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मैं- तुम यहाँ क्या कर रही हो.
आलिआ- में बस जानने आई थी की तुम्हे कोई जानकारी मिली या नहीं.
मैं- वेल कुछ जानकारी तो मिल गयी है. और जो भी पता चला है उस हिसाब से उसे हराना बहुत hi मुश्किल है.
आलिआ- ऐसा क्या पता चला है तुम्हे.
फिर मैंने उसे उसके वरदान के बारे में बताया. जिसे सुनके आलिआ का चेहरे hi लटक गया.
आलिआ- तो क्या उसे हारने का कोई तरीका नहीं है.
मैं- है तो लेकिन उसे करने में पता नहीं हम फ़ैल होंगे या पास.
आलिआ- मतलब.
मैं- मतलब की उसे हारने के लिए हमें उसे पृथ्वी पैर ले जाना होगा. यहाँ अंतरिक्ष में उसे हराना न मुमकिन hai.or जरा सोचो ऐसी इस्थिति में अगर उसे ये ाँस मिल जाये तो वो अमर बन जायेगा. उसे कोई नहीं हरा पायेगा जिंदगी भर.
आलिआ- तुमने सही कहा लेकिन उसे पृथ्वी पैर कैसे ले जा सकते है हम. वो बहा आएगा hi क्यों.
मैं- मैंने अभी इसके बारे में कुछ नहीं सोचा है. फिलहाल हमारा पहला काम है सभी परियो को छुड़ाना. उसके बाद सोचेंगे उसे कैसे हराना है.
आलिआ- क्या तुम्हे पता चला की वो कहा है.
मैं- है कुछ हद tak.lekin बहा क्या क्या खतरा है ये मुझे पता नहीं चला इसलिए. में चाहूंगा की तुम यही रहो. बहा में अकेले hi जाऊंगा.
आलिआ- और ये बिलकुल भी मुमकिन नहीं hai.me तुम्हारे साथ आऊँगी. फिर चाहे बहा मेरी जान hi क्यों न चली जाये.
मैं- में ये रिस्क नहीं ले सकता. में तुम्हारी जान को डाव पैर नहीं लगा सकता. तुम्हे यही रहना होगा.
. आलिआ- ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ. मुझे ले चलो तुम जानते हो में मदद कर सकती हु तुम्हारी.
मैं- नहीं तुम केवल बहा मेरी मुसीबत hi बढ़ाओगी. जब वो तुमसे भी ज्यादा शक्तिशाली परियो को अपनी क़ैद में कर सकता है तो तुम्हे तो आसानी से पकड़ लेगा वो. और में नहीं चाहता की वो तुम्हे पकड़ कर मुझसे कोई भी सौदा करे. इसलिए तुम यही जायदा सुरक्षित रहोगी. और अब इसपर कोई भी बात नहीं होगी. समझ गयी.
मेरी बाटे सुनकर आलिआ का चेहरा लटक गया tha.lekin ये उसके और मेरे लिए hi अच्छा था की वो यही रहे सुरक्षित. बहा उसकी जानको खतरा ज्यादा था.
मैं- अब में जाता हु.
ये कहके मैं बहा से सीधा टेलिपोर्ट हो गया उस जगह पैर जहा मुझे वो साडी परिया दिखी थी. मैंने खुद को गायब किया. और चारो तरफ देखने laga.ye जगह कोनसी थी पता नहीं. लेकिन थी बड़ी hi भयानक. यहाँ आते hi. मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे थे. जो इस जगह का hi प्रभाव था. चारो तरफ घोर अन्धकार छाया हुआ था. चारो तरफ वेरानी छै हुई थी. न तो कोई जीव दिख रहा था दूर दूर तक. लेकिन मुझे उम्मीद थी की साडी परिया यही कही पैर है. इसलिए मैंने एक बार और अपनी आँखों को बंद करके उन परियो को ढूंढा तो वो मुझे इसी जगह पैर दिखाई दी. इसलिए में कन्फर्म हो गया. और आगे बाद गया. ये जगह एक छोटे सेहर जितनी बड़ी थी. मतलब जल्दी और आसानी से ढूंढा जा सकता था सभी को. और में गायब था इसलिए किसी को दिखने का सवाल hi नहीं था. अब दिक्कत ये हुई की मैंने पूरी जगह छान मरी लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला. चारो तरफ कुछ था hi नहीं. जिससे मुझे थोड़ी टेंशन हुई की कहा गयी साडी परिया. है तो यही पैर लेकिन यहाँ पैर किस जगह पैर. जमीन के ऊपर मैंने देख लिया नहीं है. मतलब साफ़ था की सायद जमीन के नीचे रखा है उन्हें. इसलिए मैंने फिर से सब जगह का चक्कर लगाया. मेरी आँखे से तेज़ रौशनी निकल रही थी जो सभी जगहों को अच्छे से देख रही थी की किस जगह पैर उसने परियो को छिपाया है. और ऐसा