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- Dec 5, 2013
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अब तक
मोहिनी और सौर्य प्रदीप क पास उसके ऑफिस म जाते है. सौर्य पूरी तरह स शॉकेड था ये सब देख. मोहिनी न प्रदीप स कुछ कहा और प्रदीप बी उससे एक शीशी दे दी. उस शीशी म रानीपारी क आशु थे जो सौर्य को पीना पड़ता है जिसे पिटे hi वो बेहोश हो जाता hai.Kuch देर म सौर्य को होश आने लगता है.
आगे.
(सौर्य क रेस्पेक्ट म)
मैंने जैसे hi वो शीशी ख़तम की मेरे सर म न जाने क्या क्या चलने लगा कभी बाबा कभी माँ कभी शिल्पा कभी माँ सब कुछ याद आता रहा मुझे फिर एक झटके म मेरे आखो क सामने एक ब्लैक एनर्जी बॉल और एक वाइट एनर्जी बॉल आ गए दोनों hi टकराते है और और मैं होश म आ जाता हु.
सामने मेरे प्रदीप खड़ा था जो क थोड़ा बहुधा सा दिख रहा था और उसके पास कड़ी थी मोहिनी.
मैं उनकी बातें सुनने लगा.
मोहिनी पूछ रही थी प्रदीप स सभी क बारे म क हमारे ऐसे जाने क बाद क्या कुछ हुआ.
तभी उन्हें मैं दीखता हु जो उन्हें hi देख रहा था.
प्रदीप- तो होश आ गया आपको.
मैं बस उठ क्र शिदा बैठ गया.
मैं- कैसे हो प्रदीप.
प्रदीप- बस काट रही है कुछ काम मिले थे मुझे हमारे लिए उन्हें hi पूरा क्र रहा था.
Mani-Kaise काम और एक बात बताओ जब तुम्हे सब याद आ गया था तो फिर...
प्रदीप- बाबा का आदेश था. उन्हें पहले स hi अंदेशा था क ये सब होगा तुम लोगो की मौत और फिर स जनम लेना ये सब तो उन्होंने मुझे तुम सभी स दूर रखा.
मैं- क्या उन्हें पता था इसके बारे म और वो फिर भी और तुम भी.
प्रदीप- "जो पाया है उससे खोना होगा वो पाने को जो खोया था" याद है ये.
मैं- है याद है बाबा न कहा था पर इसका मतलब क्या है.
मोहिनी- इसका मतलब ये है क आपने जो कुछ भी हासिल किया था उस जनम म उसको छोड़ना होगा ताके आप वो हासिल कर सको जो आपने पहले जनम म छोड़ा था.
मैं- अब ये क्या था मेरी कुछ सम्ह्ज म नहीं आ रहा.
प्रदीप- अरे मैं हु न बताने को पर तू मेरे कुछ सवालो का जवाब दे.मेरी मौत कैसे हुई थी?
मैं- किसी न मुझ प हमला किया था उस अचूक अस्त्र स और तूने उससे खुद प ले लिया.
प्रदीप- है सही bola.Ab ये बता क हम कहा थे जब ये सब हुआ था?
मैं- हम निल पत्थर की तलाश म थे जब किसी न पीछे स वार किया था.
प्रदीप- वाह भाई बिलकुल सही अब चलो ये बताओ उस निल पत्थर ko.hum क्यू ढूंढ रहे थे.
मैं- निल पाथेर उन् 7 पथरो म स थे जो ेलिका मदर ऑफ़ लॉर्ड्स क तलवार की थे.
प्रदीप- हां सही बोलै अब मैं जो भी बोलू उससे ध्यान स सुन्ना सम्ह्जे
मैंने बस हां म मुंडी हिल्ला दी.
प्रदीप- है तो समरथ सौर्य क्या आपने मिस्ट्री ऑफ़ यूनिवर्स नाम की किताब क बारे म सुन्ना है कभी.
मैंने ना म सर हिला दिया.
Pradeep(muskurate हुए)- कोई नहीं अब सुन लो. Elika,Mother ऑफ़ लॉर्ड्स ने इस किताब को लिखा था. जैसा की नाम है उस किताब का उसमे सारे मिर्त्य लिखे हुए है यूनिवर्स क सब कुछ. उस किताब म सब कुछ खुद hi आ जाता है जैसे हमारा मिलना ये भी.
मैं- इंटरेस्टिंग ाचा वो किताब है कहा .
प्रदीप- वो खो गयी है.
मैं- पर कैसे ऐसी चीजों का तो ठीक स देख रेख होनी चाहिए फिर गम कैसे हो गयी.
Pradeep-Baat उस वक़्त की थी जब मदर ेलिका न अपनी जान दी तो उनके साड़ी चीजे जैसे म वो तलवार वो किताब उनकी छड़ी और भी बहुत कुछ कही गम हो गए.
मोहिनी- भाई क्या क्र रहे हो ठीक स बताओ इसको.
