अपडेट 31 थे डिस्टेंस….
एक हफता ऐसे hi गुज़रा, सैटरडे को रूही अपनी ट्यूशन के लिए जाती, और उस वक़्त सभी के नज़रें रूही पर होती क्यूंकि वो एक अप्सरा लगती थी जब भी सज संवर कर निकलती थी. हद से ज़्यादा खूबसूरत दिखती थी, उस्सको पाने के लिए कोई भी दीवाना होता उस रूप में रूही को कोई भी देखता तो.
सुनील ने अभी को चढ़ते हुए कहा,
“अभी देख, तुझको जलन नहीं होती जब रूही ऐसे बन थान के निकलती है तो? ज़रा देख तो सब की नज़र उसी पर ठीके हुए हैं, देख देख सबको….. अब पता नहीं जहाँ जा रही है वहां उस शहर के कितने लोग अभी उसस्के पीछे पड़ेंगे….”
अभी ने बुसस मुस्कुराते हुए सुनील से कहा,
“यार अगर यह काम लास्ट फेज पर नहीं होता तो मैं ने सोच लिया था के एक सैटरडे को मैं लीव लेता और उसस्के साथ जाता बस में, ऐसे मुझे पता चल जाता के वो कहाँ जाती है स्वेज कोर्स के लिए.”
सुनील: “इस्सकी किआ ज़रुरत है, उसस्के पिता के आने के बाद उस्का हाथ तो मांग रहा है नाह तू? तब उसस्के बाद कोई नहीं रोकेगा तुमको रूही के साथ कहीं भी जाने के लिए तब चले जाना आराम से!”
अभी ने खुश होते हुए कहा,
“भाई इसी लिए तो धीरज रख रखा हुआ है आज तक!”
सुनील ने कहा,
“यह ऐसे दिन होते हैं जो तुम्हारी लाइफ के सबसे हसीं दिन होंगे अभी, एक लड़की को शादी से पहले कोर्ट करना, उसस्के घर हर हफ्ते को आना , उसस्के लिए चॉकलेट्स वग़ैरा लाना उसस्के पेरेंट्स से मिलना, लंच या डिनर अपने in-laws के साथ करना, जब तक शादी के दिन नाह आजाये… शादी के पहले वाले लाइफ के बेहतरीन दिन होते हैं वो मेरे भाई, खूब जी भर के एन्जॉय करना उन् दिनों को!”
अभी ने कहा,
“सुनील भाई और इन दिनों के बारे में किआ ख्याल है आप का? जब से यहाँ काम शुरू किया हूँ, जिस दिन से उस्सको देखा पहली बार, तबसे आज तक लगा हुआ हों उसस्के पीछे, उस्सको अपना प्यार दिखाया, अपने प्यार को कबूल करवाया, उस्सको भी प्यार हुआ hi है नाह? तो मेरे लिए यह दिन बहोत इम्पोर्टेन्ट हैं भाई… माना के जीन दिनों को आप कह रहे हो वो भी उतना hi ज़रूरी होगा और बेशक उन् दिनों का भी इंतज़ार है मुझे के सब ऑफिसियल हो जाएगा तब बात और होगी, जैसे के लाइसेंस मिल जाएगा, और अभी बिना लाइसेंस के चला रहा हूँ अपनी प्यार की गाड़ी को, इश्क अलग hi मज़ा है भाई… और मैं हमेशा ऐसा hi प्यार चाहता था, के खुद किसी से प्यार हो जाए मुझे और उसी के साथ सगाई, फिर शादी करूँ…… it’s ा ड्रीम के ट्रू सुनील भाई… मगर अभी इस ड्रीम को ट्रू होने में कुछ टाइम बाकी है“
सुनील ने तब कहा,
“समझता हूँ भाई मैं भी गुज़र चूका हूँ नाह इस फेज से रूही के सिस्टर के साथ…. मगर मैं कामयाब नहीं हुआ अपने ड्रीम को ट्रू करने में…. तुम ज़रूर ड्रीम को ट्रू करना भाई!”
