनी की मस्त पहली हुई छूट को देखा तो पागलो की तरह वह रौशनी की छूट को चाटने लगा, रौशनी मस्ती से भरी हुई आह आह करती हुई सलीम के सामने अपनी झंघों को और फैला कर अपनी छूट utha-utha कर अब सलीम के मुँह से रगड़ने लगी.

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सलीम ने अपने दोनों हांथो से अपनी माँ की छूट की लिप्स को फैला कर उसके गुलाबी छेड़ को खूब चूसने लगे और एक हाथ से रौशनी के दूध को भी मसलने लगा,

लगभग 15 मिनट तक सलीम , रौशनी की छूट को छत्ता रहा उसके बाद सलीम ने रौशनी को उठाकर उसे

घोड़ी की तरह झुका दिया और उसकी मोती गांड पर अपने जीभ को सेट कर फिर छूट तक अपनी जीभ निकल कर चाटने लगे .

रौशनी मो यह बात रही नहीं गयी और उसने एक डैम से सलीम के मोठे लुंड को अपने मुँह मैं भर कर पागलो की तरह चूसने लगी, रौशनी खूब kas-kas के सलीम का लुंड चूस रही थी और सलीम अपने हांथो से रौशनी की छूट को सेहला रहा था. फिर सलीम ने रौशनी की छूट मैं दो तीन उंगलिया दाल कर आगे पीछे कर्णशूरू कर दिया और रौशनी , सलीम के लुंड को दोनों हांथो से खूब daboch-daboch कर चाट रही थी,

रौशनी अब -हफ्ते हुए

“सलीम कितना मस्त लुंड है आपका .. ममम मैं मालिश की शुरुवात से आपके इस मोठे लुंड को चूसने के लिए तड़प रही थी आज मैं इसे रत भर चूसूंगी

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सलीम अब रौशनी के रसीले होंठो को चूस कर

“रौशनी जी मैं भी तो तेरी इस रसीली छूट का रास पिने के लिए कब से तड़प रहा हु आज तू मेरा लुंड चूस और मैं तेरी पहली हुई छूट का रास चुस्त हु.”

फिर सलीम ने लेट कर रौशनी को उल्टा अपने ऊपर चढ़ा लिया और रौशनी ी मोती गदराई गांड को अपने मुँह की और खिंच कर उसके गुलाबी रास से भरी छूट को अपने मुँह से पिने लगा. उधर रौशनी , सलीम के ऊपर चढ़ी हुयी उसका मोटा लोढ़ा पिने लगी. अब दोनों पागलो की तरह एक दूसरे के छूट और लुंड को चूसने लगे और दोनों ने एक दूसरे के छूट और लुंड को चूस -चूस कर लाल कर दिया.

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अब सलीम और रौशनी की चुदाई की बारी थी .. सलीम, रौशनी की दोनों जांघो को ऊपर उठा कर मोड़ देता है और फिर उसकी उठी हुई छूट मैं अपने लोडे को रखता हैं..

आज उसकी मुराद पूरी होने वाली थी .. सलीम आज आख़िरकार रौशनी की गुलाबी पहली हुयी जवान छूट की चुदाई करने जा रहा था …

वहां रौशनी भी आज स्कीम के लोडे को होने छूट में लेने के लिए तैयार थी … ाः वह एक असली मोरे लोडे को अपनी छूट में लेने वाली थी …

सलीम ने अपने लोडे को उसकी छूट पर रख अब धीरे से आगे धकेलने लगा…

उफ्फ्फ ममम सलीम जी धीरे से आपका लोढ़ा … मम आईटी ा मोटा .. उफ्फ्फ धीरे से अहह मममम”

सलीम के लोडे का बस सर hi रौशनी की छूट के होठों को फैला रहा था … सलीम का लोढ़ा पूरा औकात में जहटके मारते हुए रौशनी की छूट में घुस रहा था …

“ये ले रौशनी उफ्फ्फ मंमकब से तेरी छूट की चुदाई करना चाहता था .. ममम क्या गुलाबी छूट हैं उफ्फ्फ मममम ले मेरा लोढ़ा तेरी छूट में .. अह्ह्ह”

“ उफ़ रौशनी जी तेरे जैसे मस्त शादीशुदा माल की आज तक मई नहीं चुदाई की हैं पर आज तुझे जी भरके छोडूंगा. चल अपने प्रेमी का लुंड पकड़ कर अपनी छूट पे रख ताकि मई उसको तेरी छूट मई घुसके तुझे छोड़ सकू. "

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रौशनी भी पूरी कामुकता से सलीम का एक हाथ अपने मम्मो पे रखते हुए और सलीम का लुंड पकड़के अपने छूट पे रखते बोली,

"यह ले सलीम , तेरा लुंड मेरी छूट पे रखा है, अब तू लुंड घुसा और अपनी इस प्रेमिका को छोड़ छोड़ के पागल बना..

