दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 6 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

अपडेट 39



मैं- कोण है.

तभी मेरे सामने ठीक बैसि hi रौशनी आई जैसी पंडित जी के सामने आई थी. और में समाज गया की ये कोण है.

मैं- प्रणाम नागराज वासुकि के भांजे आस्तिक

रौशनी- ओह्ह्ह तो तुमने मुझे पहचान लिया.

मैं- आपको मैंने देखा tha.pandit जी की यादो में.

रौशनी- जैसा सुना था बिलकुल वैसे hi हो. में तुम्हारा hi इन्तजार कर रहा था.

मैं- ये मेरा सौभाग्य है नागदेव

रौशनी- लेकिन क्या तुम अंदर जाने को तत्पर हो वत्स

मैं- बिलकुल नागदेव. आप बताये मुझे क्या करना है

रौशनी- वत्स. अंदर क्या होगा कैसे होगा ये तो में भी नहीं जनता हु. ये तुम्हे खुद hi पता करना होगा. और मुझे उम्मीद है की अंदर जो भी होगा तुम उसे प्राप्त कर लोगे. और उसके लिए तुम्हे केवल अपने धैर्य का इस्तेमाल करना है. जल्दबाज़ी में कोई गलती मत करना.

मैं- में पूरी कोसिस करूँगा की आपके द्वारा कहे बचानी को निभा सकू. कृपया मुझे मार्ग प्रदान करे

रौशनी- अवस्य वत्स.

.ये कहके उन्होंने अपनी थोड़ी रौशनी- उस दीवार पैर मरी और बहा पैर एक बड़ा सा रास्ता खुल गया

रौशनी- अब अंदर जाओ वत्स. महादेव तुम्हे सफल करे.

.मैंने उन्हें प्रणाम किया और उस रस्ते से अंदर चला गया. और मेरे अंदर जाते hi वो रास्ता बंद हो गया. में एक कमरे में था इस वक़्त. चारो तरफ अँधेरा चाय हुआ था. लेकिन मेरी आँखे मुझे सब साफ़ साफ़ दिखा रही थी. उस कमरे में एक पत्थर का बड़ा दरवाजा सा लगा हुआ था. बाकि उस कमरे में कुछ भी नहीं था. इसलिए में आगे बड़ा उस दरवाजे की तरफ. लेकिन तभी अचानक से मेरे पेअर जमीन में hi जैम गए में बिलकुल भी नहीं हिल प् रहा था. न hi आगे बाद प् रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत hi मजबूती से मेरे पैरों को पकड़ रखा हो. मेरे पेअर के पंजे पूरी तरह से सुन्न पद गए थे. और सुन्नता धीरे धीरे मेरे पैरो से ऊपर बाद रही थी. मतलब की पंजो से घुटनो तक बाद चुकी थी. मैंने सोचा जरूर ये कोई मायाजाल है. इसलिए मैंने हिलना बंद किया और अपनी आँखों को बंद किया अपने हाथ जोड़े. और अपने तीसरे नेत्र का आवाहन किया. जैसे hi तीसरा नेत्र खुला बैसे hi मेरे पेअर जो पूरी तरह से सुन्न पद गए थे वो फ्री हो गए. और अब में चल सकता था. मैंने बैसि hi आँखे बंद और हाथ जोड़े हुए आगे बाद गया. उस पत्थर के दरवाजे की तरफ. उसके बाद उस कमरे में कोई भी मुसीबत नहीं आई. अब इस दरवाजे को खुलना जरुरी था. इसलिए मैंने अपना एक हाथ उस पत्थर पैर रखा. लेकिन वो नहीं हटा. ये देखकर में अचंभित था. मैंने फिर से प्रयास किया लेकिन फिर से इस पत्थर को कुछ नहीं हुआ. तब मैंने सोचा इसे अपने बल से हटाना पड़ेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और ऐसा करते hi फिर से मेरे पेअर सुन्न पड़ने लगे. मतलब साफ़ था की जब तक सटी चक्र जागृत रहेंगे मुझे कुछ नहीं होगा. और जैसे hi नार्मल रहूँगा तब ये माया मुझे जकड़ने लगेगी. और बिना निर्मल हुए में इस पत्थर को खोल नहीं सकता था. इसलिए मैंने जल्दी से इस पत्थर को हटाने की कोसिस की.

मैंने अपने दोनों हाथो को पत्थर पैर रखा और उसे दूसरी तरफ धकेलने लगा. काफी ताकत लगनी पद रही थी मुझे और इसका असर भी हो रहा था वो पत्थर हिल रहा था. अभी तक मेरी कमर सुन्न हो चुकी थी. और पत्थर थोड़ा सा hi हिला था. मैंने एक और कोसिस की और अबकी बार अपने हाथो का पूरा जोर लगाया और साथ में हर हर महादेव का नैरा भी लगाया. और उसका असर भी हुआ. और वो पत्थर दूसरी तरफ पूरा लुढ़क गया. और उसके लुड़कते hi मेरा शरीर फिर से नार्मल हो गया. आगे एक लुम्बी ढलान थी जो नीचे की तरफ जा रही थी. और बहुत hi सकती थी. लिखे वो पत्थर के साइज की. मैं- जल्दी से उस ढलान में बैठ गया अपने पैरो को नीचे की तरफ किया और अपनी बॉडी को आगे की तरफ पुश किया और इसका नतीजा ये हुआ की में नीचे की और सरक गया. मेरा बैलेंस धीरे धीरे खोता जा रहा था. मेरी बॉडी अब मेरे कण्ट्रोल में नहीं थी. वो अब उस ढलान में जैसी चाहे बैसि खिसक रही थी. कभी मेरा सर ऊपर होता तो कभी नीचे. और में बहुत hi तेज़ स्पीड से नीचे की तरफ खिसकता हुआ जा रहा था. लेकिन हैरानगी की बात ये थी की इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. ऐसा लग रहा था जैसे में पाताललोक में घुसता जा रहा हु. करीब 20 मं. तक में उस टनल में नीचे की तरफ खिसकता रहा. मेरा पूरा सिस्टम एक डैम से डाउन हो गया था. ऐसा लग रहा था जैसे मेरी किडनी ऊपर और मेरा हार्ट नीचे पहुंच गया हो. कुछ समाज में नहीं आरहा था की ये क्या है. मेरा दिमाग भी प्रोसेस नहीं कर प् रहा था की में क्या करू क्युकी इस टनल का अंत hi नहीं आरहा था. तब मेरा थोड़ा सा दिमाग चला और मैंने सरकते हुए अपने हाथो को जोड़ा और अपनी आँखों को बंद कर लिया. ऐसा करते hi मेरी तीसरी आँख खुल गयी. और ऐसा होता hi में उस टनल से बहार निकल गया. इतनी जोर की स्पीड से की पता नहीं में कितना आगे जेक गिर इस टनल के दरवाजे se.or सीधा एक पेड़ के मोठे रहने से चिपक गया. और धीरे धीरे खिसक कर नीचे जमीन पैर आज्ञा. और सीधा लेट गया. और अपनी ससो को सँभालने laga.meri आँखे अभी बंद hi थी. और मेरी ससे बहुत तेज़ चल रही थी. करीब 5 मं. लगे मुझे नार्मल होने में. और जैसे hi नार्मल हुआ मैंने अपनी आँखों को खोला. तो मेरे ऊपर एक विशाल लम्बा पेड़ खड़ा हुआ था. जिसे देखकर ऐसा लगा की वो सीधा मेरे ऊपर hi गिरने वाला है. इस लिए में जल्दी से उल्टा हो गया और खड़ा होने लगा. जैसे hi खड़ा हुआ मेरे बैलेंस बिगड़ा और में फिर से नीचे गिर गया. तो मैंने फिर अपने आप को थोड़ा काबू में करने के लिए बही पैर पालथी मार ली और अपने हाथो को जोड़ कर अपनी आखो को बंद किया और मन में ॐ नमः सिवाय का जाप करने लगा. और ऐसा करते hi मेरे अंदर एक अलग सी िस्फुर्ति आगयी. केवल कुछ hi सेक्. में. मैंने 2 मं. तक कागतार जाप किया और फिर अपनी आँखों को खोला और खड़ा हो गया. मुझे अब अच्छा फील हो रहा था. इसलिए मैंने चारो तरफ देखा तो मैंने खुद को एक जंगल में पाया. चारो तरफ बहुत hi ऊँचे ऊँचे पेड़ थे. सामने पेड़ो के आल्वा कुछ नहीं दिख रहा था. अब मुझे यहाँ से कहा जाना है ये भी कन्फर्म नहीं हो रहा था. तो सोचा क्यों न इन पेड़ो के ऊपर से देखा जाये. इसलिए मैं बही पैर मौजूद एक पेड़ पैर चढ़ने लगा. उसकी सखते बहुत बड़ी थी और चढ़ने में सहायक भी. धीरे धीरे चढ़ कर में ऊपर जाने लगा. एक टहनी से दूसरी टहनी. और थोड़ी देर की म्हणत के बाद में आखिर कार उप पेड़ के बिलकुल ऊपरी कोने पैर पहुंच गया. मुझे अब आसमान साफ़ साफ़ दिखने लगा था. इसलिए मैंने चारो तरफ ध्यान से देखा की मुझे आखिर जाना किस तरफ है. तभी एक दिशा में मुझे एक पहाड़ नजर आया. जिसकी बनावट बिलकुल वैसी hi थी जैसी मैंने अपने सपने में देखि थी. और उसे देखकर hi में समाज गया की मुझे इसी के पास जाना है. लेकिन अब सवाल ये था की ये दिशा है कोण सी. और नीचे उतारते hi कही में भटक न जाऊ. ये भी दर था मुझे. और मुझे इसका कोई हल ढूंढ़ना था. मैंने सोचा उड़द कर चला जाऊ तो. लेकिन फिर गुरूजी की बात याद आगयी. की जहा जरुरत होगी शक्तिया खुद संकेत करेंगी जैसे अभी तक करती आई है. लेकिन अभी मेरी शक्तिया मुझे नहीं कह रही यही उनका उपयोग करने के लिए. इसलिए मुझे पैदल hi बहा पैर जाना होगा ये तय था. मैंने अपना मोबाइल निकला और उसमे मैंने देखा की सिग्नल मिल रहे है. मतलब की ये जगह बकै में है. लेकिन फ़िलहाल मयाबी हो सकती है. मैंने अपने मोबाइल में कंपास निकला और उस पहाड़ की दिशा को देखा तो वो मोबाइल में नार्थ बता रहा था. यानि की ये पहाड़ उत्तर दिशा में है. मैंने मोबाइल को चारो तरफ घुमा कर देखा तो कंपास सही से काम कर रहा था. बाकि दिशा भी सही बता रहा था. मतलब ये काम कर रहा है. तो मैंने सोचा की अब मोबाइल का hi सहर लेना पड़ेगा. इसलिए में उस पेड़ से नीचे उतरने लगा. संभल संभल कर में नीचे आज्ञा. मैंने मोबाइल को ों किया और कंपास में नार्थ डायरेक्शन को देखा और उस तरफ आगे बाद गया.

रास्ता काफी भयानक लग रहा था. दिन का समय था लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे रात के 12 बज रहे हो. चारो तरफ से कही भी सूरज की रौशनी नीच नहीं आप रही थी. खैर में आगे बढ़ता हुआ जा रहा था. और मोबाइल में देख रहा था की किस तरफ जाना है. अभी थोड़े hi कदम आगे बड़ा की मुझे मेरे जस्ट पीछे किसी के होने का एहसास हुआ. लिखे अंदर से पूरा हिल गया में. में बही पैर रुक गया. और गौर से सुनने लगा की क्या है मेरे पीछे. आवाज धीरे धीरे तेज़ हो रही थी में समाज गया की सायद कोई जानवर हो सकता है. या फिर कुछ और. इसलिए मैं पीछे मुदा. लेकिन मेरे पीछे कोई नहीं था. सायद झाड़ियों और पेड़ो के पीछे छिपा हुआ हो सकता है. मैंने सोचा अब थोड़ी जॉगिंग कर ली जाये. इसलिए में बापिस से उसी दिशा में मुदा और भागने लगा. और मैंने ध्यान से सुना तो वो आवाज अभी भी आरही थी. मतलब बो भी भाग रहा है मेरे पीछे. मैंने अपनी रफ़्तार बड़ाई और लिखे सुपरफास्ट स्पीड में भागने लगा. हलाकि जंगल था और टेड़ा मेदा रास्ता इसलिए थोड़ी hi देर में स्पीड काम होने लगी. क्युकी कभी कूदना था तो कभी jhukna.or कभी मुड़ना. इसीलिए ज्यादा तेज़ नहीं भाग का रहा था. नीचे भी देखना था की कही ठोकर न लग जाये. मैंने भागते हुए hi पीछे मुद कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा लेकिन नीचे के सूखे पत्ते हिल रहे थे. और उड़द रहे थे. झाडिया अपने आप हिल रही थी जैसे कोई उनसे सात कर गुजरा हो. ये सीन देखकर में समाज गया की मामला थोड़ा सीरियस है. क्युकी जी भी मेरे पीछे है वो अदृश्य है. इसलिए मैंने अपनी स्पीड बड़ाई और थोड़ा टेड़ा मेदा होकर भागने लगा ताकि इसकी नजरो से थोड़ा दूर हो सकू. और ये आईडिया काम कर गया. में एक बड़े पेड़ की पीछे छिप गया और सामने देखने लगा तो मुझे वो पैरो के दौड़ने की आवाज आरही थी. मतलब बो अभी भी मेरे पीछे है. मैंने आसपास देखा और ढूंढा की सायद कोई डंडा बगेरा मिल जाये. तो मुझे एक पेड़ की टहनी दिखी जो पतली थी. और लचीली भी. मैंने उसे पकड़ा और अपोजिट डायरेक्शन में उसे खींच लिया. इतना hi जोर लगाया की वो टूटे na.or बैसे hi पकड़ कर खड़ा हो गया. धीरे धीरे वो आवाज मेरे करीब आरही थी. ये टहनी किसी 4 फुट तक के इंसान को लग सकती थी. और जो मेरे पीछे भाग रहा था वो काम से काम 4 फट. का हो यही आशा कर रहा था मैं. और जैसे hi वो मेरे सीमा के बहार पंहुचा मैंने उस टहनी को छोड़ दिया. और वो टहनी स्पीड में छूट कर सीधे उस अदृश्य जीव को जेक लगी. और जैसे hi लगी उसकी एक चीख निकल गयी. जिसे सुनकर में समाज गया की ये कोई इंसान है. लेकिन अब समाज नहीं आरहा था की वो किस दिशा में गिरा होगा. क्युकी इन सब में मैंने ध्यान नहीं दिया की किस तरफ से उसके गिरने की आवाज आई है. इसलिए मैंने अपनी आखो को बंद किया और अपनी तिरदये को ओपन किया और उसको देखने लगा की वो कहा है. थोड़ा इधर उधर देखने के बाद मुझे एक अजीब सा जीव दिखा जो लागबहग 4 फट. का hi होगा. उसके बड़े बड़े कान थे. देखने से कोई एल्फ की तरफ दिख रहा था. एक छोटा सा जीब. अब ये इस जंगल में क्या कर रहा है ये तो यही बता सकता है. इसलिए में उसके पास गया. और उसने मुह्हे देख लिया और वो छिपने लगा एक पेड़ के पीछे.

मैं- में तुम्हे देख सकता हु. छिपने की जरुरत नहीं है.

ये सुनकर वो थोड़ा हैरान हुआ और उसने अपना सर खुजाया और कुछ सोचा और फिर बोलै.

एल्फ- ये संभव नहीं है तुम क्या मुझे कोई भी नहीं देख सकता. तुम झूट बोल रहे हो.

मैं- में झूट नहीं बोल रहा. रुको में तुम्हे कुछ बताता हु. तुमने एक कपडा करता हुआ है. तुमने पैरो में कुछ नहीं पहना है. तुम्हारे कान थोड़े लम्बे है नाक थोड़ी नुकीली है. और तुम मेरी कमर तक hi लम्बे हो.

ये सब सुनते hi वो पूरी तरह हैरान हो गया. और वो तुरंत hi मेरे सामने झुक गया.

मैं- ये क्या कर रहे हो तुम.

एल्फ- मुझे एक शाप मिला था बहुत पहले तब से में गायब hi इस जंगल में भटक रहा हु. जिसने मुझे शाप दिया था उन्होंने ये कहा था की तुम्हे कोई नहीं देख पायेगा kabhi.me खुद भी नहीं. लेकिन कोई एक इंसान होगा जो तुम्हे देख पायेगा. वो जैसे hi मुझे छुएगा मेरा शाप बही समाप्त हो जायेगा. क्या आप मुझे छुएंगे.

ये सब सुनकर मुझे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन सोचा एक बार छूने में क्या हर्ज़ है. इसलिए मैं उसके पास गया और अपना हाथ आगे बढ़ाया उसे छूने के लिए. वो भी आगे आया और जैसे hi मेरा हाथ उसके सर से झुका अचानक से कुछ हुआ लिखे कोई शक्ति उसके सरीर से निकल कर आसमान में चली गयी. और मैंने अपना हाथ हटा लिया. और थोड़ी hi देर में उस एल्फ को कुछ हुआ और वो उछलने लगा. मुझे लगा सायद अब वो खुली आँखों से दिखेगा. इसलिए मैंने अपनी आँखों को खोल लिया और उसकी बात सच निकली वो मुझे अब साफ़ साफ़ दिख रहा था. वो खुद को इतने सालो बाद देखकर खुस था. वो इस बात की खुसी को उछाल उछाल कर जाहिर कर रहा था और चिल्ला रहा था की अब वो सबको दिख सकता है.

मैं- अब बस भी करो.

एल्फ- ओह्ह माफ़ करना में अपनी खुसी में आपको भूल hi गया. शुक्रिया जो आपने मेरी मदद की और मुझे फिर से दिखने वाला बना दिया

मैं- चलो छोडो इस बात को. अच्छा क्या तुम मुझे उस पहाड़ तक पहुंचना सकते हो जो उत्तर दिशा में है. बैसे लगता नहीं वो यहाँ से ज्यादा दूर है.

एल्फ- है पंहुचा सकता हु. लेकिन जिस पहाड़ की आप बात कर रहे है वो उत्तर दिशा में नहीं बल्कि दक्षिण दिशा में है.

मैं- ये कैसे संभव है मैंने उसे खुद अपनी आँखों से देखा है और मैंने उसकी दिशा का भी पता लगाया था. वो उत्तर दिशा में hi है.

एल्फ- आपका कहना सही है. लेकिन इस जंगल की एक खासियत है. यहाँ हर चीज़ उलटी है. मतलब जो चीज़ आपको पूर्व दिशा में दिखेगी वो आपको पश्चिम दिशा में मिलेगी. यहाँ चीज़े दिखती कही और है और मिलती कही और है. ठीक उसके उलट. वो तो अच्छा हुआ की मैं आपको मिल गया वर्ण आप उत्तर दिशा में उस पहाड़ को ढूंढ़ते रहते और इस जंगल में भटकते रहते.

मैं- तुम मुझसे झूट तो नहीं बोल रहे हो न. क्युकी ये बहुत भरी पड़ेगा तुम्हे.

एल्फ- आप चाहे तो मेरी जान अभी लेले. लेकिन में उस इंसान से कभी झूट नहीं बोलूंगा जिसने मुझे एक नया जीवन दिया है. आपको मुझपर भरोसा करना होगा. में कई वर्षो से इस जंगल में रह रहा हु. और यहाँ के कोने कोने से बाखिफ़ हु. ये जंगल जितना दीखता है उससे भी कई गुना विशाल और भयानक है. में अदृश्य था इसलिए अभी तक में जीवित हु यहाँ पैर.

मैं- फिर तो अब तुम्हारे ऊपर भी खतरा बाद जायेगा क्यों.

एल्फ- बाद जायेगा लेकिन मुझे उसकी फ़िक्र नहीं क्युकी मैंने इसके लिए पहले hi बचने की व्यवस्था कर राखी है. एक बहुत hi खुफ़िआ छिपने की जगह. जहा मुझे कोई नहीं ढूंढ सकता.

मैं- बैसे इस जंगल में ऐसा क्या खतरनाक है जिससे तुम्हे छिपने की जरुरत पद रही है

एल्फ- है कुछ जीव. बैसे मैंने उन्हें आज तक नहीं देखा है. बस उनके बारे में सुना है. अपने पूरवजों से. जो अब नहीं है. अब हमें चलना chahiye.verna आपको देर हो जाएगी.

.मुझे भी ये सही लगा और में उसके पीछे पीछे चलने लगा

मैं- तुमने अपना नाम नहीं बताया.

एल्फ- हमारे कोई नाम नहीं होते है. हमें सब एल्फ कहकर hi बुलाते है. बैसे आपका नाम क्या है

मैं- मेरा नाम देव है. बैसे ये जगह कोनसी hai.kye ये पृथ्वी पैर है

एल्फ- है ये जगह पृथ्वी पैर hi है. लेकिन इस जगह को कोई भी आम इंसान नहीं देख सकता न hi यहाँ आसक्त है. लेकिन तुम आये हो. इसलिए तुम आम इंसान हो hi नहीं सकते हो.

मैं- है वैसे ये सच है. लेकिन में हु इंसान hi. हलाकि आम नहीं हु. फिर भी इंसान hi हु. और मेरी किस्मत hi मुझे यहाँ ले आई है.

एल्फ- है सही कहा. वैसे उस पहाड़ पैर ऐसा क्या है जिसके लिए तुम बहा जा रहे हो

मैं- कुछ कह नहीं सकते. बाकि बहा पहुंचने के बाद hi साडी सचाई का मुझे पता चलेगा.

हम ऐसे hi बाटे करते हुए आगे बढ़ते चले गए. और करीब 2-3 घंटे तक लगातार चलने के बाद हम आखिर कार उस पहाड़ तक पहुंच hi गए.

एल्फ- ये आज्ञा आपका पहाड़. मुझे बस यही तक आने की अनुमति है. इसके आगे में नहीं आसक्त.

मैं- क्यों.

एल्फ- क्युकी यहाँ से उन खतरनाक जीवो का इलाका सुरु होता है. और मुझे बहा जाने के लिए मन किया गया है. इसलिए में इससे आगे नहीं जा सकता. आपको अब अकेले hi जाना होगा

मैंने सोचा ये भी सही है. इसकी जान खतरे में क्यों डालना.

मैं- ठीक है एल्फ तुम्हारे साथ के किये शुक्रिया. अगर तुम न होते तो सच में मैं भटक जाता इस जंगल में

. एल्फ- ये तो मेरा फ़र्ज़ था अच्छा अब में चलता हु .

ये कहकर वो बहा से बापिस लौट गया. में आगे बाद गया उस पहाड़ के ऊपर की तरफ. बड़ी hi मुश्किल चढाई थी लेकिन हिम्मत के साथ आगे बढ़ता गया और आखिर कार पहाड़ पैर चढ़ गया. अब दिक्कत ये थी की में अब कहा जाऊ. क्युकी पहाड़ पैर तो आज्ञा था लेकिन इसके अंदर जाने का कोई रास्ता तो था नहीं. न hi कोई gufa.ek तरफ जंगल था दूसरी तरफ गहरी खाई. और उसी के उस तरफ फिर से जंगल. जहा बही जीव रहते होंगे जिनके बारे में उस एल्फ ने बताया था. मुझे समाज नहीं आरहा था की कहा जाया जाये. और जब कोई रास्ता नहीं होता तब गुरुदेव की याद आती है. इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और गुरुदेव का स्मरण किया. और थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आने लगी

मैं- प्रणाम गुरुदेव

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव मुझे आगे का मार्ग दिखाए में कहा जाऊ मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा है.

गुरुदेव- vats.isme मैं तुंहारी मदद नहीं कर पाउँगा. तुम्हे स्वयं hi रास्ता ढूंढ़ना होगा. ये तुंहारी परीक्षा है वत्स. तुम्हे होने धैर्य का प्रदर्शन करना होगा. उतावलापन छोड़ना होगा.

मैं- में समाज गया गुरुदेव. धन्यबाद

गुरुदेव- कल्याण हो वत्स

ये कहके वो चले गए.

अब मैंने सोचा की यहाँ खली बैठने से कुछ होगा नहीं. तो सोचा ध्यान में hi बैठा जाये. सायद कोई रास्ता निकल आये. इसलिए मैं बही पहाड़ी पैर बैठ गया ध्यान की मुद्रा में. और अपनी आँखों को बंद किया और मंत्र का उच्चारण करने लगा. में सब भूल गया की में कहा हु क्यों हो. बस ध्यान में hi कीं होने लगा धीरे धीरे. न hi समय की कोई सीमा न hi बंधन सब छोड़ कर ध्यान करने लगा और महादेव का नाम जपने लगा.



