RUDRADIP- The God And Devil - Page 4 - SexBaba
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RUDRADIP- The God And Devil

अपडेट 29

ऋतू- कहा से शुरू करू कुछ समाज नहीं आ रहा.. क्यों की तुम्हारे बारे में बताने की कहानी hi अलग है.. और जितना बताऊ उतना काम...

Mai-Kuch भी बताओ मुझे मेरे पिछले जनम के बारे में.................................

आगे............................

Ritu-(Jor से) तुम्हारा कोई भी पिछले जनम नहीं है जो भी है यही है तुम्हारा सिर्फ एक hi जनम है कोई दूसरा तीसरा नहीं समजे....

ऋतू के इस बात से मई शॉक हो गया था क्या कहु और क्या नहीं कुछ सूझ नहीं रहा था..

बल्कि मई कुछ देर के लिए तो स्टेचू बांके खड़ा हो गया था...

ऋतू ने जो कहा मुझे उसपर भरोसा hi नहीं हो रहा था.. क्यों की उसने कहा hi कुछ ऐसा था जिसपे भरोसा करना तो दूर उससे मन्ना भी असंभव था...

मई तो फुल शॉक में खड़ा tha...Mujhe तो तब होश आया जब ऋतू ने मुझे हिलाया...

Ritu-kaha खो गए थे तुम.. मई यहाँ कुछ कह रही थी तुमसे...

मई- Tttt.....tum...Tumne अभी क्या कहा मेरा......

Ritu-(Serious) है सच hi तो कहा है मैंने...

मई- नहीं तुम मुझसे मजाक कर रही हो न ये सच नहीं है न.. यार मई तुमसे सच बोलने को कह रहा हु और तुमसे मजाक कर रही हो...

Ritu-(Serious) मई तुमसे मजाक नहीं कर रही हु अभी दीपू. ये सच है...

ये सुनकर मेरे आँखों में आंसू आ गए थे पता नहीं क्यों पर मैंने रट हुए hi ऋतू से कहने लगा...

मई- तो क्या मई बचपन से यहाँ रह रहा हु वो सब झूठ है.. मुझे माँ ने जनम दिया वो सब झूठ है..

तुम मेरी जुड़वाँ हो क्या वो hi झूठ है... अब तक मई जिनको माँ डैड कह रहा था क्या वो भी मेरे माँ डैड नहीं है....

मेरी इस परिवार के साथ जो बचपन की यादे है क्या वो भी झूठी है...

मेरा रोना देख ऋतू के भी आँखों में आंसू आ गए थे तो वो भी रो रही थी..

और मेरे ऐसे सवाल करने से कुछ गुस्सा भी तो तो वो कुछ जोर से मुझसे कहती है...

Ritu-(Rote हुए जोर से) है है नहीं है तुम्हारा कोई भी यहाँ... नहीं माँ नहीं डैड और मई भी तुम्हारी कोई जुड़वाँ- तुड़वा नहीं हु..

नहीं है हमारा कोई खून का Rishta...nahi hai....nahi है..... नहीं है....

ये कहने के बाद तो वो और भी रोने लगी.. और मेरा तो ये सुनने के बाद बहुत hi बुरा हाल हो गया था...

क्यों की अगर आप कभी जान जाये की बचपन से आप जिसके साथ रह रहे है वो तुम्हारे असली माँ- बाप नहीं है तो क्या हाल होता होगा उस बचे पर...

कुछ वैसा hi हाल हो रहा था रूद्र पर .. वो ये बात सहन hi नहीं कर प् रहा था..

और करे भी तो किस मुँह से करे.. उसे तो अब क्या करे और क्या न करे ऐसा हाल होते जा रहा था...

उसके आँखों में आंसू थे.. पर अभी वो किसी अंगार से काम नहीं लग रहे थे..

मेरे अंदर एक गुस्सा बढ़ता जा रहा था और वो भी खुद पर ...

इसके चलते मेरा इतना गुस्सा बढ़ गया की मई ऊपर मुँह करते हुए और अपने दोनों हाथ फैलये इतने जोर से चिल्लाया की....

मई- Nnaaaahhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiii.........................................

मेरे ऐसे चिल्लाने से वह की पूरी धरती हिल गयी थी... यहाँ तक मेरे अंदर जितना भी गुस्सा लव्हा बनकर तड़प रहा था वो सब बहार आ गया..



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और वह की पूरी धरती को जला दिया.. मेरी अबाज इतने जोर से थी जहा पर इतना सन्नाटा था अब वह पर चारो और मेरी hi अबाज घूम रही थी...

जहा पर कुछ देर पहले हरियाली hi हरियाली थी... जो जगह सबसे सुन्दर थी..

अब वो कब्रिस्तान बन चुकी थी.. मतलब सब रख में बदल चुकी थी... पानी सुख गया था वह ka.Charo तरफ आग hi आग थी..

लेकिन इस गुस्से में मैंने ऋतू की तरफ ध्यान hi नहीं दिया.. हालाँकि वो भी मेरे गुस्से की आग में जल जाती..

पर उसको इसका पहले से अंदाज़ा था ऐसा hi कुछ होगा तो उसने पहले hi अपने चारो और कवच बनाया हुवा था..

अब मई फिर से रोने लगा.. लेकिन तभी ऋतू मेरे पास आयी और उसने मेरे सर के ऊपर से हाथ फिकराय..

मेरी नजर उसकी तरफ गयी.. उसको मेरी तरफ देखा भी नहीं जा रहा था.. क्यों की मेरी दोनों आंखे आग में जल रही थी...

मेरी पूरी बॉडी किसी सूरज की तरह तप रही थी.. लेकिन फिर भी जैसे hi मैंने ऋतू को देखा...

तो कुछ हद तक मेरा गुस्सा शांत हो गया.. और मेरी जो लाल आंखे थी वो अब धीरे धीरे नीली होती जा रही थी...

मतलब वह का पूरा माहौल शांत होते जा रहा tha...Shayad इसीलिए ऋतू ने मुझे लाया होगा..

और उसने इसीलिए कहा होगा की हमारी बजह से किसी और को डिस्टर्ब न हो...

वैसे मई तो अपने घर से बहुत दूर था.. पर मेरे ऐसे चिल्लाने से थोड़ी सी धरती तो हिल गयी थी.. पर वह ज्यादा महसूस न हुवा...

मैंने ऋतू को देखते hi उसके गले में लगकर फिर से रोने लगा.. जब मेरा गुस्सा शांत हुवा..

तब मुझे अहसास हुवा की असल में यहाँ हुवा क्या.. तब मैंने ऋतू के गले से चुटककर उसे मुँह को और उसे चारो तरफ से देखने लगा...

मई- तुम्हे कुछ हुवा तो नहीं न ऋतू मेरी बजह से कही चोट तो नहीं न आयी...

Ritu-Nahi फ़िक़र की कोई बात नहीं है मई ठीक हु मुझे कुछ भी नहीं हुवा..

मुझे पता था ऐसा hi कुछ होगा इसलिए मई पहले hi साइड हो गयी थी...

मई- ये सब मेरी बजह से हुवा मुझे इतना गुस्सा नहीं करना चाहिए था पर क्या करू मई अपने आप को रोक न सका..

तुमने जो बताया उसके लिए मेरा दिमाग मान hi नहीं रहा है...

ऋतू- वो इसलिए क्यों की तुम्हे जो दिख रहा है तुम उसे hi सच मान रहे हो.. बल्कि सच तो कुछ और है..

मई- मई कैसे मान लू सब कुछ समाज नहीं आ रहा है..

Ritu-Pahle तुम अपने दिमाग को शांत करो.. उसके बाद hi तुम सब समाज पाओगे और उसे असेप्ट कर पाओगे...

Mai-Kaise करू मेरे मन पर मेरा काबू hi नहीं हो प् रहा है... मुझे लगता है मई कुछ देर के लिए अकेला रहना चाहता हु...

ऋतू- पर दीपू....

मैंने उसकी तरफ ऐसे नजर से देखा की वो शांत हो गयी और कहने लगी

ऋतू- ठीक है पर सुबह होने से पहले घर आ जाना...

ये कहकर वो वह से चली गयी पर जाने से पहले वो जगह जैसे थी वैसे करके चली गयी..

और अब सिर्फ वह थे मई और मेरा अकेलापन. जो मैंने एक्सेप्ट किया था...

कब रात से सुबह हो गयी कुछ पता hi नहीं चला.. जब सूरज की किरणे मेरे चहरे पर पड़ी...

तब मुझे अहसास हुवा की सुबह हो गयी है और मुझे घर चलना चाहिए...

पर कोनसे घर जो मेरा कभी था hi नहीं.. मई किस हक़ से वह जाऊ जो मेरा कभी था hi नहीं..

किस मुँह से जाऊ मई उस घर... पर आखिर मेरे पेअर उसी घर की तरफ चल पड़े...

सुबह सुबह सब अपने काम में लगे हुए थे.. माँ ने मुझे बहार से एते हुए देखा..

तो उन्हें लगा की मई कसरत करके आया हु तो उन्होंने भी कुछ नहीं बोलै..

और मेरा तो कुछ कहने का hi मूड नहीं था.. मई जैसे तैसे अपने रूम में गया..

फ्रेश हुवा और फिर से किसी को कुछ न कहते हुए चल पड़ा घर से बहार...

सुबह का ब्रेकफास्ट भी नहीं किया वैसे hi एक ऐसे जगह चला गया जहा पर मुझे कोई ढूंढे न और मुझे कोई डिस्टर्ब न करे...

इधर माँ परेशां थी क्यों की पहली बार मई घर से सुबह जल्दी निकल गया था और वो भी नाश्ता न करके..

हालाँकि ऋतू को ये बात समाज आ गयी थी मैंने ऐसा क्यों किया और मुझ पर क्या बिट रही है..

उसने मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश की पर मैंने सभी कांटेक्ट बंद किये हुए थे यहाँ तक दिमाग के भी..

यहाँ तक रसिका ने भी मुझे कांटेक्ट और अपने मैजिक से मुझे ढूंढ़ने की कोशिश की पर वो मुझे ढूंढ नहीं पायी..

क्यों की आज हम दोनों को वह पर जाना था जहा पर चिका थे..

मई एक सुनशान जगह बैठा था जहा पर कोई भी नहीं था.. और वह पर बैठे बैठे अपने hi बारे में सोच रहा था...

मुझे कुछ याद क्यों नहीं है Phir..Mera तो एक hi जनम था तो ऐसा कैसे हो सकता है...

मई बचपन से कैसे यहाँ पर hu..Mujhe तो सिर्फ धरती की यादे याद अति है उससे पहले की क्यों नहीं.

ये सब मेरे जिंदगी में क्या हो रहा है वो सब सच है या कोई सपना..

कुछ समाज नहीं आ रहा था.. कितनी अछि लाइफ थी मेरी पर जिनको मई अपना मंटा था..

वो मेरे अपने hi नहीं है और जिनको मैंने कभी देखा hi नहीं नहीं वो मेरे अपने है और वो भी कहा है कुछ पता नहीं..

.

न जाने कैसे वक़्त बिट गया और सुबह से रात हो गयी..

अब तो मेरे पेट में भी चूहे दौड़ रहे थे.. और घर जाऊ भी तो किस मुँह से.. तो मई बहार से hi कुछ खाकर चला गया...

घर गया तो सब लोग मेरी बजह से परेशां थे.. क्यों की सुबह से मई गायब था..

और अब आया हु तो बहार से खाकर आया हु.. सबने मुझसे पूछने की बहुत कोशिश की..

पर मई उन्हें इग्नोर करते हुए सीधा अपने रूम में चला गया..

और अंदर से रूम लॉक कर दिया क्यों की कोई मैजिक से भी मेरे रूम में नहीं ए....

ऐसे hi कुछ दिन बिट गए न मई किसी सर अचे से बात करता था और नहीं दिन भर घर में रहता था..

सुबह होते hi घर से बहार और रात होने के बाद घर में.. मेरे इस रवैये से सब परेशां थे..

और सबने मुझे पूछने की भी कोशिश की पर मैंने किसी को भी कुछ जवाब नहीं दिया. बल्कि सबको टालता चला गया..

मुझे उन सबसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी...

कभी कभी तो मुझे बहुत रोना आता था ऋतू को लगता था ये सब उसके hi कारन हो रहा है उसे बताना hi नहीं चाहिए था..

पर कभी न कभी मुझे पता तो चलता न तभी भी कुछ ऐसा hi होता...

इन सबके बिच मई अपने घरवालों से बहुत दूर हो गया था मई उन सबसे दूरिया बढ़ने लगा न जाने क्यों...

अकेले hi मई सोचने लग जाता की मेरे माँ बाबा कोण है कहा होंगे कैसे होंगे लेकिन इन सवालो के जवाब मेरे पास नहीं थे...

और इन सवालो के जवाब में ढूंढ़ना चाहता था..

तो मुझे इन सवालो के जवाब सिर्फ एक hi पर्सन दे सकता है और वो है रितिका..

क्यों की अंश से मैंने एक बार कोशिश की थी पर वो मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहता था...

और आज के दिन मई किसी भी हाल में रितिका से मेरे सवालो जे जवाब चाहता hi था...

तो मैंने उसे उसी जगह बुलाया जहा पर हमारी पिछली बाते अधूरी रह गयी थी.................................
 
मेगा अपडेट 30

क्यों की अंश से मैंने एक बार कोशिश की थी पर वो मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहता था...

और आज के दिन मई किसी भी हाल में रितिका से मेरे सवालो जे जवाब चाहता hi था...

तो मैंने उसे उसी जगह बुलाया जहा पर हमारी पिछली बाते अधूरी रह गयी थी.................................

आगे............................

कुछ hi देर में वह रितिका आ गयी.. और एते hi उसने मुझे गले लगा लिया और गले लगते hi रोने लगी और ऋतू रट हुए कहने लगी...

ऋतू- ी ऍम सॉरी रद... ी ऍम रियली सॉरी... मुझे नहीं पता था तुम्हे जब ये बात पता चलेगी तो तुम ऐसे रियेक्ट करोगे...

बल्कि तुम तो हम में से किसी को भी बात नहीं कर रहे हो ी लव यू डिअर.... वे अरे लव यू...

मैंने ऋतू के इस बात का कोई भी जवाब नहीं दिया मैंने उसे अपने आप से छुड़ाया..

वो मुझसे दूर होना hi नहीं चाहती थी पर जैसे तैसे मैंने उसे दूर किया और उसकी आँखों में देखने लगा...

मुझे उसकी आंखे लाल दिख रही थी.. जैसे उसने रो रो के ऐसा हाल किया हो.. और लगता है वो ठीक से सोई भी नहीं हो..

पर मई उस वक़्त किसी ऐसे हाल में था जो मई समाज hi नहीं पाया की ऋतू के मन में क्या चल रहा है...

Mai-Dekho ऋतू मैंने तुम्हे यहाँ इसीलिए बुलाया है की मुझे सब सच जानना है..

मुझे सबकुछ बताओ मुझसे कुछ भी मत छुपाना तुम्हे मेरी कसम...

अब मेरी कसम देने के बाद तो ऋतू कुछ देर के लिए तो मेरी आँखों में hi देखे जा रही थी..

जैसे वो मेरा हाल संजना चाहती हो तो आगे कहती है...

रितिका- ठीक है दीपू मई तुम्हे सब कुछ बताउंगी.. उसके बाद तुम जो चाहो कर सकते हो...

मई- ठीक है अब चलो वह बैठते है और बातो मुझे..

हम दोनों वह बैठ गए ऋतू रोई थी तो शायद उसे पानी पीना था तो मैंने अपने हाथो में पानी लेकर उसे पानी पिलाया और शांत बैठ गया अपनी जगह...

वो पानी पिने तक मुझे देखती hi रह गयी..

उसके बाद वो भी शांत हो गयी और उसने अपनी कहानी शुरू कर दी....

फ्लैशबैक.........

ये दुनिया बहुत hi बड़ी है इसका अंत कहा और शुरुवात कहा ये बता पाना मुश्किल है..

इस दुनिया का निर्माण बहुत hi पहले हुवा था.. कब हुवा ये बीhi बीअत पाना मुश्किल है..

मगर ये कोई आम देव नहीं थे जिन्होंने पूरी सहर्षति को बनाया..

