Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya - Page 19 - SexBaba
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Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya

अपडेट 56 अभी वेंट तो सी हेर अगेन

अभी को बिल्कुल नहीं लग रहा था के उस्सने श्वेता के जिस्म को अपने बाहों में भरा हुआ था 100% रूही को बाहों में लिया हुआ था ऐसा लग रहा था अभी को… 1% की भी डिफरेंस नहीं दिख रहा था अभी को… वो बहोत दूर तक चला गया ड्राइव करते हुए मगर तब भी श्वेता को अपने बाहों में महसूस कर रहा था….. उस्सने अचानक ब्रेक लगाया और ुतुरं लिया वापस श्वेता के घर जाने के लिए….

अब आगे….

अभी ने 20 मिनट्स तक गे ड्राइव कर लिया था फिर वहां से ुतुरं करके वापस श्वेता के घर के तरफ और 20 मिनट्स लगा रीच होने में मतलब 40 मीन्स के बाद जब श्वेता के घर के पास आया तो एक कार देखा उस्सकी गेट के अंदर और एक आदमी उतर रहा था कार से…..

तुरंत अभी ने मोबाइल निकला…. (अब लास्ट अपडेट में जब मैं ने लिखा था के श्वेता ने अभी का नंबर लिया था तो मैं ने सोचा था कोई रीडर ये सवाल करेगा के कैसे नंबर लिया जब उस वक़्त वो नुदे थी और नंगी अभी के गले में बाहें डाले हुए थी तो अभी का नंबर कैसे लिया था श्वेता ने…. मगर किसी ने सवाल नहीं किया) तो बता दूँ के उस वक़्त श्वेता ने अभी के जेब से उसी की मोबाइल लेकर अपनी मोबाइल पर कॉल किया था जिस से अभी का नंबर चला गया था उस्सकी मोबाइल पर…

तो इस वक़्त जब अभी ने एक कार देखा तो उस्सको डाउट हुआ के वो उसका पति होगा, इस लिए जल्दी से, इस से पहले के वो घर के अंदर दाखिल हो, अभी ने श्वेता को कॉल किया जिसस्ने तुरंत फ़ोन रिप्लाई किया,

“अभी यकीन नहीं था इतनी जल्दी फ़ोन करोगे आप मिस करने लगे मुझे आप अभी से hi हीहीहीही!”

अभी: “आरी पागल लड़की देख तेरे आँगन में कौन है किआ वो तेरा हस्बैंड है के नहीं?!”

श्वेता: “ोफो हाँ बाबा वही है उस्सने अभी संस किया था के आ रहा है….. मगर आप किधर हो नहीं गए अभी तक तबसे यही हो किआ रोड पे?”

अभी: “वो अंदर आ रहा है मैं वापस जा रहा हूँ, वे विल टॉक लेटर और प्लीज इतना ख्याल रहे के मेरा नंबर उसस्के हाथ नहीं लगे bye…”

श्वेता: “अभी उस को बताउंगी के हम मिले थे आज… हे मस्ट क्नोव यू सो तहत यू मई के ात माय प्लेस अन्य डे, अन्य टाइम…. ी विल सोमेदय इंट्रोडस यू तो हिम वाक्य?!”

अभी: “बिल्कुल भी नहीं, यह ग़लती मत करना श्वेता प्लीज…. बिल्कुल भी मत बताना के हम मिले थे, मेरे बारे में एक भी लव्ज़ मत कहना उससे तुमको मेरी कस्सम समझी?!”

श्वेता: “ोकिए अब कस्सम दिया है तो नहीं बताउंगी… ok bye bye bye वो अंदर आगया है सी यू लेटर मुउउउउआअह”

और श्वेता ने कॉल काट दिया….. अभी वहीँ कार में बैठा उसस्के घर के तरफ देखता रहा फिर खुद से कहा;

“कमाल है यह लड़की, अभी किआ से किआ हो जाता, किआ होता अगर मैं अंदर होता और यह उस्का हस्बैंड चला आता जैसे अभी आया है तो?! शुक्र है के मैं ने अपने आप वापस जाने को डीडे किया…. मगर श्वेता ने कहा के वो काम पर चला गया है तो यह इस वक़्त कैसे घर आया है?! पफ्फफ्फ्फ्फ़ ग्रेट एस्केप अभी!!”

और अभी वापस चला गया….. अपने गेराज गया, जहाँ उस्सको खबर मिली के सईद को लकवा मार गया उस्सको हॉस्पिटल लेजाया गया है कंपनी की ट्रांसपोर्ट से….

तो अभी वहां से जितना जल्दी हो सका हॉस्पिटल गया…. कुछ देर बाद उस्सको सईद से वार्ड में मिलने दिया गया…. सईद का मुंह टेढ़ा हो गया था बोल नहीं पा रहा था, दायां हाथ और पेड़ नम्ब थे काम नहीं कर रहे थे, चेहरा ऐंठा हुआ था ाईड ने अभी को बायां हैं से इशारे से बुलाया अपने पास…. उसस्के आँखों से ाँसों जारी थे, अभी उसस्के पास गया और अपने कान को सईद के मुहं के पास किया…. सईद के बोल समझने लायक नहीं था, कुछ इस तरह बोल रहा था,

“ाअब्ब …बह बब ही मईउएऊऊऊ नईउऊ झूठ बोलै थाआ..”

कई बार उस्सको रिपीट करने को बोलै अभी ने तब समझ में आया के सईद बोल रहा था के उस्सने झूट बोलै था…

आधा घंटा लगा अभी को सईद से सब बताने के लिए और किसी तरह से भी सईद ने कहा के उस्सने जो भी कहा था मेहबूब और रूही के बारे में सब झूट था, वो गेराज में अपना काम नहीं खोना चाहता था इस लिए उस्सने साड़ी बातें बनाये थे क्यूंकि उस्सको पता था के अभी कभी भी वहां नहीं जाएगा पूछने के लिए वो साड़ी बातें…. सईद ने रट हुए अभी से माफ़ी मांगे अपने उस झूट के लिए और उस्सने कहा के रूही और मेहबूब के बिच कुछ भी नहीं था, रूही बल्कि मेहबूब को एक पिता की तरह देखती थी और उस से दरर्ति थी क्यूंकि मेहबूब उसस्के साथ स्ट्रिक्ट था किसी वजह से!

अभी को ज़ोरों से सईद को गाली देने का मैं कर रहा था, उस्सको उसस्के टेढ़े मुहं पर एक घूंसा मारने को मैं कर रहा था, मगर अपना सय्यम रखते हुए धीरे से अभी ने उस से कहा,

“कर्मा किआ होता है पता चला सईद? देख किआ हालत हो गयी तेरी…. खुद को देख बात भी नहीं कर पा रहा है, तेरा जिस्म खुद तेरा साथ नहीं दे रहा क्यूंकि तेरी रूह साध चुकी है, जा भगवान् तेरा डीडे करेगा अब!”

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उस रात को अभी ने नवीन से पूछा,

“तुम्हारी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स में एक नुनहुक नाम की लड़की है?”

याद करते हुए नवीन ने कहा,

“हम्म्म नुनहुक? सुर्नामे है नाह?!”

अभी: “तुमको यह सुर्नामे नहीं पता? डायरीज में मेरे पढ़ी थी नाह?!”

नवीन: “ओह!! रूही का सुर्नामे है नाह? तो कौन स्टूडेंट होगा मेरे क्लास में नहीं याद मुझे! हो सकता है उस्सको उसस्के फर्स्ट नाम से जानती हूँ….. मगर क्यों? किआ हुआ?!”

