Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 5 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट .... 37

आदि की माँ को जब होश आती है तो आदि की माँ खुद को एक रूम मैं पति है आदि की माँ उठ कर बीएड पर बैठ जाती है

आदि की माँ उस रूम को चरों तरफ देखने लगाती है उस रूम के दीवारों पर सिर्फ नंगी नंगी लड़की आवर जयादा उम्र की औरतों की फोटो होती है उस रूम की दीवारों पर नंगी नंगी फोटो देख कर आदि की माँ शर्म से अपनी आँखें निचे कर लेती है

आदि की माँ को इतनी शर्म महसूस होने लगाती है की आदि की माँ अपनी आँखे भी उठा नहीं पति है

हे देवी माँ कैसी परीछा ले रही है माँ मेरी मदद कीजिये मेरे बेटे आदित्य से मुझे मिलवा दीजिये मैं अपने बेटे को लेकर अपने घर चली जाउंगी मेरी मदद कीजिये देवी माँ ..... आदि की माँ निचे सर किये hi मन मैं बिनती करती है

आदि की माँ सोच रही होती है तभी रूम का गेट खुलता है आवर एक आदमी अंदर आता है ........ गेट खुलने की आवाज़ सुन कर आदि की माँ गेट की तरफ देखती है तो एक आदमी खड़ा होता है उस आदमी के चहरे पर मास्क होता है जो उस आदमी का चेहरा दिख नहीं रहा होता है वह आदमी पहले गेट को बंद करता है आवर आदि की माँ की तरफ बढ़ने लगता है

आदमी को अपनी तरफ आते हुआ देख कर आदि की माँ की जिस्म मैं सनसनी सी मच जाती है आवर आदि की माँ फ़ोन पे उस आदमी के साथ हुई बातों को याद करने लगाती है की कैसे वह आदमी गन्दी बाते कर रहा था ये सोच कर आदि की माँ अपनी दोनों हाँथ से साड़ी को जिस्म पर पकड़ लेती है

वह आदि आकर बीएड पर बैठ जाता है आदि की माँ की बगल मैं आवर अपने हाँथ को धीरे धीरे आदि की माँ की जिस्म की तरफ लेकर जाने लगता है

आदमी के बगल मैं बैठने से hi आदि की माँ की जिस्म कैंप सी जाती है ऊपर से उस आदमी की हाँथ को अपनी जिस्म की तरफ आते देख कर आदि की माँ बीएड से थोड़ी आगे बढ़ जाती है

भगवन के लिए मेरे बेटे को मुझे लौटा दो मैं अपने बेटे से एक बार मिलना चाहती हुईं .... आदि की माँ रोटी हुई कहती है

आदि की माँ रोटी हुई कहती है मगर वह आदमी कुछ बोले hi अपना एक हाँथ आदि की माँ के कमर पर रख कर सहला देता है जो आदि की माँ सिसक पड़ती है आवर बीएड पर आवर भी पीछे की तरफ चली जाती है

जो मर्ज़ी करे मेरे साथ कर लेना मुझे आज तक मेरे पति के अलावा किसी ने नहीं छुआ है मगर मेरे बेटे से एक बार मिलवा दो मैं तुम्हारे सामने हाँथ जोड़ती हुई ....... आदि की माँ बोलती हुई हाँथ जुड़े देती है

मिलवा दूंगा उससे पहले तुम मेरा साथ दो मैं पहले तेरी इस मस्त जवानी का मज़ा लेना चाहता हुईं अगर तुझे तेरे पति के अलावा किसी ने नहीं छोड़ा है तो तेरी छूट मैं बहुत आग लगी होगी मैं तेरी छूट की आग मैं अपने लैंड को जलना चाहता हुईं

hhhhhhhhhh तेरी ये जवानी इतनी गर्म है तो तेरी छूट मैं कितनी गर्मी होगी ...... वह आदमी आदि की माँ को पीछे से पकड़ कर कहता है आवर आदि की माँ के गले को चूमने लगता है

अचानक पीछे से पकड़ने से आदि की माँ सिहर सी जाती है आवर आदि की माँ सिसक पड़ती है

वह आदमी आदि की माँ को पूरी तरह से अपने बाँहों मैं पकड़ लेता है आवर अपने दोनों हाथों से आदि की माँ की नरम मोलायम पेट को समझने लगता है

आदि की माँ उस आदमी से दूर भागने की कोशिश करती है मगर वह आदमी बहुत hi मज़बूती से पकड़ लेता है जो आदि की माँ दूर नहीं हो पति है

वही वह आदमी आदि की माँ को चूमते hi चला जाता है आवर आदि की माँ की पेट को हलाहट हुआ मसल भी रहा होता है

वह आदि आदि की माँ की पेट को मसलते हुआ अपना हाँथ जैसे hi चुकी के करीब लता है आदि की माँ पूरी ताकत से उछाल पड़ती है आवर बीएड से उतर जाती है जिससे वह आदमी बीएड पर गिर पड़ता है

साली रांड जयादा नखरे मत कर अपने बेटे से मिलना चाहती है तो मेरा साथ दे नहीं तो भूल जा अपने बेटे को ...... वह आदमी गुस्से मैं कहता है

आदि की माँ गेट के पास जाते जाते वही रुक जाती है आदि की माँ की दिल की धड़कन बहुत तेज़्ज़ चल रही होती है आवर आदि की माँ की आँखों मैं आंसू की बूंदें आ जाती है आदि की माँ अपने बेटे के लिए वही पर मूर्ति की तरह कड़ी रह जाती है

वह आदमी उठ कर आदि की माँ के करीब जाता है आवर आदि की माँ को फिर से पकड़ कर गले को चूमने लगता है

वह आदमी आदि की माँ को मुंह से चूमते हुआ आदि की माँ की गले पे राखी हुई आँचल को दांत से खिंच कर सरका देता है जिससे आदि की माँ की आँचल सार्क कर निचे गिर जाती है

आँचल सरकते hi आदि की माँ एक बार फिर से उस आदमी से दूर चली जाती है

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आदि की माँ थोड़ी दूर होकर अपनी आँचल पकड़ कर कड़ी रह जाती है

आदि की माँ की पहाड़ की तरह उफनती हुई चुकी दिखने लगाती है

आदि की माँ की उम्र 35 से 40 के करीब होने के बाद भी उनकी जिस्म जवान लड़कियों की तरह होती है चुकी भी इतनी टाइट होती है की बलाउज मैं तानी हुई होती है जिसको देखते hi पकड़े बिना कोई भी खुद को रोक नहीं सकता है सामने चाहे बीटा hi क्यू न हो

आदि की माँ की पेट भी एकदम चिकनी होती है ऊपर से आदि की माँ की आनर की तरह गोल नाभि जिसमे शराब दाल कर पिने कर दिल करे आएसी दिख रही होती है

आदि की माँ की जिस्म को देख कर वह आदमी खुद को रोक नहीं पता है आवर वह आदमी इस बार आदि की माँ के आगे आ जाता है आवर आदि की माँ के सामने बैठ कर आदि की माँ की पेट पर हाँथ फेरने लगता है

ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह कसम से कहता हुईं तेरी जिस्म मेरी जान निकल रही है ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या नरम है तेरी ये जिस्म hhhhhhhhhh तू मेरी बीवी होती तो अभी तक तेरी ये जिस्म इतनी गर्म नहीं होती मैं तुझे छोड़ छोड़ के तेरी इस मदमस्त जिस्म की साडी गर्मी निकल देता

तेरी जिसममें इतनी गर्मी है तो तेरी ये छूट तो जल रही होगी हहहहहहहजहहहहहहहह ..... वह आदमी आदि की माँ की पेट को मसलते हुआ अपना एक हाँथ आदि की माँ की छूट के ऊपर रख देता है आवर ह्ह्हह्ह्ह्ह करते हुआ हटा भी लेता है जिसे उस आदमी का हाँथ hi जल गया हो

छूट के ऊपर हाँथ रखने से hi आदि की माँ की जिस्म मैं सनसनी सी हो जाती है आवर आदि की माँ की दोनों पेअर कंपनी लगती है आदि की माँ की मुंह से गर्म गर्म शैशे निकलने लगती है आदि की अचानक सिसकते हुआ बैठ जाती है

हहहहह साली रैंड तू सच मैं बहुत गर्म औरत है चल आज मैं तेरी साडी गर्मी निकल देता हुईं ..... वह आदमी बोलता है आवर निचे बैठी हुई आदि की माँ को अपने बाँहों मैं उठा लेता है

आदि की माँ जिस्म अब आग की तरह जल रही होती है आदि की माँ की आँखों मैं भी एक मदहोशी सी छै हुई होती है आदि की माँ उस आदमी की बाँहों मैं पड़ी बस सिसक रही होती है

वह आदमी आदि की माँ की गर्दन को चूमते हुआ बीएड पर पटक देता है बीएड पर गिरते hi आदि की माँ शर्म से अपनी सर निचे कर लेती है जैसे आदि की माँ को आगे पता हो क्या होने वाला है जो आदि की माँ भी अब वही छह रही हो

वह आदमी अपना कुरता निकल कर बीएड पर एक पेअर रक्त hi है की कोई रूम मैं का गेट पीटने लगता है

कौन है मक छोड़ साला .... वह आदमी गली देते हुआ बोलता है आवर गेट खोलने के लिए चल देता है

वही आदि की माँ अपनी साड़ी को ठीक कर के अपनी जिस्म पर रख लेती है

कौन है बस क्या हुआ ..... वह आदमी के खुलते hi बोलता है

बॉस अड्डे पर छपा पड़ा है आवर सारा मॉल पुलिस ने पकड़ लिया है आवर हम्हारे एक आदमी ने यह के बारे मैं भी बता दिया है पुलिस यह भी किसी भी वक़्त आ सकती है हमेह यह से जाना चाहिए बॉस लगता है पुलिस यह भी आ गयी है ..... दूसरा आदमी बोल hi रहा होता है की पुलिस की साइरन की आवाज़े सुनाई दे देती है

पुलिस की साइरन की आवाज़ सुन कर वह आदमी बिना आदि की माँ को देखे वह से निकल जाता है

कैसे भी कर के िनेह यह से निकल लेना वर्ण मैं तुझे जान से मार दूंगा ..... वह आदमी जाते हुआ कहता है आवर एक बार आदि की माँ को देख कर निकल जाता है

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दो पहर के 2 : 30 पं

अर्जुन की नींद पारी के रोने से खुल जाती है जो बीएड पर पारी रो रही होती है तो अर्जुन उठ कर पारी को गॉड मैं ले लेता है

हो हो क्या हुआ मेरी पारी रो क्यू रही है मेरी अच्छी पारी रट नहीं ओह ओह आजा मां के पास ..... अर्जुन पारी को गले लगते हुआ कहता है

अर्जुन पारी को लेकर रूम से निकल जाता है अर्जुन जब हॉल मैं जा रहा होता है तो किचेन से पूजा दीदी को आते हुआ देखता है

अर्जुन पारी को लेकर हॉल मैं चला जाता है

गुड़िया तुमने मां को उठा hi दिया न ..... पूजा दीदी हॉल मैं आकर बोलती है आवर टीवी को ों कर देती है

आज हम्हरे सहर के पुलिस ने कई जगह पर छपा मारा है आवर कई जगह से तरह तरह के हथियार बरामद हुआ है आवर एक बोतल मैं कई साडी महिलाएं मिली है

सप ने बताया के उस होटल मैं बहुत सी औरते भी धंधा करती है भी पकड़ी गयी है जब पुलिस ने उन सभी औरतों को होटल से पुलिस ने पकड़ा तो उनमें से एक औरत को बचने की एक औरत ने कोसिस किया जो सप ने उस औरत को भी हिरासत मैं ले लिया है उस औरत का नाम हमेह अभी पता तो नहीं चली है मगर वह औरत लखन पूरी की रहने वाली है आवर लखन पूरी की ठकुराइन भी है आगे जैसे जैसे हमेह पता चलेगा हम आप को साडी ख़बरें पहुंचते रहेंगे तब तक बने ने रहे हम्हरे साथ ..... टीवी पर रिपोर्टर इतना बोलता है आवर फिर अड़ आने लगता है वही

लखन पूरी का नाम सुनते hi पूजा आवर अर्जुन एक दूसरे को देखने लगते है पूजा दीदी की तो आँखे hi बड़ी हो जाती है

अर्जुन कही वह राखी माँ तो नहीं है ..... पूजा दीदी हैरान होती हुई बोलती है

अर्जुन कुछ बोले बिना hi पूजा दीदी के घर से निकल पड़ता है पूजा दीदी भी अर्जुन के साथ जाने को होती है मगर अर्जुन जाते हुआ पूजा दीदी को मन कर देता है आवर बाइक लेकर निकल पड़ता है

दो पहर के 3 :पं

पुलिस स्टेशन बहुत से औरते बैठी हुई होती है वही आदि की माँ भी बैठी हुई होती है आदि की माँ की आँखों से आंसू रुक नहीं रही होती है आवर आदि की माँ थोड़ी बहुत कनाप भी रही होती है

आदि की माँ ये सोच सोच कर आवर भी रो रही होती है की जब उनकी रिश्तेदार लोगों को पता चलेगा तो वह लोग क्या क्या बाटे करेंगे आदि की माँ इस बात को सोच कर आवर भी रो रही होती है

आदि की माँ इतने अच्छे से अपने ससुराल मैं रहती थी की आदि की माँ को बस अपने घर के लोगों के सामने hi अपनी चेहरा दिखती थी वर्ण जब को रिश्तेदार बड़े उम्र का मर्द घर मैं आते थे तो आदि को माँ घूँघट दाल कर उनके सामने जाती थी आदि की माँ इतनी संस्कारी औरत थी मगर आज आदि की माँ उन बदनाम औरतों के बिच बैठी हुई होती है आदि की माँ बेबसी से रोटी हुई सामने की तरफ देखती रहती है क्यू की कुछ दुरी पर राखी देवी एक पुलिस वाले से बात कर रही होती है

मेम आप समझ क्यू नहीं रही है वह औरत हमेह होटल की रूम से मिली है आवर वह उसी हालत मैं मिली थी जिस हालत मैं एक रंडी होती है हम उससे छोड़ नहीं सकते है वह एक रंडी है जो पैसों के लिए कही भी तंग खोल देती है .... पुलिस वाला राखी देवी की चुकी को घूरते हुआ कहता है

आप झूट बोल रहे है वह औरत मेरे घर के बगल की रहने वाली है आवर वह एक टीचर है वह मेरे साथ hi सहर आई थी आवर आज हमेह सहर hi रुकना था तो मैंने hi उसे होटल मैं रूम लेने को बोली थी आप उस औरत को क्यू बदनाम कर रहे हो फिर से अगर उस औरत को गली दिया तो अच्छा नहीं होगा ..... राखी देवी थोड़ी तेज़ आवाज़ मैं कहती है

ये तुम्हारी हवेली नहीं पुलिस स्टेशन है जयादा छिलाई तो तुझे भी उन सब के साथ बैठा दूंगा आवर तू मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकती है निकल यह से ..... पुलिस वाला कुर्सी से खड़ा होकर राखी देवी की आँखों मैं देखते हुआ कहता है

भड़वे भूल मत वह गाओं की ठकुराइन है आवर हमेशा hi रहेंगी मगर तू एक नौकर है आवर तेरे जैसे कितने नौकर इनके सामने सर झुका लेते है .... क्या बोल रहा है तू िनेह ..... राखी देवी थोड़ी दर कर पीछे की तरफ हो जाती है

तभी पीछे से एक आवाज़ आती है जो पुलिस वाला तो गुस्से से लाल हो जाता है मगर राखी दिया के चहरे पर जो अभी थोड़ी दर होती है वह चली जाती है आवर एक मुस्कान आ जाती है

राखी देवी जो अभी थोड़ी पीछे की तरफ हो गयी होती है अब राखी देवी बिना कोई दर के पुलिस वाले के सामने कड़ी हो जाती है

वही वह लड़का आकर राखी देवी के सामने खड़ा होकर राखी देवी का हाँथ पकड़ लेता है जिससे राखी देवी के चहरे पर आवर भी ख़ुशी आ जाती है आवर राखी देवी बस उस लड़के को देखने लगाती है

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गीता बीटा गुड़िया नहीं दिख रही है कहा है वह .... आँचल हॉल मैं आकर कहती है जो अभी गीता हॉल मैं टीवी देख रही होती है

ममी माँ गुड़िया सायद अपनी रूम मैं होगी ...... गीता कहती है

ठीक है बीटा मैं गुड़िया को देखती हुईं वह दिन भर रूम मैं है उसकी तबियत तो ठीक है न ...... अंचल कहती है आवर अंजलि की रूम की तरफ चल पड़ती है

वही गीता भी टीवी बंद कर के आँचल के पीछे चल पड़ती है

क्या हुआ आज मेरी नटखट गुड़िया इतनी उदास क्यू है ...... आँचल कहती है

आँचल अंजलि के रूम मैं जब जाती है तो देखती है अंजलि उदास होकर सोइ हुई होती है तो आँचल अंजलि की सर उठा कर अपनी जांघ पर रख लेती है



ममी माँ गुड़िया को सायद जोखम हो गया है अब तो इंजेक्शन देना पड़ेगा बिना इंजेक्शन के गुड़िया की जोखम ठीक hi नहीं होती है ...... गीता आँचल के पीछे बैठ कर बोलती है

ममी माँ दीदी झूट बोल रही है मुझे कोई जोखम वखम नहीं हुआ है ...... अंजलि आँचल की जांघ से झट से उठ कर बोल पड़ती है

अंजलि के हड़बड़ा कर उठ कर बोलना देख कर गीता आवर आँचल दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा पड़ती है

गीता मेरी गुड़िया को जोखम नहीं हुआ है समझी तू तो बस एहि चाहती रहती है मेरी गुड़िया को इंजेक्शन लग जाये क्यू की तू अच्छे से जानती है मेरी गुड़िया इंजेक्शन से कितनी डर्टी है

देख मेरी गुड़िया बिलकुल ठीक है ...... आँचल फिर से अंजलि को अपने गॉड मैं लेकर बोलती है

आप ठीक कह रही है ममी माँ दीदी बस मुझे इंजेक्शन दिलवाना चाहती है मैं कोई इंजेक्शन नहीं दिलवाने वाली हुईं कितना दर्द होती है दीदी को क्या पता इंजेक्शन लगवाने मैं ... अंजलि मुंह बना कर कहती है

हां मुझे पता है मैं भी इंजेक्शन नहीं लगवाती हुईं .... मेरी गुड़िया इतनी उदास क्यू है ..... आँचल कहती है

ममी माँ मुझे अर्जुन की चिंता हो रही है वह जब से गया है एक फ़ोन भी नहीं किया है ...... अंजलि कहती है

