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- Dec 5, 2013
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अपडेट-19
अब तक...
अंशिका बड़ी हिम्मत करके वापस पीछे हो गयी और दुबारा से रूम में आने लगी मगर इस बार उसने आवाज़ पहले hi दे दी थी.
आवाज़ सुन्न राहुल और वंशु अलग हुए और वंशु राहुल को आंख मारते हुए अंशिका क साथ नेहा के कमरे में चली गयी.
जाते जाते अंशिका राहुल को घर रही थी और मासूम सा चेहरा बनाए हुए थी. राहुल ने उससे इग्नोर किया और अपने रूम में आराम करने क लिए लेत गया.
शाम को उससे ऋचा के घर जाना था और फिर रात में तनीषा से चेक उप करवाने भी.
अब आगे...
दिन का समय बीता और राहुल ने दिन का बखूबी इस्तेमाल करते हुए एक झपकी मार hi ली.
इधर नेहा के कमरे में नेहा अंशु और वंशु ने पूरा दिन कर्रम खेलते हुए हसी मज़ाक में, गप्पे लड़ाते हुए बिताया. आज इन् सभी लोगो ने घर पे hi रिलैक्स करने का डीडे किया था क्युकी कल वैसे hi बात बिगड़ गयी थी.
पर अंशिका असमंजस में डूबी हुई थी. क्युकी उसने जो देखा था, वो मंज़र उसकी आँखों के सामने से हैट hi नहीं रहा था. उसकी वंशु दी और राहुल दोनों किश कर रहे थे वो भी होंठो से होंठ मिला कर. ऐसे तोह कोई लवर्स या कपल्स hi करते है. ये कोई भाई बहिन वाला प्यार तोह कही से नहीं लग रहा था.
"क्या चल क्या रहा है? दी और भाई एक दूसरे से.... ी मैं कैसे? मतलब दी यहाँ जबसे आयी है तभी से शुरू है. दोनों में कुछ ज़रूर चल रहा है. पर दोनों भाई बहिन, दोनों समझदार है फिर आखिर कैसे? केसा लगा होगा दी को भाई को किश करते वक़्त?? वो फीलिंग... उफ्फ्फ!!! ये में क्या सोच रही हु. ये गलत है. पर मुझे उतना गुस्सा क्यों नहीं आ रहा जितना आना चाहिए. एक प्रकार से मुझे भी भाई के होंठ फील करने का मैं कर रहा है... ओह माय गॉड!!!! ये... ये किसी चीज़े सोचने लगी हु में... ऍम ी गेटिंग माध और व्हाट? उफ्फ्फ!!!"
अंशिका अपनी वंशु दी को देखती जा रही थी और मैं hi मैं सोचते जा रही थी.
नेहा ने अब अपने जज़्बातो पे नियत्रण रखा हुआ था, उसने अपनी प्यारी बड़ी बहिन अंशु को भी माफ़ कर दिया. कुल मिलाकर घर का वातावरण अभी शांत था और नार्मल पहले की तरह hi था. पर कब क्या हो जाए? कोण भड़क जाए? कोण किस से खफा हो जाए? कोण किस से लड़ जाए? आखिर क्या भरोसा? ज़िन्दगी का यही उसूल है जनाब. आज मौज में हो कल कब क्या सजा मिल जाए किस्से पता? अब भविष्य भी किसी ने देखा है क्या?
शाम के 4 बजे जैसे तैसे राहुल मिया उठे अपने बिस्तर से अंगड़ाई लेते हुए, अब ऋचा को बोल के जो रखा था की मिलने आएँगे उसके घर. वादा कर के मुकर तोह नहीं सकते न अब? है की नहीं दोस्तों? राहुल जुबां का बोहत पक्का था. जो बोल दिया मतलब बोल दिया. वो काम करना hi है फिर. वो डायलाग है न... "एक बार जो मेने कमिटमेंट कर दी तोह में अपने आप की भी नहीं सुनता". बस वही सन था राहुल के साथ.
अब ऋचा को जुबां दी थी, तोह उस जुबां पे कायम भी रहना पड़ेगा.
हाथ मुँह धो के फ्रेश होक राहुल नीचे हॉल में आया और निशा को आवाज़ लगाई...
"मा....!! ऋचा के घर जा रहा हु. स्नैक्स dedo...kuch खा के फिर निकलता हु."
निशा अपने रूम में थी, दिन का वक़्त था तोह वो भी घर के कामो से फुर्सत होक आराम फार्मा रही थी.
राहुल की पुकार सुन्न तुरंत बाहर आयी और उससे स्नैक्स देने के लिए किचन में चली गयी.