प्रदीप- ठीक है बताता हु रुको सौर्य एक काम करो तुम जोर स डीप चिल्लाओ समझे.
मैं- पर क्यों.
मोहिनी- जो बोलै वो करो सब समझ म आ जायेगा.
मैं- डीइएप्पप
तभी मेरे हातो म एक तलवार आ गयी जिसके ऊपर 7 होल्स बने हुए थे.
मैं- ये ये क्या है.
मोहिनी- रुको अभी बताती हु.
इतना बोल मोहिनी न एक ब्लेड निकला और अपना थोड़ा सा खून निकल उस तलवार क एक होल म गिरा दिया.
उसके वैसा करते hi उसी होल म एक स्टोन आ गया जो रेड कलर का था.
Main(chokte hue)-ye ये तो ये तो लाल पत्थर है मदर ेलिका क तलवार का.
प्रदीप- है ये वही है और ये तलवार भी मदर ेलिका की hi है.
मैं- पर ये मेरे पास कहा स आयी.
प्रदीप- जब तुम सभी की मौत हुई थी और तुम सारे एनर्जी लाइट क फॉर्म म एक हुए थे तब आयी ये तुम्हारे पास.
मैं- हैं पर कैसे.
मोहिनी- मैं बताती हु न देखो मदर ेलिका की मौत क बाद उनकी सभी चीजे बात गयी थी समझे अब सुनने उनकी तलवार और उसके सारे पत्थर जो थे वो भी अलग अलग हो गए. तलवार और गुलाबी पत्थर की एनर्जी यहाँ पृत्वी क आस पास घूमते रहते वो उस पल का इंतजार क्र रहे थे जब बाकी क सारे पत्थर और तुम यहाँ पहुँचो पर ना तो तुम यहाँ आये और ना hi बाकी क कोई पत्थर. एक दिन एक तपस्वी बैठा हुआ तपस्या क्र रहा था जंगल म उससे किसी तरह उस गुलाबी पत्थर क एनर्जी का आभास होता है वो उसका आवाहन करता है. वो गुलाबी पत्थर भी वह चली जाती है.
फ़्लैश बैक
(तपस्वी & मंजुलिका)
तपस्वी- कोण हो तुम बड़ा तेज है तुममे इतना तेज मैंने कभी नहीं देखा पहले.
G.pathar- हे तपस्वी मैं कोण हु ये तो मैं भी नहीं जानती पर यहाँ किसी का इंतज़ार है जो आये और मुझे ले जाए अपने साथ मेरी अपनी जगह पे पर वो आ hi नहीं रहा और मैं हज़ारो सालो स यही भटक रही हु.
कृपया मेरी मदद करे.
तपस्वी एक शक्तिशाली व्यक्ति था उसने अपनी आखें बंद की और देखने लगा क ये कोण है और किसका इंतज़ार क्र रही है.
तपस्वी को जब पता चला क ये मदर ेलिका क तलवार की माननी है और यहाँ बैठी उस तलवार और बाकी पथरो और तलवार क उत्तरादिकारी की प्रतीक्षा क्र रही है तो वो चौक गया.
तभी उसके कानो म एक आवाज गुंजी.
"इससे अपने संग ले जाओ पुत्र बाकी पत्थर अब जीवित हो चले है और अपने ुत्रादिकारी की लरतीक्षा म है इससे भी जीवित क्र इसका दयँ रखो और इससे प्रतीक्षा करने बोलो."
तपस्वी न पहले तो आवाज को प्रणाम किया.
तपस्वी- जो ीचा हो अलेक्स
फिर तपस्वी न उस गुलाबी पत्थर स अपनी पत्नी क गर्भ म प्रवेश करने को कहा.
गुलाबी पत्थर न भी वही किया.
फिर जन्म हुआ एक सूंदर सी लड़की का बड़ी hi प्यारी थी वो पर तपस्वी की पत्नी उसकी ऊर्जा को सह नहीं सकीय थी और वो उससे जनम देते hi मर गयी.
तपस्वी को दुःख तो बहुत हुआ पर वो क्र भी कुछ नहीं सकता था उससे अलेक्स द्वारा दिए गए दाइत्वा को पूरा जो करना था.
वो लड़की वक़्त स पहले hi बड़ी होती जा रही थी और उसकी सुंदरता की बात hi मत karo.Uska नाम मंजुलिका था.
तपस्वी उससे बड़े hi प्रेम स बड़ा क्र रहा था. अब जब मंजुलिका बड़ी होने लगी तो तपस्वी को उसकी शादी की चिंता होने लगी वो भूल चूका था क ये कोण है और यहाँ क्या क्र रही है. तपस्वी न फिर एक दिन अलेक्स स इस बारे म बात की तब अलेक्स न उससे बताया क बाकी क पत्थर और तलवार का उत्तरदिखारी यहाँ क लिए निकल चुके है. उसने ये भी बोलै क तलवार पहले स hi पृत्वी पर है यही कारन ह क सभी पत्थरों को यहाँ आना hi होगा और साथ म उत्तराधिकारी को भी.