ओह मेरी गुड़िया इस लिए उदास है सायद अर्जुन को टाइम hi नहीं मिला हो फ़ोन करने का ..... गुड़िया अर्जुन ने फ़ोन नहीं किया तो तू खुद भी तो कर सकती है न मेरी बुद्धू गुड़िया ..... आँचल हस्ती हुई कहती है

ममी माँ मैं तो भूल hi गयी थी ी लव यू ममी माँ मुझे याद दिलाने के लिए ...... अंजलि खुश होकर कहती है आवर आँचल को किश कर देती है

ठीक है तू अर्जुन को फ़ोन लगा मैं कॉफ़ी लेकर आती हुईं ..... आँचल कहती है आवर उठ कर किचेन की तरफ चल पड़ती है
 
अपडेट .... 38

अंजलि कई बार फ़ोन लगाती है मगर रिंग होने के बाद भी अर्जुन फ़ोन नहीं उठता है जो अंजलि थोड़ी उदास हो जाती है आवर अंजलि फ़ोन को बीएड पर फेक देती है

अरे मेरी गुड़िया तो लगता है फिर से उदास हो गयी क्या हुआ अर्जुन का फ़ोन नहीं लग रहा है क्या ..... रूम मैं आती हुई आँचल कहती है

ममी माँ फ़ोन तो लग रहा है मगर अर्जुन फ़ोन नहीं उठा रहा है .... अंजलि मुंह बना कर कहती है

ओह्ह ये बात है सायद अर्जुन सो रहा होगा तभी फ़ोन नहीं उठा रहा है चलो ये कॉफ़ी पियो अर्जुन रात मैं ज़रूर फ़ोन करेगा जब उठ कर फ़ोन देखेगा तो ..... आँचल कॉफ़ी देते हुआ कहती है

अंजलि भी कुछ नहीं कहती है आवर ममी माँ से कॉफ़ी लेकर पिने लगती है

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तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे hi ठाणे मैं आकर मुझे hi गली देने की बस तुझे मैं

अपनी औकात मैं रहो वर्ण अभी तेरी ये वर्दी को छीन लुंगी

वह पुलिस वाला अपनी कुर्सी से उठ कर अर्जुन को बोलते हुआ कलर पकने वाला होता है तभी एक लड़की की आवाज़ गूंज पड़ती है ठाणे मैं

लड़की की ठाणे मैं आते हुआ देख कर सभी पुलिस वाले अपनी कुर्सी से उठ कर सलाम करने लगता है

वह लड़की लाल साड़ी मैं होती है माथे पर सिंदूर हांथो मैं कंगन गले मैं मंगलसूत्र वह लड़की देखने मैं बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है आवर उस लड़की को देख कर आएसा लग रहा होता है वह लड़की किसी शादी से आ रही है

वही वह पुलिस वाला भी उस लड़की के सामने आते hi हाँथ उठा कर सलूट कर देता है

मेडम आप यह क्यू आई आप एक फ़ोन भी कर देती तो मैं आप का काम कर देता .... वह पुलिस वाला हिचकते हुआ कहता है

वह तो तुम्हें मेरा काम करना hi पड़ता मर श्रीवास्तव मैं अपने भाई के लिए यह आई हुईं तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई से ाएसि बात करने की ...... वह लड़की गुस्से मैं कहती है आवर सामने राखी हुई कुर्सी पर राखी देवी को बैठा देती है

राखी देवी को अपने सामने बैठा हुआ देख कर पुलिस वाला अंदर से गुस्सा तो होता है मगर कुछ बोल नहीं पता है

जहा थोड़ी देर पहले पुलिस वाला कुर्सी पर बैठ कर बाटे कर रहा होता है आवर राखी देवी कड़ी होकर बोल रही होती है वही अब राखी देवी कुर्सी पर बैठी हुई होती है आवर वह पुलिस वाला खड़ा होता है

सॉरी मेडम मुझे नहीं पता था ये आप का भाई है मैं अभी छोड़े देता हुईं प्लीज अपने पापा से मेरी कोई शिकायत मत करियेगा ........ वह पुलिस वाला निचे सर किये hi बोलता है

जाने दो आरती दीदी ...... लड़की कुछ बोलती उससे पहले hi वह लड़का बोल पड़ता है

इस बार मांफ करती हुईं अगली बार किसी से भी ाएसि बात की तो अच्छा नहीं होगा तुम्हारे लिए ..... वह लड़की आरती बोलती है

वह पुलिस वाला कुछ hi देर मैं आदि की माँ को छोड़ देता है

आंटी आप ठीक तो है न ..... आरती आदि की माँ से पूछती है .... जो सभी एक होटल मैं बैठी हुई होती है

आदि की माँ बस हां मैं सर हिला देती है

थैंक्स आरती दीदी मदद करने के लिए .... वह लड़का कहता है

ये क्या अर्जुन दीदी भी बोल रहा है आवर थैंक्स भी जा मैं तुझसे बात नहीं करती

देखिये आंटी मैं अपने देवर की शादी को छोड़ कर इसके एक फ़ोन करने पर आ गयी क्यू की मैं इसको अपना छोटा भाई मानती हुईं आवर देखिये आंटी ये मुझे थैंक्स बोल रहा है ..... आरती थोड़ी रूठने वाली सवार मैं राखी देवी से कहती है

बेटी बहुत सुक्रिया मदद करने के लिए अगर तुम नहीं आती तो सायद वह पुलिस वाला रणजी दीदी को नहीं छोड़ता आवर उसके बाद रजनी दीदी को कितनी शर्मिंदगी के साथ जीना पड़ता ...... अर्जुन से कुछ बोले बिना hi राखी देवी भी आरती की सुक्रिया अदा कर देती है

आंटी आप भी लगता है आप भी मुझे बेटी नहीं मान रही .... आरती फिर मुंह बना कर कहती है

ाएसि बात नहीं है तुम मेरी बेटी हो जब तुम मेरे बेटे को अपना भाई मान लिया है तो फिर मैं भला क्यू तुमेह अपनी बेटी नहीं मानूंगी आज से मेरी 2 नहीं 3 बेटी है ...... राखी देवी आरती के चहरे पर हाँथ फेरती हुई कहती है

वही आरती उठ कर राखी देवी के पास चली जाती है आवर पीछे से पकड़ लेती है

हां माँ आज से मैं आप की बड़ी बेटी हुईं .... आरती खुश होकर कहती है

तभी आरती का फ़ोन बजने लगता है तो आरती वह से हैट कर बात करने लगाती है

आंटी आप सब मेरे साथ घर चलिए ..... आरती बात करने के बाद आकर बोलती है

बेटी मुझे मन करने का दिल तो नहीं कर रहा मगर बेटी मुझे मांफ कर देना जो मैं मन कर रही हुईं जो कुछ भी हुआ वह सब तुमेह पता चल hi गया है आवर तुम रजनी दीदी की हालत देख hi रही हुईं बेटी मैं जितना जल्दी िनेह यह से घर लेकर जाना चाहती हुईं ..... राखी देवी कहती है

कोई बात नहीं माँ ये मेरा नंबर है आप दुबारा इस सहर मैं आएँगी तो मुझे फ़ोन कर दीजियेगा मैं आप को लेने आ जाउंगी ..... आरती अपना नंबर राखी देवी को देते हुआ बोलती है आवर फिर वह से चल देती है आरती के साथ अर्जुन भी होटल के बहार तक आता है

वही अर्जुन आवर आरती के जाने के बाद राखी देवी कॉल लगा देती है

hello भीमा कहा हो तुम अभी क्या तुमने उसे पकड़ लिया .... फ़ोन उठने के बाद राखी देवी कहती है

मेडम मैंने उसका पीछा किया था मगर वह बच निकला ..... उधर से भीमा कहता है

कैसे बच निकला वह तुमसे एक आदमी नहीं पकड़ सका ठीक है तुम उसे ढूंढते रहो मुझे वह आदमी किसी भी हालत मैं चाहिए ..... राखी देवी थोड़ी गुस्से मैं कहती है आवर अर्जुन को आते देख कर फ़ोन रख देती है

मेम आप ठीक है न ... अर्जुन पास आकर आदि की माँ से पूछता है तो आदि की माँ बस हां मैं सर हिला देती है

बीटा एक टैक्सी बुला दो मैं िनेह लेकर घर चली जाती हुईं ..... राखी देवी कहती है

अपनी माँ की बात को सुन कर अर्जुन राखी देवी को थोड़ी हैरानी से देखने लगता है

बीटा वह गाड़ी ख़राब हो गयी है मैंने अभी फ़ोन किया तो बोलै कल तक ठीक होगी ... अर्जुन को हैरानी से देखते हुआ प् कर राखी देवी बोलती है

मेम आप मेरे साथ चलिए पूजा दीदी घर आने को बोली है ..... अर्जुन इतना बोल कर वह से बहार की तरफ चल देता है

अर्जुन की बात सुन कर आदि की माँ को हैरानी होती है की अर्जुन ने अपनी माँ की जवाब दिए बिना मुझसे क्यू बोलै आवर ये पूजा कौन है

दीदी आप परेशां न हो अभी अर्जुन मुझसे नाराज़ है .. आवर पूजा अपने गाओं की लड़की है अर्जुन उसके साथ hi यह आया है .. पूजा मेरी बेटी की तरह hi है ..... अर्जुन की बाते सुन कर राखी देवी को दुखी तो होती है मगर वह आदि की माँ के सामने ज़ाहिर नहीं होने देती है आवर होटल से निकल जाती है भींगी पलकों के साथ

रात के 9:पं

राखी देवी आवर आदि की माँ खाना खाने के बाद अभी पूजा दीदी की रूम मैं बैठी हुई होती है आवर राखी देवी की गॉड मैं पारी होती जो राखी देवी की हाँथ की कंगन निकल रही होती है आवर नहीं निकलने पर रोने लगाती है

ओह ओह मेरी पारी बिटिया को ये कंगन चाहिए लो मैं अभी निकल कर देती हुईं ..... बोलती हुई राखी देवी अपने हाँथ से कंगन निकल कर पारी को दे देती है

चची आप ने कंगन क्यू निकल दिया इस बदमाश के लिए ..... पूजा दीदी कहती है जब पारी को कंगन के साथ खेलती हुई देखती है तो

पूजा बेटी तुझे कंगन की पारी है देख नहीं रही कैसे खेल रही है पारी बिटिया कंगन के साथ अभी खेलने दे ...... पूजा दीदी कंगन पारी से लेने लगाती है तो राखी देवी कहती है

ठीक है चची आप दोनों भी आराम कीजिये .. पूजा दीदी कहती है आवर पारी को लेकर रूम से निकल जाती है

अर्जुन अभी छत पर खड़ा होकर सिगरेट फुक रहा होता है आवर अपनी माँ के बारे मैं सोच रहा होता है

अर्जुन क्या हुआ सोना नहीं है क्या मैंने तेरी बिस्तर लगा दिया है चल गेट बंद कर देना मैं हॉस्पिटल जा रही हुईं ..... पूजा दीदी छत पर आ कर कहती है

पूजा दीदी की आवाज़ सुन कर अर्जुन सिगरेट को निचे फेक देता है

दीदी हॉस्पिटल मैं चला जाता हुईं आप आराम कर लीजिये कल से आप नहीं सोइ हो .... अर्जुन छत से निचे उतरते हुआ कहता है

पूजा दीदी भी आगे अर्जुन से कुछ नहीं कहती है

निचे आने के बाद अर्जुन टेबल पर राखी हुई खाने का टिफिन उठा कर घर से निकल जाता है

अर्जुन के जाने के बाद पूजा दीदी भी पारी को लेकर रूम मैं चली जाती है

पूजा दीदी को रूम मैं आते हुआ अभी थोड़ी hi देर हुई होती है की तभी पूजा दीदी की फ़ोन पर रिंग होने लगती है पूजा दीदी फ़ोन देखती है तो पूजा दीदी के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

hello गुड़िया तू अभी तक सोइ नहीं .... पूजा दीदी फ़ोन उठा कर कहती है

दीदी सोने hi जा रही थी मैं अर्जुन को दो पहर से कॉल कर रही हुईं वह उठा hi नहीं रहा है इस लिए आप के पास कॉल किया कहा है वह ..... अंजलि कहती है

अर्जुन दिन मैं सो रहा था इस लिए फ़ोन नहीं उठाया होगा अभी थोड़ी देर पहले hi उठा है आवर खाना खा कर फिर से हॉस्पिटल चला गया मेरी नन्द के लिए खान लेकर तू परेशां न हो अर्जुन तेरा कॉल देखेगा तो कॉल करेगा .... पूजा दीदी कहती है

पूजा दीदी दिन मैं हुआ हादसे को अंजलि को नहीं बताती है

दीदी क्या अर्जुन ने कुछ बात किया उस बात को लेकर मुझे तो लग रहा है अर्जुन को पता चल गया है ..... अंजलि थोड़ी चिंतित सवार मैं पूछती है

गुड़िया मुझे भी लग रहा है अर्जुन को पता चल गया है अब तक अर्जुन ने मुझसे ठीक से बात भी नहीं किया है .. पूजा दीदी थोड़ी दुखी होकर कहती है

दीदी आप परेशां न अर्जुन आप पर जयादा देर तक गुस्सा नहीं रह सकता है वह ज़रूर आप से बात करेगा फिर आप उसे अपनी दिल की बात बता देना ..... अंजलि कहती है

कास तेरी बात सही हो गुड़िया ... पूजा दीदी कहती है

दीदी अर्जुन का कॉल आ रहा है .... अंजलि बोलती हुई पूजा दीदी की कॉल काट कर देती है

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रात के 11:30 पं

एक रूम मैं दो औरत सोइ हुई होती है की तभी उस रूम मैं एक औरत का फ़ोन गंगनानी लगता है जिससे एक औरत की नींद खुल जाती है जिस औरत की फ़ोन गंगनाना रहा होता है वह औरत नंबर देख कर फ़ोन उठा लेती है

hello इतनी रात को कॉल क्यू कर रहे हो तुम्हारी बीवी छोड़ने नहीं दे रही है क्या .... वह औरत थोड़ी नींद मैं hi धीरे से कहती है

क्या बताओं भाभी इसके जैसी ठंडी औरत मैंने देखि hi नहीं सकीय एक बार छोड़वाने के बाद दुबारा छोड़ने hi नहीं देती है अपनी बड़ी गांड मेरी तरफ कर के सो रही है इसकी गांड देख देख कर मेरा लैंड खड़ा होकर दर्द करने लगा है ...... वह आदमी कहता है

तो सोच क्या रहा है मैक्सी को उठा कर दाल दे उसकी गांड मैं आवर करले अपने लैंड को ठंडा .... वह औरत कहती है

भाभी बोलना बहुत आसान होती है ये छूट hi कितने नखरे करने के बाद छोड़ने देती है आवर गांड तो कभी छोड़ने दिया hi नहीं है अगर सोते हुआ इसकी गांड मैं दाल दिया तो ये चीख चीख कर सबको जगा देगी

भाभी प्लीज आप ऊपर कमर मैं आ जाइये न बस एक बार लैंड शांत करूँगा आप की गर्म छूट मैं दाल कर .... वह आदमी मिनट करते हुआ कहता है

मैं नहीं आ सकती अभी पास मैं मैं hi मेरी नन्द सोइ हुई है ..... वह औरत धीरे आवाज़ मैं कहती है

भाभी इतनी रात मैं किस्से बात कर रही हो आप ..... बगल वाली औरत नींद मैं hi कहती है

व व्वह तेरे भैया है .... वह औरत डर्टी हुई बोलती है

अरे भैया भी न सुबह बात नहीं कर सकते बूढ़े हो रहे है मगर उनकी मस्ती काम नहीं हो रही है ..... वह औरत नींद मैं hi कहती है

ठीक है जी आप की बहन उठ गयी आप की वजह से अभी रखती हुई सुबह मैं करुँगी कॉल .... वह औरत बोल कर फ़ोन रख देती है

आवर फिर दोनों सो जाती है

वही उस रूम मैं वह आदमी अपना लैंड मसलते रह जाता है उसका लैंड इतना दर्द करने लगता है की वह खुद को रोक नहीं पता है आवर बगल मैं सोइ हुई अपनी बीवी की मैक्सी को गांड तक उठा कर अपना लैंड अपनी बीवी की बड़ी गांड की दरार मैं कर के अंदर बहार करने लगता है आवर मस्ती मैं गर्म गर्म शैशे लेने लगता है जैसे अपने लैंड अपनी बीवी की गांड मैं hi दाल रहा है

आवर वह आदमी अपनी बीवी की बड़ी गर्म गांड मैं जयादा देर तक टिक नहीं पता है आवर अपने लैंड का पानी अपनी बीवी की गांड के दरार मैं गिरा देता है

वह आदमी लैंड क गर्मी के नशे मैं अपना लैंड का मॉल अपनी बीवी के गांड पर तो गिरा देता है मगर उस आदमी की जब हवश ख़तम हो जाती है तो उस आदमी की खुद की गांड फटने लगाती है

अरे बस ये क्या कर दिया सुबह मैं मेरी तो खैर नहीं ये तो मेरी जान hi ले लेगी इसे पता चल hi जायेगा मैंने hi इसके गांड पानी गिराया है ..... डरते hi सोच कर वह आदमी अपनी आँखें बंद कर लेता है

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अपडेट ..... 39

अगली सुबह के 6: पं

अर्जुन पूजा दीदी के सास के बगल के एक कुर्सी पर बैठा हुआ सो रहा होता है तभी किसी के हिलने से अर्जुन की नींद खुल जाती है तो अर्जुन आँखें खोल कर देखता है तो सामने रम्य होती है जो एक हाँथ मैं कॉफ़ी लिए हुआ कड़ी होती है

भाभी का कॉल आया था वह घर आने को बोली है .... रम्य कॉफ़ी देते हुआ कहती है मगर अर्जुन से नज़र नहीं मिला पति है जैसे रम्य अर्जुन से किसी बात को लेकर शर्मा रही हो

अर्जुन भी रम्य से कॉफ़ी ले लेता है

मैं डॉ से बात कर लेता हुईं आज वह बोले थे आंटी को घर लेकर जाने के लिए ... अर्जुन कॉफ़ी पिटे हुआ कहता है .... रम्य हां मैं सर हिला देती है

अर्जुन डॉ से बात करता है तो डॉ भी पूजा दीदी को घर लेकर जाने को बोल देता है

अर्जुन डॉ से दवा लिखवा कर सब ले लेता है आवर फिर डॉ से मिल कर पूजा दीदी की सास को घर लेकर आया जाता है

राजू का नंबर दीजिये मैं बात कर लेता हुईं वह अभी तक गाड़ी लेकर आया क्यू नहीं .... अर्जुन अपनी माँ से कहता है जो घर के बहार कड़ी होकर गाड़ी का इंतज़ार कर रही होती है

