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- Dec 5, 2013
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अपडेट 10
वैसे ऋतू का सवाल तो सबके hi मन में था पर कोई कुछ बोलै नहीं...
मतलब की कोई कुछ बोलता नहीं और ये छिपकली कभी शांत बैठती नहीं.......................
आगे............................
उसके बाद मई दिव्या के साथ बहार चला गया. और उस दिन हम दोनों बहुत घूमे..
हम दोनों ने बहुत मजा की और फिर रात होते होते हम लौट ए.....( छोटा सा फ्लैशबैक एन्ड...)
मई ये सब सोच hi रहा था तभी मेरा दूर जोर जोर से नॉक होता है मई जाकर ओपन करता हु तो दी थी..
Di-kitne देर से मई तेरा दूर बजा रही थी कहा था तू..
Mai-yahi था दी वो मई लैपटॉप पर गेम खेल रहा था इसलिए सुनाई नहीं Diya..waise आप यहाँ कैसे..
Di-(naraj होते हुए) क्यों मई यहाँ आ नहीं सकती क्या..
Mai-Aisa क्यों बोल रही हो दी.. ये रूम तो आपका hi है ये रूम क्या मई भी आपका hi हु आप जब चाहे तब आ सकती है...
Di-Acha आज बड़ा हक़ ज़माने को कह रहा है कही आगे जाकर तेरा मन नहीं बदल जाये...
Mai-koi चांस hi नहीं दी.. है बाकियो को बारे में नहीं कह सकता पर आपके बारे में No चांस...
दी- Ok ok ठीक है अब मस्का मरना बंद कर और चल जल्दी से निचे आ सब तेरा वेट कर रहे है...
मई- क्या दी वही रोज रोज क्या घर का खाना कभी बहार भी तो चला करो खाने के लिए...
दी- मतलब अब तुझे हमारे हाथ का खाना पसनद नहीं आ रहा.. ऐसा है तो सीधा सीधा बोल न ऐसे घुमा फिरकर क्यों कह रहा है... रुक अभी माँ को बताती हु..
Mai-(Hath पकड़ते हुए) ऐसी बात नहीं है दी मई तो बस ऐसे hi कह रहा था.. चंगेस के लिए..
तभी निचे से माँ की अबाज अति है जो हम दोनों को निचे बुला रही थी...
दी- चल अब निचे चल बाद में बताती हु तुझे खाने के बारे में..
फिर मई और दी निचे आ गए.. हमे देखकर माँ कहने कागि...
Mom-Kyu रे मोनू तू दीपू को बुलाने गयी थी क्या वही से खाना खाकर चली आयी..
Di-(Apne चेयर पर बैठते हुए) वो क्या है न माँ आपके लाड साहब कह रहे थे..
की उनको aaj-kal घर का खाना पसंद नहीं आ रहा है तो कुछ बहार जाने की बात कर रहे थे डिनर के लिए...
अब मई तो पूरा हैंग हो गया साला क्या सोचा था और क्या हो रहा है...
mom-kyu रे दीपू तूने सच में ऐसा कहा..
मई- नहीं माँ दी झूठ बोल रही है.. मई तो बस ऐसे hi कह रहा था सबके लिए...
Mom-Iska मतलब तूने सच में कहा था.. तो अब तुझे ये खाना नहीं मिलेगा चल बहार hi जाकर खाकर आओ...
ये सुनते hi कोई और तो नहीं पर एक शक्श थी जो बहुत खुश हो गयी थी और वो कोण है....
रितिका- (खुश होते हुए) एस्सस.......! माँ आपने ये बहुत ाचा किया एक दिन ये भुक्कड़ भूका रह जायेगा तो कुछ नहीं होगा...
मई- अगर मई भूका रहा न तो तुझे भी नहीं खाने दूंगा...
ऋतू- तू मुझे धमकी दे रहा है मोठे...
मई- है है तुझे hi बोल रहा हु नकचढ़ी....
पापा- रूद्र चल तू मेरे पास आ.. हम दोनों साथ कहते है...
और मई क्या ऋतू को चिढ़ाते हुए पापा के पास जाकर बैठ गया..
दी- तू वही बैठ वह से हिलना मत है कुछ भी हो जाये... अब जा भाई और भाबी की लेकर आ खाने के लिए...
