Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya - Page 10 - SexBaba
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Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya

नहीं विक्रम भाई मैं ने रीडर्स के दबाव में आकर नहीं लिखा, मैं कभी रीडर्स के कहने पर कुछ नहीं लिखता, वही लिखता हों जो मेरे प्लाट में है, जो मैं ने सोचा है, जो मेरी बनायी हुई कहानी है.

बहोत सारे रीडर्स जल्दी से कन्क्लूसिओं निकाल लेते हैं... मगर मेरे कहानियों को जब तक कोई एन्ड तक रीड नहीं करता उसस्के समझ में नहीं अत... एन्ड होने के बाद के क्रिटिक को ैसेपट करता हूँ , बीच में कुछ कह देना सही नहीं होता क्यों के ुंकिंग उपदटेस में जो सवाल पहले किया जाता है उस्का जवाब नेक्स्ट या अपडेट के बाद मिल जाता है.... ऐसा hi हो रहा था 2010 में एक्सबी पर जब मैं ने मेरा पहला लव स्टोरी लिखा था जो सुपर हिट हुई थी "यह भी मुहबत hi है" उस कहानी में विजय और ऐसा की कहानी थी जिस में विजय की पॉइंट ऑफ़ व्यू से कहानी चल रही थी मगर ऐसा के बारे में कुछ नहीं ारः था... मेरे प्लाट में मैं ने प्लान कर लिया था कब ऐसा के पार्ट्स आना शुरू होगा, मगर रीडर्स नाराज़ हो रहे थे के सिर्फ विजय के बारे में डिटेल दिए जा रहे हैं ऐसा की नहीं..... मगर जब टाइम आया और ऐसा के बारे में लिखने लगा मैं तो सब छुप हो गए और सब को दिखा के वही सही वक़्त था ऐसा के बारे में बयान करने के लिए

मैं ने किसी के कहने पे नहीं खुद अनुमान लगाया के कितने उपदटेस हो गए मगर अभी तक रूही की सेक्रेस्ट ज़ाहिर नहीं हुई है... ाचा hi था सस्पेंस स्टैंड बी था मगर वक़्त था उस part को लिखने की इसी लिए ुओडेट्स तक लिखब गया था और अब्रप्टली उस्सको रोक दिया अस्सल में अपडेट भी साथ में होना चाहिए था और वो करता तो 5700 वर्ड्स ओवर 7000 वर्ड्स हो जाता इसी लिए वहीँ अबरपोटल्य रोक दिया था उस अपडेट को
 
हाहाहाहा, सही कहा भाई

मगर आप ने कहा था के मैं ने उस गक्ली में जाना चोरर दिया तो आप वहां चले जाओगे मगर आप ने इतना देर लगाया के मुझे वापस आना hi पड़ा उस गली में :lol:
 
किआ आप ने 28 उपदटेस सब एक साथ पढ़ दिए सुनील भाई? :ओहनो:

एनीवे आप का स्वागत है इस थ्रेड पर सुनील भाई

मुझे बहोत ख़ुशी हुई आप को देख कर एंड थैंक्स ववर्य वैरी मच भाई
 
अपडेट 29 थे नेक्स्ट डे

जब अभी नाहा कर वापस अपने कमरे में आया तो नैना डायरी हाथ में लिए अभी को देख रही थी और कहा,

“भाई शी इस नॉट ा वर्जिन? मगर क्यों उस्सने डिटेल नहीं बतायी आप को?”

अब आगे….

अभी ने नैना की बात सुनकर रीलीज़ किया के उस्सको वो part नहीं लिखना चाहिए था, लिखते वक़्त वो भूल hi गया था के नैना वो सब पढ़ने वाली है. तो वो जल्दी से नैना के पास जाते हुए उस्सको फुसलाते हुए पहले तो यह कहा के उस बारे में माँ को बिल्कुल भी नहीं बताना है. वो एक सीक्रेट की तरह सब से घर में छुपाना है. नैना मान गयी के अपनी माँ से वो बात नहीं बताएगी, मगर फिर भी पूछा के डिटेल क्यों नहीं बतायी रूही ने.

तो अभी ने नैना को यह कहते हुए समझाया,

“नैना, अब तुम्ही बताओ किआ इस बात को और ज़्यादा पूछ कर उस्सको परेशान करता किआ? किआ यह ठीक होता के ऐसे नाज़ुक बात को मैं उस मौके पर उस से और ज़्यादा पूछ सकता था, फिर भी मैं ने पूछा तो था नाह के किश ने किया कैसे हुआ, कौन था वो…. एहि सब पूछने के लिए मैं ने 100 बार सोचा पहले, उस्सने बताना शुरू किया फिर रुक गयी यह कहते हुए के वो उस बारे में बात नहीं करना चाहती. अब तुम्ही सोचो नैना, अगर उसस्के साथ कोई दुर्घटना टाइप कुछ हुआ होगा तो किआ अगर उसस्के बारे में बात करती तो वो उन् दिनों को वापस नहीं जीती? उस्सको और दुःख नहीं होता? होता नाह? तो मैं नहीं दुःख पहुंचना चाहता था उस्सको इसी लिए मैं ने और नहीं पूछा!”

नैना ने फिर भी कहा,

“भाई मगर उस्सको आप को बताना चाहिए था नाह?”

अभी ने नैना से कहा.

“नैनो, मान लो के तुम रूही हो और तुम्हारे साथ कुछ वैसा हुआ हो तो किआ तुमको अच्छा लगेगा अगर उस बारे में कोई तुमसे सवाल करे और तुमको सब कुछ डिटेल में बताने के लिए कहे? तुमको ाचा लगेगा उस बारे में फिर से सब कुछ डिटेल में बताने को? बोलो? अरे फिल्मों में नहीं देखा के कोर्ट में किसी लड़की को किश तरह से ब्लामे किया जाता है अगर किसी मर्द ने उसस्के साथ रपे किया हो या ज़बरदस्ती किया हो तो उस लड़की से किश तरह के सवाल किया जाता है और उस्सको सब बताने में कितनी शर्मिंदगी महसूस होती है? तो सोचो रूही को कैसा फील होगा वो सब बताने में?! मैं ने यह सब सोचा इस लिए और कुछ पूछा hi नहीं….. अगर कभी रूही को बताना है तो बताएगी, मगर मैं कभी भी इस बात को नहीं चरूँगा, मैं उस से प्यार करता हूँ उस्सकी विर्जिनिटी से नहीं, मेरे लिए उस्का कोई इम्पोर्टेंस hi नहीं है!”

नैना ने अपने भाई के बातों को सुनकर उस्सको ज़ोर से गले लगाया और कहा,

“मुझको मेरे भाई पर गर्व है. गॉड ब्लेस्स यू भाई!”

तो इस बारे में फिर कभी नैना और अभी में बात नहीं हुई. और नैना ने किसी को भी घर में इस बारे में बताया hi नहीं. यह बात सिर्फ भाई और बेहेन के बीच hi रही.

मगर उस शाम को नैना ने अभी को बहोत चड्डा यह पूछते और अनुमान लगाते हुए के कल रात रूही के साथ किआ किआ किया उस्सने, के एक फुल रात गुज़ारा उस्सने रूही के साथ तो कितनी हसीं रात हुई होगी दोनों के….

अब उस रात को डायरी में अभी ने अब अपने फीलिंग्स को लिखा और उस्सको उस वक़्त किआ फील हो रहा था, रूही को कितना चाहता है और मिस कर रहा है वो सब लिखा उस ने. अभी ने यह भी लिखा….

“ी ऍम वेटिंग फॉर तहत डे व्हेन रूही विल बे हेरे ों थिस बीएड टुगेदर विथ में एंड ी विल मेक हेर रीड आल थिस. शी विल थें रीड एंड क्नोव व्हाट ी वास् गोइंग थ्रू थे डेज ी वोरकेड इन हेर यार्ड. ठोस वेरे थे मोस्ट ब्यूटीफुल डेज ऑफ़ माय लाइफ व्हिच ी विल नेवर फॉरगेट. ी मेट लव, ी मेट थे ओने ी वास् वेटिंग फॉर, ी मेट माय सोल मात इन तहत यार्ड. एंड ी ऍम ग्रेटफुल तो गॉड एंड माय जॉब. िफ़ ी वास् नॉट दोंग थिस जॉब ी वोउल्ड नेवर हैवे गॉन तेरे, वोउल्ड हैवे नेवर नोन हेर, वोउल्ड हैवे नेवर मेट हेर….”