सलीम अब रौशनी से ऐसी बात सुनके, रौशनी के दुद्धियाँ मसलते उसके लुंड को जोरसे छूट मई दबाता है.

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रौशनी निचे चटपटा रही थी … सलीम के लोडे ने उसकी छूट अभी से hi फुल कर दी थी … और अब तोह और उनका लोढ़ा अंदर जाना बाकी था ..

फिर करीब आधा लुंड छूट मई घुस जाता है. ऐसे मोठे लुंड की आदत न होने से रौशनी को हल्का सा दर्द होता है और वह चिल्लाते कहती है, "हैईईईई सलीम जी आरामसे दाल न मेरी छूट उफ्फ्फ्फ़… ? तूने मेरी छूट फैला दो तो मई अपने पति को बता भी नहीं सकती की इस छूट को तेरे जैसे मर्द ने फैला दी हैं .. "

सलीम को अब रहा नहीं गया और उसने एक जोर दर झटका मरता है की रौशनी के मुँह से आह की सिसकारी निकल जाती है और वह जोरों से कराहती हैं.

रौशनी एक तरफ लुढ़क कर हाफने लगती है तब

सलीम अब ताबड़ तोड़ तरीके से उसकी छूट की कुटाई करने लगता है, वह हर धक्का इतना जोर से मरता है की उसका लोढ़ा रौशनी की अब बच्चेदानी से टकराने लगती है,

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रौशनी hay-hay करती हुई अपने भरी चूतड़ों को खूब उठाने लगती है और रौशनी की छूट मैं सलीम सटासट अपने लैंड को पेलने लगता है. beech-beech मैं सलीम जब अपनी माँ की पहली हुई छूट देखता है तो

अपने लुंड को बहार निकल कर रौशनी की छूट बुरी तरह चाटने लगता hai,karib 20 मं तक रौशनी अपनी माँ की छूट को कभी अपनी जीभ से छत्ता है कभी अपने लुंड से रौशनी के चुदाई करता हैं..

जब वह अपना पूरा लोढ़ा रौशनी की छूट के अंदर जाता है तो वह रौशनी की कमर पकड़के उसकी चुदाई करते हुए कहता है, "साली यह ले मेरा फौलादी लुंड. ारे अभी तो छूट फटेगी और बाद मई तेरी गांड भी छोडूंगा. तेरा पति कुछ बोले तो तू सीधे ंगो में आजा मेरे घर वहां छोडूंगा तेरी छूट. मैंने तेरी छूट मई इतने जोरसे लुंड इसलिए घुसाया क्योंकि तू आखिर कार इतने महीनो के बाद मिली. आज तोह तेरे जिस्म की ऐसे की तैसी कर दूंगा. यह ले मेरा फौलादी lund..Salim अब जोरसे रौशनी को छोड़ते उसके मम्मी बेरहमी से मसलने लगता है. रौशनी भी मस्ती कामुकता में सलीम के पीठ को कसके पकड़ते अपने छूट निचे से utha-uthake छुड़वाने लगती है. सलीम का पूरा लोढ़ा अपनी छूट मई घुसने से रौशनी को बहुत मज़ा आने लगता है. वह अब सलीम को पूरा सहयोग देते हुए अपनी छूट छुडवाके बोलती है, "हैई और छोड़ो राजा, और चुदाई करो मेरी छूट की..

“हैं बहुत गरम है आप भी .. रौशनी आगे बोलती हैं ..” ऐसा नहीं की रोनित की चुदाई से मई खुश नहीं थी लेकिन जिस हिम्मत और डिमांड से तूने मुझे नंगी करके मालिश करवा के मेरी चुदाई की में उस पर फ़िदा हूँ… . टारे जैसे मर्द के सामने झुकके उससे छुड़वाने मई अच्छा लगने लगा मुझे. अह्ह्ह्हह जी भरके छोड़ मुझे” अहह ममम उफ्फ्फ मममम करते हुए अब रौशनी सलीम का पूरा साथ देते हुए चुदती रही.

चुदाई का स्पीड और फ़ास्ट करते, बोलते हैं “ हाँ रौशनी तुझे जब चहु तब छोडूंगा अब .. . टारे पति को भी कुछ शक नहीं होगा. बड़ी गर्मी है न तेरी छूट मई तो यह ले छुडवाले मेरे लुंड से अपनी छूट. पहले कितने नाटक किये तूने, बड़ी सीधी साडी बन रही थी और अब देख uchal-uchal के चुद्वाराही है. तेरी जैसे गर्म महिला का एहि नाटक मुझे पसंद है रौशनी, इसीलिए अब तुमको छोड़ने और माज़ा आता है….

सलीम अब पास मैं रखा तेल उठा कर रौशनी की चूतड़ों के बीच उसकी गांड के छेड़ मैं ऊँगली dal-dal कर तेल लगाने लगता है और पहले एक फिर दो उंगलिया तेल मैं भीगी होने से सात से रौशनी की गदरायी गांड के छेड़

मैं घुसाने लगता है. फिर सलीम अपने मोठे लोडे पर ढेर सारा तेल लगा कर रौशनी की छूट मैं लोडे को दाल वहां पेलने लगता है.