राहुल ने गयम ज़रूर चोरर दी थी पर घर पे वो एक्सरसाइजेज ज़रूर करता था जिस से उसका शरीर आउट ऑफ़ शेप नहीं था और लाजिनेस्स नहीं आती थी. ये ज़रूरी था. उसके मार्टिकल आर्ट ट्रेनर हमेशा उससे चुस्त रहने के लिए कहते थे.
निशा ने फौरन एक फ्रूट सलाद की प्लेट तैयार की और राहुल को सर्वे की पर आज उसका मैं विचलित सा था.
कल अपने बेटे के बारे में सोच के गीली जो हो गयी थी. आज उसी बेटे को देख उसका मैं बिलकुल भी शांत नहीं था. खुद पे घिन्न भी आ रही थी पर राहुल को देख उसका मैं भी दोल रहा था.
जैसे तैसे निशा ने अपनी उत्तेजनाओं को दबाए हुए रखा और राहुल फ्रूट्स खा क ऋचा के घर निकल गया अपनी बाइक उठा के.
*डिंग डाँग*
दूर बेल्ल बजाने पर निकिता ने गेट खोला. आज वो भी नेहा के कहने पर कॉलेज नहीं गयी थी. दोनों जाती थी तोह साथ में hi जाती थी. राहुल को देख चेहेक्ते हुए वो राहुल के गले लग गयी...
"भैया!!!!"
निकिता को गले लगा कर राहुल उसकी पीठ सेहला रहा था, पर अचानक उससे एक झटका सा लगा. निकिता का उभार उसके सीने में डब्ब रहा था.
अब निकिता बच्ची नहीं थी. बड़ी हो गयी थी. उसने पहले भी कई दफा इस नन्ही फुलझड़ी को गले लगाया था पर पहले उभार का एहसास बिलकुल ना के बराबर रहता था.
पर आज तोह....
हम्म लड़की बड़ी हो गयी है मतलब.
ज़्यादा देरर यदि राहुल रुका तोह निकिता का उभार तोह दिख hi रहा था साथ में राहुल के जीन्स का उभार दिखने में भी देरर नहीं लगती. यही सोचते हुए उसने निकिता को अपने सीने से जुड़ा किया...
"आइये न भैया!! अंदर आइये!! कितनो दिनों बाद आप आए हमारे घर. वर्ण जब कॉलेज जाते थे तोह अक्सर आया करते थे."
निकिता ने राहुल के सीने से अलग होते हुए कहा.
"क्या करू अब? देख तोह रही है तू कंपनी के चक्कर में हम सभी लोग बिजी रहते है. पर आज तोह आया न?" राहुल ने कहा.
दोनों फिर घर के अंदर आते है, निकिता राहुल को सोफे पे बैठा के अंदर दौड़ती हुई आवाज़ लगाते हुए चली जाती है...
"अरे डीई!!! राहुल भैया आए है, माआ!!!!!"
निकिता की माँ आरती उसकी आवाज़ सुन्न बहार आती ह तोह राहुल उनके चरण स्पर्श करता ह, पर आरती राहुल की बाहें पकड़ के उसको अपने गले से लगा लेती है...
जिस से उसके बड़े बड़े दूध राहुल के सीने में धस्स गए. आज आरती को भी राहुल को गले लगाते वक़्त बोहत अच्छा लगा. राहुल का चौड़ा मजबूत शरीर उसको बोहत अच्छा लगा. वर्ण रोज़ रोज़ अपने पति का थुल तुला शरीर hi मिलता है उससे.
"अरे बीटा परर वेरर मत छुआ कर तू भी तोह मेरे बीटा जैसा hi है... आज कितने दिनों बाद आया तू हां? याद नहीं आती क्या हमलोग की?"
आरती ने राहुल को गले से लगते हुए कहा.
"नहीं आंटी! किसी बात करती हो आप, अभी थोड़ा समय hi ऐसा है, घर पर भी सारा समय पढाई और प्रिपरेशन में निकल जाता है."
राहुल ने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा.
"हां बीटा!! ऋचा भी प्रिपरेशन में लगी रहती है. भगवान् करे तुम दोनों की अच्छी सी कंपनी में नौकरी लग जाए तोह तुमलोग भी अपने पेर्रो पे खड़े हो जाओगे. मेरी तोह बस यही विनती है."
आरती ने उसको वापस सोफे पे बैठाते हुए कहा...
र : "वैसे ऋचा कहा है आंटी??"
"बीटा वह अपने कमरे में है, तू एक काम कर ऊपर चले जा और में चाय नाश्ता वही भिजवा देती हु"
आरती इतना बोल किचन में चली गयी.
"चलिए भैया!! में ले चलती हु आपको दी के कमरे में..."
निकिता फिर राहुल का हाथ पकडे उसको ऊपर ले जाती है ऋचा के कमरे में...
