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- Dec 5, 2013
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अपडेट-28
अब तक..
ब्रा न पहने होने के कारण नरम मुलायम दूध का एहसास राहुल को भी पागल कर देता है और वो बस अपना सर दूध की दरार में घुसाया रहता है और गरम गरम साँसे छोड़ता रहता है.
निशा भी उसकी सासो से पागल होक उसके माथे को चुम्बनों से भर देती है और पुचकारते हुए उससे प्यार करने लगती है.
शायद ये रात लम्बी होने वाली थी, ममता के अलावा शायद कोई और भी चीज़ थी जो निशा पर हावी हो रही थी...
क्या थी वो!?
अब आगे...
राहुल तोह बेचारा आज जो भी हुआ उसके कारण काफी साद और फ़्रस्ट्रेटेड था. शायद इसलिए वो अपनी माँ को प्यार जाता रहा था. पर निशा तोह पहले hi राहुल को नज़दीक पाकर मदहोश हो जाय करती थी.
और आज जब राहुल hi पहला हमला कर दिया तोह काउंटर अटैक भी तोह करना पड़ेगा न!? माँ की ममता पे कामेक्छा अब भारी होने लगी थी.
निशा ने अब सोचना समझना बंद कर दिया था और केवल फ्लो के हिसाब से चल रही थी.
हाथ को पीछे ले जाते हुए उसने राहुल के सर के बालो को थामा और दबाव बनाते हुए अपने छूछीयो पर राहुल का मुँह घुसाने लगी.
तभी राहुल ने एक किश और जड़ दी क्लीवेज पे. रात में ये दोनों माँ बेटे के बीच केसा खेल चल रहा था ये बताना मुश्किल था.
राहुल के किश करते hi निशा की आँखें बंद हो गयी और एक सिसकी निकल गयी. जो शायद राहुल ने गौर नहीं करि क्युकी वो तोह बस प्यार करने में लगा था.
राहुल का पप्पू भी खड़ा हो चूका था, पर उसका ध्यान पप्पू पे बिलकुल भी नहीं था. सिर्फ अपनी माँ के नरम छूछीयो में वह मुँह घुसाया हुआ था.
राहुल ने बिना कुछ सोचे समझे एक हमला और किया...
उसने अपनी गरम जीभ निकाल के सीधा निशा के क्लीवेज की दरार में घुसा दी.
"Ssssssssssssssssssss"
बेचारी निशा सिसकी लिए बिना रह नहीं पायी.
आखिर कितनो सालो के बाद किसी ने उसके उरोजों पे ऐसे दुबारा जुबां फिराई थी.
राजेश अब कोई भी फोरप्ले नहीं करते थे, बस 5 मिनट की चुदाई और काम ख़तम. पर निशा हमेशा तड़पती थी इस प्यास के लिए.
आखिर उसका भी तोह मैं करता था की कोई उसके दूध के साथ खेले, उन्हें छाते, चूसे, दबाये...
पर कई सालो से उसके स्तन पे मानो कर्फ्यू लगा हुआ था.
आज इतने साले बाद किसी ने उसके क्लीवेज को चूमा और छाता था.
और वो भी उसके बेटे ने जिसके नाम की निशा ने मुठ मारी थी.
उत्तेजित होते हुए निशा ने राहुल को और कस के अपने दूध पे दबा लिया. और उसका चेहरा पे हाथ फेरते हुए पुचकारने लगी...
"ाआरररीीे मेरा बेटू...
मेरा बच्छाए....
आजा अपनी मम्मी के पास...
आजा...
नई हुआ सिलेक्शन तोह क्या होता है?
अगली कंपनी में हो जाएगा...
हम्म्म!??"
राहुल भी हम्म कहते हुए क्लीवेज पे अपनी जीभ फिराता रहता है.
शायद अब उसपे खुमारी छाने लगी थी. और अब वो किसके साथ है और क्या कर रहा है ये भी भूलने लगा था.
वंशु के साथ तोह वो रोज़ ये सब करता hi था, वही सोच के आज भी राहुल उत्तेजित होते हुए निशा की गर्दन पे पहुँच गया और जुबां से चाटने लगा.
बस!!! ये निशा का वीक पॉइंट था.
जो अनजाने में राहुल ने खोज लिया.
