दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 8 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

अपडेट 59



मैं- तुम यहाँ क्या कर रही हो.

आलिआ- में बस जानने आई थी की तुम्हे कोई जानकारी मिली या नहीं.

मैं- वेल कुछ जानकारी तो मिल गयी है. और जो भी पता चला है उस हिसाब से उसे हराना बहुत hi मुश्किल है.

आलिआ- ऐसा क्या पता चला है तुम्हे.

फिर मैंने उसे उसके वरदान के बारे में बताया. जिसे सुनके आलिआ का चेहरे hi लटक गया.

आलिआ- तो क्या उसे हारने का कोई तरीका नहीं है.

मैं- है तो लेकिन उसे करने में पता नहीं हम फ़ैल होंगे या पास.

आलिआ- मतलब.

मैं- मतलब की उसे हारने के लिए हमें उसे पृथ्वी पैर ले जाना होगा. यहाँ अंतरिक्ष में उसे हराना न मुमकिन hai.or जरा सोचो ऐसी इस्थिति में अगर उसे ये ाँस मिल जाये तो वो अमर बन जायेगा. उसे कोई नहीं हरा पायेगा जिंदगी भर.

आलिआ- तुमने सही कहा लेकिन उसे पृथ्वी पैर कैसे ले जा सकते है हम. वो बहा आएगा hi क्यों.

मैं- मैंने अभी इसके बारे में कुछ नहीं सोचा है. फिलहाल हमारा पहला काम है सभी परियो को छुड़ाना. उसके बाद सोचेंगे उसे कैसे हराना है.

आलिआ- क्या तुम्हे पता चला की वो कहा है.

मैं- है कुछ हद tak.lekin बहा क्या क्या खतरा है ये मुझे पता नहीं चला इसलिए. में चाहूंगा की तुम यही रहो. बहा में अकेले hi जाऊंगा.

आलिआ- और ये बिलकुल भी मुमकिन नहीं hai.me तुम्हारे साथ आऊँगी. फिर चाहे बहा मेरी जान hi क्यों न चली जाये.

मैं- में ये रिस्क नहीं ले सकता. में तुम्हारी जान को डाव पैर नहीं लगा सकता. तुम्हे यही रहना होगा.

. आलिआ- ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ. मुझे ले चलो तुम जानते हो में मदद कर सकती हु तुम्हारी.

मैं- नहीं तुम केवल बहा मेरी मुसीबत hi बढ़ाओगी. जब वो तुमसे भी ज्यादा शक्तिशाली परियो को अपनी क़ैद में कर सकता है तो तुम्हे तो आसानी से पकड़ लेगा वो. और में नहीं चाहता की वो तुम्हे पकड़ कर मुझसे कोई भी सौदा करे. इसलिए तुम यही जायदा सुरक्षित रहोगी. और अब इसपर कोई भी बात नहीं होगी. समझ गयी.

मेरी बाटे सुनकर आलिआ का चेहरा लटक गया tha.lekin ये उसके और मेरे लिए hi अच्छा था की वो यही रहे सुरक्षित. बहा उसकी जानको खतरा ज्यादा था.

मैं- अब में जाता हु.

ये कहके मैं बहा से सीधा टेलिपोर्ट हो गया उस जगह पैर जहा मुझे वो साडी परिया दिखी थी. मैंने खुद को गायब किया. और चारो तरफ देखने laga.ye जगह कोनसी थी पता नहीं. लेकिन थी बड़ी hi भयानक. यहाँ आते hi. मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे थे. जो इस जगह का hi प्रभाव था. चारो तरफ घोर अन्धकार छाया हुआ था. चारो तरफ वेरानी छै हुई थी. न तो कोई जीव दिख रहा था दूर दूर तक. लेकिन मुझे उम्मीद थी की साडी परिया यही कही पैर है. इसलिए मैंने एक बार और अपनी आँखों को बंद करके उन परियो को ढूंढा तो वो मुझे इसी जगह पैर दिखाई दी. इसलिए में कन्फर्म हो गया. और आगे बाद गया. ये जगह एक छोटे सेहर जितनी बड़ी थी. मतलब जल्दी और आसानी से ढूंढा जा सकता था सभी को. और में गायब था इसलिए किसी को दिखने का सवाल hi नहीं था. अब दिक्कत ये हुई की मैंने पूरी जगह छान मरी लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला. चारो तरफ कुछ था hi नहीं. जिससे मुझे थोड़ी टेंशन हुई की कहा गयी साडी परिया. है तो यही पैर लेकिन यहाँ पैर किस जगह पैर. जमीन के ऊपर मैंने देख लिया नहीं है. मतलब साफ़ था की सायद जमीन के नीचे रखा है उन्हें. इसलिए मैंने फिर से सब जगह का चक्कर लगाया. मेरी आँखे से तेज़ रौशनी निकल रही थी जो सभी जगहों को अच्छे से देख रही थी की किस जगह पैर उसने परियो को छिपाया है. और ऐसा करते करते मुझे जमीन के नीचे एक जगह पैर कुछ हलचल दिखाई दी. और में समाज गया की यही पैर सबको रखा गया है. इसलिए में तुरंत hi बहा से जमीन के नीचे चला गया. बिना जमीन को तोड़े ताकि किसी को भी बिलकुल शक न हो. अपने आप को हवा बनाकर में नीचे आज्ञा. तो नीचे एक लुम्बी गुफा जैसी बानी हुई थी. और हर 5 फट. पैर एक पहरेदार खड़ा हुआ था इस असुर का. हाथो में शास्त्र लिए. जिससे में और कन्फर्म हो गया की यही है सभी. इसलिए में गायब होक hi आगे बढ़ता चला. किसी को भी कुछ भी भनक नहीं लगी की यहाँ उनके बीच कोई है या नहीं. काफी लुम्बी गुफा थी. लेकिन आगे तो जाना hi था. इसलिए आगे बढ़ता चला गया. और करीब आखिर में मैं पहुंच hi गया एक जेल जैसी जगह पैर जहा पैर सभी परियो को अलग अलग जगहों पैर क़ैद करके रखा गया था. किसी को भी साथ में नहीं रखा था उसने. और उनके पास न तो उनकी छड़ी थी न hi कोई और शक्ति. सभी बेहोश थी. और उन्हें जंजीरों में बंधा हुआ था. सायद ये जंजीरे मयाबी थी. जिससे इनकी शक्तिया धीरे धीरे काम होती जा रही थी. इसलिए अब मुझे जल्दी hi कुछ करना था. मैंने सबसे पहले रानी पारी को ढूंढा. हलाकि उनको देखा नहीं था. लेकिन ध्यान में उनका चेहरा दिख गया था. इसलिए मैंने उनको ढूंढा. वो मुझे एक जेल में अकेली मिल गयी. तो में जेल के आरपार गया. और अपना हाथ उनके सर पैर रख दिया. और अपनी आँखों कोबन्द कर लिया. और ऐसा होते hi मेरर हाथो से एक ऊर्जा निकल कर उनके सरीर में जाने लगी. और वो तुरंत hi होश में आगयी. और होश में आते hi वो चारो तरफ देखने लगी

मैं- घबराइए मत में आप सभी को ले जाने के लिए आया हु.

रानी- कोण हो आप

मैं- में आपकी पुत्री का मित्र हु.

रानी- मित्र. परन्तु उसका तो कोई मित्र नहीं है. सच सच बताओ कोण हो आप और मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहे हो.

मैं- कृपा करके धीमी आवाज में बोलिये. में बकै आलिआ का मित्र हु. और में पृथ्वी से हु. और बाकि जानकारी आप उसी से ले लेना. अभी आप चलने के लिए रेडी हो जाइये. ये कहके मैंने उनका हाथ पकड़ा और अगले hi सेक्. हम उन्ही के महल में खड़े the.mere hi कमरे में. जहा आलिआ बैठी हुई थी. जिसे देखकर रानी के मुख से आवाज निकल पड़ी.

रानी- पुत्री आलिआ.

ये सुनकर आलिआ ने ऊपर देखा और उसकी माँ को देखकर वो दौड़ कर उनके गले लग गयी. और में उनको बैसा hi छोड़ कर बापिस पंहुचा सीधा उसी गुफा में. और उसके बाद मैंने एक एक करके सभी परियो को महल में छोड़ना सुरु कर दिया. परियो की दँख्या 100 से ज्यादा थी. इसलिए मुझे ये सब करने में करीब. 15-20. मं का समय लग गया. अगर सब एक साथ होती तो एक सेक् में सबको बापिस ले आता. खैर. अब साडी परिया बापिस आचुकी थी. और ये समाचार सरे परीलोक में फ़ैल चूका था. और सभी महल की ओरे आने लगे थे. इसलिए अब मुझे इस परीलोक की सुरक्षा के इंतजाम करने थे. इसलिए मैंने सबसे पहले तो पोरे परीलोक के चारो तरफ एक मजबूत सुरक्षा कवच बना दिया. इतना मजबूत की चाहे कितना hi पावरफुल असुर क्यों न आजाये लेकिन इसको पार नहीं कर पाए. और ये सब करने के बाद समय था. उसके पहरेदारो को सबक सीखने का. इसलिए में बापिस गया उसी गुफा में. जहा चारो तरफ सिपाही भाग रहे थे और हैरान थे की अचानक से साडी परिया कहा गायब हो गयी. तब मैंने खुद को नार्मल किया और उन्हें आवाज लगाई.

मैं- किसे ढूंढ रहे है आप लोग.

उन सभी ने मेरी आवाज सुनकर मेरी तरफ देखा तो मेरे हाथ में मेरा फरसा देखा और मेरे साधारण से कपडे. तो वो कंफ्यूज हो गए की में आखिर है कोण.

तो उनमे से एक बोलै.

ा1- कोण हो तुम. और इस जगह पैर कैसे पहुंचे.

À2- लगता है इसी ने साडी परियो को छुड़ाया है. इसे क़ैद करके महाराज के सामने ले जाना चाहिए हमें.

ा1- सही कहा तुमने. इस बंदी बना लो.

जैसे उसने ये कहा कुछ सेनिको की भीड़ मेरी तरफ आगयी.

मैं- अरे भाई मुझे दर लग रहा है. कृपा करके मेरे प्राणो को बॉक्स दे. में तो बस यहाँ से गुजर रहा था. तभी आपलोगो को यहाँ बहा भटकते देखा. इसीलिए चला आया की कोई मदद कर दू सायद आपकी.

सैनिक- जो भी मदद करना है वो महाराज के सामने जाकर करना.

उसके बाद उन्होंने मेरे सरीर पैर जंजीर दाल दी. और मेरे फरसे को जैसे hi मुझसे छीनने की कोसिस की वो गायब हो गया.

जिसे देखकर बाकि सब अचंभित हो गए.

ा1- ये तुम्हारा अस्त्र कहा गया.

मैं- वो अस्त्र थोड़ा भाबुक है. उसे मेरे अलावा अगर कोई भी छूने की कोसिस करता है तो वो ु hi गायब हो जाता है.

À2- ये कोई मयाबी लग रहा है. ऐसा मयाबी अस्त्र तुम्हारे पास कहा से आया.

मैं- एक साधु की मैंने बहुत सेवा की थी तो उन्होंने मेरी सेवा से कुश होक मुझे वो वरदान स्वरुप दिया था. लेकिन वो आता और जाता अपनी मर्जी से है.

À2- सेनिको इसे जल्द से जल्द महाराज के सामने ले चलो. मुझे कुछ गड़बड़ लगता है ये. बही इससे साडी सच बहार निकालेंगे.

उसके बाद सरे सैनिक और में एक साथ बहा से टेलिपोर्ट हो गए. और जहा हम पहुंचे. वो भी एक अज्ञात जगह hi थी. इसका नाम तो पता नहीं. लेकिन थी उस जगह से भी मनहूस. बही शामे चारो तरफ अन्धकार छाया हुआ था.

मैं- यहाँ क्या सूर्य उदय नहीं होता है.

ा1- नहीं.

मैं- तो फिर आपको दिनों के बारे में कैसे पता चलता है.

ा1- हमारे महाराज सब पता लागलेते है. अब चलो चुपचाप.

उसके बाद वो मुझे सीधे ले गए उनके महाराज के सामने जो इस वक़्त उनकी सभा में बैठे हुए थे. और अपने इन सेनिको को और मुझे बेड़ियों में देख कर उनके होश hi उड़द गए. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की ये यहाँ क्या कर रहे है और में कोण हु.

कालनेमि- सेनापति तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो. और उन परियो के पास कोण है

ा1- महाराज हमसे भूल हुई है हमें शमा करे. अचानक से साडी परिया बहा से गायब हो गयी है. और हमें देखने पैर ये लड़का दिखाई दिया बहा उसी गुफा में. इसीलिए हम इसे यहाँ के आये.

ये सुनके उसको भयंकर गुस्सा आज्ञा और उसने अपने हाथो से एक भयंकर ज्वाला निकली जिसमे वो बेचारा सेनापति बही भस्म हो गया

कालनेमि- साला मनहूस समाचार सुनाता है. और तुम सभी को 1000 कोड़े मरे जाये. सेनिको ले जाओ इन सभी को. सिर्फ इस लड़के को छोड़ कर.

उसके बाद बहा से सैनिक तैनात थे उन्होंने बाकि के सेनिको को बंदी बनाया और उन्हें कोड़े मारने के लिए ले gye.or में बही बेड़ियों में जकड़ा खड़ा हुआ था.

कालनेमि और उसके साडी सभा मुझे घर कर देखे जा रही थी. बहा पैर मौजूद हर कोई बड़ा hi भयानक लग रहा था. बचे अगर देखले तो जिंदगी भर यही उनके सपने में आते रहेंगे. लेकिन मेरे चेहरे की मुस्कान उन भयानक असुरो को और बिचलित कर रही थी. फिर इस सभा में से एक आदमी खड़ा हुआ.

महामंत्री- ये बालक कोण हो तुम. और हमारी सीमा में कैसे घुस आये तुम.

मैं- में तो बस गुजर रहा था की ऐसे hi नीचे देखने चला आया. और तभी आपके सेनिको ने मुझे बंदी बना लिया.

महामंत्री- सत्य बोलो बालक. हम इतने बेबकुफ़ नहीं है जो तुम्हारी बातो में आजाये. और तुम्हारी जानकारी के लिए में बाटाडू. की हमारी सीमा धुंदलेना hi ये बताता है की तुम साधारण नहीं हो. कोई देवता भी हमें नहीं ढूंढ सकता है.

मैं- में सच hi कह रहा हु. में एक आम इंसान हु.

अभी वो कैच बोलता उससे पहले hi पीछे से आवाज आई.

क्या बात है इस बालक को पकड़ लिया. कालनेमि तुमने हमें कुश कर दिया है.

ये आवाज मेरे पीछे से आरही थी. और मैंने पीछे मुड़कर देखा तो में देखता hi रह गया. क्युकी मेरे पीछे एक साधु खड़े हुए थे. माथे पैर एक अलग hi तेज़. सर पैर जाता हाथो में कुदाल और माला. और इन्हे देखते hi में पहचान गया की ये कोण है. और मेरा शक यकीन में तब बदला जब सरे लोग जो बहा बैठे हुए थे. वो सभी खड़े होक उनको प्रणाम करने लगे.

कालनेमि- प्रणाम गुरुदेव. आप जानते है इसको

शुक्राचार्य- है हम जानते है इसे. ये बही है जिसने हमारी नाक में दम कर रखा है. और तुम्हे जानकार हैरानी होगी की इसी के पास अभी तक जागृत हुए दोनों ाँस है.

ये सुनकर बहा मौजूद सरे असुर जैसे एक सख्त मूर्ति में बदल गए.

कालनेमि- क्या.

शुक्राचार्य- है.

ये कहके उन्होंने मेरी तरफ देखा और मेरे चेहरे की मुस्कान देखकर वो भी बिचलित हो गए

मैं- प्रणाम गुरु शुक्राचार्य. आज आपके दर्शन हो hi गए.

शुक्राचार्य- है ये तो होना hi था. लेकिन मुझे भी इसकी उम्मीद नहीं थी की इतनी जल्दी ये होगा.

मैं- है उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी.

शुक्राचार्य- तुम्हारे यहाँ आने का कारण क्या है.

मैं- में तो बस आपके सिस्य को देखने आया था की जिन्होंने यहाँ तहलका मचा रखा है वो आखिर दीखते कैसे है.

कालनेमि- यहाँ जैसे तैसे ऑटो गए हो लड़के लेकिन यहाँ से जा नहीं पाओगे. और अगर जीवित रहना चाहते हो तो हमें वो दोनों ाँस दे दो. हम तुम्हारी जान बॉक्स देंगे. बचन है हमारा.

मैं- माफ़ कीजियेगा महाराज. मुझे उस ांसो को बहार निकालना नहीं आता है. इसलिए में उन्हें आपको दे hi नहीं पाउँगा. बाकि आप जानो.

शुक्राचार्य- बड़े hi चतुर हो बालक लेकिन में जनता हु की तुम्हे ये बिधि आती है. मैंने खुद तुम्हे ऐसा करते हुए देखा है. इसलिए तुम्हारा ये नाटक यहाँ नहीं चलेगा.

मैं- आप तो परम ज्ञानी है आपको साडी बातो की जानकारी है. फिर मुझसे यु मांग कर क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे है आप.