दरवाज़ा खुला hi था और ऋचा शायद वाशरूम में थी. सजने सवारने में लगी थी शायद ये सोच के की आज राहुल आने वाला था.
राहुल और निकिता बीएड पे बैठ जाते है और कुछ एक दो मिनट बाद ऋचा वाशरूम से निकलती है. बाहर राहुल और निकिता को देख बिलकुल जम्म सी जाती है वही पे. लाली छा गयी थी उसके चेहरे पर राहुल को देखते hi. जो राहुल ने तोह नोटिस नहीं की पर निकिता की नज़रो ने सब भाप लिया था. वो बाद में आने का बोलके नीचे चली जाती है और दोनों को अकेला चोरर देती है.
"Hi!!!" राहुल ने बीएड से उठते हुए कहा.
आज ऋचा ने शॉर्ट्स और एक ब्लैक टॉप पतला सा डाला हुआ था. घर पर वो और निकिता दोनों लूसे कपडे hi पहनती थी. ऋचा वाक़ई एक बोहत hi ख़ूबसूरत लड़की थी. जबसे उसमे बदलाव आया था तब से वो और भी ज़्यादा आकर्षक लगने लगी थी.
ऋचा धीरे धीरे बिना कुछ बोले राहुल के नज़दीक आयी. दोनों की आँखें एक दूसरे को hi निहार रही थी. और इतने में ऋचा ने कस के राहुल को अपनी बाहो में जकड लिया.
जिस से राहुल भी अचंभित हो गया. राहुल ऋचा के घर आता रहता था पर ऋचा तब ऐसे उससे हुग नहीं करती थी. जब कोई स्पेशल ोक्सासिओं या कुछ और रहता था तब hi सिर्फ ऋचा हुग करती थी. पर आज तोह एकदम से hi उसने ये हमला कर दिया.
एक तोह पहले निकिता के उभरते दूध का एहसास और फिर आरती के बड़े बड़े मुलायम स्तन का एहसास और अब ये.
ऋचा के कड़क वेल राउंडेड दूध उसके सीने में धस्स रहे थे. और अभी अभी वो वाशरूम से आयी थी. पूरा बदन महक रहा था उसका. जो राहुल को मदहोश कर रहा था. किसी भी वक़्त उसका पप्पू खड़ा हो सकता था. :रोफ्लोल:
"तुम! तुम इतने दिनों बाद आए और बस एक hi !?" ऋचा ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा.
"अरे!! तू देख तोह रही है न! कितना व्यस्त हु में. और ऊपर से दोनों बहने आयी हुई है मेरी. अब तोह आ गया न. और ये क्या आज तुझे क्या हो गया एकदम से?" राहुल ने ऋचा की पीठ थप तपाते हुए कहा. और तभी एक झटका और लगा उससे.
ऋचा की ब्रा के स्ट्राप का एहसास हो गया. न जाने आज कितने एहसास होएंगे उससे. कही पप्पू जाग न जाए. बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा आज उससे.
दोनों थोड़ी देरर तक यही हुग किये रहे. राहुल जहा ऋचा के शरीर से आती हुई खुस्भु में डूबा हुआ था तोह वही ऋचा राहुल के शरीर से आती हुई मर्दो वाली महक, डॉ की खुशबु और राहुल के मजबूत शरीर से मदहोश हुई जा रही थी.
फिर दोनों बीएड पे hi विराजमान हुए और राहुल ने hi चुप्पी तोड़ते हुए बोलना स्टार्ट किया वर्ण अट्मॉस्फेरे बोहत ऑक्वर्ड हो रहा था.
"बी थे वे मेने भी चेक किया व्हाट्सप्प ग्रुप. पहली कंपनी एक बड़ी मुलती नेशनल कंपनी है. 5 लाख का है पैकेज जो की बोहत बढ़िया है एक फ्रेशर के हिसाब से. तोह!? प्रिपरेशन किसी चल रही है!?"
राहुल ने अपनी बात रखते हुए कहा.
"ठीक hi है अभी. मुझे प्रैक्टिस की और ज़रुरत है. मेरा यदि कोई मोचक इंटरव्यू ले तोह मुझमे कॉन्फिडेंस और बढ़ जाएगा." ऋचा ने कहा...
"हम्म! तोह एक काम क्यों नहीं करती! एक दिन तुम मेरे यहाँ आ जाओ या में तुम्हारे घर आ जाता हु. में तुम्हारा मोचक इंटरव्यू ले लूंगा और तुम मेरा. इसी बहाने हम दोनों की प्रिपरेशन हो जाएगी. क्या कहती हो?" राहुल ने आईडिया देते हुए कहा.
"सूरे!! तुम hi आ जाना मेरे यहाँ. जब भी आना हो. पर 2 दिन बाद hi आ रही है कंपनी तोह हमारे पास सिर्फ दो hi दिन है."