अभी: “फर्स्ट नाम है श्वेता…. इस्को भी तुमने पढ़ा था नाह डायरीज में?!”

नवीन: “ओह हाँ श्वेता नुनहुक पेडगाय क्लास में बोलो नाह… इंग्लिश की क्लास में सोच रही थी मैं हाँ है वो मेरे पेडगाय की part टाइम कोर्स में क्यों?!”

अभी: “अरे व्हाट क्यों?? तुमको श्वेता नहीं याद डायरीज वाली? जो मुझको ाभीईई कहकर बुलाती थी!!”

नवीन की चेहरे में एक चमक दिखी और बड़े प्यार से पूछा,

“आरईईए वो आप को मिली किआ? कैसे पता आप को के वो मेरी स्टूडेंट में से हैं बताओ बताओ कैसे मिली और उस्सको कैसे पता के मैं आप की वाइफ हूँ? तेल्ल में तेल्ल में आल प्लीज….”

अभी के चेहरे में बहोत ख़ुशी छलक रहे थे, नवीन खुश थी अभी को इतना खुश देख कर और अभी ने कहा,

“मैं ने तो उस्सको पहचाना hi नहीं 18 साल बाद देखा उस्सको, मैं तो उस्सको वही छोटी से 6 साल की बची के रूप में सोचता हूँ और आज वो खुद एक माँ है…. आज मैं यूनिवर्सिटी गया हुआ था एल्युमीनियम विंडोज फ्रेम के सीसलसिलेय में और श्वेता ने मुझे देख कर पहचान लिया और मुझको फुकरा….. और हमारी बात हुई तो तुम्हारा नाम आया तो उस्सने कहा के वो तुम्हारी भी स्टूडेंट है….”

नवीन: “वाओ, 18 साल बाद भी उस्सने आप को पहचान लिया और बात करने आयी आप से. कैसे फील हुआ आप को?!”

अभी: “उस्सको हुग करके मैं रो पड़ा, वो भी रो पड़ी…. हम दोनों एक दूसरे के बहोत क्लोज थे……”

और अभी के दिमाग़ में श्वेता के साथ बीएड पर गुज़ारे लम्हात याद आये तो वो छुप हो गया और उठ कर अपने स्टडी रूम में चला गया……

देर रात तक बैठा रहा उस रूम में और श्वेता की मैसेज आयी उसस्के मोबाइल पर. लिखा था

“गुड नाईट, स्वीट ड्रीम्स माय वैरी लोविंग स्टड! विल टॉक तो यू टुमारो. दो नॉट रिप्लाई प्लीज हे इस हेरे. Bye मुउउउउआअह. लव यू.”

अभी ने तुरंत मैसेज को डिलीट किया. और अपने पेशानी को हाथ में थाम कर डेस्क पर अपना सर रख दिया….

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दूसरे दिन सुबह सुबह श्वेता की मैसेज आयी गुड मॉर्निंग वाली और साथ साथ यह लिखा था उस्सने;

“आज वो नाईट शिफ्ट करेगा प्लीज के तो माय हाउस, ी वांट तो स्पेंड थे नाईट इन योर कंपनी एंड यू विल बे अबले तो सी माय बेबी डॉल तू. Don’t रेफुसे प्लीज ी नीड यू.”

अभी ने रिप्लाई नहीं किया. फिर दिन के करीब बारह बजे एक और मैसेज आया श्वेता की तरफ से, इस बार अभी ने रिप्लाई किया;

“ी दो नॉट वांट तो टेक अन्य रिस्क एंड मेक यू गेट ट्रबल्स…. उस दिन को देखा नाह वो कैसे अचानक घर आगया था, किआ होता अगर मैं अंदर होता तेरे बीएड पर उस वक़्त? तो हम किआ करते? तुम किआ जवाब देती उस्सको?”

श्वेता ने अभी की मैसेज पढ़ने के बाद तुरंत उस्सको कॉल किया. अभी ने कॉल लिया, श्वेता ने कहा,

“ोफो आप दररते हो अभी? आप तो दररने वालों में से बिल्कुल भी नहीं थे, और सुनों मेरा हस्बैंड बिना मुझको संस या कॉल किये कभी भी घर नहीं अत पता है क्यों? इस लिए के उसस्के आने से पहले मुझको गेट जा कर खोलना पड़ता है उस्सको अंदर आने के लिए. सो, don’t वोर्री हे विल नेवर के इनसाइड थे हाउस टिल ी ऍम नॉट मेड अवेयर तहत हे इस किंग!”

अभी: “और कल किआ उस्सने आने से पहले तुमको बताया था?!”

श्वेता: “ऑफ़ कोर्स बताया था, आप के जाने के बाद मैं गेट बांध करके घर के अंदर चली आयी तब उस्का कॉल आया तो मैं फिर बाहर गयी गेट खोला और वापस घर में आयी तब उस्का कार अंदर आया था उसस्के बाद आप ने फ़ोन करके बात किया था मुझसे….”

अभी खामोश हो गया. श्वेता ने फिर कहा,

“आप मेरी बेबी से नहीं मिलना चाहते? प्लीज आना नाह रात को अभी!”

अभी: “और मैं नवीन से किआ कहूंगा के रात को कहाँ जा रहा हूँ? इस्सके बारे में सोचा है तुम ने?!”

श्वेता ने एक बची की तरह नटखटी आवाज़ में कहा,

“हम्म्म प्लीहासससीई आप कोई भी बहाना बना सकते हो नाह? घर जाना hi नहीं कह देना के किसी फ्रेंड के घर जा रहे हो, या गेराज में लोग ओवरटाइम कर रहे हैं या कुछ भी आप को बहाना बनाना नहीं अत किआ अभी?!”

अभी: “मैं झूट नहीं बोलता श्वेता तुमको पता है…. मुझे नहीं चाह लगेगा नवीन से झूट बोलते हुए….”

श्वेता: “और आप को अच्छा लगेगा मुझको तड़पाते, तरसाते हुए? हम्म अभी? मैं फिर भी आप का वेट करुँगी, टेक्स्ट करुँगी आप को रात भर….. ी विल कीप वेटिंग स्वीटहार्ट!”

अभी छुप हो गया और कॉल एन्ड किया दोनों ने. अभी गहरे सोच में पद गया श्वेता को सोचते हुए…. उस्सको एक किस्सम का डर लग रहा था, उस्सको सब ग़लत लग रहा था…. मगर फिर श्वेता की जिस्म की खुशभु अभी को पागल करता….. वो रूही की जिस्म को फिर सोचता….. कल जितना ाचा महसूस हुआ था उस्सको श्वेता के साथ उस्सकी जिस्म के हर एक अंग को तराशते हुए वो सब अभी के ज़हन में बार बार अत रहता और यह सब अभी को बहोत परेशान करता…..

रात हुई. अभी घर वापस चला गया. डिनर के बाद टीवी देख रहा था नवीन के साथ के उस्सकी मोबाइल पर मैसेज आया श्वेता की…. मोबाइल को अभी ने साइलेंट मोड पर कर रखा था… अभी टॉयलेट जाने के बहाने मेसज रीड किया; श्वेता ने लिखा था के वो वेट कर रही है, अभी को आना hi पड़ेगा, और लिखा थे के कार को उसस्के घर से थोड़ा दूर रास्ते पर hi पार्क करके गेट खोलके अंदर आना, आते हुए कॉल करें और श्वेता उस्सको रिसीव करेगी….

अभी ने रिप्लाई नहीं किया. वापस टीवी के सामने बैठ गया….. और नवीन ने कहा उस्सको नींद आरही है वो सोने जा रही है तो अभी ने उससे जाने को कहा.