ये सुनते hi मई चल पड़ा न्यूयोर्क वो दोनों मस्त जैसे कपल बैठते है वैसे बैठ हुए थे..
तो मैंने दोनों को उठाया और ले आया सीधा घर उन्हें चेयर पर बिठाया और अपनी जगह आकर बैठ गया...
लेकिन भाई और भाबी को क्या हुवा कुछ समाज hi नहीं आया...
जैसे hi उन्होंने खुद को देखा की वो घर में है और डाइनिंग टेबल पर बैठ हुए है तो वो दोनों भी मेरी तरफ देखने लगे गुस्से सी...
भाबी- ऐसे कोई लता है क्या दीपू एक बार हमे बता तो देते.. ये ऐसा लग रहा है जैसे हमे अगवाह करके यहाँ ले ए हो...
भाबी की इस बात पर सब जोर जोर से हसने लगे.. मतलब मुझे भी हसी आ रही थी.. क्यों की सच में ऐसा hi लग रहा था...
माँ- चलो जो भी कहना है बाद में.. अभी खाना खाओ...
Bhai-Ha भाई फिर मेरी मीटिंग है...
Sonam-Itne रात को कैसी मीटिंग जीजू...
भाई- सोनम यहाँ तो रात है पर वह तो सुबह है न...
Sonam-Aise कैसे... मतलब यहाँ रत और वह सुबह...
Di-Wo मई तुम्हे बाद में बताउंगी.. वैसे दीपू मुझे एक बात बता..
Mai-(Khana कहते हुए) है दी....
दी- दोपहर को कॉलेज में क्या हुवा था..
मई- (मन में) साला ये मटर तो सुबह hi क्लोज हो गया था न तो अब कैसे खुल गया...
अच्छा तो इसलिए दी ने कहा तहत वह बैठा है अब हिलना मत...
साला मंद कही का एक इशारा भी नहीं समाज सकता...
माँ- दीपू मोनू कुछ पूछ रही है तुम्हे...
Mai-ha... वोऊ.... वो आपको ऋतू कहेगी क्या हुवा था...
Ritu-(hadbadte हुए) Mmaaiii....Mai.. क्या कहु... तुमने hi किया है तुम hi बोलो...
भैया- रुक जाओ तुम दोनों, मई बताता हु क्या हुवा है...
मई- भैया आप कैसे...?
Bhaiya-Bhul मत मई कोण हु... और मुझे यहाँ न होकर भी यहाँ का सब पता होता है..
Di-Wo तो आप बताइये भैया क्या हुवा था दोपहर में..
Bhaiya-jyada कुछ नहीं बस ऋतू ने एक पुलिस के लड़के को बहुत मारा..
लेकिन इसमें इसकी कोई भी गलती नहीं है वो खुद hi इस फ़्लर्ट कर रहा था...
वहहह रे भाई हमारी पोल्ल भी खोली तो ऐसे खोली जैसे लाठी तो टूटे पर कोई अबाज न हो...
Papa-Kon वो दसप का लड़का.. उसको तुम दोनों ने मारा....
Mai-Maine नहीं पापा सिर्फ इसने इस अकेली ने 6-7 लड़को को ऐसे धोया की अब वो हॉस्पिटल में है..
Ritu-wah रे झूठे... सच बोल तूने hi मारा है दसप के लड़के को...
माँ- जिस किसने भी किया हो लेकिन ऐसा झगड़ा करना अछि बात नहीं है..
मई- Ok माँ... लेकिन ये बात आप इसे कहो मुझे नहीं...
ऋतू- ाचा तो तुम बहुत दूध के धुले हो..
भैया- ाचा ाचा चलो अब शांति से खाना खाओ और रूद्र खाना ख़तम होने के बाद मुझे आकर मिलो कुछ जरुरी बात करनी है...
अब भाई ने कह दिया तो कह दिया हम सब ने बहुत hi शांति से खाना ख़तम किया और फिर मई भाई के रूम में चला गया और भाबी थी माँ के साथ...
Mai-(door नॉक करते हुए) भैया क्या बात करनी है आपको...
Bhai-Ha आ यहाँ आकर बैठ..
मई उनके सामने जाकर बैठा तो वो आगे कहने लगे.......................
