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अपडेट- 30
सरिता ऑटो से अपने क्वार्टर पहुंची और फ्रेश वगैरह होकर पस के लिए निकल गयी. पस में आज रोज़ की अपेक्षाः आज ज्यादा भीड़ थी. पता चला की मीडिया वाले फिर से सरिता का इंटरव्यू लेना चाहते हैं. जिससे उनके चैनल की टॉप बढ़ जाये. सरिता को लिम्लिते में रहना अच्छा नहीं लगता था इसलिए उसने सभी को ये कहकर जाने के लिए बोल दिया.
सरिता- मैंने जो भी किया उसे अपना फ़र्ज़ समझ कर किया. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके लिए मुझको इतनी तवज्जो दी जा रही है. समाज में सभी को एक दुसरे की मदद करनी चाहिए. हर जगह पुलिस नहीं पहुंच सकती. इसलिए आप लोगो की भी कुछ नैतिक जिम्मेदारी है. जिसके लिया आपका भी कुछ फ़र्ज़ बनता है.
मेरी न्यूज़ दिखने के बजाय आप देश में बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या के बारे में न्यूज़ दिखाइए. रोज बलात्कार की घटनाओं घाट रही हैं उसपर लगाम लगाने के लिए प्रशाशन और जनता को जागरूक काटने की न्यूज़ दिखाइए. महिलाओ का सम्मान करना चाहिए ऐसी न्यूज़ दिखाइए. मेरी न्यूज़ दिखाकर आपको कुछ हासिल होने वाला नहीं है. इसलिए आप सब मेहरबानी करके यहाँ से चले जाइये और मुझे अपना काम करने दीजिये.
मीडिया वालो के चले जाने के बाद सरिता अपने केबिन में चली गयी. थोड़ी देर बाद उसे रावत सर ने अपने पास बुलाया और कहा.
रावत सर- ये सब क्या है सरिता बेटी. ये सब करने की क्या जरूरत थी.
सरिता- जरूरत थी सर, कभी न कभी तो इन सब पर लग्गम लगाने की जरूरत थी hi. हम कब तक ऐसे हाथ पर हाथ धरे हुवे बैठे रहते. हमारे इसी अटूटते का वो फायदा उठाते हैं. उन्हें लगता है की पुलिस वाले किसी काम के नहीं हैं. वो उन लोगो का कुछ नहीं बिगड़ सकते. वो समझते हैं की वो चाहे कुछ भी कर जाये. पुलिस उनका कुछ नहीं कर पायेगी. पुलिस तो उनकी जेब में है.
उनका जब मन चाहेगा उनसे काम निकलवा लेंगे. लेकिन उनकी सोच गलत है पुलिस इतनी निकम्मी भी नहीं है की वो कुछ भी कर ले और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे.
रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल सही है बेटी. पुलिस को उनपर लगाम लगनी चाहिए, लेकिन अभी तुम नयी हो और इन सब मामलों से अनजान हो, तुम अभी कुछ दिन पहले hi आयी हो और हमें सैलून का अनुभव है इस मामले में.
सरिता- मैं मानती हूँ सर की मैं अभी आप लोगो की तरह अनुभवी नहीं हूँ. पर जो गलत होता है वो हमेशा गलत होता है. और मेरी आँखों के सामने जो गलत होता है या गलत हो रहा है मैं उसे रोकने की पूरी कोशिश करुँगी. अब चने मुझे इसमें कामयाबी मिले या नाकामी. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल ठीक है बेटी. लेकिन ऐसे तो तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है.
सरिता- मुझे उसकी कोई परवाह नहीं है सर. आप नहीं जानते सर ये लोग ऊपर से दिखने में जीतनेय खूंखार दीखते हैं अंदर से उतने hi बुजदिल होते हैं. अगर हम अपनी पर आ जाये तो ये लोग 1 मिनट भी हमारा सामना नहीं कर सकते.
रावत सर- तुम बिलकुल ठीक कह रही हो बेटी. पुलिस अगर अपनी पर आ जाये तो सरे गुंडे एक मिनट में मैदान छोड़कर भाग जाएं. तुमने जो अभी तक किया सो किया, लेकिन आगे जो भी करना थोड़ा सोच विचार कर और सावधानी से करना.
सरिता- ठीक है सर. वैसे सर एक बात और पूछनी थी. वो जिस एरिया में पुलिस को तैनात करना था उसकी परमिशन मिल गयी है या नहीं मिली अभी.
रावत सर भी जानते थे की उससे बच्चा सिंह के मामले में कुछ भी बात करने का कोई फायदा नहीं है. सारिता जब धीरे धीरे यहाँ के माहौल को जानेगी तो सब समझ जाएगी, इसलिए रावत सर ने आगे इस मुद्दे पर बात नहीं की बस सरिता के पूछे गए सवाल का जवाब उन्होंने दिया.
रावत सर- हाँ. सप सर ने परमिशन दे दी है. तुम तुरंत कुछ आदमियों को तैनात करवा दो वह पर.