उसका लुंड अब पूरी तरह से रौशनी की छूट में फंसा महसूस कर और भी सख्त होकर फूलने लगता है, सलीम का लोढ़ा cheer-cheer कर अपने मोठे लैंड को सटासट अंदर पेलने लगता है और रौशनी ओह अह्ह्ह्हह करते हुए सिसकियाँ मारती रहती है, और रौशनी भी मस्ती मैं सलीम जैसे काळा बुड्ढे के मोठे लुंड को अपनी बुर मैं भरे हुए खूब kas-kas कर मरवा रही थी.

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सलीम तोह अब पूरी मस्ती में रौशनी मि ऐसी सिसकियाँ सुनकर रौशनी को घोड़ी बनाकर उसके ऊपर

chadh-chadh कर उसे छोड़ना शुरू कर दिया और इतना jor-jor से रौशनी की बुर को ठोंकने लगा की पुरे कमरे मैं उसके द्वारा रौशनी की ठुकाई की आवाज गूंजने लगी. ऐसी कुछ 10 मं ठुकाई के बाद अब

रौशनी एक डैम से उठ कर और सलीम को लिटा कर को अपने हांथो से सलीम के सलथ मोठे लोडे को पकड़ कर उस पर अपनी छूट रख कर बैठ गई और सलीम बुड्ढे के मोठे लोडे पर कूदने लगी .

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सलीम ने रौशनी को फिर से निचे बीएड पर लिटा कर उसके पैरों को चौरा करने लगा ... अपने लोडे को फिर से रौशनी की छूट पर रख , वहां सहलाने लगा ...

फिर झट से सलीम अपने लोडे को रौशनी की छूट में उतरने लगा .....

Karib-karib आधा लुंड रौशनी की छूट मई घुस जाता है. ऐसे मोठे लुंड की आदत न होने से रौशनी को हल्का सा दर्द होता है और वह चिल्लाते कहती है, "हैईईईई सलीम जी आरामसे डालो न…”

सलीम रौशनी के मम्मी मसलते और 2-3 ज़ोरके धक्के मरता है. जब उसका पूरा लुंड अंदर जाता है तो वह रौशनी की कमर पकड़के उससे छोड़ते कहता है,

" मैंने आपकी छूट मई इतने जोरसे अपने लोडे को डाला हूँ क्योंकि तू इतने महीनो के बाद मिली हैं मेरे लोडे के निचे.”

सलीम अब जोरसे रौशनी को छोड़ते उसके मम्मी बेरहमी से मसलने लगता है. रौशनी सलीम को कसके पकड़ते अपने छूट निचे से utha-uthake छुड़वाने लगती है. सलीम का पूरा लुंड छूट मई घुसने से उससे बहुत मज़ा आने लगता है. वह सलीम को पूरा सहयोग देके अपनी छूट छुडवाके बोलती है, "हैई और छोड़ो राजा, मेरी छूट की चुदाई करीईई.”

तूने मुझे नंगी करके झुकाया उससे मई तुझपे मार गयी. तेरे जैसे मर्द के सामने छुड़वाने मई अच्छा लगने लगा हैं मुझे. जी भरके छोड़िये मुझे सलीम जी. " चुदाई का स्पीड और फ़ास्ट करते, रौशनी के दूध अच्छे से चुस्की सलीम बोलता हैं, "रौशनी तू मेरी आइटम हैं आज से … अब जब चहु तुम्हारी चुदाई करुँगाअ”. टी

पहले कितने नाटक किये तूने, बड़ी सीधी साडी बन रही थी और अब देख uchal-uchal के छुडवाके ले रही है मज़्ज़े. तेरी जैसे गर्म औरत का एहि नाटक मुझे पसंद है रौशनी, फिर hi तुमको छोड़ने और माज़ा आता है मुझे. "

फिर सलीम के मुँह पर अपने निप्पल पे दबाते रौशनी बोली, "उफ़ मेरे सलीम राजा, ारे शर्माना, नाटक करना यह तो औरत का हक्क हैं …. अगर मई सीधे से टारे हाथ आती तो इतना माज़ा कहाँ मिलता जो अब मिल रहा है. अह्ह्ह उफ्फ्फ ममम बहुत मस्त चुदाई कर रहे हो आप …. मैंने नखरे किये इसलिए तो तू अब मुझे ऐसे छोड़ रहा है.”

“देख तेरा पूरा जिस्म कैसे मुझसे छुड़वाते वक़्त उछाल रहा है.”

वहां रौशनी भी चुदाई के डरुअन ..”आज कितने दिन के बाद पहली बार मेरी छूट में दामदार लुंड मिला है अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ओह गॉड मममम और जोरसे छोड़िये मुझेईई”.