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 40

में कब तक ध्यान में बैठा रहा इसका मुझे थोड़ा भी अंदाजा नहीं था. में ध्यान में पूरी तरह लीं था. बस गुरुदेव के द्वारा दिए गए मंत्र का जाप करने में. तभी मुझे एक आवाज सुनाई दी.

आवाज बहुत तेज़ थी ऐसा लग रहा था की जैसे जिसकी वो आवाज है वो मेरे सामने hi खड़ा हुआ है. उन आवाजों की बजह से मेरा ध्यान टूट गया और मैंने आँखे खोली तो मेरे सामने लगभग 20-20 फट के बहुत hi लम्बे और भयानक जीव खड़े हुए थे. इतने भद्दे थे की देख कर hi उलटी हो jaye.vo मुझे घूर रहे थे. और वो कुल 4 थे. मुझे लगा शायद ये वही जीव है जिनके बारे में इस एल्फ ने बताया था. सायद सूंघते हुए आगये होंगे. इसलिए में खड़ा हुआ.

मैं- कोण हो तुम सब.

मैंने जोर से बोलै ताकि मेरी आवाज उनके कानो तक पहुंच सके. तभी मेरे पीछे से किसी की आवाज आई इस आवाज को में जनता था. ये एल्फ की आवाज थी

एल्फ- ये बही जीव है जिनके बारे में मैंने बताया था. ये तुम्हारी भासा नहीं समझेंगे.

मैं- तुम यहाँ क्या कर रहे हो. तुम्हे तो यहाँ आने से मन किया गया है न.

एल्फ- है लेकिन मैंने इन जीवो को तुम्हारे पास आते हुए देखा था इसलिए में तुम्हारी मदद करने आया हु.

मैं- किस प्रकार की मदद

एल्फ- यहाँ से भागने की मदद.

मैं- में नहीं भागने वाला कही भी. अगर तुम इनकी भासा जानते हो तो इनको कहो की अगर अपनी जान प्यारी है तो बापिस लौट जाये. वर्ण सभी का सर्वनाश कर दूंगा में.

एल्फ- तुम समाज नहीं रही हो. ये हमें मसल कर रख देंगे. और दूसरी बात इनके पास अमरता का वरदान है

मैं- ये संभव नहीं हो सकता. इस पृथ्वी पैर कोई अमर नहीं है. फिर ये कैसे हो सकते है.

एल्फ- ये बैसि अमरता नहीं है. दरअशल इनको ये वरदान है की ये काम से काम 1000 साल तक जिन्दा रहेंगे. इन सालो में इन्हे कोई नहीं हरा सकता और न hi उन्हें मार सकता है. इसलिए जब तक इनकी आयु समाप्त नहीं हो जाती ये अजेय है और अमर भी.

मैं- अगर ऐसी बात है तो बकै चिंता का विषय है. फिर भी उनसे बात तो करनी hi होगी. आखिर ये चाहते क्या है.

एल्फ- इन्हे बस अपना भोजन चाहिए जो की हम है.

मैं- लेकिन इन्होने अभी तक हम पैर हमला क्यों नहीं किया. ये चाहते तो जब में बैठा हुआ था ध्यान में तब hi मेरा काम तमाम कर देते.

एल्फ- क्युकी ये उसी पैर हमला करते है जो पहले इन पैर हमला करता है. अगर हम ऐसे hi शांति से खड़े रहे या यहाँ से भाग जाये तो ये हमें कुछ नहीं करेंगे. लेकिन अगर हमने इनके ऊपर एक पत्थर भी फेका तो फिर हमारा बचना न मुमकिन है.

मैं- फिर तो कोई बात hi नहीं है. मैं- बापिस से ध्यान में बैठ जाता हु. ये ऐसे hi खड़े rahenge.hamla तो करेंगे नहीं

एल्फ- दरअशल इसमें भी एक समस्या है. इनका प्रभाव बहुत hi खतरनाक है. हम न चाहते हुए भी इन पैर हमला कर hi देते है. अगर ये हमारे सामने रहे तो इनके प्रभाव से हम इन्हे किसी न किसी तरह ललकार hi देंगे. और अगर आप ध्यान में बैठेंगे तो भी ये शोर मचाते रहेंगे ताकि आपका ध्यान पूरा न ho.jaise उन्होंने अभी किया.

मैं- तो अब क्या किया जाये.

एल्फ- एक hi रास्ता है. भाग लो यहाँ से

एल्फ की बातो से मुझे भी यही लग रहा था की भागना hi सही. रहेगा. लेकिन फिर ये ख्याल आया की वो ाँस को कैसे पाउँगा अगर यहाँ से भाग गया तो. और गुरुदेव ने भी कहा था की धैर्य बनाये रखना है. लगता है यही है वो परीक्षा जिसमे मुझे खरा उतरना है. इसलिए मैंने तय किया की में अब बिना ध्यान किये hi यहाँ बैठूंगा इनके सामने और इनपर हमला न करने की कोसिस करूँगा और अपना धैर्य बनाये रखूँगा.

मैं- तुम्हारा कहना सही है एल्फ लेकिन में यहाँ से कही नहीं जा सकता हु. मुझे यही पैर रुकना होगा.

एल्फ- लेकिन कैसे रुकोगे. तुम किसी न किसी तरह इन पैर हमला कर hi डोज. और फिर यहाँ युद्ध सुरु हो जायेगा

मैं- में अपने आप पैर पूरा नियंत्रण रखूँगा की इनपर में बिलकुल भी हमला न karu.baki जैसी महादेव की इक्छा.

एल्फ ने काफी समझाया मुझे लेकिन में उसकी नहीं मन और बही पैर नीचे बैठ गया. लेकिन एल्फ की बात जब मैंने नहीं मणि तो वो पहाड़ी से नीचे चला गया. और में बही बैठा रहा. अब मेरा समय बिलकुल भी नहीं कर रहा था मेरे सामने वो चारो एल्फ भी बैठ गए थे. और इन्तजार कर रहे थे की कब में उनपर कोई हमला करू. लेकिन मैंने कुछ नहीं किया. हलाकि मेरी बहुत इक्छा हो रही थी की इनसे में लाडू और इनको दिख दू की में क्या चीज़ हु. लेकिन मैंने बैसा नहीं किया अपने मन को बहुत hi कोसिस करके मैं काबू में रखे हुए था. लेकिन ये कब तक चलने वाला था पता नहीं. सायद जब तक ये जीव खुद यहाँ से नहीं चले जाते. दोपहर से शाम हुई और शाम से रात. मुझे न तो भूक लग रही थी न hi प्यास. बस में एक तक उन्हें देख रहा था. और वो मुझे. ऐसे hi कई दिन निकल गए लेकिन में अपनी जगह से नहीं hila.mera दिमाग हिलने लगा था मेरा गुस्सा बाद रहा मेरे दिमाग में पागलपंती चालू हो गयी थी. लेकिन में किसी तरह उसे काबू में रखे हुए था. में नहीं चाहता था की दिमाग की एक गलती सभी पैर भरी पड़े इसलिए में डाटा रहा अपनी जिद पैर कितने दिन पता नहीं. अगर गिनती की जाये तो करीब 7-8 दिन. लेकिन में बैसा hi बैठा हुआ था. और आखिर कार वो दिन ाही गया जब वो जीव अपनी जगह से हिले और खड़े हो गए और बापिस से उस खाई के दूसरी तरफ चले गए एक एक करके. वो चार थे इसलिए इक दिन में एक hi जाता था और अगला उसके दूसरे दिन. ऐसे hi चार दिनों में बहा से सभी जीव चले गए. सायद उनकी उम्मीदों पैर पानी फिर गया था. सभी के जाते hi एल्फ मेरे पास आज्ञा और उसने मुझसे कहा.

एल्फ- बकै में तुमने कमाल कर दिया. इतने दिनों तक तुमने जो धैर्य और संयम का परिचय दिया है बैसा कोई नहीं कर सकता इस संसार में. तुम अद्भुत हो देव.

मैं- टैरिफ के लिए सुक्रिया एल्फ. लेकिन अगर तुमने मुझे साबधान नहीं किया होता तो में उनसे लड़ जाता और सारा काम ख़राब हो जाता. इसलिए असल में तुम्हारी मदद के बिना ये संभव नहीं हो पता. इसलिए टैरिफ के हक़दार तो तुम हो.

एल्फ- मुझे जो सही लगा मैंने बैसा hi किया.

अभी हमारी बाटे चल hi रही थी की अचानक से एक और आवाज मेरे कानो में पड़ी.

मैं- कोण है

मेरे ये कहते hi मेरे सामने एक रौशनी उत्पन्न हुई.

ये देखकर उस एल्फ ने भी अपने हाथो को जोड़ उस रौशनी को प्रणाम किया और बहा से चला गया.

मैंने अपने हाथो को जोड़ा.

आवाज- वत्स मैं प्रसन्न हु तुमसे.

मैं- आपको है

आवाज- वत्स में पृथ्वी हु.

मैं- प्रणाम पृथ्वी माता.

पृथ्वी- वत्स तुमने अपने धैर्य का बहुत hi खूब परिचय दिया है. तुमने उन जीवो के सामने बैठ कर उनपर बिना हमला किया समय निकला है. और तुम चाहते तो उनपर हमला कर सकते थे या फिर जब इस पहाड़ को तोड़ कर अंदर भी जा सकते थी. तो तुमने बैसा किया क्यों नहीं.

मैं- माता मैंने अपने स्वप्न में देखा था की जो भी इस पहाड़ को तोड़ने की कोसिस करता है उसका विनाश हो जाता है. और मेरे गुरुदेव ने भी कहा था की केवल अपना धैर्य बनाये रखना. इसलिए मैंने कुछ भी नहीं किया.

पृथ्वी- मतलब अगर तुम्हे वो स्वप्न नहीं आया होता तो तुम इसको तोड़ने की कोसिस करते.

मैं- नहीं माता. में बही करता जो मुझे गुरुदेव कहते. अगर वो तोड़ने को कहते तो में तोड़ता. परन्तु उन्होंने शक्तियों का इस्तेमाल करने को मन किया था. इसलिए मैंने केवल प्रतीक्षा की. ताकि कोई रास्ता मिल सके मुझे.

पृथ्वी- अच्छा वत्स तुम्हे अगर वो ाँस मिल जाता है तो तुम उससे क्या करोगे.

Main-mata गुरुदेव के अनुसार मेरा जन्म असुरो के विनाश के लिए हुआ है. और इस दिव्यास्त्र को सँभालने के लिए. ताकि कोई भी बुरी शक्ति के हाथो में ये विनाशकारी शक्ति न आये. इसलिए में नहीं करूँगा जो मेरा दायित्व है जिसके लिए मेरा जन्म हुआ है.

पृथ्वी- वत्स तुम्हे ज्ञात है तुम कबसे यहाँ हो.

मैं- माता सायद 12-14 दिवस हो चुके होंगे.

पृथ्वी- सही कहा वत्स. और तुम इतने दिनों से बिना भोजन और पंज के ऐसे hi बैठे हुए हो. मैंने तुम्हे देखा है. तुमने एक पल के लिए भी अपना ध्यान भांग नहीं किया. और तुम्हारे इस समर्पण से में प्रसन्न हुई. और इसी लिए मैं खुद तुम्हारे पास आई हु. तुम्हे तुम्हारी मजिल तक पहुंचने के लिए.

मैं- ये तो मेरा सौभाग्य होगा mata.jo आपके दिव्या रौशनी के दर्शन हुए मुझे. में आपको सात सात नमन करता हु माता. और सरे पृथ्वी वासियो की तरफ से आपसे शमा मांगता हु. क्युकी मनुस्यो ने आपको बहुत नुकसान पहुँचता है. और आपको धन्यबाद देता हु की आपने हर जीव को अपने अंदर िस्थान दिया है. आपने सभी को हमेशा hi शमा दान दिया है.

पृथ्वी- तुम सच में महँ वो वत्स. में प्रसन्न हु तुमसे. आओ अब में तुम्हे तुम्हारी मजिल तक ले जाती हु.

उसके बाद रौशनी इतनी ज्यादा बाद गयी की मुझे सब कुछ दिखना बंद हो गया. सिर्फ सफ़ेद रौशनी के आल्वा कुछ नहीं था मेरे आस पास. और थोड़ी hi देर में वो रौशनी काम हो गयी और जब काम हुई तो मैंने अपने आस पास देखा तो में किसी गुफा जैसे बंद कमरे में आज्ञा था. जो बिलकुल बैसा hi था जैसा मैंने आपने में देखा था. मैंने अपने पीछे मुद कर देखा तो वो ाँस अपनी रौशनी बिखेर रहा था.

पृथ्वी- वत्स यही है वो महँ दिव्यास्त्र के एक ाँस. जिनका काम और नाम पृथ्वी hi है. ये मेरे hi ाँस का एक छोटा सा भाग है.

ये सुनकर मैंने उस ाँस को प्रणाम किया.

मैं- माता अब मुझे क्या करना होगा.

इस पैर वो हसने लगी.

पृथ्वी- वत्स तुम सच में भोले हो. जाओ और जाकर उस ाँस को अपने हाथो में ले लो बाकि का कार्य वो खुद कर लेगा.

मैं- जो आज्ञा माता.

मैं अपने हाथो को जोड़ कर आगे बड़ा जैसे जैसे उस रौशनी के करीब आरहा था मेरा मन और भी ज्यादा shan't होता जा रहा था. में उस ाँस के बिलकुल करीब पहुंच गया. और मैंने उन्हें फिर से प्रणाम किया और उसके बाद अपने हाथ को आगे बढ़ाया और ाँस के नीचे अपनी हथेली को खोल दिया. ऐसा करते hi वो ाँस मेरी हथेली पैर आज्ञा. और आते hi वो ाँस मेरे हाथो से होता हुआ seedha.mere सरीर के उन हिस्सों में समां गया जो हमारे शरीर में पृथ्वी को दर्शाते है. जैसे की हमारी haddiya,dant,maas और हमारी चमड़ी. और इन ाँस के प्रवाह से मेरे ये सभी हिस्से एक डैम से अटूट हो चुके थे. इनको अब चाहे कुछ भी क्यों न उन्हें इतनी सी भी खर्च नहीं आने वाली थी. हलाकि ये शक्तिया पहले से थी मेरे अंदर लेकिन पहले उनकी लिमिट थी लेकिन अब कोई लिमिट नहीं है. लेकिन एक सवाल भी आरहा था मेरे मन में.

मैं- माता ये तो दिव्यास्त्र के ाँस है. फिर ये मेरे अंदर क्यों समां गए.

पृथ्वी- वत्स ये ाँस दिव्यास्त्र के अंदर hi समाये है.

मैं- में समझा नहीं माता.

पृथ्वी- वत्स कहने का अर्थ ये है की जब तक इस दिव्यास्त्र के पांचों भाग जागृत नहीं हो जाते. तब तक हर भाग तुम्हारे अंदर hi निवेश करेंगे. और जब उसके सभी भाग तुम्हारे अंदर समाहित हो जायेंगे तब ये भाग फिर से जुड़ जायेंगे तुम्हारे सरीर में. और एक संपूर्ण दिव्यास्त्र का रूप ले लेंगे. जिसका तुम जब चाहे तब इस्तेमाल कर सकते हो.

ये सब सुनने के बाद में साडी बाटे समाज गया.

मैं- में समाज गया माता. परन्तु माता अब में 7 दिनों से यहाँ हु तो मेरे दोस्त और परिवार वाले सभी चिंतित हो रहे होंगे मेरे लिए.

पृथ्वी- नहीं वत्स. तुम अपनी शक्ति से उसी समय में बापिस जा सकते हो जब तुम गायब हुए थे.

मैं- क्या ये प्रकृति के नियमो के खिलाफ नहीं होगा.

पृथ्वी- नहीं वत्स. तुम अभी जिस हिस्से में हो यहाँ समय अलग तरह से कार्य करता है. तुम अपनी शक्तियों के इस्तेमाल से उसी समय में बापिस जा सकते ho.isse कोई भी नियम नहीं टूटेगा.

मैं- ठीक है माता आपका बहुत बहुत आभार जो आपने मेरा मार्गदर्शन किया.

पृथ्वी- ये मेरा फ़र्ज़ था वत्स. अब जाओ और समस्त जीवो का कल्याण करो. विजयी भाव.

ये कहके वो चली गयी. और उसके बाद मैंने अपनी आँखों को बंद किया और अपनी तीसरी आँख से मुझे बापिस ले जाने को कहा मैंने अपने होटल का स्मरण किया. और अगले hi पल में अपने कमरे में था. मैंने टाइम देखा तो अभी सुबह के 7 बज रहे. थे. मतलब की मैं 7 बजे उस गुफा के बहार था. और इसके बाद hi में अंदर गया था. तो में उसी समय पैर यहाँ बापिस आज्ञा.

अब मेरे पास एक ाँस आचुका था और अब में जनता था की खतरा और बाद गया है. असुर मुझसे इसे छीनने का प्रयास तो जरूर करेंगे किसी न किसी तरह. अब इसलिए मुझे ज्यादा सभ्दान रहना पड़ेगा.

बही दुरी तरफ शुक्राचार्य का दिमाग घूम गया था. क्युकी उन्हें ये पता चल चूका था की पहला ाँस उस शक्ति के हाथ लग चूका है. लेकिन अभी तक उन्हें उस शक्ति के बारे में कुछ भी पता नहीं चला था. क्युकी जब से उन्हें ये पता चला की ाँस जागृत हो चूका है तब से hi उनके सरे असुर उस पहाड़ की खोज में लगे हुए थे. क्युकी जिस जिस को भी उस अस्त्र की लालसा थी. अस्त्र ने उन सभी के सपने में जेक अपने जागृत होने का और अपनी जगह के बारे में बताया था. जैसे देव को बताया था वैसे hi शुक्राचार्य को भी बताया था. और उन्होंने सरे कामो को छोड़ कर उसकी खोज जारी कर दी थी. और देव के बारे उन्हें पता करना था लेकिन पहले उस ाँस का पता करना था. लेकिन अब बो नकमयाद हो चुके थे. इसलिए boura(pagla) गए थे.

इसलिए उन्होंने अपनी साडी शक्तियों से ध्यान में ये पता किया की उस ाँस की ज्योति किस जगह पैर ज्यादा चमक रही है. जो की पचमढ़ी hi थी. क्युकी देव बही था. इसलिए उन्होंने अपने असुरो को बहा पैर भेज दिया और मयासुर को भी. ताकि वो कोई छल कपट करे या कुछ भी करे लेकिन वो ाँस उससे बापिस ले आये. अब मयासुर और उसके साथ कई असुर और देव और उसके साथ उसके दोस्त सभी इस वक़्त पचमढ़ी में थे. बही शुक्राचार्य ने यज्ञ से प्राप्त दिव्यादृस्ति को जागृत किया और अपने असुरो को देखने लगे. क्युकी उन्हें ये पता था की जैसे hi वो शक्ति किसी असुर के संपर्क में आएगी उन्हें उस शक्ति का चेहरा दिख जायेगा और साथ में उसकी जानकारी भी.

बही देवराज और सरे देवता ये देख रहे थे और थोड़े चिंतित भी थे की अब आगे क्या होने वाला है. और ब्रह्मदेव ने उन्हें देव की मदद करने से रोक दिया था. वो चाहते थे की देव खुद hi अपनी और सबकी मदद करे. इसीलिए देवराज थोड़े ज्यादा चिंतित थे. क्युकी उन्हें एक भीसाद युद्ध की आशंका हो रही थी.

पवनदेव- देवराज हमें काम से काम अर्णव को सावधान करदेना चाहिए.

इंद्रदेव- मुझे भी यही लगता है लेकिन हाँ फिलहाल कुछ नहीं कर सकते. ब्रह्मदेव का आदेश है किसी भी प्रकार की मदद हमारी तरफ से नहीं मिली चाहिए अर्णव को. इसलिए हम देखने के आल्वा कुछ नहीं कर सकते है. बस महादेव से प्रार्थना करो को देव इस मुश्किल का जल्दी hi कोई हल धुंदले और सभी असुरो का विनाश कर दे.

ये सुनने के बाद बाकि देवगढ़ भी अपने हाथो को जोड़ कर महादेव से प्रार्थना करने लगे. की अर्णव की रक्षा करे. हलाकि वो खुद भी जानते थे की अर्णव ये संभल सकता है. परन्तु उन्हें चिंता तो हो hi रही थी. जिसका कोई अंत नहीं था.

बही करीब 9 बजे तक सभी जाग गए. उनकी साडी थकन भी मिट गयी थी. सरे लोग रेडी होक नीचे पहुंचे. हमने पहले तो पेट भर नास्ता किया और उसके बाद हमने थोड़ा घूमने का प्लान बनाया की कहा कहा जाना है. बैसे तो बहुत जगह थी यहाँ देखने के लिए. लेकिन हमने कुछ खास जगहों का चयन किया. जैसे पांडव केव, silvarfall,national पार्क और कुछ हिल्स और कुछ मंदिर. हमने होटल से एक गाइड की मांग की जो हमें साडी जगह घुमा सके. तो उन्होंने एक आदमी को हमारे साथ कर दिया. और हाँ निकल पड़े. वो हमें सबसे पहले पांडव केव ले गया और उसके बाद नेशनल पार्क. जहा हमने कई जानवरो को देखा. और उसके बाद ाम्गये हम सीधे झरने पैर जहा का मनमोहक दृश्य देख कर हमारी साडी थकन मिट गयी. और लकी और चिराग तो अपने कपडे उतार कर तुरंत hi बहा नहाने चले गए. लेकिन प्राची भी साथ में थी इसलिए में नहीं गया. उस बही एक चट्टान पैर बैठ गया. और मेरे साथ प्राची

प्राची- तुम भी जाओ नाहा लो.

मैं- फिर तुम अकेली यहाँ क्या करोगी.

प्राची- क्या बात है मेरे लिए इतनी बड़ी क़ुरबानी

मैं- क्या करे अब दोस्ती की है तो कुरवानी तो देनी hi पड़ेगी. बैसे तुम बताओ क्या चल रहा है आज कल. काफी टाइम से बात hi नहीं हुई है तुमसे.

प्राची- चलो तुम्हे कमसे काम याद तो आया.

मैं- है अब आज्ञा तो बता दो. बैसे सलग में कोई पसंद आया क्या.

प्राची- है एक लड़का है थोड़ा अकड़ू सा. बही मुझे पसंद आज्ञा है.

मैं- कोण है वो दुखनसीब.

प्राची- क्या दुखनसीब.

मैं- है भाई. अब तुमने उसे पसंद किया है तो दुखनसीब hi हुआ न. क्युकी तुम तो उसकी बंद बजा के रख डौगी.

प्राची- वैरी फनी.

और प्राची ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया. और में मन hi मन हसने लगा.

मैं- ok ok ी म सॉरी. ी म जस्ट जोकिंग.

प्राची- ठीक है कोई बात नहीं. तुम बताओ दिल्ली में कोई पसंद आयी खा.

मैं- दिल्ली में तो नहीं लेकिन एक लड़की है जो पसंद आई है. लेकिन मामला अभी आगे नहीं बड़ा है. बाकि देखते है क्या होता है आगे

ये सुनते hi प्राची का चेहरा एक डैम से लटक गया उसे कुछ समाज में नहीं आया की आगे क्या बोलू.

मैं- क्या हुआ मुँह क्यों लटक गया.

ये सुनते hi उसने दूसरी तरफ चेहरा कर लिया और बोली. जैसे मुझसे नजरे छिपा कर.

प्राची- कुछ नहीं. बैसे कोण है वो मुझे भी बताओ. सायद में कोई हेल्प कर सकू.

मैं- जब बात कुछ बनती दिखेगी तब बताऊंगा तुम्हे और मिलवा भी दूंगा.

प्राची- क्या यार मुझे तो बता hi सकते हो. कोई हिंट hi दे दो.

मैं- ठीक है अब इतना कह रही हो तो बता देता हु. वो हमारी hi क्लास में है.

ये सुनते hi उसकी साडी उम्मीद hi टूट गयी. उसे लगा जैसे उसका सब कुछ छीन गया हो. और वो बहा से उठ गयी.

मैं- कहा जा रही हो.

प्राची- ी म नॉट फीलिंग वेल. में होटल बापिस जा रही हु.

मैं- ठीक है में भी चलता हु.

प्राची- नहीं में बो गाइड के साथ चली जाउंगी.

ये कहकर उसने गाइड को बुलाया और उसे होटल बापिस छोड़ने को कहा.

मैंने भी उसे कहा की उसे होटल बापिस ले जाऊ.

तो गाइड बहा से चला गया प्राची को लेके होटल.

