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मैं- कोण है.
तभी मेरे सामने ठीक बैसि hi रौशनी आई जैसी पंडित जी के सामने आई थी. और में समाज गया की ये कोण है.
मैं- प्रणाम नागराज वासुकि के भांजे आस्तिक
रौशनी- ओह्ह्ह तो तुमने मुझे पहचान लिया.
मैं- आपको मैंने देखा tha.pandit जी की यादो में.
रौशनी- जैसा सुना था बिलकुल वैसे hi हो. में तुम्हारा hi इन्तजार कर रहा था.
मैं- ये मेरा सौभाग्य है नागदेव
रौशनी- लेकिन क्या तुम अंदर जाने को तत्पर हो वत्स
मैं- बिलकुल नागदेव. आप बताये मुझे क्या करना है
रौशनी- वत्स. अंदर क्या होगा कैसे होगा ये तो में भी नहीं जनता हु. ये तुम्हे खुद hi पता करना होगा. और मुझे उम्मीद है की अंदर जो भी होगा तुम उसे प्राप्त कर लोगे. और उसके लिए तुम्हे केवल अपने धैर्य का इस्तेमाल करना है. जल्दबाज़ी में कोई गलती मत करना.
मैं- में पूरी कोसिस करूँगा की आपके द्वारा कहे बचानी को निभा सकू. कृपया मुझे मार्ग प्रदान करे
रौशनी- अवस्य वत्स.
.ये कहके उन्होंने अपनी थोड़ी रौशनी- उस दीवार पैर मरी और बहा पैर एक बड़ा सा रास्ता खुल गया
रौशनी- अब अंदर जाओ वत्स. महादेव तुम्हे सफल करे.
.मैंने उन्हें प्रणाम किया और उस रस्ते से अंदर चला गया. और मेरे अंदर जाते hi वो रास्ता बंद हो गया. में एक कमरे में था इस वक़्त. चारो तरफ अँधेरा चाय हुआ था. लेकिन मेरी आँखे मुझे सब साफ़ साफ़ दिखा रही थी. उस कमरे में एक पत्थर का बड़ा दरवाजा सा लगा हुआ था. बाकि उस कमरे में कुछ भी नहीं था. इसलिए में आगे बड़ा उस दरवाजे की तरफ. लेकिन तभी अचानक से मेरे पेअर जमीन में hi जैम गए में बिलकुल भी नहीं हिल प् रहा था. न hi आगे बाद प् रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत hi मजबूती से मेरे पैरों को पकड़ रखा हो. मेरे पेअर के पंजे पूरी तरह से सुन्न पद गए थे. और सुन्नता धीरे धीरे मेरे पैरो से ऊपर बाद रही थी. मतलब की पंजो से घुटनो तक बाद चुकी थी. मैंने सोचा जरूर ये कोई मायाजाल है. इसलिए मैंने हिलना बंद किया और अपनी आँखों को बंद किया अपने हाथ जोड़े. और अपने तीसरे नेत्र का आवाहन किया. जैसे hi तीसरा नेत्र खुला बैसे hi मेरे पेअर जो पूरी तरह से सुन्न पद गए थे वो फ्री हो गए. और अब में चल सकता था. मैंने बैसि hi आँखे बंद और हाथ जोड़े हुए आगे बाद गया. उस पत्थर के दरवाजे की तरफ. उसके बाद उस कमरे में कोई भी मुसीबत नहीं आई. अब इस दरवाजे को खुलना जरुरी था. इसलिए मैंने अपना एक हाथ उस पत्थर पैर रखा. लेकिन वो नहीं हटा. ये देखकर में अचंभित था. मैंने फिर से प्रयास किया लेकिन फिर से इस पत्थर को कुछ नहीं हुआ. तब मैंने सोचा इसे अपने बल से हटाना पड़ेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और ऐसा करते hi फिर से मेरे पेअर सुन्न पड़ने लगे. मतलब साफ़ था की जब तक सटी चक्र जागृत रहेंगे मुझे कुछ नहीं होगा. और जैसे hi नार्मल रहूँगा तब ये माया मुझे जकड़ने लगेगी. और बिना निर्मल हुए में इस पत्थर को खोल नहीं सकता था. इसलिए मैंने जल्दी से इस पत्थर को हटाने की कोसिस की.
मैंने अपने दोनों हाथो को पत्थर पैर रखा और उसे दूसरी तरफ धकेलने लगा. काफी ताकत लगनी पद रही थी मुझे और इसका असर भी हो रहा था वो पत्थर हिल रहा था. अभी तक मेरी कमर सुन्न हो चुकी थी. और पत्थर थोड़ा सा hi हिला था. मैंने एक और कोसिस की और अबकी बार अपने हाथो का पूरा जोर लगाया और साथ में हर हर महादेव का नैरा भी लगाया. और उसका असर भी हुआ. और वो पत्थर दूसरी तरफ पूरा लुढ़क गया. और उसके लुड़कते hi मेरा शरीर फिर से नार्मल हो गया. आगे एक लुम्बी ढलान थी जो नीचे की तरफ जा रही थी. और बहुत hi सकती थी. लिखे वो पत्थर के साइज की. मैं- जल्दी से उस ढलान में बैठ गया अपने पैरो को नीचे की तरफ किया और अपनी बॉडी को आगे की तरफ पुश किया और इसका नतीजा ये हुआ की में नीचे की और सरक गया. मेरा बैलेंस धीरे धीरे खोता जा रहा था. मेरी बॉडी अब मेरे कण्ट्रोल में नहीं थी. वो अब उस ढलान में जैसी चाहे बैसि खिसक