सरिता- ोकक सर. थैंक यू. अब मैं जा रही हूँ. बहुत काम पेंडिंग है सर.
इतना बोलकर सरिता अपने केबिन में चली गयी और अपना काम करने लगी. सरिता ने जिन लोगो को पकड़ा था उनसे बच्चा सिंह का पता उगलवाने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था. सरिता ने फिर कुछ सोचते हुवे अपने आप से hi कहा.
सरिता- (मन में) ये बच्चा सिंह तो बहुत पहुंची हुई चीज़ है, इसने अब तक कोई एक्शन भी नहीं लिया. लगता है ये अंदर ग्राउंड हो गया है. अभी मुझे भी कुछ दिन शांत हो जाना चाहिए. कभी न कभी तो वो सामने आएगा hi. तब देखती हूँ मैं इसको. ये सब पुलिस का इतना टॉर्चर सह रहे हैं लेकिन अपना मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं. लगता है बच्चा सिंह की पकड़ बहुत ऊपर तक है. िसिये ये डार्क इ कारन अपना मुंह बंद किये हुवे हैं. अभी मुझे भी शांति से काम लेना पड़ेगा.
इधर निश्छल ने मोहित और जावेद को फ़ोन करके एक जगह मिलने के लिए बुलाता है. निस्चल का फ़ोन आने से दोनों बहुत डरे हुवे थे. दोनों को दर था की उस दिन के बाद से निश्छल ने उनको फ़ोन नही किया था. कही वो दोनों को सजा दें ेके लिए तो नहीं बुला रहे हैं. दोनों निश्छल की बताई हुई जगह पर पहुंचे तो निश्छल वह पहले से hi मौजूद था. उसे देखते hi दोनों ने उसे सेलुटे किया.
दोनों- जय हिन्द सर.
निश्छल- जय हिन्द. आ गए तुम दोनों. मैं तुम दोनों से पिछले कई दिन से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन समय hi नहीं मिल प् रहा था. आज फ़िनली समय मिल hi गया. और बताइये आप दोनों क्या हाल हैं आपके.
मोहित- देखिये सर अगर आप उस बात के लिए हमसे नाराज़ हैं और सजा देना चाहते हैं तो सजा केवल मुझको hi दीजिये. मैडम को में hi सबकुछ बताया है. इसमें जावेद की कोई गलती नहीं है.
मोहित ने ये बात एक hi साँस में निस्चल से कह दी. मोहित की बात सुनकर निश्छल ने कहा.
निश्छल- अरे शांत रहो तुम मोहित. उस बात के लिए मैं तुम दोनों को कुछ नहीं बोलूंगा. जब वो मुझे चकमा दे सकती है तो फिर भी तुम लोग उसके सामने क्या टिकोगे.
निस्चल की बात सुनकर मोहित और जावेद एक दुसरे को देखने लगे. जावेद ने अपने हाँथ ऊपर हवा में उठाते हुवे कहा.
जावेद- हे खुदा. ये सरिता मैडम तो कितनी चालक हैं. मोहित तो मोहित. उन्होंने तो सर को भी नहीं छोड़ा.
निश्छल- (मुस्कुराते हुवे) अच्छा अब ये नौटंकी बंद करो तुम दोनों. मैंने जिस काम के लिए तुम दोनों को बुलाया है वो तो सुन लो. मैंने तुम दोनों की उस गलती को माफ़ कर दिया है और उसकी कोई सजा नहीं दे रहा हूँ, लेकिन अगर इस बार तुम दोनों से कोई चूक हुई तो समझ लेना मैं क्या करूँगा तुम दोनों के साथ.
मोहित- कोई गड़बड़ नहीं होगी सर. इस बार हम अपने काम में पूरी तरह समर्पित होकर करेंगे.
उसके बाद निश्छल ने दोनों से कुछ देर तक किसी मुद्दे पर बात की और दोनों की हिदायत देखर निष्काहल वह से चला गया. निश्छल के जाने के बाद जावेद ने मोहित से कहा.
जावेद- चलिए अब सर्कार और इस बार कोई गड़बड़ मत करियेगा. नहीं तो सर खटिया कड़ी कर देंगे हम दोनों की.
मोहित- (मुस्कुराते हुवे) ह्ह्हम्मम्मम. इस बात पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर्नेगे.
सरिता सैम तक पस के काम में उलझी रही और अपना काम ख़तम करने के बाद वो हॉस्पिटल चली गयी और. सभी बच्चो को डिस्चार्ज करवाकर उन्हें लेकर ंगो चली गयी. सवी को उसने पहले hi फ़ोन कर दिया था इसलिए वो ंगो में पहले से hi मौजूद थी. सभी बछिया ंगो पहुंचकर बहुत खुश थी. अक्कू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.
