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अपडेट-40 (बी) (महा Episode सुहागरात स्पेशल)
" तुम्हारा जैसा मुन्न kare..............jis तरह से मुन्न करे तुम अपना लुंड मेरे मुँह के अंदर डालना hari....................bhale hi मुझे कितनी भी तकलीफों का सामना क्यों न करना pade...............tum मेरी परवाह मुट्ठ karna..............tum वो सब चीज़ करना जिससे तुम्हें पूरा पूरा मज़ा mile................aaj तुम्हारी ये दुल्हन तुम्हारे सरे इम्तिहानों में पास होगी..............." और आसमा हरी का हौसला बढाती हुई धीरे से मुस्कुरा दी वहीँ हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर gayi....................wo वहीँ फ़ौरन खड़ा हुआ और अपना एक पवन बीएड पर रखता hua...............aasma के तरफ बड़े गौर से देखने लगा.................
आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने laga........................durr की एक लखीर उसके चेहरे पर भी साफ़ नज़र आने lagi........kehney को तो वो कह दी थी मगर वो इतना बड़ा लुंड कैसे पूरा अपने मुँह में लेगी ये उसने कभी सोचा नहीं tha...................magar वो हार मानने वालों में से नहीं thi...................hari उसे वहीँ फर्श पर बैठने का इशारा किया और आसमा फ़ौरन वहीँ हरी के टांगों के बीच आकर बैठ गयी .....................अब उसकी नज़रियों के सामने हरी का विशाल लुंड खड़ा था जो अब फन फैलाये खड़ा tha....................hari के लुंड की मोटाई और लम्बाई को देखकर आसमा के बुर में भी पसीने आने लगे they..................wo टकटकी लगाए हरी के लौड़े को बस देख रही थी............
हरी अगले hi पल अपने मुँह से गधा गधा थूक निकलता हुआ इस बार अपने थूक को सीधा अपने खड़े लुंड के टोपी पर गिरने लगा ................वहीँ उसका थूक बेहटा हुआ नीचे की तरफ जाने laga..............aasma ाचे से जानती थी की आगे उसे क्या करना hain......wo थोड़ा आगे की ओरे अपना चेहरा ले गयी और हरी के टोपी पर हौले से अपना जीभ फेरती हुई उसके थूक को फिर से चटनी lagi......wahin इस बार हरी की लजात और मज़े से आँखें बंद हो gayi..........ek तेज़्ज़ सिसकारी उसके मुँह से फुट पड़ी वहीँ आसमा अपना जीभ हौले हौले से उसके लुंड के चरों तरफ बस फेरती rahi........ek अजीब सा गंध उसके लुंड से निकल रहा tha............................jo आसमा को और भी बेचैन करता जा रहा था...............
आसमा हौले से अपना एक हाथ हरी के खड़े हुए लुंड पर रखकर उसे धीरे से पकड़ ली और अपना जीभ धीरे धीरे उसके टोपी पर चलने lagi...................wahin हरी की सांसें तेज़्ज़ होने लगी साथ hi साथ उसके मुँह से सिसकारी भी लगातार निकलती rahi..............kitne आरसे के बाद आज कोई लड़की उसका लुंड ऐसे चाट रही thi...............nahin तो दुर्र की वजह से कभी कोई लड़की उसका लुंड अपने मुँह में भी नहीं लेती thi...................aasma के इस तरह जीभ चलने से हरी की आहें तेज़्ज़ होने lagi................wo मज़े के समुन्दर में जूते लगाने laga................aasma हौले हौले से अपने जीभ हरी के लुंड के सभी हिस्सों पर चला रही thi...............usey धीरे धीरे से चाट रही thi............uske थूक से उसका लुंड धीरे धीरे अब गिला होता जा रहा था...............
हालाँकि हरी के लुंड पर बल थे मगर छोटे they.................dekhney से ऐसा लग रहा था जैसे उसने आज hi अपने झात के बल काटे hain.................na hi वो ज़्यादा बड़े थे और न hi ज़्यादा chote...................aasma धीरे से और नीचे की तरफ अपना सर ले गयी और हरी के दो ांडें जो इस वक़्त नीचे की तरफ लटक रहे थे उनपर भी अपना जीभ फेरने lagi..............wahin हरी की सिसकारी तेज़्ज़ होती चली gayi..............lajaat और मज़े से उसकी आँखें जैसे बंद हो gayi..........wo आसमा के बालों पर अपने हाथ धीरे धीरे फेरता हुआ मज़े से सिसक रहा tha................hari उसे और अंदर की तरफ धकेलता हुआ उसे अपने शरीर का सबसे गन्दा हिस्सा चटनी का इशारा करने laga...............aur ये बताने की बात नहीं थी की शरीर का सबसे गन्दा हिस्सा कौन सा होता हैं............