रही थी. कभी मेरा सर ऊपर होता तो कभी नीचे. और में बहुत hi तेज़ स्पीड से नीचे की तरफ खिसकता हुआ जा रहा था. लेकिन हैरानगी की बात ये थी की इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. ऐसा लग रहा था जैसे में पाताललोक में घुसता जा रहा हु. करीब 20 मं. तक में उस टनल में नीचे की तरफ खिसकता रहा. मेरा पूरा सिस्टम एक डैम से डाउन हो गया था. ऐसा लग रहा था जैसे मेरी किडनी ऊपर और मेरा हार्ट नीचे पहुंच गया हो. कुछ समाज में नहीं आरहा था की ये क्या है. मेरा दिमाग भी प्रोसेस नहीं कर प् रहा था की में क्या करू क्युकी इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. तब मेरा थोड़ा सा दिमाग चला और मैंने सरकते हुए अपने हाथो को जोड़ा और अपनी आँखों को बंद कर लिया. ऐसा करते hi मेरी तीसरी आँख खुल गयी. और ऐसा होता hi में उस टनल से बहार निकल गया. इतनी जोर की स्पीड से की पता नहीं में कितना आगे जेक गिर इस टनल के दरवाजे se.or सीधा एक पेड़ के मोठे रहने से चिपक गया. और धीरे धीरे खिसक कर नीचे जमीन पैर आज्ञा. और सीधा लेट गया. और अपनी ससो को सँभालने laga.meri आँखे अभी बंद hi थी. और मेरी ससे बहुत तेज़ चल रही थी. करीब 5 मं. लगे मुझे नार्मल होने में. और जैसे hi नार्मल हुआ मैंने अपनी आँखों को खोला. तो मेरे ऊपर एक विशाल लम्बा पेड़ खड़ा हुआ था. जिसे देखकर ऐसा लगा की वो सीधा मेरे ऊपर hi गिरने वाला है. इस लिए में जल्दी से उल्टा हो गया और खड़ा होने लगा. जैसे hi खड़ा हुआ मेरे बैलेंस बिगड़ा और में फिर से नीचे गिर गया. तो मैंने फिर अपने आप को थोड़ा काबू में करने के लिए बही पैर पालथी मार ली और अपने हाथो को जोड़ कर अपनी आखो को बंद किया और मन में ॐ नमः सिवाय का जाप करने लगा. और ऐसा करते hi मेरे अंदर एक अलग सी िस्फुर्ति आगयी. केवल कुछ hi सेक्. में. मैंने 2 मं. तक कागतार जाप किया और फिर अपनी आँखों को खोला और खड़ा हो गया. मुझे अब अच्छा फील हो रहा था. इसलिए मैंने चारो तरफ देखा तो मैंने खुद को एक जंगल में पाया. चारो तरफ बहुत hi ऊँचे ऊँचे पेड़ थे. सामने पेड़ो के आल्वा कुछ नहीं दिख रहा था. अब मुझे यहाँ से कहा जाना है ये भी कन्फर्म नहीं हो रहा था. तो सोचा क्यों न इन पेड़ो के ऊपर से देखा जाये. इसलिए मैं बही पैर मौजूद एक पेड़ पैर चढ़ने लगा. उसकी सखते बहुत बड़ी थी और चढ़ने में सहायक भी. धीरे धीरे चढ़ कर में ऊपर जाने लगा. एक टहनी से दूसरी टहनी. और थोड़ी देर की म्हणत के बाद में आखिर कार उप पेड़ के बिलकुल ऊपरी कोने पैर पहुंच गया. मुझे अब आसमान साफ़ साफ़ दिखने लगा था. इसलिए मैंने चारो तरफ ध्यान से देखा की मुझे आखिर जाना किस तरफ है. तभी एक दिशा में मुझे एक पहाड़ नजर आया. जिसकी बनावट बिलकुल वैसी hi थी जैसी मैंने अपने सपने में देखि थी. और उसे देखकर hi में समाज गया की मुझे इसी के पास जाना है. लेकिन अब सवाल ये था की ये दिशा है कोण सी. और नीचे उतारते hi कही में भटक न जाऊ. ये भी दर था मुझे. और मुझे इसका कोई हल ढूंढ़ना था. मैंने सोचा उड़द कर चला जाऊ तो. लेकिन फिर गुरूजी की बात याद आगयी. की जहा जरुरत होगी शक्तिया खुद संकेत करेंगी जैसे अभी तक करती आई है. लेकिन अभी मेरी शक्तिया मुझे नहीं कह रही यही उनका उपयोग करने के लिए. इसलिए मुझे पैदल hi बहा पैर जाना होगा ये तय था. मैंने अपना मोबाइल निकला और उसमे मैंने देखा की सिग्नल मिल रहे है. मतलब की ये जगह बकै में है. लेकिन फ़िलहाल मयाबी हो सकती है. मैंने अपने मोबाइल में कंपास निकला और उस पहाड़ की दिशा को देखा तो वो मोबाइल में नार्थ बता रहा था. यानि की ये पहाड़ उत्तर दिशा में है. मैंने मोबाइल को चारो तरफ घुमा कर देखा तो कंपास सही से काम कर रहा था. बाकि दिशा भी सही बता रहा था. मतलब ये काम कर रहा है. तो मैंने सोचा की अब मोबाइल का hi सहर लेना पड़ेगा. इसलिए में उस पेड़ से नीचे उतरने लगा. संभल संभल कर में नीचे आज्ञा. मैंने मोबाइल को ों किया और कंपास में नार्थ डायरेक्शन को देखा और उस तरफ आगे बाद गया.
