Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

hotaks

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एक परिवार की कहानी जिसमे बेटे को अपनी माँ से बचपन मैं hi नफरत हो जाती है आवर वह लड़का पढ़ने के लिए हॉस्टल मैं चला जाता है .... वह खुद से नहीं जाता उसे भेजा जाता है जो खुद की माँ होती है जिससे लड़के के दिल मैं अपनी माँ के लिए आवर नफरत आ जाती है फिर बड़ा होकर वह घर आता है
 
उपडेट __1

यह कहानी है लखन पुर गाँव की इस गाँव मैं बहुत कब लोग hi रहते है इस गाँव मैं कुल लग भाग 25 घर है आवर एक बड़ी सी हवेली है आवर उस हवेली के ऊपर बड़े बड़े अंकों मैं लिखा हुआ है लखन सिंह

ये लखन पुर गाँव भी इनके hi वजह से बसा हुआ था जब लखन सिंह का राज चल रहा था तब इस हवेली मैं चहल पहल रहती थी हर दिन नाच गण होता रहता था मगर जब से लखन सिंह इस हवेली से गए तब से इस हवेली मैं फिर कभी नाच गण नहीं हुआ फिर इनके कई पीडिया ख़तम हो गयी अब इस हवेली मैं बस 5 लोग hi रहते है जिनमे से 3 बचे है आवर दो मर्द आवर औरत है जो औरत है वह इस हवेली की मालकिन है आवर इस हवेली की बहु भी आवर जो मर्द है वह उस औरत का भाई है जो औरत के साथ hi रहता है आवर जो 3 बच्चे है वह औरत के बच्चे है

औरत का नाम है राखी देवी ये पढ़ी लिखी बहुत है खूबसूरत भी उतनी hi है इस लिए तो सोल्लगे मैं पढ़ते वक़्त hi एक लड़के से प्यार भी कर लिया आवर उसी लड़के से शादी भी हो गयी आवर फिर ये सहर से इस गाँव मैं चली आई कुछ सल्ल तो इनकी जीवन अच्छे से बीती मगर इनके बेटे की जनम के कुछ दिन बाद hi इनके पति की एक कार दुर्घटना मैं मौत हो गयी तब ये अपने भाई को साथ मैं रखती है क्यू के गाँव मैं इतने ज़मीन बहुत है आवर खेत मैं काम करने वाले मज़दूर को ये अकेले नहीं संभल सकती थी ऊपर से इनका बीटा भी तो अभी बहुत छोटा था इस लिए राखी देवी ने अपने भाई को साथ मैं रख लिया

राखी देवी की परिवार मैं बस माँ भाभी आवर एक भाई है इनकी माँ आवर भाभी सहर मैं रहती है

राखी देवी की माँ का नाम सिला है आवर भाभी का नाम आँचल है राखी देवी की तरह hi इनकी माँ भी खूबसूरत है या कह सकते है राखी देवी अपनी माँ की तरह खूबसूरत है इनकी भाभी भी खूबसूरत तो है मगर इनकी तरह नहीं.... आवर राखी देवी का भाई का नाम रंजीत है... रंजीत राखी देवी से छोटा है आवर राखी देवी के परिवार मैं कोई नहीं है

राखी देवी की 2 लड़किया आवर एक लड़का है लड़के का नाम अर्जुन है जो अभी *** सल्ल का हो गया है आवर बड़ी वाली लड़की का नाम गीता है जो गीता अभी *** सल्ल की है .... आवर छोटी वाली लड़की का नाम अंजलि है ... अंजलि अभी *** सल्ल की है गीता आवर अंजलि अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करती है आवर उतना hi प्यार अपनी माँ से भी करती है

राखी देवी की उम्र अभी 29 सल्ल की है आवर उनकी भाभी आँचल की उम्र 25 सल्ल की है आवर राखी देवी की माँ की उम्र 47 सल्ल की है आवर राखी देवी के भाई का उम्र 27 सल्ल का है

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अंजलि अंजलि भाई कहा गया रे तू तो बोल रही थी मैं उसे अपने hi साथ लेकर स्कूल आउंगी फिर क्या हुआ गीता अपनी छोटी बहन से बोलती है

वही अंजलि मुंह बना लेती है दीदी वह साथ तो आ रहा था फिर रस्ते मैं कुछ लड़के नदी मैं नहाने गए तो वह भी भाग गया उनके साथ मैं पकड़ने की बहुत कोसिस की मगर वह बहुत तीजी से भाग गया अंजलि कहती है

कल से अगर तुमने बोली के मैं साथ लेकर जाउंगी तो तुझे hi मरूंगी चल जा क्लास मैं बैठ मैं देख कर आती हुईं गीता कहती है आवर अपने भाई को ढूंढने के लिए नदी की तरफ निकल जाती है

वही अर्जुन अंजलि की नज़र मैं नदी की तरफ गया होता है मगर असल मैं अर्जुन अभी अपने hi हवेली मैं चुपके से घुसने की कोसिस कर रहा होता है अर्जुन किसी तरफ अपने हवेली मैं घुस जाता है छुपते हुआ ताकि उसकी माँ आवर मां देख न ले अर्जुन जैसे hi हवेली के अंदर जाता है जल्दी से ऊपर की तरफ भागता है आवर हवेली के बिलकुल किनारे वाले रूम के पास जाता है आवर फिर रूम के ठीक बगल मैं जाकर एक टेबल पर चढ़ जाता है आवर खिड़की से अंदर की तरफ देखने लगता है

अंदर अर्जुन की माँ बिलकुल नंगी होती है राखी की गोरा बदन अभी बिकुल अर्जुन के आँखों के सामने होता है वही अंदर उसकी माँ बीएड पर नागिन की तरह अभी मचल रही होती है आवर हहहह हहहह सससससस हहहह सिसक रही होती है तभी अर्जुन की नज़र अपनी माँ की पेअर की तरफ जाती है तो देखता है उसकी माँ के कमर के दोनों टैंगो के बिच एक आदमी का सर होता है जो हिल रहा होता है अभी अर्जुन को कुछ कुछ तो समझ मैं आने लगा था वह आदमी अभी क्या कर रहा है उसकी माँ के साथ जो अर्जुन अपनी माँ आवर आदमी पर गुस्सा करने लगता है तभी अर्जुन को उस आदमी का चेहरा दिखाई देता है आवर अर्जुन को आवर गुस्सा आने लगता है अभी अर्जुन बहुत छोटा hi था मगर अर्जुन को कुछ कुछ समझने का वजह थे अर्जुन के दोस्त लोग जो अर्जुन को लैंड बुर गांड की बाते बताते थे अर्जुन पहले तो उन सब की बातो पर धयान नहीं देता था मगर जब से अपनी माँ को एक बार नंगी हालत मैं देखा था तब से वह अपने दोस्तों की बात सुन कर सब कुछ के बारे मैं जानने लगा था

एक बार इसी तरह नदी नहाने के लिए स्कूल से भगा हुआ था फिर सोचा घर से कपडे लेकर जाता हुईं वह ऊपर कपडे लेने आया तो उसे अपनी माँ की सिसकने की आवाज़ सुनाई दिया मगर जब अर्जुन पास आया तो उसकी माँ की आवाज़ अब बदल चुकी थी जो अभी सिसक रही होती है वह हसने लगती है फिर भी अर्जुन उस रूम की गेट पीटने लगता है जो कुछ hi देर मैं उसकी माँ आकर दरवाज़ा खोल देती है आवर सामने अर्जुन को देख कर थोड़ी देर के लिए सहम जाती है क्यू के अभी राखी सिर्फ बलाउज आवर पेटीकोट मैं होती है आवर वह भी पेटीकोट का नाडा पकड़ती होती है जो अर्जुन को देख कर बांध लेती है

अर्जुन तू यह पे क्या कर रहा है अपने बेटे को उस दिन अचानक देख कर राखी देवी थोड़ी दर कर बोली थी आवर फिर अर्जुन को मरने लगी क्यू के गेट खुलते hi अर्जुन उस रूम के अंदर जाने लगा था जो राखी देवी को गुस्सा आ गया था

अर्जुन तू स्कूल क्यू नहीं गया है राखी देवी फिर बोली मगर उस वक़्त अर्जुन कुछ बोल नहीं रहा होता है आवर अंदर देखने की कोसिस करता है मगर अंदर कौन है देख नहीं पता है फिर राखी देवी उसी वक़्त अपने कपडे पहन कर अर्जुन को स्कूल लेकर चली जाती है

उस दिन अर्जुन ने अपनी माँ को कुछ कहा तो नहीं बस रट हुआ स्कूल चला गया मगर उसके कुछ दिन के बाद फिर अर्जुन उस रूम के पास गया आवर उस दिन भी अर्जुन को अपनी माँ की सिसकिया आवर फिर आहे सुनाई देती है अपनी माँ की आहे सुन कर उस दिन भी अर्जुन गेट पीटने लगता है आवर जब उसकी माँ दरवाज़ा खोलती है तो आज भी उसी रूप मैं होती है आवर दरवाज़ा खोलते hi फिर से स्कूल क्यू नहीं गया बोल कर मरने लगती है फिर उस दिन भी राखी देवी कपडे पहन कर अर्जुन को स्कूल लेकर चली जाती है इसी तरह अर्जुन अकसर आकर अपनी माँ को इस हालत मैं देखने लगा मगर सही अर्जुन अपनी माँ को बिलकुल नंगी देख लेता है मगर अर्जुन को गुस्सा आवर आता है की उसके माँ के साथ वह आदमी क्या कर रहा है
 
उपडेट __ 2

अर्जुन कुछ देर देखता है फिर जैसे hi उसकी माँ उठ कर साड़ी पहनने लगती है अर्जुन वह से निचे आ जाता है आवर हवेली के बहार निकल जाता है अर्जुन हवेली से निकल कर स्कूल नहीं जाता है आवर सीधे नदी की तरफ निकल जाता है

वही गीता अर्जुन को ढूंढते हुआ पहले घर आती गीता हवेली के अंदर आने के बाद ऊपर जाने को होती है की अपनी माँ को ऊपर से नीचे आती हुई पति राखी अपनी बेटी को देख कर थोड़ी घबरा जाती है मगर फिर खुद को संभल लेती है

गीता बेटी तुम घर पर क्या कर रही है तुम अभी तक स्कूल नहीं गयी क्या राखी कहती है आवर गीता के पास आ जाती है

माँ वह अर्जुन लगता है आज भी नदी नहाने चला गया है मैं अर्जुन को hi देखने आई थी तो सोचा पहले घर जाकर देख लेती हुईं गीता कहती है

गीता की बात सुन कर राखी बहुत hi जयादा घबरा जाती है आवर अपनी साड़ी को ठीक करने लगती है जो अभी पहन रही होती है मगर सामने hi गीता आ जाती है राखी अपनी साड़ी को पहन कर ऊपर की तरफ देखती है फिर गीता के पास आ जाती है

क्या अर्जुन आज भी स्कूल नहीं गया मगर बेटी मैंने तो खुद रस्ते तक अर्जुन आवर अंजलि को छोड़ कर आई थी.. ..इस लिए मैं तुझे कहती हुईं अपने साथ hi लेकर स्कूल जाया कर मगर तू मेरी बात सुनती hi कहा है ... चल मैं किसी को नदी की तरफ देखने के लिए भेजती हुईं ये लड़का मुझे बहुत परेशां करने लगा है राखी थोड़ी बेचैनी से कहती है .... क्यू के राखी को साख भी हो रहा होता है की अर्जुन आज भी रूम की तरफ तो नहीं आया

गीता फिर स्कूल चली जाती है अपनी माँ के कहने पर क्या हुआ

दीदी आप इतनी जयादा परेशां क्यू हो रही है कुछ हुआ है क्या .... आवर क्या बोल रही थी गीता बेटी .... राखी का भाई निचे आते हुआ अपनी दीदी को परेशान देखता है तो पूछता है

छोटे ये अर्जुन आज भी स्कूल नहीं गया है ज़रा तू ऊपर देख कही आज भी ऊपर तो नहीं है मैं क्या करू इस लड़के का राखी कहती है

वही उसका भाई ऊपर देखने चला जाता है मगर अर्जुन ऊपर कही भी नहीं मिलता है तो आकर राखी को बता देता है के अर्जुन ऊपर नहीं है

भाई ज़रा तू नदी की तरफ देख कर आ मैं खेतों की तरफ जा रही हुईं राखी देवी बोल कर चल देती है

वही राखी का भाई नदी की तरफ चल पड़ता है

खेत भी जयादा दूर नहीं होता है तो राखी देवी आयी hi चली जाता है चलते हुआ राखी देवी जब रस्ते से जाती है तो सामने से हर कोई नमस्ते करता है वही राखी देवी भी सब को हस्ते हुआ हाँथ जुड़ देती है जब राखी देवी थोड़ी आगे जाती है तब जो किशन पीछे चले जाते है वह वही रुक कर राखी देवी का गांड देख कर अपने धोती पर हाँथ को फेरने लगते है ये हर रोज़ का थी इन जाओंवालों का हर दिन राखी देवी को सामने से तो नमस्ते करते रहते थे मगर जैसे hi राखी देवी उनसे दूर जाती वह खड़े होकर राखी देवी की जिस्म को देखने लगते आवर उन लोगो की आँखे एक जगह आकर रुक जाती थी आवर वह जगह थी राखी देवी की गांड ऊपर से राखी देवी कपडे भी ाएसि पहनती थी जो साड़ी उनकी गांड से चिपकी हुई होती थी जो राखी देवी के चलने से उनकी गांड उभर कर निकली हुई होती थी जो वह लोग देख कर आवर जयादा गर्म भी हो जाते थे मगर किसी मैं इतनी भी हिम्मत नहीं होती थी के वह कुछ भी कर सके राखी देवी को ये उनकी दर नहीं थी राखी देवी के लिए वह सम्मान थी राखी देवी हर जाओंवालों की मदद करती थी किसी को पैसे की ज़रूरत होती तो राखी देवी उनके घर जाकर मदद करती जो जाओंवालों राखी देवी की इज़्ज़त करते थे मगर किसी के मन को कोई रोक तो नहीं सकता है भला वही हल जाओंवालों की भी थी राखी देवी की जिस्म को देख कर उन सब का भी मन मचल जाता था

राखी देवी भी थोड़ी hi देर मैं अपने खेत पर पहुंच जाती है आवर देखती है के सभी मज़दूर काम कर रहे होते है तो राखी देवी एक औरत को पुकारती है ...

