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बस राहुल को पता था की उसने कैसे अभी तक अपना विरए निकलने से रोका था. सुप्रिया के नरम शरीर और मुँह से छू कर उसका लुंड अब तक कई बार अपनी चरम सीमा तक पहुंच कर वापस आया था. उसने बस किसी तरह अपने आपको कण्ट्रोल किया था, पर अब उससे और सब्र नहीं हो रहा था. वह अपना सारा माल सुप्रिया के अंदर निकालना चाहता था. उसे ऐसा लग रहा था की जैसे की कड़ी तपस्या के बाद अब बस उसे आखिर वह फल मिलने hi वाला था जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार था.
अपनी हालत जानते हुए hi उसने सुप्रिया के मुँह से अपना लुंड दूर किया, और अब सुप्रिया को भी बुरी तरह उत्तेजित करने का सोचा. ताकि जब उसका लुंड सुप्रिया की छूट में जाये तोह वह भी उतना hi मज़ा ले पाए जितना उसे आने वाला. उसके सामने सुप्रिया की खुली टाँगे थी और उनके ठीक बीच में उसका आज का लक्ष्य.
राहुल को अपनी छूट की तरफ घूरते देख, सुप्रिया ने अपनी खुली टाँगे बंद करने की कोशिश करि ताकि राहुल वहां न झाँक पाए, पर राहुल के अपने हाथों से उसकी दोनों टांगो को कास के पकड़ा हुआ था.
सुप्रिया - राहुल... छोडो न पेअर प्लीज... और वहां मत देखो प्लीज...
राहुल ने सुप्रिया के हिलती हुई टांगो को काबू में लाने की कोशिश की - सुप्पु... आज कुछ नहीं छोड़ने वाला...
सुप्रिया बेचैन होते हुए बोली - ये सुप्पु सुप्पु क्या होता है...
राहुल - प्यार से तुम्हारा नाम... जो मैंने रखा है... ाचा नहीं लगा क्या...
सुप्रिया - तोह मैं क्या तुम्हे राहु बुलायो.... सच में ऐसा hi लग रहा है की राहु केतु मुझे पर आज छड्ड गए है...
राहुल एक बड़ी सी मुस्कान लिए बोलै - अभी तोह काफी कुछ बाकी है चढ़ना...
सुप्रिया - बेशरम हो बिलकुल....
सुप्रिया ने शर्म से अपना मुँह दूसरी और फेर लिया और राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया की सुडोल झांघो पर रखते हुए उन्हें हलके हलके मसलना शुरू कर दिया. ऐसा करने से सुप्रिया की हालत खराब होनी शुरू हो गयी थी. राहुल ने सुप्रिया की टांग पकड़ कर उसे नीचे से ऊपर तक किश करना शुरू कर दिया. कितने लचीले से पेअर थे उसके.
जैसे hi राहुल के होंठ सुप्रिया की झांग के ऊपरी हिस्से पर आये, सुप्रिया ने राहुल के बाल पकड़ते हुए उसके रोक लिया - अह्ह्ह..... ममममम.... गुदगुदी हो रही है.... रुको न...
राहुल - ाचा.... फिर ये बताया अब क्या महसूस हो रहा है...
राहुल ने ये बोलते hi एकदम से अपना मुँह सुप्रिया की जाँघों के बीच में घुसा दिया, और उसकी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर चूमना शुरू कर दिया. सुप्रिया ने अपनी कमर उचकते हुए ज़ोर से चद्दर को पकड़ लिया. वह अभी भी अपनी टाँगे बंद करने के कोशिश कर रही थी पर राहुल अपना मुँह गड़ाए उन्हें बंद नहीं होने दे रहा था.
सुप्रिया ने घबराते हुए कहा - प्लीज राहुल... वहां रहने दो न... मुझे नहीं करवाना कुछ भी....
राहुल - पर मुझे तोह करना है... और जब तक करोगी नहीं तुम्हे पता कैसे चलेगा की कितना ाचा लगता है...
