XXX Sex Kahani - Nukar ya Raja - Page 15 - SexBaba
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XXX Sex Kahani - Nukar ya Raja

रूल्स फॉर अपडेट

1 -15 रेविएवस no अपडेट के

2 15 तो 25 रेविएवस अपडेट के विथ 1800+ वर्ड्स

3 30+ रिव्यु मेगा अपडेट 3क + वर्ड्स के

4 40+ रिव्यु महा मेगा अपडेट 5क+ वर्ड्स के

तो ये है मेरे रूल्स अपडेट को ले कर और अभी तक 15 के ऊपर रेविएवस नहीं मिले है तो no अपडेट

जिनको बुरा लगेगा की मैं नाटक कर रहा हु, तो समझा लो मैं 1800 से 2000 और 3क तक वर्ड्स के अपडेट लिखता हु, तो मैं चाहता हु की सभी रीडर्स रिव्यु दे , जो चाहते है की अपडेट मिले सिर्फ अपडेट मए रियेक्ट करने से कुछ नहीं होगा..

तो ये अब ये आपके उप्पेर है, अगर अप्प ये चाहते हो की अपडेट मिले तो रेविएवस दो, न तो मुझको अपडेट लिकने के पैसे मिलते है न आपको रेविएवस देने के लिया पैसे लगते है ok गुड डे,

अब जो होगा रूल्स के हिसाब से होगा, "रेविएवस दो अपडेट लो, नहीं तो वेट करो आराम से 😄
 
कमला

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अपडेट 88

विक्रम- कमाया ने मुझको भी ये बात अज्ज तक नहीं बताई की उसने क्यों है कहा, अब वो तुझको बता सकती है अभी तक तूने विक्रम के मुँह से विक्रम का रज़ज़ जाना है, और अब तुझको कमाया के रज़ज़ के लिया कमाया से hi बात करनी पड़ेगी यहाँ मेरा चैप्टर ख़त्म हुआ ..

राजू खड़ा हो गया और बोलै

राजू - मतलब आपका चैप्टर पूरा हुआ, अब भाभी का चैप्टर सुरु

तो चलिए सुरु करते है अज्ज का अपडेट

जब राजू ने बोलै तो विक्रम उसकी हालत देख है पड़ा और बोलै..

विक्रम - अरे छोटे तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे कोई बहुत बड़े ख़ज़ाना मिल जायेगा तुझको, अच्छा छोटे एक बात बता जरा मुझको..

राजू - है बोलिये न भैया क्या बात है

विक्रम- छोटे तूने मेरा रज़ज़ तो जान hi लिया तो तुझको क्या लगता है, मतलब तेरे हिसाब से क्या मेने गलत किया कमाया के साथ.

राजू - भइया अगर अप्प उनको अँधेरे मए रख कर उनसे सधी करके ये बात बताते तो ये गलत होता, अपने टिक किया की उनको सच्ची बात दी, पर..

विक्रम- पर क्या छोटे बोल, आराम से मेने तुझको सब बता दिया जो मेरे मन मए था तू भी बता दे

राजू - पर भइया क्या अपने बाबूजी के और अम्मा और पुरे परिवार के साथ धोका नहीं किया..

विक्रम- जनता हु छोटे, पर मेरे पास कोई रास्ता hi नहीं था

राजू - अच्छा भैया क्या भाभी को भी आपके रज़ज़ के बारे मए पता है पूरा, और अगर है तो उन्होंने क्यों खुद नहीं बताया मुझको..

विक्रम- राजू कभी ऐसे होता है की हमें अपने रज़ज़ के बारे मए खुद hi बताना पड़ता है, और वैसे भी किसी दूसरे के महू से क्या सुन्ना.. और है कमाया को पूछना पहले क्या थी उसकी कहानी..

राजू- अच्छा टिक है भैया..

विक्रम- अच्छा चल तोडा मैं तुझको हमारी खेती दिखा लू, तेरा टाइम पास भी हो जायेगा और मेरा भी सुबह का काम, उसके बाद चले जाना हवेली टिक है..

राजू - टिक है भैया..

तो इधर राजू और विक्रम को खेतो की तरफ जाने देते है और चलते है गाओं की तरफ पारो के घर जहा पारो खाना बना कर हॉल मए बैठी हुई थी और कजरी ( पारो की जितनी) नाहा धो कर आ रही रही थी..

पारो - अरे दीदी हो गया आपका काम जो करनी गई thi,sab साफ हो गया न..

कजरी - है ऋ पारो सब कपडे साफ कर लिए mene,bahut समय लग गया रे छोटी अच्छा छोटी अज्ज जब तालाब मए वो उनके बारे मए बाते चल रही थी

पारो - किनके बारे मए दीदी क्या बात हो रही थी जरा अच्छे से बोलो

कजरी - अरे वो का नाम था uska,hm हम है राजू बाबू की बाटे हो रही थी..

पारो राजू का नाम कजरी के महू से सुन चौक gai,fir बोली

पारो - अच्छा ऐसी कोण सी बास्त हो गई दीदी जरा हमको भी तो पता चले..

कजरी - अरे पगली तोडा घर से बहार जाती तो तुझको भी पता चल जाता सरे गाओं मए उनकी hi बाते हो रही है..


पारो - दीदी अप्प बातो को घूमना बंद करो और मुद्दे पर ावो बोलो क्या बात हुई है..

कजरी - अरे वो मैं तो कल गई नहीं थी खेत, तो कुछ और औरते गई थी, साथ मए मर्द भी तो वो बात रहे थी, कल जब राजू बाबू वह गए तो..

उसके बात कजरी ने साडी बात मिर्च मसाला लगा कर पारो को बता दी, अब पारो के दिल मए तो राजू के लिया इज़त और बाद गई.. फिर कजरी बोली..

कजरी - अच्छा सुन जल्दी से मुझको खाना दे दे मए चालू फिर खेत, और सुना है राजू बाबू भी कल खेतो मए hi रुके थे, सायद उनसे मुलाकात हो जाये..

कजरी की ये बात सुन, पारो के दिल मए राजू से मिलने की तड़प हुई तो वो बोली..

पारो - अच्छा दीदी मए भी चालू क्या आपके साथ खेत..

कजरी - तू, तू क्या करेगी रे छोटी खेतो मए, तेरा कोई काम नहीं होगा वह पर.

पारो - अरे दीदी वो तो मए बस तोडा सा घूम कर आ जंगी वापिस, वैसे भी यहाँ खली तो रहती hi हु..

कजरी - है ये भी चल फिर तू भी खाना खा ले दोनों चलते है, क्या पता राजू बाबू से मुलाकात हो जाये..

तो ये कह कर दोनों ने अपना खाना ख़त्म किया और चल दी खेतो की तरफ,

इधर राजू कुछ देर विक्रम के साथ खेतो मए घूमता रहा फिर अपने मोबाइल मए देखा तो 9 बजने वाले थे,

राजू (मन मए) - अरे यार 9 बजने वाला है मेरे नहाने का समय हो चूका है क्या करू है एक काम करता हु, भैया को पूछ लेता हु.. पर वो भी बिजी लग रहे है कुछ देर रुक जाता हु..

तोड़ी देर बाद विक्रम फ्री हुआ, क्युकी वो मजदूरों को काम समझा रहा था, इधर कजरी और पारो भी खेत पाउच चुकी थी, पर वो अभी विक्रम के माकन के पास नहीं आयी थी.. राजू विक्रम के पास जाकर बोल ा

राजू- भियो विक्रम भाइये

विक्रम- है छोटे क्या हुआ, मैं बहुत देर से देख रहा हु कुछ पूछना है क्या तुझको बोल क्या बात है..

राजू- भैया वो मुझको नहाना है..

विक्रम- अरे छोटे तू भी न 😄, ये भी कोई पूछने की बात है जा , टूबवैल मए नाहा ले

राजू- क्या भैया अप्प भी, मैं ऐसे खुले मए नहीं नाहा पाउँगा, कुछ और इंतज़ाम है तो बोलो..

विक्रम - तू भी न छोटे एक काम कर हमारे चाट पर बाथरूम है, वह नाहा ले जा.. और है काकी (कामवाली) को बोल कर दोनों के लिया कुछ नास्ता बनवा ले टिक है

राजू- टिक है भैया मैं चलता हु..

राजू ने पहले कामवाली को नास्ते के लिया बोल दिया और उप्पेर गया तो देखा की कुछ लोग बाथरूम के अंदर कुछ काम कर रहे थे, राजू उनको देख बोलै..

राजू- अरे भैया अप्प लोग बाथरूम मए क्या कर रहे हो मुझको नहाना है..

आदमी 1- अरे राजू बाबू, आपको नहं है तो अज्ज तो हो नहीं सकता है..

राजू- अज्ज नहीं हो सकता है, मतलब क्या है भैया आपका..

आदमी 2- अरे यार जरा देख कर बोलै कर की क्या बोल रहा है तू ये छोटे मालिक के छोटे भाई जैसे है, और तू

आदमी 1- माफ करना राजू बाबू वो मजाक करने की आदत हो गई है. तो गलती से.

राजू- अरे वो सब छोड़िये न भैया अप्प बताई की क्या परेशानी है.

आदमी 2- अरे बाबू वो लगता है, पाइप लाइन मए जाम हो गया है, या मोटर खरब हो गया है पानी नहीं आ रहा, हम लोग उसी को टिक कर रहे है..

राजू- अरे यार तो कितना टाइम लगेगा कुछ, अंदाजा है..

आदमी1- पता नहीं बाबू कुछ बोल नहीं सकते 1-2 घंटे लग सकते है, या पूरा दिन भी लग सकता है..

राजू- क्या पूरा दिन, अरे भैया मुझको नहाना था, और खुले मए नहाने की आदत नहीं है मुझको..

आदमी 2- तो ये बात तो एक काम करो न बाबू, यहाँ से 2 खेत के उस पार नहाने ले लिया, जगह (बाथरूम) बना है अप्प वही चले जाओ, पर जल्दी से, वो क्या है वह कुछ मजदुर लोग आते है, हाथ पर धोने के लिया

राजू- अच्छा टिक है, मैं वही नाहा लेता हु अज्ज, अच्छा मैं चलता हु..

इधर कजरी और पारो दोनों बाकि औरतो के साथ मिल गई और

औरत 1- अरे कजरी ये कोण है ,किसके साथ आई है अज्ज खेतो मए.

औरत- अरे काकी पहचान नहीं पाई क्या अरे ये तो पारो hai,kajri की देवरानी पर कजरी इसको यहाँ कैसे..

कजरी - अरे कुछ नहीं बभाभी अब घर मए hi रहती hai,to बोली की अज्ज थोड़ा खेत देख कर आ जो तो के आई और कुछ नहीं..

ये और कुछ बाटे कर hi रही थी की पारो को जोरदार पिसबा लगी तो.. पारो धीरे से कजरी को साइड मए ले जाकर बोली..

पारो - दीदी, दीदी जोर से पिसबा लगी है, कोई जगह डंडो जल्दी से

कजरी- अरे तू भी न छोटी, पूरी पागल है अरे करके आना चाहिए न था और तू..

