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फिर दोनों बहाने कुछ देर बात करती रही. थोड़ी hi देर में लड़के वाले आ गए. अपनी क्षमता के अनुसार आनंद जी ने पूरी व्यवस्था की थी. कुछ hi देर में सगाई की रश्म शुरू हो गयी, लेकिन सगाई होते होते लड़के वालों का मुंह फूल गया. लड़के के पापा तो ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे उनके घर में किसी की मृत्यु हो गयी हो.
लड़के के पापा ने आनंद जी को अलग से बात करने के लिए बुलाया. आनंद जी के साथ उनके सेल भी थे. लड़के के पापा ने आनंद जी से कहा.
L.Papa- ये क्या है आनंद जी आपने तो कहा था की आपकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहेगी और सगाई की रेशम बहुत अचे से होगी, लेकिन यहाँ तो न खातिरदारी ठीक से हुई और न hi सगाई की रेशम hi अचे से हुई. जब सगाई में ये हाल है तो शादी में तो आप मुझे लूट hi लोगे.
आनंद जी- अरे नहीं भाई साहब. ये आप कैसी बात कर रहे हैं. मैं अपनी क्षमता से ज्यादा कर रहा हूँ. ताकि मेरी बेटी खुश रहे. शादी में कोई कमी नहीं होगी भाई साहब. हमने पूरी कोशिश की सगाई में कोई कमी न रहने पाए. फिर भी अगर कोई कमी रह गयी हो तो आप हमको बता दीजिये. हम पूरी कोशिश करेंगे की उसे दूर कर सके.
L.Papa- देखो आनंद एक तो लड़के को अपने सोने की जंजीर नहीं दी. और आपने सगाई में पैसे भी काम दिए हैं. ऐसे कैसे चलेगा. आखिर हमने अपने बेटे की पढाई लिखे में कितना पैसा खर्चा किया है. और तुम अपनी बेटी के लिए उसे फोकट में अपना दामाद बनाना चाहते हो. और साथ में हमारे साथ आये हुवे मेहमानो का आपने स्वागत ढंग से नहीं किया.
आनंद जी- या आप कैसी बात कर रहे हैं भाई साहब. हमने अपनी तरफ से खातिरदारी में कोई कमी नहीं राखी. भाई साहिब सगाई के लिए पैसे और जंजीर की कोई बात हुई hi नहीं थी. सगाई की अंगूठी के अलावा मैंने अपनी तरफ से एक सोने की अंगूठी दी है. वैसे भी बात तो शादी के लिए हुई है मोटर साइकिल और 2 लाख रूपये की. जो मैं शादी के समय दूंगा आपको.
L.papa- ऐसे कैसे मैं तुम्हारी बात का भरोषा कर लून. जो इंसान सगाई में इतनी कंजूसी कर सकता है वो शादी में क्या खर्चा करेगा. मुझे तो लूट लिया तुमने सगाई में और शादी में तो कंगाल hi बना डोज तुम मुझे.
S.Mama- देखिये भाई साहब आप अब कुछ ज्यादा hi बोल रहे हैं. हमने अपनी तरफ से कोई कसार नहीं राखी खातिरदारी में. फिर भी अगर कही कमी रह गयी हो तो हमको माफ़ कर दीजिये. और रही बात शादी के समय किये गए वेड की तो वो हम पूरी तरह से निभाएंगे. जो हमने देने के लिए कहा है वो हम्म आपको देंगे.
सरिता के मां की बात सुनकर लड़के के पापा गुस्से में आ गए और उन्होंने तेज़ आवाज़ में कहा.
L.papa- क्या ज्यादा बोल रहा हूँ मैं. मुझे आप दोनों पर तनिक भी भरोषा नहीं हैं. अब जब तक आप लड़के के लिए जंजीर और 50000 रुपये और नहीं देंगे. तब तक शादी के बारे में भूल जाइये.
S.mama- ये क्या बात हुई भाई शाहब. हम आपसे इतने प्रेम से बात कर रहे हैं तो अआप धमकी देने पर उतर आये हैं. मैं भी देखता हूँ की कैसे नहीं करते आप शादी. हमारी बिटिया कोई सजावट का सामान है क्या की जब मन चाहा हां किया और जब मैं चाहा न कर दिया. जब हम बोल रहे हैं की आपको शादी के समय जो भी देने के लिए कहा गया है वो हम देंगे तो अब आप की डिमांड बढाती जा रही है. ये बिलकुल भी सही नहीं है.