रास्ता काफी भयानक लग रहा था. दिन का समय था लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे रात के 12 बज रहे हो. चारो तरफ से कही भी सूरज की रौशनी नीच नहीं आप रही थी. खैर में आगे बढ़ता हुआ जा रहा था. और मोबाइल में देख रहा था की किस तरफ जाना है. अभी थोड़े hi कदम आगे बड़ा की मुझे मेरे जस्ट पीछे किसी के होने का एहसास हुआ. लिखे अंदर से पूरा हिल गया में. में बही पैर रुक गया. और गौर से सुनने लगा की क्या है मेरे पीछे. आवाज धीरे धीरे तेज़ हो रही थी में समाज गया की सायद कोई जानवर हो सकता है. या फिर कुछ और. इसलिए मैं पीछे मुदा. लेकिन मेरे पीछे कोई नहीं था. सायद झाड़ियों और पेड़ो के पीछे छिपा हुआ हो सकता है. मैंने सोचा अब थोड़ी जॉगिंग कर ली जाये. इसलिए में बापिस से उसी दिशा में मुदा और भागने लगा. और मैंने ध्यान से सुना तो वो आवाज अभी भी आरही थी. मतलब बो भी भाग रहा है मेरे पीछे. मैंने अपनी रफ़्तार बड़ाई और लिखे सुपरफास्ट स्पीड में भागने लगा. हलाकि जंगल था और टेड़ा मेदा रास्ता इसलिए थोड़ी hi देर में स्पीड काम होने लगी. क्युकी कभी कूदना था तो कभी jhukna.or कभी मुड़ना. इसीलिए ज्यादा तेज़ नहीं भाग का रहा था. नीचे भी देखना था की कही ठोकर न लग जाये. मैंने भागते हुए hi पीछे मुद कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा लेकिन नीचे के सूखे पत्ते हिल रहे थे. और उड़द रहे थे. झाडिया अपने आप हिल रही थी जैसे कोई उनसे सात कर गुजरा हो. ये सीन देखकर में समाज गया की मामला थोड़ा सीरियस है. क्युकी जी भी मेरे पीछे है वो अदृश्य है. इसलिए मैंने अपनी स्पीड बड़ाई और थोड़ा टेड़ा मेदा होकर भागने लगा ताकि इसकी नजरो से थोड़ा दूर हो सकू. और ये आईडिया काम कर गया. में एक बड़े पेड़ की पीछे छिप गया और सामने देखने लगा तो मुझे वो पैरो के दौड़ने की आवाज आरही थी. मतलब बो अभी भी मेरे पीछे है. मैंने आसपास देखा और ढूंढा की सायद कोई डंडा बगेरा मिल जाये. तो मुझे एक पेड़ की टहनी दिखी जो पतली थी. और लचीली भी. मैंने उसे पकड़ा और अपोजिट डायरेक्शन में उसे खींच लिया. इतना hi जोर लगाया की वो टूटे na.or बैसे hi पकड़ कर खड़ा हो गया. धीरे धीरे वो आवाज मेरे करीब आरही थी. ये टहनी किसी 4 फुट तक के इंसान को लग सकती थी. और जो मेरे पीछे भाग रहा था वो काम से काम 4 फट. का हो यही आशा कर रहा था मैं. और जैसे hi वो मेरे सीमा के बहार पंहुचा मैंने उस टहनी को छोड़ दिया. और वो टहनी स्पीड में छूट कर सीधे उस अदृश्य जीव को जेक लगी. और जैसे hi लगी उसकी एक चीख निकल गयी. जिसे सुनकर में समाज गया की ये कोई इंसान है. लेकिन अब समाज नहीं आरहा था की वो किस दिशा में गिरा होगा. क्युकी इन सब में मैंने ध्यान नहीं दिया की किस तरफ से उसके गिरने की आवाज आई है. इसलिए मैंने अपनी आखो को बंद किया और अपनी तिरदये को ओपन किया और उसको देखने लगा की वो कहा है. थोड़ा इधर उधर देखने के बाद मुझे एक अजीब सा जीव दिखा जो लागबहग 4 फट. का hi होगा. उसके बड़े बड़े कान थे. देखने से कोई एल्फ की तरफ दिख रहा था. एक छोटा सा जीब. अब ये इस जंगल में क्या कर रहा है ये तो यही बता सकता है. इसलिए में उसके पास गया. और उसने मुह्हे देख लिया और वो छिपने लगा एक पेड़ के पीछे.
मैं- में तुम्हे देख सकता हु. छिपने की जरुरत नहीं है.
ये सुनकर वो थोड़ा हैरान हुआ और उसने अपना सर खुजाया और कुछ सोचा और फिर बोलै.
एल्फ- ये संभव नहीं है तुम क्या मुझे कोई भी नहीं देख सकता. तुम झूट बोल रहे हो.
मैं- में झूट नहीं बोल रहा. रुको में तुम्हे कुछ बताता हु. तुमने एक कपडा करता हुआ है. तुमने पैरो में कुछ नहीं पहना है. तुम्हारे कान थोड़े लम्बे है नाक थोड़ी नुकीली है. और तुम मेरी कमर तक hi लम्बे हो.
ये सब सुनते hi वो पूरी तरह हैरान हो गया. और वो तुरंत hi मेरे सामने झुक गया.
मैं- ये क्या कर रहे हो तुम.
एल्फ- मुझे एक शाप मिला था बहुत पहले तब से में गायब hi इस जंगल में भटक रहा हु. जिसने मुझे शाप दिया था उन्होंने ये कहा था की तुम्हे कोई नहीं देख पायेगा kabhi.me खुद भी नहीं. लेकिन कोई एक इंसान होगा जो तुम्हे देख पायेगा. वो जैसे hi मुझे छुएगा मेरा शाप बही समाप्त हो जायेगा. क्या आप मुझे छुएंगे.
ये सब सुनकर मुझे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन सोचा एक बार छूने में क्या हर्ज़ है. इसलिए मैं उसके पास गया और अपना हाथ आगे बढ़ाया उसे छूने के लिए. वो भी आगे आया और जैसे hi मेरा हाथ उसके सर से झुका अचानक से कुछ हुआ लिखे कोई शक्ति उसके सरीर से निकल कर आसमान में चली गयी. और मैंने अपना हाथ हटा लिया. और थोड़ी hi देर में उस एल्फ को कुछ हुआ और वो उछलने लगा. मुझे लगा सायद अब वो खुली आँखों से दिखेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया और उसकी बात सच निकली वो मुझे अब साफ़ साफ़ दिख रहा था. वो खुद को इतने सालो बाद देखकर खुस था. वो इस बात की खुसी को उछाल उछाल कर जाहिर कर रहा था और चिल्ला रहा था की अब वो सबको दिख सकता है.
मैं- अब बस भी करो.
एल्फ- ओह्ह माफ़ करना में अपनी खुसी में आपको भूल hi गया. शुक्रिया जो आपने मेरी मदद की और मुझे फिर से दिखने वाला बना दिया
मैं- चलो छोडो इस बात को. अच्छा क्या तुम मुझे उस पहाड़ तक पहुंचना सकते हो जो उत्तर दिशा में है. बैसे लगता नहीं वो यहाँ से ज्यादा दूर है.
एल्फ- है पंहुचा सकता हु. लेकिन जिस पहाड़ की आप बात कर रहे है वो उत्तर दिशा में नहीं बल्कि दक्षिण दिशा में है.
मैं- ये कैसे संभव है मैंने उसे खुद अपनी आँखों से देखा है और मैंने उसकी दिशा का भी पता लगाया था. वो उत्तर दिशा में hi है.