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अब देखते हैं 10 आखरी दिनों को जो अभी ने गुज़ारा उस आँगन में. क्यूंकि हर रोज़ शामे चीज़ें होते रहे तो बहोत रेपेटिशन जैसा लगेगा और बोरडम फील होने लगेगा, एक्सेप्ट लास्ट 10 दिनों में बड़े डिफरेंसेस आये….. फिर अभी का वहां काम ख़तम करने के बाद कितना कुछ हुआ वो सब देखना बाकी हैं, और बहोत कुछ हुआ था, बहोत कुछ.
तो हर सुबह अभी का वहां जाना, रूही से मिलना, प्यार करना, घर के पीछे वाले हिस्से पर अपने कोने में जाना किश करना सब चलता रहा. उस आँगन के सभी लोगों का पता चलना, मेजोरिटी को अभी और रूही के प्यार को सपोर्ट करना सब बिल्कुल सही चलता रहा.
महेश अपने नानी के घर से वापस आगया था. उस्सकी दोस्ती अभी के साथ मस्त था और उस्सको सब पता था के रूही और अभी एक दूसरे से प्यार करते हैं. वो छोटा भाई था तो उस्सको कोई प्रॉब्लम नहीं थी बल्कि महेश ने जैसे अभी को अपना brother-in-law मान लिया था उन् दिनों को. जब रूही और अभी घर के पीछे मिलते तो महेश को पता होता और कोई उस तरफ अत तो वो ऊंचे आवाज़ में रूही और अभी को बता देता था, मतलब महेश दोनों को सपोर्ट करता था.
10 दिन काम एन्ड करने से पहले, मालाब 15तह दिसंबर का दिन था. शाम को घर जाने से पहले जब अभी रूही से मिला तो रूही ने प्यार से अभी से कहा,
“कल मैं अपने नानी के घर जाउंगी मम्मी के साथ”
अभी को शॉक लगा और पूछा के उस्का किआ होगा, तो रूही ने कहा के शाम को वापस आजाएगी. तो अभी ने पूछा कितने बजे घर से निकलेगी जाने को? रूही ने कहा सुबह को, तो अभी ने कहा उसस्के आने से पहले तो हरगिज़ नहीं जाना जब वो यहाँ आ जाए तब घर से निकलने को. रूही ने कहा के हाँ वो अभी का वेट करेगी जब आजाएगा तब घर से निकलेगी अपनी मम्मी के साथ. और वही हुआ…..
रूही अपनी माँ के साथ अपनी नानी के घर जा रही थी सुबह 8 बजे. अभी ने उस्सको गुडमॉर्निंग कहा, रूही ने नाह अभी के तरफ देखा नाह रिप्लाई किया, न मुस्कुरायी, सर झुकाये आगे बढ़ती गयी. अभी को बहोत ऐम्बर्रास फील हुआ. रूही की माँ ने अभी को देखा और मुस्कुरायी उस से. दिन भर अभी सोचता रहा के रूही ने क्यों अजीब बेहवे किया था सुबह को जाते वक़्त. कहने की ज़रुरत नहीं के वो कितनी खूबसूरत दिख रही थी नए लिबास में और किश तरह से उस्सकी खूबसूरती निखार कर आ रही थी, ऊपर से उस्सकी जान लेवा अदाएं….
और दिन में रेज़ा ने अभी से कहा के रूही की माँ ने उस से कहा के वो कभी भी अभी का रिश्ता रूही के लिए एक्सेप्ट नहीं करेगी. यह बात ने अभी को दिन भर बहुत टार्चर किया.