ये परमात्मा थे जिन्होंने सभी को बनाया सबको जीने की रह दिखाई वही अंत है और वही शुरवात....

उन्होंने सबसे पहले त्रिदेव बनाये जिनको आप जानते hi हो..

वो इस पूरी कायनात को कण्ट्रोल करते है और इस सही ढंग से चलते है...

यही त्रिदेव जो बहुत बड़े मतलब सबसे शक्तिशाली है और सर्वशक्तिमान भी है वो सब...

लेकिन परमात्मा ने सिर्फ उन्हें hi नहीं बनाया और एक गॉड को भी उन्होंने जनम दिया...

जिसमे उतनी hi पावर्स होंगी जितनी त्रिदेव में होंगी... पर उनको इस त्रिदेव के जैसे कार्य नहीं दिया...

मतलब जहा पर त्रिदेव को सब जानते है सब पहचानते है..

लेकिन उस गॉड को कोई नहीं पहचानता क्यों की वो कभी किसी के सामने hi नहीं ए..

उनकी एक अलग hi दुनिया है एक अलग पहचान जो सबसे परे है सबसे अलग...

उन्हें कोई पहचानता नहीं पर वो सबको जानते है.. वो सब देख सकते है और उनका नाम है थे लार्ड....

सब उनको इसी नाम से जानते है बल्कि उनका तो और भी एक नाम है..

और ये वही है तुम्हारे नाना.. मतलब तुम्हारे माँ के डैड..

है वही है जो सर्वशक्तिमान hai.Amar है.. उन्हें आज तक कोई भी देख नहीं सका है..

उनके ीचा के anusar.Jab तक वो नहीं चाहे उन्हें कोई नहीं देख सकता ऐसे है तुम्हारे नाना...

तुम उनके परिवार से हो.. ऐसे महँ परिवार है तुम्हारा.. तुम थे लार्ड के वंशज हो....

ऐसी कोई बात नहीं जो उन्हें पता नहीं.. ऐसे कोई बात नहीं जो वो कर नहीं सकते...

ऐसा कोई रूल्स नहीं जो उन्हें बांध सके पर फिर भी उन्होंने अपने कुछ रूल्स बनाये है क्यों की अपने पावर्स का किसी भी तरह से गलत इस्तेमाल न हो...

अब मई तुम्हे थे लार्ड के फॅमिली का मतलब तुम्हारे फॅमिली का इंट्रो देती हु...

इंट्रो ऑफ़ रुद्रदीप रियल फॅमिली...

थे लार्ड- विश्वम.

वाइफ ऑफ़ थे लार्ड- अन्विता.

सोन ऑफ़ थे लार्ड- देवेश.

वाइफ ऑफ़ देवेश- समय.

डॉटर ऑफ़ देवेश- त्रिगुणा.

सोन ऑफ़ थे लार्ड- ईश्वर.

वाइफ ऑफ़ ईश्वर - इशानी.

डॉटर ऑफ़ ईश्वर - शताक्षी.

डॉटर ऑफ़ Lord(Mother ऑफ़ रद)- शिवप्रिया.

फादर ऑफ़ रद- अमित्रजीत

सोन ऑफ़ अमित्रजीत - रुद्रदीप...

यही है तुम्हारी फॅमिली तो अब रियल कहानी शुरू करते है..

तुम्हारे नानाजी याने थे लार्ड बहुत पावरफुल इंसान थे.. तो उन्होंने अपनी hi एक मैजिकल वर्ल्ड तैयार किया..

जहा पर हर तरह के माजिक्स होते थे और वह पर लोग बहुत hi ख़ुशी से रहते थे..

उन्होंने वह पर सिर्फ 4 स्टेट्स बनवाये थे जो एक से बढ़कर एक पॉवेर्स्फुल थे..

उन सब लोगो को पता था की उन्होंने थे लार्ड ने बांया है.. पर उन्होंने कभी उन्हें देखा नहीं था और नहीं उनके परिवार वालो को...

सिर्फ जब कभी लार्ड की ीचा होती थी तो वो उनसे मिलने एते थे और कोई नहीं..

उन्होंने इन 4 स्टेटस को छोड़कर और भी बहुत कुछ बनाया था पर किसी को इस बारे में पता नहीं था और अभी भी पता नहीं है ये सिर्फ उन्हें hi पता है..

तो उन 4 स्टेट्स में एक और एक स्टेट्स अत है जो 5तह स्टेट्स भी है और उसमे इन 4 स्टेट्स में से बुरे लोगो को डाला जाता था..

जो बुरे लोग थे उन्हें हर साल वह पर डाला जाता था..

इसलिए उसे सब हेलल के नाम से जानते थे और वह पर कोई जाना पसंद नहीं करता था..

कहते है की वो 5तह स्टेट्स बहुत हु भयानक एयर दरिंदो का स्टेट्स है...

वह पर बहुत hi बुरे काम होते थे.. जो कोई कहने सी भी डरता है...

उन 4 स्टेट्स के नाम है गोल्डन उसके बाद Crystal,Atlanta और सबसे लास्ट में सिल्वर ये 4 स्टेट्स है..

इन सब में बहुत तकद्वर गोल्डन. उसके बाद क्रिस्टल फिर एटलांटा और लास्ट में स्लिवर का नंबर अत है..

(नोट- ये इंट्रो शार्ट में मैंने स्टोरी के स्टार्टिंग में दिया था इसके और भी डिटेल्स मई आगे दूंगा...)

तुम्हारे नानाजी के एक दोस्त थे.. जो उन्होंने खुद hi बनाया था..

जब उन्होंने किसी को भी नहीं बनाया था या जब वो अकेले रहते थे तब उनके ये दोस्त बने थे...

तुम्हारे नानाजी के दोस्त का नाम किसी को भी नहीं पता और नहीं आज तक उन्हें किसी ने देखा है..

पर सुना है वो सबसे तकद्वर और बहुत hi शक्तिशाली है बिलकुल तुम्हारे नानाजी जितने...

पर उनके दोस्त एक बहुत hi बुरे किसम के थे... वो किसी भी प्रकार की दया नहीं दिखते थे..

सुना है उनका नाम सुनकर hi बॉडी के अंदर दर की भावना आ जाती है..

एक डरवाना ख्वाब जिस किसने भी उनको देखा है कहते है वो कभी जिन्दा नहीं लौटा सिवाय तुम्हारे नानाजी के...

उनका भी एक परिवार है पर हमने सिर्फ उनके दूसरे बेटे को देखा है और सिर्फ उनको hi जाना है..

वो फुल उसके पापा से मतलब लार्ड के दोस्त से विपरीत था..

और ये सब गन उसे अपने माँ से ए थे और वो लड़का और कोई नहीं तुम्हारे डैड थे...

तुम्हारे नानीजी के आने से लार्ड ने उनसे बात करना बहुत हाल तक काम किया हुवा था..

पर उनका दूसरा बीटा तो हमेशा लार्ड के साथ hi रहता था. उसे अपने पापा के साथ रहना पसंद नहीं था..

वो बचपन से hi उनसे नफरत करता था.. और लार्ड के दोस्त भी उसे अपना बीटा कभी नहीं मन हालाँकि ये उनका hi बीटा था...

अब तुम्हारे पापा के परिवार का सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे फॅमिली को hi पता है वो hi तुम्हे बता सकती उन सबकी बारे में...

मगर है तुम्हारे पापा के अंदर भी कुछ काम पावर्स नहीं थे.. उनका भी कोई मुकाबला नहीं था..

वो अजय थे उनको आज तक कोई हरा नहीं पाया है.. है पर उन्हें गुस्सा बहुत hi ज्यादा अत था..

जैसे मैंने बताया की तुम्हारे पापा हमेशा लार्ड के साथ hi रहते थे तो उनकी तुम्हारे माँ से बहुत जमती थी..

तुम्हारे पापा और तुम्हारी माँ बचपन से एक साथ खेलते थे रहते थे...

तो ऐसे चलते चलते उन दोनों में कब प्यार हुवा कुछ पता hi नहीं चला..

ये बात जब लार्ड को पता चली तो वो भी खुश हो गए..

क्यों की वो बचपन से hi तुम्हारे पापा की अचे से जानते थे पहचानते थे...

तो उन्होंने तुम्हारे पापा और माँ की शादी करा दी..

तुम्हारी माँ एक प्यार की देवता है वो सभी को प्यार देती है..

उन्हें देखकर कोई भी उनसे गुस्सा हो hi नहीं सकता था.. इसीलिए तुम्हारे पापा को तुम्हारी माँ अस प्यार हो गया था...

जहा देखो वह वो अपना प्यार छोड़कर जाती थी...

उसके बाद तुम्हारे माँ और पापा की लार्ड बहुत hi धूमधाम से शादी करा दी..

हालाँकि तब तुम्हारे पापा के घर से कोई नहीं आया था.. फिर ऐसे hi कुछ दिन बहुत hi हसी मजाक करते हुए गुजर गए...

और वो शुभ दिन आ गया जब तुम्हारी माँ को पता चला की वो प्रेग्नेंट है और माँ बनने वाली है...

ये खबर सुनकर सब ख़ुशी से झूम उठ गए the.Sab बहुत hi खुश थे..

और वैसे भी तुम्हारी माँ तो प्यार की देवता है तो जब वो खुश होती है सारा संसार खुश हो जाता है..

वैसे hi तभी से सब बहुत hi ाचा हो रहा tha..is खबर को सुनकर तुम्हारे नानाजी तो बहुत hi खुश हो गए थे..

उन्होंने सभी और बहुत साडी खुशिया दी जो वो दे सकते थे... सभी तरफ ख़ुशी का माहौल था

इसी ख़ुशी में कुछ दिन बिट गए लेकिन एक दिन तुम्हारी माँ ने लार्ड को कुछ परेशां होते देखा...

तो उन्हें लगा होगा कुछ कारन इसलिए उन्होंने ज्यादा धायण नहीं दिया...

पर हर रोज लार्ड कुछ परेशां नजर एते थे.. वो किसी को दिखते नहीं थे पर उनकी बेटी के नजर से बात छुपी नहीं रह सकीय...

क्यों की थे लार्ड की वो सबसे प्यारी और बहुत hi लाड़ली बेटी थी.. तो उन दोनों को बिना कुछ कहे एक दूसरे के मन का माहौल पता लग जाता था...

एक दिन तुम्हारी माँ से रह नहीं सका और वो लार्ड को परेशां होते हुए देख उनके पास चली गयी उनके दुखो का कारन पूछने के लिए...

शिवप्रिया- क्या हुवा बाबा आप कुछ दिन से बहुत परेशां दिख रहे है कुछ प्रॉब्लम है क्या आपको...

लार्ड- ऐसी कोई बात नहीं है बेटी बल्कि मई क्यों दुखी होऊंगा मई तो खुश हु की हमारे घर एक नन्हा मेहमान एंड वाला है...

सप- बाबा आपको पता है न आप मुझसे कोई बात छुपा नहीं सकते तो क्या बात है मुझे बतातिये..

लार्ड- बीटा परेशानी तो है पर मई वो तुम्हे देना नहीं चाहता...

Beti-Baba कोई बात नहीं आप मुझे बता सकते है मई किसी को नहीं बताउंगी...

लार्ड- ठीक है बेटी वैसे ये बात बहुत hi बड़ी है पर मई तुमसे जो कुछ भी कह रहा हु वो किसी को मत कहना...

सप- ठीक है बाबा बताइये क्या बात है...

लार्ड- इस दुनिया में तुम्हे पता है सभी और सिर्फ अँधेरा hi अँधेरा है पर जहा अँधेरा है वह उजाला भी..

पर यहाँ पर बात अलग है.. तुम्हे तो पता है उसके पास कला स्टोन है..

(जो आपने जब देखा था तब जिसे लगने से रद की याददास्त चली गयी थी)

सप- है पर उसका क्या.. वो तो सिर्फ आधा hi है न....

लार्ड- है बेटी आधा hi है पर कुछ दिन बाद वो पूरा हो जायेगा क्यों की वो पहली दफा पूरा होने वाला है...

और जब सबसे शक्तिशाली दो स्टोन एक हो जायेंगे... एक तो वो कला स्टोन और दूसरा सफ़ेद स्टोन...

सप- लेकिन ऐसा क्यों होगा बाबा जहा तक मुझे याद है कला स्टोन तो उसके पास है और वाइट मणि को अब तक किसी ने भी नहीं देखा है..

मतलब हम में से अपने देखा है उसको पर वो दोनों तो एक दूसरे के विरोध शक्तिया है न..

एक के पास आचायी की तो दूसरे के पास बुराई और वो भी वैसे की उन दोनों से hi शक्तिया इस पुरे भरमहंद में जाती है..

मतलब एक तरह से कहा जाये तो वो दोनों Srot(Source) है...

लार्ड- है तुम्हारा कहना सही है उन दोनों स्टोन की शक्तिया अलग है. पर तुम ये भूल रही हो की उन दोनों शक्तियों को बनाने वाला hi सिर्फ एक hi है..

और वो कोण है तुम्हे पता hi है.. इसलिए बहुत सालो बाद ये मौका या कहे की मुहूर्त आया है...

की वो दोनों स्टोन एक होने वाले hai..ye पहली दफा होने वाला है..

इसलिए उसका परिणाम क्या होने वाला है ये तो सिर्फ उसे बनाने वाला hi जनता है...

SP-Aur ये सब कब होने वाला है पर उससे हमें खतरा क्या है...

लार्ड- ये सब बहुत hi जल्द होने वाला है.. और उससे ये खतरा है की उसमे से बहुत hi पावरफुल किरणे निकलने वाली है..

मतलब दोनों शक्तियों का संगम होने से उसमे से एक अजीब सी शक्ति निकलने वाली है..

और उस शक्ति को उस पावर को वो हासिल करना चाहता है क्यों की वो इस पुरे भरमहंद का बादशाह बन जाये..

और सबसे तकद्वर सर्वशक्तिमान बन jaye..Aur वो इस शक्ति को किसी भी हाल में हासिल करना hi चहियेगा...

SP-Ye तो बहुत hi चिंता का विषय है लार्ड पर अब इसमें हम क्या कर सकते है..

अब जो होना है होकर hi रहेगा.. जहा तक मुझे पता है..

आप इसमें से कुछ रास्ता निकल hi लोंगे मुझे आप पर भरोसा है...

लार्ड उसके बेटी के ऐसे कहने से कुछ देर मुस्कुराते है और फिर उन दोनों में ऐसे hi कुछ देर बाटे चलती रहती है...

कुछ दिनों बाद आखिर वो मौका आ hi जाता है जब वो शक्तिया एक होने वाली थी..

लेकिन इस बार क्या होने वाला है किसी को भी नहीं पता था..................................
 
अपडेट 31

कुछ दिनों बाद आखिर वो मौका आ hi जाता है जब वो शक्तिया एक होने वाली थी..

लेकिन इस बार क्या होने वाला है किसी को भी नहीं पता था..................................

आगे............................

सुबह से थे लार्ड बहुत परेशां थे वो एक जगह बैठ hi नहीं रहे थे..

उनके पास उनके दो बेटे बैठे हुए थे.. उनकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी की कुछ पूछे थे लार्ड से...

क्यों की वो सुबह से बहुत hi अलग फील कर रहे थे.. एक बार बड़े बेटे देवेश ने पूछने की कोशिश भी की...

पर लार्ड ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया वो वैसे की वैसे घूमते रहे...

तभी वह पर उनकी लाड़ली बेटी शिवप्रिया अति है और वो अपने बाबा मतलब लार्ड को ऐसे परेशानी में घूमते हुए देखती है...

तो वो समाज जाती है मामला क्या है पर फाई भी वो जानना चाहती थी तो इसलिए उसने अपने दोनों भाइयो को बहार जाने का कहती है...

और वैसे भी उन दो भाइयो को पता है बाबा अगर किसी को कुछ बताएँगे किसी की सुनेंगे...

तो वो शिवप्रिया hi है और वही उनको उनके परेशानी का कारन पूछ सकती है...

तो उन्होंने अपनी छोटी बहन की बात मानते हुए वो उस कक्ष से बहार चले गए...

और वो लार्ड के सामने जाकर कड़ी हो जाती है और पूछती है ..

सप- क्या हुवा बाबा आप क्या सोच रहे हो..