करते करते मुझे जमीन के नीचे एक जगह पैर कुछ हलचल दिखाई दी. और में समाज गया की यही पैर सबको रखा गया है. इसलिए में तुरंत hi बहा से जमीन के नीचे चला गया. बिना जमीन को तोड़े ताकि किसी को भी बिलकुल शक न हो. अपने आप को हवा बनाकर में नीचे आज्ञा. तो नीचे एक लुम्बी गुफा जैसी बानी हुई थी. और हर 5 फट. पैर एक पहरेदार खड़ा हुआ था इस असुर का. हाथो में शास्त्र लिए. जिससे में और कन्फर्म हो गया की यही है सभी. इसलिए में गायब होक hi आगे बढ़ता चला. किसी को भी कुछ भी भनक नहीं लगी की यहाँ उनके बीच कोई है या नहीं. काफी लुम्बी गुफा थी. लेकिन आगे तो जाना hi था. इसलिए आगे बढ़ता चला गया. और करीब आखिर में मैं पहुंच hi गया एक जेल जैसी जगह पैर जहा पैर सभी परियो को अलग अलग जगहों पैर क़ैद करके रखा गया था. किसी को भी साथ में नहीं रखा था उसने. और उनके पास न तो उनकी छड़ी थी न hi कोई और शक्ति. सभी बेहोश थी. और उन्हें जंजीरों में बंधा हुआ था. सायद ये जंजीरे मयाबी थी. जिससे इनकी शक्तिया धीरे धीरे काम होती जा रही थी. इसलिए अब मुझे जल्दी hi कुछ करना था. मैंने सबसे पहले रानी पारी को ढूंढा. हलाकि उनको देखा नहीं था. लेकिन ध्यान में उनका चेहरा दिख गया था. इसलिए मैंने उनको ढूंढा. वो मुझे एक जेल में अकेली मिल गयी. तो में जेल के आरपार गया. और अपना हाथ उनके सर पैर रख दिया. और अपनी आँखों कोबन्द कर लिया. और ऐसा होते hi मेरर हाथो से एक ऊर्जा निकल कर उनके सरीर में जाने लगी. और वो तुरंत hi होश में आगयी. और होश में आते hi वो चारो तरफ देखने लगी
मैं- घबराइए मत में आप सभी को ले जाने के लिए आया हु.
रानी- कोण हो आप
मैं- में आपकी पुत्री का मित्र हु.
रानी- मित्र. परन्तु उसका तो कोई मित्र नहीं है. सच सच बताओ कोण हो आप और मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहे हो.
मैं- कृपा करके धीमी आवाज में बोलिये. में बकै आलिआ का मित्र हु. और में पृथ्वी से हु. और बाकि जानकारी आप उसी से ले लेना. अभी आप चलने के लिए रेडी हो जाइये. ये कहके मैंने उनका हाथ पकड़ा और अगले hi सेक्. हम उन्ही के महल में खड़े the.mere hi कमरे में. जहा आलिआ बैठी हुई थी. जिसे देखकर रानी के मुख से आवाज निकल पड़ी.
रानी- पुत्री आलिआ.
ये सुनकर आलिआ ने ऊपर देखा और उसकी माँ को देखकर वो दौड़ कर उनके गले लग गयी. और में उनको बैसा hi छोड़ कर बापिस पंहुचा सीधा उसी गुफा में. और उसके बाद मैंने एक एक करके सभी परियो को महल में छोड़ना सुरु कर दिया. परियो की दँख्या 100 से ज्यादा थी. इसलिए मुझे ये सब करने में करीब. 15-20. मं का समय लग गया. अगर सब एक साथ होती तो एक सेक् में सबको बापिस ले आता. खैर. अब साडी परिया बापिस आचुकी थी. और ये समाचार सरे परीलोक में फ़ैल चूका था. और सभी महल की ओरे आने लगे थे. इसलिए अब मुझे इस परीलोक की सुरक्षा के इंतजाम करने थे. इसलिए मैंने सबसे पहले तो पोरे परीलोक के चारो तरफ एक मजबूत सुरक्षा कवच बना दिया. इतना मजबूत की चाहे कितना hi पावरफुल असुर क्यों न आजाये लेकिन इसको पार नहीं कर पाए. और ये सब करने के बाद समय था. उसके पहरेदारो को सबक सीखने का. इसलिए में बापिस गया उसी गुफा में. जहा चारो तरफ सिपाही भाग रहे थे और हैरान थे की अचानक से साडी परिया कहा गायब हो गयी. तब मैंने खुद को नार्मल किया और उन्हें आवाज लगाई.
मैं- किसे ढूंढ रहे है आप लोग.
उन सभी ने मेरी आवाज सुनकर मेरी तरफ देखा तो मेरे हाथ में मेरा फरसा देखा और मेरे साधारण से कपडे. तो वो कंफ्यूज हो गए की में आखिर है कोण.
तो उनमे से एक बोलै.
ा1- कोण हो तुम. और इस जगह पैर कैसे पहुंचे.