शाम 3 बजे अभी रूही की राह देखने लगा, वो रूही को बहोत मिस करने लगा था, उस्सको देखना चाहता था, उस्सकी स्माइल देखना चाहता था, उस्सकी आवाज़ सुन्ना चाहता था. खुद से अभी ने कहा, “ओह माय गॉड!!”
शाम को 3.30 बजे जब रूही वापस आयी अपने नानी के यहाँ से तो उस्सकी रवैया अभी के तरफ थोड़ा डिफरेंट था. वो उस शाम को अभी से नहीं मिली और अभी वहां से घर उदास गया बिना रूही से मिले, बिना किश किये जो अभी के लिए एक पहाड़ के ज़्यादा भरी वज़न की तरह था उसस्के सीने पर.
रात को अपने डायरी में अभी ने लिखा के किआ उसस्के नानी के यहाँ अभी और रूही की बात हुई और उन्हों ने कहीं इंकार तो नहीं किया इस रिश्ते को? और अभी ने याद किया के वो अमित जिस्सके बारे में पहले बात किया गया था वो उस्सकी नानी के शहर का hi रहने वाला था. तो अभी सोचने लगा के कहीं जब रूही वहां गयी तो वो बात फिर से नाह चिढ गयी हो रूही की मम्मी और रूही के साथ??!
अभी ने यह भी याद किया के जब रूही ने उस्सको अपनी विर्जिनिटी वाली बात बताई थी तब अभी ने यह भी पूछा था के अमित वाली बात झूट थी तो रूही ने कहा था के हाँ सब नाटक था. मगर रूही की माँ ने कहा था के बात सच थी के अमित ने शादी का प्रपोजल भेजा है रूही के लिए वो जब फ्रांस से आएगा तो रूही को लेकर जाएगा.
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अगले दिन अभी काम पर पहुंचा तो रूही नहीं दिखी हर सुबह की तरह, खिड़की के पास नहीं थी. अभी ने अपना गीत सीटी बजाते हुए 6 बजे से 7 बजे तक विस्सल किया, मगर रूही नहीं निकली, उस्सकी खिड़की बंद थी.
जिस टाइम को वो टेरेस और लाउन्ज में झाड़ू देती थी वो भी नहीं किया रूही ने, नज़र आयी तो 11 बजे के करीब और उल्टा लाउन्ज के सारे परदे को बांध रखा रूही ने जो कभी नहीं होता था, सब ओपन होते थे और अंदर रूही हर रोज़ नज़र आती थी. मगर इस सुबह को सब उल्टा हो रहा था….
अभी पर किआ गुज़र रहा था यह बयान के बाहर था. सुफ्फुसाशन, घुटन, सांस लेने में तकलीफ दिल की धड़कनों का तेज़ बढ़ना, यह सब हो रहा था अभी के साथ और काम और भी ज़्यादा मुश्किल होते जा रहा था फिनिशिंग करने की…..
लंच टाइम में भी रूही नहीं मिली अभी से. खिड़की के पास अभी वेट करता रहा मगर खिड़की बंद रखा रूही ने, और उस्सकी माँ भी नहीं दिख रही थी और नाह महेश आया था बाहर. लगता था सब अभी को एस्केप कर रहे थे.
और शाम को जब अभी ने किचन के चौकठ पर देखा तब रूही की एक झलक दिखाई दिया अभी को. उस्सने अभी अभी नहाया हुआ था, उस्सकी बाल खुले और भीगे हुए थे जो नज़र ारः था.
जब अभी वाशरूम जा रहा था खुद को वाश करने और चेंज करने को तो रूही किचन के स्तैर पर कड़ी अभी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी…… ऐसा लग रहा था आज पहली बार वाला मोमेंट फिर से रेक्रेट हो रहा था, लगता था दोनों अजनबी हैं और आज पहली बार एक दूसरे को देख रहे थे.
