Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 9 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

अपडेट- 30

सरिता ऑटो से अपने क्वार्टर पहुंची और फ्रेश वगैरह होकर पस के लिए निकल गयी. पस में आज रोज़ की अपेक्षाः आज ज्यादा भीड़ थी. पता चला की मीडिया वाले फिर से सरिता का इंटरव्यू लेना चाहते हैं. जिससे उनके चैनल की टॉप बढ़ जाये. सरिता को लिम्लिते में रहना अच्छा नहीं लगता था इसलिए उसने सभी को ये कहकर जाने के लिए बोल दिया.

सरिता- मैंने जो भी किया उसे अपना फ़र्ज़ समझ कर किया. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके लिए मुझको इतनी तवज्जो दी जा रही है. समाज में सभी को एक दुसरे की मदद करनी चाहिए. हर जगह पुलिस नहीं पहुंच सकती. इसलिए आप लोगो की भी कुछ नैतिक जिम्मेदारी है. जिसके लिया आपका भी कुछ फ़र्ज़ बनता है.

मेरी न्यूज़ दिखने के बजाय आप देश में बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या के बारे में न्यूज़ दिखाइए. रोज बलात्कार की घटनाओं घाट रही हैं उसपर लगाम लगाने के लिए प्रशाशन और जनता को जागरूक काटने की न्यूज़ दिखाइए. महिलाओ का सम्मान करना चाहिए ऐसी न्यूज़ दिखाइए. मेरी न्यूज़ दिखाकर आपको कुछ हासिल होने वाला नहीं है. इसलिए आप सब मेहरबानी करके यहाँ से चले जाइये और मुझे अपना काम करने दीजिये.

मीडिया वालो के चले जाने के बाद सरिता अपने केबिन में चली गयी. थोड़ी देर बाद उसे रावत सर ने अपने पास बुलाया और कहा.

रावत सर- ये सब क्या है सरिता बेटी. ये सब करने की क्या जरूरत थी.

सरिता- जरूरत थी सर, कभी न कभी तो इन सब पर लग्गम लगाने की जरूरत थी hi. हम कब तक ऐसे हाथ पर हाथ धरे हुवे बैठे रहते. हमारे इसी अटूटते का वो फायदा उठाते हैं. उन्हें लगता है की पुलिस वाले किसी काम के नहीं हैं. वो उन लोगो का कुछ नहीं बिगड़ सकते. वो समझते हैं की वो चाहे कुछ भी कर जाये. पुलिस उनका कुछ नहीं कर पायेगी. पुलिस तो उनकी जेब में है.

उनका जब मन चाहेगा उनसे काम निकलवा लेंगे. लेकिन उनकी सोच गलत है पुलिस इतनी निकम्मी भी नहीं है की वो कुछ भी कर ले और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे.

रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल सही है बेटी. पुलिस को उनपर लगाम लगनी चाहिए, लेकिन अभी तुम नयी हो और इन सब मामलों से अनजान हो, तुम अभी कुछ दिन पहले hi आयी हो और हमें सैलून का अनुभव है इस मामले में.

सरिता- मैं मानती हूँ सर की मैं अभी आप लोगो की तरह अनुभवी नहीं हूँ. पर जो गलत होता है वो हमेशा गलत होता है. और मेरी आँखों के सामने जो गलत होता है या गलत हो रहा है मैं उसे रोकने की पूरी कोशिश करुँगी. अब चने मुझे इसमें कामयाबी मिले या नाकामी. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

रावत सर- तुम्हारी बात बिलकुल ठीक है बेटी. लेकिन ऐसे तो तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है.

सरिता- मुझे उसकी कोई परवाह नहीं है सर. आप नहीं जानते सर ये लोग ऊपर से दिखने में जीतनेय खूंखार दीखते हैं अंदर से उतने hi बुजदिल होते हैं. अगर हम अपनी पर आ जाये तो ये लोग 1 मिनट भी हमारा सामना नहीं कर सकते.

रावत सर- तुम बिलकुल ठीक कह रही हो बेटी. पुलिस अगर अपनी पर आ जाये तो सरे गुंडे एक मिनट में मैदान छोड़कर भाग जाएं. तुमने जो अभी तक किया सो किया, लेकिन आगे जो भी करना थोड़ा सोच विचार कर और सावधानी से करना.

सरिता- ठीक है सर. वैसे सर एक बात और पूछनी थी. वो जिस एरिया में पुलिस को तैनात करना था उसकी परमिशन मिल गयी है या नहीं मिली अभी.

रावत सर भी जानते थे की उससे बच्चा सिंह के मामले में कुछ भी बात करने का कोई फायदा नहीं है. सारिता जब धीरे धीरे यहाँ के माहौल को जानेगी तो सब समझ जाएगी, इसलिए रावत सर ने आगे इस मुद्दे पर बात नहीं की बस सरिता के पूछे गए सवाल का जवाब उन्होंने दिया.

रावत सर- हाँ. सप सर ने परमिशन दे दी है. तुम तुरंत कुछ आदमियों को तैनात करवा दो वह पर.

सरिता- ोकक सर. थैंक यू. अब मैं जा रही हूँ. बहुत काम पेंडिंग है सर.

इतना बोलकर सरिता अपने केबिन में चली गयी और अपना काम करने लगी. सरिता ने जिन लोगो को पकड़ा था उनसे बच्चा सिंह का पता उगलवाने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था. सरिता ने फिर कुछ सोचते हुवे अपने आप से hi कहा.

सरिता- (मन में) ये बच्चा सिंह तो बहुत पहुंची हुई चीज़ है, इसने अब तक कोई एक्शन भी नहीं लिया. लगता है ये अंदर ग्राउंड हो गया है. अभी मुझे भी कुछ दिन शांत हो जाना चाहिए. कभी न कभी तो वो सामने आएगा hi. तब देखती हूँ मैं इसको. ये सब पुलिस का इतना टॉर्चर सह रहे हैं लेकिन अपना मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं. लगता है बच्चा सिंह की पकड़ बहुत ऊपर तक है. िसिये ये डार्क इ कारन अपना मुंह बंद किये हुवे हैं. अभी मुझे भी शांति से काम लेना पड़ेगा.

इधर निश्छल ने मोहित और जावेद को फ़ोन करके एक जगह मिलने के लिए बुलाता है. निस्चल का फ़ोन आने से दोनों बहुत डरे हुवे थे. दोनों को दर था की उस दिन के बाद से निश्छल ने उनको फ़ोन नही किया था. कही वो दोनों को सजा दें ेके लिए तो नहीं बुला रहे हैं. दोनों निश्छल की बताई हुई जगह पर पहुंचे तो निश्छल वह पहले से hi मौजूद था. उसे देखते hi दोनों ने उसे सेलुटे किया.

दोनों- जय हिन्द सर.

निश्छल- जय हिन्द. आ गए तुम दोनों. मैं तुम दोनों से पिछले कई दिन से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन समय hi नहीं मिल प् रहा था. आज फ़िनली समय मिल hi गया. और बताइये आप दोनों क्या हाल हैं आपके.

मोहित- देखिये सर अगर आप उस बात के लिए हमसे नाराज़ हैं और सजा देना चाहते हैं तो सजा केवल मुझको hi दीजिये. मैडम को में hi सबकुछ बताया है. इसमें जावेद की कोई गलती नहीं है.

मोहित ने ये बात एक hi साँस में निस्चल से कह दी. मोहित की बात सुनकर निश्छल ने कहा.

निश्छल- अरे शांत रहो तुम मोहित. उस बात के लिए मैं तुम दोनों को कुछ नहीं बोलूंगा. जब वो मुझे चकमा दे सकती है तो फिर भी तुम लोग उसके सामने क्या टिकोगे.

निस्चल की बात सुनकर मोहित और जावेद एक दुसरे को देखने लगे. जावेद ने अपने हाँथ ऊपर हवा में उठाते हुवे कहा.

जावेद- हे खुदा. ये सरिता मैडम तो कितनी चालक हैं. मोहित तो मोहित. उन्होंने तो सर को भी नहीं छोड़ा.

निश्छल- (मुस्कुराते हुवे) अच्छा अब ये नौटंकी बंद करो तुम दोनों. मैंने जिस काम के लिए तुम दोनों को बुलाया है वो तो सुन लो. मैंने तुम दोनों की उस गलती को माफ़ कर दिया है और उसकी कोई सजा नहीं दे रहा हूँ, लेकिन अगर इस बार तुम दोनों से कोई चूक हुई तो समझ लेना मैं क्या करूँगा तुम दोनों के साथ.

मोहित- कोई गड़बड़ नहीं होगी सर. इस बार हम अपने काम में पूरी तरह समर्पित होकर करेंगे.

उसके बाद निश्छल ने दोनों से कुछ देर तक किसी मुद्दे पर बात की और दोनों की हिदायत देखर निष्काहल वह से चला गया. निश्छल के जाने के बाद जावेद ने मोहित से कहा.

जावेद- चलिए अब सर्कार और इस बार कोई गड़बड़ मत करियेगा. नहीं तो सर खटिया कड़ी कर देंगे हम दोनों की.

मोहित- (मुस्कुराते हुवे) ह्ह्हम्मम्मम. इस बात पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर्नेगे.

सरिता सैम तक पस के काम में उलझी रही और अपना काम ख़तम करने के बाद वो हॉस्पिटल चली गयी और. सभी बच्चो को डिस्चार्ज करवाकर उन्हें लेकर ंगो चली गयी. सवी को उसने पहले hi फ़ोन कर दिया था इसलिए वो ंगो में पहले से hi मौजूद थी. सभी बछिया ंगो पहुंचकर बहुत खुश थी. अक्कू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

सभी बच्चियों को ंगो में छोड़ने के बाद कुछ देर तक सवी से बात करने के बाद रात के लगभग 10-10.30 पर सरिता अपने क्वार्टर की तरफ निकल गयी. क्वार्टर पर पहुंच कर फ्रेश होने के बाद सरिता ने अपने लिए कॉफ़ी बनायीं और आँगन में राखी कुर्सी पर बैठकर कॉफ़ी पिने लगी. तभी उनका फ़ोन बजने लगा. सरिता ने फ़ोन देखा तो वो मनीषा का फ़ोन था. सरिता ने फ़ोन उठाया.

सरिता- Hello मनीषा.

मनीषा- हे दिदिया. कैसी हो आप.

सरिता- मैं अच्छी हूँ. तुम बताओ अपना.

मनीषा- (उदास होकर) ठीक hi हूँ मैं भी.

सरिता- क्या हुवा मेरी मनीषा को. इतना उदास क्यों है.

मनीषा- क्या करू दिदिया. खुश राहु क्या. एक तो तुम अपना बर्थडे भी हमारे साथ नहीं मन रही हो. ऊपर से पूछ रही हो की मैं उदास क्यों हूँ.

सरिता- अच्छा, इसलिए मेरी मनीषा उदास है. वैसे तुझे उदास होने की जरूरत नहीं है. मैंने छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दाल दिया है. शायद 1 हफ्ते में मैं घर आ जॉन.

मनीषा- क्या फायदा दिदिया. तुम्हारा जन्मदिन तो कल है न. तो तुम एक हफ्ते बाद आकर क्या करोगी. रहने दो तुम आने के लिए.

सरिता- तो तुम्हे क्या लगता है की मैं अपना जन्मदिन सेलेबराते करने के लिए आ रही हूँ. नहीं. मुझे तुम्हारी और मम्मी पापा की बहुत याद आती है इसलिए मैं मिलने के लिए आ रही हूँ.

मनीषा- अरे वह. तुमको तो बहुत जल्दी हम लोगो की याद आ गयी दिदिया.

सरिता- अच्छा चुप कर अब. नहीं तो बहुत पिटेगी मुझसे तू.

मनीषा- अच्छा ये सब छोडो दिदिया. तुम्हे याद है न की हम लोग बर्थडे पर क्या क्या करते हैं.

सरिता- हाँ मेरी माँ. मुझे सब याद है. मुझे आते समय सबकी लिए गिफ्ट लेकर आना है. हमारे यहाँ पर उल्टा रिवाज़ है. बर्थडे पर गिफ्ट मिलता नहीं है बल्कि बर्थडे के दिन गिफ्ट दिया जाता है.

मनीषा- वह वहहह इंस्पेक्टर साहिबा. देखा मेरी सांगत में रहकर तुम्हारा दिमाग कितनी तेज़ी से काम करता है..

सरिता- हैं दादी अम्मा. अगर अभी तुम मेरे सामने होती तो एक कण के निचे लगाती तो सही हो जाती तुम.

मनीषा- क्या यार दिदिया. हर समय मरने की hi बाते करती रहती हो. जैसे लग hi रहा तुम लेडी डॉन हो कोई इंस्पेक्टर नहीं हो तुम.

सरिता- अच्छा चल बस कर अब. बहुत बाते करने लगी हो तुम अब. ये सब छोड़. ये बता मम्मी पापा सब कैसे हैं.

मनीषा- सब बहुत अच्छे हैं और तुमको बहुत याद करते हैं. कल तुम्हारा जन्मदिन है तो मान तुम्हे बहुत याद कर रही हैं.

सरिता- मुझे भी माँ पापा की बहुत याद आती है. मैं जल्दी hi आती हूँ मान पापा से मिलने के लिए.

मनीषा- ठीक है दिदिया. अब मैं फ़ोन रखती हूँ. रात को ठीक 12.00 बजे वीडियो कॉल करुँगी. सो मत जाना तुम.