वैसे ऋतू का सवाल तो सबके hi मन में था पर कोई कुछ बोलै नहीं...
मतलब की कोई कुछ बोलता नहीं और ये छिपकली कभी शांत बैठती नहीं.......................
आगे............................
उसके बाद मई दिव्या के साथ बहार चला गया. और उस दिन हम दोनों बहुत घूमे..
हम दोनों ने बहुत मजा की और फिर रात होते होते हम लौट ए.....( छोटा सा फ्लैशबैक एन्ड...)
मई ये सब सोच hi रहा था तभी मेरा दूर जोर जोर से नॉक होता है मई जाकर ओपन करता हु तो दी थी..
Di-kitne देर से मई तेरा दूर बजा रही थी कहा था तू..
Mai-yahi था दी वो मई लैपटॉप पर गेम खेल रहा था इसलिए सुनाई नहीं Diya..waise आप यहाँ कैसे..
Di-(naraj होते हुए) क्यों मई यहाँ आ नहीं सकती क्या..
Mai-Aisa क्यों बोल रही हो दी.. ये रूम तो आपका hi है ये रूम क्या मई भी आपका hi हु आप जब चाहे तब आ सकती है...
Di-Acha आज बड़ा हक़ ज़माने को कह रहा है कही आगे जाकर तेरा मन नहीं बदल जाये...
Mai-koi चांस hi नहीं दी.. है बाकियो को बारे में नहीं कह सकता पर आपके बारे में No चांस...
दी- Ok ok ठीक है अब मस्का मरना बंद कर और चल जल्दी से निचे आ सब तेरा वेट कर रहे है...
मई- क्या दी वही रोज रोज क्या घर का खाना कभी बहार भी तो चला करो खाने के लिए...
दी- मतलब अब तुझे हमारे हाथ का खाना पसनद नहीं आ रहा.. ऐसा है तो सीधा सीधा बोल न ऐसे घुमा फिरकर क्यों कह रहा है... रुक अभी माँ को बताती हु..
Mai-(Hath पकड़ते हुए) ऐसी बात नहीं है दी मई तो बस ऐसे hi कह रहा था.. चंगेस के लिए..
तभी निचे से माँ की अबाज अति है जो हम दोनों को निचे बुला रही थी...
दी- चल अब निचे चल बाद में बताती हु तुझे खाने के बारे में..
फिर मई और दी निचे आ गए.. हमे देखकर माँ कहने कागि...
Mom-Kyu रे मोनू तू दीपू को बुलाने गयी थी क्या वही से खाना खाकर चली आयी..
Di-(Apne चेयर पर बैठते हुए) वो क्या है न माँ आपके लाड साहब कह रहे थे..
की उनको aaj-kal घर का खाना पसंद नहीं आ रहा है तो कुछ बहार जाने की बात कर रहे थे डिनर के लिए...
अब मई तो पूरा हैंग हो गया साला क्या सोचा था और क्या हो रहा है...
mom-kyu रे दीपू तूने सच में ऐसा कहा..
मई- नहीं माँ दी झूठ बोल रही है.. मई तो बस ऐसे hi कह रहा था सबके लिए...
Mom-Iska मतलब तूने सच में कहा था.. तो अब तुझे ये खाना नहीं मिलेगा चल बहार hi जाकर खाकर आओ...
ये सुनते hi कोई और तो नहीं पर एक शक्श थी जो बहुत खुश हो गयी थी और वो कोण है....
रितिका- (खुश होते हुए) एस्सस.......! माँ आपने ये बहुत ाचा किया एक दिन ये भुक्कड़ भूका रह जायेगा तो कुछ नहीं होगा...
मई- अगर मई भूका रहा न तो तुझे भी नहीं खाने दूंगा...
ऋतू- तू मुझे धमकी दे रहा है मोठे...
मई- है है तुझे hi बोल रहा हु नकचढ़ी....
पापा- रूद्र चल तू मेरे पास आ.. हम दोनों साथ कहते है...
और मई क्या ऋतू को चिढ़ाते हुए पापा के पास जाकर बैठ गया..
दी- तू वही बैठ वह से हिलना मत है कुछ भी हो जाये... अब जा भाई और भाबी की लेकर आ खाने के लिए...
