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अपडेट ...... 62
अगली सुबह
सोते हुआ अर्जुन अचानक hi उठ कर बैठ जाता है आवर अपना सर पकड़ लेता है अर्जुन कुछ देर अपना सर पकड़े रहता है तभी अर्जुन की नज़र खुद पर जाता है जो बिलकुल नंगा होता है मगर अर्जुन के ऊपर कई सरे बिस्तर पड़े हुआ होते है
अर्जुन थोड़े देर के लिए अपने हालत को देख कर हैरान होकर रूम मैं चरों तरफ देखने लगता है मगर अर्जुन को रूम मैं कोई दिखाई नहीं देता है
मैं इस रूम मैं कैसे आया मैं तो माँ के साथ दूसरे गाओं मैं गया था आवर फिर मैं माँ को लेकर घर जा रहा था
ओह्ह्ह माँ ...... माँ कहा है
ओह्ह no ये किसने किया मेरे साथ
अर्जुन को जैसे hi राखी देवी की याद आती है अर्जुन हड़बड़ा कर बिस्तर मैं से निकल जाता है तब अर्जुन खुद को बिलकुल hi नंगा पता है अर्जुन रूम के दरवाजे की तरफ देखते हुआ अपने कपडे देखने लगता है मगर अर्जुन को अपने कपडे कही नज़र नहीं आते है जो अर्जुन सामने तंगी हुई टावल लपेट लेता है
बीटा तुम उठ गए अब तबियत कैसी है तुम्हारी ... वह बुद्धि औरत रूम मैं आती हुई बोलती है
आऍप कौन है .... में मेरे कपडे किसने निकले ..... कहा है मेरे कपडे ... क्या किया है मेरे साथ आप ने
अरे अरे बीटा कितने सवाल पूछ लिए
बीटा तुम घबराओं नहीं
मैंने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया है
सब कुछ तुम्हारी माँ ने किया है
तुम्हारा कपडा तुम्हारी माँ धोने लेकर गयी है
ये लो कपडे पहन लो अभी
आवर ये बताओ तुम्हारा तबियत अब कैसा है .... वह बुद्धि औरत कपडा को अर्जुन के तरफ करती हुई पूछती है
मैं ठीक हुईं
क्या आप बता सकती है मेरे साथ मेरी माँ भी यह है ... अर्जुन कपडे लेते हुआ शर्म से पूछता है क्यू के वह बुद्धि औरत अर्जुन के जिस्म को घूरती हुई मन hi मन मुस्कुरा रही होती है जो अर्जुन देख कर थोड़ा शर्माने भी लगता है ऊपर से वह बुद्धि औरत ये भी बोल गयी के अर्जुन के कपडे उसकी माँ ने hi निकली है
हां बीटा तुम्हारी माँ भी एहि है
वह पास मैं एक झरने पर नहाने के लिए गयी है
बीटा तुम भी जाकर नाहा लो ..... बहुत बदबू आ रही है तुम्हारे जिस्म से ..... वह बुद्धि औरत अर्जुन के जिस्म को फिर से घूरती हुई बोलती है
उस बुद्धि औरत को अपने जिस्म को घूरते हुआ देख कर अर्जुन को अब आवर भी जयादा शर्म सा लगता है जो अर्जुन बुद्धि औरत से लिए हुआ कायदे को अपने जिस्म के आगे कर देता है
मगर अर्जुन के चेहरे का रंग पल भर मैं hi बदल जाता है आवर अर्जुन रात की बाते याद करने की कोशिश करने लगता है मगर अर्जुन को कुछ भी याद नहीं आता है
मगर अर्जुन को बुद्धि औरत के मुंह से जब ये सुनता है के उसके साथ उसकी माँ भी एहि है तो अर्जुन को अपनी हालत पर बड़ी hi हैरानी होती है आवर अर्जुन मन hi मन शर्म से लाल हो जाता है ये सोच कर के कही उसकी माँ ने उसे नंगा देख तो नहीं लिया होगा
अम्मा वह झरना पास मैं hi है न ... अर्जुन रूम से जल्दी मैं निकलते हुआ पूछता है
अर्जुन अंदर से बेचैन हो गया होता है आवर उस बुद्धि औरत को अपनी जिस्म को घूरते हुआ प् कर अर्जुन आवर वह नहीं रह पता है जो वह से निकल जाता है
हां बीटा बस थोड़ी सी दुरी पर है .... वह बुद्धि औरत बोलती है
बिलकुल पहलवान के जैसा शरीर है इस लड़के का ..... कितनी चीख रही थी इसकी .... पता नहीं ठण्ड के हालत मैं कैसे कैसे पकड़ा होगा बेचारी को .... वह बुद्धि औरत मन मैं सोचती है
अर्जुन रास्ता चलते हुआ रात की बाते याद करने की कोशिश कर रहा होता है मगर अर्जुन को कुछ भी याद नहीं आ रहा होता है ... तभी अर्जुन की नज़र कुछ दूर कड़ी अपनी माँ पर नज़र जाती है आवर अर्जुन का पेअर वही रुक जाता है
अर्जुन जो कुछ भी रात की बाते याद करने की कोशिश कर रहा होता है वह एक पल मैं hi भूल जाता है आवर अर्जुन की नज़र बस अपनी माँ के ऊपर टिक जाती है
वही राखी देवी कुछ दूर कड़ी होकर अपनी साड़ी की पल्लू ठीक कर रही होती है जो राखी देवी चिकनी जिस्म दिख रही होती है ... मगर अर्जुन की नज़र तो अभी बस अपनी माँ की नंगी दिख रही आनर की तरह खूबसूरत नेवल पर तिकी हुई होती