सरिता- ठीक है. मैं इंतज़ार करुँगी.

इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया. अभी वो फ़ोन रखती hi है की अचानक से लाइट कट हो गयी. लाइट कट होने के साथ hi कुछ निचे गिरने की आवाज़ तंत्र की आयी. जिसे सुनकर सरिता ने मन में hi कहा.

सरिता- (मन में) इस लाइट को भी अभी जाना था और ये क्या गिरने की आवाज़ आयी. चलकर देखती हूँ.

यही सोचकर सरिता ने अपना मोबाइल कुर्सी पर रख दिया और उस तरफ चली गयी जिस तरफ से उसे आवाज़ आयी थी. जैसे hi वह उस कमरे के पास पहुंची तभी किसी ने उसे पीछे से दबोच लिया और उसका हाँथ पकड़कर अपनी तरफ पीठ के बल खींच लिया. जिसके कारन वो उस सख्स के साइन से पीठ के बल चिपक गयी. जैसे hi उस सख्स ने उसे खींचा वो चिल्लाने hi जा रही थी की तभी उस सख्स ने अपना हाँथ आगे बढाकर उनके मुंह पर रखकर उसकी चीख को दबा दिया.

सरिता हस्त परैड थी की ये कौन हो सकता है जो इतनी रात को उसके कमरे में आकर उसे पकड़ रखा है. सरिता उसे धक्का देने hi वाली होती है की वो सख्स सपना होंठ सरिता के कानो के पास लेकर धीरे से बोलता है.

सख्स- आवाज़ मत करना. मैं निश्छल हूँ. मुझे पता चला है की 2-3 लोग तुम्हारे घर में घुस चुके हैं और तुम्हे नुकसान पहुंचना चाहते हैं. मैं अपना हाँथ तुम्हारे मुंह से हटा रहा हूँ. प्ल्ज़ तुम चिल्लाना बिलकुल भी मत नहीं तो उन्हें पता चल जायेगा.

लेकिन यहाँ एक अजीब बात ये हो गयी की जब निश्छल अपना होंठ सरिता के कण के पास लेकर उसे सब बता रहा था. तब दो चार शब्द बोलने के बाद उसका होंठ सरिता के कण को टच कर गया. जिसके कारन सरिता एक बूत बैंकर कड़ी रह गयी. जैसे जैसे निश्छल सरिता के कण में बोल रहा था. वैसे वैसे सरिता के शरीर में अजीब सी सनसनाहट दौड़ने लगी.

उसके सांसो की छुवन से सरिता सिहरने लगी. सरिता के रोंगटे खड़े हो गए निस्चल की गरम सांसो और उसके होंठो की छुवन से. सरिता ने बस ‘’मैं निश्छल हूँ’’ इतना hi सुना. उसके बाद तो सरिता अलग hi दुनिया में पहुंच गयी. निश्छल ने अपना हन्हट उसके मुंह से हटा लिया था, परनतु उसका एक हाँथ अभी भी सरिता के पेट पर था. मुंह से हाँथ हटने के बाद भी सरिता अभी भी बूत बानी कड़ी थी, उसे देखकर निश्छल ने कहा.

निस्चल- तुम ठीक तो हो न मिस जोशी.

लेकिन सरिता को कोई होश नहीं था की वह क्या बोल रहा है. ये देखकर निस्चल ने अपना हाँथ उसके पेट से हटाया और दोनों हाँथ उसके कंधे पर रखकर उसे झकझोरते हुवे बोलै.

निश्छल- सरिता . तुम ठीक तो हो न. तुम सुन रही हो जो मैंने तुमसे कहा.

सरिता (नींद से जागते हुवे) हां……… आए….. अआप इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हैं.

निश्छल- (फुसफुसाते हुवे) धीरे बोलो सरिता. मैंने अभी तुमसे जो कुछ भी कहा वो तुम्हे सुनाई नहीं दिया क्या.

सरिता- (चिल्लाकर) मैं क्यों धीरे बोलू. ये मेरा घर है. आप इतनी रात को मेरे घर में क्या कर रहे हैं. मुझे आपकी नियत पर शक हो रहा है.

निश्छल- (फुसफुसाकर) तुम कुछ भ्हीइ………….

अभी निश्छल ने इतना hi कहा था की लाइट आ गयी. लाइट आने के बाद सरिता और निश्छल ने देखा की सामने दो आदमी खड़े थे. जिनमे से एक के हाथ में गन थी और दुसरे के हाँथ में डंडा था. सरिता और निश्छल कही बहार भाग भी नहीं सकते थे. क्योंकि दरवज़े के सामने वो दोनों आदमी खड़े थे. पीछे की तरफ दीवार थी. अब दोनों पूरी तरफ से कमरे में फंस चुके थे. निश्छल ने अपने सर Pit-te हुवे कहा.

निस्चल- तुमने मेरी बात न man-ne की कसम खा रख है क्या. कभी तो मेरी बात मान लिया करो. अब भुगतो.

सरिता को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है. उसे तो बस यही दिख रहा था की वो दो आदमी उसके सामने हाँथ में गन और डंडा लिए खड़े हुसे हैं. तभी सरिता को अपनी स्थिति का बहन हुवा तो वो निस्चल का हाथ अपने कंधे से हटाया और us-se अलग कड़ी होते हुवे बोली.

सरिता- कौन हो तुम लोग. तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो. और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की. तुम्हे पता है की तुम किसके घर में घुसे हो.

पहला आदमी- हमको पता है की हम किसके घर में घुसे हैं. मैंने तो सोचा था की तू भाग गयी होगी, लेकिन यहाँ तो तुम दोनों का रोमांस चल रहा है. जिसे शायद हम दोनों ने डिस्टर्ब कर दिया है, लेकिन कोई नहीं तुम दोनों चिंता मत करो. तुम दोनों अपना रोमांस ऊपर जाकर कर कंटिन्यू रखना. अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार हो जाओ. हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.

इतना कहकर वो आदमी अपने दुसरे साथी को देखकर हंसने लगा.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
🙏👋🙏👋🙏👋

😀😂😁😛

प्यार की शुरुआत तो हो ही चुकी है निश्चल के मन मे। लेकिन अभी इतनी पुख्ता तरीके से नहीं हुई है। अभी बस शुरुआत है।

वो बाजार वाली जो घटना घटी थी वो अनजाने में हुई थी। उसमें निश्चल का कोई हाथ नहीं था। बहरहाल सरिता को टच तो उसका हाथ ही हुआ था।😂😀

अब जब प्यार हो रहा है तो चाहे सरिता के मुंह से शहद टपके या गाली, वो सब निश्चल को अच्छी ही लगेंगी न।😁😛

जब किसी इंसान का दूसरे इंसान से बात करने पर जलन होने लगे हमें तो समझ जाना चाहिए कि वो सामने वाले के प्यार में गिरफ्तार हो चुका है।

वैसे अपने को ज्यादा अनुभव नहीं है इसके बारे में।।😂

सच बात तो यही है।

पाया इंसान को पागल अंधा बना देता है उसे सामने वाला का गलत दिखता तो है लेकिन वो नहीं चाहता कि उसे इसके लिए किसी की डांट पड़े। निश्चल भी सब अपने तरीके से देख रहा है।

बहुत मुश्किल है मानना महोदय।

उसने एक बार सरिता से कहने की कोशिश की है आगे, लेकिन सरिता ने निश्चल की अच्छी खासी क्लास लगा दी है।।

हम तो उस दृश्य को और लंबा खीचने के फिराक में थे, लेकिन फिर सोचा कि कहीं ज्यादा के चक्कर में कुछ गड़बड़ ने हो जाए इसलिए उतना ही रहने दिया। वैसे भी दोनों अपनी अपनी जगह सही थे। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गई थी कि दोनों को वो कदम उठाना ही पड़ा।।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

अब सरिता निश्चल को इतना नापसन्द करती है तो उसके साथ जाने से अच्छा उसने ngo में ही रुकना सही समझा।

गांव देहात में ये कहावत है बधुत पुरानी।

हम लोग भी जब छोटे थे तब ये करते थे। अभी भी करते हैं। एक बार और सिर लड़ा लेने से क्या बिगड़ जाएगा। कम से कम 2000 रुपया तो बच ही जाएंगे।।😀😁

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

बच्चा सिंह की पहुँच है तभी तो वो बेखौफ होकर अपने काम को अंजाम देता है।।

सरिता को मारने जो लोग आए हैं उनकी हालत खराब होने वाली है दोनों की बक बक सुनकर।

निश्चल समझदार आदमी है। ऊपर से साथ मे सरिता है इसलिए वो कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता है।

वो इस स्थिति को किस तरह से संभालता है वो आपको अगले भाग में पता चल ही जाएगा।

साथ बने रहिए।।
 
👋🙏🙏👋👏👏

😁😀😂😛😃

अरे नहीं ।

निश्चल चालाक भी है। अगर सरिता उसे पकड़ भी लेगी तो भी निश्चल अपनी बातों से उसे कंफ्यूज़ कर ही देगा।

जलन तो स्वाभाविक ही है। आखिर वो सरिता से प्यार जो करने लगा है।।

ये तो अभी थोड़ा था राघव ने बताया सरिता को।

इसकी विस्तृत जानकारी आगे समय आने पर कहानी में आएगा, कि राघव को कैसे और किन परिस्थितियों में सरिता राठौड़ परिवार ने अपनाया था।

क्या आईडिया दिया है आपने। सरिता को सरप्राइज देना ही होगा अब।

आपकी बात बिल्कुल सही है कि सरिता सबकुछ एक ही दिन में कर लेना चाहती है। बधुत अधीर सी हो गई है। इसी चक्कर मे वो अपना परिवार भी भूल गई है।। लेकिन निश्चल कुछ नहीं भूला है।।😀

वो निश्चल के आदमी नहीं हैं वो वाकई में बच्चा सिंह के भेजे हुए गुंडे हैं जो सरिता को मारने के लिए आए हैं। लेकिन यहां भी दोनों की तू तू मैं मैं शुरू होने वाली है।

धन्यवाद आपका महोदय।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 31

पहला आदमी- हमको पता है की हम किसके घर में घुसे हैं. मैंने तो सोचा था की तू भाग गयी होगी, लेकिन यहाँ तो तुम दोनों का रोमांस चल रहा है. जिसे शायद हम दोनों ने डिस्टर्ब कर दिया है, लेकिन कोई नहीं तुम दोनों चिंता मत करो. तुम दोनों अपना रोमांस ऊपर जाकर कर कंटिन्यू रखना. अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार हो जाओ. हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.




इतना कहकर वो आदमी अपने दुसरे साथी को देखकर हंसने लगा.


उस आदमी की बात सुनकर निश्छल का खून खौल उठा. लेकिन अभी वो इस सेतुएशन में नहीं था की कोई एक्शन ले पता. फिर निश्छल ने सोचा की अपने दिमाग से अभी काम लेना पड़ेगा, जोश जोश में उसे होश नहीं खोना है, क्योंकि उन दोनों के निशाने पर इस समय सरिता थी. निस्चल को ये भी नहीं पता था की इन दोनों के साथ और कितने आदमी हैं. इसलिए वो कोई भी खतरा मोल लेने से अभी दर रहा था.

अगर निस्चल ने थोड़ी सी भी होशियारी दिखाई तो सरिता की जान जा सकती थी. जब वो दोनों आदमी एक दुसरे को देखकर हंस रहे थे. तभी निश्छल ने सरिता को कुछ इशारा किया कुछ समझने के लिए. लेकिन सरिता शायद समझी नहीं. तभी दुसरे आदमी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

दूसरा आदमी- चलो अच्छा hi है. वैसे तो हम इस इंस्पेक्टरनी को मरने के लिए आये थे. लेकिन दसप तुम इसके बिच में फालतू का आ गए. अब हमें तुमको भी ख़तम करना पड़ेगा, क्योंकि तुम अब इसकी मौत का तमाशा लाइव देखोगे.

हम अपने किसी भी कतल का कोई सुराग नहीं छोड़ते, इसलिए तुम्हे भी इसके साथ मरना होगा. वैसे भी जब तुम दोनों एक दुसरे से इतना प्यार करते हो तो तुम दोनों को एक साथ मरने में कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी. क्यों दसप सही कहा न मैंने.

गुंडे की बात सुनकर सरिता ने उसे खा जाने वाली नजरो से देखा, लेकिन वो अभी कुछ बोल भी नहीं सकती थी. उसकी बात सुनकर निश्छल ने कहा.

निश्छल- प्यार और इससे. मुझे पागल कुत्ते ने कटा है क्या. तुम लोग मुझे क्यों मरना चाहते हो. वैसे भी मैंने तो कुछ किया hi नहीं. जो कुछ भी किया है इस जंगली बिल्ली ने किया है. मुझे छोड़ दो.

निश्छल ने सरिता की तरफ देखकर उस आदमी से कहा. निश्छल की बात सुनकर सरिता ने हैरानी से निश्छल की तरफ देखा और कहा.

सरिता- ये क्या कह रहे हैं आप सर. आप इतने डरपोक कैसे हो सकते हैं. मैंने सोचा नहीं था की आप मेरे साथ ऐसा कुछ करेंगे. आज मेरे ऊपर मुसीबत आयी तो आप मुझे बचने के बजाय अपनी जान की भीख मांग रहे हैं.