आसमा एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई हौले से अपना जीभ और नीचे की तरफ ले gayi........hari के गांड के taraf...........ek बार तो उसे घिन्न सी aayi..............aisa लगा की अभी वो उलटी कर degi..............magar जैसे तैसे वो अपना मुन्न मरती हुई अपना जीभ धीरे से सरकती हुई हरी के गांड के उस काळा छेद पर ले गयी जो दिखने में बेहद गन्दा सा tha................aur कला bhi.......jispar थोड़े बल भी they..............jaise hi आसमा के जीभ ने उस हिस्से को चुवा हरी की तो मज़े से सिसकारी निकल पड़ी मगर वहीँ आसमा को ऐसा लगा की वो अभी उलटी कर degi.............ek अजीब सी घिन्न लगी उसे मगर वो उस बदबू को जैसे तैसे बर्दास्त करती हुई हौले हौले से हरी के काळा और गंदे से गांड को धीरे धीरे फिर चटनी lagi..................waise हरी समझ चूका था की आसमा उसके गांड को चटनी से झिझक रही hain................wo फ़ौरन उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड़ता हुआ ज़ोरों से खींचने लगा वहीँ आसमा की एक बार फिर ज़ोरों से चीख निकल पड़ी...............
आसमा हरी के चेहे की तरफ देखे जा रही थी वहीँ हरी इस बार अपने मुँह से गधा गधा थूक निकलता हुआ उसके मुँह पर फिर से गिरने laga................wo ऐसा दो तीन बार किया जिससे आसमा का खूबसूरत सा चेहरा उसके गंदे थूक से भर गया...................
" लगता हैं तू मेरी गांड को ठीक से चाट नहीं पा रही hain................aaj मैं तुझे सिखाता हूँ की गांड कैसे छाती जाती हैं.............." और इतना कहकर हरी फ़ौरन आसमा का सर बीएड पर करता hua.............uska पूरा शरीर इस वक़्त फर्श पर tha.................sir का हिस्सा बस बीएड पर रखता हुआ वो फ़ौरन अपने गांड को आसमा के मुँह के ऊपर रखने लगा और धीरे धीरे उसके चेहरे पर अपने गंदे से गांड को रगड़ने laga....................aasma का दम घुटता सा लगा मगर अगले hi पल वो थोड़ी नार्मल हुई और हरी के गंदे गांड को अपने जीभ से धीरे धीरे फिर चटनी lagi.............wahin हरी मज़े से अपने गांड आगे पीछे करके आसमा से पूरे मज़े के साथ उससे अपनी गांड चटवा रहा tha...............hari के गांड पर जितनी भी गंडीगड़ी थी सब आसमा के जीभ के रास्ते सीधा उसके मुँह के अंदर जा रही thi..............shuru में तो आसमा को गुलिटी सा फील हुआ मगर धीरे धीरे उसे भी इस खेल में मज़ा आने लगा........
वो भी पूरे जी जान से हरी के गंदे गांड को चाट रही थी साथ hi उसके दोनों ांडों को भी चाट leti................kareeb 10 मिनट तक हरी इसी पोजीशन में आसमा से अपनी गांड उससे चतवता raha...............usey मुन्न hi मुन्न बहुत सुकून और ख़ुशी मिल रही thi.........ek ख़ूबसूरत सी जवान और इस घर की मालकिन एक गंदे बुड्ढे नौकर के साथ ऐसे गंदे खेल खेल रही थी ये उसके लिए बहुत बड़ी बात thi............aab आसमा के चेहरे पर न hi लिपस्टिक थी और न hi कोई फेसवाश क्रीम powder...............aur न hi bindiya............uski जगह अब हरी के थूक और लार ने ले ली thi...........uska खूबसूरत सा चेहरा थोड़ा अजीब सा लग रहा था..............
