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रात मैं अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं सोने के लिए चला जाता है अर्जुन जब अपने बीएड पर सोता है आवर फ़ोन चलने लगता है आवर अपने फ़ोन मैं लड़कियों की फोटो देखने लगता है तभी एक लड़की की फोटो आती है जो सिर्फ ब्रा आवर पेंटी मैं होती है लड़की की ब्रा पेंटी मैं देख कर अर्जुन को अपनी अंजलि दीदी की याद आ जाती है अर्जुन उस लड़की की ब्रा की साइज देखने लगता है मगर अर्जुन को पता नहीं चल पता है
अर्जुन लड़की की चुकी से अपनी अंजलि दीदी की चुकी के बारे मैं सोचने लगता है क्या मेरी अंजलि दीदी का भी चुकी इतनी बड़ी होगी ये सोच कर hi अर्जुन अपने फ़ोन मैं अपनी अंजलि दीदी का फोटो निकल देता है
अर्जुन जब अपनी अंजलि दीदी की फोटो देखता है तो अर्जुन को अपनी अंजलि दीदी की चुकी उस लड़की से थोड़ी छोटी लगती है अर्जुन फिर अपने आप से hi अंदाजा लगाने लगता है उसकी अंजलि दीदी की चुकी कितनी बड़ी होगी सायद अंजलि दीदी की ब्रा 32 34 होगी आवर अंजलि दीदी की पेंटी 36 होगी अर्जुन अपने मन मैं सोचता है .. तभी अर्जुन को याद आता है उसने वह डब्बा से निकल कर सारा ब्रा पेंटी तो रूम मैं लेकर आया hi है चलो देख hi लेता हुईं अंजलि दीदी की साइज क्या है ... अर्जुन झट से उठ जाता है आवर अपने तकिया को हटा कर तोशक के निचे से सरे ब्रा पेंटी निकल लेता है आवर फिर अपने जेन्स से वह पुर्जा भी निकल लेता है आवर पहले उसपे ब्रा पेंटी का साइज देखता है कौन साइज की कितनी ब्रा पेंटी है तो देखता है उसमे 30 साइज की 2 .. 32 साइज की 3.. 34 साइज की 3 .. आवर 36 साइज की 2 होती है
फिर अर्जुन पेंटी की साइज भी देखता है तो पेंटी भी वही साइज hi होती है फिर अर्जुन ब्रा को देखने लगता है तो उसमे से 2 ब्रा 32 साइज की नहीं होती आवर 2 ब्रा 34 की नहीं होती है
ये क्या गीता दीदी ने अलग अलग साइज की क्यू ले गयी है अगर वह ब्रा अंजलि दीदी के लिए लेकर गयी है एक hi साइज की लेकर जाती है आवर मुझे पूरा यकीन है अंजलि दीदी की ब्रा 32 hi होगी तो 34 की ब्रा क्यू ले गयी है गीता दीदी
ओह्ह तेरी कही गीता दीदी अपने लिए तो नहीं ले गयी है .. क्या गीता दीदी की ब्रा की साइज 34 है तभी गीता दीदी 34 की ब्रा लेकर गयी है हहहह कितनी बड़ी होगी गीता दीदी की वह अह्ह्ह्ह सोच कर अर्जुन सिसक पड़ता है
फिर अर्जुन पेंटी को देखता है पेंटी भी 2 तो 34 की नहीं होती है आवर 2 पेंटी 36 की नहीं होती है अब अर्जुन को समझने मैं देर नहीं लगता की 36 वाली पेंटी गीता दीदी की है अर्जुन की आँखें बड़ी होने लगता है आवर उसका लैंड भी खड़ा होने लगता है जो अर्जुन को अपनी गीता दीदी का साइज सोच कर hi अंदर से मस्त मिज़ाज़ होने लगता है अर्जुन सभी ब्रा पेंटी को रख कर फिर से फ़ोन उठा लेता है आवर बीएड पर लेट जाता है अर्जुन अपने फ़ोन मैं अपनी गीता दीदी की फोटो निकल लेता है आवर देखने लगता
फ़ोन मैं अपनी गीता दीदी को अर्जुन देख कर फिर अपनी आँखें बंद कर लेता है आवर अपनी गीता दीदी की पेंटी ब्रा मैं सोचने लगता है जो अर्जुन के आँखों के सामने उसकी गीता दीदी ब्रा पेंटी मैं दिखाई देने लगाती है
अर्जुन गीता दीदी को नंगी ब्रा पेंटी मैं सोच कर गरम होने लगता है आवर अर्जुन का हाँथ कब अपने लैंड पर जा पहुंचता है अर्जुन को भी पता नहीं चलता है अर्जुन बस अपनी गीता दीदी को याद कर रहा होता है मेरी गीता दीदी क्या लग रही है आअह्ह्ह गीता दीदी की दूध कितने बड़े लग रही है