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सुबह 6 बजे अभी वहां पहुँच गया था और रूही उस से पहले तैयार अभी का वेट कर रही थी अपने कमरे की खिड़की पर तक लगाए, मैं रोड पर नज़रें बिछाये के कौन सी बस से अभी आएगा. हर बस जो गुज़रती रूही कहती ‘अब आएगा, अब आया होगा, इस बस में तो ज़रूर आएगा….’ और जब अभी को देखा मैं रोड से उस्सकी आँगन में दाखिल होते हुए रूही की आँखें भर आयी…. बड़ी इमोशनल थी वो भी, छोटी छोटी बातों में उस्सकी आँख भर आती थी, जैसे आसानी से आँखें चालक जाती थी उस्सकी, अब किआ सोचते हुए उस्सकी आँखे इस वक़्त अभी को देख कर छलकी थी यह वही जाने.

अभी की नज़रें भी आँगन में दाखिल होते हुए सबसे पहले उस्सकी खिड़की पर hi पड़े थे और दोनों के नज़रें चार हुए, अभी ख़ुशी से मुस्कुराया क्यूंकि वो रास्ते भर रूही को सोचते हुए hi सफर किया था, उसी को दिल ो दिमाग़ में बसाये हुए अत था हर सुबह. तो रूही भी उसी को देखती रही और अभी सीधा उस खिड़की तक गया, और ऊंचा होने से उस्सको बिल्कुल तकलीफ नहीं हुई अपने गाल को रूही के होंठ के पास करने को, जिस पर रूही ने बड़े प्यार से पप्पी दिया, और खिड़की से hi रूही ने अपने दोनों बाज़ू को अभी के गले में दाल दिया और अभी ने भी रूही को पाकर लिया जिस से रूही का आधा जिस्म खिड़की के बाहर आगया था, और दोनों ज़ोरों से हंससने लगे….. रूही को अभी ने फाइनली कमरे के बाहर निकल दिया उस खिड़की से, नंगे पैर रूही अब बाहर थी और दोनों के हंसी नहीं रुक रहे थे तो अंदर से रूही की माँ ने जब दोनों को हँस्ते सुना तो देखने आयी, और वो रूही की कमरे में आयी तो देखा के रूही बाहर है अभी को थाम कर ज़ोरों से दोनों हंस रहे थे…..

अब माँ खिड़की से तक लगाया और दोनों को देखते हुए समझने की कोशिश कर रही थी के किआ हुआ, तो रूही अपनी माँ को देख कर और भी ज़ोरों से हंससने लगी, माँ ने पूछा के हुआ किआ क्यों पागलों की तरह हंस रही hai,to रूही ने कहा;

“माँ मेरी चपल दो नाह, मैं नंगे पेयर हूँ!!”

तो माँ ने वापस कमरे में देखा के रूही की स्लिपर्स अंदर है तो अब उस्सने रीलीज़ किया और हँस्ते हुए पूछा,

“किआ तुम खिड़की से बाहर गयी? कैसे?!!”

रूही ज़्यादा जोरर से हँस्ते हुए अपने ऊँगली को अभी के तरफ करते हुए कहा,

“मुझको अभी ने निकला हीहीहीहीहीहीहीहीही!”

अभी की हंसी भी नहीं रुक रहा था, तो रूही की माँ ने कहा,

“यह चोर्रों वाली काम होती है खिड़की से अंदर आना या बाहर जाना अभी किआ तुम मेरी बेटी को भगा के लेजाने को तो नहीं प्लान किया है?!”

इस पर अभी भी ज़्यादा हंससने लगा फिर कहा,

“अगर आप ने इस्सके हाथ मुझे नहीं सौंपा तो एहि करना होगा मुझे, इसी खिड़की से उदा ले जाऊंगा रूही को एक दिन!!”

रूही की माँ ने उस्सकी स्लिपर्स दिया रूही को और रूही ने तब उस्सको पहना और अभी का हाथ पाकर के घर के पीछे लगाई अपनी रोमांस करने वाले कोने में कुछ प्यार के लम्हे गुज़ारने के लिए अभी के साथ…..

उस डरुअन चिपका चिपकी में रूही का हाथ अभी के पंत के पॉकेट पर पड़ा जहाँ उस्सको लगा के सिगरेट का पैकेट था, उसस्के जेब में हाथ डाला रूही ने तो निकला एक नोटबुक. अभी के पास हमेशा एक छोटा सा नोटबुक हुआ करता था, लाल रंग का, और पेन तो बेशक हमेशा अभी के कमीज़ के बटनहोल में हुआ करता था, जो अक्सर रूही के बाल में फंस जाया करता था. पेन पार्कर था अभी के पास जिसका रिफिल वो चेंज करता था इंक एन्ड होने के बाद. सिल्वर कलर का पार्कर पेन हुआ करता था अभी का.

उस दिन रूही ने अभी का वो नोटबुक लिया और कहा,

“मैं ने आप के लेटर का जवाब नहीं दिया था नाह? तो यह नोटबुक मेरे साथ रहने दो आज इस में मैं कुछ लिखूंगी आप के लिए, शाम को जाते वक़्त ले लेना वापस, और अपना पार्कर पेन भी दीजिये, इसी से लिखूंगी, ऐसे मेंहगे पेन से कभी लिखा hi नहीं मैं ने लाइफ में.”

अभी ने दे दिया अपने नोटबुक और पेन दोनों रूही को.

दिन में जब अभी काम में लगा हुआ था तो देखा के अचानक रूही की माँ बहोत तेज़ क़दमों से आँगन से गुज़रते हुए मैं रोड के तरफ जा रही थी… अभी को कुछ समझ में नहीं आया के किआ हुआ, लगता था कुछ हुआ था, फिर एक पल बाद रूही भी उसस्के पीछे गयी, अभी बस के अंदर था और कुछ पूछा नहीं मगर रूही को नज़रों से फॉलो किया, तो देखा के रोड को क्रॉस किया माँ बेटी दोनों ने, रोड क्रॉस करने के बाद तो फिलिंग स्टेशन होता था और दोनों उसी तरफ गए…..

अभी बस से निकला और दादा जी से पूछने गया के किआ हुआ कहाँ गए दोनों धडपडाते हुए?

दादा जी ने बताया के रूही के पापा ने फ़ोन किया है सऊदी अरबिया से, उसी से बात करने गए हैं दोनों. तो अभी ने पूछा तो घर में इधर दोनों को कैसे पता चला के वहां फ़ोन आया हुआ है? तब दादा जी ने कहा के फिलिंग से कोई आया था बुलाने को.

और लंच टाइम में जब अभी रूही से मिला तो पूछा किआ कहा उसस्के पिता ने तो रूही ने कहा के दो हफ्ते बाद वो वापस आरहे हैं. रूही खुश थी, उस्सकी माँ भी. वो तीन साल से S.Arabia में था. अभी ने रूही से उसस्के पापा के बारे में सवाल किया के वो कैसा आदमी है, स्ट्रिक्ट है, सीवियर है, बोल्ड है या कैसा है. तो रूही ने कहा,

“मेरा पापा क्रीम है. बिल्कुल माखन. 100% नरम मिज़ाज का इंसान है, बिल्कुल कूल, ठंडा दिमाग़ वाला, जिसको ग़ुस्सा करना hi नहीं अत कभी.”

अभी खुश हुआ और कहा,

“तब तो उस्सको हमारे बारे में पता चला तो उस्सको ऐतराज़ बिल्कुल भी नहीं होगा?!”

रूही ने ख़ुशी से कहा,

“बिल्कुल भी नहीं, मैं ने हाँ कहा तो वो कभी एक वर्ड भी नहीं बोलेगा, जिस में मेरी ख़ुशी उसी में उस्सकी.”

अभी: “ग्रेट थें, ी ऍम लकी!”

रूही: “हाँ इस मामले में आप बिल्कुल लकी hi हो, यू विल लव माय पापा वैरी मच ी ऍम सूरे!”

अभी: “एंड हे? विल हे लव में, एंड लव में अस ा son-in-law?”

रूही: “ऑफ़ कोर्स हे विल. माय एल्डर sister’s हस्बैंड तहत इस बी बीआरओ इन लॉ इस ऑलवेज लव्ड एंड चेरिषद माय आल ात होम, सो विल बे यू, राथेर यू विल बे मोरे स्पेशल बिकॉज़ यू अरे यंगर, एंड वैरी हैंडसम, यू अरे ा हीरो एंड माय डैड विल गेट ा हीरो अस ा सोन इन लॉ सो no डाउट हे विल बे हैप्पी एंड लव यू”

अभी ने रूही हो अपने बाहों में भड़ते हुए कहा,

“तुम मुझे चढ़ा रही हो नाह? जो मैं तुमको दीखता हूँ, ज़रूरी नहीं के तुम्हारे पापा को भी वही दिखूं, कुड बे हे विल नॉट लिखे में ात आल!”

रूही: “okay जब वो आये तो खुद hi देख लेना मैं कुछ नहीं कहने वाली अब!”