À2- लगता है इसी ने साडी परियो को छुड़ाया है. इसे क़ैद करके महाराज के सामने ले जाना चाहिए हमें.
ा1- सही कहा तुमने. इस बंदी बना लो.
जैसे उसने ये कहा कुछ सेनिको की भीड़ मेरी तरफ आगयी.
मैं- अरे भाई मुझे दर लग रहा है. कृपा करके मेरे प्राणो को बॉक्स दे. में तो बस यहाँ से गुजर रहा था. तभी आपलोगो को यहाँ बहा भटकते देखा. इसीलिए चला आया की कोई मदद कर दू सायद आपकी.
सैनिक- जो भी मदद करना है वो महाराज के सामने जाकर करना.
उसके बाद उन्होंने मेरे सरीर पैर जंजीर दाल दी. और मेरे फरसे को जैसे hi मुझसे छीनने की कोसिस की वो गायब हो गया.
जिसे देखकर बाकि सब अचंभित हो गए.
ा1- ये तुम्हारा अस्त्र कहा गया.
मैं- वो अस्त्र थोड़ा भाबुक है. उसे मेरे अलावा अगर कोई भी छूने की कोसिस करता है तो वो ु hi गायब हो जाता है.
À2- ये कोई मयाबी लग रहा है. ऐसा मयाबी अस्त्र तुम्हारे पास कहा से आया.
मैं- एक साधु की मैंने बहुत सेवा की थी तो उन्होंने मेरी सेवा से कुश होक मुझे वो वरदान स्वरुप दिया था. लेकिन वो आता और जाता अपनी मर्जी से है.
À2- सेनिको इसे जल्द से जल्द महाराज के सामने ले चलो. मुझे कुछ गड़बड़ लगता है ये. बही इससे साडी सच बहार निकालेंगे.
उसके बाद सरे सैनिक और में एक साथ बहा से टेलिपोर्ट हो गए. और जहा हम पहुंचे. वो भी एक अज्ञात जगह hi थी. इसका नाम तो पता नहीं. लेकिन थी उस जगह से भी मनहूस. बही शामे चारो तरफ अन्धकार छाया हुआ था.
मैं- यहाँ क्या सूर्य उदय नहीं होता है.
ा1- नहीं.
मैं- तो फिर आपको दिनों के बारे में कैसे पता चलता है.
ा1- हमारे महाराज सब पता लागलेते है. अब चलो चुपचाप.
उसके बाद वो मुझे सीधे ले गए उनके महाराज के सामने जो इस वक़्त उनकी सभा में बैठे हुए थे. और अपने इन सेनिको को और मुझे बेड़ियों में देख कर उनके होश hi उड़द गए. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की ये यहाँ क्या कर रहे है और में कोण हु.
कालनेमि- सेनापति तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो. और उन परियो के पास कोण है
ा1- महाराज हमसे भूल हुई है हमें शमा करे. अचानक से साडी परिया बहा से गायब हो गयी है. और हमें देखने पैर ये लड़का दिखाई दिया बहा उसी गुफा में. इसीलिए हम इसे यहाँ के आये.
ये सुनके उसको भयंकर गुस्सा आज्ञा और उसने अपने हाथो से एक भयंकर ज्वाला निकली जिसमे वो बेचारा सेनापति बही भस्म हो गया
कालनेमि- साला मनहूस समाचार सुनाता है. और तुम सभी को 1000 कोड़े मरे जाये. सेनिको ले जाओ इन सभी को. सिर्फ इस लड़के को छोड़ कर.
उसके बाद बहा से सैनिक तैनात थे उन्होंने बाकि के सेनिको को बंदी बनाया और उन्हें कोड़े मारने के लिए ले gye.or में बही बेड़ियों में जकड़ा खड़ा हुआ था.
कालनेमि और उसके साडी सभा मुझे घर कर देखे जा रही थी. बहा पैर मौजूद हर कोई बड़ा hi भयानक लग रहा था. बचे अगर देखले तो जिंदगी भर यही उनके सपने में आते रहेंगे. लेकिन मेरे चेहरे की मुस्कान उन भयानक असुरो को और बिचलित कर रही थी. फिर इस सभा में से एक आदमी खड़ा हुआ.
महामंत्री- ये बालक कोण हो तुम. और हमारी सीमा में कैसे घुस आये तुम.
मैं- में तो बस गुजर रहा था की ऐसे hi नीचे देखने चला आया. और तभी आपके सेनिको ने मुझे बंदी बना लिया.
महामंत्री- सत्य बोलो बालक. हम इतने बेबकुफ़ नहीं है जो तुम्हारी बातो में आजाये. और तुम्हारी जानकारी के लिए में बाटाडू. की हमारी सीमा धुंदलेना hi ये बताता है की तुम साधारण नहीं हो. कोई देवता भी हमें नहीं ढूंढ सकता है.
मैं- में सच hi कह रहा हु. में एक आम इंसान हु.
