सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 7 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 49

सुप्रिया अभी अभी अपने ऑफिस पहुंची थी, और कल के दिन के बारे में सोच सोच कर मुस्कुरा रही थी.

कल दिन में राहुल और उसने सोफे पर सेक्स किया था जिसके बाद वह एक दुसरे की बाहों में लेते हुए सो गए थे. जागने के बाद पूरी शाम राहुल उसके आगे पीछे घूमता रहा था. सुप्रिया ने किसी तरह से एक टीशर्ट और लेग्गिंग्स पेहेन ली थी, पर राहुल को तोह जैसे चैन hi नहीं था. कभी यहाँ छू लिया, कभी वहां, हर पल जैसे उसे सताए hi रखा था. पर उस सताने में भी ऐसा मज़ा था जो सुप्रिया को बहुत ाचा लगा था. सच में किसी नेवली वेद कपल की hi फीलिंग दी थी उसने सुप्रिया को. इतना पागल तोह अतुल भी नहीं हुआ था सुप्रिया के लिए शुरू में.

और फिर रात के खाने के बाद वह उसके hi बैडरूम में उसके साथ लेट गया था. पहले तोह सुप्रिया को लगा की राहुल दिन में सब करने के बाद थका हुआ होगा और सो जायेगा, पर न तोह वह खुद सोया और न सुप्रिया को सोने दिया. रात भर उन दोनों की कुश्ती जाम कर चलती रही. सुप्रिया किसी तरह से अपनी तेज़ आवाज़ों पर काबू करने की कोशिश कर रही थी ताकि साथ वाले फ्लैट में न जाये, पर पता नहीं वह इसमें कितना कामयाब हुई थी. रात को उन दोनों ने 2 बार और सेक्स किया और आखिर में वह थके हुए एक दुसरे में समाये सो गए.

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सुबह जब सुप्रिया की नींद खुली तोह राहुल के हाथ उसकी नंगी गांड पर घूम रहे थे. किसी तरह से सुप्रिया ने उसके शरारती हाथों को रोका, और ऑफिस जाने की तैयारी की. राहुल का बस चलता तोह वह दोनों पूरे दिन बीएड पर hi लेते रहते. तैयार होते होते भी राहुल कभी उसके गालों पर किश कर रहा था और कभी उसके होंठों पर. कल की दी हुई हिक्की का निशाँ भी गर्दन पर काफी ज़ोर का दिख रहा था, और सुप्रिया ने चाहे जितना मेकअप वहां लगा लिया वह पूरी तरह नहीं छिप रहा था. सुप्रिया ने गले में एक बड़ा सा पेंडंट पेहेन कर उस पर से ध्यान न जाने की कोशिश करि.

राहुल ने ऑफिस जाने के लिए अतुल की शर्ट पेहेन ली और ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गया. सुप्रिया राहुल को नीचे ले जाते हुए थोड़ा सा घबरा रही थी, किसी ने देख लिया तोह पता नहीं क्या सोचेगा. तोह सुप्रिया पहले उतर कर नीचे गयी और अपनी गाडी को बिल्डिंग के ठीक सामने लगा दिया, और राहुल जल्दी से उतर कर बखसैत पर बैठ गया. मैं एंट्रेंस पर इक़बाल तोह नहीं था, पर जो भी, अगर किसी ने राहुल को वहां देख लिया तोह बात फैलनी तय थी. ऐसे छुप छुप के प्यार करने में भी एक अलग सा मज़ा था.

सुप्रिया ने गाडी चलते हुए बिल्डिंग से निकाल दी और फिर बीच रास्ते में रोक कर गाडी राहुल को चलने को दे दी. राहुल ने पहले सुप्रिया को उसके ऑफिस ड्राप किया और फिर गाडी चलता हुआ अपने ऑफिस चला गया. शाम को आते हुए वह अपने घर से कुछ कपडे और बाकी कुछ चीज़े लाने वाला था.

सुप्रिया अपनी ऑफिस की सीट पर बैठी एहि सब सोच कर मुस्कुरा रही थी. आज उसे ऐसा लग रहा था की 2 दिन पहले hi उसकी शादी हुई हो और उसके हस्बैंड ने उसे ऑफिस ड्राप किया हुआ. सुप्रिया ने देखा की कृति भी आज थोड़े से बेहतर मूड में थी, शायद उसके सर से अब राहुल के नाम का बुखार उतरने लगा था.

कृति सुप्रिया के पास किसी काम से आयी - सुप्रिया.... इस क्लाइंट की बिलिंग हो गयी थी क्या?

सुप्रिया - हाँ... वह तोह मैंने लास्ट वीक hi कर दी थी..

