- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 138,579
अपडेट 53
रुचिका ने ये सुनकर मोहनलाल के चेहरे पर चुम लिया तू मोहनलाल ने भी प्रतिक्रिया में उसके नरम नरम गलों पर अपने होठों से स्पर्श किया तू रुचिका सिहर उठी तू मोहन लाल ने अब होठों को दूसरे गाल पर भी स्पर्श किया तू रुचिका की साँसे तेज़ हो गयी और उसने धीरे से कहा 'चलें' तू मोहनलाल ने कहा 'ठीक है' और वो वंहा से बहार निकलने लगे.
बहार आने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'अब क्या प्रोग्राम है' तू रुचिका ने कहा 'आगे का प्रोग्राम आप डीडे करो'
मोहनलाल 'देखो हम तू कोई सामान लाये नहीं थे और बिना सामान के होटल में एंट्री गलत नज़रो से देखि जाती है, इसलिए पहले मार्किट चलते हैं और कुछ शॉपिंग करके फिर होटल चलेंगे'
रुचिका 'आप सही कह रहे हो, वैसे भी कुछ कपडे तू होने hi चाहिए नहीं तू दिक्कत हो जाएगी'
मोहनलाल 'अब मार्किट जाना है तू तुम क्या बन कर चलोगी'.
रुचिका हँसते हुए 'आप मुझे क्या बनाकर ले जाना चाहते हैं'
मोहनलाल 'आज मैं ये तुम पर छोड़ता हूँ, क्योँकि मैं कोई भी चीज़ तुम पर लड़ना नहीं चाहता'
रुचिका 'आप सच में मुझे उलझकर फंसा देते हो. जब मैंने आपकी बात मान ली है तू मैं भी आज आपके साथ आपकी मर्जी से चलूंगी'
मोहनलाल 'ठीक है फिर बेटी बनकर चलो'
रुचिका हँसते हुए 'मुझे मंजूर है'
मोहनलाल 'मैं जनता हूँ की तुम भी मुझसे बहुत प्यार करती हो, इसलिए मेरी उचित अनुचित बात मान लोगी, लेकिन मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता. अब से जो भी निर्णय हो वो हम दोनों का हो न की अकेले मेरा'
रुचिका 'आपकी बात ठीक है, तू फिर आप hi सुझाव दो'
मोहनलाल 'देखो पिछली बार हम दोनों पति पत्नी तू बनने थे और मन hi मन में एक दूसरे से प्यार करने लगे थे लेकिन कुछ कहने से डरते थे तू क्योँ न इस बार हम सही में पति पत्नी बन जाएँ'
रुचिका 'आप जो कहेगे मैं आपके साथ हु लेकिन एक रिक्वेस्ट है की चाहे हम किसी के सामने अपने आप को पति पत्नी पेश करें लेकिन हमें एक दूसरे को बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड समझे. इससे हमें एक दूसरे को अच्छे से समझने का मौका मिलेगा और हमारा रिश्ता भी गहरा होगा'
मोहनलाल 'बात तू तुम्हारी बिलकुल ठीक है तू अब तुम बाकि सबके सामने मेरी बीवी और मेरे मन में गर्लफ्रेंड'
रुचिका हँसते हुए 'अगर चाहो तू असल में भी बीवी मान सकते हो'
मोहनलाल 'सोच लो फिर बाद में कहोगी नहीं अभी बीवी नहीं'
रुचिका 'मैं तू नहीं कंहूगी बाकि आपकी मर्जी'
मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़ा और चल पड़े. वंहा पर एक कैब को रुकवाया और मॉल में जाने के लिए बोल दिया. दोनों कैब में अब ऐसे पास पास बैठे थे जैसे की वो वाकई पति पत्नी हो. दोनों के चेहरों पर ख़ुशी झलक रही थी. मोहनलाल ने अपने बांये हाथ से रुचिका का दांया हाथ पकड़ा हुआ था क्योँकि उसके दांये हाथ में अभी भी दर्द था. वो रुचिका के हाथ को हलके हलके सेहला भी रहा था. तिधि देर में वे दोनों मॉल में पंहुच गए
मॉल में पंहुच कर रुचिका ने मोहनलाल से कहा की पहले हाथ पर लगाने के लिए ऑइंटमेंट ले लेते हैं तू मोहनलाल को रुचिका पर बहुत प्यार आने लगा और उसने जिस हाथ को पकड़ा हुआ था उससे कुछ जयादा hi दबाकर ख़ुशी जाहिर की. फिर उन दोनों ने पहले एक मेडिकल स्टोर से ऑइंटमेंट ली और रुचिका बड़े प्यार से उससे लगाने लगी, जिससे देखकर मोहनलाल की आँखों में रुचिका के लिए अथाह मोहबात उत्तर आयी.
