Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya - SexBaba
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Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya

hotaks

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उस्सकी गली में जाना चोरर दिया

इंट्रोडक्शन

प्यार, मुहबत, इश्क, लव. इस शब्द ने कितनों को पागल बनाया, इस शब्द को युवक से लेकर अधेड़ लोगों ने भी इतने एहमियत दिया है पिछले हज़ारों बल्कि करोड़ों सालों से देते आये हैं.

बीते कई हज़ारों साल पुराणी कहानियां बनने मुहबत को लेकर, सच्ची बीते हुए प्यार भरी ज़िन्दगियों को भी लेखकों ने कहानी बना कर पेश किया पिछले हज़ारों सालों से और आज भी करते जा रहे हैं.

हर किसी की लाइफ में एक दौर ऐसा ज़रूर अत है, या आया हुआ होगा जहाँ एक व्यक्ति को किसी से प्यार हो जाता है. कोई अपने प्यार को पा लेता है तो कोई ना कामयाब होता है. किसी को प्यार आसानी से मिल जाता है तो किसी को बहोत जद्दो जहद के बाद उस्सको उस्का प्यार मिलता है.

किसी के साथ धोका होता है प्यार में, तो कोई खुद धोका देता है अपने प्यार को. और कई बार ऐसा भी हुआ है के किसी के समझ में भी नहीं अत के उस्सको प्यार हो गया, और किसी को पता भी नहीं चलता के कब और कैसे प्यार होगया.

प्यार एक एहसास है, एक जज़्बात है जो दिल से महसूस की जाती है. प्यार में इंसान सब कुछ भूल जाता है, यहाँ तक के दिमाग़ से सोचना बांध कर देता है बुसस अपने दिल की सुनता है, एहि प्यार की ताक़त होती है के इंसान को दिल से सोचने पर मजबूर करता है. जब इंसान को प्यार हो जाता है तो कहता है रीजनिंग और दिमाग़ गया भाव में अपने दिल की सुनता हूँ. और हर सच्चा आशिक एहि करता है, सिर्फ दिल की सुनता है, जो उस्का दिल कहे वही करता है, बाकी कुछ भी प्यार में एहमियत hi नहीं रखता.

जो लोग प्यार और दिमाग़ के जुंग में फंस्ते हैं वो प्यार में कभी कामयाब नहीं होते. ख़ास कर जो लोग ऐसे मोड़ पर आजाते हैं जहाँ दिमाग़ को सुन्ना ज़्यादा पसंद करते हैं वो तो बिल्कुल भी प्यार से दूर हो जाते हैं.

मिस्साल के तौर पर समझाता हूँ के एक लड़की थी जो एक लड़के से बेहद प्यार करती थी, मगर ऐसा वक़्त आया जहाँ लड़की को अपना सपना पूरा करने के लिए स्टार बनने के लिए ऑफर आया तो उस वक़्त उस्सने अपने दिल की नहीं सुनी बल्कि अपने दिमाग़ को सुना के उस्सको स्टार बनना है और चली गयी हीरोइन बनने क्यूंकि एक ऑफर आया था उस्सको. और दूर होगयी, अलग हो गयी अपने प्यार से और धीरे धीरे शौहरत और पैसे ने उस लड़की को भुला दिया अपने प्यार को क्यूंकि उस्सको वो चकाचौंद और शौहरत वाली लाइफ ज़्यादा पसंद आया और उस्सने उसी को चुना अपने प्यार को टुकड़ा कर…. मगर आखिर में ढलती उम्र में उस्सको पता चला के उस्सको अपने प्यार को एहमियत देना चाहिए था तो आज वो खुश होती अपने मेहबूब की बाहों में, और यहाँ क्यूंकि उम्र ढलने लगी थी उस्सको किसी ने नहीं पूछा और वो अकेली रही मरते दम तक.

यह बुसस एक मिसाल था ऐसे बहोत सारे एक्साम्प्लेस हैं जहाँ लोग अपने दिमाग़ को सुनते हैं और दिल की नहीं जब प्यार का सवाल अत है तो. और जिसस्ने ने भी दिल की आवाज़ को सुना वह सब कामयाब हुए अपने प्यार को पाने में.

यह कहानी भी एक प्यार की कहानी है. दिल के रिश्तों की कहानी है, जहाँ प्यार तो हो जाता है मगर निभाना किआ आसान होता है? प्यार प्यार होता है, रोज़ मर्रे की ज़िन्दगी से इस्सके कोई लेना देना नहीं होता, प्यार में लोग महलों को चोरर देते हैं, जंगलों में भी रहने चले गए हैं अपने प्यार के पीछे, और कुछ ग़रीबी को चोरर कर महलों तक पहुँच गए हैं अपने प्यार के पीछे, बुसस प्यार सच्चा होना चाहिए.

इस कहानी में हमारे हीरो को बाली उम्र में कई बार प्यार हुआ मगर नाकामयाब रहा. या तो लड़की ने कुछ वक़्त बाद पीछे कदम ले लिया, या खुद हीरो को दिखा के आगे चल कर उस्सको सफलता नहीं मिलेगा उस प्यार में, तो पीछे कदम हत्ता लिया.

मगर हमारा हीरो है बहोत इमोशनल और हमेशा दिल से hi सोचता है. प्यार को बहोत सख्त ज़रुरत था उस्सको कम उम्र से hi, किसी भी खूबसूरत लड़की को देखा तो दिल दे बैठता था, हमेशा सोचता, “यह ज़रूर मेरी बनेगी, यह वाली बहोत hi खूबसूरत है, नहीं वो वाली बेस्ट है….” ऐसे हमेशा सोचता था अक्सर किसी भी हसीं को देख कर.

उस्सको तलाश थी एक कमसीन, नाज़ुक, भोली, खूबसूरत, अच्छी लड़की की…… वो इस लिए के उस्का पहला प्यार वैसा था…. वो 12तह में था जब उस्सको अपनी बचपन के साती से प्यार हो गया. बच्चा था तबसे दोनों एक साथ मैटरनल स्कूल गए, प्राइमरी में भी साथ थे और 12तह तक साथ रहे. लड़की का नाम था रूही. और हमारा हीरो है अभी, वैसे नाम है अभिनव, पर सब अभी बुलाते हैं.

इस्सके पहला अपडेट 10तह जनुअरी से आना शुरू होगा दोस्तों, तब तक आप लोग अपना कमेंट पोस्ट करें, कहें के कैसा लगा इंट्रो? बहोत फर्माइसेहिं आये थे रोमांटिक स्टोरी के लिए तो यह रहा…….

एडिटेड:

कहानी की टाइटल से रीडर्स समझ चुके होंगे के इस में बिछड़ने वाली बात होगी.

हाँ तो तो यह अभिनव की कहानी है. अभी वो 22 साल का है, 23 का होने वाला है.

यह कहानी अभी को बहोत दूर लेकर जाएगा. अभी की फुल लाइफ स्टोरी है. अभी तो 1986 में कहानी चल रही है. अभी आज भी यहीं है. हम वहां तक देखेंगे अभी की स्टोरी को. अभी का सबसे बड़ा और गहरा प्यार रूही रही है.

आप जानना नहीं चाहोगे के अगर अभी और रूही बिछड़े तो किआ वो लाइफ में फिर कभी मिले या नहीं?

इसी रूही के बदौलत अभी लाइफ में इतना आगे बढ़ेगा, इसी प्यार के बदौलत उस्सकी लाइफ एक ज़बरदस्त टर्न लेगा भाई. कहते हैं नाह "ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़?" लाइफ में कभी कुछ बुरा होता है आगे चल कर भला होने के लिए.

बिछड़ना है मगर क्यों और कैसे? हो सकता है आप सोच कुछ और रहे हो और होगा कुछ और.... तो कोई भी अपडेट मिस नाह मारें, सारे उपदटेस पढ़ें जान्ने के लिए अभी और रूही के लाइफ में किआ हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ....
 
ऐसा क्यों लगा तुमको राहुल?