अभी: “होप के हमारे यहाँ के काम एन्ड होने से पहले वो आजाये.”

रूही: आप ने कहा तहत 24तह दिसंबर को एन्ड हो रहा है नाह काम? आज 8तह है, पापा 19तह को आरहे हैं, सो यू विल स्टिल बे हेरे!”

अभी: “ग्रेट ी विल गेट 5 डेज तो क्नोव हिम, वो बस के पास ज़रूर आएगा, हम किआ काम कर रहे हैं देखने तो आएगा, तो मैं उस से बात करूँगा.”

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शाम को काम ख़तम करने के बाद अभी जब वाशरूम गया तो रूही नज़र नहीं आरही थी. बल्कि पहले एक घंटे से नज़र नहीं आयी थी और अभी को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था, उस्सने सीटी भी बजायी उस गाने की फिर भी रूही नहीं दिखी और न hi उस्सकी माँ नज़र आरही थी और मेहबूब सईद से बात कर रहा था ठीक बस के सामने. अभी को डर था के कहीं उस्सको बिना रूही को देखे hi घर वापस नाह जाना पर जाए आज.

और जब बस को पास किया अभी ने और रूही के खिड़की के तरफ देखा, तो रूही नज़र आयी उस्का इंतज़ार करते हुए पता नहीं कबसे… रूही उस्सको कुछ कहने जा रही थी मगर अभी ने उस से पहले अपना नोटबुक मांग लिया…… यह चौथी बार हुआ था के रूही कुछ कहने जा रही थी मगर नहीं कहा था, यह घर जाकर अभी ने नोट किया था डायरी में के 4 बार रूही ने कुछ कहना चाहा था मगर नहीं कह पायी थी, और डायरी में एक्सएक्ट दिन और वक़्त लिखा हुआ था.

तो रूही गयी नोटबुक और अभी की पेन लाने तब तक अभी सईद से बात करने लगा, मगर सईद जाने लगा तो मेहबूब ने अभी से पूछा के अब वो किआ वेट कर रहा है, तो अभी ने कहा के रूही एक बुक देने वाला है उससे.

फिर मेहबूब चला गया और अभी वापस गया खिड़की के पास और रूही की माँ किचन के चौकठ से अभी को जाते हुए देख रही थी मुस्कुराते हुए, तो जब अभी रूही से मिला खिड़की के पास तो उस से कहा के उस्सकी माँ देख रही थी उस्सको इस तरफ आते हुए, तो रूही ने कहा,

“देखने दो किआ बुराई है?!”

अपना पेन और नोटबुक लेने के बाद अभी ने रूही से कहा,

“अब जाओ किचन के स्टैर्स पर प्लीज!”

रूही ने नटखटी अदा में हँस्ते हुए पूछा,

“क्यों?! वहां क्यों जॉन मैं?!”

अभी: “ोफो तुमको अछि तरह से पता है के मैं घर वापस जाते हुए तुमको देखना पसंद करता हूँ नाह जाओ नाह प्लीज….”

और अभी ने उस्सको bye किया और मैं रोड के तरफ बढ़ने लगा मूढ़ कर देखते हुए के रूही किचन के पास गयी या नहीं… और मैं रोड रीच होने से पहले देखा के रूही ने उस्सकी बात मानी और आयी थी किचन के स्तैर पर और अभी को देखते हुए मुस्कुरा रही थी….. यह छोटी छोटी चीज़ें अभी के लिए बहोत इम्पोर्टेन्ट था, सिर्फ रूही वहां नहीं आती तो अभी की शाम और रात बहोत बुरा गुजरने वाला था.

बस में जाते वक़्त अभी ने अपने नोटबुक चेक किया तो उस में बुसस सैकड़ों लव थॉट्स और प्रोवर्ब्स लिखा हुआ था रूही ने…. मुस्करात हुए अभी सब पढता गया बार बार. यह पहली बार थी के रूही की हैंडराइटिंग मिला था अभी को वो भी अपने पर्सनल नोटबुक में, जिस्सको अभी उम्र भर रखने वाला था.

तो बे कॉन्टिनोएड…. (2521 वर्ड्स)
 
बहोत शुक्रिया सुनील भाई अब आप पर स्पैमिंग की चार्ज लगे हैं तो मेरे सारे अपडेट पर एक एक करके रिलीज देते तो मुझे 28 रिलीज मिलता नाह यहाँ भाई :डी

आप ने 28 अपडेट के बदले सिर्फ 3 या 4 कमैंट्स किये हैं बता दो ठेकेदारों को :लाफ:
 
एक्साक्ट्ली, अभी िस्ख की जादू में जकरा हुआ है तो उस्सको सिर्फ रूही का प्यार दिख रहा है जो रूही ने दिखाया तो था अभी को....

ुर हाँ अभी सच में बहोत भोला है और दिल का बिल्कुल साफ़ तो जैसे वो प्यार करता है रूही को वो समझ रहा है के रूही भी उस्सको वैसे hi प्यार करती है
 
बहोत शुक्रिया कामदेव भाई, धीरे धीरे तीनगर वाला इश्क में डूबा अभी को दुन्यादारी आ hi जाएगी भाई :डी

इश्क कबि निकम्मा बना देता है तो कभी ऐसा सबक देता है के इंसान को मातुरे बना देता है :डी
 
अपडेट 30 फ्रेंड्स ऑफ़ अभी ात तहत प्लेस

काम एडवांस स्टेज पर पहुँच चूका था. जॉर्ज मैकेनिक ने इंजन स्टार्ट कर दिया था और इलेक्ट्रीशियन ने सारे वायर्स फिट कर दिए थे, इंजन की कनेक्शंस से लेकर पुरे बस में सारे बल्ब्स, लाइट्स, हेडलाइट्स, फ्लेशेर्स, विपर्स, इंडिकेटर के लाइट सब सही चलने लगे थे. इन् सब को अभी के टीम के साथ मिलकर काम चलना था क्यूंकि वायर्स सारे बस के अंदर से पास होते थे, तो कई बार ऐसा हुआ था के अभी या सईद की ज़रुरत पड़े थे एलेक्ट्रिशन्स को उन् लोगों के हेल्प लेने के लिए ताके उन् के इलेक्ट्रिक वायर्स कोई ऐसी जगह से नहीं गुज़रे जिस से बाद में कनेक्शन के प्रोब्लेम्स हो. अभी का जॉर्ज और इलेक्ट्रीशियन से ाचा बनता था.

अब टाइम आया था पेंटर को ज्वाइन करने की. उस्सको बस को पेंट करना था, मगर उसस्के लिए अभी के टीम को काम फिनिसिंग तक करना था तब वो पेंट कर पाटा. मगर फिर भी आगया था प्रिमर पेंट लगाने सभी उन् जगहों पर जहाँ अभी के टीम ने काम कम्पलीट कर दिए थे. पेंटर का नाम था सुनील. जिस दिन सुनील आया अभी हैरान हुआ यह देख कर के सुनील डायरेक्ट रूही से बात करने गया और दोनों कुछ देर तक बात करते रहे रूही के किचन के पास.

सुनील एक बहोत hi ाचा इंसान था. उसस्के चेहरे और स्वाभाव से दीखता था के वो कितना ाचा इंसान है. उस्का चेहरा बहोत सिम्पैथेटिक चेहरा था, एक मुस्कान रहता था हमेशा उसस्के चेहरे पर. लगभग 30 से 35 साल का होगा और शादी शुदा था.

अभी के दो बहोत अच्छे दोस्त बने थे रूही के आँगन में काम करते हुए. वो थे जॉर्ज और सुनील. जॉर्ज भी कुछ उसी टाइप का हस्मुख इंसान था, जो कभी भी ग़ुस्सा नहीं करता और कूल रहता था. उस्का अभी से हमेशा बनता था ख़ास कर वो अभी को सपोर्ट करता था रूही के प्यार को लेकर.

और सुनील भी वैसा hi इंसान था. कहते हैं नाह, ओप्पोसिट्स गेट अत्त्रक्टेड तो एच इतर, तो शायद अभी की इसी लिए उन् दोनों से बहोत बनता था क्यूंकि अभी हॉट टेम्पर वाला था, उस्सको ग़ुस्सा बहोत जल्दी अत था, उस्सको अपने ग़ुस्से पर काबू रखना नहीं अत था, और वह दोनों अभी के अपोजिट थे, शायद इस लिए उन् दोनों से अभी की अच्छी दोस्ती हुई थी. वह दोनों अभी को बहोत पसंद करते थे और जब भी अभी ग़ुस्सा होता काम को लेकर तो जॉर्ज और सुनील हंसः अभी को शांत कराते थे.