मोहनलाल उसके बाद रुचिका को अच्छे से गारमेंट्स स्टोर में ले गया और वंहा मौजूद एक सलेसगिरल को रुचिका के लिए कपडे दिखने के लिए कहा तू वंहा से उसने एक ड्रेस पसंद की और वो ट्रायल रूम में तरय करने चली गयी और उसके बाद उसने एक और ड्रेस देखि और दो ड्रेस ले ली. अब बरी थी उन्देर्गर्मेन्ट्स को तू साइज पूछा तू रुचिका मोहनलाल की तरफ देखने लगी तू मोहनलाल ने सलेसगिरल को उसका साइज बताया तू उसने रुचिका से उनको भी पसंद करा लिया. तभी मोहनलाल की नज़र एक अच्छी सी निघ्त्य पर पड़ी तू उसने सलगिरल को उससे अलग से पैक करने के लिए कहा. ये तब हुआ जब वंहा रुचिका नहीं थी. फिर एक नाईट ड्रेस भी ली. मोहनलाल ने भी अपने लिए एक पेंट शर्ट रुचिका की पसंद से लिया और वो बहार आ गया.
फिर उन्होंने एक ट्राली बैग ख़रीदा और सारा सामान उसमे डाला. फिर वो कुछ कास्मेटिक और कुछ और जरुरी चीज़ों की शॉपिंग करके वंहा पर फ़ूड कोर्ट में जाकर जूस का आर्डर करके एक टेबल पर बैठे थे तू रुचिका ने शरमाते हुए पूछा 'आपको मेरा साइज अभी तक याद है' मोहनलाल उसकी आँखों में देखते हुए 'मैं अपनी बीवी का साइज कैसे भूल सकता हूँ, जो मेरी बहुत प्यारी प्रेमिका भी है' जिससे सुनकर रुचिका और जयादा शर्मा गयी तू मोहनलाल ने कहा 'बुरा लगा है तू भूल जाता हूँ'
रुचिका शरमाते हुए 'मैंने ऐसा कब कहा'
मोहनलाल 'मुझे लगा की तुम्हे बुरा लग रहा है'
रुचिका शरमाते हुए 'कुछ और बात करो न'
मोहनलाल 'अच्छा ये बताओ की रूम लेने के लिए क्या रिश्ता लिखवाएं'
रुचिका 'जो हमारे रिश्ता है'
मोहनलाल 'बाप बेटी'
रुचिका ने गुस्से से मोहनलाल की तरफ देखा तू मोहनलाल भी डरने का नाटक करता हुआ 'ठीक है मैं समझ गया मेरी जान'
रुचिका एक बार फिर सोच में पद गयी की जो हो रहा है वो ठीक है या नहीं. जब तक रुचिका अपनी सोच में थी तू मोहनलाल ने एक होटल बुक कर लिया और तभी जूस भी आ गया. मोहनलाल ने रुचिका का ध्यान भांग करने के लिए टेबल के नीचे से उसकी तंग पर अपने पेअर से इशारा किया तू उसने नज़र उठाकर देखा तू मोहनलाल ने रुचिका से जूस पीने के लिए कहा. जूस पीकर वो बहार आ गए और कैब में बैठकर होटल की तरफ चल पड़े.
होटल में पंहुच कर मोहनलाल रुचिका का हाथ पकडे पकडे रिसेप्शन पर गया और अपनी बुकिंग के बारे में बताय तू उसने उन्हें वेलकम किया और एक वेटर को उनके साथ भेज दिया जो जाकर उन्हें कमरे में छोड़ आया. उसके जाने के बाद मोहनलाल ने कमरे को अंदर से बंद किया और रुचिका को लेकर सोफे पर बैठ गया.
रुचिका ने कमरे को देखकर कहा 'क्या जरुरत थी इतने महंगे होटल में आने की. मोहनलाल ने उससे अपने पास खिसका कर बैठा लिया और कहा 'मैं अपनी जान के लिए कोई सस्ते होटल में जाता, हरगिज़ नहीं. मैं चाहता हूँ की तुम दुनिया की सब अच्छी से अछि चीज़ों का भोग करो'
रुचिका 'ये होटल तू उस होटल से भी जयादा अच्छा लग रहा है'
मोहनलाल ने अपने एक हाथ को उसके सर के पीछे से लेजाकर कंधे पर रखकर थोड़ा सा रुचिका को अपने और पास खिसका लिया और कहा 'तुमने सही पहचाना है, ये उस होटल से काफी बेहतर है. अब तुम मेरी जान हो तू तुम्हारा ख्याल मैं नहीं रखूँगा तू और कौन रखेगा. तुम ये बताओ की खुश हो की नहीं'
रुचिका 'बहुत खुश हूँ'
मोहनलाल 'इस कमरे में आकर खुश हो या किसी और बात से?'