अर्जुन अर्जुन अर्जुन अर्जुन आँखे बंद किये हुआ अपनी गीता दीदी के बारे मैं सोच hi रहा होता की बहार से उसकी गीता दीदी की आवाज़ आने लगती है ..... अर्जुन हड़बड़ा कर उठ जाता है आवर जल्दी से सरे ब्रा पेंटी छिपा देता है आवर फिर अपने आप को ठीक करता है जो अर्जुन के माथे पर पसीने बाह रहे होते है फिर जाकर गेट खोलता है आवर जल्दी से बीएड पर आकर सो जाता है क्यू के अर्जुन का लैंड भी खड़ा हो गया होता
अर्जुन फिर से फ़ोन देखने लगता है तभी उसकी गीता दीदी रूम मैं आ जाती है मगर अर्जुन अपनी गीता दीदी को नहीं देखता है क्यू के अर्जुन को अभी अफ़सोस होने लगता है की अपनी गीता दीदी के लिए इतना गन्दा क्यू सोच रहा था
वही गीता अर्जुन के पास बीएड पर साथ लेट जाती है आवर फिर अर्जुन को प्यार से देखने लगती है जो अर्जुन की नज़र भी अपनी गीता दीदी पर पड़ता है जो अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही होती है .... बदले मैं अर्जुन भी मुस्कुरा देता है जो गीता अपने भाई का माथा चुम लेती है
तो अर्जुन अब आगे क्या करना है मतलब अब कहा पर रह कर पढ़ना ... अगर तू चाहे तो मैं तेरा भी एडमिशन पास ले गोंवाले सोल्लगे मैं करवा देती हुईं जो तुम आवर अंजलि भी साथ मैं जा सकते हो आवर हम भाई बहन साथ मैं फिर से रहने लगेंगे देख अंजलि आवर मैं कितनी दुखी रहते है तेरे लिए हम्हरा भाई होते हुआ भी हम तरस जाते है अपने भाई को देखने के लिए प्लीज भाई अपनी दीदी के लिए घर आ जा अब मैं तेरे सामने हाँथ जोड़ती हुईं ..... गीता मायूसी से कहते हुआ अर्जुन के सामने अपन हाँथ जोड़ देती है
जो अर्जुन झट से अपनी दीदी का हाँथ पकड़ लेता है
दीदी ये आप क्या कर रही है मैं भी आप दोनों के बिना कितना रोटा हुईं मैं hi जनता हुईं मैं भी अपनी प्यारी दीदी के साथ रहना चाहता हुईं मगर यह ममी माँ अकेली हो जाएँगी न इस लिए मुझे अच्छा नहीं लगता है ममी माँ को अकेले छोड़ना .... अर्जुन कहता है आवर अपनी दीदी की आंसू पोछ देता है जो थोड़ी नाम हो गयी होती है
भाई अगर हम ममी को भी अपने साथ लेकर चले तो कैसा रहेगा फिर हम सभी फॅमिली साथ मैं रहेंगे ममी की कोई औलाद भी नहीं है आवर मैं जानती हुईं ममी हमेह hi अपने बच्चे मानती है तो एहि सही रहेगा हम सभी साथ मैं रहे नानी को भी साथ लेकर चलेंगे ..... गीता फिर से कहती है
अब अर्जुन क्या बोले अर्जुन को कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था आवर अभी अर्जुन अपनी दीदी को मन भी नहीं कर पता रहा होता है क्यू के अर्जुन अपनी गीता दीदी को फिर से दुखी नहीं करना चाहता है .... दीदी आप पहले ममी माँ से बात कर लीजिये अगर वह साथ चलेंगी तो मैं जाने के लिए तैयार हुईं ..... अर्जुन कहता है
वही गीता बहुत खुश हो जाती है आवर अर्जुन के गलों पर किश करने लगती है गीता की चुकी अर्जुन के साइन पर भी टाच हो जाते है मगर अर्जुन जयादा धयान नहीं देता है अर्जुन को अभी अपनी गीता दीदी की ख़ुशी देख कर बहुत अच्छा लग रहा होता है
कुछ देर के बाद खुश होते हुआ गीता रूम से चली जाती है
दीदी मुझे मांफ कर दीजियेगा मैं वह नहीं जाना चाहता हुईं मैं फिर से उस घटिया औरत के साथ नहीं रहना चाहता हुईं ..... मैं कल hi ममी माँ को सब कुछ बता दूंगा जो मैं ममी माँ को कब से नहीं बताना चाहता था .... मगर अब मैं ममी माँ को सब कुछ बता दूंगा ....मैं जनता हुईं उस घटिया औरत आवर वह हरामी मां के बारे मैं जान कर ममी माँ को बहुत दुःख होगा ....