सभी बच्चियों को ंगो में छोड़ने के बाद कुछ देर तक सवी से बात करने के बाद रात के लगभग 10-10.30 पर सरिता अपने क्वार्टर की तरफ निकल गयी. क्वार्टर पर पहुंच कर फ्रेश होने के बाद सरिता ने अपने लिए कॉफ़ी बनायीं और आँगन में राखी कुर्सी पर बैठकर कॉफ़ी पिने लगी. तभी उनका फ़ोन बजने लगा. सरिता ने फ़ोन देखा तो वो मनीषा का फ़ोन था. सरिता ने फ़ोन उठाया.
सरिता- Hello मनीषा.
मनीषा- हे दिदिया. कैसी हो आप.
सरिता- मैं अच्छी हूँ. तुम बताओ अपना.
मनीषा- (उदास होकर) ठीक hi हूँ मैं भी.
सरिता- क्या हुवा मेरी मनीषा को. इतना उदास क्यों है.
मनीषा- क्या करू दिदिया. खुश राहु क्या. एक तो तुम अपना बर्थडे भी हमारे साथ नहीं मन रही हो. ऊपर से पूछ रही हो की मैं उदास क्यों हूँ.
सरिता- अच्छा, इसलिए मेरी मनीषा उदास है. वैसे तुझे उदास होने की जरूरत नहीं है. मैंने छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दाल दिया है. शायद 1 हफ्ते में मैं घर आ जॉन.
मनीषा- क्या फायदा दिदिया. तुम्हारा जन्मदिन तो कल है न. तो तुम एक हफ्ते बाद आकर क्या करोगी. रहने दो तुम आने के लिए.
सरिता- तो तुम्हे क्या लगता है की मैं अपना जन्मदिन सेलेबराते करने के लिए आ रही हूँ. नहीं. मुझे तुम्हारी और मम्मी पापा की बहुत याद आती है इसलिए मैं मिलने के लिए आ रही हूँ.
मनीषा- अरे वह. तुमको तो बहुत जल्दी हम लोगो की याद आ गयी दिदिया.
सरिता- अच्छा चुप कर अब. नहीं तो बहुत पिटेगी मुझसे तू.
मनीषा- अच्छा ये सब छोडो दिदिया. तुम्हे याद है न की हम लोग बर्थडे पर क्या क्या करते हैं.
सरिता- हाँ मेरी माँ. मुझे सब याद है. मुझे आते समय सबकी लिए गिफ्ट लेकर आना है. हमारे यहाँ पर उल्टा रिवाज़ है. बर्थडे पर गिफ्ट मिलता नहीं है बल्कि बर्थडे के दिन गिफ्ट दिया जाता है.
मनीषा- वह वहहह इंस्पेक्टर साहिबा. देखा मेरी सांगत में रहकर तुम्हारा दिमाग कितनी तेज़ी से काम करता है..
सरिता- हैं दादी अम्मा. अगर अभी तुम मेरे सामने होती तो एक कण के निचे लगाती तो सही हो जाती तुम.
मनीषा- क्या यार दिदिया. हर समय मरने की hi बाते करती रहती हो. जैसे लग hi रहा तुम लेडी डॉन हो कोई इंस्पेक्टर नहीं हो तुम.
सरिता- अच्छा चल बस कर अब. बहुत बाते करने लगी हो तुम अब. ये सब छोड़. ये बता मम्मी पापा सब कैसे हैं.
मनीषा- सब बहुत अच्छे हैं और तुमको बहुत याद करते हैं. कल तुम्हारा जन्मदिन है तो मान तुम्हे बहुत याद कर रही हैं.
सरिता- मुझे भी माँ पापा की बहुत याद आती है. मैं जल्दी hi आती हूँ मान पापा से मिलने के लिए.
मनीषा- ठीक है दिदिया. अब मैं फ़ोन रखती हूँ. रात को ठीक 12.00 बजे वीडियो कॉल करुँगी. सो मत जाना तुम.
सरिता- ठीक है. मैं इंतज़ार करुँगी.
इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया. अभी वो फ़ोन रखती hi है की अचानक से लाइट कट हो गयी. लाइट कट होने के साथ hi कुछ निचे गिरने की आवाज़ तंत्र की आयी. जिसे सुनकर सरिता ने मन में hi कहा.
सरिता- (मन में) इस लाइट को भी अभी जाना था और ये क्या गिरने की आवाज़ आयी. चलकर देखती हूँ.
यही सोचकर सरिता ने अपना मोबाइल कुर्सी पर रख दिया और उस तरफ चली गयी जिस तरफ से उसे आवाज़ आयी थी. जैसे hi वह उस कमरे के पास पहुंची तभी किसी ने उसे पीछे से दबोच लिया और उसका हाँथ पकड़कर अपनी तरफ पीठ के बल खींच लिया. जिसके कारन वो उस सख्स के साइन से पीठ के बल चिपक गयी. जैसे hi उस सख्स ने उसे खींचा वो चिल्लाने hi जा रही थी की तभी उस सख्स ने अपना हाँथ आगे बढाकर उनके मुंह पर रखकर उसकी चीख को दबा दिया.