रुचिका 'आपको क्या लगता है की मैं किस बात से खुश हूँ'
मोहनलाल 'मैं तू तुम से जानना छह रहा हु'
रुचिका 'मैं आपके साथ खुश हु, कमरा तू टेम्पररी है, लेकिन रिश्ता परमानेंट है'
मोहनलाल 'सच सच बताओ की तुम मेरा मन रखने के लिए कह रही हो या सही में खुश हो'
रुचिका अपने सर को मोहनलाल के कंधे पर टिकते हुए 'मैं आप से बहुत प्यार करने लगी थी लेकिन आप मेरा दिल तोड़कर मुझे बताये बिना चले आये. आपने ये भी नहीं सोचा की मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी'
मोहनलाल उसके कंधे और गर्दन को प्यार से सहलाते हुए 'मैं समझ सकता हूँ क्योँकि मैंने भी उस तड़प और दूर होने के दर्द को महसूस किया है. मैं भी दुखी था लेकिन दिल पर पत्थर रखकर तुमसे दूर होता रहा लेकिन मैं जितना दूर हुआ मेरा प्यार उतना hi जयादा बढ़ता रहा. कई बार मन किया की सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे पास पंहुच जॉन, लेकिन हिम्मत नहीं जूता पाया. आज वक़्त ने एक बार हमें फिर मिलाया है और अब मैं तुम्हे अपने दिल से दूर नहीं होने दूंगा' ये कहकर उसने रुचिका को थोड़ा अपने से भींच लिया तू रुचिका के बूब्स उसकी छथि में धंसने लगे.
रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर 'मैं भी आज बहुत खुश हूँ की आप मेरे साथ हैं'
मोहनलाल 'ये ठीक है की हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करने लगे हैं, लेकि इसका अंजाम क्या होगा'
रुचिका 'अंजाम से मतलब'
मोहनलाल 'कल को तुम्हारी शादी होगी तू......'
रुचिका हंसने लगी और कहने लगी 'मेरी शादी अब किसी और के साथ हो hi नहीं सकती'
मोहनलाल 'क्योँ नहीं हो सकती, क्या तुम शादी करोगी hi नहीं'
रुचिका 'मेरी अगर किसी से भी शादी होती है तू जिन लोगों को हम अपने आप को पति पत्नी बता चुके हैं और वो कहीं गलती से भी मिल गए तू वो शादी तू उसी वक़्त hi टूट जाएगी. जरा सोचकर देखो तब मेरी हालत क्या होगी'
मोहनलाल कुछ सोचते हुए 'इसका मतलब तुम इस दर की वजह से किसी और से शादी नहीं करोगी और इसलिए मेरे साथ मज़बूरी में रिश्ता बना रही हो'
रुचिका 'मैंने तू सिर्फ लॉजिकल बात की, अगर गलत है तू बताओ. दूसरा मैं किसी दर की वजह से नहीं बल्कि अपने पहले प्यार को पाने के लिए आपसे रिश्ता बनाया है'
मोहनलाल 'मैं शादीशुदा हु, दो बच्चों का बाप हु और मेरी उम्र भी तुम से जयादा है तू फिर किस लिए मुझसे रिश्ता बना रही हो'
रुचिका ने अपना एक हाथ अपने बूब पर रखकर कहा 'ये दिल अब सिर्फ आपके लिए धड़कता है और इसमें आपके आलावा अब कोई नहीं आ सकता. रही बात आपके शादीशुदा होने की तू मुझे उन सब से कोई फरक नहीं पड़ता. मुझे सिर्फ इतना hi चाहिए की आप मेरे से सच्चे दिल से प्यार करें और कभी मुझे अकेला न छोड़े'
मोहनलाल ने रुचिका को एक बार फिर अपने से चिपटा लिया और उसके कंधे और गर्दन को सहलाते हुए उसके चेहरे को थोड़ा सा ऊपर उठाकर उसके माथे को चुम लिया तू रुचिका के हाथ भी मोहनलाल के कन्धों पर पंहुच गए. मोहनलाल ने अपने होठों को उसकी आँखों पर पलकों के ऊपर रखा तू रुचिका मचलने लगी, फिर मोहनलाल अपने होठों को दूसरी आँख की पलकों पर ले गया और उस को भी चुम लिया तू रुचिका की साँसे तेज़ चलने लगी और उसकी गरम गरम सांसों को अपने चेहरे पर महसूस कर मोहनलाल उत्तेजित होने लगा लेकिन वो उत्तेजना में इतना आगे नहीं बढ़ना छह रहा था की बना बनाया खेल बिगड़ जाये, इसलिए मोहनलाल ने रुचिका के कंधे और बाज़ू को हलके हलके सहलाते हुए उसकी आँखों में झंकार कहने लगा 'कैसा लग रहा है'
रुचिका ने अपनी पलके झुका कर कहा 'अच्छा'
मोहनलाल का जो हाथ उसके कंधे पर था वो उसके गाल पर पंहुच गया और उसके गलों को सहलाते हुए 'मेरी जान बहुत खूबसूरत है'
रुचिका शरमाते हुए 'आप भी न'
मोहनलाल उसके गलों पर हाथ फेरते हुए 'सच में तुम्हारे गाल बहुत प्यारे हैं' रुचिका ये सुनकर और शर्माने लगी और अपने चेहरे को मोहनलाल की चाहती में छुपाने लगी और उसकी गरम गरम साँसें मोहनलाल को अपनी चाहती पर महसूस हो रही थी तू मोहनलाल अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए उससे अपने से दूर करने के लिए उसके चेहरे को दांये हाथ से ऊपर उठाने लगता है तू उस हाथ की ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर लग जाती है और उसकी स्मेल भी रुचिका को आने लगती तू वो सोचती की स्मेल किस चीज़ की है? उससे मेरे हाथ पर लगी ऑइंटमेंट याद आती है और वो कड़ी होकर अपने आप को मोहनलाल के उस हाथ से दूर करती है लेकिन स्मेल उससे तब भी आ रही होती है. उससे ध्यान आता है की मोहनलाल का हाथ उसके चेहरे पर आ गया था जिसकी वजह से ऑइंटमेंट लग गयी होगी.
