Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 7 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

अपडेट- 32(ा) (मेघा अपडेट)

अब अगर तुम मेरे बदन को भी चूना चाहो तो भी मैं अब तुम्हें मन नहीं karungi.................is बदन पर अब तुम्हारा उतना hi अधिकार हैं जितना की सैम ka.............tum इस जिस्म को भोगना चाहते हो naa.................to आवो मेरे पास और एक बार मुझसे कह के तो dekho.................main तुम्हारी ख़ुशी के लिए अपने आपको तुम्हारे क़दमों में बिछा दूँगी...............: और आसमा की आँखों से आंसूं चालक पड़ते हैं वहीँ वो हरी के लिए फिर से तड़प उठती hain.................aasma गुज़रते वक़्त के साथ बदल नहीं रही thi.................balki अब पूरी तरह से बदल चुकी थी.........................



अब आगे.....................................................................


वक़्त गुज़रता गया और देखते hi देखते शाम हो gayi........................aasma कई दफा हरी को अपना फ़ोन लगा चुकी थी और हर बार उसे बस एक hi जवाब मिलता tha............"Switch Off"........jissey सुनने के बाद उसके चेहरे पर और भी ज़्यादा मायूसी चा jati...................uska खूबसूरत और मासूम सा चेहरा और भी मुरझा सा jata..................shaam को जब वो नीचे बरामदे में जब गयी और अपने तंगी हुए कपड़े उतरने लगी तो उसकी नज़रें उसकी ब्रा और पंतय पर जैसे अटक सी gayi................wo अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हुई उसे ाचे से छूने lagi............uspar कुछ महसूस करने लगी .................मगर जो चीज़ वो खोज रही थी वो उसे नहीं मिला tha...................aasma की ब्रा और पंतय को हरी ने टच भी नहीं किया tha..........jisey देखने के बाद आसमा का चेहरा और भी ज़्यादा मायूस हो गया था................

वो अपने कपड़े समेटती हुई अंदर आयी और आकर बिस्टेर पर चुप चाप से लेट gayi...............usney आज सुबह से खाना भी नहीं खाया tha...............na hi उसका किसी चीज़ में मुन्न लग रहा tha.................sara दिन वो बस बिस्टेर पर ऐसे hi गुमसुम सी लेती rahi..............shaam को सैम का जब फ़ोन आया तो उसने ठीक से सैम से भी बात नहीं ki..............tabiyat खबर का बहाना बनाकर वो बात ताल दी..................

इस वक़्त घडी में शाम के 7 बज रहे they............aasma का मोबाइल तकिये के पास पड़ा हुआ tha................wo वहीँ गुमसुम सी बैठी हुई thi.............tabhi उसका मोबाइल बज utha...............phone हरी का tha............jab आसमा की नज़रें अपने मोबाइल के स्क्रीन पर गयी उसके चेहरे पर आयी मायूसी जैसे पल भर में छु हो gayi.....................uska चेहरा ख़ुशी से खिल utha..............wo फ़ौरन अपना मोबाइल रइवे की और उधर से हरी फिर बोल पड़ा..............

" memsaheb......................jo हुआ उसके लिए मुझे आप माफ़ कर dijiye..............mujhe आपसे एक ज़रूरी बात करनी थी.................." और हरी धीरे से बोल pada.............uski आवाज़ में आज कठोरता स्पष्ट झलक रही थी................. वहीँ आसमा का कलेजा दुर्र से धड़क utha................uske मुन्न में अजीब तरह के विचार आने लगे जिससे उसका दुर्र और भी गहराता चला gaya...........wo हौले से बस hhhhhhnnnnnnnnnnn कहती हुई फिर से खामोश हो gayi......................magar इस वक़्त उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था..............

" memsaheb...................aap अपने लिए कोई ाचा सा दूसरा नौकर तलाश lijiye...............main ये जगह छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए अब गाँव जाना चाहता हूँ..........." और हरी जैसे आसमा के ऊपर बम फोड़ दिया जिसे सुनकर आसमा की बोलती hi नहीं बंद hui...............balki उसकी आँखों से आंसूं भी चालक pade..............ek पल तो उसे ऐसा लगा जैसे वो वहीँ चाकर खाकर गिर jayegi................magar वो इस वक़्त बिस्टेर पर थी .............अगर वो कड़ी होती तो हरी की ऐसी बातें सुनकर वो यकीनन जमीन पर गिर padti.................idher आसमा हिम्मत करती hui...............apne ज़ज़्बातैव को संभालती hui.............fir धीरे से बोल पड़ी................

"yyeeeeeeeee................tttttuummmmm kyyyaaaa........bbboboolllllllllllllll राहीही हूऊऊऊ.........." और आसमा रोटी हुई धीरे से बोल padi..........uski आँखों से आंसूं अब थमने का नाम नहीं ले रहे थे.................

" हाँ memsaheb................mera यहाँ से चले जाना hi सही rahega....................issey आप भी खुस रहेंगी और ............." और हरी इतना कहकर चुप हो गया वहीँ आसमा अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछती हुई फिर धीरे से बोल पड़ी.............

" haan.............khus तो मैं बहुत rahungi................jab तुम्हें जाना hi था तो तुम आये क्यों मेरी ज़िन्दगी mein................pehle hi चले jate................kum से कम ये तकलीफ तो मुझे नहीं hoti............theek हैं................ तुम अगर जाना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं rokungi.............waise भी मैं होती कौन हूँ तुम्हें रोकने वाली..............." और आसमा इतना कहकर चुप हो जाती हैं वहीँ हरी की तो जैसे बोलती बंद हो गयी thi.............uska चलाया हुआ दांव उसे उल्टा पड़ता हुआ नज़र आ रहा tha..................wo फ़ौरन बात संभालता हुआ धीरे से बोल पड़ा.............

"आप hi बताइये मैं क्या करूँगा यहाँ पे rehkar..................aap मुझे किसी और के पास जाने नहीं dengi................na hi खुद आप मेरे पास कभी aayengi.....................chalo मान भी लिया की आप मेरे पास अगर आयी to......................fir मैं चाह कर भी आपके बदन को छु नहीं sakta..................aapse मैं गन्दी बातें कर नहीं sakta...............zyada मैं कुछ कहूंगा तो आप मुझे चुप रहने के लिए bolengi....................nahin तो आप मुझे अपने पास से भगा dengi.............is हाल में मैं क्या karun.....................aap hi बताइये........................" और हरी शिकायत के लहज़े से अपनी बात पे ज़ोर देता हुआ धीरे से बोल पड़ा ....................वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही thi............hari ने उससे जो कुछ भी कहा था सब सच hi तो था..................

" ठीक हैं हरी मैं मानती हूँ की मुझसे गलती hui................maine तुम्हें हर चीज़ के लिए रोका और toka..............magar मैं जिस माहोल में पड़ी बड़ी हूँ वहां ऐसी भासा को लोग पाप मानते hain..............magar फिर भी मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए तुम्हारी साडी बातें सुनती रही............ इतनी छोटी सी बात के लिए क्या तुम मुझे छोड़कर चले jawogey.................tum अपने साथ साथ मुझे भी तकलीफ दे रहे हो हरी................" और आसमा के आँखों से आंसूं जैसे सूख gaye....................wo भी आज जैसे ज़िद्द पर आ गयी thi............wahin हरी की एक बार फिर से जैसे बोलती बंद हो गयी thi.....................kuch देर की चुप्पी के बाद हरी फिर धीरे से बोल पड़ा.......................

"memsaheb.....................sach तो ये हैं की मैं आपसे बहुत प्यार करता hoon.................aapko मैं अपना मंटा hoon................aur अपनों से hi तो लोग खुलकर साडी बातें किया करते hain................aapko कोई अगर आँख उठकर भी देखे तो मैं उसकी आँखें निकल loonga.................jab आपको भी मुझसे प्यार हैं तो फिर आप मुझसे बोल क्यों नहीं देती वो तीन shabdh...............mujhe भी इस बात की तसल्ली और सुकून मिल जाएगी..............." और हरी अपनी बात पर ज़ोर देता हुआ फिर से बोल पड़ा................ वहीँ आसमा अब पहले से बहुत ाचा महसूस कर रही thi...............wo बहुत हुड्ड तक अब नार्मल हो चुकी थी.............

" बस इतनी सी बात hain................main ये तीन शब्द तुम्हें तभी बोलूंगी जब तुम मेरे सामने aawogey................aise फ़ोन पर nahin..................tumhara दिया हुआ फूल मैंने बहुत संभलकर रखा हुआ hain..................aur उसे मैं अपनी जान से ज़्यादा संभलकर भी rakhungi.................dekho हरी............... मुझे सब कुछ मंज़ूर हैं मगर तुम्हारी ये नाराज़गी nahin...................tum चाहो तो मुझे गली दे dena..............maar लेना ..................मुझसे सब मंज़ूर hain..............magar मुझसे कभी खफा मुट्ठ hona................aur न hi मुझे छोड़कर जाने की बात करना................" और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी के चेहे पर एक विजयी मुस्कान फिर से तैर gayi.............wo आसमा पर अपना पूरा अधिकार जैसे हासिल कर चूका tha................ye उसकी आज सबसे बड़ी जीत थी.................

" तो फिर ठीक hain..............main आपसे वादा करता हूँ की मैं कभी आपसे नाराज़ नहीं howunga..........aur आपको कभी छोड़कर कहीं नहीं jawunga..............magar आप भी मुझे कभी गुस्सा मुट्ठ dilaiyega....................aaj के बाद मैं खुलकर आपसे गन्दी बातें भी करूँगा aur.................aap मेरा इसमें बराबर का साथ भी dengi..............aap भी मेरे साथ गन्दी बातें बोलेंगी....................." और हरी जैसे इस बार अपना फाइल्स सुनाता हैं वहीँ जवाब में आसमा धीरे से मुस्कुरा देती hain...............aaj सुबह से वो पहली दफा मुस्कुरा रही थी.............

" मैं वादा तो नहीं कर सकती magar...................jitna मुझसे हो पायेगा मैं तुमसे पूरी तरह खुलकर साडी बातें karungi...................tumhari ख़ुशी के लिए मुझसे जो बन पायेगा मैं वो सब कुछ करुँगी.................." और आसमा की सांसें एक बार फिर से जैसे भरी होने lagi...........aaj उसने हरी को ग्रीन सिग्नल दे दी thi.................aab हरी उस अप्सरा को जैसे आज अपनी मुट्ठी में कैद कर चूका tha.........magar एक दो चीज़ें और भी थी जिसे वो पूरी तरह से संतोष होना चाहता tha....................jo उसके दरमियान थोड़ी बहुत कसार हो वो भी आज पूरी हो जाये.................

" ठीक हैं memsaheb....................magar................... मेरा अगर मुन्न हुआ आपके बदन को छूने का तो....................." और हरी जैसे अपनी बात बीच में बोल pada..............aur आसमा के जवाब का इंतज़ार करने laga................aasma ने जो उसके बीच अपने बदन को छूने की जो भी रेस्ट्रिक्शन्स डाली थी वो अब उन्हें पूरी तरह से ख़तम करना चाहता tha...................jaisa उसे उम्मीद थी आसमा ने उसे कुछ वैसा hi जवाब दिया.................

" मेरे इस बदन पर जितना अधिकार सैम का hain.................utna hi अधिकार अब तुम्हारा भी हैं hari.....................tum मेरे साथ वो सब कुछ कर सकते हो जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता हैं.................." और आसमा की सांसें और धड़कनें तेज़्ज़ होती चली gayi...............usney सारा अधिकार अब हरी को दे दिया tha.................wahin हरी मुन्न hi मुन्न ख़ुशी से झूम उठा ..........वो एहि चीज़ तो आसमा के मुँह से सुनना चाहता tha...................magar एक चीज़ और भी थी जो वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्म करना चाहता tha................wo थी उसकी fantasy......................jiski बहुत साडी पिक्स वो अपने मोबाइल में रखा हुआ tha..................kuch फोटोज के रूप mein............aur कुछ छोटी छोटी वीडियोस के रूप mein....................jisey दिखने के बाद अब वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्मेशन चाहता था...............

" ठीक हैं memsaheb..................magar एक बात और hain..............jo अब भी आपके और मेरे बीच आ रही ....................वो हैं मेरा sapna...............mere मोबाइल में बहुत सी ऐसी छोटी छोटी क्लिप्स और फोटोज हैं जो मैं किसी हसीं और जवान लड़की के साथ वो सब मैं बचपन से करना चाहता hoon...................jo आज भी बस मेरा एक सपना hain.............agar आप मेरे इन सपनों को पूरा कर देंगी तो ................" और हरी इतना बोलकर खामोश हो जाता हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता हैं....................
 
अपडेट- 32(बी) (मेघा अपडेट)

जब आसमा ने फैसला कर hi लिया था की हरी के साथ जब छोड़ना hi हैं तो फिर इन सब के बारे में इतना क्या sochna.................usney अपना ये हसीं बदन जब उसके हलवे कर hi दिया था तो उसे अब क्या फर्क पड़ने वाला tha...............wo हरी के सवालों को सुनकर फिर धीरे से मुस्कुरा देती हैं............

" ठीक हैं hari.................tumhari जो भी फंतासी हैं वो तुम मुझे बता do.....................agar मेरे बस में हुआ तो मैं तुम्हारे हर एक सपने को ज़रूर पूरी karungi..........chahe वो जो भी हो..............." और आसमा बोल तो दी थी मगर वो हरी का इरादा कुछ नहीं जानती थी की हरी आखिर उसस्के साथ किस तरह का सेक्स करना चाहता hain..............magar आसमा को अब इन सब की जैसे कोई परवाह नहीं thi..............wo अब हरी के खुशियों के लिए किसी भी हुड्ड tak...............aur कुछ भी कर सकती थी...............

" एक बार फिर से सोच लीये memsaheb..............fir बाद में आप कहीं मुकर गयी तो................." और हरी जैसे आसमा को वारं करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से फिर मुस्कुरा दी....................

" मेरी जान से बढ़कर तो तुम और कुछ नहीं मांगोगे न hari...................agar तुम्हें मेरी जान भी चाहिए तो मैं वो भी तुम्हें दे दूँगी..........................." और आसमा जैसे अपना फैसला सुनती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी खुस होता हुआ बोल पड़ा............

" नहीं memsaheb.................upar वाले करे की आपको कभी कुछ न ho..............aap हमेशा खुस रहिये बस............" और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा धीरे से मुस्कुरा दी.............

