Thriller "विश्वरूप" ( completed ) - Page 7 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Thriller "विश्वरूप" ( completed )

जरुर भाई मेरी पुरी कोशिश है जल्द से जल्द कहानी को निपटाने की

ओह अब मैं खुद अपनी कालोनी की पुजा कमेटी में हूँ या यूँ कहूँ के खुद को व्यस्त रखने के लिए पुजा कमेटी की आमंत्रण को स्वीकार किया

हाँ बात तो सही है पर दुख यह हुआ कि कुछ चरित्रों को भुला दिया था जिनके लिए मुझे पुनरावलोकन करना होगा क्यूंकि इतने दिन दूर रहने के पश्चात उन चरित्रों के लिए कहानी के आरंभ को जाना पड़ेगा

क्यूँ नहीं आख़िर आप उन लेखकों में हैं जिनकी कहानियाँ मुझे इस फोरम में आने के लिए प्रेरित किया था l

धन्यबाद मेरे भाई
 
मित्रों दोस्तों

दशहरा के छुट्टियों के तुरंत बाद एक मित्र के अनुरोध पर उनके गाँव गया हुआ था ढेंकानाल l ढेंकानाल में शरत पूर्णिमा के दिन माता गजलक्ष्मी की पूजा बड़ी धूमधाम से की जाती है l इसलिए मैं अपने पेज पर नहीं आ पाया l क्षमा चाहता हूँ

अपडेट आज रात को आएगा

देरी के लिए क्षमा प्रार्थना करता हूँ
 
👉एक सौ चालीसवां अपडेट
------------------------------

आज की ताजा खबर,

जैसा कि आप को ज्ञात है रुप फाउंडेशन की भ्रष्टाचार में अपनी भुमिका सही ढंग से ना निभा पाने के कारण अदालत ने राजगड़ के पूर्व तत्कालीन पुर्व सरपंच विश्व प्रताप महापात्र को सात वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और अदालत के द्वारा ने यह आदेश भी जारी किया गया था कि रुप फाउंडेशन की तहकीकात के लिए बनाई गई एसआईटी को सरकार बहाल रखे और तहकीकात को जारी रखे और उसकी रिपोर्ट तैयार कर अदालत में जमा करे, पर विश्व प्रताप के कानूनी सजा पुरी होने के बाद उन्होंने आरटीआई के द्वारा अब तक हुई तहकीकात की प्रगति के बारे में जानने की कोशिश की, पर आपको जान कर हैरानी होगी अदालत के आदेश के बावजूद एसआईटी की जाँच एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी थी l इस दौरान विश्व प्रताप महापात्र सरकार द्वारा स्वीकृत कॉलेज में डिस्टेंस एजूकेशन के जरिए अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की और डिस्टेंस एजूकेशन के जरिए अपनी वकालत की डिग्री भी हासिल की l उन्हें बार काउंसिल की लाइसेंस मिलने के बाद अदालत में रुप फाउंडेशन की जाँच नए सिरे से शुरु करने और असली अपराधियों को ढूँढ कर उन पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए पीआईएल दाखिल किया था l जिसे अदालत ने सहसा स्वीकर कर गृहमंत्रालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को समन जारी किए l जिसके पश्चात मुख्यमंत्री कार्यालय तुरंत हरकत में आ गई l कल देर रात को पुराने एसआईटी को ख़तम कर नया एसआईटी का गठन किया गया है एसिपी सुभाष सतपती जी के नेतृत्व में l यह खबर बाहर आने के बाद हमारी सम्वाददाता पूर्व अधिकारी श्रीधर परीड़ा से संपर्क करने की कोशिश की, पर उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है यहाँ तक वे अपने घर में भी नहीं हैं, उनका घर कल से बंद है l आसपास के लोग उनके फरार होने की बात कर रहे हैं l इसके साथ मुझे आपकी सुप्रिया रथ को इजाजत दीजिए

फिर रहिए ना बेख़बर

यह था आज की ताजा खबर

ESS की ऑफिस

विक्रम अपने चेंबर पर बैठा यह न्यूज देख रहा था l न्यूज के समाप्त होते ही विक्रम टीवी की रिमोट हाथ में लेता है और टीवी को बंद कर देता है l कुछ देर के लिए अपनी आँखे बंद कर गहरी सोच में खो जाता है l फिर अचानक वह एक झटके के साथ अपनी आँखे खोलता है जैसे उसे कुछ याद आया हो l झट से फोन निकाल कर किसी को फोन मिलाता है l उधर से कॉल लिफ्ट होते ही

विक्रम - हैलो...

X - बोलिए सर...

विक्रम - वीर कैसा है...

X - सर सलामत हैं... और खुश भी हैं...

विक्रम - और... मेरे खास... वह लोग कैसे हैं...

X - अभी तक तो ठीक ही हैं... पर एक बात है सर... लगता है उन पर हमारे सिवा दो तीन ग्रुप और भी नजर रखे हुए हैं...

विक्रम - ह्म्म्म्म... तुम अपना काम करो... और मुझे पल पल की जानकारी दो...

X - जी सर... रूटीन से कुछ भी अलग होता है... मैं आपको खबर कर दूंगा...

विक्रम - हाँ... ठीक है

विक्रम फोन काट देता है l तभी उसकी इंटरकॉम पर सेक्रेटरी खबर करती है कि उससे मिलने पार्टी ऑफिस से कोई आया है l विक्रम उसे भेजने के लिए कहता है l कुछ देर बाद कमरे में पार्टी के युवा मोर्चा का सेक्रेटरी आता है l

विक्रम - आइए... सेक्रेटरी महोदय आइए... बैठिए...

सेक्रेटरी - जी युवराज... धन्यबाद... (कह कर सेक्रेटरी बैठ जाता है)

विक्रम - कहिये... कैसे आना हुआ...

सेक्रेटरी - युवराज जी... देखिए मेरी बातों को अन्यथा ना लीजिएगा... पार्टी के अध्यक्ष के कहने पर मैं आपसे मिलने आया हूँ...

विक्रम - सारे तक्कलुफ किनारे कीजिए... सीधे मुद्दे पर आइए...

सेक्रेटरी - अभी आपने युवामोर्चा का पद छोड़ कर अपने भाई राजकुमार वीर जी को सामने लाये... (कह कर चुप हो जाता है)

विक्रम - आगे बोलिए...

सेक्रेटरी - अब राजकुमार ने अपना इस्तीफा भेज दिया है... हम उन्हें मनाने की सोच रहे थे कि... तभी छोटे राजा जी की हुकुम आ गया... के पार्टी के तरफ़ से राजकुमार जी का किसी भी प्रकार से कोई संबंध ना रखा जाए... अब हम में से किसी की भी हिम्मत नहीं बन रही है... उनके हुकुम के खिलाफ जाने की... अब पार्टी की युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद रिक्त है... अब आप कोई मार्ग दर्शन कीजिए... क्यूँ के.. सभी एक मत से आपको चाह रहे हैं...

विक्रम - देखिए सेक्रेटरी जी... मैंने.. अपनी जगह वीर का नाम सुझाया था... जिसे पार्टी ने सहसा स्वीकार भी किया था... अब जब वीर नहीं है... तो बेहतर होगा... पार्टी कि अध्यक्ष ही कोई निर्णय लें... क्यूँकी... मैं अब राजनीति से फ़िलहाल दुर ही रहना चाहता हूँ... जब समय आएगा... तब मैं पार्टी से जुड़ुंगा...

सेक्रेटरी - तो अब...

विक्रम - देखिए... पार्टी में कोई और चेहरा भी हो सकता है... आप उन्हें सामने लाइये...

सेक्रेटरी - बात तो आपकी सही है... और बड़े विमर्ष के बाद एक चेहरा मिला है... पर उनके लिए वोट... मेरा मतलब है... (थोड़ी झिझक के साथ) आप अगर लोगों के पास जाकर उनके लिए वोट माँगे तो... (चुप हो जाता है)

विक्रम उसकी बातेँ सुन कर मुस्कराते हुए अपनी जगह से उठता है l विक्रम को उठते देख सेक्रेटरी भी उठ खड़ा होता है l विक्रम उसके पास आकर खड़े हो कर उस सेक्रेटरी के कंधे पर हाथ रखकर

विक्रम - (कड़क लहजे में) आइंदा कभी मिलो तो इतना याद रखो... मांगना हमारी फितरत नहीं है... छीनना या दे देना हमारी आदत है... समझे...

विक्रम ने जिस अंदाज से बात करी थी पार्टी सेक्रेटरी की फटके हाथ में आ गई थी l उसे ऐसा लग रहा था जैसे विक्रम के हर एक शब्द उसके हड्डियों में कड़ कड़ की कंपन पैदा कर रही थी l

विक्रम - वैसे... कौन है वह बंदा... जिसे इसबार पार्टी ने अपना युवा चेहरा बनाया है...

सेक्रेटरी - ज.. ज.. जी उसे साथ में लाया हूँ... ब ब ब बाहर खड़ा है...

विक्रम - कांप क्यूँ रहे हो... तो सब पहले से ही तय कर रखे हो... और हमारे मुहँ पर मारने आए हो... खैर कोई नहीं... बुलाओ उसको... हमसे थोड़ा परिचय करवाओ...

सेक्रेटरी - जीजीजी... अभी बुलाता हूँ....

सेक्रेटरी अपनी जगह से उठता है और बाहर जाकर एक बंदे को अंदर लाता है l उस बंदे को देखते ही विक्रम की आँखे बड़ी हो जाती हैं l गेरुए कपड़े में मृत्युंजय खड़ा था l हैरानी के मारे विक्रम का मुहँ खुला रह जाता है l मृत्युंजय अंदर आते ही विक्रम को हाथ जोड़ कर नमस्ते करता है l

मृत्युंजय - नमस्ते युवराज जी...

विक्रम - तुम...

मृत्युंजय - जी... मैं... मैं वापस आ गया...

विक्रम - क्या तुम्हें... पुष्पा का कातिल मिला...

मृत्युंजय - नहीं... नहीं मिला... इसीलिए... मैं एक दिन आत्महत्या करने जा रहा था... के एक साधु बाबा ने मुझे रोका... और अपने साथ उनके आश्रम में ले गए... वहीं पर उन्होंने मुझे जीवन के दर्शन समझाया... जब मुझे अपने कर्मों का बोध हुआ... तो मैं वापस आ गया... लोक सेवा के लिए... लोक कल्याण के लिए... मैं आप ही की पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता बन पार्टी को सेवा देता रहा... राजकुमार जी के प्रकरण के बाद... मुझे पार्टी के महा महीम ने इस पद को संभालने की जिम्मेदारी दी है... और इसबार आने वाले चुनाव में मुझे भाग लेने के लिए कहा है...

विक्रम का चेहरा सख्त होता जा रहा था l मुट्ठीयाँ भींचने लगी थी l पर उसके उलट मृत्युंजय बहुत ही शांत खड़ा था l मृत्युंजय अपने चेहरे पर एक मुस्कान लाकर फिर से कहना चालु करता है l

मृत्युंजय - युवराज जी... आप मेरे अन्नदाता रहे हैं... मेरे प्रथम मालिक... दीवंगत महांती जी मेरे गुरु रहे हैं... इसलिए चुनाव में हिस्सा लेने से पहले... मेरे इस नव जीवन प्रारम्भ करने से पहले... मुझे आपकी आशीर्वाद चाहिए... क्या मुझे मिलेगा...

इतना कह कर मृत्युंजय विक्रम के आगे घुटने पर बैठ जाता है l विक्रम बहुत असहज हो जाता है l विक्रम अपने भावनाओं पर काबु पाते हुए अपना सिर हिलाता है और

विक्रम - ठीक है... मेरी शुभकामनाएँ तुम्हारे साथ है... अब जाओ तुम दोनों यहाँ से...

मृत्युंजय अपनी जगह से उठता है फिर पार्टी सेक्रेटरी के साथ बाहर चला जाता है l

×_____×_____×_____×_____×_____×_____×

रुप कॉलेज में दाखिल होती है l गाड़ी को पार्किंग में लगा कर सीधे कैंटीन में जाति है पर उसे वहाँ पर उसके दोस्त नहीं दिखते हैं l वह छोटु से अपनी दोस्तों के बारे में पूछती है पर छोटु उसे कुछ कह नहीं पाता, तो रुप कैंटीन से बाहर निकल कर बॉटनीकल गार्डन की ओर जाती है l कुछ देर तक यहाँ वहाँ नजर दौड़ाने के बाद एक कोने में उसे सारे दोस्त नजर आ जाते हैं l वह उनके तरफ जाती है l जब उसके दोस्तों की नजर उसके ऊपर पड़ती है तो रुप हाथ उठा कर हाय का इशारा करती है l बदले में उसके सारे दोस्त भी उसे हाथ हिला कर हाय का इशारा करते हैं, पर रुप को महसूस होती है कि उन लोगों के चेहरे पर कोई हडबड़ी वाला एक्सप्रेसन दिखता है l उनके चेहरे पर आए हाव भाव देख कर रुप थोड़ी असहज होती है l उनके पास पहुँच कर

रुप - हैलो एवरी वन...

सब - हैलो...

रुप - क्या बात है... कोई सीरियस डिस्कशन चल रही थी क्या...

बनानी - अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं...

रुप - देखो झूठ मत बोलो... तुम्हारा जुबान कुछ कह रहा है... और तुम्हारा चेहरा कुछ कह रहा है...

इतिश्री - नहीं सच में... अब देखो... कुछ दिनों बाद शेषन ख़तम हो जायेंगी और होली के साथ छुट्टियाँ भी शुरु हो जाएंगी... तो हम लोग उसीकी डिस्कशन कर रहे थे...

रुप - वाव... वैसे कौन कहाँ जा रहा है इस बार...

इतिश्री - मैं तो अपने गाँव जा रही हूँ...

भाश्वती - मेरा तो घर ही भुवनेश्वर में है...

बनानी - हाँ... पर इस बार हम शायद बाहर जा रहे हैं...

तब्बसुम - मेरा तो बेड लक ही ख़राब है... ना रिवार्ड मिली... ना नाम...

रुप देखती है दीप्ति चुप बैठी है और अपने भीतर कुछ सोच रही है l रुप दीप्ति को बुलाती है

रुप - दीप्ति... ऐ..

दीप्ति - (चौंक कर) हाँ... कुछ कहा तुमने...

रुप - क्या सोच रही थी तुम...

दीप्ति - यही के... फर्स्ट सेमिस्टर एक्जाम के लिए... सर के पास जाकर.. हम क्यूँ ना कुछ टिप्स लें...

रुप की भवों पर सिलवटें पड़ जाती हैं l वह कनखियों से देखती है सब के सब दीप्ति को इशारे से कुछ समझाने की कोशिश कर रही हैं l

रुप - ओके... तो मेरे आने से पहले... कुछ ऐसा डिस्कशन हो रहा था... जो मुझे नहीं जानना चाहिए... है ना... (सबका चेहरा झुक जाता है) ओके देन... अब बेहतर होगा... तुम लोग मुझे साफ साफ सब बता दो...

सभी एक दूसरे को देखने लगते हैं l कुछ देर बाद दीप्ति अपने आप को तैयार करते हुए कहती है

दीप्ति - ठीक है... बात दरअसल यह है कि... हम तेरे और विश्व के बारे में डिस्कश कर रहे थे...

बनानी - दीप्ति... (बनानी दीप्ति को टोकती है)

रुप - अच्छा... मेरे और विश्व के बारे में... ऐसी कौनसी बात डिस्कशन कर रहे थे... जो मुझे देख कर चुप हो गए...

दीप्ति - देख... यह देख... (कह कर दीप्ति रुप को अपना मोबाइल पर न्यूज चला कर देती है, रुप न्यूज को पुरा सुनती है और दीप्ति को मोबाइल वापस लौटा कर पूछती है)

रुप - हाँ तो इसमें ऐसा क्या है... जो मैं और विश्व डिस्कशन में आ गए...

दीप्ति - क्या... इसमें ऐसा कुछ नहीं है... नंदिनी... तुम्हारा विश्व कानूनन सजायाफ्ता है...

रुप - हाँ.. तो क्या हुआ...