पर लार्ड कोई जवाब नहीं देते बल्कि वो तो अपने hi धुन में घूमते रहते है..

सप फिर से वही पूछती है पर कोई जवाब नहीं आता तो इस बार वो लार्ड के आगे जाकर कड़ी हो जाती है..

और उनको जोर से हिलती है तो वो होश में एते है और अपने बेटी को सामने खड़े होते देख पूछते है...

लार्ड- अरे बेटी तुम यहाँ कब ayi..aur तुम्हारा यहाँ ऐसे घूमना ाचा नहीं है जाओ जाकर आराम करो...

Mai-Mai तो आराम करुँगी मगर आप किस सोच में दुबे हुए हो की आपको मेरी अबाज भी सुनाई नहीं दे रही...

Lord-Kuch नहीं बीटा वो बस....

सप- मई जानती हु बाबा पर आपके मुँह से सुन्ना चाहती हु...

लार्ड इस बार कुछ नहीं कहते और वो अपनी बात बहुत hi सीरियस होकर कहते है ..

लार्ड- है बेटी तुम जो सोच रही हो वही है... वो सब आज hi होने वाला है पर कब ये कोई नहीं जनता..

और उसमे से निकलने वाली शक्ति कितनी भयानक होगी ये भी नहीं बल्कि वो कहा जाएगी ये भी नहीं जनता...

सप- आप चिंता मत करो बाबा जो होगा अचे के लिए hi होगा और मुझे सब पता है..

आपको उस बात की चिंता है hi पर और भी कुछ बात है उसकी भी चिंता आपको हो रही है..

पर आप मुझे बताना नहीं चाहते है कोई बात नहीं वक़्त आने पर मई जान hi जाउंगी...

Lord-(Is बार कुछ मुस्कुराते हुए) है बेटी पता है और मई भी तुम्हे वक़्त आने पर hi बताऊंगा अभी जाओ जाकर आराम करो...

सप- ठीक है बाबा मई चलती हु..

ये कहकर वो जाने के लिए पलटती है और जाने लगती है की तभी उसके पेट में बहुत जोर से दर्द शुरू होता है...

और वो उस दर्द के मरे बहुत जोर से चिल्लाती hai..Aur वो दर्द के मरे निचे गिरने hi वाली थी की ..

तभी लार्ड ने उसे संभल लिया.. शिवप्रिया की चीखने की अबाज सुनकर सब घर वाले वह जल्दी से आ गए...

लार्ड की पत्नी उनके दो बेटे और उन दोनों की पत्निया सब आ जाते है..

और देखते है सप दर्द के मरे अपना पहला हुवा पेट पकड़कर रो रही है..

और चिल्ला रही है और लार्ड ने उसे अपने हाथ में पकड़ा हुवा है...

Anwita(The लार्ड की Patni)-(Apne बेटी की तरफ जाते हुए) क्या हुवा मेरे बेटी को.. Priya....ShivaPriya...

Lord-Pata नहीं अभी यहाँ से आराम करने जाने hi वाली थी तभी उसके पेट में दर्द होने लगा और दर्द से चिल्लाने लगी...

Anwita-(Apne पति को दांते हुए) Offoo...jaise आपको कुछ पता hi नहीं hai..Aisa दर्शा रहे हो..

Lord-(Apne बीवी से डरते हुए) मैंने क्या किया जो सच है वही तो बताया....

अन्विता- आपसे तो बात करना hi बेकार है... ले चलो इसे उसके रूम में और इशानी डैम को बुलाओ बोलो वक़्त आ चूका है बचे का....

ये सुनकर अन्विता अपनी बची को मतलब सप को हवा में उठकर अपने साथ दूसरे कक्ष ले गयी..

और लार्ड के दोनों बेटे उसके बाबा की तरफ अजीब सी नजर से देखने लगे..

जैसे कुछ कहना चाहते हो पर थे लार्ड ने उनसे आंखे hi नहीं मजलायी और वह से बहार चले गए...

जब ये खबर अमित्रजीत को पता चली तो वो दौड़ते हुए वह आ गया.. और अपने बहनोई के साथ कक्ष के बहार उनकी प्रतीक्षा करने लगा..

बहार भी शिवप्रिया की दर्द से चिल्लाने की अबाजे आ रही थी इसलिए बहार के सब लोग बहुत परेशां हो गए थे...

इधर थे लार्ड वह से बहार आ गए और ऊपर गैलेक्सी की तरफ देखते हुए...

उस वक़्त की प्रतीक्षा करने लगे जिसकी उन्होंने इतने दिनों से प्रतिसखा की थी...

इधर हेलल में आज वो बहुत खुश था क्यों की वो आज बहुत hi पावरफुल बनने वाला था..

और एक बार उसे जब वो शक्ति मिल गयी तो वो इस पुरे भरमहंद को अपनी मुठी में करके राज karega.Phir कोई उसके सामने टिक नहीं पायेगा..

यही सोचकर वो बहुत खुश हो रहा था तभी उसके पास में रखा हुवा ब्लैक स्टोन चमकने लगा..

अपनी काली लाल शक्तियों se..Aur वह से हवा में उड़ते हुए लाइट स्पीड से वह से गायब हो गया...

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जब उसने ये होते हुए देखा तो वो भी उस ब्लैक स्टोन के पीछे लाइट स्पीड से चला गया...

और एक जगह जाकर वो खड़ा हो गया जैसे उसको पता हो की...

उन दोनों स्टोन के टकराने के बाद वो असीम शक्ति, पावरफुल शक्ति वही से गुजरने वाली हो...

और यहाँ से थे लार्ड ने भी जब गैलेक्सी में देखा की दो शक्तिया लाइट स्पीड से एक दूसरे की तरफ आ रही है...



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तब उन्हें समाज आ गया की अब वक़्त हो गया है और ये कभी भी हो सकता है...

पर वो इसमें कुछ हस्तक्षेप करना नहीं चाहते थे इसलिए वही खड़े होकर देखने लगे....

उसने देखा की बहुत दूर से और एक स्टोन लाइट स्पीड से भागते हुए आ रहा है..

तो वो और भी खुश हो गया और ख़ुशी के मरे बहुत जोर जोर से हसने लगा...

और तभी उन दोनों स्टोन्स का टकराव हो गया और उन दोनों स्टोन के टकराने से...

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एक बहुत hi बड़ा शोर पुरे भरमहंद में दूर दूर तक फ़ैल गया और उसी के साथ एक बहुत hi तेज रौशनी भी फ़ैल गयी...

जिसके कारन थे लार्ड को और उसको दोनों को भी अपनी आंखे एक सेकंड के लिए बंद करनी पड़ी..

पर दोनों ने बहुत जल्द अपनी आंखे खोल ली और उस नज़ारे को देखने लगे...

उन दोनों स्टोन के टकराने से एक जो तेज रौशनी पुरे भरमहंद में फ़ैल गयी थी..

वो उसी स्पीड के साथ फिर से उन्ही दो स्टोन में जाकर समां gayi..Ab वो स्टोन बहुत hi बड़ा और विशालकाय हो गया था..



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हमारे यहाँ के लाखो करदो सूरज उसके अंदर समां जाये इतना बड़ा वो स्टोन अब हो गया था...

वो स्टोन एक तरह से सफ़ेद लाल और काळा रंग के रौशनी में मिला जुला लग रहा था...

और वो वैसे hi वो जगमगाया हुवा दिख रहा था..

उसने जितनी तेज रौशनी बहार फेकि थी टकराने कद बाद उतनी hi लाइट पावर फिर से अपने अंदर खींच ली...

ये देखकर तो उसको एक पल के लिए झटका सा लगा की ये क्या हो गया वो रौशनी कहा चली गयी...

पर तभी उस बड़े से स्टोन में से एक तेज रौशनी निकली जो बहुत hi बड़ी थी...

और बहुत hi तेजी से मतलब प्रकाश के गति से भी दुगने तिगने रफ़्तार से उस स्टोन में से निकलकर एक दिशा की और चली जा रही थी...



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जिस दिशा में वो खड़ा था उसी दिशा के और वो तेज रौशनी चली जा रही थी..

वो रौशनी इतनी तेज थी एक पल के लिए वो उसके भी आँखों से ओझल हो चुकी थी....

इधर महल में सप की चिल्लाना अब बंद हो गया था ये सुनकर बहार बैठे तीनो एक पल के लिए तो घबरा गए..

और दूर के पास जाकर तीनो भी खड़े हो गए अंदर का हाल जानने के लिए...

तभी अंदर से और एक रोने की अबाज आने लगी पर इस बार ये रोने की अबाज किसी बचे की लग रही थी..

मतलब शिवप्रिया को एक बचा हो गया था पर क्या ....

तभी बहार एक दासी आ गयी और उन तीनो को ऐसे दूर पर खड़े हुए देखकर एक पल के लिए तो वो चुप hi हो gayi...Tabhi अमित्रजीत जोर से बोला .

अमित्रजीत- जल्दी बोलो क्या हुवा....

दासी- जी वो राजकुमारी को एक बीटा हुवा है....

ये सुनते hi उस दासी को उन तीनो ने अपने गले से Ek-ek हार निकलकर उस दासी को दे दिए और जल्दी से तीनो अंदर जाने लगे पर फिर वो दासी कहने लगी...

दासी- माफ़ कीजिये महाराज पर आपको कुछ देर रुकना होगा ऐसा रानी माँ का आदेश है...

Devesh-Thik है जाओ जाकर माँ से कहना हमें जल्दी बुलाओ....

उसके बाद वो दासी चली गयी और कुछ hi देर में फिर से लौट अस गयी..

इस बार उसने इन तीनो को भी अंदर बुलाया और वो तीनो भी ख़ुशी से उस कक्ष में चले गए...

उन्होंने अंदर जाकर देखा तो उनकी माँ अन्विता और सब वह साइड में कड़ी हुयी शिवप्रिया और उसके बचे को देखे जा रही थी...

और उस कक्ष के मध्य में एक बीएड था उसी पर शिवप्रिया लेती हुयी थी उसके आंखे बंद थी..

और उसी के पास एक बचा था जिसको उन्होंने दूर से hi देखा था तो वो तीन्हो ख़ुशी के मरे उस बचे के पास जाने लगे...

और इधर वो रौशनी उसकी तरफ बढ़ने लगी और जहा वो खड़ा था ठीक उसी दिशा में...

अब बस कुछ hi लम्हे बचे थे उस रौशनी को उस तक पहुंचने के लिए...

उसने अपने दोनों हाथ फैलाये और उस तेज रौशनी को अपने अंदर सामने का इंतज़ार करने लगा...........................
 
अपडेट 32

और इधर वो रौशनी उसकी तरफ बढ़ने लगी और जहा वो खड़ा था ठीक उसी दिशा में...

अब बस कुछ hi लम्हे बचे थे उस रौशनी को उस तक पहुंचने के लिए...

उसने अपने दोनों हाथ फैलाये और उस तेज रौशनी को अपने अंदर सामने का इंतज़ार करने लगा...........................

आगे............................

(अब वो के नाम डेमों लिखूंगा)

लेकिन तभी वो रौशनी डेमों के कुछ hi दूर से वो रौशनी चली गयी.

डेमों उस शक्तिशाली तेज रौशनी को अपने पास से गुजरते हुए सिर्फ देखता hi रह गया पर कुछ कर न सका....

और जैसे hi उसे पता चला की वो रौशनी उसके पास से गुजरते हुए गयी है..

तो डेमों अपनी फुल रफ़्तार में उस रौशनी को पाने की ख्वाहिश लिए उसका पीछा करने लगा....

वो रौशनी बहुत तेज में उसे दूर जाती दिख रही थी.. और वो रौशनी उसी दिशा में जा रही थी जहा पर थे लार्ड का महल था..

ये देखते hi डेमों गुस्से से तिलमिला गया और उसके साइड से अभी भी वो शक्ति पास हो रही थी..

तो उसने गुस्से से उस शक्ति को हाथ लगाने लगा और उस शक्ति के बिच में वो जाने लगा उसे हासिल करने की छह में...

पर जैसे hi वो चुने के किये अपना हाथ बढ़ाया वैसे hi उस शक्ति ने एक करंट लगा और वो बहुत दूर धकेल दिया गया..

और वो वह से बहुत बहुत दूर जाकर गिर गया...

इधर थे लार्ड के महल में बहार खड़े हुए थे लार्ड देखने लगे की वो शक्ति अपने hi महल की और बढ़ रही है तो वो और भी खुश हो गए..

पर वो शक्ति उनकी तरफ न एते हुए महल की दूसरी तरफ जा रही है तो वो उस तरफ जाने लगे...

इधर महल में जैसे अमित्रजीत और बाकि उस बचे के पास जाने लगे तभी आसमान को चीरते हुए..

उस महल के कवच को तोड़ते हुए उस महल की दीवारों से होते हुए वो तेज शक्तिशाली रौशनी सीधा जाकर उस बचे पर जा गिरी..

और उस बचे पर गिरते hi वह पर उस कक्ष में बहुत hi लाइट हो गयी..

जिसकी बजह से अमित्रजीत और उसके बहनोई उस बचे के पास जा रहे थे वो वही रुक गए...

उस लाइट का तेज इतना था की उन सब को अपनी आंखे बंद करनी पड़ी..

वह पर किसी की भी आंखे नहीं खुल रही थी इतना उजाला था वह पर..

कुछ देर में उन दोनों स्टोन की साडी शक्ति उस बचे में समाज गयी..

और पूरी शक्ति उस स्टोन से निकलने के बाद वो दोनों स्टोन अलग होकर अपने अपने रस्ते फिर से निकल पड़े...

मतलब जहा से वो दोनों ए थे वो उसी जगह वापस चले गए..

और इधर उस दोनों स्टोन की शक्ति उस बचे में समां जाने के बाद भी उस कक्ष की रौशनी काम hi नहीं हो रही थी बल्कि वो जैसे थी वैसी hi रही...

सब लोगो ने अपनी आंखे खोलने की पूरी कोशिश की पर किसको भी अपनी आंखे खोलना असंभव लग रहा था..

तभी उस कक्ष में थे लार्ड की एंट्री हुयी और जब उन्होंने देखा की उस दोनों स्टोन्स की शक्ति बचे में समां गयी है तो वो और भी खुश हुए...

पर वो आगे का नजारा देखकर बिलकुल भी सरप्राइज नहीं हुए..

जहा तक बाकियो को आगे का देखना असंभव था वही पर थे लार्ड आगे के इस नज़ारे को बड़े आराम से देख सकते थे..

सब लोग अपनी और से पूरी कोशिश कर रहे थे आंखे खोलनी की पर ये हो नहीं रहा था..

थे लार्ड ने देखा की वो बचा उस कक्ष में हवा में ुध रहा है और उस बचे से बहुत तेज रौशनी निकल रही है इसीलिए कोई देख नहीं प् रहा है...

तो वो उस बचे के पास जाने लगे और लार्ड उस बचे के पास जाकर अपने दोनों फैलाये...

उस बचे को लेने के लिए तो वो बचा आराम से हवा में hi उनके हाथो में आ गया...

वो उस बचे के तेज को देख रहे थे.. बहुत hi सुन्दर और बहुत hi तेजमय बचा था..

उस बचे को देखकर न जाने क्यों पर थे लार्ड की दो नैनो से आंसू निकल ए और वो जाकर सीधा उस बचे की माथे पर और मुँह पर गिर गए...

जिसका ये असर हुवा की उस कक्ष की तेज रौशनी धीरे धीरे काम होने लगी और कुछ hi देर में वह पर पूरी तरह से नार्मल हो गया...

जब सबने अपनी आंखे खोल ली तो उन्होंने देखा की शिवप्रिया का बीटा अब थे लार्ड की हाथो में है..

और अब तो वो पहले से hi ज्यादा चमक रहा है ये देखके सब शॉक हो गए...

जब तेज रौशनी इतनी बढ़ गयी थी तभी शिवप्रिया भी जग गयी थी पर बाकियो की तरह hi उसका भी हल था..

वो भी अपनी आँखों खोल नहीं प् रही थी.. लेकिन जब नार्मल हुवा तब उसने देखा की..

उसका बीटा अब उसके बाबा मतलब थे लार्ड के पास है तो वो और भी ज्यादा खुश हो गयी.. और साथ में शॉक भी...

सब थे लार्ड के पास आ गए और उनके हाथो में बेटे को देखने लगे...

