Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 6 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

थैंक्स बीआरओ

हां सायद वही आंटी लक्ष्मी हो सकती है :अप्प्रोवे:

लक्ष्मी आंटी का राज जल्द hi खुल जायेगा बीआरओ

अर्जुन आवर लक्ष्मी माँ बीटा तो नहीं हो सकते है बीआरओ ..... क्यू की पूजा दीदी की माँ को उसकी सास ने लक्ष्मी के बारे मैं बताया है इसका मतलब सायद राखी देवी भी उस वक़्त इस गाँव मैं नहीं आई होगी

तुमने ठीक से नहीं पढ़ा है बीआरओ उस आंटी ने क्या कही थी राखी देवी

उस आंटी ने कहा है जिस तरह भगवन ने तुमेह मुझसे मिलाया है उसी तरह मुझे अर्जुन गीता आवर अंजलि से भी मिला देगा
 
अपडेट ...... 45

अर्जुन थोड़ी hi देर मैं खेत पर बने घर के बहार होता है आवर घर मैं जाता है तो देखता है उसकी माँ सामने hi बीएड पर बैठी हुई कुछ लिख रही होती है

अर्जुन भी जाकर बीएड पर बैठ जाता है अर्जुन को देख कर राखी देवी लिखना बंद कर देती है आवर अर्जुन को देख कर मुस्कुरा देती है आवर फिर डायरी आवर पेन अर्जुन के आगे रख देती है

राखी देवी डायरी को अर्जुन के आगे रख कर बीएड से उतर कर घर के अंदर चली जाती है

वही अपनी माँ के जाने के बाद अर्जुन उस डायरी को देखने लगता है जो उसमे अभी उसकी माँ कुछ मज़दूरों की हिसाब कर रही होती है

अर्जुन कुछ देर डायरी को देखता है आवर फिर डायरी से नज़र हटा कर अपना फ़ोन चलने लगता है

मालकिन मुझे आज सहर जाना है चलिए जल्दी से साड़ी निकालिये मैं आप की मालिश कर देती हुईं ... राखी देवी के अंदर जाते hi कमला कहती है जो अंदर वाले रूम मैं बैठी हुई राखी देवी का इंतज़ार कर रही होती है

कमला मुझे आज मालिश नहीं करवानी है तुझे कब से बोल रही हुईं फिर भी तू समझ नहीं रही है ये पैसे ले आवर सहर जा आवर ये अपने कपडे ठीक करले बहार अर्जुन है ..... राखी देवी कमला को मन कर के कमला को कुछ पैसे देकर जाने को कहती है

कमला मुझे आज मालिश नहीं करवानी है तुझे कब से बोल रही हुईं फिर भी तू समझ नहीं रही है ये पैसे ले आवर सहर जा आवर ये अपने कपडे ठीक करले बहार अर्जुन है ..... राखी देवी कमला को मन कर के कमला को कुछ पैसे देकर जाने को कहती है

ठीक है मालकिन मैं पहले सहर जाती हुईं आने के बाद समय रहा तो शाम मैं आप की मालिश कर दूंगी .... कमला पैसे लेते हुआ कहती है

तू इतनी उतावली क्यू रहती है मेरी मालिश करने के लिए मुझे आज मालिश नहीं करवानी है तुझे आने की कोई ज़रूरत नहीं है ...... राखी देवी कमला को थोड़ी गुस्से से बोलती है

अब मैं क्या बताऊ मालकिन आप की मालिश करते हुआ मेरी छूट जो रो कर संत हो जाती है आप की जिस्म मैं गर्मी hi इतनी है की मैं भी गर्म हो जाती हुईं आवर मेरी छूट से पानी अपने आप hi निकल जाती है

क्या बोल रही है तू .... राखी देवी कमला को घूरती हुई कहती है

कमला तो धीरे से hi बोलती है मगर राखी देवी सुन लेती है जो थोड़ी गुस्सा भी हो जाती है

कुछ नहीं मालकिन मैं बोल रही थी बस मैं बहुत गर्मी होती है सारा जिस्म पानी पानी हो जाती है .... कमला कहती है मगर जैसे hi कमला की नज़र राखी देवी पर जाती है कमला समझ जाती है उसकी बात राखी देवी सुन चुकी है इस लिए कमला कुछ बोले hi तेज़ी से निकल जाती है

रूम से जाते हुआ कमला की नज़र अर्जुन पर पड़ती है जो कमला एक वक़्त के लिए रूकती भी है मगर पीछे राखी देवी को आते हुआ देख कर कमला कुछ बोले निकल जाती है

ये कमला पहले से कुछ जयादा hi बोलने लगी है गरीब नहीं होती तो अभी मैं इसे निकल देती ...... राखी देवी गुस्से मैं बुदबुदाती है

माँ आप ने मुझे यह क्यू आने को बोली है ... राखी देवी के आते hi अर्जुन कहता है

अर्जुन बीटा एक काम के लिए बुलाया है अभी तेरे माँ मां भी यह नहीं है आवर सभी को पैसे भी देने है क्या तुम सहर जाकर बैंक से पैसे निकल डोज ..... राखी देवी मां का नाम लेते हुआ थोड़ी सी हिचकिचा जाती है जो अर्जुन का हाँथ अपने हाँथ मैं लेकर बोलने लगती है

अपने मां के बारे मैं सुन कर अर्जुन को अच्छा तो नहीं लगता है मगर अपनी माँ को देख कर अर्जुन आपने चहरे पर थोड़ा मुस्कान ला देता है ताकि उसकी माँ मायुश न हो

ठीक है मैं सहर चला जाता हुईं आप चेक दे दीजिये ..... अर्जुन कहता है

अर्जुन बीटा सहर जाने से पहले अपनी दोनों दीदी से मिल लेना वह भी सहर जाने के लिए बोल रही थी .... चेक देते हुआ राखी देवी कहती है

अर्जुन भी चेक लेता है आवर ठीक है बोल कर घर के लिए निकल जाता है ताकि अपनी डूडीयों से पूछ ले क्या लेना है

गुड़िया क्या कर रही है शर्म नहीं आती अपनी बड़ी बहन के सामने ाएसि हरकत करते हुआ जा अपने रूम मैं ..... गीता थोड़ी गुस्से मैं कहती है

दीदी इसमें शर्म की क्या बात है वह खुजली हो रही थी तो खुजला रही हुईं आप नहीं खुजलाती क्या ..... अंजलि गीता की तरफ देखती हुई कहती है

नहीं मैं नहीं खुजलाती बड़े होने से पहले hi साफ कर देती हुईं तेरी तरह उसकी रखवाली करने के लिए नहीं छोड़ती समझी गन्दी लड़की ..... गीता मुस्कुराती हुई कहती है

ओह ओह किसके लिए इतनी जल्दी जल्दी साफ कर रही है कही बर्फ के लिए तो नहीं उसे गुफा साफ पसंद है क्या ...... अंजलि भी हस्ती हुई कहती है

गुड़िया तू जयादा मत बोल वर्ण मरूंगी मैंने कोई भी बर्फ नहीं बनाया है कुछ भी बोलती है चल जा आवर साफ कर तू बहुत सैतान है तू खुजलाने के बहाने कुछ आवर तो नहीं कर रही है .... गीता अंजलि के सर पर मरती हुई कहती है

दीदी सच मैं कोई गन्दी हरकत नहीं कर रही आवर मैं किस चीज से साफ करूँ आप ने सब ख़त्म तो कर दिया है आप खुद तो लती नहीं आवर मैं लती हुईं तो सब ख़त्म कर देती है .... अंजलि मुंह बना कर कहती है

अरे सॉरी सॉरी मैं तो भूल hi गयी थी वह क्रीम भी ख़तम हो गयी है चिंता न कर मैं उसका भी नाम लिख देती हुईं माँ आज सहर जाने वाली है तो उन्हें बोल दूंगी लेन के लिए ... गीता कान पकड़ कर कहती है

दीदी क्या मैं अंदर आ सकता हुईं .... गीता बोल रही होती है तभी गेट के बहार से अर्जुन की आवाज़ आती है

हां अर्जुन आजा ..... गीता कहती है

दीदी मैं सहर जा रहा हुईं माँ बोल रही थी आप दोनों को कुछ मंगवाना है सहर से लिख कर दे दीजिये मैं लेकर आ जाऊंगा ..... अर्जुन कहता है

क्या माँ सहर नहीं जा रही ..... गीता चौंकाते हुआ कहती है

क्या हुआ दीदी आप चौंक क्यू रही है मैं माँ को बोल देता हुईं वही चली जाएँगी ..... अर्जुन कहता है

अर्जुन माँ सुबह hi बोली थी के वह सहर जाने वाली है मुझे कुछ सामान मंगवाना था इस लिए चौंक गयी ठीक है अच्छे से जाना आवर शाम होने से पहले hi घर आ जाना ..... गीता कहती है

दीदी वह सामान मैं नहीं ला सक ताआआ ........ अर्जुन बोलता तो है मगर फिर अंजलि की सकल देख कर कुछ आवर बोलने से पहले hi चुप हो जाता है

ठीक है दीदी माँ फिर कभी सहर जाएँगी तो उनसे hi मांग लेना ... अर्जुन अंजलि की सकल देख कर समझ जाता है उनकी दीदी कुछ आवर सामान मंगवाना चाहती है जो नहीं चाहती मैं जॉन इस लिए अर्जुन रूम से जाने लगता है

भाई रुक जा मैं लिस्ट देती हुईं ..... गीता कहती है

गीता बोलने के बाद अपनी एक कॉपी से एक कागज निकलती है आवर फिर उसमे लिख कर उसे अच्छे से लपेट देती है ताकि अर्जुन को न दिखे

मुझे आवर गुड़िया को जो भी चाहिए इसमें लिख दिया है मगर इसे तुम सालनि आंटी को दे देना मैं उनसे बात कर लुंगी अर्जुन रस्ते मैं कोई सैतानी नहीं ....... गीता अर्जुन को लिस्ट देते हुआ घर कर कहती है

अर्जुन ठीक है बोलता है आवर लिस्ट को गीता के सामने hi पर्श मैं रख लेता है आवर रूम से चला जाता है

दीदी कही रस्ते मैं अर्जुन लिस्ट पढ़ लिया तो क्या होगा ..... अंजलि मुंह बना कर कहती है

देख भी लिया तो होगा क्या कुछ नहीं

वैसे भी अर्जुन को मेरी साइज पता तो है hi ..... गीता ये मन मैं सोचती है आवर खुद hi शर्मा जाती है

अर्जुन गाओं से निकल hi रहा होता है की तभी अर्जुन को सिगरेट पिने का मन करता है तो अर्जुन पंकज के दोकान पर बाइक रोक देता है तो देखता है पंकज दोकान पर उदास बैठा हुआ है

पंकज एक सिगरेट का पैकेट दे ...... अर्जुन कहता है

पंकज एक सिगरेट का पैकेट निकल कर अर्जुन को दे देता है

अर्जुन सिगरेट का पैकेट लेकर पैसे वही निचे रख देता है आवर एक सिगरेट निकल कर जलने लगता है

क्या हुआ पंकज koi.paresani है क्या ..... जब पंकज पैसे निचे से नहीं उठता है तो अर्जुन पूछता है

अर्जुन भाई क्या तुम मुझे अपनी बाइक दे सकते हो अगर तुम कही नहीं जा रहे हो तो मुझे जल्दी कही जाना है प्लीज भाई ..... पंकज रोने जैसे सवार मैं कहता है

पंकज के आँखों मैं मायूसी देख कर अर्जुन पंकज से कुछ पूछता भी नहीं है आवर बाइक की चाभी पंकज को दे देता है

अर्जुन फिर वह से गाओं के बस स्टैंड की तरफ चल पड़ता है ताकि वह बस से सहर जा सके

अर्जुन बीटा कहा जा रहे हो .... अर्जुन गाओं के बहार आता hi के सामने से एक औरत की आवाज़ आती है
 
अपडेट ....... 46

अर्जुंन जब गाओं के बस स्टेण्ड गया तो सामने अर्जुन को कमला दिखाई दी जो अभी बस की इंतज़ार कर रही होती है अर्जुन को देख कर कमला मुस्कुराती हुई बोल पड़ी

आंटी मैं सहर जा रहा हुईं आप कहा जा रही है ... अर्जुन भी पूछ लेता है

अर्जुन बीटा मैं भी सहर जा रही हुईं अपनी बेटी से मिलने के लिए ..... कमला कहती है

ठीक है आंटी .... वैसे बस कब आने वाली है ..... अर्जुन फ़ोन मैं टाइम देखते हुआ पूछता है

अर्जुन कब नहीं देख वह बस आ रही है ..... हे राम मैं कैसे जाउंगी मेरी तो बुरी हालत हो जायेगा .... आती हुई बस को देख कर कमला बोलती है

क्यू की उस बस मैं कुछ लड़के गेट पर hi लटके हुआ होते है जो कमला को थोड़ा अजीब लगता है क्यू के कमला को पहले से पता होता है भरी हुई बस मैं औरतो को कितनी परेशानी होती है आवर कितने लड़के औरतो के जिस्म को छू कर आवर उनकी जिस्म को मसल कर मज़ा लेते है

कमला चची आप परेशान न हो बस थोड़ी यह खली हो जायेगा आप मेरे साथ मैं रहिएगा मैं जगह बना दूंगा आप के खड़े होने का ..... अर्जुन कमला के मायुश चहरे को देख कर समझ जाता है इस लिए कमला को साथ रहने को बोलता है

बस हॉर्न देते हुआ अर्जुन के आगे hi रुक जाती है अर्जुन बस का हेंडल पकड़ कर नोचे hi बगल मैं खड़ा हो जाता है जो बस से सवारी उतरने लगते है वही कमला भी अर्जुन के पीछे कड़ी हो जाती है थोड़ी hi देर मैं बस से कुछ सवारी उतर जाते है जो अर्जुन झट से बस मैं चला जाता है

अर्जुन के जाते hi कमला भी बस मैं चढ़ जाती है तो देखती है अर्जुन गेट के पास hi खड़ा है कमला भी अर्जुन के पीछे कड़ी हो जाती है

चची तुम आगे आ जाओ .... जब अर्जुन पीछे कमला चची को देखता है तो कहता है क्यू के अर्जुन के आगे एक आंटी कड़ी होती है वही कमला के पीछे लड़के खड़ा होते है तो अर्जुन कमला को अपने आगे खड़ा कर देता है ताकि कमला चची को कोई परेशानी न हो

बस हॉर्न देते हुआ चलने लगती है बस से सवारी उतरने के बाद भी बस अभी भी भरी हुई होती है कमला चची अर्जुन के आगे तो कड़ी हो जाती है मगर कमला चची की जिस्म अर्जुन से सटी हुई होती है आवर खास कर कमला चची की गांड अर्जुन के लैंड के निचे होती है जो अर्जुन का लैंड कमला चची के गांड के बिल के पास तो नहीं मगर बिल के ऊपर दरार पर सत्ता हुआ होता है अर्जुन बस के ऊपर रेड को पकड़ कर खड़ा होता है आवर खुद को पीछे की तरफ करने की कोशिश कर रहा होता है ताकि कमला चची आराम से कड़ी रहे मगर पीछे खड़े हुआ लड़के आगे की तरफ hi आ रहे होते है जो अर्जुन को थोड़ी ताक़त लगाना पद रहा होता है कभी अर्जुन पीछे हो रहा होता है तो कभी आगे की तरफ हो रहा होता है बस भी चलती हुई कभी कभी हचक रही होती है जो अर्जुन झटक से कमला चची के जिस्म पर गिर रहा होता है आवर अर्जुन के गिरने से उसका लैंड कमला चची के गांड से टकरा रही होती है

वही कमला चची के चहरे पर थोड़ी शर्म होती है आवर कमला चची का एक हाथ तो बगल के सीट के ऊपर होती है मगर एक हाथ खुद के जिस्म पर होती है आवर वह भी गांड के पीछे जो अर्जुन के बार बार गिरने से कमला चची को शर्म आ रही होती है जो कमला चची अपना छाँह गांड पर रख कर अर्जुन को पीछे कर रही होती है मगर अचानक hi बस हचक पड़ती है आवर कमला चची झट से अपनी हाथ आगे कर लेती है

हाई दिया ये क्या था क्या वह अर्जुन का लैंड था नहीं नहीं सायद अर्जुन अपनी पॉकेट मैं कुछ लिया होगा .... कमला चची मन मैं सोचती है मगर कमला चची की जिस्म मैं एक हलचल hi मची हुई होती है आवर कमला चची गर्म गर्म शैशे निकल रही होती

बहन थोड़ी अपनी मुंह उधर कर लीजिये आप की गर्म शैशे मेरी गार्डन पर आ रही है ..... कमला चची के आगे कड़ी हुई औरत कहती है

औरत की आवाज़ सुन कर कमला चची आवर भी शर्मा जाती आवर अपनी सर शीशे की तरफ कर लेती है

वही अर्जुन को भी थोड़ी अजीब तो लग रहा होता है कमला चची के जिस्म पर बार बार गिरना मगर अर्जुन कुछ कर भी नहीं सकता तहत क्यू के पीछे से लड़के धक्का दे रहे होते है आवर ऊपर से सड़क ख़राब होने से हचक भी रही होती है मगर अर्जुन खुद को पीछे करने की कोशिश कर रहा होता है मगर बार बार कमला चची के भरी हुई गांड से टकराने से अर्जुन का लैंड खड़ा हो गया होता है मगर अर्जुन के मन मैं कमला चची के लिए कोई बुरे ख्याल नहीं होते है

अभी अर्जुन खुद को पीछे करने की कोशिश कर हो रहा होता है तभी बस हचक पड़ती है आवर तभी अर्जुन को अपने लैंड के ऊपर एक हाथ का अहसास होता है जो अर्जुन के जिस्म सनसना सा जाता है अर्जुन एक वक़्त के लिए उसी तरह hi खड़ा रह जाता है अर्जुन को कुछ समझ नहीं आया रहा होता है के उसका लैंड कमला चची ने जान बुझ कर पकड़ा या गलती से हो गया मगर अर्जुन ये बात कमला चची से पूछ भी नहीं सकता था तो अर्जुन भी बहार की तरफ देखने लगता है

थोड़ी देर तक अर्जुन आवर कमला चची संत से होते है अर्जुन भी आवर पीछे हो जाता है आवर पूरी ताक़त लगा कर खड़ा होता है ताकि वह कमला चची के जिस्म से न सटे मगर औरत के बोलने से कमला चची अपनी सर शीशे की तरफ करने के लिए थोड़ी घूम जाती है जो कमला चची की गांड का एक हिस्सा फिर से अर्जुन के लैंड से टकरा जाती है जो अर्जुन के मुंह से एक हआ निकल जाती है क्यू के अर्जुन का लैंड अब पुरे जोश मैं खड़ा होता है जो कमला चची के अचानक hi गांड से टकराने से अर्जुन को एक पायरा से अहसास होता है जो अर्जुन के मुंह से आआआआ निकल जाता है

वही अर्जुन के आआआआ के साथ कमला चची की भी आआआआ निकल जाती है क्यू की अर्जुन के लैंड का अहसास अपनी गांड पर कमला चची को भी होती है आवर दोनों hi एक दूसरे की आआआआ सुन लेते है

हाऐ दिया ये तो अर्जुन का hi लैंड है अर्जुन के मुंह से ाएसि आवाज़ क्यू निकल रहा है कही अर्जुन का लैंड दर्द तो नहीं कर रहा है

अगर वह अर्जुन का लैंड है तो सच मैं अर्जुन को बहुत दर्द हो रहा होगा कैसे मेरा पति मेरी पेअर पकड़ने लगता है लैंड खड़ा होने के बाद छोड़ने के लिए आवर पानी निकलने के बाद hi दर्द से आजाद होता है अर्जुन को भी वैसा hi दर्द तो नहीं हो रहा