L.papa- ऐसे कैसे नहीं देंगे आप. आखिर मैंने अपने बेटे को पलने और पढाई लिखे पर जो खर्च किया है वो कौन देगा. आप फ्री में मेरे कमाऊ बेटे को अपना दामाद बनाना चाहते हैं. या तो मेरी बात मानिये या तो ये रिश्ता ख़तम समझिये.
आनंद जी- नहीं नहीं भाई साहब ऐसा मत कहिये. अभी इतनी जल्दी ये सब कैसे अर्रंगे करूँगा मैं. आप हमें कुछ दिन का समय दीजिये मैं जंजीर और 50000 रुपये आपको दे दूंगा. लेकिन आप ये रिश्ता मत तोड़िये. बहुत बदनामी हो जाएगी मेरी समाज में.
ल. पापा- मुझे अब और कोई बात नहीं करनी. मुझे अभी के अभी 50000 रुपये और सोने की जंजीर लड़के के लिए चाहिए. नहीं तो मैं चला लड़के को लेकर अपने घर.
लड़के के पापा की बात सुनकर आनंद जी की आँखों में आँशु आ गए. उन्होंने अपनी पगड़ी उतर कर लड़के के पापा के पैरों में रखने लगे तो सरिता के मां ने उनको रोकते हुवे कहा.
S.Mama- ये क्या कह रहे हैं आप जीजा जी. ये लालची लोग हैं इनके क़दमों में अपनी इज़्ज़त रखने का कोई मतलब नहीं है. इतना तो मैं भी समझ गया हूँ की इनकी नजर में पैसा hi सबकुछ है. अब आप इनकी कोई भी बात नहीं मानेंगे. इनकी मानगो को पूरा करके आप सरिता के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.
अभी ये सब बाटे हो रही थी की किसी ने सरिता को खबर कर दी की लड़के के पापा और आनंद जी में कुछ कहा सुनी हो गयी है तो सरिता भी सगाई वाले कपड़ों में hi वह पहुंच गयी. जब उसने पूरी बात सुनी और अपने पापा को अपनी पगड़ी लड़के के बाप में पैरों में रखते हुवे देखा तो उसका माथा भन्ना गया. उसने लड़के के पापा को दो टूक जवाब देते हुवे कहा.
सरिता- आप क्या शादी के लिए मन करेंगे. मैं ये शादी खुद तोड़ रही हूँ. नहीं करनी मुझे आप के बेटे से शादी. निकल जाइये आप अभी और इसी समय यहाँ से और अपने बेटे के लिए कोई और लड़की ढूंढ लीजिये.
सरिता की बात सुनकर आनंद जी ने उससे गुस्से से कहा.
आनंद जी- ये क्या कर रही हो तुम सरिता. तुम अंदर जाओ. मैं बात कर रहा हूँ न.
सरिता- मैं क्यों अंदर जाऊं पापा. और आप क्यों इनकी बात सुन रहे हैं. क्या अपने हमें इसीलिए पाल पॉश कर बड़ा किया था की एक दिन हमारी वजह से इन भिखमंगो के सामने हाँथ फैलाना पड़े. मैं ये कभी बर्दास्त नहीं करुँगी की मेरी वजह से मरे पापा को किसी के सामने हाँथ फिअलना पड़े और किसी के सामने शर्मिंदा होना पड़े.
आप हमारा गुरुर हैं पापा. अभिमान हैं आप हमारे. मैं अपने गुरुर और अभिमान को किसी के सामने toot-ta हुवा नहीं देख सकती. आप खुद सोचिये पापा की अभी मेरी शादी भी नहीं हुई है तो इनका ये हाल है. मेरी शादी हो जाने के बाद तो ये शेर हो जायेंगे. आपसे कुछ भी डिमांड कर देंगे. और आप मेरी ख़ुशी के लिए इनकी हर डिमांड पूरी करते फिरेंगे. इनके पैरो में गिर कर रोयेंगे, गिड़गिड़ाएंगे. जो मैं कभी नहीं होने दूँगी.
औरत कोई सजावट की वस्तु नहीं है पापा जो उसकी बोली लगायी जाये. अरे ठोकर मरती हूँ मैं इनकी दौलत और इनके बेटे की नौकरी पर. आप मेरी शादी किसी गरीब मजदूर से कर देना पापा. मैं रोज कमाकर खा लुंगी. लेकिन इन जैसे भिखमंगो के घर मेरी शादी मत करिये पापा. मेरी बात मन लीजिये पापा. अपनी सरिता की बात मन लीजिये.
S.mama- सरिता सही कह रही है जीजा जी. ये लोग लालची हैं शादी के बाद अगर इनकी कोई डिमांड हम न पूरी कर पाए तो. आपने सोचा है की ये अपनी सरिता के साथ कितना बुरा बर्ताव कर सकते हैं. मान जाइये जीजा जी. मैं सरिता बिटिया के साथ हूँ. और मैं भी नहीं चाहता की अब ये शादी हो.
