इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 2 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट-9

अब तक ...



ऋचा राहुल को किश करने क बाद उसको कहती ह की वो अब उठ जाए चलने का वक़्त हो गया.

और अपने फ़ोन पे वही सेल्फी देखने लगती ह...

अब आगे...

प्रेजेंट:

ये वही सेल्फी थी जो ऋचा अपने बीएड पे लेते हुए देख रही थी और नींद क अघोष में चली गयी थी, अपने अतीत को सपने में देख रही थी और जब उसकी आँख खुलती ह तोह देखती ह की सुबह हो चुकी ह और उसके हाथ में फ़ोन था, वो स्क्रीन को ों करती ह तोह वही फोटो उससे दिखती ह.

उसके चेहरे पे स्माइल आ जाती ह. और फिर उठ क फ्रेश होने चली जाती ह.

इधर राहुल क घर में राहुल भी जब उठता ह तोह देखता ह की उसके क्लास क व्हाट्सप्प ग्रुप में मैसेज आया ह की पहली कंपनी दो हफ्ते बाद आने वाली ह. कंपनी का नाम नहीं बताया था. पर एक मल्टीनेशनल कंपनी थी.

राहुल फ्रेश होक नीचे आता ह तोह उसकी माँ निशा उससे खाना सर्वे करती ह.

इतने में कॉल आता ह निशा क फ़ोन पर...

निशा: hello? हं भाभी जी.. क्या??? आ गए दोनों बच्चे?? चलो बढ़िया ह? अच्छा परसो आए?? बढ़िया ह... आज?? अभी??? ारी नहीं नहीं... मुझे तोह बेहद ख़ुशी होगी, 2 साल से दोनों को देखि नहीं हु, आइये न घर पे में और राहुल तोह रहेंगे hi, ये ऑफिस गए ह शाम तक आएँगे. और नेहा कॉलेज में ह. राहुल? हं राहुल बढ़िया ह.. अभी प्रिपरेशन में लगा ह कम्पनीज आने वाली ह. हं ज़रूर... हं क्यों नहीं करेगी, राहुल उसका फवौरीते जो h..haha.. कहा भाभी? आपको पता तोह ह, नेहा किसी ह... हं.. तोह कब तक आ रहे हो आप सब? अच्छा भैया जी नहीं आ रहे? ओह्ह!! ठीक ठीक!! जी में वेट कर रही हु. हं.. ोकक... बई!!

र: तै जी का फ़ोन था माँ??

निशा: हनन बेतु, चल फटाक से घर व्यवस्थित कर दे, तेरी तै जी, वंशिका और अंशिका लोग आ रहे ह.

र: वो दोनों लौट आई? चलो बढ़िया ह. कब तक आ रहे मम्मी?

निशा: बस बीटा 1-2 घंटे से आ रहे ह सब. अंशिका और वंशिका शयद यहाँ रुकने आ रही ह, दोनों ज़िद्द क्र रही थी यहाँ रुकने की, खासकर तेरी वंशिका, बोल रही थी की तुझे बोहत मिस किया और तेरे साथ यही रुकना चाहती ह , तोह तै जी ने बोल दिया की ृक्क जाना... तुझे पढाई की टेंशन हो तोह बेतु तू ऋचा क घर जाके पढ़ सकता ह. तुझे डिस्टर्ब न हो.

र: नहीं माँ! ठीक ह, दोनों से बोहत दिनों बाद मिलने जा रहा हु, ये वंशु दी भी न... कितना बचपना भरा ह इनमे, पर बोहत प्यारी ह.... और रही बात पढाई की तोह पढ़ाई तोह चल hi रही ह, पढ़ता भी रहूंगा में साथ में अपने रूम में.

निशा: अच्छा ठीक ह...

थोड़ी देर बाद एक डस्टर राहुल क घर क सामने आती ह और उसमे से राहुल की तै जी और उसकी बहने वंशिका और अंशिका निकलती ह.

निशा: आइये... आइये...

अंशू कितनी बड़ी हो गयी तू...

अंशिका और वंशिका को दोनों को निशा अपने गले से लगा लेती ह.

निशा: हाई मेरी दोनों बेतिया कितनी सुन्दर ह. नज़र न लगे किसी को....

{अंशिका को ा और वंशिका को व् लिखूंगा}

ा: चची, ी मिस्ड यू सूऊओ मच!!

निशा: अच्छा तोह आई क्यों नई इतने साल?

ा: आपको पता तोह ह चची, मुझे कितने दिन क लिए टाइम मिलता था? और फिर खुद क घर पे भी कहा आई हु उतना में?

निशा: हम्म... अब आ गयी ह न, अब इधर hi रहना कुछ दिन.

ा: पूरी तैयारी क साथ आई हु.

फिर निशा वंशिका और अपनी भाभी से भी मिलती ह और सभी को अंदर हॉल में बैठाती ह.

व्: चची! मेरा प्यारा राहुल किधर ह?

निशा: तेरा प्यारा राहुल ऊपर ह बीटा, बुलाती हु ृक्क.

व्: नहीं चची में सरप्राइज दूंगी...

निशा: अरे बीटा उससे पता ह तमलोग आने वाले हो.

व्: हनन पर उससे ये नहीं पता की हमलोग आलरेडी आ चुके ह.

वंशिका ऊपर जाके राहुल का दूर नॉक करती ह...

राहुल तब अपनी टी शर्ट बदल रहा था, और उसने सोचा शयद इसकी माँ ह, और ऐसे hi बिना दूसरी टी शर्ट पहने दूर खोल दिया...

सामने कोई नहीं था, राहुल ने सर बाहर निकाल कर देखा की कोण ह आखिर? अगल बगल.. पर कोई न दिखा..

फिर राहुल निकल कर नीचे स्टैर्स की तरफ देखने लगा तभी उसकी आँखों क सामने अँधेरा चा गया

दो कोमल हाथो क स्पर्श से उसकी आँखें ढकी हुई थी.

किसी ने उसको पीछे से उसकी दोनों आँखों पे हाथ रखा हुआ था.







राहुल शिरट्लेस्स था, उसकी नंगी पीठ पे डब्ब रहे वंशिका क बूब्स, वंशिका को उकसा रहे थे, ऊपर से राहुल की सिक्स पैक्स की बॉडी और पीछे की सुडोल, मज़बूत बैक. वंशिका अपना आप खो hi देती यदि राहुल कुछ करता तोह.



वही दूसरी तरफ ...

ये खुशबु... ये स्पर्श...

ये अदा... ये अपनापन...

ये हरकत...

ये सब किसकी करतूत थी, राहुल भली भाति समझ गया था.

र: वंशु दी.. आप hi हो, मुझे पता ह.

व्: क्या कुटी!! तूने इतनी जल्दी कैसे पहचान लिया?

(वंशिका प्यार से राहुल को कुटी बुलाती ह, और राहुल उससे प्यार से वंशु दी)

र: आप मेरी बहिन हो वंशु दी, आपको बोहत प्यार करता हु. आपको कैसे नहीं पहचानूंगा...

वंशिका राहुल की आँखों से हाथ हटती ह और सामने आके उसके राइट गाल पे किश करती ह...

फिर लेफ्ट गाल पर...





फिर माथे पर...

फिर उसकी आँखों में देखती ह...

उसकी साँसे तेज़्ज़ चल रही थी...

इधर राहुल स्माइल कर रहा था...

और कुछ कहने वाला था की वंशिका जोरर से राहुल को हुग क्र लेती ह...





V(mann में) : इडियट!! इतना भी नहीं समझता... हर्र बार में hi कोशिश करती हु. और ये ह की बुद्धू... समझता hi नहीं ह इशारा.

दोनों एक दूसरे को जकड़े हुए थे.

वंशिका क बड़े बड़े बूब्स राहुल की छाती में धस्स रहे थे.

और उसके बदन से निकलने वाली मनमोहक खुशबु..

राहुल को उत्तेजित कर रही थी.

पर राहुल क मैं में कोई गन्दा विचार नहीं आया था.

प्यार जो करता ह प्यारी बड़ी बहिन से अपनी.

एक बहिन क प्यार को तोह उसने कब का खो दिया.

तोह दूसरी जब उस से इतना प्यार करती ह तोह राहुल तोह अपनी जान लुटा देगा उस पर.

तभी नीचे से आवाज़ आती ह...

"अरे तुमलोगो का भारत मिलाप हो गया हो, तोह नीचे आ जाओ..."

निशा की आवाज़ से दोनों एक दूसरे से अलग होते ह, और वंशिका राहुल क हाथ में हाथ डाले एक कपल की तरह उसके साथ नीचे आती ह.

(अब इस से पहले की कहानी आगे बढे, मुझे यहाँ इंट्रोडक्शन देना बोहत ज़रूरी ह...)

रुपेश मिश्रा (आगे-56): राजेश क बड़े भाई, राहुल क ताऊ जी.

इनका ग्वालियर में hi इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का बिज़नेस ह. पैसे से अमीर ह. पर कभी भी घमंड नहीं किया. कोई ज़मीन थी नहीं माँ बाप की, तोह लड़ाई और बटवारा जैसी चीज़े हुई hi नहीं कभी. इनका बैंक अकाउंट भी राजेश क hi बैंक में ह. तोह दोनों में बोहत यूनिटी ह.





विनीता Mishra(Age- 51): रुपेश की पत्नी, राहुल की तै जी. दिखने में 51 की कही से नहीं लगती, 30स की दिखती ह. जनरेशन क हिसाब से चलती ह, फैशनेबुल ह, और एक अच्छी अर्धांग्नी.





वंशिका मिश्रा (आगे- 23): रुपेश और विनीता की बड़ी लड़की, राहुल की कजिन दीदी. इसने कॉमर्स लिया था, और फिर ब किया, फिर जॉब लगी तोह ये 2 साल बाहर hi रही. पर पैसा तोह ह hi पिता जी क पास, इसलिए वह ज़्यादा देरर नहीं ठहरी और इधर hi अब ग्वालियर में शिफ्ट हो गयी ह. राहुल को बोहत ज़्यादा चाहती ह. इसका भी एक रीज़न ह.





अंशिका मिश्रा (आगे- 20): रुपेश और विनीता की छोटी लड़की, राहुल की कजिन, और वंशिका की छोटी बहिन. इसने भी कॉमर्स लिया था पर जब वंशिका 21 की थी तोह वो बाहर चली गयी थी, इसलिए इससे भी 18 की उम्र में स्कूल ग्रेजुएशन क बाद का की तैयारी क लिए बाहर भेज दिया. पर का निकला नहीं इसका, इसलिए अब वापस घर आ गयी ह, और ब करने का सोच रही ह अपनी दीदी की तरह. ये राहुल को भी ज़्यादा पसंद नहीं करती, क्युकी नेहा ने उसको वो सब बताया ह जो की उसको पता ह और जिससे वो सच मानती ह. इसी कारण वह राहुल से बात hi नहीं करती ह बस.

नेहा और अंशिका में भी बोहत अच्छी बॉन्डिंग ह क्युकी अंशिका अपनी दी से ज़्यादा अटैच्ड नई थी, और नेहा और उसके बीच सिर्फ 2 साल का hi अंतर था. इसलिए अंशिका नेहा क साथ काफी टाइम स्पेंड किया करती थी.





विशाल मिश्रा (आगे- क्सक्स): अभी छोटा ह, 9तह क्लास में ह, ज़्यादा रोले नहीं ह इसका कहानी में.

ये था इंट्रोडक्शन.



नेहा क्यों हेट करती ह राहुल को. ये सिर्फ राजेश, निशा और राहुल hi जानते ह बस.

और में यानी लोनवॉल्फ. :हहै:

आज क लिए इतना hi गुइज़्ज़!
 
अपडेट-10

अब तक...

"अरे तुमलोगो का भारत मिलाप हो गया हो, तोह नीचे आ जाओ..."

निशा की आवाज़ से दोनों एक दूसरे से अलग होते ह, और वंशिका राहुल क हाथ में हाथ डाले एक कपल की तरह उसके साथ नीचे आती ह.

अब आगे...

नीचे आते hi अंशिका की नज़र दोनों पे पड़ती ह, हाथो में हाथ डाले वंशिका और राहुल किसी शादी क जोड़े से काम नहीं लग रहे थे.

अंशिका क लिए ये कोई नई बात नहीं थी. वंशिका और राहुल में बोहत अच्छी बॉन्डिंग थी, और ये क्यों थी ये सवाल हमेशा अंशिका को सताता था.

नेहा ने जब अंशिका को बताया था राहुल क बारे में, तोह वही बात तोह नेहा ने वंशिका को भी बताई थी, तोह फिर वंशिका भी राहुल को हेट क्यों नहीं करती? उससे भी हेट करना चाहिए. पर यहाँ तोह उल्टा hi ह.

वंशिका तोह और राहुल से प्यार करती ह, यह सवाल हमेशा अंशिका क मैं में रहता था जब भी वो दोनों को साथ देखती थी. उससे पता था की दाल में कुछ तोह काला ह. कुछ ऐसी बात ह जो सामने नहीं आई ह.

अंशिका ने अपनी दीदी वंशिका से बात भी की थी कई बार इस बारे में, पर हर्र बार वंशिका उससे कभी कुछ नहीं बताती थी.

बस ये कह देती थी की राहुल उसका सबसे प्यारा छोटा भाई ह और वो उससे बोहत पसंद करती ह.

पर क्यों? ये कभी नहीं बताया...

अंशिका नेहा क साइड hi रहती थी, इसलिए उसने नेहा की कही बात को सच माना और वही बात सभी घरवालों को पता ह.

पर फिर भी, सभी घरवाले राहुल को कभी भी गलत नज़रिये से नहीं देखते... ये अपने आप में सुर्प्रिसिंग बात थी.

अंशिका कुछ नहीं बोलती ह. हलाकि राहुल को 2 साल बाद देखने क बाद उसके मैं में ये ख़याल ज़रूर आया था की राहुल अब बोहत स्मार्ट दिखने लगा ह, एक अट्रैक्शन हो रहा था उससे. पर क्युकी वो राहुल से अब बात नहीं करती थी इसलिए उसने कुछ नहीं कहा.

बाकी सभी लोग समझ चुके थे, की क्या बात ह...

विनीता: आ गया मेरा बीटा...!! है रे... कितना स्मार्ट हो गया ह...

राहुल तै जी क परर चुने क लिए नीचे झुकता ह तोह विनीता उससे अपने सीने से लगा लेती ह.

उसके बड़े बड़े मुलायम बूब्स राहुल क सीने में धस्स गए, बूब्स इतने बड़े और सॉफ्ट थे की राहुल क पंत में उभार आने लगा था. वो तोह अच्छा हुआ की राहुल तुरंत hi अपनी तै जी क चंगुल से अलग हो गया और उसका उभर काम हो गया वर्ण सभी लोग उसका उभार देख hi लेते.

विनीता: क्या बॉडी बना ली रे तूने मेरे बच्चे!! कितनी गफ बन गयी बता ज़रा.. हं?

V(mann में): हम्म्म?? राहुल की गफ?? नहीं होनी चाहिए... छोड़ूंगी नहीं यदि इसने गफ बनाया किसी को...

हम्फ!!!

R(hasste हुए): क्या तै जी आप भी... आपको सबसे पहले बताऊंगा यदि बनेगी तोह...

V(mann में): हष्ठ!!

विनीता: हं हं... झूठ बोलो और क्या... नई बताना तोह मत बताओ..

अच्छा वो सब चोरर और ये सुन्न, ये दोनों छिपकलियाँ यहाँ रुकेंगी. तुझे पढाई में कोई दिक्कत तोह नहीं ह न? वर्ण में बाद में कभी भेज दूंगी इन्हे..

र: नहीं तै जी. ये भी कोई बात हुई... मुझे कोई दिक्कत नहीं ह. बिंदास रुकने दीजिये इनलोगो को.

राहुल की सहमति सुन्न क वंशिका उससे ज़ोर से गले लगा लेती ह. और सब क सामने hi गाल पे एक ज़ोरदार किश जड़ देती ह.

सभी को पता था की अंशिका तोह बात करने से रही राहुल से इसलिए किसी ने उसको फाॅर्स नहीं किया मिलने से.

ा: चची!! नेहा किधर ह? कॉलेज?

निशा: हं बीटा! उसका कॉलेज ह, बस आती hi होगी.

फिर चाय पानी, नाश्ता वगैरह में समय व्यतीत हो जाता ह, और इतने में नेहा भी आ चुकी थी निकिता क साथ.

अंदर आते hi वो सभी से मिलती ह और अंशिका उसकी सबसे फवौरीते कजिन से मिलके वो बोहत खुश थी. और ये जान क की अंशिका और वंशिका दोनों कुछ दिन रुकेंगे नेहा और भी ज़्यादा खुश हो गयी थी.

डिनर का समय हो गया था. और सभी लोग डिनर कर रहे थे.

की इतने में नेहा बोलती ह...

न: मम्मी!! अब अंशिका दी आ गयी ह और वंशिका दी भी, तोह में कल कॉलेज नहीं जाउंगी, कल हम सभी लोग कही घूमने चलते ह न...

ा: ऑब्वियस्ली... कल कही चलते ह... दी आप बताइये न...

व्: में... में... में तोह कही भी चल दूंगी, राहुल तुम बताओ...

N(thoda तेज़्ज़ स्वर में): डीई सिर्फ आप में और अंशिका दी hi जा रहे ह. अब बताइये कहा चलना ह.

व्: क्या??? राहुल नहीं जा रहा??

न: नहीं...

व्: क्यों?

*राहुल की तरफ देखते हुए*

कुटी!! तू नहीं जा रहा क्या?

तू नहीं जाएगा तोह में भी नहीं जाउंगी...

न: डीईई.... ी टोल्ड यू न. He's नॉट किंग विथ उस. उसको पढ़ना होगा.

अब जल्दी कहिये.

व्: नहीं. I'm सॉरी नेहा. यदि राहुल नहीं जाएगा तोह में भी नहीं जाउंगी.

न: व्हाट? बूत...

ा: दी... यू सीरियस?

इस से पहले की वंशिका कुछ बोलती...

र: वंशु दी! मुझे सच में पढाई करनी ह, आप जाइये, आप और में किसी और दिन चल देंगे. ठीक?

N(mann में): मक्खन लगाना भी कोई इस से सीखे... हम्फ!!

निशा और विनीता साड़ी बाते सुन्न रहे थे पर कुछ बोलना ठीक नहीं समझा. बच्चे बड़े हो गए थे, और उन्हें सही गलत की समझ आ चुकी थी. इसलिए वो सिर्फ खाने में ध्यान दे रही थी.

पर राहुल क लिए उन दोनों को भी बुरा लग रहा था.

ा: हां दी!! देखा न आपने, उससे पढाई करनी ह. अब जल्दी बताइये..

वंशिका आउट ऑफ़ मूड हो गयी थी.

उससे पता चल गया था की नेहा ने राहुल को इन्क्लुडे नहीं किया. और राहुल ने जान बुझ क पढाई का बहाना कर दिया. राहुल बेचारा इधर भी चाहते हुए भी कुछ नहीं कर सका. बस फ्लो क साथ चलना पड़ा उससे.

वंशिका को बोहत ज़्यादा तरस आ रहा था राहुल पे... वो उससे साइड से देखे hi जा रही थी. राहुल की स्माइल.. उसके पीछे कितना दर्द छुपा था. पर राहुल फिर भी उससे बखूबी निभा रहा था, वो किसी को पता चलने नहीं देता था. पर जो अपने रहते ह न, उन्हें पता चल hi जाता ह...

वंशिका क दिल में बोहत दर्द हो रहा था. एक बेचैनी थी, उस वक़्त वो राहुल को ज़ोर से हुग करना चाह रही थी. पर सभी लोग डाइनिंग टेबल पे थे...

इतने में राहुल अपना लेफ्ट हैंड वंशिका क लेफ्ट हैंड पे रखता ह और उस से धीरे से कहता ह...

र: सुनो दी!! आप जाओ... मेरी बात मानो और जाओ. वर्ण माहौल खराब होएगा घर में... प्लीज समझिये.

हम चलेंगे न.. किसी और दिन. ी प्रॉमिस. बूत अभी प्लीज...

वंशिका को भी आखिर ना चाहते हुए राहुल की बात को मान न पड़ा.

अब इतने प्यार से उसका कुटी उस से बोलेगा तोह वंशिका कैसे मन कर सकती ह?

वंशिका बिना मैं क अपना सर हां में हिला देती ह.

न: ठीक. तोह दोने फिर. कल हम चलते ह मूवी देखने एंड थें , Domino's में पिज़्ज़ा, थें सुन सिटी. हाउ डस तहत साउंड्स???

ा: ऑलराइट! साउंड्स गुड!

न: ठीक ह न दी?

व्: हम्म्म्म...

फिर विनीता अपनी दोनों लड़कियों को राहुल क घर चोरर क वापस चली जाती ह.

उसके जाने क बाद अंशिका नेहा क रूम में सोने चली जाती ह, और वंशिका को गेस्ट रूम दिया था बूत उसने मन कर दिया और राहुल क साथ सोने को कह दिया.

दोनों में अच्छा प्यार था, इसलिए सब समझते थे, और किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई. इतने में राजेश भी आ गए थे, और खाना खा क वो भी निशा क साथ अपने रूम में चले गए. निशा ने उसको सब बताया था की आज क्या क्या हुआ.