एल्फ- आपका कहना सही है. लेकिन इस जंगल की एक खासियत है. यहाँ हर चीज़ उलटी है. मतलब जो चीज़ आपको पूर्व दिशा में दिखेगी वो आपको पश्चिम दिशा में मिलेगी. यहाँ चीज़े दिखती कही और है और मिलती कही और है. ठीक उसके उलट. वो तो अच्छा हुआ की मैं आपको मिल गया वर्ण आप उत्तर दिशा में उस पहाड़ को ढूंढ़ते रहते और इस जंगल में भटकते रहते.
मैं- तुम मुझसे झूट तो नहीं बोल रहे हो न. क्युकी ये बहुत भरी पड़ेगा तुम्हे.
एल्फ- आप चाहे तो मेरी जान अभी लेले. लेकिन में उस इंसान से कभी झूट नहीं बोलूंगा जिसने मुझे एक नया जीवन दिया है. आपको मुझपर भरोसा करना होगा. में कई वर्षो से इस जंगल में रह रहा हु. और यहाँ के कोने कोने से बाखिफ़ हु. ये जंगल जितना दीखता है उससे भी कई गुना विशाल और भयानक है. में अदृश्य था इसलिए अभी तक में जीवित हु यहाँ पैर.
मैं- फिर तो अब तुम्हारे ऊपर भी खतरा बाद जायेगा क्यों.
एल्फ- बाद जायेगा लेकिन मुझे उसकी फ़िक्र नहीं क्युकी मैंने इसके लिए पहले hi बचने की व्यवस्था कर राखी है. एक बहुत hi खुफ़िआ छिपने की जगह. जहा मुझे कोई नहीं ढूंढ सकता.
मैं- बैसे इस जंगल में ऐसा क्या खतरनाक है जिससे तुम्हे छिपने की जरुरत पद रही है
एल्फ- है कुछ जीव. बैसे मैंने उन्हें आज तक नहीं देखा है. बस उनके बारे में सुना है. अपने पूरवजों से. जो अब नहीं है. अब हमें चलना chahiye.verna आपको देर हो जाएगी.
.मुझे भी ये सही लगा और में उसके पीछे पीछे चलने लगा
मैं- तुमने अपना नाम नहीं बताया.
एल्फ- हमारे कोई नाम नहीं होते है. हमें सब एल्फ कहकर hi बुलाते है. बैसे आपका नाम क्या है
मैं- मेरा नाम देव है. बैसे ये जगह कोनसी hai.kye ये पृथ्वी पैर है
एल्फ- है ये जगह पृथ्वी पैर hi है. लेकिन इस जगह को कोई भी आम इंसान नहीं देख सकता न hi यहाँ आसक्त है. लेकिन तुम आये हो. इसलिए तुम आम इंसान हो hi नहीं सकते हो.
मैं- है वैसे ये सच है. लेकिन में हु इंसान hi. हलाकि आम नहीं हु. फिर भी इंसान hi हु. और मेरी किस्मत hi मुझे यहाँ ले आई है.
एल्फ- है सही कहा. वैसे उस पहाड़ पैर ऐसा क्या है जिसके लिए तुम बहा जा रहे हो
मैं- कुछ कह नहीं सकते. बाकि बहा पहुंचने के बाद hi साडी सचाई का मुझे पता चलेगा.
हम ऐसे hi बाटे करते हुए आगे बढ़ते चले गए. और करीब 2-3 घंटे तक लगातार चलने के बाद हम आखिर कार उस पहाड़ तक पहुंच hi गए.
एल्फ- ये आज्ञा आपका पहाड़. मुझे बस यही तक आने की अनुमति है. इसके आगे में नहीं आसक्त.
मैं- क्यों.
एल्फ- क्युकी यहाँ से उन खतरनाक जीवो का इलाका सुरु होता है. और मुझे बहा जाने के लिए मन किया गया है. इसलिए में इससे आगे नहीं जा सकता. आपको अब अकेले hi जाना होगा
मैंने सोचा ये भी सही है. इसकी जान खतरे में क्यों डालना.
मैं- ठीक है एल्फ तुम्हारे साथ के किये शुक्रिया. अगर तुम न होते तो सच में मैं भटक जाता इस जंगल में
. एल्फ- ये तो मेरा फ़र्ज़ था अच्छा अब में चलता हु .
ये कहकर वो बहा से बापिस लौट गया. में आगे बाद गया उस पहाड़ के ऊपर की तरफ. बड़ी hi मुश्किल चढाई थी लेकिन हिम्मत के साथ आगे बढ़ता गया और आखिर कार पहाड़ पैर चढ़ गया. अब दिक्कत ये थी की में अब कहा जाऊ. क्युकी पहाड़ पैर तो आज्ञा था लेकिन इसके अंदर जाने का कोई रास्ता तो था नहीं. न hi कोई gufa.ek तरफ जंगल था दूसरी तरफ गहरी खाई. और उसी के उस तरफ फिर से जंगल. जहा बही जीव रहते होंगे जिनके बारे में उस एल्फ ने बताया था. मुझे समाज नहीं आरहा था की कहा जाया जाये. और जब कोई रास्ता नहीं होता तब गुरुदेव की याद आती है. इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और गुरुदेव का स्मरण किया. और थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आने लगी
मैं- प्रणाम गुरुदेव
गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.
मैं- गुरुदेव मुझे आगे का मार्ग दिखाए में कहा जाऊ मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा है.
गुरुदेव- vats.isme मैं तुंहारी मदद नहीं कर पाउँगा. तुम्हे स्वयं hi रास्ता ढूंढ़ना होगा. ये तुंहारी परीक्षा है वत्स. तुम्हे होने धैर्य का प्रदर्शन करना होगा. उतावलापन छोड़ना होगा.
मैं- में समाज गया गुरुदेव. धन्यबाद
गुरुदेव- कल्याण हो वत्स
ये कहके वो चले गए.
अब मैंने सोचा की यहाँ खली बैठने से कुछ होगा नहीं. तो सोचा ध्यान में hi बैठा जाये. सायद कोई रास्ता निकल आये. इसलिए मैं बही पहाड़ी पैर बैठ गया ध्यान की मुद्रा में. और अपनी आँखों को बंद किया और मंत्र का उच्चारण करने लगा. में सब भूल गया की में कहा हु क्यों हो. बस ध्यान में hi कीं होने लगा धीरे धीरे. न hi समय की कोई सीमा न hi बंधन सब छोड़ कर ध्यान करने लगा और महादेव का नाम जपने लगा.
तो बे कॉन्टिनुए………………...
