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अपडेट..... 54
अंजलि मन मैं सोचती है आवर छत से निचे आने लगती है
अंजलि भगति हुई निचे जब आती है तो देखती है उसकी गीता दीदी का एक हाथ अर्जुन के गर्दन पर होती है आवर अर्जुन भी गीता दीदी के कमर को पकड़ा हुआ है आवर उसकी गीता दीदी अर्जुन का सहारा लेकर धीरे धीरे चल रही होती है
डीईई
ओह्ह्ह गीता मेरी बच्ची... क्या हुआ अर्जुन बीटा .... अंजलि कुछ बोलती उससे पहले hi किचेन से निकलती हुई आँचल बोल पड़ती है
माँ वह वह
ममी माँ वह पेअर मैं थोड़ी चोट लग गयी थी ......
अर्जुन बस वह वह कर रहा होता है इस लिए गीता बोल पड़ती है
hhhhhhhhhhh
ओह्ह्ह अर्जुन बीटा आराम से
कैसे चोट लग मेरी बच्ची... दिखा मुझे चोट जयादा तो नहीं लगी है
गीता बोलती हुई दर्द मैं सिसक पड़ती है जो आँचल का दिल तड़प जाती है आवर आँचल गीता को पकड़ लेती है बोलती हुई
आँचल जैसे hi गीता को पकड़ती है अर्जुन गीता को छोड़ देता है
ममी माँ चोट तो बहुत बुरी गति से लगी है ..... जो अभी मुझे समझ मैं आ रही है
ममी माँ आप मत देखिये नहीं तो आप मेरी चोट को देख कर दर जाएँगी के कैसे आप के बेटे ने मेरी चिपकी हुई छोटी सी छूट मैं अपने मोटा सांप दाल दिया है
hhhhhhhhhhhhhhhh
ओह्ह मेरी बच्ची
वह कड़ी होकर क्या देख रही है पकड़ नहीं सकती है
गीता मन मैं सोचती हुई सिसक पड़ती है
गीता की दर्द भरी आहे सुन कर आँचल दर जाती है आवर सामने कड़ी अंजलि से बोलती है... जो अंजलि भी भाग कर गीता को दूसरी तरफ से पकड़ लेती है
आँचल आवर अंजलि दोनों मिल कर गीता को उसके रूम मैं लेकर जाती है आवर बीएड पर लेता देती है
अंजलि बीटा ज़रा पानी लेकर आ देख
कितनी गर्म है मेरी बच्ची का जिस्म ..... बीएड पर लेटते हुआ आँचल बोलती है आवर गीता के माथे पे लटकी हुई बाल अलग कर देती है
चोट कहा आवर केस लग गयी मेरी बच्ची देख दर्द की वजह से तेरी जिस्म भी गर्म हो रही है ..... आँचल घबराती हुई बोलती है आवर गीता की जिस्म को देखने लगती है के चोट कहा लगी है जिसके वजह से गीता को इतनी दर्द हो रही है
ममी माँ आप परेशान न हो मैंने दवा खा लिया है ..... गीता गेट की तरफ देखती हुई बोलती है
दिखा मुझे कितनी चोट लगी है .... आवर कहा पर .....