सब अपने रूम में आ चुके थे. नेहा क रूम में अंशिका और नेहा बातो में लगी हुई थी. और राहुल क रूम में राहुल और वंशिका दोनों साथ में लेते हुए थे.

वंशिका राहुल से सात क चिपकी हुई थी, उसके कंधे पे अपना सर रखी हुई थी...

व्: कुटी!! तूने जान बुझ कर पढाई का बहाना बनाया न?

र: आप सब समझ जाती हो दी?

व्: हन्नन... बोल अब!

र: हाँ दी, ऐसा करना ज़रूरी था.

आप टेंशन मत लो...

व्: पर न .... मुझे हर्ट हुआ...

र: किस बात क लिए दी?

व्: तुझे जब ऐसी सीटुएशन्स में देखती हु न... जब देखती हु की तू कितना लाचार ह, कुछ कर नहीं पा रहा ह ... तोह.... तोह मुझे... मुझे हर्ट होता ह.

वंशिका उसकी शर्ट को कस क मुठी में ले लेती ह...

राहुल को ये वंशु क मुँह से सुन्न क एक नया एहसास हुआ था. की उसकी वंशु दी कितना प्यार करती ह उस से. उसने कभी ऐसा नहीं सुना था अपनी वंशु दी क मुँह से...

राहुल उससे और कस क अपने पास खींच लेता ह

इतने में वंशु भी उसके गालो को गीला करने में कोई कसार नहीं छोड़ती. हलकी हलकी किस्सेस करती जा रही थी उसके गालो पे.

V(mann में) : क्या करू?? आगे बधु की नहीं? ये तोह और बुद्धू ह. पर इसकी भी कोई गलती नहीं ह. सगी बहिन से भी ज़्यादा मानता ह मुझे. पर कुटी तू समझता क्यों नहीं ह? की में तुझ से बोहत कुछ कहना और करना चाहती हु. कभी तोह इशारे समझ मेरे... शायद मुझे आगे एक स्टेप बढ़ना hi पड़ेगा. पर कही नाराज़ हो गया मेरा कुटी मुझ से तोह? यदि मुझ से रूठ गया तोह?

में अपने कुटी की बेरुखी कभी सेहन नहीं कर पाऊँगी.

में तोह मर्डर hi जाउंगी... यही सोच क हर्र बार पीछे हट जाती हु. पर अब पता नहीं ऐसा मौका कब फिर मिलेगा मुझे...

आगे बढ़ती हु... यदि कुटी नाराज़ हुआ तोह उससे मनाऊंगी... हं... यही ठीक ह... यदि बुरा भी माना तोह उससे मना क रहूंगी...

वंशु धीरे धीरे राहुल क होंठो क पास आती ह, उसकी गरम गरम सासे राहुल क होंठो पे पद रही थी. राहुल को भी कुछ समझ नहीं आया और उसने पूछा..

"क्या हुआ दी..??"

उसने इतना कहा hi था की वंशु ने अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए...





एक दम से हुए इस हमले से राहुल भी चौक गया था.

उसकी आँखे बड़ी हो गयी थी...

अपनी वंशु दी क नरम नरम गुलाबी, रसीले होंठो का जब उससे अपने होंठो पे एहसास हुआ तोह उसमे एक अलग hi आग सी उठ गयी थी.

एक जोश सा चढ़ गया था. पर वंशु उसकी प्यारी बहिन थी. उसने ऐसा क्यों किया आखिर?

राहुल शॉकेड था एकदम. 8-10 सेक् तोह उससे साड़ी चीज़ प्रोसेस करने में hi लग गए की आखिर हुआ क्या.

जब उससे ध्यान आया तोह उसने तुरंत hi वंशु क कंधो को पकड़ क अपने से दूर किया जिसमे उससे 4-5 सेक् और लग गए, क्युकी वंशु उससे छोड़ hi नहीं रही थी.

R(shocked होक) : दी?? ये आप... ये आपने क्या किया??

V(bholi बनते हुए) : क्या किया? अपने कुटी को किश किया और क्या?

र: दी आपको पता ह न में किस की बात कर रहा हु? आपने मुझे लिप्स पे किश किया... क्यों?

व्: हं तोह? क्या में अपने कुटी को किश नहीं कर सकती?

र: aap...Aap कर सकती हो बेशक. पर लिप्स पे? आप मेरी बहिन हो दी... बताइये प्लीज आपने ऐसा क्यों किया? आपने पहले तोह कभी ऐसा नहीं क्या..

व्: अरे य्र्र कुटी!! तू इतने सवाल जवाब मत कर समझा... पहले से नई किया तोह अब कर दी ह न स्टार्टिंग. अब से किया करुँगी... ठीक?

र: एक.. एक मिनट... क्या मतलब? अब स्टार्ट कर दी मतलब?

अब से आप किश करोगी मुझे लिप्स पे?

व्: हाँ... क्यों? एक बहिन अपने भाई को लिप्स पे किश नहीं कर सकता क्या?

र: लिप्स पे नहीं कर सकती.

व्: किसने कहा??

र: मेने कहा...

व्: हम्फ!! में तोह करुँगी...

र: डीई!! ये मज़ाक नहीं ह... मेरी बात सुनिए...

राहुल उठ क बैठ जाता ह और वंशु को भी उठा क बैठता ह अपने सामने और फिर कहता ह...

"दी!! सच सच बताइयेगा. आपको मेरी कसम...

आपने ऐसा क्यों किया?"

अब वंशु असमंजस में थी और घबरा गयी थी की अब तोह सच सामने आके hi रहेगा, जो वो पिछले 3 साल से छुपाती आ रही थी. उसके कुटी ने कसम जो देदी थी.

उससे पता था अब तोह सच बोलना hi ह, तोह वो सब कुछ बताना स्टार्ट करती ह...

"कुटी!! मेने ये कोई मजबूरी में नहीं किया, ना hi मुझे कोई दौरा पद रहा ह जो में ये करुँगी. मेने ये अपनी मर्ज़ी से किया! मेरी खुद की मर्ज़ी से. क्युकी उसके पीछे कारण ह कुटी. वो ये ह की... ी... ी लव यू... कुटी!!"

र: हं दी! ी लव यू तू, पर इसमें...

"नहीं कुटी!! तुम गलत समझ रहे हो. मेने जो 'ी लव ु' कहा, उसका मतलब एक भाई बहिन वाला 'ी लव यू' नहीं ह... ी मैं... में तुझ से एक bf-gf की तरह... प्यार करती हु..."

8-10 सेक् तक तोह सन्नाटा छ गया था पूरे कमरे में. राहुल को अपने कानो पे विश्वाश hi नहीं हो रहा था की अभी अभी उसकी वंशु दी ने क्या कहा.

R(thoda मज़ाक में) : ः... दी... दी आप मज़ाक कर रही हो ह न?

नीस जोके!! ः... पर दी...

V(chillate हुए) : It's नॉट ा जोके राहुल...

It's नॉट ा जोके. में पागल हु क्या जो ऐसी बात का मज़ाक बनाउंगी.

I'm सीरियस. समझे?? और ...

और ... यदि तुम्हे नाराज़ होना ह मुझ से तोह मुझे मंज़ूर ह... मुझे सच बताना hi नहीं था...

वंशु इतना कह क सर झुकाए रोने लगती ह

राहुल को अब सब समझ आ रहा था की जो जो बात वंशु ने कही वो सब सच थी. उसका दिमाग hi हिल गया था. पर अभी उसका काम था वंशु को चुप्प कराना...

राहुल वंशु को अपनी बाहो में जकड लेता ह, वंशु भी कस क उसकी बाहो में होक उससे भी हुग कर लेती ह और रोटी भी जा रही थी.

र: I'm सॉरी दी! मेरी वजह से आप रोई...

V(roti हुई आवाज़ में): it's okay कुटी! गलती तुम्हारी नहीं ह. मेरी hi ह... मुझे माफ़ कर दे, पर प्लीज मुझ से दूर मत जाना कभी भी. ी लव यू. ी लव यू.....

र: कभी नहीं जाऊंगा दी....

अच्छा तोह ये सब कबसे हुआ? ी मैं... आपको अपने hi कुटी से प्यार कब हुआ?

व्: उस दिन से... 3 साल पहले...

तुझे याद hi होगा. उस दिन क बाद से hi मुझे हमेशा तेरे ख़याल आते थे. तुझ पे hi मुझे सबसे ज़्यादा भरोसा रहता था. तुझ से बात कर क मेरा दिल खुश हो जाता था. 2 साल तुझ से मिली नहीं थी तोह में hi जानती हु मेने कैसे काटे 2 साल, इसलिए में ज़िद्द करके इधर शिफ्ट हुई हु अब. अब तेरे साथ hi रहूंगी... मुझे और कोई नहीं चाहिए. सिर्फ तू...

र: इतना प्यार करती हो आप मुझसे?

व्: हनन... तुझे कोई शक ह तोह आज़मा ले...

र: नहीं

व्: और सुन्न!! आज से में तुझे किश किया करुँगी, तू मन नहीं karega...ok?

र: हँ!!? पर...

व्: मुझे पता था... पता था तू मुझ से प्यार नहीं करता...

र: नहीं दी ... ये आप किसी..

व्: तोह कर अभी मुझे किश, कर और साबित कर... मेने तोह कर दिया...

राहुल को अब समझ नहीं आ रहा था की इस सिचुएशन से बाहर कैसे निकले. वो वंशु को नाराज़ भी नहीं कर सकता था...

एक्ससिटेड तोह राहुल भी था. क्यों नहीं होगा? उसकी प्यारी बड़ी बहिन ने उसके होंठो को चूमा था अभी अभी. और अब वह खुद कह रही थी की उससे किश चाहिए. अब यदि आपकी बहिन आपसे ऐसा कहेगी तोह क्या आपलोग एक्ससिटेड नहीं होइगे दोस्तों??

इसलिए फिर राहुल धीरे धीरे आगे बढ़ता ह और आँखे बंद करते हुए वंशु क गुलाबी होंठो को अपने होंठो से सत्ता देता ह.

वंशु तोह पहले hi गरम थी, राहुल क खुद से किश करने से और भी गरम हो गयी...

और अपनी जीभ निकाल क सीधा राहुल क मुँह क अंदर कर दी. वंशु बोहत वाइल्ड हो गयी थी.





राहुल की जीभ को किसी कुल्फी की तरह चूस रही थी वंशु. बोहत जोश चढ़ गया था उससे. आखिर पूरे 3 साल तक इंतज़ार किया था उसने ये पल का. पूरा मज़्ज़ा लुटे बजर्र वंशु रुकने वाली नहीं थी.

उसने राहुल को धक्का दिया और उसके ऊपर आके लेत गयी और फिरसे चुम्बन को शुरू किया.









थूक का मेल मिलाप हो रहा था और *स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ आ रही थी पूरे कमरे में.

राहुल का लुंड भी खड़ा हो गया था.

दोनों क जीवन की ये पहली किश थी, दोनों ने जितना मूवी और पोर्न में देखा था किसिंग सन बस वैसे hi करने की कोशिश कर रहे थे.

यह किसिंग का खेल आधे एक घंटे तक चला, जब तक की वंशु पूरी सटिस्फी नहीं हो गयी.

उससे पता था ज़्यादा आगे बढ़ना एक दम से ठीक नहीं.

आज क लिए इतना काफी था उसके लिए.

इसलिए वो राहुल को आखिरी बार उसके लिप्स पे किश क्र क गूडनिघत कह क उस क साथ चिपक क सो जाती ह.





पर कल कुछ होने वाला था...

क्या? कल तोह वंशु और बाकी बहने घूमने जा रही ह. कल ऐसा क्या होने वाला था? कही कुछ उन्होनी तोह नहीं? राहुल क्या करेगा? जान ने क लिए बनने रहिएगा. :बिगबॉस:
 
अपडेट-11

अब तक...

आज क लिए इतना काफी था उसके लिए.

इसलिए वो राहुल को आखिरी बार उसके लिप्स पे किश क्र क गूडनिघत कह क उस क साथ चिपक क सो जाती ह.

अब आगे...

कहानी आगे बढ़ाने से पहले एक शार्ट रिमाइंडर दे देता हु

राहुल- हीरो

राजेश- हीरो क डैड

निशा- हीरो की माँ

नेहा- हीरो की सगी बहिन

निकिता- नेहा की बेस्ट फ्रेंड

ऋचा- निकिता की बड़ी बहिन, राहुल की बेस्ट फ्रेंड

विनोद- निकिता और ऋचा क पापा

आरती- निकिता और ऋचा की माँ

रुपेश- राहुल और नेहा क ताऊ जी

विनीता- राहुल और नेहा की तै जी

वंशिका- रुपेश और विनीता की बड़ी लड़की, राहुल की बड़ी कजिन बहिन

अंशिका- रुपेश और विनीता की छोटी लड़की, राहुल की छोटी कजिन बहिन

अब कहानी को आगे बढ़ाता हु..

सुबह क 8:30 बज चुके थे...

और राहुल और वंशिका दोनों एक दूसरे की बाहो में, मदमस्त, बेखबर, गहरी नींद में अभी तक सो रहे थे. कल देरर तक किसिंग सीन्स जो चल रहे थे. तोह रात को प्यारी नींद तोह आणि hi थी.

इसलिए अभी तक बिस्तर पे hi पड़े थे.

इतने में अंशिका आती ह राहुल क दूर पे जोरर से आवाज़ लगाते हुए खत खटाती ह...

"डीई!! सो रही हो क्या अभी तक? चलिए... उठिये... आज हमे बाहर जाना ह घूमने..."

2-4 बार और ज़ोर से खत खटाने क बाद राहुल की नींद खुलती ह, वंशु तोह अभी तक चिपकी हुई बेसुध सी पड़ी थी.

राहुल वंशु को हिला कर उससे उठाता ह और गेट खोलने बोलता ह और खुद वाशरूम में चला जाता ह.

वंशु क गेट खोलने पर अंशिका सवाल करने लगती ह...

"इतना टाइम क्यों लगा दी? अभी तक सो रही थी क्या??"

व्: हनन वह! नींद थोड़ी ज़्यादा देरर लग गयी आज..

ा: हं चलिए, फ्रेश हो जाइये और ब्रेकफास्ट करके हम लोग 11 बजे निकलते ह... Ok?

व्: इतनी जल्दी?

ा: हनन, नेहा बोली शॉपिंग भी कर लेंगे, तोह उस्समे तोह टाइम लगेगा hi बोहत.

व्: ोहकक...

फिर सभी लोग फ्रेश होक, ब्रेकफास्ट करते ह... और तीनो बहने जाने क लिए रेडी होने लगती ह.

इधर राहुल क मैं में विचार चल रहे थे.. उससे तोह अल्लोवेद hi नई था आना.

निशा भी बीच बीच में अपने बेटे राहुल को देख रही थी जैसे कुछ कहना चाह रही हो पर शयद कह नहीं पा रही थी.

राहुल समझ गया था, इसलिए वह सिर्फ हाँ में सर हिला देता ह.

और निशा वापस किचन में अपने कामो में लग जाती ह.

अब क्यूंकि गाडी राजेश ले गया था, तोह इनका ऑप्शन था की येलोग कैब में जाए, क्युकी बाइक चलना तीनो में से किसी को नहीं आता था. और बाइक से घंटा जाते ये लोग. तोह कैब सबसे सही चॉइस थी.

नेहा ने कैब बुक करि और तीनो रेडी होक घर से निकल गए...

निशा: बेटू!!!...

र: पता ह माँ!! जा रहा हु...

Nisha(udaas होते हुए, राहुल क हाथ को पकड़ती ह) : मुझे माफ़ कर दे...

र: मा!!! ये क्या कह रही हो आप, कितनी बार बोलै ह आपको. भूल जाइये उससे, जा रहा हु में.

Nisha(aasu पोछते हुए): हम्म... कुछ बात हो तोह तुरंत कॉल करना.

र: जी माँ! चलता हु.

राहुल अपनी गिग्सेर उठा क निकल जाता ह.

राहुल को सारा प्लान पता था की ये सभी लोग का प्लान क्या ह आज, उसने ब्रेकफास्ट करते टाइम सब कुछ सुना था...

पहले ये लड़किया, मूवी देखने जाएंगी, उसके बाद Domino's में पिज़्ज़ा खाने, फिर ये लोग शॉपिंग करेंगी, और फिर लौट ते वक़्त कैफ़े जाएंगी, और फिर घर वापस.

राहुल भी बाइक लगा देता ह कैब क पीछे पर नज़र में ना आए उतनी दूरी बनाए रखता ह.

तीनो लड़किया कैब से उतरती ह, आप पास क लोग तीनो को देख रहे थे, आखिर इतनी सुन्दर जो थी...

राहुल थोड़ी दूर पे अपनी बाइक लगा देता ह और तीनो क अंदर जाने का वेट करता रहता ह.

उसका काम hi यही था की वो छुप क उन् तीनो की सेफ्टी का ध्यान रखे. क्युकी तीन जवान लड़किया अकेली थी, कोई मर्द भी नहीं था. न जाने कब क्या हो जाए. एक मर्द का रहना ज़रूरी होता hi ह साथ में. ज़माना इतना खराब ह. इसलिए राहुल पूरी निगरानी किये था.

राहुल भी एक टिकट लेता ह और पीछे की सीट में जाके बैठ जाता ह.

सिनेमा तक कोई प्रॉब्लम नहीं गयी, पिज़्ज़ा भी खा लिया, यहाँ तक की शॉपिंग भी अच्छे से हो गयी.

कोई दिक्कत नहीं आयी. राहुल को भी लगा की वह फ़ालतू hi इतना टेंशन ले रहा था.

अँधेरा हो गया था, शाम क 6:30 हो गए थे, और तीनो बोहत थकी हुई थी इसलिए कैफ़े जाके कॉफ़ी पीना तब किया.

राहुल भी धीरे से अंदर गया, और सीधा वाशरूम में चला गया, वह से आया और गेट क पास वाली सीट पे बैठ गया, और मेनू कार्ड को अपने चेहरे क सामने हाथो में ले लिया, अपना चेहरा छुपाने क लिए.

तीनो लड़किया बीच में बैठी थी कैफ़े में और बातो में लगी हुई थी

तभी इतने में कैफ़े में 5 लड़के आते ह, और राहुल क आगे वाली सीट पे बैठ जाते ह. राहुल को उनकी पीठ दिख रही थी.

अब राहुल को पसीना आना शुरू हो गया था.

R(mann में घबराए हुए) : दमन आईटी! दमन आईटी! दमन आईटी!!!!! शीत्तट!! अभी क्यों? ये चूतिये.... शीट!! कुछ करना पड़ेगा... पर कैसे?? इनको बाहर ले जाना पड़ेगा. लकी बहनचोद!! तूने आज यदि पुरानी हरकत दोहराई, तोह तू बचेगा नहीं आज.... 5 ह साले, पर ये तीन लड़किया भी ह...

काश में अकेला होता यहाँ!! फुकक! फ़क!!! ोककक... Okay!! राहुल!! कलम डाउन, कलम डाउन. It's okay!! तू संभाल लेगा... तुझे किसी भी हालत में तीनो को बचा क रखना ह.

राहुल अपने आप को शांत करने की कोशिश में लगा हुआ था. उसके दिल की धड़कन अभी सबसे तेज़्ज़ थी. राहुल को किसी भी कीमत पे अपनी तीनो बहनो क सामने नहीं आना ह अभी और उनको ये बिलकुल भी पता नहीं चलना चाहिए की राहुल उनको प्रोटेक्ट कर रहा ह. ये राहुल का अपने आप क लिए मिशन था. एक कठिन मिशन, जिससे वह हर्र बार करता था जब भी नेहा अकेले कही भी जाती थी.

हमेशा उसकी परछाई बांके प्रोटेक्ट करता था.

अंशिका वाशरूम में थी, इसलिए उससे अभी कुछ पता नहीं था, न hi 5 लड़को को...

अंशिका वाशरूम से निकली hi थी की उसने सुना...

"बॉस!! बॉस!! आपका टारगेट, आपका टारगेट!! नेहा!!... वो... वो देखिये, उधर... "

अंशिका ने इतना सुना और वो दिवार से सत् क कड़ी हो गयी और आगे सुन्न ने की कोशिश करने लगी, बाकी 5 लड़के यहाँ तक की राहुल भी उससे नहीं देख सकता था...

उन् 5 लड़को में से एक लकी था जो की इन् 4 बाकी लफंगो का बॉस था.

ये नेहा की क्लास का hi बंदा ह. यहाँ तक की स्कूल में भी नेहा की hi क्लास में था.

इसकी कहानी आगे पता चलेगी...

लड़का 1: बॉस!! नेहा को देखा न आपने... वो रही... आज बदला लेलो बॉस! देखो न.. साली अकेली ह. और हम 5 ह. उसके साथ भी क्या सामान लड़की ह, बॉस क्या मस्त माल लग रही ह य्र्र!! मज़ा आ जाएगा ऐसी की साथ तोह, और आप अपनी नेहा क साथ लगे rehna...hehe

राहुल ने इतना सुना hi था की उसकी मुठी इतनी तेज़्ज़ बंद हुई की कप टूट ते... टूट te...reh गया.

अपनी बहिन क बारे में कैसे उल्टा सीधा सुन्न सकता था.

ल: चुप्प कर बसड्क!! पहले ये देख उसकी शील्ड आस पास तोह नहीं ह? साला लवडे लग जाएंगे यदि वो हरामखोर राहुल यही कही हुआ तोह...