राखी देवी को पता था उनकी गाड़ी अभी सायद नहीं आने वाली है आवर वह बस अर्जुन को देखने के लिए गाड़ी का इंतज़ार करने की नटकट करती हुई बार बार फ़ोन कर रही होती ताकि अर्जुन घर के अंदर जाए आवर राखी देवी टैक्सी मैं बैठ कर निकल जाये मगर अर्जुन आवर पूजा दीदी भी बहार तक आ गए था आवर 10 मिनट होने के बाद भी गाड़ी अभी तक नहीं आई होती है इस लिए अर्जुन राजू का नंबर मांगता है क्यू के अर्जुन को पता था राजू hi गाड़ी लेकर आया है

राजू का फ़ोन नहीं लग रहा है वह सायद घर चला गया है

राजू ने रात मैं फ़ोन किया था गाड़ी ठीक होने के बाद आवर बोल रहा था उसकी बीवी की तबियत ख़राब है वह रात मैं पूजा के घर का पता भी पूछ रहा था मगर मैंने नहीं बताया आवर बोली थी तेरी बीवी की जयादा तबियत ख़राब होगी तो घर चले जाना सायद वह घर hi चला गया होगा

हम दोनों बस से hi चली जाती है .... राखी देवी झूट बोलती हुई कहती है

चची आप बस से कैसे जाएँगी बस मैं काफी भिड़े होती है आवर आप ने बस से जयादा सफर भी नहीं किया है

अर्जुन तू बाइक से लेकर चला जा .... पूजा दीदी कहती है

अर्जुन भी साथ hi लेकर जाना ठीक समझता है क्यू के अर्जुन को अच्छे से पता था उसकी माँ सिर्फ अपनी गाड़ी मैं hi सफर करती आई है आवर वह बस मैं सफर नहीं कर सकती है आवर अर्जुन सहर मैं रह चूका होता है तो उसे अच्छे से पता होता है बस कितने लड़के औरतों के साथ गन्दी से गन्दी हरकत करते है तो अर्जुन ठीक है बोल देता है

अर्जुन अपनी बाइक निकलता है आवर फिर बाइक स्टार्ट कर के बैठने का इंतज़ार करने लगता है

बाइक स्टार्ट होते hi राखी देवी झट से आगे आ जाती है भला ये मक्का राखी देवी कैसे छोड़े सकती थी जो अर्जुन के साथ बैठने का मक्का मिल रहा होता है इसी बहाने आज राखी देवी अर्जुन को छू तो सकती थी अर्जुन को अपने साइन से लगा तो सकती थी ये सोच कर hi राखी देवी झट से अर्जुन के पीछे बैठने के लिए आ जाती है

राखी देवी बाइक पर बैठते वक़्त कांपते हुआ हाँथ अर्जुन के कंधे पर हाँथ रख देती अर्जुन के कंधे पर हाँथ रखते hi राखी देवी की जिस्म मैं हलचल सी मच जाती है जो राखी देवी थोड़ी डगमगा जाती है आवर गिरने वाली होती की तभी पूजा राखी देवी को पकड़ लेती है

चची आप चोट तो नहीं लगी .... पूजा दीदी पकड़ती हुई बोलती है जो राखी देवी बस न मैं सर हिला देती है

वही अर्जुन भी हड़बड़ा कर पीछे देखने लगता है कही उसकी माँ को चोट तो नहीं लगी ये बात अर्जुन भी अपनी माँ से अभी पूछना तो चाहता था के माँ चोट तो नहीं लगी मगर अर्जुन कुछ बोल नहीं पता है आवर फिर आगे की तरफ देखने लगता है

चची आप दर क्यू रही है पहले अच्छे से अर्जुन को पकड़ लीजिये फिर बाइक पर बैठ जाइये ..... पूजा दीदी कहती है

पूजा दीदी के कहने पर इस बार राखी देवी एक हाँथ से अर्जुन के कंधे को ज़ोर से पकड़ लेती है फिर बाइक पर बैठ जाती है पूजा दीदी की सहारा लेकर

बैठने के बाद भी राखी देवी अर्जुन के कंधे से हाँथ नहीं हटती है

राखी देवी के बैठने के बाद पूजा दीदी आदि की माँ को बैठा देती है

अर्जुन पूजा दीदी को फिर कभी आने का बोलता है आवर बाइक लेकर निकल पड़ता है

एक बाइक पर 3 लोग बैठे हुआ होते है अर्जुन का जिस्म तो ठीक होता है मगर राखी देवी आवर आदि की माँ की जिस्म गदराई हुई होने से दोनों की गांड भी बड़ी होती है जो वह दोनों 3 लोगों की जगह 2 hi पूरा कर चुकी होती है

अर्जुन को बाइक चलने मैं थोड़ी परेशानी भी हो रही होती है क्यू के अर्जुन बाइक की टंकी तक आ चूका होता है

वही राखी देवी बहुत गर्व के साथ बाइक पर बैठी हुई होती है आवर वह थोड़ी मुस्कान के साथ सहर के मार्किट को देख रही होती है

राखी देवी की ये एक सपना था के कभी वह अर्जुन के बाइक पर भी बैठेंगी क्यू के अर्जुन तो इतने दिन तक राखी देवी से ठीक से बात भी नहीं किया होता है आवर नहीं कभी राखी देवी के सामने कभी कुछ वक़्त तक खड़ा भी नहीं हुआ होता है

मगर आज अर्जुन के साथ बाइक पे बैठने का सपना पूरी हो चुकी होती है राखी देवी की राखी देवी दिल मैं बहुत खुश होती है आवर राखी देवी की चहरे पर मुस्कान बता रही होती है की राखी देवी कितनी खुश है अभी अर्जुन के साथ बाइक पर बैठ कर

राखी देवी का दिल ज़ोर ज़ोर से ख़ुशी से मचल रही होती है राखी देवी अपना दूसरा हाँथ भी धीरे धीरे उठा कर अर्जुन के पेट पर रख देती है आवर फिर खुद की जिस्म को अर्जुन के पीठ पर सत्ता कर साइन से लगने की कोशिश करने लगाती है अर्जुन को साइन से लगने की कोशिश करते हुआ राखी देवी की आँखों मैं नमी सी आ जाती है आवर एक दो बूंदें भी अर्जुन के पीठ पर गिर जाती है

राखी देवी की अभी आँखों से ख़ुशी की आंसू निकल रही होती जो कई सैलून के बाद राखी देवी अपने बेटे को छू रही होती है साइन से लगा रही होती है इन सब मैं राखी देवी ये भी भूल गयी होती है की राखी देवी को इस तरह करने से उनकी बड़ी बड़ी हार्ड चुकी का निप्पल उसके बेटे की पीठ मैं चुभ रहा है आवर उनके चुकी की निप्पल की गर्मी से उसके बेटे का लैंड फुल खड़ा हो रहा है

राखी देवी अर्जुन को साइन से लगने मैं इतनी खो सी जाती है की राखी देवी अर्जुन को दोनों hi हाँथ से पूरी ताक़त से पकड़ लेती है तभी राखी देवी की एक हहह निकल जाती है

अर्जुन एक सुनसान जगह पर बाइक को रोक चूका होता है अर्जुन की शैशे तेज़ी से धड़क रही होती है

अभी सड़क पर दूसरी गाड़ी होती तो यकीनन अभी खतरा हो सकता था मगर ये अच्छा होता है की अभी बाइक गाओं के रस्ते मैं होती है जो अभी गाड़ी नहीं होती है उस रस्ते पर

अर्जुन को समझ मैं नहीं आता है उसकी माँ उसके साथ क्या कर रही है उसकी माँ इतनी गिर गयी है की अपने बेटे के साथ hi ये सब कर रही ये सोच कर अर्जुन को बहुत गुस्सा आता है

अर्जुन का दिल तो पूजा दीदी के घर के पास hi धड़कना सुरु हो गया था जब राखी देवी ने अर्जुन को ज़ोर से पकड़ कर बाइक पर बैठी थी उस वक़्त अर्जुन को एक अलग hi ख़ुशी महसूस हुई होती है मगर जैसे जैसे अर्जुन बाइक चलते हुआ आगे बढ़ रहा होता है वैसे वैसे अर्जुन के जिस्म मैं अजीब अजीब से हलचल होती चली आ रही होती है आवर वजह थी खुद की माँ की जिस्म की गर्मी जो राखी देवी के बार बार अर्जुन से अपनी जिस्म को रगड़ रही होती है ...... जिससे अर्जुन की शैशे तो तेज़्ज़ चल hi रही होती है मगर राखी देवी की जिस्म की गर्मी के चलते अर्जुन का लैंड भी खड़ा हो चूका होता है

अर्जुन के दिल मैं अपनी माँ के लिए कोई गलत ख्याल तो नहीं होती है मगर राखी देवी की जिस्म hi इतनी गर्म होती है की अर्जुन के न चाहते भी उसका लैंड खड़ा हो जाता है ये तो अच्छा होता है वह लड़का अर्जुन होता है आवर वह औरत उसकी माँ होती है

अगर अर्जुन के जगह कोई दूसरा लड़का होता तो ये पक्का होता वह लड़का अभी बाइक लेकर सीधे किसी जंगल मैं लेकर जाता आवर राखी देवी को पटक पटक कर छोड़ता आवर राखी देवी की छूट को छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना देता

अर्जुन अपनी माँ की हरकत को कब से सहन कर रहा होता है मगर जब राखी देवी अर्जुन को पूरी ताक़त से पकड़ती है तो अर्जुन का जिस्म पूरी तरह हिल जाता है आवर अर्जुन बाइक झट से रोक देता है

बाइक रुकते hi राखी देवी अर्जुन के जिस्म पर गिर पड़ती है जिससे एक बार फिर से राखी देवी की हार्ड चुकी की निप्पल अर्जुन से टकरा जाती आवर एक साथ दोनों माँ बेटे की हहहहह निकल जाती है

जितना तेज़्ज़ अर्जुन की शैशे चली रही होती है वैसे hi राखी देवी की भी शैशे चल रही होती है अपनी माँ की हरकत से अर्जुन को गुस्सा तो बहुत आता है मगर अर्जुन बाइक रोक कर भी अपनी माँ को कुछ नहीं कहता है .... क्यू की अर्जुन जब गुस्से मैं पलट कर अपनी माँ को कुछ बोलने को होता है तो अर्जुन अपनी माँ की आँखों मैं एक अजीब सी बेबसी सी दिखाई देती है जैसे राखी देवी की आँखों मैं ख़ुशी आवर दर दोनों हो जो अर्जुन अपनी माँ को कुछ बोल नहीं पता है

मगर अर्जुन अपनी माँ को गुस्से से ज़रूर देखता है सायद अर्जुन अभी कुछ बोल भी देता अपनी माँ को मगर फिर अर्जुन को आदि की माँ का ख्याल आता है जो अर्जुन चुप hi रह जाता है

वही अर्जुन के पीछे देखने से राखी देवी अपना सर निचे कर लेती है

अर्जुन क्या हुआ कोई आएसा गाड़ी को रोकता है क्या ..... आदि की माँ कहती है

आदि की माँ तो अपने बेटे की बारे मैं सोच रही होती है आदि की माँ की आँखों मैं नमी थी अपने बेटे के लिए आदि की माँ दुखी थी उसका बीटा अभी कहा किस हालत मैं होगा मगर अचानक बाइक रोकने से वह भी गिरने के दर से राखी देवी को पकड़ ली होती है

मेम बाइक चलते हुआ काफी वक़्त हो गया है आवर प्यास भी लगी है थोड़ा पानी पि लेते है इसी बहाने मुझे थोड़ा आराम भी मिल जायेगा बाइक चलते हुआ हाँथ भी दर्द करने लगा था

मेम अब गाओं बस थोड़ी hi दूर है .... अर्जुन बाइक खड़ा करते हुआ बोलता है

अर्जुन बाइक खड़ा कर के पास के एक दुकान से पानी की बोतल लेकर पिने लगता है फिर दी बोतल लेकर बाइक के पास आ जाता है आवर पानी की बोतल अपनी माँ आवर आदि की माँ को दे देता है

पानी पिने के बाद घर की तरफ अर्जुन बाइक लेकर चल पड़ता है

रजनी दीदी आप परेशां न हो आप का बीटा शाम तक आप के साथ होगा ये मेरा वादा है आप से ..... राखी देवी आदि की माँ से कहती है जो अभी आदि की माँ के घर पर साथ आ गयी होती है

आदि की माँ बस रोटी हुई राखी देवी से लिपट जाती है

इधर अर्जुन भी अपनी माँ आवर आदि की माँ को वह उतर कर घर आकर अपने रूम मैं बैठा हुआ होता है अर्जुन के दिमाग मैं अभी भी चल रहा होता है की उसकी माँ वह सब जान भुज के कर रही थी

अर्जुन ये सोच सोच कर अपनी माँ पर आवर भी गुस्सा हो रहा होता है

कैसी औरत है ये पहले अपने भाई के साथ मुंह कला कर रही थी आवर अब अपने hi बेटे के साथ छी कोई औरत इतनी कैसे गिर सकती है

मुझे यह आने hi नहीं चाहिए था ये औरत कभी नहीं सुधर सकती है मुझे लगा था ये औरत अब सुधर गयी होगी मैं भी अब उसे मांफ करने का सोच रहा था मगर ये औरत कभी सुधर hi नहीं सकती है

छियई ये मेरी माँ हो hi नहीं सकती है ::: अर्जुन सोचते हुआ अपना टेबल पर राखी हुई कांच की गिलास उठा कर फेक देता है

गिलास की टूटने की आवाज़ सुन कर अर्जुन की दोनों नानी आवर आँचल गीता आवर अंजलि भी भगति हुई आ जाती है

अर्जुन इतना ज़ोर से गिलास को दिवार पर मरता hi की अर्जुन के रूम खुला हुआ होने से छान की आवाज़ गूंज पारी है घर मैं

अर्जुन क्या हुआ ये गिलास कैसे टूट गयी .... पहले रूम मैं आती हुई आँचल पूछती है मगर अर्जुन कुछ जवाब दिए बिना hi रूम से निकल जाता है

वही सभी बस अर्जुन को जाते हुआ देखती रही जाती है

अर्जुन को कुछ न बोलने से आँचल थोड़ी दुखी हो जाती है क्यू की आँचल ने अर्जुन की आँखों मैं गुस्से को देख ली होती है

हे भगवन क्या हुआ मेरा अर्जुन को इतनी गुस्से मैं मैंने कभी नहीं देखि उसे ::: आँचल सोचती है

अर्जुन के गुस्से मैं जाने से आँचल परेशां बहुत हो जाती है वह हवेली के बहार तक भगति हुई मगर अर्जुन बाइक लेकर निकल चूका होता है

आँचल गाओं की तरफ देखती है मगर अर्जुन दिखाई नहीं देता है मगर राखी देवी आती हुई दिखाई देती है आँचल वही पर रुक जाती है

दीदी अर्जुन आप को साथ लेकर आया है न वह इतने गुस्से मैं क्यू है ........ राखी देवी के पास आने पर आँचल पूछती है

आँचल के अचानक पूछने से राखी देवी भी थोड़ी हैरान हो जाती है आवर आँचल की नज़रों का पीछा कर के गाओं की तरफ देखने कहती है जो आँचल अभी भी गाओं की तरफ देख रही होती है

अर्जुन गुस्सा है ये सुन कर राखी देवी समझ जाती है अर्जुन किस बात के लिए गुस्सा है राखी देवी की आँखों मैं नमी सी आ जाती है

मगर राखी देवी कोई जवाब दिए बिना hi हवेली के अंदर चली जाती है

राखी देवी को कुछ बोलते हुआ न देख कर आँचल भी समझ जाती है कोई बात तो हुई है अर्जुन आवर राखी देवी के बिच

हे देवी माँ क्यू सत्ता रही है इतनी एक माँ को दीदी ने बहुत दुःख किया है अपनी ज़िंदगी मैं आवर मत तड़पाइए एक माँ को देवी माँ मिलवा दीजिये एक माँ बेटे को

राखी देवी को कुछ बोलते हुआ न देख कर आँचल मन मैं सोचती है क्यू की आँचल राखी देवी की चहरे पर दर्द को देख लेती है

आँचल भी राखी देवी से कुछ नहीं बोलती है आवर कुछ देर मैं इस बारे मैं बात करने को सोचती है

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सोभा माँ क्या मैं अंदर आ सकती हुईं .... आस्था अपनी चची के रूम के बहार से पूछती है

वही रूम के अंदर आस्था की चची बहुत गुस्से मैं होती है अभी थोड़ी देर पहले hi अपने पति से लड़ाई कर रही होती है आवर पति के बहार जाते hi रूम मैं गुस्से से घूम रही होती है मगर आस्था की आवाज़ सुन कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

आस्था बेटी तुझे रूम मैं आने के लिए पूछने की ज़रूरत है भला कोई बचा अपनी माँ की रूम आने के लिए पूछता है क्या आप जा अंदर ...... आस्था की चची मुस्कुराती हुई कहती है

अपनी चची के हां बोलते hi आस्था रूम मैं चली आती है आस्था रूम मैं आने के बाद अपनी चची के बीएड पर बैठ जाती है

क्या बात है कुछ चाहिए क्या बस बोल मैं अभी ोदर कर देती हुईं ..... आस्था की चची कहती है

सोभा माँ मुझे कुछ भी नहीं चाहिए वैसे भी आप ने बहुत कुछ लेकर आई है वह से ..... आस्था कहती है

वह सब तो मैं अपनी मर्ज़ी से ले थी जब मैं शॉपिंग करने जाती थी तो जो मुझे अच्छी लगाती थी वह मैं तेरे लिए ले लेती थी मगर मैं तेरी पसंद की कोई चीज तुझे देना चाहती हुईं बोल तुझे क्या चाहिए .... आस्था की चची आस्था के पास बैठ कर कहती है

ठीक है सोभा माँ मुझे जो चीज पसंद होगी मैं आप को बता दूंगी .... सोभा माँ आप आवर चाचा के बिच सब कुछ ठीक तो है न .... अपनी चची का हाथ पकड़ कर आस्था मासूमियत से पूछती है

हां बीटा सब ठीक है आप को आएसा क्यू लगा के हम्हारे बिच सब ठीक नहीं है ..... आस्था की चची पूछती है

आस्था के सवाल करने से आस्था की चची थोड़ी परेशां तो होती है मगर चहरे पर नहीं लती है आवर पूछ लेती है

सोभा माँ सुबह से देख रही आप चाचा से ठीक से बात नहीं कर रही आवर थोड़ी देर पहले भी आप आवर चाचा के बिच बहस हो रही थी ..... कोई परेशानी है तो मुझे बताइये मैं चाचा से बात करती हुईं .... आस्था फिर से मासूमियत से पूछती है