तपस्वी- तो वो सारे कब आ रहे है यहाँ और वो तलवार वो कहा है.
अलेक्स- उनके यहाँ आने म कुछ कठिनाईयां आ रही है और अब तो सिर्फ एक hi मार्ग दिख रहा है.
Tapaswi-kon सा मार्ग.
अलेक्स- पुत्र तुमने मुझसे पूछा न क मंजुलिका क योग्य कोई वार हो तो.
तपस्वी- हां अलेक्स मैं अपने सारे पिता क जिम्मेदारियां पूरी करना चाहता हु बस इसी लिए.
अलेक्स- तो वक़्त आ गया है पुत्र तुम्हे अब उस तलवार का आवाहन करना होगा पर सावधान वो बड़ा hi शक्तिशाली है ऐसे hi किसी की नहीं सुनता समझे तुम अपनी पुत्री क साथ एक हवन करो और उस तलवार का आवाहन करो तुम्हारी पुत्री को देख वो सांत हो जाएगा. जब वो तुम्हारे सामने आये तो उससे बोलो क वो तुम्हारी पुत्री इस मंजुलिका क वार क रूप म आये और उससे शादी करे.
तपस्वी - जो आज्ञा.
अलेक्स- तुमने देखा hi होगा क तुम्हारी पुत्री क पास शक्तियां है है न
तपस्वी- है प्रभु.
अलेक्स- हवन की तयारी करो बाकी बाते मैं उस तलवार स hi क्र लूंगा.
फिर वही हुआ तपस्वी और मंजुलिका न तलवार का आवाहन किया और फिर तलवार और मंजुलिका की शादी हो गयी.
साडी क बाद पहली रात को जब दोनों hi अपने कमरे म थे तो अलेक्स प्रकट हुआ वह.
तलवार अलेक्स क बारे म जानता था.
अलेक्स- तुम दोनों को अपनी सकती स एक बचा पैदा करना है ये वही होगा उत्तराधिकारी इस दुनिया म कैद हुए उस दोस्त को मारने वाला जब वो आएगा तब धीरे धीरे बाकी सरे पत्थर भी आएंगे यहाँ फिर वो तुम सभी को एक क्र वापस स मदर ेलिका का तलवार को अपना लेगा.
तलवार और मंजुलिका ये सुन्न बड़े खुश हुए क वो एक जरिया बनने जा रहे गई उत्तराधिकारी क यहाँ आने का.
फिर वही हुआ दोनों न hi अपनी साड़ी शक्ति को एकत्रित क्र लगा लिया मंजुलिका क गर्भ म
यही कोई 2 दिन हुए होंगे इन सब को तरह तरह की परेशानियां आने लगी तपस्वी पर और साथ hi इन् दोनों पर भी कभी कुछ तो कभी कुछ.
{ये सब वो सैतान कर रहा था उससे सौर्य क आने का पता जो चल चूका था}
परेशां हो तपस्वी न दोनों स बात करने का सोचा.
तपस्वी- देखो ये साड़ी ख़ातिनाईएन जो आ रही है वो कोई करवा रहा है मेरी मानो तो तुम दोनों hi अभी यहाँ स चले जाओ और चिप जाओ कही मैं उस शक्ति को रोकने का पर्यटन करता हु जब तक उत्तराधिकारी ना आ जाए.
दोनों को भी यही सही लगा क्यू की दोनों hi अपनी साड़ी शक्तियां गवा एक आम इंसान बन चुके थे.
दोनों hi चल पड़े और पहुंच गए एक गाओं म जिसका नाम था मादवपुर.
कुछ महीने बाईट दोनों ने एक छोटा सा सूंदर घर बना लिया गाओं म और रहने लगे. यहाँ सब कुछ सही था कोई भी परेशानी नहीं आ रही थी.
वही तपस्वी भी तपस्या म बैठा हुआ था और उन दोनों क लिए एक सुरक्षा कवच न निर्माण किये हुए था.
इस कवच को भेदना लगभग अशंभव hi था.
अब सैतान बैठा था और सोच रहा था क क्या किया जाए जिससे वो उत्तराधिकारी ना आ पाए यहाँ.
उसने एक योजना बनायीं कुछ लोगो को अपने वाश म कर उन्हें भेज दिया मंजुलिका क नए घर म माधवपुर म.
अब उन् सभी क मान म मंजुलिका क प्रति काम वासना जगा दी थी.
एक दिन मौका पा वो सारे चल दिए मंजुलिका क घर और वह पहले तो उसके पति को मारा फिर मंजुलिका को भी.
तपस्वी ये देख बौखला गया और पुरे गाओं को श्राप दे डाला.
