अपडेट 90
राजू कजरी पारो -1
पिछले अपडेट मैं अपने देखा की
कजरी - छोटी मंजिल जितनी बड़ी होगी, मजा उतना hi आएगा, और रास्ता टूटेगा नहीं तो नया रास्ता उससे निकलेगा कैसे..
दोनों देवरानी जेठी इस तरह से बोल रही थी की, राजू को उनकी बात समज मए आ जाये और राजू समझ भी गया,
राजू (जोर से) - मंजिल बड़ी है न तो रस्ते के भी बड़ा करना होगा, चाहे वो 1 रास्ता हो ( पलट कर दोनों को देखते हुए) या फिर दो रस्ते..
तो चलिए सुरु करते है..
अब कजरी और पारो कोई नासमज तो नहीं थी की राजू की बातो का मतलब न समझ सके वो, समझ गई की, राजू उनका इशारा अच्छी तरह से समझ चूका था, दोनों मेसे कोई कुछ नहीं बोलै पर, उनके चेहरे की चमक सब कुछ बता रही, तब तक गाओं भी आ गया और कजरी का घर सामने hi था तो..
कजरी - अच्छा राजू बाबू, हमारा घर तो आ गया अब..
राजू- अच्छा इतनी जल्दी ध्यान hi नहीं दिया की कब घर आ गया अप्प लोगो का..
पारो- ाचा ध्यान क्यों नहीं दिए, कहा ध्यान था आपका हूँ

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राजू- बस कुछ पर था ध्यान पर माँ कसम मजा आ गया तोडा पास से देखता, उसको अपने हाथो से छू लेता, मसल देता तो मजा hi आ जाता..
कजरी और पारो की गाल लाल हो रहे थे राजू की बात सुन कर क्युकी वो दोनों समझ चुकी थी राजू उसके सरृर की hi बात कर रहा है, मतलब वो दोनों को मसलना चाहता था , तब कजरी बोली
कजरी - ाचा टिक है मुका मिले तो कर लीजिएगा अपने मन की जब का तब देखना, पर पहले, आये हमारे घर मए, अप्प भी तोडा ढूढ़, छाए ( टिया) या सरबत पी कर hi जाना
पर यहाँ कजरी ने दूध सब्द पर तोडा ज्यादा जोर दिया, और राजू की नजर बर्बर कजरी की कपड़ो की ऊपर उसके चुकी का आकलन करने लगा, पर कुछ पल की लिया hi क्योंकि पारो ने उसका ध्यान तोड़ दिया..
पारो - कहा कहा खो गए अप्प राजू बाबू, चलना है की नहीं अंदर आपको..
राजू - चलते है, वो मैं ये सोच रहा था की, मणि तोडा ज्यादा hi ढूढ़ ( पारो से स्तनों को गुरते हुए) पसंद है तो जरा ध्यान से

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पारो - अप्प बिलकुल टेंसन मत लीजियेगा राजू बाबू है न दीदी..
कजरी - बिलकुल सही, वैसे भी राजू बाबू हमारे घर दो मस्त भरी हुई गए (काऊ) है, जिनके पास बहुत दूध है, आपको पसंद आएगा..
राजू ( मन मए) - है तुम दोनों जो हो, तोड़ी देर रुक जाओ इतना ढूढ़ निचोड़ लूंगा की हमेसा मेरे hi पास आओगी दूध पिलाने मुझको..
राजू- है वो तो मैं देख hi चूका हु, मुझको तो दोनों hi पसंद आ गई, पर सोच रहा हु, किसका दूध पहले पि लू किसका बाद मए.. अप्प दोनों क्या लगता है किसका पहले चूस लू मैं, मतलब किसका दूध पी लू.. अप्प दोनों hi फैसला लेट लेना किसका दूध मुझको पहले पिने को मिलेगा


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पारो और कजरी के तन बदन मए आग लग गई, राजू के बोलने से, एक तो पहले से पयासी थी और यहाँ, कुवा खुद उनके पास आ गया उनको अपना पानी पिलाने के लिया,..
कजरी (मन मए) - अहह मैं तो सोच कर hi गरम हो रही हु की, जब अपने अपने होंटो से मेरा दूध piyenge,mere दूध को मसल मसल कर दबा दबा कर उफ़, कितना मजा आएगा मुझको तो इंतज़ार hi नहीं हो रहा है
पारो (मन मए) - मैं तो कबसे तैयार हु आपको दूध पिलाने के लिया, अच्छा है अप्प कुढ़ hi समज गए मुझको ज्यादा महेनता नहीं करनी पड़ी, पर किसका दूध अप्प पहले पिओगे राजू बाबू हूँ..