निश्छल- तो क्या करू मैं. मैं तुम्हारी तरह बेवकूफ नहीं हूँ. जान है तो जहाँ है. तभी नौकरी भी है और तभी प्यार भी है. अगर ज़िंदा hi नहीं रहूँगा तो नौकरी और प्यार ख़ाक करूँगा. वैसे भी बहादुर बैंकर कौन सा तमगा मिल जायेगा मुझे. तुमने तो बहादुरी दिखाई थी न. देखो आज उस बहादुरी का परिणाम सामने है. मैं डरपोक hi ठीक हूँ.

निश्छल ने अपने हाँथ खड़े कर दिए. ये देखकर सरिता गुस्से से बोली.

सरिता- आपको शर्म आणि चाहिए सर. आप जैसे डरपोक इंसान के लिए ये नौकरी है भी नहीं. अरे जो एक लड़की की हिफाजत नहीं कर सकता वो इस वर्दी की हिफाजत क्या करेगा.

निश्छल- मुझे नहीं करनी किसी की हिफाजत. मुझे अपनी जान बहुत प्यारी है. तुम्हे बहुत शौक है खतरों से खेलने का तो तुम hi बनो लेडी डॉन और तुम मुझे बचाओ. अब देखो तुम्हारी जान खतरे में पद गयी. मेरी मनो तो इनसे माफ़ी मांग लो. शायद तुम्हारी जान बख्श दे ये लोग. क्यों भाई सही कहा न मैंने.


निश्छल की माफ़ी वाली बात सुनकर सरिता ने उसे गुर्जर देखा और गुस्से से बोली.

सरिता- कभी नहीं. मैं मर जाना पसंद करुँगी, लेकिन इनके सामने अपने घुटने नहीं टेकूँगी. और आप. मैं तो आपको बहुत बहादुर समझती थी, लेकिन आप तो बुजदिल और डरपोक निकले. इन सड़क छाप टपोरियों से दर गए.

निश्छल- अब ये टपोरी हो या ढपोरी हो. लेकिन इनके हाँथ में गन है और मुझे गन देखकर बहुत दर लगता है. अरे भाई. आपके साथ जो और भाई लोग बहार हैं उनके पास भी गन है क्या. सबको अंदर बुला लो.

पहला आदमी- कैसी बात करते हो दसप. हम तो तुम्हे बहुत बहादुर समझते थे. लेकिन तुम तो एक नंबर के डरपोक निकले. वैसे भी. इसके लिए तो हम दोनों hi काफी हैं. एक अदना सी लड़की को मरने के लिए अगर पूरी फ़ौज लेकर आऊं तो ये हम लोगो के लिए शर्म से डूब मरने की बात है. अरे हम लोग भले hi गुंडे और खुनी हैं, लेकिन अपना भी एक उसूल है.

निस्चल अपनी बातो में उन्हें उल्जहकर जो कुछ भी jan-na चाहता था वो उसने जान लिया की इन दोनों के आलावा और कोई भी इनके साथ नहीं है. निश्छल ने अपना ड्रामा कंटिन्यू कटे हुवे कहा.

निश्छल- सही कहा भाई. एक लड़की को मरने के लिए 2 लोग बहुत हैं. अगर फिर भी तुम लोग मुझे छोड़ने का वडा करो तो मैं hi इस लड़की को टपका देता हूँ. जब से ये आई है इसने भी मेरी नाक में डैम करके रखा हुवा है.

निश्छल की बात सुनकर सरिता हैरानी से उसे देखने लगी. निश्छल की बात सुनकर सरिता ने कहा.

सरिता- कितने घटिया इंसाने हो आप सर. अपने hi जूनियर को मरने की बात कर रहे हैं. अरे आप तो सर कहलाने के लायक hi नहीं हैं. आपके लिए मेरे दिल में थोड़ा बहुत जो सम्मान था वो आपकी इस बात को सुनकर ख़तम हो गया है. अरे आप तो पुलिस डिपार्टमेंट के ऊपर एक कलंक हैं. जिसने गुंडों के तलवे चाटने के लिए ये नौकरी ज्वाइन की है. मैं मरने से नहीं डर्टी हूँ, लेकिन आप जैसे घटिया आदमी के सामने मरूंगी इस बात का मुझे अफ़सोस है. थू है आपके ऊपर.

इतना कहकर सरिता ने अपना मुंह फेर लिया. निस्चल ने सरिता से कहा.

निस्चल- तो और क्या करूँ मैं. मुझे अपनी जान बहुत प्यारी है. तुम्हारी तरह मैं बहादुर नहीं हूँ. मैं तो बस पैसे कमाने के लिए hi ये नौकरी ज्वाइन की है.

पहला गुंडा जो इन दोनों की tu-tu main-main सुनकर झुंझला गया और गुस्से से चीखने हुवे बोलै.

पहला गुंडा- चूक करो तुम दोनों. कब से देख रहा हूँ की तुम दोनों अपनी बकवास किये जा रहे हो. हम यहाँ तुम्हे मरने आये हैं तुम्हारी बकवास सुनाने नहीं आये हैं.

गुंडे की बात सुनकर सरिता ने उससे कहा.

सरिता- तुम शांत रहो थोड़ी देर. मरने आये हो तो मार लेना. मैं कहनी भागी नहीं जा रही हूँ. (फिर निश्छल से मुखातिब होगर) और आप. अब समझी मैं. मुझे रिश्वत के केस में आपने hi फंसाया था. रिश्वत आप लेते थे और उसका ठीकरा मेरे ऊपर डालते थे आप. सवी दीदी के कहने पर आप ने इस मामले को रफा दफा किया. तभी तो मैं सोचु की आपको दादी इतनी आसानी से मिल कैसे गयी जो मुझे जमीन आसमान एक कर देने से नहीं मिली. आपने hi बच्चा सिंह के साथ मिलकर ये सारा खेल खेला था मेरे साथ. है न.

निस्चल- तो क्या करता मैं. जब से आयी हो मेरी नाक में डैम करके रख दिया है तुमने. तुम्हारी वजह से मेरी ऊपरी कमाई बंद होने की कगार पर आ गयी. तो क्या करता मैं. वो तो दी की बात मैं कभी नहीं tal-ta इसलिए तुम्हे मुझे मजबूरन इस केस से निकलना पड़ा.

सरिता- (गुस्से में) जो लोग गलत हैं मैं उनकी नक् में डैम करती आयी हूँ और आगे भी करती रहूंगी. मुझे कोई नहीं रोक सकता.

इन दोनों की तू तू, मैं मैं फिर से शुरू हो गयी थी. जो हर पल बढ़ती जा रही थी. जिसे दोनों गुंडे बहुत देर से सुन रहे थे. जब उन गुंडों के बर्दास्त की सिमा पर हो गयी तो एक गुंडा चीखा हुवा बोलै.

दूसरा आदमी- चुप बिलकुल चुप रहो तुम दोनों. अगर दोनों की एक भी आवाज़ बहार निकली तो 6 की 6 गोलिया उसके भेजे में उतर दूंगा. यहाँ मौत तुम दोनों के सर पर कड़ी है और तुम दोनों अपने में hi व्यस्त हो गए हो. मरने के लिए तैयार हो जाओ तुम दोनों. पहले इस लड़की को टपकता हूँ उसके बाद तुझे देखता हूँ दसप.

इतना कहकर दुसरे आदमी ने अपनी गन सरिता पर तान दी. ये देखकर निश्छल ने फुर्ती से झुककर अपने शूस से गन निकली और उस आदमी के पैरो पर गोली मार दी जिसके हाँथ में गन थी. पैरो में गोली लगने से वो आदमी दर्द से चिल्लाते हुवे जमीन पर गिर पड़ा. जिसके कारन उसके हाँथ से गन छिटक कर दूर जा गिरी.

ये देखकर दूसरा आदमी चौकन्ना हो जाता है और डंडा फेंक कर सरिता को मरता है, लेकिन सरिता पहले से hi चौकन्नी थी. इसलिए उसने निचे झुककर अपने आपको बचाया और फुर्ती से दौड़कर वो निचे गिरी हुई गन उठा लेती है. तब तक वो आदमी एक चाकू निकल लेता है. सरिता उसके हाँथ में निशाना लगाकर ट्रिगर दबा देती है. जिससे गोली जाकर उसके हाँथ में लगती है और उसके हाँथ से चाकू छूटकर जमीन में गिर जाती है.

गोली हाथ में लगने से वो आदमी भी तड़पता हुवा जमीन पर गिर जाता है. फिर सरिता और निस्चल दोनों अपनी अपनी गन दोनों के सर पर तन देते हैं ये सब कुछ कुछ hi पल में घटित हुवा था. सरिता हैरानी से निश्छल की तरफ देखते हुवे कहती है.

सरिता- जब आपके पास गन थी तो आप ने इसे चलायी क्यों नहीं उनसे अपनी जान की भीख क्यों मेंग रहे थे.

निस्चल- क्योंकि मैं तुम्हारी तरह बेवकूफ नहीं हूँ. वैसे भी तुमसे बात करने का अभी मेरा मूड नहीं है. तुमको समझते समझते मैं पागल हो जाऊंगा.

इतना कहकर निश्छल अपना फ़ोन निकलता है और जावेद को फ़ोन करता है और उसे साडी सेतुएशन से अवगत करता है. जावेद थोड़ी देर में एम्बुलेंस लेकर पहुंचने के लिए बोल देता है. थोड़ी देर बाद जावेद और मोहित एक एम्बुलेंस लेकर आते हैं और उन दोनों आदमियों को एम्बुलेंस में डालकर हॉस्पिटल चले जाते हैं.

उसके बाद सरिता ने जमीन पर खून के धब्बो को साफ़ किया. निश्छल सरिता से बिना कोई बात किया जाने लगता है तो सरिता निस्चल से कहती है.

सरिता- रुकिए सर. मुझे आपसे बात करनी है.

निस्चल- नहीं मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है.

सरिता- लेकिन मुझे तो करनी है न.

उसी समय निश्छल को एक पुराणी बात याद आती है जब सरिता बच्चा सिंह को पकड़ने की जिद कर रही थी और निश्छल उसे समझा रहा था. निश्छल उसकी नक़ल करते हुवे कहता है.

निस्चल- मैं आपका नौकर नहीं हूँ. मैं भी एक पुलिस अफसर हूँ.

निस्चल की बात सुनकर सरिता उसे घूरकर देखती है और बोलती है.

सरिता- आप बात बात पर मेरी नक़ल मत उतरा करिये.

निस्चल- क्यों न उतारू. तुम मेरी बात कभी सुनती हो जो मैं तुम्हारी बात सुनु.

सरिता- आप अपने आपको समझते क्या हैं. बात बात पर मुझे सुना देते हैं.

निस्चल- मैं अपने आपको कुछ नहीं समझता, लेकिन तुम जब से आई हो अपने आपको टॉप समझने लगी हो. बिना सोचे समझे कुछ भी करती रहती हो. अकेले hi बच्चा सिंह जैसे गुंडे से पकड़ने चली हो. लेकिन मैं तुम्हें क्यों बता रहा हूँ ये सब. तुमसे कुछ कहने का कोई मतलब hi नहीं है, क्योंकि तुम मेरी बात सुनती कहाँ हो. मैं जब बोल रहा था की मैं हाँथ हटा रहा हूँ आवाज़ मत करना तो मेरी बात नहीं मान सकती थी क्या तुम.

निस्चल की इस बात का सरिता के पास कोई जवाब नहीं था. क्योंकि उस समय तो सरिता किसी और hi दुनिया में चली गयी थी निस्चल की छुवन से. उसने बात को बदलते हुवे कहा.

सरिता- जब आपके पास गन थी तो आपने उन्हें पहले क्यों शूट नहीं किया. उनसे अपनी जान की भीख मांगने की क्या जरूरत थी.

निस्चल- मुझे तो ये समझ नहीं आता की तुमको ये नौकरी किसने दी. तुम सच में पढ़ाई और ट्रेनिंग करके hi ज्वाइन की हो न या कही से सौरसे सिफारिश से तुम्हे ये नौकरी मिली है. तुम्हारे पास दिमाग है भी या नहीं. मुझे नहीं पता था की वो अकेले आये हैं या उसके साथी भी साथ में हैं उनके.

यही पता लगाने के लिए मैं ड्रामा कर रहा था. जिसके लिए मैंने तुम्हे इशारा भी किया था. लेकिन तुम सच में बैल बुद्धि हो या तुमने मेरी बात किसी भी कीमत पर न man-ne की कसम खा राखी है. तुम तो उन्हें उकसा सही थी गोली चलने के लिए. तुम्हे मरने की बहुत जल्दी थी क्या. कभी तो मेरी बात मान लिया करो. अगर मैं समय पर नहीं आता तो पता नहीं क्या हो जाता आज. और क्या बोल रही थी तुम. मैं डरपोक हूँ. घटिया इंसाने हूँ मैं. ठु है मुझपर.

सरिता- (शर्मिंदगी के साथ) सॉरी सर. उस समय मुझे यही लगा तो मैंने बोल दिया. और क्या अब मेरी जान बचने के लिए जीवन भर मुझे एहसान जटाओगे क्या आप. और मैं इतनी कमजोर भी नहीं हूँ की अपनी हिफाजत न कर सकू.

निस्चल- तुमसे तो बात करना hi बेकार है. पता नहीं तुम्हारे पास हर बात का उत्तर कहा से मौजूद रहता है.

सरिता- हाँ तो मत बात करिये ने. मैंने नहीं बुलाया आपको यहाँ पर बात करने के लिए.