सलीम अब और जोरसे बेरहमी से रौशनी की छूट छोड़ते हुए उसकी चकहियों को बेहरहमी से मसलता रहता हैं ….., "उफ़ आज बहुत दिनों बाद तेरे जैसी सहादशुदा लेडीज की चुदाई कर रहा हूँ … मममम ये ले रौशनी जी .. मेरा मोटा कला लोढ़ा तेरी मस्त गुलाबी छूट में ….”

अब सलीम लेते हुए आराम से रौशनी की दूधियों को चूसने लगा, करीब 10 मिनट तक ऐसी hi उनकी चुदाई जारी राखी..

सलीम जैसे बुड्ढे से इस तरह की चुदाई से pani-pani होलार रौशनी की छूट ढेर सारा रास छोर देती है.. सलीम से भी अब रहा नहीं गया और उसने अपने लोडे को निकल कर रौशनी के मुँह पर अपने लुंड से निकले माल के फावड़ों को उसके चेहरे पर और मुँह पर चोर्ने लगा ..

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सुबह हुयी .. रौशनी की आँखें खुली .. एक बड़ी सी अंगड़ाई लेते हुए जब वह निचे देखि तोह पायी की वह नग्न थी .. फॉर वह साइड में देखि तोह पायिनकी सलीम भी नग्न सोये हुए थे .. उसका शैतानी मोटा काला लुंड अब ढीला पड़ा हुआ था और फिर भी मनो 6 इन ला था … उफ्फ्फ ऐसे काळा लुंड को डेल्ह रौशनी बस उसे देखती रही और कॉंटा से अपनी निचली होठों को काट ली ..

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उसे कुछ पल बस सलीम के मोठे लोडे के सिवाय कुछ न दिखा .. फिर उसे एहसास हुआ की वह नग्न थी और सलीम भी नग्न थे .. मतलब कल रात दोनों ने इस सुहागरात से सहाये बिस्तर पर चुदाई करि हैं .. इससे सोच वह बहुत शर्मा गयी .. बहुत hi शर्मिंदगी से उसके वाल लाल हुए ..

वह अपने बदन को बेडशीट से व्रैप करते हुए चुप के से बाथरूम चली गयी

(उफ्फ्फ्फ़ उसने यह क्या किया था .. वह सलीम के साथ चुदाई करि थी … उसने अपने पति रोनित को ढोल दिया था .. यह सब कैसे हुआ .. हु कैसे इतनी बहक गयी थी की रोनित से चीट करि हु भी एक काले सांड जैसे बुड्ढे से .. हे भगवान् उसने क्या किया …

रौशनी अपनी ानकेहिं बंद करती तोह बस कल रात की चुदाई उसके सामने आती .. मालिश से चुदाई तक का सफर की सोच उसकी छूट फिर से गीली भी हो रही थी …

उफ्फ्फ अब रौशनी कैसे सलीम को मुँह दिखाएगी .. और बाद में अपने पति को किस मुँह से मिलेगी … यह बस सोचती रही रौशनी … और वह शावर के अंदर नहाने चली गयी .. ाआहे क्या करना हैं उसकी सोचते हुए नहाने लगी .

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रौशनी अब नाहा hi रही थी की अचानक पोछे से उसे दो मज़बूत हाथ उसे पकड़े हुए महसूस

करि … उफ्फ्फ पीछे तोह सलीम आ गए थे और उसके पीछे से चिपक hi गए थे ज़.. उनका शैतानी लुंड अब उसकी चूतड़ों से डाब रहा था और उनका लुंड अब फिर से उभरने लगा था ..

“उफ्फ्फ सलीम जी छोड़िये मुझे .. क्या कर रहे हो आप ?”

“बस मेरी डार्लिंग को है कर रहा हूँ पीछे से .. चिपक कर हुग कर रहा हूँ और क्या …”

“ओह गॉड प्ल्ज़ मुझे छोड़िये … मत करिये ऐसा ..”

“ओह डार्लिंग इसमें क्या हिअ .. कल रात तोह हमने बाकी बहुत कुछ किया ..”

उतना कह कर रौशनी की चिचियों को सलीम दबाने लगा .. पीछे से उसके उभरते लुंड लो अलनी चूतड़ों पर रगड़ते हुए महसूस करा ुर आगे से सलीम को अपनी चूचियों को दबोचने के एहसास से रौशनी की छूट का पानी फिर से निकलने लगा था .. उसने एक हलकी सी हामी भी भरी .. अह्ह्ह मममम”

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“सलीम जी छोड़िये मुह्हे उफ्फ्फ ममम प्ल्ज़ छोड़िये ..”

“ओह हो डार्लिंग कल रात को तोह तुम अलग hi धुन गए रही थी …”

इतना कह कर अब सलीम ोीचे से रौशनी की पीठ को चुनता हैं … फिर उसकी गर्दन को साइड से चूमता हैं ..