ऋचा तोह चाह hi रही थी की राहुल उस से ये बोले इसलिए वो ख़ुशी ख़ुशी राज़ी हो गयी.
र: "Ok!!"
तभी इतने में निकिता चाय नाश्ता लेके आ गयी. राहुल ने इन् सब के लिए मन किया पर कहा मान ने वाली थी वो. राहुल ने भी फिर अपने हाथ खड़े कर दिए. और चाय नाश्ता में सभी लोग टूट पड़े फिर.
स्नैक्स वगैरह होने के बाद निकिता ट्रे वापस ले गयी. और राहुल ने अब निकलना बेहतर समझा. अभी उससे तनीषा दी के लिए गिफ्ट भी लेना था और उन्हें मनाना भी था. ये भी एक बड़ी प्रॉब्लम थी उसके लिए. क्युकी तनीषा कभी नाराज़ नहीं होती थी इस तरह उस से. कॉल तोह करती hi थी वह पर इस बार न कोई मैसेज और न hi कोई कॉल.
राहुल ने निकलने के लिए कहा और बीएड से उठ गया. की इतने में ऋचा ने एक बार और हुग कर लिया उससे.
अब राहुल सूरे था की ऋचा कुछ आज अजीब सा रियेक्ट कर रही है. थोड़ा ज़्यादा क्लोज थी आज वह. पर राहुल को सिर्फ शर्म hi आ रही थी. उससे इस बात का बुरा बिलकुल भी नहीं लगा था.
"हमारा सिलेक्शन हो तोह जाएगा न!?" ऋचा ने बात को घुमाते हुए उससे अपनी बाहो में ले लिया.
अब ये थोड़ी न कहती की राहुल मुझे तुम्हे हुग करना है. इतनी हिम्मत नहीं थी उसमे अभी. इसलिए बात को घुमा के उसने एप्रोच किया.
राहुल ने एक बार फिर उसकी पीठ थप थपै और उससे फिर से ब्रा की स्ट्राप का एहसास हुआ. पर इस बार राहुल को भी मज़ा आ रहा था और उसने जान बूझ के hi हाथ रखा था वह. मर्द था, मर्दो वाली हरकते हो hi जाती है.
"बिलकुल होएगा" राहुल ने उससे अलग करते हुए कहा.
की इतने में ऋचा ने उसके गालो पे अपने होंठ रख दिए. और तुरंत hi पीछे भी हट गयी.
अब ये कुछ नया था. ऋचा ने इस से पहले कभी भी राहुल को किश नहीं किया था ऐसे. एक बार hi किया था जब राहुल टेक फेस्ट वाले दिन सो गया था. उसके बाद से ऋचा ने आज तक किश नहीं किया था. उससे वैसा मौक़ा hi नई मिला कभी. और राहुल के जागते हुए किश करने की उसमे आज तक हिम्मत hi नहीं हुई थी
हुग तोह कई बार करि थी ऋचा पर किश नहीं. राहुल के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ये फर्स्ट किश था ऋचा का उसके लिए. पर ऋचा के पॉइंट ऑफ़ व्यू से दूसरा. अब बेचारा राहुल पहली किश से अनजान था तोह इसमें उसकी क्या गलती.
इधर राहुल थोड़ा शॉकेड होक ऋचा को देख रहा था तोह वह ऋचा अपनी नज़रे चुराने में लगी हुई थी. पूरा चेहरा उसका शर्म से लाल टमाटर की तरह हो गया था.
न जाने कितनी हिम्मत जूता के उसने आज ये काम किया था. पर अब नज़रे कैसे मिलाए? उसके लिए और हिम्मत चाहिए थी. जो शायद ऋचा में अब नहीं बची थी.
"तुम कल hi आ जाना. हम कल hi मिलते है." बस इतना hi कहा ऋचा ने और फिर नीचे देखने लगी.
"हँ!? ओह्ह हआ... सूरे!!" राहुल जैसे उसकी बात सुन्न अपने शॉक से बाहर आया. कितनी क्यूट लग रही थी ऋचा शर्माते वक़्त. राहुल का भी दिल धक् धक् करने लगा था उससे ऐसे शर्माते देख.
फाइनली वो बाहर निकला और सभी को bye बोल और कल का आने का बोलके वो मार्किट साइड निकल गया. उससे गिफ्ट लेना था तनीषा दी के लिए. पर क्या? कोण सा गिफ्ट दे की तनीषा दी खुश हो जाए? क्या पसंद है उन्हें? मानेगी भी नहीं या नहीं? सवालों से उलझे राहुल बस बाइक पे सवार आस पास की दुकाने देख चलता जा रहा था...
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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!!
कीप सपोर्टिंग एंड कीप रीडिंग!