कृति का ध्यान सुप्रिया की गर्दन पर हिक्की के निशाँ पर गया - ये कैसी लगी...

सुप्रिया - उम्... ये....

कृति हस्ते हुए - मैं भी कितनी बेवक़ूफ़ हो.... ये तोह लगता है लव बाईट है... लगता है तुम और अतुल काफी मूड में थे इस वीकेंड....

सुप्रिया हलके से हसी और आँखें नीचे कर ली. अब वह कैसे कृति को बताती की ये लव बाईट उसे अतुल ने नहीं, राहुल ने दे थी.

कृति - पर तुम तोह कह रही थी न की शायद अतुल अपने घर जा रहा है...

ओफ्फो, ये तोह सुप्रिया फास गयी थी - हाँ वह... उनका जाना कैंसिल हो गया...

कृति - हम्म्म... सही है... हाँ भाई इतनी स्वीट सी बीवी को छोड़ कर कौन जाना चाहेगा...

सुप्रिया झेपते हुए - तुम भी न...

कृति - सच तोह है... अतुल इस रियली लकी तो हैवे ा वाइफ लिखे यू... स्वीट एंड हॉट और इतनी लॉयल भी...

सुप्रिया सोचने लगी की ओह गॉड, ये क्यों बोल रही है ऐसे. उसे और गिलटी सा फील हो रहा था. पता नहीं क्यों वह राहुल के चक्कर में पद गयी थी, पर अब तोह जैसे उसके बिना रह पाना hi मुश्किल था. और इस हफ्ते तोह वह बिलकुल एक मैरिड कपल की तरह रहने वाले थे. इस सब छोरी चुप्पे के खेल से बेहतर ये नहीं होगा की वह अतुल को सब सच बता दे और राहुल से शादी कर ले?

पूरे दिन ऑफिस में सुप्रिया को नींद सी hi आ रही थी. आखिर वह और राहुल 2-3 बजे तक तोह जगे hi हुए थे. सुप्रिया झपकी लेती हुई एक दो बार तोह अपनी सीट पर hi गिरने वाली थी. पर उसने किसी तरह से अपने आप को जगाये रखा.

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दिन में राहुल का मैसेज उसके फ़ोन पर आया - हे सेक्सी... क्या कर रही हो...

उसका मैसेज देख कर सुप्रिया के शरीर में जैसे थोड़ी सी एनर्जी आ गयी - जगे रहने की कोशिश कर रही हु... तुमने सोने कहाँ दिया पूरी रात..

राहुल - तभी तोह कहा था छुट्टी ले लो...

सुप्रिया - ाचा... और तुम सोने देते अगर छुट्टी ले लेती तोह...

राहुल - वह तोह तुम्हे पता hi है... कोई सेक्सी सी फोटो भेजो न... इंतज़ार नहीं हो रहा शाम तक का अपनी बीवी से मिलने का...

सुप्रिया - शट उप... ऑफिस से कैसे फोटो भेजू..

राहुल - बाथरूम में जा कर खींच लो...

सुप्रिया - कुछ hi घंटे तोह है मिलने में, इतनी क्या बेसब्री है...

राहुल - एहि घंटे निकालने के लिए तोह एक फोटो चाहिए... प्लीज भेज दो न...

सुप्रिया राहुल की जिद्द के आगे पिघलती हुई ऑफिस के एक सुनसान से कोने में गयी और जल्दी से अपनी एक सेल्फी खींच कर राहुल को भेज दी.

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राहुल फोटो में सुप्रिया के रसीले होंठ और हलकी सी दिखती हुई क्लीवेज को देखते hi फिर से बेकाबू सा हो चला था.

राहुल - वाओ... हॉट लग रही हो... एक फोटो अंदर ब्रा की भी भेज दो न...

सुप्रिया - नहीं, मैं और फोटोज नहीं भेज रही... मुझे डिस्टर्ब मत करो... काफी काम है ऑफिस में... शाम को मिलते है..

सुप्रिया ने फ़ोन रखते हुए किसी तरह से फिर से अपने काम पर फोकस किया. पर बार बार उसकी नज़र भी घडी पर hi जा रही थी. वह वेट कर रही थी की शाम हो और कब वह फिर से राहुल के साथ हो. राहुल और उसकी सुबह hi बात हो चुकी थी की राहुल थोड़ा लेट आएगा पिक करने, ताकि कोई उन दोनों को साथ न देख पाए. आज तोह कृति भी 5 बजे के आस पास ऑफिस से निकल गयी थी.