वो बचा अब पहले से भी ज्यादा तेजमय और बहुत hi सुन्दर दिख रहा था...

ऐसा की उस बचे को देखइ बस उसमे hi खो जाये उनको कोई और दिखे hi न और उससे आंखे दूर भी नहीं hi रही थी...

उसकी वो दो नीली आंखे जो उसमे देखे बस खो जाये.. बहुत तेज था उस बचे के चहरे पर...

जब सब ने देखा की थे लार्ड की आँखों से निकलते हुए दो बून्द आंसू उस बचे की माथे पर है..

और उसके चहरे पर गिरे है तो वो और भी शॉक हो गए.. पर उस वक़्त कोई कुछ बोलै नहीं.

तभी वो बचा रोने लगा और उसके रोने की अबाज सुनकर सबकी तन्द्रा टूट गयी..

फिर थे लार्ड ने उस बचे को उसकी माँ के पास दे दिया और सबको लेकर बहार ले गए...

और इधर बचे को भूक लगी है ये समझकर उस बचे को दूध पिलाने लगी...

इधर बहार एते hi थे लार्ड को सब सवाल पूछने लगे थे अभी जो कुछ भी हुवा वो सब जानने के लिए...

तो थे लार्ड ने उन्हें सब कुछ सच बता दिया ये सुनकर तो सब और भी शॉक हो गए और बहुत खुश भी हो गए ये सब सुनकर...

उन सबके ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं रहा कुछ देर बाद जब सब उस कक्ष में चले गए तो बचा दूध पिने के बाद आराम से सो रहा था...

अमित्रजीत ने अपने बचे को उठकर किश किया और बचे को गले लगा लिया...

उस बचे ने भी जैसे अपने बाबा को पहचान लिया था वैसे hi वो उनके हाथ में आकर hi नींद में hi मुस्कुराया था..

ये देखकर तो अमित्रजीत की आँखों में भी आंसू आ गए थे पर वो ख़ुशी के अंशु थे ..

फिर सबने बरी बरी उस बचे को लिया और प्यार किया..

फिर उस बचे को और उसकी माँ को आराम करने को कहकर वो सब वह से वापस चले गए...

इधर डेमों बहुत hi गुस्से में था क्यों की उसने बरसो से जो सपना देखा था..

आज वो टूथ गया tha.Isliye वो बहुत hi गुस्से में था...

क्यों की वो शक्ति उसके इतने पास से गयी पर वो उसे प् बही सका और नहीं छू सका.

और वो पूरी शक्ति गयी भी किसके अंदर एक बचे के जो उसके बेटे का बीटा था.. इसलिए वो और भी गुस्से में था...

उसका गुस्सा देखकर कोई भी उसके पास नहीं जा रहा था..

जो भी जाता वही रख हो जाता. अब वो उस शक्ति को पाने की नयी नयी योजनाए बनाने लगा...

इधर अगले दिन जब उस बचे का नामकरण होना था तो सब परिवार मिलकर..

उस बचे का नाम सोच रहे थे क्या रखे पर किसी को भी कुछ समाज नहीं आ रहा था..

तभी थे लार्ड उस बचे को देखकर कहते है...

थे लार्ड- देखो इस बचे को कैसा तेजस्वी चेहर है एक अग्नि की तरह जो दोनों स्टोन की शक्तियों से बना है..

इसमें असीम सी शक्तिया है जो किसी के भी पास नहीं है..

और ये पुरे भरमहंद में बहुत hi शक्तिशाली होगा जिसका कोई भी सामना नहीं कर सके...

पर इसमें ब्लैक स्टोन की भी पावर्स है तो इसी कारन ये बहुत जल्द रौद्रा रूप धारण करेगा..

और इसे बहुत जल्द गुस्सा भी आएगा तो इसीलिए इसका नाम हम रूद्र रखेंगे ...

अन्विता- बिलकुल नहीं आप भूल रहे है की इसके पास दूसरे स्टोन मतलब वाइट स्टोन की भी शक्ति है..

जो इस पुरे संसार को एक नयी ऊर्जा देती है नया उजाला जो दीपक की तरह सबको सुख और समर्ध देती है तो इसलिए इसका नाम हम दीपक रखेंगे...

तो इस बात पर दोनों झगड़ने लगे आपस में hi और इनके बचे कभी इधर तो कभी उधर देखने लगे..

ये इतने बड़े होकर भी इस छोटी से बात पर झगड़ रहे है. ये देखकर तो बाकि सब मन hi मन में है रहे थे..

ये देखकर शिवप्रिया hi कहती है...

शिवप्रिया- चुप हो जाओ आप दोनों hi.. मेरे ख्याल से बाबा ने जो नाम रखा है वो बहुत hi उत्तम है..

थे Lord-(Bich में) देखा मैंने कहा था न मैंने दिया हुवा नाम hi रखा जायेगा ..

शिवप्रिया- पहले पूरी बात तो सुनलो बाबा और उससे भी बढ़िया नाम माँ ने रखा हज वो भी बहुत अति उत्तम है...

अन्विता- देखा आप का नहीं मेरा नाम ाचा है मैंने तो पहले hi कहा था...

अन्विता के ऐसा कहने से शिवप्रिया उनको भी टेड़े नजर से देखने लगी तो वो भी थे लार्ड की तरह चुप हो गए..

ये देखकर बाकि सब अपनी हसी नहीं कण्ट्रोल कर सके तो वो सब भी हसने लगे...

इस बार थे लार्ड ने और अन्विता ने उन सबको टेडी नजर से देखा तो सब शांत हो गए पर मन hi मन है रहे थे...

तो इस बार फिर से शिवप्रिया कहती है...

शिवप्रिया- अब कोई बिच में बोलै न तो देख लो है तो मई कह रही हु की दोनों ने no भी जो नाम सुजाये है..

वो दोनों नाम भी अति उत्तम है और बहुत hi लाजवाब तो मई ये कह रही थी की...

आप दोनों के नाम को मिलकर क्यों न हम कोई और नाम hi रख दे...

इशानी- जैसे की.....

शिवप्रिया- जैसे की रूद्र और दीपक को मिलकर क्यों न हम रुद्रदीप Hi रख दे...

थे लार्ड- वह क्या नाम रखा है बहुत hi ाचा नाम सुजय है मतलब तूने तो हम दोनों के भी नाम रख दिए मई आज बहुत खुश हु....

और ये नाम सबको भी बहुत hi पसंद आ गया सब अब बहुत खुश थे..

तुम्हारी जनम से और तुम्हारे नाम से भी.. अब वह पर बहुत hi खुशिया hi खुशिया थी...

फ्लैशबैक एन्ड.......

इन सब बातो में कब रात से दिन गुजर गया कुछ पता hi नहीं चला तो मई ऋतू की बात सुनने के बाद उसे पूछा..

मई- मुझे एक बात बताओ रितिका मई इतना बड़े परिवार का हिस्सा हु तो फिर आज तक थे लार्ड को छोड़कर मुझे आज तक कोई क्यों मिलने नहीं आया...

और है इन सब कहानी मई तुम कहा थी तुमने तो इस कहानी अपना कही भी जिक्र hi नहीं किया तुम कहा थी इस वक़्त और तुम्हे ये सब कैसे पता...

रितिका- मैंने आपको पहले hi बताया था की वह पर 4 प्लेनेट जो सबसे तकद्वर है..

तो उनमे से जो पहला है वो चारो से में से सबसे तकद्वर है उसका नान गोल्डन है..

मई- है तो उसका क्या वो तुमने मुझे बताया था...

Ritika-Mai उसी गोल्डन प्लेनेट की राजकुमारी हु और वह पर मेरा नाम सोनालिका है..

गोल्डन प्लेनेट की राजकुमारी होने की बजह से मुझे तुम्हारे बारे में सबकुछ पता है..

उस समय मुझे तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के बारे में मुझे मेरे बाबा ने बताया था...

मई- ाचा तो तुम उस प्लेनेट की राजकुमारी हो तो फिर हम दोनों की मुलाकात कैसे हो गयी और हम दोनों एक दूसरे को इतने अचे तरीके से कैसे जानती हो..

और सबसे बड़ी बात तो तुम वह की राजकुमारी हो तो फिर तुम यहाँ कैसे आयी तुम मेरी जुड़वाँ कैसे हो गयी...

रितिका अभी कुछ कहने hi वाली थी तभी मैंने उसे फिर से रोकते हुए कहने लगा

मई- रहने दो ऋतू वो सब तुम मुझे बाद में बता देना...

पर पहले मुझे मेरे फॅमिली से मिलना है मुझे मेरे असली mom-Dad से मिलना है और वो भी अभी.................................
 
अपडेट 33

मई- रहने दो ऋतू वो सब तुम मुझे बाद में बता देना...

पर पहले मुझे मेरे फॅमिली से मिलना है मुझे मेरे असली mom-Dad से मिलना है और वो भी अभी.................................

आगे............................

ये सुनकर ऋतू बहुत hi हैरान थी पर उसने जल्द hi मुझसे कहा..

ऋतू- नहीं दीपू मई तुम्हे वह नहीं ले जा सकती बल्कि वो कहा है मुझे भी नहीं पता..

और सबसे बड़ी बात मई अभी इस वक़्त उस जगह जाने के लायक नहीं हु इसलिए मई अभी तुम्हे वह नहीं ले सकती...

मई ऋतू के ऐसा कहने से कुछ सुरप्रीसेड हुवा क्यों की ऋतू मेरे बारे में जानते हुए भी वो जगह कहा है वो नहीं पता

मई- फिर तुम्हे मेरे बारे में इतना सबकुछ कैसे पता चला.. तुम मुझे वह नहीं ले जा सकती..

तो फिर मुझे वह पर कोण लेके jayega..Kon है जो मुझे वह पर मुझे मेरे फॅमिली से मिलवाएगा.

रितिका- तुम्हारा अंश.... दीपू... है वही है जो तुम्हे वह ले जा सकता है..

वो तुम्हारा अंश होने की बजह से कही भी कभी भी जा सकता है तो वो तुम्हे वह ले जा सकता है..

मई- लेकिन वो मेरी कोई बात hi नहीं मंटा अगर उसे इस बारे में कुछ पुछु तो सीधा न कहता है और भाग जाता है...

रितिका- नहीं इस बार ऐसा नहीं होगा बल्कि वो तुम्हे खुद वह लेकर जायेगा.. क्यों की तुम अब बहुत कुछ खुद के बारे में जान चुके हो..

मई- ठीक है फिर मई अंश को कहकर चला जाता हु...

Ritu-Dekho दीपू मई तुम्हे वह जाने के लिए मन नहीं कर रही हु पर मेरी एक बात मनो..

तुम कल चले जाना तुम्हारे ऐसे कुछ दिन क्र बिहेवियर से घर में सब लोग बहुत परेशां है...

पता है और दी ने तो कुछ दिनों से अचे से खाना भी नहीं खाया..

Mai-Dekho ऋतू तुम सच कह रही हो पर इस वक़्त मेरा मन मुझे अभी घर जाने के लिए मान नहीं रहा है..

इसलिए मई बाद में आ जाऊंगा.. और सबको कह दो मेरी फ़िक़र करने की कोई जरुरत नहीं है मई घर आ जाऊंगा पर कब पता नहीं ..

ऋतू आगे कुछ कहने वाली थी पर मैंने उसे कुछ कहने नहीं दिया. और वह सी उसे जाने का इशारा किया...

मेरे ऐसे रूडली बिहेवियर से उसके आँखों में कुछ आंसू आ गए थे पर उसने वो जल्द hi छुपा दिए...

और वह से चलो गयी.. मुझे भी ऐसे ऋतू से बोलना ाचा नहीं लगा पर न जाने क्यों मई उस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था..

क्यों की अगर आपके मन में एक बात चल रही हो और आप दूसरी बात को इग्नोर कर रहे हो.

फिर चाहो दूसरी बात भले hi कुछ भी हो..

पर जब तक आपके मन को पहले बात क्लियर नहीं होती तब तक आपका मन दूसरे बात की और जाता hi नहीं..

या एक तरह से कहा जाये तो आप उस तरफ देखना hi नहीं चाहते..

चलो छोड़ो अब ऋतू भी वह से चली गयी थी तो मैंने पहले फ्रेश होने का सोचा...

क्यों की पहली बार बोले तो बहुत सालो बाद मई अपने घर जाने वाला था..

तो मई ऐसे तो नहीं जाऊंगा इसलिए मैंने अपने आप को फ्रेश किया और फिर अंश को याद किया...

अंश- भाई आपने मुझे याद किया ..

मई-(अंश को घूरते हुए) अंश मुझे एक बात समाज नहीं आती तुम मेरे अंश hi हो न...

अंश- है भाई पर आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो...

मई- क्यों की तुम मेरे अंश होकर भी मेरे मन की बात नहीं जान पते इसलिए पूछ रहा हु ..

Ansh-Wo क्या है न भाई मई आपके मन की साडी बात जनता हु आप क्या करना चाहते हो..

आप क्या कर रहे हो ये भी जनता हु पर ये एक फॉर्मेलिटी है जो मई पूरी करता हु..

वार्ना मई आपके याद करने के बाद hi यहाँ से वह ले जाता...

मई- ठीक है भाई मई हार गया तुमसे आज तक मई बात करने में मई जित नहीं पाया तो आज क्या खाक जीतूंगा..

वैसे वो सब छोड़ो तुम्हे पता है न मैंने तुम्हे यहाँ पर किस किया बुलाया है...

Ansh-Ha भाई पता है और अब आप वह जाने के लिए तैयार भी हो और अब आपके बारे में कुछ तो पता चल गया है...

Mai-Thik है फिर ी ऍम रेडी...

उसके बाद अंश ने मुझे आंख बंद करने को कहा और मैंने भी अपनी आंखे बंद कर दी और वह से हम दोनों गायब हो गए...

( वैसे मैंने हर बात नोटिस की है की आपने की है की नहीं पता नहीं पर वो आप लोग मुझे बताइये की...

यहाँ पर मैंने ऐसा कोनसा राज छोड़ा है जो बहुत बड़ा है... और वो रद के लिए बहुत hi महत्वपूर्ण है..

वैसे ये राज तो सबसे लास्ट में hi खुलेगा पर आप में से कोई बता सकता है तो बताइये मुझे....)

इधर थे लार्ड के महल में आज सब लोग बहुत hi खुश थे..

इतने खुश थे की किसी से भी ये ख़ुशी छुपाये नहीं चुप रही थी..

उस महल को आज किसी दुल्हन की तरह सजाया गया tha...Ye पूरा महल सभी और से लाइट ने चमक रहा था सभी और चहल पहल थी..

उनके बचो ने थे लार्ड से और बाकियो से पूछने की बहुत कोशिश की पर कोई भी ठीक से जवाब नहीं दे रहा था...

सब लोग उन्हें सिर्फ इतना hi बता देते की आज यहाँ पर खुशिया आने वाली है और तुम सबके लिए एक सरप्राइज...

पर वो सरप्राइज क्या है कोई भी बताने के लिए रेडी नहीं था..

सब उनके बचे ये जानने के लिए बहुत hi बेताब थे की कोनसा सरप्राइज है..

इसलिए बड़ो ने जैसा कहा वैसे hi बाकि लोग भी रेडी हो गए...

तभी थे लार्ड को कुछ विज़न दिखा तो और भी खुश होकर सबको कहते है...

थे लार्ड- चलो वो आ रहा है कुछ hi देर में वो यहाँ पहुंच जायेगा...

उसके बाद वो सब उस महल के द्वार पर चले गए उसका वेलकम करने के लिए..

सबके आंखे चमक गयी थी उसे देखने के लिए पर उनके बचो को तो पता hi नहीं था की कोण आने वाला है...

सबसे बड़ी बात ये थी की उनके बिच एक ऐसी व्यक्ति थी जिसे तो कुछ भी पता नहीं था की यहाँ पर क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है...

वैसे मई रद के यहाँ आने सी पहले मई आपको एक बात बताना तो भूल hi गया की यहाँ पर सब लोग कैसे दीखते है..

मतलब उनको देखकर उनकी आगे का अनुमान नहीं लगाया जा सकता पर फिर भी...

मई आपके लिए उनकी आगे बता देता हु जिसके कारन आपको उन्हें इमेजिन करने में आसानी होगी...