शुक्राचार्य- सही कहा तुमने. कालनेमि इसे यातनाये देना सुरु करो. इसकी जान भी चली जाये तो परवाह नहीं. परन्तु मुझे वो दोनों ाँस चाहिए है.

कालनेमि- जो आज्ञा गुरुदेव. लड़के में आखिरी मौका दे रहा हु. हमें वो दे दो. वर्ण बहुत डार्क होगा तुम्हे.

मैं- आप कोसिस कर सकते है महाराज.

ये सुनते hi कालनेमि ने सेनिको को इशारा किया. और वो मेरी तरफ बढ़ने लगे. लेकिन जैसे hi उन्होंने मुझे छुआ वो सरे सैनिक जल कर रख में बदल गए. और ये देखकर बहा उपस्थित सरे लोग एक डैम से अचंभित रह गए. और कुछ सोचते उससे पहले hi मैंने अपनी तीसरी आँख को खोल लिया. और जब उससे तेवर ज्वाला निकली तो बहा मौजूद सभी अपनी जान बचते नजर आये. उस सभा में इतना तेज़ प्रकाश फैला की सबकी आँखे कुछ पल के लिए बंद हो गयी. उन्हें कुछ भी नहीं दिख रहा था. बस लोगो की चीखो की आवाज आरही थी सबको. कालनेमि और शुक्राचार्य दोनों hi अपनी शक्तियों से इस प्रकाश को हटाने का प्रयास कर रहे थे. तभी शुक्राचार्य ने अपने कमंडल से जल निकला और उस पैर कोई मंत्र पड़ा. और सभा में छिड़क दिया. और ऐसा करते hi सारा प्रकाश कुछ hi देर में गायब हो गया. लेकिन अब उस पूरी सभा में केवल 2 लोग hi बचे हुए थे. पहला कालनेमि और दूसरे थे शुक्राचार्य बाकि बचे लोग मेरे तेज़ में जल कर भस्म हो चुके थे. और में बहा से सीधा पहुंच चूका था परीलोक……………..



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 60

देव के बहा से गायब होते hi कालनेमि और शुक्राचार्य की आँखे फटी की फटी रह गयी. उन्हें समाज में नहीं आया की क्या बोले और क्या नहीं.

कालनेमि- गुरुदेव ये सब क्या था.

शुक्राचार्य- उस बालक में असीमित शक्तियां है. जो हर ाँस के साथ और भी बाद रही है. अगर उसे सभी ाँस प्राप्त हो गए तो इस संसार में कोई उसका मुकाबला नहीं कर पायेगा. फिर चाहे उसके पास कैसा hi वरदान क्यों न हो.

कालनेमि- लेकिन उसने मेरी सभा को ख़त्म कर दिया बस ु hi. आपको पता है न ये कितने वीर योद्धा थे. देवता इनके आसपास भी नहीं भटकते थे. और उसने केवल अपने तेज़ से सबको भस्म कर दिया. और आपने हमें सावधान भी नहीं किया.

शुक्राचार्य- मुझे उसकी मुस्कान देखकर शक तो हुआ था. लेकिन मैंने सोचा ये जंजीर में किड है. और ये मयाबी ज़ंजीर थी तुम भी ये बात जानते हो. इसलिए में थोड़ा बेपरवाह हो गया tha.lekin मुझे अंदेशा था. इसीलिए मैंने जल्दी hi उसकी क़ैद करने को कहा tha.lekin वो बहुत चालाक है उसने हाँ कुछ करते उससे पहले hi अपना काम कर दिया. और उसकी शक्ति से अब सिद्ध हो चूका है की ये साक्षात शिव का hi ाँस है.

कालनेमि- मेरी सेना को चलने वाले सरे योद्धा खतम हो गए. अब में उसको किसी भी हालत में छोड़ने नहीं वाला hu.fir चाहे वो किसी का भी ाँस क्यों न हो.

शुक्राचार्य- देखो यही वो चाहता है. की तुम अपना आपः खो कर उसके पीछे जाओ और वो तुम्हे समाप्त कर दे. क्युकी मुझे लगता है उसे ज्ञात हो गया है तुम्हारे वरदान के बारे में.

कालनेमि- होता है तो हो जाने दो. लेकिन अब में उसे किसी भी हालत में नहीं छोड़ने वाला. सेनिको…

ये सुनकर उसके कुछ खास सैनिक बहा आगये.

कालनेमि- जाओ और परीलोक पैर हमला करने की तैयारी करो. आज उन परियो को इसकी भरी कीमत चुकानी होगी.

सैनिक- जो आज्ञा महाराज.

ये कहके वो बहा से चले गए. और शुक्राचार्य बस देखते hi रह गए. उन्हें देव की शक्तियों का आभाष बहुत करीब से हो गया था. और वो जानते थे की कालनेमि ज्यादा देर नहीं टिक पायेगा देव के सामने लेकिन जब तक वो अंतरिक्ष में है सलामत है. मुझे बस ये देखना है की वो इसको पृथ्वी पैर न ले जा पाए. फिर भले hi मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े. और उन्हें ये भी ज्ञात था की अब कुछ और असुर जागने वाले है. इसलिए शुक्राचार्य बहा से सीधे एक अज्ञात जगह पैर चले गए जो अंतरिक्ष में hi थी.

.और बही कालनेमि अपनी सेना को तैयार करने का बोल कर खुद भी तैयार होने चला गया. आज वो परीलोक पैर भयंकर हमला करने वाला था. उसका चेहरा देख कर तो यही लग रहा था.

बही मैं परीलोक में पंहुचा तो सभी ने मेरी खूब जय जय कार की. जिसे करने से मैंने उन्हें रोका.

मैं- माफ़ करना रानी पारी. परन्तु अभी संकट ताका नहीं है. कालनेमि जल्द hi यहाँ हमला करने वाला है. इसलिए अपनी साडी सेना को तैयार रहना का बोल दीजिये. हलाकि मैंने एक कवच बना दिया है. जिसे वो पार नहीं कर पाएंगे. लेकिन कितनी देर तक वो कवच उन्हें रोक सकता है ये में नहीं जानता हु.

मेरी बाटे सुनकर बहा मौजूद सभी एक डैम से हैरान रह गए. उनके मुँह खुले के खुले रह गए. उन्हें समाज में नहीं आया की क्या कहे क्या नहीं. और सभी अपनी रानी की तरफ देख रहे थे.

रानी- हम देव की बातो से सहमत है. महामंत्री जल्दी से सेना को तैयार करवाइये. और सभी बचो और प्रजाजन को गुप्त स्थान पैर पहुंचने का बंदोबस्त करिये. हम नहीं चाहते की हमारी आने वाली पीड़ी इस असुर के हाथो नस्ट हो जाये.

ये सुनकर उस सभा मेसे एक पारी उठी और उनकी आज्ञा पाकर बहस चली गयी और उनके साथ कुछ और परिया भी चली गयी.

तभी आलिआ कड़ी हुई.

आलिआ- रानीपारी. में इस युद्ध में भाग लेना चाहती हु. में भी सभी के साथ लड़ना चाहती हु

ये सुनकर उनके चेहरे पैर थोड़ी परेशानी आगयी. लेकिन उन्हें बोलना तो था hi.

रानी- पुत्री हम जानते है तुम एक बहुत hi निडर और शक्तिशाली पारी हो. लेकिन एक सच ये भी है की तुम इस परीलोक की राजकुमारी हो. और जल्द hi यहाँ की रानी भी बन जाओगी. इसलिए हाँ ये खतरा नहीं मोल ले सकते. अगर इस युद्ध में हमें कुछ हो गया तो तुम hi हमारे बाद यहाँ का राज्य संभालोगी. यहाँ की प्रजा को एक रानी की जरुरत हमेशा पड़ती है. इसलिए हम तुम्हे युद्ध में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं दे sakte.parantu हमारे पास तुम्हारे लिए एक कार्य है. तुम्हे हमारी प्रजा को सही सलामत रखना है. उनके साथ रहना है और ये ध्यान रखना है की उनपर किसी भी प्रकार का कोई संकट न आपये.

ये सब सुनकर आलिआ का मुँह लटक गया. लेकिन वो रानी की आज्ञा को नजरअंदाज भी नहीं कर सकती थी. इसलिए उसे अपना मन मारकर है कहना पड़ा. और मुझे भी ये निर्णय सही लगा.

अभी ये सभी चल रहा था की मेरे दिमाग की घंटी बजी. और मुझे एक आईडिया आया. की अगर ऐसा हो गया तो बकै में मजा आजायेगा.

इसलिए मैंने रानी पारी से आज्ञा ली और में परीलोक के बहार gaya.or खुद को अदृश्य कर liya.or सबकी राह देखने लगा की ये असुर आखिर कहा से आते है ये देखना है मुझे. मैं हवा में hi बैठ गया और अपनी आँखों को बंद कर लिया. और देखने की कोसिस करने लगा की कालनेमि क्या कर रहा है. लेकिन अगेन मुझे उसके बारे में कुछ नहीं दिखा. लेकिन में कोसिस करता रहा.

बही करीब 10-15 मं. बाद मुझे कुछ आभाष हुआ तो मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और देखा तो मेरे सामने कालनेमि और उसकी समस्त सेना कड़ी हुई थी. मुझे बस कालनेमि से निपटना था बाकि सेना से तो परिया आराम से निपट लेंगी.

उनकी सेना आगे बाद रही थी. तभी मैंने अदृश्य होक hi कालनेमि को ललकारा.

मैं- अरे और महाराज कहा चल्दीए अपनी ये सेना लेके.

मेरी आवाज समस्त सेना को सुनाई दी और वो चारो तरफ देखने लगे की ये आवाज आखिर आ कहा से रही है. कालनेमि भी मुझे चारो तरफ देखने लगा. लेकिन में उसे नहीं दिखा.

कालनेमि- तू बही है न. हिम्मत है तो सामने आ बचे. आज तू मेरे हाथो से नहीं बचेगा. चाहे कुछ भी क्यों न हो जाये.

मैं- ओह्ह्ह्होऊ कितना गुस्सा भरा पड़ा है तुम्हारे अंदर कालनेमि. और यहाँ आगये मुँह उठाकर. क्या भूल गए कैसे मैंने एक hi झटके में तुम्हारी साडी सभा को भस्म कर दिया. क्या बही नजारा फिर से देखना चाहते हो

ये सुन्ना था की उसकी सेना बही के बही रुक गयी. और साथ में उनकी ससे भी. की कही वो भी भस्म न हो जाये. और ये देखकर कालनेमि का गुस्सा बाद गया.

कालनेमि- इतना hi बलवान है तो सामने क्यों नहीं आता है. छिपकर बाटे क्यों कर रहे हो किसी कायर की तरह.

मैं- में तुम्हारे सामने hi खड़ा hi कालनेमि लेकिन तुम्हारी आखो पैर जो अहंकार की पट्टी छड़ी हुई है. उसके कारण तुम मुझे देख नहीं प् रहे हो. इसलिए में तुम्हे एक आखरी मौका देता हु. दुसरो पैर अत्याचार करना छोड़ दो. वर्ण आज तुम्हारी जीवन लीला में समाप्त कर दूंगा. फिर चाहे तुम्हारे पास कैसा hi वरदान क्यों न हो

कालनेमि- बाटे तो बहुत बड़ी बड़ी करते हो लड़के. लेकिन भूलो मत तुम किस्से बात कर रहे हो. कालनेमि हु में. काल को स्वयं अपने वश में करके रखता हु. तुम क्या मेरा अंत करोगे. में तुम्हे चेतावनी देता हु. अगर तुम मेरे सामने अभी नहीं आये तो इस भूल का परिणाम समस्त परीलोक भुगतेगा.

मैं- अरे जाओ. किसी और को ये बाटे बताओ. अगर हिम्मत है तो परिवार लोक के अंदर प्रवेश करके hi दिखा दो.

ये सुनके कालनेमि का भेजा घूम गया उसे समाज में आज्ञा की जरूर मैंने कोई चाल चली है. इसलिए उसने तुरंत hi अपनी आँखों को बंद किया और अपनी मुठी बांध कर उस पैर कुछ मंत्र पड़ने लगा. और थोड़ी hi देर बाद उसने उस मुठी को परीलोक की तरफ खोल दिया. उस मुठी में से कुछ तीब्र तरंगे निकली और जैसे hi वो तरंगे परीलोक की सीमा से टकराई अचानक से चारो तरफ एक तेज़ आवाज गूंज गयी. और ऐसा होते hi उसे समाज में आज्ञा की क्या किया है मैंने.

कालनेमि- अपने आप को बहुत होशियार समझते हो. लेकिन तुम मेरे सामने अभी बचे हो. तुम्हारी इस चाल का जवाब में निकाल लूंगा फिर कैसे बचाओगे इन परियो को.

मैं- बड़ी बाटे कर रहे हो. जो कहा है कर के दिखाओ तो मनु.

मेरी बाटे सुनकर कालनेमि ने फिर से मंत्र पड़े और इस कवच के ऊपर छोड़े. लेकिन वो इतनी आसानी से टूट जाता तो मेरा कवच नहीं कहलाता. कालनेमि के सरे बार खली जाते देखा उसकी सेना का मनोबल टूटने लगा था. वो भी अब सोचने लगे थे की ये कुछ कर भी पाएंगे या नहीं. काफी कोसिस करता रहा लेकिन मेरे कवच की एक परत भी कमजोर नहीं पड़ी इसके बरो से.

मैं- क्या हुआ महाराज आपकी शक्तिया काम नहीं कर रही है क्या.

मेरी बाटे उसे और गुस्सा दिला रही थी. और जब मेरी बाटे कुछ ज्यादा hi चुभने लगी उसे तो वो दौड़ लगा कर और अपने हाथ में उसका भरी गदा लेके गया. और सीमा पैर जाते hi मेरे कवच को जोर से गदा मरने का प्रयास करने लगा. और यही में चाहता था. बही जैसे hi उसने मेरे कवच को होनी गदा से टच किया. और बहा से गायब हो गया. और ये देखकर उसकी साडी सेना बही कड़ी हैरान और परेशान हो गयी. उन्हें समाज में नहीं आया की उनके महाराज कहा गायब हो गए. और कालनेमि के गायब होते hi. में भी गायब हो गया. और अब हम दोनों एक जनि पहचानी जगह पैर थे.

कालनेमि जमीन पैर गिरा पड़ा था. उसने चारो तरफ देखा तो उसके होश उड़द गए. वो तुरंत hi खड़ा हुआ. और चारो तरफ देखने लगा.

कालनेमि- ये में यहाँ कैसे आज्ञा. जरूर ये उसी लड़के की चाल थी. मुझे फ़साने की. और में फास गया. मुझे जल्दी hi यहाँ से जाना होगा.

ये कहके वो जल्दी से ऊपर की तरफ उड़ने लगा लेकिन जैसे hi उसने ऊपरी सतह को छुआ उसे बहुत hi तेज़ झटका लगा और वो फिर से जमीन पैर गिर पड़ा. और रही उसे मेरी आवाज आई.

मैं- स्वागत है महाराज. पृथ्वी पैर आपका हार्दिक स्वागत है.

और इस बार में उसके सामने खड़ा था. उसे दिख रहा था. और उसकी आँखे hi बता रही थी की उससे कितनी बड़ी गलती हो गयी है.

कालनेमि- तूने छल किया hai.ladke.

मैं- है भाई में कलयुग का योद्धा हु. और में छल करने वालो के साथ छल करना जनता हु. और तुम जैसे महापापी असुरो के साथ कैसे वर्ताव करना है ये भी जानता हु. अब इसे चाहे तुम छल कही या फिर चालाकी. लेकिन तुम अब फास चुके हो बांगड़ू.

कालनेमि- ये बांगड़ू कोण है.

मैं- है कोई तुम्हारे जैसा. जो अब गैस चूका है.

कालनेमि- लड़के भले hi पृथ्वी मेरी कमजोरी हो लेकिन में कमजोर नहीं हु. तुझे मारने के लिए यही जगह है तो यही सही. आजा.

ये कहके उसने अपनी गदा उठाई और मेरी तरफ दौड़ लगा दी. और उसी वक़्त मेरे हाथो में आगयी गुरुदेव की परसु. जिसे देखकर उसकी दौड़ बही रुक गयी.

कालनेमि- ये तुम्हारे पास कहा से आई.

मैं- क्यों क्या हुआ. दर गए क्या. अभी तो बहुत बड़ी बड़ी बाटे कर रहे थे.

उसका फरसा देखकर यु डरना मुझे समाज में नहीं आया. की आखिर ये मटर क्या है.

लेकिन उसने जो इसके बाद किया वो देखकर में तो बिलकुल हैरान hi रह गया.

कालनेमि- में समाज गया हु की मेरा अंत अब आचुका है. बालक में चाहता हु की तुम इस फरसे से मेरा सर धड़ से अलग कर दो एक hi बार में. और मुझे मुक्ति प्रदान करो.

ये कहके उसने अपना गदा छोड़ दिया और वो अपने घुटनो के बल नीचे हो गया

मैं- ये क्या कह रहे हो तुम. क्या मुझसे युद्ध नहीं करोगे

कालनेमि- बालक ये फरसा स्वयं भगवन परसुराम का है. और इसका यहाँ होना hi मेरे अंत का प्रमाण है. और उनके सामने या उनके अस्त्र के सामने तो स्वयं इंद्रा भी अपने सस्त्र त्याग देता है. फिर मेरी क्या हैसियत है.