ओह मेरी बेटी को इस बात से लगा की हम्हारे बिच ठीक नहीं चल रहा है बेटी ये बात है की मैं उनसे बोल रही थी कुछ दिनों के लिए मैं अपने माँ के घर चली जाती हुईं जो तेरे चाचा मुझे नहीं जाने दे रहे है इस लिए मैं उनसे गुस्सा हुईं .... आस्था की चची कहती है

आस्था बीटा मुझे मांफ करना जो मैं तुझसे झूट बोल रही हुईं अब मैं तुझे कैसे बताऊ के तेरे चाचा मेरे साथ क्या क्या करने लगे है तेरे चाचा ने रात मैं मेरी गांड के बिल मैं hi अपना लैंड का पानी गिरा दिया था जो सारा पानी रात भर मैं मेरी गांड मैं सुख गया था आवर मेरी पेंटी भी गांड मैं चिपक गयी थी मुझे सुबह मैं कितनी दर्द हुआ चिपकी हुई पेंटी निकलने मैं ..... आस्था की चची मन मैं सोचती है

सोभा माँ आप जब चाहे नाना नानी के घर जा सकती है मैं अभी पापा से चाचा की शिकायत करती हुईं देखना कैसे पापा चाचा को डाँटते है .... आस्था कहती है

ओह मेरी प्यारी बेटी इतना प्यार करती है अपनी सोभा माँ से जाने दे बड़े भैया से शिकायत मत कर मेरा जब मन होगा तो मैं दीदी से बात कर लुंगी .... आस्था की चची मुस्कुराती हुई कहती है

ठीक है शोभा माँ .... आस्था कहती है आवर रूम से निकल जाती है

अपनी चची के रूम से निकल कर आस्था अपनी छत पर चली जाती है

आस्था जब अपने छत पर जाती है तो निचे गार्डन मैं अपनी दोनों बहनों को खेलती हुई पति है दोनों बहनों को खुश देख कर आस्था के चहरे पर भी मुस्कान आ जाती है फिर पता hi नहीं आस्था के दिमाग मैं क्या आता है जो आस्था के चहरे से ख़ुशी चली जाती है आवर फिर आस्था छत की दूसरी तरफ आ जाती है आवर मायूसी से अर्जुन के गाओं की तरफ देखने लगती है

तुम मुझे इतने क्यू सत्ता रहे हो मेरा ये नन्ही सी दिल तुम पर आ गयी तो इसमें मेरी क्या गलती है .... आस्था अर्जुन के गाओं की तरफ देखते हु कहती है आस्था की आँखों मैं नमी सी भी आ जाती है जो आस्था अपनी ऊँगली से गिरती हुई आंसू पोछ लेती है

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अपडेट .... 40

आस्था अपनी आँखों से आंसू पोछ कर पलट जाती है मगर फिर आस्था को कुछ अहसास होती है आवर आस्था अर्जुन के गाओं की तरफ देखने लगाती है आवर आस्था के चहरे पर मुस्कान आ जाती है

आस्था मुस्कुराती हुई छत से उतर कर घर से बहार की तरफ भगति है

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रात के 11 : पं

अर्जुन बाइक खड़ा कर के बहुत तेज़ी से घर मैं जाता है अर्जुन जैसे hi अंजलि दीदी के रूम के पास जाता है अंजलि दीदी की रूम अंदर से बंद पता है तभी अर्जुन को सामने अपना रूम खुला हुआ पता है तो अर्जुन अपने रूम मैं घुस जाता है आवर अपने रूम के बाथरूम मैं जाने को होता है मगर उसके रूम का बाथरूम अंदर से बंद होता है अर्जुन गेट को पिट कर रूम मैं घूमने लगता है तभी बाथरूम का गेट खुलता है आवर बाथरूम से राखी देवी निकलती है अर्जुन जब अपनी माँ को देखता है तो अर्जुन को गुस्सा आता है आवर अर्जुन रूम से जाने लगता है तभी राखी देवी भाग कर गेट जल्दी से बंद कर देती है

ये क्या कर रही है अब खुद के बेटे के साथ भी मुंह कला करना चाहती है क्या तू कैसी औरत है तुझमे ज़रा भी शर्म नहीं है कितनी गिरी हुई औरत है तू गेट खोल तू गिरी हुई है मैं नहीं ...... अर्जुन बहुत hi गुस्से मैं कहता है आवर अपनी माँ को गेट से धक्का दे देता है

राखी देवी अअअअअ करते हुआ गिर जाती है मगर जल्द hi उठ कर गेट पर कड़ी हो जाती है

अर्जुन बीटा तुमेह जो कहना है कह मगर मुझसे एक बार बात करले मैं तेरे सामने हाँथ जुड़ती हुई ..... अर्जुन के मुंह से अपने लिए गुस्से भरी बात सुन कर राखी देवी की आँखें भर आती है आवर सायद धक्का देने से राखी देवी को चोट भी लगी हुई होती है मगर अपने दर्द के परवाह किये बिना hi राखी देवी गेट पर कड़ी होकर कहती है

क्या बात एहि की तू अपने भाई के साथ कैसे कैसे अपनी जिस्म की आग भुजती है कैसे अपनी हवश को मिटने के लिए खुद के बेटे को उसके घर से निकल दिया क्या बात करनी है तुझे हैट मुझे जाने दे ...... अर्जुन गुस्से मैं लाल आँखें दिखते हुआ कहता है

अर्जुन की बात सुन कर इस बार तो राखी देवी की आँखों से आंसू गिर जाती है आवर राखी देवी अपने दोनों हाँथ मुंह पर रख लेती है

अर्जुन की बाते राखी देवी को आह बहुत दर्द दे रही होती है राखी देवी का दिल दर्द से फटा जा रहा होता है राखी देवी अर्जुन के सामने अपनी सर निचे कर लेती है मगर गेट से हटती नहीं है

हां मैंने किया है अपने भाई के साथ मुंह कला मगर अपनी जिस्म की हवस के लिए नहीं अपने भाई के लिए मगर मैंने कभी तेरे पापा को धोखा नहीं दिया है

हां मैंने तुझे इस घर से दूर किया मगर अपने दिल से कभी भी नहीं मैं नहीं चाहती थी मेरा बीटा मुझे मेरे भाई के साथ देखे मगर मैंने इस लिए तुझे हॉस्टल नहीं भेजा की तुमने मुझे मेरे भाई के साथ देख लिया मैंने इस लिए तुझे हॉस्टल भेजा के मेरा बीटा अच्छे से पढाई कर सके आवर ये घर संभल सके तू यह बिलकुल भी पढाई पर ध्यान नहीं देता था आवर गाओं के आवारा लड़कों के साथ घूमता रहता था जब तू इतने छोटे होने के बाद मेरी बात नहीं मंटा था तो जब गाओं के लड़कों के साथ बड़ा होता तो तू बिलकुल भी पढ़ नहीं पता आवर कही गलत सांगत मैं पद कर तू जुवा शराब पिने लगता तो मैं ये सोच कर दर जाती थी इस लिए होटल भेजा आखिर तुझे hi इस हवेली के साथ मेरी आवर अपनी बहनों का ख्याल रखना था

मैं बहुत बुरी माँ हुईं जो मैंने अपने दिल के टुकड़े को खुद से अलग किया आवर उसकी सजा मैं अब तक भुगत रही हुईं उस वक़्त के बाद मैं कैसे घुट घुट कर जिह रही हुईं मैं hi जानती हुईं मैं तुझसे माँ सब्द सुनने के लिए तड़प रही हुईं मेरा दिल तुझे अपने साइन से लगाने के लिए मचलती रहती है मैं तुझसे बात करने के लिए हर वक़्त तड़पती रहती है

तेरे सामने होने के बाद भी मैं तुझे अपने साइन से नहीं लगा पति थी उस वक़्त मेरे दिल मैं कितनी दर्द उठती थी मैं hi जानती हुईं तेरे पापा के मरने के बाद तो मैं टूट कर बिखर गयी थी मैं भी तेरे पापा के पास जाना चाहती थी मगर तुझे देख कर मुझे ज़ीने की छह हो जाती थी बेटे मैं तेरे लिए hi जिह रही हुईं ....... राखी देवी की आंसू रुक नहीं रही होती है राखी देवी वही गेट के निचे बैठ जाती है रट हुआ

अर्जुन अपनी माँ को रट हुआ देख कर पीछे हैट जाता है अर्जुन के आँखों से भी आंसू निकलने लगते है

आप कह रही है पापा को देखा नहीं दिया फिर जो कुछ भी मैंने देखा वह क्या था

आपने अपने hi भाई के साथ मुंह कला किया शर्म नहीं आई आप को आप इतनी निचे कैसे गिर गयी आप को अपनी जिस्म की हवस hi मिटानी थी तो दूसरी शादी कर लेती

आप ने मेरा बचपन मुझसे छीन लिया आप ने मेरे चहरे से मुस्कान छीन लिया

आप से बात न करके क्या मुझे अच्छा लगता था मैं भी आप से बात करना चाहता था मैं भी आप के गले लग्न चाहता था आप को पता है रात मैं सोते हुआ उठा कर आप को याद करता था मगर आप वह नहीं होती थी आप ने खुद से तो अलग किया साथ मैं मेरी दोनों दीदी से भी अलग कर दिया आप ने मेरे साथ आएसा क्यू किया ...... अर्जुन भी बीएड के निचे पर कर बोलता hi चला जाता है अर्जुन के आँखों मैं जो थोड़ी देर पहले गुस्सा होता है अब उन आँखों मैं आंसू होती है

रूम मैं एकदम शांति सी छ गयी होती है एक तरफ अर्जुन अपनी बाते बोल कर रो रहा होता है वही राखी देवी गेट के निचे बैठ कर रोटी जा रही होती है

ये मैंने क्या कर दिया मैंने अपने hi बेटे को इतनी दर्द दे दिया है मैं कैसी माँ हुईं .... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर धीरे धीरे अर्जुन की तरफ बढ़ने लगाती है राखी देवी अर्जुन के पास चली जाती है अर्जुन के पास जाकर राखी देवी अपना हाँथ अर्जुन के सर पर रखना च रही होती है मगर रख नहीं पति है तभी अर्जुन खुद hi अपना सर राखी देवी की गॉड मैं रख देता है

अर्जुन के सर अपने गॉड मैं पते hi राखी देवी को एक प्यारा सा अहसास होती है जो राखी देवी अपनी पल्लू अर्जुन के ऊपर रख देती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेरने लगाती है

राखी देवी की दिल की धड़कन भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रही होती है मगर चहरे पर मुस्कान होती है राखी देवी अर्जुन के सर पर हाँथ फेरती हुई अपनी भी आँखे बंद कर लेती है जैसे आज बरसों बाद राखी देवी की आँखें बंद हो रही हो

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आस्था अपनी रूम मैं अकेली सोइ हुई होती है आस्था की दिल की धड़कन तेज़ चल रही होती है आस्था अपनी रूम की ऊपर छत की तरफ देख रही होती है आस्था के चहरे पर कभी मुस्कान तो कभी शर्म आ रही होती है आवर आस्था अपने हाँथ से अपनी गुलाब की तरफ फैली हुई होंठ पर ऊँगली चला रही होती है आवर एक हाँथ आस्था की छूट पर होती है जो आस्था अपनी पेंटी को छूट से निचे जांघ पर की होती है आवर अपनी छूट के ऊपर से आस्था अपनी फूली हुई छूट सहला रही होती है

आस्था जैसे जैसे अपनी छूट को सहला रही होती है आस्था की मुंह से गर्म गर्म शैशे निकल रही होती है कभी कभी तो आस्था अपनी गांड उठा कर सिसक भी रही होती है आस्था की आँखों मैं भी हवस साफ़ दिख रही होती है

aaaaaaaaaaaaaaaaa कैसे कटा है प्यार से नहीं कर सकता था क्या मैं मन थोड़ी करती उसे

aaaaaaaaaa वह क्या था क्या वह अर्जुन का लाए .... सोचते हुआ आस्था चुप हो जाती है

आस्था अभी छूट के ऊपर आयी हाँथ फेर रही होती है जैसे की कुछ वक़्त मैं आस्था की छूट मैं लैंड जाने वाला है आवर आस्था अभी अपनी छूट से पानी निकल कर अपनी छूट गिला कर रही है

आस्था अपनी छूट पर हाँथ को फेरते हुआ एक ऊँगली छूट मैं दाल देती है जिससे आस्था ssssssssss ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करते हुआ सिसक पड़ती है

आस्था की छूट मैं एक ऊँगली जाने के बाद आस्था बीएड से थोड़ी उठ जाती है आवर तकिये को अपनी पीठ के पीछे रख कर अपनी छूट को देखने लगाती है

आस्था की छूट बिलकुल चिकनी होती है आस्था की छूट पर अभी एक भी बाल नहीं होती है आस्था की छूट की दोनों होंठ एक दूसरे से चिपकी हुई होती है आवर थोड़ी सी गुलाबी दिख रही होती है जहा आस्था की एक ऊँगली छूट मैं होती है आस्था अपनी छूट को देख कर खुद hi शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगाती है आवर आस्था के चहरे पर शर्माती हुई मुस्कान आ जाती है

मैं तुमेह इतनी अच्छी गिफ्ट देना चाहती हुईं मगर तुम मुझे इतना सत्ता रहे हो देखो मैंने कभी अपनी इस जगह पर पूरी ऊँगली भी नहीं डाली है देखो अभी कितनी जल रही है मन कर रहा है इसमें अपनी पूरी ऊँगली दाल दूँ मैं मगर मैं नहीं दाल रही इसमें पहले सिर्फ तुम्हारा hi वह जायेगा चाहे मुझे कितनी भी दर्द क्यू न सहना पड़े ... फिर भी तुमेह मेरा प्यार नहीं दिख रहा है

आज इस तरह किया के मैं कोई राण गन्दी लड़की हुईं ...... आस्था बोलना तो कुछ चाहती थी मगर बोल नहीं पति है आस्था की छूट आग की तरह जल रही होती है आस्था को छूट मैं चींटियां रंग रही होती है मगर आस्था अपनी छूट की आग मैं जल तो रही होती है मगर वह अपनी छूट मैं पूरी ऊँगली नहीं कर रही होती है

आस्था एक ऊँगली hi अपनी छूट मैं सिसकने हुआ छूट मैं हिला रही होती है आवर अपनी आँखे बंद कर लेती है कुछ सोचते हुआ

ही क्या तुम मुझसे मिलने के लिए आये हो आखिर तुमेह मेरे प्यार का अहसास हो hi गया

हआ तेरे लिए hi आया हुईं चल मेरे पास आ आवर अपनी साइन से ये दुपट्टा हटा तू मुझसे प्यार करती है तो

hhhhhhhhhhh प्लीज यह नहीं कोई देख लेगा आएसा मत करो

लड़का बोलते हुआ hi उस लड़की की साइन से दुपट्टा को हटा देता है जिससे लड़की सिसकते हुआ पीछे की तरफ हैट जाती है अपनी साइन पर हाँथ रखते हुआ मगर वह लड़का दुपट्टा को निचे फेक कर फिर से लड़की के करीब चला जाता है आवर लड़की को पकड़ कर लड़की के होंठों पर किश करने लगता है लड़की उस लड़के को दूर करने की बहुत कोशिश करती है मगर वह लड़का उस लड़की को एक पेड़ पे सत्ता कर किश करता hi रहता है

वह लड़का किश करते हुआ अपना एक हाँथ लड़की की चुकी पर रख देता है जिससे लड़की आआआ हहहहह करते हुआ लड़के को धक्का दे देती है आवर वह से भाग जाती है

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अपडेट ..... 41

आस्था की अचानक आँखें खुल जाती है आवर आस्था बीएड पर ज़ोर ज़ोर से हांफने लगती है आस्था खुद की शंशो को रोक नहीं प् रही होती है आस्था को जिस्म अभी भी गंगनाना रही होती है आस्था की हाँथ एक ऊँगली छूट मैं hi होती है आस्था कुछ देर तक बीएड पर हाफति रहती है

आस्था की शैशे जब गति से चलने लगाती है तो आस्था धीरे से अपनी छूट से ऊँगली को निकलती है आस्था की वह ऊँगली छूट रास से भींगी हुई होती है आस्था जब उस ऊँगली को उठती है देखने के लिए तो ऊँगली से छूट का पानी आस्था की पेट पर गिर जाती है जिससे आस्था की जिस्म मैं थोड़ी हलचल सी होती है आस्था सिसक कर रह जाती है आस्था की छूट से पानी निकल जाने पर आस्था खुद को बहुत अच्छा महसूस करती है आवर बीएड से उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

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सुबह के 5: 30 ऍम

दोनों माँ बेटे अभी भी बीएड के निचे hi सोये हुआ होते है सोते हुआ अर्जुन घूम जाता है अर्जुन के घूमते hi अर्जुन का मुंह राखी देवी की एक चुकी के पास चला जाता है आवर राखी देवी की बहार की तरफ निकली हुई निप्पल अर्जुन के मुंह मैं चला जाता है अर्जुन सो रहा होता है मगर जब निप्पल मुंह मैं जाता है तो अर्जुन दोनों होंठ से पकड़ कर चूसने लगता है जिससे राखी देवी की नींद खुल जाती है

राखी देवी की आँखें तो खुल जाती है मगर राखी देवी की चहरे पर एक मुस्कान सी आ जाती है राखी देवी अर्जुन को दूर करने की सोचती है मगर कुछ सोच कर नहीं करती है आवर अपनी पल्लू हटा कर देखती है तो पति है अर्जुन नींद मैं सो रहा है आवर अर्जुन के मुंह मैं निप्पल है जो अर्जुन चूस रहा है तभी राखी देवी सिसक पड़ती है आवर जल्दी से अपना एक हाँथ मुंह पे रख लेती है ताकि चीख अर्जुन न सुन ले क्यू के निप्पल को चूसते हुआ अर्जुन दांत लगा देता है जिससे राखी देवी की चीख निकल जाती है मगर राखी देवी अपनी चीख को निकलने नहीं देती है

राखी देवी धीरे से अर्जुन का सर अपनी चुकी की निप्पल से निकल देती है आवर बीएड से तकिया उठा कर अर्जुन के सर के निचे रख देती है आवर फिर धीरे धीरे वह से उठ जाती है राखी देवी मुस्कुराती हुई अर्जुन के माथे को चूमती है आवर फिर अर्जुन के रूम के बाथरूम मैं चली जाती है