रौशनी मममम करती हुयी सिसकियाँ देती हैं हलके से ..

“सलीम जी कल रात जो हुआ भूल हाइये … आज से ऐसा कभी नहीं होगा .. छोड़िये मुझे .. और हाँ में आपकी डार्लिंग वार्लिंग कुछ नहीं हूँ”

“ओह हो रूत न जाना डार्लिंग .. कल रत को उचक उचक कर मेरे इस लोडे से चुद रही थी .. और अब ऐसे नाटक कर रही हो ..” बस इतना केजतेभी स्कीम फिर से एक जोरों से होने कोड़े का झटका रौशनी की चूतड़ों के बीच मारता हैं की उसका लोढ़ा अब रौशनी की कग ूतडों के बच्च जाकर उसकी छूट से फिर से टकराता हैं ..

“ओह डार्लिंग तुम कुछ और कह रही हो और तुम्हारी छूट कुछ और कह रही हैं .. उफ्फ्फ इतना सारा रास चोर रही हैं तुम्हारी रसीली छूट .. अब चोर भी दो और आओ फिर से मस्ती करे ..”

रौशनी सिसकियाँ तोह मार रहे थी .. लेकिन उसे एक अलग सी ताकत मिलती है और वह सलीम से अपने आप को चुरा लेती हैं .. और एक टॉवल लेते हुए बाथरूम के बहार जाती हैं

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और खुद को कवर कर लेती हैं..

सलीम भी बहार आता हैं ..

“सलीम जी दिर रजो मुझे से नहीं तोह में यहाँ बताउंगी आप फाॅर्स कर रहे हैं मुझ पर ..”

सलीम इस बात से बस हस्ता हैं ..

“रौशनी जी सब को पता हैं आप और में इस कमरे में थे रात भर और यह सुहागरात से सजाई रूम और बिस्तर थी” (सलीम झूट बोलता हैं रौशनी को … उसके और हसीना के अलावा किसी को कुछ नहीं ोाता था और कल तोह उसने बोलै था किसी को की रौशनी की तबियत ख़राब थी)

रौशनी यह सुन दांग रह जाती हैं .. ( उफ्फ्फ सब को ोाता चला की में और सलीम जिंकल रात कोंक्या कर रहे थे उफ्फ्फ … यह में कहा फास गयी हूँ … ओह गॉड अब क्या करू ..)

“सलीम जी आप दूर hi रहिये … में जा रही हूँ अभी इसी वक़्त वापस … आप दूर रहिये ..”

सलीम कुछ नहीं कहता बस रौशनी को देख मुस्कुराता हैं .. (साली अभी तोह चूड़ी हैं मेरे लोडे से .. देखते हैं कितनी देर तक भागती रहेगी .. एक बार मरे लोडे का चस्का तेरी छूट को लगा हैं .. अब तू आएगी खुद मेरे लोडे से वापस छोड़ने .. फॉर तोह तेरी छूट hi नहीं तेति इन चूतड़ों के बीच के छेद में अपने लोडे को घुसा घुसा कर तेरी गांड की चुदाई करूँगा .. यह वादा हैं सलीम का वादा ..)

रौशनी अपने कपडे पहनती हैं.. बाद पैक कर वहां से निकल जाती हैं .. बहार उसे हसीना दिखाई देती हैं…

वह खुद को हसीना के चेरे को देख नहीं पाती और वहां से चली जाती हैं.. हसीना मन में मुस्कुराती हैं .. (मेरे भाईजान नेट ओह राग भर इसकी चुदाई करि हैं… तू वापस आएगी मेरे भाईजान से फिर से छुड़ेगी…)

रौशनी एक टैक्सी से स्टेशन जाती हैं .. वहां जाकर उसे एक एक केबिन की लास्ट सीट मिलती हैं और ट्रैन रावण होती हैं..

रौशनी सफर में तैर करती हैं की वह ंगो से और कुछ दिनों की छूती लेगी…

सफर के बाद वह अपने घर जाती हैं ..

घर पर रोनित नहीं होते इसलिए रौशनी थोड़ी चैन की सांस लेती हैं .. वह सलीम से चूड़ी थी , अपने hi पति को धोका दित hi … कैसे वह अब उसके चेहरे को देख पाएगी .. इसलिए वह खुश थी की अभी तोह रोनित घर पर नहीं हैं..

वह घर के कामों में खुद को बिजी रखती हैं .. उसने तैर किया था की वह रोनित से कुछ नहीं कहेगी और अब ंगो भी वह सलीम से तोह बिलकुल न मिलेगी न उससे बातें करेगी.

रोनित शाम को घर आता हैं .. रौशनी को देख वह मुस्कुराता हैं ..

“ी ऍम सो सॉरी डार्लिंग तुम्हे जाते समय बहुत कुछ बोल गया था ..”