सुप्रिया - नहीं.... नहीं.... मैं बहुत सेंसिटिव हु वहां...
राहुल ने उसकी जांघ पर हलके से चुकती काटी - तुम कहाँ सेंसिटिव नहीं हो...
सुप्रिया - ोुछः....
राहुल - तुम बस चुप चाप लेती रहो... मैंने कहा न....
सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, पर राहुल उसे वहां से हिलने नहीं दे रहा था. जंघ के अंदरूनी हिस्से को चूमता हुआ, राहुल अपने मुँह को सुप्रिया की छूट के बिलकुल करीब ले आया. उसने अपना एक हाथ सुप्रिया के बूब्स पर रखा और दूसरा पलंग पर अपने आप को सहारा देने के लिए. सुप्रिया ने भी कांपते हुए अपना हाथ राहुल के हाथ पर रखते हुए उसे जकड लिया. वह बेहद घबराई हुई थी, क्यूंकि उसे बिलकुल भी नहीं पता था की उसे ये सब कैसा लगने वाला था.
राहुल ने सुप्रिया के बूब को ज़ोर से अपने हाथ से दबाया ताकि उसका धयान नीचे से हैट जाये, जो हुआ भी. और फिर एक डैम से अपने होंठ सुप्रिया की छूट पर लगा दिए. सुप्रिया की ज़ोर की अह्ह्ह्हह निकल गयी, और उसने दुसरे हाथ से अपना बूब पकड़ लिया. उसे आज कुछ ऐसी अनुभूति हो रही थी जो पहले कभी नहीं हुई थी. राहुल ने अपने होंठ वहां नीचे अचे से घुमा दिए जिससे उसकी दादी सुप्रिया के कोमल अंगो पर चुभने लगी.
सुप्रिया - Ufff....mmmm.... राहुल... बस... प्लीज....
पर राहुल ने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपनी जीब छूट के बहार फेरनी शुरू कर दी, और सुप्रिया ने और भी उत्तेजित होते हुए अपनी गांड ऊपर कर ली. अब सुप्रिया की छूट राहुल के होंठों के बीच में थी और वह बहुत hi हलके हलके से छूट के बहार के हिस्से को अपने होंठों से खींच रहा था.
सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ममममयीय..... उफ्फ्फ......
सुप्रिया ने पागल होते हुए अपने बाल पकड़ लिए.
राहुल ने मुस्कुराते हुए ऊपर देखा, और सुप्रिया को इतने ज्यादा आनंद में देख कर उसे अपनी कलाकारी पर नाज़ हो रहा था.
राहुल ने फिर से वहां चूमते हुए कहा - कैसा लग रहा है सुप्पु....
सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ओह गॉड.... राहुल... ये क्या कर रहे हो... समझ hi नहीं आ रहा कुछ....
राहुल ने सुप्रिया की कमर पकड़ते हुए अपना मुँह और ज़ोर से सुप्रिया ने नीचे गदा दिया. सुप्रिया को अब ऐसा लग रहा था जैसे उसके अंदर कोई ज्वाला मुखी पनप रहा हो, जो किसी भी पल फुट सकता था.
राहुल ने और आगे बढ़ते हुए अपनी जीब सुप्रिया की छूट में ज़रा सी घुसा दी...
सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे कोई छोटा सा जानवर उसकी छूट में घुस गया हो, और उसने राहुल को अपने पेअर से पीछे धकेलते हुए कहा - उफ्फ्फ.... बस बस... प्लीज.... नहीं तोह तुम गीले हो जाओगे...
सुप्रिया ने नीचे झाँक कर देखा तोह चद्दर थोड़ी गीली हो चुकी थी और राहुल अपना होंठ चाट रहा था.
सुप्रिया ने बनावटी गुस्से में बोलते हुए कहा - की... कितने गंदे हो तुम.... मुझे नहीं करना ये अब....
सुप्रिया करवट लेते हुए पलट गयी और खड़े होने की कोशिश कर hi रही थी की राहुल ने पीछे से उसके जकड़ते हुए उसके ऊपर लेट गया.