सरिता हस्त परैड थी की ये कौन हो सकता है जो इतनी रात को उसके कमरे में आकर उसे पकड़ रखा है. सरिता उसे धक्का देने hi वाली होती है की वो सख्स सपना होंठ सरिता के कानो के पास लेकर धीरे से बोलता है.
सख्स- आवाज़ मत करना. मैं निश्छल हूँ. मुझे पता चला है की 2-3 लोग तुम्हारे घर में घुस चुके हैं और तुम्हे नुकसान पहुंचना चाहते हैं. मैं अपना हाँथ तुम्हारे मुंह से हटा रहा हूँ. प्ल्ज़ तुम चिल्लाना बिलकुल भी मत नहीं तो उन्हें पता चल जायेगा.
लेकिन यहाँ एक अजीब बात ये हो गयी की जब निश्छल अपना होंठ सरिता के कण के पास लेकर उसे सब बता रहा था. तब दो चार शब्द बोलने के बाद उसका होंठ सरिता के कण को टच कर गया. जिसके कारन सरिता एक बूत बैंकर कड़ी रह गयी. जैसे जैसे निश्छल सरिता के कण में बोल रहा था. वैसे वैसे सरिता के शरीर में अजीब सी सनसनाहट दौड़ने लगी.
उसके सांसो की छुवन से सरिता सिहरने लगी. सरिता के रोंगटे खड़े हो गए निस्चल की गरम सांसो और उसके होंठो की छुवन से. सरिता ने बस ‘’मैं निश्छल हूँ’’ इतना hi सुना. उसके बाद तो सरिता अलग hi दुनिया में पहुंच गयी. निश्छल ने अपना हन्हट उसके मुंह से हटा लिया था, परनतु उसका एक हाँथ अभी भी सरिता के पेट पर था. मुंह से हाँथ हटने के बाद भी सरिता अभी भी बूत बानी कड़ी थी, उसे देखकर निश्छल ने कहा.
निस्चल- तुम ठीक तो हो न मिस जोशी.
लेकिन सरिता को कोई होश नहीं था की वह क्या बोल रहा है. ये देखकर निस्चल ने अपना हाँथ उसके पेट से हटाया और दोनों हाँथ उसके कंधे पर रखकर उसे झकझोरते हुवे बोलै.
निश्छल- सरिता . तुम ठीक तो हो न. तुम सुन रही हो जो मैंने तुमसे कहा.
सरिता (नींद से जागते हुवे) हां……… आए….. अआप इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हैं.
निश्छल- (फुसफुसाते हुवे) धीरे बोलो सरिता. मैंने अभी तुमसे जो कुछ भी कहा वो तुम्हे सुनाई नहीं दिया क्या.
सरिता- (चिल्लाकर) मैं क्यों धीरे बोलू. ये मेरा घर है. आप इतनी रात को मेरे घर में क्या कर रहे हैं. मुझे आपकी नियत पर शक हो रहा है.
निश्छल- (फुसफुसाकर) तुम कुछ भ्हीइ………….
अभी निश्छल ने इतना hi कहा था की लाइट आ गयी. लाइट आने के बाद सरिता और निश्छल ने देखा की सामने दो आदमी खड़े थे. जिनमे से एक के हाथ में गन थी और दुसरे के हाँथ में डंडा था. सरिता और निश्छल कही बहार भाग भी नहीं सकते थे. क्योंकि दरवज़े के सामने वो दोनों आदमी खड़े थे. पीछे की तरफ दीवार थी. अब दोनों पूरी तरफ से कमरे में फंस चुके थे. निश्छल ने अपने सर Pit-te हुवे कहा.
निस्चल- तुमने मेरी बात न man-ne की कसम खा रख है क्या. कभी तो मेरी बात मान लिया करो. अब भुगतो.
सरिता को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है. उसे तो बस यही दिख रहा था की वो दो आदमी उसके सामने हाँथ में गन और डंडा लिए खड़े हुसे हैं. तभी सरिता को अपनी स्थिति का बहन हुवा तो वो निस्चल का हाथ अपने कंधे से हटाया और us-se अलग कड़ी होते हुवे बोली.
सरिता- कौन हो तुम लोग. तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो. और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की. तुम्हे पता है की तुम किसके घर में घुसे हो.
पहला आदमी- हमको पता है की हम किसके घर में घुसे हैं. मैंने तो सोचा था की तू भाग गयी होगी, लेकिन यहाँ तो तुम दोनों का रोमांस चल रहा है. जिसे शायद हम दोनों ने डिस्टर्ब कर दिया है, लेकिन कोई नहीं तुम दोनों चिंता मत करो. तुम दोनों अपना रोमांस ऊपर जाकर कर कंटिन्यू रखना. अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार हो जाओ. हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.