राखी देवी अपनी पल्लू ठीक कर रही होती है जिससे राखी देवी की भिनगा हुआ रेशमी बॉल राखी देवी की चेहरे के आगे गिर रही होती है तो राखी देवी अपने बॉल ऊपर की तरफ करती है तभी राखी देवी की नज़र सामने खड़ा अर्जुन पर जाती है जो राखी देवी अपने पलकें निचे कर लेती है
वही अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को बड़े hi प्यार से देख रहा होता है मगर अचानक अपनी माँ को अपनी तरफ देखते हुआ पाकर अर्जुन पास के झाड़ियों मैं चला जाता है
अर्जुन झाड़ियों मैं कुछ देर तक छिपा हुआ होता है
अर्जुन को थोड़ा दर आवर शर्म भी लग रहा होता है
अर्जुन क्या खूबसूरती है न तेरी माँ निचे से ऊपर तक तेरी माँ की जिस्म राश से भरी हुई है
अर्जुन तेरी माँ की तरह खूबसूरत औरत मैंने तो सहर ये इस गाँव मैं अभी तक नहीं देखा
अर्जुन तेरी माँ की इतनी खूबसूरत जिस्म आयी hi बर्बाद हो रही है अब तो तेरा मां hi यह नहीं है
अर्जुन मैं तो कहता हुईं तुझे भी अपनी माँ पर डोरे डालना चाहिए मुझे यकीन तेरी माँ तुझे मन नहीं करेगी
अर्जुन तेरी माँ अगर मन गयी तो तेरी किस्मत hi बदल जाएगी
अर्जुन हर रात तेरी माँ तेरी बाँहों मैं रहेगी
अर्जुन मुझे तो लगता है तुझे भी तेरी माँ तुझे पसंद है तभी तो तेरा टाइगर अभी डहर मार रहा है
अर्जुन झाड़ियों मैं छिपा हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं ये साडी बातें चल रही होती है
अर्जुन के दिमाग अपनी माँ की बातें चल रही होती है वैसे वैसे अर्जुन का लैंड आवर भी खड़ा हो रहा होता है
वही राखी देवी अर्जुन को देख चुकी होती है मगर राखी देवी के दिमाग मैं पता नहीं क्या होता है राखी देवी थोड़ी मुस्कुराती हुई दूसरी तरफ देखने लगती है
राखी देवी मन hi मन मुस्कुराती हुई वह से बुद्धि अम्मा के घर की तरफ निकल जाती है
राखी देवी के जाने के बाद hi अर्जुन भी झाड़ियों से निकल कर अपनी माँ को जाते हुआ देखने लगता है मगर अर्जुन जल्द hi फिर से झाड़ियों मैं चला जाता है आवर झाड़ियों मैं जाते hi अर्जुन का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है आवर अर्जुन के आँखों मैं एक अजीब सा नस्ग होने लगता है
वही राखी देवी थोड़ी hi दुरी पर जाकर एक पेड़ के पास कड़ी हो जाती है आवर अपनी होंठों को डबडती हुई तिरछी नज़रों से अर्जुन की तरफ देखने की कोशिश करने लगती है
राखी देवी पेड़ के पास इस तरह कड़ी हुई होती है के राखी देवी की बड़ी गांड पीछे की तरफ निकली हुई होती है जैसे राखी देवी अर्जुन को खुद hi बता रही है के अर्जुन आ आवर मेरी गांड मैं अपना लैंड दाल दे
राखी देवी फिर मुस्कुराती हुई वह से आगे चलने लगती है
अर्जुन ये क्या था
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
अर्जुन क्या बताऊँ भाई दिल कर रहा था जाकर तेरी माँ की बहार की तरह निकली हुई गदराई हुई बड़ी गांड को अपने हांथों से मसल मसल कर तेरी माँ की दूध की तरह उजली गांड को चुद की लाल होंठ की तरह लाल कर दूँ
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh अर्जुन बर्दाश्त नहीं हो रहा है मुझसे
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
अर्जुन झाड़ियों मैं छिपा हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं फिर से अपनी माँ के बारे मैं ये सब बातें चलने लगती है आवर अर्जुन का हाथ कब लैंड पर चला जाता है अर्जुन को भी पता नहीं चलता है आवर अचानक hi अर्जुन के लैंड से पानी निकल जाता है
अर्जुन का पानी निकलते hi अर्जुन एक दर्द भरी अह्ह्ह निकल देता है जैसे अर्जुन के लैंड मैं दर्द हो रहा है
अर्जुन कुछ देर तक लैंड को पकडे हुआ उन झाड़ियों मैं बैठा hi रह जाता है
अह्ह्ह्हह्हह बस इतना दर्द क्यू हो रहा है जैसे मैं कई बार अपना लैंड हिला चूका हुईं
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस ये क्या लगा है मेरे जिस्म पर ...