{लकी को ल और बाकी लड़को को ल 1, 2, 3, 4 लिखूंगा}

ल1: बॉस! कही नहीं दिख रहा ह, और यदि होता तोह साथ में hi होता न...

ल: नहीं बसड्क!! नेहा की अपनी भाई से नहीं बनती... पता नहीं ह क्या बसड्क!! बताया था न मेने, उस दिन क बाद से हहै... भले hi मुझे मार सहनी पड़ी हो, पर क्या सन था बहनचोद वह! पिछली बार तोह बच गयी थी, और वो हरामी राहुल इसका पीछा नहीं छोड़ता, पर आज अकेली ह.. लगता ह अपनी बहन क साथ आयी ह... प्लान सुनो भड़वो!! इसको निकलने दो बाहर तब तक हम बाहर वेट करते ह, जैसे hi निकलेगी, कैफ़े क आगे hi गली ह, उधर खींच लेंगे इसको और गली क सामने मेरी कार लगा दो, ताकि कुछ दिखाई न दे... बस एक बार... एक बार ये हाथ में आ गयी न फिर देखना... छोड़ छोड़ क भोसड़ा बना दूंगा इसका...

राहुल को अभी इतना तेज़्ज़ गुस्सा आ रहा था की वो अभी खड़ा होक इनकी माँ छोड़ देता. पर अभी उससे सामने नहीं आना था...

इधर अंशिका ने भी साड़ी बातें सुन्न ली थी और उसके परर कप कपाने लगे थे. अंशिका बाहर से ज़रूर कठोर बर्ताव रखती थी.

पर ऐसी सीटुएशन्स में वो एकदम सेहम सी जाती थी. उससे ये रोज़ रोज़ रपे केसेस की खबरे सुनकर hi इतना डर हो जाता था की वह हमेशा अकेली कही नहीं जाती थी. हॉस्टल में भी 2 साल कही अकेली नहीं गयी. घरवाले भी उसकी और वंशिका की सेफ्टी का पूरा ध्यान रखते थे.

पर आज उन लड़को को ऐसी लाइव प्लानिंग करते हुए उसने सुना..

और ये सब उनके साथ होने वाला था.

क्या करना चाहिए उससे अब?

A(mann में): मैंन... में... Ky..kyaa करू अब?? ये लोग कोण ह?? और ...और नेहा क पीछे क्यों ह? ये.. ये तोह शयद वही ह.. जो उस दिन नेहा की बर्थडे पार्टी में था.. हनन.. पर ये.. ये यहाँ नेहा क पीछे? आखिर क्यों? अब्ब अब में क्या करू??

इतने में लकी वाशरूम में जाता ह पर वाशरूम क एंट्रेंस पे अंशिका दिख जाती ह.

लकी की भी पल भर क लिए फट गयी थी. उससे पता था ये लड़की नेहा की कजिन ह, और ये यहाँ ऐसी कड़ी क्या कर रही थी? मतलब साफ़ था, उसने साड़ी बातें सुन्न ली थी.

ल: ओह्ह्ह!! मिस अंशिका... तोह.. तोह.. तुमने सब सुन्न लिया? हम्म... ी बेट सुन्न hi लिया होगा... तोह सुनो अब... यदि भलाई चाहती हो तोह जैसा में कहु वैसा करना वर्ण आज तुम सब क साथ बोहत बुरा होगा, बोहत hi bura...hehe...

अंशिका पूरी तरह से दर्री हुई थी. उससे वैसे भी बाद बॉयज पसंद नहीं थे, ऊपर से लकी जैसे गुंडे से तोह वो और भी डर गयी थी...

उसकी टांगें और शरीर में कम्पन आ गया था... न उस से कुछ बोलै जा रहा था न कुछ किया जा रहा था.

लकी ने इतने में उसका पर्स चीन लिया, जिस से अंशिका पूरी तरह हिल सी गयी...

और लकी ने पर्स में से फ़ोन निकल क उससे पर्स वापस दे दिया..

ल: अब तुम सोच रही होगी, की यहाँ इतने बड़े कैफ़े में दिन दहाड़े मने तुम्हे धमकी दी पर किसी को कानो कान खबर नहीं.. ह न? ः...

एक्चुअली न... ये.. ये जो कैफ़े ह न, यहाँ कोई भी मेरी बात को नहीं टालता.. ः... इस कैफ़े का जो मालिक ह न? वो मेरे डैड का राइट हैंड ह समझी?? तोह सुन्न अब!

तुझे तोह पता hi ह की में नेहा को कितना पसंद करता हु ह न??

तोह तू जा और आराम से अपनी कॉफ़ी एन्जॉय कर! और तूने जो कुछ सुना किसी को भी कानो कान खबर नहीं लगनी चाहिए समझी? यदि तू ऐसा करती ह तोह कुछ नहीं होगा, में सिर्फ नेहा को साइड में ले जाके थोड़ी प्राइवेट बात करना चाहता हु...

बस थोड़ी देरर क लिए.. हहै..

तुझे और तेरी बड़ी बहिन को कुछ नहीं करूँगा.. ी प्रॉमिस... न hi नेहा को, बस बात करूँगा, उसका फ्रेंड हु में...

पर यदि तूने जाके अभी बताया उन्हें कुछ तोह फिर तू देखना आगे क्या होता ह. तेरी भी मारूंगा और उन् दोनों की भी... समझी??

अंशिका को कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब वह क्या करे....

वह धीरे धीरे हिलते हुए जाके वापस अपनी सीट पे बैठ जाती ह

राहुल ने जब अंशिका को वाशरूम से बाहर आते हुए देखा तोह चौंक गया..

R(mann में) : ये अंशिका... ये.. ये जबसे वाशरूम में क्या कर रही थी? सहित!! इसके बारे में तोह ध्यान से निकल hi गया था.. एक मिनट!! अभी लकी भी तोह अंदर गया था...

इतना टाइम... सहित!! I'm दमन सूरे लकी ने अंशिका से कुछ कहा ह. तभी इतनी घबराई हुई दिख रही ह.

दमन आईटी!! मुझे बाहर जाना चाहिए...

राहुल बाहर निकल जाता ह...

और इधर बाकी क 4 लड़के कार को उस पतली गली क सामने लगा क गली क अँधेरे में खड़े हुए थे.

इधर अंशिका कप कप रही थी और अपनी दोनों कोमल जैसी प्यारी बहनो को देख रही थी. और लकी की बात को याद कर रही थी.

उससे कुछ पल्ले नहीं पद रहा था की क्या करे, बता देती तोह आगे क्या अंजाम होगा उसका डर, नहीं बताती तोह अभी क्या होने वाला ह उसका डर. उसका फ़ोन भी नहीं था. एक ख़याल आया उससे की राहुल को फ़ोन kare...kyuki लकी क मुँह से उसने सुना था की हर्र बार राहुल आस पास रहता ह, और नेहा की शील्ड की तरह ह.

इस बात से अंशिका खुद शॉकेड थी. की राहुल भला क्यों नेहा की शील्ड ह?

उससे इतना तोह विश्वाश हो गया था की अभी यदि कोई कुछ कर सकता ह तोह वो ह राहुल.

अंशिका वंशु का फ़ोन मांगती ह, पिक्स देखने का बहाना कर क जो अभी थोड़ी देरर पहले उनलोग ने पिज़्ज़ा खाते टाइम ली थी.

और सीधे राहुल को कॉल करती ह.

राहुल ने अपना फ़ोन साइलेंट पे कर लिया था ताकि ऐसी सीटुएशन्स में उसका फ़ोन बज क कोई मुसीबत कड़ी न कर दे...

अंशिका क लिए राहुल hi आखिरी उम्मीद था, पर राहुल ने फ़ोन नहीं उठाया...

उसकी आखिरी उम्मीद एकदम टूट सी गयी थी.

सारा बिल चूका लेने क बाद नेहा और वंशु कैफ़े से निकल गयी, और अंशिका अभी भी कैफ़े में बैठे हुए सोच hi रही थी की क्या करे, और उसने एन्ड में सभी को सच बताना hi बेहतर समझा, क्युकी उसकी बहने इम्पोर्टेन्ट ह, वो लकी की बात का बिलकुल भी भरोसा नहीं क्र सकती थी.

जैसे hi उसने डीडे किया वह तुरंत बताने क लिए उठी... पर ये क्या? नेहा और वंशु तोह जा चुकी थी...

उसकी दिल की धड़कन इतनी बढ़ गयी थी मानो हार्ट अटैक hi आ जाएगा. उससे लगा की उसने अपना सब कुछ खो दिया...

नेहा और वंशु ने बिल पाय किया और सीधा निकल गयी, उन्हें लगा की अंशिका उनके पीछे आ hi रही होगी...

अंशिका तुरंत हड़बड़ी में दौड़ती हुई बाहर निकली और देखा की वंशु और नेहा उस गली क जस्ट सामने से hi निकल रही ह और कार भी कड़ी हुई ह...

इतने में एक हाथ निकला गली क अँधेरे से और नेहा क चेहरे की तरफ बढ़ा, उसके पीछे से...

अंशिका ने ये देखा hi था की उसने तेज़्ज़ आवाज़ में चिल्लाया...

ा: nehaaaaaaaaaaaaaa!!!

क्या होगा आगे? क्या नेहा पकड़ी जाएगी? क्या लकी की चाल कामयाब होएगी? राहुल कहा पे ह?

जान ने क लिए बनने रहिये!! :बुढऊ:
 
अपडेट-12

अब तक...

अंशिका तुरंत हड़बड़ी में दौड़ती हुई बाहर निकली और देखा की वंशु और नेहा उस गली क जस्ट सामने से hi निकल रही ह और कार भी कड़ी हुई ह...

इतने में एक हाथ निकला गली क अँधेरे से और नेहा क चेहरे की तरफ बढ़ा, उसके पीछे से...

अंशिका ने ये देखा hi था की उसने तेज़्ज़ आवाज़ में चिल्लाया...

ा: nehaaaaaaaaaaaaaa!!!

अब आगे...

अंशिका ने अपनी नज़रो से देखा था साफ़ साफ़ की एक हाथ अँधेरे में से नेहा क चेहरे की तरफ बढ़ा...

इसलिए उसने तुरंत अपनी पूरी ताकत से नेहा को पुकारा...

उससे पता था की यदि नेहा पकड़ी गयी तोह बोहत बुरा हो जाएगा...

पर जैसे hi अंशिका ने चिल्लाया...

एक और हाथ अँधेरे में से आया और उस पहले हाथ वाले बंदे क चेहरे को पकड़ क सीधा पीछे खींच लिया. ये सब इतनी फुर्ती में हुआ की अंशिका भी प्रोसेस नहीं कर पायी की एकदम से हुआ क्या...

अंशिका की आवाज़ सुन्न क नेहा और वंशु पीछे पलटी...

अंशिका चौंक चुकी थी... आखिर क्या हुआ अभी अभी? अभी एक हाथ तोह बढ़ा था नेहा की तरफ, फिर ये दूसरा हाथ कहा से? और दूसरे हाथ ने पहले हाथ वाले बंदे को पीछे खींच लिया था. इतना तोह अंशिका को समझ आ गया था.

न: अंशिका दी!! क्या हुआ? और आप उतनी दूर वह कैफ़े क सामने क्या कर रही हो?

A(ghabrae हुए): वो... वो...

अंशिका ने आगे कुछ बताना सही नहीं समझा... अभी ये वक़्त वो सब बात करने का नहीं थी, अंशिका वह से तुरंत निकलना चाहती थी.

वो दौड़ क नेहा और वंशु क पास आई, और आते आते उसने एक झलक गली में देखा, तोह उससे 2 बंदे दिखे... एक बंदा दूसरे बन्दे को खींच क गली क मोड़ पे एक और छोटे से रस्ते में ले गया...

यह वही बंदा था जिसने उस पहले बन्दे का हाथ खींचा था.

अंशिका को जान न था की आखिर हुआ क्या...

पर उसकी फट भी बोहत रही थी.

अंशिका आके सीधा दोनों बहनो क गले लग जाती ह. उससे बोहत डर था की कही उसकी वजह से उसकी बहन कोई खतरे में ना पद जाए...

वर्ण क्या मुँह दिखाती घर पे, और आखिर किसी बहन कहलाती वह? जो अपनी बहन को सेफ तक नहीं रख पाई और उल्टा उन्हें फसा दिया...

अंशिका को घबराए हुए देखते दोनों वंशु और नेहा को भी थोड़ी टेंशन हुई...

व्: छोटी... क्या हुआ तुझे?? इतनी दर्री हुई क्यों ह?

न: हं दी! क्या हुआ? कुछ बताइये...

ा: वह.. वह... कुछ नई...

व्: छोटी बोल न...

ा: कुछ नई... मुझे लगा आप लोग मुझे चोरर क चले गए.

व्: क्या? अरे पर हमे लगा तू पीछे hi आ रही ह इसलिए हम निकल गए. सॉरी छोटी! मुझे ध्यान रखना था...

ा: नहीं दी! कोई बात नहीं! I'm फाइन.

अंशिका देखना चाहती थी, की आखिर वो बंदा कोण था और हुआ क्या...

ा: दी! वो देखिये न सामने...

गिफ्ट शॉप! क्यों न हम कुछ चल क ले ले वह... चची क लिए?

न: अरे नहीं दी, इसकी क्या ज़रुरत? माँ का बर्थडे थोड़ी ह..

ा: कोई बात नहीं नेहा. ये हमारी तरफ से ह, ह न दी?

व्: हनन छोटी तू सही बोल रही ह.

हमने शॉपिंग कर ली, हमे चची और कुटी क लिए भी कुछ लेना चाहिए...

तीनो गिफ्ट शॉप में पहुचती ह...

ा: अरे दी! में अपना फ़ोन तोह कैफ़े में hi भूल आयी...

अभी लेके आती हु.

व्: चल में भी चलती हु...

ा: अरे नहीं दी, आप गिफ्ट देखिये, में अभी गयी और अभी आई..

व्: ध्यान से...

अंशिका सीधे उसी गली में जाती ह और साइड में एक मोड़ था उसी गली में जहा पे अँधेरा था काफी, अंशिका दबे पाँव धीरे धीरे आगे बढ़ी, उससे डर भी बोहत लग रहा था





उसने आगे जाने से पहले एक बार झाकना बेटर समझा...





इसलिए उसने अपना सर साइड की दिवार से लगाया और मोड़ पे देखने क लिए धीरे धीरे सर आगे बढ़ाया..

तोह उससे दिखा...

नीचे 4 बंदे पड़े हुए थे, और दर्द से कराह रहे थे...

और एक बंदा दूसरे बंदे को डेडलॉक बना क फसाया हुआ था...

अंशिका को अँधेरे में चेहरा नहीं दिख रहा था, पर उनके कपडे से समझ आ रहा था...

नीचे 4 बंदे तोह उसी लकी क दोस्त थे ये अंशिका जान गयी थी.

और लकी ने ब्राइट येलो टी शर्ट पहनी हुई थी, तोह वो भी अँधेरे में दिख गया...

पर लकी को जिसने डेडलॉक में फसाया हुआ था उसका चेहरा भी नहीं दिख रहा था और वो अलग hi कोई बंदा था. उसने वाइट शर्ट पहनी हुई थी.

एक पल क लिए अंशिका को ख़याल आया की कही राहुल तोह नहीं...

पर राहुल ने तोह उसका फ़ोन भी नहीं उठाया था, तोह उससे ये सब घटना क बारे में कैसे मालूम पड़ेगा? पर लकी ने कहा था की नेहा की शील्ड ह राहुल...

पर क्यों? उससे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.

इतने में लकी चिल्लाया...

ल: चोरर दे मुझे साले, चोरर...

अबे बेवकूफो क्या पड़े हुए हो...

उठो भड़वो... आह्ह्ह्हह... चोररर...

R(dheemi आवाज़ में): आज तोह जब तक तेरी अच्छे से खातिर दारी न करदु तब तक तुझे नहीं चौररने वाला...

ाहिन्डा से तू 100 बार सोचेगा ऐसी हरकत करने से पहले...

दरअसल जब इन् 4 लफंगो ने कार को गली क सामने लगाया तोह लकी कैफ़े से निकल क गली में खड़ा हो गया था, नेहा को खींचने क लिए. और ये 4 उस गली क अंदर वाले मोड़ पे खड़े थे ताकि जब नेहा को लकी लेके आएगा तोह नेहा को फिर ये लोग पकड़ लेंगे...

वह पे सभी लोग इसलिए नहीं खड़े हुए क्युकी एक से ज़्यादा लोग खड़े होते तोह अलग hi दिख जाते..

इसलिए एक बंदा बस काफी था.

पर राहुल स्मार्ट था. उसने पहले hi निकल क सब देख लिया था. इसलिए वह पीछे से घूम क उस गली में घुसा और इन् चारो को ढेर किया.

चार लोगो को अँधेरे में मारना भी एक मुश्किल काम था. पर राहुल मार्टिकल आर्ट्स और टायक्वोंडो सीखा हुआ था. बस दो चार कस क वीक पॉइंट्स पे मारा उसने और चारो दर्द से कराहने लगे.

लकी इन सब बातो से बेखबर था. और नेहा को पकड़ने की फ़िराक में था.

पर लकी का लक hi नहीं चला

उस से पहले hi राहुल ने उससे खींच लिया और सीधा उसी गली क मोड़ में ले गया जहा उसके पंटर लोग पड़े हुए थे.

Anshika(mann में) : इस बन्दे की वजह से आज हम बच गए. बूत कोण ह ये? मुझे इससे थैंक्स कहना पड़ेगा...

मेरा फ़ोन भी उस लकी क पास ह...

अब लकी से पैन सेहन नहीं हो रहा था.

उसके जीन्स क जेब में एक छोटा कट्टा रखा था, छुरी एक प्रकार से.

उसने अब ज़्यादा टाइम गवाना सही नहीं समझा और धीरे धीरे एक हाथ से अपनी जेब में राखी छुरी को निकालने लगा, और दूसरे से राहुल क हाथ को हटाने की कोशिश करने लगा ताकि राहुल को पता न चले.

लकी का लक छुरी निकालने में चल गया, उसने अपने लेफ्ट हैंड से छुरी को खोला और सीधा राहुल क राइट हैंड में छुरी को अपनी पूरी ताकत लगा क घुसेड़ क पूरा हथेली तक चीयर दिया...

इस अचानक हुए हमले से राहुल की चींख निकल गयी.

अंशिका चींख सुन्न क डर गयी एकदम. बेचारी सेहम गयी थी पूरी. उससे अँधेरे में समझ नहीं आया की हुआ क्या...

राहुल क राइट हैंड में लकी ने छुरी घुसेड़ क उससे पूरा हथेली तक चीयर दिया था..

छुरी छोटी थी, और लकी राइट हैंडेड पर्सन था, इसलिए छुरी पूरी तरह तोह अंदर नहीं गयी थी पर घाव छोटा भी नहीं था.

राहुल को बोहत दर्द हो रहा था, उसके हाथ को ऊपर से पूरा चीयर दिया था.

ल: हाहाहाहा .. देखा साले...

मुझसे उलझने का अंजाम...

लकी ने अपने एक पंटर जो की नीचे डाला हुआ था दर्द में उसको लात मारते हुए कहा..

ल: उठ बे बसड्क! अब ये घायल ह, इसको हम देख लेंगे.. उठो सब बहनचोड़ो... जल्दी.. आज जाने न पाए ये...

एक दो साथी लकी क कहने पे ज़बरदस्ती उठ गए पर बाकी क डेल हुए थे, क्यूंकि उन्हें उठने तक की हिम्मत नहीं थी.

राहुल का राइट हैंड अब खून से सन्न गया था. अपने राइट हैंड को लेफ्ट हैंड से पकडे हुए था.

अँधेरा नहीं होता तोह राहुल इस हमले से आसानी से बच जाता.

पर अँधेरे ने अपना काम कर दिया, लकी हमला करने में सफल हो गया.

दो पंटर लकी k...aage बढ़ने लगे राहुल की तरफ...

ल: तुझे क्या लगा बे? मेरे पास कोई हथियार नहीं होगा? ये चाक़ू ह न? ये मेरे बाप ने मेरे बर्थडे पे दी थी. तुझ जैसे कांटो को अपने रास्ते से हटाने क लिए.

ः .. और मज़्ज़े की बात पता? की इसमें सबसे पहले तेरा hi खून छपा... हाहाहा...

पकड़ साले को, थोड़ा अगले हाथ में भी तोह प्यारा निशाँ चोरर दू अपना.

अंशिका ने जब ये सुना तोह उसकी आंखें बड़ी हो गयी... उसने अपने मुँह पे हाथ रख लिया... उससे अब समझ आया था की वो बंदा चिल्लाया क्यों... अंशिका राहुल क चिल्लाने की आवाज़ नहीं समझ पाई थी. उससे डर लग रहा था की कही उस बेचारे बंदे को कुछ हो न जाए...

2 बंदे राहुल की तरफ बढे उसको पकड़ने...

राहुल को पता था अब उससे जो भी करना ह, अपने राइट हैंड को बिना उसे किये करना होगा..

ब्लीडिंग भी ज़्यादा न हो उससे इस बात का भी ध्यान रखना था.

राहुल की तरफ पहला बंदा बढ़ा तोह राहुल पीछे हट क उसके वार से बच गया और तुरंत फिर आगे बढ़ क अपने लेफ्ट हैंड से उसके जबड़े पे अपनी फिस्ट से वार किया जिस से उस बंदे क मुँह से खून निकल गया और वो सीधा गिर पड़ा.