दोनों की तू तू मैं मैं फिर से शुरू हो गयी थी. अभी इनकी तू तू मैं मैं और आगे बढ़ती तभी सरिता का फ़ोन बजने लगा. ये देखकर निश्छल ने कहा.

निश्छल- क्या बात है मिस जोशी. इतनी रात को कौन फ़ोन कर रहा है. तुम्हारा बॉयफ्रेंड है क्या.

सरिता- (घूर कर) आपसे मतलब.

निश्छल- मतलब क्यों नहीं है. आखिर उसके गिर्ल्फ्रेंड की जान बचायी है मैंने. उसे बोल देना की सिर्फ फ़ोन पर बात करने से hi कोई बॉयफ्रंड नहीं बन जाता. गिर्ल्फ्रेंड को प्रोटेक्ट करना भी जरूरी होता है.

सरिता- आप थोड़ी देर शांत रहेंगे. आप अपना मुंह बंद कर चुपचाप कुर्सी पर बैठ जाइये. और हाँ मुंह से आवाज़ बिलकुल भी नहीं आणि चाहिए.

निस्चल- हाँ. मेरे मुंह से आवाज़ निकलेगी तो तुम्हारा बॉयफ्रंड तुम्हे छोड़ देगा. इसलिए तुम दर रही हो न.

सरिता- प्लीज सर. दो मिनट के लिए शांत होकर बैठ जाइये.

निश्छल- (धीरे से) अपने बॉयफ्रंड से बात करनी है तो मुझे क्यों बैठा रही हो.

सरिता- (फ़ोन रिसीव करके) रुको मैं वीडियो ओने करती हूँ.

सरिता- (फ़ोन का माइक हाथ से बंद कर निस्चल से) मैं वीडियो कालिंग करने जा रही हूँ. कोई आवाज़ नहीं निकालनी चाहिए मुंह से आपके और इस जगह से हीलियेगा भी मत. नहीं तो समझ लीजियेगा फिर.

इतना कहकर कहकर सरिता ने वीडियो कॉल लगा दिया. दूसरी तरफ से मनीषा ने वीडियो कॉल रिसीव किया और कॉल रिसीव करते hi मनीषा गण गाने लगी.

मनीषा- बार बहार दिन ये आये. बार बार दिल ये गए. तुम जियो हजारो साल या मेरी है आरज़ू.


हैप्पी बैठदय तू यू. हैप्पी बर्थडे तू यू. हैप्पी बर्थडे डिअर दिदिया हैप्पी बर्थडे तू यू.

जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामना दिदिया. भगवन जी तुम्हे जल्द hi आईएएस बना दें ताकि तुम मेरा पीछा छोड़ दो.

सरिता- (खुश होकर) थैंक यू थैंक यू थैंक यू सो मुछ मनीषा. वैसे तुम्हारा पीछा मेरा आईएएस ban-ne के बाद भी नहीं छूटेगा. वैसे अगर तुमने अपने गाने की प्रतिभा का प्रदर्शन कर लिया हो तो मम्मी पापा से भी बात करवा दो जो तुम्हारे पीछे खड़े हैं.

उधर निश्छल कुर्सी पर बैठा अपने मन hi मन बोलै.

निश्छल- अरे ये तो बड़ी अच्छी बात है. आज तो इस लेडी डॉन का बर्थडे है. अगर मैं सही समय पर नहीं पहुँचता तो पता नहीं आज क्या हो जाता.

ये सोचते हुवे उसके चेहरे पर एक उदासी आकर चली गयी. वो मन hi मन जावेद और मोहित को धन्यवाद दे रहा था. जिनके कारन आज उसने सरिता को बचा लिया था. सरिता अपने घरवालों से बात करने में व्यस्त थी और बड़ी खुश लग रही थी. इधर निस्चल कुर्सी पर बैठा अपने एक हाँथ की हथेली पर अपना एक गाल टिकाये सरिता को एकटक निहारे जा रहा था.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 32

सरिता अपने घर वालो से बात कर रही थी जो उसे उसके जन्मदिन की बधाई दे रहे थे. सरिता अपने घर वालो से बात करके बहुत खुश थी. उसकी आँखों में आँशु आ गए थे. निश्छल अपनी हथेली पर अपना चेहरा रखकर एक तक सरिता को देखे जा रहा था. पता नहीं क्यों पर निश्छल को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था सरिता की उत्सुकता देखकर. वह अपने घरवालों से दूर थी. जन्मदिन के मौके पर भी घर वालो से दूर रहना कितना मुश्किल होता है. ये निस्चल को अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था.

उसे याद आता है की जब वो भी अकेला रहता था तो किसी ख़ुशी के मौके पर वो भी भावुक हो जाता था. अभी तो उसके साथ उसकी सवी दी रह रही थी. पर जब वो अकेला रहता था तो उसे बहुत hi याद आती थी अपने घर की. उसका मन करता था की वो जाकर उन सब लोगो को पिटे जो ये कहते हैं की लड़का है. आराम से घर के बहार रह सकता है. उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्हें घर की याद नहीं आती. वगैरह वगैरह.

सरिता की बात हो चुकी थी और वो बात करने के बाद पास में रखे बीएड पर बैठ गयी. उसके चेहरे पर उदासी साफ देखि जा सकती थी. निश्छल कुर्सी पर बैठा सरिता की hi तरफ देख रहा था. सरिता को देखते हुवे उसने कहा.

निस्चल- अच्छा अब तो तुम्हारी बात हो गयी है. अब ये भी बता दो की मुझे क्यों रोका तुमने.

सरिता- (मन में) अरे यार कितना अकड़ू इंसान है. हिटलर कही का. अभी इसके सामने hi इतनी देर से मैं बात कर रही हूँ. इसे भी मालूम चल गया होगा की आज मेरा जन्मदिन है. फिर भी एक बार भी इसके बारे में मुझसे बात नहीं की. विष भी नहीं किया अभी तक. वैसे मैं क्यों सोच रही हूँ इतना. इस हिटलर के विष के लिए मैं मरी थोड़े hi जार यही हूँ.

सरिता को चुप चाप सोचते देख निस्चल ने चुटकी बजाते हुवे कहा.

निश्छल- मिस जोशी, मिस जोशी, कहा खो गयी तुम. मैंने कुछ पुछा आपसे.

सरिता- वो हां… kahi.nahi….. अच्छा मुझे ये बताइये की आपको कैसे पता चला की कोई मुझे मरना चाहता है और आज hi मुझे मरना चाहता है.

निश्छल- वो सब छोडो. जब कुछ देर पहले मैं तुम्हे कॉल कर रहा था तो तुम किससे बात कर रही थी.

सरिता- (हैरानी से) आपने कब मुझे कॉल किया.

निस्चल- ये पूछने से पहले अपना फ़ोन चैक करो.

सरिता ने अपना फ़ोन देखा तो उसमे 4 मिस कॉल पड़ी थी जो निश्छल की थी. मिस कॉल देखने के बाद सरिता ने कहा.

सरिता- हैं.. सोरययय. मैंने ध्यान hi नहीं दिया.

निस्चल- मैंने तुम्हे कितनी बार मन किया की इन सब चक्करो में मत पदों, ये बहुत खतरनाक लोग हैं, लेकिन तुमने तो मेरी बात कभी भी न man-ne की कसम खा राखी है. अभी भी जब मैंने तुम्हे कहा था की मैं तुम्हारे मुंह से हाथ हटा रहा हूँ. आवाज़ मत करना, लेकिन तुम. इतनी तेज़ तेज़ बोल रही थी की बहार से लोगो को पता चल जाये की आवाज़ कहाँ से आ रही है. तुम्हे उस समय हो क्या गया था. मेरे समझने के बाद भी तुम मेरी बात नहीं मणि.

निस्चल की बात सुनकर सरिता हड़बड़ा गयी, क्योंकि उस समय तो वो किसी और hi दुनिया में थी, उसने निश्छल की बात hi नहीं सुनी थी. वो हड़बड़ाते हुवे निश्छल से बोली.

सरिता- कुछः नही.. कुछ भी तू नही.. पहले मैंने जो.. पुछा है आपसे वो बताइये मुझे.

निस्चल- तो अपने बॉस को hi आर्डर दे रही हूँ तुम.

सरिता- हाँ दे रही हूँ आर्डर. तो बताइये मुझे.

निश्छल- मैं क्यों बताऊँ तुम्हे. तुम मेरी वाइफ नहीं हो की तुम मुझसे कुछ भी पूछो और मैं तुम्हे बता दूँगा.

सरिता- (गुस्से से) ये क्या फालतू की बकवास कर रहे हैं आप. एक तो वो आदमी पता नहीं क्या क्या अनर्गल बाटे कर रहा था और अब आप भी शुरू हो गए. शांत रहिये आप बिलकुल भी.

निश्छल- हाँ फालतू इंसान को हर बाते फालतू hi लगती हैं. अभी तो तुम बोल रही थी की मैं तुम्हे वो बात बताऊँ और अभी बोल रही हो की मैं छू प्रभु.

सरिता- अरे यार. जो पूछ रही हूँ वो बताइये न.

निस्चल- अरे यार. मतलब मैं यार हो गया तुम्हारा. अब आगे पता नहीं क्या क्या बनाओगी मुझे तुम.

निश्छल की बात सुनकर सरिता ने अपने हाँथ जोड़ लिए और निस्चल से कहा.

सरिता- अब प्ल्ज़ मुझे और परेशां मत करिये और मैं जो पूछ रही हूँ उसका जवाब दे दीजिये. अगर आप कहिये तो मैं आपके पेअर भी पद लेती हूँ.

निस्चल- नहीं उसकी जरूरत नहीं है. आज के लिए इतना hi काफी है. मुझे अपने मुखबिर से खबर मिली थी की तुम्हारी जान खतरे में है. तुम्हे कोई मरना चाहता है. मैं तुम्हारी तरह किसी बात की आधी अधूरी जानकारी नहीं रखता हूँ.

सरिता- बड़े आये मुझे सीखने वाले. अगर वो मुझे मरना चाहते थे तो मुझे कही पर भी मार सकते थे. फिर उन्होंने मुझे घर में hi मरने की कोशिश क्यों की.

निश्छल- (चिढ़कर) मुझे क्या पता. अबकी बार जब वो तुम्हे फिर से मरने आये न तब तुम उन्ही से hi पूछ लेना ये बाटे.

सरिता- हद है यार. आप किसी भी बात का सिद्ध जवाब नहीं दे सकते हैं क्या.

निस्चल- तुम्हे सीधी बात कभी समझ में आती है क्या जो मुझसे सीधे जवाब की उम्मीद करती हो. तुम खुद अपना दिमाग नहीं लगा सकती. पस में तुम्हे आकर मारेंगे क्या ये लोग. पस से तुम्हारा निकलने का समय भी फिक्स नहीं है की ये लोग तुम्हे रस्ते में टारगेट करें. फिर बचा ये घर. इससे अच्छी और आसान जगह और क्या हो सकती है उन्हें अपना काम पूरा करने के लिए.

सरिता- हाँ ये बात तो सही कही आपने.

निश्छल- ठीक है. कल से तुम मेरे घर में रहोगी दी के साथ.

सरिता- (हैरान होते हुवे) क्यों. मैं क्यों रहूंगी आपके घर में. मैं नहीं रहूंगी आपके यहाँ.

निस्चल- जितना कह रहा हूँ. तुम उतना hi करो. मुझे तुमसे इस बारे में बहस नहीं करनी है. समझी तुम.

सरिता- आप हैं कौन जो मैं आपकी बात मनु. आप कही के जज हैं जो आपने एक बार बोल दिया तो उसपर कोई बहस नहीं हो सकती. मैं नहीं रहने वाली आपके घर पर.

निश्छल- मैं सीओ के पोस्ट पर hi ठीक हूँ. मुझे जज मत बनाओ. मैंने जितना कहा है तुमसे उतना करो.

सरिता- मैं ऐसा कुछ भी नहीं करने वाली समझे आप.

निस्चल- तुम्हारी परेशानी क्या है हाँ. मुझे समझ में नहीं आता की तुम्हारा ऊपर की मंजिल में कुछ है या एकदम खली पड़ी हुई है. तुमने मेरी बात न man-ne की कही मन्नत मांग राखी है क्या.

सरिता- नहीं. मैंने एक बार बोल दिया तो बोल दिया. मैं नहीं आने वाली आपके घर.

निश्छल- (गुस्से से) भाड़ में जाओ तुम. जो मन हो तुम्हारा वो करो.

इतना कहकर निस्चल बहार जाने लगता है. तभी कुछ सोचकर वापस मुड़ता है और सरिता की तरफ आने लगता है. सरिता सोचने लगती है की अब इसे क्या हो गया है. फिर से दिमाग चाटेगा मेरा. कही मुझे अभी अपने साथ घर तो नहीं ले जाने वाला. तब तक निश्छल उसके पास पहुंच चूका था. सरिता के पास आकर निश्छल ने अपना हाँथ आगे बढ़ाया और कहा.

निश्छल- हैप्पी बिरथ डे मिस जोशी.

निस्चल के ऐसा कहने से सरिता एक टक निश्छल को देखने लगती है उसे तो यकीन hi नहीं हो रहा था की निश्छल उसे जन्मदिन की बधाई दे रहा है. सरिता को अपनी तरफ एकतुछ घूरता हुवा पाकर निश्चल ने उससे कहा.