जब सुनील से अभी की दोस्ती हो गयी तो सुनील को पता चला के अभी रूही से प्यार करता है, कैसे पता नहीं चलता जब बस के सारे लोगों को पता था और सब देख सकते थे किश तरह दोनों आपस में इशारे से बात करते हैं फिर छुप कर घर के पीछे मिलते हैं ेट्स…. जब सुनील ने वो सब देखा तो वो खुश हुआ. और उस बारे में अभी और सुनील की बात हुई.

तो दोनों के दोस्ती होने के बाद अभी को पता चला के सुनील कुछ साल पहले रूही की बड़ी बेहेन से प्यार करता था. रूही की बेहेन भी उस से प्यार करती थी. मगर उन् दिनों सुनील बेकार था, ढंग का काम नहीं था उसस्के पास, और रूही की बेहेन को बहोत सारे शादी के प्रोपोज़ल्स आरहे थे. तो रूही के पेरेंट्स ने दबाव डाला था सुनील और उसस्के पेरेंट्स पर के अगर वह चाहते हैं के सुनील उनके बेटी से शादी करें तो सुनील को कोई भी काम तो करना होगा नाह!

और सुनील ने खुद रूही के पेरेंट्स को कह दिया के रूही की बड़ी बेहेन के लिए कोई भी दूसरे प्रपोजल को एक्सेप्ट कर लें. सुनील इतना चाह था के वो नहीं चाहता था के उस्सकी बेकारी की वजह से रूही की बेहेन की ज़िन्दगी बर्बाद हो और किसी अचे घर के रिश्ते चुत जाये उस्सकी.

सुनील इसी इलाके का रहने वाला था, तो सबसे उस्सकी जाना पहचान थे. और क्यूंकि उस्सने खुद रूही की बड़ी बेहेन को कहीं और शादी करने के लिए आज़ादी दे दिए थे, रूही के पेरेंट्स उस्सको रेस्पेक्ट करते थे. अपनी बेकारी की वजह से उस्सने अपने प्यार को क़ुर्बान किया था.

उसस्के बाद से हमेशा सुनील और रूही की फॅमिली से एक ाचा रिलेशनशिप बना रहा. उस्सको छेड़ते थे वहां के लोग के वो मिस हुआ जमाई था उस घर का.

रूही की बड़ी बेहेन की शादी के 5 साल बाद सुनील ने कहीं और शादी किये, क्यूंकि 5 साल बाद सुनील की लाइफ में तब्दीलियां आये थे, और वो अस पेंटर एक कंपनी में काम करने लगा था.

सुनील की शादी में रूही की पूरी फॅमिली इन्वितेद थे यहाँ तक के रूही की बड़ी बेहेन और पति भी आये थे. उस्सकी पति को कभी भी पता नहीं चला के सुनील कभी उस्सकी पत्नी से प्यार करता था.

तो इस तरह से रूही तब छोटी थी मगर उस्सकी दोस्ती भी बानी रही सुनील के साथ. जीन दिनों रूही कॉलेज जाती थी तो सुनील के घर के पास से गुज़र कर जाती थी, और कोई लड़का रूही को छेड़ता या तंग करता तो रूही सुनील से कहकर लड़कों को भगति थी.

अब जब अभी को पता चला के सुनील इतना क्लोज है उस फॅमिली से तो वो सुनील से रूही के बारे में और ज़्यादा जानना चाहा.

सुनील को जब सब दिख गया के अभी और रूही एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं तो सुनील ने अभी से कहा,

“मुझे बहोत ख़ुशी हुई यह जान कर के तुम रूही को इतना चाहते हो. उस्सको कभी नहीं चोरर्ण, उस्सको बहोत प्यार देना, बहोत अच्छी लड़की है वो!”

अभी को अच्छा लगा सुनील की उन् बातों को सुनकर. और एक दिन अभी ने सोचा के किआ सुनील को रूही की विर्जिनिटी वाली बात शायद पता होगा अगर वो इतना क्लोज है उन् लोगों से तो……

अभी ने यह सोच कर उस बात को पूछना चाहा सुनील से, के सुनील इतना अच्छा इंसान है के वो अभी से कभी झूट नहीं बोलेगा, और उस से सच नहीं छुपाएगा. अभी को यकीन था के सुनील वैसा इंसान नहीं है के वैसी बात को वो उछलेगा या किसी से भी कभी उस बारे में बात करेगा. सिर्फ इस लिए उस्सने एक दिन रूही के बारे में बात करते हुए पूछा के किआ रूही की लाइफ में कभी कोई था? किआ रूही ने कभी किसी से प्यार किया था?

जवाब में सुनील ने बताया के जीन दिनों रूही कॉलेज जाती थी, तो ट्यूशन के लिए किसी एक टीचर के घर जाना पड़ता था उस्सको, और उन् दिनों रूही ने सुनील को बताया था के वो टीचर उस से प्यार करता है, मगर उसस्के आगे किआ हुआ कभी पता नहीं चला. मगर अभी को विर्जिनिटी वाली बात सुनील से पूछने की हिम्मत नहीं हुई और उस्सने याद किया के रूही ने कहा था के किसी को भी नहीं पता है उस बारे में. तो शुक्र है के अभी ने उस बात के बारे में नहीं पूछा सुनील से.

सुनील ने अभी को ेन्सॉरगे किया के रूही के पिता बहोत ाचा इंसान है उसस्के आने के बाद अभी उस से बात कर सकता है और उस से रूही का हाथ मांग सकता है वो कभी इंकार नहीं करेगा, इस बात का यकीन दिलाया सुनील ने अभी को.

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अगले दिन, सुबह को जब अभी काम पर पहुंचा तो देखा के रूही सवेरे सवेरे कपडे धो रही थी, बहोत सारे कपडे थे उस्सकी बकेट में, रूही ने अभी को आते हुए नहीं देखा उस्सने पीठ किया हुआ था अभी से. और अभी को हैरानी इस बात की हुई के उस्सकी माँ उसस्के साथ नहीं थी तो अभी ने सोचा के क्यों आज इतने सारे कपडे रूही अकेली धो रही है.

वो उसस्के पास गया, एक दूसरे को पुप्पियाँ दिए दोनों ने और 7 बजे तक बात किये, और अभी काम पर लग गया अपना.

काम करते वक़्त हमेशा की तरह अभी सैकड़ों बार रूही को देख रही थी और वो भी वाशिंग स्टोन से हज़ारों बार अभी को कभी देखती, कभी हस्ती, कभी मुस्कुराती….. ऐसा चलता रहा, और जब रूही कपडे सूखने को तंग रही थी तो अभी बस के पीछे वाले हिस्से पर काम कर रहा था जिस से रूही को उससे देखने में मुश्किल हो रहा था तो अभी ने देखा के किश तरह से रूही बार बार हट कर, झुक कर या जगह बदल कर अभी को देख रही थी.

और जब रूही टेरेस पर पोंछा लगाने आयी तो उस्सकी माँ साथ थी और रूही ने अचानक अपने जीब निकाल कर चिढ़ाया अभी को और उस्सकी माँ ने हँस्ते हुए उस से पूछा,

“किश के साथ जीब निकली तुमने!”

रूही ने ऊँगली दिखाया अभी को दिखते हुए और ज़ोर से हंस पड़ी…. अभी को बहोत ाचा लगा उस्सकी वो अदा….

अभी सोचता रहा के सिर्फ उसी के साथ रूही वैसा करती है और किसी के साथ भी नहीं, इतने सारे लोग हैं बस में काम करते हुए और सिर्फ अभी को जीब से मोचक करती है तो मतलब साफ़ है के सिर्फ अभी के लिए वो स्पेशल ट्रीट था. जब अभी नया था उस आँगन में तब तो रूही ने कभी वैसा नहीं किया था अभी के साथ सिर्फ क्लोसनेस्स बढ़ने के बाद वो वैसा करने लगी थी, तो अभी के समझ में आया के यह रूही के तरफ से अभी को प्यार करने का एक इशारा था…. इस से अभी को बहोत ख़ुशी मिलती थी.

लंच टाइम में जब दोनं बातें कर रहे थे तो क्यूंकि चरितमास करीब ारः था अभी ने रूही से कहा के वो उस्सको एक क्रिसमस विशिंग कार्ड पोस्ट करेगा एक लेटर के साथ, उस्सको दूसरी लेटर मिलेगा अभी के तरफ से मगर वो उस्सको हाथ में नहीं देगा बल्कि पोस्टमैन उस्सको वो लाकर देगा.

रूही ने मन किया यह कहते हुए के सबको पता चल जाएगा के पोस्टमैन ने उस्सको अभी की लेटर दिया है, उस्सने मन किया. मगर अभी ने ज़िद किये के वो वैसे hi पोस्ट करेगा, और कहा के इसी इलाके में पोस्ट करेगा और खुद पोस्टमैन को उस्सको डिलीवर करते हुए भी देखेगा… रूही बार बार कहती रही के कुछ नहीं पोस्ट करने को….