जी मालकिन कोई काम हैं क्या थोड़ी देर मैं वह औरत आकर बोलती है

हां पुरवा मेरी कमर बहुत दर्द कर रही है ज़रा दबा दे तू राखी देवी कहती है आवर वही बने हुआ घर मैं घुश जाती है

खेत के पास hi राखी देवी के पति ने एक घर भी बनवा दिए थे आवर वही पर खेतों मैं पानी डालने के लिए एक बोरिंग भी लगा दिया थे उस घर मैं 2 रूम थे उस रूम मैं राखी देवी hi रहती थी जब तक खेत पर होती थी

राखी देवी रूम मैं जाकर अपनी साड़ी को खोल कर चौकी पर लेट गयी

वही राखी देवी की जिस्म को देख कर पुरवा की मुंह खुल गयी आज पहली बार पुरवा राखी देवी की जिस्म को सामने से नंगी देख रही थी पुरवा कब से राखी देवी की इस जिस्म को नंगी देखना चाहती थी क्यू के राखी देवी अक्सर किसी न किसी को अपने जिस्म की मालिस करने के लिए बोलै hi लेती थी आवर जो औरत भी राखी देवी की जिस्म की मालिस करती वह खुद hi राखी देवी की जिस्म की मालिस करते हुआ गर्म हो जाती थी आवर फिर अपने जिस्म की तुलना राखी देवी से करती मगर उन सब की जिस्म राखी देवी के सामने कुछ भी नहीं होती थी आवर वह औरत जब राखी देवी की मालिस कर के जाती तो अपने सहेलियों को भी बताती पूर्व उनकी बाते सुन कर सिर्फ गर्म हो जाती थी आवर राखी देवी की जिस्म को आँखे बंद कर के नंगी ावस्था मैं देखने की कोसिस करती मगर पुरवा के आँखों मैं राखी देवी की नंगी हालत कभी भी नहीं दिखती थी क्यू की पुरवा ने राखी देवी को जब भी देखि थी फुल साड़ी मैं hi देखि थी फिर भी पुरवा राखी देवी की साड़ी मैं hi याद कर के अपनी छूट मैं ऊँगली कई बार कर चुकी थी राखी देवी का जिस्म hi कुछ आएसा था की मर्द तो मर्द औरत भी राखी देवी की इस जिस्म को मसलन चाहती थी आवर वह पुरवा का सपना आज पूरा होने वाला था

राखी देवी चौकी पर लेती हुई थी आवर राखी देवी की गांड उभर कर ऊपर की तरफ उठी हुई थी पुरवा भी आज वही कड़ी होकर पहले राखी देवी की गांड से होते हुआ राखी देवी की जिस्म को देख रही थी पुरवा गांड को देखते हुआ अपनी नज़र फिर ऊपर करती है तो देखती है राखी देवी की कमर बिलकुल चिकना है जो दूध की तरह चमक रहा है फिर पुरवा अपनी नज़र ऊपर की तो देखि राखी देवी की दोनों चुकी लेते की वजह से चौकी मैं हल्का सा टाच हुआ है जो बिलकुल टाइट है राखी देवी अपने दोनों हाँथ निचे कर के लेती हुई थी आवर अपना सर दोनों हाँथ पर राखी हुई थी जो पुरवा को राखी देवी की चुकी कितनी टाइट है पता चल रही थी पुरवा धीरे धीरे राखी देवी के पास जाती है आवर एक हाँथ अपना राखी देवी के गांड को छूने की कोसिस करती है पुरवा की मुंह मैं पानी आने लगती है आवर पुरवा की छूट भी गर्म होने लगती है

मालकिन की कितनी अच्छी जिस्म है जो मुझे भी कुछ कुछ होने लगी है मन कर रही है मालकिन की गांड को पकड़ कर मसल दू मालकिन अपनी इस जिस्म को कैसे संभालती होगी मालकिन की पति भी अब इस दुनिया मैं नहीं है मालकिन अपनी इस मस्त जिस्म को सिर्फ बर्बाद कर रही है मालकिन को दूसरी शादी कर लेनी चाहिए थी राखी देवी की जिस्म को देखती हुई पुरवा मन मैं सोचती है

पुरवा क्या कर रही है तुझे अपनी जिस्म देखने के लिए नहीं बोल्या है चल जल्दी से मालिस कर मेरी जिस्म को राखी देवी थोड़ी तेज़्ज़ आवाज़ मैं बोलती है

क्यू के राखी देवी को गुस्सा आ गया था पुरवा की अपनी जिस्म को इस तरह देखते हुआ

आएसा नहीं था की जब भी कोई राखी देवी की भरी जिस्म को देखता था तो राखी देवी को पता नहीं चलता था राखी देवी को पता थी आवर राखी देवी ये भी जानती थी गाँव के मर्द तो मर्द औरत भी इनकी जिस्म के बारे मैं बहुत बाते करती है मगर कभी भी राखी देवी ने सुनी नहीं थी तो किसी को कुछ बोल भी नहीं पति थी

राखी देवी की गुस्से भरी आवाज़ को सुन कर पुरवा जल्दी से राखी देवी की कमर पर हाँथ रख कर प्यार से मसलने लगती है राखी देवी की जिस्म को छूटे है पुरवा की दिल की धड़कन बढ़ जाती है पुरवा की छूट मैं एक हलचल सी मच जाती जो पुरवा की मुंह से गर्म शैशे भी निकलने लगती है मगर पुरवा अपनी शंशो पर काबू कर लेती है आवर राखी देवी की जिस्म की मालिस करने लगती है पुरवा बड़े hi प्यार से राखी देवी की जिस्म की मालिस करती है जैसे राखी देवी की जिस्म एक नाजुक सी फूल है ज़ोर से मसलने पे मुरझा जाएगी इस तरह पुरवा राखी देवी की जिस्म की मालिस करती है

जैसे जैसे पुरवा राखी देवी की जिस्म की मालिस करती है राखी देवी मस्ती मैं कहरने लगती है राखी देवी की कहरने की आवाज़ सुन कर आवर भी पुरवा गर्म हो जाती है पुरवा फिर अपना हाँथ धीरे धीरे लेकर राखी देवी की गांड पर रख hi देती पुरवा जैसे hi राखी देवी की गांड को छूती है झट से हटा भी लेती है आवर राखी देवी से थोड़ी सी दूर हो जाती आवर राखी देवी की गांड को देखने लगती है पुरवा की आँख मैं एक नशा सा होने लगती है आवर पुरवा कभी राखी देवी की गांड तो कभी हाँथ को देखने लगती है

जब कुछ देर तक पुरवा का हाँथ अपने जिस्म पर नहीं पड़ता है तो उसी वक़्त राखी देवी पलट जाती है आवर फिर पुरवा को गुस्से मैं घूरने लगती है

मगर पुरवा की हालत आउट ख़राब हो जाती है राखी देवी की चट्टान की तरह दोनों चुकी को खड़ा देखते हुआ पुरवा की दोनों पेअर भी कुछ देर तक कंपनी लगते है तभी फिर पुरवा की नज़र राखी देवी से मिलती है आवर पुरवा अपनी नज़रे चुरा कर निचे देखने लगती है

पुरवा तू वह खड़ा होकर क्या सोच रही है मेरी जिस्म दबा नहीं सकती क्या तू इतनी शर्मा क्यू रही है शर्माना तो मुझे चाहिए क्यू की मैं यह नंगी हुई हुईं तू नहीं चल दबा जल्दी से मुझे घर भी जाना है पता नहीं छोटे को मेरा अर्जुन मिला भी होगा की नहीं अर्जुन को याद करते हुआ राखी देवी कहती है

मालकिन आप की जिस्म बहुत गर्म है मैं जिसे hi आप की वह हाँथ को रखा मुझे आएसा लगा मेरी ऊँगली जल गयी है पुरवा निचे देखते हुआ hi बोली

क्या बकवास कर रही है कभी किसी औरत की जिस्म की मालिस नहीं की क्या आवर तुझे hi सिर्फ मेरी जिस्म गर्म लगती है हर औरत की जिस्म थोड़ा बहुत हर वक़्त गर्म hi रहती है ठीक है तू जा किसी आवर को भेज आवर जाते हुआ गेट बंद कर देना राखी देवी गुस्से मैं कहती है

वही पुरवा निचे सर किये hi रूम से निकल जाती है फिर थोड़ी hi देर मैं एक औरत आती है आवर राखी देवी की जिस्म की मालिस करने लगती है उस औरत को जयादा फर्क नहीं पड़ता है क्यू के वह औरत कई बार राखी देवी की जिस्म की मालिस पहले भी कर चुकी थी

कुछ देर तक औरत राखी देवी की जिस्म की मालिस करती है उस औरत की भी मालिस करते हुआ छूट से पानी गिर hi जाता है क्यू की जैसे hi राखी देवी उसकी आँखों मैं देखती है औरत की आँखे बहुत मदहोश होती है मगर राखी देवी कुछ कहती नहीं है आवर उठ कर अपनी साड़ी पहनने लगती है तब तक वह औरत रूम से निकल जाती है

पता नहीं क्या सोचती रहती है मेरे जिस्म के बारे मैं जैसा हर किसी का जिस्म है वही जिस्म तो मेरा भी है कुछ भी तो अलग नहीं है आवर वह पुरवा बोल रही थी मेरा जिस्म गर्म है वह कितनी पागल है उसे ये भी नहीं पता औरत की जिस्म तो गर्म रहती है है राखी देवी मन मैं hi बुदबुदाती है फिर अपने हवेली की तरफ निकल जाती है

अर्जुन तुम स्कूल क्यू नहीं गए थे तुम अभी कहा से आ रहा है मैंने तुझे मन किया है न नदी नहाने मत जाया कर तुझे कुछ हो गया तो तू बहुत बदमाश हो गया है आज मैं तुझे नहीं छोड़ने वाली हुईं गीता कहते हुआ अर्जुन की तरफ भगति है वही अर्जुन वही चरों तरफ भागने लगता है हस्ते हुआ

तभी जाकर अपनी माँ से टकरा जाता है अर्जुन की अभी हालत को देख कर राखी देवी को इतना गुस्सा आता है की वह अर्जुन को वही मरने लगाती है आवर फिर अर्जुन के सरे कपडे को निकलने लगती है अर्जुन भी अपनी माँ को कुछ कहता नहीं है बस रोने लगता है

तुझे मैंने स्कूल जाने को बोली थी न फिर स्कूल क्यू नहीं गया आवर क्या हालत बना लिया है अपनी तूने तुझे इस हालत मैं ठंढ लग गयी तो तेरा ये साए कपडे भी भीगने हुआ है राखी देवी बोलते हुआ आवर मरती है फिर अर्जुन के कपडे निकल कर अर्जुन को लेकर रूम मैं चली जाती है फिर अर्जुन को कपडे पहनने लगाती है

कपडे पहनने के बाद राखी देवी बड़े hi प्यार से अर्जुन को खाना खिलाती है जो अर्जुन भी अपनी माँ को प्यार से देख देख कर खाना खाने लगता है

माँ ये मां यह क्यू रहते है अपने घर क्यू नहीं जाते है अर्जुन कहते हुआ hi अपनी माँ से कहता है

जो राखी देवी थोड़ी देर के लिए hi चुप हो जाती है

हम सब यह अकेले है न इस लिए तेरे मां यह रह कर हमारी मदद करते है देखता नहीं है तेरे मां कितने खेत पर काम करते है अगर वह नहीं रहते तो सब काम मुझे अकेले hi करना पड़ता क्या आप को अच्छा लगता अपनी माँ को काम करते हुआ देख कर राखी देवी प्यार से कहती है

फिर अर्जुन कुछ नहीं कहता है आवर खाना खा कर अपनी गीता दीदी के पास चला जाता है

रात के 9:पं

अर्जुन जब सोने जाता है तो अर्जुन का मन करता है आज अपनी माँ के साथ सोने का तो अर्जुन उसी वक़्त अपने रूम से निकल कर अपनी माँ के रूम के पास जाकर गेट पीटने वाला होता है की रूम से उसकी माँ की हसने की आवाज़ सुनाई देती है तो अर्जुन हॉल से अंदर देखने लगता है तो देखता है उसकी माँ बीएड पर लेती हुई है आवर उसकी माँ की साड़ी निषे ज़मीन पर पड़ी हुई है उसकी माँ सर्फ प्रतिकूल आवर ब्रा मैं लेती हुई है आवर उसके मां माँ के ऊपर लेते हुआ है आवर माँ की चुकी को पकने की कोसिस कर रहे है जो उसकी माँ हस्ते हुआ मन कर रही है अर्जुन अंदर देख hi रहा होता है की अर्जुन का हाँथ से गेट खुल जाता है जो राखी देवी की नज़र अर्जुन पर पद जाती है राखी देवी जल्दी से अपनी जिस्म पर साड़ी दाल कर अर्जुन के पास आ जाती है आवर अर्जुन को 2 तप्पड़ मार देती है

अभी मैंने तुमेह सोने को बोली न फिर तू यह क्या कर रहा है अर्जुन तू बहुत बदमाश हो गया है चल जा अब सो जाए राखी देवी कहती है आवर फिर से अर्जुन को रूम मैं लेकर चली जाती है

माँ मुझे आप के साथ सोना है अर्जुन रूम मैं आने के बाद बोलता है

नहीं मुझे अभी बहुत काम करनी है मुझे सोने मैं अभी बहुत वक़्त है चल तू अपने रूम मैं hi सो जा सुबह स्कूल भी जाना राखी देवी कहती है

नहीं मुझे आप के साथ hi सोना है आप कभी मुझे अपने साथ नहीं सोने देती है आवर मां के साथ दिन भर सोती रहती है अभी भी मां के साथ hi सो रही थी मुझे भी आप के साथ सोना है अर्जुन कहता है

अर्जुन की बात सुन कर राखी को बहुत गुस्सा आता है आवर राखी गुस्से मैं अर्जुन को मरने लगती है

गुस्से मैं राखी देवी कुछ जयादा hi अर्जुन को मरने लगाती है तभी वह गीता आवर अंजलि भी आ जाती है जब अपनी माँ को अर्जुन को मरते हुआ देखती है तो गीता अपनी माँ को अलग करती है

वही अंजलि अर्जुन को चुप करने लगती है आप बहुत गन्दी हो मैं कभी आप से बात नहीं करूँगा मैं आप की कोई बात नहीं माँगा आप बहुत गन्दी हो अर्जुन रट हुआ hi कहता है

अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी को आवर गुस्सा आता है फिर मरने के लिए होती है की गीता पकड़ कर रूम से बहार लेकर आ जाती है