राहुल - कहाँ जा रही हो... अभी असली खेल तोह बाकी है...
सुप्रिया ने हाँफते हुए कहा - अह्ह्ह्ह... हो गया न सारे खेल....
राहुल ने अपना हाथ सुप्रिया की बाहों के नीचे घुसते हुए उसको दोनों बूब्स को पकड़ लिया और उसे अपने बिलकुल पास सत्ता लिया. राहुल का लुंड सुप्रिया की गांड की दरार को छू रहा था, पर आज वह जगह उसकी मंज़िल नहीं थी. वह अपना मुँह सुप्रिया के कानो के पास लाया और उसके कान के सॉफ्ट वाले हिस्से को हलके से काटा. सुप्रिया अपने आप को राहुल की कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर वह अछि तरह जानती थी की अब बहुत देर हो चुकी थी, और जो होना था वह तोह हो कर hi रहेगा.
राहुल से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, उसने सुप्रिया को अपने साइड में लिटाया और पीछे से उसकी एक टांग को हल्का सा ऊपर करते हुए, अपना लुंड उसकी छूट के ठीक बहार लगाया. उसने एक हाथ से सुप्रिया की सर पकड़ा हुई थी जिससे वह नीचे नहीं देख प् रही थी, बस झटपटी रही थी. और फिर एक hi झटके में उसने अपना कड़क लुंड सुप्रिया की छूट में दाल दिया.
लुंड के अंदर जाते hi सुप्रिया की तोह जैसे सांस hi अटक गयी थी. वह अपने पेअर हिला रही थी पर कोई फायदा नहीं था. राहुल ने सुप्रिया की छूट के अंदर धक्के मारने शुरू करे.
धक्के लगते hi सुप्रिया की ज़ोर ज़ोर की चीखे निकालनी शुरू हो गयी थी - अह्ह्ह... अह्ह्ह.... अह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ...
राहुल का लुंड उसके इतनी अंदर जा रहा था जितने पहले कभी नहीं गया था. राहुल भी लुंड डालते डालते महसूस कर पा रहा था की सुप्रिया की छूट अभी भी काफी टाइट थी. उसने शुरुवात हलके हलके धक्को से hi की. पर कुछ hi देर में जैसे hi सुप्रिया की चीख दर्द से बदल कर उत्तेजना भरी होने लगी, उसने भी अपनी गति बड़ा दी.
उसका लुंड सुप्रिया के अंदर की गर्मी को महसूस करता हुआ उसे बुरी तरह फड़क रहा था, और सुप्रिया उसे अपने अंदर घुसता हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी. इतना तोह उसने अपने फर्स्ट नाईट पर भी महसूस नहीं किया था.
राहुल ने हाथ सुप्रिया को जकड़े हुए उसे बूब्स को नोच रहे थे, जिससे सुप्रिया की चीखे कुछ दर्द में और कुछ चरम सुख में निकल रही थी. राहुल अब बस अपने आप को और नहीं रोक पा रहा था, एक घंटा हो चूका था उन्हें ये पूरा खेल शुरू करे हुए. सुप्रिया का भी कुछ ऐसा hi हाल था, और उसके अंदर का ज्वाला जो पहले hi थोड़ा फुट चूका था, अब सैलाब बनने वाला था. आज उसे पता चल रहा था की ओर्गास्म होता क्या है.
राहुल ने एक तेज धार के साथ सुप्रिया के अंदर अपना सारा झाग निकालते हुए अपनी स्पीड को थोड़ा धीरे किया.
उसके हाथ अभी भी सुप्रिया के बदन पर घूम रहे थे और उसने सुप्रिया के सर को अपनी कैद से आज़ाद कर दिया था. सुप्रिया को भी पूरे सुख की अनुभूति हो चुकी थी और उसने अपना हाथ पीछे करके राहुल के सर पर फेरना शुरू कर दिया था.
