Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala - Page 5 - SexBaba
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Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala

अपडेट 38: शादी और सुहागात की तैयारी

राजू रत्न को आँखों से इशारा करता है की क्या हुआ?

रत्न राजू के पास aakar…beta तूने हमें बताया नहीं रानी के बारे में?

राजू: नहीं maa…maine तो सब बातें बताया था जब हम रानी के घर गए the..uske बारे में पूरा तो बताया था..

रत्न: बताया tha..lekin अधूरा hi….

राजू: मतलब?

रत्न: राजू के कान में धीरे se…yehi की तू बाप बनने वाला है और मैं दादी..

राजू जब यह बात सनटैन है तो उसे समझ नहीं आता और रत्न की तरफ देखता है..

रत्न रानी की तरफ देख कर उसे पास में बुलाती hai..jab रानी शर्माते हुए रत्न के पास आती है तो रानी तो राजू के बगल में बिठा के…

रत्न राजू से: अब समझ आया?

राजू रानी की तरफ देखता है तो वह शर्मा के हाँ में अपना सर हिलती है..

इतने में संध्या भी वहां आती है और राजू को अपने बाहों में लेकर ख़ुशी का इज़हार करती है और उसे बधाई देती है..

राजू भी थोड़ी मस्ती में आकर संध्या के कान में धीरे से कहता hai…aap भी कुछ महीनो बाद ऐसे hi खुश खबर dogi…to संध्या भी शर्मा जाती है..

वहां पर सुधा और ारु भी आ जाते है और घर में ख़ुशी का माहौल हो जाता है…

फिर राजू कहता है..

Chalo..bahut तैयारियां करनी hai..zyaada टाइम नहीं hai..aur फिर सब अपने काम में लग जाते है..

घर को सब लोग थोड़ा सजा देते hai…yeh सब काम में सब थक जाते है तो रात को जल्दी खाना ख़तम कर लेते है.

राजू फिर सब से कहता hai..aaj जल्दी सो jaao…thak भी गए ho…aur तीनो की तरफ देख kar..kal रात को सोने का टाइम नहीं मिलेगा और उनको आँख मार देता है..

तीनो शर्मा जाते है और सब साफ़ कर के अपने कमरे में चले जाते है…

तो डीडे यह होता है की रानी संध्या के साथ उसके कमरे में hi सोयेगी..

राजू भी अपने कमरे में चले जाता है और फिर रानी को आवाज़ देकर उसे कुछ काम hai..keh कर बुलाता है..

रानी जैसे hi कमरे में आती है तो राजू झट से उसे अपनी बाहों में लेकरडारवाज़ा बंद कर देता है..

राजू: अब जा कर थोड़ा टाइम मिला है अकेले में बात करने kaa…aur ऐसा कहते हुए रानी के होंठों को अपने होंठों से जोड़ देता है और स्मूच करता hai..Rani भी उसका पूरा साथ देती hai..kiss करते वक़्त राजू उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी चुकी को दबाता है ज़ोर से…

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रानी aaah..ki धीमी आवाज़ करती है तो राजू उसी वक़्त उसकी जुबां को अपने मुँह में लेकर जुबां भी चूसने लगता है..

5 मं के गहरे किश के बाद राजू रानी को अलग करता है और कहता hai..pehle आपने बताया क्यों नहीं?

रानी राजू se:ab मुझे तुम बुलाया karo…mere बच्चे के बाप बनने वाले ho..so, फिर तो एक तरह से आप मेरे पति hi हुए ना..

राजू: वह सब chhodo…Raju को वह सुबह वाली चुदाई याद आती है और कहता hai..kahin यह उसी दिन का नतीजा तो नहीं है?

रानी शर्मा के हाँ में सर हिलती है और कहती है..

रानी: मैंने कहा था naa…apna रास मेरे अंदर छोड़ना तो शायद मैं प्रेग्नेंट हो jaaongi..to देखो हो gayi..aur है देती है..

Raju:yeh तो बहुत ख़ुशी की बात है Rani…to फिर अपना वादा भी याद है ना?

रानी को पता tha..phir भी थोड़ा नाटक करते हुए ..कौनसा वादा?

राजू: अच्छा अब मुझसे hi jhoot..aur ऐसा कहते हुए अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को दबाते हुए अपनी ऊँगली उसकी साडी के ऊपर से hi चेक पे kured-te hue..agli बार इसकी बारी aayegi…yaad है ना वादा..

रानी: मैं तो मज़ाक कर रही thi..kaise भूल सकती हूँ waada…tumne भी तो मुझे वह ख़ुशी दी है जिसके लिए मैं इतनी सालों से तरस रही thi..aur ऐसा कहते हुए फिर से रानी राजू के होंठों को चूम लेती है..

राजू: तुमसे बहुत साड़ी बातें करनी है लेकिन अभी टाइम नहीं hai..jaa कर सो jaao..kal बहुत काम है…

रानी भी थोड़ा राजू की टांग खींचते hue..haan…time तो नहीं rahega..biwiyaan जो मिल jaayegi..aur आँख मार देती है..

राजू: accha…dekh lo..unke साथ तुम्हे भी शामिल ना कर लून..

रानी दुखी मन se..kaash ऐसा होता…

राजू: तो क्या hua…shaadi नहीं तो सुहागरात hi सही और है देता है..

रानी: मैं भी उस पल का इंतज़ार karoongi..aur ऐसा कह कर राजू के होंठ चूम कर कमरे से निकल जाती है…

राजू भी बहुत थका हुआ tha..woh भी जल्दी hi सो जाता है..

शादी:

अगली सुबह राजू भी जल्दी उठ जाता है और बाकियों को भी भी उठा देता है ..

घर में भाग दौड़ होती है तैयारियां की…

सुबह 8.00 बजे राजू पंडितजी को फ़ोन करता है और निकल जाता है उसे अपने घर लाने..

जाने से पहले राजू सब से कहता है की वह तीनो तैयार रहे..

जाते वक़्त वह ध्यान देता है की कोई उसका पीछा ना kare…aur यह भी जान लेता है की ठाकुर के आदमी अभी तक नहीं आये थे..

राजू जल्दी से मंदिर पहुँच जाता है जहाँ पुजारी पहले से hi उसका इंतज़ार कर रहा था.

राजू उनको लेकर घर आ जाता है..

पंडितजी घर में प्रवेश करते है और घर को सजा हुआ देख कर उनके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है..

इतने में राजू भी तैयार होने चला जाता है..

फिर रत्न आ कर पंडितजी को नमन करते हुए पूछती है की और क्या ज़रुरत है?

पंडितजी उसको हवन का सामान लाने को कहते है और अपने काम में लग जाते है..

रत्न सब सामान लाकर पंडितजी को देती है जो उन्होंने पुछा था…

जब सब सेट हो जाता है तो पंडितजी कहते है की समय नज़दीक आ रहा है और सब को आने को कहते है..

Teeno…Sudha, संध्या और ारु सज धज के बाहर आती hai..teeno बहुत खूबसूरत लग रही thi..shaadi के लाल जोड़े में..

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ारु को देख कर पंडितजी कहते है ..तुम वही हो ना beti..jinki शादी मैंने पहले किया था..

ारु हाँ में सर हिला देती है और पण्डितजीको भी सब समझ आ जाता है..

इतने में राजू भी तैयार हो कर आ जाता है और वह भी बहुत स्मार्ट और डैशिंग लग रहा tha….sherwaani पहने हुए और सर पे सेहरा भी लगाए हुए था..

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पंडितजी सब को बैठने को कहते है और वह शादी की रस्में शुरू करता है..

फिर वह वक़्त भी आ जाता है और देखते hi देखती शादी भी सम्पन हो जाती hai..(deliberately स्किप्पिंग थे फाइनर डिटेल्स ) और तीनो राजू की पत्नियां बन जाती है..

शादी के बाद राजू और तीनो पंडितजी का आशीर्वाद लेते है और साथ में रत्न से भी आशीर्वाद लेते है..

रत्न की आँखों में ख़ुशी के आंसूं बह जाते है और चारो को ढेर सारा आशीर्वाद देती है..

इन सब में काफी टाइम लग जाता है और लगभग दोपहर हो जाता है..

राजू और रटने के ज़िद पर पंडितजी भी चाय नास्ता कर के निकलने के लिए रेडी होते है..

राजू को कुछ सूझता है और फिर हु अपने कपडे फिर से चेंज करने के लिए कमरे में चला जाता है..

संध्या, ारु और सुधा भी शर्माते हुए कमरे में चले जाते है..

रत्न पंडितजी को बुला कर अपने कमरे में ले जाती है और पंडितजी से बात करती है..

रत्न: पंडितजी, आपसे विनती है की आप यह बात किसी को ना बताये की आपने यह शादी करवाई hai..main नहीं चाहती की कोई मसला हो..

पंडितजी: धैर्य रखिये behanji…Aapke bête से मेरी बात हो गयी hai..kisi को कुछ नहीं बताऊंगा और भले hi यह शादी समाज के नज़रिये से जायज़ ना ho..lekin कोई गलत भी नहीं hai..aap निश्चिंत रहिये..

रत्न के मन में एक दुविधा होती है जो पंडितजी जान जाते है और कहते है..

पंडितजी: बहनजी, आपके मन में क्या दुविधा है? मुझसे आप पूछ सकती हो..

रत्न: मैं एहि सोच रही थी सुहागरात कब मन सकते है यह लोग…

पंडितजी: आज का दिन बहुत शुभ hai..aur उनकी कुंडलियों के हिसाब से आज राजू और सुधा (पंडिजित को नाम नहीं मालूम tha..to उनके शादी में बैठने के हिसाब से कहता है) सुहागरात मन सकते है और 2 दिन बाद बाकी दोनों बिटिया भी मन सकते है..

रत्न को थोड़ा राहत मिलता है और हाँ में सर हिला कर पंडितजी को दक्षिणा देकर उनके पाँव छु कर आशीर्वाद लेती है..

पंडितजी: अब सब क्लियर हो गया है तो मुझे भी निकलना hai..aaj का दिन बहुत शुभ है तो मुझे और भी शादियां करवानी है और बहार निकल आता है..

इतने में राजू भी अपने कपडे चेंज कर के नार्मल कपड़ों में आ जाता है और पंडितजी को लेकर घर से निकल जाता है..

राजू को नार्मल कपड़ों में देख कर सब आश्चर्य हो जाते है और रत्न और रानी पूछती है की कपडे क्यों चेंज किये..

राजू कहता है की वह वापस आ कर सब बताएगा..

राजू का तेज़ दिमाग और सोच:

जैसा hi राजू ने सोचा tha..tab तक ठाकुर के आदमी भी निगरानी के लिए आ जाते है जो राजू देख लेता है..

राजू पंडितजी को मंदिर के तरफ ले जाता hai..raaste में

राजू: पंडितजी, हो सकता है की कुछ आदमी आपको रोके या बाद में मिले और पूछे की मेरे घर में क्या करने आये हो..

पंडितजी: मैं कह दूंगा की तुम्हारे किसी दूर के रिश्तेदार की शादी के बारे में बात करने आया था..

राजू: haan..yeh ठीक rahega..aise hi कह देना आप..

राजू फिर पंडितजी को मंदिर में छोड़ कर थोड़ी दूर छुप कर किसी का इंतज़ार कर रहा होता है..

राजू का शक एकदम सही निकलता है और कुछ देर बाद ठाकुर के 2 आदमी मंदिर में दर्शन के बहाने से आते है…

दर्शन कर के पंडितजी से 5 मं के लिए “कुछ बात करते है” और निकल जाते है..

जब वह निकल जाते है तो राजू फिर से मंदिर जाकर पंडितजी से मिलता है..

पंडितजी: अरे बीटा, अब तक गए नहीं तुम?

राजू: मैंने कहा था ना aapse…kuch लोग आपसे मिलने आएंगे और मेरे बारे में पूछेंगे..

पंडितजी: सही कहा beta…woh लोग तुम्हारे बारे में hi पूछ रहे the..unki बातों से मैं भी थोड़ा दर गया tha…dikhne और बात करने में अच्छे नहीं लग रहे थे..

एहि पूछ रहे थे की मैं तुम्हारे घर क्यों गया tha…aur मैंने भी वही जवाब दिया जैसा हमने बात किया था…

राजू: उनको कोई शक तो नहीं हुआ?

पंडितजी: मुझे तो नहीं लगता beta..but इतना ज़रूर कहूंगा की उन लोगों से थोड़ा संभल के rehna..kahin तुम्हे कोई नुक्सान ना करे..

राजू: धन्यवाद Panditji..main संभल कर रहूंगा…

राजू फिर से उनका आशीर्वाद लेता है और घर की तरफ चला जाता है..

वापस आते वक़्त राजू काम्य को फ़ोन करता है..

राजू: मालकिन, कैसी हो?

काम्य: राजू, अकेले में तो मालकिन मत kaho…waise भी मैं यहाँ इस घर में एक नौकरानी की तरह रहती hoon..waise भी जब से माला गयी है, तुम तो आना hi बंद कर दिए हो..

राजू: ऐसा नहीं है Malkin….Kaamya..thoda काम में बिजी था तो टाइम नहीं मिल paaya..zaroor आके मिलता हूँ.

काम्य: बोलो, कैसे याद किया..

राजू: काम्य, मेरे लिए एक छोटा काम karo…yeh पता लगाओ की ठाकुर रोज़ सुबह कितने बजे घर से निकलता है और शाम को घर कब तक आता है?

काम्य: क्यों, कुछ गड़बड़ हुआ है क्या?

राजू: अभी के लिए तो कुछ nahi..lekin मैं कुछ सोच रहा hoon..woh मैं बाद में बताऊंगा..

काम्य: ठीक hai..pata करती हूँ.

राजू: ठीक hai..main कल सुबह फिर फ़ोन करता hoon…aur फिर फ़ोन कट कर देता है.

राजू के घर:

राजू घर आ जाता hai..ghar में सब शांत रहता hai..Raju आवाज़ देता है तो रानी बहार आती है..

रानी: क्या hua..chilla क्यों रहे हो?

राजू: सब कहाँ गए? कोई नज़र नहीं आ रहा है..

इतने में रत्न भी बहार आती है और राजू से पूछती है की वह कपडे बदल कर क्यों गया था??

राजू: अभी दोपहर हो गया hai..mujhe पता था की अब तक ठाकुर के आदमी यहाँ आ गए honge..mujhe शेरवानी में देख लेते तो उनको शक हो jaata..isiliye कपडे बदल लिए..

राजू रत्न को अपने बाहों में लेकर जो कुछ देर पहले हुआ tha..sab बता देता hai…Ratna चिंता करती है तो राजू अपना ऊँगली उसके मुँह पे रख kar..chinta मत करो maa..main हूँ naa…mujhe पता tha..Thakur कुछ ऐसा hi करेगा कर ke..isiliye कपडे बदल लिया tha…lekin आप फ़िक्र मत करो…

इतने में बाकी तीनो भी शर्माते हुए बहार आ जाते है और अपनी नज़रें झुका लेते है..

राजू: उनकी टांग खींचते hue…kya खूबसूरत लग रही है मेरी biwiyaan..aur शर्मा तो ऐसे रही है जैसे हम आज पहली बार मिल रहे है..

रत्न: चुप कर Raju..unko परेशान क्यों कर रहा hai..shaadi हुई है तो थोड़ा तो शर्माएगी naa…naa की खुल कर तेरे सामने आएँगी..

राजू: अब क्या शर्माना maa…main भी चाहता हूँ की घर में सब नार्मल hi प्यार से एक दुसरे के साथ rahe…jaise पहले tha..ab भी वैसा hi rahe..aur हस्ते hue..haan..farak अब इतना hi रहेगा की हम सब रात में एक hi बिस्तर में soyenge..aisa कहते हुए रत्न और रानी को आँख मार देता है..

वह तीनो यह बात सुन कर शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी..

<1 हर बैक>

जब राजू पंडितजी को मंदिर छोड़ने गया था तो रत्न कमरे में तीनो से मिलने जाती है..

रत्न को कमरे में देख कर तीनो रत्न के गले लग जाते है और सब की आँखों में ख़ुशी साफ़ दिख रही थी..

रत्न तीनो को प्यार से माथा चूम kar..jab तक मैं भी राजू से शादी नहीं कर leti…tab तक तो तुम तीनो मेरी बहु हुई naa..aur है देती hai..meri प्यारी gudiyaan…kitni खूबसूरत लग रही हो तुम sab…bhagwaan हम सब को अपनी नज़र में अच्छे से रखे..

तो तीनो एक साथ हाँ कह कर रत्न के पेअर छूटे है..

रत्न उनको उठा कर अपने गले लगा कर..

रत्न: आज मैं बहुत ख़ुशी hoo…ki मुझे इतनी अच्छी बहु मिली hai..tum सब राजू के लिए एक दम सही ho..main जानती hoon..woh हम सब को बहुत खुश रखेगा..

वहीँ कोने में कड़ी हो कर रानी भी यह सब बातें सुन रही thi..aur उनकी बातें सुनकर उसकी आँखों में भी आंसूं आ जाते है..

रत्न रानी को देख लेती है और इशारे से उसको भी अपने पास बुला कर उसको गले लगा कर..

तू भी तो एक तरीके से इस परिवार का हिस्सा ho..to तुम कैसे अलग हो सकती हो..

रानी भी खुश हो जाती है और रोने लग जाती है..

रत्न: nahi..aise ख़ुशी के मौके पे रोना नहीं hai…Sandhya भी रानी को अपनी बाहों में लेकर उसको दिलासा देती है और उसे संभालती है..

थोड़ा और ऐसे hi बातें करके रत्न कहती है..

रत्न: एक एहम baat…main पंडितजी से बात कर ली hai…aaj का दिन बहुत शुभ hai..to आज रात राजू और छोटी (सुधा) का सुहागरात होगा… और 2 दिन बाद ारु और संध्या भी…

यह सुनकर सुधा शर्मा जाती है और कहती है..

सुधा: आज ारु को करने दो naa….mera फिर भी हो जाएगा..

रत्न: नहीं रे chhoti…Panditji ने बताया है की आज की रात तुम दोनों के लिए अच्छा hai…to सुधा कुछ नहीं कह पाती.

रत्न - रानी और संध्या se…kamre को अच्छे से सजा dena..main और ारु सुधा को तैयार करते है..

<बैक तो प्रेजेंट>

घर में ख़ुशी का माहौल रहता hai…sab खाना खा कर राजू कमरे में सोने जाता तो रत्न उसे रोकती है और कहती है की अभी के लिए वह उसके (रत्न) के रूम में सो jaaye..aur राजू को भेज देती है..

घर की औरतें सब फिर से थोड़ी तैयारी में जुट जाती है..

ऐसे hi रात हो जाती है और रात को खाना खाने के बाद राजू सब की तरफ देखता है तो रत्न उसे अपने कमरे में ले जाती है..

रत्न: सुन Raju..aaj तेरी सुहागरात hai..to आज सुधा hi तेरे पास aayegi…Aaru और संध्या 2 दिन baad..aisa पंडितजी ने कहा है..

राजू हाँ कहता है और कमरे में जाने को होता है तो रत्न उसे रोकती है और धीरे से उसके कान में कहती है..

रत्न: beta…tumhe पता hoga..chhoti की भी उम्र हो रही hai..to मैं चाहती हूँ की वह मुझे जल्दी hi खुश खबर de…Raju को पहले यह बात समझ नहीं आती लेकिन कुछ सेकण्ड्स बाद जब उसको इस बात का मतलब समझ आता है तो है देता है और रत्न को भी अपने बाहों में lekar…uske होंठ चूमते hue..waise आपकी भी थोड़ी उम्र हो रही hai..jab मैं आपसे शादी करूंगा तो आप भी मुझे जल्दी hi खुश खबर देना…

रत्न: चल jhoote..bahut बदमाश हो गया hai..jaa और आराम से करना..

राजू भी रत्न की टांग खींचते hue…kaho तो आज सुधा की चीखें निकलवा दूँ क्या??

रत्न भी हल्का सा राजू को मुक्का मारती है और उसे उसके कमरे में भेज देती है..

कमरे में जाने से पहले राजू चुपके से किचन में जाता हैं और एक कटोरी में तेल लेकर कमरे की तरफ चला जाता है..

नोट: जैसे मैंने कहा tha...the एंटीरे अपडेट वास् गेटिंग वैरी long..so, हद तो स्प्लिट it...next अपडेट में suhaagraat...saath बने rahiye..will पोस्ट थे नेक्स्ट अपडेट सून.
 
अपडेट 39: राजू और सुधा का डबल मस्ती और मजा (मेगा अपडेट)

सुहागरात:

राजू कमरे के अंदर जाता है तो कमरे देख कर उसकी आँखें बड़ी हो जाती hai..kamra एकदम फूलों से सजाया हुआ tha..aur बिस्तर के बीच में सुधा लाल कलर के शादी के जोड़े में घूंघट ओढ़ कर बैठी हुई थी..

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कमरा पूरा भीनी भीनी खुशबू से महक रहा था..

राजू दरवाज़ा बंद कर के धीरे से बिस्तर के पास जाता है तो सुधा भी थोड़ा पीछे हैट के राजू के लिए बिस्तर में थोड़ा जगह देती है..

राजू ने सुधा के चेहरे से घूंघट उठाया तो देखा की सुधा अपनी नज़रें नीचे किये हुए hai..waise तो राजू ने यह चेहरा काफी बार देखा tha..lekin आज की बात अलग thi..dono मिया बीवी बन गए थे और दोनों को थोड़ा शर्माना लाजमी था..

आज सुधा का चेहरा एकदम चमक रहा tha..uska चेहरा पूरे गहनों से सजा हुआ tha..maathe पे sindoor..gale में haar..naak में nath..ekdum अप्सरा जैसी लग रही थी सुधा..

राजू सुधा का घूंघट उठा कर उसको देखते हुए…

सुधा: ऐसा क्या देख रहे हो? पहले कभी नहीं देखा क्या?

राजू: देखा तो बहुत बार hai..lekin आज जो बात तुम में hai..woh पहले कभी नहीं thi..aur आज तो तुम किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही हो..

सुधा अपनी तारीफ़ सुन कर खुश हो जाती है..

राजू इससे पहले की कुछ कहता, सुधा बिस्तर से उठ जाती है और बगल में रखे दूध का गिलास लेकर राजू को देती है और उसे पीने कहती है..

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फिर दोनों मिल कर थोड़ा दूध पीते है..

राजू सुधा को पकड़ कर एक बार फिर से उसे देखता है और कहता hai..jitna भी तारीफ़ karoon..aaj तो काम hi lagega..itni खूबसूरत लग रही ho..apni नज़रें नीचे कर के उसके सीने पे डालता है तो देखता है की एकदम लौ कट ब्लाउज में उसकी आड़े से ज़्यादा चूचियां बहार झलक रही है और बाहर आने को तड़प रही है..

सुधा उसकी नज़र का पीछा करते हुए देखती है तो शर्मा जाती है..

राजू फिर सुधा को बिस्तर पे hi उसका कन्धा पकड़ कर खड़ा कर देता hai…aur उसे ऊपर से नीचे तक देखता है तो उसे भी रहा नहीं जाता और लार टपकने लगता hai…Woh लग hi रही थी इतनी sundar..deep लौ कट ट्रांसपेरेंट blouse..lehanga भी ट्रांसपेरेंट और नाभि के 2 इंच नीचे बंधा हुआ tha…phir राजू वैसे hi खड़े खड़े सुधा को घुमाता है तो पाटा है की उसकी ब्लाउज बैकलेस है और सिर्फ एक धागे से बंधी हुई hai..aur फिर थोड़ा नीचे उसकी थोड़ी उठी हुई गांड भी उस लहंगे में केहर धा रही थी..

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राजू से सबर नहीं होता और वैसे hi लहंगे के ऊपर से उसकी गांड के पाटो को चूम लेता है तो सुधा की धीरे से आहात निकल जाती hai..Sudha भी राजू की हरकत से गरमा जाती है और उसकी टांगों के बीच हलचल होती है और महसूस करती है की उसकी पंतय भी पूरी गीली हो गयी है और छूट से रास बह रहा है..

राजू: jaan..aaj तो तुम केहर धा रही ho..lagta है मेरी जान निकल jaayegi…itni खूबसूरत लग रही ho..aisa कहते हुए राजू सुधा को फिर से बिठा देता है..

राजू जब यह बात कहता है तो सुधा अपना हाथ उसके मुँह पे रख kar…aise शुभ समय मैं अशुभ बाते ना करो..

राजू: तो फिर मुँह मीठा कर do…aisa कहते हुए राजू आगे बढ़ता है और सुधा को अपनी आग़ोश में लेकर उसके होंठों को चूमता है….

सुधा जो राजू के हरकत से पहले से hi उत्तेजित thi..woh भी पूरा साथ देते हुए राजू पर टूट पड़ती है और उसके चुम्बनों का जवाब भी ऐसे hi देती hai…dono एक गहरे किश में डूब जाते hai..dono की जीभ आपस में टकराती है और एक दुसरे की जुबां को मुँह में लेकर चूसते चले जाते है…5-10 मं तक ऐसा hi गहरा किश चलता hai..kiss तोड़ने पर दोनों की साँसों में हलचल होती है और सुधा के होंठों की लाली भी चली जाती है..

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दोनों एक दुसरे को देख कर हस्ते है और फिर से दोनों के होंठ फिर से जुड़ जाते है..

राजू धीरे से सुधा के कान में: हमने जो उन्देर्गर्मेन्ट्स खरीदे the..tumhaare liye..pehni की नहीं?

सुधा: आप hi देख लो…

और सुधा फिर से राजू को किश करने लग जाती है..

इस बार राजू अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्लाउज की डोरी खोल देता hai…Sudha को जब अहसास होता है तो वह भी उसकी मदत करते हुए अपने बदन से ब्लाउज अलग कर देती है..

छोटी लाल ब्रा में सुधा की चूचियां केहर धा रहे थे..

राजू फिर किश तोड़ते हुए उन पर टूट पड़ता है और ब्रा के ऊपर से hi एक को किश करते हुए दुसरे को ज़ोर से दबाता है..

Sudha..oohhh…dheere दबाओ naa…dard हो रहा है..

राजू फिर प्यार से उसकी चुकी चूसता रहता है…

राजू चुकी चूसते हुए अपनी आँखें ऊपर कर ke…dekhna…9 महीने के अंदर इसमें दूध आ jaayega…mujhe भी अपना दूध पिलाओगी ना?

सुधा शर्मा जाती hai..dhat..aise कोई बात करता है क्या?

राजू: मैं तो करूंगा hi..aur फिर से स्तन मर्दन में लग जाता है..

इस बार राजू अपना हाथ नीचे ले जाकर लहंगे की डोरी भी खोलने की कोशिश करता hai..lekin खुल नहीं पाटा तो सुधा है देती है और अपनी गांड उठा के खुद डोरी को लूसे करती है तो राजू भी डोरी पूरी निकल कर लहंगे को भी निकल देता है…

और देखता है की सुधा ने वही bra-panty पहना tha..jo 2 दिन पहले उन दोनों ने शॉपिंग की थी…

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अब सुधा एकदम सिर्फ एक छोटी सी ट्रांसपेरेंट लाल ब्रा पंतय में खूबसूरत माल और सेक्सी लग रही थी..

राजू से भी रहा नहीं जाता और सुधा पर टूट पड़ता hai…bra को निकल कर एक चुकी को मुँह में भर के मस्त चूसते हुए निप्पल को खींचता है तो वहीँ दूसरी चुकी को दबाता रहता hai..beech बीच में …मस्ती में आकर हु निप्पल को हल्का सा kaat-ta है तो सुधा aah…ki सिसके लेते hue…kaat-te क्यों ho…dard होता hai..thoda धीरे से चूसो naa..kehti है..

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फिर वही हाल दूसरी चुकी का भी करता hai..woh दोनों चूचियों पर जगह जगह पे काट के लव बिट्स देता hai…Sudha सिसकियाँ लेती रहती hai..aur आहें भर्ती हुई उसकी टांगों के बीच भी हलचल मच जाती है और रास छोड़ती है जिसकी वजह से उसकी छोटी पंतय पूरी गीली हो जाती है..

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दोनों चूचियों से अच्छे से खेलने के बाद राजू फिर से सुधा को किश करता है जिसमें सुधा को भी बहुत मजा आता है..

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सुधा जब अपनी आँखें नीचे कर के अपने सीने पर देखती है तो उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है..

सुधा: क्या कर दिया है jaanu..meri चूचियों kaa..dekho ..जगह जगह पर निशाँ पद गए है..

राजू: Jaanu..yeh हमारी पहली रात की निशानी hai..tumhe तो पता है naa..ise लव बिट्स कहते hai..aur है देता है..

राजू सुधा के कान में धीरे se…ab जन्नत की सैर के लिए तैयार हो jaao..aur ऐसा कहते हुए राजू फिर से सुधा को चूमते हुए नीचे सरकता है और उसकी गहरी नाभि को अच्छे से चूमते हुए chaat-ta hai…Raju के इस हरकत से सुधा की फिर से सिसकारी निकल जाती है और राजू का सर उसकी नाभि में दबा देती है..

राजू जब उसकी नाभि को चूमता hai..us वक़्त अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी छूट को पंतय के ऊपर से सहलाता hai…aur पाटा है की पंतय पूरी गीली हुई है..

राजू अपने उँगलियों को मुँह के पास लेकर सुधा को देखते हुए चाट जाता है और कहता है की रास तो बहुत मीठा hai…Sudha यह बात सुन कर शर्मा जाती है..

राजू फिर नीचे सरकते हुए उसको कोमल और मुलायम जांघो जो चूमते chaat-te हुए अपनी नाक को पंतय के उपरसे छूट पे रख कर एक गहरा सांस लेता hai…Sudha से रहा नहीं जाता और फिर से राजू का सर उसकी छूट पे दबा देती है और ाँहें भर्ती है..

सुधा: jaanu…kyun तड़पा रहे ho…main मरी जा रही hoon…kuch तो करो..

राजू: वही तो कर रहा hoon..aur ऐसा कहते हुए उसकी पंतय भी निकल देता है जिसमे सुधा भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा कर पंतय को निकलवाती है..

रास से भर एकदम चिकने मुलायम और पाँव रोटी की तरह फूली हुए छूट को देख कर राजू भी लार टपकाता है और उसकी छूट पर टूट पैदा hai…upar से नीचे तक chaat-ta रहता है और अपनी जुबां को नुकीली कर के उसकी छूट के अंदर घुसता hai..maano जैसे उसकी छूट को छोड़ रहा हो..

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सुधा की धड़कने तेज हो जाती hai..aur aaah…ooohh…aah…marrrr gayi..jaise बडबाति है..

राजू भी बड़ी शिद्दत से उसकी छूट की सेवा करता hai..aur केवल 2 मं में hi सुधा फिर से अपना पानी निकल देती है जिसे राजू बड़े चाव से पी जाता hai..Sudha इस हमले से एकदम अड़मारे जैसा पड़ी रहती है और अपनी साँसों को दुरुस्त करने की कोशिश करती है..