निशा की मुँह से एक तेज़्ज़ आठ निकली और उसने फौरन राहुल की गर्दन पे चाटना शुरू कर दिया...
दोनों माँ बेटे एक दूसरे की गर्दन का स्वाद ले रहे थे.
हलकी हलकी आह की आवाज़े कमरे में हो रही थी.
की तभी राहुल एक स्टेप और आगे बढ़ गया और अपनी माँ के नरम दूध को जकड लिया.
"आअह्ह्ह" निशा ने फौरन राहुल के हाथ पे हाथ रख दबा दिया.
आज इतने सालो के बाद किसी ने उसके दूध पे अपने हाथ लगाया था.
शायद अब वो इलाका वीरान नहीं रहेगा.
"सष्ठ आअह्हह्ह्ह्हह
ाएलईए मेरा बाछूउ..
मम्मी का दुद्दू पसंद है बेतु!?
पीयेगा मम्मी का दुद्दू!?"
शायद निशा पूरी तरह अब मदहोश हो चुकी थी. नीचे से उसकी मुनिया तोह पहले hi पानी छोड़ चुकी थी.
राहुल का भी बुरा हाल था.
पेण्ट में टेंट जो बन गया था.
निशा उत्तेजना में अपने कंधो से निघ्त्य हटा देती है. ब्रा तोह वो पहनती नहीं थी.
उसने अपने दूध को आज़ाद किया और झटके से राहुल का चेहरा पकड़ जे अपने बाए दूध के भूरे निप्पल को राहुल के मुँह में ठूस दिया.
"आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.............
Sssssssssssssssssssssssssssss.......
ले बेतुउउउउ.....
पी ले दुद्दू.....
अपनी मम्मी का दुद्दू..........
इनमे दूध नहीं है पर इनको चूस दाल बेतु....
जोरर जोरर से चूस मेरा बाछहा...
Aahhhh......ufffffff.....ssssssssssssss
आआआआह्ह्ह्हह्ह haaaaaaaaaaaaaassssss
ऐसे hi बेतु ....."
निशा राहुल को अपने दूध चुसवाते हुए उससे बिस्तर पे लिटा देती है और खुद भी उसकी तरफ करवट लेके लेत जाती है.
दूध चूस चूस के राहुल ने निप्पल बड़े कर दिए थे. और दबा दबा के उसके दूध भी लाल हो गए थे. ऐसे hi चुसाई करते हुए दोनों कब नींद में चले जाते है दोनों को hi नहीं पता चलता.
सुबह निशा की आँख पहले खुलती है और जो वो देखती है उस से झेप सी जाती है.
वो बीएड पे अधनंगी और उसका एक छूछा राहुल के मुँह में था. हालत देख के उससे कल की बात याद आती है और फिर वही ग्लानि के भाव उत्त्पन्न होने लगते है.
"ये क्या कर दिया निशा तूने!? किसी माँ है तू!? अपने बेटे का फायदा उठा रही है?"
पर तभी उसकी नज़र राहुल के सोते हुए चेहरे पे चली जाती है जो बड़ा hi प्यारा लग रहा था सोते हुए और चुच्ची को मुँह में hi लिया हुआ था.
"क्या गलत किया मेने? मेरा बीटा है.
पहले भी तोह पीटा था न मेरा दूध?
तोह अब पी लिया तोह क्या गलती हो गयी?
वो जब चाहे पिए. इतना सब कुछ करता है हमारे लिए तोह क्या में इतना नहीं कर सकती? हां! उससे भी तोह पसंद आया न? तभी तोह देखो... कैसे मुँह में लिया है अभी तक. और मुझे भी अच्छा लगा. तोह बुराई क्या है इसमें? हां! राहुल का इनपे हक़ है. उससे अच्छा लगता है तोह मुझे किसी आपत्ति?"
निशा ऐसा सोचते हुए विरोधी मैं को शांत कर देती है पूरी तरह.
और राहुल को यु देख उससे उसपे बड़ा स्नेह आता है और झुक के उसके गालो को चुम्बनों से भर देती है. और दूध को भी उसके मुँह में hi रहने देती है.
"देखो तोह... छोड़ने का नाम hi नहीं ले रहा. एक इसके पिता है जो इन् दूध को हाथ तक नहीं लगाते और एक ये है की जबसे कल से मुँह में लिया है तोह अब तक नहीं छोड़ा... चूस ले बीटा चूस ले, पर अब दूध नहीं निकलेगा इनमे से.