" अब अपनी फोटोज भेजोगे या nahin............zara मैं भी तो देखूं की साहबज़यादे की कैसी फंतासी हैं जो वो मेरे साथ पूरा करना चाहते हैं................." और आसमा धीरे से हंस पड़ी वहीँ हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर gayi...............wo "...भेजता हूँ........" बोलकर अपना फ़ोन रख दिया और आसमा रहत की सांस लेती हुई पहले किचन में गयी और अपने लिए खाना निकलकर खाने lagi...........subeh से उसने कुछ नहीं खाया था तो उसे भूख बहुत ज़ोरों की लगी thi..................aaram से खाना खाने के बाद वो बर्तन धोकर और किचन का सारा काम समेटकर बाथरूम में नहाने चली gayi...................garmi से उसका बदन पूरा भीगा हुआ tha...............shower का ठंडा ठंडा पानी जैसे hi उसके बदन पर पड़ा उसे बहुत रहत महसूस हुई...........

नहाने के बाद वो ऐसे hi पूरी नंगी अपने बैडरूम में आयी तो देखा की उसके मोबाइल पर हरी का कम से कम 200 से ज़्यादा पिक्स और शार्ट वीडियोस आया हुआ tha................jo उसकी फंतासी thi...............aasma का दिल ज़ोरों से धड़क utha...............wo भी जानना चाहती थी की हरी उसके साथ किस तरह का सेक्स करना चाहता tha................wo फ़ौरन अपना मोबाइल हाथ में ली और अपने फ़ोन को अनलॉक करती हुई व्हाट्सप्प में जाकर हरी की साडी वीडियोस को डाउनलोड करने lagi..............kareeb 5 मिनट के अंदर साडी क्लिप्स डाउनलोड हो गयी और आसमा नंगी बीएड पर बैठी हुई एक एक क्लिप्स को ओपन करती हुई बड़े आराम से फिर देखने लगी..................

जो निहायती गन्दा और घटिया होता हैं कुछ ऐसे hi शार्ट वीडियोस थे उसमें जिसे देखने के बाद आसमा का गाला सुक्ने लगा और उसकी आँखें धीरे धीरे बड़ी होने lagi...............uski बुर उन क्लिप्स को देखकर एक दम से गीली हो गयी thi.........un क्लिप्स में ऐसा कुछ था जो आम तौर पर इंसान इस तरह का सेक्स नहीं karta................jaise जैसे वो उन क्लिप्स को देख रही थी आसमा के चेहरे का रंग बदलता जा रहा tha..................aaj से पहले न वो इस तरह का कभी सेक्स देखि thi......aur न कभी सुनी thi................aaj उसने जाना था की लोग इस तरह का सेक्स भी करते होंगे..............." आसमा की हालत बिगड़ गयी thi.................wo एक बार फिर से गरम हो गयी थी........................

इतना तो उन क्लिप्स और फोटोज को देखने के बाद आसमा को ये समझ में आ चूका था की हरी जवान और खूबसूरत लड़कियों के प्रति कैसी सोच रखता hain..............magar उसे हरी के कोई शिकायत नहीं thi..............wo ये बात भी जानती थी की हरी की जो भी फंतासी हैं वो अपने हुड्ड और दायरे में रहकर उसे कभी पूरी नहीं कर सकती............. उसके लिए उसे उस हुड्ड और दायरे से बहार निकलना padega....................aur अपनी शर्म लाज मान सामान को पीछे छोड़कर पूरी तरह से उसके लिए बेशरम बनाना पड़ेगा जो हरी चाहता hain..................magar ये सब आसमा के लिए इतना आसान नहीं tha......................magar वो भी अब पीछे नहीं हटना चाहती थी और कदम से कदम मिलकर उसके साथ चलना चाहती थी.................

घडी में रात के 10 बजे और हरी का दुबारा से फ़ोन aaya...................wahin आसमा का चेहरा ख़ुशी से एक बार फिर खिल utha.................wo हरी के फ़ोन का hi इंतज़ार कर रही thi...............usney तुरंत फ़ोन उठाया और उधर से हरी बोल पड़ा.............

" कैसी लगी मेरी pics.................aachi थी न.............." और हरी धीरे से सवाल करता हुआ बोल pada.................wahin आसमा जवाब में हौले से मुस्कुराती हुई कुछ देर खामोश रही फिर धीरे से बोल पड़ी..................

" कौन सी pics..............aur कैसी pics.....................mujhe तो नहीं मिली..............." और आसमा हरी का टांग खींचती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी थोड़ा परेशां होता हुआ फिर बोल पड़ा............

" अरे मैंने थोड़ी देर पहले तो भेजी थी जो पिक्स ...............और आपने सब देखि भी thi...............aap झूट बोल रही mujhse...................main उसी पिक्स की बात कर रहा आपसे................." और हरी आसमा को जैसे समझाता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से बोल पड़ी..............

" ाचा वो sab..................kitni बकवास फोटोज थी साडी की sari.........ye सब तुम्हारा सपना hain...............bhala किसी का ऐसा भी सपना होता hain................mujhe लगा तुम कोई बढ़िया सा रोमांटिक फोटोज bhejogey...........jismein हीरो हीरोइन को किश कर रहा honga.............uske लिप्स चूम रहा hoga..............heroine हीरो के बाँहों में hogi.............magar जैसे तुम गंदे हो वैसे hi तुम्हारी साडी फोटोज भी गन्दी हैं..............." और आसमा हरी को चिढ़ाते हुए बोल पड़ी वहीँ हरी बुरा सा मुँह बनता हुआ ......अपना सर खुजाता हुआ धीरे से बोल पड़ा............

" क्या सच में आपको एक भी फोटोज पसंद नहीं आयी................" और हरी फिर से अपनी बात पे ज़ोर देता हुआ बोल pada..............wahin आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा दी.............

" hari...................jab तुम मुझे पसंद हो और मैं तुम्हें ....................तो फिर हमारे बीच इन फोटोज और फंतासी का क्या kaam.................jab मैं खुद को तुम्हारे हवाले कर hi चुकी हूँ ..........तुम्हें अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ तो तुम अभी तक वहीँ पर अटके हुए ho.....................jab मैं तुम्हारे पास ावुंगी जो तुम्हारा मेरे साथ दिल करे वो सब तुम कर lena....................main तुम्हें अब कभी किसी चीज़ के लिए मन नहीं karungi...............magar पार्टनर को खेल में मज़ा तब आता हैं जब उसका पार्टनर भी उसके साथ साथ पूरा उसका सपोर्ट kare..................tum मुझे दर्द दो और तुम्हें मज़ा आये इसमें क्या मज़ा milega.....................asli मज़ा तो तब आएगा जब तुम्हारा पार्टनर भी मज़े में हो और उसे देखकर तुम्हें भी मज़ा आये.................

इतने बड़े हो गए मगर तुम हो अभी तक बुद्धू hi......................pata नहीं तुम्हें कब अकाल aayegi....................shareer बस सांस की तरह hain.......magar अकाल वहीँ hain,...................meri ज़िन्दगी में हमेशा एक कमी सी महसूस होती थी hari..............main बहुत परेशां थी की ऐसी क्या चीज़ थी जो हर वक़्त मुझे कमी सी लगती thi.................laakh सोचा मगर अब तक समझ नहीं aaya...................magar जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो लगती हैं वो कमी भी अब मेरी धीरे धीरे अब पूरी हो जाएगी................" और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी ख़ामोशी से उसकी एक एक बातें सुन रहा tha..............usey भी समझ में आ गया था की ये फोटोज दिखाकर किसी के साथ ऐसे सेक्स नहीं होता.................

जब सेक्स होगा तो साडी चीज़ें अपने आप होती चली jayegi..............aur अब उसे आसमा की बाटिओं से ऐसा लगने लगा था की आसमा न hi इंकार कर रही थी और न ikraar....................magar जब वो उसके करीब होगी वो उसे यकीनन किसी भी चीज़ के लिए उसे मन नहीं karegi................aur हरी एहि चाहता था की आसमा खुल कर उसका हर चीज़ में साथ दें................

" memsaheb.....................aapko छोड़ने का बहुत मुन्न कर रहा mera..................mera लौड़ा टैंकर पूरा खड़ा हो गया hain................jee तो कर रहा की आपको यहीं पटककर अभी छोड़ दूँ................" और हरी अब एक दम से खुलकर आसमा से बातें करने लगा वहीँ आसमा की भी सांसें तेज़्ज़ चलने lagi..............halanki वो भी शाम से गरम हो चुकी थी और अब वो हरी को कभी दुखी नहीं करना चाहती thi..................kuch सोचकर वो धीरे से बोल पड़ी............

" आवो न hari........mere paas................main तैयार hoon................jab जब तुम्हारा मुन्न करे तुम मेरे पास बेझिझक चले aana.................mere इस जिस्म पर तुम्हारा पूरा अधिकार हैं.............." और आसमा हरी का पूरा समर्थन करती हुई धीरे से बोल पड़ी वही हरी आसमा की ऐसी बाटिओं को सुनकर ख़ुशी से उछाल पड़ा.............

" aabhi........magar शांति हैं yahan................agar वो जान गयी तो दिखात हो jayegi..........,....main कल सुबह aawunga..............aapke paas.................aur haan..............aaj के बाद जब भी मैं आवूंगा आप मेरे लिए साड़ी hi pehnengi............kyon की साड़ी में आप बेहद हसीं लगती hain............jaise उस दिन आप पहनी thi.............jo मैं कहूंगा वो ड्रेस आप पहनेंगी.................." और हरी अपने दिल की इच्छा ज़ाहिर करता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा दी.............

" जो हुकुम sarkaar................aab मैं सूने जा रही हूँ कल मैं सुबह तैयार होकर तुम्हारे आने का इंतज़ार करुँगी..................." और आसमा अपना फ़ोन रख देती हैं और काफी देर तक वो बिस्टेर पर करवटें बदलती रहती hain...................kuch हरी का भी वैसा hi हाल tha................neend तो उसे भी नहीं आ रही थी और वो आसमा के लिए अब एकदम से मचल उठा tha..............aab उसके लिए ये रात काटना किसी साल काटने जैसा tha.................dekhna था की ये इंतज़ार की घडी कौन सा सुकून लेकर उन दोनों की ज़िन्दगी में अब आने वाली थी.................

तो बे कॉन्टिनोएड.........................................
 
अपडेट-33 (ा) (मेघा अपडेट)

" जो हुकुम sarkaar................aab मैं सूने जा रही हूँ कल मैं सुबह तैयार होकर तुम्हारे आने का इंतज़ार करुँगी..................." और आसमा अपना फ़ोन रख देती हैं और काफी देर तक वो बिस्टेर पर करवटें बदलती रहती hain...................kuch हरी का भी वैसा hi हाल tha................neend तो उसे भी नहीं आ रही थी और वो आसमा के लिए अब एकदम से मचल उठा tha..............aab उसके लिए ये रात काटना किसी साल काटने जैसा tha.................dekhna था की ये इंतज़ार की घडी कौन सा सुकून लेकर उन दोनों की ज़िन्दगी में अब आने वाली थी.................

अब आगे...........................................................................

सुबह का वक़्त था ............हर रोज़ की तरह आसमा अपने समय से आज भी उठ गयी thi................ya शायद आज कुछ पहले उठी thi...................wajah था hari...............subeh से hi उसके मुन्न में तरह तरह के एक्ससिटेमेंट उठ रहे थे जो उसे पल पल बेचैन कर रहे they......................wo फ़ौरन फ्रेश होकर अपने लिए नाश्ता बनाने लगी और फिर घर का सारा काम ख़तम करके वो बाथरूम में चली गयी और हेयर रिमूवल से अपने बदन के उन हिस्सों के बालों को ाचे से साफ़ करने लगी जिसकी सबसे ज़्यादा ज़रूर अब हरी को पढ़ने वाली thi........yani उसके छूट और गांड की..........

जब उसके बदन से सरे बाल ाचे से साफ़ हो गए तब वो फिर से आईने के सामने जाकर नंगी कड़ी हो गयी और अपने संगमरमर जैसे बदन को बड़े गौर से देखने lagi...........uska एक हाथ अपने छूट पर tha.........wahin दूसरा अपने राइट चूचियों पर..............

" आज तो तेरी खैर nahin..............jab हरी अपना मोटा और लुम्बा सा ौरज़ार इसमें पूरा अंदर तक डालेगा to.............uffffffffff..............meri ये छोटी सी सूराख फटकार हमेशा के लिए बड़ी हो jayegi............mujhe दर्द तो बहुत होगा मगर मैं हरी के ख़ुशी के लिए सब सेह loongi............main उसे अपनी जवानी का वो सुख दूँगी की वो आज के बाद सब कुछ भूल jayega...........aur हर वक़्त सुबह शाम रात दिन बस मेरे पास hi रहेगा.............." और आसमा फिर से गरम होने लगती हैं मगर ये सही टाइम नहीं था और वक़्त भी कम tha.............usey आज हरी के लिए उसकी पसंद की साड़ी भी तो पहननी थी जिसमें उसे तैयार होने में आज घंटों का वक़्त लगने वाला था............

ाचे से शावर लेने के बाद वो पूरी नंगी हालत में अपने बैडरूम में आयी और अपने बदन को टॉवल से साफ़ करती hui......................ek खुसबूदार बॉडी स्पाय परफ्यूम लगाने lagi..............jissey उसका बदन महक utha....................samney के ालमिरह में से उसने एक साड़ी का सेट निकला जो की लाल रंग का tha................aur ब्लाउज black..............jo उस साड़ी का मैचिंग tha....................blouse हमेशा की तरह पीछे से पूरा स्लीवलेस था और बड़े से दिल के आकर में tha....................jissey पहनने के बाद उसकी पीठ पूरी नंगी नज़र आती हुई एक दिल का आकर बना रही thi.................neechay की तरफ 3 इंच की पतली सी पट्टी थी जो उस ब्लाउज को बंधे राखी thi..................aur पीठ पर उसी काळा रंग की एक डोर थी जो ऊपर के हिस्से को संभाली हुई थी..............

आज आसमा जान बूझकर अपनी साड़ी को अपनी नैवेल से 4 इंच नीचे की तरफ पहनी हुई थी जिससे उसका पेट का काफी हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा tha.......saath में 2 इंच की गहरी उसकी नाभि भी क़हर धा रही थी जो पूरे गोल शेप में thi...............blouse जो की ज़्यादा स्लीवलेस होने की वजह से वो उसपर ब्रा नहीं पहन सकती thi....................so आसमा ने आज केवल ब्लाउज hi पहना tha..............saari के अंदर उसने एक डिज़ाइनर पंतय पहना हुआ tha...............jo साइड से चरों तरफ थोड़ा थोड़ा ट्रांसपरेंट भी था....................