और हाँ ये सेक्स स्टोरी नहीं है राहुल, लव स्टोरी है. हाँ लव में भी सेक्स वाले फीलिंग्स अत है नाह कभी? जिस लड़की से लड़का प्यार करने लगता है उसस्के जिस्म को देख कर, उस्सकी एवं कुछ तो ऐसा एस्सार करता है लड़के पर के लड़का उस लड़की को अपने बाहों में भरे, उस्सकी रसीली होंठों को अपने होंठों से लगाए?? ऐसे खयालात आते हैं नाह आशिक क मैं में? और ऐसा सोचने से मैं में कामुकता जागता है नाह उतेजिना होता है नाह? बुसस अगर इस कहानी में सेक्स का सन होगा तो कुछ ऐसा hi होगा बिल्कुल हल्का फुल्का.... ज़्यादातर इस में इमोशंस और फीलिंग्स होंगे सेक्स नहीं.

थैंक्स राहुल. तुम ने भी लास्ट ईयर के शुरू में hi रोमांटिक स्टोरी की फरमाईश किये थे, तो यह रहा भाई. दो दिन बाद पहला अपडेट आजाएगा उसस्के बाद डेली अपडेट होगा इस थ्रेड पर एन्ड तक.
 
थैंक्स एंड वेलकम भाई. अब आप ने इतना कह hi दिया तो ठीक है .... जैसे 10तह ऑफ़ जनुअरी शुरू होगा मतलब रात क बारह बजे फर्स्ट अपडेट पोस्ट करता हूँ. ठीक है नाह भाई. ऑनलाइन रहोगे उस टाइम ?
 
हाँ कितने मं

ठेस बाकी हैं 12 बजने में? वैसे तो मैं कल सुबह पोस्ट करने वाला था मगर कहा गया के आज रात बारह बजे 10तह जनुअरी शुरू हो जाएगा तो पोस्ट करदूँ वही करने जा रहा हूँ, और ी ऍम सूरे के जिस ने वो फरमाईश किया वही ऑनलाइन नहीं है पढ़ने के लिए :lol:
 
अपडेट 1 अभिनव आल्सो नोन अस अभी

अभी और रूही एक दूसरे से सच में बेहद प्यार करते थे, मगर कुछ ऐसा हुआ के दोनों एक दूसरे से हमेशा के लिए अलग हो गए, और आज अभी हर एक लड़की में रूही को hi ढूंढ़ता है, उस्सकी अदाएं, उस्सकी भोलापन, उस्सकी क्यूटनेस, उस्सकी वो कमसिन दिखना, नाज़ुक, और कोमलता एहि सब ढूंढ़ता रहता था अभी किसी भी लड़की में. और हाँ रूही बहोत hi खूबसूरत थी तो अभी कोई बहोत खूबसूरत hi लड़की की तलाश में था.

अलग क्यों हुए दोनों? मामूली सी बात थी. सब ग़रीब लोग थे, अभी के पिता किसान था, रूही का पिता वॉचमन था. एक hi मोहल्ले में रहते थे सब…. मगर रूही के पिता की एक दिन लाटरी लग गयी. आमिर हो गया, और खुद को बहुत बड़ा आदमी समझने लगा, अभी के पिता उसस्के लिए बहोत निचा और छोटा हो गया था, रूही के पिता का उठना बैठना अब बड़े आमिर लोगों में होने लगा…. और वो सब चोरर चार कर कनाडा चला गया. एड्रेस भी नहीं दिया अपना और रूही को सख्त मन किया अभी से कोई भी कांटेक्ट करने के लिए…. फिर धीरे धीरे सालों बाद रूही अभी को बिल्कुल भूल गयी और कनाडा की लाइफस्टाइल, वहां के दोस्त, वहां के लोग, वहां के बॉयफ्रैंड्स सब हो गए usski…to अभी को डिलीट कर दिया बिल्कुल उस्सने तो अभी किआ करता? उस्सने भी भुला दिया रूही को, मगर लड़की उस्सको रूही जैसी hi चाहिए थे अपने लाइफ में.

अभी 20 साल का हुआ. कोई ढंग की नौकरी भी नहीं मिल रहा था, कभी यहाँ तो कभी वहां, कभी इस कंपनी में तो कभी टेम्पररी काम मिलता किसी और कंपनी में…..

ग़रीबी के कारण स्टडीज कम्पलीट नहीं कर पाया, बाप के पास उतना पैसा नहीं था उस्सको आगे पढ़ाने के लिए…. 12तह के बाद एक साल बेकार था फिर बाप के साथ खेतों में जाता और फिर अपने ढंग की नौकरी धुनता गया…. उस्सको इंग्लिश लिखने और बोलने का बड़ा शौख था….. एक आदत नहीं चोर्रा था उस्सने वो था पढ़ना, रीडिंग. बुकवर्म था. एंगलसिंह किताबें बहोत पढता था, बोर्रोव करता था पढ़ने के लिए… क्लास में इंग्लिश में अव्वल था, हमेशा सबसे ज़्यादा मार्क्स पाटा था क्लास में. तो वो रीडिंग की आदत बना रहा उस्का. और हाँ अभी लिखता भी था, इंग्लिश में hi. किआ लिखता था? अपना डेली इवेंट्स लिखता था, हर साल एक डायरी खरीदता था और हर रात को सोने से पहले उस्का दिन कैसे गुज़रा वो लिखता था बिना किसी दिन को मिस किये. और एक स्पेशल कॉपीबुक में उसस्के और रूही के बारे में लिख चूका था जो अपने ड्रावर में संभाल कर रखा था अभी ने. उस में अपने बचपन से 12तह तक के सब कुछ लिखा था, जिस दिन रूही उस्सको चोरर कर कनाडा गयी और उसस्के बाद के एक साल उस्सने कितने दुःख में गुज़ारे वो सब कुछ लिखा था उस्सने उस में. आज भी वो सब पढ़ के उसस्के आँखों में इनसो आजाता है. आज भी याद करता है रूही को कभी कभी, मगर रूही का चेहरा अब कैसा होगा उस्सकी इमेजिनेशन में नहीं ारः था. एक तड़प, एक तीस सा उठता था उसस्के दिल में रूही के साथ उन् बिठाये हुए दिनों को याद करते वक़्त… उस्सको इतना तो पता था के अब उस्सको रूही कभी वापस नहीं मिलेगा, उस्सको मालूम था के रूही की स्टेटस अब उसस्के सामने बहोत hi ऊंचा हो गया है और वो खुद को रूही के नौकर के भी काबिल नहीं समझता था; इस लिए रूही को हमेशा के लिए भुला देना hi बेहतर समझा अभी ने, मगर किसी और लड़की का प्यार चाहिए तो था उस्सको, इस लिए हर लड़की में रूही को hi धुनता फिरता था. मिले कई लड़कियां, दोस्ती हुई, करीब गया अभी मगर उस्सको उन् लड़कियों में रूही जैसी कुछ नहीं दिखा तो कदम पीछे हत्ता लिया अभी ने….. उस्का तलाश जारी रहा फिर भी….