ये हरामी नेता लोग भी न सड़क नहीं बनवा सकते है ये कितनी ख़राब सड़क हो गयी है ये सब कुछ हच्कने से hi हुआ है बार बार अर्जुन का लैंड मेरी गांड से टकराने से उसका लैंड खड़ा हुआ है बेचारा क्या करू मैं अब ..... कमला चची अपने मन मैं सोचती है

कमला चची के दिमाग मैं अचानक hi कुछ आता है आवर कमला चची झट से घूम जाती है अब कमला चची का सर अर्जुन के सामने होता है आवर अर्जुन का लैंड कमला चची के छूट के ऊपर होता है आवर Jen's मैं टाइट होने से कमला चची को अर्जुन का लैंड अपनी छूट के ऊपर अहसास हो जाती है

कमला चची को अपनी तरफ होते हुआ देख कर अर्जुन को थोड़ी शर्म आने लगता है आवर अर्जुन कमला चची से इसारे से पूछता है क्या हुआ ..... तो कमला चची कुछ नहीं बस इशारा कर देती है तो अर्जुन फिर से बहार की तरफ देखने लगता है

बस थोड़ी दूर आवर चलती है आवर फिर रुक जाती है बस रुकते hi बस मैं आवर लोग भी भर जाते है इस बस स्टॉप पर एक दो लोग hi उतारते है मगर काफी लोग भर जाते है जो बस मैं अब लोग एक दूसरे से सात जाते है आवर न चाहते हुआ भी अर्जुन को कमला चची से सतना hi पड़ता है कमला चची भी अर्जुन से सात जाती है बस अपनी रफ़्तार से चलने लगती है कमला चची की बड़ी बड़ी चुकी अर्जुन के जिस्म मैं सटी हुई होती है आवर बस हचकने से अर्जुन को कमला चची की नरम नरम चुकी का अहसास हो रहा होता है जिससे अर्जुन का लैंड आवर हार्ड होने से दर्द करने लगता है जिससे अर्जुन एक बार फिर सी आआआ भर लेते है जो कमला चची इस बार भी सुन लेती है

बेचारा अर्जुन ये बस मैं कैसे आ गया कितनी बुरी हालत हो गयी है इसकी अगर अर्जुन के जगह दूसरा कोई लड़का होता तो वह अब तक मेरे साथ पता नहीं क्या क्या करता मेरी जिस्म की बुरी हालत कर देता आवर अपना लैंड निकल कर यकीनन मेरी जिस्म से रगरता आवर अपने लैंड की गर्मी मेरी साड़ी पर गिरा देता मगर बेचारा अर्जुन मेरे साथ कुछ नहीं कर रहा है मैं समझती थिस अर्जुन सहर रह कर सहर के लड़को जैसा लफंगा होगा मगर अर्जुन तो बिलकुल सरीफ है मुझे hi कुछ करना होगा ताकि अर्जुन को आराम मिल सके मगर मैं क्या करूँ क्या मैं अर्जुन का लैंड जीन्स से निकल कर हिला दूँ .... नहीं नहीं कही अर्जुन ने मुझे गलत समझ लिए तो ..... कमला चची मन मैं सोचती है

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अरे अरे कहा आ रहा है जा पहले किचन मैं दूध राखी है उसे पीकर आ फिर नहला देती हुईं ...... आँचल कहती है जो अभी बाथरूम मैं सिर्फ पेटीकोट पहन कर कपडे धो रही होती है तभी अर्जुन बाथरूम मैं नंगा hi आ जाता है

ममी माँ मुझे दूध नहीं पीना है मैं भी आप के साथ कपडे धोऊंगा .... अर्जुन आँचल के करीब बैठ कर कहता है

अरे बाबा मैं कपडे धो रही हुईं तू मेरा राजा बीटा है न अपनी ममी माँ की बात नहीं मानेगा मेरा अच्छा बीटा जा पहले दूध पिले ..... आँचल कपडे धोना छोड़ कर अर्जुन को अपनी गॉड मैं लेकर कहती है आँचल की चुकी एक तरह से नंगी hi होती है आवर अर्जुन का मुंह भी आँचल के चुकी के करीब होती है मगर आँचल को कोई फर्क नहीं पड़ता है जैसे अर्जुन उसका hi बीटा है

ममी माँ मुझे अभी दूध नहीं पीना है प्लीज प्लीज बाद मैं पि लूंगा अभी मुझे कपडे धोना है इतने कपडे आप अकेली धो रही है अगर आप की हाँथ दुखने लगी तो ..... अर्जुन भी आँचल के गाल दोनों हाँथ से पकड़ कर कहता है

अर्जुन की बात सुन कर आँचल के चहरे पर मुस्कान आ जाती है आवर आँचल मुस्कुराती हुई अर्जुन के माथे को चुम लेती है ये सोच कर की अर्जुन उसे कितना प्यार करता है आवर अर्जुन को मेरी कितनी परवाह है जो इतने काम कपडे होने के बाद भी अर्जुन को इतने काम कपडे भी जयादा लग रहे है जो मेरी मदद करने के लिए आ गया

ठीक है बाबा तुझे अपनी माँ की मदद करनी है न मैं धोकर देती हुईं तुम छत पर दाल कर आते ताकि मेरी पेअर भी दर्द न करने लगे ..... आँचल हस्ती हुई कहती है जो अर्जुन भी हां मैं सर हिला देता है

आँचल कपडे धोने लगती है आवर अर्जुन पास मैं बैठ कर पलटी मैं राखी हुई कपडे निकल निकल कर आँचल को देने लगता है जो आँचल जल्दी जल्दी कपडे धोने लगती है

अर्जुन बाल्टी मैं भिनगा हुआ कपडा निकल कर आँचल को दे रहा होता है तभी अर्जुन के हाथ मैं एक छोटा कपडा अस जाता है जो आँचल की ब्रा होती है मगर अर्जुन ब्रा को हाथ मैं लेकर देखने लगता है

माँ इतने छोटे कपडे किसके है ये तो मेरा नहीं है ..... अर्जुन ब्रा के एक चुकी मैं हाथ दाल कर आँचल से पूछता है

वही अर्जुन के हाथ मैं अपनी ब्रा देख कर आँचल शर्मा जाती है आवर अर्जुन के हाथ से ब्रा लेकर दूसरे कपडे के साथ धोने लगती है मगर अर्जुन को कोई जवाब नहीं देती है

मैं भी कितनी पागल हुईं ब्रा को बाल्टी मैं क्यू रख दिया पहले hi धोकर छिपा देनी चाहिए था अब मैं अर्जुन को क्या जवाब दूँ अगर बताया तो आवर भी सवाल करेगा ...... आँचल मन मैं सोचती है

माँ वह कपडे किसके है बताइये न मैं जनता हुईं वह मेरे कपडे नहीं है क्या मुझसे भी छोटा कोई घर मैं आवर आप ने मुझे नहीं बताया मुझे भी उससे मिलना है ये कपडे जिसके है .... अर्जुन फिर से पूछता है आवर थोड़ा ज़िद्द भरा हुआ सवार मैं कहता है

अर्जुन बीटा तुझे छोटा घर मैं कोई नहीं है एक तुहि तो मेरा राजा बीटा है ...... आँचल अर्जुन से कहती है

माँ फिर ये कपडे किसके के है कही ये बगल वाली आंटी की लड़की चिंकी की तो नहीं है ..... अर्जुन पूछता है

हा

आँचल क्या कर रही है अगर सोच कल वह लड़की घर आई आवर उसके जिस्म पर आयी कपडे नहीं देखा तो फिर से पूछता आवर सायद अर्जुन उस कीर्ति के सामने भी पूछ ले फिर सोच कितनी शर्मिंदा होगी तू जो भी है सच बता दे अर्जुन समझ जायेगा अगर अर्जुन कोई सवाल भी पूछेगा तो तू बता देना आखिर तू अर्जुन को अपना बीटा मान hi चुकी है तो अर्जुन तेरी जिस्म को देख भी लेगा तो क्या फर्क पड़ेगा एक औरत को बस दो hi लोग नंगा देखते है तो औरत को कोई फर्क नहीं पड़ता एक पति आवर दूसरा खुद का छोटा बीटा आवर अर्जुन अभी छोटा hi है ..... आँचल हां बोलते बोलते रुक जाती है आवर अपने मन मैं सोचने लगती है

अर्जुन बीटा ये कपडे चिंकी की नहीं मेरी है ...... आँचल थोड़ी शर्मा कर कहती है

माँ आप झूट बोल रही है आप को लग रहा है आप बताएंगी तो मैं आप पर गुस्सा करूँगा की आप उसके कपडे क्यू धो रही है

माँ मैं गुस्सा नहीं करूँगा ये कपडे चिंकी के hi है न झूट मत बोलिये आप hi कहती है झूट नहीं बोलना चाहिए ..... अर्जुन ऊँगली देखते हुआ कहता है

अरे बाबा मैं सच बोल रही हुईं ये कपडे तेरी माँ की है भला मैं अपने बेटे से क्यू झूट बोलने लगी ..... आँचल कहती है

माँ आप झूट बोल रही है इतने छोटे कपडे आप कैसे पहन सकती है ये तो फैट जायेगा आवर आप की पूरी जिस्म तो नंगी hi नज़र आएगी .... अर्जुन आँचल के भरी हुई जिस्म को देखते हुआ कहता है

हे माँ ये लडक सब कुछ जान कर hi रहेगा मैंने बहुत बड़ी गलती कर दिया इसे साथ मैं कपडे धोने के लिए रख कर .... आँचल मन मैं सोचती है आवर खुद थोड़ी मुस्कुरा भी रही होती है अर्जुन की बातें सुन कर

अरे बाबा इसको पहले पहनते है फिर आइल ऊपर बड़े कपडे पहनते है चल जा ये कपडे ऊपर दाल के आ बहुत सवाल करता है ..... आँचल कुछ कपडे देते हुआ कहती है

माँ झूट पर झूट बोल रही है आप मैं नहीं लेकर जाऊंगा छत पर कपडे डालने के लिए मुझे पहले बताइये उसे आप कहा पहनती है तभी मैं जाऊंगा ..... अर्जुन रूठने जैसा सवार मैं कहता है

आँचल अब क्या सोच रही है दिखा दे अपने लादले को अपनी अनमोल खजाना जिसे देखने के लिए कोई सरे लड़के पागलों की तरह तेरे पीछे घुमा करते थे शादी के पहले ..... आँचल के मन से आवाज़ आती है जो आँचल थोड़ी थोड़ी शर्माने भी लगती है फिर कड़ी होकर पीछे की तरफ घूम जाती है आवर अपनी पेटीकोट निचे कर के कमर पर बांध लेती है आवर फिर धीरे से घूम जाती है

देख उसको मैं एहि पहनती हुईं ...... आँचल अपनी बड़ी बड़ी टाइट चुकी को अर्जुन को नंगी दिखती हुई कहती है

माँ इतने बड़े दुधु मैं वह कैसे आएगा वह तो फैट जायेगा

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaa ममी maaaaaaaaaaaa

अरे क्या हुआ गुड़िया चीख क्यू रही है गुड़िया क्या हुआ ..... आँचल झट से उठ कर बोलती है जो अभी गहरी नींद मैं सोइ हुई होती है मगर अंजलि की चीख सुन कर उठ जाती है

वही अंजलि आँचल के पैरों को पकड़ कर चीख रही होती है आवर थोड़ी दरी हुई भी होती है

असल अंजलि आवर आँचल एक साथ hi सोइ हुई होती है आवर सायद दोनों hi गहरी नींद मैं सोइ हुई होती है मगर आँचल के अचानक हसने से अंजलि की नींद खुल जाती है आवर अपनी ममी माँ को हस्ते हुआ देख कर थोड़ी दर जाती है क्यू के आँचल की आँखे अभी भी बंद होती है आवर आँचल दिल खुल कर है रही होती है जो अंजलि ममी माँ चीखती हुई आँचल को पकड़ लेती है

ममी माँ आप बुरी हो अपनी बेटी को hi डरा रही हो मैं तो आप की अच्छी बेटी हुईं फिर मुझे क्यू डरा रही है ...... अंजलि थोड़ी दरी हुई आवाज़ मैं कहती है

ओह्ह मेरी गुड़िया रानी भला मैं क्यू अपनी राजकुमारी को डरने लगी मैं तो सपने मैं भी अपनी गुड़िया को सर पर बैठा कर रखती हुईं ...... अंजलि को अपनी गॉड मैं सोलटि हुई कहती है

फिर अभी डायन की तरह है कर मुझे क्यू डरा रही थी देखिये मेरी दिल अभी भी धड़क रही है कही मैं दर कर मर जाती तो ..... अंजलि आँचल के कमर को पकड़ कर कहती है आवर अपनी सर आँचल के गॉड मैं दबा लेती है

अपनी माँ को कोई डायन बोलता है क्या गन्दी लड़की वह तो मैं सपने मैं अर्जुन के बचपन की बातें सुन कर है रही थी उस दिन अर्जुन ने ाएसि बातें hi बोलै था जो जब भी याद आयी है मुझे हसी आ जाती है आवर मैं हसने लगती हुईं ...... आँचल कहती है

ममी माँ आप सच कह रही है न आप अर्जुन के सपने देख कर hi है रही थी न कही आप झूट तो नहीं बोल रही आप को किसी डायन ने तो नहीं पकड़ लिया है ..... अंजलि कहती है

अरे मेरी माँ सच मैं अर्जुन की सपने मैं बातें सुन कर hi है रही थी ..... आँचल कहती है

फिर बताइये अर्जुन ने आएसा क्या कहा था जो आप साइट हुआ भी डायन की सॉरी इस तरह हसने लगती है ...... अंजलि पूछती है

हे भगवन अब इसे भी वह सब जानना है अगर इसे बताया तो ये अर्जुन से भी जयादा सवाल करेगी उस वक़्त तो छोटे थे तो अर्जुन को बड़े लगे थे मगर अब तो उससे भी बड़े है ये भी देखने को बोलेगी ..... आँचल मन मैं सोचती है

कुछ नहीं कहा था अर्जुन ने जा मेरा सर दुःख रही है कॉफ़ी लेकर आ ..... आँचल अपनी सर पकड़ती हुई कहती है

ममी माँ मैं कॉफ़ी नहीं लाऊंगी पहले बताइये अर्जुन ने क्या पूछा था वर्ण मैं आप से कटती कर लेंगी ..... अंजलि रूठने जैसी सवार मैं कहती है आवर दूसरे तरफ मुंह कर के बैठ जाती है

वही आँचल की शर्म से चेहरा लाल होने लगती है अंजलि के मुंह फेरने से आँचल समझ जाती है अंजलि सच मैं उससे नाराज़ हो गयी है आवर जब तब वह जमेगी नहीं तब तक उससे बात नहीं करने वाली है जो आँचल को वह बातें अंजलि को बतानी hi होगी मगर आँचल ये भी जानती थी वह बातें बताने के बाद भी अंजलि क्या क्या करने वाली है उसके बारे मैं सोच कर आँचल की हालत ख़राब होने लगती है जो टेबल पर राखी हुई पानी का गिलास उठा कर एक शंश मैं पि जाती है

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अपडेट ....... 47

कमला अर्जुन के आगे कड़ी होकर अपना हाथ अर्जुन के जेन्स के चैन पर रख कर फिर हाथ हटा ले रही होती है

कमला मन मैं सोच चुकी होती है की वह अर्जुन के लैंड हिला कर उसका पानी निकलेगी मगर कमला की हिम्मत साथ नहीं दे रही होती है

चाहे कमला जितनी भी अपने पति से छुड़ा सकीय थी मगर वह कभी दूसरे मर्द के साथ खुद से गन्दी हरकत नहीं की होती है हां मगर कमला राखी देवी के जिस्म के साथ बहुत मस्ती की होती है जो कई बार तो राखी देवी के जिस्म के मालिश करते हुआ कमला की छूट पानी ज़रूर छोड़ देती थी. इसमें कमला का कोई दोस नहीं होती थी अब राखी देवी की जिस्म hi आयेशी थी जो मर्द तो मर्द कमला भी राखी देवी की जिस्म के गर्मी के आगे खुद को रोक नहीं पति थी आवर मालिश करते करते खुद की छूट से पानी निकल देती थी

इधर अर्जुन की अब हालत खरब हो चुकी होती है क्यू की अब अर्जुन को दोनों तरफ से गर्मी मिल चुकी होती है क्यू की अर्जुन के पीछे एक आंटी कड़ी हो चुकी होती है जो उस आंटी की बड़ी बड़ी चुकी अर्जुन के पीठ से बार बार टकरा रही होती है

वही आगे से कमला की चुकी भी अर्जुन के साइन से टकरा रही होती है मगर कमला को कोई फर्क नहीं पद रही होती है अभी कमला के दिमाग मैं बस अर्जुन के लैंड का पानी कैसे निकलना है एहि चल रही होती है

बस क्या ज़रूरत थी मुझे बस मैं आने की कितने अच्छा बाइक लेकर जा रहा था थोड़ा देर रुक जाना चाहिए था मुझे पंकज के आने के बाद hi सहर जाता मैं....... दोनों औरत के जिस्म की गर्मी से बेकाबू होते हुआ अर्जुन मन मैं सोचता है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन अभी सोच hi रहा हटा है तभी अर्जुन को अपने लैंड पर किसी का हाथ का अहसास हटा है जो अर्जुन मस्ती मैं सिसक पड़ता है

एक वक़्त के लिए अर्जुन अपना सर उठा कर मस्ती मैं सिसक तो पड़ता है मगर फिर अर्जुन को अहसास हटा है किसी ने उसका लैंड पकड़ने की कोशिश की है तो अर्जुन अपना सर कमला की तरफ करते है तो देखता है कमला का हाथ अभी भी अर्जुन के लैंड के सामने होती है आवर कमला अपना हाथ को मसल रही होती है

ये कमला चुकी आयेशा क्यू कर रही है बस पहले क्या काम मैं आग मैं जल रहा था जो अभी कमला चुकी आवर आग मैं गहि दाल कर बढ़ा रही है

ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन अभी सोच hi रहा हटा है तभी कमला चुकी फिर से अर्जुन का लैंड पकड़ लेती है जो अर्जुन मस्ती मैं लम्बी सिसकी ले लेता है

सॉरी बीटा वह गलती से लग गया बस मैं इतना भिड़े है पेअर दर्द करने लगा था........ अर्जुन के पीछे कड़ी औरत कहती है जो अपना पेअर दूसरी तरफ रखती है तो गलती से अर्जुन के पेअर पर चल जाता है तो औरत सोचती है पेअर दबने से अर्जुन दर्द मैं सिसका है मगर उस औरत को क्या पता था अर्जुन किस मस्ती मैं सिसका था

कोई बात नहीं आंटी

अर्जुन उस औरत से कहता है आवर कमला को देखता है आवर कमला आवर अर्जुन की नज़ारे एक दूसरे से टकरा जाती है

अर्जुन से नज़ारे टकराते hi कमला अपनी सर निचे कर लेती है मगर पेअर जल्द hi अपनी नज़र उठा कर अर्जुन को देखने लगती है आवर अर्जुन को देखते हुआ अर्जुन के जेन्स का चैन खोल देती है आवर अंदर हाथ दाल कर अर्जुन का लैंड निकल देती है

हे भगवन ये अर्जुन का लैंड कितना बड़ा है मेरे पति का लैंड तो इसके आधा भी नहीं है बड़ी किस्मत वाली होगी वह लड़की जिसके छूट मैं ये लैंड पहली बार जायेगा उसकी छूट तो फैट कर भोसड़ा तो बनेगी मगर उसे पहली बार चौड़ाई उसे हर दिन याद आएगी....... कमला अर्जुन को देखते हुआ मन मैं सोचती है

कमला अभी भी अर्जुन के लैंड को अपनी आँखों से नहीं देखि हुई होती है कमला बस अर्जुन को देखते हुआ शर्मा रही होती है मगर कुछ कहती नहीं है मगर इस बार कमला चुकी के मुंह से सिसकिया निकल जाती है मगर कमला चुकी के सिसकने की आवाज़ कोई नहीं सुन पता है सिवाए अर्जुन के क्यू की कमला चची झट से अपनी मुंह अर्जुन के साइन पर रख देती है जो कमला चुकी की सिसकिया अर्जुन के साइन मैं डाब जाती है