वो अपने लम्बे बालों पर जुड़ा बनती हुई उसपर चरों तरफ से पिन लगाने lagi............aur अपने चेहरे पर हल्का क्रीम पाउडर लगाकर एक छोटी सी लाल रंग की बिंदी लगायी जिससे उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज़्यादा निखरने laga................haathon में लाल रंग की खनकती चूड़ियां और माथे पर sindoor.................pawn में पायल और गले में एक सोने की locket..............haathon में लाल रंग की डीप गहरी nailpolish......aur होंठों पर भी डार्क रेड lipstick...................final टच देकर वो अपने आपको शीशे में बड़े गौर से निहारने लगी और जब उसे लगा की वो पूरी तरह से संज संवर चुकी हैं तो उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी...............

जब वो घडी की तरफ देखि तो इस वक़्त घडी में 8 बजने में अभी 10 मिनट कम they...................dhadaktey दिल से वो हरी के आने का वहीँ हाल में इंतज़ार करने lagi................jab 8 बजा उसके घर का दुर्बल फिर से बज utha...................wahin आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क utha..........................wo अपने बेकाबू हो रहे सांसों को संभालती हुई धीरे से मैं दूर के तरफ फिर चल di.................aur जैसे hi उसने दरवाज़ा खोला सामने हरी और शांति दोनों खड़े होकर आसमा की तरफ मुस्कुराने lage......................wahin शांति आसमा को देखती हुई तारीफ पे तारीफ करने लगी................

हरी की भी आँखें चमक गयी thi...................aasma का ये रूप और उसका ये यौवन देखकर वो अंदर hi अंदर मचल उठा tha.....................wo बड़े गौर से आसमा के बदन को अपनी नज़रियों से स्कैन कर रहा tha................wahin आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढता जा रहा tha..................ye सोचकर की आज हरी उसके साथ वो सब कुछ करने वाला हैं जो एक मर्द औरत के साथ अकेले में करता hain...............wahin आज हरी बहुत खुस नज़र आ रहा tha..................waise वो खुस होता भी क्यों naa.....................aaj उसे छोड़ने को पारी जैसी लड़की मिल गयी thi................jo एक बेहद जवान और haseen..............jo उसकी उम्र में आधे से भी कम thi............aisi कड़क माल को पाकर कोई कैसे खुस नहीं रहेगा........................

शांति अंदर आयी और बाद बाद करती हुई ऊपर के कमरे में चली gayi...............wahin हरी कुछ देर तक खामोश खड़ा raha....................aur आसमा को सर से लेकर पवन तक बस घूरता रहा ..................

" memsaheb...................aap सच में आज बेहद हसीं लग रही hain.................main hi जनता हूँ की कैसे मैंने अब तक खुद को रोका हुआ hain................mera तो जी कर रहा की मैं यहीं पटककर आपको अभी छोड़ दूँ......." और हरी अपने लोअर के ऊपर से ..............अपने लुंड पर हाथ फेरता हुआ.................. धीरे से आसमा की तरफ देखता हुआ ...........फिर बोल pada......................wahin आसमा की सांसें एक बार फिर ज़ोरों से चलने lagi.................wo अब हरी के लिए खुद को तैयार कर रही थी...............

" तुम्हें रोका किसने हैं hari...................main आज तुम्हारे लिए hi तो सज संवर आयी hoon................tumhein जो करना हैं कर लो मेरे saath....................magar..................yahan nahin..................mere बैडरूम mein...................mere बिस्टेर पर.................." और आसमा का दिल बहुत ज़ोरों से धड़क utha..................jaise तैसे वो अपनी सांसें संभालती हुई धीरे से बोल padi...............wahin हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा.....................

" memsaheb.........................aabhi मैं आपको आपके बैडरूम में ले जाकर अगर छोड़ भी दूंगा तो फिर मज़ा तो हम दोनों को इस वक़्त बहुत आएगा magar....................jo तड़प होती हैं वो हमारे बीच ख़तम हो jayegi...............aur मैं इस तड़प को हमेशा ऐसे hi बरक़रार रखना चाहता hoon................jab तक ये मिलान की आग हम दोनों के दिल में जलती रहेगी हमारा ये मिलान हमेशा यादगार बनता rahega................aur मैं आपके साथ बिताया हर एक लम्हा .................हर एक पल................ को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बनाकर रखना चाहता hoon.................aur मैं चाहता हूँ की जब भी हम मिले हमारे बीच कोई भी सीमा न rahe.................aap अपनी हुड्ड भूल jaye...............aur मैं apni..................fir हमारे बीच ये प्यास हर वक़्त ऐसे hi बरक़रार रहेगी..............." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा को भी उसकी बातें सही lagi....................wo चुप होकर उसकी बातें फिर आगे सुनने लगी.............

" चुदाई का असली मज़ा तब आता हैं जब मर्द और औरत खुलकर ढेर साडी गन्दी बातें kare..................unke बीच शर्म की दीवार न rahe......................jo मर्द चाहता हैं वो औरत बिना किसी झिझक और रोक टोक के kare..................aur सबसे बड़ी बात जब चुदाई हो तो समय की कोई सीमा न rahe................aurtein अपनी ख्वाहिश ज़ाहिर करके मर्द से छुड़वाए और मर्द apni..............tab देखिएगा इस खेल में कितना मज़ा आएगा.................." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा बड़े गौर से हरी के चेहरे को बस देखे जा रही thi.................wo तो अब हरी का खुलकर साथ देने को भी तैयार thi............magar हरी का इरादा क्या था वो बिलकुल नहीं समझ पा रही थी............

" to........tum चाहते क्या हो हरी.................." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वही हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा................

" आपके साथ सब kuch................bus.................jo भी मैं आपके साथ करूँगा बहुत आराम से karunga...............kyon की जल्दीबाज़ी में चुदाई का मज़ा पूरा ख़राब हो जाता hain................main आपकी इस जवानी का रूस बड़े आराम से पीना चाहता hoon............uska लुफ्त बड़े आराम से उठाना चाहता hoon..............har के पल को यादगार बनाना चाहता हूँ................" और हरी आसमा की तरफ फिर बड़े गौर से देखते हुए बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा di................wo बेवजह घबरा रही थी की आज हरी आएगा और उसे बिस्टेर पर लेजाकर खूब ragdega..............magar वो अब बहुत रहत की सांस ले रही thi.........aur हरी का ये तरीका उसे पसंद भी आ रहा tha...................aur कहीं न कहीं वो भी ऐसा hi कुछ चाहती thi..............ki हरी उसके साथ खुलकर हर चीज़ें kare............magar शर्म और लाज की वजह से वो अपनी बात उससे ज़ाहिर नहीं कर पा रही थी...............

" ठीक हैं hari...........jaisa तुम chaho....................jab तुम्हें किसी बात की जल्दीबाज़ी नहीं हैं तो फिर भला मुझे क्यों hogi..................tumko जैसा ाचा लगे तुम करो मेरे saath.................aaram आराम se...........aur बड़े प्यार se...............main तुम्हारे हर एक खेल में तुम्हारा पूरा पूरा साथ दूँगी.............." और आसमा हरी का पूरा समर्थन करती हुई धीरे से मुस्कुरा दी वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ा...................

वो सब तो ठीक हैं memsaheb...................magar पहले मुझे वो तीन शब्द कहो जो मैं कब से आपके मुँह से सुनना चाहता हूँ................." और हरी अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ हंस पड़ा वहीँ आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढ़ gaya..................jitney आसान ये तीन शब्द थे उतना hi इसे कहना मुश्किल tha..............uska दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़क utha............wo तो सैम के सामने भी ये तीन शब्द बड़े मुश्किल से कहती thi.................wahin हरी इस बार आसमा के बिलकुल करीब आकर उसके ठीक सामने खड़ा हो गया और उसकी आँखों में बड़े गौर से देखने laga..................wahin आसमा अपने धड़कते हुए दिल को काबू में करती हुई लुम्बी लुम्बी सांसें लेती hui....................dheere से बोल पड़ी.........

" ीीी लल्लूऊऊऊऊवववववववववीईईई यू....................." और आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क उठा वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा...............
 
अपडेट- 33(बी) (मेघा अपडेट)

" मुझे सही से सुनाई नहीं diya.............ek बार और कहिये ना...................." और हरी फिर से बोल पड़ा वहीँ आसमा एक तुक उसकी तरफ देखती हुई फिर बोल पड़ी............

" ी लव यू.............." इस बार आसमा ने पहले से तेज़्ज़ आवाज़ में ये तीन शब्द उससे कहे थे जिसे सुनकर हरी फिर से मुस्कुरा pada..............baazi अब उसके हाथ में hi थी .............मगर अब वो आसमा के अंदर के शर्म और लाज को हमेशा के लिए बहार निकलना चाहता था और उसे पूरी तरह से बेशरम बनाना चाहता tha..................aur उसे अब इस बात का पूरा यकीन हो गया था की आसमा उसके इरादों पर पूरा पूरा खरा utregi.............jo वो बरसों से जवान और किसी खूबसूरत लड़की के साथ जो करना चाहता हैं वो आसमा उसके लिए सब कुछ karegi............ye सोचकर एक बार फिर से उसके चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर गयी...............

" कल जैसे मैंने आपसे पुछा था की आपके इन दोनों दुढवून की साइज क्या hain...........to आपने मुझे नहीं बताया tha...............aab तो उसका साइज आप बता दीजिये.............." और हरी एक बार फिर आसमा के साथ पूरी बेशर्मी का खेल खेलना शुरू कर चूका tha................wahin आसमा के बदन में एक अजीब सी सिरहन दौड़ gayi................wo अपनी सांस संभालती हुई धीरे से बोल पड़ी.........

" जज्जी........36..........." और इतना कहकर आसमा चुप हो गयी वहीँ हरी फिर से बोल पड़ा..............

" मैंने कहा था न की आप मुझसे खुलकर साडी बातें karengi............to fir........aap पूरा खुलकर साफ़ साफ़ कहिये............" और हरी जैसे आसमा को आदेश देता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा लुम्बी शासन लेती हुई धीरे से बोल पड़ी............

" मेरे बूब्स की साइज 36 हैं............." और आसमा जैसे hi अपनी बात ख़तम की वैसे हरी इस बार उसपर गुस्से से जैसे चिल्ला पड़ा..............

" मैंने कहा था न मुझे अंग्रेजी ज़्यादा नहीं aati..................jo भी कहना हैं शुद्ध हिंदी में kahiye..........aur सब कुछ साफ़ saaf....................aur मेरे सामने ये शर्म का नाटक नहीं चलेगा...................." और हरी जैसे इस बार आसमा को वारं करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा कुछ देर तक चुप रही और धीरे से हाँ में अपना सर हिलती हुई फिर बोल padi.................usney आज से पहले ऐसे गंदे वर्ड्स का इस्तेमाल कभी नहीं किया था इस वजह से वो अंदर hi अंदर बहुत झिझक रही thi...............magar वो हरी को भी नाराज़ नहीं करना चाहती थी इस वजह से वो कुछ सोचकर बोल पड़ी.........

" मेरे इन दोनों दूधवों की साइज 36 हैं .............." और आसमा की सांसें तेज़्ज़ तेज़्ज़ चलने लगी वहीँ हरी जवाब में इस बार हंस pada..................ye देखकर वो खुस हो गया की आसमा अब धीरे धीरे उसके रंग में रंगति जा रही हैं...............

आपके जब दोनों दूध इतने बड़े हैं तो इनमें से तो ढेर सारा दूध भी निकलता होगा ........हैं naa.............mujhe आपके ये दूध पीने हैं..............." और हरी आसमा के साथ गन्दा खेल खेलने laga..............wahin है की ऐसी बाटिओं से आसमा की छूट भी धीरे धीरे गीली होने lagi.....................maza तो उसे भी आ रहा था मगर हुड्ड से ज़्यादा उसे शर्म आ रही thi................is वजह से वो हरी से खुलकर बातें नहीं कर पा रही thi..............magar इतना तो वो समझ चुकी थी की हरी उसकी बेशर्मी देखना चाहता हैं.............

" nahi..............aabhi इनमें दूध नहीं हैं............." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ उसके दोनों टांगों के बीच गीलापन अब बढ़ता hi जा रहा था.............

" इतने बड़े बड़े दूधवों के अंडे कोई दूध nahin...................kamal hain................to फिर इनमें दूध कहाँ से आएगा......................" और हरी फिर से आसमा को नंगा करता hua......dheere से बोल pada.............wahin आसमा की सांसें तेज़्ज़ तेज़्ज़ चलने लगी................

" wo..............jab मेरा बाचा होगा तब......................." और आसमा का गाला सूखने लगा वहीँ हरी अब पूरे मूड में tha.................aasma को तो जब चाहे वो छोड़ सकता था मगर जिस तरह का खेल वो उसके साथ खेल रहा था उसमें मज़ा hi कुछ और tha..............uska लुंड भी पेण्ट के अंदर अकड़ने लगा था....................

" और आपका बाचा कहाँ से hoga..........aur कैसे होगा........................" और हरी पूरी बेशर्मी के साथ बोल पड़ा वहीँ आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई फिर धीरे से बोल पड़ी............

" जब मर्द औरत के साथ सम्भोग करेगा tab...............aur.........." आसमा आगे बोलती तभी हरी बीच में hi बोल पड़ा..............

" ऐसे इधर उधर की बाटिओं से मुझे मुट्ठ samjhawo...................agar समझाना hi हैं तो अपनी बात खुलकर मुझे batawo..............aur haan......sab कुछ साफ़ साफ़ कहना ताकि मुझे जल्दी से समझ में आ sake.................hari ने आसमा के लिए मुस्खिलें और भी बढ़ा दी thi.................aab वो न चाहते हुए भी हरी के सामने खुलकर गंदे वर्ड्स बोलने पर मज़बूर हो गयी thi...............agar न कहती तो हरी उससे गुस्सा हो जाता और वो हरी को नाराज़ नहीं कर सकती थी............

"जब आप मेरे साथ सम्भोग करेंगे तो..............." और आसमा आगे कुछ कहती तभी हरी फिर से बीच में बोल पड़ा...............

" ये क्या सम्भोग लगा राखी हैं aap......................aurat के टांगों के बीच जो होता हैं उसे बुर कहते हैं.............. और मर्द का जो होता हैं उसे............ lund..........aur जब मर्द औरत की छूट मरता हैं तो उसे चुदाई कहते hain..............aayi बात समझ mein.................agar आपने ठीक से नहीं कहा तो मैं अबकी बार आपकी माँ छोड़ दूंगा................" और हरी इस बार गुस्से से बोल पड़ा वहीँ आसमा हाँ में अपना सर धीरे से हिलती हुई बोल padi..............wo हरी को जितना गुस्सा नहीं दिलाना चाहती थी उतना hi हरी उसपर गुस्सा कर रहा tha.................kuch सोचकर वो फिर अपनी हिम्मत जुटती हुई धीरे से बोल पड़ी............

