दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 5 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

थैंक्स भाई लोग.......

आप लोगो के साथ के बिना ये इतनी जल्दी संभव नहीं हो पता... इतने जल्दी आपलोगो ने 100 पेजेज पोरे करवा दिए. ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात हज. और में उम्मीद करूँगा की ये स्टोरी ऐसे hi आपलोगो को एंटरटेन करती रहे और आपलोगो अपना प्यार ु hi बरसते रहे ....

और है आगे देखिये की देव क्या करता है उन पिसाचो से निपटने के लिए.....

कीप सपोर्टिंग...............
 
अपडेट 30



में सोच रहा था की अब क्या किया जाये. क्युकी अभी मुझे ममी के साथ बहार जाना है और ऊपर से इसे फ़ोन भी करना है. अब क्या किया जाये. तभी मुझे नीचे से ममी की आवाज आने लगी वो मुझे बुला रही थी.

मैं- ये इतनी जल्दी रेडी हो गयी. क्या बात है. आज तो काम से काम 1 घंटा ले लेती रेडी होने में. लेकिन ये तो 20 मं. में hi रेडी हो गयी. अब कुछ किया भी नहीं जा सकता था. इसलिए मैंने फ़ोन को रखा जेब में और नीचे पहुंच गया.

जहा ममी बढ़िया रेडी होक कड़ी थी.

ममी- कैसी लग रही हु में.

मैं- ममी कसम से आप किसी भी एंगल से मेरी ममी तो बिलकुल नहीं लग रही है. है मेरी बड़ी बहन जरूर लग रही है.

ममी- हैट बदमाश कुछ भी बोलता है. चल अब लेट हो रहे है.

उसके बाद में बहार गया और गेराज में गया. जहा मैंने देखा की एक से बढ़कर एक कार्स राखी हुई थी. और दिल्ली का तो आपलोगो को पता hi है. यहाँ पैर 3-4 कर. की कार होना भी कोई बड़ी बात नहीं है. और मां को भी बढ़िया कार्स का शोक है. इसमें Rolls-Royce ज्यादा थी. उनके ऑफिस जाने के लिए. बाकि कुछ hi कार्स थी जिन्हे में ले जा सकता था. क्युकी बाकि सभी कार तो मां की पसंद की hi थी. लिखे उन्हें ऑफिस ले जाने के लिए.

में अभी देख hi रहा था की ममी बहा आगयी.

ममी- क्या हुआ कार पसंद नहीं आई.

मैं- ममी कार तो सभी बढ़िया है. लेकिन ये सभी कार्स ऑफिस ले जाने लायक है. शॉपिंग पैर कोनसी ले चले.

ममी- बैसे ये बात भी सही है. ये सभी तुम्हारे मां के ऑफिस के लिए hi है. अब यहाँ और कोई तो कार चलने वाला है नहीं जिसे कार्स का शोक हो. रही बात सुरभि की तो उसे स्कॉटी भी दे दो तो वो उसने भी कुश हो जाती है.

मैं- बही तो अब आप hi पसंद कीजिये कोनसी ले चले

ममी- बैसे इन्हे चला तो लोगे न. या फिर ड्राइवर को ले चले.

मैं- ममी में सब चला लूंगा आप बस कार बताओ.

ममी- ठीक है ये वाली ले चलो. बैसे इसका नाम क्या है.

मैं- ममी ये है Rolls-Royce व्रेथ.

ममी- बढ़िया है ले चलो इसी को.

मैंने उसकी के को लिया और हम दोनों उसमे बैठ गए. और हम आगे बाद गए. बकै में मक्खन थी चलने में.

मैं- अब बताइये कहा चलना है.

ममी- हम्म्म सीटीवॉक चलो.

मैंने डेस्टिनेशन डाली और उस रुट पैर निकल पड़े. रस्ते में ट्रैफिक काफी बाद गया था. इस time.isliye आराम से hi ड्राइव कर रहा था मैं. और हम दोनों बढ़िया म्यूजिक सुनते हुए आगे बाद रहे थे. करीब 1 घंटे में हम पहुंच गए. मैंने कार को पार्क किया और फिर हम पहुंचे मॉल में. बकै में शानदार मॉल था. सबसे पहले हम गए शॉपिंग के लिए. मैंने सभी के लिए बढ़िया कपडे सेलेक्ट किये. जिसमे दादू माँ मां ममी रेनू और सुरभि शामिल थे. बही ममी ने मेरे लिए शॉपिंग की. बढ़िया जीन्स टी शर्ट शूज वाच गॉगल्स. सब लिया उन्होंने. और मैंने उन सब के लिए. और अब बरी थे लकी चिराग और प्राची के लिए कुछ लेने की.

मैं- ममी मुझे कुछ सुग्गेस्टियन्स चाहिए आपके.

ममी- किस बारे में.

मैं- ममी मेरी एक फ्रेंड है. उसके लिए में क्या लू. और दो लड़के फ्रेंड्स है उनके लिए क्या लू.

ममी- तुम्हे उनकी पसंद बगेरा पता है

मैं- कुछ खास नहीं. हलाकि मैंने उनसे पूछा था तो उन्होंने कहा की जो अच्छा लगे ले आना.

ममी- देखो लड़की फ्रेंड के लिए तो बढ़िया सी ड्रेस ले लो. बैसे उसकी कोई फोटो बगेरा है क्या तुंहरे पास

मैं- एक मं. देखता हु. होना तो चाहिए.

मैंने अपने फ़ोन में देखना सुरु किया तो एक फोटो मिल गयी एक ग्रुप सेल्फी की. जिसमे हम चारो थे

मैं- ममी ये है तीनो.

ममी- ने फोटो देखि और उन्होंने शॉपकीपर को कुछ कहा और बढ़िया ड्रेस दिखने को कहा.

और थोड़ी hi देर में उसने अलग अलग वैरायटी की ड्रेस लेक दिखा दी. जिनमे में तो टोटली कंफ्यूज हो गया क्युकी साडी ड्रेसेस hi कमल की थी और इनमे प्राची तो और भी कमाल की लगती. लेकिन ममी साथ थी तो उन्होंने एक बढ़िया गाउन सेलेक्ट किया. जो उसकी फिटिंग का भी लग रहा था.

मैं- वाओ ममी नीस चॉइस.

ममी- to.manta है की नहीं.

मैं- बिलकुल.

ममी ने उस गाउन को पैक करवाया.

मैं- अब इनदोनो के लिए क्या लू.

ममी- ये तू सोच. तेरे दोस्त है. लड़की का प्रॉब्लम मैंने सोल्वे कर दिया अब लड़को का तू कर.

मैं- बैसे दोनों को टी शर्ट्स पहनने का बहुत शोक है.

ममी- जरुरी थोड़ी है की सबके लिए कपडे hi लेके जाया जाये.

कुछ और देखलो लिखे वाच गूगल या फिर ब्रेसलेट बगेरा

मैं- नीस आईडिया. चलो तो फिर देखते है.

उसके बाद हमने उस शॉप का बिल पेमेंट किया. मैंने hi साडी चीज़ो का बिल दिया सिर्फ ममी ने जो मेरे लिए कपडे और बाकि सब लिया था उनको छोड़ कर. हलाकि ममी ने बहुत कहा बिल देने के लिए लेकिन मैं नहीं मन और मैंने बिल दे दिया. उसके बाद हम एक अलग शॉप में गए और बहा से मैंने दोनों के लिए मेरे जैसी hi शामे वाच खरीद ली. लिखे हम तीनो की एक जैसी. निशानी के टूर पैर. और मैंने उसी ब्रांड की एक लेडीज वाच भी ले ली. और फिर मैंने उसपे हम चारो का नाम लिखवाया. जैसे मेरी वाच पैर उन तीनो का. और प्राची की वाच पैर हाँ तीनो का. ऐसे hi चिराग की वाच पैर और लकी की वाच पैर भी. ये हमेशा याद रहेगी सबको. हमारी शॉपिंग पूरी हो चुकी थी. उसके बाद हमने फ़ूड कोर्ट में जेक बढ़िया लंच किया और अपना दिन इंजॉय किया. लंच करने के बाद हम नीच जा रहे थे. की एक कोने में मेरी नजर गयी जहा पैर तीन लड़के एक लड़की को घेर कर खड़े हुए थे. और उसे परेशान कर रहे थे. उनके मंद में जो चल रहा था वो बकै में खतरनाक था. इसलिए मैंने उन तीनो के मंद को कण्ट्रोल किया और उन्हें बही पैर चिपका दिया. लिखे की वो अब अपनी जगह से हिल भी नहीं प् रहे थे. तीनो hi अपने हाथ और पेअर चलने की कोसिस कर रहे थे लेकिन वो उसी जगह पैर चिपक गए थे. और इस मौके का फायदा उठा कर वो लड़की भ से भाग गयी. और वो बैसे hi चिपके रह गए. और जब काफी देर तक नहीं हिल पाए तो चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ. तो उनकी आवाज सुनके बहा लोगो की भीड़ जैम गयी. और में और ममी नीच पहुंच गए सीधे पार्किंग में. उसके बाद बहा क्या हुआ ी don't no. हमने सरे बागेस कार में रखे और निकल गए घर की तरफ. घर पहुंचते पहुंचते हमें 4 बज गए थे.

हम जैसे hi अंदर एंटर हुए दोनों जान सोफे पैर बैठी हुई थी. और हमारे हाथो में बैग्स देखकर काफी एक्सीटेंड हो गयी की क्या लाये हो.

फिर मैंने उन दोनों के लिए जो शॉपिंग की थी वो उन्हें दे दी. जिसे प् कर वो दोनों बहुत कुश हो गयी और दोनों ने hi मुझे गले लगा लिया और मेरे दोनों तरफ के गलो को चुम लिया.

मैं- बस करो अब. पहन कर दिखाओ कैसा लग रहा है. और फिटिंग बगेरा ठीक है की नहीं.

रेनू- है अभी आये हम चेंज करके.

और दोनों hi भाग गयी अपने कमरे में. और मैंने ममी के लिए जो लिया था वो भी उनको दे दिया. और अभी मैंने दिया hi था की मां भी आगये और बैग्स देखकर समाज गए की क्या माजरा है

मां- क्या बात है शॉपिंग वो भी हमारे बिना

मैं- अब क्या करे मां आप तो ऑफिस निकल जाते है और ये दोनों सलग बचे हम दोनों तो निकल लिए आज.

मां- बैसे सॉरी यार तुम्हे में टाइम hi नहीं दे प् रहा हु.

मैं- कोई बात नहीं मां. काम पहले. चलो ये सब छोडो और ये तरय करके दिखाओ. मैंने लिया है आपके लिए.

मां- वाओ यार नीस. अभी आया में इसे पहन कर.

ममी- है लेकिन पहले फ्रेश हो लेना.

मां- है है. में हो जाऊंगा.

और ये कहके वो भी चले gye.or ममी भी चली गयी और में भी. बडिय फ्रेश hua.or नीचे पहुंच गया. जो गिफ्ट्स मैंने उन तीनो के लिए लिए थे उनको मैंने बही कमरे में रख दिया. और मेरे लिए जो ममी ने शॉपिंग की थी उसे भी कमरे में hi छोड़ दिया.

नीचे पंहुचा तो बढ़िया कॉफ़ी रेडी थी. और में पीने लगा. तभी रूम से मां रेडी होक निकले बढ़िया सूट पेण्ट था. फिटिंग भी बढ़िया थी.

और ऊपर से वो दोनों भी आगयी रेडी होक.

मैं- गजब लग रहे हो मां.

मां- थैंक्स भांजे. कल यही पहन कर जाऊंगा ऑफिस

मैं- है अच्छा लगेगा.

रेनू- और हम कैसे लग रहे है.

मां- एक दम परिया

मैं- बिलकुल. मस्त लग रही हो दोनों. बहुत hi प्यारी

सुरभि- थैंक्स बीआरओ.

मैं- योर वेलकम सीस.

बैसे फिटिंग बगेरा ठीक हैना.

रेनू- है सब बढ़िया है. और तुम्हारी चॉइस भी.

मैं- वेल थैंक्स. लेकिन इस पैर ममी का हक़ ज्यादा है. उन्ही ने ये सुग्गेस्ट किये थे.

रेनू- ओह्ह थैंक्स ममी.

सुरभि- थैंक्स माँ.

ममी- वेलकम बीटा.

चलो अब कॉफ़ी पेलो.

उसके बाद सबने कॉफ़ी का लुत्फ़ उठाया और हमने गप्पे स्टार्ट कर दी.

आज का दिन बहुत बडिय गया था. और अब मुझे प्राची को कॉल करने की जरुरत थी. इसलिए में गया अपने कमरे में और सीधा कॉल लगाया प्राची को. लेकिन अफ़सोस की फ़ोन बंद आरहा था. और जहा तक मुझे पता था ये फ़ोन जांभोज कर बंद किया गया था. इसलिए मैंने उसे एक सॉरी का मश्ग भेज दिया. ताकि जब बो फ़ोन स्टार्ट करे मुझे पता चल जाये. और मैंने फिर कॉल किया सीधा चिराग को. जो उसने थोड़ी hi रिंग में उठा लिया.

चिराग- कैसा है भाई.

मैं- एक दम मस्त तू बता. क्या हाल है. और सलग कैसा चल रहा है.

चिराग- सब बढ़िया hai.baise तू कब आरहा है बापिस.

मैं- यार 2-3 दिन बाद आऊंगा. क्यों क्या हुआ

चिराग- कुछ नहीं बस तेरी याद आरही थी.

मैं- ओह्ह्हो कही तेरा टेस्ट तो नहीं बदल गया

चिराग- क्या यार कुछ भी बोलता है.

मैं- अरे मजाक कर रहा हु. अच्छा ये बता मैडम ठीक है.

चिराग- है याद आया काफी परेशान थी कल और आज तो सलग भी नहीं आई थी. मैंने फ़ोन किया तो बंद आरहा था. तेरी कोई बात हुई क्या उससे.

. मैं- अबे यार कल में भूल गया उसे कॉल करना. उसके पता नहीं कितने मिस्स्कॉल पड़े हुए है मोबाइल में. सोचा आज कॉल करू लेकिन आज ममी ने शॉपिंग पैर खींच लिया. और अब जेक फ्री हुआ तो सोचा कॉल कर लू लेकिन बंद आरहा है. तू जरा उससे बात करवा न मेरी.

चिराग- ओह्ह्हू क्या बात है. मतलब आग दोनों तरफ लगी हुई है.

मैं- अबे जायेगा या नहीं.

चिराग- ठीक है बीआरओ जाता हु. बहा पहुंच कर तुझे कॉल करूँगा में.

मैं- ठीक है. बैसे सलग में सब ठीक था न.

चिराग- है भाई किसकी हिम्मत जो हमसे पन्गा ले sake.baki वो प्रोफेसर उस दिन से भड़का हुआ है ऐसा मुझे लग रहा है.

मैं- अब मैंने उसका क्या बिगाड़ दिया.

चिराग- पता नहीं भाई. जब तू आएगा ये मटर तभी सामने आएगा

मैं- चल देखते है फिलहाल जा तू और उससे मेरी बात करवा.

चिराग- ठीक है बीआरओ जाता हु.

मैंने कॉल कट कर दिया. और सोचा जब तक उसका कॉल आता है क्यूना में खुद hi बहा का राउंड लगा लू.

ये सोच कर मैं बैठा और आँखे बंद करके सलग और बाकि सबको देखने लगा कल के दिन से की क्या क्यावहुअ बहा पैर.

मुझे जो भी दिखा सब नार्मल hi था. कही कोई लफड़ा नहीं हुआ. सिर्फ प्राची hi परेशान थी. उसके मंद को थोड़ा रीड किया तो वो सिर्फ मेरे कॉल न आने की बजह से परेशान थी. उसके बाद रात में भी वो काफी परेशान रही कई बार कॉल किये मुझे उसने. लेकिन मेरा कोई रिस्पांस hi नहीं मिला उसे. जिस बजह से उसने फ़ोन बंद कर दिया और दीवार से दे मारा. मतलब फ़ोन तोड़ दिया. इससे पता चलता है की लड़की काफी जिद्दी है. फिर वो रात भर सोई hi नहीं. बस अपने टूटे फ़ोन को hi देखती रही. और सुबह उसकी हालत थोड़ी ख़राब सी हो गयी. रात भर न सोने की बजह से. जिस बजह से वो सलग भी नहीं गयी. और बस फिर कुछ नहीं हुआ. तभी मेरे फ़ोन की रिंग बजी जिससे मेरा ध्यान हटा. मैंने देखा तो चिराग का कॉल था. मैंने रेसिवेद किया.

मैं- है पहुंच गया

चिराग- है भाई पहुंच गया लेकिन वो कमरे से बहार hi नहीं आरही है. मैंने और आंटी ने कितना बुलाया लेकिन दरवाजा hi नहीं खोल रही है. अब क्या कृ तू hi बता.

मैं- एक काम कर तेरा मोबाइल किसी तरह उसके कमरे में पंहुचा दे. मेरा कॉल ों मार्के hi और लाउडस्पीकर ों करके. अगर बात बन गयी तो ठीक वर्ण तेरा मोबिल तो गया समाज लेना.

चिराग- पागल नहीं हु मैं. अपना मोबाइल नहीं डालने बाला अंदर में. उसने गुस्से में तोड़ दिया तो क्या करूँगा में. एक काम कर भाई तू आजा और उसे मनाए ले.

मैं- बीआरओ यार समझा कर. तेरे लिया एक नया फ़ोन ले दूंगा में. लेकिन फिलहाल तू अपना फ़ोन अंदर दाल de.pls यार.

मेरे लाख मानाने पैर वो मान गया. और उसने दरवाजे के नीचे से फ़ोन को सरका दिया. अब मुझे नहीं पता था की उसे आवाज आरही होगी या नहीं. फिर भी मैंने बोलना स्टार्ट किया

मैं- प्राची सॉरी यार कल फ़ोन नहीं कर पाया. सॉरी माफ़ कार्डो यार. वो कल एक्चुअली रेनू ने मेरा मोबाइल छिपा दिया था. साइलेंट करके. जिस बजह से में कॉल hi नहीं कर पाया. आज जब उसने मुझे मेरा फ़ोन लौटाया तब जेक मैंने तुम्हारे मिस कॉल देखे. और जैसे hi फ़ोन किया तुम्हारा फ़ोन बंद आरहा था. इसीलिए चिराग को भेजा तुम्हारे पास. प्लस यार बात करो mujhse.aise बाजार तो मत हो.

मैं उसको काफी देर तक मनाता रहा लेकिन उसने कोई भी रिप्लाई नहीं दिया.

मैंने अपनी आँखे बंद करके बहा का नजारा लिया तो पता चला की वो फ़ोन को अपने पास hi रख कर सब सुन रही है. और अपना मुँह टेड़ा कर रही है.

मैं- ये मुँह टेड़ा करना बंद कर दो अब अच्छा नहीं लग रहा है. और बात करो मुझसे. वर्ण में लौटे कर आऊंगा hi नहीं. यही अड्मिशन ले लूंगा.

ये बात जैसे hi उसने सुनी तुरंत hi बोल पड़ी

प्राची- खबरदार जो यहाँ बापिस नहीं आये तो. टंगे तोड़ दूंगी तुम्हारी

मैं- क्यों औ बापिस तुम बात कर नहीं रही हो. तो फिर बहा आके क्या करूँगा मैं.

प्राची- उल्टा चोर कोतवाल को दांते. तुम बात नहीं कर रहे mujhse.pata बी है मैंने कल से कितने कॉल किये है तुम्हे. और तुमने एक का भी जवाब नहीं दिया.

मैं- सॉरी यार वो प्राची ने कल गुस्से में मेरा फ़ोन छिपा दिया. उसे कितना मनाया तब जाने उसने फ़ोन बापिस किया. मुझे no. याद भी नहीं था वर्ण किसी और के फ़ोन से कर लेता.

प्राची- ठीक है माफ़ किया. बैसे किस बात पैर गुस्सा थी तुमसे दीदी.

मैं- कुछ नहीं उसे कल थोड़ा ज्यादा चिड़ा दिया था. और मजाक मजाक में वो कब सीरियस हो गयी पता hi नहीं चला.

प्राची- बुरी बात. कोई ऐसा करता है क्या बड़ो के साथ.

मैं- ी क्नोव की नहीं किया जाता लेकिन थोड़ी हसी मजाक में मामला सीरियस हो गया.

प्राची- चलो कोई बात नहीं उनको सॉरी बोलै की नहीं.

मैं- कल से सॉरी hi तो बोल रहा हु. तब जेक फ़ोन बापिस मिला है.

प्राची- बहुत अच्छा किया दीदी ने. जो तुम्हरा फ़ोन छोड़ लिया. बहुत hi बढ़िया सजा दी तुम्हे

मैं- बैसे तुम्हे तो पता hi है की मुझे फ़ोन की ज्यादा जरुरत नहीं पड़ती है. वो तो तुम्हे कॉल करना था इसी लिए इतना सब किया. वर्ण में जेक एक नया फ़ोन ले लेता

प्राची- है है जानती हु. खैर छोडो. ये. बताओ की बापिस कब आरहे हो. मन नहीं लग रहा तुम्हारे बिना..

मैं- शामे हेरे. जल्दी hi आऊंगा 2-3 दिनों में.

प्राची- ठीक है. लेकिन आजाना.

मैं- है आऊंगा नहीं तो कहा जाऊंगा.

प्राची- बैसे कोई फ्रेंड्स बगेरा बने बहा की नहीं

मैं- कुछ खास नहीं.

प्राची- बहुत अच्छा किया. बहा पैर बनाना भी मत.

. मैं- क्यों.

प्राची- ऐसे hi. मैंने कह दिया सो कह दिया. चलो अब रखो मुझे पड़ना है अभी.

मैं- ठीक है रखता हु और है उसका फ़ोन तोड़ मत देना बापिस कर देना. वर्ण खामखा मुझे चुना लग जायेगा

प्राची- है ठीक है कर दूंगी बापिस.

उसके बाद bye बोलके मैंने फ़ोन काट कर दिया. और अपना माथा पकड़ कर प्राची को सॉरी बोलै झूट बोलने के लिए.

तभी मेरे कानो में किसी की आवाज गुंजी. और मैंने इस तरफ देखा तो मेरी हालत hi ख़राब होने लगी…….

तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 31



मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मेरी हालत ख़राब हो गयी क्युकी मेरे सामने सुरभि और रेनू दोनों जान कड़ी हुई थी और मुझे घूर रही थी. मैंने सोचा सायद इन्होने सब सुन लिया है. यही अच्छा हुआ की इन्होने बीच में कुछ बोलै नहीं वर्ण सब गड़बड़ हो जाती.

मैं- कब से कड़ी हो यहाँ पैर.

रेनू- जब से मैंने तुम्हारा फ़ोन छिपाया है.

मैं- मतलब सब सुन लिया है.

सुरभि- ये किसको पट्टी पड़ा रहे थे तुम

मैं- है एक.

सुरभि- लड़की है क्या

मैं- है रेनू तो जानती है उसके बारे में.

रेनू- इसीलिए मैंने बीच में टोका नहीं तुम्हे. वैसे काफी सही झूट बोलने लगे हो तुम.