रुप की इस सवाल पर सब थोड़े असमंजस सा एक दुसरे को देखने लगते हैं l रुप उनकी नजरों की पीछा कर सबकी चेहरे को गौर से देखती है फिर कहना शुरु करती है l

रुप - ओह के... तो तुम लोगों की नज़र में पहले मेरी खानदान वाले सही नहीं थे... फिर धीरे धीरे मेरा भाई वीर कुछ ही दिन हुए हीरो बना... अब तुम लोगों की नज़र में विश्व एक क्रिमिनल है... जिससे मैं प्यार करती हूँ... है ना... (सब मौन रहते हैं, भाष्वती से) भाष्वती तु भी... (इस सवाल पर भाष्वती अपनी नजरें झुका लेती है) तु तो उसे अपना भाई मानती है ना... भुल गई... तुझे प्रताप ने कैसे बचाया था... खैर... और तु... तब्बसुम... अपने वालिद से पुछ लेना कभी फुर्सत में... कैसे आज तु कॉलेज आ पा रही है... (तब्बसुम इधर उधर देखने लगती है) वैल वैल.. तुम लोगों की नजर और कान शायद वही देखा... जो तुम्हारे मतलब कि थी... कोई नहीं... अगर यही वज़ह है... तो मुझे तुम लोगों से कोई शिकायत नहीं है... हाँ कास के... तुम सभी प्रताप के बारे में सब कुछ जान कर अपना ओपिनियन रखते तो अच्छा होता...

वह मेरा अनाम है... उसका नाम विश्व प्रताप महापात्र है... किसी और के गुनाह की सजा उसने अपने सिर लिया था... क्यूँकी जो भी हुआ था... उस अपराध के पीछे कहीं ना कहीं खुद को दोषी समझता था... जरा सोचो... कभी ऐसा हुआ है... की कोई वकील किसी मुजरिम की पैरवी करते करते उसे अपना बेटा समझने लगे... और अपनी जायदाद उसके नाम कर दे... एडवोकेट जयंत राउत... जो प्रताप का केस लड़ रहे थे... उन्होंने अपनी जायज कमाई प्रताप के नाम कर दी...

कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाती है l रुप एक गहरी साँस लेती है फिर कहना चालु रखती है l

रुप - एक वकील जो उसके खिलाफ लड़ी... वह आज उसे अपना बेटा मानती हैं... जो आज इस स्टेट के हर एक कामकाजी महिलाओं की आवाज बनी हुई हैं... प्रतिभा जी... याद है... या भूल गए...

फिर वही सन्नाटा थी l इस बार सभी ल़डकियां संकोच से सिर झुकाने लगे l

रुप - हम लोग दोस्त हैं... मैं समझती थी... के हम सब एक दुसरे को समझते हैं... पर आज तुम सब ने मुझे गलत साबित कर दिया... मेरे अनाम के लिए... मुझे किसी की सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है... मैं तुम लोगों से पूछती हूँ... कितने ऐसे लोग हैं... जो जैल में रह कर अपनी पढ़ाई पूरा कर पाते हैं... या करते हैं... अनाम ने ना सिर्फ वकालत की डिग्री हासिल की... बल्कि बार काउंसिल की लाइसेंस भी हासिल करी... अब बताओ... अगर वह क्रिमिनल होता... तो क्या उसे लाइसेंस मिलता... खैर... अब इस वक़्त तुम लोगों से बातेँ करना भी बेकार है... आई तो थी तुम लोगों के साथ कुछ गप्पे लड़ाने... पर... चलती हूँ... (रुप पलट कर जाने लगती है)

भाष्वती - (रुप को रोक कर) सॉरी यार... हमसे गलती हो गई... अब ऐसे जुते भिगो भिगो के मार मत...

रुप - नहीं... आज तुम लोगों ने मेरा दिल दुखाया है... इसलिए मैं अब जा रही हूँ... जब तक मैं अपने आप शांत ना हो जाऊँ... तुम लोग मुझे कॉन्टैक्ट मत करना...

भाष्वती - अरे सुन तो...

रुप - प्लीज...

इतना कह कर रुप गार्डन से बाहर आती है l तेजी से चलते हुए अपनी गाड़ी की डोर खोल कर बैठ जाती है l रुप को महसुस होती है कि उसकी आँखों में नमी छा रही थी l अपनी हाथों से आँखों से आँसू पोछते हुए गाड़ी स्टार्ट करती है और गाड़ी कॉलेज की सीमा से बाहर ले कर रास्ते पर दौड़ाने लगती है l कुछ देर बाद गाड़ी को एक जगह रोकती है और स्टीयरिंग पर अपना सिर रख कर बैठी रहती है l कुछ गहरी साँसे लेने के बाद गाड़ी से उतर कर देखती है कि वह निको पार्क के पास गाड़ी को रोकी है l निको पार्क को देखते ही उसे विश्व को याद आती है l अपना मोबाइल निकाल कर विश्व को कॉल लगाने ही वाली होती है कि एक आदमी आता है और रुप की मोबाइल छिन कर भागने लगता है l रुप पहले हैरान हो जाती है और जब संभलती है तब चोर चोर चिल्लाती है l आसपास के कुछ लोग और कुछ लड़के उस चोर के पीछे लग जाते हैं और थोड़ी देर बाद उसे घेर लेते हैं, वह चोर अपने को घिरा हुआ देख कर रुप के पास भागते हुए आता है और रुप के पैरों में गिर जाता है और रहम की भीख माँगते हुए रुप को मोबाइल लौटा देता है l कुछ लोग उसे पकड़ कर मारने को होते हैं, रुप उन लोगों को रोकती है और उस आदमी को छुड़ा कर चले जाने को कहती है l वह आदमी रुप को बहुत दुआयें देते हुए वहाँ से चला जाता है l कुछ लड़के रुप को इम्प्रेस करने के लिए अपनी अपनी बड़ी बड़ी हांकने लगते हैं l सिचुएशन को ऐसे देख कर रुप अपनी गाड़ी में वापस बैठ कर वहाँ से निकलने लगती है l थोड़ी दुर जाने के बाद रुप ब्लू टूथ से गाड़ी से कनेक्ट कर विश्व को कॉल लगाती है l

विश्व - हैलो जी... हुकुम जी... कहिए क्या करना है...

रुप - तुम जानते हो... अभी मेरे साथ क्या हुआ है...

विश्व - नहीं जी... बिल्कुल नहीं...

रुप - (खीज कर) आह... देखो... मैं मज़ाक के मुड़ में बिल्कुल नहीं हूँ...

विश्व - अरे बाप रे... ठीक है कहिए... क्या हुआ... आपके साथ...

रुप - क्यूँ तुम तो कह रहे थे... मेरे पास हवा भी अगर रुख बदलेगा... तो तुम्हें खबर हो जाएगी...

विश्व - हाँ कहा तो था... क्यूँ.. कोई शक़...

रुप - हाँ हो रहा है शक़...

विश्व - मत कीजिए... प्लीज...

रुप - क्यूँ न करूँ... बड़े बड़े डींगे जो हांक रहे थे...

विश्व - अरे अरे.. इतना गुस्सा... क्या हुआ... वह जो चोर... आपसे मोबाइल छिन कर भाग रहा था... पकड़ा गया... और आपका मोबाइल आपको मिल गया ना...

रुप अपनी गाड़ी में ब्रेक लगाती है l उसकी आँखे हैरानी से बड़े हो जाते हैं, वह गाड़ी रोक कर अपनी चारों तरफ देखती है l उसे कोई नहीं दिखता l लड़खड़ाती हुई आवाज में विश्व से पूछती है

रुप - तततत.. तुम हे कैसे मालुम हुआ...

विश्व - कहा था ना... हवा तक आपके पास करवट बदलेगा... तब भी मुझे भान हो जाएगा...

रुप - (एक टूटी हुई आवाज़ में) ओह...

विश्व - पर आज आपको हुआ क्या है... इस बात के लिए तो फोन नहीं किया आपने...

रुप - हाँ वैसे... बात कुछ और थी...

विश्व - क्या उस बात के लिए मुड़ उखड़ा हुआ था...

रुप - (थकी हुई आवाज में) हाँ...

विश्व - अरे... ऐसा क्या हो गया.. जो मेरी दिल की शहजादी को मायूस कर दिया...

फिर रुप कॉलेज में दोस्तों के साथ हुई बातचीत को ज्यादा कुछ नहीं बताती बस अपनी नाराजगी को संक्षिप्त कर बताती है l विश्व सब सुनने के बाद एक गहरी साँस छोड़ते हुए कहता है

- ह्म्म्म्म...

रुप - जानते ही अनाम... मैं बनानी से दोस्ती के लिये क्या कुछ नहीं किया... रॉकी की प्लान में दीप्ति शामिल थी... यह जानने के बावजूद.. मैंने उसे माफ भी किया... और भाष्वती जरा देखो उसे... भाई कहती थी तुम्हें... तुम्हारे वज़ह से... अपनी कॉलोनी से कॉलेज... बिना डरे आ रही है... उसने भी... और आखिर में तब्बसुम... वह भी... जो आज तुम्हारे वज़ह से कॉलेज आ पा रही है... (विश्व कोई जवाब नहीं देता) क्या हुआ... ओ समझी... देखा तुम्हें भी बुरा लगा ना...

विश्व - नहीं... मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा...

रुप - व्हाट... तुम्हें बुरा.. नहीं लगा..

विश्व - नहीं...

रुप - क्यूँ...

विश्व - क्यूंकि अभी आप जो महसुस कर रही हैं... जो कुछ भी देख रही हैं... उन हालातों से मैं गुजर चुका हूँ...

रुप - ओ... फिर भी... वह लोग मेरे दोस्त हैं... कोई दुसरा होता तो... मुझे इतना बुरा ना लगता...

विश्व - वह लोग आम हैं... आप और मैं खास हैं... और जो लोग आम होते हैं... वे लोग खुद को... समाज के हर चीज़ से दुर रखते हैं... वे लोग चाहते हैं... समाज में बदलाव हो... पर बदलाव की दौर से वे लोग ना गुज़रे... वे चाहते हैं... कोई क्रांति हो... कोई क्रांतिकारी आए... पर उनके घर में नहीं... वे सोचते हैं... वोट दे दिया... सर्कार चुन लिया बस बात काम खत्म... सरकार अपना काम करे... पुलिस अपना काम करे और न्यायलय अपना काम... पर किसी भी पचड़े में खुद को देखना नहीं चाहते... वे लोग सिर्फ अपने और अपने परिवार के के सिवा... किसी और की सोचना भी नहीं चाहते... यह बहुत आम फितरत है... पर जब उन पर कुछ गुज़रती है... तब वे लोग अपनी चारों तरफ देखते हैं... उम्मीद करने लगते हैं... शिकायत करने लगते हैं... क्योंकि यह लोग... आम लोग होते हैं...

रुप - तो मुझे... क्या करना चाहिए...

विश्व - माफ कर दीजिए...

रुप - क्यूँ...

विश्व - क्यूँ की वे लोग आपके दोस्त हैं... एक दिन वे आपकी भावनाओं को समझेंगे और माफी मांगेंगे... (इस बार रुप कुछ नहीं कहती) क्या हुआ... आप खामोश हो गईं...

रुप - तो तुम कहना चाहते हो... मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए...

विश्व - जी बिल्कुल... क्यूँकी आप कोई आम नहीं हो... बहुत ही खास हो... (रुप फिर से खामोश हो जाती है) अब क्या हुआ..

रुप - मेरा मुड़ खराब है... ऐसे ठीक नहीं होगा...

विश्व - अच्छा तो फिर कैसे ठीक होगा...

रुप - तुम्हें मालुम है... क्यूँ भूल गए... मैंने कहा था... मैं रूठुंगी..

विश्व - और मैं मनाऊंगा...

रुप - तो मनाओ...

विश्व - पर आप तो मुझसे रूठी नहीं है...

रुप - तो इसका मतलब यह हुआ... तुम मुझे अभी नहीं मनाओगे...

विश्व - अरे मेरी ऐसी हस्ती कहाँ... बिसात कहाँ... आप हुकुम करें और हम तमिल ना करें... (रुप की चेहरे पर मुस्कान आ जाती है) बस इतने में ही आपकी चेहरे पर मुस्कान आ गई... (रुप फिर चौंकती है)

रुप - तुम्हें कैसे पता....

विश्व - आपकी अदाओं से मुझे एहसास हो जाता है...

रुप - पर तुमने कोई शायरी नहीं कही मेरे लिए...

विश्व - अभी किए देते हैं...

चेहरे पे मेरे जुल्फों को फैलाओ किसी दिन,

रोज गरजते हो बरस जाओ किसी दिन,

खुशबु की तरह गुजरो मेरी दिल की गली से,

फूलों की तरह मुझपे बिखर जाओ किसी दिन !

रुप - कमाल है... फर्माइश हमने किया है... ख्वाहिश आप फर्मा रहे हैं...

विश्व - वाह वाह क्या बात है... अजी हम हमेशा आपके फर्माबरदार रहे हैं... पर आपकी फर्माइश के लिए हमने सोच बहुत कुछ रखा है... बस आपकी आने का इंतजार है... (रुप की गाल शर्म से लाल हो जाते हैं)

रुप - तुम चाहते हो... मैं राजगड़ आऊँ...

विश्व - क्यूँ मैंने भी तो आपकी हुकुम बजाया था... आपकी घर आकर...

रुप - ह्म्म्म्म... ठीक है... तो हम ज़रूर आयेंगे...

विश्व - कब...

रुप - बता देंगे बता देंगे... अब से आप सब्र पालें...

कह कर रुप फोन काट देती है और मन ही मन मुस्कराते हुए अपना सिर स्टियरिंग पर रख देती है l तभी उसे पीछे से गाड़ियों की हार्न सुनाई देती है l रुप अपनी जीभ दांतों तले दबा कर गाड़ी स्टार्ट कर निकल जाती है

×_____×_____×_____×_____×_____×_____×

एक कुर्सी पर विश्व फैला हुआ था, एक पैर जमीन पर और दुसरा पैर टेबल पर था l बात ख़तम होते ही मुस्कराते हुए कान से फोन निकाल कर टेबल पर रख देता है l तभी कमरे में मायूस चेहरे के साथ टीलु अंदर आता है l उसका लटका हुआ चेहरा देखकर विश्व उससे सवाल करता है

विश्व - क्या हुआ.. यह चेहरा क्यूँ लटका हुआ है...

टीलु - सात दिन हो गए...

विश्व - तो...

टीलु - जब से साले यह दो पुलिस वाले हमारे इर्द गिर्द भिनभिना रहे हैं... तब से बच्चे भी नहीं आ रहे हैं...

विश्व - पहली बात... वे छोटे रैंक के ईमानदार पुलिस वाले हैं... इसलिए उन्हें गाली मत दो...

टीलु - तुम्हें कैसे मालुम... के यह दोनों ईमानदार हैं...

विश्व - यह लोग पहले अर्दली थे... उसके बाद हेल्पर कांस्टेबल बने हैं... अभी प्रोवेशन में हैं... इसलिए सौ फीसदी ईमानदारी बरत रहे हैं...

टीलु - अच्छा... पर भाई यह बात कुछ हजम नहीं हुई... अनिकेत रोणा... हमारे लिए ईमानदार लोगों को लगाया है...

विश्व - क्यूंकि... रोणा को... बिकने वालों पर भरोसा नहीं है... हमारी सारी ख़बरें और जानकारी ईमानदारी से जो बता दे... उन्हीं को उसने ड्यूटी पर लगाया है...

टीलु - हाँ... तभी मैं सोचूँ... उनका नाम भी ईमानदारों वाला क्यूँ लग रहा है...

विश्व - नाम से भी ईमानदारी पहचानी जा सकती है... यह मैं नहीं जानता...

टीलु - हाँ भाई... एक का नाम हरिश्चंद्र बल है... और दुसरे का नाम जगन्नाथ महाकूड़ है... है ना ईमानदारी वाला नाम...

विश्व सब सुन कर अपना चेहरा घुमा लेता है l यह देख कर टीलु मुहँ बनाता है l टीलु बाहर जा कर थोड़ा झाँकता है फिर अंदर आकर विश्व से

टीलु - भाई...

विश्व - ह्म्म्म्म...

टीलु - हम सात दिनों से... एक तरह से नजर बंद हैं... कहीं जा भी नहीं पा रहे हैं...

विश्व - क्यूँ झूठ बोल रहे हो... रोज दीदी के यहाँ जा रहे हैं... गले तक ठूँस ठूँस कर आ रहे हैं...

टीलु - मैं राजगड़ अंदर की बात नहीं कर रहा हूँ...

विश्व - फ़िलहाल ऐसा कुछ सोचना भी नहीं... हमारी छोटी सी हरकत... दूसरों पर आफत बन सकती है... (बात घुमाने के लिए) वैसे... बच्चे कहाँ तक लाठी घुमाना सीखे...