थोड़ी देर बाद राजू ऐसे hi उसकी छूट फिर से चाटने के बाद ऊपर सुधा की तरफ आकर अपनी जुबां उसकी मुँह में दाल देता hai…Sudha भी अपना रास चक्ति है राजू के मुँह से..

राजू: क्यों मजा आया naa…apna रास चख कर..

सुधा: dhat..aisi बात ना करो jaanu..mujhe शर्म आती है..

राजू: कोई nahi…dekhna ..एक हफ्ते के अंदर तुम सबकी शर्म दूर कर doonga..yaad है naa…agle हफ्ते से हम अब एक hi बिस्तर पर सोने वाले hai..aur ऐसा कहते हुए राजू सुधा को आँख मार देता है..

राजू: jaanu…ab तुम अपना कमाल दिखाओ..

सुधा को कुछ समझ नहीं आता तो राजू हस्ते हुए कहता hai…apna कमाल याने अपने हाथ और मुँह का kamaal…jab सुधा को समझ आता है तो हस्ते हुए राजू को बगल में सुला कर उसके ऊपर आ जाती hai…ukso फिर से चूमते हुए राजू की निप्पल को अपने मूहमें लेकर चूसते हुए वह भी नीचे की तरफ जाती hai..jahan उसके अंडरवियर में तम्बू बना हुआ था…

सुधा: उसके लुंड को अंडरवियर के ऊपर से hi पकड़ते hue…yeh तो आज कुछ ज़्यादा hi बड़ा लग रहा है..

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राजू: haan..lagega hi naa…aaj की रात हमारी जो स्पेशल है और तुम्हारी “सब” गुफाओं में घूमने के लिए मचल रहा है..

सुधा फिर उसके अंडरवियर को निकल फेकती है और लुंड को मुँह में लेकर लोल्लयपोप की तरह चूसती चली जाती है..

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राजू: aaah..ahhhh..jaanu..tum तो बहुत मस्त चूस रही ho..mujhe भी जन्नत की सैर करा रही ho…aise hi 10 मं तक सुधा राजू का लुंड चूस रही thi…yaa फिर मानो की राजू उसकी मुँह को छोड़ रहा tha…aur अपना पूरा लुंड उसके गले तक उतार देता hai…jiske चलते उसका लुंड एक लोहे की रोड की तरह हो जाती hai..jo की एक विकराल रूप में सुधा के थूक से सना हुआ tha…aur मचल रहा tha…Sudha भी उसका लुंड मुँह से निकल कर गहरी गहरी सांस लेती hai…aur कहती hai..jaan लेने का इरादा है क्या?

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राजू भी मस्ती mein…jaan nahi…choot…

राजू फिर से अपना लुंड उसकी मुँह में डालने की कोशिश करता है तो सुधा कहती hai…nahi ना jaanu…ab मेरा मुँह दुःख रहा hai..main भी मचल रही hoon…aaonaa..mujhe में समां जाओ…

राजू भी समझ जाता है की अब देर करना सही नहीं होगा…

राजू फिर सुधा को पलट कर उसे सुला कर उसके ऊपर आ जाता है और उसकी आँखों में देखते हुए अपने लुंड का टोपा उसकी छूट पर रख कर एक हल्का सा धक्का देता hai..Sudha aah..karti hai…phir से राजू थोड़ा दबाव बनाता है और उसका आधा मोटा लुंड सुधा की छूट में चला जाता है.. सुधा को थोड़ा दर्द का एहसास होता है लेकिन अपनी मुट्ठी को कास के चादर को पकड़ लेती है…

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राजू सुधा की आँखों में देखते हुए अपना लुंड बाहर टोपे तक निकालता है और देखते देखते एक ज़बरदस्त शॉट मारता hai..aur उसका लुंड सुधा की छूट को चीरते हुए पूरा जड़ तक समां जाता hai….Raju भी उसी वक़्त अपने होंठ सुधा के होंठ से जोड़ देता है जिसकी वजह से सुधा की चीख राजू के होंठों में डाब जाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहते है..

एक मं baad…Raju: कुछ नहीं हुआ jaanu..jo होना tha..ho gaya..ab तो बस मजे hi मजे hai..aur अपनी जुबां से उसके आंसूं पी जाता है..

जब सुधा को थोड़ी राहत मिलती है तो राजू फिर से धीरे धीरे झटके मारना शुरू करता hai…Sudha भी राजू की आँखों में देखते हुए हाँ में सर हिलती है तो राजू तो पता चल जाता है की अब उसका दर्द काम हो गया है तो राजू भी अपनी धक्कों की स्पीड बढ़ा देता है और ज़बरदस्त प्लेन शुरू कर देता है..10 मं तक राजू सुधा को इसी पोजीशन में पेलता hai…itne वक़्त में ना जाने सुधा कितनी बार झाड़ चुकी होती है..

10 मं baad…Raju सुधा se..jaanu..ab तुम मेरे ऊपर आ jaao..aisa कहते हुए राजू लेट जाता है और सुधा राजू के खड़े लुंड पे अपनी छूट रखते हुए उस पर बैठ जाती hai..aur उछलना शुरू कर देती hai…is पोजीशन में राजू उसकी चूची को दबाते हुए वह भी नीचे से धक्का लगाता रहता है..

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थोड़ी देर baad..Sudha: क्यों jaanu..thak नहीं गए क्या? इतनी देर से लगे हुए हो..

राजू भी शरारत se:..kya लगा हुआ hoon..khul कर bolo..kaha था naa..bistar पे शर्म छोड़ दो..

सुधा भी हस्ते hue…to आप सुधरोगे नहीं..

राजू: तो “तुम” से “आप” में आ गयी हो..

सुधा: haan..kyun nahi..hamaare पति जो बन गए ho..aur ऐसा कहते हुए सुधा राजू के होंठ चूम लेती है और धीरे से उसके कान mein..itni देर से छोड़ रहे ho..thakte नहीं क्या?

राजू: आज कोई थकने की रात है क्या? जब राजू यह बात बोलता है तो सुधा अपना मुँह खोलकर आश्चर्य से राजू को डेक्टि रहती है..

सुधा: क्या कह रहे हो? मुझे कुछ समझ नहीं आया..

राजू: कोई nahi..sab समझ आ jaayega…ab पलट jaato…Sudha ऐसे hi राजू के लुंड पे बैठे hi पलट जाती है और उसके लुंड पे उछलती रहती hai..is पोजीशन में सुधा की पीठ राजू की तरफ थी और उसकी गांड भी राजू के आँखों के सामने थी..

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फिर से एक धुआंदार चुदाई का दौर चलता है और कोई 10 मं बाद राजू सुधा से कहता hai…mera होने वाला है…

सुधा झट से उसके लुंड से उठ कर उसके बगल में सो जाती hai…Raju को कुछ समझ नहीं आता तो सुधा कहती hai..aa जाओ jaanu…mere upar…apni दोनों उभरी हुई चूचियों को दबा kar..aap hi ने कुछ देर पहले कहा था naa..ismein से आपको दूध पीना hai…to अपना यह रास मेरे अंदर hi daalo..taaki हम दोनों का प्यार भी जल्दी hi पनप जाए..

राजू भी सुधा की बात पे है देता है और प्यार से कहता hai..mujhe बहुत ख़ुशी है की मुझे इतनी प्यारी बीवी मिल gayi..aur उसके ऊपर आकर फिर से उसके होंठ चूमते हुए फिर से छोड़ना शुरू कर देता है और कोई 2-3 मं में hi राजू भी झाड़ जाता hai…aaaahhhh…ooohhh…uuuufff…maaiiiiiinnnnnnn अअअअअअअ राहाआआआआ होऊणणन्न..

और ऐसा कहते हुए वह भी झड़ने लगता है और अपनी साड़ी पिचकारी सुधा के अंदर hi छोड़ता hai..lagbhag 1-2 मं तक अपना पानी निकालते रहता hai…Sudha यह देख kar..baap रे baap…itna ras…lagta है अगले महीने hi मैं आपको खुश खबर दे दूँ..

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राजू: मैं भी तो यही चाहता hoon..ki तुम भी मुझे जल्दी hi खुश खबर दे दो..

दोनों hi थके हरे एक दुसरे के बगल में लेट जाती है और सुधा अपना चेहरा राजू के कंधे पे रख कर लेट जाती है..

थोड़ी देर बाद राजू उठता है और सुधा को भी उठा कर अपनी गॉड में लेते हुए बाथरूम जाता है जहाँ दोनों फ्रेश हो कर आकर बिस्तर पे लेट जाते है..

बिस्तर पे let-te वक़्त सुधा एक तिरछी नज़र से बगल के टेबल पे रखे तेल की बोतल को देख लेती है लेकिन कुछ नहीं keti…jaise मानो उसने वह बोतल देखि hi ना हो..

सुधा: jaanu..aapne तो मुझे एकदम से थका hi दिया hai..main बहुत थक गयी hoo..neend आ रही है..

राजू: इतनी जल्दी कैसे neend..aaj तो मैं तुम्हे सोने नहीं doonga..Sudha राजू के कंधे पे प्यार से चपत मारते hue..chhi..aisa क्यों कहते हो?

राजू: अरे bhai..aaj तो हमारी सुहागरात hai..licence भी मिल गया hai…kal सुबह लेट भी उठे तो कोई कुछ नहीं पूछेगा…

आखिर पिछवाड़ा खुल hi गयी..

5-10 मं के बाद दोनों ऐसे hi बातें करते हुए..

राजू: jaanu…yaad hai..jab हम पहली बार नहाने के टाइम पे मिले थे तो तुमने क्या कहा था..

सुधा को पता tha..phir भी थोड़ा नाटक करते hue..kya कहा tha..mujhe याद नहीं है..

राजू: accha..mujhse hi झूट बोल रही हो?

सुधा है देती है उस बात pe..to राजू कहता hai..dekho बगल में टेबल पे क्या रखा hai..tumhaare लिए कुछ लाया hooni..aur हल्का सा है देता है..

सुधा: क्या लाये हो?

राजू: तुम खुद hi देख लो..

सुधा पलट कर टेबल पे देखती है तो एक तेल की बोतल दिखाई देती है..

सुधा: यह तेल का बोतल क्यों है यहाँ पर?

राजू धीरे से उसके कान mein..yaad है तुमने hi कहा था की शादी के बाद तुम अपनी कुंवारी गांड मुझे dogi..aur वैसे भी सुहागरात में कुछ तो कुंवारी मिलनी चाहिए ना मुझे…

सुधा इस बात पे शर्मा जाती है और कहती hai..aakhir आप मानोगे नहीं..

राजू: nahi..maanne का सवाल hi नहीं है..

सुधा: आप भी naa..bahut जिद्दी हो..

राजू: तो अपने यार को तैयार कर दो फिर से …और सुधा का हाथ उसके लुंड पे रख देता है..

सुधा भी समझ जाती है और उसके लुंड पे तेल दाल के मुठियाती है…

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उसकी म्हणत का फल जल्दी hi रंग लाता है और फिर से राजू का लुंड एक लोहे की रोड की तरह तन कर खड़ा हो जाता hai..jo तेल से पूरा सना हुआ था..

सुधा भी फिर पलट कर उसके बगल में जाती है और कहती hai..zara आराम se..aaj hi आप इसकी सील खोलने वाले ho..main पहले कभी नहीं लिया वहां पे..

राजू: फिर se..khul कर bolo..tabhi तो तुम्हे भी मजा आएगा..

सुधा: आप भी naa…to suno…maine पहले कभी गांड नहीं मरवाई hai..to थोड़ा धीरे से करना..

राजू: सुधा के कान mein..haan jaanu…pata hai..ekdum धीरे और प्यार से करूंगा…

और ऐसा कहते हुए राजू सुधा को फिर से छूट से लेकर गांड तक चाटने लगता है..

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सुधा भी बहक जाती है और राजू का सर उसकी छूट पे दबा देती है…

राजू: ऐसा karo..tum घोड़ी बन jaao…chaatne और लुंड डालने में और मजा आएगा..

तो सुधा पलट कर बिस्तर पे घोड़ी बन जाती है जिसकी वजह से उसकी गांड भी उभर कर आ जाती है..

राजू फिर से इस बार उसकी गांड chaat-ta hai..Sudha भी ाँहें भरते हुए अपनी मुट्ठी को चादर को पकड़ लेती है..

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राजू फिर एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो ऊँगली जाती नहीं hai…gand जो इतनी कासी हुई thi…to राजू फिर थोड़ा तेल उसकी गांड में डालता है और उसे चिकना करता है और अपने हाथ में भी तेल लगा कर फिर से ऊँगली डालने की कोशिश करता hai…chikna होने की वजह से ऊँगली घुस जाती है और सुधा के मुँह से aaahhh..ki कराह निकल जाती है और अपनी मुट्ठी भींच लेती है..

उसी वक़्त राजू भी थोड़ा तेल अपने खड़े लुंड पर दाल कर उसे भी चिंका और गीला कर देता है..

इस बार राजू अपनी दो उंगलियां उसकी गांड में दाल देता है तो सुधा भी फिर से आँखें भरते हुए उसकी गांड को कास लेती है जिस वजह से राजू की उंगलियां उसकी गांड में थम जाती है..

सुधा: aah…kya करते हो jaanu..dard हो रहा है..

राजू हलके से उसकी गांड पे चपत लगाते hue..gand को कास लेगी तो दर्द तो होगा hi naa..thoda गांड को ढीला कर दो..

राजू के बात मान कर सुधा अपनी गांड को थोड़ा ढीला करती है तो इस बार राजू की उंगलियां थोड़ा आराम से उसकी गांड में चला जाता है और राजू अपनी उँगलियों को अंदर बहार करता hai..main जैसे उसकी गांड को उँगलियों से छोड़ रहा हो..

अब उसकी गांड थोड़ी खुल गयी thi..aur राजू फिर से उसके लुंड पे तेल लगा के उसके लुंड को सुधा की गांड के छेद पर रखता है और हल्का सा धक्का देता है..

थोड़ा खुला होने और चिकनी होने की वजह से राजू के लुंड का सूपड़ा पहहकक की आवाज़ से थोड़ा अंदर चले जाता hai…Sudha भी चिक्ति है और अपना एक हाथ मुँह पे रख कर चीख को मुँह में hi दबा देती hai..aur उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है..

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राजू: हो गया jaan…abhi थोड़ी देर और तकलीफ hogi..sehan कर lena..aur फिर बाद में मजे hi मजे होगा..

सुधा थोड़ी रोने की आवाज़ में: आपको क्या hai…takleef तो मुझे हो रही है..

राजू: मैं जाता हूँ jaan…aur राजू वही रुक जाता है और सुधा को थोड़ा सांस लेने में मदत करता है..

राजू फिर झुक कर सुधा के पीठ को चूम लेता है जिससे सुधा को थोड़ी रहत मिलती है और अपने जात आगे ले जाकर उसकी दोनों चुकी थाम लेता है और दबाने लग जाता है..

इस हरकत से सुधा का ध्यान भटक जाता है और राजू के स्तन मर्दन में थोड़ा खो जाती है..

ध्यान भटकने की वजह से सुधा को अपनी गांड में लुंड का एहसास काम होता है और एहि मौका देख कर राजू फिर से एक धक्का मारता hai..jiske चलते उसका आधा लुंड सुधा की गांड में चला जाता है..

सुधा फिर से इस बार अपनी चीख नहीं रोक पाती और चीख पड़ती hai..usi वक़्त राजू अपना हाथ सुधा के मुँह पे रख कर उसकी चीख को रोक लेता hai..aur सुधा की चीख राजू के हाथ में hi डाब जाती है.

सुधा: आह राजू (पहली बार शादी के बाद सुधा राजू का नाम ले रही थी क्यूंकि ुक्सो उतनी तकलीफ हो रही thi)..lagta है आप नहीं maanoge..uufffff…ooohh…mmaarrrrrrrr गैय्यीइइइइइइ और सुधा छटपटाने लगती है..

राजू फिर अपना एक हाथ उसकी कमर पे रखते हुए उकसी छूट पे ले जाता है और उसको सहलाता hai…aur अपनी दो उंगलियां उसकी छूट में घुसा देता है..

सुधा: aah…kya कर रहे हो राजू?

सुधा: कुछ नहीं jaan..tumhaara मजा दुगना कर रहा हूँ और फिर राजू धीरे से अपनी उंगलियां अंदर बहार करता है जिससे सुधा को भी थोड़ी रहत मिलती है…

फिर से सुधा अपना दर्द भूल जाती है (या फिर उसका ध्यान फिर से भटक जाता है) और आँहें भरते हुए उसकी छूट पे हो रहे हमले का मजा लेती है..

राजू भी मौका देख कर एक और तगड़ा झटका लगाता है और इस बार उसका पूरा 8” मोटा लुंड पूरा सुधा की गांड की जड़ में समा जाता है…

सुधा इस हमले को झेल नहीं पाती और फिर से अपनी मुट्ठियाँ भींचे हुए चादर को पकड़ लेती hai..aur अपना सर तकिये पे घुसा देती है जिसकी वजह से उसकी चीख भी तकिये पे डाब जाट hai..aur उसकी आँखों से फिर से पानी बेहटा hai..dard की वजह से..

राजू को पता था की पहली बार दर्द hoga..isiliye हु अपनी दोनों उँगलियों को उसकी छूट में hi रख कर अंदर बाहर करने लगता hai…lekin अपने लुंड को निकलता नहीं है बल्कि स्थिर रहता है..2-3 मं बाद सुधा को थोड़ी रहत मिलती है तो राजू धीरे धीरे अपने लुंड को आगे पीछे करता hai..chiknahat की वजह से अब लुंड थोड़ा आसानी से अंदर बहार होता है और कुछ hi पल में राजू भी अपनी धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता है और गांड पेले शुरू कर देता hai…Raju अपनी उंगलियां उसकी छूट से निकल कर दोनों चुकी पकड़ लेता है और दबाने लग जाता है..

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अब सुधा को दो तरफ़ा प्रहार हो रहा था.. जिसको वह सेहन नहीं कर पाती और भर भर के अपना रास निकल लेती है…

अब सुधा भी मस्ती के सागर में डूबते चली जाती hai..ab उसको भी मजा आ रहा tha..gand मरवाने में..

सुधा: हाँ jaanu..aise hi मेरी गांड maaro..bahut मजा आ रहा है…

राजू: मैंने कहा था naa…pehle dard/saja..phir maja…aur ऐसे hi राजू भी सुधा की गांड मारने लगता है..

अब कमरे में थप थप की आवाज़ एक ले में गूँज रही thi..aur इसमें दोनों को भी मजा आ रहा था….

क्यूंकि यह दोनों के लिए पहली बार tha..jab राजू सुधा की गांड मार रहा tha..to दोनों hi ज़्यादा देर सेहन नहीं कर paaye…jahan सुधा अपनी मस्ती में पानी छोड़े जा रही thi..wahi राजू भी ज़्यादा देर नहीं रुक पाटा है 2-3 मं में hi धक्का लगाते हुए उसकी गांड में झाड़ जाता है..

राजू भी थक कर बगल में लेट जाता है और सुधा भी मस्ती में थके हरे राजू के कंधे पे सर रख कर आँख मूँद लेती है..

राजू: मजा आया क्या तुमको?

सुधा: haan..maja तो aaya..lekin दर्द भी बहुत हुआ..

राजू टाइम देखता है तो आधी रात हो चुकी thi..yaane वह दोनों 2-3 घंटो से मजे ले रहे थे..

राजू मज़ाक mein…dard में hi तो मजा hai..aur हलके से उसका माथा चूम लेता hai..dono थके हुए होते है तो जल्दी hi दोनों की आँख लग जाती है..

बाथरूम में मस्ती..

अगली सुबह राजू की जल्दी नींद खुल जाती है और हु बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाता है और बिस्तर पे आके लेट जाता है ,,

इतने में सुधा भी उठ जाती है और डेक्ठी है की राजू पहले से hi उठा हुआ hai..Sudha धीरे से उसके होंठ चूम kar..itni जल्दी कैसे उठ गए?

राजू: कुछ nahi..neend खुल गयी तो जाग गया..

सुधा फिर उठ कर हु भी बाथरूम में जाने की कोशिश करती है तो उससे चला नहीं जा रहा tha…Raju उसको देख कर है देता है तो सुधा रूठा से मुँह बनाते hue…has क्यों रहे ho..thoda मदत कर दो naa..dekho…mujhse चला भी नहीं जा रहा है..

राजू भी मस्ती mein…ab ऐसे चलने की आदत दाल lo…dekhna..roz तुम hi कहोगी mujhse…ki बिना गांड मरवाये तुम्हे नींद नहीं aayegi…aur ऐसा कहते हुए राजू सुधा को अपनी गॉड में उठा के बाथरूम में छोड़ देता है और बहार निकल जाता है..

थोड़ी देर बाद राजू को लगता है की सुधा नाहा रही है तो वह भी बाथरूम में घुस जाता है नहाने के लिए..

बाथरूम में सुधा नहीं रही होती hai…aur उसके गीले बदन को देख कर राजू से भी रहा नहीं जाता और पीछे से सुधा को पकड़ लेता है..

सुधा चौक जाती है और पूछती है की राजू क्यों आया है?

राजू: चलो naa..dono एक साथ नहाते hai..maja भी आएगा..

सुधा मन करती है लेकिन राजू कहाँ मानने वाला tha…woh नहीं मंटा और सुधा को भी शावर के नीचे ले जाता है जहाँ दोनों नहाते हुए मस्ती करते है..

खड़े खड़े hi राजू सुधा को चूम लेता है और उसके कंधो को पकड़ कर उसे नीचे की तरफ करता hai…Sudha समझ जाती है और उसका लुंड मुँह में लेकर चूसने लगती है..

देखते hi देखते उसका लुंड तन कर एकदम खड़ा हो जाता hai…jo की थूक से सना हुआ था..

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वहीँ राजू फर्श पे लेट जाता है और सुधा को उसके मुँह पे बैठने को कहता hai…Sudha भी अपनी बड़ी गांड लेकर राजू के मुँह पे बैठ जाती है और राजू फिर से उसकी छूट से लेकर गांड तक chaat-te चला जाता है

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सुधा भी पलट कर राजू के लुंड को मुठियाती रहती है..

राजू फिर खड़ा होता hai…Sudha को दीवार पे झुका के उसके पीच ाजर पीछे से उसकी गांड को chaat-ta hai…ismein सुधा को भी मजा आ रहा tha..lekin दर्द भी हो रहा था..

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सुधा: suna..abhi वहां मत डालना..

राजू: फिर se…dekhna एक दिन तुम मार khaaogi..aur है देता है..

सुधा: ठीक है baba…aap तो मानने वाले नहीं ho..khud बेशरम हो और मुझे भी बेशरम बना doge….to ठीक है suno…abhi गांड मत maarna..wahan बहुत दुःख रहा hain…theek से चला भी नहीं जा रहा hai…dekha naa..aap hi ने मुझे अपनी गॉड में उठा के यहाँ लाया था..

राजू भी मान जाता है और उसे भी लगता hai..abhi इस समय उसकी गांड मारना ठीक नहीं रहेगा..

राजू अच्छे से गांड चाटने के बाद पीछे से सुधा को पकड़ कर लुंड उसकी छूट में दाल देता है और खड़े खड़े hi उसको पेलने लग जाता है…

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सुधा भी सुबह सुबह मस्ती में ाँहें भर्ती रहती hai..aur राजू भी पेलने में लगा रहता है..

10 मं ऐसे hi छोड़ने के बाद सुधा कहती है…

सुधा: अब मेरे पेअर दुःख रहे ho..zameen पे लिटा दो ना..

राजू भी थोड़ा थका हुआ tha..to हु भी ज़मीन पे लेट कर सुधा को लेता के हु भी उसके पीछे लेट के फिर से पेलना शुरू करता है..

इस पोजीशन में सुधा को भी छुड़वाते हुए बड़ा मजा आ रहा था..

सुधा: आपने ऐसी पोजीशन में चुदाई पहले कभी नहीं ki…kahan से सीखा है?

राजू: पहले कभी मौका hi नहीं mila…ab चिंता मत karo..tumko रोज़ नए नए पोस्टिव में chodunga..aur ऐसा कहते हुए उसकी चुकी दबाते हुए उसके होंठों को चूम लेता है..

10 मं की ऐसी दुमदार चुदाई में सुधा ना जाने कितनी बार झाड़ कर अपना पानी निकाल देती है जो की फर्श पर पड़े पानी से मिल जाता है…

फिर राजू भी झड़ने के कगार में होता hai…is बार सुधा कहती है की उसे उसका रास पीना hai…to राजू भी बड़े मजे से धक्के मारते हुए उसके लुंड को सुधा के मुँह के पास ले जाकर अपना रास पूरा उसको पीला देता hai…Sudha भी बड़े चाव से सब पी जाती है और थोड़ा उसकी चूचियों पे भी गिर जाता है..

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दोनों थोड़ा हाँफते हुए वहीँ फर्श पे लेट जाते है और थोड़ी देर बाद उठ कर दोनों एक साथ नाहा कर बहार निकल जाते है..

आगे क्या hoga..agle अपडेट में jaanenge…saath बने रहिये..

नोट: फ्रेंड्स, थिस इस ओने ऑफ़ थे लांगेस्ट update/episode तहत ी हैवे रिटेन एंड पोस्टेड. (4.7क वर्ड्स) आईटी है ताकें ा लोट ऑफ़ टाइम एंड एफर्ट एंड इमेजिनेशन तो के उप विथ थिस अपडेट. होप यू विल अप्प्रेसियते आईटी. होप तो रिसीव मोरे कमैंट्स. लुक फॉरवर्ड तो आईटी एंड अप्प्रेसियते योर सपोर्ट. थैंक्स.
 
अपडेट 40: रानी का tohfa…(Once Again...Mega अपडेट)..

रत्न और सुधा की इमोशनल बातें:

सुबह…

सुबह राजू और सुधा जल्दी hi तैयार हो जाते है और क्यूंकि सुधा जल्दी उठ गयी थी तो हु किचन में जाकर चाय बना रही होती है…

इतने में रत्न भी उठ जाती है और फ्रेश हो कर जब हु किचन में जाती है चाय बनाने के लिए तो सुधा को देख कर खुश और चौक भी जाती है की इतनी जल्दी हु उठ कैसे गयी..

रत्न: क्यों रे chhoti..itni जल्दी सुबह कैसे उठ गयी?

सुधा: थोड़ा शर्मा kar..kya करून didi..yeh रात भर सोने hi नहीं diye..aur हलके से हस्ते हुए अपनी नज़रें नीचे कर लेती है..

रत्न भी हस्ते हुए और छेड़ते hue..kyun..maja नहीं आया क्या?

सुधा: मजा तो बहुत आया didi…Raju ने साड़ी हड्डी पसली एक कर दी hai..woh तो रात भर लगा hi raha..aur हल्का सा है देती है..

रत्न: यह तो अच्छी बात है naa…aur उसे गले लगा कर धीरे से उसके कान mein..usne अपना माल तेरे अंदर hi छोड़ा ना?

सुधा बड़ी आँखें करते हुए रत्न की और देखती hai..to रत्न फिर से उसके कान में धीरे se..haan..maine hi कहा था राजू se..ki तुझे भी जल्दी से माँ बना de…dekh तेरी भी उम्र हो रही hai…lagbhag 40 की हो रही hai..aur देरी होगी तो मुश्किल hoga..theek है ना?

सुधा: रत्न को अपनी बाहों में भींच कर उसके चेहरे को सामने लाकर आँखों में देखते हुए रत्न के होंठ को गहरे से चूमते हुए..

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आप कितनी समझदार हो didi…aur मेरा कितना ख़याल रखती ho…haan….woh भी एहि कह रहा tha..aur मेरे अंदर hi अपना पानी nikaala..kehte हुए सुधा की आँखों से दो बूँद पानी निकल आता है…

रत्न उसकी आँखें साफ़ करते hue…Sudha कहती hai..yeh तो ख़ुशी के आंसूं है दीदी..

सुधा: तो didi..aaj आप बहार jaayiye..main hi चाय बना कर लाती हूँ..

इतने में बाकी सब भी उठ कर आ जाते है और चाय का वेट करते है..

रत्न को किचन से बहार आता देख कर संध्या पूछती है..

संध्या: माँ ji..aaj चाय नहीं मिलेगी क्या? और है देती है..

रत्न: उसकी टांग खींचते hue…tu किचन में जा और आज सब के लिए चाय बना कर ला..

संध्या भी उसी अंदाज़ mein..kyun nahi..roj आप सब के लिए चाय बनाती ho..aaj मैं चली जाती hoon…aur ऐसा कहते हुए जब हु किचन के अंदर जाती है तो सुधा को पहले से वहां देख कर सरप्राइज हो जाती है और उसके चेहरे पर भी एक कातिल मुस्कान आ जाती है..

सुधा और संध्या की कामुक बातचीत:

दरवाज़े पर खड़े हो कर संध्या सुधा को देखती रहती है..

किचन की दूसरी तरफ से टिया कप्स लेने के लिए सुधा जब 2 कदम लेती है तो उसे ठीक से चला नहीं जाता और थोड़ा लंगड़ाती है..

यह देख कर संध्या अपनी हसी रोक नहीं पाती जो सुधा देख लेती है..

सुधा: क्यों है रही हो कमीनी? (कमीनी वर्ड प्यार se..jhoota गुस्सा दिखाते हुए)

संध्या: सुधा की तान खींचे hue..aap लंगड़ कर क्यों चल रही हो?

सुधा: एहि बात मैं तुम से प्रसून पूछूँगी तो बताना..

संध्या जानते hue..parsoon क्या होने वाला है?

सुधा: accha..mujhe से hi पूछ रही हो जैसे कुछ पता hi नहीं..

संध्या थोड़ा हस्ते hue..main तो मजाक कर रही थी didi..aur अंदर आकर सुधा की मदत कर्त्रे हुए बात करती है..

संध्या: तो कल रात को मजा आया की नहीं?

सुधा: जान भूझ kar…maja तो बहुत aaya…patak पटक कर छोड़ दिया हमारे राजू ने..

संध्या थोड़ा आश्चर्य से अपने मुँह पे हाथ रख kar…aise गन्दी बातें कैसे कर रही हो ड्डी?

सुधा संध्या को अपने और पास बुला kar..dheere से उसके कान mein…ek बात kahoon…kal जब तुम और ारु कमरे में जाओगी तो खुल कर बातें करना …वर्ण राजू तुम्हे बहुत tadpaayega….mera भी कुछ वैसे hi हाल tha..kal रात ka…lekin मुझे भी आखिर खुलना pada..lekin ऐसे खुल कर बात करने में मुझे भी बहुत मजा aaya…kal उसने मेरी गांड की सील भी खोल di…shayad कल तुम दोनों की बारी है…

संध्या इस बात को सुनते hi आँखें बड़ी कर के सुधा की तरफ देखती है तो सुधा हाँ में सर हिला ke…isiliye तो चलने में दिक्कत हो रही hai…tumhaara भी कुछ ऐसे hi हाल होने वाला hai..aur धीरे से संध्या की गांड में चपत मारती है..

संध्या: फिर ारु को भी तैयार करना पड़ेगा फिर…

सुधा: haan..usko भी तैयार कर देना…

संध्या: धीरे से सुधा के कान के पास aakar…waise एक बात बताओं दीदी…

सुधा: क्या?