अभी को थोड़ी सी ख़ुशी हुई के कम से कम उसस्के तरफ रूही ने देखा तो, मुस्कुरायी तो! और अभी ने हाथ के इशारे से पूछा के किआ हुआ क्यों नहीं दिखी दिन भर और रूही ने भी इशारे से कुछ कहा जो अभी नहीं समझा…. तो अभी ने थोड़ा करीब जाते हुए दोबारा कहने को कहा रूही से, तो रूही ने अपने सीने पर अपने हाथ को रखा और फिर उस हाथ को अभी के तरफ किया और मुंह से बिना आवाज़ के कहा, “ी लव यू!” उसस्के होंठों के मूवमेंट्स से पढ़ना आसान था के 'ी लव यू' hi प्राणोँके किया रूही ने!
अभी की आँखें भर आयी और कांपते हुए होंठ से पूछा,
“क्यों तड़पा रही हो? क्यों मिलने नहीं आयी आज?!”
रूही ने हाथ के इशारे से नाह किया.
अभी पागल होता जा रहा था के किआ कह रही है क्यों नाह कह रही है फिर बी ी लव यू कह रही है किआ बात है, क्यों वैसा बेहवे कर रही है!!
अभी का जाने का टाइम हो गया था तो रूही को खिड़की के पास आने को कहा मगर रूही ने फिर नाह कहा.
तो अभी उसस्के किचन के पास hi गया, रूही मुस्कुरा तो रही थी, मगर एक बार बाहर देखा फिर अपने कदम को दो कदम पीछे कर लिया रूही ने, ऐसा लगता था के किसी से डर रही है, जैस किसी ने उस्सको अभी से बात करने के लिए मन किया हुआ है, वो तो बात करना चाहती है मगर किसी का डर था उस्सको, तो अभी ने बुसस इतना कहा,
“कमाल करती हो यार, सुबह जब जा रही थी तो मुझको देखा भी नहीं और गुडमॉर्निंग को रिप्लाई भी नहीं किया तुमने किआ यार!”
रूही ने हस्सणते हुए कहा,
“उफ़ मैं कैसे आप के तरफ देखती, सभी के नज़र मुझ पर थे, सब मुझि को देख रहे थे मुझे बहोत ऐम्बर्रास फील हो रही थी इसी लिए नहीं देखा था आप को, आप भी तो मुझको hi देख रहे थे नाह!..... अब जाओ प्लीज मैं अंदर जा रही हूँ bye!”
अभी को वापस जाना पड़ा, दूसरा दिन था बिना मिले वापस घर गया, मगर रूही की “ी लव यू “कहने वाली बात को सोच कर जैसे अभी को तस्सल्ली हो रहा था.
घर जाकर डायरी में लिखा के किआ अब रूही के नानी वालों ने अभी और रूही की बात को ऑफिसियल करने का फैसला कर लिया इस लिए रूही को अभी से मिलने या बात करने से मन किया है? किआ अब जब तक सगाई नहीं होगी तब तक किआ रूही अभी से बात नहीं करेगी? किआ उन् लोगों का कोई रस्म रिवाज था किआ के लड़के लड़की को मांगनी से पहले नाह मिलने दिया जाए नाह बात करने दिया जाए? किआ एहि बात थी किआ?! अभी यह सब अपनी डायरी में लिखते हुए पगला रहा था!!
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इन् लास्ट दिनों में एक सैटरडे था, 20तह दिसंबर. 19तह को रूही के पिता नहीं आया, न्यूज़ मिली के वो 23रद को ारः है फ्लाइट पोस्टपोन किया गया था उस्का. तो इस सैटरडे को, सुबह को जब अभी वहां रीच हुआ, तो रूही को किचन में देखा, अपने दादा की आर्मचेयर पर अपनी येलो निघ्टड्रेस में रेस्ट करती हुई. 15तह से 20तह तक एक सुबह को भी रूही खिड़की के पास नज़र नहीं आयी, उस्सकी खिड़की बांध रहती थी सुबह को अब…. इन् 5 दिनों में अभी का दिल जैसे टुकड़े टुकड़े हुए थे रूही की डिस्टेंस से… आखिर क्यों वो दूरी रख रही थी अभी समझ नहीं पा रहा था…
खैर इस सुबह को जब अभी ने रूही को किचन में देखा तो वो अभी से मुस्कुरायी मूढ़ कर उससे देखते हुए. अजीब बात यह लगा था अभी को के उस्सकी माँ सारे किचन के काम कर रही थी जबकि रूही आर्मचेयर पर बैठी हुई थी, तो अभी ने सोचा शायद रूही की तबियत ठीक नहीं होगी.