मैं- कोण है.
तभी मेरे सामने ठीक बैसि hi रौशनी आई जैसी पंडित जी के सामने आई थी. और में समाज गया की ये कोण है.
मैं- प्रणाम नागराज वासुकि के भांजे आस्तिक
रौशनी- ओह्ह्ह तो तुमने मुझे पहचान लिया.
मैं- आपको मैंने देखा tha.pandit जी की यादो में.
रौशनी- जैसा सुना था बिलकुल वैसे hi हो. में तुम्हारा hi इन्तजार कर रहा था.
मैं- ये मेरा सौभाग्य है नागदेव
रौशनी- लेकिन क्या तुम अंदर जाने को तत्पर हो वत्स
मैं- बिलकुल नागदेव. आप बताये मुझे क्या करना है
रौशनी- वत्स. अंदर क्या होगा कैसे होगा ये तो में भी नहीं जनता हु. ये तुम्हे खुद hi पता करना होगा. और मुझे उम्मीद है की अंदर जो भी होगा तुम उसे प्राप्त कर लोगे. और उसके लिए तुम्हे केवल अपने धैर्य का इस्तेमाल करना है. जल्दबाज़ी में कोई गलती मत करना.
मैं- में पूरी कोसिस करूँगा की आपके द्वारा कहे बचानी को निभा सकू. कृपया मुझे मार्ग प्रदान करे
रौशनी- अवस्य वत्स.
.ये कहके उन्होंने अपनी थोड़ी रौशनी- उस दीवार पैर मरी और बहा पैर एक बड़ा सा रास्ता खुल गया
रौशनी- अब अंदर जाओ वत्स. महादेव तुम्हे सफल करे.
.मैंने उन्हें प्रणाम किया और उस रस्ते से अंदर चला गया. और मेरे अंदर जाते hi वो रास्ता बंद हो गया. में एक कमरे में था इस वक़्त. चारो तरफ अँधेरा चाय हुआ था. लेकिन मेरी आँखे मुझे सब साफ़ साफ़ दिखा रही थी. उस कमरे में एक पत्थर का बड़ा दरवाजा सा लगा हुआ था. बाकि उस कमरे में कुछ भी नहीं था. इसलिए में आगे बड़ा उस दरवाजे की तरफ. लेकिन तभी अचानक से मेरे पेअर जमीन में hi जैम गए में बिलकुल भी नहीं हिल प् रहा था. न hi आगे बाद प् रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत hi मजबूती से मेरे पैरों को पकड़ रखा हो. मेरे पेअर के पंजे पूरी तरह से सुन्न पद गए थे. और सुन्नता धीरे धीरे मेरे पैरो से ऊपर बाद रही थी. मतलब की पंजो से घुटनो तक बाद चुकी थी. मैंने सोचा जरूर ये कोई मायाजाल है. इसलिए मैंने हिलना बंद किया और अपनी आँखों को बंद किया अपने हाथ जोड़े. और अपने तीसरे नेत्र का आवाहन किया. जैसे hi तीसरा नेत्र खुला बैसे hi मेरे पेअर जो पूरी तरह से सुन्न पद गए थे वो फ्री हो गए. और अब में चल सकता था. मैंने बैसि hi आँखे बंद और हाथ जोड़े हुए आगे बाद गया. उस पत्थर के दरवाजे की तरफ. उसके बाद उस कमरे में कोई भी मुसीबत नहीं आई. अब इस दरवाजे को खुलना जरुरी था. इसलिए मैंने अपना एक हाथ उस पत्थर पैर रखा. लेकिन वो नहीं हटा. ये देखकर में अचंभित था. मैंने फिर से प्रयास किया लेकिन फिर से इस पत्थर को कुछ नहीं हुआ. तब मैंने सोचा इसे अपने बल से हटाना पड़ेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और ऐसा करते hi फिर से मेरे पेअर सुन्न पड़ने लगे. मतलब साफ़ था की जब तक सटी चक्र जागृत रहेंगे मुझे कुछ नहीं होगा. और जैसे hi नार्मल रहूँगा तब ये माया मुझे जकड़ने लगेगी. और बिना निर्मल हुए में इस पत्थर को खोल नहीं सकता था. इसलिए मैंने जल्दी से इस पत्थर को हटाने की कोसिस की.
मैंने अपने दोनों हाथो को पत्थर पैर रखा और उसे दूसरी तरफ धकेलने लगा. काफी ताकत लगनी पद रही थी मुझे और इसका असर भी हो रहा था वो पत्थर हिल रहा था. अभी तक मेरी कमर सुन्न हो चुकी थी. और पत्थर थोड़ा सा hi हिला था. मैंने एक और कोसिस की और अबकी बार अपने हाथो का पूरा जोर लगाया और साथ में हर हर महादेव का नैरा भी लगाया. और उसका असर भी हुआ. और वो पत्थर दूसरी तरफ पूरा लुढ़क गया. और उसके लुड़कते hi मेरा शरीर फिर से नार्मल हो गया. आगे एक लुम्बी ढलान थी जो नीचे की तरफ जा रही थी. और बहुत hi सकती थी. लिखे वो पत्थर के साइज की. मैं- जल्दी से उस ढलान में बैठ गया अपने पैरो को नीचे की तरफ किया और अपनी बॉडी को आगे की तरफ पुश किया और इसका नतीजा ये हुआ की में नीचे की और सरक गया. मेरा बैलेंस धीरे धीरे खोता जा रहा था. मेरी बॉडी अब मेरे कण्ट्रोल में नहीं थी. वो अब उस ढलान में जैसी चाहे बैसि खिसक रही थी. कभी मेरा सर ऊपर