संध्या: वैसे राजू ने मेरी गांड की सील खोल दी है…

सुधा आश्चर्य से संध्या की और देखे hue…yeh कब हुआ?

संध्या: हु chhodo..kabhi फुरसत में bataaongi…lekin एक hi बार हुआ hai..to अभी भी बहुत टाइट hai..ekdum सील बंद के maafik…aur है देती है..

सुधा: तू तो बड़ा छुपा रुस्तम nikli…bataaya भी नहीं…

संध्या: बताती कैसे? शर्म आती है ना…

वैसे हम सब जब एक hi आदमी की बीवी बन गए है तो हम सब को भी थोड़ा खुलना chahiye..isimein सब की भलाई है..

सुधा: haan..tum एकदम सही कह रही ho..isiliye कल तुम बिंदास में जाओ और मजे करो..

संध्या: वैसे कल कितने बार किया राजू ने?

सुधा: क्या किया??

संध्या: अरे, मैं पूछ रही thi..kal कितने बार राजू ने छोड़ा आपको?

सुधा: क्या bataoon…chod छोड़ के मेरी हालत ख़राब कर di…abhi पूरा बदन दर्द कर रहा है…

टाइम का तो पता nahi…lekin रात को 2 बजे तक तो पेलता raha..aur सुबह बाथरूम में एक और राउंड हो गया hamaara..aur है देती है..

संध्या: बाप re…itni der..thaka नहीं क्या?

और ऐसे hi दोनों सेक्सी बातें करते hue…dono मिलकर चाय बनाते है और चाय लेकर बहार आ जाते है…

सुधा को लंगडता देख कर रत्न भी है देती है लेकिन कुछ नहीं कहती..

राजू भी तिरछी नज़र से सुधा को देख कर अपनी हसी रोक लेता है..

सब मिलके चाय पीते है और फिर सब अपने काम करने के लिए निकल जाते है…

जब नकल रहे होते है तो राजू रानी की तरफ कामुक नज़र से देखता है और कुछ इशारा करता है जो संध्या और सुधा की नज़र से बच नहीं पाती..

रानी जब अपने कमरे में जाती है तो संध्या भी उसके पीछे जाती है और दरवाज़ा बंद कर के रानी से पूछती है तो रानी कहती है की राजू उसे रात को बुला रहा है..

ठाकुर के घर:

वही दूसरी तरफ ठाकुर सुबह अपना काम कर के घर से निकल रहा होता है तो काम्य ठाकुर से पूछती है की हु कहाँ जा रहे है..

ठाकुर उसकी बात सुनकर एकदम गुस्से में आ जाता है और काम्य को गाली देते हुए उसे मारता है और कहता है..

ठाकुर: साली, तूने हिम्मत कैसे की मुझसे पूछने की मैं कहाँ जा रहा हूँ और कब आऊँगा…

Kaamya:to मैंने क्या गलत पुछा?

ठाकुर: चुप कर kutiya..tujhe बताना मैं ज़रूरी नहीं samajhta…kab aaonga..kahan jaaonga..tujhe जान्ने की ज़रुरत नहीं hai..tu सिर्फ घर में hi पड़ी reh..aur ऐसा कहते हुए उसे मारता hai…jiski वजह से काम्य की आँखों में आसूं आ जाते है लेकिन हु कुछ नहीं कर पाती और ठाकुर वैसे hi उसे गाली देते हुए घर से निकल जाता है..

ठाकुर निकलते वक़्त अपने आदमियों से कहता hi की हु काम्य पे नज़र रखे और कुछ गड़बड़ हुई तो उसे बता दे…

काम्य अपनी हालत को कोसते हुए अपनी आंसूं पोछती है और गुस्से से ठाकुर को मन में गाली देते हुए अपना बचा कुछ काम करने लगती है..

काम्य और माला की बातचीत:

दोपहर को काम्य माला को फ़ोन करती है..

काम्य: Mala..kaisi ho..wahan के क्या हाल है?

माला: मैं तो ठीक hoon..tum कैसी हो?

माला जब यह बात काम्य से पूछती है तो उससे रहा नहीं जाता और सुबह हुई ठाकुर से की गए बातें, उसकी गालियां और maarna..sab माला को बताती है और फिर से फ़ोन पे रोटी है..

माला: चुप karo..sab ठीक हो जाएगा..

काम्य: Mala..mera यहाँ दम घुट रहा hai..tum आ जाओ ना यहाँ par..shayad मुझे थोड़ा चैन मिल jaaye..warna पता नहीं मैं क्या कर जाऊँगी..

काम्य की बात सुनकर माला भी थोड़ा परेशान हो जाती है और उसे कुछ गड़बड़ का लगता है और जल्दी hi 1-2 दिन मैं वापस आ जाऊँगी कह कर बात ख़तम कर देती है..

बात ख़तम कर के माला भी वापस आने ना निर्णय ले लेती है और गौरी से कहती है की हु कुछ दिन अपने भाई के पास जा रही hai..aur कुछ समय बाद हु वापस आकर अजय से बात करने की कोशिश करेगी..

गौरी भी उसकी बात मान लेती है और माला वापस कामये के घर निकल जाती है..

राजू जब घर से निकलता है तो देखता है की उस दिन ठाकुर के आदमी उसके घर के आस पास मंडरा नहीं रहे the..Raju थोड़ा सोच में पद जाता है लेकिन उसके बारे में ज़्यादा कुछ नहीं सोचता और खेत की और निकल जाता है..

राजू खेत जा कर अपना काम ख़तम कर के काम्य को फ़ोन करता है..

राजू काम्य से: कैसी हो?

काम्य: जैसे किसी के उसकी दुखी हालत को छेड़ दिया ho..woh राजू से फ़ोन पे बात करते हुए फिर से रो देती है और सुबह ठाकुर से बातचीत की बात भी उसे बता देती है..

राजू: मैं समझ सकता hoon….abhi आऊं क्या वहां पर?

काम्य: नहीं अभी मत aao..khatre से खाली नहीं hai..ghar में अभी भी नौकर है जो मेरी निगरानी कर रहे है..

मैं तुम्हे bataaongi..tab आना..

राजू: ठीक hain..lekin मैंने जो बात तुमसे पूछती thi..uska कुछ पता चला क्या?

काम्य: ज़्यादा कुछ nahi..main पूछ रही थी तो मुझे गाली दिया और मारा bhi..lekin इतना है की हु रोज़ सुबह 9 के बाद निकल जाता है और शाम 7-8 बजे hi आता hai..naa खाना ले जाता है ना खाने आता hai…pata नहीं दोपहर को कहाँ और क्या खाता है..

राजू: ठीक hai..mein देख लेता hoon..aur चिंता मत karo..main जल्दी hi कुछ ऐसा करता हूँ जो तुम्हे सुकून dega…aur फिर बात ख़तम कर देता है..

राजू के घर:

राजू फिर अपना काम कर के शाम को घर लौट आता hai..to पता है की सब सज धज के बेटी hai..sab सेक्सी लग रहे the..khaas कर के sudha..jo टाइट साडी और ब्लाउज में एकदम केहर धा रही thi…usko देख कर राजू भी ललचा जाता hai…aur लार टपकने लगता है..

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ारु और रत्न भी राजू को देख कर हस्ते है और ारु राजू के पास aakar..thoda सबर कर लो Raju….aur आँख मार देती है..

भले hi राजू तीनो से शादी किया tha..lekin घर में अब भी सब नार्मल रहते है और राजू को उसकी के नाम से बुलाते है जैसा पहले था..

राजू भी आस भरी नज़र से सब को देखता है और रानी को भी वैसा hi पाटा है…

खैर सब नार्मल होकर अपने काम में लग जाते है और फिर रात को खाना खा कर सोने जाते है तो रत्न राजू से कहती hai…ek दिन और सबर कर le…Aaru और संध्या तेरे पास कल सोने आएगी..

राजू भी समझ जाता है और हाँ में सर हिला देता है और मजाक में कहता hai..Sudha तो मेरे साथ सो सकती है ना..

रत्न भी है kar..haan..kyun nahi..aur फिर राजू अपने कमरे में चले जाता है और दरवाज़ा बंद कर देता hai..Sudha का इंतज़ार करते हुए..

रानी का तोहफा:

थोड़ी देर बाद उसके दरवाज़े के कोई खटखटा है तो राजू उठ कर एहि सोचते हुए की सुधा होगी, जा कर दरवाज़ा खोलता है तो सामने वाली शख्स को देख कर उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती hai…aur उस शख्स के पीछे एक और औरत कड़ी thi..to दोनों को देख कर राजू अपनी बत्तीसी (32) दिखाते हुए उन्हें अंदर आने को कहता है…

दोनों hi औरत अपनी सेक्सी अंदाज़ में गांड मटकाते हुए अंदर आती hai…aur यह दोनों कोई नहीं बल्कि सुधा और रानी thi..darwaaze पे पहले रानी कड़ी थी और उसके पीछे Sudha..aur दोनों कम्बल ओढ़ कर आये हुए थे..

अंदर आकर सुधा: तुम क्या समझते ho..hum जानते नहीं है क्या? सुबह जिस नज़र से तुम रानी को देख रहे the…hum समझ गए की तुम रानी को फिर से पाना चाहते ho…aur सुधा धीरे से राजू के पास आकर उसके कान mein…tumne तो मुझे कल बेशरम बना hi दिया tha..bolotum रानी को भी छोड़ना चाहते हो ना??

राजू: तुम तो वाकई में समझदार हो गयी ho…aur रानी के सामने hi सुधा को पकड़ कर उसकी होंठ चूसने लगता है जिसमें सुधा भी उसका पूरा साथ देती है…

सुधा: थोड़ा एक मं के लिए सबर तो kari..aur ऐसा कहते हुए सुधा रानी को इशारा करती है और दोनों एक साथ अपना कम्बल निकल कर फ़ेंक देते hai…Raju दोनों के देख कर दांग रह जाता hai…dono एक सेक्सी bra-panty पहने हुए एकदम सेक्सी जान लेवा लग रहे the…khaas कर के सुधा जिसका गदराया हुआ बदन किसी बुड्ढे का भी लुंड खड़ा कर दे..

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राजू इस बार रानी को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा है और उसके होंठों पर टूट पड़ता hai…aur अपनी जुबां उसके मुँह में दाल देता hai…Rani भी वही करती है और दोनों एक दुसरे के मुँह का रास चूस रहे थे…

राजू रानी को चूमते हुए सुधा को भी अपनी तरफ खींचता है और उसको भी चूमता hai..teeno एक दुसरे की जुबां को चूस चाट रहे थे…

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राजू दोनों को चूमते हुए अपना हाथ पीछे ले जाकर दोनों की गांड को मसलता hai..aur दोनों की मुँह से aahh…ki आवाज़ निकल जाती है..

इस किश से तीनो hi गरम हॉग ए थे और एक hi पल में तीनो अपने कपडे बदन से निकल फेंकते है और देखते hi देखते तीनो नंगे हो जाते है..

दोनों सुधा और रानी एकदम कमाल की लग रही thi..thos उत्तेजना के मारे उठी हुई chuchiyaan….balkhaati kamar….gehri नाभि, मांसल चिकनी जांघें और दोनों की रास बहाती चिकनी choot…jise देख कर राजू का सब्र भी टूट जाता hai..aur उसका लुंड भी फूल तन जाता है..

फिर भी हु सुधा को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ और चूचियों को चूमता है तो रानी नीचे बैठ कर उसका तन्नाया हुआ लुंड चूस रही थी, फिर सुधा भी निचे बैठ गई और रानी को देखते हुए लुंड के पीछे के हिस्से को चूमने लगी जिसमें राजू को बहुत मजा आ रहा था.. अगला टोपा रानी के मुँह में था पीछे से सुधा चुम रही थी ..

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फिर दोनों सुधा और रानी अलग अलग साइड से लुंड को चुम रही थी, राजू ने दोनों के सर पड़के और उन दोनों के होंठो के बिच लुंड के धक्के लगाने लगा, राजू के लिए ये बहुत जबरदस्त नजारा था जैसे हु स्वर्ग में पहुँच गया ho..Sudha उसका लुंड चूस रही थी तो वहीँ रानी उसकी गोटियों को मुँह में लेकर चूस रही थी..

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5-7 मं की ज़बरदस्त चूसै के बाद फिर फिर वो सब बिस्तर पे आ गए तो राजू ने रानी को घोड़ी बना दिया और सुधा को रानी के सामने सोने का इशारा kiya…Sudha समझ गयी और अपनी टांगें फैलाये रानी के सामने आ gayi…Rani को भी समझ में आ गया और सुधा की छूट पैर मुँह लगा दिया और बड़ी शिद्दत से सुधा की छूट चाट रही थी और अपनी गांड उठा ली जिसके पीछे राजू पहले से hi तैयार tha..aur इशारा kiya..Raju इशारा पाते है अपने तने हुए लुंड को रानी की छूट पे रख कर एक तगड़ा शॉट मारता है जिसकी वजह से उसका आधे से ज़्यादा लुंड रानीकी छूट में उतर gaya…Rani को सुधा की छूट चाट रही thi..uski आवाज़ सुधा की छूट में hi डाब gayi…Sudha ने देखा की जैसे hi राजू ने अपना लुंड रानी की छूट में घुसाया है उसी वक़्त सुधा ने अपने हाथ से रानी का सर पकड़ कर उसकी छूट पे दबा दिया…

राजू फिर से अपने लुंड को बाहर निकल कर अपने दोनों हाट कर के रानी की कमर को जकड कर इस बार ऐसा शॉट मारा की उसका पूरा 8 इन का लुंड रानी की छूट की जड़ तक चला gaya…Rani को दर्द तो हुआ लेकिन आवाज़ नहीं निकल पायी..

अब रानी पे दोहरा हुम्ला हो रहा tha..peeche से राजू उसकी छूट पेल रहा tha..to सामने से सुधा अपनी छूट उसके मुँह में धस दी thi…maano उसकी मुँह को छोड़ रही हो…

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राजू अपनी चुदाई जारी रखा और कुछ hi मं में रानी का सब्र टूट गया और अपनी पानी छोड़ di…lekin इससे राजू को hi फायदा hua..Pani निकलने की वजह से रानी की छूट की चिकनाहट और बढ़ गयी और बी राजू आराम से उसकी चुदाई करने laga..kuch देर छोड़ने के बाद रानी थक गयी तो दोनों ने अपनी पोजीशन बदल ली…

रानी थक कर बगल में लेट गयी तो सुधा अपनी छूट उसके लुंड पे रख कर उछलने lagi…aur राजू अपना हाथ ले जाकर उसकी चूचियों लो दबाने लगा..

कुछ देर बाद रानी भी सुधा के सामने आ gayi…aur बारी बारी से कभी राजू का लुंड तो कभी सुधा की छूट chaat-ti चली जाती hai…ismein तीनो को बहुत मजा आ रहा था…

राजू का लुंड जब सुधा की छूट से बहार आता तो रानी उसका लुंड मुँह में लेकर चूसती और फिर गीला कर के सुधा की छूट को चूस कर लुंड फिर से उसकी छूट में तेल देती..

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ऐसे hi दुमदार चुदाई 10-15 तक फिर से चलती rahi…jismein दोनों सुधा और रानी ना जाने कितनी बार झड़ी thi…Rani जब दोनों की “सेवा” कर रही थी तो हु अपना एक हाथ से अपना छूट मसल कर अपनी पानी खुद निकालने की कोशिश कर रही थी..

दोनों (रानी और सुधा) थोड़ा थक गए तो राजू से अलग हॉग ए और हफ्ते हुए बिस्तर पे लेट gaye..lekin राजू का लुंड वैसे hi तना हुआ था..

कुछ देर बाद…

रानी राजू के सामने लेट जाती है और अपनी गांड को थोड़ा उठा कर राजू के सामने लेट जाती है और राजू से कहती hai…lo Raju…tumhaara tohfa…maine कहा था na..ki अगर तुम मुझे प्रेग्नेंट कर डोज तो मैं तुम्हे अपनी गांड doongi…aaj हु वक़्त आ गया है जब मैं भी अपनी बात रख लून…

राजू यह बात सुनकर बहुत खुश हो जाता है और रानी के होंठ चूम kar…tum कितने प्यारी ho..jo मेरी बात का इतना ख्याल रखती हो..

रानी: suno..maine कभी वहां पहले नहीं लिया hai..kunwari hai..thoda आराम से करना…

राजू: चिंता मत karo…ekdum आराम से करूंगा मेरी जान…

राजू उसकी गांड की छेद को फील करता है तो पाटा है की हु बहुत टाइट है…

राजू सुधा को इशारा करता है सुधा भी नीचे आ जाती hai..dono बारी बारी से उसकी गांड को चाट कर गीला कर देते hai…aur सुधा भी राजू का लुंड अपने मुँह में लेकर उसे भी गीला कर देती है…5 मं तक दोनों उसकी गांड पे बहुत म्हणत करते है और उसे एकदम चिकना कर देते है..

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राजू रानी से: तैयार हो?? तुम्हे पहले थोड़ा दर्द hoga..jhel lena…phir मजा hi मजा होगा..

रानी: हाँ..

राजू सुधा को इशारा करता है तो सुधा रानी के बगल में लेट जाती है और उसकी चूची को दबा कर थोड़ा उसे भी गरम करती है..

राजू भी अपने लुंड पर अच्छे से थूक लगा कर उसे भी गीला कर देता है और रानी की गांड के छेद पे रख कर धक्का मारता hai..lekin घुसता nahi..to राजू फिर से तरय करता hai..lekin फिर भी नहीं hota..Raju फिर से दोनों जगह पे अच्छे से थूक लगा के इस बार तरय करता है तो बड़ी मुश्किल से ‘फक’ की आवाज़ से उसका लुंड का टोपा अंदर चला जाता है…

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रानी ज़ोर से चिल्लाने को होती है तो सुधा उसका मुँह बंद कर देती hai…Raju वहीँ रुक जाता hai..Rani की आँखों से आंसूं निकल जाते hai..to सुधा उसको थोड़ा दिलासा देते हुए उसके होंठ को चूम कर चुकी मसलती रहती hai..jiski वजह से उसका ध्यान भटक जाता है..2 मं बाद सुधा उसको इशारा करती है तो राजू फिर से एक झटका मारता hai..aur इस बार उसका आधा लुंड अंदर चला जाता hai…Rani को बहुत तकलीफ होती hai..lekin सुधा उसकी मदत करती hai..Raju भी झुक कर उसकी एक चूची को चूसता है तो दुसरे को दबाता hai…jab रानी को थोड़ी रहत मिलती है तो इस बार राजू सुधा को इशारा करता है औररानी की कमर पकड़ कर एक करारा शॉट मारता है जिसकी वजह से उसका पूरा लुंड रानी की गांड की जड़ तक चला जाता hai…theek उसी वक़्त सुधा भी उठ कर रानी के मुँह में बैठते हुए उसकी चूची को दबाती hai....aur रानी की चीक सुधा की छूट में डाब जाती है…

रानी की आँखों से आंसूह की धार बहती जाती hai…Raju भी बड़े प्यार se…jaanu..ho गया ab..jo दर्द होना तो हो gaya…ab बस मजे hi मजे है…

रानी goon..goon..ki आवाज़ निकालती रहती hai..thodi देर बाद जब सुधा उसके मुँह से उठती है तो रानी रट hue..koi ऐसे ज़ालिम तरीके से डालता है kya…mujhe बहुत दर्द हो रहा hai..nikal लो…

राजू: कुछ नहीं jaanu…sab ठीक हो jaayega…Sudha भी उसके माथे और बाल पे प्यार से हाथ फेरते हुए उसको सहारा देती hai…koi 3-4 मं बाद जब रानी को थोड़ा रहत महसूस होता है तो राजू को इशारा करती है तो राजू भी धीरे धीरे अपने लुंड को आगे पीछे करता है और फिर दोनों को थोड़ा मजा आने लगता है और देखते hi देखते राजू अपनी स्पीड बढ़ाता है और रानी की गांड की कुटाई करने लग जाता है…

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सुधा की उसके होंठ चूमते हुए अपनी एक चुकी उसके मुँह में दाल देती hai…Rani को अब दोनों तरफ से मजा आ रहा tha…aise hi 5 मं की दुमदार चुदाई में रानी भी 2 बार झाड़ जाती है और फिर राजू का भी वक़्त आ जाता है और हु भी घुर्राटे हुए रानी की गांड में झाड़ जाता है और रानी भी उसी वक़्त तीसरी बार झाड़ जाती है…

राजू भी थका हारा रानी के बगल में लेट जाता hai…to सुधा भी उसे थोड़ा जगह देती है…

अब दोनों सुधा और रानी दोनों राजू के बगल में अपना सर उसके कंधे पे रख कर हांफ रही होते है और अपनी साँसों को काबू करने की कोशिश करते है..

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जब तीनो थोड़ा नार्मल होते है तो ..

रानी: कैसा लगा मेरा तोहफा??

राजू: मैंने तो सोचा भी नहीं tha..yaa कहूँ की भूल भी गया था इस बारे mein..lekin तुम्हे याद tha..jitna मुझे मजा aaya..tumhe कैसा लगा?

रानी: पहले तो बहुद दर्द hua..lekin बाद में मुझे भी मजा aaya..aisa कहते हुए रानी सुधा की तरफ देखती है..

तीनो है देते है और पता भी नहीं चलता कब तीनो नींद की आग़ोश में चले जाते है…
 
थैंक यू फ्रेंड्स फॉर योर inputs...will प्रोसीड विथ थे स्टोरी विथ व्हाट ी हैवे planned...especially थे scenes..hopefully आईटी विल बे एक्ससिटिंग.



थैंक्स वन्स अगेन.



 
अपडेट 41:जुगलबंदी.. (मेगा अपडेट)

अगली सुबह:

रोज़ की तरह सब उठ कर फ्रेश हो कर चाय पीने बैठ जाते hai…jahan राजू एकदम खुश था जो उसके चेहरे से पता चल रहा tha..wahin संध्या और ारु शर्मा रही thi..kyunki आज रात उन दोनों की सुहागरात thi..Sudha और रानी के चेहरे पे दर्द के भाव नज़र आ रहे the…aaye भी क्यों nahi..raat भर उनकी जो ठुकाई हुई thi..khaas कर के Sudha..jisko 2 दिन से ठीक से सोना भी नहीं हुआ था…

रत्न सब चुपके से देखती है लेकिन कुछ नहीं kehti..chai पीने के बाद सब फिर अपने काम में व्यस्त हो जाते है तो रत्न राजू को बुला कर कहती है की आज सुधा को आराम करने do..has के राजू से कहती hai..bechaari बहुत थकी हुई लगती hai..aur है देती है..

राजू: आप भी naa..bahut मजाक कर लेती हो..

रत्न: मैं कहाँ मजाक कर रही hoon..sahi तो कह रही हूँ..

राजू: रत्न को पकड़ के अपने पास खींचते हुए धीरे से उसके कान में कहता hai..accha..to फिर देखते hai..jab मेरा वच्चान पूरा होगा तो आपको भी ऐसे hi सोने नहीं doonga..aur उसकी आँखों में देखते हुए हस्ता है..

रत्न भी उसकी आँखों में देखते हुए शर्मा जाती है और उससे अलग हो kar…kehti hai..tu भी बहुत बदमाश हो गया hai..chal jaa..apna काम कर..

राजू फिर तैयार हो कर अपने काम के लिए निकल जाता hai..jab हु बहार आकर देखता है की आज भी ठाकुर के आदमी नहीं the…use कुछ शक होता है लेकिन आज हु अच्छे मूड में था तो ज़्यादा कुछ नहीं सोचता और अपने काम के लिए निकल जाता है.

खेत में पहुँचने के बाद थोड़ा काम कर के काम्य को फ़ोन करता है..

राजू: काम्य, कैसी हो?

काम्य: राजू की बात सुन कर उससे रहा नहीं जाता और रट हुए सुबह जो कुछ ठाकुर के साथ हुआ tha..sab बता देती है..

राजू भी थोड़ा परेशान हो जाता है और कहता है की हु उससे मिलने aayega..lekin काम्य उसे मन कर देती है और कहती है ठाकुर घर से निकलने से पहले अपने आदमियों को उस पर नज़र रखने की हिदायत दी hai..isiliye वह अब ना aaye..kyunki खतरा हो सकता है..

राजू फिर पूछता है तो काम्य कहती है ठाकुर सुबह 9.00-9.30 तक वह घर से निकल गया hai..shaam को कब आएगा पता nahi..kal सुबह वह उसे बता देगी की शाम को घर कब आया है Thakur…phir ऐसे hi थोड़ी और बात चीत कर के राजू बात ख़तम कर देता है.

ठाकुर के घर:

दोपहर को काम्य सो रही होती है तो माला वापस आ जाती है और काम्य को जगाती है..

काम्य माला को देख कर उससे रहा नहीं जाता और गले मिल कर रो देती hai…Mala उसको दिलासा देती है और कहती है की हु ठाकुर से बात करेगी इसके बारे mein..Kaamya मन कर देती है लेकिन माला मानती नहीं..

शाम को करीब 7.00 बजे ठाकुर नशे की धुत में घर आता है लेकिन थोड़ा होश में रहता hai..aur माला को देख कर पूछता है की हु कब आयी है..

माला भी थोड़ा संभल कर अच्छे से बात करते हुए कहती है की दोपहर को hi आयी है..

ठाकुर को अचानक याद आता है और तीखे स्वर में माला से पूछता है की हु अजय के घर क्यों गयी thi…Mala को यह बात पसंद नहीं आती फिर भी थोड़ा सय्यम से बात करती hai..Thakur फिर भी गुस्सा हो जाता है..

माला जब ठाकुर से काम्य के बारे में पूछती है तो उसका फ्यूज उड़ जाता है और चिल्लाते हुए माला से कहता है की उसके (काम्य) के बारे में उसे चिंता करने की ज़रुरत नहीं है..

ठाकुर: क्यों, तुझे उसके बारे में जान्ने की क्यों पड़ी hai..tu यहाँ मेरे पास रहने आयी है तो अपनी हद में reh..aur ज़्यादा इधर उधर नाक घुसड़ने की ज़रुरत नहीं है..

तुझे मैं यहाँ रहने दे रहा hoon…tere लिए एहि बहुत hai..upar से तू मेरे कामो में दखल अंदाजा कर रही hai..jo मुझे अच्छा नहीं lagta..chup चाप कड़ी reh..isi में तेरी भलाई hai..agar ज़्यादा कुछ टांग अदाएगी तो भूल जाऊँगा की तू मेरी बहिन है और काम्य जैसा hi तेरा हाल भी karoonga…agar मैं तुझे घर से धक्का देकर निकल दिया तो tera/tujhe देखने वाला भी कोई नहीं रहेगा..

माला को इस बात पे बहुत गुस्सा आता है लेकिन अपने गुस्से को काबू में रख कर (और ठाकुर को मन में गाली देते हुए) ज़्यादा कुछ नहीं कहती और वहां से निकल जाती है..

राजू के घर:

शाम को राजू अपना काम कर के घर आता है तो सब नार्मल hi नज़र आता hai..(use लगा था की आज घर में कुछ चहल पहल hoga…kyunki सब जानते थे आज की रात के बारे में).

राजू फ्रेश हो जाता है तो सुधा उसे चाय देती है..

राजू: बाकी सब कहाँ है? कोई नज़र नहीं आ रहा है..

सुधा: सब यहीं hai..itne में रानी भी थोड़ा आराम से चल कर आती है और शर्माते हुए राजू के बगल में बैठ जाती hai..woh दोनों भी कल की तरह hi सज धज के आई थी..

सुधा राजू को चाय देकर जा रही होती है तो राजू चाय को बगल में रख कर सुधा को अपनी और खींचता है और उसे अपने गॉड में बिठा कर कहता है ..कहाँ जा रही हो जान?

सुधा: शर्माते hue…kya कर रहे ho..koi देख लेगा ना..

राजू: तो देखने दो naa..main तो अपनी बीवी से बात कर रहा hoon..aur ऐसा कहते हुए सुधा के होंठ चूम लेता hai..Sudha थोड़ा नखरे करती है लेकिन वह हार जाती है और राजू का पूरा साथ देती hai..dono एक दुसरे के मुँह में जुबां दाल कर कुश्ती लड़ाते hai..aur राजू सुधा के चुकी को दबाता है ..

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Sudha..aah..aah..karte हुए उसका हाथ अपनी चुकी से हटाते हुए अपने होंठों को अलग कर के उसके कान में कहती hai…raat तक रुक jaao…tumko दबाने के लिए मिल jaayenge…aur कोई मन भी नहीं karega..aur उसको देखते हुए आँख मार देती है..

राजू थोड़ा मज़ाकिया ढंग से सुधा से कहता hai..lekin अभी तो बहुत नाइंसाफी है ना..

सुधा: रात को पूरा इन्साफ मिल jaayega..thoda सबर करो मेरे raja…aur वहां से चले जाती है किचन में..

रात को खाना खाने baith-te है तो ारु और संध्या नहीं aati..Raju पूछता है तो रत्न कहती है की वह आज खाना अपने कमरे में hi खाएंगे..

राजू कुछ नहीं कहता और खाना खा कर थोड़ा वक़्त सुधा के साथ बीतता hai..itne में रत्न भी साफ़ सफाई कर के आ जाती hai..aur कुछ देर बाद राजू को सुधा और राटा उसके कमरे में भेज देते hai..aur धीरे से दोनों उसके कान में कहती hai..jaa..enjoy कर..

राजू जब अपने कमरे में जाता है तो कमरा देख कर दांग रह जाता hai….poora कमरा एकदम फूलों से सजाया हुआ tha…aur बिस्तर भी पूरा फूलों से सजाया हुआ tha…aur बिस्तर के बीचो beech..dono ारु और संध्या अपने शादी के लाल जोड़ो में घूंघट सर पे ओढ़े हुए बैठे थे..

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राजू तब मन में सोचता hai..isiliye यह दोनों आज खाना खाने नहीं aayi..aur मन hi मन हस्ता है और दरवाज़ा बंद कर के धीरे से उन दोनों के पास आता है..

दोनों अपनी नज़रें नीचे किये हुए बैठी थी..

फिर धीरे से राजू दोनों का घूंघट उठा कर देखता है तो देखते hi रह जाता hai..dono hi बहुत खूबसूरत दिख रही thi…(din में जब राजू काम पे गया tha..to सुधा और रानी ने दोनों को सजाया tha..is पल के लिए)..

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माथे पे bindi..maang में sindoor…naak पे एक छोटा सा nath…laal लाल honth..dono एकदम क़यामत लग रही थी..

राजू: लगता है तुम दोनों मेरी जान लेकर रहोगे…

जब यह बात कहता है तो दोनों एक साथ अपना हाथ उसके मुँह पे रख kar..aisi बाते ना karo..aaj के दिन…

राजू है देता है और कहता hai..tum दोनों को पा कर मैं बहुत खुश हूँ..

दोनों फिर से शर्मा जाती है और अपना सर झुका लेती है..

राजू मज़ाकिया ढंग se..waise हम तो पहले hi “मिल” चुके hai..phir शर्माना कैसा..