इतना कहकर वो आदमी अपने दुसरे साथी को देखकर हंसने लगा.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
सरिता ऑटो से अपने क्वार्टर पहुंची और फ्रेश वगैरह होकर पस के लिए निकल गयी. पस में आज रोज़ की अपेक्षाः आज ज्यादा भीड़ थी. पता चला की मीडिया वाले फिर से सरिता का इंटरव्यू लेना चाहते हैं. जिससे उनके चैनल की टॉप बढ़ जाये. सरिता को लिम्लिते में रहना अच्छा नहीं लगता था इसलिए उसने सभी को ये कहकर जाने के लिए बोल दिया.
सरिता- मैंने जो भी किया उसे अपना फ़र्ज़ समझ कर किया. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके लिए मुझको इतनी तवज्जो दी जा रही है. समाज में सभी को एक दुसरे की मदद करनी चाहिए. हर जगह पुलिस नहीं पहुंच सकती. इसलिए आप लोगो की भी कुछ नैतिक जिम्मेदारी है. जिसके लिया आपका भी कुछ फ़र्ज़ बनता है.
मेरी न्यूज़ दिखने के बजाय आप देश में बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या के बारे में न्यूज़ दिखाइए. रोज बलात्कार की घटनाओं घाट रही हैं उसपर लगाम लगाने के लिए प्रशाशन और जनता को जागरूक काटने की न्यूज़ दिखाइए. महिलाओ का सम्मान करना चाहिए ऐसी न्यूज़ दिखाइए. मेरी न्यूज़ दिखाकर आपको कुछ हासिल होने वाला नहीं है. इसलिए आप सब मेहरबानी करके यहाँ से चले जाइये और मुझे अपना काम करने दीजिये.
मीडिया वालो के चले जाने के बाद सरिता अपने केबिन में चली गयी. थोड़ी देर बाद उसे रावत सर ने अपने पास बुलाया और कहा.
रावत सर- ये सब क्या है सरिता बेटी. ये सब करने की क्या जरूरत थी.
सरिता- जरूरत थी सर, कभी न कभी तो इन सब पर लग्गम लगाने की जरूरत थी hi. हम कब तक ऐसे हाथ पर हाथ धरे हुवे बैठे रहते. हमारे इसी अटूटते का वो फायदा उठाते हैं. उन्हें लगता है की पुलिस वाले किसी काम के नहीं हैं. वो उन लोगो का कुछ नहीं बिगड़ सकते. वो समझते हैं की वो चाहे कुछ भी कर जाये. पुलिस उनका कुछ नहीं कर पायेगी. पुलिस तो उनकी जेब में है.
उनका जब मन चाहेगा उनसे काम निकलवा लेंगे. लेकिन उनकी सोच गलत है पुलिस इतनी निकम्मी भी नहीं है की वो कुछ भी कर ले और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे.
रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल सही है बेटी. पुलिस को उनपर लगाम लगनी चाहिए, लेकिन अभी तुम नयी हो और इन सब मामलों से अनजान हो, तुम अभी कुछ दिन पहले hi आयी हो और हमें सैलून का अनुभव है इस मामले में.
सरिता- मैं मानती हूँ सर की मैं अभी आप लोगो की तरह अनुभवी नहीं हूँ. पर जो गलत होता है वो हमेशा गलत होता है. और मेरी आँखों के सामने जो गलत होता है या गलत हो रहा है मैं उसे रोकने की पूरी कोशिश करुँगी. अब चने मुझे इसमें कामयाबी मिले या नाकामी. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल ठीक है बेटी. लेकिन ऐसे तो तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है.
सरिता- मुझे उसकी कोई परवाह नहीं है सर. आप नहीं जानते सर ये लोग ऊपर से दिखने में जीतनेय खूंखार दीखते हैं अंदर से उतने hi बुजदिल होते हैं. अगर हम अपनी पर आ जाये तो ये लोग 1 मिनट भी हमारा सामना नहीं कर सकते.
रावत सर- तुम बिलकुल ठीक कह रही हो बेटी. पुलिस अगर अपनी पर आ जाये तो सरे गुंडे एक मिनट में मैदान छोड़कर भाग जाएं. तुमने जो अभी तक किया सो किया, लेकिन आगे जो भी करना थोड़ा सोच विचार कर और सावधानी से करना.
सरिता- ठीक है सर. वैसे सर एक बात और पूछनी थी. वो जिस एरिया में पुलिस को तैनात करना था उसकी परमिशन मिल गयी है या नहीं मिली अभी.
रावत सर भी जानते थे की उससे बच्चा सिंह के मामले में कुछ भी बात करने का कोई फायदा नहीं है. सारिता जब धीरे धीरे यहाँ के माहौल को जानेगी तो सब समझ जाएगी, इसलिए रावत सर ने आगे इस मुद्दे पर बात नहीं की बस सरिता के पूछे गए सवाल का जवाब उन्होंने दिया.
रावत सर- हाँ. सप सर ने परमिशन दे दी है. तुम तुरंत कुछ आदमियों को तैनात करवा दो वह पर.