गेराज में अस्सल में अक्सर रातों को एक टीम जो शिफ्ट में काम करते थे वह लोग आज काम कर रहे थे क्यूंकि कल एक बस की डिलीवरी करनी थी, फुल नई बस थी.

अभी ने सच में गेराज जाने का मैं बनाया और नवीन से कहा के कुछ देर बाद वो गेराज जाएगा और लेट वापस आएगा.

टीवी ों था, अभी देख तो नहीं रहा था मगर सोच रहा था, उस्का मैं कहीं और hi था…. अभी के दिमाग़ में श्वेता की जिस्म की खुशभू जैसे शोर मचा रहा था…. अभी को दोबारा उस्सकी जिस्म को सूंघने का मैं करने लगा, जिस तरह से उस्सको अपने बाहों में भरके उसस्के हर अंग को फील किया था वो फिरसे महसूस करने का मैं करने लगा….. रात की तन्हाई में जब ऐसे खयालात मैं में आते हैं तो एक रात hi होती है जो ऐसे ख्वाहिशों को हकीकत में बदलने की ताक़त रक्ति है… और यह रात hi होती है जो ऐसे अरमानों को और भी जगाते हैं मैं के अंदर….. अभी का मैं डाँवा दोल हो रहा था, हाँ या नाह, जॉन के नहीं जाऊं? और इतने में एक और मैसेज आया श्वेता की, लिखा था,

“Don’t मेक में सुफ्फेर प्लीज, आप को अछि तरह से पता है तड़पना किआ होता है, रूही ने आप को बहोत तड़पाया था नाह? तो आप सोचो आप इस वक़्त मुझको तड़पा रहे हो, मेरी किआ कुसूर अगर आप को चाहा मैं ने? मैं किश को अपने दिल के पीड़ा को बताऊँ अभी? एक आप hi हो जो मुझे समझ सकते हो क्यूंकि आप इस से गुज़र चुके हो…. तो मुझे उम्मीद है, आस लगाए बैठी हूँ के कुछ देर में आप मेरी बाहों में होंगे और मुझे इतनी ख़ुशी देंगे के मैं टर्र टर्र हो जाउंगी – वेटिंग फॉर यू माय लव.”

इस मैसेज को पढ़ कर अभी उठा और अपने गेराज से कार निकला और फ़ास्ट ड्राइव करते हुए बढ़ने लगा श्वेता के घर के तरफ…. श्वेता को सोचते हुए hi ड्राइव किये जा रहा था, अस्सल में वो उसस्के जज़्बातों का कदर करता था, समझता था श्वेता को, उस्सकी तकलीफ को, ख़ास कर जो शारीरिक सम्बन्ध कल कर चूका था….. अभी समझ रहा था के दो जिंसों के मिलान के बाद अलग रहने से कितना तकलीफ होती है, एक प्यास होती है जो बढ़ने लगती है उस्सको बुझाने के लिए मिलना सख्त ज़रूरी होता है वार्ना मैं का पीड़ा इतना बढ़ता है के, दिल, जिस्म, और जान, सब को दुःख होते हैं और वो सहना बड़ा मुश्किल होता है. अभी से ज़्यादा कौन समझ सकता था उस तकलीफ को.

जितना श्वेता का घर करीब ारः था अभी के दिल का धड़कन उतना बढ़ता चला जा रहा था और उसस्के साँसों में श्वेता और रूही के जिस्म के खुशभू ज़्यादा करीब होते हुए महसूस किये जा रहा था….. वो फीलिंग होता है नाह, किसी खूबसूरत लड़की के जिस्म को अपने बाहों में लेना, महसूस करना, ख़ास कर जब वो निवस्त्र हो….. यह वो अलग फीलिंग होती है जो एक बार वैसा फील कर लिया तो बार बार उस्सको फील करने की चाहत मन में ुनबार्ने लगता है. अभी के मैं में इस वक़्त वही वाला फील हो रहा था श्वेता को याद करते हुए और उस्सको पता था के श्वेता को 100 गुना ज़्यादा वैसा फील हो रहा होगा…. श्वेता के लिए अभी कभी अफ़सोस फील कर रहा था, तरस ारः था उस्सको श्वेता पर, और उस्सको सच में खुश देखना चाहता था अभी.

कार को श्वेता के घर के थोड़ा दूर रास्ते पर hi पार्क करके उस्सने श्वेता को कॉल किया. रात के 11.30 हुआ था. तुरंत श्वेता ने उठाया, और बात किये, श्वेता बालकनी से अभी को देख रही थी और फ़ोन पर hi कह रही थी कैसे गेट को खोला जाए…. वो हो गया, वापस गेट को बांध किया और अभी पहुंचा श्वेता के टर्रस पर जहाँ जल्दी से श्वेता भागी हुई आयी अभी को अपने बाहों में बहोत ज़ोर से भड़ने को…..

सुबह 3 बजे तक दोनों एक साथ रहे श्वेता के बीएड पर….. बहोत ख़ुशी दिए दोनों ने एक दूसरे ko….Abhi को सिर्फ रूही फील हुआ फिर से इश्क करते वक़्त, अभी फिर सवाल करने वाला था रूही से ेँ वक़्त पर श्वेता की बेबी जाग गयी और रोने लगी, तो श्वेता ने उस्सको पिलाया और सुला दिया…. अभी ने बेबी को गॉड में लिया कुछ देर बड़े प्यार से उस्सको देखते हुए और श्वेता और उस बेबी के चेहरे में डिफरेंस को देखते हुए….

3.30 हो गए थे और अभी ने श्वेता से फिर कहा के यह सब ठीक नहीं सब रोकना चाहिए दोनों को….. श्वेता ने कहा,

मैं किसी से बदला ले रही हूँ यह सब करके बाद में आप को समझाउंगी, अब बदला लेते हुए खुद आप से इतना लगाओ हो गया के आप के बिना अब रहा नहीं जाता…..”

अभी ने हैरानी से श्वेता को देखते हुए कहा,

“तुम अगर अपने डॉक्टर साहब से किसी बात का बादल ले रही हो तो इस में मैं शामिल हो रहा हूँ जो नहीं होना चाहिए, तुम इस तरह से मुझको इस्तेमाल कर रही हो…. हमको यह सब रोकना चाहिए, यह एक खतरनाक खेल है जिस्का एन्ड भयानक भी हो सकता है स्वीटहार्ट…..”

श्वेता कहने कुछ और जा रही थी मगर कह कुछ और बैठी,

“Okay अभी शुरुवात है इस लिए आप से मिलने का मैं किया, चलो एक टाइम टेबल बनाते हैं के किश किश दिन को मिलेंगे…. हफ्ते में 1 बार ठीक रहेगा व्हाट से?!”

अभी: “No, नॉट ात आल… बिल्कुल रोकना होगा हमेशा के लिए…. कभी सोचता हूँ 18 साल बाद क्यों हम मिले, हमको मिलना hi नहीं चाहिए था श्वेतु!”

श्वेता ने अपने बाहों को अभी के गले में लपेटते हुए एक बहोत सेडक्टिव मन्नेर में पूछा,

“आप रह पाओगे अब मेरे बग़ैर? मेरे जिस्म से आप को जिस्सकी फील आती है आप उसस्के बिना रह पाओगे अभी?!”

अभी के होंठ थरथरा गए श्वेता को जवाब देते हुए,

“हाँ रह लूंगा, जैसे इतने दिनों तक रहा था….”