पारो ( अपने होंटो को काटे हुए) - जी वो तो आपकी मर्जी जिसजे भी दूध आपको पसंद आते चलिए अब..
राजू ( तोडा और खुल कर) - देकता हु किसका दूध जाता मिटा होगा, उसी को पि लूंगा, पर मेरी एक डाटा बहुत बुरी है
पारो करजरी (एक साथ) - कोण सी आदत
राजू -एक बार जो दूध मुझको पसंद आ jate,mere होंटो मए लग जाये फिर to,jab मेरा मन करेगा , जहा करेगा वह दूध पिलाना होगा सोच lol..
कजरी और पारो तो कुछ बोल hi nahi,raju ने सीधे बोल दिया ki,wo तो छोड़ेगा नहीं दोनों को और पारो कजरू तो यही चाहती थी और दोनों ने है मए मुंडी हिला कर अंदर घुस गई..
राजू (मन मए) - क्या बात है, पहले तो सिर्फ पारो का दूध पिने को मिलता अब तो दोनों ननद जेठानी का दूध एक साथ मिलेगा, अज्ज hi पि लूंगा किसी एक का दूध, अब दोनों तैयार है मतलब टोनो hi आपस मए फैसला करेगी.
राजू भी अंदर चला गया, परप और कजरी दोनों समन अंदर रख कर वापिस आ गई और फिर कजरी बोली..
कजरी - राजू बाबू अप्प, वह उस रूम मए जाओ, हम दूध ले कर आती है..
राजू - है टिक है पर, एक एक करके पहले एक दूध पिऊंगा, फिर दूसरे का दूध पिऊंगा टिक है और तोडा जल्दी से आना, बहुत पायष लगी है..
राजू रूम अंदर गया और कजरी और पारो किचन मए चली गई और दोनों एक दूसरे को देखती रही फिर
पारो - दीदी अब क्या करे, यहाँ तक तो सब बढ़िया hi था पर अब क्या, मुझको तो लगता है वो तैयार है हमारा सीकर करने के लिया..
कजरी, - है तो करेगा hi जब कुढ़ सीकर सामने से निमंतरण दे रहा है तो शेर पीछे तोड़ी हटेगा वो सीकर करेगा hi.. और हम तो वही चाहती थी न
पारो - है हम वही कहती थी दीदी पर अब क्या, अपने देखा न उनका कितना बड़ा और सुन्दर था..
कजरी : अरे जब से उसको देखा है तब से तड़प रही हु मैं, पर अब अंतिम निर्णय लेना है की कोण पहले उसके सामने जायेगा तू या मैं,
पारो - दीदी अप्प hi पहले जाओ देखो वो क्या करते है, और अगर अज्ज hi वो आपको पूरा पेल दे तो मेरे पास टाइम रहेगा hi..
कजरी - पर मैं क्यों छोटी तू क्यों नहीं..
पारो - वो दीदी अप्प तोड़ी anubha(experience) वाली हो आपको अच्छे से पता होगा की क्या करना है कैसे फिर अप्प मुझको बताना..
कजरी - बात तो टिक बोल रही है छोटी पर, मुझको तोडा दर लग रहा है..
प्रो- दर केसा दर दीदी
कजरी - मतलब दर और तोड़ी गब्रहत भी की क्या होगा, कैसे होगा, देख मुझे लगा था की, राजू को पटाने मए कुछ समय लगेगा पर, यहाँ इतनी जल्दी से हो गया की, कुछ समझ hi नहीं आया..
पारो - वैसे दीदी बात तो अप्प सही बोल रही हो तोड़ी सी दर तो मुझको भी लग रही, कही हम जल्दबाजी तो नहीं कर रहे है..
कजरी- वही तो छोटी कही कुछ गड़बड़ न हो जाये वैसे bhi,kuch भी बोलो राजू तो अभी भी एक लड़का (22-23सल्ल ) hi है..
पारो - पर अब बहुत देर हो क्युकी है दीदी हम कुछ भी नहीं कर सकते है, बात आगे निकल चुकी है अब जो होगा देखा जायेगा
कजरी: टिक है छोटी तू बोलती है तो मैं जाती हु fir,wese मुझको तो अभी तक भरोसा नहीं हो रहा है, की ये सब हो रहा है..
पारो - बात तो टिक बोल रही हो दीदी पर हो तो यही रहा है, अब ये लीजिये दूध का गिलास और जाये, देखते है क्या करते है वो..
और कजरी और पारो की बात ख़त्म हुई, और कजरी दूध का ग्लास लेकर चल दी रूम मए . .
