Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 7 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

अपडेट- 19

सरिता अपना फ़ोन no. सविता को dek-kar निकल जाती है. निश्छल अपनी बालकनी पर खड़ा होकर अपने गलो को सहलाते हुवे मन में सोचता है की बड़ी तीखी मिर्ची है ये मिस जोशी तो. इससे बच कर रहना पड़ेगा.

सरिता के जाते हुवे निश्छल देखता रहता है . तभी पीछे से सविता भी बालकनी पर आ जाती है और निश्छल के कंधे पर हाँथ रखकर उससे बोलती है.

सवी- क्या देख रहा है निशु. बहुत परेशां है बेचारी. इसलिए तुझपर गुस्से से चिल्ला रही थी. भूल जा इस बात को भाई और उसकी मैडम कर दे.


सविता की बात सुनकर निश्छल ने उसकी तरफ देखते हुवे कहा.

निश्छल- मैं उसकी मदद बिलकुल भी नहीं करूँगा. वो जाने और उसका काम जाने.

सवी- इसका मतलब तुम अपनी दी की बात नहीं मानोगे. मैंने उससे प्रॉमिस किया है की तुम उसकी मदद करोगे. मानती हूँ की उसने तुमसे चिल्लाकर बात की, लेकिन वो परेशां थी बेचारी. कर दे न उसकी मदद.


निश्छल- वो आपको बेचारी दिखती है और आपको क्या जरूरत थी उससे प्रॉमिस करने की. चलो मन की चिल्लाने तक तो ठीक था दी, लेकिन उसने तो हद hi कर दी. उसने आज फिर से………

इतना बोलकर निश्छल चुप हो गया और अपने गलो को सहलाने लगा. जिसे देखकर सरिता सोच में पद गयी और चुंकते हुवे बोली.

सवी- फिर से मतलब. फिर से थप्पड़. मतलब… कही ये वही लड़की तो नहीं जिसने उस दिन मार्किट में तुम्हे थप्पड़ मारा था. ये लड़की hi है न. वैसे तुम्हे बिलकुल सही नाम दिया है उसे लेडी डॉन. वैसे एक बात कहूँगी मैं वो लड़की बिलकुल तुम्हारे टक्कर की है. बिलकुल निडर, निर्भीक और बहादुर.

निश्छल- (मुंह बिचकाते हुवे) वैसे बात क्या थी. कुछ बताया उसने.

सविता ने निश्छल को पूरी बात बता दी. जिसे sun-ne के बाद निश्छल सोच में पद गया. फिर वो अपने कमरे में चला गया और तैयार होकर सविता से बोलकर घर से बहार निकल गया. सरिता घर आ गयी थी. उसके ऊपर केस चल रहा था तो वो पस नहीं जा रही थी. वो अपने कमरे में बैठी हुई सोच रही थी की तभी उसके फ़ोन पर पस से कॉल आया उसे फ़ोन उठाया.

सविता- Hello

उधर से बोलने वाले की आवाज़ सुनकर सरिता के फेस एक्सप्रेशन चेंज हो जाते हैं. पस से निश्छल का फ़ोन था.

निश्छल- मिस जोशी. क्या तुमको बुढ़िया की शकल याद है.

सरिता- हाँ.. याद है.

निश्छल- तुरंत पस पहुँचो. कोई बहाना कोई आर्गुमेंट मुझे नहीं चाहिए. मैं तुम्हारा बॉस हूँ. जितना बोल रहा हूँ. उतना करो. तुरंत पस पहुँचो.

निश्छल जनता था की अगर सरिता को बोलने का मौका दिया तो तो तरह तरह के बहाने बनाने लगेगी इसलिए उसने उसे आर्डर देने के तुरंत बाद फ़ोन काट दिया. इधर सरिता कुछ बोलना चाहती थी लेकिन तब तक फ़ोन काट चूका था. उसे निश्छल पर बहुत गुस्सा आ रहा था जो उसने बिना बात सुने hi फ़ोन काट दिया था. सरिता ने बड़बड़ाते हुवे कहा.

सरिता- पता नहीं अपने आपको क्या समझता है. हिटलर कही का. मेरी बात भी नहीं सुनी और फ़ोन काट दिया. पता नहीं क्या काम पद गया इसे मुझसे. कही सुबह की बात का बदला तो नहीं लेगा मुझसे. हे भगवन कहाँ फंसा दिया है तुमने मुझे. अब हुकुम आया है तो जाना hi पड़ेगा. नहीं तो वो हिटलर पता नहीं क्या करेगा.

यही सोचते हुवे सरिता तैयार होकर पस पहुँचती है तो सरिता को देखते hi उसके साथ काम करने वाले सभी अपने चेयर से उठकर उसे सलूट किया. ये देखकर सरिता को बहुत अच्छा लगा की काम से काम उसके साथ काम करने वालो को भरोषा है की उसने कोई गलत काम नहीं किया है. सरिता निस्चल का पूछी तो उसे केबिन की तरफ इशारा करके बताया गया.

सरिता जब केबिन में गयी तो वह पर निस्चल स्क्रीच आर्टिस्ट के साथ बैठा था. सरिता को देखते hi वो उठकर उसके पास आया और उसका हाँथ पकड़कर उसे लेजाकर कुर्सी पर बैठा दिया और बोलै.

निश्छल- स्क्रीच आर्टिस्ट को उस बुढ़िया की पूरी डिटेल्स बताओ.

सरिता- लेकिन किसलिए.

निश्छल- मैं सही कहता हूँ. तुम्हारे दिमाग का नट बोल्ट ढीला हो गया है. क्या तुम मेरी कोई भी बात बिना बहस किये नहीं मन सकती हो. अब मेरा दिमाग ज्यादा ख़राब मत करो और चुपचाप बैठकर स्क्रीच आर्टिस्ट को बुढ़िया की पूरी डिटेल्स बताओ.

सरिता निश्छल की बात सुनकर चुपचाप स्क्रीच आर्टिस्ट को उस बुढ़िया की पूरी डिटेल्स बताने लगी. कुछ hi देर में स्क्रीच बैंकर तैयार हो गया. निश्छल ने आर्टिस्ट को थैंक्स बोलकर स्क्रीच लेकर पस से बहार चला गया.

सरिता भी उसके बॉस अपने क्वार्टर पर वापस आ गई. सरिता अपने आपको बेक़सूर साबित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही थी. उसने यहाँ वह बहुत हाथ पेअर मरे, लेकिन उसे ऐसा कोई सुराग नहीं मिला था जिससे वो अपने आपको बेगुनाह साबित कर सके. आज एक हफ्ते पूरा हो चूका था. दोपहर का समय था. प्रधान की दी हुई समय की मियाद के पूरी होने में कुछ hi घंटा का समय शेष था.

सरिता को अब लगने लगा था की उसकी नौकरी चली जाएगी, क्योंकि अपनी बेगुनाही से जिस साबुत को वह एक हफ्ते से लगातार ढूंढ रही है. वह कुछ घंटो में कैसे ढूँढा जा सकता था. सरिता पस भी नहीं जा रही थी. सरिता ईमानदार थी ये सबको पता था, लेकिन वो कहते हैं न की जहाँ आपके चाहने वाले होते हैं वह आपके नापसंद भी करने वाले होते हैं. तो सरिता के रिश्वत लेने वाली बात जंगल में आग की तरह सरे डिपार्टमेंट में फ़ैल गयी थी.

सरिता आगे आने वाली मुसीबत के बारे में सोच रही थी की जिस नौकरी के लिए उसने रात दिन एक कर दिया था वो कुछ घंटा बाद उसे चीन ली जाएगी और जो बदनामी होगी वो अलग. वो यही सब सोचते हुवे अपने कमरे में चक्कर लगा रही थी. तभी सरिता के मोबाइल की घंटा बजी. उसने अपना फ़ोन उठाया. जो किसी अननोन NO. से था. सरिता ने फ़ोन उठाया.

सरिता- Hello.

ूंकंऊ- मिस सरिता जोशी.

सरिता- जी हाँ. आप कौन.

ूंकंऊ- जी मैं सीबीआई से प्रधान बोल रहा हूँ.

सरिता- जय हिन्द सर. फरमाइए सर.

प्रधान- जय हिन्द मिस जोशी. हमने ये बताने के लिए आपको फ़ोन किया है की आप पर लगाए गए सरे आरोप बबुनिया साबित हुए हैं. आपकी खिलाफ जितनी कम्प्लाइंस थी. सब फाल्स थी. इसलिए आप कल से अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर सकती हैं.

सरिता ने जैसे hi ये खबर सुनी. ख़ुशी से उछाल पड़ी. उसे तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की उसके ऊपर लगा आरोप बेबुनियाद साबित हो चूका है. लेकिन ये सब हुवा कैसे उसके समझ में ये नहीं आ रहा था. तो उसने ख़ुशी से प्रधान से पुछा.

सरिता- थैंक यू सर जी. मैंने तो पहले hi कहा था की मैंने कुछ नहीं किया है. लेकिन फिर भी अपने मेरी बात का भरोषा नहीं किया, लेकिन आप मुझे ये बताइये की आपको मेरी बात पर भरोषा अब कैसे हो गया. मेरी बेगुनाही का सबूत आपको कहा से मिला.

प्रधान- देखिये मिस जोशी. हम सुबूतों के आधार पर hi अपना काम करते हैं उस समय आपके खिलाफ हमको सुबूत मिले थे. हमने आपको रेंज हांथो पकड़ा था, लेकिन बाद में हमें आपकी बेगुनाही का सुबूत मिला इसलिए आपकी ड्यूटी बहाल की जा रही है.

सरिता अभी और कुछ कहना चाहती थी, लेकिन तब तक प्रधान ने फ़ोन कट कर दिया था. फ़ोन रखने के बाद सरिता के चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी. सरिता ने सोचा की आखिर प्रधान को मेरी बेगुनाही का सुबूत मिला कैसे. तभी उसे याद आया की हिटलर (निश्छल) ने उस दिन स्क्रीच आर्टिस्ट से उस बुढ़िया का स्क्रीच बनवाया था. तो कही ये हिल्टर का काम तो नहीं है.

लेकिन उसने ऐसा क्या कर दिया की मेरी बेगुनाही का सुबूत लेकर आ गया. कही उसने उस बुढ़िया को खोज तो नहीं लिया है. जिसे मैं इतने दिन से खोजने की कोशिश कर रही थी. अब ये तो पस जाने के बाद hi पता चलेगा की आखिर ये सब हुवा कैसे. यही सब सोचते हुवे आज का दिन ख़ुशी ख़ुशी गुजर गया. रात में सरिता ने अपने घर में बात की और खाना पीना करके सो गयी.

अगले दिन सुबह सबेरे उठकर उसने साडी तयारी की और नाश्ता करके पस के लिए निकल गयी. जब सरिता पस पहुंची तो सारा स्टाफ सरिता को दोबारा से देखकर बहुत खुश था. सरिता का सभी ने अभिवादन किया. जिसे सरिता ने अपना सर हिलाकर स्वीकार किया. उसके बाद सरिता रावत सर के पास गयी और बोली.

सरिता- गुड मॉर्निंग सर जी.

रावत सर- अरे बेटी तुम. वैरी वैरी गुड मॉर्निंग . तुम्हे यहाँ दोबारा देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है. मुझे पहले से पता था की तुम बेगुनाह हो. किसी ने तुम्हे फंसने की कोशिश की है, लेकिन मैं तुमसे माफ़ी भी चाहता हूँ बेटी की मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाया.

सरिता- नहीं सर. आप क्यों माफ़ी मांग रहे हैं. आप ने हमेशा मेरा भला hi सोचा है. आपने तो मुझे पहले से hi आगाह कर दिया था इसके बारे में की कोई मेरी झूठी कम्प्लेन कर रहा है. आपसे जितना बन पड़ा आपने किया मेरे लिए. इसलिए आप मुझसे माफ़ी मांग कर मुझे शर्मिंदा मत कीजिये. लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आयी की मेरी बेगुनाही का सुबूत प्रधान सर को कहा मिला.

रावत सर- ये सब अपने निश्छल बेटे ने किया है. उसी ने दिन रात एक कर दिया था तुम्हारी बेगुनाही का सुबूत ढूंढने के लिए. तुम्हे पता नहीं है की तुम्हारे नाम से रिश्वत लेने की जितनी भी कम्प्लाइंस आयी थी वो सब फर्जी थी. जब निश्छल ने साडी कम्प्लाइंस की इन्वेस्टीगेशन किया तो पता चला की जिस एड्रेस और जिस नाम से वो कम्प्लाइंस भेजी गयी हैं उस ाड्र्स और वो नाम दोनों फर्जी निकले और वह पर इस नाम का कोई भी आदमी नहीं मिला.

किसी ने भी इस बात के ऊपर ध्यान hi नहीं दिया की कम्प्लाइंस फाल्स भी हो सकती है. ये तो अच्छा हुवा की निश्छल बेटे ने बहुत बारीकी से इस केस को ऑब्सेर्वे किया और उसने साडी सच्चाई सामने लायी. जिससे तुम्हारी बेगुनाही साबित हो गयी.

सरिता- लेकिन मेरी बेगुनाही का सुबूत तो वो बूढ़ी दादी थी. जिन्होंने मुझे इस केस में फंसाया था. उनके मिले बिना मेरी बेगुनाही संभव hi नहीं थी. तो क्या हिटलर ने… (दांतो टेल ऊँगली दबाकर) मेरा मतलब है सर ने उनको ढूंढ लिया है.

रावत सर- इसके बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं है बेटी. ये सब निश्छल ने किया है तो उसी को इसके बारे में पूरी जानकारी होगी. अच्छा ये सब छोडो. तुम इतने दिन बाद पस आयी हो तो जाओ कुछ काम कर लो. जब निश्छल आएगा तो उससे पूछ लेना तुम जो पूछना होगा तुम्हे.

रावत सर की बात सुनकर सरिता हाँ में सर हिलाते हुवे अपने केबिन में चली गयी और अपनी चेयर पर बैठकर अपने हांथो में पेन उठाकर उसको अपनी ऊँगली में फंसकर हिलाते हुवे सोचने लगी.

सरिता- (अपने मन में) यार ये बुद्धि दादी तो बड़ी शातिर थी. मुझे फंसा कर कैसे गायब हो गयी थी उस दिन. लेकिन इस हिटलर ने दादी को ढूँढा कैसे. मुझे तो कही भी नहीं मिली थी वो दादी. मैंने भी तो कितनी कोशिश की थी ढूंढने की. चलो जब हिटलर आएगा तो उसी से पूछ लुंगी की बुद्धि दादी हैं कहा. वैसे एक बात तो है. हिटलर उतना भी बुरा नहीं है जितना मैं उसे समझती हूँ. मैंने hi उसे समझने में गलती कर दी. बेवजह बिना पूरी बात जाने उसे थप्पड़ भी मर दिया. मैं उससे माफ़ी मांग लुंगी. आखिर गलती तो मेरी hi थी इन सब में.

कुछ देर इसी तरह सोचने के बाद सरिता ने बेल्ल बजाकर एक हवलदार को बुलाया और उससे जान्हवी को अंदर भेजने के लिए कहा. थोड़ी hi देर में जान्हवी, रंजना और विकास उसके केबिन में आये.

जान्हवी- आपका एक बार फिर से इस पस में स्वागत है मैडम, हम लोगो ने आपको बहुत मिस किया. हमें तो आपके ऊपर पूरा भरोषा था की आपने कुछ भी नहीं किया है. लेकिन हम लोग आपकी मदद नहीं कर सकते थे. इसके लिए सॉरी.

सरिता- इतस ोकक जान्हवी. जब मैंने खुद इतनी दौड़ धुप की और मुझे कुछ नहीं मिला तो मैं तुम लोगो को क्यों तकलीफ देती इसके लिए. वैसे सर ने बहुत मैडम की मेरी.

रंजना- हाँ मैडम सीओ सर ने इस मामले को अपने हांथो में ले लिया था और बहुत hi बारीकी से सब छान बिन की और पोरे मामले को इन्वेस्टीगेट किया. उन्होंने दिन रात एक कर दिया आपको बेगुनाह साबित करने के लिए. जावेद और मोहित भी सर के साथ hi थे इस पूरी इन्वेस्टीगेशन में.

सरिता- अच्छा. जावेद भी था. जावेद आया है क्या आज पस में. जरा उसे भेजना मेरे पास.

फिर तीनो सरिता को सेलुटे करके केबिन से बहार चले जाते हैं. थोड़ी देर बाद केबिन का दूर नॉक होता है और सरिता अंदर आने के लिए बोलती है. जावेद सरिता के सामने जाकर खड़ा हो जाता है. सरिता उसे बैठने का इशारा करती है. जावेद सरिता के सामने कुर्सी पर बैठ जाता है. सरिता जावेद से मुखातिब होते हुवे बोली.

सरिता- जावेद. सुना है की मेरे केस में तुम भी पूरी तरह से इन्वॉल्व थे मुझे बेगुनाह साबित करने के लिए.

जावेद- जी मैडम. हमको आपकी ईमानदारी पर पूरा भरोषा था, इसलिए मैंने और मोहित ने सर के साथ मिलकर अपनी जान लगा दी इस केस में.

सरिता- केस मेरा था और मुझे hi कोई जानकारी नहीं मिल रही है इस केस के बारे में. मुझे तुम पूरी बात बताओ.

जावेद- सॉरी मैडम नहीं बता सकता आपको कुछ भी.

सरिता- क्यों नहीं बता सकते मुझे. केस मेरा था और मुझे jan-ne का पूरा हक़ है. तुम्हे बताने में कोई प्रॉब्लम है क्या.

जावेद- नहीं मैडम मुझे बताने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन मैं नहीं बता सकता. मेरी कुछ मजबूरी है.

सरिता- अरे ऐसी क्या मजबूरी है जो तुम मुझे नहीं बता सकते इस केस के बारे में.

जावेद- क्योंकि सर ने आपको इस केस के बारे में कुछ भी बताने से मन किया है. इसलिए मैं आपको कुछ भी नहीं बता सकता.

सरिता- कौन से सर ने मन किया है तुम्हे.

जावेद- निश्छल सर ने मन किया है.

सरिता- क्या. वो हिट.. मेरा मतलब है की सर पागल हो गए हैं क्या. मेरा केस है और मुझे hi कुछ बताने से मन किया जा रहा है. समझ में नहीं आता की तुम और तुम्हारे सर को मुझसे क्या प्रॉब्लम है.

जावेद- कोई काम था क्या आपको मैडम या मैं जॉन.

सरिता- नहीं तुम जा सकते हो. मुझे जब जरूरत होगी तो मैं बुला लुंगी. तुम सब किसी काम के नहीं हो. सब उस हिट… अच्छा जाओ तुम अब. मुझे कुछ काम करना है.

जावेद सरिता की बात सुनकर उसके केबिन से बहार चला गया. उसके बाद सरिता अपने काम में जुट गयी. पस का काम ख़तम करके जब वो अपने कमरे पर आती है और फ्रेश होकर चाय की चुस्किया लेने लगती है तभी उसका फ़ोन बजने लगता है. जब वो फ़ोन उठती है तो स्क्रीन पर ूंकंऊ नंबर फ़्लैश हो रहा था. सरिता ने फ़ोन उठाया तो उधर से आवाज़ आई.

सरिता- hello.

ूंकंऊ- है सरिता. मैं सवी बोल रही हूँ.

सरिता- ओह्ह्ह्ह डीई आप. कैसी हैं आप दी.

सवी- मैं बिलकुल बढ़िया हूँ. और आज मैं बहुत खुश हूँ तो इसी ख़ुशी के मौके पर आज का डिनर तुम मेरे यहाँ पर करोगी.