वही लैंड पिंजरे से बहार निकलते hi अर्जुन को बहुत अच्छा महसूस हटा है जो अर्जुन छह कर भी कमला चुकी को कुछ नहीं बोल पता है मगर अचानक hi अर्जुन का एक हाथ कमला चची के कुमार पर चली जाती है जो कमला चची की जिस्म कैंप सी जाती है आवर कमला चची भी इस बार मस्ती मैं सिसक पड़ती है

क्यू की इस बार कमला चची को डबल मज़ा मिलता है एक तो अर्जुन कमला चची के कमर पकड़ लेता है आवर दूसरा अर्जुन का लैंड बहार निकलते hi कमला चची के हाथ से निकलते हुआ कमला चची के अनार की तरह गोल नेवल मैं चला जाता है जिससे कमला चची को एक वक़्त के लिए लगता है अर्जुन का लम्बा बड़ा लैंड कमला चची के छूट मैं चला गया है जिससे कमला चची की छूट मैं एक हलचल सी हो जाती है आवर सायद कमला चची की छूट रो कर एक दो बून्द पानी भी गिरा देती है

अर्जुन आवर कमला चची दोनों का जिस्म आग की तरह जलने लगती है जो रह रह कर दोनों की गर्म शैशे निकलने लगती है वही कमला चची अर्जुन का लोहे की तरह टाइट गर्म लैंड अपनी मोलायम हाथों से धीरे धीरे हिलने लगती है जो अर्जुन भी मस्ती मैं सिसक रहा होता है आवर कमला चची की नरम कमर को मसल रहा होता है

हे दिया कितना गर्म है अर्जुन का लैंड जब अर्जुन का लैंड इतना गर्म है तो इसके लैंड से कितना गर्म पानी निकलेगा जब अर्जुन का पानी मेरी छूट मैं गिरेगा तो मेरी छूट तो जल hi जाएगी hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh छाआआछःहःहःही कमला चची जब अर्जुन के गर्म पानी अपनी छूट मैं गिरने के बारे मैं सोचती है तभी कमला चची की पूरी जिस्म आकद जाती है आवर कमला चची की छूट से पानी गिरने लगती है जो अचानक छूट से पानी गिरने से कमला चची अर्जुन के लैंड को ज़ोर से दबाते हुआ छूट के पास कर देती है जो अर्जुन भी आआह्ह्ह्हह्हे बजारते हुआ कमला चची के छूट के ऊपर कमला चची के साड़ी पर लैंड का पानी निकल देता है

अर्जुन आवर कमला चची दोनों अपनी जिस्म की गर्म पानी निकल कर कुछ देर शांत हो जाते है आवर कमला चची अर्जुन का लैंड अपने हाथ से छोड़ देती है मगर कमला चची के हाथ मैं कुछ पानी जाता है मगर उससे कही जयादा अर्जुन का लैंड का पानी कमला चची के छूट के आगे साड़ी पर गिरा होता है जो कमला चची छूट के आगे साड़ी पूरी तरह गिला हो चुकी होती है

वही दोनों के पानी निकलते hi बस रुक जाती है आवर सभी उतरने लगते है अर्जुन भी झट से अपना लैंड जेन्स मैं दाल कर चैन बंद कर लेता है आवर बस से उतरने लगता है

बस मैं अब कुछ hi लोग बचे होते है आवर उनमे से एक कमला चची भी होती है जो अपनी साड़ी के पल्लू छूट के आगे पकड़ कर कड़ी होती है ताकि छूट के आगे गिरा हुआ अर्जुन का पानी छिपा सके

कमला चची के शर्म से बुरा हल होती है कमला चची अर्जुन के लैंड का पानी निकल कर अर्जुन की मदद तो कर देती है मगर कमला चची खुद hi एक मुसीबत मैं पद जाती है जो कमला चची की पेअर उस जगह से आगे बढ़ नहीं रहे होते है कमला चची बस के शीशे से बहार देखती है तो कमला चची को अर्जुन बहार hi खड़ा दिखाई देता है जो कमला चची को आवर शर्म से बुरा हल हो जाती है जिससे कमला चची की माथे पर पसीने भी आने लगती है कमला चची वही सीट पर बैठ जाती है आवर अपनी पल्लू से माथे पर आ रही पसीने को पोछने लगती है आवर अर्जुन के जाने का इंटर करने लगती है ताकि अर्जुन के जाने के बाद वह अपनी बेटी के घर जा सके

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ठीक है बाबा अब नाराज़ न हो मैं बताती हुई मगर पहले वडा कर फिर कोई सवाल नहीं करेगी ...... पानी पिने के बाद आँचल कहती है

ममी माँ की आवाज़ सुन कर अंजलि जो अभी रूठने की नाटक कर रही होती है वह नाटक करते हुआ hi आँचल की तरफ देखती है ताकि आँचल उसे सच बता सके क्यू की अंजलि ये बात जानती थी आँचल सबसे जयादा अगर किसी से प्यार करती है तो वह सिर्फ मैं हुईं जो ममी माँ मुझे कभी दुखी नहीं देख सकती है

हां बताइये मगर कोई झूट मत बताइयेगा माँ वर्ण ...... आँचल को ऊँगली से इशारा करते हुआ अंजलि कहती है

हां मेरी माँ मैं कोई झूट नहीं बोलूंगी अब सुन बात ये है की एक दिन मैं कपडा धो रही थी आवर कपडा धोने से पहले मैं अर्जुन को उसमे रूम से उठा कर दूध पिने को बोल कर बाथरूम मैं कपडा धोने लगी मगर मेरे पीछे hi वह बाथरूम मैं आ गया आँचल अंजलि को बता रही होती है आवर अंजलि बड़े hi धयान से अपनी ममी माँ की बात सुन रही होती है ताकि उसे सच पता चल सके उसकी ममी माँ उसे सच बता रही है की नहीं आवर अर्जुन के किस बात पर उनको हसी आती है जो सोते हुआ भी वह डायन की तरह हसने लगती है

फिर जानती है अर्जुन ने के कहा .....

क्या कहा था अर्जुन ने ....... अंजलि झट से बोल पड़ती है

आँचल अंजलि को बताते हुआ शर्मा भी रही होती है मगर अंजलि अभी कोई भी बात पर कोई भाव नहीं देती है मगर अपनी ममी माँ की बात धयान से ज़रूर सुन रही होती है मगर जब आँचल उससे पूछती है तो अंजलि झट से बोल पड़ती है

आँचल थोड़ी देर चुप रहती है आवर अंजलि को देखते हुआ अपनी साड़ी की पल्लू को उठा कर अपनी दोनों बड़ी बड़ी चुकी पर रख लेती है ताकि वह अंजलि से छिपा सके

अब बोलिये भी क्या कहा था अभी तो मुझे आप की बात कर यकीन hi नहीं हो रही आप सच बोल रही है क्यू की अभी मुझे किसी बात पर हसी नहीं आ रही है ..... अंजलि मुंह बनाते हुआ कहती है

झूटी कही की मुझे पता है तुझे तो अभी भी हसी आ रही है मगर है नहीं रही है मगर देख मुझे कितनी शर्म आ रही है अब मैं तुझे कैसे बताऊँ आगे क्या बोलने वाली हुईं ये सोच कर hi मुझे शर्म आ रही है अगर तेरी जगह राखी दीदी होती तो मैं उनेह अपनी ये दोनों कबूतर को देखा कर बता देती मगर तुझसे बताने मैं मुझे शर्म आ रही है आखिर एक माँ अपनी बेटी से ाएसि बाते कैसे कर सकती है मगर तुझे तो बस जानना है ........ कैसे छोटी बच्ची की तरह देख रही है ..... अंजलि को देखते हुआ आँचल मन मैं सोचती है

जानती है अर्जुन मेरी ब्रा को हाथ मैं लेकर क्या बोलै था

अर्जुन ने कहा था ....... माँ ये कपडा तो इतना छोटा है फिर आप के इतने बड़े धुधु इसमें कैसे जा सकते है

जिस बात को सपने मैं भी सोच कर आँचल हसने लगती थी मगर इस बार आँचल बोल कर शर्म से सर निचे करते हुआ अपनी पल्लू को ज़ोर से साइन पर दबा लेती है

आँचल तो किसी तरह बोल देती है मगर बोलते हुआ आँचल के चेहरे पर कोई हसी नहीं होती है ...... तभी उस रूम मैं हसी गूंज जाती है क्यू की अंजलि ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है आवर हस्ती हुई बोलने लगती है ममी माँ जब अर्जुन अभी आप की दूध देखेगा तो क्या बोलेगा

अंजलि इतनी ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है की रूम मैं भगति हुई राखी देवी के साथ गीता भी आ जाती है

आँचल क्या हुआ गुड़िया को चोट लगगगगगी ...... रूम मैं आते हुआ राखी देवी डर्टी हुई बोलती हुई रुक जाती है क्यू के राखी देवी को लगता है अंजलि दर्द मैं चीख रही है मगर रूम मैं आने के बाद पता चलता है अंजलि चीखी नहीं थी वह तो है रही है जो बोलते हुआ चुप हो जाती है

माँ मुझे चोट नहीं लगी है मैं तो ममी माँ की बात सुन कर है रही थी ........ ममी माँ अभी देख कर अर्जुन क्या बोलेगा पता है ........ अंजलि फिर हस्ती हुई बोलती है

वही आँचल शर्म से उठ कर कड़ी हो जाती है आवर अंजलि को चुप रहने का इशारा करने लगती है

तू घोड़ी की तरह होती जा रही है मगर अकाल नहीं आ रही तुझे तू हर वक़्त आँचल को परेशान करती रहती है चल उठ मुंह धो मैं खाना लगा रही हुई ....... अंजलि को मरते हुआ राखी देवी कहती है आवर अंजलि के बीएड ठीक करने लगती है

वही अपनी माँ से बचते हुआ अंजलि आँचल के पास कड़ी हो जाती है हस्ती हुई तभी अंजलि की नज़र सामने की ताएफ़ जाती है आवर अंजलि की आँखें बड़ी हो जाती है

ममी माँ अगर अर्जुन ने ये देख लिया तो क्या कहेगा हे देवी मायआ इतने बड़े मेरे तो इसके आधे भी नहीं है ........ अंजलि सामने देखते हुआ आँचल के कान मैं कहती है

वही आँचल जैसे hi अंजलि के नज़र की पीछा करती है अपनी सर पिट लेती है

ही देवी माँ इसे इतनी काम अकाल क्यू दी है ये लड़की किसी को भी नहीं छोड़ती है

क्या कहा अभी दीदी ने जा मुंह धो कर आ ........ अंजलि के सर पर मरती हुई आँचल बोलती है आवर फिर रूम से चली जाती है

वही उसके पीछे गीता भी चली जाती है जो रूम मैं आने के बाद बस अंजलि आवर आँचल की नज़र देख कर समझने की कोशिश कर रही होती है मगर गीता को भी कुछ समझ नहीं आती है

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उपडेट. . . . . . 48

वही अर्जुन को जाते देख कर कमला को थोड़ी रहत मिलती है कमला भी बस से उतर कर अपनी बेटी के घर की तरफ चल पड़ती है

अर्जुन पहले बैंक जाता है आवर पैसे निकल कर अपने ममी माँ के घर चला जाता है अर्जुन का मन तो नहीं कर रहा होता है ममी माँ के घर जाने का क्यू के उसको पता होता है उसका मां भी घर होगा मगर अर्जुन जब घर जाता है तो उसके मां अभी घर पर नहीं होते है अर्जुन सीधे अपने रूम मैं चला जाता है

अर्जुन तू आ गया क्या हुआ बीटा फिर माँ से गुस्सा हो गया ..... पीछे से आती हुई अर्जुन की नानी कहती है जो अर्जुन को अचानक देख कर थोड़ी उदास भी हो गयी होती है

नानी माँ मैं काम से आया हुईं आप को बस अपनी बेटी की पड़ी रहती है आवर ...... अर्जुन आवर कुछ बोलता के अपनी नानी की मायुश चेहरा देख कर रुक जाता है

नानी ये गीता दीदी की सामान का लिस्ट है इसे आप hi ला दीजिये फिर मैं घर चला जाऊंगा ..... अर्जुन लिस्ट देते हुआ कहता है

मुझे अपनी बेटी की कोई कोई चिंता नहीं होती है मुझे तो अपने एक लौटे नाती की पड़ी रहती है चल ठीक है ला वह लिस्ट गीता की मैं अभी ला देती हुईं तब तक तू नाहा ले फिर खाना खा कर चले जाना ..... अर्जुन की नानी कहती है

अर्जुन की नानी वह लिस्ट लेकर चली जाती है आवर अर्जुन बाथरूम मैं नहाने चला जाता है

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अर्जुन बाथरूम से निकल कर जब रूम मैं आता है तभी उसके फ़ोन पर कई सरे मैसेज आ रहे होते है तो अर्जुन फ़ोन लेकर देखने लगता है तो उसी लड़की की मैसेज आ रही होती है तो अर्जुन उसके मैसेज पढ़ने लगता है

hello क्या तुम मुझे एक बात बता सकते हो तुम एक लड़के हो तो तुमको पता होगा इस लिए पूछ रही हुईं

तुमेह पता तो चल hi गया होगा मैं अपने भाई को बहुत पसंद करती हुईं मगर मुझे नहीं पता मेरे भाई के मन मैं मेरे लिए क्या है तो सोचा क्यू न उसके भी मन मैं क्या है पता करू इस लिए मैंने अपने पर्सनल सामान की लिस्ट बनाई है आवर मैं वह लिस्ट अपने भाई को दे कर वह सरे सामान लेन को बोलने वाली हुईं ताकि मेरे भाई को मेरी जिस्म की निचे से लेकर ऊपर तक पता चल सके

मुझे पूरा यकीन है जब मेरे भाई को मेरी ये जिस्म की साइज के बारे मैं पता चलेगा तो उसके मन कुछ होगा आवर वह पक्का मेरी छोटे कपडे के ऊपर अपने लैंड का पानी गिरायेगा

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कितना मज़ा आएगा जब मैं अपने भाई के लैंड का पानी गिरा हुआ पेंटी को पहनुंगी hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ये सोच कर मेरी छूट मैं आग लग रही है

क्या ये सही होगा प्लेस्से बता दो

अर्जुन जब उस लड़की की मैसेज को पढता है तो अर्जुन का भी लैंड खड़ा हो जाता है मगर चेहरे पर थोड़ी हैरानी भी होती है ये कैसी बहन है जो अपने hi भाई को इतना पसंद करती है जो इतनी गिरी हुई हरकत करना चाहती है

hello मुझे कुछ नहीं पता है तुम कितनी गिरी हुई लड़की हो मुझे पता चल गया है आज के बाद मुझे कोई मैसेज नहीं करना नहीं तो अच्छा नहीं होगा.... अर्जुन इतना लिख कर सेंड कर देता है आवर फ़ोन बीएड पर फेक कर कपडे पहनने लगता है

अर्जुन कपडे पहन रहा होता है तभी फिर मैसेज आता है

ठीक है मैं अब मैं तुमेह मैसेज नहीं करुँगी मगर मैं कोई गिरी हुई लड़की नहीं हुईं मैं बस अपने एकलौते भाई से बहुत प्यार करती हुईं मैं गिरी हुई ये बेशर्म लड़की होती तो अब तक मैं कुवारी नहीं होती कितने लड़कों के निचे सो चुकी होती

मेरी जिस्म hi ाएसि है की सोल्लगे मैं बस लड़के मेरी जिस्म को hi देखते रहते है मैं बस किसी को एक बार बोल दूंगी तो वह पागल होकर मुझे बिच सड़क पर hi छोड़ देंगे मगर मैं आएसा नहीं कर सकती हुईं क्यू के मैं नहीं चाहती के कोई लड़का मेरे भाई को उस नज़र से देखे की उसने उसकी बहन को छोड़ दिया है आवर सायद कभी वह बात मेरे भाई को पता चले आवर वह शर्मिंदा हो इस लिए मैंने अपने भाई को पसंद किया

तुम लड़के हो तो ये बात तो मुझे अच्छे से पता है जब तुम अपनी बड़ी बहन को किसी लड़के के साथ सेक्स करते हुआ या सुन कर कितना बुरा लगेगा

सॉरी तुम्हारी डूडी के बारे मैं बस मैंने तुमेह बताने के लिए बोली अब मैं तुमेह मैसेज नहीं करुँगी उस लड़की की मैसेज देख कर अर्जुन के हाथ से फ़ोन छूट जाता है मगर अच्छा होता है फ़ोन बीएड पर hi गिरता है मगर अर्जुन के दिमाग मैं बस उस लड़की के बाटे hi चलने लगती है आवर तभी अर्जुन के दिमाग मैं अपनी गीता दीदी का चेहरा दिखने लगता है

अर्जुन का सर दर्द करने लगता है आवर अर्जुन बीएड पर गिर जाता है

अर्जुन खाना लगा दिया है चल आजा साथ मैं कहते है......... अर्जुन की नानी रूम मैं आकर कहती है

नानी गीता दीदी का सामान किधर है ......... अर्जुन अपनी नानी की आवाज़ सुन का झट से बोलता है

अरे बाबा इतना जल्दी क्या है वह बाकि सामान तो अपने दूकान मैं hi है बाकि सामान नीता लेन गयी है वह बस लेकर आ hi रही होगी ..... अर्जुन की नानी कहती है

अपनी नानी की बात सुन कर अर्जुन अपना सर निचे कर लेता है अर्जुन को खुद पर hi गुस्सा आने लगता है की उसके मुंह से ये क्यू निकल गया गीता दीदी की सामान नानी लेकर तो आएँगी hi अर्जुन बिना कुछ बोले बीएड से उठ कर चला जाता है

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शाम हो चुकी होती है आवर गीता अभी अपनी रूम मैं अकेली बार बार फ़ोन देख रही होती है आवर खुद hi मायुश हो जा रही होती है

दीदी क्या हुआ ये हम्हरा भाई अर्जुन hi है ाल अर्जुन को इतना क्यू देख रही है....... अंजलि गीता के बगल मैं सोती हुई बोलती है

अंजलि की आवाज़ सुन कर गीता हड़बड़ा सी जाती है आवर फ़ोन बंद कर देती है

टूउउउ तू रूम मैं कब आवर कैसे आई....... गीता परेशां होती हुई गुस्से मैं बोलती है क्यू के गीता को लगा था वह अपने रूम का गेट लॉक कर चुकी है मगर गीता गेट बंद करते हुआ कुण्डी लगाना भूल गयी होती है

दीदी क्या मतलब कैसे आई मैं बहुत थोड़ी हुईं जो अचानक आ जाउंगी गेट से अब्बी आई मैं चलिए माँ बुला रही है ....... मुंह बनाते हुआ अंजलि कहती है आवर उठ कर जाने लगती है तभी गीता अंजलि का हाथ पकड़ लेती है

अरे मेरी गुड़िया रानी तो नाराज़ हो गयी मैं तो मस्ती कर रही थी....... गीता अपने चेहरे पर हसी लती हुईं कहती है

दीदी मैं भी तो मसि hi कर रही थी देखा अंजलि भी मुस्कुराती हुई कहती है

मेरी नटखट गुडया तू चल मैं आती हुईं..... गीता कहती है तो अंजलि रूम से चली जाती है

हे ऊपर वाले बच गयी...... गीता मन मैं सोचती है

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क्या हुआ इस तरह क्या देख रही है जा देख पूजा कहा है....... आस्था पूनम से कहती है जो कब से आस्था को तैयार होते हुआ देख रही होती है

दीदी एक बात पुछु आप से गुस्सा तो नहीं होंगी...... पूनम धीरे से भोलेपन से कहती है

गुड़िया मैं क्यू गुस्सा होने लगी तुझसे एक तू आवर पूजा hi तो है जिसपर मुझे गुस्सा नहीं सिर्फ प्यार आता है बोल क्या कहना है..... ब्रा की हुनक लगते हुआ आस्था कहती है

