Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN - Page 9 - SexBaba
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Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN

Part - 51

मल्लिका के किचन में जाते hi, आर्यन ने अनु को सहज करने की कोशिश की. वह सोफे के पास राखी टेबल से अपना फ़ोन उठाकर बैठ गया.

आर्यन: (उत्साह से) अनु दीदी, मल्लिका ने जिन गांव की बात की थी, वह बहुत ज़बरदस्त हैं! हमने abhi-abhi एक नया एल्बम सुना है. मैं आपको सुनाता हूँ.

आर्यन ने अपना फ़ोन अनु की तरफ बढ़ाया.

अनु अभी भी गहरे विचारों में डूबी हुई थी. उसका ध्यान मल्लिका और आर्यन के खुलेपन और बीएड के दर्द से हैट नहीं प् रहा था. वह इस बात से नाराज़ थी की आर्यन इतना सहज क्यों है, जैसे कुछ हुआ hi न हो.

अनु: (बिना फ़ोन देखे, ठंडी आवाज़ में) नहीं, धन्यवाद, आर्यन. मेरा सुनने का मन नहीं है.

आर्यन: (थोड़ा निराश होते हुए) अरे, एक बार सुनिए तो! यह बहुत अच्छे बीट्स हैं. मल्लिका और मैं तो...

आर्यन ने रुक कर अपनी बात पूरी नहीं की, क्यूंकि उससे लगा की मल्लिका का नाम और उनके साझा अनुभव अनु को असहज कर सकते हैं.

अनु: (रूखेपन से, आर्यन की आँखों में देखते हुए) आर्यन, देखो. मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है, और न hi मुझे तुम्हारी 'बीट्स' में कोई दिलचस्पी है. मैं यहाँ अपनी ज़रूरी चीज़ें लेने आयी हूँ. तुम अकारण मुझे तवज्जो देने की कोशिश मत करो.

अनु ने jaan-bujhkar यह कहकर आर्यन को अपनी सीमाएं याद दिला दी. आर्यन को एहसास हुआ की अनु, मल्लिका जैसी खुली मिज़ाज की नहीं है, और वह उनके 'चिल' अंदाज़ को स्वीकार नहीं कर रही थी.

आर्यन: (माथे पर बल डालते हुए) ओह! ठीक है. सॉरी. मुझे लगा आप...

आर्यन ने अपना फ़ोन वापस रख लिया और सोफे पर थोड़ा दूर खिसक गया. अनु सोफे पर अकेली बैठी रही, अपनी नाराज़गी और मल्लिका की ज़िन्दगी से उपजी असहजता में डूबी हुई.

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मल्लिका दो कप कॉफ़ी लेकर वापस आयी. एक कप उसने अनु को दिया और दूसरा खुद आर्यन को पकड़ाया. मल्लिका ने स्थिति भांप ली थी — अनु ने आर्यन को पूरी तरह से उपेक्षित कर दिया था.

मल्लिका jaan-bujhkar अनु के पास, सोफे पर बिलकुल करीब आकर बैठ गयी. आर्यन अब फ़ोन पर व्यस्त होने का नाटक करने लगा.

मल्लिका: (कॉफ़ी का कप अनु की तरफ बढ़ते हुए) यह लो, तुम्हारी पसंदीदा कॉफ़ी. अब शांत हो जाओ. तुम यहाँ मुझे जज करने आयी हो, या ज़रूरी फाइल्स लेने?

अनु: (कॉफ़ी लेते हुए, रूखेपन से) मैं तुम्हे जज नहीं कर रही हूँ, मल्लिका. मैं बस... परेशां हूँ. तुम इतनी बेफिक्र कैसे हो सकती हो?

मल्लिका: (शांत लहजे में) परवाह के लिए धन्यवाद, दीदी. लेकिन मेरी फलसफा सुनो. तुम और मैं, हम दोनों काम करते हैं. तुम अपने घर की मर्यादाओं को लेकर चिंता करती रहती हो. तुम्हारा दिमाग हमेशा फॅमिली वैल्यूज और पारिवारिक इज़्ज़त में उलझा रहता है.

मल्लिका अनु के कंधे पर धीरे से हाथ फेरती है.

मल्लिका: तुम विक्रम जैसे घटिआ लोगों की गन्दी नज़रों से क्यों परेशां होती हो? क्यूंकि तुम खुद को दोषी महसूस करती हो की शायद तुमने कुछ गलत पहना होगा. लेकिन मैं नहीं करती. मैंने अभी आर्यन से सेक्स किया, तुम अचानक आ गयी, और मैंने तुम्हे कॉफ़ी ऑफर की. क्यों?

अनु चुपचाप मल्लिका को देखती रही.

मल्लिका: (आँखों में आत्मविश्वास) क्यूंकि यह मेरी आज़ादी है. मैं अपने शरीर की मालिक हूँ, और मैं किसी को अधिकार नहीं देती की वह मेरे जीवन को कण्ट्रोल करे. न विक्रम की नज़र, न सोसाइटी, और न hi तुम्हारे 'क्या कहेंगे' वाले दर.

मल्लिका की बातों में एक ज़बरदस्त आत्मविश्वास और सच्चाई थी.

मल्लिका: तुम्हे पता है, अनु? तुम बहार से बहुत सख्त दिखती हो, लेकिन अंदर से तुम भी बहुत कुछ चाहती हो — वह चाहत जो तुम अपने पार्टनर से नहीं कह पाती. इसीलिए जब तुम मुझे देखती हो, तो तुम्हे गुस्सा आता है — क्युकी तुम वह आज़ादी जी नहीं पाती.

अनु को मल्लिका की बात चुभ गयी. उसे याद आया की विक्रम की नज़रों से वह कितनी परेशां हुई थी. मल्लिका शायद सही कह रही थी.

अनु: (निराश होकर) तुम... तुम इतनी खुली बातें क्यों करती हो?

मल्लिका: क्यूंकि मुझे उम्मीद है की एक दिन तुम भी अपने लिए जीना सीखेगी. जाओ, अपनी फाइल्स लो. और हाँ, अगर तुम्हे कभी कोई रोमांच चाहिए हो, तो मुझे कॉल करना. मैं तुम्हे ज़रूर कोई अच्छा साथी ढूंढने में मदद कर सकती हूँ!

मल्लिका हसने लगी. अनु ने अपने ज़रूरी कागज़ात उठाये, लेकिन अब वह पहले से ज़्यादा परेशां थी. मल्लिका ने उसके दिमाग में खतरे की घंटी बजा दी थी, जिससे उसे अपनी मर्यादा और अपनी दबी हुई चाहतों के बीच का संघर्ष साफ़ दिखाई दे रहा था.

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पारी, माणिक के कमरे में आयी. वह जानती थी की माणिक अभी भी दिव्या के प्रतिशोध की योजना बना रहा होगा. वह तुरंत माणिक के पास बैठ गयी और फुसफुसाते हुए एक काम की बात बताई.

पारी: (उत्सुकता से) भाई, मुझे तुम्हे एक बात बतानी है. यह शायद तुम्हारे काम की हो.

माणिक: (आँखें चमकते हुए) क्या है? जल्दी बता!

पारी: मुझे लगता है की मैंने दीदी की कोई कमज़ोरी पकड़ ली है. भाई, पता है दिव्या दीदी रात को 11 बजे के बाद छत (टेरेस) पर जाती हैं. पता नहीं क्या करती हैं! वह रोज़ जाती हैं और काफी देर तक ऊपर रहती हैं.

माणिक का चेहरा तुरंत उत्साह से भर गया. उसे लगा की उसकी प्रतिशोध की योजना के लिए यह पहला सुराग है.

माणिक: (पारी को शाबाशी देते हुए, उसके गाल पर थपथपाकर) यह तो तुमने बड़े काम की बात बताई है, छुटकी! तुमने मेरा काम आसान कर दिया!

माणिक की पुराणी नफरत और नयी वासना का आवेग फिर जाग उठा.

माणिक: बस! अब देखना उसका (दिव्या का) तो बंटाधार करना है मुझे! अब तो मैं उसका जीना हराम कर दूंगा! देखना, एक दिन उसकी छूट मारूंगा! यह उसकी हर नफरत का बदला होगा.

पारी तुरंत गंभीर हो गयी. वह माणिक की वासना और गंदे शब्दों से परेशां थी.

पारी: (गंभीरता से) फिर वही बात, भाई! प्लीज! अपनी बहिन के लिए ऐसी बात नहीं बोलते! यह सब गलत है, भाई.

माणिक, जो अब अपनी योजना में पूरी तरह खो चूका था, उसने पारी की चेतावनी को अनदेखा कर दिया. वह बस हंस देता है.

माणिक: (आत्मविश्वास और गर्व से) तेरे भाई का लुंड अगर कुछ सोच ले, तो उसे पूरा करके रहता है! मेरी बात मान, यह दिव्या की छूट लेकर hi रहेगा! उसका सारा गुस्सा और नफरत इसी से निकलेगा!

पारी, हार मानकर, ना में गर्दन हिलती है. वह जानती थी की वह माणिक को रोक नहीं सकती, लेकिन उसे अपने भाई के इस खतरनाक इरादे से दर भी लग रहा था. माणिक अब पूरी तरह से तैयार था की आज रात 11 बजे वह छत पर जाकर दिव्या का 'रहस्य' पता लगाएगा.



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Part - 52

रात के ठीक 10:30 बजे, माणिक, पारी की दी गयी इनफार्मेशन के अनुसार, छत पर पहुँच गया. छत पर एक पुराण स्टोर रूम था, जहाँ tooti-footi चीज़ें राखी रहती थी. माणिक वही स्टोर रूम के अंदर गया और खुद को छुपा लिया. उसने स्टोर रूम की खिड़की को थोड़ा सा खोला, ताकि बहार का नज़ारा देख सके, लेकिन बहार से उससे कोई देख न पाए.

माणिक इंतज़ार करने लगा. हर गुज़रता मिनट उससे और ज़्यादा उत्सुक कर रहा था.

ठीक 10:50 बजे, माणिक ने देखा की दिव्या छत पर आयी. वह अपने साथ एक chhoti-si कुर्सी और अपना मोबाइल फ़ोन लायी थी. दिव्या छत पर एक शांत कोने में बैठ गयी.

माणिक की आँखें बड़ी हो गयी. उसने देखा की दिव्या ने अपनी पॉकेट से एक सिगरेट निकली और उसे जलाया. माणिक के लिए यह पहला आश्चर्य था — उसकी संस्कारी बेहेन सिगरेट पीती थी!

जैसे hi दिव्या ने सिगरेट का एक काश लिया, उसने अपने मोबाइल पर कुछ प्ले किया. माणिक ने अपनी आँखें ज़ोर से गड़ाई. दिव्या ने अपने फ़ोन पर पोर्न लगा ली थी. माणिक ने दिव्या को पहली बार अपने कमरे में पोर्न देखते पकड़ा था, पर छत पर, खुलेआम, यह देखना उसके लिए और भी बड़ा झटका था.

खुशकिस्मती से, दिव्या का बैठने का एंगल ऐसा था की उसका फ़ोन और उसकी तरफ का दृश्य, सीधे माणिक की खिड़की की तरफ था. माणिक अपने मोबाइल का कैमरा ों करता है.

माणिक ने बिना एक पल गंवाए, अपने फ़ोन पर दिव्या की वीडियो बनानी शुरू कर दी. वह सिगरेट पी रही थी, और अपने मोबाइल पर पोर्न देख रही थी, उसके चेहरे पर एक अलग तरह का भाव था — थकान, वासना और एक अजीब सी आज़ादी का मिश्रण.

माणिक के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गयी. उसे उसकी 'कमज़ोरी' मिल गयी थी. यह वीडियो उसके लिए दिव्या से बदला लेने का सबसे बड़ा हथियार बनने वाली थी. उसकी पिछली साड़ी नफरत और वासना अब इस वीडियो में क़ैद हो रही थी.

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माणिक अपनी खिड़की से दिव्या का वीडियो बना रहा था. दिव्या ने अपनी सिगरेट ख़तम की और उसे बुझा कर फ़ेंक दिया. उसने अपने मोबाइल पर पोर्न का वॉल्यूम थोड़ा और बढ़ाया.

फिर, माणिक की आँखें फटी की फटी रह गयी. दिव्या ने बिना किसी संकोच के, अपनी लोअर (पायजामा) को नीचे किया. वह पूरी तरह से नग्न नहीं हुई, लेकिन उसका निजी अंग (योनि) पूरी तरह से खुला दिखा रहा था.