ये सुनके में हैरान परेशान दोनों था की ये आखिर माजरा क्या है. तभी मेरे कानो में आवाज आई. और ये आवाज थी गुरुदेव की. जो बिलकुल मेरे पीछे खड़े हुए थे.

मैंने पीछे मुद कर देखा तो में और भी ज्यादा हैरान और कुश हो गया. मेरे सामने गुरुदेव खड़े हुए थे. मैंने तुरंत hi दंडवत उन्हें प्रणाम किया और कालनेमि ने भी उन्हें दंडवत hi प्रणाम किया.

मैं- गुरुदेव आप यहाँ.

गुरुदेव- है वत्स तुम्हारे मन में जो सवाल उठ रहे है उनके जवाब देने आया हु और कालनेमि का अंत तुम अपने हाथो से करो ये कहने आया हु.

मैं- परन्तु गुरुदेव वो अपने हथियार दाल चूका है. फिर कैसे में उसपर हमला करू.

. गुरुदेव- वत्स यही इसकी नियति है. और यही इसका वरदान भी. इसका अंत मेरे ास्त्रो से hi हो सकता था. इसीलिए इसने भगवन से वरदान माँगा की ये अंतरिक्ष में रहे और इसे बहा पैर कोई परास्त न कर पाए. और इस तरह ये अपने काल से बच गया. लेकिन जब आज उसने तुम्हारे हाथो में मेरा फरसा देखा तो इसे तुरंत hi आभाष हो गया की इसका बचना अब मुमकिन नहीं है. इसीलिए ये इसको काफी सरल बनाना चाहता है. और इसमें आसानी से अपने हथियार दाल दिया. और इस तरह एक ऋषि का श्राप भी सिद्ध हो गया.

मैं- जैसा श्राप गुरुदेव.

गुरुदेव- कई वर्षो पहले उसने एक महँ मुनि का अपमान कर दिया था. तो उन्होंने इसे श्राप दिया था की. इसका अंत मेरे अस्त्र के द्वारा hi होगा. और जब इसका अंतिम समय नजदीक आएगा तब ये युद्ध करने की जगह पैर खुद को मारने की भीक मांगेगा. उसकी मृत्यु किसी बहादुर योद्धा की तरह युद्ध में नहीं होगी. बल्कि ऐसे hi होगी जैसा अभी हो रहा है. एक कायर की तरह. और इसको ये बात जैसे hi पता चली ये अंतरिक्ष में जेक छिप गया और कही पैर तपस्या करने लगा. इसलिए में इसे इस समय नहीं मार पाया. क्युकी ये तपस्या में बैठा हुआ था. और उसके बाद इसने वरदान स्वरुप ये मांग लिया की इसे कोई न तो ढूंढ पाए और न हरा पाए. अंतरिक्ष में. इसलिए इसकी मृत्यु ताल गयी. परन्तु आज तुम्हारी सूझ बुझ और उसके सर पैर नाच रहे काल की बजह से ये अपने अंत तक आ hi गया. और अब में तुम्हे आज्ञा देता हु इसका वध कार्डो.

कालनेमि- है बालक मेरा वध कर दो. और हे परम प्रतापी भगवन परशुराम आपको सात सात नमन जो आपने मुझे मेरे अंतिम समय में दर्शन दिए.

गुरुदेव ने अपना हाथ उठा कर उसे आसीर्बाद दिया. और मैंने फरसे को उठाया और एक hi झटके में उसके सर को धड़ से अलग कर दिया. और जैसे hi उसका सर जमीन पैर गिरा. उसका सरीर जल गया. और देखते hi देखते वो रख में बदल गया.

उसके बाद गुरुदेव ने मुझे अपने पास बुलाया.

मैं- आज्ञा गुरुवार.

गुरुदेव- वत्स तुम मेरी अपेक्षा से भी अच्छा काम कर रहे हो. मुझे गर्व है तुम्हारे गुरु होने पैर. में महादेव को धन्यबाद देता हु. की उन्होंने मुझे तुम्हारे गुरु के रूप में चुना.

मैं- ये मेरा सौभाग्य है भगवन. की मुझे आप जैसा गुरु मिला है. मेरी आने वाली साडी पीडियो का जीवन इसी में सुधर गया.

गुरुदेव- अब तुम्हे परीलोक जाना चाहिए.

मैं- बहा अब क्या है गुरुवार

गुरुदेव- तुम सवाल बहुत करते हो. बिना सवाल किये बहा जाओ. और कुछ दिन आराम करो. उसके बाद कुछ नै मुस्किले आने वाली है

मैं- में समाज गया गुरुवार. आप के फरसे का क्या करू में.

गुरुदेव- फिलहाल इसे अपने पास hi रखो. सैयफ आगे जरुरत पद जाये.

मैं- ठीक है गुरुवार आज्ञा दीजिये…

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

ये कहके वो चले गए और उनके पीछे से में भी बहा से चला गया. सीधा परीलोक……


तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 61



में बापिस से परीलोक आज्ञा था लेकिन मुझे ये समाज में नहीं आरहा था की गुरुदेव ने मुझे यहाँ भेजा क्यों है. अब कोनसा खतरा आने वाला है. सायद वो असुर जो इस ाँस के बाद जागेंगे. लेकिन उसके लिया परीलोक में रहकर क्या करूँगा में. वो तो पृथ्वी से भी संभल सकता था. कुछ भी समाज में नहीं आरहा है की क्यों मुझे यहाँ भेजा है गुरुदेव ने. कहिअर अब बोलै है उन्होंने तो यही रहना पड़ेगा. बाकि देखते है आगे क्या होता है. खैर जैसे hi कालनेमि ख़त्म हुआ उसके साथ उसकी सेना भी समाप्त हो गयी. मेरे कवच ने अपना काम कर दिया tha.ab परीलोक पूरी तरह से सुरक्षित था. हमेशा के लिए. इसलिए अब मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा था. मुझे बापिस पृथ्वी पैर जाने की इक्छा हो रही थी. सभी से मिलना था. लेकिन में जा नहीं सकता था. इसलिए सोचा की ध्यान करके सबके हालचाल देखलु.

इसलिए में एक सुनसान जगह पैर रुक गया और बैठ कर देखने लगा की क्या कर रहे है सभी.

तो सबसे पहले गया में अपने घर. जहा पैर माँ अपने कामो में लगी हुई थी. किचन के नहीं. ऑफिस के. एंड दादू ऑफिस में hi थे. उनके चेहरों को देखकर बिलकुल नहीं लग रहा था की उन्हें किसी बात की चिंता है. मतलब की मेरे क्लोन ने ससभी को अच्छे से हैंडल किया hai.uske बाद में गया सलग का चक्कर लगाने जहा सभी इस वक़्त लंच टाइम था इसलिए कैंटीन में बैठे हुए थे. साथ में प्राची और मेरा क्लोन भी. उनकी गप्पे चली थी. और मेरे न चाहते हुए भी प्राची कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी उससे. हलाकि वो उसे में समाज कर hi चिपक रही है. लेकिन क्लोन भी समझदार है वो अपनी लिमिट जानता है इसलिए वो आगे नहीं बढ़ने दे रहा था. जो की अच्छी बात थी. सभी सेट चल रहा था. अब मैंने सोचा जरा पीछे से देखु की मेरे जाने के बाद उसने क्या क्या किया है.

आज मुझे बहा से आये 4-5 दिन हो चुके थे. इसलिए मैंने बही से देखना स्टार्ट किया जब मैंने उसे बनाया था. सब कुछ फ़ास्ट फॉरवर्ड में.

वो सलग गया चिराग को पिक करके बहा सबसे मिला नार्मल बाटे की. क्लास अटेंड की. शाम को प्राची के कहने पैर वो उसे घूमने ले गया. और बहा प्राची काफी नौगहत्य होने की कोसिस करने लगी लेकिन किसी तरह उसने मामला संभल लिया. शाम को बही रूटीन और उसने भी ध्यान लगा कर सभी जगहों की छानबीन की. सब सही लगने पैर सो गया. सुबह अपने रूटीन से उठा एक्सरसाइज की. और सलग निकल gya.yahi रूटीन उसने बना कर रखा था. और मेरे लिए अच्छी बात ये थी की अभी तक किसी भी असुर ने बहा पैर कोई और हरकत नहीं की थी. जो की उनके हिसाब से अच्छा मौका था. पता नहीं उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया. हलाकि वो कामयाब तो नहीं होते लेकिन कोसिस तो करनी hi thi.ab पता नहीं उन सभी के दिमाग में क्या चल रहा है.

ये सब देखने के बाद मैंने सोचा जरा उनकी जानकारी लेने की कोसिस करता hu.jo अब जागने वाले है.

तो अपने ध्यान को उस तरफ मोड़ा.

लेकिन कुछ नहीं मिला उनके बारे me.baar बार देखने की कोसिस की लेकिन नाकाम रहा. फिर सोचा की शुक्राचार्य को देखु तो उनकी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई. आखिर वो एक सिद्ध साधु थे. अपने आप को कैसे छिपाना है वो जानते है. इसी लिए मुझे उनके बारे में भी पता नहीं चला की वो क्या कर रहे है और उनके दिमाग में क्या चल रहा है. थक हार कर मैंने अपनी आँखों को खोल लिया और एक जगह पैर बैठ गया.

तभी पीछे से आलिआ की आवाज आई.

आलिआ- क्या हुआ जनाब अकेले क्यों बैठे हो.

मैं- क्या बात है पृथ्वी का रंग अच्छे से चढ़ गया है तुमपर.

आलिआ- है अब बहा रही हु तो असर तो दिखेगा hi. बताओ न अकेले क्यों बैठे हो.

मैं- ऐसे hi टाइम नहीं काट रहा था तो सोचा जरा देखलु सब के हाल कैसे है.

आलिआ- तो देख लिया.

मैं- है देख लिया सब बढ़िया है.

आलिआ- अब आगे क्या करने का इरादा है

मैं- बैसे मेरा तो जाने का इरादा था लेकिन गुरुदेव ने फिलहाल यहाँ से जाने को मन कर दिया है. बाकि ऐसा क्यों कहा पता नहीं

आलिआ- तो अब यही रुकोगे.

मैं- है जब तक गुरुदेव यहाँ से जाने को नहीं कहते.

आलिआ- यययययय.

मैं- क्या बात है बड़ी कुश हो रही हो.

आलिआ- अब तुम यही रुकोगे ये मेरे लिए काफी कृषि की बात है.

मैं- बढ़िया है. और सुनाओ अब तुम क्या कर रही हो

आलिआ- तुम्हारे साथ बाटे.

मैं- बैसे तुम राजकुमारी हो. लेकिन तुम काम क्या करती हो. अपना दिन कैसे निकालती हो.

आलिआ- में राजकुमारी हु इसीलिए मुझे कुछ नहीं करना पड़ता है. में अपना दिन निकालने के लिए यहाँ बहा घूमती रहती हु.

मैं- लेकिन में क्या करू. मुझे ऐसे बैठना बहुत बोरिंग लगता है.

आलिआ- चलो में तुम्हे सारा परीलोक घुमा कर लती हु. तुम्हारा दिमाग सही हो जायेगा.

मैं- ok चलो.

उसके बाद आलिआ मुझे अपने साथ ले गयी. और दिन भर मुझे परीलोक घूमती रही. जिसमे मेरा भी टाइम पास होता hi रहा. कुछ ऐसी खूबसूरत जगह देखि मैंने. जिन्हें देख कर में नहीं का होक रह गया. बहुत hi मजा और आनंद आया उन जगहों की खुनसुरति देख कर.

लेकिन जैसे तैसे पहला दिन काट गया.

में रात को अपने कमरे में आराम कर रहा था. मुझे कुछ आभाष हुआ. मैं नींद से जगा और देखने लगा की कहा पैर क्या गड़बड़ hai.to मुझे पता चला की पृथ्वी पैर वो असुर फिर से कोई नै चल चल रहे है. जगह जगह उत्पात मचा रहे है. मानव भेष में. लोगो को मार रहे है पुलिस को मार रहे है. और उसकी जानकारी मेरे क्लोन को भी लग गयी. और वो तुरंत hi निकल गया उनकी बंद बजने के लिए. में सब देख रहा था की वो क्या कर रहा है.

उसने अपने हाथो में एक तलवार ली और एक एक करके सबको मार दिया. और सबको मारने के बाद जैसे hi उसने अपनी तलवार को बापिस किया तुरंत hi उसे किसी चीज़ ने जकड लिया बहुत बुरी तरह से. वो उससे छूटने की कोसिस कर रहा था लेकिन नहीं कर प् रहा था. और ये सब देखकर में परेशां हो रहा था की ये सब क्या हो रहा है. और कैसे. जो चीज़ उसे जाकर रही थी. वो बिलकुल लचीली थी और धीरे धीरे उसके अंदर समाती जा रही थी. मैंने उससे बात करने की उसे शक्ति प्रदान करने की कोसिस की तो में नाकाम रहा. जिस बजह से मेरा दिमाग hi फ्राई हो गया. में उससे कहना छह रहा था की अपने हाथ जोड़ कर ध्यान कर. लेकिन वो उस चीज़ से लड़ रहा था और नाकाम हो रहा था. उसने बहुत कोसिस की लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाया. और आखिर कार वो लचीली चीज़ उसके अंदर समां गयी. और ऐसा होते hi. उसकी आँखे कुछ देर के लिए बिलकुल काली हो gyi.lekin अगले hi पल वो नार्मल दिखने लगी. एंड उसके बाद मैंने उसका दिमाग पड़ने की कोसिस की तो में फिर से नाकाम हो गया. मुझे इतना समाज में आज्ञा था की ये जो कुछ भी हुआ है ठीक नहीं हुआ है. और इस चक्कर में मेरी बंद बजने वाली hai.mujhe पहले प्राची को सावधान करना होगा. क्युकी जितना मुझे समझ में आरहा था. उस हिसाब से मेरे क्लोन को किसी ने अपने वश में कर लिया था. और अब मुझे आगे होने वाली घटनाये साफ़ साफ़ दिख रही थी. लेकिन मुझे एक अंदाजा ये भी था की जिसने भी ये किया है. उसने उसे मुझे समाज कर वश में किया है. लेकिन उसे अभी तक सायद इस बात का अंदाजा नहीं है की ये में नहीं हु. बल्कि मेरा एक क्लोन एक हमशक्ल है. फिर भी अगर उसे इस बात का पता चल गया तो वो मेरा hi चेहरा दिखा कर चारो तरफ तबाही मचा देगा. और मुझे मेरी hi शक्तियों से लड़ना होगा. जो की बहुत hi बुरी बात थी. और अब मुझे समाज में आया की क्यों गुरुदेव ने मुझे पृथ्वी से बापिस भेज दिया tha.unko सायद इस बात का पहले से अनुमान था. और इस बात का भी की सायद में भी इसे अपने से अलग नहीं करपाता. चलो जो हुआ अच्छा हुआ. लेकिन अब इसका में करू क्या और कैसे.

मैं- सबसे पहले प्राची को बताना होगा. सायद वो उसे रोक सके. और उसपर नजर भी रख सकेगी. लेकिन वो मुझपर भड़कने वाली है इस बात का मुझे बहुत hi तेज़ आभाष हुआ था. क्युकी एक तो में उसे बिना बताये बहार गया. और दूसरा वो मेरे क्लोन के साथ रोम्णे करने की तरय कर रही थी. लेकिन अब जो भी उसे कहना तो पड़ेगा hi.

इसलिए मैं फिर से ध्यान में बैठा और प्राची को देखा जो अभी सो रही थी. प्यारे सपने देख रही थी. लेकिन उसे जगाना तो पड़ेगा hi इसलिए में उसके दिमाग में घुसा. और उस एक hi झटके में उठा दिया. वो एक डैम से जाग गयी और देखने लगी चारो तरफ. की कोण है क्या है. तभी मैंने उसे आवाज दी. जो सीधे उसके कानो में पहुंच रही थी.

प्राची- देव कहा हो तुम सामने आओ

मैं- में अभी सामने नहीं आ सकता हु. मर पृथ्वी पैर नहीं हु.

ये सुनके उसका चेहरे जैसा बर्फ का बन गया. वो एक दम जैम गयी.

मैं- सुन रही हो.

उसे होश आया.

प्राची- तुम यहाँ नहीं हो तो कहा हो और बहा कब गए मुझे बताया भी नहीं.

मैं- फ़िलहाल वो सब समझने का टाइम नहीं है. काम की बात सुनो. मेरा एक हमशक्ल है बहा पैर. और उसके दिमाग को असुरो ने काबू कर लिया. और उसकी शक्तियों को भी. और अब बो भयंकर खतरा बन गया है सभी के लिए. खासकर मेरे करीबी लोगो के लिए. जिनमे तुम दादू माँ चिराग लकी बाकि सब है. इसलिए अब तुम्हे hi इस मटर पैर नजर रखनी होगी. वर्ण बहुत देर हो जाएगी.

मेरी बाटे उसके बिलकुल पल्ले नहीं पड़ी. उसका चेहरा देख कर ऐसा मुझे लगा.