सरिता- क्या मैं आपकी ख़ुशी का राज़ जान सकती हूँ दी.

सवी- मैं इसलिए खुश हूँ क्योंकि तुम पर जो केस चल रहा था वो क्लियर हो गया. इसलिए मैंने तुम्हारे लिए डिन्नर में अचे अचे खान ेके पकवान बनाये हैं. तुम जल्दी से आ जाओ.

सरिता- थैंक यू दी. लेकिन इन सबकी क्या जरूरत है.

सवी- जरूरत है सरिता. इसी लिए तो तुम्हे बुला रही हूँ. और मुझे पता है की तुम जरूर आओगी.

सरिता सवी की बातो में अपने लिए मिठास और प्यास का अनुभव कर रही थी. इसलिए उसने ज्यादा बहस नहीं की और आने के लिए हाँ कर दी. सरिता की इस हाँ के पीछे एक और मकसद था की वो इसी बहाने अपने केस के बारे में कुछ पता भी कर सकती थी.

सरिता सवी के यहाँ जाने के लिए तैयार हो गयी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 20 [MEGA UPDATE]

सरिता सवी के यहाँ जाने के लिए तैयार हो गयी. पहले तो उसने अपनी गाड़ी से जाने का सोचा. फिर कुछ सोचते हुवे उसने रिक्शा लिया और सवी के घर चली गयी जो लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर था. जब सरिता वह पहुंची तो सविता दूर पर hi कड़ी होकर उसका इंतज़ार कर रही थी. सरिता सविता के साथ घर के अंदर गयी और हॉल में लगे सोफे पर बैठ गयी. सरिता की पीठ दरवाज़े के तरफ hi थी. दोनों में बातचीत शुरू हो गयी.

सवी- तुम बहुत प्यारी लग रही हो इन कपड़ो में. शामे पीस मेरे पास भी है ऐसा hi.

सरिता- थैंक्स दी. वैसे दी. आप क्या करती हैं यहाँ. मेरा मतलब है की कोई जॉब वगैरह.

सवी- मैं यहाँ ंगो में हेड आर्गेनाइजर हूँ. मुझे हर 3 से 6 महीने में शहर बदलना पड़ता है अपने ंगो के काम से. अलग अलग शहरो में जाकर सेमिनार ओर्गनइजे करना पड़ता है.

वैसे तो मेरा काम ज्यादा नहीं है. लेकिन फिर भी जब आर्गेनाइजेशन का समय आता है तो मेरा काम बढ़ जाता है. मेरे ंगो को जो कंपनी प्रमोट करती है वही सरे अरेंजमेंट करती है हमारे रहने खाने और आने जाने के लिए. लेकिन यहाँ पर निशु था तो उसके कहने पर मैं उसी के साथ रहने लगी.

सरिता- ये तो बहुत अच्छा है दी. आप समझ सेवा कर रही हैं.

सवी- समाज सेवा तो तुम भी कर रही हो सरिता. वैसे ये तुम्हारी पहली पोस्टिंग है या इसके पहले किसी और जगह पोस्टेड थी.

सरिता- नहीं दीदी. मेरी जॉब नई है तो ये मेरी पहली पोस्टिंग है.

सवी- यहाँ अकेले रहने में तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं हो रही है सरिता.

सरिता- सच बताऊ तो मुझे यहाँ आने में hi दर लग रहा था की मैं यहाँ पर अकेले कैसे रहूंगी. यहाँ आने के बाद इस बात का दर था की पता नहीं जहा पर मेरी जॉब लगी है वह पर लोग कैसे हैं. उनका नेचर कैसा है, लेकिन उनसे मिलने के बाद मेरी धरना बदल गयी. सभी लोग बहुत hi सपोर्टिंग है और मुझे बहुत मानते हैं. उनके साथ काम करके लगता है की मैं अपनों के बिच में hi हूँ. कभी कभी घर की याद आती है. बाकि सब ठीक hi है.

सवी- अब तो मैं भी यहाँ हूँ. तुम्हारा जब भी दिल करे मेरे पास आ सकती हो. इसे अपना hi घर समझो.

सरिता- आप हो hi इतनी अच्छी की मैं खुद अपने आपको यहाँ आने से नहीं रोक पाऊँगी. लेकिन वो सर….

सवी- (बात को काटकर) तुम्हे उससे डरने की जरूरत नहीं है. मैं हूँ न. उससे मैं बात कर लूंगी. वैसे मैंने तुम्हारा आर्टिकल पढ़ा था. तुम्हारी बाटे बहुत प्रभावशाली लगी मुझे.

सरिता- आप किस आर्टिकल की बात कर रही हैं आप दी.

सवी- अरे ये देखो. जो तुमने न्यूज़ वालो को इंटरव्यू दिया था.

सरिता- मुझे तो पता hi नहीं चला इस टेंशन के आगे की मेरा आर्टिकल भी आया है न्यूज़ पेपर में. वो तो बस ऐसे hi मुझे जो सही लगा. मैंने अपने इंटरव्यू में कह दिया.

सवी- अच्छा तुम तब तक अपना आर्टिकल पदों. तब तक मैं रसोई में देख लेती हूँ की खाना ban-ne में अभी कितनी देर है.

सविता ये कहकर किचन में चली जाती है. सरिता पेपर उठाकर आर्टिकल पढ़ने लगती है. उसी वक्त निश्छल भी घर आता है और देखता है की हॉल में कोई बैठा है. जब वो हॉल में जाता है तो देखता है की सविता दी बैठी हुई है, जबकि वह पर सरिता बैठी हुई थी.

चूँकि दरवाज़े की तरफ सरिता की पीठ थी और सरिता के कपडे भी शामे थे जो सविता के पास थे, इसलिए निश्छल को ग़लतफ़हमी हो गयी ये समझने में. निश्छल ने जाकर सोफे के पीछे से सरिता के गले में बहे डालकर उसे हुग कर लिया और उसके गलो को चुम लिया और बोलै.

निश्छल- लव यू डी….

निश्छल इतना hi बोल पाया था की तभी उसके गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ पड़ा जो सरिता ने मारा था. क्योंकि निश्छल के इस तरह से हुग करने और चूमने से सरिता गुस्से से तमतमा गयी थी. और उसने लव यू सुना तो उसने एक थप्पड़ जड़ दिया. निश्छल का पूरा गाल झनझना गया. वो सकपका कर थोड़ा पीछे हैट गया. सरिता ने उसे गुस्से से देखते हुवे कहा.

सरिता- आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे चूमने की और लव यू बोलने की.

निस्चल- तुम.... तुम यहाँ क्या कर रही हो. तुम पागल हो गयी हो क्या. जब भी मिलती हो मेरा गाल टेबल की तरह बजा देती हो. अरे मेरे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं की मैं तुमसे लव यू बोलू. वो मैंने सोचा की दी बैठी हुई है. इसलिए मैंने दी समझकर ऐसा किया.

सरिता- आप कितने बद्तमीज़ हो. अपनी बहन की ाँद लेकर इतनी घटिया हरकत करते हो. आप कैसे इंसान हो जो अपनी बहन को नहीं पहचान पते.

निश्छल- (गुस्से से) चुप बुल्कुल चुप. मुझे क्या पता की तुम यहाँ पर बैठी हो मेरी दी के कपडे पहनकर. पहले तुम ये बताओ की तुम मेरे घर पर क्या कर रही हो.

इन दोनों की चिल्लाने के आवाज़ सुनकर सविता को लग गया की दोनों कुत्ते बिल्ली की तरह फिर से लड़ने लगे हैं तो वो किचन से निकल कर उनके पास पहुंची और बोली.

सवी- ये क्या है. तुम दोनों फिर से शुरू हो गए.

अभी सरिता सविता की बातो का कोई जवाब देती. उससे पहले hi निश्छल बोल पड़ा.

निश्छल- ये यहाँ क्या कर रही है

सवी- इसे मैंने बुलाया है डिन्नर के लिए.

निस्चल- शुरू हो गया आपका समाज सेवा का काम घर में भी. मैंने आपसे कितनी बार कहा है की अनजान लोगो को घर पर मत बुलाया करो. आपको पता नहीं की कैसे अनजान लोग पहले मेल मिलाप बढ़ाते हैं फिर कांड करके भाग जाते हैं. लेकिन आप तो मेरी बात सुनती hi नहीं हैं दी.

सरिता को निश्छल की बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और वो सविता से बोली.

सरिता- दी मैं अब एक मिनट भी यहाँ नहीं रुकूंगी. मैं घर जा रही हूँ.

सवी- निशु. अब क्या मैं अपने मन से किसी को घर बुला भी नहीं सकती हूँ. तुम ये सब छोडो और अपने कमरे में जाओ. जब खाना बन जायेगा तो मैं खुद तुम्हे बुला लुंगी.

सविता की बात सुनकर निश्छल अपने कमरे में चला गया. अपने कमरे में पहुंचकर निश्छल अपने बिस्टेर पर पसर गया और सोचने लगा.

निश्छल- (मन में) क्या लड़की है यार. बहुत तीखी मिर्ची है ये तो. जब भी मिलती है मेरा गल्ल लाल कर देती है. बहुत सख्त हाँथ हैं यार इसके तो. मेरा सर झनझना जाता है इसके थप्पड़ से. मुझे तो अब इससे बचकर रहना चाहिए. नहीं तो किसी दिन अगर इसने पस में मेरे गाल लाल कर दिए तो मेरी इज़्ज़त का फालूदा हो जायेगा.

उधर निश्छल के जाने के बाद सरिता सविता से कहती है.

सरिता- दी आज के बाद जब ये हिटलर घर पर न रहे तो hi मुझे बुलाइयेगा.

सवी- (आँखे दिखाकर) गलत बात सरिता. एक बहन के सामने उसके भाई को हिटलर बोल रही हो.

सरिता- अब काम भी तो वो हिटलर वाला hi करते हैं तो मैं क्या करू. मैं उन्हें हिटलर hi बोलूंगी.

सवी- (मजाक उड़ाते हुवे) अरे वाह्ह. क्या बात है. बहन के सामने उसके भाई को पता रही हो तुम.

सरिता- (चौकते हुवे) क्या. क्या कहा आपने. मैंने कब किया ऐसा. मेरे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं की मैं इस हिटलर को पटाऊँ.

सवी- बड़ा सम्मान दे रही हो मेरे भाई को उन्हें बोलकर तो मैंने सोचा शायद तुम उसे पटाने की कोशिश कर रही हो.

सरिता- क्या दी आप भी. अगर आप मुझसे ऐसी बात करेंगी तो मैं नहीं आउंगी आपसे मिलने दोबारा.

सवी- अच्छा ठीक है. नहीं करती तुझसे इस तरह की बात. चलो जाकर हाँथ मुंह धो लो डिनर रेडी हो गया है मैं निशु को बुलाकर लती हूँ.

सरिता फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी. सविता और निश्छल भी आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए. सरिता ने तीन प्लेट खाना निकला और तीनो खाने लगे. इस दौरान सरिता निश्छल को घूर रही थी और निश्छल सरिता को घूर रहा था. सविता दोनों को बरी बरी से एक दुसरे को घूरते हुवे देख रही थी. तीनो में से खाना खाने के दौरान किसी भी प्रकार की bat-chit नहीं की.

खाना खाने के बाद निश्छल अपने कमरे में चला गया. सविता और सरिता ने कुछ देर बैठ कर बाते की. उसके बाद सरिता ने कहा.

सरिता- दी अब मैं चलती हूँ. रात काफी हो चुकी है. सुबह पस भी जाना है. अपने मुझे डिनर के लिए इन्विते किया उसके लिए थैंक यू दी.

सवी- चुप कर. दी भी बोलती हो और थैंक यू बोलकर पराया भी कर देती हो. रुको मैं निशु को बोल देती हूँ वो तुम्हे घर तक छोड़ देगा.

सरिता- (चौंक कर)- नहीं दी. उन्हें तकलीफ मत दीजिये. मैं खुद चली जाउंगी. मुझे किसी का दर थोड़ी hi है.

सवी- हाँ मैं जानती हूँ किट ुम पुलिस वाली हो और बहादुर भी हो, लेकिन अभी रात बहुत ज्यादा हो गयी है और अकेली लड़की का घर से बहार जाना सेफ नहीं है, जमाना बहुत ख़राब चल रहा है.

सरिता सविता को रोकती रही, लेकिन सविता ने उसकी बात न सुनते हुवे निश्छल के कमरे की तरफ चल पड़ी. निश्छल के कमरे में पहुंचकर सविता ने निश्छल से कहा.

सवी- निशु. सरिता को जरा उसके घर तक छोड़ कर आ जा भाई.

निश्छल- (चौंक कर) क्या. नहीं नहीं. मैं उसको छोड़ने नहीं जाऊंगा. जब वो मुझे मेरे घर में नहीं छोड़ती बजा देती है तो अपने घर पर पता नहीं क्या हाल करेगी मेरा.

सवी- मतलब आज फिर से उसने तुझे थप्पड़ मारा.

सविता की बात सुनकर निस्चल ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. सविता ये देखकर मुस्कुराने लगी और निस्चल से बोली.

सवी- वैसे एक बात तो है. पहली बार कोई ऐसी लड़की मिली है जो तेरे टक्कर की है. अब छोड़ इस बात को और जाकर उसे छोड़ आ उसे घर पर.

निश्छल- मैं नहीं जाऊंगा दी.

सवी- ये क्या जिद है निशु. अकेली लड़की घर कैसे जाएगी.

निश्छल- वो किस जंगल से आपको लड़की लगती है. बिल्ली है बिल्ली. जो बात बात पर पंजा मरती है. उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ पायेगा. उसे किसी का दर नहीं है, बल्कि उसके सामने जो आएगा दर तो उसको लगेगा. आप ड्राइवर को उसके साथ भेज दीजिये.

उधर सविता के निश्छल के पास आने के बाद सरिता मन में कहती है.

सरिता- (मन में) हे भगवन. फिर से मुझे उस हिटलर के साथ रहना पड़ेगा. मेरी किस्मत पता नहीं बार बार मुझे उस हिटलर से क्यों सामना करवाती है. पता नहीं क्या होने वाला है.

उधर निस्चल के मन करने पर सविता वापस आ गयी और ड्राइवर को कहकर गाड़ी बहार निकलने के लिए भेज दिया और सरिता को लेकर बहार तक आ गयी. ड्राइवर ने गाड़ी बहार निकली और जैसे hi सरिता गाड़ी में बैठने लगी. वह पर निश्छल आ गया और उसे ड्राइवर से कहा.

निस्चल- सुनो रामु. तुम रहने दो. इन्हे मैं छोड़ आता हूँ.

ड्राइवर- अरे सर आप क्यों तकलीफ कर रहे हैं. मैं मैडम को छोड़ आता हूँ.

निस्चल- अरे यार. तुम्हे जो बोलै है वो करो. मेरा मूड पहले से hi ख़राब है तुम उसे और ख़राब मत करो.

ड्राइवर अपनी शीट से उतर कर गाड़ी से बहार आ गया. निस्चल ने ड्राइविंग शीट संभल ली. सरिता जब पीछे का दरवाज़ा खोलकर बैठने लगी तो निस्चल ने कहा.

निस्चल- मिस जोशी. मैं आपका ड्राइवर नहीं हूँ जो आप पीछे बैठ रही हैं. आगे आकर बैठिये.

सरिता निस्चल की बात सुनकर मुंह बिचका कर आगे आकर बैठ गयी और सवी को bye बोल दिया. निस्चल ने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी. थोड़ी दूर जाने के बाद निस्चल ने सरिता से कहा.

निश्छल- अपनी सीटबेल्ट बांध लो मिस जोशी.

सरिता ने निश्छल की बात को अनसुना कर दिया. जिससे निस्चल को गुस्सा आ गया और उसने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी और कुछ दूर जाने पर अचानक से ब्रेके मार दी. गाड़ी चररररररररर की आवाज़ के साथ रुक गयी. अचानक से ब्रेक लगने से सरिता का सर दस बोर्ड से जाकर टकराया और उसके मुंह से आह्हः निकल गयी. सरिता ने निस्चल को गुस्से से देखते हुवे कहा.

सरिता- अगर गाड़ी चलनी नहीं आती तो एक बैलगाड़ी ले लो और उसे चलना सीखो, उसके बाद गाड़ी चलना.

निश्छल- मैं कब से कह रहा हूँ की सीटबेल्ट बांध लो. लेकिन तुमने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया. तो मैं तुम्हे बताना चाह रहा था की मेरी बात को नजर अंदाज़ करने का क्या परिणाम हो सकता है.

इसके बाद दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई. निश्छल बहुत hi स्लो स्पीड से गाड़ी ड्राइव कर रहा था. कुछ देर ख़ामोशी के बाद सरिता ने निश्छल से पुछा.

सरिता- दादी कहाँ पर हैं.

निश्छल- कौन दादी. किसकी दादी. मैं जब छोटा था तभी मेरी दादी की डेथ हो गयी थी. मेरे पापा के कोई चाचा या दादा नहीं थे तो मेरे एक hi दादी थी.

सरिता- कितना नाटक करते हैं आप. मैं जो पूछ रही हूँ आप अच्छी तरह से समझ रहे हैं फिर भी बात को घूमने की कोशिश कर रहे हैं. क्या आप सच में नहीं जानते की मैं किसकी बात कर रही हूँ.

निश्छल- किश की.

सरिता- हाँ किसकी.

निस्चल- तुम कितनी बद्तमीज़ लड़की हो. एक अकेले और जवान लड़के से ऐसी बात करते हुवे तुम्हे शर्म नहीं आती.

सरिता- देखो. अब आप हद से ज्यादा बोल रहे हैं. अगर मेरे बारे में एक भी शब्त और उल्टा सिद्ध बोलै तो ाचा नहीं होगा आपके लिए.

निस्चल- क्या करोगी तुम. एक तो मुझे इनविटेशन देती हो और ऊपर से मुझे बोल रही हो की मैं हद से ज्यादा बोलता हूँ.

सरिता- किसकी इनविटेशन मैंने आपको दी है. आप पागल तो नहीं हो गए हैं.

निस्चल- देखा कब से तुम मुझे इनविटेशन दे रही हो और अभी फिर से तुमने किश की इनविटेशन दी मुझे. अगर मैंने कर लिए तो बुरा मत man-na.

इतना कहते हुवे निस्चल ने अपने होंठो पर अपना हाँथ रख कर इशारा किया. जिसे समझकर सरिता ने उसे गुस्से से देखा और खीझकर रह गयी. सरिता ने आँखे दिखते हुवे कहा.

सरिता- आप कितने बद्तमीज़ हैं. आपको यही सब बाते आती हैं करने के लिए. मुझे तो लगता था की मैंने आपको थप्पड़ मार्कर गलत किया. और इसकी माफ़ी भी मांगना चाहती थी आपसे. लेकिन अब मुझे लगता है की मैंने आपको थप्पड़ मार्कर बिलकुल सही किया है.

निस्चल- क्या तुम मुझसे सच में माफ़ी मांगना चाहती हो. ठीक है अगर तुम माफ़ी मांगती हो तो मैं तुम्हे माफ़ कर दूंगा इस बार.

सरिता- (चिढ़कर) माफ़ी मांगे मेरी जुटी. अब मैं कोई माफ़ी वफी नहीं मांगूंगी. मैंने जो किया है बिलकुल सही किया है. आप उसी लायक हो. अब सीधे सीधे बता दीजिये की दादी कहा हैं.

निस्चल- मेरी दादी मर चुकी हैं.