अभी वो कैच बोलता उससे पहले hi पीछे से आवाज आई.
क्या बात है इस बालक को पकड़ लिया. कालनेमि तुमने हमें कुश कर दिया है.
ये आवाज मेरे पीछे से आरही थी. और मैंने पीछे मुड़कर देखा तो में देखता hi रह गया. क्युकी मेरे पीछे एक साधु खड़े हुए थे. माथे पैर एक अलग hi तेज़. सर पैर जाता हाथो में कुदाल और माला. और इन्हे देखते hi में पहचान गया की ये कोण है. और मेरा शक यकीन में तब बदला जब सरे लोग जो बहा बैठे हुए थे. वो सभी खड़े होक उनको प्रणाम करने लगे.
कालनेमि- प्रणाम गुरुदेव. आप जानते है इसको
शुक्राचार्य- है हम जानते है इसे. ये बही है जिसने हमारी नाक में दम कर रखा है. और तुम्हे जानकार हैरानी होगी की इसी के पास अभी तक जागृत हुए दोनों ाँस है.
ये सुनकर बहा मौजूद सरे असुर जैसे एक सख्त मूर्ति में बदल गए.
कालनेमि- क्या.
शुक्राचार्य- है.
ये कहके उन्होंने मेरी तरफ देखा और मेरे चेहरे की मुस्कान देखकर वो भी बिचलित हो गए
मैं- प्रणाम गुरु शुक्राचार्य. आज आपके दर्शन हो hi गए.
शुक्राचार्य- है ये तो होना hi था. लेकिन मुझे भी इसकी उम्मीद नहीं थी की इतनी जल्दी ये होगा.
मैं- है उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी.
शुक्राचार्य- तुम्हारे यहाँ आने का कारण क्या है.
मैं- में तो बस आपके सिस्य को देखने आया था की जिन्होंने यहाँ तहलका मचा रखा है वो आखिर दीखते कैसे है.
कालनेमि- यहाँ जैसे तैसे ऑटो गए हो लड़के लेकिन यहाँ से जा नहीं पाओगे. और अगर जीवित रहना चाहते हो तो हमें वो दोनों ाँस दे दो. हम तुम्हारी जान बॉक्स देंगे. बचन है हमारा.
मैं- माफ़ कीजियेगा महाराज. मुझे उस ांसो को बहार निकालना नहीं आता है. इसलिए में उन्हें आपको दे hi नहीं पाउँगा. बाकि आप जानो.
शुक्राचार्य- बड़े hi चतुर हो बालक लेकिन में जनता हु की तुम्हे ये बिधि आती है. मैंने खुद तुम्हे ऐसा करते हुए देखा है. इसलिए तुम्हारा ये नाटक यहाँ नहीं चलेगा.
मैं- आप तो परम ज्ञानी है आपको साडी बातो की जानकारी है. फिर मुझसे यु मांग कर क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे है आप.
शुक्राचार्य- सही कहा तुमने. कालनेमि इसे यातनाये देना सुरु करो. इसकी जान भी चली जाये तो परवाह नहीं. परन्तु मुझे वो दोनों ाँस चाहिए है.
कालनेमि- जो आज्ञा गुरुदेव. लड़के में आखिरी मौका दे रहा हु. हमें वो दे दो. वर्ण बहुत डार्क होगा तुम्हे.
मैं- आप कोसिस कर सकते है महाराज.
ये सुनते hi कालनेमि ने सेनिको को इशारा किया. और वो मेरी तरफ बढ़ने लगे. लेकिन जैसे hi उन्होंने मुझे छुआ वो सरे सैनिक जल कर रख में बदल गए. और ये देखकर बहा उपस्थित सरे लोग एक डैम से अचंभित रह गए. और कुछ सोचते उससे पहले hi मैंने अपनी तीसरी आँख को खोल लिया. और जब उससे तेवर ज्वाला निकली तो बहा मौजूद सभी अपनी जान बचते नजर आये. उस सभा में इतना तेज़ प्रकाश फैला की सबकी आँखे कुछ पल के लिए बंद हो गयी. उन्हें कुछ भी नहीं दिख रहा था. बस लोगो की चीखो की आवाज आरही थी सबको. कालनेमि और शुक्राचार्य दोनों hi अपनी शक्तियों से इस प्रकाश को हटाने का प्रयास कर रहे थे. तभी शुक्राचार्य ने अपने कमंडल से जल निकला और उस पैर कोई मंत्र पड़ा. और सभा में छिड़क दिया. और ऐसा करते hi सारा प्रकाश कुछ hi देर में गायब हो गया. लेकिन अब उस पूरी सभा में केवल 2 लोग hi बचे हुए थे. पहला कालनेमि और दूसरे थे शुक्राचार्य बाकि बचे लोग मेरे तेज़ में जल कर भस्म हो चुके थे. और में बहा से सीधा पहुंच चूका था परीलोक……………..
तो बे कॉन्टिनुए………………….