मैं- सब तुम लोगो की सांगत का hi असर है.

सुरभि- हमने कब झूट बोलै तुमसे.

मैं- अच्छा ये भी में बताऊ.

रेनू- है जरा बता भी दो

मैं- रहने दो वर्ण खामखा मुझपर भड़क जाओगी दोनों.

सुरभि- नहीं बता दो हम नहीं भड़केंगे.

मैं- ठीक है तो सुन लो. पब मैं मैंने कुछ देखा था.

ये सुनते hi दोनों की सिटी पित्ती गुल हो गयी. और दोनों एक दूसरे को घूरने लगी.

रेनू- क्या देखा था. और तुम तो बहार थे न.

मैं- है लेकिन अंदर आया था कुछ काम के लिए.

सुरभि- देखो साफ़ साफ़ बताओ क्या केहन चाहते हो तुम.

मैं- तुमने मुझसे झूट क्यों बोलै की रोहित और शुभम तुम्हारे दोस्त है.

रेनू- इसमें झूट क्या था वो सच में हमारे दोस्त है.

मैं- या फिर तुम दोनों के ड्रग डीलर.

ये सुनते hi उनके चेहरे की हवइया उड़द गयी.

मैं- मुझे तुम दोनों से ये उम्मीद नहीं थी. तुम दोनों ड्रग्स लेने लगीहो. और ऐसे क्रिमिनल लड़को से दोस्ती रखती हो.

दोनों तुरंत hi मेरे पास दौड़ कर आई और मेरे आजु बाजु बैठ गयी.

रेनू- देख देव ये बात हमारे बीच hi रहे प्लस मेरे भाई. में बड़ा करती हु आजके बाद हम वो कभी नहीं लेंगे. इनफैक्ट उस दिन के बाद हमारी इक्छा hi नहीं हुई है लेने की. तेरी कसम खा के बोलती हु.

अब आप लोग सोच रहे होंगे की ये क्या नया मटर है. तो में बता दू की. उस रात पब में मैंने दोनों के मंद रीड किये थे. दोनों hi लड़के अव्वल दर्जे के क्रिमिनल है. उन लोगो का यही काम है लड़के या लड़कियों को पहले ड्रग्स की आदत लगाई और फिर उन्हें ड्रग्स के लिए तरसाओ इस हद तक की वो कुछ भी करने को रेडी हो जाये. फिर उनसे जो चाहे वो करवा लो. उनकी साडी बैक हिस्ट्री मुझे पता चल गयी थी. और उस दिन उन्होंने वेटर से कहके हम सभी के ड्रिंक्स में ड्रग्स मिला दिए थे खास कर मेरे ड्रिंक्स में. और नैना रेनू और सुरभि को तो पहले से hi आदत लग चुकी थी. और ये दोनों जब देहरादून आई थी तब ये काफी दोसे अपने साथ ले थी. ताकि इतने दिनों तक इनका काम चलता रहे. और जिस दिन दोसे ख़त्म हो गया उस दिन ये बापिस आगयी. ये लोग एक्सरसाइज करती है इसलिए इनकी बॉडी पैर ये ड्रग्स धीरे धीरे असर करता है. लेकिन इतना तय था की लम्बे समय तक ये लेने से इनकी हालत बिगड़ने लगती और फिर एक ला इलाज बीमारी में बदल जाती. उस दिन मेरी ड्रिंक्स में भी ड्रग्स थे. इसीलिए मैंने उसे नहीं लिया. और उनके मुँह लटक गए क्युकी. उनका एक कस्टमर जो नहीं बना था आज. और जब हम घर बापिस आये थे तो मैंने उनके सर पैर हाथ रखकर सारा माल बहार निकाल दिया था और साथ में इन्हे जो कर लग गयी थी उससे भी छुटकारा दिलवा दिया था. और या दिन के बाद से इन्हें ड्रग्स की बिलकुल भी इक्छा नहीं हुई. जिस बजह से वो दोनों काफी ज्यादा चूड़े हुए है इनसे. और वो कुछ अलग प्लान बना रहे है इनके लिए. हलाकि नैना अभी भी फांसी हुई है. और रही बात उसकी जो मैंने कहा की पब मैं मैंने कुछ देखा था तो है इन्होने मेरे जाने के बाद अपने अगले दोसे उनसे लिए थे. लेकिन वो इन्होने अगले दिन hi फेक दिए क्युकी इन्हे इक्छा hi नहीं हुई. उलटी ड्रग्स से नफरत हो गयी है. और उन्हें इसके वेयर में पता भी नहीं की ये कैसे संभव हुआ. अब बरी थी रोहित और शुभम की. इनफैक्ट जिन लड़को को मैंने आज मॉल में फ़रीज़े किया था वो इन्ही के लिए काम करते है. ऐसा मुझे उनके मंद में घुसने से पता चला. और कल जब हम बहा से निकल गए तब बहा पुलिस आई और उनकी जब तलाशी की गयी तो उनके पास से ड्रग्स बरामद हुए. और ड्रग्स मिलते hi वो आज़ाद हो गए और पुलिस उन्हें पकड़ ले गयी. हलाकि ये सवाल सभी के मन में था की वो फ़रीज़े कैसे हुए. जिसका जवाब उन्हें कभी नहीं मिलेगा.

तो अब आते है प्रेजेंट में.

मैं- मुझे उससे कोई मतलब नहीं है. मुझे बस ये जानना है की तुम ये कब से ले रही हो और क्यों.

रेनू- भाई यार उन्दोनो से हम सलग में मिले थे धीरे धीरे हमारी दोस्ती हुई और फिर एक दिन हम पब गए जहा उन्होंने हमें ड्रग्स दिए. हलाकि हमने मन किया. लेकिन उन्हीने दोस्ती का वास्ता देके हमें ड्रग्स दे दिए. और जब उनका नशा किया तो दिमाग hi घूम गया काफी मजा आया हमें और उसके बाद हम ड्रग्स लेने लगे. हलाकि अभी सिर्फ एक महीना hi हुआ है. ज्यादा टाइम नहीं हुआ है. और भाई तेरी कसम हमने उस पब से आने के बाद एक दिन भी ड्रग्स नहीं लिए है.

सुरभि- है भाई हमारा यकीन करो. प्लस ये. माँ एंड डैड को मत बताना प्लस. वर्ण बहुत मार पड़ेगी.

मैं- जब ड्रग्स लिए थे तब ये बात सोचनी चाहिए थी. काम से काम ये तो सोचती की ड्रग्स से केवल कुछ पालो का सुकून मिलता है उसके बाद केवल बर्बादी hi बर्बादी होती है. खुद की परिवार की और समाज की.

सुरभि- भाई इस वक़्त हमें ये ख्याल नहीं आया था. और नशे में हमने वो ले लिए.

मैं- मुझे अब ये बताओ की ड्रग्स के आल्वा और कुछ तो नहीं किया न. कही उन्दोनो के पास तुम्हारे कुछ सेक्रटेस तो नहीं है न. तुम दोनों समाज रही हो न मैं क्या कह रहा हु.

रेनू- जहा तक मुझे पता है. उनके पास हमारा कुछ नहीं है. लेकिन अगर ड्रग्स के नशे में कुछ हुआ हो तो कह नहीं सकते. और आज कल हम उनसे ड्रग्स नहीं ले रहे है तो वो दोनों काफी भड़के हुए है हैंपर. और हमें धमकी भी दी की पुलिस में हमारे खिलाफ झूटी कंप्लेंट बगेरा कर देंगे या ड्रग्स में केस में फसा देंगे.

मैं- और ये बात तुम हमें तो बताने वाली थी नहीं क्यों.

सुरभि- हम अगर बता देते तो हमें बहुत दन्त पड़ती और फिर उनका क्या भरोसा वो कुछ कर देते तो.

मैं- और नहीं बताने से प्रॉब्लम जैसे सोल्वे हो रही है क्यों. तुम दोनों बिलकुल बेबकूफ हो गयी हो यहाँ आके. मां इस मामले में तुम दोनों की मदद कर सकते है. उन दोनों को इसके लिए सजा मिलेगी. तुम दोनों क्यों दर रही हो.

सुरभि- एक्चुअली जो रोहित है न उसके डैड यहाँ के पुलिस ैप है. और वो तो खुद के बेटे की hi मानेंगे न. हमारी कोण सुनेगा. उन दोनों ने अगर ये कह दिया की हमने उन्हें ड्रग्स सप्लाई किये थे. तो सोचो हमारा कर्रिएर सुरु होने से पहले hi ख़त्म हो जायेगा. उसके बाद हम गिलटी पाए जाये या नहीं कोई फर्क नहीं पड़ता है. यही सोच कर हम दर गए थे इसीलिए हमने किसी को कुछ नहीं कहा अभी तक.

रेनू- ये सही कह रही है. प्लस भाई हमें बचा लो.

मैं- अब बस करो. एक तो करने से पहले कुछ सोचती नहीं और फिर जब फास जाती हो तो कहती हो बचा लो. मुझे सच में ये उम्मीद नहीं थी तुम दोनों से.

रेनू- प्लस देव यार हम शर्मिंदा है अपने किये पैर.

मैं- और अगर अभी कुछ बाकि रह गया हो तो अभी बता दो. वर्ण बाद में प्रॉब्लम हो सकती है.

सुरभि- हमें कोई आईडिया नहीं है.

मैं- ठीक है जाओ तुम दोनों में सोचता हु कुछ. और है एक बात याद रखना. अगर आगे से कभी कुछ भी ऐसा कोई करने का ख्याल भी आये तो ये भी सोच लेना की तुम्हारा कोई भी भाई नहीं है. वो मर चूका है. मेरा मारा हुआ मुँह देखोगी दोनों.

सुरभि- नहीं ऐसा मत बोल. हम आगे से ऐसा कुछ नहीं करेंगे. प्लस भाई हमें माफ़ कार्डो

रेनू- है हमें माफ़ कर दे भाई. प्लस आगे से कभी भी कोई भी नशा नहीं करेंगे. और ऐसे लोगो से डोरी बना कर रखेंगे.

मैं- यही अच्छा होगा तुम दोनों के लिए. अब जाओ और मुझे सोचने दो.

दोनों की आँखे काफी नुम हो गयी थी. और दोनों को डिल से पछतावा भी हो रहा था. और मेरे आज ये कहने के पीछे भी यही कारण था की कल सायद कुछ बुरा हो जाता इनके साथ. उसी को रोकने के लिए आज hi इन्हे साझा दिया. अब बाकि इनकी मर्ज़ी.

रेनू- देव तुम्हे जब पता था तो तुमने हमें पहले क्यों नहीं टोका.

मैं- क्युकी में सही टाइम का वेट कर रहा था. और वो सही टाइम आज्ञा है.

सुरभि- मतलब.

मैं- कल बताऊंगा. अभी जाओ.

वो दोनों बहा से चली गयी. और मैंने गेट को लॉक किया. और सोचा की इस मामले को कैसे हैंडल किया jaye.un दोनों को रेंज हाथो पकड़वाने होगा. पता नहीं उन्दोनो ने कितनी को इसकी लत लगवाई होगी. और ये भी की इनके पीछे आखिर किसका हाथ है. कोण है जो इनको ड्रग्स सप्लाई करता है.

मैंने अपनी आँखे बंद की और इनदोनो को ढूंढ़ना स्टार्ट किया की अभी कहा है ये दोनों. तो थोड़ा ढूंढ़ने पैर ये मुझे उसी पब में दिख गए. ये दोनों पब में थे और दारू पे रहे थे. तभी इनके पास एक वेटर आया और इनको कुछ कहा तो ये दोनों उठ कर पब में बने एक केबिन में चले गए. जहा उनके सामने एक आदमी बैठा हुआ था. और इनके कुछ कह रहा था और साथ में कुछ ड्रग्स की पैकेट भी दे रहा था. सायद आगे पहुंचने के लिए. मतलब ये आदमी इनदोनो को ड्रग्स प्रोवाइड करवा रहा था. उसके बाद वो दोनों बहा से चले गए और वो आदमी बही बैठा रहा और उसने किसी को फ़ोन किया. उस फ़ोन के थ्रू में उस छठे आदमी तक पंहुचा. जो सायद इस आदमी का बॉस था. और वो उसे कह रहा था माल की डिमांड काम हो रही है कुछ दिनों.

और उससे इसका कारण पूछ रहा था. और वो आदमी बता रहा था जिन लड़को से वो ये काम करवाता है उनके कुछ क्लाइंट ने ड्रग्स लेना बंद कर दिया है.

ऐसे hi इनकी बाटे चली. उसके बाद इस छठे इंसान ने किसी को एक मश्ग किया. और और उस मश्ग के द्वारा में उस पांचवे इंसान तक पंहुचा. जो बढ़िया अपने कमरे में बैठा हुआ सिगरेट पे रहा था. और मश्ग मिलते hi उसने उसे पड़ा और बापिस रिप्लाई कर दिया. जिसमे लिखा था जो करना है करो पैर डिमांड बढ़ाओ. और इस मश्ग के बाद कुछ नहीं किया उसने. मतलब यही है इनके पीछे

मुझे अब सबकी लोकेशन और चेहरे मिल चुके थे. और अब मुझे इनके माल का पता लगाना था की कहा पैर रखा हुआ है.

तो मैंने उस आखिरी इंसान के दिमाग में घुस गया और उस जगह का पता खोजने लगा जहा उनका माल रखा हुआ था. और मुझे ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ी और मुझे वो पता मिल गया. और साथ में ये जानकारी भी की आज कुछ माल आरहा है और उसके बाद वो सभी जगहों पैर फैलाया जायेगा.

अब मुझे साडी जानकारी मिल चुकी थी. और में अब कंफ्यूज था की इनलोगो का किया क्या जाये. इनको में खुद हैंडल करू या फिर पुलिस को इनके पीछे लगा दू. और उनको साडी जानकारी दे दू.

मुझे लगा शायद ये पुलिस से बच सकते है. इसलिए मैंने डीडे किया की ड्रग्स की इन्फो में पुलिस को दूंगा और इन लोगो को मैं खुद हैंडल करूँगा. जिससे दोनों का काम हो जायेगा. है ये सही रहेगा.

मैंने अपनी आँखे खोली और कपडे चेंज किये. एक जैकेट मुँह पैर मास्क और एक हुड वाली जैकेट. और इसके बाद बहा से में सीधा पंहुचा पब के बाथरूम में. जहा से निकल कर में बहार आया और सीधा गया उस आदमी के पास जो होने केबिन में बैठा हुआ था. मैंने भीड़ का फायदा उठाया और आगे बड़ा और जो इंसान कक्तव देख रहा था. उसके मंद को कण्ट्रोल करके सरे कक्तव बंद करवा दिया. और सीधे पंहुचा में सबकी नजरो से बचता हुआ उस इंसान के केबिन के बहार. मैंने दूर नॉक किया

तो अंदर से आवाज आई.

ा1- कोण है

मैं- सर कुछ काम है आपसे.

ा1- ठीक है आओ अंदर

मैं अंदर गया

ा1- है बोलो क्या काम है

मैं- आपको टपकना है.

ा1- व्हाट.

मैं- सही सुना है आपने. बहुत लोगो की जिंदगी बर्बाद की है तुमने अपने ये ड्रग्स से. और अब उस सबका हिसाब करने का समय आगया है.

ये सुनके वो हँसा.

ा1- अबे है कोण तू. और जनता भी है की में कोण हु.

मैं- उससे कोई फर्क नहीं पड़ता मुझे.

ा1- बीटा फर्क बना. तब hi समाज पायेगा की तुझसे कितनी बड़ी गलती हुई है.

ये कहके उसने टेबल के नीचे से गन निकल कर मुझपर तान दी

ा1- अब समाज में आया की कितनी बड़ी गलती हुई है तुझसे.

वो अभी आगे कुछ बोलता उससे पहले hi उसका गाला जोर से दबने लगा. और वो अपना गाला छुड़ाने लगा. अब इसमें बात ये की मैं- उससे दूर hi खड़ा हुआ था. और उसका गाला अपने आप देव रहा था. उसके हाथ से गन नीचे गिर गयी. और वो तडफने लगा. और में बस उसे देखता hi रहा की. करीब 10 मं. में उसने अपने प्राण त्याग दिए. और उसकी बेजान बॉडी बही नीचे पड़ी रही. क्युकी वो कुर्सी से नीचे गिर पड़ा था अपना गाला छुड़ाने की कोसिस me.lekin छुड़ाया किस्से जब उसका गाला कोई दवा hi नहीं रहा था. इसका काम हो गया था. इसलिए में बहा से सीधा पंहुचा उस छठे इंसान के पास. जो एक गोडाउन में बैठा हुआ था और बहा पैर करीब 50 आदमी भी थे. अब ये गोडाउन था कपास का. यानि रुई. यहाँ पैर ये वाइट टूर पैर रुई का कारोबारी है. लेकिन ब्लैक में इस गोडाउन के नीचे ये ड्रग्स बेचता है. और कभी कभी इसी कपास में छिपा कर ये ड्रग्स एक जगह से दूसरी जगह पंहुचा देता है. और यहाँ काम करने वाला बार इंसान इस बात को जनता है.

मैं इस गोडाउन के अंदर hi था.

मैं गायब होकर सीधा पंहुचा गोडाउन के निचले हिस्से में. जहा काफी मात्रा में ड्रग्स रखा हुआ था. और नीचे करीब 10 लोग इसकी पहरे दरी कर रहे थे. मैंने एक गॉर्डस के दिमाग को कण्ट्रोल किया और उसके पास जो गन थी उसने उस गन से बाकि के 9 लोगो को अचानक से शॉट कर दिया किसी को भी कोई मौका hi नहीं मिला. और बिलकुल भी शोर नहीं हुआ क्युकी उसने गोलिया चलने से पहले गन पैर सीलेंसर लगा लिया था. फिर उस इंसान ने एक दूसरी गन से खुदको भी मार लिया. अब में आगे बड़ा उस इंसान की तरफ जिसका ये सब था. जो अपने केबिन में बैठा हुआ था. और सिगरेट जलाये हुए था. में उस केबिन के अंदर गया और उसके सामने आया.

मैं- hello मर.

ये आवाज सुनते hi उसने पीछे मुद कर देखा.

À2- कोण हो तुम और यहाँ तक कैसे पहुंच गए.

मैं- में hi तुम्हारी मौत. और यहाँ तक आना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है. और अब तुम मरने वाले हो.

À2- क्या मजाक है ये. सिक्योरिटी….

उसने जोर से चिल्लाया.

मैं- सब मर चुके है. यहाँ कोई नहीं है तुम्हे बचने वाला सिवाय तुम्हारी गन के. जिस पैर तुम अपनी पकड़ बनारहे हो.

ये सुनते hi उसने मुझपर बैसे hi गन तान दी.

मैं- यही गलती तुम्हारे उस आदमी ने भी की थी जिसे तुम उस पब में ड्रग्स सप्लाई करते हो. बेचारा बहुत बुरी मौत मारा.

ये सुनते hi उसे पसीना आज्ञा.

À2- ये क्या कह रहे हो तुम.

मैं- बही जो तुम सुन रहे हो. जानना चाहते हो उसे मैंने कैसे मारा.

ये कहते hi इसके गले पैर भी दबाव बढ़ने लगा और ये भी बैसे hi तड़पने लगा. और ठीक उसी इंसान की तरह थोड़ी देर में इसने भी अपना दम तोड़ दिया और ये टपक गया. फिर मैं बहा से सीधा पंहुचा उस आखिरी इंसान के पास. सीधे उसके कमरे में. जहा वो ऑलमोस्ट सो चूका था

मैंने बही रखे हुए एक जग को उसके ऊपर उल्टा कर दिया और वो हड़बड़ा कर उठ गया.

ा3- कोण है कोण है.

मैं- तेरा काल.

उसने अपने आप को नार्मल किया और मेरी तरफ देखा.

ा3- कोण हो तुम और यहाँ कैसे पहुंचे.

मैं- अब यार हर बार एक hi सवाल और उसका शामे जवाब दे दे कर में थक गया हु. तेरे उन दोनों आदमियों ने भी यही पूछा था मुझसे. लेकिन दोनों मरे gye.or अब तेरी बरी है.

ये कहके मैंने शामे तरीके से इसका गाला वि दवा दिया. और ये भी उन्ही की तरह तड़पने लगा और थोड़ी hi देर में इसने भी अपनी जान गाबा दी. उसके बाद मैंने कॉल किया सीधा पुलिस कमिश्नर को.

कुछ रिंग्स जाने के बाद उन्होंने कॉल अटेंड कर लिया.

कम- hello

मैं- hello क्या में पुलिस कमिश्नर से बात कर रहा हु

कम- है कोण बोल रहे हो तुम.

मैं- वो सब छोड़िये सर और मेरी बात ध्यान से सुनिए.

आज रात को दिल्ली में एक बहुत बड़ा ड्रग्स का कन्साइनमेंट आने वाला hai.via रोड. क्या आप उसे पकड़ना चाहेंगे

ये सुनते hi उसके होश उड़द गए.

. कम- hello कोण बोल रहे हो नाम बताओ अपना.

मैं- सर आपको नाम जानना है या address.jaha पैर ये ड्रग्स आने वाले है.

कम- एड्रेस.

मैं- ठीक है लिखिए.

2 ट्रक है. जिनके no. है.

*****************************.

इनदोनो में रुई आरही है. और उसी रुई के पीछे ड्रग्स छिपा हुआ है. और दूसरा एड्रेस लिखिए.

**********************************

यहाँ पैर एक गोडाउन है जिस के ऊपरी हिस्से में रुई का कारोबार चलता है और इसी के अंडरग्राउंड में ड्रग्स का. जहा आपको करीब. 200कग. ड्रग्स मिल जाएगी. और करीब 500कग उन दोनों ट्रक्स में. और सबसे इम्प बात. ये काम ईमानदार इंसान से hi करवाना. वर्ण हो सकता है तुम्हारे hi लोग उस इंसान को इनफार्मेशन दे दे. जिसका ये माल है.

कम- में समाज गया लेकिन तुम मुझे तो बताओ की ये माल है किसका.

मैं- ये माल किसी अब्दुल नाम के आदमी का है. जो इस वक़्त अपने घर पैर आराम कर रहा है. उसका एड्रेस भी लिख लो. हलाकि ये प्रोफ करना थोड़ा मुश्किल होगा. और एक पब का एड्रेस भी लिख को जहा का मालिक इसी के लिए काम करता है और पब में बचो को ड्रग्स प्रोवाइड करता है

उसके बाद मैंने उसे दोनों अड्रेस दिए. और फ़ोन काट कर दिया. और उसके बाद मैंने आँखे बंद करके देखा की कम क्या कर रहा है. तो उसने बैसा hi किया. उसने फ़ौरन किसी अफसर को साडी जानकारी दी और तुरंत hi राइड मरने को कहा. और वो अफसर भी ईमानदार निकल उसने तुरंत hi आर्डर को फॉलो किया और बताई हुई जगहों पैर निकल गया फाॅर्स लेके. और उसने सभी को अलग अलग भेज दिया. कुछ को गोडाउन कुछ को पब तो कुछ को अब्दुल के घर. और खुद कुछ के साथ उन ट्रक्स के पीछे निकल पड़ा. और में बहा से गायब होम सीधा पंहुचा रोहित के घर जहा वो सो रहा था. और जो ड्रग्स इसे उस पब वाले ने दिए थे वो अभी भी इसके पास था. मैंने इसका सर पैर हाथ रखा और उसे इसकी गलती का एहसास करवाया. इसके अंदर मैंने ये विचार दाल दिए की इसने अभी तक जितना को भी ड्रग्स बेचे है वो कितना बड़ा गुनाह किया है. कल सुबह होते hi इसे सबसे हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगनी है. और अपने डैड से भी. और ये अबसे ड्रग्स न तो खुद लेगा और न hi किसी और को लेने देगा. न hi उन्हें खुद बेचेगा.