दोनों एक साथ: पहले की बात अलग है और आज की रात अलग है..

राजू: haan..yeh भी सही hai..aisa कहते हुए राजू ारु को अपनी तरफ लेकर उसके होंठ चूमता hai…Aaru पहले थोड़ा शर्माती है लेकिन थोड़ी देर बाद हु भी राजू का साथ देती है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है..2-3 मं के गहरे किश के बाद अलग होते है तो दोनों हाँफते रहते है…

राजू: ारु se..aaj तो कुछ ज़्यादा hi मीठी लग रही हो tum..Aaru शर्माते हुए है देती है…

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फिर राजू संध्या se…tum कितनी मीठी ho…zara मुझे तो चकाओ naa..aur ऐसा कहते हुए संध्या को भी अपने बाहों में लेकर उसे भी चूमता है और वैसे hi दोनों भी किश में डूब जाते hai..ek गहरे चुम्बन के baad…tum भी शायद उतनी hi मीठी हो जितना ारु थी..

दोनों फिर भी शर्मा रही होती है तो राजू कहता hai..ab शर्मा क्यों रही हो इतना?

तुम जितना sharmaaogi..tumhe उतना काम मजा आएगा..

इतने में संध्या को सुधा की बाद याद आती है जो उसने उसे 2 दिन पहले बताया tha..ki राजू से खुल करके बात करने में hi मजा है..

संध्या: शर्म तो आएगी naa..aise कैसे खुल कर बात कर सकते है..

राजू: खुल कर बात करने में hi मजा hai..jab हम पहले hi मिल चुके है तो मैं चाहता hoon..tum दोनों भी अच्छे से मिल लो…

ारु: मतलब?

राजू: मतलब यह की जैसे हमने किश किया tha..waise hi तुम दोनों भी किश करो…

दोनों एक दुसरे को और फिर राजू को आँखें फाड़े देखती hai..Raju है kar..apne दोनों हाथ उनके सर के पीछे ले जाकर उन दोनों को थोड़ा पुश करता है तो दोनों की नज़रें मिलती है और राजू थोड़ा ज़ोर देता है तो दोनों के चेहरे एक दुसरे से हल्का सा टकराते है और फिर दोनों के होंठ जुड़ जाते hai….dono धीरे से चूमते है तो राजू कहता hai..jaise हमने किश किया tha..waise hi karo..aur फिर थोड़ी झिझक और शर्माहट के साथ दोनों फिर से चूमते है और इस बार दोनों ारु और संध्या भी किश में जुड़ जाते है और एक दुसरे की जुबां चूसने लग जाते है…

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राजू खुश हो जाता है और राजू भी उनके साथ जुड़ जाता है और तीनो का एक लम्बा किश चलता है जिसमें तीनो को मजा आता hai…jahan राजू का लुंड उसके पयजामे में तन जाता hai..wahi दोनों भी गीली हो जाती है और पहली बार बिना कोई छुए अपना पानी निकल लेती है..

राजू: यह हुई ना baat…dekho..kitna मजा आया…

वैसे, मैंने तुम लोगों के लिए शॉपिंग किया tha…Sudha के saath…woh पहने हो की नहीं?

दोनों एक साथ: जी ..शर्म आती है बताने में…

राजू: तो ठीक hai..main खुद hi देख लेता हूँ…

रत्न का कमरा:

वहीँ दूसरी तरफ, रत्न को पता था की अभी राजू, ारु और संध्या उसके कमरे में मजे कर रहे है और यहाँ रत्न तड़पती रहती है और पंतय के ऊपर से hi अपनी छूट मसलती हुई बड़बड़ाती hai…aah…Raju…kya कर दिया tune…main इतनी जल रही hoon…lekin मैं भी मेरे दिए हुए वचन से बंधी hoon..kab मुझे आज़ाद karega…kab तू मेरे ऊपर चढ़ेगा और मेरी प्यास bujhaayega..aise hi बड़बड़ाते हुए संध्या अपनी छूट को मसलते रहती है..

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इतने में धीरे से उसका दरवाज़ा खुलता है और सुधा चुपके से अंदर आ जाती है और रत्न को देख कर उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है.

दरवाज़ा बंद कर के..

सुधा: क्यों didi..neend नहीं आ रही है क्या और खुद hi अपनी उँगलियों से खेल रही हो? मैं कुछ मदत कर दूँ क्या? ऐसा कहते हुए वह रत्न के बिस्तर की तरफ बढ़ती है..

रत्न: chhoti..tu यहाँ क्या कर रही है? तुझे तो आराम करने को बोलै था..

सुधा: haan..lekin क्या karoon…Raju ने 2 दिन से पूरा बदन तोड़ दिया है और मुझे नींद नहीं आ रही hai..socha यहाँ आकर तुमसे कुछ बात कर loon..lekin यहाँ का नज़ारा तो कुछ अलग hi दिख रहा है..

रत्न: haan..sahi कहा तूने chhoti..kya karoon..main भी तड़प रही hoon..lekin अभी उसके लिए वक़्त नहीं आया है..

सुधा पूछती है तो रत्न उसे बताती है की जब तक ठाकुर का अंत नहीं होता, तब तक उसका बदला पूरा नहीं होगा और वह राजू के “पास” नहीं आएगी..

सुधा सब सुन कर: haan..baat तो सही hai..lekin कब तक अपनी उँगलियों से काम chalaaogi…aao मैं थोड़ी मदत कर देती hoon…aur ऐसा कह कर पहले हु रत्न की टांगों के बीच आ जाती है और पंतय के ऊपर से hi रत्न की छूट को चूसती है मस्त तकरीके से…

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फिर उसकी पंतय निकल देती है

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और डेक्ठी है की रत्न की छूट पूरा पानी से भीगा हुआ और एकदम गीली hai..Sudha उस पर प्यार से हाथ फेरते hue..bahut मजा आएगा चकने mein..aur हल्का सा उसपर जीभ फेर कर दो बूँदें चक लेती hai..waah…kya स्वादिष्ट है तेरा रास दीदी…

रत्न से रहा नहीं जाता और फिर अपने कपडे भी निकाल देती है और सुधा के सर को अपनी छूट पे दबा देती hai…Sudha समझ जाती है और बड़ी शिद्दत से रत्न की छूट पे टूट पड़ती है और चूसने और चाटने लग जाती है…

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रत्न aahh…oohh….haan…aise hi खा jaago..nigodi बहुत परेशान करती hai..aaj इसकी पूरी गर्मी निकल de..aise hi बड़बड़ाते हुए सुधा का सर अपनी छूट पे दबाती रहती है..

राजू के कमरे में..

वही राजू भी बड़े सेक्सी तरीके से ारु और संध्या के कपडे निकालता है और खुद भी नंगा हो जाता hai..aur देखता है की दोनों भी उसके लाये हुए सेक्सी ट्रांसपेरेंट ब्रा और पंतय पहने हुए थी..

राजू: दोनों बहुत कमाल की लग रही हो inmein…aur ऐसा कहते हुए पहले ारु और फिर संध्या के चुकी को पकड़ कर दबाते हुए चूमने चाटने लगता है और दोनों के बदन से वह भी निकाल देता है और राजू की तरह वह दोनों भी नंगे हो जाते है..

राजू ारु को बिस्तर पे सुला देता है और उसकी टांगों के बीच आकर देखता है की उसकी छूट एकदम चिकनी है और रास से भरी हुई hai…Raju से रहा नहीं जाता है और हु ारु की छूट पे टूट पड़ता है और बड़े लगन से उसकी छूट chaat-te चला जाता है…

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ारु भी ज़ोर से ाँहें भर्ती चली जाती hai…Aaru की छूट chaat-te वक़्त अपनी आँखों से संध्या की तरफ देखता है और उसका इशारा समझ कर संध्या भी अपनी टाँगे फैला कर ारु के मुँह पे बैठ जाती है और ारु का सर पकड़ कर अपनी छूट पे दबा देती है..

यह ारु का पहली बार था जब हु किसी की छूट चूस रही thi..pehle तो ठीक नहीं लगता फिर उसे भी मजा आने लगता है और हु भी मजे से संध्या की छूट चूसती hai..teeno में घमासान चूसै का दौर चलता है जिसमें दोनों ारु पता नहीं कितनी बार अपना पानी छोड़ देते है..5-10 मं बाद राजू फिर संध्या को इशारा करता है तो इस बार संध्या अपनी टांगें फैलाये राजू के पास आती है तो ारु भी घूम कर संध्या के चेहरे पे बैठ जाती है..

उन दोनों का पानी फिर से निकालने के बाद राजू भी अपना चेहरा साफ़ करता है जो की उन दोनों के पानी से पूरा भीगा हुआ था..

और कहता hai..tum दोनों को जन्नत की सैर कराया hai..ab मुझे भी karaao…dono समझ जाते है और झट से पलट कर उसका तन्नाए हुए लुंड को अपनी आँखें बड़ी करती हुए एक दुसरे को देखते है और फिर बारी बारी से उसका लुंड मुँह में लेकर लोल्लयपोप की तरह चूसने लग जाते है…

रत्न के कमरे में..

इधर रत्न के कमरे में भी तूफ़ान मचा हुआ tha…Sudha भी बड़ी शिद्दत से रत्न की छूट चूस रही थी और अपनी दो उंगलियां उसकी छूट में दाल कर अंदर बाहर कर रही thi..aur उसी वक़्त हु भी अपनी दुसरे हाथ की दो उंगलियां अपनी छूट में दाल कर अंदर बाहर कर रही thi…Ratna से रहा नहीं जाता और इस हमले को सेहन नहीं कर पाती और ज़बरदस्त तरीके से झाड़ जाती hai..jisko सुधा बड़े चाव से चाट जाती है..

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सुधा; क्यों didi..maja आया क्या?

रत्न: हाँ re..accha किया तूने जो मेरा पानी निकलवा दिया..

सुधा: अब मेरा क्या होगा?

रत्न: अभी के लिए मैं हूँ naa…aur ऐसा कहते हुए रत्न सुधा को खीचंह कर पहले उसके होंठों पे लगे हुए अपने रास को चखती है और फिर थोड़ा खींच कर अपने चेहरे पे उसे बिठा लेती है और मस्त हो कर अपनी जीब सुधा की छूट में घुसा देती है और फिर वही दौर चलता hai..sirf पोजीशन चेंज हुए थे..

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सुधा भी रत्न का सर अपनी छूट पे भिड़ा देती है और aaahh…ooohhh…karte हुए ाँहें भर्ती है..5 मं बाद सुधा भी हमले को सेहन नहीं कर पाती और वह भी झाड़ जाती है..

दोनों हाँफते हुए बगल में अपनी साँसों को दुरुस्त करते रहते hai..aur जब नार्मल होते है तो एक दुसरे को देख कर हस्ते हुए चूम लेते है..

सुधा धीरे से रत्न के कान में कहती hai..abhi तो पूरी रात बाकी hai..aur आँख मार देती है..

रत्न भी समझ जाती है और फिर रत्न पलट कर अपना चेहरे सुधा की टांगों के बीच ले जाती है और अपनी गांड सुधा के चेहरे pe..dono 69 पोजीशन पे आ जाते है और एक दुसरे को मजे देने लग जाते है..

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राजू के कमरे में..

इस वक़्त यहाँ भी धमाल मचा हुआ tha…Aaru और संध्या बारी बारी से राजू ले लुंड को अपने मुँह में लेकर एकदम गीला और मुठियाते हुए खड़ा कर देते है जिसमें राजू को भी बहुत मजा आता hai..aur हु भी एक तरह से जन्नत की सैर कर लेता है..

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फिर अपना लुंड उनके मुँह से निकल कर कहता hai….chalo..ab तुम दोनों की जन्नत की सैर कराता hoon..aur ऐसा कहते हुए वह ारु को सुला देता है और खुद उसकी टांगों के बीच आ जाता hai…Aaru भी ाँहें भर्ती रहती है क्यूंकि उसे भी पता था अब क्या होने वाला है..

संध्या उसके बगल में लेट जाती है और एक चुकी को मुँह में लेकर चूसती है तो दुसरे को दबाती hai…Aaru को भी मजा आ रहा था ismein…Raju ारु की आँखों में देखते हुए अपना लुंड को धीरे से ारु की छूट में गुसाता hai..’phak’ की आवाज़ से लुंड का टोपा अंदर चले जाता है …ारु ाः करती है…

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राजू कहता hai..Aaru..tumhaari छूट अभी भी बहुत टाइट hai..lagta है पूरी तरह से अच्छे से खोलना padega..aur ऐसा कहते हुए संध्या को इशारा करता है और फिर से अपने लुंड को बहार निकल कर एक ज़बरदस्त झटका मारता hai..jhatka इतना ज़बरदस्त था की राजू का पूरा लुंड जड़ तक ारु की छूट में समां जाता hai…Aaru…aaah….kar के ज़ोर की चिल्लाती है लेकिन उसकी चीक संध्या के मुँह में डाब जाती है क्यूंकि राजू के इशारे पर संध्या उसके होंठ अपने होंठ पे रक् लेती है ..जिस वजह से ारु की चीख उसके मुँह में डाब जाती है..

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राजू: jaanu..ho गया hai..ab दर्द नहीं hoga…Aaru की आँखों से पानी गिरता है दर्द की वजह से जिसे संध्या भी प्यार से चाट लेती है और उसकी चुकी को दबाना चालु रखती है..

जब ारु का दर्द थोड़ा काम होता है तो राजू अपने लुंड को धीरे से अंदर बाहर करना शुरू करता है और देखते hi देखते एक ले पकड़ लेता है और धुआंदार चुदाई शुरू करता hai..Aaru भी अब मजे लेने लगती है और aaahhh….ooohh…maar डाला रे टूंणन्नीीी कर के बडबडी रहती hai…Raju ारु को chod-te वक़्त हु भी उसकी चुकी को मसलते रहता hai..is दोहरे हमले से ारु की बाँध टूट जाती है और 2 मं में hi झाड़ जाती hai…pani निकलने की वजह से उसकी छूट में चिकनाहट पैदा होती है तो राजू बड़े आराम से बिना कोई दिक्कत हुए अपने लुंड को अंदर बाहर करके छोड़ने लगता है..

5 मं की ज़बरदस्त चुदाई के बाद ारु कहती है की हु थक गयी है और उसे थोड़ा दर्द हो रहा है..

संध्या ारु के होंठ चूमते hue…beta..dard में hi तो मजा hai..hum सब इसी दर्द के लिए तरसते है..

Aaru..theek कहती हो maaji…lekin अब सहा नहीं जा रहा है..

राजू अपना लुंड ारु की छूट से निकलता है और संध्या को इशारा करता है तो संध्या घोड़ी बन के राजू के सामने आ जाती है..

संध्या की चिकनी छूट और बड़ी गांड को देख कर राजू से रहा नहीं जाता ..झुक कर संध्या की चुकी को दबाते हुए उसके कान mein…jaanu…teri गांड एकदम जान लेवा लग रही hai…raha नहीं jaata…pehle तेरी गांड मारता हूँ..

संध्या हाँ में सर हिलती है तो राजू अपने लुंड को और संध्या की गांड को अच्छे से थूक से गिला कर के अपने लुंड को संध्या की गांड की सुराख पे रख kar..taiyyar हो जाओ jaanu..aur एक हल्का सा धक्का लगाता hai…lund का टोपा उसकी गांड में घुस जाता hai..Sandhya को बहुत तकलीफ होती है और अपनी मुट्ठी को चादर पकड़ कर भींच लेती hai..jab राजू का लुंड उसकी गांड में घुस जाता है तो 1 मं वैसे hi रहता hai…Sandhya को भी एडजस्ट होने के liye..itne में ारु भी संध्या के सामने अपनी टांगें खोल कर लेट जाती hai…aur उसका चेहरा अपने छूट पे दबा देती है और उसी वक़्त राजू भी पूरी ताकत से शॉट मारता है जिसकी वजह से उसका लुंड पूरा संध्या की गांड में जड़ तक चला जाता hai…Sandhya की चीखें ारु की छूट में डाब जाती hai…Aur राजू भी रुक जाता है और अपने एक हाथ से संध्या की छूट को मसलता रहता hai…is हमले से संध्या रह नहीं पाती और उसकी छूट पानी छोड़ देती hai…Raju का हाथ पूरा गीला हो जाता है और अपने हाथ को निकल कर संध्या की गांड और अपने लुंड पे लगाता है जिसकी वजह से दोनों चिकने हो जाते hai…apna हाथ वापस ले जाकर उसकी छूट को मसलते हुए दनादन लुंड को आगे पीछे करते हुए उसकी गांड की कुटाई चालु कर देता है…

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संध्या को भी अब मजा आ रहा tha..aur उसी मजे से वह भी ारु की छूट chaat-te चली जाती है…

इधर रत्न के कमरे में…

यहाँ भी कुछ ऐसा hi हाल tha…dono सुधा और रत्न 69 पोजीशन में एक दुसरे को संतुष्ट करते रहते है…

खूब अच्छे से चूस कर जब दोनों का पानी निकल जाता है और दोनों संतुष्ट हो जाते है तो बगल में लेट कर…

रत्न: अच्छा किया तूने जो यहाँ मेरे पास आ gayi..nahi तो आज मुझे भी नींद नहीं आती.

सुधा: chalo..acchi बात hai..ab तो तुमको अच्छे से नींद आएगी naa..waise तेरी राजू से कब बात हुई thi..tere वचन के बारे में?

रत्न: शायद तू नहीं jaanti..lekin राजू सबसे ज़्यादा प्यार मेरे से करता है और मुझसे कोई बात नहीं chupaata…usi ने मुझे गुरूजी के पास लेकर गया tha…aur उसके जितने भी (बहार भी) सम्बन्ध hai..mujhe सब बताता hai..aur जब उसने मुझे तेरे जीजाजी और रवि के बारे में बताया tha..usi वक़्त मैंने राजू से कहा था की ठाकुर से बदला le..tabhi मुझे चैन मिलेगा और तभी मैं उसके पास aaoongi..aur थोड़ा इमोशनल हो जाती है और रोने लगती है..

सुधा झट से रत्न को अपनी बाहों में लेकर प्यार se..nahi didi..tumne एकदम सही किया hai..us ठाकुर ने हमारा जीना हराम कर दिया hai..agar राजू नहीं होता तो शायद हम भी उसकी वहस का शिकार हो जाते अब tak..aur हमें बचाने वाला भी कोई नहीं होता..

पता नहीं कब तक चलेगा..

रत्न: तू फ़िक्र मत kar..main राजू से इस बारे में जल्दी hi बात करती hoon..aur ऐसी hi कुछ और बातें कर के दोनों नींद की आग़ोश में चले जाते है..

राजू के कमरे में..

यहाँ राजू संध्या की ज़बरदस्त गांड मारने के बाद उसे फिर से सीधा लिटा देता है और छूट की कुटाई करने लग जाता है..

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वह भी अब झड़ने के कगार पेट ha…jag लगता है की उसका भी पानी निकलने वाला है तो कहता hai..main भी आ रहा hoon….itne में संध्या कहती है..

राजू: तूने तो रानी को पेट से कर दिया hai…mujhe भी जल्दी hi कर de…main भी हमारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ…

राजू: haan..bilkul मेरी jaan..aur ऐसा कहते हुए अपना पूरा गाढ़ा माल संध्या की छूट के अंदर hi छोड़ देता है…

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संध्या को उसका माल अपनी छूट में लेकर बहुत रहत महसूस होती है..

राजू ारु se…tera क्या करना है?

ारु समझ जाती है और कहती hai..Raju..main इतनी जल्दी प्रेग्नेंट नहीं होना chahti..inke मुक़ाबले मैं तो अभी काफी जवान hoon…itni जल्दी मुझे माँ नहीं बनना hai…abhi उसके लिए तैयार नहीं हूँ..2-3 साल के बाद मैं hi तुझसे कह doongi…tumhe बुरा तो नहीं लगेगा ना?

राजू: ऐसी कैसे बात करती हो जा? तुम जो कह रही ho..woh भी सच hai..abhi तो तेरे मजे करने के दिन hai…Sudha और संध्या की उम्र थोड़ा ज़्यादा है तो उनका माँ बनने की इच्छा एकदम सही hai…aur फिर हस्ते hue..agar सब एक साथ पेट से हो गयी तो, और अपने लुंड पे इशारा करते हुए, इस बेचारे पर कौन ध्यान dega..ise तो फिर सूखा hi रहना padega…aisa कहता है तो तीनो है देते है…

राजू के बगल में दोनों लेट जाते hai…aur नींद की वादियों में चले जाते है..

नोट: फर्स्ट टाइम ी हैवे ुसेड थे राइटिंग स्किल्स ऑफ़ माय फ्रेंड इन माय update...his राइटिंग स्किल्स अरे यूनिक वेयर हे शिफ्ट्स सीन्स फ्रॉम ओने फॅमिली तो ानोथेर quickly...here ी हैवे ट्राइड तो दो थे शामे अलबैत फ्रॉम ओने रूम तो ानोथेर :) होप यू लिखे आईटी. :)
 
अपडेट 42: ठाकुर और राजू की अपनी अपनी chaal…(Mega अपडेट)

अगली सुबह…

अगली सुबह सब उठ कर अपना काम करते है और चाय पे मिलते hai…Ratna के अलावा सब थोड़ा शर्मा रही thi…jo राजू और रत्न भी देख लेते है..

राजू मूड को थोड़ा हल्का करने के लिए कहता hai…tum लोग इतना क्यों शर्मा रहे हो? नार्मल hi raho..jaise पहले रहते थे..

तीनो हाँ में सर हिलाते है लेकिन कुछ नहीं कहते..

फिर राजू फ्रेश होने चला जाता है तो संध्या भी अपने कमरे में फ्रेश होने जाती है..

रानी और संध्या की कामुक बातें..

कमरे में जाते hi रानी भी उसके पीछे चली जाती है और कमरे के अंदर जा कर संध्या को पकड़ कर पूछती है..

रानी: क्यों re..kal मजा आया की नहीं?

संध्या: पूछो मत didi…mast मजा aaya..raat भर तो सोने hi नहीं दिया…

रानी संध्या को अपनी बाहों में लेते hue..jigyaasa से …क्या क्या किया?

संध्या: धत didi..aap भी naa…mujhe तो थोड़ा शर्म आती hai..aapko तो पता hi होगा की राजू ने क्या किया है..

रानी: लगता है तू ऐसे नहीं maanegi….aur ऐसा कहते हुए संध्या की एक चुकी को ज़ोर से दबा देती hai…jiski वजह से संध्या aaahhh..kar के सिसकी लेती है..

संध्या: धीरे से dabaana…raat को राजू ने दबा दबा कर बुरा हाल कर दिया है और तू भी ज़ोर से दबा रही है..

रानी है kar…phir खुल कर पूरा bata..nahi तो और ज़ोर से dabaaongi…aur संध्या के होंठ चूम लेती है..

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संध्या भी रानी के होंठ चूमते hue..to तू सुधरेगी nahi..to सुन…

संध्या रात का पूरा किस्सा रानी को बताती है और रानी की गांड को दबा kar…Rani के कान में धीरे se…yahan भी अपना झंडा गाड़ दिया राजू ne…aur हलके से है के शर्मा जाती है..

रानी: वाह re..to तूने तो पूरा मजा liya…Aaru का क्या हाल है?

संध्या: उसका भी कुछ ऐसे hi हाल hai..haan…uska पिछवाड़ा खुला नहीं है..

संध्या: और sun….ek और baat…raat को राजू ने अपना माल मेरे hi अंदर छोड़ा hai..maine hi उसे ऐसा कहा tha…ab तू पेट से हो गयी है तो मेरा भी होना बनता है na…aisa कह कर संध्या रानी को आँख मार देती है..

रानी: हाँ re..accha किया तूने bhi..ab तू भी 30 के ऊपर हो गयी hai..tujhe भी अब जल्दी माँ बन जाना chahiye..warna और देर होगी तो मुश्किल भी हो सकता है..

संध्या: इसीलिए तो मैंने राजू का माल मेरे अंदर लिया hai…kya गाढ़ा रास tha…kaash मैं भी तेरे जैसे hi पेट से हो जाऊं..

रानी: चिंता मत kar…bhagwaan पे भरोसा rakh..sab अच्छा hi होगा…

ऐसे hi दोनों और कुछ देर छेड़खानी और बातें करते है और फिर दोनों भी फ्रेश हो कर आ जाते है..

राजू भी तैयार हो कर खेत के लिए निकल जाता है. जब वह घर से निकलता है तो देखता है की ठाकुर के आदमी उसके घर की निगरानी नहीं कर रहे the…Raju को थोड़ा शक होता hai..aur रास्ते में काम्य को फ़ोन करता है..

फ़ोन पे..

राजू जब काम्य को फ़ोन करता है तो काम्य उस वक़्त नाहा रही होती hai..phone की आवाज़ से माला फ़ोन पिक करती है..

माला: (राजू से) क्यों re..tujhe मेरी याद नहीं आयी क्या? बहुत दिनों से कोई खबर भी नहीं है तेरी..

राजू: ऐसी कोई बात नहीं है Mala..main थोड़ा बिजी था..

माला: इतना भी क्या बिजी की मुझे फ़ोन भी नहीं कर सकते? तुझे याद करके मैं हमेशा गीली हो जाती हूँ..

राजू: राजू को समझ आता hai..phir भी माला की टांग खींचते hue…kya गीली हो जाती है?

माला: accha…mujhse hi badmaashi…mil एक baar..tera लुंड पकड़ कर मरोड़ doongi…phir पता चलेगा…

राजू: हस्ते hue..agar मरोड़ देगी तो हमेशा गीली hi रह jaaogi..is बात पे दोनों को हसी आ जाती है..

राजू: khair..majaak बहुत हो gaya…ek बात पूछना tha..tumhe पता hai..thakur कहाँ गया है? मैंने काम्य से कहा था की मुझे बताये की ठाकुर कब और कहाँ और किस वक़्त जाता hai…yeh मेरे लिए jaan-na बहुत ज़रूरी है..

माला: मुझे उसके बारे में पता nahi..abhi वह नाहा रही hai..agar मुझे कुछ पता चलेगा तो बताऊँगी…

राजू: ठीक hai..main hi कुछ करता हूँ और ऐसा कह कर फ़ोन कट कर देता है..

राजू फिर सोचता है की ठाकुर कहाँ गया hoga..aur सोचता है की हु वहीँ खँडहर जा कर dekhega…agar कुछ मिल जाता है तो theek..nahi तो वापस आकर माला और काम्य से बात karega..aur खँडहर के लिए निकल जाता है..

ठाकुर के घर..

माला राजू से बात करने के बाद वह भी नहाने के लिए चली जाती है..

माला भी नाहा कर एक टॉवल बाँध के काम्य के कमरे में जाती hai..jahan काम्य भी नाहा कर एक टॉवल बाँध कर आईने के सामने खड़े हो कर अपने गीले बाल सवार रही होती है..

माला काम्य को देख कर चुपके से उसके पीछे आती है और पीछे से बाहों में पकड़ कर..

माला: क्यों re..tujhe मेरी याद नहीं आयी क्या?

माला उसको पकड़ते हुए अपना सर उसके गार्डन पे रख के एक गहरी सांस लेते hue..teri यह mehak…yeh गीले baal…aur हाथ से काम्य की चुकी को दबाते hue…teri यह chuchiyaan…mujhe तेरा दीवाना बना देती hai..aur तू है की मुझे याद hi नहीं karti…aisa कहते हुए माला काम्य का टॉवल उसके बदन से नीचे गिरा देती है और चूचियों को दबाते हुए उसके गले को चूमती है…

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माला के इस हमले से काम्य भी उत्तेजित हो जाती है और ाँहें भरते hue..nahi re..tu भी तो मुझे पागल कर देती hai..lekin क्या karoon..tu तो अजय के पास thi…tujhse बात करना ठीक नहीं होता..

माला काम्य को अपनी तरफ पलटा कर एकदम गहरी और नशीली आँखों से काम्य को देखते हुए अपने होंठ आगे बढ़ाती है तो काम्य भी अपने आप उसके होंठों को अपने मुँह में लेती hai..dono में एक ज़बरदस्त गहरा किश चलता है 5 मं तक जहाँ दोनों एक दुसरे की जुबां को अपनी मुँह में लेकर चूसती रहती है…

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इस दौरान माला के बदन से भी उसका टॉवल गिर जाता है और दोनों नंगे एक दुसरे को चूमते रहता है और माला काम्य की चुकी को दबाते रहती है..

किश टूटने के बाद माला अपने एक हाथ काम्य की छूट पे ले जाती है और अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में डालते हुए काम्य के कान में कहते है..

ठाकुर तो चुटिया hai…main उसकी जहह होती तो अब तक घर में बच्चों की लाइन लगा देती और अपनी ऊँगली को उसकी छूट में पूरा घुसा kar..ab तक इसका भोसड़ा भी बना देती..

काम्य: क्या karoon..iccha तो मेरी भी है की घर में बच्चे हो और मेरी छूट का भी भोसड़ा बन जाए…

माला: चिंता मत kar…Raju को तेरे पास लाती hoon…uska लुंड भी एकदम लुम्बा और मोटा hai..jo तेरी छूट को फाड़ देगा…

दोनों hi ऐसे कामुक बातें करती हुए बिस्तर की तरफ चली जाती है…

खँडहर में..

राजू कुछ देर बाद खँडहर में पहुँच जाता है और ठाकुर की गाडी को वहां देखता hai..to समझ जाता है की ठाकुर वहीँ पे है..

राजू फिर एक अच्छी जगह ढूंढता है जहाँ से उसे अंदर का पूरा नज़ारा दीखता hai..lekin ठाकुर और उसके आदमी दूर रहते है तो राजू को उनकी बातें ठीक से सुनाई नहीं देती..

ठाकुर अपने आदमियों से:

Suno..tum लोग कल रात को अपना काम करके hi aana…us घर की 1-2 औरत को उठा के laao…unhe अपना हथियार बना कर उनकी ज़मीन ले loonga..aur अगर हु लौंडा बीच में आये तो उसे थोक dena…mujhe उसकी परवाह नहीं hai…baaki मैं सब देख लूँगा…

ठाकुर मन में सोचता hai..woh माल मेरे हाथ लग गयी तो खूब छोडूंगा bhi..aisa सोचते हुए ठाकुर अपना छोटा लुंड मसलता hai..jo की उसके आदमी भी देख लेते है और समझ जाते है..

काम में कोई लापरवाही नहीं चाहिए मुझे…

एक आदमी: ठीक है ठाकुर sahab..aisa hi होगा…

ठाकुर: तुम सब कल के लिए अच्छे से तैयारी कर lo..jo भी हथियार chahiye..sab देख lo..aur 5-6 लोग jaana..lekin ज़्यादा हंगामा मत करना..

राजू बहार से उनकी बातें सुनने की कोशिश करता है लेकिन इस बार उसे उनकी बातें सुनाई नहीं देती..

राजू थोड़ा परेशान हो जाता है की किस बारे में और क्या बात कर रहे hai..woh इतना तो समझ लेता है की उसकी और उसके घर वालों की hi बात ठाकुर कर रहा hai..lekin kya..yeh समझ नहीं पाटा…

कुछ देर बाद ठाकुर वहां से निकल जाता है तो राजू भी थोड़ा सावधान हो कर निकल जाता hai…pareshaani में…

ठाकुर के घर..