अब तक...
अंशिका बड़ी हिम्मत करके वापस पीछे हो गयी और दुबारा से रूम में आने लगी मगर इस बार उसने आवाज़ पहले hi दे दी थी.
आवाज़ सुन्न राहुल और वंशु अलग हुए और वंशु राहुल को आंख मारते हुए अंशिका क साथ नेहा के कमरे में चली गयी.
जाते जाते अंशिका राहुल को घर रही थी और मासूम सा चेहरा बनाए हुए थी. राहुल ने उससे इग्नोर किया और अपने रूम में आराम करने क लिए लेत गया.
शाम को उससे ऋचा के घर जाना था और फिर रात में तनीषा से चेक उप करवाने भी.
अब आगे...
दिन का समय बीता और राहुल ने दिन का बखूबी इस्तेमाल करते हुए एक झपकी मार hi ली.
इधर नेहा के कमरे में नेहा अंशु और वंशु ने पूरा दिन कर्रम खेलते हुए हसी मज़ाक में, गप्पे लड़ाते हुए बिताया. आज इन् सभी लोगो ने घर पे hi रिलैक्स करने का डीडे किया था क्युकी कल वैसे hi बात बिगड़ गयी थी.
पर अंशिका असमंजस में डूबी हुई थी. क्युकी उसने जो देखा था, वो मंज़र उसकी आँखों के सामने से हैट hi नहीं रहा था. उसकी वंशु दी और राहुल दोनों किश कर रहे थे वो भी होंठो से होंठ मिला कर. ऐसे तोह कोई लवर्स या कपल्स hi करते है. ये कोई भाई बहिन वाला प्यार तोह कही से नहीं लग रहा था.
"क्या चल क्या रहा है? दी और भाई एक दूसरे से.... ी मैं कैसे? मतलब दी यहाँ जबसे आयी है तभी से शुरू है. दोनों में कुछ ज़रूर चल रहा है. पर दोनों भाई बहिन, दोनों समझदार है फिर आखिर कैसे? केसा लगा होगा दी को भाई को किश करते वक़्त?? वो फीलिंग... उफ्फ्फ!!! ये में क्या सोच रही हु. ये गलत है. पर मुझे उतना गुस्सा क्यों नहीं आ रहा जितना आना चाहिए. एक प्रकार से मुझे भी भाई के होंठ फील करने का मैं कर रहा है... ओह माय गॉड!!!! ये... ये किसी चीज़े सोचने लगी हु में... ऍम ी गेटिंग माध और व्हाट? उफ्फ्फ!!!"
अंशिका अपनी वंशु दी को देखती जा रही थी और मैं hi मैं सोचते जा रही थी.
नेहा ने अब अपने जज़्बातो पे नियत्रण रखा हुआ था, उसने अपनी प्यारी बड़ी बहिन अंशु को भी माफ़ कर दिया. कुल मिलाकर घर का वातावरण अभी शांत था और नार्मल पहले की तरह hi था. पर कब क्या हो जाए? कोण भड़क जाए? कोण किस से खफा हो जाए? कोण किस से लड़ जाए? आखिर क्या भरोसा? ज़िन्दगी का यही उसूल है जनाब. आज मौज में हो कल कब क्या सजा मिल जाए किस्से पता? अब भविष्य भी किसी ने देखा है क्या?
शाम के 4 बजे जैसे तैसे राहुल मिया उठे अपने बिस्तर से अंगड़ाई लेते हुए, अब ऋचा को बोल के जो रखा था की मिलने आएँगे उसके घर. वादा कर के मुकर तोह नहीं सकते न अब? है की नहीं दोस्तों? राहुल जुबां का बोहत पक्का था. जो बोल दिया मतलब बोल दिया. वो काम करना hi है फिर. वो डायलाग है न... "एक बार जो मेने कमिटमेंट कर दी तोह में अपने आप की भी नहीं सुनता". बस वही सन था राहुल के साथ.
अब ऋचा को जुबां दी थी, तोह उस जुबां पे कायम भी रहना पड़ेगा.
हाथ मुँह धो के फ्रेश होक राहुल नीचे हॉल में आया और निशा को आवाज़ लगाई...
"मा....!! ऋचा के घर जा रहा हु. स्नैक्स dedo...kuch खा के फिर निकलता हु."
निशा अपने रूम में थी, दिन का वक़्त था तोह वो भी घर के कामो से फुर्सत होक आराम फार्मा रही थी.
राहुल की पुकार सुन्न तुरंत बाहर आयी और उससे स्नैक्स देने के लिए किचन में चली गयी.