सरिता- आपको अगर नहीं बताना तो सीधे सीधे मन कर दीजिये. मुझे भी कोई शौक नहीं है एक hi बात को बार बार पूछने का, लेकिन नहीं आपको तो बस बकवास करना आता है. आप क्या समझते हैं की आप मुझे कुछ नहीं बताएंगे तो मुझे पता नहीं चलेगा. मैं खुद पता लगा लुंगी की आपने दादी को कहा छुपा कर रखा हुवा है.

निश्छल- ओह मैडम हेल्लो. मैं कुछ बोल नहीं रहा हूँ तो इसका मतलब ये नहीं है की मैं बोलना नहीं जनता. मैं चाहू तो तुम्हारे सरे थप्पड़ का जवाब दे सकता हूँ, लेकिन तुम लड़की हो इसलिए मैंने छोड़ दिया तुमको. एक तो मदद करो. ऊपर से इनके नखरे भी झेलो. दो शब्त मदद के बदले थैंक यू के मुंह से नहीं निकल रहे हैं, ऊपर से मुझे hi उल्टा सिद्ध सुना रही हो.

सरिता- हाँ तो मैंने कब कहा था की मेरी मदद करो आप. मत करते मेरी मदद, काम से काम मैं सुकून से रहती. अब तो हर समय मुझे अपने किये गए अहसान की याद दिलाते रहोगे. जिसमे मैं दबकर रह जाउंगी. मुझे आपकी मदद की जरूरत नहीं थी तो मेरी मदद क्यों की आपने.

निस्चल- मैं तुम्हारी मदद तो बिलकुल भी नहीं करता. किसी कीमत पर नहीं करता, लेकिन क्या करता मैं. दी ने कहा था की मैं तुम्हारी मदद करू. सच्चाई का पता लागू. और मैं दी की बात नहीं टालल सकता था. ऊपर से रावत सर और मोहित, जावेद, विकास, रंजना और जान्हवी को भी तुम्हारे ऊपर भरोषा था. इसलिए मुझे तुम्हारी मदद करनी पड़ी .

तो इस खुशफहमी में मत रहो की मैंने तुम्हारे लिए ये सब किया है. लेकिन मुझे नहीं पता था की तुम एहसान फरामोश निकलोगी और मदद के बदले मुझे थप्पड़ मरोगी. जंगली बिल्ली.

सरिता- क्या कहा मुझे जंगली बिल्ली, तो आप भी किसी हिटलर से काम नहीं हो. अकड़ू. खड़ूस.

निश्छल- क्या बोलै तुमने. मैं हिटलर हूँ. अकड़ू हूँ. खड़ूस हूँ.

सरिता- हाँ. इसके आलावा भी जो शब्द इनसे मैच करते है. वो सब आप पर लागु होते हैं.

निस्चल- तो तुम्हारे ऊपर भी जंगली बिल्ली से रिलेटेड जितने वर्ड्स हैं वो सब लागु होते हैं.

फिर दोनों में बहस शुरू हो गयी. दोनों के बिच ऐसे वर्ड्स का आदान प्रदान होने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा माहौल बना रहा. फिर सरिता ने ऊबकर रेडियो चालू कर दिया. जिसमे 93.5 फम पर पुराने ज़माने का गण आ रहा था.

ज़िन्दगी का सफर है ये कैसा सफर.


कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं.

है ये ऐसी डगर चलते हैं सब मगर.

कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं.

ज़िन्दगी को बहुत प्यार हमने दिया.

मौत से भी मोहब्बत निभाएंगे हम.

जायेंगे अब किधर है ये किसको खबर.


कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं.

निश्छल को ये गण बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था तो उसने चैनल चेंज करके 92.7 फम लगा दिया. जिसमे नए ज़माने का गण बज रहा था.

कैंडी पौन. पौन हो कैंडी.

हो जाने जाना. कैंडी पौन.

इस गाने को सुनकर सरिता ने निस्चल को घूरकर देखा और फिर से चैनल चेंज करके 93.5 फम लगा दिया. जिसके कारन निस्चल चिढ गया और बोलै.

निस्चल- ये बाबा आदम के ज़माने के गाने क्यों सुनती हो. नए गाने सुना करो बहुत मज़ा आता है नए गाने sun-ne में. वही गण लगाओ जो अभी आ रहा था 92.7 फम पर.

सरिता- अरे कुछ तो क्लास रखो अपनी चॉइस में. नए ज़माने के वही घटिया गाने. न कोई सुर रहता है न कोई ताल रहती है. गण काम शोर ज्यादा सुनाई देता है. नए गांव में वह सुकून नहीं मिलेगा जो पुराने गांव में मिलता है. कभी रात में आपको नींद न आये तो पुराने गाने लगा लीजिये. उसकी मधुर आवाज़ में सुकून की नींद आ जाएगी.

आजकल के गाने रात में बजा दो तो सोता हुवा आदमी भी जग जायेगा. रात में अगर कही सफर पर निकले हो तो पुराने गाने लगा दीजिये. सफर का पता hi नहीं चलेगा की कब अपनी मंजिल पर पहुंच गए हैं. मेरी मानिये तो कभी आप भी इस सुकून को महसूस करने की कोशिश कीजिये.

निस्चल- मैं आज के ज़माने का इंसान हूँ. या बाबा आदम के ज़माने वाले गांव का शौक मुझे नहीं है. तुम्हे hi मुबारक हो ये बाबा आदम के गांव का शौक. अब चुपचाप पहले वाला गण लगा दो.

सरिता- (गुस्से से) ठीक है अगर मैं बाबा आदम के ज़माने की हूँ तो ठीक है फिर अब ये गण नहीं बदलेगा. मैं यही गण सुनूंगी अब. और इसे बदलने की कोशिश भी मत करियेगा.

तभी वह पर दूसरा गण बजने लगा.

तेरे मेरे बिच में, तेरे मेरे बिच में


कैसा है ये बंधन अंजना.

मैंने नहीं जाना.


तूने नहीं जाना.

ये गण सुनकर सरिता इस गाने में खो गयी. उधर गण सुनकर निश्छल इर्रिटेट होता हुवे बोलै.

निश्छल- तुम बिना बहस किये मेरी बात नहीं मन सकती क्या. जब देखे दाना पानी लेकर मेरे ऊपर सवार हो जाती हो.

इतना कहकर निश्छल ने फिर से चैनल चेंज करके अपना वाला लगा दिया. जिसमे नए ज़माने के गाने बज रहे थे. सरिता को वो गाने पसंद नहीं आये तो उसने चैनल बदल कर अपना वाला लगा दिया. जिसमे पुराने ज़माने के गाने बज रहे थे.

ये देखकर निश्छल ने गाड़ी रोक दी और चैनल बदलकर अपना वाला चैनल लगा दिया. फिर तो दोनों का ये खेल शुरू हो गया. जब निश्छल अपना चैनल लगता तो सरिता चिढ जाती और अपना चैनल लगा देती. जब सरिता अपना चैनल लगाती तो निस्चल चिढ़कर अपना चैनल लगा देता. जिसके कारन एक भी गण ढंग से नहीं बज प् रहा था.

फिर तो ये क्रिया जल्दी जल्दी होने लगी. जिसके कारन दोनों की उंगलिया आपस में टकरा रही थी. कभी कभी तो दोनों एक दुसरे की ऊँगली पर ऊँगली रखकर hi चैनल चेंज कर देते थे. लेकिन दोनों को इस बात का होश नहीं था. दोनों को तो अपने गाने की पड़ी थी. ये खेल लगभग 10 मिनट तक चला दोनों का. जिसके फ़्रस्ट्रेशन में निश्छल ने एक जबरदस्त मुक्का राडो पर दे मारा. रेडिओ टूट फुट गया. निश्छल ने सरिता से कहा.

निस्चल- हो गया न. बज गया गण. अब तो तुम बहुत खुश होगी.

सरिता- (मुस्कुराते हुवे) बहुत hi ज्यादा.

निस्चल- ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है तुमको. इसके पैसे मैं तुमसे hi वसूल करूँगा मिस जोशी.

सरिता- (हैरान होकर). मुझसे क्यों. मैं क्यों पैसे दूँगी आपको. तोडा तो आपने है न

निश्छल- लेकिन टूटा तो तुम्हारी वजह से है न. तो हर्जाना तो तुम्हे hi भरना पड़ेगा.

सरिता- ये तो गलत है. सरासर गलत है. इसमें मेरी गलती नहीं है. साडी गलती आपकी है. अगर आप मेरी पसंद का गण बजने देते तो न ये गण बदलने की नौबत आती न हम दोनों में लड़ाई होती और न hi ये रेडिओ toot-ta.

निश्छल- ज्यादा सायानी ban-ne की कोशिश मत करो मिस जोशी. अगर यही बात मैं भी तुमसे कहूँ इसमें मेरी गलती नहीं है. साडी गलती तुम्हारी है. अगर आप मेरी पसंद का गण बजने देते तो न ये गण बदलने की नौबत आती न हम दोनों में लड़ाई होती और न hi ये रेडिओ toot-ta.

सरिता- (इर्रिटेट होकर) हे भगवान्. पता नहीं किसकी न न. पता नहीं वो कौन था जिसकी शकल देखकर मैं उठी थी जो मेरे साथ ये सब हो रहा है.

सरिता ने किसकी शब्द आते hi उसे बदल दिया. क्योंकि उसे कुछ देर पहले की निश्छल की बाते याद आ गयी. वो नहीं चाहती थी की दुबारा से निस्चल उसे परेशां करे इस बात को लेकर. सरिता की बात सुनकर निस्चल ने कहा.

निश्छल- किसी और की क्यों अपनी hi शकल देख ली होगी दर्पण में. वैसे भी तुम्हारी शकल अगर तुम खुद देख लो तो दिन बहुत बुरा गज़रता होगा तुम्हारा.

सरिता- आप अपनी बकवास बंद करिये. मैं आपसे बात नहीं कर रही हूँ. मैं अपने आपसे बात कर रही हूँ.

निश्छल- एकदम पगलैट हो क्या तुम. हर बात का जवाब देना जरूरी होता है क्या. एक तो गाड़ी मेरी है. ऊपर से मैं थका हरा होने के बावजूद भी तुम्हे तुम्हारे घर तक छोड़ने आया हूँ. एक मिनट भी आराम नहीं मिला मुझे सुबह से और अब ऊपर से तुम्हारी बक बक सुनकर मेरे कण पाक गए हैं.

सरिता- मैंने कहा था क्या आपको की मुझे घर छोड़ दो. ड्राइवर तो आ hi रहा था मुझे छोड़ने के लिए. फिर आप क्यों aaye.maine तो नहीं बुलाया था आपको.

निश्छल- अपना चेहरा देखा था कैसे लातल गया था. इसलिए तुम पर दया करके तुम्हे छोड़ने चला आया. लेकिन मुझे नहीं पता था की मैं एक जंगली बिल्ली को छोड़ने जा रहा हूँ.

सरिता- आप हिटलर थे. हिटलर हैं और हिटलर hi रहेंगे. कोई जरूरत नहीं है मुझपर दया दिखने की.

इसी बातचीत में सरिता का घर आ गया. सरिता तुरंत गाड़ी से बहार निकली और बिना निस्चल को देखे थैंक यू बोलकर अपने घर की तरफ चल दी. पीछे से निस्चल ने आवाज़ लगायी.

निस्चल- Hello मिस जोशी. आपने कुछ कहा क्या. मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया.

सरिता- (बिना उसकी तरफ देखे)- आपने मुझे यहाँ तक छोड़ा. उसके लिए धन्यवाद् आपका.

निस्चल- (छेड़ते हुवे)- तुमने क्या कहा मिस जोशी. थोड़ा जोर से बोलिये. मुझे सुनाई नहीं दिया.

सरिता- (निश्छल की तरफ घूमकर गुस्से से) एक hi बात को बार बार कहने की मेरी आदत नहीं है. अगर नहीं सुनाई पड़ता तो अपने कण का इलाज करवाओ आप.

इतना कहकर सरिता अपने कमरे का टाला खोलकर अंदर चली गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया. निश्छल काफी देर वही खड़ा उसके दरवाज़े की तरफ देखता रहा और फिर गाड़ी आगे बढ़ा दी और मन hi मन सोचने लगा.

निस्चल- क्या लड़की है यार. कोई मन्नेर hi नहीं है. ऐसे भी कोई थैंक यू बोलता है क्या. ऐसा लगता था जैसे कोई जबरदस्ती थैंक यू बुलवा रहा है. बड़ी तीखी मिर्ची है यार ये लड़की तो. गुस्सा तो इसकी नक् पर रहता है. भगवन बचाये इस लड़की से.

कुछ hi देर में निश्छल अपने घर पहुंच गया. जब वो घर पंहुचा तो सविता अभी भी जाग रही थी. निश्छल ने चुप चाप गाड़ी पार्क की और अपने कमरे में जाने लगा तो सविता ने उससे पुछा.

सवी- निशु. छोड़ा ए सरिता को.

निश्छल- हाँ दी.

सवी- बड़ी देर लगा दी वापस आने में.

निश्छल- आप तो जानती है की वो कैसी है. बिना मतलब दिमाग chat-ti रहती है. उसने बहुत इर्रिटेट किया पूरे रस्ते मुझे. इसलिए मुझे आने में देर हो गयी.

सविता निस्चल की बात सुनकर मुस्कुराये बिना नहीं रह सकीय. अपनी दीदी को मुस्कुराते हुवे देखकर निश्छल खिसिया गया और अपने कमरे में चला गया और कपडे बदलकर अपने बिस्टेर पर धड़ाम से गिर पड़ा और सो गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
🙏👋👏😂😃😄

कर तो बहुत कुछ सकता था लेकिन वो ठहरी लड़की जात इसलिए निश्चल थप्पड़ खाने के बाद झल्लाकर रह जाता है।।

सही कहा आपने उसका एक नट ढीला है दिमाग का। उसे शायद लड़कों से नफरत हो गई है शादी वाले वाकये के बाद से।😂

😃😄😂🤣

अनुभव बोल रहा है महोदय।

अब ये तो आप बेहतर तरीके से जानते हैं कि शादी के बाद क्या से क्या हो सकता है।😃😄😂

जब दोनों की शादी होगी तब की बात अभी बहुत दूर है।।

ये तो आगे आने वाले भागों में पता चल जाएगा महोदय।

धन्यवाद आपका महोदय।

साथ बने रहिए।
 
अपडेट- 21

सरिता भी अपने कमरे माँ जाकर सो गयी. सुबह उठाकर हर काम से फिनिश होकर नाश्ता करके सरिता पस पहुंच गयी. वह पर सरिता ने देखा की मोहित और जावेद किसी बात को लेकर गहन विचार विमर्श कर रहे थे. जब सरिता उनके पास पहुंची तो वो दोनों चुप हो गए. सरिता को देखते hi दोनों ने एक साथ सरिता से कहा.

मोहित & जावेद- गुड मॉर्निंग मैडम.

सरिता- वैरी गुड मॉर्निंग बोथ ऑफ़ यू. आज तो मेरा दिन hi बन गया जो दोनों के सुबह सुबह एक साथ में दर्शन हो गए. क्या बात है दोनों बहुत गहरी मंत्रणा कर रहे थे. लगता है किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, इसलिए मुझे देखते hi दोनों चुप हो गए.

मोहित- नहीं मैडम ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो बस ऐसे hi जावेद के साथ बात चीत कर रहा था.

सरिता- अच्छा ठीक है. मैं अपने केबिन में जाती हूँ. तुम लोगो की चर्चा अगर समाप्त हो गयी हो तो तुम दोनों भी अपने काम पर ध्यान दो.

जावेद- जी मैडम.

इतना कहकर सरिता अपने केबिन में चली गयी. सरिता ने कौशल को अपने केबिन में बुलाकर उसे समझा दिया की जब मोहित अकेला हो तो उसे इन्फॉर्म करे. दोपहर को जावेद को किसी का फ़ोन आया तो वो पस से बहार चला गया. कौशल ने सरिता को इन्फॉर्म कर दिया की मोहित अकेला है तो सरिता ने मोहित को अपने केबिन में बुलाया. मोहित सरिता के केबिन में गया सरिता ने उसे बैठने का इशारा किया, मोहित एक कुर्सी पर बैठ गया और बोलै.

मोहित- जी मैडम आपने बुलाया मुझे.

सरिता- हाँ मोहित जी मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

मोहित- जी मैडम कहिये.

सरिता- देखिये मोहित जी. जावेद ने मुझे सबकुछ बता दिया है. तो अब मैं चाहती हूँ की आप भी मुझसे कोई बात न छुपाये और सच सच बताये.

मोहित- (हड़बड़ाते हुवे) कौन सी बात मैडम, मुझे तो कुछ पता hi नहीं है. आप क्या बात कर रही हैं.

सरिता- देखिये मोहित जी. मैं अपने केस के बारे में आपसे बात कर रही हूँ. मुझे ये तो पता चल चूका है की बूढी दादी को आपके सर ने कहा छुपकर रखा है. इसके बारे में जावेद ने कल मुझे सबकुछ बता दिया है. कल आप आये नहीं थे, इसलिए आपको इसके बारे में कुछ पता नहीं है.

मोहित- (चौंक कर) क्या… जावेद ने आपको सबकुछ बता दिया. विश्वास नहीं होता. लेकिन उसने तो मुझे इस बारे में कुछ नहीं बताया.

सरिता- क्योंकि मैंने hi उसे मन किया था की मैं तुमसे खुद इस बारे में बात करुँगी वो तुम्हे कुछ भी न बताये. अब अगर आपने मुझसे कुछ भी छिपाने की कोशिश की तो मैं दसप सर को बोल दूंगी की आप लोगो ने मुझे मेरे केस से सम्बंधित साडी इनफार्मेशन दे दी है.

मोहित- क्या. ये क्या कह रही हैं आप मैडम. आप मुझे बिच में क्यों ला रही है. आपको बताया तो उस जावेद ने है तो मेरा नाम क्यों सर को बताएंगी आप.

सरिता- तो इसीलिए मैं आपसे पूछ रही हूँ की आखिर मेरे केस सोल्वे कैसे हुवा. और वो बुद्धि दादी मिली कहाँ सर को. जावेद को तो मैं बचा लुंगी, क्योंकि उसका नाम मैं लुंगी hi नहीं सर के सामने. बचे आप. तो आप अपने बारे में खुद सोच लीजिये. की अगर सर को पता चला की आपने मुझे सब बताया है तो वो आपका क्या हल करेंगे.

मोहित- लेकिन ये तो गलत है मैडम. आप जावेद की सभी गलत का ठीकरा मेरे सर क्यों फोड़ना चाहती हैं.

सरिता- सही गलत का मुझे कुछ नहीं पता मोहित जी. अगर आपने मेरे साथ co-oprate किया तो मैं सर को कुछ नहीं बताउंगी. इस तरह ये बात हम तीनो के बिच में hi रहेगी. अब बताओ सच्चाई क्या है.

मोहित- ठीक है मैडम मैं बताता हूँ आपको. इन सब के पीछे बचा सिंह का हाथ था. उसी न सबकुछ किया था. आपने आदमियों से आपकी खिलाफ रिश्वत की फालसे कम्प्लेन दर्ज़ करवाई. उसमे जो भी पता और नाम था. उसमे कुछ पते hi गलत थे. और जो पते सही थे वह पर कम्प्लेन करने वाले नाम का कोई आदमी नहीं मिला.

सरिता- बच्चा सिंह. अच्छा हाँ जावेद ने मुझे बताया था की इन सबके पीछे बचा सिंह का हाथ है. उसी ने मुझे फंसने के लिए ये सब किया है, लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की उसने मुझे झूठे केस में क्यों फंसना चाहा.