मैं- समाज में आया कुछ.

प्राची- नहीं. साफ़ साफ़ बताओ बात क्या है.

मैं- देखो फिलहाल तुम बस ये करो की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके. मेरे जैसे दुखने वाले उस सेक्स पैर नजर रखो. जो इस वक़्त मेरे hi घर में है और देव बनकर रह रहा है. उसकी हर हरकत पैर नजर रखो. और कुछ भी गड़बड़ लगे तो फ़ौरन hi मुझे बताओ. और है उससे अकेले लड़ने की कोसिस मत करना वो बहुत hi ज्यादा ताकतवर है. तुम्हे चोट पहुंचा सकता है. इसलिए अकेले मत उलझना उससे. बस नजर रखो उस पैर.

प्राची- ठीक है लेकिन क बात याद रखना की में तुम्हे छोड़ने नहीं वाली. जब भी यहाँ आओ तो सबसे पहले मुझसे मिलना. तुम्हारी अच्छे से खबर लुंगी में.

मैं- अरे बाप रे. ठीक है मेरी अच्छे से खबर ले लेना.

प्राची- है ये ठीक है. अच्छा अब सोने दो मुझे में कल से उसपर पूरी नजर रखूंगी.

मैं- ठीक है लेकिन सोने से पहले एक नजर जरूर मार लेना उसपर. क्या कर रहा है वो.

प्राची- ठीक है.

उसके बाद मैंने अपनी आँखों को खोल लिया और अपना कांटेक्ट तोड़ लिया प्राची से.

अब मुझे सुबह का इन्तजार था जब में गुरुदेव से उसके बारे में पूछूंगा की आखिर ये सब था क्या.



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 62



जैसे तैसे रात निकली. और सुबह हुए. साडी नित्य क्रियाये करने के बाद में ध्यान में बैठा और सबसे पहले गुरुदेव का ाबहन किया.

और थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आने लगी मुझे.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव आपको जानकारी तो मिल hi गयी होगी. ये सब आखिर हुआ कैसे.

गुरुदेव- वत्स शुक्राचार्य ने यज्ञ से उस असुर का निर्माण किया है. उसका कोई रूप कोई आकर नहीं है. वो इतना शक्तिशाली है. की जिसके ऊपर भी चढ़ जाये उस को अपने वश में कर लेता है. इसीलिए मैंने तुम्हे यहाँ नहीं रुकने दिया था.

मैं- वो तो में समाज गया था गुरुदेव परन्तु क्या उन्हें इस बात का पता है की वो में नहीं हु

गुरुदेव- जल्दी hi पता चल jayega.or फिर वो क्या करेंगे ये तुम अच्छे से जानते हो.

मैं- तो अब में क्या करू गुरुदेव. इसको कैसे roku.usne मेरे hi ाँस को अपने वश में कर लिया है. मतलब की उसकी शक्तिया मुझसे ज्यादा है.

गुरुदेव- तुम्हे hi इसका कोई उपाय सोचना होगा वत्स जल्दी सोचना होगा. वर्ण बहुत देर हो जाएगी. ये असुर एक तरह का लावा जैसा है. सबके अंदर समां जाता है. इससे कोई नहीं बच सकता. इसलिए इसको रोकना जल्द जल्द से जरुरी है.

मैं- ठीक है गुरुदेव में कोसिस करूँगा. लेकिन उन असुरो का क्या हुआ जो अब जागने वाले थे. दूसरे ाँस के बाद.

गुरुदेव- वो भी जाग गए है. और जल्द hi तुम्हारे सामने आएंगे. इसलिए मेरा सुझाव हज की जल्द से जल्द अपने दुश्मनो की गिनती काम करते जाओ. अगर सब एक साथ मिल गए तो उन्हें रोकना मुश्किल होता जायेगा तुम्हारे लिए.

मैं- में समाज रहा हु गुरुवार. में आज से hi इस काम में लग जाता हु.

गुरुदेव- उसे पृथ्वी से बहार ले जाओ. ताकि वो ज्यादा नुकसान न कर सके.

मैं- ठीक है गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा. मुझे आसीर्बाद दीजिये गुरुदेव.

गुरुदेव- विजय भाव वत्स.

उसके बाद मेरा संपर्क कर गया. और में ध्यान में hi बैठा रहा. और उस लावा के बारे में जानकारी लेने की कोसिस करने लगा लेकिन ज्यादा कुछ पता नहीं चला क्युकी इसका जन्म अभी हुआ था इसलिए इसको शक्तियों और कमजोरियों की ज्यादा जानकारी नहीं मिल प् रही थी. इसलिए अब एक hi रास्ता था की इसको पृथ्वी से बहार ले जाओ और ख़तम करने की कोसिस करो.

ध्यान के बाद में उठा और सीधा रानी पारी के पास गया. उनसे बीड़ा लेने के लिए.

मैं- प्रणाम रानी पारी.

रानी- प्रणाम देव.

मैं- रानीपारी अब हमें जाना होगा. पृथ्वी पैर एक नया संकट आज्ञा है.

रानी- कैसा संकट

मैं- शुक्राचार्य ने अपने यज्ञकुंड से किसी लावा का जन्म किया है. और उसकी शक्तिया कुछ ज्यादा hi घातक है. उस लावा ने मेरे ाँस को अपने वश में कर लिया है पूरी तरह से. जिसे में मेरे पीछे पृथ्वी की रक्षा के लिए छोड़ कर आया था. और अब उसके द्वारा वो कुछ भी करवा सकते है बहा पैर इसलिए मुझे उसे रोकने के लिए जाना होगा.

रानी- आपने लावा कहा क्या.

मैं- है. आप जानती है उसके बारे में.

रानी- है सायद. कई वर्षो पहले भी एक ऐसा hi लावा का जन्म हुआ था. जिसने एक साथ कई छोटे छोटे गृह को निगल लिया था. ये अपना आकर चाहे जितना बड़ा और घटा सकता था. लेकिन एक दिन अचानक से कही गायब हो गया. और उसके बाद ये फिर कही नहीं दिखा. लेकिन अगर बैसा hi लावा फिर से आया है तो ये बकै में बहुत hi चिंता का विषय है.

मैं- क्या बैसा hi लावा ने यहाँ पैर भी हमला किया था.

रानी- है किया था. और हम परियो ने उससे युद्ध भी किया था. और उसे रोले रहने में काफी हद तक कामयाब भी रहे थे. लेकिन उसकी शक्तिया बहुत ज्यादा थी. और आखिर कार उसने हमें निगल लिया था. लेकिन कुछ समय पश्चात हाँ आज़ाद हो गए थे. कैसे ये पता नहीं. हमने जानने की कोसिस की तो हमें पता चला की जहा से वो आया था बही पैर बापिस लौट गया था. और ज्यादा जानकारी हमें नहीं मिल पाई थी.

मैं- क्या कोई है जो मुझे इसकी संपूर्ण जानकारी दे सके.

रानी- वो एक hi है. लेकिन लगता नहीं की वो मदद करेंगे.

मैं- आपका इशारा कही शुक्राचार्य की तरफ तो नहीं है न.

रानी- आपका अंदाजा बिलकुल सही है. हम उन्ही की बात कर रहे है.

मैं- फिर तो वो मुझे कुछ भी बताने से रहे.

रानी- फिर आप क्या करेंगे.

मैं- उससे लडूंगा. और कोई रास्ता भी नहीं है.

रानी- हम आपकी इसमें मदद करना चाहते है.

मैं- जैसी मदद

रानी- हम चाहते है आप आलिआ को अपनी सहायता के लिए साथ ले जाये. उसकी शक्तिया हाँ परियो से थोड़ी अलग है. वो जरूर आपकी काफी मदद कर सकेगी.

ये सुनके मुझे थोड़ी हैरानी हुई को जो रानी कालनेमि से युद्ध में आलिआ को यही पैर रहने को कह रही थी वो अब उसे मेरे साथ भेज रही है. वो भी इतने खतरनाक काम के लिए.

रानी- आपको कोई ऐतराज तो नहीं है न.

मैं- जी बिलकुल नहीं. आलिआ का साथ हमेशा मेरी मुस्किले आसान कर देता है. मुझे कृषि होगी उसे साथ ले जाने में.

रानी- ठीक है. आलिआ को बुलाया जाये.

ये आदेश पते hi एक रानी बहा से चली गयी आलिआ को ढूंढ़ने और करीब 10-15 मं में बापिस आई आलिआ के साथ.

उसने रानी को प्रणाम किया.

आलिआ- आपने हमें बुलाया माँ.

रानी- पुत्री आपके मित्र देव यहाँ से जा रहे है. एक संकट आया है पृथ्वी पैर. और हम चाहते है आप उनके साथ जाये और उनकी हर संभव मदद करे.

ये सुनके आलिआ के डिल में जैसे फूल खिल गए हो. उसको इतनी कृषि मिली जितनी वो बता भी नहीं सकती थी.

आलिआ- क्या आप सच कह रही है.

रानी- हमारे द्वारा कहा गया हर एक शब्द सत्य है.

आलिआ- ठीक है में जाने के किये तैयार हु

मैं- धन्यबाद रानीपारी. अब मुझे जाना होगा.

उसके बाद मैंने आलिआ का हाथ पकड़ा और हम अगले hi पल बहा से गायब होगये. और सीधे पहुंचे dehradun.ham दोनों hi गायब थे. किसी को देखे से भी न दिखे.

आलिआ- आपने बताया नहीं कैसा संकट आया है.

मैं- मैंने जो मेरा हमशक्ल बनाया था न. उसे किसी काली शक्ति ने अपने वश में कर लिया है. मुझे समाज कर. लेकिन अभी तक उन्हें इस बात का पता नहीं है की वो में नहीं बल्कि मेरा एक हमशक्ल है

आलिआ- अरे मर गए अब तो.

मैं- तुम्हे क्या हुआ.

आलिआ- प्राची

मैं- कहा है.

में चारो तरफ देखने लगा. तो पाया की प्राची मेरे पीछे hi कड़ी हुई थी. और वो हमें देख सकती थी. और उसका चेहरा देख कर hi पता चल रहा था की कितने गुस्से में है वो

लेकिन हैरानी की बात ये थी की वो यहाँ आई कब और कैसे.

क्युकी इस वक़्त हम देहरादून के बहार थे

प्राची- तुम आगये और बताया भी नहीं. मेने कहा था न मुझसे मिलने आना सबसे पहले.

मैं- बही तो आरहा था. अभी जस्ट यहाँ पेअर रखा है.

प्राची- क्यों रखा यहाँ पेअर. सबसे पहले मेरे रूम में पेअर रखना था तुम्हे.

ये सुनके मुझे एहसास हो गया की मेरी बंद बजना तय है.

मैं- अब छोडो भी इस बात को.

प्राची- न न न न . ये बात में नहीं छोड़ने वाली. तुम्हे पता भी है में उस हमशक्ल के साथ क्या क्या करने का सोच रही थी.

मैं- है मुझे पता है

प्राची- फिर भी तुमने नहीं रोका मुझे

मैं- अरे पगली वो में hi था. मेरा ाँस. उसे मैंने hi बनाया था. और वो होनी हाडे जानता था. इसी लिए वो तुम्हे करीब नहीं आने दे रहा था. तुम खुद याद करो और बताओ. क्या उसने कभी पहल की क्या.

ये सुनके वो सोचने लगी और बोली.

प्राची- अगर में ज्यादा hi आगे बाद जाती तो

मैं- मुझे विस्वास है तुमपर. और उसपर भी.

प्राची- लेकिन मुझे बताया क्यों नहीं

मैं- वो अचानक जाना पड़ा था. आलिआ के यहाँ बहुत बड़ी प्रॉब्लम आगयी थी इसलिए. और इस सब में बताना रह hi gya.socha तुम्हे सब फुर्सत से बतादूँगा. लेकिन उससे पहले hi ये कांड हो गया.

प्राची- कैसी मुसीबत आई थी आलिआ तुम बताओ मुझे

आलिआ- एक असुर ने हमला किया था परीलोक पैर और उसने मेरी माँ और बाकि साडी परियो को क़ैद कर लिया था. और उसने समय सीमा भी दी थी. जिसके लिए देव का तुरंत hi जाना जरुरी था.

प्राची- क्या इतना सब हुआ. और मुझे बताया भी नहीं.

आलिआ- में उस वक़्त बहुत परेशान थी कुछ समाज में नहीं आरहा था कहा जाओ कहा नहीं. तभी देव की याद आगयी और में सीधे उसे यहाँ से ले गयी. बिना कुछ भी सुने.

प्राची- फिर क्या हुआ..

आलिआ- फिर क्या हमने उसके साथ युद्ध किया और सबको छुड़ा लिया. और उसका अंत भी कर दिया.

मैं- है कल hi उसका अंत हुआ और रात में ये सब हो गया. इसीलिए मैंने फ़ौरन hi तुम्हे इसके बारे में बताया.

हमारी बाटे सुनने के बाद प्राची का गुस्सा काम होने लगा था. और वो ढीली पड़ती जा रही थी. जो हमारे लिए अच्छी बात थी

मैं- अब तुम hi बताओ उस टेंशन में बताना भूल गया तो क्या हुआ. हमारे डिल जुड़े हुए है. हम हमेशा एक साथ hi रहते है. चाहे जिस भी कोने में रहे.

Prachi-vha लेकिन बता कर जाते तो मुझे ज्यादा कृषि होती. खैर चलो माफ़ किया. वो भी आलिआ की बजह से

मैं- थैंक्स मेरी जणू.

उसके बाद हाँ गले मिले और उसके बाद प्राची आलिआ के गले मिली.

मैं- तुम यहाँ कैसे पहुंची और तुम्हे कैसे पता चला की में यहाँ आज्ञा हु.

प्राची- मैंने तुम्हे आते देखा तो आगयी तुरंत hi तुम्हारे पास

मैं- मतलब मुझपर नजर जमाये हुए है महारानी.

प्राची- है तो कुछ गलत किया क्या.

मैं- नहीं किया. अब ये बताओ की सिर्फ मुझपर hi नजर राखी या उस पैर भी राखी है

प्राची- है उसपर भी नजर राखी है. वो आज सलग नहीं आया है. लेकिन घर से सलग का कहके hi निकला hai.or में उसका पीछा कर रही थी. की अचानक से वो कही गायब हो गया. उसके बाद मैंने बहुत ढूंढा लेकिन मुझे नहीं मिला वो

मैं- सायद वो शुक्राचार्य के पास गया होगा.

आलिआ- हो सकता है. उन्हें hi तुम्हारे ाँस चाहिए है. ओह माय गॉड.

मैं- अब क्या हुआ.

आलिआ- तुम्हारा ाँस.

मैं- मतलब.

आलिआ- अरे बुद्धू तुम्हारा वो हमशक्ल तुम्हारे ाँस से hi तो बना है. पृथ्वी ाँस से. और अब उसकी शक्तिया शुक्राचार्य के पास है. मतलब की

मैं- पृथ्वी ाँस की कुछ शक्तिया उनके हाथ लग गयी है. ओह माय गॉड. ये तो मेरे दिमाग में hi नहीं आया

ये सोचते hi में अपना सर पकड़ कर बैठ गया.

मैं- सत्यानाश हो तेरा डुप्लीकेट कही के……….



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 63



में अपना सर पकड़ कर बैठा हुआ था और सोच रहा था की ये तो साला इनके हाथ जैकपोट लग गया बिना म्हणत किये. अब क्या किया जाये. और कैसे.

प्राची- क्या सोच रहे हो.

मैं- यही की अब क्या करना है. मेरी तो कुछ पल्ले hi नहीं पद रहा है. वो इस पुरे ब्रह्माण्ड में कही भी हो सकता है. और उसके पास शक्तियों को अच्छी खासी मात्रा भी है. शुक्राचार्य उसके जरिये यहाँ भयंकर तबाही मचा सकते है. तुम सभी को नुकसान पहुंचा सकते है. तुम्हे पता भी नहीं चलेगा की वो में था या फिर मेरा clone.uske पास मेरा चेहरा है. पूरी दुनिया के सामने मेरा चेहरा दिखा कर वो जो चाहे करवा सकते है. और सनकी नजरो में बुरा में बनूँगा.

आलिआ- तुमने सही कहा देव. हमें जल्दी hi कुछ करना होगा. वीणा बहुत देर हो जाएगी.

प्राची- लेकिन हाँ क्या कर सकते है. उसे हम ढूंढ नहीं प् रहे है. उसे जिसने भी अपने वश में किया है वो बहुत hi शक्तिशाली है.

आलिआ- वो तो है. लेकिन हाँ ऐसे हाथ पैर हाथ रखे नहीं बैठ सकते.

प्राची- हमें उसे फ़साना होगा. देव वो तुम्हारा ाँस है. तुम उसे सायद ढूंढ सकते हो. उसकी शक्तियों को कण्ट्रोल कर सकते हो.