दिव्या ने पोर्न को देखते हुए, अपनी उँगलियों को अपनी छूट पर रखा और उसे सहलाना शुरू कर दिया. माणिक के लिए यह दृश्य अविश्वसनीय था. उसकी बेहेन, जो घर में इतनी संस्कारी बनती थी, छत पर आकर खुलेआम तीव्र हस्तमैथुन (मस्टरबैशन) कर रही थी.

माणिक हैरान था की यह लड़की आखिर kya-kya करती है. उसका गुस्सा अब एक तीव्र वासना में बदल रहा था. वह दिव्या को बदला लेना चाहता था, लेकिन इस दृश्य ने उसे खुद hi बेकाबू कर दिया था.

दिव्या की उँगलियाँ उसकी छूट पर तेज़ी से चल रही थी. वह पोर्न के दृश्यों में खोई हुई थी, उसके होठ दबे हुए थे और उसके चेहरे पर पीड़ा और आनंद का मिश्रण था. उसकी सांसें तेज़ हो गयी, और उसके शरीर में एक हलकी थरथराहट थी.

वह baar-baar अपनी छूट के संवेदनशील हिस्सों को रगड़ रही थी, उसे दबा रही थी, और उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी. वह अपनी इस निजी दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी थी, जहाँ उसे कोई देखने वाला नहीं था. कुछ hi मिनट्स में, दिव्या का शरीर काँप उठा और उसने एक धीमी, तृप्त कर देने वाली सिसकारी भरी. वह चरम सुख (ओर्गास्म) पर पहुँच चुकी थी.

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स्टोर रूम के अंदर, माणिक यह सब देख रहा था, और वीडियो बना रहा था. दिव्या के हस्तमैथुन के हर पल ने माणिक को खुद भी बेकाबू कर दिया था. उसका लुंड उसके अंडरवियर में बुरी तरह से तन चूका था.

जैसे hi दिव्या ने अपनी लोअर ऊपर की, माणिक भी उसी क्षण, स्टोर रूम के अंदर, अपने अंडरवियर के ऊपर से अपने लुंड को तेज़ी से सहलाने लगा. वह दिव्या की आवाज़ों और उसके चेहरे के भावों को देखकर, ठीक उसी तरह अपना हस्तमैथुन कर रहा था.

माणिक के चेहरे पर एक अजीब सी शैतानी मुस्कान थी. वह जानता था की अब उसके पास दिव्या को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में करने का सबसे बड़ा हथियार था. वह अपनी बेहेन की उस 'कमज़ोरी' का मज़ा ले रहा था, और खुद भी उसी आज़ादी को महसूस कर रहा था, जिसे दिव्या ने छत पर पाया था.

माणिक भी कुछ hi पलों में चरम सुख पर पहुँच गया. उसने एक गहरी सांस ली, और अपने कपडे ठीक किये. वह जानता था की आज रात उसने सिर्फ एक वीडियो नहीं बनाया था, बल्कि दिव्या के सारे राज़ अपने हाथों में ले लिए थे.

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माणिक, छत पर अपना हस्तमैथुन करने के बाद, दिव्या के जाने का इंतज़ार किये बिना, स्टोर रूम से तेज़ी से निकला और सीढ़ियों से नीचे आ गया. वह जानता था की अब उसके पास सबसे बड़ा हथियार है.

वह सीधे किचन में गया. मुठ मारने के बाद उसे बहुत प्यास लगी थी. उसने एक बड़ा गिलास उठाया और ठंडा पानी पीने लगा. उसका शरीर शांत था, लेकिन दिमाग में दिव्या की वीडियो और प्रतिशोध की योजना घूम रही थी.

माणिक को अभी पानी पीते हुए कुछ hi पल हुए थे की उसे हलकी आहात सुनाई दी. उसने मुड़कर देखा, और उसे हैरानी हुई की दिव्या भी पानी पीने आयी. दिव्या अभी भी थोड़ी थकी हुई लग रही थी, लेकिन उसने अपनी लोअर ठीक कर ली थी.

माणिक ने दिव्या को अजीब से ढंग से देखना शुरू कर दिया. उसकी आँखों में एक छुपी हुई मुस्कान थी — वह जानता था की दिव्या ने ऊपर क्या किया था, और इस जानकारी ने उसे एक अजीब सी शक्ति दे दी थी.

दिव्या: (माणिक को इतना घूरते और हँसते देखकर गुस्से में) माणिक! क्या बात है? तुम इस तरह क्यों हंस रहे हो? और मुझे ऐसे घूर क्यों रहे हो?

माणिक ने दिव्या की बात का जवाब देने के बजाये, अपने गिलास को सिंक में रखा और तुरंत पलटकर, जासूसी भरे लहजे में पुछा.

माणिक: (मुस्कुराते हुए, आवाज़ में शरारत) अच्छा! तुम ऊपर क्या करने गयी थी इतनी रात गए? आजकल छत पर तुम्हे बहुत शान्ति मिलती है क्या?

दिव्या, इस अचानक और सीधे सवाल से एक बार तो घबरा गयी. उसे लगा की शायद माणिक ने उसे देख लिया होगा. उसका चेहरा तुरंत सफ़ेद पद गया.

दिव्या: (एक पल रूककर, खुद को संभालकर और आत्मविश्वास बटोर कर) मैं... वह... मैं ठंडी हवा खाने गयी थी. दिन भर कॉलेज में गर्मी लगती है, इसलिए थोड़ी ताज़ी हवा लेने गयी थी. तुम क्यों मेरी जासूसी कर रहे हो?

माणिक: (शरारती हंसी हँसते हुए) अच्छा! ताज़ी हवा? तुम्हारा A.C. ख़राब हो गया है क्या? या तुम्हे अचानक गर्मी कुछ ज़्यादा लगने लगी है?

माणिक का यह व्यंग्य सीधा दिव्या की छत पर की गयी हरकतों पर था — सिगरेट और हस्तमैथुन.

दिव्या, यह सुनकर सकपका गयी. माणिक के शब्दों में एक गहरा मतलब छिपा था, जिसे दिव्या पूरी तरह से समझ गयी थी. वह अब पूरी तरह से जानती थी की माणिक को ऊपर उसके 'हवा खाने' के दौरान हुई असुविधा (garmi/utpatti) के बारे में कुछ पता है.

दिव्या: (गुस्से से, आवाज़ सख्त करते हुए) तुम! तुम क्या बकवास कर रहे हो? मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी!

दिव्या ने तेज़ी से पानी पिया और वहां से जाने लगी, जबकि माणिक मुस्कुराने लगा. उसने बिना एक भी शब्द बोले, दिव्या को जाता दिया था की उसका राज़ अब उसके हाथ में है. दिव्या के चेहरे पर दर और माणिक की मुस्कान, दोनों ने यह साबित कर दिया था की छत का खेल अब ख़तम हो चूका था और असली खेल अब शुरू होगा.

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Part - 53

Divya gusse mein tezi se kitchen se jaane lagi. Manik ne usko jaane nahi diya.

Manik: (shaant lekin sakht awaaz mein) Ek minute ruko, Divya!

Divya ekdum se ruk gayi. Uske mann mein dar tha ki Manik ab kya karne wala hai.

Manik dheere se uske paas aaya aur ekdum se uske chehre ke paas jakar ruk gaya. Woh Divya ko kuch bol nahi raha tha, balki usko sunghne laga.

Divya is harkat se ghabra gayi.

Divya: (gusse aur ghabrahat se) Yeh kya badtameezi hai, Manik! Aisa kyun kar rahe ho? Tum had paar kar rahe ho!

Manik ne sunghna band kiya. Usse woh halki, chirparichit gandh mil gayi thi.

Manik: (gehri hansi hanshte hue, aankhein chamkate hue) Kuch nahi. Bas dekh raha tha. Kahin koi ajeeb si gandh to nahi aa rahi? Mujhe laga shayad chhat se koi nayi hawa aayi hai, jiski gandh thodi tez hai.

Manik apni baat se cigarette ki gandh ki taraf ishara kar raha tha. Divya samajh gayi ki Manik ne sirf hastmaithun karte nahi dekha, balki usko cigarette peete hue bhi pakad liya tha.

Manik: (khuleaam mazaak udate hue) Khair chhodo. Tum jao. Apne kamre mein jaakar porn dekho!

Manik ne yeh kehkar Divya ke raaz par antim muhar laga di.

Divya ab poori tarah se toot chuki thi. Woh jaanti thi ki Manik ke paas ab poora saboot hai. Woh itni sharminda aur gusse mein thi ki uske paas bolne ke liye shabd nahi the.

Divya: (sirf gusse se bhari, dheemi awaaz mein) You!

Divya ne pair patakte hue kitchen se tezi se prashthan kiya. Woh apne kamre ki taraf bhagi, yeh jaante hue ki ab woh poori tarah se Manik ke control mein thi. Manik muskuraata raha. Woh jaanta tha ki badla lene ka pehla chरण successfully pura ho chuka tha.

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Manik apne kamre mein aaya, uska chehra jeet ki khushi se chamak raha tha. Pari pehle se hi intezaar kar rahi thi ki chhat par kya hua.

Manik: (khushi se bistar par baithte hue) Aa ja, chhutki! Baith! Tu ne jo baat batayi thi na, usne mera kaam kar diya!

Manik ne utsaah se poori baat batayi — kaise woh store room mein chhupa, kaise Divya ne cigarette jalayi, aur kaise usne porn dekhte hue hastmaithun kiya. Usne yeh bhi bataya ki usne kaise kitchen mein Divya ko cigarette aur porn ka taana diya.

Pari pehle to aankhein faadkar sunti rahi, lekin jaise-jaise Manik utsaah se batata gaya, woh hansne lagi. Use yeh drishya itna ajeeb aur romanchak laga ki woh apni hansi rok nahi paayi.

Pari: (hanshte hue) Bhai! Matlab! Di aur cigarette? Aur... aur woh sab? Mujhe yakeen nahi ho raha!

Manik: (hanshte hue) Haan! Woh bhi chhat par! Maine uski poori video bana li hai! Ab dekh, woh kaise mujhe mana karti hai!

Saara rahasyodghaatan karne ke baad, Manik ka chehra ab krur aatmavishwas se bhar gaya. Woh Pari ke aur kareeb aaya.

Manik: (awaaz mein vasna aur adhikaar) Ab samajh, Pari! Ab woh meri mutthi mein hai. Ab uska ghurur tootega! Aur ab...

Manik ne thoda rukkar ek bhayankar ghoshna ki.

Manik: Ab uski choot par tere bhai ke lund ka adhikaar hai! Woh meri baat manegi, aur meri har baat manegi!

Pari ne apne hont bheenche, lekin woh is vichar par gussa nahi ho paayi. Manik ke aatmavishwas aur Divya ki pakdi gayi kamzori par use ek ajeeb si romanchak hansi aa gayi.

Pari: (dheere se na mein gardan hilaakar bhi hansne lagi) Tum... tum nahi sudhroge, bhai! Par tum yeh sab kar kyun rahe ho?

Manik: (hanshte hue, use gale lagate hue) Kyunki main ab use apne barabar laana chahta hoon! Yeh meri jeet hai, chhutki! Aur tu dekhna, ab uska hansna-bolna sab mere ishare par hoga!

Dono bhai-behen hanste rahe. Pari ke liye yeh sab ek khatarnak khel tha, lekin Manik ki jeet ne use bhi us khel ka hissa bana diya tha.

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Manik aur Pari abhi bhi Divya ki kamzori pakadne ki khushi mein hans rahe the. Manik ke haath mein uska phone tha, jismein Divya ki saari harkatein kaid thi.

Pari: (achanak utsaah se) Bhai! Mujhe woh video dekhni hai! Please! Mujhe dekhna hai ki di chhat par kya-kya kar rahi thi!

Manik ne phone ko hawa mein lahraya aur ek shaitaani muskuraahat di.

Manik: (awaaz mein shararat) Haan, zaroor! Tujhe dikhaunga. Par ek shart par!

Pari: (utsukta se) Kya? Kaisi shart?

Manik ne Pari ki aankhon mein dekha aur apni shart rakhi, jisse unki nazdeeki aur badh jaaye.

Manik: Tum mere god mein baithkar dekhogi. Aur jab tum video dekh rahi hogi, tab tum mujhe apni body par thoda haath lagane dogi. Aur haan, mujhe lambi, uttejak kiss dogi!

Pari ek pal ke liye ruk gayi. Divya ki video dekhne ki utsukta bahut zyada thi, lekin Manik ki shartein unki seemaon ko aur bhi zyada tod rahi thi. Woh thodi der tak sochti rahi. Antataah, utsukta ne dar par jeet haasil kar li.

Pari: (dheere se, sankoch ke saath) Theek hai, bhai. Tumhari shart manzoor hai.

Pari turant Manik ki god mein baith gayi, theek waise hi jaise woh pehle bhi baithte the, lekin is baar ka maksad aur bhi zyada spasht tha.