मैं- (मन में) सॉरी प्राची. लेकिन तुम्हारा यहाँ से जाना जरुरी था. क्युकी यहाँ कुछ भयानक होने वाला है और में नहीं चाहता की तुम्हे कोई नुकसान पहुंचे.

ये कहकर में उस झरने के पास से चुपके से जंगल के अंदर चला गया. वो दोनों फिलहाल नहाने और मस्ती में ब्यस्त थे. उन्हें कोई खबर नहीं थी की में कहा हु या प्राची कहा है. जो अच्छी बात थी मेरे लिए.

में जंगल में आया और अपनी आँखों को बंद किया. और तीसरी आँख से देखने लगा की कही यहाँ आसपास असुर तो नहीं है. क्युकी मुझे उनके होने का एहसास हो रहा था. और जो कवच मैंने पृथ्वी के ऊपर बनाया था उससे भी मुझे जानकारी मिली थी की कुछ असुर पृथ्वी के अंदर आये है. और मेरी उनपर तभी से नजर बानी हुई थी. और वो सीधे इसी इलाके में आये थे. और उनके आते hi और असुरो के पास होने के संकेत मिलने लगे. जो यहाँ मौजूद लोगो के लिए सही बात नहीं थी.

खैर मुझे वो सरे असुर दिखने लगे थे. वो मुझसे ज्यादा दुरी पैर नहीं थे. लेकिन मुझे इनको इस इलाके से दूर ले जाना था. इसलिए मैंने खुद को गायब किया और उनकी अपोजिट डायरेक्शन में उड़द गया. ताकि सबको उस दिशा में बुला सकू.

तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 41



में दूसरी तरफ पहुंच चूका था और उन असुरो को कोई आईडिया नहीं था की में इस वक़्त कहा पैर हु. इसलिए वो सभी उस झरने के पास hi आगे बाद रहे थे. और उसे घेरने की कोसिस कर रहे थे. सभी असुर झुण्ड बनाकर चल रहे थे. इसलिए मैंने अपना हाथ जमीन पैर रखा और असुरो की एक टुकड़ी की तरफ देखा और हाथ को जोर से जमीन पैर पटक दिया. और उसका ये प्रभाव हुआ की जमीन में एक दरार हो गयी और वो आगे बाद गयी सीधे उन असुरो की एक टुकड़ी की तरफ और तेज़ गति से आती हुई उस दरार को किसी ने नहीं देखा जैसे hi दरार उन असुरो के पैरो के नीचे पहुंची मैंने अपने दोनों हाथो को जोड़ा और फिर धीरे धीरे अलग कर diya.or ऐसा करते hi वो दरार एक दम से चौड़ी हो गयी इतनी चौड़ी की जितने भी असुर उसे दरार के आसपास थे वो सरे hi उसने जा गिरे. और उनके गिरते hi मैंने फिर से अपने हाथो को जोड़ दिया. और वो दरार फिर से जुड़ गयी. ये सीन कुछ असुरो ने देख लिया जो उनसे थोड़ी दुरी पैर थे. उन्हें कुछ समाज में नहीं आया की अचानक से वो असुर कहा गायब हो गए. उसने अपनी टुकड़ी के मुख्या से बात की और अपनी टुकड़ी को उस दरार के पास ले आया. बहा वो चारो तरफ देखने लगे लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला. तब मैंने फिर से अपने हाथो को अलग कर दिया और ऐसा करते hi वो टुकड़ी भी उसी दरार में जा गिरी और मैंने फिरसे अपने हाथो को जोड़ लिया. और वो दरार फिर से जुड़ गयी. मैंने उनकी लगभग आधी संख्या को जमीन में दफ़न कर दिया था. और अब बाकिओ की बरी थी. फिर मैंने ऐसे hi बाकि के असुरो की टुकड़ी को भी एक एक करके जमीन में दफ़न कर दिया. उन्हें तो समाज में hi नहीं आरहा था की आखिर हो क्या रहा है. बाकि की सेना परेशान थी क्युकी उनकी संख्या अब काम हो गयी थी. तभी कुछ हुआ. जंगल के सरे पेड़ अचानक से हिलने लगे बहुत जोर से. हवा बहुत तेज़ चलने लगी थी. लेकिन मुझे हिला नहीं प् रही थी. इस हवा को महसूस करते hi में समाज गया की मयासुर आज्ञा है यहाँ पैर. और अब बो फिर से कोई गलत माया रचेगा. हवा की गति बढ़ती जा रही थी और उसमे आसपास के पेड़ उखाड़ने लगे थे. और मुझे दिख रहा था की जितने भी लोग इस जंगल में मौजूद है वो भी अब हवा में उड़ने लगे थे. जिनमे मेरे दोस्त भी शामिल था.

इसलिए मैंने अपने दोनों हाथो को फैलाया और अपनी आँखों को बंद किया. और जब मेरी आँखे खुली तो मेरी तीनो आँखे एक साथ खुली हुई थी जो साफ़ साफ़ दिख जाती किसी को bhi.uske बाद मैंने हवा में अपने हाथो को लहराना चालू किया जिससे जो ब्बि हवा आसपास बह रही थी वो मेरे हाथो के कण्ट्रोल में आने लगी. उस हवा को मैंने काफी तेज़ गति में गोल गोल घूमना स्टार्ट किया अपने हाथो की मदद से इतना तेज़ की वो एक बड़े बबंडर में बदल gya.jaise hi वो बबंडर रेडी हुआ मैंने उसे जंगल के अंदर धकेल diya.sari हवा को अपने अंदर लेने के लिए. और ये आईडिया काम कर गया. जहा से भी वो बबंडर गुजरता बहा की साडी मयाबी हवा को वो अपने अंदर लेने लगा. उसने पुरे जंगल का चक्कर लगाया स्पीड में और थोड़ी hi देर में सरे जंगल की मयाबी हवा उस बबंडर में समां गयी. जिनमे वो मयाबी असुर भी शामिल थे जो अभी तक बचे हुए थे. वो भी अब उस बबंडर में गोल गोल घूम रहे थे. बाकि सारा जंगल फिर से नार्मल हो गया था. अब मैंने उस बबंडर को ऊपर आकाशगंगा की तरफ फेल diya.vo उड़ता हुआ सीधा आसमान में चला गया. उसके जस्ट बाद मैंने मैंने मेघों का आवाहन किया. ये कोई साधारण मेघ नहीं थे. मुझे पता था की मयासुर कही छिपा हुआ है. वो सामने नहीं आएगा. वो मुझे दिख नहीं रहा था. इसलिए ये मेघ उसका पता लगाएंगे. फिर चाहे वो अदृश्य hi क्यों न हो. पोरे जंगल में अँधेरा छ गया. बचे खुचे असुर घबराने लगे की ये क्या हो रहा है. कुछ को लगा की शायद मयासुर ये कर रहा है. उन मेघों ने जब अपनी गर्जना की तब अच्छे अच्छा की दहाड़कर रुक जाये. इतनी जोर की गर्जना थी. और फिर हुई मूसलाधार बारिश शुरू. सरे लोग बहा से भागने लगे. मेरे दोस्त मुझे ढूंढ रहे थे. लेकिन में उन्हें मिलु kaise.jaise hi ये बारिस की बुँदे असुरो पैर गिरी उनकी सरीर में बहुत hi तीब्र जलन होने लगी. और वो यहाँ बहा भागने लगे. उन्हें समाज नहीं आरहा था की ये बारिस आखिर है किसकी. क्युकी पानी से सेटलता आती है लेकिन उनको जलन हो रही थी. ठीक ऐसी hi जलन किसी और को भी होने लगी थी. और वो था मयासुर. जो एक पेड़ बनकर उसी जंगल में छिपा हुआ था. ताकि सब देख सके और अपनी माया आराम से रच सके. मैंने बिजली के तेज़ी से उसके पास गया. और एक पॉवरफुल पंच दिया उस पेड़ को. और पंच लगते hi वो पेड़ दो टुकड़ो में बात गया. और मयासुर बहा से भागने की कोसिस करने लगा लेकिन मेरी बर्षा से कैसे बच सकता था वो. उन सब के सरीर की जलन अब बहुत बाद चुकी थी. उन्हें समाज नहीं आरहा था की क्या करे क्या न करे. वो दर्द में चिल्ला रहे the.jinme मयासुर भी शामिल था. पानी उनकी जलन को और बड़ा रहा था. जिस बजह से वो कुछ भी नहीं कर प् रहे थे. अपने आप को नोचने लगे थे वो लोग. सभी अपने अपने सरीर को होने नुकीले नाख़ूने से नोचने लगे थे. कभी गर्दन पैर तो कभी पैट पैर. लेकिन उन्हें कुछ सफलता नहीं मिल रही thi.tab मैंने बिजली गिरनी सुरु की. एक एक per.mujhe सभी के बारे में पता था की वो इस वक़्त कहा पैर खुद को नोच रहे है. एक एक करके बिजली इनपर गिरने लगी. और उनका शरीर रख में बदलने लगा. मयासुर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन उनका कोई असर नहीं हो रहा था. वो खुद के गुरुदेव से मदद मांग रहा था लेकिन वो इस वक़्त ध्यान में बैठे हुए थे. और देव को देखने की कोसिस कर रहे थे. लेकिन देव उन्हें दिख नहीं रहा था क्युकी वो इस वक़्त अदृश्य था. बिलकुल किसी हवा की तरह. लेकिन मयासुर था बहुत होशियार उसने अपनी संपूर्ण शक्ति का इस्तेमाल किया और अपने ऊपर एक सुरक्षा कवच बना लिया. और वो कवच बनाकर वो बहा से भाग गया. और मेरे वॉर से बो बच निकला. लेकिन उसके अंदर जो जकाँ हो रही थी वो इतनी आसानी से नहीं मिटने वाली थी. बाकि शुक्राचार्य क्या करते है पता नहीं.

सरे असुरो का विनाश हो चूका था. इसलिए मैंने बारिस को बंद करदिया. और फ़ौरन hi बहा से में पंहुचा अपने दोस्तों के पास जो एक चट्टान के पास छिपे हुए थे. और मुझे आवाज लगा रहे थे. मैंने खुद को नार्मल किया और बारिश में भीगा हुआ इस चट्टान के पास पंहुचा. और उन्हें आवाज दी.

मैं- (जोर से) लकी चिराग कहा हो तुम दोनों.

ये आवाज उनतक पहुंच गयी और वो चट्टान से बहार निकल आये और उन्हें में सामने hi दिख गया. तो दोनों भागते हुए आगये.

मैं- कहा थे दोनों में कब से ढूंढ रहा हु तुमको.

चिराग- अबे हम ढूंढ रहे थे तुझे. अब बता कहा था तू.

मैं- वो में प्राची के पीछे पीछे गया था होटल तक. वो अकेली गयी थी उस गाइड के साथ तो सेफ्टी के लिए. लेकिन इतने में आंधी तूफान सुरु हो गया और में लौट hi नहीं पाया. जब आंधी रुकी तब में आपया यहाँ लेकिन तुम झरने के पास थे hi नहीं. कहा गए थे दोनों..

लकी- हम तुझे ढूंढ रहे the.achha हुआ तू मिल गया चल अब चलते है होटल. कपडे चेंज करने पड़ेंगे.

मैं- ठीक है चलो

उसके बाद में उन्हें होटल बापिस ले गया. जहा प्राची भी टेंशन में थी. लेकिन हमें देखकर वो ठीक हो gyi.lekin मूड अभी भी ऑफ था uska.jo में समाज सकता था की क्यों hai.hamne फिर उस दिन आराम किया और नेक्स्ट डे बहा से निकल गए सीधे देहरादून. शाम तक हम पहुंच गए थे घर पैर. दादू- बगेरा कुश थे हमें देखकर. मैंने सभी को समझा दिया था की पचमढ़ी की बात न बताये. केवल यही कहना की बाराणसी में hi थे हम लोग. जिसे वो समाज गए. सब चीजे अब नार्मल होने लगी थी.

नेक्स्ट डे में अपने रूटीन से उठा और ऊपर ध्यान करने चला गया. ध्यान में बैठ कर में अपना मंत्र जाप करने लगा तो मुझे मेरे पहले ाँस की शक्तियों का आभाष होने लगा. जो की बहुत ज्यादा थी विनाश और निर्माण की साडी खूबियां थी इस ाँस me.is पृथ्वी पैर इस ाँस के द्वारा कुछ भी किया जा सकता था. चाहे तो महा प्रलय कर दो या फिर निर्माण. और उसकी शक्तिया में अपने अंदर महसूस कर प् रहा था. जिससे मुझे बहुत अच्छी अनुभूति हो रही थी.

नहीं दूसरी तरफ मयासुर सीधा गया था शुक्राचार्य के पास और इस दर्द का निवारण उनसे मांगने लगा. शुक्राचार्य संजीवनी विद्या में निपुण थे उनके पास मृत लोगो को जीवित करने की तक शक्ति थी. जो उन्हें शिव जी से वरदान स्वरुप मिली थी और उन्होंने इसका कई बार इस्तेमाल भी किया था कई असुरो को जीवित करने में. और उसी संजीवनी के मदद से उन्होंने मयासुर का उपचार किया और उसे पहले से भी ज्यादा स्वस्थ बना दिया.

और बही पहले ाँस के देव को प् लेने के बाद कुछ असुर महादेव के मायाजाल से बहार आचुके थे. जिनका निर्माण पृथ्वी वाले ाँस से हुआ था. जैसा गुरु परसुराम ने देव को बताया था की दिव्यास्त्र के जागृत होते hi बहुत hi खतरनाक असुर दानव जाग जायेंगे जो उस वक़्त महादेव के मायाजाल में बंदी थी. क्युकी उनका विनाश उस दिव्यास्त्र से hi हो सकता था. पृथ्वी वाले सरे असुर जागृत हो चुके थे. और इसकी सुचना शुक्राचार्य को भी लग चुकी थी जिस बजह से वो बहुत कुश थे. क्युकी उन्हें पता था की ये असुर इतनी आसानी से नहीं हारने वाले ये जरूर उस शक्ति को कड़ी टक्कर denge.jo की उनकी बात सही भी थी सायद. वो असुर इस वक़्त पृथ्वी पैर hi मौजूद थे और एक एक करके जाग रहे थे. जैसे hi वो सरे जाग गए उन्हें शुक्राचार्य ने तुरंत hi अपने पास आने का बुलावा भेज दिया. और वो थे तो आज्ञाकारी इसलिए फ़ौरन hi चले गए. जिनकी गिनती तो फिलहाल 5 थी. पैर ये 5 hi काफी थे देव की बंद बजने के लिए. और देव इनकी बंद बजने के लिए. अब देखना ये था की इनके बीच युद्ध का क्या परिणाम होता है.

जैसे hi वो शुक्राचार्य के पास पहुंचे उन्होंने उनके गुरु को प्रणाम किया.

डी1- प्रणाम गुरुदेव.

डी2- प्रणाम गुरुदेव.

डी3- प्रणाम गुरुदेव.

डी4- प्रणाम गुरुदेव.

डी5- प्रणाम गुरुदेव.

शुक्राचार्य- मेरे सिसयो आयुष्मान भाव.

डी1- हमारे जागने का अर्थ है की दिव्यास्त्र जागृत हो चूका है. क्या उसे आपने हासिल किया

शुक्राचार्य- नहीं देवताओ ने फिर से कोई चल चली है. उन्होंने किसी बचे का जन्म किया है. जिसका जन्म साक्षात शिव के आसीर्बाद से हुआ है. उसमे असीमित शक्तिया है और उसका जन्म उसी दिव्यास्त्र को सँभालने के लिए हुआ है. और अभी तक हमने कई कोसिस की उसके बारे में जानने की लेकिन हमारे कई असुर मरे गए लेकिन उसकी इतनी सी भी जानकारी हनारे हाथ नहीं कह पाई है और उसने हमसे पहले दिव्यास्त्र के पहले ाँस को हासिल कर लिया.

ये सब सुनकर उन सभी को गुस्सा आने लगा. और वो बोले.

डी2- गुरुदेव आप आज्ञा करे अभी जेक उस शक्ति बाले बालक का सर आपके चरणों में समर्पित करता हु में.

शुक्राचार्य- लगता है तुमने मेरी बातो को ठीक से सुना नहीं है. वि बालक असीमित शक्तियों का मालिक है. मेरे कई शक्तिशाली असुर उसकी परछाई तक को नहीं छू जाये है अभी तक. उसे मारना तो दूर की बात है. और अब उसके पास वो शक्ति भी है जिससे वो तुम्हारा विनाश कर सकता है.

डी3- गुरुदेव उसके पास अभी तक वो शक्ति नहीं आई है. आपको सायद याद नहीं. हमारा विनाश संपूर्ण दिव्यास्त्र से hi संभव है उसके एक दो ाँस से हमें कोई नुकसान नहीं होगा.

शुक्राचार्य- हमें ज्ञात है इसीलिए हमने तुम सभी को यहाँ बुलाया है. ताकि तुम सभी मिलकर उसका विनाश कर सको दूसरे ाँस के जागृत होने से पहले. परन्तु याद रहे वो बहुत शातिर है. तुमपर कब हमला करेगा ये किसी को नहीं पता चलेगा. इसलिए हर समय चौकन्ना रहना होगा तुम सभी को. और उसको ढूंढ़ने का सबसे आसान तरीका है इंसान बनकर जाओ. और उसके बारे में पता करो. उसकी कमजोरियों को ढूंढो और फिर उसपर बार करो. ताकि उसके पास कोई भी मौका न ho.vo चारो खाने चित्त हो जाये.

डी1- ठीक है गुरुदेव हम बैसा hi करेंगे जैसा आपने कहा है. हम उसे कोई मौका नहीं देंगे और उसका अंत भी करेंगे.

शुक्राचार्य- और है अपने सभी साथियो को इकसठ करो ताकि तुम्हारी शक्ति मजबूत हो और वो उनके hi उलझा रहे और तुम उनके पीछे अपना काम कर सको.

डी2- ठीक है गुरुदेव. अब इस बालक का अंतिम समय नजदीक आचुका है. आप बिलकुल भी चिंतन न करे. हम उसका सर आपके कदमो में जरूर chadayenge.parantu वो बालक पृथ्वी पैर कहा रहता है कुछ पता है आपको.

शुक्राचार्य- है वो उत्तर दिशा में एक नगर है देहरादून नाम का. उसी में रहता है. क्युकी हमारे असुरो का विनाश उसी नगर से सुरु हुआ था. और देवी ने भी मुझे उसी दिशा में खोजने को कहा था. खैर मुझे विस्वास है वो बही रहता है. बाकि तुम लोग पता करलो.

डी1- ठीक है हम पता कर लेंगे. उस नगर में भी और बाकि नगरों में भी. हमें आसीर्बाद प्रदान करे गुरुदेव.

शुक्राचार्य- विजय भाव. अब जाओ और अपना कार्य सफल करो

ये आसीर्बाद पते hi वो पृथ्वी पैर दोबारा आगये. और इस बार देव के द्वारा बनाया गया कवच उन्हें नहीं देख पाया क्युकी ये पृथ्वी के ाँस से hi जीवित हुए थे. इसलिए इनके पास भी कुछ खास शक्तिया थी. जिनका इन्हे बहुत फायदा होने वाला था आगे चलकर. ये लोग सीधे पहुंचे देहरादून. इनलोगो ने सोचा की शुरुवात यही से कीजये.

ये लोग बहा पहुंचे एक पहाड़ी पैर पहुंचे. और बहा पहुंच कर इन्होने अपने सभी साथियो का ाबहन किया और उन्हें देहरादून पहुंचने का ाबहन किया. ऐसा करते hi पता नहीं कहा कहा से दानव उड़ते हुए रेंगते hue.inke पास पहुंचने लगे. ये सभी दानव रात्रि के राजा थे. जो इसी पृथ्वी पैर hi रहते है और जीवो का आहार करते है. फिर चाहे वो जानवर हो या इंसान. हलाकि इनकी शक्तिया अभी तक कमजोर थी. लेकिन जब से इनके स्वामी जाग गए तैसे इनकी शक्तिया भी बाद गयी थी. और ाबहन पते hi ये लोग उस पहाड़ पैर पहुंचने लगे. इनकी गिनती की नहीं जा सकती थी ये गिनती में बहुत hi ज्यादा थे..

जब सभी आगये तब पहले वाले ने उन्हें सम्बोधित किया.

डी1- मेरे प्यारे असुरो. एक शक्ति है जिसने हमें चुनौती दी है. हमें उसे दिखाना है की हमारे सामने कोई भी शक्ति नहीं टिक सकती है. क्या कहते है आप लोग.

ये सुनते hi सरे दानव जोर जोर से चिल्लाने लगे.

उसके बाद उसने अपने सभी दानवो को कुछ कहा और वो सुनते hi सरे बहा से चले गए. अलग अलग जगहों पैर कुछ देहरादून में hi रह गए. और उसके बाद इन चारो ने असुरो के रूप छोड़ कर इंसानो के रूप ले लिए. और नगर के अंदर चले गए.



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 42



में सुबह ध्यान में बैठा tha.or शक्तिया जागृत कर रहा था. तभी मुझे गुरुदेव की एक बात याद आई. मुझे कुछ डाउट हुआ. इसलिए मैंने गुरुदेव का ाबहन किया. और वो आगये

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- कल्याण हो वत्स. कहो

मैं- गुरुदेव आपने मुझसे कहा था की दिव्यस्त्र से जिन असुरो को फिर से जीवन मिला था वो दिव्यस्त्र के जागते hi खुद भी जाग जायेंगे. तो पहले ाँस के जागने से क्या वो जगे है

गुरुदेव- है वत्स वो जाग गए है. और तुम्हारे चारो तरफ फ़ैल भी गए है

मैं- परन्तु मुझे इसकी खबर क्यों नहीं लगी गुरुदेव. मुझे न hi कोई आभाष हुआ न कुछ. ऐसा कैसे संभव है.

गुरुदेव- वत्स वो असुर उसी ाँस से जन्मे है जिस ाँस को तुमने धारण किया है. उनके अंदर भी उसी ाँस से मिली शक्तिया है. और उन्हें तुम्हारे बारे में भी खबर है. इसलिए उन्होंने अपनी आसुरी ज्योति को छिपा लिया है ताकि तुम उनका पता न लगा पाओ. तुम्हारी शक्तियों के द्वारा

मैं- गुरुदेव आवे कहा था की उनका अंत दिव्यस्त्र से hi होगा. लेकिन अभी संपूर्ण दिव्यस्त्र जागृत नहीं हुआ है तो क्या उन्हें अभी मारा जा सकता है.

गुरुदेव- नहीं वत्स वो संपूर्ण दिव्यस्त्र की शक्तियों से hi. मरे जा सकते है. उससे पहले नहीं. और वो तुम जैसे hi काफी शक्तिशाली भी है. इसलिए मेरा यही सुझाव है की जब तक संपूर्ण दिव्यस्त्र नहीं मिल जाता तुम्हे तब तक उनसे छिप कर hi रहना और उसने उलझना नहीं.

मैं- गुरुदेव आप जानते है ये संभव नहीं है. वो मुझे सामने लेन के लिए किसी भी हद तक जायेंगे और अगर में उन्हें नहीं रोकूंगा तो चारो तरफ वो विनाश मचा देंगे.

गुरुदेव- पैर तुम उन्हें कैसे रोकोगे वत्स. वो फ़िलहाल अमर है. तुम उन्हें ढूंढ भी लोगे तब भी उन्हें मार नहीं पाओगे.

मैं- गुरुदेव. उन्हें मार नहीं सकते लेकिन कैद में तो कर सकते है न. उन्हें बैसे hi एक मायाजाल में बंद कर सकते है जैसा प्रभु ने किया था.

गुरुदेव ये सुनकर मुस्कुराते है और फिर कहते है

गुरुदेव- उचित कहा वत्स. परन्तु ये कार्य आसान नहीं होगा. वो इंसानी रूप में तुम्हारे आस पास hi है. न उन्हें पता है की असल में वो बालक कोण है और न hi तुम्हे पता है की असल में वो असुर कोण है उन्होंने किसका रूप लिया है. फिर ये कैसे करोगे

मैं- कोसिस तो कर hi सकते है गुरुदेव.

गुरुदेव- ठीक है. तुम फिलहाल shan't रहो और केवल उनके बारे में पता लगाओ की आखिर वो कोण है उन्होंने किसका रूप लिया है और जब तुम्हे ये पता चल जाये तब तुम उनका वध कर सकते हो. और है उनके पास बहुत बड़ी सेना भी है जिसे उन्होंने सभी जगह फैला दिया है. तुम उनका वध कर सकते हो. पैर संभल कर. तुम्हारे बारे में उन्हें छोटी सी भी भनक नहीं लगनी चाहिए. तभी ये करना.