ऐसे hi विचार मैंने शुभम के दिमाग में भी दाल दिया. और उसके बाद में हर इस इंसान के कमरे में गया जिन्होंने इनसे ड्रग्स लिए और उनका सेवन किया. मैंने रात भर में उनसबको ठीक किया और सबके अंदर ड्रग्स के प्रति नफरत भर दी. लेकिन ऐसे कई लोग है जो अभी भी इसका सेवन करते है.

ये सोचकर में सीधा पंहुचा अपने कमरे में. अपने कपडे चेंज किये. और सो गया.

बही पुलिस ने ट्रक को पकड़ लिया. और उनमे से ड्रग्स भी बरामद कर लिए. और बाकि जो पब और गोडाउन और उस घर में गए थे. उन जगहों पैर उन्हें केवल लाशे hi मिली और गोडाउन में लाशो के साथ ड्रग्स भी. और जब ये बात कम. को पता चली तो उसका दिमाग घूम गया. क्युकी वो समाज गया था की जिसने भी उन्हें फ़ोन किया था. उसी ने इस सभी को मारा है. और साइबर बालो ने कम का फ़ोन ट्रेस करके ये कन्फर्म भी कर दिया की जो कॉल आया था वो अब्दुल के घर से hi आया था. लेकिन अफ़सोस की उन्हें मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. मिला तो बस कई किलो ड्रग्स और लाशे. हलाकि कम इसी में कुश था. उसने स्टोरी बना दी इन लाशो को लेके की पकडे जाने के दर से इन सभी ने आत्महत्या कर ली. और गोडाउन में तो ऐसा हुआ भी था. बाकि पुलिस वाले खुद समझदार थे. उन्होंने स्पॉट को स्टोरी के हिसाब से सजा भी दिया. बस मीडिया में जब ये खबर पहुंची तो सरे देश में पुलिस की वह वे होने लगी. जिसकी खबर सुबह के न्यूज़ पेपर और टीवी पैर आने वाली थी.

जिसे देख कर पूरा देश चोकने वाला था…………

तो बे कॉन्टिनुए………………...

 
अपडेट 32



सुबह में अपने रूटीन से उठा और ध्यान में बैठ गया. और अपने टाइम पैर hi ध्यान से उठ गया. नीच आया बढ़िया कॉफ़ी पे.

मैं- ममी वो दोनों गई क्या सलग.

ममी- है वो निकल गयी है.

मैं- बढ़िया है.

मैंने टीवी ों किया और न्यूज़ चैनल लगा दिए. और अस ी एक्सपेक्टेड. बही दिखा रहे थे जो कल रात में हुआ था.

मैं- ममी जरा बहार आके देखो. टीवी पैर शॉकिंग न्यूज़ दिखा रहे है.

मेरी आवाज सुनकर ममी बहार आई. और टीवी देखने लगी.

और टीवी पैर न्यूज़ चैनल वाले उसी न्यूज़ को बड़ा चढ़ा कर दिखा रहे थे. और साथ में कम का इंटरव्यू भी. जिसमे उन्होंने साफ़ साफ़ कहा की करीब 700कग ड्रग्स उन्होंने कल रात को पकड़ी है. और ये न्यूज़ सुनकर सभी शॉक में थे.

ममी- माय गॉड इतनी ज्यादा.

मैं- बही तो जरा सोचो अगर ये पोरे सेहर में फ़ैल जाती तो कितनो की जिंदगी बर्बाद हो जाती.

ममी- कीड़े पड़े उन सभी को जो ये धंदा करते है. बैसे मुझे यकीन है लेकिन फिर भी एक डाउट आरहा है मन में.

मैं- कैसा डाउट

ममी- कही ये दोनों भी तो ड्रग्स नहीं लेती होंगी न.

वो क्या है आजकल के बचो के लिए ये एक फैशन की तरह बन गया है. तो कही सांगत में आके इन्होने भी तो ड्रग्स लेना स्टार्ट नहीं कर दिया न.

मैं- बैसे आपकी बात सही है ममी. लेकिन मुझे नहीं लगता की ये दोनों ड्रग्स लेंगी. वो जानती है इससे क्या क्या हो सकता है.

ममी- भगवन करे ऐसा hi ho.chalo अच्छा हुआ एक काम तो सही हुआ.

मैं- बही तो.

तभी मुझे दादू और माँ की याद आई की यार मैंने उनसे बात hi नहीं की है इतने दिनों से. इसलिए मैंने तुरंत hi उन्हें कॉल कर दिया

ममी- किसको कॉल कर रहे हो.

मैं- माँ को. उनसे मैंने बात hi नहीं की इतने दिनों से

ममी- सही कहा लगाओ. मुझे ब्बि बात करनी है.

मैंने कॉल किया और कुछ रिंग्स के बाद उन्होंने कॉल अटेंड कर लिया.

माँ- hello

मैं- ही माँ कैसी हो

माँ- क्यों रे. इतने दिनों में आज मेरी याद आई तुझे.

मैं- माँ क्या करता ममी ने इतना प्यार दिया की मुझे याद hi नहीं रहा बिलकुल. सॉरी में कॉल नहीं कर पाया.

माँ- क्या सच में. अच्छी बात hai.chal माफ़ किया तुझे. और बात कैसे है बहा सब.

मैं- माँ सब बढ़िया है यहाँ पैर. आप बताओ दादू और आप कैसे हो. और बाकि सब. और वो पंडित जी को खाना पंहुचा देती हो की नहीं

माँ- अरे यहाँ भी सब ठीक है. है लेकिन तेरी याद आती है. और दादू तो दिन भर तेरी hi बाटे करके तेरी और याद दिलाते रहते है. और है पंडित जी को खाना पंहुचा देती हु मैं दोनों टाइम. और वो भी तुझे बहुत याद कर रहे थे. बैसे तू कब बापिस आरहा है.

मैं- माँ 1-2 दिन में आजाऊंगा. लीजिये ममी से बात कीजिये.

मैंने फ़ोन ममी को दिया और वो फ़ोन से चिपक गयी. और में बस उन्हें सुनता रहा. कितनी बाटे करती है ये लेडीज. बैसे बहुत टाइम बाद इनकी बात हो रही थी. रोज के कामो में ये भूल hi जाती है बात करना.

और करीब 30 मं. तक इनलोगो की बाटे चलती रही और में बोर हो गया. तब जेक ममी ने फ़ोन रखने की बात कही. और मैंने चैन की सास ली.

मैं- ममी आपलोग कितनी बाटे करती हो.

ममी- अब क्या करे बीटा जी. कितने दिनों बाद हमारी बाटे हुए. बस फ्लो फ्लो में हो जाती है.

मैं- में तो इतना किसी से बात कर hi नहीं सकता हु. मुझे आती नहीं है बाते

ममी- ये टेलेंट केवल लेडीज में hi होता है. हम कही से भी बातो की शुरुवात कर सकते है. और घंटो तक उस पैर चर्चा कर सकते है

मैं- ये तो मैंने आज देख भी लिया.

ममी- चल में जाती हु. तू क्या करेगा अब.

मैं- कुछ खास नहीं. देखते है.

ममी- ठीक है. बैसे एक काम कर इन लोगो के सलग घूम आओ.

मैं- अभी सब क्लास में होंगे में बहा अकेला बैठ कर क्या करूँगा

ममी- ये बात भी है.

उसके बाद ममी बहा से चली गयी और में बही बैठा मोबाइल में गेम बगेरा खेलने लगा. लाइफ काफी बोरिंग सी हो गयी थी मेरी. करने को कुछ था hi नहीं.

बही दूसरी तरफ मयासुर अपनी तैयारियों में लगा हुआ था. वो कुछ बड़ा प्लान कर रहा था. उसे भी खबर मिली की पुलिस ने ड्रग्स को बरामद कर लिया है. और सुरेश का खास आदमी मारा गया है. जिसे सुनकर उसे कोई भी अफ़सोस नहीं हुआ. उसे इस बात की जरा भी खबर नहीं थी की ये काम पुलिस ने नहीं बल्कि किसी और ने किया है. बही मयासुर के पास प्लान तो था लेकिन वो सोच रहा था की इसे किस रंग रूप में ढला जाये. जिससे उसके मनसूबे पोरे हो सके. और आखिर कार उसे आईडिया मिल hi गया. और उसने सोच लिया की अब उसे क्या करना है. फिलहाल सुबह के 10 11 बज रहे थे. सभी लोग इस वक़्त घरो के बहार थे और ये उसके लिए सबसे सही समय था अपने प्लान को आजमाने के लिए. क्युकी उसे यकीन था की लोगो को मुसीबत में देखकर वो शक्ति जरूर सामने आएगी. बस उसे पहचानने की नजर चाहिए.

यही सोचकर मयासुर एक एकांत जगह पैर पहुंच गया. जो कोई हाईवे था. और उसके आसपास कुछ नहीं था. बस छोटा सा जंगल टाइप था. बहा वो पहुंचा और उसने अपनी शक्तियों से माया रचना सुरु किया. उसने अपनी माया से अलग अलग प्रकार के आदमखोर जानवरो को बनाया. ये देखने में hi इतने खूंखार लग रहे थे की क्या बताऊ. और अगर लोग इन्हें देख ले तो नहीं बेहोश हो जाये. उसने इन जानवरो की तादात बहुत hi ज्यादा राखी. इतनी की ये पूरी दिल्ली में फ़ैल सके. और सभी लोगो के सामने पहुंच जाये. और ये जानवर भले hi माया से बने थे लेकिन थे असली. और ये काफी भूले भी थे. मतलब साफ़ था की ये सेहर में जेक क्या करने वाले है. और इनमे एक खास बात ये थी की सभी की आँखे नीली चमक रही थी. और इन सभी जानवरो की आँखों के द्वारा खुद मयासुर देख रहा था. मतलब ये जानवर जहा भी जायेंगे जो भी देखेंगे वो सब मयासुर को भी दिखेगा.

मयासुर ने प्लान तो अच्छा बना लिया था. और उसे उम्मीद थी की सेहर में हड़कंप मचते hi वो शक्ति जरूर कुछ न कुछ तो करेगी hi. उसके लिए उसने एक खास इंतजाम किया. उसने सरे बदलो से पूरी दिल्ली को धक् दिया. पूरी दिल्ली में इस वक़्त घनघोर काळा बदल छ गए. और उन बदलो ने सूरज को पूरी तरह से धक् लिया था. और ये बदल भी मायावी थे. और अगर वो शक्ति किसी जानवर के सामने नहीं भी आती है तब भी ये बदल से इस शक्ति का पता चल जायेगा. बस वो कुछ करे. अगर कुछ नहीं किया तो लोग मरेंगे. और कुछ किया तो खुद की पहचान वो मयासुर को बता देगा. और इस प्लान में मयासुर के हरने की संभावना बिलकुल नहीं थी. किसी न किसी तरह उसे उस शक्ति के बारे में कुछ न कुछ तो जरूर पता चल hi जाना था. ये बात पक्की थी

बही देवराज ने जब ये देखा तो उनकी भी चिंता बाद गयी. क्युकी वो समाज गए थे की देव की पहचान अब सायद नहीं छिप सकती है. मयासुर जान जायेगा की वो शक्ति आखिर है कोण. और यही सवाल लेके वो सीधे गए ब्रह्मा जी के पास

इंद्रदेव- प्रणाम ब्रह्मदेव..

ब्रह्मा- कही इंद्रा कैसे आना हुआ.

इंद्रदेव- प्रभु मयासुर ने बड़ी hi जटिल माया रची है. और अर्णव उसमे किसी भी तरह फास hi जायेगा. और अगर देव फास गया तो फिर मयासुर उसकी असलियत जान जायेगा. आप कुछ कीजिये प्रभु.

ब्रह्मा- हम जानते है इंद्रा की मयासुर ने क्या किया है पृथ्वी पैर. और उसका परिणाम भी जानते है. और हम आपसे बस यही कहना चाहेंगे की जो हो रहा है उसे होने दे.

इंद्रदेव- परन्तु ब्रह्मा देव. इसमें कई लोगो की जाने जाएगी और अरनव की पहचान भी खुल जाएगी.

ब्रह्मा- इंद्रा अर्णव जनता है उसे कैसे ये सब संभालना है. वो अब हर परिस्थिति से लड़ने के लिए तत्पर है. अगर उसकी पहचान खुल भी जाती है. तब भी वो अपनी और दुसरो की सुरक्षा कर सकता है. आप बिचलित न हो. और देखे की अर्णव क्या और कैसे करता है.

ये सब सुनने के बाद इंद्रदेव में थोड़ा भरोसा जगा की अर्णव ये संभल सकता है. और फिर उन्होंने ब्रह्मदेव को प्रणाम किया और बापिस से स्वर्ग पहुँच गए और देखने लगे की क्या होता है आगे.

बही दूसरी तरफ मैं घर में hi घुसा हुआ था. और टीवी hi देख रहा था. मेरा बढ़िया टाइम पास हो रहा था. न्यूज़ और मूवीज से. तभी एक न्यूज़ चैनल पैर दिखाया गया की दिल्ली में इस वक़्त कितने काळा बदल छ गए है. ऐसा लग रहा है जैसे बहुत hi भयंकर तूफ़ान आने बाला है. और इस वेयर में मौसम विभाग वालो को भी कोई नॉलेज नहीं है. ये देख कर मैं थोड़ा चौका और सोचा की कही फिर से तो कोई माया बाला बदल नहीं छ गया दिल्ली में. में उठ कर खिड़की के पास गया और बहार का नजारा देखा तो बकै दिल्ली में पूरा अँधेरा लगा हुआ था. और थोड़ी थोड़ी बिजली भी कड़क रही थी. और बदल को देखकर hi मनहूसियत की फीलिंग आने लगी थी मुझे. और मुझे समझने में बिलकुल भी देर नहीं लगी की मामला कुछ गड़बड़ है.

तभी टीवी पैर बहुत जोर से चीख ने और चिल्लाने की आवाज आने लगी. मैं फ़ौरन hi टीवी के पास गया और देखा की कैमरा जमीन पैर पड़ा हुआ है. उसमे कुछ साफ़ नहीं दिख रहा है. तभी अचानक से कुछ चहेते कैमरा पैर पद जाते है और ये सीन देखकर अच्छे अच्छा को हार्ट अटैक आजाये. में भी थोड़ा पीछे को हो गया की ये क्या चक्कर है. मैंने फ़ौरन hi दूसरा चैनल बदला तो उसपर दिखा रहे थे की सेहर में कुछ खतरनाक जानवर आगये है जिन्होंने आते hi सब तरह तहलका मचा दिया है. वो जानवर एक एक करके लोगो को मार रहे है और खा रहे है. पुलिस फाॅर्स जब उन जानवरो के सामने गयी तो उन जानवरो सभी पुलिस वालो को मार दिया. और अब कम साहब ने आर्मी और जानवरो को कण्ट्रोल करने वाली टीम को बुलाया है जो किसी भी वक़्त आ सकते है. फिलहाल ये जानवर पोरे सेहर में फैलते जा रहे है इनकी गिनती करना फिलहाल मुश्किल है. मगर अंदाजन ये करीब 200-300 के बीच है जो बहुत ज्यादा है. अगर इनको जल्दी hi ख़त्म नहीं किया गया तो ये पूरा सेहर कुछ hi देर में समसान में बदल जायेगा.

ये सुनते hi में सोफे पैर गिर पड़ा और मेरे पीछे ममी ने भी ये सुन लिया और उनकी हालत भी ख़राब होने लगी. क्युकी इस वक़्त मां रेनू और सुरभि तीनो hi घर से बहार थी.

ममी- देव रेनू सुरभि और तेरे मां को जल्दी फ़ोन कर. और उनसे कहो की क्लबहार न निकले अंदर hi रहे

.ये सुनते hi मुझे भी ख्याल आया और मैंने सबसे पहले रेनू को कॉल किया. लेकिन उसने कॉल रेसिवेद नहीं किया तो फिर मैंने सुरभि को कॉल किया. लेकिन उसने भी नहीं उठाया. मैंने 6-7 बार दोनों का no. डायल किया लेकिन किसी का भी कोई भी रेस्पोंद नहीं मिला. फिर मैंने मां को कॉल किया तो उन्होंने कॉल उठा लिया.

मैं- hello मां कहा हो आप.

मां- में ऑफिस में hi हु. तुम घर पैर hi हो न.

मैं- है में और ममी घर पैर hi है. लेकिन वो दोनों सलग गयी है.

मां- उन्हें कॉल किया की नहीं

मैं- मैंने लगाया था लेकिन वो उठा नहीं रही है. में उनके सलग जा रहा हु.

मां- नहीं तुम कही नहीं जाओगे. में सलग में फ़ोन करके जानकारी लेता हु. तुम फिलहाल घर पैर hi रहना.

मैं- ठीक है आप सलग में पता करके मुझे इन्फॉर्म करो. और है कसम है अगर आपने ऑफिस के बहार कदम भी रखा तो.

मां- लेकिन उन दोनों को लेने के लिए किसी को तो जाना पड़ेगा न.

मैं- वो में देख लूंगा आप ऑफिस के अंदर hi रहोगे.

मां- नहीं में तुम्हे नहीं जाने दे सकता बहार.

मैं- मां फिलहाल आप उन्हें कॉल करिये ये बाद में डीडे करेंगे

और मैंने कॉल कट कर दिया.

ममी- तू कहा जा रहा है.

मैं- में कही नहीं जा रहा हु. यही हु में. और न hi मां जा रहे है. आप बैठिये. आइये.

मैंने उनको अपने पास बैठाया और उनके सर पैर हाथ रख दिया. और ऐसा करते hi ममी गहरी नींद में सो गयी. और मैंने उनको उठाया और सीधे उनके कमरे में ले गया और सुला दिया. फिर में आया बहार. और अपनी आँखे. बंद करके सबसे पहले उन्दोनो के बारे में जानकारी. तो मुझे पता चला की दोनों hi सलग के अंदर है. और उनके साथ बाकि स्टूडेंट भी है. और वो बहार देख रही है. क्युकी बहार 2 बड़े बड़े जानवर घूम रहे है. और में समाज गया की खतरा उनके बिलकुल पास hi है. लेकिन तभी मां का ख्याल आया तो मैंने उनको देखा वो इस वक़्त बहार निकलने के बारे में सोच रहे थे. तो मैंने उनकी सोच को यही से बदल दिया. अब वो अंदर hi रहेंगे. अब बरी थी एक्शन की. मैं अपने कमरे में आया बही रात बाले कपडे पहने. चेहरे पैर मास्क लगाया और सर पैर हुड और सीधा पंहुचा छत पैर.



तो बे कॉन्टिनुए……………….
 
अपडेट 33



छत पैर पहुंचने से पहले मैंने अपने आप को गायब kiya.or फिर ऊपर गया. और मैंने सोचा पहले इन काळा मयाबी बदलो को हटाना पड़ेगा. फिर hi इन जानवरो को देखेंगे.

मैंने अपनी आँखे बंद की

और अपने दोनों हाथो को फैलाया और त्रिनेत्र से इन मायावी बदलो को हटाने का आवाहन किया. ऐसा कहते hi मेरे हाथो से अदृस्य रौशनी निकलने लगी और सीधे बदलो में जाने लगी जैसे hi वो रौशनी बदलो में गयी. अचानक से बहुत तेज़ बिजली कड़कनि स्टार्ट हो गयी. इतनी तेज़ की सुनकर hi लोगो को हैरतटक आजाये. इतना शोर होने लगा था जिसकी कोई सीमा नहीं थी. और मेरे हाथो से लगातार रौशनी निकल रही thi.dheere धीरे सरे काळा बदल हटने लगे थे और आसमान साफ़ होने लगा था और करीब 5 मं. में सारा शोर ख़त्म हो गया और साथ में काळा बदल भी. अब सूरज अपनी चमक चारो तरफ बिखेरने लगे थे. और जैसे hi सूरज की रौशनी उन सरे जानवरो पैर पड़ी वो जलने लगे. और जितने भी जानवर बहार घूम रहे थे वो सरे देखते hi देखते रख में बदल गए. लेकिन अभी भी बहुत ऐसे जानवर थे जो घरो में या फिर किसी ऐसी जगह पैर रुके थे जहा उनको धुप छू भी न सके. जिनमे से 2 जानवर तो उसी सलग की बिल्डिंग के अंदर घूम रहे थे. और सूंघ रहे थे लोगो को. जिनमे रेनू- और सुरभि भी शामिल थे. और मुझे खुद hi उनके सामने जाना होगा.

ये सोचकर में उड़द गया. और सीधा पंहुचा सबसे पहले सलग. हलाकि अभी भी में अदृस्य था. और मुझे कोई नहीं देख सकता था. मैं उन दोनों जानवरो के सामने hi खड़ा था लेकिन वो मुझे नहीं देख सकते थे और नहीं सूंघ सकते थे. जैसे hi एक जानवर मेरे पास पंहुचा मैंने उसे हवा में उठाया और बहार धुप में फेक दिया. और जैसे hi धुप उसे लगी वो जल कर रख में बदल गया. और ये सीन देखकर दूसरा जानवर चारो तरफ देखने लगा की यहाँ आखिर है कोण. किसने उसे फेका. और वो सूंघने लगा. और इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने उसे भी बहार फेक दिया. जिससे वो भी धुप में जल कर रख बन गया. और ये सीन सरे स्टूडेंट एक कमरे में छिप कर देख रहे थे. उन्हें भी कुछ समाज में नहीं आया की ये कैसे हुआ. उसके बाद में हर जगह गया जहा पैर वो जानवर मौजूद थे. मैंने सभी को उठा उठा कर धुप में पटक दिया. और सरे जानवर जल गए धुप में. अब सेहर में जानवर तो नहीं थे. लेकिन सरे लोग बहुत ज्यादा डरे हुए थे. इसलिए मुझे अब ये यदि मिटानी होगी सभी के दिमाग से.