टीलु - पूरा सीख लिए हैं... पर स्पीड नहीं है...

विश्व - कोई ना... अगली मुलाकात में देखना... उनकी लाठी घुमाना बहुत जबरदस्त हो चुका होगा...

टीलु - भाई... तुम बात टाल रहे हो... हमारा यश पुर जाने का टाइम नजदीक आ रहा है...

विश्व - (चेयर पर सीधा होकर बैठ जाता है) क्या मतलब...

टीलु अपनी अपनी जेब से एक काग़ज़ निकाल कर विश्व को देता है l विश्व काग़ज़ को खोल कर उसमें लिखे शब्दों को पढ़ने लगता है l पढ़ते ही उसकी आँखों में एक चमक छा जाती है l फिर टीलु की ओर देखता है

टीलु - हाँ भाई... तुम तो जानते हो.. सात दिनों से मैं सुबह सुबह यशपुर में अपने दोस्तों की हालचाल जानने और दीदी की दुकान के लिए कुछ सामान लेने चला जाया करता था... पर तुम्हारे मना करने के बावजूद... मैं रोज न्यूज पेपर पढ़ कर... उस अंजान आदमी की मेसेज को डी कोड किया करता था... उसने इस बार तुमसे मिलने की इच्छा जतायी है... कैसे और कब लेटर में साफ लिखा है....

विश्व - मैं जानता था... तुम शांत बिल्कुल नहीं रह सकते थे... कुछ ना कुछ उल्टा सीधा करोगे...

टीलु - भरोसा रखो विश्वा भाई... मेरी इस हरकत के बारे में... रोणा जानता नहीं है... अब सवाल है... हम राजगड़ से निकल कर... यशपुर जाएं तो जाएं कैसे...

विश्व चेयर से उठ खड़ा होता है l कमरे में थोड़ा टहल लेने के बाद टीलु से कहता है

विश्व - यह दो सिपाही... हमारे साथ क्यूँ हैं...

टीलु - तुम्हारी हिफाज़त के लिए... और तुम्हारी हर पल की रिपोर्ट रोणा को देने के लिए...

विश्व - (कुछ देर के लिए सोच में पड़ जाता है) अच्छा क्या तुम दस बारह लोग... जुगाड़ कर सकते हो... अपने टाइप के... काम थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है...

टीलु - क्या... मेरा मतलब है.. कब तक...

विश्व - कल तक... परसों के लिए...

टीलु - हाँ... सीलु भाई आज रात तक... कुछ बंदों को बुला लेंगे...

विश्व - तो फिर चलो... हम रोणा तक खबर पहुँचा ही देते हैं...

टीलु - (चौंक कर) क्या... यह क्या कह रहे हो भाई... फिर तो वह अनजाना शख्स कौन है... और हमारी क्या मदत करना चाहता है... हम कभी जान नहीं पाएंगे...

विश्व - मैंने सिर्फ इतना कहा... रोणा जो जानना चाहता है... हम उस तक खबर इन्हीं कांस्टेबलों के जरिए पहुँचाएँगे...

टीलु - एक मिनट... तुम खुल कर समझाओ भाई...

विश्व - खबर कुछ ऐसे पहुँचाओ... के उन्हें लगे के उन लोगों ने कोई बड़ा तीर मार लिया हो... और पुरी खबर जानने या निकालने के लिए... रोणा हमें खुद यशपुर ले जाएगा... (टीलु की आँखे चमकने लगती है)

टीलु - समझ गया भाई... पर हमारे एक्शन के लिए... टेढ़े लोगों की जरूरत पड़ेगी... मतलब हमारी गैंग की...

विश्व - इसी लिए तो पुछा था

टीलु - ओ... फ़िकर नोट... बुला लेंगे...

विश्व - ठीक है... अब एक्शन के लिए... पहले हमारी गैंग को बुलावा भेजो... एक्शन के दिन से पहले पहुँच जाएंगे...

टीलु - ठीक है भाई... सब समझ गया... अभी जाता हूँ... उन दो कांस्टेबलों को शीशे में उतारता हूँ...

×_____×_____×_____×_____×_____×_____×

रंग महल के परिसर के गोल्फ कोर्स में भैरव सिंह गोल्फ क्लब से एक स्ट्रोक लेता है l पास खड़े एक नौकर बॉल लाने के लिए भाग जाता है l भैरव सिंह आकर छत्री के नीचे लगे चेयर पर बैठ जाता है और पैरों को टी पोए पर टिका देता है l तभी भीमा आता है l

भीमा - हुकुम...

भैरव सिंह - भीमा... कोई आया है क्या...

भीमा - जी हुकुम.. दरोगा और वकील... आपसे मिलने की इजाज़त मांग रहे हैं...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... ठीक है भेज देना... (भीमा जाने लगता है) एक मिनट रुको... (भीमा रुक जाता है) भीमा...

भीमा - जी हुकुम...

भैरव सिंह - तुम्हारे लाव लश्कर... अब कहाँ हैं...

भीमा - हुकुम... अपना मुहँ छुपाये... छुपे हुए हैं...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... एक काम करो... उन्हें कहो... अखाड़े में फिर से लग जाएं... विश्वा से टकराने के बाद... उन्हें एहसास तो हो गया होगा... उनसे चूक कहाँ पर हुई है...

भीमा - जी हुकुम...

भैरव सिंह - अब उन्हें तैयार करो... एक जबरदस्त मुकाबले के लिए... और हाँ... उनकी बहुत जल्द... विश्वा से टकराव हो सकता है... उसके लिए तैयारी करने के लिए बोलो... क्यूँकी अगला मुठभेड़.... या तो उनके लिए... या फिर विश्व के लिए... आखिरी मुठभेड़ होनी चाहिए...

भीमा - जी... जी हुकुम...

भैरव सिंह - अब जाओ उन दोनों को भेजो...

भीमा - जी हुकुम..

कह कर भीमा वहाँ से चला जाता है l तब तक नौकर भागते हुए अपनी हाथ में गोल्फ बॉल लेकर पहुँचता है और ड्राइवर पर बॉल को सेट करता है l भैरव सिंह अपना क्लब निकाल कर शॉट लेने को होता है कि बल्लभ और रोणा पहुँचते हैं l भैरव सिंह रुक जाता है

भैरव सिंह - आओ... आओ... दरोगा... आओ... (रोणा और बल्लभ एक दुसरे को ताकने लगते हैं) आओ दरोगा... रुक क्यूँ गए... यह रहा बॉल... एक शॉट मेरे क्लब से मारो... (बेवक़ूफ़ की तरह रोणा कभी बल्लभ को कभी भैरव सिंह को देखने लगता है) ओह... कॉम ऑन... यह लो...

कह कर अपना क्लब रोणा की

बढ़ाता है, रोणा असमंजस सा भैरव सिंह के पास चलते हुए आता है, भैरव सिंह अपना गोल्फ क्लब को रोणा के हाथ में देता है l रोणा पोजीशन लेता है और एक शॉट खेलता है बॉल दुर जाकर गिरता है l भैरव सिंह चुटकी बजाता है तो नौकर बॉल को वापस लाने भाग जाता है l

भैरव सिंह - कप कहाँ है... तुम्हारा शॉट कहाँ है... सबसे ऊपर तुम्हारा ध्यान कहाँ है... (रोणा का सिर झुक जाता है) हम क्या समझे दरोगा... तुमसे हो पाएगा या नहीं...

रोणा - जी इसी विषय पर आपसे बात करने आए हैं...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... (अपनी जगह पर बैठ कर) क्या बात करने आए हो...

रोणा बल्लभ से एक न्यूज पेपर लेकर भैरव सिंह के सामने टी पोय पर रख देता है l भैरव सिंह पेपर उठा कर पेपर देखने लगता है l फिर पेपर को एक किनारे पर रख कर रोणा की ओर देख कर

भैरव सिंह - क्या मतलब है इसका...

रोणा - केस... के लिए... नया एसआईटी बनने वाला है...

भैरव सिंह - तो...

रोणा - श्रीधर परीड़ा... गायब है...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म तो...

बल्लभ - राजा साहब... मैं कुछ कहूँ...

भैरव सिंह - हाँ कहो...

बल्लभ - इस वक़्त अगर विश्व के खिलाफ कुछ किया गया... तो केस हमारे हाथ से निकल सकता है...

भैरव सिंह - सीधे सीधे बको... पहेलियाँ मत बुझाओ...

बल्लभ - राजा साहब... हर न्यूज में... विश्व को हीरो की तरह प्रेजेंट किया गया है... बहुत बढ़ा चढ़ा कर लिखा गया है... ऐसे में.. विश्व को कुछ हुआ तो...

भैरव सिंह अपनी जगह से उठता है और दोनों के सामने खड़ा होता है l बल्लभ का जबड़ा पकड़ कर गोल गोल घुमाते हुए

भैरव सिंह - हम राजा हैं... तुझे पाल इसलिए रहे हैं... के तु सोचे... अपना दिमाग खपाये... और इसे.. (रोणा की ओर देखते हुए) पाल इसलिए रहे हैं... यह कर गुजर जाए... (बल्लभ का जबड़ा छोड़कर) अब अगर तुम दोनों का काम हमें ही करना है... तो... जरा सोच के बताओ... हमें तुम दोनों की कोई जरूरत है भी या नहीं...

दोनों के चेहरे पर खौफ छा जाती है l डर के मारे दोनों के चेहरे सफेद हो जाता है l भैरव सिंह अपनी कुर्सी पर वापस बैठ कर

भैरव सिंह - हाँ तो क्षेत्रपाल रियासत के दो रत्न.. बताओ... तुम लोगों के काम... किसी और को दिया जाए... या...

रोणा - नहीं राजा साहब... आप ने जो काम दिया है... वह अब ख़तम कर ही वापस आयेंगे...

भैरव सिंह - बहुत अच्छे.. जल्दी से काम पर लग जाओ... ताकि हमें यह मालुम रहे की हमारे काम में तुम लोग मसरूफ हो... ताकि तुम्हारे काम को ना तो हमें अपनी हाथों में लेनी पड़े... ना ही किसी और को देनी पड़े...

बल्लभ - जी राजा साहब...

भैरव सिंह - अब जाओ यहाँ से...

बल्लभ और रोणा बिना पीछे देखे वापस चल देते हैं l दोनों बाहर आकर रोणा के जीप में बैठ जाते हैं l रोणा तेजी से गाड़ी मोड़ कर अपने क्वाटर की ओर जाने लगता है l

रोणा - कभी कभी लगता है... यह राजा साहब ही पागल है...

बल्लभ - वह नहीं... हम पागल हैं... और हाँ... राजा साहब पर गुस्सा इसी गाड़ी में ही रख कर... उतरते वक़्त थूक देना... वर्ना... यह राजगड़ है... हवाओं के कान होते हैं...

रोणा चुप हो जाता है, गाड़ी निरंतर चलाने के बाद अपनी क्वार्टर के पास गाड़ी रोकता है पर गाड़ी से उतरता नहीं है और अपनी हाथ को स्टीयरिंग पर दो तीन बार अपने हाथ से मारने लगता है l

बल्लभ - शांत... क्यूँ गुस्सा कर रहा है...

रोणा - सात दिन से... सिपाही लगाए हैं... पर विश्वा कहीं जाता नहीं है... क्या कर रहा है... कुछ मालुम भी नहीं हो रहा है... और ऊपर से... यह साले न्यूज वाले... उसे हीरो बना कर.. हमारा काम मुश्किल कर रहे हैं... और यह राजा साहब... बात की गहराई को समझने के लिए तैयार नहीं है... साले काले कोट वाले... तुझे साथ लेकर गया था... ताकि राजा साहब को तु समझा पाए... पर तेरे से वह भी नहीं हुआ...

बल्लभ - हाँ नहीं हुआ... (कह कर गाड़ी से उतर जाता है) पर राजा साहब ने गलत क्या कहा है बोल... हम उनके फेंके हुए टुकड़ों पर इसी लिए तो पल रहे हैं... ताकि उन्हें सोचना ना पड़े... और करना ना पड़े... सोचने के लिए... मुझे पैसे मिलते हैं... और कर गुजरने के लिए तुझे...

रोणा - (गाड़ी से उतर कर) खूब अच्छा सोचा है तुने... तेरे कहने पर... आदमी लगाए हैं... और वह साला हरामी... सात दिन से खा पी कर अजगर की तरह डकार मार रहा है... पर हिल नहीं रहा...

बल्लभ - पहले भी कहा था तुझे... सब्र कर... उतावला मत हो... विश्वा कोई ना कोई गलती करेगा... जरा सोच... अब तक तुने उसके हाथ पैर बाँध रखा है... जैसे ही हरकत करेगा... तब तु उसे ख़तम कर देना... और तब रिपोर्ट में लिख देना... भाग रहा था... पैर पर गोली चला रहा था... गलती से गोली... पीठ पर लग गई....

इतना सुनने के बाद रोणा थोड़ा शांत हो जाता है l बल्लभ की कही बातों को समझने के अंदाज में अपना सिर हिला कर सहमती देता है l

रोणा - ठीक कह रहा है... मैं थोड़ा उतावला हो जाता हूँ... अब तक किस्मत ने विश्व के साथ दिया है... पर कब तक... अपनी भी बारी आएगी... तब साले को कुत्ते की मौत मारूंगा... कसम से... गालियों में दौड़ा दौड़ा कर मरूंगा... (बल्लभ से) चल अंदर आजा... मिलकर कुछ सोचते हैं...

दोनों क्वार्टर के अंदर जाने लगते हैं कि तभी रोणा की मोबाइल बजने लगती है l अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर देखता है स्क्रीन पर टोनी डिस्प्ले हो रहा था l टोनी का नाम देखते ही रोणा की भवें तन जाती हैं l कमरे में सोफ़े पर बैठते हुए बल्लभ रोणा की हालत देखता है l

बल्लभ - क्या हुआ किसका फोन है...

रोणा - लगता है... किस्मत पलटने वाली है... अगर यह कॉल मेरे मतलब कि हुई... तो समझ लो... विश्वा की बर्बादी शुरु होने वाली है...

बल्लभ - अच्छा यह बात है... तो फिर कॉल को स्पीकर पर डाल... (रोणा वही करता और कॉल लिफ्ट करता है)

रोणा - हैलो...

टोनी - हैलो... रोणा सर...

रोणा - बोल टोनी... उर्फ लेनिन...

टोनी - लेनिन... मेरा पास्ट है... टोनी... मेरा प्रेजेंट... अब वक़्त आ गया है... टोनी को पास्ट करने का...

रोणा - ह्म्म्म्म... मतलब लड़की के बारे में... बहुत कुछ पता कर लिया है...

टोनी - नहीं... बहुत कुछ नहीं... पर तुम्हारे मतलब कि जितनी होनी चाहिए... पता कर लिया है...

रोणा - क्या पता किया है...

टोनी - इतनी जल्दी भी क्या है... पहले यह बताइए... मेरे काम का क्या हुआ... मेरी नई आइडेंटिटी...

रोणा - हो गया है... मैंने तुम्हारे लिए... नई आधार कार्ड... और वोटर आईडी कार्ड जुगाड़ कर दिया है...

टोनी - तो ठीक है... सुनिए... बहुत जल्द विश्व से मिलने वह नंदिनी... राजगड़ जाने वाली है.. और विश्व के दीदी के पास ठहरने वाली है...

रोणा - (इतना सुनते ही आँखे किसी शिकारी की तरह चमकने लगते हैं) कब...

टोनी - बहुत जल्द...

रोणा - मैं कैसे मान लूँ... तुझे यह सब कैसे मालुम हुआ...

टोनी - हा हा हा हा... रोणा बाबु... विश्वा चालाक सही... पर मैं भी कुछ कम नहीं... आज सुबह ही मेरे आदमी ने नंदिनी के मोबाइल फोन में... मेमोरी कार्ड वाली जगह पर बग फिक्स किया है... अब तोता मैना दोनों जो भी बातेँ करेंगे... मुझे मालुम हो जाएगा... बस इतना जान लीजिए... लड़की के इर्द-गिर्द विश्वा के आदमी बिछे हुए हैं...

रोणा - क्या बात कर रहा है... तुने तो बहुत बड़ा काम कर दिया है...

टोनी - तो बोलिए... अपना नया पहचान लेने कब आऊँ...

रोणा - जब लड़की मेरे हाथ लग जाएगी...