Manik ne Pari ko apni baahon mein kas liya. Phone on kiya aur Divya ki gupt video play kar di.

Pari ne aankhein gadakar woh video dekhi. Cigarette, porn, aur phir Divya ka khulkar hastmaithun karna — yeh sab dekhkar Pari poori tarah se stabdh reh gayi. Use apni badi behan ka yeh chhupa hua roop dekhkar ek ajeeb sa romanch mehsoos hua.

Jaise-jaise video mein Divya ki harkatein badhti gayi, Pari bhi uttejit ho gayi. Uske sharir mein garmi badhne lagi.

Udhhar, Manik ne apni shart nibhani shuru kar di thi. Woh Pari ke sharir par haath pherne laga. Usne pehle Pari ki kamar ko sahlaaya, phir dheere-dheere uske vakshasthal ko pakadkar dabana shuru kar diya.

Manik ne turant Pari ke honthon par apne hont rakh diye. Yeh ek gehra, junooni chumban tha, jo Divya ki uttejana ko dekhkar paida hua tha. Woh dono, Divya ki nagnata ko dekhte hue, khud hi yaun kriya mein lipt ho rahe the.

Pari ko apni behan ki video dekhkar aur Manik ke sparsh se ek varjit sukh mil raha tha. Dono ki saansein tez ho gayi, aur unhone apni yaun urja ko ek-dusre mein mehsoos kiya. Woh jaante the ki Divya ke raaz ne unke apne rishte ko ek khatarnak mod par la diya tha.

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Kuch der baad, video khatam ho gaya. Divya ka drishya aur Manik ka sparsh — in dono cheezon ne milkar Pari ko charam uttejana par pahuncha diya tha. Manik ki god mein baithi, poori tarah se bahki hui, Pari ko ehsaas hua ki ab unhe ruk jaana chahiye.

Pari: (kaampti hui awaaz mein, Manik ke honthon se door hatkar) Bhai... bas! Ab mujhe jaana chahiye. Main... main aur nahi ruk sakti.

Manik, jo khud bhi poori tarah se uttejit tha, usne Pari ko kaskar pakda.

Manik: (gehri saanson ke saath) Haan... mujhe pata hai. Tum... tum jao.

Pari, Manik ki god se uthi, uske kapde ast-vyast the aur uska chehra laal tha. Woh bina kisi sankoch ke apni niji ichha ko vyakt karti hai.

Pari: (sharmate hue, par dridata se) Haan. Tum bhi ab... tum bhi muth maar lo. Aur mujhe bhi... mujhe bhi apni choot ko sahlana hai. Yeh sab dekhkar mujhse raha nahi ja raha.

Pari ne apni baat poori ki aur kehkar chali gayi.

Manik, Pari ke jaane ke baad bistar par baith gaya. Uska lund 'fatne ko ho raha tha' — woh itni teevra uttejana mein tha ki ab aur bardasht nahi kar sakta tha. Pari ka khulapan, Divya ka raaz, aur unka varjit sparsh — in sabne milkar use bekaboo kar diya tha.

Manik ne bina der kiye hastmaithun shuru kar diya. Uska junoon itna teevra tha ki jab woh charam sukh par pahuncha, to uske veerya ki dhaar bahut door tak gayi. Yeh uske andar ki saari vasna, gussa aur tanav ki ek visphotak abhivyakti thi.

Manik haanfte hue bistar par let gaya, ab shaant aur santusht. Woh jaanta tha ki ab uske paas Divya se badla lene ka sabse bada hathiyar hai, aur woh iska istemaal karne ke liye poori tarah se taiyaar tha.



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Part - 53

Divya gusse mein tezi se kitchen se jaane lagi. Manik ne usko jaane nahi diya.

Manik: (shaant lekin sakht awaaz mein) Ek minute ruko, Divya!

Divya ekdum se ruk gayi. Uske mann mein dar tha ki Manik ab kya karne wala hai.

Manik dheere se uske paas aaya aur ekdum se uske chehre ke paas jakar ruk gaya. Woh Divya ko kuch bol nahi raha tha, balki usko sunghne laga.

Divya is harkat se ghabra gayi.

Divya: (gusse aur ghabrahat se) Yeh kya badtameezi hai, Manik! Aisa kyun kar rahe ho? Tum had paar kar rahe ho!

Manik ne sunghna band kiya. Usse woh halki, chirparichit gandh mil gayi thi.

Manik: (gehri hansi hanshte hue, aankhein chamkate hue) Kuch nahi. Bas dekh raha tha. Kahin koi ajeeb si gandh to nahi aa rahi? Mujhe laga shayad chhat se koi nayi hawa aayi hai, jiski gandh thodi tez hai.

Manik apni baat se cigarette ki gandh ki taraf ishara kar raha tha. Divya samajh gayi ki Manik ne sirf hastmaithun karte nahi dekha, balki usko cigarette peete hue bhi pakad liya tha.

Manik: (khuleaam mazaak udate hue) Khair chhodo. Tum jao. Apne kamre mein jaakar porn dekho!

Manik ne yeh kehkar Divya ke raaz par antim muhar laga di.

Divya ab poori tarah se toot chuki thi. Woh jaanti thi ki Manik ke paas ab poora saboot hai. Woh itni sharminda aur gusse mein thi ki uske paas bolne ke liye shabd nahi the.

Divya: (sirf gusse se bhari, dheemi awaaz mein) You!

Divya ne pair patakte hue kitchen se tezi se prashthan kiya. Woh apne kamre ki taraf bhagi, yeh jaante hue ki ab woh poori tarah se Manik ke control mein thi. Manik muskuraata raha. Woh jaanta tha ki badla lene ka pehla chरण successfully pura ho chuka tha.

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Manik apne kamre mein aaya, uska chehra jeet ki khushi se chamak raha tha. Pari pehle se hi intezaar kar rahi thi ki chhat par kya hua.

Manik: (khushi se bistar par baithte hue) Aa ja, chhutki! Baith! Tu ne jo baat batayi thi na, usne mera kaam kar diya!

Manik ne utsaah se poori baat batayi — kaise woh store room mein chhupa, kaise Divya ne cigarette jalayi, aur kaise usne porn dekhte hue hastmaithun kiya. Usne yeh bhi bataya ki usne kaise kitchen mein Divya ko cigarette aur porn ka taana diya.

Pari pehle to aankhein faadkar sunti rahi, lekin jaise-jaise Manik utsaah se batata gaya, woh hansne lagi. Use yeh drishya itna ajeeb aur romanchak laga ki woh apni hansi rok nahi paayi.

Pari: (hanshte hue) Bhai! Matlab! Di aur cigarette? Aur... aur woh sab? Mujhe yakeen nahi ho raha!

Manik: (hanshte hue) Haan! Woh bhi chhat par! Maine uski poori video bana li hai! Ab dekh, woh kaise mujhe mana karti hai!

Saara rahasyodghaatan karne ke baad, Manik ka chehra ab krur aatmavishwas se bhar gaya. Woh Pari ke aur kareeb aaya.

Manik: (awaaz mein vasna aur adhikaar) Ab samajh, Pari! Ab woh meri mutthi mein hai. Ab uska ghurur tootega! Aur ab...

Manik ne thoda rukkar ek bhayankar ghoshna ki.

Manik: Ab uski choot par tere bhai ke lund ka adhikaar hai! Woh meri baat manegi, aur meri har baat manegi!

Pari ne apne hont bheenche, lekin woh is vichar par gussa nahi ho paayi. Manik ke aatmavishwas aur Divya ki pakdi gayi kamzori par use ek ajeeb si romanchak hansi aa gayi.

Pari: (dheere se na mein gardan hilaakar bhi hansne lagi) Tum... tum nahi sudhroge, bhai! Par tum yeh sab kar kyun rahe ho?

Manik: (hanshte hue, use gale lagate hue) Kyunki main ab use apne barabar laana chahta hoon! Yeh meri jeet hai, chhutki! Aur tu dekhna, ab uska hansna-bolna sab mere ishare par hoga!

Dono bhai-behen hanste rahe. Pari ke liye yeh sab ek khatarnak khel tha, lekin Manik ki jeet ne use bhi us khel ka hissa bana diya tha.

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Manik aur Pari abhi bhi Divya ki kamzori pakadne ki khushi mein hans rahe the. Manik ke haath mein uska phone tha, jismein Divya ki saari harkatein kaid thi.

Pari: (achanak utsaah se) Bhai! Mujhe woh video dekhni hai! Please! Mujhe dekhna hai ki di chhat par kya-kya kar rahi thi!

Manik ne phone ko hawa mein lahraya aur ek shaitaani muskuraahat di.

Manik: (awaaz mein shararat) Haan, zaroor! Tujhe dikhaunga. Par ek shart par!

Pari: (utsukta se) Kya? Kaisi shart?

Manik ne Pari ki aankhon mein dekha aur apni shart rakhi, jisse unki nazdeeki aur badh jaaye.

Manik: Tum mere god mein baithkar dekhogi. Aur jab tum video dekh rahi hogi, tab tum mujhe apni body par thoda haath lagane dogi. Aur haan, mujhe lambi, uttejak kiss dogi!

Pari ek pal ke liye ruk gayi. Divya ki video dekhne ki utsukta bahut zyada thi, lekin Manik ki shartein unki seemaon ko aur bhi zyada tod rahi thi. Woh thodi der tak sochti rahi. Antataah, utsukta ne dar par jeet haasil kar li.

Pari: (dheere se, sankoch ke saath) Theek hai, bhai. Tumhari shart manzoor hai.

Pari turant Manik ki god mein baith gayi, theek waise hi jaise woh pehle bhi baithte the, lekin is baar ka maksad aur bhi zyada spasht tha.

Manik ne Pari ko apni baahon mein kas liya. Phone on kiya aur Divya ki gupt video play kar di.

Pari ne aankhein gadakar woh video dekhi. Cigarette, porn, aur phir Divya ka khulkar hastmaithun karna — yeh sab dekhkar Pari poori tarah se stabdh reh gayi. Use apni badi behan ka yeh chhupa hua roop dekhkar ek ajeeb sa romanch mehsoos hua.

Jaise-jaise video mein Divya ki harkatein badhti gayi, Pari bhi uttejit ho gayi. Uske sharir mein garmi badhne lagi.

Udhhar, Manik ne apni shart nibhani shuru kar di thi. Woh Pari ke sharir par haath pherne laga. Usne pehle Pari ki kamar ko sahlaaya, phir dheere-dheere uske vakshasthal ko pakadkar dabana shuru kar diya.

Manik ne turant Pari ke honthon par apne hont rakh diye. Yeh ek gehra, junooni chumban tha, jo Divya ki uttejana ko dekhkar paida hua tha. Woh dono, Divya ki nagnata ko dekhte hue, khud hi yaun kriya mein lipt ho rahe the.

Pari ko apni behan ki video dekhkar aur Manik ke sparsh se ek varjit sukh mil raha tha. Dono ki saansein tez ho gayi, aur unhone apni yaun urja ko ek-dusre mein mehsoos kiya. Woh jaante the ki Divya ke raaz ne unke apne rishte ko ek khatarnak mod par la diya tha.

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Kuch der baad, video khatam ho gaya. Divya ka drishya aur Manik ka sparsh — in dono cheezon ne milkar Pari ko charam uttejana par pahuncha diya tha. Manik ki god mein baithi, poori tarah se bahki hui, Pari ko ehsaas hua ki ab unhe ruk jaana chahiye.

Pari: (kaampti hui awaaz mein, Manik ke honthon se door hatkar) Bhai... bas! Ab mujhe jaana chahiye. Main... main aur nahi ruk sakti.

Manik, jo khud bhi poori tarah se uttejit tha, usne Pari ko kaskar pakda.

Manik: (gehri saanson ke saath) Haan... mujhe pata hai. Tum... tum jao.

Pari, Manik ki god se uthi, uske kapde ast-vyast the aur uska chehra laal tha. Woh bina kisi sankoch ke apni niji ichha ko vyakt karti hai.

Pari: (sharmate hue, par dridata se) Haan. Tum bhi ab... tum bhi muth maar lo. Aur mujhe bhi... mujhe bhi apni choot ko sahlana hai. Yeh sab dekhkar mujhse raha nahi ja raha.

Pari ne apni baat poori ki aur kehkar chali gayi.

Manik, Pari ke jaane ke baad bistar par baith gaya. Uska lund 'fatne ko ho raha tha' — woh itni teevra uttejana mein tha ki ab aur bardasht nahi kar sakta tha. Pari ka khulapan, Divya ka raaz, aur unka varjit sparsh — in sabne milkar use bekaboo kar diya tha.