दीदी पूछ रही हुईं गुस्सा नहीं करना ....... पूनम फिर से वही बात दोहराती है

गुड़िया परेशान मत कर बोल क्या कहना है आवर फिर पूजा को बुला वर्ण हमेह लेट माँ बहार जाने नहीं देगी शाम होने पर...... आस्था कहती है

दीदी आप मुझसे बड़ी है तो वह आप के बड़े है मगर एक बात मुझे समझ नहीं आ रही है वह आप की मेरी जैसी क्यू है आप के उसमे मैं तो 2 से 3 ऊँगली जाने पर दर्द होनी चाहिए...... पूनम ऊँगली से इशारा करते हुआ कहती है

पूनम की बात सुन कर तो आस्था की होश hi उड़ जाते है आस्था बस पूनम को देखती रह जाती है आस्था को कुछ समझ नहीं आती है पूनम के दिमाग मैं ये सवाल कैसे आई आस्था अब खुद सोच मैं पद जाती है वह अपनी छोटी बहन को क्या जवाब दे आस्था को खुद पर hi गुस्सा आने लगता है के वह पूनम के सामने नंगी hi क्यू हुई

गुड़िया ये कैसा बेमतलब की सवाल कर रही है इसके बारे मैं तो मुझे भी नहीं पता है तो तुझे कैसे बता सकती हुईं जब मुझे पता चलेगा तो मैं तुझे बताउंगी...... आस्था को ये बात तो पता होती है की जब तक वह कुवारी रहेगी एक भी ऊँगली छूट मैं डालने से दर्द आवर मस्ती की लहार तो होगी hi मगर ये बात पूनम को नहीं बताती है

दीदी ये बेमतलब का सवाल नहीं है आप खुद देख लीजिये

hhhhhhhhhhhhhhhh दीदी hhhhhhhhhhhhh

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh गुड़िया hhhhhhhhhhhhhhhhh

आस्था आहे भरते हुआ दिवार से टकरा जाती है आस्था अपनी छूट पर हाथ रख लेती है आवर लम्बी लम्बी शैशे लेन लगती है जुस्से आस्था की चुकी भी हिलने लगती है आवर ब्रा भी निचे गिर जाती है जो आस्था की टाइट चुकी का निपल दिखने लगती है जो आस्था की अभी छोटी सी निपल भी उठ चुकी होती है

डरा साल ये हुआ की पूनम बोलती हुआ अपनी सलवार खोल कर पेंटी भी निचे कर देती है आवर अपनी छोटी सी छूट मैं अपनी hi एक ऊँगली दाल देती है जो मस्ती मैं सिसक पड़ती है आवर फिर अपनी छूट से ऊँगली निकल कर सामने दिख रही आस्था की चिखनि छूट मैं 2 ऊँगली दाल देती है जिससे आस्था दर्द आवर मस्ती मैं सिसकते हुआ पूनम से थोड़ी पीछे हैट कर दिवार मैं सात जाती है

ओह माय गॉड ये कौन सा गेम चल रही है

आस्था आवर पूनम एक दूसरे को देख रही होती है तभी उस रूम मैं एक आवाज़ गूंज पड़ती है जो आस्था भाग कर पहले अपने कालदे उठा कर अपनी जिस्म पर दाल लेती है

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अर्जुन अभी बस के सबसे पीछे अकेला बैठा हुआ होता है आवर उसके हाथ मैं गीता का सामान एक पलास्टिक मैं होता है अर्जुन बार बार पलास्टिक के अंदर हाथ दाल कर फिर खली हाथ निकल ले रहा होता है मगर उस पलास्टिक से कोई सामान नहीं निकलता है

क्या मुझे देखना चाहिए दीदी ने क्या क्या मंगवाया है नहीं इसमें सायद दीदी की परसनल चीजें भी हो सकती है मुझे नहीं देखना चाहिए

क्या हो सकता है दीदी की ब्रा पेंटी तो मैंने पहले भी देख चूका हुईं क्या दीदी की अभी भी वही साइज होगी या उससे बड़ी होदी क्यू की अभी दीदी पहले से थोड़ी मोती हो गयी है तो उनकी पेंटी की साइज भी बढ़ गयी होगी

अर्जुन क्या सोच रहा है देख ले पक्का दीदी की पेंटी की साइज बढ़ गयी होगी

सुबह मैं देखा नहीं कितनी बड़ी गांड लग रही थी उनकी जब वह सीढ़ियों से ऊपर जा रही थी कैसे उनकी बड़ी गांड हिल रही थी देख ले अर्जुन सच मैं गीता दीदी की पेंटी का साइज पहले से बढ़ गयी होगी

अर्जुन के दिमाग मैं बाते चल रही होती है जिससे अर्जुन के मन मैं बेचैनी सी होने लगती है जिससे अर्जुन का लैंड भी खड़ा होने लगता है अर्जुन के माथे पर पसीने भी आने लगता है अर्जुन उस पलास्टिक को अपने लैंड के ऊपर रगड़ने लगता है

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अपडेट ....... 49

रात के 10 पं

अर्जुन अपने रूम मैं सो रहा होता है आवर उसके फ़ोन पर बार बार मस्सगे आ रहे होते है मगर अर्जुन फ़ोन को नहीं देखता है सायद अर्जुन अभी गहरी नींद मैं होता है कुछ देर के बाद अर्जुन का फ़ोन बंद हो जाता है

रात के 11 पं

अर्जुन के रूम का गेट खुलता है आवर एक लड़की उसके रूम मैं आती है जो अभी नाईट ड्रेस मैं होती है आवर नाईट ड्रेस भी आएसा होता है की उस लड़की की टाइट चुकी का निप्पल का आधार दिख रहा होता है आवर वही हॉल उस लड़की की निचे का भी होता है निचे भी उस लड़की की छूट का छाप दिख रहा होता है जो अभी कोई भी लड़का उस लड़की को इस हालत मैं देख ले तो मुंह मैं पानी के साथ उसका लैंड का भी पानी निकल जाये आवर वह लड़का लैंड के गर्मी मैं पागल होकर अभी hi उस लड़की के छूट की जगह को अपनी मुट्ठी से पकड़ कर उस लड़की की छूट को मसल दे आएसा लग रहा होता है वह लड़की अभी अपनी जिस्म के मुताबिक बहुत छोटी कपडे पहन कर आई हो

वह लड़की अर्जुन के रूम मैं आते hi पहले रूम को लॉक करती है आवर फिर रूम की एक लाइट जला देती है

अर्जुन सो गया है क्या

लाइट जलाते हुआ वह लड़की बोलती है मगर अर्जुन कोई जवाब नहीं देता है जैसे अर्जुन अभी सच मैं गहरी नींद मैं है

जब अर्जुन कोई जवाब नहीं देता है तो वह लड़की अर्जुन के बीएड के सामने कड़ी होकर अर्जुन के सोते हुआ मासूम चेहरे को प्यार से देखने लगती है

कुछ देर तक वह लड़की अर्जुन को देखती रहती है फिर अपनी जिस्म को देख कर खुद hi शर्मा जाती है

देख मैं कैसी हालत मैं तेरे सामने कड़ी हुईं जो मैं इस हालत मैं अपने पति के सामने भी कभी कड़ी होने के बारे मैं सोच भी नहीं सकती

देख मेरी उभरती हुई जवानी कैसे दिख रही है देख कैसी मेरी निप्पल दिख रही है तेरा मन नहीं कर रहा इसे अपने मुंह मैं लेकर चूसने का

hhhhhhhhhhhh

मुझे कैसा लगेगा जब तू मेरी चुकी को मुंह मैं लेगा

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

बाबू देख सोच कर hi मेरी ये निगोड़ी निप्पल आवर टाइट हो रही है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhh माआआआआ hhhhhhhhhhhhhhhhh

वह लड़की मन मैं सोचती हुई अपनी कपडे के ऊपर से hi निप्पल पर हाथ फेरती रहती है जो लड़की की माधोसी मैं गर्म आहे निकलने लगती है

अभी उस लड़की की आँखों मैं भी एक माडोसी hi छै हुई होती है वह लड़की धीरे से अर्जुन के बीएड पर चली जाती है आवर अर्जुन के जिस्म पर बैठ जाती है

बाबू तुझे कुछ नहीं हो रहा है क्या देख कैसे तेरी दीदी की जिस्म जल रही है देख न देख sssssssssss hhhhhhhhhhhhhh

वह लड़की अर्जुन के जिस्म पर बैठ कर बहुत धीरे से बोलती है आवर फिर अर्जुन के एक हाथ को उठा कर अपनी चुकी पर रख देती है आवर खुद hi सिसक पड़ती है

देखा कितनी जल रही है तेरी दीदी की जिस्म क्या तू अपनी दीदी की इस तरह जलते हुआ देखना चाहता है

मैं जानती हुईं तू अभी जाग रहा होता तो मुझे इस हालत मैं देख कर तुझे तो बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता आवर तू मेरी जलती हुई जिस्म को जब तक रगड़ता जब तक ये ठंडी नहीं हो जाती

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बबबबबबबूउऊउउउउउ hhhhhhhhhhhhhhhhh

क्या कर रहा है अपनी दीदी की जान लेगा क्या जो पूरी ऊँगली गुसा रहा है hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मत कर बाबू hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरी छूट

hhhhhhhhhhhhhhhh माआआआ hhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मत कर बभ मैं मर जाउंगी hhhhhhhhhhhhhhhhhhh तेरी 2 ऊँगली भी नहीं जा सकती है आवर तू पूरी ऊँगली दाल रहा है

hhhhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssss hhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhhh

Hhhhhhhhhhhhh

देख कितनी आग दे रही है hhhhhhhhhhhh

गन्दा कर दिया न अपनी दीदी के कपडे को

वह लड़की खुद hi अर्जुन का हाथ को अपनी चुकी से हटा कर छूट पर रख देती है आवर फिर अर्जुन के ऊँगली को कपडे के ऊपर से hi छूट मैं डालते हुआ सिसकिया लेने लगती है आवर ज़ोर ज़ोर से अर्जुन के ऊँगली को छूट मैं डालते रहती है आवर कुछ hi देर मैं उस लड़की की छूट से पानी निकल जाती है जो लड़की हफ्ते हुआ अर्जुन के ऊपर hi गिर जाती है

अब हालत ये होती है की अर्जुन निचे सोया हुआ होता है आवर वह लड़की अर्जुन के ऊपर सोइ हुई होती है जिससे उस लड़की की चुकी अर्जुन के साइन मैं दबे हुआ होते है मगर उस लड़की को कोई फर्क नहीं पद रही होती है के अभी अर्जुन उठ गया तो क्या होगा वह अर्जुन को क्या जवाब देगी

मगर अभी उस लड़की को इसका कोई दर नहीं होता है सायद लड़की पहले से जानती है की अर्जुन उठने वाला नहीं है इस लिए तो वह लड़की अर्जुन के जिस्म पर हाफति हुई अर्जुन के बालों पर हाथ चला रही होती है

हे माआआआ

बाबू अब मुझे जाना चाहिए देख अब कुछ देर मैं सुबह होने वाली है आवर मुझे पता भी नहीं चला कितने घंटे तेरे साथ सो गयी

लड़की की कब आँख लग जाती है उसे पता भी नहीं चलती है लड़की अचानक hi उठ जाती है तो उसकी घडी पर नज़र जाती है तो देखती है 5 : 15 ऍम हो रहे होते है

हे भगवान् बाबू ये क्या हुआ सॉरी सॉरी मुझे मांफ कर देना मुझे साफ कर देनी चाहिए थी

वह लड़की जब अर्जुन के जिस्म से हटती है तो उसकी नज़र अर्जुन के लैंड के ऊपर नज़र जाती है जो अर्जुन के लैंड के जगह के कपडे भी पूरी तरह गिला हो चुकी होती है जो लड़की को लगता है उसकी छूट की पानी से भींग गया है जो दर भी जाती है आवर बिना देरी किये अर्जुन के रूम से निकल जाती है

हे माँ ये क्या किया मैंने सुबह जब अर्जुन उठेगा तो क्या होगा

कुछ नहीं होगा वह सोचेगा उसका hi पानी है

आज तो तुझे डरने की नहीं खुश होने का दिन है कई दिन की तड़प जो तेरी मिट गयी है

ये तो बस अभी शुरुआत हुई है अर्जुन ने तो कुछ किया भी नहीं है सब कुछ तो तूने खुद की आवर देख तुझे कितना मज़ा आया आवर देख तेरी छूट की गरमज भी अभी ठंडी हो गयी है

ज़रा सोच जब तर्ज ये नाज़ुक सी जिस्म को जब अर्जुन अपने सख्त हाथों से पकड़ कर मैलेगा तो तुझे कैसा लगेगा तेरी नाज़ुक सी जिस्म को अर्जुन तोड़ मरोड़े कर रख देगा

तेरी छोटी सी छूट की लकीर मैं जब अर्जुन का किंग कोबरा जायेगा तो तुझे कितना मज़ा आएगा

तू तो मस्ती आवर दर्द मैं चीख चीख कर पुरे गाओं के लोगों को सोते हुआ जगा देगी तेरी छूट से खून भी इतना बहेगा की वह की पूरी चादर hi कौन hi होली खेल लेगी तू बीएड पर तड़पती रहेगी आवर अर्जुन बस तेरी गुफा मैं अपनी नाग को भेजता hi रहेगा

तेरी छूट से खून आवर पानी दोनों एक साथ बहेगा hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह लड़की बाथरूम मैं नहाती हुई सोचती है आवर अपनी छूट मैं ऊँगली करती हुई एक बार फिर अपनी छूट से पानी निकल देती है

लड़की कुछ देर तक झरने के निचे बैठी हुई हाफति रहती है जिससे उस लड़की की चुकी भी ज़ोर ज़ोर से हिल रही होती है वही लड़की छूट की पानी भी झरने के पानी के साथ बहने लगती है

अब उस लड़की की जिस्म जवाब दे चुकी होती है वह लड़की किसी तरह नहाती है आवर धीरे धीरे बाथरूम से निकल कर अपनी बीएड पाए नंगी हालत मैं hi सो जाती है

अगली सुबह

गुड़िया क्या कर रही अभी तक तैयार नहीं हुई आज से सोल्लगे जाना है न चल उठ जा

हे माआआआ ये क्या तू नंगी सो रही है ....... राखी देवी जब अंजलि को सोल्लगे जाने के लिए उठा रही होती है आवर जैसे hi अंजलि के चादर को हटती है अंजलि को नंगी सोती हुई पति है जो फिर से उस चादर को अंजलि के ऊपर दाल देती है

बेशर्म कही की तुझे ज़रा भी अकाल नहीं है तू घोड़ी की तरह होती जा रही है मगर अकाल नहीं आ रही तुझमे....... राखी देवी बोलती हुई अंजलि के गांड पर कई सरे तप्पड़ मार देती है

मा सॉरी सॉरी गलती हो गति aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अंजलि भी झट से चादर लेकर hi चीखती हुई बीएड के दूसरी तरफ चली जाती है उसकी आँखें भी लाल लाल होती है जैसे वह रात भर सोइ नहीं है

दीदी अब जाने भी दीजिये हम दोनों इसे जितना भी समझा दे मगर ये अपने hi मन की करने वाली है........ आँचल रूम मैं आती हुई कहती है

आ गयी इसे बचने के लिए तेरी hi वजह से ये इतनी बिगड़ती जा रही है

अगर सोच मेरी जगह अर्जुन रूम आ जाता तो....... राखी देवी आँचल को घूरती हुई गुस्से मैं बोटी है

रुक आज मैं तुझे नहीं छोड़ने वाली गलती तू कर आवर बात मैं सुनु आज तेरी टंगे तोड़ देती हुईं....... आँचल अंजलि को आँख मरते हुआ बोलती है आवर अंजलि को मरने के लिए भगति

aaaaaaaaaaaaaaaaa

बस बस रहने दे मैं जानती हुईं तू कितना मारेगी इसे बोल जल्दी से तैयार होकर सोल्लगे जाये मैं गीता को उठा रही हुईं........ राखी देवी बोलती हुई रूम से निकल कर गीता के रूम मैं चली जाती है

वही आँचल आवर अंजलि एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देती है जैसे आँचल आवर अंजलि को पहले से पता हो सुबह ये होने वाला है

हे मा ये हो क्या रहा है मेरे घर मैं

राखी देवी जैसे hi गीता के रूम मैं जाती है गीता भी अभी बिलकुल नंगी सोइ हुई होती है जो राखी देवी के चहरे पर एक हैरानी सी आ जाती है
 
अपडेट ..... 50

गीता बीटा ये कैसे सो रही है ....... तुझे ज़रा भी अकाल नहीं है ........ या तू भी अपनी छोटी बहन की आदत सिख रही है .... ये नंगी सोने की आदत तुझे कब से होने लगी ........ राखी देवी गीता के जिस्म पर चादर को डालती हुई कहती है

वही गीता नींद से सोइ हुई होती है मगर अपनी माँ की तेज़्ज़ आवाज़ सुन कर उठ जाती है आवर हड़बड़ा कर चादर को अपनी जिस्म पर लपेट लेती है आवर अपनी माँ की तरफ देखती है जो राखी देवी गुस्से से घर रही होती है तो गीता अपनी सर निचे कर लेती है

सॉरी माँ वह रात मैं अचानक आ गयी जो कपडे गांडेय हो गए तो मैं रात मैं नाहा कर उसी तरह सो गयी ...... गीता सर निचे किये हुआ hi अपनी माँ से कहती है

ठीक है कोई बात नहीं बीटा मगर गेट तो बंद कर लेती अगर मेरी जगह सोच अर्जुन रूम मैं आ जाता तो तुझे इस तरह देख लेता तो ..... ये बात आगे से धयान रखना बीटा चल फ्रेश होकर आ जा मैं नास्ता लगा रही हुईं ..... गीता की बात सुन कर राखी देवी समझ जाती है गीता किस बारे मैं बोल रही है इस लिए आवर कुछ नहीं बोलती है आवर रूम से चली जाती है

गीता भी उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

ममी माआआ आप

अर्जुन जब बाथरूम से निकलता है तो अपनी बीएड पर आँचल को बैठा हुआ पता है तो वह टावल मैं होने से हड़बड़ा सा जाता है

वही अर्जुन को हड़बड़ाते हुआ देख कर आँचल झट से घूम कर मुस्कुराने लगती है

ममी माँ आप घूम सकती है ...... कपडे पहने के बाद अर्जुन कहता है

मेरा रहा बीटा तो अब बिलकुल जवान हो गया है अब मुझे बहु ढूंढनी सुरु कर देनी चाहिए ..... आँचल घूमती हुई मुस्कुरा कर कहती है

वही अर्जुन घर कर आँचल को देखने लगता है

इस तरह क्यू देख रहा है क्या शादी नहीं करनी है

सोच अगर अभी इस रूम मैं तेरी बीवी होती तो कैसे तेरे कपडे निकल कर देती कैसे तेरी भींगे हुआ बॉल पोछती कैसे ये बिखड़े हुआ बीएड को ठीक करती ..... आँचल अर्जुन के भींगे हुआ बॉल को पोछती हुई कहती है

माँ इसके लिए बीवी की क्या ज़रूरत है ये सब करने के लिए आप हो न आवर ाभज मेरी उम्र शादी की नहीं हुई है पहले गीता दीदी की होगी फिर अंजलि दीदी की उसके बाद hi मेरी होगी .... आँचल से अलग होते हुआ कहता है

अरे मैं कितने दिन तेरी ये काम करुँगी अब मैं बुद्धि हो रही हुईं कुछ सल्ल के बाद मैं आवर बुद्धि हो जाउंगी फिर तेरा क्या होगा इस लिए मैं कहती हुईं तेरी शादी भी गीता के साथ hi कर दूँ .....