6 बजे के आस पास, राहुल का मैसेज आया की वह नीचे आ गया था. सुप्रिया जल्दी से नीची की और गयी और उसने देखा की ठीक सामने सुप्रिया की लाल कार परकेड थी, और राहुल बहार खड़ा था. सुप्रिया भागी हुई सी गाडी की तरफ गयी. वह दरवाज़ा खोल कर अंदर बैठने hi वाली थी की राहुल अपने बाहें आगे बड़ा कर उसे हुग कर लिया.

सुप्रिया - क्या कर रहे हो... कोई देख लेगा...

राहुल - देखने दो... मैं डरता हूँ क्या...

सुप्रिया - चलो... जल्दी से बैठो गाडी में...

सुप्रिया ड्राइवर सीट पर बैठी और राहुल के बैठते hi गाडी चलने लगी. सुप्रिया के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी और राहुल बस सुप्रिया की और hi देख रहा था.

सुप्रिया - इतनी क्या बेसब्री थी ऑफिस में.... कल तोह हमने....

राहुल - कल हमने क्या? पूरा बोलै न...

सुप्रिया - पता तोह है तुम्हे... कल हमने कितनी बार किया था... मुझसे क्यों बुलवाना चाहते हो...

राहुल - तुम्हारे मुँह से सुन्ना बहुत ाचा लगता है... वैसे तुम्हारे मुँह में और भी काफी कुछ ाचा लगता है...

सुप्रिया - शट उप!!! क्या बोलते हो तुम! लड़कियों से बात करने की तमीज नहीं है बिलकुल...

राहुल ने अपने ऊँगली सुप्रिया के पेट पर फेरी, सुप्रिया - क्या कर रहे हो एक्सीडेंट हो जायेगा... दूर रहो..

राहुल फिर सुप्रिया की और किश करने के लिए अपना मुँह बढ़ाया पर सुप्रिया ने राहुल को अपने हाथ से पीछे धकेला - सच में... अगर नहीं रुके तोह मैं गाडी साइड में रोक दूंगी...

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राहुल - ाचा बाबा ठीक है...

सुप्रिया - घर आने वाला है तुम पीछे वाली सीट पर चले जायो, और नीचे हो जायो..

राहुल - ारी क्या यार.... इतना क्या डरना... प्यार किया है कोई छोरी नहीं की...

सुप्रिया ने सोचा की छोरी hi तोह की है उसने. शादी शुदा हो कर भी किसी और के साथ ये सब.

सुप्रिया - डायलाग मत मारो... जल्दी जायो न... नहीं तोह एहि उतर जायो...

राहुल चलती हुई गाडी में पीछे की सीट पर चला गया और बिल्डिंग आते hi वह सीट पर लेट गया ताकि किसी को दिखे न. शाम को बिल्डिंग के गेट पर इक़बाल hi खड़ा था. सुप्रिया ने उसे देख कर कुछ पल के लिए गाडी वही रोक दी.

इक़बाल - मैडमजी... कैसे हो आप...

सुप्रिया - मैं ठीक हु... आप कैसे हो...

इक़बाल - बहुत बढ़िया... कुछ चाहिए तोह नहीं आपको...

सुप्रिया - नहीं नहीं, सब है अभी तोह, मैं बता दूंगी अगर कुछ भी चाहिए होगा तोह...

इक़बाल - ठीक है मैडमजी...

इक़बाल को पीछे की सीट पर झांकते देख, सुप्रिया ने उसे आवाज़ दी - इक़बाल जी... उस दिन वैसे काफी ाचा लगा था मुझे...

इक़बाल - सच में... तोह फिर चलते है न किसी और दिन भी...

सुप्रिया - हाँ ज़रूर... ाचा अभी मैं चलती हु, काफी थक गयी हु...

इक़बाल - हाँ... आप अकेली है यहाँ... सब अकेले देख रही है... थक तोह गयी होंगी... पर जब कुछ काम हो आप मुझे याद कर लेना...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और गाडी पार्किंग की और ले गयी. उसने गेट की तरफ नज़र राखी और जैसे hi इक़बाल एक और गाडी के लिए दरवाज़ा खोलने में बिजी हुआ, वह और राहुल जल्दी से लिफ्ट की तरफ हो लिए. थैंक गॉड, आज भी उन्हें कोई नहीं मिला था और वह जल्दी से घर के अंदर घुस गए. ये सब करने से सुप्रिया काफी ज्यादा स्ट्रेस में चली जाती थी.

घर में घुसते hi राहुल ने सुप्रिया को अपनी गोदी में उठा लिया, और उसे बैडरूम में ले गया.

सुप्रिया - ओफ्फो राहुल... इतनी क्या जल्दी है... कपडे तोह चेंज करने दो न...

राहुल - कपडे मैं उतार देता हूँ न...