ओह्ह्ह मेरी गुड़िया
आँचल गीता के पेअर को देखती हुई बोलती है जो गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई होती है
आँचल के फिर से पूछने पर गीता अपनी पेअर उठा कर दिखती है जो आँचल गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई देख कर आँचल का दिल मचल जाती है
पता नहीं कितनी चोट लगी है देख ये पट्टी भी लाल हो रही है.... आँचल गीता के पेअर पर हाथ फेरती हुई बोलती है
ममी माँ ये लो पानी.... अंजलि पानी का गिलास आँचल के आगे करती हुई बोलती है
आँचल पानी का गिलास लेती है आवर अपनी साड़ी के पल्लू को भिनगा कर गीता के माथे पर रख कर वही बैठ जाती है
दीदी को चोट कब लग गयी रात मैं तो दीदी को कोई चोट नहीं लगी थी आवर दीदी रात मैं पता नहज कहा चली गयी थी आवर दीदी के साथ अर्जुन कैसे आ गया..... अंजलि वह कड़ी होकर मन मैं सोचती है
अर्जुन कैसे ममी माँ से बोलते हुआ घबरा रहा था जैसे उसने कोई चोरी किया है आवर कैसे दीदी अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही थी
अंजलि वह कड़ी होकर बस एहि सोच रही थी क्यू के अंजलि कब से बस अर्जुन आवर गिरा को hi देख रही थी जो अंजलि को गीता की बात पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रही होती है मगर अंजलि अभी कुछ पूछ भी नहीं सकती थी अपनी गीता दीदी से क्यू के अभी वह आँचल थी आवर गीता के पेअर मैं सच मैं चोट लगी हुई होती है
गुड़िया तेरी दीदी सो गयी है लेकिन देख अभी भी इसका जिस्म थोड़ा गर्म है ज़रा तू माथा भिनगा दे मैं आती हुई....
आँचल बोलती है तो अंजलि गीता की माथे पर अपनी दुप्पटा भिनगा कर रख देती है आवर पास मैं बैठ जाती है
हहहह हूऊं अअअअअअअ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
दीदी ये क्या करवा दिया आप ने..... मैं बुरा भाई हुईं जो अपनी दीदी की ये हालत कर दिया ..... चलिए हॉस्पिटल चलते है ..... आप को कितनी दर्द हो रहा है ..... अर्जुन रोने जैसा आवाज़ मैं बोलता है
अर्जुन की जब नींद खुलती है तो अर्जुन को अपनी गीता दीदी की आह्ह्हह्ह्ह्ह सुनाई देती है जो उसकी गीता दीदी दर्द मैं कैंप रही होती है आवर गीता की जिस्म भी गर्म होती है जो अर्जुन की आँखे भींग जाती है
बाबू कुछ नहीं हुआ है मुझे बस थोड़ी दर्द हो रही है.... आवर तूने कुछ नहीं किया है ...... मैं तो ये दर्द कब से लेना चाहती थी.... मगर मुझे नहीं पता था इतना दर्द होता है..... गीता अर्जुन को देखती हुई फींकी मुस्कुराहट से बोलती है
गीता को अभी कितनी दर्द हो रही है गीता की आँखों से पता चल रही होती है मगर सामने अपने छोटे भाई के उदास चेहरे को देख कर गीता अपनी दर्द थोड़ी देर के लिए भूल जाती है आवर चेहरे पर एक मुस्कान लेकर बोल देती है
अर्जुन तेरी दीदी सही कह रही है ये दर्द तो हर लड़की को सहना hi पड़ता है मगर यह थोड़ा उल्टा है जो दर्द तेरी दीदी को तेरा जीजा देने वाला था वह दर्द तूने दे दिया.. आवर ये भी तेरे साथ कुछ जयादा hi मस्ती मैं तेरे सांप को अपनी गुफा मैं ले ली
सीतल मुस्कुराती हुई बोलती है
सीतल की बात सुन कर अर्जुन अपना सर निचे कर लेता है वही गीता शर्म के मारे सीतल को चुप रहने का इशारा करती है जो सीतल हस्ती हुई अपनी होंठों पर हाथ रख लेती है