रूम मए राजू मोबाइल चला रहा था ( मोबाइल मए बर्बाद हो गए सब) कजरी को देख राजू ने मोबाइल साइड रख दिया, अब कजरी दूध का ग्लिस टेबल पर रखने जे जोकि थो, उसके सर्जरी का पालो कसक गए और राजू की आँखों के सामने, कजरी के असली दूध की घाटी आ गई, कजरी को पता चल गया, फिर भी उसने राजू की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली..
कजरी - ली जिए राजू बाबू आपके लिया दूध, बिलकुल मीठे है और बिना मिलावट के पि लीजिए..
और धीरे से कजरी ने अपना पालो सम्हाल लिया, पर राजू समझ गया की ग्लाश तो एक बहाना, असली दूध दिखना था कजरी को..
राजू - अच्छा सच मए , पाए यहाँ तो एक hi दूध है दुरी वाली दूध ( पारो) कहा है..
कजरी - वो क्या है राजू बाबू छोटी ने hi बोलै की आपको पहले एक दूध चक लेना चाहिए फिर दूसरा भी पी लीजिए गए, न दूध कही जायेगा न अप्प, अच्छा मैं चलती हु..
राजू - अरे रुको, मुझको आपसे बात करनी है काकी, बहुत हो गए ये इशारो इशारो मए बाते खुल कर बोलिये की हो क्या रहा है,
राजू के बोलने पर कजरी भी सन्ति के साथ राजू के सामने बाथ गई, दोनों कुछ देर शांत रहे, फॉर राजू ने सुरुवात की..
राजू- देखिए काकी, अब अप्प को पारो भाभी और मेरे बारे मए आपको पता hi होगा, इसका अंदाजा तो मैं लगा चुकु हु, आपको पता है न..
राजू के सावला पर कजरो बोली तू नहीं पर मुंडी हिला कर अपनी रजामंदी जरूर दी..
राजू - टिक है पारो का मैं समझ सकता हु, पर अप्प क्यों, मतलब अप्प भी उनकी तरह hi, मतलब पयासी पर मैं hi क्यों कोई और क्यों नहीं.. अप्प दोनों ने ये सब पहले hi सोच लिए है की अप्प दोनों क्या करना है कैसे करना है तो बोलिये साइड बात क्या है..
कजरी - है राजू तुमने टिक सोचा, मुझको सब मालूम है, और जो कुछ भी अज्ज हुआ, हम दोनों ने पहले hi सोच लिया था, और रही बात की तुम hi क्यों तो सुनो, मेरे पति भी मेरे डावर की तरह hi है, मतलब पुरे नामर्द नहीं, पर वो मुझको पूरी संतुस्ती नहीं दे सकते और न hi माँ बना सकते है कभी, मैं उनको छोड़कर जाना चाहती थी पर, मेरे परिवार मए भी कोई नहीं है, मेने सोचा की अगर मेरे पति नहीं तो काम से काम मेरे डावर की औलाद से इस कंदन का चिराग आगे बाद जायेगा, पर मुझको क्या पता की, मेरी डावरणी की किसमत भी मेरी तरह निकलेगा, इसीलिए जब मुझको तुम दोनों में बारे मए पता चला तू, मेने पारो को रजामंदी दे दी.. पर मेरे दिल मए तुम्हारे लिए एक अलग जगबा थी पर वो उतनी नहीं ,पर जब अज्ज तुम्हारे उस, उस हत्यार को देखा तो मेरे अंदर की पयासी औरत जग गई,
राजू- मैं किसी और की पत्नी के साथ ऐसा नहीं कर सकता, उसके पति की इजाजत के बगेरा क्या काका को पता है इसके बारे मए..
कजरी - है उनको पता है, पर ये नहीं की वो तुम हो..
दोनों कुछ देर चुप रहे फिर राजू ने कुछ ऐसा बोलै की कजरी शर्मा गई
राजू- चलाओ सब बात फाइनल हो गई, तो काकी अब तोडा दूध भी पीला तो, दिखा तो चुकी हो पर पूरी तरह से देखना है मुझको
कजरी शर्मा गई और उठ कर का कर जाने लगी, पर राजू ने उसका हाथ पकड़, कजरी समझ गई की अज्ज वो काम सी गई, पर फिर भी नाटक करते हुए बोलने लगी..
कजरी- छोड़दिज्ये राजू बाबू, पारो देख लेगी, जाने दीजिये मुझको, ाःह ममम
पर कजरी आगे कुछ बोल नहीं पाई, क्युकी

तो बे कॉन्टिनोएड