उस रात अर्जुन को गीता अपनी साथ hi सुलाती है आवर अर्जुन से पूछती है माँ किआ लिए मार रही थी मगर अर्जुन कुछ नहीं बताता है आवर रट हुआ hi सो जाता है

अगली सुबह अर्जुन पहले hi उठ कर हवेली से निकल जाता है जब राखी देवी सुबह उठ कर अर्जुन की रूम मैं जाती है तो अर्जुन रूम मैं नहीं होता है तो फिर अंजलि के रूम मैं जाती है अर्जुन वह भी नहीं होता है जो राखी देवी का दिल अब घबराने लगता है वह भाग कर गीता की रूम मैं जाती है तो अर्जुन वह भी नहीं होता है

गीता बेटी अर्जुन कहा है राखी देवी परेशां होकर पूछती है जो गीता भी अर्जुन को हवेली मैं हर जगह धुंध लेती है मगर अर्जुन कही नहीं मिलता है सभी परेशान होकर गाँव मैं ढूंढने लगते है जो अर्जुन खेतो की तरफ बैठा हुआ होता है अर्जुन मिलता भी है तो राखी देवी को जो अर्जुन को वह धुंध धुंध कर बहुत जयादा परेशां होती है यह तक उनकी आँखों से आंसू भी बाह रही होती है राखी देवी जाकर अर्जुन के पास बैठ जाती है

अर्जुन बीटा मुझे गुस्सा है राखी देवी कहती है मगर अर्जुन कोई जवाब नहीं देता है आवर वह से उठने लगता है जो राखी देवी अर्जुन को पकड़ लेती है अर्जुन अपनी माँ से हाँथ छोड़ने लगता है जो कभी देर तक अर्जुन अपनी माँ से हाँथ छोड़ता hi रहता है जो अब राखी देवी को गुस्सा आ जाता है आवर फिर वही राखी देवी अर्जुन को 1 तप्पड़ मार देती है

तू मेरी माँ नहीं है तू एक गन्दी औरत है मुझे हर वक़्त मरती hi रहती है मैं तेरे साथ घर नहीं जाऊंगा अर्जुन रट हुआ बोलता है

अर्जुन जब बोलता है तो वह कुछ जाओंवालें भी होते है अपने बेटे की बात सुन कर राखी देवी वही बैठ कर रोने लगती है मगर अर्जुन को छोड़ती है

फिर 2 जाओंवालों की सहारा लेकर अर्जुन को घर लेकर आती है राखी देवी को बहुत दुःख होता है अर्जुन की बातो पर

छोटे माँ से बात कर अब अर्जुन यह नहीं रहेगा इसे हॉस्टल मैं भेज देता आवर फिर अगले hi दिन राखी देवी अर्जुन को हॉस्टल मैं भेज देती है अर्जुन रो रो कर बहुत कहता है मुझे हॉस्टल नहीं जाना मगर अर्जुन की बातो पर कोई भी धयान नहीं देती है राखी देती

गीता आवर अंजलि अर्जुन को रोकना तो चाहती थी मगर अपनी माँ के आगे कुछ भी बोल नहीं पति है अर्जुन अपनी बहनो से भी रो रो कर कहता है अर्जुन की बहनो को अर्जुन का रोना देखा नहीं जाता है तो वह अपने अपने रूम मैं चली जाती है आवर फिर अर्जुन को हॉस्टल मैं भेज देती है राखी देवी अर्जुन अपनी माँ पर बहुत गुस्सा होता है आवर जाते वक़्त भी गली दे देता है मगर उस वक़्त राखी देती कुछ नहीं करती है बस रो कर हवेली मैं भाग जाती है
 
उपडेट __ 3

अर्जुन जिस सहर के हॉस्टल मैं पढ़ने के लिए गया होता है उसी सहर मैं अर्जुन के नानी का भी घर होता है मगर राखी देवी ने अर्जुन को हॉस्टल मैं hi रहने के लिए हर इंतज़ाम कर चुकी थी अर्जुन भी सुरु मैं जब हॉस्टल मैं गया तो कई दिन तक रोटा रहा

अर्जुन की माँ बहन कई बार सहर मैं मिलने के लिए आती थी मगर अर्जुन अपनी माँ से नहीं मिलता था मगर अपनी दोनों दीदी से मिलता था आवर बहुत रोटा था वही अर्जुन की दोनों दीदी भी अर्जुन को रट देख कर दोनों को भी रोना अत था मगर अपने भाई के सामने वह नहीं रोटी थी आवर अर्जुन के साथ कुछ देर रह कर अर्जुन के साथ खेलती थी जो अर्जुन उस दिन थोड़ा खुश भी हो जाता था वही राखी देवी दुखी होकर घर आ जाती थी

यह अर्जुन से मिलने के लिए अर्जुन की नानी आवर ममी भी आती थी मगर अर्जुन उनसे सिर्फ मिलता तो था मगर कुछ बात नहीं करता था बस अपनी नानी आवर ममी के सामने रट हुआ मिल कर भाग जाता था

एक दिन अर्जुन की ममी हॉस्टल मैं आकर सीधे अर्जुन के रूम मैं hi चली गयी अर्जुन भी रूम मैं hi था आवर दुखी होकर रो रहा होता है अर्जुन की ममी पास जाकर बैठ जाती है

आँचल को अर्जुन का रोना बिलकुल भी पसंद नहीं आता है क्यू की आँचल की कोई भी औलाद नहीं थी जो आँचल अपनी नन्द के hi बच्चो को अपनी बच्चे समझती थी आवर अर्जुन को सबसे जयादा प्यार करती थी हर टाइम जब अर्जुन बिना बात किये hi भाग जाता था तो आँचल का दिल भी मचल जाता था आवर दुखी होकर चली जाती थी ......मगर आज सुबह जब आँचल मार्केटिंग करने गयी तो आँचल को एक बहुत प्यारी घडी दिख गयी थी जो घडी देख कर hi आँचल को अर्जुन की याद आ गयी थी आँचल उस घडी को खरीद कर hi हॉस्टल मैं चली आई थी

मगर यह अर्जुन को रट हुआ देख कर आँचलगा दिल दुखी हो जाती है

अर्जुन बीटा आज तुम क्लास मैं नहीं गए क्या आँचल अर्जुन के सर पर हाँथ फेरते हुआ बोलती है

वही अर्जुन को जब अपनी ममी की आवाज़ आती है तो अर्जुन अपनी ममी का हाँथ पकड़ लेता है आवर अपनी ममी के गॉड मैं सर रख कर रोने लगता है

अर्जुन बीटा तुम रो क्यू रहे हो अच्छा नहीं लग रहा है हॉस्टल मैं क्या हॉस्टल मैं अगर आएसा है तो मैं तुमेह घर लेकर चलती हुईं तुम घर से hi पढाई करना आँचल कहती है आवर अर्जुन के सर पे हाँथ फेरने लगती है

मुझे दीदी के पास जाना है मुझे यह नहीं रहना है रत मैं यह अकेले सोने से मुझे दर लगता है प्लीज आप मुझे घर लेकर चलिए न मा अर्जुन रट हुआ कहता है

अर्जुन का लास्ट सब्द सुन कर आँचल का जिस्म एक वक़्त के लिए सुन पर जाया है आँचल का दिल तड़प उठता है आँचल माँ सबद सुनने के लिए न जाने कब से तड़प रही होती है जो अर्जुन का माँ सबद सुन कर आँचल का दिल ख़ुशी से मचल जाता है आवर आँचल की आँखों मैं आंसू आ जाते है आँचल अर्जुन को अपने साइन से लगा लेती है आवर अर्जुन को अपने साइन मैं दबाने लगती है जैसे अभी अर्जुन को अपनी साइन मैं छुपा लेगी

जो सबद सुनने के लिए आँचल कब से तड़प रही थी वह सब्द आज अर्जुन ने बड़ी आसानी से बोल गया था सायद अर्जुन को अपनी माँ की कमी खाल रही थी मगर आँचल तो बहुत खुश हो गयी थी

आँचल की शादी हुआ अब धीरे धीरे 6 सल्ल होने वाले थे मगर आँचल अभी तक माँ नहीं बन पाई थी आवर आँचल को पता भी होती है की वह कभी माँ नहीं बन सकती है मगर आँचल अब अर्जुन को hi अपना बीटा आवर गीता अंजलि को बेटी मानती थी आवर हर वक़्त एहि सोचती थी कास कभी अर्जुन अंजलि गीता कभी उस ममी की जगह माँ पुकार सके जो आज अर्जुन ने पुकार दिया है आँचल का दिल ख़ुशी से नाच रहा था आँचल इतनी खुश हुई की आँचल अर्जुन को ख़ुशी मैं चूमने लगी

मैं तुमेह घर लेकर जाउंगी मेरे बेटे तुमेह मैं अकेले नहीं सोने दूंगी तुम अपने इस माँ के साथ hi आँचल अर्जुन को चूमते हुआ बोलती है आवर उसी वक़्त अर्जुन का सारा सामान बैग मैं डालने लगती है आवर फिर टीचर से बात कर के अपने साथ घर लेकर आ जाती है

घर आने के बाद अर्जुन भी थोड़ा खुश हो जाता है

आँचल अपनी नन्द को भी बता देती है की अर्जुन मेरे साथ hi रहेगा आवर एहि से पढ़ने के लिए जायेगा जो अर्जुन की माँ भी मान जाती है

आँचल अर्जुन को कभी अपने से दूर नहीं जाने देती थी सुबह मैं अपने साथ हॉस्टल तक छोडने जाती आवर फिर घर आकर दूकान चलने लगती थी जो एक कपडे की दूकान होती है

ये दूकान आँचल ने अपनी सास से ज़िद कर के खोलवै थी क्यू के आँचल घर पर अकेली परेशां हो जाती थी आँचल पढ़ी लिखी थी तो उसकी सास ने भी दूकान खोल दिया अपने hi घर मैं जो उनका घर भी मार्किट मैं था तो अच्छी चल रही होती है कभी कभी आँचल की सास भी साथ आ जाती थी

मगर अब अर्जुन के घर आने पर जब तक अर्जुन घर नहीं आता तब तक के लिए आँचल दूकान पर रहती आवर फिर अर्जुन के आने पर आँचल भी दूकान बंद कर के घर मैं आ जाती थी नहीं तो कभी कभी आँचल की सास दूकान जाकर खोल देती थी

अर्जुन के घर आने से अब आँचल को दूकान पर मन नहीं लगता था वह बस अर्जुन के बारे मैं hi सोचने लगती थी ..... वह पढ़ी ठीक से कर रहा है की नहीं उसने खाना भी खाया होगा की नहीं आँचल बस एहि सब सोचती रहती थी ..... अर्जुन जब घर आता तो आँचल पहले अर्जुन के बैग मैं टिफ़िन चेक करती खाना खाया है की नहीं ..... अर्जुन कभी खाया होता है तो कभी नहीं खाया होता जो आँचल पहले तो अर्जुन को बहुत बोलती फिर रूत जाती थी .....जो अर्जुन को अच्छा नहीं लगता था तो अर्जुन आँचल को माँ माँ कह कर किसी तरह आँचल को मन hi लेता था

अब अर्जुन को अपनी माँ की याद नहीं आती थी हआ मगर अर्जुन को अपनी दोनों दीदी की बहुत याद आती थी जब भी अर्जुन की माँ मिलने के लिए आती अर्जुन घर से बहार चला जाता था आवर कभी उसकी दीदी साथ मैं आती तो अर्जुन अपनी दोनों दीदी के साथ रूम मैं ले जाकर खूब मस्ती करता था अर्जुन के साथ थोड़ा समय बिता कर गीता आवर अंजलि भी खुश हो जाती थी मगर अपनी दीदी के जाते hi अर्जुन फिर थोड़ा दुखी हो जाता जो आँचल भी समझ जाती थी उस दिन आँचल अर्जुन को स्कूल नहीं जाने देती आवर अर्जुन को बहार घूमने के ली लेकर चली जाती थी आँचल अर्जुन को इतना प्यार देती थी के अर्जुन जल्द hi सब कुछ भूल जाता है अर्जुन आँचल की हर बात मंटा था बहार कुछ भी करता था तो सोचता था बहार की बात कभी आँचल को बता न चले मगर आँचल को पता चल hi जाता था मगर बहार की बात को आँचल अर्जुन से कभी नहीं पूछती थी क्यू के आँचल जब भी सुनती थी तो उसमे अर्जुन की कोई गलती नहीं होती थी जो आँचल खुश हो जाती थी

फिर आँचल ने दूकान पर 2 औरत को रख लिया जो वह दोनों आँचल की दोस्त थी आवर उसी सहर मैं दोनों की शादी हुई थी जब दोनों ने अपनी मज़बूरी आँचल को बताई तो दोनों को आँचल ने दूकान पर भी रख लिया क्यू के दूकान बंद होने से बहुत नुकशान भी होने लगा था तब आँचल को किसी को रखना hi था तो अपनी दोनों दोस्त को hi रख लिया

दूकान पर आँचल भी साथ रहती थी मगर अर्जुन के आते hi आँचल घर मैं चली जाती थी आँचल अर्जुन को अपने साथ hi सुलाती भी थी जो अर्जुन भी आँचल से लिपट कर सो जाता है अर्जुन को अपने साथ सुला कर आँचल अंदर से बहुत खुश होती है क्यू के अर्जुन के साथ सोने से अंजलि को माँ होने का भी अहसास होती थी

इसी तरह दिन बीतने लगा आवर अर्जुन भी धीरे धीरे बड़ा होते गया मगर अर्जुन को जब भी अपनी माँ की याद आती थी अर्जुन का चेहरा गुस्से से लाल हो जाती थी अर्जुन घर मैं तो बहुत संत आवर अच्छे बच्चे की तरह रहता था मगर बहार अर्जुन का नाम सुन कर लड़के दर जाते थे अर्जुन जैसे जैसे बड़ा हो रहा था उसका गुस्सा भी बढ़ रहा था आवर अपनी माँ का गुस्सा अर्जुन उन लड़को पर उतर देता था जो किसी लड़की को छेड़ रहे होते है

कुछ लड़के तो अर्जुन को पागल भी कहने लगे थे मगर अर्जुन के सामने कोई कुछ नहीं बोलता था अर्जुन की मार मिट की बाते उसकी माँ तक भी पहुँच जाती थी क्यू की कुछ गाँव के लड़के भी अर्जुन के साथ पढ़ने लगे थे आवर वह अर्जुन की बात अपनी घरवालों को बता देते थे आवर उनकी माँ बाप अर्जुन की माँ को बता देते थे