फ़्लैश बैक एन्ड
मोहिनी - यही पर एक गलती हुई गुलाबी पत्थर की आत्मा मुक्त हुई पर शरीर वैसे hi रहा जिसका सिर्फ एक hi हल था और वो क उन् दोनों को एक किया jaaye.Aage तुम सैफअली और डीप की कहानी जानते hi हो. इस बार ये तय हुआ क सारे पत्थर कैसे भी क्र क पहले hi यहाँ लाये जाये फिर तुम यहाँ आवो समझे
मैं- एक मं मैं उत्तरदिखारी कैसे बना उस तलवार का और तुम लोग पत्थर कैसे.
प्रदीप- देख भाई तू माने या न माने तू मदर ेलिका का पर पर पर पर पर पोता था जब तू समरथ सौर्य था तब समझा और इसी लिए तू hi तो हुआ न उत्तराधिखारी उनकी साड़ी शक्तियों और चीजों का.
मोहिनी- और पाथेर हम जैसे इस लिए बने क्यू की हम उन् जगहों क राज घराने स है जिसका इज़त मदर ेलिका न किया था.
Main-To तुम सारे मेरी पत्नियां क्यू.
मोहिनी- क्यू तुम्हे कोई दिकत है हमारे होने स हां बोलो.
मैं- ारी नहीं मैं तो बस.
ाचा तो अब गुलाबी पत्थर कहा है मतलब क्या वो भी अब.
मोहिनी- हां वो भी अरे वो तो तब भी तुम्हारा उसी रूप म इंतज़ार क्र रही थी वो तो उस प्रॉब्लम की वजह स. वो अभी हमें उसका पता नहीं चला है उसका क्या किसी का भी पता नहीं है हमें पर चिंता नहीं कसम है खून क लाली की कुछ hi दिन म वो हमारे साथ होंगे.
मैं- (प्रदीप s)Bhai एक बात बता हम सभी का मरना ये कुछ..
प्रदीप- गधे ये जो तूने हाथ म पकड़ा हुआ है ये कहा स आता तेरे अंदर ये बता तुम दोनों को एक होना था और उसका बस यही एक तरीका था तो हमने वही किया.
मैं- ठीक है गुस्सा क्यू होता है. यार पर बाबा क साथ क्या हुआ था वो..
प्रदीप- बाबा न अपना काम पूरा किया वो भी पूरी निष्ठा स उन्होंने ना सिर्फ परीलोक जिनलोक को छिपा दिया बल्कि इस पृत्वी पर स उस सैतान को भी आजाद करा दिया जिसको यहाँ मारा नहीं जा सकता tha.Saath hi उन्होंने इससे हमारे जैसो क लिए सुरक्षित भी क्र दिया है.
मैं- हां बाबा न बोलै था मुझे.
मोहिनी- प्रदीप भाई आप इनको बेझो ट्रेनिंग क लिए और मैं बाकियों को ढूंढ़ती हु.
मैं- यार मैंने बाबा स ट्रेनिंग ली थी. मुझे नहीं लगता क मुझे कोई ट्रेनिंग चाहिए.
प्रदीप- सुन्न तूने फिजिकल ट्रेनिंग hi ली थी न अब्ब बारी है मैजिक सीखने की तुझे तो बस कुछ hi माजिक्स आते है. चल अब. हां वो कापा को आज़ाद क्र दे और उसको तेरी जगह प रहने बोल समझा.
मैंने ठीक वैसा hi किया.
कापा- सौर्य बड़ा ाचा लगा तुमसे मिल क्र वर्ण अंदर तो बस वो R.book और O.Book की chapd-chapd hi सुनता रहता था चलो अब सही है.
R.book- आए कपो ज्यादा उछाल मत समझा न अभी तेरी हदी तोड़ दूंगी.
O.book- जाने दे छोटी ऐसो क मुँह hi नहीं लगते.
कापा- देखो ज्यादा हो रहा है.
मोहिनी- कैसे हो दोस्तों.
मोहिनी की आवाज सुन और उसकी आखों को देख hi 3 no शहर स उठे.
3no- V..vetal लोक की राज कुमारी को हमारा प्रणाम.
मोहिनी- सौर्य कापा आज स मेरे साथ रहेगा उन् दोनों को तुम hi सम्भालो (कापा स) तुम सौर्य की तरह बन जाओ फिर हम दोनों hi मिल क्र.
Pradeep-Mohini हो तुम इससे ले जाओ और वो सोल्लगे क काण्ड को देख लेना कापा.
कापा- जी.
मोहिनी और कापा चले गए.
प्रदीप- तू क्या अब ये तलवार ऐसे hi पकडे रहेगा.
मैंने उसकी बात सुनते hi उससे अपने अंदर खींच लिया.
मैं- यार एक बात बता मुझे कितनी चीजे ढूढ़नी है पहले मेरी वो 15 चीजे जिनमे स बस 2 मिली है अभी और अब ये मदर ेलिका की चीजे.
प्रदीप- बेटे अभी और भी है लिस्ट बड़ी लम्बी है. उस सैतान को मारना है तो म्हणत और वक़्त तो लगेगा न.
मैं- अरे क्या सैतान सैतान लगा रखा है नाम बता मुझे.