मगर ये बात कभी न कभी तो ममी माँ को पता तो चल hi जायेगा तो मैं कल hi बता दूंगा ताकि मैं उस औरत के पास न जा सकू ... मैं ममी माँ को दुखी भी नहीं देख सकता हुईं हे भगवन मेरी मदद करना सच्चाई जान कर मेरी ममी माँ जयादा दुखी न हो भगवन मुझे मांफ कर देना जो मैं कल खुद hi अपनी ममी माँ को दुखी करने वाला हुईं .... अर्जुन मन मैं hi सोच कर दुखी हो जाता है आवर अपनी आँखे बंद कर लेता है
वही आँचल की रूम मैं आँचल बीएड पर बैठ होती है आवर राखी बाथरूम मैं होती है
दीदी अब बहार भी आ जाइये मैं आप को जिस्म को इतनी बार देख चुकी हुईं की मुझे याद भी नहीं है आवर मैंने तो कई बार आप की छूट की पानी भी पि चुकी हुईं मगर आज आप इतनी क्यू शर्मा रही है .... आँचल कहती हुई बीएड से उतर जाती है
आँचल काली ब्रा पेंटी मैं गजब की खूबसूरत मॉल लग रही होती है आँचल की दोनों चुकी भी ब्रा मैं पहाड़ की तरह टाइट कड़ी होती है क्यू के अभी तक किसी ने भी आँचल की चुकी को ठीक से दबाया नहीं होता है ऊपर से अभी तक आँचल माँ भी नहीं बन पायी थी जो उसकी चुकी से दूध पिने से ढीली हो जाया क्यू के अभी तक आँचल बिलकुल एक कुवारी लड़की की तरह थी
वही राखी शरमाते हुआ बाथरूम से निकलती है अभी राखी को बहुत शर्म आती रही होती है .... वही आँचल की नज़र जैसे hi राखी पर पड़ती है आँचल की आँखें बड़ी हो जाती है
वाओ वाओ दीदी आप बहुत खूबसूरत लग रही है कमल की जिस्म है आप की दीदी मैं एक औरत होकर भी आप की जिस्म को देख कर खुद को रोक नहीं पति हुईं ..... आँचल कहती हुईं बीएड से उठ जाती है आवर राखी के पास चली जाती है आवर पास जाकर राखी की गर्दन को चूमने लगती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर रही है आँचल ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मत कर ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स आएसा मत कर ..... राखी बोलते हुआ आँचल की गांड दबाने लगती है वही आँचल बस राखी को चूमते hi जा रही होती है राखी तड़पने लगती है आवर आँचल को दूर करने की कोशिश करती है मगर आँचल अब बहुत गर्म हो गयी होती है राखी की मदहोश जिस्म को देख कर आँचल राखी के होंठों को चूमने लगाती है
आँचल जैसे hi राखी की होंठ पर होंठ रखती है राखी झट से आँचल की कमर पकड़ लेती है आँचल राखी की होंठ चूमते हुआ बीएड पर लेकर चली जाती है आवर राखी को धक्का दे देती है
मैं इस लिए ये नहीं पहन रही थी पता नहीं क्या हो जाता है तुझे जब भी मुझे ब्रा पेंटी मैं देखती है मुझपे टूट पड़ती है आएसा क्या है मेरी जिस्म मैं जो तेरे पास है वही तो मेरे पास है .... राखी कहती है
आँचल बस मुस्कुरा कर एक बार राखी को देखती है फिर अपनी ब्रा पेंटी निकल कर राखी की तरफ बढ़ जाती है आवर आँचल जैसे hi राखी के पास जाती है राखी की पेंटी मैं हाँथ दाल देती है आवर राखी की पेंटी के ऊपर से hi छूट रगने लगती है
राखेर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसा आँचल हहहह मज़ा आ रहा ह्ह्हह्ह्ह्ह आँचल ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh कहते हुआ राखी संत हो जाती है
राखी के झड़ते hi आँचल मुस्कुरा पड़ती है आवर फिर अपने ब्रा पेंटी निकल कर राखी की भी ब्रा पेंटी निकल देती है
दीदी आज मैं आप को बहुत मज़ा देने वाली हुईं आज हम दोनों एक दूसरे की पायस को भुजा लेंगी बहुत दिन से तड़प रही थी आप की छूट की पानी पिने के लिए .... आँचल बोलती हुई राखी की छूट का पानी ऊँगली से चाट लेती है आवर राखी की छूट के पास मुंह लगा देती है
आँचल जैसे hi राखी की छूट पर मुंह लगाती है राखी सिसकियाँ लेकर तड़प जाती है राखी का मुंह भी खुल जाती है आँचल राखी की छूट ज़ोर ज़ोर से चाटने लगती है जो राखी बस सिसकियाँ लेने लगी है