आनंद को भी सरिता की बात सही लगी. उन्होंने भी दबे मन से अपनी सहमति दे दी. लड़के के पापा को फ़िलहाल ऐसी उम्मीद नहीं थी की लड़की खुद आकर शादी के लिए मन कर देंगी. उन्होंने ने सोचा था की दरवाज़े पर सगाई टूट जाने के दर से आनंद जी उसकी मांग पूरी कर देंगे, लेकिन सरिता के दो टूक इंकार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. शादी टूट जाने के बाद लड़के वाले अपना अपना मुंह लेकर वह से चले गए.
सरिता के इंकार करने के कुछ hi देर में जंगल में आग की तरह चारो तरफ ये खबर फिकल गयी की सरिता ने शादी से इंकार कर दिया. फिर तो वही हुवा जो अक्सर लड़की की शादी टूटने पर होता है. जीतनेय मुंह उतनी बातें. कोई कह रहा था की सरिता ने बहुत अच्छा किया जो ऐसे लालची लोगो के यहाँ बहु बैंकर जाने से इंकार कर दिया तो कोई कह रहा था की लड़की वालो को इतना घमंड शोभा नहीं देता.
आनंद जी के पदोष में एक नए परिवार ने कुछ समय पहले नया घर बनवाया था और वो घर के सभी सदश्यो के साथ वह सिफत हुए थे. घर के मुखिया पुलिस महकमे में इंस्पेक्टर थे. तो उनका मन सम्मान भी था. उनकी पत्नी हाउसवाइफ थी. लेकिन मुंहफट थी. किसी के सामने कुछ भी बोल देती थी. ये भी नहीं समझ आता था उनको की उनकी बात किसी को बुरी लग सकती है.
हमेशा अपने पति के इंस्पेक्टर होने का घमंड दिखती रहती थी. इनका बीटा सेंट्रल बैंक में पो की पोस्ट पर पिछले साल hi लगा था. और बिटिया हम उम्र थी सरिता की. इसलिए दोनों में थोड़ी बहुत बातचीत हो जाती थी, लेकिन वो भी अपनी माँ की तरह hi थी. पदोष में रहने के कारन उनको ये भी पता चल गया था की अभिषेक घर छोड़कर चला गया है. और किसलिए गया है ये भी पता था.
सगाई में शामिल होने वो लोग भी आये थे इंस्पेक्टर को छोड़कर. तो जब उनको भी ये बात पता चली की सरिता ने शादी से मन कर दिया है तो उन्हें मौका मिल गया अपनी बात कहने का, लेकिन उन्होंने यह नहीं देखा की सरिता और मनीषा उनके पीछे आ रही हैं. उन्होंने पास बैठी औरत से कहा.
I.wife- जानती हो बहन मुझे तो शक है की इस सरिता का कही न कही चक्कर चल रहा है. जिसके कारन उसने शादी से मन कर दिया. नहीं तो बताओ भला. नौकरी वाले लड़के को आजकल कौन मन करता है शादी से.
औरत- नहीं बहन ऐसा कुछ नहीं है तुम गलत समझ रही हो बहुत hi नेक बछिया हैं.
I.wife- तुम्हे नहीं पता कुछ भी. ये दोनों ऊपर से मासूम दिखती हैं, लेकिन अंदर से बहुत घाघ हैं. मुझे तो लगता है जिससे सरिता का चक्कर चल रहा हैं ये वही लड़के होंगे. जिनको अभिषेक ने मारा होगा. बिना लड़की की हाँ के कोई लड़का उसके बारे में ऐसे थोड़ी बोल सकता है. पता नहीं क्या संस्कार दिए हैं आनंद जी ने अपनी बेटियों को. अभिषेक को पता चल गया होगा इन चक्करो के बारे में. वो तो पहले से hi गुंडा था. इसलिए उस लड़के को पिट दिया.
अपने भाई से बदला लेने के लिए इसने अभिषेक को घर से निकलवा दिया होगा. कोई संस्कार नहीं हैं इसके अंदर. कोई इज़्ज़त नहीं है उनकी समाज में. अरे जिसके बेटे और बेटियों के ये लक्षण होंगे उसकी क्या इज़्ज़त रहेगी समाज में. मेरे पति को देखो. कितना मान सम्मान है. मेरे बेटे को देखो बैंक में पो हैं ये सब अच्छे संस्कार का नतीजा है. मुझे दुःख होता है की आनंद ने कैसे संस्कार दिया हैं अपने बच्चो को. बीटा गुंडा बन गया और दोनों बेतिया चरित्रहीन निकल गयी.