दूसरा बंदा ये देख क अपनी टांगो का इस्तेमाल किया और राहुल को किक किया





पर राहुल ने लेफ्ट हैंड से hi उसकी टांग पकड़ ली और थोड़ा ऊपर उठा दी... और अपनी टांग सीधे उसके अंतुले पे मार दी...

बेचारे की चींख निकल गयी.

क्या पता कहो अंडे hi फुट गए हो.

उसका चूज़ा तोह पूरा फुस्स हो गया था. इतना दर्द तोह उससे शायद कभी नहीं हुआ था. अपने अंडो को पकड़ क नीचे hi गिर पड़ा वो और दर्द से चिल्लाने लगा.

ल1: आअह्ह्ह्ह... मेरे... मेरे अंतुले... आह्ह्ह्हह्हह्हआआह्ह्ह्हह... :हहै:

ल: सब मादरचोद हो तुम सब बस.. गांड में दाल ले वही अंडे बहनचोद!! किसी काम क नहीं तुमलोग...

शीट!!

लकी अब अपनी छुरी से hi आगे बढ़ता ह. पर ये उसकी बेवकूफी थी.

एक सीधा हमला कभी भी मार्टिकल आर्ट ट्रेनर क ऊपर नहीं आज़माना चाहिए. पर लकी को ये घंटा पता था.

चाक़ू लेके आगे तोह बढ़ा लकी पर राहुल हट गया था जैसे hi उसने चाकू चलाई.. और उससे दुबारा वार करने क लिए वापस अपना हाथ पोजीशन में लाने क पहले hi राहुल उसके पीछे आ गया था और राहुल ने अपनी पूरी ताकत से वीक पॉइंट पे लकी की कमर पे एक मुक्का जड़ दिया...

लकी चींखते हुए गिर पड़ा और उसके हाथ से चाक़ू भी छूट गयी.

बस फिर क्या था? राहुल ने उससे खूब पीटा और गद्दे की तरह उछाल उछाल क उसका कचूमर बना दिया. लकी इतनी पिटाई से बेहोश हो गया था.

राहुल ने निकलना बेहतर समझा..

राहुल जैसे hi जाने को हुआ...

ा: वीईट्टत्त!! सुनिए...

अंशिका बाहर निकल दौड़ क उससे थैंक्स कहने आई

पर राहुल ने जैसे hi यह सुना उसने तुरंत बिना कुछ कहे वह से और तेज़्ज़ आगे बढ़ना शुरू कर दिया और बाहर निकल गया.

अंशिका को कुछ समझ नई आया.

उसने बेहोश पड़े लकी की जेब से अपना फ़ोन निकाला और सीधा दौड़ क अपनी बहनो क पास चल दी...

व्: छोटी किधर थी तू? हम जबसे तुझे ढून्ढ रहे ह.. किधर थी? कैफ़े में भी देखा तू कही दिखी hi नहीं ..

ा: वह.. वह.. दी.. मेने फ़ोन लिया और इधर आ hi रही थी तोह मुझे वो मोड़ पे एक क्यूट सी वाइट कैट दिख गयी... इसलिए में... हहै.. उसके पीछे चली गयी उससे खिलाने..

अंशिका को किटेन बोहत पसंद थे इसलिए वंशु और नेहा ने उसकी बात का तुरंत यकीन कर लिया

व्: उफ़ ओह्ह्ह छोटी, तूने पता ह कितना द्वारा दिया था हमे...

चल अब, मने चची और कुटी क लिए गिफ्ट ले लिया ह. कैब भी बुक कर दी ह, चल...

ा: ोहक दी.

राहुल अंशिका की नज़रो से बच क बाहर निकल तोह गया था पर उसकी बाइक थोड़ी दूर कड़ी हुई थी कैफ़े क पहले ...

इसलिए अब उससे वह पहुचना था, जो वो उन् तीनो क जाने क बाद hi क्र पाटा. पर उससे घर भी जल्द hi पहुचना था. इन् तीनो क घर पहुचने से पहले उसका घर पहुचना ज़रूरी था.

वर्ण उसका खून से भरा हाथ देख क तोह उसकी पोल खुलनी hi थी.

इधर तीनो बहने सारा सामान लेके कैब में बैठ क निकल चुकी थी.

राहुल अपनी बाइक उठाता ह और सीधा सबसे पहले एक वाटर बोतल खरीद ता ह और पानी से अपना हाथ धोता ह, ब्लड अभी भी नहीं ृक्क रहा था. वह अंदर किसी कैफ़े में जाके हाथ नहीं धोना चाहता था, इस से लोग कुछ का कुछ समझ लेते, इसलिए उसने पानी की बोतल से जितना धुला उतना धोया और अपना रुमाल को हाथ में बाँध क निकल गया घर की तरफ. उससे बाइक चलाने में भी पैन हो रहा था...

कट बोहत लम्बा था और गहरा भी, खून तोह जैसे तैसे रुमाल की वजह से थोड़ा काम हुआ बहना पर पहले hi काफी बह गया था.

घर पोहचता ह तोह राहुल देखता ह की तीनो आलरेडी आ चुकी ह...

और उसकी माँ को अपनी शॉपिंग में खरीदे हुए सामानो को दिखा रही ह.

अब राहुल अंदर कैसे जाएगा? ये उसके लिए सबसे बड़ा टास्क था.

राहुल अपनी बाइक लगाता ह और अपनी दोनों स्लीव्स को नीचे खींच लेता ह. पर खून अभी भी बह रहा था, और नीचे टपकने क चान्सेस थे.

इसलिए राहुल ने अपना चोटिल वाला हाथ पीछे कर लिया.

और अपने लेफ्ट हैंड को उसके नीचे लगा लिया ताकि यदि खून की बुँदे गिरे तोह उसके लेफ्ट हैंड पे गिरे ना की ज़मीन पे.

वर्ण किसी को दिख गया तोह दिक्कत हो जाएगी.

राहुल ऐसे hi हाथ पीछे किये अंदर आता ह...

व्: कुटी!! तू किधर था? कहा से आ रहा ह?

र: वो... वो में...

निशा: अरे! ः... बीटा राहुल थोड़ा ऋचा क घर गया था.

पढाई से रिलेटेड काम था उससे कुछ...

निशा ने यहाँ पारी संभाल ली वर्ण राहुल हड़बड़ा गया था...

व्: ओह्ह्ह!! बी थे वे कुटी! तेरे लिए एक गिफ्ट लायी hu..abhi देखेगा?? या बाद में?

र: ओह्ह! थैंक्स दी... में ... में कपडे चेंज करके आता हु...

क्या होगा आगे? क्या राहुल सभी से अपना हाथ छुपा क ऊपर चला जाएगा? क्या होगा जब वंशु को पता चलेगा राहुल की चोट क बारे में? क्या अंशिका को कुछ पता चलेगा?

जान क लिए बनने रहिये.... :बुढऊ:

 
अपडेट-13

अब तक...

व्: ओह्ह्ह!! बी थे वे कुटी! तेरे लिए एक गिफ्ट लायी hu..abhi देखेगा?? या बाद में?

र: ओह्ह! थैंक्स दी... में ... में कपडे चेंज करके आता हु...

अब आगे...

राहुल का अब दर्द सहना मुश्किल हो रहा था, अब इतना खून बह गया था, ऊपर से गहरा घाव, उस से बिलकुल सहा नहीं जा रहा था.

इधर जबसे अंशिका कैब में बैठी थी घर लौट ते वक़्त, तभी से उस शख्स क बारे में सोचे जा रही थी.

उससे जान न था की किस अनजान बंदे ने उनकी मदद की. और तोह और वह चोटिल भी हो गया था, और उसने बदले में भी कुछ नहीं माँगा, वो चाहता तोह अंशिका का फायदा उठा सकता था, पर उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और जब अंशिका ने उससे थैंक्स कहना चाहा तोह वो भी नई सुना और निकल गया...

एक फ़रिश्ते से काम नहीं था वो शख्स अंशिका क लिए. अंशिका बस उसी क खयालात में डूबी हुई थी, पर राहुल क घर आने से उसकी तन्द्रा टूट गयी.

उसने गौर किया की राहुल अपने दोनों हाथ पीछे किये हुए था...

राहुल अपने कमरे में जाना स्टार्ट करता ह तेज़्ज़ कदमो क साथ. सबसे नज़रे चुराते हुए, और दोनों हाथो को पीछे किये हुए वो निकलने में सफल हो जाता ह.

पर एक शख्स था जिसने सब देख लिया...

अंशिका ने राहुल की शर्ट पे लगा खून देख hi लिया. राहुल को ऊपर जाने क लिए मुड़ना पड़ता. राहुल ने सोचा था की सभी लोग बातो में लगे ह और वो जल्दी से निकल जाएगा पर अंशिका तोह नज़रे गड़ाए राहुल को hi ऑब्सेर्वे कर रही थी.

जैसे hi खून वाली स्लीव अंशिका को दिखी, उससे एक शॉक लगा...

उसकी धड़कन तेज़्ज़ हो गयी अचानक,

वह एकदम से उठी और सीधा राहुल क पीछे चल दी, जाते जाते उसने बाकी को कह दिया की वह वाशरूम जा रही ह, ताकि कोई गलत न समझे.

राहुल को लगा वो निकलने में कामयाब हो गया ह, इसलिए वो तेज़्ज़ी से अपने रूम में घुसा और सीधा वाशरूम में गया, उसने जल्दबाज़ी में गेट नहीं लगाया, ना hi वाशरूम का गेट लॉक किया. उसका दर्द इतना था की उसने इन सब बातो पे ध्यान नहीं दिया.

अंशिका पीछे पीछे राहुल क कमरे में आई और झाँक क उसने वाशरूम में देखा...

राहुल ने तुरंत अपनी शर्ट उतारी, उसके राइट हैंड में रुमाल बंधा हुआ था. राहुल ने अपने लेफ्ट हैंड और अपने दांतो की मदद से रुमाल की गाठ खोली और उससे नीचे गिराया...

राहुल का पूरा खून से सना हाथ और उसका गहरा घाव देख क अंशिका की हालत hi पतली हो गयी.





अब अंशिका को साड़ी बीती बाते याद आ रही थी, की लकी ने कहा था की राहुल नेहा की शील्ड ह, वो शख्स भी वाइट शर्ट पहना था और राहुल भी वाइट शर्ट पहना ह, उससे भी चोट लगी थी चाक़ू से, और राहुल को भी चोट लगी हुई ह.

मतलब साफ़ था, वो शख्स कोई और नहीं राहुल hi था.

पर क्यों?? राहुल ने ऐसा क्यों किया? और यदि किया भी तोह सबसे छुप क क्यों?

नेहा ने जो बाते अंशिका को बताई थी की वह क्यों राहुल से हेट करती ह, उस हिसाब से तोह राहुल को ये सब नहीं करना चाहिए था. फिर राहुल क्यों नेहा को प्रोटेक्ट कर रहा ह? अंशिका समझ गयी थी की कुछ गड़बड़ तोह ज़रूर ह.

पर अभी उससे राहुल क ऊपर तरस आ रहा था. राहुल ने उन् सबको बचाया, घायल हो गया, और किसी को पता तक चलने नहीं दिया. अब अंशिका को हमदर्दी हो रही थी.

वो चाह रही थी की अभी राहुल क पास जाए और उससे कस क अपने सीने से लगा ले...

A(mann में) : राहुल... तुमने ऐसा क्यों किया? और उस से भी बड़ी बात किसी को बताया क्यों नहीं? क्या मेने तुमको गलत समझा इतने साल? क्या नेहा भी तुमको गलत समझ रही ह? हनन.. कुछ बात तोह ह... क्युकी वंशु दी तुमसे अच्छे से बेहवे करती ह, और बाकी लोग भी... पक्का कुछ बात तोह ह. देखो तोह...

कितना खून निकल रहा ह... ससससस...

मुझे आगे जाके उसकी फर्स्ट अिध करनी चाहिए... नई... मने तोह इतने साल उस से बात भी नहीं की, और अब अचानक से उसकी परवाह करुँगी तोह उससे शक हो जाएगा. पर क्या करू?? मुझे राहुल पे निगरानी रखनी होगी, शयद तभी मुझे कुछ पता चल पाएगा... हं... अब से में राहुल को hi ऑब्सेर्वे करुँगी. I'm सॉरी राहुल! I'm सो सॉरी एंड थैंक यू सो मच... थैंक यू!!

राहुल अपना पूरा हाथ धोके और डेटोल और कॉटन से अपना खून साफ़ करके बाहर निकलने क लिए मुड़ता ह और बाहर रूम में आता ह.

पर अंशिका तब तक जा चुकी थी.

राहुल को पता नई था की अंशिका ने सब देख लिया ह.

अंशिका की आँखों में आंसू आ गए थे. वो सोच रही थी की यदि आज राहुल वह नई आता तोह आज क्या होता. उसका मैं कर रहा था की अभी जाके राहुल को सब बता दे और उस से पूछे की सच्चाई क्या ह. पर वह हिम्मत नहीं जूता पायी.

उससे गिलटी फील हो रहा था, यदि राहुल सही निकला तोह पता नई राहुल आगे चल क उससे माफ़ भी करेगा या नहीं? अंशिका को कभी भी बड़े भाई का प्यार नहीं मिला. उसका खुद एक सागा भाई ह पर वो छोटा ह अभी.

बचपन में राहुल का ज़रूर साथ मिला था उससे और वो राहुल को पसंद भी करती थी. पर जबसे उसने राहुल से बात करना बंद किया उसके बाद से उससे किसी बड़े भाई का प्यार नहीं मिला था. उसकी मम्मी क मायके में उसके बड़े भाई ज़रूर थे पर वो सभी मैरिड थे और दो दो बच्चो क बाप थे. राहुल hi एक था जो उसकी उम्र जितना था. एक साल hi बड़ा था बस वो अंशिका से.

इसलिए राहुल को अंशिका अपने बड़े भाई क रूप में बोहत पसंद करती थी.

आज जब राहुल ने उन् सब को प्रोटेक्ट किया. तोह अंशिका अपने आप hi राहुल की तरफ अत्त्रक्ट होने लगी...

और जब उससे पता चला की उन्हें बचाने वाला शख्स कोई और नहीं उन्ही का भाई ह, तोह वो फीलिंग और भी ज़्यादा बढ़ गयी.

अंशिका का मिशन था सच्चाई को जान न.

वो नीचे आई और राहुल क आने का वेट करने लगी.

राहुल ने अपने हाथ की फर्स्ट अिध की और एक फुल स्लीव टी शर्ट दाल क नीचे आ गया. उसने सोचा की कल डॉक्टर को अपना घाव दिखाएगा.

नीचे आते hi डाइनिंग टेबल पे बैठ गया.

उसके बैठने क तुरंत बाद hi अंशिका ठीक राहुल क राइट साइड वाली चेयर पर आकर बैठ गयी.

राहुल तोह चौंक hi गया था पर साथ में बाकी सब भी.

वंशु लेफ्ट साइड बैठ गयी राहुल क और नेहा और निशा राहुल क सामने..

सभी लोगो ने खाना स्टार्ट किया, राहुल सिर्फ खाने पे ध्यान दे रहा था, उससे दर्द हो रहा था हाथ में.

जल्द से जल्द वो अपने रूम में जाना चाहता था.

अंशिका बीच बीच में राहुल क चेहरे को देख रही थी. काफी तेनसेद थी वह.

उसने अचानक राहुल की राइट थिगह पे अपना लेफ्ट हैंड रख दिया.

राहुल को कुछ समझ नई आया, वो हैरान था.

जो अंशिका उस से बात नई करती, वो आज उसके बगल में बैठ गयी और अब तोह उसकी थिगह पे हाथ भी रख दिया...

राहुल अपना खाना चोरर क अंशिका की तरफ देखता ह.

पर अंशिका तोह जैसे उसको कुछ फ़र्क़ hi नई पद रहा था, वह खाना खाते जा रही थी पर अपना हाथ अभी भी राहुल क थिगह पे राखी हुई थी.

राहुल ने अपने लेफ्ट हैंड से अंशिका का हाथ पकड़ क हटाया...

इस बार दोनों की नज़रे एक दूसरे से मिली. राहुल को लगा जैसे अंशिका कुछ कहना चाह रही ह.

एकदम से राहुल अंदर hi अंदर चौंक गया...

R(mann में): एक मिनट...

ये... ये अंशिका... इसने मुझे पक्के से वह पे देख लिया था. पर ी थिंक मुझे जहा तक याद ह, अंशिका मेरा फेस नहीं देख पायी थी. फिर ये ऐसी हरकते क्यों कर रही ह? कही इससे पता चल गया क्या? नू... सहित!! अब क्या करू? क्या में पुछु? नई... ी थिंक इससे मेरी ऊपर शक ह या शयद पता चल गया ह. फिर इसने बाकी को बताया क्यों नई? इस से बाद में बात करनी होगी...

सभी लोग अपना खाना फिनिश क्र अपने रूम्स में आ जाते ह...

वंशु भी राहुल क रूम में आ जाती ह और आते hi राहुल को कस क हुग क्र लेती ह. और फिर उससे लिप किश जड़ देती ह...

थोड़ी देरर किसिंग क बाद...

व्: कुटी!! मेने कहा था न तेरे लिए गिफ्ट लायी हु. ये रहा तेरा गिफ्ट.. खोल क देख

वंशु राहुल को गिफ्ट देती ह जिससे राहुल खोलता ह, तोह उसमे एक हार्ट शेप का लॉकेट था, जिसको खोलने पर लेफ्ट साइड में व् और राइट साइड में र लिखा था.

राहुल को लॉकेट बोहत पसंद आया, उसने तुरंत hi पहन लिया.

वंशु भी खुश होक राहुल क गले लग क उसको स्मूच करने लगती ह...


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व्: ी लव यू कुटी!!

र: दी!! ी लव यू तू, बूत आपको नई लगता की आपको अपने लिए एक बर्फ ढूंढ लेना चाहिए, तै जी आपकी शादी करवाएंगी तब आप क्या करोगी? उनको यह कहोगी की आप मुझ से प्यार करती हो?

व्: में शादी नहीं करुँगी कुटी! तेरे साथ hi रहूंगी हमेशा... और खबरदार बर्फ की बात की तोह...

मुझे कोई और नहीं चाहिए. सिर्फ तू.

र: पर दी...

व्: सस्शह्ह्ह्हह्ह....

वंशु आगे बढ़ क राहुल क होंठ चूसने लगती ह और अपनी जीभ उसके मुँह में धकेलती ह तोह कभी राहुल की जीभ को चूस चूस क उसका थूक पीती जाती ह.

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राहुल का लुंड खड़ा हो गया था.

वंशु इतने में राहुल क दोनों हाथ पकड़ती ह तोह राहुल क मुँह से "आअह्ह्ह" निकल जाती ह.

जिस से दोनों का चुम्बन टूट जाता ह.

व्: क्या हुआ कुटी??

र: कुछ नई दी..

व्: नहीं. कुछ तोह बात ह, तू चिल्लाया क्यों?

र: नहीं दी... नथिंग... आप कंटिन्यू कीजिये...

वंशु समझ गयी थी की कुछ लफड़ा ह, इसलिए वो तुरंत राहुल क दोनों हाथ फिर से तेज़्ज़ी से पकड़ती ह और राहुल फिरसे हल्का सा "ाःह" करता ह

तोह वंशु उसके दोनों हाथो की स्लीव्स ऊपर कर देती ह.

और जब राइट हैंड में बंधी हुई खून से सनी पट्टी उससे दिखती ह तोह उसकी आँखें चौड़ी हो जाती ह और मुँह खुला का खुला रह जाता ह

V(ghabrate हुए) : ये... ये... कुटी... ये खून... क्या हुआ?

बोल...

र: दी... वह... कुछ नई.. थोड़ा पार्क का गेट लग गया था...

व्: झूठ... अब तू मुझ से भी झूठ बोलेगा कुटी

वंशु की आँखों से ासु आने लगते ह...

राहुल का दिल भी रोने लगता ह अपनी वंशु को ऐसा रट देख.

कितना प्यार करती ह उसकी वंशु उस से.

उससे भी आज पता चला की वंशु को वो कितना प्यार करता ह, उसको रोटा देख उसके खुद क दिल में भी दर्द होता ह.

राहुल वंशु क गाल पे हाथ सहलाता ह और आगे बढ़ क उसके होंठ को चुम लेता ह...

ये पहली बार था जब राहुल ने खुद अपनी तरफ से किश िनितीयते करि थी. वंशु भी हैरान थी, और रोटी जा रही थी. एक तरफ राहुल क किश करने की ख़ुशी तोह दूसरी तरफ उसके हाथ पे लगी चोट देख क दुःख...

राहुल को पता था की वंशु दी से वो झूठ नहीं बोल सकता...

इसलिए राहुल उससे सब बता देता ह पर ये नहीं बताता की अंशिका ने उससे देख लिया ह.

राहुल अपनी कसम दे देता ह वंशु को की वो ये बात किसी से भी नहीं करेगी...

आज वंशु उदास भी थी पर साथ hi साथ खुश भी.

वंशु लाइट्स ऑफ करती ह राहुल क लेफ्ट हैंड पे अपना सर रख उससे किस्सेस देती ह.

फिर समूचेस देती ह..

और साथ hi राहुल क फेस को अपने बूब्स में घुसा देती ह...

राहुल तोह वैसे hi किस्सेस से जोश में आ गया था, बूब्स का एहसास पाके तोह उसकी हालत और खराब हो गयी.