फिर रोनित , रौशनी को गले लगता हैं …

रौशनी अपने आप को होने पाटिंकी बाँहों में पाकर अच्छी महसूस करती हैं .. सेफ महसूस करती हैं..

वह अब रोनित को चूमने लगती हैं .. उसके कन्धों के इर्द गिर्द पलडे हुए उसे प्यार से चूमती हैं .. रोनित भी मूड में आ चूका हैं और वह भी रौशनी को चूमने लगता हैं ..

कुछ hi पलों में दोनों के कपडे निचे फर्श पर .. होने बैडरूम पर रास्ता करते हुए पड़े हैं एयर रोनित और रौशनी बिस्तर पर नग्न एक दूसरे के बाँहों में चूमते हुए एन्जॉय कर रहे थे .

रौशनी आँखें बंद रोनित को चूमती हुयी रहती है की उसके दिमाग में उसे , उस रात के सलीम के साथ चुम्बन का नज़ारा आता हैं … उसकी छूट उसे सोच गीली होने लगती हैं .. कुछ सेकंड बाद उसे एहसास होता हैं की वह क्या सोच रही हैं और वह रोनित के चुम्बन को तोड़ देती हैं …

“रौशनी क्या हुआ … अचानक तुम चूमना क्यों बंद करि हो ..”

(उफ़ अब में क्या , कैसे बताऊ रोनित से की में क्या कर आयी हूँ सलीम जैसे गैर मर्द के साथ उफ्फ्फ)

“कुछ नहीं डिअर बस थोड़ी सी सांस लेने में मुश्किल हो रही थी ..”

“अच्छा कोई बात नहीं …” और रोनित फिर से रौशनी को चूमने लगता है. ..फिर से रौशनी को सलीम के साथ बिताये पलों की याद आती है .. और फिर से रोनित से चुम्बन तोड़ देती हैं ..

“रोनित दो मं बाथरूम जाकर आयति हूँ..”

“अच्छा जल्दी आओ रौशनी .. आज तोह रात भर मस्ती करनी है.”

रौशनी एक झूट मुठ का स्माइल देते हुए बाथरूम चली जाती हैं.

अंदर आईने को देखती हुयी ( उफ़ रौशनी यह तुमने क्या किया … ओह गॉड तुम अपने पति को चूमते हुए उस काळा बदसूरत बुड्ढे की क्यों सोच रही हो .. यह तुम्हे क्या हो गयभ हैं .. कन्ट्रो करो खुद पर ..

फिर रौशनी सोचती हैं ( उफ़ रोनित भी न .. जाने से पहले मेरी प्यास बुझाते और ऐसी गर्मी में आ जाते तोह क्या प्रॉब्लम थी … उफ्फ्फ मेरी प्यास बुझाते और में उस सलीम से नहीं चुदती .. हवस में नहीं बह जाती ..ु हे भी गलत टाइम पर गर्मी आ रही है. … उफ्फ्फ क्या हाल में फास गयी हूँ ….)

रौशनी खुद को फिर शांत करती हैं … और बाथरूम से बहार जाती है. .. बहार रोनित तोह नग्न बिस्तर पर लेता था .. उसका लुंड पीरा सख्त था .. न चाहते हुए भी रौशनी अब रोनित अपने पति के लुंड किट ऊलना सलीम के काळा मोठे लुंड से करने लगती है. .. रोनित का लुंड वैसे काफी अच्छा था 7इन और सख्त लेकिन सलीम के बड़े और मोठे लुंड के सामने कोई कपरिसों नहीं .. उसे कभी नहीं लगा था की रोनित के लुंड से भी बड़ा लुंड साचै में किसी मर्द के पास होगा .. हु तोह रोनित के लुंड का कपरिसों बस सलीम के लोडे से नहीं बल्कि रमेश और असलम के लुंड से भी कर रही थी .. (उफ्फ्फ रौशनी यह क्या सोचती रहती हैं … अपने पति के पास जा और अब उन्ही से मस्ती कर ..)

रौशनी अब रोनित के पास जाती हैं और रोनित उसे झट से बाँहों में लेकर उसे बेतहाशा चूमने लगता हैं .. उसकी चूचियों की दरार पर … होठों पर … बाँहों पर .. पेट पर … उसकी निघ्त्य उतारते हुए उसे जकड कर दबोचता हैं …

रौशनी ानकेहिं बंद एन्जॉय करने hi लगती हैं की अब उसके दिमाग मेजन रमेश आ जाते हैं और उनके साथ उस फोर्ट के पार्क में पल बताये सोचती हैं.. उनके लोडे की सोचतिभाईं .. उसने वहां उनके लोडे को सहलाया था .. इस सोच से उसकी छूट बहुत गीली हो जाती हैं ..

जैसे hi रोनित बोलता हैं

“ै है मेरी बीवी की बुर से तोह रास टपक रहा हैं अपने पति के बाँहों में ..”