राखी देवी बाथरूम मैं जाने के बाद गेट को बंद कर देती है गेट बंद करते hi राखी देवी की चहरे पर थोड़ी शर्म सी आने जाती है आवर राखी देवी की एक हाँथ खुद hi अपनी चुकी पर चली जाती है राखी देवी की हाँथ जब चुकी पर जाती है तो राखी देवी को थोड़ी दर्द के साथ गिला गिला सा महसूस होती है तो राखी देवी अपनी चुकी पर नज़र डालती है तो देखती है उनकी निप्पल के पास की बलाउज पूरी तरह भींगी हुई है

बदमाश इतना बड़ा होने के बाद तुझे दूध पिने का मन किया है अब इसमें दूध थोड़ी है जो मैं तुझे पुलाव ..... राखी देवी खुद से कहती है

राखी देवी के जाने के थोड़ी hi देर मैं अर्जुन के भी आँखे खुल जाती है अर्जुन उठ कर रूम मैं देखता है तो उसकी माँ रूम मैं नहीं होती है तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है तो अर्जुन समझ जाता है उसकी माँ अभी बाथरूम मैं है तो अर्जुन उठ कर रूम मैं से निकल जाता है

आदि के घर सुबह के 6: 30 ऍम

आदि की माँ अपने बेटे के लिए अभी भी सिसक रही होती है आवर बीएड पर सोइ हुई आदि की बचपन की फोटो देख रही होती है आवर आदि क मुस्कुराती हुई फोटो देख कर आदि क माँ खुद भी कभी कभी मुस्कुरा रही होती है तभी आदि की माँ की फ़ोन पर रिंग होने लगाती है आदि की माँ झट से फ़ोन उठा लेती है

दीदी मैं आँचल बोल रही हुईं आप गेट खोलिये आप का बीटा आ गया है ..... फ़ोन उठाते hi आँचल की आवाज़ आती है

आदि की माँ फ़ोन बीएड पर फेक कर गेट की तरफ भगति है आवर झट से गेट खोल देती है तो देखती है बहार गाड़ी मैं आदि बैठा हुआ होता है आवर आँचल पकड़ी हुई है आदि के जिस्म पर बहुत से झखम के नीसाण होते है आवर आदि के कपडे भी खून से भींगे हुआ होते है आदि की माँ रट हुआ आदि से लिपट जाती है

क्या हुआ मेरे बेटे को आँचल प्लीज जल्दी से मेरे बेटे को हॉस्पिटल लेकर चलो भगवन के लिए मेरी मदद करो .... आदि की माँ रोटी हुई कहती है

दीदी चिंता न करिये अभी मेरा अर्जुन आ रहा है फिर चलते है ..... आँचल कहती है

तब तक अर्जुन भी भागते हुआ आता है तो राजू जल्दी से गाड़ी लेकर हॉस्पिटल की तरफ चल पड़ता है

गाओं के hi हॉस्पिटल मैं आदि को भर्ती किया जाता है अर्जुन को देख कर डॉ बिना कुछ बोले आदि का इलाज करने लगता है वही बहार आदि की माँ बस रोटी hi जा रही होती है आवर आँचल चुप करवा रही होती है

आंटी आप के बेटे को जयादा चोट नहीं लगी है मैंने खुद देखा है उसके कपडे ज़रूर खून से भिनगा है मगर मुझे यकीन है वह उसका खून नहीं है ....... अर्जुन कहता है

अर्जुन की बात सुन कर आदि की माँ थोड़ी चुप होकर अर्जुन को देखने लगाती है जैसे पूछ रही हो क्या तुम सच बोल रहे हो तो अर्जुन भी हां मैं सर हिला देता है

आदि का इलाज चल रहा होता है तब तक राखी देवी भी वह पहुँच जाती है आवर अर्जुन के पास चली जाती है

क्या कहा डॉ ने वह ठीक है न ..... राखी देवी कहती है

अभी तो इलाज चल रहा है डॉ के आने के बाद hi पता चलेगा वह कैसे है ..... अर्जुन कहता है

अर्जुन क बात सुन कर राखी देवी आवर कुछ तो नहीं पूछती है मगर मुस्कुरा ज़रूर देती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेर देती है अर्जुन भी अपनी माँ को देख कर मुस्कुरा देता है

राखी देवी ये सोच कर मुस्कुरा रही होती है की अब अर्जुन ठीक से बात तो कर रहा है

राखी देवी मुस्कुरा कर आदि की माँ के पास चली जाती है कुछ वक़्त के बाद डॉ खुद राखी देवी के पास आ जाता है

नमस्ते ठकुराइन जी ...... डॉ पास आकर कहता

राखी देवी भी हाँथ जोड़े देती है :: अब वह लड़का कैसा है ..... राखी देवी पूछती है

डरने की कोई बात नहीं है वह ठीक है कुछ छोटे लगी थी जो मैंने पट्टी कर दिया है आप सब मिल सकती है ..... डॉ कहता है

डॉ की बात सुन कर आदि की माँ उठ कर आदि की तरफ भगति है पीछे से आँचल आवर राखी देवी भी चली जाती है अर्जुन भी जाने को होता है मगर वह डॉ अर्जुन को रोक लेता है ये बोल कर की कुछ बात करनी है तो अर्जुन भी डॉ के साथ उसके केविन मैं चला जाता है

इधर आदि की माँ आदि के पास आकर देखती है तो आदि के जिस्म पर कई साडी पट्टी बंधी हुई होती है जिससे आदि की माँ दुखी होती है मगर अपने बेटे को ज़िंदा देख कर खुश भी होती है

गीता दीदी माँ आवर ममी माँ किचेन मैं नहीं है आवर अर्जुन भी अपने रूम मैं नहीं है ..... अंजलि आँखे मलते हुआ कहती है

छोटी सभी हॉस्पिटल मैं गयी है तू कॉफ़ी बना तब तक वह सब घर आ जायेंगे ..... गीता कहती है

दीदी किसे क्या हुआ हॉस्पिटल क्यू गए है मुझे भी हॉस्पिटल जाना है ...... अंजलि घबराती हुआ कहती है

गुड़िया परेशां न हो किसी को कुछ नहीं हुई है वह हम्हारी रजनी मेम का बीटा हॉस्पिटल मैं है रजनी मेम के साथ hi माँ अर्जुन आवर ममी माँ गयी है .... गीता अंजलि को परेशां देख कर कहती है क्या

रजनी मेम का बीटा मिल गया है अच्छा हुआ उनका बीटा मिल गया रजनी मेम बहुत दुखी थी ठीक है दीदी मैं अभी कॉफ़ी बना कर लती हुईं .... अंजलि गीता को देखती हुई बोलती है

गीता भी हां मैं सर हिला देती है फिर अंजलि किचेन मैं कॉफ़ी बनाने के लिए चली जाती

दिन के 11 पं

आदि को लेकर अर्जुन घर आ जाता है आवर आदि को उसके रूम मैं लेकर सुला देता है फिर अर्जुन अपने घर आ जाता है साथ मैं आँचल भी घर आ जाती है

अर्जुन घर आने के बाद अपने रूम मैं जाता है आवर फ़ोन को बीएड पर रख कर अपने कपडे निकलता है आवर टावल लेकर बाथरूम मैं चला जाता है

अर्जुन जब बाथरूम से फ्रेश होकर रूम मैं आता है आवर शीशे के सामने खड़ा होकर खुद को देख रहा होता है तभी उसके फ़ोन पर मैसेज आने लगते है तो अर्जुन फ़ोन उठा कर देखने लगता है किसका मैसेज आ रहा है अर्जुन जैसे hi फ़ोन मैं मैसेज ओपन करता है अर्जुन के हाँथ से फ़ोन निचे गिर जाता है

मैसेज अर्जुन आई हुई फोटो को देख कर अर्जुन कपूर जिस्म hi हिल जाता है अर्जुन का लैंड भी एक दो बार सलामी दे देता है

ये क्या बकवास है ये मक है कौन आवर मुझे क्यू भेज रहा है ..... अर्जुन बीएड पर बैठ कर बुदबुदाता है आवर बीएड पर गिरा हुआ फ़ोन फिर से उठा लेता है आवर फिर से उन फोटो को देखने लगता है जो किसी लड़की की फोटो होती है वह भी कुछ कपडे मैं तो कुछ बिलकुल नंगी आवर उसमे सिर्फ लड़की की छूट आवर चुकी की फोटो जयादा दिख रही होती है जैसे फोटो भेजने वाला जान भुज कर hi अर्जुन के पास भेजा है

अर्जुन अभी फोटो को देख hi रहा होता है तभी गेट खुलने की आवाज़ अर्जुन के कानों मैं आती है

अर्जुन झट से फ़ोन को बंद कर देता है मगर गेट पर कड़ी औरत को देख कर अर्जुन घबरा भी रहा होता वही गेट पर कड़ी औरत मुस्कुरा रही होती है मगर अर्जुन के नंगा जिस्म को देख कर फिर शर्मा भी जाती है आउट मुस्कुराती हुई गेट के दूसरी तरफ मुंह कर लेती है
 
अपडेट .... 42

कोई काम है क्या आप को ....... अर्जुन अपना टावल ठीक करते हुआ कहता है आवर अर्जुन भी दूसरी तरफ घूम जाता है

अर्जुन बीटा मुझे अपनी एक दोस्त के घर जाना है आवर राजू अपनी बीवी को लेकर उसके घर चला गया है क्या तुम मुझे लेकर चल सकते हो .... राखी देवी कहती है जो एहि बात पूछने के लिए आई होती है अर्जुन से

राजू नहीं है तो आप अपने भाई को लेकर चली जाइये मुझे अभी नींद आ रही है मैं अभी सोने जा रहा हुओं ..... अर्जुन कपडे पहनते हुआ कहता है

अर्जुन बीटा तेरे मां सहर के लिए गए है नानी को लेकर वह10 दिन के बाद hi आएंगे ठीक है बीटा तुम अभी आराम करो मैं अपनी दोस्त को मन कर दूंगी .....

राखी देवी थोड़ी दुखी होकर कहती है राखी देवी को अभी जयादा दुःख इस लिए होती के अर्जुन अभी भी मेरे भाई के बारे मैं बात कर रहा है राखी देवी बोल कर मायूस होकर रूम से जाने लगाती है

रुकिए कब जाना है दोस्त के घर मैं आप को छोड़े दूंगा ...... अपनी माँ को जाते हुआ अर्जुन कहता है

अर्जुन तू क्या बेवकूफी कर रहा है इतने सल्ल के बाद तो तू अपनी माँ से बात कर रहा है कल रात को नहीं सुना वह कितनी दुखी रह रही थी तेरे प्यार के लिए फिर भी तू उनको आवर दुखी कर रहा है तू जितना अपनी माँ के पास रहेगा तू उतना अपनी माँ के बारे मैं जान सकेगा आवर भूल मत तुझे अपनी माँ से जानना भी है आखिर तेरी माँ ने अपने भाई के साथ रिश्ता क्यू बनाई है .... अर्जुन के दिमाग मैं अचानक hi ये बात आती है जो अर्जुन बोल पड़ता है

राखी देवी मायूस होकर जा रही होती है मगर अर्जुन को बात सुन कर रुक जाती है आवर राखी देवी के चहरे पर मुस्कान भी आ जाती है

शाम को जाना है अर्जुन बीटा अगर तुम्हारा मन नहीं कर रहा है जानने को तो रहने दो मैं मन कर दूंगी अपनी दोस्त को ..... राखी देवी कहती है

ठीक है जब जाना होगा मुझे बता दीजियेगा ..... अर्जुन कहता है

राखी देवी ठीक है बोल कर रूम से निकल जाती है

राखी देवी अर्जुन के रूम से निकलते हुआ मुस्कुरा रही होती है

राखी देवी इससे पहले सायद hi कभी खुश हुआ करती थी नहीं तो राखी देवी बस सभी को दिखने के लिए अपनी चहरे पर मुस्कान लती थी मगर वह मुस्कान भी अर्जुन से मिलने के बाद चली जाती थी मगर आज की मुस्कान सबसे अलग थी जो सायद hi किसी के सामने जाती

राखी देवी मुस्कुराती हुई अपनी रूम मैं जाती है आवर कुछ गुनगुना भी रही होती है

माँ आप बहुत खुश लग रही है कही किसी ौंकल ने आप को ी लव यू तो नहीं बोल दिया ..... अपनी माँ को गुनगुनाते हुआ रूम मैं आते हुआ देख कर अंजलि कहती है जो अभी अपनी माँ के रूम मैं होती है

राखी देवी अपनी रूम मैं जाती है तभी उनके कानों मैं आवाज़ सुनाई देती है तो राखी देवी जो निचे देखते हुआ मुस्कुराती हुई गुनगुना रही होती है मगर मांगा अंजलि की आवाज़ सुन कर गुनगुना बंद कर देती है मगर अभी भी मुस्कुरा रही होती है

हां आज मैं बहुत खुश हुई तू यह क्या कर रही है .... राखी देवी कहती है आवर बीएड पर बैठ जाती है

ओह ओह आप इतनी खुश है कौन है वह खुश नसीब जिसने आप के दिल पर राज कर लिया है मुझे भी बता दीजिये ....... अंजलि खुश होकर बोलती है

अंजलि को भी अभी बहुत ख़ुशी हो रही होती है अपनी माँ को खुश देख कर

क्या ौंकल ौंकल लगा राखी है किसी ने मुझे कुछ नहीं कहा अब मैं जवान नहीं रही जो कोई भी मुझे ी लव यू बोले मैं अब बुद्धि हो गयी हुईं मेरी ख़ुशी का राज कुछ आवर है मगर मैं तुझे नहीं बताउंगी ...... राखी देवी थोड़ी डांटने हुआ सवार मैं अंजलि से बोलती है आवर फिर से मुस्कुराने लगाती है

माँ पहली बात की आप बुद्धि नहीं है आप को याद है उस दिन वह आंटी क्या बोल रही थी सहर मैं जब आप मैं आवर दीदी एक बोतल मैं नास्ता कर रही थी ..... मैं hi बता देती हुईं वह आंटी बोल रही थी आप मेरी आवर दीदी की बड़ी बहन लग रही है आवर आप शर्मा गयी थी आंटी के सामने ..... अंजलि हस्ती हुई बोलती है

वह औरत तो पागल लग रही थी मुझे देखि नहीं कैसे बस मुझे hi घूरे जा रही थी जैसे मैं कोई औरत आदमी हुईं ..... राखी देवी उस औरत के बारे मैं सोचती हुई बोलती है

माँ मुझे लग रही थी वह औरत आप के साथ प्यार करना चाहती थी अब आप खुद hi सोचिये आप कितनी जवान हो ौंकल तो ौंकल वह आंटी भी आप के साथ प्यार करना चाहती थी

दो औरतों वाला प्यार कितना मज़ा आया होगा ...... अंजलि कुछ सोचती हुई बोलती है

वही राखी देवी पहले तो अंजलि की बात सुन कर शर्मा जाती है मगर फिर अंजलि को घूरने लगती है

वही अंजलि बोल अभी भी कुछ सोच रही होती है मगर अंजलि की नज़र जैसे hi अपनी माँ पर जाती है अंजलि दूसरी तरफ देखने लगती है

अभी क्या बोली तू किसने बताया तुझे दो औरत एक दूसरे से प्यार कर सकती है गुड़िया ये गन्दी बाते किसने बताया तुझे बता मुझे ..... राखी देवी गुस्से मैं पूछती है

वही अंजलि अपनी माँ की बात सुन कर अपना सर निचे कर लेती है आवर अपनी दोनों हाँथ एक दूसरे से मोड़ने लगाती है

ये क्या निकल गया मेरी मुंह से दीदी सही कहती है मैं अभी एक बच्ची hi हुईं मुझे क्या ज़रूरत थी ये बात मास से बोलने की अब मैं मन को क्या जवाब दूँ प्लीज कोई बचा लो मुझे ..... अंजलि निचे सर किये hi मन मैं सोचने लगती है

दीदी वह आप का फ़ोन कब से बज रहा है देखिये किसका फ़ोन है .... राखी देवी अभी अंजलि को गुस्से से देख रही होती है तभी आँचल रूम मैं आती हुई कहती है

राखी देवी के रूम से जाते hi अंजलि जो अभी निचे देख रही होती है उछाल कर आँचल के ऊपर कूद पड़ती है ी लव यू माँ माँ माँ माँ ी लव यू ी लव यू

हहहहहह मेरी कमर गुड़िया मेरी कमर टुडे दिया उतर मोती मेरे ऊपर से हहहहहह .... आँचल थोड़ी दर्द मैं सिसकियाँ लेते हुआ बोलती है मगर अंजलि के बार बार माँ कहने पर आँचल बहुत खुश भी होती है आवर दर्द मैं होने के बाद भी अंजलि पर गुस्सा नहीं करती है बल्कि प्यार से हटने को कहती है

वही अंजलि माँ माँ कहते हुआ आँचल के गलों पर चुम्मा देती hi रहती है

अंजलि बीटा तेरी माँ को सच मैं दर्द हो रहा है प्लीज हैट जा ..... आँचल दर्द मैं कहती है यह तक आँचल के आँखों मैं आंसू की बूंदें भी आ जाती है मगर आँचल अंजलि को कुछ नहीं बोलती है बस प्यार से हटने को बोलती है

वही अंजलि बहुत खुश होती है आवर वह ख़ुशी मैं hi बीएड से उछाल कर आँचल के ऊपर कूद जाती है ये तो अच्छा होता है अंजलि आवर आँचल बीएड पर hi गिरती है नहीं तो आँचल को आवर भी दर्द की अहसास होती अपनी ममी माँ की दर्द भरी आवाज़ सुन कर अंजलि को पता चलता है जो अंजलि झट से आँचल के ऊपर से हैट जाती है आवर अपनी ममी माँ की आँखों मैं नमी देख कर अंजलि भी दुखी हो जाती है

सॉरी सॉरी माँ मैंने जान भुज कर नहीं किया प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये माँ कहा दर्द हो रही है आप को ...... अंजलि दुखी सवार मैं कहती है यह तक अंजलि की भी आँखें नाम हो जाती है जिसे आँचल देख लेती है आवर झट से उठ कर अंजलि को गले लगा लेती है

ये क्या मेरी गुड़िया क्यू रोने लगी मुझे दर्द नहीं हो रही है आवर मेरी बेटी को सॉरी बोलने की कोई जरुरत नहीं है बच्चे तो अपनी माँ के जिस्म पर अक्सर hi खेलते रहते है ..... हआ मगर मुझे थोड़ी दर्द हुई है क्यू की मेरी गुड़िया बेटी बच्ची से थोड़ी बड़ी हो गयी है मगर मुझे इतनी भी दर्द नहीं हुई है मैं तो बस तुझे हटने के लिए वैसा बोल रही थी ..... आँचल अंजलि के आँखें नाम देख कर खुद की दर्द भूल जाती है आवर दर्द होने के बाद भी झूट बोल देती है