सुप्रिया राहुल की बाहों में झटपटा रही थी, और राहुल ने उसे बीएड पर गिरते hi उसे किश करनी शुरू कर दी. राहुल ने सुप्रिया के कपडे ऊपर किये और उसकी ब्रा के अंदर हाथ दाल दिया.

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कुछ पल सुप्रिया को ऐसे hi किश करने के बाद, राहुल एक डैम रुकते हुए - मेरे पास तुम्हारे लिए एक सुप्रिसे है...

सुप्रिया - क्या सरप्राइज?

राहुल बहार से अपना बैग लेकर आया और उसके अंदर से कुछ कपडे निकाल की सुप्रिया की और फेके - ये तुम पर बहुत अचे लगेंगे, इन्हे तरय करो न...

सुप्रिया ने उन कपड़ो को देखा, वह तोह काफी छोटी छोटी लिंगेरी जैसी ड्रेसेस थी और ऊपर से एक हल्का पारदर्शी शर्ट टाइप का कपडा - मैं ये नहीं पेहेन्ने वाली..

राहुल - के ों यार... अब क्या शर्माना... सब कुछ तोह हो चूका है हमारे बीच...

सुप्रिया - ाचा ठीक है बाबा.. तुम गुस्सा क्यों होते हो बार बार... तुम बहार जायो न और मैं चेंज करती हु...

राहुल - नहीं... मेरे सामने...

सुप्रिया ने राहुल की और सर हिलाते हुए देखा. राहुल वहीँ बीएड पर बैठ गया था. सुप्रिया ने अपने कपडे वहीँ राहुल के सामने उतारने शुरू करे, उसे काफी शर्म आ रही थी, पर राहुल की बात तोह सच थी. सब कुछ तोह कर चुके थे वह, अब कैसी शर्म. सुप्रिया ने अपने सारे कपडे उतार दिए, राहुल की नज़र उस पर से हैट नहीं रही थी. सुप्रिया ने ये छोटी सी ड्रेस पहनी जिसमे काले रंग की ब्रा जैसा टॉप था और ऊपर एक सफ़ेद पारदर्शी शर्ट.

सुप्रिया को इन कपड़ो में देख कर राहुल का लुंड पूरा खड़ा हो चूका था, और वह सुप्रिया पर टूट पड़ा. सुप्रिया भी अब मस्त हो कर राहुल के साथ मजे ले रही थी. राहुल को सतना तड़पना उसे बहुत ाचा लग रहा था.

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कुछ hi देर में ये ड्रेस में आधे से ज्यादा उतर चुकी थी और सुप्रिया के बूब्स राहुल के मुँह में थे. वह सुप्रिया के ऊपर चड्डा हुआ आराम से उसके बूब्स को चूस रहा था. तभी सुप्रिया का फ़ोन बजा, और सुप्रिया ने देखा तोह वह अतुल का कॉल था.

सुप्रिया ने राहुल को चुप होने रहना का इशारा करते हुए कॉल उठाया - Hello...

अतुल - Hi.. कैसी हो...

सुप्रिया - मैं ठीक... आप...

राहुल अभी भी सुप्रिया के ऊपर लेता हुआ था और सुप्रिया के निप्पल्स उसके मुँह में थे. कितना ाचा लग रहा था उसे की अतुल से बात करते हुए उसकी बीवी अपने मम्मी उससे चुसवा रही थी. दूसरी तरफ सुप्रिया की हालत ख़राब थी और वह राहुल को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी.

अतुल - तुम्हे काफी मिस कर रहा हूँ...

सुप्रिया - मैं भी.... सससससस

अतुल - क्या हुआ?

सुप्रिया - कुछ भी नहीं, ऐसे hi काम कर रही हु...

राहुल के मुँह से थोड़ा ज़ोर से चूसने की आवाज़ आयी.

अतुल - कोई है क्या वहां....

सुप्रिया ने गुस्से में राहुल को देखा - नहीं... कौन होगा यहाँ...

अतुल - मैं सोच रहा थोड़ा जल्दी आ जायु...

सुप्रिया - इतने दिनों के बाद तोह गए हो... आप आराम से आयो...

अतुल - ाचा सोचता हूँ...

सुप्रिया - जब आप वहां से चलो तोह मुझे मैसेज कर देना..

अतुल - ठीक है... चलो मैं अभी रखता हूँ.. तुम ध्यान रखना अपना...

सुप्रिया - हाँ... आप भी...

फ़ोन रखते hi सुप्रिया ने राहुल के हाथ पर ज़ोर के मारा - रुक नहीं सकते थे... देख रहे थे न मैं अतुल से बात कर रही थी.

राहुल - सॉरी जान... तुम हो hi इतनी सेक्सी की मैं खुद को रोक नहीं पाटा हूँ...