मैं- तुम यहाँ क्या कर रही हो.
आलिआ- में बस जानने आई थी की तुम्हे कोई जानकारी मिली या नहीं.
मैं- वेल कुछ जानकारी तो मिल गयी है. और जो भी पता चला है उस हिसाब से उसे हराना बहुत hi मुश्किल है.
आलिआ- ऐसा क्या पता चला है तुम्हे.
फिर मैंने उसे उसके वरदान के बारे में बताया. जिसे सुनके आलिआ का चेहरे hi लटक गया.
आलिआ- तो क्या उसे हारने का कोई तरीका नहीं है.
मैं- है तो लेकिन उसे करने में पता नहीं हम फ़ैल होंगे या पास.
आलिआ- मतलब.
मैं- मतलब की उसे हारने के लिए हमें उसे पृथ्वी पैर ले जाना होगा. यहाँ अंतरिक्ष में उसे हराना न मुमकिन hai.or जरा सोचो ऐसी इस्थिति में अगर उसे ये ाँस मिल जाये तो वो अमर बन जायेगा. उसे कोई नहीं हरा पायेगा जिंदगी भर.
आलिआ- तुमने सही कहा लेकिन उसे पृथ्वी पैर कैसे ले जा सकते है हम. वो बहा आएगा hi क्यों.
मैं- मैंने अभी इसके बारे में कुछ नहीं सोचा है. फिलहाल हमारा पहला काम है सभी परियो को छुड़ाना. उसके बाद सोचेंगे उसे कैसे हराना है.
आलिआ- क्या तुम्हे पता चला की वो कहा है.
मैं- है कुछ हद tak.lekin बहा क्या क्या खतरा है ये मुझे पता नहीं चला इसलिए. में चाहूंगा की तुम यही रहो. बहा में अकेले hi जाऊंगा.
आलिआ- और ये बिलकुल भी मुमकिन नहीं hai.me तुम्हारे साथ आऊँगी. फिर चाहे बहा मेरी जान hi क्यों न चली जाये.
मैं- में ये रिस्क नहीं ले सकता. में तुम्हारी जान को डाव पैर नहीं लगा सकता. तुम्हे यही रहना होगा.
. आलिआ- ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ. मुझे ले चलो तुम जानते हो में मदद कर सकती हु तुम्हारी.
मैं- नहीं तुम केवल बहा मेरी मुसीबत hi बढ़ाओगी. जब वो तुमसे भी ज्यादा शक्तिशाली परियो को अपनी क़ैद में कर सकता है तो तुम्हे तो आसानी से पकड़ लेगा वो. और में नहीं चाहता की वो तुम्हे पकड़ कर मुझसे कोई भी सौदा करे. इसलिए तुम यही जायदा सुरक्षित रहोगी. और अब इसपर कोई भी बात नहीं होगी. समझ गयी.
मेरी बाटे सुनकर आलिआ का चेहरा लटक गया tha.lekin ये उसके और मेरे लिए hi अच्छा था की वो यही रहे सुरक्षित. बहा उसकी जानको खतरा ज्यादा था.
मैं- अब में जाता हु.
ये कहके मैं बहा से सीधा टेलिपोर्ट हो गया उस जगह पैर जहा मुझे वो साडी परिया दिखी थी. मैंने खुद को गायब किया. और चारो तरफ देखने laga.ye जगह कोनसी थी पता नहीं. लेकिन थी बड़ी hi भयानक. यहाँ आते hi. मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे थे. जो इस जगह का hi प्रभाव था. चारो तरफ घोर अन्धकार छाया हुआ था. चारो तरफ वेरानी छै हुई थी. न तो कोई जीव दिख रहा था दूर दूर तक. लेकिन मुझे उम्मीद थी की साडी परिया यही कही पैर है. इसलिए मैंने एक बार और अपनी आँखों को बंद करके उन परियो को ढूंढा तो वो मुझे इसी जगह पैर दिखाई दी. इसलिए में कन्फर्म हो गया. और आगे बाद गया. ये जगह एक छोटे सेहर जितनी बड़ी थी. मतलब जल्दी और आसानी से ढूंढा जा सकता था सभी को. और में गायब था इसलिए किसी को दिखने का सवाल hi नहीं था. अब दिक्कत ये हुई की मैंने पूरी जगह छान मरी लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला. चारो तरफ कुछ था hi नहीं. जिससे मुझे थोड़ी टेंशन हुई की कहा गयी साडी परिया. है तो यही पैर लेकिन यहाँ पैर किस जगह पैर. जमीन के ऊपर मैंने देख लिया नहीं है. मतलब साफ़ था की सायद जमीन के नीचे रखा है उन्हें. इसलिए मैंने फिर से सब जगह का चक्कर लगाया. मेरी आँखे से तेज़ रौशनी निकल रही थी जो सभी जगहों को अच्छे से देख रही थी की किस जगह पैर उसने परियो को छिपाया है. और ऐसा करते करते मुझे जमीन के