इसलिए मैं आसमान में गया. और आँखे बंद करके हवा एक साथ सभी के मंद को कण्ट्रोल करने लगा और सभी के दिमाग से ये साडी यदि मिटा दी जिसमे उन्होंने आज भयानक जीवो को देखा था. उन्हें कुछ भी याद नहीं था. और जिन जिन ने टीवी के द्वारा ये सब देखा था उनके मनो को वो कण्ट्रोल किया और उनके अंदर से भी ये साडी भयानक यदि निकल दी. और इस सबमे मुझे करीब 1 घंटा लग गया. लेकिन आखिर कार सब नार्मल होगया. लेकिन जिन लोगो को उन जानवरो ने मार दिया था. उनके लिए मैं कुछ नहीं कर सकता था. सिवाय इसके की उनकी मौत को किसी दुर्घटना का शिकार बताने के शिव. इसलिए इन लोगो से जुड़े जितने भी लोग थे मैंने उन सबके मन में ये दाल दिया की इनकी मौत कुछ पागल कुत्तो के हमला करने से हुई है. जिन्होंने इनके बॉडी को काट दिया है. और वो कुत्ते सेहर से बहार भाग गए है.

अब सब ठीक हो चूका था. लेकिन में समाज गया था की कुछ तो ऐसा हुआ है जो मुझे फिलहाल समाज में नहीं आरहा है. वो मयाबी बदल कुछ अलग प्रकार के थे. जरूर मयासुर की योजना मुझे सामने लेन की होगी. लेकिन में अदृश्य हु. अब पता नहीं उसने मुझे देखा है या नहीं. न hi देखा हो तो ठीक है..

यही सोचकर में पंहुचा सीधा अपने घर जहा ममी सो रही थी. मैंने उनके सर पैर हाथ रखा और उन्हें जगा दिया और उनके मन से भी साडी बाटे गायब हो चुकी थी. और वो अपने आप को सोता हुआ पाकर बहुत हैरान भी थी.

ममी- में सोइ कब.

मैं- वो आपके सर में थोड़ा दर्द था तो मैंने hi आपको टेबलेट दे मर सुलाया था. आपको याद नहीं.

मैंने ये बात उनके दिमाग में दाल दी. और उन्होंने तुरंत hi यकीन कर लिया.

ममी- है याद आया. चलो टेबलेट ने असर कर दिया अब दर्द नहीं है. चलो में लंच बना देती हु.

उसमे बाद ममी उठी और सीधे किचन में चली गयी. और में अपने कमरे में.

बही दूसरी तरफ मयासुर ने साडी घटनाओं को ध्यान से देखा. और उसे तुरंत hi सुचना मिल गयी की शक्ति आगयी है. लेकिन वो अदृश्य थी. इसलिए मयासुर फिर से शक्ति का चेहरा नहीं देख पाया. और उसकी साडी योजना धरी की धरी रह गयी. क्युकी देव जब अदृश्य होता है तब वो पूरी तरह से हवा में बदल जाता है. उसका कोई रूप नहीं होता है. जिस बजह से मयासुर ने कई कोसिस की देव को प्रगट करने की लेकिन उसका कोई भी असर नहीं हुआ देव पैर. इनफैक्ट उसे पता भी नहीं चला की मयासुर ने उस पैर कोई मंत्र का वॉर किया है.

और यही सब सोचकर मयासुर बौखलाया हुआ था की इतनी तगड़ी योजना भी काम नहीं आई. उसके मयाबी बदलो ने भी उसकी ज्यादा मदद नहीं की. है अगर देव पहले जानवरो से निपटने जाता तो सायद बदल उसकी कुछ मदद कर देते लेकिन देव ने पहले बदलो को hi हटाया और बाकि काम तो अपने आप हो गया.

मयासुर- ये शक्ति आखिर है क्या चीज़. इतनी शक्तिशाली है इसने मेरी माया को कितनी आसानी से तोड़ दिया. और मेरे मंत्रो का भी इस पैर असर नहीं हुआ. इसने मुझे दो बार हरा दिया. और में अभी तक उसका चेहरा भी नहीं देख पाया हु. धिक्कार है मुझपर. अब मुझे गुरुदेव से hi सहायता मांगनी पड़ेगी. वो hi कोई उपाय बता सकते है मुझे.

ये सोचकर मयासुर बहा से सीधा निकल गया शुक्राचार्य के पास

नहीं दूसरी तरफ इंद्रदेव ने जब ये सब देखा तो उनकी टेंशन भी काम हो गयी. क्युकी काम भी हो गया और ज्यादा नुकसान भी नहीं हुआ. और उन्हें अब पूरा विस्वास हो गया था की अर्णव हर तरह की परिस्थिति को संभल सकता hai.koi भी दैत्य उसके सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक पायेगा. ये विस्वास उन्हें हो गया था. और वो अब चिंता मुक्त हो गया थे.

बही मयासुर सीधा पहुंच शुक्राचार्य के पास. जो इस वक़्त अपनी आँखों को बंद किये हुए पृथ्वी के सरे नज़ारे देख रहे थे और उन्हें भी सब जानकारी पता चल गयी थी. जैसे hi मयासुर ने उन्हें प्रणाम किया उन्होंने अपनी आँखे खोल ली.

शुक्राचार्य- मयासुर ये सब क्या कर रहे थे तुम.

मयासुर- गुरदेव मेरे पास कोई रास्ता नहीं था. उसे सामने लेन का. लेकिन ये रास्ता भी सफल नहीं हो पाया.

शुक्राचार्य- में तुम्हे बहुत अक्लमंद समझता था लेकिन तुम तो एक no. के बेबकूफ निकले. अगर ऐसे hi तुम तबाही मचाते रहे तो. इस शक्ति का तो पता नहीं लेकिन में जरूर तुम्हारा वध कर दूंगा

मयासुर- मुझे शमा करे गुरुदेव. इसीलिए में आपके पास आया हु मुझे कोई रास्ता दिखाए की में क्या करू. मेरी बूढी पृथ्वी पैर जेक भ्रष्ट हो गयी है.

शुक्राचार्य- वो तो मुझे दिख hi रहा है. अब मुझे hi कुछ करना होगा. ये काम किसी के बस का नहीं लग रहा है मुझे.

मयासुर- ऐसा न कहे गुरदेव. मुझे एक और अवसर प्रदान करे. में इस बार जरूर उसका पता लगा लूंगा. लेकिन उसके लिए मुझे आपके मार्गदर्शन की जरुरत है.

शुक्राचार्य- हम्म्म. ठीक है तुम अभी यही रहो में कुछ सोचता हु. बैसे मुझे लगता है जब तक वो अस्त्र सामने नहीं आता तब तक ये शक्ति भी हमारे सामने नहीं आने वाली. तुम्हे और मुझे इतना तो पता चल चूका है की ये साधारण शक्ति नहीं है. बहुत hi शातिर और शक्तिशाली है. उसने कितनी आसानी से तुम्हारी माया का अंत कर दिया. ऐसी क्या शक्ति है उसके पास और वो है कोण. हमें फिलहाल कुछ भी पता नहीं है.

मयासुर- है गुरुदेव. अगर मेरी पहली योजना सफल हो जाती तो जरूर उसके बारे में कुछ पता चल hi जाता लेकिन वो सुरु होने से पहले hi ख़त्म हो गयी. इसलिए अब हमें कुछ अलग सोच रखनी होगी. लेकिन क्या?

शुक्राचार्य- हम चाहे कितने hi देत्यो को बहा भेज ले और वो चाहे कितने hi शक्तिशाली क्यों न हो. लेकिन इस शक्ति का मुकाबला सायद नहीं कर पाएंगे वो सभी. और अब इस शक्ति के साथ क्या करना है ये मुझे पता चल चूका है.

मयासुर- क्या करना होगा हमें गुरुदेव.

शुक्राचार्य- एक यज्ञ करना होगा. उसमे मुझे 100 साफ़ और मासूम जीवो की बलि देनी होगी. अगर ये यज्ञ सफल हो गया तो हमें साडी जानकारी मिल जाएगी इस शक्ति से सम्बंधित.

मयासुर- गुरुदेव अगर ये रास्ता पहले से hi था तो आपने अभी तक किया क्यों नहीं

शुक्राचार्य- क्युकी मुझे तुम सब पैर कुछ ज्यादा hi भरोसा था. लेकिन अब उस यज्ञ के शिव कोई और रास्ता नहीं है. अब माता पातालभैरवी hi हमारी आखिरी उम्मीद है. बही हमें रास्ता दिखा सकती है. हम चाहे कितनी hi माया क्यों न रच ले. लेकिन हमें सफलता सायद hi मिले. एक बार अगर उस शक्ति का स्रोत पता चल गया फिर हम उसके बारे में ज्यादा सोच सकते है.

मयासुर- गुरुदेव आपका कहना उचित है.

शुक्राचार्य- आज रात्रि में यज्ञ सुरु होगा. जाओ और उसकी तय्यरिया करो.

मयासुर- जो आज्ञा गुरुदेव.

ये कहके मयासुर बहा से चला गया. अधीरा के पास. और उसे ये सब सुचना देने के लिए. और जब अधीरा को ये सब पता चला तो उसे भी बुरा लगा की मयासुर उस शक्ति का पता नहीं लगा पाया. लेकिन शुक्राचार्य पैर उसे भरोसा था की वो जो यज्ञ कर रहे है उससे उन्हें जरूर सफलता मिलेगी. और यही सब सोच कर उसने सेवको को यज्ञ की तैयारियों के लिए भेज दिया.

बही दूसरी तरफ पृथ्वी पैर अब सब ठीक हो चूका था. लेकिन मुझे लग रहा था की ये असुर कभी भी यहाँ आके तबाही मचा सकते है. अगर में पृथ्वी के चारो तरफ एक आवेद सुरक्षा कवच बना दू तो सायद और नए असुर पृथ्वी पैर नहीं आ पाएंगे. और जो यहाँ पैर है उन्हें में आसानी से ढूंढ लूंगा. और अगर कोई इस कवच को तोड़ कर अंदर आता भी है तो काम से काम मुझे उसकी जानकारी तो मिल hi जाएगी की कोई आया है. है ये रास्ता मुझे ठीक लगा. और मैंने सोच लिया की अब पृथ्वी पैर कोई भी असुर प्रवृति वाला नहीं आसकेगा. है अगर वो मुझसे ज्यादा ताकत वर हुआ तो आजायेगा. और अगर नहीं हुआ तो वो कवच hi उसे ख़त्म कर देगा.

यही सब सोच कर मैंने डीडे किया की रात में ये काम करूँगा में.

और रात तक सब कुछ नार्मल hi रहा. रात में वो दोनों मेरे कमरे में आई.

मैं- ही

रेनू- ये बताओ तुमने ये कैसे किया.

मैं- हैरान होते हुए. क्या किया मैंने. तुम किस बारे में बात कर रही हो.

रेनू- भोले मत बनो. सच सच बताओ.

मैं- अरे मुझे बताओ तो की तुम किस बारे में बात कर रही हो.

सुरभि- वो एक्चुअली उन दोनों ने आज सरे सलग के सामने हमसे और 3-4 लड़के और लड़कियों से माफ़ी मांगी और सबके सामने कुबूल किया की वो ड्रग्स बेचते hai.or उन्होंने पुलिस को भी सरेंडर कर दिया है. तो हम यही जानना चाहते है की ये सब हुआ कैसे.

मैं- जैसे भी हुआ हो. इसमें मेरा हाथ कहा से आज्ञा जरा ये बताओ. तुम दोनों को ऐसा क्यों लगता है की इस काम के पीछे में हु.

रेनू- वो इस लिए क्युकी तुमने कल रात को कहा था की तुमने हमें कल hi ये सब क्यों बताया is.baat का जवाब आज सुबह डोज तुम. और सुबह से hi न्यूज़ चल रही है की पुलिस ने कई किलो ड्रग्स बरामद किये और उनसे जुड़े सरे लोग भी मरे गए है. और उसके जस्ट बाद वो दोनों आके हम सभी से माफ़ी मांगते है. ये सब कोई कोइंसिडेन्स तो नहीं हो सकता.

मैं- जितना तुम सोच रही हो. उतना कुछ नहीं है. है इसके पीछे मेरा hi हाथ है. लेकिन सिर्फ हाथ. मैंने पुलिस कम. को टिप दी ड्रग्स की. और उन दोनों लड़को की. पुलिस ने उन्हें पकड़ा और उनसे सच उगलवा लिया. वो दोनों जिसके लिए काम करते थे उसका नाम सामने आया. पुलिस बहा गयी. उससे पूछताछ करने पैर कोई और आया होगा. और इसी तरह सब काम चलता गया और पुलिस ने सभी को पकड़ लिया. और वो दोनों में से एक ैप का बीटा था ऐसा तुमने बताया था मुझे तो सायद उन्होंने उसे समझाया होगा और वो समाज भी गया होगा. इसीलिए उसने सबसे माफ़ी मांगी और जेल चला गया. अब मुझे पूरी कहानी तो नहीं पता लेकिन सायद ऐसा hi हुआ होगा.

ये सब सुनने के बाद दोनों के मुँह खुले रह गए.

सुरभि- क्या सच में.

मैं- है मुझे उन दोनों और उस इंसान के बारे में पता चल गया था जो उन्हें ड्रग्स सप्लाई करता है. इसीलिए मैंने एक गुमनाम कॉल किया और साडी जानकारी उन्हें दे दी. और उन्होंने फ़ौरन hi एक्शन ले लिया. और आज देखो सेहर में एक ग्राम भी ड्रग्स नहीं है. जो की अच्छी बात है.

रेनू- क्या सिर्फ इतनी hi बात है. या और कुछ भी है.

मैं- बस इतनी hi बात है.

रेनू- तूने सच में कमाल कर दिया. एक रात में ड्रग्स का सारा बिज़नेस ख़त्म हो गया. ी म प्राउड ऑफ़ you.mere भाई.

मैं- है ठीक है लेकिन ये बात हमारे बीच hi रहे. किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए की मैंने hi पुलिस को कॉल किया था. समाज में आया. इस बात को यही भूल जाओ.

सुरभि- भूल गए.

मैं- बढ़िया. चलो अब सो जाओ. कल में बापिस जा रहा हु देहरादून. सलग में पड़े का बहुत नुकसान हो गया है.

सुरभि- क्या इतनी जल्दी. लेकिन और कुछ दिन रुक जाओ न.

मैं- यार सच कहु तो में बोर हो गया हु. तुम दोनों सलग चली जाती हो. में रह जाता हु अकेला. इसलिए में बापिस जा रहा हु. बहा काम से काम सलग के बहाने टाइम पास होता रहेगा.

सुरभि- बैसे ये बात भी ठीक है. हम उस दिन के. बाद से कही भी घूमने नहीं गए. बूर तो तुम होंगे hi.

रेनू- बैसे अगर रुक तो कल हम कही भी जा सकते है.

मैं- बाद में आऊंगा कभी जब तुम दोनों की छुटिया होगी. तब आराम से घूमेंगे और इंजॉय करेंगे. फिलहाल जाना होगा यार मुझे सॉरी है.

रेनू- चल कोई बात नहीं. बैसे मां को बताया या नहीं.

मैं- अभी तो नहीं बताया है. कल सुबह बता दूंगा और शाम की फ्लाइट से निकल जाऊंगा.

सुरभि- ठीक है. सुबह मिलते है. गुड नाईट..

मैं- है गुड नाईट लेकिन एक बात याद रखना आगे से अगर तुम दोनों के. बारे में मुझे कुछ भी ऐसा बैसा पता चला तो देख लेना में क्या करूँगा फिर.

रेनू- नहीं तुम्हे ऐसा मौका कभी नहीं देंगे हम.

मैं- बढ़िया. चलो जाओ सो जाओ.

वो दोनों चली गयी होने अपने कमरे में.

तभी मेरा फ़ोन बजा .मैंने देखा तो अस ुसल प्राची का hi कॉल था. मैंने रेसिवेद किया कॉल और उससे बाटे करने लगा. मैंने उसे नहीं बताया की मैं कल आरहा हु. उसे क्या किसी को नहीं बताया उधर.

हमारी नार्मल बातचीत चलती रही. करीब 30 मं. तक जो बहुत ज्यादा थी. लेकिन ठीक था. अब रात के 11 बज गए थे. इसलिए मैंने सोचा की अब समय आज्ञा है वो कवच बनाने का.

मैंने कमरे को लॉक किया. और गायब होक सीधा छत पैर पंहुचा. और बही पैर बैठ गया. और आँखे बंद करे ध्यान लगाने लगा. और कवच का आवाहन करने लगा. तभी गुरुदेव की आवाज आई मुझे.

तो बे कॉन्टिनुए……………….

 
अपडेट 34

गुरुदेव- तेहरो वत्स ये क्या कर रहे हो तुम.

मैं- प्रणाम गुरुदेव आप इस वक़्त.

गुरुदेव- में तो हर वक़्त तुम्हारे साथ hi रहता हु. अब तुम ये बताओ की ये क्या कर रहे हो तुम.

मैं- गुरुदेव में एक कवच बना रहा थे इस पृथ्वी पैर. ताकि अब फिर कोई असुर यहाँ आके तबाही न मचा सके.

गुरुदेव- परन्तु वत्स अगर वो यहाँ आएंगे नहीं तो तुम उनका बढ़ कैसे करोगे.

मैं- उनका वध तो में पृथ्वी के बहार भी कर सकता हु गुरुदेव. पैर अगर वो यहाँ आये तो बिना बजह मासूम लोग मरे जाते है. सिर्फ इस लिए क्युकी वो मेरा पता लगाना चाहते है.

गुरुदेव- तुम्हारा सोचना उचित है वत्स. परन्तु ये कोई हल नहीं है. तुम्हे क्या लगता है ये कवच क्या कोई और नहीं बना सकता. अगर ये सही फैसला होता तो बहुत पहले hi ऐसा हो चूका होता. जरा सोच कर देखो. इस बारे में. तुम एक तरह से इस पोरे संसार के चक्र में रूकावट लेन वाले थे.

मैं- आपका कहना उचित है गुरुवार. पैर जब लोग मरते है बिना बजह के वो मुझसे देखा नहीं जाता है. में क्या करू इसके लिए.

गुरुदेव- वत्स ये कवच बनाना इसका हल नहीं है. पैर है एक उपाय है. तुम कवच न बनाकर कुछ ऐसा चक्र बनाओ जिससे जब भी कोई असुर पृथ्वी पैर प्रवेश करे तो तुम्हे उसके बारे में तुरंत hi सुचना मिल जाये. और तुम सतर्क हो जाओ.

गुरुदेव का ये विचार मुझे सही लगा.

मैं- धन्यबाद गुरुदेव आपने मेरी समस्या का समाधान निकल दिया. इससे में उन देत्यो पैर बाजार रख पाउँगा. और अगर वो कुछ गलत करने का प्रयास करेंगे तो उनको सबक भी सीखा पाउँगा.

गुरुदेव- बिलकुल वत्स. और अगर लोगो के मरने से तुम्हारा मन विचलित हो तो ये सोचकर चलना की तुम्हारा जीवन का उद्देस्य क्या है. और जब कोई बड़ा लक्ष्य हमारे जीवन में होता है तो हमें कुरबानी तो देनी hi पड़ती है. फिर वो किसी भी सूरत में हो सकती है. और इसका जीता जागता उदहारण है श्री कृष्णा का जीवन. तुम्हे ये तो पता hi होगा की भगवन श्री कृष्णा हमेशा हर परिस्थिति में अपना संयम बनाये रखते थे. और चेहरे पैर एक मनमोहक मुस्कान जिसे देखकर सभी का ह्रदय भर जाता था. और ये भी याद रखो को उन्होंने अपने पोरे जीवन में कितने बलिदान दिए है. सबसे पहले तो उन्हें अपने माता पिता से बिछड़ना पड़ा. अपने hi मां का वध करना पड़ा. और सिर्फ 11 वर्ष की आयु में उन्होंने सारा घर बार छोड़ दिया और उनके प्यारे गोकुल वासियो से दूर हो गए. अपने मित्र और सकहो से दूर हो गए. और फिर लौट कर भी नहीं आपये कभी. और उसके बाद अपने hi बुआ के परिवार का विनाश देखा उन्होंने.

उनका जीवन कितने संघर्षो से भरा हुआ था. तुम्हे उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए. और मुझे उम्मीद है एक बार तुमने उनके जीवन से प्रेरणा ले ली. फिर तुम्हे जीवन में कभी भी दुखी नहीं होना पड़ेगा.

ये सब बाटे सुनकर मेरा मंद पूरा ब्लेंक हो गया था. क्युकी गुरुदेव की कही हर बात सही थी.

गुरुदेव- और वत्स एक बात का और स्मरण रखो की तुम सभी को नहीं बचा सकते. लेकिन तुम ज्यादा से ज्यादा लोगो को बचा सकते है. और तुमने अभी तक ये सब बहुत अच्छे से किया है. जरा सोचो की अगर तुम समय पैर कुछ नहीं करते तो कितने hi और मरे जाते. लेकिन तुम अपना शौर्य दिखाया और ज्यादा से ज्यादा लोगो को बचा लिया. बस यही सोच कर तुम्हे आगे बढ़ना है.

मैं- गुरुदेव आपकी कही गयी हर एक बात सीधे मेरे ह्रदय में उतर गयी है. में हमेशा ये बाटे याद रखूँगा जो आपने कहा है. और उसे hi अपना जीवन का मूल मंत्र बनाऊंगा.

गुरुदेव- मुझे तुमसे यही आशा है वत्स. अपने जीवन के कार्य को सफल करो. और जब भी मन विचलित हो तो मुझे पुकारना में आजाऊंगा तुम्हारे मन को शांत करने के लिए.

मैं- में याद रखूँगा गुरुदेव.

गुरुदेव- तुम्हारा कल्याण हो वत्स.

मैंने गुरुदेव को प्रणाम किया और ध्यान से बहार आज्ञा. और सोचने लगा की गुरुदेव ने कितनी बड़ी बातो को कितनी आसानी से समझा दिया. अब मेरा मन थोड़ा shan't है और अंदर से अच्छा भी फील हो रहा था. और अब समय था कुछ ऐसा करने का जिसके बारे में गुरुदेव ने कहा था

मैंने फिर से अपनी आँखों को बंद किया और तिरदये को ओपन किया. और उससे कुछ ऐसा कवच बनाने को कहा जिससे कोई भी असुर अगर पृथ्वी पैर आये तो मुझे उसकी सुचना तुरंत hi मिल जाये. एक ऐसा अदृश्य कवच जो किसी को कोई नुकसान न पहुचाये वस् असुरो पैर नजर रखे.

मेरा ऐसा सोचते hi लेयर निकलना स्टार्ट हो गयी. और इसबार ये लेयर सीधे मेरी तिरदये से निकल रही थी. और बदलो को चीरती हुई आकाशगंगा में फ़ैल रही थी.

धीरे धीरे उस लेयर ने पूरी पृथ्वी के चारो तरफ एक अदृश्य घेरा बना लिया. और ऐसा होते hi अचानक से मुझे कुछ असुरे के संकेत मिले. जो अलग अलग वेश में इसी पृथ्वी पैर निवेश कर रहे थे. मुझे करीब 1000 से ज्यादा असुरो के संकेत मिले जो अलग अलग जगहों पैर विचरण कर रहे थे बिलकुल आम इंसानो की तरह. और इनके यहाँ आने का जो मकसद था वो एक hi था की उस दिव्यास्त्र की खोज की जाये. अब मुझे ये समाज में नहीं आरहा था की इन सबका किया क्या जाये. इनको मार दू या फिर सही समय का वेट करू. यानि की दिव्यास्त्र का.