टोनी - ऐसी कोई डील नहीं हुई थी...

रोणा - देख टोनी... नया आईडी लेकर तु निकल गया... और कहीं मैं फंस गया.. तो... वैसे भी... अभी अभी जो तुने कहा है... क्या ग्यारंटी है... वह सब सच ही है...

टोनी - अभी रिकार्डिंग भेज देता हूँ...

रोणा - चल भेज...

टोनी - भेज दूँगा.. भेज दूँगा... पर आपकी डील पर... अपनी भी एक डील है...

रोणा - हाँ बोल...

टोनी - अगर लड़की सच में राजगड़ जाती है... तो उसे बीच रास्ते से मैं उठा लूँगा... आपको डायरेक्ट डेलिवेरी देकर अपनी नई पहचान ले लूँगा...

रोणा - यह हुई ना... कमीनों वाली डील... मंजुर है... एक हाथ लड़की देगा... दुसरे हाथ अपने लिए नई आईडी लेगा...

टोनी - डील...

रोणा - अब भेज वह कंवरसेशन...

टोनी फोन काट देता है और रुप और विश्व के बीच हुई बातचीत का रिकार्डिंग व्हाट्सएप पर भेज देता है l रोणा और बल्लभ दोनों वह कंवरसेशन सुनने लगते हैं l सब सुनने के बाद जहां रोणा बहुत खुश होता है वहीँ बल्लभ कुछ सोच में पड़ जाता है l

रोणा - देखा वकील... अब किस्मत हमारा साथ देने लगी है... और विश्वा की लेने लगी है... क्या सोचने लगा है वकील...

बल्लभ - पहली बात... जहां तक मुझे भान हो रहा है... वह लड़की कोई मामूली लड़की नहीं है... दुसरी बात... जैसा कि टोनी ने कहा... उस लड़की के चारों तरफ... विश्वा के आदमी बिछे हुए हैं... (कहते कहते चुप हो जाता है, फिर अचानक रोणा से कहता है) एक बात कहूँ...

रोणा - क्या...

बल्लभ - क्यूँ ना लड़की के बारे में... हम जितना जानते हैं... वह सब हम राजा साहब को बता दें... एक बार विश्व की कमजोरी राजा साहब के हाथ में आ गई... तो विश्वा कुत्ता बन कर राजा साहब के जुते चाटने आएगा... (रोणा चुप रहता है) क्या हुआ... मेरी बात तुझे पसंद नहीं आई...

रोणा - नहीं... नहीं आई पसंद..

बल्लभ - क्यूँ... क्या गलत कह दिया... मत भुल... उस लड़की को... मैंने राजकुमार की सगाई वाले दिन देखा था... मतलब वह कोई मामुली हस्ती की बेटी नहीं होगी... कुछ ऊँच नीच हो गई... तो फिर राजा साहब के पास भागना पड़ेगा...

रोणा - जो होना वह होगा... पर उस लड़की के बारे में... राजा साहब अभी नहीं... उसकी चुत में.. अपना लौड़ा गाड़ने के बाद हो खबर करूँगा... मुझे कोई मतलब नहीं है... वह लड़की कौन है.. किसकी है... (अपनी गाल पर हाथ फेरते हुए) मुझे बस इतना मालुम है... मुझे उसकी लेनी है... वह भी विश्वा के सामने...

बल्लभ - (गुस्से में खड़े होकर) राजा साहब को खबर करने से... तुझे प्रॉब्लम क्या है....

रोणा - (गुस्से में तमतमा कर खड़ा होता है) हाँ प्रॉब्लम है... राजा साहब को कह देने से.. वह लड़की को उठा लेंगे... अपनी रंडी बनाएंगे... फिर जब मन भर जाएगा... तब अपनी झूठन को हमारी ओर फेंक देंगे... इसे तो मैं अपनी पर्सनल रंडी बनाऊँगा... विश्वा को अंजाम तक पहुँचाने के बाद... राजा साहब मुझे रंग महल दे देंगे... मैं मरते दम तक... उस लड़की के साथ ऐस करता रहूँगा...

बल्लभ - पागल हो गया है तु...

रोणा - देख... राजा साहब को... विश्व को बर्बादी चाहिए... मैं वही कर रहा हूँ...

बल्लभ - ठीक है... तेरे इस प्लान में मैं नहीं हूँ... घबरा मत... तेरे इस प्लान के बारे में किसी से नहीं कहूँगा... क्यूँकी जब तेरा यह प्लान बैक फायर करेगा... तब तो तु मेरे पास आएगा ही... चलता हूँ... बेस्ट ऑफ लक...

इतना कह कर रोणा को वहीँ छोड़ कर बल्लभ चल देता है l रोणा अपने मन में बल्लभ को गालियाँ बकते हुए चेयर पर बैठ जाता है l बल्लभ के जाने के कुछ पल के बाद रोणा के क्वार्टर की डोर बेल बजती है, रोणा अपनी जगह से उठने के बजाय चिल्लाते हुए कहता है

- कौन है... अंदर आ जाओ...

कमरे में एक कांस्टेबल अंदर आता है, एक जोरदार सैल्यूट मारने के बाद कहता है

- कांस्टेबल जगन्नाथ महाकुड़ रिपोर्टिंग सर...

रोणा - अरे जगन्नाथ... तुम इस वक़्त... लगता है कोई जरूरी खबर है...

जगन्नाथ - जी... सर... एक बहुत ही खास खबर है सर... विश्व के बारे में... और उसके अगले मूवमेंट के बारे में...

इतना सुनते ही रोणा के कान खड़े हो जाते हैं, चेयर पर सीधा बैठ जाता है और जगन्नाथ से कहने के लिए कहता है l जगन्नाथ कहता है कि कोई यशपुर में है,जो विश्व को न्यूज पेपर के जरिए कुछ ना कुछ ख़बरें भेजता रहता है l उसके आधार पर विश्व अपने काम को अंजाम देता रहता है l अब शायद आगे कुछ खास करने वाले हैं इस लिए वह दो दिन बाद विश्व से मिलने के लिए कह दिया है l सब सुनने के बाद

रोणा - कैसे मिलेंगे... इस बाबत कोई जानकारी...

जगन्नाथ - जी नहीं सर...

रोणा - ठीक है... तुमने बहुत अच्छा काम किया है... जाओ इस पर तुम एक ऑफिसीयल रिपोर्ट बनाओ... और मेरे पास डीपोजीट करो...

जगन्नाथ - जी सर... (कह कर सैल्यूट मारता है, और वापस जाने को होता है कि फिर मुड़ कर) सर परसों हमे क्या करना होगा... अगर विश्व बाहर गए... तो क्या हम उनके साथ जाएंगे...

रोणा - (मुस्कराते हुए अपनी जगह से उठता है और जगन्नाथ के यूनीफॉर्म के बटन पर हाथ फेरते हुए) जगन्नाथ जी... आपको विश्व के घर के बाहर ड्यूटी लगाया गया है... आप बस उतना ही कीजिए... आगे क्या करना है... वह हम देख लेंगे... समझे कुछ...

जगन्नाथ - जी... जी सर..

रोणा - गुड... नाउ यु मे लिव...
 
धन्यबाद लियोन भाई

हाँ मृत्युंजय का कुछ अतीत है

जो क्षेत्रपाल परिवार से जुड़ा हुआ है

बदला लेने वाला है अपने तरीके से

हाँ यही तो कहानी का विशेष है

कहानी में यह लोग आम नहीं हैं

खास हैं

यह शह और मात का खेल है

कभी बाजी इस तरफ़ कभी बाजी उस तरफ़

वह अंजाम बहुत ही भयानक होगा

जिसकी कल्पना तक रोणा ने ना कि होगी
 
भाई बहुत बहुत धन्यबाद

🥰🥰🥰

फ़िलहाल रोणा की लाइफ लाइन थोड़ी और बची है

विश्व उसे बहुत जलील पहले भी किया है

अब अंतिम बार करेगा

फिर रोणा का एक ही लक्ष रहेगा किसी भी तरह से विश्व से बदला लेना

वही उसका अंतिम प्रयास होगा

भैरव सिंह कभी इतना इंसिक्योर नहीं हुआ है

अभी वह जितना हो रहा है

इसका एक इतिहास है

खुद मृत्युंजय अपने मुहँ से कहेगा

पर यह सत्य है कि मृत्युंजय के वज़ह से वीर और विक्रम बहुत बुरी तरह प्रभावित होंगे

अंत में धन्यबाद SANJU ( V. R. ) भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया
 
कहानी में जिसका जितना जरूरत होती है उसका किरदार भी उसके अनुरुप होता है

छटी गैंग की भूमिका अब सीमित होता जाएगा हाँ आगे रॉकी की कुछ कुछ भूमिका बचा है

हाँ कोई जैल से आया है

तो उसका कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट उसका जैल यात्रा जो होता है

इसका एक पोजिटिव एंगल है

विश्वास रखिए विक्रम बदल चुका है

नहीं अभी थोड़ा और समय है

इस बार जो झटका लगेगा उससे रोणा अपना आपा खो बैठेगा

अच्छे बुरे की भी नहीं सोच पाएगा

एक तरह से पागल हो जाएगा

उस वक़्त उसे मौत मिलेगी

हाँ यह बात एकदम सही कही

अपनी इगो के चलते रोणा को विश्व के पीछे छोड़ा है

ताकि विश्व को वह फंसा सके पर विश्व उससे आगे की सोचा हुआ है इस बात का एहसास रोणा की मौत के बाद होगा

अगले अपडेट पर काम चल रहा है

आशा है जल्द ही आपके समक्ष लाउंगा
 
👉एक सौ इकतालीसवां अपडेट

------------------------------

--------


दो दिन बाद

अपने क्वार्टर में शीशे के सामने खुशी से सिटी मारते हुए रोणा अपना खास खाकी शूट निकालता है और पहनने लगता है l खाकी टाई गले में बाँधता है l अपने कंधे के फीते पर चमकते हुए तीन सितारों वाली स्ट्रिप लगाता है l सितारों पर हाथ फेरते हुए सिटी बजाना बंद कर देता है, उसे तभी अदालत में एडवोकेट जयंत राउत के पूछे सवाल याद आता है

"कितने स्टार्स हैं आपके कंधे पर"

रोणा - तीन स्टार्स हैं... बुड्ढे... तीन स्टार्स... राजगड़ आदर्श थाने का आदर्श थानेदार हूँ... दो बार आदर्श थाने की प्रभारी के रुप में पुरस्कार जीत चुका हूँ... जिंदगी में कभी हारा नहीं था... पर पहली बार... तुने अदालत में मेरी इज़्ज़त उतारी... और छह महीने के लिए... सस्पेंड भी करवा दिया... पर तु... परलोक सिधार गया... और पीछे उस नासूर विश्वा को छोड़ गया... जो किसी बिच्छु की तरह... मुझे कानूनी और गैर कानूनी डंक जब चाहे तब मार कर चला जाता है... पर अब नहीं... (अपना कैप सिर पर पहनते हुए) एक वकालत की डिग्री क्या हासिल कर ली... डैनी की जुते चाट चाट कर... थोड़ी मार पीट क्या सीख ली... मेरे साथ गेम खेल रहा है... साले हरामी के पिल्ले... हर कुत्ते का दिन आता है... आज मेरा दिन है... आज तुझे और तेरे उस डाकिए को एक साथ पकुड़ुंगा... और राजा साहब के हवाले करूंगा... उस डाकिए को भले ही मगरमच्छ का निवाला बना दें राजा साहब... पर तुझे मैं जिंदा रखूँगा... क्यूँकी मुझे आज रंग महल मिल जाएगा... उस महल में तेरी छमीया की जब जब फाड़ुंगा... तब तब तु अपना जीभ लह लहाते हुए... मेरा तलवे चाटेगा... ही हा हा हा हा... हा हा हा हा हा...

कह कहा लगाते हुए हँसने लगता है l फिर वह अपनी हँसी को रोक कर फिर से अपनी टाई को कसने लगता है l फिर अपने क्वार्टर से बाहर निकलता है l बाहर उसे गाड़ी के पास उदय मिलता है l उदय उसे सैल्यूट मारता है l पहले उसे इग्नोर करते हुए रोणा अपने गाड़ी में बैठता है, फिर कुछ सोच कर गाड़ी से उतरता है और उदय के पास पहुँचता है l

रोणा - ओ उदय उदय उदय... आज मैं बड़ा खुश हूँ... बहुत ही खुश... बस तु दुआ कर... मैं जिस काम के लिये निकला हूँ... वह कामयाब हो जाए.... अगर ऐसा हो गया... तो... (रुक जाता है)

उदय - (हाथ जोड़ कर बड़ी जिज्ञासा भरी नजर से देखता है)

रोणा - तो मैं... स्पेशल सिफारिश कर... तुझे ग्राम रखी से... कांस्टेबल बना दूँगा...

उदय - (बहुत खुश होते हुए) जी ज़रूर... जी ज़रूर... मैं आपका यह उपकार जनम जनम तक नहीं भुलाऊंगा...

रोणा - (उदय के कंधे को थपथपाते हुए) शाबाश...

कह कर रोणा अपनी जीप में बैठ जाता है और गाड़ी स्टार्ट कर अपने थाने की ओर चल देता है l थाने के आगे अपनी जीप लगा कर बड़े एटीट्यूड के साथ उतरता है और मोबाइल निकाल कर फाइल फ़ोल्डर में नंदिनी और विश्व की तस्वीर निकाल कर देखने लगता l नंदिनी की फोटो को एनलार्ज कर स्क्रीन से विश्व को गायब कर देता है l एक कमिनी मुस्कराहट उसके चेहरे पर उभर आती है l रोणा का ध्यान टूटता है जब एक हवलदार उसके पास आकर सैल्यूट मारता है l रोणा थोड़ा सकपका जाता है और फिर मोबाइल को बंद कर अपनी जेब में रख देता है l

रोणा - क्या खबर है...

हवलदार - सर... दस बंदे आए हैं... देवगड़ से.... आपसे मिलना चाहते हैं...

रोणा - ह्म्म्म्म... चलो मिलते हैं...

दोनों थाने में आते हैं l दस बंदे जो बैठे हुए थे वह लोग खड़े होकर रोणा को सैल्यूट करते हैं l सब के सब एक सफेद टी शर्ट, खाकी पेंट और पुलिसिया लाल जुते पहने हुए थे l उनमें से एक बंदा आगे आकर रोणा के हाथ में एक लिफ़ाफ़ा देता है l रोणा लिफ़ाफ़ा खोल कर उसमें से एक चिट्ठी निकाल कर देखता है और उनसे कहता है

रोणा - ठीक है... जाओ अपनी गाड़ी में बैठो... मैं अभी दस मिनट में आता हूँ... (सभी मूड कर जाने को होते हैं कि) रुको सब... (सभी रुक जाते हैं) यह क्या... हम कोई पिटी करने नहीं जा रहे हैं... किसी खास को... आम लोगों के बीच गार्ड करने जा रहे हैं... जाओ सभी यह PT कपड़े उतार कर आम डेली यूज कपड़े पहन लो... ताकि भीड़ में किसी को भी यह ना लगे कि तुम सब पुलिस वाले हो...

सभी - जी सर...

सारे बंदे रोणा को सैल्यूट मार कर बाहर चले जाते हैं l सबके जाने के बाद रोणा अपने चेंबर में जाता है और कमरे में एक आलमारी खोलता है l घर से पहन कर आया अपना शूट निकाल कर आलमारी में रख देता है और साधारण सी शर्ट और पैंट निकाल कर पहन लेता है l जब अपने चेंबर से बाहर निकलता है तो, पाता है सारे स्टाफ उसे आँख और मुहँ फाड़े देख रहे हैं l

रोणा - क्या देख रहे हो...

हावलदार - सर... क्या कोई स्पेशल मिशन है...

रोणा - हाँ बैकुंठ... बहुत ही स्पेशल मिशन है...

बैकुंठ - सर... यह लोग क्या बाहर से इसीलिए आए हैं...

रोणा - हाँ...

बैकुंठ - सर... यह वह विश्व वाला मैटर ही है ना...

रोणा - हाँ बिल्कुल...

बैकुंठ - तो हमें क्यूँ सामिल नहीं किया आपने...