मैं- कर सकता था. अब नहीं कर सकता. कल रात hi मैंने कोसिस की थी. लेकिन नाकाम रहा. और रही बात उसे ढूंढ़ने की तो. मैंने कोसिस की थी लेकिन वो तब hi मेरे सामने आरहा था जब वो छह रहा था. सायद. बाकि मुझे इसके बारे में कोई आईडिया नहीं है

आलिआ- तुम्हे फिर से एक बार कोसिस करनी चाहिए. सायद कुछ काम बन जाये. आखिर तुमने इसे बनाया है. और पृथ्वी ाँस की साडी शक्तिया तुम्हारे पास है. और सबसे जरुरी बात ये की वो चाहे कही भी छिप जाये. उसकी शक्तिया पृथ्वी तक hi सीमित है. इसलिए उसे यही बापिस आना पड़ेगा.

प्राची- वो असुर का कुछ पता है वो कहा है इस समय. जो पहले ाँस के साथ जागे थे.

मैं- वो अपने आप को छिपाना जानते है. उन्हें में पहले भी ढूंढ़ने में नाकाम था और अब भी हु. जब तक सम्पूर्ण दिव्यस्त्र मुझे नहीं मिलता. तब तक ये असुर मेरे हाथो से हमेशा बचते hi रहेंगे.

बही दूसरी ओरे. देव का क्लोन शुक्राचार्य के पास गया था. उसे खुद उन्होंने hi अपने पास बुलाया था. जैसे hi वो बहा पंहुचा. बहा मौजूद सरे असुर बहुत कुश हो गए. लेकिन वो थोड़े डरे हुए भी थे की कही ये कोई चाल न हो. लेकिन शुक्राचार्य के आश्वासन देने पैर उन्हें यकीन हो गया.

शुक्राचार्य- देव अब तुम मुझे वो दोनों ाँस प्रदान करो. अभी.

मैं2- माफ़ करे गुरुदेव. परन्तु में देव नहीं हु. में बस उसके द्वारा बनाया गया एक पुतला हु. जो उसी के शक्तियों से बना हुआ हु. वो जब परीलोक गया था. तब उसने मेरा निर्माण किया था. ताकि उसकी अनुपस्थिति में मैं बहा की रक्षा कर सकू. इसलिए में आपकी कोई मदद नहीं कर सकता. क्युकी मेरे पास कोई ाँस नहीं है

ये सुनकर बहा मौजूद सबके मुँह खुले के खुले रह गए. शुक्राचार्य भी हैरान थे की ये क्या हो गया. उनसे इतनी बड़ी भूल कैसे हो गयी.

अधीरा- गुरुदेव ये क्या कह रहा है. क्या आपको इस पैर यकीन है

शुक्राचार्य- है ये इस वक़्त हमारे वश में है. ये जो ब्बि कह रहा है. वो सात प्रतिसत सत्य है.

अधीरा- मतलब हमारे हाथ कुछ नहीं लगा. एक बार फिर से हाँ हार गए उस लड़के से.

डी1- नहीं. मन की हमारे हाथ वो ाँस नहीं लग पाए. लेकिन ये मत भूलो की ये उसी की शक्तियों से बना हुआ पुतला है. और इसके अंदर उसी की शक्तिया hai.or उसके खिलाफ ये हमारा सबसे बड़ा हथियार है. वो हैंपर जब भी हमला करेगा ये हमारी रक्षा करेगा. क्युकी इसके पास उसकी हर शक्ति का तोड़ होगा. और दूसरी बात ये की इसका और उसका चेहरा एक जैसा है. तो हम इसकी मदद से ऐसा कुछ कर सकते है. जिसमे नाम उसका ख़राब हो. और हम उसको इस हद तक मजबूर कर सकते है की वो हमें सरे ाँस खुद hi लौटा दे. हम उसके घर में घुस सकते है. उसके परिवार को पकड़ कर क़ैद कर सकते है. उसने जितने भी सुरक्षा कवच बनाये है उन्हें तोड़ सकते है. ये हमारे हाथ एक खजाने से काम नहीं लगा है. आपका क्या कहना है गुरुवार.

. शुक्राचार्य- तुम्हारा कहना बिलकुल सही है शुम्भ्कासुर और सबसे जरुरी इसके पास पृथ्वी ाँस से मिली हुई शक्तिया है. जिनका हम पृथ्वी पैर कैसा भी इस्तेमाल कर सकते है.

अधीरा- बकै में ये तो मैंने सोचा hi नहीं. इसकी मदद से हम बहुत कुछ कर सकते है. पृथ्वी पैर. और उसको पता भी नहीं चलेगा.

ये विचार आते hi वो सभी जोर जोर से हसने लगे. और उत्सव मानाने लगे. बही शुक्राचार्य ये सोच रहे थे की अब इससे क्या कराया जाये ताकि देव उनके सामने झुकने पैर मजबूर हो जाये.

बही में और बाकि दोनों अपना सर खपा रहे थे की इसको रोका कैसे जाये. और दिमाग है की काम hi नहीं कर रहा था.

प्राची- यार ऐसे सोचने से कुछ भी नहीं होने वाला.

आलिआ- सही कहा. और अब वो तुम्हारी जगह ले ले उससे पहले तुम्हे अपनी जगहों पैर बापिस जाना होगा. सबसे पहले तो यही करो. वीणा कही ऐसा न हो जाये की तुम्हारे दादू और माँ hi तुम्हे खुद का बहरूपिया समझे.

प्राची- यस सही कहा आलिआ ने. तुम यही करो सबसे पहले.

मुझे भी ये आईडिया सही लगा. और सोचा जब वो सामने आएगा तब उसकी हैंडल करूँगा. अभी तो पता नहीं वो सामने कब आएगा मेरे.

मैं- ठीक कहा तुमने. एक काम करो. आलिआ को अपने साथ ले जाओ. और बही रखो. अगर कोई कुछ कहे तो मेरी उससे बात करा देना.

प्राची- ठीक है.

उसके बाद में सबसे पहले पहुंचा अपनी कार के पास जो एक जगह पार्क थी. और फिर उसके बाद मैं कार और अपना बेग लेके सीधा पंहुचा घर. और जाहिर सी बात है माँ मुझे अचानक देखकर हैरान तो होगी hi. लेकिन मैंने उसकी साडी तैयारी कर ली थी. मैंने पहले तो वही कपडे पहने जो वो सुबह पहन कर घर से निकला था. और उसके बाद में पंहुचा घर के andar.or हो गया कांड.

मेरे सामने में hi खड़ा हुआ था और साथ में माँ भी. और मुझे देखकर माँ का मुँह तो खुला hi रह गया. और वो बाले देव के चेहरे पैर आगयी एक शैतानी मुस्कान. और मेरी चिंता बाद गयी दो गुनी.

और इससे पहले कोई कुछ kehta.maine अपने दिमाग से माँ को जोड़ा और उन्हें तुरंत hi सुला दिया. और ये अच्छा हुआ की बहा पैर और कोई नहीं था. और जैसे hi माँ सोफे पैर गिरी वो देखता रह गया.

मैं- क्यों भाई. अब तो मेरी hi जगह लेने आज्ञा तुम. भूलो मत मैंने hi तुम्हे बनाया है.

मैं2- है बनाया है लेकिन अब मुझे मिटा नहीं सकते

मैं- ऐसा है क्या. तो आजाओ कर लेते है 2-2 हाथ.

मैं2- ठीक है आजाओ कर लेते है

और यही में गलती कर बैठा. जैसे hi में आगे बड़ा. पता नहीं क्या हुआ. मेरे नीचे की साडी जमीन खिसक गयी और में जमीन के अंदर जाने लगा. मैंने तुरंत hi अपनी आँखों को बंद किया और ऊपर जाने की कोसिस की लेकिन में सफल नहीं हो पाया जिस बजह से में हैरान रह गया. मैंने फिर से कोसिस की. और अपनी तीसरी आँख को खोला. और अपने चारो तरफ भयंकर तेज़ फैलाया. ये तेज़ इतना तेज था की जितनी भी बुराई उसके आसपास होती है वो साडी जल जाती है. और यहाँ भी ऐसा hi हुआ. जैसे hi ये फैला. साडी जमीन फिर से जुड़ने लगी और में ऊपर जाने लगा सब कुछ पहले जैसा hi होने लगा और ये देखकर दूसरा देव मुस्कुराने लगा. आखिर था तो मेरा hi ाँस. उसे पता था आगे क्या करना है. ये सेल असुर मुझे मुझसे hi लाडवा रहे थे.

यहाँ मैं वस मैं की फाइट चल रही थी. लेकिन में हैरान था की इस तेज़ में इसके अंदर की बुराई क्यों नहीं नस्ट हुई.

अभी में कुछ और करता उससे पहले hi उसने अपनी शक्तियों का प्रहार किया मुझपर. लेकिन मेरे तेज़ की बजह से वो मेरे आसपास भी नहीं पहुंच सकीय. अबकी बार उसने कुछ नहीं किया. बल्कि वो सरे असुर एक साथ मेरे घर में घुस आये. सायद इसने मेरे द्वारा बनाया गया कवच तोड़ दिया होगा. लेकिन बीटा में भी सबका बाप था. वो सभी इस वक़्त भले hi मेरे सामने थे लेकिन मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकते थे. और अब बरी मेरी थी. मैंने अपने तेज़ को अति तीव्र किया. और इसका असर उस सभी पैर दिखने लगा. और कुछ हद तक मेरे डुप्लीकेट पैर भी. और इसी का फायदा उठा कर मैं उसके एकदम करीब पहुंच गया. और वो कुछ करता उससे पहले hi मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. और अगले hi पल हम पृथ्वी से कोसो दूर खड़े हुए थे. लेकिन यहाँ एक प्रॉब्लम ये थी को मेरे घर में असुर घुसे हुए है. और माँ घर पैर hi है. इसलिए मैंने तुरंत hi प्राची और आलिआ को घर पहिचने को कहा. जिससे वो तुरंत hi मेरे घर के लिए निकल गयी. और कुछ hi सेक् में वो मेरे घर पैर थी. जहा वो असुर माँ को उठा कर ले जाने की तैयारी कर रहे थे. तभी आलिआ ने उनपर छड़ी से हमला कर दिया. और उनके हाथ से माँ छूट गयी और नीचे गिरने लगी. तभी प्राची ने जल्दी से उनको संभल लिया. और उन्हें लेके तुरंत hi बहा से गायब हो गयी. बहा पैर बहुत सरे असुर थे. ये दोनों मिलकर भी उनका मौकाब्ला नहीं कर सकते थे. इसलिए आलिआ बस उन्हें उलझा कर रखे हुए थी. ताकि प्राची उन्हें कही सेफ छिपा सके. बही आलिआ एक के बाद एक बार उनपर कर रही थी. लेकिन वो ठहरे पक्के खिलाडी. आलिआ की शक्तियों को जल्दी hi समाज गए. और उसपर हावी होने लगे. और आलिआ के हाथ से छड़ी छूट गयी. अब आलिआ बिलकुल निहथि हो गयी. इसलिए उसने जल्दी से अपनी छड़ी उठाने की कोसिस की. लेकिन उनमे से एक ने आलिआ को बही पैर जमा दिया. आलिआ बिलकुल भी हिल नहीं प् रही थी. उसके पाँव पुरे जैम गए थे. और बही प्राची पहुंची ऐसे मौके पैर और उसने तुरंत hi आलिआ की छड़ी उसको दे दी. ये देखकर बाकिओ ने प्राची पैर हमला किया. और प्राची ने अपने दोनों हाथो को आगे कर लिया. जिससे उनकी साडी शक्तियों का वेग बही रुक गया. लेकिन उनका लोड बहुत ज्यादा था. प्राची संभल नहीं प् रही थी. तभी आलिआ ने उसमे अपनी छड़ी का फाॅर्स भी ऐड कर दिया. और इसमें मेरा पूरा घर तहस नहस हो गया था. घर में जो भी नौकर थे वो ये सब देखकर बेहोश हो चुके थे उन्हें समाज में नहीं आरहा था की ये सब आखिर हो क्या रहा है.

बही आलिआ का फाॅर्स ऐड होते hi असुरो की सगक्ति कमजोर पड़ने लगी. हलाकि आलिआ के पेअर अभी भी हमें हुए थे. वो उस जादू का तोड़ नहीं जानती थी. इसलिए वो खुद को आज़ाद नहीं कर प् रही थी.

बही ऊपर आसमान में मेरे सामने मेरा hi ाँस खड़ा हुआ था. और अब उसकी शक्तिया काफी कमजोर पद चुकी थी. और इसको अब कैसे हैंडल करना है में अच्छे से जानता था.

मैंने अपने दोनों हाथो को जोड़ा और उनको अलग करने लगा. ऐसा करते hi मेरे हाथो के बीचे एक बिजली से लेस बॉल बनने लगा. और जैसे जैसे मेरे हाथ दूर जाते वो और बड़ा होने लगा. और ये देखकर उसे समाज में आज्ञा की में क्या करने की कोसिस कर रहा हु. इसलिए वो बहा से भागने की तैयारी करने लगा. और यहाँ बहा भागने लगा. और उसे रोकने के लिए मेरी आँखों से तेज़ ज्वाला निकलने लगी. जिससे वो बचने की कोसिस करने लगा. और इतनी देर में मेरी बॉल रेडी हो गयी. और जैसे hi वो रेडी हुई मैंने उसे उसके ऊपर फेक दिया. और जैसे hi बॉल उससे टकराई. मेरा डुप्लीकेट उसमे क़ैद हो गया. अब में जानता था की चाहे कितनी hi पावरफुल आसुरी शक्ति हो. लेकिन जब उसे तकलीफ पहुंचेगी तो उसके पास भागने के आल्वा कोई चारा नहीं होगा. और यही हुआ. वो बॉल से उसे इतने तगड़े झटके लगने लगे जिसकी कोई सीमा नहीं. और ऐसा होते hi उसके अंदर समाहित वो लावा तड़पने लगा और उस सरीर से बहार निकलने की कोसिस करने लगा. लेकिन निकल नहीं प् रहा था. और में उसे निकलने hi नहीं देना चाहता था. में चाहता था की वो यही ख़त्म हो जाये. और ऐसा होता मुझे दिख भी रहा था. वो लावा काफी तड़प रहा था. और उसके साथ मेरे डुप्लीकेट का सरीर भी. और आखिर कार मेरे सरीर की सीमा टूट गयी और वो उसी बॉल में नस्ट हो गया. और ऐसा होते hi वो लावा अब अकेला तड़पने laga.or में उसे देख कर कुश हो रहा था. की तभी पता नहीं क्या हुआ. में बैसे hi पूरा जैम गया. न मेरे हाथ हिल रहे थे न hi पेअर. और धीरे धीरे मेरा दिमाग भी सोता जा रहा था. और ऐसा होते hi मेरे द्वारा बनाया गया वो बॉल नस्ट होता जा रहा था. और वो लावा आज़ाद हो रहा था. में ये देखकर हैरान था लेकिन मुझे समाज में नहीं आरहा था की ये आखिर हो क्या रहा है और कैसे. मेरे hi सामने वो लावा अपने असली विकराल रूप में आने लगा था. और मेरी तरफ बढ़ने लगा tha.mujhe कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की अब क्या करू. दिमाग ने काम करना लगभग बंद hi कर दिया था. ऐसा लग रहा था जैसे में कोई पत्थर की मूर्ति में बदलता जा रहा हु. जिसमे कोई प्राण नहीं है.

और बही नीचे प्राची और आलिआ की शक्तिया उन असुरो से टकरा रही थी. जिसका नतीजा तबाही ला रहा था. जिसकी शुरुवात मेरे hi घर से हो रही थी………………………………..



तो बे कॉन्टिनुए……………….
 
अपडेट 64.



में पूरी तरह जैम hi गया था. की मेरे पीछे से आगे कोई आया. और उसे देखकर में शोक था. पूरी तरह से. की ये कैसे संभव हुआ. मेरे सामने इस वक़्त नहीं मेरा क्लोन खड़ा हुआ था. जिसे मैंने अभी थोड़ी देर पहले hi नस्ट कर दिया था. और अगर ये जिन्दा है तो मतलब साफ़ था की जिसे मैंने मारा वो इसका डुप्लीकेट था. मतलब डुप्लीकेट का भी डुप्लीकेट. हद है यार

मैं2- क्यों देव बाबू मुझे देखकर चौक गए क्या. है खैर ये तो होना hi था. जिसे तुमने मारा वो बस एक कॉपी था मेरी कॉपी जिसे उसी लावा ने बनाया tha.taki तुझे जाल में फसा सके. और देख तू फास गया. तूने सोचा भी कैसे की मुझे इतनी आसानी से तू मार सकता है. भूल गया क्या मेरा तेरा hi ाँस हु. खैर अब तेरा कुछ नहीं हो सकता. ये लावा तेरा अंदर घुस कर सरे ाँस निकाल लेगा. और हमारे लिए तेरा chapter ख़त्म लेकिन दुनिआ के लिए अब में hi देव रहूँगा. तेरी गफ प्राची के लिए. और जो बनने वाली है न आलिआ उसके लिए भी. दोनों को में hi पालूंगा. तू अब इस विशाल अंतरिक्ष में एक मूर्ति बनकर घूमता रह. तेरा कुछ नहीं होने वाला.