सुप्रिया - राहुल.... हमारे इस रिश्ते का फ्यूचर क्या है?

राहुल - तुम इतनी टेंशन क्यों ले रही हो, कुछ न कुछ फिगर आउट हो जायेगा...

सुप्रिया - नहीं प्लीज, मुझे बताया न...

राहुल - अभी तोह तुम इधर आयो...

राहुल ने फिरसे सुप्रिया को अपने नीचे खींचा और कुछ hi देर बाद उसका लुंड सुप्रिया के अंदर था. सुप्रिया भी मस्त हो कर सब कुछ भूल कर उसके साथ एन्जॉय करने लगी. दोनों ने एक दुसरे के साथ एक राउंड पूरा किया.

फिर कुछ देर ब्रेक लेकर दोनों ने खाना खाया. वैसे तोह करुणा ने सिर्फ सुप्रिया के लिए hi खाना बनाया था, पर दोनों ने वही मिल कर खा लिया. कुछ देर बाद वह फिर से अपने हसीं पालो में मस्त हो गए. दोनों रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे, और सुप्रिया भी धीरे धीरे और बोल्ड होती जा रही थी. दोनों पसीनो में तर, कभी सुप्रिया राहुल के ऊपर और कभी राहुल सुप्रिया के ऊपर. उनका ये खेल इस रात भी यूँ hi चलता रहा.

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सुबह उठने में दोनों को hi लेट हो गया था, और जल्दी जल्दी करके सुप्रिया किसी तरह से अपने ऑफिस पहुंची. सुप्रिया का रोम रोम बुरी तरह दर्द कर रहा था, पर अभी भी जैसी उसकी प्यास पूरी तरह ख़तम नहीं हुई थी. पिछले 2 दिन में हो काम से काम 5 बार तोह सेक्स कर hi चुके थे, और हर बार राहुल उसका पानी निकलने में कामयाब रहा था. ऐसा लग रहा था की पिछले पूरे साल की कमी इन्ही दो दिनों में पूरी हो रही थी.

सुप्रिया अपने काम में लगी हुई थी की दिन में अचानक से करुणा का कॉल उसके फ़ोन पर आने लगा. करुणा बहुत काम hi ऑफिस में उसे कॉल करती थी. अगर उसे कुछ पूछना होता तोह वह मैसेज पर hi पूछ लेती. उसका फ़ोन देख सुप्रिया के दिमाग की घंटी बजने लगी थी और उसने हैरान होते हुए फ़ोन उठाया - Hello....

दूसरी तरफ से करुणा की तेज़ साफ़ आवाज़ आयी - दीदी...

सुप्रिया - हाँ बोल करुणा.. क्या हुआ..

करुणा - आपका रूम काफी फैला हुआ था मैंने देखा, इसलिए कॉल किया... आपने किसी और को चाबी तोह नहीं दी है न?

ओह गॉड, सुबह जल्द बाज़ी में सुप्रिया फर्श और बीएड पर से सारे कपडे हटाना भूल गयी थी. उसमे राहुल और उसके दोनों के कपडे थे, और कुछ कपडे तोह उनके प्यार की होली में साणे हुए थे. करुणा तोह वह देखते hi समझ गयी होगी की यहाँ क्या हो रहा था. पता नहीं वह अब इस बात कैसे संभालेगी.

सुप्रिया - नहीं वह मैं कल कुछ सफाई कर रही थी तोह सब बहार रह गया, तू ऐसा कर, कमरे में सफाई मत कर... बल्कि आज सफाई करने की जरूरत भी नहीं है..

करुणा - वह तोह मैं कर चुकी सब... कपडे भी धो दिए... भैया तोह गए हुए है न...

सुप्रिया ने मुँह से धीरे से आवाज़ निकली - हाँ...

कुछ सेकंड के सन्नाटे के बाद करुणा बोली - ाचा.... रात को दो लोगो का खाना बना कर रख जायु?

सुप्रिया अभी भी पीछे नहीं हैट रही थी - दो का क्यों?

करुणा - कहीं आपको ज्यादा भूक लगे तोह उसके लिए... बाकी आप देख लो...

सुप्रिया - हम्म्म... ठीक है... दो लोगो का बना दे... मैं अभी ऑफिस में हु और मैं बाद में तुझ से बात करती हु... सुन... मैं..

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की वह कैसे क्या बोले करुणा को.

करुणा - दीदी आप टेंशन मत को... आप अपने काम पर ध्यान दो...

सुप्रिया किसी भी तरह करुणा को अपनी साइड करना चाहती थी - और सुन... वह इक़बाल और तू...

करुणा - दीदी... वह सब बोलने की जरूरत नहीं है आपको… आप मुझ पर भरोसा कर सकते हो....