प्रदीप- मारकुस.
अब तक
मोहिनी और सौर्य प्रदीप क पास उसके ऑफिस म जाते है. सौर्य पूरी तरह स शॉकेड था ये सब देख. मोहिनी न प्रदीप स कुछ कहा और प्रदीप बी उससे एक शीशी दे दी. उस शीशी म रानीपारी क आशु थे जो सौर्य को पीना पड़ता है जिसे पिटे hi वो बेहोश हो जाता hai.Kuch देर म सौर्य को होश आने लगता है.
आगे.
(सौर्य क रेस्पेक्ट म)
मैंने जैसे hi वो शीशी ख़तम की मेरे सर म न जाने क्या क्या चलने लगा कभी बाबा कभी माँ कभी शिल्पा कभी माँ सब कुछ याद आता रहा मुझे फिर एक झटके म मेरे आखो क सामने एक ब्लैक एनर्जी बॉल और एक वाइट एनर्जी बॉल आ गए दोनों hi टकराते है और और मैं होश म आ जाता हु.
सामने मेरे प्रदीप खड़ा था जो क थोड़ा बहुधा सा दिख रहा था और उसके पास कड़ी थी मोहिनी.
मैं उनकी बातें सुनने लगा.
मोहिनी पूछ रही थी प्रदीप स सभी क बारे म क हमारे ऐसे जाने क बाद क्या कुछ हुआ.
तभी उन्हें मैं दीखता हु जो उन्हें hi देख रहा था.
प्रदीप- तो होश आ गया आपको.
मैं बस उठ क्र शिदा बैठ गया.
मैं- कैसे हो प्रदीप.
प्रदीप- बस काट रही है कुछ काम मिले थे मुझे हमारे लिए उन्हें hi पूरा क्र रहा था.
Mani-Kaise काम और एक बात बताओ जब तुम्हे सब याद आ गया था तो फिर...
प्रदीप- बाबा का आदेश था. उन्हें पहले स hi अंदेशा था क ये सब होगा तुम लोगो की मौत और फिर स जनम लेना ये सब तो उन्होंने मुझे तुम सभी स दूर रखा.
मैं- क्या उन्हें पता था इसके बारे म और वो फिर भी और तुम भी.
प्रदीप- "जो पाया है उससे खोना होगा वो पाने को जो खोया था" याद है ये.
मैं- है याद है बाबा न कहा था पर इसका मतलब क्या है.
मोहिनी- इसका मतलब ये है क आपने जो कुछ भी हासिल किया था उस जनम म उसको छोड़ना होगा ताके आप वो हासिल कर सको जो आपने पहले जनम म छोड़ा था.
मैं- अब ये क्या था मेरी कुछ सम्ह्ज म नहीं आ रहा.
प्रदीप- अरे मैं हु न बताने को पर तू मेरे कुछ सवालो का जवाब दे.मेरी मौत कैसे हुई थी?
मैं- किसी न मुझ प हमला किया था उस अचूक अस्त्र स और तूने उससे खुद प ले लिया.
प्रदीप- है सही bola.Ab ये बता क हम कहा थे जब ये सब हुआ था?
मैं- हम निल पत्थर की तलाश म थे जब किसी न पीछे स वार किया था.
प्रदीप- वाह भाई बिलकुल सही अब चलो ये बताओ उस निल पत्थर ko.hum क्यू ढूंढ रहे थे.
मैं- निल पाथेर उन् 7 पथरो म स थे जो ेलिका मदर ऑफ़ लॉर्ड्स क तलवार की थे.
प्रदीप- हां सही बोलै अब मैं जो भी बोलू उससे ध्यान स सुन्ना सम्ह्जे
मैंने बस हां म मुंडी हिल्ला दी.
प्रदीप- है तो समरथ सौर्य क्या आपने मिस्ट्री ऑफ़ यूनिवर्स नाम की किताब क बारे म सुन्ना है कभी.
मैंने ना म सर हिला दिया.
Pradeep(muskurate हुए)- कोई नहीं अब सुन लो. Elika,Mother ऑफ़ लॉर्ड्स ने इस किताब को लिखा था. जैसा की नाम है उस किताब का उसमे सारे मिर्त्य लिखे हुए है यूनिवर्स क सब कुछ. उस किताब म सब कुछ खुद hi आ जाता है जैसे हमारा मिलना ये भी.
मैं- इंटरेस्टिंग ाचा वो किताब है कहा .
प्रदीप- वो खो गयी है.
मैं- पर कैसे ऐसी चीजों का तो ठीक स देख रेख होनी चाहिए फिर गम कैसे हो गयी.
Pradeep-Baat उस वक़्त की थी जब मदर ेलिका न अपनी जान दी तो उनके साड़ी चीजे जैसे म वो तलवार वो किताब उनकी छड़ी और भी बहुत कुछ कही गम हो गए.
मोहिनी- भाई क्या क्र रहे हो ठीक स बताओ इसको.