श्वेता: “हम्म्म स्वीटहार्ट, इतने दिनों तक रहे थे क्यूंकि मैं मिली नहीं थी, अब मिल गयी हूँ और आप मुझे चख चुके हो तो रहना आसान नहीं होगा मेरे बिना…. लहू मुंह लग गया…. समझे किआ हुज़ूर?! हहहहए!!”

अभी ने मैं में सोचा के श्वेता सही कह रही थी, मगर फिलहाल उस्सको जल्दी था घर वापस जाने को वो नवीन को सोचने लगा था इस लिए जितना जल्दी हो सका वहां से निकला….. श्वेता ने अभी को एक लम्बा पैशनेट किश किया टेरेस पर निकलते वक़्त.

तो बे कॉन्टिनोएड… (3052 वर्ड्स)
 
बहोत शुक्रिया विक्रम भाई.

मगर आप ने मेरे बिना मांगे मंडे को 4 उपदटेस पर लगातार रिव्यु दिए थे देख लीजिये पेज 332 और 332 पर और ऊपर से कामदेव भाई की रिप्लाई को काउंटर रिप्लाई भी किया था. मतलब 5 रेविएवस इन ा रौ दिए थे आप ने मंडे को वो भी बिना मेरा कुछ कहे :लाफ:

ठीक है भाई कल मिलते हैं शुभ रात्रि विक्रम भाई
 
बहोत बहोत शुक्रिया विक्रम भाई अप्प्रेसियते करने के लिए

भाई कैलकुलेशन में कोई भी ग़लती बहिन है शादी को 2 साल कहा था अब 2 साल और 5 महीने तो नहीं कहती नाह गेनेराल्ल्य स्पीकिंग 2 साल कह दिया 2 इयर्स... आप 5 महीना जोड़ कर कैलकुलेशन कर लेना अब विक्रम भाई :डी
 
थैंक्स ववर्य मच विक्रम भाई......

कुछ अजीब नहीं था.... आप ने जितने बार ात माय प्लेस लिखा है उतने बार तो नहीं कहा था श्वेता ने :डी

जब कोई इतना क्लोज और इमोशनली अटैच्ड होते हैं तो ऐसे क्लोसनेस्स होते हैं अक्सर देखा गया है :डी
 
अपडेट 57 अभी लर्न्ट समथिंग अबाउट मनोज

दोस्तों मैं कुछ वाक़ियात स्किप कर रहा हूँ अब…. ज़रूरी है स्किप करना क्यों के श्वेता और अभी का यह रिश्ता 6 साल तक चला. सब बहोत रेपेटिटिवे लगेगा अगर इन् 6 सालों को लिखा गया तो, ब्रीफ में 6 सैलून को बता देता हूँ फिर जो ख़ास हैं वो लिखता हूँ….

श्वेता ने कुछ महीने बाद डॉक्टर से डाइवोर्स ले लिया…. उस्सको पसंद hi नहीं था उस डॉक्टर के साथ रहना वो सच में खुश नहीं थी, डॉक्टर मनी माइंडेड और वर्कहोलिक था, श्वेता का बिल्कुल ख्याल नहीं रक्त था, सिर्फ अपने प्राइवेट कंसल्टेशन और हॉस्पिटल से उस्सको जैसे प्यार था…. अपनी बची तक को भी नहीं प्यार करता था, वो बिज़नेस माइंडेड आदमी था उस्सको कभी शादी करना hi नहीं चाहिए था…. हमेशा श्वेता से झगड़ा होता, और जब श्वेता ने डाइवोर्स चाहा तो डॉक्टर ने आसानी से तुरंत एक्सेप्ट किया और श्वेता चली गयी अपनी माँ के घर रहने बच्ची के साथ. डॉक्टर ने बच्ची को भी नहीं लेना चाहा… मगर हर महीने बच्ची को ालीमोनी देना पड़ा उससे कोर्ट की डाइवोर्स रूल के ज़रिए से.

इन् 6 सालों में अभी ने एक बार भी श्वेता से रूही के बारे में बात hi नहीं किया. उस आँगन और वहां के लोगों के बारे में एक दिन भी बात नहीं हुए दोनों के बिच हालां के श्वेता के दिल के अंदर एक बहोत बड़ा राज़ छुपा हुआ था जिस्सको वो भी कई बार अभी से कहना चाहि मगर कह नहीं पायी….

श्वेता ने सोचा शुरू में hi उस्सको अभी से उस राज़ के बारे में बताना चाहिए था मगर वो किसी से बदला लेने पर तुली हुई थी इस लिए कभी बात को चेरर hi नहीं पायी, और क्यूंकि अभी ने भी कभी सवाल नहीं किया तो श्वेता ने भी कभी कुछ नहीं बताया…. और वैसे दोनों हर रोज़ तो नहीं मिलते थे, हफ्ते में एक बार वार्ना महीने में दो बार मिलने लगे थे जबसे श्वेता अपनी माँ की घर चली गयी थी. अभी को श्वेता ने अपनी माँ के यहाँ मिलने को कहा मगर अभी ने इंकार किया…. श्वेता ने कहा के घर आना और अभी बनकर hi आना, वो अपनी माँ से कहेगी के अभी से मुलाकात हुई इतने सालों बाद मिले तो उस्सको घर पर इन्विते किया दोनों दोस्त हैं ेट्स…

फिर मौके के हिसाब से फिर भी अभी गया श्वेता से उस घर में मिलने मगर तब, जब श्वेता के पिता का (याने रूही के चाचा का) स्वर्गवास हो गया तब कई बार अभी गया उस घर में रात को श्वेता से मिलने, कैसे? इस लिए के जब श्वेता की माँ नाईट शिफ्ट करती थी, नर्स थी नाह, तो उन् रातों को श्वेता अभी को मिलने के लिए ज़िद करती…. तो उस तरह से कई बार अभी गया उस घर में श्वेता से मिलने…. वार्ना दिन में मिलते थे जब श्वेता स्कूल से निकलती, अभी किसी होटल में रूम बुक कर लेता था और दोनों वैसे मिलते रहे 6 सालों तक….. और 6 सालों बाद कुछ ऐसा हुआ जो श्वेता ने सोचा भी नहीं था के वैसा कभी होगा…..

मगर वो होने से पहले एक ख़ास बात और हुई और इस ख़ास बात के ज़रिए वो बात हुई जो श्वेता ने सोचा नहीं था

दिसंबर 2010

श्वेता की बेटी का नाम आरोही था…. एक दिन अभी ने इस पर श्वेता से सवाल भी किया था के बच्ची के नाम में क्यों रूही का नाम लगाया है श्वेता ने, और जवाब में श्वेता ने सिर्फ इतना कहा था के उस्सकी कंपनी अब्रूहि से आरोही निकला था श्वेता ने….. अभी के दिल में मान लो श्वेता ने रूही की जगह 100% बना चुकी थी और अभी जैसे रूही को इन् 6 सालों में बिल्कुल भूल गया था – क्यों नाह भूले जब उस्सको रूही से प्यार के बदले प्यार बिल्कुल नहीं मिला था, और श्वेता से इतना प्यार मिला इतनी स्नेह मिली और ख़ास कर उस्सकी जिस्म और जिस्म की खुशभू से जितना लगाओ था अभी को वो पूरी तरह से मिल रहा था अभी को…. इन् 6 सालों में अभी इतना खुश रहने लगा था के जैसे उस्सको उस्सको खोया हुआ प्यार वापस मिल गया था….