पारो- दीदी दन्त बाद मए लेने, अभी तोडा जल्दी से..

कजरी - है समझ गई मैं, चाल यही पास मए जगह है, मैं भी तेरे साथ चलती हु,

इधर राजू तुरंत वह गया, अब उसने दूसरे कपडे तो पकडे नहीं थे न विक्रम से मांगे थे तो

राजू - एक काम करता हु ऐसे hi नाहा लेता हु, और छड़ी को निचोड़ कर वापिस पहन लूंगा.. पर ये दरवाजे मए लॉक नहीं है कही खुल न जाये, अरे नहीं ऐसे कैसे खुल जायेगा वैसे भी इस टाइम कोई नहीं आता है ऐसे बोल रहे थे वो लोग,

और राजू नहाना सुरु कर चूका था और इधर कजरी और पारो, दोनों उसी तरफ ा ा रहे थे

अब राजू नाहा चूका था और उसने अपनी छड़ी निकल ली, लेकिन इससे पहले की वो टावल पकड़ पता दरवाजा खुल और

- हाय दिया ये क्या

राजू ने सामने देखा तो कजरी और पारो का पूरा महू खुला हुआ, और उन दोनों की नजरे निचे राजू के मोठे लानत पर जो टांडा पानी की वजह से तित हो गया था

इमेज


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कजरी और पारो की नज़ीरो ने कुछ पालो मए राजू के लानत को पूरा अपने दिमाग मए उतर लिया, और कजरी ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया , पारो और कजरी कुछ देर ऐसे hi कड़ी रही फिर कजरी बोली..

कजरी - ये क्या देख लिया रे छोटी, गलती हो गई रे हमसे.

पारो - दीदी जो हुआ वो अच्चानक हुआ, अब चोलो भी उनको भहर भी आना होगा, और मुझको जोर से लगी भी है..

कजरी - है, है टिक तू वह कर ले चल मैं भी साथ मए चलती हु..

कजरी पारो चल दी, और राजू अपने मन मए सोचने लगा.

राजू - ये क्या हो गया अच्चानक से, मतलब उन दोनों ने पूरा देख लिया होगा, अरे यार अब मैं कैसे, मतलब पारो का समझ मए आता है, पर कजरी भाभी वो कैसे..

ये सब सोचना ख़त्म कर राजू और जल्दी से निकल कही और कोई न देख ले मुझको इस हालत मए

इधर कजरी और पारो हलकी होने लगी पर पारो और कजरी के दिल दिमाग मए तूफान उठ चूका था

पारो ( मन) हाय कितना बड़ा और खूबसूरत लानत था राजू का, तोड़ी देर और देख लेती, पर दीदी साथ मए, मैं तो सुच कर आई थी की राजू से मुलाकात हो जाये पर यहाँ तो उनके हत्यार के hi दरसन हो गए .. जरूर दीदी भी यही सोच रही होगी , क्यों न मैं दीदी को पता लू और दोनों देवरानी, जेठानी एक साथ मजे ले लेंगे...

कजरी ( मन मए) - हाय रे कितना बड़ा लानत की लानत नहीं लुदा था कितना बड़ा और सुन्दर, मेरे पति का तो आधा भी नहीं, एक बार मुझको छोड़ दे तो कितना मजा आये . जरूर पारो भी यही सोच रही होगी, वैसे भी मेरी तरह ये भी प्यासी है, मेरे पति की तरह इसका मर्द भी कुछ काम का नहीं है, किसी भी तरह से इसको मानना होगा...

पारो और कजरी दोनों अपनी सोच मए लगी थी अब कैसे होगा क्या होगा इसलिए, रिव्यु देते रहिये 😁

😎 तो बे कॉन्टिनोएड 😎
 
तो पिछले अपडेट मए अपने देखा ki,paro और कजरी दोनों ने, राजू की मोठे हत्यार को सामने से देख लिया, पर कुछ नहीं बोल पाई और राजू भी जल्दी से बहार निकल गया, इधर पारो और कजरी दोनों hi अपने दिमाग मए प्लान सोचें लगी की क्या हो सकता है आगे,

तो चलिए सुरु करते है

इधर पारो और कजरी खली हो चुकी थी और बाकि औरतो के साथ जा मिली, अब जहा दो से ज्यादा औरते हो वह बात तो होगी hi, यहाँ भी ऐसा hi कुछ चल रहा था, पर कजरी और पारो तो अभी जो हो रहा उसका कोई मतलब hi नहीं था वो तो बस राजू और उसके हत्यार के बारे मए सोच रही थी, तभी

औरत 1- क्यों हुआ रे कजरी कहा घूम है, हम यहाँ क्या बोल रही है , कुछ ध्यान भी है तुझको हूँ..

औरत 2- अरे काकी तुम भी न अरे क्या सोचेगी जरूर भैया के बारे मए सोच रही होगी, की अज्ज रात कैसे जाएगी..

औरत1- है ऐसा है क्या कजरी, अरे हमको भी बता न, वैसे भी तेरी चूतड़ ऐसी hi बड़ी नहीं होगी, जरूर तेरे मर्द ने बहुत म्हणत की है इसमें..

और वो सब हसने लगी, पर सच्ची तो सिर्फ कजरी hi जानती है की उसका मर्द है या नहीं है..

औरत 2- है काकी सही है, वैसे भी हमारे भैया इतने तगड़े है, जरूर रात भर रेल (ट्रैन) चलते होंगे वो, और कजरी उसकी पटरी क्यों भाभी सही है न..

कजरी बस मुस्कुरा दी और मन hi मन सोचने लगी की

Kajri(man मए) - अब तुमको क्या बोलू बहन सरीरिका बड़ा होने से कुछ नहीं होता मारंगी भी होनी chahiye,jo मेरे पति के पास नहीं है

औरत 1- अरे कजरी को छोड़ो भी वो तो पुराणी हो गई है, जरा हमरी नै दुल्हन पारो की तरफ तो ध्यान दो जरा, कैसे पारो रात मए नींद तो पूरी होती बाई न, की रात भर जगा कर रखते है हमारे देवर जी तुमको..

औरत2- अरे तू भी क्यों हंसी उदा रही बिचारि की, क्यों तेरी भी सदी हुई थी, तब तू तो 2 हफ्ते तक घर के बहार न निकली थी क्यों..

औरत1- क्या काकी वो भी बोलने की बात है, वो क्या है न आपके देवर जी तो खिलाडी है, तो बिस्तर मए भी, हमें पीस देते थे, क्या रात क्या दोपहर, जब भी उनका मन करता चढ़ जाते थे मेरे उप्पेर..

आवर्त2- आये हाय जरा लाली तो देखो इसकी, क्यों ऋ अभी भी, हर रोज हु हु..

औरत1- ची काकी तुम भी न, मेरा मजाक उड़ाना बंद करो..

इसी तरह हर औरत एक दूसरे के बारे मए मजाक उड़ाती रही पर, इस मजाक मए भी वो कजरी और पारो को अनजाने मए बता रही थी कक, कैसे उनकी कई रेट रंगीन हुआ करती थी.

पारो (मन मए) - अप्प सही बोल रही दीदी जगाई तो रहती हु मए, इस जिस्म की गर्मी से जिसको आपके देवर बजा नहीं सकते है.. 🥺

इधर पारो और कजरी ने एक दूसरे की आँखों मए देखा, दोनों की आँखों मए तोड़ी नमी थी, जो बताने के लिया काफी थी की टोनो दुखी और प्यासी थी..

फिर भी दोनों मुस्कुराते रही क्युकी और कुछ नहीं कर सकती थी वो इस बारे मए.. दो अपना मन और सरीर दोनों को मरकर बाकि सब औरतो की तरह हसने लगी और कर भी क्या सकती थी...

इधर बिचारा राजू नाहा कर आ गया और कमरे मए बाथ सोचने लगा की, कजरी भाभी और पारो दोनों अचानक से कैसे आ गई वह पर,.

राजू- यार साला किस्मत hi खरब निकली, वो दोनों कैसे आ गई वह, पर पारो का समझ आता है की वो मेरे लानत को घर कर देख रही थी, पर कजरी कही वो भी तो प्यासी नहीं है, पारो की तरह, देखना पड़ेगा की अब आगे क्या होता है हु.. पर अभी कमाया के रज़ज़ को पता करना होगा, की कोण सी बात है की उनहोंने विक्रम भैया की सच्ची जानते हुए भी उनसे सधी की..

राजू अपनी सोच मए लगा हुआ था, इधर कजरी पारो अपनी अपनी सोच मए था और तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई ,राजू ने जा कर दरवाजा खोला too,kaamwli नास्ता लेकर कड़ी हुई थी, राजू ने नास्ता लिया और फिर कहते कहते सोचने लगा की क्या होगा ab,aur वह हवेली मए कुछ और hi हो रहा था, क्या चलते है हवेली मए...

तो जैसा की हमेसा की तरह हवेली के हॉल मए कमाया, माया और परिधि बैठी हुई थी, और ठकुरिन और सलोनी मदिर गई थी.

परिधि - हूँ तो भाभी क्या बात, अभी तक मेने राजू बाबू (मुँह मटका करके ) नहीं दिख रहे है हूँ..

माया - है जरा मैं भी तो सुनु की तूने राजू को कहा बेझा है कमाया हूँ..

कमाया - क्या मतलब कहा बेझा है, और तुम दोनों मुझसे क्यों पूछ रही हो वो उनकी मर्जी जहा भी जा सकते..

माया - अच्छा झूट मत बोल, है मानती हु राजू अपनी मर्जी से कही भी आ जा सकता है, पर तुझको मालूम न हो मैं नहीं मानती हु..

परिधि - है मैं माया भाभी की इस बात से पूरी तरह से सहमत हु..

कमाया - है तो क्या, मुझको तो पता है वो कहा है और मेने मजी को भी बता दिया है पहले से..

माया - है वो तो मैं समझ hi गई थी, क्युकी मजी ने अभी तक राजू के बारे मए नहीं पूछा था इसलिए, तो कहा है राजू..

कमाया- क्यों तुझको क्या करना है कही भी हो, वैसे भी वो शाम तक आ जायेंगे, तुम दोनों चिंता मत करो..

परिधि- पर ये तो गलत है न भाभी की राजू के बारे मए आपको सब कुछ पता रहता है पहले से, और हमें नहीं ऐसा क्यों..

माया - है क्यों बोल, मैं भी तो जणू क्या बात है, क्या रज़ज़ है..

कमाया कड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए और तोड़ी ऐडा के साथ बोली..

कमाया- वो क्या है न पारी ( परिधि ) , माया की उनके दिल मए मेरे लिए एक अलग और स्पेशल जगह है, और जो बात उनको पता है, मतलब मुझको भी और अगर नहीं तो मुझको बता देते है 😎..

वैसे भी उनको तुम्हारे विक्रम भैया में बुलाया था कल, तो रात वही रुक गए , अज्ज आ जायेंगे मुझको बता चुके है वो 🙃, ाचा अब मैं चलती हु bye..

और कमाया एक विजय मुस्कान लिया चली गई पर परिधि और माया को अपनी बातो से hi जला गई और दोनों सोचने लगी..