Manik ne bina der kiye hastmaithun shuru kar diya. Uska junoon itna teevra tha ki jab woh charam sukh par pahuncha, to uske veerya ki dhaar bahut door tak gayi. Yeh uske andar ki saari vasna, gussa aur tanav ki ek visphotak abhivyakti thi.

Manik haanfte hue bistar par let gaya, ab shaant aur santusht. Woh jaanta tha ki ab uske paas Divya se badla lene ka sabse bada hathiyar hai, aur woh iska istemaal karne ke liye poori tarah se taiyaar tha.



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Part - 54

सविता अपने घर के ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठी, अपने मोबाइल पर अनीता से बात कर रही थी. अनीता, जो हाल hi में आनंद से प्रेग्नेंट हुई थी, और सविता, जो abhi-abhi आनंद से होटल में bahu-style चौड़ाई करवा कर लौटी थी — दोनों सहेलियां अब खुलकर आनंद की यौन क्षमता पर चर्चा कर रही थी.

सविता: (ख़ुशी और गर्व के साथ) सच कहती हूँ, अनीता! तुम खुशकिस्मत हो. तुम्हे पता है, आनंद का लुंड लगभग 8 इंच का है, और उसकी मोटाई भी ढाई इंच के aas-paas है!

अनीता: (फ़ोन पर उत्तेजित आवाज़ में) हाँ, सविता! मुझे पता है! जब वह पूरा अंदर जाता है तो लगता है जैसे दीवारें फैट जाएँगी! बहुत मज़ा आता है उससे छुड़वा कर! उसकी ताकत और गति का कोई जवाब नहीं!

दोनों सहेलियां बिना किसी संकोच के, बहुत चाव से ek-dusre को आनंद से अपनी चौड़ाई की बातें बता रही थी. उनके लिए यह सिर्फ गपशप नहीं, बल्कि आनंद की शक्ति की प्रशंसा थी.

सविता को ज़रा भी पता नहीं था की उसकी 18 साल की बेटी 'छोटू', जो abhi-abhi कॉलेज से लौटी थी, लिविंग रूम के पास के बैडरूम के दरवाज़े की ओट में कड़ी होकर उनकी साड़ी बातें सुन रही थी. छोटू का नाम यूँ hi 'छोटू' था, पर अब वह जवान हो चुकी थी.

छोटू ने जैसे hi '8 इंच', 'ढाई इंच', 'चौड़ाई', 'मज़ा' और 'आनंद अंकल का लुंड' जैसे शब्द सुने, उसके मैं में एक भयंकर उत्सुकता और रोमांच जाग उठा. उसके लिए यह शब्द किसी रहस्यमयी ख़ज़ाने की चाबी जैसे थे.

वह चुपके से वहां कड़ी रही, उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. उसने अपनी माँ की बातचीत से यह समझ लिया था की उसके अंकल, आनंद, कुछ ऐसे हैं जो 'बहुत मज़ा' दे सकते हैं, और उनका लुंड '8 इंच' का है.

छोटू के मैं में तीव्र विचार आया: “आनंद अंकल का लुंड! 8 इंच का! मैंने कभी किसी पुरुष के इतने बड़े लुंड के बारे में नहीं सुना. मुझे बड़ी उत्सुकता हुई की वह भी आनंद अंकल का लुंड देखे!”

वह वही ओट में कड़ी रही, यह योजना बनाते हुए की वह कैसे, कब, और कहाँ आनंद अंकल को अकेला में मिलेगी ताकि वह उनके उस '8 इंच के ख़ज़ाने' का दर्शन कर सके.

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छोटू अभी भी दरवाज़े की ओट में कड़ी थी, उसका दिमाग उसकी माँ और अनीता आंटी की बातचीत से मिले नए 'ज्ञान' से भरा हुआ था. उसके मैं में माँ की बातें गूंज रही थी: “8 इंच का... ढाई इंच मोटाई... बहुत मज़ा आता है...”

वह अपनी आँखों के सामने आनंद अंकल की छवि लाती है. अंकल हमेशा शांत और गंभीर दीखते थे, लेकिन उनके नीचे एक ऐसी शक्ति छिपी थी जिसकी कल्पना छोटू ने कभी नहीं की थी. अब उसकी उत्सुकता यौन इच्छा में बदल रही थी.

छोटू मैं hi मैं आनंद का लुंड अपनी छूट में लेने की योजना बनाने लगी और सोचने लगी.

वह कल्पना करती है की जब 8 इंच का वह लुंड उसकी छूट में जायेगा, तो उससे कैसा महसूस होगा. उसने अभी तक किसी पुरुष को क़रीब से नहीं देखा था, लेकिन माँ की बातों ने उससे एक स्पष्ट, रोमांचक तस्वीर दिखा दी थी.

वह सोचती है, “जब माँ को इतना मज़ा आता है, तो मुझे कितना आएगा? मेरी छूट अभी नयी है. क्या वह फैट जाएगी? क्या वह असहनीय दर्द होगा, या वह दर्द hi सबसे बड़ा सुख होगा?”

वह जानती थी की उससे आनंद अंकल से अकेला में मिलना होगा. “माँ के साथ वह कभी ऐसा नहीं करेंगे. मुझे कोई ऐसा बहाना ढूंढना होगा, जहाँ मैं और अंकल बिलकुल अकेला हों.”

वह सोचने लगी, “शायद ऑफिस में, या किसी काम के बहाने. वह हमेशा काम में व्यस्त रहते हैं. मुझे कोई 'ज़रूरी कागज़ात' या 'पर्सनल हेल्प' का बहाना बनाना पड़ेगा.”

“मैं उनसे सीधे बात नहीं कर सकती. मुझे उन्हें इशारा करना होगा. शायद थोड़ी देर तक उन्हें घूरना, या कोई छोटी स्कर्ट पहनकर उनके सामने बैठना. उन्हें पता चलना चाहिए की मैं तैयार हूँ.”

छोटू अपने निचले हिस्से में एक तीव्र उत्तेजना महसूस करती है. वह कल्पना करती है की एक बार जब वह 8 इंच का लुंड उसकी छूट में होगा, तो वह अपनी माँ की तरह hi चीखेगी और चरम सुख पाएगी. यह सिर्फ यौन इच्छा नहीं थी; यह प्रतिस्प्रधा थी — उस रोमांच को पाने की जो उसकी माँ को मिल रहा था.

वह अब सिर्फ एक जिज्ञासु लड़की नहीं थी, बल्कि अपनी वर्जित वासना को पूरा करने के लिए एक गुप्त योजना बनाने वाली युवती थी. छोटू ने ठान लिया था की वह जल्द hi आनंद अंकल के उस '8 इंच के ख़ज़ाने' को अपनी छूट में लेकर hi रहेगी.

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छोटू को एहसास हुआ की सिर्फ कल्पना करना hi काफी नहीं है. उससे आनंद अंकल को अपनी तरफ खींचने के लिए एक ठोस कदम उठाना होगा. उसका दिमाग तुरंत एक चालाक विचार पर गया.

वह अभी भी दरवाज़े की ओट में कड़ी थी. उसकी माँ, सविता, अभी भी फ़ोन पर अनीता से हँसते हुए आनंद के लुंड और चौड़ाई के बारे में विस्तार से बातें कर रही थी.

छोटू ने बिना देर किये, अपने मोबाइल का रिकॉर्डिंग फीचर (ऑडियो रिकॉर्डिंग) ों किया. उसने फ़ोन को दरवाज़े के पास रखा और धीरे से रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.

सविता की बातें: (फ़ोन पर, उत्तेजित होकर) “हाँ, अनीता! और जब वह डोगग्य स्टाइल में... उफ़! उसकी मोटाई... मैं तो बस...”

छोटू ने माँ की फ़ोन पर चल रही बात की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली. रिकॉर्डिंग में सविता और अनीता की हंसी, आनंद की यौन क्षमता की तारीफ, और “8 इंच” तथा “मज़ा” जैसे शब्दों का स्पष्ट उल्लेख था.

रिकॉर्डिंग बंद करने के बाद, छोटू ने अपने आप से सोचा, “शायद यह आनंद अंकल को पाने में काम आ जाए.”

वह जानती थी की यह रिकॉर्डिंग दो तरह से काम कर सकती है:

1. आनंद अंकल यह सुनकर दर सकते हैं की उनका राज़ पकड़ा गया है, और वह छोटू की बात मानने को मजबूर हो सकते हैं.

2. आनंद अंकल को यह देखकर रोमांच हो सकता है की उसकी जवानी बेटी उसके कारनामों से कितनी उत्तेजित है.

यह ऑडियो रिकॉर्डिंग अब छोटू के लिए एक गुप्त हथियार बन चुकी थी. वह चुपचाप दरवाज़े के ओट से खिसकी और अपने कमरे की तरफ चली गयी, अपने फ़ोन में छिपे इस राज़ के साथ, अपनी योजना को अंतिम रूप देने के लिए तैयार.

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दिव्या के राज़ को पकड़ने और पारी के साथ अंतरंगता के बाद भी, माणिक को लगभग एक महीने से आस्था के साथ मिलने का मौका नहीं मिला था. इस दौरान उसका यौन तनाव बहुत बढ़ चूका था. दिव्या के प्रतिशोध की योजना उसके दिमाग में थी, लेकिन उसकी शारीरिक ज़रूरतें अब आस्था से मिलना चाहती थी.

माणिक ने तुरंत आस्था को फ़ोन किया और उससे अपने दोस्त के खाली पड़े अपार्टमेंट में बुलाया.

आस्था तुरंत माणिक के पास पहुंची. दरवाज़ा बंद होते hi, उनका इंतज़ार ख़तम हो गया.

आस्था: (माणिक को कसकर पकड़ते हुए) माणिक! मुझे लगा तुम मुझे भूल गए! मैं बहुत बेताब थी.

माणिक: (उसे उठाकर) कैसे भूल सकता हूँ! अब देखो, मैं तुम्हारी साड़ी बेताबी मिटा दूंगा.

माणिक आज पूरी तरह से बेकाबू था, एक महीने की साड़ी वासना और तनाव को आस्था पर उतारने के लिए तैयार.

बिस्तर पर पहुँचते hi, माणिक ने आस्था को अपने ऊपर आने को कहा, लेकिन नियंत्रण अपने पास रखा.

माणिक ने आस्था के दोनों कूल्हों को ज़ोर से पकड़ा और उसे अपने लुंड पर तेज़ी से upar-neeche उछालना शुरू कर दिया. आस्था अपनी मर्ज़ी से हिल नहीं प् रही थी, बल्कि माणिक के हाथों से नियंत्रित हो रही थी.

आस्था: (तेज़ सांस लेते हुए) तुम... तुम मुझे चोट पहुंचाओगे!

माणिक: (जूनून से) यह दर्द नहीं, यह मेरा इंतज़ार है! अब तुम्हे अपनी साड़ी ऊर्जा मुझे देनी होगी!

आस्था पूरी तरह से माणिक की ले में आ गयी. माणिक नीचे से उसके वक्षस्थल को चूस रहा था, जबकि वह उसे एक उग्र सवारी दे रहा था.

माणिक को अभी भी संतुष्टि नहीं मिली थी. उसने आस्था को उठाया और उसे दीवार से तक लगाकर खड़े होने को कहा. आस्था ने दीवार का सहारा लिया.

माणिक ने आस्था को डोगग्य स्टाइल की स्थिति में दीवार से सताया. उसने अपने लुंड को योनि में डाला और zor-daar, तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए. वह इतनी तेज़ी से गति दे रहा था की आस्था का शरीर दीवार से baar-baar टकरा रहा था.

आस्था: (चीखते हुए) हाँ! हाँ! यह बहुत तेज़ है! रोको मत!

माणिक ने अपने दोनों हाथों से आस्था के वक्षस्थल को पीछे से पकड़कर इतना ज़ोर से दबाया की आस्था दर्द और आनंद के मिश्रण से चीख उठी. माणिक का गुस्सा और उत्तेजना इस क्रिया में पूरी तरह से बहार आ रही थी.

अंत में, माणिक ने आस्था को बिस्तर पर सीधा लिटाया और खुद उसके ऊपर आया. वह अपनी पूरी ताकत के साथ आस्था की गहराई में जाने लगा.

माणिक: (आँखों में देखते हुए) एक महीने का हिसाब बाकी है!

आनंद ने अंतिम चरण में अपने धक्कों को गहरा और धीमा कर दिया, ताकि दोनों चरम सुख को ज़्यादा देर तक महसूस कर सकें. माणिक आस्था के होंठों को चूमता रहा, जबकि वह अपनी साड़ी ऊर्जा उस क्रिया में लगा रहा था.