में जनता था की ये निर्णय मुझे hi लेना होगा. इसमें गुरुदेव मुझे यही कहेंगे की जो डिल कह रहा है उसकी बात मनो. और मेरा डिल कह रहा था की इन असुरो ने कल वर्षो से कोई भी ऐसा काम नहीं किया है जिसकी बजह से इन्हे मारा जाये. लेकिन दिमाग कह रहा था की इनका क्या भरोसा कल को कुछ भी कर सकते है.

मेरे डिल और दिमाग दोनों के बीच जुंग चल रही थी की इनका क्या किया जाये. और आखिर कार बहुत सोचने के बाद मैंने ये निर्णय लिया की फिलहाल इन पैर नजर hi राखी जाये. अगर इनमे से कोई भी गलत काम करता पाया गया उसे उसी वक़्त निपटा दूंगा.

यही सोचकर मैंने ध्यान को समाप्त किया. क्युकी अब कवच बन चूका था और अब कोई और काम तो था नहीं. बस आराम करना था. क्युकी 2-3 रातो से ठीक से सोया नहीं था में. इसलिए में सीधा कमरे में पंहुचा और सोने चला गया.

कही किसी अनजान जगह पैर एक बहुत hi चमकीली चीज़ चमक रही थी. जैसे कोई मड़ई हो. उसकी रौशनी बहुत hi सुहावनी थी. ये मड़ई हवा में लटकी हुई थी. और गोल गोल घूम रही थी अपने आप. ये जगह कोनसी थी पता नहीं लेकिन ये मड़ई एक गुफा में चमक रही थी. और इसका उजाला इतना था की उस पूरी गुफा को रौशनी दे रहा था. लेकिन गुफा के बहार नहीं. क्युकी गुफा पूरी तरह से पैक थी. मतलब इस गुफा का कोई भी प्रवेश दरवाजा नहीं था. इसके अंदर कैसे जाया जाये ये किसी को पता नहीं था. और ऐसा भी नहीं है की कोई चट्टान ने इस गुफा के दरवाजे को धक् लिया हो. बल्कि ये एक बंद कमरे की तरह था. जिससे बहार जाने का कोई भी रास्ता नहीं था. न तो कोई खिड़की और न hi कोई दरवाजा. और दूसरी तरफ कुछ अजीब से लोग उस गुफा के बहार खड़े थे और उन पथरो को तोड़ने की कोसिस कर रहे थे. जैसे वो उस गुफा के अंदर जाना चाहते है. काफी लोग लगे हुए थे बहा पैर लेकिन कोई भी सफल नहीं हो प् रहा था उन पथरो को तोड़ने में. तभी उस मड़ई में से रौशनी की एक किरण उन पथरो को चीरते हुए बहार निकली जिसे देखकर बहा खड़े सभी लोग हैरान हो गए. उन्हें अपनी आँखों पैर भरोसा नहीं हो रहा था की ये किरण इन पथरो को चीयर कर बहार निकल आई है. लेकिन अगले hi पल उस किरण ने अपना आकार बढ़ाना सुरु किया. जिसे देख कर बाकि सभी और हैरान होने लगे की ये क्या बो रहा है. और उसके अगले hi पल उस किरण से इतना उजाला हुआ जिसमे बहा खड़े सभी लोग एक तरह से अंधे हो गए. अब बहा केवल उजाले के कुछ नहीं दिख रहा था. और फिर वो उजाला धीरे धीरे काम होना सुरु हुआ. कुछ hi सेक् में बहा पैर पूरा अँधेरा छ गया और वो किरण भी पूरी तरह से गायब हो गयी. और जो लोग बहार खड़े थे. अब उनकी जगह केवल रख का ढेर बचा था. मतलब की उस किरण ने सभी को भस्म कर दिया था.

तभी उस जगह की एक हलकी सी छबि नजर आई और अचानक से बहुत hi बड़ा विस्फोट हुआ. जिसमे उस जगह के परखचे उड़द गए. वो साडी गुफा और बहा मौजूद पत्थर सरे कंकड़ में बदल गए.

और इतना भयानक विस्फोट था की किसी की भी आतम कामो जाये ये देखकर.

तभी अचानक से मेरी आँखे खुल गयी और में उठ कर बैठ गया

मेरा पूरा चेहरा इस वक़्त पसीने में लतपथ था. तभी मुझे याद आया विस्फोट का और में चारो तरफ देखने लगा मैंने तुरंत hi रूम की खिड़की खोल कर बहार देखा. तो मुझे सब नार्मल दिखा चारो तरफ घनघोर अँधेरा छाया हुआ था. मेरा मंद थोड़ा रिसेट हुआ और मुझे याद आया की में तो सो रहा था. मतलब की ये सब एक सपना था. लेकिन ये सपना आया क्यों. कही इसका कोई मतलब तो नहीं है. बैसे जो जगह दिख रही थी वो एक पहाड़ जैसा था. तो हो सकता है किसी पहाड़ में विस्फोट हुआ होगा. लेकिन क्यों. और kaise.or जो मड़ई दिख रही थी वो क्या चीज़ थी.

मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की इस सपने का ु आना क्या सन्देश लाया है. मुझे इतना लता था की इस आपने का कोई न कोई महत्व तो जरूर है. लेकिन क्या?

बहुत सोचने पैर मुझे वो दिव्यास्त्र की याद आई. और गुरुदेव की बात भी की वो बिवाजित हो गया था. अलग अलग भागो में. तो कही ये जो मड़ई दिख रही थी. वो उसी दिव्यास्त्र का hi तो भाग नहीं है.

ये सोच दिमाग में आते hi मेरा विज़न क्लियर हो गया और मुझे समाज में आज्ञा की इसका दिव्यास्त्र से कोई न कोई कनेक्शन है. और इसके बारे में विस्तार से केवल गुरुदेव hi समझा सकते है. कल प्रातः. उन्ही से पूछूंगा में.

ये निर्णय मैंने लिया और उसके बाद मैंने ठंडा पानी पिया अपना चेहरा साफ़ किया और दीवार सोने की कोसिस करने laga.abhi रात के 3 बज रहे the.mujhe 5 बजे तक hi उठना था मतलब 2 घंटे बाद. इसलिए आराम से सो गया. लेकिन मन में उस आपने का ख्याल आते hi रहे. और पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी.

बही दूसरी तरफ शुक्राचार्य अपना यज्ञ कर रहे थे. रात में hi उनका यज्ञ भी सुरु हुआ था. एक के बाद एक आहुति वो देते जा रहे थे. और जब पूरी 100 आहुति हो गयी. उसके बाद शुक्राचार्य कुछ मंत्रो का उच्चारण करने लगे. काफी देर तक वो लगातार मंत्र का पथ करते रहे और आखिर कार यज्ञ कुंड से एक भयंकर ज्वाला निकली जिसकी लपटों ने शुक्राचार्य की आँखे खोल दी. उन्होंने आँखे खोल कर देखा तो वो लपट ने एक आकृति बना ली थी. जो देखने से किसी देवी की hi लग रही थी. शुक्राचार्य ने उन देवी को प्रणाम किया.

देवी- शुक्राचार्य कहिये आज मेरा आवाहन क्यों किया है आपने.

शुक्राचार्य- माता इस सेवक का प्रणाम स्वीकार करे.

देवी- स्वीकार किया.

शुक्राचार्य- माता हम असुरो पैर संकट आज्ञा है. परन्तु हमें उस संकट के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है. हमारी साडी कोसिसो को बिफल कर दे रहा है. किसी शक्ति का जन्म हुआ है पृथ्वी पैर. मुझे उसके वेयर में जानना है. वो कोण है किसका अवतार है या फिर किसी शक्ति है उसके पास. और उसका बढ़ हम कैसे कर सकते है. मुझसे सब कुछ जानना है.

देवी- शुक्राचार्य तुम कितने विवश हो गए हो. मुझे तुमसे ऐसे आशा बिलकुल नहीं थी. तुम खुद उस शक्ति का पता लगाने में सक्षम हो. फिर भी तुमने मेरा आवाहन किया.

शुक्राचार्य- देवी. हमने कई कोसिस कर के देख ली है. बदले में हमारे वो असुर मरे गए है. पैर हमें सफलता बिलकुल नहीं मिली है. इसीलिए मैंने आपका आवाहन किया है. कृपा करके हमारा मार्गदर्शन करे.

देवी- में देख रही हु तुम्हारी कोसिसो को. तुमने अपना पूरा जोर फिर भी नहीं लगाया है. तुम बस 1-2 हार से घबरा गए हो.

शुक्राचार्य- कुछ ऐसा hi समाज लीजिये माता. जब मेरे इतने शक्तिशाली असुर उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए तो मैंने और क्या कर सकता हु.

देवी- ठीक है शुक्राचार्य अब में आई हु तो तुम्हे कुछ न कुछ बता कर hi जाउंगी.

शुक्राचार्य- आपकी कृपा होगी माता.

देवी- जिस शक्ति की तुम बात कर रहे हो. उसका सम्बन्ध साक्षात महादेव से है. और में तुम्हे ये भी बता दू की तुम्हारा कोई भी असुर उसे पराजित नहीं कर सकता है. चाहे वो कितनी hi शक्तियों का प्रयोग क्यों न कर ले. इसलिए तुम्हे कुछ और सोचना होगा उस शक्ति के लिए. और इसका जन्म हुआ है उस दिव्यास्त्र के लिए. और वो दिव्यास्त्र प् कर hi रहेगा. तुम्हे अगर वो दिव्यास्त्र प्राप्त करना है तो तुम्हे अपना पूरा जोर लगाना होगा. अभी वो शक्ति थोड़ी काम ताकतवर है क्युकी उसकी शक्तिया सीमित है. लेकिन अगर एक बार वो दिव्यास्त्र उसने प्राप्त कर लिया फिर उसकी शक्तियों की कोई सीमा नहीं होगी. और उस दौरान में यही कहूँगी की अपनी जान बचने के बारे में सोचना. भूल कर भी उसके सामने मत जाना वर्ण काम ख़त्म समझो.

ये सब सुनकर शुक्राचार्य की धड़कने तेज़ी से बढ़ने लगी थी.

शुक्राचार्य- माता वो कैसी दिखती है. हम उसे कैसे ढूंढे. और सबसे जरुरी की उसे कैसे हराया जा सकता है.

देवी- वो शक्ति फिलहाल एक बालक के रूप में है पृथ्वी पैर. और उसे ढूंढ़ने के लिए भारत के उत्तर दिशा में प्रयास करो. और उसे पहचानने के लिए में तुम्हे दिव्यादृस्ति प्रदान करती हु. तुम इससे उसको पहचान पाओगे और देख पाओगे. लेकिन तभी जब वो तुम्हारे ये तुम्हारे असुरे के आसपास मौजूद होगा. और रही बात उसके कैसे हराया जा सकता है. तो में कहूँगी की प्रयास करते रहो. सायद तुम सफल हो जाओ. और फिर भी न हो तो उसे हारने के बारे में नहीं बल्कि अपने वश में करने के बारे में सोचना. तुम्हे तुम्हारा जवाब मिल जायेगा.

उसके बाद देवी के हाथ से एक छोटी सी लो बिल्ली और शुक्राचार्य की आँखों में समां गयी. और इस दृस्टि से वो देव को देख सकते थे जब भी बो किसी असुर के आसपास होगा. पहले उन्हें देव की जगह पैर एक तेज़ प्रकाश दीखता था. लेकिन अब देव की शक्ल दिखेगी.

ये सब जानकारी प्राप्त करके शुक्राचार्य बहुत कुश थे. उन्होंने देवी को प्रणाम किया और ऐसा करते hi देव बापिस से अग्नि कुंड .में चली गयी. और उनके जाते hi शुक्राचार्य कुश हो गए क्युकी उन्हें बहुत hi बहुमूल्य जानकारी मिल चुकी थी इस शक्ति से जुडी. और उसका तोड़ भी मिल चूका था. लेकिन ये बात तो वो भी जानते थे की इस शक्ति का सम्बन्ध स्वयं महादेव से है. तो इसका मतलब ये था की शक्ति को काबू करना या हराना लगभग न मुमकिन है. लेकिन कोसिस तो कर hi सकते है.

बही ये सब गुरु परसुराम जी को पता चल गया की शुक्राचार्य को देव के बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है देवी से. और वो इसको लेके चिंतित भी हो गए थे. उन्हें अब चिंता सताने लगी थी की अगर देव का राज खुल गया तो सभी पैर बहुत बड़ा संकट आजायेगा. और उन्हें इसका कोई हल भी नहीं मिल रहा था. इसलिए वो सीधे निकल गए कैलाश पर्वत के लिए. महादेव से मिलने के लिए.

हलाकि अभी रात थी. लेकिन वो ब्रह्म काल तक बहा पहुंच जायेंगे. यही सोच कर वो निकल पड़े.

बही देवराज को भी इसकी जानकारी मिली. और उन्होंने ब्रह्मा जी के पास जाने का निश्चय किया. सुबह सबसे पहले.

बही मैं आराम से सो रहा था इन सब से बेखबर. अपनी नींद का आनंद ले रहा था.

सुबह के 4 बजे तक गुरुदेव महादेव के सामने पहुंच गए. अभी महादेव अपने ध्यान में लीं बैठे हुए थे. इसलिए गुरुदेव ने महादेव की िस्तुति करना प्रारम्भ कर दिया.

काफी देर तक गुरुदेव महादेव की िस्तुति करते रहे. तब जेक महादेव ने अपनी आँखों को खोला.

गुरुदेव ने महादेव को प्रणाम किया. और महादेव ने उन्हें आसीर्बाद दिया.

गुरुदेव- महादेव संकट आने वाला है अर्णव पैर.

महादेव- हम जानते है परसुराम.

गुरुदेव- फिर इसका कोई उपाय भी बताइये भगवन. शुक्राचार्य के मन में अब जो विचार चल रहा है. अगर वो सच में परिवर्तित हो गया तो अनर्थ हो जायेगा.

महादेव- परसुराम अर्णव की अब कठिन परीक्षा सुरु होने वाली है. उसे इन सबका हल खुद hi ढूंढ़ना होगा. और आप तो जानते hi है की वो ऐसा करने में सक्षम है. शुक्राचार्य के मन में जो विचार आया है वो उनके अनुसार ठीक है. और सच कहु तो यही एक तरीका है अर्णव को जीतने का. परन्तु वो मेरा ाँस है. और उसे जीतना आसान काम नहीं होगा किसी के लिए भी. ये बात भी आप जानते है. फिर आप चिंता क्यों कर रहे है.

गुरुदेव- भगवन में अर्णव के लिए चिंता नहीं कर रहा हु. मुझे उसके घरवाले और आम इंसानो की चिंता है. जिनका इस्तेमाल असुर अर्णव के खिलाफ कर सकते है. और अर्णव सायद उनके सामने विवश हो जायेगा. इसके लिए कोई उपाय बताये भगवन.

महादेव- परसुराम आप तो जानते hi है की जब संसार की भलाई का प्रश्न आता है तब इन सबसे ऊपर उठकर सोचना होता है. और अब अर्णव की यही परीक्षा होनी है. क्या वो अपने सांसारिक रिश्तो में hi उलझा रहता है या फिर उनसे ऊपर उठकर अपना कर्त्तव्य निभाता है. असुरो को अर्नब की सचाई पता चलेगी तब वो हर संभव प्रयास करेंगे परन्तु उनके हर प्रयास को बिफल करना है और उनसे मासूम इंसानो की रक्षा भी करनी है. फिर चाहे वो उसके घरवाले हो या फिर कोई और.

गुरुदेव- भगवन आप तो जानते hi है. इस कलयुग का प्रभाव कितना घातक होता है. इंसानो की बूढी को hi भ्रष्ट कर देता है. परन्तु अर्णव ने अभी तक अपने चरित्र का बखूभी परिचय दिया है. लेकिन है वो आधा इंसान hi. कही सांसारिक मोह माया में फास कर उसने कुछ गलत फैसला ले लिए तो क्या होगा. है तो अभी वो एक बालक hi.

महादेव- ऐसा न हो इसीलिए hi तो आपको उसके गुरुदेव का दायित्व सपा गया है. ये आपकी जिम्मेदारी है. आपको उसे मार्ग भटकने से रोकना होगा. उसकी सहायता करनी होगी हर मोड़ पैर. आगे और भी संकटकारी समय आने वाला है. जिसमे अर्णव की हर संभव परीक्षा होगी. जिसमे उसे खरा उतरने के लिए आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ेगी.

गुरुदेव- में समाज गया भगवन. आपके कहने का उद्देश्य. में हरसंभव प्रयास करूँगा अपने दायित्व को निभाने के लिए.

महादेव- और है परसुराम आपको जानकार खुसी होगी की उस दिव्यास्त्र का एक भाग जागृत हो गया है. और इसका आभास भी अर्णव को हो चूका है.

गुरुदेव- मुझे ज्ञात है भगवन. में उसे उचित मार्गदर्शन दूंगा. और मुझे पूरा विस्वास है की वो जल्द hi उस दिव्यास्त्र को प्राप्त कर लेगा.

महादेव- मुझे भी उससे ऐसी hi आशा है. अब आप जाइये अर्णव जल्द hi आपसे संपर्क करने वाला है.

गुरुदेव- जैसी आपकी आज्ञा भगवन…

गुरुदेव ने महादेव को प्रणाम किया और महादेव ने अपनी आँखे फिर से बंद कर ली. और ध्यान में बैठ गए. बही गुरुदेव फिर से अपने आशाराम की तरफ निकल गए.


तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 35



सुबह में अपने रूटीन से उठा बढ़िया फ्रेश हुआ नहाया और छत पैर चला गया. आसान बिछाया और ध्यान में बैठ गया. और सबसे पहले hi मैंने गुरुदेव का आवाहन किया.

और मेरा आवाहन करते hi गुरुदेव की आवाज मुझे आने लगी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव. वत्स.

मैं- गुरुदेव वो कल रात में एक सपना आया था मुझे जन्नत है की कही इस सपने का इशारा उस दिव्यास्त्र की तरफ तो नहीं था न.

गुरुदेव- तुम्हे क्या लगता है वत्स.

मैं- मुझे लगता है वो दिव्यास्त्र का hi एक भाग था जिसे मैंने सपने में देखा था.

गुरुदेव- तुम्हारा अनुमान बिलकुल सत्य है वत्स. दिव्यास्त्र ने तुम्हे अपना स्वामी चुन लिया है. इसीलिए उसने तुम्हे उस जगह के दर्शन कराये जहा वो इस वक़्त मौजूद है.

मैं- परन्तु गुरुदेव जिस जगह पैर वो ाँस मौजूद है वो जगह तो पूरी तरह बंद है. उसमे न तो अंदर जाने का रास्ता है और न hi बहार जाने का. और मैंने सपने में ये भी देखा की कुछ लोगो ने उस जगह को तोड़ कर रास्ता बनाने की कोसिस की तो उस ाँस ने बहा मौजूद सभी को भस्म कर दिया और उसके बाद उस पूरी जगह को एक बड़े विस्फोट से तबाह कर दिया.

गुरुदेव- इसके आगे क्या हुआ.

मैं- इसके आगे में कुछ देख पता उससे पहले hi मेरी नींद खुल गयी. क्युकी वो विस्फोट इतना भयानक था की उसका कम्पन मुझे अपने अंदर तक महसूस हुआ था.

गुरुदेव- में समाज सकता हु. तो जो तुमने देखा है उसका केवल एक hi मतलब बनता है. और वो ये है की अगर कोई भी इस ाँस को प्राप्त करने की कोसिस करेगा वो ाँस उन सबका विनाश कर देगा और उस जगह से कही और चला जायेगा. ताकि फिर उसे कोई ढूंढ न सके.

मैं- तो क्या अभी वो उसी जगह पैर है जिसको मैंने देखा था.

गुरुदेव- है वो अभी उसी जगह पैर मौजूद है.

मैं- परन्तु गुरुदेव में इस गुफा के अंदर कैसे जाऊंगा. और सबसे पहले तो ये की में उस पहाड़ को धुंडु कैसे. यहाँ तो कई पहाड़ है.

गुरुदेव- तुम्हे इस बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है वत्स. जब उस ाँस तुम्हे अपनी जगह का पता बताया है. तो वो खुद hi तुम्हे इस तक पहुँचाने का मार्ग भी दिखाएगी. तुम बस सबसे पहले ये पता लगाओ की वो जगह आखिर है कहा. लेकिन अपनी शक्तियों से नहीं बल्कि अपने दिमाग के इस्तेमाल से. तुम्हे सांसारिक साधनों का इस्तेमाल करके उसे जगह का पता लगाना होगा. फिर hi तुम्हे आगे का रास्ता मिलेगा.

मैं- ठीक है गुरुदेव. आपने जैसा कहा है में बैसा hi करूँगा.

गुरुदेव- और है तुम्हे एक सुचना और देनी है मुझे. की अब तुम्हे ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है. क्युकी दैत्यगुरु शुक्राचार्य को तुम्हे ढूंढ़ने के लिए कुछ शक्तिया प्रदान की है. और अब वो तुम्हारा चेहरा देख सकते है. अगर उनका कोई भी असुर तुम्हारे आसपास हुआ या फिर तुम्हारी उससे लड़ाई हुई. तो वो तुम्हे पहचान सकते है

ये सुनकर में बुरा चायका.

मैं- गुरुदेव अगर ऐसा है तो में क्या करू. क्या उनसे लड़ना छोड़ दू.

गुरुदेव- नहीं तुम्हे लड़ना छोड़ने की जरुरत नहीं है. अगर उनको तुम्हारे बारे में पता चल भी जाता है तब भी तुम्हे केवल सतर्क रहने की जरुरत है. और अपने परिवार और पोरे पृथ्वी के इंसानों की सुरक्षा भी करनी है.

मैं- में समाज गया गुरुदेव. में सतर्क रहूँगा और उनकी हर चल को नाकाम करके दिखूंगा.

गुरुदेव- बहुत hi बढ़िया वत्स. अब तुम ध्यान लगाओ.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

मैंने उन्हें प्रणाम किया और वो चले गए और में ध्यान में hi बैठा रहा और अपना मंत्र उच्चारण करता रहा.

बही करीब 7 बजे में ध्यान से उठा फ्रेश हुआ और नीचे चला gya.jaha फिलहाल सभी लोग मौजूद थे. में बही सोफे पैर बैठा और ममी ने मुझे कॉफ़ी दी. तब मैंने सोचा की सभी को बता hi दू

मैं- मां में शाम की फ्लाइट से बापिस जा रहा हु

ये सुनते hi ममी और मां दोनों शोक. बाकि उन दोनों को तो पता hi था

ममी- क्या हुआ तुझे. जो अचानक जाने का मन बना liya.sab ठीक हैना

मैं- ममी सब ठीक है. वो क्या है मेरा सलग का बहुत सिलेबस पीछे रह गया है. और अभी 2-3 हफ्तों बाद मिडसेम एग्जाम भी सुरु होने बाले है. और मेरी तैयारी कुछ भी नहीं है. इसलिए मुझे जाना होगा ताकि कुछ पद सकू. पड़े का बहुत लोस्स हो रहा है

मां- है ये बात तो है. ठीक है हम रोकेंगे नहीं तुम्हे. लेकिन है चुटकियो में बापिस आना पड़ेगा. और में पहले से hi ऑफिस से छूती लेकर रखूँगा ताकि तुम्हे वक़्त दे सकू. इस बार बिलकुल भी टाइम नहीं दे पाया तुम्हे.