" वाह मेरी जान तुमने तो मुझे खुस कर diya..................mere शर्ट के जेब में एक बीड़ी की पैकेट राखी हुई hain..............aur साथ में माचिस bhi......jaa तू उसे लेकर आ....................." और हरी आसमा को जैसे हुकुम किया वहीँ आसमा नंगी चलती हुई थोड़ी दूर गयी तो हरी बड़े गौर से उसकी थिरकती हुई गांड को देख रहा tha....................aur ये सोचकर मुस्कुरा रहा था की अब उसे छोड़ने को एक छूट तो मिलेगी hi साथ में एक कुंवारी गांड भी milegi.................jisey वो जब चाहे जैसा चाहे छोड़ सकता था......................
आसमा हरी के शर्ट के जेब में से बीड़ी का बंडल निकलती हुई साथ में उस माचिस को भी लेकर उसके पास आयी तो हरी फिर से आसमा के नंगे जिस्म को देखने laga..........uski बुर तो उसे नज़र नहीं आयी उसकी जगह उसे एक छोटी सी लाइन दिखाई di...............jo अभी भी पूरी तरह से बंद thi.................saath में दो बड़े बड़े चूचियां थी जो अभी तक टैंकर कड़ी थी जो इस वक़्त हरी के मसलने से लाल हो गयी thi............aasma चलती हुई आयी और आकर हरी के गॉड में बैठ गयी वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा............
" तुम्हें बुरा तो नहीं लग रहा न जान जो मैं तुम्हारे साथ कभी कभी ऐसे बर्ताव कर रहा हूँ to.................kya करूँ मुझे जब बर्दास्त नहीं होता तो मैं ऐसे hi जंगली बन जाता hoon...............aur खास कर तब जब मैं किसी औरत को जब छोड़ता हूँ तब.................." और हरी आसमा के कमर में अपना हाथ डालता हुआ उसे अपनी तरफ खींचने लगा वहीँ आसमा बड़े प्यार से हरी के सर पर अपने हाथों को फेरने लगी...........
" nahin.....mujhe कुछ भी बुरा नहीं लग raha.................sach तो ये हैं की मैं भी चाहती हूँ की तुम मुझे बिस्टेर पर खूब बुरी तरह से ragado..............sach तो ये हैं की मुझे वाइल्ड सेक्स बेहद पसंद hain...........magar अफ़सोस अब तक मैंने ऐसा सेक्स कभी किसी के साथ किया hi nahin...............aur मैंने देखा हैं जब तुम शांति की जब चुदाई कर रहे they...............mujhe भी वैसा hi सेक्स chahiye............ya फिर उससे भी कहीं ज़्यादा...................." और आसमा अपने दिल की बात खोलती हुई धीरे से मुस्कुरा दी वहीँ आसमा की ऐसी बाटिओं को सुनकर हरी का लौड़ा फिर से अकड़ने laga.................jaisa उसने आसमा के बारे में सोचा था उससे कहीं बढ़कर उसे पाया tha................aaj सच में उसे अपनी किस्मत पर नाज़ हो रहा था....................
" तू फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी jaan....................tu चाहे जितना रोये गिड़गिड़ाए आज तुझे मुझसे कोई नहीं बचने wala..............teri बुर का भोसड़ा तो आज मैं बनाकर hi रखूँगा................" और हरी आसमा के हाथों से उस माचिस और बीड़ी का पैकेट लेता hua................usmein से एक बीड़ी निकलता हैं और उसे आसमा के सामने जलाने लगता hain............jaise hi बीड़ी जलती हैं उसके धुएं से आसमा इस बार ज़ोरों से खांस पड़ती हैं वहीँ हरी धीरे से मुस्कुरा देता हैं.............
वो उस बीड़ी को पूरा जलाता hua.................uska धुवां पूरा अपने मुँह के अंदर रखता हैं और आसमा के चेहरे के ठीक सामने अपना चेहरा एल्जाकर धीरे धीरे अपने मुँह से बीड़ी के उस धुवें को छोड़ने लगता hain................jaise hi धुवां आसमा के चेहरे पर पढता हैं आसमा वहीँ ज़ोरों से खांसने लगती हैं ये देखकर हरी दुबारा से मुस्कुरा देता हैं........
" तू नशा नहीं करती हैं न इस लिए तुझे खांसी आ रही hain.............ek दो बार तुझे खांसी आएगी फिर तुझे भी मज़ा आने लगेगा.............." और हरी फिर से बीड़ी की एक काश खींचता hua............apne मुँह के अंदर ढेर सारा धुवां रखता हैं और फिर से आसमा के मुँह पर उस धुएं को छोड़ने लगता hain.......jawab में आसमा अपना मुँह तो नहीं छुपाती मगर ख़ास ज़रूर देती hain.............................hari आसमा के साथ ऐसे दो तीन बार करता hain.............wahin आसमा धीरे धीरे उस बीड़ी की स्मेल को अब बर्दास्त करती जा रही थी........