निस्चल- ऐसे क्या देख रही हो मिस जोशी. मैं तुम्हे जन्मदिन की बधाई दे रहा हूँ. तुम्हारी जान नहीं मांग रहा हूँ. जो मुझे घूर रही हो.

अभी सरिता कुछ बोलती इसके पहले hi निश्छल का फ़ोन बजने लगता है. निस्चल जब फ़ोन देखता है तो सविता का फ़ोन था. निश्छल उसका फ़ोन देख फ़ोन कट कर देता है, लेकिन यहाँ पर वो गलती से कट करने के बजाय रिसीव का बटन दबा देता है और फ़ोन को कट समझकर जेब में फ़ोन वापस रख लेता है. फ़ोन वापस जेब में रखने के बाद सरिता बोलती है.

सरिता- हाँ कह तो ऐसे रहे हैं जैसे बहुत जल्दी बोल दिया मुझे. मैं कब से इंतज़ार कर रही थी लेकिन अभी कोई मतलब नहीं रह गया है.

निश्छल- तुम हद करती हो यार.

इतना कहकर निश्छल 2 कदम और सरिता के पास चला गया इस डरुअन जब उसने अपना तीसरा कदम उठाया तो उसका पेअर बीएड से निचे आ गयी चादर में फंस गया जिसका एक सिरा उसके दुसरे पेअर से दबा हुवा था.

पेअर चादर में फंस जाने के कारन वो अपने आपको संभल नहीं पता और लड़खड़ाते हुवे सरिता के ऊपर गिर पड़ता है. पर सरिता ने तुरंत अपना बचाव करते हुवे अपना हाथ उसके साइन पर रख कर उसे अपने साइन पर गिरने से रोक दिया. जिसके कारन दोनों के बिच एक दूरी बन जाती है.

सरिता ने अपना हाँथ उसके साइन पर रखा था, सरिता को ऐसा महसूस हो रहा था की निस्चल के साइन की धड्कण बहुत तेज़ गति से चल रही है. सरिता का भी यही हाल था. दोनों एक दुसरे की आँखों में देखने लगे. एक दुसरे की आँखों में देखते हुवे दोनों लगभग खो से गए. यही स्थिति लगभग 5 मिनट तक बानी रही.

न सरिता ने निश्छल को अपने ऊपर से हटने के लिए कहा और न hi अपने हाँथ से उसे धक्का देकर हटाया. और न hi निश्छल ने उसके ऊपर से उठने की कोशिश की. निश्छल के फ़ोन पर बजने वाली रिंगटोन ने उस दोनों को वास्तविकता के धरातल पर ला पटका. सरिता ने निश्छल को अपने ऊपर से धक्का देकर परे किया और उठकर कड़ी हो गयी. निश्छल ने अपना फ़ोन निकल कर देखा तो फ़ोन सविता का था. निश्छल ने फ़ोन उठाया और कहा.

निश्छल- Hello दी.

Savi-Nishu कहा है तू. कितनी रात हो गयी है और तू अभी तक घर नहीं आया.

निश्छल- हाँ दी. कुछ काम में फंस गया हूँ. मैं घर नहीं आ पाउँगा आज शायद.

सवी- मुझे पता है तुम्हारा जरूरी काम और कहा पर है तू ये भी पता है मुझे. तू इतनी रात को सरिता के पास क्या कर रहा है.

सवी की बात सुनकर निश्छल चौक गया. उसे समझ नहीं आ रहा था की उसकी दी को कैसे पता चला की वो सरिता के यहाँ पर है. उसे दर नहीं था की उसकी दी उसके बारे में कुछ गलत सोचेगी, क्योंकि सवी को निश्छल पर पूरा भरोषा था. निस्चल ने सरिता से कहा.

निश्छल- हाँ दी मैं सरिता के पास hi हूँ. जल्दी hi निकलता हूँ यहाँ से.

उधर से सविता ने फ़ोन रख दिया. सरिता ने जब या सुना तो उसकी आँखे बड़ी हो गयी. वो गुस्से से निश्छल को देखने लगी. जैसे उसे कच्चा चबा जाएगी. तभी निश्छल ने इसी बात का फायदा उठाकर सरिता को परेशां करने की सोची और झूठ मोथ के फ़ोन कण के पास लगाए हुवे कहा.

निश्छल- अब मैं क्या बताऊँ दी. इसी ने मुझसे जिद की के आज रात मुझे इसके साथ रहना है तो मैं क्या करता. मैंने भी सोचा की मैं इसकी बात मान लेता हूँ. नहीं तो ये आपसे मेरी शिकायत करेगी.

सरिता ने उसकी बात सुनकर उसे गुस्से से देखने लगी. निश्छल ने उसको इग्नोर करते हुवे कहा.

निश्छल- नहीं दी आप बिलकुल भी फ़िक्र मत करिये. मैं इसके साथ इसके कमरे में hi सोऊंगा.

सरिता ने जब ये सुना तो वो तुरंत निश्छल के पास पहुंची और उसके हाँथ से फ़ोन छीनकर अपने कण में लगते हुवे कहा.

सरिता- नहीं दी ऐसा कुछ भी नहीं है. मैंने इन्हे नहीं बुलाया. ये खुद आये हैं यहाँ. इन्होने आपसे जो भी कहा है सब झूठ है. मैंने इन्हे कुछ बात करने के लिए रुकने के लिए कहा था.

दूसरी तरफ से जब कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी सरिता को तो वो 2-3 बार hello hello बोली. जब उधर से कोई आवाज़ नहीं आयी तो सरिता ने फ़ोन की स्क्रीन पर देखा तो वह पर कोई कॉल नहीं दिखी सरिता ने जब निश्छल की तरफ देखा तो वो जोर j0r से हंस रहा था. निश्छल को हँसता हुवा देखकर उसे समझते देर न लगी की निश्छल ने उसे चुटिया बनाया है. उसे परेशां किया है. ये समझ में आते hi सरिता ने कहा.

सरिता- आपने ये बिलकुल भी अच्छा नहीं किया. मैं आपको छोडूंगी नहीं.

इतना कहकर सरिता निश्छल को मरने के लिए दौड़ी. ये देखकर निश्छल अपने आपको बचने की कोशिश करने लगा. इसी पकड़म पकड़े में सरिता का पेअर बीएड के परुवा (पाया) में उलझ गया और वो निचे गिरने को हुई तो निस्चल ने फुर्ती दिखते हुवे सरिता को थम लिया.


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सरिता ने भी गिरने से बचने के लिए अपना हाँथ चलाया तो एक निस्चल के कंधे पर और एक हाँथ निश्छल की चौड़ी छाती पर आ गया. निश्छल ने सरिता को दोनों हांथो से उसकी कमर को थम रखा था. इस समय सरिता झुकी हुई निश्छल की बाहो में थी. दोनों एक दुसरे की आँखों में देखने लगे. सरिता को ऐसा प्रतीत हो रहा था की उसके हाँथ के निचे निश्छल का दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था.

निश्छल के धड़कन की आवाज़ सुनकर सरिता के दिल की धड़कन भी तेज़ हो गयी. उसके होंठ फड़फड़ाने लगे. शरीर में एक अनचाही सिहरन सी दौड़ती चली गयी. दोनों एक दुसरे की आँखों में देखते हुवे खो से गए. दोनों बहुत देर तक एक दुसरे की आँखों में खोये रहे. दोनों का ध्यान सरिता के फ़ोन ने तोडा, जिस पर किसी का फ़ोन आ रहा था.

निश्छल हड़बड़ाते हुवे सरिता को खड़ा किया सरिता ने शर्म के मरे अपनी नज़ारे झुका ली और फ़ोन सरिता की सहेली का था जिसे रिसीव करके अपनी सहेली से बात करने लगी. जिसने उसे जन्मदिन की बधाई देने केलिए फ़ोन किया था.

थोड़ी देर सरिता ने अपनी सहेली से बात करने के बाद फ़ोन रखा और अपनी नजर ऊपर उठायी तो निश्छल वह पर नहीं था. सरिता बीएड से निचे उतर कर बहार आयी और इधर उधर देखने लगी. मगर निश्छल उसे कही दिखाई नहीं पड़ा तो सरिता ने उसे आवाज़ लगायी.

सरिता- निश्छल सर. आप कहा पर हैं.

मगर उसे निस्चल की आवाज़ नहीं सुनाई पड़ी. निश्छल सरिता के यहाँ से चला गया था. सरिता ने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और अपने बिस्टेर पर लेट गयी और सोने की कोशिश करने लगी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 33

सरिता के यहाँ से निकलकर निश्छल घर न जाकर पास बने एक पार्क में चला गया. आज मौसम बहुत सुहाना था और ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. निश्छल पार्क के अंदर जाकर पत्थर की बानी एक बैठके पर लेट गया और उस वक्त (जिस दिन सरिता ने लड़कियों को बच्चा सिंह के चंगुल से छुड़ाया था और निश्छल सरिता को थप्पड़ मरने के बाद पस से बहार आया था) के के बारे में सोचने लगा जब उसने मोहित और जावेद को मिलने के लिए बुलाया था.

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निस्चल- मैं तुम दोनों से दो दिन से मिलने की कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन समय hi नहीं मिल प् रहा था तुम दोनों से मिलने का.

मोहित- सर अगर आप उस बात से नाराज़ हैं और सजा देने के लिए हम दोनों को बुलाया है तो मैं आपको बता देना चाहता हूँ की इसमें जावेद की कोई गलती नहीं है. मैंने सरिता मैडम को सबकुछ बताया है. अगर आपको सजा देनी है तो आप मुझे दीजिये. जावेद को नहीं.

निश्छल- मैं तुम दोनों को सजा देने के लिए नहीं बुलाया बल्कि तुम दोनों को मैंने एक खास काम के लिए बुलाया है. उम्मीद है की इस बार तुम दोनों मुझे निराश नहीं करोगे.

जावेद- यस सर. आप काम बताइये. हम आपके वडा करते हैं की इस बार कोई भी गलती नहीं होगी हमसे.

निश्छल- तुम दोनों को तो पता hi है की सरिता ने इन दिनों सरे गुंडे मवालियों का जीना हराम कर दिया है. उनके काम धंधे का बहुत नुकसान किया है उसने. खास कर बच्चा सिंह और उसके आदमियों का. जिसके कारन उसकी जान पर बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है. कभी भी किसी भी समय कुछ भी हो सकता है.

मोहित- आप बिलकुल सही कह रहे हैं सर. अपनी मैडम भी किसी मामले में उनसे काम नहीं हैं. बहुत खतरनाक हैं अपनी मैडम भी, खतरनाक होने के साथ साथ मैडम जिद्दी भी हैं, हमने उन्हें इन्वेस्टीगेशन के लिए बहुत मन किया लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं मणि.

निश्छल- जब वो मेरी बात नहीं मानती तो तुम लोगो की बात कैसे मानेगी वो. वो थोड़ी जिद्दी है और अपने मन का करती है लेकिन वो बहुत hi होनहार और दबंग पुलिस अफसर है. ऐसे लोगो को हमारे डिपार्टमेंट को बहुत जरूरत है. इसलिए मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है.

मैं चाहता हूँ की आज से, बल्कि अभी से तुम दोनों उस पर नजर रखोगे. वो जहा भी जाती है तुम दोनों साये की तरह उसके पीछे रहोगे. पस, घर, हॉस्पिटल या अगर वो बच्चों को कहीं रखती है, हर जगह. तुम लोगो को अगर कुछ भी इस दौरान संदिग्ध लगे तो तुरंत मुझे फ़ोन करना.

जावेद- आपने सही कहा सर. मुझे भी ऐसा लग रहा था की मैडम की जान को खतरा हो सकता है. इतना सबकुछ हो जाने के बाद जरूर कोई मैडम को जान से मरने की कोशिश करेगा.

निश्छल- इसीलिए ये जिम्मेदारी मैं तुम दोनों को सौप रहा हूँ. अपने काम में हमेशा की तरह मुस्तैदी दिखाना.

मोहित- ठीक है सर. हम लोग मैडम के पीछे साये की तरह लगे रहेंगे और आपको पल पल की सुचना देंगे.

निस्चल- मुझको तुम लोगो से यही उम्मीद है. और ध्यान रहे इस बात का पता मिस जोशी को बिलकुल भी नहीं चलना चाहिए की तुम दोनों उसपर नजर रख रहे हो. अगर इस बार तुम दोनों से कुछ भी गड़बड़ हुई तो तुम दोनों समझ सकते हो की मैं क्या करूँगा तुम दोनों के साथ.

मोहित- बहुत अचे से जान और समझ गया हूँ सर. अब हम चलते हैं. आपको समय समय पर फ़ोन करते रहेंगे.

इतना कहकर दोनों वह से चले जाते हैं और निश्छल भी अपने काम के सिलसिले में दौरे पर चला जाता है. दो दिन बाद शाम को लगभग 10.15 बजे निश्छल के पास जावेद की कॉल आती है. फ़ोन उठाकर निश्छल ने बात की.

निश्छल- हाँ जावेद. कोई खबर.

जावेद- सर, मैडम के घर के बहार 1-2 लोग दिख रहे हैं सर.

निश्छल- तो इसमें नयी बात क्या है जावेद. कोई राहगीर होंगे. आने जाने वाले होंगे.

जावेद- नहीं सर. ये लोग बहुत देर से यही पर खड़े हुवे है. और बार बार मैडम के घर की तरफ hi देख रहे हैं.