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एक दिन उस्सको एक Coach-Building की कंपनी में अस apprentice/helper नौकरी मिली. वहां ज़्यादा तर बस बनाते थे. बस की चेसिस नंगे आते थे इंजन के साथ, उस्सकी बॉडी, कवर, अंदर के सीट वग़ैरा सब बना कर बस को कम्पलीट करना होता था. उसी को कोच बिल्डिंग कहा जाता है. अभी को वो काम दिलचस्प लगा. जिस दिन उस्सने ज्वाइन किया कई बुसस आये थे चेसिस और इंजन के साथ उस पर बॉडी बनाना था. तक़रीबन दो महीने में एक बस कम्पलीट बन जाता था. कोई 300 लोग मुलाज़िम थे उस कंपनी में. जब अभी ने एक कम्प्लेटेड बस को देखा तो वो हैरान हुआ के कैसे सिर्फ एक लोहे की चेसिस पर एक पूरा बस बना दिया गया है, वो बहोत प्रभावित हुआ और उस काम को हमेशा के लिए करने को सोचा…. और अभी वहां काम सीखने लगा… मेटल काटना, फ्रेम बनाना, वेल्डिंग करना, फिर बस की पुरे बॉडी के लिए एल्युमीनियम शीट्स को हिसाब से काट कर रिवेट से सब फिर मेटल्स पर चिपकना, विंडोज के ग्लासेज लगाना, सीट बनाना और बस के अंदर फिट करना, बुसस की फ़्लोरिंग्स पर थिक वाला एल्युमीनियम चिपकना स्पेशल रिवेट्स से, जिस्सको हतोड़े से कई बार थोक थोक कर चिपकाया जाता था; कुछ लुक्सुरिओउस चीज़ों को भी लगाना बस की खरीदने वाले की डिमांड पर, यह सब कुछ सीखा अभी ने 3 साल तक, और उस्सको सब पक्का करना आगया. पैसा कम मिल रहा था शुरू में, महीने में सिर्फ 100 रूपए कमा रहा था. एक तो ग़रीबी ने चारों तरफ से हाथ फैलाया hi हुआ था, कुछ भी लुक्सुरिओउस खरीदने की औकात नहीं थी… क्यूंकि अभी को लगा के उस काम को सीख कर वो ज़रूर आगे चल कर खुद सब कर पाएगा इस लिए उस्सने हिम्मत की और 100 रूपए माहवार की तनख्वा में काम करता गया, अपरेंटिस था पहले 3 साल तक फिर भी करता गया मगर 3 साल तक होते होते उस्सको एक फुल एम्प्लोयी की सैलरी मिलने लगी.

उन् दिनों मोबाइल का विकास नहीं हुआ था. शुक्र है वार्ना उन् दिनों एक जवान बिना मोबाइल के कैसे जीता. सिगरेट पिने लगा था, दोस्तों से मिल जाता था पिने के लिए, तनख्वा मिलता तो कुछ घर में देता, कुछ अपने लिए रखता फिर भी 100 रूपए में किआ रखता एक महीने के लिए, पैसे तो दो दिन में hi ख़तम हो जाते थे क्यों के 75 रूपीस घर में दिया तो 25 बचता था उसस्के पास और 25 रूपए को कितने दिन चला पाटा हालां के उन् दिनों सब कुछ इतना महंगा नहीं था जितना आज कल है….. उन् दिनों को आराम से एक महीने गुज़ारने के लिए ात लीस्ट 300 रूपए होना चाहिए था….. पैदल फैक्ट्री अत जाता था, एक नया पेअर ऑफ़ शूज भी नहीं खरीद पाटा था, बाप की कमाई के पैसे से घर का राशन चलता था, इलेक्ट्रिसिटी बिल, वाटर बिल वग़ैरा सब बाप पाय करता था ऊपर से और भी भाई बहनें थे…. बहोत तंग हालात थे जीन दिनों अभी जवान था. फिल्में देखना बहोत पसंद करता था, हर नयी मूवी को फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखता था. उन् दिनों टिकट इतना मंहगा भी नहीं था तो कोई नाह कोई जुगाड़ कर लेता था अपना टिकट पाने के लिए, कभी दोस्त लोग उस्सकी टिकट खरीद देते थे….

बियर पीने की आदत भी लग गयी दोस्तों के साथ, तो बियर भी पिने लगा और आहिस्ते आहिस्ते दारू की लत्त भी लग gayi….magar पैसे की कमी की वजह से हर रोज़ तो नहीं पीटा था, महीने में एक या दो बार एन्जॉय कर लेता था… और कभी किसी दोस्त के पास ज़्यादा पैसा होता और वो ऑफर करता तो अभी को भी गले में उतारने का मौका मिल जाता था.

अभी के भी सपने थे, हर ग़रीब की तरह वो भी सोचता के एक दिन मेरे पास भी कार होगी, बड़ा घर होगा, लाइफ में आगे बढूंगा, कुछ कर दिखाऊंगा, एक दिन मेरे सारे सपने पुरे होंगे…. और सबसे ख़ास सपना उस्का यह था के उस्सको एक रूही जैसी मेहबूबा मिले…. इमोशनल था, दिल से ज़्यादा सोचता था प्यार के बारे में, अपने डायरी में अक्सर लिखता के उसस्के लिए कहीं तो बानी होगी एक लड़की, धरती के किसी कोने में तो होगी वो दिलनशीं जिस्का इंतज़ार अभी कर रहा था, मगर अभी को जल्दी था, कहाँ मिलेगी वो अगर वो कहीं है भी तो, कब मिलेगी उस्सको वो? किआ नाम होगा उस्का? कैसी दिखती होगी? किआ पढ़ी लिखी होगी? क्यूंकि अभी को इंग्लिश बोलना पर्फेक्ट्ली अत था इस लिए उस्सको यह उम्मीद थी के उस लड़की को भी इंग्लिश में लिखना और बोलै आना चाहिए…. क्यूंकि अभी दिल की बातों को इंग्लिश में बड़े आसानी से इज़हार करता था इस लिए वो हमेशा सोचता था के अपने दिल की बातों को अपने मेहबूबा तक इंग्लिश में लिख कर बयान करेगा.

क्यूंकि उन् दिनों मोबाइल नहीं हुआ करता था तो, आम तौर पर सभी चिट्ठियों द्वारा कम्यूनिकेट करते थे. इंटरनेट का नाम ो निशाँ भी नहीं था. हाँ टेलीफोन था. टेलीविज़न था, और टीवी सेरिअल्स भी चलता था. मगर अभी के घर में टीवी था hi नहीं. पडोसी के घर टीवी देखने जाते थे अभी के घर वाले, अभी भी चला जाता था जिस दिन उसस्के पससंजीदा मूवी अत था टीवी पर.

ठीक जब अभी एक एम्प्लायर बन गया उस कंपनी में और अब उसस्के साथ हेल्पर्स और अप्प्रेक्टिस काम करने लगे, अभी की सैलरी तब 2,500 रूपए माहवार हो गया, तभी कंपनी को बांध होना था!!

3 सैलरी मिल पाया अभी को जबसे वो एम्प्लायर बना. बहोत खुश हुआ, घर में पार्टी दिया, दोस्तों को बुलाया, माँ बाप, भाई बहनों के लिए नए कपडे ख़रीदे, खुद के लिए अचे कपडे और जूते ख़रीदे, वॉकमेन का ज़माना था, जिस्में कैसेट लगा कर गाने सुनते थे तो अभी ने एक वॉकमेन भी ख़रीदा और अपने पसंद की कस्सेट्स खरीदता और सुनता रहता…. पहला तनख्वा मिला तो करीबन 2,000 तो स्पेंड कर दिया वैसे hi. दूसरे महीने की सैलरी मिली तो अपने पिता को 2,000 रूपए थमा दिया उसस्के छोटे छोटे कर्ज़ों को अदा करने के लिए और घर चलाने की मदद के लिए. जो भाई बेहेन कॉलेज जाते थे उन् सबको तगड़ा पॉकेट मनी दे दिया अभी ने.

और तीसरी सैलरी मिलने के बाद कंपनी का दिवाला निकल गया और बंद होगया…… यह सब क्यों और कैसे हुआ अगले अपडेट में देखते हैं…..

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
थैंक्स वैरी मच एंड वेलकम तो थे थ्रेड विक्रम बीआरओ.

रियली हैप्पी तो सी यू हेरे, आल्सो हैप्पी तो क्नोव तहत यू रीड 2 ऑफ़ माय इतर लव स्टोरीज व्हिच यू अप्प्रेसिएटेड.

अब आ गए हो तो साथ बने रहना एन्ड तक भाई.

थैंक्स अगेन.
 
अपडेट 2 व्हाट विल अभी दो नाउ?

और तीसरी सैलरी मिलने के बाद कंपनी का दिलवाला निकला गया और बंद होगया…… यह सब क्यों और कैसे हुआ अगले अपडेट में देखते हैं…..

अब आगे….