हरी फिर से बीड़ी की एक काश लेता हैं और अपने मुँह के अंदर ढेर सारा धुवां रखता hua................is बार वो अपना एक हाथ आसमा के बालों पर ले जाता हैं और उसके बालों को कसकर पकड़ता hua...........uska चेहरा अपने सामने कर देता हैं और एक नज़र आसमा के चेहरे की तरफ देखता hua...........apna होंठ आसमा के होंठों पर रखकर उसे धीरे धीरे से चूसने लगता hain................hari के इस हरकत से उसके मुँह के अंदर रखा सारा धुवां उसके होंठ के रास्ते अब आसमा के मुँह के अंदर जा रहा tha............wahin हरी बड़े इतेमेनन के साथ उसके होंठों को बस चूसे जा रहा था और धीरे धीरे अपने मुँह के अंदर उस धुएं को आसमा के मुँह के अंदर छोड़ता जा रहा था............
थोड़ी बहुत आसमा को खशी आयी मगर अब वो पहले से बेहतर thi...............ye देखकर हरी मुस्कुरा पड़ा और फिर सारा धुवां आसमा के मुँह के अंदर छोड़ने लगा और साथ hi साथ उसके होंठों को भी चूसने laga...............wo फिर से बीड़ी की एक तेज़्ज़ काश अपने मुँह में भरता हुआ फिर से आसमा के होंठों को दुबारा से चूसने लगा और धीरे धीरे फिर से उसके मुँह के अंदर उस बीड़ी के धुवयें को छोड़ने laga............ek अजीब सा स्मेल आसमा के मुँह एक अंदर घुल रहा tha..............maza तो आ रहा था साथ hi साथ एक अजीब सा नशा भी उसपर चा रहा था.............
हरी फिरसे आसमा के साथ वही खेल खेलने laga.............is बार भी वो ढेर सारा धुवां अपने मुँह के अंदर रखकर फिर से आसमा के मुँह के अंदर छोड़ने लगा मगर इस बार जैसे hi आसमा के मुँह के अंदर वो धुवां gaya.....................wo उसके सर को नीचे की तरफ दबाते हुए सीधा अपने खड़े लुंड की तरफ ले गया और आसमा बिना देर किये हरी के लौड़े को पूरा अपने मुँह के अंदर लेकर धीरे धीरे चूसने lagi.............jaise जैसे वो अपना मुँह खोल रही थी वैसे वैसे उसके मुँह के अंदर से धुवां भी बहार निकल रहा tha...............ek अजीब सा मज़ा था इस खेल mein............aisa खेल आज तक उसने न कभी किसी पोर्न मूवी में देखा tha...........aur न कभी सुना tha...............shayad एहि वजह था की वो हरी को दिल ो जान से चाहती थी क्यों की हरी सबसे जुड़ा tha..............alag था............
थोड़े देर तक लुंड चूसने के बाद हरी आसमा का सर अपने चेहरे के पास ले गया और उसके होंठों को फिर से चूसने laga.......aasma के होंठों पर अभी भी उसके लुंड का रूस लगा हुआ था जो अब हरी के मुँह के अंदर जाने लगा tha.............hari उस बीड़ी को इस बार आसमा के होंठ के करीब ले गया और टकटकी लगाए उसके चेहरे की तरफ देखने laga..............wahin आसमा समझ गयी की हरी अब क्या चाहता hain........wo कुछ देर तक हरी को ऐसे hi देखती रही फिर वो हौले से अपना मुँह खोलती हुई उस बीड़ी को अपने मुँह के अंदर ली और जैसे hi वो एक काश ली इस बार ज़ोरों से खांसने lagi..........magar हरी उसे बार बार ऐसे hi करने को कहता raha......do तीन कोशिहों के बाद आखिर आसमा इसमें कामयाब हुई और जैसे hi उसके मुँह में बीड़ी का ढेर सारा धुवा गया हरी फिर से उसके सर को नीचे की तरफ ले गया और उसके मुँह में अपना लौड़ा डालकर उससे चूसवाने laga............aur तब तक ये खेल चलता रहा जब तक वो बीड़ी ख़तम नहीं हो गयी.........