अर्जुन बगल वाला रूम मैं बाथरूम है तुम फ्रेश हो लो तब तक मैं गीता को देख लेती है कितनी बुरी हालत किया है तुमने इसकी छहु
सीतल आगे कुछ बोलती उसके पहले hi गीता उठ कर सीतल की मुंह दबा देती है जो सीतल की मुंह सा बस छू hi निकल कर रह जाता है
लेकिन अर्जुन तो समझ जाता है सीतल क्या बोलने वाली थी जो अर्जुन शर्म के मारे रूम से निकल जाता है
साली कुटिया हरामजादी .... मेरे भाई से इतना भी मज़ा न ले ... गीता सीतल के पीठ पर मरती हुई बोलती है
hhhhhhhhhhhhhhh
साली अभी शर्मा रही है आवर रात मैं कैसे चीखे निकल रही थी
मैं पक्का कहती हुईं तेरी छूट तो पूरी फैट गयी होगी गीता रानी ...... सीतल हस्ती हुई कहती है
साली जब मेरे भाई का वह तेरी छूट मैं जायेगा तब तेरी भी छूट फैट जाएगी आवर तू तो चीला चीला कर सभी गाँव के लोगो को बता देगी के तेरी छूट फार गयी ..... गीता भी मुस्कुराती हुई बोलती है
मुझे नहीं लेना अपनी छूट मैं तुहि ले
वैसे गीता तेरी सपना तो पूरी हो गयी... अब क्या दूसरी सपना भी पूरी करेगी ...... गीता को देखती हुई सीतल पूछती है
सीतल मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रही है लेकिन मैं दूसरी सपना पूरी जरूर करुँगी ...... Sssssssssssssssssssssssssssssssssssss hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
गीता बोलते हुआ कुछ सोचने लगती है तभी सीतल अपनी एक ऊँगली गीता की छूट मैं दाल देती है जो गीता सिसक पड़ती है
दीदी क्या हुआ गीता सिसकते हुआ जैसे hi आँखे खोलती है सामने अंजलि को देखती है
वही अंजलि बोल कर गीता को अजीब नज़र से देखने लगती है जैसे अंजलि समझने की कोशिस कर रही हो के उसकी गीता दीदी सिसक क्यू रही है क्यू के अभी आएसा कुछ हुआ hi नहीं के गीता दीदी को दर्द महसूस हो
गु गु गुड़िया पानी..... अंजलि को खुद को घूरते हुआ पाकर गीता थोड़ी घबरा जाती है जो घबराती हुई पानी मांगने लगती है
अंजलि भी उठ कर फ्रीज से पानी निकलने लगती है
हे भगवन बचा लेना कैसे घर रही थी गुड़िया मुझे...... गीता बीएड पर उठ कर बैठती हुई मन मैं सोचती है
वही अंजलि फ्रीज से पानी का बोतल निकल कर गीता को दे देती है तो गीता पानी पिने लगती है
वही अंजलि बस गीता को घूरती रहती है
जैसे अंजलि के दिमाग मैं कुछ चल रहा हो
गुड़िया गुड़िया गुड़िया
अंजलि अपनी गीता दीदी को घर रही होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है
हुईं ये ममी माँ बस मुझे hi पुकारती रहती है.... अंजलि मुंह बना कर बोलती है आवर रूम से निकल जाती है
अंजलि के जाते hi गीता चैन की शंश लेती है आवर पानी पीकर फिर से लेट जाती है
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राखी मैं बोल रहा हुईं अब आवर कोई बच्चे के बारे मैं नहीं सोचते है हम्हारी दो राजकुमारी hi काफी है क्या बोलती हो राखी
अभी ाढी रात हो रही होती है आवर राखी दे अपने पति की बाँहों मैं सिमटी हुई होती आवर दोनों hi नंगे होते है तभी राखी देवी के पति बोलता है
क्या आप जीवन भर खुश रहेंगे .... राखी देवी बहुत hi मासूमियत से पूछती है
हां राखी तुम मेरी बाँहों मैं इसी तरह लिपटी रही तो मैं जीवन भर खुश रहूँगा..... राखी का पति कहता है