निश्छल- क्या सरिता घर पर है इस वक्त.

जावेद- नहीं सर. देख कर तो लग नहीं रहा है की वो अभी नहीं आयी हैं, क्योंकि मैंने उन्हें जाते हुवे नहीं देखा और अभी तक उनके कमरे की लाइट भी बंद है.

निश्छल- ठीक है जावेद. मैं पहुंच रहा हूँ वह.

जावेद- सर एक बात और. ये लोग आपस में कुछ बात कर रहे थे, जिसमे से एक ने कहा को वो पिछले 2 दिन से घर नहीं आयी है, लेकिन शायद आज आये. और आज hi उसका काम तमाम करना है.

निश्छल सोचने लगता है की सरिता वाकई में 2 दिन से घर नहीं गयी है. एक दिन तो वो हॉस्पिटल में सो गयी थी और दुसरे दिन दीदी के साथ ंगो में थी. तो हो सकता है की आज वो घर जरूर आये. मुझे उसे किसी भी तरह घर नहीं जाने देना है. अगर वो घर गयी तो निश्चित hi आज उसकी जान चली जाएगी. मुझे कुछ करना होगा. मैं मिस जोशी को फ़ोन करके घर जाने से रोकता हूँ.

इतना सोचकर निश्छल ने सरिता को फ़ोन किया लेकिन फ़ोन नॉट रेचेबले आ रहा था. do-tin बार कोशिश करने के बाद जब फ़ोन कनेक्ट नहीं हुवा तो निश्छल ने जावेद से बात की.

निश्छल- जावेद तुम वही रुको. मैं अभी पहुंच रहा हूँ वह. वो सरिता को नुकसान पहुंचने के लिए hi वह पर आये हैं. तुम नजर रखो उनपर.

जावेद- यस सर. मैं इनपर नजर रखूँगा.

इतना कहकर निश्छल ने फ़ोन रख दिया और सरिता के क्वार्टर की तरफ चल पड़ा. वह पहुंच कर उसने अपनी गाड़ी जावेद को देते हुवे कहा.

निश्छल- कहा हैं वो लोग.

जावेद- सर वो लोग अभी कुछ देर पहले hi यहाँ से चले गए हैं. सरिता मैडम भी चाँद मिनट पहले hi आयी हैं.

निश्छल- अच्छा तुम अब जाओ और मेरे फ़ोन की प्रतीक्षा करना. जब मैं फ़ोन करूँगा तो तुम और मोहित आ जाना.

जावेद- अगर आप कहे तो मैं भी आपके साथ चालू.

निश्छल- नहीं जावेद. अभी फ़िलहाल जरूरत नहीं है तुम्हारी. तुम बस चौकन्ने रहना और मेरे फ़ोन का इंतज़ार करना.

निश्छल की बात सुनकर जावेद वह से निश्छल की गाड़ी लेकर चला जाता है. निश्छल ने सरिता के फ़ोन पर कॉल किया तो वो बिजी आ रहा था. कई बार तरय करने पर भी जब फ़ोन बिजी रहा तो निश्छल के पास घर के अंदर जाने के सिवाय और कोई मार्ग नहीं बचा. जब वह बॉउंड्री कूदकर घर के अंदर दाखिल हुवे तो उसे दो परछाईया. कमरे में जाती हुई दिखाई दी. निश्छल ने फुर्ती दिखते हुवे लाइट ऑफ की और सरिता के पास पहुंच गया.

********

तभी बहार किसी गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ से निस्चल अपनी सोच से बहार आया. उस समय रात के 2 बज रहे थे. उसका घर जाने का मोड़ नहीं हुवा तो उसने सोचा की वो पार्क में hi सो जाता है, लेकिन वह झींगुर और अन्य कीड़े मकौड़ो की आवाज़ उसकी नींद डिस्टर्ब कर रही थी. इसलिए कुछ देर बाद वो उठकर अपने दुसरे वाले घर चला गया जहा पर उसने दादी को रखा था.

सुबह सरिता की नींद खुलती है सुबह के 8 बज रहे थे. वो जल्दी से नाहा धोकर तैयार होकर पूजा पथ करके ंगो के लिए निकल गयी. जब वो ंगो पहुंची तो सभी उसे देखकर बहुत खुश हुवे. उसने सभी के लिए चॉकलेट लिया था. उसने सभी को चॉकलेट देकर मुंह मीठा करवाया.

तभी सरिता की नजर दादी के ऊपर पड़ी तो वो उन्हें वह देखकर खुश भी हुई और चकित भी हो गयी. सरिता ने दादी से पुछा.

सरिता- ारी दादी आप कब आयी. मैं सर से आपके बारे में बात करने hi वाली थी.

दादी- आज सुबह hi पुलिस बहु मुझे यहाँ पर लेकर आये और मुझे मेरी बेटी से मिलवाया. पुलिस बाबू बहुत hi अच्छे हैं बेटी.

सरिता- (भुनभुनाते हुवे) हाँ वो तो पता है की वो कितने अचे इंसाने हैं. पूरी म्हणत मैंने की और दादी को गुड़िया से मिलवाने के क्रेडिट खुद ले लिया. मतलबी इंसाने.

दादी- लेकिन पुलिस बाबू ने ये भी बताया की मेरी बच्ची को तुमने बच्चा सिंह से बचाया. गुड़िया ने भी मुझे तुम्हारे बारे में बताया की कैसे तुमने उसका ख्याल रखा

ये बात सुनकर सरिता बहुत खुश हो गयी. उसे अपनी पिछली कही गयी बातो का अफ़सोस होने लगा, की नाहक hi उसने निश्छल को भला बुरा कहा. तभी वह पर एकक्कु दौड़ती हुई आयी और सरिता से कहा.

अक्कू- अरे दीदी. आप सबको चॉकलेट क्यों बाँट रही हैं. मुझे चॉकलेट बहुत अच्छी लगती है. आप साडी चॉकलेट मुझे दे दीजिये. मैं सबसे छोटी हूँ न. मैं किसी को भी चॉकलेट नहीं दूँगी .

सरिता- (हँसते हुवे) लेकिन ये तो गलत बात है अक्कू. अच्छे बचे तो साडी चीजे अपने दोस्तों और सखियों से मिल बाँट कर कहते हैं. मैं तो समझती थी की तुम बहुत अच्छी बच्ची हो, लेकिन तुम तो साडी चॉकलेट अकेले hi खाना चाहती हो. इसका मतलब तुम अच्छी बच्ची नहीं हो.

अक्कू- नहीं मैं बहुत अच्छी बाछहि हूँ दीदी. मुझे घर में सब बोलते हैं की अक्कू बहुत अच्छी बच्ची है.

सरिता- तब तो तुम्हे चॉकलेट सबके साथ बांटकर खाना चाहिए फिर.

अक्कू- हाँ दीदी मैं सब को चॉकलेट दूंगी. आप मुझे पूरी चॉकलेट दे दीजिये.

अभी अक्कू और सरिता बात कर hi रहे थे की वह पर गुड़िया आ जाती है. गुड़िया ने अक्कू से कहा.

गुड़िया- अक्कू तुमने दीदी को बर्थडे विश किया या नहीं.

अक्कू- क्या आज दीदी का बर्थडे है. लेकिन दी तो कक लायी hi नहीं हैं. ये तो छोकलाते लायी हैं.

सरिता- हाँ मैं कक लाना भूल गयी अक्कू.

अक्कू- लेकिन बर्थडे पर सभी कक kat-te हैं फिर अपना बर्थडे मानते हैं. तो आप क्यों नहीं लेकर आयी कक.

सरिता- चलो मेरे साथ अभी कक kat-te हैं फिर.

सरिता की बात सुनकर अक्कू उसके साथ चल पड़ी. सरिता अक्कू का उतावलापन देखकर बहुत खुश हो रही थी. सरिता ने कल hi सोच लिया था की इस बार वो घर नहीं जा रही है तो अपना बर्थडे ंगो में hi इन बच्चो के साथ hi मनाएगी. सरिता ने ंगो के एक कर्मचारी को बेकरी भेजकर कक मंगवाया. सरिता ने उस बेकरी का एड्रेस भी उस आदमी को दे दिया. जहा पर उसने कल hi कक का आर्डर दे दिया था.

थोड़ी hi देर में वो कर्मचारी कक लेकर आ गया और बहार एक टेबल लगाकर कक उस पर रख दिया. सभी बच्चे सरिता को घेरकर खड़े हो गए. सरिता से ज्यादा खुश तो अक्कू थी. कक देखते hi उसके मुंह में पानी आ गया. उसने ख़ुशी से उछालते हुवे सरिता से कहा.

अक्कू- चलिए दीदी. जल्दी से कक काटिये. मेरे मुंह में पानी आ रहा है.

सरिता- मैं नहीं अक्कू. कक तुम कटगी.

अक्कू- नहीं दीदी. मम्मी कहती हैं की जिसका बर्थडे होता है कक वही kat-ta है. तो बर्थडे आपका है तो कक भी आप hi कटगी न.

सरिता- चलो ठीक है दोनों लोग मिलकर कक kat-te हैं.

फिर सरिता ने अक्कू के हाथ में छुरी पकड़ा दी और उसका हाँथ पकड़कर कक काटने लगी. कक काटने के बाद बच्चो ने सरिता को बर्थडे विश किया. सरिता ने सभी को कक खिलाया और शाम को वापस आने का बोलकर पस के लिए निकल गयी.

सरिता ने पस में किसी को नहीं बताया था की आज उसका जन्मदिन है तो किसी को पता नहीं था इस बारे में. सरिता ने पस पहुंच कर रोज के जैसे काम करने बैठ गयी. कुछ देर बाद रावत सर ने सरिता को काम के सिलसिले में सरिता को अपने केबिन में बुलाया. सरिता रावत सर के केबिन में चली गयी.

जैसे hi सरिता रावत सर के केबिन में गयी. उसी वक्त निस्चल पस में आता है और सीधा सरिता के केबिन में चला जाता है, लेकिन सरिता अपने केबिन में नहीं थी तो निश्छल इंतज़ार करने लगता है सरिता को. सरिता रावत सर के पास थी और उसका मोबाइल उसके केबिन में hi रखा था. कुछ देर इंतज़ार करने के बाद जब सरिता नहीं आती तो निस्चल उसके केबिन से निकलने की सोचता है.

उसी वक्त सरिता का मोबाइल बजने लगता है. निश्छल ने स्क्रीन पर देखा तो जानू नाम शो कर रहा था. निश्छल ने सोचा की ये शायद सरिता का बॉयफ्रंड होगा. कुछ देर बजने के बाद फ़ोन बंद हो गया. कुछ पल में फिर से दोबारा कॉल आयी और कुछ देर बजने के बाद बंद हो गयी. कुछ पल बाद तीसरी बार जब कॉल आयी तो निश्छल झुंझला गया और मन में hi बोलै.

निश्छल- (मन में) किस्त्न चिपकू है ये सरिता का बॉयफ्रंड. इसको समझ में नहीं आता की अगर सरिता फ़ोन नहीं उठा रही है तो बिजी होगी, कुछ देर बाद करू, लेकिन नहीं, सबर hi नहीं हो रहा है इससे तो. फ़ोन पर फ़ोन किये पड़ा है. सही भी है. किसको सबर होगा सरिता जैसी लड़की अगर उसकी गिर्ल्फ्रेंड हो. सुन्दर, बहादुर और अपने काम के प्रति वफादार. देखु तो आखिर किसका नसीब इतना जोरदार है जिसे सरिता जैसी गिर्ल्फ्रेंड मिली.

यही सोचकर सरिता का फ़ोन निश्छल ने उठा लिया. लेकिन तब तक कॉल कट हो गया था. कुछ पल बाद फिर से फ़ोन बजने लगा तो निश्छल ने फ़ोन रिसीव कर लिया और जैसे hi अपने कण में लगाया. एक दनदनाती हुई मधुर और तेज़ आवाज़ उसके कानो से टकराई. ये मनीषा की आवाज़ थी.

मनीषा- Hello दिदिया. कहा हो तुम. कब से तुमको फ़ोन कर कर के परेशां हो रहे हैं और एक तुम हो जो फ़ोन hi नहीं उठा रही हो. हम लोग स्टेशन के बहार खड़े हैं. कोई रिक्षा और ऑटो वाला नहीं मिल रहा है. तुम्हारे क्वार्टर तक कैसे आऊं.

Hello दिदिया. मुझे पता है तुम गुस्सा करोगी की मैंने तुम्हे आने की खबर क्यों नहीं की, लेकिन हम तुम्हे सरप्राइज देना चाहते थे. इसलिए अगर बता देते तो वो सरप्राइज कैसे रहता फिर. हेल्लो दिदिया. सुन रही हो न. अरे कुछ बोली भी दिदिया.

निश्छल- (अपने मन में) अरे यार ये तो अपनी बहन से भी चार कदम आगे हैं. फ़ोन उठाने की देरी में hi इसने इतना कुछ सुना दिया. बाप रे. बड़ी शेर है तो छोटी सवा शेर है. दोनों बहनो से तो बच कर रहना पड़ेगा. (मनीषा से) Hello.

मनीषा- आप कौन हैं और मेरी दिदिया सरिता जोशी कहाँ पर हैं.

निश्छल- वो तो सर के साथ मीटिंग में बैठी हुई हैं.

मनीषा- अच्छा, फिर आप कौन हैं और मेरी दिदिया का फ़ोन आपके पास क्या कर रहा है.