परिधि (मन मए) - कुछ तू है राजू और भाभी के बिच, मैं पता करके रहूंगी की क्या बात है, और ये भाभी कभी भी राजू को उनके नाम से क्यों नहीं बोलती हमेसा अप्प या उनके hi बोलती है, जैसे की 😦 एक बीवी या प्रेमिका, पर क्यों और राजू भैया के पास क्यों गया है कुछ तो रज़ज़ है...

माया ( मन मए) - 😡 साली कुटिया, कामिनी कही की कैसे मेरे मुँह पर hi बोल गई की, राज के लिया वो स्पेशल है और मैं कुछ नहीं 😠, तू रुक जा कमाया की बच्ची अब देख तू मेरी माया कैसे राज को अपना बना लुंगी..

इधर राजू इन तीनो की सोच से अंजना अपने कदम हवेली की तरफ ले चूका था, पर उसकी नज़रे कही जैम चुकी थी, और वो थी उसके टिक सामने पारो और कजरी जो चल काम और अपनी जवानी का रस राजू के लिया छलका रही थी, दोनों को hi पता था की राजू उनके पचे hi है तो ये हुआ कैसे तो जब सब के जाने की बारी आई तब..

राजू - तो विक्रम भैया मैं भी अब चलता हु, वैसे भी 4 बज चुके है, जाते जाते 5 बज जाएगी..

विक्रम- है वो तो टिक है छोटे पर तुझको रास्ता तो पता है न, गाओं की तरफ जाने का की कही भूल न जाये तू

इससे पहले की राजू कुछ बोल पता, पीछे से कजरी और पारी की आवाज आ गई..

कजरी- अरे छोटे मालिक अप्प इसकी चिंता मत करिये, हम दोनों घर hi जा रही है, ये भी हमारे पीछे पीछे चल देंगे क्यों पारो..

पारो - है दीदी बिलकुल, अप्प चिंता मत करिये छोटे मालिक, हम दोनों इनका पूरा ख्याल रखेंगी..

राजू तोडा कप गया क्युकी पारो और कजरी की आँखों मए उसने एक अलग सी चमक देख ली. वो कुछ बोलता उससे पहले hi विक्रम बोल पड़ा...

विक्रम- है ये टिक रहेगा, टिक राजू मैं भी चलता हु..

विक्रम के चले जाने, के बाद राजू के सामने कजरी और पारो दोनों कड़ी थी और बोली..

कजरी - जरा ध्यान से पीछे -पीछे hi चलिए गए, ध्यान से देख कर ध्यान न बात जाये, है न पारो.

पारो - जी दीदी अप्प टिक बोल रही हो, ध्यान से चलिए फिर राजू जी 😉..

और फिर क्या राजू उन दोनों से तोड़ी दुरी बना कर राजू उन के पीछे चल रहा है, पर दोनों देवरानी जेठानी, राजू को अपनी जवानी दिखने का कोई मुका नहीं छोड़ना चाहती थी, इसलिए अपनी साडी को तोडा कमर के नीस कर लिया और सर्जरी तोड़ी टाइट कर ली, राजू बिचारे का ध्यान न चाहते हुए भी, दोनों की मदमस्त जवानी को देखे बिना नहीं रहा और एक जगह तो, दोनों औरते पूरी तरह से झुक गई, कटे का बहना बना कर, और राजू को अपनी टाइट चूतड़ों का दरसन भी करा दिया, दोनों hi राजू को तरसती रही रस्ते भर और राजू बड़ी मुश्किल से अपने हत्यार को अपने पेण्ट के अंदर काबू रख पाया था..

पर दोनों hi पारो और कजरी दोनों के दिल की बात समझ चुकी थी की दोनों की मंजिल एक hi है, जिसको दोनों देख भी चुकी थी, और राजू तोडा आगे चला गया तब कजरी बोली

कजरी - क्यों ऋ छोटी मैं देख रही हु कुछ ज्यादा hi तू अपनी चूतड़ मटका रही थी, राजू को दिखने के लिया है न..

पारो - है दीदी जैसे अप्प मटका रही थी अपनी चूतड़ है न,

कजरी - मतलब क्या है ऋ..

पारो - साफ मतलब है दीदी, अप्प भी जानती हो और मैं भी की, हम दोनों के पति इस काबिल नहीं की हमें एक औरत होने का पूरा सुख दे सके, तो अब हमारे पास एक hi रास्ता बचा है..

कजरी- तो क्या तू अपने पति को धोका देगी सिर्फ अपनी पायस मिटने के लिया छोटी

पारो - की दीदी अप्प मुझको इतनी भी गिरी हुई मत संजो, वैसे भी आपके डावर मुझको इसकी इजाजत दे चुके है.. बस उनको पिता बना है और उनका नाम ख़राब न हो इतना hi चाहते है वो..

कजरी - मतलब तुझको भी..

पारो - तुझको भी से मतलब, एक मिनट मतलब आपको भी इजाजत मिल चुकी है जेठ जी से, मतलब..

कजरी - है मतलब अब हम दोनों को मिल कर अपनी मंजिल पाई होगी तू तैयार तो है न छोटी..

पारो - पर दीदी एक परेशानी है

कजरी - क्या, क्या परेशानी है ऋ पगली..

पारो (कजरी के कान मए ) - दीदी वो मंजिल बहुत बड़ी है, और रास्ता तोडा सकरा कही रास्ता फैट न जाये, hi hi hi

और पारो हसने लगी कजरी समझ गई पारो की बातो का मतलब वो मुस्कुरा कर बोली.

कजरी - छोटी मंजिल जितनी बड़ी होगी, मजा उतना hi आएगा, और रास्ता टूटेगा नहीं तो नया रास्ता उससे निकलेगा कैसे..

दोनों देवरानी जेठी इस तरह से बोल रही थी की, राजू को उनकी बात समज मए आ जाये और राजू समझ भी गया,

राजू (जोर से) - मंजिल बड़ी है न तो रस्ते के भी बड़ा करना होगा, चाहे वो 1 रास्ता हो ( पलट कर दोनों को देखते हुए) या फिर दो रस्ते.. 😎

😎 तो बे कॉन्टिनोएड 😎
 
अपडेट 90

राजू कजरी पारो -1

पिछले अपडेट मैं अपने देखा की

कजरी - छोटी मंजिल जितनी बड़ी होगी, मजा उतना hi आएगा, और रास्ता टूटेगा नहीं तो नया रास्ता उससे निकलेगा कैसे..

दोनों देवरानी जेठी इस तरह से बोल रही थी की, राजू को उनकी बात समज मए आ जाये और राजू समझ भी गया,

राजू (जोर से) - मंजिल बड़ी है न तो रस्ते के भी बड़ा करना होगा, चाहे वो 1 रास्ता हो ( पलट कर दोनों को देखते हुए) या फिर दो रस्ते..

तो चलिए सुरु करते है..

अब कजरी और पारो कोई नासमज तो नहीं थी की राजू की बातो का मतलब न समझ सके वो, समझ गई की, राजू उनका इशारा अच्छी तरह से समझ चूका था, दोनों मेसे कोई कुछ नहीं बोलै पर, उनके चेहरे की चमक सब कुछ बता रही, तब तक गाओं भी आ गया और कजरी का घर सामने hi था तो..

कजरी - अच्छा राजू बाबू, हमारा घर तो आ गया अब..

राजू- अच्छा इतनी जल्दी ध्यान hi नहीं दिया की कब घर आ गया अप्प लोगो का..

पारो- ाचा ध्यान क्यों नहीं दिए, कहा ध्यान था आपका हूँ 🙃..

राजू- बस कुछ पर था ध्यान पर माँ कसम मजा आ गया तोडा पास से देखता, उसको अपने हाथो से छू लेता, मसल देता तो मजा hi आ जाता..

कजरी और पारो की गाल लाल हो रहे थे राजू की बात सुन कर क्युकी वो दोनों समझ चुकी थी राजू उसके सरृर की hi बात कर रहा है, मतलब वो दोनों को मसलना चाहता था , तब कजरी बोली

कजरी - ाचा टिक है मुका मिले तो कर लीजिएगा अपने मन की जब का तब देखना, पर पहले, आये हमारे घर मए, अप्प भी तोडा ढूढ़, छाए ( टिया) या सरबत पी कर hi जाना

पर यहाँ कजरी ने दूध सब्द पर तोडा ज्यादा जोर दिया, और राजू की नजर बर्बर कजरी की कपड़ो की ऊपर उसके चुकी का आकलन करने लगा, पर कुछ पल की लिया hi क्योंकि पारो ने उसका ध्यान तोड़ दिया..

पारो - कहा कहा खो गए अप्प राजू बाबू, चलना है की नहीं अंदर आपको..

राजू - चलते है, वो मैं ये सोच रहा था की, मणि तोडा ज्यादा hi ढूढ़ ( पारो से स्तनों को गुरते हुए) पसंद है तो जरा ध्यान से 😉..

पारो - अप्प बिलकुल टेंसन मत लीजियेगा राजू बाबू है न दीदी..

कजरी - बिलकुल सही, वैसे भी राजू बाबू हमारे घर दो मस्त भरी हुई गए (काऊ) है, जिनके पास बहुत दूध है, आपको पसंद आएगा..

राजू ( मन मए) - है तुम दोनों जो हो, तोड़ी देर रुक जाओ इतना ढूढ़ निचोड़ लूंगा की हमेसा मेरे hi पास आओगी दूध पिलाने मुझको..

राजू- है वो तो मैं देख hi चूका हु, मुझको तो दोनों hi पसंद आ गई, पर सोच रहा हु, किसका दूध पहले पि लू किसका बाद मए.. अप्प दोनों क्या लगता है किसका पहले चूस लू मैं, मतलब किसका दूध पी लू.. अप्प दोनों hi फैसला लेट लेना किसका दूध मुझको पहले पिने को मिलेगा 😉🙃..

पारो और कजरी के तन बदन मए आग लग गई, राजू के बोलने से, एक तो पहले से पयासी थी और यहाँ, कुवा खुद उनके पास आ गया उनको अपना पानी पिलाने के लिया,..

कजरी (मन मए) - अहह मैं तो सोच कर hi गरम हो रही हु की, जब अपने अपने होंटो से मेरा दूध piyenge,mere दूध को मसल मसल कर दबा दबा कर उफ़, कितना मजा आएगा मुझको तो इंतज़ार hi नहीं हो रहा है

पारो (मन मए) - मैं तो कबसे तैयार हु आपको दूध पिलाने के लिया, अच्छा है अप्प कुढ़ hi समज गए मुझको ज्यादा महेनता नहीं करनी पड़ी, पर किसका दूध अप्प पहले पिओगे राजू बाबू हूँ..

पारो ( अपने होंटो को काटे हुए) - जी वो तो आपकी मर्जी जिसजे भी दूध आपको पसंद आते चलिए अब..

राजू ( तोडा और खुल कर) - देकता हु किसका दूध जाता मिटा होगा, उसी को पि लूंगा, पर मेरी एक डाटा बहुत बुरी है

पारो करजरी (एक साथ) - कोण सी आदत

राजू -एक बार जो दूध मुझको पसंद आ jate,mere होंटो मए लग जाये फिर to,jab मेरा मन करेगा , जहा करेगा वह दूध पिलाना होगा सोच lol..