तभी मोहनलाल खड़े होकर चाणक्य से उसके चेहरे को साफ़ करने लगता है लेकिन ऐसा करने से ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर फ़ैल जाती है तू वो उससे बाथरूम में वाश करने के लिए कहता है.
रुचिका बाथरूम से फेस वाश करके बहार आती है तू उसने दुप्पटा नहीं ूढा हुआ था. कुछ पानी उसके कुर्ते पर गिर गया था जिससे वो गीला हो गया था. गीला होने से उसका कुरता ट्रांसपेरेंट सा हो गया था, जिस वजह से उसकी ब्रा का काफी सारा हिस्सा नज़र आ रहा था. इतना hi नहीं उसके बूब्स के ऊपरी भाग का काफी हिस्सा भी नग्न नज़र आ रहा था. रुचिका की इस हालत को देखकर मोहनलाल की आँखें खुली की खुली रह गयी और उसका ध्यान कन्टिन्यूसली उसके बूब्स पर था. रुचिका ने जब उसकी नज़रों का पीछा किया तू उसने पाया की उसके पापा की नज़र उसके बूब्स को घूरे जा रही है. उसने अपनी हालत का जायजा लिया तू अपने हाथ आगे करके अपने बूब्स को छुपाने का प्रयास करने लगी. तब तक मोहनलाल उसके पास आकर कहने लगा 'यू अरे रियली ब्यूटीफुल'
रुचिका उसके गले लग गयी ताकि अपने बूब्स को छुपा सके, लेकिन इससे उसके बूब्स का स्पर्श मोहनलाल की छथि पर हुआ तू उसकी भावनाओं को अब भड़कने से कौन रोक सकता था. उसने अपने बांये हाथ को उसकी कमर में डालकर अपने नजदीक करते हुए 'मेरी जान को शर्म आ रही है' तू रुचिका मोहनलाल से थोड़ा पीछे होकर उसकी चाहती में घूंसे मरने लगी. अब रुचिका के घूंसो का मोहनलाल पर क्या असर होना था वो तू उसके पीछे हटने से नज़रे उसके बूब्स पर जमा ली. जैसे hi रुचिका को इसका एहसास हुआ तू वो उसके आगोश में से निकल कर पीठ करके कड़ी हो गयी. मोहनलाल तू उसकी पीठ में भी खूबसूरती को ढूंढ़ते हुए उसके पीछे जाकर उसके बालों को हटाकर उसकी गर्दन पर अपने होठों को रख दिया तू रुचिका की साँसे बहुत तेज़ चलने लगी. मोहनलाल ने दुबारा उसकी गर्दन पर किश किया तू वो पलटकर उसकी छाती से लग गयी. मोहनलाल ने इस बार उसकी कमर में हाथ डालकर उससे अच्छे से अपने से लिपटा लिया और फिर अपने होठों से उसके गाल पर किश कर दिया तू रुचिका सिहर उठी और उसकी हाथ अपने आप hi मोहनलाल की पाठ पर चले गए. मोहनलाल ने जब दुबारा उसके गलों पर किश किया तू रुचिका ने मोहनलाल को कास लिया और हद तू तब हो गयी जब रुचिका ने अपने पंजो पर कड़ी होकर मोहनलाल के गाल पर किश कर दिया और फिर शरमाते हुए उसकी बांहों में से निकल कर उलटी होकर कड़ी हो गयी. उसकी साँसें सँभालने का नाम hi नहीं ले रही थी.