" जब आप मेरी ccchhhuudaaaayyyiii.........karenge तब.................." और आसमा का गाला पूरी तरह से सूखने laga............uski छूट बहुत हुड्ड तक गीली हो चुकी थी वहीँ उसकी सांसें बहुत ज़ोरों से चलने lagi.............wahin हरी अभी भी उसकी ओरे बस गुस्से से घूरे जा रहा tha..............aaj आसमा पहली बार अपनी जुबान पर चुदाई जैसा शब्द लायी thi................magar वो ये नहीं जानती थी की ऐसे गंदे वर्ड्स उसके लिए आगे चलकर आम होने वाले हैं..............

" जब मैं तुझे पूरा नंगा karke..............jab तेरी बुर में अपना ये लौड़ा डालकर तेरी जब ाचे से चुदाई करूँगा और जब मेरा माल तेरी बाक्सेडाणी के अंदर गिरेगा ..............तब मेरे माल से तेरा बाचा thehrega...............aur एरा बाचा कहाँ से niklega........teri बुर की छेद se..........................uske बाद तेरे इन दूधवों में दूध bharengey...............aayi बात समझ में.................." और हरी आसमा को गंदे तरीके से समझता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा के टांगों के बीच गीलापन बढ़ने laga..................wo एहि सोच रही थी की वो इतने गंदे वर्ड्स हर के सामने कैसे kahegi................magar आज के बाद हरी उसे इतनी आसनी से छोड़ने वाला भी नहीं था...............

" जब आप मेरी ब्ब्ब्बूउऊररररररर में अपना lllluuuunnnndddddddddddd डालकर जब मेरी कछुउड़ायीईइ करेंगे तब .......आप अपना माल मेरे अंदर जब गिराएंगे to...........mera गर्भ therega.............aur मेरा फिर बाचा होगा.............." और आसमा का जिस्म में एक तेज़्ज़ सनसनाहट होने lagi..................excitement से उसका गाला सूखने लगा और टांगों के बीच गीलापन बहुत हुड्ड तक बढ़ने laga.........jo अब वो साफ़ महसूस कर रही thi...............wo hi जानती थी की ये शब्द उसने आज कैसे कहे they.............aabhi तक उसके जिस्म के रोएं पूरी तरह से खड़े थे................

" एक बार मैं आपसे ये सवाल पूछ चूका हूँ और दुबारा आपसे फिर से पूछ रहा hoon......aap झूट मुट्ठ boliyega...............maalik आपको ठीक से छोड़ते हैं की nahin.................wo आपकी बुर की आग को ठंडी करते हैं या nahin.............aur आपको जब छोड़ते हैं तो कितनी देर तक बिस्टेर पर रगड़ते हैं.............." और हरी फिर से गंदे सवाल आसमा से पूछे laga.......wahin आसमा अब जान चुकी थी की हरी अब उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ने wala..............is लिए अब उसने शर्म को किनारे रखते हुए उसके सवालों का जवाब देने का फाइल्सला kiya............wo थोड़ी हिम्मत जुटती हुई फिर धीरे से बोल पड़ी...........

" wo.........mujhe ठीक से नहीं छःहोंऊदद्द pate...............aur न hi मेरे बबबबबूररररर की आग को वो ठंडी कर पते hain............mushkil से वो एक या दो मिनट भी मेरे सामने नहीं टिक pate.................is वजह से मैं हमेशा अंदर hi अंदर तड़पती रहती हूँ..................." और आसमा बहुत हुड्ड तक हरी के सामने खुलने लगी thi.................aab वो बहुत हुड्ड तक खुलकर कह रही थी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा.............

" मैं ये बात बहुत ाचे से जनता था मेरी jaan...............ki वो आपके जैसी गरम माल को संभल नहीं payega.............aur मुझे अंदाज़ा भी हैं की उसका लुंड छोटा hi hoga...............jo आपकी बुर की आग को इतनी आसनी से ठंडी नहीं कर payega......................magar आप फ़िक्र मुट्ठ kijiye.....................mere पास बहुत मोटा और लुम्बा लौड़ा हैं ................जो आपकी इस बुर की आग को न सिर्फ ठंडी hi karega.........balki आपकी बुर की धाज्जियाँ भी उदा dega..............jab आप मेरे इस लम्बे लौड़े को अपनी छूट में पूरा लेगी तो आपकी ये छोटी सी छेद खुद बा खुद बड़ी हो jayegi..............aap फ़िक्र मुट्ठ कीजिये................ मैं आपकी इस छूट को छोड़ छोड़कर भोसड़ा बना hi दूंगा.................

और मैं आपके मर्द जैसा नहीं हूँ जो बस एक मिनट में ठंडा हो jawunga.........................main जब किसी औरत को छोड़ता हूँ तो घंटों तक उसकी बुर को बिना रुके बस रगड़ता hi रहता hoon.................kabhi कभी तो मैं बुर से मूट भी निकलवा देता hoon..............aap फ़िक्र मुट्ठ कीजिये मैं भी जब आपकी चुदाई करूँगा तो आपकी बुर की ऐसी hi धाज्जियाँ उदा doonga..............fir आप मेरा ये लौड़ा छोड़कर कहीं मुझसे दूर नहीं जा पायेगी...................." और हरी के गंदे बाटिओं का सिलसिला यु hi चलता रहा और उधर आसमा के साबरा का बाँध टूटने laga.................bhale hi हरी उसे आज चुवा भी नहीं था मगर शब्दों से वो उसे पल पल नंगा करता जा रहा tha..................dekhna था ये सिसलिला अब कहाँ जाकर थमने वाला था................

तो बे कॉन्टिनोएड...............................................
 
अपडेट 34 (ा) (मेघा अपडेट)

और मैं तेरे मर्द जैसा नहीं हूँ जो बस एक मिनट में ठंडा हो jawunga.........................main जब किसी औरत को छोड़ता हूँ न तो घंटों तक उसकी बुर को बिना रुके बस रगड़ता hi रहता hoon.................kabhi कभी तो मैं बुर से मूट भी निकलवा देता hoon..............tu फ़िक्र मुट्ठ कर मैं तेरी भी जब चुदाई करूँगा तो तेरी बुर की ऐसी hi धाज्जियाँ उदा doonga..............fir तू मेरा ये लौड़ा छोड़कर कहीं मुझसे दूर नहीं जा पायेगी...................." और हरी के गंदे बाटिओं का सिलसिला यु hi चलता रहा और ुहेर आसमा के साबरा का बाँध टूटने laga.................bhale hi हरी उसे आज चुवा भी नहीं था मगर शब्दों से वो उसे पल पल नंगा करता जा रहा tha..................dekhna था ये सिसलिला अब कहाँ जाकर थमने वाला था................

अब आगे...............................................................

खेल चलता रहा और आसमा धीरे धीरे अब बेचैन होने lagi..................na hi वो हरी को अब मन कर सकती थी और न hi वो उसे रोकना चाहती thi...................kyon की अंदर hi अंदर उसे भी हरी का ये गन्दा खेल पसंद आ रहा tha................itne देर से हरी से बात करते करते आसमा बहुत हुड्ड तक अब खुल चुकी thi.............is लिए अब उसे गन्दी बात कहने और सुनने में ज़्यादा झिझक नहीं हो रही thi..............balki अब वो हरी का खुलकर साथ दे रही थी...........

" आपने बताया नहीं मेमसाहेब जब आपके इन दूधवों में जब दूध भर जायेगा तब आप अपना दूध मुझे पिलायेंगी या नहीं.................!!!!!!!!!!!!" और हरी धीरे से आसमा की तरफ सवाल करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से शर्माती हुई मुस्कुरा दी................

" ये भी कोई पूछने की बात हैं hari..................mere इस जिस्म पर तुम्हारा पूरा हक़ hain....................jab जब तुम्हारा मुन्न करेगा मेरा दूध पीने ka................tum बेझिझक आकर पी lena..........main तुम्हें कभी किसी बात के लिए मन नहीं करुँगी..............." और आसमा हरी के साथ बातें करती हुई पल पल बेचहिं हो रही thi.............wahin हरी अपने बाटिओं से आसमा को पूरा नंगा करने की अब सोच चूका था.............

" magar...................meri एक आदत hain................jab भी मैं किसी औरत का दूध पीटा हूँ तब उसे मैं पहले बेरहमी से मसलता hoon................aur तब तक मसलता हूँ जब तक मेरा मुन्न नहीं भर jata............chahe वो औरत कितने भी दर्द से चीखे या............... chillaye..................main उसके दर्द की परवाह नहीं karta.............aur तो मैं उसकी दोनों निप्पल्स को ज़ोरों से खींचता भी hoon...........masalta भी हूँ .............और अपने डेंटन से कसकर काटता भी hoon.............aisa करने में मुझे बड़ा hi मज़ा आता hain...........agar मैं ये सब आपके साथ भी करूँगा तो आपको किसी बात की दिक्कत तो नहीं होगी ना................." और हरी आसमा के दोनों चूचियों को गौर से एक बार फिर निहारते हुए बोल पड़ा..................

वहीँ आसमा की सांसें फिर से तेज़्ज़ होने lagi.................uski बुर में हज़ारों चीटियां काट रही थी कुछ वैसा hi हाल इस वक़्त उसका tha...............kaise खुद को वो अब तक संभाले हुई थी ये बात वही जानती थी magar.............kab तक वो खुद को संभल पायेगी ये उसे भी मालूम नहीं tha..................kyon की हरी उसे एक पल भी संभालने का मौका नहीं दे रहा था.............

" तुम्हें जैसा मुन्न करे वैसा peena....................main तुम्हें कभी किसी बात के लिए मन नहीं करुँगी................." और आसमा हरी का पूरा फुल सपोर्ट करती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी कुछ ऐसे hi जवाब आसमा के मुँह से अब सुनना चाहता tha....................wo मुन्न hi मुन्न खुस होता हुआ धीरे से बोल पड़ा................

" वैसे memsaheb....................jab भी मैं औरतों को छोड़ता हूँ घंटों घंटों तक उन्हें रगड़ता hi रहता hoon.............aur मैं उन सब की ऐसी हालत कर देता हूँ की वो न hi कुछ अपनी बुर से निकलने के लायक रह जाती hain.................aur न hi कुछ डलवाने के layak............aap समझ रही हैं न की मैं क्या कहना चाहता हूँ..............." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ आसमा के सामने धीरे से बोल pada..............aab उसके अंदर की शर्म लगभग ख़तम हो गयी thi.................kuch वैसा hi बेशरम अब वो आसमा को भी धीरे धीरे बना रहा था..............

"haaan............main समझ रही हूँ................." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी के बाटिओं का सिलसिला अब कहाँ रुकने वाला tha..................idher आसमा को अब हरी पर गुस्सा आने लगा tha..................kyon की वो इतने देर से उसके साथ सिर्फ बातें कर रहा tha...................magar कर कुछ नहीं रहा था..................

" अगर मैं भी आपको घंटों घंटों तक ऐसे hi बिना रुके छोड़ता रहा to..............aap मेरे इस चुदाई में मेरा पूरा पूरा साथ देंगी या................ बीच में hi मुझे छोड़कर भाग जाएँगी............." और हरी अपने मुन्न में उठ रहे शंका को दूर करता हुआ फिर से बोल पड़ा वहीँ आसमा उसकी तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुराने लगी................

"hari................main अपनी ये दोनों टांगें हर वक़्त तुम्हारे लिए बस खोली rahungi..................tumhara जब जब मुन्न kare.............jaisa मुन्न kare..........tum मेरे किसी भी छेद में अपना ये लूउड दाल सकते ho...............jitni देर तक तुम मुझे रगड़ना चाहते ho...........ragad सकते ho..................aakhir मैं भी तो देखना चाहती हूँ की tum..................kitne बड़े मर्द हो............" और आसमा आज हरी के मर्दानगी को चैलेंज करती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी ख़ुशी से उछाल pada..................is लिए ख़ुशी से उछाल पड़ा क्यों की आसमा ने उसे किसी भी छेद को छोड़ने की उससे बात कही thi.................aur औरत का दूसरा छेद हरी बहुत ाचे से जनता tha...............to क्या आसमा उससे ख़ुशी ख़ुशी अपनी गांड भी क्या मरवाना चाहती thi..............ye ख्याल आते hi हरी का लुंड फनफना उठा...............

" वो तो वक़्त hi बताएगा मेरी jaan.......................ki मेरे लौड़े में कितना दम hain................rahi बात आपके छेद की तो मैं आपके तीनों छेद में अपना ये मोटा लौड़ा पूरा अंदर तक डालकर pelunga.......................aur तब तक पेलता रहूँगा जब तक मैं उसके अंदर अपना माल न भर doon...................aap लेंगी न मेरा माल अपने सरे छेद में................." और हरी अपनी बात स्पष्ट करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा इस बार जवाब में धीरे से मुस्कुरा di...............wo अब चाह रही थी की हरी उसके पास आये और उसके बदन के उन हिस्सों को छुएं ...............जिनका अधिक्कार उसने अब तक सिर्फ सैम को hi दिया था............

वो उसके प्राइवेट पार्ट्स पर अपना हाथ lagaye..............unhein ragadey............jo भी उसका दिल करता हैं वो सब कुछ kare...........magar हरी सिर्फ अब तक बातें कर रहा tha...................kar कुछ नहीं रहा tha...................jis वजह से आसमा अंदर hi अंदर गुस्सा होती जा रही thi.........................aur उसका ये चिड़चिड़ापन भी अब बढ़ता जा रहा tha................uska साबरा भी अब पूरी तरह से जवाब दे चूका tha...............aab वो खुद को और नहीं रोकना चाहती thi.................magar शर्म और लाज की दीवार अब तक उसे ऐसा करने से रोक राखी थी.................

" haan..............hari................main तुम्हारा लूउउउनंनददददद आपने तीनों छेद में भी loongi................aur तुम्हारा माल अंदर भी दलवाउंगी.........." और आसमा अब खुलकर हरी से गन्दी बातें कर रही थी ...................छूट का नशा उसके सर चढ़कर अब बोल रहा tha...............wahin हरी का लुंड और भी सख्त होने laga..................aasma के मुँह से ऐसी खुली गन्दी बातें सुनकर वो अब पागल सा हो रहा tha..............uske अंदर के साबरा का बाँध भी अब टूट चूका tha................aab तो उसे hi ऐसा लगने लगा था की जैसे वो खुद अपना कण्ट्रोल खो baithega............wo hi जनता था की कैसे उसने खुद को संभल रखा था.............