आज आँचल बहुत खुश थी आवर दूकान पर सभी को मिठाइयां बाँट रही थी

क्यू के आँचल ने जब सुबह 10 बाजे दूकान खोली की तभी दूकान पर एक टीचर मेडम आ गयी साड़ी लेने के लिए आवर उनहोंने ने hi बताया की अर्जुन 10 मैं अच्छे नंबर से पास हो गया है जो आँचल बहुत खुश होती है आवर उसी वक़्त मिठाई की पूजा करवा कर दूकान पर बाटने लगती है

मगर आँचल अर्जुन पर थोड़ी गुस्सा भी हो गयी थी क्यू के अर्जुन का रिजल्ट कल hi आ गया था मगर अर्जुन ने आँचल को नहीं बताया था

सासु माँ सासु माँ अर्जुन कहा है आँचल जब अर्जुन के रूम मैं जाकर देखती है तो अर्जुन रूम मैं नहीं होता है तो आँचल अपनी सा से पूछती है

आँचल अर्जुन रात भर घर पर था hi कब जो तू पूछ रही है आँचल की सास कहती है

सासु माँ आप क्या बोल रही है मैं खुद अर्जुन को देखि थी अपने रूम मैं सोते हुआ तब मैं अपने रूम मैं जाकर सोई थी आवर आप बोल रही है अर्जुन घर पर नहीं था आप का दिमाग काम नहीं कर रहा है अब आँचल कहती है

अर्जुन तेरे सोने के बाद गया था आवर मुझे बता कर गया था तुझे नहीं बताया की तू रात को जाने नहीं देगी मैंने भी उसे बहुत मन किया मगर मेरी बात नहीं मन आवर मुझसे पैसे लेकर चला गया ..... आँचल की सासु माँ कहती है

आवर आप ने जाने hi क्यू दिया उसे मैं मुझे बता नहीं सकती थी आप ...... मैं जानती हुईं कहा गया होगा आने दीजिये .....मैं आज उसे नहीं छोड़ने वाली हुईं जैसे जैसे बड़ा जो रहा है मुझे परेशां मर रहा है आँचल बुदबुदाती हुई किचेन मैं चली जाती

आँचल क्या तुमने अर्जुन की माँ को भी बताया की नहीं अर्जुन के बारे मैं आँचल की सास किचेन मैं आते हुआ बोलती है

है सासु माँ मैंने दीदी को बता दिया है वह भी बहुत खुश थी वह भी शाम तक यह आने के लिए बोल रही थी आँचल कहती है

बस इस बार का मेरी बेटी से ठीक से बात करले अर्जुन पता नहीं कब ख़तम होगी इन दोनों माँ बीटा का झगड़ा अर्जुन की नानी कहती है
 
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अर्जुन एक होटल के रूम मैं सिर्फ एक अंदर बियर मैं सोया होता है बाकि उसके कपडे भी इधर उधर पड़े होते है जो अर्जुन अचानक hi उठ जाता है आवर सबसे पहले अर्जुन फ़ोन को देखता है जो उसकी ममी माँ की बहुत सरे मिस कॉल होते है फिर अन्जु की नज़र फ़ोन मैं टाइम पर जाती है टाइम देख कर अर्जुन बहुत hi जयादा दर जाता है

ओह साला बहुत लेट हो गया है माँ बहुत प्रशन्न होगी आज मैं सोचा था सुबह hi माँ को अपने रिजल्ट के बारे मैं भी बता दूंगा पहले hi घर पहुँच कर मगर साला अभी दिन के 1 बजने वाले है अर्जुन अपने कपडे पहनते hi रूम से निकल जाता है

क्या हुआ भाई कपडे तो ठीक से पहन ले एक लड़का बोलता है जो अर्जुन उस लड़के को गुस्से मैं घर कर होटल रूम से चला जाता है

बीटा पक्का तेरी लगने वाली है उसने तुझे कई बार बोलै था मुझे मत पीला मगर तुमने उसे ज़िद्द कर के पीला दिया आवर फिर अर्जुन भी पिटे चला गया आवर इतने देर तक वह यह पे सोता रहा अर्जुन कई बार बता चूका है वह अपनी ममी से बहुत प्यार करता है आवर वह अपनी ममी को कभी परेशान नहीं करना चाहता है लेकिन आज तेरी वजह से उसकी ममी ज़रूर परेशान होंगी जो अर्जुन इस तरह गया है बेटे पक्का तुझे अर्जुन नहीं छोड़ेगा ..... उस लड़के के साथ वाला दूसरे लड़का कहता है .......तो वह लड़का जो अभी हस्स रहा होता है उसकी हसी गायब हो जाती है

सेल तू है मत नहीं तो मैं अभी तेरी गांड मर लूंगा अब मुझे कुछ दिनों के लिए कही चला जाना चाहिए साला अर्जुन बहुत बड़ा पागल है लड़का बोलता है ....... जो दूसरा लड़का फिर से हसने लगता है

अर्जुन बाइक को बहुत तेज़ी मैं चला के घर को पहुंचता है आवर फिर धीरे धीरे अपने मैं जाने के लिए होता है के अर्जुन को अपनी ममी पे नज़र पद जाता है ...... जो अभी अपनी रूम मैं फ़ोन पर किसी से बात कर रही होती .... आवर उनकी मुंह आगे की तरफ होती है जो अर्जुन को वह नहीं देख पति है मगर अर्जुन अपनी माँ को देख लेता है दरवाज़ा खुला हुआ होता है तो ........अर्जुन को एहि वक़्त सही लगता है अपनी माँ से सॉरी बोलने का ...... जो अर्जुन भी धीरे धीरे से अपनी माँ के पास जाकर पीछे से अपनी ममी माँ को पकड़ने hi बोलै होता है की अपनी ममी माँ की आवाज़ सुन कर वही पर रुक जाता है तब तक अर्जुन का हाँथ उसकी ममी माँ के कमर पर टाच हो जाता है

छोटे हम घर पहुंचा गए है अभी अर्जुन घर पर नहीं है तू वह का धयान रखना हम 1 से 2 दिन के बाद आ जाउंगी एहि आवाज़ अर्जुन को सुनाई देती है .... आवर वह आवाज़ को अर्जुन अच्छी तरह से पहचानता था क्यू की वह आवाज़ उसकी ममी माँ की नहीं खुद की माँ की होती है

वही राखी देवी को जैसे hi अपनी कमर पे हाँथ की अहसास होती राखी देवी पलट जाती है आवर अपने बेटे को सामने देख कर ख़ुशी से अर्जुन पकड़ने को होती है के अर्जुन पीछे की तरफ हैट जाता है आवर फिर जल्दी से रूम से निकल जाता है

अर्जुन को बहुत गुस्सा आता है अपनी माँ को यह देख कर जो अर्जुन गुस्से मैं अपने रूम मैं चला जाता है अर्जुन जब रूम मैं जाता है तो देखता है दो लड़की अर्जुन के बीएड पर लेती हुईं है आवर दोनों लड़की को देख कर अर्जुन को बहुत hi ख़ुशी होती है आवर अर्जुन के चहरे पर जो अपनी माँ के लिए गुस्सा होती है वह उसी वक़्त चली जाती है

दीदी .... अर्जुन बोलते हुआ जाकर अपनी दोनों दीदी के बिच मैं लेट जाता है

गीता आवर अंजलि अपने भाई को देख के बहुत खुश होती है आवर दोनों बहाने अर्जुन को एक एक गाल पर चूमने लगती है गीता आवर अंजलि काफी वक़्त तक अर्जुन को चूमते hi रहती है जो अर्जुन परेशां होकर दोनों के बिच से निकल जाता है

दीदी आप दोनों बहुत गन्दी है एक तो इतने दिन के बाद आती है आवर फिर मुझे चूमने लगती है बात तो करती hi नहीं है कभी ठीक से अर्जुन अपने गाल को पोछते हुआ कहता है जो दोनों बहन के चूमने से गिला हो गया होता है

अर्जुन की बात सुन दोनों बहन है देती है

है तो इतने दिन के बाद आती है तभी तो हम वह सरे दिन की चुम्मी एक hi बार मैं अपने मुन्ने को देकर खुश करती है गीता मुस्कुरा कर कहती है आवर फिर अर्जुन को पकड़ कर बीएड पर सुला देती है

अर्जुन जैसे hi बीएड पर गिरता है अंजलि फिर से अर्जुन को चूमने लगती है जो अर्जुन हस्ते हुआ अंकल को दूर करता है

अब अर्जुन अपनी दोनों बहन के बिच मैं होता है आवर गीता आवर अंजलि दोनों किनारे होती है दोनों बहन की एक एक साइड की चुकी अर्जुन के आँखों के सामने होती है वही गीता आवर अंजलि अपनी भाई के सर पे ऊँगली चला रही होती है

दीदी इस बार आप लोग फिर जल्दी तो नहीं चली जाएँगी मुझे आप दोनों की बहुत याद आती है अर्जुन गीता का हाँथ को पकड़ कर कहता है

अर्जुन की बात को सुन कर दोनों बहन थोड़ी उदास हो जाती है आवर अर्जुन को क्या जवाब दे सोचने लगती है दोनों को पता होता है माँ यह जयादा दिन नहीं रुकेंगी आवर हम दोनों को भी नहीं रुकने देंगी क्यू की वह कभी नहीं चाहेंगी की हम्हारी पढाई छूटे

इस बार मैंने माँ से बोल दिया है हम दोनों अपने मुन्ने के पास इतना बोल कर hi अंजलि चुप हो जाती है

बोलो न दीदी क्या बोली उस गन्दी औरत से आवर उसे क्यू साथ लेकर आई आप दोनों अर्जुन अपनी माँ को सुन कर hi गुस्सा हो जाता है

मुन्ना आएसा नहीं बोलते वह हम्हारी माँ है आवर तुमेह भी बहुत प्यार करती है माँ हर वक़्त सिर्फ तुम्हारी hi बात भी करती रहती है अंजलि थोड़ी नाराजगी से बोलती है

दीदी वह औरत कभी मुझे प्यार नहीं करती है आप दोनों देखती नहीं थी हर वक़्त सिर्फ मुझे मरती रहती थी अगर वह मुझे प्यार करती तो मुझे हॉस्टल मैं नहीं भेजती आवर वह मेरी माँ नहीं है अर्जुन बोलते हुआ बीएड से उतर कर रूम से चला जाता है अंजलि अर्जुन को पकड़ने की कोसिस करती है मगर अर्जुन घर से बहार निकल जाता है

वही दोनों बहनो की आँखे नाम हो जाती है अंजलि गीता से जाकर लिपट जाती है

दीदी मुझे मांफ कर दीजिये मुझे अर्जुन के सामने माँ की नाम नहीं लेनी चाहिए थी दीदी अर्जुन आखिर माँ से इतनी नफरत क्यू करता है ......माँ ने जो भी किया अर्जुन के लिए hi तो किया ....अर्जुन घर पर ठीक से पढाई भी नहीं करता था हर वक़्त नदी मैं नहाने के लिए अपने दोस्तों के साथ दिन भर के लिए भाग जाता था .....आवर आज देखिये अर्जुन यह पढ़ कर कितना अच्छा नंबर लाया है .... दीदी अगर अर्जुन माँ से इस लिए गुस्सा है की माँ उसे मरती थी तो ये अर्जुन सही नहीं कर रहा है माँ कितनी रोटी रहती है अर्जुन के लिए ..... दीदी माँ तो हम दोनों को भी मरती थी मगर हम दोनों कभी माँ से गुस्सा नहीं हुई क्यू की माँ जब भी मरती थी उस वक़्त हम्हारी गलती होती थी अंजलि रोटी हुई कहती है

तुम सही कह रही है छोटी माँ हम दोनों को भी मरती थी मगर माँ अर्जुन को कुछ जयादा hi गुस्से मैं मरती थी जैसे माँ अर्जुन पर किसी आवर बात की गुस्सा निकल रही है ...... मैंने कई बार माँ आवर अर्जुन से पूछा भी था मगर दोनों मैं से किसी ने कुछ नहीं बताया गीता कहती है

वही राखी देवी अभी रूम मैं मायुश होकर बैठी हुई थी ....तभी आँचल रूम मैं आ जाती है आवर अपनी नन्द को देख कर समझ जाती है अर्जुन सायद घर आ गया है

दीदी क्या आज भी अर्जुन आप से बात नहीं किया आँचल कहती है ...जो राखी देवी अपनी सर न मैं हिला देती है

दीदी वक़्त आ गया है अर्जुन को साडी बात बता देनी चाहिए अब आवर कितने दिन अपने बेटे की नफरत का घुट पीती रहेंगी अब तो मुझे भी नहीं देखा जाता है ..... दीदी आप से एक गलती तो हुई है अर्जुन को अपने से अलग नहीं करनी चाहिए थी आँचल कहती है

तो आँचल तुहि बता की मैं क्या करती अपनी काली करतूत हर दिन अर्जुन को देखने देती वह अभी बच्चा था उसके छोटे दिमाग पर कैसा असर होता मैं नहीं चाहती थी मेरे आवर छोटे के बारे मैं किसी को कुछ पता चले ....

मगर पता नहीं कैसे अर्जुन ने हम दोनों को देख लिया था उस दिन आवर मैंने अर्जुन को इस लिए मरने लगी के वह स्कूल क्यू नहीं गया वह कई दिन से स्कूल न जाकर नदी की तरफ नहाने चला जाता था उस दिन भी मुझे लगा वह नदी जाने के लिए hi उस रूम मैं आया है क्यू के उसी रूम मैं उसके कुछ कपडे मैं रखती थी .....

मैं इस लिए अर्जुन आवर गीता अनजलि को पहले स्कूल मैं जाने के बाद वह सब करती थी ... आवर किस्मत देख जिस दिन मैं छोटे के साथ होती उसी दिन अर्जुन भी हम दोनों को आकर देख लेता था ....