कुछ देर बाद दोनों ऐसे hi निढाल बीएड पर पड़े रहे. राहुल का हाथ हलके हलके से सुप्रिया के बूब्स को मसलता हुआ और सुप्रिया का हाथ पीछे राहुल की टांग को छूटा हुआ. सुप्रिया की बड़ी हुई सांसें अभी धीमी होती जा रही थी, और वह अपनी आँखें बंद करके राहुल के हाथ पर लेट गयी
राहुल जो चाहता था आखिर सच हो hi गया था, और उसके हिसाब से, दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की आज उसकी बाँहों में बे झिझक लेती हुई थी. दूसरी और सुप्रिया इतनी लम्बे सेशन से काफी थक गयी थी और सब होने के बाद उसे थोड़ा गिल्ट सा आने लगा था.
थोड़ी देर बाद राहुल ने पुछा - कैसा लगा सब सुप्पु....
सुप्रिया ने धीमी सी आवाज़ में कहा - पता नहीं.... तुम बताया... तुम्हे कैसे लगा...
राहुल - सच बतायु तोह आज तुम्हारे साथ करने के बाद लग रहा है की मैंने कभी पहले सेक्स hi नहीं किया था....
सुप्रिया - ाचा... और कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है तुमने...
राहुल हस्ते हुए - अगर मैं कहु तुम पहली हो तोह?
सुप्रिया - तोह मैं कहूँगी तुम झूठ बोल रहे हो... उस दिन hi तोह....
राहुल - किस दिन क्या?
सुप्रिया अभी राहुल को कृति की याद नहीं दिलाना चाहती थी और न hi ये बताना चाहती थी उसे पता था उनके बीच क्या हुआ था - कुछ नहीं....
राहुल - हाँ मैं मानता हु कॉलेज में मेरी गर्लफ्रेंड थी और हमने ये सब किया था, पर वह तुम्हारे आगे कुछ नहीं थी... तुम्हारे आगे तोह कोई भी नहीं हो सकता...
सुप्रिया अछि तरफ जानती थी की ये पूरा सच तोह नहीं था, कृति वाली बात कितनी आसानी से राहुल ने गोल कर दी थी. पर इस समय वह इस बारे में कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी.
राहुल ने सुप्रिया का मुँह अपनी और मोड़ते हुए उसे हलके से किश किया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा.
सुप्रिया ने राहुल को पीछे धकेला - मैं नहीं भरा क्या...
राहुल - तुम से कभी किसी का मैं भर सकता है क्या.... कोई बेवक़ूफ़ hi होगा...
सुप्रिया - तोह फिर आज के बाद किसी और के साथ कुछ नहीं करोगे....
राहुल - जब तक तुम मेरे साथ हो... तब तक मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता...
राहुल की बातों से सुप्रिया मैं hi मैं खुश हो रही थी. शायद आज के बाद राहुल कभी कृति की और देखेगा भी नहीं. सही मायने में तोह शायद आज उसका बर्थडे मन था और वह भी ऐसा बर्थडे जो वह कभी भूल नहीं सकती थी.
तभी सुप्रिया के फ़ोन की घंटी बजने लगी, फ़ोन बहार लिविंग रूम में hi रह गया था. सुप्रिया बहार ऐसे नंगी नहीं जाना चाहती थी तोह उसने राहुल की और इशारे से देखा और वह उसका इशारा समझते हुए बहार फ़ोन लेने गया.
सुप्रिया ने बैडरूम से आवाज़ लगायी - किसका फ़ोन है?
राहुल कमरे में बजते हुए फ़ोन के साथ दाखिल हुआ - अतुल कॉल कर रहा है...
ये सुन कर सुप्रिया एक डैम से सकपका सी गयी, जैसे अतुल ने उसे राहुल के साथ सेक्स करते हुए hi पकड़ लिया हो, और वह राहुल की और डर भरी नज़रो से देखने लगी. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अतुल से कैसे बात करेगी और उससे कैसे नज़रे मिलाएगी. जो कुछ हुआ उसका अंजाम अब शायद उसकी आँखों के सामने घूमने लगा था.