" क्या साहेब ने कभी आपकी गांड मरी हैं......................." और हरी अचानक से बोल पड़ा वहीँ आसमा धीरे से उसकी तरफ ना में अपनी गुर्दें हिलती हुई मुस्कुरा दी.................

" नहीं hari...................unhone कभी आज तक मेरी गांडडडडड नहीं mari..............na hi उन्होंने इस बात का मुझसे कभी ज़िक्र भी kiya............aur न hi कभी मुझसे manga..............in सब चीज़ों का तो उन्हें कभी शौक hi नहीं raha.............magar मेरी जितनी भी सहेलियां हैं उनके लवर हो या फिर हस्बैंड ....................मैंने जितने भी मर्दों के बारे में उन सब से जो अब तक सुना हैं .............की सरे मर्द औरतों के गांड के ज़्यादा शौक़ीन होते hain...............agar तुम भी इन सब चीज़ों का अगर शौक रखते हो to............mere ये छेद तुम्हारे लिए हर वक़्त खुले हैं..............

तुम जब chahe.......jaisa chaho..........meri गांड में अपना लुंड दाल सकते ho.................itna मैं ज़रूर जानती हूँ की शुरू शुरू में थोड़ी तकलीफ होगी magar.........mujhe तुम्हारी ख़ुशी के लिए ये भी मंज़ूर हैं............" और आसमा ने अब खुलकर हरी को हरी (ग्रीन) झंडी दिखा दी thi................wahin हरी का लुंड पूरी तरह से फनफना उठा................

आसमा क्या जानती थी की हरी गांड का कितना बड़ा शौक़ीन hain...............usey छूट से ज़्यादा गांड में लुंड डालना ाचा लगता tha...............bus फर्क सिर्फ इतना था की उसका लौड़ा ज़रुरत से ज़्यादा मोटा और बड़ा था ................जिससे कोई भी लड़की उसका लुंड अपनी गांड में लेना नहीं चाहती thi.................kyon की उन्हें मालूम था की जब वो उसका लुंड अपनी गांड में lengi.............unki गांड फात jayegi...............aur दर्द होगा सो alag...............magar आसमा ने तो उसे खुला न्योता दिया tha............to उसका खुस होना लाज़मी tha.............usey पूरा यकीन हो गया था की आसमा उसके इरादों पर पूरा पूरा खरा utregi...............ya शायद उससे भी कहीं ज़्यादा................

इस वक़्त उसका लौड़ा पूरी तरह टैंकर लोअर में साफ़ नज़र आ रहा था जो ास्मि के नज़रियों से भी नहीं छुपा tha.................wo तो ाचे से जानती थी की हरी का लुंड कितना बड़ा और मोटा hain..............wahin हरी ज़्यादा वक़्त न गंवाते हुए धीरे धीरे आसमा के करीब जाने laga............ye देखकर आसमा के चेहरे पर भी एक मुस्कान आ gayi...............magar अगले hi पल उसकी भी सांसें ज़ोरों से चलने lagi................uski पंतय इस वक़्त पूरी तरह से भीग चुकी thi..............aur अब उसका ऐसे खड़ा रहना मुश्किल होता जा रहा था..............

जैसे hi हरी आसमा के करीब aaya..................wo उसके ठीक पीछे जाकर इस बार उससे सत्कार खड़ा हो गया ................वो उसके इतने करीब था की उन दोनों के बीच एक इंच का भी फासला नहीं tha..............sir से लेकर पवन तक वो आसमा के बदन की कोमलता को अपने बदन पर ाचे से महसूस कर सकता tha...................wo अपना लुंड आसमा के गांड के दरारों के बीच फंसता hua..............uske दोनों हाथों पर अपने हाथों को धीरे से थमता hua................uske बदन से उठ रही भीनी भीनी खुसबू को अपने बदन में उतरने लगा..................
 
Update-34(B) (मेघा अपडेट)

एक पल के लिए तो उसे यकीन नहीं हो रहा था की जो इस वक़्त उसके साथ हो रहा वो हकीकत hain...........ya फिर sapna................jis पारी को वो न जाने कब से पाना चाहता tha............aaj वो उसकी बाँहों में thi............us अनछुई काली को अब वो जैसे चाहे वैसे मसल सकता tha................uski जवानी का रूस निचोड़ निचोड़ कर पी सकता tha.................aur उसकी शुवात अब वो कर चूका tha...............uske पास आकर............

आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क utha.....................hari को इतने करीब और उसके बदन से एक दम सत्कार महसूस होते hi उसका रोम रोम सिहर utha.................uski सांसें भरी होने lagi.............wahin हरी आसमा के दोनों हाथों में हाथ डेल उसे अपनी गिरफ्फत में लेता hua................zoron से उसके बदन की खुसबू को सूंगी laga.............wahin हेयर के इतने करीब होने से आसमा बुरी तरह मचल उठी thi.................ek तो मरदाना ehsaas..............upar से हरी के साथ इतने देर से हो रही गन्दी baatein......aur ऊपर से उसके बदन से उठने वाली वो अजीब सी स्मेल उसकी रही सही साबरा को तोड़ती जा रही थी..................

आसमा हरी के जब इतने करीब थी तो वो अपने आपको जैसे उसके हवाले कर चुकी thi.........aab हरी उसके बदन पर जहा हाथ lagaye........jo kare........usey अब कोई फर्क नहीं पढ़ने वाला tha............magar हरी का तो इरादा आसमा को और भी ज़्यादा बेचैन करना tha................na की उसके प्यास को शांत करना...............

" memsaheb........................aap जैसी माल को तो खूब रगड़ रगड़ ke............khoob इत्मीनान के साथ छोड़ने में अलग hi मज़ा aayega.................aur मेरी आदत हैं जब भी मैं किसी औरत को जब छोड़ता हूँ तो सबसे पहले मैं उसे सर से लेकर पवन तक पूरा नंगा करता hoon...............aur खुद भी नंगा होता hoon..............usmein एक अलग मज़ा hain...............aapko पसंद हैं क्या पूरी नंगी होकर छुड़वाना................" और हरी इस बार कहता हुआ अपना मुँह आसमा के शोल्डर पर ले गया और अपने चेहरे को धीरे धीरे नीचे की तरफ सरकता hua.............peechay की तरफ ले जाने laga....................aasma के नंगी पीठ की taraf.....................aur जैसे hi उसके होंठ आसमा के गोरी और नंगी पीठ को जब chuye................aasma इस बार खुद को न संभल पायी और ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaassssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhh करती हुई सिसक पड़ी.........

उसका रोम रोम सिहर उठा tha................excitement से उसका बदन थार थार काँप रहा tha...............wahin हरी बहुत आहिस्ता से अपना गन्दा होंठ आसमा के नंगी पीठ पर रखकर उसपर हौले हौले अपने जीभ को चला रहा tha.............uski गोरी पीठ को अब चाट रहा tha..............jissey उसके मुँह से निकलने वाली लार और थूक दोनों आसमा के गोरी और चिकनी पीठ को गीली करती जा रही thi...........wahin आसमा की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi.............hawas के लाल डोरे साफ़ उसकी आँखों में अब नज़र आने लगे they..................maze से उसकी आँखें जैसे बंद हो रही thi..................lumbi लुम्बी सांसें लेती हुई वो खुद को काबू कर रही थी मगर अब कुछ भी उसके बस में न tha.............na hi sansein.......aur न hi उसका जिस्म.................

" आपने मेरे सवालों का जवाब नहीं दिया.................." और हरी आसमा को कुछ याद दिलाता हुआ धीरे से उसके पीठ को फिर से चटनी laga................wahin आसमा पूरी तरह से बेचैन हो uthi..................ek आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सी उसके मुँह से दुबारा निकल पड़ी वहीँ हरी को किसी बात की कोई जल्दी नहीं थी...........

"assssssssss.........haan hari................tum मुझे पूरा नंगा करके hi chooddnaaaa...........agar तुम्हें मुझे नंगा रखने में अगर ख़ुशी मिलती हैं तो मैं हर वक़्त तुम्हारे सामने पूरी नंगी hi रहूंगी............" और आसमा का साबरा जवाब देने laga...............uska दिल कर रहा था की हरी उसे यहीं पूरा नंगा करके अभी छोड़ dale....................magar शांति के आने का भी दुर्र tha..............wo कभी भी किसी भी वक़्त आ सकती थी......................

" मेरा अगर बस चले तो मैं आपकी जैसी माल को तो हर वक़्त नंगा hi रखूँगा..................." और हरी आसमा की गोरी पीठ पर अपना जीभ फेरता hua............uske बदन को ाचे से चाटता hua........dheere से बोल pada...............wahin आसमा बुरी तरह से मचल उठी...........

"aassshhhhhhhhhhhhhh.......aur तुम्हारा क्या क्या मुन्न करता हैं hari..............mere साथ................" और आसमा गहरी सांस छोड़ती हुई धीरे से बोल padi..............uski पंतय पूरी तरह से भीग चुकी thi...............jiska गिलपन साफ़ उसे अब महसूस हो रहा tha..............wo भी चाहती थी की हरी उससे खुलकर ऐसे hi गन्दी बातें करता रहे.....................

" मैंने आपके पास जितनी भी तसवीरें और क्लिप्स भेजी thi.............wo सब kuch.............main आपके साथ खुलकर करना चाहता हूँ................." और हरी आसमा को फिर से अपनी फंतासी के बारे में याद दिलाता हुआ धीरे से बोल pada..................wahin आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा दी...............

" magar.....................wo तसवीरें और क्लिप्स तो बहुत ज़्यादा गन्दी और घटिया thi...............kya तुम मेरे साथ वो सब करना chahogey............hari.................." और आसमा हरी को और उत्तेजित करती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में अपना लौड़ा आसमा के गांड में और चुभता हुआ बोल pada.................agar कपड़े की दीवारें न होती तो उसका लुंड आसमा की गांड में घुस चूका hota....................aabhi भी वो हौले हौले से आसमा के गोर पीठ को आहिस्ते आहिस्ते चाट रहा tha..................wahin आसमा के मुँह से हल्की हल्की सिसकारी फुट रही थी............

" अगर उससे भी ज़्यादा गन्दा और घटिया होता तो वो भी मैं आपके साथ karta...............aur वैसे भी प्यार में कुछ भी गन्दा और घटिया नहीं hota...............mai चाहता हूँ की आप मेरा पूरा पूरा साथ dein................waise memsaheb..................mujhe आपकी पंतय चाहिए इस waqt...................wo क्या हैं न मेरा लौड़ा बहुत ज़्यादा गरम हो गया हैं और मुझे अपने लुंड से अब पानी निकालनी hain............wo भी आपके पंतय पर..............." और हरी इतना कहकर आसमा के पीठ पर पूरा जीभ फेरता hua......ussey दुर्र हुत्त gaya................jissey आसमा की पूरी पीठ उसके थूक और लार से भीग गयी thi...............jitn भी हिस्सा उसकी पीठ का खुला हुआ था अब कहीं पर भी सूखा हुआ नज़र नहीं आ रहा था................

हरी काफी देर से उसके पीठ को किसी सेहद की तरह बस कहते जा रहा tha.................aur आसमा को उत्तेजित करता जा रहा tha...............wahin आसमा पूरी तरह से बेचैन thi..............uska साबरा पूरी तरह से टूट चूका था मगर लाज की दीवारें अब तक उसे रोक राखी thi.............hari की बातें सुनकर उसके दिल में आया की वो हरी से कह दें की वो खुद hi आकर उसकी पहनी हुई पंतय निकल lein.................magar ऐसा कहने की उसे हिम्मत नहीं hui.........................wo हरी की तरफ अजीब नज़रियों से देखने लगी............

"आपको कहीं और जाने की ज़रुरत नहीं hain..............aap यहीं मेरे सामने अपनी साड़ी के अंदर हाथ डालकर अपनी पंतय खुद hi निकल दीजिये........................" और हरी आसमा के तरफ देखता हुआ मुस्कुराने laga..................wahin आसमा हरी की तरफ देखती हुई हौले से अपनी साड़ी को घुटनों तक ऊपर करती hui..............haule से अपना एक हाथ साड़ी के अंदर ले जाने लगी और जब उसका एक हाथ उसके जंगों पर पहुँच गया तब वो उस पंतय को धीरे धीरे नीचे की तरफ सरकती हुई नीचे खींचने lagi..................wahin हरी बड़े गौर से आसमा के नंगी टांगों को देख रहा tha................lauda अब तक उसका पूरा उसके लोअर में तना हुआ tha..............aur ऊपर का हिस्सा उसके प्रेकम से भीगा हुआ भी था...................

आसमा थोड़ी नीचे की तरफ झुकाती हुई अपने पंतय को और नीचे की तरफ करती rahi............jab तक उसकी पंतय उसके पैरों में नहीं आ gayi...............jaise hi उसकी पंतय फर्श पर गिरी आसमा हौले से उसे उठती हुई .........धीरे से हरी के तरफ बढाती हुई उसकी तरफ अजीब नज़रियों से देखने lagi...........wahin हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान थी..............

" आज आपने अपनी ये पंतय खुद निकली hain..................magar कल ................मैं खुद अपने हाथों से आपकी ये पंतय निकुंगा....................." और हरी आसमा की पंतय को अपने हाथों में लेता hua.............usey ज़ोरों से सूंघता hua...............uspar अपना जीभ फेरने laga.............waise आसमा की पंतय पूरी तरह से भीगी हुई thi.............us पंतय का पीछे का थोड़ा सा hi हिस्सा बस सूखा हुआ था............. उधर हरी को जैसे कोई सेहद मिल गयी हो वैसे hi वो बड़े आराम से आसमा की पंतय को चाट रहा tha..............wahin आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा था.............

इससे पहले की वो कुछ कहती या हरी कुछ karta................upar के सीढ़ियों से शांति के क़दमों की आवाज़ आने लगी जिससे सुनकर हरी एक पल मुस्कुराता hua...........aasma की पंतय को अपने लोअर के जेब में डालता hua...........apne खड़े लुंड को सही से एडजस्ट करता hua.................dheere से मुस्कुराता हुआ वह से बहार की तरफ जाने laga..............wahin आसमा कड़ी बस चुप चाप हरी को अपने से दूर जाता हुआ बस देखती rahi..................pichely दो घंटों से शांति अपने काम को अंजाम देकर अब वापस अपने कमरे की ओरे लौट चुकी थी वहीँ आसमा जल्दी से जाकर मैं दूर बंद की और अपने सोफे पर aakar.......................apne दोनों हाथ अपने सर पर रखती हुई लुम्बी लुम्बी सांसें लेने lagi.......................dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था..................