कजरी और पारो तो कुछ बोल hi nahi,raju ने सीधे बोल दिया ki,wo तो छोड़ेगा नहीं दोनों को और पारो कजरू तो यही चाहती थी और दोनों ने है मए मुंडी हिला कर अंदर घुस गई..

राजू (मन मए) - क्या बात है, पहले तो सिर्फ पारो का दूध पिने को मिलता अब तो दोनों ननद जेठानी का दूध एक साथ मिलेगा, अज्ज hi पि लूंगा किसी एक का दूध, अब दोनों तैयार है मतलब टोनो hi आपस मए फैसला करेगी.

राजू भी अंदर चला गया, परप और कजरी दोनों समन अंदर रख कर वापिस आ गई और फिर कजरी बोली..

कजरी - राजू बाबू अप्प, वह उस रूम मए जाओ, हम दूध ले कर आती है..

राजू - है टिक है पर, एक एक करके पहले एक दूध पिऊंगा, फिर दूसरे का दूध पिऊंगा टिक है और तोडा जल्दी से आना, बहुत पायष लगी है..

राजू रूम अंदर गया और कजरी और पारो किचन मए चली गई और दोनों एक दूसरे को देखती रही फिर

पारो - दीदी अब क्या करे, यहाँ तक तो सब बढ़िया hi था पर अब क्या, मुझको तो लगता है वो तैयार है हमारा सीकर करने के लिया..

कजरी, - है तो करेगा hi जब कुढ़ सीकर सामने से निमंतरण दे रहा है तो शेर पीछे तोड़ी हटेगा वो सीकर करेगा hi.. और हम तो वही चाहती थी न

पारो - है हम वही कहती थी दीदी पर अब क्या, अपने देखा न उनका कितना बड़ा और सुन्दर था..

कजरी : अरे जब से उसको देखा है तब से तड़प रही हु मैं, पर अब अंतिम निर्णय लेना है की कोण पहले उसके सामने जायेगा तू या मैं,

पारो - दीदी अप्प hi पहले जाओ देखो वो क्या करते है, और अगर अज्ज hi वो आपको पूरा पेल दे तो मेरे पास टाइम रहेगा hi..

कजरी - पर मैं क्यों छोटी तू क्यों नहीं..

पारो - वो दीदी अप्प तोड़ी anubha(experience) वाली हो आपको अच्छे से पता होगा की क्या करना है कैसे फिर अप्प मुझको बताना..

कजरी - बात तो टिक बोल रही है छोटी पर, मुझको तोडा दर लग रहा है..

प्रो- दर केसा दर दीदी

कजरी - मतलब दर और तोड़ी गब्रहत भी की क्या होगा, कैसे होगा, देख मुझे लगा था की, राजू को पटाने मए कुछ समय लगेगा पर, यहाँ इतनी जल्दी से हो गया की, कुछ समझ hi नहीं आया..

पारो - वैसे दीदी बात तो अप्प सही बोल रही हो तोड़ी सी दर तो मुझको भी लग रही, कही हम जल्दबाजी तो नहीं कर रहे है..

कजरी- वही तो छोटी कही कुछ गड़बड़ न हो जाये वैसे bhi,kuch भी बोलो राजू तो अभी भी एक लड़का (22-23सल्ल ) hi है..

पारो - पर अब बहुत देर हो क्युकी है दीदी हम कुछ भी नहीं कर सकते है, बात आगे निकल चुकी है अब जो होगा देखा जायेगा

कजरी: टिक है छोटी तू बोलती है तो मैं जाती हु fir,wese मुझको तो अभी तक भरोसा नहीं हो रहा है, की ये सब हो रहा है..

पारो - बात तो टिक बोल रही हो दीदी पर हो तो यही रहा है, अब ये लीजिये दूध का गिलास और जाये, देखते है क्या करते है वो..

और कजरी और पारो की बात ख़त्म हुई, और कजरी दूध का ग्लास लेकर चल दी रूम मए . .

रूम मए राजू मोबाइल चला रहा था ( मोबाइल मए बर्बाद हो गए सब) कजरी को देख राजू ने मोबाइल साइड रख दिया, अब कजरी दूध का ग्लिस टेबल पर रखने जे जोकि थो, उसके सर्जरी का पालो कसक गए और राजू की आँखों के सामने, कजरी के असली दूध की घाटी आ गई, कजरी को पता चल गया, फिर भी उसने राजू की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली..

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कजरी - ली जिए राजू बाबू आपके लिया दूध, बिलकुल मीठे है और बिना मिलावट के पि लीजिए..

और धीरे से कजरी ने अपना पालो सम्हाल लिया, पर राजू समझ गया की ग्लाश तो एक बहाना, असली दूध दिखना था कजरी को..

राजू - अच्छा सच मए , पाए यहाँ तो एक hi दूध है दुरी वाली दूध ( पारो) कहा है..

कजरी - वो क्या है राजू बाबू छोटी ने hi बोलै की आपको पहले एक दूध चक लेना चाहिए फिर दूसरा भी पी लीजिए गए, न दूध कही जायेगा न अप्प, अच्छा मैं चलती हु..

राजू - अरे रुको, मुझको आपसे बात करनी है काकी, बहुत हो गए ये इशारो इशारो मए बाते खुल कर बोलिये की हो क्या रहा है,

राजू के बोलने पर कजरी भी सन्ति के साथ राजू के सामने बाथ गई, दोनों कुछ देर शांत रहे, फॉर राजू ने सुरुवात की..

राजू- देखिए काकी, अब अप्प को पारो भाभी और मेरे बारे मए आपको पता hi होगा, इसका अंदाजा तो मैं लगा चुकु हु, आपको पता है न..

राजू के सावला पर कजरो बोली तू नहीं पर मुंडी हिला कर अपनी रजामंदी जरूर दी..

राजू - टिक है पारो का मैं समझ सकता हु, पर अप्प क्यों, मतलब अप्प भी उनकी तरह hi, मतलब पयासी पर मैं hi क्यों कोई और क्यों नहीं.. अप्प दोनों ने ये सब पहले hi सोच लिए है की अप्प दोनों क्या करना है कैसे करना है तो बोलिये साइड बात क्या है..

कजरी - है राजू तुमने टिक सोचा, मुझको सब मालूम है, और जो कुछ भी अज्ज हुआ, हम दोनों ने पहले hi सोच लिया था, और रही बात की तुम hi क्यों तो सुनो, मेरे पति भी मेरे डावर की तरह hi है, मतलब पुरे नामर्द नहीं, पर वो मुझको पूरी संतुस्ती नहीं दे सकते और न hi माँ बना सकते है कभी, मैं उनको छोड़कर जाना चाहती थी पर, मेरे परिवार मए भी कोई नहीं है, मेने सोचा की अगर मेरे पति नहीं तो काम से काम मेरे डावर की औलाद से इस कंदन का चिराग आगे बाद जायेगा, पर मुझको क्या पता की, मेरी डावरणी की किसमत भी मेरी तरह निकलेगा, इसीलिए जब मुझको तुम दोनों में बारे मए पता चला तू, मेने पारो को रजामंदी दे दी.. पर मेरे दिल मए तुम्हारे लिए एक अलग जगबा थी पर वो उतनी नहीं ,पर जब अज्ज तुम्हारे उस, उस हत्यार को देखा तो मेरे अंदर की पयासी औरत जग गई,

राजू- मैं किसी और की पत्नी के साथ ऐसा नहीं कर सकता, उसके पति की इजाजत के बगेरा क्या काका को पता है इसके बारे मए..

कजरी - है उनको पता है, पर ये नहीं की वो तुम हो..

दोनों कुछ देर चुप रहे फिर राजू ने कुछ ऐसा बोलै की कजरी शर्मा गई

राजू- चलाओ सब बात फाइनल हो गई, तो काकी अब तोडा दूध भी पीला तो, दिखा तो चुकी हो पर पूरी तरह से देखना है मुझको 😉

कजरी शर्मा गई और उठ कर का कर जाने लगी, पर राजू ने उसका हाथ पकड़, कजरी समझ गई की अज्ज वो काम सी गई, पर फिर भी नाटक करते हुए बोलने लगी..

कजरी- छोड़दिज्ये राजू बाबू, पारो देख लेगी, जाने दीजिये मुझको, ाःह ममम

पर कजरी आगे कुछ बोल नहीं पाई, क्युकी

😎 तो बे कॉन्टिनोएड 😎
 
तो इतने दिनों बाद इस स्टोरी को फिर से सुरु कर रहा हु तो तोडा इंट्रो एक बार फिर से

1 दीनदयाल ठाकुर - घर और गाओं के महकीया, खानदानी जमीं जितना ज्यादा पैसा उतना hi बड़ा दिल, गाओं वालो के लिए सब कुछ

2 सन्ति देवी - नाम है सन्ति पर है क्रांति तेज है और तोडा गुस्से वाली भी फिर पर नारयल की तरह भर से कठोर और अंदर से नरम

इनके 2 बेटे है (पहली पत्नी से)

1 वीर ठाकुर- बड़ा लड़का है ज्यादा तर गाओं से बाहर hi रहता है, सिटी की जिम्मेदारी इनकी hi है

सलोनी ठाकुर- वीर की बीवी तोड़ी सी सवाली है पर दिन की बहुत अछि बड़े घर से आई है



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2 विक्रम ठाकुर- दूसरा लड़का एक सदाहरण कद kati,patli सी आवाज, गाओं के खेतो की जिम्मेदारी इनकी है, वही बने घर मैं रहते है , बहुत काम हवेली आना होता है

काम्य ठाकुर (हेरोइन) - ये विक्रम की बीवी जैसे नाम वैसी hi काम हर एक अंग जबरदस्त, लम्बे बाल, तिरछी नजर ढूढ जैसे गोरा बदन, और पड़ी लिखी बहु


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राजू- एक अनजान लड़का जिको अपने पिछली ज़िन्दगी के बारे मैं कुछ याद नहीं है, पर अब ठाकुर परिवार का लाडला बन चूका है
 
अपडेट 91

कजरी पारो और राजू कंटिन्यू

सो फ्रेंड्स काफी दिनों बाद लगभग 1 साल बाद अपडेट लिख रहा हु, तो हो सकता है की कुछ वर्ड्स मिस हो जाये या फिर इधर उधर तो तोडा देख ली जिए गए,

पिछले अपडेट मए अप्प लोगो ने देखा की राजू कजरी और पारो ( जितनी और देवरानी) के साथ उनके घर जा चूका है और यहाँ पर कजरी ने उसको अपने ढूढ (ब्लाउज) के ऊपर से दिखा भी चुकी है

कजरी को राजू पीछे से पकड़ चूका था जबरदस्त , और कजरी की नरम चुदत की गर्मी से राजू का हत्यार भी अपना सर उठा कर कजरी की गांड मए घुस रहा था..

राजू- तो कजरी काकी अपने दोनों कलस तो दिखा दिए अपने पर अब मैं इनका रास पीना चाहता हु तो नाटक कर रही हो..