कुछ hi पलों में, वह दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे. माणिक ने अपना सारा वीर्य आस्था की गहराई में उतरा, और वह पूरी तरह से उसके ऊपर गिर पड़ा. एक महीने के यौन तनाव के बाद, माणिक पूरी तरह से संतुष्ट था.

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तीव्र चौड़ाई के बाद, माणिक और आस्था लगभग बीस मिनट तक हाँफते हुए बिस्तर पर लेते रहे. पसीना और गर्मी दोनों को परेशां कर रही थी.

आस्था: (माणिक के सीने पर सर रखकर) माणिक! मुझे लगता है की मैं चल नहीं पाऊँगी. तुम हमेशा मुझे तोड़ देते हो!

माणिक: (हँसते हुए) अभी तो सफाई बाकी है, मेरी जान! चलो, एक और राउंड करते हैं — शावर में!

माणिक ने आस्था को उठाया. वह दोनों नग्न hi बाथरूम में चले गए.

बाथरूम में, पानी की गर्म धार उनके शरीर पर पद रही थी. इससे उनकी थकान दूर होने लगी, लेकिन उनकी वासना अभी भी चरम पर थी.

माणिक ने आस्था को शावर की दीवार से सत्ता दिया.

शारीरिक खेल:

माणिक ने आस्था के वक्षस्थल को दोनों हाथों से पकड़ा और उन्हें upar-neeche सहलाते हुए ज़ोर से चूसना शुरू किया. पानी की धार उनके शरीर पर पद रही थी, और उनका मुँह ek-dusre के वक्षस्थल पर घूम रहा था.

आस्था: (पानी की आवाज़ के बीच, तेज़ी से सांस लेते हुए) माणिक... तुम... तुम हमेशा hi बेकाबू हो जाते हो!

माणिक ने तुरंत आस्था को घुमाया, और उसे झुकने को कहा, उसका एक हाथ दीवार पर था.

आक्रामक प्रवेश:

माणिक ने आस्था के बालों को एक हाथ से कसकर पकड़ा, और दूसरे हाथ से उसकी कमर को थाम लिया. उसने अपने लुंड को आस्था की योनि में ज़ोर से प्रविष्ट किया. इस स्थिति में, माणिक ने अपनी गति को पहले से भी ज़्यादा तेज़ रखा. गर्म पानी की धार उनके शरीर पर पद रही थी, जिससे उनकी त्वचा फिसल रही थी, और यह क्रिया और भी तीव्र हो गयी थी.

माणिक: (आवाज़ में जीत का जूनून) तुम्हे पता है न! तुम मेरी हो! सिर्फ मेरी! यह पानी... यह मेरे जोश को ठंडा नहीं कर सकता!

माणिक ने आस्था को दीवार के सहारे इतनी ज़ोरदार चौड़ाई दी की आस्था की आवाज़ शावर की आवाज़ में डाब गयी. आस्था ने अपनी साड़ी शक्ति दीवार को पकडे रखने में लगा दी, जबकि माणिक ने उसे पूरी तरह से अपने जूनून में डुबो दिया.

चरम सुख का सैलाब:

माणिक ने अंतिम धक्के लगाए. पानी की तेज़ धार के बीच, वह दोनों एक साथ चरम सुख के सैलाब में बाह गए. माणिक ने आस्था की कमर को कसकर थाम लिया और गहराई में अपना सारा वीर्य उतर दिया.

वह दोनों कुछ देर तक वही, दीवार से ठीके रहे. पानी की धार उनकी थकान और उत्तेजना को धो रही थी. आस्था, संतुष्टि से भरी हुई, माणिक की बाहों में दाह गयी. माणिक ने अपनी तीसरी इनिंग भी पूरी कर ली थी, और उसका एक महीने का तनाव पूरी तरह से ख़तम हो चूका था.

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Part - 55

माणिक के लिए वह एक महीना सिर्फ इंतज़ार का नहीं, बल्कि शिकार का टाइम था. उसने आस्था से दूर रहकर, अपना सारा ध्यान अपनी प्रतिशोध की योजना पर केंद्रित कर दिया था. उस एक महीने की अवधि में, माणिक ने रात के 11 बजे का इंतज़ार किया और स्टोर रूम में छिपकर दिव्या की लगभग 10 से 12 वीडियोस बना ली थी.

माणिक को अब दिव्या की हर आदत, हर वर्जित क्रिया की जानकारी थी.

माणिक के कैमरा में कैद दृश्य:

माणिक के लिए यह देखना हैरानी की बात थी की उसकी संस्कारी बहिन अपनी वासना को शांत करने के लिए kya-kya करती थी.

- कोमल चीज़ों का प्रयोग: कई रातों को दिव्या अपनी लोअर नीचे करती और अपनी छूट पर कोई सॉफ्ट सी चीज़ (जैसे कोई मखमल का कपडा या छोटा टॉवल) फेरत कर खुद को उत्तेजित करती थी.

- सब्ज़ियों का इस्तेमाल: माणिक ने काम से काम दो बार ऐसा दृश्य रिकॉर्ड किया जहाँ दिव्या ने एक खीरा (कुकुम्बर) या मूली (रदिश) डालकर खुद को संतुष्ट किया. यह दृश्य माणिक के लिए सबसे ज़्यादा चौंकाने वाले थे.

- नियमित हस्तमैथुन: बाकी दिनों में, दिव्या सिर्फ हाथ से hi अपनी छूट को सहलाकर खुद को चरम सुख देती थी.

- अटल आदत: इन सब वर्जित क्रियाओं के बीच, एक बात रोज़ होती थी — दिव्या सिगरेट डेली पीती थी. वह हर सेशन से पहले एक सिगरेट ज़रूर सुलगाती थी.

माणिक का यह निजी संग्रह दिव्या की गुप्त और दबी हुई वासना का एक संपूर्ण प्रमाण था. माणिक अब पूरी तरह से जानता था की उससे दिव्या को कहाँ से और कैसे पकड़ना है. उसके चेहरे पर एक शैतानी आत्मविश्वास था — यह सिर्फ वीडियोस नहीं थी, यह दिव्या के शरीर और इच्छा पर उसके भाई का अधिकार था.

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आज रात घर का माहौल बिलकुल अलग था. अनु दीदी को एक बड़ी शादी का इवेंट मिला था, जिसमें उससे पूरी रात बहार रहना था. दूसरी तरफ, आनंद को भी सविता ने रोक लिया था — वह दोनों भी आज रात पूरी रात चौड़ाई करने वाले थे.

घर पर अब सिर्फ माणिक, दिव्या और पारी थे.

माणिक अपनी योजना को अंजाम देने के लिए तैयार था. उसे अच्छी तरह से पता था की दिव्या अपनी रात की क्रिया (सिगरेट, हस्तमैथुन) के बाद, क़रीब 11:30 बजे नीचे आती है और आते hi पानी पीती है.

माणिक, पारी के कमरे में जाकर, अपने आप को उत्तेजित कर चूका था. रात के 11:35 बजे, वह सिर्फ अंडरवियर में, किचन में खड़ा था, पानी के लिए गिलास लिए हुए. उसका लुंड पूरी तरह से तन कर खड़ा था, जो उस पर पहने अंडरवियर से साफ़ दिख रहा था.

ठीक उसी टाइम, दिव्या छत से नीचे आयी और पानी पीने के लिए किचन में घुसी.

दिव्या ने अपने छोटे भाई को, किचन में इस हाल में — अंडरवियर में और खड़ा लुंड दिखते हुए — देखकर चौंक गयी. उसका दिल तेज़ी से धड़का.

दिव्या: (हैरानी और गुस्से से) माणिक! यह... यह क्या कर रहे हो? तुम इस हाल में किचन में क्यों खड़े हो?

माणिक ने दिव्या की तरफ देखा. उसके चेहरे पर एक भयंकर, कामिनी हंसी थी. यह नफरत, वासना और जीत का मिश्रण था.

माणिक: (शालीनता की साड़ी हदें तोड़ते हुए) क्या कर रहा हूँ? मुठ मार रहा था! तुम्हे देखा तो लगा, यहाँ सफाई कर लून.

दिव्या के पैरों टेल ज़मीन खिसक गयी. उसका छोटा भाई उसके सामने न सिर्फ हस्तमैथुन की बात कर रहा था, बल्कि उसे खुलेआम आमंत्री कर रहा था.

माणिक: (अपने तन चुके लुंड पर हाथ रखते हुए, उत्तेजक लहजे में) क्यों? क्या तुम मेरी मुठ मारोगी? आज रात मैं तुम्हे बहुत कुछ सीखा सकता हूँ.

दिव्या हैरान रह गयी की उसका छोटा भाई उससे किस तरह से बात कर रहा है. उसका मैं चीख उठा, लेकिन वह जानती थी की उसके पास बोलने के लिए कोई शक्ति नहीं है — माणिक के पास उसके सारे राज़ थे.

दिव्या को अपने छत वाले वीडियोस, सिगरेट और मूली वाले दृश्यों की याद आयी. उसने तुरंत फैसला किया की अभी टकराव का टाइम नहीं है.

दिव्या ने कोई जवाब नहीं दिया. उसने माणिक की तरफ गुस्से और लाचारी से देखा. उसने एक लम्बी सांस ली, और तुरंत वहां से चली गयी... लगभग भगति हुई.

माणिक एक ज़ोरदार, विजयी हंसी हँसता है. वह जानता था की दिव्या भाग गयी है, लेकिन उसने अपने गुलाम होने का पहला संकेत दे दिया था.

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सविता के घर से जाते hi छोटू ने अपनी योजना पर काम शुरू कर दिया. उसने तुरंत आनंद को फ़ोन लगाया.

छोटू: (आवाज़ में थोड़ी घबराहट और रहस्य) Hello, आनंद अंकल?

आनंद: (फ़ोन पर, थोड़ा हैरान होकर) हाँ, बीटा छोटू. क्या बात है? तुम इस समय फ़ोन कर रही हो?

छोटू: (धीरे से, पर दृढ़ता से) अंकल, मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात बतानी थी, पर मैं फ़ोन पर या किसी के सामने नहीं बता सकती. आप मुझे अकेला में मिलो, मैं मम्मी या पापा के सामने नहीं बता सकती.

आनंद, जिसने abhi-abhi सविता के साथ रात गुज़री थी, घबरा गया. उसे लगा की कहीं सविता या विनोद को उनके रिश्ते के बारे में कुछ पता तो नहीं चल गया.

आनंद: (थोड़ा चिंतित होकर) क्या हुआ बीटा? तुम इतनी परेशां क्यों लग रही हो? क्या बात थी? क्या बताना था बीटा? क्या तुम्हारे साथ कुछ गलत हो रहा है?

छोटू: (जानबूझकर माहौल बनाते हुए) नहीं अंकल, मेरे साथ कुछ गलत नहीं हो रहा है. बल्कि... बात यह है की मम्मी और पापा दो दिन के लिए देहरादून गए हैं. वह सुबह hi निकल गए हैं.

आनंद को थोड़ी रहत मिली की उसका राज़ नहीं खुला.

छोटू: (अपनी बात पर ज़ोर देते हुए) आप मेरे घर आ जाओगे? आप आज रात ऑफिस के बाद हमारे घर आ जाओ, मैं आपको फेस तो फेस hi बताउंगी. यह बहुत ज़रूरी है और किसी को पता नहीं चलना चाहिए.

आनंद को छोटू की बात अजीब लगी, लेकिन वह यह जान्ने को उत्सुक था की वह अकेली लड़की उससे क्या कहना चाहती है. साथ hi, उसके मैं में एक दर भी था.

आनंद का विचार (मैं hi मैं): “यह बच्ची मुझे इतनी रात को क्यों बुला रही है? कहीं इसके साथ घर पर कुछ गलत तो नहीं हो रहा है? कहीं किसी ladke-vadke का चक्कर तो नहीं है?”

बाहरसे उसने अपनी चिंता को छुपाया.

आनंद: (गंभीरता से) ठीक है बीटा. अगर इतनी ज़रूरी बात है, तो मैं ऑफिस के बाद तुम्हारे घर आता हूँ. लेकिन तुम्हे मुझे फ़ोन पर थोड़ा संकेत तो देना चाहिए था.

छोटू: (ख़ुशी से) ठीक है अंकल. मैं इंतज़ार करुँगी.



छोटू ने फ़ोन रख दिया. आनंद थोड़ा घबराया हुआ था, लेकिन उसके मैं में एक उत्सुकता भी थी. उसने सोचा, “मुझे जाना चाहिए. शायद वह सच में किसी परेशानी में हो.” लेकिन छोटू की आवाज़ में जो रहस्य था, उसने आनंद के दिमाग में एक वर्जित विचार भी दाल दिया था.
 