" तुम्हारा जैसा मुन्न kare..............jis तरह से मुन्न करे तुम अपना लुंड मेरे मुँह के अंदर डालना hari....................bhale hi मुझे कितनी भी तकलीफों का सामना क्यों न करना pade...............tum मेरी परवाह मुट्ठ karna..............tum वो सब चीज़ करना जिससे तुम्हें पूरा पूरा मज़ा mile................aaj तुम्हारी ये दुल्हन तुम्हारे सरे इम्तिहानों में पास होगी..............." और आसमा हरी का हौसला बढाती हुई धीरे से मुस्कुरा दी वहीँ हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर gayi....................wo वहीँ फ़ौरन खड़ा हुआ और अपना एक पवन बीएड पर रखता hua...............aasma के तरफ बड़े गौर से देखने लगा.................
आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने laga........................durr की एक लखीर उसके चेहरे पर भी साफ़ नज़र आने lagi........kehney को तो वो कह दी थी मगर वो इतना बड़ा लुंड कैसे पूरा अपने मुँह में लेगी ये उसने कभी सोचा नहीं tha...................magar वो हार मानने वालों में से नहीं thi...................hari उसे वहीँ फर्श पर बैठने का इशारा किया और आसमा फ़ौरन वहीँ हरी के टांगों के बीच आकर बैठ गयी .....................अब उसकी नज़रियों के सामने हरी का विशाल लुंड खड़ा था जो अब फन फैलाये खड़ा tha....................hari के लुंड की मोटाई और लम्बाई को देखकर आसमा के बुर में भी पसीने आने लगे they..................wo टकटकी लगाए हरी के लौड़े को बस देख रही थी............
हरी अगले hi पल अपने मुँह से गधा गधा थूक निकलता हुआ इस बार अपने थूक को सीधा अपने खड़े लुंड के टोपी पर गिरने लगा ................वहीँ उसका थूक बेहटा हुआ नीचे की तरफ जाने laga..............aasma ाचे से जानती थी की आगे उसे क्या करना hain......wo थोड़ा आगे की ओरे अपना चेहरा ले गयी और हरी के टोपी पर हौले से अपना जीभ फेरती हुई उसके थूक को फिर से चटनी lagi......wahin इस बार हरी की लजात और मज़े से आँखें बंद हो gayi..........ek तेज़्ज़ सिसकारी उसके मुँह से फुट पड़ी वहीँ आसमा अपना जीभ हौले हौले से उसके लुंड के चरों तरफ बस फेरती rahi........ek अजीब सा गंध उसके लुंड से निकल रहा tha............................jo आसमा को और भी बेचैन करता जा रहा था...............
आसमा हौले से अपना एक हाथ हरी के खड़े हुए लुंड पर रखकर उसे धीरे से पकड़ ली और अपना जीभ धीरे धीरे उसके टोपी पर चलने lagi...................wahin हरी की सांसें तेज़्ज़ होने लगी साथ hi साथ उसके मुँह से सिसकारी भी लगातार निकलती rahi..............kitne आरसे के बाद आज कोई लड़की उसका लुंड ऐसे चाट रही thi...............nahin तो दुर्र की वजह से कभी कोई लड़की उसका लुंड अपने मुँह में भी नहीं लेती thi...................aasma के इस तरह जीभ चलने से हरी की आहें तेज़्ज़ होने lagi................wo मज़े के समुन्दर में जूते लगाने laga................aasma हौले हौले से अपने जीभ हरी के लुंड के सभी हिस्सों पर चला रही thi...............usey धीरे धीरे से चाट रही thi............uske थूक से उसका लुंड धीरे धीरे अब गिला होता जा रहा था...............
हालाँकि हरी के लुंड पर बल थे मगर छोटे they.................dekhney से ऐसा लग रहा था जैसे उसने आज hi अपने झात के बल काटे hain.................na hi वो ज़्यादा बड़े थे और न hi ज़्यादा chote...................aasma धीरे से और नीचे की तरफ अपना सर ले गयी और हरी के दो ांडें जो इस वक़्त नीचे की तरफ लटक रहे थे उनपर भी अपना जीभ फेरने lagi..............wahin हरी की सिसकारी तेज़्ज़ होती चली gayi..............lajaat और मज़े से उसकी आँखें जैसे बंद हो gayi..........wo आसमा के बालों पर अपने हाथ धीरे धीरे फेरता हुआ मज़े से सिसक रहा tha................hari उसे और अंदर की तरफ धकेलता हुआ उसे अपने शरीर का सबसे गन्दा हिस्सा चटनी का इशारा करने laga...............aur ये बताने की बात नहीं थी की शरीर का सबसे गन्दा हिस्सा कौन सा होता हैं............