ये बात सुनकर सरिता रट हुवे अपने कमरे में भाग गयी, लेकिन मनीषा आग बबूला हो गयी और चिल्लाते हुवे बोली.
मनीषा- ये क्या बोल रही हो आप. मेरी दिदिया के चरित्र पर इतना घटिया इलज़ाम लगते हुवे आपको शर्म नहीं आती. मेरी दिदिया गंगा की तरह पवित्र है और आपको मेरी दिदिया के चरित्र का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं हैं. आपकी समाज में इज़्ज़त है. तो हम लोग भी आपके यहाँ भीख मांगने नहीं जाते. आप अपनी इज़्ज़त अपने पास रखिये.
आप संस्कार की बात कर रही हैं. तो आप अपने संस्कार देखिये. आपके यही संस्कार हैं की आप बिना सच्चाई जाने मेरी दिदिया पर इतना घटिया इलज़ाम लगा रही हैं. आप मेरी दिदिया को कुछ बोलने से पहले अपनी बिटिया की सच्चाई जाकर पता करिये की वो पढाई का बोल कर बहार जाती है तो पढाई करने जाती हैं या लड़को के साथ गुल छर्रे उड़ने जाती है.
महिषा की तेज़ आवाज़ सुनकर बहुत सी औरते और आदमी वह पर जमा हो गए थे. उस औरत की बेटी भी वह आ गयी थी. जब उसने अपने बारे में सुना तो वो भी अपनी माँ की तरह शुरू हो गयी.
लड़की- क्यों रे मनीषा. क्या बोली तू. तू मेरे बारे में जासूसी करती हैं. तुझे मैं छोडूंगी नहीं. मेरी माँ सही कह रही हैं तुम दोनों बहने चरित्रहीन हो. कोई इज़्ज़त नहीं है समाज में तुम लोगों की. भाई गुंडा है और बहन बदचलन. अरे तुम लोगो को तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए. चलो माँ यहाँ से ऐसे लीचड़ो के यहाँ से कोई रिश्ता नहीं रखना है हमको.
अन्य पडोसी व्यक्ति- ये तुम माँ बेटी क्या बोले जा रही हो ानप सनाप. हम लोग इन बच्चियों को बचपन से जानते हैं. इन दोनों बच्चियों जैसा संस्कारी और व्यवहारी. बड़ो का आदर करने वाली बछिया यहाँ आस पास ढूढ़ने से भी नहीं मिलेंगी. और इनके बेटे के बारे में क्या जानती हो तुम दोनों. वो शरारती था, लड़ाई झगड़ा करता था, लेकिन कभी भी किसी लड़की से गलत व्यव्हार नहीं किया उसने कभी किसी की बहन बेटियों को गन्दी नजर से नहीं देखा.
उसने उन लड़को को इसलिए मारा था क्योंकि उन दोनों ने इन बच्चियों के बारे में गन्दी बात की थी. तुम्हारे आदमी पुलिस में हैं तो इसका ये मतलब नहीं है की तुम्हारे जो मुंह में आये वो तुम बक्ति जाओ. तुम दोनों को ये नहीं दिख रहा है की उस बच्ची पर मुसीबतो का पहाड़ टूटा है. उसकी शादी कैंसिल हो गयी है. उसे दिलाशा देने के बजाय उसे बदनाम कर रही हो तुम दोनों. शर्म आणि चाहिए तुम दोनों को.
I.wife- हम क्यों शर्म करे. हमने या हमारी बेटी ने कही मुंह कला नहीं किया है. शर्म तो इन दोनों लड़कियों को आणि चाहिए. जो मुंह कला करती फिरती हैं. भलाई का तो जमाना hi नहीं रहा.
अभी वो आदमी कुछ और बोलता उससे पहले आनंद जी बिच में बोले पड़े.
आनंद जी- बस कीजिये आप लोग. क्यों मेरी सरिता के पीछे पड़े हैं आप सब. भगवन के लिए उसे बक्श दीजिये और अपने अपने घर जाइये. जो भी दुःख और मुसीबत हमारे ऊपर पड़ी है उसे हम झेल लेंगे. हमें आप लोगो की सहानुभूति की जरूरत नहीं है. मेहरबानी करके आप लोग जाइये यहाँ से.