थे लार्ड- 55 आगे...

अन्विता- 50 आगे..



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देवेश- 45 आगे...

समय- 41 आगे..

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त्रिगुणा- 20 आगे..



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देवेश- 42 आगे..

इशानी- 39 आगे...



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शताक्षी- 19 आगे...



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शिवप्रिया- 40 आगे..

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अमित्रजीत- 45 आगे...

और एक मेंबर है पर वो मिस्ट्री है जो शायद अगले अपडेट में पता लग जायेगा..

या शायद मैंने आपको इससे पहले बता भी दिया होगा अगर आपको याद होगा तो पर कोई बात नहीं अगले अपडेट में वो भी मई बता दूंगा...

तो अब मई यहाँ पर अंश के साथ कुछ 10 सेकंड में hi वाला आ गया...

बल्कि ये पहली बार था की मुझे अंश के साथ होते हुए भी 10 सेकंड आंखे बंद करना पड़ा.. शायद इतना दूर होगा मेरा घर...

Ansh-Bhai अब आप आंखे खोल सकते हो...

मैंने अंश के कहने के बाद धीरे धीरे आंखे खोलने लगा और आंखे खोलने वक़्त मई उसे कहने लगा था

मई- यार अंश ये इतनी देर क्यों.............

इसके आगे मई कुछ कह hi नहीं पाया क्यों की मेरे आगे hi एक ऐसा सन था.

जिसे मई न चाहकर भी मुँह फाड़े हुए देख रहा था....

है भाई आगे का नजारा देखकर मेरी तो जैसी बोलती hi बंद हो गयी थी..

क्यों की मेरे आगे कोई घर वॉर नहीं बल्कि एक विशालकाय महल था...



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वो महल अपने धरती के इतना बड़ा था इतना बड़ा की मेरी आंखे उस महल को बिना पालक झपकाए बस देखते जा रही थी...

मई तो बस उस महल के एक hi हिस्से को देखे जा रहा था जो मुझे दिख रहा था न जाने ये और कितना बड़ा होगा..



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इस महल को घूमने के लिए नार्मल इंसान को करीब 2 साल लग जायेंगे वो भी किसी व्हीकल से..

पर अगर चलते हुए देखना चाहता हो तो उसकी पूरी लाइफ ख़तम हो जाएगी पर ये महल कभी नहीं ख़तम होगा ऐसा दिख रहा था...

Ansh-(Mujhe हिलाते हुए) क्या हुवा भाई किस सोच में दुबे हुए हो...

Mai-Are यार ये महल है कुछ और... ये तो साला हमारे एअर्थ इतना बड़ा है..

न जाने इस महल में कैसे रहते होंगे लोग.. मई तो इस महल को देखते hi घायल हो गया...

अंश- भाई ये आपका hi महल है या यु कहो तो ये आपका hi घर है.. आप पहले यही रहते थे...

ये सुनकर मुझे बहुत ताज्जुब हुवा पर शॉक नहीं लगा वैसे ये महल बहुत शानदार था..

जो भी इसे देखे बस खो जाये... और मई फिर से उस महल की Shaan-E-Shaukat को देखकर खो गया. फिर मुझे अंश कहता है...

ये विशालकाय महल बहार से इतना मनमोहक और सुन्दर है तो अंदर से कैसा होगा..

Ansh-Chalo भाई अब इसके आगे आपको hi जाना है मई इसके आगे नहीं आ सकता..

मई- क्यों भाई तुम क्यों नहीं आ सकते इसके अंदर क्या बात है..

अंश- कुछ बात नहीं है पर बस मई आपको यही तक छोड़ने आया था इसके आगे आपको अकेले जाना होगा..

ये कहते hi वो गायब हो गया और मई अंश को ऐसे गायब होते हुए कहने लगा...

Mai-Ye अंश भी न इसकी माया ये hi जाने...

ये कहने के बाद मई उस महल को देखकर उसकी तरफ जाने लगा..

और तभी मुझे एक बहुत बड़ा द्वार दिखा और उसके दोनों तरफ दरबान...

बिच में एक रेड कारपेट सजाई हुयी थी.. वैसे बहार का महल भी कुछ काम नहीं था...

जहा तक गैलेक्सी में अँधेरा रहता है पर यहाँ तो चारो और उजाला hi उजाला था.

मेरे निचे कुछ भी नहीं था इसका मतलब ये महल हवा में था.. वैसे अभी तक तो मुझे यहाँ पर सिर्फ बड़ा महल hi दिख रहा था और कुछ नहीं...

तो मई आगे बढ़ने लगा उस रेड कारपेट पर चलते हुए तो जैसे hi मैंने उस पर पेअर रखा..

मेरे ऊपर फूलो की बर्षा हो रही थी.. मैंने ऊपर देखा अपने चारो और देखा...

तो कोई नहीं था पर फिर भी मेरे ऊपर फूलो की बर्षा हो रही थी..

मई कुछ आगे बढ़ा तो आगे का उस रेड कारपेट के दोनों साइड बहुत hi सुन्दर सुन्दर लड़किया थी..

जैसी की मैंने उन्हें पहले धरती पर भी नहीं देखा इतनी सुन्दर... वो किसी अलग hi ड्रेस उप में थी...

उन्होंने मुझे देखते hi मेरे ऊपर फूलो की और किसी अत्तार टाइप कुछ छिड़का जिसकी महज बहुत hi अछि थी..

उसके बाद कुछ आगे बढ़ने कद बाद आगे कुछ म्यूजिशियन थे जो संगीत बजा रहे थे मेरे आने की खुसी में..

वो बहुत सुन्दर म्यूजिक बजा रहे थे जिससे सुनाने वालो के दिल को बहुत hi सुकून लग रहा था..

और उस म्यूजिक को सोते हुए अपने अंदर एक ऊर्जा जैसा लग रहा था.. मई उसको सुनते हुए आगे बढ़ने लगा....

कुछ आगे जाने के बाद मुझे दिखा की कुछ लोग नाच रहे है किसी संगीत पर..

लेकिन वो किसी एक hi म्यूजिक पर और एक hi तरह का डांस कर रहे थे...

सब एक ताल पर नाच रहे थे.. और मुझे देखते hi मेरे आगे झुककर मुझे प्रणाम करने लगे..

मेरे साथ जो अब तक हो रहा था वो देखकर मई बहुत hi खुश हो रहा था...

न जाने ऐसा स्वागत और किसी का तो पता नहीं पर मेरा स्वागत तो ऐसा hi हो रहा था यहाँ पर..

मई तो बस उस जगह पर जैसे खो गया था और आगे बढ़ रहा था...

आगे जाकर मुझे एक दूर दिखा जो बहुत hi बड़ा और विशालकाय था जिसके दोनों और उसके दरबान थे जो उस दूर की रक्षा कर रहे थे..

और फिर उस दरबान के आगे मतलब मेरे दोनों साइड कुछ लोग झुके हुए मुझको प्रणाम कर रहे थे...

और ठीक उनके पीछे मेरे नाम का जयजयकार हो रही थी..

जिसे मई सुन रहा था पर मेरे अब तक हुए सभी मोमेंट पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई थी..

बल्कि मई तो सिर्फ इन सबको देखते हुए या एक तरह से कहा जाये तो एन्जॉय करते हुए आगे बढ़ रहा था...

उसके बाद मई उस दूर के पास आकर खड़ा हो गया...



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उस दूर के पास खड़े दोनों दरबानो में मुझे देखकर मुझे झुककर प्रणाम किया और फिर धीरे धीरे वो दूर खुलने लगा...................................
 
अपडेट 34

उसके बाद मई उस दूर के पास आकर खड़ा हो गया...

उस दूर के पास खड़े दोनों दरबानो में मुझे देखकर मुझे झुककर प्रणाम किया और फिर धीरे धीरे वो दूर खुलने लगा...................................

आगे............................

अब वो पूरा दूर खुल गया था पर जैसे जैसे वो दूर खुल रहा था वैसे अंदर का प्रकाश बढ़ रहा था...

और वो मेरे चहरे पर बढ़ते hi जा रहा था...

कुछ hi देर में वो दूर पूरी तरह खुल गया और मैंने आगे देखा तो और भी शॉक हो गया...

क्यों की आगे और एक महल था बोले तो ये अभी खुल गया ये एक तरह का गेट था महल तो अभी आना बाकि था...

उस गेट से वो महल बहुत hi दूर दिख रहा था मई जैसे hi दूर के अंदर जाने के लिए पहला पेअर उठाया...

और अंदर रखा तभी मेरे बॉडी में एक तरह का करंट लगा..

जिससे मेरे पुरे बॉडी पर एक नयी उत्तेजना महसूस हो रही थी..

एक अलग hi सुकून जो आज तक घर आने के बाद मुझे कभी भी महसूस नहीं हुवा...

मुझे ऐसे लग रहा है जैसे मई इस जगह को बहुत अचे से जनता हु..

ये जगह मुझे देखकर बहुत hi खुश लग रही थी जैसे इसको भी मेरा hi इंतज़ार था..

वो महल मुझसे बहुत hi दूर थे इसलिए मई अपनी शक्ति से उस महल के दूर पास 1 सेकंड में hi पहुंच गया..

अब तो सिर्फ उस महल का दूर खोलना बाकि रह गया था..

मुझे तो ताज्जुब इस बात का हो रहा था जहा तक उस गेट के बहार इतने बड़े लोग खड़े थे...

जिन्होंने मेरे स्वागत इतना जंगी तरह से किया उससे लग रहा था...

यहाँ भी कुछ ऐसा hi होंगे पर यहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं था..

यहाँ पर तो कोई भी नहीं था इसलिए मई जल्दी से उस महल के दूर के पास चला गया..

मई जैसे hi उस दूर के पास गया और उस दूर को नॉक hi करने वाला था की तभी वो दूर धीरे से खुलने लगा...

ये अंदर के लोगो ने भी महसूस किया की दूर खुलने लगा वैसे वो भी ख़ुशी से पहले hi नहीं समा रहे थे...

इधर मई जैसे जैसे दूर खुल रहा था वैसे वैसे अंदर के लोग मुझे दिखाई दे रहे थे और उन्हें भी मई...

अब तो वो दूर भी खुल गया था.. सब लोग वह खड़े थे जैसे सब लोग मेरी hi रह देख रहे थे...

पर अंदर जो लोग थे उनके हर एक चहरे पर एक तेज था जिसके कारन उनका चेहरा बहुत चमक रहा था...

और सबसे खास तो औरत क्यों की उन्हें देखकर लग hi नहीं रहा था की ऋतू ने मुझे जो उनकी आगे बताई थी वो उनकी होगी...

क्यों की वो सब तो एक दूसरे की बहाने hi लग रही थी उन्हें देखकर पता hi नहीं चल रहा था..

कोण मेरी सिस्टर है कोण मेरी ममी कोण माँ और कोण मेरी नानी है...

पर जब उन्होंने मुझे अपने सामने देखा तो वो अपने आंसू नहीं रोक सके...

सबकी आँखों में आंसू थे कुछ लोगो को छोड़कर..

मुझे वह पर थे लार्ड मतलब मेरे नानाजी भी दिखाई दिए जिन्हे मई पहले से जनता था...

वह पर और एक चेहरा था जो मुझे कुछ जाना पहचाना लग रहा था...

पर उन्हें मैंने कहा देखा था याद नहीं आ रहा tha..Vaha पर कुछ 9-10 लोग होंगे जो वह पर खड़े थे...

मई तो वह पर किसी को भी नहीं जनता था न कोई मुझे पहचान आ रहा था...

फिर भी उनके आँखों में आंसू देखकर न जाने क्यों मेरे भी आँखों में आंसू आ गए...

मुझे देखते hi एक औरत भागते हुए मेरे पास आयी और वही पर सबके सामने मुझे गले लगा लिया...

उस औरत के गले लगने से मेरे तन, मन मेरे पुरे बॉडी को एक अलग hi अहसास हो रहा था...

मुझे एक अलग hi सुकून लग रहा था उस औरत की बहो में ..

जैसे बरसो से मई उनकी बहो में आने के लिए तड़पा हु और बस मुझे यही चाहिए थे ऐसा लग रहा था...

वो औरत मेरे गले लगते hi जोर जोर से रोने लगी उनका रोना देखकर मुझे भी रोना आ रहा था...

मैंने भी उन्हें अपने बहो में लेकर रोने लगा वह पर हम दोनों को ऐसा देखकर...

सब लोगो की आँखों में आंसू तो थे पर उनके चहरे पर ख़ुशी भी थी मेरे लौट आने की ...

उस औरत की बहो में मुझे उनकी मुझे लेकर तड़प महसूस हो रही थी जो मुझे आज तक किसी के भी गले लगने से महसूस नहीं हुयी थी...

उस औरत की आँखों से तो आंसू रोकने का नाम hi नहीं ले रहे थे कुछ देर वो मेरे ऐसे hi बहो में थी और रोने लगी थी..

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे सरे चहरे को चूमते हुए गिला कर दिया..

औरत- (मेरे चहरे पर किश करते हुए) मेरा बछ्हा...........

ये कहकर वो औरत फिर से मेरे गले लगकर रोने लगी...

उसके बाद न वो औरत कुछ बोल रही थी और नहीं उनके पीछे खड़े लोग वो सब तो हमारे इस प्यार के मिलान को देखे जा रहे थे..

तभी पीछे से और एक औरत आयी उन्होंने मेरे गले लगे हुए औरत क्र कंधो पर हाथ रखा और वो कहने कागि....

औरत- बीटा अब ये इस अंदर भी तो आने दो.. हम सब भी इस मिलना चाहते है...

फिर मेरे गले लगे हुए उस औरत ने मुझे न चाहते हुए भी छोड़ा और मेरे हाथ को पकड़ कर अंदर ले गयी..

मुझे कुछ कुछ तो अंदेशा हो रहा था की अभी मेरे गले लगे हुयी मेरी माँ hi होगी..

पर मई सूरे नहीं था इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था.. फिर मई थे लार्ड के पास गया वो मुझे देखकर बहुत hi खुश थे...

मई भी उन्हें देखकर बहुत खुश था मई जैसे hi उनके पेअर चुने के लिए निचे झुका तो उन्होंने मुझे रोका और मुझे कहने लगा..

थे लार्ड- तुम्हारी जगह यहाँ नहीं मेरे दिल में है बीटा आओ मेरे गले लग जाओ....

फिर उन्होंने मुझे अपने गले लगा लिया.. उनके गले लगते hi मुझे पहले की तरह hi अनुभूति हो रही थी जैसे उस औरत के गले लगते hi हो गयी थी...

वैसे इसके पहले मई थे लार्ड से मिला था पर मई इससे पहले उनके कभी गले नहीं लगाया था और उसके बाद सीधा आज hi गले लगा लिया...

फिर मई उसके बाद सबके पेअर छुए और सब लोगो ने मुझे अपने गले लगा लिया..

मुझे जिसका चेहरा जाना पहचाना लग रहा था उनके पास जाकर मई अजीब सी नजर से देखने laga..to वो कहने लगे..

आदमी- क्यों बीटा मुझे पहचानने की कोशिश कर रहे हो..

मैंने कुछ नहीं कहा पर सिर्फ है में सर हिला दिया.. तो वो मुस्कुराते हुए कहने लगे...

Admi-Beta याद करो मई तुम्हे पहली बार कुछ सीखने आया था..

तुम्हे तुम्हारी पांच भूतो की शक्ति जागृत करने के लिए और तुम्हे हर तरह की लड़ाई की विद्या सीखने के लिए..

ये सुनते hi मुझे याद आ गया अरे ये तो मेरे गुरु है.. मुझे याद आया की है यार उन्होंने hi मुझे सब कुछ सिझाया था...

पर तब वो कुछ और hi भेष में और इस बार अलग ड्रेस उप में है इसलिए इन्हे मई पहचान नहीं पाया...

मैंने ये सब अपने मन में hi कहने लगा

क्युकी मेरे मुँह से कोई वर्ड्स hi नहीं निकल रहे थे..

मई तो बस उनको वह देखकर ख़ुशी से उनके गले लगा गया..

फिर मुझे अपने hi आगे की कुछ लड़किया दिखाई दी.. जो मुझे बहुत hi अजीब सी नजर से देख रही थी..