Part - 56छोटू ने फ़ोन रख दिया, और उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. आनंद अंकल को बुलाने में वह सक्सेसफुल रही थी, लेकिन अब असली चुनौती सामने थी: उनसे बात क्या करनी है?

छोटू सोचने लगी की “मैंने अंकल को बुला तो लिया, पर उनसे कहूँगी क्या?”

उसने अपने मैं में alag-alag योजनाएं सोचने लगी की ‘कैसे करूँ?’

- छोटू ने सोचा, “क्या मैं सीधे जाकर बोल सकती हूँ की ‘अंकल, मम्मी ने बताया की आपका लुंड 8 इंच का है, क्या मैं उसे देख सकती हूँ?’”

- तुरंत hi इस विचार पर उसने विराम लगा दिया. “नहीं! वह चौंक जायेंगे और मुझे डांटेंगे. वह सोचेंगे की मैं पागल हूँ, या मुझे तमीज नहीं है. वह तुरंत वापस चले जायेंगे.”

- निष्कर्ष: इतना सीधा और बोल्ड होना खतरनाक है.

- वह सोचने लगी की क्या कोई भावनात्मक कहानी बनायीं जाए. “मैं उन्हें बताउंगी की मैं कॉलेज में अकेली महसूस करती हूँ और मुझे किसी बड़े की सलाह चाहिए. शायद रोने लागूं?”

- “इससे वह मेरे क़रीब आ सकते हैं, लेकिन यह मेरे असली मकसद को पूरा नहीं करेगा. वह बस मुझे सर पर हाथ रखकर दिलासा देंगे.”

- निष्कर्ष: यह बहुत धीमा है और गारंटी नहीं है.

- छोटू को अपनी ऑडियो रिकॉर्डिंग याद आयी. “हाँ! यह सबसे अच्छा तरीका है!”

- योजना: जब अंकल आएंगे, तो मैं उन्हें बताउंगी की मुझे एक बहुत hi निजी समस्या है. फिर मैं ‘गलती’ से यह ऑडियो रिकॉर्डिंग प्ले कर दूंगी, जहाँ मम्मी और अनीता आंटी उनकी प्रशंसा कर रही हैं.

- जब अंकल सुनेंगे, तो वह घबरा जायेंगे की उनका राज़ खुल गया है. तब मैं शांत होकर बोलूंगी, “अंकल, मुझे यह सब सुनकर बहुत हैरानी हुई. मुझे लगा, मैं भी देखूं की यह 8 इंच का कैसा होता है...”

- “इससे वह डरेंगे, लेकिन साथ hi उत्तेजित भी होंगे. उन्हें पता होगा की वह पकडे गए हैं, और मेरे पास वह शक्ति है.”

- छोटू ने तुरंत यह भी तय किया की उसे कैसा दिखना है. “मुझे कुछ ऐसा पेहेनना होगा जो बहुत ज़्यादा उत्तेजक न हो, लेकिन अंकल को इशारा ज़रूर करे.”

- उसने सोचा, “आज मैं शॉर्ट्स और एक ढीली t-shirt पहनूंगी, जिसमें मैं बिना ब्रा के रहूंगी. जब मैं झुकूँगी या चलूंगी, तो उन्हें मेरी शारीरिक बनावट दिखनी चाहिए.”

छोटू ने अब अपनी योजना को अंतिम रूप दे दिया था. वह जानती थी की उसे चालाकी से काम लेना होगा. उसकी योजना रिकॉर्डिंग का दर और यौन आकर्षण का मिश्रण थी.

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छोटू ने अपनी योजना के अनुसार कपडे पेहेन्ने का फैसला किया. उसने सोचा की स्कर्ट उसकी जवानी को उभरेगी और शर्ट (जिसके ऊपर के दो बटन खुले होंगे) से उसकी वक्षस्थल की क्लीवेज का हल्का सा दर्शन होगा. यह पहनावा न तो ज़्यादा अश्लील था और न hi ज़्यादा शालीन — आनंद अंकल को साफ़ इशारा देने के लिए एकदम सही.

उसने अपने बाल सँवारे, हलके से परफ्यूम का इस्तेमाल किया, और कमरे में इंतज़ार करने लगी.

ठीक 8:00 बजे, दरवाज़े की घंटी बजी. छोटू का दिल ज़ोरों से धड़का, लेकिन वह अपनी उत्तेजना को छिपकर भागकर दरवाज़ा खोलने गयी.

दरवाज़ा खुलते hi, सामने आनंद अंकल खड़े थे — वही आदमी जिनके 8 इंच के लुंड की चर्चाएं उसने सुनी थी और जिसका वह दर्शन करना चाहती थी.

छोटू ने तुरंत मुस्कुराकर आनंद अंकल का स्वागत किया. उसकी मुस्कान में न सिर्फ विनम्रता थी, बल्कि उसकी आँखों में एक गुप्त, वासना भरी चुनौती थी.

आनंद ने छोटू को इस बोल्ड रूप में — छोटी स्कर्ट और ऊपर के बटन खुले हुए शर्ट में — देखकर हैरान रह गया. वह जानता था की छोटू एक जवान लड़की है, लेकिन इस तरह का खुला और उत्तेजक पहनावा उसके घर पर उसने पहले कभी नहीं देखा था. आनंद की चिंता (की छोटू किसी परेशानी में है) अब वर्जित वासना में बदलने लगी थी.

आनंद: (थोड़ा हकलाते हुए) Hello, बीटा छोटू. तुम... तुम ठीक हो?

छोटू: (मुस्कुराते हुए) हाँ, अंकल. मैं बिलकुल ठीक हूँ. आइये, अंदर आइये. पापा और मम्मी नहीं हैं, इसलिए आप आराम से बैठिये.

आनंद अंदर आया, लेकिन उसकी नज़र baar-baar छोटू की खुली गर्दन और छोटी स्कर्ट पर जा रही थी. उसे पता था की आज रात कुछ तो अजीब होने वाला है.

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आनंद लिविंग रूम में सोफे पर बैठ गए. उनके मैं में अभी भी छोटू के पहनावे और उसके रहस्यमयी निमंत्रण को लेकर अजीब से विचार चल रहे थे.

छोटू तुरंत उनके लिए एक गिलास पानी लायी. आनंद ने पानी पीकर गिलास मेज पर रखा.

आनंद: (थोड़ा बेचैन होकर) हाँ, छोटू बीटा. अब बताओ क्या बात है जो तुम्हे mummy-papa के सामने नहीं बोलनी थी? तुम इतनी परेशां क्यों लग रही हो?

छोटू ने पानी का गिलास मेज पर रखा. उसने अपनी कुर्सी उठायी और उसे आनंद की कुर्सी के ठीक सामने खिसककर बैठ गयी, ताकि वह ek-dusre को एकदम फेस कर सकें. यह नज़दीकी आनंद को और ज़्यादा असहज कर रही थी.

छोटू: (धीरे से, गंभीर आवाज़ में, आनंद की आँखों में देखते हुए) अंकल, बात hi कुछ ऐसी है की मैं किसी को नहीं बता सकती. अपने mummy-papa को भी नहीं. यह मेरे लिए बहुत मुश्किल है.

आनंद को लगा की छोटू किसी बड़ी परेशानी में है. उसके मैं में फिर चिंता और जिज्ञासा जाग उठी.

आनंद: (झुंझलाकर, थोड़ा परेशां होकर) अरे, बीटा! अब बताओ भी! क्या बात है? तुम इतनी बड़ी लग रही हो, तुम्हे पता है, तुम मुझसे कुछ भी कह सकती हो. मैं तुम्हारी मदद करूँगा. क्या तुम्हारे कॉलेज में कोई समस्या है? या किसी दोस्त ने कुछ किया है?

आनंद छोटू के माथे पर चिंता की लकीरों को देखकर परेशां था. उसे पता नहीं था की छोटू का असली मकसद क्या है.

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छोटू ने देखा की आनंद अंकल पूरी तरह से उसकी बात जान्ने के लिए उत्सुक हो गए हैं. यही सही समय था जब वह जानबूझकर झिझकते हुए अपनी बात रखती.

छोटू ने गहरी सांस ली, जैसे वह कोई बहुत बड़ा बोझ उतारने वाली हो.

छोटू: (आवाज़ में संकोच और चिंता का भाव लाते हुए) अंकल... बात ऐसी है, की... (वह रूकती है और नज़रें नीचे कर लेती है) ...पर आपसे मुझे बतानी hi पड़ेगी! क्यूंकि मम्मी और पापा के अलावा आप hi वह बड़े हो जिनसे मैं खुलकर बात कर सकती हूँ. मुझे किसी और पर उतना भरोसा नहीं है.

छोटू ने बड़े चतुराई से ‘भरोसे’ और ‘खुलकर बात करने’ का जाल फेंका. वह जानती थी की आनंद एक ज़िम्मेदार व्यक्ति हैं और वह उसकी बात को गंभीरता से लेंगे, खासकर जब छोटू उन्हें ‘अकेला बड़ा’ मानकर इतना सम्मान दे रही थी.



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Part - 57

आनंद: (अब और ज़्यादा चिंतित होकर, थोड़ा आगे झुकते हुए) हाँ, बीटा. तुम बिलकुल सही कह रही हो. तुम मुझ पर भरोसा कर सकती हो. अब हिम्मत करके बता दो की क्या बात है. मैं सुन रहा हूँ. क्या कोई... क्या कोई पर्सनल प्रॉब्लम है?

आनंद अब पूरी तरह से छोटू के जाल में फँस चुके थे. वह उत्सुक थे की छोटू का वह 'बहुत बड़ा और गुप्त' रहस्य क्या है, जिसे वह इतनी रात को, अकेला में, बता रही है.

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छोटू को एहसास हुआ की आनंद अंकल पूरी तरह से अब उसके कण्ट्रोल में हैं. अब उससे dheere-dheere अपने असली मकसद की तरफ बढ़ना था.

छोटू: (आवाज़ में धीमी, झिझकती हुई) अंकल... बात ऐसी है की... (वह फिर रूकती है, जैसे शब्दों को चुन रही हो) ...मेरे कॉलेज के फ्रेंड्स, ाशी और अरु, वह दोनों सेक्स करते हैं.

छोटू ने जानबूझकर यह शब्द इस्तेमाल किया.

छोटू: (शरमाते हुए, हाथ जोड़कर) सॉरी, अंकल. मुझे आपसे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना पद रहा है.

आनंद को एक पल के लिए झटका लगा, लेकिन उसकी जिज्ञासा तुरंत हावी हो गयी. वह जानता था की छोटू अब बड़ी हो चुकी है और यह बातें सामान्य हैं.

आनंद: (उत्सुकता से, थोड़ा आगे झुकते हुए) कोई बात नहीं बीटा. यू अरे एडल्ट. आज के ज़माने में यह सब चलता है. बात बताओ आगे. तुम्हे इससे क्या परेशानी है?

आनंद को भी उत्सुकता हो रही थी. उसे लगा की वह किसी टीनएज ड्रामा की बात करेगी.

छोटू: (नज़रें नीचे किये हुए) दरअसल, उन्हें देखकर मुझे भी 'kuch-kuch' होता है. मतलब... मुझे भी उनकी तरह का एहसास चाहिए. तो अरु बोलता है, 'तू भी मेरे दोस्त प्रथम के साथ कर ले.'

छोटू ने अपनी बात पूरी की और सीधे आनंद की आँखों में देखा.

छोटू: तो अंकल, मैं आपसे यह पूछना चाहती थी की क्या मेरी उम्र हो गयी है विर्जिनिटी खोने की? मुझे क्या करना चाहिए?

यह सवाल सुनकर आनंद तो hakka-bakka रह गया!

उसे लगा था की यह लड़की किसी लड़के की शिकायत करेगी की वह उसे परेशां कर रहा है या ब्लैकमेल कर रहा है. लेकिन यह तो खुद अपनी विर्जिनिटी खोने की इच्छा रख रही थी और एक बड़े से सलाह मांग रही थी.

आनंद के मैं में अब दोहरी भावनाएं थी: एक तरफ, उसके अंदर एक pita-tulya चिंता थी की वह इस लड़की को गलत दिशा में न जाने दे; दूसरी तरफ, उसके अंदर एक वर्जित वासना जाग उठी थी — यह देखकर की छोटू कितनी बोल्ड और खुली विचारों वाली थी.

आनंद कुछ देर तक चुप रहा, उसके दिमाग में अब छोटू की समस्या काम, और उसके अपने 8 इंच के लुंड की महिमा ज़्यादा घूमने लगी थी.

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आनंद, छोटू के इस खुले सवाल पर अब थोड़ा सहज हो गया था. उसने अपने चेहरे पर एक गंभीर और सलाह देने वाला भाव ला दिया.