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वंशु अब और बोल्ड होती जा रही थी. अब वो सीधे लिप्स पे hi किश करती थी जैसे वो उसकी नार्मल किश ह. राहुल को डर रहता की कही वंशु सबके सामने न किश क्र दे..

वर्ण उसके लौड़े लग जाते...

वंशिका बड़े प्यार से राहुल को पुचकार कर उसके सर पे हाथ फेरते हुए उससे सुला रही थी.

अपनी बहिन की केयर देखती हुए राहुल क मुँह से आखिर निकल hi गया..

"ी लव यू! दी"

8-10 सेकंड तक सन्नाटा सा छ गया था कमरे में.

तभी राहुल क चेहरे पे एक पानी की बूँद गिरी.

उसने ऊपर अपना चेहरा कर क देखा तोह वंशु रो रही थी, उसकी ासु की बूँद राहुल क चेहरे पे गिर गयी थी.

र: आप रो रही ह दी??

व्: में आज खुश हु कुटी! बोहत खुश! और हनन... ी लव यू तू!

लॉट्स एंड लॉट्स...

दोनों भाई बहिन फिर एक दूसरे की बाहो में गहरी नींद क आग़ोश में चले जाते ह...

अब आगे क्या होगा? जान ने क लिए बनने रहिएगा!! :हिंतहिंट:
 
अपडेट-14

अब तक...

र: आप रो रही ह दी??

व्: में आज खुश हु कुटी! बोहत खुश! और हनन... ी लव यू तू!

लॉट्स एंड लॉट्स...

दोनों भाई बहिन फिर एक दूसरे की बाहो में गहरी नींद क आग़ोश में चले जाते ह...

अब आगे...

राहुल सोया तोह ज़रूर था पर उससे 2-3 घंटे से ज़्यादा नींद नहीं आयी.

दर्द इतना था की उससे नींद भी नहीं लग पायी. इसलिए बेचारा रात भर करवट बदलता रहा.

चोट का यदि सही समय पर इलाज हो जाए तोह ये स्थिति नहीं आती.

पर राहुल यहाँ पर केयरलेस था, उसने अपनी माँ निशा को भी कुछ नहीं बताया.

एक तोह निशा वैसे hi टेंशन में रहती ह ऊपर से यदि राहुल का घाव देख लेती तोह पता नहीं क्या होता.

बस यही सोच क राहुल ने अपनी माँ को सच नहीं बताया.

सुबह होते hi राहुल फ्रेश होक सीधा डॉक्टर क पास जाने क लिए रेडी होता ह. वंशु को पता लगते hi वह भी साथ चलने क लिए रेडी हो जाती ह. घर पर दोनों सामान लाने का बहाना कर निकल जाते ह.

अंशिका ने राहुल क मुँह से सुन्न लिया था की वह किस हॉस्पिटल जा रहे ह.

अंशिका एक स्पाई की तरह हर वक़्त राहुल पे नज़र रख रही थी.

उसने भी निशा को बहाना बता क कैब बुक करि और सीधा उसी हॉस्पिटल में पहुँच गयी.

हॉस्पिटल पहुचने क बाद, राहुल सीधा मिस तनीषा वर्मा क केबिन में गया. दरअसल, राहुल इस हॉस्पिटल में पिछले कुछ सालो से आता रहता था, जब भी उससे कोई भी चोट लगती थी.

उससे पहली बार जब नेहा क बर्थडे पे चोट लगी थी तब इधर hi आया था और तब तनीषा यहाँ पे नई कमर थी. ये एक बोहत अच्छी डॉक्टर ह. अब ये सीनियर डॉक्टर्स क साथ काम करती ह. इनकी स्किल्स देख क इन्हे जल्दी प्रमोशन मिल गया.

ये एक जूनियर सर्जन ह. और राहुल को जब भी कोई चोट लगती थी तोह वह तनीषा क पास hi आता था.

तनीषा की आगे अभी 26 साल ह. ये दिखने में बोहत hi ख़ूबसूरत ह.






पूरे हॉस्पिटल में सबसे सुन्दर स्त्री. बड़े बूब्स, गोरा रंग, पतली कमर, लम्बे काले बाल, राहुल ने जब पहली बार तनीषा को देखा था तोह पूरा मंत्र मुग्ध हो गया था. पहली बार उससे इतनी शर्म आई थी की वह इतनी ख़ूबसूरत लड़की को नज़रे उठा क देख नहीं पा रहा था. राहुल को जबसे वो यहाँ आ रहा ह तबसे जानती ह और दोनों क बीच बोहत अच्छी दोस्ती ह.

राहुल कॉलेज क लिए मेडिकल सर्टिफिकेट्स भी तनीषा से hi बनवाता था.

अंदर केबिन में पॅहुचते hi राहुल तनीषा को देखता ह...

तनीषा फ़ोन पे बात कर रही थी. राहुल को अंदर आते देख तुरंत कॉल को कट कर देती ह.

दरअसल राहुल को तनीषा क केबिन में बिना नॉक किये आना जाना अल्लोवेद था.

टी: अरे राहुल?? आओ... बैठो न..

क्या हुआ?

राहुल बिना कुछ बोले अपनी स्लीव ऊपर कर देता ह...

खून की पट्टी देख तनीषा हैरान हो जाती ह थोड़ा.

टी: राहुल?? क्या हुआ ये?

र: लम्बी कहानी ह मिस...

टी: फिरसे मिस??

र: ी मैं तनीषा दी...

तनीषा राहुल को अपना भाई जैसा मानती ह. राहुल भी तनीषा क बोहत से काम किया करता था. उसने तनीषा की तब मदद की थी जब तनीषा को मदद की सबसे ज़्यादा ज़रुरत थी. ये एहसान तनीषा कभी भी नहीं भूल सकती. पर राहुल क लिए वो एहसान नहीं था. तनीषा की चिंता उससे भी रहती ह. वो भी तनीषा को अपनी बड़ी बहिन जैसा मानता ह, हालांकि कभी कभी वो तनीषा को एक सुन्दर लड़की क रूप में देखा करता ह, पर कभी कुछ हरकत नहीं करि राहुल ने. दोनों दोस्त से कही ज़्यादा थे. तनीषा राहुल को रक्षाबंधन पर भी राखी बांधती ह.

टी: हम्म... अब बताओ क्या हुआ? अच्छा.. वो चोर्रो पहले ट्रीटमेंट. बाद में बताना सब विस्तार में.

तनीषा राहुल को साइड में लगी बर्थ पर बैठा देती ह. और उसकी पट्टी खोलती ह.

पट्टी खोलने पर उससे घाव दीखता ह, उसके ऊपर बोरिक पाउडर की परत चढ़ी थी. इसी की मदद से राहुल ने खून को रोका था.

तनीषा कॉटन और सवलों से पाउडर की परत को आहिस्ता से बड़े hi आराम से हटाती ह ताकि राहुल को बिलकुल भी दर्द न हो. राहुल को भाई जो मानती ह. उसके लिए तोह स्पेशल ट्रीटमेंट करना hi पड़ेगा.

पाउडर की परत हट ते hi एक बड़ा सा कट सामने आता ह.

जिससे देख क वंशु की हालत पतली हो जाती ह और उसका मुँह खुला का खुला रह जाता ह.

बड़ा कट देख क तनीषा भी हैरान हो जाती ह.

तनीषा अपना काम रोक क एक बार राहुल की तरफ देखती ह. जैसे उस से पूछ रही हो की ये इतना बड़ा घाव कहा से आया?

राहुल की फ़िक्र उससे भी बोहत रहती थी. बोहत केयर से ट्रीटमेंट करती थी राहुल का जब भी उससे कुछ होता था.

राहुल भी जवाब में बस तनीषा को देखता ह और फिर अपनी नज़रे चुरा लेता ह.

व्: कुटी! तूने मुझे बताया क्यों नहीं की घाव इतना बड़ा ह. और उस लकी की तोह में... पहले पता होता तोह कुटी में तुझे रात को hi लेके आती. डॉक्टर! प्लीज मेरे कुटी को दर्द न हो... थोड़ा ध्यान से...

टी: लकी?? ओह्ह्ह!! अब समझ आया..

ः... आप इसकी बहिन हो न? राहुल बताया करता ह मुझे आप क बारे में.

और जैसा वो बताता ह आप बिलकुल वैसी hi हो. चंचल, सुन्दर, भोली, प्यारी, नेक दिल, और बोहत परवाह करने वाली इंसान...

तनीषा क मुँह से खुद की तारीफ सुनते हुए और वो भी ये जान क की राहुल ने ऐसा तनीषा को बताया ह...

उसके गालो पे लाली आ जाती ह

और शर्म क मारे वो सर और अपनी नज़रे नीचे कर लेती ह और राहुल क कंधे पर प्यार से एक थपकी मारती ह...

इधर तनीषा भी राहुल क सर पर प्यार से एक थपकी देते हुए कहती ह...

टी: और तुम... पहले hi अपनी बहन को नहीं बता सके सब कुछ? कल hi आ जाते... हम्म??

र: ोुछः!! अब आ गया न.. मारती क्यों हो?

टी: मारूंगी.. मेरा हक़ ह. हम्म... सवलों लगाने से वोँड मॉइस्ट हो गया ह फिरसे. घाव गहरा ह इसलिए अभी तक फ्रेश ह.

अच्छा हुआ ज़्यादा लेट नहीं किया.

अभी स्टीट्चेस लगाने पड़ेंगे. और बच्चू... यदि कही और जाते न तुम तोह शयद डॉक्टर तुम्हारा इलाज करने से पहले 100 सवाल पूछता की चोट कैसे लगी? कोई लड़ाई तोह नहीं की? पुलिस केस तोह नहीं..

वो तोह में हु जो तुम्हे अपना भाई मानती हु इसलिए सब कर रही हु वर्ण तुझे तोह मेरी कोई परवाह hi नहीं ह. हम्फ!! और ये कट तुझे नाइफ से लगा ह.. ह न?

र: हाँ हाँ.. जी आप सही हो. ठीक? में hi गलत hu...par आप ने ये गलत बोलै की में आपकी परवाह नहीं करता. और हं ये कट नाइफ का hi ह...

टी: हम्म.. हं तोह? क्या गलत कहा? तुम मेरी परवाह करते होते तोह...

खर्र बाते बाद में.. अब स्टीट्चेस लगेंगे.

राहुल देख रहा था की तनीषा कुछ कहने वाली थी पर शयद वंशु क कारण नहीं कह पायी. तनीषा ने भी एक बार राहुल की तरफ बड़ी hi मासूमियत से देखा और फिर अपने काम में लीं हो गयी.

थोड़ी देरर में सारे स्टीट्चेस लग गए थे और एक नेसेसरी इंजेक्शन जो इन्फेक्शन क लिए लगता ह वो भी लगा दिया तनीषा ने और राहुल क लिए उसकी साड़ी मेडिसिन्स और पत्तिया वगैरह सब तनीषा ने प्रिस्क्रिप्शन में लिख दिया. और कुछ एक्स्ट्रा ोइंटमेंट्स घाव पर लगाने क लिए उसने अपने केबिन में hi जो रखे थे वो दे दिए फ्री में.

टी: हं तोह भाई साहब! अब कष्ट करेंगे बात बताने का?

फिर राहुल तनीषा को सब बताता ह की क्या हुआ था कल. जिससे सुनकर तनीषा को भी लकी पे गुस्सा आने लगता ह...

टी: राहुल! तुम्हे मेरे ख्याल से अब उस लड़के से ज़्यादा नहीं उलझना चाहिए और अकेले तोह बिलकुल भी नहीं. तुम्हे पता ह न पहले भी...

राहुल बीच में hi तनीषा की बात को काट देता ह ताकि वंशु को पता न चले..

र: उलझ रहा हु तभी तोह मेरे घरवाले सही सलामत ह. उसके बाप का दारु का ठेका ह, तोह उसकी पहचान कई गुंडों मवाली से ह, यहाँ तक की पुलिस वालो से भी. सब कर्रप्टेड ह साले. वो तोह अच्छा ह की मेरी भी पहचान ह वर्ण में तोह कबका मर्डर गया होता उसके है...

राहुल ने इतना बोलै hi था की वंशु और तनीषा ने दोनों ने एक साथ एक hi समय पर राहुल क मुँह पे अपना हाथ रख दिया...

जिस से वंशु और तनीषा क हाथ आपस में भीड़ गए...

अब दोनों को ावक्वार्ड लग रहा था. तनीषा को तोह ज़्यादा hi अजीब लग रहा था क्यूंकि वो तोह राहुल की कजिन बहिन भी नई थी.

दोनों ने हाथ हटाए और तनीषा ने ख़ामोशी को हटाते हुए कहा...

"ऐसे म्ररने की बात नहीं करते राहुल... "

व्: हनन कुटी! ऐसा नहीं कहते...

र: उम्... हम्म्म... ी थिंक अब हमे चलना चाहिए.. थैंक्स ा लोट फॉर थे ट्रीटमेंट तनीषा दी...

तनीषा कड़ी होती ह और राहुल क गालो पे हाथ रख क माथे और फिर गाल पर किश कर देती ह...

राहुल शर्मा गया था क्युकी वंशु भी देख रही थी.

इधर वंशु को जेएलओसी फील होने लगी...

और उसने कस क राहुल का हाथ पकड़ लिया और मुँह बनाते हुए उससे देखने लगी जैसे कह रही हो की तू घर चल तुझे घर पे बताती हु.

तनीषा वंशु की जेएलओसी देख मुस्कुराते हुए कहती ह..

"थैंक्स कहके पराया कर दिया न... बी थे वे टेक केयर राहुल! और कोई भी चीज़ की ज़रुरत हो तोह जस्ट कॉल में...

और हनन, अभी जबतक ये ठीक न हो जाए डेली आना मेरे पास. Ok?"

र: हनन सूरे.. चलता हु दी. आपको भी जब भी कुछ काम हो, या मेरी ज़रुरत हो बस कॉल कर दीजियेगा!!

राहुल और वंशु दोनों फिर घर की तरफ वापस निकल जाते ह.

पर कोई था जो इनकी बातें पूरी सुन्न चूका था.

ये अंशिका hi थी. केबिन क बाहर खड़े होक उसने सब सुन्न लिया था.

वो थोड़ा अंदर भी चली गयी थी ताकि अच्छे से सुनाई दे और केबिन बड़ा था इसलिए दूर क पीछे कड़ी रही और कोई भी उससे देख न सका.

A(mann में) : में सही थी. राहुल hi हमे प्रोटेक्ट किया. उसने कहा की यदि वो लकी से नहीं भिड़ेगा तोह उसका परिवार सही सलामत नहीं रहेगा... मतलब इतने साल से राहुल प्रोटेक्ट कर रहा ह सबको? ओह्ह गॉड!! और में यहाँ उससे... छी... कितनी बुरी हु में... नेहा भी तोह... उससे भी कुछ नहीं पता ी गेस. अभी मुझे और छान बीन करनी पड़ेगी. तब जाके शयद मुझे कुछ पता चल पाए... वंशु दी को राहुल ने सब बता दिया, दोनों की बॉन्डिंग अच्छी ह. क्या वंशु दी को सच्चाई पता ह? उनसे पुछु क्या? ये में पहले भी कर चुकी हु और वंशु दी ने कहा था उन्हें भी कुछ नहीं पता... फिलहाल तोह निगरानी hi करनी पड़ेगी ी थिंक.

अंशिका भी वापस कैब लेके घर आ जाती ह. नेहा और राजेश को चोरर कर सभी लोग घर पर थे...

नेहा को आज कॉलेज में कुछ काम था इसलिए जाना पड़ा आज उससे.

सभी लंच करते ह और वंशु और राहुल अपने रूम में चले जाते ह.

अंशिका भी चाह रही थी की वो राहुल क रूम में किसी प्रकार हो रही बाते उससे भी सुनाई दे पर राहुल ने रूम लॉक कर लिया था.

व्: हनन तोह जनाब! कोण थी वो ? हमारे प्यारे कुटी को तोह मैडम ने किश भी किया, वो भी गाल पर और माथे पर, में न होती तोह होठ पे भी करती ह न???

र: दी! ये किसी बाते कर रही हो आप. वो मुझे अपना भाई मानती ह. आपने देखा न उन्हें भी मेरी चिंता ह. और वो ऐसे hi मुझे ट्रीट करती ह.

व्: ओह्ह्ह! तोह पहले भी कई किस्सेस ले चुके हो... तुम्हे तोह मज़ा आ रहा होगा. ह न?

र: दी वैसी बात नहीं ह ट्रस्ट में...

व्: आज तू कुछ नहीं बोलेगा... ृक्क अभी बताती हु तुझे.

V(mann में) : जब एक रैंडम डॉक्टर राहुल क इतने क्लोज ह तोह मुझे तोह और क्लोज होना पड़ेगा. ये बुद्धू राहुल, कुछ समझता नहीं ह. आज जैसे वो तनीषा इससे देख रही थी, मुझे उसकी नज़रो से hi पता चल गया था की कुछ और भी बात ह. और जब उसने माथे क साथ साथ गाल पे किश किया तब तोह मुझे और भी विश्वाश हो गया. पूरे 4 सेकंड, 4 सेकंड तक उसने कुटी क गालो पे अपने होंठ चिपकाए थे. हम्फ!! मुझे पता नई चलेगा क्या? अब आज से मुझे आगे बढ़ना पड़ेगा. हनन... आज कुटी को अपनी बॉडी दिखाऊ क्या? ज़्यादा हो गया तोह? हम्म... आज बूब्स का टास्ते करवाती हु इससे. कुटी को बूब्स बोहत पसंद ह. मने देखा ह उससे लड़कियों क इवन मेरे बूब्स देखते हुए. हहै... आज अपने कुटी को जमके प्यार करुँगी.

वंशु सीधा राहुल पे लपकती ह और उसके होंठो को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगती ह.

पर राहुल की चोट का भी ध्यान रखे हुए थी.

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वंशु आज पूरी आक्रामक थी.

राहुल को सास लेने तक का समय नहीं दे रही थी.

राहुल कुछ कह hi नहीं पा रहा था.

किस्सेस इतनी डीप थी की वो हाफने लगा था.

दोनों क मुँह क बीच थूक की एक पतली सी डोर बन गयी थी.

वंशु एक बार फिरसे लपकी और इस बार किश क साथ उसने राहुल का लेफ्ट हैंड उठा क अपने सुडोल बड़े बूब्स पे रख दिया और साथ hi साथ मसल दिया. उसके मुँह से एक आअह्ह्ह निकल गयी पर उसने किश नहीं तोड़ी.




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राहुल का ये फर्स्ट टाइम था जब उसने वंशु क बूब्स को हाथ में लिया. उसके पंत क अंदर की हालत बोहत बिगड़ रही थी अब. वो कई बार वंशु क बूब्स देखा करता था पर आज वंशु ने खुद अपने हाथो से उससे दबवाया तोह राहुल का प्रेकम निकल गया. फिर वंशु ने अपना हाथ हटा लिया ताकि राहुल अपनी मर्ज़ी से उसके दूध निचोड़ सके, पर राहुल सिर्फ हाथ रखे हुए था. असमंजस में था बेचारा क्युकी वंशु उसकी बहिन थी. बास उससे एक किक स्टार्ट चाहिए था जो वंशु उससे देने जा रही थी.

वंशु राहुल क कान की तरफ बढ़ती ह और उसके एअरलोबेस को मुँह में अंदर दाल क चूस क कहती ह... राहुल की ाःह निकल गयी इसमें भी...

"क्या सोच रहा ह कुटी!? ये तेरे hi है. दबा ले जितना दबाना हो. आज से जब भी तुझे मेरे बूब्स मसलना हो बस आ जाया कर मेरे पास. अब सोच क्या रहा ह? दबा न... देख तेरे hi ह... तुझे पसंद ह न? स्क्वीज़ थम.... "




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बस राहुल को इतना hi सुन्न न था की उसने अपने लेफ्ट हैंड से वंशु का एक दूध पकड़ क पूरा निचोड़ दिया.

जिस से वंशु की एक दर्द भरी "आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह" निकल गयी.

पर उससे मज़ा भी आया.

बस इतना hi होना था की वंशु पूरी ज़ोरो से किश करती हुई अपने दूध दबवाने लगी और राहुल से भी रहा नहीं गया था तोह वो भी वंशु का साथ देते हुए उसके मम्मी निचोड़ने लगा.

वंशु आहें भरते हुए...

"Aahhhhhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह हाय कुटी..!! ी लव यू सो सो मच... आह्ह्ह्ह... ऐसे hi दबा कुटी!! ी लव यू! तू मेरी ज़िन्दगी ह रे... तेरे बिना तोह में जी hi नई पाऊँगी. तू hi मेरा सब कुछ ह. और दबा... ज़ोर से... आह्ह्ह्ह... एसससस... ये तेरे hi ह कुटी... आआआह्ह्ह्हह्ह... एससससस... जब मैं करे ीन्हो निचोड़ लिया कर आह्ह्ह्हह.... उम्मम्मम"

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राहुल भी आहें भर रहा था और दूध दबाए जा रहा था साथ hi साथ किसिंग भी चालु थी.

थोड़ी देरर इनकी ये मस्ती चली और फिर दोनों वापस से एक दूसरे को चिपक क सो गए...

.

.

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आज क लिए इतना hi फ्रेंड्स.

अब कल इनकी ज़िन्दगी में क्या होगा? क्या अंशिका कुछ पता कर पाएगी? क्या वंशु को अपना प्यार मिलेगा?