सरिता- ोकक सर. थैंक यू. अब मैं जा रही हूँ. बहुत काम पेंडिंग है सर.
इतना बोलकर सरिता अपने केबिन में चली गयी और अपना काम करने लगी. सरिता ने जिन लोगो को पकड़ा था उनसे बच्चा सिंह का पता उगलवाने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था. सरिता ने फिर कुछ सोचते हुवे अपने आप से hi कहा.
सरिता- (मन में) ये बच्चा सिंह तो बहुत पहुंची हुई चीज़ है, इसने अब तक कोई एक्शन भी नहीं लिया. लगता है ये अंदर ग्राउंड हो गया है. अभी मुझे भी कुछ दिन शांत हो जाना चाहिए. कभी न कभी तो वो सामने आएगा hi. तब देखती हूँ मैं इसको. ये सब पुलिस का इतना टॉर्चर सह रहे हैं लेकिन अपना मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं. लगता है बच्चा सिंह की पकड़ बहुत ऊपर तक है. िसिये ये डार्क इ कारन अपना मुंह बंद किये हुवे हैं. अभी मुझे भी शांति से काम लेना पड़ेगा.
इधर निश्छल ने मोहित और जावेद को फ़ोन करके एक जगह मिलने के लिए बुलाता है. निस्चल का फ़ोन आने से दोनों बहुत डरे हुवे थे. दोनों को दर था की उस दिन के बाद से निश्छल ने उनको फ़ोन नही किया था. कही वो दोनों को सजा दें ेके लिए तो नहीं बुला रहे हैं. दोनों निश्छल की बताई हुई जगह पर पहुंचे तो निश्छल वह पहले से hi मौजूद था. उसे देखते hi दोनों ने उसे सेलुटे किया.
दोनों- जय हिन्द सर.
निश्छल- जय हिन्द. आ गए तुम दोनों. मैं तुम दोनों से पिछले कई दिन से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन समय hi नहीं मिल प् रहा था. आज फ़िनली समय मिल hi गया. और बताइये आप दोनों क्या हाल हैं आपके.
मोहित- देखिये सर अगर आप उस बात के लिए हमसे नाराज़ हैं और सजा देना चाहते हैं तो सजा केवल मुझको hi दीजिये. मैडम को में hi सबकुछ बताया है. इसमें जावेद की कोई गलती नहीं है.
मोहित ने ये बात एक hi साँस में निस्चल से कह दी. मोहित की बात सुनकर निश्छल ने कहा.
निश्छल- अरे शांत रहो तुम मोहित. उस बात के लिए मैं तुम दोनों को कुछ नहीं बोलूंगा. जब वो मुझे चकमा दे सकती है तो फिर भी तुम लोग उसके सामने क्या टिकोगे.
निस्चल की बात सुनकर मोहित और जावेद एक दुसरे को देखने लगे. जावेद ने अपने हाँथ ऊपर हवा में उठाते हुवे कहा.
जावेद- हे खुदा. ये सरिता मैडम तो कितनी चालक हैं. मोहित तो मोहित. उन्होंने तो सर को भी नहीं छोड़ा.
निश्छल- (मुस्कुराते हुवे) अच्छा अब ये नौटंकी बंद करो तुम दोनों. मैंने जिस काम के लिए तुम दोनों को बुलाया है वो तो सुन लो. मैंने तुम दोनों की उस गलती को माफ़ कर दिया है और उसकी कोई सजा नहीं दे रहा हूँ, लेकिन अगर इस बार तुम दोनों से कोई चूक हुई तो समझ लेना मैं क्या करूँगा तुम दोनों के साथ.
मोहित- कोई गड़बड़ नहीं होगी सर. इस बार हम अपने काम में पूरी तरह समर्पित होकर करेंगे.
उसके बाद निश्छल ने दोनों से कुछ देर तक किसी मुद्दे पर बात की और दोनों की हिदायत देखर निष्काहल वह से चला गया. निश्छल के जाने के बाद जावेद ने मोहित से कहा.
जावेद- चलिए अब सर्कार और इस बार कोई गड़बड़ मत करियेगा. नहीं तो सर खटिया कड़ी कर देंगे हम दोनों की.
मोहित- (मुस्कुराते हुवे) ह्ह्हम्मम्मम. इस बात पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर्नेगे.
सरिता सैम तक पस के काम में उलझी रही और अपना काम ख़तम करने के बाद वो हॉस्पिटल चली गयी और. सभी बच्चो को डिस्चार्ज करवाकर उन्हें लेकर ंगो चली गयी. सवी को उसने पहले hi फ़ोन कर दिया था इसलिए वो ंगो में पहले से hi मौजूद थी. सभी बछिया ंगो पहुंचकर बहुत खुश थी. अक्कू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.