मोहनलाल ने सोचा की जयादा आगे बढ़ना अभी ठीक नहीं है और उसने प्यार से पूछा 'क्या हुआ मेरी जान को' तू रुचिका ने कोई जवाब नहीं दिया. तब मोहनलाल जाकर सोफे पर बैठ गया aur.kehne लगा 'चलो तैयार हो जाओ थोड़ा घूम कर आते हैं'
रुचिका ने ये सुनकर मोहनलाल के चेहरे पर चुम लिया तू मोहनलाल ने भी प्रतिक्रिया में उसके नरम नरम गलों पर अपने होठों से स्पर्श किया तू रुचिका सिहर उठी तू मोहन लाल ने अब होठों को दूसरे गाल पर भी स्पर्श किया तू रुचिका की साँसे तेज़ हो गयी और उसने धीरे से कहा 'चलें' तू मोहनलाल ने कहा 'ठीक है' और वो वंहा से बहार निकलने लगे.
बहार आने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'अब क्या प्रोग्राम है' तू रुचिका ने कहा 'आगे का प्रोग्राम आप डीडे करो'
मोहनलाल 'देखो हम तू कोई सामान लाये नहीं थे और बिना सामान के होटल में एंट्री गलत नज़रो से देखि जाती है, इसलिए पहले मार्किट चलते हैं और कुछ शॉपिंग करके फिर होटल चलेंगे'
रुचिका 'आप सही कह रहे हो, वैसे भी कुछ कपडे तू होने hi चाहिए नहीं तू दिक्कत हो जाएगी'
मोहनलाल 'अब मार्किट जाना है तू तुम क्या बन कर चलोगी'.
रुचिका हँसते हुए 'आप मुझे क्या बनाकर ले जाना चाहते हैं'
मोहनलाल 'आज मैं ये तुम पर छोड़ता हूँ, क्योँकि मैं कोई भी चीज़ तुम पर लड़ना नहीं चाहता'
रुचिका 'आप सच में मुझे उलझकर फंसा देते हो. जब मैंने आपकी बात मान ली है तू मैं भी आज आपके साथ आपकी मर्जी से चलूंगी'
मोहनलाल 'ठीक है फिर बेटी बनकर चलो'
रुचिका हँसते हुए 'मुझे मंजूर है'
मोहनलाल 'मैं जनता हूँ की तुम भी मुझसे बहुत प्यार करती हो, इसलिए मेरी उचित अनुचित बात मान लोगी, लेकिन मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता. अब से जो भी निर्णय हो वो हम दोनों का हो न की अकेले मेरा'
रुचिका 'आपकी बात ठीक है, तू फिर आप hi सुझाव दो'
मोहनलाल 'देखो पिछली बार हम दोनों पति पत्नी तू बनने थे और मन hi मन में एक दूसरे से प्यार करने लगे थे लेकिन कुछ कहने से डरते थे तू क्योँ न इस बार हम सही में पति पत्नी बन जाएँ'
रुचिका 'आप जो कहेगे मैं आपके साथ हु लेकिन एक रिक्वेस्ट है की चाहे हम किसी के सामने अपने आप को पति पत्नी पेश करें लेकिन हमें एक दूसरे को बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड समझे. इससे हमें एक दूसरे को अच्छे से समझने का मौका मिलेगा और हमारा रिश्ता भी गहरा होगा'
मोहनलाल 'बात तू तुम्हारी बिलकुल ठीक है तू अब तुम बाकि सबके सामने मेरी बीवी और मेरे मन में गर्लफ्रेंड'
रुचिका हँसते हुए 'अगर चाहो तू असल में भी बीवी मान सकते हो'
मोहनलाल 'सोच लो फिर बाद में कहोगी नहीं अभी बीवी नहीं'
रुचिका 'मैं तू नहीं कंहूगी बाकि आपकी मर्जी'
मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़ा और चल पड़े. वंहा पर एक कैब को रुकवाया और मॉल में जाने के लिए बोल दिया. दोनों कैब में अब ऐसे पास पास बैठे थे जैसे की वो वाकई पति पत्नी हो. दोनों के चेहरों पर ख़ुशी झलक रही थी. मोहनलाल ने अपने बांये हाथ से रुचिका का दांया हाथ पकड़ा हुआ था क्योँकि उसके दांये हाथ में अभी भी दर्द था. वो रुचिका के हाथ को हलके हलके सेहला भी रहा था. तिधि देर में वे दोनों मॉल में पंहुच गए
मॉल में पंहुच कर रुचिका ने मोहनलाल से कहा की पहले हाथ पर लगाने के लिए ऑइंटमेंट ले लेते हैं तू मोहनलाल को रुचिका पर बहुत प्यार आने लगा और उसने जिस हाथ को पकड़ा हुआ था उससे कुछ जयादा hi दबाकर ख़ुशी जाहिर की. फिर उन दोनों ने पहले एक मेडिकल स्टोर से ऑइंटमेंट ली और रुचिका बड़े प्यार से उससे लगाने लगी, जिससे देखकर मोहनलाल की आँखों में रुचिका के लिए अथाह मोहबात उत्तर आयी.