मोहित- वो क्या है मैडम की आपकी वजह से उसके काम में बहुत नुकसान हो रहा था. उसने दो बार आपको do-do लाख रुपये देने की कोशिश की थी लेकिन आपने वो रुपये उसके मुंह पर मार दिए थे. इसलिए वो आपसे भिन्नया हुवा था और आपको अपने रस्ते से हटाना चाहता था. ताकि उसका कारोबार फिर से पहले जैसा चलने लगे.

वो यहाँ का बहुत बड़ा गुंडा है. अपने कारोबार के बिच में आने वाले किसी भी इंसान को अपने रस्ते से हटाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है. सभी उससे डरते हैं. इसलिए सर नहीं चाहते थे की आप इस सब पचड़ो में पदों. जैसा की मैंने अभी बताया की वो अपने काम में रुकावट ban-ne वाले को अपने रस्ते से हटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. खून खराबा उसके लिए नयी बात नहीं है. इसलिए सर नहीं चाहते थे की आपकी जान को कोई खतरा हो. इसलिए उन्होंने कहा है की वो खुद hi ये केस हैंडल कर्नेगे. और आपको बताने के लिए सख्ती से मन किया था.

मोहित ने ये साडी बाते एक hi साँस में जल्दी जल्दी बता दी. जिसे दुंकर सरिता कुछ देर सोचती रही फिर मोहित से बोली.

सरिता- अच्छा मोहित जी. तो क्या दादी भी बच्चा सिंह के पास hi है अभी भी.

मोहित- नहीं मैडम, उसे तो सर ने यहाँ से कुछ hi दूरी पर एक कमरे में छुपा कर रखा हुवा है. क्योंकि उन्हें बहुत सरे लोगो से बचा कर रखना है आगे की इन्वेस्टीगेशन के लिए.

सरिता- ( भोलेपन के साथ) किससे बचाकर रखना है अब दादी को. अब तो केस सोल्वे हो चूका है.

मोहित- दादी को बचा सिंह से बचाकर रखना है और आपसे भी.

सरिता (हैरानी से) क्या मुझसे. लेकिन मुझसे क्यों. बच्चा सिंह का तो समझ में आता है, की कही वो दादी को कोई नुकसान न पंहुचा दे, लेकिन मुझसे क्यों. मैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुचाउंगी.

मोहित- क्योकि सर नहीं चाहते की आपकी जान को खतरा हो, क्योंकि अगर आपको पता चल जाता की दादी कहा है तो अब तक आप फिर इन्वेस्टीगेशन करने बैठ जाती. जो सर नहीं चाहते थे.

सरिता- और सर न जहाँ पर दादी को छुपकर रखा हुआ है वो उसका एड्रेस क्या है.

मोहित- यहाँ से आगे जाने पर अगले चौक से लेफ्ट लेकर 1 K.M. आगे ………………….. इस एड्रेस पर सर ने दादी को रखा है.

सरिता- ओह्ह्ह. थैंक यू मोहित जी. आपने भी वही बताया जो मुझे जावेद ने बताया था.

मोहित- इसमें थैंक्स की क्या बात है मैडम. ये तो मेरे फ़र्ज़ है, लेकिन एक बात मुझे समझ में नहीं आयी की जब जावेद ने आपको सबकुछ बता दिया था तो आपने वही बात मुझसे क्यों jan-na चाही.

सरिता- मैं ये देखना चाहती थी की जावेद ने मुझको कितना सही और कितना गलत बताया है, लेकिन तुम्हारी बाते sun-ne के बाद तो ये कन्फर्म हो गया की जावेद ने पूरी बाटे सच hi बताई थी. अब तुम जाओ और अपना काम करो.

मोहित सरिता के केबिन से बहार आ गया. थोड़ी देर बाद जब जावेद पस वापस आया तो मोहित उसपर भड़क गया और बोलै.

मोहित- तुम्हारे पास दिमाग है या नहीं. क्या जरूरत थी तुझे मैडम को सब कुछ बताने की.

जावेद- (सोचते हुवे) अरे भाई मैंने क्या बताया मैडम को जो तू मेरे ऊपर भड़क रहा है.

मोहित- भड़कु नहीं तो और क्या करू. तूने केस के बारे में मैडम को क्यों बताया.

जावेद- (सोचते हुवे) अरे भाई किस केस की बात कर रहा है जिसके बारे में मैडम को मैंने बताया है.

मोहित- मैडम वाले रिश्वत के केस की बात कर रहा हूँ मैं.

जावेद- मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया.

मोहित- देखो जावेद अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं है. मुझे मैडम ने सबकुछः बता दिया है की तुमने उन्हें केस के बारे में सबकुछ बता दिया है.

जावेद- अरे मेरे भाई. मैंने मैडम को कुछ नहीं बताया. कल जब तू नहीं आया था तो मैडम ने मुझे अपने केबिन में बुलाया था केस के बारे में पूछने के लिए, लेकिन मैंने एक भी इनफार्मेशन मैडम को नहीं दी. क्योंकि सर ने मैडम को कुछ भी बताने के लिए मन किया है.

मोहित- ये क्या बात कर रहा है भाई तू. मैडम ने hi तो मुझसे कहा की तुमने उन्हें एक एक बात सच सच बता दी है.

जावेद- (चौकते हुवे) एक मिनट… कही तुमने तो मैडम को साडी बाटे नहीं बता दी है.

मोहित- (अफ़सोस के साथ) यार मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है. मैं इतना बड़ा बेवकूफ कैसे हो सकता हूँ. मुझे सोचना चाहिए था की मैडम को अगर तुमने सबकुछ बता दिया होता तो मैडम अब तक इन्वेस्टीगेट में लग गयी होती. ओह्ह्ह्हह सीटत यार. मैंने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी. मैडम ने मुझे अपनी बातो में फंसकर सारा सच उगलवा लिया. और मैं उगलता चला गया.

जावेद- (तेज़ आवाज़ में) क्याआ. तूने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी भैई. काम से काम एक बार मुझसे पूछह तो लिया होता.

मोहित- तू बहार गया था पस से. तभी मैडम ने मुझे बुलाया था.

जावेद- ओह्ह्ह्हह. अब तो गए काम से. मुझे अब समझ में आया. वैसे man-na पड़ेगा मैडम के दिमाग को. कैसे उन्होंने तुम्हे कन्विंस कर लिया अपनी बातो में और तुमसे झूठ बोलै की मैंने उन्हें सबकुछ सच बता दिया है. ताकि तुम उन्हें सबकुछ सच सच बता दो. इसलिए उन्होंने तुम्हे उस समय बुलाया जब मैं पस में नहीं था. ताकि तुम मुझसे पूछ भी न सको इसके बारे में.

जावेद की बार सुनकर मोहित अपना सर पकड़कर बैठ गया और बोलै.

मोहित- अरे यार ये क्या हो गया. मैं इतना बड़ा बेवकूफ कैसे हो सकता हूँ. मुझे एक बार मैडम से पूछना तो चाहिए था की जावेद ने आपको क्या बताया है. सीयतत्त्त याररर.

जावेद- सही कहा. अगर मैंने उन्हें सच में कुछ बताया होता तो वो तुमसे पूछती hi नहीं और अगर पूछती भी तो मेरे सामने तुमसे पूछती. मैडम तो बहुत चालक निकली.

मोहित- अब क्या करे यार. अगर सर को इस बात का पता चल गया की मैंने मैडम को सबकुछ बता दिया है तो वो मुझे छोड़ेंगे नहीं.

जावेद- अब जब ओखली में मुंडी दाल hi दी है तो मुसल से क्यों दर रहा है. अब कुछ भी नहीं हो सकता. देखते हैं आगे क्या होता है.

मोहित को अपनी बेवकूफी पर इतना गुस्सा आ रहा था की उंसने अपना हाँथ टेबल पर दे मारा.


**********

उसी वक्त शहर से दूर उसी खंडहर नुमा माकन में जहा पर बच्चा का अड्डा था. बच्चा, कलुवा के साथ बैठ कर बाते कर रहा था. उसके साथ रखा और संभु भी थे.

कलुवा- ी हम का सुन रहे हैं बच्चा भाई. ु लौंडिया फिर से नौकरी पर आ गयी है.

बच्चा- हाँ सही सुने हो तुम. उसने फिर से नौकरी ज्वाइन कर ली है.

कलुवा- लेकिन भाई. आपने तो ओके रिश्वत के झूठे केस में फंसा दिया था. और ु परधानवा ने ओके रेंज हांथो पकड़ लिया था. फिर इ कैसे होइ गवा.

बच्चा- पता नहीं ये कैसे हो गया कलुवा. लेकिन सुना है की उसके यारर उस दसप ने उसे बेगुनाह साबित कर दिया. लेकिन ये समझ में नहीं आ रहा है की उसने उस लौंडिया को बेगुनाह साबित किया तो कैसे किया.

रखा- (बिच में) मई बाप- वो दसप उस लौंडिया का यार नहीं है. ु दोनों जनि दुश्मन हैं. दोनों की बिलकुल भी नहीं बनती. तो वो दसप उस लौंडिया को क्यों बेगुनाह साबित करेगा.

बच्चा- अच्छा. तुझे कैसे पता की ु दसप लौंडिया का यार नहीं है.

रखा- माई बाप. पुलिस थाना में थोड़ी बहुत जान पहचान हमारी भी है. तो हमका इस बारे में थोड़ी बहुत जानकारी मिल गयी की उन दोनों में बिलकुल भी नहीं बनती.

बच्चा- अच्छा. फिर उसने क्यों बचाया उस लड़की को.

संभु- क्यों नहीं बचा सकता हैं वो दसप उस लड़की को मालिक. बाले दोनों में कितनी भी दुश्मनी हो लेकिन अपने दुसमन को शिकस्त खुद के हांथो से देने का मज़ा hi कुछ और होता है. शायद यही सोचकर उस दसप ने उसे बचा लिया होगा.

कलुवा- हाँ बे. तोहरे इ बात में बेम बा. जरूर यही बात होगी.

बच्चा- लेकिन उसने बेगुनाह साबित कैसे किया. कही ऐसा तो नहीं है की वो बुढ़िया उस दसप के हाँथ लग गयी हो और उसने सब सच उगल दिया हो. अगर उस बुढ़िया ने ऐसा किया होगा तो वो बहुत पछताएगी. संभु. पता कर की वो बुढ़िया कहा पर है वो जहा भी मिले उसे लेकर मेरे पास आ.

कलुवा- चलो इ सब तो होता रहेगा भाई, लेकिन अब इ बतावा की अब आगे क्या करना है. ु नयी इन्स्पेटराइन बहुत सख्त जान बा. अगर जल्दी ओकरे के अपने रस्ते से न हटवा गया तो अपना कारोबार तो बंद hi समझो.

बच्चा- ऐसा कुछो नहीं होगा कलुवा. मैं कोई न कोई रास्ता निकल लूंगा. मैंने तो सोचा था की खून खराबा से कोई मतलब नहीं निकलेगा. खून खराबा तो आखिरी उपाय है, इसलिए मैंने मामला इस तरह सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन लगता है की उस लौंडिया की ज़िन्दगी के दिन ख़तम हो चुके हैं. उसका बंदोबस्त करना hi पड़ेगा. लेकिन अभी हमको सर्कार और बॉस ने कुछ दिन शांत रहने के लिए कहा है, इसलिए अभी कुछ दिन कुछः होने से रहा और साथ में अभी रघु भी बहार है. अब जो भी करेगा रघु hi करेगा. बहुत दिन हो गया है भाई को किसी का मुर्दार किये हुवे. उस लड़की की मौत रघु भाई के hi हांथो होगी.

कलुवा- सही कहा भाई. रघु भाई बहुत बेरहमी से मरते हैं. बहुत मज़ा आएगा.

इतना कहकर कलुवा हंसने लगता है उसके साथ साथ बच्चा, रखा और शम्भू भी हंसने लगते हैं.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 22

अब जबकि सरिता को पता चल गया था की बुद्धि दादी को निश्छल ने कहा छुपा कर रखा है तो वो जल्द से जल्द दादी से मिलना चाहती थी. लेकिन वो सोच रही थी की वह तक पंहुचा कैसे जाये. अगर निश्छल ने दादी को वह रखा है तो वो घर गोपनीय होगा बच्चा और उसके गुर्गो की नजर में. और उस घर की सुरक्षा भी तगड़ी होगी. सरिता ये सब सोच रही थी की उसके दिमाग में आया की एक बार सविता से मिल लिया जाये तो हो सकता है की इसमें वो कुछ मदद कर पाए.

इधर मोहित अपनी बेवकूफी के कारन परेशां था. उसका मुंह कुछ लटका हुवा था. जान्हवी बहुत देर से मोहित को ऑब्सेर्वे कर रही थी. जब उससे न रहा गया तो उसने मोहित से पूछ लिया.

जान्हवी- मोहित सर. क्या हुवा आप बहुत परेशां लग रहे हैं. कोई समस्या है क्या सर.

मोहित- नहीं जान्हवी ऐसी तो कोई बात नहीं है.


विकास उनके पास hi बैठा था. मोहित की बात सुनकर वो मज़ा लेते हुए बोलै.

विकास- तुम्हे नहीं पता क्या. सर की शादी फिक्स हो गयी है. तो वो अपनी होने वाली दुल्हन के खयालो में खोये हुवे हैं. क्यों मोहित सही कहा न.

जान्हवी- अरे वाह. ये तो बहुत ख़ुशी की बात है और आप मुंह लटकाये हुवे हैं. आप तो बड़े कंजूस निकले सर. इतनी बड़ी ख़ुशी की बात है और आपने इसे सूखा सूखा जाने दिया. हम लोगो को मिठाई भी नहीं खिलाई आपने.

मोहित- (अपने मन में) यहाँ अभी सर मेरी चटनी बनाने वाले हैं और तुम सब को मिठाई की पड़ी हुई है. थोड़ी देर रुक जाओ. जब मेरी चटनी बन जाएगी तो मिठाई समझकर खा लेना.

विकास- नहीं जान्हवी. सर तो लगता है डायरेक्ट शादी में रसगुल्ला hi खिलाएंगे.

मोहित- (बात को बदलते हुवे) अच्छा ये बताओ दसप सर आएंगे आज या नहीं.

जान्हवी- ये क्या बात हुई सर. आप बात क्यों बदल रहे हैं. इतनी ख़ुशी की बात है और आप अभी भी काम के पीछे पड़े हुवे हैं.

जावेद- तुम सब चिंता मत करो. तुम लोगो को मिठाई भी मिलेगी और ट्रीट भी मिलेगी. लेकिन वो दसप सर के हांथो से मिलेंगी.

जावेद ने ये बात मोहित की और देखकर मुस्कुराते हुवे बोली थी. जिसे सुनकर जान्हवी ने कहा.

जान्हवी- दसप सर क्यों देंगे ट्रीट. शादी तो मोहित सर की फिक्स हुई है और ट्रीट दसप सर देंगे. ये बात कुछ समझ में नहीं आयी.

जावेद- अब ये बात तो तुम मोहित से hi पूछ.

मोहित- (धीरे से) अभी घर बसा नहीं मेरा और बाराती पहले से hi आ गए हैं. (जावेद के कण में) क्यों मुझे हार्ट अटैक दिलवाना चाहता है भाई. डरा मत मुझे नहीं तो मेरा ऊपर का टिकट काट जायेगा.

जावेद- (तेज़ आवाज़ में) तुम्हारा hi नहीं. तुम्हारे बाद मेरा भी नंबर लगने वाला है.

विकास- किस नंबर की बात कर रहे हो तुम. तुम्हारा कौन सा नंबर लगने वाला है.

जावेद- मैं प्रमोशन की बात कर रहा हूँ. मोहित के बाद मेरा नंबर लगने वाला है प्रमोशन में.

जावेद इतना बोलकर मुस्कुराते हुवे वह से चला गया. उसके जाने के बाद विकास ने मोहित से कहा.

विकास- ये क्या बोल कर गया जावेद. अगर तुम दोनों का प्रमोशन होने वाला है तो ये बात मुझे क्यों पता नहीं है. आखिर चक्कर क्या है ये मोहित.

मोहित- मुझे भी इस बारे में कुछ नहीं पता. मैं अभी जावेद से पूछकर आता हूँ.

इतना कहकर मोहित भी वह से चला गया. विकास और जान्हवी दोनों कुछ सोचते हुवे मोहित को जाता देखते रहे. मोहित के जाने के बाद विकाश ने जान्हवी से कहा.

विकास- जान्हवी. मुझे तो लग रहा है की दोनों कुछ छिपा रहे हैं हमसे. दोनों का बर्ताव कुछ अजीब सा हो गया है. तुम्हे क्या लगता है.

जान्हवी- हाँ सर आप बिलकुल सही कह रहे हैं. मुझे भी दोनों का बिहेवियर कुछ ठीक नहीं लग रहा है. रोज से थोड़ा हटकर दोनों बर्ताव कर रहे हैं.

इसके बाद दोनों अपने अपने काम में लग गए. उधर केबिन में सरिता बैठी हुई कुछ सोचते हुवे सविता को फ़ोन लगा दिया.

सरिता- Hello दी. कैसी हैं आप.

सवी- मैं तो बिलकुल ठिक्क हूँ. तुम बताओ तुम कैसी हो.

सरिता- मैं भी बहुत बढ़िया हूँ दी. बस घर की याद आ रही है.

सवी- तो एक काम करो. मेरे पास आ जाओ.

सरिता- नहीं दी. ऐसे रोज रोज आपके घर आना अच्छा नहीं लगता. लोग देखेंगे तो क्या सोचेंगे.

सवी- लोगो की छोडो. मुझे दी भी बोलती हो और इतनी फॉर्मलिटीज भी कर रही हो. मुझे तुम्हारी कोई बात नहीं sun-ni. तुम आ रही हो मतलब आ रही हो.

सरिता- ऐसी बात नहीं है दी. मैं तो आना चाहती हूँ, लेकिन वो हिट…… मेरा मतलब है की सर घर पर रहेंगे तो मैं कैसे आ पाऊँगी.

सवी- अच्छा ये बात है. तो आ जाओ. निशु अभी घर पर नहीं है. वो देर रात तक लौटेगा.

सरिता- ठीक है दी मैं शाम को 4 बजे तक आती हूँ.

सवी- ठीक है सरिता मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारा. अगर तुम्हारा कुछ खाने का मन हो तो मुझे बता दो. मैं बनवा डोंगी .

सरिता- नहीं दी. अगर कुछ खाने का मन हुवा तो मैं खुद बना लुंगी आपके साथ मिलकर.

सवी- ठीक है. मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.

सरिता- ठीक है दी. मैं शाम 4 बजे तक पहुंच रही हूँ आपके पास.

इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया. और सोचने लगी.

सरिता (मन में) बस कुछ देर और उसके बाद मैं दादी को खोज लुंगी और सबकुछ पता लगा लुंगी की उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया. लेकिन मुझे ये काम हिटलर की नजरो से बचकर करना होगा. अगर उसे भनक भी लगी इसके बारे में तो वो दादी को वह से कही और सिफत कर देगा. दी से भी मुझे इस घर में बारे में घुमा फिर कर बात करनी होगी और उनसे अधिक जानकारी इकठी करनी होगी तभी मैं कुछ कर पाऊँगी.

यही सब सोचते हुवे सरिता अपना काम फिनिश करती है और 4.30 बजे सविता के घर के लिए निकल जाती है. कुछ hi देर में वो सविता के पास पहुंच जाती है. सरिता के पहुंचने के बाद सविता ने कहा.