माँ मुझे अभी शादी नहीं करनी है ..... अर्जुन कहता है

ठीक है तू एहि चाहता है की मैं बुद्धि होने तक तेरी ख्याल रक्ति रहूं तो कोई बात नहीं ..... आँचल मुंह बना कर कहती है

माँ ये क्या बात हुई ....... ठीक है आप एहि चाहती है के मैं अभी शादी कर लूँ तो ठीक है मैं करूँगा आप के लिए ....... चाहे भले hi ये मेरी मस्ती करने की उम्र hi न हो ..... अर्जुन भी मुंह बना कर कहता है

अपनी ममी माँ को रूत जाना देख कर अर्जुन को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है जो अर्जुन भी बोल पड़ता है है

हहहहहहह

मेरा अर्जुन बीटा मुझे तो पता hi नहीं था के मेरा अजब इतना प्यार करता है अपनी ममी माँ से .... मगर मैं तो मस्ती कर रही थी अपने लादले के साथ

भला मैं अभी क्यू अपने लादले की मस्ती करने के दिन को बर्बाद कर सकती हुईं ...... आँचल मुस्कुराती हुई बोलती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है

वही अर्जुन भी ख़ुशी से अपनी ममी माँ के गले लग जाता है

माँ आप ने तो मुझे डरा hi दिया था ..... अर्जुन गले लगे हुआ hi कहता है

हे भगवन जी कैसा बीटा दिया है मुझे दुनिया के हर लड़का अपनी शादी की बात सुन कर खुश हो जाता है मगर एक मेरा लाडला है जो दर रहा है शादी के नाम पर

भगवन जी मेरे लादले को थोड़ी उन लड़कों जैसा अकाल भी देते जो अपनी शादी की बात सुन कर ख़ुशी होती है क्यू के उनको पता होती है शादी के बाद वह अपनी बीवी के साथ कितनी मस्ती करेंगे आवर कैसे दिन रात अपनी बीवी के साथ ....... बोलती हुई आँचल रुक जाती है

हे भगवन ये मैं क्या बोलती जा रही हुईं अर्जुन मेरा है देवर नहीं जो मैं ये सब बोलती जा रही हुईं ..... आँचल मन मैं सोचती है

आँचल को जैसे hi ये अहसास होती है वह क्या बोल रही है आँचल की शैशे भी तेज़्ज़ चलने लगती है आँचल की आँखों मैं एक शर्म सी आ जाती है आँचल का हाथ भी अर्जुन के सर से हैट जाता है

माँ मुझे अभी कोई मस्ती नहीं करनी है बीवी विवि के साथ चलिए जल्दी मुझे नास्ता दीजिये मुझे सोल्लगे भी जाना है

अर्जुन को अपनी ममी माँ की साडी बाते तो समझ आ रही होती है जो अर्जुन को अजीब भी लग होती है मगर जैसे hi आँचल चुप होती है अर्जुन को अपनी ममी माँ की धड़कन तेज़्ज़ चलने की अहसास होती है जो अर्जुन अपनी ममी माँ के चेहरे को देखता है तो आँचल की नज़ारे निचे होती है तो अर्जुन को अच्छा नहीं लगता है आवर अर्जुन समझ जाता है सायद ममी माँ ने ख़ुशी मैं बोल गयी है इस लिए अर्जुन नास्ता करने के लिए जाने को बोलता है ताकि उसकी ममी माँ को लगे अर्जुन ने उनकी बात पर धयान न दिया हो

हआ बीटा देख मस्ती करने के चक्कर मैं भूल गयी मैं नास्ता करने के लिए hi बोलने आई थी चल जल्दी आए ..... आँचल बोलती हुई रूम से निकल जाती है

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दीदी छोटी को बता दीजिये न ये बड़ा क्यू नहीं है आप का

ssssssssss

नास्ता करते हुआ पूजा कहती है आवर अपनी एक हाथ निचे कर के आस्था के छूट के ऊपर से hi ऊँगली दाल देती है जिससे आस्था सिसक पड़ती है

क्या हुआ आस्था सब्जी तीखी है क्या ले पानी पि ...... आस्था की सिसकियाँ सुन कर उसकी माँ पानी देते हुआ कहती है जो आस्था पानी लेकर पिने लगती है

वही पूजा मन मैं मुस्कुरा देती है

आस्था आवर पूनम को रूम मैं नंगी देख कर पूजा को बहुत hi जयादा अजीब तो लगी थी मगर उस वक़्त अपनी आस्था दीदी को शरमाते हुआ देख कर पूजा भी नहीं बोलती है आस्था भी जल्दी से कपडे पहन कर रूम से निकल गयी जाती है

मगर पूजा को साडी बाते जाने की छुल होती है के आखिर रूम मैं पूनम आवर दीदी नंगी होकर क्या कर रही थी आवर पूजा के दिमाग मैं एक बात भी होती है जो पूजा को अच्छी नहीं लग रही होती है इस लिए पूनम को अकेले पते hi पूजा साडी बाते जान लेती है जिससे पूजा को पूनम की हरकते सुन कर हसी भी आती है पूनम से जान्ने के बाद से पूजा काम से अच्छे मक्के का इंतज़ार कर रही होती है आवर नास्ता करते वक़्त hi मस्ती करने का सही समय लगता है पूजा को जो कर भी देती है

वही आस्था तो बेचारी खुद hi पूजा से शर्मा कर नास्ता कर रही होती मगर जैसे hi पूजा बोलती हुई आस्था की छूट मैं ऊँगली करती है आस्था की हालत ख़राब हो जाती है आस्था कक जिस्म भी कैंप जाती है ये दूसरी बार होती है जब दूसरे की ऊँगली आस्था की छूट मैं गयी होती है

आस्था जल्दी से पानी पीकर गिलाश टेबल पर रख कर अपनी रूम मैं चली जाती है

पूजा भी जल्दी जल्दी नास्ता करती है आवर आस्था के रूम मैं जाने को होती है के तभी आस्था तैयार होकर सोल्लगे के लिए निकल जाती है

पूजा दीदी प्लीज मस्ती मत कीजिये दीदी के साथ वह पहले से परेशान है .... पूनम पूजा से कहती है जो अभी दोनों एक साथ रूम मैं होती है

छोटी क्या मतलब दीदी परेशान है क्या हुआ आस्था दीदी पहले से क्यू परेशान है बता मुझे..... पूनम की बात सुन कर पूजा को एक दर्द सा अहसास होता है क्यू के पूजा सबसे जयादा किसी से प्यार करती है तो वह उसकी आस्था दीदी होती है

छोटी चुप क्यू है बता न दीदी क्यू परेशान है देख मुझे गुस्सा आ रही है बता नहीं तो ...... पूजा चिढ़ती हुई कहती है

पूजा को गुस्से मैं देख कर पूनम थोड़ी दर जाती है

पूजा दीदी वह आस्था दी एक लड़के को पसंद करती है मगर वह लड़का दीदी को हमेशा दुखी कर देता है वह बहुत बुरा लड़का है

आस्था दीदी उस लड़के से मिलने के लिए मेरे घर भी गयी थी एक बा पूनम की जितनी बात पता होती है वह साडी बाते पूजा को बता देती है आवर पूनम की बाते सुन कर पूजा को बहुत गुस्सा आती है

साला कुत्ता कमीना उसकी क्या औकात जो मेरी दीदी को ठुकराएगा मेरी दीदी इतनी खूबसूरत है की कोई भी लड़का उनके पीछे दम हिलाते हुआ घूम जायेंगे

मेरी दीदी को दुखी किया न मैं उसे छोडूंगी नहीं... पौंआ गुस्से मैं बोलती है

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सुनीता जब भी तेरी हां होगी मुझे कभी भी फ़ोन कर के बता सकती है ........ मैं तेरी हां की इंतज़ार करुँगी

चल तू मैं अभी आती हुईं....... गीता अपनी एक सहेली के साथ सोल्लगे के गेट पर बाते कर रही होती है तभी उसे आस्था आती हुई दिखाई देती है तो वह वही रुक जाती है आवर अपनी सहेली को जाने को बोलती है

अरे गुड़िया आज अकेली कैसे तेरी दोस्त नहीं आई....... आस्था के पास आते hi गीता पूछती है

दीदी मेरी दोस्त अपने मां के घर गयी है आप अकेली आई है क्या अंजलि दीदी नहीं आई.... आस्था कहती है

अंजलि छोटे के साथ बाइक पर आती होगी... आवर बताओ कैसा चल रहा है पढाई... इतने दिन मैं एक दिन भी किताबे खोली की नहीं.... गीता हस्ती हुई पूछती है

दीदी क्या लगता है आप को मैंने खोली होगी की नहीं..... आस्था उल्टा सवाल खुद कर देती है गीता से

मैं बताऊँ क्या कितनी बार खोली होगी पहनती hi नहीं होगी क्यू की ज़रूरत hi नहीं है ..... दोनों आपस मैं बाते करते हुआ जा hi रही होती है तभी एक लड़का बोल पड़ता है आवर उसके दोस्त हसने लगते है

तुझे शर्म नहीं आएगी अपनी माँ के बारे मैं बताने मैं...... आस्था चलते हुआ रम जाती है आवर उस लड़के पास जाकर बोलती

साली तेरी हिम्मत

रुक जा देख प्रिंसिपल सर आ रहे है अभी कल्लस मैं चलते है

वह लड़का गुस्से मैं आस्था को मरने वाला होता है तभी उसका एक दोस्त उसका हाथ पकड़ कर बोलता है

अभी तो प्रिंसपल के वजह से बच गयी लेकिन फिर कौन बचाएगा तुझे......

Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

पागल कर रही है तेरी ये जिस्म की खुसबू

hhhhhhhhhhhhhhhhh

गुलाब की तरह खिली हुई है

hhhhhhhhhhhhh

सारा रास निकल दूंगा

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

वह लड़का आस्था की जिस्म को सूंघते हुआ बोलते हुआ ाआहे भर रहा होता है मगर जब वह लड़का जैसे hi लास्ट का सबद बोलता है वह लड़का चीखते हुआ 2 कदम पीछे चला जाता है

वह लड़का जैसे जैसे बोल रहा होता है आस्था की आँखें गुस्से से लाल हो रही होती है मगर आस्था कुछ कर नहीं पा रही होती है क्यू के पीछे कड़ी गीता आस्था को पकड़ चुकी होती है

मगर लड़के की बाते सुन कर गीता भी अपना आप खो देती है आवर आस्था को छोड़ कर एक तप्पड़ उस लड़के को मार hi देती है

गीता का तप्पड़ इतना ज़ोर की होती हैकि उस लड़के के आँखों के आगे अँधेरा सा छ देता है वह लड़का बिलकुल संत सा खड़ा रह जाता है

वही गीता आस्था को लेकर चली जाती है

वह लड़का अभी वही गाल पर हाथ रखे हुआ खड़ा hi रहता है तभी सोल्लगे के गेट से एक बाइक तेज़ी से आती है उस बाइक पर बैठे हुआ लड़के को देख कर वह लड़का बाइक वाले लड़के को देख कर अपनी नज़र निचे कर लेता है

वही बाइक वाला लड़का उस लड़के को मुस्कुरा कर देखता है
 
अपडेट ......... 51

अर्जुन मैं दीदी को देखती हुईं तू भी अपने कल्लस मैं जा ..

बाइक से उतरती हुई अंजलि अर्जुन से कहती है

वह बाइक वाला लड़का कोई आवर नहीं अर्जुन hi होता है

जी दीदी ....अर्जुन बोल कर जाने लगता है लेकिन कुछ दूर जाकर रुक जाता है आवर अपनी अंजलि दीदी की तरफ देखता है जो अंजलि अपनी सहेलियों के साथ जा रही होती है तो अर्जुन वह से उस लड़के के पास आ जाता है

देख ये सहर नहीं गाँव है यह की लड़किया सहर की लड़कियों से बहुत अलग है सहर मैं जो लड़की सीना तान कर चलती है वहज यह की लड़की साइन छिपा कर चलती है ताकि किसी कुत्ते की नज़र न लगे आवर यह हर लड़की की इज़्ज़त बहुत बड़ी दौलत होती है तो यह उनसे बच कर hi रहना वर्ण ..... अर्जुन ऊँगली देखते हुआ वह से चल देता है

क्या भाई वह इतना कुछ बोल कर जा रहा है आवर आप कुछ भी नहीं कर रहे है .... उस लड़के का एक साथी कहता है

अभी चल यह से .... वह लड़का बस इतना hi बोल कर चला जाता है

अर्जुन वह से अपने कैल्लस मैं जाता है तभी अर्जुन को आस्था दिखाई देती है जो अभी किसी ख्यालों मैं खोई हुई होती है अर्जुन आस्था की मासूम चेहरे को देखते हुआ पीछे चला जाता है

ये किन ख्यालों मैं खोई है जो मेरे तरफ देखि भी नहीं ये तो मुझे देखते hi भागी चली आती है चलो अच्छा है इससे पीछा तो छूटा ..... अर्जुन सोचते हुआ बैठ जाता है

ये गुड़िया भी न कुछ भी करती रहती है बहुत सैतान हो गयी है क्या ज़रूरत थी पूजा को बताने की अब वह हर वक़्त मस्ती करती hi रहेगी .... आस्था मन मैं सोचती है

आस्था क्या हुआ तू घर नहीं जाएगी क्या सभी तो चले गए .... आस्था ख्यालों मैं खोई हुई होती है तो पास बैठी हुई लड़की कहती है तब आस्था ख्यालों से बहार आती है

क्या हुआ अभी तो कैल्लस भी नहीं लगा आवर तुम घर जाने की बात कर रही है ..... कैल्लस रूम मैं एक भी स्टूडेंस को न देख कर आस्था चौकते हुआ कहती है

अरे पागल टाइम देख कितना हो रहा है लांच का टाइम होने वाला है आवर कुछ देर पहले hi प्रिंसिपल सर आये थे सायद किसी बड़े नेता की मौत हो गयी है इस लिए अभी घर जाने को बोलै है .... वह लड़की कहती हुई रूम से निकल जाती है

आस्था भी अपना बैग लेकर घर की तरफ चल पड़ती है

अर्जुन गाँव मैं घूमते हुआ पंकज के दूकान पर पहुँच जाता है तो देखता है उसका दूकान बंद होता है

ये पंकज ने दूकान क्यू बंद किया है मेरे पास सिगरेट का पैकेट भी नहीं है अब क्या करूँ .... पंकज के दूकान के पास खड़ा होकर अर्जुन सोचता है

अर्जुन क्या हुआ यह क्या कर रहा है ....

अर्जुन सोच hi रहा होता है तभी पीछे से लड़की की आवाज़ आती है तो अर्जुन घूम कर देखता है तो गीता आवर अंजलि के साथ एक लड़की होती है

खड़ा नहीं दीदी घर hi जा रहा हुईं आप दोनों कहा जा रही है ..... अर्जुन पूछता है

होम दोनों इसके घर जा रही है इसकी बहन की आज हल्दी है तू भी चलेगा .... गीता से पहले अंजलि बोल पड़ती है

नहीं दीदी आप दोनों जाओ मैं घर जाता हुईं ..... अर्जुन कहता है

ोये छोटे कहा जा रहा है सुन यह

पास से जाते हुआ एक छोटे लड़के को बोलते हुआ गीता कहती है तो वह लड़का गीता के पास आ जाता है तो गीता उस लड़के को पैसे देते हुआ कुछ कहती है आवर चली जाती है जो लड़का भागते हुआ एक घर मैं चला जाता है

अर्जुन भी कुछ देर मैं वह से घर जाने लगता है अर्जुन अभी कुछ कदम hi चलता है के पीछे से वह लड़का पुकारते हुआ पास आ जाता है आवर सिगरेट का पैकेट अर्जुन के आगे कर देता है लड़के के हाथ मैं सिगरेट का पैकेट देख कर अर्जुन थोड़ा हैरान भी हो जाता है

अबे मैंने सिगरेट कब लेन को कहा ..... अर्जुन कहता है

भैया दीदी ने पैसे दिए है आवर उन्होंने ने hi सिगरेट लेकर आप को देने को कहा है .... लड़का बोलता है आवर वह से चला जाता है

इसका मतलब दीदी को पता चल गया है मैं सिगरेट पिता हुईं तो क्या दीदी को बुरा नहीं लगा ... अर्जुन सोचते हुआ वह से घर जाने लगता है

आँचल .......... आँचल ...... आँचल

अर्जुन जब घर मैं जाता है तो राखी देवी की आवाज़ सुनता है जो आँचल को पुकार रही होती है तो अर्जुन पहले आँचल के रूम मैं जाता है तो देखता है आँचल सो रही है तो अपनी माँ की रूम की तरफ जाने लगता है

नंन्तआह्ह्ह्हहईईईई hhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी नहीं बोलती हुई hhhhhhhhhhh कर के बैठ जाती है आवर दोनों हांथों से अपनी जिस्म को छुपाने लगती है

वही अर्जुन एक ज़िंदा लॉस की तरह वही खड़ा रह जाता है अर्जुन के जिस्म से सारा खून एक वक़्त के लिए सुख गया है आएसा लग रहा होता है

अर्जुन क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा होता है क्यू के सामने उसकी माँ सिर्फ पेटीकोट मैं बैठी हुई होती है आवर अपनी दोनों चुकी को हांथों से छिपा तो ली होती है मगर राखी देवी ाएसि बैठी हुई होती है की राखी देवी की पेटीकोट जांघ तक उठ चुकी होती है आवर राखी देवी की काली पेंटी मैं राखी देवी की छूट की छाप दिख रही होती है जिससे अर्जुन की हालत ख़राब हो रही होती न चाहते हुआ भी अर्जुन की नज़र अपनी माँ की छूट से नहीं हैट रही होती है

अर्जुन ..... अर्जुन

राखी देवी तो शर्म से लाल हो चुकी होतक है मगर अपनी जिस्म को छिपा कर जैसे hi अर्जुन की तरफ देखती है राखी देवी की जिस्म कैंप सी जाती है आवर राखी देवी जैसे hi अर्जुन की नज़र की पीछे करती है राखी देवी की शैशे एक वक़्त के लिए रुक सी जाती है मगर जल्द hi राखी देवी अपनी बड़ी सी मोलायम गांड ज़मीन पर रख देती है आवर दोनों पेअर सीधा लम्बा कर देती है ताकि छूट न दिखे उसके बाद अर्जुन को पुकारने लगती है

अर्जुन तो अपनी माँ की छूट की छाप hi देख कर खो गया होता है आवर ये भी भूल जाता है सामने उसकी माँ है जिसकी छूट की छाप इस तरह देख रहा होता है अर्जुन का लैंड भी जेन्स मैं खड़ा होने लगता है अर्जुन के माथे पर पसीने भी होने लगते है मगर अर्जुन के कानो मैं जैसे hi अपनी माँ की आवाज़ आती है अर्जुन हड़बड़ा कर घूम जाता है

सॉरी माँ मुझे नहीं पता था आप इस हालत मैं होंगी ..... बिना अपनी माँ को देखे hi अर्जुन बोलता है

अर्जुन के आवाज़ मैं एक नरमी सी होती है जैसे अर्जुन को अभी बहुत बुरा लग रहा हो

कोई बात नहीं बीटा मुझे इस तरह रूम से बहार नहीं आना चाहिए था .... राखी देवी शर्म भरी आवाज़ मैं बोलती है आवर उठ कर रूम की तरफ जाने लगती है

बीटा ज़रा रूम मैं देख आँचल है क्या .... रूम मैं जाती हुई राखी देवी कहती है

वह सो रही है कोई काम है तो बोलिये मैं कर देता हुईं .... अर्जुन बोलता है

राखी देवी रूम का गेट बंद कर के वही कड़ी हो जाती है आवर अर्जुन की आवाज़ सुन कर राखी देवी का जिस्म सिहर जाता है

बीटा कोई काम नहीं है बस आँचल को बोलै दे ..... राखी देवी फिर से बोलती है

लेकिन माँ वह सो रही है कुछ लाना है तो बोलिये मैं ला देता हुईं ...... अर्जुन कहता है

बीटा अब मैं तुझे कैसे बताओं मुझे क्या चाहिए क्यू के मुझे खुद नहीं पता वह कहा है आवर जिसे पता है वह सो रही है ..... राखी देवी मन मैं सोचती है