सुप्रिया - थैंक यू...

सुप्रिया ने फ़ोन रखा, उसके हाथ बुरी तरह काँप रहे थे. उसकी छोरी आखिर कार पकड़ी hi गयी थी. कितनी बेवक़ूफ़ थी वह, की दो hi दिन में वह पकड़ी गयी. अब उसकी जान जैसे करुणा के हाथों में थी, पता नहीं वह क्या करने वाली थी. उसे करुणा पर बिलकुल भी भरोसा नहीं था. अगर उसने अतुल को सब बता दिया तोह? अगर उसने इक़बाल को ये बात बता दी तोह? पर उसे इक़बाल से इतना डर क्यों लगता था, वह तोह उसका कुछ भी नहीं था.

शाम को राहुल सुप्रिया को पिक किया और वह मुरझाई हुई सी कार में बैठी. सुप्रिया ने कार चलते hi राहुल को करुणा के साथ हुई बातचीत के बारे में बोलना शुरू किया. राहुल चुप चाप उसकी पूरी बात सुनता रहा. सुप्रिया कुछ ज्यादा hi परेशान थी.

राहुल - यार पता नहीं तुम इन कामवाली वॉचमन वैगेरा से इतना क्यों डर्टी हो...

सुप्रिया - तुम समझते क्यों नहीं... अगर अतुल को पता चल गया तोह... तुम्हारा तोह कुछ नहीं होगा न... मेरी hi बदनामी होगी...

राहुल - कुछ बदनामी नहीं होगी... सब भूल जायो... इधर आयो...

राहुल ने गाडी साइड में रोकते हुए सुप्रिया को साइड से हुग किया. सुप्रिया ने अपना सर राहुल के कंधे पर रख दिया, वह सच में काफी परेशान थी. और ये साड़ी परेशानी उसी ने तोह अपने लिए बनायीं थी.

राहुल - सुप्रिया जो कुछ हो... मैं तुम्हारे साथ खड़ा हु...

सुप्रिया ने राहुल का हाथ पकड़ लिया.

राहुल - वैसे... खड़ा तोह कुछ और भी है... जिसे तुमने अब तक मुँह नहीं लगाया है...

सुप्रिया ने राहुल की पेअर पर हाथ मारा - तुम इस टेंशन के टाइम में भी ये फालतू मजाक सूझ रहा है....

राहुल हस्ते हुए - मजाक नहीं कर रहा हूँ बाबा...

सुप्रिया ने अपना सर उठाते हुए कहा - हम्म्म्म... तोह क्या चाहते हो... यहीं सड़क किनारे शुरू हो जायु?

राहुल - सच में... ऐसा हो जाये तोह कितना मज़ा hi आ जाये... ahhhhhhhhhh

सुप्रिया - शट उप!!! ाचा चलो जल्दी घर चलो... कल सुबह तुम अपना सामान लेकर वापस चले जाना प्लीज... बस हो गया...

राहुल - क्या हो गया.. अभी तोह बस ट्यूसडे है आज... अभी तोह पूरे 4 दिन और बच्चे है हमारे हनीमून को....

सुप्रिया सोच में पद गयी, पता नहीं 4 दिन के बाद उसकी जिंदगी कैसी होने वाली थी. जब अतुल वापस आ जायेंगे तोह क्या वह फिर से अपनी उसी पुराणी लाइफ में ढल पायेगी? फिलहान तोह पिछले दो दिनों से वह राहुल की कुछ ज्यादा hi आदि हो चुकी थी, और उसके साथ प्यार का बिताया हर पल उसे पागल सा कर रहा था.
 
No नीड तो गेट रौदे प्लीज… िफ़ यू डोंट लिखे आईटी यू कैन स्टॉप रीडिंग… अस ी साइड बिफोर ी हैवे ा स्टोरी इन मंद एंड इतस गोइंग अकॉर्डिंग तो तहत. अभी इक़बाल का टाइम नहीं आया है, पर जब आएगा तब ऐसा नहीं लग्न चाहिए की सुप्रिया इसके साथ क्यों कर रही है. आईटी वोउल्ड बे कम्प्लीटली अगेंस्ट हेर करैक्टर राइट नाउ तो दो आईटी विथ हिम.

अगेन, हाथ जोड़ कर विनती है, आप मुझसे प्लीज रौदे मत हो, मैं अपना बहुत सारा समय निकाल कर ये स्टोरी लिख रही हु. मेरी लाइफ में बहुत कुछ है - वर्क, फॅमिली, इतर एंटरटेनमेंट स्टफ. काफी मुश्किल से टाइम निकाल के ये स्टोरी लिख रही हु. शायद इस स्टोरी के बाद दुबारा कभी न लिखू.