रोणा - (एक कमिनी मुस्कान दिखाते हुए) बैकुंठ... क्या करूँ मैं... बोलो... कैसे करूँ बोलो... विश्वा ने कोर्ट में एफिडेविट किया है... उसे राजगड़ थाने में से... किसी पर भी विश्वास नहीं है... इसीलिए तो दो कांस्टेबल डेपुटेशन में... वह भी बाहर से लाकर उसकी रखवाली किया जा रहा है... अब वह एडवोकेट विश्व प्रताप राजगड़ से निकल कर यशपुर जा रहे हैं... अब उनकी रखवाली तो करनी पड़ेगी ना... इसीलिए... हमने यह दस पैरा कमांडोज को डेपुटेशन में देवगड़ से बुलाया है.... ताकि विश्व प्रताप जहां भी जाएं... जिससे भी मिले आराम से मिले... और उन्हें कुछ तकलीफ ना हो... समझे...

बैकुंठ - जी सर...

रोणा मुस्कराते हुए बाहर चला जाता है l अपनी जेब से जीप की चाबी निकाल कर एक बंदे को देता है l वह बंदा रोणा की जीप स्टार्ट करता है l उस जीप में रोणा और ड्राइवर के साथ और दो बंदे बैठते हैं, और बाकी सात बंदे एक वैन में बैठ जाते हैं l दोनों गाड़ियां थाने से निकल कर गाँव में से होते हुए दुसरी तरफ आखिरी छोर यानी उमाकांत सर जी के घर के बाहर रुकती है l घर के बाहर बैठे जगन्नाथ और हरिश्चंद्र दोनों रोणा को देख कर सैल्यूट मारते हैं l रोणा उनके सैल्यूट को नजरअंदाज कर आँखों के इशारे से विश्व के बारे में पूछता है l जगन्नाथ भी उसे इशारे में विश्व अंदर होने की बात कह देता है l रोणा गाड़ी से उतर कर घर की अंदर जाने लगता है कि विश्व तभी टीलु के साथ बन ढंन के बाहर आ रहा था l

रोणा - हैलो... एडवोकेट महोदय... (रोणा को यूँ अपने सामने अचानक देख कर विश्व चौंकता है) किधर चल दिये... यूँ बन ढंन कर...

विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) इंस्पेक्टर साहब आप... यहाँ... इस वक़्त...

रोणा - क्या करें एडवोकेट बाबु... क्या करें... हम तो चैन से जिए जा रहे थे... आपने ही... यह एफिडेविट वाला कांड करके... हमारा जीना हराम कर दिया...

विश्व - क्यूँ क्या हुआ... आपने तो अपनी ड्यूटी खूब निभाई है... मेरे यहाँ दो कांस्टेबलों की तैनाती कर...

रोणा - पर यह तैनाती सिर्फ राजगड़ के लिए ही है... अब आप यशपुर निकलेंगे तो स्पेशल ड्यूटी बजानी पड़ेगी ना...

विश्व - (चुप रहता है)

रोणा - क्यूँ क्या हुआ... लगता है... आप हमसे नाराज हो गए...

विश्व - इंस्पेक्टर साहब... मैं सिर्फ अकेला हूँ... जब कि आप पुरे फोर्स के साथ आए हैं...

रोणा - क्या करें आपकी जान ही इतनी क़ीमती है... घबराईए नहीं... आप यशपुर ही क्यूँ... जहां भी जाना चाहें जाएं... यह हमारे सारे बंदे... आपके इर्द-गिर्द रहेंगे... पब्लिक में घुल कर...

विश्व - नहीं... ऐसा नहीं हो सकता....

रोणा - क्यूँ.. क्यूँ नहीं हो सकता...

आप इनकी और मेरी निगरानी में ही... आप जहां चाहें जाएं... जिससे चाहें मिलें... क्यूँ के... आज के दिन यह लोग... और मैं आपके साथ ही रहेंगे...

विश्व - आपको कैसे मालुम हुआ... मैं आज यशपुर जा रहा हूँ...

रोणा - वह सोलै वाला डायलॉग है ना... हमारे जासूस चारों और फैले हुए हैं...

विश्व - मत भूलिए... वह डायलॉग असरानी ने कहा था..

रोणा - हाँ पर यहाँ गब्बर सिंह कह रहा है...

विश्व - तो फिर मेरा प्रोग्राम कैंसिल...

विश्व इतना कह कर अंदर चला जाता है l पर टीलु वहीँ खड़ा रह जाता है l थोड़ी देर के लिए रोणा का चेहरा उतर जाता है l विश्व के ना जाने से उसका प्लान चौपट हो सकता है l उसे लगने लगता है शायद उसने थोड़ी ओवर स्मार्टनेस दिखा दी l विश्व को किसी भी तरह आज के आज राजगड़ से बाहर ले जाना होगा l तभी उसका प्लान कामयाब हो पाएगा l इसलिए वह विश्व से बात करने अंदर जाता है l अंदर विश्व एक चेयर पर बैठा हुआ था l

रोणा - क्या हुआ... तुम ने अपना प्लान कैंसिल क्यूँ किया... कोई ई-लीगल काम था क्या... जो पुलिस वालों के होते हुए... तुम कर नहीं सकते...

विश्व - मुझे आपके या आपके थाने के पुलिस वालों पर भरोसा नहीं है...

रोणा - जानता हूँ... तभी तो मेरे साथ जो बंदे आए हैं... वे लोग देवगड़ डिविजन के... ओडिशा स्पेशल आर्म्ड पुलिस के पैरा कमांडोज हैं...

विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) मुझ जैसे... एक आम आदमी के लिए... पैरा कमांडोज... यह बात कुछ हजम नहीं हो रही है...

रोणा - भई... एफिडेविट तुमने करा है... तुम कोई गैर मामूली तो हो नहीं... न्यूज पेपर हो या टीवी... हर जगह तुम ही तुम छाए हुए हो... आरटीआई एक्टिविस्ट... एडवोकेट और ना जाने क्या क्या...

विश्व - ठीक है फिर... अगर बात ऐसी है... तो मेरे साथ आप अकेले चलिए... आप उन लोगों को वापस भेज दीजिए...

रोणा - ना... ऐसा तो नहीं हो सकता... सरकारी ऑर्डर तुमने निकलवाई है... और हम ठहरे... सरकारी मुलाजिम... (लहजा थोड़ा कड़क कर) अब तुम चाहो या ना चाहो... यह लोग आज तुम्हारे साथ रहेंगे... आफ्टर ऑल हम पब्लिक सर्वेंट जो ठहरे... ऑफ द पीपुल.. बाय द पीपुल.. फॉर द पीपुल..

विश्व - यह डेमोक्रेसी में गवर्नमेंट के लिए कहा जाता है...

रोणा - हाँ मालुम है... और हम पार्ट ऑफ द... गवर्नमेंट हैं... और हाँ आज कोई चालाकी नहीं करना... क्यूँकी आज के लिए.. मैंने स्पेशल ऑर्डर निकलवाया है... अगर इस वक़्त तुम मेरे कहे मुताबिक नहीं चले... तो ऐसी रिपोर्ट बनाऊँगा की... तुम कुछ दिनों के लिए ही सही... मेरे थाने में मेहमान बन कर रहोगे...

विश्व - (कुछ सोचने लगता है, कुछ देर के बाद) ठीक है... मुझे उन पैरा कमांडोज साथ... इंट्रोड्युस करायीये...

रोणा - अभी कराए देते हैं...

रोणा बाहर जाकर सभी पैरा कमांडोज को अंदर बुलाता है l सभी रोणा के साथ अंदर आते हैं l विश्व अपनी जगह से खड़ा होता है, रोणा एक एक कर के सबका विश्व से परिचय करवाता है l

रोणा - तो... क्या फैसला किया तुमने... (विश्व कुछ सोचने लगता है) देखो नवा नवा वकील... तुम हमारे साथ चलो... गाँव में कोई सीन ना करो... तो तुम्हारे लिए अच्छा ही रहेगा... और हाँ... अपने ज़ज्बात... हाथ पैर पर काबु बनाए रखो... यह लोग... सरकारी मिशन पर हैं... तुम्हारा एक भी गलत कदम... तुम्हारे खिलाफ जा सकता है...

विश्व - ह्म्म्म्म... बहुत तैयारी के साथ आए हो... इंस्पेक्टर अनिकेत रोणा....

रोणा - (एक कुटिल मुस्कराहट के साथ) कोई शक़...

विश्व - (सरेंडर करने के अंदाज में) बात मेरी समझ में आ गई... मैं चाहे जाऊँ या ना जाऊँ... तुम लोग आज मेरे साथ चिपके रहोगे... चूंकि सरकारी फरमान है... मैं कम से कम आज के दिन... मैं तुम लोगों के खिलाफ... जा नहीं सकता....

रोणा - वाकई... बहुत समझदार हो गए हो... (लहजा कड़क करते हुए) चलें...

विश्व चुप चाप उनके साथ बाहर जाने लगता है l घर के बरामदे से उतरते वक़्त टीलु पायदान उतरने लगता है तो रोणा उसे रोक कर गाने के अंदाज में

रोणा - विश्व के साथ यशपुर में तुम्हारा क्या काम है...

पैरा कमांडोज है साथ तो तु क्यूँ परेशान है...

विश्व उसे सिर हिला कर अपना सहमती देता है l पहले वाले जीप में विश्व के साथ रोणा ड्राइवर और दो कमांडोज बैठ जाते हैं l पिछले गाड़ी में बाकी सात कमांडोज l गाड़ी राजगड़ से निकल कर यशपुर के रास्ते पर धुल उड़ाते हुए दौड़ने लगती है l एक किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अचानक रोणा के कान में पीछे वाली गाड़ी की हॉर्न सुनाई देती है l रोणा अपनी गाड़ी को रुकवाता है l

अपनी गाड़ी से उतर कर पीछे वाली गाड़ी के पास आता है, देखता है उनकी गाड़ी के इंजन में कोई प्रॉब्लम आई थी शायद l स्टार्ट ही नहीं हो रही थी l रोणा चिढ़ कर उस वैन के ड्राइवर से पूछता है

- और कितना वक़्त लगेगा...

ड्राइवर - पता नहीं सर... ज्यादा से ज्यादा... एक घंटा...

रोणा - ठीक है... मैं तुम लोगों का... सर्कल आउट हाउस में इंतजार कर रहा हूँ... अगर एक घंटे में नहीं आए... तो हम चारों ही विश्व को लेकर निकल जाएंगे...

ड्राइवर - कोई मसला नहीं है सर... हम एक घंटे से पहले ही... सर्कल आउट हाउस में पहुँच जाएंगे...

रोणा अपनी गाड़ी में वापस आकर बैठता है और ड्राइवर से सर्कल आउट हॉउस चलने को कहता है l ड्राइवर गाड़ी को ड्राइव करते हुए बीस मिनट बाद यशपुर के सर्कल ऑउट हॉउस में दाखिल होता है l विश्व उस ऑउट हॉउस को अच्छी तरह से मुआयना करता है l

रोणा - आओ एडवोकेट साहब... जब तक दुसरी टीम नहीं पहुँचती... तब तक क्यूँ ना अंदर कुछ गुफ़्तगू करें..

विश्व - जगह अच्छी चुनी है इंस्पेक्टर साहब... यह वह जगह है ना... जहां... सरकारी किडनैपिंग के बाद छुपा कर रखा जाता है... अरेस्ट नहीं दिखाया जाता...

रोणा - (आस्तीन से रिवॉलवर निकाल कर) जानता हूँ... तु बहुत तेज हो गया है... दिमाग से भी... और शरीर से भी... पर यहाँ कोई होशियारी मत करना... सीधे अंदर चल... आज मेरा दिन है विश्वा... इसलिए चुप चाप अंदर चल... वर्ना यकीन मान... मुझे गोली मारते हुए... कोई हिचक नहीं होगी...

कमांडोज में से एक भागते हुए उस हॉउस का दरवाजा खोलता है l विश्व देखता है अंदर एक कमरे में आमने सामने दो ही कुर्सी पड़े हैं l रोणा विश्व की पीठ पर रिवॉलवर की नाल लगा कर धकेलते हुए एक कुर्सी पर बिठा देता है और खुद विश्व की सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता है l इतने में वह तीन कमांडोज रोणा के पीछे आकर खड़े होते हैं और अपनी अपनी जेब से रिवॉलवर निकाल कर विश्व की ओर तान देते हैं l अब रोणा शरारती मुस्कान मुस्कराते हुए अपनी रिवॉलवर को आस्तीन में रखता है l

रोणा - आखिर... तु आया ना मेरे कब्जे में... (अचानक रोणा का चेहरा और आँख लाल हो जाता है) साले हरामजादे... आज एक एक का हिसाब लूँगा... माँ कसम एक एक का हिसाब लूँगा... जब से जैल से छुटा है... साले हरामी... मेरी लिए जा रहा है... बजाये जा रहा है... आज तुझे पुरे सुध के साथ लौटाऊँगा...

विश्व - यह अचानक तुम स्प्लीट पर्सनालिटी के शिकार कैसे हो गए... भूल गए... तुम मुझे यशपुर क्यूँ लेकर आए हो...

रोणा - नहीं भुला हूँ... सब याद है मुझे... तेरे साथ साथ... उस हरामी अज्ञात को भी धर दबोचना है... इसीलिए तो... तु अब तक जिंदा है... नहीं तो...

विश्व - नहीं तो तु मेरा झांट की बाल उखाड़ना तो दुर... मोड़ भी नहीं पाता... ना अभी पाएगा...

रोणा - अच्छा... हा हा हा हा...

हँसने लगता है, उसके साथ आए वह तीन बंदे भी हँसने लगते हैं l हँस लेने के बाद बड़े अदब से विश्व के सामने अपना पैर मोड़ कर घुटने पर रखता है l

रोणा - (खिल्ली उड़ाते हुए) तुझे क्या लगा... डैनी का चेला है... बड़ा लड़ाकू है... तो हमको यहाँ निपटा कर चला जाएगा... (अचानक गुस्से वाले लहजे में) गोली से तो तेज तु हो नहीं सकता... और मत भुल... तेरा एनकाउंटर भी हो सकता है...

विश्व - (हल्का सा मुस्कान लाते हुए) रोणा... गोली से कोई तेज नहीं हो सकता... माना... पर गोली चलाने के लिए जिगर चाहिए...

रोणा - ओ... तो तु इन लोगों का जिगर देखना चाहता है...

विश्व - हा हा हा हा...

अब विश्व हँसने लगता है l विश्व को हँसते देख कर रोणा हैरानी से विश्व की ओर देखने लगता है फिर मुड़ कर अपने बंदों को देखने लगता है l अंदर ही अंदर रोणा को डर लगने लगता है l वह धीरे से अपना कुर्सी पीछे की ओर थोड़ा सा खिसकाता है l विश्व हँसते हुए ही पूछता है

विश्व - इनकी नहीं बे... भुतनी के तेरी... (उसी मुस्कुराहट के साथ) भुवनेश्वर में तो तेरे से गोली चली नहीं... तो इन छपरीओं को लेकर आया है... मेरी एनकाउंटर करने... वह भी... स्मगल्ड चाइनीज माउजर के साथ...

रोणा - (आँखे फैल जाता है) मतलब तु समझ गया... यह लोग पुलिस वाले नहीं है...

विश्व - हाँ बे ढक्कन... (एक बंदे की ओर इशारा करते हुए) यह... यह देवगड़ रेड लाइट एरिया का गुंडा... हफ्ता वसुली करता है... नाम है... गुल्लू... (और एक बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ इंडस्ट्रीयल एरिया में मटका चलाने वाला... कांगालु... (आखिरी बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ का मशहूर जेब कतरा बाबुनी...

रोणा - (अपनी कुर्सी से हैरानी से उठ कर खड़े होते हुए) तु इन सब के बारे में कैसे जानता है...

विश्व - मैं इन्हें इसलिए जानता हूँ... के मैं तेरी जात और और औकात... अच्छी तरह से जानता हूँ.... तु मेरा एनकाउंटर कर ही नहीं सकता... क्यूँकी उसके लिए... तुझे सरकारी बंदूक इस्तेमाल करना पड़ता... और सरकारी गोली खर्चने पड़ते... इसीलिए... तु यह प्लान किया है... किसी तरह... मुझसे इनकी पुरानी दुश्मनी एस्टाब्लीश कर... मुझे मरवाने की सोच रखा है...

रोणा अपनी हलक से थूक निगलता है l वह तीन बंदे अब पुरी तरह से विश्व की ओर ऋण निशाना लगाए खड़े थे, तभी बाहर एक वैन आकर रुकती है l कुछ लोगों की अंदर आने की आहट होती है l बिना पीछे मुड़े रोणा पूछता है

रोणा - दलाई... तुम लोग आ गए...