दिन के 10 बजे काम ज़ोरों से चल रहा था बस में और अभी ने रूही को लाउन्ज में झाड़ू लगाते हुए देखा, परदे को हटाया रूही ने और बस के अंदर अभी को देखा. अभी इस इंतज़ार में था के रूही टेरेस पर झाड़ू लगाने आये तो वो उस से बात करने की कोशिश करेगा…. पिछले 5 दिनों को तो रूही ने एक भी मौका नहीं दिया अभी को, सामने आयी hi नहीं थी पता नहीं क्यों हालां के जब आमने सामने होते तब रूही मुस्कुराती थी अभी से.
और दरवाज़ा खुला और रूही टेरेस पर आयी झाड़ू मारने, तो अभी ने बस के अंदर से रूही से पूछा इशारों से के आज वो अपनी ट्यूशन को नहीं जाएगी. रूही ने बस एक स्माइल दिया अभी को, दोनों एक दूसरे को बड़े प्यार से देख रहे थे बिना कोई बात किये.
उसस्के बाद रूही नज़र आयी अपनी माँ के पास एक छोटी सी चेयर पर बैठी जब उस्सकी माँ कपडे धो रही थी. तो इशारे से अभी ने रूही से पूछा किआ वो बीमार है? रूही नहीं समझी के अभी किआ कह रहा था तो पूछा, “व्हाट” तो अभी ने हाथ से वेट करने का इशारा किया और अपने नोटबुक से एक पेज लिया और उस पर लिखा:
“नाउ ी लव यू मोरे एंड मोरे थान ी एवर लव्ड यू बिफोर. इन माय लाइफ ी हैवे नेवर लव्ड एनीवन अस मच अस ी लव यू” साइंड – अभी.
और उस नोट को लेकर अभी वहां गया रूही के पास जहाँ कपडे धोती है हमेशा, और जैसे वहां रीच हुआ तो रूही कुछ फिकरमंद दिखने लगी और कहा,
“आप को यहाँ नहीं आना चाहिए था, देखो सब लोग इधर देख रहे हैं” मगर यह सब कहते हुए रूही हंस रही थी.
अभी उस्सको वो नोट दे रहा था मगर रूही ने नहीं लिया और उस कागज़ को खिड़की के पास रख देने को कहा. और अभी को उस्सको ज़्यादा देखने से मन किया यह कहते हुए के सब लोग देखते हैं दोनों को. अभी ने नोट को उस्सकी खिड़की के पास रख दिया और वापस चला गया बस के अंदर.
अब अभी सोच रहा था के यह सब किआ नाटक है, इतने दिनों से खुले आम दोनों मिलते और बात करते थे तो अब क्यों रूही कहने लगी के लोग दोनों को देखते हैं उस्सको ज़्यादा नहीं देखने को कहा वग़ैरा वग़ैरा….