नीचे एक जगह पैर कुछ हलचल दिखाई दी. और में समाज गया की यही पैर सबको रखा गया है. इसलिए में तुरंत hi बहा से जमीन के नीचे चला गया. बिना जमीन को तोड़े ताकि किसी को भी बिलकुल शक न हो. अपने आप को हवा बनाकर में नीचे आज्ञा. तो नीचे एक लुम्बी गुफा जैसी बानी हुई थी. और हर 5 फट. पैर एक पहरेदार खड़ा हुआ था इस असुर का. हाथो में शास्त्र लिए. जिससे में और कन्फर्म हो गया की यही है सभी. इसलिए में गायब होक hi आगे बढ़ता चला. किसी को भी कुछ भी भनक नहीं लगी की यहाँ उनके बीच कोई है या नहीं. काफी लुम्बी गुफा थी. लेकिन आगे तो जाना hi था. इसलिए आगे बढ़ता चला गया. और करीब आखिर में मैं पहुंच hi गया एक जेल जैसी जगह पैर जहा पैर सभी परियो को अलग अलग जगहों पैर क़ैद करके रखा गया था. किसी को भी साथ में नहीं रखा था उसने. और उनके पास न तो उनकी छड़ी थी न hi कोई और शक्ति. सभी बेहोश थी. और उन्हें जंजीरों में बंधा हुआ था. सायद ये जंजीरे मयाबी थी. जिससे इनकी शक्तिया धीरे धीरे काम होती जा रही थी. इसलिए अब मुझे जल्दी hi कुछ करना था. मैंने सबसे पहले रानी पारी को ढूंढा. हलाकि उनको देखा नहीं था. लेकिन ध्यान में उनका चेहरा दिख गया था. इसलिए मैंने उनको ढूंढा. वो मुझे एक जेल में अकेली मिल गयी. तो में जेल के आरपार गया. और अपना हाथ उनके सर पैर रख दिया. और अपनी आँखों कोबन्द कर लिया. और ऐसा होते hi मेरर हाथो से एक ऊर्जा निकल कर उनके सरीर में जाने लगी. और वो तुरंत hi होश में आगयी. और होश में आते hi वो चारो तरफ देखने लगी
मैं- घबराइए मत में आप सभी को ले जाने के लिए आया हु.
रानी- कोण हो आप
मैं- में आपकी पुत्री का मित्र हु.
रानी- मित्र. परन्तु उसका तो कोई मित्र नहीं है. सच सच बताओ कोण हो आप और मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहे हो.
मैं- कृपा करके धीमी आवाज में बोलिये. में बकै आलिआ का मित्र हु. और में पृथ्वी से हु. और बाकि जानकारी आप उसी से ले लेना. अभी आप चलने के लिए रेडी हो जाइये. ये कहके मैंने उनका हाथ पकड़ा और अगले hi सेक्. हम उन्ही के महल में खड़े the.mere hi कमरे में. जहा आलिआ बैठी हुई थी. जिसे देखकर रानी के मुख से आवाज निकल पड़ी.
रानी- पुत्री आलिआ.
ये सुनकर आलिआ ने ऊपर देखा और उसकी माँ को देखकर वो दौड़ कर उनके गले लग गयी. और में उनको बैसा hi छोड़ कर बापिस पंहुचा सीधा उसी गुफा में. और उसके बाद मैंने एक एक करके सभी परियो को महल में छोड़ना सुरु कर दिया. परियो की दँख्या 100 से ज्यादा थी. इसलिए मुझे ये सब करने में करीब. 15-20. मं का समय लग गया. अगर सब एक साथ होती तो एक सेक् में सबको बापिस ले आता. खैर. अब साडी परिया बापिस आचुकी थी. और ये समाचार सरे परीलोक में फ़ैल चूका था. और सभी महल की ओरे आने लगे थे. इसलिए अब मुझे इस परीलोक की सुरक्षा के इंतजाम करने थे. इसलिए मैंने सबसे पहले तो पोरे परीलोक के चारो तरफ एक मजबूत सुरक्षा कवच बना दिया. इतना मजबूत की चाहे कितना hi पावरफुल असुर क्यों न आजाये लेकिन इसको पार नहीं कर पाए. और ये सब करने के बाद समय था. उसके पहरेदारो को सबक सीखने का. इसलिए में बापिस गया उसी गुफा में. जहा चारो तरफ सिपाही भाग रहे थे और हैरान थे की अचानक से साडी परिया कहा गायब हो गयी. तब मैंने खुद को नार्मल किया और उन्हें आवाज लगाई.
मैं- किसे ढूंढ रहे है आप लोग.
उन सभी ने मेरी आवाज सुनकर मेरी तरफ देखा तो मेरे हाथ में मेरा फरसा देखा और मेरे साधारण से कपडे. तो वो कंफ्यूज हो गए की में आखिर है कोण.
तो उनमे से एक बोलै.
ा1- कोण हो तुम. और इस जगह पैर कैसे पहुंचे.