मैं- में समाज गया गुरुदेव. में बैसा hi करूँगा जैसा आपने कहा है

गुरुदेव- विजय भाव वत्स.

उसके बाद वो बहा से चले गए. और में ध्यान में hi बैठ गया. और अब मैंने अपनी तिरदये को खोला और उन असुरो की सेना का पता लगाने लगा की वो कहा कहा है. और क्या कर रहे है.

तो मुझे पता चला की वो यही देहरादून की सीमा में आये थे और यहाँ से चारो तरफ निकल गए. मतलब की वो असुर भी इसी सेहर में आगये है. सायद शुक्राचार्य ने उन्हें बताया होगा यहाँ के बारे में. मैंने उन असुरो को देखने की कोसिस की लेकिन नहीं देख पाया. मुझे केवल कला धुआँ hi दिखाई दिया उनकी जगह पैर. लेकिन बाकि के असुर साफ़ साफ़ दिख रहे थे. वो कहा कहा गए ये जानकारी भी मिल गयी थी. वो सरे जीव चिप गए थे. अलग अलग जगहों पैर और कुछ करना का प्लान बना रहे थे. जैसे लोगो को गायब करना bagera.taki में उनके पीछे औ और पकड़ा जाऊ. चुकी जाना तो मुझे था hi इसलिए अब मुझे कुछ प्लान बनाने की जरुरत थी. इसलिए में ध्यान से उठ गया. और सोचने लगा की कैसे उन सभी की बंद बजा सकता हु. गायब होक जाऊ और सबकी बंद बजा दू. लेकिन मुझे लगा सायद जो असुर जगे है वो मेरी इस चल को पहचान ले और इसका कोई तोड़ भी ढूंढ ले. तब मुझे आईडिया आया की मुझे जाने की hi क्या जरुरत है में तो यही से उनकी बंद बजा सकता हु. वो कभी नहीं पता कर पाएंगे की कोण उनकी बंद बजा गया. ये आईडिया मुझे सही लगा इसलिए मैंने इसको रात में करने का फैसला किया ताकि वो सभी एक साथ हो और सभी की एक साथ बजे जा सके. लेकिन सावधानी से.

इसलिए में छत से नीचे आया और सलग के लिए रेडी हुआ. और नीचे आज्ञा. जहा माँ के हाथ का बढ़िया नास्ता किया. और उनका आसिर बाद लेके निकल गया सलग के लिए. रस्ते से चिराग को पिक किया. और उसे लेके पहुंचे सीधे सलग. जहा हमें लकी तो मिला लेकिन प्राची नहीं. इसलिए मैंने उसे कॉल किया. लेकिन उसने फ़ोन नहीं उठाया. मैंने उसके डैड को कॉल किया. तो उन्होंने फ़ोन उठा लिया.

मैं- hello अंकल कैसे है आप.

कम- बढ़िया हु तुम बताओ. उस दिन के बाद आये hi नहीं घर पैर.

मैं- आपको तो पता hi है सर. सलग से टाइम hi नहीं मिलता है. और थोड़े दिल दिल्ली में था.

कम- है प्राची ने बताया था. और बताओ

मैं- वो प्राची के बारे में पूछना था वो आज सलग नहीं आई है

कम- ओह्ह सायद उसने तुम्हे बताया नहीं.

मैं- किस बारे में बात कर रहे है आप

कम- एक्चुअली मेरा ट्रांसफर हो गया है. इसलिए में यहाँ से जा रहा हु. प्राची को भी बोलै था साथ में चलने को लेकिन पहले उसने मन किया और फिर अचानक से कल उसने साथ में जाने की बात कही. उसने अपना नाम भी कटवा लिया है सलग से

मैं- व्हाट लेकिन अंकल ये बीच सेमेस्टर में उसे कहा अड्मिशन मिलेगा. उसका पूरा साल बर्बाद हो जायेगा

कम- है मैंने भी उसे यही कहा था. लेकिन वो नहीं मणि. तब मैंने उसी सेहर के एक सलग में बात की तो उसे वो अड्मिशन देने को रेडी हो गए है. इसलिए अब टेंशन की बात नहीं है

मैं- कमाल है उसने हमें बताया भी नहीं. वो कहा है अभी मुझे उससे बात करनी है

कम- बीटा वो घर पैर hi होगी. में ऑफिस आया हु थोड़ा काम निपटने के लिए. तुम घर चले जाओ. वो बहा मिल जाएगी

मैं- ठीक है में घर जाता हु थैंक्स फॉर थे इनफार्मेशन अंकल.

कम- कोई बात नहीं बीटा. जाओ उससे मिल लो. और अगर मान जाये तो मन लो. में नहीं चाहता की तुम सब की दोस्ती मेरी जॉब की बजह से टूट जाये.

मैं- ठीक है अंकल में कोसिस करता हु

मैंने कॉल कट कर दिया. और फिर चिराग और लकी को साडी बात बताई. जिसे सुनके उनके भी होश उड़द गए

चिराग- तू मुझे ये बता की तूने उससे कुछ कहा तो नहीं था न.

मैं- मैंने उसे कुछ नहीं कहा था.

लकी- मुझे विस्वास नहीं है. जरूर तूने उसे कुछ कहा है तभी उसने जाने का मन बनाया है अब सच बता क्या कहा था उसे.

मैं- अरे यार कुछ नहीं. वो उस दिन झरने के पास उसने मुझसे पूछा था की मुझे कोई पसंद है या नहीं. तो मैंने घुमा फिर का उसको जवाब दिया था. हलाकि मेरा इशारा उसकी तरफ hi था. लेकिन वो समझी नहीं. और अब उसे सायद लगता है की में किसी और को ोासनद करता हु जो हमारी hi क्लास में है.

चिराग- माय गॉड पागल हो दोनों के दोनों.

लकी- सच कहा. अब जा उसे मन. और हो सके तो सच बता देना. वर्ण बैठे रहना फिर.

मैं- मुझे भी यही लगता है. अच्छा में जाता हु तुम लोग सलग सम्भालो.

चिराग- आल थे बेस्ट भाई.

मैं- थैंक्स.

मैं- बहा से बापिस पार्किंग में भगा और अपनी कार में बैठा और कार को सीधा भगाया उसके घर की तरफ. रस्ते में मैंने उसको फ़ोन तरय किया लेकिन फिर से बंद hi आरहा था. मुझे पता था जांभोज कर बंद करके बैठी है चुहिया. इसको आज दिखता हु में. की मैं क्या चीज़ हु. घर से उठा कर ले जाऊंगा इसको तो में.

जैसे तैसे. 15 मं. में मैं पहुंच गया उसके घर. दरवाजा पैर बेल्ल बजे तो आंटी ने दरवाजा खोला. और मुझे देखकर hi काफी एक्सीटेंड होने लगी तो मैंने इशारे से चुप रहने को कहा. और उनसे धीमी आवाज में प्राची के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की यही बैठी है.

मैं- आंटी आपकी बेटी को में उठा ले जा रहा हु. आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं

आंटी- नहीं है ले जाओ. काम से काम पीछा छूटेगा इससे.

मैं- आंटी सिर्फ कुछ देर के लिए. बाकि इसको बापिस दे जाऊंगा में.

ये सुनकर आंटी का मुँह लटक गया

आंटी- बीटा तू इसको हमेशा के लिए लेजा. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है

मैं- वो बाद में देखेंगे फिलहाल उसको देखना है मुझे

तभी अंदर से उसकी आवाज आगयी.

प्राची- कोण है माँ.

मैं- में हु.

मेरी आवाज सुनकर hi वो कड़ी hi गयी. और में कुछ करता उससे पहले hi वो ऊपर कमरे की तरफ भागने लगी. तो मैंने भी दौड़ लगाई और उसे सीढ़ियों पैर hi पकड़. लिया.

मैं- बहुत हो गया. मुझसे भाग नहीं सकती तुम.

प्राची- छोडो मुझे. नहीं तो पुलिस को बुला लुंगी में.

मैं- आज चाहे तुम आर्मी को बुला लो. आज नहीं छोड़ने वाला में. चलो मेरे साथ

प्राची- कहा? में कही नहीं जाने वाली.

मैं- ऐसे नहीं मानेगी तू. रुक अभी बताता हूँ तुझे.

.ये कहकर मैंने उसे हवा में उठा लिया और अपने कंधे पैर तंग लिया. अब वो कुछ नहीं कर प् रही थी सिवाय मेरी पीठ खुजाने के. में उसे बहा से बहार ले जाने लगा

प्राची- माँ कड़ी क्या हो बचाओ मुझे

आंटी- बीटा चाहिए तो मुँह भी बंद कर दे इसका.

ये सुनकर उसकी उम्मीद hi टूट गयी.

प्राची- कैसी माँ हो आप. अपनी बेटी को किसी अजनबी को ले जाने दे रही हो

आंटी- अब क्या करे. जो जैसा करता है बैसा hi भरता है. जल्दी जा बीटा

मैं- थैंक्स आंटी

ये कहके मैं अपनी कार के पास आया दरवाजा खोला और उसे कार में पटक दिया और जल्दी से दूसरी तरफ जेक में भी बैठ गया. इतने में बो बहार निकलने की कोसिस कर रही थी लेकिन इससे पहले hi मैंने कार को आगे बड़ा दिया.

मैं- बैठी रहो वर्ण दन्त टूट जायेंगे फिर बैठी रहना बिना दांतो के.

ये सुनके वो भी shan't पद गयी. और में कार भागता हुआ सिटी से बहार ले जाने लगा. एक खूबसूरत जगह पैर. जहा से सिटी का नजारा दीखता है. करीब 20 मं. में हाँ बहा पहुंच गए. मैंने कार को रोका और बहार निकला. और उसे भी बहार आने को kaha.lekin वो नहीं आई तो मैंने उसे बहार निकला और हम एक जगह जेक बैठ गए.

मैं- ये सब क्या है तुमने मुझे बताया क्यों नहीं की तुम जा रही हो

प्राची- ऐसे hi नहीं बताना था तो नहीं बताया

मैं- ये सब बाटे उसे कहना जो तुम्हे समझता न हो. समझी. में तुम्हारी नस नस से बाखिफ़ हु. साफ़ साफ़ बताओ की बात क्या है

प्राची- जब तुम मुझे जानते हो तो खुद hi बताओ की मैंने ऐसा क्यों किया.

मैं- ठीक है जब यही बात है तो बताता हु. दरअशल तुम अपसेट हो किसी बात को लेकर. तुम्हे हार्ट ब्रेक वाली फीलिंग आरही है. और इसीलिए तुम ये सिटी छोड़ कर अचानक जा रही हो. क्यों सही कहा न मैंने.

ये सुनने के बाद उसका मुँह देखने लायक था. एक दम शोक थी वो. जैसे मैंने उसकी पोल खोल दी हो. लेकिन अचानक से उसने अपने एक्सप्रेशन बदले और बोली.

प्राची- गलत. ऐसा कुछ नहीं है. वो माँ डैड जा रहे है तो उनकी याद आएगी मुझे इसलिए में साथ hi जा रही हु उनके.

मैं- सरासर झूट. अब मान भी जाओ.

प्राची- क्यों मनु. जब वो सच है hi नहीं.

मैं- अच्छा तो ये बताओ की उस दिन झरने के पास मेरी बात सुनते hi तुम्हारी तबियत अचानक क्यों बिगड़ गयी. जबकि तुम पूरी तरह फिट न फाइन थी. और उसके अगले दिन तुम देहरादून छोड़ कर जा रही हो. क्या बात है. हैना.

.ये सुनकर फिर से बही शामे एक्सप्रेशन.

मैं- ये एक्सप्रेशन बता रहे है की में सच बोल रहा हु. अब जल्दी से सच बताओ. वर्ण जिंदगी भर बात नहीं करूँगा तुमसे.

प्राची- सही है न . बैसे भी तुम मुझसे बात नहीं करोगे. क्युकी तुम्हे तो मिल गयी न कोई. फिर मुझे क्यों याद करोगे.

ये बोलकर उसने अपनी जीव को अपने दांतो में दवा लिया. और सोचने लगी की ये क्या बोल दिया.

मैं- ओह्ह्ह तो ये बात है. अब समाज में आया सारा मटर.

प्राची- कोई मटर नहीं है. जैसा तुम सोच रहे हो.

मैं- अब भी झोट बोल रही हो. अब तुम्हे एक शोक और देता हु. जानना चाहोगी की क्या

प्राची- मुझे नहीं जानना कुछ भी.

मैं- खैर में तो बताऊंगा.

तो सुनो. में पहले दिन से जनता हु. की तुम्हारे अंदर क्या हो रहा है. तुम किसके बारे में क्या सोचती हो. सब कुछ. तुम्हारे मन में हुई एक एक बात में जनता हु. और तुमने जिसकी बात झरने पैर की थी. ये भी जनता हु की वो कोण है. असल में.

प्राची- क्या देख रहे हो. ऐसा कुछ नहीं जानते तुम अगर जानते तो मेरी फीलिंग्स की कदर करते.

मैं- अच्छा ये बताओ की मैंने तुमसे एक्साक्ट्ली क्या कहा था झरने पैर

प्राची- क्यों.

मैं- बताओ तो मुझे सुन्ना है तुमसे.

प्राची- तुमने कहा था की तुम्हे कोई लड़की पसंद है और वो हमारी hi क्लास में पड़ती है.

मैं- राइट. अब ये बताओ की तुम किसकी क्लास में पड़ती हो.

ये सवाल का जवाब जैसे hi उसके मन में आया. उसने एक डैम से मुझे घूर कर देखा.

मैं- यस जो तुम सोच रही हो वो बिलकुल सही है.

ये सुनते hi वो मुझपर चढ़ गयी और मुझे मरने लगी.

प्राची- जांभोज कर मेरा मूड ख़राब किया तुमने. सब जानते हुए भी. में तुम्हे नहीं छोड़ने वाली. आज तुम्हारी खैर नहीं. बहुत हीरो समझते हो अपने आप को. आज नहीं बचने वाले मुझसे तुम.

मैं- अब बस कर वर्ण लग जाएगी तुझे.

और मैंने उसे अपनी बहो में भर लिया.

मैं- shan't हो जा अब. में सुरु से hi जनता था की तू मुझे पसंद करती है. और कही न कही में भी पसंद करता था तुझे. बस किसी सही समय का वेट कर रहा था. लेकिन तू उससे पहले hi ये ूत पतंग हरकते करने लगती है. पता है में कितनी टेंशन में आज्ञा था. दुफर कही की.

मेरी बातो को वो सुन रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी. बस मुझे वो अपने अंदर फील कर रही थी. और में उसे. थोड़ी देर तक ये मिलान चलता रहा और आखिर कार मैंने उसे अलग किया.

मैं- अब बस कर. अब बोल पहले तू बोल.

प्राची- में क्यों. पहले हमेशा लड़के कहते है. लड़किया बाद में बोलती है

मैं- कॉमन ये काफी ओल्ड हो चूका अब. हमसे एक रेवोलुशन आना चाहिए. इसलिए पहले तू बोल.

प्राची- कोई जरूरत नहीं है रेवोलुशन लेन की. जैसा चल रहा है बैसा hi सही. ये हमारा हक़ है. जो कभी नहीं बदलेगा.

मैं- अब बोल भी दो. इतना सब बोल दिया लेकिन जो बोलना चाहिए वो नहीं बोलै

प्राची- तुमने भी तो.

हमारी बहस बढ़ने लगी थी इसलिए मैंने एक बीच का रास्ता निकला.

मैं- एक काम करते है दोनों एक साथ बोलते है. क्या कहती हो

प्राची- ठीक है.

मैं- ok 1 2 3 नाउ.

दोनों- ी लव यू तू.

ये सुनते hi हम दोनों हसने लगे. और हम फिर से एक बार गले लग गए.

मैं- लव यू प्राची देवी.

प्राची- लव यू तू देव.



तो बे कॉन्टिनुए……………..
 
अपडेट 43



हम दोनों बही बैठे थे पहाड़ी पैर. एक तरफ गहरी खाई थी और दूसरी तरफ रास्ता और हाँ बीच में एक दूसरे का हाथ पकड़ कर बैठे हुए थे. और गप्पे लड़ा रहे थे

प्राची- बैसे तुम मुझे कब बताने बाले थे इस बारे में.

मैं- सायद तुम्हारे बर्थडे पैर.

प्राची- चाहे तब तक में पागल hi क्यों न हो jati.ha.

मैं- में था न. तुम्हे एक चुटकी में ठीक करने के लिए.

प्राची- मर. देव तुम डॉक्टर नहीं हो. फिर कैसे ठीक करते तुम मुझे.

मैं- में तुम्हारे पास आता तुम्हारे चेहरे को अपने करीब लता और उसके बाद ………….

प्राची- फिर क्या करते.

उसने बहुत hi नाजुक ऐडा के साथ पूछा.

मैं- फिर कभी बताऊंगा. अभी छोडो ये बाटे

प्राची- क्यों छोड़ू. मुझे अभी जानना है. क्या करते तुम.

मैं- तुम समाज गयी हो. फिर क्यों मुझसे पूछ रही हो.

प्राची- मुझे जानना है की में सही सोच रही हु या नहीं

मैं- है तुम सही सोच रही हो बस.

प्राची- ओह्ह्ह्हो यार तुम कितने उन रोंमान्टिक हो. कोई और होता तो पता नहीं अभी तक क्या क्या कर देता.

मैं- क्या तुम्हे किसी और का इन्तजार है.

प्राची- नहीं. में बस एक्साम्प्ले दे रही हु.

मैं- यही तो फर्क है बाकिओ में और मुझमे. में अलग हु थोड़ा.

प्राची- ये बात तो सच कही है तुमने. इसीलिए मुझे तुम पसंद हो

मैं- मतलब अगर में ऐसा नहीं होता तो तुम मुझे पसंद नहीं करती.

प्राची- सायद. कुछ कह नहीं सकते. तुम्हारा करैक्टर पसंद आया था मुझे. और अगर तुम्हारा वो करैक्टर होता hi नहीं तो फिर क्या पसंद आते तुम मुझे. क्युकी हैंडसम तो बहुत मिल जायेंगे. लेकिन एक अच्छे करैक्टर वाला इंसान मिलना मुश्किल है. इसीलिए में पागल थी तुम्हारे लिए. क्युकी तुम हैंडसम भी हो और तुम्हारा करैक्टर भी लाजवाब है. एक परफेक्ट मैच.

मैं- क्या बात है.

प्राची- अब तुम बताओ की मुझमे तुमने ऐसा क्या देखा जो मुझे पसंद करने लगे

मैं- सच कहु तो केवल तुम्हारा डिल. मुझे तुम पसंद हो बस यही काफी है. जरुरी नहीं की जिसे हम पसंद करे उसमे कोई न कोई खूबी hi हो. वो ऐसा इंसान भी हो सकता है जो बिलकुल साधारण हो बस उसका मन खूबसूरत होना चाहिए. इसलिए मैंने केवल तुम्हारा खूबसूरत मन देखा जो मुझे भ गया. बस. तुम बहार से जितनी उद्यमी दिखने की कोसिस करती थी. अंदर से इतनी hi नाजुक थी. तुम्हे हर बात से दर लगता है. लेकिन तुम हर बार अपने दर को भगा देती हो. और उससे जीतने की कोसिस करती हो. यही है तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी.

ये सब सुनके उसने बिना कुछ बोले अपने होंटो के मेरे होंटो से जोड़ दिया. और हमने अपना पहला प्यारा सा स्मूच किया. जो छोटा सा hi था.

मैं- ये क्या था

प्राची- बही जो तुम करना और कहना चाहते थे.

मैं- पागल हो पूरी. चलो अब चलना चाहिए. शाम हो गयी है. टाइम का पता hi नहीं चला कब सुबह से शाम हो गयी. अब तो अँधेरा भी लगने वाला है.

प्राची- रुकते है न. जेक क्या करेंगे.

मैं- कल मिलेंगे सलग में. तुम्हारा अड्मिशन फिर से करवाना पड़ेगा.

प्राची- लेकिन में रहूंगी कहा.

. मैं- हॉस्टल है.

प्राची- मुझे बहा नहीं रहना है. मुझे तुम्हारे साथ रहना है

मैं- ये फिलहाल संभव नहीं है. शादी से पहले तो बिलकुल नहीं. है हॉस्टल की जगह कही और तुम्हारा ठिकाना जरूर बना सकता हु.

प्राची- कहा पैर.

मैं- हमारी एक बिल्डिंग है स्टाफ के लिए. उसी में कुछ फ्लैट्स खली है. उसी में तुम रह सकती हो. और वो सलग से ज्यादा दूर भी नहीं है.

प्राची- लेकिन मुझे अकेले दर लगता है. में नहीं रह सकती. एक बिल्डिंग के कमरे में वो भी अकेले.

मैं- तुम रह सकती हो. में जनता हु. अब नाटक करना बंद करो. और चलो. आंटी राह देख रही होंगी.

प्राची- बड़ी फ़िक्र है आंटी की

मैं- होगी hi. आखिर मेरी होने वाली सासु जो है.

प्राची- सास की फ़िक्र है लेकिन अपनी बीवी की नहीं है.

मैं- उसकी भी है. इसीलिए तो तुम्हे जाने से रोका है. और तुम्हारे रहने के लिए एक सुरक्षित जगह का भी इंतजाम किया है.

प्राची- बड़े आये फ़िक्र वाले. अगर इतनी hi फ़िक्र होती तो अपने साथ रखते न की इतना दूर खुद से. मैंने तय कर लिया है. या तो में तुम्हारे साथ घर में रहूंगी या फिर में माँ डैड के साथ चली जाउंगी.

मैं- ये सरासर ब्लैकमेलिंग है. में नहीं मैंने वाला ये शर्त.

प्राची- ठीक है तो फिर में जाउंगी माँ में साथ दूसरे सेहर.

मैं- ऐसी बात है तो ठीक है जाओ. में नहीं रोकूंगा तुम्हे.

ये सुनते hi उसका मुँह लटक गया. उसे सायद उम्मीद थी की मैं मान जाऊंगा इस धमकी से.

प्राची- में सच में चली जाउंगी.

मैं- है तो जाऊ न. मैंने कब रोका है.

प्राची- सच में चली जाउंगी में. और बापिस भी नहीं आउंगी में.

मैं- ठीक है. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

प्राची- ठीक है में जाती हु.

ये कहकर वो बहा से उठ गयी और रस्ते की तरफ चलने लगी.

तो मैंने दौड़ कर उसे पकड़ा.

प्राची- छोडो मुझे.

मैं- अरे ऐसे कैसे छोड़ दू. अभी तो हाथ में आई हो.

प्राची- अब क्यों रोक रहे हो. तुमने कहा था चली जाओ तो जाने दो अब मुझे.

मैं- में मजाक कर रहा था. तुम क्या छोटी छोटी बात पैर सीरियस हो जाती हो. इतनी सी बात भी नहीं समझती हो

ये सुनकर वो रुकी.

प्राची- ये मजाक था

मैं- है. और नहीं तो क्या. में तुम्हे जाने को कहूंगा क्या कभी.

प्राची- तो मतलब में तुम्हारे साथ रह सकती हु

मैं- ये फैसला में नहीं ले सकता. तुम्हारे माँ डैड कहेंगे तब hi कोई निर्णय लिया जायेगा.

प्राची- उन्हें में मन लुंगी.

मैं- देखो प्राची. में जनता हु तुम मेरे साथ रहना चाहती हो. लेकिन ये सही नहीं है. हलाकि हम रोज मिल सकेंगे इस कोई हर्ज़ नहीं है. लेकिन एक hi छत के नीचे रहना. मतलब की हम अपने पेरेंट्स की उम्मीदों को तोड़ रहे है. इसलिए मेरा विचार है की तुम उसी बिल्डिंग में रहो. बाकि तुम्हारी मर्ज़ी.

मेरी बात उसके अंदर तक घुस गयी. और उसने सोचा की सायद ये सही भी है.

प्राची- ठीक है अब तुम इतना कह रहे हो तो ठीक hi होगा. मुझे मंजूर है.

मैं- ये हुई न बात. चलो अब.

मैंने फिर प्राची को कार में बैठाया. और में सुस्ती तरफ जाने लगा. तभी मुझे कुछ एहसास हुआ. जैसे कोई हमारे एक डैम करीब है. और जाने देख रहा है. ये एहसास पते hi में रुक गया. मैंने चारो तरफ बाजार दौड़ाई तो अँधेरा होने लगा था. जिस बजह से कोई नहीं दिख रहा था. इसलिए मैंने अपनी आँखों को बंद किया और फिर देखना सुरु किया. तो मुझे थोड़ी hi दुरी पैर कुछ दिखा. और उसे देखते hi में पहचान गया. ये उन्ही असुरो की टोली में से एक था. सायद अपने शिकार को देख रहा था जो की हम थे इसके लिए.