सभी बच्चियों को ंगो में छोड़ने के बाद कुछ देर तक सवी से बात करने के बाद रात के लगभग 10-10.30 पर सरिता अपने क्वार्टर की तरफ निकल गयी. क्वार्टर पर पहुंच कर फ्रेश होने के बाद सरिता ने अपने लिए कॉफ़ी बनायीं और आँगन में राखी कुर्सी पर बैठकर कॉफ़ी पिने लगी. तभी उनका फ़ोन बजने लगा. सरिता ने फ़ोन देखा तो वो मनीषा का फ़ोन था. सरिता ने फ़ोन उठाया.
सरिता- Hello मनीषा.
मनीषा- हे दिदिया. कैसी हो आप.
सरिता- मैं अच्छी हूँ. तुम बताओ अपना.
मनीषा- (उदास होकर) ठीक hi हूँ मैं भी.
सरिता- क्या हुवा मेरी मनीषा को. इतना उदास क्यों है.
मनीषा- क्या करू दिदिया. खुश राहु क्या. एक तो तुम अपना बर्थडे भी हमारे साथ नहीं मन रही हो. ऊपर से पूछ रही हो की मैं उदास क्यों हूँ.
सरिता- अच्छा, इसलिए मेरी मनीषा उदास है. वैसे तुझे उदास होने की जरूरत नहीं है. मैंने छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दाल दिया है. शायद 1 हफ्ते में मैं घर आ जॉन.
मनीषा- क्या फायदा दिदिया. तुम्हारा जन्मदिन तो कल है न. तो तुम एक हफ्ते बाद आकर क्या करोगी. रहने दो तुम आने के लिए.
सरिता- तो तुम्हे क्या लगता है की मैं अपना जन्मदिन सेलेबराते करने के लिए आ रही हूँ. नहीं. मुझे तुम्हारी और मम्मी पापा की बहुत याद आती है इसलिए मैं मिलने के लिए आ रही हूँ.
मनीषा- अरे वह. तुमको तो बहुत जल्दी हम लोगो की याद आ गयी दिदिया.
सरिता- अच्छा चुप कर अब. नहीं तो बहुत पिटेगी मुझसे तू.
मनीषा- अच्छा ये सब छोडो दिदिया. तुम्हे याद है न की हम लोग बर्थडे पर क्या क्या करते हैं.
सरिता- हाँ मेरी माँ. मुझे सब याद है. मुझे आते समय सबकी लिए गिफ्ट लेकर आना है. हमारे यहाँ पर उल्टा रिवाज़ है. बर्थडे पर गिफ्ट मिलता नहीं है बल्कि बर्थडे के दिन गिफ्ट दिया जाता है.
मनीषा- वह वहहह इंस्पेक्टर साहिबा. देखा मेरी सांगत में रहकर तुम्हारा दिमाग कितनी तेज़ी से काम करता है..
सरिता- हैं दादी अम्मा. अगर अभी तुम मेरे सामने होती तो एक कण के निचे लगाती तो सही हो जाती तुम.
मनीषा- क्या यार दिदिया. हर समय मरने की hi बाते करती रहती हो. जैसे लग hi रहा तुम लेडी डॉन हो कोई इंस्पेक्टर नहीं हो तुम.
सरिता- अच्छा चल बस कर अब. बहुत बाते करने लगी हो तुम अब. ये सब छोड़. ये बता मम्मी पापा सब कैसे हैं.
मनीषा- सब बहुत अच्छे हैं और तुमको बहुत याद करते हैं. कल तुम्हारा जन्मदिन है तो मान तुम्हे बहुत याद कर रही हैं.
सरिता- मुझे भी माँ पापा की बहुत याद आती है. मैं जल्दी hi आती हूँ मान पापा से मिलने के लिए.
मनीषा- ठीक है दिदिया. अब मैं फ़ोन रखती हूँ. रात को ठीक 12.00 बजे वीडियो कॉल करुँगी. सो मत जाना तुम.
सरिता- ठीक है. मैं इंतज़ार करुँगी.
इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया. अभी वो फ़ोन रखती hi है की अचानक से लाइट कट हो गयी. लाइट कट होने के साथ hi कुछ निचे गिरने की आवाज़ तंत्र की आयी. जिसे सुनकर सरिता ने मन में hi कहा.
सरिता- (मन में) इस लाइट को भी अभी जाना था और ये क्या गिरने की आवाज़ आयी. चलकर देखती हूँ.
यही सोचकर सरिता ने अपना मोबाइल कुर्सी पर रख दिया और उस तरफ चली गयी जिस तरफ से उसे आवाज़ आयी थी. जैसे hi वह उस कमरे के पास पहुंची तभी किसी ने उसे पीछे से दबोच लिया और उसका हाँथ पकड़कर अपनी तरफ पीठ के बल खींच लिया. जिसके कारन वो उस सख्स के साइन से पीठ के बल चिपक गयी. जैसे hi उस सख्स ने उसे खींचा वो चिल्लाने hi जा रही थी की तभी उस सख्स ने अपना हाँथ आगे बढाकर उनके मुंह पर रखकर उसकी चीख को दबा दिया.