लंच के बाद रूही इस दिन को दिन भर अभी के सामने रही. सोने नहीं गयी थी वो, अभी के सामने रही दिन भर जो अभी को बहोत ाचा लगा.

एक बार रूही फ़र्ज़ीनः की बाइसिकल चढ़ रही थी, बस के पास से गुज़री तो अभी ने उस्सको रोका, वो बस के पीछे रुकी ताके बाकी के लोग नहीं देख पाए उस्सको अभी से बात करते हुए. रुक कर उस्सने अपनी मीठी और सुरीली आवाज़ में पूछा,

“किआ है जी, क्यों रोका मुझको आप ने जी!”

अभी ने पूछा के क्यों वो नहीं चाहती के अभी उस्सको पोस्ट से कुछ सेंड करे. तो रूही ने कहा,

“ी विल गेट ट्रबल्स विथ माय पेरेंट्स.”

अभी: “बूत यू विल रिसीव आईटी इन योर ओन हैंड्स, no ओने विल क्नोव व्हाट वास् इन थे लेटर….”

रूही “no, no no!”

अभी: “क्यों? इस से पहले कोई था जो तुमको खत वग़ैरा लिखता था? पेनफ्रिएंड्स थे किआ तुम्हारे? किसी को लिखती थी तुम? पता है मेरे कई पेनफ्रिएंड्स है, तुम्हारे भी रहे होंगे है नाह?!”

सईद उस तरफ आ रहे थे तो रूही ने नाह कहते हुए वहां से निकल गयी.

उसस्के बाद रूही सामने hi रही ….

हर रोज़ करीब 1 बजे रहीम जूस सर्वे करती थी सारे वर्कर्स को. एक ट्रे में जूस के ग्लासेज होते थे, जिस्सको फिनिश करने के बाद हमेशा अभी hi ट्रे वापस करने जाता था. और आज जब अभी ट्रे वापस करने जा रहा था तो रहीम ने रूही से कहा,

“प्लीज वो ट्रे लेलो अभी से, मैं कुछ और लिया हुआ हूँ हाथ में….”

तो रूही गयी अभी के हाथ से ट्रे पकड़ने, अब रूही के समझ में नहीं ारः था के कैसे ट्रे संभाले और एक बोतल था साथ में लेने को, तो अभी ने तो एक हाथ से ट्रे थमा हुआ था और एक हाथ में बोतल मगर रूही ने दोनों हाथ से ट्रे पकड़ा तो समझ नहीं पा रही थी के कैसे बोतल को लें, इस लिए अभी उसस्के चेहरे में देखते हुए हंस रहा था, और रूही जैसे लड़ रही थी ट्रे और बोतल के बीच किआ संभाले, फिर दोनों हंससने लगे तो रहीम खुद आयी अभी से ट्रे पकड़ने और रूही ने बोतल लिया अभी के हाथ से और जाते हुए वही अपनी जीब से मोचक करती हुई गयी अभी को और कहती गयी,

“कितना बड़ा हाथ है उस्का, एक hi हाथ से ट्रे पकड़ा था सारे ग्लासेज के साथ, और मैं दोनों हाथों से ट्रे नहीं संभल पा रही थी!”

उस्सको सुनकर अभी, जॉर्ज, टोनी, सुनील सब हंससने लगे.

शाम करीब 4 बजे अभी को बस के ऊपर काम करना था. कड़ी धुप थी, सब महिलाएं बाहर आगाँ में थे, रूही की माँ, रूही, रहीम और श्वेता भी. अभी धुप में झुलस रहा था, बार बार रूही उस्सको देख रही थी जैसे अफ़सोस करते हुए के धुप से अभी बस के ऊपर झुलस रहा है….

अभी ने ऊंची आवाज़ में कहा,

“उफ़ यह गर्मी सहा नहीं जा रहा किसी के पास कोई हैट नहीं है मुझे इस धुप से बचने के लिए”

तुरंत रूही की माँ ने रूही से कहा,

“रूही जा अपने दादा की हैट देदे अभी को देख कितना धुप है ऊपर!”

ख़ुशी से रूही भागी घर के अंदर और अपने दादा जी के गार्डन में काम करने वाले हैट लेकर आयी अभी को देने… मगर अभी तो बस के ऊपर था, कैसे देती वो अभी को. तो अभी बस के शामे वाले एन्ड पर गया और रूही को हैट को थ्रो करने के लिए कहा… सब लोग बस के अंदर से, बाहर से, साइड से, सभी की नज़रें रूही पर थी देखते हुए के किआ वो अभी तक हैट पहुंचा पाती है या नहीं… अब वैसे मूवमेंट्स करने से एक जवान लड़की की बॉडी कैसे पोजीशन में कैसे दिखेगा, किआ दिखेगा, क्लीवेज, तइस, या बॉडी का कौन सा part hillega….kuch लड़के और मर्द शायद वो देखना चाहते थे, और कोई नार्मल देख रहे थे मगर खुद अभी रूही की अदा को, उस्सकी मुस्कान को, उस्सकी धुप से बचने के लिए आँखों से सामने एक हाथ से शादी करने को, वो सब अदमीरे कर रहा था जिस वक़्त रूही हैट ऊपर के तरफ उड़ाने वाली थी….. मगर अभी को बहोत ग़ुस्सा आया जब पता नहीं किधर से अचानक रेज़ा आया और रूही के हाथ से हैट लेकर अभी के तरफ फेंका!!

अभी ला बबूला हो गया रेज़ा को वैसा करते हुए देख कर! रूही को पता था के अभी को अच्छा नहीं लगा जब रेज़ा ने उस्सकी हाथ से हैट लिया तो और अफ़सोस वाली नज़रों से अभी को देखा ऊपर. और वापस चली गयी अपनी माँ के पास जहाँ से रूही अभी को कामम करते हुए देखती रही बस के ऊपर. वो एक फिनिशिंग वाला काम था जो अभी कम्पलीट कर रहा था ताके बरसात में बस के अंदर बिल्कुल पानी नहीं ग़ुस्से.

शाम को काम एन्ड किया और जब रूही से अभी मिलने गया खिड़की के पास तो अभी ने उस्सको घर के पीछे बुलाया. वो पीछे गयी, तो अभी ने उस्सको किश किया अपने बाँहों में भरके और कहा अब हर रोज़ जाने से पहले उस्सको किश करेगा और रूही को हर शाम को पीछे मिलना होगा….. और रूही से अलग होने से पहले अभी को याद आया के रूही ने कैसे कहा था के उस्का हाथ कितना बड़ा है, तो अभी ने रूही से कहा अपने दोनों हाथों को उसस्के हाथ में डालने को जो रूही ने किया, और अभी ने रूही के दोनों हाथों को अपने एक हाथ में क़ैद किया और कहा ,

“देखा इतने बड़े में मेरे हाथ, तुम्हारे हाथ एक छोटी सी बची वाली हाथ हैं, श्वेता का हाथ शायद तुम्हारे हाथ से बड़े होंगे हहहहए!”

रूही ने बहोत हैरान होते हुए खुद से कहा,

“मेरे हाथ इतने छोटे हैं के दोनों हाथ आप के एक हाथ में बांध हो गया उफ़!! अब छोड़िये मेरे हाथों को अभी!!”

फिर अभी ने रूही के दोनों हाथों को अपने होठों से लगाया, चूमा, प्यार किया और कहा,

“यह मेरी होने वाली पत्नी के हाथ हैं इस्को संभालना, कभी किसी तरह की चोट या तकलीफ मत होने देना इनको हम्म!”

रूही, ख़ुशी और बहोत प्यार से अभी के चेहरे में देखती रही उस वक़्त.

और ख़ुशी के साथ अभी वहां से निकला इस दिन को.

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
अपडेट 31 थे डिस्टेंस….

एक हफता ऐसे hi गुज़रा, सैटरडे को रूही अपनी ट्यूशन के लिए जाती, और उस वक़्त सभी के नज़रें रूही पर होती क्यूंकि वो एक अप्सरा लगती थी जब भी सज संवर कर निकलती थी. हद से ज़्यादा खूबसूरत दिखती थी, उस्सको पाने के लिए कोई भी दीवाना होता उस रूप में रूही को कोई भी देखता तो.

सुनील ने अभी को चढ़ते हुए कहा,

“अभी देख, तुझको जलन नहीं होती जब रूही ऐसे बन थान के निकलती है तो? ज़रा देख तो सब की नज़र उसी पर ठीके हुए हैं, देख देख सबको….. अब पता नहीं जहाँ जा रही है वहां उस शहर के कितने लोग अभी उसस्के पीछे पड़ेंगे….”