लेकिन मैं खुश नहीं रहूंगी जीई मैं बहुत खुश हुईं के मेरे पास दो राजकुमारी है मगर मुझे एक राजकुमार भी चाहिए जो मुझे माँ माँ कह के पुकारे आवर मैं उसे लल्ला कह के गले लगा लू
हम्हरा ये महल खुशियों से भर जायेगा मुझे मेरा लल्ला मिल जायेगा आवर आप को अपना वरिष्ठ आवर हम्हारी दो राजकुमारियों को राजकुमार जैसा भाई फिर हम्हरा परिवार सफल हो जायेगा फिर चाहे मैं अपने लल्ला को आखिरी बार hi क्यू न देखूं ..... राखी देवी एक मुस्कान के साथ बोलती है
राखी ये सब्द दोबारा अपनी जुबान पर मत लाना राखी मुझे आवर कोई बच्चा नहीं चाहिए बस मुझे तुम चाहिए...... राखी देवी का पति तड़प आवर गुस्से से बोलता है जैसे राखी के पति को राखी की बात बिलकुल भी अच्छी न लगा हो
आप चाहते है मैं ाएसि बात न करूँ तो प्लीज भगवान् के लिए मुझे एक बार ोुए माँ बना दीजिये मैं जानती हुईं आप मुझसे बहुत प्यार करते है आवर
आप नहीं चाहते के मैं एक बार आवर माँ बनो
विक्रम जी हर किसी का जान बस एक भगवान् hi ले सकता है ये दुनिया के लोग तो कुछ भी बोलते है
आप देख लेना भगवान् ने चाहा तो मैं अपने बेटे को युनि के रस्ते दूंगी आवर युनि के रस्ते नहीं भी दूंगी तब भी मुझे कुछ नहीं होगा मैं अपने लल्ला को अप्प्रेसिअशन के ज़रिये hi आप को दूंगी
प्लीज मुझे एक बार माँ आवर बना दीजिये मेरी तीसरी ओप्प्रेशन भी ठीक से होगी बस आप मेरे साथ होना मुझे बस एक लल्ला चाहिए ....... राखी देवी बोलती हुई अपने पति के आगे रोने लगती है
राखी ये कैसी ज़िद्द पकड़ कर बैठी हो तुम डॉ ने मन किया है मगर तुम मान hi नहीं रही हो मैं तुमेह नहीं खोना चाहता हुईं मगर मैं तुमेह दुखी भी नहीं देख सकता हुईं
राखी तुमने मुझे उलझन मैं दाल दिया है मैं जानते हुआ कैसे तुमेह...... राखी मैं तुमेह खोना नहीं चाहता हुईं.... विक्रम तड़प कर बोलता है आप कहते है मैं दुखी न रहूं तो प्लीज भगवान् के लिए मान जाइये
मैं इस हवेली मैं जब से आई हुईं आप से कुछ नहीं माँगा है मैं आज आप से मांग रही हुईं प्लीज प्लीज प्लीज मान जाइये .... इस बार राखी देवी रोटी दहकती बोलती हुई अपने पति से लिपट जाती है
राखी देवी की तड़प देख कर वुक्रम सिंह सोचने पर मज़बूर हो जाता है
राखी
मालकिन मालकिन मालकिन
मुझसे दूर रह हरामज़ादी
राखी देवी अपने खेत वाले रूम मैं सोइ हुई सपनो के हसीं दुनिया मैं खोई हुई होती है तभी कमला
राखी देवी की जिस्म को पकड़ती हुईं उनेह पुकारने लगती है जो राखी देवी की नींद खुल जाती है आवर राखी देवी कमला को गुस्से मैं पुकार देती है
राखी देवी की लाल आँखे देख कर
कमला भी दर कर थोड़ी दूर हैट जाती है
मममम म मालकिन वववववा हहह छ्होटे मालिक आये है ..... राखी देवी की लाल आँखे देख कर कमला डर्टी हुई बोलती है
ये पहली बार होती है जब राखी देवी की आँखों मैं इतना गुस्सा कमला ने देखि हुई होती है जो कमला बोलकर राखी देवी की बिना कुछ जवाब सुने रूम से निकल जाती है
आप क्यू मुझे छोड़ कर चले गए
मैं बोली थी न..... मैं अपने लल्ला को इस दुनिया मैं लाऊंगी
देखिये लल्ला आवर मैं दोनों ठीक है मगर आप मुझे छोड़ कर चले गए
मेरा लल्ला बिलकुल आप पे गया है
आप जानते है मेरा लल्ला मुझसे अभी बहुत रूठा है मगर मुझे कोई गम नहीं है
मेरा लल्ला मेरे पास है मैं बहुत खुश हुईं
देखिये मेरा लल्ला आ रहा है .....