कंपनी बंद इस लिए हुआ के जिस कंपनी को आज की ओनर्स के बाप ने शुरू किया था अब 4 भाई चला रहे थे…. चरों में टूटू मैं मैं होता रहता था कंपनी के प्रॉफ़िट्स को लेकर इन् में से हर एक ज्यादा पैसा चाहता था, कोई उडाता फिरता था पैसा, सभी के वाइव्स थे और इन् में से कई के वाइव्स ऐसे थे जो बेकार में खर्च करते, देश विदेश घूमने जाते, बेकार के सामान खरीदते, बड़े बड़े 5 स्टार होटलों में दिन गुज़ारते, हाई सोसाइटी वालों के बीच वक़्त गुज़ारते, और इतना एक्सपेंस करते जीतनेय की हैसियत थी hi नहीं…. लोन पर लोन लेते गए कंपनी के नाम पर करोड़ों में और बैंक को पाय बैक नहीं कर पाए इस लिए सब चौपथ हो गया….. कंपनी के 300 कर्मचारी रास्ते पर आगये… कुछ नहीं हो पाया, सील लग गए कारखाने में और सब अपने जॉब्स खो बैठे…. अभी भी बेकार हो गया….

इस एक महीने में अभी ने बहोत एन्जॉय किया लाइफ को. हर रोज़ पीना, घूमना, दोस्तों के साथ ेश करना, अचे अचे जगह जाना, गोवा भी चला गया मौज मस्ती करने, लड़कियों को चेररणा ेट्स…

फिर तक़रीबन एक महीने तक दर दर के ठोकरें खाने के बाद, अभी को एक दिन उस्का मास्टर मिलने आया. मास्टर मतलब जिस से अभी ने कंपनी में काम सीखा था. उस्का नाम था सईद. सईद कोई 55 साल का अधेड़ आदमी था और क्यूंकि अभी ने बहोत जल्दी काम सीखा था और बहोत ाचा और साफ़ काम करता था सईद अभी को पसंद करता था अस ा वर्कर.

अब होता यह था उस कंपनी में के जीतनेय भी बस ओनर्स थे वहां से बस खरीदने वाले, उन् लोगों से सईद की जान पहचान थे. वो एक बहोत पुराण मुलाज़िम था उस कंपनी का तो बस के मालिक लोग सईद को पहचानते थे और कभी कोई बस का हिस्सा बिगड़ जाता था तो कंपनी में मरम्मत करने की बजाये वह लोग सईद के घर जाकर उस से मिलते थे और बस की मरम्मत करने को कहते जो सईद कर देता था. अब समझलो के उस मरम्मत को कंपनी में बस लेजाते तो 50,000 रूपए लगता, तो वही काम सईद बस ओनर के घर जाकर कर देता था और 10,000 में काम हो जाता था.

इस लिए एक दिन सईद अभी से मिलने आया और कहा के उसस्के साथ काम पर चलना है. तो अभी गया सईद के साथ और कोई 25 कंस की दूरी पर एक बस ओनर था जिस्सकी बस का एक्सीडेंट हुआ था और बस के फ्रंट साइड बिल्कुल बिगड़ गया था, तो उस्सको वापस बनाना था. उस काम के लिए 20,000 माँगा सईद ने और ओनर दाम पर राज़ी हुआ और काम शुरू हुआ. 20 दिनों में काम को पूरा किया सईद और अभी ने.

सईद ने उन् 20 दिनों के लिए अभी को 5,000 दिए और अपने लिए 15,000 रखा. अब्बी के लिए 5,000 काफी था 20 दिनों के काम के लिए और उस्सने सईद से कहा के वैसे hi और काम ढूंढें तो कम से कम रोज़ी रोटी चलता रहेगा, तो सईद ने कहा ढूंढ़ना तो मुश्किल है मगर बस ओनर्स खुद उसस्के पास आएंगे तभी काम मिलेगा.

जब वो बस वापस काम करने लगा तो बाकी के बस ओनर्स जिनको पता था उस बस की एक्सीडेंट हुई थी और बस बिल्कुल बिगड़ गया था सामने से, फिर 20 दिन बाद उस बस को वापस काम करते हुए देख कर बाकी के बस ओनर्स हैरान हुए और पूछा के किश ने बस की मरम्मत इतनी जल्दी कर दिए के लगता hi नहीं के कभी एक्सीडेंट हुआ था. इस तरह से सईद का नाम मशहूर होने लगा बस ओनर्स के दरमियान. एक के मुंह से दूसरे के कान तक बात फैलती गयी और सईद और अभी काफी मशहूर हो गए तमाम बस ओनर्स के बीच. ठीक एक हफ्ते बाद एक पुराने बस ओनर ने अपने बस की मरम्मत करने को सोचा क्यूंकि उस्का बस काफी पुराण था 15 साल से कुछ नहीं किया था उस बस में और बहोत सारे अंदर के लोहे लगभग साध गए थे और जब बस चलती थी तो बहोत सारे शोर होते थे और आवाज़ें सुनाई देते थे, पैसेंजर्स कम्प्लेंट्स करते थे. तो उस ओनर ने सईद से कांटेक्ट किये और एक जनरल रिपेयर का काम शुरू हुआ उस बस में जो अभी और सईद ने करना शुरू किया. काम बहोत ज़्यादा था बस में, चेसिस से लेकर ऊपर के तमाम वेल्डेड लोहे खराब हो गए थे, नए लोहे खरीदने थे और काफी सारा अल्लिमिनियम के तीन भी पुराने हो गए थे वो भी खरीदना था, तो उस में वेल्डिंग का काम भी था और अल्लिमिनियम के भी, सारे बस के सीट्स निकाले गए, फ़्लोरिंग्स में दोबारा नए रिवेट्स लगाने थे, वापस सीट्स लगाने थे, पेंट भी करना था, बस के तमान शीशे भी उतार कर नए रबर लगाना था तीन में जिस पर शीशे चिपकते हैं; इस लिए अभी के इलावा सईद ने और दो मुलाज़िमों को ढूंढा साथ काम करने के लिए.

यह काम 2 महीनों तक चला. और दाम हुआ 60,000 रूपए जो ओनर ने ख़ुशी ख़ुशी दिया क्यूंकि उस्सको पता था एहि काम अगर कंपनी की गेराज में करवाता तो करीबन 2 लाख रूपए लग सकते थे. उस में से अभी को 15,000 मिला. अभी बहोत खुश हुआ. उस्सको लाइफ में पहली बार इतना पैसा एक साथ मिला था उस्सको. इतना पैसा उस्सने कभी देखा hi नहीं था एक साथ. घर में बाप को उस्सने 10,000 थमा दिया. माँ बाप दोनों बेहद खुश हुए, भाई बेहेन सब बहोत खुश हुए. बाप को अब समझ में आया के उस्का बीटा अब कुछ बन गया है और घर को संभाल पाएगा उसस्के मरने के बाद.

अभी अपने दोस्तों को नहीं भूला था, उस्सने काफी सारे प्रोग्रमनस बनाये दोस्तों के बीच, जीन दिनों वो मुश्किल में था, तंगी चल रही थी, उन् दिनों जीन दोस्तों ने उस्का हेल्प किया था फिनांकिअल्ली, अभी ने उन् सभी दोस्तों के लिए पार्टी दिए, खूब मौज मस्ती किये, दारू पीना, पिकनिक जाना, गोवा जाना लड़कियों को ताड़ना, फ़्लर्ट करना वग़ैरा वग़ैरा… वही जो हर नौजवान करता है अभी भी बिल्कुल वैसा hi था और सब कुछ एन्जॉय किया करता था….

दो हफ्ते तक कोई काम नहीं मिला था तो उन् दो हफ़्तों तक अभी हर रोज़ पीटा, मस्ती करता, मूवीज देखने जाता, खूब घूमता, लॉन्ग ड्राइव्स पर जाता ेट्स…

फिर छोटे छोटे काम मिले सईद को जो हफ्ते भर में पूरा हो जाता, छोटे मरम्मत, कभी फ्रंट विंडशील्ड बदलना, कभी कहीं के सीट बनाना, कभी कुछ और karna…magar हर काम करने के लिए सईद अभी को साथ ज़रूर लेजाता था क्यूंकि अकेले उन् कामों को करना नामुमकिन होते थे.