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मुझे लगा ये भी मुझसे बड़ी होगी क्यों की यहाँ पर सबको देखकर किसी के भी आगे का अंदाज़ा नहीं लग प् रहा था..

तो मई उनके भी पेअर चुने लगा. जैसे hi उन्हें लगा की मई उसके पेअर चुने वाला हु..

वो कुछ कदम पीछे चली गयी तभी थे लार्ड कहते है...

थे लार्ड- बीटा तुम इनके क्यों पेअर छू रहे हो ये तो तुमसे भी बहुत छोटी है और ये तुम्हारे बहाने है..

ये सुनकर भी मैंने कुछ नहीं कहा और उनके चहरे पर देखने लगा..

पर उन्हें देखते हुए मैंने अपने दोनों हाथ सिर्फ जोड़े जो हम प्रणाम करते हुए करते है...

वो लड़की बहुत hi सुन्दर और ब्यूटीफुल थी उसके पास और लड़की थी वो भी उससे काम नहीं थी..



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उन दोनों जैसी लड़की मैंने पहले कभी भी नहीं देखि थी चहरे से उनकी मासूमियत छुपते चुप नहीं रही थी...

दोनों भी एक से बढ़कर एक दिख रही थी...

कोण काम और कोण ज्यादा ब्यूटीफुल ये बता पाना मुश्किल था..

और उन दोनों में चूसे कर पाना भी बहुत मुश्किल था तो मई बस उन्हें देखते hi रह गया...

उसके बाद मुझे कुछ हलचल होती महसूस हुयी तो मेरा ध्यान मेरे पीछे गया..

तो मेरे पीछे एक औरत कड़ी थी जिसके मैंने पेअर छूकर उनके गले भी लगा हुवा था..

पर उनके पीछे और एक था जो मुझे देखकर चुप रहा था.. शायद वो मेरे सामने आने से दर रहा हो..

उसे मैंने अभी तक देखा नहीं था क्यों की वो मुझे देखकर चुप रहा था..

उस औरत के पीछे तभी जो सबसे पहले औरत मेरे गले लगी हुयी थी वो कहने लगी...

औरत- अब सब यही रहेंगे की मेरे बचे को अंदर भी लेकर जायेंगे...

वो औरत मेरे पास आयी और मेरा हाथ पकड़कर अंदर ले जाने लगी... हम कुछ hi देर में अंदर आ गए..

फिर वह पर बैठने के लिए कुछ जगह थी जहा पर हम दोनों बैठ गए वो औरत तो जैसे मुझे छोड़ने के लिए तैयार hi नहीं थी..

वैसे मुझे भी ये पसंद ा रहा था बल्कि मुझे भी लग रहा था की मई उस औरत से दूर hi नहीं जाऊ ऐसे hi उसके पास हमेसा के लिए रह जाऊ...

उसने बैठते hi मुझे फिर से एक साइड से गले लगा लिया और उसके बाद सब मेरे चारो और बैठ गए.

तभी एक दासी पानी टाइप कुछ लेकर आयी जिसे मैंने पिया तो वो बहुत hi टेस्टी था..

ऐसा मैंने पहले कभी भी नहीं पिया था उसे पीके बॉडी में एनर्जी महसूस हो रही थी जिसे मई महसूस कर रहा था...

मई यहाँ पर जब से आया था तब से शांत hi था तो मेरे मन में क्या चल रहा है..

मेरा अभी क्या हाल है वो समझकर थे लार्ड कहते है ..

थे लार्ड- बीटा मुझे पता है तुम्हारे मन में इस समय क्या चल रहा है.. तुम यही सोच रहे हो न..

तुम हम में से किसी को भी नहीं पहचान प् रहे हो. तो मई तुम्हे सबका परिचय करवा देता हु..

थे लार्ड- ये जो तुम्हारे पास बैठी और यहाँ आने पर तुम्हारे जो पहली बार गले लगी थी वो तुम्हारी माँ है...

ये सुनते hi मुझे जो अंदेशा था वही हुवा.. ये मेरी माँ hi है..

ये सुनकर मई फ्री होकर अपने माँ के गले लगकर बैठ गया बल्कि अब तो मेरा मन इन्हे छोड़ने का hi नहीं हो रहा था...

फिर एक आदमी की तरफ इशारा करते हुए कहते है ये तुम्हारे सबसे बड़े मां है..

याने मेरा बड़ा बीटा देवेश उनके पास बैठी हुयी वो तुम्हारी बड़ी ममी है समय...

फिर जिसके तुम पेअर छू रहे थे न वो तुम्हारी छोटी बहन और तुम्हारे मां की लड़की त्रिगुणा है...

जो धरती पर तुम्हारे गुरु बनकर ए थे न वो तुम्हारे छोटे मां और मेरे दूसरे बेटे है ईश्वर..

फिर उनके पास बैठी वो तुम्हारी ममी इशानी और उनके पास जो लड़की है तुम्हारी दूसरी छोटी बहन है शताक्षी और....

ये कहते हुए थे लार्ड इधर उधर देखने लगे और उनके साथ सब लोग भी इधर उधर देखने लगे

जैसे वो लोग किसी को ढूंढ रहे हो तभी शताक्षी एक तरफ इशारा करते हुए कहती है...

शताक्षी- वो देखो वो वह कड़ी है छुपकर हमे देख रही है...

थे Lord-(Us तरफ देखते है कुछ चहरे पर स्माइल लेट हुए) आओ बीटा यहाँ आओ देखो कोण आया है तुमसे मिलने ..

पर वो जो कोई भी था यहाँ नहीं आया बल्कि वही से हमे देखने लगा..

वो छुपकर हमे देख रहा था तभी माँ उठते हुए कहती है...

माँ- रुको मई उसे लेकर अति हु...

फिर माँ उसके पास चली गयी और फिर कुछ hi दूर में वो हमारी तरफ चली आ रही थी..

पर इस बार माँ के साथ कोई लड़की थी जो बहुत hi क्यूट और बहुत hi सुन्दर दिख रही थी...



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बहुत hi मासूम चेहर था उस लड़की का जैसे उसे देखे तो बस उसमे hi खो जाये बस उसे दूसरा कोई दिखे hi न...

मई भी उस लड़की के खूबसूरती में खो गया था... वैसे वो दिखने में वह पर सबसे छोटी दिख रही थी..

मतलब कुछ 14-15 साल की लड़की की तरह जो अभी अभी आगे में आ चुकी है...

वो डरते हुए मुझसे नजरे चुराकर हमारे पास आ रही थी...

और आकर माँ ने उसे अपने पास बिठाया और अब उसके और मेरे बिच में माँ बैठी हुयी थी...

मई तो सिर्फ उसे hi देख रहा था तभी थे लार्ड की अबाज से मई होश में अत हु तो वो कहने लगते है ..

थे Lord-Beta वह पर क्या कर रही थी तुम..

Ladki-(najre चूरकर निचे देखते हुए) कुछ नहीं वो मई आप सबको देख रही थी..

थे लार्ड- तो वह से क्यों यहाँ भी तो आ सकती थी न...

इस बात पर वो लड़की कुछ नहीं बोली और चुप चाप बैठी रही पर ये देखकर माँ ने उसे गले लगाया...

और उसके माथे पर एक किश किया फिर एक तरफ से मुझे और...

एक तरफ से उसे गले लगा लिया ये देखकर सबकी आँखों में आंसू भी थे और एक अलग चमक भी जो मुझे दिखाई दी...

जहा तक मुझे याद है इस लड़की के बारे में मुझे ऋतू ने कुछ भी नहीं बताया था

तो ये आयी कहा से और इसके साथ इतना लगाव सबको क्यों है...

यही मेरे मन में चल रहा था की तभी थे लार्ड ये दृश्य देखकर कहने लगे.............................
 
अपडेट 35

जहा तक मुझे याद है इस लड़की के बारे में मुझे ऋतू ने कुछ भी नहीं बताया था

तो ये आयी कहा से और इसके साथ इतना लगाव सबको क्यों है...

यही मेरे मन में चल रहा था की तभी थे लार्ड ये दृश्य देखकर कहने लगे.............................

आगे............................

इधर धरती पर किसी एक घनघोर जंगल में जहा सूरज की रौशनी भी आना असंभव है वह इंसान कहा से आएंगे...

ऐसा जंगल बहुत hi डरावना भी था और वैसे hi उस जंगल का रहस्य भी...

ये जंगल सब शहरों से बहुत hi दूर था जहा जल्दी से किसी की नजर न जाये एक ऐसी जगह..

वैसे वो जंगल बहुत hi बड़ा था.. और बहुत डरावना भी जहा आज तक कोई भी इंसान नहीं गया...

उसी जंगल में कही रहस्य दफ़न थे और उन रहस्यों के बारे में वह पर रहने वालो के शिव और कोई भी नहीं जनता था..

उसी जंगल में कही ऐसी जगह जहा पर कुछ अघोरी मन्त्रिक सैतान की पूजा और तपस्या कर रहे थे..

वह पर सिर्फ 1 hi अघोरी था जो घोर तपस्या में लीन था..

बाकि उस अघोरी के शिष्य थे जो उस अघोरी की सेवा करते थे..

अभी तो वह पर कुल 4 hi लोग थे जो सैतान की पूजा कर रहे थे..

उनमे से एक अघोरी भी था जो बहुत सालो से तपश्या कर रहा था..

और उनके वो 3 शिष्य अभी कुछ देर पहले hi तपश्या में लीन हुए थे..

उन शिष्यों में से 2 मेल और 1 फीमेल थी.. जो वह पर बैठे उस अघोरी का चिंतन कर रहे थे..

तभी उन चारो की पूजा हो जाती है और वो उस अघोरी के आगे झुककर प्रणाम करने के बाद...

वह से उनकी सेवा में कुछ लेन के लिए निकलते hi है तभी वो अघोरी बाबा अपनी आंखे खोल देता है...

और आंखे खोलते hi उनकी आँखों में से एक तेज आग निकलती है जो आगे एक पेड़ था उसको जलकर रख कर देती है...

और ये दृश्य उनमे से ी शिष्य देखते hi उस अघोरी बाबा के चरणों में गिर जाता है और उनकी जयजयकार करने लगता है..

उसे जयजयकार करते देख बाकि शिष्य भी वह देखते है...

तो वो भी उसी के तरह उस अघोरी के पेअर में गिरकर उस अघोरी की जयजयकार करने लगते है...

क्यों की वो अघोरी करीब 500 सालो से तपश्या में लीन था और आज इतने सालो बाद उसने अपनी आंखे खोली है..

तब से ये शिष्य उस अघोरी की रह देख रहे थे..

वैसे अभी अभी जो शिष्य उनके पैरो में गिरकर उनकी जयजयकार कर रहे थे वो कुछ 50 सालो से hi उसकी सेवा कर रहे थे..

ऐसे hi उस अघोरी के बहुत से शिष्य थे जो वह पर मौजूद नहीं थे..

क्यों की वो भी अघोरी के सेवा के लिए कुछ काम करने गए थे....

और तभी उस अघोरी की तपस्या ख़तम हो जाती है और वो आंखे खोल देता है वो अघोरी आंखे खोलने के बाद..

अपने चारो और देखता है फिर वो अपनी जगह से उठकर जोर जोर से हसने लगता है...

और उन शिष्यों के देखकर कहता है...

अघोरी- आज मई बहुत खुश हु इतने सालो से मई जो शक्ति हासिल करना चाहता था...

अब सिर्फ उस शक्ति को पूरी तरह से पाने के लिए मुझे एक काम और करना है..

फिर मेरा मकसद पूरा होने में मुझे कोई नहीं रोक सकता कोई भी नहीं...

ये कहकर वो अघोरी फिर से हसने लग जाता है.

वो अघोरी क्या कह रहा था उन शिष्यों को कुछ समाज नहीं आ रहा था सिर्फ वो उसकी बाटे सुन रहे थे...

तभी वो अघोरी उन शिष्यों की तरफ देखते हुए कहता है...

अघोरी-(गुस्से से) जाओ और कन्ट्रा को बुलाकर लाओ हमे उससे कुछ बात करनी है जाओ जल्दी जाओ उससे कहना हमने बुलाया है..

ये बात वो अघोरी बहुत hi गुस्से से कहता है तो वो सब शिष्य वह से भाग जाते है किसी कन्ट्रा को बुलाने के लिए...

शायद ये कन्ट्रा कोई उनका कोई पहला शिष्य होगा जो उसे बुलाने के लिए कह रहा हो..

ऐसा कहने के बाद उस अघोरी को कुछ याद अत है तो वो फिर से तपस्या में लीन हो जाता है ..

जैसे ध्यान करते हुए किसी को ढूंढ रहा हु अपनी ीचा प्राप्ति के लिए...

तो चलो अब फिर से रुद्रदीप के पास चलते है....

थे लार्ड - (मेरी तरफ देखते हुए) बीटा तुम्हे पता है ये कोण है..

मैंने न में सर हिलाया तो फिर थे लार्ड उस लड़की की तरफ देखते हुए कहते है..

थे लार्ड- बीटा तुम्हे पता है ये कोण है..

तभी बिच में माँ कहती है..

Maa-Kaise पता होगा बाबा इसे... इसके सामने तो हमने कभी भी इसका जिक्र नहीं किया.. इसे तो पता भी नहीं है ये इसका क्या लगता है और कोण है..

ये सुनकर जहा तक मई कुछ नहीं कहता वैसे hi उस लड़की का यही हाल था.

ये सुनकर सबकी आँखों पर कुछ पल के लिए आंसू आ गए थे पर जल्द hi सब सम्हाल गए..

तो इस बार थे लार्ड अपने चहरे पर हसी लेट हुए कहते है..

थे Lord-Beta ये तुम्हारी सबसे छोटी और बहुत hi प्यारी सगी बहन है इसका नाम प्रकृति है पर इसे हम सब प्यार से दित्य कहते है...

और दित्य बीटा ये है तुम्हारे सेज बड़े भाई और इस घर के बचो में सबसे बड़े बेटे..

इस महल के चिराग मेरे दिल का टुकड़ा तुम्हारी माँ के आँखों का तारा और तुम्हारे पापा का सबसे लाडला बीटा...

इस घर में जितने भी लोग है उन सबका दुलहरा रुद्रदीप .....

ये सुनकर जहा तक मई सरप्राइज हो गया था वैसा hi कुछ हाल उस लड़की मतलब मेरी छोटी सगी बहन दित्य का भी था..

मेरे बाकि बहनो को तो मुझे देखकर कुछ कुछ अंदेशा हो गया था पर ये सुनकर उनको भी बहुत hi ख़ुशी हुयी...

Mai-(Man में) ये कैसे हो सकता है ये मेरी बहन कैसे हो सकती है जहा तक मुझे पता है..

मतलब ऋतू ने जितना बताया है उसकी बताई कहानी में तो ये नहीं थी..

मतलब उसने ऐसा कुछ नाम भी नहीं लिया था तो ये कहा से आयी...

मई इसी सोच में डूबा हुवा था तभी माँ मुझे हिलती है और मुझे कहती है...

Maa-Kya सोच है रहे हो दीपू...

Mai-Yyyeee..... ये नहीं हो सकता...

देवेश- क्या नहीं हो सकता रूद्र...

Mai-Ye मेरी बहन नहीं हो sakti...(Ye सुनकर सब शॉक हो जाते है) मतलब इसके बारे में मुझे रितिका ने कुछ भी नहीं बताया तो ये कहा से आ गयी...

रितिका का नाम जैसे hi मैंने लिया तो मैंने माँ को देखा तो ये नाम सुनकर उनकी आंखे लाल हो गयी थी..

मुझे ऐसा लगा जैसे वो इस नाम से बहुत hi नफरत...

सबने मेरे मुँह से ये नाम सुनकर एक बार माँ की तरफ देखा तो उन्हें जिस बात का दर था उन्हें वही दिख रहा था..

तो मैंने माँ को हिलाया तो माँ मुझे देखकर कुछ शांत हो गयी..

पर माँ के फिर से आँखों में आंसू आ गए और फिर से वो मेरे गले लग जाती है और कहने कागती है..

माँ- दीपू.. अब मुझे तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी. अब तुम्हे मुझसे कोई नहीं चीन सकता कोई भी नहीं...

मुझे माँ का ऐसे अचानक मुझे गले लगकर रोना और ऐसा कहना बहुत hi अजीब लगा..