बीटा मैं मुझे पता है तू आँचल से कितना प्यार करता है मगर प्लेस उसे उठा कर मेरे पास भेज दे ..... राखी देवी कहती है

अर्जुन फिर कुछ नहीं कहता है आवर वह से फिर से आँचल के रूम मैं चला जाता है अर्जुन जब अपनी ममी माँ के रूम मैं जाता है तो अर्जुन को एक झटका लगता है आवर अर्जुन झट से घूम जाता है अर्जुन का दिल की धड़कन भी तेज़्ज़ हो जाती है

अर्जुन कुछ देर पहले hi अपनी माँ की जिस्म को देख कर हिल गया होता है जो अर्जुन के जिस्म मैं गर्मी हुई होती है आवर लैंड तो अभी भी खड़ा होता है मगर अभी अपनी ममी माँ को देख कर अर्जुन का लैंड आवर भी तन कर एक बार डांक मार देता है मगर अर्जुन घूम कर खुद को संत करने लगता है

ये माँ आयी कैसे सो रही है अभी तो ठीक से सो रही थी फिर इस तरह कैसे हो गयी क्या करूँ माँ को उठाऊं या नहीं ..... अर्जुन मन मैं सोचता है

वही आँचल बीएड पर चित होकर सो रही होती है आवर आँचल की साड़ी एक तरफ पड़ी हुई होती है आवर आँचल की दोनों चुकी पहाड़ की तरह कड़ी दिख रही होती है आवर बलाउज भी ाएसि होती है की आँचल की निप्पल उसमे खड़ा साफ पता चल रही होती है अभी अगर अर्जुन के जगह कोई दूसरा मर्द होता तो यकीनन वह आँचल की चुकी पर टूट पड़ता आवर आँचल की निप्पल को मुंह मैं लेकर चूसने लगता

अर्जुन कुछ देर खड़ा रहता है फिर घूम जाता है जो अर्जुन की नज़र फिर से अपनी ममी माँ की जिस्म पर पड़ता है जो अर्जुन झट से आँखें बंद कर लेता है

माँ ....... माँ ...... माँ अर्जुन को आवर कुछ नहीं सूझता है तो वही से माँ माँ माँ पुकारने लगता है मगर अपनी आँखे नहीं खोलता है

वही अर्जुन की आवाज़ सुन कर आँचल झट से उठ जाती है आवर बीएड से उठ कर अर्जुन के पास आ जाती है

क्या हुआ मेरा बच्चा क्या चला गया तेरे आआँख मैं दिख मुझे

आँचल उठते hi अर्जुन के पास चली जाती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी दोनों चुकी पर रखती हुई बोलती है

आँचल को अभी खुद की जिस्म की नहीं पड़ी होती है जो अभी सिर्फ बलाउज आवर पेटीकोट मैं होती है आवर आँचल की रेड पेंटी दिखाई दे रही होती है

आँचल को सिर्फ ये दिखाई देता है की अर्जुन आँख मैं कुछ चला गया है जो अर्जुन दर्द मैं उसे पुकार रहा है

माँ मुझे कुछ नहीं हुआ आप परेशान न हो मैं ठीक हुईं ...... अर्जुन अलग होते हुआ कहता है क्यू के आँचल की गर्म जिस्म से अर्जुन के जिस्म मैं गर्मी फिर से होने लगती है जो अर्जुन झट से अलग हो जाता है

अर्जुन बीटा दिखा मुझे क्या गया है तेरी आँख मैं तू अभी अपनी आँखे बंद किये हुआ खड़ा था ..... पास आकर अर्जुन का सर पकड़ती हुई आँचल कहती है

माँ मेरी आँख मैं कुछ गया नहीं है वह मैं आप की वजह से आखे बंद किया था अपनी हालत देखिये जल्दी से साड़ी पहनिए ..... अर्जुन कहता है

तू सच बोल रहा है न तेरी आँख मैं कुछ गया तो नहीं है न ....आँचल फिर से पूछती है

हआ माँ मैं सच बोल रहा हुईं .... अर्जुन कहता है

ठीक है फिर तू आँखे खोल सकता है .... आँचल कहती है

आँचल के कहते hi अर्जुन आँखे खोल देता है मगर जल्द hi बंद भी कर लेता है क्यू के आँचल अभी साड़ी बीएड से उठा रही होती है

अरे आँखे फिर बंद क्यू कर रहा है अब तूने देख तो लिया है मेरी नंगी पेट को फिर से देख ले इतना मत शर्मा तू मेरा बीटा है आवर बीटा तो अपनी माँ को इस हालत मैं दिन मैं कई बार देख लेते है क्यू के एक बीटा hi अपनी माँ की रूम मैं जब चाहे आ सकता है .... आँचल साड़ी पहनती हुई बोलती है

माँ मुझे नहीं देखना आवर जल्दी से जाइये आप की ननद कब से बोलै रही है ..... अर्जुन बोलता हुआ रूम से निकल जाता है

कितना शर्मीला है मेरा अर्जुन जो मुझे आधी नंगी भी नहीं देख सकता है .... आँचल मन मैं सोचती है

क्या हुआ दीदी अर्जुन ने कहा आप बोलै रही है ..... राखी देवी के गेट पर कड़ी होकत आँचल कहती है

hhhhhhhhhhhhhhhhhh दीदी

राखी देवी को जैसे hi आँचल की आवाज़ सुनाई देती है राखी देवी झट से गेट खोल कर आँचल को रूम मैं खिंच लेती है आवर आँचल की चुकी मसल देती है जो आँचल मस्ती आवर दर्द मैं सिसक पड़ती है

आँचल मेरी वह ब्रा कहा रख दिया है तूने बता नहीं तो तेरी चुकी को मसल कर रख दूंगी ..... राखी देवी कहती है

क्या हुआ जो इतनी गर्म हो रही हो आप की छूट को मेरी ऊँगली की याद तो नहीं आ रही मैं अभी दाल देती हुईं ...... आँचल अपनी आँखे मटकती हुई बोलती है

साली कामिनी तुझे तो बस वही नज़र आती है तेरी वजह से मुझे कितनी शर्म महसूस हो रही है जल्दी बता मेरी ब्रा कहा राखी है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी एक बार फिर आँचल की चुकी मसलते हुआ बोलती है जो आँचल इस बार भी दर्द आवर मस्ती मैं सिसक पड़ती है

ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी वह आप के बीएड के निचे है साडी ब्रा ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ..... आँचल दर्द मैं कहती है जो राखी देवी जल्दी से बीएड के पास जाती है आवर साड़ी को साइन से हटा कर ब्रा पहनने लगती है

शाम के 7 पं

अर्जुन अभी अपने बाथरूम के झरने के निचे बिलकुल नंगा दिवार के पास खड़ा होता है आवर अर्जुन लैंड तन कर दिवार मैं सत्ता हुआ होता है आवर अर्जुन अपने हाथों धीरे धीरे हिला रहा होता है

अर्जुन जब से अपनी माँ की छूट का छाप देखा होता है तब से उसका लैंड खड़ा होता है आवर रह रह कर अर्जुन के नज़र के सामने अपनी माँ की छूट का छाप नज़र आ रहा होता है जो अर्जुन का लैंड फिर से खड़ा हो जा रहा होता है जो अर्जुन परेशान होकर बाथरूम मैं नाहा रहा होता है मगर लैंड बैठने का नाम नहीं ले रहा होता है इस लिए अर्जुन लैंड को हिला रहा होता है ताकि उसे थोड़ी रहत मिले

अर्जुन लैंड को हिलने मैं बिजी होता है तभी उसका फ़ोन बजने लगता मगर अर्जुन फ़ोन नहीं उठता है मगर फ़ोन भी कई बार आने लगता है

तभी अर्जुन की नज़र फ़ोन के स्क्रीन पर पड़ता है जो उसकी गीता दीदी की होती है तो अर्जुन जाकर फ़ोन उठा लेता है

जयादा बात नहीं करुँगी तुझे अपनी दोनों बहन चाहिए तो मेरी बात मान आवर जो मैं पता भेज रही हुईं वह 1हर मैं आजा वर्ण तेरी दोनों बहन के साथ अच्छा नहीं होगा .... फ़ोन उठते hi उधर से एक लड़की की आवाज़ आती है

साली कुटिया रंडी मक कौन है तू आवर मेरी दोनों दीदी कहा है उनेह कुछ हुआ तो मैं तुझे छोड़ छोड़ के मार डालूंगा ..... अर्जुन गुस्से मैं बोलता है मगर उधर से फ़ोन काट चुकी होती है

अर्जुन बार बार उस no पर फ़ोन करता है मगर कोई फ़ोन नहीं उठता है तभी अर्जुन के फ़ोन पर एक मैसेज आता है जिसमे एक जगह का पता होता है अर्जुन झट से बाथरूम से गुस्से मैं निकल जाता है आवर जल्दी से कपडे पहन कर घर से भी निकल जाता है अर्जुन इतने गुस्से मैं होता है की घर से निकलते हुआ पीछे से आँचल के पुकारने से भी नहीं सुनता है

साली तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी दीदी को पकड़ने की .... अर्जुन बुदबुदाता है आवर बाइक को तेज़ी से चला देता है

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अपडेट.... 52

अर्जुन बाइक तेज़्ज़ चलते हुआ अपने गाओं से दूसरे गाओं मैं चला जाता है अर्जुन जब उस गाओं मैं जाता है तो देखता है एक घर के बहार एक लड़की कड़ी होती है आवर अर्जुन को देख कर मुस्कुराती है आवर घर के अंदर चली जाती है

अर्जुन अभी बहुत गुस्से मैं तो होता है मगर कुछ वक़्त के लिए अपने गुस्से को काबू कर लेता है क्यू के अर्जुन तो उस पते पर आ गया होता है मगर यकीन नहीं हुआ होता है के वह फ़ोन करने वाली लड़की वही है इस लिए अर्जुन पहले यकीन करने के लिए वही पर बाइक रोक कर फ़ोन निकल कर कॉल करने लगता है तभी अर्जुन के फ़ोन पर उस लड़की का फ़ोन आ जाती है तो अर्जुन फ़ोन उठा लेता है

तो तुम सही पते पर आ hi गए चलो अब जयादा मत सोचो आवर अंदर आ जाओ... फ़ोन उठाने पर वह लड़की बोलती है आवर कॉल काट हो जाती है

अर्जुन भी अब जयादा नहीं सोचता है आवर सामने घर के अंदर चला जाता है

अर्जुन जब घर के अंदर जाता है तो सामने वही लड़की दिखाई देती है जो कुछ देर पहले गेट पर दिखाई दी होती है तो अर्जुन गुस्से मैं उस लड़की की तरफ बढ़ता है

नहीं नहीं मेरे पास इतने गुस्से मैं आने की ज़रूरत नहीं है वर्ण तुम्हारी पेयरी दीदी के साथ कुछ बुरा हो जायेगा

अर्जुन आगे उस लड़की की तरफ बढ़ता उसके पहले hi वह लड़की एक तरफ इशारा करते हुआ बोलती है है तो अर्जुन उस लड़की की ऊँगली के इशारे की तरफ देख कर वही रुक जाता है

साली कुटिया तूने बिलकुल भी अच्छा नहीं किया मेरी दीदी के साथ आज रात मैं तेरे साथ वह करूँगा की तू जीवन भर ये रात भूल नहीं पायेगी.... अर्जुन सामने अपनी गीता दीदी की हालत को देख कर गुस्से मैं कहता है आवर उस लड़की के बिलकुल करीब चला जाता है आवर उस लड़की की गाला पकड़ने hi वाला होता है की वह लड़की अपनी साड़ी का पल्लू एक पल मैं निचे गिरा देती है जिससे उस लड़की की ब्रा मैं बड़ी बड़ी चुकी दिखने लगती है जो अर्जुन अपना हाथ वही रोक लेता है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह बेबी मैं भी तो वही चाहती हुईं आज की रात तुम मेरी इस जालिम जिस्म की साडी गर्मी निचोड़ कर निकल दो जो मैं हर दिन रात बस ये रात याद करती रहूं नहीं तो फिर अपनी दीदी की हालत देख hi रहे हो बस मुझे ये बटन दबाना है आवर तुम्हारी दीदी भगवन को पेयरी हो जाएगी बोल दबाड़ू क्या ..... वह लड़की हस्ती हुई बोलती है

नहीं रुकू रुकू तुम क्या चाहती हो बताओ मैं करने को तैयार हुईं बस वह बटन नहीं दबाना....

लड़की के हाथ मैं रिमोट देख कर अर्जुन का गुस्सा एकदम संत हो जाता है आवर अर्जुन उस लड़की से पूछता है

वही गीता दीदी एक रूम के गेट पर कुर्सी से बंधी हुई होती है आवर गीता दीदी के साइन पर एक बेम लटकी हुई होती है जिससे देख कर अर्जुन को अपने गुस्से का घुट पीना hi पड़ता है वही वह लड़की कुछ देर तक हस्ती hi रहती है

मैं कोई खुनी नहीं हुईं आवर नहीं इतनी बुरी हुईं के एक भाई से उसकी दीदी को छीन लू तो जयादा घबराओ नहीं अगर तुम मेरी बात मान लेते हो तो तुम सुबह अपनी दीदी को साथ लेकर जा सकते हो आवर कोई चालाकी नहीं करना नहीं तो अच्छा नहीं होगा सायद यह तुम अपनी दीदी को मुझसे बच्चा सकते हो लेकिन सुबह तक मैं किसी को फ़ोन नहीं किया तो तुम्हारी दूसरी दीदी के साथ इससे भी बुरा होगा जो तुम्हारे साथ तुम्हारी फॅमिली भी सहन नहीं कर पायेगी.... वह थोड़े गुस्से मैं मुंह बना कर कहती है

मैं आएसा कुछ नहीं करने वाला जिससे मेरी दीदियों के साथ बुरा हो तो बताओ मुझे क्या करना होगा...... अर्जुन गुस्से का घुट पीकर कहता है

ठीक है तो अब तुम सिर्फ मेरी बात मनो आवर अपनी दीदी के रूम के अंदर जाओ मैं कुछ देर मैं आती हुईं आवर कोई चालाकी नहीं आवर मैं जो करना चाहती हुईं बस करने देना... वह लड़की कहती है

लड़की की बात सुन कर अर्जुन अपनी गीता दीदी को पुकारते हुआ उसकी की तरफ भागता है मगर उससे पहले hi वह लड़की गीता दीदी की कुर्सी पकड़ लेती है

बेबी तुम चिंता न करो ये बिलकुल ठीक है बस मैंने इसे नींद की गोली दी है सुबह तक उठ जाएगी तो तुम बे फिकर होकर रूम मैं जाओ आवर मैं इसे दूसरे रूम मैं सुला कर आती हुईं नहीं तो कही पहले उठ गयी तो अच्छा नहीं होगा ..... वह लड़की एक कामिनी मुस्कान के साथ कहती है

ज़रा अपना फ़ोन मुझे देना मैं नहीं चाहती तुम

हाआआआआ हाआआआ

अर्जुन उस लड़की को देखता है आवर रूम मैं जाने लगता है तभी वह लड़की बोल पड़ती है आवर कामिनी मुस्कान से हसने लगती है तो अर्जुन फ़ोन भी उस लड़की को दे देता है

अर्जुन जैसे hi रूम मैं जाता है उस रूम के साथ घर की साडी लाइट ऑफ़ हो जाती है

बेबी डरना नहीं मैं नहीं मैं बस आती hi हुईं.... लाइट ऑफ़ होते hi अर्जुन का कानो मैं उस लड़की की आवाज़ सुनाई देती है

अर्जुन अँधेरे मैं hi उस रूम मैं जाकर बीएड पर बैठ जाता है

ये कुटिया है कौन आवर क्या करना चाहती है मेरे साथ मुझे आएसा लग रहा है मैंने कही पर इसे देखा है मगर मुझे याद नहीं आ रहा है

पहले मैं अपनी दीदियों को बचता हुईं फिर इस साली को बताऊंगा.... अर्जुन बीएड पर बैठा हुआ सोचता है

बेबी मैं आ गयी तुम दर तो नहीं रहे न

बेबी डरना तो मुझे चाहिए कैसे तुम्हारा नाग मेरी गुफा मैं जायेगा hhhhhhhhhh

बेबी अब मेरी प्यास भुजा दो सबर नहीं हो रही है उस लड़की की आवाज़ आती है आवर तभी अर्जुन के कंधे पर एक हाथ का अहसास होती है जिससे अर्जुन झट से उठ जाता है

देखों मैंने पहले hi कहा है तुम आज रात मेरा साथ दो वर्ण अच्छा नहीं होगा तो मैं जो कर रही हुईं करने दो..... वह लड़की थोड़ी गुस्से मैं कहती है जो अर्जुन वही पर खड़ा रह जाता है तो वह लड़की फिर से अर्जुन को पकड़ लेती है आवर गले लगा लेती है

बेबी प्यार से करना मैं अभी कच्ची काली हुईं

हाआआ हाआआ वह लड़की अर्जुन के कान मैं कहती है आवर हस्ती हुई अर्जुन को बीएड पर धक्का दे देती है जो अर्जुन बीएड पर गिर पड़ता है वही रूम मैं उस लड़की की हसी गुंजन जाती है

अर्जुन बीएड पर लेता hi रहता है तभी अर्जुन के जांघ पर हाथ फिर से महसूस होती है जो अर्जुन ऊपर की तरफ बढ़ना चाहता है मगर बढ़ नहीं पता है वह हाथ कुछ देर तक अर्जुन के जांघ पर रहता है फिर धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है जो अर्जुन के दिल मैं एक हलचल सी होने लगती है आवर अचानक अर्जुन के मुंह से एक आआअह्ह्ह्ह निकल जाता है

क्यू के उस लड़की का हाथ अभी अर्जुन के लैंड के ऊपर होती है आवर वह लड़की अर्जुन का लैंड पर ऊपर से hi अपनी हाथ फेर रही होती है जिससे अर्जुन के लम्बी आह्ह्ह्ह भर लेता है

अर्जुन अपना मुंह खोल कर सिसक hi रहा होता है तभी वह लड़की अर्जुन के सर पकड़ लेती है आवर अपनी मुंह अर्जुन के मुंह मैं रख कर अर्जुन का एक होंठ को चूसने लगती है

अचानक उस लड़की के इस तरह करने से अर्जुन का बैलेंस बिगड़ जाता है जिससे अर्जुन का दोनों हाथ उस लड़की के कमर पर चला जाता है जिससे अर्जुन झट स अपना हाथ उस लड़की के कमर से हटा भी लेता है

क्यू के उस लड़की के कमाए पर हाथ रखते hi अर्जुन के हाथ मैं एक जलन सी होती है जैसे अर्जुन का हाथ आग मैं चला गया हो जो अर्जुन झट से अपना हाथ हटा लेता है

sssssssssss hhhhhhhhhhhhhhh स्स्सस्स्स्स hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ये साली तो पूरी नंगी होकर आई है साली कुटिया बहुत गर्मी है न तेरी जिस्म मैं आज आएसा निकलूंगा की साडी ज़िंदगी याद करेगी तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी दीदी को जान से मरने के बारे मैं सोचने की..... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर फिर से अपना हाथ उस लड़की के कमर पर रख कर ज़ोर से मसल देता है जिससे वह लड़की सिसकते हुआ आहे ले लेती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपने साइन मैं दबा लेती है जिससे अर्जुन का मुंह उस लड़की की तानी हुई चुकी मैं डाब जाता है आवर अर्जुन उस फायदा उठा कर उस लड़की की चुकी को मुंह मैं लेकर निप्पल के किनारे पर दांत लगा देता है जिससे लड़की दर्द मैं आहे भर्ती हुई एक बार फिर से अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी चुकी मैं दबा लेती है मगर अर्जुन से कुछ बोलती नहीं है

चीख साली चीख साली पूरी रात इतनी चीखे निकलूंगा की हर वक़्त तुझे प्रस्ताव होगा की मेरी दीदियों को नुकसान पहुँचाने के बारे मैं सोची क्यू थी..... अर्जुन मन मैं सोचता है

अर्जुन उस लड़की की कमर पकड़ कर उठ जाता है आवर अपनी जगह पर उस लड़की को लेता देता है आवर बड़ी तेज़ी से अपने जिस्म से सरे कपडे निकल कर बीएड के निचे फेक देता है आवर झट से एक हाथ से लड़की की टाइट चुकी पकड़ कर मसल देते है

जिससे लड़की फिर से दर्द मैं सिसक पड़ती है आवर आहे भरते हुआ उठ कर बैठ आवर अर्जुन को पकड़ कर फिर से किश करने लगती है

ये साली तो कुछ जयादा hi गर्म लग रही है इतने ज़ोर से मसलने के बाद भी इतनी जोश से मुझे पकड़ रही है क्या ये सेक्स की गोली खा कर आई है...... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर अर्जुन भी उस लड़की की होंठ चूसने लगता है

दोनों कुछ देर तक एक दूसरे की होंठ को चूसते रहते है उस लड़की की होंठ चूसते हुआ अर्जुन को कुछ अलग hi मज़ा आता है जो अर्जुन उस लड़की के एक चुकी को प्यार से सहलाने लगता है ये भूल कर की इस लड़की को प्यार से नहीं तड़पते हुआ सेक्स करना है मगर उस लड़की की होंठ को चूसते हुआ अर्जुन कुछ देर के लिए भूल गया होता है

अचानक वह लड़की हिचक पड़ती है जिससे दोनों के होंठ अलग हो जाते है अलग होते hi वह लड़की लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है

वही हाल अर्जुन का भी होता है वह भी ज़ोर ज़ोर से सांसे लेने लगता है

ये क्या हो गया था मुझे मैं इसे इतने प्यार से कैसे किश करने लगा था........