जान ने क लिए बनने रहिये! :बुढऊ:
 
अपडेट-15

अब तक...

वंशु आहें भरते हुए...

"Aahhhhhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह हाय कुटी..!! ी लव यू सो सो मच... आह्ह्ह्ह... ऐसे hi दबा कुटी!! ी लव यू! तू मेरी ज़िन्दगी ह रे... तेरे बिना तोह में जी hi नई पाऊँगी. तू hi मेरा सब कुछ ह. और दबा... ज़ोर से... आह्ह्ह्ह... एसससस... ये तेरे hi ह कुटी... आआआह्ह्ह्हह्ह... एससससस... जब मैं करे ीन्हो निचोड़ लिया कर आह्ह्ह्हह.... उम्मम्मम"

राहुल भी आहें भर रहा था और दूध दबाए जा रहा था साथ hi साथ किसिंग भी चालु थी.

थोड़ी देरर इनकी ये मस्ती चली और फिर दोनों वापस से एक दूसरे को चिपक क सो गए...

अब आगे...

अगली सुबह भी ये दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाहो में बाहे डाले बेखबर सोये हुए थे. अब रात को आपकी बहिन आपको पशनातेली किस्सेस करके और खुद क बूब्स दबवा क आपको बाहो में लेके सोयेगी तोह क्या आपको मीठी नींद नहीं आएगी? ज़रा खुद से ये सवाल पूछ क देखिये.. हहै!! :गायलॉग़:

यही हाल राहुल का था, रात भर उसकी प्यारी वंशु ने जो उधम मचाया था उससे अपने ख्वाबो में समेटे हुए गहरी मीठी नींद में था. तभी राहुल क दूर पे नॉक होती ह...

"दी!! उठिये, 8 बज चुके ह"

अंशिका ने आवाज़ लगाते हुए कहा. एक चाहत तोह उससे भी थी की वो भी राहुल क कमरे में उस क साथ सो सके पर अभी ये मुमकिन नहीं था शायद.

अंशिका क खत खटाने पर राहुल और वंशु दोनों की मीठी नींद टूट जाती ह और दोनों आँखे रगड़ते हुए एक दूसरे को देखते ह, वंशु राहुल को देख स्माइल करती ह और उसके होंठ पे हलकी सी मॉर्निंग किश देती ह और फिर उठ क दूर खोलती ह. राहुल भी उठ क तब तक वाशरूम में चला गया था.

"क्या ह छोटी? 8 hi तोह बजे ह, कोनसा हमारा नेहा की तरह कॉलेज ह. हम तोह वैसे भी रुकने क लिए आए ह"

वंशु ने आँखे मीस्ते हुए कहा

ा: अरे दी! अपने घर में चलता ह पर हम यहाँ नेहा क घर में ह और ऐसे देरर तक सोना अच्छा नहीं लगता

व्: ये भी हमारा hi घर ह छोटी. कुटी का घर यानी मेरा घर, और हमारा घर यानी कुटी का घर...

ा: अच्छा ठीक ह. आप फ्रेश होक नीचे आ जाइये. आज हमे चलना ह फिरसे घूमने.

"हँ?? किधर" वंशु नींद से जागती हुई बोली.... उससे अभी भी हलकी हलकी नींद आ रही थी.

ा: आप फ्रेश होक नीचे आइये पहले...

अंशिका इतना कहके नीचे चली जाती ह और राहुल क निकलने क बाद वंशु वाशरूम से फ्रेश होक फिर सभी लोग डाइनिंग टेबल पे ेखथे ब्रेकफास्ट करने लगते ह...

आज संडे था, इसलिए राजेश भी घर पर hi था.

नाश्ता करते हुए नेहा बात छेड़ती ह

"वंशिका दी!! मेने और अंशिका दी ने डीडे किया ह की आज ज़ू चलते ह, यदि टाइम रहा तोह वही से फोर्ट और ओल्ड वाटर पार्क भी हो आएँगे... क्या कहती हो आप?"

फिर नेहा राहुल की तरफ एक बार देखती ह और वापस वंशु को देख क फिरसे बोलती ह..

"और हैं, सिर्फ हम तीनो hi चल रहे ह. अब बताइये.."

नेहा की बात से राजेश अपना अखभार नीचे करते हुए नेहा को देखा और कुछ कहने hi वाला था की राहुल ने इशारे से उससे शांत रहने को कह दिया. अपने बेटे की बात क आगे हार क राजेश ने फिर कुछ नहीं कहा.

पर ये जो बाप और बेटे क बीच हरकत हुई थी ये नेहा को चोरर क सभी लोगो ने नोटिस कर ली थी.

वंशु को पता था की पिछली बार अकेले जाने पर क्या काण्ड हो गया था, पर नेहा इस काण्ड से अनजान थी. और बात सिर्फ अकेले जाने की नहीं थी. राहुल भी परिवार का एकलौता वारिस ह और उसका पूरा हक़ ह हर्र जगह जाना पर फिर भी बेचारा सब कुछ अपने परिवार क लिए लुटा देता ह.

वंशु नाश्ते की प्लेट पे अपनी स्पून को रखते हुए इस बार बुलंद इरादे से कहती ह.

"नेहा! इस बार मेरा डिसिशन साफ़ ह, यदि कुटी जाएगा साथ में तोह hi में जाउंगी. वर्ण हर्गिज़ज़ नहीं .."

वंशु ने अपने इरादे मज़बूत रखे थे इस बार.

इतना कह क उसने पूरी बात hi ों पॉइंट कह दी.

की जाएगी तो राहुल क साथ hi वर्ण नहीं.

N(pareshan होते हुए) : वह.. ? पर...

राजेश (अपना अखबार रखते हुए) : वंशिका ने एकदम सही कहा. राहुल मेरा बीटा ह और घर की लड़किया कही घूमने जाएंगी तोह भला वह क्यों घर में रहेगा? वो भी भाई ह तुम सब का... और वैसे भी अकेली लड़कियों का जाना ठीक नहीं. यदि किसी दिक्कत में फस्स जाओगे तोह फिर? एक लड़के का होना अच्छी बात ह. और आज तोह मेरी भी छुट्टी ह, राहुल मेरी कार में ले जाएगा तुम सब को.

न: व्हाट?? बूत... बूत पापा...

"वंशिका दी और चाचा जी सही कह रहे ह. राहुल को हमारे साथ चलना चाहिए"

अंशिका धीमी आवाज़ में बोली...

और राहुल की तरफ नज़रे उठा कर मासूमियत से देखती ह..

उसकी सासे भी तेज़्ज़ चल रही थी..

दिंनिंग टेबल पे बिछे क्लॉथ को कस क अपनी मुट्ठी में जकड़ा हुआ था उसने..

राहुल भी बस उससे hi देख रहा था

अंशिका की बात सुनते hi जैसे सन्नाटा सा छ गया घर में.

जी हं! किसी को विश्वाश नहीं हो रहा था की ये बोल अंशिका के ह. क्युकी वो तोह नेहा की पार्टनर थी. पर आज राहुल की साइड ले ली उस्सने.

घरवालों क लिए ये चमत्कार से काम नहीं था.

जहा एक तरफ वंशु और राजेश और निशा इस बदलाव से खुश थे तोह वही दूसरी तरफ नेहा अपनी बॉहे ऊपर करके अंशिका को देखे जा रही थी और पूरी तरह अचंभित थी. उससे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की अंशिका ऐसा कुछ कहेगी.

उसने आगे कुछ कहना मुनासिब ना समझा...

सभी लोग नाश्ता से फुर्सत हुए तोह अपने अपने रूम की और प्रस्थान किये

रूम में एंटर होते hi नेहा ने दूर लॉक किया और अंशिका से सवालो की झड़ी लगा दी...

"दी!? आप को पता ह आपने अभी अभी नीचे क्या कहा? आपने उसको आने क लिए अल्लोव किया? आखिर क्यों?? अरे कल hi तोह हमारे बीच तये हुआ था की हम तीन कल ज़ू चलेंगे फिर क्यों??"

नेहा ने एक सास में परेशान होते हुए पुछा...

नेहा क सवालों से अंशिका अपने मैं में सोचने लगती ह...

"अब तुझे क्या बताऊ नेहा. आज जो हम सही सलामत खड़े ह वो राहुल की hi वजह से... मुझे पता ह क्या हुआ था पिछली बार जब हम सब अकेले गए थे. मेरी टांगें कप कपाने लगी थी उस लकी को सामने देख कर. उस वक़्त राहुल ने hi हमें बचाया था. वर्ण तोह...

में नहीं चाहती की आगे ऐसी कोई दुर्घटना हो. और चाचा जी की बात भी सही ह. राहुल इस घर का चिराग ह, हमारा भाई ह. उसका हक़ ह हम पे और हमारा उसपे. पर काश तुम ये बात समझ पाती नेहा. मुझे भी बोहत देरर से समझ आया और अभी तक मुझे भी असलियत पता नहीं ह. पर में इतना कह सकती हु की राहुल बेक़सूर ह. कोई वजह ज़रूर ह. और में जान क रहूंगी."

अंशिका को खामोश पा क नेहा फिरसे उसका ध्यान अपनी और आकर्षित करती ह और अपनी बॉहे ऊपर कर क उस से सवाल जान ने कोशिश करती ह.

"मेने नीचे जो भी कहा वो सही कहा नेहा.

हमारा अकेले जाना सही नहीं ह. और वैसे भी आज कार अवेलेबल ह. हमें hi आसानी होगी. और राहुल सेफ्टी क लिए रहेगा hi... ड्राइव भी वही कर लेगा"

अंशिका ने अपने पॉइंट्स रखते हुए कहा...

"दी! आपको पता नहीं क्या हो गया ह आज. आज से पहले तोह आपने सेफ्टी की बात नहीं की. फिर आज कहा से ये सेफ्टी आ गयी? और ज़माना कहा से कहा आ गया ह दी! हम 21सत सेंचुरी में जी रहे ह. ऐसा थोड़ी ह की हम बाहर क्या निकले और हमें कोई पकड़ क ले जाएगा. और वो इडियट हमारी सेफ्टी करेगा? सेफ्टी माय अस्स!!"

नेहा थोड़ा विरोध में बोली.

A(mann में) : अब तुम्हे क्या पता नेहा. उस दिन राहुल नहीं होता तोह वो लकी तुमको उठा क hi ले गया था. और में न होती तोह उसका ये सच डब्ब क रह जाता. में तोह खुशकिस्मत मानती हु की में ये सब जान पायी. वर्ण यदि कोई उसका महान काम नहीं देखता तोह? पता नहीं आखिर कैसे वो ये सब कर रहा ह और क्या ह उसके मैं में. आज तुम्हारी बात पे जब मेने उसको नाश्ता करते वक़्त देखा तोह मेरी रूह काँप गयी एकदम. कितना सेहत आ रहा ह वो...

मेरी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी थी उसका मासूम चेहरा देख क. आज ऐसा फील हुआ जैसे मेरा बड़ा भाई बोहत तकलीफ में ह... में... में उससे अपने अंदर समां लेना चाहती थी.

आज मुझे उससे देख कर मेरे दिल में एक अजीब सा दर्द हुआ. और ये दर्द जब भी होता ह मुझे रुलाई आ जाती ह. समझ नहीं आता क्या करू. वंशु दी कितनी लकी ह. भाई क साथ सोना, उसको प्यार करना... काश... काश..."

नेहा फिरसे चुटकी बाजा क अंशिका को होश में लाती ह.

"किधर खो गयी दी??"

"कुछ.. कुछ.. नहीं.." अंशिका अपनी तन्द्रा से टूटने क बाद हड़बड़ा क कहती ह...

न: ठीक ह तोह...

फाइन.. अब सब यही बोल रहे तोह मुझे भी चलना पड़ेगा. इवन थौघ मेरा मैं नहीं ह उसके साथ जाने का. पर सिर्फ आप दोनों क लिए.. सिर्फ आप दोनों क लिए में चलूंगी.

और नेहा इतना कह क वाशरूम में अपने कपडे लेके नहाने चल देती ह.

अंशिका उससे जाता देख फिरसे अपने खयालात में डूब जाती ह.

फिर प्लानिंग क हिसाब से सभी लोग तैयार होते ह और अच्छे कपडे पहन घर से कार में बैठ निकल जाते ह.

राजेश और निशा घर पर hi थे.

इनकी सेक्स लाइफ अब बोहत काम थी. राजेश का बीटा hi 21 साल का हो गया था. और अब उसमे भी इतना जोश नहीं रहता था. दिनभर की जॉब क बाद वो थक जाता था और घर आके खाना खाके सीधा सो जाता था.

कभी कभी 2- 3 महीनो में एक बार 5-10 मिनट क लिए सेक्स कर लेता था, उतने में hi इनका निकल जाता था. पर निशा को और चाहत रहती की उसका पति काम से काम 20-25 मिनट तोह ठीके...

पर उससे नाराज़गी hi मिलती थी.

पर निशा ने कभी भी इस बात का ज़िक्र नहीं किया. वो नहीं चाहती थी इस बात से उसके पति का आत्म सम्मान काम हो.

एक असली हिंदुस्तानी स्त्री की यही तोह खूबसूरती ह. अपने सुहाग क लिए कुछ भी कर लेती ह.

निशा ना hi बाहर किसी मर्द को अपने ऊपर डोरे डालने देती थी. अपनी मर्यादा में कैसे और किस हद्द तक रहना ह उससे बखूबी आता था.

आज भी राहुल और बाकी सब क जाने क बाद निशा ने राजेश का मूड बनाया पर राजेश संडे क दिन आराम का बहाना दे क टीवी ों कर क देखने लगा.

अब क्या करती निशा? थोड़ी मिन्नत की उसने पर राजेश ने ये कह क ताल दिया की किसी और दिन करेंगे.

निशा अपने वाशरूम में जाती ह और साड़ी उतार कर मिरर क सामने नंगी होक अपनी छूट खोल क गुलाबी हिस्सा और छेद देखनी लगती ह...

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Nisha(mann में) : कितना टाइम हो गया इससे भी... आज कितना मैं था मेरा. कितना अच्छा मौक़ा था. आज ये मेरे साथ कर सकते थे. पर इनका भी अब मैं नहीं करता. क्या में hi हवसी हु क्या? क्या इस उम्र में अब ये सब नहीं करना चाहिए? फिर ये इससे इतनी खुजली क्यों होती ह?

सोचते सोचते निशा अपनी छूट में एक साथ दो उंगलिया घुसेड़ कर अंदर बाहर करने लगती ह और सिसकिया भरणे लगती ह...

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साथ hi वो अपनी गांड में भी ऊँगली डालती ह. उसका हमेशा से मैं था की राजेश से गांड मरवाए पर राजेश ने कभी मारी hi नहीं. उसकी गांड अभी भी कुवारी थी.





"काश... काश इनमे वही पुराना वाला दम होता. अब इस आग का क्या करू? जेठानी जी से पूछूँगी की वह क्या करती ह. आअह्ह्ह्हह...

ससससस.... हैए.... किसी निगोड़ी ह रे.... इतनी क्या खुजली मच रही ह तुझ में हाँ?? आह्ह्ह्हह्ह... उफ्फ्फ.... हयईए.... ससससस..... ओह्ह्ह्हह"

निशा उंगलिया की गति बढ़ाते हुए अंदर बाहर करते हुए और तेज़्ज़ सिसकिया भरने लगती ह और अपने मैं में इमेजिन करते हुए मस्टुर्बते करने लगती ह. जोश जोश में निशा अपनी गांड क सुराख़ में दो उंगलिया दाल लेती ह जिस से उससे और मज़ा आने लगता ह पर हल्का दर्द भी करता ह...



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"हायईए दिया... उफ्फ्फ.... आआह्ह्ह्हआआआआ.... Ohhhhhhhhhhhhhh... माआआआआ....... एसससससस...... हैंण्ण्ण्णन........ हैइए..... आअह्हह्ह्ह्हह..... Ohhhh-hhhhhh बेतुउउउउ...."

निशा क मुँह से बेतु शब्द निकलते hi वह एकदम ृक्क जाती ह और तुरंत अपनी छूट और गांड से हाथ हटा लेती और अचंभित सी कड़ी होक खुद को मिरर में देखने लगती ह.

चाँद पल क लिए तोह निशा खुद को hi देखती रही, उससे खुद की हरकत पे विश्वाश नहीं हो रहा था.

और जब उससे रीलीज़ हुआ तोह एकदम अपना सर पकड़ क बैठ गयी...

"हे भगवन!! निशा!! पागल हो गयी ह क्या तू? ये... ये.. क्या कर दिया मेने? आखिर कैसे? छियई... अपने hi बेतु को सोच क... चीई

कितनी गन्दी औरत ह तू निशा. कहा मेरा प्यारा बेतु जो मेरी लिए न जाने क्या क्या कर दे और यहाँ में उसको सोच क अपनी...."

निशा खुद से hi मैं में बाद बड़े जा रही रही. अब जो हो गया सो हो गया. आखिर वक़्त भी कभी उल्टा चला ह क्या?

देखा जाए तोह इसमें निशा की भी कोई गलती नहीं थी. बेचारी की छूट की आग hi ऐसी थी. कितने दिन से तड़प रही थी. ऊपर से राजेश ने भी मन कर दिया. राहुल ने जब से बॉडी बनाई थी निशा को राहुल पहले से आकर्षित लगने लगा था.

पर एक माँ की ममता की नज़र से hi.

राहुल से डेली बाते करना और राहुल उसके लिए और परिवार क लिए कितना कुछ करता ह शायद इन्ही सब क बारे में सोच सोच क निशा क दिमाग में अभी राहुल बसा हुआ था.

और जब उसने मुट्ठ मारनी चाहि तोह अचानक राहुल का चेहरा उसके सामने आ गया.

अब इसमें उसकी क्या गलती. राजेश क अलावा वही तोह एक मर्द ह जिस से निशा सबसे ज़्यादा बात करती ह.

तोह इसमें कोई चौंकने वाली बात नहीं थी. पर निशा क लिए ज़रूर थी.

खुद को कोसते हुए निशा शावर ों कर क गिल्ट की फीलिंग दूर करने क लिए नाहने लगती ह फिरसे.

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आज क लिए इतना hi फ्रेंड्स. क्या होगा आगे? निशा की गिल्ट जाएगी या कुछ और होक रहेगा? राहुल और बाकी सब सही सलामत घर आएँगे? क्या होगा इनकी ट्रिप पर? अंशिका को कुछ और पता चलेगा? जान ने क लिए बनने रहिएगा

थोड़ा फेस्टिवल का वक़्त ह इसलिए बिजी रहूँगा फ्रेंड्स और साथ hi मेरा प्रोजेक्ट का काम चल रहा ह. तोह आने वाले उपदटेस थोड़े लेट हो सकते ह.

उसकी इन्फो में दे दूंगा.

एन्जॉय योर फेस्टिवल हॉलीडेज!! :तूहैप्पी:
 
अपडेट-16

अब तक...

अब इसमें उसकी क्या गलती. राजेश क अलावा वही तोह एक मर्द ह जिस से निशा सबसे ज़्यादा बात करती ह.

तोह इसमें कोई चौंकने वाली बात नहीं थी. पर निशा क लिए ज़रूर थी.

खुद को कोसते हुए निशा शावर ों कर क गिल्ट की फीलिंग दूर करने क लिए नाहने लगती ह फिरसे.

अब आगे...

इधर राहुल और उसकी बहनो की टोली चल पड़ती ह आज क दिन की ट्रिप पर, कार राहुल ड्राइव कर रहा था. राहुल क बगल से वंशु बैठी हुई थी. और नेहा और अंशिका पीछे की सीट्स पर विराजमान थी.

थोड़ी देरर की दूरी तये करने के बाद नेहा ख़ामोशी को दूर करते हुए कहती ह...

"वंशिका दी!! पहले ज़ू hi चलना ह न?? की फोर्ट??"

व्: ज़ू hi चल देते ह नेहा, फिर फोर्ट चल देंगे.

इतना सुन्न राहुल ज़ू की तरफ गाडी मोड़ देता ह. ज़ू भी बोहत बड़ा नहीं था एक नार्मल ज़ू था जहा एनिमल्स थे, हर टाइप क नहीं बूत टिगर्स, क्रॉकोडिल्स, स्नैक्स, बर्ड्स, वगैरह आसानी से देखे जा सकते थे.

थोड़ी hi देरर में ज़ू भी आ गया. सभी लोग कार से उतारते ह.

आज राहुल ने एक कासुअल चेक शर्ट और ब्लैक जीन्स पहनी हुई थी, रेबां क गॉगल्स और नाइके क स्नीकर्स. जिसमे वो बोहत hi जांच रहा था और अट्रैक्टिव भी बोहत लग रहा था. और सबसे ज़्यादा अट्रैक्टिव तोह और कोई नहीं हमारी अंशिका को hi लग रहा था. क्युकी जबसे उसने राहुल पे निगरानी रखना स्टार्ट किया था वो उसकी आदतों, उसकी बॉडी, उसका स्टाइल, उसका फैशन सेंस, उसका अपनी बहनो क प्रति प्यार और उनको प्रोटेक्ट करना, बड़ो का आदर सत्कार, सभी चीज़ पे बड़े hi ध्यान से गौर करती थी अंशिका... यही कारण था की वो राहुल की तरफ अत्त्रक्ट होने लगी थी. उसने आज से पहले ऐसा लड़का कभी नहीं देखा था जिनमे ये साड़ी खुबिया हो. और वैसे भी अंशिका लड़को को दूर से hi परखती थी. उससे एक तोह रेपिस्ट्स का डर बोहत रहता था. और आवारा गर्दी करने वाले लड़को से वो दूर hi रहती थी. पर आज राहुल को छुप छुप क कमुख भरी नज़रो से देख भी रही थी. कार में भी उसको मिरर से देख रही थी. क्या चल रहा था उसके दिल में? ये तोह वही जाने.