सवी- तुमने तो कहा था की 4 बजे तक आओगी, लेकिन समय देखो 4.45 हो गए हैं. लोग सही कहते हैं पुलिस कभी समय से कही नहीं पहुँचती.

सरिता- (मुस्कुराते हुवे) क्या दी. अब आप भी मेरी तंग खींच रही हैं. पस में काम ज्यादा था तो उसे फिनिश करने में टाइम लग गया.

सवी- ठीक है तुम बैठो मैं चाय लेकर आती हूँ.

सरिता- नहीं दी मैं भी आपके साथ किचन में चलती हूँ. चाय बनाते हुवे बाटे भी होती रहेंगी.

सरिता भी सविता के साथ किचन में चली गयी और चाय बनाते हुवे दोनों बाटे करने लगी. सरिता को भी सविता के रूप में दी और एक सहेली मिल गयी थी. जिससे वो अपने मन की बात कर सकती थी. सविता से बात करते हुवे सरिता ने पुछा.

सरिता- अच्छा दी. आप से कुछ पूछना था मुझे.

सवी- हाँ तो इसमें इतना फॉर्मलिटीज की क्या जरूरत है. तुम कुछ भी पूछ सकती हो.

सरिता- इस घर के आलावा सर कही और रहते हैं क्या. मेरा मतलब है की जहाँ सर अपने ऑफिस का इम्पोर्टेन्ट काम करते हो.

सवी- (सरिता को छेड़ते हुवे) क्या बात है सरिता. बड़े इंटरेस्ट ले रही हो निशु में. वैसे तो बड़ा कहती हो की उसके रहते घर कैसे आउंगी. अब आते hi उसके बारे में जानकारी ले रही हो मुझसे.

सरिता- क्या दी. आप भी न. कुछ भी बोलती रहती हैं. ऐसा बिलकुल भी नहीं है. मेरा ये कहने का मतलब है की वो घर में तो रहते नहीं हैं ज्यादा और ऑफिस का काम भी घर पर करना होता है तो फिर वो काम करते कहा हैं.

सवी- यहाँ से कुछ दूरी पर एक दूसरा घर है. जहाँ पर निशु ऑफिस के इम्पोर्टेन्ट काम करता है.

सरिता- आप कभी वह पर गयी हैं दी.

सवी- न बाबा. अगर उससे वह जाने की बात भी कर दो तो वो नाराज़ हो जाता है. इसलिए मैं कभी भी वह नहीं गयी हूँ.

सरिता- नाराज़ क्यों हो जाते हैं वो. आखिर वह ऐसा क्या है. जो वो आपसे छुपाना चाहता हैं.

सवी- अरे सरिता. ऐसा कुछ भी नहीं है. वह पर उसकी कुछ कॉन्फिडेंटिअल फाइल्स वगैरह राखी हुई है. इसलिए वो वह जाने से मन करता है.

इसके बाद सरिता इस विषय पर कुछ नहीं बोली. थोड़ी देर ऐसे hi दोनों इधर उधर की बात करते हुवे शाम के 7 बज गए. सरिता ने सविता से कहा.

सरिता- ठीक है दी अब मैं चलती हूँ. नहीं तो अभी कोई आ जायेगा तो यहाँ शीट युद्ध छिड़ जायेगा.

सरिता के बात का मतलब समझ कर सविता मुस्कुराते हुवे बोली.

सवी- ठीक है सरिता अब तुम जाओ, लेकिन जब भी तुम्हारा मन करे तुम आ जाया करना मुझसे मिलने. तुम्हे निशु से डरने की कोई जरूरत नहीं है.

सरिता- ठीक है दी. आप अपना ख्याल रखियेगा, मेरा जब मन करेगा मैं आती जाती रहूंगी.

सवी- तुम भी अपना ख्याल रखना.

इसके बाद सरिता और सविता बहार तक आयी. सरिता ने सविता को bye बोलै और अपने घर की तरफ चल पड़ी. कुछ दूर जाने के बाद सरिता ने पीछे मुद कर देखा तो सविता घर के अंदर जा चुकी थी. ये देखकर सरिता निश्छल के दुसरे घर जाने वाले रस्ते पर मुद गयी. थोड़ी देर में वो निश्छल के घर के सामने थी. ये घर दो मंजिला था. जैसा मोहित ने उसे बताया था. सौभाग्य से बहार का गेट खुला हुवा था और बहार एक गार्ड बैठा हुवा था. सरिता ने अपने मुंह पर रुमाल बंधा और दनदनाती हुई गेट के अंदर घुसने लगी. ये देखकर गार्ड चिल्लाया.

गार्ड- ये लड़की. यहाँ कहा घुसी चली जा रही है. कौन हो तुम.

सरिता- मैं बहुत बड़ी मुसीबत में हूँ. मुझे निश्छल सर से मिलना है.

गार्ड- कौन से निश्छल की बात कर रही हो. मैं किसी निश्छल को नहीं जनता.

सरिता- लेकिन मैंने सुना है की ये घर उन्ही का है.

गार्ड- किसने कहा तुमसे की ये निश्छल का घर है. और ये निश्छल है कौन जिसे बारे में तुम बात कर रही हो. जाओ यहाँ से. पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते हैं दिमाग खाने.

सरिता. मैं दसप निश्छल सर की बात कर रही हूँ. ये उन्हीं का तो घर है.

गार्ड- तो ऐसा बोलो न. उनका घर ये नहीं है यहाँ से 1 कम. उस तरफ जाओ फिर किसी से भी पूछ लेना वो तुम्हे उनका घर बता देगा. अब तुम जाओ यहाँ से.


सरिता को समझ में आ गया की गार्ड उसे अंदर जाने नहीं देगा. तो वो गेट से बहार आ गयी और घर के पीछे की तरफ चली गयी. जैसा की मोहित ने उसे बताया था उसके हिसाब से घर यही है और निश्छल ने दादी को दुसरे मेल पर रखा हुवा है, लेकिन दुसरे मेल पर दो कमरे बने हुवे थे. अब निश्छल ने दादी को किस कमरे में रखा है.

सरिता घर के पीछे वाली गली में कड़ी घर का मुआयना कर रही थी. फिर सरिता ने इधर उधर देखा और जब उसे कोई दिखाई नहीं पड़ा तो वह बॉउंड्री कूदकर अंदर आ गयी. जिस तरफ से वो अंदर कुड़ी थी वह पर हल्का अँधेरा था, क्योंकि उस तरफ की स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही थी.

बॉउंड्री से अंदर आने के बाद सरिता पीछे से आगे की तरफ आयी और झांक कर देखा तो गेट बंद था और गार्ड बहार बैठा हुवा था. सरिता आहिस्ता आहिस्ता आकर पोर्च के सामने कड़ी हो गयी. ऊपर जाने की सीढिया घर के बहार hi थी, लेकिन उसमे लॉक लगा हुवा था. तब सरिता ने पोर्च की तरफ से ऊपर जाने का निर्णय लिया और थोड़ी बहुत मसक्कत के बाद वो पोर्च के ऊपर चढ़ गयी. और दुसरे मेल पर पहुंच gayi.dono कमरे में तीन बड़े बड़े टेल लगे हुवे थे. ये देखकर सरिता मन hi मन सोचने लगी.

सरिता- अरे यार. इतने बड़े बड़े टेल वो भी तीन तीन टेल. इतनी सिक्योरिटी कौन रखता है भला. ऐसे लगता है जैसे अंदर मोहर मोती छुपकर रखा हुआ है. फिर भी देखना तो पड़ेगा hi. लेकिन मुझे तो ये भी पता नहीं है की दादी दोनों में से किस कमरे में हैं. कैसे पता लगाऊं मैं.

तभी सरिता के दिमाग में आईडिया आता है वो निचे की तरफ झुक गयी और के होल से अंदर देखने लगी. पहले कमरे में अंदर देखने के बाद उसे कुछ खास नजर नहीं आया. सरिता ने के होल से दुसरे कमरे में झाँका तो उसे बीएड का कोना दिखाई दिया. सरिता ने मन hi मन सोचा की हो न हो दादी इसी कमरे में होंगी. अब सरिता कमरे के अंदर कैसे जाया जाये ये सोचने लगी.

उसने घूम घूम कर चारो तरफ देखा तो उसे कमरे की खिसकी खुली दिखाई पड़ी जो एल्युमीनियम के शटर वाली थी जिसमे शीशे लगे हुवे थे. वो शटर खुल्ला हुवा था. शायद उसे जानबूझकर खोला गया था. ताकि जो भी कमरे में है उसे घुटन माँ महसूस हो. सरिता ऐसा सोच रही थी. उसने खिड़की के निचे देखा तो निचे बाउंड्री की घेरे फेंसिंग वायर (जो ब्लेड की तरह होता है जिससे अक्सर विप एरिया के बॉउंड्री की घेरे की जाती है.) से की गयी थी.

खिड़की तक पहुंचना बहुत hi खतरनाक काम था. बस एक गलती और निचे बॉउंड्री की तरफ फेंसिंग वायर पर गिरना. जिसमे ज्यादा जख्मी होने और जान जाने का भी दर था. उसकी वह जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी. लेकिन उसने खुद को हौसला देते हुवे कहा.

सरिता- ये तुम क्या कर रही हो सरिता. तुम इतनी डरपोक कैसे हो सकती हो. ट्रेनिंग में तो तुम्हे इससे भी खतरनाक सेतुएशन को फेस करने के लिए दिया गया था और तुम्हे उसे फेस कर लिया था. फिर तो ये उसके आगे कुछ भी नहीं है. अगर दादी को ढूंढकर अपने सवालो का जवाब jan-na है तो तुम्हे ये रिष्क तो उठाना hi पड़ेगा. यू कैन दो आईटी सरिता. यू कैन दो आईटी.

यही सब सोचते हुवे सरिता ने अपना दिल मजबूत किया वो खिड़की की तरफ जाने का सोचने लगी. खिड़की के ठीक निचे कुछ पहले से hi आयरन की 6 इंच मोती एक पाइप निकली हुई थी जो 3 फिट आगे आकर निचे की तरफ चली गयी थी. सरिता ने खिड़की तक इसी पाइप के सहारे जाने की सोची. सरिता ने हिम्मत दिखते हुवे पाइप पर अपने पांव रख दिए और धीरे धीरे सरकते हुवे दिवार के सहारे खिड़की तक आने लगी.

खुछ देर की मसक्कत के बाद वो पाइप के आखिर साइड पर कड़ी थी. फिर उसने किसी तरह जम्प लगाकर खिड़की को पकड़ लिया और कमरे में अंदर दाखिल हो गयी. कमरे में पहुंच कर उसने देखा की बीएड पर दादी लेती हुई हैं. उन्हें देखते hi सरिता के चेहरे पर ख़ुशी आ गयी.

सरिता ने देखा की बीएड के पास एक स्टूल रखा हुआ है जिसपर खाने की प्लेट राखी हुई थी. जो जूठी थी. शायद निश्छल ने सुबह उनके लिए खाना रख कर चला गया था. खिड़की के बगल में एक रैक था जिसपर कुछ फाइल्स राखी हुई थी. सरिता जैसे hi आगे बढ़ी उसका पेअर रैक से टकरा गया जिसके कारन दो फाइल्स जमीन पर गिर पड़ी. जिसकी आवाज़ सुनकर दादी बिस्टेर से उठकर बैठ गयी और बोली.

दादी- पुलिस बाबू तुम आ गए.

सरिता की पीठ दादी की तरफ थी, क्योंकि वो झुककर फाइल्स उठाकर रैक में वापस रख रही थी. फाइल्स रखने के बाद जब सरिता दीदी की तरर्फ घूमी तो सरिता को देखकर दादी की दर के मरे हवा ख़राब हो गयी. वो सरिता को देखकर कंपनी लगी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

उसने बुढ़िया को ढूंढ लिया है तो उसे बुढ़िया ने ऐसा क्यों किया उसका कारण भी पता चल जाएगा।

अब सरिता के इस कृत्य से क्या नया तूफान आने वाला है है तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

मुसीबत सरिता का पीछा कभी नहीं छोड़ेंगी। लेकिन उसकी हर मुसीबत की काट है उसके पास निश्चल सिंह राठौड़। जो थप्पड़ भी खाएगा और उसे हर मुसीबत से बाहर भी निकालेगा।😂

साथ बनी रहिए।।
 
अपडेट- 23

सरिता को अपने सामने देख दादी दर गयी और डरते हुवे सरिता से बोली.

दादी- बेटी तुमममम… वोऊ मुझे कुछ मैट करना. मुझी माफ़ कर दू. मैंने कुछ नहीं किया. मेरी कुछ मजबूरी थी जिसके चलते मुझसे वो गलती हो गयी. मुझे कुछ मत करना.

दादी की बात से सरिता ने अंदाज़ा लगा लिया की दादी उसे देखकर दर रही हैं. उन्हें लग रहा है की मैं उनकी उस दिन की हरकत से गुस्सा हूँ और उनसे बदला लेने आयी हूँ. सरिता ने दादी से कहा.

सरिता- अरे दादी आप दर क्यों रही हैं. मैं आपको नुकसान पहुंचने या आपसे बदला लेने नहीं आयी हूँ. इसलिए आप मुझसे मत घबराइए.. मैं कुछ नहीं करुँगी आपको. मैं खुद आपसे मिलकर ये पता करना चाहती थी की आखिर आपने ऐसा क्यों किया. आखिर आपकी ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके कारन आपने मुझे झूठे केस में फंसाया. मैं आपसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं हूँ. लेकिन आपको मुज्झे सबकुछ सच सच बताना पड़ेगा.

दादी- क्या तुम सच में मुझसे बदला लेने नहीं आयी हो. तुम सच बोल रही हो न की तुम मुझे नुकसान नहीं पहुँचाओगी.

सरिता- नहीं दादी. मैं सच बोल रही हूँ. मैं आपको बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचाउंगी. अगर मुझे आपसे बदला लेना होता या नुकसान पहुंचना होता तो मैं आपसे इस समय बात नहीं कर रही होती. अपना काम करके चली जाती मैं. मैं बस इतना चाहती हूँ की आप मुझे पूरी बात बताइये.

दादी- क्या तुम पुलिस बाबू के साथ काम करती हो बिटिया.

सरिता दादी की बात सुनकर सोचने लगी की ये तो अच्छा हुवा की उस हिटलर के साथ रोज रोज मिलना नहीं होता. हफ्ते में एक या दो बार hi काम करना पड़ता है उसके साथ. अगर मुझे उसके साथ रोज काम करना पड़े तो या तो मैं पागल हो जाउंगी या तो मुझे नौकरी छोड़नी पड़ेगी. दादी की बात सुनकर सरिता बोली.

सरिता- हाँ दादी मैं उस हिट… उन्ही के साथ काम करती हूँ.

दादी- पुलिस बाबू बहुत hi अचे आदमी हैं. मेरा कितना ध्यान रखते हैं.

सयरता- (मन में) हाँ मुझे पता है की हिटलर कितना अच्छा आदमी है. मुझसे बेहतर उसे कौन जान सकता है. एक नंबर का खड़ूस आदमी है वो. (फिर दादी से) हाँ दादी वो बहुत अच्छे हैं, लेकिन एक बात मुझे समझ में नहीं आती की आपको उन्होंने यहाँ पर कैद करके क्यों रखा हुवा है.

दादी- वो बच्चा सिंह है न. वो गुंडा. मुझे उसी से बचने के लिए पुलिस बाबू ने मुझे यहाँ पर कैद करके रखा हुवा है. मेरी नातिन भी उसके पास है.

सरिता- (चौक कर) क्या….. किसके पास है. क्या हुवा उसे. कब हुवा ये.

दादी- ये उस समय की बात है जब मैं तुमसे मिली थी. उस दिन बच्चा सिंह के आदमी मेरे घर आये और मुझसे कहा की मैं वो पैसे और गहने की पोटली आपको दे दूँ. जब मैंने उनसे पुछा की किसलिए तो उन्होंने बताया की वो तुम्हे झूठे केस में फंसना चाहते हैं. जब मैंने मन कर दिया तो वो लोग मेरे साथ जोर जबरदस्ती करने लगे.

मेरी नातिन जो बहार खेलने गयी थी. उसी समय घर पर आ गयी. तो उन्होंने मेरी नातिन को पकड़ लिया और मुझे धमकी दी की अगर मैंने उनका काम नहीं किया तो वो मेरी नातिन को या तो मार डालेंगे ये कोठे पर लेजाकर बेंच देंगे. जिसे सुनकर मैं बहुत दर गयी थी. मैंने उनके बहुत हाँथ पांव जोड़े. रहम की भीख मांगी. लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी. इसलिए मजबूरन मुझे ये काम करना पड़ा.

जब वो ऑफिसर्स लोग आये थे आपको पकड़ने तब भी उनका एक आदमी वही छुपा था और अपने साथियो को जिन्होंने मेरी नातिन को पकड़कर रखा हुवा था. उन्हें पल पल की खबर दे रहा था. जब वो ऑफिसर्स तुमसे बात करने लगे तो मैं मौका देखकर वह से भाग आयी और सीधे अपने घर पहुंची, क्योंकि अगर मैं वह रुक जाती तो मैं उन ऑफिसर्स के पूछने पर झूठ नहीं बोल पति. और अगर मैं झूठ नहीं बोलती तो बच्चा सिंह मेरी नातिन के साथ बहुत बुरा करता. इसीलिए मैं वह से भाग कर अपने घर आई, लेकिन तब तक…..

इतना कहकर दादी रोने लगी. सरिता ने उन्हें अपने गले लगा लिया और चुप करवाते हुवे पुछा.

सरिता- पर क्या दादी. आपकी नातिन ठीक तो है न. उसे खुछ हुवा तो नहीं न.

दादी- पता नहीं बिटिया. जब मैं वह पहुंची तो बच्चा सिंह के आदमी मेरी नातिन को लेकर चले गए थे. अब कैसी है. किस हॉल में है. उन्होंने मेरी नातिन के साथ क्या किया है. मुझे कुछ नहीं पता. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की मैं मैडम मांगने किसके पास जॉन. अपनी नातिन को कहा ढूँढू. बचा सिंह की आदमी मेरी नातिन को कहा लेकर गए हैं. मैं ये बात किसी से कह भी नहीं सकती थी. क्योंकि कोई भी मेरी मैडम नहीं करता.

सरिता- (गुस्से से) उस बचा की इतनी हिम्मत. एक छोटी बच्ची की ाँद लेकर अपने आपको गुंडा कहता है. आप बिलकुल भी चिंता मत करिये दादी. मैं उस बच्चा सिंह को छोडूंगी नहीं. उसे मैं अच्छा सबक सिखाऊंगी. मैं आपकी नातिन को वापस लेकर आउंगी. आप मुझपर भरोषा रखिये. मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है. लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आयी की आप सर को कहा से मिली.

दादी- वो क्या है न जिस दिन से मेरी नातिन को बच्चा सिंह के आदमी लेकर गए थे तब से मैं बहुत परेशां थी. मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मैं किसके पास जॉन. किससे मदद मांगू. पुलिस के पास भी नहीं जा सकती थी. क्योंकि अगर बच्चा सिंह को पता चल जाता की मैं पुलिस के पास गयी हुई हूँ तो वो मेरी नातिन के साथ पता नहीं क्या करता. मुझे उसका ठिकाना भी नहीं पता था की मैं उसके पास जाकर अपनी नातिन के लिए भीख मांगती.