रौशनी आँखें खोलती हैं और पाती हैं वह तोह रोनित के बाँहों में हैं .. उफ्फ्फ वह क्यों सोच रही थी की वह रमेश जी के बहिन में थी .. उफ्फ्फ उसे यह क्या हो रहा था .. वह अपने पति के साथ रोमांस कर रही हैं लेकिन उसके दिमाग में पहली सलीम फॉर अब रमेश जी की साथ किये मस्तियाँ घूम रही हैं .. उफ्फ्फ ये क्या हो रहा हैं और उसकी छूट इस सोच पर इतनी गीली क्यों हो रही हैं ….

“क्या हुआ डिअर किसके बारे में सोच रही हो … तुम्हारे पति के hi न .. हहै”

रौशनी खुद को सँभालते हिये .. “उफ़ आप भी न रोनित .. हाँ में बस अपने पति के बारे में hi सोच कर गीली हुयी हूँ …”

रौशनी , रोनित के तरफ देखि फिर साइड में देखि … (उफ्फ्फ में रोनित का नहीं बल्कि एक गैर मर्द रमेश जी की सोच रही थी उफ्फ्फ्फ़)

रोनित ने रौशनी को फिर से बाँहों में लिया चूमा .. फिर खड़ा होकर अपने लुंड को रौशनी के मुँह के पास लार “चुसो मेरा कुंड डार्लिंग , बहुत दिनों के बाद आयी हो उफ़ ममम चुसो न ..”

रौशनी अब रोनित के लुंड को मुँह में लेकर चूसने लग जाती हैं .. वह तोह सलीम और रमेश के मोठे लोदों को मुँह में ले चुकी थी .. इसलिए रोनित का लुंड तोह वह आसानी से मुँह में ले रही थी … वह उसे गहराई तक लेते चूसने लगी … रोनित ने कभी भी रौशनी को उसके बड़े लुंड को आईटी ी आसानी से मुँह की गहराई में लेते नहीं देखा था .. वह काफी सरप्राइज था .. लेकिन खुश भी .. नहीं तोह उसे बार बार रौशनी से पिच कर hi अपने लुंड को इतनी गहराई में दाल पाटा था .. वह अब रौशनी की सर को पलाद उसके मुँह को अपने लुंड से छोड़ने लगा …

रौशनी चूस तोह रोनित का लुंड थी लेकिन उसके ख्यालों में कभी वह असलम के लोडे को चूस रहे थी , तोह कभी रमेश जी के या सलीम के … अब वह नहीं सोची की वह रोनित का लुंड चूस रही थी .. बस उन तीनो का सोचतेबहुये hi मस्ती से चुस्ती रही .. उसकी बुर से और रास बहने लगा और बिस्तर की शीट उसकी रास से भीग गयी ..

रौशनी ौरी मस्त में चुस्ती रही लुंड .. रमेशः, सलीम और असलम के लुन्डों के बारे में बारी बारी से सोचते हुए ..

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रोनित अब रौशनी की मुँह की चुदाई बंद करि और लुंड बहार निकला ..

रौशनी अब कामुक निगाहों से रोनित को देकब “उफ़ डार्लिंग और डालो न मुँह में और चुदाई करिये मुँह की उफ़ ममम “

रौशनी को खुद ऐसे लुंड चूसै चाहते देख रोनित सरप्राइज था लेकिन खुश भी .. उसे भी ऐसी hi लेडीज पसंद थी जो खुद चाहती हो मस्ती .. और आज उसे रौशनी को कुहक भी कहना नहीं पड़ा था .. लेकिन उसे क्या पता उसकी बीवी उसके लुंड और उसके बारे में सोच इतनी गरमी से बेहाल नहीं थी बल्कि तीन बुद्धों के लुंड और उनके बारे में सोच गर्मी की आग में डूबी थी …

वह फिर से रौशनी की मुँह की चुदाई करने लगा ..वह रौशनी की लुंड चूसै से इतनी मस्ती में था की उसे लगा वह जहर hi जाएगा .. रौशनी भी यह महसूस की लेकिन अब उसे तोह चुदाई चाहिए hi थी .. वह लुंड चूसै बंद कर बल्ली

“रोनित झरो मई पेरी मेरी छूट की चूडैन्कारिये उफ्फ्फ बहुत दिनों से आपके लुंड की प्यासी हूँ ममममम छोड़िये मेरी छूट अहह ममम

रोनित ने रौशनी को लिटा दिया और अपने लुंड को उसकी छूट में दाल उसकी चुदाई करने लगा .. खुद काफी दम से रौशनी की चुदाई कर रहा था .. लेकिन रौशनी को और जोरों से चुदाई चाहिए थी .. जैसे सलीम ने उसकी छूट ठोकी थी वैसे hi ..