अभी ने बुसस मुस्कुराते हुए सुनील से कहा,

“यार अगर यह काम लास्ट फेज पर नहीं होता तो मैं ने सोच लिया था के एक सैटरडे को मैं लीव लेता और उसस्के साथ जाता बस में, ऐसे मुझे पता चल जाता के वो कहाँ जाती है स्वेज कोर्स के लिए.”

सुनील: “इस्सकी किआ ज़रुरत है, उसस्के पिता के आने के बाद उस्का हाथ तो मांग रहा है नाह तू? तब उसस्के बाद कोई नहीं रोकेगा तुमको रूही के साथ कहीं भी जाने के लिए तब चले जाना आराम से!”

अभी ने खुश होते हुए कहा,

“भाई इसी लिए तो धीरज रख रखा हुआ है आज तक!”

सुनील ने कहा,

“यह ऐसे दिन होते हैं जो तुम्हारी लाइफ के सबसे हसीं दिन होंगे अभी, एक लड़की को शादी से पहले कोर्ट करना, उसस्के घर हर हफ्ते को आना , उसस्के लिए चॉकलेट्स वग़ैरा लाना उसस्के पेरेंट्स से मिलना, लंच या डिनर अपने in-laws के साथ करना, जब तक शादी के दिन नाह आजाये… शादी के पहले वाले लाइफ के बेहतरीन दिन होते हैं वो मेरे भाई, खूब जी भर के एन्जॉय करना उन् दिनों को!”

अभी ने कहा,

“सुनील भाई और इन दिनों के बारे में किआ ख्याल है आप का? जब से यहाँ काम शुरू किया हूँ, जिस दिन से उस्सको देखा पहली बार, तबसे आज तक लगा हुआ हों उसस्के पीछे, उस्सको अपना प्यार दिखाया, अपने प्यार को कबूल करवाया, उस्सको भी प्यार हुआ hi है नाह? तो मेरे लिए यह दिन बहोत इम्पोर्टेन्ट हैं भाई… माना के जीन दिनों को आप कह रहे हो वो भी उतना hi ज़रूरी होगा और बेशक उन् दिनों का भी इंतज़ार है मुझे के सब ऑफिसियल हो जाएगा तब बात और होगी, जैसे के लाइसेंस मिल जाएगा, और अभी बिना लाइसेंस के चला रहा हूँ अपनी प्यार की गाड़ी को, इश्क अलग hi मज़ा है भाई… और मैं हमेशा ऐसा hi प्यार चाहता था, के खुद किसी से प्यार हो जाए मुझे और उसी के साथ सगाई, फिर शादी करूँ…… it’s ा ड्रीम के ट्रू सुनील भाई… मगर अभी इस ड्रीम को ट्रू होने में कुछ टाइम बाकी है“

सुनील ने तब कहा,

“समझता हूँ भाई मैं भी गुज़र चूका हूँ नाह इस फेज से रूही के सिस्टर के साथ…. मगर मैं कामयाब नहीं हुआ अपने ड्रीम को ट्रू करने में…. तुम ज़रूर ड्रीम को ट्रू करना भाई!”

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अब देखते हैं 10 आखरी दिनों को जो अभी ने गुज़ारा उस आँगन में. क्यूंकि हर रोज़ शामे चीज़ें होते रहे तो बहोत रेपेटिशन जैसा लगेगा और बोरडम फील होने लगेगा, एक्सेप्ट लास्ट 10 दिनों में बड़े डिफरेंसेस आये….. फिर अभी का वहां काम ख़तम करने के बाद कितना कुछ हुआ वो सब देखना बाकी हैं, और बहोत कुछ हुआ था, बहोत कुछ.

तो हर सुबह अभी का वहां जाना, रूही से मिलना, प्यार करना, घर के पीछे वाले हिस्से पर अपने कोने में जाना किश करना सब चलता रहा. उस आँगन के सभी लोगों का पता चलना, मेजोरिटी को अभी और रूही के प्यार को सपोर्ट करना सब बिल्कुल सही चलता रहा.

महेश अपने नानी के घर से वापस आगया था. उस्सकी दोस्ती अभी के साथ मस्त था और उस्सको सब पता था के रूही और अभी एक दूसरे से प्यार करते हैं. वो छोटा भाई था तो उस्सको कोई प्रॉब्लम नहीं थी बल्कि महेश ने जैसे अभी को अपना brother-in-law मान लिया था उन् दिनों को. जब रूही और अभी घर के पीछे मिलते तो महेश को पता होता और कोई उस तरफ अत तो वो ऊंचे आवाज़ में रूही और अभी को बता देता था, मतलब महेश दोनों को सपोर्ट करता था.

10 दिन काम एन्ड करने से पहले, मालाब 15तह दिसंबर का दिन था. शाम को घर जाने से पहले जब अभी रूही से मिला तो रूही ने प्यार से अभी से कहा,

“कल मैं अपने नानी के घर जाउंगी मम्मी के साथ”

अभी को शॉक लगा और पूछा के उस्का किआ होगा, तो रूही ने कहा के शाम को वापस आजाएगी. तो अभी ने पूछा कितने बजे घर से निकलेगी जाने को? रूही ने कहा सुबह को, तो अभी ने कहा उसस्के आने से पहले तो हरगिज़ नहीं जाना जब वो यहाँ आ जाए तब घर से निकलने को. रूही ने कहा के हाँ वो अभी का वेट करेगी जब आजाएगा तब घर से निकलेगी अपनी मम्मी के साथ. और वही हुआ…..

रूही अपनी माँ के साथ अपनी नानी के घर जा रही थी सुबह 8 बजे. अभी ने उस्सको गुडमॉर्निंग कहा, रूही ने नाह अभी के तरफ देखा नाह रिप्लाई किया, न मुस्कुरायी, सर झुकाये आगे बढ़ती गयी. अभी को बहोत ऐम्बर्रास फील हुआ. रूही की माँ ने अभी को देखा और मुस्कुरायी उस से. दिन भर अभी सोचता रहा के रूही ने क्यों अजीब बेहवे किया था सुबह को जाते वक़्त. कहने की ज़रुरत नहीं के वो कितनी खूबसूरत दिख रही थी नए लिबास में और किश तरह से उस्सकी खूबसूरती निखार कर आ रही थी, ऊपर से उस्सकी जान लेवा अदाएं….

और दिन में रेज़ा ने अभी से कहा के रूही की माँ ने उस से कहा के वो कभी भी अभी का रिश्ता रूही के लिए एक्सेप्ट नहीं करेगी. यह बात ने अभी को दिन भर बहुत टार्चर किया.

शाम 3 बजे अभी रूही की राह देखने लगा, वो रूही को बहोत मिस करने लगा था, उस्सको देखना चाहता था, उस्सकी स्माइल देखना चाहता था, उस्सकी आवाज़ सुन्ना चाहता था. खुद से अभी ने कहा, “ओह माय गॉड!!”

शाम को 3.30 बजे जब रूही वापस आयी अपने नानी के यहाँ से तो उस्सकी रवैया अभी के तरफ थोड़ा डिफरेंट था. वो उस शाम को अभी से नहीं मिली और अभी वहां से घर उदास गया बिना रूही से मिले, बिना किश किये जो अभी के लिए एक पहाड़ के ज़्यादा भरी वज़न की तरह था उसस्के सीने पर.

रात को अपने डायरी में अभी ने लिखा के किआ उसस्के नानी के यहाँ अभी और रूही की बात हुई और उन्हों ने कहीं इंकार तो नहीं किया इस रिश्ते को? और अभी ने याद किया के वो अमित जिस्सके बारे में पहले बात किया गया था वो उस्सकी नानी के शहर का hi रहने वाला था. तो अभी सोचने लगा के कहीं जब रूही वहां गयी तो वो बात फिर से नाह चिढ गयी हो रूही की मम्मी और रूही के साथ??!

अभी ने यह भी याद किया के जब रूही ने उस्सको अपनी विर्जिनिटी वाली बात बताई थी तब अभी ने यह भी पूछा था के अमित वाली बात झूट थी तो रूही ने कहा था के हाँ सब नाटक था. मगर रूही की माँ ने कहा था के बात सच थी के अमित ने शादी का प्रपोजल भेजा है रूही के लिए वो जब फ्रांस से आएगा तो रूही को लेकर जाएगा.

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अगले दिन अभी काम पर पहुंचा तो रूही नहीं दिखी हर सुबह की तरह, खिड़की के पास नहीं थी. अभी ने अपना गीत सीटी बजाते हुए 6 बजे से 7 बजे तक विस्सल किया, मगर रूही नहीं निकली, उस्सकी खिड़की बंद थी.