राखी देवी सामने लटकी हुई अपने पति की तस्वीर से रोटी हुई बोलती है आवर जैसे hi अर्जुन के आने की आहात होती है राखी देवी अपने बहते हुआ आंसू को पोछ लेती है
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अंजलि मन मैं सोचती है आवर छत से निचे आने लगती है
अंजलि भगति हुई निचे जब आती है तो देखती है उसकी गीता दीदी का एक हाथ अर्जुन के गर्दन पर होती है आवर अर्जुन भी गीता दीदी के कमर को पकड़ा हुआ है आवर उसकी गीता दीदी अर्जुन का सहारा लेकर धीरे धीरे चल रही होती है
डीईई
ओह्ह्ह गीता मेरी बच्ची... क्या हुआ अर्जुन बीटा .... अंजलि कुछ बोलती उससे पहले hi किचेन से निकलती हुई आँचल बोल पड़ती है
माँ वह वह
ममी माँ वह पेअर मैं थोड़ी चोट लग गयी थी ......
अर्जुन बस वह वह कर रहा होता है इस लिए गीता बोल पड़ती है
hhhhhhhhhhh
ओह्ह्ह अर्जुन बीटा आराम से
कैसे चोट लग मेरी बच्ची... दिखा मुझे चोट जयादा तो नहीं लगी है
गीता बोलती हुई दर्द मैं सिसक पड़ती है जो आँचल का दिल तड़प जाती है आवर आँचल गीता को पकड़ लेती है बोलती हुई
आँचल जैसे hi गीता को पकड़ती है अर्जुन गीता को छोड़ देता है
ममी माँ चोट तो बहुत बुरी गति से लगी है ..... जो अभी मुझे समझ मैं आ रही है
ममी माँ आप मत देखिये नहीं तो आप मेरी चोट को देख कर दर जाएँगी के कैसे आप के बेटे ने मेरी चिपकी हुई छोटी सी छूट मैं अपने मोटा सांप दाल दिया है
hhhhhhhhhhhhhhhh
ओह्ह मेरी बच्ची
वह कड़ी होकर क्या देख रही है पकड़ नहीं सकती है
गीता मन मैं सोचती हुई सिसक पड़ती है
गीता की दर्द भरी आहे सुन कर आँचल दर जाती है आवर सामने कड़ी अंजलि से बोलती है... जो अंजलि भी भाग कर गीता को दूसरी तरफ से पकड़ लेती है
आँचल आवर अंजलि दोनों मिल कर गीता को उसके रूम मैं लेकर जाती है आवर बीएड पर लेता देती है
अंजलि बीटा ज़रा पानी लेकर आ देख
कितनी गर्म है मेरी बच्ची का जिस्म ..... बीएड पर लेटते हुआ आँचल बोलती है आवर गीता के माथे पे लटकी हुई बाल अलग कर देती है
चोट कहा आवर केस लग गयी मेरी बच्ची देख दर्द की वजह से तेरी जिस्म भी गर्म हो रही है ..... आँचल घबराती हुई बोलती है आवर गीता की जिस्म को देखने लगती है के चोट कहा लगी है जिसके वजह से गीता को इतनी दर्द हो रही है
ममी माँ आप परेशान न हो मैंने दवा खा लिया है ..... गीता गेट की तरफ देखती हुई बोलती है
दिखा मुझे कितनी चोट लगी है .... आवर कहा पर .....