मैं उसे इस लिए नहीं मरती थी के उसने हम दोनों भाई बहन को देख लिया है मैं इस लिए मरती थी की वह स्कूल मैं जाकर पढाई नहीं करता था ......तब मैंने सोची हॉस्टल मैं रहेगा तो अच्छे से पढाई पर धयान देगा आवर बचपन की साडी बाटे भी भूल जायेगा मगर सब उल्टा हो गया वह मुझसे नफरत करने लगा ...... आँचल तुम जानती हो वह सब मैं अपनी मस्ती के लिए नहीं कर रही थी वह मेरी मज़बूरी थी जिसमे मेरे छोटे भाई ने मेरा साथ दिया ..... आँचल अभी मैं नहीं चाहती अर्जुन को कुछ पता चले मुझे पूरा यकीन हुईं अर्जुन की गुस्से की असली वजह वही है मगर अब मैं चाहती हुईं अर्जुन ये बात खुद आकर मुझसे पूछे मैं उससे सब कुछ बता दूंगी मगर वह मुझे देखता भी नहीं है .. आँचल क्या मैं इतनी बुरी हुईं राखी बोल कर सिसकने लगती है

दीदी मैं सब कुछ जानती हुईं आप बहुत अच्छी है आवर वह भी बहुत अच्छे है इस लिए तो मैं उनेह अभी तक तलाक नहीं दिया ...... दीदी आप चिंता न कीजिये मैं को अर्जुन कुछ नहीं बताने वाली हुईं मुझे यकीन है एक दिन अर्जुन ज़रूर आप से बात करेगा आँचल कहती है

आँचल मैं अर्जुन को अपने साथ गाँव लेकर जाना चाहती हुईं क्या तू अर्जुन को गाँव जाने के लिए मन सकती है भले hi वह मुझसे नफरत करेगा मगर मैं चाहती हुईं वह मेरे नज़रों के सामने रहे राखी आँचल के सामने हाँथ जुड़ती हुई कहती है

दीदी आप हाँथ जुड़ कर मुझे शर्मिंदा न करे मैं आप आवर गेता अंजलि बेटी की ख़ुशी के लिए मैं अर्जुन को गाँव जाने के लिए मनाऊंगी आँचल राखी की आंसू पोछते हुआ कहती है
 
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अर्जुन गुस्से मैं घर से निकल कर पहले एक दूकान पे जाता है आवर दूकान से सिगरेट की पैकेट लेकर एक पार्क मैं जाकर बैठ जाता है आवर फिर एक सिगरेट निकल कर जलने hi वाला होता है तभी अर्जुन के गाल पर एक तप्पड़ पर जाता है जो अर्जुन थोड़ा दूसरी तरह गिरने लगता है मगर खुद को संभल कर खड़ा होकर सामने वाले मरने hi वाला होता है मगर फिर रुक जाता है मगर सामने लड़की को देख कर अपना हाँथ रोक लेता है

पागल है क्या जा भाग यह से ... अर्जुन कहता है

अर्जुन लड़की की बिना चेहरा देखे hi फिर वह बैठ कर दूसरा सिगरेट निकल कर जलने लगता है

वही लड़की जब देखती है कुछ देर तक तप्पड़ नहीं पड़ा तो वह फिर से खड़ा हो जाती है जो तप्पड़ पढ़ने की सोच कर अपने गाल पर हाँथ रख कर बैठी होती है

मैं क्यू जाओ यह से तुम जाओ अभी ठीक से मूंछे भी नहीं आई आवर सिगरेट पिने लगे हो .... लड़की कहती है

तो तेरे बाप का क्या जाता है तेरा बाप मुझे थोड़ी अपना दामाद बनाने वाला है जो तू मुझे मन करने के लिए यह आ गयी है ..... अर्जुन सिगरेट का फुक मरते हुआ कहता है

अगर मेरे पापा तुमेह अपना दामाद बना लेंगे तो तुम ये सिगरेट पीना छोड़ डोज अगर तुम रही हो तो मैं अपना पापा से बात कर लुंगी वैसे अभी मेरी शादी की उम्र नहीं हुई है मगर मैं अपने पापा से बोल दूंगी मैं इसी लड़के से शादी करुँगी अब बोलो क्या कहते हो .... लड़की अर्जुन के पास बैठ कर बोलती है

अर्जुन अभी फुक मर hi रहा होता है की लड़की की बात सुन कर अर्जुन खस्ने लगता है ये क्या बोल रही है

देखा मैं इस लिए hi बोल रही थी सिगरेट मत पिया करो अभी बहुत वक़्त है सिगरेट पिने का अगर तुम मुझसे शादी करने पे सिगरेट छोड़ डोज तो मैं तुमसे शादी करने के लिए भी तैयार हुईं वैसे मेरा नाम आस्था है .... आवर तुम्हारा नाम क्या है

अर्जुन अभी खास hi रहा होता है की लड़की फिर से बोल पड़ती है

ठीक है अभी तुम अपना नाम मत बताओ अभी मुझे जाना भी होगा लेकिन फिर से हम मिलेंगे तो तुम मुझे अपना नाम ज़रूर बताना तुमसे शादी जो करनी है मुझे लड़की बोलती है आवर अर्जुन के हाँथ से सिगरेट फेक कर भाग जाती है

अर्जुन बस उस लड़की को भागते हुआ देखता रह जाता है

साला ये क्या था कही वह सच मैं पागल तो नहीं थी मुझे कुछ बोले बिना वह इतना कुछ बोल कर चली गयी ऊपर से दो सिगरेट भी बर्बाद कर दिया हे उपरवाले फिर से दोबारा न मिलवाना इस पागल से ..... लड़की को भागते हुआ देख कर मन मैं सोचता है

अर्जुन फिर से एक सिगरेट निकल कर जलाता है फिर पिने लगता है .. अर्जुन कुछ देर तक पार्क मैं बैठा रहता है ... फिर अर्जुन को अपनी अंजलि दीदी की याद आती है तो अर्जुन थोड़ा मायूस हो जाता है सोच कर के अपनी माँ का गुस्सा अपनी प्यारी अंजलि दीदी पर उतर दिया है तो अर्जुन को बहुत दुःख होता है मुझे अंजलि दीदी से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी दीदी मुझे कितना प्यार करती है मैं दीदी को सॉरी बोल दूंगा आखिर दीदी की क्या गलती है जो वह घर पर देखती होंगी वही तो बोल रही रही थी .... क्या वह गन्दी औरत मेरे बारे मैं सोच कर सच मैं रोटी होगी मुझे तो नहीं लगता है सायद दोनों दीदी के सामने रोने की नाटक करती होगी आवर फिर अपने भाई के साथ छी अर्जुन सोच कर आगे कुछ नहीं बोलता है ... कुछ देर के बाद अर्जुन फिर घर के लिए निकल जाता है .... अर्जुन जब घर जाता है तो देखता है हॉल मैं hi उसकी दोनों दीदी बैठ कर टीवी देख रही होती है आवर साथ मैं नानी भी होती है अर्जुन जब अपनी अंजलि दीदी को देखता है तो पता है उसकी अंजलि दीदी का चेहरा थोड़ा उतरा हुआ है मगर अर्जुन कुछ बोलता नहीं है आवर अपने रूम की तरफ चला जाता है ...... वही अर्जुन को कुछ न बोलते देख कर अंजलि थोड़ी आवर उदास हो जाती है आवर अपनी गीता दीदी को देखने लगती है तो गीता उसके गाल पर हाँथ फेर कर मायूस न होने को बोलती है

अर्जुन अपने रूम मैं फ़ोन चला रहा होता है की उसकी ममी माँ रूम मैं आ जाती है अर्जुन की नज़र जब अपनी ममी माँ के चेहरे पर पड़ता है तो अर्जुन थोड़ा सा मायूस हो जाता है

माँ प्लीज इस बार मांफ कर दीजिये मुझे मैं सुबह hi आप को बताने वाला था लेकिन मुझे आने मैं hi देरी हो गयी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये मैं तो आप का प्यारा बीटा हुईं अर्जुन आँचल के गाल को पकड़ कर थोड़ा दुखी होकर कहता है

अर्जुन के चेहरे पर मायूसी देख कर आँचल मुस्कुरा पड़ती है

ठीक है मैं तुझे मांग कर दूंगी मगर तुमेह भी आज अपनी माँ की बात माननी होगी नहीं तो मैं नाराज़ हो जाउंगी आँचल भी अर्जुन के गाल को पकड़ कर कहती है

ओह आप ने मांफ कर दिया एहि बहुत है... मैं फिर से आप को नाराज़ नहीं करूँगा बोलिये क्या करना है .... अर्जुन अपनी से कहता है

आज सब के साथ खाना खाना होगा तुझे नहीं तो मैं सच मैं नाराज़ हो जाउंगी क्या अपनी माँ के लिए इतना करेगा मेरा बीटा ..... आँचल थोड़ी उदासी से कहती है ....क्यू के आँचल को पता होता है अर्जुन कभी अपने माँ के साथ बैठ कर खाना नहीं खाना चाहेगा ... क्यू के पहले भी अर्जुन आएसा hi करता था अपनी माँ के आने के बाद तो आज आँचल साथ खाने को बोली

अपनी ममी माँ की चेहरे पे उदासी देख कर अर्जुन को भी अच्छा नहीं लगा कुछ देर तो चुप रहा फिर अपनी ममी माँ के गलों पर किश कर के ठीक है बोल दिया

ओह ओह मेरा राजा बीटा तुम्हारी हां से आज मैं बहुत खुश हुईं आँचल कहते हुआ अर्जुन को साइन से लगा ली अर्जुन को अपनी ममी माँ की अचानक hi चुकी का अहसास होने लगता है अपने साइन पर जो अर्जुन का छोटा अर्जुन भी जागने लगता है तो अर्जुन जल्दी से अपनी ममी माँ से अलग हो जाता है .... फिर आँचल जल्दी आने को बोल कर ख़ुशी मैं चली जाती है

साला ये क्या हो रहा अगर माँ को पता चल जाता तो वह कितनी नाराज़ होती मुझसे अर्जुन अपना लैंड को ठीक करते हुआ सोचता है फिर बाथरूम मैं चला जाता है ..... अर्जुन बाथरूम से निकल कर फिर खाना खाने के लिए चला जाता है आवर अपनी अंजलि दीदी के पास बैठ जाता है तभी अंजलि अर्जुन को देखती है तो अर्जुन अपनी दीदी को एक मुस्कान दे देता है जिससे अंजलि खुश हो जाती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेर देती है ...वही गीता भी खुश हो जाती है कुछ hi देर मैं आँचल आवर राखी देवी खाना लगा देती है जब राखी देवी अर्जुन को टेबल पर देखती है तो थोड़ी खुश हो जाती है .... फिर सभी खाना खाने लगते है ... खाना कहते हुआ अर्जुन को नज़र अपनी माँ पर पड़ती है जो खाना न कहते हुआ कुछ सोच रही होती है .... कितनी मासूम लग रही है ये औरत कोई भी देख कर एहि सोचेगा कितनी सरीफ है मगर अपने hi भाई के साथ मुंह कला करने के लिए अपने बेटे को दूर भेज दिया ... अर्जुन मन मैं सोचता है फिर खाने लगता है अर्जुन जल्द hi खाना खा कर उठ कर अपने रूम मैं चला जाता है

अर्जुन बीएड पर लेता हुआ रहता है की अंजलि आकर बीएड पर लेट जाती है आवर अर्जुन को सोते हुआ hi पकड़ लेती है आवर अर्जुन को किश करने लगती है गलों पर जो अर्जुन अपनी दीदी को खुश देख कर अर्जुन भी खुश हो जाता है

ओह्ह मेरा राजा भाई मुझसे नाराज़ नहीं है मैं बहुत hi खुश हुईं ......मुझे तो लगा था माँ की तरह मुझसे भी नाराज़ हो गया है ये सोच कर तो मुझे रोना आ रहा था अंजलि अर्जुन के सर सहलाते हुआ बोलती है

दीदी मैं आप से क्यू नाराज़ आवर गुस्सा होने लगा आप तो मेरी सबसे नटखट दीदी हो ... दीदी मुझे मांफ कर दीजिये जो मेरी वजह से आप दुखी हो गयी .... अर्जुन अंजलि के सामने कान पकड़ कर कहता है

तो अंजलि की आँखे भर आती है अपने लिए अर्जुन का प्यार देख कर आवर अंजलि खुश मैं अर्जुन के गाल को चूमने के लिए होती है के अर्जुन मुंह घुमा लेता है

दीदी आवर नहीं दीदी आवर नहीं अर्जुन कहने लगता है मगर अंजलि नहीं मानती है आवर जबरजस्ती अर्जुन को किश करने लगती है ......तभी अर्जुन की आँखे बड़ी हो जाती है

वही अंजलि का तो बहुत बुरा हल हो जाता है आवर अंजलि तो उसी वक़्त रूम से भाग जाती है सॉरी सॉरी कहते है

क्या दीदी ने ये जान भुज कर किया ... कितनी गन्दी हो गयी है दीदी भी ... नहीं नहीं दीदी तो मेरे गाल पर किश कर रही थी वह तो सायद गाल पर करने के चक्कर मैं मेरे होठों पर कर दिया मैं भी तो इतना हिल रहा था ...इस लिए तो दीदी शर्मा कर भाग गयी है वह गलती से लग गया होगा मेरी अंजलि दीदी बहुत अच्छी है .... अर्जुन मन मैं सोचता है

क्यू के अर्जुन के गाल पर किश करने के चक्कर मैं अंजलि ने अर्जुन के होठो पर होंठ रख दिए था मगर जल्द hi हटा भी लिए

वही अंजलि को बहुत शर्म आती रही होती है आवर सोच रही होती है किऐसे उसने अपने hi भाई के होंठ पर किश कर दिया क्या सोच रहा होगा वह मेरे बारे मैं .... मेरा भाई बहुत समझदार है वह मुझे गलत नहीं समझेगा क्या हो गया उसके होंठों पर किश कर दिया तो वह जब छोटा था तो मैंने कई बार किश किया है होंठों पर दीदी भी तो करती थी अंजलि सोचती हुई रूम तक पहुँच जाती है

क्या हुआ अंजलि क्या सोच रही है चल अब जा सो जा अंजलि अभी यादों मैं खोई हुई होती है के राखी देवी बोल पड़ती है अपनी माँ की आवाज़ सुन कर अंजलि जल्दी से जाकर बीएड पर लेट जाती है
 
थैंक्स भाई

इतने सल्ल मैं कभी तो गीता या अंजलि को अपनी माँ आवर मां को एक साथ रूम मैं देखि होगी मगर सायद उस हालत मैं नहीं देखि होगी की उनेह अपनी माँ पर साख होइ

सायद आँचल सब जानते हुआ भी पूछ कर अर्जुन को दुखी न करना चाहती हो .... आवर वही हाल सायद अर्जुन का भी हो अर्जुन ये सोच कर न बता रहा हो वह सब जानने के बाद उसकी ममी माँ पर क्या बीतेगी