आवर इसके किश मैं इतना खो गया के कुछ देर के बाद सायद ये तो डैम घुटने से मर भी जाती....

मुझे इस जान से नहीं मरना है

आवर ये भी तो अलग नहीं हो रही थी ये चाहती तो कब के मुझसे अलग हो जाती

ये साली कैसी सेक्स की गोली खा कर आई है hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh....... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर सिसक भी पड़ता है

अर्जुन के दिमाग मैं ये सब चल hi रहा होता है तभी उस लड़की का हाथ अपने लैंड पर पता है

वह लड़की अर्जुन का लैंड निचे से पूरी मुठ्ठी मैं पकड़ कर अपनी मुठ्ठी को बंधे हुआ ऊपर की तरफ करने लगती है ताकि अर्जुन का लैंड का लम्बी पता चल सके

उस लड़की के अपना लैंड मुठ्ठी मैं पकड़े हुआ महसूस कर के अर्जुन को एक अलग hi मज़ा आता है जो अर्जुन का एक हाथ अपने आप hi उस लड़की के जांघ पर चला जाता है जिससे लड़की की जिस कैंप सा जाता है आवर लड़की का कांपना अर्जुन भी महसूस कर लेता है

अर्जुन अपना हाथ धीरे धीरे जांघ से होते हुआ उस लड़की की छूट की तरफ ले जाने लगता है जिससे वह लड़की अर्जुन का लैंड छोड़ देती है आवर खुद को पीछे ले जाने लगती है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बबबबबहहहहहाआईईई

उस लड़की की आवाज़ सुन कर अर्जुन बीएड से उतर जाता है
 
अपडेट.... 53

रूम मैं एक सन्ति सी छै हुई होती है

वही अर्जुन की तो हालत hi ख़राब हो चुकी होती है अर्जुन का जिस्म भी ठंडा सा पद गया होता है अर्जुन बीएड के बगल मैं खड़ा होकर भगवन को याद करने लगता है आवर मिन्नतें करने लगता है के अभी जो आवाज़ सुना है वह आवाज़ वाली लड़की न हो अर्जुन कुछ देर तक खड़ा रहता है आवर फिर बीएड के किनारे बैठ जाता है

गई गीता दी ककककया आए आप हो ...... अर्जुन कुछ देर के बाद हिचकते हुआ बोलता है.... क्यू के अर्जुन उस आवाज़ को अच्छी तरह से पहचान गया होता है मगर अर्जुन को अभी भी यकीन नहीं हो रहा होता है की ये लड़की उसकी गीता दीदी हो सकती है

अर्जुन के बोलने पर भी वह लड़की कुछ भी नहीं बोलती है बस उस लड़की की शैशे तेज़्ज़ चलने की आवाज़े आती है जिससे अर्जुन के दिल की धड़कन बढ़ने लगती है आवर अर्जुन फिर से बीएड से उतर जाता है आवर अँधेरे मैं hi उस बीएड से चादर खिंच कर अपने जिस्म पर लपेट लेता है

गीता दीदी क्या आप हो भगवन के लिए बोल दीजिये ...... आप आएसा कैसे कर सकती है अपने hi छोटे भाई के साथ...... लड़की के कुछ न बोलने पर अर्जुन को यकीन होने लगता है के वह उसकी गीता दीदी hi है

अर्जुन बोलता है आवर गुस्से मैं गेट के पास पहुँच कर गेट खोलने लगता है तभी उस रूम की लाइट जल जाती है

सीईइताल नाआआआहि लाइट जलते hi उस रूम मैं एक आवाज़ गूंज जाती है मगर अब देर हो चुकी होती है क्यू के लाइट जल चुकी होती है आवर लाइट जलते hi अर्जुन गेट खोलते खोलते रुक जाता है आवर अर्जुन पलट कर बीएड की तरफ देख कर अपनी आँखे बंद कर लेता है

अर्जुन अपनी आँखे खोल आवर देख अपनी दीदी की तरफ

देख कितनी तड़प रही है तेरे प्यार के लिए

तू इतना क्यू तड़पा रहा है अपनी दीदी को

क्या तू अपनी दीदी से प्यार नहीं करता है..... अर्जुन के कानो मैं उसी लड़की की आवाज़ आती है

उस लड़की की आवाज़ सुन कर अर्जुन का खून hi गरम हो जाता है आवर अर्जुन अपनी आँखे खोल कर सामने कड़ी उस लड़की का गाला पकड़ लेता है

साली रंडी कुटिया मैं तुझे जान से मर दूंगा

तूने hi मेरी दीदी को ये घटिया काम करने के लिए मज़बूर किया है न..... अर्जुन बोलते हुआ उस लड़की की गाला दबाने लगता है जिससे कुछ सेक् मैं hi उस लड़की की आँखे लाल होने लगती है आवर उस लड़की की जिस्म कपङे लगती है जैसे उस लड़की की अब शैशे बंद होने वाली है

वही गीता जल्दी से टेबल पर पड़े टावल उठा कर जिस्म पर डालती हुई अर्जुन के पास भगति है

अर्जुन भगवन के लिए सीतल को छोड़ दे वह मर जाएगी उसने मुझे मज़बूर नहीं किया है

जो भी किया है मैंने खुद किया है

मैंने hi सीतल को ये सब करने के लिए कहा है

प्लीज भाई सीतल को छोड़ दे वह मर जाएगी ..... अर्जुन के पीछे कड़ी होकर गीता बोलती है गीता की आवाज़ मैं एक दर्द भरी हुई होती है

अपनी गीता दीदी की बाते सुन कर अर्जुन को एक ज़ोर का झटका लगता है जिससे अर्जुन का हाथ खुद hi उस लड़की सीतल के गले से हैट जाता है आवर अर्जुन पलट कर अपनी गीता दीदी को देखते हुआ पीछे की तरफ हटते हुआ दिवार मैं सात जाता है

वही वह लड़की सीतल भी अपनी गाला पकड़ कर खस्ने लगती है

रूम मैं कुछ देर तक सन्ति सी छै हुई होती है

गीता दीदी बीएड पर नंगी बैठी हुई होती है बस एक टावल मैं जो गीता दीदी की मोती मोती जांघ अर्जुन के आँखों के सामने दिखाई दे रही होती है मगर गीता दीदी की नज़रे शर्म के मरे निचे hi होती है गीता दीदी की हिम्मत नहीं हो रही होती है के वह अर्जुन के तरफ देखे

वही अर्जुन दिवार से सत्ता हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं बस गीता दीदी की एहि बाते चल रही होती है

सीतल ने जो भी किया वह सब मेरे कहने पर किया

जिससे अर्जुन को अभी भी यकीन नहीं हो रहा होता है

अर्जुन यकीन करे भी तो कैसे.... क्यू के उसकी गीता दीदी कभी उसके साथ बात करते हुआ गन्दा सबद भी नहीं बोलती थी आवर वह अर्जुन के सामने कभी बिना दुप्पटे या ाएसि हालत मैं नहीं होती थी के अर्जुन अपनी गीता दीदी की जिस्म को घर सके मगर आज वह अर्जुन के सामने ाएसि बात बोल गयी थी जिससे अर्जुन को अभी भी यकीन नहीं कर पा रहा होता है

अर्जुन मुझे मनाफ़ कर दे... मैंने जो भी किया वह गीता के कहने पर किया

अर्जुन मैं ये नहीं करना चाहती थी मगर गीता की तड़प देख कर मुझे करना पड़ा

जब गीता मुझे बताया के वह लड़का तुम हो तो मैं खुद hi हैरान हो गयी आवर मुझे बहुत गुस्सा भी आया ये सोच कर के कोई बहन अपने hi भाई के साथ समभंद कैसे बना सकती है मैं उसी वक़्त मन कर दिया था मगर मेरे मन करते hi गीता की चेहरे पर मायूसी के साथ आँखों मैं आंसू भी आ गए थे तब मुझे पता चला वह तुझसे प्यार करती है जो तेरे बिना अकेली नहीं रह सकती है इस लिए मैंने ये सब किया

अर्जुन मैं ये नहीं कहती के तुम अपनी दीदी के साथ समभंद बनाओ तुम्हारे जो दिल करे तुम वही करना मगर इतना याद रखना अगर आज तुमने अपनी प्यारी दीदी को नहीं संभाला तो आगे चल कर तुम छह कर भी नहीं संभल सकते हो.... क्यू के जो इंसान जिस चीज की तमन्ना कर लेता है आवर वह चीज उसे नहीं मिलता है तो उस इंसान को बहुत बुरा महसूस होता है मगर जिस चीज की तुम्हारी दीदी ने तमन्ना किया है वह कोई चीज नहीं तुम हो आवर तुम उसे नहीं मिले तो वह टूट जाएगी

अर्जुन जो मुझे कहना था मैंने बोल दिया जो तुमेह ठीक लगे वही करो

अर्जुन मुझे पता है तुम अपनी फॅमिली से कितना प्यार करते आवर आवर खास कर अपनी दोनों बहनो से तो मुझे यकीन है तुम अपनी दीदी को टूटने नहीं डोज..... सीतल अर्जुन से बोलती है आवर रूम से निकल जाती है

सीतल को बोलते हुआ अर्जुन बस सुनता रहता है मगर कुछ बोलता नहीं है आवर नहीं अपनी नज़र उठा कर सीतल की तरफ देखता है लेकिन सीतल के रूम से जाने के कुछ देर बाद अर्जुन अपनी नज़र उठा कर अपनी गीता दीदी की तरफ देखता है जो उसकी गीता दीदी कभी अर्जुन को देखती है तो कभी अपनी नज़र निचे कर रही होती है जिससे अर्जुन को यकीन होने लगता है के सीतल ने जो कहा वह सच है उसकी गीता दीदी सच मैं मुझे प्यार करती है आवर ये सोच कर अर्जुन के चेहरे से शर्म हैट कर गुस्सा आने लगता है

ये उस औरत की वजह से हो रहा है जब माँ hi अपने भाई के साथ सम्भन्ध बना सकती है तो उसकी बेटी कैसे पीछे रह सकती है आखिर है तो उसी की खून न...... अर्जुन मन मैं सोचता है

दीदी आप को शर्म नहीं आती जो ये गन्दा काम कर रही थी अपने hi छोटे भाई के साथ

आप ने ज़रा भी नहीं सोचा जब मुझे पता चलेगा तो क्या होगा

आप आएसा कैसे कर सकती है

दीदी आप को सेक्स hi करना है तो बताइये मैं ममी माँ से बात करूँगा..... ममी माँ उस औरत से बात कर लेंगी आवर आप की जल्द hi शादी हो जाएगी....... अर्जुन अपने गुस्से का घुट पिटे हुआ कहता है क्यू के अर्जुन अपनी दोनों बहनो से बहुत प्यार करता है आवर इतना कुछ होने के बाद भी अर्जुन को अपनी गीता दीदी पर नहीं अपनी माँ पर गुस्सा हो रहा होता है

भाई मुझे अभी शादी नहीं करनी है..... गीता अपनी नज़र निचे किये हुआ hi बहुत hi धीरे से बोलती है जो अर्जुन सुन लेता है

दीदी मैं जनता हुईं इस उम्र मैं ये मामूली बात है आप को शादी नहीं करना है तो आप किसी अच्छे लड़के को बॉयफ्रेंड बना सकती है..... अर्जुन प्यार से बोलता है

भाई मुझे कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाना है मुझे किसी लड़के पर भरोषा नहीं वह कब मुझे धोक्का दे देगा नहीं पता आवर ये बात घर पर पता चलेगा तो माँ कितनी दुखी हो जाएगी..... गीता फिर धीरे से जवाब देती है

तो क्या उस घटिया औरत की तरह तुम भी अपने भाई के साथ सोना चाहती हो.... आवर वह क्यू दुखी होगी वह खुद एक बेसरम औरत है उसकी जैस माँ किसी लड़के को न मिले.... पता नहीं मेरे खून मैं किसी खून दौर रहा है मेरे बाप का ये उस घटिया भाई

छताछकक्क

जैसे hi अर्जुन अपनी गीता दीदी की मुंह से अपनी माँ का नाम सुनता है अर्जुन को फिर से गुस्सा आ जाता आवर आवर अर्जुन गुस्से मैं बोलने लगता है .......अर्जुन आगे कुछ बोलता उसके पहले hi गीता बीएड से उतर कर अर्जुन के पास कर एक ज़ोर का तप्पड़ मार देती है

माँ के खिलाफ मैं आवर कुछ नहीं सुन्ना चाहती हुईं

हां ये सच है मैं अपने छोटे भाई के साथ सोना चाहती हुईं आवर मुझे इसमें शर्म नहीं आई मुझे नहीं पता ये कैसे हो गया मगर मैं तुझसे बहुत प्यार करती हुईं

मेरे दिलों दिमाग पाए बस तू hi छाया हुआ है मैं जब आँखे बन करती हुईं तो बस तेरे hi बारे मैं सोचती हुईं

हां मैं तेरे साथ सोना चाहती हुईं

तुझे क्या पता मैं तेरे लिए कितनी तदपि हुईं तू तो बचपन मैं hi मुझे छोड़ कर चला गया था

तुझे हम दोनों बहनो का ज़रा भी ख्याल नहीं आया उस वक़्त तो हम दोनों अपने छोटे भाई के प्यार के लिए रोटी थी मगर ये छोटे भाई का प्यार की तड़प बढ़ते बढ़ते का पति के प्यार मैं बदल गया मुझे नहीं पता मैं

तेरे बिना नहीं जिह सकती हुईं

मैं ये भी जानती हुईं मुझे ये प्यार कभी नहीं मिलने वाली है इस लिए मैं आएसा कर के तेरा प्यार पाना चाहती थी मगर मेरी किस्मत मैं तेरा प्यार hi नहीं है

मगर कोई गम नहीं मुझे थोड़ा सा hi तेरे प्यार का अहसास मिल गया है

अब मुझे जब भी तेरी तड़प सताएगी मैं इस रात को याद कर लुंगी जो मुझे सकूँ देगा

अब जीवन भर जीने के लिए मुझे थोड़ा सा प्यार कभी है

आवर ये सच है भाई

मैं तू आवर गुड़िया अपने पापा के बच्चे है

भगवान् के लिए ये गन्दा इल्जाम माँ पर मत लगाना....... गीता रोटी हुई अपनी दिल की साडी भड़ास बोलती हुई निकल देती

भाई घर जा ममी माँ की कब से फ़ोन आ रहा है परेशान हो रही है तेरे लिए...... गीता सीतल से फ़ोन लेकर अर्जुन को देती हुई बोलती है आवर रूम से निकल जाती है अर्जुन को उस रूम मैं अकेला छोड़ कर

गीता अपनी दिल की साडी बाते तो उसे बता दी क्या अर्जुन तेरा प्यार काबुल करेगा..... दूसरे रूम मैं बैठी हुई सीतल बोलती है

मेरा प्यार अर्जुन कभी काबुल नहीं करेगा लेकिन मैं भी उसकी बहन हुईं साडी जिन्दी उसकी तड़प मैं निकल दूंगी

सीतल मैं ये सोच लुंगी भगवन ने मुझे इतना प्यारा जिस्म बस तड़पने के लिए दिया है..... गीता अपनी आँखों से आंसू की बून्द पोछते हुआ बोलती है

क्या बात कर रही है साली ये इतनी कातिल जवानी बर्बाद इस जिस्म के लिए तो मैं जीवन भर शादी नहीं करुँगी आवर तेरी इस राश भरी चुकी को पीती रह जाउंगी

गीता तेरी जिस्म को देख कर जब मुझे कुछ हो रहा है तो सोच अर्जुन का तो लैंड बैठ hi नहीं रहा होगा मुझे तो लगता है आज मेरे घर मैं तेरी चीखे निकलने वाली है..... आवर तेरी इस छूट से खून

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भाआईईई

गीता गुस्से मैं बीएड से सिर्फ ब्रा आवर पेंटी मैं hi अर्जुन के पास आ गयी होती है आवर अर्जुन से बोल वैसे hi दूसरे रूम मैं सीतल के साथ आ गयी होती है आवर बीएड पर बैठी हुई होती है जिससे गीता की छूट की छाप पेंटी मैं दिख रही होती है जो बाते करती हुई सीतल की जब नज़र पड़ती है तो सीतल मस्ती मैं गीता की छूट पकड़ कर मसल देती है जो गीता मस्ती आवर दर्द मैं अर्जुन को पुकार देती है

गीता diiiiiiiiii ये क्या किया

गीता इतनी ज़ोर से चीखती है की उसकी आवाज़ दूसरे रूम मैं अर्जुन को सुनाई देती है जो अर्जुन अपनी गीता दीदी की चीख सुन कर भागता हुआ आ जाता है आवर डीई कर के पुकारता हुआ गीता के पास आ जाता है आवर छूट को पकड़ी हुई अपनी गीता दीदी का हाथ हटा देता है जिससे अर्जुन का मुंह खुला का खुला रह जाता है

वही गीता की चीख सुन कर एक वक़्त के लिए सीतल भी दर कर हसना बंद कर देती है

वही गीता की आँखों मैं फिर से आंसू आ गए होते है आवर गीता अपनी दोनों हांथो से छूट पकड़ी हुई होती है मगर चेहरे पर दर्द साफ पता चल रही होती है जिससे रूम मैं आने के बाद अर्जुन देख कर थोड़ा दर जाता है ये सोच कर के कही उसकज गीता दीदी हाथ तो नहीं काट दी इस लिए अर्जुन गीता का हाथ देखने के लिए गीता का हाथ छूट के ऊपर से हटाता है जिससे अर्जुन की नज़र गीता की छूट के ऊपर टिक जाती है

रूम मैं कुछ देर तक सन्ति सी छै हुई होती है

अर्जुन अभी तो गीता ने कुछ नहीं किया मगर इसे तेरा प्यार नहीं मिला तो आगे कुछ भी कर सकती है मेरी बात मान आवर गीता का प्यार काबुल करले क्यू आवर तड़पा रहा है इस बेचारी को देख इसकी ये भरपूर जवानी जो ये बर्बाद करना चाहती है