वैसे आहिस्ते आहिस्ते अभी कुछ नाह कुछ कर लिया करता था जिस से जेब में पैसा बना रहता था. कभी इस शहर के बस ओनर से जान पहचान होता तो कभी दूर किसी शहर में, लगभग 10 से 15 शहरों तक घूम चुके थे सईद और अभी बस के मरम्मत करते हुए. फिहाल सब सही चलने लगा था…. मगर अभी के दिल में एक खालीपन सा महसूस होता था…. वो अपने दिल की मालकिन की तलाश में भी लगा हुआ था…

पुरे दो साल बीत गए कंपनी को बांध हुए, और इन् दो सालों में तक़रीबन 20 से 25 बस ओनर्स के यहाँ काम कर लिए थे सईद और अभी ने. दोनों मशहूर हो गए थे अस बस कोच बिल्डर्स. और दूर दूर तक देश में इनके नाम हो गए थे बस के मालिकों के बीच.

अभी रात को जब अपने डायरी में लिखता तो उदास हो जाता और लिखता के अभी तक उस्सकी ज़िन्दगी में वो नहीं आयी है जिस्सकी उससे तलाश है. लिखता के कहीं न कहीं तो कोई बानी होगी उसस्के लिए और वो भी अभी का इंतज़ार कर रही होगी किसी कोने में. अभी सोचता, तस्सवुर में खोते हुए कहता के…

“वो दिन कैसा होगा जब उस्सको पहली बार देखूंगा? वो मुझको देख कर कैसा फील करेगी? किआ मेरे नज़रों में वो पढ़ पाएगी के मैं उसस्के लिए बना हूँ? किआ मैं उस्सको पहचान लूंगा? और वो? किआ वो मुझको एक नज़र में hi पहचान लेगी? हाँ मैं तो उस्सको देखते hi समझ जाऊंगा के वो मेरे लिए बानी है…. किआ मुझको उस तक पहुँचने में मुश्किलें पेश आएंगे? या सब कुछ आसान से हो जाएगा? बिछड़ना तो नहीं पड़ेगा जैसे रूही से बिछड़ा हूँ?.”

अभी ऑलमोस्ट हर रात को यह सब सोचता, एहि कुछ लिखता अपने डायरी में, और कभी उस कॉपी बुक को पढता जिस में उसस्के और रूही के बीच का तमाम किस्सा लिखा है उस्सने, वो पढ़कर उसस्के आखें नाम हो जाते और वो रूही को सोचने लगता और सोचता के इस वक़्त रूही कितनी बड़ी हो गयी होगी, वो कितनी खूबसूरत लग रही होगी. अगर आज वो यहाँ होती तो वो अभी के बाहों में होती…. अभी हर रात को कुछ ऐसा सोचते हुए नींद के आगोश में चला जाता….

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
अपडेट 3 ा नई टर्न इन Abhi’s लाइफ

एक जाना माना बस ओनर था मेहबूब जान नाम का. उसस्के 4 बसेस रनिंग आलरेडी थे रोड्स पर. मगर उस्सकी नज़र एक पुराने सादे हुए बस पर पड़ी कहीं एक जंगल में जो किसी बस ओनर ने डंप कर दिया था. उस पर घांस फुस्स, पावड़े भी उग उठे थे. मेहबूब जान ने उस बस का मुआएना किया तो पाया के उस्सकी चासी बिल्कुल मज़बूत आउट अचछह है, मगर इंजन था hi नहीं बस में सिर्फ चेसिस समेत सदा हुआ कोच था उस पर. मेहबूब जान ने सोचा के 50,000 में एक सेकंड हैंड इंजन तो मिल hi जाएगा, चेसिस सही है तो सिर्फ कोच बिल्डिंग करना पड़ेगा और बस वापस रोड पर चलाया जा सकता है. चेसिस का नंबर नोट किया उस्सने और लीगल मटर के लिए रोड ट्रैफिक ब्रांच वालों के कांटेक्ट से पता कर लिया के सब लीगली बनाया जा सकता है अगर वो बस को वापस रोड पर लाना चाहे तो.

तो उस्सको अब सईद से मिलना बाकी था जो उस्सने किया. सईद को लेकर वो बस दिखाने लगाया. उस बस में काम वही करना था जो बिल्कुल एक नए बस में किया जाता है शुरू से अंत तक. मतलब चेसिस से शुरू करना होगा और एन्ड तक कोच बिल्डिंग करनी होगी. ऐसे काम के लिए गेराज में 20 लाख रूपए लग जाता है. और अगर नए बस पर कोच बिल्डिंग करना होता है तब 40 से 50 लाख लगता है. यह सब मेहबूब को भी पता था और सईद को भी. मेहबूब ने सईद से पूछा के कितने की मटेरियल तकरीबन खरीदने पड़ेंगे? और बस को पूरा बनाने में कितना टाइम लगेगा?

सईद के दिमाग़ में कई बातें चल रहे थी उस वक़्त. वो सोच रहा था गेराज के हिसाब से कितना पैसा लगता मेहबूब को और अब सईद गेराज वाला काम पूरा करने वाला था तो कितना पैसा लेना चाहिए उस्सको मेहबूब से एक पूरा बस की कोच बनाने के लिए. सईद ने सोचा के अभी से मिलकर डिसिशन लेना पड़ेगा उस्सको, तो उस्सने मेहबूब से कहा,

“मुझे अपने वर्कर्स से बात करना होगा पहले, यह उन् के हाथ में हैं के कितने दिनों में काम पूरा हो सकता है और मैटेरियल्स के लिए एक कोटशन बनवा कर दूंगा आप को, बहोत सारे शीट्स ऑफ़ अल्लुमिनियम खरीदने होंगे, बहोत मेटल्स खरीदने होंगे पूरा फ्रेम के लिए और बस के तमाम सीट्स के लिए अलग से मेटल्स लेने होंगे और सारे सीट्स भी बनाना हैं, तमाम शीशे बस के खरीदने hein….sab कुछ फ्रॉम जीरो स्टार्ट करना है….. ऊपर से सारे रिवेट्स, फ़्लोरिंग्स, सिलिंग्स के पैनल्स, साइड्स के फ्रेम्स, सब कुछ शुरू से स्टार्ट करना है बिल्कुल जैसे एक नया बस बनता है वैसे करना है….”

मेहबूब ने कहा के वो सब करने को तैयार है उस्सको वो बस वापस रोड पर चाहिए hi चाहिए!

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सईद जाकर अभी से मिला और उस्सको लेकर उस जंगल में बस दिखाने लगाया और दोनों मिलकर डिसकस करने लगे के कितना कॉस्ट होगा सारे मेटेरियल्स का और कितना पैसा लेना पड़ेगा मेहबूब से बस को रोड पर लाने के लिए और कितने दिनों में कामम पूरा हो सकता है.

सईद और अभी फिर उसस्के घर पर मिले और कागज़ कलम लेकर बैठे दोनों सब कुछ लिखने के लिए.

सारे मैटेरियल्स को सोच सोच कर लिखा गया एक एक करके, सब याद करते हुए के बस की कोच बनाने के लिए किआ किआ इस्तेमाल होता है, एक कील से लेकर अल्लिमिनियम शीट्स तक सब कुछ लिखा गया और दाम एक कोने में नोट किया गया.

एक पूरा कोटशन तैयार किया अभी ने. क्यूंकि वो पढ़ा लिखा था तो इस लिए सईद ने अभी पर काउंट किया वो सब तैयार करने के लिए. सब कुछ कलम और कागज़ पर किया गया कंप्यूटर तो था नहीं तब.