मैं- कोई बात नहीं मां अगली बार आऊंगा तब ये कसार भी पूरी कर लेना.

ममी- ठीक है बीटा. तुम चले जायेंगे तो याद तो आएगी लेकिन चला लेंगे हम.

मैं- क्या ममी आप तो सेंटी हो रही हो. ऐसा करना अबकी बार आप सभी बहा पैर आजाना. माँ से भी मिलना हो जायेगा और साथ में छूती भी. क्या कहते हो मां.

मां- बैसे आईडिया अच्छा है. यही करेंगे हम.

.तभी ममी ने मां को कुछ इशारा किया और मां फिर मुझसे बोले.

मां- बीटा तुम्हारी ममी और में तुम्हे एक गिफ्ट देना चाहते है प्लस मन मत करना

मैं- कैसा गिफ्ट.

मां- वो जैसा भी हो तुम्हे लेना पड़ेगा. बस.

मैं- लेकिन बताओ to.ki गिफ्ट क्या है.

ममी- बीटा गिफ्ट जो भी हो उसे ले लेते है ये नहीं पूछते की क्या है क्या नहीं.

मैं- ठीक है में ले लूंगा. अब तो बताओ की क्या गिफ्ट है.

मां- आओ मेरे साथ.

मां ने मेरी आँखों पैर हाथ रखा और मुझे कही ले जाने लगे. और फिर एक जगह पैर रुक गए. और फिर उन्होंने मेरी आँखों से हाथ हटा लिया. और जब मैंने आँखों को खोल कर सामने देखा तो बहा पैर एक चमचमाती brand-new कार कड़ी थी.

मेरसेदेज़ बेंज अंग गत.

मैं- ये क्या है मां….

मां- एक छोटा सा gift.or तुम इसे मन नहीं कर सकते. तुम्हे लेना hi hoga.tumne अभी अंदर कहा था

मैं- लेकिन इसकी जरुरत क्या है. मेरे पास बाइक है.

ममी- वो तो है hi. लेकिन कार नहीं है न. मुझे पता चला था की तुम्हारी कार को किसी ने तोड़ दिया था. इसलिए hi मैंने इनको कहके कार माँगा ली थी.

मैं- ममी मुझे अभी कार्स की क्या जरुरत है. कही आना जाना तो है नहीं. कड़ी रहेगी बे फालतू में.

मां- क्यों सलग तो जाते हो न. बही ले जाना. और बैसे भी देव सिन्हा बाइक पैर सलग जाये ये अच्छा नहीं लगता इसलिए अब ककी सवाल नहीं. ये रखो चाबी और शाम को टुम इसे से जाओगे घर.

मां और ममी और साथ में सुरभि ने बहुत कहा तो फिर में मन hi नहीं कर पाया उनको. मैंने उनका दिया हुआ गिफ्ट एक्सेप्ट कर लिया और उनको थैंक्स कहा. कार बकै में मस्त थी. ब्लैक कलर में. केहर ध रही थी.

उसके बाद ममी ने नास्ता बगेरा दिया और हमने साथ में नास्ता फिनिश किया और फिर सभी अपनी अपनी मंजिल की और निकल गए. अब घर में केवल में और ममी hi बचे हुए थे.

शाम तक में ऐसे hi टाइम पास करता रहा. थोड़ा बहुत ममी के साथ गप्पे लगाई और बस अपने सामान को पैक किया. शाम को सभी जब घर पैर आये तो में रेडी hi था जाने के लिए. सभी ने मुझे गुडबाय विश किया. और में बहा से निकल गया अपनी नै कार में. में करीब 5 बजे निकला था. और एक घंटा तो मुझे दिल्ली को पार करने में hi लग गया. उसके बाद हाईवे पैर पंहुचा और कार को स्पीड देके भगा लिया. अंधेरा होने लगा था धीरे धीरे और रास्ता भी अधिकतर खली hi चल रहा था. बस इक्का दुक्का गाड़िया hi दिख रही थी. और कुछ प्राइवेट buses.rasta ज्यादा लुम्बा नहीं था. और में अच्छी स्पीड से जा रहा था. और बिना कोई टेंशन के आराम से में देहरादून पहुंच गया. करीब 8 बजे तक. हाईवे से में घर की तरफ निकला और आज जब देहरादून पंहुचा तो ऐसा लगा जैसे वर्सो बाद आया हु यहाँ पैर. इससे ये बात मुझे समाज में आगयी थी की चाहे पूरी दुनिआ घूम लो लेकिन जब हम अपने होमटाउन में पहला कदम रखते है उसकी बात hi अलग होती है. और घर चाहे कैसा भी हो. लेकिन वो हमारे लिए किसी जन्नत से काम नहीं होता. ठीक ऐसी hi फीलिंग आ रही थी मुझे. बैकग्राउंड में स्वदेश का टाइटल ट्रैक बज रहा था. पता नहीं कैसे. लिस्ट में कहा से आया ये सांग पता नहीं. लेकिन बिलकुल स्वदेश के मोहन भार्गव जैसी फीलिंग आरही थी मुझे. खैर यही सांग सुनते सुनते में घर पहुंच गया. गार्ड्स ने जब अनजान कार को देखा तो गेट नहीं खोला. तब एक गेस चक्कर कार के पास आया और जब उसने मुझे देखा तो तुरंत hi सॉरी बोल दिया और गेट खुलवा दिया. और मैंने भी उसके काम की सराहना की जिसे सुनकर वो भी कुश हो गया. और में अंदर चला गया. कार को मैंने गेट के पास रोका. सारा सामान निकला तो राजू आज्ञा. उसने मदद की कुछ सामान उसने किये कुछ मैंने.

मैं- और राजू भाई क्या चल रहा है आजकल.

राजू- बस

मैं- है है ये मत बोलना की फॉग चल रहा है….

राजू हसने लगा.

राजू- क्या भैया आप भी. सब बढ़िया है.

मैं- अच्छी बात है. अच्छा ये बताओ टिफिन देने जाते हो पंडित जी को.

राजू- है भैया कभी में तो कभी दादू ले जाते hai.or आज का में दे आया hu.or पंडित जी आपके बारे में पूछ रहे थे.

मैं- है मिल लूंगा कल उनको.

राजू- देखना सभी आपको अचानक देखकर शोक हो जायेंगे.

मैं- इसीलिए तो अचानक आया हु.

ये बात करते करते हम अंदर पहुंच gye.jaha दादू और माँ देने ने मुझे देखा तो शोक hi हो गए. क्युकी उन्हें सायद ये उम्मीद नहीं थी.

माँ- तू आज्ञा. क्या बात है बढ़िया सरप्राइज दिया है तूने.

दादू- है भाई मजा hi आज्ञा. डिल खुश हो गया. तेरे बिना तो सब सुना सुना लगता था.

मैं- कोई बात नहीं अब आ गया हु तो सब पहले जैसा हो जायेगा.

मैंने दोनों के पेअर छुए. और आसीर्बाद लिया. फिर दोनों ने मुझे गले लगाया. दोनों से मिलकर में भी खुश था.

उसके बाद में कमरे में गया फ्रेश हुआ कपडे चेंज किये और जो गिफ्ट में माँ और दादू के लिए लाया था वो नीचे ले आया. और तभी मुझे याद आया की राजू और बाकिओ के लिए कुछ नहीं ले पाया. साला याद hi नहीं रहा. तो सोचा उनको सेल्लरी बड़ा कर दे दूंगा वो सभी अपनी पसंद से खरीद लेंगे.

मैंने दोनों को गिफ्ट्स दिए. जो उन्हें बहुत पसंद आये. माँ के लिए बढ़िया सूट और दादू के लिए बढ़िया स्टाइलिश कुरता. लिखे मोदी. दोनों hi कुश हो गए.

मैं- दादू इस महीने सबको थोड़ा बोनस दे देना. में उनसभी के लिए कुछ ले hi नहीं पाया. बोनस से ये खुद ले लेंगे अपने लिए.

दादू- ठीक है कल hi दे दूंगा.

माँ- चल आजा खाना खा ले.

उसके बाद हमने खाना खाया. और रात में मैंने प्राची से बात की और उसे बिलकुल नहीं बताया की में आज्ञा हु. उससे कहा की कल या परसो तक आऊंगा. जिसे सुनकर वो और साद हो गयी. लेकिन कल सलग में उसे सरप्राइज जरूर मिलने वाला था इतना तय था. ऐसे hi उससे बात करके में सो गया.

सुबह अपने रूटीन से उठा ध्यान लगाया और सलग के लिए रेडी हो गया. और नीचे पहुंच गया.

मैंने बढ़िया नास्ता किया और राजू से कहके वो गिफ्ट्स जो उन तीनो के लिए लाया था वो कार में रखवा दिए. और उनका आसीर्बाद लेके निकल गया पहले चिराग के घर.

बहा पहुंचकर में सीधा अंदर जाने के लिए बेल्ल बजे और किस्मत से दरवाजा चिराग ने hi खोला और मुझे देखकर वो भी पूरा शोक हो गया.

चिराग- क्या बात है बीआरओ. सरप्राइज है. मजा आज्ञा.

मैं- मजा तो आएगा hi.

चिराग- और बता कैसा रहा दिल्ली ट्रिप.

मैं- ठीक hi था. काफी बोर हुआ बहा पैर. खैर ये छोड़ और ये ले गिफ्ट तेरे लिए. और चल जल्दी लेट हो रहे है.

चिराग ने गिफ्ट लिए और उन्हें बही खोल लिया. और बस उसे वो वाच काफी पसंद भी आगयी. और उसने बही पैर पहन ली. और उसने मुझे थैंक्स भी kaha.fir मैंने अंकल आंटी से मिला उनका आसीर्बाद लिया और निकल गए हम सलग के लिए.

रस्ते में थोड़ी बहुत बक बक चलती रही और हम पहुंच गए सलग. पार्किंग में कार को पार्क किया और लकी और प्राची का वेट करने लगे. थोड़ी hi देर में एक एक करके दोनों आगये और जैसा मैंने सोचा था प्राची तो जैसे स्टेचू hi बन कर एक जगह कड़ी रह गयी मुझे अचानक देख कर. उसे सायद लगा की में उसका कोई बहम हु. लेकिन नहीं में सच था. में उसके पास गया और उसे थोड़ा हिलाया तो वो होश में आई और मेरे गले लग गयी. मैंने भी उसे गले लगा लिया. वो मुझे छोड़ ने को रेडी नहीं थी. तो मैंने उसके कान में कहा.

मैं- प्राची सब देख रहे है. हम सलग में है. छोडो मुझे.

ये बात दिमाग में जाते hi वो मुझसे दूर हो गयी.

प्राची- तुम तो कल या परसो आने वाले थे

मैं- है लेकिन फिर सोचा की जब मुझे सभी इतने दिलो जान से याद कर hi रहे है तो बापिस आजाना चाहिए. इसलिए कल शाम में hi आज्ञा था.

प्राची- मतलब जब हमने बात की थी तब.

मैं- है में यही अपने घर पैर था. और मैंने सोचा सुबह तुम्हे बढ़िया सरप्राइज दिया जाये और देखो मेरा काम बन गया

प्राची- सही कहा तुमने बकै में तो सरप्राइज hi हो गयी थी. थैंक्स इसके लिए.

चिराग- बीआरओ ी थिंक क्लास का टाइम हो गया है.

मैं- है हमें चलना चाहिए.

उसमे बाद हम क्लास में गए. और टाइम पैर पहुंच गए. उन सर से पहले. और मुझे क्लास में देखकर वो ब्बि थोड़े सरप्राइज हो गए. हलाकि उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा. और शाम तक हम ऐसे hi क्लास अटेंड करते रहे. शाम को छूती के वक़्त मैंने उन्दोनो में गिफ्ट उनको दिए जिन्हे देखकर वो भी कुश हो गए और थैंक्स बोलै. और हम सब bye बोलके चले गए बापिस.

रस्ते में मैंने चिराग को छोड़ा और सीधा पंहुचा मंदिर पंडित जी से मिलने के लिए. मैंने अपनी कार पार्क की और ऊपर मंदिर में जाने लगा. जैसे hi ऊपर पंहुचा तो देख कर दांग रहगया. क्युकी मंदिर की हालत काफी ख़राब बानी हुई थी. सामान बिखरा पड़ा था और पंडित जी कही ब्बि दिखाई नहीं दे रहे थे. मैंने आवाज लगाई उनको लेकिन कोई भी रिप्लाई नहीं आया. तो मैं मंदिर के अंदर गया. और बहा का नजारा देख कर में हैरान था. की ये क्या हो गया और कैसे.



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 36



मैंने मंदिर के अंदर देखा की अंदर चारो तरफ खून फैला हुआ है. जिसे देख कर मैं हैरान था. मैंने थोड़ा आगे को गया तो मुझे पेअर दिखाई दिए. में दौड़ कर बहा पंहुचा तो पाया की पंडित जी दीवार से टिक कर लेते हुए है. और उनके सीने से खून बह रहा था. जो अब सुख चूका था. मैंने उनके पास बैठा उन्हें हिलाया. लेकिन कोई फायदा नहीं क्युकी वो मर चुके थे. मेरी आँखों में ासु आने लगे थे. और ये घाव देख कर लग रहा था की किसी ने इन्हे मारा है. लेकिन क्यों. इनकी किसी से क्या दुश्मनी. ये तो अकेले रहते है. इनका कोई भी नहीं है. फिर किसने इन्हे मारा. मेरा ये जानना बहुत जरुरी था. लेकिन पता कैसे लगाया जाये. मैंने उनके घाव को देखा तो चाकू का घाव लग रहा था. में अपने आप को कैसे संभाले हुए था ये में hi जनता था. मेरे अंदर गुस्सा भरता जा रहा था. और इसका असर प्रकृति पैर हो रहा था. अचानक से काळा घने बदल चारो तरफ चने लगे थे और जोरो से बिजली भी कदने लगी थी. मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की में क्या करू. और इसी उधेड़ बन में मैंने उनका हाथ पकड़ लिया. और जैसे hi हाथ पकड़ा अचानक से पता नहीं क्या हुआ मुझे कुछ दुखने लगा. मैंने ध्यान से देखा तो वो पंडित जी थे. आराम से बैठे अपनी माला जाप कर रहे थे. तभी बहा कोई लोग आये. उन्होंने भगवन को प्रणाम किया और फिर पंडित जी के पास आये. और उन्होंने कुछ पूछा उनसे. मेरा विज़न क्लियर था पैर कहता है साउंड में कुछ दिक्कत थी. जिस बजह से मुझे ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था की वो क्या बात कर रहे है मैंने काफी ध्यान से सुनने की कोसिस की तो मुझे कुछ वर्ड समाज में आये. जैसे की वो डेरी कहा है.

बस इतना hi. उसके बाद कुछ नहीं. पंडित जी उठ कर बहा से जाने लगे. उन्होंने उन्हें कुछ भी बताने से सायद मन कर दिया. तभी उन आदमियों में से एक ने पंडित जी के सीने में चाकू घुसा दिया. और बहार निकाल लिया. और फिर वो लोग मंदिर में चारो तरफ कुछ ढूंढ़ने लगे. और पंडित जी की आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी. और मेरा विज़न पूरी तरह से बंद हो गया. और में प्रेजेंट में आज्ञा. और मुझे समाज में आया की ये पंडित जी की आखिरी याद थी. जो मुझे दिखी लेकिन कैसे. मैंने तो कोई आवाहन नहीं किया था इसे देखने का. हाथ पकड़ते hi ये दुखने लगी. कैसे. में काफी कंफ्यूज था की ये हो क्या रहा है. कोण थे वो लोग. और किस डेरी की बात कर रहे थे. उन्हें यहाँ सायद डेरी नहीं मिली है. या फिर बाद में मिल गयी हो कुछ कह नहीं सकते. मुझे उन्हें ढूंढ़ना hi होगा. लेकिन उससे पहले पुलिस को बताना होगा. यही सोचकर मैंने पुलिस को कॉल किया और उन्हें एम्बुलेंस के साथ मंदिर में बुला लिया. करीब 15 मं. में वो सभी आगये. और जब उन्होंने ये सब देखा तो वो भी हैरान थे की एक बुजुर्ग आदमी को किसने मारा और क्यों. सायद लूटने के लिए. उनकी यही थ्योरी चल रही थी. और में उन्हें सच न तो बता सकता था और न hi समझा सकता था. इसलिए मैंने उनको उन्ही के हाल पैर छोड़ दिया. उन्होंने बॉडी को एम्बुलेंस में डाला और पुलिस वालो ने बहा से सबूतों को उठाना सुरु कर दिया. हलाकि कुछ खास नहीं मिला उन्हें. मुझसे कुछ सवाल बगेरा पूछे और जब उन्हें मेरी आइडेंटिटी पता चली तो फिर कुछ भी नहीं पूछा उन्होंने. वो सभी बहा से चले गए. उनके जाने के बाद मैं बही पैर खड़ा रहा. जब वो चले गए बहा से दूर तो मैं बापिस से मंदिर में आया और अपने हाथो को जोड़ कर अपनी आँखों को बंद किया और त्रिनेत्र को ओपन किया. और पूरी जगह की बारीरकी से जाँच करने लगा. उन चेहरों को याद करने लगा जो यहाँ आये थे. और उनके चेहरे याद करते hi वो कहा पैर थे इस वक़्त ये मुझे पता चल गया. और में बहा से सीधा निकला उस जगह के लिए. ये जगह देहरादून से बहार थी हाईवे पैर एक ढाबा. जहा ये लोग बैठ कर खाना खा रहे थे. और इस मंदिर से करीब 15 कम. दूर. मेरा ये जानना बहुत जरुरी था की इनलोगो ने उन्हें किस लिए मारा है. ऐसी किस चीज़ की तलाश थी इन्हे जिसके लिए इन्होने खून कर दिया. शाम का वक़्त था. और अँधेरा छाने लगा. और में कार को अच्छी खासी स्पीड में भगा रहा था. क्युकी उनके निकलने से पहले मुझे उनको पकड़ना था. करीब 15 मं. मैं मैंने सिटी को क्रॉस कर लिया. और अब में हाईवे पैर था. जहा मैंने कार को और स्पीड में भागना स्टार्ट कर दिया और करीब अगले 15 मं. में मैं पहुंच गया उस धने पैर. मैंने कार को रोका और एक जगह अपना मुँह और हाथ धोया और ढाबे के अंदर चला गया. अंदर जेक मुझे वो लोग दिख गए वो टोटल 4 लोग थे. जो एक टेबल पैर बैठे हुए थे. और में सीधा उनकी hi टेबल पैर जेक बैठ गया. और एक कॉफ़ी का आर्डर दे दिया.

ा1- दीखता नहीं ये पहले से फुल है

मैं- लेकिन फुल होती तो में यहाँ बैठ कैसे पता. जगह थी इसलिए बैठ गया.

À2- ज्यादा होसियारी मत झाड़ो. वर्ण बहुत भरी पड़ेगा. निकलो यहाँ से हमें जरुरी बात करनी है

मैं- है कर लो में कोनसा तुम्हे रोक रहा हु. लेकिन में यहाँ से नहीं हिलने वाला

तभी एक ने बिना कुछ कहे मुझ पैर हाथ उठाने की गलती कर दी. और मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया

मैं- ये गलती बहुत भरी पद सकती है सभी को.

देखना चाहते हो कैसे.

.ये कहके मैंने उसकी कलाई को झटके से मोड़ दिया और उसकी हथेली बही पैर टूट गयी. और वो चिल्लाने लगा. और उसका चिल्लाना सुनकर सभी का ध्यान हमारी तरफ आज्ञा.

ये देखर पहले वाले ने गन निकल कर मेरे ऊपर तान दी.

मैं- अभी कहा था गलती बहुत भरी पद सकती है. में पंडित जी जैसा सीधा नहीं हु.

ये वर्ड जैसे hi सुना सबकी बोलती बही पैर बंद हो गयी. और उनके माथे से पसीना बहने लगा और चारो का मुँह खुला और आँखे बहार को आगयी.

.. मैं- मुँह बंद करले वर्ण मच्छर घुस जायेगा अंदर

ये सुनकर उन्हें होश आया और बाकि के दोनों ने एक साथ मेरे दोनों हाथो को पकड़ लिया. और सामने वाले से गोली चलने को कह दिया. बहा मौजूद सभी ये सीन देखकर दर गए. और बहार को भागने लगे. सिवाय उस ढाबे के मालिक के. जो की एक सरदार था. और आ गया वो उन्हें समझने.

. सरदार- ोये ये क्या कर रहे हो तुम लोग. जल्दी निकला जाओ यहाँ से वर्ण सबको पुलिस में हवाले कर दूंगा.

मैं- सरदार जी पुलिस तो आचुकी है. और आपसे अनुरोध करती है की प्लस बीच में न आये.

ये सुनते hi सरदार जी मामला समाज गए. और बहा से बहार निकल गए. और उन चारो की बंद बज गयी

मैं- देखो अगर यहाँ से भागना चाहते हो तो ये बताओ की उनको क्यों मारा. सच सच बता दो और निकल जाओ यहाँ से.

ा1- हिम्मत तो देखो गन हमारे हाथ में है और ये हमें धमकी दे रहा है

मैं- गन का इस्तेमाल कायर लोग करते है. में उनमे से नहीं हु. तुम सभी के लिए मेरे हाथ hi काफी है

ये कहके मैंने खड़े होकर जल्दी से अपने दोनों हाथो को घुमाया और जो लोग मेरा हाथ पकडे हुए थे अब उनकी गर्दन मेरे हाथो में थी. और गन वाले के सीने पैर एक कास कर लात जमा दी. जिससे वो चेयर सहित नीचे का गिरा. और उसके अगले hi पल मैंने दोनों की गर्दनो को जोर से घुमा दिया और छोड़ दिया. दोनों hi बेजान होक नीचे गिर गए. और ये देखकर उन दोनों की फैट गयी. बेचारा एक तो अभी भी अपनी कलाई पकडे बैठा हुआ था. सिर्फ एक hi था जिसके पास गन थी. में उसके पास गया और सीढ़ी लास्ट उसके सीने पैर पटक दी. जिससे उसका मुँह ऊपर को हुआ और एक सॉलिड पंच दिया उसके थोबड़े पैर जिससे वो बही बेहोश हो गया. अब बचा केवल वो जिसका हाथ सबसे पहले टूटा था

में उसके पास गया.

मैं- देख अगर लड़ना है तो इनका अंजाम देख ले. और अगर नहीं लड़ना है और जिन्दा भागना चाहता है तो मुझे सच बता

ा3- साब मुझे ज्यादा पता नहीं है. हम सभी इस अरुण के लिए काम करते है. यही हमें यहाँ लाया था. और इसी ने उन्हें मारा है.

मैं- लेकिन क्यों. उसने क्या बिगाड़ा था तुमलोगो का.