जिस टाइम को वो टेरेस और लाउन्ज में झाड़ू देती थी वो भी नहीं किया रूही ने, नज़र आयी तो 11 बजे के करीब और उल्टा लाउन्ज के सारे परदे को बांध रखा रूही ने जो कभी नहीं होता था, सब ओपन होते थे और अंदर रूही हर रोज़ नज़र आती थी. मगर इस सुबह को सब उल्टा हो रहा था….

अभी पर किआ गुज़र रहा था यह बयान के बाहर था. सुफ्फुसाशन, घुटन, सांस लेने में तकलीफ दिल की धड़कनों का तेज़ बढ़ना, यह सब हो रहा था अभी के साथ और काम और भी ज़्यादा मुश्किल होते जा रहा था फिनिशिंग करने की…..

लंच टाइम में भी रूही नहीं मिली अभी से. खिड़की के पास अभी वेट करता रहा मगर खिड़की बंद रखा रूही ने, और उस्सकी माँ भी नहीं दिख रही थी और नाह महेश आया था बाहर. लगता था सब अभी को एस्केप कर रहे थे.

और शाम को जब अभी ने किचन के चौकठ पर देखा तब रूही की एक झलक दिखाई दिया अभी को. उस्सने अभी अभी नहाया हुआ था, उस्सकी बाल खुले और भीगे हुए थे जो नज़र ारः था.

जब अभी वाशरूम जा रहा था खुद को वाश करने और चेंज करने को तो रूही किचन के स्तैर पर कड़ी अभी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी…… ऐसा लग रहा था आज पहली बार वाला मोमेंट फिर से रेक्रेट हो रहा था, लगता था दोनों अजनबी हैं और आज पहली बार एक दूसरे को देख रहे थे.

अभी को थोड़ी सी ख़ुशी हुई के कम से कम उसस्के तरफ रूही ने देखा तो, मुस्कुरायी तो! और अभी ने हाथ के इशारे से पूछा के किआ हुआ क्यों नहीं दिखी दिन भर और रूही ने भी इशारे से कुछ कहा जो अभी नहीं समझा…. तो अभी ने थोड़ा करीब जाते हुए दोबारा कहने को कहा रूही से, तो रूही ने अपने सीने पर अपने हाथ को रखा और फिर उस हाथ को अभी के तरफ किया और मुंह से बिना आवाज़ के कहा, “ी लव यू!” उसस्के होंठों के मूवमेंट्स से पढ़ना आसान था के 'ी लव यू' hi प्राणोँके किया रूही ने!

अभी की आँखें भर आयी और कांपते हुए होंठ से पूछा,

“क्यों तड़पा रही हो? क्यों मिलने नहीं आयी आज?!”

रूही ने हाथ के इशारे से नाह किया.

अभी पागल होता जा रहा था के किआ कह रही है क्यों नाह कह रही है फिर बी ी लव यू कह रही है किआ बात है, क्यों वैसा बेहवे कर रही है!!

अभी का जाने का टाइम हो गया था तो रूही को खिड़की के पास आने को कहा मगर रूही ने फिर नाह कहा.

तो अभी उसस्के किचन के पास hi गया, रूही मुस्कुरा तो रही थी, मगर एक बार बाहर देखा फिर अपने कदम को दो कदम पीछे कर लिया रूही ने, ऐसा लगता था के किसी से डर रही है, जैस किसी ने उस्सको अभी से बात करने के लिए मन किया हुआ है, वो तो बात करना चाहती है मगर किसी का डर था उस्सको, तो अभी ने बुसस इतना कहा,

“कमाल करती हो यार, सुबह जब जा रही थी तो मुझको देखा भी नहीं और गुडमॉर्निंग को रिप्लाई भी नहीं किया तुमने किआ यार!”

रूही ने हस्सणते हुए कहा,

“उफ़ मैं कैसे आप के तरफ देखती, सभी के नज़र मुझ पर थे, सब मुझि को देख रहे थे मुझे बहोत ऐम्बर्रास फील हो रही थी इसी लिए नहीं देखा था आप को, आप भी तो मुझको hi देख रहे थे नाह!..... अब जाओ प्लीज मैं अंदर जा रही हूँ bye!”

अभी को वापस जाना पड़ा, दूसरा दिन था बिना मिले वापस घर गया, मगर रूही की “ी लव यू “कहने वाली बात को सोच कर जैसे अभी को तस्सल्ली हो रहा था.

घर जाकर डायरी में लिखा के किआ अब रूही के नानी वालों ने अभी और रूही की बात को ऑफिसियल करने का फैसला कर लिया इस लिए रूही को अभी से मिलने या बात करने से मन किया है? किआ अब जब तक सगाई नहीं होगी तब तक किआ रूही अभी से बात नहीं करेगी? किआ उन् लोगों का कोई रस्म रिवाज था किआ के लड़के लड़की को मांगनी से पहले नाह मिलने दिया जाए नाह बात करने दिया जाए? किआ एहि बात थी किआ?! अभी यह सब अपनी डायरी में लिखते हुए पगला रहा था!!

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इन् लास्ट दिनों में एक सैटरडे था, 20तह दिसंबर. 19तह को रूही के पिता नहीं आया, न्यूज़ मिली के वो 23रद को ारः है फ्लाइट पोस्टपोन किया गया था उस्का. तो इस सैटरडे को, सुबह को जब अभी वहां रीच हुआ, तो रूही को किचन में देखा, अपने दादा की आर्मचेयर पर अपनी येलो निघ्टड्रेस में रेस्ट करती हुई. 15तह से 20तह तक एक सुबह को भी रूही खिड़की के पास नज़र नहीं आयी, उस्सकी खिड़की बांध रहती थी सुबह को अब…. इन् 5 दिनों में अभी का दिल जैसे टुकड़े टुकड़े हुए थे रूही की डिस्टेंस से… आखिर क्यों वो दूरी रख रही थी अभी समझ नहीं पा रहा था…

खैर इस सुबह को जब अभी ने रूही को किचन में देखा तो वो अभी से मुस्कुरायी मूढ़ कर उससे देखते हुए. अजीब बात यह लगा था अभी को के उस्सकी माँ सारे किचन के काम कर रही थी जबकि रूही आर्मचेयर पर बैठी हुई थी, तो अभी ने सोचा शायद रूही की तबियत ठीक नहीं होगी.

दिन के 10 बजे काम ज़ोरों से चल रहा था बस में और अभी ने रूही को लाउन्ज में झाड़ू लगाते हुए देखा, परदे को हटाया रूही ने और बस के अंदर अभी को देखा. अभी इस इंतज़ार में था के रूही टेरेस पर झाड़ू लगाने आये तो वो उस से बात करने की कोशिश करेगा…. पिछले 5 दिनों को तो रूही ने एक भी मौका नहीं दिया अभी को, सामने आयी hi नहीं थी पता नहीं क्यों हालां के जब आमने सामने होते तब रूही मुस्कुराती थी अभी से.

और दरवाज़ा खुला और रूही टेरेस पर आयी झाड़ू मारने, तो अभी ने बस के अंदर से रूही से पूछा इशारों से के आज वो अपनी ट्यूशन को नहीं जाएगी. रूही ने बस एक स्माइल दिया अभी को, दोनों एक दूसरे को बड़े प्यार से देख रहे थे बिना कोई बात किये.

उसस्के बाद रूही नज़र आयी अपनी माँ के पास एक छोटी सी चेयर पर बैठी जब उस्सकी माँ कपडे धो रही थी. तो इशारे से अभी ने रूही से पूछा किआ वो बीमार है? रूही नहीं समझी के अभी किआ कह रहा था तो पूछा, “व्हाट” तो अभी ने हाथ से वेट करने का इशारा किया और अपने नोटबुक से एक पेज लिया और उस पर लिखा:

“नाउ ी लव यू मोरे एंड मोरे थान ी एवर लव्ड यू बिफोर. इन माय लाइफ ी हैवे नेवर लव्ड एनीवन अस मच अस ी लव यू” साइंड – अभी.

और उस नोट को लेकर अभी वहां गया रूही के पास जहाँ कपडे धोती है हमेशा, और जैसे वहां रीच हुआ तो रूही कुछ फिकरमंद दिखने लगी और कहा,

“आप को यहाँ नहीं आना चाहिए था, देखो सब लोग इधर देख रहे हैं” मगर यह सब कहते हुए रूही हंस रही थी.

अभी उस्सको वो नोट दे रहा था मगर रूही ने नहीं लिया और उस कागज़ को खिड़की के पास रख देने को कहा. और अभी को उस्सको ज़्यादा देखने से मन किया यह कहते हुए के सब लोग देखते हैं दोनों को. अभी ने नोट को उस्सकी खिड़की के पास रख दिया और वापस चला गया बस के अंदर.