À2- लगता है इसी ने साडी परियो को छुड़ाया है. इसे क़ैद करके महाराज के सामने ले जाना चाहिए हमें.
ा1- सही कहा तुमने. इस बंदी बना लो.
जैसे उसने ये कहा कुछ सेनिको की भीड़ मेरी तरफ आगयी.
मैं- अरे भाई मुझे दर लग रहा है. कृपा करके मेरे प्राणो को बॉक्स दे. में तो बस यहाँ से गुजर रहा था. तभी आपलोगो को यहाँ बहा भटकते देखा. इसीलिए चला आया की कोई मदद कर दू सायद आपकी.
सैनिक- जो भी मदद करना है वो महाराज के सामने जाकर करना.
उसके बाद उन्होंने मेरे सरीर पैर जंजीर दाल दी. और मेरे फरसे को जैसे hi मुझसे छीनने की कोसिस की वो गायब हो गया.
जिसे देखकर बाकि सब अचंभित हो गए.
ा1- ये तुम्हारा अस्त्र कहा गया.
मैं- वो अस्त्र थोड़ा भाबुक है. उसे मेरे अलावा अगर कोई भी छूने की कोसिस करता है तो वो ु hi गायब हो जाता है.
À2- ये कोई मयाबी लग रहा है. ऐसा मयाबी अस्त्र तुम्हारे पास कहा से आया.
मैं- एक साधु की मैंने बहुत सेवा की थी तो उन्होंने मेरी सेवा से कुश होक मुझे वो वरदान स्वरुप दिया था. लेकिन वो आता और जाता अपनी मर्जी से है.
À2- सेनिको इसे जल्द से जल्द महाराज के सामने ले चलो. मुझे कुछ गड़बड़ लगता है ये. बही इससे साडी सच बहार निकालेंगे.
उसके बाद सरे सैनिक और में एक साथ बहा से टेलिपोर्ट हो गए. और जहा हम पहुंचे. वो भी एक अज्ञात जगह hi थी. इसका नाम तो पता नहीं. लेकिन थी उस जगह से भी मनहूस. बही शामे चारो तरफ अन्धकार छाया हुआ था.
मैं- यहाँ क्या सूर्य उदय नहीं होता है.
ा1- नहीं.
मैं- तो फिर आपको दिनों के बारे में कैसे पता चलता है.
ा1- हमारे महाराज सब पता लागलेते है. अब चलो चुपचाप.
उसके बाद वो मुझे सीधे ले गए उनके महाराज के सामने जो इस वक़्त उनकी सभा में बैठे हुए थे. और अपने इन सेनिको को और मुझे बेड़ियों में देख कर उनके होश hi उड़द गए. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की ये यहाँ क्या कर रहे है और में कोण हु.
कालनेमि- सेनापति तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो. और उन परियो के पास कोण है
ा1- महाराज हमसे भूल हुई है हमें शमा करे. अचानक से साडी परिया बहा से गायब हो गयी है. और हमें देखने पैर ये लड़का दिखाई दिया बहा उसी गुफा में. इसीलिए हम इसे यहाँ के आये.
ये सुनके उसको भयंकर गुस्सा आज्ञा और उसने अपने हाथो से एक भयंकर ज्वाला निकली जिसमे वो बेचारा सेनापति बही भस्म हो गया
कालनेमि- साला मनहूस समाचार सुनाता है. और तुम सभी को 1000 कोड़े मरे जाये. सेनिको ले जाओ इन सभी को. सिर्फ इस लड़के को छोड़ कर.
उसके बाद बहा से सैनिक तैनात थे उन्होंने बाकि के सेनिको को बंदी बनाया और उन्हें कोड़े मारने के लिए ले gye.or में बही बेड़ियों में जकड़ा खड़ा हुआ था.
कालनेमि और उसके साडी सभा मुझे घर कर देखे जा रही थी. बहा पैर मौजूद हर कोई बड़ा hi भयानक लग रहा था. बचे अगर देखले तो जिंदगी भर यही उनके सपने में आते रहेंगे. लेकिन मेरे चेहरे की मुस्कान उन भयानक असुरो को और बिचलित कर रही थी. फिर इस सभा में से एक आदमी खड़ा हुआ.
महामंत्री- ये बालक कोण हो तुम. और हमारी सीमा में कैसे घुस आये तुम.
मैं- में तो बस गुजर रहा था की ऐसे hi नीचे देखने चला आया. और तभी आपके सेनिको ने मुझे बंदी बना लिया.
महामंत्री- सत्य बोलो बालक. हम इतने बेबकुफ़ नहीं है जो तुम्हारी बातो में आजाये. और तुम्हारी जानकारी के लिए में बाटाडू. की हमारी सीमा धुंदलेना hi ये बताता है की तुम साधारण नहीं हो. कोई देवता भी हमें नहीं ढूंढ सकता है.
मैं- में सच hi कह रहा हु. में एक आम इंसान हु.