आनंद: (शालीनता से) देखो बीटा छोटू, वैसे तो विर्जिनिटी किस उम्र में खोनी है, यह आपका व्यक्तिगत मामला (पर्सनल मटर) है. मैं तुम्हे कोई आदेश नहीं दे सकता.

आनंद ने अपनी बात को ऐतिहासिक सन्दर्भ से जोड़ा, जो उसके अपने कृत्यों को सही ठहरने जैसा था.

आनंद: मैं तुम्हे बताना चौंगा की पहले के समय में लड़कियों की शादी बहुत छोटी उम्र में हो जाती थी. वह भी छोटी उम्र में hi विर्जिनिटी खो देती थी. तो तुम अगर 18 में करो, तो वैसे भी यह लीगल आगे है (कानूनी उम्र) यह सब करने की. तुम कोई गलत काम नहीं करोगी.

आनंद ने अब अपनी दूसरी, ज़्यादा महत्त्वपूर्ण सलाह दी.

आनंद: पर दूसरी सलाह मैं तुम्हे यह दूंगा की तुम किसी ऐसे लड़के के साथ करना जो सही हो. जो तुम्हे समझे, तुम्हारी इज़्ज़त करे और जो तुमसे प्यार करता हो. वर्ण यह अनुभव तुम्हे ज़िन्दगी भर के लिए दुःख दे सकता है.

आनंद की यह सलाह सुनकर छोटू ने तुरंत अपनी योजना का अगला कदम उठाया. उसने जानबूझकर एक उदास सा मुँह बनाया और नाटक किया की वह बहुत परेशां है.

छोटू, आनंद की कुर्सी के और करीब आयी और अपने दोनों हाथ आगे बढाकर, आनंद की जाँघों (तइस) पर प्यार और लाचारी से रख दिए.

छोटू: (आवाज़ में दर और निराशा) वही तो, अंकल! मुझे इसी बात का तो दर है! मैं किसी बहार वाले पर भरोसा नहीं कर सकती. मुझे इस बात का भी दर है की वह मुझे ब्लैकमेल न करने लगे!

छोटू ने अब अपने असली मकसद की तरफ बढ़ना शुरू किया.

छोटू: इसलिए मैं चाहती थी की कोई अपना hi मेरी विर्जिनिटी ले. कोई ऐसा जिस पर मैं पूरा भरोसा कर सकूँ. कोई ऐसा जो मुझे ब्लैकमेल न करे, जो जानता हो की यह मेरा एक निजी और पवित्र पल है.

छोटू की बात सुनकर आनंद पूरी तरह से हिल गया. वह जानता था की 'अपना' कहने से उसका क्या मतलब है, खासकर जब वह उसकी जाँघों को छू रही थी और उसने पहले hi आनंद की यौन क्षमता के बारे में सुन लिया था. आनंद की साड़ी चिंता अब वर्जित यौन आकर्षण में बदल गयी थी.

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आनंद, छोटू के जाँघों पर हाथ रखने और 'कोई अपना' की बात सुनकर पूरी तरह से असहज हो गया था. उसे पता था की छोटू का इशारा किस तरफ है. वह स्थिति को सँभालने की कोशिश करने लगा.

आनंद: (झुंझलाहट और घबराहट के मिश्रण से) लेकिन बीटा, इस बारे में मैं क्या कह सकता हूँ? यह बहुत... बहुत निजी फैसला है. मुझे लगता है तुम्हे अपनी माँ से या किसी सहेली से बात करनी चाहिए.

छोटू ने आनंद के टालने के प्रयास को भांप लिया. वह अपनी कुर्सी से थोड़ा और आगे बढ़ी, और आनंद के दोनों कन्धों पर अपने दोनों हाथ रखे. उसकी आँखें आनंद की आँखों में गाड़ी थी.

छोटू: (आवाज़ में लाचारी, लेकिन आँखों में गहरा इशारा) तभी तो आपको बुलाया है, अंकल! आप hi तो एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिस पर मैं इतना भरोसा कर सकती हूँ. आप hi मेरा मसला हल कीजिये!

छोटू ने अब अपनी समस्या को और भी स्पष्ट किया, जो की एक तरह का खुला निमंत्रण था.

छोटू: (फुसफुसाते हुए, अपने वक्षस्थल को थोड़ा आगे करते हुए) क्यूंकि... क्यूंकि मेरे नीचे बड़ी खुजली होती है! मुझे अब लगता है की यह सब दिमाग का खेल नहीं है. अब मुझे लगता है की मुझे भी किसी का लेना चाहिए!

छोटू अब पूरी तरह से इशारों से बात कर रही थी. उसने 'खुजली' कहकर अपनी यौन उत्तेजना को बताया और 'किसी का लेना' कहकर आनंद के लुंड की तरफ स्पष्ट इशारा किया.

आनंद का मुँह सूख गया. छोटू की नज़दीकी, उसकी आँखों का वासना भरा भाव, और उसके कंधे पर रखे हाथ — सब कुछ आनंद को एक वर्जित रिश्ते की तरफ खींच रहा था. आनंद की साड़ी pita-tulya चिंता अब उसके अंदर की वासना से टकरा रही थी. वह इस बात से घबरा रहा था की अगर वह इस स्थिति को संभालेगा नहीं, तो वह एक बहुत बड़ी गलती कर बैठेगा.



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Part - 58आनंद अब पूरी तरह से दुविधा में पद गया था. एक तरफ उसके अंदर का ज़िम्मेदार व्यक्ति उससे छोटू को सही रास्ता दिखने को कह रहा था, दूसरी तरफ छोटू की नज़दीकी और उसके खुले निमंत्रण ने उसके अंदर की वासना को जगा दिया था.

आनंद: (आवाज़ में बेचैनी, छोटू के हाथों को धीरे से हटाने की कोशिश करते हुए) बीटा... लेकिन इस मामले में मैं क्या कर सकता हूँ? यह बहुत... बहुत मुश्किल बात है. तुम्हे समझना चाहिए.

छोटू को एहसास हुआ की आनंद अभी भी हिचकिचा रहा है. यह सही समय था अपने अंतिम हथियार का इस्तेमाल करने का.

छोटू ने तुरंत अपनी आँखों में झूठे आंसू ला लिए. उसकी आवाज़ भर्रा गयी, और वह और भी ज़्यादा लाचार दिखने लगी.

छोटू: (आंसू भरी आँखों से, आनंद की आँखों में देखते हुए) अंकल! आप मेरी बात क्यों नहीं समझ रहे हो? मैं कितनी परेशां हूँ! मुझे अपनी छूट में किसी का लुंड लेना है! बहुत मैं है मेरा! मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ!

छोटू ने अपने दर्द और वासना को एक साथ व्यक्त किया.

छोटू: (रोने का नाटक करते हुए) मुझे दर है, अंकल! देखना, कहीं मैं गलत जगह न भटक जॉन! कहीं मैं किसी ऐसे लड़के के साथ न कर लून जो मुझे बर्बाद कर दे! आप hi तो कहते थे की किसी भरोसेमंद के साथ करना चाहिए.

छोटू ने अपने इस अंतिम भावनात्मक और यौन ज़ोर से आनंद को पूरी तरह से घेर लिया था. ‘गलत जगह भटकने’ का दर और ‘भरोसेमंद’ का आग्रह — दोनों बातें सीधे आनंद की तरफ इशारा कर रही थी.

आनंद की साड़ी नैतिकता अब उस दृश्य के सामने दहलने लगी थी. छोटू के आंसू, उसका जवान और उत्तेजक शरीर, और उसकी saaf-saaf कही गयी इच्छा — यह सब मिलकर आनंद को एक ऐसे चौराहा पर ले आया था जहाँ उसे एक वर्जित फैसला लेना था.

**************************

छोटू रोने का नाटक करते हुए और अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए, जानबूझकर आनंद की तरफ ज़्यादा झुक गयी थी. इस झुकाव की वजह से, उसकी शर्ट के दो खुले बटन अब किसी काम के नहीं रहे.

उसके बूब्स आनंद को काफी हद तक दिख रहे थे. उसकी t-shirt के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी, जैसे उसने तय किया था.

यहाँ तक की, उसके झुकाव के कारण, उसके एक बूब का निप्पल भी आनंद को साफ़ नज़र आ रहा था. वह निप्पल, उत्तेजना और शायद थोड़ी ठंडक के कारण तन चूका था.

जैसे hi आनंद की नज़र उस तने हुए निप्पल पर पड़ी, वह तुरंत उस दृश्य में खो गया. उसकी आँखें छोटू के चेहरे से हटकर उसके बूब्स पर टिक गयी.

छोटू बहुत चालाक थी. उसने देख लिया की आनंद की नज़र कहाँ है. उसने तुरंत इस बात का फायदा उठाते हुए अपनी बात पूरी की.

छोटू: (आंसू पोंछने का नाटक करते हुए, आवाज़ में शरारतीपन) देखो न, अंकल! आप भी देख प् रहे हो! मुझे नहीं पता यह क्यों होता है, पर मेरे निप्पल कितने तन गए हैं! शायद मेरी खुजली बहुत बढ़ गयी है.

छोटू की यह बोल्ड बात सुनकर और उसके खुले अंग देखकर, आनंद के अंदर की साड़ी वर्जित वासना अब बेकाबू हो गयी. उसकी पंत के अंदर, आनंद का लुंड एकदम खड़ा हो गया.

आनंद ने तुरंत अपने पैरों को कसकर बंद करने की कोशिश की, लेकिन छोटू ने उसके शरीर की प्रतिक्रिया को तुरंत भांप लिया.

छोटू, जो आनंद के लुंड की 8 इंच की शक्ति देखने आयी थी, वह अपनी योजना की सफलता देखकर मुस्कुराने लगी. उसकी आँखों से अब आंसू गायब थे, और वहां एक विजयी, वासना भरी चमक थी. आनंद अब पूरी तरह से उसके वश में था.

************************************

छोटू ने आनंद के लुंड की प्रतिक्रिया को भांप लिया था, और अब वह पीछे हटने वाली नहीं थी. उसने अपनी बोल्ड बातों और बोल्ड हरकतों से आनंद को पूरा सडके करना शुरू कर दिया.

आनंद, शर्म और वासना के कारण, पूरी तरह से हिल गया था और उसकी तो बोलती बंद हो गयी थी. वह सिर्फ हांफ रहा था और अपनी जाँघों को कसकर बंद करने की कोशिश कर रहा था.

छोटू ने इसका फायदा उठाया और आनंद के कान के पास झुककर, फुसफुसाते हुए कहा.

छोटू: (मीठी, उत्तेजक आवाज़ में) अंकल! आप खुद देखो न! जब आपका इस उम्र में मुझे देखकर लुंड खड़ा हो गया, तो मेरी चढ़ती जवानी में क्या हाल होगा? आप तो समझ सकते हो न! मेरा तो खून खौल रहा है!

छोटू की यह बात आनंद के दिमाग में सीधे चोट कर गयी. वह साफ़ कह रही थी की अगर एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति का यह हाल है, तो जवान लड़की का क्या हाल होगा — और इसका सीधा इलाज आनंद के पास hi था.

छोटू रुक नहीं रही थी. वह अपनी नज़रों, मुस्कान और शारीरिक निकटता से छक्के पे छक्के मार रही थी.

छोटू: (और ज़्यादा झुकते हुए) अंकल, आप इतने अच्छे हो, आप इतने सच्चे हो. आप hi मुझे बचा सकते हो. मुझे पता है आप मुझे गलत रास्ते पर नहीं जाने डोज.

छोटू की हर बात, हर स्पर्श — उसके कंधे पर रखे हाथ, उसके खुले अंग — आनंद को baar-baar बोल्ड कर रहे थे. आनंद अब पूरी तरह से हार मान चूका था. उसका सारा दर, साड़ी नैतिकता अब छोटू की जवानी और उसके खुले आमंत्रण के आगे पिघल चुकी थी.

वह अब न तो ‘न’ कह सकता था, और न hi ‘हाँ’. वह सिर्फ इंतज़ार कर रहा था की छोटू कब पहल करे.



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Part - 59

आनंद अब पूरी तरह से हार maan-ne वाला था, तभी उसके मैं में एक ख्याल आया. उसे याद आया की वह इस लड़की की माँ (सविता) के साथ भी वही सब करता है. इस एहसास ने उसे अंतिम बार रोका.

आनंद: (खुद को पीछे खींचते हुए, घबराया हुआ) नहीं, छोटू बीटा! तुम मेरे साथ ऐसे मत करो! तुम मेरी बेटी के सामान हो! यह सब... यह बहुत गलत है!

छोटू को आनंद का प्रतिरोध देखकर हंसी आ गयी. उसने अब अपने अंतिम डाव का इस्तेमाल किया.