आपको नहीं पसंद तोह ी अंडरस्टैंड क्यूंकि मैं सबकी उम्मीदों पर तोह खरी नहीं उतर सकती. बाकी और भी स्टोरीज हैं इस साइट पर आप उन्हें पड़े.
 
एक्सबीएक्सोसिप2 - कमैंट्स एंड सुग्गेस्टियन्स अरे फाइन, बूत आप कुछ ज्यादा hi रौदे हो गए थे. एनीवे ी अंडरस्टैंड योर विएवपॉइन्ट. लिखे ी साइड, ट्रस्ट में, इन थे एन्ड एवरीथिंग विल बे फाइन.
 
अपडेट 50

घर पहुंचते पहुंचते राहुल ने सुप्रिया का मूड थोड़ा ठीक कर hi दिया था. और वह दोनों फिर से अपनी रासलीला में लग गए. राहुल ने सुप्रिया को दबोचने में कोई देरी नहीं दिखाई और उसे अपने नीचे लेते हुए अचे से किश किया. और फिर सुप्रिया के कपडे उतारते हुए उसके शरीर के हर हिस्से को चूमने लगा. सुप्रिया की सॉफ्ट सी स्किन थी hi माखन की तरह मुलायम, जिस पर एक बार मुँह लग जाये तोह हटाने का मैं hi न करे.

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आधी नंग अवस्था में सुप्रिया ने राहुल को किसी तरह से अपने ऊपर से हटाया. अब तोह दोनों एक दुसरे के साथ और भी कम्फर्टेबले होते जा रहे थे की सुप्रिया को राहुल के सामने काम कपडे पेहेन कर घूमने में भी कोई शर्म नहीं लग रही थी. राहुल सुप्रिया के लिए अलग अलग सेक्सी से मॉडर्न ड्रेसेस लाये था, और उसने सुप्रिया को उन्ही में से एक ड्रेस पेहेन्ने के लिए बोलै. सुप्रिया थोड़ा सा हिचकिचाई पर फिर जल्दी से चेंज करके एक ड्रेस में आ गयी. राहुल उसे ड्रेस में देखते hi फिर से पागल सा हो गया था और उस बुरी तरह टूट पड़ा.

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राहुल सुप्रिया पर एक जंगली जानवर की तरह झपटा और उसने सुप्रिया के सारे कपडे उतार फेके, बल्कि कपडे उतारने वह थोड़े से फैट भी गए. सुप्रिया की कभी हलकी और तेज़ ाँहों से उसका असली जंगलीपन और बहार निकल के आ रहा था. सुप्रिया भी थोड़ा हलके से न न कर रही थी पर उसे भी राहुल के इस जोश में पूरा मजा आ रहा था. दोनों से फिर से पूरी रात एक दुसरे के साथ काफी एन्जॉय किया.

दोनों का ये खेल अगले दिन भी कुछ ऐसे hi चला और फिर देखते देखते थर्सडे की सुबह हो गयी थी. सुबह उठते hi सुप्रिया के दिमाग में बस एक hi बात चल रही थी, उसे ऐसा लग रहा था उनके साथ का समय बस ख़तम होने को आया था. इस सब के बारे में सोचते सोचते उसकी टेंशन और बाद जाती, पता नहीं अतुल के आने के बाद क्या होगा.

थर्सडे की सुबह ऑफिस में सुप्रिया की थकन उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी. वह बार बार उबासी ले रही थी और उसकी आँखें सुर्ख लाल थी. संडे से जो सिलसिला चालु हुआ था, वह किसी की भी हालत ख़राब कर दे. कृति ने उसे देखा तोह उसे पूछे बिना रहा नहीं गया.

कृति - क्या बात है मैडम, काफी टायर्ड सी लग रही हो इस हफ्ते?

सुप्रिया - हाँ वह नींद सही से पूरी नहीं हो पारी रही है...

कृति - लगता है मुझे अतुल से बात करनी hi पड़ेगी आज शाम को... इतना भी नहीं सतना चाहिए इतनी मासूम सी लड़की को...

सुप्रिया - नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है... मुझे बस टेंशन से नींद नहीं आयी...

कृति - कोई नहीं आज तोह बात हो कर hi रहेगी... मैं भी तोह देखु उस हैंडसम लड़के को जिसने सुप्रिया मैडम की नींदे उदा राखी है...

सुप्रिया - ारी सुनो न प्लीज...

पर कृति कहाँ सुनने के मूड में थी. वह तोह अब ठान के बैठी थी की आज अतुल से मिलकर रहेगी. सुप्रिया की टेंशन जैसे और बढ़ती जा रही थी. जब अतुल था hi नहीं लखनऊ में तोह वह उसे कैसे मिलवाएगी कृति से.