ऐसे hi चूस..."
निशा मैं hi मैं खुद से बाते किये जा रही थी.
कल की राहुल की हरकत ने जो भी उसके मैं में राहुल के प्रति असमंजस वाले भाव थे वो हटा दिए थे. अब वो खुलके राहुल को अपनी और आकर्षित करना चाह रही थी. रीज़न ये भी था क्युकी राहुल ने मन नहीं किया. ये निशा ने उसका एक इशारा समझा और तभी वो आगे बढ़ी.
राहुल बेचारा सपने में कुछ भयंकर hi देख रहा था. एक कुत्ता उसके पीछे भाग रहा है और गांड में काट देता है. जिसके कारण राहुल मुँह में निशा की निप्पल को काट देता है.
"आआआआहहहहहहहससससससमममममममपफहह"
निशा की चींख तेज़्ज़ होते होते बच गयी जो उसने अपने होंठो से दबा ली.
"बदमाशह!! अब मुँह में आ गया तोह ऐसे काटेगा? " सोचते हुए निशा अपने दूध को राहुल के मुँह से आज़ाद करती है.
अब इसमें बेचारे राहुल की क्या गलती?
गलती तोह उसके सपने में आये कुत्ते की थी जिस से निशा अनजान थी.
निशा उठने को होती है की तभी उसकी नज़र राहुल की पेण्ट पे जाती है जहा सुबह का रोज़ की तरह तम्बू बना हुआ था.
"हे भगवान्!! ये क्या है? बिगड़ता जा रहा है मेरा बेतु!! पता नहीं क्या देख रहा होगा सपने में?"
निशा का दिल : देख क्या रही है निशा, हाथ में लेके देख...
दिमाग : पागल है क्या?
दिल : लेके देख तोह निशा, ज़रा लम्बाई तोह नाप, तुझे भी तोह पता चले की तेरे बेतु का औज़ार कितना बड़ा है?
दिमाग : इसकी मैट सुन्न निशा
दिल की सुन्न निशा अपना हाथ आगे बढ़ा के पेण्ट के अंदर करने लगती है...
दिमाग : निशा ये क्या कर रही है तू?
दिल : सही कर रही है. निशा पेण्ट उतार और हाथो में लेके देख...
निशा राहुल का लुंड जैसे hi पकड़ती hi उसको एक झटका सा लगता है.
इतना गरम था राहुल का लुंड, और इतना बड़ा...
निशा (मैं में) : बाप रे... ये क्या है? इतना बड़ा और मोटा? कितना साफ़ है, एक भी बाल नहीं है, इतना चिकना लुंड तोह मेने आजतक नहीं देखा. राहुल के पापा का तोह हमेशा बालो से भरा रहता है...
हाय भगवान्!! ये मेरी छूट में जाएगा तोह फट के चार हो जाएगी मेरी छूट तोह...
छी छी... ये में क्या सोचने लगी
दिल : देख क्या रही है निशा, मुँह में लेले...
दिमाग : निशा तू पागल हो गयी है क्या? सोचना भी मत...
दिल : तू एक बार चाट के तोह देख निशा, मज़ा न आए तोह कहना...
दिल की एक और बार सुन्न निशा लुंड की तरफ झुकती है...
दिमाग : नहीं निशा नहीं...
और जीभ निकाल के हल्का सा सुपाड़ी को चाट लेती है.
पर उससे स्वाद कुछ समझ नहीं आता इसलिए फिरसे झुक के एक बार लुंड को सूंघती है. और लुंड की महक मानो उससे पागल सा बना देती है.
इस बार निशा लुंड को जड़ से चाट ते हुए सुपाड़ी तक जुबां लाती है और फिरसे स्वाद के बारे में सोचने लगती है. इस बार उससे कुछ अच्छा लगा.
दिल : अब एक बार पूरा मुँह में लेले...
निशा फौरन लुंड को एक बार में पूरा ले लेती है पर थोड़ा लुंड बच गया.
और चूसते हुए वापस सुपाड़ी पे आती है.
"Aaaahhhhhssssssmmmmmmmmmmmmm"
लुंड के नशे ने उससे पागल बना दिया था. मदहोशी में निशा लुंड को चूसने लगती है और हिला हिला के उसके सुपाड़ी को भी चाटने लगती है.