दोनों सायद एक दूसरे को दुखी न करना चाहते हो

आगे देखते है भाई क्या होता है
 
उपडेट __ 6

हे भगवन मार गयी रे एक औरत चीख पड़ती है !जो अभी अपने घर के बहार गार्डन मैं बैठ कर कॉफ़ी पि रही होती है तभी उसे पीछे से एक लड़की टकरा जाती है आवर वह औरत कुर्शी से निचे गिर जाती है

ओहोह सॉरी सॉरी दादी आप को छोट तो नहीं लगी न ..... लड़की अपनी दादी से कहती है

तू तो मुझे कही भी चैन से नहीं रहने देगी पता नहीं तू कैसे मेरे hi घर पे आ गयी है मैं तो एक नाती चाहती थी मगर तेरी हरकत देख कर तो मैं अब नाती को भी भूल गयी हुई अह्ह्ह्हह मेरी कमर .... लड़की की दादी उठती हुई बोलती है

हां तो दादी अपने बेटे से बोल दीजिये न की मुझे एक नाती भी चाहिए मुझे क्यू बोल रही है मुझे भी तो एक प्यारा भाई की बहुत ज़रूरत है ..... आवर दादी आप बिच मैं बैठ कर क्या कर रही थी वह किनारे नहीं बैठ सकती थी क्या .. अब मुझे hi आप को रूम तक लेकर जाना पड़ेगा ..... लड़की मुंह बना कर कहती है

लड़की की बात सुन कर उसकी दादी अपना सर पिट लेती है

तू पागल है या पागल की तरह नाटक करती है यर मुझे भी समझ नहीं आती ...इतनी बड़ी हो गयी है मगर बाटे अभी भी बच्चों जैसी करती है .... जा मेरे लिए एक कॉफ़ी लेकर आ मुझे अभी रूम मैं नहीं जाना है .... लड़की की दादी कहती है

मैं अभी कॉफ़ी ोफ्फी नहीं लेन वाली हुईं मुझे अभी दौड़ने जाना है ... लड़की कहती है

तभी उस लड़की की दादी अपनी एक उंगली आगे कर देती है .. ठीक है फिर चल आज से हम्हारी दोस्ती भी ख़तम चल कटती कर लेते है ...... लड़की की दादी कहती है ऊँगली देखते हुआ

ये क्या बात हुई बुद्धि दीदी आप बहुत चालक हो हर टाइम आयी hi करती है चलो दोस्ती ख़तम कर लेते है मैं भी दोस्ती नहीं तोड़ने वाली समझी मैं अभी कॉफ़ी लेकर आती हुईं ......... लड़की थोड़ी गुस्से मैं बोल कर घर मैं चली जाती है ...... वही लड़की की दादी मुस्कुराने लगती है

आस्था बीटा ज़रा मेरे लिए एक कॉफ़ी लेकर आना मुझे अभी खेतों की तरफ जाना है प्लीज बीटा ज़रा जल्दी से लाना .... जब लड़की घर मैं जाती है तो उसके पापा कहते है

मैं आप दोनों माँ बेटे की नौकर नहीं हुईं ...... मैं तो कॉफ़ी नहीं लेन वाली ....मैं मां को बोल देती हुईं .... आस्था कहती हुईं किचेन मैं चली जाती है

वही आस्था के बोल कर जाते hi उसके पापा बस मुस्कुराने लगते है ..... लगता है आज भी माँ ने दोस्ती तोड़ने की धमकी दी होगी तभी आस्था इतनी गुस्से मैं है ... आस्था के पापा मन मैं कहते है

मां एक कॉफ़ी दीजिये जल्दी से मुझे लेट हो रही है ....... आस्था अपनी माँ से कहती है

आस्था की माँ भी जल्दी से एक कॉफ़ी आस्था को देती है आवर आष्टा कॉफ़ी लेकर जाते हुआ अपने पापा को देखती है जो मुस्कुरा रहे होते

देखो कैसे हस्स रहे है ये दोनों माँ बेटे तो मुझे सिर्फ परेशान कर के रख दिया है ....आष्टा मन मैं कहती है आवर अपने पापा को हुईं कर के चली जाती है ..... जो आस्था के पापा फिर से मुस्कुरा पड़ती है

ये लो अपनी कॉफ़ी फिर से दोस्ती तोड़ने के लिए आप बोली तो देख लाना दादी मैं आप की टंगे तोड़ दूंगी ...... आशा कहती हुई वह से चली जाती है

पता नहीं क्या होगा इस लड़की की बिलकुल एक बच्चे की तरह करती रहती है ...... मगर बहुत hi प्यारी है मेरी आष्टा .... दीदी मुस्कुराते हुआ सोचती है फिर अपनी कॉफ़ी पिने लगती है

विजय सिंह .... आस्था के पापा इनकी गाँव मैं बहुत से ज़मीन जायदाद है आवर विजय सिंह ने अपने गाँव के पास मैं एक बहुत बड़ा सोल्लगे भी बनवा दिए है ताकि उसमे गाँव के गरीब लोग के बच्चे भी पढ़ सके विजय सिंह दिल के बहुत अच्छे है घर मैं सभी से प्यार करते है इनकी बस एक hi बेटी है आष्टा विजय सिंह आवर बच्चे तो चाहते थे मगर एक हादसे मैं विजय सिंह को इतनी बड़ी छोट लगी के इनका लैंड hi ठीक से काम करना बंद कर दिया जो इनका आवर बच्चे का सपना अधूरा रह गया मगर विजय सिंह आष्टा मैं hi अपने बीटा का सपना देख लेते है

राधा देवी .... आस्था की माँ बहुत अच्छी है आवर बहुत खूबसूरत भी अपने पति आवर बेटी से बहुत प्यार करती है आवर घर भी अपना अच्छे से संभल लेती है

आष्टा .... अभी 18 सल्ल की हो चुकी है ... विजय आवर राधा की बेटी

बिंधा देवी .... आस्था की दादी बिंधा देवी के पति बहुत सल्ल पहले hi गुजर चुके थे अपने बेटी को बिंधा देवी ने अकेले hi बड़ा की बिंधा देवी के पास हर चीज थी तो उनको कोई परेशानी नहीं हुई अपने बेटो को पलने मैं

विक्रम सिंह ..... आस्था के चाचा ये अपने भाई से बिलकुल अलग है ये अमेरिका मैं रहता है अपने पत्नी आवर एक बेटी के साथ इसे बस किसी औरत की मज़बूरी का पता चल जाये तो उसकी हेल्प कर के उस औरत के साथ राते बिता लेता है

सोभा देवी ..... आस्था की चची

पूजा ..... विक्रम आवर सोभा की बेटी आवर आस्था की छोटी बहन .... पूजा आष्टा से कुछ दिन की छोटी है ... आवर अपनी बहन की तरह खूबसूरत है आवर अपनी बहन की हर बात मानती है

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अर्जुन सुबह उठ कर पहले बाथरूम मैं जाता है है जब अर्जुन बाथरूम से फ्रेश होकर निकलता है तो सामने अपनी ममी माँ को देखता है जो अर्जुन के लिए कॉफ़ी लेकर आई हुई होती है अर्जुन अपनी ममी माँ को गुड मॉर्निंग बोलते हुआ गलो पर किस कर देता है ..... वही आँचल भी अर्जुन के माथा चुम लेती है

अर्जुन बीटा प्लीज आज तुम ज़रा दूकान खोल दे आज वह दोनों नहीं आने वाली है आवर आज कल दूकान पर बहुत hi भीड़ होने लगी है लगन की वजह से सुबह सुबह hi कई साडी औरतें आ जाती है कुछ बिक्री हो जाएगी ...... आँचल कहती है

ठीक है माँ आप चाभी दे दीजिये मैं दूकान खोल देता हुईं ...... अर्जुन कहता है तो आँचल अपनी कमर से चाभी निकल कर अर्जुन को दे देती है

अर्जुन कॉफ़ी पीकर कर थोड़ी देर मैं दूकान खोलने के लिए चला जाता है

अंजलि बेटी चल अब उठ जा देख कब की सुबह हो गयी है आवर तू अभी तक सो रही है ...... आँचल कहती है

अपनी ममी की आवाज़ सुन कर अंजलि अंगड़ाई लेते हुआ उठ जाती है

तभी आँचल की नज़र अंजलि के जिस्म पर पड़ती है जो अंजलि की छोटे कपडे पहने ने उसकी सलवार ऊपर की तरफ उठ गए होते है आवर अंजलि की ब्रा मैं चुकी उभर कर दिख रही होती है

इतनी बड़ी हो गयी है फिर भी तुझे सोना नहीं आता है सोते हुआ क्या कपडे को निकलती है आवर इतने छोटे कपडे किसने कहा तुझे पहने को मुझसे मांग नहीं सकती थी क्या .... आँचल अंजलि के सर पर मरते हुआ कहती है

ओह सॉरी सॉरी ममी गलती से हो गयी होगी ..... ममी एहि कपडा रूम मैं था तो एहि पहन लिया था... मैंने सोची रात मैं मेरी प्यारी ममी परेशां हो जाएँगी .. वैसे ममी आप को कुछ कुछ हो तो नहीं रहा मेरी जवान जिस्म को देख कर ... अंजलि मुस्कुरा कर कहती हुई बाथरूम मैं भाग जाती है

रुक तुझे मैं अभी बताती हुई मुझे क्या हो रही है पागल लड़की ..... आँचल पीछे जाते हुआ कहती है तब तक अंजलि गेट बंद कर देती है

ये लड़की कभी नहीं बदलने वाली है मुझे अकेली पाई की नहीं मस्ती करने लगती है .... आँचल मुस्कुराते हुआ सोचती है

अंजलि बेटी तुम जल्दी से फ्रेश होकर आ मैं नाश्ता लगा रही हुईं आँचल बोल कर रूम से निकल जाती है

दो पहर का वक़्त होता है जो अभी दूकान पे राखी देवी बैठी होती है

वही थोड़ी दुरी पर एक पान की दूकान पे दो लड़के बैठे हुआ होते है

यार वह देख आज गजब की सेक्सी आंटी बैठी हुई है उस दूकान पे यार दूर से hi देख कर मेरे लैंड मैं हलचल होने लगा है चल न थोड़ी मस्ती करते है आंटी के साथ आवर मक्का मिला तो आंटी को अपना नंबर भी दे देंगे अगर आंटी की बस नंगी देखने को भी मिल जाये तो मज़ा आया जायेगा .... उनमे से एक कहता है

सेल जा तुझे मरना है तो वह अर्जुन का दूकान है अगर उसे पता चला तो घर आकर हम दोनों को मरेगा बहुत पागल है वह मुझे तो नहीं जाना है .......दूसरा कहता है

अरे यार तू दर क्यू रहा है अर्जुन को कुछ पता नहीं चलेगा मैं पहले भी दो आंटी से दूकान पर जाकर मस्ती कर चूका हुईं आवर उनकी बड़ी बड़ी चुकी भी कई बार अपनी नज़रों से देख चूका हुईं यार बहुत मज़ा आता है .....लगता है ये मस्त मॉल आंटी नई आई है साला अगर आंटी की चुकी थोड़ा भी दिख जाये तो मेरा लैंड का पानी निकल जायेगा ... वह लड़का कहता है

वही दोनों की बाते पान के दूकान वाला सुन रहा होता है तभी उसे अर्जुन दिखाई देता है जो अपने घर के छत पर सिगरेट पि रहा होता है

तुम दोनों अगर अभी मर नहीं खाना चाहते तो अभी यह से चले जाओ नहीं तो वह यह आया तो पक्का तुम दोनों का चेहरा बिगड़ देगा ...... वह पानवाला कहता है

क्या बोल रहा हो भाई मैं कुछ समझा नहीं .... वही लड़का बोलता है

वह आंटी दूकान पर रहने नहीं आई है वह आंटी अर्जुन की माँ है ये अपना पान लो आवर निकलो यह से समझे ...... पानवाला कहता है

वही जब दोनों सुनते है की वह आंटी अर्जुन की माँ है तो धीरे से पैन लेकर निकल जाते है
 
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अर्जुन सिगरेट पीकर दूकान पे फिर से आ जाता है तो देखता है दूकान कर कुछ जयादा hi औरत आ गयी है आवर उसकी माँ उनेह साड़ी दिखा रही होती है आवर साथ मैं ममी माँ भी होती है ... तो अर्जुन काउंटर पर बैठ जाता है आवर सामान के पैसे लेने लगता है

पास मैं hi थोड़ी दुरी पर राखी देवी भी कड़ी होती है आवर साड़ी दिखा रही होती है

दीदी ज़रा अच्छे वाला ब्रा आवर बनती देखना तो एक औरत कहती है

औरत की बात सुन कर राखी देवी को थोड़ी शर्म आती है आवर राखी देवी अर्जुन की तरफ देखती है जो अर्जुन हिसाब कर रहा होता है

कितने साइज की दिखाना है बहन राखी देवी कहती है

पहले तो 36 की साइज थी मगर अब सायद 38 की साइज हो गयी है औरत अर्जुन की तरफ देखती हुई बोलती है

जब राखी देवी उस औरत की नज़र का पीछा करती है तो पति है वह औरत अर्जुन को घर रही होती है

वही राखी देवी को थोड़ा गुस्सा आता है मगर कुछ कहती नहीं है

दीदी ज़रा जल्दी से दिखा दीजिये न मेरे पति घर पे इंतज़ार कर रहे होंगे औरत बोलती है

कितनी बेशर्म होती है सहर की औरते ब्रा पेंटी भी कितनी आसानी से मांग लेती है िनेह ज़रा भी शर्म नहीं आती है सामने hi मेरा बीटा बैठा है फिर भी इतनी ज़ोर से बोल रही है .. िनेह तो कोई भी फर्क नहीं पद रहा है ... गाँव की औरते तो किसी औरते से भी लेते हुआ धीरे से बोलती है की दूसरा कोई सुन न ले . राखी देवी मन मैं सोचती है

तब तक औरत एक बार फिर से बोल देती है आवर इस बार औरत कुछ जयादा hi ज़ोर से बोलती है जो अर्जुन भी सुन लेता है

ममी माँ देखिये ये आंटी क्या बोल रही है ... अर्जुन अपनी माँ को देखते हुआ कहता है

जो राखी देवी अपने आप मैं hi शर्मा जाती है .. आवर थोड़ी दुखी भी हो जाती है की अर्जुन उससे न बोल कर आँचल को माँ बोल रहा है ... राखी देवी दूकान से चली जाती है