क्यों की मैंने कुछ और hi कहा था और माँ कुछ और hi कह रही है..

मुझे माँ को ऐसा देख मेरे भी आँखों में आंसू आ गए ths..Par मई इस बात को बाद में सोचते हुए माँ से कहने लगा..

मई- नहीं माँ मुझे आप से कोई नहीं दूर कर सकता.. मई भी अब आपको छोड़कर अब कही भी नहीं जाऊंगा..

ये सुनकर देवेश और ईश्वर अंकल नानाजी की तरफ देखते है.. और थे लार्ड उन्हें इशारो से शांत रहने का कहते है..

पर मई ये सब देख नहीं पता क्यों की मई तो अभी माँ के गले लगा हुवा था...

यहाँ पर आने के बाद ये मेरा पहला वर्ड था.. नहीं तो इससे पहले मई सिर्फ देख और सुन रहा था...

मई माँ को ऐसा कहकर उनके आंसू पोछता hu.Aur फिर माँ मुझे और दित्य को गले लगकर बैठ जाती है तब थे लार्ड कहते है...

थे लार्ड- बीटा ऋतू को जितना पता था उसने उतना hi बताया बल्कि उसे क्या किसी को भी दित्य के बारे में नहीं पता...

क्यों की तुम्हारे यहाँ से जाने के बाद दित्य का जनम हुवा है...

ये सुनकर मई कुछ शांत होता हु और वैसे भी दित्य बहुत खुश होती है ये सुनकर की उसका भी कोई बड़ा भाई है...

पर वो अपनी ख़ुशी अंदर hi अंदर जाहिर करती है बहार किसी को दिखती नहीं...

सिर्फ निचे मुँह करके छोटी सी स्माइल कर देती है...

पर ये सुनकर मेरे मन में एक सवाल अत है वैसे ये सवाल मेरे मन में बहुत पहले hi आ गया था...

पर मैंने पूछा नहीं पर बात अब उस विषय में आ hi गयी है तो पूछ hi लेता हु...

Mai-(The लार्ड से) नानाजी मुझे यहाँ पर ए हुए इतना वक़्त हुवा है पर मेरे बाबा कही दिखाई नहीं दे रहे है कहा है वो...

ये सुनकर सब के मुँह खुले रह जाते है... मतलब सब अपना मुँह देखते जा रहे थे.. पर कोई बोलता कुछ नहीं..

मई सिर्फ थे लार्ड की तरफ देख रहा था इसलिए बाकियो की तरफ मेरा ध्यान नहीं गया वार्ना मई समाज जाता की कुछ बात जरूर है..

पर फिर भी ये सुनकर दित्य भी चुप नहीं बैठती वो भी अपने बचपना अबाज में कह जाती है...

दित्य- मैंने भी ये सवाल माँ से बहुत बार पूछा है पर माँ कोई जवाब hi नहीं देती...

ये सुनकर मई दित्य की तरफ देखने लग जाता हु क्यों की उसने जो कहा मुझे समाज में hi नहीं आया तो मई सरप्राइज होकर उससे कहता हु...

Mai-Matlab... मई समजा नहीं...

अभी दित्य या और कोई कुछ कहता तभी नानाजी कहते है

नानाजी- बीटा वो तुम्हारे बाबा किसी काम से बहार गए है.. वो भी गॉड है तो उनको मैंने कुछ काम दिया है..

वो उसी सिलसिले में बहार गए है और वो अभी तुमसे नहीं मिल सकते...

पर उन्होंने तुम्हारे लौट एंड की ख़ुशी जताई है और वो तुम्हे जल्द hi मिलने आएंगे ऐसा उन्होंने कहा है..

ये सुनकर सब बहुत hi शांत हो जाते है जैसे इस जवाब ने सबको बचा लिया..

पर मेरी छोटी बहन कैसे शांत बैठती उसे तो अब मौका hi मिल गया था कुछ बोलने का...

और दित्य भी ये सुनकर अपने hi टोन में कहती है............................
 
अपडेट 36

नानाजी- बीटा वो तुम्हारे बाबा किसी काम से बहार गए है.. वो भी गॉड है तो उनको मैंने कुछ काम दिया है..

वो उसी सिलसिले में बहार गए है और वो अभी तुमसे नहीं मिल सकते...

पर उन्होंने तुम्हारे लौट एंड की ख़ुशी जताई है और वो तुम्हे जल्द hi मिलने आएंगे ऐसा उन्होंने कहा है..

ये सुनकर सब बहुत hi शांत हो जाते है जैसे इस जवाब ने सबको बचा लिया..

पर मेरी छोटी बहन कैसे शांत बैठती उसे तो अब मौका hi मिल गया था कुछ बोलने का...

और दित्य भी ये सुनकर अपने hi टोन में कहती है............................

आगे............................

...

दित्य- (गुस्से से) तो फिर ये बता अपने मुझे पहले क्यों नहीं बताई नानाजी आप भी मुझसे झूट बोलते है जाओ मई आपसे बात नहीं करती...

ये कहकर दित्य टेढ़ा मुँह करके निचे मुँह करती है और गुस्से से निचे देखती रहती है...



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उसके ऐसे बचो जैसी बात करते हुए मुझे भी एक बार हसी आ गयी थी.

पर मई कुछ कह नहीं पाया क्यों की अभी तक दित्य से मेरी अचे से बात भी नहीं हुयी थी...

उसी से क्या किसी से भी मेरी अचे से बात नहीं हुयी थी तो क्या कहु इसलिए चुप रहना hi बेहतर समजा...

वैसे ये सुनकर सबके चहरे पर स्माइल आ जाती है पर कोई अबाज नहीं करता नहीं तो दित्य सुन जाती और उसके बाद तो वो लोग hi जाने ..

नानाजी- अरे दित्य बीटा तुम तो मुझे नाराज हो गयी पर मई तो तुम्हे आज की तरह hi आश्चर्य देखना चाहता था..

जैसे आज तुम्हे अपना भाई मिला वैसे hi मई तुम्हे तुम्हारे बाबा देने वाला था..

पर अब जाने दो तुम तो मुझसे गुस्सा हो गयी अब जाने दो मई तुम्हारे बाबा को नहीं बुलाता..

ये सुनते hi दित्य अपना मुँह जल्दी से ऊपर करती है और हस्ते हुए कहती है...

दित्य- नहीं तो नानाजी मई आपसे गुस्सा नहीं हु मई तो मजाक कर रही थी.. चलो अब बाबा को भी बुलाओ...

नानाजी- नहीं अभी नहीं फिर तुम बाद में फिर से गुस्सा हो गयी तो इसलिए नहीं. .

दित्य- नहीं नहीं नानाजी अब मई आपसे कभी नहीं गुस्सा करुँगी.. प्रॉमिस.

माँ- हां बीटा तुम्हारे बाबा जल्द hi लौट आएंगे अब जैसे तुम्हारे भाई लौट ए है वैसे तुम्हारे बाबा भी लौट आएंगे..

Ditya-Phir ठीक है आने दो बाबा को मई उन पर बहुत गुस्सा करुँगी..

बहुत डाटूंगी मई उनको क्यों की वो हमे इतने दिन से मिलने क्यों नहीं ए...

ये सुनकर जहा पर सबकी चहरे पर हसी आ जाती है पर वैसे hi उसी के साथ...

सबके आँखों में आंसू भी थे जिसे मई समाज hi नहीं पाया की ये किस तरह के आंसू है

तभी माँ को कुछ याद अत है तो वो कहती है...

Maa-Aap सब लोग भी न इतने दिनों बाद मेरा बीटा घर लौट आया है और आप सब लोग है की उससे बाटे कर रहे है...

देखो तो मेरा बीटा कितना पतला हो गया है इसे भूक भी बहुत लगी होंगी..

इसे देखकर लगता है इसने बहुत दिनों से पेट भरकर खाना भी नहीं खाया होंगे..

ये सुनकर मई कुछ शॉक होता हु क्यों की इन्हे ये बात कैसे पता चली..

क्यों की जब से मुझे ये बात पता चली थी तब से मैंने ढंग से खाना भी नहीं खाया था...

पर वही मई समाज गया की इनको मेरे बारे में सबकुछ पता है ये तो होना hi था और वैसे भी ये तो मेरी माँ है..

हर माँ बिना बताये बचे के मन की बात समाज जाती है फिर ये तो.....

Maa-(Age कहती है) चलो दीपू मैंने आज अपने हटो से तुम्हारे लिए तुम्हारे मन पसंद खाना बनाया है चलो अब...

फिर माँ मुझे और दित्य को अपने साथ ले जाती है और वो शताक्षी और त्रिगुणा को भी अपने साथ ले जाती है खाने के लिए...

वैसे मई यहाँ पर जब से आया था तबसे मई उन दोनों को बात करते हुए या और कुछ करते हुए नहीं देखा...

क्यों की मई जब से आया हु तब से वो मुझे hi घूरे जा रही है पर कुछ कह नहीं प् रही है...

हम एक जगह जाकर डाइनिंग टेबल की तरह था वह पर बैठ गए..

नानाजी सबके मिड में बैठे हुए थे उनके दोनों साइड मामाजी और फिर ममी..

फिर उनके दोनों बछिया फिर राइट साइड में दित्य और फिर माँ बैठ गयी...

मुझे नानाजी के ठीक सामने मतलब उस डाइनिंग टेबल की दूसरी चोर पर एक चेयर दिखाई दी..

और न जाने क्या सोचते हुए मई सीधा उस चेयर पर जाकर बैठ देखकर सबके चहरे पर स्माइल थी...

Mai-Kya हुवा आप सब ऐसा है क्यों रहे हो..

तभी बड़ी ममी कहती है...

समय- ये बता अलग है की तुम्हे कुछ याद नहीं है पर तुम्हे कुछ याद न होते हुए भी अपनी पुराने आदतें नहीं भूले हो...

Mai-Matlab... मई कुछ समजा नहीं...

Somya-Iska मतलब तुम पहले भी इसी चेयर पर बैठते थे और आज भी इसी चेयर पर बैठे थे..

न तब तुम वह किसी को बैठने देते थे और तुम्हारे जाने के बाद भी वह कोई नहीं बैठा..

बल्कि उस चेयर ने किसी को बैठने के लिए स्वीकार hi नहीं किया...

और आज देखो इतने सालो बाद भी उस चेयर ने तुम्हे पहचान लिया और उसने तुम्हे बिठा भी दिया...

Mai-(Man में) ाचा इसलिए तो मई न जाने कैसे इस चेयर पर बैठ गया.. जैसे मुझे यहाँ पर सिर्फ यही एक चेयर खली महसूस हुयी...

Ditya-Acha तभी तो सोचु माँ मुझे इस चेयर पर बैठने को मन क्यों करती थी और इतना डांटती क्यों थी..

इस बात पर कोई कुछ नहीं बोलै पर सिर्फ hase.Aur तभी कुछ दसिया हमारे लिए खाना लेकर आ गयी...

खाना देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया था क्यों की सब मेरी hi पसंद का खाना बनाया था माँ ने...

मई खाने के हाथ लगाने hi वाला था की तभी माँ ने मेरे हाथ पे मारा और कहने लगी...

माँ- आज मई अपने बचे को अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी...

फिर सबसे पहले नानाजी ने निवाला लिया उसके बाद मुझे बोलै गया खाने को तो माँ ने मुझे अपने हाथो से खिलाया...

मैंने जैसे hi निवाला अंदर लिया मई उस खाने को महसूस कर रहा था.. सही में यार वो खाना बहुत hi टेस्टी था..

ऐसा था जिसके हाथो ने मुझे खिलाया मई उसको भी खा जाऊ.. और जितना भी खो मेरा पेट नहीं भरेगा..

मई- सच में खाना बहुत hi टेस्टी बना है ऐसा है की सिर्फ खता hi जाऊ मगर मेरा पेट नहीं भरेगा..

माँ- तेरे लिए hi तो खाना बनाया है बीटा जितना खाना है खा ले..

मेरे खाने के बाद सबने अपना खाना सुरु किया तो दित्य माँ की तरफ गुस्से से देखकर कहने लगी...

दित्य- ये ठीक नहीं किया अपने माँ इनके एते hi आप मुझे भूल गयी..

आप सिर्फ उन्हें hi खाना खिला रही हो मेरी तरफ तो कोई ध्यान hi नहीं दे रहा...

माँ के कुछ कहने से पहले hi मई दित्य की तरफ देखते हुए कहने लगा...

मई- अरे.. मेरी छोटी को गुस्सा आ गया.. क्या हुवा तुम्हारी माँ ने तुम्हे नहीं खिलाया..

तो मई हु न आओ यहाँ आओ मई तुम्हे अपने हाथ से खाना खिलता हु..

ये सुनकर दित्य ने एक दफा अपनी माँ की तरफ देखा तो माँ कहने लगी...

माँ- Kya...mujhe क्यों देख रही हो मई तुम्हे आज नहीं खिलने वाली.. अगर खाना खाना है तो...

जाओ अपने बड़े भाई को पास जाओ मई तो आज सिर्फ अपने बेटे को hi खाना खिलाऊंगी..

.

ये सुनकर दित्य बहुत hi उदास हो गयी.. उसे लगा की अब माँ उसे नहीं खाना खिलने वाली..

पर एक तरफ वो मेरे हाथ से भी खाना चाहती थी.. तो उसने एक दफा नानाजी की तरफ देखा तो...

नानाजी ने उसे इशारो से hi कह दिया जाओ अपने भाई के पास जाओ और उसके हाथ से खाना खाओ...

वैसे मुझे ऐसा लग रहा था की मई जब से आया हु दित्य मुझसे कुछ दर रही है..

अब उसके ऐसे डरने के पीछे क्या कारन है वो मई नहीं जान पाया पर मई उसे बाद में जरूर पूछूंगा...

तब दित्य डरते हुए वह से खरी होकर मेरी दूसरी तरफ आकर बैठ गयी और माँ की तरफ देखने लगी..

पर माँ ने उसकी तरफ देखा hi नहीं माँ तो बस मुझे खिला रही थी...

तो मैंने अपने हाथ से एक निवाला लिया और उसे खिलाया तो उसने भी अपना मुँह खोलकर खा लिया...

अब तो ऐसा हो गया था की माँ मुझे खिला रही थी और मई दित्य को और सब हमारे hi तरफ देख रहे थे...

शताक्षी और त्रिगुणा भी हमारे hi तरर्फ देख रहे थे..

जैसे कह रही हो हमने क्या किया है हमे भी खिला दो. तो मई उनकी तरफ देखते हुए कहने लगा...

Mai-Tum दोनों को अलग से बुलाना पड़ेगा क्या चलो अब जल्दी से यहाँ मेरी दोनों तरफ आओ अगर खाना खाना है तो..

शताक्षी तो ये सुनते hi आ गयी जैसे वो मेरे कहने का hi इंतज़ार कर रही थी..



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पर त्रिगुणा मुझे घूरे जा रही thi.jaiसे वो मुझ पर बहुत गुस्सा हो और शताक्षी के ऐसे चले जाने से भी..



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पर वो ये चांस नहीं मिस करना चाहती थी तो वो भी आकर मेरी तरफ बैठ गयी...

अब मंजर ये हो गया था की माँ मुझे और मई उन तीनो को खिला रहा था अपने हाथो से..

एक दफा तो शताक्षी और त्रिगुणा ने जैसे hi मेरे हाथ से निवाला खाया उनकी आँखों में से दो बून्द आंसू निकल ए..

बिच बिच में मई माँ को भी खिलने लगा तो वो भी बड़े प्यार से मेरे हाथ से खा रही थी..

वैसे ये दृश्य देखकर सबकी आँखों में भी आंसू the.kyu की बहुत सालो बाद ऐसा ख़ुशी का और प्यार का महल बन गया था जिसे देखकर सब खुश थे..

मैंने सबकी आँखों में आंसू तो देखे पर मैंने कुछ कहा नहीं क्यों की मुझे पता था..

इन आंसुओ के पीछे क्या राज़ है इसलिए मैंने अभी कुछ न कहना hi बेहतर समजा...

मेरा फुल पेट भर गया था पर फिर भी माँ मुझे खिलाती hi रही जब तक उनका पेट नहीं भरा...

इतना खाना खाने के बाद मुझे बहुत जोर की नींद आ रही थी..