प्रदीप- ठीक है बताता हु रुको सौर्य एक काम करो तुम जोर स डीप चिल्लाओ समझे.
मैं- पर क्यों.
मोहिनी- जो बोलै वो करो सब समझ म आ जायेगा.
मैं- डीइएप्पप
तभी मेरे हातो म एक तलवार आ गयी जिसके ऊपर 7 होल्स बने हुए थे.
मैं- ये ये क्या है.
मोहिनी- रुको अभी बताती हु.
इतना बोल मोहिनी न एक ब्लेड निकला और अपना थोड़ा सा खून निकल उस तलवार क एक होल म गिरा दिया.
उसके वैसा करते hi उसी होल म एक स्टोन आ गया जो रेड कलर का था.
Main(chokte hue)-ye ये तो ये तो लाल पत्थर है मदर ेलिका क तलवार का.
प्रदीप- है ये वही है और ये तलवार भी मदर ेलिका की hi है.
मैं- पर ये मेरे पास कहा स आयी.
प्रदीप- जब तुम सभी की मौत हुई थी और तुम सारे एनर्जी लाइट क फॉर्म म एक हुए थे तब आयी ये तुम्हारे पास.
मैं- हैं पर कैसे.
मोहिनी- मैं बताती हु न देखो मदर ेलिका की मौत क बाद उनकी सभी चीजे बात गयी थी समझे अब सुनने उनकी तलवार और उसके सारे पत्थर जो थे वो भी अलग अलग हो गए. तलवार और गुलाबी पत्थर की एनर्जी यहाँ पृत्वी क आस पास घूमते रहते वो उस पल का इंतजार क्र रहे थे जब बाकी क सारे पत्थर और तुम यहाँ पहुँचो पर ना तो तुम यहाँ आये और ना hi बाकी क कोई पत्थर. एक दिन एक तपस्वी बैठा हुआ तपस्या क्र रहा था जंगल म उससे किसी तरह उस गुलाबी पत्थर क एनर्जी का आभास होता है वो उसका आवाहन करता है. वो गुलाबी पत्थर भी वह चली जाती है.
फ़्लैश बैक
(तपस्वी & मंजुलिका)
तपस्वी- कोण हो तुम बड़ा तेज है तुममे इतना तेज मैंने कभी नहीं देखा पहले.
G.pathar- हे तपस्वी मैं कोण हु ये तो मैं भी नहीं जानती पर यहाँ किसी का इंतज़ार है जो आये और मुझे ले जाए अपने साथ मेरी अपनी जगह पे पर वो आ hi नहीं रहा और मैं हज़ारो सालो स यही भटक रही हु.
कृपया मेरी मदद करे.
तपस्वी एक शक्तिशाली व्यक्ति था उसने अपनी आखें बंद की और देखने लगा क ये कोण है और किसका इंतज़ार क्र रही है.
तपस्वी को जब पता चला क ये मदर ेलिका क तलवार की माननी है और यहाँ बैठी उस तलवार और बाकी पथरो और तलवार क उत्तरादिकारी की प्रतीक्षा क्र रही है तो वो चौक गया.
तभी उसके कानो म एक आवाज गुंजी.
"इससे अपने संग ले जाओ पुत्र बाकी पत्थर अब जीवित हो चले है और अपने ुत्रादिकारी की लरतीक्षा म है इससे भी जीवित क्र इसका दयँ रखो और इससे प्रतीक्षा करने बोलो."
तपस्वी न पहले तो आवाज को प्रणाम किया.
तपस्वी- जो ीचा हो अलेक्स
फिर तपस्वी न उस गुलाबी पत्थर स अपनी पत्नी क गर्भ म प्रवेश करने को कहा.
गुलाबी पत्थर न भी वही किया.
फिर जन्म हुआ एक सूंदर सी लड़की का बड़ी hi प्यारी थी वो पर तपस्वी की पत्नी उसकी ऊर्जा को सह नहीं सकीय थी और वो उससे जनम देते hi मर गयी.
तपस्वी को दुःख तो बहुत हुआ पर वो क्र भी कुछ नहीं सकता था उससे अलेक्स द्वारा दिए गए दाइत्वा को पूरा जो करना था.
वो लड़की वक़्त स पहले hi बड़ी होती जा रही थी और उसकी सुंदरता की बात hi मत karo.Uska नाम मंजुलिका था.
तपस्वी उससे बड़े hi प्रेम स बड़ा क्र रहा था. अब जब मंजुलिका बड़ी होने लगी तो तपस्वी को उसकी शादी की चिंता होने लगी वो भूल चूका था क ये कोण है और यहाँ क्या क्र रही है. तपस्वी न फिर एक दिन अलेक्स स इस बारे म बात की तब अलेक्स न उससे बताया क बाकी क पत्थर और तलवार का उत्तरदिखारी यहाँ क लिए निकल चुके है. उसने ये भी बोलै क तलवार पहले स hi पृत्वी पर है यही कारन ह क सभी पत्थरों को यहाँ आना hi होगा और साथ म उत्तराधिकारी को भी.