माँ आप मेरे लिए झूट बोल रही है आप को दर्द हुआ है मैं अभी आप की जिस्म की मालिश कर देती हुईं चलिए मेरी रूम मैं .... अंजलि नरमी से बोलती है आँचल भी आवर कुछ नहीं बोलती है आवर अंजलि के साथ उसके रूम मैं चली जाती है

राखी देवी के जाने के बाद अर्जुन अपने बीएड पर लेट कर अपनी माँ के बारे मैं सोचने लगता है अर्जुन सोच मैं घूम होता है तभी अर्जुन के फ़ोन गंगनानी लगता है तब अर्जुन सोच से बहार निकल कर फ़ोन उठा लेता है तो देखता है इस बार भी वही नंबर से मैसेज आया हुआ होता है आवर आवर एक फोटो होती है

अर्जुन सोच मैं पद जाता है ये कौन लड़की है आवर मुझे इतनी गन्दी फोटो क्यू भेज रही क्या मैं इसे जनता हुईं

अर्जुन के आँखों के सामने फिर से वह सभी फोटो आने लगती है

उन सभी नंगी फोटो के बारे मैं सोचते hi अर्जुन का लैंड फनफना जाता है अर्जुन फिर से वह सब फोटो देखने लगता है आवर एक फोटो को गौर से देखने लगता है

वह फोटो भी आयी ली हुई होती है के उसमे छूट की दोनों होंठ एक दूसरे से चिपकी हुई होती है आवर छूट के पास मैं hi लड़की की एक हाँथ होती है जैसे लड़की ऊँगली से छूट की एक होंठ खोलना चाहती है

अर्जुन उस फोटो देखते हुआ अपना एक हाँथ लैंड पर रख देता है आवर सहलाने लगता है

आज पहली बार अर्जुन किसी छूट को इतने गौर से देख रहा होता है

ये कौन लड़की हो सकती है क्या ये आस्था का नंबर है कितनी गिरी हुई लड़की है मैंने इतनी बुरी तरह से उसके साथ किश किया ताकि वह मेरा पीछा करना छोड़ दे मगर ये लड़की तो अपनी नंगी फोटो तक भेजने लगी है इसको मेरा नंबर कैसे मिला ..... अर्जुन सोचता है फिर पता नहीं अर्जुन के दिमाग मैं क्या आता है अर्जुन उस नंबर पर फ़ोन लगा देता है फ़ोन का रिंग फुल होता है मगर उधर कोई फ़ोन नहीं उठता है अर्जुन फिर से कॉल करता है

वही एक रूम मैं एक लड़की एक चादर अपनी जिस्म पर दाल कर सोइ हुई होती है आवर उसके हाँथ मैं फ़ोन होता है जो अभी उस फ़ोन पर रिंग हो रहा होता है मगर वह लड़की अपनी ऊँगली को फ़ोन के ऊपर राखी हुई होती है मगर फ़ोन उठाने के लिए ऊँगली से टाच नहीं कर रही होती है

जैसे लड़की का मन तो कर रहा है फ़ोन उठाने कर मगर उठा नहीं रही है

ये उस लड़की के फ़ोन पर तीसरा फ़ोन आया हुआ होता है फ़ोन काट होने के बाद वह लड़की उस फ़ोन को अपने साइन पर रख लेती है उस लड़की की धड़कन तेज़ी से चल रही होती है जो फ़ोन भी साइन से निचे गिर जाता है

तभी फिर से फ़ोन गंगनानी लगता है लड़की झट से फ़ोन को उठा आवर हैडफ़ोन लगा लेती है

उधर से लड़का बोल रहा होता है लड़की बस सुनती रहती है

कैसी लगी तुझे मेरी फोटो अच्छी है न क्या तुझे सामने से देखना है ...... लड़की बोलती है

उधर लड़का कुछ देर चुप रहता है ....... फिर कुछ देर बाद वह लड़का कुछ बोलता है

तुम पागल है क्या किस लड़की की बात कर रहा है मैं तेरी बड़ी दीदी हुईं तू हर वक़्त छिप कर मुझे बाथरूम मैं नहाते हुआ देखता है आवर अपना वह हिलता है आवर मेरी कई साडी पेंटी भी ख़राब कर चूका है मुझे पता है समझा

मुझे तेरी ये आदत बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी आवर मुझे बहुत गुस्सा भी आया था मगर मैं तुझसे बहुत प्यार करती हुईं मैं नहीं चाहती तू मेरी आवर भी पेंटी ख़राब करे इस लिए अपने hi रूम मैं ये फोटो देख कर हिला आवर चादर गन्दा कर मगर मेरी पेंटी फिर नहीं लेना ..... इतना बोल कर लड़की चुप हो जाती है

उधर लड़का फिर से कुछ देर चुप रहने के बाद कुछ बोलता है

अरुण मजाक मत कर मैं जानती हुईं तुहि बोल रहा है मुझे अच्छे से पता है ये तेरा hi नंबर है बता दे देख तेरी दीदी का दिल घबरा रही है ........ इस बार लड़की डरते हुआ बोलती है

उधर से लड़का कुछ बोलता है .........

वह सॉरी सॉरी मुझसे गलती हो गयी प्लीज मेरी साडी फोटो उदा दीजिये मैंने वह साडी फोटो अपने भाई को भेजी थी प्लीज उदा दीजिये ...... लड़की डर्टी हुई रोनी सी आवाज़ मैं कहती है

उधर से लड़का कुछ बोलता है आवर फ़ोन काट हो जाता है फ़ोन करने के बाद लड़की के चहरे पर एक मुस्कान होती है आवर वह लड़की उठा कर बाथरूम मैं चली जाती है जो अभी बिलकुल नंगी होती है

यह अर्जुन की शैशे रुक नहीं रही होती है आवर अर्जुन का हाँथ अभी भी लैंड पर होता है आवर अर्जुन का लैंड बार बार फनफना रहा होता है मगर अर्जुन तो कुछ सोच रहा होता है फ़ोन भी निचे बीएड पर पड़ा हुआ होता है

कैसी लड़की थी वह जो अपने hi छोटे भाई को अपनी नंगी फोटो भेज रही है

हे भगवन मैं तो दर hi गया था जब वह लड़की पेंटी के बारे मैं बोल रही थी मुझे लगा वह गीता दीदी है मैंने भी तो गीता दीदी की पेंटी मैं .... अर्जुन इतना सोच कर चुप हो जाता है

वह मुझे अपनी गीता दीदी की पेंटी के साथ नहीं करना चाहिए था ...... कही उस दिन हरकत के बारे मैं मेरी गीता दीदी को भी पता तो नहीं चल गया होगा इस लड़की की तरह

अगर दीदी को पता चल गया होगा तो क्या इस लड़की की तरह दीदी भी मुझे अपनी नंगी फोटो देंगी या गुस्सा करेंगी मुझे

गुस्सा तो नहीं करेंगी क्यू की मेरी दोनों दीदी मुझसे बहुत प्यार करती है

दीदी की छूट आवर चुकी भी इस लड़की की तरह होगी छियई छियई ये मैं क्या सोच रहा हुईं मेरी दीदी मुझसे प्यार करती है मगर वह इतनी गन्दी हरकत नहीं करेंगी ..... अर्जुन सोच कर अपनी आँखे बंद कर लेता है

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बस अच्छा नहीं किया उन सैलून ने मैं किसी को नहीं छोड़ने वाला हुईं उन सभी की माँ छोड़ दूंगा जिसने भी किया है साला मेरी इतने सैलून की मेहनत को बर्बाद कर दिया

आदि अपने बीएड पर लेता हुआ सोच रहा होता है जो बहुत गुस्से मैं होता है आदि की आँखें भी गुस्से से लाल होती है

आदि बीटा कुछ चाहिए तुझे ... आदि की माँ कहती है मगर आदि कोई जवाब नहीं देता है जैसे आदि को सुनाई नहीं दिया हो

आदि सोच मैं घूम होता है तो आदि की माँ फिर से आदि से पूछती है आवर इस बार आदि के करीब जाकर पूछती है जो आदि अपनी सोच से बहार आ जाता है

आदि अपनी माँ को सामने देख कर मुस्कुरा देता है

माँ आप परेशां मत होइए मुझे अभी कुछ नहीं चाहिए जब से मैंने घर आया हुईं आप कई बार रूम मैं आ चुकी है ...... आदि कहता है

बीटा तू नहीं जनता है माँ को कितनी तकलीफ होती है जब उसके बेटे के साथ बुरा होता है मैं तो दर गयी थी ये सोच कर के मैं फिर अपने बेटे से नहीं मिलूंगी मगर भगवन ने तुझे मेरे पास ला hi दिया बीटा जयादा दर्द तो नहीं हो रहा है न ....... आदि को माँ दुखी होकर बोलती है

तुम्हारी तरह इतनी प्यार करने वाली जिसकी माँ हो उसके बेटे के साथ कुछ बुरा हो hi नहीं सकता है फिर भला मेरे साथ बुरा क्यू होता ...... आदि कहता है

बीटा कुछ चाहिए तो कमला को बोल देना मैं नहाने जा रही हुईं ..... आदि की माँ कहती है आवर आदि के रूम से निकल जाती है

कमला को .... हां माँ कमला को बुला लूंगा अब तो वही मेरी प्यास बुझा सकती है ..... आदि मन मैं सोचता है

शाम के 6 : पं

अर्जुन फ्रेश होकर अपने रूम से निकल कर आता है तो हॉल मैं अपनी गीता दीदी को देखा है जो टीवी देख रही होती है

अर्जुन भी गीता दीदी के दूसरी तरफ बैठ जाता है आवर अपनी गीता दीदी को देखने लगता है जो गीता दीदी अभी टीवी देखने मैं बिजी होती है

अर्जुन क्या हुआ कुछ लगा है क्या मेरी चहरे पर जो इस तरह देख रहा है ..... अर्जुन को अपनी चहरे पर देखते हुआ देख कर गीता कहती है

गीता दीदी की बात सुन कर अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर टीवी की तरफ देखने लगता है मगर कुछ बोलता नहीं है

अर्जुन कहा कहा घूमता रहता है तुझे याद है न इस घर मैं तेरी एक बड़ी दीदी भी है ..... कभी मुझसे भी बात कर लिया कर ...... अर्जुन को कुछ बोलते हुआ न प् कर गीता दीदी बोलती है

दीदी मैं तो आने के बाद आप के रूम मैं गया था मगर आप रूम मैं नहीं थी तो मैं अपने रूम मैं चला गया

दीदी मुझे याद करने की ज़रूरत नहीं है ... याद उनेह करते है जो हम्हारे पास नहीं होते है मगर आप तो मेरी दिल मैं रहती हो फिर मैं आप को याद क्यू करूँगा ..... अर्जुन मुस्कुराते हुआ कहता है

ओह्ह मेरा हीरो इतना प्यार करता है अपनी दीदी से ...... गीता दीदी इतनी खुश होती है की उठ कर अर्जुन के गलों पर किश कर देती है

अर्जुन बीटा ये कॉफ़ी पिले फिर चलते है ..... राखी देवी अर्जुन को कॉफ़ी देती हुई कहती है आवर एक कॉफ़ी गीता को देती आवर फिर अपने रूम मैं चली जाती है तैयार होने के लिए

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हां अभी तो मांफ कर hi दिया है भाई :फाइव:

आगे देखते है क्या अर्जुन ने अपनी माँ को पूरी तरह मांफ किया है या नहीं

आदि ये नाटक कर रहा है या नहीं ये आगे तो पता चल जायेगा भाई. हआ मांगा अर्जुन आवर डॉ के बिच जो बाते हुई है वह अर्जुन के लिए आगे बहुत काम आने वाला है :अप्प्रोवे:

थैंक्स भाई

अर्जुन को पिछ भेजने वाली सायद कोई अपनी भी हो सकती है :शहहह:
 
थैंक्स भाई

बीआरओ सब की अपनी अपनी सोच होती है किसी को बुरा लगता है तो कुछ को अच्छा लगता है मगर दोनों नज़र से देखा जाये तो वह दोनों नज़र अपने आप मैं सही होता है

जैसे आस्था ने पहली बार मैं hi अर्जुन को तप्पड़ मार दिया जो सही नहीं था मगर गलत भी नहीं था क्यू के आस्था ने अर्जुन को तप्पड़ दुश्मनी से नहीं अर्जुन के लिए मरी थी

सायद आस्था को अर्जुन को पहली नज़र मैं देख कर कुछ लव वाला फाइलिंग हुआ हो मगर सिगरेट पिटे हुआ देख कर आस्था को अच्छा न लगा हो इस लिए तप्पड़ मार दिया होगा

मगर उसके बाद आस्था के साथ जो भी हो रहा है अच्छा नहीं हो रहा क्यू आस्था बस अर्जुन से शादी करना चाहती है आवर कोई खवाहिश नहीं है उसकी

मगर अर्जुन भी अपनी जगह सही है आस्था जब भी उसके पास आई है उस वक़्त अर्जुन का मुंड सही नहीं होता है जो अर्जुन दूसरे का गुस्सा आस्था पर निकल देता है

अब आगे देखते है भाई क्या होता है :फाइव:
 
अपडेट ..... 43

अर्जुन कॉफ़ी पिटे हुआ अपनी माँ को जाते हुआ एक नज़र देखता है आवर फिर टीवी की तरफ देखने लगता है

वही अब गीता दीदी अर्जुन के पास hi बैठ कर कॉफ़ी पिने लगती है

गीता दीदी कॉफ़ी पिटे हुआ अपना एक हाँथ अर्जुन के गर्दन पर रख देती है आवर अर्जुन के सर पर ऊँगली चलने लगती है

गीता दीदी के इस तरह बैठने से उनकी एक चुकी अर्जुन के पीठ से थोड़ी दबी हुई होती है मगर गीता दीदी को कोई भी फर्क नहीं पड़ता है आवर गीता दीदी अर्जुन के सर पर ऊँगली फेरती रहती है

क्या कर रही है दीदी मेरे सर मैं कोई जो नहीं है आप जब भी पास बैठती है जो ढूंढने लगती है ..... अर्जुन गीता दीदी से दूर होते हुआ कहता है आवर एक नज़र गीता दीदी को देख कर अर्जुन फिर से कॉफ़ी पिने लगता है

वही गीता दीदी अर्जुन के बल मैं जो धुंध रही होती है मगर अर्जुन के बोलते हुआ आवर फिर अर्जुन को खुद को देख के कॉफ़ी पिटे हुआ देख कर गीता दीदी अपनी चुकी की तरफ देखती है आवर खुद hi शर्मा जाती है

हे भगवन ये कैसे हो गया कही अर्जुन को इसका अहसास तो नहीं हो गया .... गीता दीदी मन मैं सोचती है आवर फिर निचे गिरी हुई दुप्पटे को साइन पर रख लेती है

अर्जुन बीटा ये छोत पहन लो ये छोत तुमपे अच्छा लगेगा ..... राखी देवी तैयार होने के बाद रूम से एक छोत लेकर आती हुई बोलती है

राखी देवी के चहरे पर अभी प्यारी सी मुस्कान होती है जो गीता अपनी माँ के चहरे पर मुस्कान देख कर खुश हो जाती है मगर फिर कुछ सोच कर उदास भी हो जाती है

वही अर्जुन अपनी माँ को देखते हुआ सोचने लगता है वह छोत पहने की नहीं

अर्जुन प्लीज अपनी दीदी के लिए माँ को मन नहीं करना माँ से छोत ले लो प्लीज मेरे भाई ...... गीता अर्जुन से उदासी भरे स्वर मैं कहती है

अर्जुन मुस्कुरा कर गीता दीदी को देख कर हां मैं सर हिला देता है जो गीता दीदी मुस्कुरा पड़ती है .... ी लव यू ी लव यू ूउम्म्मा गीता दीदी बहुत खुश होती है आवर ख़ुशी मैं अर्जुन को गले लगा लेती है आवर फिर अर्जुन के गलों पर किश कर के अपनी माँ के पास चली जाती है आवर राखी देवी से वह छोत लेकर अर्जुन को पहना देती है

मेरी नज़र न लगे अर्जुन तू बहुत अच्छा लग रहा है ........ माँ आप ने बहुत अच्छा छोत लिया है अर्जुन के लिए अर्जुन इस छोत मैं फिल्मी हीरो से भी अच्छा लग रहा है ....... गीता खुश होकर कहती है आवर अपनी आँखों से काजल निकल कर अर्जुन के गलों पर लगा देती है

अपनी गीता दीदी प्यार देख कर अर्जुन गीता दीदी के गले लग जाता है वही थोड़ी दूर कड़ी राखी देवी भी अर्जुन के पास आ जाती है आवर गीता आवर अर्जुन दोनों के सर पर हाँथ फेर देती है जिससे गीता दीदी अपनी माँ के गले लग जाती है थोड़ी देर तीनो गले लगते है आवर फिर अर्जुन खुद hi अलग होकर घर के बहार चला जाता है

राखी देवी गीता को प्यार से देखती है आवर वह भी घर से निकल जाती है

अर्जुन बहार बाइक लेकर खड़ा होता है अपनी माँ को आते हुआ देख कर बाइक स्टार्ट कर देता है राखी देवी बाइक के पास आकर अर्जुन को पकड़ कर बैठ जाती है आवर अर्जुन बाइक लेकर चल देता है

बाइक चलते हुआ जब अर्जुन अपने गाओं से बहार निकलता है तो एक बार अपना सर पीछे कर के अपनी माँ को देखता है जो राखी देवी समझ जाती आवर किधर जाना है बताती है कोई 25 मिंट के बाद राखी देवी एक हवेली के सामने बाइक रोकने को बोलती है तो अर्जुन बाइक रोक देता है आवर बाइक खड़ा कर देता है मगर बाइक से उतरता नहीं है राखी देवी बाइक से उतर कर कड़ी हो जाती है आवर अपनी साड़ी ठीक करने लगती है जब

आप को आना होगा मुझे कॉल कर दीजियेगा मैं आ जाऊंगा ...... अर्जुन कहता है

अर्जुन बीटा जयादा टाइम नहीं लगेगा मैं जल्दी hi चलूंगी तुम भी साथ चलो मेरे ...... राखी देवी कहती है

वैसे भी अर्जुन तो एहि चाहता था अपनी माँ के साथ रहना इस लिए फिर कुछ बोलता नहीं है आवर बाइक को हवेली के गर्दन मैं खड़ा कर देता है आवर अपनी माँ के साथ हवेली के अंदर चला जाता है

अर्जुन जब हवेली के अंदर जाता है तो देखता है अंदर हवेली को सजाया हुआ होता है आवर एक साथ लाइन से कई सरे केक रखे हुआ होते है अर्जुन को थोड़ा हैरानी होती है की एक साथ कई सरे केक क्यू रखे है क्या इस हवेली मैं कई लोगों का जनम दिन एक साथ हुआ है