ओह्ह्ह मेरी गुड़िया
आँचल गीता के पेअर को देखती हुई बोलती है जो गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई होती है
आँचल के फिर से पूछने पर गीता अपनी पेअर उठा कर दिखती है जो आँचल गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई देख कर आँचल का दिल मचल जाती है
पता नहीं कितनी चोट लगी है देख ये पट्टी भी लाल हो रही है.... आँचल गीता के पेअर पर हाथ फेरती हुई बोलती है
ममी माँ ये लो पानी.... अंजलि पानी का गिलास आँचल के आगे करती हुई बोलती है
आँचल पानी का गिलास लेती है आवर अपनी साड़ी के पल्लू को भिनगा कर गीता के माथे पर रख कर वही बैठ जाती है
दीदी को चोट कब लग गयी रात मैं तो दीदी को कोई चोट नहीं लगी थी आवर दीदी रात मैं पता नहज कहा चली गयी थी आवर दीदी के साथ अर्जुन कैसे आ गया..... अंजलि वह कड़ी होकर मन मैं सोचती है
अर्जुन कैसे ममी माँ से बोलते हुआ घबरा रहा था जैसे उसने कोई चोरी किया है आवर कैसे दीदी अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही थी
अंजलि वह कड़ी होकर बस एहि सोच रही थी क्यू के अंजलि कब से बस अर्जुन आवर गिरा को hi देख रही थी जो अंजलि को गीता की बात पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रही होती है मगर अंजलि अभी कुछ पूछ भी नहीं सकती थी अपनी गीता दीदी से क्यू के अभी वह आँचल थी आवर गीता के पेअर मैं सच मैं चोट लगी हुई होती है
गुड़िया तेरी दीदी सो गयी है लेकिन देख अभी भी इसका जिस्म थोड़ा गर्म है ज़रा तू माथा भिनगा दे मैं आती हुई....
आँचल बोलती है तो अंजलि गीता की माथे पर अपनी दुप्पटा भिनगा कर रख देती है आवर पास मैं बैठ जाती है
हहहह हूऊं अअअअअअअ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
दीदी ये क्या करवा दिया आप ने..... मैं बुरा भाई हुईं जो अपनी दीदी की ये हालत कर दिया ..... चलिए हॉस्पिटल चलते है ..... आप को कितनी दर्द हो रहा है ..... अर्जुन रोने जैसा आवाज़ मैं बोलता है
अर्जुन की जब नींद खुलती है तो अर्जुन को अपनी गीता दीदी की आह्ह्हह्ह्ह्ह सुनाई देती है जो उसकी गीता दीदी दर्द मैं कैंप रही होती है आवर गीता की जिस्म भी गर्म होती है जो अर्जुन की आँखे भींग जाती है
बाबू कुछ नहीं हुआ है मुझे बस थोड़ी दर्द हो रही है.... आवर तूने कुछ नहीं किया है ...... मैं तो ये दर्द कब से लेना चाहती थी.... मगर मुझे नहीं पता था इतना दर्द होता है..... गीता अर्जुन को देखती हुई फींकी मुस्कुराहट से बोलती है
गीता को अभी कितनी दर्द हो रही है गीता की आँखों से पता चल रही होती है मगर सामने अपने छोटे भाई के उदास चेहरे को देख कर गीता अपनी दर्द थोड़ी देर के लिए भूल जाती है आवर चेहरे पर एक मुस्कान लेकर बोल देती है
अर्जुन तेरी दीदी सही कह रही है ये दर्द तो हर लड़की को सहना hi पड़ता है मगर यह थोड़ा उल्टा है जो दर्द तेरी दीदी को तेरा जीजा देने वाला था वह दर्द तूने दे दिया.. आवर ये भी तेरे साथ कुछ जयादा hi मस्ती मैं तेरे सांप को अपनी गुफा मैं ले ली
सीतल मुस्कुराती हुई बोलती है
सीतल की बात सुन कर अर्जुन अपना सर निचे कर लेता है वही गीता शर्म के मारे सीतल को चुप रहने का इशारा करती है जो सीतल हस्ती हुई अपनी होंठों पर हाथ रख लेती है
अर्जुन बगल वाला रूम मैं बाथरूम है तुम फ्रेश हो लो तब तक मैं गीता को देख लेती है कितनी बुरी हालत किया है तुमने इसकी छहु