तपस्वी- तो वो सारे कब आ रहे है यहाँ और वो तलवार वो कहा है.
अलेक्स- उनके यहाँ आने म कुछ कठिनाईयां आ रही है और अब तो सिर्फ एक hi मार्ग दिख रहा है.
Tapaswi-kon सा मार्ग.
अलेक्स- पुत्र तुमने मुझसे पूछा न क मंजुलिका क योग्य कोई वार हो तो.
तपस्वी- हां अलेक्स मैं अपने सारे पिता क जिम्मेदारियां पूरी करना चाहता हु बस इसी लिए.
अलेक्स- तो वक़्त आ गया है पुत्र तुम्हे अब उस तलवार का आवाहन करना होगा पर सावधान वो बड़ा hi शक्तिशाली है ऐसे hi किसी की नहीं सुनता समझे तुम अपनी पुत्री क साथ एक हवन करो और उस तलवार का आवाहन करो तुम्हारी पुत्री को देख वो सांत हो जाएगा. जब वो तुम्हारे सामने आये तो उससे बोलो क वो तुम्हारी पुत्री इस मंजुलिका क वार क रूप म आये और उससे शादी करे.
तपस्वी - जो आज्ञा.
अलेक्स- तुमने देखा hi होगा क तुम्हारी पुत्री क पास शक्तियां है है न
तपस्वी- है प्रभु.
अलेक्स- हवन की तयारी करो बाकी बाते मैं उस तलवार स hi क्र लूंगा.
फिर वही हुआ तपस्वी और मंजुलिका न तलवार का आवाहन किया और फिर तलवार और मंजुलिका की शादी हो गयी.
साडी क बाद पहली रात को जब दोनों hi अपने कमरे म थे तो अलेक्स प्रकट हुआ वह.
तलवार अलेक्स क बारे म जानता था.
अलेक्स- तुम दोनों को अपनी सकती स एक बचा पैदा करना है ये वही होगा उत्तराधिकारी इस दुनिया म कैद हुए उस दोस्त को मारने वाला जब वो आएगा तब धीरे धीरे बाकी सरे पत्थर भी आएंगे यहाँ फिर वो तुम सभी को एक क्र वापस स मदर ेलिका का तलवार को अपना लेगा.
तलवार और मंजुलिका ये सुन्न बड़े खुश हुए क वो एक जरिया बनने जा रहे गई उत्तराधिकारी क यहाँ आने का.
फिर वही हुआ दोनों न hi अपनी साड़ी शक्ति को एकत्रित क्र लगा लिया मंजुलिका क गर्भ म
यही कोई 2 दिन हुए होंगे इन सब को तरह तरह की परेशानियां आने लगी तपस्वी पर और साथ hi इन् दोनों पर भी कभी कुछ तो कभी कुछ.
{ये सब वो सैतान कर रहा था उससे सौर्य क आने का पता जो चल चूका था}
परेशां हो तपस्वी न दोनों स बात करने का सोचा.
तपस्वी- देखो ये साड़ी ख़ातिनाईएन जो आ रही है वो कोई करवा रहा है मेरी मानो तो तुम दोनों hi अभी यहाँ स चले जाओ और चिप जाओ कही मैं उस शक्ति को रोकने का पर्यटन करता हु जब तक उत्तराधिकारी ना आ जाए.
दोनों को भी यही सही लगा क्यू की दोनों hi अपनी साड़ी शक्तियां गवा एक आम इंसान बन चुके थे.
दोनों hi चल पड़े और पहुंच गए एक गाओं म जिसका नाम था मादवपुर.
कुछ महीने बाईट दोनों ने एक छोटा सा सूंदर घर बना लिया गाओं म और रहने लगे. यहाँ सब कुछ सही था कोई भी परेशानी नहीं आ रही थी.
वही तपस्वी भी तपस्या म बैठा हुआ था और उन दोनों क लिए एक सुरक्षा कवच न निर्माण किये हुए था.
इस कवच को भेदना लगभग अशंभव hi था.
अब सैतान बैठा था और सोच रहा था क क्या किया जाए जिससे वो उत्तराधिकारी ना आ पाए यहाँ.
उसने एक योजना बनायीं कुछ लोगो को अपने वाश म कर उन्हें भेज दिया मंजुलिका क नए घर म माधवपुर म.
अब उन् सभी क मान म मंजुलिका क प्रति काम वासना जगा दी थी.
एक दिन मौका पा वो सारे चल दिए मंजुलिका क घर और वह पहले तो उसके पति को मारा फिर मंजुलिका को भी.
तपस्वी ये देख बौखला गया और पुरे गाओं को श्राप दे डाला.