अर्जुन इस जवानी को बर्बाद मत होने दे आवर आज hi इसे मास

सीतल आगे कुछ बोलती उससे पहले hi गीता आगे कुछ बोलने का इसारे से मन कर देती है

सीतल आवर कुछ नहीं बोलती है आवर रूम से चली जाती है

क्या देख रहा है ये सिर्फ तेरा है इसमें सिर्फ तेरा hi कुछ जा सकता है आवर किसी का नहीं

प्लीज भाई मुझे अपना बना ले मिटा दे मेरी तड़प प्लीज

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

diiiiiiiiiiii

बोलती हुई गीता अर्जुन का हाथ अपनी छूट पर रख देती है आवर खुद hi सिसक पड़ती है जो अर्जुन उठ कर पीछे की तरफ हो जाता है आवर गीता को देखने लगता है

वही गीता अर्जुन को देखती हुई बीएड से उतर जाती है आवर अर्जुन के आँखों मैं देखती हुई अर्जुन के करीब चली जाती है आवर अर्जुन के करीब जाकर अपनी बड़ी बड़ी चुकी अर्जुन के साइन मैं सत्ता कर अर्जुन का सर दोनों हाथ से पकड़ लेती है आवर अपना मुंह अर्जुन के मुंह के पास कर देती है

अब हालत ये होती है की अर्जुन का लैंड आवर उसकी गीता दीदी की छूट आमने सामने होती है बस गीता की छूट पेंटी मैं होती है आवर अर्जुन का लैंड जेन्स के अंदर होता है जो अर्जुन का सेर गीता के छोटी गुफा मैं नहीं जा पता

वर्ण अभी दोनों नंगे होते तो यकीनन अर्जुन का सेर गीता की छोटी गुफा मैं चला जाता

अर्जुन आवर गीता की लम्बाई लगभग बराबर hi होती जो इस वक़्त दोनों की मुंह भी एक दूसरे के सामने होती है आवर दोनों भाई बहन एक दूसरे की आँखों मैं देख रहे होते है

गीता अर्जुन के आँखों मैं देखती हुई अपनी आँखे बंद कर लेती है आवर अपनी होंठ अर्जुन के होठ पर रख देती है

sssssssssssssssssssssssssssssssssss

गीता जैसे hi अपनी होंठ अर्जुन के होंठ पर रखती है तभी अर्जुन का एक हाथ गीता के कमर पर पड़ता है जिससे गीता सिसकती हुई आँखे खोल देती है आवर अर्जुन की आँखों मैं फिर से देखने लगती है

हे भगवन क्या मैं गलत करने जा रहा हुईं मैं नहीं जनता ये गलत होगा या सही मगर मैं अपनी गीता दीदी को इस तरह नहीं छोड़ सकता हुईं भगवन जी मुझे मांफ कर देना....... अपनी गीता दीदी की आँखों मैं देखते हुआ अर्जुन मन मैं सोचता है

वही अपने भाई की मासूम चेहरे को देख कर गीता को इतना प्यार आता है की गीता एक बार फिर से अपनी होंठ अर्जुन के होंठ पर रख देती है आवर अर्जुन का निचे वाला होंठ को अपनी होंठ मैं लेकर चूसने लगती है गीता की जल रही गर्म जिस्म की आग जब अर्जुन की जिस्म से टकराती है तो अर्जुन के जिस्म मैं हलचल सी हो जाती है जिससे अर्जुन अपनी गीता दीदी की कमर दोनों हांथों से पाकर लेता है जिससे गीता की दोनों टाइट चुकी का निप्पा अर्जुन के साइन मैं डाब जाता है

ये दोनों बपनी लाइफ की पहली किश कर रहे होते जो दोनों hi किश नहीं किये हुआ होते है इस लिए कभी गीता अर्जुन की होंठ चूस रही होती है तो कभी अर्जुन गीता की होंठ चूस रहा होता है किश करते हुआ अर्जुन गीता की कमर पकड़ कर उठा लेता है जो गीता भी अपने दोनों पेअर से अर्जुन के कमर पकड़ लेती है किश करते हुआ गीता अर्जुन के सरत का बटन खोल कर अर्जुन के साइन पर अपना एक हाथ फेरने लगती है

अर्जुन किश करते हुआ बीएड की तरफ चलने लगता है आवर किश करते हुआ hi अपनी गीता दीदी को बीएड पर बैठा देता है आवर खुद बीएड के निचे ज़मीन पर बैठ कर किश करता रहता है दोनों को किश करते हुआ 2 से 3 मिनट हो गए होते है मगर दोनों मैं कोई किश करना नहीं छोड़ रहे होते है बाद एक दूसरे की कभी होंठ तो कभी एक दूसरे की जीभ चूस रहे होते है

ssssssssssssssss

अचानक गीता सिसकते हुआ बीएड पर लेट जाती है आवर अर्जुन की आँखों मैं देखते हुआ हेफनर लगती है जो गीता की दो पहाड़ की छोटी की तरह कड़ी दोनों चुकी ऊपर से निचे होने लगता है

गीता मदहोश भरी आँखों से बस एक तक अर्जुन को देख रही होती है जैसे गीता की आँखे बता रही हो की बहुत मीठा अहसास हुआ है आवर इससे भी मीठा अहसास दे दो

गीता की जिस्म मैं अभी इतनी गर्मी होती है की गीता की जिस्म पसीने से भींग चुकी होती है आवर वह पसीना बून्द बन कर पेट से होते हुआ छूट की तरफ बाह रहे होते है आवर तभी उस रूम मैं एक बार फिर गीता की सिसकियाँ निकल जाती है

दरअसल अर्जुन भी अपनी गीता दीदी की आँखों मैं देखने लगता है आवर तभी अर्जुन की नज़र गीता दीदी की पेट पर बाह रही पसीने पे नज़र जाती है अर्जुन कुछ समय उस बाह रहे पसीने को देखता है आवर फिर पता नहीं अर्जुन के दिमाग मैं क्या आता है जो अर्जुन तेज़ी से अपना एक हाथ गीता दीदी की पेट की तरफ करता है जिससे उसकी गीता दीदी भी अपना एक हाथ बढ़ा कर अर्जुन का हाथ पकड़ने लगती है जिससे अर्जुन भी अपना हाथ हटाने लगता है तभी अर्जुन का बैलेंस बिगड़ जाता है आवर अर्जुन का हाथ सीधे गीता की छूट पर चला जाता है जिससे गीता सिसक पड़ती है

अर्जुन का हाथ अपनी छूट के ऊपर पाकर अभी गीता को मीठा मीठा अहसास तो हो रही होती है मगर उससे भी कही जयादा अभी गीता को शर्म आ रही होती है जिससे गीता अपनी आँखे बंद की होती है मगर गीता की जिस्म रह रह कर कैंप रही होती है

बाबू प्लीज लाइट बंद करदे मुझसे आवर बर्दास्त नहीं हो रही है .... गीता आँखे बंद किये हुआ hi मदहोशी मैं बोलती है

ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या है कितनी जल रही है दीदी की.... अर्जुन अपनी गीता दीदी की छूट को देखते हुआ सोचता है आवर फिर अर्जुन की नज़र अपनी गीता दीदी की चेहरे की तरफ जाती है जो उसकी गीता दीदी अपनी आँखे बंद की होती है

अर्जुन आवर मत तड़पा अपनी दीदी को देख कितनी जल रही है तेरी दीदी सेक्स की आग मैं चल जल्दी से लाइट बंद कर आवर अपने सेर को इस जलती हुई गुफा मैं दाल कर ठंडा करदे अर्जुन के मन से आवाज़ आती है

अर्जुन कुछ देर तक अपनी दीदी की मासूम चेहरे को देखता है फिर जाकर लाइट बंद करने लगता है तभी अर्जुन की नज़र गेट की तरफ नज़र जाती है आवर एक परछाई दिखाई देती तो अर्जुन गेट की तरफ जाने लगता जो वह परछाई वह से हैट जाती है मगर अर्जुन तो समझ जाता है वह परछाई किसकी है फिर अर्जुन गेट भी बंद कर देता है आवर फिर लाइट बंद कर के फिर से अपनी गीता दीदी की तरफ बढ़ जाता है

बाबू कुछ देर मैं सुबह होने वाली है देख ममी माँ अभी भी फ़ोन कर रही है.... अर्जुन के कानो मैं उसकी गीता दीदी की आवाज़ आती है जो अर्जुन भी समझ जाता है उसकी गीता दीदी जल्दी से लैंड मांग रही है तो अर्जुन भी अपना सारा कपडा निकल देता है आवर सारा कपडा निकलते hi अर्जुन का लैंड कैद से आजाद होकर फुफकार मरने लगता है जो न जाने कब से जेन्स के अंदर कैद मचल रहा होता है लैंड बहार आटे hi अर्जुन भी एक रहत भरी शंश लेता है

अर्जुन अपनी गीता दीदी की ख़ुशी के लिए सेक्स करने के लिए मान तो गया होता है मगर अर्जुन को बहुत शर्म महसूस हो रही होती है मगर लाइट बंद होने से अर्जुन को कुछ अच्छा महसूस होता है आवर तभी अर्जुन की नज़र अपनी गीता दीदी की छूट पर जाती है क्यू की गीता फ़ोन की लाइट जला कर अर्जुन की तरफ बढ़ा रही होती है जो गीता की छूट पर भी चली जाती है मगर गीता जल्द hi घुमा भी देती है जो अर्जुन फ़ोन ले लेता है

दीदी क्या आप ने पहले भी इसमें कुछ डाला है.... अर्जुन बीएड पर आते हुआ पूछता है आवर फ़ोन की लाइट से अपनी गीता दीदी की छूट देखने लगता है जो पेंटी मैं उसकी गीता की छूट दिख रही होती है

कुछ नहीं बाबू.... गीता बहुत धीरे से बोलती है

दीदी आप को बहुत दर्द होगा

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन बोलते हुआ अपनी गीता दीदी की छूट के ऊपर से पेंटी को पकड़ कर निचे कर देता है जिससे उसकी गीता दीदी अपनी गांड उठा कर सिसकने लगती है

बाबू मैं हर दर्द सह लुंगी बस जल्दी करो बाबू ये उस पर लगा लो ..... गीता सिसकते हुआ hi बोलती है आवर एक डब्बा अर्जुन के हाथ मैं दे देती है जो तेल्ल की होती है

गीता की बात सुन कर अर्जुन समझ जाता है अभी उसकी दीदी सेक्स की आग मैं जल रही है तो अर्जुन आवर कुछ नहीं बोलता है उस डब्बे से तेल्ल निकल कर अपने लैंड पर बहुत सारा लगता है आवर कुछ तेल्ल अपनी गीता दीदी की छूट पर भी गिरा देता है जिससे गीता सिसकते हुआ अपनी पेअर मोड़ने लगती है फिर अर्जुन अपने लैंड को पकड़ कर अपनी गीता दीदी की छूट के पास कर देता है आवर डालने लगता है तभी उसकी गीता अर्जुन के पेट पर हाथ रख देती है

बाबू एक बार मैं मत डालना...... गीता बड़े hi प्यार से बोलती है जो उस आवाज़ मैं थोड़ा दर थोड़ा शर्म सी होती है

जी डीई..... अर्जुन बस इतना बोलता है

अर्जुन पहले अपनी गीता दीदी की पेंटी छूट से निचे करता है जिसमे गीता भी अपनी गांड उठा देती है ताकि पेंटी निचे हो जाये

पेंटी निचे करने के बाद अर्जुन एक हाथ मैं फ़ोन लेकर उसकी लाइट छूट पर करता है आवर एक हाथ से लैंड पकड़ कर छूट के पास कर देता है आवर लैंड को छूट के अंदर डालने लगता है

hhhhhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssss लैंड आवर छूट की मिलान होती hi है की गीता सिसकियाँ लेने लगती है

अर्जुन जयादा मत सोच तेरी दीदी तुझसे अपनी छूट छोड़ना तो चाहती है मगर तेरे लैंड से दर रही है जो अपनी टाच होने से hi सिसकने लगी है तू चाहता है तेरी दीदी को जयादा दर्द न हो तो आयी hi कुछ देर रुक आवर एक hi बार मैं जितना हो सके लैंड अंदर दाल दे ताकि तेरी को जयादा दर्द न हो..... अर्जुन के मन से आवाज़ आती है

अर्जुन को अपने मन की आवाज़ सही लगता है इस लिए अर्जुन फ़ोन को निचे रख कर एक हाथ से अपने लैंड को पकड़ लेता है आवर एक हाथ से अपनी गीता दीदी की कमर पकड़ लेता है आवर एक तेज़्ज़ झटका मरते हुआ कमर को अपने लैंड की तरफ कर देता है

hhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa hhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhh उउउउउम्माह

उस रूम मैं गीता की दर्द भरी आवाज़े गूंजने लगती है तभी अर्जुन अपना होंठ गीता के होंठ पर रख देता है आवर किश करने लगता है

अर्जुन कुछ देर तक अपनी गीता दीदी को किश करने लगता है तभी अर्जुन को महसूस होता है के उसकी गीता दीदी अपनी गांड हिला रही है तो अर्जुन समझ जाता है के सायद अभी उसकी दीदी को दर्द नहीं हो रहा है तो किश तोड़े देता है

दीदी जयादा दर्द तो नहीं हो रहा है.... अर्जुन पूछता है

बाबू प्लीज आवर अंदर नहीं इतने पे मुझे प्यार करो..... गीता रोनी सी आवाज़ मैं कहती है तो अर्जुन ठीक है बोल कर अपना लैंड धीरे धीरे हिलने लगता है जिससे गीता रह रह कर सिसक रही होती है

अर्जुन कुछ देर तक धीरे धीरे धक्का मरता है जो गीता की छूट टाइट होने से अर्जुन का लैंड भी दर्द करने लगता है तो अर्जुन थोड़ा ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है

स्स्स्सस्स्स्स बाबू ाःह उउउउउउउउउ हहहहह hhhhhhhhhhh बाबूउउउ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बबआबू ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आवर तेज़्ज़ज़ नाहा ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह. माआ आआआआआ हहहह हहज sssssssssssssss ssssssssssss hhhhhhhhhh sssssssssssssssssss hhhhhhhhhhhh मेरी छूट बाबू ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अर्जुन धीरे धीरे धक्का मरते हुआ अचानक तेज़्ज़ तेज़्ज़ मरने लगता है जिससे गीता ज़ोर ज़ोर से सिसकते हुआ चीखने लगती है मगर अर्जुन को रोकने के लिए नहीं बोलती है

hhhhhhhhhh बाअबूउ hhhhhhhhhh बाबू hhhhhhhhhhhh मेरी चहहहहः hhhhhhhhhhh baaaaaaaaaabuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu

गीता अर्जुन का तेज़्ज़ धक्के से जयादा देर तक नहीं सह पति है आवर अपनी गर्म छूट से गर्म पानी निकल देती है

गीता के झरने के बाद भी अर्जुन धक्का मरते hi रहे है मगर अर्जुन भी अपनी गीता दीदी की टाइट छूट की गर्मी के आगे जयादा देर तक नहीं टिक पता है आवर कुछ hi देर मैं aaaaaaaaaaaaa करते हुआ अपनी गीता दीदी के ऊपर गिर जाता है

अर्जुन को अपने ऊपर पाकर गीता दर्द मैं भी मुस्कुरा देती है आवर अपना हाथ अर्जुन के सर के ऊपर रख देती है

सुबह के 6:ऍम आदि के घर

आज कोई भी नहीं आने वाली है मैं अपने बेटे को अकेले छोड़ कर सोल्लगे कैसे जाओं

आदि की माँ रजनी किचेन मैं कॉफ़ी बना कर खुद पी रही होती है आवर पिने के बाद कॉफ़ी लेकर बोलती हुई किचेन से निकल जाती है

हहहह मक क्या हो गया है ये कोई हरकत क्यू नहीं कर रहा है यह तक मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी चीज को भी देख कर खड़ा नहीं हो रहा है

मगर पहले तो बस उसके पायल की आवाज़ सुन कर hi सर उठा देता था

बस खड़ा हो न क्यू परेशान कर रहा है

hhhhhhhhhhhhh

क्या हुआ आदि बीटा दर्द हो रहा है क्या

आदि की माँ रूम मैं आती हुई बोलती है आवर आदि के चेहरे पर अपना हाथ रख कर आदि के चेहरे पर हुई जखम पर मुंह से फुख मरने लगती है

अचानक अपनी माँ की आवाज़ सुन कर आदि घबरा जाता है आवर झट से आदि अपना हाथ चादर के अंदर से निकल लेता है जो कब से आदि अपना यह हाथ चादर के अंदर किये हुआ अपना लैंड हिला रहा होता है

हआ मा थोड़ा दर्द हो रहा है.... आदि घबराहट मैं बोलता है मगर ये बात तो आदि को hi पता होता है के आदि को दर्द कहा पर हो रहा है

बस लगता है ये छील भी गया है...... आदि मन मैं गली देते हुआ बोलता है

वही आदि की थोड़ी दुखी होकर मायुश हो जाती है आवर आदि के चेहरे पर फुख मरने लगती है ताकि आदि को थोड़ी रहत मिले

आदि के चेहरे पर फुख मरने के चक्कर मैं आदि की माँ को ये भी अहसास नहीं होती है की उसकी पल्लू साइन से निचे गिर कर आदि के साइन पर पड़ी है आवर उसकी बड़ी बड़ी दो अनमोल रतन की चुकी का दिल दिख रहा है जो आदि के नज़रो के सामने पड़ी है जिसको उसका पेयारा आदि एक हवस भरी नज़र से देख रहा है

वैसे आदि की माँ अपनी जिस्म को अच्छे से छिपा कर तो रखती थी आवर खास कर अपनी दोनों बड़ी बड़ी चुकी को मगर आज सायद आदि की माँ अपनी दोनों अनमोल रतन को कपडे से छिपाना भूल गयी थी जो कितने सल्ल से छिपाती हुई आ रही थी मगर आज आदि की माँ अपनी दोनों चुकी को सिर्फ बलाउज मैं क़द की होती है आवर ब्रा भी नहीं पहनी होती है जिससे आदि के झखम पर झुक कर फुख मरने से आदि की माँ रजनी की आदि चुकी आदि के नज़रों के सामने होती है जिस पर आदि की नज़र तिकी हुई होती है

आदि बीटा अब भी दर्द हो रहा है क्या..... आदि की माँ मुंह बना कर बोलती है जैसे आदि का दर्द वह महसूस कर रही है मगर आदि कोई जवाब नहीं देता है

आदि बीटा अब भी दर्द हो रहा है क्या..... आदि के जवाब न देने से आदि की माँ फिर से बोलती है आवर आदि को हिलती हुई कड़ी होकर अपनी पल्लू साइन पर रख लेती है क्यू के आदि की माँ देख लेती है आदि की नज़र अभी कहा पर है

हआ नाही माआ नाहीई.... आदि हड़बड़ाते हुआ बोलता है आवर अपनी नज़र निचे कर लेता है

ठीक है बीटा ये कॉफ़ी पि आवर फ्रेश होजा मैं नास्ता बना देती हुईं लगता है आज कमला चमेली मैं कोई भी नहीं आने वाली है...... आदि की माँ अपनी पल्लू की साइन पर पकड़ी हुई hi रूम से निकल जाती है

वही आदि बस अपनी माँ रजनी को जाते हुआ देखता रह जाता है आवर अपना एक हाथ फिर से चादर के अंदर दाल कर लैंड पकड़ लेता है

अबे बस अब खड़ा नहीं होगा तो कब होगा...... आदि अपनी माँ को जाते हुआ देख कर मन मैं सोचता है

सुबह के 10 :ऍम

अंजलि छत पर घूम रही होती है तभी उसको गाओं मैं आते हुआ अर्जुन आवर गीता दिखाई देते है तो अंजलि देखती रहती है कुछ hi देर मैं अर्जुन की बाइक गावेली के अंदर आती है तो बाइक से गीता पहले उतरती है आवर वही कड़ी रह जाती है आवर अर्जुन बाइक आगे कर देता है

ये दीदी अंदर घर मैं क्यू नहीं आ रही है..... अंजलि मन मैं सोचती है
 
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