ये सुनते hi मई चल पड़ा न्यूयोर्क वो दोनों मस्त जैसे कपल बैठते है वैसे बैठ हुए थे..
तो मैंने दोनों को उठाया और ले आया सीधा घर उन्हें चेयर पर बिठाया और अपनी जगह आकर बैठ गया...
लेकिन भाई और भाबी को क्या हुवा कुछ समाज hi नहीं आया...
जैसे hi उन्होंने खुद को देखा की वो घर में है और डाइनिंग टेबल पर बैठ हुए है तो वो दोनों भी मेरी तरफ देखने लगे गुस्से सी...
भाबी- ऐसे कोई लता है क्या दीपू एक बार हमे बता तो देते.. ये ऐसा लग रहा है जैसे हमे अगवाह करके यहाँ ले ए हो...
भाबी की इस बात पर सब जोर जोर से हसने लगे.. मतलब मुझे भी हसी आ रही थी.. क्यों की सच में ऐसा hi लग रहा था...
माँ- चलो जो भी कहना है बाद में.. अभी खाना खाओ...
Bhai-Ha भाई फिर मेरी मीटिंग है...
Sonam-Itne रात को कैसी मीटिंग जीजू...
भाई- सोनम यहाँ तो रात है पर वह तो सुबह है न...
Sonam-Aise कैसे... मतलब यहाँ रत और वह सुबह...
Di-Wo मई तुम्हे बाद में बताउंगी.. वैसे दीपू मुझे एक बात बता..
Mai-(Khana कहते हुए) है दी....
दी- दोपहर को कॉलेज में क्या हुवा था..
मई- (मन में) साला ये मटर तो सुबह hi क्लोज हो गया था न तो अब कैसे खुल गया...
अच्छा तो इसलिए दी ने कहा तहत वह बैठा है अब हिलना मत...
साला मंद कही का एक इशारा भी नहीं समाज सकता...
माँ- दीपू मोनू कुछ पूछ रही है तुम्हे...
Mai-ha... वोऊ.... वो आपको ऋतू कहेगी क्या हुवा था...
Ritu-(hadbadte हुए) Mmaaiii....Mai.. क्या कहु... तुमने hi किया है तुम hi बोलो...
भैया- रुक जाओ तुम दोनों, मई बताता हु क्या हुवा है...
मई- भैया आप कैसे...?
Bhaiya-Bhul मत मई कोण हु... और मुझे यहाँ न होकर भी यहाँ का सब पता होता है..
Di-Wo तो आप बताइये भैया क्या हुवा था दोपहर में..
Bhaiya-jyada कुछ नहीं बस ऋतू ने एक पुलिस के लड़के को बहुत मारा..
लेकिन इसमें इसकी कोई भी गलती नहीं है वो खुद hi इस फ़्लर्ट कर रहा था...
वहहह रे भाई हमारी पोल्ल भी खोली तो ऐसे खोली जैसे लाठी तो टूटे पर कोई अबाज न हो...
Papa-Kon वो दसप का लड़का.. उसको तुम दोनों ने मारा....
Mai-Maine नहीं पापा सिर्फ इसने इस अकेली ने 6-7 लड़को को ऐसे धोया की अब वो हॉस्पिटल में है..
Ritu-wah रे झूठे... सच बोल तूने hi मारा है दसप के लड़के को...
माँ- जिस किसने भी किया हो लेकिन ऐसा झगड़ा करना अछि बात नहीं है..
मई- Ok माँ... लेकिन ये बात आप इसे कहो मुझे नहीं...
ऋतू- ाचा तो तुम बहुत दूध के धुले हो..
भैया- ाचा ाचा चलो अब शांति से खाना खाओ और रूद्र खाना ख़तम होने के बाद मुझे आकर मिलो कुछ जरुरी बात करनी है...
अब भाई ने कह दिया तो कह दिया हम सब ने बहुत hi शांति से खाना ख़तम किया और फिर मई भाई के रूम में चला गया और भाबी थी माँ के साथ...
Mai-(door नॉक करते हुए) भैया क्या बात करनी है आपको...
Bhai-Ha आ यहाँ आकर बैठ..
मई उनके सामने जाकर बैठा तो वो आगे कहने लगे.......................