आनंद जी की बात सुनकर वो दोनों माँ बेटी भुनभुनाती हुई अपने घर चली गयी. उसके बाद धीरे धीरे सब पास पदोष के लोग उनके घर से बहार निकल गए.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
फिर दोनों बहाने कुछ देर बात करती रही. थोड़ी hi देर में लड़के वाले आ गए. अपनी क्षमता के अनुसार आनंद जी ने पूरी व्यवस्था की थी. कुछ hi देर में सगाई की रश्म शुरू हो गयी, लेकिन सगाई होते होते लड़के वालों का मुंह फूल गया. लड़के के पापा तो ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे उनके घर में किसी की मृत्यु हो गयी हो.
लड़के के पापा ने आनंद जी को अलग से बात करने के लिए बुलाया. आनंद जी के साथ उनके सेल भी थे. लड़के के पापा ने आनंद जी से कहा.
L.Papa- ये क्या है आनंद जी आपने तो कहा था की आपकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहेगी और सगाई की रेशम बहुत अचे से होगी, लेकिन यहाँ तो न खातिरदारी ठीक से हुई और न hi सगाई की रेशम hi अचे से हुई. जब सगाई में ये हाल है तो शादी में तो आप मुझे लूट hi लोगे.
आनंद जी- अरे नहीं भाई साहब. ये आप कैसी बात कर रहे हैं. मैं अपनी क्षमता से ज्यादा कर रहा हूँ. ताकि मेरी बेटी खुश रहे. शादी में कोई कमी नहीं होगी भाई साहब. हमने पूरी कोशिश की सगाई में कोई कमी न रहने पाए. फिर भी अगर कोई कमी रह गयी हो तो आप हमको बता दीजिये. हम पूरी कोशिश करेंगे की उसे दूर कर सके.
L.Papa- देखो आनंद एक तो लड़के को अपने सोने की जंजीर नहीं दी. और आपने सगाई में पैसे भी काम दिए हैं. ऐसे कैसे चलेगा. आखिर हमने अपने बेटे की पढाई लिखे में कितना पैसा खर्चा किया है. और तुम अपनी बेटी के लिए उसे फोकट में अपना दामाद बनाना चाहते हो. और साथ में हमारे साथ आये हुवे मेहमानो का आपने स्वागत ढंग से नहीं किया.
आनंद जी- या आप कैसी बात कर रहे हैं भाई साहब. हमने अपनी तरफ से खातिरदारी में कोई कमी नहीं राखी. भाई साहिब सगाई के लिए पैसे और जंजीर की कोई बात हुई hi नहीं थी. सगाई की अंगूठी के अलावा मैंने अपनी तरफ से एक सोने की अंगूठी दी है. वैसे भी बात तो शादी के लिए हुई है मोटर साइकिल और 2 लाख रूपये की. जो मैं शादी के समय दूंगा आपको.
L.papa- ऐसे कैसे मैं तुम्हारी बात का भरोषा कर लून. जो इंसान सगाई में इतनी कंजूसी कर सकता है वो शादी में क्या खर्चा करेगा. मुझे तो लूट लिया तुमने सगाई में और शादी में तो कंगाल hi बना डोज तुम मुझे.
S.Mama- देखिये भाई साहब आप अब कुछ ज्यादा hi बोल रहे हैं. हमने अपनी तरफ से कोई कसार नहीं राखी खातिरदारी में. फिर भी अगर कही कमी रह गयी हो तो हमको माफ़ कर दीजिये. और रही बात शादी के समय किये गए वेड की तो वो हम पूरी तरह से निभाएंगे. जो हमने देने के लिए कहा है वो हम्म आपको देंगे.
सरिता के मां की बात सुनकर लड़के के पापा गुस्से में आ गए और उन्होंने तेज़ आवाज़ में कहा.
L.papa- क्या ज्यादा बोल रहा हूँ मैं. मुझे आप दोनों पर तनिक भी भरोषा नहीं हैं. अब जब तक आप लड़के के लिए जंजीर और 50000 रुपये और नहीं देंगे. तब तक शादी के बारे में भूल जाइये.
S.mama- ये क्या बात हुई भाई शाहब. हम आपसे इतने प्रेम से बात कर रहे हैं तो अआप धमकी देने पर उतर आये हैं. मैं भी देखता हूँ की कैसे नहीं करते आप शादी. हमारी बिटिया कोई सजावट का सामान है क्या की जब मन चाहा हां किया और जब मैं चाहा न कर दिया. जब हम बोल रहे हैं की आपको शादी के समय जो भी देने के लिए कहा गया है वो हम देंगे तो अब आप की डिमांड बढाती जा रही है. ये बिलकुल भी सही नहीं है.