बाहर से आवाज आती है - हाँ सर... हम आ गए...

रोणा -(विश्व से) हाँ... हरामजादे हाँ... तु सही समझा... पर तुझे मारना... मेरा प्लान बी है... प्लान ए नहीं... प्लान ए के तहत तुझे अपने पिंजरे में रखने के लिए... तुझे कुत्ते की तरह अपने तलवे चटवाने के लिए... तु क्या समझता है... तेरी सुरक्षा के लिए जो दो कांस्टेबल क्यूँ लगाए थे... उन्हीं के हाथों से मैंने रिपोर्ट बनाया है... के तुझे आज किसी से मिलने जाना है... इसी बहाने तुझे मैंने एक ऑफिशियल ऑर्डर बना कर यहाँ यशपुर लेकर आया हूँ... यहीं थोड़ी देर बाद तेरा गुमशुदगी का रिपोर्ट... थाने में दर्ज होगी... पर तु रहेगा मेरे कब्जे में... मेरे पिंजरे में... फिर कुछ दिनों बाद तेरी लाश सरकार को मिलेगी... पर तुझे मैं मारूंगा नहीं... बल्कि तु खुद अपनी जिंदगी को कोसते हुए... अपनी मर्दानगी पर थूकते हुए... खुदकुशी करेगा... समझा...

विश्व - ह्म्म्म्म प्लान तो बहुत बढ़िया है... तो तु इन छपरीओं के दम पर... मुझे काबु करेगा...

रोणा - बेहतरी इस में है के तु कोई हरकत ना करे... वर्ना... प्लान बी ऐक्टिव हो सकता है... क्यूँकी तु अब मेरे आदमियों से घिरा हुआ है... और उनके हाथों में.. चीनी कट्टे हैं... सोच ले...

विश्व - सोच लिया...

रोणा - (मुस्कराते हुए) क्या सोचा है तुने... मरेगा या... मेरे जुते चाटेगा...

विश्व - तु अपनी जुते इन छपरीयों से चटवा ले... मैं शेर हूँ... तेरे खुन का प्यासा हूँ... तेरा खुन ही पीयूंगा...

रोणा - मेरे दस बंदों के बीच तु घिरा हुआ है... वह भी हतीयार बंद... पर अकड़ ऐसी... जैसे तु हमारी लेने वाला है...

विश्व - हूँ तो... देख ना... अड्डा तेरा... आदमी तेरे... फिर भी मैं बैठा हुआ हूँ... और तुम सब खड़े हुए हो...

रोणा कुछ कह नहीं पाता, गुस्से में उसका जिस्म थर्राने लगती है l साँसे इतनी जोर से लेने लगता है कि नथुने उपर नीचे होने लगते हैं l अपने आदमियों को हुकुम देता है

रोणा - मार दो हरामजादे को... (कोई हरकत नहीं होती, पीछे मुड़ कर) अरे खड़े खड़े देख क्या रहे हो मार दो... इस... (रुक जाता है)

रोणा देखता है उसके तीनों बंदों के कनपटी पर पीछे से तीन नकाबपोश लोग माउजर लगा रखे हैं, यह देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है, उसे कुछ सूझता नहीं है तो अपने आस्तीन से रिवाल्वर निकाल कर विश्व पर तान देता है l पर यह क्या पलक झपकने भर की देरी थी अब रिवाल्वर विश्व के हाथ में थी l रोणा को यकीन ही नहीं हो रहा था l कुछ सेकेंड पहले जो रिवाल्वर उसके हाथ में थी अब विश्व के हाथ में थी l

विश्व - तु अभी भी नहीं समझा... रास्ते में वैन ख़राब नहीं हुई थी... उसे खराब मेरे बंदों ने किया था... उसमें जितने भी छपरी थे... उन सबको बड़े हिफाज़त से यहाँ लेकर आ गए हैं... अब मैं तुम लोगों के कब्जे में नहीं हूँ... तुम सब अब... मेरे कब्जे में हो... और रोणा... तु तो जानता है ना... रिपोर्ट अब मैं बना सकता हूँ... और अदालत में पेश कर सकता हूँ...

विश्व रोणा की कलर पकड़ कर रोणा को अपनी जगह बिठा देता है और इशारे से रोणा के आदमियों को रोणा के पीछे खड़े होने के लिए कहता है l वह सारे लोग वही करते हैं l

विश्व - तुझे कहा था... औरत तु है नहीं... मर्द तु रहा नहीं और... हिजड़ों में तेरी भर्ती होगी नहीं... फिर साले... तु किस बात रौब झाड़ रहा है बे...

रोणा - देख विश्वा....

विश्व - श्श्श्श्... अब मैं कहता हूँ तु सुन... राजगड़ में तु अपने चेलों के जरिए नजर रख रहा था... आज के दिन अगर मैं छुप के भी निकलता... तो तेरे जासूस मुझे ढूंढने निकल जाते... जिसके वज़ह से... मेरे उस मोहसिन की जान और पहचान दोनों खतरे में पड़ सकती थी... इसीलिये... तेरे उन दो कांस्टेबलों के जरिए... मुझे ऑफिशियली राजगड़ से निकलने के लिए... तेरे पास आधी अधुरी खबर भिजवाया था... (यह सुन कर रोणा सकते में आ जाता है) तुने भी पिछली बार की तरह... अंगुल ट्रेनिंग स्कुल की तरह एक ऑर्डर निकलवाई... पर उसके साथ साथ एक फेक ऑर्डर भी बनाया... ताकि एसकॅट के बहाने... इन छपरीयों के जरिए... मुझे काबु में लेने के लिए... पर तेरी चालाकी तुझ पर ही भारी पड़ गई ना... (विश्व अपने एक बंदे से पूछता है) एजेंट वन..

वन - येस बॉस...

विश्व - इस घर का मुआयना किया...

वन - जी हो गया है...

विश्व - कोई काम की चीज़...

वन - कुछ नहीं बॉस... एक फ्रिज और एक वाशिंग मशीन है...

विश्व - इतनी बड़ी चीज़ है... और तुम कह रहे हो... कोई काम की चीज़ नहीं है... (रोणा के पीछे खड़े बंदों से) अब तुम सब बिना देरी किए... अपने अपने कपड़े उतरो... जल्दी...

वह लोग एक दूसरे को देखने लगते हैं l विश्व के आदमी सब उन पर रिवाल्वर तान देते हैं, उस पर भी जब वह लोग अपने कपड़े नहीं उतार रहे थे तब एजेंट वन जाकर उनमें से एक को जोरदार थप्पड़ मार देता है l उस झन्नाटेदार थप्पड़ के गूंज से ही सभी रोणा के बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर जांघीये में खड़े रहते हैं l

एजेंट वन - अबे ढक्कनों... सारे कपड़े उतारने को बोला बॉस ने... उतारो नहीं तो... तुम लोगों के नो एंट्री पॉइंट में... गोली एंटर कर दूँगा...

गुल्लू - पर नंगे...

एजेंट वन - कौनसा फेशन परेड में जा रहे हो... सब के सब.. लौड़े वाले हो... शर्माना किससे बे... अब ज्यादा बकैती नहीं... या तो चड्डी उतारो... या फिर पर लोक सिधारो...

सब के सब फटाफट अपनी अपनी जांघीया उतार फेंक देते हैं l विश्व इशारा करता है तो विश्व का एक एजेंट जाकर उन सबके कपड़े इकट्ठा करने लगता है l विश्व रोणा की ओर देखता है तो एजेंट वन विश्व से पूछता है l

एजेंट वन - इसे ऐसे क्या देख रहे हो बॉस...

विश्व - सोच रहा हूँ... इन नंगों के बारात में... यह कपड़े वाला दूल्हा क्यूँ...

रोणा - ऐ... खबर दार... ऐसा सोचना भी मत...

एजेंट वन - सोचना भी मत... क्या सोचना भी मत... अरे बॉस ने ऑल रेडी सोच लिया है... चल कपड़े उतार...

रोणा - मर जाऊँगा... मगर...

एजेंट वन - तेरी मर्जी पूछा ही कौन...

रोणा - हाथ तो लगा के देख...

एजेंट वन रोणा की ओर बढ़ रहा था कि विश्व उसे रोक लेता है और रोणा के जो बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर नंगे खड़े थे उनकी ओर देख कर

विश्व - (सारे नंगों को) अगर तुम लोग कपड़ों में अपने गाँव जाना चाहते हो... तो तुम लोग इसके कपड़े उतारो... फाड़ के उतारोगे या खोल के... यह तुम्हारी मर्जी...

सभी नंगे पहले एक दुसरे को देखते हैं और फिर सभी रोणा की ओर देखने लगते हैं l रोणा गुस्से से विश्व से

रोणा - ऐ... यह क्या ड्रामा है... हमें कब्जे में ले रखा है... हम से तुमको कोई खतरा भी नहीं है... फिर...

विश्व - फिर भी तु जहरीला है... बीच बीच में जहर उगलता रहता है... तेरे सारे जहरीले दांत आज उखाड़ फेंकना है... (रोणा के बंदों से) देरी क्यूँ हो रही है... अपने गाँव जाना नहीं है क्या...

उन लोगों में से बाबुनी आगे आ कर रोणा के कंधे पर हाथ रखता है l रोणा पलट कर एक थप्पड़ लगा देता है l

रोणा - अबे हराम के जने... तेरी इतनी हिम्मत... मत भूल आज तुम लोग जो भी हो... वह मेरी मेहरबानी के वज़ह से... जिस काम के लिए तुम लोगों को लाया था... वह तो तुमसे हुआ नहीं... किया नहीं... मादरचोदों मेरे कंधे पर हाथ रखने की जुर्रत कर रहे हो...

इतने में कांगालु आकर रोणा के गाल पर एक झन्नाटेदार तमाचा मार देता है l थप्पड़ इतना जोरदार था कि पूरा का पूरा कमरा गूँज उठा l रोणा हैरानी से उन सबकी और देखने लगता है l

रोणा - मेरे टुकड़ों पर पलने वाले कुत्तों... आज मुझे ही काटने चले हो... खबरदार अगर किसीने कोई गुस्ताखी की... तो कहे देता हूँ... तुम में से कोई जिंदा वापस नहीं जाएगा...

तभी रोणा के पीछे से गुल्लू आकर पकड़ लेता है l रोणा गुल्लू के हाथ छुड़ाने की कोशिश करता है पर उस पर सभी नंगे एक साथ टूट पड़ते हैं l रोणा बहुत हाथ पैर चलाने लगता है पर फायदा कुछ नहीं होता l सभी मिलकर रोणा के बदन से कपड़े छोटे छोटे टुकड़ों में फाड़ फाड़ कर उसे नंगा कर देते हैं l रोणा के लिए यह एक बहुत बड़ा शॉक था l वह रेंगते हुए एक कोने में खुद में सिमटे हुए दुबक कर बैठा हुआ था l

विश्व - (सभी नंगों को) तुम लोग अब एक किनारे हो जाओ... (वे लोग सभी वही करते हैं) (विश्व एक कुर्सी लेकर रोणा के पास बैठता है) अनिकेत रोणा... सोचा था.. तेरी इलाज हिजड़ों ने अच्छी तरह से कर दी है... पर तु है कि मानता ही नहीं... तु भूल कैसे गया... अभी भी तेरी वीडियो का मीडिया वालों को इंतजार है... मैंने तुझे कहा था... एक को मारने की सोच रखा था... तु दुसरा मत बन... पर... तु है की मानता ही नहीं... कपड़ा चाहे किसी की उतरे... मर्जी के खिलाफ... वह बलात्कार से कम नहीं होता है... तुने ना जाने कितने बेबसों की कपड़े उतारे होंगे... यह उसीका सिला है... वह कहते हैं ना... कर्मा द बिच... (अपनी कुर्सी से उठता है) तु तब भी बेवक़ूफ़ था... आज भी है... मेरे खिलाफ तेरे अंदर की जहर ने... आज तुझे आखिर फंसा ही दिया... रोणा आज तुने अपनी आखिरी लाइफ लाइन मिटा दी है... अब तेरे पास कोई लाइफ लाइन नहीं बची है.... यह मेरा अंतिम चेतावनी है... या तो तु एसआईटी ऑफिसर श्रीधर परीड़ा की तरह खुद को गायब कर दे... या फिर नौकरी छोड़ कर चला जा... क्यूँ की तेरी मेरे खिलाफ अगली हरकत... जानलेवा होगा... तु ऐसी मौत मरेगा... जिसकी तुने सोचा भी ना होगा...

विश्व कमरे की दरवाजे के पास आता है आपने एजेंटों को कुछ फुसफुसा कर कहता है l उनमें से एक एजेंट सभी उतरे हुए कपड़ों को बाहर ले जाता है l थोड़ी देर बाद वाशिंग मशीन चलने की आवाज आती है l और कुछ एजेंट पानी के कुछ बॉटल लाकर वहीँ रख देते हैं l

विश्व - अभी तुम लोग मेरा काम ख़तम होने तक.. यहाँ नजर बंद हो... तब तक प्यास लगे तो पानी पियो... पेशाब या संढास जाना हो तो इसी कमरे में बिंदास करो... चार घंटे बाद तुम लोगों को कपड़े मिल जाएंगे... वह भी धुले हुए...

गुल्लू - विश्वा भाई... (रोणा को दिखाते हुए) इंस्पेक्टर साहब के कपड़े...

विश्व - फाड़े तो तुम लोगों ने ही है ना... जिसे इस इंस्पेक्टर को अपना दामाद बनाना हो... वह अपना कपड़ा इसे दहेज में दे सकता है...

यह सुन कर गुल्लू चुप हो जाता है l विश्व के एजेंट कमरे का दरवाजा बंद कर देते हैं l सभी अब बाहर आ चुके थे l तब तक सबके चेहरे से नकाब उतर चुका था l विश्व मुड़ कर देखता है सीलु मीलु जिलु और टीलु से बारी बारी गले मिलता है l बाकी सभी से वह पहले हाथ मिलाता है फिर गले से लगा लेता है l

विश्व - (सब से हाथ जोड़ कर) आप सबका शुक्रिया... काम मुश्किल था... पर आप लोगों ने इसे बखुबी अंजाम दिया...

उनमें से एक - क्या विश्वा भाई... आप तो शर्मिंदा कर रहे हो... हम सभी किसी ना किसी तरह से आप से बहुत कुछ पाया है... हक अदा करने का वक़्त आया तो पीछे कैसे रह सकते थे... आपके साथ तो भगवान भी है... तभी तो... बिना किसी एरर के प्लान कामयाब हो गया... वैसे विश्वा भाई अभी के लिए क्या काम है...

विश्वा - कोई काम नहीं... अभी तुम लोग अलग अलग हो कर यशपुर से निकल जाओ... आधे घंटे में धीरे धीरे यहाँ से खिसक लो...

टीलु - यह लोग तो चले जाएंगे.. तो फिर हम अभी क्या करें...

विश्व - वाशिंग मशीन को चलने दो... आधे घंटे बाद शायद बंद हो जाएगा... उससे पहले तुम लोग भी अपने अपने ठिकाने पर लौट जाओ...

मीलु - और तुम...

विश्व - मुझे मिलना है... उस आदमी से... जो मुझे केस के बारे में... बहुत कुछ इंफॉर्मेशन देना चाहता है... इसलिए हम शाम को सीलु के घर में मिलते हैं...

जिलु - तब तक क्या यह लोग...

विश्व - दिन के उजाले में... यह लोग बाहर नहीं निकलेंगे... इसलिए... घबराओ मत...

फिर विश्व उनसे आगे क्या करना है समझाने लगता है, विश्व के सब कुछ समझाने के बाद सभी विदा ले कर चले जाते हैं l विश्व भी ऑउट हाऊस से बाहर निकल कर यशपुर के यशवर्धन लाइब्रेरी की ओर जाने लगता है l क्यूंकि जो संदेशा उसे न्यूज पेपर से मिला था उसके अनुसार उसे लाइब्रेरी में एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिलने वाली थी l विश्व लाइब्रेरी में आता है l देखता है लाइब्रेरी एक कमरे वाला है l वहाँ पर एक लाइब्रेरियन बैठा हुआ था, बाकी पुरा का पुरा लाइब्रेरी खाली ही था l विश्व उसके पास जाता है और मिले संदेशा के तहत आज की नभवाणी साप्ताहिक पत्रिका माँगता है l

लाइब्रेरियन विश्व को पहले उपर से नीचे तक देखता है फिर ड्रॉयर से पत्रिका निकाल कर देता है l विश्व एक टेबल पर बैठ जाता है और पत्रिका खोलता है l पत्रिका के ऊपर उसे पेंसिल में लिखे नंबर दिखता है l विश्व उन्हें डिकोड करने लगता है l डिकोड में उसे एक और संदेश मिलता है l

“ लाइब्रेरियन से राजगड़ रियासत की गौरव गाथा नाम की किताब माँगो., उस किताब की अंतिम पृष्ठा में एक जेब होगी l"

बस इतना ही संदेश था l विश्व लाइब्रेरियन के पास जाकर वही किताब माँगता है l

लाइब्रेरियन - यहीं पढ़ना है... या कहीं लेकर जाना है...