नवीन को बिल्कुल कोई भी शक नहीं हुआ और नाह श्वेता की माँ (रूही की चची) को. अभी और श्वेता बड़े होन्शिआरी से अपने मीटिंग्स फिक्स करते थे और कभी किसी ने दोनों पर कोई भी शक नहीं किया 6 सालों में…. अभी बहोत hi खुश रहा करता था, उस्सको श्वेता की बची में अपनी बेटी नज़र आने लगे थे.. आरोही को भी उतना hi प्यार करता अभी जितना श्वेता को… अपना प्यार निछावर करता था दोनों पर

और एक रात 2010 में जब अभी श्वेता के घर से मिलने के बाद वापस जा रहा था तो श्वेता ने कहा;

“वैसे आप से एक बात पूछनी भूल गयी कल से परसों से hi सोच रही थी के पूछना है मुझे…”

अभी टेरेस पर निकल चूका था तो मुड़कर पूछा,

“किआ पूछना है पूछो नाह”

तब तक श्वेता ने अभी को ज़ोर से बाहों में भर लिया, उसस्के गाल पर किश किया, उसस्के होंठ पर चुम्बन दिए, उसस्के गर्दन पर किश करते हुए कहा,

“आप को मनोज के बारे में पता चला होगा नाह लास्ट मंथ को किआ हुआ था….. मुझे पता है के उसी ने आप को घर से निकला था जिस दिन आप गए थे वहां…. मुझको बाद में सब पता चला था… तब मैं बची थी मगर सब जान कर बहोत रोई थी मैं के आप के साथ ऐसा कुछ हुआ था?!”

अभी का एक हाथ उस वक़्त श्वेता के कमर पर था और दूसरे हाथ से वो श्वेता के चेहरे से उसस्के बाल की लत्त को हटाते हुए हैरानी से पूछा,

“व्हाट? नहीं पता मुझे किआ हुआ है?..... श्वेतु मुझे उधर की एक भी खबर नहीं मिलता है पिछले 24 सालों से… मैं जानने की कोशिश भी नहीं करता हूँ सिवाए एक दिन के जब मैं उस फिलिंग स्टेशन पर गया था 8 साल बाद… तुम बताओ तो किआ हुआ है??!!”

श्वेता बहोत hi हैरान हुई और तक़रीबन चिल्लाते हुए पूछा,

“किआ? आप को नहीं पता? पेपर्स नहीं पढ़ते हो किआ आप? नेव्स्पपेर्स में आया था सब कुछ डिटेल में….!!!”

नेव्स्पपेर्स नाम सुनकर अभी ने सोचा के क्यूंकि मनोज फोटोग्राफी करता था तो ज़रूर उस्सने कोई इनाम वग़ैरा जीता होगा तो उस्का नाम पेपर्स में आया होगा वही श्वेता कहना चाहती थी तो अभी ने ये जवाब दिया श्वेता को,

“बेबी, मुझे नहीं सुन्ना कुछ भी हुआ हो, जाने दो नाह क्यों उधर की बात बताना चाहती हो मुझे ख़ास कर उस इंसान की जिस्सको इंसानियत किआ होता है एहि नहीं पता उससे! जिस्सको एक घर आये हुए मेहमान को रिसीव करना नहीं अत उसस्के बारे में क्यों कुछ भी सुनूंगा मैं hmm?!Let आईटी जो श्वेता!”

श्वेता अभी को समझ रही थी क्यूंकि श्वेता को सब कुछ पता था… श्वेता को तो वो कुछ भी पता था जो अभी को hi नहीं पता था… पता नहीं क्यों श्वेता इतने दिनों से इतना कुछ जानते हुए भी अभी को नहीं बता रही थी…. शायद श्वेता किसी सही समाये के इंतज़ार में थी सब कुछ बताने के लिए, बाद में श्वेता खुद बताएगी के क्यों उस्सने शुरू से सब कुछ नहीं बताया था अभी को, मगर यह मनोज वाली बात बताना ज़रूरी था तो श्वेता ने अभी के गाल पर हाथ फरते हुए कहा,

“अभी मनोज इस no मोरे! वो इस दुन्या में नहीं है वो चल बसे लास्ट मंथ को!”

तब अभी को झटका लगा!!!! उस्सको यकीन नहीं हुआ जो उस्सने सुना सही सुना या ग़लत उस्सने श्वेता के चेहरे में देखते हुए फिर से कहने को कहा तो श्वेता ने दोहराया अपने अलफ़ाज़ को….

अभी अपने टांगों पर बैठ गया…. उस्सको घबराहट जैसे फील हुए….. श्वेता भी उसस्के पास बैठ गयी… टेरेस के स्टैर्स पर दोनों बैठे, श्वेता ने टेरेस के सारे लाइट्स को ों किये अभी के चेहरे के एक्सप्रेशंस देखने के लिए क्यूंकि सिर्फ एक बल्ब जल रही थी जिस वक़्त श्वेता ने बात कही थी…..

अभी गहरे सोच में डूबा हुआ था और श्वेता के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“कब? कैसे हुआ यह? इतना सुना था के उसस्के दो छोटे छोटे बचे भी हैं नाह?!”

श्वेता ने गंभीरता से कहा,

“खतरनाक एक्सीडेंट में मारा वो…. सुबह सुबह काम पर जाने के लिए निकला था…. जिस जगह आप बस स्टॉप लेते हो अपने घर वापस जाने के लिए उसस्के यहाँ से निकल कर उसी बस स्टॉप पर मारा वो, एक कुत्ते को बचाने के लिए एक ड्राइवर ने व्हीकल को उस बस स्टॉप पर चढ़ा दिया और मनोज वहां खड़ा था उसी बस स्टॉप पर तुरंत मर गया वो वहीँ कुत्ते की तरह!!”

अभी ज़ोर से फुट फुट कर रोने लगा यह सुन कर!!

अभी क्यों रोने लगा किआ किसी रीडर्स को पता है? याद है किसी को किआ हुआ था उस रोज़ जब अभी को कुत्ते की तरह धित्कार कर घर से निकला था मनोज ने? कितनी बारिश हो रही थी उस रोज़, अभी कितना भीगा हुआ था यहाँ तक के उसस्के ुंडेरवेअर्स भी भीगे हुए थे, अभी उस घर से निकल कर चिल्ला कर रट हुए रूही के आँगन के एन्ड पर बैठ गया था, पानी चल रहे थे रास्ते पर कीचड़ समेत एक बस गुज़रा था अभी के नए कपडे कीचड़ और पानी से मैले हो गए थे, अपना होश ो हवास खो चूका था उस वक़्त और उसी बस स्टॉप तक चल कर अभी मुश्किल से रीच हुआ था और अभी के दिल से एक आह निकली थी…. याद है मेरे किसी रीडर्स को यह बात?!! अभी ने बाद दुः तो नहीं दिया था मगर वो इतना दुखी था के उसस्के मुंह से यह निकल गया थे के मनोज एक दिन इसी जगह कुत्ते का मौत मरेगा….. (यह आप सब अपडेट 41 में पढ़ सकते हो … चलो उस part को यहाँ कॉपी कर देता हूँ)

फ्रॉम अपडेट 41

{वहां से उठते हुए, बस टॉप के पास कड़े होकर, अभी ने इतना कहा ऐसे hi हवा में,

“घर आये मेहमान का ऐसे स्वागत किया जाता है मनोज, बददुआह लगेगी मेरे टूटे हुए दिल का तुझे याद रखना, कहीं कुत्ते की मौत नसीब नाह हो जाए तुझे एक दिन इसी जगह” अभी के जुबां से ऐसे hi यह अल्फ़ाज़ निकल गया था, क्यूंकि उस्का दिल बुरी तरह से टुटा हुआ था उस वक़्त… उस्सको पता भी नहीं था के वो किआ बोल रहा है, मगर किआ पता एक दिन यह बाद दुः लग जाएगा मनोज को? हु कनौस?}

तो अभी ज़ोरों से रोने लगा श्वेता की बात को सुनकर…. श्वेता उस्सको संभल रही थी और पूछे जा रही थी के किआ हुआ क्यों रो रहे हैं वो…..