एक दिन सोचने के बाद मैंने फिर खुद से hi अपनी नातिन को ढूंढने का निर्णय लिया. मैंने उसको बहुत ढूँढा लेकिन वो मिली नहीं. एक दिन भटकते भटकते मैं पुलिस बाबू से टकरा गयी. जो शायद मुझे hi ढूंढ रहे थे. उन्होंने जब मुझसे आपको झूठे रिश्वत के केस में फंसने का कारन पुछा तो पहले मैं बहुत दर गयी थी, लेकिन जब उन्होंने कहा की वो मुझे कुछ नहीं करेंगे तो मैंने उन्हें पूरा सच बता दिया. फिर वो मुझे यहाँ लेकर आ गए. लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है की वो मुझे यहाँ लेकर क्यों आये हैं.

सरिता- (मन में) क्योंकि हिटलर चाहता hi नहीं था की मैं आप तक पहुँचू. (दादी से) वो इसलिए आपको यहाँ लाये हैं की मेरे बेगुनाह साबित हो जाने के बाद आपकी जान को भी खतरा बढ़ गया है. बच्चा सिंह के आदमी आपको भी खोज रहे होंगे. लेकिन उन लोगो को पता नहीं है की आपको सर ने अपने घर में छिपा कर रखा हुवा है, और आप सबसे ज्यादा सुरक्षित अभी यही पर हैं. इसलिए आप यहाँ से अभी कही मत जाइएगा. अच्छा दादी ये बताइये की आपको खाना पीना सही से मिलता है की नहीं.

दादी- पुलिस बाबू बहुत अचे हैं बेटी. वो मेरा पूरा ध्यान रख रहे हैं. वो रोज सुबह शाम यहाँ पर आते हैं मेरा हल चल लेने और साथ में खाना भी लेट हैं. मुझे यहाँ पर कोई दिक्कत नहीं है. बस मुझे बहार नहीं जाने देते. इसके आलावा सब कुछ तक है.

सरिता- बहुत hi जल्द आप बहार भी जाएँगी दादी. मैं बहुत जल्द आपकी नातिन को खोज निकलूंगी. अच्छा दादी. आज जब वो आपसे मिलने के लिए आये तो उनसे ये मत बताइयेगा की मैं आपसे मिलने के लिए आयी थी.

दादी- (हैरान होते हुवे) वो किसलिए बेटी.

सरिता- क्योंकि उन्होंने सभी को यहाँ आने के लिए मन किया है. जो भी आपसे मिलने आएगा वो उनसे पूछकर आएगा, लेकिन मैं उनसे बिना पूछे hi आपसे मिलने के लिए आ गयी. अगर आपने उनसे बता दिया की मैं आपसे मिलने आयी थी तो वो मुझसे नाराज़ हो जायेगे. (अपने मन में) नाराज़ हो जाये मेरी बाला से. (दादी से) और अगर वो नाराज़ हो गए तो मुझको भी सजा दे सकते हैं. क्योंकि वो मेरे साहब हैं. और अगर उन्होंने मुझे सजा दे दी तो मैं आपकी नातिन को कैसे ढूंढूंगी फिर.

दादी- ठीक है बिटिया मैं पुलिस बाबू को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो बहुत गलत किया. लेकिन मैं क्या करती मैं मजबूर थी. इसलिए हो सके तो मुझे माफ़ कर देना बेटी.

इतना कहकर सरिता के सामने दादी ने अपने हाँथ जोड़ लिए. सरिता ने तुरंत उनका हाँथ पकड़कर उनसे कहा.

सरिता- ये आप क्या कर रही हैं दादी. आप मुझसे बड़ी हैं. आपका मेरे सामने यूँ हाँथ जोड़ना मुझे अचे नहीं लगता. आपने मुझे बेटी कहा है न. तो जैसे आप गुड़िया के लिए उसकी दादी हो उसी तरह मेरे लिए भी आप दादी हो. अच्छा दादी मैं चलती हूँ नहीं तो अगर वो हिटलर आ गया तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी. आप उनसे मेरे बारे में कुछ मत कहना. मैं बहुत जल्दी hi गुड़िया के साथ आपके पास वापस आउंगी.

दादी- ठीक है बिटिया. अपना ख्याल रखना.

दादी ने सरिता के सर पर हाँथ फिरते हुवे ये बात कही. उनकी बात सुनकर सरिता मुस्कुराते हुवे खिड़की की तरफ जैसे hi पहला कदम बढ़ाया. बहार से कुछ खत पैट की आवाज़ सुनाई पड़ी. ऐसा लग रहा था की जैसे कोई टाला खोल रहा है दरवाज़े का. बहार हुई खटपट सुनकर सरिता समझ गयी की हिटलर आ गया है. अब सरिता परेशां हो गयी. क्योंकि अगर निश्छल ने उसे यहाँ देख लिया तो बवाल मचाना तय है. जो वो फ़िलहाल इस वक्त नहीं चाहती थी. सरिता अपने मन में सोचने लगी.

सरिता- हे भगवन ये हिटलर तो आ गया है. अब मैं क्या करूँ. इतनी जल्दी जल्दी में मैं खिड़की से बहार जा hi नहीं सकती. अब क्या होगा. अब मैं कैसे बच्चू इस हिटलर से. कुछ भी हो मुझे इसकी नजरो के सामने नहीं आना है.

हैरान परेशां सरिता चारो तरफ छुपने की जगह देख रही थी. लेकिन उसे छुपने जैसी जगह नहीं मिल रही थी. तभी उसका ध्यान बिस्टेर की तरफ गया . फिर उसने दादी को कुछ न बताने का इशारा किया और बिस्टेर के निचे घुस गयी. ठीक उसी समय निश्छल टाला खोलकर अंदर आ गया और दादी के पास आकर खड़ा हो गया. इस दौरान सरिता के एक हाँथ पर निस्चल का पेअर पद चूका था. जिसके कारन उसे दर्द हुवा और उसने दुसरे हाँथ से अपना मुंह बंद कर लिया. ताकि उसकी आवाज़ बहार न निकले.

दरअसल हुवा ये की हड़बड़ाहट में सरिता पीछे की तरफ से बिस्टेर के निचे घुस रही थी. तो उसका हाँथ बिस्टेर के थोड़ा आगे निकला हुवा था. और निश्छल भी चलता हुवा सिद्ध दादी के पास आकर रुक गया. जिसके कारन उसके एक पेअर ने निचे सरिता का हाँथ आ गया था.

निश्छल दादी के पास खड़ा होकर उनका हल चल लेने में व्यस्त हो गया. इधर निचे सरिता का दर्द से बुरा हॉल हो रहा था. वो अपने दुसरे हाँथ से अपने मुंह को कसकर बंद किये हुवे पेट के बल लेती हुई थी. वो इतनी मजबूर थी की अपना हाँथ खींच भी नहीं सकती थी. क्योंकि हाँथ के खींचने से निश्छल को पता चल सकता था की सरिता वह पर है. सरिता दर्द से बेहाल मन hi मन सोच रही थी.

सरिता- इस खड़ूस को भी अभी hi आना था. हे भगवन. किस जनम का बदला ले रहे हो मुझसे. ये तो अँधा हो गया है. इसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है की इसने अपना पेअर कहा पर रखा हुवा है. सिद्ध आकर मेरे हाँथ पर खड़ा हो गया है. ये आदमी का पेअर है या हांथी का पेअर है. कितना भरी है ये.

ओह्ह्ह्हह्हह मम्मी. इसने अपने पेअर को ऐसे जैम कर लिया है जैसे अंगद ने अपना पेअर जैम कर दिया था. जल्दी से मेरे हाँथ से हैट जा हिटलर, खड़ूस आदमी. मेरी जान निकल रही है. हे भगवन मैं क्या करूँ. मुझसे ये दर्द बर्दास्त नहीं हो रहा है. अगर ये थोड़ी देर नहीं हटा तो मैं चिल्ला दूंगी. फिर जो होगा देखा जायेगा.

शायद भगवन ने सरिता की पुकार सुन ली थी और उन्हें सरिता पर दया आ गयी थी. इसलिए कुछ hi पल में निस्चल वह से चलता हुवा दूसरी तरफ राखी मेज के पास खाना रखने के लिए चला गया. सरिता ने अपना हाँथ खींच लिया और अपने दुसरे हाँथ से सहलाती हुई फूंक मरने लगी. उसकी जान में जान लौट आयी थी.

खाना रखकर निश्छल दादी की तरफ पलटा. तभी उसकी नज़र खुली खिड़की पर पड़ी. खिड़की के बाद उसकी नजर अपने रैक पर पड़ी तो उसे वह की फाइल कुछ बिगड़ी हुई नजर आयी. ये देखकर निस्चल ने दादी से पुछा.

निस्चल- अम्मा. मेरे जाने के बाद इस कमरे में कोई आया था क्या.

निश्छल की बात सुनकर सरिता की हालत ख़राब हो गयी. उसे लगा की शायद वो अब पकड़ी जाएगी. वो मन hi मन प्रार्थना करने लगी की दागी कुछ कह न दे मेरे यहाँ आने के बारे में. तभी उसे दादी की आवाज़ सुनाई दी. जिसे सुनकर उसने सुखों की साँस ली. लेकिन कही न कही उसे दर भी लग रहा था की कही दादी के मुझ से हड़बड़ी में उसके यहाँ आने की बात निकल न जाये.

दादी- नहीं पुलिस बाबू. यहाँ तो कोई नहीं आया था आपके जाने के बाद.

निश्छल- फिर ये फाइल कैसे इधर उधर हो गयी है. क्योंकि मैंने जैसे रखा था फाइल. उस हिसाब से ये नहीं राखी है.

दादी- वो क्या है बीटा की दोपहर में तेज़ हवा चली थी. और ये खिड़की भी खुली हुई है तो तेज़ हवा के कारन दो फाइल जमीन में गिर गयी थी, जिसे मैंने उठाकर वह पर रख दी थी.

निश्छल- ठीक है अम्मा आप खाना खा लीजिये. तब तक मैं फाइल को सही से रख देता हूँ.

निस्चल ने इतना कहकर खाना लेकर स्टूल पर रख दिया. दीदी खाना खाने लगी तो निश्छल अपनी फाइल को ठीक करने लगा. फिर वो कमरे में इधर उधर टहलने लगा. थोड़ी देर में दादी ने खाना खा लिया और निस्चल से पुछा.

दादी- पुलिस बाबू. अभी मुझे यहाँ पर कितना दिन रुकना पड़ेगा. मुझे अपने घर जाना है.

निश्छल- बस कुछ दिन और यहाँ रुकना पड़ेगा अम्मा. उसके बाद आप घर जा सकती हैं. बात ये है की मुझे इस बिच बहुत ज्यादा काम है तो मैं उन लोगो पर ज्यादा ध्यान नहीं दे प् रहा हूँ. कुछ hi दिनों में पूरा काम फिनिश करके पहले उन लोगो से निपटूंगा उसके बाद आप अपने घर जा सकती हैं.

इधर सरिता पलंग के निचे अपने दर्द होते हाथ को दुसरे हाँथ से सहलाती हुई सोच रही थी की इसको जाना नहीं है क्या. ये तो अपनी पूरी राम कहानी लेकर बैठ गया. पता नहीं किसका मुंह देखकर सुबह उठी थी. तभी उसे दादी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

दादी- बस पुलिस बाबू मेरी नातिन को उनसे बचा लो. मैं उसे बहुत प्यार करती हूँ. उसे कुछ हो गया तो मैं मर जाउंगी.

निस्चल- आप उसकी फ़िक्र मत करिये अम्मा. उसे कुछ नहीं होगा. मैं उसे आपके पास लेकर आऊंगा. तब तक आप थोड़ा धीरज रखिये. अच्छा अम्मा अब मैं चलता हूँ. आपने खाना खा लिया है तो आराम करिये आप.

इतना कहकर निश्छल कमरे से बहार निकल जाता है और टाला लगाकर निचे चला जाता है.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
👋👋👏👏🙏🙏🙏

सरिता अभी इस क्षेत्र में अनाड़ी ही है। और साथ मे अपनी मनमानी भी कर रही है। अब कहानी की नायिका वो है और नायक निश्चल है तो दोनों का इलू इलू तो होगा ही।😄😁😂

ये भी एक राज़ है महोदय।

ये तो आप सबको कहानी के आखिर तक पता चलेगा कि प्रधान एकदम सहो जगह पहुंच कैसे गया सरिता को रंगे हाथों पकड़ने में लिए। उसी के साथ एक बड़ा खुलासा भी होगा और सारे राज़ से पर्दे भी उठ जाएंगे।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय इस खूबसूरत समीक्षा के लिए। आप सभी को ये दोनों की तू तू मैं मैं पसंद आई। इसका मतलब मेरा लिखना सार्थक हो गया।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 24

निश्छल के बहार चले जाने के बाद सरिता बीएड के निचे से बहार निकली. उसके हाँथ में अभी भी दर्द हो रहा था जो वो अपने दुसरे हांथो से दबाकर दूर करने की कोशिश कर रही थी. सरिता को देखकर दादी ने उससे कहा.

दादी- तुम ठीक तो हो न बेटी. कुछ हुवा तो नहीं. ये तुम अपने हाँथ को बार बार क्यों दबा रही हो.

सरिता- मैं ठीक हूँ दादी. लेकिन आप भी कमल की एक्टिंग करती हैं. जिसका नमूना उस दिन मैंने देखा था, लेकिन आज तो आपने उससे भी ज्यादा जबरदस्त एक्टिंग की है. कितनी आसानी से आपने सर को बेवकूफ बनाया. मज़ा आ गया ये देखकर. अच्छा अब मैं चलती हूँ. बहुत जल्दी मैं आपकी गुड़िया के साथ आपसे मिलूंगी. आप अपना ध्यान रखना. और भूल से भी आप के मुंह से ये न निकले की मैं यहाँ आई थी. नहीं तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

इतना कहकर वो खिड़की के पास आती है और निचे उतरने के लिए तैयार होती है. लेकिन खिड़की से अंदर जाने से ज्यादा कठिन था खिड़की से बहार आना. क्योंकि बॉउंड्री के ऊपर चारो तरफ फेंसिंग वायर लगे हुवे थे और जिस सिरे पर खिड़की थी उसकी दीवार लगभग बॉउंड्री से सटी हुई थी. लगभग 3-4 फिट का गैप था दीवार और बॉउंड्री के बिच.

निचे उतर कर वापस पाइप के सहारे फर्स्ट फ्लोर की खली जगह पर आना बहुत मुश्किल था. सरिता बड़ी मुश्किल से फेंसिंग वायर को पार करके अंदर कूदि थी. रात ज्यादा गहरी हो गयी थी, इसलिए आस पास के घरो को लाइट भी करीब करीब बंद hi हो गयी थी.

सरिता ने थोड़ी देर खिड़की के पास खड़े होकर सोचा फिर एक लम्बी साँस लेते हुवे खिड़की का सहारा लेकर निचे लटक गयी और बड़ी मुश्किल में घूमकर अपना एक पेअर पाइप पर रखना चाहा तो इस दौरान उसका हाँथ भी छूट गया खिड़की से और वो निचे गिरने लगी. लेकिन निचे गिरते हुवे उसके हाँथ में पाइप का ऊपरी सिरा आ गया जिसे उसने मज़बूती से पकड़ लिया.

इस सकते से उसकी जान हलक में आ गयी थी. उसकी सांसे बहुत तेज़ चलने लगी थी. फिर वह थोड़ी देर अपनी साँस दुरुस्त करती रही और साँस दुरुस्त होने के बाद उसने निचे का जायजा लिया और अपना हाँथ पाइप से छोड़ दिया. जिसके कारन वो लगभर 8-10 फिट निचे जमीन पर गिरी.

जिसके कारन धम्म्म्म की आवाज़ हुई. रात का समय था. आवाजाही काम हो गयी थी. चरों तरफ लगभग शांति सी छै हुई थी. गार्ड भी बॉउंड्री का गेट बंद करके अपने क्वार्टर में था. धम्म की आवाज़ उसके कानो में पड़ी . शायद वो अभी सोया नहीं था तो वो टॉर्च लेकर बहार आया और बोलै.

गार्ड- कौन है. कौन है वह.

ये बोलकर गार्ड ने आवाज़ की दिशा में देखा और उसके पास जाने लगा. फिर जैसे जैसे गार्ड लांड्री के चक्कर लगाकर देखने लगा सरिता भी उसके आगे आगे बाउंड्री का चक्कर लगते हुवे छुपाते छुपाते अपने आपको गॉर्ड की नजर से बचती रही और भागकर दूसरी तरफ चली गयी और बौंडरी के अंदर लगे अशोक के पेड़ के पीछे छिप गयी. गार्ड ने थोड़ी देर अपनी सर्चिंग जारी राखी, उसके बाद वो अपने क्वार्टर में चला गया.

गार्ड के चले जाने के बाद सरिता जिस तरफ से बॉउंड्री पार की थी. उसी तरफ आयी और बड़ी सावधानी से फेंसिंग वायर को बचते हुवे बॉउंड्री पार किया. लेकिन इतनी सावधानी के बाद भी सरिता की कलाई में वायर का कट लग गया. जिससे उसके हांथो से खून निकलने लगा.

सरिता बॉउंड्री पार कर होने के बाद वही पड़ा ेंट (ब्रेके) का टुकड़ा उठाया और अपनी कलाई पर लगाकर दुसरे हाँथ से दबा लिया और अपने रस्ते चल पड़ी. थोड़ी hi देर में वो निश्छल के घर के सामने पहुंच गयी. जब वो उसके घर के करीब पहुंची तो उसने देखा की सविता अपनी बालकनी में कड़ी होकर किसी से बात कर रही हैं. सरिता तुरंत अँधेरे में चिप गयी. और सविता की तरफ देखने लगी.

निश्छल के घर में दो बालकनी थी. एक घर के साइड में थी और एक बालकनी पीछे की तरफ थी. बालकनी के ठीक बाद बॉउंड्री थी. उस बॉउंड्री के तुरंत बाद सड़क थी. सविता जहा पर कड़ी थी. उसके सामने की सड़क पर थोड़ा अँधेरा था. इस समय रात के लगभर 11 बजे से ज्यादा का समय हो चुक्का था. उसी अँधेरे में एक आदमी खड़ा था जिसकी पीठ सरिता की तरफ थी और जिससे सविता बात कर रही थी. सरिता ने ये देखकर अपने मन में सोचा.

सरिता- आखिर दी इतनी रात को चोरी छुपे इस आदमी से क्यों बात कर रही हैं. और ये आदमी कौन है. इसे तो मैंने पहले कभी नहीं देखा. मैं अभी जाकर दी से पूछती हूँ की ये आदमी कौन है जिससे वो इतनी रात में चोरी छुपे बात कर रही हैं . नहीं नहीं मैं कैसे पूछ सकती हूँ. अभी मैं उन्हें जानती hi कितना हूँ. मेरा कोई हक़ नहीं है उनसे इसके बारे में कुछ पूछने का.

अभी अगर मैं दीदी के सामने चली गयी तो दी मुझे देखकर शर्मिंदा हो जाएँगी. हो सकता है दी मुझसे रिश्ता भी तोड़ ले. जो मेरे साथ जुड़ रहा है. कुछ दिन बाद मैं दी से खुद पूछ लुंगी इसके बारे में. अगर मैं अभी सामने चली गयी और दी ने मुझसे सवाल कर लिया की मैं इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हूँ तो मैं क्या जवाब दूँगी.

नहीं नहीं. उनके सामने जाने के बजाय मुझे पहले अपने आपको सेव करना होगा और अपने क्वार्टर पर जाना होगा. इसके बारे में बाद में दी से बात करेंगी. अगर मैं अभी निकलने की कोशिश करती हूँ तो दी की नजर मुझपर पद सकती है. मैं कुछ देर यही कड़ी रहती हूँ. दी के अंदर जाने के बाद hi मैं जाउंगी यहाँ से.