तब तक आँचल औरत को ब्रा पेंटी दिखने लगती है थोड़ी hi दर मैं दूकान से साड़ी औरते चली जाती है ... तो फिर आँचल भी घर मैं चली जाती है अर्जुन फिर बैठ कर फ़ोन चलने लगता है तभी दूकान मैं गीता आवर अंजलि भी आ जाती है ...... गीता आकर अर्जुन के पास मैं बैठ जाती है मगर अंजलि अभी दूकान मैं कुछ ढूंढने लगती है मगर अंजलि को वह चीज मिल नहीं रही होती है तो फिर आकर गीता के बगल मैं hi बैठ जाती है

दीदी मुझे नहीं दिख रही है पता नहीं कहा पर है ...... अंजलि धीरे से गीता से कहती है

देख एहि कही पर होगा नहीं तो फिर अभी चल बाद मैं आएंगे जब ममी दूकान पे होंगी अभी अर्जुन है यह पे ... गीता भी धीरे से कहती है

दीदी क्या बाटे कर रही है आप दोनों वह भी धीरे धीरे से ... अर्जुन कहता है

भाई वह बर अअअअअ

अभी अंजलि आगे कुछ बोलती के गीता अंजलि के सर पर मार देती है आवर आँखे दिखते हुआ चुप रहने का इशारा करती है जो अंजलि मुंह बना कर चुप हो जाती है

गीता दीदी .. आप मेरी नटखट भली सी अंजलि दीदी को मार क्यू रही है क्या चाहिए मेरी दीदी को कही जेन्स आवर टीशर्ट तो नहीं चाहिए बताइये मैं अभी आप को बता देता हुईं वह कहा पर है .... अर्जुन कहता है

नहीं मुझे अब कुछ भी नहीं चाहिए आप बहुत गन्दी दीदी हो हर वक़्त मुझे मरती hi रहती है .. बोल कर अंजलि चली जाती है

गीता दीदी अगर अंजलि दीदी को जेन्स टीशर्ट पहनने का मन है तो पहन लेने दीजिये न दीदी बस घर मैं hi पहन कर रही गाँव मैं थोड़ी घूमेंगी मगर आप ने दीदी को मायूस कर दिया ...... अर्जुन थोड़ी नाराजगी से कहता है

अब अर्जुन समझ रहा था उसकी अंजलि दीदी दूकान मैं जेन्स टीशर्ट देख रही थी क्यू की पहले भी अंजलि अर्जुन को बता चुकी थी के उनेह जेन्स टीशर्ट पहनने का बहुत दिल करता है मगर माँ आवर दीदी के वजह से नहीं पहनती हुईं ... मगर अर्जुन को ये नहीं पता था की अभी अंजलि जेन्स टीशर्ट नहीं कुछ आवर धुंध रही थी

अरे भाई अब मैं तुझे कैसे बताओं अंजलि जेन्स टीशर्ट नहीं ब्रा पेंटी देख रही थी वह तो जेन्स टीशर्ट घर पर अब पहनने hi लगी है जो गाँव के काफी लड़के हम्हारे हवेली के बहार घूमते रहते है अंजलि को देखने के लिए गीता मन मैं सोचती है

दीदी मैं खुद hi अंजलि दीदी को जेन्स टीशर्ट दे देता हुईं ..... अर्जुन बोल कर जेन्स आवर टीशर्ट निकलने लगता है की गीता बोल पड़ती है

अर्जुन वह अंजलि जेन्स टीशर्ट नहीं कुछ आवर धुंध रही थी वह जेन्स टीशर्ट तो घर पर पहनती hi है ... गीता बोल कर चुप हो जाती है

फिर क्या चाहिए अंजलि दीदी को प्लीज दीदी बताइये न आवर क्या चाहिए मैं अंजलि दीदी को दुखी नहीं देख सकता हुईं .... अर्जुन कहता है

क्या मुसीबत है अब मैं कैसे अर्जुन को बताऊ की अंजलि आवर मुझे ब्रा पेंटी चाहिए .... गीता मन मैं कहती है वही अर्जुन अब गीता से ज़िद्द कर के पूछने लगता है जो आखिर गीता को बताना hi पद जाता है

अर्जुन वह अंजलि को अंदर के कपडे चाहिए वही धुंध रही हुईं .... गीता शर्माती हुई बोलती है आवर निचे की तरफ देखने लगती है

अपनी गीता दीदी की बात सुन कर अर्जुन भी थोड़ा शर्मा जाता है .... दीदी वह वह पर है आप लेकर अंजलि दीदी को दे दीजिये अर्जुन ब्रा पेंटी की तरफ इशारा कर के कहता है आवर फिर अपना फ़ोन चलने लगता है वही

गीता थोड़ी शरमाते हुआ ब्रा पेंटी वाले डब्बा लेकर वही निचे बैठ जाती है आवर पेंटी ब्रा साइज देख कर निकलने लगती है थोड़ी थोड़ी शर्मा भी रही होती है

वही अर्जुन तो अभी फ़ोन को चला रहा होता है मगर अर्जुन रह रह कर अपनी गीता दीदी को भी देख रहा होता है मगर गीता दूसरी तरफ बैठ कर देख रही होती है मगर अर्जुन डिब्बे को देख चूका होता है जो गीता ने निकली होती है

दीदी तो मोदन वाली ब्रा पेंटी ले रही है गीता दीदी की साइज की ब्रा पेंटी ले रही होंगी अंजलि दीदी के लिए दीदी के जाने के बाद देखता हुईं ..... अर्जुन फ़ोन चला रहा होता है आवर सोच रहा होता है

गीता जल्दी से कुछ ब्रा पेंटी लेकर दूकान से चली जाती है

गीता के जाने के बाद hi अर्जुन पहले अपने निचे बक्से से एक पुर्जा निकलता है आवर उसपर देखता जो पुर्जे पर दाम आवर उसमे ब्रा पेंटी का साइज होता है अर्जुन देखने के बाद पहले दूकान से निकल कर अपने घर मैं देखता है कही दीदी फिर तो नहीं आ रही मगर अर्जुन को अभी घर मैं कोई नहीं दिखा देता है तो अर्जुन समझ जाता है सभी अपने अपने रूम मैं होंगी तो अर्जुन जाकर वह से दोनों डब्बे को लेकर काउंटर पर आता है जो ब्रा पेंटी की होती है

आवर फिर अर्जुन उसे डब्बे को खोलने लगता है ..... मुझे नहीं देखना चाहिए वह मेरी दीदी है अगर दीदी को पता चल गया तो मैं अपनी hi डूडीयों की ये चीज कैसे देख सकता हुईं नहीं ये हालत है ...... मगर मैं दीदी को पहने हुआ थोड़े देख रहा हुईं मैं तो बस ये देखना चाहता हुईं अंजलि दीदी की साइज की पहनती है ब्रा पेंटी की छी ये गलत है भाई ... अर्जुन डिब्बे को लेकर खोलते हुआ सोच रहा होता है

फिर कुछ देर के बाद अर्जुन डिब्बे को खोलने का फैसला कर लेता है

अर्जुन फिर डिब्बे को खोल कर देखता है की दोनों डब्बे से 4 !4 ब्रा पेंटी लेकर गयी होती है उसकी गीता दीदी

अर्जुन अभी बचे हुआ ब्रा आवर पेंटी की साइज देखने hi वाला होता है की तभी उसकी ममी माँ की आवाज़ आती है जो किसी से बात करते हुई आ रही होती है ...अर्जुन जल्दी से ब्रा पेंटी को डब्बा मैं रख कर वही निचे रख देता है आवर ठीक से बैठ कर फ़ोन देखने लगता है

आँचल भी दूकान पर बैठ कर बात करने लगती है फिर कुछ औरते भी आ जाती है तो आँचल उनेह कपडे दिखने लगती है

तभी अर्जुन उस दोनों डब्बे को वही निचे छिपा देते है आवर सोचता है बाद मैं देख लूंगा आवर दूकान से निकल जाता है

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ोये आस्था कहा जा रही है हमसे भी कुछ बाटे कर लिया करो कितने दिन हो गए तुझसे बात किये हुआ आवर आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो कितने दिन के बाद देखा तुमेह ...... आस्था जा रही होती है की पीछे से एक लड़का बोल पड़ता है

तुझसे क्या बात करनी है हर वक़्त तो मेरे घर के पीछे hi रहता है आवर बस मुझे hi घूरते रहता है मुझे ये भी पता है तू स्कूल मैं भी मुझे hi देखता रहता है जाकर अपनी बहन को देख आवर उससे hi बात कर .... आस्था थोड़ी गुस्से मैं कहती है

अरे यार आष्टा तू इतनी गुस्सा क्यू हो रही है हम तो अच्छे दोस्त थे न फिर इतनी क्यू चिढ़ रही है आज ..... लड़का कहता है

तू हर किसी से ये क्यू कहता फिर रहा है मैं तेरी गर्लफ्रेंड हुईं मैं कब बोली मैं तुझसे प्यार करती हुईं आया बड़ा मुझसे प्यार करने वाला ....... आस्था मुंह बना कर कहती है

अच्छा तू इस लिए तू गुस्सा है मगर मैं तो बस आयी hi बोल देता हुईं ताकि वह सब मुझसे जले की आष्टा जैसी सुन्दर लड़की मेरी गर्लफ्रेंड है सॉरी अगर तुझे बुरा लगा तो ..... लड़का कहता है

हां मुझे बुरा लगा है आवर आज के बाद किसी से नहीं कहना समझ नहीं तो क्यू की मैं नहीं चाहती की मेरे हीरो को पता मैं किसी आवर से प्यार करती हुईं ...... आस्था किसी को याद करती हुईं मुस्कुरा कर कहती है

क्या तू प्यार करती है मगर किस्से तू स्कूल मैं तो किसी के साथ बात भी नहीं करती है कही अपने मामू के घर तूने लड़के से प्यार नहीं कर लिया ...... लड़का कहता है

वह मैं तुझे क्यू बताऊ तू अपने काम से काम रख ये याद रखना अब किसी से मत कहना की मुझसे प्यार करता है इस बार तुझे मांफ किया मैंने ..... आस्था बोल कर वह से चली जाती

वही आष्टा के जाते है वह लड़का आष्टा को घूरने लगता है आवर फिर अपने लैंड पर हाँथ रख देता है

मैं तुझे अपनी बीवी बना कर hi रहूँगा .... लड़का मन मैं कहता है
 
अपडेट __ 8

रात मैं अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं सोने के लिए चला जाता है अर्जुन जब अपने बीएड पर सोता है आवर फ़ोन चलने लगता है आवर अपने फ़ोन मैं लड़कियों की फोटो देखने लगता है तभी एक लड़की की फोटो आती है जो सिर्फ ब्रा आवर पेंटी मैं होती है लड़की की ब्रा पेंटी मैं देख कर अर्जुन को अपनी अंजलि दीदी की याद आ जाती है अर्जुन उस लड़की की ब्रा की साइज देखने लगता है मगर अर्जुन को पता नहीं चल पता है

अर्जुन लड़की की चुकी से अपनी अंजलि दीदी की चुकी के बारे मैं सोचने लगता है क्या मेरी अंजलि दीदी का भी चुकी इतनी बड़ी होगी ये सोच कर hi अर्जुन अपने फ़ोन मैं अपनी अंजलि दीदी का फोटो निकल देता है

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अर्जुन जब अपनी अंजलि दीदी की फोटो देखता है तो अर्जुन को अपनी अंजलि दीदी की चुकी उस लड़की से थोड़ी छोटी लगती है अर्जुन फिर अपने आप से hi अंदाजा लगाने लगता है उसकी अंजलि दीदी की चुकी कितनी बड़ी होगी सायद अंजलि दीदी की ब्रा 32 34 होगी आवर अंजलि दीदी की पेंटी 36 होगी अर्जुन अपने मन मैं सोचता है .. तभी अर्जुन को याद आता है उसने वह डब्बा से निकल कर सारा ब्रा पेंटी तो रूम मैं लेकर आया hi है चलो देख hi लेता हुईं अंजलि दीदी की साइज क्या है ... अर्जुन झट से उठ जाता है आवर अपने तकिया को हटा कर तोशक के निचे से सरे ब्रा पेंटी निकल लेता है आवर फिर अपने जेन्स से वह पुर्जा भी निकल लेता है आवर पहले उसपे ब्रा पेंटी का साइज देखता है कौन साइज की कितनी ब्रा पेंटी है तो देखता है उसमे 30 साइज की 2 .. 32 साइज की 3.. 34 साइज की 3 .. आवर 36 साइज की 2 होती है

फिर अर्जुन पेंटी की साइज भी देखता है तो पेंटी भी वही साइज hi होती है फिर अर्जुन ब्रा को देखने लगता है तो उसमे से 2 ब्रा 32 साइज की नहीं होती आवर 2 ब्रा 34 की नहीं होती है

ये क्या गीता दीदी ने अलग अलग साइज की क्यू ले गयी है अगर वह ब्रा अंजलि दीदी के लिए लेकर गयी है एक hi साइज की लेकर जाती है आवर मुझे पूरा यकीन है अंजलि दीदी की ब्रा 32 hi होगी तो 34 की ब्रा क्यू ले गयी है गीता दीदी

ओह्ह तेरी कही गीता दीदी अपने लिए तो नहीं ले गयी है .. क्या गीता दीदी की ब्रा की साइज 34 है तभी गीता दीदी 34 की ब्रा लेकर गयी है हहहह कितनी बड़ी होगी गीता दीदी की वह अह्ह्ह्ह सोच कर अर्जुन सिसक पड़ता है

फिर अर्जुन पेंटी को देखता है पेंटी भी 2 तो 34 की नहीं होती है आवर 2 पेंटी 36 की नहीं होती है अब अर्जुन को समझने मैं देर नहीं लगता की 36 वाली पेंटी गीता दीदी की है अर्जुन की आँखें बड़ी होने लगता है आवर उसका लैंड भी खड़ा होने लगता है जो अर्जुन को अपनी गीता दीदी का साइज सोच कर hi अंदर से मस्त मिज़ाज़ होने लगता है अर्जुन सभी ब्रा पेंटी को रख कर फिर से फ़ोन उठा लेता है आवर बीएड पर लेट जाता है अर्जुन अपने फ़ोन मैं अपनी गीता दीदी की फोटो निकल लेता है आवर देखने लगता

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फ़ोन मैं अपनी गीता दीदी को अर्जुन देख कर फिर अपनी आँखें बंद कर लेता है आवर अपनी गीता दीदी की पेंटी ब्रा मैं सोचने लगता है जो अर्जुन के आँखों के सामने उसकी गीता दीदी ब्रा पेंटी मैं दिखाई देने लगाती है