कजरी - यह यह ऐसी बात नहीं hi बाबू वो तो बस, अभी कोई भी आ सकता है न, और ऊपर से पारो भी तो घर मैं है इसीलिए छोड़िये न मुझको..

कजरी बोल तो रही थी पर, अपने गांड पर राजू का लुदा उसको ाचा लग रहा था और वो अपनी गांड अचे से राजू के लूट पर रगड़ भी रही थी..

राजू ने कजरी को अपने से आजाद किया और वही बाथ कर बोलने लगा

राजू- ाचा क्या काकी मुझको बुढ़ऊ समझ है क्या मैं नहीं जनता की, अप्प और पारो भाभी दोनों hi कितनी प्यासी हो और अपनी जमीं भी सुखी है क्यों काकी..

कजरी - क्या मतलब जमीं सुखी है अरे हमरे मर्द है न जमीं सुखी क्यों रहेगी भला..

राजू - अरे काकी अब कहा मैं और कहा आपके मर्द, और वैसे भी काकी मेरा हल बहुत बड़ा है, एक बार आपके और आपकी दवाणी के खेतो मैं घुस गया न तो तो फिर

करजी राजू की डबल माइनिंग बातो को अचे से समझ रही थी साथ मैं उसको मजा भी आ रहा था तो वो बोलने लगी..

कजरी- ाचा तो ये बात है आगे बोलो जरा मैं भी सुन लू..

राजू- काकी देख लो मेरा हल एक बार घुस गया आपकी सुखी जमीं मए तो फिर, आपकी जमीं मए इतनी खुदाई करेगा इतनी खुदाई करेगा की अपने जमीं पूरी गीली हो जायेगी, पानी से लबलबा जाएगी और फिर

कजरी- और फिर आगे भी बोल

राजू- फिर क्या काकी जब पानी मैं मए अपना बीज डालूंगा न तो फिर अप्प दोनों की खेतो मैं फसल hi फैसला होगी और है काकी एक बार जो तुम दोनों की खेतो की खुदाई की न मेने फिर, सर मेरा hi हल से तुम्हारे खेत हरी होगी नहीं तो नहीं..

राजू के महू से ये सब बाटे सुन कर कजरी की छूट गीली हो चुकी थी और वही राजू के पिछले कड़ी पारो की भी , और पारो हाथ मए दूध का ग्लास लेकर आ गई

पारो - ये लीजिये ढूढ पीजिये pahle,acha ये मजन क्या सुन रही हु दीदी क्या सच मए राजू बाबू अपना हल इतना जबरदस्त है की हमारी खुदाई कर पाए, कही बिना पानी के अटक कर न रह जाये क्यों दीदी..

कजरी- बिलकुल छोटी तू सही कह रही है

और दोनों हसने लगी, राजू ने पहले दूध का गिलास पूरा ख़त्म किया और फिर, दोनों के पास जाकर, दोनों को अपने तरफ कीच लिया दोनों के ढूढ राजू की छाती से लग गए

राजू- क्यों भाभी काकी अज्ज सुबह हो तो देखा था न मेरा हल, कोई शक है क्या की तुम्हारी खेत की खुदाई अचे से नहीं कर पायेग क्यों 😉

दोनों शर्मा 😊 गई और अपनी नज़र निचे कर ली राजू दोनों से अलग हुआ और दरवाजे के पास पूछा और पीछे मुदा और बोलै


कजरी

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पारो

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राजू- अब दोनों मए से किसको पहले अपनी खुदाई करवाई है बता देना मुझको अच्छा चलता हु..

और ये बोल राजू निकल गया घर से, पर कजरी और पारो एक दूसरे को देख रही थी और मन hi मन अपने अप्प से सवाल कर रही थी की किसकी खेत पर राजू पहले हल चलेगा, पर दोनों कुछ नहीं बोली और अपने कामो मैं लग गई

इधर राजू गाओं के बिच आ चूका था जहा चबूतरे( जहा गाओं के लोग बाटे करते है है अक्सर) पर कुछ लोग बैठे हुए थे, जब उनकी नज़र राजू पर गई तो एक बुजुर्ग ने राजू को आवाज दी

बुजुर्ग 1- अरे छोटे मालिक कहा से आ रहे वो यहाँ आवो तो..

राजू पहले तोडा चौंक गया , छोटे मालिक सुन कर फिर उनके पास पहुंच गया, सभी लोग राजू के पहुँचते hi अपनी अपनी जगह से खड़े हो गए जिसको देख राजू बोले..

राजू - अरे काका अप्प लोग खड़े क्यों हो गए मेरे आते hi, सब बाथ जाओ ..

राजू की बात सुन सब अपनी जहग पर बाथ गए तब वो बुजुर्ग बोलै

बुजुर्ग 1- अरे बेटे ये तो हमारे गाओं की परंपरा है जब भी हवेली का कोई आता है छोटा हो या बड़ा हम लोग उनका सामान ऐसे hi करते है, और तुम तो हमरे छोटे मालिक हो..

राजू- अरे काका ये हवेली के लोगो का सामान यहाँ तक तो आपकी बात मैं मन भी लू पर अप्प लोग मुझको छोटे मालिक क्यों भुला रहे हो भला..

बुजुर्ग 2- अरे बेटे जब हमारे मालिक( ठाकुर ) ने तुमको अपना बीटा मन लिया तो तुम हमारे लिए छोटे मालिक हु की नहीं

राजू- पर काका मुझको ये मालिक वालिक मत बोलो मुझको ाचा नहीं लगता है ..

बुजुर्ग 3- अरे बेटे इसमें ाचा और बुरा क्या, ये तो हमारे गाओं के लोगो का धर्म है, और हमको ये धर्म निभाने दो बेटे...

राजू- ाचा काका अप्प लोग hi जीते, बेटे hi बोलो अप्प सब ये मालिक ाचा नहीं लगता hai,wese काका तोड़ी टांड लग रही है कुछ मिल जाता तो...

बुजुर्ग 1- अरे इसमें क्या, ये जा तो हलवाई को बोल कर गरमा -गर्म chay(tea) और कुछ पकोड़े माँगा लो बोलना छोटे मालिक ने बोलै है

बुजुर्ग की बात सुन एक आदमी चल दिया, फिर राजू बोलै..

राजू- ाचा काका ये तो बातो आखिर हमारा गाओं है कितना बड़ा और क्या अस्स पास भी कुछ गाओं है और सहर (सिटी) कितनी दूर है यहाँ से...

बुजुर्ग 3- अरे इतने सवाल चलो टिक है इसकी बहाना चाय आने तक कुछ बाटे भी हो जाये

तो सुनो हमारा गाओं अस्स पास के सभी गाओं की तुलना मए सबसे बड़ा है , और साथ hi सबसे ज्यादा विकसित भी और दूसरी बात हमारे गाओं मए सबसे बड़ा मेला लगता है बेटे (फ्यूचर मए मेला अर्च होगा) जो हर 25 साल मए एक बार लगता है, महा मेला, और है रही बात सहर कितनी दूर है तो काम से काम 70-75 कम तो होगा hi, लो च्या और पकोड़ा भी आ गए.. बाकि बाते कहते हुए करते है

सब ने मिल कर पहले पेट पूजा की फिर

बुजुर्ग 1- ाचा बीटा अभी हमारा बीटा खेतो से घर आया और बता रहा था की तुमने अज्ज बहुत बड़ा काम किया, उस कलुआ की चोरी पकड़ कर..

राजू- अरे नहीं काका कोई बड़ा काम नहीं किया, ये तो बस मेरा फ़राज़ था आखिर मैं भी तो इसकी गाओं का हिस्सा हु न , और फिर कोई हमारे hi लोगो को धोखा दे रहा हो ये मैं कैसे बर्दाश्त कर सकता था...

बुजुर्ग 2- बिलकुल राजू बाबू सही बोल रहा है, बोलो भला साला कलुआ हमारे मालिक का खा रहा था और पिट पीछे उनको hi देखा दे रहा था, ाचा किया तुमने राजू बेटे ...

राजू- काका अब मैं चलता हु शाम हो चुकी सब लोग मेरी रह देख रहे hi, चलता हु...

बुजुर्ग- टिक है बीटा पर एते रहन, इस तरफ कुछ बाटे हो जाएँगी तुमसे..

राजू- जी काका अब तो अत रहूँगा इस तरफ

और राजू मुदा और हवेली की तरफ चल दिया, और राजू के दिमाग मए मए कमाया के बारे मैं ख्याल आ रहे थे

राजू -(मन मए) आखिर ऐसी क्या वजह थी क्या मज़बूरी रही होगी भाभी की, की उनको विक्रम भैया से सदी करनी पड़ी वो भी ये सब सच जानने के बाद भी, और जहा तक मैं भाभी को जान चूका हु वो पैसे की भुकी नहीं है, तो फिर और क्या वजह होगी और वो वजह कितनी बड़ी होगी की भाभी ने एक ऐसे रिश्ता के लिए है बोल दी जहा उनको एक नामर्द पति मिल रहा हो..

राजू अपने मन मए ऐसे hi कही बातो को सोचने लगा पर उन सभी सवालो का जवाब उसको सिर्फ कमाया hi दे सकती थी, राजू अपनी दुनिया मए मस्त था की तभी उसके पास एक गाड़ी रुक गई राजू ने गाड़ी देखा और चढ़ कर बाथ गया क्युकी ये गाड़ी हवेली की थी और इसको भीमा (ठाकुर है राइट हैंड मन) चला रहा था..

भीमा - क्या हुआ राजू तुम तो बहुत समय के खेतो से निकल गए थे और अभी तक यही पर पूछे हो..

राजू- है काका वो बात ऐसी है की, जब मैं आ रहा था तो

फिर राजू ने भीमा को साडी बात बता दी तब तक हवेली भी आ चुकी थी, भीमा गाड़ी को रखने चल दिया और राजू हवेली मए, सामने मैं हॉल मए ठकुरिने, कमाया और सलोनी चाय की चुस्की ले रहे थे..

ठकुरिने- आ गया बीटा , बहुत देर लगा दी कहा - कहा गया था, बाथ तो जरा..

राजू- अरे कही नहीं अम्मा वो बस विक्रम भैया से मिलने गया था, तो उनके साथ खेतो को भी देख लिया, और इधर उधर भी..

सलोनी- ाचा किया राजू, ये बहुत ाचा किया वैसे भी तुम जब से टिक हुए थे बस घर मए hi रहे थे, आदमी को तोडा बहुत घूमना भी चाहिए, है न छोटी( काम्य) ..

काम्य- बिलकुल दीदी, बहार घूमने से शरीर को भी ाचा लगता है साथ मए दिल भी बहाल जाता है, ाचा राज अप्प लोग बाटे करो मैं जरा आपके लिए च्या लती हु...

राजू- अरे नहीं भाभी बस अभी तोड़ी hi देर पहले तो चाय की चुस्की ली थी मेने..

तब तक कमला चाय का कप ले कर हाजिर हो चुकी थी,

कमला- अरे बाबू मुसम देख रहे हो कितनी टांड पद रही है 1 चाय से क्या होगा ये लो तुम्हारी आवाज सुन कर तुरंत चाय बना ली मेने...