वैसे लग तोह आज अंशिका भी बोहत हॉट रही थी. वाइट टॉप और ओलिव ग्रीन क्रोपपद पेग ट्राउज़र्स में क़यामत लग रही थी. अंशिका क बूब्स भी बोहत hi कमाल क थे. एकदम परफेक्ट. वंशु क बूब्स बड़े ज़रूर थे पर थोड़े मुलायम थे जबकि अंशिका क एकदम सुडोल, टाइट, well-rounded बूब्स थे और वाइट टॉप की खूबसूरती को और भी बढ़ा रहे थे.

वंशु ने लाइट पिंक कलर का टॉप पहना हुआ था और नीचे डेनिम डार्क ब्लू जीन्स.

नेहा ने क्रीम कलर का क्रॉप टॉप और ब्लैक जीन्स पहनी हुई थी.

सभी लोग जब कार से उतरे तोह आस पास क लोग भी उनको देखने लगे. सभी इतने जांच जो रहे थे. लौंडे लपाड़े तोह हमारी लड़कियों को घूरे जा रहे थे.

फिर टिकट लेने क लिए राहुल टिकट काउंटर जाता ह और 4 एडल्ट्स की टिकट लेके आ जाता ह.

फिर सभी लोग अंदर जाते ह तोह अलग अलग प्रकार क जानवरो को देख मनोरंजन करते ह.

काफी फैमिलीज़ भी आयी हुई थी आज वह, संडे का दिन था. घर परिवार क लोग भी एन्जॉय करने आये हुए थे. जिस से काफी चहल पहल थी ज़ू में. ऐसे थोड़ी देरर घूम लेने क बाद राहुल एक जगह जाके बेंच पे बैठ जाता ह.

तभी वह एक छोटी सी बड़ी hi क्यूट सी बच्ची आती ह और राहुल की जांघ पे हाथ फरने लगती ह और उससे अपनी ख़ूबसूरत आँखों से देखने लगती ह जैसे कुछ कहना चाह रही हो.

ये बच्ची वही आयी हुई एक फॅमिली में से थी और उसके परिवार वाले भी बगल वाली बेंच पे hi बैठे हुए थे और उसकी हरकते देख स्माइल कर रे थे, साथ hi साथ राहुल की तरफ भी देख क मुस्कुरा रहे थे.

राहुल भी बदले में स्माइल कर देता ह और क्यूट सी बच्ची क गुलाबी सॉफ्ट सॉफ्ट गालो को हल्का सा प्यार से नोचते हुए उससे खिलाने लगता ह.

दूर से अंशिका सब देख रही थी. राहुल की स्माइल देख वो खुद घूम सी हो गयी थी उस मुस्कराहट में. कितनी चंचल थी उसकी मुस्कान, कितनी सच्ची थी वो मुस्कान, आखिर कितने सालो बाद राहुल ऐसे मुस्कुराया होगा? कितना खुश ह राहुल, यही सब अपने दिल में सोचते हुए अंशिका बस खो सी गयी थी राहुल को देख.

अंशिका फिर वापस पलट क सर झुका क सोचने लगती ह की आखिर कब उससे सच पता चलेगा!?

क्या राहुल उससे माफ़ करेगा?

सवालों में डूबे अंशिका जाली क पास कड़ी हुई थी जिसके उस तरफ बन्दर था और अंशिका क बेहद करीब आ गया था.

रोड पे हाथ रखे अंशिका तोह सर्र झुकाए कड़ी थी पर उससे होश hi नहीं था की उसके हाथ की तरफ बन्दर अपना मुँह खोल क आगे बढ़ रहा था...

यहाँ पे इंसानो का भरोसा नहीं रहता की कोण कब क्या कर दे, फिर ये तोह जानवर ह...

बन्दर धीरे धीरे अंशिका क हाथ की उंगलियों की तरफ बढ़ रहा था.

बन्दर काटने hi वाला था की किसी ने उससे तुरंत खींच लिया, जिस क कारण अंशिका सीधे उस शख्स क सीने में सिमट गयी.

अंशिका ने फिर बन्दर को देखा और फिर उस शख्स को, उससे समझ आ गया था की क्या हुआ. शख्स को देख अंशिका अंदर hi अंदर इतनी खुश थी की शब्दों में बया नहीं कर सकते. अब भी राहुल ने hi उससे बचाया. इसका मतलब क्या था? राहुल सिर्फ नेहा को hi प्रोटेक्ट नहीं करता, उससे अपनी साड़ी बहनो की बराबर चिंता ह. बिना कोई स्वार्थ क वो हमेशा अपनी बहनो को सेफ रखता ह.

अंशिका बास टकटकी लगाए राहुल क चेहरे को कमुख भरी नज़र से देखे जा रही थी. तभी राहुल अंशिका से दूर होने लगता ह, ये देख अंशिका को ऐसा फील होता ह जैसे उस से कोई बोहत hi कीमती चीज़ छीनी जा रही हो, जैसे कुछ लूटने वाला हो, एक अजीब सा दर्द उठता ह उसके अंदर तोह अंशिका तुरंत hi राहुल की शर्ट क अंदर अपनी दो ऊँगली दाल उससे पकड़ लेती ह.

अब राहुल क लिए ये नया सन था. क्युकी अंशिका आज कल कुछ अलग सा बेहवे कर रही थी. ऐसा राहुल का मान न था.

शर्ट को अपनी मुट्ठी में भींचे हुए अंशिका राहुल के सीने को देख आगे बढ़ती ह, उसकी धड़कने एकदम ट्रैन क माफ़िक़ तेज़्ज़ थी और फिर अपनी बाहे फैला क उसको जकड़ते हुए उसके सीने में सिमट जाती ह. राहुल को आज उसने इतने सालो बाद हुग किया था. और हुग करने में जो आनंद और सुकून उससे मिला, वो अंशिका को पहले कभी नहीं मिला था.

राहुल क जिस्म से आती मर्दो की खुशबु, उसका कड़क मज़बूत शरीर, ये सब अंशिका को और भी मदहोश कर रहा था.

इधर राहुल पूरा कंफ्यूज था, साला एकदम से क्या हो गया? यही सोच रहा था वह.

दरअसल राहुल छोटी बच्ची को खिला रहा था पर तभी उसकी नज़र अंशिका पे पद गयी और उसने देखा की बन्दर धीरे धीरे अंशिका की तरफ बढ़ रहा ह तोह राहुल ने टाइम वास्ते न किये तुरंत अंशिका की तरफ दौड़ लगा दी और उससे बचाया...

पर एकदम से अंशिका ऐसा क्यों बेहवे करने लगी? राहुल ने सोचा की शायद अंशिका को गिल्ट फील हो रहा ह क्युकी उसने अभी अंशिका को बचाया. अंशिका इतने टाइम तक उस से बात नहीं करि पर फिर भी राहुल उसकी केयर करता ह शायद इसलिए अंशिका गिलटी फील कर रही थी.

राहुल अंशिका को भी प्यार करता था और हमेशा करेगा. अंशिका भले hi उस से बात नहीं करती थी. पर अंशिका ने कभी भी राहुल को गलत या उस से बदतमीज़ी से बात नहीं करि थी. और राहुल इस बात को समझता था. इसलिए अंशिका के प्रति उसके मैं में कभी कोई गुस्सा या चिढ़न नहीं आती थी. बस आता तोह केवल प्यार.

वो तोह अंशिका नेहा की पार्टनर इन क्राइम थी. नेहा से उसकी बोहत बनती थी. और नेहा ने जब जो सच्चाई बताई तब अंशिका ने राहुल से बात करना बंद की. पर उसका अपमान कभी नहीं किया. यही बात राहुल को बोहत प्यारी लगती थी अंशिका की.

अब हुग किये हुए 2-3 मिनट हो गए थे पर अंशिका राहुल को चौररने का नाम hi नहीं ले रही थी.

आस पास क लोग भी देख रहे थे. ये कोई lover's स्पॉट नहीं था. अब लोगो को क्या पता की वो भाई बहिन ह, ऐसे इतनी देरर हुग करके तोह लवर्स hi खड़े रहते ह. इसलिए राहुल को अब ावक्वार्ड लगने लगा था.

पर साथ hi साथ अंशिका का ख़ूबसूरत जिस्म आज उसने इतने सालो बाद महसूस किया था. हर्र सही जगह से उभार आ गया था उसमे. कड़क बूब्स राहुल की हालत पतली कर रहे थे. अंशिका वैसे hi कस क चिपकी थी. तोह बूब्स राहुल के सीने में दहस्से जा रहे थे.

उसकी मदहोश कर देने वाली खुस्भु, बालो से आती मनमोहक सुगंध, उसके गोर गोर हाथ अपनी पीठ पे कैसे हुए, और उसका ख़ूबसूरत चेहरा अपने सीने में महसूस करके राहुल तोह पूरा मंत्र मुग्ध हो चूका था. पर अपना आप यहाँ नहीं खोना चाहता था. उसकी बहिन उस से प्यार से हुग कर रही थी. इसलिए राहुल कोई भी बुरा विचार नहीं लाया और अंशिका की तन्द्रा तोड़ते हुए कहता ह...

"अंशिका... ी... थिंक... हमें चलना चाहिए.."

उसकी बात सुन्न अंशिका 8-10 सेकंड बाद अपनी रुवासी हुई क्यूट सी आवाज़ में बोल अपनी चुप्पी तोड़ती ह...

"B...bh...bhaii...."

बस... बस इतना सुन्न राहुल के रोंगटे खड़े हो जाते ह. आज कितने सालो बाद अंशिका ने उससे भाई कहा. अंशिका पहले राहुल को भाई कहके hi बुलाती थी. वंशु बचपन से hi उससे कुटी कहके बुलाती थी. नेहा हमेशा उससे उसके नाम से hi बुलाती थी.

सिर्फ अंशिका hi थी जो राहुल को भाई कहके बुलाती थी. जैसा की पहले बताया था की अंशिका राहुल को बोहत मानती थी अपने बड़े भाई क रूप में. आज उसके मुँह से सुन्न ने पर राहुल भी पूरा दांग रह गया.

"I'm सॉरी... I'm सॉरी... I'm सॉरी... मुझे नई पता की आप माफ़ करोगे या... या नहीं... बूत I'm सॉरी. उस दिन... उस दिन मेने देखा था... लकी से किसी ने हमको बचाया था पर में चेहरा नहीं देख पायी, फिर आपको वाशरूम में देखा मेने, आपकी खून से सनी वाइट शर्ट, और हाथ पे लगी चोट तब मुझे यकीन हो गया की आप hi थे, फिर आपको अगले दिन फॉलो किया तोह पता चला की आप सबको प्रोटेक्ट कर रहे हो... मुझे नहीं पता की सच्चाई क्या ह और aap...aap शायद मुझे बताओगे भी नहीं. Par..par में इतना जानती हु की नेहा ने जो भी बताया ह, वो पूरा सच नहीं ह. कुछ बात और भी ह जो हम सभी को नहीं पता ह... और में जानती हु की आप सही हो. आपको उस दिन क बाद से जब भी परेशानी में देखती हु न.. तोह bhai..mujhe..mujhe अंदर से बोहत दर्द होता ह. ऐसा लगता ह जैसे कोई मुझे hi चोट पहुचा रहा ह... प्लीज... प्लीज हो सके तोह.. तोह मुझे माफ़ कर देना.. I...I लव यू भाई!"

अंशिका रट हुए अपनी बात जो इतने दिन से नहीं कह पायी थी आखिर कह hi देती ह.

राहुल की आँख में भी पानी आ hi गया. अंशिका इतनी चंचल थी और इतनी ईमानदार की कुछ भी झूठ नहीं बोली सब सच सच बता दिया राहुल को.

अच्छा तोह उस दिन अंशिका ने डाइनिंग टेबल पे इसलिए राहुल की जांघ पे हाथ रखा था. शायद बात करना चाह रही थी पर हिम्मत नहीं जूता पा रही थी. पर आज सब कुछ कह दिया. राहुल को इस वक़्त अंशिका पर बोहत प्यार आ रहा था. अंशिका की वैसे भी उसमे कोई गलती नहीं थी. उसने वैसे रियेक्ट किया जिस हिसाब से उससे सच पता चला. पर उसने राहुल को कभी भी गलत नहीं कहा ना hi कुछ गलत किया उसके साथ.

हां बात ज़रूर नहीं की अंशिका ने, थोड़ी बोहत गलती थी इसमें, पर उससे सच भी नहीं पता ह इसलिए राहुल ने इससे गलती नहीं माना.

राहुल ने अंशिका की बाहो को पकड़ क उससे थोड़ा अपने सीने से हटाया और उसके चेहरे को देखते हुए कहा...

"इसमें तेरी कोई गलती नहीं ह, तूने तोह वही किया जो तुझे सही लगा, तूने कभी भी मेरा अपमान नहीं किया. और तुझे सच्चाई भी नहीं पता पर फिर भी आज तुमने मुझे सॉरी कहा और गले से लगाया... है की नहीं??? जब तू ऐसे सॉरी कहेगी तोह भला कोण सा ऐसा भाई होगा जो अपनी बहिन को ऐसे सॉरी बोलने पर माफ़ न करे... हम्म?? और रही बात तुम सब को प्रोटेक्ट करने की तोह वह मेरा फ़र्ज़ ह और ज़िम्मेदारी भी और में तुम सभी को चाहता हु, अपनी बहनो को भी और अपने फॅमिली के सदस्यों को भी...

ये बात नेहा को मत बताना ok? की मेने तुम सब को उस दिन प्रोटेक्ट किया.

और हनन.... लव यू तू अंशु!! "

राहुल इतना बोल अंशु की चीन पकड़ क उसके माथे पे किश कर देता ह.

बस... बस इतना राहुल के करते hi और उसके मुँह से "अंशु" सुनते hi अंशिका की आँखों से आंसू झड़ने लगते ह. और सिसक के रट हुए भाई भाई कहके ज़ोर से गले लगा लेती ह.

दोनों भाई बहनो का भारत मिलाप चल रहा था इतनी देरर से की इनको खबर hi नहीं थी की 2 आँखे इनको इस वक़्त गुस्से में देख रही थी...

कोण था वो? क्या होगा आगे? अंशु और राहुल के रिलेशन्स में क्या बदलाव आएगा? जान ने क लिए बने रहिये.

आल्सो थैंक्स ा लोट गाइस फॉर सपोर्टिंग में व्हेन ी वास् रियली सिक. कीप सपोर्टिंग!!

:डेरिसीवे:
 
अपडेट-17

अब तक...

बस... बस इतना राहुल के करते hi और उसके मुँह से "अंशु" सुनते hi अंशिका की आँखों से आंसू झड़ने लगते ह. और सिसक के रट हुए भाई भाई कहके ज़ोर से गले लगा लेती ह.

दोनों भाई बहनो का भारत मिलाप चल रहा था इतनी देरर से की इनको खबर hi नहीं थी की 2 आँखे इनको इस वक़्त गुस्से में देख रही थी...

अब आगे...

दोनों एक दूसरे की बाहो में आस पास की नज़रो से बेखबर अपने प्यार का इज़हार कर रहे थे. पर दो आँखे इनको इस वक़्त घृणा से देख रही थी. काफी देरर जब हो गयी इनको ऐसे hi तोह राहुल ने अपने सीने से लगी हुई अंशिका को अलग किया. अंशिका के गालो पे आसुओ के निशाँ साफ़ बतला रहे थे की कितना रोई है अभी वह, उसकी आँखे भी भीगी हुई थी और पलकों में छोटी छोटी आसुओ की बूंदे सजी हुई थी. तभी राहुल ने पलटकर देखा तोह उससे वंशु और नेहा साथ में कड़ी हुई दिखी.

अंशिका ने भी दोनों को देख लिया.

जहा वंशु खुश नज़र आ रही थी तोह वही दूसरी तरफ नेहा गुस्से से लाल थी. पलटकर नेहा सीधे कार की तरफ बढ़ गयी. और ज़ू से बाहर निकल गयी.

सभी लोग समझ गए थे की नेहा अभी गुस्से में है. और उन्हें ये भी पता था की उसके पीछे कारण क्या ह. अब नेहा को एप्रोच कैसे करे यही ख्याल तीनो के मैं में था.

"देखा अंशु! बस इसलिए, इसलिए में कुछ नहीं कहता, तुझे शायद मुझ से बात नहीं करनी थी..."

राहुल के इतना कहते hi अंशु ने अपने हाथ राहुल के लबो पे रख दिए...

"नहीं भैया!! आज आप से बात करके मेने अपने जीवन का सबसे सही डिसिशन लिया है. आज आप सोच भी नहीं सकते की में कितनी खुश हु, आप से दुबारा पहले जैसे बात कर सकती हु, रही बात नेहा की तोह में उसको देख लुंगी और समझा भी दूंगी"

अंशु ने राहुल की बाजू को कस्ते हुए कहा...

व् (राहुल के पास आते हुए) : कुटी!! तुम और छोटी की सलाह हो गयी? चलो... बोहत अच्छा हुआ. में भी बोहत खुश हु. आखिर कार छोटी को कुछ अकाल तोह आयी, अब पहले की तरह सब नार्मल हो गया. पर शायद नेहा नहीं ह. चल के बात करनी पड़ेगी उस से. कुटी शायद तुमको सुनाने वाली ह बोहत अभी... में पर उससे तुम पर हावी होने नहीं दूंगी. चल मेरे साथ.

र: नहीं दी! आप प्लीज कुछ मत बोलना.

फिर सभी लोग कार की तरफ आते ह, नेहा वही कड़ी हुई थी.

उनके आते hi नेहा जो अपना गुस्सा रोके हुए थी पूरा बरसाने लगती है.

न (गुस्से में राहुल से) : मिल गयी ख़ुशी? मिल गया चेन्न?? अंशिका दी को भी अपने साइड कर लिया...

यही तोह प्लान था न तुम्हारा शुरू से? हन्नन?? बोलते क्यों नहीं कुछ...

कैसे बोलोगे... रेंज हाथो पकडे जो गए... अब तोह बड़ी ख़ुशी हो रही होगी न, सबको अपने साइड करके. अकेली हो गयी अब तोह में...

यही तोह तू चाहता था... ह न??

तू... तू...

नेहा को बोलते बोलते रुलाई आ जाती ह और उसकी आँखों से आसुओ की धरै बहने लगती ह. इधर वंशु और अंशिका उससे चुप कराती ह तोह और भड़क जाती ह नेहा...

न (रट हुए) : और आप दी!!! बड़ी hi तेज़्ज़ निकली आप तोह... आपने.. आपने.. मुझे धोका दिया?? मुझे? क्या बिगाड़ा था मेने आपका दी? बस आपका साथ hi तोह था मेरे पास, वो भी नहीं रहा अब...

और तुम... तुम सब को छीन लो मुझसे ह न?? यू बास्टर्ड!!

व् (दांत ते हुए) : नेहा... मंद योर लैंग्वेज.

तुम्हे पता भी ह क्या बोल रही हो...

राहुल ने वंशु को बीच में hi रोक दिया. शायद वो चाहता था की एक बार में hi नेहा का गुस्सा पूरा शांत हो जाए. यदि बुरा बोलने से नेहा को शान्ति मिल रही है तोह राहुल तोह हस्ते हस्ते राज़ी था.

अंशिका को भी बुरा लगा उसने फिर नेहा को साइड में ले जाके अपने ढंग से समझाया.

ा: देखो नेहा. तुम जो ये कह रही हो की मैंने तुम्हारा साथ चोर दिया तोह ये गलत बात ह. में अब भी तुम्हारे साथ हु नेहा बस बात ये है की आज मुझे कुछ... कुछ एहसास हुआ, और भाई... भाई गलत नहीं है...

न: आपको वो सही लग रहा है? दी? आप इतनी अंधी कैसे हो सकती हो??

ा: देख नेहु... तुझे वह बात नहीं पता जो मुझे पता है. इसलिए तू कुछ भी बक रही है. और में भी इसमें तेरे साथ थी पहले. पर आज मुझे कुछ नया पता चला, आज मुझे एहसास हुआ की भाई गलत नहीं है. मुझे सच्चाई नहीं पता. पर में जानती हु वह गलत नहीं ह.

न: किसी सच्चाई??

ा: वही जो तूने मुझे और बाकी सब को बताई थी...

न (चौंकते हुए) : डीई!!! आप... अआप... मुझपे शक कर रही हो? की कही मेने आप सभी लोग को झूठ तोह नहीं बताया..!??

ा: नहीं नेहु ... तेरी बात पे पूरा यक़ीन है. मुझे ये लगता ह की बात कुछ और भी है. तेरी बात को कभी भी में झूठ नहीं मानूंगी नेहु... मुझे तुझ पर विश्वाश है. अब प्लीज रोना बंद कर..

मेरी बात समझ, आज भाई को दुबारा पाकर में बोहत hi खुश हु. पर इसका ये मतलब नहीं ह नेहु की में तुझे भूल गयी या तुझसे दूर जा रही हु. तू अपनी जगह सही है. पर अब मुझे वापस से भाई से खफा होने के लिए मत कहना नेहु. वो मुझसे नहीं होगा.