सीतल आगे कुछ बोलती उसके पहले hi गीता उठ कर सीतल की मुंह दबा देती है जो सीतल की मुंह सा बस छू hi निकल कर रह जाता है
लेकिन अर्जुन तो समझ जाता है सीतल क्या बोलने वाली थी जो अर्जुन शर्म के मारे रूम से निकल जाता है
साली कुटिया हरामजादी .... मेरे भाई से इतना भी मज़ा न ले ... गीता सीतल के पीठ पर मरती हुई बोलती है
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साली अभी शर्मा रही है आवर रात मैं कैसे चीखे निकल रही थी
मैं पक्का कहती हुईं तेरी छूट तो पूरी फैट गयी होगी गीता रानी ...... सीतल हस्ती हुई कहती है
साली जब मेरे भाई का वह तेरी छूट मैं जायेगा तब तेरी भी छूट फैट जाएगी आवर तू तो चीला चीला कर सभी गाँव के लोगो को बता देगी के तेरी छूट फार गयी ..... गीता भी मुस्कुराती हुई बोलती है
मुझे नहीं लेना अपनी छूट मैं तुहि ले
वैसे गीता तेरी सपना तो पूरी हो गयी... अब क्या दूसरी सपना भी पूरी करेगी ...... गीता को देखती हुई सीतल पूछती है
सीतल मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रही है लेकिन मैं दूसरी सपना पूरी जरूर करुँगी ...... Sssssssssssssssssssssssssssssssssssss hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
गीता बोलते हुआ कुछ सोचने लगती है तभी सीतल अपनी एक ऊँगली गीता की छूट मैं दाल देती है जो गीता सिसक पड़ती है
दीदी क्या हुआ गीता सिसकते हुआ जैसे hi आँखे खोलती है सामने अंजलि को देखती है
वही अंजलि बोल कर गीता को अजीब नज़र से देखने लगती है जैसे अंजलि समझने की कोशिस कर रही हो के उसकी गीता दीदी सिसक क्यू रही है क्यू के अभी आएसा कुछ हुआ hi नहीं के गीता दीदी को दर्द महसूस हो
गु गु गुड़िया पानी..... अंजलि को खुद को घूरते हुआ पाकर गीता थोड़ी घबरा जाती है जो घबराती हुई पानी मांगने लगती है
अंजलि भी उठ कर फ्रीज से पानी निकलने लगती है
हे भगवन बचा लेना कैसे घर रही थी गुड़िया मुझे...... गीता बीएड पर उठ कर बैठती हुई मन मैं सोचती है
वही अंजलि फ्रीज से पानी का बोतल निकल कर गीता को दे देती है तो गीता पानी पिने लगती है
वही अंजलि बस गीता को घूरती रहती है
जैसे अंजलि के दिमाग मैं कुछ चल रहा हो
गुड़िया गुड़िया गुड़िया
अंजलि अपनी गीता दीदी को घर रही होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है
हुईं ये ममी माँ बस मुझे hi पुकारती रहती है.... अंजलि मुंह बना कर बोलती है आवर रूम से निकल जाती है
अंजलि के जाते hi गीता चैन की शंश लेती है आवर पानी पीकर फिर से लेट जाती है
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राखी मैं बोल रहा हुईं अब आवर कोई बच्चे के बारे मैं नहीं सोचते है हम्हारी दो राजकुमारी hi काफी है क्या बोलती हो राखी
अभी ाढी रात हो रही होती है आवर राखी दे अपने पति की बाँहों मैं सिमटी हुई होती आवर दोनों hi नंगे होते है तभी राखी देवी के पति बोलता है
क्या आप जीवन भर खुश रहेंगे .... राखी देवी बहुत hi मासूमियत से पूछती है
हां राखी तुम मेरी बाँहों मैं इसी तरह लिपटी रही तो मैं जीवन भर खुश रहूँगा..... राखी का पति कहता है
लेकिन मैं खुश नहीं रहूंगी जीई मैं बहुत खुश हुईं के मेरे पास दो राजकुमारी है मगर मुझे एक राजकुमार भी चाहिए जो मुझे माँ माँ कह के पुकारे आवर मैं उसे लल्ला कह के गले लगा लू