आसमा एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई हौले से अपना जीभ और नीचे की तरफ ले gayi........hari के गांड के taraf...........ek बार तो उसे घिन्न सी aayi..............aisa लगा की अभी वो उलटी कर degi..............magar जैसे तैसे वो अपना मुन्न मरती हुई अपना जीभ धीरे से सरकती हुई हरी के गांड के उस काळा छेद पर ले गयी जो दिखने में बेहद गन्दा सा tha................aur कला bhi.......jispar थोड़े बल भी they..............jaise hi आसमा के जीभ ने उस हिस्से को चुवा हरी की तो मज़े से सिसकारी निकल पड़ी मगर वहीँ आसमा को ऐसा लगा की वो अभी उलटी कर degi.............ek अजीब सी घिन्न लगी उसे मगर वो उस बदबू को जैसे तैसे बर्दास्त करती हुई हौले हौले से हरी के काळा और गंदे से गांड को धीरे धीरे फिर चटनी lagi..................waise हरी समझ चूका था की आसमा उसके गांड को चटनी से झिझक रही hain................wo फ़ौरन उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड़ता हुआ ज़ोरों से खींचने लगा वहीँ आसमा की एक बार फिर ज़ोरों से चीख निकल पड़ी...............
आसमा हरी के चेहे की तरफ देखे जा रही थी वहीँ हरी इस बार अपने मुँह से गधा गधा थूक निकलता हुआ उसके मुँह पर फिर से गिरने laga................wo ऐसा दो तीन बार किया जिससे आसमा का खूबसूरत सा चेहरा उसके गंदे थूक से भर गया...................
" लगता हैं तू मेरी गांड को ठीक से चाट नहीं पा रही hain................aaj मैं तुझे सिखाता हूँ की गांड कैसे छाती जाती हैं.............." और इतना कहकर हरी फ़ौरन आसमा का सर बीएड पर करता hua.............uska पूरा शरीर इस वक़्त फर्श पर tha.................sir का हिस्सा बस बीएड पर रखता हुआ वो फ़ौरन अपने गांड को आसमा के मुँह के ऊपर रखने लगा और धीरे धीरे उसके चेहरे पर अपने गंदे से गांड को रगड़ने laga....................aasma का दम घुटता सा लगा मगर अगले hi पल वो थोड़ी नार्मल हुई और हरी के गंदे गांड को अपने जीभ से धीरे धीरे फिर चटनी lagi.............wahin हरी मज़े से अपने गांड आगे पीछे करके आसमा से पूरे मज़े के साथ उससे अपनी गांड चटवा रहा tha...............hari के गांड पर जितनी भी गंडीगड़ी थी सब आसमा के जीभ के रास्ते सीधा उसके मुँह के अंदर जा रही thi..............shuru में तो आसमा को गुलिटी सा फील हुआ मगर धीरे धीरे उसे भी इस खेल में मज़ा आने लगा........
वो भी पूरे जी जान से हरी के गंदे गांड को चाट रही थी साथ hi उसके दोनों ांडों को भी चाट leti................kareeb 10 मिनट तक हरी इसी पोजीशन में आसमा से अपनी गांड उससे चतवता raha...............usey मुन्न hi मुन्न बहुत सुकून और ख़ुशी मिल रही thi.........ek ख़ूबसूरत सी जवान और इस घर की मालकिन एक गंदे बुड्ढे नौकर के साथ ऐसे गंदे खेल खेल रही थी ये उसके लिए बहुत बड़ी बात thi............aab आसमा के चेहरे पर न hi लिपस्टिक थी और न hi कोई फेसवाश क्रीम powder...............aur न hi bindiya............uski जगह अब हरी के थूक और लार ने ले ली thi...........uska खूबसूरत सा चेहरा थोड़ा अजीब सा लग रहा था..............