यहाँ माला काम्य को बिस्तर पे ले जाकर उसे पटक देती है और खुद उसके ऊपर आकर उसके होंठों को चूमते हुए काम्य की चुकी दबाती है..

होंठों को चूमते हुए नीचे जाती है और गले को चूमते हुए और थोड़ा नीचे आकर एक चुकी को मुँह में भर्ती है और दुसरे को दबाती है…

काम्य के मुँह से सिसीकारी निकलती hai…aaahh..ooohh…aise hi पी जाओ चूचियों ko…saali बहुत परेशान करती hai..aur माला का सर अपने चूचियों पे दबाती है…

5-7 मं तक दोनों चूचियों का मर्दन करने के बाद माला नीचे सरकते हुए उसकी गहरी नाभि को चूमती है और एक हाथ ले जा कर उसकी छूट को दबोच लेती है जो की बहुत गीली और रास बहा रही थी…

माला: तेरी छूट तो बहुत रास बहा रही है..

काम्य: क्यों nahi..pichhle दस मिनट से तू जो मुझे गरम कर रही hai..ras तो निकलेगा hi naa…aur माला का सर उसके पेट पे दबा देती है…

माला फिर नीचे जाकर एकदम से काम्य की छूट को पूरा मुँह में लेकर गहरी तरह से चूसते हुए एक ऊँगली उसकी छूट में पेल देती है…

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काम्य से रहा नहीं जाता और इस हमले से हु पहली बार झाड़ जाती है और पूरा रास माला के जुबां पे छोड़ती है..

माला भी बड़े शिद्दत से काम्य का रास पी जाती है और बड़े चाव से chat-te हुए कहती hai…accha laga..bahut दिनों के बाद तुझे चखा hai…tu अभी भी वैसे hi पानी छोड़ती hai..jis दिन पहली बार तुझे चखा tha…aur ऐसा कहते हुए माला है देती है और फिर से काम्य की छूट को चूसने में लग जाती hai…aur साथ hi इस बार 2 ऊँगली भी अंदर बहार करती रहती hai..Mala को थोड़ा मस्ती सूझती है और इस बार काम्य की गांड को भी chaat-ti hai..aur फिर से वही दोहराती hai..choot से गांड tak..chaat-te हुए..

काम्य का सेहन शक्ति टूट जाता hai..aur ज़ोर ज़ोर से ाँहें भरते hue…aaah…ooohh…uuuffff…karte हुए माला का सर को छूट पे दबा देती है…

ऐसे hi माला भी बड़े मजे से काम्य की छूट 5 मं तक चूसती है और इन 5 मिनटों में ना जाने कितने बार काम्य झाड़ जाती है…

काम्य ाँहें भर्ती हुए नार्मल होती है और माला से कहती hai..tu तो मेरी जान लेकर hi rahegi..itna मजा दिया तूने..

माला: मरे तेरे dushman…aur उसके ऊपर आकर उसके होंठों को चूम लेती hai..chal अब मुझे खुश kar…aisa कहते हुए माला काम्य के चेहरे के दोनों तरफ अपनी टांग रख कर उकसे मुँह पे बैठ जाती है…

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काम्य भी समझ जाती है और अपनी जुबां माला के छूट के अंदर दाल कर उसको चूसने लग जाती hai…Mala भी गरम हो जाती है और अपनी छूट काम्य के मुँह पे घिसते हुए उसकी जुबां पे दबाव डालती hai…aur काम्य की जीब को ज़्यादा से ज़्यादा उसके अंदर लेने की कोशिश करती है..

काम्य को भी मस्ती सूझती है और माला की छूट chaat-te हुए अपनी एक ऊँगली माला की गांड में घुसाने की कोशिश करती hai…Mala का हु छेद थोड़ा टाइट रहता है लेकिन थोड़ी कोषसिंह के बाद काम्य अपनी ऊँगली उसकी गांड में दाल देती hai..aur जैसे hi उसकी ऊँगली अंदर जाती है माला एकदम से थोड़ा उछाल जाती hai…aur हु भी एकदम ज़ोर से झाड़ जाती है और काम्य का पूरा चेहरा उसके पानी से गीला हो जाता है..

काम्य माला को देखते हुए हस्ती है और उसकी आँखों में देखते हुए उसका रास चक्ति है और कहती hai..tu भी वैसे hi स्वादिष्ट है जैसे मैं hoon..aur है देती है..

माला फिर उसके चेहरे से उतर कर काम्य को चूम लेती है और कहती hai..tune भी मुझे मस्त कर दिया hai..socha नहीं था की तू गांड में ऊँगली karegi…lagta है अब मुझे भी तेरे साथ ऐसा hi करना पड़ेगा..

माला: चल अब तू पलट…

काम्य पलट जाती है और दोनों 69 पोजीशन में आकर एक दुसरे को चूसने लग जाते hai..aur जैसे माला ने कहा tha…kaamya की छूट चूसते हुए एक ऊँगली काम्य की गांड में डालने की कोशिश करती hai..lekin ऊँगली जाती नहीं hai..kyunki वह तो अभी सील पैक thi..to बहुत टाइट थी…

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माला काम्य की छूट को चूसते हुए वह ऊँगली को छूट में दाल कर उसके चुतरस से पूरा गीला करती है और काम्य की गांड को भी थोड़ा गीला कर के फिर से कोशिश करती है और इस बार माला अपनी ऊँगली उसकी गांड में डालने में समर्थ हो जाती है…

माला की ऊँगली उसकी गांड में जाते है काम्य को बहुत ज़ोर से दर्द का एहसास होता है..

Kaamya…aaah….dard होता है wahan…thoda आराम से करो ना…

Maya…dard में hi तो मजा hai..jab ऊँगली जाने से hi इतना दर्द है तो फिर जब मोटा लुंड जाएगा तो झेलोगी कैसे?? इसीलिए तुझे तैयार कर रही hoon…aisa कहते हुए माला अपनी ऊँगली को उसकी गांड में घुसा के आगे पीछे करती है और उसकी छूट को छाती रहती hai..Kaamya को भी अब इसमें मजा आ रहा tha..aur हु भी माला की छूट को पूरा अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसती hai…dono को इसमें बहुत मजा आता है और दोनों hi जल्दी से अपना पानी छोड़ देते है जो दोनों बड़ी शिद्दत से पी जाते hai..phir दोनों अलग हो कर एक दुसरे को देख कर होंठ को चूम कर दोनों फिर से नहाने चले जाते है….

इधर रास्ते में..

ठाकुर के आदमी भी ठाकुर से बात कर के निकल जाते है और राजू भी उनका पीछा करता है लेकिन थोड़ी दूरी बनाये रखता hai..kyunki राजू को पता था वह लोग राजू को पहचान jaayenge..aur जान्ने की कोशिश करता है की वह लोग क्या बात कर रहे है और ठाकुर ने उन्हें क्या बताया है..

वह लोग चलते चलते गाँव आ जाते है और गाँव के चहल पहल और शोर शराबा में राजू को उनकी कुछ बातें सुनाई नहीं देती…

जब उसे लगता है की उस दिन कुछ और नहीं हो सकता तो वह अपने खेत के लिए निकल जाता है …

अपना काम कर के शाम को हु घर पहुँच जाता hai…jahan उसकी तीनो बीविया सज धज के उसका इंतज़ार कर रही होती है…

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घर में chhed-chaad…

तीनो को देख कर हु ठाकुर के बारे में भूल जाता है..

अपने कमरे में जाकर फ्रेश होता है और संध्या को आवाज़ बुलाता hai..Sandhya जब कमरे में आती है तो राजू झट से उसे दीवार से सत्ता देता है और उसके होंठों पे एक गहरा किश करता है और उसकी चुकी दबा देता है..

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संध्या: छोडो ji…kya कर रहे हो? माजी देख लेगी..

राजू: तो देखने दो naa…main तो अपनी बीवी से प्यार कर रहा hoon….aur ऐसा कहते हुए वह अपना हाथ संध्या की छूट पे ले जाता है साडी के ऊपर से hi…aur दबोच लेता है…

संध्या के मुँह से aah…ouchhh…ki सिसीकी निकल जाती hai…aur राजू के हाथ को हटाने की कोशिश करती hai..Raju उसका हाथ हटा कर उसकी कमर पे हाथ फिरता है तो संध्या भी उत्तेजना में ाँहें भर्ती रहती है…

राजू मौका देख कर उसकी साडी में हाथ दाल देता है और पाटा है की उसकी पंतय पूरी गीली हो चुकी hai….apne हाथ को पंतय के ऊपर से छूट तो सहलाते hue….meri jaan..tu तो पूरी गीली हुई है..

संध्या: haan..kyun nahi..subah से आपके इंतज़ार में हम सब मर रहे है और ऐसा कहते हुए राजू के लुंड को पकड़ कर इसको याद कर के hi गीली हुए hai..main hi nahi..shaayad आपकी दोनों और बीवियों की भी शायद एहि हाल है…

इतने में ारु आवाज़ देती hai…miya बीवी में प्यार हो गया हो तो बहार आ jaao…hum भी आपका इंतज़ार कर रहे है…

संध्या भी उसकी बात सुन कर है देती है और राजू का हाथ निकल कर उससे छुटकारा पा कर कमरे से भाग निकलती है..

राजू भी अपनी गीली ऊँगली को chaat-te हुए मस्त हो जाता है और फिर फ्रेश हो कर वह भी बहार आ जाता है..

फिर सब लोग बैठ के बातें करते है लेकिन राजू किसीको कुछ नहीं बताता ठाकुर के बारे में..

रात को..

रात को खाना खा कर सब की सोने तैयारी करते है तो राजू रानी से कहता है की वह माँ के साथ सोये..

राजू और रत्न जब थोड़ा अकेले होते है तो ..

रत्न: बीटा, ऐसा क्यों? ऐसे पहले तो कभी नहीं hua..main अकेले hi सोती thi..ab रानी क्यों मेरे साथ?

राजू रत्न की मनोदशा समझता है और कहता कुछ दिन आप अकेले नहीं rahogi..koi ना कोई आपके साथ सोयेगा..

रत्न: लेकिन ऐसा क्यों?

राजू: पहले की बात अलग thi..ab बात अलग है..

रत्न: क्या अलग है?

राजू: धीरे से रत्न के कान mein…ab वह तीनो मेरी बीवियां बन गयी hai..jab तक मैं अपना दिया हुआ वादा पूरा नहीं karta..aap मेरे साथ नहीं सो सकती..

सुधा और संध्या भी जल्दी माँ बनना चाहती hai..to जब मैं उन्हें प्यार करूंगा तो आप तड़पती रह jaayegi..isiliye मैं नहीं चाहता की आप अकेली रहे..

रत्न: राजू को कामुक नज़रों से देखती hui..tu मेरे इतना ख़याल रखता है?

राजू: अपनी जान से भी zyaada..aur रत्न को बाहों में लेकर उसके होंठ चूम लेता है..

रत्न राजू को अलग कर के झूठे गुस्से se..chal झूठा कहते हुए चले जाती hai…aur राजू अपने कमरे में चला जाता है जहाँ उसकी तीनो बीवियां आज पहली बार उसके बिस्तर पे इंतज़ार कर रही थी..

राजू कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर के पीछे मुद कर देखता है तो देखते hi रह जाता hai..teeno कातिल अदाओं से राजू को देखती रहती hai..aur तीनो hi ट्रांसपेरेंट निघ्त्य पहन कर उसका इंतज़ार कर रही होती है..

राजू से भी उन तीनो को देख कर रहा नहीं जाता और अपने कदम बढ़ाते हुए बिस्तर पे जाता hai…teeno को एक साथ बाहों में लेते hue…aaj मेरा एक सपना पूरा हो गया…

तीनो एक साथ: कौनसा सपना?

राजू: एहि की हम सब एक साथ बिस्तर पे है बिना किसी के dare…aisa कहते हुए राजू बरी बरी से तीनो को चूमता है जिसमें तीनो भी उसका भरपूर साथ देती है..

राजू फिर तीनो को सुला कर बारी बारी से तीनो की निघ्त्य निकल कर नंगा कर देता है और खुद भी नंगा हो जाता है…

तीनो भी बहुत गरम हो जाती hai..aur राजू को सुला कर उसपर टूट पड़ती hai…jahan संध्या और ारु राजू का लुंड अपने मुँह में लेती hai..wahin सुधा उसके मुँह पे बैठ जाती है और राजू भी बड़े मजे से सुधा की छूट chaat-ta है…

ारु उसका लुंड चूसती है तो संध्या उसकी गोटियां..

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कमरे में धमाल मचा हुआ tha..aur ज़ोर से सिसक्यारियाँ गूँज रही thi..jiski आवाज़ रत्न को भी सुनाई देती hai..Ratna की कमरे के सन को याद कर के अपनी छूट मसलते रहती hai…Wahi बगल में रानी का भी कुछ ऐसे hi हाल था…

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लुंड और छूट चूसै के बाद राजू फिर बारी बारी से तीनो को पेलता hai…jismein ना जाने कितनी बार तीनो अपनी चरम सुख में पहुँच कर अपना पानी निकल देती है…

और फिर राजू संध्या और सुधा की गांड भी मारता है जिसमें दोनों को भी बहुत मजा आता है..

जब राजू संध्या की गांड मारता है तो ारु और सुधा भी एक दुसरे की छूट को चाट कर खुश करते hai…aur साथ में संद्य की छूट भी chaat-te hai…aur वैसा hi हाल संध्या और ारु का था जब राजू सुधा की गांड मारता है..

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राजू जब ारु की गांड मारना चाहता था तो ारु कहती है..

ारु: अभी नहीं naa…jab सही समय आएगा तो मैं hi आपको अपनी गांड मारने को kahoongi..tab तक आप मेरी छूट को hi छोड़िये…

राजू: वह समय कब आएगा??

ारु: 2 महीने बाद जब मेरा जन्मदिन आएगा…

राजू भी खुश हो जाता है और ारु की बात मानते हुए उसको भी पेलता है..

बारी बारी से राजू भी अपना तगड़ा रास संध्या और सुधा की छूट में hi छोड़ देता है जैसे की दोनों hi चाहते थे..

अंत में सब थक के सो जाते है और वक़्त का पता भी नहीं chalta…aur गहरी नींद की आग़ोश में चले जाते है..

अगली सुबह…

राजू अगली सुबह जल्दी hi उठ जाता है और फ्रेश हो कर काम्य को फ़ोन करता है तो काम्य कहती है की ठाकुर तो अपने काम से निकल गया है..

राजू भी फटाफट खंडहर की तरफ जाता hai..aur आज हु पक्का निश्चय कर लेता है की उसे जानना है की ठाकुर क्या सोच रहा है…

राजू क्या अपने मंसूबे में कामयाब होगा? देखते है आगे राजू क्या करता है..
 
अपडेट 43: ठाकुर का ant….almost…

अगली सुबह…

राजू अगली सुबह जल्दी hi उठ जाता है और फ्रेश हो कर काम्य को फ़ोन करता है तो काम्य कहती है की ठाकुर तो अपने काम से निकल गया है..

राजू भी फटाफट खंडहर की तरफ जाता hai..jab वह खंडहर पहुंचता है तो उसे आज ठाकुर दिखाई नहीं deta..lekin उसके आदमी दीखते है जो अपने हथियार (बन्दूक, चाक़ू और कुछ ऐसी hi चीज़ें) को ठीक कर के चेक कर रहे थे की सब काम कर रहे है या नहीं..

राजू यह सब देख कर समझ जाता है की कुछ तो गड़बड़ होने वाला hai..lekin kya..kab और kahan..use पता नहीं tha..aur इसी वजह से वह भी थोड़ा परेशान हो जाता hai..lekin थोड़ा सैय्याम रखते हुए वह वहीँ रह कर यह देखना चाहता था की आगे वह लोग क्या करने वाले hai..aaj भी उसका वही हाल था की वह अंदर का नज़ारा तो देख सकता tha..lekin उनकी बातें राजू को सुनाई नहीं दे रही थी..

अंदर खंडहर में..

एक aadmi..doosre se…theek से देख ले be..is बार जैसे ठाकुर ने कहा tha..koi गड़बड़ नहीं होना chahiye..chaaku को धार करना है तो कर lo..kal बहुत काम आने वाला है..

दूसरा आदमी पहले वाले se…haan..theek hai..dekh लेते hai..jab हम उनको पकड़ के लाएंगे तो ठाकुर के बाद हम भी तबियत से उनको chodenge…kya माल है यार सब के sab…bas..ek बार नीचे आ jaaye..phir तो पटक पटक को chodunga..aur ऐसा कहते हुए वह आदमी अपने लुंड को मसल रहा tha..jo की उन औरतों को याद कर के उसका लुंड खड़ा हो गया था..

वह आदमी जब यह बात बोलता है तो बाकी लोग भी ज़ोर के हस्ते है और हाँ में सर हिलाते है…

बहार राजू को यह समझ नहीं आ रहा था की अंदर के लोग किस बात पे है रहे है और किसकी हामी दे रहे hai..Raju बहुत फ़्रस्ट्राटे हो जाता है और बहुत कोशिश करता है की उनकी बातें सुन sake..lekin फिर भी कामयाब नहीं होता तो थोड़ा मायूस हो कर वहीँ रह जाता है..

अंदर के लोग ऐसे hi बातें करते हुए अपना काम करते है और दोपहर को निकलने को होते है..

राजू देख लेता है और राजू सोचता है की उन लोगों का पीछा करेगा और पता करने की कोशिश karega…yeh सोच कर राजू अपने सर पे एक गमछा दाल के अपना चेहरा थोड़ा धक् लेता है ताकि उनको पता ना chale…aur जब वह लोग बहार निकलते है तो उनका पीछा करता है..

वह लोग गाँव आकर पैदल चलते हुए एक चाय की टापरी के तरफ जाते है चाय पीने के liye…aur राजू भी उनका पीछा करता hai..aur उनके बहुत नज़दीक बगल में आ कर उनके साथ चलता है एकदम जैसे आम लोग भीड़ में थोड़ा नज़दीक चलते है..

एक आदमी धीरे से (दुसरे se)..chal..chai पीकर कल रात की तैयारी करते है और फिर कल शाम को मिलते है..

Doosra..theek hai..thakur ने भी एहि कहा की आज अपनी तैयारी कर के घर निकल जाओ और कल hi मिलना…

इतने में दोनों चाय की दूकान पे आकर चाय पीने लगते है और राजू भी अपना चेहरा छुपा कर चाय पीने लगता है..

राजू उनकी बातें सुन लेता है लेकिन यह नहीं जान पाटा की कल रात को क्या होने वाला hai..lekin राजू को अंदेशा हो जाता है की वह लोग किस बारे में बात कर रहे है..

फिर सब लोग वहां से चाय पीकर निकल जाते है और राजू भी अपने घर की तरफ निकल जाता hai..kuch सोचते hue..ki वह जो सोच रहा hai..woh सही है या गलत..

ठाकुर…

ठाकुर आज अच्छे मूड में tha..use पूरा यकीन था की कल के दिन उसके आदमी राजू को मार कर उसके घर की औरतों को उसके सामने ले आएंगे और फिर वह उनकी ज़मीन हड़प सकता है…

इसी ख़ुशी में ठाकुर एक रंडी के पास जाता है और उसे थोक कर दारु पीकर अपने घर चला जाता है एकदम नशे की हालत में..

काम्य ठाकुर की देख कर उसे सहारा देने की कोशिश करती है लेकिन ठाकुर उसकी परवाह ना करते हुए काम्य को धकेल कर लदखता हुआ अपने कमरे में जाकर बिस्तर पे गिर जाता है और सो जाता है..

काम्य माला se..dekhna कैसे दारु पीकर सो गया hai…maine उसे थोड़ा मदत करने की कोशिश ki..lekin मुझे भी धकेल दिया..

माला: यह अब सुधरेगा nahi..iska कुछ नहीं कर सकते…

और ऐसे hi थोड़ा बात कर के वह दोनों भी अपना काम कर के सो जाते है..

दुसरे दिन..

दुसरे दिन भी सब नार्मल hi रहता hai..kisiko कोई शक या गड़बड़ नहीं lagta…sab अपनी अपनी योजना के बारे में सोचते हुए वक़्त बिताते है..

ठाकुर – यह सोच के की आज उसकी सालों की तमन्ना पूरी हो jaayegi…Raju की मौत और उसकी ज़मीन पे कब्ज़ा..

ठाकुर के आदमी – यह सोचते हुए की राजू को मार कर उसकी औरतों को ठाकुर के पास ले जाएंगे और फिर जब उन्हें मौका मिलेगा तो उन्हें छोड़ कर अपनी भूक मिटायेंगे..

राजू – पता नहीं वह क्या सोच रहा tha..aur अपने खेत में बैठा हुआ था..

रात को…

रात को करीब 10 बजे के बाद जब गाँव में सब सो जाते hai..thakur के आदमी अपने हथियार, ेट्स लेकर राजू की घर निकल जाते hai…raasta और गाँव पूरा सुनसान था..

जब वह लोग राजू के घर के नज़दीक जाते है तो पाते है की घर की सब खिड़कियाँ, दरवाज़े सब बंद है (हो की हर घर का एहि हाल tha…)..sab लाइट्स भी बुझी हुई थी और एकदम andhera…aadmiyon को यही लगता है की घर में सब सो रहे है…

एक आदमी एक सरिया निकल कर दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश करता है लेकिन हो नहीं pata..lekin बहुत कोशिश के बाद और बड़ी मुश्किल से दरवाज़ा तोड़ता है और घर में सब लोग जाते है बिना कोई आवाज़ kiye..jaise ठाकुर ने उन्हें बताया tha..zyaada शोर शराबा ना करने kaa..un आदमियों ने सोचा था की वह लोग चुपके से औरतों का मुँह दबा कर उन्हें घर से ले jaayenge..taki कोई आवाज़ ना कर sake..ghar में घुस कर सब कुछ सन्नाटा सा रहता hai..woh लोग एक कमरे में जाते है जो पूरा अँधेरा tha…aadmi टोर्च जला कर देखता है तो उस कमरे में कोई नहीं rehta…unko लगता है की सब दुसरे कमरे में honge…lekin एक एक करके जब सब कमरे ढूंढते है तो वह लोग पाते है की पूरा घर खाली है…

वह लोग गुस्से में आकर घर की सब लाइट्स जला देते है और पूरा घर खाली पा कर गुस्से में घर को तहस नहस कर देते hai…ghar का पूरा सत्यानाश करते है और राजू को गाली देते hai..kyunki उन्हें दर और मालूम था की कल सुबह उनकी शामत आने वाली है जब ठाकुर को पता चलेगा की वह लोग खाली लौट आये है और राजू को नहीं मार सके और ना hi उस घर की औरतों को उसके पास ले जा सके…

वह लोग काफी देर तक राजू के घर में रहते है लेकिन जब वहां कोई नहीं आता तो वह लोग आधी रात को चुपके से निकल जाते hai…aur थोड़ी दूर राजू वहां खड़ा हो कर उनको देखते हुए हस्ता रहता है…

अगली सुबह..

अगली सुबह ठाकुर आज जल्दी hi निकल जाता है (रोज़ के मुक़ाबले) और पहुंच जाता है खढ़हर ..यह सोच के की आज उसकी जीत होने वाली है…

ठाकुर ने अपने आदमी से बोल रखा था की उन औरतों को उठा कर उनको खंडहर में बाँध के रखने को…

ठाकुर जब वहां जाता है तो पाटा है की वहां भी सन्नाटा hai…koi नहीं रहता वहां पर…

ठाकुर आग बबूला हो जाता है और गुस्से से चिल्लाता hai…kahan है सब madarchod..kahan मर गए…

ठाकुर की कड़क आवाज़ से उसके आदमी चुपके से उसके सामने आकर सर झुकाये खड़े रहते है..

ठाकुर: क्या हुआ सालों?? तुम सब अकेले hi ho..kahan है वह सब औरत?

एक आदमी थोड़ा हिचखिचाते hu…sahab जैसा आपने कहा tha..hum सब कल रात को उसके घर गए the..maarne के liye..lekin घर तो पूरा खाली tha..us घर में कोई नहीं था..

ठाकुर जब यह बात सुनता है तो और भी गुस्सा हो जाता है और उस आदमी को गुस्से में लात मारता हुआ गाली देता hai…saale तुम से एक काम भी नहीं hota…us घर की इतनी दिनों से निगरानी कर रहे the…sab वहीँ the..to अचानक सब कैसे गायब हो गए?

आदमी: पता नहीं sahab…ghar का कोना कोना dhoondha..lekin कोई नहीं mila..hum घर में 2 घंटे the..ki शायद वह लोग बहार गए honge..agar आगये तो उन्हें उठा laayenge…lekin कोई नहीं aaya..to हम लौट आये..

ठाकुर अब भी गुस्से में tha…aur उनको गालियां दे रहा tha…jab उसे अपनी हार नज़र आ रही थी तो वह अजय को फ़ोन करता है..

ठाकुर: सुन Ajay…aur फिर उसे सब बताता है..

अजय: ok chachu..mujhe एक हफ्ते का टाइम do…main hi वहां आता हूँ और फिर उसका काम तमाम करता hoon..tab तक आप लोग ऐसा कोई काम मत करो की लोगों को शक हो जाए..

ठाकुर अजय की बात मान तो लेता है लेकिन फिर भी बहुत गुस्से में होता hai..aur फिर वैसे hi गुस्से में घर के लिए निकल जाता है यह सोचते हुए की आखिर उससे गलती कहाँ हो गयी है....

<फ्लैशबैक>

पिछले दिन पहले राजू जब अपने खेत जाता है और रास्ते में सोचता है की कहीं ना कहीं ठाकुर के आदमी उसे नुक्सान पहुंचाने वाले hai…use और उसके परिवार को..

राजू को इतना तो समझ आता है की बात अब बहुत सीरियस है और वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहते था..

खेत में कुछ देर रह कर घर पहुँच कर राजू सब को बुला कर इक्कट्ठा करता hai..lekin उस वक़्त ारु और सुधा बहार गयी हुई थी..

राजू को इतना सीरियस देख कर रत्न को भी दर लगता है और जल्दी hi सुधा और ारु को भी बुला लेती है…

जब सब आ जाते है तो राजू कहता है..

राजू: पहली baat…aap सब को मुझ पे कितना भरोसा है?

सब: यह कैसा सवाल hai..tum तो अब हमारे पति हो..

राजू: फिर भी..

रत्न: यह क्या बात कर रहे हो बीटा?

राजू: तो suno..main जो कह रहा hoon..dhyaan से suno..aur मैं जैसा कहता हूँ वैसे hi करो..

ारु: क्या कहना चा रहे हो आप?

राजू: हो सकता है (मैं शायद गलत भी हो सकता hoon..lekin अभी पूरा पक्का नहीं hai)..Thakur के आदमी हम पर हुम्ला कर सकते hai..mujhe ऐसा लग रहा hai..do दिन से उनका पीछा कर रहा hoon…woh लोग अपने हतियार को ठीक कर रहे the..mujhe शक है लेकिन पूरा यकीन नहीं है..

राजू की यह बात सुन कर सब का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है..

संध्या: ऐसा क्यों लगता है aapko…aur ठाकुर हम पे हुम्ला क्यों करवाएगा?

राजू: कहा था na..uski नज़र तुम सब पर है और हमारे ज़मीन पे भी hai..aur 2-3 दिन से देख रहा हूँ के उसके आदमी हमारे घर पे निगरानी नहीं कर रहे है..

राजू: तो Suno…tum सब लोग हफ्ता 10 दिन के लिए सामान बाँध लो और रानी के घर चले जाओ..

जैसा तुम सब को पता hai…Rani अब पेट से hai..aur मैं कोई रिस्क नहीं लेना chahta..main नहीं चाहते की कोई इस परिवार को नुक्सान पहुंचाए..

रत्न: वह तो ठीक है beta…humaare साथ तुम भी चलो..

राजू: नहीं maa..main नहीं जा sakta..mujhe देखना है की ठाकुर क्या करता hai..agar में भी तुम लोगों के साथ आ गया तो ठाकुर क्या कर रहा है ..मुझे पता नहीं चलेगा..

सुधा: ऐसी बात है तो हम में से कोई तुम्हारे साथ रहेगा..

राजू: नहीं…

सुधा: फिर bhi…jab सुधा यह बात कहती है तो राजू उसको पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठों पे रख कर एक किश करते hue…uski बात को kaat-te हुए नहीं तो nahi…isiliye मैंने तुम सब से पुछा tha..ki मुझ पर कितना भरोसा करते हो..

रानी: भरोसा तो है लेकिन…

राजू फिर से रानी की तरफ देख kar..tera भी मुँह बंद कर दूँ क्या??

रानी उसकी बात समझ जाती hai…aur अपनी आखें नीचे कर लेती है..

राजू: तो जल्दी से सब तैयार हो जाओ..

फिर सब जल्दी से फटाफट तैयार हो जाते hai…aur जाने को रेडी रहते है..

रत्न: beta..mujhe बहुत दर लग रहा है..

राजू: मुझ पर भरोसा रखो maa..kuch नहीं होगा..

सब दुखी मन से जाने को होते hai..to राजू यह देख कर सब को एक एक कर के सब के सामने सब के होंठों पे एक गहरा चुम्बन करता है और बेशर्मी से कहता hai..mera यह किश तुम सब को मेरी याद दिलाएगी और गीला भी करती रहेगी…

राजू जब यह बात कहता है तो सब के चेहरे पे मुस्कान आ जाती hai…aur रत्न से कहता hai..apne होने वाले पोता और उसकी माँ का अच्छे से ख्याल रखना..

रत्न: रत्न हाँ में सर हिला देती है और कहती है की वह उनको रोज़ फ़ोन करते रहेगा और अपना हाल चाल बताता रहेगा….

राजू भी इस बात को मान जाता hai…..aur राजू उनको को बस में बिठा के रानी के गाँव की तरफ भेज देता hai..aur रह जाता है अकेला राजू…

इस तरह से राजू का घर खाली रहता है..

<एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक>

बैक तो ठाकुर..

जब वह घर जाता है तो काम्य उसे कल रात को पीने के बारे में पूछना चाहती थी..

लेकिन ठाकुर का पारा चढ़ा हुआ tha..jab काम्य उसे बात करना चाहती thi..to गुस्से में वह काम्य को बहुत मारता hai…laat भी मारता hai..kaamya शोर करती है तो माला दौड़ कर काम्य को बचाती है और ठाकुर को भी गुस्से से पूछती है की वह काम्य को क्यों मार रहा है..

ठाकुर: चुप kar….agar तू बीच में आएगी तो तुझे भी maaroonga..aur फिर काम्य को मारने की कोशिश करता है..

माला काम्य को बचा लेती hai..aur गुस्से से और ठाकुर को भी गाली देते हुए काम्य को वहां से ले जाती है और कहती है ठाकुर से…1-2 दिन मैं काम्य को यहाँ से ले जाऊँगी…

ठाकुर और गुस्सा हो जाता है और माला को मारने के लिए आगे बढ़ता है तो माला जल्दी से बहार आकर दरवाज़ा बहार से बंद कर देती है और ठाकुर दरवाज़े को peeth-ta रह जाता है..