उसस्के बाद अब दोनों ने डिसकस किये के कितना पैसा लेना होगा मेहबूब से उस काम के लिए. सईद और अभी ने मिलकर डिसकस किया के कंपनी की गेराज में तो उस काम के लिए कम से कम दो या तीन लाख लिए जाते और 3 महीनों में काम पूरा किया जाता…. तो बात यह हुई के गेराज में और भी कई मुलाज़िम काम करते तब 3 महीनों में काम पूरा होता, यहाँ तो 4 मुलाज़िम हैं तो ज़्यादा दिन तो लगेंगे hi…… 6 महीने सोचा दोनों ने… फिर सोचा के मेहबूब को 6 महीने बहोत ज़्यादा लगेंगे, तो 4 से 5 महीने कहने को सोचा दोनों ने. तब बात आयी पैसे की, लेबर की, मतलन मज़दूरी की….. सईद ने कहा के 75,000 मांगेगा. और कहा के वो 50,000 लेगा और अभी को 25,000 देगा.

अभी ने कहा,

“75,000? आप पागल हो किआ सईद जी? 3 लाख का काम आप 75 हज़ार रूपए में करोगे? और दो वर्कर्स के भी पेमेंट करने होंगे तो कैसे मुझको 25 और आप 50 लोगे उन् में से? मैं कहता हूँ दो लाख मांगना है मेहबूब जी से इस काम के लिए.”

अभी दूर का सोचता था. सईद जी के लिए 75 हज़ार बहोत बड़ा रकम था इस लिए उस्सको ज़्यादा माँगना अजीब लग रहा था, मगर अभी को पता था के मेहबूब जी अगर गेराज को 3 लाख की पेमेंट कर सकते हैं तो 2 लाख तो दे पाएगा इस काम के लिए. तो सईद जी ने कहा,

“देखो अभी, मुझ में हिम्मत नहीं है मेहबूब जी से इतना बड़ा रकम मांगने की, एक काम करते हैं, तुम मेरे साथ चलो, मैं तुमको अपने असिस्टेंट कहकर मिलवाऊंगा उस से और तुम प्राइस डिसकस करना उनके साथ देखते हैं किआ होता है.”

अभी मान गया. और दोनों मिले मेहबूब जी के घर पर. अभी ने कोटशन दे दिया मेहबूब जी को. देरर लाख की मैटेरियल्स खरीदने थे मेहबूब जी को. तब उस्सने सईद जी से पूछा के कितना लेंगे इस काम के लिए और कितने दिनों में काम पूरा होगा. तो सईद ने मेहबूब से कहा,

“उसी से पूछिए नाह जनाब, यह अभी है नाह वही सब एकाउंटिंग करता है. वो सही फिगर्स देगा आप को.”

मेहबूब के यहाँ आने से पहले तो बात 2 लाख की हुई थी मगर यहाँ अभी ने मेहबूब से 3 लाख की फरमाईश किये! सईद जी को झटका लगा 3 लाख सुनकर! मगर मेहबूब जी ने अभी से पूछा,

“3 लाख कुछ ज़्यादा नहीं है बरखुरदार? गेराज में भी तो उतना hi लगता नाह?”

अभी ने कहा,

“किआ आप के यहाँ गेराज है जनाब? या आप के यहाँ हम खुले हवा में काम करेंगे, धुप में तपते हुए सारे काम करने होंगे, इन् सब को ख्याल में रखते हुए hi नाह हमने सब कुछ सोचा है? और फिर दो और मुलाज़िम होंगे हमारे साथ, उनके भी तो पेमेंट्स करने होंगे, ट्रवेलिंग्स का भी सोचा है हमने सारे मुलाज़िम के ट्रैवेलिंग का ख्याल भी तो करना पड़ता है नाह?”

मेहबूब जी ने मुस्कुराते हुए वापस सईद जी को देखा और कहा,

“अरे सईद भाई आप तो अपने फाइनेंस मैनेजर को लेकर साथ आये हो या यह आप का हर है?!” और वो हंस पड़े.

मेहबूब जी ने 3 लाख को मंज़ूर किया जिस से सईद जी को ज़बरदस्त झटका लगा, उस्सने तो सपने में भी नहीं सोचा था के लाइफ में कभी किसी से 3 लाख मांगेगा काम करने के लिए.

सईद चुप चाप बैठा रहा और अभी को सब डील पूरा करने दिया.

मेहबूब जी ने पूछा के कितने दिनों में काम पूरा होगा. अभी ने कहा 5 से 6 महीने तो लग जाएगा, और मेहबूब जी को मैकेनिक्स वाले काम अलग से करवाने होंगे इंजन को लेकर और पेंटिंग्स भी अलग से वो करवाएगा अपने तरफ से. मेहबूब जी राज़ी हुए और पूछा के पेमेंट कैसे करेगा सब एक साथ काम पूरा होने के बाद या एडवांस पेमेंट चाहिए?

बिना सईद को देखे या पूछे अभी ने कहा,

“अगर आप 1 लाख दे देते हमें काम शुरू होने से पहले तो हमारे लिए आसान होता बाकी के मुलाज़िमों की पेमेंट करने के लिए क्यूंकि उन् लोगों को वीकली पेमेंट करते हैं हम.”

सईद जी को एक और झटका लगा अभी की बात को सुनकर. उस्सने तो लाइफ में कभी 1 लाख रूपए नाह लिया था नाह देखा था. और 22 साल की उम्र का अभी 1 लाख रूपए मांग रहा था एक बस ओनर से, वो भी एडवांस और 2 लाख काम पूरा होने के बाद मिलने वाला था….. सईद सोच रहा था के साला उस्सने तो 75 हज़ार पूरा काम के लिए मांगने वाला था! और यहाँ अभी एडवांस 1 लाख मांग रहा है और मेहबूब देने को तैयार था!

मेहबूब जी ने एक चेक कटा 1 लाख रूपए की और अभी को थमा दिया सईद को देखते हुए. फिर पूछा के काम शुरू कब होगा. तो अभी ने कहा काम कल से hi शुरू होगा, बस को टो किया जाएगा उनके आँगन में आज hi.

वहां से निकले तो सईद ने अभी से कहा,

“कमाल करते हो तुम अभी? साला 2 लाख की बात हुई थी और तुमने 3 लाख मांग लिया?”

अभी ने ज़ोर से हँस्ते हुए कहा,

“यह एक लाख मेरा अपना कमाई है सईद जी. इस में से मैं आप को कुछ नहीं देने वाला” और ज़ोरों से हंस्ता गया. सईद जी खामोश रहे.

कुछ देर बाद अभी ने पूछा,

“यह चेक आप अपने अकाउंट में डेबिट करोगे या मैं अपने अकाउंट में दाल दूँ?”

सईद ने कहा,

“अरे बीटा मेरा तो आज तक कोई बैंक अकाउंट है hi नहीं! तो तुम्ही डालो अपने अकाउंट में नाह!”

उस दिन लाइफ में पहली बार अभी की बैंक अकाउंट में 1 लाख रूपए डिपाजिट किया गया! जिस बन्दे को 10 रूपए के लिए तरसना पड़ता था, एक सिगरेट पिने के लिए दोस्तों से माँगना पड़ता था आज 1 लाख रूपए डिपाजिट किया गया उसस्के अकाउंट में उस्सको खुद यकीन नहीं हो रहा था!

शाम को बस टो किया गया और मेहबूब जी के आँगन में एक बड़े से पेयर के निचे रखा गया. सईद और अभी वहीँ मौजूद थे. बस को देख कर लोग हंस रहे थे. पड़ोस के लोग आकर बस को देखने लगे जिस पर घणन्स फुस्स उगे हुए थे, इतना मेला था, गन्दा था, गंदे हरे रंग के पानी कई जगा जमा हुआ था बस में, जो एक दो शीशे बचे हुए थे सब डार्क ग्रीन गंदे इस कदर दिख रहे थे के घिन ारः था… कुछ लोग मेहबूब जी को पागल कह रहे थे के एक सादे हुए बस को जंगल से उठाकर अपने आँगन में ला रखा था….

अभी सुन रहा था सभी के कमैंट्स को और अपने दिल में कहा,

“सालो, तीन महीने बाद तुम्ही लोग तारीफ़ करने आओगे इस बस की….”