I'm रियली सॉरी! बाकी में तेरे साथ हमेशा हु...

न: झूठी तस्सल्ली मत दो दी! ी गेट आईटी नाउ. आप सभी मिले हुए हो. जस्ट गेट अवे फ्रॉम में...

नेहा उठ के जाने लगी थी की वंशु ने उससे पकड़ लिया और साइड ले जाके बात करने लगी.

अभी माहौल बोहत hi तंग हो गया था. सिचुएशन बोहत खराब थी. मन मुटाव पैदा हो गया था सबके अंदर. कहा सब साथ में रहने वाले भाई बहिन आज एक दूसरे से लड़कर अपनी अपनी भड़ास निकल रहे थे. कोई किसी की बातो से हर्ट हो रहा था तोह कोई किसी की शकल तक देखना पसंद नहीं कर रहा था.

एक परिवार के हस्ते खेलते हुए चेहरे आज यु झगड़ रहे थे जैसे सदियों पुरानी दुश्मनी चली आ रही हो.

र (रोटी हुई अंशिका के पास जाते हुए) : मुझे अकेला चोरर दिया होता अंशु. देखा क्या हो गया...

ा : कभी नहीं भाई. आप हमेशा से अकेले hi तोह हो... अब और नहीं.

आपको कही भी अकेले जाने नहीं दूंगी. कोई भी काम अकेले करने नहीं दूंगी. आपका साया बन के रहूंगी. में नहीं चाहती की आप अकेले फिरसे काटो के रास्ते में जाओ और सभी के दुःख दर्द अकेले सहो..

में आपके साथ hi रहूंगी. नेहा कभी न कभी समझ जाएगी, जब उससे सच पता चलेगा तोह वह भी आपके पास लौट आएगी देखना...

र (मैं में) वही तोह में नहीं चाहता अंशु. यदि सच उससे पता चल गया. तोह परिवार बिखर जाएगा अंशु. बिखर जाएगा... सब कुछ...

"आप कहा खो गए भाई!?"

र: अरे कुछ नहीं...

इतने में वंशु वापस नेहा को समझाते हुए लाती है और गाडी में बैठ के राहुल को गाड़ी चलाने का इशारा करती ह.

इस बार अंशिका राहुल के साइड से बैठी हुई थी.

जबकि वंशु नेहा को संभल रही थी पीछे.

वंशु ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा

"कुटी सीधा घर चलो अब..."

ा: क्यों दी!? फोर्ट नहीं चलना क्या!?

उसकी बात पे वंशु उससे देखने लगी... तोह अंशु समझ गयी की नेहा का अब मूड ऑफ है और घर जाना ह उससे अब.

राहुल गाडी घर की तरफ मोड़ देता ह...

घर पहुँच के सभी लोग अपने अपने कमरे में चले जाते है.

राहुल के माँ और डैड आराम कर रे थे, तोह उसकी माँ ने hi गेट खोला था और सवाल किया था की सभी शाम को आने वाले थे फिर दिन में क्यों लौट आए!? फिर अंशिका निशा को साड़ी बात बता देती है और राहुल के साथ उसके रूम में आ जाती ह.

वंशु नेहा के रूम में चली गयी थी उसको कम्फर्ट फील करवाने.

अंशु राहुल के बीएड पे पसरी हुई वही कपडे पहने उससे पूछती ह...

"भाई... क्या आज जो कुछ हुआ. वो सही हुआ!?"

राहुल अपने कपडे बदल रहा था. इसलिए वो अंशु के सामने hi शर्ट उतार देता ह जिस से अंशु की आँखे फटी की फटी रह जाती ह. उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी राहुल की बॉडी देखते हुए. मदहोशी छाने लगी थी अब उसपर.

"मेरे हिसाब से तोह ये सब नहीं होना चाहिए था..."

राहुल ने एक डेली उसे की टी शर्ट डालते हुए कहा. और फिर लोअर पहन ने क लिए वो वाशरूम में जाने लगा. तोह अंशिका ने टोक दिया...

"क्या भाई! आपने शर्ट बदल ली, अब जीन्स बदलने में क्या इतना शर्मा रहे हो मेरे सामने..."

तोह राहुल बस स्माइल कर देता है और वापस मिरर के सामने आके जीन्स उतार देता ह. एकदम एथलेटिक लेग्स देख क अंशु तोह पूरी निहाल हो गयी थी. बस कब वो राहुल पे लपक के उसको अपनी बाहो में समेत ले यही ख़याल आ रहा था उससे.

राहुल ने फिर लोअर पहना और अंशु के साथ बीएड में लेत गया.

दोनों भाई बहिन पुराने गीले शिकवे दूर करते रहे और बाहो में बाहे दाल वही सो गए थोड़ी देरर.

रात में सभी ने डिनर किया. नेहा का मैं नहीं था वो अपने रूम में स्केच बना रही थी एक रोटी हुई गर्ल का. आज उसके दिल में चोट जो पहुची थी. आज उसका मैं उदास था. शायद यही बात वह अपनी कला में दर्शाना चाह रही थी. और अपना ध्यान भटकना छह रही थी.

राहुल और अंशिका जब नीचे जा रहे थे तोह उन्होंने ये देख लिया.

फिर वंशु को बुलवा के नेहा के रूम में भेजा ताकि वो उससे मनाए...

वंशु के कहने पर नेहा मान गयी और नीचे चल दी.

उसके जाने के बाद राहुल ने अंशिका को जाने के लिए कहा और खुद नेहा के रूम में चला गया.

थोड़ी देरर बाद राहुल भी आया सभी ने डिनर किया और फिर वापस सब अपने रूम में जाने लगे. राहुल ने अंशिका को बोल दिया की रात में नेहा के साथ सोये और उससे पूरी तरह समझाए. वंशु वापस से राहुल के रूम में आ गयी और आज की बीती हुई बातो को भुलाने के लिए राहुल को कम्फर्ट देने के लिए उससे वही रोज़ की तरह किस्सेस करने लगी.

इधर नेहा जब अपने रूम में आयी तोह ड्राइंग बुक देख के उसकी आँखें चौड़ी हो गयी....

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आज के लिया इतना hi गाइस!!

आने वाले अपडेट या उसके अगले अपडेट में कुछ पता चलेगा आपको.

तनीषा के बारे में...
 
अपडेट-18

अब तक...

थोड़ी देरर बाद राहुल भी आया सभी ने डिनर किया और फिर वापस सब अपने रूम में जाने लगे. राहुल ने अंशिका को बोल दिया की रात में नेहा के साथ सोये और उससे पूरी तरह समझाए. वंशु वापस से राहुल के रूम में आ गयी और आज की बीती हुई बातो को भुलाने के लिए राहुल को कम्फर्ट देने के लिए उससे वही रोज़ की तरह किस्सेस करने लगी.

इधर नेहा जब अपने रूम में आयी तोह ड्राइंग बुक देख के उसकी आँखें चौड़ी हो गयी....

अब आगे...

नेहा बोहत देरर से अथक प्रयास कर रही थी, एक रोटी हुई स्त्री का चेहरा बनाने में पर बना नहीं पायी. अपने जज़्बातो को शायद पेंसिल से पेपर पे बतलाना चाह रही थी की क्या उथल पुथल मची है अभी उसके दिमाग में. डिनर करने के बाद जब लौट के नेहा अपने रूम में आयी तोह ड्राइंग बुक पे एक बोहत hi सुन्दर सी स्त्री का खिल खिलाता हुआ चेहरा बना था.

अब ये चेहरा कहा से आया? किसने बनाया ये स्केच? कोण था जो नेहा की जरर हाज़िरी में ये सब किया?

सवाल कई थे... जवाब एक hi था

आखिर पूरे घर में है hi कोण जो कला में होनहार है? ज़ाहिर सी बात थी राहुल hi था. राहुल hi अभी नेहा के कमरे में आया था और उसी ने ये सुन्दर कला को चित्रित किया.

एक आम परिवार में यदि कोई भाई उसकी बहिन के लिए इतना कर दे तोह बहिन तोह ख़ुशी से फूली न समय और हो सकता है आपसे पैट भी जाए हहै!!

पर जनाब ये तोह राहुल की बहिन थी. स्केच देखते से hi नेहा का गुस्सा चरम सीमा पे पहुँच गया और उसने ड्राइंग बुक से पेपर फाड़ दिया और पूरा मरोड़ के पास में hi स्टडी टेबल पे रखे एक पेन होल्डर में ठूस दिया.

गुस्से में नेहा अपने hi कमरे में इधर से उधर हो रही थी.

N(mann में) : बास्टर्ड!! फुककक! क्या समझता क्या है अपने आप को? कोई कुछ बोलता क्यों नहीं है इसको? अरे परिवार का चिराग है तोह क्या जो मैं में आएगा वो करेगा... उसकी हिम्मत कैसे हुई? माँ डैड भी मिले हुए है, कभी कुछ नहीं बोलते इतना सब कुछ होने के बाद भी, सब उसको चाहते है... क्या में झूठी हु? ऑब्वियस्ली नॉट!! मेरे सामने hi तोह वो सब हुआ था. आ गया बड़े अच्छे से स्केच बनाने इधर. सोच रहा होगा की में सब भूल जाउंगी और इम्प्रेस हो जाउंगी. हम्फ!! बेवक़ूफ़ थोड़ी न हु. और वो सब तोह कभी भी नहीं भूल सकती में...

इधर नेहा यही सब सोचते हुए अपने पूरे रूम में चक्कर लगा रही थी तोह वही अंशिका उसके कमरे के दूर पे खड़े उससे देख रही थी.

जब दोनों की निगाहें एक दूसरे से मिली तोह नेहा चुप चाप अपने बीएड पे बैठ गयी और उसने कुछ बोलना मुनासिब न समझा. अंशिका को भी पता था अभी नेहा क्रोध में है और क्रोध में अक्सर आदमी आप खो बैठ ता है और वो निर्णय ले लेता है जो उसके जीवन में आगे चल के मुसीबत का कारण बनते है. नेहा को चिंतित देख अंशिका उसके पास आके बैठती है और बड़े hi प्यार से उस से बात कहती है...

"नेहु देख. I'm रियली सॉरी. और शायद सॉरी से कुछ नहीं होगा ी क्नोव. बूत प्लीज ट्रस्ट में नेहु. हम दोनों एक दूसरे को कब से समझते आ रहे है. कोई भी गलती हम में से किसी से भी होती थी तोह भी हम एक दूसरे को समझते थे न?

ी क्नोव मुझसे गलती हुई है.

गलती ये है की तुम्हारी बात से मुकर गयी. जो चीज़ हमें साथ में करनी थी उस से में पीछे हट गयी.

इसलिए तुम गुस्सा हो.... जो की... जो की लाज़मी है नेहु. तुम्हारा गुस्सा होना बनता है. पर एक बार मेरी बात सुन्न लो प्लीज.

मेरे ऐसा करने के पीछे भी कारण है नेहु, तुमको वो बातें नहीं पता है जो मुझे पता है

और में वो साड़ी बातें तुम्हे नहीं बता सकती, में मजबूर हु.

आज इतने सालो बाद वापस जब भाई से बात हुई तोह मुझे पता चला की मेरे जीवन में क्या कमी थी. आज में पूरी हो गयी. पर तेरी यदि नाराज़गी अब भी रही तोह फिर से अधूरी हो जाउंगी.

तू ये कभी मत सोचना नेहु की मेरे भाई को पाने के बाद तुम अकेली हो और तुम्हारी परवाह किसी को नहीं है.

में हमेशा तुम्हारे साथ हु और रहूंगी पर बस तुम अब भाई से खफा होने के लिए मत कहना.

जीवन में जब भी तुम्हे मेरी ज़रुरत पड़े तोह बस एक बार पुकारना में हाज़िर हो जाउंगी.

एंड वन्स अगेन सॉरी!!"

अंशिका अपनी आँखों में पानी लिए ये बाते नेहा को कहती तोह नेहा भी इधर पिघल गयी. उसकी सबसे जिगरी बहिन जो थी अंशिका. जैसे राहुल और वंशु बचपन से क्लोज थे वैसे hi अंशिका और नेहा थे.

आज अपनी प्यारी बहिन की बोली सुन्न नेहा का सारा गुस्सा छूमंतर हो गया और उसने भी रट हुए अंशिका को अपने गले से लगा लिया.

न : दी! में आपको माफ़ कर सकती हु. आपको में बचपन से जानती हु. यदि कोई बात ह जो आप नहीं बता पा रही तोह it's ok. पर उसको कभी भी माफ़ नहीं karungi...kabhi नहीं ... हरगिज़ नहीं.

ा (मैं में) : तुम उसको माफ़ करो... तुम इस ओहदे पे नहीं हो नेहु. राहुल यदि तुम्हे माफ़ कर दिया तोह ये तुम्हारे लिए सबसे बड़ी बात होगी.

"अच्छा चलो! अब सो जाते है..."

अंशिका ने नेहा को अपनी बाहो से आज़ाद करते हुए कहा. लाइट ऑफ की और दोनों फिर सोने चल दिए.

अगली सुबह जब राहुल की आँख खुली तोह देखा की वंशु उसके बगल से लिपटे हुए नींद के आग़ोश में है.

पीछे खिड़की से आती हुई सूरज की हलकी किरण वंशु के चेहरे पे पद रही थी. उसके गुलाबी और रुई से भी नरम गाल, गुलाबी रसीले होंठ, काली और बड़ी बड़ी सुन्दर पलके, काले चमकते हुए लम्बे बाल जो उसकी पीठ तक बिखरे थे, भगवान् का दिया हुआ अनमोल ख़ूबसूरत चेहरा, बड़े बड़े मुलायम स्तन जिनपे राहुल का एक हाथ अभी भी रखा हुआ था, पतली गोरी टांगें जो उसने एक राहुल के ऊपर राखी हुई थी, मुलायम हथेली जो राहुल के दाए गाल पे थी...

सच में वंशु किसी पारी से काम नहीं थी. ये नज़ारा देख राहुल का टेंट जो सुबह हर्र रोज़ बनता था आज कुछ ज़्यादा hi ुचा बन गया था. कितनी प्यारी है उसकी बहिन, जहा आज सभी लोग स्वार्थ देखते है वही उसकी बहिन वंशु निस्वार्थ उस से प्रेम करती है और उसके लिए कुछ भी कर जाए. वंशु का अनमोल प्यार देख और उसका सोता पा के राहुल को आज बड़ा प्यार आ रहा था उस पे.

उसने प्यार से वंशु क गाल को नोचा और फिर एक किश कर दिया.

तभी उससे कुछ ख़याल आया जिस से राहुल हड़बड़ाते हुए उठा और अपना सर पकड़ के बैठ गया...

"ओह्ह्ह्ह शीट्ट्ट्ट!!! में भूल गया... फुककक!!! कैसे??? कल की बात के कारण शायद....

तनीषा दी ने कहा था की जबतक चोट सही न हो जाए में रोज़ उनके पास चेकउप के लिए औ...

और कल hi में भूल गया. शित्त्त!

पक्का नाराज़ है मुझ से वर्ण उनका कॉल आ जाता. अब क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में. की कितना स्वार्थी हु में...

कही बुरा न मान गयी हो. पर ऑब्वियस्ली बुरा मान गयी ह वह... कॉल तोह करती वर्ण, और कॉल पे hi मुझे खरी खोटी सुनाती. पर न तोह कॉल आया न कोई मैसेज, न कोई रिमाइंडर... दमन आईटी! अब मनाना पड़ेगा. आज जाता हु शाम को, या सीधे रात को उनके घर hi जाता हु, कुछ प्रेजेंट भी गिफ्ट कर दूंगा. हां ये सही रहेगा..."

राहुल ने डीडे किया की आज वह रात में तनीषा से मिलेगा...

सभी लोग फिर बारी बारी उठते है और नाश्ता कर अपने रूम्स में आते है फिरसे. इधर नेहा कर्रम उठा के ले आती है और अंशिका को वंशु को बुलाने के लिए भेज देती है की इसी बहाने टाइम पास हो जाएगा...

तभी राहुल को ऋचा का कॉल आ जाता ह. कॉल पे ऋचा का नाम वंशु ने देख लिया था पर कुछ बोली नहीं ...

र (कॉल उठाते हुए) hello? हं बोलो ऋचा...

ऋ: ........

र: hello!??

ऋ (शर्माते हुए) : he..hello...

र: हं ऋचा बोलो...

ऋ: ummm...ke..kese हो राहुल!?

र: में? में बढ़िया हु... बोल न क्या बात है? कोई ज़रूरी काम?

ऋ: ज़रूरी काम होगा तभी कॉल करुँगी क्या में राहुल?

र: किसी बाते करती ह ऋचा. तू जब चाहे तब कॉल कर सकती ह.

ऋ: एक्चुअली! आज मैसेज आया अपने क्लास के व्हाट्सप्प ग्रुप पे... पहली कंपनी आने वाली ह. 2 दिन बाद...

र: ओह्ह्ह! मेने चेक नहीं किया व्हाट्सप्प. अच्छा! ठीक है. थैंक्स बी थे वे.

ऋ: थैंक्स बस!?

र: और क्या चाहिए हमारी मैडम को?

ऋ: उम्... Ummm....kuch.. कुछ नई

र (मुस्कुराते हुए) : शाम को आता हु तेरे घर. आंटी से और तुझ से भी मिल लूंगा, वही कंपनी के बारे में डिसकस कर लेंगे.

ऋ (खुश होते हुए) : ohh..ohkkk... में वेट करुँगी... ब्बये...

र: सूरे! Bye!!

कॉल कट करने के बाद वंशु ने आखिर पूछ hi लिया...

"कोण थी कुटी!? गर्लफ्रेंड??"

र : नहीं दी! ऑब्वियस्ली फ्रेंड ह मेरी. बड़ी अच्छी दोस्त है. यही तोह है बस कॉलेज में जिस से मेरी बात चीत होती ह. बाकी कोई नहीं ह.

"हनन हनन!! पूरे कॉलेज में इतने लोग और एक लड़की बस तेरी दोस्त ह...

वो भी बोहत अच्छी वाली...

समझ रही हु में"

चिढ़ाते हुए वंशु ने कहा...

"अरे दी! आपसे झूठ बोलै है कभी? वे अरे फ्रेंड्स"

राहुल वंशु को गले लगाते हुए कहता है और कान में धीरे से मुस्कुराते हुए कहता ह...

"आपको जलन हो रही है क्या दी?"

राहुल की गरम साँसे और उसकी धीमी सी आवाज़ सुन्न वंशु की धड़कन तेज़्ज़ हो जाती है और बात भी सही थी, वंशु को जलन hi तोह हो रही थी ...

"हँ!!!? Me..mein..mein क्यों जेलस होने लगी भला!?"

हड़बड़ाते हुए वंशु ने कहा...

तोह राहुल ने वंशु के एअर लोबेस अपने मुँह में ले लिए और हल्का सा दातो से काट दिया...

"आअह्ह्ह्हह ssssssssss" वंशु की सिसकी निकल गयी राहुल की इस हरकत पर , उससे अंदाजा नहीं था की राहुल अग्ग्रेसिवे हो जाएगा...

गलती भी तोह थी उसकी, राहुल से झूठ बोल रही थी की वो जेलस नहीं है.

"अच्छा बाबा! ठीक... ठीक... में.. में जेएलओसी फील कर रही थी ok? और हाँ सिर्फ फ्रेंड्स hi रहना. ज़्यादा गुल छर्रे उड़ाए तोह देख लेना फिर हम्फ!!"

वंशु ने अपनी बात को एडमिट किया..

"ये हुई न बात. झूठ नहीं बोलते. चलो अब प्यारी सी किसी देदो एक..."

राहुल ने अपने होठ वंशु के होंठ की तरफ झुकते हुए कहा.

आज राहुल की अग्ग्रेस्सिवेनेस्स देख क वंशु खुश थी. उसने फ़ौरन राहुल की कालर पकड़ी और अपने गुलाबी होंठ जड़ दिए उसके होंठो पर.



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दोनों मीठे चुम्बन में खोए हुए थे की अंशिका नेहा क रूम से निकली और वंशु दी को बुलाने आयी थी कर्रम खेलने के लिए. पर जब उसने जो देखा तोह मानो उसके परर जैम से गए राहुल के रूम क बहार.

न उसके मुँह से आवाज़ निकली न उसकी पलके झपकी. उसकी आँखों के सामने ऐसा मंज़र था जिससे देख के वो अचंभित सी मूर्ति बने कड़ी हुई थी.

सामने राहुल और वंशु दोनों लिप तो लिप किसिंग में डूबे हुए थे. किश वाक़ई बोहत पैशनेट था.

अंशिका बड़ी हिम्मत करके वापस पीछे हो गयी और दुबारा से रूम में आने लगी मगर इस बार उसने आवाज़ पहले hi दे दी थी.

आवाज़ सुन्न राहुल और वंशु अलग हुए और वंशु राहुल को आंख मारते हुए अंशिका क साथ नेहा के कमरे में चली गयी.

जाते जाते अंशिका राहुल को घर रही थी और मासूम सा चेहरा बनाए हुए थी. राहुल ने उससे इग्नोर किया और अपने रूम में आराम करने क लिए लेत गया.

शाम को उससे ऋचा के घर जाना था और फिर रात में तनीषा से चेक उप करवाने भी.

आज के लिए इतना hi गाइस!!!
 
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