ठकुरिने- तूने ये टिक किया कमला लो राजू ली लो..

राजू- जी अम्मा बस जरा ये जूता (शूज) उतर दू, पता नहीं क्यों तोड़े समय से दर्द कर रहा है..

कमला - अरे कही चोट वोट तो नहीं लग गई बाबू, लाओ मैं निकल देती हु आराम से..

राजू- अरे नहीं काकी अप्प क्यों तकलीफ उठा रही हो मैं निकल देता हु न..

कमला - अरे इसमें तकलीफ कैसे, तुम चाय की चुस्की लो मैं आराम से निकल देती हु ये जूता..

ये बोल कमला राजू के परे के पास hi बाथ गई क्युकी कमला अभी किचन से आई थी तो अपनी साड़ी का पालो अपने कमर मए कोच की थी जिसकी वजह से न चाहते हुए भी कमल की जवानी राजू की आँखों के सामने आ गई..


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क्युकी कमला ने ब्रा नहीं पहना हुआ था ऊपर से उसके 2-2 किलो के ढूढ उसके ब्लाउज मए समां नहीं पते इसलिए वो और ज्यादा बड़े लग रहे थे

35 साल की कमला अभी तक माँ बनाने का सुख नहीं पाई थी, इसीलिए उसके दूध मए अभी भी कड़क पैन था और क्युकी वो लगभग राजू के परे मए झुकी हुई थी तो उसके बाल भी सामने आ गए तो ये नज़ारा सर राजू को hi देखने को मिला 😉...

वो बोलते है न अगर कोई हमारी तरफ देख रहा हो तो हमको ये पता चला hi जाता है, वैसे hi कमला को भी पता चला और उसको अपने कपड़ो का होश भी आया और उसने अपना सर उठा कर राजू को देखा दोनों की नज़रे मिली और एक कुटिल मुस्कान कमला के चारे पर आ गई, वो समज गई की राजू उसके दूध को hi देख रहा था, और वो कड़ी हो गई..

कमल- देख लो मालकिन क्या घुल खिला कर आया है आपका बीटा, जरा देखो तो इनके पेरो को..

सबकी नज़र राजू के पेरो पर गई, जो की कही जगह से लाल. लाल हो गया था जैसे किसी खिड़े ने काट लिया हो..

ठकुरिने- अरे बाप रे, क्या बीटा, तेरे पैर इतने लाल हो गया है और तुझको अभी दर्द हो रहा क्यों रे बतया कुय नहीं..

राजू- अम्मा अब आपको क्या बटवृ, जब वापिस गाओं से आ रहा था तब तोडा दर्द सुरु हुआ, तब तक भीमा काका की गाड़ी भी आ चुकी थी..

ठकुरिने- तू एक काम करना कल hi भीमा के साथ sahar(city) जा कर अपने लिए अछि सी मोटर सिकिल ( बाइक) ले आएं और है भीमा को बोल दूंगी वो तुझको सीखा दे गए जल्दी से...

कमाया- काकी जाओ तो पहले बर्फ से राज के पेरो की सिकाई कर दो फिर मए रात को इनको गोली दे dungi..or दीदी चलिए हम भी भोजन की तैयारी करते है, मुसम टांडा है सब को ग्राम गर्म खाना hi मिलना चाहिए...

सलोनी- है छोटी चला , काकी अप्प भी चलो मैं बर्फ देती हु आपको..

कमला - टिक बड़ी बहु..

😁 तो बे कंटिन्यू 😁
 
अपडेट 92

ठकुराइन की फॅमिली राणा है

1- भाई देवानंद राणा - बहुत hi साफ दिल के इंसान है जैसा नाम वैसा hi काम हमेसा खुश रहते है अपनी दोनों बहनी (काँटी - जो मर चुकी है, शांति - जो ठकुराइन है) से बहुत प्यार करते हैं इनकी hi वाखा से ठाकुर और शांति की शादी हुई थी

आगे 56 साल ठाकुर साहब के बचपन के दोस्त भी

2 भाभी - देवकी राणा - देवानंद की पत्नी जैसे इनके पति ऐसी hi ये भी है दिल की बहुत अच्छी है इन्होने अपनी दोनों नानन्द को अपनी छोटी बहन की तरह hi प्यार किया

आगे - 54 साल

3 बीटा देवराज राणा - बिलकुल अपने माँ बाप की तरह hi है पर ये ज्यादा तर अपना समय अपने काम को देते है अपनी ममी (शांति) की बहुत इजाजत करते हैं अपनी माँ की तरह hi मानते है ज्यादा तर आवर ऑफ़ सिटी रहते है आगे 33 साल

4 बहु - दामिनी राणा एक सुन्दर औरत अपने सास ससुर को माँ बाप की तरह रखने वाली अच्छा नेचर की औरत 30 साल कोई 1 बच्चा है पर ,पति की तरफ से कोई प्यार nahi,tab से अकेले मए रोटी रहती है पर अपना दुःख किसी को नहीं बताती है

अब आगे चलते हैं ठाकुर की फॅमिली

(क्युकी ठाकुर साहब छोटे भाई है इसलिए बड़े भाई से इंट्रो की सुरुवात होगी)

1 भाई - दिनकर ठाकुर - एक बहुत बढ़िया इंसान और दीनदयाल ठाकुर के बड़े भाई उनके मोडल अज्ज दीनदयाल जिस मुकसम पर है उनकी वजह उनके बड़े भाई hi इनको राजगारने से ज्यादा मतलब नहीं था इसलिए इन्होने अपनी जगह अपने छोटे भाई को राजा बनाया और अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए आगे 57 साल

2 भाभी - सिमा ठाकुर - अपने पति की हर बात मानाने वाली संस्कारी महिला आगे 55साल

3बड़ा बीटा विनायक ठाकुर - क्युकी ठाकुर साहब इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काम करते हैं इसलिए इनका ज्यादा तर समय देश से बहार hi बिताये है

आगे - 34 साल

4बड़ी बहु - विणा ठाकुर - एक आदर्श पत्नी और माँ भी इनकी एक 10 साल की बेटी भी है ज्यादा तर अपनी बेटो और सास ससुर के साथ hi होती है पति साल मए 2-3 बार hi आता है

आगे 33साल (23 की आगे मए शादी हुई)

5 छोटा बीटा - मोहित ठाकुर - ये भी अपने भाई के काम करता है ज्यादा समय बहार hi रहता है सब को यही लगता है की काम की वजह से पर इसकी एक बहुत बड़ी वजह है जिसके बारे ये और इसकी पत्नी हुए 1और +++ जनता /जानती है 28 साल

6 छोटी बहु माया ठाकु -

आगे 27

इनकी खूबसूरत के बारे मए का कहे 5.5 की हिघ्त है अगर रंग की बात करे तो - मिल्क शाइनिंग रंग काळा और कटीली आँखे गुलाब सी होंठ लाल लाल गाल मतलब किसी सुन्दर अप्सरा की तरह की खूबसूरत मैं कोई भी फास जाये, पतली kamar,ek कातिल मुस्कान ,ये अच्छे परिवार से आती है पर इनके दिल मए अपने ससुर के लिए किसी भी तरह की इज्जत नहीं है इसकी एक बहुत बड़ी वजह है जो आपको आने वाले अपडेट मए मिलेगा


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एक शायरी hi लिख देते हैं (मेरे मन से)

"" की उनकी खूबसूरती के बारे मए क्या लिखे हम

की उनकी खूबसूरती के बारे मए क्या लिखे हम

लिखने लगे हम तो सब्द Hi ख़त्म हो गए हमारे ""

सबसे छोटी बेटी - परिधि ठाकुर

आगे 22 - सकल अकाल और सुंदरता मैं अपनी माँ पर गई, संस्कारी है, पर चुलबुली भी, दिल की साफ़ है

एक वजह से ये सब हवेली से दूर हुए क्युकी परिवार मए किसी की मौत हो गयी थी तो ये रहा इनकी फॅमिली इंट्रो, क्युकी लोग ज्यादा है तो मैं इनकी स्टोरी दो पार्ट्स मैं लिखूंगा, इस स्टोरी मैं मर्दो का ज्यादा बाटे नहीं है नार्मल है बस...

तो चलिए सुरु करते है अज्ज का अपडेट

इधर सलोनी ने बर्फ कमला को दे दिया और कमला बारक लेकर आ गई,

कमला - चलो छोटे मालिक, अपनी pent(jins) को तोडा उप्पर उठा लो नहीं तो मैं अचे से बर्फ नहीं लगा पाऊँगी और अपनी पंत भी गीली हो जायेगी...

राजू- अरे काकी अप्प बिलकुल चिंता मत करो छोटी सी चोट है टिक हो जायेगी

कमला - देख लो छोटे मालिक , मालकिन का हुकम है, या फिर मैं उनको बोल देती हु की तुम मन कर हो करके, फिर तुम जानो और मालकिन..

राजू- टिक है काकी अम्मा को कुछ मत बोलो वर्ण वो मुझको डाटेंगी, लाओ कर लो अपना काम..

ये बोल राजू ने अपने दोनों परे को तोडा आगे किया और पेण्ट को तोडा ऊपर कुछ लिया ताकि कमला को आसानी हो

कमला निचे बाथ गई पर इस बार कमला ने जान बच कर अपने बालो को बंद लिया था पर अपना ब्लौसे को खुला hi छोड़ दिया और अपने काम मैं लग गई..

आप जब राजू की नजर निचे गया तो उसका पारा बाद गया, क्युकी नज़ारा hi इतना कामुक था

क्युकी पहले hi बता चूका हु कमला के दूध बहुत बड़े बड़े है ऊपर से वो झुक कर बैठी है और साथ मैं हिल भी रही है, जिसकी वजह से उसके दूध नाच रहे है, राजू के लिए ये बहुत ज्यादा बड़ी बात थी, एक अपने से दुगनी औरत के दूध के दर्शन वो भी इतने पास से, ये सीन कुछ पांच मिनट तक चला इसी बिच कमला ने चुपके से राजू के पंत पर भी नज़र डाली, और जैसा की उसने सोचा था राजू का हत्यार पूरा खड़ा हो गया था,

कमला ( मन मए) - है दया देखो दो कैसे अपनी काकी की जवानी को घर कर देख रहा है मेरा राजू, और साथ मए अपने लुणत को भी दिखा रहा, हाय, पंत के ऊपर से तो इतना बड़ा लग रहा है, जब सच मए हाथ मए पकड़ लू तो, उफ्फ्फ..

एक तरफ राजू तो दूसरी तरफ कमला दोनों की गरम हो रहे थे तभी ठाकुर साहब के आने की आहत मिलते hi कमला ने अपने अप्प को सही कर लिया पर सही करने से पहले राजू को एक कुटिल मुस्कान के साथ बोली..

कमला - चलो छोटे मालिक अज्ज के लिए इतना hi काफी है, कल और देख लेंगे..

राजू- क्या देख लेंगे काकी..

कमला (धीरे से) - वही जिसको तुम इतनी देर से घूरे जा रहे थे हम्म...

और वो चली गई और राजू भी मुस्करा गया, तब तक ठाकुर साहब भी अंदर आ चुके थे...