छोटू: (शरारती अंदाज़ में आँख मारते हुए और आत्मविश्वास से) अंकल! वह तो मैं हूँ! क्यूंकि मेरी माँ आपकी इतनी अच्छी दोस्त जो है!

आनंद को छोटू की बात का मतलब समझ नहीं आया.

आनंद: (झुंझलाकर) क्या मतलब? Saaf-saaf बताओ!

छोटू ने अब बिना संकोच के, आनंद के तन चुके लुंड पर बहार से (पंत के ऊपर से) हाथ फेरते हुए कहा.

छोटू: (मीठी, फुसफुसाती आवाज़ में) क्या आप सच में नहीं जानते? अरे! उनको तो आपके लुंड का साइज भी पता है! इसीलिए तो मुझे भी इतनी उत्सुकता हुई!

इस हरकत से आनंद पूरी तरह से घबरा गया. उसने तुरंत छोटू का हाथ झटका और अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया.

आनंद: (लगभग चिल्लाते हुए) यह सब क्या बोल रही हो तुम, छोटू? तुम होश में तो हो? तुम्हे किसने क्या बता दिया?

आनंद की बात भी पूरी नहीं हुई थी की छोटू ने अपने सोफे के पास रखा फ़ोन उठाया और तुरंत वह ऑडियो चला दी.

ऑडियो में छोटू की माँ (सविता) की उत्तेजित आवाज़ थी, जो आनंद की दूसरी पार्टनर अनीता से बात करते हुए saaf-saaf बोल रही थी की आनंद के लुंड का साइज 8 इंच है, और उससे चौड़ाई करके कितना मज़ा आता है.

ऑडियो सुनकर आनंद के होश उड़ जाते हैं. उसे एहसास हुआ की न सिर्फ छोटू को उसके काले कारनामों का पता है, बल्कि छोटू की माँ ने खुद अपना राज़ खोल दिया है. आनंद को अब पता चल गया था की वह पूरी तरह से पकड़ा जा चूका है और छोटू के पास अब उस पर पूरा कण्ट्रोल है.

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ऑडियो रिकॉर्डिंग के विस्फोट ने आनंद को पूरी तरह से निहथा कर दिया था. उसके राज़ अब खुले बाजार में थे, और वह जानता था की अब उसकी साड़ी शक्ति ख़तम हो चुकी है.

इससे पहले की आनंद कुछ सोच पाटा या समझ पाटा, छोटू बिजली की तेज़ी से उठी. वह आनंद के सामने आयी, ज़ोर से झुकी, और उसकी पंत की ज़िप खोल दी.

आनंद पूरी तरह से स्तब्ध था. वह विरोध करने लायक भी नहीं बचा था.

छोटू ने आनंद के तन चुके लुंड को पंत से बहार निकाला. वह 8 इंच का लुंड छोटू की आँखों के सामने था.

छोटू ने तुरंत उसे दोनों हाथों से पकड़ा, और उसे प्यार से अपने गालों पर फेरते हुए कहा.

छोटू: (आवाज़ में गहरी प्रशंसा और वासना) अंकल! यह वाक़ई बहुत प्यारा है! और मुझे लगता है की इससे बड़ा शायद hi किसी का हो! मम्मी और अनीता आंटी सही कहती हैं.

छोटू की यह हरकत आनंद के लिए अंतिम झटका थी. वह अब इतना कमज़ोर पद चूका था की ‘न’ कहने के क़ाबिल hi नहीं रहा था. उसका दिमाग, उसकी नैतिकता, उसका कण्ट्रोल — सब कुछ छोटू की जवानी और उसके खुलेआम निमंत्रण के सामने समर्पण कर चूका था.

आनंद सिर्फ वही खड़ा रहा, उसकी आँखें बंद थी. अब उसके सामने सिर्फ छोटू की वासना थी, और वह उसका शिकार बनने के लिए तैयार था.

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छोटू ने बिना एक पल गंवाए, अपने गालों से आनंद के 8 इंच के लुंड को हटाकर, अपने होंठों पर लगा दिया.

छोटू के होंठ लगते hi — उसकी जवानी और गर्मजोशी के पहले स्पर्श से — आनंद के लुंड ने विकराल रूप ले लिया. वह अंतिम हद तक तन गया, और अब वह किसी लोहे की रोड के सामान कठोर और सीधा हो गया था.

आनंद की आँखें बंद हो गयी. वह विरोध करने लायक भी नहीं रहा था. उसकी साड़ी इच्छाएं, जो पहले वर्जित थी, अब छोटू के इस खुले आक्रमण से आज़ाद हो गयी.

छोटू ने तुरंत उसे चूसना शुरू कर दिया. वह जानती थी की उसे क्या करना है, और उसने पूरे चाव से, अपनी माँ के प्रेमी के लुंड को अपने मुँह में लिया. उसकी जीभ और होंठ आनंद के लुंड के संवेदनशील हिस्सों को उत्तेजित करने लगे.

आनंद अब किसी भी तरह की शर्म या प्रतिरोध से मुक्त था. वह सिर्फ सुख में डूबा हुआ था. उसके मुँह से गहरी आहें निकलने लगी.

आनंद: (सिसकते हुए) आआह... छोटू... तुम... तुम...

छोटू ने मुँह से लुंड को निकालकर आनंद की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक विजयी चमक थी.

छोटू: (मीठी हंसी के साथ) अंकल! अभी तो बस शुरुआत है!

यह mukh-maithun, जो छोटू के घर के लिविंग रूम में हो रहा था, उनके बीच के वर्जित सम्बन्ध की नीव रख रहा था.

******************************

छोटू और आनंद, अब लिविंग रूम के सोफे पर, पूरी तरह से वासना से भर चुके थे. छोटू ने abhi-abhi आनंद के लुंड को चूसना बंद किया था, और आनंद का सारा प्रतिरोध दाह चूका था.

छोटू ने अपने शरीर से सारे कपडे उतार दिए. आनंद ने भी जल्दी से अपनी पंत नीचे खिसका दी. दोनों ek-dusre की नग्नता को देखकर हांफ रहे थे.

छोटू: (सांस भरते हुए, पूरी तरह उत्तेजित) अंकल! अब और इंतज़ार नहीं होता! मुझे वही चाहिए, जिसके बारे में मम्मी और अनीता आंटी बात करती हैं!

आनंद ने छोटू को तुरंत सोफे पर लिटाया. अब आनंद ने कमान संभाली.

आनंद: (उत्तेजित आवाज़ में) मेरी जान छोटू... तुम्हारा यह दर और इच्छा... मैं अब इसे शांत करूँगा!

आनंद ने छोटू के अंगों को प्यार से सहलाया. फिर, वह अपनी बेटी की उम्र की उस लड़की पर, जो अभी भी कुंवारी थी, पूरी तरह से चढ़ गया. उसने अपना सारा वज़न छोटू पर नहीं डाला, बल्कि खुद को हाथों पर संभाला.

पहला प्रवेश और चीख:

आनंद ने अपने 8 इंच के लुंड को छोटू की वर्जिन छूट के मुहाने पर रखा. छोटू की आँखें उत्तेजना से बंद थी. आनंद ने एक गहरी सांस ली और पहला ज़ोरदार धक्का लगाया.

तीव्र, असहनीय दर्द हुआ. आनंद का कठोर लुंड, छोटू के कुंवारेपन को तोड़ता हुआ अंदर गया.

छोटू के मुँह से एक बड़ी, तेज़ चीख निकल गयी! वह चीख, दर्द, आश्चर्य और उस वर्जित इच्छा की पूर्ती के कारण थी. उसका शरीर अचानक अकड़ गया.

छोटू: (आवाज़ फटते हुए) आआह! ऊऊफफफफ! आनननकककललललल!

आनंद, जो जानता था की वह क्या कर रहा है, वह एक पल के लिए रुक गया.

आनंद: (माथे पर पसीना) दर्द हो रहा है?

छोटू: (आंसू आँखों में भरकर, लेकिन सर हिलाकर) नहीं! रुको मत! बस... अंदर रहो! मुझे यह चाहिए था!

आनंद ने dheere-dheere, लेकिन मज़बूती से, खुद को पूरा अंदर तक दाल दिया. छोटू अब पूरी तरह से आनंद के कण्ट्रोल में थी. आनंद ने dheere-dheere चौड़ाई शुरू की, और जल्दी hi दर्द तीव्र सुख में बदल गया. छोटू की चीखें अब आनंद और उसकी वासना के लिए संगीत बन चुकी थी.

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पहली, ज़ोरदार चौड़ाई के बाद, छोटू को बहुत दर्द हो रहा था. उसका शरीर काँप रहा था और उसकी आँखें थोड़ी नाम थी. लेकिन, वह दर्द से ज़्यादा संतुष्टि महसूस कर रही थी.

आनंद, अपनी जीत का जश्न मानते हुए, पूरी तरह से छोटू के ऊपर लेता हुआ था. उसका भरी शरीर छोटू को दबा रहा था, और छोटू इस दबाव का आनंद ले रही थी.

दर्द के बावजूद, छोटू ने अपने दिल की बात कही.

छोटू: (सांस लेते हुए, धीरे से) अंकल... सच कहूं तो... मुझे बहुत दर्द हो रहा है. पर... (वह ज़ोर देकर बोलती है) जब मैंने सुना की आपका लुंड 8 इंच का है, तो मुझसे रहा नहीं गया.

छोटू ने आनंद के चेहरे पर हाथ रखा.

छोटू: मैंने बस यह सोचा की मुझे अपनी विर्जिनिटी आपके 8 इंच वाले से hi खोनी है! इसीलिए मैंने यह सब किया. आप वाक़ई में बहुत शानदार हो.

आनंद, उसके ऊपर लेता हुआ था और पूरा आनंद ले रहा था. छोटू की यह बात सुनकर उसका अहंकार और उसकी वासना दोनों तृप्त हो रहे थे.

आनंद: (आवाज़ में गहरा प्यार और वासना) तुम कमाल हो, छोटू!

आनंद ने छोटू के बूब्स पर अपना मुँह रखा और उन्हें zor-zor से चूसना शुरू कर दिया. वह एक निप्पल से दुसरे निप्पल पर जा रहा था, और छोटू ख़ुशी से सिसकने लगी. इसके साथ hi, आनंद झुककर छोटू के होंठों को भी चूमने लगा.

छोटू, आनंद के हर स्पर्श, हर चुम्बन और हर चूसने का आनंद ले रही थी. दर्द के बावजूद, उसे एहसास हो रहा था की उसकी वर्जित इच्छा पूरी हो चुकी है, और वह इस 8 इंच के लुंड की मालकिन बन चुकी है.

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आनंद और छोटू की अठखेलियां (फ्लिर्टिंग एंड फोरप्ले) सोफे पर बहुत देर तक चलती रही. आनंद कभी छोटू के बूब्स चूसता, तो कभी उसके होंठों को चूमता, और छोटू दर्द के बावजूद हर स्पर्श का जवाब दे रही थी.

काफी देर बाद, छोटू को एहसास हुआ की उसका शरीर अब और बर्दाश्त नहीं कर पायेगा.

छोटू: (सांस भरते हुए, आनंद को हटते हुए) अंकल! बस... बस अब!

छोटू: (दर्द भरी लेकिन लाचार आवाज़ में) आज तो इतना दर्द हो रहा है की मैं आपका दूसरी बार नहीं ले पाऊँगी! मेरी तो जान निकल जाएगी!

छोटू ने फिर अपनी अगली इच्छा सामने राखी, जो उनके रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी थी.

छोटू: लेकिन, अंकल, आप वादा कीजिये, आप मेरे साथ जल्द hi पूरी रात बिताएंगे! मैं आपको बहुत सारा प्यार दूंगी, जिसकी मम्मी को भी खबर नहीं होगी!

आनंद को भी कुंवारी छूट पाकर बहुत सुख मिला था. छोटू की जवानी, उसका समर्पण, और उसके राज़ ने उसे एक नया रोमांच दिया था. वह तुरंत वादा करने को तैयार हो गया.

आनंद: (भावुक होकर, छोटू के माथे को चूमते हुए) हाँ, बीटा! तुमसे वादा है! मैं तुम्हारे साथ जल्द hi पूरी रात बिटूंगा. और हाँ, आज रात की बात हम दोनों के बीच राज़ रहेगी.

आनंद ने छोटू को प्यार से विदा किया. छोटू ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोला.

आनंद ने अपने कपडे पहने और वहां से अपने घर की तरफ चल दिया. वह जाते हुए भी संतुष्टि और चिंता के मिश्रण में था — वह जानता था की उसने एक वर्जित सीमा पार कर ली है, और अब उसकी एक और गुप्त प्रेमिका है, जिसकी उम्र उसकी बेटी के बराबर है.



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