इतना कहकर वो जोर जोर से हसने लगा. और में उसकी इतनी बाटे सुनकर कुछ भी नहीं कर प् रहा था. मेरा दिमाग सुन्न हो गया था. और मुझे अभी कुछ करना था वर्ण बाद में मेरा कुछ नहीं होने वाला था. लेकिन में करू क्या. इसको कैसे तोडू मेरी समाज में नहीं आरहा tha.ye कुछ अलग प्रकार का जादू था. अगर किसी अस्त्र द्वारा इसे तोड़ने की कोसिस की गयी तो साथ में मेरे भी टुकड़े हो जायेंगे. और काम ख़त्म. और बही वो लावा मेरे सरीर पैर कब्ज़ा करने लगा था. धीरे धीरे मेरे पुरे सरीर में वो फैलता जा रहा था. और में उससे लड़ नहीं प् रहा था. अब एक hi उपाय था. मेरा शरीर तो साथ दे नहीं रहा था. लेकिन मेरे आतम आज़ाद थी. इसलिए मैंने अपनी आत्मा के द्वारा अपने हाथ जोड़े अपनी आँखों को बंद किया. और ॐ का उच्चारण करने लगा. थोड़ी hi देर में चमत्कार हो गया. मेरा सरीर जो अब पूरी तरह पत्थर बन गया था और मेरे ऊपर वो लावा चढ़ा हुआ था. उसी बीच मेरे माथे से तीसरी आँख खुलने लगी. मेरे पुरे सरीर में गर्मी आने लगी और ये देखकर मेरा क्लोन पूरी तरह से हड़बड़ा गया अब उसे समाज में नहीं आरहा था की वो क्या करे वो मेरे ऊपर प्रहार करने लगा ताकि मेरा सरीर कई भागो में विभाजित हो जाये और में फिर से जिन्दा न हो सकू. लेकिन मेरी आँख से निकलने वाला तेज़ अब काफी ज्यादा मात्रा में निकलने लगा और उसके प्रहार से मेरे शरीर में कई जगहों पैर दरार भी आने लगी थी. बस कुछ hi प्रहार में मेरे टुकड़े हो जाने the.lekin बही अंदर से देखा जाये तो इस जादू का टूटना सुरु हो गया. वो मेरे एज़ को सेह नहीं प् रहा था. और ये बात उनसभी को भी पता थी. बही लावा का चढ़ना अब बंद हो गया tha.balki अब वो नीचे उतरने लगा था. और मेरे शरीर से उसका कण्ट्रोल छूटने लगा था. लावा भी तकलीफ में था और मेरा क्लोन भी. और उसका जादू भी. लेकिन मेरी ज्वाला उन सभी को तड़पा रही थी. और फिर एक दम से मेरे शरीर के ऊपर से वो सारा जादू और उसके साथ वो लावा दोनों hi टूट कर एक झटके के साथ बहार निकल गए. और मेरे सामने खड़े मेरे hi ाँस को इतना तेज़ झटका लगा की वो उड़ता हुआ दूर जा gira.or अब में पूरी तरह से ठीक और आज़ाद था. वो लावा कहा गया पता नहीं लेकिन मेरे ाँस के अंदर वो अभी भी था. इसलिए मैंने देर न करते हुए. अपनी साडी ज्वाला उसके ऊपर छोड़नी स्टार्ट कर di.ab वो न तो भाग प् रहा था न hi कुछ कर प् रहा था. बस उसका सरीर और उसके अंदर उपस्थित वो लावा मेरी क्रोधाग्नि में जल रहे थे. दोनों hi तड़प रहे थे. उनकी न तो कोई मदद हो प् रही थी न hi कुछ और. बस थोड़ी hi देर में उस जगह पैर मौजूद दोनों जल कर भस्म हो गए. मेरा ाँस भी और साथ में उसके अंदर का लावा भी. में जानता था की ये लावा इतनी आसानी से ख़त्म होने वालो में से नहीं है. इसकी अगर एक बून्द भी बच गयी होगी तो ये फिर से जिन्दा हो सकता है. लेकिन अब परेशानी की बात ये थी की मुझे उसकी एक बून्द भी नहीं दिख रही थी. अब या तो वो यहाँ से भाग गया या फिर बकै में उसका अंत हो गया. खैर को भी हुआ हो. दोनों से पीछा छूटा. अभी में यही सोच रहा था की मुझे प्राची- और आलिआ के कराहने की आवाजे आने लगी. में समाज गया की दोनों मुसीबत में है. इसलिए अगले hi पल में अपने घर की तरफ निकल गया. और मुझे ज्यादा समय नहीं लगा बहा पहिचने में. लेकिन जैसे hi बहा पंहुचा. में देखकर कर हैरान था की ये क्या हाल कर दिया मेरे घर का. और ऊपर से इनकी लड़ाई अभी भी चल रही है. न तो ये दोनों हार मान रही है. और न hi ये असुर. लेकिन मुझे हैरानी इस बात की है की ये दोनों इतनी देर तक टिक कैसे गयी. बल्कि मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. लेकिन अगर ये बकै में सच है तो बकै में दोनों ने कमाल कर दिया.

लेकिन अब मेरी बरी थी इन असुरो को सबक सीखने की. और मैंने बही किया जिसमे में माहिर था.

मैंने एक के बाद एक इलेक्ट्रिक बॉल बनाये जो किसी कवच से काम नहीं थे. और निशाना लगाकर एक एक असुर पैर में फेकता गया. और जिसपर भी वो गिरता. वो असुर उसी बॉल में फास कर रह जाता.

बही मेरा ये कारनामा देखकर बाकि के असुर उसी समय बहा से भाग गए. क्युकी वो समाज चुके थे की अब उनकी खैर नहीं है.

मेरे हाथो 2-3 लग गए थे. जिनमे से एक तो पृथ्वी ाँस के बाद जागने वाला था. और बाकि इ बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी.

मैं- क्यों भाइयो कैसी रही ये.

डी3- ये तूने ठीक नहीं किया. पीछे से हमला किया हैंपर.

मैं- लो भाई ये तो बही कहाबत हो गयी को जैसा करोगे बैसा भरोगे. तुमने मुझपर पीछे से हमला करवाया और मैंने उसी का बदला तुमपर आजमाया. अब सकते रहना जिंदगी भर इसी में.

ये कहके मैंने एक चुटकी बजे और वो तीनो बहा से गायब हो गए. मैंने उन्हें किसी ऐसी जगह भेज दिया जहा उनके साथी उन्हें कभी न ढूंढ सके. उस जगह की जानकारी केवल मुझे hi थी. क्युकी मैंने hi इसका निर्माण किया था. इन्ही असुरो के liye.ye मेरा मायाजाल था. जिसमे ये अब मौत की भीक न मांगे तो कहना.

प्राची- कहा रह गए थे.

मैं- थोड़ा बिजी हो गया था. लेकिन देखो मेरे पीछे मेरे घर का क्या हाल कर दिया तुम दोनों ने.

आलिआ- इसमें आधा हाथ हमारा है बाकि का उन असुरो का है.

मैं- है वो तो में देख hi रहा था. अब ये बताओ माँ कहा है.

प्राची- उन्हें मैंने अपने हॉस्टल में छोड़ दिया था. और उनके चारो तरफ एक घेरा भी बना दिया था ताकि कोई उन तक न पहुंच सके.

मैं- बढ़िया. उनको लेके आओ तब तक में घर की हालत ठीक करता हु

प्राची- ok.

उसके बाद प्राची बहा से चली गयी. और मैंने अपनी आँखों को बंद किया और अपने पहले ाँस की शक्तियों से मेरे घर को बनाने का काम फिर से शुरू किया. काफी डैमेज कर दिया था. लेकिन सब अपने आप ठीक होने लगा था. जब तक प्राची माँ को लेके बापिस आई तब तक पूरा घर फिर से पहले जैसा हो गया और मैंने इस बार और भी मजबूत सुरक्षा कवच घर के चारो तरफ बना दिया.

इस दौरान मेरा ध्यान दादू और मेरे दोस्तों के ऊपर बिलकुल नहीं गया. पता नहीं वो सभी ठीक भी है या नहीं.

मैं- प्राची तुम दादू और चिराग और लकी को देखकर आओ वो ठीक है या नहीं

प्राची- ठीक है जाती हु.

आलिआ- में भी चलती हु.

प्राची- इस हालत में.

तुरंत hi आलिआ ने अपना लुक बदल लिया और खुद को प्राची जैसे hi कपडे पहना कर पृथ्वी बसी में बदल गयी. और दोनों बहा से चली गयी. और में माँ को लेके सोफे पैर आज्ञा. और फिर मैंने माँ के दिमाग से वो बलि इमेज मिटा दी. जब उन्होंने दो देव को एक साथ देखा था और मेरे आने से पहले जो भी उस नकली देव ने उनसे कहा था वो सभी भी मिटा दिया. और इसके बाद उनको जगाया. और मैंने घर के सरे नौकरो को भी पहले जैसा hi कर दिया. ताकि उनके दिमाग में भी कोई कन्फूसिओं न हो. और फिर सबको एक साथ जगा दिया.

माँ जाएगी और मुझे अपने पास देखकर बोलने लगी.

माँ- तू कब आया.

मैं- अभी आया हु. आप यहाँ क्यों सो रही थी.

माँ- में कहा. ओह पता नहीं कब यहाँ बैठे बैठे नींद लग गयी. चल छोड़ में कॉफ़ी लेके आती हु.

माँ बहा से उठ कर चली गयी कॉफ़ी बनाने और में सोफे पैर बैठ कर सोचने लगा की ये सब कब ख़त्म होगा. और कब तक माँ से झूट बोलना पड़ेगा. बही अब ये भी तय किया की अब कोई और क्लोन नहीं बनाऊंगा में. पता नहीं सेल कब फिर से उसे अपने वश में करले.

में बही बैठा ये सब बाटे सोच रहा था की माँ दो कप कॉफ़ी लेके आगयी. और उनके बैठते hi दरवाजे से प्राची और आलिआ दोनों अंदर आगयी. और माँ और मुझे देखकर लौटने लगी तो माँ ने उन्हें रोक लिया.

माँ- कोण हो बीटा आप लोग.

मैं- माँ ये मेरी फ्रेंड्स है. ये प्राची और ये आलिआ.

ये सुनकर माँ ने बड़ी hi टेडी नजर से देखा जैसे कह रही हो की ये सब कब हुआ. आखिर थी तो माँ hi सब समाज गयी एक hi नजर में.

माँ- अरे बहा क्यों कड़ी हो. आओ न अंदर

माँ दोनों को हाथ पकड़ कर अंदर ले और उन्हें बैठा कर उनसे कॉफ़ी बगेरा पूछने लगी. दोनों ने मन किया लेकिन माँ कहा मैंने वाली थी. वो चली गयी किचन में.

प्राची- बता तो सकते थे.

मैं- में यार काफी थक गया हु. अब मुझसे और हैंडल नहीं होने वाला. में आराम करना चाहता हु इसी में रह गया.

आलिआ- सच hi कहा. पिछले कुछ दिनों से बहुत काम भी किया है तुमने.

प्राची- लेकिन उन असुरो का क्या. वो कही फिर से आगये तो.

मैं- तुम दोनों संभालना. में अब ऑफ ड्यूटी हु. ी नीड रेस्ट. बैसे भी दोनों कमाल का लड़ती hi. उन्हें संभल सकती हो.

प्राची- हम अभी ट्रेनी है. तुम्हारे बिना हम ज्यादा देर तक नहीं टिक पाएंगे.

मैं- में बैक से तुम दोनों को असिस्ट करता रहूँगा. तुम ये बताओ सब ठीक हैना.

आलिआ- है सब ठीक है. अपने अपने कामो में लगे हुए है.

मैं- बढ़िया है.

इतने में माँ कॉफ़ी लेके आगयी. और उन दोनों को पकड़ा दी. आलिआ को तो समाज में hi नहीं आरहा था की इसका करू क्या. ये है क्या.

तो मैंने मुझे देखने का इशारा किया. और मैंने उसे एक सिप लेके बताया. और फिर मेरे hi देखा देखि उसने भी बैसा hi किया. और पहला सिप लेते hi उसको थोड़ी कड़वी लगी कॉफ़ी जिसे उसने तुरंत hi थूक दिया बहार.

ये देखकर मुझे और प्राची को हसी आगयी और माँ हैरान hi गयी की क्या हुआ.

माँ- क्या हुआ बीटा कॉफ़ी अच्छी नहीं लगी क्या.

आलिआ- जी माजी. में ये सब पहली बार पी रही हु. मुझे इसकी आदत नहीं है.

माँ- अरे बीटा तो कहना था न. में तुम्हारे लिए कुछ और ले आती.

आलिआ- नहीं माजी उसकी कोई जरुरत नहीं है. में ऐसे hi ठीक हु.

माँ- ऐसे कैसे. रुको में अभी तुम्हारे किये हॉर्लिक्स मांगती हु. ये कहके उन्होंने किचन में काम करने वाली आंटी को आवाज दी और उनसे हॉर्लिक्स लेन को कहा. लेकिन आलिआ फिर कंफ्यूज थी की ये क्या चीज़ होती है. तो मैंने इशारे से बस देखने को कहा.

थोड़ी hi देर में वो आंटी वो लेके आगयी. और जब आलिआ ने उसे पिया तो उसे वो बहुत hi अच्छा लगा और वो एक hi झटके में सारा दूध पी गयी. जिसमे हॉर्लिक्स मिला हुआ घ.

आलिआ- ये तो बकै में बहुत अच्छा था.

माँ- अच्छा लगा. और दू.

आलिआ कहने में शर्मा रही थी लेकिन उसकी आँखों से माँ समाज गयी और उन्होंने एक गिलास और माँगा लिया. और आलिआ को दे दिया. और आलिआ झट से वो गिलास भी पी गयी. उसके बाद शुरू हुआ माँ का इंटरव्यू.

जिसका जवाब प्राची तो आराम से देने लगी लेकिन आलिआ क्या कहती की वो एक पारी है. में यही सोच सोच कर घबरा रहा था. लेकिन आलिआ ने सब अच्छे से संभल लिया. उसने कह दिया की वो यहाँ अकेली है और प्राची के साथ हॉस्टल में रहती है. जिसे सुनकर माँ को थोड़ा दुःख भी हुआ लेकिन अब वो और कर भी क्या सकती थी. उन्हें भी लगा की हॉस्टल में दोनों सेफ है इसलिए उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा. हलाकि सच ये था की अब इनसे दुसरो को सेफ रहने की जरुरत थी.

बही दूसरी तरफ शुक्राचार्य एक और हार से बौखला गए थे. उन्हें समाज मर आरहा था की कुछ भी कर लो वो जीत नहीं सकते. लेकिन ऐसे हार भी नहीं मान सकते थे वो. वो क्या करे उन्हें भी समझ में नहीं आरहा था. इसलिए उन्होंने अपने सरे असुरो को कुछ दिन shan't रहने को कहा और वो एक गहरी समाधी में लीं हो गए. उन्हें विस्वास था की कोई न कोई रास्ता उन्हें जरूर मिलेगा देव से जीतने का. अभी तक वो सब तरीके अपना चुके थे लेकिन वो सफल नहीं हो प् रहे थे. इसलिए अब उन्हें कुछ नए आइडियाज की जरुरत थी. जिसके लिए वो ध्यान में बैठ गए थे. अब ये जब तक जागते नहीं तब तक असुर तो कुछ करने से रहे. इसलिए तब तक इस पुरे ब्रह्माण्ड में शांति छ गयी थी.

बही इंद्रदेव ये सब देखकर बहुत खुश थे. उन्हें अब पूरा भरोसा हो गया था देव पैर. और ये यकीन भी की कैसी भी परिस्थिति को देव संभल सकता है. लेकिन अभी अभी उनके मन में एक ताज़ा संदेह ने जन्म लिया था जिसके जवाब जानना बहुत जरुरी था इसलिए वो अब सीधे पहुंचे ब्रह्मदेव के पास.

इंद्रदेव- प्रणाम ब्रह्मदेव.

ब्रह्मा- कहो इंद्रा कैसे आना हुआ.

इंद्रदेव- आप तो सब जानते hi है प्रभु.

ब्रह्मा- है हम जानते है. अब आप कुश है न अर्णव का कौशल देखकर.

इंद्रदेव- है प्रभु. अब मुझे कोई चिंता नहीं hai.shukracharya फिलहाल हार मानकर ध्यान में बैठ गए है. और अर्णव भी अब कुछ दिन शांति से निकलेगा. उसने कितने hi दिनों से ठीक से खाना भी नहीं खाया है.

ब्रह्मा- हम जानते हैं ये बात. इसीलिए वो कुछ दिन आराम का पूरा हक़दार है. इसलिए अब आपको सब देखना है की उसके आराम में कोई दखल न aaye.khaskar असुरो का दखल.

इंद्रदेव- वो इंतजाम पहले hi हो गया है. अब कोई भी खतरा उस तक सीधे नहीं पहुंच पायेगा. क्युकी अर्णव की अब 2-2 साथी जो आगयी है. बाकि अगर कुछ गड़बड़ होगी तो में संभल लूंगा. लेकिन मन में एक प्रश्न ने जन्म लिया है. यही मुझे समाज में नहीं आरहा है.

ब्रह्मा- कैसा सवाल इंद्रा

इंद्रदेव- प्रभु अभी कुछ दिनों से देख रहा हु. में अर्णव को मुझे ऐसा लग रहा है. जैसे वो कमजोर सा पद रहा hai.vo बार बार ऐसे मायाजाल में आसानी से फास जाता hai.jinse निकलना उसके लिए आसान होना chahiye.mujhe तो समाज में hi नहीं आरहा है की ये क्या है और क्यों?