"हाय दिया!! ये क्या है? ऐसा लुंड तोह मेने आज तक नहीं चूसा...
आठ.... क्या खुशबू है इसकी...
Ummmmmmmmhhhhhhhh....hhaaaaaa
मैं करता है बस चूसती राहु...
Betuuu....aahhhhhh.... "
तभी राहुल का लुंड झटका मारता है और उसका प्रेकम निकल जाता है...
"ये क्या है? मुठ है क्या? शायद उत्तेजना में इसका जल्दी निकल गया. "
दिमाग : अब जाना नहीं है क्या? 7 बजने वाला है, राजेश उठने वाला है...
दिमाग की बात सुन्न निशा फौरन अपनी निघ्त्य सही करने लगती है...
दिल : अरे अरे... उसका मुठ गिर गया है. निशा साफ़ तोह कर दे, ज़रा पी के तोह देख...
दिमाग : हे भगवान् प्लीज निशा ऐसा नई कारण..
निशा इतने में लुंड को फिरसे मुँह में ले लेती है और चाट चाट के उससे साफ़ कर देती है
और वापस उसका पेण्ट सही कर बाहर निकल जाती है.
लुंड के स्वाद से आजतक कोई लड़की बची है क्या? आज निशा ने राहुल के लुंड का स्वाद चख लिया था. अब वह कहा पीछे हटने वाली थी?
बेचारा राहुल, पहले ऋचा से जब पहली किश मिली थी तब भी सोया हुआ था. और अब जब पहला ब्लोजॉब मिला तब भी सोया हुआ था. कही पहला सेक्स भी सोते में hi न हो जाए इसका....
"हां अब मेने सोच लिया है, मुझे क्या करना है, ये आईडिया मुझे पहले क्यों नहीं आया? बेतु के लिए इतना तोह कर hi सकती हु ... वंशिका और अंशिका चली जाए फिर आईडिया को अपनाउंगी..."
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आज कजे लिए इतना hi फ्रेंड्स!
आज एक इरोटिक अपडेट आप लोगो के लिए!
एन्जॉय!!
अब तक..
ब्रा न पहने होने के कारण नरम मुलायम दूध का एहसास राहुल को भी पागल कर देता है और वो बस अपना सर दूध की दरार में घुसाया रहता है और गरम गरम साँसे छोड़ता रहता है.
निशा भी उसकी सासो से पागल होक उसके माथे को चुम्बनों से भर देती है और पुचकारते हुए उससे प्यार करने लगती है.
शायद ये रात लम्बी होने वाली थी, ममता के अलावा शायद कोई और भी चीज़ थी जो निशा पर हावी हो रही थी...
क्या थी वो!?
अब आगे...
राहुल तोह बेचारा आज जो भी हुआ उसके कारण काफी साद और फ़्रस्ट्रेटेड था. शायद इसलिए वो अपनी माँ को प्यार जाता रहा था. पर निशा तोह पहले hi राहुल को नज़दीक पाकर मदहोश हो जाय करती थी.
और आज जब राहुल hi पहला हमला कर दिया तोह काउंटर अटैक भी तोह करना पड़ेगा न!? माँ की ममता पे कामेक्छा अब भारी होने लगी थी.
निशा ने अब सोचना समझना बंद कर दिया था और केवल फ्लो के हिसाब से चल रही थी.
हाथ को पीछे ले जाते हुए उसने राहुल के सर के बालो को थामा और दबाव बनाते हुए अपने छूछीयो पर राहुल का मुँह घुसाने लगी.
तभी राहुल ने एक किश और जड़ दी क्लीवेज पे. रात में ये दोनों माँ बेटे के बीच केसा खेल चल रहा था ये बताना मुश्किल था.
राहुल के किश करते hi निशा की आँखें बंद हो गयी और एक सिसकी निकल गयी. जो शायद राहुल ने गौर नहीं करि क्युकी वो तोह बस प्यार करने में लगा था.
राहुल का पप्पू भी खड़ा हो चूका था, पर उसका ध्यान पप्पू पे बिलकुल भी नहीं था. सिर्फ अपनी माँ के नरम छूछीयो में वह मुँह घुसाया हुआ था.
राहुल ने बिना कुछ सोचे समझे एक हमला और किया...