सरिता यही सोचकर वह कड़ी रही और सविता को देखती रही. सरिता फिर से सोचने लगी.

सरिता- कहा तो मैं सोच रही थी की मुझे 10-15 मिनट लगेंगे . मैं दादी को खोजकर उनसे सच जानकर जल्दी से अपने क्वार्टर पर चली जाउंगी. मगर उस हिटलर ने सब गड़बड़ कर दिया. वो तो वह डेरा जमकर बैठ गया. मेरे सर पर तो ये हिटलर राहु केतु की तरह मंडरा रहा है.

वो इतनी आसानी से मेरा पीछा नहीं छोड़ने वाला. किसी तरह वह से निकल कर आई तो अब यहाँ फंस गयी हूँ. हे भगवन कुछ करो. दी को जल्दी से अंदर भेजो. अगर दी रात भर इस आदमी से बात करती रही तो मैं रात भर यहाँ कैसे कड़ी रह पाऊँगी.

शायद सरिता की प्रार्थना भगवन ने सुन लिट् hi. कुछ hi देर में सविता बालकनी से हटकर घर के अंदर चली गयी. ये देखकर सरिता चैन की साँस ली. इस वक्त एकदम सन्नाटा चाय हुवा था रोड पर. बस झींगुर की सायी साययय की आवाज़ कभी कभी सुनाई पद रही थी.

सरिता अब अँधेरे से निकल कर अपने घर की तरफ चल पड़ी. अभी कुछ hi दूर वो गयी थी की उसे लगा की जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है. उसने अपनी गार्डन हल्का सा पीछे घुमाकर देखा तो एक आदमी कुछ hi दूरी पर उसके पीछे आता हुवा दिखाई दिया. सरिता ने ये देखकर अपनी चल तेज़ कर दी. ये देखकर उस आदमी ने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. कुछ दूर जाने के बाद सरिता ने अपनी पिस्टल बहार निकल ली और अपने करीब आते हुवे उस आदमी पर तन दी. ये देखकर उस आदमी ने कहा.

आदमी- अरे मैडम, ये आप क्या कर रही हैं. गन निचे कीजिये.

सरिता- मैं देख रही हूँ की आप मेरा पीछा कर रहे हैं. कौन हैं आप. आपको क्या काम है मुझसे.

आदमी- देखिये मैडम आप गलत समझ रही हैं मेरे बारे में. मैं कोई चोर उचक्का नहीं हूँ. दरअसल आपकी घडी उस मोड़ के पास गिर गयी थी. मैं वही देने आपके पीछे पीछे आ गहा हूँ.

सरिता ने उसकी बात सुनकर अपने हाँथ की तरफ देखा तो उसकी घडी सच में उसके हाँथ में नहीं थी. सरिता ने ये देखकर मन में सोचने लगी.

सरिता- लगता है घडी की चैन टूट गयी और ये मेरे हांथो से गिर गयी. कही इस आदमी ने मुझे वह पर खड़े हुवे देख तो नहीं लिया. कही ये मेरा पीछा तब से नहीं कर रहा है जब मैं दादी से मिलकर आ रही थी. पता नहीं ये आदमी कौन है.

सरिता अपने hi खयालो में गम थी की तभी उस आदमी की चुटकी से सरिता अपने खयालो से बहार आयी और उस आदमी से कहा

सरिता- To.To आप मुझको आवाज़ भी तो दे सकते थे. युन्न गुंडों की तरह पीछा करने की क्या जरूरत थी. और आपको कैसे पता चला की ये मेरी घडी है. क्या आप काफी देर से मेरा पीछा कर रहे हैं.

आदमी- देखिये मिस. आप फिर से मुझे गलत समझ रही हैं. वो आप जब उस मोड़ से आगे आ रही थी तो आप के हाँथ से कोई चमकती हुई चीज़ निचे गिरी थी. जब मैंने जाकर देखा तो वो घडी थी. मैंने आपको इसलिए आवाज़ नहीं दी की शायद आप मुझे गुंडा मावली समझे. इसलिए मैंने सोचा की मैं आपके पास आकर hi आपको घडी वापस कर दूँ.

सरिता- ओह्ह्ह धन्यवाद आपका महोदय,

आदमी- कोई बात नहीं मैडम ये तो मेरा फ़र्ज़ था. वैसे अगर आप बुरा न मेने तो एक बात पूछ सकता हूँ आपसे.

सरिता- (सवालिया नजरो से देखते हुवे) जी पूछिए. क्या पूछना है आपको.

आदमी- देखिये आप मेरी बात का बुरा मत मानियेगा, आप एक लड़की हैं और आपको इतनी रात को अकेली इस तरह नहीं घूमना चाहिए. आपको तो पता है की जमाना कितना ख़राब है. आये दिन लड़कियों के साथ बुरी बुरी घटनाये होती रहती हैं. आप इतनी रात को यहाँ पर क्या कर रही हैं.

सरिता- जी आपकी बात बिलकुल सही है और मैं ये भी जानती हूँ की जमाना बहुत ख़राब है. लड़कियों का रात में बहार निकलना खतरे से खली नहीं है. रात में hi क्या दिन भी उनके लिए सेफ नहीं है, लेकिन क्या आपको ऐसा नहीं लगता की कही न कही इसके लिए और इस ख़राब माहौल के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं.

हम क्यों अपने समाज को, अपने देश को, अपने आस पास के माहौल को इस लायक नहीं बना प् रहे हैं जहाँ लड़किया खुली हवा में साँस ले सकें. क्यों उन्हें बंदिशों में रहना पड़ता है. कुछ भी लड़की के साथ अगर बुरा होता है तो दोष हमेशा लड़कियों को hi दिया जाता है. हमारी सोच क्यों इतनी गन्दी हो गयी है की हमें अचे बुरे की पहचान नहीं है. हमें क्यों इस तरह की बात करने की जरूरत पद रही है.

आदमी- आपकी बात 100 % सही है मैडम. मैं भी आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ.

सरिता- माफ़ करियेगा जी. अभी मेरे पास समय की बहुत कमी है. नहीं तो आपको और अचे से इस बारे में समझती. रही बात आपके इस सवाल की की मैं इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हूँ. तो आपको मेरे हाँथ में गन दिख रही है न. फिर भी शायद आपको अंदाज़ा नहीं हो पाया है की मैं कौन हूँ. तो मैं आपको बता देती हूँ की मैं एक पुलिस अफसर हूँ और एक केस के सिलसिले में इधर आई थी.

आदमी- वववव ग्रेट मैडम. थोड़ा बहुत तो मैंने भी अंदाज़ा लगा लिया था की आप कोई मामूली लड़की तो नहीं हैं. मुझे ये जानकर अच्छा लगा की आप डिफेन्स सर्विस में हैं.

सरिता- ठीक है जी. अभी मुझे निकलना है. तो मैं चलती हूँ.

आदमी- ठीक है मैडम. आप से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा.

सरिता- मुझे भी आपसे मिलकर अच्छा लगा. आप बहुत अचे इंसान मालूम होते हैं. आपके संस्कार बहुत बढ़िया हैं. आप ऐसे hi रहिएगा. आप जैसे लोगो की बहुत जरूरत है इस देश को, इस समाज को.

आदमी- धन्यवाद मैडम,

इतना कहकर वो आदमी पीछे मुद गया और सरिता भी अपने रस्ते चल दी. दस कदम आगे जाने पर आदमी को कुछ ड़याँ आया और उसने अपने अपने आपसे hi कहा.

आदमी- धत्त तेरे की. मैं भी कितना पागल हूँ. इतनी देर मैडम से बात की और उनका नाम भी नहीं पुछा. जाकर नाम पूछ लू क्या. नहीं नहीं. फिर शायद मैडम मुझे गलत समझ लेंगी. चलो कोई बात नहीं. अगर फिर कभी मुलाकात हो गयी तो नाम पूछ लूंगा.

सरिता जब घर पहुंची तो बहुत थकी हुई लग रही थी. उसने खाना बनाने की जहमत नहीं उठायी और कुछ खा पि कर सो गयी. सुबह वो उठाकर तैयार होकर अपने पस चली गयी और अपना काम करने लगी. ऐसे hi एक हफ्ते और बिट गए. इस एक हफ्ते में उसे जब भी थोड़ा बहुत समय मिलता वो अपनी गाड़ी लेकर अपने भाई को ढूंढने के लिए निकल जाती.

वैसे सरिता का अपने भाई को ढूंढना अँधेरे में तीर चलने जैसा था, क्योंकि अभिषेक से अलग हुवे सरिता को 8 साल से ज्यादा का समय बीत गया था. और इन 8 सैलून में सरिता के अंदर बहुत बदलाव आ गया था तो यही बदलाव अभिषेक के अंदर भी आया होगा. उसको सरदारी निगाह देखकर सरिता के लिए pahchan-na आसान नहीं था, लेकिन सरिता एक उम्मीद के साथ उसको ढूंढ रही थी की शायद वो कहीं उसे देखकर पहचान ले.

इतना तो सरिता को भी मालूम चल गया था की अगर उसका भाई इस दुनिया में है तो उसे जरूर पता चल गया होगा की उसकी बहन एक पुलिस अधिकारी बन गयी है. क्योंकि सरिता के पास होने से लेकर अभी तक उसकी फोटो कई बात पेपर में छाप चुकी और T.V. में भी वो एकाध बार आयी थी. तो अभिषेक को इस बात की जानकारी होना स्वाभाविक थी.

सरिता ने कोई ऐड या फोटो अभिषेक की इसलिए न्यूज़ पेपर में नहीं छपवाई की अगर अभिषेक गलत सांगत में पद गया होगा तो अभिषेक की जान और उसके परवर की जान को भी खतरा हो सकता है. सरिता की इस कोशिश के बावजूद भी उसको निराशा हाथ लगी. अपने भाई को ढूंढने के साथ साथ सरिता ने पूरी कोशिश की गुड़िया को ढूंढने की लेकिन वो भी कही नहीं मिली.

लेकिन हाँ इस चक्कर में बच्चा सिंह को बहुत नुकसान हुवा. सरिता के रिश्वत के केस में फंसने के बाद बच्चा सिंह ने अपना काम फिर से शुरू कर दिया था. क्योंकि बॉस ने उसे फिर से कारोबार करने के लिए बोल दिया था. लेकिन सरिता के फिर से ज्वाइन करने के बाद और सरिता को जब ये पता लगा की उसे फंसने वाला बच्चा सिंह है तो सरिता उसके कारोबार के पीछे लग गयी थी. इस नुकसान से बच्चा सिंह भन्नाया हुवा था.

*************

बच्चा सिंह अपने आदमियों के साथ उसी खंडहर में बैठा बात कर रहा था और चिल्ला रहा था.

बच्चा – कलुवा. जब से वो इंस्पेक्टर वापस आई है तब से उसने पहले से ज्यादा हमारे कारोबार का नुकसान कर दिया है.

कलुवा- सही कह रहे हो भाई.

बच्चा- (चिल्लाते हुवे) तो सालो. तुम सब कर क्या रहे हो. मैं तुम्हे इसी दिन के लिए पाल पॉश कर रख रहा था क्या. की जब कोई मेरी मरने लगे तो तुम सब दम दबाकर बैठ जाओ. कुछ करते क्यों नहीं हो तुम लोग.

कलुवा- भाई. जितना नुकसान होना था ु हो गया है. लेकिन अभी जो माल अपने पास बचा हुवा है उसको तो यह से कही सुरक्षित जगह पर पंहुचा दू फिर सोचता हूँ कुछ उसके बारे में. क्योंकि जिस तेज़ी से ु लौंडिया आगे बढ़ रही है. उससे तो वो बहुतै जल्दी इन्हे ताका ा जाएगी. और हम नहीं चाहता की ु हमारे बचे हुवे माल को भी पकड़ ले. और अब ु जरूर आपके बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही होगी.

बच्चा- सही कहा तुमने. पहले इस माल को किसी सुरक्षित ठिकाने पर पंहुचा दो. फिर उस इंस्पेक्टरनी के बारे में सोचते हैं.

रघु- माई बाप. इ रघु भाई कब तक आ रहे हैं.

बच्चा- अभी उसके आने में समय है, पर लगता है की उसे बहुत जल्दी hi बुलाना पड़ेगा. ताकि वो आकर इस लड़की को अच्छा सबक सिखाये.

*******************

अगले दिन सरिता अपने पस पहुंची तो उसने कुछः प्लान किया हुवा था की उसे बच्चा सिंह तक कैसे पहुंचना है. उसने पस पहुंचते hi विकास, अमित और कुशल को अपने केबिन में बुलाया. तीनो सरिता के केबिन में गए. सरिता ने उनसे कहा.

सरिता- मैं आप लोगो को एक काम देना चाहती हूँ. और मैं चाहती हूँ की ये काम बहुत hi सावधानी से और बहुत hi गुपचुप तरीके से हो. किसी को भी इसके बारे में खबर नहीं होनी चाहिए. क्या मैं इतना भरोषा कर सकती हूँ तुम लोगो पर.

विकास- बिलकुल मैडम. किसी को कानो कण खबर नहीं होगी. आप भरोषा रखिये हमारा.

सरिता- वैरी गुड, एक और बात का ध्यान रहे की स्टाफ के किसी भी मेंबर को हम लोगो के आलावा इस बात का पता नहीं चलना चाहिए की हम लोग क्या काम कर रहे हैं.

अमित- जी मैडम.

सरिता- गुड. तो बात ये है की. बच्चा सिंह को तो आप लोग जानते hi होंगे.

कौशल- जी मैडम. उसके बारे में कौन नहीं जनता.

सरिता- ह्ह्ह्हह्म्मम्म्म्म. तो मुझे उस बच्चा सिंह की पूरी जन्मकुंडली चाहिए. वह कहा रहता है. कहाँ जाता है. किससे मिलता है. और उसके धंधे कौन कौन से हैं. सबकी जानकारी मुझे 1 दिन के अंदर अपने टेबल पर चाहिए. अंडरस्टुड.

विकास- वो तो ठीक है मैडम, लेकिन वो बहुत खतरनाक है. अगर वो हमारे सामने आकर खड़ा हो जाये तो भी हम उसे पहचान नहीं सकते की यही बच्चा सिंह है.

सरिता- (आश्चर्य से) पर ऐसा क्यों.

विकास- क्योंकि ham-me से किसी ने उसे देखा नहीं है. वह सिर्फ अपने आदमियों के बल पर hi अपना सारा धंधा चलता है. न तो वो जल्दी बहार निकलता है और न hi किसी चीज़ में डायरेक्ट इन्वॉल्व होता है.

सरिता- लेकिन मैंने देखा है उसे. उस दिन आया था मुझे रिश्वत दें ेके लिए.

कौशल- लेकिन मैडम हम लोगो ने नहीं देखा था उसे. फिर कैसे होगा ये.

सरिता- कोई बात नहीं कौशल जी. कितने दिन तक पुलिस के हांथो बचता रहेगा. किसी न किसी दिन तो पुलिस के छठे चढ़ेगा hi. उसका पता तो उसके आदमी hi बताएँगे. इसके आगे मुझे कुछ भी नहीं sun-na. मुझे उसकी साडी डिटेल्स एक दिन के अंदर चाहिए मतलब चाहिए.

अमित- लेकिन मैडम. एक दिन के अंदर उसकी साडी डिटेल्स कैसे निकल सकते हैं.

सरिता- एक दिन का समय बहुत होता है अमित जी. मुझे नहीं पता की आप लोग कैसे ये सब मैनेज करेंगे, लेकिन आप लोगो को ये करना hi होगा. किसी भी कीमत पर करना होगा. मैं उम्मीद करती हूँ की आप लोग मुझे निराश नहीं करेंगे.

कौशल- ठीक है मैडम. हम पूरी कोशिश करेंगे अपनी तरफ से.

विकास- मैडम. आप एक बार और अचे से सोच लीजिये. क्या हम जो करने वाले हैं वो सही है. मेरा मतलब है की वो बहुत खतरनाक है. और आप अकेले hi इस केस को हैंडल करना चाहती हैं.

सरिता- विकास जी. ये हमारी ड्यूटी है. जब कोई हमारे पास मदद की उम्मीद लेकर आता है तो हमारा फ़र्ज़ बनता है की हम उसकी पूरी मदद करे. और सर्कार ने हमें ये वर्दी इसीलिए तो दी है की हम लोगो की मदद कर सके. क्या आपको ज्वाइन करते समय ली हुई प्लेज (प्रतिज्ञा) यद् नहीं है. क्या आप उसे भूल गए हैं.

विकास- जी नहीं मैडम. मैं कुछ नहीं भूला हूँ. मैं आपको निराश नहीं करूँगा. लेकिन अगर दसप सर से भी एक बार बात कर ले आप तो ठीक रहेगा


सरिता- विकास जी. मैंने जितना कहा है आप उतना करिये. दसप सर को कैसे बताना है और कब बताना है ये मैं देख लुंगी.

विकास- जी मैडम, जैसा आप कहें.


सरिता- ठीक है फिर. आप लोग अभी से अपने काम पर लग जाइये. और याद रहे थिस इस टोटली कॉन्फिडेंशल. अब आप लोग जा सकते हैं.

सरिता की बात सुनकर तीनो उसके केबिन से बहार आ गए.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 25

तीनो के बहार जाने के बाद सरिता सोचने लगी. की क्या ये तीनो मेरा दिया हुवा काम कर सकते हैं. मोहित और जावेद अगर साथ में रहते मेरे तो मुझे इनकी जरूरत hi नहीं पड़ती, लेकिन वो दोनों तो उस हिटलर के चमचे हैं. उनको इस मिशन में शामिल करना मतलब उस हिटलर को सब कुछ पता चल जाना. उल्टा वो मेरी मदद करने के बजाय मेरा काम hi उल्टा कर देंगे.

बस एक बार ये तीनो बच्चा सिंह की इनफार्मेशन लेकर मेरे पास आ जाये. उसके बाद मैं उसे सलाखों के पीछे कर दूँगी. पता नहीं गुड़िया किस हल में होगी. हो सकता है गुड़िया जैसी और भी बछिया उसके पास हो. क्योकि जो बाँदा इतना सरे इललीगल काम करता है वो लड़कियों की तस्करी का भी काम कर सकता है. मुझे अब देर नहीं करनी चाहिए. मुझे जल्द से जल्द बच्चा सिंह के पास पहुंचना hi होगा.

अभी सरिता इन्ही खयालो में गम थी की तभी जान्हवी की आवाज़ उसे सुनाई पड़ी. जो उससे अंदर आने की परमिशन मांग रही थी. सरिता ने उसे अंदर आने के लिए कहा. जान्हवी आकर सरिता के सामने कड़ी हो गयी और बोली.

जान्हवी- आपसे कुछ बात करनी थी मैडम.

सरिता- हाँ जान्हवी. बोलो क्या बात है.

जान्हवी- मैडम. अपने पस से दो किलोमीटर दूर ……………………… इलाका है वो बहुत hi असंवेदनशील (Insencitive)ilaka है. वह आये दिन किसी न किसी बात को लेकर लड़ाई. झगडे होते रहते हैं. मुझे दर है मैडम की किसी दिन कही ये लड़ाई झगड़ा भयंकर रूप न ले ले.

सरिता- हह्म्मम्म्म्म. लेकिन तुम्हे इस बात का पता कैसे चला.

जान्हवी- मैडम पिछले चार दिनों से वह की कुछ लेडीज पस आ रही है कम्प्लाइंस करने के लिए. की आये दिन वह लड़ाई झगड़ा होता रहता है. जिसमे उनको, उनके पति और बच्चो को जान का खतरा बना रहता है. उनकी कम्प्लाइंस है की हम वह पर पुलिस भेजकर इस मामले को शांत करवाए.