ा3- सर एक्चुअली हम पैसो के लिए कुछ भी करते है. ये अरुण hi हमारे लिए काम ढूंढ कर लता है. और ये काम भी यही लाया था. किसी ने हमें पैसे दिए थे उनको मारने के लिए. और उनके यहाँ से कोई डेरी को लेन के लिए.

मैं- कहा है वो डेरी.

ा3- ये रही भाई

उसने अपनी शर्ट के अंदर से वो डेरी निकाल कर मुझे दे दी.

ा3- बाकि मुझे अब कुछ भी नहीं पता है.

मैं- जिसने काम दिया था उसके बारे में कुछ बताओ.

ा3- उसके बारे में हमें कुछ भी मालूम नहीं है. क्युकी ये अरुण hi सरे कॉन्ट्रैक्ट लेता है. साडी जानकारी उसी को होती है. हम बस पैसो और काम से मतलब होता है .

मैं- उसका कोई no. बगेरा.

ा3- है उसके मोबाइल में होगा.

मैं- निकाल कर दे मुझे.

वो जल्दी से गया और उसने अरुण का मोबाइल निकाल लिया और उसमे no. ढूंढ़ने लगा. पहले hi no. पैर दैलेड में था. उसने मुझे वो दे दिया. मैंने उसे अपने मोब. में सेव कर लिया.

मैं- एक बात ध्यान रखना अगर मुझे बाद में लता चला की तूने मुझसे कुछ छिपाया है तो सेल जहा रहता होगा वही तुझे गाड़ दूंगा. और ये मत समझना की में ढूंढ नहीं पाउँगा तुम्हे. पटल में भी छिपा होगा तो बहा से भी ढूंढ लूंगा.

ा3- समाज गया साब.

मैं- ठीक है जाओ. और ये बेहोश पड़ा है इसे भी ले जा. बाकि इनकी लाशो को भी ले जा और रस्ते में कही ठिकाने लगा देना.

ा3- लेकिन कैसे.

मैं- ये भी में hi बताऊ.

ा3- आप तो पुलिस है आप hi बता दीजिये.

मैं- रस्ते में एक जंगल आएगा. बहा पैर इनको दफना देना. अब निकल यहाँ से. सबको ले जा.

ये सुनते hi मैंने सरदार जी को अंदर बुलाया और उनकी मदद से उन तीनो को उनकी कार में रखवा दिया. और उनको थोड़े पैसे दे दिए नुकसान के. और ये सब भूलने को भी कहा जिसे वो समाज गए. हलाकि उन्हें शक तो हुआ पैर मैंने मंद कण्ट्रोल से बात को संभल लिया. और बहा से सीधा निकला अपने घर की तरफ. करीब 30 मं. में पहुंच गया घर. और अंदर घुसते hi दादू और माँ ने सवालो की झड़ी लगा दी.

फिर मैंने उन्हें बताया उन पंडित जी के. बारे में. जिसे सुनकर उन्हें भी शोक लगा. और दादू ने फ़ौरन hi कम से बात करके उनके कातिलों को पकड़ने को कहा और ये भी की उनकी बॉडी हमें दे दे. हम उनका अंतिम संस्कार करवा देंगे. और ये बात वो भी समाज गए. और उन्होंने कल के लिए कह दिया.

उसके बाद दादू और माँ मुझे सांत्वना देने लगे. लेकिन में अभी भी थोड़ा डिस्टर्ब फील कर रहा था. इसलिए में नहाने के लिए रूम में चला गया और शावर ों करके नहाने लगा और सभी बातो को सोचने लगा. लेकिन अब तो सरे सवालो के जवाब उस डेरी में hi मिलेंगे. रात में उसे पडूंगा. की आखिर ऐसी क्या खास बात है उस डेरी में.

नहाने के बाद थोड़ा हल्का फील होने लगा था. उसके बाद नीचे गया और बैठ गया. डिनर का मन नहीं कर रहा था. लेकिन माँ और दादू ने जबरदस्ती खिला दिया. तो मैंने थोड़ा सा खा लिया. और सीधा पंहुचा अपने कमरे में. बढ़िया से बीएड पैर बैठा और उस डेरी को खोल कर पड़ने लगा. लेकिन मुझे उसमे लिखी बाटे समाज में hi नहीं आरही थी. कई श्लोक लिखे थे. और कुछ मैप्स बने हुए थे. जिनमे कुछ जगहों के बारे में जानकारी थी. जो भी लिखा था वो संस्कृत में लिखा गया था. जो मुझे इतने अच्छे से नहीं आती थी. फिर भी मैंने कोसिस की उसे समझने की. पड़ना तो आसान है लेकिन उसे समझने उतना hi मुश्किल. क्युकी एक तो संस्कृत और दूसरा बाटे पहेलियों में लिखी हुई थी.

काफी देर तक माथापच्ची करने के बाद केवल इतना समाज में आया की पंडित जी किसी खजाने के बारे में जिक्र कर रहे है. वो खजाने का राज इन मैप्स में छिपा हुआ है. लेकिन अब सवाल ये था की ये कोनसे खजाने के बारे में कह रहे थे. और इसकी जानकारी उस इंसान तक पहुंची कैसे जिसने उन्हें मरने के लिए लोग भेजे थे. ये दो सवाल फिलहाल मेरे दिमाग में घूम रहे थे. मैंने सोचा जरा इन मैप्स को देखता हु.

ये मैप्स अलग अलग रास्तो से होते हुए एक जगह hi जा रहे थे. लेकिन कोनसी जगह उस जगह का नाम इस डेरी में नहीं लिखा हुआ था. मैंने पेज पलट कर देखा तो अगले पेज पैर कुछ नहीं था. पेज बिलकुल कोरा रखा हुआ था. मतलब की मैप कम्पलीट नहीं था. इसका मैं पेज सायद उन्होंने नहीं बनाया था. तभी मेरी नजर गयी उन पेज के जड़ो पैर. जहा मुझे बिलकुल हलके से निसान मिले जैसे की बहा से कोई पेज फाड़ा गया है. और में समाज गया की मैप तो पूरा था लेकिन उसका पेज फाड़ा गया है. लेकिन किसने फाड़ा होगा. क्युकी उनके पास कुछ नहीं बचा था. तो सायद पंडित जी ने hi वो पेज फाड़ दिया हो. सायद इसलिए ताकि कोई गलत हाथो में ये न पड़े.

फिलहाल मुझे कुछ भी क्लियर नहीं हो रहा था. की ये किस खजाने की बात कर रहे थे और ये नक्शा कहा का है. और इसका पेज फटा हुआ क्यों है. और जिसने उन्हें मारा है उसको ये डेरी की जानकारी कैसे लगी. आखिर वो था कोण.

मुझे लगा अब ध्यान लगाना hi पड़ेगा. और देखना पड़ेगा की बाईट कुछ दिनों से क्या चल रहा था मंदिर में. और आखिर ये चक्कर है क्या. लेकिन उससे पहले सोचा इस no. बाले का पता लगाया जाये. इसलिए मैंने उसी वक़्त सीड को कॉल लगाया.

सीड- hello सर. आज मुझे कैसे याद किया सर.

मैं- hi सीड. कैसे हो.

सीड- बढ़िया हु सर.

मैं- यार एक no. है. उसकी साडी कुंडली चाहिए किसका है और उस वक़्त कहा है वो.

सीड- सर बैसे no. फ़र्ज़ी भी हो सकता है. किसी और के नाम पैर हो. उसके असली मालिक का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होगा.

मैं- तुम सिर्फ इतना बताओ की जानकरी निकल सकते हो या नहीं.

सीड- कर सकता हु. मुझे सुबह तक का टाइम दीजिये.

मैं- देख भाई सुबह तक इसका पता लगा. और है ऐसा भी हो सकता है वो no. बंद करदे इसलिए जल्दी से काम पैर लग जा. मैंने no. तुझे भेज दिया है.

सीड- ok सर. में देखता हु

मैं- ok bye.

सीड- bye सर.

मैंने कॉल कट किया और ध्यान में बैठ गया. और पंडित से शुरुआत की. वो कोण थे क्या थे सब कुछ यहाँ कैसे पहुंचे. क्युकी उनके पास्ट में hi सरे सवालो के जवाब छिपे हुए थे.



तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 37



मैं ध्यान में बैठ कर पंडित जी के बारे में पता लगाने की कोसिस कर रहा था. उनके चेहरे को याद करके मैंने अपनी तिरदये से उनके जीवनकाल की घटनाओ के बारे में जानकारी देने को कहा. और ये होते hi साडी घटनाये एक डैम से रिवर्स में चलने लगी. और फिर शुरुवात से सुरु हुई. सबसे पहले उनके घरवालों के बारे में. की वो एक खानदानी पंडित थे. जो सबके घरो में पूजा पथ करते थे. फिर इन पंडित जी का जन्म हुआ इन्हे भी साडी विधिया सिखाई इनके पिताजी ने. ये स्कूल गए सलग गए. और तब मुझे पता चला की ये अर्चिओलोग्य पद रहे थे. और में समाज गया की इन्हे पुरातन चीज़ो को ढूंढ़ना और सबके सामने लाना पसंद है. एक दिन इनके माप बाप की मृत्यु हो गयी. उस वक़्त ये महज 19 साल के थे. और तभी से ये अकेले hi रहते आये है. इन्होने सदी कभी नहीं ki.clg के बाद ये अलग जगह पैर जेक रीसर्च करने लगे बहा के बारे में जानने लगी. पुराणी किताबो को पड़ने लगे. इन्हे किसी ऐसे चीज़ की तलाश थी. जिसकी खोज में ये निकल sake.kisi खास चीज़ के बारे में. तब इन्हे कही से एक खजाने के बारे में पता चला. लिखा तो बहुत बड़ा चढ़ा कर था की ये खजाना बहुत बड़ा है बगेरा बगेरा. हलाकि इन्होने पूरी तरह से विस्वास नहीं किया और लग गए उसकी तलाश me.kafi रीसर्च की. और अपनी रीसर्च के मैं पॉइंट ये अपनी डेरी में लिखने लगे. इन्होने सर्कार से अपने काम के लिए कभी मदद नहीं मांगी. ये अकेले hi काम करते थे. इन्होने काफी साल बर्बाद किये इस खजाने को खोजने में. लेकिन इन्हे ऐसा कोई भी सुराग नहीं मिला जिससे इस खजाने तक पहुंचा जा सकता था. और थक हार कर इन्होने ये रीसर्च बंद कर दी. इसके करीब 2 साल बाद इनसे मिलने कुछ लोग आये. जिनमे खास आदमी भी था. जिसका नाम tha.sundar. उसने इनसे उसी खजाने के बारे में जानकारी लेने की कोसिस की. और जब वो खजाना मिला hi नहीं तो पंडित ने काफी जानकारी उसको दे दी. और सुन्दर ने पंडित जी को अपने साथ काम करने का ऑफर भी दिया. हलाकि पंडित जी ने मन कर दिया क्युकी कोई फायदा नहीं था उनका टाइम बर्बाद करने के पीछे. वो आलरेडी कितना hi टाइम बर्बाद कर चुके थे. लेकिन सुन्दर ने उन्हें कुछ अपने फैक्ट्स बताये. जिसे सुनने के बाद पंडित जी का दिमाग घूम गया. क्युकी इंफ्रास्टस पैर पंडित जी आलरेडी सर्च कर चुके थे लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली थी. और सुन्दर को मिल गयी थी. और यही जानने की लालसा में पंडित जी उसके साथ चले गए. और उन फैक्ट्स को लेके बही से अपनी रिसर्च फिर से सुरु की. ये लोग कई इयर्स तक जंगलो और पहाड़ो में भटकते रहे. इन्हे किस चीज़ की तलाश थी ये भी नहीं पता था. बस इक वर्ड के पीछे hi भटकते रहते थे. इनके सफर की शुरुआत हुई थी पचमढ़ी से. जहा से सतपुड़ा पर्वत सुरु होते है. और ये उन्ही पर्वतो और जंगलो की खाक छानने में लगे हुए थे. लोगो का दवा था की यहाँ किसी गुफा में साक्षात नाग वासुकि रहते है. इन जंगलो में रहने वाले आदिवासी लोग उनकी पूजा करते है. और ऐसी ये खबर भी फ़ैल गयी की इन्ही में से किसी गुफा में बहुत खजाना भी छिपा हुआ है जहा की रक्षा स्वयं नागराज वासुकि के वंसज करते है. यानि की सपा का समूह. जो इतने जेहरीले है की पल भर में इंसान की जान निकाल दे. और इसी खजाने की खोज ये लोग कर रहे थे. इनलोगो ने कई गुफाओ को देखा लेकिन इन्हे कुछ खास नहीं मिला. तब कुछ आदिवासी लोगो की बातो को सुनकर ये लोग उस गुफा में गए जहा ये लोग नागराज वासुकि की पूजा करते है. वो गुफा काफी गहरी थी. लेकिन बंद थी. लोग इस गुफा के बहार से hi पूजा करते थे. अंदर जाने के वेयर में तो कोई सोचता भी नहीं था. लेकिन सुन्दर ने अंदर जाने का विचार बना लिया था. और पंडित जी को भी अपने साथ शामिल कर लिया था. और भोलेनाथ का नाम लेते हुए ये लोग गुफा में घुस गए. अंदर जाना धीरे धीरे मुश्किल होता जा रहा था. क्युकी गुफा अंदर से बहुत साकिरी थी. काफी पैर लेट कर तो कही पैर बैठ कर आगे जाना पड़ता था. अभी थोड़े hi आगे गए थे ये लोग की गुफा का एन्ड आज्ञा. आगे जाने का बहा से कोई रास्ता नहीं था. बहा इन लोगो ने सभी चीज़ो की जाँच की. उस गुफा में छतो तरफ से पानी रिस्ता रहता था. चट्टानें गीली थी. और अँधेरे में कई जगहों पैर छोटे छोटे जिले भी थे. जिनके अंदर नागो के होने की संभावना भी थी. सुन्दर ने गुफा की अंतिम दीवार को थोक बजा कर देखा तो उसे ये आभास हुआ की ये दीवार के इस तरफ काफी जगह है और ये दीवार भी काफी पतली है. आराम से इसे तोडा जा सकता था. और यही सोच कर उसने अपने साथ लाये हुए आदमियों से इस दीवार को तोड़ने का आर्डर दिया. और वो लोग लग गए उस दीवार को तोड़ने में. और 3-4 घंटे की म्हणत के बाद इनलोगो ने उस दीवार में इतना बड़ा होल कर दिया जिससे एक आदमी उस तरफ जा सके. और सुन्दर तो था hi ुताब्ला. वो फ़ौरन hi टोर्च और गन लेके अंदर चला गया. बाकि सभी बहार hi रुके रहे. जिनमे पंडित जी भी शामिल थे. अभी थोड़ी hi देर हुई थे उसे अंदर गए. तभी एक जबरदस्त चीख सुनाई दी सभी को. जो की सुन्दर की hi थी. और वो मदद के लिए बुला रहा था अपने लोगो को. जिसे सुनके उसके आदमी फ़ौरन hi एक एक करके अंदर चले गए. और उसके बाद अंदर क्या हुआ नहीं पता बस इतना पता की अचानक से वो जगह हिलने लगी. जैसे भूकंप आज्ञा हो. और पंडित जी के सामने hi बहा पैर इतने पठार गिरे की जिससे वो रास्ता फिर से बंद हो गया. और बहा पैर पंडित जी अंदर फसे लोगो को आवाज लगाने की कोसिस की लेकिन किसी की आवाज उन्हें बापिस से सुनाई नहीं दी. और पंडित जी ने काफी कोसिस की उन पथरो को हटाकर अंदर जाने की लेकिन वो एक भी पत्थर को हिला भी नहीं सके. काफी देर तक जब कुछ नहीं हुआ तो पंडित जी थक हार कर बहा से बापिस होने लगे. तभी उनके सामने एक बहुत hi चमकदार रौशनी उत्पन्न हुई हो उस रौशनी ने उन्हें कुछ कहा भी. जिसे सुनने के बाद पंडित जी बहा से बापिस लौट गए और अपनी डेरी में इसी जगह का एक नक्शा बना लिया. लेकिन बाद में सोचा की लोग लालच में इस नक्से से बहा जायेंगे और मरे जायेंगे. इसलिए उन्होंने वो मैं पेज फाड़ कर जला दिया. और ये सब बाटे वो भूल गए. और फिर वो यहाँ देहरादून आगये और इस मंदिर में सेवा करने लगे. तब से वो यही रह रहे है.

अब रही बात की उस रौशनी ने उनसे क्या कहा था तो

रौशनी- रविकरण तुम भले इंसान हो इसीलिए जीवित हो अभी तक. लेकिन जो अंदर गए वो इंसान केवल लालची थे और कुछ नहीं. और जो भी इंसान लालच लेके यहाँ आएगा उसका अंजाम यही होगा. वो सरे लोग मर चुके है. और तुम्हे में जाने दूंगा यहाँ से. तुम जाओ और इस जगह के बारे में भूल जाओ. और दिल से भगवन शिव की सेवा करो. कभी न कभी तुम्हे इसका फल जरूर मिलेगा.

पंडित- परन्तु आप कोण है. और उस गुफा में ऐसा क्या है. अगर में ये जान सकता तो बड़ी कृपा होगी आपकी.

रौशनी- रविकरण ठीक है तुम भले इंसान हो इसलिए तुम्हे बता देता हु. उस गुफा कुछ ऐसा है जिसकी जानकारी अगर असुरो या बुरे लोगो को लग गयी तो इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. इस गुफा में जो कुछ भी है वो किसी खास इंसान का इन्तजार कर रहा है. और में यहाँ की रक्षा. इस जगह को ऐसे इंसानो से बचने का कार्य करता हु जो इस जगह लालच लेके आते है. और उनका विनाश करता हु.

पंडित- जी में समाज गया. आपका वास्तविक रूप क्या है भगवन. अगर आप मुझे इस काबिल समझे तो.

रौशनी- अवस्य

ये कहके इस रौशनी में से एक इतना विशाल नाग बहार निकला जो उस गुफा में भी न समाये. उनके हजारो मुख थे. और चौड़ाई थी की एक फोर्लिने रोड पूरा कवर हो जाये उनसे.

रौशनी- रविकरण में hi आस्तिक. नागराज वासुकि का भांजा.

ये दर्शन पते hi पंडित जी उन्हें दंडवत प्रणाम Kiya.or फिर बोले.

पंडित- आप नहीं है जिन्होंने राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय के यज्ञ से समस्त नागो की रक्षा की थी.

रौशनी- है में बही हु. महादेव के आदेश पैर मेरे मामाश्री वासुकि ने मुझे यहाँ भेजा था. इस जगह की रक्षा करने के लिए. और आज तक में इसी जगह पैर रहकर इस जगह की रक्षा करता आया हु. है कुछ वक़्त के लिए में गया था यज्ञ से नागो की रक्षा करने के लिए. तब मेरे पुत्रो ने यहाँ की रक्षा की थी. अब तुम जाओ रवि. और अपना दायित्व निभाओ. कभी कोई आएगा जिसे मिलकर तुम्हे अद्भुत एहसास होगा. बही है इस जगह पैर उपस्थित खजाने का मालिक. तुम्हे उसे ये जानकारी देनी होगी. किसी न किसी तरह. उसे एक इशारा hi काफी होगा.

पंडित- परन्तु में कहा जाऊ

रौशनी- जहा तुम्हारा मन करे बहा चले जाओ.

उसके बाद पंडित जी उन्हें प्रणाम करके बहा से चले गए. और उनके मां यही देहरादून के मंदिर में पुजारी थे तो बे यही आगये और यहाँ सेवा करने लगे. और फिर वो मुझसे मिले जिसने उन्हें अद्भुत एहसास हुआ और वो इतने दिनों से मेरे बारे में इसलिए hi पूछ रहे थे ताकि वो मुझे उस जगह के बारे में बता सके. लेकिन मेरे मिलने से पहले hi ये सब हो गया. और इसी लिए उनकी आत्मा ने मुझे संकेत दिए जब मैंने उनका हाथ पकड़ा था. जिससे में यहाँ तक पहुंच पाया और साडी जानकारी ले पाया.

इतना सब देखने के बाद मैंने ध्यान तोड़ दिया. और सोचने लगा की ये बही पर्वत तो नहीं जहा वो ाँस है. और गुरुदेव ने भी कहा था की ाँस खुद मुझे उन तक पहुंचने का मार्ग दिखाएंगे. और नाग आस्तिक उस जगह की रक्षा कर रहे है.

ये सब सोच एक दम सही दिशा में जा रही थी. मुझे पहले ाँस तक पहुंचने का रास्ता मिल चूका था. लेकिन. सवाल अब ये था की किसने पंडित जी को मारा था. क्युकी सुन्दर को hi इस सब की जानकारी थी. और वो मर चूका है. तो कोण हो सकता है.

कोण कोण?

तभी मुझे लगा सायद सुन्दर का कोई रिश्तेदार. जैसे बीटा बगेरा

तभी मेरी नजर मेरे मोबाइल पैर गयी. जहा सीड के बहुत मिस्स्कॉल पड़े हुए थे. क्युकी मुझे ध्यान में बैठे हुए करीब 2 घंटे से ज्यादा समय लग गया था. मैंने मोबाइल को ओपन किया और सीड को कॉल बैक किया. और थोड़ी hi देर में उसने कॉल उठा ली

मैं- सॉरी सीड वो ध्यान hi नहीं गया मोबाइल पैर

सीड- कोई बात नहीं सर. मैंने साडी जानकारी आपको मेल करदी है. आओ चेक करले. जो इस वक़्त ये no. चला रहा है उसकी साडी जानकारी मिल गयी है

मैं- थैंक्स सीड. तुमने काफी काम आसान कर दिया

सीड- ये तो मेरा काम था सर.

मैं- अच्छा अब सो जाओ. Bye गुड नाईट

सीड- गुड नाईट सर.

ये कहके मैंने कॉल कट कर दिया. और मोबाइल में अपना ईमेल चेक किया.

तो उसमे किसी लड़की का जिक्र था जिसका नाम मोनिका है. और वो दिल्ली में रहती है. उसकी फोटो भी थी.