उसने अपनी गरम जीभ निकाल के सीधा निशा के क्लीवेज की दरार में घुसा दी.
"Ssssssssssssssssssss"
बेचारी निशा सिसकी लिए बिना रह नहीं पायी.
आखिर कितनो सालो के बाद किसी ने उसके उरोजों पे ऐसे दुबारा जुबां फिराई थी.
राजेश अब कोई भी फोरप्ले नहीं करते थे, बस 5 मिनट की चुदाई और काम ख़तम. पर निशा हमेशा तड़पती थी इस प्यास के लिए.
आखिर उसका भी तोह मैं करता था की कोई उसके दूध के साथ खेले, उन्हें छाते, चूसे, दबाये...
पर कई सालो से उसके स्तन पे मानो कर्फ्यू लगा हुआ था.
आज इतने साले बाद किसी ने उसके क्लीवेज को चूमा और छाता था.
और वो भी उसके बेटे ने जिसके नाम की निशा ने मुठ मारी थी.
उत्तेजित होते हुए निशा ने राहुल को और कस के अपने दूध पे दबा लिया. और उसका चेहरा पे हाथ फेरते हुए पुचकारने लगी...
"ाआरररीीे मेरा बेटू...
मेरा बच्छाए....
आजा अपनी मम्मी के पास...
आजा...
नई हुआ सिलेक्शन तोह क्या होता है?
अगली कंपनी में हो जाएगा...
हम्म्म!??"
राहुल भी हम्म कहते हुए क्लीवेज पे अपनी जीभ फिराता रहता है.
शायद अब उसपे खुमारी छाने लगी थी. और अब वो किसके साथ है और क्या कर रहा है ये भी भूलने लगा था.
वंशु के साथ तोह वो रोज़ ये सब करता hi था, वही सोच के आज भी राहुल उत्तेजित होते हुए निशा की गर्दन पे पहुँच गया और जुबां से चाटने लगा.
बस!!! ये निशा का वीक पॉइंट था.
जो अनजाने में राहुल ने खोज लिया.
निशा की मुँह से एक तेज़्ज़ आठ निकली और उसने फौरन राहुल की गर्दन पे चाटना शुरू कर दिया...
दोनों माँ बेटे एक दूसरे की गर्दन का स्वाद ले रहे थे.
हलकी हलकी आह की आवाज़े कमरे में हो रही थी.
की तभी राहुल एक स्टेप और आगे बढ़ गया और अपनी माँ के नरम दूध को जकड लिया.
"आअह्ह्ह" निशा ने फौरन राहुल के हाथ पे हाथ रख दबा दिया.
आज इतने सालो के बाद किसी ने उसके दूध पे अपने हाथ लगाया था.
शायद अब वो इलाका वीरान नहीं रहेगा.
"सष्ठ आअह्हह्ह्ह्हह
ाएलईए मेरा बाछूउ..
मम्मी का दुद्दू पसंद है बेतु!?
पीयेगा मम्मी का दुद्दू!?"
शायद निशा पूरी तरह अब मदहोश हो चुकी थी. नीचे से उसकी मुनिया तोह पहले hi पानी छोड़ चुकी थी.
राहुल का भी बुरा हाल था.
पेण्ट में टेंट जो बन गया था.
निशा उत्तेजना में अपने कंधो से निघ्त्य हटा देती है. ब्रा तोह वो पहनती नहीं थी.
उसने अपने दूध को आज़ाद किया और झटके से राहुल का चेहरा पकड़ जे अपने बाए दूध के भूरे निप्पल को राहुल के मुँह में ठूस दिया.
"आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.............
Sssssssssssssssssssssssssssss.......
ले बेतुउउउउ.....
पी ले दुद्दू.....
अपनी मम्मी का दुद्दू..........
इनमे दूध नहीं है पर इनको चूस दाल बेतु....
जोरर जोरर से चूस मेरा बाछहा...
Aahhhh......ufffffff.....ssssssssssssss
आआआआह्ह्ह्हह्ह haaaaaaaaaaaaaassssss
ऐसे hi बेतु ....."
निशा राहुल को अपने दूध चुसवाते हुए उससे बिस्तर पे लिटा देती है और खुद भी उसकी तरफ करवट लेके लेत जाती है.