मोहनलाल उसके बाद रुचिका को अच्छे से गारमेंट्स स्टोर में ले गया और वंहा मौजूद एक सलेसगिरल को रुचिका के लिए कपडे दिखने के लिए कहा तू वंहा से उसने एक ड्रेस पसंद की और वो ट्रायल रूम में तरय करने चली गयी और उसके बाद उसने एक और ड्रेस देखि और दो ड्रेस ले ली. अब बरी थी उन्देर्गर्मेन्ट्स को तू साइज पूछा तू रुचिका मोहनलाल की तरफ देखने लगी तू मोहनलाल ने सलेसगिरल को उसका साइज बताया तू उसने रुचिका से उनको भी पसंद करा लिया. तभी मोहनलाल की नज़र एक अच्छी सी निघ्त्य पर पड़ी तू उसने सलगिरल को उससे अलग से पैक करने के लिए कहा. ये तब हुआ जब वंहा रुचिका नहीं थी. फिर एक नाईट ड्रेस भी ली. मोहनलाल ने भी अपने लिए एक पेंट शर्ट रुचिका की पसंद से लिया और वो बहार आ गया.
फिर उन्होंने एक ट्राली बैग ख़रीदा और सारा सामान उसमे डाला. फिर वो कुछ कास्मेटिक और कुछ और जरुरी चीज़ों की शॉपिंग करके वंहा पर फ़ूड कोर्ट में जाकर जूस का आर्डर करके एक टेबल पर बैठे थे तू रुचिका ने शरमाते हुए पूछा 'आपको मेरा साइज अभी तक याद है' मोहनलाल उसकी आँखों में देखते हुए 'मैं अपनी बीवी का साइज कैसे भूल सकता हूँ, जो मेरी बहुत प्यारी प्रेमिका भी है' जिससे सुनकर रुचिका और जयादा शर्मा गयी तू मोहनलाल ने कहा 'बुरा लगा है तू भूल जाता हूँ'
रुचिका शरमाते हुए 'मैंने ऐसा कब कहा'
मोहनलाल 'मुझे लगा की तुम्हे बुरा लग रहा है'
रुचिका शरमाते हुए 'कुछ और बात करो न'
मोहनलाल 'अच्छा ये बताओ की रूम लेने के लिए क्या रिश्ता लिखवाएं'
रुचिका 'जो हमारे रिश्ता है'
मोहनलाल 'बाप बेटी'
रुचिका ने गुस्से से मोहनलाल की तरफ देखा तू मोहनलाल भी डरने का नाटक करता हुआ 'ठीक है मैं समझ गया मेरी जान'
रुचिका एक बार फिर सोच में पद गयी की जो हो रहा है वो ठीक है या नहीं. जब तक रुचिका अपनी सोच में थी तू मोहनलाल ने एक होटल बुक कर लिया और तभी जूस भी आ गया. मोहनलाल ने रुचिका का ध्यान भांग करने के लिए टेबल के नीचे से उसकी तंग पर अपने पेअर से इशारा किया तू उसने नज़र उठाकर देखा तू मोहनलाल ने रुचिका से जूस पीने के लिए कहा. जूस पीकर वो बहार आ गए और कैब में बैठकर होटल की तरफ चल पड़े.
होटल में पंहुच कर मोहनलाल रुचिका का हाथ पकडे पकडे रिसेप्शन पर गया और अपनी बुकिंग के बारे में बताय तू उसने उन्हें वेलकम किया और एक वेटर को उनके साथ भेज दिया जो जाकर उन्हें कमरे में छोड़ आया. उसके जाने के बाद मोहनलाल ने कमरे को अंदर से बंद किया और रुचिका को लेकर सोफे पर बैठ गया.
रुचिका ने कमरे को देखकर कहा 'क्या जरुरत थी इतने महंगे होटल में आने की. मोहनलाल ने उससे अपने पास खिसका कर बैठा लिया और कहा 'मैं अपनी जान के लिए कोई सस्ते होटल में जाता, हरगिज़ नहीं. मैं चाहता हूँ की तुम दुनिया की सब अच्छी से अछि चीज़ों का भोग करो'
रुचिका 'ये होटल तू उस होटल से भी जयादा अच्छा लग रहा है'
मोहनलाल ने अपने एक हाथ को उसके सर के पीछे से लेजाकर कंधे पर रखकर थोड़ा सा रुचिका को अपने और पास खिसका लिया और कहा 'तुमने सही पहचाना है, ये उस होटल से काफी बेहतर है. अब तुम मेरी जान हो तू तुम्हारा ख्याल मैं नहीं रखूँगा तू और कौन रखेगा. तुम ये बताओ की खुश हो की नहीं'
रुचिका 'बहुत खुश हूँ'
मोहनलाल 'इस कमरे में आकर खुश हो या किसी और बात से?'