अब अभी सोच रहा था के यह सब किआ नाटक है, इतने दिनों से खुले आम दोनों मिलते और बात करते थे तो अब क्यों रूही कहने लगी के लोग दोनों को देखते हैं उस्सको ज़्यादा नहीं देखने को कहा वग़ैरा वग़ैरा….

अभी बस के अंदर से वेट करने लगा के कब रूही वो नोट पड़ेगी, और जब रूही ने नोट को लिया, एक नज़र अभी को देखा बस के अंदर और रीड किया….. रीड करने के बाद रूही ने अभी को बड़े प्यार भाड़े नज़रों से खड़े होकर देखा, और अभी सिर्फ उस से मुस्कुराया. फिर तुरंत अभी विस्सल करने लगा “प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना” रूही के चेहरे में सीरियसली देखते हुए. रूही ने नोट को दोबारा पढ़ा फिर से अभी को देखा और कहा, “मुझको ऐसे मत देखा कीजिये प्लीज….” मगर अभी रुका नहीं बल्कि फिक्स देखता रहा रूही के चेहरे में, तो रूही हंस पड़ी और उस नोट को लेकर घर के अंदर भाग गयी.

रूही ने और एक बात फिर से कहा था अभी को जिस वक़्त वो नोट उस्सको देने गया था, कहा था, “के हाँ कितने सिगरेट पी रहे हो आप सब देख रही हूँ मैं” और अभी ने उस्सको जवाब दिया के “बुसस कंडीशन वाला दिन तो आने दो सब रोक दूंगा वडा है मेरा.”

और अभी को थोड़ा ग़ुस्सा आने लगा था के क्यों अब रूही उस से भाग रही थी, अब किआ हो गया था के लोगों की परवाह करने लगी थी, इतने दिनों से तो सब खुलम खुला हो रहा था…. क्यों अब रूही लोगों के सामने अभी से बात नहीं करना चाहती थी इस से अभी को तकलीफ होने लगा था, उस्सको बाकी मौका hi कहाँ मिलेगा रूही से मिलने और बात करने की अगर सबके सामने नहीं किया तो? अब जब कुछ दिन रह गए थे काम को एन्ड करने के लिए तो चेंज करना मुश्किल था अभी के लिए, बल्कि अब तो अभी और भी ज़्यादा रूही से बात करना और मिलना चाहता था…. अभी को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था जैसे सब कुछ होने लगा था अब. बहुत बदलाव आगया था रूही की रवैये में…. अभी को यह सब बहोत डिस्टर्ब करने लगा था, उस्सको चैन नहीं था, परेशां रहता था…. उस्का दिमाग़ काम नहीं कर रहा था के अब कैसे रूही से कांटेक्ट करे.

शाम को फ़ोन आया S.Arabia से रूही की माँ गयी फ़ोन लेने, तब रूही टेरेस पर कड़ी उस्सकी वेट कर रही थी अभी को देखते हुए. तो अभी ने उस से पूछा के किआ उस नोट का कोई रिप्लाई नहीं देगी तो रूही ने सिर्फ नाह में सर हिल्लायी मुस्कुराते हुए. अभी को ग़ुस्सा आया. रूही अभी के काफी पास आकर कड़ी हुई जहाँ अभी काम कर रहा था. यह सब छोटी छोटी चीज़ें अभी ग़ौर से नोटिस करता था और रात को अपने डायरी में सब लिखता था. क्यों रूही सबके सामने अब अभी से बात करने से इंकार कर रही थी फिर भी क्यों अभी के इतना करीब आकर कड़ी हो रही थी यह अभी के समझ में नहीं ारः था.

उस्सकी माँ फ़ोन पर बात करके आगयी थी और कहा के 23रद को रूही के पिता आजाएगा. अब रूही और उस्सकी माँ दोनों अभी के बिल्कुल पास खड़े थे, तो इस बार अभी जान बुझ कर वहां से हट गया और बस के दूसरे हिस्से पर चला गया रूही से दूर. अभी थोड़ा नाराज़ था उस वक़्त क्यूंकि रूही ने जिस तरह से इंकार किया था उस्सको नोट की रिप्लाई देने के लिए, उस से अभी को ग़ुस्सा आया था. तो जब अभी दूर चला गया रूही से, उस वक़्त रूही अभी को घुर्र रही थी, शायद रूही समझ गयी थी के अभी उस से नाराज़ है, तो रूही अभी के ग़ुस्से को शायद देखना चाहती थी… अब अभी को ग़ुस्सा इस लिए भी ारः था क्यूंकि सैटरडे था और शाम के 4 बज गए थे फिर भी काम जारी था…. और काम कॉम्प्लिकेटेड स्टेज पर था, अभी नर्वस उस्सकी वजह से भी हो रहा था ऊपर से रूही की बेरुखी….

4.30 को अभी सारे टूल्स को रखने गया वाशरूम में और खुद को वाश करने गया तो रूही उस्सको गहरे जा रही थी, रूही को पता था के अभी ग़ुस्सा है. रूही ने कभी भी अभी को उस से ग़ुस्सा होते नहीं देखा था, यह पहली बार था, तो रूही अभी को ग़ौर से देख रही थी, अभी को पता था के रूही की नज़रें उसी पर टिक्के हुए थे….

फिर जाने का वक़्त हुआ तो अभी ने रूही को अपनी किचन में बर्तन धोते हुए देखा और इशारे से पूछा,

“टीवी पर फिल्म आरही है यू अरे नॉट वाचिंग?”

तो रूही ने उन् बर्तनों को दिखाया अभी को. मतलब साफ़ थी के उस्सक्को बर्तन धोना है तो कैसे फिल्म देखेगी, सब इशारे से बातें हो रहे थे, अभी ने रूही से कहा के जब वो जाने लगे तो वो यहीं कड़ी रहे स्टैर्स पर, के अचानक रहीम आयी और देखा के अभी इशारे से किसी से बात कर रही है, वो मुस्कुरायी, और जब उधर से रूही ने रहीम को देखा तो और ज़ोर से हंससने लगी….. इस लिए के अभी और रूही की छोर्री छोर्री बातें करना पकरि गयी थी रहीम से….

जब अभी तैयार होकर निकला तो रूही अब किचन में नहीं थी, अभी समझ गया के वो टीवी देखने चली गयी, तो अभी ने खुद से कहा थोड़ी देर मेरा वेट नहीं कर सकती थी!

अभी जाने लगा तो रूही के खिड़की के तरफ देखा तो उस्सकी माँ को देखा खिड़की के पास, अभी ने उस से पूछा के रूही किधर है तो माँ ने जवाब दिया “टेलेविज़न” फिर अभी ने उससे रूही को बुलाने को कहा. तो रूही की माँ गयी रूही को बुलाने और अभी को खिड़की के पास आने को कहा तब तक…. मगर जब अभी खिड़की के पास रीच हुआ खुश होते हुए के आखिर अब रूही से कुछ बातें कर पाएगा, मगर माँ अकेली लौटी अंदर से और कहा,

“नहीं रूही नहीं आएगी क्यूंकि उस्का मेहबूब चाचा बाहर है वो रूही पर चिल्लाएगा, सॉरी अभी!”

अभी को फिर बिना रूही से मिले वापस जान पड़ा. बहोत घुसा आया अभी को. सोच रहा था किआ हो रहा है यह सब अब? क्यों मेहबूब बहार है तो नहीं बात करेगी अभी से? इतने दिनों से तो बात करती आयी है हालां के मेहबूब सामने होता था, शुरू में मन किया था मगर फिर बात करती थी मेहबूब के होते हुए तो अब किआ हो गया है….. यह सब सोचते अभी अपना शहर रीच हुआ और शहर में चारों तरफ क्रिस्टमस और नई ईयर का माहौल बना हुआ था, सारे शॉप्स में तरह तरह से रंग बिरंगे चीज़ें मौजूद थे, बहोत सारे भीड़ थे चरों तरफ…. साल के अंत का माहौल था चारों तरफ…. और ऐसे में जब अभी बाकी लड़कों को लड़कियों के साथ देख रहा था तो सोचता के क्यों इस वक़्त वो रूही का हाथ थामे शहर में एक शॉप से दूसरे शॉप में घूम नहीं सकता, कब उस्सकी बारी आएगी?

तो बे कॉन्टिनोएड… (3700 वर्ड्स)
 
सॉरी भाई आप सभी मेरे रीडर्स को तो पता होता है नाह के मैं वीकेंड्स में फॅमिली के साथ वक़्त बीतता हूँ, सो ी वास् जस्ट बिजी....

मगर फ़िक्र नाह करें अपडेट करूँगा .... बुसस थोड़ी देर में
 
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