ब्रह्मा- तुम्हारा प्रश्न कुछ हद तक सही है इंद्रा. अर्णव थोड़ा कमजोर पड़ने लगा. शक्तियों से नहीं बल्कि सरीर से. उसके सरीर में 2 ाँस आचुके है. जिसका असर उसके दिमाग पैर पद रहा है. मुश्किल परिस्थितियों में वो सही फैसले नहीं ले प् रहा है. उसके पास शक्तियों का भण्डार है. और इसी में वो फास गया है वो फैसला नहीं कर पता है की उसे कोनसी शक्ति का प्रयोग करना चाहिए. और दूसरी बात ये की उसका सरीर उन ांसो की उसमे को सेहन कर रहा है. जो ज्यादा दिनों तक संभव नहीं हो पायेगा. अभी तो केवल 2 hi ाँस मिले है. आगे 3 और बाकि है. जब तक सरे ाँस मिलकर दिव्यास्त्र का रूप नहीं ले लेते तब तक ये सब ऐसे hi चलता रहेगा. उसकी शारीरिक क्षमता काम होती जाएगी. उसका सरीर उसका साथ छोड़ने लगेगा. उन ांसो का तेज़ बहुत ज्यादा है. जिसे अर्णव का सरीर सेह नहीं प् रहा है. यही कारण है की वो आपको कमजोर सा दिख रहा है.

ये सब सुनके इंद्रदेव का चेहरा एक दम पत्थर जैसा हो गया था. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की वो क्या कहे आगे.

फिर भी हिम्मत करके बोल उठे.

इंद्रदेव- प्रभु क्या इसका कोई उपाय नहीं है.

ब्रह्मा- इसका एक hi उपाय है की जल्द से जल्द सभी ाँस अर्णव को मिल जाये और वो दिव्यस्त्र का रूप ले ले. उनके मिलने में जितनी देर लगेगी उतनी hi अधिक पीड़ा अर्णव को मिलेगी.

इंद्रदेव- प्रभु अगर अर्णव उन ांसो को अपने सरीर से अलग करले और कही छिपा दे. और जब सभी ाँस मिल जाये तो उन्हें एक साथ करके दिव्यास्त्र का रूप लेने दे तो. ऐसे में उसके सरीर को नुकसान नहीं होगा. और वो पूरी तरह से तंदरुस्त रहेगा.

ब्रह्मा- आपका विचार अच्छा है इंद्रा. लेकिन इसमें खतरा ज्यादा है. और दूसरी बात ये की इन शक्तियों की अर्णव को जरुरत है. और आगे भी पड़ेगी. अगर वो ांसो को अलग कर देगा तो उनकी शक्तिया भी उनके साथ रहेगी. और आगे कई ऐसे मौके आएंगे तब उन ांसो को शक्तियों की जरुरत उसे पड़ेगी तब वो क्या करेगा. इसलिए उसे ये पीड़ा सहनी hi होगी.

ये सब सुनके इंद्रदेव का मन बिचलित सा हो गया था. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की वो कैसे अर्णव की मदद कर सकते है. लेकिन एक सच ये भी था की उसकी मदद करने का फिलहाल कोई भी रास्ता नहीं था. अर्णव को अपनी मदद खुद hi करनी होगी.

इंद्रदेव- ठीक है ब्रह्मदेव मुझे भरोसा है अर्णव इस मुसीबत से भी खुद को जल्दी hi निकाल लेगा और भविस्य में अपनी पूरी शक्ति के साथ असुरो का सामना करेगा.

ब्रह्मा- यही अच्छा है. अब सबको उनके हालत पैर छोड़ दो. आगे जो होना है उसके लिए सबको बस तैयार रहने की आवश्यकता है. जो मुझे लगता है की सभी पहले से hi है.

उसके बाद इंद्रदेव उनको प्रणाम करके बहा से चले गए.

बही एक और विचित्र घटना घाटी. वो ये की स्वयं महादेव कैलाश से कही अन्तर्ध्यान हो गए. और इसकी जानकारी त्रिदेव के आल्वा किसी को भी नहीं लगी फिलहाल……

अब देखते है इस घटना का आगे चलकर देव की मुसीबतो से कोई सम्बन्ध तो नहीं है न……………….



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
थैंक्स भाई आपने मेरी स्टोरी पड़ी और मुझे ख़ुशी हुई ये जानकार की आपको स्टोरीज पसंद आयी. बही रही बात सूर्य की स्टोरी की तो है उसमे नेक्स्ट जनरेशन hi लीड करेगी एंड सूर्य उन सभी को असिस्ट करेगा उनके मेंटर के रूप में. लेकिन उसमे अभी टाइम है. बाकि रही बात इस स्टोरी की तो आपका कहना सही है. की सबको सच्चाई बता देनी चाहिए. लेकिन इससे प्रॉब्लम काम होने की जगह और बढ़ेगी देव के लिए. लेकिन बताना भी जरुरी है. अब देखते है ये आखिर कब तक होता है. और आलिआ का मटर कब तक चलता है. जानने के लिए साथ बने रहे ...

कीप सपोर्टिंग..............
 
सायद ऐसा संभव हो. लेकिन इस बारे में फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है. इस बात की पुस्टि अभी तक नहीं हो पाई है की वो लावा आखिर कैसे आया है यहाँ पैर. ये तो पता है की उसे लाये शुक्राचार्य hi है. लेकिन वो आया कहा से है ये अभी भी एक रहस्य hi है. जो सायद आगे चल कर खुलेगा. अब बाकि देखिये की देव कैसे इन सबका सामना करता है और किस हद तक कामयाब होता है....

कीप सपोर्टिंग...............
 
अपडेट 65



उस रात में चैन से सोया और सुबह अपने रूटीन से उठा. सबसे पहले ध्यान लगाया और उसके बाद थोड़ी एक्सरसाइज की. एंड फिर आके बढ़िया नास्ता किया.

दादू- क्या बीटा जी आजकल हमें बिलकुल भी टाइम नहीं दे रहे हो. कहा बिजी हो गए हो.

माँ- हमें कैसे टाइम देगा बेचारा दो दो फ्रेंड्स जो है उसकी वो भी गर्ल्स.

ये सुनके दादू का रिएक्शन काफी शॉकिंग था

दादू- क्या 2 2. वह बीटा जी. तूने तो मुझे भी पीछे छोड़ दिया.

मैं- ऐसा कुछ नहीं है दादू. वे अरे जस्ट फ्रेंड्स.

दादू- सही जा रहे हो. शुरुवात यही से होती है. और ये फ्रेंडशिप कब आगे बाद जाती है पता भी नहीं चलता है.

मैं- कॉमन दादू. बस ब्बि करो.

माँ- क्यों बस करे वो. तू बस कर. मैंने पहली नजर में hi दोनों को अच्छे से पहचान लिया था. उनकी आँखे कुछ और hi कहानी बया कर रही थी.

दादू- अगर ऐसा है तो बकै में तेरी प्रॉब्लम बढ़ने वाली है

मैं- में सलग जा रहा हु.

दादू- लगता है ये पूरा पागल हो गया है. जो संडे के दिन सलग जा रहा है.

माँ- मुझे तो लगता है उन्ही से मिलने जा रहा hoga.hamse झूट बोलना सीख गया है ये.

ये सुनके मुझे याद आया की आज बकै में संडे है.

ये याद आते hi कृषि भी हुई. और ये टेंशन भी की अब इन दोनों को कैसे मनौ.

मैं- आपलोग बस कीजिये. फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है हमारे बीच. और बैसे भी में पागल नहीं हु. जो एक hi टाइम लेर 2-2 लड़कियों को डेट करू.

ये सुनके दादू और माँ ने मुझे अजीब सी नजरो से देखा.

मैं- व्हाट.

दादू- कुछ नहीं. लगता है ये गया हमारे हाथ से.

माँ- है मुझे भी यही लगता है. देखो तो कैसी बात कर रहा है.

मैं- अब मैंने क्या कह दिया ऐसा.

दादू- कुछ नहीं बीटा.

मैं- नहीं बताइये न.

दादू- यही की आजकल आप हमसे खुल्लर बाटे करने लगे है. जो की पहले बिलकुल भी नहीं होता था. और इस बात से हम बकै में कुश है

ये सुनकर मुझे ख्याल आया की अभी मैंने क्या कहा था. और मैंने अपना सर पीट लिया.

माँ- बैसे मुझे दोनों hi पसंद है. अब तू सेलेक्ट करले. इनमे से कोण इस घर में आने वाली है

मैं- प्लस आप लोग ये टॉपिक बंद करेंगे.

दादू- इसमें बंद करने जैसा कुछ नहीं hai.beta जी. यही तो टॉपिक है जो उठना चाहिए.

मैं- ठीक है तो आपलोग उठाते रहिये टॉपिक में चला.

दादू- दोनों को कोई गिफ्ट लेते जाना.

ये सुनके मैंने अपना सर पीट लिया. और सोचने लगा की इनलोगो ने तो मेरी बंद hi बजा दी. थोड़ी hi देर में.

खैर बहा से जैसे निकल आया में. और सीधा पंहुचा चिराग के ghar.jaha भाईसाब घोड़े बेच कर सो रहे थे. वो भी अभी तक. खैर में सीधा गया उसके कमरे में. और एक खींच कर लास्ट दी पिछवाड़े में. और चिराग बौखलाता हुआ गिरा नीचे और चिल्लाने लगा. बचाओ मुझे मत मारो. प्लस मैंने खीर नहीं खाई.

ये सुनते hi मेरी हसी निकल गयी. और काफी जोर से निकली. और चिराग का थोड़ा जब संतुलन ठीक हुआ तो मुझे हस्ता हुआ देखा कर मुझ पैर चढ़ गया.

चिराग- सेल ऐसे कोई मारता है वो भी संडे के दिन.

में हसे जा रहा था और वो मुझे पटक कर मरे जा रहा था. मैंने होनी हसी को थोड़ा कण्ट्रोल किया और बोलै.

मैं- अबे किसकी खीर चुरा कर खा रहा था. जो इतनी जोर से चिल्लाया.

ये सुनके उसे एहसास हुआ की उसके मुँह से क्या निकला है. और वो अपना बिस्टेर में बड़ा कर लेट गया.

मैं- अबे बता तो सही किसकी खीर चुरा रहा था.

चिराग- अबे बस कर. वो सपना देख रहा था. इसीलिए चिल्ला बैठा.

मैं- खैर छोड़ ये पॉइंट बाद में उठेगा. फिलहाल रेडी होजा. आज कही घूमने चलते है.

ये सुनकर वो काफी एक्सीटेंड हो गया.

चिराग- कहा चले.

मैं- तुम लोग डीडे कर लेना. तू जल्दी रेडी हो में लकी को कॉल करता hu.or बाकि सभी को भी.

चिराग- एक मं. ये बाकि सभी कोण है.

Main-koi नहीं तू रेडी हो जल्दी वर्ण तुझे यही छोड़ दूंगा तेरी खीर के साथ.

ये सुनकर वो जल्दी से भगा बाथरूम में और मैंने फिर एक एक करके दोनों को कॉल किया और उन्हें रेडी होने को कह दिया. आज में घर से एक बड़ी कार सुव लेके आया था. ताकि सभी उसमे बैठ सके आराम से.

करीब 1 घंटे में चिराग रेडी हो गया. तो मैंने उसे साथ लिया. आंटी को bye बोलै और निकल गए हम. सीधे लकी के घर. वो भी रेडी hi था. तो बहा भी आंटी को bye बोलै और हम पहुंचे सीधे हॉस्टल. जहा दोनों रेडी होक बहार कड़ी हुई थी. और जब इन दोनों ने आलिआ को देखा तो इनके मुँह में सैलाब आज्ञा. दोनों की हालत देखने लायक थी.

मैं- अबे मुँह बंद करलो. नहीं तो मच्छर घुस जायेंगे अंदर.

ये सुनकर दोनों ने अपना मुँह बंद किया और फिर बोले.

चिराग- अबे ये कोण है.

मैं- खुद hi पूछ लेना.

ये कहके में बहार निकला. तो दोनों मेरे पास आगयी.

मैं- कैसी हो दोनों.

आलिआ- एक दम मस्त.

प्राची- बिलकुल फिट न फाइन. तुम बताओ कहा ले जा रहे हो हमें.

मैं- तुम चारो मिलकर डीडे कर लो. में तो ड्राइवर हु.

चिराग- हे प्राची अपनी फ्रेंड्स से नहीं मिलवाओगी क्या.

लकी- है ऐसा थोड़ी न होता है.

प्राची- तुम दोनों खुद hi जानपहचान कर लो. मुझे बीच में क्यों घसीट रहे हो.

ये सुनके दोनों आलिआ के सामने आये और अपने हाथो को आगे बड़ा या और अपना इंट्रो देने लगे.

चिराग- हैयय ी म चिराग.

और ये है लकी. बस नाम का लकी है. बाकि लक जैसा कुछ नहीं है इसकी लाइफ में.

ये सुनके लकी ने एक घुसा दिया चिराग की पीठ पैर

लकी- है जैसे तू किसी रियासत का चिराग है. सेल फटीचर कही के. भाग यहाँ से.

ये सुनके आलिआ की हसी छूट गयी.

और ये देखकर दोनों के अंदर घंटा बजने लगा.

आलिआ- आप दोनों बकै में कमाल के है. मेरा नाम आलिआ hai.or आपसे मिलकर अच्छा लगा. लकी और चिराग आपसे भी मिलकर अच्छा लगा hame.lekin में बस इतना कहना चाहूंगी की मुझपर कोसिस करना बेकार है. बाकि फ्रेंड्स बने रह सकते है.

ये जैसे hi सुना दोनों ने. ऐसा लगा जैसे जो घंटा अंदर बज रहा था उसका हैंडल hi टूट कर नीचे गिर गया हो. या फिर जैसे कोई कड़क और लाजबाब खाना सामने रखा है और इसको चबाने के लिए दन्त hi नहीं है. दोनों का मुँह एक दम से लटक गया.

मैं- अरे मेरे शेरो मायूस न हो. ये नहीं तो कोई और सही. चलो अब डीडे करो कहा जाना है.

उसके बाद हम सभी देखने लगे की कहा चले कहा नहीं. अधिकतर जगह हमारी देखि हुई थी. इसलिए डीडे करने में बहुत टाइम जा रहा tha.isliye मैंने hi डीडे किया.

मैं- छोडो अडवांटुरे पार्क चलते है. अच्छा टाइम पास हो जायेगा.

ये आईडिया सभी को ठीक लगा. और हम निकल गए.

ये बात अब सभी को ोाता चल गयी थी की महादेव कैलाश पैर नहीं है. और इसका कारण किसी को भी समाज में नहीं आरहा था की आखिर महादेव गए कहा. देवताओ को लग रहा था की कही किसी असुर को वरदान देने तो नहीं चले गए. बही विष्णु भगवन और ब्रह्मदेव के चेहरे पैर मुस्कान बानी हुई थी. जिसका कारन भी कोई नहीं जान प् रहा था.

बही गुरुदेव अपने ध्यान में बैठे हुए थे की उन्हें पता चला की महादेव कैलाश पैर नहीं है. तो वो भी चिंतित हो गए की आखिर वो कहा गए. हलाकि महादेव की लीला को स्वयं महादेव hi जानते है. ये बात भी सभी को पता है. इसलिए वो मन में महादेव का ध्यान करने लगे. और इसके पीछे का कारण जानने की कोसिस करने लगे.

बही इंद्रदेव पहुंचे सीधे वैकुण्ठा. जहा अपनी सेष सैया पैर इस संसार के पालनहार विश्राम कर रहे THE.OR माता लक्समी उनके पैरो की सेवा कर रही थी.

इंद्रदेव ने दोनों को प्रणाम किया.

विष्णुजी- कहो इंद्रा आज यहाँ कैसे आना हुआ.

इंद्रदेव- आप तो सब जानते hi है भगवन. मेरे यहाँ आने का कारन भी आपसे छिपा नहीं है.

विष्णुजी- महादेव के जाने से व्यथित हो.

इंद्रदेव- है प्रभु. वो ऐसे अचानक कहा चले गए है और क्यों.

विष्णुजी- इंद्रा महादेव जो भी करते है उसमे किसी न किसी तरह इस सरे संसार की भलाई hi छिपी होती है. इसलिए किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.

इंद्रदेव- ये बात सभी जानते है भगवन. परन्तु महादेव के यहाँ न होने से इसका सीधा असर अरांव पैर पड़ेगा. मुझे उसकी चिंता है. और ऐसा क्यों होगा ये तो आप जानते hi है.

विष्णुजी- है हम जानते है. और महादेव भी ये बात जानते है. और अगर वो फिर भी कही गए है तो अवस्य hi कोई महत्वपूर्ण कार्य hi होगा. उन पैर संदेह न करो.

इंद्रदेव- में उनपर कभी संदेह नहीं कर सकता भगवान. में तो बस यही जानना चाहता हु की अब क्या लीला रचा रहे है महादेव. कही किसी असुर को कोई वरदान न दे आये.