विश्व - यहीं पढ़ना है..

लाइब्रेरियन - सी रैक के तीसरे रो में होगा... जाकर लेलो...

विश्व जाता है और वहां से किताब निकाल कर उसके आखिरी पन्ने में पाकेट को टटोलता है l उस पाकेट में उसे एक चाट मिलता है, उस चाट में सारे टेबल खाली थे l इसका मतलब यह हुआ कि इस किताब को किसीने अपने साथ नहीं लेकर गए थे l विश्व चाट को पलटता है, उस में एक छोटी पॉली पैक चिपकी हुई थी l विश्व उस पॉली पैक खोल कर देखता है, जिसमें यशपुर बैंक की रसीद और एक चाबी मिलता है जो शायद एक लॉकर की चाबी था l उस रसीद के साथ एक और काग़ज़ मिलता है जिसमें लिखा था

"सौवें पेज पर जो है उसे ले जाओ, और बाकी के लिए बैंक जाओ"

विश्व सौवें पन्ने को खोलता है, एक थ्री डी होलोग्राम वाला फोटो का चौकर में कटी हुई चौथा हिस्सा मिलता है l विश्व उस फोटो को गौर से देखता है पर उसे समझ में कुछ नहीं आता l फिर विश्व वह बैंक रसीद और चाबी को जेब में रख कर वह फोटो अपने शर्ट के अंदर डालता है l किताब को उसी रैक में रख कर लाइब्रेरियन के पर आकर गेस्ट लॉग बुक में साइन कर बाहर निकल जाता है l

बाहर आकर एक ऑटो लेता है और यशपुर बैंक पहुँचता है l बैंक में बैंक मैनेजर से मिलकर लॉकर खोलने की बात कहता है l बैंक मैनेजर पहले विश्व को घूर कर देखता है और फिर अपनी जगह से उठ कर विश्व के साथ लॉकर रुम में आता है l बैंक मैनेजर अपने तरफ से चाबी लगा कर लॉकर की एक लॉक खोलता है और उसके बाद लॉकर रुम से बाहर चला जाता है l विश्व अपना चाबी निकाल कर उस लॉकर में चाबी डाल कर खोलता है l लॉकर में फिर से वही थ्री डी फोटो का एक और हिस्सा मिलता है, साथ साथ तीन दिन पहले रिजर्वेशन किया गया सोनपुर जाने वाली एक बस का टिकट था l तारीख आज की थी l विश्व कुछ समझ नहीं पाता उसे क्या करना चाहिए l क्यूंकि बस के यशपुर छोड़ने का समय आज दो पहर साढ़े बारह बजे का था l विश्व घड़ी देखता है टाइम में और आधा घंटा बचा था l विश्व लॉकर में चाबी डाल कर वह फोटो और बस का टिकट लेकर बैंक से जल्दी निकल जाता है l एक ऑटो लेकर बस स्टैंड में पहुँचता है l बस छोड़ने ही वाली थी l विश्व भागते हुए बस चढ़ जाता है l कंडक्टर को टिकट दिखा कर सीट में बैठ जाता है l वह विंडो वाली सीट थी, बगल में एक आदमी बैठा हुआ था l बस में ज्यादा भीड़ थी नहीं, बसस्टैंड से निकल कर बस राजमार्ग पर आ जाता है l ठीक डेढ़ बजे रास्ते पर एक ढाबा में गाड़ी रुकती है l सभी यात्री गाड़ी से उतर कर ढाबे में खाने के लिए चले जाते हैं l विश्व भी उतर कर ढाबे के पास एक दुकान से पानी की बोतल लेकर पानी पीने लगता है l वह आँखे मूँद कर समझने की कोशिश करता है कि वह जो आदमी उसे कुछ संदेश देना चाहता है या उससे खेल खेल रहा है l दो फोटो मिले हैं, साफ था कि वे दो फोटो किसी एक बड़े फोटो के हिस्से थे l उसे जो जरूरत है क्या उन फोटो के टुकड़ों में है l वह आदमी विश्व से सीधे मिलने से कतरा क्यूँ रहा है l ऐसे सोच में खोया हुआ था कि बस हॉर्न देता है, विश्व वापस अपनी सीट पर बैठ जाता है l उसका को पैसेंजर अभी तक नहीं आया था l पर विश्व के सीट पर एक किताब पड़ा हुआ था l उस के कवर पेज पर लिखा हुआ था

"तुम्हारे लिए संदेश"

विश्व अपने सिर पर हाथ दे मारता है l इसका मतलब यह हुआ कि वही पैसेंजर उसे संदेश दे रहा था l टेंशन के मारे विश्व उस को पैसेंजर पर नजर नहीं डाल पाया था l विश्व वह किताब उठाता है, पन्ने पलटने लगता है, किताब के बीचों-बीच उसे एक और फोटो मिलता है, उस फोटो में सोनपुर रेल्वे स्टेशन के क्लॉक रूम की एक रसीद चिपकी हुई थी l

बस सोनपुर में पहुँचता है l विश्व स्टेशन के लिए ऑटो पकड़ता है l क्लॉक रुम जाकर रसीद दिखाता है l क्लॉकरुम का आदमी सौ रुपये के बदले विश्व को एक ब्रीफ केस देता है l विश्व वह ब्रीफ केस ले लेता है और खोलने की कोशिश करता है पर लॉक्ड था l विश्व के पास अब प्रॉब्लम यह थी कि उसके पास ब्रीफकेस की चाबी नहीं थी l विश्व और कोई कोशिश नहीं करता, ब्रीफकेस को लेकर वहाँ से निकलता है l बस स्टैंड में आकर वापस यशपुर का बस पकड़ता है l बस में बैठ कर ब्रीफकेस को दुबारा चेक करता है, उसे फॉर नंबर लॉकींग सिस्टम दिखता है l अब विश्व हैरान था, अब खोले तो खोले कैसे l वह सोचने लगा, कहीं वह बेवक़ूफ़ तो नहीं बन गया l वह आँखे बंद कर सोचने लगता है l इस बीच उसे कहीं ना कहीं हींट मिला होगा l वह उन पैटर्न्स को याद करने लगा जिस पैटर्न के जरिए उसे मैसेज मिलता रहा l पहले लाइब्रेरी, फिर बैंक, फिर बस अंत में क्लॉक रुम l कुछ सोचने के बाद लाइब्रेरी के लिए सात, बैंक के लिए चार, बस स्टैंड के लिए आठ और क्लॉक रुम के लिए नौ नंबर डालता है l लॉक खुल जाता है l ब्रीफकेस के अंदर उसे फिर से एक होलोग्राम वाला फोटो मिलता है l विश्व समझ जाता है कि चारो फोटो एक फोटो के चार हिस्से हैं और हो ना हो इन्हीं फोटो में कोई ना कोई इन्फॉर्मेशन है l

×_____×_____×_____×_____×_____×_____×

रात के दस बजे

रोणा के क्वार्टर में अंधेरा था l बल्लभ स्विच टटोलने लगता है और ऑन करता है l उसे कमरे के बीचों-बीच रोणा नंगा बैठा हुआ था l रोणा को इस हालत में देख कर बल्लभ चौंक जाता है l

बल्लभ - पुरा दिन भर तु गायब रहा... पता किया तो... तु विश्व को लेकर अपने टीम के साथ यशपुर गया हुआ था... पर यह क्या... तु इस हालत में...

रोणा कोई जवाब नहीं देता, बस एक पत्थर की बुत की तरह बिना हिले डुले वैसे ही बैठा रहा l ना पलकें झपका रहा था ना ही कहीं किसी और देख रहा था l बल्लभ थोड़ा डर जाता है l डरते डरते पुकारता है

बल्लभ - अनिकेत... (इस बार रोणा बल्लभ की ओर देखता है) यह... क्या हाल बना रखा है... (रोणा की आँखे अंगारों की तरह दहकने लगता है)

बल्लभ - र.. रोणा...

रोणा - (बहुत ही गम्भीर आवाज में) तु इस वक़्त यहाँ क्यूँ आया है...

बल्लभ - क्या... क्या हुआ है आज...

रोणा - (उठ खड़ा होता है, पास से एक टवैल उठा कर अपने कमर पर बाँध कर, टेबल पर पड़े एक लिफ़ाफ़ा उठाता है और बल्लभ के पास आकर) यह मेरी लिव एप्लिकेशन है... जाकर हेड ऑफिस में पहुँचा देना...

बल्लभ - क्या हुआ है बता क्यूँ नहीं रहा...

रोणा - (आवाज को थोड़ी ऊँची कर) क्या सुनना चाहता है... विश्व ने मेरी गांड बिना मारे छोड़ दिया... वर्ना उसका प्रोग्राम कुछ ऐसा ही था... यही सुनना चाहता है ना...

बल्लभ - मतलब... विश्व ने तुझे और और तेरी टीम को...

रोणा - अबे काहे का टीम... (फिर रोणा सारी बातेँ बताने लगता है) देवगड़, झारसुगड़ा में जिन हराम खोरों पर एहसान किया था... उन्हें लाया था... विश्व को काबु करने... (दर्द भरी आवाज में) साले हराम के जने... (और कुछ कह नहीं पाता) विश्व और उसके गुर्गों हमें कमरे में बंद कर चले गए... वाशिंग मशीन बंद होने के लगभग आधे घंटे के बाद तक जब बाहर से कोई शोर शराबा सुनाई नहीं दिया तब मालुम हुआ... विश्व और उसके पट्ठे हमें वहीँ पर अकेला छोड़ कर चले गए थे... मेरे साथ के सारे बंदे दरवाजा तोड़ कर बाहर जाकर अपने अपने कपड़े पहन कर चले गए... हरामी साले... कोई पीछे मुड़ कर देखा भी नहीं... मैं निकल नहीं सकता था... नंगा जो था... जब अंधेरा हुआ तब बाहर आकर देखा... मेरी गाड़ी थी... सीट पर चाबी और मेरी मोबाइल रखी हुई थी... अंधेरा थोड़ी गहरी होने के बाद... मैं अपने क्वार्टर पर वापस आ गया...

बल्लभ - बोला था... सौ बार बोला था... तुझे तेरी उतावले पन ने... ऐसी गत बनाई है... तुझे अगर विश्व को दबोचना ही था... तो असली टीम लेकर जाता...

रोणा - श्श्श्श्... अब तुझे सब पता चल गया... अब तु जा यहाँ से...

बल्लभ - ठीक है... समझ सकता हूँ... तेरा मुड़ अभी ठीक नहीं है...(लिफ़ाफ़ा दिखाते हुए) पर यह छुट्टी..

रोणा - एक बात मेरी समझ में आ गई... मेरे इर्द गिर्द... विश्व ने अपना आदमी छोड़ रखा है... या यूँ कहें... मेरा कोई आदमी विश्व से मिला हुआ है...

बल्लभ - हाँ... ऐसा हो सकता है... तुझे क्या लगता है... कौन हो सकता है...

रोणा - मुझे सब पर शक़ हो रहा है... (कहते हुए बल्लभ को घूरते हुए देखने लगता है)

बल्लभ - व्हाट... तु मुझे घूर कर देख रहा है... कहीं..

रोणा - क्या करूँ... अभी तो मैं अपने साये पर भी शक़ कर रहा था... इसीलिए अंधेरे में बैठा हुआ था... तुने ही आकर लाइट जलाई...

बल्लभ - हैइ हैइ... तु पागल हो गया है...

रोणा - इसीलिए तो छुट्टी लिया है... ताकि यह पागलपन ठीक हो जाए...

बल्लभ - ओह गॉड...

इतना कह कर बल्लभ अपना माथा पीटते हुए वहाँ से चला जाता है l उसके जाते ही रोणा दरवाजा बंद कर देता है l फिर एक टेबल के पास आकर एक आधर कार्ड और एक वोटर आईडी कार्ड निकालता है l अपना मोबाइल निकाल कर फोटो उठाता है फिर व्हाट्सआप में टोनी नाम निकाल कर भेज देता है, फिर सोफ़े पर आकर छत की ओर घूरते हुए बैठ जाता है l कुछ देर बाद उसका फोन बजने लगता है, देखता है टोनी का कॉल था l

रोणा - देखा..

टोनी - जी... क्या यह मेरा नया आईडी है...

रोणा - हाँ... तेरा डॉक्यूमेंट सारे रेडी हैं... अब तु बता वह मेरा काम कहाँ तक पहुँची है...

टोनी - कुछ ही दिनों में... वह लड़की नंदिनी विश्व को सरप्राइज़ देने राजगड़ जाएगी... बीच रास्ते में ही... मैं उसे उठा लूँगा... और आप तक पहुँचा दूँगा...

रोणा - ह्म्म्म्म... पर यह लेन देन की प्रक्रिया... यशपुर के Xxxx गोदाम में होगी...

टोनी - यशपुर क्यूँ...

रोणा - तुझसे मतलब...

टोनी - सॉरी... पर मैं डेलीवरी करने के तुरंत बाद... वहाँ से निकल जाऊँगा...

रोणा - हाँ भोषड़ी के... तुझे कौनसा मेरा दामाद बनाना है...

कह कर रोणा फोन काट देता है और टी पोए की ओर देखने लगता है l टी पोए पर विश्व की फोटो लगी हुई थी l उसे देखते हुए रोणा बड़बड़ाने लगता है

रोणा - बहुत गलत किया तुने आज... मुझे जिंदा नहीं छोड़ना था... पर तुने छोड़ दिया... जैसे तुझे जिंदा छोड़ कर आज तक पछता रहा हूँ... वैसे ही तु पछताएगा... बहुत पछताएगा... अब मैं राजगड़ में नहीं रहूँगा... उसी गोदाम में... तेरी बंदी की चुत फाड़ कार्यक्रम पुरा करूँगा... फिर तुझे उसीके हाथों बुलवाऊंगा... तु तेरी औकात से बाहर जाकर मुझसे पंगे लिए हैं... वादा रहा... तेरी औकात तुझे दिखाऊंगा... तुझे तेरी बंदी की दल्ला बनाऊँगा... तेरे ही हाथों... उसकी नीलामी करवाऊंगा... बहुत गलत किया रे... आज तुने बहुत गलत किया... भुवनेश्वर की ज़िल्लत भुला सकता था... पर आज तुने उन राहों में नंगा गुजरने को मजबूर कर दिया... जिन राहों में.. मैं शेर की तरह आया जाया करता था... तुझे एक सबक भी सिखाऊंगा... किसी को इतना जलील नहीं करना... के उसकी जलालत... उसका जुनून बन जाए... तेरे किए हर जलालत का हिसाब मैं करूँगा... एक एक का हिसाब करूँगा...

×_____×_____×_____×_____×_____×_____×

यशपुर की एक बस्ती की एक झोपड़ी l भले ही वह बाहर से एक झोपड़ी है पर अंदर से आराम दायक घर है l असल में यह तीन आपस में सटे हुए झोपड़ियों के एक कॉमन रुम था जिसे बाहर से कोई भी जान नहीं सकता था l उस कमरे में पांचों दोस्त एक टेबल के इर्द-गिर्द बैठे हुए हैं l विश्व के हाथ में एक चिट्टी था और पांचों के सामने टेबल पर विश्व के लाए चारों फोटो के टुकड़े पड़े हुए थे l सभी के सभी उन फ़ोटो को देख कर समझने की कोशिश कर रहे थे l क्यूंकि वह चार होलोग्राम वाले फोटो एक ही बड़े फोटो के चार बराबर टुकड़े थे l अब चारों टुकड़ों को ठीक से जोड़ देने पर कोर्ट में रखे न्याय की देवी की फोटो बन गई थी l आँखों में पट्टी, हाथ में न्याय की भार दंड और एक हाथ में तलवार l

टीलु - पिछले आधे घंटे से यही देखे जा रहे हैं... मेरे पल्ले में कुछ नहीं पड़ा...