L.papa- ऐसे कैसे नहीं देंगे आप. आखिर मैंने अपने बेटे को पलने और पढाई लिखे पर जो खर्च किया है वो कौन देगा. आप फ्री में मेरे कमाऊ बेटे को अपना दामाद बनाना चाहते हैं. या तो मेरी बात मानिये या तो ये रिश्ता ख़तम समझिये.
आनंद जी- नहीं नहीं भाई साहब ऐसा मत कहिये. अभी इतनी जल्दी ये सब कैसे अर्रंगे करूँगा मैं. आप हमें कुछ दिन का समय दीजिये मैं जंजीर और 50000 रुपये आपको दे दूंगा. लेकिन आप ये रिश्ता मत तोड़िये. बहुत बदनामी हो जाएगी मेरी समाज में.
ल. पापा- मुझे अब और कोई बात नहीं करनी. मुझे अभी के अभी 50000 रुपये और सोने की जंजीर लड़के के लिए चाहिए. नहीं तो मैं चला लड़के को लेकर अपने घर.
लड़के के पापा की बात सुनकर आनंद जी की आँखों में आँशु आ गए. उन्होंने अपनी पगड़ी उतर कर लड़के के पापा के पैरों में रखने लगे तो सरिता के मां ने उनको रोकते हुवे कहा.
S.Mama- ये क्या कह रहे हैं आप जीजा जी. ये लालची लोग हैं इनके क़दमों में अपनी इज़्ज़त रखने का कोई मतलब नहीं है. इतना तो मैं भी समझ गया हूँ की इनकी नजर में पैसा hi सबकुछ है. अब आप इनकी कोई भी बात नहीं मानेंगे. इनकी मानगो को पूरा करके आप सरिता के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.
अभी ये सब बाटे हो रही थी की किसी ने सरिता को खबर कर दी की लड़के के पापा और आनंद जी में कुछ कहा सुनी हो गयी है तो सरिता भी सगाई वाले कपड़ों में hi वह पहुंच गयी. जब उसने पूरी बात सुनी और अपने पापा को अपनी पगड़ी लड़के के बाप में पैरों में रखते हुवे देखा तो उसका माथा भन्ना गया. उसने लड़के के पापा को दो टूक जवाब देते हुवे कहा.
सरिता- आप क्या शादी के लिए मन करेंगे. मैं ये शादी खुद तोड़ रही हूँ. नहीं करनी मुझे आप के बेटे से शादी. निकल जाइये आप अभी और इसी समय यहाँ से और अपने बेटे के लिए कोई और लड़की ढूंढ लीजिये.
सरिता की बात सुनकर आनंद जी ने उससे गुस्से से कहा.
आनंद जी- ये क्या कर रही हो तुम सरिता. तुम अंदर जाओ. मैं बात कर रहा हूँ न.
सरिता- मैं क्यों अंदर जाऊं पापा. और आप क्यों इनकी बात सुन रहे हैं. क्या अपने हमें इसीलिए पाल पॉश कर बड़ा किया था की एक दिन हमारी वजह से इन भिखमंगो के सामने हाँथ फैलाना पड़े. मैं ये कभी बर्दास्त नहीं करुँगी की मेरी वजह से मरे पापा को किसी के सामने हाँथ फिअलना पड़े और किसी के सामने शर्मिंदा होना पड़े.
आप हमारा गुरुर हैं पापा. अभिमान हैं आप हमारे. मैं अपने गुरुर और अभिमान को किसी के सामने toot-ta हुवा नहीं देख सकती. आप खुद सोचिये पापा की अभी मेरी शादी भी नहीं हुई है तो इनका ये हाल है. मेरी शादी हो जाने के बाद तो ये शेर हो जायेंगे. आपसे कुछ भी डिमांड कर देंगे. और आप मेरी ख़ुशी के लिए इनकी हर डिमांड पूरी करते फिरेंगे. इनके पैरो में गिर कर रोयेंगे, गिड़गिड़ाएंगे. जो मैं कभी नहीं होने दूँगी.
औरत कोई सजावट की वस्तु नहीं है पापा जो उसकी बोली लगायी जाये. अरे ठोकर मरती हूँ मैं इनकी दौलत और इनके बेटे की नौकरी पर. आप मेरी शादी किसी गरीब मजदूर से कर देना पापा. मैं रोज कमाकर खा लुंगी. लेकिन इन जैसे भिखमंगो के घर मेरी शादी मत करिये पापा. मेरी बात मन लीजिये पापा. अपनी सरिता की बात मन लीजिये.
S.mama- सरिता सही कह रही है जीजा जी. ये लोग लालची हैं शादी के बाद अगर इनकी कोई डिमांड हम न पूरी कर पाए तो. आपने सोचा है की ये अपनी सरिता के साथ कितना बुरा बर्ताव कर सकते हैं. मान जाइये जीजा जी. मैं सरिता बिटिया के साथ हूँ. और मैं भी नहीं चाहता की अब ये शादी हो.