तो मैंने माँ से कहा तो माँ भी मुझे उनके रूम में ले चली गयी...

और मुझे अपनी गोदी में सर रखकर सोने को कहा और मई भी वैसे hi सो गया..

मुझे आज माँ की गॉड में बहुत hi सुकून लग रहा था.. जैसे बरसो से मई इसी की रह देख रहा था..

मेरे पीछे पीछे दित्य भी आ गयी थी तो वो भी मेरी एक तरफ सो gayi.Jaise मई उसकी माँ को उससे चीन रहा हु..

माँ की गॉड में न जाने मुझे कब नींद आ गयी कुछ पता hi नहीं चला..

बहुत दिनों बाद मई चैन की नींद सो रहा tha.Maa के गोदी में सोकर ऐसा लग रहा था जैसे अब मुझे कुछ भी नहीं चाहिए...

मई बहुत hi गहरी नींद में थे तभी मेरी आंख खुल गयी क्यों की जब मेरे चेहरों पर कुछ पानी गिरा तो..

मेरी नींद खुल गयी तो मैंने देखा माँ मुझे hi देखे जा रही थी और..

उनके आँखों में आंसू थे जो मेरे चहरे पर गिर रहे थे..

मुझे ये देखा नहीं गया की मेरे होते हुए माँ रो रही है..

ये देखकर मेरे दिल में एक तिस सी उभर आयी और मेरे भी आँखों में आंसू आ गए...

मई ये देखकर hi झट से उठ गया और माँ के आंसू पोछकर उन्हें गले लगाया और उनसे कहना कागा.........................
 
थैंक्स भाई...

भाई अब सस्पेंस hi नहीं रहा तो रीडर्स को स्टोरी पड़ने में मजा भी तो नहीं आएगा न...

वैसे आप के सरे सवाल के जवाब जल्द hi दिए जायेंगे बी अपडेट...

और कुछ सस्पेंस ऐसे है जिनको खुलने में अभी वक़्त है..

ऋतू के बारे में बताया तो है भाई और जानना है तो सबर करो जब रद धरती चला जायेगा तब फिर से वो कहानी शुरू होंगी...
 
अपडेट 37

मुझे ये देखा नहीं गया की मेरे होते हुए माँ रो रही है..

ये देखकर मेरे दिल में एक तिस सी उभर आयी और मेरे भी आँखों में आंसू आ गए...

मई ये देखकर hi झट से उठ गया और माँ के आंसू पोछकर उन्हें गले लगाया और उनसे कहना कागा.........................

आगे............................

मई- क्या हुवा माँ आप रो क्यों रही हो...

Maa-Kuch नहीं बीटा वो मेरे आँखों में कुछ चला गया था इसलिए आंसू आ गए...

मई- माँ पता है न आप मुझसे झूठ नहीं कह सकती अब सच सच बताओ...

Maa-(Phir से आँखों में आंसू आ जाते है) बीटा पता है मई इसी दिन का कितनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी..

मैंने कितनी राते ऐसे रोकर बितायी है तुम्हारी यादो में... मैंने तुम्हे बहुत याद किया मेरे बेटे..

और आज जब ये दिन आया तो मई मेरी आंसू रोक न सकीय.. दीपू ये तो मेरे ख़ुशी के आंसू है मेरे प्यार के आंसू है...

मई- माँ अब मई आ गया हु न अब आपको रोने की कोई जरुरत नहीं है..

अब मई आपको छोड़कर कही नहीं जाऊंगा अब आज से आप नहीं रोयेगी.. अगर आप रोई तो मई यहाँ से चला जाऊंगा ..

Maa-nahi नहीं बीटा ऐसा मत कह अब मई कभी नहीं रोउंगी. और तुम भी मुझे नहीं छोड़कर जाओगे...

मई- है माँ मई कही नहीं जाऊंगा...

तभी और एक अबाज आयी जो दित्य की थी..

Ditya-Aur मुझे....

ये अबाज सुनकर हम दोनों ने दित्य की तरफ देखा तो वो भी तभी उठी थी जब मई उठा था..

पर वो हम दोनों को प्यार देखकर कुछ नहीं बोली पर आखिर वो भी कैसे चुप बैठती...

Mai-Ha छोटी मई तुम्हे भी छोड़कर कही नहीं जाऊंगा... क्यों की तुम मेरी सबसे छोटी और प्यारी बहन जो हो तुम्हे चोकड़ मई कहा चला जाऊंगा...

फिर माँ ने मुझे और दित्य को गले लगाया और हम तीनो फिर से एक दूसरे की बहो में सो गए...

इधर धरती पर उसी जगह जहा पर वो जंगल था और उसमे वो अघोरी रहता था..

वो कुछ देर पहले hi इतने सालो बाद तपस्या से बहार आया था पर इस बार वो कुछ सोचते हुए फिर से ध्यान कर रहा था...

तभी वह पर वो पहले की शिष्य और उसके साथ कुछ लोग एते है जो उसी के जैसे ड्रेस पहने हुए थे..

और अब उसके साथ कुछ 50 शिष्य होंगे जो उसके साथ आ रहे थे...

तभी उनमे से एक बुजुर्ग शिष्य सामने आता है.. जो करीब 65 साल के आसपास लग रहा था.

वो जाकर उस अघोरी के पास बैठ गया और जाकर उनके चरण छुए...

और कुछ देर वही बैठा रहा इंतज़ार करता रहा अपने गुरु मतलब अघोरी के ध्यान ख़तम होने का..

कुछ देर में hi वो अघोरी ध्यान से बहार आ गया और अपने सामने उसे करीब 50-60 के अस्सपस्स शिस्य बैठे हुए दिखाई दिए..

और सबके सामने उसका पहला शिष्य कन्ट्रा बैठा हुवा था...

अब आप को तो पता hi है ये अघोरी हर समय गुस्से में hi रहते है..

मतलब कब गुस्सा करे और कब प्यार से बोले कुछ समाज नहीं आता..

Aghori-(Gusse से) कन्ट्रा कहा थे तुम इतनी देर.. तुम्हे पता था न मई कभी भी तपस्या से बहार आ सकता था..

तो तुम यहाँ क्यों नहीं थे और ये सब कोण है जो यहाँ बैठे हुए है .

Kantra-(Dhire स्वर में) मुझे माफ़ कीजिये गुरुवर्य लेकिन मई आपके hi काम से बहार गया था..

और उन लोगो को आपकी सेवा के लिए रखा था.. और ये सब आपके hi शिस्य है जो आपके सेवा में हाज़िर है...

Aghori-Lekin मैंने तुम्हे क्या काम दिया था याद नहीं है क्या...

कन्ट्रा- सब याद है मुझे गुरुवर्य मैंने आपका वो काम भी ख़तम कर दिया है..

वैसे आप जिस बजह से तपस्या में गए थे वो काम हो गया...

इस बात पर अघोरी हस्ता है पर कुछ कहता नहीं फिर अपने सरे शिष्यों को वह से जाने के लिए कहता है..

तो वो सब चले जाते है अब वह पर सिर्फ अघोरी और वो कन्ट्रा दोनों hi थे...

अघोरी- देखो कन्ट्रा मैंने जो शक्ति हासिल की है वो तो बस जरिया है उस तक पहुंचने का असली मकसद तो अब पूरा होगा...

Kantra-Matlab मई कुछ समजा नहीं गुरुवर्य...

अघोरी- अरे मुर्ख... 5 दिनों बाद एक बहुत hi बड़ा संजोग आया है...

जो बहुत सालो बाद आया है और वो मुझे अपने कार्यपूर्ति के लिए बहुत मदद करेगा...

5 दिनों बाद एक बहुत hi बड़ी और घनघोर अमवस्या की रात है...

उस रात सैतान की ताकद बहुत hi ज्यादा बढ़ने वाली है. उसी रात हम अपने मकसद को पूरा करने वाले है...

Kantra-Ji गुरुवर्य.. लेकिन हम क्या करने वाले है..

फिर उसके बाद अघोरी उसे बहुत कुछ बताता है और उसे क्या करना है वो भी सबकुछ बताता है..

Aghori-Ab बस इस बात पर कोई विघ्न नहीं आना चाहिए.. और इसके लिए जो भी मुझे चाहिए वो सब उससे पहले यहाँ आ जाना चाहिए...

उसके बाद वो बहुत बाटे करते hai.aur वो कन्ट्रा उस काम को अंजाम देने के लिए अपने काम करने के लिए चल पड़ता है..

अब इधर हम रुद्रदीप के पास चलते है जो बीएड पर सोया हुवा था अपने माँ और अपनी बहन दित्य के साथ...

वह न सुबह थी नहीं रात पर थे लार्ड ने वह पर कुछ ऐसा किया था की दिन भी हो और रात भी और वो भी समय पर...

सुबह मई खुद hi उठ गया तो मैंने देखा की मेरे पास न माँ है और नहीं दित्य..

लगता है मई बहुत देर तक सोता रहा हु इसलिए सब उठ गए..

अब मई भी उठ गया और फ्रेश होकर मैंने अपने धरती के hi ड्रेस पहन लिए..

तो मई बहार आकर इधर उधर देखने laga..Ab ये महल इतना बड़ा और विशाल था और सबसे बड़ी बाग़ मेरा पहला hi टाइम था..

यहाँ आने का इसलिए मुझे इस महल के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं था तो मई कहा जाता...

पर मेरे पावर्स जो थी तो मई अपने स्पीड में भागते हुए उस महल में माँ को ढूंढ़ते हुए जा रहा था..

तभी एक रूम में मुझे शताक्षी और त्रिगुणा दिखाई दी...

जो एक रूम में बैठकर कुछ बाटे कर रही मैंने सोचा मई जब से आया हु..

उनसे कोई बात hi नहीं हुयी है इसलिए चलो उनसे कुछ बात तो करके देखते है...

और ये सोचकर मई उनकी रूम की तरफ बढ़ गया अंदर से दूर लॉक नहीं था तो मई अंदर चला गया..

वो दोनों अपनी बीएड पर आराम कर रही थी और कुछ बाटे कर रही थी....

वह.. क्या रूम था यार ये इतना बड़ा रूम.. मई तो देखते hi शॉक हो गया.

इस रूम में तो करीब करीब पूरा शहर बस जाये इतना बड़ा रूम था वो...



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और उससे भी शानदार वो रूम अंदर से उतना hi ब्यूटीफुल tha..Mai तो उस रूम के सुंदरता में खो hi गया था..



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मई पहले माँ के रूम में गया था पर मैंने उस वक़्त इतना ध्यान hi नहीं दिया..

पर अब जब मैंने ये रूम ध्यान से देखा तो उस रूम की भी सुंदरता मुझे याद आने लगी...



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बीएड तो इतना आलीशान था न वो मेरे घर इतना बड़ा होगा वो बीएड.. यार क्या कहना इस महल का ये तो आज मुझे घायल hi कर देना था...



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वो दोनों तो आपस में बाटे करने लगी थी तभी मई वह आ पंहुचा..

पर उन दोनों का ध्यान मेरी तरफ नहीं था मई तो अपने hi धुन में उस रूम में खोया हुवा था...

शताक्षी का बोलते हुए एक दफा मेरी और धायण गया तो वो मुझे दूर पर देख कर चौंक hi गयी..

त्रिगुणा ने जब देखा की शताक्षी का ध्यान कही और है तो उसने भी वही देखा जो उसे देखा था ..

और त्रिगुणा भी उसी की तरह चौंक गयी थी मुझे वह देखकर पर मई तो उस रूम को देखे जा रहा था..

पर उस महल मतलब उसमे हर एक रूम की एक खास बात थी कोई कितना भी दूर है..

जब वो आपको दिख रहा हो तो उसको आपकी अबाज आराम से सुनाई देती थी और वो बहुत hi अचे से दिखाई भी देता था..

और भी बहुत कुछ है इस महल में और भी राज है पर वो सब मुझे पता नहीं है...

(और इस महल के बारे में बोलना पड़े तो ये अपडेट भी काम पद जाये . इसलिए सीधा बोलू जो पिछ देख लो)

मई यही सब सोच रहा था तभी मुझे शताक्षी की अबाज सुनाई देती है..

शताक्षी- आप यहाँ...

शताक्षी की बात से मई होश में आया तो मैंने देखा तो.

वो दोनों भी मुझे hi घर रही थी.. तो इस बार मई उनके पास चला गया...

Mai-Hi... मई यहाँ से गुजर रहा था तभी मैंने ये रूम खुला देखा और आप दोनों को बाटे करते हुए तो मई यहाँ चला आया..

अगर मैंने आप दोनों की बातो में विघ्न डाला हो तो मुझे माफ़ करना अब मई चलता हु...

मई जाने के लिए मुदा hi था की तभी शताक्षी कहती है...

शताक्षी- नहीं आ जाइना आप हमें कोई परेशां नहीं कर रहे है..

और आप हमसे ये माफ़ी नहीं मागिएगा आप को ये ाचा नहीं लगता.. और हमे भी बुरा लगता है...

उसकी बात सुनकर मई मुस्कुराकर उन दोनों के पास बीएड पर बैठ गया तो मई आगे कहने लगा ..

Mai-Dekho मई यहाँ पर पहली बार आया हु मतलब मुझे जैसे याद है उस तरह से..

पर मुझे कभी कही लगता है की मई आप दोनों को बहुत अछि तरह से जनता हु..

इस महल को बहुत अछि तरह से जनता हु. क्या आपने मुझे पहले कभी यहाँ पर देखा है..

अगर है तो कृपया कर के मुझे बताओ na..Mere बारे में अपने बारे में.. यहाँ के लोगो के बारे में...

पर उन दोनों में से कोई भी कुछ नहीं बोलै बल्कि त्रिगुणा सिर्फ मुझे घूरे hi जा रही थी..

और इस बार तो शताक्षी भी पर वो कभी मुझे देखती कभी त्रिगुणा को तो कभी निचे देखती पर बोली कुछ नहीं..

मुझे ये सब बहुत अजीब लगा मेरी आँखों में आंसू भी आ गए थे पर मैंने वो रोकते हुए उनसे कहने लगा..

मई- मई जब से यहाँ आया हु तब से कुछ लोगो को शायद मेरा यहाँ आना ाचा नहीं लग रहा है..

कुछ बात होगी पर जाने दो मैंने आज से पहले किसी का भी दिल दुखाया हो तो उसके लिए मुझे माफ़ कर देना..

तो चलो अब मई चलता हु मुझे माफ़ करना आपका वक़्त बर्बाद किया इसलिए..

मई कहकर वह से उठा और कुछ आगे hi बाद गया था की तभी मेरे कानो पर किसी अबाज आयी..

जो शायद रोने की थी और ये अबाज मई पहचान लिया था क्यों की अबाज त्रिगुणा की hi होंगी...

क्यों की यहाँ पर आने के बाद मैंने एक बार भी उसकी अबाज नहीं सुनी थी और जब पहली बार सुना..

तो पहचान लिया की किसकी होगी.. पर उसके बाद उसने ऐसा कहा..

की मई उतना hi बहुत खुश हुवा पर दिल में थी भी लगी उसकी रोनी अबाज सुनकर...

त्रिगुणा- (रट हुए) भैईयययआआ........ रूद्र्रा.... भ्हाईययाआआ.........

ये सुनकर मई पलटकाद उनकी तरफ देखा तो त्रिगुणा भागते हुए आकर मेरे गले लग गयी और जोर जोर से रोने लगी...

और उधर जब शताक्षी ने ये देखा तो वो भी अपने आप को रोक न सकीय..

और रट हुए भैया पुकारने के बाद मेरे गले लगकर वो भी रोने लगी ..

मैंने दोनों को भी अपने गले लगाया उन दोनों के गले लगने से मेरे दिल को आज बहुत hi ठंडक पहुंच रही थी..

जैसे बरसो से मई इनकी hi रह देख रहा था.. मेरे जिंदगी में जितना भी सुख है बस यही है ऐसा मुझे महसूस हो रहा था..

ऐसा लग रहा था जैसे ये दोनों मेरी जान है इनके बिना मई कुछ भी नहीं हु...

मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा पर उन दोनों में से कोई भी मुझे नहीं छोड़ रहा था..

तभी त्रिगुणा मेरे गले लगे हुए hi रट हुए कहने लगी........................
 
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