जिलु - हाँ विश्वा भाई... क्या आपको अभी भी लगता है.. इन फोटो में कहीं छुपा हुआ संदेशा है...

मीलु - हाँ है... मुझे तो लगता है... है...

सीलु - हूँम्म... मुझे लगता है... या तो तुझे चश्मा लगा लेनी चाहिए... या फिर हमें... (विश्व को छोड़ कर सभी खि खि कर हँसने लगते हैं)

मीलु - देखा नहीं... यह फोटो थ्री डी इमेज वाला होलोग्राम वाला फोटो है... थोड़ा नजर सीधा और ध्यान से देखने पर... अंदर भगवत गीता उपदेश समय के... कृष्ण विश्वरुप छुपा हुआ था...

टीलु - हाँ तो... उसमें ऐसा क्या संदेशा है... (फिर अचानक वह कुछ समझते हुए पूछता है) अच्छा विश्वा भाई... कहीं वह भगवत गीता में छिपे किसी संदेश के बारे में तो नहीं कह रहा है...

सीलु - हाँ साले... अभी तेरा बल्ब जला लगता है... गीता में ही संदेश होगा... चूँकि विश्वा भाई को... महाभारत जो लड़ना है...

मीलु - हाँ तो विश्वा भाई की लड़ाई महाभारत से कौनसा कम है...

विश्व - तुम लोग क्या थोड़ी देर के लिए चुप रहोगे...

सभी चुप हो जाते हैं, विश्व चिट्ठी को पटक देता है और अपना माथा पकड़ कर आँखे बंद कर बैठ जाता है l कुछ देर बाद अपनी साँसे दुरुस्त करने के बाद अपने दोनों हाथों से चारों फोटो को उठा कर बल्ब की ओर ले जा कर देखने लगता है l तभी सीलु की नजर फोटो के पीछे पड़ता है l वह विश्व से पूछता है

सीलु - विश्वा भाई... इन फोटो के पीछे निचले कोने में... यह क्या है...

विश्व चारों फोटो को पलट देता है l देखता है चारों फोटो के नीचे कोने में कुछ निशान बने हुए हैं l वह अब उन फोटों के कोनों बने निशानों को जोड़ कर देखता है l अचानक विश्व की आँखों में एक चमक आ जाती है l

विश्व - अरे यह तो एक क्युआर कोड है... तुम लोगों के किसीके मोबाइल में क्युआर स्कैनर है क्या...

मीलु - हाँ है... मेरे मोबाइल पर है...

विश्व - लाओ दो जरा...

मीलु अपना मोबाइल विश्व को देता है l विश्व स्कैनर ऑन कर उस क्युआर कोड को स्कैन करता है l स्कैन होते ही एक लिंक डिस्प्ले होता है l उस लिंक पर क्लिक करने पर एक जीप फाइल दिखती है विश्व उस फाइल को डाउनलोड करता है l ब्रीफकेस में फोटो के साथ उसे एक काग़ज़ भी मिला था जिस पर एक नंबर लिखा हुआ था l विश्व उस जीप फाइल को खोलने के लिए उसी नंबर को पासवर्ड में ईस्तेमाल करता है l फाइल खुल जाता है l फाइल एक वॉयस रेकार्ड का था l विश्व उस वॉयस रेकार्ड को ऑन करता है l

"श्रद्धेय विश्व प्रताप,

अगर तुम मेरी यह वॉयस रेकार्ड सुन रहे हो तो बेशक तुम सही आदमी हो l तुम सोच रहे होगे मैं तुमसे सीधा बात करने के बजाय ऐसे अप्रत्यक्ष रुप से क्यूँ संदेश भेज रहा हूँ, तो ज़वाब यह है कि हम सब अभी नैपथ्य में हैं l जैसे जैसे तुम्हारा युद्ध आगे बढ़ता जाएगा, हम धीरे धीरे समक्ष आते जाएंगे l तुम इसे हमारा डर भी कह सकते हो l तुम उसी दिन से हमारे नजर में आ चुके थे, जब से तुमने अपनी वकालत की डिग्री हासिल कर ली थी l तब से हमें मालूम था, राजा साहब से कोई खुल्ला दुश्मनी ले सकता है तो वह केवल तुम ही हो l इसीलिए मैंने अपने दिल की तसल्ली के लिए इस तरह से खबर पहुँचाता रहा l खैर अब मुद्दे पर आते हैं 'रुप फाउंडेशन' याद तो होगा l हाँ क्यूँ नहीं आखिर तुम्हारे दिल का नासूर जो ठहरा, पर अगर तुम यह सोच रहे हो कि इस केस को दोबारा उछाल कर राजा साहब का कुछ बिगाड़ सकते हो तो तुम गलत हो l हाँ सर्कार ने नई एसआईटी का गठन कर दिया है पर फिलहाल के लिए अभी उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा और केस वहीँ घूमता ही रहेगा l वज़ह, जयंत सर के अनुसार जितने भी गवाह थे या हो सकते थे, सभी के सभी या तो पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं या फिर सरकारी डॉक्टर के द्वारा पागल घोषित हो चुके हैं, जिनकी गवाही अदालत में मान्य नहीं होती l इतना तो कानून तुम जानते ही होगे l

जो जिन्हें तुम गवाह बना सकते हो या बना सकते थे यानी एक था पूर्व एसआईटी की अधिकारी श्रीधर परीड़ा, जैसे ही सर्कार ने उसे एसआईटी से हटाया उसने खुद को अंडरग्राउंड कर लिया है ताकि वह किसी भी तरह से राजा साहब के हत्थे ना चढ़ जाए l बाकी बचा इंस्पेक्टर रोणा और खुद राजा साहब, रोणा की गवाही को प्रतिपक्ष के वकील अदालत में नकार सकता है क्यूंकि उसे जयंत सर ने झूठा साबित कर दिया था बचे खुद राजा साहब इन सात सालों में अच्छी तरह से खुद को केस से अलग कर चुके हैं झूठे सबूतों के सहारे l तो अब किया क्या जाए l

विश्व जुर्म की राह पर चलने वाला, उस पर पलने वाला कभी जुर्म छोड़ नहीं सकता l वह नए नए राह तलाशते रहता है जुर्म करने के लिए l जाहिर है अभी भी जुर्म वैसे हो रहे हैं l खिलाड़ी वही है, बस प्यादें बदल गए हैं l पैसों की लुट मची हुई है बस तरकीबें बदल गई हैं l

रुप फाउंडेशन के द्वारा मनरेगा की पैसे, टेंडर के पैसे मुर्दों के आधार कार्ड के जरिए हुआ था l पर अबकी बार जो फ्रॉड हो रहा है कोई सोच भी नहीं सकता है l इसलिए इस बाबत मैं तुमको सारी इन्फॉर्मेशन देने जा रहा हूँ l तुम्हें इसका भंडाफोड़ करना है l कैसे करना है यह मैं तुम पर छोड़ता हूँ l इस राह में तुम खुद को अकेला मत समझना l वह एक पुराना शेर है

'मैं चला था जानीवे मंजिल को

लोग मिलते गए कारवाँ बनता गया'

तुम्हें आगे चलते हुए हर एक मोड़ पर एक राहगीर एक हमसफ़र मिलता जाएगा l अब विस्तृत से सुनो राजा साहब और उनके सपोलों के जरिए क्या गोरखधंधा चल रहा है l

तुम्हें याद होगा राजा साहब और ओंकार चेट्टी की दोस्ती तब हुई थी जब तुम पर मुक़दमा चल रहा था l तुम्हारी सजा मुकर्रर होने के बाद भी यश वर्धन ने यहीं राजगड़ में एक बहुत बड़ी ज़मीन ली ताकि वह उस पर अपनी निरोग हस्पताल का ब्रांच खोलने के साथ साथ निरोग फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री खोल सके l इसके लिए सब्सिडी पर बहुत ही सस्ते में डेढ़ सौ एकड़ जमीन उन्हें मिली l अब हस्पताल और फैक्ट्री के लिए मार्केट से लोन उठाया गया, जाहिर है वह लोन यश वर्धन ने ही उठाया था पर उन्हीं दिनों में किसी कारण वश चेट्टी परिवार और क्षेत्रपाल परिवार के बीच दूरियां आ गई और चेट्टी परिवार खुद को इस प्रोजेक्ट से दुर कर लिए l ऐसे में राजा साहब यह डेढ़ सौ एकड़ जमीन यूँ जाने नहीं दे सकता था l इसीलिए उसने कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलकर राजगड़ मल्टिपरपॉज को ऑपरेटिव सोसाईटी का पंजीकरण किया जिसे सर्कार ने सहसा पास भी कर दिया l उसने चालाकी से राजगड़ और आसपास के तकरीबन पच्चीस गाँव के लोगों को इस सोसाइटी में मेंबर बनाया और खुद को प्रेसिडेंट l यश वर्धन के लोन को चुकाने के लिए उसने सारे गाँव वालों की जमीनों को बैंक में मड़गैज कर दिया l हाँ तुम हैरान हो सकते हो जब राजगड़ के सारे जमीनों का मालिक क्षेत्रपाल है फिर गाँव वालों के पास जमीनें आई कहाँ से, तो इसमें भी बड़ा झोल है l आजादी के बाद सर्कार ने यह कानून बनाया था कि कोई भी निजी जमीन को दस एकड़ से ज्यादा नहीं रख सकता l उस दौरान तत्कालीन राजा ने सारी जमीनें किसानों को बांट देने की घोषणा कर वह सारी कागजातों को अपने पास रख लिया था l इसीलिए राजगड़ और उसके आसपास के लोगों को यह नहीं मालुम के जिस जमीन पर अपना खुन निचोड़ कर पसीना बना कर खेती कर रहे हैं, असल में उन्हीं जमीनों की वे स्वयं मालिक हैं l पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी ही जमीन पर खेती कर राजा साहब की तिजोरी भर रहे हैं l तो इस तरह से अब ज़मीन राजा साहब के हाथ आई और वह लोन का पैसा भी l अब सोसाइटी की बिल्डिंग खड़ा करने के लिए फिर से एक लोन उठाया गया l उसके लिए गाँव वालों के घरों को मड़गैज किया गया l गाँव वालों ने दस्तावेजों पर दस्तखत भी कर दिया बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे l वह लोन पैसा भी राजा साहब ने गटक लिया l

अब बात यह है कि वह बिल्डिंग कहाँ है l कोई बिल्डिंग नहीं है l फिर वह लोन का पैसा कैसे चुकाया जा रहा है l तो विश्व प्रताप, चूँकि यह मल्टीपल कोऑपरेटिव सोसाइटी है और जाहिर है इसे सरकारी सहायता मिल सकती है, इस लिए बिल्डिंग बनाने से लेकर रास्ता बनाने तक हर एक काम को मनरेगा के आधीन सर्कार द्वारा अनुमोदित करके एक साल में तीन सौ दिन की रोजगार स्कीम में लोगों से अपने फैक्ट्री में काम करवाता रहा है l और जो पैसे सर्कार से लोगों को मिलता रहा है उन्हें लोन की इंस्टॉलमेंट चुकाने के लिए डाइवर्ट किया जा रहा है l यानी लोगों के खाते में मनरेगा का पैसा आ रहा है, पर ईसीएस के जरिए वही पैसे उस लोन की इंस्टॉलमेंट में चला जा रहा है, जो उन्होंने किया ही नहीं l और राजा भैरव सिंह को बैठे बिठाए मजदूर मिल गए जिन्हें वह कोई मजदूरी नहीं दे रहा है और उसे पैसों पर पैसा फायदा हो रहा है l विडंबना देखो जो जमीन राजा साहब ने कब्जा कर बैठा है उस पर कोई बिल्डिंग भी नहीं है l इससे बैंक वालों को कोई परेशानी नहीं है, क्यूंकि उनके लोन पर उन्हें इंस्टॉलमेंट मिल जा रहा है l

अब आते हैं और एक ब्लंडर पर l बैंक में गाँव वालों के जमीन और घर की कोई भी मड़गैज पेपर नहीं है l वज़ह, कुछ महीने पहले सर्कार ने कोऑपरेटिव सोसाइटी की सारे लोन वाइभ आउट की घोषणा कर दी, उसके बावजूद कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत से केवल कागजात पर गाँव वालों को डिफॉल्टर बना दिया गया और वह सारी ज़मीन जायदाद की काग़ज़ भैरव सिंह ने अपने कब्जे में ले लिया है, और यह दिखाया जा रहा है गाँव वालों के तरफ से भैरव सिंह यह लोन चुका रहा है l पर असलियत में सरकारी लोन सर्कार ही चुका रहा है और लोन अमाउंट से लेकर सारी जमीन जायदाद पर भैरव सिंह सांप की तरह कुंडली मार रखा है l

अब तुम सवाल करोगे इतना जानने के बाद भी हम लोग क्यूँ कुछ नहीं कर पा रहे हैं l तो विश्व भैरव सिंह की यह दुनिया एक खूबसूरत मकड़ समान है l एक बार घुसे तो सिवाय फंसने के दूसरा कोई रास्ता नहीं है l इसलिए अब तुम पर ही दारोमदार है, मैं तुम्हें बस इतना कह सकता हूँ, भैरव सिंह की इस तिलिस्म को खुद सर्कार भी उखाड़ फेंकना चाहती है, पर कुछ मजबूरियों के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है l पर यह भी सच है तुम जैसे जैसे आगे बढ़ोगे वैसे वैसे तुम्हें अनुरूप सहायता सर्कार से मिलती जाएगी l"
 
हाँ हर अति एकदिन इति तक पहुँचती है

हाँ अवश्य

हा हा हा हा

भाई मेरे

मेरे पिता, मेरे ससुर पुलिस अधिकारी थे

अभी मेरे साड़ु यहाँ तक कि मेरा छोटा भाई भी पुलिस में अहदे वाले पोस्ट पर हैं

इनकी अभिज्ञता के अनुसार

अपराध हमेशा व्यवस्था से दो कदम आगे रहता है

अपराध हो जाने के बाद ही व्यवस्था उस पर कारवाई करती है और यह कोशिश करती है वह अपराध पुनरावृति ना हो

पर अपराध नीचे की ओर बहने वाला झरना के समान है व्यवस्था से बाँध बनाकर रोक लोगे तो नया रास्ता खोज लेगी बह जाने के लिए

वैसे जो उपर मैंने अपराध लिखा है वास्तव में हो चुका है

बस कैसे निराकरण हुआ उसका नाट्य रूपांतरण मात्र है यह कहानी

हाँ यही वह इन्फॉर्मेशन था जो आगे चलकर विश्व के लिए ब्रह्मास्त्र की तरह काम आने वाला है

जी avsji भाई

त्योहार बहुत बढ़िया रहा स्वास्थ्य तो ठीक रहनी ही है क्यूंकि आप जैसे पाठक व लेखक मित्र मेरे जो ठहरे

थैंक्स शुक्रिया आभार धन्यबाद
 
जी SANJU ( V. R. ) भाई यही सुचना विश्व के लिए आधार बनेगा भैरव सिंह को कानून के चपेट में लाने के लिए

जी बिलकुल विश्व ऐसा हो करेगा

हाँ विश्व इसे निजी लड़ाई करने के बजाय उसे जन आक्रोश में परिवर्तित करेगा

पर पहले लोग यह जाने और समझे के पीढ़ी दर पीढ़ी वे जमीनों के मालिक रहे हैं

और वैदेही का श्राप भी कुछ ऐसा ही था

मेरे दोस्त कुछ चरित्र कुछ ही समय के लिए भले ही आए थे पर वह अनायास ही नहीं आए थे

आगे चलकर वे लोग सामने आयेंगे

हा हा हा हा

हाँ सच कहा आपने पर रोणा के लिए कुछ और अंजाम सोच रखा है
 
शुक्रिया लियोन भाई

यही उसकी तकदीर थी

हाँ जिनके दम पर आया था वही उसे छोड़ कर भाग गए

हाँ सभी मुक्ति चाह रहे हैं पर लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा है l विश्व की लड़ाई में धीरे धीरे खुद को शामिल करने लगे हैं

हाँ इन्हीं इन्फॉर्मेशन के बलबूते विश्व राजा भैरव सिंह को कानून के लपेटे में फंसायेगा

अंत तक जुड़े रहें

अगला अपडेट भी थोड़ी रोमांचक रहेगी
 
Back
Top