तब तक काम्य हाथ मई पानी लेकर आ गई और बोली..

कमाया - बाबू जी अप्प हाथ महू धो लीजिये मैं तब तक भोजन लगवा लेती हु..

ठाकुर ने है मए सर हिलाया और अपने रूम की तरफ चल दिया काम्य ने शामे बात राजू को भी बोली और राजू भी दिंनिंग टेबल की तरफ आ घर बाथ गया, कुछ देर बाद सभी लोग आ गए और खाना सुरु भी हो गया..

ठाकुर- तो राजू कैसे रहा अज्ज ला दिन, पहली बार गाओं घूम कर मजा आया की नहीं तुझको..

राजू- जी बाबू जी बहुत मजा आया, ने लोग मिले, कई लोगो से बाते की टाइम कैसे बिता, पता hi नहीं चला..

ठाकुर- ाचा हुआ की तू गया घूमने और अज्ज तूने काम भी ाचा किया एक धोकेबाज़ पकड़ा गया..

राजू- वैसे बाबू जी अप्प से कुछ सवाल पूछने था मुझसे पूछ लू क्या..

ठाकुर - है बिलकुल बीटा बता क्या सवाल है तेरे..

राजू- वो न बाबू जी जब मैं वापिस आ रहा था घर की तरफ तो कुछ बुजुर्ग मिले, उनसे बात कर hi रहा था की उन्होंने कोई महा मेल की बात की तो है क्या ये महा मेला,

ठाकुर- एक काम कर पहले सब लोग खाना ख़त्म कर लेते हैं फिर सब को बाटूंगा इसके बारे मई , और बहु तुम भी साथ मैं बाथ जाना ताकि तुम भी जान लेने इसके बारे मैं अचे से..

फिर आगे कुछ ज्यादा बात नहीं हुई सब ने कहना ख़त्म हुआ , और सब लोग मैं हॉल मैं आ गए.. फिर ठाकुर साहब बोलना सुरु हुए..

ठाकुर- तो बीटा राजू बात ऐसी है की, तू तो जान hi चूका है की हमारा ये परिवार रजो का परिवार है

तो जब पहले अस्स पास के सरे गाओं हमारी रियासत का हिस्सा थे तब , एक समय हमारी रियासत मए एक बीमारी फेल गई वो बीमार न तो समझ आ रही थी और न hi पकड़ आ रही हम सभी लोग मतलब मेरे दादा के दादा टिक है वो लोग बहुत परेशान हो चुके थे की क्या करे अब , तभी हमारी खुल देवता ने हमारे पुरोहित को सपना दिया और उसने कुछ बाटे उनको कही

1- की ये समस्या इसीलिए हुई क्यूंकि सभी ने देवता को नज़रअंदाज कर दिया था..

2- इसके लिए खुल देवता की पूजा और साथ मए उनके नाम से एक बड़े मेले का आयोजन होना चाहिए, जो लम्बा चले..

3- पूजा करने वाला विवहहित नहीं होना चाहिए और उनके पूजा केअधिकार से किसी को भी कोई apati(problem) न हो..

4 - सरे गाओं (25) के लगभग सभी लोगो को मेले मए आना होगा किसी भी दिन ( बचो, घरबवती, बीमार और बुजुर हो तो उनको छूट है)

और ये की पूजा के सुरु होते hi सब लोग जो बीमार है टिक हो जंगे..

राजू-- तो फिर अप्प लोगो ने उनकी बात मन लिखे बाबू जी

ठाकुर- बिलकुल बेटे अब पहले तो कोई रास्ता hi नहीं था, अब जब रास्ता मिला तो चलना हो था, तो सब लोगो ने वही किया और जैसा की देवता ने बोलै था वही हुआ, और क्यूंकि उस समय हमारे परिवार ने मेले मए सबसे ज्यादा धन और समय दिया था तो सब लोगो ने हमरे घर को hi पूजा करने के लिए मन से मन लिया, पूजा के दिन से hi सभी लोग अचानक टिक हो गए और इस मेले को सहर के लोगो को भो बहुत पसंद आया, तो उसके बात हमारे जो उस समय के पूर्वज थे उन्होंने ये संकल्प लिया की इस पूजा और मेले को हर 25 साल के बाद पुरे 1 महीने के लिए मनाया जायेगा, जिसका पालन हम लोग आज भी कर रहे है, अब समझे तुम सब

सभी लोग ने है मए अपना सर सुनाया और उसी समय फ़ोन (टेलीफोन) की घंटी बजी ठाकुर साहब ने कुछ बात की और कुछ बोले जिसने काम्य की आंखे बड़ी कर ने पर मजबूर कर दिया
 
अपडेट 93

तो पिछले अपडेट मए

ठाकुर- बिलकुल बेटे अब पहले तो कोई रास्ता hi नहीं था, अब जब रास्ता मिला तो चलना हो था, तो सब लोगो ने वही किया और जैसा की देवता ने बोलै था वही हुआ, और क्यूंकि उस समय हमारे परिवार ने मेले मए सबसे ज्यादा धन और समय दिया था तो सब लोगो ने हमरे घर को hi पूजा करने के लिए मन से मन लिया, पूजा के दिन से hi सभी लोग अचानक टिक हो गए और इस मेले को सहर के लोगो को भो बहुत पसंद आया, तो उसके बात हमारे जो उस समय के पूर्वज थे उन्होंने ये संकल्प लिया की इस पूजा और मेले को हर 25 साल के बाद पुरे 1 महीने के लिए मनाया जायेगा, जिसका पालन हम लोग आज भी कर रहे है, अब समझे तुम सब

सभी लोग ने है मए अपना सर सुनाया और उसी समय फ़ोन (टेलीफोन) की घंटी बजी ठाकुर साहब ने कुछ बात की और कुछ बोले जिसने काम्य की आंखे बड़ी कर ने पर मजबूर कर दिया

अब आगे चलते है

जब ठाकुर ने अपनी बात ख़त्म की तब कॉल आया और ठाकुर ने फ़ोन उठा लिया

(कॉल पर, दिनकर ठाकुर थे)

दिनकर ठाकुर- है दिनु कैसे है मेरे छोटे भाई..

ठाकुर- जी भैया अप्प सभी लोगो के आशीर्वाद और प्यार से सब ाचा है, और वह का क्या हल है..

दिनकर ठाकुर- अब तुझको तो पता hi है, किसी अपने को खोने का दर्द क्या होता है, भले hi वो लोग तोड़े दूर के रिश्तेदार थे, पर तेरी भाभी के करीब थे..

ठाकुर- वो तो पता hi है भैया, भाभी तो टिक है न , और अप्प लोग कब आ रहे हो हवेली वापिस..

दिनकर ठाकुर- कुछ दिन तो तेरी भाभी बहुत दुखी हुई, पर अभी सब कुछ नार्मल हो चूका है दिनु, और रही बात हवेली की तो वो तो मुस्लिल है अभी..

ठाकुर- क्या 😮पर क्यों भैया ऐसा क्या हो गया.. कुछ टेंशन की बात है क्या...

दिनकर ठाकुर- अरे कोई टेंशन की बात नहीं है दिनु, बात दरअसल ये है की, अब तू तो जनता है परिधि कॉलेज कर रही है और कुछ हफ्तों बाद उसकी एक्साम्स की डेट्स आ चुकी है, जिसकी वजह से हम लोगो की न चाहते हुए भी और कुछ दिन तुम सब से दूर रहना पड़ेगा..

ठाकुर- ाचा तो ये बात है 😌मैं भी फिर टिक है भैया, पढाई भी जरुरी है, अभी नहीं तो मेले के सुरूरत मैं hi मिल लेंगे.. सभी लोग..

दिनकर- टिक है दिनु और एक बात और, अब मैं तेरी भाभी और विणा (दिनकर की बड़ी बहु) यही रुक रहे है, पर माया बहु आ रही है हवेली.. अभी उससे बात हुई वो लगभग 10 कम दूर है गाओं से अब तुझको तो गाओं के बारे मए पता है तो नेटवर्क नहीं लग रहा है टिक है दिनु रखता हु...

ठाकुर- जी भाहिया परनाम..

दिनकर ठाकुर- खुश रहो सदा..

(कॉल कट)

ठकुरिने- क्या हुआ जी क्या बोले झट जी, कुछ परेशानी की बात तो नहीं है..

ठाकुर- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बस परिधि के कॉलेज एक्साम्स की वजह से वो लोग नहीं आ पायेगी हवेली, पर माया बहु आ रही है सायद पूछने वाली भी होगी...

अब अप्प लोगो को वजह पता चल hi गया होगा की , जिसको सुन कर माया के कण खड़े हो गए कमाया माया को मन hi मन गली देने लगी..

काम्य- साली कुटिया कही की जानती hi थी मैं उसको, जरूर कुछ न कुछ बहन बना कर आ रही है, मुझको जल्दी से राज को अपनी सरे बतानी होगी तभी काम होगा, (फिर तोडा उधास होकर) पर क्या राज मुझको एक्सेप्ट करेंगे और अगर वो मुझसे ग़ुस्सा हो गए तो मैं क्या करूँगा...

काम्य अपने अप्प से hi बाटे करने लगी जब तक ठाकुर सलोनी ने कुछ नहीं बोलै..

सलोनी- बाबू जी, माँ जी एक काम करते है अप्प लोग जा कर सो जाये अपने रूम मए, और वैसे भी आपकी dawai(medicine) का समय भी hi चूका है, ok माया के आने तक हम लोग तो यही है...

ठाकुर- है बहु तुम टिक बोल रही हो, वैसे भी अज्ज मेरा दूर कुछ ज्यादा हो गया है, तोड़ी तकन भी लग रही है तो मैं चला सोने subratri(goodnight) , चलो राजू बीटा चलता हु सुबह मिलेंगे.. चल ठकुरिने तू भी आराम लार ले बहु सब सम्हाल लेंगी...

आपको बता दू की ठाकुर और ठकुरिने का रूम ग्राउंड फ्लोर पर है क्युकी ठकुरिने को जोड़ो का दर्द रहता है, दोनों के जाने के बाद राजू भी खड़ा हुआ तभी उसको बहुत दर्द हुआ पेरो मए और वो चिक उठा जिसको देख कमाया को टेंशन हो गई और तुरंत राजू को थम लिया

कमाया- राज राज क्या हुआ आपको, अप्प इतने जोर से चिके क्यों कहा दर्द है आपको राज.

राजू-- अरे भाभी अप्प इतना टेंशन मत लीजिये, वो झटके से मैं खड़ा हुआ न तो मेरे पेरो मैं दर्द हुआ बस और कुछ नहीं..

कमाया - अरे मैं टेंशन क्यों न लू अप्प इतनी जोर से चिके और धाम से निचे घिर गया , और अप्प बोल रहे हो की कुछ नहीं हुआ, कुछ कैसे नहीं राज अप्प..

पर कमाया आगे कुछ नहीं बोल पाई क्यूंकि राजू ने उसके होंटो को अपने हाथो से धक् दिया

राजू-- शःह्हः 🤫कितना बोलती हो भाभी अप्प, और इतना ज्यादा टेंशन वो भी इतनी छोटी सी बात पर मत लो, वर्ण आपका ये चाँद जैसा खूबसूरत चेहरे जल्दी से कला हो जायेगा..