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................
 
अपडेट-35 (ा) (मेघ अपडेट)

इससे पहले की वो कुछ कहती या हरी कुछ karta................upar के सीढ़ियों से शांति के क़दमों की आवाज़ आने लगी जिससे सुनकर हरी एक पल मुस्कुराता hua...........aasma की पंतय को अपने लोअर के जेब में डालता hua...........apne खड़े लुंड को एडजस्ट करता hua.................dheere से मुस्कुराता हुआ वह से बहार की तरफ जाने laga..............wahin आसमा कड़ी बस चुप चाप हरी को अपने से दूर जाता हुआ बस देखती rahi..................pichely दो घंटों से शांति अपने काम को अंजाम देकर अब वापस अपने कमरे की ओरे लौट चुकी थी वहीँ आसमा जल्दी से जाकर मैं दूर बंद की और अपने सोफे पर aakar.......................apne दोनों हाथ अपने सर पर रखती हुई लुम्बी लुम्बी सांसें लेने lagi.......................dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था..................

अब आगे......................................................

आसमा सोफे पर बटिहि हुई पूरी तरह से बेचैन thi.....................jo कुछ भी आज उसके साथ हुआ था वो सब कुछ किसी फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने अब घूम रहा tha................hari के साथ वो गन्दी baatein..............uska हरी के सामने यु गंदे वर्ड्स खुलकर bolna........................uski नंगी पीठ पर उसका यु chatna...............aur उसके सामने खुद अपनी पंतय निकलकर हरी के हाथ में यु dena...................sab कुछ उसे पल पल बेचैन करता जा रहा tha.......................itna सब कुछ हो जाने के बाद भी हरी ने खुद को काबू कर रखा tha..........................ye बहुत बड़ी बात थी.....................

वैसे भी आसमा हरी के मर्दानगी पर पूरी तरह से फ़िदा thi......................wo जानती थी की हरी सिर्फ बातें नहीं कर रहा tha...................balki सच कह रहा tha...............kyon की उसने शांति को उससे घंटों छोड़ते हुए खुद अपनी आँखों से देखा tha................to वो ये बात ाचे से जानती थी की जब वो उसे अपने लुंड पर जब चढ़ाएगा to..................uski बुर और गांड की भी धाज्जियाँ उदा dega.................magar आसमा भी तो एहि चाहती थी की हरी उसे बिस्टेर पर रात din.........subeh शाम............ हर वक़्त बस रगड़ता hi rahe.................aur इतना रगड़े की उसकी ये प्यास ख़तम हो jaye........................magar आसमा शायद ये नहीं जानती थी की उसकी ये प्यास कभी ख़तम नहीं होने wali................balki और भी बढ़ने वाली थी..........

आसमा हरी की साडी फैंटसीज को अब ाचे से समझ चुकी thi......................un साडी क्लिप्स और फोटोज को dekhkar..................itna तो वो अंदाज़ा लगा चुकी थी की हरी उसके साथ कभी सीधा सीधा सेक्स नहीं करने wala...................usey औरत के साथ गंदे खेल खेलने में ज़्यादा मज़ा आता tha..................jaisa वो निहायती गन्दा था वैसे hi कुछ उसकी सोच भी thi....................magar कभी कभी आसमा को ये बातें परेशां भी करती थी की क्या................... वो हरी के साथ वो सब कुछ कर payegi...............kya वो उसका पूरा पूरा साथ दे payegi................jo हरी उसके साथ करना चाहता hain..................usney बोल तो दिया था मगर वो उसके इरादों पर खरा अगर न उतर पायी to...................hari को वो मज़ा नहीं मिल पायेगा जो उससे वो उम्मीद लगाकर बैठा hain....................jissey वो और भी ज़्यादा मायूस और दुखी हो jayega........................aur वो अब हरी को ज़रा सा भी दुखी नहीं देखना चाहती थी...............

उसने अपनी सहेलियों से ये कहते सुना था की सेक्स में कोई भी चीज़ कभी गन्दी नहीं hoti...............chahe वो कितना भी गन्दा क्यों न ho...............bus सामने वाला पार्टनर उससे खुस रहना चाहिए और उसे भी उस खेल में पूरा पूरा मज़ा मिलना chahiye,...................jitni गन्दी चीज़ें होंगी सेक्स करने में उतना hi ज़्यादा मज़ा aayega................aur आसमा ने भी अब फैसला कर लिया था की अब वो भी अपनी जवानी का पूरा पूरा लुफ्त उठाएगी.................

वो हर चीज़ करेगी जो आज से पहले उसने कभी सैम के साथ भी नहीं किया tha............hari की ख़ुशी और उसे पूरा मज़ा दिलाने के लिए उसे जो कुछ भी क्यों न करना pade.................wo उसके लिए सब कुछ karegi..........bina किसी शर्म और झिझक ke..................un क्लिप्स और वीडियोस को देखने के बाद उसे एहसास हुआ था की केवल ऊपर चढ़कर दो चार बार ढ़ाके लगाने se.................aur लुंड बुर में घुसा देने से सिर्फ सेक्स नहीं hota...............balki सेक्स तो वो कला हैं जो जितनी देर तक खेला जाये बिस्टेर par.................maza उस खेल में उतना hi ज़्यादा आता rahega...............is खेल में मज़े की कोई सीमा नहीं रहती..............

आसमा अपने हाथों में मोबाइल लेती हुई बड़े गौर से.............. फिर से उन साडी क्लिप्स को एक एक कर देख रही थी जो हरी ने उसे भेजी thi...............sare पिक्स और क्लिप्स को वो ज़ूम कर कर ke............pause कर कर के .................वो उसे बड़े ध्यान से देख रही thi..............aur एहि सोच रही थी की हरी भी उसके साथ कुछ ऐसा hi गन्दा खेल khelega.................kyon की उसमें की जितनी भी पिक्स थी वो साडी हरी की फंतासी थी जो वो उसके साथ एक एक कर पूरी करना चाहता था.................

कहीं न कहीं आसमा भी धीरे धीरे आपने आपको हरी के सोच के हिसाब से खुद को तैयार कर रही thi...............aaj तो उसने सिर्फ बाटिओं में उसकी बुर को पूरी तरह से पनिया दिया tha................jab वो उसे छोड़ेगा तब वो उसकी बुर से कितना पानी girayega..................ye उसे भी अब अंदाज़ा हो रहा tha........yehi सोच सोचकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ रही thi............wo भी अब देखना चाहती थी की हरी उसके साथ किस हुड्ड तक जा सकता hain....................wo भी अपनी शर्म लाज को किनारे रखते hue...............hari की अब हुड्ड देखना चाहती thi..........aur उसके इस खेल में उसका पूरा पूरा साथ देना चाहती थी................

करीब एक घंटे तक आसमा इन्ही सब ख्यालों में डूबी rahi...............uski छूट फिर से गीली हो गयी thi..................uski इच्छा हो रही थी की वो अभी बिस्टेर पर जाये और अपने सरे कपड़े निकलकर फिर से पूरी नंगी हो jaye.............aur अपनी छूट में जी भरकर ऊँगली kare................uske अंदर की कभी न मिटने वाली उस प्यास को कैसे भी करके वो शांत kare...............magar उसकी ये प्यास दिन बा दिन अब बढ़ती hi जा रही thi.............tabhi फिर से उसके मैं दूर की बेल्ल baji......................aasma थोड़ी चौंकती हुई........... अपने सांसों को फिर दुरुस्त करती hui.........seedha मैं दूर की तरफ चल padi...................usey समझ में नहीं आ रहा था की इस वक़्त कौन हो सकता हैं...............

जैसे hi उसने दरवाज़ा खोला सामने हरी खड़ा tha................uski पंतय को उसके सामने झूलाये hue.....................jispar उसका ढेर सारा वीर्य गिरा हुआ था जो साफ़ कपड़ों पर अब नज़र आ रहा tha..................aasma एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई शर्मा सी गयी और फिर से अपनी नज़रें शर्म से नीचे की तरफ झुका li.................wahin हरी जवाब में बस मुस्कुराता raha...............waise वो उसकी पंतय hi लौटने वह दुबारा आया था.....................

" ये लीजिये आपकी amanat................jisey मैं सूद समेत आपको वापस लौटा रहा hoon..................jab जब मुझे इसकी ज़रुरत पड़ेगी मैं इसे अपने पास रखता rahunga...................magar...........mujhe ऐसा क्यों लगता हैं की अब मुझे इसकी ज़रुरत कुछ दिनों में नहीं पढ़ने वाली हैं................." और हरी अपने पीले काळा दांत दिखता हुआ धीरे से बोल pada................wahin आसमा एक नज़र उसकी तरफ मुस्कुराती हुई धीरे से अपनी पंतय हरी के हाथों से लेती hui...........sharmakar अपनी नज़रें नीचे की तरफ फिर से झुका ली.............

"तुम्हें ऐसा लगता हैं तो lage.............bhala मैं इसमें क्या कर सकती हूँ................." और आसमा पलटकर वापस जाने लगी तो हरी फिर से बोल पड़ा..................

" memsaheb...............is शांति का कुछ कीजिये naa.........isey कुछ दिनों के लिए आप छुट्टी क्यों नहीं दे deti.............fir तो हमारे मज़े hi मज़े hongey...................sara दिन मैं बस आपके पास हर वक़्त रहूँगा.................." और हरी फिर से अपने लोअर के ऊपर se..........apne लुंड को मसलता हुआ बोल पड़ा ...................वहीँ आसमा धीरे से मुस्कुरा दी................

" ठीक hain..............main कुछ करती hoon.................aur ये तुम बार बार मुझे मेमसाहेब कहते हो naa............mutt कहा karo............tum अगर चाहो तो मुझे मेरे नाम से भी बुला सकते ho.............aur आप nahin..............aaj से मुझे तुम bologey..............aur जिस अंदाज़ में तुम सबसे बातें करते हो naa................theek वैसे hi तुम मुझसे भी बात karogey...............mujhe बुरा नहीं lagega.............."aur आसमा हौले से हंसती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी की मुश्किलें अब और भी आसान हो gayi................aab वो आसमा से खुलकर अपनी टपोरी स्टाइल में बात कर सत्ता था................

" memsaheb................mujhe कोई ऐतराज़ नहीं hain...........magar मुझे आपको मेमसाहेब बोलना ाचा लगता hain.................baki तो मैं आपके साथ अपने स्टाइल में hi बात karunga............aacha चलता हूँ अब..............." और हरी पीछे की तरफ मुड़ता हुआ बहार जाने लगा............... वहीँ इधर आसमा अपने दरवाज़े को बंद करती हुई फ़ौरन अपने बैडरूम की ओरे चल padi.............is वक़्त उसके चलने की रफ़्तार तेज़्ज़ thi..................wo फ़ौरन अपने कमरे में आयी और एक एक कर अपने बदन के सरे कपड़ों को उतरती हुई ...............पूरी तरह से नंगी हो gayi...............aur पास में राखी अपने उस पंतय को अपने चेहरे के पास ले गयी और उसमें से ताज़ा ताज़ा हरी की वीर्य की खुसबू को सूंघने lagi....................fir धीरे धीरे चटनी lagi.................garam तो वो पिछले कई घंटों से thi.............aab उसका साबरा जवाब दे चूका था................
 
अपडेट- 35(बी) (मेघा अपडेट)

वो हरी के उस ताज़े वीर्य को अपने जीभ पर ले गयी और धीरे धीरे उसे फिर चटनी lagi.............ek अजीब सा खुमार फिर से उसपर चढ़कर बोल रहा tha.................wo पूरी तरह से बेचैन होती हुई अपने छूट में तेज़ी से ऊँगली कर रही थी और साथ साथ अपने क्लिटस को भी रगड़ रही thi..................dheere धीरे उसने पूरी पंतय पर अपना जीभ चलते hue...........hari के वीर्य को चाट कर ाचे से साफ़ कर diya................hari के वीर्य का स्वाद उसे ाचा लगने लगा tha..................wo उस खुसबू में पागल सी हो jati................chand मिनट hi गुज़ारे होंगे और उधर आसमा के साबरा का बाँध टूट पड़ा और वो ज़ोरों से assssssssssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii करती हुई झरने lagi......................aur लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपनी बेकाबू सांसों को पल पल संभालने की नाकाम कोशिश करने लगी........................

एक बार फिर वो नींद के आगोश में डूब चुकी thi..................uska नंगा बदन किसी संगमरमर की तरह चमक रहा tha....................na जाने वो कब तक ऐसे hi सुकून की नींद सोती रही...............

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शाम को जब वो उठी तो उसे उसका बदन बहुत हल्का सा महसूस हो रहा tha......................thode देर बाद सैम का कॉल आया और आसमा खुलकर उससे बातें ki....................usney बताया की वो एक दो दिनों में विदेश जाने वाला हैं और शायद उसे लौटने में एक साल का वक़्त भी लग jaye.....................sam तो दुर्र रहा था की आसमा उसपर चिल्लायेगी या कुछ bolegi..................magar आसमा ने एक लफ्ज़ कुछ नहीं kaha.............balki ये कहा की आप अपना ध्यान rakhiyega................main यहाँ ठीक hoon.................do चार और बातें हुई और सैम ने फिर फ़ोन रख दिया................

आसमा एक निघ्त्य पहनकर हॉल में गयी और फिर t.v देखने lagi.................hari की कही हुई बात उसे अचानक से याद आ gayi....................ki शांति को कैसे भी करके उसे कुछ दिनों के लिए वो hataye................magar सवाल ये था की वो शांति से कहेगी kya...!!!!!!!!!!!.......magar ये भी सच था की शांति के रहते हरी चोरी से तो आ सकता था मगर जितना वक़्त वो उससे चाहता था वो उसे शायद नहीं दे pata.................aur आसमा भी एहि चाहती थी की जब हरी उसके पास आये उसे पूरा पूरा वक़्त de.....................wo इस बारे में बहुत कुछ सोच रही थी मगर उसका दिमाग नहीं चल रहा था की वो क्या kare....................bahut सोचने के बाद उसने सब कुछ हरी के ऊपर छोड़ दिया................

शाम को खाना बनाने के बाद आसमा हर रोज़ की तरह हरी के कॉल का इंतज़ार करने lagi..............hari ने आज वक़्त से पहले hi उसके पास कॉल कर दी thi....................issey ये पता चलता था की आग इस वक़्त दोनों तरफ बराबर की लगी हुई हैं...............