अभी बस के अंदर से वेट करने लगा के कब रूही वो नोट पड़ेगी, और जब रूही ने नोट को लिया, एक नज़र अभी को देखा बस के अंदर और रीड किया….. रीड करने के बाद रूही ने अभी को बड़े प्यार भाड़े नज़रों से खड़े होकर देखा, और अभी सिर्फ उस से मुस्कुराया. फिर तुरंत अभी विस्सल करने लगा “प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना” रूही के चेहरे में सीरियसली देखते हुए. रूही ने नोट को दोबारा पढ़ा फिर से अभी को देखा और कहा, “मुझको ऐसे मत देखा कीजिये प्लीज….” मगर अभी रुका नहीं बल्कि फिक्स देखता रहा रूही के चेहरे में, तो रूही हंस पड़ी और उस नोट को लेकर घर के अंदर भाग गयी.
रूही ने और एक बात फिर से कहा था अभी को जिस वक़्त वो नोट उस्सको देने गया था, कहा था, “के हाँ कितने सिगरेट पी रहे हो आप सब देख रही हूँ मैं” और अभी ने उस्सको जवाब दिया के “बुसस कंडीशन वाला दिन तो आने दो सब रोक दूंगा वडा है मेरा.”
और अभी को थोड़ा ग़ुस्सा आने लगा था के क्यों अब रूही उस से भाग रही थी, अब किआ हो गया था के लोगों की परवाह करने लगी थी, इतने दिनों से तो सब खुलम खुला हो रहा था…. क्यों अब रूही लोगों के सामने अभी से बात नहीं करना चाहती थी इस से अभी को तकलीफ होने लगा था, उस्सको बाकी मौका hi कहाँ मिलेगा रूही से मिलने और बात करने की अगर सबके सामने नहीं किया तो? अब जब कुछ दिन रह गए थे काम को एन्ड करने के लिए तो चेंज करना मुश्किल था अभी के लिए, बल्कि अब तो अभी और भी ज़्यादा रूही से बात करना और मिलना चाहता था…. अभी को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था जैसे सब कुछ होने लगा था अब. बहुत बदलाव आगया था रूही की रवैये में…. अभी को यह सब बहोत डिस्टर्ब करने लगा था, उस्सको चैन नहीं था, परेशां रहता था…. उस्का दिमाग़ काम नहीं कर रहा था के अब कैसे रूही से कांटेक्ट करे.
शाम को फ़ोन आया S.Arabia से रूही की माँ गयी फ़ोन लेने, तब रूही टेरेस पर कड़ी उस्सकी वेट कर रही थी अभी को देखते हुए. तो अभी ने उस से पूछा के किआ उस नोट का कोई रिप्लाई नहीं देगी तो रूही ने सिर्फ नाह में सर हिल्लायी मुस्कुराते हुए. अभी को ग़ुस्सा आया. रूही अभी के काफी पास आकर कड़ी हुई जहाँ अभी काम कर रहा था. यह सब छोटी छोटी चीज़ें अभी ग़ौर से नोटिस करता था और रात को अपने डायरी में सब लिखता था. क्यों रूही सबके सामने अब अभी से बात करने से इंकार कर रही थी फिर भी क्यों अभी के इतना करीब आकर कड़ी हो रही थी यह अभी के समझ में नहीं ारः था.
उस्सकी माँ फ़ोन पर बात करके आगयी थी और कहा के 23रद को रूही के पिता आजाएगा. अब रूही और उस्सकी माँ दोनों अभी के बिल्कुल पास खड़े थे, तो इस बार अभी जान बुझ कर वहां से हट गया और बस के दूसरे हिस्से पर चला गया रूही से दूर. अभी थोड़ा नाराज़ था उस वक़्त क्यूंकि रूही ने जिस तरह से इंकार किया था उस्सको नोट की रिप्लाई देने के लिए, उस से अभी को ग़ुस्सा आया था. तो जब अभी दूर चला गया रूही से, उस वक़्त रूही अभी को घुर्र रही थी, शायद रूही समझ गयी थी के अभी उस से नाराज़ है, तो रूही अभी के ग़ुस्से को शायद देखना चाहती थी… अब अभी को ग़ुस्सा इस लिए भी ारः था क्यूंकि सैटरडे था और शाम के 4 बज गए थे फिर भी काम जारी था…. और काम कॉम्प्लिकेटेड स्टेज पर था, अभी नर्वस उस्सकी वजह से भी हो रहा था ऊपर से रूही की बेरुखी….