बस राहुल को पता था की उसने कैसे अभी तक अपना विरए निकलने से रोका था. सुप्रिया के नरम शरीर और मुँह से छू कर उसका लुंड अब तक कई बार अपनी चरम सीमा तक पहुंच कर वापस आया था. उसने बस किसी तरह अपने आपको कण्ट्रोल किया था, पर अब उससे और सब्र नहीं हो रहा था. वह अपना सारा माल सुप्रिया के अंदर निकालना चाहता था. उसे ऐसा लग रहा था की जैसे की कड़ी तपस्या के बाद अब बस उसे आखिर वह फल मिलने hi वाला था जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार था.
अपनी हालत जानते हुए hi उसने सुप्रिया के मुँह से अपना लुंड दूर किया, और अब सुप्रिया को भी बुरी तरह उत्तेजित करने का सोचा. ताकि जब उसका लुंड सुप्रिया की छूट में जाये तोह वह भी उतना hi मज़ा ले पाए जितना उसे आने वाला. उसके सामने सुप्रिया की खुली टाँगे थी और उनके ठीक बीच में उसका आज का लक्ष्य.
राहुल को अपनी छूट की तरफ घूरते देख, सुप्रिया ने अपनी खुली टाँगे बंद करने की कोशिश करि ताकि राहुल वहां न झाँक पाए, पर राहुल के अपने हाथों से उसकी दोनों टांगो को कास के पकड़ा हुआ था.
सुप्रिया - राहुल... छोडो न पेअर प्लीज... और वहां मत देखो प्लीज...
राहुल ने सुप्रिया के हिलती हुई टांगो को काबू में लाने की कोशिश की - सुप्पु... आज कुछ नहीं छोड़ने वाला...
सुप्रिया बेचैन होते हुए बोली - ये सुप्पु सुप्पु क्या होता है...
राहुल - प्यार से तुम्हारा नाम... जो मैंने रखा है... ाचा नहीं लगा क्या...
सुप्रिया - तोह मैं क्या तुम्हे राहु बुलायो.... सच में ऐसा hi लग रहा है की राहु केतु मुझे पर आज छड्ड गए है...
राहुल एक बड़ी सी मुस्कान लिए बोलै - अभी तोह काफी कुछ बाकी है चढ़ना...
सुप्रिया - बेशरम हो बिलकुल....
सुप्रिया ने शर्म से अपना मुँह दूसरी और फेर लिया और राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया की सुडोल झांघो पर रखते हुए उन्हें हलके हलके मसलना शुरू कर दिया. ऐसा करने से सुप्रिया की हालत खराब होनी शुरू हो गयी थी. राहुल ने सुप्रिया की टांग पकड़ कर उसे नीचे से ऊपर तक किश करना शुरू कर दिया. कितने लचीले से पेअर थे उसके.
जैसे hi राहुल के होंठ सुप्रिया की झांग के ऊपरी हिस्से पर आये, सुप्रिया ने राहुल के बाल पकड़ते हुए उसके रोक लिया - अह्ह्ह..... ममममम.... गुदगुदी हो रही है.... रुको न...
राहुल - ाचा.... फिर ये बताया अब क्या महसूस हो रहा है...
राहुल ने ये बोलते hi एकदम से अपना मुँह सुप्रिया की जाँघों के बीच में घुसा दिया, और उसकी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर चूमना शुरू कर दिया. सुप्रिया ने अपनी कमर उचकते हुए ज़ोर से चद्दर को पकड़ लिया. वह अभी भी अपनी टाँगे बंद करने के कोशिश कर रही थी पर राहुल अपना मुँह गड़ाए उन्हें बंद नहीं होने दे रहा था.
सुप्रिया ने घबराते हुए कहा - प्लीज राहुल... वहां रहने दो न... मुझे नहीं करवाना कुछ भी....
राहुल - पर मुझे तोह करना है... और जब तक करोगी नहीं तुम्हे पता कैसे चलेगा की कितना ाचा लगता है...