" वाह मेरी जान तुमने तो मुझे खुस कर diya..................mere शर्ट के जेब में एक बीड़ी की पैकेट राखी हुई hain..............aur साथ में माचिस bhi......jaa तू उसे लेकर आ....................." और हरी आसमा को जैसे हुकुम किया वहीँ आसमा नंगी चलती हुई थोड़ी दूर गयी तो हरी बड़े गौर से उसकी थिरकती हुई गांड को देख रहा tha....................aur ये सोचकर मुस्कुरा रहा था की अब उसे छोड़ने को एक छूट तो मिलेगी hi साथ में एक कुंवारी गांड भी milegi.................jisey वो जब चाहे जैसा चाहे छोड़ सकता था......................
आसमा हरी के शर्ट के जेब में से बीड़ी का बंडल निकलती हुई साथ में उस माचिस को भी लेकर उसके पास आयी तो हरी फिर से आसमा के नंगे जिस्म को देखने laga..........uski बुर तो उसे नज़र नहीं आयी उसकी जगह उसे एक छोटी सी लाइन दिखाई di...............jo अभी भी पूरी तरह से बंद thi.................saath में दो बड़े बड़े चूचियां थी जो अभी तक टैंकर कड़ी थी जो इस वक़्त हरी के मसलने से लाल हो गयी thi............aasma चलती हुई आयी और आकर हरी के गॉड में बैठ गयी वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा............
" तुम्हें बुरा तो नहीं लग रहा न जान जो मैं तुम्हारे साथ कभी कभी ऐसे बर्ताव कर रहा हूँ to.................kya करूँ मुझे जब बर्दास्त नहीं होता तो मैं ऐसे hi जंगली बन जाता hoon...............aur खास कर तब जब मैं किसी औरत को जब छोड़ता हूँ तब.................." और हरी आसमा के कमर में अपना हाथ डालता हुआ उसे अपनी तरफ खींचने लगा वहीँ आसमा बड़े प्यार से हरी के सर पर अपने हाथों को फेरने लगी...........
" nahin.....mujhe कुछ भी बुरा नहीं लग raha.................sach तो ये हैं की मैं भी चाहती हूँ की तुम मुझे बिस्टेर पर खूब बुरी तरह से ragado..............sach तो ये हैं की मुझे वाइल्ड सेक्स बेहद पसंद hain...........magar अफ़सोस अब तक मैंने ऐसा सेक्स कभी किसी के साथ किया hi nahin...............aur मैंने देखा हैं जब तुम शांति की जब चुदाई कर रहे they...............mujhe भी वैसा hi सेक्स chahiye............ya फिर उससे भी कहीं ज़्यादा...................." और आसमा अपने दिल की बात खोलती हुई धीरे से मुस्कुरा दी वहीँ आसमा की ऐसी बाटिओं को सुनकर हरी का लौड़ा फिर से अकड़ने laga.................jaisa उसने आसमा के बारे में सोचा था उससे कहीं बढ़कर उसे पाया tha................aaj सच में उसे अपनी किस्मत पर नाज़ हो रहा था....................
" तू फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी jaan....................tu चाहे जितना रोये गिड़गिड़ाए आज तुझे मुझसे कोई नहीं बचने wala..............teri बुर का भोसड़ा तो आज मैं बनाकर hi रखूँगा................" और हरी आसमा के हाथों से उस माचिस और बीड़ी का पैकेट लेता hua................usmein से एक बीड़ी निकलता हैं और उसे आसमा के सामने जलाने लगता hain............jaise hi बीड़ी जलती हैं उसके धुएं से आसमा इस बार ज़ोरों से खांस पड़ती हैं वहीँ हरी धीरे से मुस्कुरा देता हैं.............
वो उस बीड़ी को पूरा जलाता hua.................uska धुवां पूरा अपने मुँह के अंदर रखता हैं और आसमा के चेहरे के ठीक सामने अपना चेहरा एल्जाकर धीरे धीरे अपने मुँह से बीड़ी के उस धुवें को छोड़ने लगता hain................jaise hi धुवां आसमा के चेहरे पर पढता हैं आसमा वहीँ ज़ोरों से खांसने लगती हैं ये देखकर हरी दुबारा से मुस्कुरा देता हैं........
" तू नशा नहीं करती हैं न इस लिए तुझे खांसी आ रही hain.............ek दो बार तुझे खांसी आएगी फिर तुझे भी मज़ा आने लगेगा.............." और हरी फिर से बीड़ी की एक काश खींचता hua............apne मुँह के अंदर ढेर सारा धुवां रखता हैं और फिर से आसमा के मुँह पर उस धुएं को छोड़ने लगता hain.......jawab में आसमा अपना मुँह तो नहीं छुपाती मगर ख़ास ज़रूर देती hain.............................hari आसमा के साथ ऐसे दो तीन बार करता hain.............wahin आसमा धीरे धीरे उस बीड़ी की स्मेल को अब बर्दास्त करती जा रही थी........