दूध चूस चूस के राहुल ने निप्पल बड़े कर दिए थे. और दबा दबा के उसके दूध भी लाल हो गए थे. ऐसे hi चुसाई करते हुए दोनों कब नींद में चले जाते है दोनों को hi नहीं पता चलता.
सुबह निशा की आँख पहले खुलती है और जो वो देखती है उस से झेप सी जाती है.
वो बीएड पे अधनंगी और उसका एक छूछा राहुल के मुँह में था. हालत देख के उससे कल की बात याद आती है और फिर वही ग्लानि के भाव उत्त्पन्न होने लगते है.
"ये क्या कर दिया निशा तूने!? किसी माँ है तू!? अपने बेटे का फायदा उठा रही है?"
पर तभी उसकी नज़र राहुल के सोते हुए चेहरे पे चली जाती है जो बड़ा hi प्यारा लग रहा था सोते हुए और चुच्ची को मुँह में hi लिया हुआ था.
"क्या गलत किया मेने? मेरा बीटा है.
पहले भी तोह पीटा था न मेरा दूध?
तोह अब पी लिया तोह क्या गलती हो गयी?
वो जब चाहे पिए. इतना सब कुछ करता है हमारे लिए तोह क्या में इतना नहीं कर सकती? हां! उससे भी तोह पसंद आया न? तभी तोह देखो... कैसे मुँह में लिया है अभी तक. और मुझे भी अच्छा लगा. तोह बुराई क्या है इसमें? हां! राहुल का इनपे हक़ है. उससे अच्छा लगता है तोह मुझे किसी आपत्ति?"
निशा ऐसा सोचते हुए विरोधी मैं को शांत कर देती है पूरी तरह.
और राहुल को यु देख उससे उसपे बड़ा स्नेह आता है और झुक के उसके गालो को चुम्बनों से भर देती है. और दूध को भी उसके मुँह में hi रहने देती है.
"देखो तोह... छोड़ने का नाम hi नहीं ले रहा. एक इसके पिता है जो इन् दूध को हाथ तक नहीं लगाते और एक ये है की जबसे कल से मुँह में लिया है तोह अब तक नहीं छोड़ा... चूस ले बीटा चूस ले, पर अब दूध नहीं निकलेगा इनमे से.
ऐसे hi चूस..."
निशा मैं hi मैं खुद से बाते किये जा रही थी.
कल की राहुल की हरकत ने जो भी उसके मैं में राहुल के प्रति असमंजस वाले भाव थे वो हटा दिए थे. अब वो खुलके राहुल को अपनी और आकर्षित करना चाह रही थी. रीज़न ये भी था क्युकी राहुल ने मन नहीं किया. ये निशा ने उसका एक इशारा समझा और तभी वो आगे बढ़ी.
राहुल बेचारा सपने में कुछ भयंकर hi देख रहा था. एक कुत्ता उसके पीछे भाग रहा है और गांड में काट देता है. जिसके कारण राहुल मुँह में निशा की निप्पल को काट देता है.
"आआआआहहहहहहहससससससमममममममपफहह"
निशा की चींख तेज़्ज़ होते होते बच गयी जो उसने अपने होंठो से दबा ली.
"बदमाशह!! अब मुँह में आ गया तोह ऐसे काटेगा? " सोचते हुए निशा अपने दूध को राहुल के मुँह से आज़ाद करती है.
अब इसमें बेचारे राहुल की क्या गलती?
गलती तोह उसके सपने में आये कुत्ते की थी जिस से निशा अनजान थी.
निशा उठने को होती है की तभी उसकी नज़र राहुल की पेण्ट पे जाती है जहा सुबह का रोज़ की तरह तम्बू बना हुआ था.
"हे भगवान्!! ये क्या है? बिगड़ता जा रहा है मेरा बेतु!! पता नहीं क्या देख रहा होगा सपने में?"
निशा का दिल : देख क्या रही है निशा, हाथ में लेके देख...
दिमाग : पागल है क्या?
दिल : लेके देख तोह निशा, ज़रा लम्बाई तोह नाप, तुझे भी तोह पता चले की तेरे बेतु का औज़ार कितना बड़ा है?
दिमाग : इसकी मैट सुन्न निशा
दिल की सुन्न निशा अपना हाथ आगे बढ़ा के पेण्ट के अंदर करने लगती है...