रुचिका 'आपको क्या लगता है की मैं किस बात से खुश हूँ'
मोहनलाल 'मैं तू तुम से जानना छह रहा हु'
रुचिका 'मैं आपके साथ खुश हु, कमरा तू टेम्पररी है, लेकिन रिश्ता परमानेंट है'
मोहनलाल 'सच सच बताओ की तुम मेरा मन रखने के लिए कह रही हो या सही में खुश हो'
रुचिका अपने सर को मोहनलाल के कंधे पर टिकते हुए 'मैं आप से बहुत प्यार करने लगी थी लेकिन आप मेरा दिल तोड़कर मुझे बताये बिना चले आये. आपने ये भी नहीं सोचा की मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी'
मोहनलाल उसके कंधे और गर्दन को प्यार से सहलाते हुए 'मैं समझ सकता हूँ क्योँकि मैंने भी उस तड़प और दूर होने के दर्द को महसूस किया है. मैं भी दुखी था लेकिन दिल पर पत्थर रखकर तुमसे दूर होता रहा लेकिन मैं जितना दूर हुआ मेरा प्यार उतना hi जयादा बढ़ता रहा. कई बार मन किया की सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे पास पंहुच जॉन, लेकिन हिम्मत नहीं जूता पाया. आज वक़्त ने एक बार हमें फिर मिलाया है और अब मैं तुम्हे अपने दिल से दूर नहीं होने दूंगा' ये कहकर उसने रुचिका को थोड़ा अपने से भींच लिया तू रुचिका के बूब्स उसकी छथि में धंसने लगे.
रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर 'मैं भी आज बहुत खुश हूँ की आप मेरे साथ हैं'
मोहनलाल 'ये ठीक है की हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करने लगे हैं, लेकि इसका अंजाम क्या होगा'
रुचिका 'अंजाम से मतलब'
मोहनलाल 'कल को तुम्हारी शादी होगी तू......'
रुचिका हंसने लगी और कहने लगी 'मेरी शादी अब किसी और के साथ हो hi नहीं सकती'
मोहनलाल 'क्योँ नहीं हो सकती, क्या तुम शादी करोगी hi नहीं'
रुचिका 'मेरी अगर किसी से भी शादी होती है तू जिन लोगों को हम अपने आप को पति पत्नी बता चुके हैं और वो कहीं गलती से भी मिल गए तू वो शादी तू उसी वक़्त hi टूट जाएगी. जरा सोचकर देखो तब मेरी हालत क्या होगी'
मोहनलाल कुछ सोचते हुए 'इसका मतलब तुम इस दर की वजह से किसी और से शादी नहीं करोगी और इसलिए मेरे साथ मज़बूरी में रिश्ता बना रही हो'
रुचिका 'मैंने तू सिर्फ लॉजिकल बात की, अगर गलत है तू बताओ. दूसरा मैं किसी दर की वजह से नहीं बल्कि अपने पहले प्यार को पाने के लिए आपसे रिश्ता बनाया है'
मोहनलाल 'मैं शादीशुदा हु, दो बच्चों का बाप हु और मेरी उम्र भी तुम से जयादा है तू फिर किस लिए मुझसे रिश्ता बना रही हो'
रुचिका ने अपना एक हाथ अपने बूब पर रखकर कहा 'ये दिल अब सिर्फ आपके लिए धड़कता है और इसमें आपके आलावा अब कोई नहीं आ सकता. रही बात आपके शादीशुदा होने की तू मुझे उन सब से कोई फरक नहीं पड़ता. मुझे सिर्फ इतना hi चाहिए की आप मेरे से सच्चे दिल से प्यार करें और कभी मुझे अकेला न छोड़े'
मोहनलाल ने रुचिका को एक बार फिर अपने से चिपटा लिया और उसके कंधे और गर्दन को सहलाते हुए उसके चेहरे को थोड़ा सा ऊपर उठाकर उसके माथे को चुम लिया तू रुचिका के हाथ भी मोहनलाल के कन्धों पर पंहुच गए. मोहनलाल ने अपने होठों को उसकी आँखों पर पलकों के ऊपर रखा तू रुचिका मचलने लगी, फिर मोहनलाल अपने होठों को दूसरी आँख की पलकों पर ले गया और उस को भी चुम लिया तू रुचिका की साँसे तेज़ चलने लगी और उसकी गरम गरम सांसों को अपने चेहरे पर महसूस कर मोहनलाल उत्तेजित होने लगा लेकिन वो उत्तेजना में इतना आगे नहीं बढ़ना छह रहा था की बना बनाया खेल बिगड़ जाये, इसलिए मोहनलाल ने रुचिका के कंधे और बाज़ू को हलके हलके सहलाते हुए उसकी आँखों में झंकार कहने लगा 'कैसा लग रहा है'
रुचिका ने अपनी पलके झुका कर कहा 'अच्छा'
मोहनलाल का जो हाथ उसके कंधे पर था वो उसके गाल पर पंहुच गया और उसके गलों को सहलाते हुए 'मेरी जान बहुत खूबसूरत है'
रुचिका शरमाते हुए 'आप भी न'
मोहनलाल उसके गलों पर हाथ फेरते हुए 'सच में तुम्हारे गाल बहुत प्यारे हैं' रुचिका ये सुनकर और शर्माने लगी और अपने चेहरे को मोहनलाल की चाहती में छुपाने लगी और उसकी गरम गरम साँसें मोहनलाल को अपनी चाहती पर महसूस हो रही थी तू मोहनलाल अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए उससे अपने से दूर करने के लिए उसके चेहरे को दांये हाथ से ऊपर उठाने लगता है तू उस हाथ की ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर लग जाती है और उसकी स्मेल भी रुचिका को आने लगती तू वो सोचती की स्मेल किस चीज़ की है? उससे मेरे हाथ पर लगी ऑइंटमेंट याद आती है और वो कड़ी होकर अपने आप को मोहनलाल के उस हाथ से दूर करती है लेकिन स्मेल उससे तब भी आ रही होती है. उससे ध्यान आता है की मोहनलाल का हाथ उसके चेहरे पर आ गया था जिसकी वजह से ऑइंटमेंट लग गयी होगी.