होता तो कभी नीचे. और में बहुत hi तेज़ स्पीड से नीचे की तरफ खिसकता हुआ जा रहा था. लेकिन हैरानगी की बात ये थी की इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. ऐसा लग रहा था जैसे में पाताललोक में घुसता जा रहा हु. करीब 20 मं. तक में उस टनल में नीचे की तरफ खिसकता रहा. मेरा पूरा सिस्टम एक डैम से डाउन हो गया था. ऐसा लग रहा था जैसे मेरी किडनी ऊपर और मेरा हार्ट नीचे पहुंच गया हो. कुछ समाज में नहीं आरहा था की ये क्या है. मेरा दिमाग भी प्रोसेस नहीं कर प् रहा था की में क्या करू क्युकी इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. तब मेरा थोड़ा सा दिमाग चला और मैंने सरकते हुए अपने हाथो को जोड़ा और अपनी आँखों को बंद कर लिया. ऐसा करते hi मेरी तीसरी आँख खुल गयी. और ऐसा होता hi में उस टनल से बहार निकल गया. इतनी जोर की स्पीड से की पता नहीं में कितना आगे जेक गिर इस टनल के दरवाजे se.or सीधा एक पेड़ के मोठे रहने से चिपक गया. और धीरे धीरे खिसक कर नीचे जमीन पैर आज्ञा. और सीधा लेट गया. और अपनी ससो को सँभालने laga.meri आँखे अभी बंद hi थी. और मेरी ससे बहुत तेज़ चल रही थी. करीब 5 मं. लगे मुझे नार्मल होने में. और जैसे hi नार्मल हुआ मैंने अपनी आँखों को खोला. तो मेरे ऊपर एक विशाल लम्बा पेड़ खड़ा हुआ था. जिसे देखकर ऐसा लगा की वो सीधा मेरे ऊपर hi गिरने वाला है. इस लिए में जल्दी से उल्टा हो गया और खड़ा होने लगा. जैसे hi खड़ा हुआ मेरे बैलेंस बिगड़ा और में फिर से नीचे गिर गया. तो मैंने फिर अपने आप को थोड़ा काबू में करने के लिए बही पैर पालथी मार ली और अपने हाथो को जोड़ कर अपनी आखो को बंद किया और मन में ॐ नमः सिवाय का जाप करने लगा. और ऐसा करते hi मेरे अंदर एक अलग सी िस्फुर्ति आगयी. केवल कुछ hi सेक्. में. मैंने 2 मं. तक कागतार जाप किया और फिर अपनी आँखों को खोला और खड़ा हो गया. मुझे अब अच्छा फील हो रहा था. इसलिए मैंने चारो तरफ देखा तो मैंने खुद को एक जंगल में पाया. चारो तरफ बहुत hi ऊँचे ऊँचे पेड़ थे. सामने पेड़ो के आल्वा कुछ नहीं दिख रहा था. अब मुझे यहाँ से कहा जाना है ये भी कन्फर्म नहीं हो रहा था. तो सोचा क्यों न इन पेड़ो के ऊपर से देखा जाये. इसलिए मैं बही पैर मौजूद एक पेड़ पैर चढ़ने लगा. उसकी सखते बहुत बड़ी थी और चढ़ने में सहायक भी. धीरे धीरे चढ़ कर में ऊपर जाने लगा. एक टहनी से दूसरी टहनी. और थोड़ी देर की म्हणत के बाद में आखिर कार उप पेड़ के बिलकुल ऊपरी कोने पैर पहुंच गया. मुझे अब आसमान साफ़ साफ़ दिखने लगा था. इसलिए मैंने चारो तरफ ध्यान से देखा की मुझे आखिर जाना किस तरफ है. तभी एक दिशा में मुझे एक पहाड़ नजर आया. जिसकी बनावट बिलकुल वैसी hi थी जैसी मैंने अपने सपने में देखि थी. और उसे देखकर hi में समाज गया की मुझे इसी के पास जाना है. लेकिन अब सवाल ये था की ये दिशा है कोण सी. और नीचे उतारते hi कही में भटक न जाऊ. ये भी दर था मुझे. और मुझे इसका कोई हल ढूंढ़ना था. मैंने सोचा उड़द कर चला जाऊ तो. लेकिन फिर गुरूजी की बात याद आगयी. की जहा जरुरत होगी शक्तिया खुद संकेत करेंगी जैसे अभी तक करती आई है. लेकिन अभी मेरी शक्तिया मुझे नहीं कह रही यही उनका उपयोग करने के लिए. इसलिए मुझे पैदल hi बहा पैर जाना होगा ये तय था. मैंने अपना मोबाइल निकला और उसमे मैंने देखा की सिग्नल मिल रहे है. मतलब की ये जगह बकै में है. लेकिन फ़िलहाल मयाबी हो सकती है. मैंने अपने मोबाइल में कंपास निकला और उस पहाड़ की दिशा को देखा तो वो मोबाइल में नार्थ बता रहा था. यानि की ये पहाड़ उत्तर दिशा में है. मैंने मोबाइल को चारो तरफ घुमा कर देखा तो कंपास सही से काम कर रहा था. बाकि दिशा भी सही बता रहा था. मतलब ये काम कर रहा है. तो मैंने सोचा की अब मोबाइल का hi सहर लेना पड़ेगा. इसलिए में उस पेड़ से नीचे उतरने लगा. संभल संभल कर में नीचे आज्ञा. मैंने मोबाइल को ों किया और कंपास में नार्थ डायरेक्शन को देखा और उस तरफ आगे बाद गया.