सरिता- उनकी मांग तो जायद है जान्हवी. रुको मैं देखती हूँ इस मटर को. मैं रावत सर की परमिशन लेकर वह अपने कुछ आदमी तैनात करती हूँ. जो वह की सेतुएशन को अचे से संभल सके. मुझे अपने पस के अंदर में आने वाले हर जगह पर शांति और सुकून चाहिए. ाचा जान्हवी एक बात बताओ. तुम बच्चा सिंह के बारे में कुछ जानती हो.

जान्हवी- नहीं मैडम. मुझे तो बस इतना hi पता है की वो इस इलाके का बदमाश है और बहुत खतरनाक है. उसके नाम से न जाने कितने केस दर्ज़ हैं फाइल में. जो रैक पर पड़े हुवे धुल फांक रहे हैं. कोई उसके खिलाफ कुछ करता hi नहीं है. मैंने सुना है की दसप सर जब नए नए आये थे तो उन्होंने बच्चा सिंह को पकड़ा भी था, लेकिन कुछ hi घंटों में वो छूट गया, साथ में दसप सर को बड़े अधिकारीयों से दन्त भी sun-ni पड़ी थी.

सरिता- ओह्ह्ह्ह. ऐसी बात है. क्या तुम मुझे वो फाइल लेकर दे सकती हो जान्हवी.

जान्हवी- जरूर मैडम, लेकिन कोई फायदा नहीं होने वाला. आप चाहे जितनी भी कोशिश कर ले. वो आपके हाँथ नहीं आने वाला. वो जितना खतरनाक है उतना hi शातिर भी है. तभी तो आज तक किसी ने उसका चेहरा नहीं देखा. और जिसने देखा है दसप सर और रावत सर को छोड़कर बाकि सभी का यहाँ से ट्रांसफर हो गया है.

सरिता- कोई बात नहीं. मैंने देखा है जान्हवी उसे. और मुजरिम कितना भी शरीर और चालक हो. एक दिन पुलिस की गिरफ्त में जरूर आता है. पुलिस के शिकंजे में तो उसका बाप भी आएगा. बस तुम मुझे उसकी फाइल्स दे दो. मैं भी देखती हूँ की वो कब तक मुझसे बचता है.

जान्हवी- ठीक है मैडम, में उसकी फाइल खोजकर आपके पास भिजवाती हूँ.

इतना कहकर जान्हवी केबिन से बहार चली गयी. उसके जाते hi सरिता ने अपने मन में कहा.

सरिता- बहुत भगा लिया पुलिस को अपने बिछे बचा सिंह, लेकिन अब नहीं. इस बार तुम्हारा पला सरिता जोशी से पड़ा है. अब तुम ज्यादा दिन मेरी पकड़ से दूर नहीं हो और न hi मैं तुम्हे दूर रहने दूँगी. जितना आतंक फैलाना था तुमने फिआला लिया. जितना तुमको करना था तुमने कर लिया अब करने की बरी पुलिस की है.

सरिता अपने खयालो से तब बहार आयी जब उसके फ़ोन की घंटी बजी. सरिता ने फ़ोन देखा तो फ़ोन उसकी माँ का था. सरिता ने सोचा की माँ का फ़ोन इस वास्कट. लगता है कोई जरूरी काम होगा, ये सोचकर सरिता ने फ़ोन उठा लिए.

Sarita-Hello माँ. कैसी तबियत है आपकी.

रानी जी- हाँ बेटी मेरी तबियत बिलकुल ठीक है. तुम बताओ बेटी. तुम तो ठीक हो न.

सरिता- मैं भी ठीक हूँ माँ, लेकिन आपने इस समय फ़ोन क्यों किया. आपको तो पता है न की मैं इस समय पस में रहती हूँ. मैंने आपको कितनी बार कहा है की बिना जरूरी काम के मुझे दिन में फ़ोन मत क्या करो. दिन में आपका फ़ोन देखकर मैं कितना घबरा जाती हूँ की कोई बात हो गयी है क्या. बताईये मान अपने किसलिए मुझे फ़ोन किया है इस वक्त.

रानी जी- अब तुझसे बात करने के लिए भी मुझे समय देखकर फ़ोन करना पड़ेगा क्या. जरूरी काम था तभी मैंने फ़ोन किया है. ये बता की अपने बर्थडे पर तुम घर आ रही हो न.

सरिता- क्या माँ. यही आपका जरूरी काम था क्या.

रानी जी- हाँ मैंने यही पूछने के लिए फ़ोन किया है.

सरिता- मैं नहीं आ पाऊँगी माँ. काम का बहुत प्रेशर है. जिसके कारन छुट्टी मिलना मुश्किल है. अभी मैं बहुत जरूरी काम कर रही हूँ. रात में बात करती हूँ मान. अब मैं फ़ोन रख रही हूँ.

इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया. उधर रानी जी hello hello करती रही. कोई आवाज़ न पाकर रानी जज ने फ़ोन रख दिया और कहा.

रानी जी- अभी तो बिना बात सुने hi फ़ोन रख दिया. शाम को फ़ोन करो फिर बताती हूँ तुम्हे. अपनी माँ से बात करने की फुर्सत नहीं है तुम्हारे पास.

सरिता भी फ़ोन रखकर सोचने लगी.

सरिता- एक तो मैं पहले से hi इतना परेशां हूँ और ऊपर से माँ को मेरे बर्थडे की पड़ी हुई है. कैसे भी करके मुझे इस केस को जल्दी से सोल्वे करना होगा. मुझे बहुत जल्द hi बच्चा सिंह को पकड़ना होगा, लेकिन अगर मेरे हाँथ कोई सुराग hi नहीं लगा तो मैं कैसे उस तक पहुँचूँगी. कैसे मैं गुड़िया को बचाऊंगी. मैंने दादी से वडा भी कर लिया है.

अभी सरिता इतना hi सोच रही थी की तभी विकास का फ़ोन उसके मोबाइल पर आता है. सरिता फ़ोन उठती है .

सरिता- हाँ विकास जी. बताओ कुछ पता चला आपको.

विकास- मैडम. हमने एक आदमी को पकड़ा है जिसने एक माकन बताया है. वो माकन थोड़ा सस्पेक्ट लग रहा है. एक दो लोगो से पता चला है की रात में इस घर में कुछ हलचल देखि गयी थी.

सरिता- तो उसमे सस्पेक्ट क्या है. घर है तो कोई न कोई तो रहेगा hi उस घर में.

विकास- नहीं मैडम. ऐसी बात नहीं है. यहाँ के आसपास के लोगो का कहना है की ये घर फिछले कई महीनो से बंद पड़ा हुआ है. यहाँ पर कोई आता जाता hi नहीं है. इसलिए मुझे ये अजीब लग रहा है की जो घर कई महीनो से बंद पड़ा है उसमे रात में hi लोग क्यों आये.

सरिता- क्या. आप मुझे झालड़ी से वह की लोकेशन भेजो मैं पहुंच रही हूँ कुछ hi देर में वह पर.

विकास- जी मैडम. अगर ये सच है तो हमें वह से कुछ न कुछ सुराग मिल सकता है. या फिर अगर वो लोग यहाँ पर अभी भी हैं तो वो क्या कर रहे हैं इस घर में.

सरिता- हाँ ये बात तो है. मैं पहुंच रही हूँ वह पर. अब ये बात अंदर जाकर hi पता चलेगी की वह पर वो लोग क्या कर रहे हैं. तब तक तुम अगर और infrmati0n जूता सकते हो तो ये और भी ज्यादा अच्छा होगा हमारे केस के लिए.

विकास- ठीक है मैडम. आप आइये.

इतना कहकर दोनों फ़ोन रख देते हैं . सरिता कुछ hi देर में वह पर पहुंच जाती है. जहा पर विकाश और कौशल खड़े हुवे थे. कौशल ने एक घर की तरफ इशारा करते हुवे कहा.

विकास- मैडम ये वही घर है जिसके बारे में मैंने आपको बताया था.


सरिता- अमित कहाँ पर है. दिखाई नहीं दे रहा है.

विकास- मैंने उसे फाइल ढूंढने के काम पर लगा दिया है मैडम.


सरिता- अच्छा. तो चलो अंदर चलकर देखते हैं की क्या कुछ मिलता है वह पर.

फिर विकास, कौशल और सरिता अपनी गन निकल कर सावधानी के साथ घर के अंदर दाखिल हो जाती हैं. वह पर उन्हें कोई इंसाने तो नजर नहीं आता, लेकिन हाँ वह पर 8-10 खली शराब की बोतले पड़ी मिलती हैं. उस माकन में एक अजीब तरह की बदबू आ रही थी. सरिता ने पूरे माकन का बारीकी से मुआयना किया. अचानक उसकी नजर किसी चीज़ पर पड़ी जो की किसी कपडे से ढाका हुवा था. उसे देखते हुवे सरिता ने विकास से कहा.

सरिता- विकास जी. जरा इसे देखिये तो सही. इसके निचे क्या है.

सरिता की बात सुनकर विकास उस कपडे को hata-ta है तो उसे उसके निचे एक लकड़ी का बड़ा सा बक्सा मिलता है. विकास जब इस बक्सा को खोलता है तो वो बक्सा खली था. विकास बॉक्स को बंद करने hi जा रहा था की तभी उसकी नजर एक कोने पर गिरे हुवे सफ़ेद पावर पर पड़ती है. जिसे देख कर विकास ने कहा.

विकास- मैडम मुझे लगता है की इस बक्से में ब्राउन सुग्गर या कोई नशीला पदार्थ था.

सरिता- (चौकते हुवे) तुम्हे कैसे पता.

विकास- ये देखिये मैडम. यहाँ पर कुछ सफ़ेद सफ़ेद पावर टाइप गिरा हुवा है. इसकी महक वैसी hi है. जैसी दो दिन पहले हमने जिस ट्रक को पकड़ा था उसमे रखे माल से आ रही थी. मुझे पूरा यकीं है मैडम की ये वही चीज़ है.

सरिता- जिस ट्रक को तुमने पकड़ा था. वह आदमी कहा पर हैं. उनके पास से हमें कुछ और इनफार्मेशन मिल सकती है. हो सकता है ये उन्ही के साथी हों. जिन्होंने यहाँ से माल गायब किया है.

विकास- हो सकता है मैडम ऐसा hi हो.

सरिता- फिर तुम निकलो यहाँ से और उससे पूछ ताछ करो. हो सकता है कोई इनफार्मेशन मिल जाये. यहाँ पर मैं और कुयशाल देख लेंगे.

सरिता की बात सुनकर विकास चला जाता है. सरिता और कौशल माकन के एक एक कमरे का जायजा लेते हैं. सरिता को एक कमरे में कुछ टूटी हुई चूडियो के टुकड़े भी मिलते हैं. साथ hi उसे एक दुपट्टा भी मिलता है. ये देखकर सरिता ने अपने मन में कहा.

सरिता- हो न हो , उन लोगो ने गुड़िया को यही पर रखा होगा. ये भी हो सकता है की गुड़िया के साथ और भी लड़किया होंगी. अब मैं ये कैसे पता लगाऊं की वो लोग गुड़िया को लेकर कहाँ गए हैं.

कौशल- मम मुझे नहीं लगता की यहाँ पर हमें कुछ मिलेगा. अब हमें यहाँ से चलना चाहिए.

सरिता- हाँ सही कह रहे हो. अभी भी हमें उसके खिलाफ ठोस साबुत नहीं मिले जिसके बिना पर हम उसे अरेस्ट कर सके.

इतना कहकर सरिता और कौशल बहार निकलने लगे, लेकिन चलते चलते सरिता अचानक से रुक गयी. उसके मन में एक विचार कौंधा .

सरिता- (मन में) अगर मेरा शक सही है और गुड़िया के साथ अगर और भी लड़किया हैं. और अगर उन लोगो ने लड़कियों को यहाँ से निकला है तो वह उन्हें जरूर शहर से बहार भेजने के प्रयास में होंगे. मुझे किसी भी तरह से उन लड़कियों को शहर से बहार नहीं जाने देना है. मुझे उन्हें शहर से बहार जाने से पहले hi पकड़ना है. जैसा की विकास ने कहा है की कुछ लोग इस माकन के अंदर आये थे रात में. तो जरूर हो या न हो, वो लोग उन लड़कियों को hi लेने आये होंगे. अगर मैंने कोशिश की तो मैं उन लोगो को पकड़ सकती हूँ.

सरिता को कुछ सोचते हुवे देखकर कौशल ने कहा.

कौशल- क्या हुवा मैडम. आप क्या सोच रही हैं.

सरिता- कौसल जी एक काम करिये आप. अमित को अपने साथ लेकर जाइये और शहर के बहार जाने वाली हर गाड़ी पर अच्छी तरह से नजर रखो. बिना तलाशी क ीक भी गाड़ी बहार नहीं जनि चाहिए. चाहे वो किसी भी विप या व्विप की hi गाड़ी क्यों न हो.

कौशल- लेकिन मैडम, ये सब हम लोग नहीं कर सकते हैं. इसके लिए हमें दसप सर की परमिशन लेनी पड़ेगी. बिना उनकी परमिशन के ये सब करना अल्लोवेद नहीं है.’

सरिता- आप समझ नहीं रहे हैं मामले की नजाकत को कौशल जी. मामला बहुत hi क्रिटिकल है. हमारे पास समय बहुत काम है. परमिशन लेने में समय लग सकता है. अभी मैं जितना बोल रही हूँ आप उतना कीजिये. बाद में जो भी होगा मैं उसे संभल लुंगी.

सरिता की बात सुनकर कौशल चला गया. सरिता भी वह से सीधा विकास के पास चली गयी. जहा वह कल पकडे गए ड्राइवर से पूछताछ कर रहा था. पहले वो उसने कुछ भी जानकारी होने से मन कर दिया. लेकिन जब विकास ने उसपर थोड़ी सख्ती बरती तो उसने अपना मुंह खोल दिया.

आदमी- हाँ ये सच है की मैं बच्चा सिंह के आदमियों से एक डील के सिलसिले में मिला था. और मेरा उसके साथ बहुत समय से कारोबार चल रहा है.

उस आदमी ने इसके आलावा भी बहुत साडी इनफार्मेशन दी. यहाँ तक की लड़कियों के बारे में भी उस आदमी ने सरिता को बताया. जिसका सरिता को फायदा भी हुवा. इसकी बात सुनकर सरिता ने अपनी सर्चिंग तेज़ कर दी. थोड़ी मसक्कत के बाद आख़िरकार सरिता के हाँथ वो गाड़ी लग गयी जो उन लड़कियों को लेकर जा रही थी. सरिता ने अपनी टीम की मदद से उस गाड़ी को शाम तक पकड़ लिया.

जब गाड़ी का गेट खोला गया तो सरिता ने देखा की लड़कियों की हालत बहुत hi ख़राब थी. सरिता ने तुरंत अमित और विकास को एम्बुलेंस बुलाने के लिए कहा. सरिता ने अमित, विकास और कौसल की मदद से सभी लड़कियों को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया और गाड़ी के ड्राइवर को पकड़कर जेल में दाल दिया.

इस बात की खबर मीडिया को भी लग गयी. तो सरे न्यूज़ चैनल्स में बस सरिता और उसकी टीम के hi कारनामे दिखाए जा रहे थे. वो सरिता के इंटरव्यू लेने के लिए आये. लेकिन सरिता ने ने सभी को इंटरव्यू देने से मन कर दिया. क्योंकि वो इन सब चक्करो में न पढ़कर जल्द से जल्द उस ड्राइवर से इनफार्मेशन निकल कर बच्चा सिंह को पकड़ना चाहती थी.

सरिता को इतना तो समझ गयी थी की उसकी इस हरकत के बाद बच्चा सिंह और भी ज्यादा चौकन्ना हो गया होगा. उसे पकड़ने के लिए सरिता को अब और भी ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी. अगर उसने जल्द से जल्द ये मटर ख़त्म नहीं किया तो ऊपर से प्रेशर आने शुरू हो जायेंगे. और उन लोगो को छोड़ने का फरमान जारी कर दिया जायेगा जिसे इतनी मसक्कत के बाद उसने पकड़ा था.

सरिता ने अमित और विकास की मदद से ड्राइवर को जेल में दाल दिया था. सरिता अमित और विकास के साथ उस ड्राइवर के सामने कड़ी हुई थी.

सरिता- कहा लेकर जा रहे थे तुम उन लड़कियों को. किसके लिए काम करते हो तुम.

सरिता की बात सुनकर ड्राइवर ने अपना मुंह नहीं खोला तो सरिता ने फिर से कहा.

सरिता- मैंने पुछा किसके लिए काम करते हो तुम और उन लड़कियों को लेकर कहा जा रहे थे तुम.

ड्राइवर- तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी मैडम मुझे पकड़कर. गलत आदमी से पन्गा ले लिया है तुमने..

सरिता को उसकी बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया और सरिता ने एक जोर की लत उसके पेट पर मरी. ड्राइवर दर्द से बिलबिला उठा और अपना पेट पकड़कर बैठ गया. सरिता ने गुस्से से कहा.

सरिता- बकवास बंद कर अपनी. तुझे क्या लगता है की ये धमकी देकर तू छूट जायेगा. तो ये तेरी सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है. मैं ऐसा कभी होने नहीं दूँगी. तुझे तो मैं ऐसे सजा दिलवाऊंगी की तेरी साडी जिंदगी जेल में hi गुजरेगी. दुसरे की जान से खेलने वाले अपनी जान की फिकर कर. तू बस मुझे बच्चा सिंह का पता बता दे मैं तेरी सजा काम करवा दूँगी.

ड्राइवर- (रहष्यमयी मुस्कान के साथ) तुम्हे जो करना हो कर लो मैडम, लेकिन मैं तुम्हे बच्चा सिंह के बारे में कोई जानकारी नहीं दूंगा. और तुम्हे क्या लगता है की तुम मुझे ज्यादा दिन यहाँ पर रोक पायेगी. तेरे बाप दादा खुद आएंगे मुझे छुड़वाने के लिए.

सरिता को भी समझ में आ गया की ये इतनी आसानी से कुछः भी नहीं बताने वाला. तभी सरिता के केबिन में रखा फ़ोन बजने लगा. सरिता ने उसे इग्नोर करते हुवे अपनी पूछताछ जारी राखी. एकक के बाद दूसरा. दुसरे के बाद तीसरा फ़ोन बजा तो ड्राइवर ने कहा.

ड्राइवर- जाओ मैडम. आपके बाप दादा का hi फ़ोन आया होगा. जाकर फ़ोन उठाइये.

सरिता- (अपने मन में) मुझे पता है की ये फ़ोन तुम सब कुत्तो को छोड़ने के लिए फरमान जारी करने के लिए आया होगा. लेकिन मैं तुम लोगो को इतनी आसानी से छोड़ने वाली नहीं हूँ. मैं तुम लोगो को सजा तो दिलवाकर hi रहूंगी. (कौशल से) कौसल मैं जा रही हूँ फ़ोन देखने. तब तक तुम इन जनाब की अचे से खातिरदारी करना. कोई कमी नहीं रहनी चाहिए इनकी खरीर्दारी में.

आखिर इनको भी तो पता चले की सभी ठाणे की खातिरदारी क्यों नहीं करवाना चाहते. अब इन्हे इस खातिरदारी का मौका मिला है तो इनकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं आणि चाहिए. नहीं तो बाद में ये हमसे शिकायत कर सकते हैं की मैं आपके ठाणे में रहा और आपने मेरी खातिरदारी नहीं की.

इतना कहकर सरिता अपने केबिन में जाती है.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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