राहुल ने गयम ज़रूर चोरर दी थी पर घर पे वो एक्सरसाइजेज ज़रूर करता था जिस से उसका शरीर आउट ऑफ़ शेप नहीं था और लाजिनेस्स नहीं आती थी. ये ज़रूरी था. उसके मार्टिकल आर्ट ट्रेनर हमेशा उससे चुस्त रहने के लिए कहते थे.
निशा ने फौरन एक फ्रूट सलाद की प्लेट तैयार की और राहुल को सर्वे की पर आज उसका मैं विचलित सा था.
कल अपने बेटे के बारे में सोच के गीली जो हो गयी थी. आज उसी बेटे को देख उसका मैं बिलकुल भी शांत नहीं था. खुद पे घिन्न भी आ रही थी पर राहुल को देख उसका मैं भी दोल रहा था.
जैसे तैसे निशा ने अपनी उत्तेजनाओं को दबाए हुए रखा और राहुल फ्रूट्स खा क ऋचा के घर निकल गया अपनी बाइक उठा के.
*डिंग डाँग*
दूर बेल्ल बजाने पर निकिता ने गेट खोला. आज वो भी नेहा के कहने पर कॉलेज नहीं गयी थी. दोनों जाती थी तोह साथ में hi जाती थी. राहुल को देख चेहेक्ते हुए वो राहुल के गले लग गयी...
"भैया!!!!"
निकिता को गले लगा कर राहुल उसकी पीठ सेहला रहा था, पर अचानक उससे एक झटका सा लगा. निकिता का उभार उसके सीने में डब्ब रहा था.
अब निकिता बच्ची नहीं थी. बड़ी हो गयी थी. उसने पहले भी कई दफा इस नन्ही फुलझड़ी को गले लगाया था पर पहले उभार का एहसास बिलकुल ना के बराबर रहता था.
पर आज तोह....
हम्म लड़की बड़ी हो गयी है मतलब.
ज़्यादा देरर यदि राहुल रुका तोह निकिता का उभार तोह दिख hi रहा था साथ में राहुल के जीन्स का उभार दिखने में भी देरर नहीं लगती. यही सोचते हुए उसने निकिता को अपने सीने से जुड़ा किया...
"आइये न भैया!! अंदर आइये!! कितनो दिनों बाद आप आए हमारे घर. वर्ण जब कॉलेज जाते थे तोह अक्सर आया करते थे."
निकिता ने राहुल के सीने से अलग होते हुए कहा.
"क्या करू अब? देख तोह रही है तू कंपनी के चक्कर में हम सभी लोग बिजी रहते है. पर आज तोह आया न?" राहुल ने कहा.
दोनों फिर घर के अंदर आते है, निकिता राहुल को सोफे पे बैठा के अंदर दौड़ती हुई आवाज़ लगाते हुए चली जाती है...
"अरे डीई!!! राहुल भैया आए है, माआ!!!!!"
निकिता की माँ आरती उसकी आवाज़ सुन्न बहार आती ह तोह राहुल उनके चरण स्पर्श करता ह, पर आरती राहुल की बाहें पकड़ के उसको अपने गले से लगा लेती है...
जिस से उसके बड़े बड़े दूध राहुल के सीने में धस्स गए. आज आरती को भी राहुल को गले लगाते वक़्त बोहत अच्छा लगा. राहुल का चौड़ा मजबूत शरीर उसको बोहत अच्छा लगा. वर्ण रोज़ रोज़ अपने पति का थुल तुला शरीर hi मिलता है उससे.
"अरे बीटा परर वेरर मत छुआ कर तू भी तोह मेरे बीटा जैसा hi है... आज कितने दिनों बाद आया तू हां? याद नहीं आती क्या हमलोग की?"
आरती ने राहुल को गले से लगते हुए कहा.
"नहीं आंटी! किसी बात करती हो आप, अभी थोड़ा समय hi ऐसा है, घर पर भी सारा समय पढाई और प्रिपरेशन में निकल जाता है."
राहुल ने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा.
"हां बीटा!! ऋचा भी प्रिपरेशन में लगी रहती है. भगवान् करे तुम दोनों की अच्छी सी कंपनी में नौकरी लग जाए तोह तुमलोग भी अपने पेर्रो पे खड़े हो जाओगे. मेरी तोह बस यही विनती है."
आरती ने उसको वापस सोफे पे बैठाते हुए कहा...
र : "वैसे ऋचा कहा है आंटी??"
"बीटा वह अपने कमरे में है, तू एक काम कर ऊपर चले जा और में चाय नाश्ता वही भिजवा देती हु"
आरती इतना बोल किचन में चली गयी.
"चलिए भैया!! में ले चलती हु आपको दी के कमरे में..."
निकिता फिर राहुल का हाथ पकडे उसको ऊपर ले जाती है ऋचा के कमरे में...