बहार आ कर काम्य रट हुए माला के गले लग जाती है और ठाकुर से बचाने के लिए उसका धन्यवाद करती है और फिर वैसे हो रट हुए राजू को फ़ोन करती है और राजू को सब बताती है…

राजू को पहले से hi सब पता tha..lekin वह कुछ नहीं कहता उसके बारे में और काम्य से इतना hi कहता है की जब इतने दिन ठाकुर के ज़ुल्म सहा है तो 3-4 दिन और इंतज़ार कर le…woh कुछ हाल निकालेगा ठाकुर के बारे में..

राजू को भी अब लगता है की पानी सर के ऊपर से निकल रहा है और जल्दी hi ठाकुर का कुछ करना पड़ेगा…

ठाकुर का रूटीन…

राजू कुछ सोचता है और फिर से चुपके से ठाकुर का पीछा करता है और jaan-na चाहता की ठाकुर अपना दिन कहाँ और कैसे बिताता है…

3-4 दिन तक राजू ठाकुर का पीछा करता है और देखता है की ठाकुर शाम को घर आते वक़्त एक जगह रुकता hai..aur 30-40 मं तक वह एक जगह अपनी गाडी रोक कर अंदर जंगल में जाता hai…aur फिर बहार आकर अपने घर के लिए निकल जाता है…

पहले दिन राजू को समझ नहीं आता की ठाकुर जंगल में क्या कर रहा है..

दुसरे दिन जब ठाकुर जंगल में जाता है तो राजू भी चुपके से बिना किसी को दिखे वह भी जंगल के अंदर जाता है करीब 400-500 मत्स्य और देखता है की वहां पर एक जगह पर बैठ के ठाकुर मस्त दारु पीटा है सुकून se…aur फिर वापस 30-45 मिस बाद बहार आकर घर के लिए निकल जाता है..

हर रोज़ ठाकुर का एहि काम tha…sham को घर जाते वक़्त उस जगह पर रुकना, दारु पीना और घर के निकल जाना…

राजू की कामुक baatein…apni बीवियों से…

रत्न ने जैसे कहा tha…Raju रोज़ उनको फ़ोन करके अपना हाल चाल बताता tha..lekin यह नहीं की वह क्या कर रहा है…

राजू ारु से: क्या कर रही हो जान?

ारु: क्या karoongi…tumhaari बहुत याद आती है..

राजू: सिर्फ मेरी?

ारु: haan..aur नहीं तो क्या?

राजू: अब तो खुल जाओ jaanu…kyun शर्माती हो?

ारु: शर्म तो आएगी ना…

राजू: इतने दिनों से हम एक दुसरे को इतना जानते hai..phir भी शर्मा रही ho…lagta है फिर से अच्छे से तुम्हारी शर्म दूर करनी पड़ेगी..

ारु: मैं भी तो एहि चाहती हूँ की तुम भी यहाँ आ जाओ और शर्म दूर कर दो…

राजू: ठीक hai..jaldi hi आता hoon…aur बाकी क्या कर रहे है?

ारु: सब यहीं पर hai..lo अपनी दूसरी बीवी से बात karo…aur फ़ोन सुधा को देती है..

राजू: सुधा se…darling..kya कर रही हो?

सुधा: क्या karoongi…jaise ारु ने kaha..tumhaari याद में तड़प रहे है..

राजू: तड़प hi रहे है या और kuch..shararti अंदाज़ में..

सुधा: तड़प भी रहे है और एकदम गीली भी हो रहे है…

राजू: मजे लेते hue…kya गीली हो रहे है? हाथ पाँव या और कुछ…

सुधा: चुप करो badmaash..tumhe पता नहीं क्या?

राजू: शरारत se..pata nahi..isiliye पूछ रहा हूँ…

सुधा: धीरे se…tumne हमे बेशरम बना hi दिया है तो suno…hum सब की छूटें एकदम गीली हो रही है तुम्हे याद कर ke…ab खुश….

राजू: ज़ोर से हस्ते hue..yeh हुई ना baat…chinta मत karo…jab आऊँगा तो तुम सब का गीलापन दूर कर दूंगा…

सुधा: कब आ रहे हो? तुमसे मिलने के लिए तड़प रहे है…

राजू: जल्दी hi…aur जब आऊँगा तो शायद खुश खबर भी लाऊँगा..

सुधा: क्या खबर?

राजू: अभी कुछ बता नहीं sakta…thoda सबर करो…

और ऐसे hi संध्या से भी बात करता hai…aur फिर कॉल कट कर देता hai..phone कट करने के बाद सब उत्तेजित हो जाते है और एक दुसरे को अपने हाथों से ठंडा करते है..

ठाकुर पे वार…

चौथे दिन भी राजू ठाकुर का पीछा करता है और वही रूटीन पाटा है ठाकुर का..

इसी बीच ठाकुर भी अजय की राह देखता है की वह कब आएगा और कब राजू पे वार karega…bina यह जाने की आगे क्या होने वाला है उसके साथ..

राजू यह निश्चय कर लेता है की ठाकुर पे वार करने का वक़्त आ गया है और उस रात राजू भी अपनी तैयारी कर लेता है….

अगले दिन राजू उस जगह पे पहले hi पहुँच जाता है और ठाकुर का इंतज़ार करता hai..jab ठाकुर अपनी गाडी रोक कर जंगल की तरफ जाता है तो थोड़ा अंदर जाने के बाद राजू चुपके से पीछे से आकर ठाकुर का मुँह दबाते हुए एक रोड से उसके राइट कंधे पर ज़बरदस्त वार करता hai…Thakur की आवाज़ राजू के हाथों में hi डाब जाती hai…instinctively ठाकुर दाहिने (राइट) तरफ से मुंडी घुमा कर पीछे देखने की कोशिश करता है तो राजू बाएं तरफ से ठाकुर के सामने आ जाता hai…is वक़्त राजू अपना चेहरा धक् लेता है और ठाकुर उसे पहचान नहीं पाटा..

ठाकुर जब वापस राजू की तरफ सामने देखता है तो राजू उसके गले में फिर से हाथ से वार करता hai…Thakur अपना हाथ गले को पकड़ कर गिरता चला जाता है और फिर से इस बार राजू अपने रोड से ठाकुर घुटनो पे निशाना लगा कर ज़बरदस्त वार करता hai…thakur पर इतने हमले सेहन नहीं कर पाटा और दर्द और पीड़ा के मारे ठाकुर वही गिर जाता hai….aur क्यूंकि राजू ठाकुर के गले में वार करता है तो ठाकुर की आवाज़ डाब जाती है और उसकी आवाज़ नहीं निकल पाती…

जब ठाकुर ज़मीन पे गिर रहा होता है तो राजू अपना मोबाइल निकल कर एक फोटो ले लेता है..

राजू चुपके से बिना कोई आवाज़ किये वहां से निकल जाता hai…aur ठाकुर बिलबिलाता हुआ वहां तड़पते हुए गिर जाता है..

बहार ठाकुर के आदमी उसका इंतज़ार कर रहे होते hai..aur जब 1 घंटा बीत जाता है और ठाकुर बहार नहीं आता तो 2 आदमी डरते हुए अंदर जाते है (ठाकुर उनको पहले hi हिदायत देता है की जब वह अंदर जंगल में हो तो कोई उसे परेशान नहीं करेगा)..

अंदर आदमी देखता है की ठाकुर बुरी तरह से ज़ख़्मी हुए पढ़ा है और दर्द से तड़प रहा है..

वह आदमी ज़ोर से चिल्लाते हुए बाकियों को बुलाता है और ठाकुर को जल्दी hi हॉस्पिटल लेकर जाते hai..aur साथ hi उसके घर में भी खबर भिजवा देते है की ठाकुर पर किसीने हुम्ला किया है..

काम्य और माला भी जल्दी hi हॉस्पिटल पहुँच जाते है और डॉक्टर से pooch-taach करते है..

यह बात पूरे गाँव में आग की तरफ फ़ैल जाती है की ठाकुर को किसी ने मारा है और वह हॉस्टपिटल में hai..jahan लोग दिखावे के लिए अफ़सोस जताते hai..wahin सब मन में बहुत खुश थे की chalo..kisine ठाकुर को मार तो दिया hai…kyunki उन सब गाँव वालो की ज़मीन के कागज़ ठाकुर ने हड़प लिया tha..aur उनसे पैसे वसूल करके ऐश करता tha…log जितना भी अपने क़र्ज़ की भरपाई karte..lekin ठाकुर हमेशा कहता था की क़र्ज़ पूरा नहीं हुआ है…

डॉक्टर ठाकुर को जांच करता है और कहता है की उनको बहुत चोट आयी है लेकिन आगे और कुछ नहीं कह sakta…unko ट्रीटमेंट करने के बाद hi वह कुछ बता सकता है..

माला और काम्य भी दिखावा करते हुए सब के सामने परेशान होने का नाटक करते है बूत मन hi मन खुश होते है की आखिर में उन्हें ठाकुर से छुटकारा मिल सकता hai..kyunki उनको भी अंदेशा था की यह काम राजू ने hi किया होगा कर के...

वहीँ ठाकुर के आदमी अजय को भी बताते है की ठाकुर पे हुम्ला हुआ है…

अजय (उसकी बीवी कुसुम और सास गौरी के साथ) भी वहां आता है और वह भी डॉक्टर से पूछता hai..doctor भी उसको वही जवाब देता है..

डॉक्टर्स अपने काम में लगे होते है तो अजय ठाकुर के आदमियों से मिलता है और उनसे jaan-ne की कोशिश करता है की यह सब कैसे हुआ है..

ठाकुर के आदमी उसे सब बताते है…

डॉक्टर्स ठाकुर का इलाज करते है और ठीक करने की कोशिश करते hai..lekin राजू का हुम्ला इतना घातक था डॉक्टर्स भी ज़्यादा कुछ नहीं कर पाते…

एक हफ्ते बाद..

डॉक्टर्स माला, काम्य और अजय को बुला कर कहते है की ठाकुर की हालत बहुत ख़राब hai…gale पे वार होने से उनकी आवाज़ चली गयी hai…ghutne दोनों टूट गए है और उनको लकवा (पैरालिसिस) भी आ गया hai..woh अभी कुछ hi दिनों के मेहमान है और हॉस्पिटल में रह के कोई फायदा नहीं hai…Doctors की बहुतबेहतर है की बाकी के दिन वह घर पे hi bitaaye…itna कहते हुए डॉक्टर्स भी अपना हाथ खड़ा कर देते है..

अजय को भी थोड़ा गुस्सा आता है लेकिन डॉक्टर्स के सामने ज़्यादा कुछ नहीं kehta…jab वह ठाकुर को देखता है तो उसे भी लगता है की डॉक्टर्स सही कह रहे hai…uski हालत बहुत बिगड़ी हुई thi…almost अधमरा सा पड़ा हुआ tha…hospital के बिस्तर पे..

वह सब भी डॉक्टर का कहा मान लेते है और ठाकुर को घर ले आते है…

घर में लाने के बाद अजय काम्य से कहता है की उसे बहुत ज़रूरी काम है और कुसुम को लेकर निकल जाता hai..yeh कहते हुए की जल्दी hi हफ्ते-10 में वापस आएगा और उसी समय वह शहर के एक अच्छे डॉक्टर से सलाह लेकर शहर ले जाकर उसका इलाज karwaayega…tab तक ठाकुर की देख बाल कर के उसे थोड़ा अच्छा करने की कोशिश करे…

आगे क्या होता hai..kya ठाकुर बच paayega..jaante है अगले अपडेट mein…thanks फॉर योर पेशेंस एंड सपोर्ट…
 
अपडेट 44: गाँव की यात्रा (2ंद राउंड) (मेगा अपडेट)

यहाँ गाँव में ठाकुर के साथ इतना हो रहा tha..to वहीँ राजू ठाकुर को मारने के बाद जंगल से चुपके से निकलने के बाद अपना फ़ोन ऑफ कर देता है और अपने घर को ताला लगा कर बस पकड़ कर रानी के घर को निकल जाता है..

रानी के घर..

राजू जब रानी के घर पहुँचता है तो उसे देख कर सब खुश हो जाते है और तीनो बीविया कामुक नज़रों से उसको देखती hai…Raju जान लेता है लेकिन कुछ नहीं कहता..

रत्न राजू से पूछती है की इतने दिन घर में अकेला क्या कर रहा tha..to राजू कुछ नहीं कहता और कहता है की रात को आराम से बात karega…Ratna फिर भी जानने की कोशिश करती है कुछ नहीं होता..

ठाकुर के घर..

ठाकुर के घर में थोड़ी बहुत हलचल होती hai..usko देखने के लिए लोग घर आते hai..lekin ठाकुर वैसे hi एकदम मुर्दे के माफिक पड़ा रहता hai..naa कुछ बोल सकता ना चल sakta..Kaamya उसको एक कुर्सी पे बिठा कर लोगों को मिलती है..

जब सब लोग चले जाते है और सिर्फ वह hi रह जाते है तो काम्य ठाकुर के पास आकर कहती है..

तुम्हे ऐसे देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही hai..tum सोच रहे होंगे की मैं तुम्हारी बीवी होकर ऐसे कैसे बात कर रही hoon…lekin तुमने कभी मुझे अपनी बीवी की तरह देखा है nahi…ghar में मैं सिर्फ एक नौकरानी बन कर hi रह रही hoon..aur जितने जुल्म तुमने मुझे और तुम्हारी बहिन पे किये hai..shayad भगवान् ने हमारी (बात) सुन ली है और तुम्हारा यह हाल देख कर हमें कोई दुःख नहीं है…

ठाकुर उसकी बात सुन कर कुछ नहीं कर paata…apna हाथ उठाने की कोशिश करता है लेकिन वह भी नहीं कर पाटा. बस गुस्से से काम्य को देखता रह जाता है..

काम्य: ठहरो एक min..aur वह तुरंत राजू को फ़ोन करती hai..lekin राजू का फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो उससे बात नहीं कर paati..Kaamya को अंदेशा था की ठाकुर की यह हालत उसी ने की hai..Thakur के सामने उसे बात कर के ठाकुर को और जलाना चाहती thi..but बदकिस्मती से राजू से बात नहीं हो पाती..

इतने में रानी भी वहां आ जाती है और काम्य से पूछती hai..thakur के सामने hi..

रानी: किसको फ़ोन कर रही है?

काम्य: राजू ko…jab काम्य यह बात कहती है तो दोनों ठाकुर को देखते hai…Thakur के चेहरे का रंग उड़ जाता hai…lekin कुछ नहीं कर पाटा..

रानी: ठाकुर se…dheemi आवाज़ mein…kyun..Raju का नाम सुन कर परेशानी हो रही है क्या?

ठाकुर गुस्से में अपने हाथ पाँव हिलता hai..lekin इससे ज़्यादा और कुछ नहीं कह पाटा..

इतने में उसे देखने कुछ और लोग आते है तो रानी और काम्य नार्मल हो कर सब से मिलते है..

रानी के घर रात को…

यहाँ रानी के घर में दिन में ज़्यादा कुछ और नहीं होता. रात को खाना खाने के बाद सब लोगों की इच्छा बहुत होती है की इतने दिनों में राजू ने क्या किया है..

खाना खाने के बाद रानी उसके पति को बहार सुला कर हु भी कमरे में आ जाता है जहाँ सब बैठे हुए the..aur राजू के बोलने का इंतज़ार कर रहे थे..

रत्न फिर से राजू से पूछती है तो राजू सब की आँखों में देखते हुए इशारा करता है..

उसका इशारा किसी को समझ नहीं आता तो रतनी पूछ hi लेती है..

रत्न: क्या इशारा कर रहा है? हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है..

तो राजू अपनी पॉकेट से मोबाइल निकल कर फोटो ओपन करके रत्न को दिखाता hai..Ratna वह फोटो को देख कर अपनी आँखें बड़ी कर लेती है और मुँह पे हाथ रख कर आश्चर्य से देखती है..

बाकी सब भी हैरान रह जाते है और बारी बारी से मोबाइल में वह फोटो देखते है..

जब किसीको कुछ समझ नहीं aata..to रत्न को झट से याद आता है और पूछती है..

रत्न: कहीं यह ठाकुर का फोटो तो नहीं है? जब यह बात रत्न कहती है तो सब की आँखें भी बड़ी हो जाती है..

राजू: हाँ maa..sahi kaha…yeh ठाकुर का hi फोटो hai..maine उसे उसके कुकर्मों की सजा दे दिया है…

राजू: जहाँ तक मुझे अंदाजा hai…Thakur अभी कुछ बोल नहीं paayega..naa hi चल paayega..…maine उसके गले पे और घुटनों में बहुत ज़बरदस्त वार किया है..

यह फोटो तो उसके गिरने की तस्वीर hai..lekin मैं उसे जैसे मारा hai..mujhe लगता नहीं की वह उठ पायेगा..

रत्न: उसने तुम्हें पहचाना नहीं क्या?

राजू: nahi..maine अपना चेहरा ढाका हुआ tha…aur उसे मैंने ज़्यादा वक़्त भी नहीं diya..yeh सब मैंने 5-6 मं के अंदर hi ख़तम करके वहां से निकल गया..

रत्न: ऐसा क्यों किया बीटा?

फिर राजू पिछले पूरे 4-5 दिन की घटना को बयान करता hai…uski बातें सुन के सब शॉक हो जाते है…

रत्न: इतना कुछ hua..aur तुमने हमें बताया भी नहीं..

राजू: बताता तो आप लोग क्या करते? और ज़्यादा परेशान हो jaate…isiliye चुपके से मैंने hi वह काम कर दिया…

राजू की बात जान कर सब को ख़ुशी होती है और राजू फिर कहता hai…ab ठाकुर से डरने की हमें कोई बात नहीं है…

यह बात सुनते hi रत्न और बाकियों की आँखों में आंसूं आ जाते है..

राजू: अब आप लोगों को रोना नहीं hai…rone के दिन तो ठाकुर के शुरू हो गए है..

ारु: अच्छा किया राजू जो तुमने ठाकुर से बदला ले लिया है..

राजू: नहीं Aaru..abhi बदला पूरा नहीं हुआ है..

ारु: मतलब?

राजू: अभी तो ठाकुर को जिस्म पे चोट किया hai..abhi उसके रूह पे चोट कर के और ज़लील कर के मरना hai..tabhi पिताजी और रवि की आत्मा को शान्ति मिलेगी..

सुधा: वह सब कैसे होगा?

राजू: सब की आँखों में देखते hue…Ratna से कहता है..

राजू: maa..maine अभी तक हो भी किया hai..aapse छुपाया नहीं hai..aur आगे जॉब hi karoonga..woh भी bataaonga..waise भी अब आप सब लोग मेरी बीवी बन गए ho..to jaan-ne का हक़ तुम सब को है..

रत्न: तो करना क्या चाहते ho..ki वह और ज़लील हो जाए….

राजू: एक गहरी सांस लेते hue..sab की तरफ देख kar…shayad तुम सबको बुरा lage..lekin इससे अच्छा तरीका और नहीं है..

ारु: मतलब?

राजू: मतलब यह की मैं ठाकुर के सामने hi उसकी बीवी और बहिन के साथ हमबिस्तर हो jaaonga…yehi मैंने उसकी बीवी और बहिन से वादा किया tha…jab ठाकुर उसके सामने यह सब होता हुआ dekhega..to उसकी रूह कांप uthegi..aur जो ज़िल्लत वह महसूस karega..woh देकने लायक होगा और वही सही तरीके से मेरा बदला पूरा hoga…Raju यह बोल कर चुप हो जाता है और कमरे में सन्नाटा चा जाता है..

ारु उस सन्नाटे को तोड़ते hue..aage बढ़ कर राजू को गले लगा लेती है और उसे चेहरे को चूमते हुए…

ारु: इसीलिए तुम हमें इतने अच्छे लगते हो Raju..main तो बहुत खुश हूँ की मैं अब तुम्हारी बीवी hoon…tumhaari जगह और कोई होता तो शायद हमारे पीछे hi यह सब काम करता और हमें अँधेरे में rakhta..lekin तुमने ऐसा नहीं kiya..aur ऐसा कहते हुए ारु भी रोने लगती hai…kuch पल बाद अपने आंसूं पोछते hue..yeh तो ख़ुशी के आंसूं है राजू..

मैं बस इतना hi कहूँगी की हम पर तुम्हारा प्यार कभी काम ना हो…

राजू: ऐसा कैसे कहती हो ारु? तुम सब तो मेरी जान ho..mera प्यार तुम सब के लिए कभी काम नहीं hoga…aur अपनी बाहें फैला देता है तो बाकी सब भी रट हुए राजू से लिपट जाते है..

इतने में राजू का फ़ोन बजता hai…Raju जब फ़ोन देखता है तो काम्य का नंबर था..

राजू: हस्ते hue..lo शैतान का नाम लो ..और शैतान हाज़िर..

राजू फ़ोन पिक करते हुए..

काम्य: कहाँ हो राजू? पिछले 2-3 दिनों से मैं तुम्हे रोज़ फ़ोन कर रही hoon..lekin तुम्हारा फ़ोन बंद पड़ा हुआ है..

राजू: मैं थोड़ा काम से बहार हूँ..2-3 दिन लगेंगे आने में..

काम्य: कहाँ हो?

राजू: फिलहाल तो बता नहीं sakta…lekin (अनजान बनते hue)..itni रात को मुझे फ़ोन क्यों किया??

धीमी आवाज़ mein..bahut धन्यवाद Raju..jo तुमने किया है..

राजू: अनजान बनते hue..maine क्या किया?

काम्य: मुझे तुम इतना बेवक़ूफ़ समझते हो क्या? मुझे इतना तो पता चल hi गया है की ठाकुर की जो हालत हुई hai..woh इस गाँव में तुम्हारे शिव और कोई नहीं कर sakta..aur फिर भी अनजान बनने की कोशिश कर रहे हो?

राजू: तुम्हे कैसे पता चला?

काम्य: तुम रोज़ मुझे फ़ोन कर के ठाकुर के बारे में पूछते the..aur जानना चाहते थे की ठाकुर कब घर से निकलता है और कहाँ जाता है..

राजू: suno…yeh सब बातें अभी फ़ोन पर nahi..kuch गड़बड़ हो सकता hai..main 2-3 दिन में आता hoon..phir बात करते hai..tab तक मुझे फ़ोन मत karna..aur रानी से भी कहना की मुझे फ़ोन ना करे..

काम्य: ठीक hai…lekin जल्दी aana..doctor ने कहा है की उसकी हालत ठीक नहीं hai..zyaada दिन और रह नहीं पायेगा..

राजू: ठीक hai..jaldi hi आता hoon..aur फ़ोन कट कर देता है..

और फिर सब को बताता है की ठाकुर अब ज़्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहने वाला है..

सब चैन की सांस लेते hai..raat बहुत हो गया tha..to सब सो सुकून से सो जाते hai..kuch लोग बिस्तर पे तो कुछ लोग ज़मीन pe…(Rani का छोटा घर tha…aur कमरे भी काम थे..)

अगली सुबह..

अगली सुबह उठ कर अपना काम कर के चाय पीते रहते बात करते है..

राजू संध्या से: Sandhya…chale क्या झरने पे?

संध्या: नहीं baba..main नहीं आने वाली hoon..aap अपनी बाकी दोनों बीवियों को ले jaao..aur उसको आँख मार देती है..

सुधा: संध्या, ऐसा क्या है? तुम क्यों नहीं जाना चाहती?

संध्या राजू की तरफ देखते hue..na बाबा naa…aur कुछ नहीं कह पाती..

राजू: तो ठीक haim…main, ारु और सुधा hi चले जाते है..

रानी: haan..tum लोग हो jaao…Aaru, पास में hi बहुत अच्छा झरना hai..paani भी बहुत साफ़ hai..wahan तुम सब लोगों को बहुत मजा आएगा..

तीनो हाँ में सर हिला देते है और जाने के लिए तैयार हो जाते है..

सुधा संध्या को बगल में ले जा कर.. (राजू तिरछी नज़र से उनको देख लेता है)

तुम क्यों नहीं आना चाहती हो?

संध्या: क्या बताऊँ didi…pichli बार जब हम वहां गए the..to झरने में hi मुझे राजू ने खूब मसल दिया tha..aur धीरे से सुधा के कान mein..aur खूब जैम कर छोड़ा था mujhe…usko याद कर के मेरी छूट अब भी गीली हो जाती है..

Sudha:to यह बात है..

संध्या: haan..isiliye इस बार आप और ारु जाओ और मजे कर के aao…khule में छोड़ने का मजा hi कुछ और hai…aur जब कोई नहीं देख रहा होता है तो संध्या भी सुधा की चुकी को दबा देती hai..aur उसके होंठ चूम kar..jaao…maje करो…

सुधा भी है कर अलग हो kar…sharmaate हुए निकल जाती है..

झरने पे..

राजू, सुधा और ारु फिर तैयार होकर झरने के तरफ निकल जाते hai..jo गाँव से थोड़ा दूर tha..man में सुधा को पता था की वहां पर क्या होने वाला hai…kyunki संध्या ने उसे पहले hi बता दिया था..

लेकिन जब वह झरने के पास पहुंचते है तो ारु और सुधा का ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha…kyunki दृश्य hi इतना सुन्दर tha…halka सा थोड़ा dhoop..aur उन्हें डिस्टर्ब करने वाला कोई nahi..sirf वह तीन लोग…

ऊपर से नीचे गिरता हुआ paani..woh भी एकदम saaf…aur मस्त हवा भी चल रहा tha…dono बहुत खुश हो जाते है..

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और झरने को देखते हुए सुधा थोड़ा आगे निकल जाती है..

राजू फिर ारु को अपनी बाहों में lekar..Sudha को देखते हुए..

राजू: dekho..tumhaari सौतन कितना गदरा गयी hai..ekdum सुडोल chuchiyaan..uthi हुई gaand..kya कहती हो?

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ारु: haan…gadra तो जायेगी naa..roz जो आप उसको ठोकते हो…

राजू: जान भूझ kar…matlab?

ारु राजू के कान में (भले वहां और कोई नहीं tha)..roz जो तुम उसको पटक पटक कर छोड़ते ho…to ऐसा hi हाल होगा naa…aisa कहते हुए ारु राजू के होंठ चूम लेती है..

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राजू: dekhna..tum भी 2-3 महीनो में ऐसे hi हो जाओगी..

ारु: पता hai…uske साथ मुझे भी तो जैम के छोड़ते ho..to मेरी भी चूचियां और गांड उभर आएगी ना..

राजू: क्यों, तुमको पसंद नहीं है क्या?

ारु: ना में सर हिलाते हुए और हस्ते hue..bahut पसंद है…

इतने में सुधा पलट कर देखती है की दोनों कुछ फूस फूसा रहे है..

सुधा: दोनों क्या खुसुर फुसुर कर रहे हो?

दोनों उसके पास जाते है और राजू सुधा को पीछे से पकड़ते हुए एक हाथ से चुकी दबा देता है और दुसरे हाथ को उसके गांड पे रख kar…Aaru से कह रहा था की तुम बहुत गदरा गयी ho..dekho तुम्हारी चुकी की साइज भी थोड़ा बढ़ गया hai..aur ऐसा कहते हुए उसकी चुकी को भी मसल देता है और दुसरे हाथ से उसके गांड पे चपत मारता hai..aur यह भी तो उभर गयी है..

राजू: वैसे घर में संध्या क्या कह रही थी तुम्हे?

सुधा थोड़ा बात को टालते hue..kuch नहीं..

राजू: अरे, मुझसे क्या छुपाना? इतना भी क्या सीक्रेट है की अपने पति को भी नहीं बताओगे??

सुधा यह बात सुन के राजू के कान में कहती है..

संध्या कह रही थी की क्या हुआ जब तुम दोनों यहाँ आये the..pichli बार..

राजू भी मजाक mein…kya हुआ था?

सुधा: बहुत शैतान हो रहे ho…pata नहीं तुम्हे क्या हुआ था?

राजू: मैं तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता हूँ..

Sudha:Sandhya कह रही थी की तुमने उसे जैम के पेला है इस खुले मौसम mein..aur इस बात को याद करके उसकी छूट भी गीली हो जाती है..

राजू: तो तुम दोनों भी तैयार हो jaao..khule में अनुभव करने के लिए…

सुधा जब यह बात राजू से सुनती है तो शर्मा जाती hai..aur धत कहते हुए उससे अलग हो जाती hai..aur फिर वह तीनो झरने की तरफ निकल जाते है..

30-45 मं तक तीनो झरने पे खेलते hai…ek दुसरे पे पानी फेंकते hai..aur नहाते भी है..

जब तीनो झरने से बहार आते है तो राजू सुधा को देखता है तो उसका लुंड एकदम फुल तन जाता hai…kyunki इस वक़्त सुधा एकदम कामुक लग रही थी…

पानी में भीगने की वजह से उसका ब्लाउज एकदम ट्रांसपेरेंट हो जाता है और उसकी चूचियां साफ़ दिख रही होती hai..saath में एकदम तने और खड़े हुए निप्पल जो की ब्लाउज में से दिख रहे थे..

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सुधा पलट कर राजू की नज़रों को देखती है तो समझ जाती है की राजू का हाल ऐसा क्यों hai..aur अपनी गांड मटकाते हुए पानी से निकल जाती है..

तीनो फिर एक जगह ढूंढते है जहाँ सब कुछ थोड़ा साफ़ tha..aur कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं था…

वहां पे जाने तक राजू अपने गीले कपडे निकल कर नंगा हो जाता है तो वहीँ ारु और सुधा भी अपने कपडे निकल कर ब्रा, पंतय में आ जाते है..

उन दोनों को ऐसे देख कर राजू का लुंड एकदम खड़ा हो जाता है और सुधा बिना कोई शर्म दिखाए उसके लुंड को पकड़ कर चूसने लगती है तो वहीँ ारु भी पीछे नहीं rehti..dono मिलकर लुंड चूसते हुए राजू को खुश करते रहते है..

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ऐसे hi मस्त 10 मं तक लुंड चूसै के बाद राजू ारु को खड़ा कर के उसके होंठ चूसने लगता है तो सुधा भी उसकी ब्रा निकल कर उसके निप्पल्स मुँह में ले लेती है..

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और साथ में अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में दाल कर अंदर बाहर करने लगती है..

ारु से रहा नहीं jaata..aur जितनी तेज़ सुधा उसकी छूट में ऊँगली अंदर बाहर करती hai…utni hi ज़ोरों से ारु राजू को चूमते रहती hai..aur अपनी जुबां उसके मुँह में डालती है..

देखते hi देखते दोनों सुधा और ारु भी अपनी ब्रा, पंतय निकल फेंकते है और वह भी राजू की तरह नंगे हो जाते है…

सुहाना mausam..halki धुप और ठंडी hawa…yeh सब चीज़ें तीनो को उत्तेजित करती रहती है…

राजू से भी अब रहा नहीं jaata…aur वहीँ लेट जाता है तो ारु उसका खड़ा लुंड पकड़ कर अपनी छूट पे सेट कर के उसपर बैठ जाती hai..to वहीँ सुधा भी राजू के सर के पास आकर उसके मुँह पे बैठ जाती है…

राजू भी जैम के ारु को पेलता रहता hai…Aaru से भी रहा नहीं jata..aur हु भी aaahhhh….oooohhh…kar के चिल्लाती है और इस खुले वातावरण में उसकी आवाज़ भी गूंजने लगती है…

उसकी आवाज़ को काम करने के लिए सुधा थोड़ा आगे झुक कर उसकी चुकी को मसलते हुए उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लेती है ..