और यहाँ पर शुरू होती है अभी की रोमांटिक कहानी… अभी ने अचानक किसी महिला की आवाज़ को कुछ यूँ फुँकारते हुए सुना;

“आरी ओह रूही किआ कर रही है आ देख तेरे मेहबूब चाचा ने किआ लाया है आँगन में!”

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
अपडेट 4 रूही केस इन Abhi’s लाइफ वन्स मोरे

“सालो, तीन महीने बाद तुम्ही लोग तारीफ़ करने आओगे इस बस की….”

और यहाँ पर शुरू होती है अभी की रोमांटिक कहानी… अभी ने अचानक किसी महिला की आवाज़ को कुछ यूँ फुँकारते हुए सुना;

“आरी ओह रूही किआ कर रही है आ देख तेरे मेहबूब चाचा ने किआ लाया है आँगन में!”

अब आगे….

जब अभी ने किसी को रूही नाम फुँकारते सुना तो उस्का दिल ज़ोरों से धड़का, उस्का चेहरा थोड़ा सा लाल हुआ और उस्सकी नज़र बस से हटकर उस अवर देखने लगा जहाँ से उस्सने उस आवाज़ को रूही नाम फुँकारते हुए सुना…. उस्सको ऐसा फील हुआ के उस्सको सांस लेने में तकलीफ होने लगा था उस पल को, मुश्किल से एक लम्बा सांस लिया और आँखों को वहीँ जमाये रखा इस इंतज़ार में के कोई रूही नाम वाली उधर आये….. तब एक ऊंचे स्तैर पर कड़ी एक औरत को देखा अभी ने; और अंदाज़ा लगाया के उसी औरत ने रूही के नाम को फुकरा, और सोचने लगा किआ यह उस रूही नाम वाली लड़की की माँ होगी किआ? अपनी बेटी को बस देखने के लिए बुला रही होगी? तो किआ बस ओनर मेहबूब उस रूही का चाचा है? मतलब यहाँ रूही एक मुस्लिम गर्ल है, मगर अभी वाला रूही तो हिन्दू थी…. फिर भी धर्म और जाट को भूल कर इस पल को अभी ने यह देखना चाहा के यह रूही कैसी होगी? खूबसूरत होगी और अपनी रूही की तरह अदाओं की मालकिन होगी? चंचल होगी? मॉडर्न होगी, या घरेलु होगी? इंग्लिश बोलना अत होगा? पढ़ी लिखी होगी? उस्सकी उम्र किआ होगी? कहीं कोई बची तो नहीं होगी? और अगर शादी शुदा आलरेडी होगी तो? उस्सकी बाल कैसे होंगे, अपनी रूही जैसी होगी? और सबसे प्यारे 2 चीज़ जो अभी अपनी रूही में ज़्यादा पसंद करता था वो थे उस्सकी मुस्कराहट, और उस्सकी मीठी आवाज़, तो किआ इस रूही की भी वैसी मुस्कराहट और आवाज़ होगी किआ?

अभी का ध्यान अब बस पर बिल्कुल नहीं था. वो तो वहां नज़रें गड़ाए खड़ा था जहाँ से यह नयी रूही आने वाली थी. सईद जी ने अभी से पूछा,

“किआ ख्याल है, काम कितने दिनों तक चलेगा?!”

अभी ने सईद जी को सुना hi नहीं, उस्का ध्यान तो कहीं और hi था उस वक़्त. सईद जी ने तब अभी के चेहरे में देखा, फिर उस्सकी नज़रों को फॉलो करते हुए सईद जी ने भी वहां देखा जहाँ अभी के नज़रें ठहरे हुए थे और एक औरत को देखा खड़ा होकर उन् दोनों के तरफ बस को देखते हुए. फासला कोई 3 मेट्रेस के थे जिस जगह बस था और जहाँ वो औरत कड़ी थी.

सईद जी ने अभी की केहुनी को अपने केहुनी से टकराते हुए कहा,

“क्यों मियां औरतों को ताड़ने लगे आते hi?”

तब अभी का ध्यान वापस वहां आया और चहूंकते हुए कहा,

“नहीं भाई मैं बुसस ऐसे hi….. कुछ सोच रहा था….”

और तभी उस औरत ने फिर कहा,

“आरी रूही आह नाह देख तो!”

और अंदर से आवाज़ आयी जिस्सको अभी ने बड़े ध्यान से सुना,

“ोफो माँ, तुम भी नाह, यह चूल्हे पर तरकारी कौन देखेगा अगर मैं तुम्हारे पास आ कड़ी हुई तो? सब जल जाएगा यहाँ, देख नहीं रही मैं पका रही हूँ!”

अभी के दिल का धड़कना जैसे रुक सा गया उस आवाज़ को सुनकर, जितनी मिठास और कोमलता उस आवाज़ में सुना अभी ने, और जिस अदा से उस लड़की की आवाज़ सुना अभी ने, वो मचल गया अब उस्सकी एक झलक देखने के लिए. मगर उसस्के समझ में नहीं ारः था के कैसे उस्सको देखें…. अभी दिल hi दिल में प्राथना करने लगा के वो लड़की ात लीस्ट एक बार अपनी माँ की बात मान ले और एक बार बस को देखने आजाये….

तब तक सईद जी ने फिर अभी से पूछा के कितने दिनों में काम पूरा हो सकता है. अभी को दर था के कहीं इधर उधर देखते वक़्त वो लड़की आकर वापस भी नाह चली जाए तो उस्सकी नज़रें वही जमी रहे और सईद को जवाब दिया जैसे हवा में बात कर रहा था, “पता नहीं बाई!”

अब तो अभी यह चाहने लगा के यहाँ का काम कभी ख़तम hi नाह हो, क्यूंकि उस्का यहाँ काम करने का एक और मकसद मिल गया था….

अभी तड़पने लगा उस्सको देखने के लिए, काश वो लड़की एक बार अपनी माँ के पास आकर कड़ी हो जाती, ऐसा सोच रहा था अभी, और अचानक उस औरत ने मेहबूब जी से कुछ कहा जो सुनाई नहीं दिया अभी को, मगर अभी उन् दोनों को hi देख रहा था तब तक सईद जी बुसस के दूसरे तरफ चले गए थे मुआएना करने बस की. और अभी की नज़र वही टिक्के हुए थे उस स्तैर पर, और लड़की की माँ ने फिर से कहा,

“रूही आकर देख तो सही नाह!”

और अंदर से आवाज़ आयी,

“उफ़ आती हूँ वेट करो, कढ़ाई को उतार तो दूँ!”

जिस स्तैर पर वो औरत कड़ी थी वो किचन में दाखिल होने वाली स्टैर्स थे. उस मकान का आखरी हिस्सा था और जहाँ बस था उस गार्डन की सामने वाले हिस्से के बिल्कुल नज़दीक था. बस लेफ्ट हैंड साइड में था और वो घर राइट हैंड साइड में था. चलो एक प्लान बना देता हूँ ताके आप सब को समझ में आजाये सब कैसा था वहां….

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तो यह रहा प्लान. बस एक बड़ी सी दरखत के निचे था जिस से आधा दिन चयन होता था बस के निचे, बाद में कड़ा धुप में काम करना पड़ता था. जहाँ रूही की किचन है वहां एक जगह स्तैर लिखा हुआ है वहीँ पर उस्सकी माँ कड़ी देख रही थी और अभी जहाँ तप ओने लिखा है वहां अपोजिट बस के पास खड़ा उस स्टैर्स के तरफ देख रहा था के कब रूही नामी लड़की सामने दिखे उस्सको. बस का फ्रंट साइड मेहबूब के घर के तरफ था और बैक साइड रूही के कजिन के घर के तरफ. बस की राइट साइड रूही के घर के तरफ, बल्कि तप 1 और तप 2 जहाँ रूही कपडे धोती है, उस तरफ था. और मेहबूब के घर के पीछे वाशरूम था जहाँ फ्रेश होना जाता था, कपडे चेंज करते थे वर्कर्स और टॉयलेट भी वहीँ थे. मेहबूब और रूही के घर के बीच का जो स्पेस था वहां ज़्यादा तर काम किया जाता था जैसे, अल्लिमिनियम शीट्स का काटना, मासुरेमेन्ट्स लेना, और बहोत सारे लोहे का सामान रखा गया था और कुछ काम करने का सामान ऐड होता गया दिन बा दिन. मतलब जब भी अभी उस स्पेस में होता तो रूही के घर के ज़्यादा करीब होता. बस से रूही का घर का फैसला बुसस देर मीटर का था, उस्सकी किचन, और स्टैर्स 2 मेट्रेस की दूरी पर थे.