रास्ता काफी भयानक लग रहा था. दिन का समय था लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे रात के 12 बज रहे हो. चारो तरफ से कही भी सूरज की रौशनी नीच नहीं आप रही थी. खैर में आगे बढ़ता हुआ जा रहा था. और मोबाइल में देख रहा था की किस तरफ जाना है. अभी थोड़े hi कदम आगे बड़ा की मुझे मेरे जस्ट पीछे किसी के होने का एहसास हुआ. लिखे अंदर से पूरा हिल गया में. में बही पैर रुक गया. और गौर से सुनने लगा की क्या है मेरे पीछे. आवाज धीरे धीरे तेज़ हो रही थी में समाज गया की सायद कोई जानवर हो सकता है. या फिर कुछ और. इसलिए मैं पीछे मुदा. लेकिन मेरे पीछे कोई नहीं था. सायद झाड़ियों और पेड़ो के पीछे छिपा हुआ हो सकता है. मैंने सोचा अब थोड़ी जॉगिंग कर ली जाये. इसलिए में बापिस से उसी दिशा में मुदा और भागने लगा. और मैंने ध्यान से सुना तो वो आवाज अभी भी आरही थी. मतलब बो भी भाग रहा है मेरे पीछे. मैंने अपनी रफ़्तार बड़ाई और लिखे सुपरफास्ट स्पीड में भागने लगा. हलाकि जंगल था और टेड़ा मेदा रास्ता इसलिए थोड़ी hi देर में स्पीड काम होने लगी. क्युकी कभी कूदना था तो कभी jhukna.or कभी मुड़ना. इसीलिए ज्यादा तेज़ नहीं भाग का रहा था. नीचे भी देखना था की कही ठोकर न लग जाये. मैंने भागते हुए hi पीछे मुद कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा लेकिन नीचे के सूखे पत्ते हिल रहे थे. और उड़द रहे थे. झाडिया अपने आप हिल रही थी जैसे कोई उनसे सात कर गुजरा हो. ये सीन देखकर में समाज गया की मामला थोड़ा सीरियस है. क्युकी जी भी मेरे पीछे है वो अदृश्य है. इसलिए मैंने अपनी स्पीड बड़ाई और थोड़ा टेड़ा मेदा होकर भागने लगा ताकि इसकी नजरो से थोड़ा दूर हो सकू. और ये आईडिया काम कर गया. में एक बड़े पेड़ की पीछे छिप गया और सामने देखने लगा तो मुझे वो पैरो के दौड़ने की आवाज आरही थी. मतलब बो अभी भी मेरे पीछे है. मैंने आसपास देखा और ढूंढा की सायद कोई डंडा बगेरा मिल जाये. तो मुझे एक पेड़ की टहनी दिखी जो पतली थी. और लचीली भी. मैंने उसे पकड़ा और अपोजिट डायरेक्शन में उसे खींच लिया. इतना hi जोर लगाया की वो टूटे na.or बैसे hi पकड़ कर खड़ा हो गया. धीरे धीरे वो आवाज मेरे करीब आरही थी. ये टहनी किसी 4 फुट तक के इंसान को लग सकती थी. और जो मेरे पीछे भाग रहा था वो काम से काम 4 फट. का हो यही आशा कर रहा था मैं. और जैसे hi वो मेरे सीमा के बहार पंहुचा मैंने उस टहनी को छोड़ दिया. और वो टहनी स्पीड में छूट कर सीधे उस अदृश्य जीव को जेक लगी. और जैसे hi लगी उसकी एक चीख निकल गयी. जिसे सुनकर में समाज गया की ये कोई इंसान है. लेकिन अब समाज नहीं आरहा था की वो किस दिशा में गिरा होगा. क्युकी इन सब में मैंने ध्यान नहीं दिया की किस तरफ से उसके गिरने की आवाज आई है. इसलिए मैंने अपनी आखो को बंद किया और अपनी तिरदये को ओपन किया और उसको देखने लगा की वो कहा है. थोड़ा इधर उधर देखने के बाद मुझे एक अजीब सा जीव दिखा जो लागबहग 4 फट. का hi होगा. उसके बड़े बड़े कान थे. देखने से कोई एल्फ की तरफ दिख रहा था. एक छोटा सा जीब. अब ये इस जंगल में क्या कर रहा है ये तो यही बता सकता है. इसलिए में उसके पास गया. और उसने मुह्हे देख लिया और वो छिपने लगा एक पेड़ के पीछे.
मैं- में तुम्हे देख सकता हु. छिपने की जरुरत नहीं है.
ये सुनकर वो थोड़ा हैरान हुआ और उसने अपना सर खुजाया और कुछ सोचा और फिर बोलै.
एल्फ- ये संभव नहीं है तुम क्या मुझे कोई भी नहीं देख सकता. तुम झूट बोल रहे हो.
मैं- में झूट नहीं बोल रहा. रुको में तुम्हे कुछ बताता हु. तुमने एक कपडा करता हुआ है. तुमने पैरो में कुछ नहीं पहना है. तुम्हारे कान थोड़े लम्बे है नाक थोड़ी नुकीली है. और तुम मेरी कमर तक hi लम्बे हो.
ये सब सुनते hi वो पूरी तरह हैरान हो गया. और वो तुरंत hi मेरे सामने झुक गया.
मैं- ये क्या कर रहे हो तुम.
एल्फ- मुझे एक शाप मिला था बहुत पहले तब से में गायब hi इस जंगल में भटक रहा हु. जिसने मुझे शाप दिया था उन्होंने ये कहा था की तुम्हे कोई नहीं देख पायेगा kabhi.me खुद भी नहीं. लेकिन कोई एक इंसान होगा जो तुम्हे देख पायेगा. वो जैसे hi मुझे छुएगा मेरा शाप बही समाप्त हो जायेगा. क्या आप मुझे छुएंगे.
ये सब सुनकर मुझे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन सोचा एक बार छूने में क्या हर्ज़ है. इसलिए मैं उसके पास गया और अपना हाथ आगे बढ़ाया उसे छूने के लिए. वो भी आगे आया और जैसे hi मेरा हाथ उसके सर से झुका अचानक से कुछ हुआ लिखे कोई शक्ति उसके सरीर से निकल कर आसमान में चली गयी. और मैंने अपना हाथ हटा लिया. और थोड़ी hi देर में उस एल्फ को कुछ हुआ और वो उछलने लगा. मुझे लगा सायद अब वो खुली आँखों से दिखेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया और उसकी बात सच निकली वो मुझे अब साफ़ साफ़ दिख रहा था. वो खुद को इतने सालो बाद देखकर खुस था. वो इस बात की खुसी को उछाल उछाल कर जाहिर कर रहा था और चिल्ला रहा था की अब वो सबको दिख सकता है.
मैं- अब बस भी करो.
एल्फ- ओह्ह माफ़ करना में अपनी खुसी में आपको भूल hi गया. शुक्रिया जो आपने मेरी मदद की और मुझे फिर से दिखने वाला बना दिया
मैं- चलो छोडो इस बात को. अच्छा क्या तुम मुझे उस पहाड़ तक पहुंचना सकते हो जो उत्तर दिशा में है. बैसे लगता नहीं वो यहाँ से ज्यादा दूर है.
एल्फ- है पंहुचा सकता हु. लेकिन जिस पहाड़ की आप बात कर रहे है वो उत्तर दिशा में नहीं बल्कि दक्षिण दिशा में है.
मैं- ये कैसे संभव है मैंने उसे खुद अपनी आँखों से देखा है और मैंने उसकी दिशा का भी पता लगाया था. वो उत्तर दिशा में hi है.