हरी फिर से बीड़ी की एक काश लेता हैं और अपने मुँह के अंदर ढेर सारा धुवां रखता hua................is बार वो अपना एक हाथ आसमा के बालों पर ले जाता हैं और उसके बालों को कसकर पकड़ता hua...........uska चेहरा अपने सामने कर देता हैं और एक नज़र आसमा के चेहरे की तरफ देखता hua...........apna होंठ आसमा के होंठों पर रखकर उसे धीरे धीरे से चूसने लगता hain................hari के इस हरकत से उसके मुँह के अंदर रखा सारा धुवां उसके होंठ के रास्ते अब आसमा के मुँह के अंदर जा रहा tha............wahin हरी बड़े इतेमेनन के साथ उसके होंठों को बस चूसे जा रहा था और धीरे धीरे अपने मुँह के अंदर उस धुएं को आसमा के मुँह के अंदर छोड़ता जा रहा था............
थोड़ी बहुत आसमा को खशी आयी मगर अब वो पहले से बेहतर thi...............ye देखकर हरी मुस्कुरा पड़ा और फिर सारा धुवां आसमा के मुँह के अंदर छोड़ने लगा और साथ hi साथ उसके होंठों को भी चूसने laga...............wo फिर से बीड़ी की एक तेज़्ज़ काश अपने मुँह में भरता हुआ फिर से आसमा के होंठों को दुबारा से चूसने लगा और धीरे धीरे फिर से उसके मुँह के अंदर उस बीड़ी के धुवयें को छोड़ने laga............ek अजीब सा स्मेल आसमा के मुँह एक अंदर घुल रहा tha..............maza तो आ रहा था साथ hi साथ एक अजीब सा नशा भी उसपर चा रहा था.............
हरी फिरसे आसमा के साथ वही खेल खेलने laga.............is बार भी वो ढेर सारा धुवां अपने मुँह के अंदर रखकर फिर से आसमा के मुँह के अंदर छोड़ने लगा मगर इस बार जैसे hi आसमा के मुँह के अंदर वो धुवां gaya.....................wo उसके सर को नीचे की तरफ दबाते हुए सीधा अपने खड़े लुंड की तरफ ले गया और आसमा बिना देर किये हरी के लौड़े को पूरा अपने मुँह के अंदर लेकर धीरे धीरे चूसने lagi.............jaise जैसे वो अपना मुँह खोल रही थी वैसे वैसे उसके मुँह के अंदर से धुवां भी बहार निकल रहा tha...............ek अजीब सा मज़ा था इस खेल mein............aisa खेल आज तक उसने न कभी किसी पोर्न मूवी में देखा tha...........aur न कभी सुना tha...............shayad एहि वजह था की वो हरी को दिल ो जान से चाहती थी क्यों की हरी सबसे जुड़ा tha..............alag था............
थोड़े देर तक लुंड चूसने के बाद हरी आसमा का सर अपने चेहरे के पास ले गया और उसके होंठों को फिर से चूसने laga.......aasma के होंठों पर अभी भी उसके लुंड का रूस लगा हुआ था जो अब हरी के मुँह के अंदर जाने लगा tha.............hari उस बीड़ी को इस बार आसमा के होंठ के करीब ले गया और टकटकी लगाए उसके चेहरे की तरफ देखने laga..............wahin आसमा समझ गयी की हरी अब क्या चाहता hain........wo कुछ देर तक हरी को ऐसे hi देखती रही फिर वो हौले से अपना मुँह खोलती हुई उस बीड़ी को अपने मुँह के अंदर ली और जैसे hi वो एक काश ली इस बार ज़ोरों से खांसने lagi..........magar हरी उसे बार बार ऐसे hi करने को कहता raha......do तीन कोशिहों के बाद आखिर आसमा इसमें कामयाब हुई और जैसे hi उसके मुँह में बीड़ी का ढेर सारा धुवा गया हरी फिर से उसके सर को नीचे की तरफ ले गया और उसके मुँह में अपना लौड़ा डालकर उससे चूसवाने laga............aur तब तक ये खेल चलता रहा जब तक वो बीड़ी ख़तम नहीं हो गयी.........