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अर्जुन गीता दीदी को नंगी ब्रा पेंटी मैं सोच कर गरम होने लगता है आवर अर्जुन का हाँथ कब अपने लैंड पर जा पहुंचता है अर्जुन को भी पता नहीं चलता है अर्जुन बस अपनी गीता दीदी को याद कर रहा होता है मेरी गीता दीदी क्या लग रही है आअह्ह्ह गीता दीदी की दूध कितने बड़े लग रही है

अर्जुन अर्जुन अर्जुन अर्जुन आँखे बंद किये हुआ अपनी गीता दीदी के बारे मैं सोच hi रहा होता की बहार से उसकी गीता दीदी की आवाज़ आने लगती है ..... अर्जुन हड़बड़ा कर उठ जाता है आवर जल्दी से सरे ब्रा पेंटी छिपा देता है आवर फिर अपने आप को ठीक करता है जो अर्जुन के माथे पर पसीने बाह रहे होते है फिर जाकर गेट खोलता है आवर जल्दी से बीएड पर आकर सो जाता है क्यू के अर्जुन का लैंड भी खड़ा हो गया होता

अर्जुन फिर से फ़ोन देखने लगता है तभी उसकी गीता दीदी रूम मैं आ जाती है मगर अर्जुन अपनी गीता दीदी को नहीं देखता है क्यू के अर्जुन को अभी अफ़सोस होने लगता है की अपनी गीता दीदी के लिए इतना गन्दा क्यू सोच रहा था

वही गीता अर्जुन के पास बीएड पर साथ लेट जाती है आवर फिर अर्जुन को प्यार से देखने लगती है जो अर्जुन की नज़र भी अपनी गीता दीदी पर पड़ता है जो अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही होती है .... बदले मैं अर्जुन भी मुस्कुरा देता है जो गीता अपने भाई का माथा चुम लेती है

तो अर्जुन अब आगे क्या करना है मतलब अब कहा पर रह कर पढ़ना ... अगर तू चाहे तो मैं तेरा भी एडमिशन पास ले गोंवाले सोल्लगे मैं करवा देती हुईं जो तुम आवर अंजलि भी साथ मैं जा सकते हो आवर हम भाई बहन साथ मैं फिर से रहने लगेंगे देख अंजलि आवर मैं कितनी दुखी रहते है तेरे लिए हम्हरा भाई होते हुआ भी हम तरस जाते है अपने भाई को देखने के लिए प्लीज भाई अपनी दीदी के लिए घर आ जा अब मैं तेरे सामने हाँथ जोड़ती हुईं ..... गीता मायूसी से कहते हुआ अर्जुन के सामने अपन हाँथ जोड़ देती है

जो अर्जुन झट से अपनी दीदी का हाँथ पकड़ लेता है

दीदी ये आप क्या कर रही है मैं भी आप दोनों के बिना कितना रोटा हुईं मैं hi जनता हुईं मैं भी अपनी प्यारी दीदी के साथ रहना चाहता हुईं मगर यह ममी माँ अकेली हो जाएँगी न इस लिए मुझे अच्छा नहीं लगता है ममी माँ को अकेले छोड़ना .... अर्जुन कहता है आवर अपनी दीदी की आंसू पोछ देता है जो थोड़ी नाम हो गयी होती है

भाई अगर हम ममी को भी अपने साथ लेकर चले तो कैसा रहेगा फिर हम सभी फॅमिली साथ मैं रहेंगे ममी की कोई औलाद भी नहीं है आवर मैं जानती हुईं ममी हमेह hi अपने बच्चे मानती है तो एहि सही रहेगा हम सभी साथ मैं रहे नानी को भी साथ लेकर चलेंगे ..... गीता फिर से कहती है

अब अर्जुन क्या बोले अर्जुन को कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था आवर अभी अर्जुन अपनी दीदी को मन भी नहीं कर पता रहा होता है क्यू के अर्जुन अपनी गीता दीदी को फिर से दुखी नहीं करना चाहता है .... दीदी आप पहले ममी माँ से बात कर लीजिये अगर वह साथ चलेंगी तो मैं जाने के लिए तैयार हुईं ..... अर्जुन कहता है

वही गीता बहुत खुश हो जाती है आवर अर्जुन के गलों पर किश करने लगती है गीता की चुकी अर्जुन के साइन पर भी टाच हो जाते है मगर अर्जुन जयादा धयान नहीं देता है अर्जुन को अभी अपनी गीता दीदी की ख़ुशी देख कर बहुत अच्छा लग रहा होता है

कुछ देर के बाद खुश होते हुआ गीता रूम से चली जाती है

दीदी मुझे मांफ कर दीजियेगा मैं वह नहीं जाना चाहता हुईं मैं फिर से उस घटिया औरत के साथ नहीं रहना चाहता हुईं ..... मैं कल hi ममी माँ को सब कुछ बता दूंगा जो मैं ममी माँ को कब से नहीं बताना चाहता था .... मगर अब मैं ममी माँ को सब कुछ बता दूंगा ....मैं जनता हुईं उस घटिया औरत आवर वह हरामी मां के बारे मैं जान कर ममी माँ को बहुत दुःख होगा ....

मगर ये बात कभी न कभी तो ममी माँ को पता तो चल hi जायेगा तो मैं कल hi बता दूंगा ताकि मैं उस औरत के पास न जा सकू ... मैं ममी माँ को दुखी भी नहीं देख सकता हुईं हे भगवन मेरी मदद करना सच्चाई जान कर मेरी ममी माँ जयादा दुखी न हो भगवन मुझे मांफ कर देना जो मैं कल खुद hi अपनी ममी माँ को दुखी करने वाला हुईं .... अर्जुन मन मैं hi सोच कर दुखी हो जाता है आवर अपनी आँखे बंद कर लेता है

वही आँचल की रूम मैं आँचल बीएड पर बैठ होती है आवर राखी बाथरूम मैं होती है

दीदी अब बहार भी आ जाइये मैं आप को जिस्म को इतनी बार देख चुकी हुईं की मुझे याद भी नहीं है आवर मैंने तो कई बार आप की छूट की पानी भी पि चुकी हुईं मगर आज आप इतनी क्यू शर्मा रही है .... आँचल कहती हुई बीएड से उतर जाती है

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आँचल काली ब्रा पेंटी मैं गजब की खूबसूरत मॉल लग रही होती है आँचल की दोनों चुकी भी ब्रा मैं पहाड़ की तरह टाइट कड़ी होती है क्यू के अभी तक किसी ने भी आँचल की चुकी को ठीक से दबाया नहीं होता है ऊपर से अभी तक आँचल माँ भी नहीं बन पायी थी जो उसकी चुकी से दूध पिने से ढीली हो जाया क्यू के अभी तक आँचल बिलकुल एक कुवारी लड़की की तरह थी

वही राखी शरमाते हुआ बाथरूम से निकलती है अभी राखी को बहुत शर्म आती रही होती है .... वही आँचल की नज़र जैसे hi राखी पर पड़ती है आँचल की आँखें बड़ी हो जाती है

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वाओ वाओ दीदी आप बहुत खूबसूरत लग रही है कमल की जिस्म है आप की दीदी मैं एक औरत होकर भी आप की जिस्म को देख कर खुद को रोक नहीं पति हुईं ..... आँचल कहती हुईं बीएड से उठ जाती है आवर राखी के पास चली जाती है आवर पास जाकर राखी की गर्दन को चूमने लगती है

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अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर रही है आँचल ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मत कर ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स आएसा मत कर ..... राखी बोलते हुआ आँचल की गांड दबाने लगती है वही आँचल बस राखी को चूमते hi जा रही होती है राखी तड़पने लगती है आवर आँचल को दूर करने की कोशिश करती है मगर आँचल अब बहुत गर्म हो गयी होती है राखी की मदहोश जिस्म को देख कर आँचल राखी के होंठों को चूमने लगाती है

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आँचल जैसे hi राखी की होंठ पर होंठ रखती है राखी झट से आँचल की कमर पकड़ लेती है आँचल राखी की होंठ चूमते हुआ बीएड पर लेकर चली जाती है आवर राखी को धक्का दे देती है

मैं इस लिए ये नहीं पहन रही थी पता नहीं क्या हो जाता है तुझे जब भी मुझे ब्रा पेंटी मैं देखती है मुझपे टूट पड़ती है आएसा क्या है मेरी जिस्म मैं जो तेरे पास है वही तो मेरे पास है .... राखी कहती है

आँचल बस मुस्कुरा कर एक बार राखी को देखती है फिर अपनी ब्रा पेंटी निकल कर राखी की तरफ बढ़ जाती है आवर आँचल जैसे hi राखी के पास जाती है राखी की पेंटी मैं हाँथ दाल देती है आवर राखी की पेंटी के ऊपर से hi छूट रगने लगती है

राखेर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसा आँचल हहहह मज़ा आ रहा ह्ह्हह्ह्ह्ह आँचल ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh कहते हुआ राखी संत हो जाती है

राखी के झड़ते hi आँचल मुस्कुरा पड़ती है आवर फिर अपने ब्रा पेंटी निकल कर राखी की भी ब्रा पेंटी निकल देती है

दीदी आज मैं आप को बहुत मज़ा देने वाली हुईं आज हम दोनों एक दूसरे की पायस को भुजा लेंगी बहुत दिन से तड़प रही थी आप की छूट की पानी पिने के लिए .... आँचल बोलती हुई राखी की छूट का पानी ऊँगली से चाट लेती है आवर राखी की छूट के पास मुंह लगा देती है

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आँचल जैसे hi राखी की छूट पर मुंह लगाती है राखी सिसकियाँ लेकर तड़प जाती है राखी का मुंह भी खुल जाती है आँचल राखी की छूट ज़ोर ज़ोर से चाटने लगती है जो राखी बस सिसकियाँ लेने लगी है

आँचल बहुत प्यार से राखी को छूट चाट रही होती है वही राखी बस अपना मुंह ऊपर कर के सिसक रही होती है राखी फिर बीएड पर लेट जाती है क्यू की राखी की कमरे दर्द करने लगती है तभी छत्ते हुआ आँचल राखी की छूट मैं दो ऊँगली दाल देती है जो राखी तड़प जाती है आवर अपनी गांड उठा कर आँचल का सर अपनी छूट मैं दबा देती है फिर राखी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है राखी की चुकी बहुत ज़ोर ज़ोर से ऊपर निचे हो रही होती है

जो आँचल राखी की चुकी मुंह मैं लेकर चूसने लगती है वही राखी आँचल के सर पर हाँथ फेरने लगती है

दीदी आप की छूट तो पहले से भी जयादा बंद हो गयी है वह बस चाट कर hi आप को संत कर रहे है क्या ... वह ऊँगली भी नहीं डालते है आएसा लग रहा है मुझे आप की छूट अब बिलकुल मेरी छूट की तरह हो गयी है ... आँचल कहती है

आँचल मैं तुझे बाद मैं बता दूंगी चल पहले मैं अब तुझे भी संत कर देती हुईं तेरी छूट भी बहुत जल रही होगी राखी कहती है है आँचल फिर कुछ नहीं कहती है आवर बीएड पर लेट जाती है तो राखी अब आँचल की छूट के पास आ जाती है आवर आँचल की छूट को चूमने लगती है aàhhhhh दीदी ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह है दीदी ह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह माआ हहहह राखी के चूमते hi आँचल सिसकियाँ लेने लगती है मस्ती मैं आवर अपनी टाइट चुकी को दबाने लगती है

आँचल अभी मस्ती मैं सिसक रही होती है आवर राखी बस आँचल की छूट को जीभ से आँचल की छूट की डेन को छेड़ती रहती है जिससे आँचल तड़प तड़प कर अपनी गांड उठ रही होती है हहहहह दीदी hhhhhhhhhh आप बहुत ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अच्छे से मेरी छूट को छेड़ रही है हहहह दीदी ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप इतने ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दिन के बाद क्यू आती है hhhhhhhhhh मेरी छूट आँचल ज़ार से चीख पड़ती है जो राखी जल्दी से अपनी हाँथ आँचल के मुंह पर रख देती है

वही आँचल की हालत ख़राब हो जाती है आँचल की सांसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है आवर आँचल की आँखों मैं पानी भी आ जाती है आँचल बीएड पर गिर जाती है

क्या कर रही है आँचल इस तरह चीखेगी तो बच्चे क्या सोचेंगे .... राखी थोड़ी डाटने जैसे सवार मैं कहती है

ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप मेरी जान लोगी क्या .... आप जानती है मैं अब मेरी छूट कुवारी लड़की की तरह हो गयी दीदी आप समझ लीजिये मैं कुवारी लड़की hi हुईं फिर भी आप अपनी मोती ऊँगली छूट मैं दाल दिया मुझे कितना दर्द हुआ आप को पता है ..... आँचल रोने जैसी सवार मैं कहती है

अभी आँचल मस्ती मैं सिसक hi रही होती है राखी के चाटने से .... तभी राखी अचानक hi आँचल की छूट मैं एक मोती ऊँगली गुसा देती है जिससे आँचल तड़प कर चीख पड़ती है

वह तो अच्छा होता है जल्दी hi राखी अपना हाँथ आँचल की मुंह पर रख देती है जो आँचल की आवाज़ बाद जाती है

आँचल की आँखों मैं नमी देख कर राखी को अपनी गलती का अहसास होता है आवर राखी जल्दी से आँचल को गले लगा लेती है आवर आँचल की आंसू भी पोछ देती है

दोनों फिर बीएड पर लेट जाती है

दीदी बहुत मज़ा आया आज तो मेरी छूट बहुत दिन से जल रही थी मैं अपनी ऊँगली से करते हुआ थक गयी थी मैं कब से आप की रह देख रही थी आज हम बहुत मस्ती करेंगी ..... आँचल कहती है

हआ बाबा आज मैं तेरी छूट की गर्मी पूरी निकल दूंगी जो तुझे काफी वक़्त तक गर्मी महसूस नहीं होगी

कास हम लोग सभी साथ होते तो कितना अच्छा होता ...... राखी उदास होते हुआ कहती है दीदी आप चिंता न करे मैं जल्द hi अर्जुन से बात करने वाली हुईं फिर हम सब साथ मैं रहेंगी .... आँचल कहती है

आँचल आवर राखी रात मैं कई बार एक दूसरे की छूट से पानी निकल देती है

जब दोनों की छूट से दर्द नहीं करने लगता है सोती नहीं है जब छूट दर्द करने लगती है तो दोनों एक दूसरे से लिपट लार सो जाती है
 
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