अभी वो कैच बोलता उससे पहले hi पीछे से आवाज आई.
क्या बात है इस बालक को पकड़ लिया. कालनेमि तुमने हमें कुश कर दिया है.
ये आवाज मेरे पीछे से आरही थी. और मैंने पीछे मुड़कर देखा तो में देखता hi रह गया. क्युकी मेरे पीछे एक साधु खड़े हुए थे. माथे पैर एक अलग hi तेज़. सर पैर जाता हाथो में कुदाल और माला. और इन्हे देखते hi में पहचान गया की ये कोण है. और मेरा शक यकीन में तब बदला जब सरे लोग जो बहा बैठे हुए थे. वो सभी खड़े होक उनको प्रणाम करने लगे.
कालनेमि- प्रणाम गुरुदेव. आप जानते है इसको
शुक्राचार्य- है हम जानते है इसे. ये बही है जिसने हमारी नाक में दम कर रखा है. और तुम्हे जानकार हैरानी होगी की इसी के पास अभी तक जागृत हुए दोनों ाँस है.
ये सुनकर बहा मौजूद सरे असुर जैसे एक सख्त मूर्ति में बदल गए.
कालनेमि- क्या.
शुक्राचार्य- है.
ये कहके उन्होंने मेरी तरफ देखा और मेरे चेहरे की मुस्कान देखकर वो भी बिचलित हो गए
मैं- प्रणाम गुरु शुक्राचार्य. आज आपके दर्शन हो hi गए.
शुक्राचार्य- है ये तो होना hi था. लेकिन मुझे भी इसकी उम्मीद नहीं थी की इतनी जल्दी ये होगा.
मैं- है उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी.
शुक्राचार्य- तुम्हारे यहाँ आने का कारण क्या है.
मैं- में तो बस आपके सिस्य को देखने आया था की जिन्होंने यहाँ तहलका मचा रखा है वो आखिर दीखते कैसे है.
कालनेमि- यहाँ जैसे तैसे ऑटो गए हो लड़के लेकिन यहाँ से जा नहीं पाओगे. और अगर जीवित रहना चाहते हो तो हमें वो दोनों ाँस दे दो. हम तुम्हारी जान बॉक्स देंगे. बचन है हमारा.
मैं- माफ़ कीजियेगा महाराज. मुझे उस ांसो को बहार निकालना नहीं आता है. इसलिए में उन्हें आपको दे hi नहीं पाउँगा. बाकि आप जानो.
शुक्राचार्य- बड़े hi चतुर हो बालक लेकिन में जनता हु की तुम्हे ये बिधि आती है. मैंने खुद तुम्हे ऐसा करते हुए देखा है. इसलिए तुम्हारा ये नाटक यहाँ नहीं चलेगा.
मैं- आप तो परम ज्ञानी है आपको साडी बातो की जानकारी है. फिर मुझसे यु मांग कर क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे है आप.
शुक्राचार्य- सही कहा तुमने. कालनेमि इसे यातनाये देना सुरु करो. इसकी जान भी चली जाये तो परवाह नहीं. परन्तु मुझे वो दोनों ाँस चाहिए है.
कालनेमि- जो आज्ञा गुरुदेव. लड़के में आखिरी मौका दे रहा हु. हमें वो दे दो. वर्ण बहुत डार्क होगा तुम्हे.
मैं- आप कोसिस कर सकते है महाराज.
ये सुनते hi कालनेमि ने सेनिको को इशारा किया. और वो मेरी तरफ बढ़ने लगे. लेकिन जैसे hi उन्होंने मुझे छुआ वो सरे सैनिक जल कर रख में बदल गए. और ये देखकर बहा उपस्थित सरे लोग एक डैम से अचंभित रह गए. और कुछ सोचते उससे पहले hi मैंने अपनी तीसरी आँख को खोल लिया. और जब उससे तेवर ज्वाला निकली तो बहा मौजूद सभी अपनी जान बचते नजर आये. उस सभा में इतना तेज़ प्रकाश फैला की सबकी आँखे कुछ पल के लिए बंद हो गयी. उन्हें कुछ भी नहीं दिख रहा था. बस लोगो की चीखो की आवाज आरही थी सबको. कालनेमि और शुक्राचार्य दोनों hi अपनी शक्तियों से इस प्रकाश को हटाने का प्रयास कर रहे थे. तभी शुक्राचार्य ने अपने कमंडल से जल निकला और उस पैर कोई मंत्र पड़ा. और सभा में छिड़क दिया. और ऐसा करते hi सारा प्रकाश कुछ hi देर में गायब हो गया. लेकिन अब उस पूरी सभा में केवल 2 लोग hi बचे हुए थे. पहला कालनेमि और दूसरे थे शुक्राचार्य बाकि बचे लोग मेरे तेज़ में जल कर भस्म हो चुके थे. और में बहा से सीधा पहुंच चूका था परीलोक……………..
तो बे कॉन्टिनुए………………….