दिमाग : निशा ये क्या कर रही है तू?
दिल : सही कर रही है. निशा पेण्ट उतार और हाथो में लेके देख...
निशा राहुल का लुंड जैसे hi पकड़ती hi उसको एक झटका सा लगता है.
इतना गरम था राहुल का लुंड, और इतना बड़ा...
निशा (मैं में) : बाप रे... ये क्या है? इतना बड़ा और मोटा? कितना साफ़ है, एक भी बाल नहीं है, इतना चिकना लुंड तोह मेने आजतक नहीं देखा. राहुल के पापा का तोह हमेशा बालो से भरा रहता है...
हाय भगवान्!! ये मेरी छूट में जाएगा तोह फट के चार हो जाएगी मेरी छूट तोह...
छी छी... ये में क्या सोचने लगी
दिल : देख क्या रही है निशा, मुँह में लेले...
दिमाग : निशा तू पागल हो गयी है क्या? सोचना भी मत...
दिल : तू एक बार चाट के तोह देख निशा, मज़ा न आए तोह कहना...
दिल की एक और बार सुन्न निशा लुंड की तरफ झुकती है...
दिमाग : नहीं निशा नहीं...
और जीभ निकाल के हल्का सा सुपाड़ी को चाट लेती है.
पर उससे स्वाद कुछ समझ नहीं आता इसलिए फिरसे झुक के एक बार लुंड को सूंघती है. और लुंड की महक मानो उससे पागल सा बना देती है.
इस बार निशा लुंड को जड़ से चाट ते हुए सुपाड़ी तक जुबां लाती है और फिरसे स्वाद के बारे में सोचने लगती है. इस बार उससे कुछ अच्छा लगा.
दिल : अब एक बार पूरा मुँह में लेले...
निशा फौरन लुंड को एक बार में पूरा ले लेती है पर थोड़ा लुंड बच गया.
और चूसते हुए वापस सुपाड़ी पे आती है.
"Aaaahhhhhssssssmmmmmmmmmmmmm"
लुंड के नशे ने उससे पागल बना दिया था. मदहोशी में निशा लुंड को चूसने लगती है और हिला हिला के उसके सुपाड़ी को भी चाटने लगती है.
"हाय दिया!! ये क्या है? ऐसा लुंड तोह मेने आज तक नहीं चूसा...
आठ.... क्या खुशबू है इसकी...
Ummmmmmmmhhhhhhhh....hhaaaaaa
मैं करता है बस चूसती राहु...
Betuuu....aahhhhhh.... "
तभी राहुल का लुंड झटका मारता है और उसका प्रेकम निकल जाता है...
"ये क्या है? मुठ है क्या? शायद उत्तेजना में इसका जल्दी निकल गया. "
दिमाग : अब जाना नहीं है क्या? 7 बजने वाला है, राजेश उठने वाला है...
दिमाग की बात सुन्न निशा फौरन अपनी निघ्त्य सही करने लगती है...
दिल : अरे अरे... उसका मुठ गिर गया है. निशा साफ़ तोह कर दे, ज़रा पी के तोह देख...
दिमाग : हे भगवान् प्लीज निशा ऐसा नई कारण..
निशा इतने में लुंड को फिरसे मुँह में ले लेती है और चाट चाट के उससे साफ़ कर देती है
और वापस उसका पेण्ट सही कर बाहर निकल जाती है.
लुंड के स्वाद से आजतक कोई लड़की बची है क्या? आज निशा ने राहुल के लुंड का स्वाद चख लिया था. अब वह कहा पीछे हटने वाली थी?
बेचारा राहुल, पहले ऋचा से जब पहली किश मिली थी तब भी सोया हुआ था. और अब जब पहला ब्लोजॉब मिला तब भी सोया हुआ था. कही पहला सेक्स भी सोते में hi न हो जाए इसका....
"हां अब मेने सोच लिया है, मुझे क्या करना है, ये आईडिया मुझे पहले क्यों नहीं आया? बेतु के लिए इतना तोह कर hi सकती हु ... वंशिका और अंशिका चली जाए फिर आईडिया को अपनाउंगी..."
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आज कजे लिए इतना hi फ्रेंड्स!
आज एक इरोटिक अपडेट आप लोगो के लिए!
एन्जॉय!!