फ़्लैश बैक एन्ड
मोहिनी - यही पर एक गलती हुई गुलाबी पत्थर की आत्मा मुक्त हुई पर शरीर वैसे hi रहा जिसका सिर्फ एक hi हल था और वो क उन् दोनों को एक किया jaaye.Aage तुम सैफअली और डीप की कहानी जानते hi हो. इस बार ये तय हुआ क सारे पत्थर कैसे भी क्र क पहले hi यहाँ लाये जाये फिर तुम यहाँ आवो समझे
मैं- एक मं मैं उत्तरदिखारी कैसे बना उस तलवार का और तुम लोग पत्थर कैसे.
प्रदीप- देख भाई तू माने या न माने तू मदर ेलिका का पर पर पर पर पर पोता था जब तू समरथ सौर्य था तब समझा और इसी लिए तू hi तो हुआ न उत्तराधिखारी उनकी साड़ी शक्तियों और चीजों का.
मोहिनी- और पाथेर हम जैसे इस लिए बने क्यू की हम उन् जगहों क राज घराने स है जिसका इज़त मदर ेलिका न किया था.
Main-To तुम सारे मेरी पत्नियां क्यू.
मोहिनी- क्यू तुम्हे कोई दिकत है हमारे होने स हां बोलो.
मैं- ारी नहीं मैं तो बस.
ाचा तो अब गुलाबी पत्थर कहा है मतलब क्या वो भी अब.
मोहिनी- हां वो भी अरे वो तो तब भी तुम्हारा उसी रूप म इंतज़ार क्र रही थी वो तो उस प्रॉब्लम की वजह स. वो अभी हमें उसका पता नहीं चला है उसका क्या किसी का भी पता नहीं है हमें पर चिंता नहीं कसम है खून क लाली की कुछ hi दिन म वो हमारे साथ होंगे.
मैं- (प्रदीप s)Bhai एक बात बता हम सभी का मरना ये कुछ..
प्रदीप- गधे ये जो तूने हाथ म पकड़ा हुआ है ये कहा स आता तेरे अंदर ये बता तुम दोनों को एक होना था और उसका बस यही एक तरीका था तो हमने वही किया.
मैं- ठीक है गुस्सा क्यू होता है. यार पर बाबा क साथ क्या हुआ था वो..
प्रदीप- बाबा न अपना काम पूरा किया वो भी पूरी निष्ठा स उन्होंने ना सिर्फ परीलोक जिनलोक को छिपा दिया बल्कि इस पृत्वी पर स उस सैतान को भी आजाद करा दिया जिसको यहाँ मारा नहीं जा सकता tha.Saath hi उन्होंने इससे हमारे जैसो क लिए सुरक्षित भी क्र दिया है.
मैं- हां बाबा न बोलै था मुझे.
मोहिनी- प्रदीप भाई आप इनको बेझो ट्रेनिंग क लिए और मैं बाकियों को ढूंढ़ती हु.
मैं- यार मैंने बाबा स ट्रेनिंग ली थी. मुझे नहीं लगता क मुझे कोई ट्रेनिंग चाहिए.
प्रदीप- सुन्न तूने फिजिकल ट्रेनिंग hi ली थी न अब्ब बारी है मैजिक सीखने की तुझे तो बस कुछ hi माजिक्स आते है. चल अब. हां वो कापा को आज़ाद क्र दे और उसको तेरी जगह प रहने बोल समझा.
मैंने ठीक वैसा hi किया.
कापा- सौर्य बड़ा ाचा लगा तुमसे मिल क्र वर्ण अंदर तो बस वो R.book और O.Book की chapd-chapd hi सुनता रहता था चलो अब सही है.
R.book- आए कपो ज्यादा उछाल मत समझा न अभी तेरी हदी तोड़ दूंगी.
O.book- जाने दे छोटी ऐसो क मुँह hi नहीं लगते.
कापा- देखो ज्यादा हो रहा है.
मोहिनी- कैसे हो दोस्तों.
मोहिनी की आवाज सुन और उसकी आखों को देख hi 3 no शहर स उठे.
3no- V..vetal लोक की राज कुमारी को हमारा प्रणाम.
मोहिनी- सौर्य कापा आज स मेरे साथ रहेगा उन् दोनों को तुम hi सम्भालो (कापा स) तुम सौर्य की तरह बन जाओ फिर हम दोनों hi मिल क्र.
Pradeep-Mohini हो तुम इससे ले जाओ और वो सोल्लगे क काण्ड को देख लेना कापा.
कापा- जी.
मोहिनी और कापा चले गए.
प्रदीप- तू क्या अब ये तलवार ऐसे hi पकडे रहेगा.
मैंने उसकी बात सुनते hi उससे अपने अंदर खींच लिया.
मैं- यार एक बात बता मुझे कितनी चीजे ढूढ़नी है पहले मेरी वो 15 चीजे जिनमे स बस 2 मिली है अभी और अब ये मदर ेलिका की चीजे.
प्रदीप- बेटे अभी और भी है लिस्ट बड़ी लम्बी है. उस सैतान को मारना है तो म्हणत और वक़्त तो लगेगा न.
मैं- अरे क्या सैतान सैतान लगा रखा है नाम बता मुझे.
प्रदीप- मारकुस.