इतने सरे केक एक साथ मैं ..... अर्जुन से रहा नहीं जाता है आवर अपनी माँ से पूछ hi लेता है जो राखी देवी मुस्कुरा देती है आवर अर्जुन के गलों पर हाँथ रख कर बस देखती रहती है

अपनी माँ को अपनी तरफ बस देखते हुआ देख कर अर्जुन को कुछ समझ नहीं आता है मगर इतना तो अर्जुन को समझ आ जाता है अभी उसकी माँ उसे बड़े hi प्यार से देख रही है आवर सायद उसकी माँ की आँखें भी नाम हुई है मगर चहरे पर मुस्कान है

अरे राखी तू आ गयी हाँ कब से तेरी hi इंतज़ार कर रही थी ..... ये अर्जुन है क्या .... एक औरत सीढ़ियों से उतरती हुई बोलती है मगर अर्जुन को देख कर उस औरत के चहरे पर भी ख़ुशी छलक जाती है

वही राखी देवी अर्जुन के पास कड़ी होकर अपने एक हाँथ को अर्जुन के कंधे पर रख कर हां मैं सर हिला देती है

वही उस औरत के पीछे आवर भी कई साडी औरत सीढ़ियों से उतर कर आती है आवर उन सभी औरतों मैं एक औरत को देख कर अर्जुन उसे देखने लगता है

अर्जुन बीटा अच्छा किया तुमने अपनी माँ को मांफ कर दिया बेचारी बहुत रोटी दहकती थी तुम्हारे लिए तुम कभी अपनी माँ से नफरत मत करना तुमेह मेरी उम्र लग जाये ...... वह औरत बोलते हुआ अर्जुन के बलए तक ले लेती है

अर्जुन को कुछ समझ मैं नहीं आता है ये आंटी कौन है आवर मुझे कैसे जानती है क्यू के अर्जुन उस औरत से आज पहली बार मिल रहा होता है मगर उस औरत की बातों से अर्जुन इतना तो समझ जाता है

वह औरत उसे अपनी माँ से फिर कभी गुस्सा नहीं करने को समझा रही होती है

उस औरत की बातों मैं कितना दर्द है अर्जुन वह भी समझ जाता है

वह औरत अर्जुन की बलए लेकर अर्जुन को अपने साथ लेकर केक के आगे कड़ी कर देती है

वही दोनों औरत भी अर्जुन के साथ कड़ी हो जाती है

अर्जुन बीटा चलो केक काटो ..... वह औरत खुश होकर कहती है मगर अर्जुन को हैरानी होती है की ये आंटी मुझे क्यू केक काटने को बोल रही है जिससे अर्जुन थोड़ा पीछे हैट जाता है आवर अपनी माँ को देखने लगता है जो राखी देवी भी केक काटने का इशारा करती है आवर उस औरत के कंधे पर हाँथ रख देती है मगर अर्जुन मुंह फेर लेता है

अर्जुन बीटा अगर तुम्हारा दिल नहीं कर रहा तो कोई बात नहीं मैं खुद hi एक बार फिर अपने बेटे की नफरत के याद मैं केक काट लुंगी मुझे मांफ करना जो मैंने तुमसे कहा ..... वह औरत दुखी स्वर मैं कहती है

अर्जुन क्या सोच रहा है केक काट क्यू नहीं देता है अभी देखा नहीं ये औरत थोड़ी देर पहले कितनी खुश हुई थी तुझे देख कर मगर अभी कितनी दुखी हो गयी है ये तुझे अजीब नहीं लग रहा है यह कई सरे केक रखे हुआ है मगर यह कोई भी जवान लड़का या लड़की नहीं है बस 3 आंटी hi है आवर वह उन सभी आंटी के चहरे पर भी उदासी है आखिर बार क्या है ये जानना है तो तुम्हें केक काट कर आंटी को खुश कार्डो ..... ये आंटी सायद तुम्हारी माँ के बारे मैं कुछ बता दे ...... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर फिर से केक के पास आ जाता है

अर्जुन को केक के पास आने पर सब आंटी खुश हो जाती है आवर सभी अर्जुन के केक काटने का इंतज़ार करने लगती है

अर्जुन भी जयादा टाइम नहीं लेता है आवर केक काट देता है अर्जुन केक काट कर पहले उस आंटी को खिला देता है वह आंटी केक कहते हुआ रो देती है आवर अर्जुन को फिर से गले लगा लेती है

अर्जुन को उस आंटी से गले लग कर अपना सा महसूस होता है जैसे उस आंटी की दिल की धड़कन अंदर से मचल रही है अर्जुन थोड़ी देर बाद खुद उस आंटी से अलग हो जाता है

बरी बरी अर्जुन उन दोनों आंटी को भी केक काट कर खिलता है मगर एक आंटी को देख कर अर्जुन को थोड़ा अजीब भी लगता है आवर दुःख भी होता है मगर वह आंटी अर्जुन को देख कर बस मुस्कुरा रही होती है मगर कुछ बोटी नहीं है मगर अर्जुन तो इतना समझ जाता है वह आंटी अभी दुखी है मगर उसके चहरे पर मुस्कान है

अब एक केक बचता है मगर उस केक के पास राखी देवी पहले से कड़ी होती है आवर चाकू लेकर अर्जुन को प्यार से देख रही होती है अर्जुन जब अपनी माँ को देखता है तो उसकी माँ की आँखों मैं बेपनाह ख़ुशी होती है

अर्जुन बीटा क्या सोच रहा है जा आवर केक काट कर अपनी माँ को खिला दे बहुत इंतज़ार किया है इस दिन के लिए तुम्हारी माँ ने ..... वह आंटी कहती है

ये चल क्या रहा है मुझे अच्छे से पता है आज न तो मेरा जनम दिन है आवर नहीं माँ की फिर ये सब क्या है ये सब किश ख़ुशी मैं केक काट रही है अर्जुन सोचते हुआ अपनी माँ के पास चला जाता है

राखी देख तेरी भगवन ने सुन लिया आवर आज तुझे अर्जुन मिल hi गया मेरी दुआ है तुम दोनों माँ बेटे मैं कभी दुरी न बने तुम दोनों हमेशा साथ रहो ..... वह आंटी राखी देवी से कहती है

राखी देवी उस आंटी के गले लग जाती है कुछ देर मैं अर्जुन को राखी देवी चाकू देती है आवर अर्जुन केक काट देता है आवर अपनी माँ केक उठा कर खिलता है

केक कहते हुआ राखी देवी की आंसू निकल hi जाती है आवर राखी देवी अर्जुन के साइन पर सर रख कर सिसकने लगाती है

अपनी माँ को सिसकते हुआ सुन कर अर्जुन के दिल की धड़कन मैं हलचल सी होने लगाती है

अर्जुन मुझे मांफ करदे मैंने बहुत बुरा किया तुझे खुद से अलग कर के तुझे हॉस्टल मैं नहीं भेजना चाहिए था मांफ करदे बीटा अपनी माँ को मांफ करदे ..... राखी देवी सिसकते हुआ बोलती है

माँ आप चुप हो जाइये मैंने मांफ किया आप को प्लीज चुप हो जाइये ..... अपनी माँ को रट हुआ सुन कर अर्जुन के दिल भी रोने जैसा हो जाता है अर्जुन अपनी माँ को दोनों हाथों से पकड़ लेता है

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एक रूम मैं एक लड़की बीएड पर ब्रा पेंटी मैं खुद की फोटो ले रही होती है कभी पेंटी के ऊपर से तो कभी पेंटी को थोड़ी सी हटा कर छूट की एक होंठ की तो कभी अपनी अपनी चुकी की निप्पल की जो अभी उस लड़की की टाइट ब्रा होने से उस लड़की को चुकी की निप्पल साफ पता चल रही होती है

जब वह लड़की कभी साडी फोटो ले लेती है तो वह अपनी जिस्म पर एक चादर दाल लेती है आवर फिर एक एक फोटो को मैसेज करने लगती है आवर कुछ hi मिनट मैं वह लड़की अभी की ली हुई साडी फोटो सेंड कर देती है

ही कैसे हो तुम ... क्या हम बात कर सकते है फेरी हो तो मुझे कॉल कर सकते हो ..... वह लड़की मैसेज कर इंतज़ार करने लगती है फ़ोन का मगर कभी वक़्त के बाद भी मैसेज नहीं आता है लड़की थोड़ी उदास तो होती है मगर फिर आँखे बंद कर लेती है

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तीनो आंटी हॉल मैं बैठी हुई होती है वही थोड़ी दुरी पर अर्जुन भी बैठ कर फ़ोन मैं कुछ कर रहा होता है आवर कभी कभी अपनी माँ की तरफ देख रहा होता है

तभी अर्जुन के फ़ोन पर एक के बाद एक मैसेज आने लगता है मैसेज अचानक लगातार आने से अर्जुन के हाँथ से फ़ोन गिर जाता है जो अर्जुन के माँ के साथ वह तीनो आंटी भी अर्जुन को देखने लगती है

क्या हुआ बीटा फ़ोन कैसे गिर गया ..... राखी देवी कहती है

मगर अर्जुन कुछ बोलता नहीं है आवर फ़ोन उठा लेता है

माँ वह बाथरूम किधर है .... अर्जुन अपनी माँ से पूछता है

राखी मैं अर्जुन को बाथरूम दिखा देती हुईं ..... वह आंटी बोलती है आवर अर्जुन को बाथरूम को बताने चली जाती है

क्या एहि अर्जुन तुम्हारा अपना बीटा है अर्जुन के पापा गुस्से वाले थे क्या ..... अर्जुन के जाने के बाद एक औरत राखी देवी से पूछती है

तुम आयी क्यू पूछ रही हो अर्जुन मेरा बीटा है आवर मेरे पति कोई गुस्से वाले नहीं थे वह बहुत शरीफ इंसान थे ...... राखी देवी कहती है

तुमेह आएसा क्यू लगा अर्जुन के पिता गुस्से वाले होंगे ...... राखी देवी पूछती है

मुझे लगा अर्जुन गुस्से वाला है तो उसके पिता जी भी गुस्से वाले होंगे ..... वह औरत कहती है

तुमेह कैसे पता मेरा अर्जुन गुस्से वाला है वह तो यह रहता भी नहीं है आवर सायद मेरे ख्याल से तुम अर्जुन से पहली बार मिल रही हो

क्या तुम मेरे बेटे से पहले से मिल चुकी हो ..... राखी देवी कहती हैरानी से पूछती है

हां दीदी मैं अर्जुन से मिल चुकी हुईं आवर अर्जुन के वजह से आज मैं इतनी खुश हुईं ..... वह औरत इस बार बोलती हुई मुस्कुरा देती है

वही राखी देवी थोड़ी हैरानी से उस औरत को देखने लगती है

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अपडेट ...... 44

मैं कुछ समझी नहीं कहना क्या चाहती हो तुम मेरे बेटे की वजह से खुश हो आखिर तुम मेरे बेटे से कब मिली ..... राखी देवी फिर हैरानी से पूछती है

कुछ दिन पहले एक लड़के ने आप की बेटी के साथ बतमीज़ी किया था वह लड़का कोई आवर नहीं मेरा hi बीटा था

मेरा बीटा पहले बहुत बदमाश था मुझसे कभी ठीक से बात भी नहीं करता था मैं कभी कभी सोचती थी कस मेरा कोई बीटा hi नहीं होता मैं बस भगवन से एहि मन्नत करती रहती थी एक दिन मेरा बीटा मुझसे अच्छे से बात करले ... आवर एक दिन मेरी मन्नत भगवान् ने सुन लिया आवर अर्जुन को मेरे पास भेज दिए

अर्जुन मेरे बेटे को मरने के लिए मेरे घर आया था मगर मेरा बीटा घर नहीं था मगर उस दिन अर्जुन की बात सुन कर मुझे भी बहुत गुस्सा आया था शाम मैं जब मेरा बीटा घर आया तो एक नौकर ने दिन की साडी बात उसे बता दिया

मेरा बीटा गुस्से मैं अपना पापा का गन लेकर अर्जुन को मरने के लिए जाने लगा था तभी मैं रूम से निकलते हुआ देख लिया आवर मैं अपने बेटे से गन छीनने लगी गन छींटे हुआ पाकर मेरे बेटे ने मुझे धक्का दे दिया जो मैं सीढ़ियों से निचे गिर पड़ी आवर मैं चीख कर बेहोश हो गयी

मुझे जब होश आया तो मैं हॉस्पिटल मैं थी आवर मेरे पास मैं बैठ कर मेरा सोनू रो रहा होता है

सोनू को अपने लिए रट हुआ देख कर मुझे इतनी ख़ुशी हुई के मैं अपनी दर्द भूल गयी मेरा सोनू मुझसे लिपट कर आवर भी रोने लगा उस दिन लगा मुझे के मेरा बीटा मुझे मिल गया उस दिन के बाद मेरा बीटा मेरी हर बात मंटा है जो मेरी धड़कन को बहुत सकूँ मिलती है आवर वह जो कुछ भी हुआ सब अर्जुन के वजह से हुआ

मैं आप से मांगी मांगती हुईं मेरे बेटे ने जो किया वह गलत किया था मेरे बेटे को मांफ कर दीजियेगा ..... वह आंटी हाँथ जुड़े कर राखी देवी से कहती है

मांफी मांगने की जरुरत नहीं बहन मैं सोनू से गुस्सा नहीं हुईं उसने मेरी बेटी के साथ गलत किया था जो सायद मैं उसे मांफ नहीं करती मगर आप के बीटा सोनू के वजह से आज मेरा बीटा अर्जुन मेरे साथ है

तुम्हारे बेटे के एक गलती के वजह से हम दोनों माँ को अपने अपने बीटा का प्यार मिल गया ........ राखी देवी सोनू की माँ के हाँथ को पकड़ कर कहती है

वही अर्जुन अभी बाथरूम मैं होता है आवर फ़ोन मैं आयी हुई फोटो को देख रहा होता है जो आज भी लड़की की hi फोटो होती है जो ब्रा पेंटी मैं होती है आवर कोई फोटो मैं लड़की अपनी निप्पल को दो ऊँगली से दबा रही होती है तो कोई फोटो मैं वह लड़की अपनी पेंटी को एक हाँथ से गांड के पीछे से खिंच रही होती है जिससे लड़की की छूट की छाप दिख रही होती है वह सभी फोटो को देखते हुआ पता नहीं कब अर्जुन का एक हाँथ लैंड पर चला जाता है आवर पेंट के ऊपर से सहला रहा होता है अर्जुन का लैंड खड़ा हो चूका होता है लैंड खड़ा होने से अर्जुन को बहुत अच्छा महसूस होता है जो अर्जुन झट से अपने पेंट का जीप खोल देता है आवर फिर अंदर बियर के अंदर से लैंड निकल कर लैंड को सहलाने लगता है कुछ hi देर लैंड सहलाने से अर्जुन के जिस्म मैं मस्ती सा होने लगता है जो अर्जुन की आँखें बंद हो जाती है

अर्जुन की आँखें जैसे hi बंद होती है अर्जुन के आँखों के सामने एक चेहरा आ जाता है आवर अर्जुन का हाँथ आवर तेज़ लैंड पर चलने लगता है उस चहरे को देख कर अर्जुन इतना गर्म हो जाता है की अर्जुन का लैंड हाँथ मैं होने के बाद भी अपना सर उठाने लगता है जैसे अभी उस लड़की की छूट मैं चला जायेगा hhhhhhhhhhhhhh

उस लड़की के बारे मैं सोचते हुआ अर्जुन अपना हाँथ इतने तेज़ी मैं हिलने लगता है की अर्जुन के लैंड जल्द hi पानी फेक देता है

अर्जुन लैंड से पानी गिर रहा होता है आवर अर्जुन बाथरूम के दिवार पर खड़ा होकर हांफ रहा होता है अर्जुन के माथे से पसीना बाह कर चहरे पर आ रहा होता है आवर अर्जुन लैंड को पकड़ कर पानी गिरा रहा होता है कोई 5 सेक् तक अर्जुन लैंड से पानी गिरता hi रहता है

अर्जुन बीटा क्या हुआ गिर गया क्या चोट तो नहीं लगी गेट खोल ..... अर्जुन हांफ रहा होता है की बाथरूम के बहार से वह आंटी बोल पड़ती है .... जो अपने रूम मैं से कुछ लेकर निकल रही होती है मगर अर्जुन की ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह सुन कर रुक जाती है

वह आंटी अर्जुन को अपने hi रूम की बाथरूम मैं लेकर गयी हुई होती है

अर्जुन को जैसे hi आंटी की आवाज़ सुनाई देती है अर्जुन थोड़ा दर जाता है आवर झट से लैंड को अपने पेंट मैं दाल कर कपडे ठीक कर लेता है

आंटी वह पेअर बिछल गया था मुझे चोट नहीं लगी है आप परेशां न हो .... . अर्जुन बोलते हुआ बाथरूम का गेट खोल देता है तो सामने आंटी को देखता है आवर कुछ बोले रूम से निकल जाता है रूम से निकलते हुआ अपने माथे पर हो रहे पसीने को कोट मैं पोछ लेता है

अर्जुन जल्द बाज़ी मैं बाथरूम से निकल तो जाता है मगर जल्द बाज़ी मैं ये भूल जाता है की उसने अभी बाथरूम मैं क्या किया है आवर उसने साफ भी नहीं किया है जो उसके लैंड का बहुत सारा पानी बाथरूम मैं किसी चीज पर गिरा हुआ है

अर्जुन इतना घबराया हुआ क्यू लग रहा है उसके माथे पर भी कितने पसीने हो रहे है अर्जुन का तबियत तो ठीक तो है

वह आंटी मन मैं सोचती है आवर अर्जुन के पीछे चली आती है

वही अर्जुन हॉल मैं आता है आवर अपनी माँ को देखते हुआ वह से बहार निकल जाता है

राखी अर्जुन का तबियत तो ठीक है न ...... वह आंटी राखी देवी के पास आकर पूछती है

दीदी आप आयी क्यू पूछ रही है अर्जुन बिलकुल ठीक है कुछ हुआ क्या अर्जुन के साथ ..... राखी देवी हैरानी से पूछती है

नहीं कुछ नहीं हुआ उसके माथे पर पसीने हो रहे थे इस लिए बोली सायद गर्मी की वजह से हो रही होगी बाथरूम मैं ..... वह आंटी कहती है

हो सकता है दीदी ....... दीदी अब मैं चलती हुईं वह बहार अकेला खड़ा होगा ..... राखी देवी कहती है

ठीक है राखी जा अर्जुन रुकता तो उसके सोने के बाद हम सब रात मैं मस्ती करती .... देख तेरी पसंद की बोतल मंगवाई थी ..... वह आंटी बोतल दीखते हुआ बोलती है