“ाहहब रोनित मम और छोड़िये मम और जोरों से अहह मम और ताकत लगाइये न डिअर .. अहह ममम अपनी बीवी की छूट छोड़िये मम एस अह्ह्ह

“रोनित ौरबजोर से चुदाई करने लगा लेकिन रौशनी उसे और जोतों से चुदाई की मांग कर रही थी .. रोनित जितना हो शामे उतनी तेज़ी और ताकत से चुदाई कर रहा था .. धक्कों पर धक्के मार रहा था रौशनी की छूट में ..

रौशनी बस आँखें बंद सलीम द्वारा हुयी चुदाई की सोची .. उफ़ क्या दमदार छोड़ा था उसने अहह ममम “ट्वीट और छोड़िये मम जोरों से अहह ममम डार्लिंग मम एस एस्सस ..”

“उफ़ रौशनी जितना हो सके कर रहा हूँ उफ़ तुम्हे अजा क्या हुआ हैं उफ्फ्फ ममम ले लो मेरा कुंडा ुर ले लो …”

“आह रोनित मम उफ्फ्फ और जोर से ाहब ममम और अंदर तक पेलो मम एस एस बेबी और जोरों से अहह मममम”

रोनित अब थक रहा था और उसकी चुदाई की गति काम हुयी .. इससे रौशनी नाराज़ हुयी ..

“ओह गॉड रोनित और दम से छोड़ो न उफ्फ्फ आपका दम कहाँ गया .. ओह एस ममम”

अब रौशनी खुद रोनित की कमर पर अपने पैरों को जकड कर उसके लुंड पर अपनी छूट मारने लगी .. उसके कमर को पकड़ खुद उसके लुंड को और अंदर तक लेने की कोषसिंह करने लगी . “अहह उफ़ एस ऐसे hi छोड़ो मुझे डार्लिंग मम एस एस उफ्फ्फ और अंदर तक पेलो ाः ममम”

“ ओह गॉड रौशनी और नहीं मम बस उफ़ मम मेरा निकलने वाला हैं अह्ह्ह .”

“नहीं और छोड़िये न डार्लिंग मम इतनी जल्दी न झरिये, और चुदाई करिये अहह ममम पलज़्ज़ज़ डार्लिंग अह्ह्ह्ह”

लेकिन अब रोनित से रहा नहीं गया .. वह एक अह्ह्ह कर धाड़ से अब झरने लगा .. उसके लुंड से उसका सफ़ेद नाल उगलने लगा … और कुछ hi सेकंड में वह पूरी तरह से जहर गया रौशनी की छूट में …

रौशनी में एक तोह और सेक्स की भूक बची थी … और दूसरी बात रोनित आईटी ा काम रास जहर चूका था .. उस रात तोह सलीम ने उनके मोठे लोडे से इतना रास छोरा था इतना छोरा था की वह लगभद 2 मं तक अपना माल उगल hi रहा था .. और यहाँ रोनित बस कुछ सेकंड तक hi जहर पाया था ..

रौशनी की प्यास अभी भी अधूरी hi रह गयी थी .. रोनित अब पूरा थका हुआ रौशनी के बगल में लेट गया और कुछ hi समय में सो भी गया ..

रौशनी उठ कर बाथरूम में गयी और अपनी छूट में ऊँगली कर कर के … आखिरकार जहर hi गयी .. उसने तोह बस सलीम, रमेश और असलम के लोदों के बारे में सोचते हुए hi जहर चुकी थी. और अब जाकर संतुष्ट हो गयी .. फॉर बिस्तर पर जाकर रोनित के बाजु में जा कर सो गयी

अब रौशनी ने छुट्टी ली थी और 5 दिन ंगो से .. इस दौरान वह बस अपने घर रह कर अपने पति की देखभाल करती और रात को दोनों के बीच सम्भोग होता लेकिन इससे रौशनी की न आग बुझती न hi वह संतुष्ट होती .. बस रोनित के साथ चुदाई के बाद वह कभी रमेश के लुंड को या सलीम के या असलम के लुंड को hi सोचती और ु गलियां चलती होनी बूत में और जहर जाती … झरने के बाद इस बात में शर्मज डा होती की वह उन बुद्धों के लुंड की सोच कर झरती हैं न की रोनित की चुदाई से :.

ऐसे और 4 दिन बीत जाते हैं .. अब 5तह दिन वह मार्किट कुछ सामान लेने गयी hi थी की उसे रमेश और उसकी रिक्शा दिखती हैं मार्किट में.. वह कोशिश करती हैं की रमेश उसे न देखे लेकिन रमेश उसे उस दिन देख hi लेता है .. अपनी रिक्शा फॉर वह रौशनी के पास लता हैं

“रौशनी जी .. रौशनी जी .. कैसी हो आप .. बहुत दिनों के बाद मिली हो .. क्या हाल हैं..?”

रौशनी फिर रमेश को देखती हैं लेकिन उसकी नज़र झट से उसकी क्रॉत्च शेट्टा पर जाती हैं और वह रमेश के मोठे लुंड और उस पर रात में झरने का सोच शरमाते हुए रमेश के आँखों में आँखें दाल नहीं देख पाती.
 
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