हम्हरा ये महल खुशियों से भर जायेगा मुझे मेरा लल्ला मिल जायेगा आवर आप को अपना वरिष्ठ आवर हम्हारी दो राजकुमारियों को राजकुमार जैसा भाई फिर हम्हरा परिवार सफल हो जायेगा फिर चाहे मैं अपने लल्ला को आखिरी बार hi क्यू न देखूं ..... राखी देवी एक मुस्कान के साथ बोलती है
राखी ये सब्द दोबारा अपनी जुबान पर मत लाना राखी मुझे आवर कोई बच्चा नहीं चाहिए बस मुझे तुम चाहिए...... राखी देवी का पति तड़प आवर गुस्से से बोलता है जैसे राखी के पति को राखी की बात बिलकुल भी अच्छी न लगा हो
आप चाहते है मैं ाएसि बात न करूँ तो प्लीज भगवान् के लिए मुझे एक बार ोुए माँ बना दीजिये मैं जानती हुईं आप मुझसे बहुत प्यार करते है आवर
आप नहीं चाहते के मैं एक बार आवर माँ बनो
विक्रम जी हर किसी का जान बस एक भगवान् hi ले सकता है ये दुनिया के लोग तो कुछ भी बोलते है
आप देख लेना भगवान् ने चाहा तो मैं अपने बेटे को युनि के रस्ते दूंगी आवर युनि के रस्ते नहीं भी दूंगी तब भी मुझे कुछ नहीं होगा मैं अपने लल्ला को अप्प्रेसिअशन के ज़रिये hi आप को दूंगी
प्लीज मुझे एक बार माँ आवर बना दीजिये मेरी तीसरी ओप्प्रेशन भी ठीक से होगी बस आप मेरे साथ होना मुझे बस एक लल्ला चाहिए ....... राखी देवी बोलती हुई अपने पति के आगे रोने लगती है
राखी ये कैसी ज़िद्द पकड़ कर बैठी हो तुम डॉ ने मन किया है मगर तुम मान hi नहीं रही हो मैं तुमेह नहीं खोना चाहता हुईं मगर मैं तुमेह दुखी भी नहीं देख सकता हुईं
राखी तुमने मुझे उलझन मैं दाल दिया है मैं जानते हुआ कैसे तुमेह...... राखी मैं तुमेह खोना नहीं चाहता हुईं.... विक्रम तड़प कर बोलता है आप कहते है मैं दुखी न रहूं तो प्लीज भगवान् के लिए मान जाइये
मैं इस हवेली मैं जब से आई हुईं आप से कुछ नहीं माँगा है मैं आज आप से मांग रही हुईं प्लीज प्लीज प्लीज मान जाइये .... इस बार राखी देवी रोटी दहकती बोलती हुई अपने पति से लिपट जाती है
राखी देवी की तड़प देख कर वुक्रम सिंह सोचने पर मज़बूर हो जाता है
राखी
मालकिन मालकिन मालकिन
मुझसे दूर रह हरामज़ादी
राखी देवी अपने खेत वाले रूम मैं सोइ हुई सपनो के हसीं दुनिया मैं खोई हुई होती है तभी कमला
राखी देवी की जिस्म को पकड़ती हुईं उनेह पुकारने लगती है जो राखी देवी की नींद खुल जाती है आवर राखी देवी कमला को गुस्से मैं पुकार देती है
राखी देवी की लाल आँखे देख कर
कमला भी दर कर थोड़ी दूर हैट जाती है
मममम म मालकिन वववववा हहह छ्होटे मालिक आये है ..... राखी देवी की लाल आँखे देख कर कमला डर्टी हुई बोलती है
ये पहली बार होती है जब राखी देवी की आँखों मैं इतना गुस्सा कमला ने देखि हुई होती है जो कमला बोलकर राखी देवी की बिना कुछ जवाब सुने रूम से निकल जाती है
आप क्यू मुझे छोड़ कर चले गए
मैं बोली थी न..... मैं अपने लल्ला को इस दुनिया मैं लाऊंगी
देखिये लल्ला आवर मैं दोनों ठीक है मगर आप मुझे छोड़ कर चले गए
मेरा लल्ला बिलकुल आप पे गया है
आप जानते है मेरा लल्ला मुझसे अभी बहुत रूठा है मगर मुझे कोई गम नहीं है
मेरा लल्ला मेरे पास है मैं बहुत खुश हुईं
देखिये मेरा लल्ला आ रहा है .....
राखी देवी सामने लटकी हुई अपने पति की तस्वीर से रोटी हुई बोलती है आवर जैसे hi अर्जुन के आने की आहात होती है राखी देवी अपने बहते हुआ आंसू को पोछ लेती है
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