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5-10 मं की धुआंधार चुदाई के बाद सब की सांसें उखाड़ने लगती hai..aur ारु भी इस उछाल कूद में थक जाती hai..aur उसके ऊपर से हैट जाती है…

राजू फिर सुधा को झुकाता है और पीछे से उसको पेलने लगता hai…aur ारु उसके आगे जाकर उसकी चुकी को मुँह में लेकर चूसने लगती है..

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अब सुधा से भी रहा नहीं जाता और हु भी इस चुदाई से ना जाने kab..lekin 2-3 बार झाड़ जाती है…

सुधा भी थक जाती hai..lekin राजू का लुंड अभी भी वैसे hi खड़ा और तना रहता hai…usko देख कर..

ारु: आप थकते नहीं हो क्या? उसके लुंड को पकड़ kar..dekho कैसे अभी भी खड़ा है..

राजू: jaanu..jab इतनी हसीं बीवियां साथ हो तो थकेगा कैसे? यह तो तुमको थकाने के लिए अभी भी तैयार है..

राजू फिर से सुधा को अपनी बाहों में लेकर उसको चूमते hue…jaanu..is खुले मौसम mein…aur ऐसा कहते हुए अपना हाथ उसके पीछे ले जाकर गांड की छेद को kured-te hue..kya कहती हो?

सुधा: ना बाबा naa..mujhe तो दर लगता है..

राजू: दर किस बात का? यहाँ तो कोई भी नहीं hai..Sudha मन करती है लेकिन राजू उसे मन hi लेता hai…aur वहीँ ज़मीन पे लेट जाता है..

राजू सुधा से ..मजाक me…haste hue..apni सौतन को मेरे लुंड पे बिठा..

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सुधा भी समझ जाती है और राजू का लुंड पकड़ कर ारु की छूट पे सेट कर के उसको थोड़ा नीचे दबाती hai…to ारु भी बिना किसी दिक्कत के उसके लुंड पे बैठ जाती hai..aur सुधा उसकी चुकी को मुँह में लेकर चूसती रहती hai…phir से एक और दौर धुआंधार चुदाई का चलता hai..aur इस बार दोनों राजू और ारु भी झाड़ जाते है और हाँफते हुए अपनी साँसों को दुरुस्त करते है..

अपनी साँसों को संभालने के बाद…

राजू: मजा आया के नहीं?

ारु राजू के होंठ चूमते hue..jaanu..poocho mat..bahut मजा aaya…pehli बार इस खुले मौसम में कर रहे है तो इसका मजा hi कुछ और है..

राजू सुधा की तरफ देखता है तो हु भी हाँ कहते हुए राजू को चूमती है..

ऐसे hi थोड़ी देर आराम करने के baad…Raju सुधा को इशारा करता है तो हु समझ जाती है और राजू के लुंड को मुँह में लेकर बड़ी शिद्दत से चूसने लग जाती है..

देखते hi देखते राजू का लुंड फिर से तन जाता है और इस बार सुधा की गांड में लुंड में लुंड दाल कर उसपे बिठा देता hai…aur पेलना शुरू कर देता है..

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सुधा भी ाँहें भरते हुए उछलते रहती hai…is सन को देख कर ारु से भी रहा नहीं जाता और हु भी सुधा के पास आकर उसकी चुकी को दबाते हुए दुसरे को मुँह में लेकर चूसने लगती है..

क्यूंकि राजू पहले hi झाड़ चूका tha..is बार उसका पानी जल्दी नहीं nikalta..lekin सुधा भी हार नहीं मानती और हु भी कई बार झाड़ जाती hai..lekin chud-te रहती है..

10-15 मं की दुमदार गांड चुदाई के बाद राजू से भी अब रहा नहीं जाता और सुधा को उठा कर दोनों के सामने आकर अपना माल दोनों के मुँह में उढेल देता है..

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जो दोनों बड़े चाव से पी जाते है..

तीनो अपने आप को थोड़ा दुरुस्त करते hai…unko यह भी पता नहीं लगता की हु यहां आये हुए 3-4 घंटे हो गए hai..aur दोपहर हो गया है..

तीनो अपने आपको ठीक करते हुए कपडे पहन कर निकल जाते है..

रास्ते में..

राजू: कैसा लगा यहाँ आकर?

ारु और सुधा: बहुत मजा aaya…aapne तो जन्नत की सैर करा दी इस खुले मौसम में..

राजू: chalo..acchi बात hai..jab तक यहाँ rahenge..aise hi जन्नत की सैर कराता रहूंगा तुम सब को…

दोनों: ना baba…hum तो बहुत थक गए hai…agli बार चाहो तो संध्या को ले jaao..hum नहीं आने वाले hai..(majaak में)..

ऐसे hi बातें करते हुए घर पहुँच जाते है और जल्दी से नाहा कर फ्रेश हो जाते है..

संध्या ारु से: बीटा मजा आया क्या?

ारु: हाँ maaji..bahut मजा आया और शर्म के मारे उसके गले लग जाती है..

इतने में राजू का फ़ोन फिर से रिंग होता है…

देखते hai..kisne और क्यों फ़ोन किया अगले अपडेट mein…saath बने रहिये...
 
अपडेट 45: काम्य का बदला (मेगा अपडेट)

राजू, ारु और सुधा जब झरने से वापस आकर फ्रेश हो कर आराम कर रहे थे तो राजू का फ़ोन रिंग होता है.

राजू देखता है की काम्य का कॉल tha..to उससे कुछ देर बात करता है और ठीक है कह कर फ़ोन कट कर देता है.

फिर राजू सब से कहता है की उन्हें जल्दी hi घर जाना hai..baaki लोग भी मान जाते है और फिर दुसरे दिन सब निकल जाते है…

उनके जाते वक़्त रानी बहुत दुखी होती hai..lekin रत्न उसे प्यार से अपने गले लगा कर कहती hai…hum जल्दी hi मेरे pote/poti को देखने aayenge..Raju भी रानी को प्यार से गले लगा कर अपना ख्याल रखने को कहता है और फिर सब गाँव (राजू के घर) के लिए निकल जाते है.

घर आ कर जब रत्न घर देखती है तो पाती है की घर पूरा सामान से बिखरा हुआ है (ठाकुर के आदमियों ने घर का कबाड़ा कर दिया था).

फिर सब लोग घर को ठीक करने में लग जाते hai…itne में राजू भी फ्रेश हो जाता है और खेत के लिए निकल जाता hai..raaste में वह काम्य को फ़ोन करता है..

राजू: (काम्य se)..main आ गया hoon…ab ठाकुर की हालत कैसी है?

काम्य: ठीक hai..lekin शायद ज़्यादा दिन जिन्दा रह नहीं पायेगा..

राजू: ठीक hai….accha..suno…main दोपहर को मिलने aaonga..jab मिलोगी तो एकदम नार्मल rehna…aur बाकी लोगों से जैसे मिलती ho..mujhse भी वैसे hi milna..Mala को भी यह बात कह देना..

काम्य: ठीक hai..main इंतज़ार करूंगी…

ठाकुर के घर (दोपहर को)..

दोपहर को राजू भी (दिखावे के लिए) कुछ लोगों के साथ ठाकुर को देखने जाता hai..uska हाल चाल पूछने के लिए..

जब राजू ठाकुर को देखता है तो पाटा है की ठाकुर देख सकता hai..pehchaan सकता है लोगों ko..lekin अपने कुर्सी पर मरियल सा hi पड़ा रहता hai…naa बात कर सकता है ना उठ कर चल सकता hai..kyunki उसके दोनों घुटने पे पत्तियां बंधी हुई thi..aur लगता तहत की उसकी हालत बहुत नाज़ुक है…

राजू उसको देख कर अपनी हसी दबा लेता hai..dikhaawe के लिए राजू उसका हाल चाल पूछता hai..Thakur राजू को देखता है लेकिन कोई रिएक्शन नहीं देता..

थोड़ी दूर में कड़ी काम्य और रानी देख कर हैरान रह जाते hai..(Mala को भी मालूम था की ठाकुर की ऐसी हालत सिर्फ राजू hi कर सकता है)..

ठाकुर से मिलने के बाद काम्य उसको एक तरफ ले जाकर धीरे से पूछती है की ठाकुर ने उसे पहचाना क्यों नहीं..

राजू: पहचाने गए कैसे?

काम्य: मतलब?

राजू: मतलब यह की जब मैंने उसे मारा tha..to मैंने अपना चेहरा धक् लिया tha..aur ठाकुर मेरे चेहरा देख नहीं paaya…isiliye ठाकुर ने मुझे पहचाना नहीं..

काम्य को इस बात पर हसी आ जाती है और राजू से कहती hai..tum तो बड़े उस्ताद निकले हो..

फिर राजू कुछ देर वही घर में रहता है और निकल जाता है..

निकलते वक़्त राजू माला को बगल में ले जाकर…

राजू: suno..main शाम को 6.00 बजे तक फिर से aaonga..tab तक मेरा एक काम करना..

माला: क्या है?

राजू: मैं बस इतना चाहता हूँ की शाम 6.00 बजे तक सब नौकरों को आज और कल छुट्टी दे do…ghar में तुम लोगों के अलावा और कोई नहीं रहना चाहिए..

माला: ठीक hai..sirf मैं, काम्य और गौरी माजी hi rahenge..aur कोई नहीं..

राजू: dhanyawaad…aur फिर वहां से बाकी सब के साथ निकल जाता है..

घर जा कर राजू रत्न और ारु से रेडी होने को कहता है..

रत्न: क्या बात है?

राजू: आप दोनों को ठाकुर के पास ले जा रहा हूँ..

रत्न थोड़ा डरते हुए: ना baaba…agar उसने पेहचान लिया और कुछ किया तो?

राजू: कुछ नहीं होगा maa…mujh पर भरोसा rakho..waise भी मैंने उसे दोपहर को देख कर आया hoon..woh सिर्फ एक कुर्सी पर पड़ा हुआ hai..hil नहीं sakta…naa hi उठ सकता hai..so, चिंता मत करो..

राजू: वैसे bhi..main आप लोगों को उसे पहचान कराने hi जा रहा हूँ..

रत्न: मतलब?

राजू: कुछ देर aur..phir सब समझ आ जाएगा..

ठाकुर के घर (शाम को)

शाम को राजू भी “तैयार” हो कर रत्न और ारु को ठाकुर के पास ले जाता है..

राजू के कपडे को देख कर रत्न हैरान हो जाती hai…kyunki राजू ने उस दिन वही कपडे पहने tha..jis दिन उसने ठाकुर पे हुम्ला किया tha..aur कंधे पर एक गमछा भी डाला हुआ था..

रत्न और ारु एक साथ: यह क्या कपडे पहने हो? ठाकुर के घर जा रहे hai..thode अच्छे कपडे पहन लो..

राजू: बस थोड़ी hi der…phir देखना मजा..

राजू, ारु और रत्न ठाकुर की घर निकल जाते है और वहां पहुँच कर माला से मिलते है तो पता करता है की माला ने सब नौकर को भेज दिया है और घर में कोई नहीं है.

माला राजू को ऐसे कपड़ों में देख कर वह भी दांग रह जाती है लेकिन राजू उसको चुप रहने को कहता है और कहता है की 2 मं बाद ठाकुर का चेहरा dekha..aur फिर माला और काम्य को ठाकुर के पास जाने को कहता है…

दोनों ठाकुर के कमरे में जाते है और वहां राजू का इंतज़ार करते है..

2 मं बाद राजू (अकेले) कमरे में आता है, अपने चेहरे पे वही gamcha/naqaab डालता है (वही नक़ाब हिज वक़्त उसने ठाकुर पे जंगल पे वार किया था) और ठाकुर के सामने खड़ा हो जाता है..

ठाकुर राजू को देखते hi उसके होश ुध जाता hai..kyun की ठाकुर ने भले hi राजू का चेहरा नहीं देखा tha..lekin राजू को उसी कपड़ों में और नक़ाब में देख कर समझ जाता है की उसी ने उस पर हुम्ला किया tha..Thakur को उस हालत में भी दर के मारे पसीना निकल जाता है और राजू उन दोनों को इशारा कर के ठाकुर की तरफ देखने को कहता है..

माला और काम्य ठाकुर को देखते है और उसकी हालत देख कर उन दोनों को भी पूरी बात समझ आ जाती है..

ठाकुर कांपते हुए राजू को देखता है और देखते hi देखते राजू अपना नक़ाब निकल कर अपना चेहरा ठाकुर को दिखाता है..

राजू ठाकुर से: देख saale…main hi राजू हूँ और मैंने hi तुझे जंगल में मार कर तेरा यह हाल किया hai…tune क्या सोचा tha..ki तू मुझे और मेरे परिवार को नुक्सान पहुचायेगा और मैं चुप चाप देखता रहूंगा??

ठाकुर की सिटी पित्ती घूम हो जाती hai…aur हाथ पाँव हिलाने की कोशिश करता है लेकिन उसकी बुरी हालत की वजह से कुछ नहीं कर paata..Mala और काम्य भी ठाकुर को देख कर अपनी हसी दबा लेते है और वहां का नज़ारा सिर्फ देखते hi रहते है..

2 मं बाद राजू ारु और रत्न को भी ठाकुर के पास बुलाता है ..

राजू: देखो maa..yehi वह ठाकुर है जिसने पिता को मारा tha..aur ारु से कहता hai..yehi वह कमीना है जिसने रवि को मारा था…

रत्न और ारु ठाकुर को देख कर बहुत गुस्सा हो जाते hai..aur गुस्से में रत्न ठाकुर के पास जा कर उसके गाल में 2-4 ज़बरदस्त तमाचे मारती है और कहती है..

रत्न: हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा tha..ki तुमने हमारी ज़िन्दगी उजाड़ दी hai..aur ऐसा कहते हुए रत्न रोने लगती hai…wahi हाल ारु का भी था..

उन दोनों को रट हुए देख कर रानी और काम्य भी उनके पास आकर उनको गले से लगा लेते है और शांत कराते है..

राजू ठाकुर से: dekha..tere बुरे कर्मों की सजा तुझे मिल गयी hai..lekin पूरी सजा नहीं..

यह बात माला और काम्य को समझ नहीं आता है लेकिन रत्न और ारु समझ जाते है..

इन सब के beech…darwaaze पे कड़ी रह कर गौरी पूरी बात सुनते रहती है..

जब माला रत्न को गले लग कर दिलासा देती रहती है तो गौरी को देख लेती है और उसे भी अंदर बुला कर सब बताती hai..Gowri भी शांत रहती है लेकिन कुछ नहीं कहती..

10 मं तक वहां रहने के बाद राजू रत्न और ारु को निकल जाता है और जाते वक़्त काम्य और माला के पास जा कर उनसे कहता है की वह 1 घंटे में वापस आएगा और माला को काम्य की तरफ देखते हुए कहता है की उतने समय में काम्य को अच्छे से तैयार से कर के rahe…jab यह बात राजू कहता है तो काम्य भी समझ जाती है और राजू को एक गहरा किश कर के कान में धीरे से कहती है की मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगी..

एक घंटे बाद…

राजू घर में रत्न और ारु को छोड़ कर सब से कहता है की अब ठाकुर से असली बदला लेने का वक़्त आ गया hai..aur उन सब से इस रात की छूती लेकर वापस ठाकुर के घर चला जाता hai..aur सीधा ठाकुर के कमरे में चला जाता है..

ठाकुर राजू को फिर से देख कर हैरान हो जाता है तो राजू कहता है ठाकुर से (भले hi ठाकुर बात नहीं कर paata)..main तुम्हे अभी असली सजा देने आया हूँ..

कमरे से hi राजू काम्य को आवाज़ देकर बुलाता है तो काम्य सज धज के एकदम सेक्सी ट्रांसपेरेंट साडी में जिसमें उसकी चूचियां भी साफ़ नज़र आती hai..kamre में आती है…

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ठाकुर काम्य को देखता hi रह जाता है और उसे कुछ समझ नहीं आता की क्या हो रहा है..

राजू: अब chutiye..aise क्या देख रहा hai..aur काम्य से..

राजू: मैंने कहा था naa..ki मैं तुम्हे ठाकुर के सामने hi chodunga…aur अब वह समय भी आ गया hai..aur ऐसा कहते हुए 5 फ़ीट दूर राजू काम्य के पीछे से गले लगाते हुए उसकी ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी चुकी को दबाता है..

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और एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी साडी के ऊपर से उसकी छूट को भी मसलते रहता है..

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काम्य aahh…oohhh…karte हुए सिसकियाँ लेती रहती है..

ठाकुर सिर्फ बेबस होकर अपनी इज़्ज़त की धज्जियां उड़ते देखता रहता hai…lekin कुछ नहीं कर पाटा…

राजू उसकी छूट और चूचियों को अच्छे से मसलने के बाद घुमाता है और उसकी आँखों में देखते हुए…

Kaamya..tumhaare बुरे दिन अब ख़तम हो गए hai..Thakur तुम्हे अब कुछ नहीं कर पायेगा और तुम अपनी ज़िन्दगी आराम से जी सकोगी..

काम्य: haan..tum सही कह रहे हो Raju…mujhe ठाकुर से आज़ाद करने के लिए shukriya..lekin मैं चाहती हूँ की तुम ठाकुर के सामने hi मुझे इतना प्यार दो जिसकी मुझे बहुत दिनों से ज़रुरत thi..aur जिसके लिए मैं तड़प रही हूँ…

राजू हाँ में सर हिलाता hai..aur राजू फिर से ठाकुर से कहता है..

राजू: dekh..aaj तेरी बीवी को तेरे hi बिस्तर पे छोडूंगा और तू कुछ नहीं कर paayega…aur ऐसा कहते हुए राजू काम्य को बिस्तर पे सुला कर उसके होंठों पर टूट पड़ता है और दोनों एक गहरे चुम्बन में खो जाते है..

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जिसमें काम्य भी राजू का पूरा साथ देती है…

5 मं की किश के बाद राजू अपनी जुबां काम्य के मुँह में डालता है जिसे काम्य बड़े प्यार से उसे स्वागत करती है और राजू की जुबां को भी बड़ी शिद्दत से चूसती है.

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दोनों प्यार में इतने खो जाते है की दोनों को पता hi नहीं चलता की कब दोनों के कपडे उनके बदन से निकल जाते hai…dono नंगे हो जाते है और एक दुसरे को रसपान करने में खो जाते है..

इन दोनों को बिना पता chale..darwaaze पे खड़े हो कर चुपके से गौरी इन दोनों की रास लीला को देख कर गरम हो जाती है और दोनों को देखते हुए अपनी छूट को साडी के ऊपर से मसलती रहती hai..aur धीरे से ाँहें भर्ती रहती है..

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इतने में माला भी चुपके से गौरी के पीछे आकर उसको बाहों में लेकर धीरे से कान mein..kyun maaji..maja आ रहा है क्या?

गौरी एकदम से चौक जाती है और चिल्लाने को होती है तो माला तुरंत अपना मुँह उसके मुँह पे रख कर ज़बजर्दास्त चूमते हुए उसकी आवाज़ दबा देती है और चुप रहने के कहती है..

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माला: चुप हो jaayiye..aur सिर्फ अंदर का नज़ारा को देख कर मजे kariye..aisa कहते हुए माला भी गौरी की चूचियों को मसल देती है जिसकी वजह से गौरी भी उत्तेजित हो जाती है और वह भी सिसकियाँ लेती रहती है..

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इधर अंदर कमरे में राजू काम्य के सुडोल चूचियों का मर्दन करते रहता है..

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काम्य भी अब बिना किसी दर के ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगती है..

हाँ Raju…aise hi पी jaao..mere दूध ko…bahut परेशान कर रखे hai..aur ऐसे hi बड़बड़ाते रहती है और राजू भी मस्ती में एक चुकी को दबाता है तो दुसरे को पीटा है…

बीच बीच में राजू उसकी चूचियों को भी kaat-ta है तो Kaamya…ouch..kar के कहती hai..kaat क्यों रहे हो? निशाँ पद जाएगा..

राजू: निशाँ पड़ने के लिए hi तो काट रहा hoon…taaki जब भी तुम यह निशाँ देखोगी तो तुम्हे इस पल को याद कर पाओगी..

राजू फिर काम्य के बदन को चूमते kaat-te नीचे सरकता है और जगह जगह पे निशाँ बनाते रहता है और उसकी गहरी नाभि को भी चूम लेता hai....aur काम्य झटके में राजू का सर उसकी नाभि में घुसा देती है…

काम्य से यह बर्दाश्त नहीं होता और वह उत्तेजित होते हुए एक बार झाड़ जाती है और आहें भर्ती रहती है..

राजू फिर नीचे जाता है तो पाटा है की उसकी छूट एकदम रास और पानी से भीगी हुई फूली हुई है…

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उसकी छूट को देख कर राजू से भी रहा नहीं जाता और हु भी उसपर टूट पड़ता है और उसकी टांगों को फैला कर बड़े मजे और चाव से उसकी छूट को चाटने लगता है..

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काम्य भी अब एकदम मजे में आ जाती है और अपनी टांगों से उसके सर को अपनी छूट पे दबाती hai..haan Raju..aise hi खा जाओ मेरी छूट ko..poori जीब घुसा do..aur पूरा रास निकाल lo…nigodi बहुत परेशान करती hai…aaj उसकी पूरी कसार निकाल do…aise hi काम्य भी मस्ती में बड़बड़ाती रहती है..

देखते hi देखते काम्य भी ज़ोरदार झाड़ जाती है और अपना पानी फ़ेंक देती है जिसे राजू बड़े चाव से उसका पानी पी जाता है…

इस धुआंधार चूसै से दोनों ाँहें भरते hai…aur राजू काम्य के ऊपर आ कर उसके होंठों को चूमते हुए…

राजू: मजा आया क्या?

काम्य: मत पूछ Raju…itna मजा मुझे ज़िन्दगी में कभी नहीं aaya…mujhe पता भी नहीं था की छूट चुसवाने में इतना मजा आता hai..tumne तो मुझे जन्नत की सैर करा दी है..

राजू: अब मेरी जन्नत में जाने का वक़्त आ गया hai…aur अपने लुंड पे इशारा कर ke..Kaamya se..ab इसको भी खुश कर do…dekho तुम्हारे मुँह में जाने के लिए कितना तरप रहा hai..aisa कहते हुए राजू खड़ा हो जाता है और उसका लुंड लहराते हुए कामये के मुँह के पास ले जाता है…

काम्य उसके लुंड को देख कर हैरान हो जाती है और कहती hai..yeh तो काफी बड़ा लग रहा है..

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राजू: इसको थोड़ा प्यार तो karo..phir देखो कितना मजा देगा तुम्हे.

काम्य राजू के लुंड को देख कर ठाकुर की तरफ मुड़ती है और कहती है..

काम्य: देख saale…ise कहते है असली लुंड. और ऐसा कहते हुए राजू के लुंड को मुठियाते रहती hai..aur ऐसा करने से उसका लुंड बड़ा होता जाता है... …और तुझे अपने मरियल लुंड पे ग़ुरूर hai…dekh saale..iske सामने तो तेरी लुल्ली hi hai…hijda कहीं kaa..aise गाली देते हुए ठाकुर को ज़लील करती है…

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गुस्से se…tu कहता था naa..ki मैं बाँझ hoon..dekh..tere आँखों के सामने hi इससे chudungi..aur इसके बच्चे को जनम doongi..tab पता चलेगा की कौन नपुंसक है..

फिर अपना ध्यान राजू के लुंड की तरफ कर के उसके लुंड को मुँह में लेकर चूसने लगती है और राजू भी बड़े मजे से उसके मुँह को छोड़ने लगता है और पूरा लुंड काम्य के मुँह में दाल देता hai..lund काम्य के गले से टकराता है और काम्य तुरंत लुंड को निकाल कर खासते hue…thoda आराम से daalna…meri सांस बंद हो रही है…

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इधर दरवाज़े पे…

माला: देखा maaji..kya लुंड है राजू kaa…pasand आया क्या?

गौरी भी राजू के लुंड को देख कर अपनी आँखें बड़ी करती है और माला से कहती hai..baap re..itna बड़ा lund…kaise जाएगा?

माला भी उसकी टांग खींचते hue…Gowri se..kahan जाएगा?

गौरी थोड़ा शर्माते hue…Kaamya की छूट में…

माला: देखती जाओ maaji…yeh दोनों बातें करते रहते है लेकिन माला अपना काम चालु रखती hai..aur इस बार अपना हाथ गौरी की साडी के अंदर दाल कर उसकी छूट को मुट्ठी में लेकर दबा देती है…

गौरी भी ाँहें भर्ती है और राजू का लुंड और माला के मुठियाने से उसकी छूट भी झाड़ जाती है और माला का हाथ भी पूरा भीग जाता है..

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कमरे में काम्य भी मस्त तरीके से राजू के लुंड को चूसते हुए उसके लुंड को पूरा खड़ा कर देती hai..Raju को लगता है की और ज़्यादा चुसवायेगा तो शायद वह रुक नहीं पायेगा और झाड़ jaayega..isiliye अपना लुंड काम्य के मुँह से निकाल कर..

राजू: chalo..ab तुम जन्नत की सैर के लिए तैयार हो जाओ..

काम्य: एक बार फिर से मेरी छूट चूसो naa..phir मुझे जन्नत की सैर पे ले जाना..

राजू: ठीक hai…lekin इस बार अलग तरीके से..

काम्य को समझ नहीं आता तो पूछती कैसे…

राजू बिस्तर पे लेट जाता है और काम्य से कहता hai..aa jaa..mere मुँह पे बैठ…

काम्य समझ जाती है और राजू के सर को पकड़ कर उसके मुँह पे बैठ जाती है और राजू से फिर से मस्त अपना छूट चुस्वाति hai…aur एकदम गरम हो जाती है..

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5 मं बाद राजू को लगता है की अब देर करना ठीक नहीं है और उसे उतार कर अब असली जन्नत की सैर करो..

काम्य: राजू, थोड़ा धीरे से daalna..maine इतना बड़ा लुंड कभी नहीं लिया hai..aur ठाकुर की तरफ देखते hue..iska तो बहुत छोटा tha…lulli…tumhaare जैसा लुंड नहीं..

राजू भी समझ जाता है और कहता है ठीक hai..aur फिर धीरे धीरे उसके लुंड को अंदर घुसाता है…

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लुंड बड़ी मुश्किल से अंदर जाता है…

राजू: बहुत टाइट है तुम्हारी छूट

काम्य: टाइट तो रहेगी naa..Thakur ने छोड़ा hi कब है की यह ढीली हो जाए..

राजू: चिंता मत karo..main ढीला कर दूंगा…

ऐसे hi काम्य को बातों में उलझाते हुए अपना पूरा लुंड काम्य की छूट में उतार देता है और काम्य को पता भी नहीं चलता..

फिर काम्य की आँखों में देखते हुए लुंड को बहार तक निकल कर एक बार फिर से ज़बरदस्त शॉट मारता hai..shot इतना मस्त था की काम्य की आँखें एकदम बहार आ जाती hai..woh ज़ोर से चिल्लाती है मगर उसी टाइम राजू उसको चूमते हुए उसकी आवाज़ को रोक देता hai…Kaamya की आँखों से आंसू आ जाते hai…Raju उसकी आंसू को पीते hue…kuch नहीं hua..jo दर्द होना tha..ho gaya..ab बस मजे karo..aisa कहते हुए फिर से धक्के लगाना शुरू करता है..

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धीरे धीरे काम्य को भी मजे आने लगता है और वह भी अपनी गांड उठा कर राजू के धक्के को सहमति देती है..

राजू भी समझ जाता है और पेलना शुरू करता है..

राजू ठाकुर की तरफ देखते हुए… तुम्हारी छूट तो बहुत टाइट है काम्य..

काम्य भी ठाकुर की तरफ देखते हुए.. haan..tight क्यों नहीं होगी? उस साले हरामज़ादे ने कभी मुझे ठीक से छोड़ा hi नहीं तो टाइट hi रहेगी ना..

ठाकुर यह बात सिर्फ सुन पाटा है लेकिन कुछ नहीं कर पाटा..

उधर दरवाज़े पे माला और गौरी भी यह बात सुन लेते है..

माला: धीरे से गौरी के कान mein..maaji..aapki छूट भी तो बहुत टाइट hogi..shayad बहुत दिनों से इसमें इतना बड़ा लुंड नहीं गया hoga…maine ठीक कहा ना?

गौरी: haan..sahi कहा tumne..meri छूट भी बहुत दिनों से बंद पड़ी हुई है..

माला जब यह बात सुनती है तो उसके चेहरे पे एक शरारत से मुस्कान आ जाती है..

इधर कमरे में..5-10 मं की चुदाई के बाद…

राजू: अब तुम मेरे लुंड पे बैठ jaao…aisa कहते हुए राजू हैट कर बगल में लेट जाता है और काम्य उसके लुंड पे बैठ जाती hai..aur ऊपर नीचे होने लगती है..

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राजू उसकी चुकी को दबाते हुए पेलने लगता है और काम्य भी मजे से राजू से चुदवाती है..

कुछ मं बाद फिर से काम्य झाड़ जाती है लेकिन राजू लगा रहता है..

काम्य: aah…Raju..ab रहा नहीं jaata..main बहुत थक गयी हूँ..

Raju:Thakna तुम्हे nahi…Thakur की तरफ देख kar..usko थकना है..

काम्य: मतलब?

राजू: मतलब यह की तुम्हारी चुदाई देखते देखते उसकी आँखें थक जानी चाहिए…

Chalo..utro..ab तुम्हे असली जन्नत की सैर कराने का वक़्त आ गया है..

काम्य: इतनी सैर करा दी hai..aur अब क्या बाकी रह गया है??

राजू काम्य को घुमा कर उसकी गांड पे चपत मार ke…ab इसकी सैर करनी है..

काम्य: ना बाबा naa..mujhe बहुत तकलीफ होगी..

राजू: चिंता मत karo…main एकदम प्यार से karoonga…aur मैंने तुम से क्या कहा tha..ki ठाकुर के सामने hi तुम्हारी गांड maroonga…yeh भी कहा था na..ab वक़्त आ गया है..

ऐसा कहते हुए राजू काम्य को ठाकुर के सामने ले जा कर उसके पीछे घुटनो पे बैठ कर उसकी गांड के छेद को अलग करते हुए चाटना शुरू कर देता है..

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काम्य: aah…oohh…kya कर रहे हो Raju..main तो मर जाऊँगी…

मुझे नहीं पता था की गांड चटवाने में इतना मजा आएगा..

राजू: गांड चटवाने में इतना मजा मिल रहा है तो गांड छुड़वाने में भी उतना hi मजा aayega..aur ऐसा कहते हुए राजू फिर से काम्य की गांड चाटना शुरू कर देता है..