कमाया को इस वक्त एक अलग hi अहसास हो रहा था, जहा राजू ने उसके होंटो को अपने हाथो से छू लिया था वही उसकी खूबसूरती की तारीफ भी कर रहा था फिर राजू ने कुछ वो किया जिसके बारे मए कमाया ने सोचा भी नहीं था, वो हुआ यु राजू ने पहले चारो तरफ अपनी नज़र डूडा ली फिर धीरे से कमाया के माथे पर किश कर लिया,

किश

और तुरंत अपनी जगह बाथ गया जैसे कोई छोटा बचा कुछ गिरा कर चुप हो जाता है, और कमाया जैसे सोक हो गई थी वो तो ये सोच भी नहीं सकती की उसका राज ऐसा कुछ सोच भी सकता है और यहाँ शिंदे किश,


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राजू- भाभी अप्प कब तक ऐसे खड़े रहोगी, बाथ भी जाओ आपको देख कर मेरे पैर मए दर हो रहा है..

कमाया पहले तो सन्ति से अपनी जगह बाथ गई पर अचानक से बादक भी गई, जिसके लिए राजू तैयार hi था..

कमाया- राज आपको पता भी है अपने अभी क्या किया मतलब अपने मुझे.. यह निचे हॉल मए की.. किश कर दिया आपको पता भी है अगर कोई देख लेता तो क्या होता, मतलब अपने एक पल भी नहीं सोचा, अगर बाबू जी दीदी माँ जी कोई और देख लेता तो...

राजू- भाभी भाभी शांत आपको क्या लगता है मेने ये सब सोचा नहीं होगा, मेने सब तरफ ाचे से देख कर hi ये किया, क्यों आपको ाचा नहीं लगा क्या...

कमाया- हम्म वो मुझको ाचा लगा न 😊, पर फिर भी राज ऐसे खुले मैं मत करना, अगर हम अकेले मैं है तो बात कुछ और है..

राजू - ू 😳मतलब अगर हम अकेले हो तब मैं कुछ और भी कर सकता हु आपके साथ भाभी बोलो..

कमाया- है बिलकुल राज अप्प जो छाए अप्प कर सकते हो..

कमाया बोल तो गई ओर जब उसको राजू और अपनी बातो पर ध्यान आया तब वो शर्मा गई और अपनी नज़रे निचे झुका ली, और राजू को देखने लगी जो मुस्कुरा रहा था..

कमाया- की राज अप्प कितने गंदे होते जा रहे हो, ये मेरे महू से क्या बुलवा लिया अपने...

राजू- अरे मेने कहा कुछ किया, सब अपने hi बोलै था, वैसे भाभी वीर भाहिया बे अपनी साडी बाटे मुझको बता दी है अब आपकी बरी..

कमाया- ok राज मैं भी आपको अपना सारा राज़ बता दूंगी अज्ज रात होते hi, की ऐसी क्या वजह थी की सब कुछ जानते हुए भी मेने इस सदी के लिए अपनी हामी भरी...

तो बे कॉन्टिनोएड

 
अपडेट 94

तो चलो इस स्टोरी को फिर से कंटिन्यू करे, अपडेट 93 मए अपने रीड किया की राजू के पेरो मए तोड़ी सी मोच आ गई है, और ठाकुर को ये न्यूज़ मिली की उसके बड़े भाई लोग नहीं आ रहे है सिर्फ माया आ रही है जिसको सुन कमाया तोडा गुस्सा 😡 हो गयी अपने मन मए और राजू ने उसके माथे को चुम लिया अब आगे चलते है ..

ठाकुर ठकुरिने खाना खाने के बाद चल दिए अपने अपने रूम मए यहाँ सलोनी और कमला किचन मए थी और टेबल मए खाना परोक्ष रही थी, तभी मैं गेट ओपन हुआ और माया की एंट्री हो गई..

सलोनी- अरे माया तुम यहाँ कैसे और वो भी इस टाइम पर

माया- क्या भाभी अब मए यहाँ आ भी नहीं सकती हु क्या

सलोनी- अरे मेरे बोलने का ये मतलब नहीं था माया, मैं तो ये कह रही थी की, तुम इतनी रात को ऊपर से अकेली..

माया- है भाभी वो बात ऐसा है की परिधि का कॉलेज एग्जाम पास मए है तो सभी लोग उसके एग्जाम ख़त्म होने के बाद आएंगे और मेरे पति ( महू बना कर 🥱) का आपको पता hi है वो कब मेरे साथ रहे है, इसलिए मैं यहाँ आ गई..

सलोनी- चलो अच्छा भी है, और तुम सही टाइम पर आई हो, हम लोग भी अभी डिनर करने hi वाले थे, जाओ तुम हाथ महू धो लो, काका (भीमा से) अप्प ये सामान उप्पेर रखा दीजिये..

भीमा समन लेकर उप्पेर चल दिया, पर माया की नज़र राज और काम्य पर थी जो एक साथ बैठे हुए थे और कमाया तोड़ी ज्यादा hi खुश लग रही थी..

माया ( हाथ धोते हुए) - हम्म ये कामिनी इतना खुश क्यों लग रही है, कही मेरे पीछे इन दोनों की लव स्टोरी तो अग्गे नहीं बाद गई पता कारण पड़ेगा..

फिर माया ने जल्दी से हाथ महू साफ़ किये और चल दी दिंनिंग टेबल के पास जहा सलोनी पहले से बाटी हुई थी... सलोनी ने कमाया को भी बुला किया, कमाया तो कड़ी हुई, और

Kamaya-(kamla को) काकी इधर आना तो राज के परे मए अभी भी दर्द hai,mujhse अकेले तो नहीं होगा..

कमाया की आवाज सुन कमला आई और फिर दोने ने मिल कर राजू अपने साथ खड़ा किया, ये देख माया को तोड़ी चिंता हुई और वो बोली..

माया- दीदी कुछ हुआ है क्या मेरे जाने के बाद, ये राज को सपोर्ट की जरुरत क्यों पद रही है खड़ा होने के लिए...

सलोनी- है वो बात ये है राज आज ऐसे hi गाओं और खेतो की तरफ घूमे निकले थे अब खेतो की जमीं तो उबड़ खाबड़ थी तो उसके परे मए मोच आ गई..

माया- वो अच्छा

माया ये सबस तोड़ी उदासी मए बोलै, जिसको सलोनी समझ भी गई

दोनों ने सहारा दिया और राजू अपनी जगह जाकर बाथ गया.. एक तरफ माया एक तरफ कमाया बिच मए राजू..

माया- राज अप्प टिक तो है न आपको ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा है वो भाभी से अभी पता चला आपकी मोच के बारे मए मुझको...

राजू- है भाभी मैं टिक हु बस हलकी सी मोच hi आई है गोली खाकर आराम करूँगा तो सुबह तक सब टिक हो जायेगा...

सलोनी- अब बाकि बड़े बाद मए होती रहेंगी, टाइम भी बहुत हो चूका है चलो जल्दी से खाना ख़त्म करो , और काकी अप्प भी आ जाओ हमारे साथ..

कमला- अरे नहीं बड़ी बहु, अगर किसी को कुछ जरुरत पद गई तो, कोई तो होना चाहिए न देने के लिए..

सलोनी- नहीं काकी किसी को कुछ भी नहीं चाहिए आ जाओ..

फिर कुछ नहीं हुआ सभी लोगो ने अपना खाना खा लिया और फिर राजू ने िश्रा किया तो कमला और कमाया दोनों ने राजू को सहारा दिया, माया भी चाहती थी की वो भी राजू को सहारा दू पर वो कुछ सोच कर रुक गई..

अब सीन ये था की राजू के एक तरफ कमाया थी एक तरफ कमला क्युकी राजू की हिघ्त तोड़ी ज्यादा थी दोनों औरतो से तो उसको तोडा सा झुकना पड़ा..

कमला- हाय दया कितना भरी है रे तू, हम दोनों से समला भी नहीं जा रहा है उफ़ क्या खिलाती हो इसको छोटी बहु..

कमाया - अब मैं क्या काकी, ये सवाल अप्प मजी से करिये गए और वैसे भी काका के साथ इनकी कुस्ती की प्रैक्टिस चल रही है तो अभी इनके खाने का डोज बड़ा दिया है काका के बोलने से...

कमला - ाचा तभी ये मोटा नहीं लग रहा है पर वजन बाद गया है क्युकी बाबू...

रज्ज- अब क्या करू काकी, रोज सुबह उठो फिर दौड़ना ,फिर टांड पेलना (एक तरह का पुश उप) और भी बहुत kuch,fir काका ले साथ कुस्ती के petre(staps) जिसके बाद बहुत भूक लगती है मुझको...

कमला- है वो तो लग्न hi है, अज्ज बाबू तू दूध तो पिता है न, मतलब तुझको दूध तो पसंद है न पीना...

कमला ने दूध सब्द पर तोडा ज्यादा जोर दिया था, और कुकी कमला की हिघ्त छोटी है तो राजू को उसके ब्लाउज से जक्ति हुई चूचिया अछि तरह से दिख रही थी


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और कमला ने भी जान बच कर अपना पलु ऐसे फसा रखा था की राजू को उसकी उफनती जवानी के दर्शन अचे से हो सके, और राजू भी अब औरतो के इशारे अचे से समझ रहा था इसीलिए उसने अपना हाथ कमला के कमर के ऊपर टिक उसके ुंदेरराम के निचे से उसकी चुचिओ को पकड़ लिया, और इसकी इस हरकत ने कमला को अपने होंटो को काटने को मजबूर कर, और राजू लगततर कमला की चुकी को मसल रहा था राजू का रूम ऊपर था इसीलिए 3 धीरे से आगे बाद रहे थे..

कमला (मन मए) - हए उफ़ ये राजू भी, मैं तो सामजी थी अभी बचा है पर इसने तो मेरी बातो को अचे से समझ लिया ऊपर से मेरी चुकी भी मसल रहा है हाय, क्या करू main,meri चुद तो पानी छोड़ने लगी hai,agar मैं अभी गुसलखाना (बाथरूम) नहीं गई तो मेरी साडी जवानी मेरी जंग तक आ जाएगी कुछ करना padega....kamla ने कुछ सोचा और रुक गई

कमला को रुकता देख काम्य बोली

कमाया- क्या हुआ काकी रुक क्यों गई अप्प, अभी तो हम आधे रस्ते hi पहुंचे है

कमला - है छोटी बहु जानती हु, वो मुझको जल्दी से जाना है

कमाया भी एक औरत थी वो समझ गई की कमला बाथरूम की बात कर रही है, कमाया आगे कुछ बोले उससे पहले hi कमला ने माया को आवाज दे दी, और माया भी इसी का जैसे वेट कर रही थी उसने तुरंत रिस्पांस दिया और फिर कमला ने अपनी जगह पर माया को खड़ा कर दिया और तुरंत बाथरूम की तरफ चल दी..

अब एक तरफ माया दूसरी तरफ कमाया और बिच मए हमारा राजू...

 
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