" memsaheb.....................aaj सच में तू उन साड़ियों में बेहद हसीं लग रही thi............ek दम पताका maal....................main hi जनता हूँ की कैसे मैंने खुद को संभाला हुआ tha.................mera अगर बस चलता तो मैं आज हुड्ड से गुज़र जाता..............." और हरी धीरे से बोल pada...............wahin आसमा जवाब में फिर धीरे से मुस्कुरा दी..............

" किसने कहा था तुम्हें खुद को संभालने ko..................aaj हुड्ड से गुज़र जाना चाहिए था न tumhein...................maine तो तुम्हें पूरी चूत दे राखी thi...........aur मैं तो आज सज सँवाकर सिर्फ तुम्हारे लिए hi आयी thi............fir........................." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ जवाब में हरी मुस्कुरा पड़ा.............

" अगर मैं आज अपनी हुड्ड भूल गया होता तो ....................आज मैं तेरी माँ वहीँ पे छोड़ दिया hota....................tujhe तेरे hi बिस्टेर पर इतना रगड़ा होता की तू ठीक से चलना तो door................theek से मूट भी नहीं पति.............." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ धीरे से बोल पड़ा............ वहीँ आसमा जवाब में फिर धीरे से मुस्कुरा दी.............

" तुमने मुझे अब तक नहीं रगड़ा हैं तो........... अब रगड़ lena..................maine तुम्हें कब मन किया hain....................kya होता अगर मैं ठीक से चल .............या फिर मूट नहीं पति to...........kum से कम मुझे तुमसे छुड़वाने का ये सुख तो नसीब hota.............jiske लिए मैं अब तक तरस रही hoon............aur वैसे भी मैं तुम्हारी ये हुड्ड देखना चाहती हूँ............." और आसमा अपने छूट में ऊँगली करती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में फिर मुस्कुरा pada.............aasma पूरी तरह से खुलकर अब हरी से गन्दी बातें कर रही thi...........wahin वो उसको उकसा भी रही thi.........jisey हरी अब और भी घटिया वर्ड्स उसके सामने बोल रहा tha..............jisey सुनकर आसमा को भी मज़ा आ रहा था................

" तू फिरकर मुट्ठ कर मेरी jaan..................tujhe तो मैं ऐसा रगडूंगा की ये जो तेरे दोनों टांगों के बीच जो दो छोटे छोटे छेद हैं naa.............wo खुद बा खुद इतने बड़े हो जाएंगे की तू उसमें कुछ भी आसानी से अंदर ले sakegi..............waise भी मुझे कासी हुई चीज़ को ढीला करने में बड़ा मज़ा आता hain.............chahe वो कासी हुई चीज़ तेरी बुर ho...............ya फिर गांड..........." और हरी अपना लौड़ा सहलाते हुए धीरे से बोल pada...............wahin इस वक़्त उसका लूँ पूरी तरह से अकड़ा हुआ था...................

हरी की ऐसी बाटिओं को सुनकर आसमा का जिस्म एक बार फिर से पूरी तरह गरम हो चूका tha...........aur उसकी बुर से इस वक़्त ढेर सारा पानी बह रहा tha.....................wahin वो लगातार हरी से बातें करती हुई अपनी छूट में ऊँगली भी कर रही thi................ek बार फिर वो अपने चरम के बेहद करीब थी.................

" मैंने तो अपना जिस्म अपनी रूह सब तुम्हें सौंप दिया हैं hari,.................jaisa तुम मुझे देखना चाहते ho.............kal मैं फिर से तुम्हारे लिए सज संवर वैसे hi तैयार rahungi.............main भी देखती हूँ की तुम कल मेरे साथ क्या करते हो.............." और आसमा हरी को एक बार फिर से जैसे चैलेंज करती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में फिर हंस पड़ा...........

" अब तक तू अपने बुर में ऊँगली डालकर खुद hi अपनी माल गिरवती थी naa..............kal बुर तो तेरी rahegi..................magar ऊँगली meri................tere बुर से माल मैं खुद nikalwaunga..............agar ऐसा नहीं हुआ तो मेरा नाम भी हरी नहीं..............." और हरी अपने लुंड पर तेज़ी से हाथ फेरता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा की सांसें बहुत ज़ोरों से चलने लगी............

" ठीक हैं hari...........wo तो वक़्त hi batayega..............tumhari ऊँगली के लिए मैं खुद अपनी टांगें पूरी खोलकर rakhungi................jitna मर्ज़ी तुम मेरा माल girwaaaaaaaaaaaaa ...leeeeeenaaaaaa.......asssssssssssss.hhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiii..........................." और आसमा एक बार फिर से फ़िराक़ हो गयी थी वहीँ हरी भी आपने आपको नहीं संभल पाया और वो भी उधर चीखते hue..........aaaaaassssssssssss ............ अचानक से हांफता hua..................bilkul ठंडा पढ़ gaya....................dono की सांसें तेज़्ज़ चल रही thi.....................na हरी कुछ कह रहा था ..................और न aasma.....................dono एक दूसरे के लिए प्यासे they.....................dekhna था उनकी ये pyaas...........ye तड़प अब kab..................aur कैसे शांत होती हैं.....................

तो बे कॉन्टिनोएड..........................................
 
Update-36(A) (मेघा अपडेट)

" ठीक हैं hari...........wo तो वक़्त hi batayega..............tumhari ऊँगली के लिए मैं खुद अपनी टांगें पूरी खोलकर rakhungi................jitna मर्ज़ी तुम मेरा माल girwaaaaaaaaaaaaa ...leeeeeenaaaaaa.......asssssssssssss.hhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiii..........................." और आसमा एक बार फिर से फ़िराक़ हो गयी थी वहीँ हरी भी आपने आपको नहीं संभल पाया और वो भी उधर चीखते hue..........aaaaaassssssssssss ............ अचानक से हांफता hua..................bilkul ठंडा पढ़ gaya....................dono की सांसें तेज़्ज़ चल रही thi.....................na हरी कुछ कह रहा था ..................और न aasma.....................dono एक दूसरे के लिए प्यासे they.....................dekhna था उनकी ये pyaas...........ye तड़प अब kab..................aur कैसे शांत होती हैं.....................

अब आगे..................................................................

हर रोज़ की तरह आसमा आज भी समय से पहले उठ गयी thi........................aur वो आज सुबह से hi बहुत ज़्यादा बेचैन thi.......................aur उसकी बेचैनी का सबब tha................hari...............

घर का सारा काम ख़तम करके जब वो अपने बाथरूम में नहाने के लिए जब जाने lagi.................tabhi उसके घर का बेल्ल बज utha..................hairani तो उसे इस बात की हुई की इतनी सुबह इस वक़्त कौन आ सकता hain.............kuch सोचकर वो मैं दूर की तरफ चल पड़ी और जैसे hi उसने दरवाज़ा खोला सामने शांति कड़ी हुई thi...................jo की काफी परेशां लग रही थी..............

आसमा को अपने सामने देखती हुई वो फ़ौरन अपने दोनों हाथ जोड़ती हुई ................फिर धीरे से बोल पड़ी...............

" memsaheb.................mujhe आपसे इस वक़्त बहुत ज़रूरी बात करनी थी................." और शांति थोड़ी परेशां होती हुई धीरे से बोल पड़ी .................वहीँ आसमा बड़े गौर से शांति के चेहरे की तरफ बस देखे जा रही थी............

" da-asal .............मुझे 10 दिनों की छुट्टी chahiye.................mere मरद का एक्सीडेंट हो गया hain.............aaj subeh.................ghar से अभी को फ़ोन आया tha.............uski एक पेअर की हड्डी टूट गयी hain.............aur शरीर में भी कई जगह ज़ख्म hain................daru के नशे में वो कहीं जा रहा था तो किसी गाड़ी वाले ने उसे तकार मार di...............bach तो वो गया हैं मगर उसकी हालत सीरियस hain...............mujhe अभी जाना hoga.................aur मुझे कुछ पैसे भी उधार चाहिए..............." और शांति रोटी हुई बोल padi.................ek तरफ तो आसमा शांति के ऐसे अचानक जाने से बेहद खुस थी वहीँ ..............दूसरी तरफ उसके मरद की ऐसी खबर सुनकर वो थोड़ी दुखी और चिंतित भी हो रही thi.............wo फ़ौरन शांति के दोनों हाथों को थमती हुई............... उसे हौसला दिलाती hui................uski तरफ देखकर धीरे से बोल पड़ी....................

" कोई बात नहीं shanti.................tum आराम से aana............pehle तुम अपने मर्द की ाचे से दवाई करवा lo..............aur तुम्हें कितने पैसे chahiye................main तुम्हें अभी लेकर देती hoon............."aur इतना कहकर आसमा फ़ौरन जाने के लिए जैसे hi पीछे की तरफ मुड़ी................. तभी शांति धीरे से बोल पड़ी.........

" मालकिन मुझे इस वक़्त 10,000 रस की सख्त ज़रुरत hain..................agar आप दे देंगी तो मुझ गरीब पर आपकी बड़ी मेहरबानी होगी................" और शांति इतना कहकर फिर से सुबुकने लगी वहीँ आसमा हाँ में अपना सर हिलती हुई अंदर कमरे में गयी और थोड़े देर बाद जब वो वापस आयी तो उसके हाथों में 100 के नोट के कुछ बंडल they.....................jinhein वो शांति के हाथों में थमती हुई फिर धीरे से मुस्कुरा दी.........

" ये लो 20,000 hazar...............ilaaz में जो भी खर्च आये तुम लगा dena.................tum निश्चिंत होकर jawo..............sab ठीक हो जायेगा....................." और आसमा हौले से शांति की तरफ देखती हुई मुस्कुरा दी वहीँ शांति एक बार फिर आसमा के सामने अपने हाथ जोड़ती hui..................usey धन्यवाद् करती हुई फ़ौरन वहां से निकल gayi.................wahin आसमा अपने कमरे का मैं दूर बंद करती हुई अंदर आयी और आकर सोफे पर बड़े आराम से बैठ गयी......................

इस वक़्त उसकी ऐसी हालत थी की उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा था की वो क्या kare............aur क्या न kare.......................jis शांति को वो कैसे भी करके कुछ दिनों के लिए अपने पास से हटाना चाहती थी .............ये ऊपर वाले का करिश्मा kahiye......ya फिर कुछ aur...................jo उसकी सबसे बड़ी समस्या का समाधान अब हो गया tha.......................shanti खुद 10 दिन तो kya...........wo कम से कम 15 दिनों से पहले अब यहाँ नहीं लौटने वाली थी ये आसमा को पूरा यकीन tha..................aur वो ये बात भी बहुत ाचे से जानती थी की इन 15 दिनों में अब उसकी इतनी भयानक चुदाई होने वाली हैं जिसका वो सही से अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती thi................kyon की हरी ऐसा सुनेहरा मौका अपने हाथ से जाने देने वालों में से नहीं था.............

उसके दिल में अजीब सी लहर उठ रही thi................badan एक्ससिटेमेंट की वजह से काँप रहा tha...................aur दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा tha.................jissey उसका गाला बुरी तरह सूख रहा tha................kaanptey हाथों से वो फ़ौरन हरी को कॉल की .............और फिर अचानक से काट di....................uska दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा tha.................fir कुछ सोचकर वो दुबारा से हरी के पास कॉल की तो थोड़े देर बाद हरी उधर से चहकता हुआ बोल पड़ा.................

" memsaheb....................aaj अपुन की तो लाटरी लग gayi...................is वक़्त सच में अपुन की किस्मत बहुत मेहरबान hain..................main शांति को कैसे भी भागने के फ़िराक में था और dekho..............kaise हमारे बीच का काँटा खुद hi निकलकर साफ़ हो gaya,...............waise शांति अभी को यहाँ से गयी hain.............aur मुझसे ये भी कह गयी की उसे लौटने में कम से कम 15 दिन तो लग hi jayega.......................tum सब संभल lena............aaj से तो अपने मज़े hi मज़े हैं..............." और हरी ख़ुशी से उछलता हुआ बोल pada..............wahin आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा दी............

" तो अब देर किस बात की हैं hari...................main इस वक़्त नहाने जा रही hoon..................jab मैं नहाकर ावुंगी तो तुम्हारे लिए कल की तरह आज भी तैयार rahungi..............tum अपने टाइम पे आ jana..............aur haan...............aab तुम्हें यहाँ से जाने की ज़रूरत नहीं hain..............tum यहीं रहना ........मेरे paas.............mere इस घर में..............." और आसमा धड़कते दिल से धीरे से बोल padi..................wahin उसका कलेजा बहुत ज़ोरों से धड़क रहा tha................wo बहुत ाचे से जानती थी की आने वाला पल उसके लिए कितना हसीं और ख़ास होने वाला hain...............ye सोच सोचकर वो बहुत रोमांचित हो रही थी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा pada...............aasma की बेचैनी उसकी बाटिओं से वो जान चूका था ...............की वो इस वक़्त कितनी ज़्यादा बेचैन हैं...........

" memsaheb......................ek बात bolun..................apun की दिल की इच्छा थी की मेरी होने वाली maal..................mere लिए दुल्हन की रूप में saje.............sanwarey...............mere आने का इंतज़ार kare...................jaise सुहागरात में होता हैं ................की दूल्हा आकर दुल्हन का घूँघट उठता hain..............kuch वैसा hi मेरे साथ भी ho......................magar मेरी ये इच्छा आज तक अधूरी hi रह gayi...............aur मैं चाहता हूँ की तू मेरी ये इच्छा अब पूरी kar.................mere लिए आज की रात तू दुल्हन bankar...........mere आने का इंतज़ार कर.....................

तेरा बिस्टेर फूलों से सजा हुआ ho............aur कमरे में वो क्या कहते हैं न..... perfume..................uski महक आती rahe..................tu बिस्टेर पर दुल्हन की लिबास में बैठी रहे और तेरे हाथों और पैरों में मेहंदी लगी ho...............aur उसमें मेरा नाम लिखा हुआ ho..................sir से लेकर पवन तक तेरे बदन पर गहने ho...................jaise तू पहली बार मालिक के साथ जब आयी thi................theek वैसे hi................fir जब मैं तेरे पास आवुन tab..................main धीरे से तेरा घूँघट uthawon.................tere इन रसभरे होंठों को खूब आराम आराम से उसका रूस piyun..............aur फिर जो उस रात होता hain...............wo तेरे साथ मैं इन 15 दिनों तक करता rahun.............raat दिन ..........सुबह sham............sirf और सिर्फ तेरी thukayi....................is बारे में क्या कहती हैं मेरी जान..................." और हरी मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में शर्माती हुई धीरे से मुस्कुरा दी............