मैंने उसकी फोटो को देखा और बापिस से ध्यान में बैठ गया. और उसकी जानकारी लेने लगा की इसका सुन्दर से क्या कनेक्शन है

.और में सही था. ये सुन्दर की बेटी hi है. और उसको ये जानकारी सुन्दर ने खुद दी थी जब वो पंडित जी के साथ सफर पैर निकला था. और उसके बाद उसे उन सभी की कोई जानकारी नहीं मिली. और उसने काफी सालो तक सबकी तलाश जारी राखी. और आखिर कार उसे पंडित जी की जानकारी मिली. और उसने सोचा की खजाने के लालच में पंडित ने उसके पिता को मार दिया है. और इसी बदले में उसने पंडित जी को मरने के लिए लोगो को भेजा. और उसे इसकी भी जानकारी थी की पंडित जी की डेरी में उस जगह की जानकारी है. जो बात सुन्दर ने hi उसे बताई थी. और ये एक तरह से बैकअप था सुन्दर का. लेकिन जंगलो में से वो अपनी बेटी को कांटेक्ट नहीं कर पाया और उसे नहीं बता पाया की वो एक्चुअली में कहा पैर है और क्या कर रहे है. इसीलिए मोनिका को कोई आईडिया नहीं था की उसके पिता कहा गए थे खजाने की खोज में. बस उसे सतपुड़ा का जंगल hi याद था. लेकिन ये कोई छोटी जगह तो है नहीं जहा ये जाये और उसे वो जगह मिल जाये. इसलिए इसे किसी पुख्ता सबूतों की जरुरत थी. जो इसे पंडित जी की डेरी से hi मिल सकते थे. जिसके लिए इसने आदमियों को भेजा और पहले तो पंडित जी को मरवाया जिससे इसका बदला पूरा हुआ और फिर वो डेरी ले ली. लेकिन बीच में मैं आज्ञा. जिसकी जानकारी इसे अभी तक नहीं लगी है. हलाकि ये no. उसने फेक दिया है. और ये no. भी किसी और के नाम पैर hi है. लेकिन सीड ने कमाल कर दिया. उसने िमे no. से मोबाइल का पता लगा लिया और मोनिका की जानकारी निकाल ली. अब कन्फर्म हो गया था सब. और ये भी की सुबह तक इसको जानकारी मिल जाएगी.

ये सब देखकर मुझे समाज में नहीं आया की अब में करू तो क्या करू. सतपुड़ा जाऊ या इस मोनिका को हैंडल करू. वैसे गुरुदेव ने कहा था की उसे जगह पैर मुझे बिना अपनी शक्तियों के पहुंचना है. मतलब म्हणत करके. जिसके लिए मुझे कोई तरकीब सोचनी होगी. क्युकी ऐसे मुझे बहा पैर कोई नहीं जाने देने वाला. उससे पहले इस मोनिका को देखते है. की ये क्या चाहती है.

इसलिए मैंने अपनी आँखों को बंद किया सीधा पंहुचा उस मोनिका के घर पैर उसके कमरे में जहा ये आराम से सो रही थी.

मैंने सोचा इसे मरने से कोई लाभ नहीं है. इसको सब भूलना होगा. यही सोचकर मैंने उसके सर पैर हाथ रखा और उसके दिमाग से ये सब यदि मिटा दी. और इनकी जगह ये भर दिया की इसके पिता की एक एक्सीडेंट में डेथ हो गयी थी. ये खजाना और पंडित और बाकि साडी बातो को इसके दिमाग से मैंने हमेशा के लिए निकाल दिया. और उसके बाद उसने जिस जिस को ये बाटे बताई है. उन सबके दिमाग में भी यही सब भर दिया. जिनकी गिनती 4 थी. एक तो इस मोनिका का बीटा जो फिलहाल 10 साल का था. और दूसर इसका पति. और तीसरा इनका एक खास आदमी जो ये सब काम देखता था. मोनिका के कहने पैर.

इन सभी के मंद को मैंने फिर से रिसेट कर दिया. अब ये जब सुबह उठेंगे तब इन्हे इस बारे में कोई जानकारी नहीं होगी. ये सब करके मैं बहा से बापिस अपने कमरे में आज्ञा. और अब रात भी बहुत हो चुकी थी इस लिए सो जाना hi बेहतर समझा. सोचा कल गुरुदेव से पूछूंगा की कैसे करना है.

सुबह टाइम से उठा और रेडी होक ध्यान में बैठ गया. और गुरुदेव का ाबहन किया.

मैं- प्रणाम गुरुदेव

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव उस जगह की जानकारी मिल चुकी है. परन्तु इसके लिए उन पंडित जी की जान hi चली गयी

गुरुदेव- वत्स उदास मत हो. उनका जीवन काल इतना hi था. और उनके जीवन का लक्ष्य भी यही था जो उन्होंने पूरा किया. अब आगे की सोचो की क्या करना है.

मैं- गुरुदेव आपने कहा था की मुझे बिना शक्तियों के बहा जाना होगा. परन्तु बहा तक में जाऊ कैसे. क्युकी ये सभी मुझे ऐसे अचानक बहा जाने नहीं देंगे. और मुझे कहा कहा शक्तियों का इस्तेमाल करना है ये भी मुझे ज्ञात नहीं है.

गुरुदेव- वत्स. तुम शुरुवात तो करो. सरे रस्ते अपने आप मिलते जायेंगे तुम्हे. तुम्हे कहा शक्तियों का इस्तेमाल करना है. कहा नहीं. ये साडी जानकारी तुम्हारी तीसरी आँख तुम्हे बताती रहेगी. तुम बस सच्चे मन से इस यात्रा को प्रारम्भ करो.

मैं- ठीक है गुरुदेव में ध्यान रखूँगा इस बात का. गुरुदेव- क्या असुरो को इसकी जानकारी मिल चुकी है.

गुरुदेव- है वत्स उन्हें इस बात की जानकारी मिल चुकी है की पहला ाँस जागृत हो गया है. लेकिन वो कहा है इस बात की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. लेकिन जल्द hi वो पता लगा लेंगे.

मैं- में समाज गया गुरुदेव. में उन्हें उस ाँस तक पहुंचने भी नहीं दूंगा और उन सबका बही अंत कर दूंगा

गुरुदेव- बहुत अच्छे वत्स. अब जाओ और अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करो मेरा आसीर्बाद है तुम्हे अपने हर कार्य में सफलता मिले.

मैं- धन्यबाद गुरुदेव. आपको हर आज्ञा का पालन करूँगा में.

और उसके बाद गुरुदेव चले गए. और ध्यान में बैठा रहा.

उसके बाद सलग के लिए रेडी हुआ. और नीचे pahucha.jaha दादू ने बताया की पंडित जी की बॉडी हमें शाम तक मिल जाएगी. और वो चाहते है की में उन्हें अग्नि प्रदान करू.

ये मेरे लिए बकै बहुत बड़ी बात थी. इसलिए मैंने उन्हें है कह दिया. और शाम को जल्दी आने का कहकर में निकल गया सलग…..

तो बे कॉन्टिनुए ………………...

 
अपडेट 38



में सलग चला गया रस्ते से मैंने चिराग को पिक किया और shan't hi बैठा रहा. जिससे चिराग को लगा की कुछ गड़बड़ है. लेकिन में केवल ये सोच रहा था की क्या किया जाये जिससे में उस गुफा में जा सकू वो भी सबकी नजरो से बच कर कुछ दिनों के लिए.

चिराग- क्या हुआ तुझे.

मैं- कुछ नहीं मन थोड़ा अपसेट है.

चिराग- ऐसा क्या होगया जिससे तू अपसेट हो गया

मैं- यार वो मंदिर के पंडित जो को किसी ने मार दिया कल.

ये सुनते hi चिराग सॉलिड चुका.

चिराग- व्हाट.

मैं- है. दरअशल दिल्ली जाने से पहले एक दिन में उनसे मिला था. और उस दिन से उनसे एक अलग सा अटैचमेंट सा हो गया था. मैंने दिल्ली जाने से पहले दादू और माँ को उन्हें रोज खाना पहुंचने का भी बोलै था और वो दोनों टाइम का खाना उन्हें पंहुचा देते थे. और कल में सलग के बाद उनसे मिलने गया उनका हाल जानने. लेकिन देर हो गयी थी. मंदिर में मुझे उनकी लाश मिली. वो भी खून से लथपथ.

चिराग- माय गॉड यार. फिर क्या हुआ कुछ पता चला किसने किया था

मैं- पता नहीं पुलिस को बहा पैर कोई सुराग नहीं मिला. और मुझे नहीं लगता की उन्हें कुछ मिलेगा भी सायद.

चिराग- सायद मिल जाये क्या पता.

मैं- ऐसा हो जाये तो अच्छी बात है. बैसे आज उनकी बॉडी हमें मिल जाएगी. तो शाम को में उनका अंतिम संस्कार कर दूंगा.

चिराग- में भी आऊंगा साथ में.

मैं- चलना लेकिन बक बक बंद रखना.

चिराग- ok.

उसके बाद हम सलग पहुंचे अस उसुअल सबसे मिले थोड़ी बहुत गप्पे मरी. और चिराग ने उन्हें बता दिया की कल क्या हुआ था. जिस पैर प्राची ने बताया की उसे पता चला था उसके डैड से.

प्राची- ये सब क्या हो रहा है कुछ समाज में नहीं आरहा है. मन करता है यहाँ से कही चली जाऊ कुछ दिनों के लिए

लकी- जाएगी भी तो कहा. इतनी अच्छी जगह छोड़ कर. बैसे अगर जाना है तो क्यों न हम कही की ट्रिप प्लान करे. कुछ दिन बढ़िया घूमेंगे मजे करेंगे. क्या कहते हो.

ये सुनके मुझे एक आईडिया आया. और मैंने सोचा ये एक अच्छा तरीका है बहा जाने का. इसलिए में सब को bye बोलके फ़ौरन गया प्रिंसिपल के ऑफिस में. वो तीनो चिल्लाते रहे लेकिन में नहीं रुका. थोड़ी hi देर में जब में बहा पहुंच गया तो मैंने नॉक किया.

प्रिन्सी- यस के.

मैं- गुड मॉर्निंग सर.

प्रिन्सी- अरे देव आओ आओ. आज कहा की लीव एप्लीकेशन देनी है.

मैं- कही की नहीं सर. एक्चुअली एक काम था अगर पॉसिबल हो सके तो.

प्रिन्सी- कैसा काम बताओ. उसे पॉसिबल करके दिखाएंगे

मैं- सर क्या कुछ स्टूडेंट के लिए सलग कोई ट्रिप बगेरा प्लान करता है क्या. जिसमे कुछ दिन इन सब से दूर बढ़िया नेचर के करीब रहा जाये.

प्रिन्सी- बैसे ऐसा हमने कभी नहीं किया है. लेकिन कर जरूर सकते है. लेकिन एक प्रॉब्लम ये है की. अभी तो सलग स्टार्ट हुए है. और अभी hi ट्रिप प्लान करना सही नहीं है. है लेकिन फाइनल एग्जाम के 2-3 महीने पहले कर सकते है ताकि सांक मूड फ्रेश हो जाये. जिसमे अभी आलरेडी 5 महीने है.

मैं- ओह्ह ी सी. चलो कोई बात नहीं देखते है बाद में.

प्रिन्सी- बैसे ये सब क्यों पूछ रहे थे तुम.

मैं- बस ऐसे hi. वो क्या है कई सलग बचो को कही न कही टूर पैर लेके जाते है घूमने नै जगह को एक्स्प्लोर करने के लिए. बस इसी लिए पूछ रहा था की क्या हमारा सलग भी ले जाता है कही पैर.

प्रिन्सी- तुमने सही कहा है. कई सलग ऐसा करते है. लेकिन जो भी करते है वो सिटी वाले सलग करते है. लिखे मुंबई और दिल्ली जैसे बड़ी सिटी के सलग. क्युकी बहा चारो तरफ केवल और केवल बिल्डिंग hi होती है. लेकिन हमारे यहाँ तो चारो तरफ पेड़ पौधे पहाड़ और ढांड के मौसम में बर्फ भी है. सब कुछ है यहाँ तो फिर यहाँ से कहा जाओगे.

मैं- आपकी बात में पॉइंट है सर. में तो बस ऐसे hi जिज्ञासा के कारण पूछने आज्ञा था. अच्छा अब में चलता हु क्लास का टाइम हो रहा है. वर्ण फिर वो सर मुझे बहार hi खड़ा कर देंगे.

गुड डे सर.

. प्रिन्सी- शामे हेरे बीटा

में बहा से सीधा क्लास में चला gya.or ये अच्छा हुआ की सर नहीं आये थे. और में अंदर जेक बैठ गया

चिराग- कहा गया था

मैं- प्रिन्सी से मिलने

चिराग- क्यों.

मैं- वो मैंने सोचा क्यों न किसी सलग ट्रिप पैर जाया जाये.

चिराग- इतस अमेज़िंग. क्या हुआ कहा जाना है

मैं- कही नहीं. सर ने कहा है की अभी सलग खुले केवल 1 महीना भी नहीं हुआ है. और सलग ट्रिप पैर जाना है. उन्होंने कहा की फाइनल एग्जाम के पहले जरूर ले जा सकते है. जो मुह्हे भी सही लगा इसलिए मैंने फिर कुछ नहीं कहा के बापिस आज्ञा

चिराग- क्या यार सारा मूड ऑफ कर दिया.

मैं- चल छोड़ बाद में देखते है.

उसके बाद कुछ भी खास नहीं हुआ. शाम को कम. अंकल ने पंडित जी की बॉडी हमें दे दी. और दादू ने एक दूसरे पंडित जी को बुलवा कर उनके अंतिम संस्कार की विधि को पूरा करने को कहा. चिराग भी साथ में hi था. और चुप था. पंडित जी के कहने पैर मैंने उनकी चिटा को अग्नि दी. और फिर बही खड़ा रहा. और सोचने लगा पंडित जी के बारे me.kafi देर में हम नहीं खड़े रहे. जब अग्नि कुछ shan't हुए तो पंडित जी ने कहा की कल सुबह आकर इनकी अस्थिया ले जाना और गंगा में प्रबहित करने के जाना कशी विश्वनाथ.

हमने उनकी बात मान ली. और हम घर आगये. हमने बहार लोन में hi नहाया कपडे पहन कर hi. मैंने चिराग और दादू तीनो ने. उसके बाद माँ ने हमें टॉवल दिए और हमने उन कपड़ो को नहीं छोड़ा और दूसरे कपडे पहन लिया. तभी मुझे एक आईडिया आया की पंडित जी की अस्थिया में जाता हु. और बहा से में पंचमढ़ी चला जाऊंगा. 2-3 दिन का प्रोग्राम रहेगा. दादू को कह दूंगा की थोड़ा घूम रहा था. मतलब उन्हें थोड़ा झूट बोलना पड़ेगा. क्या ये सही रहेगा. नहीं झूट बोलकर किसी अच्छे काम को करने जाना बिलकुल भी सही नहीं hai.fir मैंने सोचा की देखते है क्या होता है.

हम अंदर आये और सोफे पैर बैठ गए.

मैं- दादू में जाऊंगा कल उनकी अस्थिया लेके. कशी.

दादू- तुम क्यों परेशान हो रहे हो में जाऊंगा और साडी विधि विधान से उनकी अस्थिया का विसर्जन कर दूंगा.

मैं- क्या दादू आप आराम करिये. बैसे भी आपकी गैरमौजूदगी में ऑफिस कोण संभालेगा. में जाऊंगा और कर आऊंगा सब काम. आप बिलकुल भी टेंशन न लो.

काफी बहस के बाद दादू मान गए. लेकिन एक नै मुसीबत भी आगयी.

. चिराग- में भी चलूँगा तेरे साथ. एक से भले दो. क्या कहती हो दादू

दादू- बिलकुल ठीक कहा बीटा. बल्कि में भी यही सोच रहा था. तुम्हे जाना चाहिए

चिराग- नहीं तो साथ में थोड़ा घूमना भी हो जायेगा और काम भी बन जायेगा और इसे अकेला भी महसूस नहीं होगा.

मैं- उसकी कोई जरुरत नहीं है. तू यही रहेगा.

चिराग- ऐसे कैसे. दादू का हुक्म चलता है यहाँ. और उन्होंने मुझे इजाजत दी है जाने की. और अब मुझे कोई नहीं रोक सकता.

मैं- अच्छा जरा आंटी को कॉल करके तो पूछ लो.

ये नाम सुनते hi उसकी हवा निकल गयी.

दादू- कोई बात नहीं चिराग में उनसे परमिशन ले लूंगा. अब ये बताओ की जाना कैसे है.

मैं- ी थिंक की कार से जाना hi बेटर रहेगा. क्युकी फ्लाइट बगेरा है नहीं. और ट्रैन में बहुत टाइम लगता है. करीब 20-25 घंटे. इसलिए कार से जायेंगे 7-8 घंटो में पहुंच जायेंगे.

चिराग- है ये बढ़िया रहेगा. ऐसा hi करते है.

दादू- ठीक है तो फिर. कार से चले जाना परसो के din.subah.

मैं- ok. No प्रॉब्लम.

उसके बाद अगले दिन बही शाम तक पंडित जी की अस्थिया एक कलश में रख दी दूसरे पंडित जी ने. और फिर नेक्स्ट डे हमें निकलना था. मैंने उन दोनों को भी बता दिया. तो वो भी चलने की जिद करने लगे खासकर प्राची. लेकिन में बहा पिकनिक पैर थोड़ी न जा रहा था. इसलिए उसे मैंने मन लिया किसी तरह. उसने बापिस आने का टाइम पूछा तो मैंने उसे 4-5 दिन का बोल दिया. क्युकी पूजा में टाइम लगता है. और ये सुनकर तो उसने पक्का मन बना लिया की उसे चलना है. और में फिर उसे मन hi नहीं पाया. और जब उसे है कहा तो लकी भी रेडी हो गया. इसलिए मैंने सोचा की अब इनको ले जाना hi पड़ेगा. इसलिए मैंने चारो को है कह दी. और वो सभी कुश हो गए. उन्होंने अपने घरो में पूछा तो उन्होंने भी कह दिया जाओ चले जाओ. जिससे मेरी उम्मीद और काम हो गयी. अब मेरे सर पैर एक और टेंशन थी की इनको लेके अगर पचमढ़ी जाऊंगा तो फिर में बहा पैर उस ाँस की तलाश में कैसे जा पाउँगा. अब कोई रास्ता भी नहीं था. तो सोचा देखेंगे जो होगा. अभी फ़िलहाल यहाँ से निकले तो. इसलिए अगले दिन सुबह 6 बजे मैंने निकलने का तय किया. और सभी उस टाइम तक रेडी भी हो गए. और मेरे घर पैर आगये. और माँ ने रस्ते के लिए थोड़ा नास्ता बगेरा भी रख दिया. और हम चारो मेरी hi कार में बैठ कर निकल gye.via बरेली. नॉट दिल्ली. क्युकी यहाँ से सीधा 300 कम का रास्ता बच जाता है और मुझे जल्दी पहुंचना था. इसलिए कार को में हवा में उदा रहा था. कार लगभग 150-200 की स्पीड से चल रही थी. और इस हिसाब से 3-4 घंटो में हम बहा पहुंच सकते थे. में कार को इसी स्पीड पैर बरक़रार रख कर ड्राइव कर रहा था. रस्ते में वो तीनो बढ़िया म्यूजिक सुनकर और बातो से टाइम पास कर रहे थे. और में चुपचाप hi था. मुझे आगे के लिए सोचना था की क्या किया जाये. रोड एक no. था. इसलिए हमें कोई प्रॉब्लम नहीं हुई और हम लगभग 4:30 घंटो में वाराणसी पहुंच गए. हमने एक होटल में चेक इन किया. थोड़ा फ्रेश हुए उसके बाद शाम तक आराम किया. और फिर निकले हम घाट और मंदिर में दर्शन करने. दर्शन करने के बाद हम पहुंचे घात पैर. बहा एक पंडित जी से बात की तो उन्होंने कल सुबह बुला लिया मुझे. और मुझे भी ये ठीक लगा. इसलिए अगले दिन सुबह में बहा पहुंच gya.kalash लेके. पंडित जी ने पूजा करवाई. मैंने अस्थियो का विसर्जन किया. और उसके बाद शांति पूजन करवाया. और इसी में शाम हो गयी. लेकिन आखिर कार पूजा संपन्न हुई. मैंने पंडित जो को अच्छी खासी दक्षिणा दी. और गंगा जी में स्नान किया और होटल बापिस आज्ञा. अब मैंने सोचा की क्यों न आज रात में hi पचमढ़ी के लिए निकला जाये. सुबह तक बहा पहुंच जायेंगे. क्युकी बहा भी लगभग 8-9 घंटे लगने वाले थे. मुझे लगा ये सही रहेगा ये लोग दिन में आराम करेंगे और में निकल जाऊंगा जंगल में. इसलिए मैंने सभी को चलने के लिए मन किया. और वो भी एक्सीटेंड थे. इसलिए हमने रात को 9 बजे चेकआउट किया और निकल gye.pachmadi की तरफ. कार का नेविगेशन ों था इसलिए रोड तक पहुंचने में हमें कोई दिक्कत नहीं हुई. और हाईवे टच करते hi मैंने कार को भगा दिया स्पीड में. करीब 11-12 बजे तक सभी जागते रहे. और उसके बाद सभी सो गए. और जैसे hi वो सभी सोये. मैंने कार को और तेज़ कर दिया. बिलकुल ःइस्पीड पैर. रात का वक़्त था रोड खली hi थे. इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई. और अस ी एक्सपेक्टेड हम लोग रात में करीब 2 बजे तक पहुंच गए पचमढ़ी. मैंने एक होटल के पास hi कार को रोका. बहा पैर रूम्स के बारे में पूछा तो अवेलेबल थे. इसलिए मैंने सभी को जगाया और हम होटल में अपने अपने रूम में चले गए. और सीधा जेक सो गया.

करीब 2 घंटे बाद मेरी नींद खुली और में फ्रेश हुआ नहाया और रेडी होक होटल से बहार निकल गया. अभी चारो तरफ अँधेरा लगा हुआ था और बहुत hi ठंडी हवाएं चल रही थी. लेकिन मुझे ज्यादा फर्क नहीं पद रहा था इसलिए में निकल गए जंगल में. मुझे वो रास्ता याद था की कैसे और किस तरफ जाना है. इसलिए में सीधा उसी तरफ निकल पड़ा. रस्ते में पहाड़ और झाडिया काफी थी. और ये पूरा जंगल टाइगर रिजर्व था. मतलब जानवर हो सकते थे जंगल में कही भी. इसलिए संभल कर आगे बढ़ रहा था. करीब 3 घंटे लगातार चलने के बाद में उस गुफा तक पहुँच hi गया. बहा मैंने दर्शन किये. बहा पैर मिटटी की अपने आप बानी हुई काफी शिवलिंग राखी हुई थी. और आसपास नागो की मुर्तिया. ऐसा यहाँ के लोगो का मानना था की श्रावण के महीने में यहाँ साक्षात् नागराज वासुकि आते है. और लोगो को दर्शन देते है. खैर बहा दर्शन करने के बाद में आगे बड़ा गुफा के अंदर. और घोर अँधेरा छ गया था बहा पैर. खैर बहार सूरज निकलने लगा था और अंदर अंधेरा छटा जा रहा था. और बहा पैर काफी चमगादड़ भी थे. जो मोबाइल की टोर्च में यहाँ बहा फाड् गदा रहे थे. और मुझे मेरी आँखे से साफ़ दिख रहा था की इस गुफा में लगभग हर कोने में कितने नाग रह रहे है. और इतना मुझे पता था की सभी काफी जेहरीले है. खैर में महादेव का नाम लेते हुए आगे बाद गया. कभी बैठ कर तो कभी लेट कर. आगे बढ़ता हुआ जा रहा था. और आखिर कार वो आखिरी दीवार सामने ाही गयी. और में उसके सामने खड़ा हो गया. और सोचने लगा की इसके अंदर कैसे जाया जाये. तभी मुझे एक जोरदार आवाज सुनाई दी.



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
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