आँचल बहुत प्यार से राखी को छूट चाट रही होती है वही राखी बस अपना मुंह ऊपर कर के सिसक रही होती है राखी फिर बीएड पर लेट जाती है क्यू की राखी की कमरे दर्द करने लगती है तभी छत्ते हुआ आँचल राखी की छूट मैं दो ऊँगली दाल देती है जो राखी तड़प जाती है आवर अपनी गांड उठा कर आँचल का सर अपनी छूट मैं दबा देती है फिर राखी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है राखी की चुकी बहुत ज़ोर ज़ोर से ऊपर निचे हो रही होती है
जो आँचल राखी की चुकी मुंह मैं लेकर चूसने लगती है वही राखी आँचल के सर पर हाँथ फेरने लगती है
दीदी आप की छूट तो पहले से भी जयादा बंद हो गयी है वह बस चाट कर hi आप को संत कर रहे है क्या ... वह ऊँगली भी नहीं डालते है आएसा लग रहा है मुझे आप की छूट अब बिलकुल मेरी छूट की तरह हो गयी है ... आँचल कहती है
आँचल मैं तुझे बाद मैं बता दूंगी चल पहले मैं अब तुझे भी संत कर देती हुईं तेरी छूट भी बहुत जल रही होगी राखी कहती है है आँचल फिर कुछ नहीं कहती है आवर बीएड पर लेट जाती है तो राखी अब आँचल की छूट के पास आ जाती है आवर आँचल की छूट को चूमने लगती है aàhhhhh दीदी ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह है दीदी ह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह माआ हहहह राखी के चूमते hi आँचल सिसकियाँ लेने लगती है मस्ती मैं आवर अपनी टाइट चुकी को दबाने लगती है
आँचल अभी मस्ती मैं सिसक रही होती है आवर राखी बस आँचल की छूट को जीभ से आँचल की छूट की डेन को छेड़ती रहती है जिससे आँचल तड़प तड़प कर अपनी गांड उठ रही होती है हहहहह दीदी hhhhhhhhhh आप बहुत ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अच्छे से मेरी छूट को छेड़ रही है हहहह दीदी ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप इतने ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दिन के बाद क्यू आती है hhhhhhhhhh मेरी छूट आँचल ज़ार से चीख पड़ती है जो राखी जल्दी से अपनी हाँथ आँचल के मुंह पर रख देती है
वही आँचल की हालत ख़राब हो जाती है आँचल की सांसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है आवर आँचल की आँखों मैं पानी भी आ जाती है आँचल बीएड पर गिर जाती है
क्या कर रही है आँचल इस तरह चीखेगी तो बच्चे क्या सोचेंगे .... राखी थोड़ी डाटने जैसे सवार मैं कहती है
ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप मेरी जान लोगी क्या .... आप जानती है मैं अब मेरी छूट कुवारी लड़की की तरह हो गयी दीदी आप समझ लीजिये मैं कुवारी लड़की hi हुईं फिर भी आप अपनी मोती ऊँगली छूट मैं दाल दिया मुझे कितना दर्द हुआ आप को पता है ..... आँचल रोने जैसी सवार मैं कहती है
अभी आँचल मस्ती मैं सिसक hi रही होती है राखी के चाटने से .... तभी राखी अचानक hi आँचल की छूट मैं एक मोती ऊँगली गुसा देती है जिससे आँचल तड़प कर चीख पड़ती है
वह तो अच्छा होता है जल्दी hi राखी अपना हाँथ आँचल की मुंह पर रख देती है जो आँचल की आवाज़ बाद जाती है
आँचल की आँखों मैं नमी देख कर राखी को अपनी गलती का अहसास होता है आवर राखी जल्दी से आँचल को गले लगा लेती है आवर आँचल की आंसू भी पोछ देती है
दोनों फिर बीएड पर लेट जाती है
दीदी बहुत मज़ा आया आज तो मेरी छूट बहुत दिन से जल रही थी मैं अपनी ऊँगली से करते हुआ थक गयी थी मैं कब से आप की रह देख रही थी आज हम बहुत मस्ती करेंगी ..... आँचल कहती है
हआ बाबा आज मैं तेरी छूट की गर्मी पूरी निकल दूंगी जो तुझे काफी वक़्त तक गर्मी महसूस नहीं होगी
कास हम लोग सभी साथ होते तो कितना अच्छा होता ...... राखी उदास होते हुआ कहती है दीदी आप चिंता न करे मैं जल्द hi अर्जुन से बात करने वाली हुईं फिर हम सब साथ मैं रहेंगी .... आँचल कहती है
आँचल आवर राखी रात मैं कई बार एक दूसरे की छूट से पानी निकल देती है
जब दोनों की छूट से दर्द नहीं करने लगता है सोती नहीं है जब छूट दर्द करने लगती है तो दोनों एक दूसरे से लिपट लार सो जाती है