अभी ने रट हुए कहा,

“मुझे किआ पता था के मेरे कहे हुए बात एक दिन सच हो जाएगा… मैं ने उस्सको बड्ड दुः नहीं दिया था, मेरा दिल टुटा हुआ था, मैं दर्द में था इस लिए मेरे दिल से एक आह निकली थी, उसी जगह उसी बस स्टॉप पर….. ओह माय गॉड मुझे माफ़ करना मैं ने यह नहीं चाहा था!!!”

अभी ने एक्सीडेंट वाला डेट पूछा ताके वो घर जाकर पेपर्स में चेक कर सके….. श्वेता ने डेट बताया…. 1सत नवंबर.

अभी का पूरा जिस्म थरथरा उठे थे श्वेता की बाहों में उस वक़्त…. श्वेता को लगा के वो ड्राइव नहीं कर पाएगा तो उस्सको वहीँ रहने के लिए कहा…. मगर कैसे भी अभी उठा, बहोत कमज़ोर फील कर रहा था…. श्वेता अपनी निघ्त्य में थी मगर अभी को रास्ते पर उस रात में कार तक ाकोपमय किया और जब अभी ने कार स्टार्ट किया तब श्वेता वापस घर गयी…. अभी किसी तरह ड्राइव करते हुए घर गया…..

घर पहुचंते hi अभी ने उस डेट क ीक दो दिन बाद के पेपर्स ढूंढा और चेक किया तो सच में उस एक्सीडेंट का ज़िक्र किया गया था मनोज का नाम सुर्नामे और एक्सीडेंट की आर्टिकल छप्पा हुआ था….

सुबह के 4.30 हो चुके थे और अभी ज़ोर से रोने लगा अपने स्टडी में बैठ कर… नवीन ने सुना दौड़ कर स्टडी में पहुंची देखने के किया हुआ…. तो अभी ने पेपर दिखाया नवीन को….. और नवीन ने कहा,

“टूटे हुए दिल से मांगी हुई दुः बेशक क़ुबूल होते हैं, देर से hi सही ऊपर वाला अपने टाइम से काम करता है…..”

अभी ज़्यादा रोने लगा यह कहते हुए नवीन से,

“उसस्के छोटे छोटे बचे है यार…. मैं खुद को गिलटी फील कर रहा हूँ मैं ने क्यों वैसा कहा था उस दिन?!!”

नवीन ने जवाब दिया,

“और उस्सने क्यों वैसा किया था उस दिन आप के साथ? क्यों एक कुत्ते की तरह घर से निकला था आप को? भगवन का रूप माना जाता है घर आये मेहमान को…. तो समझ लीजिये के उस वक़्त मनोज ने भगवान् को धित्कारा था अपने घर के द्वार पर, सो भवान ने उस से बदला लिया!!! कर्मा है यह अभी आप की कोई दोष नहीं है इस में…”

मुझे अब रीडर्स से पूछना है… किआ आप लोग कर्मा में यकीन करते हो? किआ आप मानते हो के घर आये मेहनान भगवन के रूप होते हैं? किआ आप मानते हो के किसी के दिल को नहीं दुखाना चाहिए? किआ आप लोग मानते हो के किसी के टूटे हुए दिल से निकली आह कभी भी सच साबित हो सकते हैं? यारो यह सच में हुआ है…. मैं गवाह हूँ और प्रूफ्स कामदेव और विक्रम भाई को वात्सप्प पर पोस्ट कर रहा हूँ. इस कहानी में दो ऐसे प्रूफ्स हैं के कर्मा की मार पड़ता है, एक सईद को और एक मनोज को…

भाई, आप दोनों पहले इस अपडेट 57 को पढ़ लें तब मुझे वाट्सअप करें मुझे आप दोनों को कुछ दीकहाना है उधर. थैंक्स.

एन्जॉय थे रीड फ्रेंड्स. एंड थैंक्स आल.[/USER]
 
विक्रम भाई थैंक्स फ्रॉम थे बॉटम ऑफ़ थे हार्ट यारा

आज मैं डिटेल में रिप्लाई नहीं करूँगा कीजनके लेट हूँ अपडेट पॉपस्ट करने में

आप को किआ यह खुद अभी को बुरा और ग़लत लगता hai/tha मगर वह हालत से मजबूर था, अपने प्यार से मजबूर था.... इसी लिए नवीन को किसी भी कीमत पर बिल्कुल पता भी नहीं चलने दिया मतलब नैना को जब पता hi नहीं चला तो दुःख कैसे होगी उस्सको :डी
 
अपडेट 58 अभी मीट्स महेश एंड ???

दोस्तों कल वाले अपडेट में मैं ने डेट लेकर एक ग़लती किया था 2010 बे बदले 2011 लिखा था, और स्वेता के साथ गुज़ारे 6 साल को 7 साल लिखा था. वो हुआ यह था के दिसंबर 2010 की बात हो रहा था और मैं क्यूंकि दिसंबर था इस लिए अगले साल 2011 को सोच रहा था, दिमाग़ में 2011 बसा हुआ था सो लिख दिया था, वैसे 2011 में भी श्वेता के साथ था अभी तो 7 साल hi होते हैं मगर पूरा साल नहीं था इस लिए के बीच 2011 में hi कुछ ऐसा हुआ जो नाह श्वेता ने सोचा था और नाह खुद अभी ने सोचा था वैसा कुछ होगा कभी….

तो कल जीन लोगों ने मेरे एडिट करके करेक्ट करने से पहले उपदटेस पढ़ लिए थे उनको अब दिखेगा के मैं ने 2011 के बदले 2010 लिखा है और 7 साल के बदले 6 साल लिखा हुआ है श्वेता और अभी के रिश्ते को….

आज के अपडेट से आप लोग समझ जाओगे मुझसे यह ग़लती क्यों और कैसे हो गयी थी क्यूंकि यह 2011 hi था जिस में ऐसा कुछ हुआ ता इस लिए मेरे दिमाग़ में 2011 बसा हुआ था और वही लिख दिया था कल के अपडेट में. सॉरी फॉर तहत मिस्टेक व्हिच ी करेक्टेड लेटर.

तो नवंबर 1सत 2010 को मनोज एक्सीडेंट में मारा गया था और दिसंबर में अभी को पता चला जिस से वो बहोत एफेक्ट हुए थे इस लिए के खुद को गिलटी फील करने लगा था इस लिए के उस्सने बड्ड दुः दिया था उस बस स्टॉप पर और एक्साक्ट्ली वहीँ मनोज की डेथ हुई और बहोत बुरी तरह की डेथ हुई थी.

दिसंबर एन्ड हुआ, 2011 स्टार्ट हुआ…. अभी रेस्टलेस, बेचैन रहने लगा मनोज को सोच कर, उसस्के विधवा वाइफ और छोटे बच्चों को सोच कर…. वो उन् लोगों का फाइनेंसियल हेल्प करना चाहता था…. चाहे वहां नहीं जाता मगर अपने कंपनी की तरफ से किसी को भेज कर मनोज की वाइफ और बच्चों को फाइनेंसियल हेल्प करने को सोच रहा था.