विष्णुजी- जो भी करेंगे वो. शीघ्र hi सबके समक्ष प्रगट हो जायेगा. और सभी की साडी शंकाये भी मिट जाएगी.

जैसे hi ये सुना. इंद्रदेव समाज गए की त्रिदेव कुछ नहीं बताने वाले इस बारे में. इसलिए वो बहा से उनको प्रणाम करके बहा से चले गए. और भगवन विष्णु जी और माता लक्समी ने अपने होंठो पैर एक मुस्कान बिखेर दी. जिसे देखकर भी कई मनुस्यो के जीवन सुधर जाये ऐसी मनमोहक मुस्कान.

खैर इंद्रदेव अपने लोक पहुंचे और चिंता में यहाँ बहा घूमने लगे. नहीं सरे देवता इंद्रा को ऐसा परेशान देखकर खुद भी परेशां होने लगे

बही देव और उसकी पल्टन दिन भर बस एन्जॉय करती रही. सभी जगह घूमती रही. उन्हें कुछ काम नहीं था. देव भी बेफिक्र होकर एन्जॉय कर रहा था.

शाम को सभी को घर छोड़ने के बाद देव अपने घर गया. काफी थक गया था और खाना इनलोगो ने बहार hi खलिया था इसलिए वो सीधा अपने कमरे में गया फ्रेश होक बिस्टेर पैर लेट गया.

अभी थोड़ी hi देर लेता हुआ था की उसके कानो में आवाज आई. ये आवाज गुरुदेव की थी. देव तुरंत hi पहचान गया. और उठ कर बैठ गया और अपनी आँखों को बंद करके गुरूजी से संपर्क बनाने लगा…….

तो बे कॉन्टिनुए………………...

 
अपडेट 66



मैंने आँखे बंद करके गुरुदेव से संपर्क बनाने लगा. थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आगयी मुझे.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स.

मैं- गुरुदेव आपने याद किया मुझे.

गुरुदेव- है वत्स. हमें तुमसे बात करनी थी

मैं- कहिये गुरुदेव क्या आज्ञा है

गुरुदेव- वत्स. समय बदल रहा है. और भरी संकट आने वाले है

ये सुनके मैं थोड़ा चौका.

मैं- कैसा संकट गुरुदेव.

गुरुदेव- वत्स महादेव कही अंतर्ध्यान हो गए है. और इसका केवल एक hi मतलब है वो अज्ञात जगह पैर अपनी समाधी में बैठ गए है. और इस मौके का फायदा हमेशा असुर उठाते है. जब भी महादेव अज्ञात वश में जाते है. आसुरी शक्तियां कई गुना बाद जाती हैं और उनकी गतिविधिया भी. और यही अब होने वाला hai.or सबसे जरुरी बात इसका एक असर तुम्हारे ऊपर भी पड़ेगा.

मैं हैरान था ये सब सुनकर.

मैं- कैसा असर गुरुदेव.

गुरुदेव- तुम्हारी शक्तिया जो तुम्हे जन्म से मिली है. वो कमजोर रहेंगी इस दौरान. लेकिन जो ाँस तुम्हारे अंदर है. उनकी शक्तिया अपना पूरा काम करेगी. तुम्हारा तीसरा नेत्र अब आसानी से नहीं खुलेगा.

ये सुनके ऐसा लगा जैसे मेरे पैरो टेल जमीन खिसक गयी हो.

मैं- परन्तु गुरुदेव महादेव इस मौके पैर ऐसे अचानक क्यों चले गए. और आपने मुझे ये पहले क्यों नहीं बताया.

गुरुदेव- वत्स. अपने आप को कमजोर मत पड़ने दो. अपने आप पैर विस्वास रखोगे तो सब ठीक रहेगा वर्ण सर्वनाश हो जायेगा. और महादेव पैर किसी का वश नहीं चलता है. वो मनमौजी है. उनका जब जैसा मन करता है वो बही करते है. बस इसमें एक बात सामान्य है की उनके हर कार्य में इस संसार का भला hi छिपा रहता है. अगर वो अज्ञात वश में गए है तो जरूर इसमें भी कोई न कोई भलाई hi छिपी हुई होगी इस संसार की.

मैं- गुरुदेव अब मुझे क्या करना है.

गुरुदेव- वत्स भोलेनाथ स्वयं तुम्हारी परीक्षा ले रहे है. वो देखना चाहते है की कही तुम इस शक्तियों के अधीन तो नहीं हो गए हो. जो की तुम नहीं हो. क्युकी ऐसा होना सभी के किये खतरनाक hai.tumhe ये साबित करना होगा की तुम इस शक्तियों के नहीं बल्कि ये शक्तिया तुम्हारी अधीन है. तुम इनके बिना भी बुराई को परास्त कर सकते हो. जैसे hi ये कर लोगे सब ठीक हो जायेगा.

ये सब सुनके मेरा मन विचलित सा हो रहा था. में खुद को कमजोर सा महसूस कर रहा था. कही न कही मुझे ये लगने लगा था की सायद इन शक्तियों के बिना में कुछ भी नहीं हु. मेरा मन डगमगाने लगा था. जिसका गुरुदेव को भी आभाष हो रहा था.

गुरुदेव- तुम बही कर रहे हो जिसके लिए में मन कर रहा हु. अपने मन को काबू में रखो वत्स. उसे डगमगाने मत दो. महादेव का जाप करो. अपनी आँखों को बंद करो. और मंत्र का जाप करो. तुम्हे अच्छा महसूस होगा.

मैं- ठीक है गुरुदेव में पूरी कोसिस करूँगा की आपके और महादेव के अरमानो पैर खरा उतर सकू. आपको निराश न करू में.

गुरुदेव- मुझे तुमसे यही उम्मीद है वत्स. कल्याण मस्तु..

ये कहके वो चले गए. और में ध्यान में hi बैठा रहा. और मंत्र का जाप करने लगा. मन में. ॐ नमः सिवाय.

मंत्र का जाप करने से मेरे मन को शांति मिल रही थी. लेकिन जो बात मुझे नहीं सोचनी चाहिए वो बार बार मेरे मन में आरही thi.jis बजह से मेरा ध्यान बार बार भांग हो रहा था. दिन भर की थकन पल भर में गायब हो गयी थी. आँखों से नींद भी.

लेकिन मुझे अपने आप पैर कण्ट्रोल करना था इसलिए पूरा ध्यान लगा कर में बैठ गया और मन में मैंने महादेव की एक छबि बनाई और उन्हें hi देख कर में ध्यान करता रहा. और इस बार काम बन गया. काफी देर तक में ध्यान में बैठा रहा. और आखिर कार करीब 1 घंटे तक बैठने के बाद में उठा और फ्रेश होने चला gya.badiya गर्म पानी से नहाया तब जेक सरीर तोडा हल्का फील हुआ. और फिर चद्दर तान कर सो गया.

बही असुरो को भी ये समाचार मिल चूका था की महादेव अज्ञात वश में गए है. और शुक्राचार्य इस वक़्त ध्यान में लीं थे. इसलिए अधीरा काफी अधीर हो रहा था देव पैर हमला करने के लिए. क्युकी उसे बस इतना पता था की महादेव के जाते hi उनकी शक्तिया काफी प्रबल हो गयी है. और देव को वो अच्छी टक्कर दे सकते है. इसलिए उसने पृथ्वी वाले असुरो से संपर्क बनाया. एक दूत के द्वारा उन्हें एक सन्देश पहुंचाया और उसमे देव पैर हमला करने का सुझाव दिया. और साडी परिस्थिति भी समझे. जिसे सुनके उन्होंने ने गुरुदेव के बारे में पूछा तो अधीरा ने उन्हें समझा दिया की गुरुदेव कब उठेंगे पता नहीं. तब तक ये मौका हमें पता नहीं दोबारा मिले या नहीं. और उन्हें भी ये बात जैम गयी इसलिए वो ये करने को तैयार हो गए.

बही इंद्रदेव को इसी बात की चिंता थी. इसलिए अब उन्हें hi कुछ करना था. ताकि अर्णव इससे थोड़ा दूर rahe.use इससे सँभालने का थोड़ा समय चाहिए था. इसलिए उन्होंने प्राची के मन में ये बात दाल दी. और उसे रेडी रहने का इशारा भी कर दिया. और वो खुद भी उस सब पैर नजर बनाये हुए थे ताकि अगर बात बिगड़े तो वो संभल सके. हलाकि महादेव के न होने पैर प्राची की शक्तियों पैर भी असर पड़ा था लेकिन उसे इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं थी. और आलिआ प्राची के साथ थी.

आलिआ ने अपनी छड़ी घुमाई और सेहर में एक अलग प्रकार की रौशनी को छोड़ दिया. अब ये रौशनी एक प्रकार से आलिआ की खबरि थी. जो कही भी कुछ भी अलग घटना के बारे में इन्हे फ़ौरन hi बता देने वाली थी. ताकि ये समय रहते सब संभल सके. हलाकि असुर कब हमला करने वाले थे इसकी जाकारी किसी को नहीं थी. वो कुछ अलग hi योजना बना रहे the.ek तो उनका एक साथी पहले से hi देव के कब्ज़े में है. और वो नहीं चाहते थे की ऐसे hi उनके बाकि के साथी भी गायब हो जाये. ये 5 से अब केवल 4 hi बचे हुए the.isliye वो हर कदम सोच समाज कर उठाना चाहते थे.

बही इन सब से दूर दिल्ली के एक बार में.

रेनू और सुरभि बैठी हुई थी. उन्होंने यहाँ आना बंद कर दिया था लेकिन इनके कुछ नए दोस्त बने थे जो उन्हें यहाँ ले आये थे. फिर भी उन्होंने अभी तक कोई ड्रिंक नहीं लिया था सिर्फ जूस hi पिया था. लेकिन उन्हें नहीं पता था की इस जूस में कुछ मिलाया गया था. जिस बजह से ये दोनों hi अपने होश खो बैठी थी. और जो इन्हे यहाँ लाये थे उनकी तो लाटरी hi निकल गयी थी. वो दो थे इसलिए उन्होंने एक एक को संभाला और बार से बहार ले गए उसके बाद उनकी कार में दोनों को डाला और कार को भगा ले गए बहा से.

वो लोग कार को किसी सुनसान जगह पैर ले आये और अपना कार्यक्रम आगे बढ़ाने लगे. तभी किसी ने उनकी कार के सीसे पैर नॉक किया. ये देखकर दोनों की hi सिटी पित्ती गुल हो गयी. वो बहुत घबरा गए थे लेकिन उन्होंने अपने आप को संभाला और सीसे को नीचे करके देखने लगे की कोण है. अभी वो बहार झांक hi रहे थे की अचानक एक जोरदार पंच लगा पहले वाली की नाक पैर. और वो सीधा पीछे होते हुए कार के दूसरी साइड के दरवाजे पैर जेक लगा और उस दरवाजे पैर लगा जाँच टूट गया और कुछ उसकी पीठ में घुस गया. उसकी हालत एक hi पंच में ख़राब हो गयी. एंड ये सब इतनी जल्दी हुआ की दूसरे वाले को समाज में hi नहीं आया की क्या हुआ है अभी. अभी वो सोच hi रहा था की क्या हुआ ये. तभी किसी से उसकी कलर को पकड़ा और एक hi झटके में उसे कार की खिड़की से बहार खींच liya.or नीचे पटक दिया. और उसके अगले hi पल उसकी नाक पैर एक जोरदार पंच जिससे वो बही बेहोश हो गया.

उसके बाद उसने इन दोनों को छोड़ा और एक पानी बोतल को लिया और दोनों लड़कियों के चेहरे पैर पानी उड़ेल दिया. और एक hi झटके में दोनों होश में आगयी. लेकिन दोनों का सर फटा जा रहा था दर्द से. उन्हें ठीक से दिख भी नहीं रहा था. वो दोनों बस अपना सर पकड़ कर कराह रही थी. थोड़ी hi देर में उनका दिमाग ठिकाने पैर आज्ञा. और उन्हें सब साफ़ दिखने लगा. तब उनका ध्यान गया की वो कहा है और किस हालत में है. उन्होंने ने तुरंत hi अपने कपडे ठीक kiye.or कार से जल्दी hi बहार निकल आई.

रेनू- तू ठीक है न.

सुरभि- है में ठीक हु. तुम ठीक हो न.

रेनू- है में भी ठीक हु.

सुरभि- ये हम कहा आगये. हम तो बार में थे.

रेनू- ये जरूर उन दोनों की चल होगी. ये देखो एक तो कार में पड़ा हुआ है और दूसरा ये नीचे पड़ा हुआ है.

ये देखकर सुरभि को गुस्सा आज्ञा और उसने एक कास के काट जमा दी उसकी पसलियों में. हलाकि वो पहले से hi बेहोश था. लेकिन इतना तय था की इसका दर्द उसे होश में आते hi होने वाला था. दोनों अच्छे से मार्टिकल आर्ट्स जानती थी. और किसको कहा मारने से दर्द होगा ये भी अच्छे से जानती थी. अभी 2-3 किक्स hi मरी थी की उन दोनों को पीछे से आवाज आई.

लड़का- उसे मरने से अब कोई फायदा नहीं है. तुम दोनों पहले से hi सेफ हो.

ये आवाजे सुनकर दोनों पीछे मुड़ी और उसको देखकर दोनक सतर्क हो गयी.

रेनू- कोण हो तुम.

लड़का- मेरा नाम समीर है.

रेनू- क्या तुमने हमें बचाया है.

समीर- है कह सकती हो.

सुरभि- कैसे.

समीर- वेल मैंने एक को लंच दिया. और दूसरे

सुरभि- मेरा मतलब है तुम्हे कैसे पता चला की यहाँ क्या हो रहा है

समीर- एक दम सही सवाल पूछते हो.

रेनू- सवाल छोडो आंसर दो जो उसने पूछा है

समीर- वेल में बार में था. और मैंने देखा था की ये दोनों तुम दोनों को ले जा रहे थे. जबकि तुम दोनों ने से सिर्फ जूस hi पिया था. में सारा मटर समाज गया और इनका पीछा करता हुआ यहाँ आज्ञा. और बस दिए दोनों को एक एक.

रेनू- और हमारी मदद करने के पीछे का कारण क्या है.

समीर- वेल मुझे लगता है की तुम दोनों को मुझे थैंक्स कहना चाहिए न की इतने सवाल पूछने चाहिए

सुरभि- वो क्या है न की हमें शक हो रहा है तुम पैर. बस इसी लिए हम ये पूछ रहे है. बाकि इसके बाद तुम्हे अच्छे से थैंक्स कहेंगे.

समीर- बैसे किस प्रकार का शक हो रहा है तुम्हे.

रेनू- यही की कही तुम इनके साथ तो नहीं हो न. या फिर उनसे अलग भी हो तब भी क्या भरोसा की तुमने होने मतलब के लिए हमें नहीं बचाया hai.sayad तुम्हारा भी यही इरादा हो.

ये सुनके समीर को काफी हर्ट हुआ. उसे यकीन नहीं हुआ की उसे ये सब सुन्ना पद रहा है. उसे अब ये भी लगने लगा था की कही उसने इन्हे बचा कर कोई गलती तो नहीं करदी है.

सुरभि- क्या हुआ बोलो भी.

समीर- मुझे लगता है की भलाई का जमाना अब बकै में नहीं रहा है. एक तो मैंने तुम दोनों की जिंदगी बचाई और ऊपर से तुम दोनों मुझपर hi शक कर रही हो.

रेनू- शक करना हमारा फ़र्ज़ है. हम किसी पैर भी यकीन नहीं कर सकते. उनपर भी नहीं.

समीर- तो फिर उनके द्वारा दिया गया जूस क्यों पिया

रेनू- वो जूस हमने नहीं पिया था केवल पीने का नाटक किया था.

ये सुनते hi समीर के हाव भाव बदलने लगे

समीर- तो मतलब तुम बेहोश नहीं थी.

ये सुनके दोनों हसने लगी.

रेनू- नहीं हम केवल बेहोसी का नाटक कर रहे थे

ये सुनके समीर ने अपने मुँह पैर हाथ फेरा और थोड़ी देर बाद बोलै.

समीर- चलो अच्छा हुआ तुम्हे सब पता hai.verna खामखा मुझे और नाटक करना पड़ता.

सुरभि- वो तो है. अब बताओ की तुम कोण हो और क्या चाहते हो. और हमें यहाँ क्यों लाये हो.

समीर- में कोण हु ये छोड़ दो. क्युकी अगर मैंने अपना असली नाम या रूप दिखा दिया तो तुम hi नहीं ये सारा सेहर कम्प जायेगा.

रेनू- हम उनमे से नहीं है. जो दर जाये. समझे.

अभी इन्होने इतना hi बोलै था पता नहीं कैसे दोनों अचानक से बेहोश हो गयी.

और उनके बेहोश होते hi वो दोनों भी जाग गए. और उसके बाद उन्होंने दोनों को कार में डाला और बहा से चले गए.

बही इस हादसे के तुरंत बाद hi देव नींद से जाग गया. उसे एहसास हुआ कुछ. लेकिन क्या ये उसे भी नहीं पता था. उसे बस इतना पता था की कही मुसीबत आई है. अब कहा ये जानने के लिए उसको ध्यान लगाना पड़ेगा. जिसमे वो सफल होगा या नहीं ये देखने वाली बात है………..



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
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