आनंद को भी सरिता की बात सही लगी. उन्होंने भी दबे मन से अपनी सहमति दे दी. लड़के के पापा को फ़िलहाल ऐसी उम्मीद नहीं थी की लड़की खुद आकर शादी के लिए मन कर देंगी. उन्होंने ने सोचा था की दरवाज़े पर सगाई टूट जाने के दर से आनंद जी उसकी मांग पूरी कर देंगे, लेकिन सरिता के दो टूक इंकार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. शादी टूट जाने के बाद लड़के वाले अपना अपना मुंह लेकर वह से चले गए.
सरिता के इंकार करने के कुछ hi देर में जंगल में आग की तरह चारो तरफ ये खबर फिकल गयी की सरिता ने शादी से इंकार कर दिया. फिर तो वही हुवा जो अक्सर लड़की की शादी टूटने पर होता है. जीतनेय मुंह उतनी बातें. कोई कह रहा था की सरिता ने बहुत अच्छा किया जो ऐसे लालची लोगो के यहाँ बहु बैंकर जाने से इंकार कर दिया तो कोई कह रहा था की लड़की वालो को इतना घमंड शोभा नहीं देता.
आनंद जी के पदोष में एक नए परिवार ने कुछ समय पहले नया घर बनवाया था और वो घर के सभी सदश्यो के साथ वह सिफत हुए थे. घर के मुखिया पुलिस महकमे में इंस्पेक्टर थे. तो उनका मन सम्मान भी था. उनकी पत्नी हाउसवाइफ थी. लेकिन मुंहफट थी. किसी के सामने कुछ भी बोल देती थी. ये भी नहीं समझ आता था उनको की उनकी बात किसी को बुरी लग सकती है.
हमेशा अपने पति के इंस्पेक्टर होने का घमंड दिखती रहती थी. इनका बीटा सेंट्रल बैंक में पो की पोस्ट पर पिछले साल hi लगा था. और बिटिया हम उम्र थी सरिता की. इसलिए दोनों में थोड़ी बहुत बातचीत हो जाती थी, लेकिन वो भी अपनी माँ की तरह hi थी. पदोष में रहने के कारन उनको ये भी पता चल गया था की अभिषेक घर छोड़कर चला गया है. और किसलिए गया है ये भी पता था.
सगाई में शामिल होने वो लोग भी आये थे इंस्पेक्टर को छोड़कर. तो जब उनको भी ये बात पता चली की सरिता ने शादी से मन कर दिया है तो उन्हें मौका मिल गया अपनी बात कहने का, लेकिन उन्होंने यह नहीं देखा की सरिता और मनीषा उनके पीछे आ रही हैं. उन्होंने पास बैठी औरत से कहा.
I.wife- जानती हो बहन मुझे तो शक है की इस सरिता का कही न कही चक्कर चल रहा है. जिसके कारन उसने शादी से मन कर दिया. नहीं तो बताओ भला. नौकरी वाले लड़के को आजकल कौन मन करता है शादी से.
औरत- नहीं बहन ऐसा कुछ नहीं है तुम गलत समझ रही हो बहुत hi नेक बछिया हैं.
I.wife- तुम्हे नहीं पता कुछ भी. ये दोनों ऊपर से मासूम दिखती हैं, लेकिन अंदर से बहुत घाघ हैं. मुझे तो लगता है जिससे सरिता का चक्कर चल रहा हैं ये वही लड़के होंगे. जिनको अभिषेक ने मारा होगा. बिना लड़की की हाँ के कोई लड़का उसके बारे में ऐसे थोड़ी बोल सकता है. पता नहीं क्या संस्कार दिए हैं आनंद जी ने अपनी बेटियों को. अभिषेक को पता चल गया होगा इन चक्करो के बारे में. वो तो पहले से hi गुंडा था. इसलिए उस लड़के को पिट दिया.
अपने भाई से बदला लेने के लिए इसने अभिषेक को घर से निकलवा दिया होगा. कोई संस्कार नहीं हैं इसके अंदर. कोई इज़्ज़त नहीं है उनकी समाज में. अरे जिसके बेटे और बेटियों के ये लक्षण होंगे उसकी क्या इज़्ज़त रहेगी समाज में. मेरे पति को देखो. कितना मान सम्मान है. मेरे बेटे को देखो बैंक में पो हैं ये सब अच्छे संस्कार का नतीजा है. मुझे दुःख होता है की आनंद ने कैसे संस्कार दिया हैं अपने बच्चो को. बीटा गुंडा बन गया और दोनों बेतिया चरित्रहीन निकल गयी.