सुप्रिया - नहीं.... नहीं.... मैं बहुत सेंसिटिव हु वहां...
राहुल ने उसकी जांघ पर हलके से चुकती काटी - तुम कहाँ सेंसिटिव नहीं हो...
सुप्रिया - ोुछः....
राहुल - तुम बस चुप चाप लेती रहो... मैंने कहा न....
सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, पर राहुल उसे वहां से हिलने नहीं दे रहा था. जंघ के अंदरूनी हिस्से को चूमता हुआ, राहुल अपने मुँह को सुप्रिया की छूट के बिलकुल करीब ले आया. उसने अपना एक हाथ सुप्रिया के बूब्स पर रखा और दूसरा पलंग पर अपने आप को सहारा देने के लिए. सुप्रिया ने भी कांपते हुए अपना हाथ राहुल के हाथ पर रखते हुए उसे जकड लिया. वह बेहद घबराई हुई थी, क्यूंकि उसे बिलकुल भी नहीं पता था की उसे ये सब कैसा लगने वाला था.
राहुल ने सुप्रिया के बूब को ज़ोर से अपने हाथ से दबाया ताकि उसका धयान नीचे से हैट जाये, जो हुआ भी. और फिर एक डैम से अपने होंठ सुप्रिया की छूट पर लगा दिए. सुप्रिया की ज़ोर की अह्ह्ह्हह निकल गयी, और उसने दुसरे हाथ से अपना बूब पकड़ लिया. उसे आज कुछ ऐसी अनुभूति हो रही थी जो पहले कभी नहीं हुई थी. राहुल ने अपने होंठ वहां नीचे अचे से घुमा दिए जिससे उसकी दादी सुप्रिया के कोमल अंगो पर चुभने लगी.
सुप्रिया - Ufff....mmmm.... राहुल... बस... प्लीज....
पर राहुल ने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपनी जीब छूट के बहार फेरनी शुरू कर दी, और सुप्रिया ने और भी उत्तेजित होते हुए अपनी गांड ऊपर कर ली. अब सुप्रिया की छूट राहुल के होंठों के बीच में थी और वह बहुत hi हलके हलके से छूट के बहार के हिस्से को अपने होंठों से खींच रहा था.
सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ममममयीय..... उफ्फ्फ......
सुप्रिया ने पागल होते हुए अपने बाल पकड़ लिए.
राहुल ने मुस्कुराते हुए ऊपर देखा, और सुप्रिया को इतने ज्यादा आनंद में देख कर उसे अपनी कलाकारी पर नाज़ हो रहा था.
राहुल ने फिर से वहां चूमते हुए कहा - कैसा लग रहा है सुप्पु....
सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ओह गॉड.... राहुल... ये क्या कर रहे हो... समझ hi नहीं आ रहा कुछ....
राहुल ने सुप्रिया की कमर पकड़ते हुए अपना मुँह और ज़ोर से सुप्रिया ने नीचे गदा दिया. सुप्रिया को अब ऐसा लग रहा था जैसे उसके अंदर कोई ज्वाला मुखी पनप रहा हो, जो किसी भी पल फुट सकता था.
राहुल ने और आगे बढ़ते हुए अपनी जीब सुप्रिया की छूट में ज़रा सी घुसा दी...
सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे कोई छोटा सा जानवर उसकी छूट में घुस गया हो, और उसने राहुल को अपने पेअर से पीछे धकेलते हुए कहा - उफ्फ्फ.... बस बस... प्लीज.... नहीं तोह तुम गीले हो जाओगे...
सुप्रिया ने नीचे झाँक कर देखा तोह चद्दर थोड़ी गीली हो चुकी थी और राहुल अपना होंठ चाट रहा था.
सुप्रिया ने बनावटी गुस्से में बोलते हुए कहा - की... कितने गंदे हो तुम.... मुझे नहीं करना ये अब....
सुप्रिया करवट लेते हुए पलट गयी और खड़े होने की कोशिश कर hi रही थी की राहुल ने पीछे से उसके जकड़ते हुए उसके ऊपर लेट गया.