एल्फ- आपका कहना सही है. लेकिन इस जंगल की एक खासियत है. यहाँ हर चीज़ उलटी है. मतलब जो चीज़ आपको पूर्व दिशा में दिखेगी वो आपको पश्चिम दिशा में मिलेगी. यहाँ चीज़े दिखती कही और है और मिलती कही और है. ठीक उसके उलट. वो तो अच्छा हुआ की मैं आपको मिल गया वर्ण आप उत्तर दिशा में उस पहाड़ को ढूंढ़ते रहते और इस जंगल में भटकते रहते.
मैं- तुम मुझसे झूट तो नहीं बोल रहे हो न. क्युकी ये बहुत भरी पड़ेगा तुम्हे.
एल्फ- आप चाहे तो मेरी जान अभी लेले. लेकिन में उस इंसान से कभी झूट नहीं बोलूंगा जिसने मुझे एक नया जीवन दिया है. आपको मुझपर भरोसा करना होगा. में कई वर्षो से इस जंगल में रह रहा हु. और यहाँ के कोने कोने से बाखिफ़ हु. ये जंगल जितना दीखता है उससे भी कई गुना विशाल और भयानक है. में अदृश्य था इसलिए अभी तक में जीवित हु यहाँ पैर.
मैं- फिर तो अब तुम्हारे ऊपर भी खतरा बाद जायेगा क्यों.
एल्फ- बाद जायेगा लेकिन मुझे उसकी फ़िक्र नहीं क्युकी मैंने इसके लिए पहले hi बचने की व्यवस्था कर राखी है. एक बहुत hi खुफ़िआ छिपने की जगह. जहा मुझे कोई नहीं ढूंढ सकता.
मैं- बैसे इस जंगल में ऐसा क्या खतरनाक है जिससे तुम्हे छिपने की जरुरत पद रही है
एल्फ- है कुछ जीव. बैसे मैंने उन्हें आज तक नहीं देखा है. बस उनके बारे में सुना है. अपने पूरवजों से. जो अब नहीं है. अब हमें चलना chahiye.verna आपको देर हो जाएगी.
.मुझे भी ये सही लगा और में उसके पीछे पीछे चलने लगा
मैं- तुमने अपना नाम नहीं बताया.
एल्फ- हमारे कोई नाम नहीं होते है. हमें सब एल्फ कहकर hi बुलाते है. बैसे आपका नाम क्या है
मैं- मेरा नाम देव है. बैसे ये जगह कोनसी hai.kye ये पृथ्वी पैर है
एल्फ- है ये जगह पृथ्वी पैर hi है. लेकिन इस जगह को कोई भी आम इंसान नहीं देख सकता न hi यहाँ आसक्त है. लेकिन तुम आये हो. इसलिए तुम आम इंसान हो hi नहीं सकते हो.
मैं- है वैसे ये सच है. लेकिन में हु इंसान hi. हलाकि आम नहीं हु. फिर भी इंसान hi हु. और मेरी किस्मत hi मुझे यहाँ ले आई है.
एल्फ- है सही कहा. वैसे उस पहाड़ पैर ऐसा क्या है जिसके लिए तुम बहा जा रहे हो
मैं- कुछ कह नहीं सकते. बाकि बहा पहुंचने के बाद hi साडी सचाई का मुझे पता चलेगा.
हम ऐसे hi बाटे करते हुए आगे बढ़ते चले गए. और करीब 2-3 घंटे तक लगातार चलने के बाद हम आखिर कार उस पहाड़ तक पहुंच hi गए.
एल्फ- ये आज्ञा आपका पहाड़. मुझे बस यही तक आने की अनुमति है. इसके आगे में नहीं आसक्त.
मैं- क्यों.
एल्फ- क्युकी यहाँ से उन खतरनाक जीवो का इलाका सुरु होता है. और मुझे बहा जाने के लिए मन किया गया है. इसलिए में इससे आगे नहीं जा सकता. आपको अब अकेले hi जाना होगा
मैंने सोचा ये भी सही है. इसकी जान खतरे में क्यों डालना.
मैं- ठीक है एल्फ तुम्हारे साथ के किये शुक्रिया. अगर तुम न होते तो सच में मैं भटक जाता इस जंगल में
. एल्फ- ये तो मेरा फ़र्ज़ था अच्छा अब में चलता हु .
ये कहकर वो बहा से बापिस लौट गया. में आगे बाद गया उस पहाड़ के ऊपर की तरफ. बड़ी hi मुश्किल चढाई थी लेकिन हिम्मत के साथ आगे बढ़ता गया और आखिर कार पहाड़ पैर चढ़ गया. अब दिक्कत ये थी की में अब कहा जाऊ. क्युकी पहाड़ पैर तो आज्ञा था लेकिन इसके अंदर जाने का कोई रास्ता तो था नहीं. न hi कोई gufa.ek तरफ जंगल था दूसरी तरफ गहरी खाई. और उसी के उस तरफ फिर से जंगल. जहा बही जीव रहते होंगे जिनके बारे में उस एल्फ ने बताया था. मुझे समाज नहीं आरहा था की कहा जाया जाये. और जब कोई रास्ता नहीं होता तब गुरुदेव की याद आती है. इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और गुरुदेव का स्मरण किया. और थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आने लगी
मैं- प्रणाम गुरुदेव
गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.
मैं- गुरुदेव मुझे आगे का मार्ग दिखाए में कहा जाऊ मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा है.
गुरुदेव- vats.isme मैं तुंहारी मदद नहीं कर पाउँगा. तुम्हे स्वयं hi रास्ता ढूंढ़ना होगा. ये तुंहारी परीक्षा है वत्स. तुम्हे होने धैर्य का प्रदर्शन करना होगा. उतावलापन छोड़ना होगा.
मैं- में समाज गया गुरुदेव. धन्यबाद
गुरुदेव- कल्याण हो वत्स
ये कहके वो चले गए.
अब मैंने सोचा की यहाँ खली बैठने से कुछ होगा नहीं. तो सोचा ध्यान में hi बैठा जाये. सायद कोई रास्ता निकल आये. इसलिए मैं बही पहाड़ी पैर बैठ गया ध्यान की मुद्रा में. और अपनी आँखों को बंद किया और मंत्र का उच्चारण करने लगा. में सब भूल गया की में कहा हु क्यों हो. बस ध्यान में hi कीं होने लगा धीरे धीरे. न hi समय की कोई सीमा न hi बंधन सब छोड़ कर ध्यान करने लगा और महादेव का नाम जपने लगा.
तो बे कॉन्टिनुए………………...