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अभी बेसब्री से वेट करता रहा के कब वो रूही नाम वाली लड़की स्टैर्स पर आये ताके वो उस्सको देख सके, उस्सकी आवाज़ तो सुन लिया था और बेकरार था उस्सको देखने के लिए. उस्सकी आवाज़ से अभी को समझ में आया; या यूँ कहें के उस पतली, नरम आवाज़ से अंदाज़ा लगाया जा सकता था के उस आवाज़ की मालकिन कैसी दिखती होगी. मतलब अभी ने अपने दिमाग़ में सैकड़ों तस्वीरें बना लिए थे उस्सकी, अपने तस्सवुर में इस रूही की तस्वीर को उतार लिया था उस्सने अब इंतज़ार था उस्सको देखने को और नतीजा किआ निकलेगा इस्सके वेट कर रहा था अभी.

अभी को लगा एक बहोत खूबसूरत, नाज़ुक, कमसिन सी लड़की होगी, यह उस्सकी आवाज़ से पहचाना या अंदाज़ा लगाया था अभी ने… उस्सकी बेकरारी बढ़ने लगी थी और मैं में हलचल पैदा हो गए थे, बेचैन हो रहा था अभी उस्सकी एक झलक देखने के लिए.

अभी का रूही नाम से गहरा रिश्ता था यह सिर्फ अभी को पता था और किसी को भी नहीं उस वक़्त. इस रूही नाम से उस्का किआ नाता रहा है पिछले कई सालों से, किआ एहमियत थी उस्सक्कि लाइफ में रूही नाम का किसी को किआ पता था उसस्के सिवा. और अभी सोचने लगा के किस्मत किआ खेल खेल रहा था उसस्के साथ के उसी नाम की लड़की से फिर मिलवा रहा था उस्सको, ऐसा क्यों था? किआ यह वाला रूही अभी की लाइफ में खुशीआं लाएगी? किआ अभी की लाइफ में जो कमी है वो अब पूरी होगी? जो खालीपन अभी को आज तक अपने वीरान दिल के अंदर महसूस हो रही थी वो अब गुलज़ार होने वाला था?

अभी ने एक गहरी सांस लेते हुए उस किचन की स्तैर पर अपने नज़रों को जमाये रखा…. और उस्सको एक नीली ड्रेस नज़र आयी किचन के दरवाज़े के पास, ड्रेस उस लड़की की माँ की ड्रेस को छह रहे थे, मगर ड्रेस पहनने वाली नज़र नहीं आरही थी, फिर लड़की की एक तंग दिखी अभी को, ड्रेस उस्सकी घुटनों तक थी, हवा से ड्रेस लहरा रही थी….

अभी दिल hi दिल में सोचने लगा किआ कर रही है, क्यों दिख नहीं रही है, उस्का चेहरा किधर छुपी हुई है?! फिर अभी ने ग़ौर से देखा तो समझा के लड़की खुले हुए दरवाज़े और दीवार के बीच से बस के तरफ देख रही थी; वो जब एक दरवाज़ा फुल खुला होता है और खुल कर दीवार से चिपक जाती है फिर उस खुले हुए हिस्से और दीवार के बीच के हिस्से से बाहर देखा जा सकता है नाह? रूही उसी हिस्से से बस को देख रही थी..….

उस्का गोरा चेहरा और एक आँख दिखा अभी को, और अभी का दिल बड़े ज़ोरों से धड़कने लगा… रूही अपनी माँ से धीरे धीरे बात कर रही थी यह माँ की रिस्पांस से समझ में ारः था…. बस के तरफ देखते हुए दोनों माँ बेटी बातें कर रहे थे, अभी प्रे करने लगा के काश वो लड़की स्तैर पर एक बार आजाती तो अभी उस्सक्को पूरा देख पाटा….

मेहबूब अपने घर से निकला तो लड़की की माँ ने मेहबूब से ज़ोर से कहा,

”यह किआ गन्दगी खड़ा कर दिया आप ने आँगन में? कितना गन्दा और सदा हुआ बस है, आप किआ करोगे इस सादे हुए गंदे लोहे से?!”

अपनी माँ की बात सुनकर वो लड़की खिलखिला कर हंसी. अभी ने सब सुना और उस्सकी तरफ देखता रहा. और लड़की ने कुछ आहिस्ते से कहा अपनी माँ को जैसे डांटते हुए. अभी के समझ में आया के लड़की ने अपनी माँ से कहा के बस की मरम्मत करने वाले लोग सब सुन रहे हैं, उनको ाचा नहीं लगेगा….

और आखिर में बुसस एक पल के लिए, कोई 2 सेकण्ड्स के लिए लड़की स्तैर पर आयी, वो भी जैसे खुद को एक तंग पर सँभालते हुए जैसे स्तैर पर आना नहीं चाहती थी मगर एक पेयर फिसल गयी इस लिए मजबूरन आना पड़ा, फिर तुरंत वापस पीछे चली गयी और उसी दरवाज़े और दीवार के बीच से देखने लगी.

जिस पल वो निकली थी स्तैर पर अभी ने बहोत कुछ देखा, और उस पर किआ बीता, किआ फील हुआ, कैसे संभाला उस्सने खुद को यह बयान करना मुश्किल है. अभी की नज़रें ठीके रहे उस एक पल के लिए उन् स्टैर्स पर और उस्सको तो लगा के एक घंटे भर देख लिया उस लड़की को. उसस्के बाल खुले हुए थे जो हवा से लहरा रहे थे, काले घने बाल, और बाल भी बिल्कुल वैसी जैसी अभी को पसंद था और जैसे बाल उस्सकी रूही के थे, उस लड़की का रंग भी बिल्कुल उस्सकी अपनी रूही का रंग था, बिल्कुल गोरी थी, चेहरा मान लो चाँद का एक तड़का दिख गया अभी को, उस्सकी ड्रेस एक मिडी टाइप थी, जो उस्सकी घुटन को ढंके हुए थे, पर तलवे से थोड़ा ऊपर उस्सकी गोरी तंग दिखे अभी को और उस्सकी बाज़ुओं पर भी निगाहें पड़े थे अभी के… अभी ने खुद से कहा,

“हाँ कोमल दिखी मुझे वो, कमसीन भी है, नाज़ुक भी लगी….”

और चेहरा? मुस्कराहट? आँखें? इन् सब को देखने का मौका hi नहीं मिला सही से अभी को, क्यूंकि तब तक वो वापस छुप गयी thi…sirf एक झलक दिखा था बुसस….. अभी ने मैं में बसा लिया उस्सको उसी पल…..

उस दिन वहां से घर लौटने के बाद अभी ने अपनी डायरी में लिखा के मुद्दत बाद आज उस्सको अपनी रूही की झलक दिखी किसी में, और ताहजुब की बात यह थी के लड़की का नाम भी रूही hi था.

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2100 वर्ड्स)
 
थैंक्स लोड्स फॉर थे अप्प्रेसिअशन आकाश बीआरओ..... थे इतर रूही इस इन कनाडा एंड है लेफ्ट हिम फॉर एवर... शी वास् sabhi's पास्ट....

इतस ा स्टोरी अबाउट ा गर्ल बेअरिंग शामे नाम एंड हाउ आईटी वास् रिलेटेड तो अभी तहत नाम, होवेवेर लेटर थे इतर रूही विल के इन मोरे डिटेल्स नाउ एंड थें....
 
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