थोड़ी देर baad…aahh…raaajjjuuuu…bahut मजा आ रहा hai..Thakur को देखते हुए..

अब मेरे पेअर दुःख रहे hai…bistar पे ले चलो ना..

राजू फिर उसे बिस्तर पे ले जा कर फिर से उसकी गांड चाटना शुरू कर देता hai..aur उसकी गांड को पूरा अपनी जीभ और थोड़ा थूक से पूरा गीला कर देता है..

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5-10 मं में ना जाने काम्य कितनी बार झाड़ जाती hai…aur उसकी छूट पानी फेंकते हुए रास से भर जाती है..

राजू: अब तुम्हे असली जन्नत दिखाने का वक़्त आ गया है..

काम्य: थोड़ा आराम से karna..maine कभी वहां नहीं लिया है..

राजू: वहां मतलब? और ज़ोर से बोलो ताकि ठाकुर को भी सुनाई आये..

काम्य ठाकुर की तरफ देखते hue…maine कभी गांड नहीं मरवाई hai..to आराम से गांड मारना..

राजू: ठीक hai..aisa कहते हुए पहले उसकी छूट में लुंड पेल कर लुंड को भी अच्छे से गीला कर देता है..

राजू: तैयार हो jaao…pehle थोड़ा दर्द hoga..lekin फिर मजा hi मजा..

ऐसा कहते हुए राजू अपना लुंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है लेकिन जाता नहीं..

फिर अपने लुंड को थूक से गीला कर ke..dheere से धक्का देता है तो ‘फक’ की आवाज़ के साथ उसका टोपा गांड में घुस जाता hai..aur उसी वक़्त काम्य और बहार दोनों रानी और गौरी के मुँह से भी आह्हः की आवाज़ निकल जाती है..

राजू थोड़ी देर वैसे hi रहता है और धीरे धीरे लुंड को अंदर डालता है और थोड़ी म्हणत के बाद उसका लुंड पूरा अंदर चले जाता है..

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काम्य अपने दर्द को अपने मुँह में hi संभाल लेती hai..Raju फिर से रुक जाता है क्यूंकि उसे पता था की काम्य को भी दर्द hoga..aur झुक कर उसके होंठों को चूमते hue..bas हो gaya..thoda सबर कर lo..phir अच्छा lagega…Kaamya थोड़े आंसू बहाते हुए हाँ में सर हिला देती है..

जब राजू को लगता है की काम्य थोड़ा संभल गयी है तो लुंड को आगे पीछे करते हुए उसकी गांड मारने लगता hai…Kaamya को भी अब दर्द थोड़ा काम हो जाता है और वह भी हाँ में सर हिलाते हुए राजू को और तेज मारने का इशारा देती है..

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राजू भी समझ जाता है और फिर ज़ोर के पेलने लगता है..

राजू: कैसा लग रहा है?

काम्य: haan..accha लग रहा है..

राजू: मैंने कहा था naa…pehle dard..phir मजा..

ऐसे hi 5-10 मं तक काम्य की गांड मारने के बाद…

राजू बगल में लेट जाता है और काम्य से कहता है की वह उसके लुंड पे बैठे..

इस पोजीशन में काम्य की नज़र सीधे ठाकुर पे जाती है जो बेबस पड़ा हुआ सब देख रहा था..

काम्य राजू के लुंड को अपनी गांड के छेद पे रख कर उसपे बैठी चली जाती है..

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औरतकूर से कहती hai….dekh saale…ise कहते है गांड मारना और गांड marwaana..tujhe क्या समझ में aayega..tune कभी किसीकी गांड भी नहीं मारी होगी..

राजू अब दनादन काम्य की गांड मारने लगता hai…kaamya भी मजे से गांड मरवाते रहती है और ना जाने कितने बार हु झाड़ जाती hai..uska उसे पता hi नहीं चलता..

राजू को जब लगता है की हु भी झड़ने के कगार पे है तो काम्य को फिर से बगल में सुला कर उसकी छूट छोड़ने लगता है और 5-6 ज़ोर के झटके के बाद…

Raju:aaahhh…maainnnn अअअअअ राहहा होऊं…

काम्य: मेरा अंदर hi अपना माल girana..main भी महसूस करना चाहती hoon…aur अपने रास से मेरी कोख भर do…main भी ठाकुर को बताना और दिखाना चाहती हूँ की मैं बाँझ नहीं हूँ और मैं भी माँ बन सकती hoon..aur नपुंसक यह hai..main नहीं..

राजू भी काम्य की बात मानते हुए तेज शॉट मारता है और आखिर में वह भी पूरी तरह से झाड़ जाता hai..kareeb 30-45 सेक् तक अपना माल पूरा काम्य को छूट में hi डालता hai…uski छूट पूरी तरह से राजू के माल से भर जाता है और कुछ माल बहार भी गिर जाता hai..Kaamya भी राजू का माल अपने अंदर लेकर बहुत अच्छा महसूस करती है..

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ठीक उसी समय गौरी भी झाड़ जाती है और माला के हाथ को पूरा गीला कर देती hai..aur ज़ोर ज़ोर के सांस लेते हुए हाफति रहती है..

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माला उसकी छूट से हाथ हटा कर उसके सामने hi अपना हाथ चाट लेती है और कहती hai…hmm..bahut स्वादिष्ट है आपका पानी..

गौरी यह बात सुनकर शर्मा जाती है..

वहीँ कमरे में राजू भी बगल में लेट कर निढाल हो जाता है और दोनों काम्य और राजू भी अपनी साँसों को दुरुस्त करते है..

ठीक उसी वक़्त राजू की नज़र दरवाज़े पे जाती है जहाँ उसे माला दिखाई देती hai…Raju माला को देख कर है देता है…

काम्य पूछती है ..क्या हुआ तो राजू कुछ नहीं कहता और काम्य को अपनी बाहों में ले लेता है..

राजू: क्यों, मजा आया?

काम्य: haan..bahut मजा aaya…aakhir में तुमने मुझे इससे (ठाकुर की तरफ देख कर) छुटकारा दिला hi दिया है..

उस रात राजू और काम्य पूरे जोश में the…Thakur को नींद आ जाती है और हु सो जाता है लेकिन राजू और काम्य फिर से लग जाते है और रात भर 2-3 बार फिर चुदाई करते है और आखिर में थके हारे एक दुसरे के बाहों में सो जाते है..

राजू सुबह उठ जाता है और देखता है की काम्य चैन की नींद सो रही hai…usko वैसे देख कर राजू को भी अच्छा लगता है..

ठाकुर भी उठ जाता है और लाचारी से देखता रहता है..

राजू ठाकुर के पास aakar..dekha क्या हालत हो गयी है teri..abhi तुझे एक और झटका देना बाकी hai..tab जाकर मुझे पूरा सुकून milega..aisa कहते हुए उसके कमरे से निकल जाता है..

बहार उसको माला मिलती hai..usko अपनी बाहों में लेकर उसकी गांड पे चपत मारते hue…kyun..raat को मजा आया क्या देख कर??

माला भी उसको आँख मार्के कामुक नज़रों से देखती hai…Raju भी समझ जाता hai..aur उसको कहता hai..aaj तू तैयार rehna..aaj तेरी बारी है…

माला: जानती hoon..lekin तुम्हे भी एक सरप्राइज है…

राजू: क्या?

माला: जब तू आएगा तो पता चलेगा..

और राजू अपने घर की और निकल जाता है…

नोट: सॉरी फॉर थे डिलेड post...was busy...next अपडेट का हिंट आलरेडी दिया hai..kya होने वाला है..

साथ बने rahiye...next अपडेट जल्दी hi देने की कोशिश karoonga..thanks.
 
अपडेट 46: ठाकुर की मौत

अगले सुबह..

राजू अपने घर चला जाता है और थोड़ा थका हुआ होने के कारन घर जा कर सो जाता है..

सुबह सुधा उसको उठाने जाती है करीब 9.00 बजे..

सुधा: उठ जाओ…9.00 बज गए है..

राजू अभी थोड़ा नींद में tha…lekin जब उसे सुधा की बात सुनाई देती है तो झट से उठ जाता hai..aur सोचता hai..main काफी देर तक सो गया हूँ..

सुधा उसका मजा लेते hue…lagta है रात को सोये नहीं और बहुत मजे किया..

राजू बिस्तर पे लेते लेते hi सुधा को खींच कर अपनी बाहों में लेते hue…uske होंठ चूम kar..batoon kya..kitna मजा आये..

सुधा: छोडो …अभी कुछ nahi..suraj भी निकल आया hai..aur थोड़ी देर सोते रहोगे तो दीदी आ जायेगी..

फिर राजू भी जल्दी से उठ कर बाथरूम में चला जाता है और फ्रेश और नाहा कर सब से मिलता hai..lekin कोई ठाकुर के घर का ज़िकर नहीं karta…jo की राजू को भी अच्छा लगता है..

राजू भी चाय नाश्ता कर के अपने खेत के लिए निकल जाता hai…ab उसे ठाकुर का कोई दर नहीं tha..naa की उसके नौकरों kaa…jo की उसके घर की निगरानी kare..so, हु भी मजे में बिना कुछ सोचे अपने काम के लिए निकल जाता है..

खेत पहुँचने के बाद वह माला को फ़ोन करता है..

राजू माला se…taiyaar हो naa..main जल्दी hi आता हूँ..

माला: haan..main भी तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही हूँ..

राजू: अच्छा, एक काम karo,,kal की तरह आज भी अपने सब नौकरों को भेज दो..

माला: ठीक hai..karti हूँ..

राजू: waise..Kaamya कैसी है?

माला: कैसे रहेगी? घोड़े बेच के सो रही hai..raat को तुमने उसे सोने कहाँ diya…raat भर तो बजाते hi रहे उसकी..

राजू: वह भी तो चाहती थी naa…waise तुम भी तैयार हो ना..

फिर ऐसे hi कुछ और बातें कर के राजू फ़ोन कट कर देता है..

ठाकुर के घर:

इधर ठाकुर के घर में राजू से फ़ोन पे बात करने के baad…Mala भी तैयार होने जाती hai…lekin पहले वह गौरी से मिलती है..

लेकिन गौरी थोड़ा दुविधा में thi..woh डीडे नहीं कर पा रही thi..ki कल रात जो उसने देखा tha..aur माला ने उसे इतना गरम कर दिया tha..to क्या करे..

इतने में माला आ कर पूछती hai..maje करना है क्या?

गौरी: मतलब?

माला: मतलब राजू आ रहा है..

गौरी: फिर से?

माला: haa..phir se…lekin इस बार मैंने hi बुलाया है..

कल रात को मुझे भी इतना गरम कर दिया की अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है (इस बात में थोड़ा झूट भी tha..kyunki गौरी को पता नहीं था की माला पहले से hi राजू से चुद चुकी है और वह भी ठाकुर से बदला लेना चाहती थी)..

कल रात को आप भी तो बहुत गरम हो गयी thi..aur इतनी बार झड़ी की मेरा पूरा हाथ भीगा diya…aisa कहते हुए माला थोड़ा हस्ती hai..jise देख कर गौरी शर्मा जाती है..

माला: ऐसे शर्माने के कैसे चलेगा माजी? आपने ज़िन्दगी में इतने दुःख झेले hai…thoda मजा कर लिया तो उसमें बुराई क्या है? और वह भी खुद अपने hi लिए..

गौरी जो अब तक दुविधा में thi..Mala की बात सुनकर वह भी आखिर हाँ में जवाब देती है..

माला: देखिये maaji..ismein कोई ज़बरदस्ती नहीं hai..agar आपका मन ना हो तो कोई बात nahi..koi आपको ज़बरदस्ती नहीं करेगा…

गौर: nahi..tum जो कह रही thi..wahi सच भी hai..maine भी अब तक बहुत मुश्किलें देखि hai…thoda अपने लिए मजे कर लिया तो बुराई कुछ नहीं hai…aur वैसे भी ..कल उसका लुंड देखा tha..kitna बड़ा और मोटा tha..mujhe भी लेने की इच्छा हो रही thi..lekin दर रही thi..ab तुम ho..to मुझे कोई दर नहीं..

माला: ठीक कहती हो माजी aap..chalo..phir दोनों मिलकर तैयार हो जाते है..

इतने में काम्य भी उठ जाती है और फ्रेश हो कर डेक्ठी है की दोनों तैयार हो रहे है..

काम्य को कुछ समझ नहीं आता तो माला से पूछ hi लेती है..

काम्य: तुम लोग इतना सज धज के कहाँ जा रहे हो दिन में?

माला भी कामः की टांग खीचंते hue..kyun..tu अकेली hi मजे करेगी क्या? हमें मजे करने का हक़ नहीं है क्या?

काम्य: क्यों nahi..lekin इतने दिन में कहाँ?

माला: कहाँ kya..yahi घर mein..aur काम्य को आँख मार देती है…

काम्य भी समझ जाती है और जब देखती है की गौरी भी तैयार हो रही hai..to उसका मुँह आश्चर्य से खुल जाता है और सवाल भरे नज़र से माला की और देखती है..

माला भी हाँ में सर हिला कर कन्फर्म करती है..

फिर काम्य भी उन दोनों को तैयार होने के लिए मदत करती है..

दोनों फिर तैयार हो कर ठाकुर के कमरे में जाते है..

ठाकुर उन दोनों को ऐसे रूप में देख कर अपनी आँखें बड़ी करता hai..jaise पूछ रहा हो की इतनी सज धज कर यहाँ क्यों आयी ho..lekin वह बात नहीं कर सकता tha..aur ऐसे hi उन्हें देखता रह जाता hai..kyunki दोनों माला और गौरी एकदम कड़क माल लग रही thi...tight ब्लाउज जिनमें से उनकी चूचियां बाहर आने को तड़प रही ho...hoton पे लाल lipstick..sadi जो के नाभि के दो इंच नीचे पहना hua...aur उनके बदन को और घातक बना रहा था...

एक घंटे के बाद राजू ठाकुर के घर आता है तो काम्य उससे दरवाज़े पे मिलती है..

राजू काम्य को देख कर अंदर आते हुए उसे बाहों में भर के उसके होंठ चूमता hai…Kaamya भी उसके चुम्मे को ऐसे hi जवाब देती है और दोनों hi एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है..

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5 मैं के गहरे किश के बाद काम्य अलग होती है तो राजू पूछता hai..kaise हो?

काम्य: कैसे रहूंगी? रात भर तो आगे पीछे ठोकते रहे ho…ab ठीक से चला भी नहीं जा रहा hai…aur पूछते ho..kaise हूँ…

राजू: kyun..tumko मजा नहीं आया क्या?

काम्य: मजा तो बहुत aaya..aur फिर से तुमसे वह सब करना चाहती हूह..

राजू: वह मतलब?

काम्य: तुम भी naa..sudhroge nahi..main भी तुमसे और चढ़ा चाहती hoon…bas?

राजू है देता है और फिर से उसे बाहों में भर लेता है..

काम्य: लेकिन आज nahi…tum अंदर jaao..koi तुम्हारा इंतज़ार कर रहा hai..(Raju को गौरी के बारे में पता नहीं था)..

राजू फिर ठाकुर के कमरे में जाता hai…Thakur की नज़र जब राजू पे पड़ती hai..to उसको बहुत गुस्सा आता है और अपने हाथ पाँव हिला ने की कोशिश करता hai..lekin कुछ नहीं कर पाटा…

और फिर राजू जब बिस्तर पे बैठे चेहरे देखता है तो उसे आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं rehta..kyun की बिस्तर पे माला और गौरी एकदम सज धज के बैठी हुई थी..

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राजू: यह क्या है?

माला: मैंने कल कहा था naa..ki तुम्हे एक सरप्राइज hai..to एहि वह सरप्राइज hai..bolo…kaise लगा??

राजू: सुर्पीसे तो बहुत अच्छा hai..lekin…

राजू का इतना कहता hi था की माला बिस्तर से उठ के राजू के पास आकर उसके होंठ चूमते hue..woh अपनी मर्ज़ी से hi यहाँ hai..woh भी बहुत प्यासी hai..thoda उसे भी खुश कर do..tumhaare तो मजे hi honge..lekin वह तुम्हें दुयाएँ भी देगी..

फिर माला गौरी की तरफ देख कर उसे भी इशारा करती है तो वह भी थोड़ा शर्माते हुए

राजू के पास आती है..

राजू उसकी शर्माहट को देख कर गौरी को अपनी बाहों में lekar..maaji…aap तो बहुत हसीं लग रही ho..is उम्र में भी…30 साल से भी ज़्यादा लग नहीं रही ho..ekdum पटाखा लग रही हो…

गौरी थोड़ा शर्मा जाती hai..lekin कुछ नहीं कहती..

माला गौरी के पीछे खड़े हो कर अपना हाथ उसके सर के पीछे रख कर थोड़ा धकेलती hai…Raju भी समझ जाता है और हु भी अपना चेहरा आगे ले जाता hai..aur देखते hi देखते दोनों (राजू और गौरी) के होंठ मिल जाते hai…pehle झिझक के मारे dheere..lekin झिझक ख़तम होते hi दोनों एक गहरी किश में डूब जाते hai…aur दोनों की जुबां कुश्ती करने लगती है..

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वहीँ राजू अपना हाथ ले जाकर माला की चुकी पर रखता है और उसे दबाने लग जाता है….

उन दोनों की किश करते हुए माला देख कर हु भी गरम हो जाती है और राजू का हाथ हटा कर वह भी उनके चेहरे के पास आ जाती hai…aur फिर तीनो एक दुसरे के होंठों का रसपान करते hai…yeh सब बहार दरवाज़े पे कड़ी काम्य देख रही होती है तो वहीँ ठाकुर भी अपनी कुर्सी पे बैठे यह सब देख रहा होता hai..jahan काम्य उत्तेजना हो जाती है और अपनी छूट मसलती रहती hai…to ठाकुर बेबसी से उनको देखता रहता है..

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5 मं के किश के baad…Raju ठाकुर की तरफ देख kar…dekh बे chutiye…aaj और कल तुझे असली सजा मिली hai..kal तेरी बीवी को छोड़ा tha…aaj तेरी बहिन को चुदुँगा तेरे saamne..tab जाकर मुझे भी थोड़ी तसल्ली hogi..aur तुझे अपने कर्मों की सही सजा…

राजू ऐसा कहते हुए माला को ठाकुर के सामने लेजाकर पीछे से उसकी चुकी दबाता है

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माला भी सिसक पड़ती hai..aur कहती hai..thoda धीरे दबाओ naa…kahin भागे नहीं जा रहे है..

जहाँ राजू माला की चुकी का मर्दन करते रहता hai..wahin माला गौरी को बुला कर उसके होंठ चूसते हुए हु भी उसकी चुकी दबाती hai…jisse गौरी भी मचलती रहती hai…aur ाँहें भर्ती hai..ab पूरे कमरे में ाँहें और सिसकियों की गूँज hi सुनाई दे रही थी..

राजू माला की चुकी दबाते हुए उसकी ब्लाउज और ब्रा खोल कर उसे ऊपर से नंगा कर देता है तो माला भी गौरी के साथ वैसा hi करती hai..ab दोनों ऊपर से नंगी हो चुकी thi..aur वैसे hi राजू माला की साडी भी निकल फेंकता है और फिर अपने घुटनों के बल पे बैठ ते हुए उसकी पेटीकोट भी निकल देता hai…Mala अब सिर्फ एक छोटे पंतय में उसके सामने थी और राजू भी माला की गांड को लालची नज़र से देखता रहता है…

गौरी का भी एहि हाल tha..uska साडी और पेटीकोट भी बदन से अलग हो चुक्का tha..aur वह भी माला के सामने एक छोटी पंतय में रह जाती है…

राजू हलके से माला की गांड पे चपत मारता है तो माला भी अपनी दो उंगलियां गौरी के छूट में भिड़ा देती है और अंदर बाहर करने लगती hai..Gowri अब सब कुछ भूल कर ज़ोर से आवाज़ें निकलती रहती hai…Mala भी ाँहें भरते हुए राजू से कहती है…

माला: माजी की छूट बहुत टाइट hai..meri उंगलियां भी ठीक से नहीं जा रही hai..to तेरा लुंड कैसे जाएगा…

राजू: वैसे hi जैसे aise…aur राजू माला की पंतय को साइड करते हुए अपनी एक ऊँगली थूक से गीला करते हुए माला की गांड में ऊँगली दाल देता hai…Mala यह एक्सपेक्ट नहीं कर रही thi..aur दर्द और उत्तेजना के माफ़िक़ ज़ोर से चिक्ति है और उसकी उंगलियां भी अपना काम करते हुए गौरी के छूट में और अंदर घुसा देती है..

अब कमरे में बहुत कामुक नज़र हो गया tha…Mala और गौरी दोनों लगभग nangi..aur एक की गांड में तो एक की छूट में उंगलियां अंदर बहार हो रही थी..

इतने में गौरी कहती है की उसकी टांगें दुःख रही hai..to राजू भी माला के पीछे से हाथ जाता है और फिर तीनो बिस्तर पे आ जाते hai..aur बिस्तर पे गिरते hi दोनों भी अपनी पंतय निकल फेंखते hai..aur पूरी तरह नंगे हो जाते hai…Raju भी अपने कपडे निकल कर वह भी नंगा हो जाता है..

राजू गौरी को बिस्तर पे सुला कर उसकी टांगें खोलते हुए उसकी छूट के पास आता है तो वहीँ माला भी गौरी के मुँह पे बैठ जाती है …

दोनों जगह बड़ी शिद्दत से छूट चूसै का काम शुरू हो जाता hai…Raju गौरी ki..aur गौरी माला की छूट चूसते हुए..

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बहार कड़ी हुई काम्य से भी रहा नहीं jaata..woh भी अपनी साडी में हाथ दाल कर अपनी छूट में उंगलियां करने लगती hai..kyunki हु भी अंदर का नज़ारा देख कर बहुत गरमा गयी थी..

राजू गौरी की छूट चूसते हुए 1-2 बार ठाकुर की तरफ भी देखता है और उसे ऑलमोस्ट चिढ़ाते हुए उसकी तरफ देख कर गौरी की छूट चूसने लग जाता है…

ठाकुर का तो बहुत बुरा हाल tha…naa देख पा रहा tha…lekin वहां से जा भी नहीं पा रहा था…

5-10 मं की छूट चूसै के बाद राजू का मुँह पूरा गीला हो गया tha..kyunki पता नहीं कितनी बार गौरी झाड़ चुकी thi..aur वैसे hi हाल गौरी का भी tha…uska मुँह भी पूरी तरह माला के कॉमर्स से भरा हुआ था..

माला भी गौरी के ऊपर से उठती है और गौरी को किश करते हुए…

गौरी: lo…apna रास चख lo..aisa कहते हुए अपनी जुबां माला के मुँह में दाल देती है और माला भी खूब मस्त होकर गौरी की जीब चुस्ती है..

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राजू: chal…ab थोड़ा छोटे राजू पे ध्यान do…bahut देर से अकेला hai…aisa कहते हुए अपने लुंड दोनों के मुँह के पास ले जाता है…

गौरी फिर से माला का सर पकड़ कर राजू के लुंड के पास ले जाती है तो गौरी भी समझ जाती है और फिर देखते देखते राजू का पूरा लुंड उसके गले में उतर जाता hai..Raju अब अपना लुंड उसके मुँह से अंदर बहार करता है और उसका पूरा लुंड गौरी के थूक से भर जाता है और एकदम गीला हो जाता है..

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राजू तो ऑलमोस्ट एक अलग hi दुनिया में चला गया tha…itna मस्त गौरी उसका लुंड चूस रही थी..

राजू: Maaji..kya मस्त लुंड चूस रही हो आप…

यह नज़र देख कर माला से भी रहा नहीं जाता और वह भी अब राजू का लुंड अपने मुँह में ले लेती hai..aur फिर दोनों बड़े मजे से राजू के लुंड पे टूट पड़ते hai..ek लुंड तो दूसरा goti…aur फिर बदल बदल कर राजू को पूरा खुश करती है..

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कुछ देर बाद अब राजू से भी रहा नहीं जा रहा tha..to उसने दोनों को उठा liya..aur माला को अपनी बाहों में भरते हुए उसके होंठ चूसते हुए खड़े खड़े hi माला की एक टांग उठा लिया और दूसरी जांग को हाथ का सहारा देकर अपना लुंड उसके रसीले छूट में दाल दिया और दाना दान पेलने लगा..

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यह पोजीशन दोनों के लिए नया tha..aur इसमें दोनों को hi मजा आ रहा tha..is पोजीशन में चुदाई करते हुए दोनों एक साथ ठाकुर की तरफ देखे और उसको देख कर दोनों में और जोश बाद gaya..kyunki ठाकुर की सूरत देखने लायक thi..ekdum अपना मुँह लटकाये हुए था..

राजू माला को पेले जा रहा tha..aur फिर गौरी को इशारा किया की वह माला की गांड को तैयार kare....to गौरी भी माला के पीछे आ कर घुटनो के बल होते हुए अपनी जुबां से माला की गांड चाट ने लग gayi…Mala को यह दोहरा हुम्ला सेहन नहीं hua..aur वह कुछ hi मिनटों में झाड़ गयी और अपना पानी निकल दिया…

माला ाँहें भरते hue..Raju अब मेरे पेअर दुःख रहे hai..bistar पे ले चलो ना…

तो राजू दोनों माला और गौरी को बिस्तर पे ले kar..is बार गौरी को सुला कार उसके होंठ चूमते हुए..

Maaji..ab आपकी baari…taiyyar हो ना..

गौरी: beta..bahut साल हो gaye…thoda आराम से डालना…

राजू; जी Maaji..aap चिंता मत kijiye…main बहुत आराम से karoonga…aisa कहते हुए माला को इशारा करता है तो माला भी गौरी की एक चुकी को चूसने लगती है और दुसरे को दबाती hai…aur राजू भी उसकी छूट चूसने लगता है..

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जब राजू को लगता है की गौरी भी तैयार हो गयी है तो राजू झुक कर गौरी को चूमते हुए अपना लुंड उसकी छूट में दाल देता hai…Gowri को थोड़ा दर्द होता है लेकिन उसकी चीक राजू के मुँह में hi डाब जाती है और देखते hi देखते राजू अपना पूरा लुंड गौरी की छूट में दाल देता है..

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गौरी को पता भी नहीं चलता और अब वह भी मजे से छुड़वाने लगती है..

ऐसे hi 5 मं की दुमदार चुदाई के बाद गौरी भी झाड़ जाती है ..लेकिन राजू अभी भी लगा रहता है…

गौरी थक कर राजू को मन करती है तो राजू बिस्तर पे लेट जाता है और माला को उसके ऊपर बैठने को कहता है तो माला एक बार फिर से राजू का लुंड चूस कर उस पर बैठ जाती है और मजे से चुदवाती है..

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माला छुड़वाते हुए फिर से ठाकुर की तरफ देखती है और कहती hai..dekhlo..ise कहते है असली chudai…dekh रहे ho..kaise इसका लुंड मेरी छूट की धज्जियां उदा रहा hai….tum क्या जानो इस बारे mein..tumhe तो बस पैसे कमाने और ज़मीन हड़पने में hi लगे रहते ho…kabhi अपनी बीवी पे भी ध्यान दिया होता तो आज यह नज़ारा तुम्हे देखना नहीं पड़ता..

अब राजू भी बहुत नज़दीक tha..use भी लगता है की वह झड़ने वाला है..

वह यह संकेत माला को देता है तो माला भी झट से उसके लुंड से उतर जाती है और दोनों माला और गौरी उसके लुंड को चूसते hai..aur 1 मं बाद hi राजू अपना पूरा माल दोनों के मुँह में उढेल देता hai..jo दोनों बड़े चाव से उसका पानी पी जाते है..

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तीनो थक हार के बिस्तर पे लेट जाते है और गौरी और माला दोनों राजू के अगल बगल में लेट जाते है..

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फिर थोड़ी देर बाद ऐसे hi कुछ बातें करते हुए दोनों फिर से राजू ले लुंड को मुठियाने लगते है और फिर से राजू का लुंड खड़ा हो जाता है और फिर से धुआंधार चुदाई शुरू होती है..

इस बार राजू माला की गांड भी मारता hai…Gowri उसकी गांड मारने से मन करती है तो राजू उसकी बात का ख्याल रखते हुए फिर से उसकी छूट का बजा बजाता hai..aur इस बार राजू अपना माल माला की छूट में hi गिरता hai..usi के कहने पे..

शाम तक दोनों की अच्छे से चुदाई कर के राजू निकलते वक़्त ठाकुर से:

राजू: देख le..ab जा के मेरा पूरा बदला तुमसे हुआ hai…jaise मैंने माला और काम्य से कहा tha…tere सामने hi उनकी चुदाई की hai…baat यह नहीं है की मैंने उनकी चुदाई ke..lekin यह की तुझे तड़पते हुए देखा hi मेरा काम tha..aur तुझे ऐसे देख कर मेरा बदला पूरा हुआ है और शायद मेरे भाई और पिताजी की आत्मा को शान्ति मिले..

राजू वहां से चला जाता है और ठाकुर कुछ नहीं कर पाटा..

2 दिन बाद:

2 दिन तक ठाकुर ज़िल्लत के दिन बिताता hai…jahan उसे देखने वाला कोई नहीं tha…aur आखिर में उसे उतनी पीड़ा होती है की उसे दिल का दौरा पद जाता hai…aur अपनी अंतिम सांसें गईं रहा होता है..

ठीक उसी वक़्त अजय अपने गाँव से एक अच्छे डॉक्टर को लाकर ठाकुर को दिखाता है..

डॉक्टर ठाकुर की हालत को देख कर वह भी कहता hai..bhai sahib..ab बहुत देर हो गयी hai..Doctor इतना कहता hi है की ठाकुर अपना दम तोड़ देता है और उसकी मौत हो जाती है..

डॉक्टर भी देखता है और उसकी आँखें बंद कर देता है और कहता है की ठाकुर अब इस दुनिया में नहीं रहे है..

इतने में बाकी सब भी वहां आ जाते है और थोड़ा दिखावे के लिए रोना धोना होता है…

ठाकुर की मौत की खबर भी गाँव में फैल जाती hai..baaki सब भी वहां आते है (जिसमें राजू भी था)…

अगले दिन ठाकुर का अंतिम क्रिया कर के 2 दिन बाद अजय, उसकी बीवी कुसुम और गौरी अपने गाँव निकल जाते hai..lekin अजय के मन में कुछ सवाल the..jiski वजह से वह थोड़ा परेशान होता है लेकिन किसी को बताता नहीं…

आगे क्या होता hai..dekhte है अगले अपडेट में..

नोट: फ्रेंड्स, ऑफ़ लेट, ी ऍम वैरी बिजी विथ पर्सनल मेडिकल Emergency...hence थे डिले इन रिलीज..

थिस सिचुएशन मिगहत कंटिन्यू फॉर सम मोरे time...but रेस्ट assured..the स्टोरी विल बे completed...aadha अधूरा छोड़ कर नहीं jaaonga...aur वैसे भी स्टोरी इस नेअरिंग कम्पलीशन.

मच थैंक्स फॉर योर सपोर्ट थौघ. 🙏🙏

लुक फॉरवर्ड तो थे कमैंट्स.
 
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