सरिता हस्त परैड थी की ये कौन हो सकता है जो इतनी रात को उसके कमरे में आकर उसे पकड़ रखा है. सरिता उसे धक्का देने hi वाली होती है की वो सख्स सपना होंठ सरिता के कानो के पास लेकर धीरे से बोलता है.
सख्स- आवाज़ मत करना. मैं निश्छल हूँ. मुझे पता चला है की 2-3 लोग तुम्हारे घर में घुस चुके हैं और तुम्हे नुकसान पहुंचना चाहते हैं. मैं अपना हाँथ तुम्हारे मुंह से हटा रहा हूँ. प्ल्ज़ तुम चिल्लाना बिलकुल भी मत नहीं तो उन्हें पता चल जायेगा.
लेकिन यहाँ एक अजीब बात ये हो गयी की जब निश्छल अपना होंठ सरिता के कण के पास लेकर उसे सब बता रहा था. तब दो चार शब्द बोलने के बाद उसका होंठ सरिता के कण को टच कर गया. जिसके कारन सरिता एक बूत बैंकर कड़ी रह गयी. जैसे जैसे निश्छल सरिता के कण में बोल रहा था. वैसे वैसे सरिता के शरीर में अजीब सी सनसनाहट दौड़ने लगी.
उसके सांसो की छुवन से सरिता सिहरने लगी. सरिता के रोंगटे खड़े हो गए निस्चल की गरम सांसो और उसके होंठो की छुवन से. सरिता ने बस ‘’मैं निश्छल हूँ’’ इतना hi सुना. उसके बाद तो सरिता अलग hi दुनिया में पहुंच गयी. निश्छल ने अपना हन्हट उसके मुंह से हटा लिया था, परनतु उसका एक हाँथ अभी भी सरिता के पेट पर था. मुंह से हाँथ हटने के बाद भी सरिता अभी भी बूत बानी कड़ी थी, उसे देखकर निश्छल ने कहा.
निस्चल- तुम ठीक तो हो न मिस जोशी.
लेकिन सरिता को कोई होश नहीं था की वह क्या बोल रहा है. ये देखकर निस्चल ने अपना हाँथ उसके पेट से हटाया और दोनों हाँथ उसके कंधे पर रखकर उसे झकझोरते हुवे बोलै.
निश्छल- सरिता . तुम ठीक तो हो न. तुम सुन रही हो जो मैंने तुमसे कहा.
सरिता (नींद से जागते हुवे) हां……… आए….. अआप इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हैं.
निश्छल- (फुसफुसाते हुवे) धीरे बोलो सरिता. मैंने अभी तुमसे जो कुछ भी कहा वो तुम्हे सुनाई नहीं दिया क्या.
सरिता- (चिल्लाकर) मैं क्यों धीरे बोलू. ये मेरा घर है. आप इतनी रात को मेरे घर में क्या कर रहे हैं. मुझे आपकी नियत पर शक हो रहा है.
निश्छल- (फुसफुसाकर) तुम कुछ भ्हीइ………….
अभी निश्छल ने इतना hi कहा था की लाइट आ गयी. लाइट आने के बाद सरिता और निश्छल ने देखा की सामने दो आदमी खड़े थे. जिनमे से एक के हाथ में गन थी और दुसरे के हाँथ में डंडा था. सरिता और निश्छल कही बहार भाग भी नहीं सकते थे. क्योंकि दरवज़े के सामने वो दोनों आदमी खड़े थे. पीछे की तरफ दीवार थी. अब दोनों पूरी तरफ से कमरे में फंस चुके थे. निश्छल ने अपने सर Pit-te हुवे कहा.
निस्चल- तुमने मेरी बात न man-ne की कसम खा रख है क्या. कभी तो मेरी बात मान लिया करो. अब भुगतो.
सरिता को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है. उसे तो बस यही दिख रहा था की वो दो आदमी उसके सामने हाँथ में गन और डंडा लिए खड़े हुसे हैं. तभी सरिता को अपनी स्थिति का बहन हुवा तो वो निस्चल का हाथ अपने कंधे से हटाया और us-se अलग कड़ी होते हुवे बोली.
सरिता- कौन हो तुम लोग. तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो. और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की. तुम्हे पता है की तुम किसके घर में घुसे हो.
पहला आदमी- हमको पता है की हम किसके घर में घुसे हैं. मैंने तो सोचा था की तू भाग गयी होगी, लेकिन यहाँ तो तुम दोनों का रोमांस चल रहा है. जिसे शायद हम दोनों ने डिस्टर्ब कर दिया है, लेकिन कोई नहीं तुम दोनों चिंता मत करो. तुम दोनों अपना रोमांस ऊपर जाकर कर कंटिन्यू रखना. अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार हो जाओ. हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.
इतना कहकर वो आदमी अपने दुसरे साथी को देखकर हंसने लगा.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..