तभी मुझे प्राची की आवाज आई. तो मैंने आक्न्हो को खोला.

प्राची- क्या hua.ye आँखे बंद करके क्या कर रहे हो.

मैं- वो अच्छी ठंडी हवा चल रही है तो उसे hi महसूस कर रहा था. तुम भी करके देखो. मजा आएगा.

प्राची- क्या सच में. रुको में भी करती हु.

प्राची ने अपनी आँखों को बंद किया. और मैंने उसी वक़्त उसे एक नींद में सुला दिया. वो नीचे गिरती उससे पहले hi मैंने उसे संभल लिया. मैं नहीं चाहता था की वो इन जीवो को dekhe.or दर जाये. मैंने उसे संभल कर कार में बिठा दिया. और फिर उस जीव की तरफ देखा जो हमारी तरफ बढ़ने लगा था. मैं तुरंत hi दूसरी तरफ गया और कार के पीछे पहुंच कर खुद को गायब कर लिया और बही पैर उसके आने का वेट करने लगा. थोड़ी hi देर में वो कार के एक डैम करीब पहुंच गया. उसे प्राची तो दिखी लेकिन में नहीं. जिस बजह से वो मुझे आस पास देखने लगा. मैं उसके जस्ट पीछे पंहुचा. और उसकी गार्डन को दबोच लिया. मेरी पकड़ बहुत hi टाइट थी. वो छूटने की कोसिस कर रहा था लेकिन छूट नहीं प् रहा था. मैंने अपना दबाव उसकी गार्डन पैर बनाना स्टार्ट कर दिया उसकी ससे रुदन लगी. बो भले hi एक जीव था लेकिन जब उसकी गार्डन कोई इतनी जोर से दबाएगा तो वो मरेगा तो जरूर. और यही हुआ इसके साथ में. थोड़ी hi देर में उसने डैम तोड़ दिया. और उसका सरीर बही नीचे गिर गया. मैंने तुरंत आसमान बिजली का आवाहन किया और उसके ऊपर छोड़ दी. और पल भर में उसका सरीर रख बन गया. जो हवा में यहाँ बहा उड़ गयी. उसके बाद मैंने खुद को नार्मल किया और जेक कार में बैठ गया और प्राची को नींद से जगा दिया. वो जगी और बोली.

प्राची- क्या हुआ था

मैं- कुछ नहीं तुम महसूस करते करते सो गयी थी अब जेक जगी हो

प्राची- क्या लेकिन कब कैसे.

मैं- वो सब छोडो और चलो अब.

उसके बाद मैंने कार को भगा दिया उसके घर की तरफ. थोड़ी hi देर में हम बहा पहुंच गए. उसके माँ डैड बढ़िया चाय का मजा ले रहे थे. उन्हें सायद कोई फ़िक्र नहीं थी. क्युकी उन्हें विस्वास था मुझपर. हम घर पहुंचे और प्राची के चेहरे की मुस्कान देखकर hi वो समाज गए की मामला जैम गया है. और वो भी कुश हो गए. आंटी ने मुझे कॉफ़ी ऑफर की

मैं- तो अंकल कब जा रहे है आप लोग..

कम- बीटा कल जायेंगे. बैसे प्राची का मूड बदला.

. मैं- है बदल गया है. उसने अब न जाने का फैसला कर लिया है. लेकिन समाया ये है की वो रहेगी कहा.

कम- है समस्या तो है. बैसे हॉस्टल सही रहेगा क्यों

आंटी- सही कहा.

प्राची- मुझे हॉस्टल में नहीं रहना है.

कम- देखो कही और रहोगी तो अकेली रहोगी. और हॉस्टल में रहोगी तो कुछ फ्रेंड्स भी रहेंगे साथ में. तुम्हारा टाइम कट्टा रहेगा. और अकेली रहोगी तो बूर होती रहोगी.

मैं- बैसे में सहमत हु इस बात से. हॉस्टल की लाइफ के भी मजे लेना चाहिए. अकेले रहने में क्या मजा.

प्राची- वो सब ठीक है लेकिन अगर बहा रेग्गिंग हुई तो.

मैं- में होना. मुझे बताओ. सबके बिस्टेर गोल करवा दूंगा क्यों अंकल.

कम- और क्या. वर्ण मुझे कहना. सबको हवालात में घुसा दूंगा. और बैसे भी तुम कबसे डरने लगी रेग्गिंग से. तुम तो दुसरो की रेग्गिंग ले लो. भला तुम्हे क्या दर.

मैं- बिलकुल ठीक कहा आपने अंकल. ी थिंक तुम्हे बही रहना चाहिए

काफी देर तक चर्चा चलती रही और आखिर कार हॉस्टल पैर बात फाइनल हो hi गयी. लेकिन प्राची ने मुझे इतनी बार घुरा की क्या बताऊ. उसे लगा में उसे उस फ्लैट की बात कहूंगा. लेकिन सच कहु तो वो अकेली बहा सच में बोर हो जाती. हॉस्टल में काम से काम उसे कमपनी तो मिलेगी.

उसके बाद में बहा से bye बोलके चला गया. और कल सलग में मिलने की बात कही. रात में घर पंहुचा तो दादू को बहाना बना दिया. की ऐसे hi घूमने गया था. फ्रेश हुआ बढ़िया डिनर किया. और कमरे में पहुंच गया. और अब बरी थी उन सरे जीवो की बंद बजने की.

इसलिए मैं बही नीचे बैठ गया ध्यान में और अपनी थ्रिरदेये को ओपन किया……..



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 44



मैं ध्यान में बैठा हुआ उन सभी को ढूंढ रहा था. सबसे पहले अपने आस पास वालो ko.vo सिटी में घूम रहे थे अँधेरी गलियों में. और शिकार ढूंढ रहे थे. तभी मेरी नजर 2 जीवो पैर गयी. जो किसी ऐसे एरिया में घूम रहे थे. जहा में बिलकुल भी रिस्क नहीं ले सकता था. वो लोग प्राची के घर के आस पास थे. और देखते hi मुझे ख्याल आया की उस जीव ने मरने से पहले प्राची को देखा था. और कार भी देखि थी. मतलब की सालो को शक हो गया है मुझपर. लेकिन कन्फर्म कर रहे है. ये विचार आते hi मुझे थोड़ा गुस्सा आया और मेरी आँख से एक तीब्र ज्वाला निकल गयी. वो ज्वाला बड़ी hi तेज़ी से उन जीवो तक पहुंची. और वो कुछ समाज पते उससे hi मेरी ज्वाला में जल कर खाक में बदल गए वो दोनों. लेकिन में जनता था की खतरा अभी भी बनाहुआ है. इसलिए मैंने यही से प्राची के घर के बहार एक सुरक्षा कवच बनाया जो बिलकुल ादिर्श्य था. आज की रात के लिए hi ये था. क्युकी कल से वो हॉस्टल में रहने वाली थी. और उसके माँ डैड भी यहाँ से चले जायेंगे. इसलिए आज की रात उन्हें सेफ्टी की जरुरत थी. अब इस कवच को कोई पार नहीं कर सकता था. इसलिए अब बाकिओ पैर फोकस किया Maine.jaise hi वो दोनों मरे बाकिओ को उसकी खबर लग गयी. और वो उस दिशा की तरफ बढ़ने lage.unka रास्ता बिलकुल तय था. इसलिए उनके रस्ते में मैंने आगे एक अदृश्य दीवार बना दी. जिसे छूटे hi बाकिओ का काम भी ख़त्म samjho.ye केवल देहरादून के अंदर वाले hi थे. बहार वाले तो अभी भी बही पैर थे. और हुआ बैसा hi. जैसे hi वो भागते हुए उस अदृश्य दीवार से टकराये बही पैर जल का रख में बदल गए. अब देहरादून के अंदर कोई भी जीव नहीं था. लेकिन कब तक ये नहीं पता था. इसलिए मैंने सावधानी बरतते हुए देहरादून के चारो तरफ बैसा hi कवच बना दिया. ताकि कोई भी जीव अगर बहार से अंदर आने की कोसिस करे तो उसका भी यही हाल हो. लेकिन इसका परिणाम भी में जनता tha.vo लोग बाहिरि इंसानो को आराम से नुकसान पंहुचा सकते थे. इसलिए अब थोड़ा सीरियस होने का समय था. मैंने अपने दोनों हाथो को एक दूसरे की हथेली पैर रखा. और ॐ मंत्र का जाप kiya.thodi hi देर में मेरे सरीर से एक ऊर्जा निकलने लगी और वो ऊर्जा ठीक मेरे सामने hi जमा होने lagi.or उसने फ़ौरन hi एक रूप ले लिया. जो मेरा hi था लेकिन मेरे जैसा नहीं. उसने मुझे प्रणाम किया. और मैंने उसे आदेश दिया की जितने भी आसुरी जीव इस समय पृथ्वी पैर घूम रहे है उन सबका बिनाश कर दो.

ये आदेश पते hi वो बहा से हवा हो गया. और में ध्यान के माध्यम से देख रहा था की वो क्या कर रहा है.

वो बिजली की तेज़ी से उन जीवो पैर टूट पड़ा. सामने जीवो का भण्डार था. और वो अकेला

सरे जीव किसी न किसी तरह एक दूसरे से जुड़े हुए थे. और जैसे hi उन्हें ये सुचना मिली की उनके साथियो की मौत हो गयी है वो पगला गए थे और चारो तरफ तहलका मचने लगे थे. और कुछ जीव देहरादून की hi तरफ आरहे थे. हलाकि उनका अंजाम तय था. वो कवच से टकराये hi मस्त हो जायेंगे. लेकिन बाकिओ को कण्ट्रोल करना भी जरुरी था. इसलिए मैंने दिव्यास्त्र के पहले ाँस यानि पृथ्वी की शक्तियों का इस्तेमाल किया और अपना एक प्रतिरूप बनाया बस उसका चेहरा अलग था. ताकि सभी की नजर उस चेहरे पैर पद. और कुछ वक़्त के लिए hi सही मेरे आसपास रहने वाले लोग सुरक्षित रह सके. बस यही उम्मीद थी मुझे. और बहा दूसरी तरफ मेरे ाँस ने हर एक जीव को पकड़ पकड़ कर मौत के घाट उतरना सुरु कर दिया था. बिजली की तेज़ी से वो हर एक सेक् में सेकड़ो के सर काट रहा था. वो जीव उस पैर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते लेकिन इस पैर थोड़ा सा भी असर नहीं होता उन शक्तियों का. इसी तरह करीब आधे घंटे में उन पांचों की पूरी सेना समाप्त हो गयी थी. साडी सेना को उसी ाँस ने hi निपटा दिया. बाकि कुछ बचे खुचे थे उन्हें मेरे कवच ने निपटा दिया. अब मुझे पता था की क्या होने वाला है. उन सभी असुरो की जो फिर से जगे है नींद हराम होने वाली है. हो सकता है वो ये सब देख रहे हो.

बही इस लड़ाई में कुछ नुकसान भी हुआ था. जिसे वो ाँस मेरे कहने पैर फिर से ठीक कर रहा था. अपनी शक्तियों से. थोड़ी hi देर में ये भी काम पूरा हो गया. और फिर मैंने उसे बापिस बुला लिया. वो हवा की तरह मेरे पास आया और बापिस से मुझे समां गया और ऐसा होते hi मेरी आँखे खुल गयी.

नहीं दूसरी तरफ वो असुर ये सब देख रहे थे. और उन्हें गुस्सा तो आरहा था लेकिन वो shan't थे और इन घटनाओ पैर सोच रहे थे. तभी उन्हें एक लड़की की तस्वीर दिखी. जो कोई और नहीं प्राची hi थी.

डी1- हो न हो. इस लड़की का उस शक्ति से जरूर कोई सम्बन्ध है. जंगल में भी ये मौजूद थी. और जैसे hi इसके घर के पास वो पहुंचे तुरंत hi जल कर भस्म हो गए. वो शक्ति इसकी रक्षा कर रही थी.

डी2- सही कहा तुमने. मुझे भी यही लगता है. हमें इसकी जानकारी लेनी चाहिए. ये किस किस से मिलती hai.ye पता करना चाहिए. जरूर वो इसका कोई मित्र हो या प्रेमी.

डी3- लेकिन जिसने हमारी सेना को मारा है वो तो कोई और hi है. असली शक्ति तो बही है न.

डी1- मुझे लगता है मामला कुछ और है.

डी4- कैसे

डी1- याद करो. जब तारका सुर के पास वो अस्त्र था. तब उन्होंने अपने एक ाँस का निर्माण किया था उसी दिव्यास्त्र से. जिसको उन्होंने कोई भी रूप दे दिया था.

डी5- है याद है. वो पृथ्वी ाँस से किया था उन्होंने. हमें बताया भी था बाद में.

डी1- बिलकुल सही कहा तुमने. और फिलहाल में बही एक ाँस जागृत भी हुआ है. तो मुझे लगता है उस शक्ति ने हमारा ध्यान भटकने के लिए वैसे hi एक ाँस का निर्माण किया है. ताकि हम उस को ढूंढ़ते रहे और वो सुरक्षित रहे उसके लोग सुरक्षित रहे.

डी2- तुमने बिलकुल सही कहा है. वो बालक बहुत hi शातिर है ऐसा गुरुदेव ने बताया था. मुझे भी यही लगता है की उसने ये जांभोज कर किया है.

डी3- तो फिर अब हमें क्या करना है.

डी1- देखो उसे हमारे बारे में कुछ नहीं पता hai.isliye हमें चुपचाप उन सबकी जानकारी निकालनी है. इ एक बार पक्का हो गया. फिर दिखाएंगे उसे की हाँ क्या चीज़ है

डी4- लेकिन पक्का करेंगे कैसे. हम तो उसे जानते भी नहीं है.

डी1- देखो साधारण सी बात है. उसके पास शक्ति है. लेकिन उसने ये बात सभी से छिपा कर राखी होगी. सबके सामने वो शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकता. लेकिन छिप कर कर सकता है. तो हम उस लड़की पैर नजर रखेंगे और इस पैर बार बार मुसीबत डालेंगे. और हर बार वो शक्ति उसे बचने आएगी. और हाँ उसे पहचान लेंगे.

डी2- बकै में बहुत hi उम्दा तरकीब निकली है. भले hi वो शातिर हो लेकिन इस लड़की की छबि हमें दिख गयी जिस बजह से हमारा पलड़ा भरी हो गया है. वो इस लड़की के आस पास hi है. हम कल से उस पैर ध्यान देंगे. सब कुछ सही रहा तो बहुत जल्द हमें इस शक्ति की जानकारी मिल जाएगी.

उन्होंने ये तय किया और फिर जेक आराम करने लगे.

बही में भी ये सब करके सो गया. मुझे पता था की उन असुरो की कही न कही शक तो होगा hi प्राची पैर. और अब वो सायद उस पैर नजर भी बनाये रखे. इसलिए मुझे अब ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत थी. ताकि छोटी सी भी गलती न हो. जब तक उनका चेहरा न दिख जाये. उसके बाद तो उनकी में बंद बजा दूंगा.

यही सब सोचते सोचते कब नींद लग गयी पता hi नहीं चला.

नेक्स्ट डे टाइम से उठा ध्यान में बैठा. सभी जगहों का जायज़ा लिया. सब सही hi लगा मुझे. उसके बाद मंत्र का जाप किया. और फिर सलग के लिए रेडी हो gya.neeche आया दोनों का आसीर्बाद लिया. नास्ता किया और निकल गया. चिराग के घर की तरफ. रस्ते में प्राची को बोलै की सलग में मिलते है. क्युकी उसका घर जो है वो दूसरी साइड है और मेरा और चिराग का घर एक hi साइड है. इसलिए अगर में बहा जाता तो लेट हो जाता. इसलिए सीधा सलग गया.. बहा लकी और प्राची से मिला. हलाकि चिराग ने रस्ते में hi साडी कहानी जान ली की कल क्या हुआ. और जब उसे सच्चाई पता चली तो वो बहुत कुश था. और पार्टी की बाटे करने लगा. लेकिन में तो पार्टी बगेरा करता नहीं. इसलिए उसको बोल दिया की खुद hi कर लेना. जिस पैर वो थोड़ा मायूस सा हो गया. लेकिन मैंने उसे किसी तरह समझा दिया. सलग में मैं प्राची को लेके प्रिंसिपल के पास गया. उन्हें साडी बाटे बताई. जिसे सुनने के बाद उन्होंने बापिस से प्राची का अड्मिशन कर लिया. और जो रिक्वेस्ट उन्होंने यूनिवर्सिटी भेजी थी प्राची की तरफ से सलग चेंज को लेके. वो उन्होंने बापिस ले ली. इसलिए प्राची अब इसी सलग में पद सकती थी. और रहने के लिए हॉस्टल का भी मैंने उन्हें बोल दिया. तो समझो हो गया. हमारी क्लास लगने से पहले सब काम हो गया और हम क्लास में पहुंच गए. शाम को उसके माँ डैड जाने वाले थे. और शाम को hi वो शिफ्ट होने वाली थी. खैर पहला लैक्टुरे में बही सर आये. खैर उस दिन के बाद उनहियने मुझसे ज्यादा बाटे नहीं की. लेकिन मुझे पता था की ये किसी दिन जरूर कोई कांड करके रहेंगे. लेकिन फिलहाल उन्होंने एक सरप्राइज टेस्ट की घोसना कर दी वो भी अभी लेने की. जिसे सुनके सबकी हालत ख़राब हो गयी. और थोड़ी मेरी भी. क्युकी पड़े तो कुछ की नहीं थी. मौका hi नहीं मिला tha.or चीटिंग में करना चाहता नहीं था. इसलिए सोचा जो होगा देखा जायेगा. जब उन्होंने क़ुएस्तिओन्स बताये तो और सब बिगड़ गए. क्युकी सिलेबस के हिसाब से एक दो क़ुएस्तिओन्स आगे के थे. लेकिन उन्होंने कह दिया की जितने आते है वो करो. लेकिन मुझे तो 10 मेसे केवल 1-2 hi आरहे थे. वो भी शुरुवात की क्लास में जो पड़े थे. उसी मेसे थे इसलिए. बाकि की क्लासेज तो मैंने मिस hi की है अभी तक. में समाज गया की अच्छे से लगने वाली है मेरी. ये no. जरूर चिल्ला कर बटेगा मुझे. सभी के सामने. और पता नहीं कितना सुनाएगा. लेकिन सोचा सुन लूंगा. इसलिए करने लगा और जो जो क्वेश्चन आरहे थे उन्हें जल्दी hi लिख दिया. कुल मिला के 3 क्वेश्चन और बाकि के 7 तो भूल hi जाओ. अब मैंने टेबल पैर खाकी बैठ गया. हलाकि चिराग ने मुझे नोट्स दिए थे लेकिन उन्हें पड़ना hi भूल गया. इसलिए मुझे और गुस्सा आरहा था. की इस टेस्ट ने मेरी शिकार बता दी थी. अगर ऐसे hi चलता रहता तो फाइनल्स में बंद बजना तय था. लेकिन में थैंक्स कहना छह रहा था सर को की. उन्होंने सही समय पैर ये लिया. और मुझे ये समाज में आज्ञा. 1 घंटे के बाद उन्होंने कॉपी ले ली. और चले गए क्लास से बहार. और उनके जाते hi चिराग और लकी मुँह लटकाये आये मेरे पास

मैं- अबे सालो तुमलोगो को क्या हुआ. रेगुलर क्लास ली है. तुमने तो सब लिख hi दिया होगा.

चिराग- क्या खाक लिखा होगा. सरे क़ुएस्तिओन्स ऐसे दिए थे. जिनको सोल्वे करने में hi 2-3 घंटे भी काम पड़े. और यहाँ एक घंटे में क्या होता है. खैर तू बता तूने कितने किये.

. मैं- सिर्फ 3 बाकि के आये hi नहीं मुझे.

लकी- लेकिन तू तो 15 मं. में hi कॉपी बंद करके बैठ गया था. उतने टाइम में हो गए थे तेरे क़ुएस्तिओन्स.

मैं- है. शुरुवात की क्लासेज में पढ़ाया था इन क्वेश्चन को तो याद थे मुझे. बही लिख दिए.

लकी- बढ़िया है मुझे तो लगा था तूने एक भी नहीं किया होगा. क्युकी कोई भी क़ुएस्तिओन्स इतनी जल्दी सोल्वे होने से रहा. लेकिन तूने 3 कर दिए. तो ये बहुत बड़ी बात है. बकै तेरी मेमोरी काफी शार्प है

मैं- वो छोड़ तू बता कितने किये तूने.

लकी- 4

चिराग- मैंने भी 4 hi किये है.

मैं- तो घर पैर प्रैक्टिस नहीं करते क्या सवालो की. जो 1 घंटे में केवल 4 hi कर पाए.

चिराग- अबे यार करते है. लेकिन हमारी मेमोरी इतनी शार्प नहीं है. तूने सवालो को ठीक से देखा नहीं. कितनी साडी कन्फूसिओं क्रीट की गयी थी. उन्ही को सुलझाने में बंद बज गयी. टाइम hi नहीं बचा. इतने टफ तो सर ने खुद भी नहीं करवाए थे प्रैक्टिस में जितने उन्हीने दिए थे.

मैं- बीटा शुक्र मनाओ की ये टेस्ट हुआ. काम से काम हमें पता तो चला की हमें और कितनी म्हणत करनी है. वर्ण हम इसी में भूले रहते और फिर बाद में रट्टा मारते की अब क्या करे.

. लकी- है ये बात तो सही है. बकै में आज के टेस्ट ने औकात याद दिला दी. अब म्हणत ज्यादा करनी पड़ेगी.

तभी प्राची भी पास में आगयी. और उससे पूछने पैर पता चला की उसने भी 3-4 क़ुएस्तिओन्स hi किये है. ऑलमोस्ट पूरी क्लास का यही हाल tha.sirf एक दो को छोड़ कर. कुछ ने 6-7 क़ुएस्तिओन्स भी कर लिए थे. खैर अगर मैंने वो सिलेबस पड़ा होता तो सरे क़ुएस्तिओन्स कर देता में. लेकिन अफ़सोस. अब पछताए क्या हॉट जब चिड़िया चुग गयी खेत.

फिर एक के बाद एक टीचर्स आये और सभी ने सुप्रिसे टेस्ट लिए. पूरा दिन बंद बजती रही. सभी सब्जेक्ट्स में काफी म्हणत करने की जरुरत थी फिलहाल तो.

खैर जैसे तैसे दिन निकला. शाम को प्राची के माँ डैड को स्टेशन छोड़े गए हम. और उसके बाद प्राची के बेग लेके मैंने उसे हॉस्टल में छोड़ा. और फिर उसे bye बोलके घर बापिस आज्ञा.

चुकी अब करने को कुछ था नहीं इसलिए आज से hi पड़े स्टार्ट कर दी. और लग गया चिराग के नोट्स leke.jyada तकलीफ नहीं हुई. डिनर के बाद लगभग 4-5 घंटो में सारा सिलेबस क्लियर कर liya.pehke सब्जेक्ट का. ऐसे hi 3-4 दिन और बस सरे सब्जेक्ट्स का क्लियर हो जाना था.

हलाकि पावर्स का उसे करके पूरा कुछ hi मिंटो में याद कर सकता था. लेकिन ऐसा करना मुझे दुसरो के साथ चीटिंग करने जैसा लगा. इसलिए मैंने बैसा नहीं किया. हलाकि न चाहते हुए भी मंद पावर तो अपना काम दिखा hi रही थी. एक बार में बात समझ में आरही थी और याद रह रही थी. लेकिन उसका अब कोई इलाज में नहीं कर सकता tha.lekin उतना टाइम तो दे hi सकता था. इसलिए देता रहा. अगले दो दिनों तक यही सब चलता रहा. संडे था तो सलग था नहीं. इसलिए दिन भर में सरे सब्जेक्ट क्लियर कर डेल. और बहार का मामला भी अभी तक shan't hi था. लेकिन में जनता था की ये तूफ़ान से पहले की शांति है. आगे क्या होगा कोण जाने



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अपडेट 45



नेक्स्ट डे मंडे को सुबह अपना बही रूटीन फॉलो किया. और उसके बाद सलग चला गया रस्ते से चिराग को पिक किया.

मैं- क्या बीआरओ क्या किया कल दिन भर.

चिराग- कुछ खास नहीं रिविसिओं कर रहा था. तू बता तूने क्या किया.

. मैं- में भी सिलेबस कम्पलीट कर रहा था. और खुसी की बात ये है की हो गया कम्पलीट.

चिराग- क्या बार है यार. तूने दो दिन में 1 महीने का सिलेबस कम्पलीट कर लिया.

मैं- करना पड़ा. ताकि आगे से ऐसा कुछ न हो.

चिराग- ये भी सही है.