तभी मोहनलाल खड़े होकर चाणक्य से उसके चेहरे को साफ़ करने लगता है लेकिन ऐसा करने से ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर फ़ैल जाती है तू वो उससे बाथरूम में वाश करने के लिए कहता है.
रुचिका बाथरूम से फेस वाश करके बहार आती है तू उसने दुप्पटा नहीं ूढा हुआ था. कुछ पानी उसके कुर्ते पर गिर गया था जिससे वो गीला हो गया था. गीला होने से उसका कुरता ट्रांसपेरेंट सा हो गया था, जिस वजह से उसकी ब्रा का काफी सारा हिस्सा नज़र आ रहा था. इतना hi नहीं उसके बूब्स के ऊपरी भाग का काफी हिस्सा भी नग्न नज़र आ रहा था. रुचिका की इस हालत को देखकर मोहनलाल की आँखें खुली की खुली रह गयी और उसका ध्यान कन्टिन्यूसली उसके बूब्स पर था. रुचिका ने जब उसकी नज़रों का पीछा किया तू उसने पाया की उसके पापा की नज़र उसके बूब्स को घूरे जा रही है. उसने अपनी हालत का जायजा लिया तू अपने हाथ आगे करके अपने बूब्स को छुपाने का प्रयास करने लगी. तब तक मोहनलाल उसके पास आकर कहने लगा 'यू अरे रियली ब्यूटीफुल'
रुचिका उसके गले लग गयी ताकि अपने बूब्स को छुपा सके, लेकिन इससे उसके बूब्स का स्पर्श मोहनलाल की छथि पर हुआ तू उसकी भावनाओं को अब भड़कने से कौन रोक सकता था. उसने अपने बांये हाथ को उसकी कमर में डालकर अपने नजदीक करते हुए 'मेरी जान को शर्म आ रही है' तू रुचिका मोहनलाल से थोड़ा पीछे होकर उसकी चाहती में घूंसे मरने लगी. अब रुचिका के घूंसो का मोहनलाल पर क्या असर होना था वो तू उसके पीछे हटने से नज़रे उसके बूब्स पर जमा ली. जैसे hi रुचिका को इसका एहसास हुआ तू वो उसके आगोश में से निकल कर पीठ करके कड़ी हो गयी. मोहनलाल तू उसकी पीठ में भी खूबसूरती को ढूंढ़ते हुए उसके पीछे जाकर उसके बालों को हटाकर उसकी गर्दन पर अपने होठों को रख दिया तू रुचिका की साँसे बहुत तेज़ चलने लगी. मोहनलाल ने दुबारा उसकी गर्दन पर किश किया तू वो पलटकर उसकी छाती से लग गयी. मोहनलाल ने इस बार उसकी कमर में हाथ डालकर उससे अच्छे से अपने से लिपटा लिया और फिर अपने होठों से उसके गाल पर किश कर दिया तू रुचिका सिहर उठी और उसकी हाथ अपने आप hi मोहनलाल की पाठ पर चले गए. मोहनलाल ने जब दुबारा उसके गलों पर किश किया तू रुचिका ने मोहनलाल को कास लिया और हद तू तब हो गयी जब रुचिका ने अपने पंजो पर कड़ी होकर मोहनलाल के गाल पर किश कर दिया और फिर शरमाते हुए उसकी बांहों में से निकल कर उलटी होकर कड़ी हो गयी. उसकी साँसें सँभालने का नाम hi नहीं ले रही थी.
मोहनलाल ने सोचा की जयादा आगे बढ़ना अभी ठीक नहीं है और उसने प्यार से पूछा 'क्या हुआ मेरी जान को' तू रुचिका ने कोई जवाब नहीं दिया. तब मोहनलाल जाकर सोफे पर बैठ गया aur.kehne लगा 'चलो तैयार हो जाओ थोड़ा घूम कर आते हैं'