राहुल - कहाँ जा रही हो... अभी असली खेल तोह बाकी है...
सुप्रिया ने हाँफते हुए कहा - अह्ह्ह्ह... हो गया न सारे खेल....
राहुल ने अपना हाथ सुप्रिया की बाहों के नीचे घुसते हुए उसको दोनों बूब्स को पकड़ लिया और उसे अपने बिलकुल पास सत्ता लिया. राहुल का लुंड सुप्रिया की गांड की दरार को छू रहा था, पर आज वह जगह उसकी मंज़िल नहीं थी. वह अपना मुँह सुप्रिया के कानो के पास लाया और उसके कान के सॉफ्ट वाले हिस्से को हलके से काटा. सुप्रिया अपने आप को राहुल की कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर वह अछि तरह जानती थी की अब बहुत देर हो चुकी थी, और जो होना था वह तोह हो कर hi रहेगा.
राहुल से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, उसने सुप्रिया को अपने साइड में लिटाया और पीछे से उसकी एक टांग को हल्का सा ऊपर करते हुए, अपना लुंड उसकी छूट के ठीक बहार लगाया. उसने एक हाथ से सुप्रिया की सर पकड़ा हुई थी जिससे वह नीचे नहीं देख प् रही थी, बस झटपटी रही थी. और फिर एक hi झटके में उसने अपना कड़क लुंड सुप्रिया की छूट में दाल दिया.
लुंड के अंदर जाते hi सुप्रिया की तोह जैसे सांस hi अटक गयी थी. वह अपने पेअर हिला रही थी पर कोई फायदा नहीं था. राहुल ने सुप्रिया की छूट के अंदर धक्के मारने शुरू करे.
धक्के लगते hi सुप्रिया की ज़ोर ज़ोर की चीखे निकालनी शुरू हो गयी थी - अह्ह्ह... अह्ह्ह.... अह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ...
राहुल का लुंड उसके इतनी अंदर जा रहा था जितने पहले कभी नहीं गया था. राहुल भी लुंड डालते डालते महसूस कर पा रहा था की सुप्रिया की छूट अभी भी काफी टाइट थी. उसने शुरुवात हलके हलके धक्को से hi की. पर कुछ hi देर में जैसे hi सुप्रिया की चीख दर्द से बदल कर उत्तेजना भरी होने लगी, उसने भी अपनी गति बड़ा दी.
उसका लुंड सुप्रिया के अंदर की गर्मी को महसूस करता हुआ उसे बुरी तरह फड़क रहा था, और सुप्रिया उसे अपने अंदर घुसता हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी. इतना तोह उसने अपने फर्स्ट नाईट पर भी महसूस नहीं किया था.
राहुल ने हाथ सुप्रिया को जकड़े हुए उसे बूब्स को नोच रहे थे, जिससे सुप्रिया की चीखे कुछ दर्द में और कुछ चरम सुख में निकल रही थी. राहुल अब बस अपने आप को और नहीं रोक पा रहा था, एक घंटा हो चूका था उन्हें ये पूरा खेल शुरू करे हुए. सुप्रिया का भी कुछ ऐसा hi हाल था, और उसके अंदर का ज्वाला जो पहले hi थोड़ा फुट चूका था, अब सैलाब बनने वाला था. आज उसे पता चल रहा था की ओर्गास्म होता क्या है.
राहुल ने एक तेज धार के साथ सुप्रिया के अंदर अपना सारा झाग निकालते हुए अपनी स्पीड को थोड़ा धीरे किया.
उसके हाथ अभी भी सुप्रिया के बदन पर घूम रहे थे और उसने सुप्रिया के सर को अपनी कैद से आज़ाद कर दिया था. सुप्रिया को भी पूरे सुख की अनुभूति हो चुकी थी और उसने अपना हाथ पीछे करके राहुल के सर पर फेरना शुरू कर दिया था.