और वो अभी ने सक्सेस्स्फुल्ली किया. अपने अकाउंटेंट और उसस्के असिस्टेंट को उधर भेजा कंपनी के तरफ से, मगर अब्रूहि कंपनी के तरफ से नहीं, वार्ना उन् लोगों को पता चल जाता …. अभी ने एक वर्चुअल कंपनी क्रिएट किया जो ग़रीबों के हेल्प के लिए बनाया अभी ने और उस कंपनी के तरफ से फाइनेंसियल हेल्प भेजा मनोज के फॅमिली के लिए. अभी बिल्कुल एनोनिमस रहा उस में. वहां पर किसी को भी पता नहीं चला के अभी ने हेल्प किया उन् लोगों की. और अगर अब्रूहि कंपनी के तरफ से हेल्प करता तब तो सबको पता चल जाता के अभी ने फाइनेंसियल हेल्प दिया था….

यह बात अभी ने श्वेता को भी नहीं बताया….. अभी श्वेता से भी नहीं मिला 2011 के मार्च महीने तक, हाँ फ़ोन से बात और मेस्सगेस होते थे….

फिर अप्रैल में क्यूंकि अभी का बर्थडे अत है तब अभी श्वेता मिले और फिर मिलने लगे पहले की तरह और सब थोड़ा मामूल पर आगया अभी के लिए….. फाइनेंसियल हेल्प करने के बाद अभी को सुकून हासिल हुआ मनोज वाले बात को लेकर.

अब कुछ ऐसे होने वाला था जिस के बाद, श्वेता के लिए बहुत बुरा हुआ और वो खुद को कॉसने लगी के क्यों उस्सने आज ताल अभी को वो राज़ नहीं बतायी….

श्वेता के ज़रिए नहीं अभी को रूही से सब सच का पता चला!!

अभी और रूही मिले 2011 में!! जून का महीना था….. दोनों 24 दिसंबर 1986 के बाद 2011 के जून महीने में मिले… 25 साल बाद!!! किआ आलम था!!! किआ रोना धोना हुआ- कैसे मिले? कहाँ मिले? किआ हुआ? Okay सब आराम से बताता हूँ nah!!:D

अभी मनोज के मौत के बाद सोचने लगा के कभी भी उस्का भी डेथ हो सकता है अचानक… तो उस्सने खुद से कहा के “मरने से पहले एक बार रूही से मिल लेता तो मुझे सुकून मिलता, रूही को वो डायरीज पढ़ने को ज़रूर देना होगा, उस्सको भी मरने से पहले पता चलना चाहिए मुझ पर किआ गुज़रा था उन् दिनों…. बस एक बार सिर्फ रूही से मिल लेता मैं मरने से पहले!!”

जून महीने में अभी अचानक एक दिन महेश से मिला करीब 7 या 8 साल बाद, वो अब पुलिस इंस्पेक्टर बन गया था. मिलते hi सब से पहली बात जो अभी ने किया वो था मनोज की डेथ की सिम्पथी पेश करना महेश को. और अब महेश भी शादी शुदा था और बाप था तीन बच्चों के. महेश ने अभी से कहा,

“अभी भाई, हम बहोत दिनों बाद मिले हैं आज चलो एक चाय पिटे हैं उस होटल में बैठ कर कुछ बातें करते हैं.”

अभी राज़ी हुआ. अस्सल में अभी ने आज दिल में यह सोच लिया था के आज वो महेश से रूही का हाल पूछेगा.

तो दोनों बैठे, एक एक कप चाय के साथ. अभी महेश के चेहरे में देख रहा था, मातुरे हो गया था महेश अब, उसस्के चेहरे में वो टेंडरनेस नहीं थी अब जो अभी हमेशा देखा करता था महेश के चेहरे में, मगर वो गेंटलेनेस्स अब भी था महेश में. महेश कुछ कहना चाहता था अभी से मगर अभी को दिख गया था के महेश झिझक रहा है या समझ नहीं रहा है के कैसे शुरू करें, इस लिए अभी ने hi बात किया यह कह कर;

“अरे महेश क्यों झिझक रहे हो कहो नाह जो कहना है वे अरे तवो में टॉकिंग यार, घबरा रहे हो या किसी बात का डर है? कहो नाह भाई!”

महेश ने मुस्कुराया, और अभी के चेहरे में लाल चेहरे से कहा,

“भाई लास्ट टाइम जीतनेय बार भी मैं आप से मिला था तो रूही को बताया था. रूही हर बार कहती रही के अगले बार आप से मिलूं तो आप को घर आने को कहूं, मगर हर बार आप अगले बार मिलते थे तो हम में सिर्फ कासुअल बात होते और मुझ में हिम्मत नहीं होती थी आप से घर आने को कहने के लिए, इस लिए के जिस तरह से आप को घर से निकला गया था मैं हमेशा सोचता था के आप इंकार करोगे आने से….”

अभी के जिस्म में एक थरथराहट सी हुई महेश की बातों को सुन कर…. एक अफ़सोस भी हुआ उस्सको और उस दिन को सोचा जिस दिन वो उस पंप स्टेशन पर गया था और फिर वापस नहीं गया…. रूही ने उस्सको बुलाया था वो भी कोई 17 साल पहले और अभी गया hi नहीं…. इतना अफ़सोस हो रहा था अभी को…. उसस्के आँखें भर आये महेश को देखते हुए और इस से पहले के अभी कुछ कहता महेश ने सर निचे झुकाते हुए कहा,

“भाई हम सब आप के गुनेहगार हैं, आप का दिल तोडा था हम सब ने, कुसूर मेरा भी है के उस दिन मैं ने कुछ नहीं कहा था, छुप रहा था उस दिन हालां के मैं रूही को बहोत प्यार करता हूँ मगर उस रोज़ उसस्के लिए कुछ नहीं कर पाया था, भाई मनोज बड़ा भाई था मेरा इस लिए उसस्के सामने मैं कुछ नहीं बोल सका था…. भाई उस्सने बहोत ग़लत किया था आप के साथ सबको पता है घर में….. रूही बहोत रोई थी और 5 साल तक मनोज से बात नहीं किया था उस दिन के बाद…. भाई जब मनोज मारा तो घर में सब ने एहि कहा के उस्सको आप की और रूही के दिल तोड़ने का सजा मिली….. मनोज की वाइफ आप को नहीं जानती मगर रूही ने उस्सक्को सब कुछ बता दिया था शादी के बाद के खुद मनोज की वाइफ ने भी कहा के आप की और रूही की बड्ड दुः लगी मनोज को…… अभी भाई हम सब को माफ़ कार्डो प्लीज….. आप घर चलिए नाह रूही आप का इंतज़ार कर रही है बरसों से!!”

अभी जैसे इमोशनल आदमी किआ यह सब सुनकर बिना रोये रह सकता था……? नहीं नाह? उसस्के आखों से झरर झरर आंसू बहने लगे थे और खुद महेश ने भी रो दिए यह सब कहते हुए….

कांपते होंठों से अभी ने पूछा,

“कैसी है मेरी रूही महेश?”

महेश: “आप चल कर खुद देख लीजिये नाह भाई! हर बार जब आप से मिला हूँ तो उस्सको बताया, वो नाराज़ होती के इस बार क्यों नहीं बुलाया आप को… हम शायद 5 या 6 बार मिले हैं नाह? तो उन् पाँचों बार रूही मुझसे रट हुए आप को कहने को कहा के उस्सने आप को बुलाया है…. उसस्के तरफ से बुलावा है भाई चलोगे नाह आप?! - और अब मनोज भी नहीं है आप को कुछ कहने के लिए….”