ये बात सुनकर सरिता रट हुवे अपने कमरे में भाग गयी, लेकिन मनीषा आग बबूला हो गयी और चिल्लाते हुवे बोली.
मनीषा- ये क्या बोल रही हो आप. मेरी दिदिया के चरित्र पर इतना घटिया इलज़ाम लगते हुवे आपको शर्म नहीं आती. मेरी दिदिया गंगा की तरह पवित्र है और आपको मेरी दिदिया के चरित्र का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं हैं. आपकी समाज में इज़्ज़त है. तो हम लोग भी आपके यहाँ भीख मांगने नहीं जाते. आप अपनी इज़्ज़त अपने पास रखिये.
आप संस्कार की बात कर रही हैं. तो आप अपने संस्कार देखिये. आपके यही संस्कार हैं की आप बिना सच्चाई जाने मेरी दिदिया पर इतना घटिया इलज़ाम लगा रही हैं. आप मेरी दिदिया को कुछ बोलने से पहले अपनी बिटिया की सच्चाई जाकर पता करिये की वो पढाई का बोल कर बहार जाती है तो पढाई करने जाती हैं या लड़को के साथ गुल छर्रे उड़ने जाती है.
महिषा की तेज़ आवाज़ सुनकर बहुत सी औरते और आदमी वह पर जमा हो गए थे. उस औरत की बेटी भी वह आ गयी थी. जब उसने अपने बारे में सुना तो वो भी अपनी माँ की तरह शुरू हो गयी.
लड़की- क्यों रे मनीषा. क्या बोली तू. तू मेरे बारे में जासूसी करती हैं. तुझे मैं छोडूंगी नहीं. मेरी माँ सही कह रही हैं तुम दोनों बहने चरित्रहीन हो. कोई इज़्ज़त नहीं है समाज में तुम लोगों की. भाई गुंडा है और बहन बदचलन. अरे तुम लोगो को तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए. चलो माँ यहाँ से ऐसे लीचड़ो के यहाँ से कोई रिश्ता नहीं रखना है हमको.
अन्य पडोसी व्यक्ति- ये तुम माँ बेटी क्या बोले जा रही हो ानप सनाप. हम लोग इन बच्चियों को बचपन से जानते हैं. इन दोनों बच्चियों जैसा संस्कारी और व्यवहारी. बड़ो का आदर करने वाली बछिया यहाँ आस पास ढूढ़ने से भी नहीं मिलेंगी. और इनके बेटे के बारे में क्या जानती हो तुम दोनों. वो शरारती था, लड़ाई झगड़ा करता था, लेकिन कभी भी किसी लड़की से गलत व्यव्हार नहीं किया उसने कभी किसी की बहन बेटियों को गन्दी नजर से नहीं देखा.
उसने उन लड़को को इसलिए मारा था क्योंकि उन दोनों ने इन बच्चियों के बारे में गन्दी बात की थी. तुम्हारे आदमी पुलिस में हैं तो इसका ये मतलब नहीं है की तुम्हारे जो मुंह में आये वो तुम बक्ति जाओ. तुम दोनों को ये नहीं दिख रहा है की उस बच्ची पर मुसीबतो का पहाड़ टूटा है. उसकी शादी कैंसिल हो गयी है. उसे दिलाशा देने के बजाय उसे बदनाम कर रही हो तुम दोनों. शर्म आणि चाहिए तुम दोनों को.
I.wife- हम क्यों शर्म करे. हमने या हमारी बेटी ने कही मुंह कला नहीं किया है. शर्म तो इन दोनों लड़कियों को आणि चाहिए. जो मुंह कला करती फिरती हैं. भलाई का तो जमाना hi नहीं रहा.
अभी वो आदमी कुछ और बोलता उससे पहले आनंद जी बिच में बोले पड़े.
आनंद जी- बस कीजिये आप लोग. क्यों मेरी सरिता के पीछे पड़े हैं आप सब. भगवन के लिए उसे बक्श दीजिये और अपने अपने घर जाइये. जो भी दुःख और मुसीबत हमारे ऊपर पड़ी है उसे हम झेल लेंगे. हमें आप लोगो की सहानुभूति की जरूरत नहीं है. मेहरबानी करके आप लोग जाइये यहाँ से.
आनंद जी की बात सुनकर वो दोनों माँ बेटी भुनभुनाती हुई अपने घर चली गयी. उसके बाद धीरे धीरे सब पास पदोष के लोग उनके घर से बहार निकल गए.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..