निश्छल- मैं भी उनके साथ hi काम करता हूँ. उन्होंने hi मुझे फ़ोन संभल कर रखने के लिए दिया है.

निश्छल ने मनीषा से झूठ बोल दिया, लेकिन उसे नहीं पता था की उसका ये झूठ उसे भरी पड़ने वाला है. निश्छल की बात सुनकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अच्छा. तो आप मेरी दिदिया से निचे पोस्ट पर काम करते हैं. ी थिंक की आप दिदिया के ड्राइवर हैं. तभी दिदिया ने अपना फ़ोन आपको दिया है. तो ड्राइवर जाओ और मेरी दिदिया को बोलो की उसकी जणू का फ़ोन है.

निश्छल -(चकित होते हुवे मन में) लो बहुत स्मार्ट बनते फिरते थे न. लो ड्राइवर बन गए अब. और झूठ बोलो. सीधे नहीं बता सकते थे की उसके बॉस हो. नहीं. मस्ती चढ़ी थी न तो अब ड्राइवर बैंकर भुगतो. (मनीषा से) जी जरूर. अभी कुछ देर बाद जब मीटिंग ख़तम हो जाएगी तो मैं उन्हें बोल दूंगा.

मनीषा- तब तक हम यहाँ बैठकर मक्खी मारें क्या. आप अभी अंदर जाइये और मेरी दिदिया को बोलिये की उसकी बहन और उसके मम्मी पापा उसका स्टेशन के बहार इंतज़ार कर रहे हैं.

निश्छल- लेकिन अभी तो मीटिंग…………

मनीषा- (बिच में hi) अब ज्यादा जुबान न लड़ाओ मुझसे. नहीं तो दिदिया को बोलकर तुमको नौकरी से निकलवा दूँगी. समझे या नहीं समझे. अब चुपचाप जाओ और दिदिया को मेरा संदेसा दो.

निश्छल- (मन में) अरे बाप रे. क्या लड़की है यार. सीधे धमकी पर उतर आयी. बड़े मिया तो बड़े मिया. छोटे मिया सुभान अल्लाह. (मनीषा से) मैडम को तो अभी समय लगेगा. रुकिया मैं आता हूँ आप सब को लेने के लिए.

मनीषा- हाँ ये हुई न बात. अब आये लाइन पर. जल्दी से आना. ज्यादा देर नहीं लगाना नहीं तो दिदिया..

निश्छल- (बिच में) हाँ मुझे पता है की आप अपनी दिदिया से बोलकर मुझे नौकरी से निकलवा देंगी. रुकिए मैं जल्दी hi आ रहा हूँ.

इतना कहकर निस्चल ने फ़ोन रख दिया. उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. उसने अपने दिमाग में कुछ नया प्लान किया और सरिता के केबिन से बहार निकल गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

🤣😃😂😃

अगर यहां सरिता न होकर कोई और लड़की होती तो आपको मजाकिया न लगता।🤣 सरिता से आपकक नफरत जो है।🤣

सरिता के कारनामे के चलते निश्चल ने इतना अंदाज़ लगा लिया था कि सरिता के लिए खतरा बढ़ गया है इसलिए उसने जावेद और मोहित को लगा दिया था सरिता पर नजर रखने के लिए और उसका अंदाज़ा भी सही निकला। बच्चा सिंह ने अपने नुमाइंदों को भेज दिया घग सरिता को मारने के लिए।।

अब प्यार हो गया है तो नखरे तो उठाने पड़ेंगे, वो अगल बात है कि प्यार एकतरफा ही है, लेकिन फिर भी निश्चल कोशिश पूरी कर रहा है इसे दोतरफा करने की।।

मनीषा जैसी दिखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है। मनीषा ही वजह बनेगी सरिता और निश्चल को मिलाने की, लेकिन अभी उसमें बहुत समय है तब तक इनकी नोक झोंक का आनंद उठाइये।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 34

निस्चल मनीषा से बात कर के उसे स्टेशन पर इंतज़ार करने के लिए बोल देता है और सरिता के मोबाइल स्क्रीन पर कुछ देर देखने के बाद मोबाइल कट कर केबिन से बहार निकल जाता है. जैसे hi निश्छल सरिता के केबिन से बहार निकल कर बहार की तरफ जाता है ठीक उसी वक्त सरिता रावत सर के केबिन से बहार निकल कर आती है. उसने निस्चल को अपने केबिन से निकलते हुवे देखा और मन में सोचने लगी.

सरिता- (मन में) ये हिटलर मेरे केबिन में क्या कर रहा था. जान्हवी से पूछकर देखती हूँ.

यही सोचकर वो जान्हवी के पास जाती है जो अपने काम में बिजी थी. सरिता को देखते hi वो अपनी चेयर से कड़ी हो जाती है. सरिता ने उसे बैठने का इशारा करते हुवे पूछा.

सरिता- सर मेरे केबिन में क्या कर रहे थे जान्हवी.

जान्हवी- पता नहीं मैडम, शायद आपका इंतज़ार कर रहे थे. अभी वो मोहित सर के साथ कही पर निकल गए.

सरिता- अच्छा ठीक है फिर.

जान्हवी- वैसे आपको कुछ काम था क्या सर से.

सरिता- नहीं तो, ऐसी कोई बात नहीं है. मैंने तो बस उन्हें अपने केबिन से निकलते हुवे देखा, इसलिए तुमसे पुछा मैंने.

इतना कहकर सरिता अपने केबिन में चली जाती है. उधर मोहित को लेकर निश्छल पस से बहार आता है और उसे कुछ जरूरी दिशा निदेश देते हुवे कही भेज देता है और खुद गाड़ी लेकर स्टेशन चला जाता है मनीषा और उसके मम्मी पापा को लेने के लिए.

लगभग 20-25 मिनट में hi वो स्टेशन पर पहुंच जाता है और मनीषा को फ़ोन करता है. मनीषा ने फ़ोन उठाया और कहा.

मनीषा- Hello.

निश्छल- जी मैं स्टेशन पर आ गया हूँ आप लोग कहा पर हैं.

मनीषा- अच्छा ड्राइवर बोल रहे हो तुम. मैं स्टेशन के बहार मैं गेट से आ रही हूँ. तुम वह पर आ जाओ.

निश्छल- (मन में) अरे यार इस लड़की ने तो मुझे सच में ड्राइवर बना दिया है.

मनीषा की बात सुनकर निश्छल मैं गेट पर पहुंच जाता है और अपने सर पर कैप लगाकर मनीषा का इंतज़ार करने लगता है. थोड़ी देर बाद मनीषा और उसके मम्मी पापा उसकी गाड़ी के पास आये. निश्छल ने आगे बढ़कर आनंद जज और रानी जी के पेअर चुवे तो उन्होंने निश्छल को जीते रहो बीटा बोलकर आशीर्वाद दिया.

सामान गाड़ी में रखने के बाद निश्छल ड्राइविंग शीट पर बैठ गया. मनीषा भी आ कर उसके आगे वाली शीट पर बैठ गयी. आनंद जी और रानी जी के बैठने के बाद निश्छल ने अपनी कैप उतरी और गाड़ी स्टार्ट करके आगे बढ़ा दी.

निश्छल के कैप उतरने के बाद मनीषा उसे गौर से देखने लगी और pahchan-ne की कोशिश करने लगी. और निश्छल से बोली.

मनीषा- मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की मैंने आपको कहीं देखा है.

मनीषा की बात सुनकर निश्छल मन hi मन सोचने लगा की इसने जरूर मुझे सरिता से बाज़ार में थप्पड़ कहते हुए देखा होगा. कहीं इसे ये बात याद न आ जाये और जैसे ये है उससे तो लगता है की ये किसी के सामने ये बात बोल भी देगी, इसलिए निश्छल ने झूठ बोलते हुवे कहा.

निश्छल- जी नहीं हम पहली बार मिल रहे हैं..

नाचल की बात सुनकर मनीषा अपने गाल पर अपनी ऊँगली रखकर सोचने लगी. थोड़ी देर बाद वो निश्छल को पहचान गयी. उसने निश्छल से कहा.

मनीषा- अरे तुम तो वही हो न जिसको मेरी दिदिया ने थप्पड़ मारा था मार्किट में.

उसकी बात सुनकर निश्छल ने अपना सर पिट लिया. जिससे वो बचने की कोशिश कर रहा था. उसी बात को मनीषा ने बोल दिया. उसने सोचा की अभी इतनी बेइज्जती क्या काम थी जो अपने मम्मी पापा के सामने और बेइज्जती कर रही हैं. मनीषा की बात सुनकर आनंद जी ने कहा.

आनंद- ये क्या बोल रही हो मनीषा. ऐसे किसी को अपमानित नहीं किया जाता बेटी. चलो माफ़ी मानगो इनसे.

निश्छल- नहीं अंकल. उसकी जरूरत नहीं है. मैं वही हूँ. जिसे तुम्हारी दिदिया ने थप्पड़ मारा था.

मनीषा- मुझे पता था की दिदिया को अपनी गलती का पछतावा जरूर होगा. मैंने भी डीडीए को कहा था की उन्होंने आपको थप्पड़ मार्कर गलत किया. उसमे आपकी गलती नहीं थी. लेकिन दिदिया को बाद में आखिर रीलीज़ हो hi गया. इसीलिए दिदिया ने अपनी गलती रीलीज़ होते hi आपको नौकरी पर रख लिया और अपना ड्राइवर बना लिया.

निश्छल- (मन में) हद है यार. मिस जोशी ने तो आज तक सॉरी का एक शब्द नहीं बोलै और ये अपनी बहन का बखान किये जा रही है. ये लड़की तो अपनी बहन से ज्यादा तेज़ है. मिस जोशी ने तो नहीं लेकिन इसने मुझे अपना ड्राइवर जरूर बना लिया है.

निश्छल- हाँ आपने सही कहा. ऐसे hi हुवा था.

मनीषा- देखा मैं न कहती थी. मेरी दिदिया दुनिया की बेस्ट दिदिया है. ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू दिदिया.

इसी तरह मनीषा सरे रस्ते बक बक करती रही. निश्छल ने गाड़ी अपने घर पर जा कर रोकी और फ़ोन करके सविता को बहार आने के लिए कहा. थोड़ी देर बाद सविता घर से बहार आयी. निश्छल ने सविता को उन लोगो से थोड़ा दूर लेजाकर उससे कहा.

निस्चल- दी . ये सरिता के मम्मी पापा और उसकी बहन हैं. आप इन्हे अंदर ले जाइये. मैं जा रहा हूँ. बाद में आऊंगा. आज सरिता का जन्मदिन है. ये लोग उसका जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए आये हैं. इन्हे अभी मेरे बारे में कुछ मत बताना.

सवी- क्या सच में आज सरिता का जन्मदिन है. लेकिन उसने तो मुझे कुछ नहीं बताया. और ये लोग तुझे कहा मिल गए.

सविता के पूछने पर निश्छल ने उसे सबकुछ बता दिया. जिसे sun-ne के बाद सविता की हंसी निकल गयी. सविता ने हँसते हुवे कहा.

सवी- निशु. तू तो सरिता को लेडी डॉन बोलता है न. लेकिन उसकी बहन तो उससे भी ज्यादा खतरनाक है. इसने तो तुम्हे सरिता का ड्राइवर बना दिया. तू इसे क्या बोलेगा.

निश्छल- मैं जा रहा हूँ. बाद में आता हूँ मैं.

निश्छल ने सविता की बातो को दरकिनार करते हुवे जाने को बोलकर गाड़ी वापस लेकर चला गया. निस्चल के जाने के बाद सविता ने जाकर सरिता के मम्मी पापा के पेअर छूकर आशीर्वाद लिया और उनसे कहा.

सविता- आइये अंकल, आंटी अंदर चलिए.

मनीषा- आप कौन है. मेरी दिदिया तो यहाँ पर नहीं रहती तो ड्राइवर ने हमको यहाँ पर क्यों छोड़ा.

सवी- मैं सविता. सरिता की दोस्त. अब साडी बाते यही करनी है या घर के अंदर चलें.

इतना कहकर सविता ने नौकर को बुलाकर उनका सामान अंदर रखने के लिए बोल दिया और सबको लिवाकर घर के अंदर चली गयी. घर के अंदर जाने के बाद सरिता ने उन्हें हॉल में बैठकर नौकर को पानी लेन का बोलकर एक कोने में जाकर सरिता को फ़ोन किया. सरिता उस समय अपने केबिन में बैठकर काम कर रही थी. फ़ोन रिसीव करने के बाद सरिता ने कहा.

सरिता- Hello दी. कैसी हैं आप.

सवी- मैं तो ठीक हूँ सरिता. लेकिन मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी.

सरिता- क्या हुवा दी. सब ठीक तो है न. मैंने क्या किया दी. जो आप मुझसे ऐसे बात कर रही हैं.

सवी- तो और कैसे बात करूँ मैं तुमसे. इतनी बड़ी बात हो गयी और तुमने मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा. मैं इतनी परायी हो गई हूँ तुम्हारे लिए.

सरिता- (टेंशन में आकर) आखिर बात क्या है दी. आप ऐसे क्यों बोल रही हैं. जो भी बात है साफ साफ बताइये न.

सवी- आज तुम्हारा जन्मदिन है न. तुमने ये बात मुझे बताना जरूरी नहीं समझा. मुझे दूसरो से पता चल रहा है की आज तुम्हारा जन्मदिन है.