अर्जुन अपने नेवल के निचे आस पास देखते हुआ मन मैं सोचता है क्यू के अचानक hi अर्जुन को नेवल के निचे दर्द होने का अहसास होता है तो अर्जुन वह देखने लगता है तो अर्जुन को वह चरों तरफ उजला उजला दिखाई देता है जो अर्जुन हैरानी से देखने लगता है
ये तो लगता है मेरे hi लैंड का पानी है मगर इधर कैसे लगा ..... अर्जुन अपने जिस्म को उजले उजले डेग को मसलते हुआ मन मैं सोचता है
अर्जुन फिर वह से झरने के तरफ नहाने के लिए चला जाता है है
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सुबह के 9:पं
आँचल हॉल मैं परेशान बैठी कभी राखी देवी तो कभी अर्जुन पर फ़ोन लगा रही होती है मगर रिंग होने के बाद भी कोई फ़ोन नहीं उठा रहा होता है जो आँचल आवर भी परेशान हो रही होती है
ममी माँ .... मैं माँ को कब से फ़ोन लगा रही हुईं मगर माँ फ़ोन hi नहीं उठा रही है
गीता घर के अंदर आती हुई बोलती है
गीता बेटी मैं भी दीदी को कब से फ़ोन लगा रही हुईं मगर वह फ़ोन नहीं उठा रही है सायद दीदी आवर अर्जुन ठाकुर साहब के घर hi सो गए होंगे आवर अभी तक नहीं उठे होंगे
सायद कभी रात तक पार्टी चली होगी
वैसे तू दीदी को क्यू पूछ रही है कोई काम है तो मुझे बता मैं कर देती हुईं .... आँचल बोलती है
ममी माँ आप की बेटी की छूट मैं आग लगी हुई है जो आप के राजकुमार hi बुझा सकता है
ममी माँ मैं माँ को नहीं बल्कि अर्जुन के बारे मैं जानना चाहती हुईं वह घर आया की नहीं
बोल भी क्या काम है तुझे
कोऊ कोइइइइइ काम नहीं है ममी माँ मैं बस आयी hi पूछ रही थी
गीता कड़ी होकर मन मैं सोच hi रही होती है के आँचल बोल पड़ती है ...... जो गीता थोड़ी घबरा कर हिचकते हुआ बोल पड़ती है
ठीक है मैं नाश्ता लगा देती है तब तक तू ज़रा मेरी राजकुमारी को उठा दे पता नहीं रात मैं क्या करती है जो अभी तक सो रही है .... आँचल बोलती हुई किचेन की तरफ चली जाती है
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बेटी मैं तो सोचती थी हम गरीब लोगों की ज़िन्दगी दुखों आवर मुसीबतों से गुजरती है मगर बेटी तुमने तो बहुत दुःख देखा है
भगवन करे तुम्हारी ज़िंदगी अब से खुशियों से भर जाये
वह बुद्धि औरत अपनी आंसू पोछते हुआ कहती है आवर राखी देवी की सर अपनी गॉड मैं ले लेती है
वही राखी देवी उस बुद्धि औरत से लिपर्ट कर आवर भी रोने लगती है
कौन है ...... सोनी बेटी तुम आ गयी क्या
वह बुद्धि औरत बहार कुछ गिरने की आवाज़ सुन कर बोल पड़ती है मगर बहार से कोई आवाज़ नहीं आती है
वही राखी देवी भी उस बुद्धि अम्मा से अलग होकर रूम से निकल कर बहार देखती है तो कोई भी नहीं होता है जो राखी देवी थोड़ी हैरान हो जाती है बहार किसी को न देख कर
क्यू के गेट के पास पानी से भरा हुआ जग गिर चूका होता है आवर जग का सारा पानी बाह चूका होता है
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