दीदी ये बोतल मेरी पसंद की है मगर आज मैं सच मैं नहीं पिने वाली थी मैं जिस गम को भुलाने के लिए पीती थी वह अब मेरे साथ है मैं अब कोई आएसा काम नहीं करुँगी जिससे मेरा अर्जुन मुझसे दूर हो जाए मैं उसे बस प्यार देना चाहती हुईं गम नहीं ...... राखी देवी कहती है

अच्छी बात है राखी अर्जुन को बहुत सारा प्यार देना इतना प्यार देना की वह भूल जाए की कभी वह तुझसे नफरत करता था ..... वह आंटी कहती है

दीदी आप कहो तो मैं अर्जुन को आप के बारे मैं बता देती हुईं वह आवर भी खुश हो जायेगा आवर आप की कसम भी पूरी हो जाएगी दीदी अब आप को सब कुछ भूल जाना चाहिए वह सब अब इस दुनिया मैं नहीं है आप कितने दिन खुद को तड़पती रहेंगी जो हुआ उसमे आप की कोई गलती नहीं थी ...... राखी देवी मायूस होकर कहती है

नहीं राखी मत बताना अर्जुन आवर गीता अंजलि किसी को भी उनेह मेरे बारे मैं पता चलेगा तो वह सब मुझे कभी अलग नहीं रहने देंगे आवर साथ चलने को बोलेंगे जो मेरी कसम भी एहि है मगर राखी मैं भी देखना चाहती हुईं मुझे भगवान् जी आवर कितना तड़पना चाहते है ..... जिस तरह भगवन ने तुमसे मुझे मिलाया क्या वह गीता अंजलि आवर अर्जुन से भी मुझसे माइलेज अगर नहीं मिलायेगे तो मत मिलाये मगर मैं अपनी कसम कभी नहीं तोड़ने वाली हुईं

मैं चाहती हुईं अर्जुन को खुद पता चले न की तुम्हारे बताने से उसे मेरे बारे मैं पता चले

अगर तुमने अर्जुन गीता अंजलि को मेरे बारे मैं बताया तो मेरी कसम की कोई महत्त्व नहीं रह जाएगी अगर मैं सही हुईं तो मुझसे यकीन है एक दिन अर्जुन मुझे लेने ज़रूर आएगा ...... वह आंटी बोलती है आवर हाँथ मैं ली हुई बोतल खोल कर बोतल hi मुंह मैं दाल कर पिने लगती है

राखी देवी उस आंटी को भरी हुई बोतल पिटे हुआ देख कर रोकने के बारे मैं सोचती तो है मगर रोक नहीं पति है क्यू की राखी देवी को पता होती है रोकने से वह नहीं रुकने वाली है तो राखी देवी भी दुखी होकर हवेली से निकल जाती है

राखी देवी जब बहार आती है तो देखती है अर्जुन बाइक के पास hi खड़ा है राखी देवी बाइक के पास कड़ी हो जाती है तब अर्जुन बाइक स्टार्ट करता है आवर राखी देवी बाइक पे बैठ जाती है आवर अर्जुन बाइक लेकर चल देता है

रस्ते मैं अर्जुन के दिमाग मैं बहुत कुछ चल रहा होता है आवर अर्जुन अपनी माँ से पूछना भी छह रहा होता है मगर पूछ नहीं पता है हवेली आने के बाद राखी देवी अपनी रूम मैं चली जाती है आवर अर्जुन अपने रूम मैं चला जाता है

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अगली सुबह 8 :20 ऍम

अर्जुन अभी अपने खेत की तरफ जा रहा होता है जो राखी देवी ने खेत पर आने के लिए बोली होती है

चची दो मैं उठा लेता हुईं .... रस्ते मैं जाते हुआ अर्जुन को पूजा दीदी की माँ दिखाई देती है जो हाँथ मैं खाना आवर कुछ रस्सी लेकर जा रही होती है तो अर्जुन कहता है

अर्जुन तू आज खेत पर जा रहा है क्या पहले तो कभी खेत पर जाते हुए नहीं देखि तुझे .... पूजा दीदी की माँ कहती है

वह चची माँ ने बुलाया है तो जा रहा हुईं दो मैं खाना लेकर चलता हुईं ..... अर्जुन कहता है

अच्छा है अर्जुन अब तुझे अपनी माँ की थोड़ी बहुत मदद करनी चाहिए वह इतने सरे जायदाद को अकेली कब तक देखेंगी

अर्जुन मैं जब भी तेरी माँ को देखती हुईं मुझे अपनी सास की बात याद आ जाती है

आवर जिस तरह से मेरी सास रागनी के बारे मैं बताया करती थी मुझे तो सुन कर hi मेरी दिल दहल जाती थी

तेरी माँ आवर रागनी मैं कोई फर्क नहीं है तेरी माँ के पास सब कुछ होते हुआ वह अकेली है आवर रागनी के पास भी सब कुछ होते हुआ भी अकेली थी

वह रागनी बहुत मेहनत किया करती थी उसकी जैसी लड़की तो मैंने कभी देखि hi नहीं पता नहीं बेचारी अब कहा होगी बहुत दुःख झेला है उसने भगवन कभी उसके जैसा दुःख किसी को न दे अगर आज वह तुम लोगों के साथ रहती तो बहुत ख़ुशी से अपनी ज़िन्दगी जीती उस बेचारी को कभी परिवार का प्यार नहीं मिला

भगवन इतना बुरा कैसे कर सकते है किसी के साथ.... पूजा की माँ अपनी सास की कही हुई बात याद करती हुई कहती है

चची क्या मतलब है आप का हमारे साथ रहती ये रागनी थी कौन मैंने तो कभी नाम भी नहीं सुना उनकी आवर किसने बुरा किया उनके साथ ...... अर्जुन हैरान होते हुआ कहता है

अर्जुन को पूजा दीदी की माँ की पूरी बात तो समझ नहीं आती है मगर इतना तो समझ आती है वह रागनी उसके घर की कोई लड़की थी जो अर्जुन हैरान हो जाता है

क्यू के अर्जुन ने कभी अपनी माँ के मुंह से किसी रागनी के नाम तक नहीं सुना था

अर्जुन बीटा तुझे नहीं पता है क्या सायद मालकिन को भी नहीं पता तभी तुझे नहीं बताया तुझे

चची जल्दी आओ देखों कब से धुप मैं मर रहे है हम .... पूजा दीदी की माँ आगे बोलती उससे पहले hi एक लड़का खेत से चिल्ला देता है

अर्जुन बीटा अभी जाती हुईं वर्ण तेरी माँ से शिकायत कर देंगे वह ..... पूजा दीदी की माँ कहती हुई चली जाती है

पूजा दीदी की माँ तो चली जाती है मगर अर्जुन के दिमाग मैं एक सवाल छोड़े जाती है जिसका नाम होता है रागनी जो रागनी नाम अर्जुन ने पहली बार hi सुना होता है

अर्जुन कुछ वक़्त तक वह खड़ा होकर सोचता hi रह जाता है

ये रागनी कौन थी क्या मेरे घर की थी तो माँ ने कभी उनके बारे मैं जीकर क्यू नहीं किया क्या माँ को पता नहीं है या माँ ने मुझे बताया hi नहीं ..... अर्जुन मन मैं सोच रहा होता है

मालिक यह धुप मैं खड़ा होकर क्या सोच रहे है मालकिन कब से इंतजार कर रही है ..... अर्जुन सोच रहा होता है एक बूढ़ा सा आदमी आकर कहता है

कुछ नहीं काका .... अर्जुन बोलता है आवर अपनी माँ की तरफ चला जाता है

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आदि के घर

आदि बीएड पर लेता कुछ सोच रहा होता है आवर रह रह कर आदि के चहरे का रंग बदल रहा होता है

आदि अब थोड़ा ठीक हो गया था थोड़ा क्या आदि बिलकुल hi ठीक था क्यू के आदि के जिस्म पर थोड़ा बहुत hi चोट लगी हुई थी जिसका इलाज डॉ ने कर दिया था

आदि बीएड से उठ कर रूम से निकल जाता है तो देखता है घर मैं कोई नौकरानी है तो आदि समझ जाता है वह अपना काम कर चली गयी है

आदि अपनी माँ को पुकारते हुआ अपनी माँ की रूम मैं जाता है तो देखता है उसकी माँ रूम मैं नहीं होती है तभी आदि को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है तो आदि समझ जाता है उसकी माँ बाथरूम मैं नाहा रही है

आदि को जब यकीन हो जाता है के उसकी माँ नाहा रही है तो आदि सीधे अपनी माँ की बीएड पर बैठ जाता है आवर फिर सामने बीएड पर राखी हुई कपडे को देखने लगता है आवर एक कपडे को देख कर आदि के आँखों मैं नशा सा होने लगता है आवर उस कपडे को आदि उठा कर अपने नाक के पास ले जाता है आवर कुत्ते की तरह सूंघ कर अपना सर ऊपर कर लेता है आवर उस कपडे को लैंड के ऊपर रख देता है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

क्या खुसबू माँ कैसे इस कपडे को अपनी पहाड़ जैसी जोबन पर बांधती हो मुझसे तो जयादा किस्मत वाला ये कपडा है जो आप की जोबन पर हर समय रहता है देखिये आप की जोबन की खुशबु अभी भी इस कपडे से आ रही है

मैं तो आप की जोबन की खुशबु को महसूस कर के पागल हो जाता हुईं

कब मैं आप की जोबन की उस गोल गोल निप्पल को अपनी मुंह मैं लेकर दूध पिऊंगा

मैंने बहुत बर्दाश्त कर लिया अब नहीं होता मुझसे मैंने कई साडी औरतें आवर लड़की की जिस्म से खेल लिया मगर मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आता जितना मुझे आप की इस कपडे को सूंघ कर आती है

मैं हर बड़ी औरत मैं आप की तस्वीर को देख कर उनकी छूट गांड को छोड़ा मगर मुझे कभी मज़ा नहीं आया मगर आप की जिस्म को सोचते hi मेरे लैंड का पानी जल्दी ज़रूर गिर जाता था

मगर अब मुझे आप के जिस्म के साथ खेलना है मैं आप की छूट मैं अपना लैंड डालना चाहता हुईं मैं रात दिन आप को छोड़ना चाहता हुईं आप के जिस्म पर सिर्फ मेरा हक़ है मैं hi आप की छूट की गर्मी निकलूंगा

माँ आप ने कभी सोचा है मैंने आज तक किसी घर मैं नौकर क्यू नहीं रखा

आदि बीटा तू यह क्या कर रहा है .... आदि अभी अपनी माँ की एक कपडे को लेकर खुद से hi बाते कर रहा होता है तभी उसकी माँ की आवाज़ सुनाई देती है

आदि अपनी माँ की आवाज़ सुन कर आँखे खोल देता है आवर उस कपडे को घूमते हुआ करोड़ों मैं रख देता है ताकि उसकी माँ न देख ले आवर अपने चेहरे पर मुस्कान लेकर पलट जाता है मगर जैसे hi अपनी माँ को देखता है फिर से दूसरी तरफ घूम जाता है मगर घूमते वक़्त आदि की आँखों मैं एक मदहोशी सी हवश दिखाई देती है

माँ मैं आप का फ़ोन लेने के लिए आया था आवर वही तकिये के निचे देख रहा था मगर आप का फ़ोन तकिये के निचे तो नहीं है ...... आदि आयी कहता है जैसे आदि सच मैं फ़ोन लेने के लिया अभी आया है

वही आदि की माँ अपने रूम मैं आदि को देख कर शर्मा गयी होती है आवर टावल लपटने के बाद भी पास मैं तंगी हुई अपनी एक साड़ी जिस्म पर दाल लेती है ताकि उनकी बड़ी बड़ी पहाड़ की तरह चुकी आदि न देख ले

आदि बीटा मेरा फ़ोन देख उधर चार्जिंग मैं लगी है लेजा आवर बात करले मैं कपडे पहन कर आती हुईं ....... आदि की माँ कहती है

वही आदि भी आवर नहीं बोलता है आवर बीएड से उतर कर अपनी माँ की फ़ोन चार्जिंग से निकलने लगता है तभी आदि की नज़र कुछ दुरी पे शीशे पर नज़र पड़ता है आवर अपनी माँ को घूरते हुआ देखता है जो उसकी माँ कभी आदि तो कभी अपने बीएड पर पड़ी कपडे को देख रही होती है

वही आदि फ़ोन लेकर रूम से निकल जाता है आदि को माँ झट से गेट बंद कर देती है

हे भगवन जो मैंने देखा क्या सही था क्या आदि मेरे कपडे को

आदि की माँ मन मैं सोचती है आवर जल्दी से उस कपडे को उठा लेती है आवर टावल गिरा कर उस कपडे को अपनी जुबान मैं बांधने को होती है मगर फिर निचे गिरा देती है

क्या कर रहा था मेरा कपडे के साथ आदि इस कपडे को वह क्यू गीश रहा था क्या आदि मेरे जोबन के बारे मैं

नहीं नहीं मेरा आदि आएसा कभी नहीं कर सकता है उसने बोलै वह फ़ोन लेने के लिया आया था आउट फ़ोन देखते हुआ ये कपडा वह आ गया होगा मैं भी क्या क्या सोचने लगती है

आदि की माँ मन मैं सोचती हुई कपडे पहनने लगती है मगर आदि की माँ आज उस कपडे को अपनी जोबन पर नहीं लपेटती है आवर ब्रा पहन कर बलाउज पहन लेती है

बलाउज पहन कर जब आदि को माँ शीशे के सामने जाती है तो अपनी पहाड़ की तरह उठी हुई जोबन को देख कर खुद शर्मा कर आँखे बंद कर लेती है

इतनी उठी हुई जोबन को लेकर अपने बेटे के सामने कैसे जाउंगी आवर बेटे के सामने चली जाउंगी तो मुझे जयादा फर्क नहीं पड़ेगा मगर कॉलेज मैं जाउंगी तो कितनी शर्म आएगी

क्या करू कपडे बांध लूँ अच्छा रहेगा

मगर कपडे न बांधने से मुझे कितनी आराम मिल रही है मेरी जोबन दर्द करने लगती है कपडे से बांधने से

नहीं मैं आज आयी hi कॉलेज मैं जाती हुईं बस कुछ देर तो कॉलेज मैं रहना है आवर कोई स्टूडेंट थोड़े होंगे एक दो मास्टर hi होंगे ...... आदि की माँ मन मैं सोचती है आवर साड़ी पहनने लगती है

आदि की माँ मन मैं सोच तो लेती है की वह अपनी उठी हुई जोबन के साथ कॉलेज आज चली जाएँगी मगर उनके दिल मैं अभी भी शर्म आवर दर होती है क्यू की आदि की माँ शर्म की वजह से hi अपनी चुकी पर कपडे बांध रही होती है ताकि उनकी चुकी जयादा बड़ी न लगे

वैसे आदि की माँ की चुकी इतनी भी बड़ी नहीं होती है आदि की माँ की उम्र के हिसाब से चुकी भी वैसी होती है मगर आदि की माँ जब लोगों को खुद की चुकी को घूरते हुआ देखने लगी तो कपडे बांधने लगी ताकि उनकी चुकी थोड़ी छोटी दिखे आवर लोग काम घूरे आवर हुआ भी वही था पहले से काम लोग घूरते है आएसा आदि की माँ को लगने लगा था मगर आदि की माँ को क्या पता था घूरते तो लोग अब भी है मगर आदि की माँ अब उनपे धयान काम देती है

आदि की माँ साड़ी पहन तैयार होकर रूम से निकल जाती है आवर हॉल मैं जाती है तो देखती है आदि टीवी देख रहा है

आदि बीटा मैं कॉलेज जा रही हुईं बस थोड़ी देर का काम है मैं 1 घंटे मैं आ जाउंगी तुम दवा खा लेना ..... आदि की माँ थोड़ी शर्माती हुई कहती है क्यू की आदि की माँ को पता होता है अब आदि उसे देखेगा आवर आदि की माँ एहि देखना चाहती थी आदि का क्या रिएक्शन होता है इस लिए आदि की माँ अपनी पल्लू भी ठीक करने के बहाने साइन से हटा देती है मगर जल्द hi साइन पर रख भी देती है

वही आदि टीवी देख रहा होता है आवर अपनी माँ की आवाज़ सुन कर पीछे देखता है आवर आदि की आँखे बड़ी हो जाती है आदि के एक वक़्त के लिए गाला भी सुख जाता है क्यू के आदि जैसे hi पीछे देखता है उसकी माँ साइन से पल्लू हटा दी होती है है पहाड़ जैसी चुकी आदि के आँखों के सामने होती है आदि बस अपनी माँ की चुकी को घूरता hi चला जाता है

आदि बीटा जवाब नहीं दिया ...... आदि की माँ पूछती है

हां हआ माँ मैं दवा खा लूंगा आप कॉलेज से आ जाओ ..... आदि हिचकिचाहट से कहता है

ठीक है बीटा ... आदि की माँ कहती है आवर घर से निकल जाती है घर से निकलते हुआ पल्लू को अपनी साइन पर आवर भी अच्छे से दाल लेती है ताकि गाओं वालो की नज़र न पड़े

कैसे कुत्ते की तरह देख रहा था तेरा बीटा वह तुझे छोड़ना चाहता है ले ले अपने बेटे का लैंड छूट मैं

रजनी मिटा ले अपनी छूट की गर्मी अपने बेटे से ..... आदि की माँ चल रही होती है तभी उसके दिल से आवाज़ आती हैं

तुम अपनी बकवास बंद करो मैं जिस तरह अपनी पल्लू उठायी थी अगर वह बुद्धा भी होता तो मेरी उठी हुई छाती को देख कर उसका वह खड़ा हो जाता मगर मेरा आदि का नहीं हुआ इसका मतलब मेटा बीटा मेरे बारे मैं गलत नहीं सोचता है

मुझे उस हालत मैं देखने के बाद भी आदि के पेंट मैं कोई उभर नहीं हुई थी इसका मतलब आदि मेरे बारे मैं गलत नहीं सोचता है ....... आदि की माँ मन मैं कहती है

क्या तूने अपने बेटे के लैंड पर भी ध्यान दिया था

तूने ठीक से धयान नहीं दिया होगा उसका लैंड तेरी छूट मैं जाने के लिए बेचैन हो रहा होगा .... आदि की माँ की दिल से फिर से आवाज़ आती है

छी छी तुझे शर्म नहीं आता अपने hi बेटे के बारे मैं आयी बोल रही है चला जा तू ...... आदि की माँ को अपनी आत्मा की बाते बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती है जो आदि की माँ एक पड़े के सामने कड़ी होकर अपनी दिमाग शांत करने लगती है

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