ऐसे hi हम बाटे करते हुए सलग पहुंच गए. बहा हमें लकी मिला और प्राची भी. जो अब हॉस्टल से hi आती थी. सबसे मिलके अच्छा लगा. प्राची का मंद थोड़ा उदास सा लग रहा था. सायद उसके माँ डैड चले गए इसलिए. लेकिन हम थे उसके साथ इसलिए ज्यादा देर तक उदासी नहीं तिकी और चिराग और लकी की फालतू बातो ने उसका मूड फ्रेश कर दिया. खैर उसके बाद कैंटीन में गए. और अससल लकी भीड़ गया खाने के liye.aaj तक समाज में नहीं आया की ये इतना खता क्यों है. और ऊपर से इतना खाने के बाफ भी इतना फिट है. मतलब की इसकी बॉडी बरकरार थी. न hi पेट बहार निकल रहा था न और कोई प्रॉब्लम. में तो कम्पलीट हैरान था इसे देखकर.

उसके बाद हम गए अपनी अपनी क्लास में. जहा हमारे टेस्ट का रिजल्ट बताने वाले the.mujhe तो सॉलिड डाउट था की मुझे आज काफी कुछ सुनने को मिलने वाला hai.khaskar ये पहले पीरियड वाले सर से. फिर सोचा सुन लेंगे.

सर आये उन्होंने सबके मार्क्स बताये और में हैरान था की केवल 3 जान को छोड़ कर बाकि सभी के केवल 20-25 no. आये थे. ये बात काफी हैरान करने वाली थी. ोढ़ेरानी की बात ये भी थी की मेरा नाम बाकिओ में नहीं था. बल्कि उन तीन में था जिनके no. 25 से ज्यादा आये है. ये सुनके तो में और भी हैरान हुआ.

सर- क्लास तुम सबको पता चल hi चूका होगा की तुम्हारी तैयारी कैसी है. ये टेस्ट इसीलिए लिया गया था ताकि सबको ये पता चल सके की कोण कितने पानी में है. अब मुझे बताओ की ये इतने काम मार्क्स क्यों आये है तुम लोगो के. मैंने सभी को 10 क़ुएस्तिओन्स दिए थे. और लगभग सभी ने केवल 3-4 क़ुएस्तिओन्स hi हल किये है केवल 2 को छोड़ कर. उन्होंने 6-7 क़ुएस्तिओन्स को हल किया है. लेकिन हैरानी की बात ये है की जिन्होंने भी ये 3-4 क़ुएस्तिओन्स किये है उनमे से भी सभी के क़ुएस्तिओन्स का सही आंसर नहीं aaya.ek साथ हो तो मान सकते है लेकिन सभी के साथ ऐसा कैसे हो सकता है. मुझे बताओ की तुम लोगो को कहा पैर प्रॉब्लम आई थी उन्हें सोल्वे करने में.

तभी एक लड़का खड़ा हुआ और बोलै

लड़का- सर दरअशल टाइम की कमी थी. एक घंटे में सभी केवल 3-4 क़ुएस्तिओन्स तक hi पहुंच पाए. और जल्दबाज़ी में कुछ न कुछ गड़बड़ होती रही जिन पैर हमने ध्यान नहीं दिया. लेकिन टेस्ट के बाद जब मैंने उन्हें आराम से सोल्वे किया तो में साडी बात समाज गया था की कहा पैर गलती हुई है.

सर- तो मैं प्रॉब्लम थी टाइम की कमी. जिसके कारण गलतिया हुई क्यों.

तो सभी ने है कह दिया. सिवाय मेरे. क्युकी मुझे तो वो आते hi नहीं थे. और तभी सर मेरी तरफ आये और बोले

सर- देव मैंने तुम्हे देखा था. तुमने 15 मं के बाद hi लिखना बंद कर दिया था. और उसके बाद तुमने एक शब्द भी नहीं लिखा था कॉपी में. लेकिन जब मैंने तुम्हारी कॉपी चेक की तो पाया की तुमने 3 क़ुएस्तिओन्स सोल्वे किये है और में हैरान था की वो तीनो एक डैम परफेक्ट थे. उनमे इतनी सी भी गलती नहीं थी. तुमने ये कैसे किया. क्या चीटिंग की है

मैं- सर में चीटिंग नहीं करता कभी भी. और रही बात उन क्वेश्चन की तो. मैंने बो hi क़ुएस्तिओन्स सोल्वे किये है. जो आपने शुरुवात की क्लासेज में बताये थे. अब में क्या कहु मेरी मेमोरी काफी अच्छी है. एक बार में hi चीज़ो को समाज जाता हु तो मुझे वो याद थे. और क़ुएस्तिओन्स पेपर में जब वो क़ुएस्तिओन्स आये तो उसी तरीके से मैंने उन्हें सोल्वे किया. और मैंने 15 मं. में उन तीनो को सोल्वे कर दिया. उसके बाद के क़ुएस्तिओन्स मुझे नहीं आते थे क्युकी मैंने वो क्लासेज मिस की थी. जिस बजहा से मैं उन्हें सोल्वे नहीं कर पाया.

सर- अगर आते होते वो क़ुएस्तिओन्स तो क्या उन्हें सोल्वे कर देते

मैं- में अहह भी कर सकता हु. दरअशल टेस्ट के बाद मैंने सोचा की में काफी पीछे पहुंच गया हु. इसलिए मैंने कल में hi सारा सिलेबस कम्पलीट कर लिया. जहा तक आपने पढ़ाया है.

सर- क्या बात है. में नमूना देखना चाहूंगा. रुको जरा.

वो बोरड़ के पास गए और उन्होंने एक क़ुएस्तिओन्स बोर्ड पैर लिख दिया. और मुझे उसे सोल्वे करने को कहा. तो में बहा पैर गया और क़ुएस्तिओन्स को मैंने ध्यान से देखा और फिर उसे सोल्वे करने लगा. और मात्रा 5 मं. में मैंने पूरा क़ुएस्तिओन्स सोल्वे कर दिया. और दूसरी तरफ साडी क्लास भी उसे सोल्वे कर रही थी लेकिन वो सायद नहीं कर paye.or मेरा हो गया. और जब सर ने चेक किया तो वो भी हैरान थे ये देखकर. और काफी इम्प्रेस भी. और उन्होंने मेरी टैरिफ कर दी.

सर- बकै में तुमने एक बहुत hi टफ प्रॉब्लम को आसानी से सोल्वे कर दिया. तुम्हे सायद पता नहीं में बताता हु. मुझे hi इसको सोल्वे करने में पोरे 20 मं. लगे थे. पहली बार में. और तुमने केवल 5 मं. में कर दिया. क्या बात है. Well-done देव.

मैं- थैंक्स सर.

फिर में जेक अपनी सीट पैर बैठ गया. और फिर सर बोले.

सर- देखो बच्चो टाइम काम पद रहा है. ये प्रॉब्लम किसी और की नहीं तुम्हारी hi है. तुम्हे तो पता hi है की एग्जाम में केवल 3 घंटे hi मिलते है. इसलिए मेरी मनो तो प्रैक्टिस करना स्टार्ट करो. जितनी ज्यादा प्रैक्टिस होगी उतनी hi स्पीड बढ़ेगी. और एक स्टॉपवॉच रखो. और खुद को केवल 10 मं. का समय दो एक सवाल को सोल्वे करने के लिए. अगर 10 मं. में पूरा नहीं होता तो फिर से सवाल को सिरु से सोल्वे करो. और बही 10 मं. में. पहली बार में नाकाम रहोगे. लेकिन जैसे जैसे प्रैक्टिस. बढ़ेगी तुम ये कर loge.agar 10 मं. में सवाल को सोल्वे करने लगे तो सोचो की तुम्हारे पास कितना टाइम बचेगा एग्जाम में. रिवाइज्ड करने के लिए. और ये देखने के लिए की कही कोई गलती तो नहीं हुई है तुमसे. सब समाज गए.

तो सभी ने मुंडी हिला दी. उसके बाद सर ने पढ़ाया और वो चले गए. और एक के बाद एक टीचर्स आती गयी और हमारे no. बताती gyi.or ऐसे hi ये दिन भी निकल गया.

न hi मुझे कोई असुरो की खबर thi.Filhaal सब ठीक चल रहा था. मुझे अंदाजा था की ये लोग कुछ न कुछ तो जरूर करेंगे. लेकिन क्या यही मुझे नहीं पता था. सलग के बाद मैं सबको bye बोलके बहा से चला गया. रात में करीब 10 बजे मुझे प्राची का कॉल आया.

मैं- hello क्या कर रही हो मिस

प्राची- बस तुम्हे याद कर रही हु. तुम बताओ. क्या कर रहे हो.

मैं- शामे शामे. तुम्हे याद

प्राची- मिलने आओगे क्या अभी

मैं- पागल हो क्या. रात के 10 बज रहे है. ऊपर से तुम हॉस्टल में हो. तुम्हारी वार्डन खा जाएगी मुझे. ये रिस्क में नहीं ले सकता. और तुम्हारी रूम मात भी तो है. वो क्या सोचेगी.

प्राची- मेरी कोई रूममेट नहीं है. मुझे अलग रूम मिला है. में अकेली hi रहती हु

मैं- ये पॉसिबल नहीं हो sakta.hostel में कोई भी अकेला नहीं रहता है.

प्राची- है सही कहा लेकिन मेरी जो रूममेट है वो घर गयी है. उसके डैड को कुछ मेडिकल प्रॉब्लम हुई है. मेरे यहाँ आने से पहले hi वो चली गयी थी. इसलिए में अकेली hi हु फिलहाल तो.

मैं- ओह्ह्ह तो ये बात है. सो साद. बैसे तुम्हारी बाकि की फ्रेंड्स कहा है

प्राची- यहाँ सभी सीनियर hi है. जो मुझसे फ्रेंडशिप नहीं करना चाहती है. याद है वो मला की लड़की. उसी की बजह से.

मैं- है मुझे याद है. देखा उस दिन अगर तुमने उससे लड़ाई न की होती तो सब तुमसे दोस्ती करते और तुम्हे यु अकेला फील नहीं करना पड़ता.

प्राची- यार मेरा बिलकुल मन नहीं लग रहा है यहाँ. कोई बात भी नहीं करता है मुझसे. सब उस की चाकरी करती है

. मैं- वेल सच कहु तो ये तुम्हारी प्रॉब्लम है और तुम्हे hi इसे सोल्वे करना पड़ेगा

प्राची- लेकिन कैसे

मैं- उनका डिल जीतने की कोसिस करो. उनकी मदद करो. सायद कोई तुमसे दोस्ती करले.

प्राची- क्या में यहाँ से जा नहीं सकती.

मैं- जा तो सकती हो लेकिन जहा भी जाओगी अकेली hi पाओगी खुदको.

प्राची- क्यों तुम मेरे साथ नहीं रहोगे क्या.

मैं- में हमेशा तुम्हारे साथ हु. लेकिन सिर्फ दिन में. रात में नहीं. वो वक़्त तुम कैसे निकलोगी. और यार तुम कबसे हार मैंने लगी. कहा है वो लड़की जिसे में पहले दिन मिला tha.use जगाओ और निडर होक इस सिचुएशन का सामना करो. देखना सब तुमसे बात करने लगेंगे. लेकिन है उनपर धौस मत ज़माने लग्न.

प्राची- में भला ऐसा क्यों करने लगी. उस दिन के बाद मैंने ये सब छोड़ दिया है. बैसे तुमसे बात करके हमेशा अच्छा लगता है. तुम मेरी हिम्मत बढ़ाते हो हमेशा.

मैं- इसीलिए तो में हु. ऑलवेज विथ you.jab भी पीछे मुद कर देखोगी मुझे पाओगी. इसलिए बिना डरे आगे बढ़ती रहो.

प्राची- थैंक्स मेरी जानू. ी लव यू.

मैं- लव यू तू. अच्छा माँ डैड से बात हुई. वो पहुँच गए बहा पैर.

प्राची- है वो पहुंच गए और सेट भी हो गए.

मैं- बढ़िया है. चलो अब सो जाओ. बढ़िया.

प्राची- ok bye गुड़ नाईट.

मैं- गुड़ नाईट…

उसके बाद फ़ोन काट गया. और वो सोने की कोसिस करने लगी.

मैं भी सोने की कोसिस करने लगा और कब नींद लगी पता hi नहीं चला.

रात में अचानक मेरी नींद खुली. मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ जिस बजह से मेरी नींद खुल गयी. तभी मेरी नजर मोबाइल पैर गयी. तो देखा प्राची के मिसकॉल आये थे. में समाज गया की बहा पैर कुछ गड़बड़ चल रही है. मैंने अपनी आँखों को बंद किया और प्राची को देखने लगा. मैंने उसका पूरा हॉस्टल छान मारा लेकिन वो मुझे नहीं दिखी. मैंने सभी जगह उसे ढूंढा लेकिन नहीं वो नहीं दिखी मुझे. ऐसा लग रहा था जैसे वो इस पूरी पृथ्वी पैर कही है hi नहीं. और ये कैसे संभव हो सकता था. मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा था. इसलिए मैंने उसे फ़ोन किया. और अपनी आँखों को बंद करके उसका फ़ोन की रिंग को सुनने लगा तो वो उसके कमरे से hi आरही थी. मतलब उसका फ़ोन उसके कमरे में hi था. लेकिन प्राची कहा है. कही उन असुरो ने उसे कुछ…..

नहीं नहीं नहीं…… ऐसा नहीं हो सकता…

मैंने तुरंत hi अपनी आँखों को बंद किया. और साडी घटनाओ को फिर से देखा. तो पाया की वो सो रही थी. अचानक से उसके कमरे की लाइट जलने और भुजने लगी. लिखे जैसे हॉरर मूवी में दिखते है. प्राची की नींद अभी सायद लगी नहीं थी. इसलिए वो जाग गयी. और देखने लगी की क्या प्रॉब्लम है. तभी उसका पलंग हिलने लगा और अपने आप उठने लगा. वो अब हवा में थी. पलंग पैर. उसे कुछ समाज में नहीं आरहा था इसलिए उसने तुरंत hi मुझे फ़ोन किया. लेकिन मैंने रेसिवेद नहीं किया. तभी वो पलंग तेज़ी से नीचे जा गिरा. और प्राची नीचे गिर गयी. उसने कमरे से बहार जाने की कोसिस की लेकिन दरवाजा नहीं खुला तो उसने फिर से मुझे कॉल किया और जोर जोर से बहार चिल्लाने लगी. लेकिन उसकी आवाज कमरे से बहार जा hi नहीं रही थी. और में भी उसका फ़ोन नहीं उठा रहा था. इस बात पैर में भी हैरान था की मेरी नींद खुली क्यों नहीं. कुछ तो माया रची होगी उन्होंने. नहीं तो एक रिंग में मेरी नींद खुल जाती है. खैर उसके बाद प्राची को जोर्का धक्का लगा और पीछे को उड़ती हुई दीवार से जा टकराई और उसका फ़ोन छूट कर नीचे गिर गया. और वो बेहोश हो गयी. और उसके बाद उस कमरे में इतना अन्धकार फ़ैल गया. जिसमे मुझे भी कुछ नहीं दिखा. और जब वो अँधेरा हटा तो बहा प्राची नहीं थी. और सब कुछ नार्मल हो चूका tha.tabhi दीवार पैर कुछ लिखने लगा

"शक्ति में जनता हु तुम ये जरूर देखोगे. और में ये ब्बि जनता हु की ये लड़की तुम्हारे लिए खास है. इसलिए अगर इसकी खैर चाहते हो तो दिव्यस्त्र का पहला ाँस हमें दे दो. और इसको छुड़ा लो. में जनता हु तुम काफी शक्तिशाली हो. इसकिये तुम्हे एक मौका देता हु. अगर आज सूर्य उगने से पहले तुमने इसे बचा लिया तो हम कभी तुम्हारे रस्ते में नहीं आएंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं कर पाए तो तुम्हे हमें वो ाँस देना HOGA.TUMHARA समय सुरु होता है अब "

ये सब देखते hi मेरी हालत ख़राब हो गयी. ये लोग तो सही खेल गए. इन्हे पता है की मुझे मार भी देंगे तब भी वो ाँस इन्हे नहीं मिलेगा. अगर में खुद उन्हें वो न दू तो. इसीलिए प्राची को मुजरा बनाया है. ताकि ाँस भी मिल जाये और मेरा भी खत्म कर sake.dev बाबू बहुत नूरे फसे हो अब.

मैंने टाइम देखा तो अभी रात के 2 बज रहे थे. और सूरज सुबह 6-7 के बीच उदय होंगे. मतलब मेरे पास 4 घंटे का समय है.

और प्राची को ढूंढ़ने का एक hi उपाय था की वो खुद मुझे पुकारे. और मुझे बहा का पता चल जायेगा. अगर उसने नहीं पुकारा तो में सायद hi उसे ढूंढ पाव. उनका मायाजाल बहुत hi खतरनाक था. उसे मेरी शक्तिया भेद नहीं प् रही थी.

मैंने बार बार कोसिस की. लेकिन मुझे कुछ नहीं दिख रहा था. न hi प्राची न उसकी परछाई. समय निकलता जा रहा था.

में सोच रहा था की वो उसे कहा गायब कर सकते है. वो सभी पृथ्वी के असुर है. यहाँ से बहार उनकी शक्तिया ज्यादा काम नहीं करेंगी मतलब साफ़ था की वो यही पृथ्वी पैर hi मौजूद है. लेकिन kaha.ho सकते है. मैंने सोचा सबसे पहले तो उस कमरे में जेक देखना चाहिए सायद बही से कुछ सुराग मिल जाये. इसलिए मैं फ़ौरन hi उसे कमरे में पहुंच गया. जहा प्राची थी गायब होने से पहले. मैंने अपनी आँखों को बंद किया और अपनी पॉजिटिव एनर्जी को उस कमरे में फैला दिया चारो तरफ. जैसे hi मेरी ऊर्जा उस कमरे में फैली. उस कमरे का सारा मायाजाल धीरे धीरे ख़त्म हो गया. और जैसे hi उनका मायाजाल ख़त्म हुआ. मुझे उस कमरे में एक बहुत hi गहरा खड़ा दिखाई दिया. जो इस मायाजाल की बजह से किसी को भी नहीं दीखता. मैंने सोचा चलो कुछ तो मिला. लेकिन इसमें जाना ठीक होगा की नहीं ये नहीं पता था. लेकिन जाना तो था hi. इसलिए बिना कुछ सोचे कूद गया usme.vo गद्दा मुझे अपने अंदर खींच रहा था. जैसे कोई शक्ति मुझे नीचे के जाना चाहती हो. मुझे फिलहाल प्राची को ढूंढा जरुरी था इसलिए मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया और उस गद्दे में नीचे जाता चला गया. वो गद्दा कहे या गुफा. पता नहीं. लेकिन गहरा बहुत था. उसका अंत hi नहीं आरहा था. मेरी आँखे सुन्न सी पड़ती जा रही थी. और मेरा मंद भी. धीरे धीरे काम करना बंद करता जा रहा था. सायद मयाबी शक्तियों का असर tha.mujhe ऐसा फील हो रहा था जैसे कोई मेरे पुरे सरीर पैर कब्ज़ा कर रहा है. धीरे धीरे मेरा पूरा मंद ब्लेंक होता जा रहा था. मुझे कुछ भी होश नहीं था की क्या हुआ क्या नहीं. ऐसा लग रहा था जैसे में किसी भयंकर मायाजाल में फास गया हु. जिसका कोई भी अंत नहीं था. और मेरी शक्तिया कमजोर पड़ती जा रही थी.



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 46



में इस मायाजाल में फास्ट हुआ जा रहा था. न hi उसका कोई अंत आरहा था. और मेरी आँखे भी बंद होने लगी थी. कुछ समाज में नहीं आरहा था की क्या किया जाये. लेकिन कुछ तो करना hi था. इसलिए गिरते हुए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और अपनी आँखों को पूरी तरह से बंद किया. और ॐ का जाप किया. और जैसे hi ॐ की ध्वनि उस गुफा की दीवारों से टकराई. तुरंत hi बहा का सारा मायाजाल एक झटके में टूट गया. जैसे hi वो मायाजाल टूटा मैंने खुद को उसी कमरे में पाया. मतलब की वो गद्दा केवल एक भ्रम था. जिसे ओमकार ने तोड़ दिया. मैंने एक और आखिरी कोसिस करने के लिए. प्राची को याद kiya.uske मन की आवाज को सुनने का प्रयास किया. कही से तो आएगी. बहुत कोसिस की और अंत में मुझे एक आवाज सुनाई दी. जो मेरा नाम पुकार रही थी. उस आवाज में दर्द tha.jo मुझे उसकी तरफ खींच रहा tha.me पालक झपकते hi उस आवाज के पास पहुंच गया. मैंने आस पास देखा तो ये बही जंगल था जहा पैर मुझे वो पहला ाँस मिला था. बही पहाड़ और जंगल. और बही जीव जो इस वक़्त बहा नहीं the.or वो एल्फ भी इसी जंगल में रहता है. मुझे साडी कहानी समाज में आगयी. की क्यों में नहीं देख पाया प्राची को. एक तो ये जगह पहले से hi मयाबी है. और दूसरी उन असुरो ने अपनी शक्तियों से प्राची को एक ऐसे मायाजाल में बांध दिया था. जिसके पार में नहीं जा प् रहा था. लेकिन उसकी मन की आवाज मुझ तक पहुंच गयी और में उस तक पहुंच गया. प्राची मेरे सामने hi बेहोश पड़ी हुई थी. और उसके आसपास कोई नहीं था. लेकिन में जनता था की ये 4 कदम की दुरी आसान नहीं होने वाली. इसलिए सबसे पहले मैंने अपनी आँखों को बंद किया और ऐसा करते hi तीसरा नेत्र खुल गया. जैसे hi वो खुला. चारो तरफ एक ऊर्जा फ़ैल गयी. जिसने साडी माया का अंत कर दिया. लेकिन अभी भी वो मायाजाल बना हुआ था प्राची के ऊपर. इसलिए मैंने अपनी पॉजिटिव एनर्जी को अपने माथे पैर एकजुट किया. और एक साथ उसे प्राची के ऊपर छोड़ दिया. जो सीधे मेरी आँख से निकली. और जैसे hi प्राची से टकराई उस मयाबी शक्ति और मेरी शक्ति के बीच युद्ध होने लगा. दोनों hi एक दूसरे को ख़त्म करना चाहती थी. और इसका असर प्राची पैर दिख रहा था. उसका सरीर हवा में तैर रहा था. और जल रहा था दोनों की शक्तियों se.use भयंकर तकलीफ हो रही थी. जिसे में नहीं देख प् रहा था. लेकिन उसे ये पीड़ा सहनी hi पड़ेगी. और मुझे मजबूत होना पड़ेगा. वर्ण वो कभी भी इस मायाजाल से बहार नहीं निकल पायेगी. इसलिए मैंने अपने डिल को पक्का किया. और अपनी पावर को और बढ़ाया. और जैसे hi पावर बड़ी मयाबी शक्तिया कमजोर पड़ने लगी और प्राची का सरीर धीरे धीरे नीचे आने लगा. और जैसे hi उसका सरीर जमीन पैर बापिस गिरा. बहा पैर एक भयानक विस्फोट हुआ. और ये देखकर hi मेरा सारा ध्यान टूट गया. साडी शक्तिया बापिस से अंदर चली गयी. और मेरे सामने उस विस्फोट से एक गद्दा बन गया था. और प्राची का सरीर उस गद्दे में पड़ा हुआ था. जो पूरा काला पद गया था. मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही थी आगे बढ़ने की मेरे पेअर जैसे बही जैम गए थे. मेरे आंसू निकलने लगे थे. और ऐसा होते hi आसमान से बारिस सुरु होगयी थी. मैंने जैसे hi आगे बढ़ने की कोसिस की तो मेरे पेअर लड़खड़ा गए. और में बही पैर नीचे गिर गया. में आगे बढ़ना चाहता था और प्राची को उठाना चाहता था लेकिन मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा था. में अब क्या करू मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा था.

में अपने सर को नीचे रख कर ासु बहा रहा था.

तभी मुझे कुछ आहात सुनाई दी. किसी के कदमो की. जो धीरे धीरे मेरी तरफ hi बाद रहे थे. ये आहात पते hi मैंने अपना सर ऊपर किया. और सामने देखा तो मेरी कृषि का ठिकाना नहीं था. क्युकी सामने प्राची कड़ी हुई थी. और उसका पूरा सरीर ठीक हो चूका था. वो पहले जैसी नार्मल हो चुकी थी. उसने जैसे hi मुझे देखा वो दौड़ कर मेरे पास आने लगी. और उसे देखकर मेरे अंदर भी एक नयी ऊर्जा आगयी और में खड़ा हो गया और उसकी तरफ आगे बड़ा और एक पॉइंट पैर आकर हम दोनों गले लग गए. मेरी आँखों से अब कृषि के ासु निकल रहे थे. और वो हैरान थी की ये सब आखिर हो क्या रहा hai.vo यहाँ कैसे. बगेरा बगेरा. काफी देर तक हम गले लगे रहे. और फिर अलग हुए.