दरवाज़ा खुला hi था और ऋचा शायद वाशरूम में थी. सजने सवारने में लगी थी शायद ये सोच के की आज राहुल आने वाला था.
राहुल और निकिता बीएड पे बैठ जाते है और कुछ एक दो मिनट बाद ऋचा वाशरूम से निकलती है. बाहर राहुल और निकिता को देख बिलकुल जम्म सी जाती है वही पे. लाली छा गयी थी उसके चेहरे पर राहुल को देखते hi. जो राहुल ने तोह नोटिस नहीं की पर निकिता की नज़रो ने सब भाप लिया था. वो बाद में आने का बोलके नीचे चली जाती है और दोनों को अकेला चोरर देती है.
"Hi!!!" राहुल ने बीएड से उठते हुए कहा.
आज ऋचा ने शॉर्ट्स और एक ब्लैक टॉप पतला सा डाला हुआ था. घर पर वो और निकिता दोनों लूसे कपडे hi पहनती थी. ऋचा वाक़ई एक बोहत hi ख़ूबसूरत लड़की थी. जबसे उसमे बदलाव आया था तब से वो और भी ज़्यादा आकर्षक लगने लगी थी.
ऋचा धीरे धीरे बिना कुछ बोले राहुल के नज़दीक आयी. दोनों की आँखें एक दूसरे को hi निहार रही थी. और इतने में ऋचा ने कस के राहुल को अपनी बाहो में जकड लिया.
जिस से राहुल भी अचंभित हो गया. राहुल ऋचा के घर आता रहता था पर ऋचा तब ऐसे उससे हुग नहीं करती थी. जब कोई स्पेशल ोक्सासिओं या कुछ और रहता था तब hi सिर्फ ऋचा हुग करती थी. पर आज तोह एकदम से hi उसने ये हमला कर दिया.
एक तोह पहले निकिता के उभरते दूध का एहसास और फिर आरती के बड़े बड़े मुलायम स्तन का एहसास और अब ये.
ऋचा के कड़क वेल राउंडेड दूध उसके सीने में धस्स रहे थे. और अभी अभी वो वाशरूम से आयी थी. पूरा बदन महक रहा था उसका. जो राहुल को मदहोश कर रहा था. किसी भी वक़्त उसका पप्पू खड़ा हो सकता था. :रोफ्लोल:
"तुम! तुम इतने दिनों बाद आए और बस एक hi !?" ऋचा ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा.
"अरे!! तू देख तोह रही है न! कितना व्यस्त हु में. और ऊपर से दोनों बहने आयी हुई है मेरी. अब तोह आ गया न. और ये क्या आज तुझे क्या हो गया एकदम से?" राहुल ने ऋचा की पीठ थप तपाते हुए कहा. और तभी एक झटका और लगा उससे.
ऋचा की ब्रा के स्ट्राप का एहसास हो गया. न जाने आज कितने एहसास होएंगे उससे. कही पप्पू जाग न जाए. बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा आज उससे.
दोनों थोड़ी देरर तक यही हुग किये रहे. राहुल जहा ऋचा के शरीर से आती हुई खुस्भु में डूबा हुआ था तोह वही ऋचा राहुल के शरीर से आती हुई मर्दो वाली महक, डॉ की खुशबु और राहुल के मजबूत शरीर से मदहोश हुई जा रही थी.
फिर दोनों बीएड पे hi विराजमान हुए और राहुल ने hi चुप्पी तोड़ते हुए बोलना स्टार्ट किया वर्ण अट्मॉस्फेरे बोहत ऑक्वर्ड हो रहा था.
"बी थे वे मेने भी चेक किया व्हाट्सप्प ग्रुप. पहली कंपनी एक बड़ी मुलती नेशनल कंपनी है. 5 लाख का है पैकेज जो की बोहत बढ़िया है एक फ्रेशर के हिसाब से. तोह!? प्रिपरेशन किसी चल रही है!?"
राहुल ने अपनी बात रखते हुए कहा.
"ठीक hi है अभी. मुझे प्रैक्टिस की और ज़रुरत है. मेरा यदि कोई मोचक इंटरव्यू ले तोह मुझमे कॉन्फिडेंस और बढ़ जाएगा." ऋचा ने कहा...
"हम्म! तोह एक काम क्यों नहीं करती! एक दिन तुम मेरे यहाँ आ जाओ या में तुम्हारे घर आ जाता हु. में तुम्हारा मोचक इंटरव्यू ले लूंगा और तुम मेरा. इसी बहाने हम दोनों की प्रिपरेशन हो जाएगी. क्या कहती हो?" राहुल ने आईडिया देते हुए कहा.
"सूरे!! तुम hi आ जाना मेरे यहाँ. जब भी आना हो. पर 2 दिन बाद hi आ रही है कंपनी तोह हमारे पास सिर्फ दो hi दिन है."