सरिता- (मुस्कुराते हुवे) क्या दी इतनी छोटी सी बात के लिए आपने मुझे डरा hi दिया था. मुझे गलती हो गयी दी. मुझे तनिक भी याद नहीं रहा आपको बताना.

सवी- वो तो मुझे निशु ने बताया नहीं तो मुझे पता hi नहीं चलता की आज तुम्हारा जन्मदिन है. निशु बता रहा था की आज सुबह तुम ंगो भी गयी थी और वह अपना जन्मदिन भी मनाया.

सरिता- हाँ दी. वो इस बार मैं घर से दूर हूँ, और यहाँ पर मेरा कोई है नहीं तो मैंने सोचा की इस बार बच्चो के साथ hi अपना जन्मदिन मन लून.

सवी- ये क्या बोल रही हो तुम. एक थप्पड़ पड़ेगा तो अकाल ठिकाने आ जाएगी तुम्हारी. क्या मैं कुछ नहीं हूँ तुम्हारी. क्या तुम बस मुंह से hi मुझे दी कहती हो. दिल से मुझे अपनी दी नहीं मानती. क्या मैं तुम्हारे लिए परायी हूँ जो तुम बोल रही हो की तुम्हारा यहाँ कोई नहीं है.

सरिता- अरे नहीं दी. मेरे कहने का वो मतलब नाही था.

सवी- तो और क्या मतलब था तुम्हारे कहने का. तुम यही तो कहना चाहती हो की मैं कुछ भी नहीं हूँ तुम्हारे लिए.

सरिता- नहीं दी. आप मुझे गलत समझ रही हैं. इस अनजाने शहर में एक आप hi तो हैं. जिनसे मेरी मुलाकात हुई हैं और मैंने सोचा भी नहीं था की इतने काम समय में आप मेरे लिए इतनी खास बन जाएँगी. आज मेरा जन्मदिन है और आप मुझे थप्पड़ मरने के लिए बोल रही हैं.

सवी- और नहीं तो क्या. ये थप्पड़ hi मेरी तरफ से तुम्हारे लिए जन्मदिन का तोहफा होगा.

सरिता- आप जो भी तोहफा देंगी वो मुझे दिल से कुबूल होगा दी.

सवी- तुम्हे तोहफा और बम दोनों मिलेगा तुम्हारे जन्मदिन पर सरिता.

सरिता- सच में दी. सॉरी दी. आपको न बता पाने के लिए.

सवी- अब माफी तो तुम्हे तभी मिलेगी, जब तुम घर आओगी वर्ण भूल जाओ की मैं तुम्हे माफ करुँगी.

सरिता- ये क्या बात हुई दी. आपने तो मुझे मुसीबत में दाल दिया है. मैं आज नहीं आ पाऊँगी दी. मैं कल आती हूँ आपके पास.

सवी- आज मतलब आज. अगर आज नहीं आयी तो फिर कभी मत आना मेरे पास.

सरिता- अरे दी. मैंने तो ंगो जाने का प्लान बनाया था. बच्चो के साथ अपना जन्मदिन मानाने के लिए.

सवी- मुझे कुछ नहीं sun-na. तुम वह सुबह तो गयी थी न. तो शाम को जाने की क्या जरूरत है.

सरिता- वो तो ठीक है दी. लेकिन मैंने उनको बोलै था की मैं शाम को उनसे मिलने जरूर आउंगी

सवी- अच्छा. तो अपना वह जाने का प्लान सांक्ले करो . क्योंकि आज शाम को तुम मेरे घर पर आ रही हो. इसके आगे मुझे तुम्हारी है या न नहीं sun-ni है. मैं तुम्हे बताने के लिए फ़ोन नहीं किया है , आने के लिए फ़ोन किया है. तो तुम शाम को आ रही हो मतलब आ रही हो. तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है.

सरिता- सच में दी. क्या सरप्राइज है दी. बताओ न.

सवी- सुर्प्रीज़े है भाई. अगर अभी बता दिया तो वो सरप्राइज कैसे रहेगा फिर. वो तो तुम्हे तभी पता चलेगा जब तुम शाम को घर आओगी. अच्छा अब मैं रख रही हूँ. शाम को तुम्हारा इंतज़ार करुँगी.

इतना कहकर सविता ने फ़ोन रख दिया और सबके साथ आकर बैठ गयी और बाते करने लगी. इधर फ़ोन रखने के बाद सरिता मन hi मन सोचने लगी.

सरिता- (मन में) क्या यार. ये दी ने तो मुझे फंसा hi दिया. अब तो मुझे जाना hi पड़ेगा दी के यहाँ. नहीं तो वो मुझसे नाराज़ हो जाएँगी.

सरिता पस में बैठी शाम तक काम में बिजी रहती है. सारा काम निपटाकर वो पस से निकल जाती है और अपने कमरे पर जाने का सोचती है. फिर पता नहीं कुछ सोचकर सविता के घर की तरफ निकल जाती है. जैसे hi वो घर के अंदर दाखिल होने लगती है तो गेट कीपर सरिता को रोक देता है.

गेट कीपर- अरे कहा घुसी जा रही हो.

सरिता- अरे काका मैं हूँ सरिता. आपने मुझे पहचाना नही क्या. मुझे सविता दी ने बुलाया है

गेट कीपर- आप अभी रुकिए. पहले मैं सविता बिटिया से पूछ लेता हूँ. उसके बाद आप अंदर जाइएगा.

सरिता- ठीक है काका. आप दी से बात कर लीजिये. तब तक मैं यही इंतज़ार कर रही हूँ.

सरिता की बात सुनकर गेट कीपर ने सविता के पास फ़ोन लगाया और उसे सरिता के बारे में बता दिया. सविता ने 5 मिनट बाद सरिता को भेजने के लिए कहा. फ़ोन रखने के बाद गेट कीपर ने सरिता से कहा.

गेट कीपर- सविता बिटिया ने आपको 5 मिनट बाद अंदर आने के लिए कहा है,

सरिता- (मन में) ये क्या हो गया है आज सबको. ये मुझे जाने नहीं दे रहे हैं और दी मुझे 5 मिनट बाद अंदर बुला रही हैं, लगता है दी मुझे नाराज़ हैं जो मैंने उन्हें अपने जन्मदिन के बारे में नहीं बताया. मुझे सबसे पहले दी की नाराज़गी दूर करनी होगी.

5 मिनट बाद गेट कीपर ने सरिता को अंदर भेज दिया. सरिता जब घर के अंदर जाती है तो पूरे घर में अँधेरा था. सरिता लॉबी से hi सविता को आवाज़ देती है.

सरिता- सविता दी. कहा हैं आप. दी कुछ तो बोलिये दी. आप ऐसे तो नाराज़ मत होइए मुझसे.

तभी घर की लाइट ों होती है और सभी एक साथ चिल्लाते हुवे बोलते हैं.

सभी- बार बार दिन ये आये. बार बार दिल ये गए. तुम जियो हज़ारों साल ये मेरी है आरजू. हैप्पी बैठदय तो यू. हैप्पी बैठदय तो यू. हैप्पी बैठदय डिअर सरिता. हैप्पी बर्थडे तो यू.

सरिता की आँखे आश्चर्य से फटी की फटी रह गयी जब उसने सामने आनंद जी, रानी जी और मनीषा को देखा तो. उनके साथ राघव और सविता भी कड़ी थी. सरिता को तो पता भी नहीं था की उसके मम्मी पापा और मनीषा उसका जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए आ रहे हैं और वो सविता के यहाँ पर उसे मिलेंगे.

अपने मम्मी पापा और मनीषा को देखकर सरिता की आँखों में आँशु आ गए. इतने दिन बाद वो अपनी आँखों के सामने वो उन्हें देख रही थी. वो दौड़कर अपनी माँ के गले लिपट गयी और रोने लगी. रानी जी ने उसकी पीठ पर थपकी देते हुवे कहा.

रानी जी- अरे मेरी बच्ची. तुम रो क्यों रही हो. ये तो ख़ुशी का मौका है. चलो अब चुप हो जाओ.

रानी जी की बात सुनकर सरिता ने अपने आँशु साफ किये और उनसे अलग होकर अपने पापा के पांव छूने के लिए झुकी तो आनंद ने उसका हाँथ बिच में पकड़कर अपने गले लगा लिया और कहा.

आनंद जी- कैसी है मेरी बच्ची. तू ठीक तो है न.

सरिता- हां पापा मैं बिलकुल ठीक हूँ.

तभी मनीषा ने खू खोओ की आवाज़ निकल कर अपना गाला साफ करने की एक्टिंग करते हुवे कहा.

मनीषा- अरे कोई हमको भी पूछ ले. हम भी यही पर हैं.

मनीषा के ऐसा बोलने पर सरिता अपने पापा से अलग हुई और मनीषा से जाकर मिली और पुछा.

सरिता- आप लोगो ने मुझे क्यों नहीं बताया की आप लोग आ रहे हैं.

मनीषा- अरे भाई. सुर्प्रीज़े नाम की भी कोई चीज़ होती है. उसका नाम तो सुना hi होगा. ये वही है.

मनीषा की बात सुनकर सब हंसने लगे. सरिता ने मनीषा के सर पर हलकी सी चपत लगाई और कसकर उसको अपने गाला लगा लिया. अभी भी सरिता के मन में बहुत सरे सवाल चल रहे थे. उसे अभी भी ये समझ में नहीं आ रहा था की उसके मम्मी पापा और मनीषा बिना उसे बताये यहाँ कैसे आ गए. सरिता ने अपने मन में चल रहे सवालो को सविता के सामने खोल कर रख दिया.

सरिता- एक बात मुझे समझ में नहीं आती की आप लोग यहाँ पर आये कैसे. कौन लेकर आया आपको यहाँ पर. मेरा मतलब है की मैंने तो सवी दी को अपने जन्मदिन के बारे में कुछः बताया भी नहीं था और सबसे बड़ी बात आप लोगो में से किसी को दी के घर का एड्रेस भी पता नहीं था. तो फिर ये सब हुवा कैसे.

सवी- अरे थोड़ा सबर तो करो. तुम्हे सब का जवाब मिल जायेगा. पहले तुम जाओ फ्रेश हो जाओ. मुझे लग रहा है की तुम सीधी पस से hi यहाँ आ गयी हो. तुम जाकर अपनी यूनिफार्म बदल लो.

सरिता- मैं कमरे पर गयी थी और वह से यहाँ आ गयी. मुझे नहीं पता था की यहाँ पर ऐसा कुछ होगा. नहीं तो मैं यूनिफार्म बदल कर hi आती. आपने भी मुझे कुछ नहीं बतया इसके बारे में.

मनीषा- अरे दिदिया. बात तो तुम ऐसे कर रही हो जैसे दीदी के बता देने पर तो तुम आती hi. मैंने hi दीदी को मन किया था की आपको कुछ न बताये. आखिर आपको सरप्राइज जो देना था. वैसे कपडे की चिंता आप बिलकुल न करे दी. मैं अपने साथ लेकर आयी हूँ..

सरिता- क्या. इतनी दूर से तुम कपडे लेकर आई हूँ.

मनीषा- हाँ जैसे हम लन्दन में रहते हैं न. अरे यार इनको इंस्पेक्टर किसने बना दिया. ऐसा करो दिदिया. कल hi रेसिग्ने देकर तुम वकील बन जाओ . बहुत सवाल जवाब करती हो. मैं तो पाक जाती हूँ तुम्हारे सवालो से. अपना यह दुर्लभ टैलेंट तुम अपने क्लिंट के केस में लगाना. तुम पक्का हर केस जीतोगी. पता नहीं कितने सवाल करती हो. तुम्हारे सवालो का जवाब तो जज के पास भी नहीं मिलेगा.

सरिता- अच्छा अब ज्यादा मत बोल और ये बता की कौन से कपडे लेकर आयी है मेरे लिए.

मनीषा- वो गाउन तुम्हे याद है दिदिया. जो मैं तुम्हे यहाँ आते समय लेन के लिए बोलै था. की इसे अपने पास रख लो किसी पार्टी में pahan-ne के लिए काम आएंगे. उसे hi लेकर आयी हूँ. मम्मी तो बोल रही थी की कोई दूसरा नया कपडा खरीदने को, लेकिन मैंने hi मन कर दिया मम्मी को की दिदिया के लिए गाउन hi लेकर चलेंगे.

सरिता- हाँ पता है मुझे तू जलभुन कर राख हो गयी होगी. जब मम्मी ने मेरे लिए नए कपडे खरीदने के लिए कहा होगा, तू नहीं चाहती थी की मेरे पास तुमसे ज्यादा कपडे हो.

मनीषा- क्या बात है दिदिया. तुम्हारे दिमाग तो यहाँ भी बिलकुल सही काम कर रहा है. मैंने सोचा था की अपराधी को पकड़ते पकड़ते तुम्हारे दिमाग का दही हो गया होगा. लेकिन अब लगता है की मैं गलत थी.

सरिता- मेरा दिमाग तो पहले भी सही काम करता था और अब भी सही काम करता है, लेकिन तुम्हारे दिमाग पर मुझे पहले भी शक था और अभी भी शक है की उसमे लगी हुई जंग अभी तक साफ़ हुई भी है या अभी भी लगी हुई है. कभी कभी उसे इस्तेमाल भी कर लिया करो.

दोनों बहाने अपने में hi लगी हुई थी. दोनों एक दुसरे से पीछे नहीं रहचा चाहती थी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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