प्राची- तुम यहाँ. में कहा हु. और ये सब क्या है. में तो हॉस्टल में थी. यहाँ कैसे आगयी. और ये सब क्या हो रहा है.

मैं- shan't हो जाओ. पहले ये बताओ तुम ठीक हो. हाथ पेअर सब बराबर से चल रहे है न. कही कोई चोट बगेरा तो नहीं है न. दर्द बगेरा

प्राची- नहीं में ठीक हु. मुझे कही भी दर्द का एहसास नहीं हो रहा है. अब ये बताओ की हम कहा है. और यहाँ आये कैसे और कब. और तुम्हे पता है रात में क्या हुआ था रूम में. मैंने कितने फ़ोन किये लेकिन तुमने एक का भी जवाब नहीं दिया.

मैं- सॉरी यार नींद थोड़ी ज्यादा गहरी लग गयी थी. लेकिन में रात में hi उठ गया था और तभी से तुम्हे ढूंढ रहा था. अब जेक मिली हो तुम.

प्राची- ढूंढ रहे थे लेकिन कहा. में तो कमरे पैर hi थी.

मैं- है तुम्हारा किडनैप हुआ था. रात में hi.

प्राची- क्या लेकिन मुझे किसने किडनैप किया था.

मैं- थे कुछ बुरे लोग.

प्राची- अब कहा है वो. अभी बताती हु उन्हें में.

मैं- वो दरअशल मुझे देखते hi भाग गए कही पैर.

प्राची- मुझे ये बताओ की ये जगह कोनसी है. और सच बताओ तुम्हे कसम है मेरी. तुम क्या छिपा रहे हो मुझसे. ये सब अचानक से क्या हो रहा है. और जिस चीज़ का मैंने एहसास रूम में किया था. वो कोई साधारण नहीं थी. इसलिए सच बताओ की बात क्या है. हम कहा hai.or ऐसा कोई भी जंगल देहरादून के आसपास भी नहीं है. तो अगर रात में मेरा किडनैप हुए था तो इतने जल्दी वो मुझे देहरादून से ज्यादा दूर नहीं ले जा सकते है.

मैं- तुम ज्यादा hi सोच रही हो. ऐसा कुछ भी नहीं hai.tumne जो कुछ भी महसूस किया था वो केवल तुम्हारा ब्रह्म था और कुछ नहीं. अब तुम बिलकुल ठीक हो.

अभी में उसे समझा hi रहा था की हमारे चारो तरफ से एक आवाज आने लगी. जो सायद उन्ही असुरो मेसे किस एक की थी

डी1- बहुत बढ़िया देव. मैंने सही कहा न यही नाम है तुम्हारा देवज. में तुम्हे धन्यबाद देता हु प्राची की तुम्हारी बजह से हमारा कितना मुश्किल काम आसान हो गया. हमें हमारे दुश्मन की शक्ल देखने को मिल गयी. और साथ में इसकी साडी कमजोरिया भी. बैसे मन्ना पड़ेगा देव की तुम्हारे अंदर शक्ति तो बहुत है और तुम्हे उनका इतेमाल करना भी आता है. लेकिन तुम जानते हो की मेरा मुकाबला तुम फिलहाल नहीं कर सकते हो. और में चहु तो इसी वक़्त तुम्हारा अंत कर सकता हु. लेकिन ऐसा करने से फिलहाल कोई भी फायदा नहीं है मेरा. इसलिए अगर तुम अपने परिवार वालो को सलामत देख चाहते हो तो मुझे वो ाँस दे दो. और में वडा करता हु की तुम्हारे परिवार की तरफ हम आँख उठाकर भी नहीं देखेंगे.

ये आवाज सुनकर प्राची का भेजा फ्राई हो गया.

प्राची- हो कोण तुम सामने आओ फिर बात करेंगे. सायद तुम जानते नहीं मेरे पापा पुलिस कमिश्नर है. तुम्हे ऐसा जेल में बंद करेंगे की जिंदगी भर तुम्हारी जमानत नहीं होगी. और तुम पछताओगे की तुमने आखिर हमसे पन्गा लिया hi क्यों.

ये सुनते hi मैंने अपना सर पीट लिया

डी1- अरे में तो दर गया. देव इससे कहो की मुझे पुलिस के हवाले न करे. समझाओ इसे.

यही सुन्ना चाहती थी क्या तुम प्राची. लेकिन सायद तुम हमारी असलियत नहीं जानती. इसलिए कुछ भी कहने से पहले जरा अपने प्रेमी की ओरे देखो. और उससे पूछो की में क्या चीज़ हु.

ये सुनकर प्राची ने मेरी तरफ देखा तो मुझे उसने थोड़ा परेशान पाया .

प्राची- क्या हुआ तुम परेशान क्यों हो रहे हो. देखना डैड से कहकर इनकी ऐसी बंद बजवाउंगी की ये हमेशा याद रखेंगे.

मैं- एक मं. प्राची. Shan't raho.jaisa तुम सोच रही हो ये आवाज किसी साधारण इंसान की नहीं है जिसे पुलिस का दर लगेगा. ये दूसरा मटर है. तुम इससे फिलहाल दूर hi रहो और मुझे बात करने दो. में तुम्हे सब कुछ बाद में समझाऊंगा.

मैं- सुनो पहले ये बताओ की तुम हो कोण. अपना परिचय दो.

डी1- ठीक है तो सुनो. मेरा नाम है. शुम्भ्कासुर.

मैं- अब एक बात कान खोलकर सुनलो शुम्भ्कासुर की तुम चाहे कितनी hi कोसिस करलो मुझे तोड़ने की गिराने की या मारने की. लेकिन तुम मेरा बाल भी बका नहीं कर पाओगे ये तय है. रही बात तुमसे टकराने की तो जब तुम जानते हो की में तुम्हारा सामना नहीं कर सकता तो तुम सामने क्यों नहीं आरहे हो. क्या दर लग रहा है मुझसे. तुम तो असुरो के नाम पैर hi कलंक हो. जाओ जेक अपनी माँ के आँचल में छिप जाओ. तो सायद में तुम्हे जीवित छोड़ दूंगा. रही बात ाँस को पाने की तो तुम और तुम्हारे गुरुदेव शुक्राचार्य से कह देना की तुम लोगो का ये सपना सपना बनकर hi रहेगा. न hi मेरे जीवित रहते और न hi मेरे मरने के बाद. तुम कभी भी उस ाँस को नहीं प्राप्त कर पाउँगा. और याद याद रखना जिस दिन मुझे सरे ाँस मिल गए. उस दिन इस सरे संसार से में तुम लोगो की साडी नस्लों को मिटा दूंगा. अब अगर तुम्हारे अंदर थोड़ी भी हिम्मत हो तो आजाओ और मुकाबला करके देखलो. की में झूट नहीं बोल रहा हु. वर्ण यहाँ से हमेशा के लिए चले जाओ. और आपने में भर यहाँ बापिस आने के बारे में मत सोचना. वर्ण उसका अंजाम तुम सोच भी नहीं सकते कितना भयानक होगा

ये सब सुनने के बाद प्राची का मुँह देखने लायक था. उसकी आँखे तो जैसे बहार hi निकलने बलि थी. और वो असुर का तो कुछ पता hi नहीं चला. कैसा असुर है मैंने कितना ललकारा लेकिन सामने hi नहीं आया वो. इसलिए मैंने सोचा अब यहाँ से निकलना चाहिए. और मैंने प्राची का हाथ पकड़ा और अपनी आँखों को बंद करके गायब हो गए. और पालक झपकते hi हम सीधे पहुंचे प्राची के हॉस्टल वाले रूम में. और ये देखकर तो प्राची की हालत और ख़राब हो गयी उसे समाज hi नहीं आरहा था की ये सब हो क्या रहा है. क्या ये कोई सपना है या कुछ और. और उसके अगले hi पल वो इतना प्रेशर बर्दास्त नहीं कर पाई और बेहोश हो गयी. उसके सोते hi. मैंने उसके माथे पैर हाथ रखा और उसके दिमाग से साडी बातो को निकाल दिया. उसे अब केवल इतना पता था की उसने रात में मुझसे बात की और फिर वो सो गयी. इसके साथ hi मैंने अपनी आँखों को बंद किया और प्राची के चारो तरफ एक आवेद सुरक्षा कवच बना दिया. अब कोई असुर चाहे भी तो भी प्राची पैर न तो कोई माया रच सकता था और न hi उसे कोई नुकसान पंहुचा सकता था.

अभी सुबह के 5 बज रहे थे. इसलिए उसके अगले hi पल में अपने सभी दोस्तों और परिवार वालो के पास गया और सभी के ऊपर मैंने बैसा hi सुरक्षा कवच बना दिया. ताकि वो असुर किसी को भी कोई भी नुकसान न पंहुचा पाए. और मेरे परिवार को मेरे hi खिलाफ इस्तेमाल न कर पाए.

उसके बाद में गया अपने कमरे में और थोड़ा आराम करने लगा. 15 मं. लेटने के बाद में उठा बढ़िया फ्रेश हुआ नहाया और छत पैर चला गया. ध्यान लगाने के लिए.

जैसे hi आँखे बंद की गुरुदेव की आवाज मेरे कानो में आने लगी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव आपको जानकारी तो मिल hi गयी होगी. कल उन असुरो ने किस प्रकार की हरकत की थी.

गुरुदेव- है मुझे पता चला और मैंने सारा प्रकरण भी देखा की कैसे तुमने उन असुरो के मायाजाल को तोडा और प्राची की जान बचाई.

मैं- एक पल के लिए तो मुझे लगा की मैंने उसे खो दिया है. लेकिन महादेव ने उसे बचा लिया.

गुरुदेव- वत्स उसे महादेव ने नहीं बल्कि तुमने बचाया है. उस वक़्त अगर तुम भावनाओ में बहकर उसके सरीर की पीड़ा को देखकर बही पैर रुक जाते तो और अपनी ऊर्जा को उसके सरीर पैर छोड़ना बंद कर देते तो सायद वो नहीं बच पति. लेकिन तुमने अपने ह्रदय को पक्का किया और उसपर ऊर्जा का प्रभाव जारी रखा जिस बजह से उसकी जान बच गयी. क्युकी उस मायाजाल का यही प्रभाव था. उसे जो भी तोड़ने की कोसिस करता उसे वो इंसान बहुत पीड़ा में hi दीखता जिस बजह से वो अपनी शक्तियों को बापिस ले लेता और वो हमेशा के लिए उसी मायाजाल में फांसी रह जाती और एक दिन उसके प्राण चले जाते. लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया और उसे ठीक कर लिया. मुझे एक पल को तो लगा था की तुम अपनी ऊर्जा का प्रभाव रोक लोगे क्युकी तुम उसे दर्द में नहीं देख सकते. लेकिन तुमने वो कर दिखाया जिसकी उन असुरो को भी उम्मीद नहीं थी. मुझे गर्व है तुम per.vats.

मैं- ये सब आपकी शिक्षा का hi कमाल है गुरुदेव. मैंने तो बही करने की कोसिस की जो मुझे सही लगा. परन्तु गुरुदेव उन्हें मेरी पहचान का पता चल चूका है.

गुरुदेव- में जनता हु वत्स. लेकिन तुम चिंतित न हो. वो तुम्हारे बनाये हुए कवच को नहीं तोड़ पाएंगे. और तुम्हारे सरे सम्बन्धी सही सलामत रहेंगे. तुमने ठीक किया उन सभी के ऊपर कवच बना कर.

मैं- परन्तु गुरुदेव वो तो मुझे देख चुके है लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा और इसका मतलब ये है की वो अभी भी हम पैर छिपकर हमला मर सकते है.

गुरुदेव- उसके लिए तुम्हे सतर्क रहना होगा. अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा को फैलाना होगा ताकि वो जल्द hi तुम्हारे सामने aasake.ab खतरा और भी बाद गया है.

मैं- में जनता hi गुरुदेव.

धन्यबाद की आप आये गुरुदेव.

गुरुदेव- भला में क्यों न आता वत्स. अपने सिस्य को तकलीफ में देखकर. परन्तु अब सब ठीक है. अपना ध्यान सम्पूर्ण करो.

मैं- जैसा आप कहे गुरुदेव. प्रणाम.

फिर वो चले गए.

उसके बाद मैंने अपना ध्यान सम्पूर्ण किया और नीचे चला गया. माँ और दादू से मिला उनका आसीर्बाद liya.nasta किया और सलग चला गया. रस्ते से चिराग को पिक किया और बातो hi बातो में हम पहुंच गए सलग. बहा हमें लकी मिला और प्राची भी जो अब ठीक लग रही थी. उसके बाद गए क्लासेज में. शाम तक सब सही hi चला. सलग के बाद प्राची को उसके हॉस्टल तक छोड़ने गया.

मैं- ख्याल रखना अपना. में फ़ोन करूँगा शाम को. और बैसे कुछ हुआ फिर हॉस्टल की लड़कियों के साथ.

.

प्राची- नहीं वो अभी भी बैसि hi है. लेकिन में उन्हें मन लुंगी जल्द hi. तुम बताओ.

मैं- क्या बताऊ. अच्छा चलता हु.

प्राची- रुको जरा. मुझे कुछ पूछना है तुमसे

. मैं- क्या.

प्राची- यही की तुमने मुझे अभी तक साडी सच्चाई नहीं बताई है. की उस जंगल में हम कैसे पहुंचे थे और वो किस की आवाज थी जिसे तुम ललकार रहे थे और जिसने मेरा किडनैप किया था

ये बाटे सुनते hi मेरा सर घूम गया की ये कैसे पॉसिबल है. मैंने तो इसकी यादास्त मिटा दी थी. फिर उसे सब या कैसे रह गया.



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 47



मैं- किस बारे में कह रही हो तुम.

प्राची- मुझे सब याद है.

मैं- तुम साफ़ साफ़ बताओ की तुम किस बारे में बात कर रही हो. मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा है.

प्राची- अच्छा तो तुम्हे समाज में नहीं आया की में किस बारे में बात कर रही हु. ठीक है. जाओ मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है.

ये कहके वो हॉस्टल के अंदर चली gyi.or में बही पैर खड़ा रह गया की ये कैसे संभव हुआ. आखिर. मैंने इसकी यादास्त मिटा दी थी. लेकिन इसे सब याद कैसे है.

अभी में सोच hi रहा था की मेरे कानो में आवाज आई. मैंने ध्यान से सुना तो ये आवाज प्राची की थी. और ये आवाज सुनके मैंने दौड़ लगाई हॉस्टल के अंदर की तरफ. हलाकि वार्डन ने रोकने की कोसिस की लेकिन मुझे रोक नहीं पाई और में सीधा पंहुचा हॉस्टल की छत पैर और मेरे पीछे वार्डन और गॉर्ड भी. मैंने यहाँ बहा देखा तो प्राची छत के बिलकुल किनारे पैर कड़ी हुई थी. वो भी दूसरी तरफ. जिस तरफ केवल खली मैदान बगेरा hi थे. मैंने उसे देखा और दौड़ कर उसके पास गया और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया.

मैं- पागल हो गयी हो क्या. ये क्या कर रही थी

प्राची- में कुछ नहीं करने वाली थी. लेकिन मुझे ये बताओ की तुम यहाँ कैसे आये मैंने तो तुम्हे कोई आवाज नहीं लगाई. और में सामने की तरफ भी नहीं कड़ी थी जिससे तुमने मुझे देखा भी नहीं. फिर तुम यहाँ आये कैसे और तुम्हे कैसे पता में छत पैर हु.

वार्डन- ये क्या हो रहा है.

मैं- कुछ नहीं मम. बस ये ूत पतंग हरकत कर रही है. इसे कमरे में बंद कर दो.

गार्ड- सर आप जाइये यहाँ से. ये गर्ल्स हॉस्टल है. बाकि लोग क्या कहेंगे.

मैं- तुमने सही कहा. मुझे जाना hi चाहिए.

और मैंने प्राची को घर कर देखा और बहा से नीचे चला गया. और वो केवल मुस्कुरा रही थी. और में गुस्सा और कंफ्यूज था की ये संभव कैसे हुआ.

मैं हॉस्टल से निकला अपनी कार में बैठा और सीधा घर निकल गया. रस्ते में मुझे बस यही बात सत्ता रही थी की ये कैसे बच गयी. तभी मुझे ख्याल आया की गुरुदेव से hi पूछना पड़ेगा. इसलिए मैंने कार को साइड में रोका और अपनी आँखों को बंद किया और गुरुदेव का आवाहन किया. और थोड़ी hi देर में मुझे उनकी आवाज आने लगी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- कहो वत्स कैसे याद किया मुझे.

मैं- गुरुदेव अभी कुछ अजीब घटना घाटी है. जो मुझे समाज में नहीं आरही है. इसलिए आप से पूछना चाहता हु.

गुरुदेव- पूछो कोनसी घटना के बारे में पूछना है.

मैं- गुरुदेव मैंने कल प्राची की याददास्त मिटा दी थी. लेकिन आज उसे सब याद आज्ञा है वो मुझसे कल की घटनाओ के बारे में पूछ रही है. ये कैसे संभव हुआ.

गुरुदेव- वत्स मुझे कल hi पता था की उसपर तुम्हारी शक्ति का सायद hi प्रभाव पड़ा हो. लेकिन अब तुम्हारी बातो से लग रहा है बकै उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तुम्हारी शक्ति का.

मैं- लेकिन ये कैसे संभव हुआ गुरुदेव.

गुरुदेव- वत्स कल तुमने अपनी शक्ति का इस्तेमाल प्राची पैर किया था उस मायाजाल को तोड़ने के लिए. और उसी दौरान तुम्हारी कुछ ऊर्जा को प्राची के सरीर ने अपने अंदर सोख लिया था. और फिर उसके बाद तुम्हारे आसुओ से जो बारिस हुई थी. वो उसमे पूरी तरह से भीग गयी थी. जिस बजह से उसके सरीर में तुम्हारी शक्तियों का कुछ ाँस न चाहते हुए भी चला गया है. जिस बजह से जब तुमने उसकी याददास्त को मिटाया तो उसके अंदर जो थोड़ी शक्तिया पहुंची है उनकी मदद से उसके मस्तिष्क ने उन यादो को बापिस से ले लिया. इसीलिए उसे अब सब याद है.

मैं- ये कैसे हो सकता है गुरुदेव. मेरी शक्तियों को उसका सरीर कैसे सोख सकता है. और वो बारिस में तो कई लोग भीगे होंगे तो क्या उन सभी में मेरे शक्तिया आगयी है.

गुरुदेव- तुम समझे नहीं वत्स. जो बारिस हुई थी वो तुम्हारी hi शक्तियों से हुई थी. और उस मायाजाल को भी तुम्हारी शक्तियों ने hi तोड़ था. और उन्ही शक्तियों में प्राची को ठीक किया था वो भी कुछ hi देर में. वर्ण तुम खुद देखो की इतने भीषण विस्फोट के बाद उसके सरीर पैर एक भी घाव नहीं था. और वो पूरी तरह से ठीक हो गयी थी. जबकि होना तो यु चाहिए था की उसको बहुत hi गंभीर रूप से घायल तो होना hi था. लेकिन तुम्हारी शक्तिया जो उसके सरीर ने सोखी थी उन्ही ने उसे टूलरांट hi ठीक कर दिया और उन्ही के प्रभाव से उसकी याददास्त भी बापिस आगयी. और रही बात उस बारिस की तो. उस वक़्त उस पोरे जंगल में तुम दोनों के आल्वा कोई भी नहीं थी. सिवाय पैर पोधो के. और वो बारिस केवल प्राची के लिए hi हुई थी. और उसका असर भी उसी पैर हुआ.

मैं- गुरुदेव उसके ऊपर इन शक्तियों का क्या क्या प्रभाव पड़ा है. कही उसे कोई खतरा तो नहीं है न.

गुरुदेव- नहीं वत्स. बल्कि ये तो एक ऐसी घटना है जिसका होना तय था. और ऐसा होना तुम्हारे लिए भी अच्छा है. अब वो अपनी सुरक्षा करने में स्वयं hi सक्षम hai.or तुम्हे चिंता करने की भी कोई जरुरत नहीं. उसे कुछ भी नुकसान नहीं होने वाला.

ये सुनकर मुझे थोड़ा सुकून मिला.

मैं- धन्यबाद गुरुदेव आपने एक बहुत बड़ी चिंता से मुक्त कर दिया मुझे. वर्ण में तो पता नहीं क्या क्या सोच रहा था.

Gurudev-yahi तो मेरा कर्त्तव्य है वत्स. तुम्हारी साडी परेशानियों का निवारण करना. अब निश्चिंत रहो. सब ठीक है.

उसके बाद मैंने उन्हें प्रणाम किया और वो चले गए. और में भी टेंशन फ्री होक घर चला गया. जहा फ्रेश हुआ और कॉफ़ी पीने लगा तभी रेनू का कॉल आज्ञा

मैं- और क्या हाल है

रेनू- सब बढ़िया है. तुम बताओ. उस दिन के बाद एक कॉल भी नहीं किया तुमने.

मैं- है वो थोड़ा सिलेबस को पूरा करने में बिजी था. काफी पीछे हो गया था. लेकिन अब सब सेट है

रेनू- चलो बढ़िया है. और माँ और दादू कैसे है.

मैं- सब बढ़िया है तुम सबको याद करते है. बैसे ममी और मां और सभी सब ठीक है

रेनू- है सब ठीक है. तुम्हे याद करते है.

मैं- उनको बोलना की जल्द से यहाँ आजाये छूती लेके. हमें भी उनकी याद आती है

रेनू- है जरूर बोल दूंगी.

मैं- फिर इस दिन के बाद कोई और पन्गा तो नहीं किया न.

रेनू- नहीं अब सब सेट है. हम अब केवल स्टडी पैर hi ध्यान देते है.

मैं- गुड. बैसे कोई लड़के का टेंशन तो नहीं है न.

रेनू- नहीं और होगा भी तो हम संभल लेंगे. तुम्हारी जरुरत नहीं पड़ने वाली.

मैं- गुड. अच्छा है. बैसे भी में तो यहाँ हु. मुझे बहा की खबर लगेगी hi नहीं तो में मदद क्या करूँगा.

रेनू- बही तो.

मैं- बैसे में सोच रहा था. की तुम दोनों भी यही पैर अड्मिशन ले लो. काम से काम हम साथ hi रहेंगे.

रेनू- आईडिया तो अच्छा है लेकिन ममी फिर अकेली पद जाएँगी. और वो हमें जाने hi नहीं देंगी. इसलिए इस बात को यही छोड़ दो

मैं- ये भी सही है. चलो मिलते है बाद में. अभी रखता हु में.

. रेनू- ठीक है bye.

मैं- bye…..

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ रात में डिनर किया और प्राची का कॉल आज्ञा और उसने फिर से जान खली मेरी बही बाटे पूछ पूछ कर.

मैं- तुम मानती क्यों नहीं.

प्राची- मुझे सच जानने का हक़ है. अब तुम बताते हो या फिर में कुछ उल्टा सीधा करू.

मैं- जरुरत नहीं है. ठीक है छत पैर मिलो मुझे में आता हु

प्राची- ok जल्दी आना. लेकिन आओगे कैसे.

मैं- पता चल जायेगा. पहुँचो छत पैर.

वो फ़ोन को चालू करके hi छत पैर चली गयी.

प्राची- लो आगयी में छत पैर.

मैं- पीछे देखो.

उसने पीछे देखा और मुझे बहा पाया. और दौड़ कर मेरे गले लग गयी

मैं- बस करो. तुम्हारी खड़ूस वार्डन- आगयी तो पता नहीं क्या सोचेगी मेरे बारे में.

प्राची- सोचने दो. ी डोंट केयर.

काफी देर तक वो गले लगी रही और फिर वो दूर हुई मुझसे.

प्राची- अब मुझे साडी बाटे बताई सच सच.

मैं- ठीक है सुनो.

फिर मैंने उसे शुरुवात से साडी बातो के बारे में बताया. कैसे शक्तिया जागृत हुई गुरुदेव से बाटे और असुरो से लड़ाई. जिसे वो बड़ी hi ध्यान से सुन रही थी.

साडी बाटे सुनने के बाद वो कुछ भी नहीं बोली.

मैं- कुछ बोलो.

प्राची- तुमने जो कहा वो सच है kya.ye ऐसे hi फेल रहे हो.