" magar....................uske लिए तो मुझे बेऔतीपार्लौर जाना hoga..................massage करवाना hoga..............poorey बॉडी ka...............fir मेहंदी लगवानी padegi..............in सब में कम से कम 4 या 5 घंटे का वक़्त लग जायेगा.................." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा................

" कोई बात नहीं मेरी jaan.....................jab मैं इतने दिनों तक रुक सकता हूँ तो क्या मैं तेरे लिए शाम तक और नहीं रुक pawunga...................tujhe जितना वक़्त चाहिए ले le...............magar शाम को जैसा मैं तुझे देखना चाहता हूँ तू वैसे hi मुझे मिलनी chahiye.......................mujhe कुछ दो चार बहार के काम भी करने hain...............jinhein मैं आज निबटाकर पूरे इतेमेंआन के साथ तेरे पास बस rahunga..................aur तुझे छोड़कर कहीं भी नहीं jawunga..................ye मेरा वादा hain.............chal जा तुझे दिया टाइम................." और हरी इतना कहकर आसमा के जवाब का इंतज़ार करने लगा वहीँ आसमा हौले से मुस्कुरा padi................uski दिल की धड़कें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी thi................uska बदन में सनसनाहट होनी अभी से शुरू हो गयी थी............

" ठीक हैं hari..................tum अपना काम देख lo..............main मार्किट जाती हूँ और शाम को तुम्हारे आने का बेसब्री से इंतज़ार karungi..............aur तुम वक़्त से पहले आ jana...........aur haan................tum ऐसे hi aana..................tum गंदे hi मुझे ज़्यादा ाचे लगते हो......................" और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में हंस पड़ा..............

" लगता हैं तू मेरे रंग में पूरी तरह से अब रंगति जा रही hain...............maza आएगा तेरे साथ इस गंदे खेल mein...............lagta हैं जैसे मेरे बरसों की मुराद अब पूरी हो jayegi.................aur haan..............tu फ़िक्र मुट्ठ कर मैं वक़्त से पहले hi तेरे पास हाज़िर हो jawunga..............jaise तू बेचैन hain..........waise मैं भी.........." और हरी ज़ोरों से हंस pada.................wahin आसमा का चेहरा शर्म से लाल हो gaya............aur आसमा फ़ोन रखती हुई वहीँ बहुत देर तक साडी बातें सोचती रही..............

वैसे वो आज बेहद खुस thi..............aur वो खुस होती भी क्यों naa.............aaj उसकी सुहागरात जो thi..............hari के saath..................uske दिल में घबराहट तो हो रही थी मगर साथ hi साथ एक्ससिटेमेंट भी बढ़ती जा रही thi..................wo फ़ौरन नहाने के लिए बाथरूम में घुस गयी और एक ाची सी सूट पहनकर ...............थोड़ी सज धज कर ..................सीधा अपनी कार लेती हुई पार्लर की तरफ चल padi.............wahin उधर हरी भी अपने काम से निकल चूका था....................

जैसे hi आसमा पार्लर पहुंची और जब वो अंदर गयी ..............अंदर एक 32 साल की खूबसूरत औरत उसे बैठी हुई mili..................jisey देखकर आसमा हौले से मुस्कुरा padi...............wahin जवाब में वो औरत भी धीरे से मुस्कुरा पड़ी...........
 
अपडेट- 36(बी) (मेघा अपडेट)

" कहिये madam..................kaun सी सर्विस chahiye...............sare सेट के लिस्ट लगी हुई हैं और नीचे उनकी प्रिंसेस bhi.............aap कौन सा पैकेज करवाना चाहेंगी............." और वो औरत धीरे से बोल पड़ी वहीँ आसमा सामने के तरफ बहुत सी पचकागेस को बड़े ध्यान से देखने लगी और जब उसकी नज़र दुल्हन सेट पर गयी तो वो उस तरफ अपने हाथों को इशारा करती हुई धीरे से मुस्कुरा di............neechay उस पैकेज की प्राइस 15,000 थी वहीँ आसमा उस औरत की तरफ बड़े ध्यान से देखने लगी..........

" आप प्राइस पर मुट्ठ जाइये madam..............aapko डिस्काउंट मिल jayega...............dulhan सेट हम 10,000 में कर dengey.............aap बस अपने कपड़े उतारकर यहीं लेट jaiye...........ismein कम से कम 4 घंटे का वक़्त लग सकता hain...............aap फ्री तो हैं ना................" और वो औरत आसमा की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ आसमा जवाब में धीरे से हाँ में अपना गुर्दें हिलती हुई बोल पड़ी............

" मुझे कोई दिखात नहीं hain.............aap पूरा टाइम मुझे दे सकती हैं.................." इतना कहकर वो औरत आसमा के पास आयी और उसका मेकउप करने lagi..............waqt गुज़रता गया और आसमा की बेचैनी भी धीरे धीरे बढ़ने lagi.............hair रिमूवल से उसके जिस्म पर जहाँ कहीं भी बल थे सब कुछ उस पार्लर वाली ने रिमूव kiya.................yahan तक की उसकी छूट गांड के बाल को bhi..............fir वो उसपर एक खुसबूदार लोशन lagayi..............jissey आसमा का प्राइवेट पार्ट्स महक utha..................parlour वाली भी जानती थी की दुल्हन सेट में किस और कौन से चीज़ों का ख़ास ध्यान दिया जाता हैं..............

आसमा का बदन सर से लेकर पवन तक खिल उठा tha...................poorey बदन पर लोशन और क्रीम लगे they................jissey उसका गोरा रंग और भी ज़्यादा निखर गया tha............poori बॉडी मस्सगे हो जाने के बाद उसके हाथों और पैरों में मेहंदी lagi.........aur जैसा की हरी ने आसमा से कहा था वैसे hi आसमा ने अपने हाथों पर हरी का नाम लिखवाया tha.............poora फाइनल हो जाने पर जब वो आईने में आपने आपको जब देखती तो कुछ देर तक वो अपने आपको बस निहारती rahi................sach में वो आज बेहद हसीं लग रही thi.............uska सूंदर सा चेहरा और भी निखरकर उस आईने में झलक रहा tha............us पार्लर वाली ने आसमा से ज़्यादा कुछ नहीं पुछा मगर इतना ज़रूर पुछा की वो शादी शुदा हैं तो फिर वो आज दुल्हन सेट क्यों करवा रही हैं...............

तो आसमा ने सीधा और सिंपल सा जवाब दिया की उसके हस्बैंड बहार रहते हैं और वो आज शाम को घर आ रहे हैं और उनकी ये डिमांड हैं की मैं उनके लिए कुछ वैसे hi सज संवर rahun...........aasma ने ये भी ज़ाहिर नहीं होने दिया था की वो मुस्लिम हैं मगर वो पार्लर वाली शायद समझ गयी थी की आसमा उससे झूट बोल रही thi..............wo अपने लवर के लिए कुछ ऐसा कर रही thi.........usey उसको क्या था उसे तो अपने बुसिनेस्स से मतलब tha............is लिए वो उससे ज़्यादा सवाल जवाब नहीं की..............

वो पेमेंट्स करती हुई फिर मार्किट चली गयी और अपने लिए कुछ दो तीन उन्देर्गर्मेन्ट्स khareedi............fir उसने कुछ फ्रूट्स वगैरह li..............jaise kela........angoor..........aur लास्ट में वो मटन शॉप पे गयी जहाँ उसने मटन liya....................jo उसे बेहद पसंद tha.....................fir वो एक मेडिसिन के दूकान पर गयी और अपने लिए ढेर सारा िपिल्स खरीद कर रख liye..............wo जानती थी की अब इसकी बहुत ज़रुरत पढ़ने वाली hain.......saath में एक टेबलेट पैन किलर की bhi..............shayad वो भी आगे काम आये................

सारा मार्किट हो जाने के बाद वो सब सामान समेटती हुई सीधा अपने घर आयी तो देखि की हरी अब तक नहीं लौटा tha.....................shaam को 4 बजने को आये they..............usey थोड़ी घबराहट और चिंता भी हुई मगर फिर भी उसने तसाली के लिए हरी के पास कॉल कर hi diya.................wahin थोड़े देर बाद हरी अपना फ़ोन उठता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ा........

" तुम कहा हो हरी.................." और आसमा धड़कते दिल से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुरा पड़ा..........

" तेरे लिए hi मैं कुछ चीज़ें लेने आया tha..................waise तो मैं सब ले चूका hoon...............tu फ़िक्र मुट्ठ kar.........main शाम को 6 बजे तक तेरे पास हाज़िर हो jawunga............tu बस मेरे लिए रेडी रहना................." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा रहत की सांस ली..........

" ठीक हैं hari...............ek बात aur................aaj घर का मैं दूर खुला rahega....................matlab बहार से बस सत्ता rahega................jab तुम अंदर आना सीधा मेरे कमरे में चले aana.............aur हाँ .............मैं दूर ायचे से लॉक करते हुए aana.............aur कमरे की लाइट्स भी बुझा देना................" और आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा.............

" घर की लाइट्स बंद हो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं hain.................magar तेरे कमरे की लाइट्स नहीं बंद होनी chahiye..............sab कुछ खुली रोशनी में hoga...........aur haan.........bedsheet की चदार सफ़ेद होनी chahiye.............uska एक अलग मज़ा hain...........aur तू फ़िक्र मुट्ठ kar...............jaisa तू कही हैं मैं टाइम पे आ जावूंगा............." और हरी इतना कहकर फ़ोन रख दिया वहीँ आसमा फ़ौरन किचन में गयी और जाकर मटन बनाने lagi............fir वो बैडरूम में गयी और उस बीएड की शीट को चेंज करने lagi.......jaisa हरी ने उससे कहा tha................usney एक सफ़ेद रंग की चादर bichayi.....................jismein बीचों बीच एक बड़ा सा दिल बना हुआ tha..................wo फिर फूलों का पैकेट खोलती हुई सरे बिस्टेर पर फूल बिखेरने लगी...............

साथ में काफी सरे माला थे जिन्हें वो साइड साइड से लटकती हुई उस बीएड के चरों तरफ झूलने lagi.................upar से लेकर नीचे tak..................ek घंटे के अंदर उसने अपना बैडरूम को पूरा सजा लिया tha..............aab देखने से ऐसा लग रहा था जैसे ये सुहागसेज की बीएड ho..................fir वो बाथरूम में गयी और अपने बदन को एक खुसबूदार साबुन से ाचे से मलने lagi.............usney अपने सरे आंग को ाचे से साफ़ kiya.....fir एक खुसबूदार बॉडी परफ्यूम अपने बदन पर लगाती हुई अपने उन्देर्गर्मेन्ट्स पहने और जो उसने अपनी निकाह में कपडा पहना था वहीँ हरी के लिए भी अब पहने lagi..................upar एक रेड कलर की ब्लाउज और नीचे उसी रंग का बड़ा सा lehanga...............fir उसने साडी ज्वेल्लेरी पहनी...................

हाथों में ढेर साडी खनकती choodiyaan.............aur पैरों में पायल और उँगलियों में रेड कलर की nailpolish...........aankhon में काजल और होंठों पर लिपस्टिक लगाती हुई वो पूरी तरह से अब रेडी हो gayi..................poorey रूम को उसने एक खुसबूदार परफ्यूम से स्पर्य किया जिससे वो कमरा पूरी तरह से महक उठा..............................

इधर खाना बन चूका tha...............bister सज चूका tha...............dulhan भी अब सज चुकी thi................kamey में एक हल्का नीले रंग की बल्ब जल रही thi...............kami थी तो बस दूल्हे के आने ki.................ghadi में शाम के 6 बज रहे they...................jaise जैसे वक़्त बीत रहा था आसमा के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रही thi............uska दिल और भी ज़्यादा घबराता जा रहा tha............itni बेचैन तो वो उस रात भी नहीं हुई थी जब उसकी सैम के साथ जब सुहागरात thi............ye लम्हा उसके लिए बेहद ख़ास जो होने वाला tha.............ye बात वो भी ाचे से जानती थी.........

इधर थोड़े देर बाद हरी का फ़ोन आया.............. आसमा ने कहा की मैं उसके लिए अब पूरी तरह से रेडी hoon..............wo आ jaye.............aur उधर हरी ख़ुशी से झूम utha..................hari का इंतज़ार अब ख़तम होने वाला था...............

आज उसका इंतज़ार एक हूर .........एक पारी जैसी कमसिन सी कम उम्र की लड़की कर रही thi................jo उसकी बेटी के बराबर की hogi..................jo अब उस घर की मालकिन thi................aur हरी न सिर्फ उस लड़की के साथ सुहागरात मानने वाला tha..............balki उसकी काची जवानी का रूस पूरी तरह से निचोड़ निचोड़ कर पीने वाला tha..................uske साथ वो सब कुछ करने वाला था जिसकी इज़ाज़त उसने सिर्फ और सिर्फ अपने शौहर को दी thi............wo भी एक रात के लिए nahin..................balki कई रातों के लिए..............

आसमा भले hi सेक्स के मामले में अभी थोड़ी काची thi................magar बाची भी thi................magar हरी तो पहुंचा हुआ शातिर खिलाडी tha...............wo चुदाई के हर एक दांव पीच बहुत ाचे से जनता tha..............aur उसे इस बात का एहसास था की आज की रात आसमा की क्या हालत होने वाली hain..................wo उसे बर्दास्त कर भी पायेगी या nahin..............aur करेगी भी तो आखिर कब tak...........magar जो भी हो वो उसे अब नहीं छोड़ने वाला था...............

वो ाचे से जनता था की पूरे होश हवश में आसमा कभी उसे नहीं झेल payegi.....................aur वो अपने सरे खुननाश सरे अरमान बिस्टेर पर आसमा के साथ निकलना चाहता tha.............aab जो आसमा की चीखें निकलेंगी तो शायद अब बंद भी न ho.................kuch ऐसा hi हाल वो अब आसमा के साथ करना चाहता tha........magar प्यार se.............na की ज़ोर ज़बरदस्ती se.............itna तो पक्का था की आसमा उसके लुंड के नीचे आकर अब उसकी पूरी रांड ज़रूर बनाने वाली थी...........

वो रांड जिसे वो अपनी हर इच्छा पूरी करवा sake......................uske एक िसहरी पर वो अपनी टांगें हर वक़्त खोली खड़े rahe...............hari उसे जब जब chahe.........jitni देर तक chahe.................uski जवानी को भोगता rahe............wo उसे एक चुदाई की मशीन बना चाहता tha........................jo हर वक़्त उसके लिए हाज़िर rahe................har waqt.....har समय..............

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................................
 
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