ऋचा तोह चाह hi रही थी की राहुल उस से ये बोले इसलिए वो ख़ुशी ख़ुशी राज़ी हो गयी.
र: "Ok!!"
तभी इतने में निकिता चाय नाश्ता लेके आ गयी. राहुल ने इन् सब के लिए मन किया पर कहा मान ने वाली थी वो. राहुल ने भी फिर अपने हाथ खड़े कर दिए. और चाय नाश्ता में सभी लोग टूट पड़े फिर.
स्नैक्स वगैरह होने के बाद निकिता ट्रे वापस ले गयी. और राहुल ने अब निकलना बेहतर समझा. अभी उससे तनीषा दी के लिए गिफ्ट भी लेना था और उन्हें मनाना भी था. ये भी एक बड़ी प्रॉब्लम थी उसके लिए. क्युकी तनीषा कभी नाराज़ नहीं होती थी इस तरह उस से. कॉल तोह करती hi थी वह पर इस बार न कोई मैसेज और न hi कोई कॉल.
राहुल ने निकलने के लिए कहा और बीएड से उठ गया. की इतने में ऋचा ने एक बार और हुग कर लिया उससे.
अब राहुल सूरे था की ऋचा कुछ आज अजीब सा रियेक्ट कर रही है. थोड़ा ज़्यादा क्लोज थी आज वह. पर राहुल को सिर्फ शर्म hi आ रही थी. उससे इस बात का बुरा बिलकुल भी नहीं लगा था.
"हमारा सिलेक्शन हो तोह जाएगा न!?" ऋचा ने बात को घुमाते हुए उससे अपनी बाहो में ले लिया.
अब ये थोड़ी न कहती की राहुल मुझे तुम्हे हुग करना है. इतनी हिम्मत नहीं थी उसमे अभी. इसलिए बात को घुमा के उसने एप्रोच किया.
राहुल ने एक बार फिर उसकी पीठ थप थपै और उससे फिर से ब्रा की स्ट्राप का एहसास हुआ. पर इस बार राहुल को भी मज़ा आ रहा था और उसने जान बूझ के hi हाथ रखा था वह. मर्द था, मर्दो वाली हरकते हो hi जाती है.
"बिलकुल होएगा" राहुल ने उससे अलग करते हुए कहा.
की इतने में ऋचा ने उसके गालो पे अपने होंठ रख दिए. और तुरंत hi पीछे भी हट गयी.
अब ये कुछ नया था. ऋचा ने इस से पहले कभी भी राहुल को किश नहीं किया था ऐसे. एक बार hi किया था जब राहुल टेक फेस्ट वाले दिन सो गया था. उसके बाद से ऋचा ने आज तक किश नहीं किया था. उससे वैसा मौक़ा hi नई मिला कभी. और राहुल के जागते हुए किश करने की उसमे आज तक हिम्मत hi नहीं हुई थी
हुग तोह कई बार करि थी ऋचा पर किश नहीं. राहुल के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ये फर्स्ट किश था ऋचा का उसके लिए. पर ऋचा के पॉइंट ऑफ़ व्यू से दूसरा. अब बेचारा राहुल पहली किश से अनजान था तोह इसमें उसकी क्या गलती.
इधर राहुल थोड़ा शॉकेड होक ऋचा को देख रहा था तोह वह ऋचा अपनी नज़रे चुराने में लगी हुई थी. पूरा चेहरा उसका शर्म से लाल टमाटर की तरह हो गया था.
न जाने कितनी हिम्मत जूता के उसने आज ये काम किया था. पर अब नज़रे कैसे मिलाए? उसके लिए और हिम्मत चाहिए थी. जो शायद ऋचा में अब नहीं बची थी.
"तुम कल hi आ जाना. हम कल hi मिलते है." बस इतना hi कहा ऋचा ने और फिर नीचे देखने लगी.
"हँ!? ओह्ह हआ... सूरे!!" राहुल जैसे उसकी बात सुन्न अपने शॉक से बाहर आया. कितनी क्यूट लग रही थी ऋचा शर्माते वक़्त. राहुल का भी दिल धक् धक् करने लगा था उससे ऐसे शर्माते देख.
फाइनली वो बाहर निकला और सभी को bye बोल और कल का आने का बोलके वो मार्किट साइड निकल गया. उससे गिफ्ट लेना था तनीषा दी के लिए. पर क्या? कोण सा गिफ्ट दे की तनीषा दी खुश हो जाए? क्या पसंद है उन्हें? मानेगी भी नहीं या नहीं? सवालों से उलझे राहुल बस बाइक पे सवार आस पास की दुकाने देख चलता जा रहा था...
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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!!
कीप सपोर्टिंग एंड कीप रीडिंग!