अभी: “25 साल बाद उस घर में जाना पड़ेगा मुझे महेश? वो आँगन, वो घर, वो कपडे धोने वाला पत्थर, वो गुलाब का बगीचा… सब वैसे hi हैं आज भी किआ?”

महेश: “चलो नाह भाई, खुद चल कर देख लो…. सब कुछ बदल गया है अब…. जहाँ वो बगीचा था वहां मेरा घर है और रूही मेरे साथ hi रहती है…. जहाँ पहले हमारा घर था वहां मम्मी पापा रहते हैं और ऊपर मनोज रहता था और अब उस्सकी वाइफ और बचे हैं!! सब कुछ बदल गया हैं पीछे 25 सालों में भाई….”

बिना चाय ख़तम किये अभी ने कहा,

“चलो भाई चलते हैं आज फिर उस गली में जहाँ जाना चोरर दिया था!”

महेश पुलिस की कार में था, अभी ने उस्सको फॉलो किया अपने कार से…. 14 कंस ड्राइव करना था और 15 मीन्स में रीच हो गए..

उस आगाँ में पहले महेश गया और उसस्के पीछे अभी ने अपने कार को किया और उस्सको सब नया लग रहा था कुछ भी वैसा नहीं था…. बिल्कुल अलग जगह था… वो आँगन अब सिर्फ एक लम्बा सा लेन बन गया था… हर किसी ने एक एक घर बना लिया था दोनों तरफ राइट साइड और लेफ्ट साइड में भी…. जो स्पेस था पहले किचन और मेहबूब के घर के बीच वो अब था hi नहीं…. जहाँ रूही की किचन हुआ करता था आज एक गेराज था, जहाँ बगीचा था अब महेश का घर था, हाँ मेहबूब का घर अब भी वही था, मगर रूही का पुराण तीन और लड़की वाला घर अब कंक्रीट का बारे एक माला वाला घर था, निचे रूही के पेरेंट्स रहते थे और ऊपर मनोज की वाइफ और बचे…. वो लेन अब अस्फाल्टेड था… नया नया अस्फाल्टेड लग रहा था… जो बड़ा सा पेयर हुआ करता था जिस के निचे बस था वो पेयर अब एक्सिस्ट hi नहीं करता था…. कोई बस भी नहीं था कहीं…. एक टोयोटा हीअके 15 सीटर जो नया लग रहा था वो लेन के आखरी एन्ड पर था, मान लो रूही के ओल्ड किचन के भी बाद में….. जो फीलिंग अभी पाना चाहता था वो बिल्कुल भी नहीं मिला ussko…wo फ़िज़ा नहीं थी, वो हवा नहीं थे, वो सुकून नहीं थी उस लेन में जो उन् दिनों उस आँगन में हुआ करता था…. सब कुछ बदला बदला सा था जैसे किसी और जगह पहुँच गया था अभी…..

अभी अपनी ज़हन में आज भी उस आँगन को वैसा hi सोचता था जैसे चोर्रा था 25 साल पहले…. उस्सको बिल्कुल भी नहीं पता था इतना बदलाव आगया होगा उस आँगन में …. लास्ट टाइम भी जब 8 साल के बाद आया था पंप स्टेशन पर तब तक तो सब बराबर था…. मगर आज सब कुछ बिल्कुल hi अलग था….

महेश अपने पुलिस कार से उतरा और अभी के करीब आकर धीरे से कहा,

“मैं उस्सको सरप्राइज करूँगा, आप कुछ मत बोलना आप को उसस्के सामने खड़ा करूँगा okay?!”

अभी ने एक गहरी सांस ली…. उस्का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था, हाथ पेयर थोड़ा कांपने लगे थे, फिर भी एक नया बना हुआ घर के दरवाज़े से एंटर किया अभी ने महेश के पीछे…. और जिस वक़्त अभी अंदर जा रहा था एक अधेड़ आदमी निकला उसी घर से जिसस्ने अभी के चेहरे में देखा, अभी ने भी उस्सको देखा थोड़ा सा दाढ़ी था आदमी का, और वो रूही के पहले वाले घर के तरफ गए, और टेरेस से होकर उस घर में गया तब अभी ने याद किया के वो ज़रूर रूही के पिता होगा…. अब भी ज़िंदा है वो अभी ने सोचा!

महेश ने अभी को कॉरिडोर में वेट करने को कहा, और एक कमरे में गया और कहा,

“देखो तो कौन आया है पहचानों इससे!”

तब महेश ने अभी का हाथ पाकर के कमरे के अंदर किया….

अभी के सामने एक पतली सी औरत एक व्हीलचेयर पर बैठी चश्मे के साथ अभी के चेहरे में देख रही थी!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…. (2134 वर्ड्स)
 
कामदेव भाई ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी यार. आप को पता है के मैं अपडेट देने में कभी भी कंजूसी करता hi नहीं, कई डबल और ट्रिप्पले उपदटेस भी दिया हूँ, 5700 वर्ड्स के अपडेट भी दिया हूँ इसी थ्रेड पर... मगर भाई अफ़सोस के रात को लिखता हूँ देर कभी 3 बजे तक लिखता हूँ, मगर कल की रात आप से बेहतर किस्को पता के कैसे गुज़रा था.... आप से hi बात करते आधी रात चली गयी थी फिर आप से कहा था नाह किश से बात करने जा रहा हूँ आप से बात करने के बाद :डी

भाई सुबह हो गयी उस से बात करते सिर्फ 1 घंटा सोया.... आज इसी लिए अपडेट लेट आया क्यूंकि उस्सको 1 घंटा पोस्ट करने से पहले लिखा गया था...

वैसे आज मैं डबल अपडेट hi देने वाला था. प्लान दिमाग़ में कर लिया था के कहाँ स्टॉप करूँगा मगर तब बहुत देर हो जाती अपडेट लिखते लिखते... इस लिए इतने में स्टॉप कर दिया....

फ़िक्र नहीं दोस्त कल कम्पेनसाते कर दूंगा क्यूंकि उन् दोनों के बिच जितना सुन्ना सुनना है वो काफी लम्बा जाएगा तब फ्लैशबैक शुरू होगी रूही की लाइफ की.

सॉरी भाई अब कल hi आएगा अपडेट.
 
इतनी डिटेल्ड रिव्यु और अप्प्रेसिअशन के लिए तेहि दिल से धन्यवाद विक्रम भाई, हाँ जो मिस्टेक आप ने कोटे किया है वो रूही का नाम लिख दिया श्वेता के बदले अभी सुधारता हूँ भाई
 
बहोत पुण्य किये हैं अभी ने पुण्य सब कवर कर देता है, जैसे के मनोज के बच्चों की फाइनेंसियल हेल्प....

दो यू थूंक और बिलीव के पुण्य करने से कर्मा बदलता है?

#मेरे ख़याल और बिलीफ से हाँ

और रही बात नवीन को धोका देने की तो अभी ने कभी एक लव्ज़ भी नहीं चोट वाली पहुंचाई नवीन को, उसस्के साथ फूल की तरह पेश आया, कभी उस्सको पता भी नहीं चलने दिया के उस्सको धोका दे रहा है, नवीन को कभी भी दुःख पंहुचा hi नहीं अब्भी के तरफ से जैसे मनोज ने पहुँचाया था अभी को..... तो किआ अभी की चान्सेस ज़्यादा है करना की मार से बचने की? पुण्य किआ कर्मा बदल देता है?? :हम:

यह बुसस मेरा एक सवाल है यारो :डी
 
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