4.30 को अभी सारे टूल्स को रखने गया वाशरूम में और खुद को वाश करने गया तो रूही उस्सको गहरे जा रही थी, रूही को पता था के अभी ग़ुस्सा है. रूही ने कभी भी अभी को उस से ग़ुस्सा होते नहीं देखा था, यह पहली बार था, तो रूही अभी को ग़ौर से देख रही थी, अभी को पता था के रूही की नज़रें उसी पर टिक्के हुए थे….
फिर जाने का वक़्त हुआ तो अभी ने रूही को अपनी किचन में बर्तन धोते हुए देखा और इशारे से पूछा,
“टीवी पर फिल्म आरही है यू अरे नॉट वाचिंग?”
तो रूही ने उन् बर्तनों को दिखाया अभी को. मतलब साफ़ थी के उस्सक्को बर्तन धोना है तो कैसे फिल्म देखेगी, सब इशारे से बातें हो रहे थे, अभी ने रूही से कहा के जब वो जाने लगे तो वो यहीं कड़ी रहे स्टैर्स पर, के अचानक रहीम आयी और देखा के अभी इशारे से किसी से बात कर रही है, वो मुस्कुरायी, और जब उधर से रूही ने रहीम को देखा तो और ज़ोर से हंससने लगी….. इस लिए के अभी और रूही की छोर्री छोर्री बातें करना पकरि गयी थी रहीम से….
जब अभी तैयार होकर निकला तो रूही अब किचन में नहीं थी, अभी समझ गया के वो टीवी देखने चली गयी, तो अभी ने खुद से कहा थोड़ी देर मेरा वेट नहीं कर सकती थी!
अभी जाने लगा तो रूही के खिड़की के तरफ देखा तो उस्सकी माँ को देखा खिड़की के पास, अभी ने उस से पूछा के रूही किधर है तो माँ ने जवाब दिया “टेलेविज़न” फिर अभी ने उससे रूही को बुलाने को कहा. तो रूही की माँ गयी रूही को बुलाने और अभी को खिड़की के पास आने को कहा तब तक…. मगर जब अभी खिड़की के पास रीच हुआ खुश होते हुए के आखिर अब रूही से कुछ बातें कर पाएगा, मगर माँ अकेली लौटी अंदर से और कहा,
“नहीं रूही नहीं आएगी क्यूंकि उस्का मेहबूब चाचा बाहर है वो रूही पर चिल्लाएगा, सॉरी अभी!”
अभी को फिर बिना रूही से मिले वापस जान पड़ा. बहोत घुसा आया अभी को. सोच रहा था किआ हो रहा है यह सब अब? क्यों मेहबूब बहार है तो नहीं बात करेगी अभी से? इतने दिनों से तो बात करती आयी है हालां के मेहबूब सामने होता था, शुरू में मन किया था मगर फिर बात करती थी मेहबूब के होते हुए तो अब किआ हो गया है….. यह सब सोचते अभी अपना शहर रीच हुआ और शहर में चारों तरफ क्रिस्टमस और नई ईयर का माहौल बना हुआ था, सारे शॉप्स में तरह तरह से रंग बिरंगे चीज़ें मौजूद थे, बहोत सारे भीड़ थे चरों तरफ…. साल के अंत का माहौल था चारों तरफ…. और ऐसे में जब अभी बाकी लड़कों को लड़कियों के साथ देख रहा था तो सोचता के क्यों इस वक़्त वो रूही का हाथ थामे शहर में एक शॉप से दूसरे शॉप में घूम नहीं सकता, कब उस्सकी बारी आएगी?
तो बे कॉन्टिनोएड… (3700 वर्ड्स)