कुछ देर बाद दोनों ऐसे hi निढाल बीएड पर पड़े रहे. राहुल का हाथ हलके हलके से सुप्रिया के बूब्स को मसलता हुआ और सुप्रिया का हाथ पीछे राहुल की टांग को छूटा हुआ. सुप्रिया की बड़ी हुई सांसें अभी धीमी होती जा रही थी, और वह अपनी आँखें बंद करके राहुल के हाथ पर लेट गयी
राहुल जो चाहता था आखिर सच हो hi गया था, और उसके हिसाब से, दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की आज उसकी बाँहों में बे झिझक लेती हुई थी. दूसरी और सुप्रिया इतनी लम्बे सेशन से काफी थक गयी थी और सब होने के बाद उसे थोड़ा गिल्ट सा आने लगा था.
थोड़ी देर बाद राहुल ने पुछा - कैसा लगा सब सुप्पु....
सुप्रिया ने धीमी सी आवाज़ में कहा - पता नहीं.... तुम बताया... तुम्हे कैसे लगा...
राहुल - सच बतायु तोह आज तुम्हारे साथ करने के बाद लग रहा है की मैंने कभी पहले सेक्स hi नहीं किया था....
सुप्रिया - ाचा... और कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है तुमने...
राहुल हस्ते हुए - अगर मैं कहु तुम पहली हो तोह?
सुप्रिया - तोह मैं कहूँगी तुम झूठ बोल रहे हो... उस दिन hi तोह....
राहुल - किस दिन क्या?
सुप्रिया अभी राहुल को कृति की याद नहीं दिलाना चाहती थी और न hi ये बताना चाहती थी उसे पता था उनके बीच क्या हुआ था - कुछ नहीं....
राहुल - हाँ मैं मानता हु कॉलेज में मेरी गर्लफ्रेंड थी और हमने ये सब किया था, पर वह तुम्हारे आगे कुछ नहीं थी... तुम्हारे आगे तोह कोई भी नहीं हो सकता...
सुप्रिया अछि तरफ जानती थी की ये पूरा सच तोह नहीं था, कृति वाली बात कितनी आसानी से राहुल ने गोल कर दी थी. पर इस समय वह इस बारे में कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी.
राहुल ने सुप्रिया का मुँह अपनी और मोड़ते हुए उसे हलके से किश किया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा.
सुप्रिया ने राहुल को पीछे धकेला - मैं नहीं भरा क्या...
राहुल - तुम से कभी किसी का मैं भर सकता है क्या.... कोई बेवक़ूफ़ hi होगा...
सुप्रिया - तोह फिर आज के बाद किसी और के साथ कुछ नहीं करोगे....
राहुल - जब तक तुम मेरे साथ हो... तब तक मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता...
राहुल की बातों से सुप्रिया मैं hi मैं खुश हो रही थी. शायद आज के बाद राहुल कभी कृति की और देखेगा भी नहीं. सही मायने में तोह शायद आज उसका बर्थडे मन था और वह भी ऐसा बर्थडे जो वह कभी भूल नहीं सकती थी.
तभी सुप्रिया के फ़ोन की घंटी बजने लगी, फ़ोन बहार लिविंग रूम में hi रह गया था. सुप्रिया बहार ऐसे नंगी नहीं जाना चाहती थी तोह उसने राहुल की और इशारे से देखा और वह उसका इशारा समझते हुए बहार फ़ोन लेने गया.
सुप्रिया ने बैडरूम से आवाज़ लगायी - किसका फ़ोन है?
राहुल कमरे में बजते हुए फ़ोन के साथ दाखिल हुआ - अतुल कॉल कर रहा है...
ये सुन कर सुप्रिया एक डैम से सकपका सी गयी, जैसे अतुल ने उसे राहुल के साथ सेक्स करते हुए hi पकड़ लिया हो, और वह राहुल की और डर भरी नज़रो से देखने लगी. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अतुल से कैसे बात करेगी और उससे कैसे नज़रे मिलाएगी. जो कुछ हुआ उसका अंजाम अब शायद उसकी आँखों के सामने घूमने लगा था.