मैं- लो जी सच जानने के बाद भी यकीन नहीं है.

प्राची- यकीन है लेकिन विस्वास नहीं हो रहा है की ये सब सच हो सकता है.

मैं उसके हाथ को पकडे हुए था.

मैं- यकीन नहीं है तो नीचे देखो.

उसने जैसे hi नीचे देखा उसकी हालत ख़राब हो गयी क्युकी इस वक़्त हम बीच आसमान में रुके हुए थे. और उसको इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं लगा की हम कब यहाँ आगये

प्राची- हम यहाँ कब पहुंचे.

मैं- जब तुम इसके बारे में सोच रही thi.ab यकीन हुआ

प्राची- ये तो कमाल हो गया. तुम्हारे पास सुपर पावर्स है. क्या बात है. मेरा बॉयफ्रेंड एक सुपरहेरो है.

ययययययय…

वो कुछ ज्यादा hi एक्सीटेंड हो रही थी. और मेरी टेंशन बाद रही थी.

मैं- बस करो. नहीं तो सीढ़ी नीचे गिरेगी.

Prachi-achha तुम क्या क्या कर सकते हो.

मैं- जो तुम कहो.

प्राची- मुझे माँ डैड को देखना है अभी.

मैं- ok. लो देखो.

उसने नजर उठा कर देखा तो इस वक़्त हम उसके माँ डैड के कमरे में थे. जहा उसकी माँ सोने की तैयारी कर रही थी. और उसके डैड कुछ पद रहे थे

प्राची- ये कैसे किया. क्या वो हमें देख सकते है.

मैं- अगर में चहु तू. फिलहाल वो हमें न तो सुन सकते है न hi देख सकते है.

प्राची- वाओ it's अमेज़िंग.

मैं- और कुछ या बापिस चले.

प्राची- नहीं अभी मुझे घूमना है. मुझे मॉन्टेवेरेस्ट पैर जाना है. ले चलो मुझे प्लस

मैं- ठीक है देख लो

अचानक से ढांड बाद गयी और प्राची मुझसे चिपकने लगी

प्राची- तुम्हे ढांड नहीं लग रही है

मैं- नहीं. देखलो हम माउंट एवेरेस्ट पैर खड़े है इस वक़्त.

उसने चारो तरफ देखा तो हलकी चाँद की रौशनी में गजब का नजर दिख रहा था.

प्राची- क्या बात है. कितना खूबसूरत नजारा है

मैं- दिन में और भी खूबसूरत होता है.

प्राची- तुम आये हो यहाँ.

मैं- नहीं लेकिन ऐसा सुना है मैंने.

प्राची- सच hi सुना है. चलो कुछ शॉपिंग करने चलते है.

मैं- इस वक़्त कहा पैर शॉपिंग करनी है तुम्हे.

प्राची- न्यूयोर्क में. बैसे कार्ड बगेरा है तुम्हारे पास

मैं- नहीं है.

प्राची- तो लेलो. और चलो जल्दी. मुझे बहा से शॉपिंग करनी है.

मैं- सीरियसली.

प्राची- और नहीं तो क्या. चलो अब यहाँ बहुत ठण्ड है.

मैं- ठीक है चलो.

और उसके अगले hi पल हम एक मॉल में थे जो नई यॉर्क में था.

और बहा की शॉप्स देख्नर प्राची पागल hi हो गयी. और दौड़ कर एक शॉप में घुस गयी.

और अपने लिए और मेरे लिए उसने बहा से कुछ कपडे खरीद लिए. और मैं बैग्स लेके बहार निकल आया और एक सुनसान जगह से हम बापिस से उसके हॉस्टल रूम में पहुंच गए.

प्राची- वाओ आज तो मजा hi आज्ञा. थैंक्स तो मेड माय डे. अब बताओ की कल में क्या पहन कर औ.

मैं- कुछ भी पहन लो तुम सभी में प्यारी hi लगती हो. मेरी पारी.

प्राची- ौवववीए सो स्वीट. बैसे में तुम्हे बता दू. पारी जो होती है वो पापा की होती है. बर्फ की तो जणू स्वीटी होती है.

मैं- ओह्ह्ह माय मिस्टेक. मेरी प्यारी स्वीटी…

प्राची- थॉट्स बेटर.

मैं- अब बताओ क्या करना है.

प्राची- कुछ नहीं. तुम अब जा सकते हो

मैं- में नहीं जाने वाला यहाँ से. मेरा तो आज यही पैर पेअर फैला कर सोने का मन है.

प्राची- ठीक है सो जाओ. ी don't मंद.

ये सुनके मेरा पूरा पचका हो गया.

मैं- व्हाट.

प्राची- है सो सकते हो यहाँ पैर.

मैं- और अगर में रात में नॉटी हो गया तो

प्राची- कोई बात नहीं. बैसे तुमसे ज्यादा नॉटी तो में होती हु रात में. इसलिए मेरे लिए hi अच्छा है

मैं- बेहया बेशर्म. जाओ में नहीं रुकता यहाँ. क्या पता रात में मेरी इज़्ज़त लूट लो तुम.

प्राची- क्यों दर गए क्या. तुम्हे hi रुकना था यहाँ पैर.

मैं- अब नहीं रुकना है. में जाता हु यहाँ से. बैसे भी तुम्हारे इरादे मुझे ठीक नहीं लग रहे है

प्राची- अब तो सच में मेरे इरादे बदल गए है. आओ न जणू प्लस मुझे अपनी बहो में भर लो.

मैं- हैट बेशर्म

ये कहके में बहा से सीधा अपने कमरे में आज्ञा. और चैन की सास ली. और बही प्राची हस्ती हुई बिस्टेर में लेट गयी. और ये हसी देखकर में भी कुश हो गया और सो गया सीधा. क्युकी रात के 2 बज गए थे. इसने शॉपिंग में hi 2 घंटे लगा दिए थे. जो की मेरे हिसाब से ठीक hi थे. वर्ण मुझे तो सुबह होने की आशंका थी.

बही दूसरी तरफ वो असुर शुक्राचार्य के पास hi थे और उन्हें साडी घटनाओ के बारे में बता रहे थे. ये भी की उस शक्ति का पता चल गया है. जिसकी जानकारी शुक्राचार्य को भी लग चुकी थी

शुक्राचार्य- है मुझे भी वो दिख गया था.

मयासुर- अब हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए गुरुदेव. क्युकी जहा तक मैंने उसे जाना है. उसने अपने सरे परिवार के लोगो को सुरक्षित कर लिया होगा अभी तक.

डी1- है उसने कर लिया है aisa.ham उन्हें छू भी नहीं सकते. न hi उनपर हमारी कोई भी शक्ति का असर हो रहा है.

शुक्राचार्य- उसके परिवार को फिलहाल भूल जाओ. उसने उन्हें सुरक्षित कर लिया है. लेकिन बाकि के जो पृथ्वी बसी है उन्हें तो नहीं किया न. उनका इस्तेमाल करो और उससे ाँस हासिल करो. मुझे बस वो ाँस चाहिए है. चाहे उसके लिए जो भी करना पड़े. और जल्द hi दूसरा ाँस भी जागृत होने वाला है. इसलिए मयासुर तुम केवल उस ाँस का पता लगाओगे. बाकि शुम्भ्कासुर तुम उस बालक से निपटोगे. उससे वो ाँस हासिल करोगे. और मयासुर जैसे hi ाँस जागृत होता है. तुम्हे उसकी जानकारी में दे दूंगा. तुम्हे इस जगह का पता लगाना है बहा पैर अपना भयंकर मायाजाल फैलाना है. जिससे वो बालक ब्रहमित हो जाये और उसे तक कभी न पहुँच सके. और हाँ आसानी से उसे हासिल कर ले.

अधीरा- परन्तु गुरुदेव उसे भी इस ाँस की जानकारी मिल जाएगी. तो वो हम से पहले भी तो बहा पहुंच सकता है. और इस मयासुर की माया को तो उसने पहले भी तोडा है. तो अब भी तोड़ सकता है.

डी1- अधीरा की बात सही है. उस ाँस के पीछे हम hi जायेंगे. और वो बालक अगर हमारे सामने आएगा तब भी हमसे मुकाबला नहीं कर पायेगा. इससे ाँस भी मिल जायेगा और उसे भी हम दवोच सकते है.

शुक्राचार्य- सायद तुम्हारी बातो में सच्चाई है. ठीक है. तो मयासुर तुम्हे उसे उलझना होगा. जब ाँस जागृत होगा तब. उसका ध्यान भटकना होगा. ताकि वो बहा तक पहुंचे hi नहीं. और तब तक शुम्भ तुम उसे सम्भालो और उससे वो ाँस लेने की कोसिस करो

डी1- ठीक है गुरुदेव. जैसा अपने कहा है वैसा hi होगा. अब आज्ञा दीजिये….

शुक्राचार्य- विजय भाव

उसके बाद सरे अपने अपने िस्थानो पैर निकल गए….

तो बे कॉन्टिनुए……………..

 
अपडेट 48



नेक्स्ट डे अपने रूटीन से उठा थोड़ी एक्सरसाइज की एंड ध्यान लगाया और सलग के लिए रेडी हो गया. नीचे जेक बढ़िया ब्रेकफास्ट किया दोनों का आसीर्बाद लिया थोड़ी बहुत गप्पे मरी और निकल गया सलग के लिए. रस्ते से चिराग को पिक किया और हाँ सलग पहुंच गए. बहा दोनों से मिले और कैंटीन में जेक बैठ गए.

मैं- यार लकी तूने अपने बारे में कुछ बताया नहीं अभी तक. मतलब तेरे पेरेंट्स और तुम कहा से बिलोंग करते हो और यहाँ पैर कहा रहते हो. कुछ भी नहीं पता है हमें तो. कुछ बताओ यार.

ये सवाल सुनकर लकी थोड़ा हैरान और परेशां सा होगया. में उसके हाव भाव बराबर से देख रहा था.

चिराग- है बोलना तूने अभी तक कुछ बताया hi नहीं है. सिवाय उस फोटो के जिसमे तू हठी जैसा मोटा था.

लकी- यार उसमे बताने जैसा कुछ है hi नहीं. मेरे माँ और डैड दोनों hi अलग रहते है. डैड दिल्ली में और माँ यहाँ पैर. स्कूल तक की पड़े दिल्ली में hi की है. और बाकि की पड़े के लिए में यहाँ आज्ञा. माँ के पास भी रह सकता हु और साथ में स्टडी भी हो जाती है. और में तो बहुत नसीब बाला हु जो यहाँ आज्ञा. वर्ण तुम जैसे अच्छे दोस्त मुझे कहा से मिलते. और अभी तक बताया नहीं वो इसलिए क्युकी अभी तक ऐसी कोई बात निकली hi नहीं और किसी ने मुझसे पूछा hi नहीं. बाकि देव बाबू आज ये पूछने की कोई खास बजह.

मैं- यार कैसी बात कर रहा है. में तो बस जानना चाहता था की तू रहता कहा है कोई मदद की जरुरत तो नहीं बगेरा बगेरा. और मेरा कोई गलत इंटेंसिव नहीं है. तुझे हैरत करने का. एंड तेरे पेरेंट्स के बारे में सुनकर दुःख हुआ. सॉरी.

लकी- कैसी बात कर रहा है तू. .इ जनता हु तुम मेरे क्या किसी के बारे में भी गलत नहीं सोच सकते सपने में भी नहीं. इसलिए डिल पैर मत लो. और अगर कोई डाउट हो तो आज शाम को मेरे साथ घर पैर चल कर मेरी माँ से मिल सकते हो.

चिराग- बैसे आईडिया अच्छा है. डाउट की बजह से नहीं बल्कि तुम्हारी माँ से मिलने के लिए चल सकते है. क्या कहते हो देव.

मैं- ी don't मंद अगर लकी कहे तो.

लकी- ok तो फिर शाम को चलेंगे. एंड बही पैर दिनीर करोगे सब में कोई एक्सक्यूज़ नहीं सुनुँगा. इनफैक्ट में अभी माँ को बता कर साडी तैयारी करने को कह देता हु. ताकि कोई भी फिर मन न कर पाए.

प्राची- लेकिन मैं हॉस्टल से कैसे आउंगी.

मैं- लास्ट टाइम कितने बजे तक का है

प्राची- 10 बजे तक का.

लकी- जब तक तो हम फ्री हो hi जायेंगे.

मैं- है और बैसे भी हॉस्टल में बैठी बैठी क्या करोगी. बढ़िया आंटी के हाथ का खाना खाने को मिलेगा इसके घर पैर.

प्राची- बैसे ये बात सही कही. हॉस्टल का बकवास खाने से तो रहत मिलेगी काम से काम. ठीक है. ी म इन.

लकी- ok ग्रेट में अभी कॉल करता हु.

उसके बाद लकी बहा से उठ कर साइड में चला गया. और फ़ोन करने लगा. और थोड़ी देर बात करने के बाद वो बापिस आज्ञा.

लकी- दोने. चलो अब क्लास में चलते है.

मैं- है चलो.

उसके बाद हम क्लासेज में गए. एंड शाम तक टाइम पास होता रहा. शाम को मैंने माँ को कॉल करके अपना प्लान बता diya.ki में कही और खाना खा रहा हु. तू वो भी उसी प्रकार से डिनर की तैयारी करने लगी. यही शामे चिराग ने भी बोल दिया अपने घर पैर. और प्राची ने अपना बेग अपने कमरे में रखा और फ्रेश होक 20 मं. बाद नीचे आगयी. और हम ऐसे भूतो की तरह लग रहे थे और वो एक फ्रेश पारी की तरह. ऐसा लग रहा था की 3 बहुत एक पारी को उठा कर ले जा रहे हो. सिचुएशन काफी कॉम्प्लिकेटेड थी.

मैं- ये गलत बात है. हम ऐसे hi बिना फ्रेश हुए भूतो की तरह लग रहे है और तुम आगयी पापा की पारी बन के.

इस बात पैर तीनो hi हसने लगे.

मैं- हसो मत सालो. तुमसे फिर भी हैंडसम लग रहा हु.

लकी- में तो घर जेक फ्रेश हो hi जाऊंगा. लेकिन तुम दोनों का क्या होगा

चिराग- है भाई फ्रेश हो jayega.lekin रहेगा मुझसे काम hi हैंडसम. और देव के तो बराबर में भी नहीं लगेगा.

लकी- फिर भी दोनों से बेटर hi लगूंगा. खैर छोडो घर चलके फ्रेश हो जाना अभी चलो जल्दी.

मैं- ठीक है लेकिन बंधू रास्ता तो बताओ की कहा जाना है.

लकी- सॉरी बताओ डेस्टिनेशन सेट कर दे रहा हु. अब चलो

उसके बाद मैंने उसकी बताई हुई डेस्टिनेशन पैर कार को बड़ा दिया. और करीब 15 मं. में हाँ उसके घर के सामने थे. बढ़िया घर था.

मैंने कार को पार्क किया और हम सभी लकी के पीछे चलने लगे. आगे चलके उसके दूर बेल्ल बजायी तो एक आंटी ने दरवाजा khola.or फिर लकी ने हमारा परिचय उनसे मरवाया.

लकी- सो गाइस ये है मेरी माँ. और माँ ये है मेरे दोस्त. ये देव ये प्राची और ये है चिराग.

आंटी- है मैंने देखते hi पहचान लिया था. ये हमेशा hi तुम लोगो की बाटे करता रहता है.

मैंने आगे बढ़कर उनके पेअर छू कर आसीर्बाद लिया और मेरी देखा देखि चिराग और प्राची ने भी.

आंटी- सीख कुछ अपने दोस्तों से. तूने कभी मेरे पेअर छुए है

. लकी- क्या माँ अभी छू लेता हु.

तो लखइने भी उनके पेअर छू कर आसीर्बाद लिया.

आंटी- आओ अंदर आओ सभी

हम सभी घर में अंदर आये और घर को देखने लगे.

लकी- जनता हु छोटा है.

मैं- उससे क्या फर्क पड़ता है. अब मेरा घर hi देख लो बड़ा है लेकिन रहने वाले केवल 3 hi है. और वो कहते है न. घर नहीं बल्कि उसने रहने वालो का दिल्ली बड़ा होना चाहिए. और वो तुम्हारा है. इसलिए don't फील बाद.

आंटी- बहुत अच्छी बात कही. खैर जाओ और फ्रेश हो लो में चाय कॉफ़ी लती हु.

प्राची- चलिए आंटी में आपकी मदद करती हु बैसे भी इन बॉयज के साथ में बोर hi जाउंगी.

आंटी- नहीं बीटा तुम जाओ और गप्पे लड़ाओ. में कर लुंगी. और बैसे भी तुम पहली बार हमारे यहाँ आई हो. और में तुमसे काम करवौ. ये अच्छा नहीं लगता है.

प्राची- क्या आंटी आपने तो मुझे पल में पराया कर दिया. जाओ में आपसे बात नहीं करुँगी.

आंटी- अरे मेरी गुड़िया नाराज़ मत हो. चलो आजाओ मेरे साथ

ये सुनके प्राची के चेहरे पैर एक प्यारी सी स्माइल आगयी. और वो कुश होती हुई चली गयी आंटी के साथ.

और हम भी चले गए लकी के कमरे में.

कमरे में आते hi चिराग तो सबसे पहले बीएड पैर फ़ैल गया

चिराग- क्या बीएड है यार.

लकी- है जी आपका hi है सर.

देव तुम फ्रेश हो आओ फिर में जाता हु.

मैं- ok.

उसके बाद में घुस गया बाथरूम में. और बढ़िया से फ्रेश hua.or बहार आज्ञा. और उसके बाद लकी घुस गया. एंड उसके बाद चिराग.

हम सभी फ्रेश होम रेडी थे. फिर प्राची को आवाज आगयी. तो हम सभी कमरे से बहार चले गए. जहा हमारी चाय कॉफ़ी रेडी थी. मैंने अपना मग उठाया और चिराग और लकी ने चाय. और प्राची ने भी कॉफ़ी. और आंटी किचन में hi थी. खाने की तैयारी कर रही थी. तो मैं उठा और उन्हें बहार लेके आज्ञा और उनके हाथो में भी एक मग पकड़ा दिया.

मैं- आंटी काम बाद में होता रहेगा आप बैठिये हमारे साथ

आंटी- अरे बीटा काम में लेट हो जायेगा.

लकी- माँ बैठो न. काम में थोड़ा बहुत लेट चलेगा.

आंटी- ठीक है. तो और बताओ कैसी चल रही है पड़े तुम लोगो की.

चिराग- एक दम first-class.lekin साथ में बोरियत भी होने लगी है. लेकिन अब किया भी क्या जा सकता है. झेलना तो पड़ेगा hi

आंटी- सही बात है. झेलना तो पड़ेगा hi. लेकिन तुम सभी सलग में हो और बोर हो रहे है. ये बात कुछ मैच नहीं कर रही है.

चिराग- एक्चुअली आंटी- सारा दोष हमारे इस दोस्त का है. ये न तो पार्टी करता है न hi हमें करने देता है. न hi कही घूमने जाता है

आंटी- जहा तक बात पार्टी की है तो ये तो सही करता है वो. और रही बात घूमने की तो अभी तुम लोग गए तो थे बनारस. बहा पैर नहीं घुमा.

मैं- बिलकुल सही कहा आपने आंटी. इनलोगो को आदत हो गयी है हर काम के लिए मुझे जिम्मेदार बनाने की. अरे भाई पड़े करो. और जब भी घूमने जाने का मन हो तो कह सकते हो हम चलेंगे.

लकी- ठीक है तो फिर जल्दी hi प्लान बनाते है

मैं- अभी नहीं पहले पड़े करो. वेकेशन में jayenge.kyu आंटी

आंटी- बिलकुल सही कहा. फिलहाल पड़े पैर ध्यान दो. घूमना तो होता hi रहेगा

मैं- आंटी लकी बता रहा था की लकी के पिता अब साथ नहीं रहते. फिर आप क्या करती है

आंटी- बीटा में यही एक बैंक में जॉब करती हु. मेरा और लकी दोनों का hi काम चल्जता है. और है वो अब हमारे साथ नहीं है. लकी जब छोटा था तब hi हमारा डाइवोर्स हो गया था. तब से में अकेली hi रहती हु. लकी आता जाता बना रहता था. लेकिन अब यही रहने आया है तब से में तो बहुत कुश हु. लेकिन इसके डैड नहीं है.

मैं- वैरी बाद. खैर कोई बात नहीं. एंड लकी में वॉर्न कर रहा हु तुझे. अगर आंटी को जरा भी तकलीफ दी तो छोडूंगा नहीं तुझे.

लकी- समाज gya.bilkul अच्छे से समाज गया. आगे कुछ भी कहने की जरुरत नहीं है. और में वडा करता हु की माँ का अच्छे से ख्याल रखूँगा. उन्हें बिलकुल भी परेशानी नहीं आने दूंगा.

मैं- गुड. और आंटी अगर ये परेशान करे तो आप मुझे बता सकती है. इसको तुरंत hi ठीक करदूंगा में.

आंटी- में तुम्हे hi फ़ोन करुँगी सबसे पहले. बैसे लगता नहीं इसकी कभी नौबत आएगी. क्युकी लकी बहुत ख्याल रखता है मेरा. एंड जब से तुम सभी इसके दोस्त बने hi तब से इसमें काफी चंगेस आये है जो मैंने खुद महसूस किये है. उसके लिए में तुम सभी को थैंक्स कहती हु. एंड सच कहु तो मुझे बिलकुल भी चिंता नहीं है अब लकी की. तुम लोगो के बारे में सुनकर और आज देख कर मुझे पूरा भरोसा हो गया है की मेरा बीटा सही सांगत में है.

मैं- थैंक्स आंटी आपने इस काबिल समझा हमें. एंड में भी वडा करता हु की लकी मेरे लिए भाई जैसा है उसपर एक भी आंच नहीं आने दूंगा कभी.

आंटी- थैंक्स. ओह्ह्हो में तो भूल hi गयी. तुम लोग बाटे करो में खाना रेडी करती हु

उसके बाद वो अंदर चली गयी. एंड हम आपस में hi बातो में बिजी हो गए. 1 घंटे बाद आंटी ने खाना लगाया और हमने बड़े चाव से खाना खाया. बहुत टेस्टी था. और खाने के बाद हम सभी आंटी और लकी को bye बोलके निकल गए अपने अपने घरो को. रस्ते में मैंने प्राची को छोड़ा और फिर चिराग को और सीधा पंहुचा अपने घर पैर. दादू और माँ से मिला उन्होंने पूछा की कहा गए थे तो मैंने उन्हें बता दिया की लकी के घर गए थे. उसकी माँ से मिले बहुत hi बढ़िया लेडी है. और बहुत hi टेस्टी खाना बनती है. मजा hi आज्ञा आज तो.

ये सुनके माँ भड़क गयी.

माँ- क्या में नहीं बनती अच्छा खाना.

मैं- अरे माँ आप क्यों भड़क रही हो. आपके हाथ का खाना तो जैसे स्वर्ग है. लेकिन उनका भी अच्छा था तो टैरिफ तो करना बनता है न.

माँ- ठीक है जाओ अब मुँह हाथ धो लो.

मैं- आपलोगो का हो गया डिनर.

दादू- है बीटा जी हमारा हो गया

जाओ अब आराम करो.

मैं- ठीक है जाता हु. Bye गुड नाईट.

दादू- गुड नाईट बीटा

माँ- गुड नाईट

उसके बाद में चला गया बहा se.apne कमरे में.

थोड़ा फ्रेश हुआ कपडे चेंज किये और थोड़ी देर प्राची से बाटे की प्यार भरी जिनमे मैं बिलकुल अनादि हु. फिर भी कोसिस तो की hi. एंड सो गया

बही आधी रात को. आकाश से एक बहुत hi चमकदार रौशनी नीचे धरती की तरफ आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा एस्ट्रोनॉट जमीन पैर गिर रहा हो. उसकी स्पीड भी काफी तेज़ थी. और देखते hi देखते वो रौशनी जमीन से टकरा गयी. और जहा पैर वो गिरी बहा पैर बहुत hi बड़ा विस्फोट जैसा हुआ और उसका असर भी काफी बड़ा था. जो अपने 50 मीटर के रेडियस में चारो तरफ धूल उदा दी और जिस जगह पैर वो एक्सएक्ट गिरी बहा पैर एक बड़ा सा गद्दा बन गया. चारो तरफ धूल और धुआँ उड़द रहा था जिस बजह से कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था की ये आखिर है क्या.

बही देव अपनी मस्ती में सो रहा था इन सब से बेखबर. लेकिन इतना तय था की ये धमाके का असर देव के जीवन में भी होगा. अब कैसे होता है ये देखने वाली बात है…….



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
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