सुप्रिया ने मौका मिलते hi राहुल को कॉल लगाया.

राहुल - क्या हुआ सुप्पु... शाम तक का भी वेट नहीं हुआ तुमसे आज...

सुप्रिया - नहीं... सुनो...

राहुल - ओह हो... सुनो जी hi बोल दो मुझे... उफ्फ्फ्फ़ पूरा हस्बैंड वाला फील करवा दो...

सुप्रिया - राहुल... सुनो तुम.... इस सब का टाइम नहीं है अभी... एक गड़बड़ हो गयी है... कृति ने ज़िद्द ठान ली है की वह आज अतुल से मिलकर रहेगी...

राहुल - क्या मतलब? उसे बोलै होगा न की अतुल बहार गया है...

सुप्रिया - ारी मेरे मुँह से गलती से निकल गया था की अतुल यहीं है... बाद में समझती हु... पर अब क्या करे...

राहुल - तुम बोल दो न की अतुल ऑफिस में बिजी है...

सुप्रिया - हम्म्म ये ठीक रहेगा... पता नहीं मेरा दिमाग hi क्यों नहीं चल रहा आज..

राहुल - तुम इतना स्ट्रेस ले रही हो न हर बात का, इसलिए. मैं तुम्हे पिक करने आ जायूँगा शाम को...

सुप्रिया - हाँ ठीक है... मिलते है शाम को...

सुप्रिया ने कृति को बता दिया की अतुल शाम को बिजी रहेंगे, और वह लोग कभी और मिल सकते है. कृति भी बात को भूल सी गयी थी, शायद सुप्रिया hi कुछ ज्यादा सोच रही थी आज.

शाम होते होते सुप्रिया वेट कर रही थी की कब ऑफिस खाली हो. पर आज तोह कृति जैसे जाने का नाम hi नहीं ले रही थी. 6 बजने वाले थे और राहुल भी बस आने hi वाला था. सुप्रिया अपना बैग लेकर नीचे चली गयी ताकि राहुल के आते hi वह जल्दी से गाडी में बैठ कर उसके साथ चली जाये. टाइम जैसे बहुत धीरे धीरे बीत रहा था, 15 मिनट जैसे 2 घंटो के बराबर हो गए हो.

तभी पीछे से कृति की आवाज़ आयी - सुप्रिया, गयी नहीं तुम अब तक....

सुप्रिया ने उसे देखते hi सोचा, ओफ्फो, अब ये कहाँ से आ गयी यहाँ इस टाइम. अभी नीचे आना था इसे.

सुप्रिया - हाँ मैं बस वेट कर रही थी...

कृति - तुमने तोह कहा था की तुम्हारे हस्बैंड बिजी है आज...

सुप्रिया - हाँ वह...

इससे पहले वह और बोलती, एक लाल रंग की गाडी सामने आ कर रुकी और उसने हल्का सा हॉर्न मारा, जैसे सुप्रिया को इशारा कर रहा हो कोई आने के लिए.

कृति - एहि तोह है शायद तुम्हारी कार.... चलो फाइनली मैं आज अतुल से मिल hi लुंगी...

इससे पहले सुप्रिया कुछ और कहती या कृति को रोकती, कृति गाडी की और बाद चली, और पैसेंजर साइड पर आती hi एक्ससिटेमेंट में बोली - Hi अतुल.......

राहुल की शकल देखते hi उसकी आवाज़ बीच में hi रुक गयी. वह हक्की बक्की कड़ी राहुल को देख रही थी. ये क्या कर रहा था यहाँ.

राहुल ने कृति को देख कर हलके से कहा - Hi कृति... कैसी हो...

कृति ने पलट कर सुप्रिया की और देखा, उसकी शकल पर hi 100 सवाल थे. सुप्रिया नई किसी तरह से अपने चेहरे के परेशान इमोशंस को हटाया और वह भी थोड़ी सी सुरप्रीसेड आवाज़ में बोली - राहुल तुम यहाँ? अतुल ने भेजा है क्या?

राहुल खिलाडी आदमी था और एकदम समझ गया माज़रा क्या था - हाँ वह अतुल ऑफिस में बिजी है, तोह उसने बोलै मुझे तुम्हे पिक करने के लिए...

सुप्रिया - ाचा.... मुझे तोह कोई मैसेज नहीं दाल उन्होंने...

राहुल - काफी ज्यादा बिजी है... चलो मैं तुम्हे ड्राप कर दू... कृति, तुम्हे भी कहीं ड्राप कर दू क्या?

कृति ने सीरियस आवाज़ में कहा - No थैंक्स! ी ऍम गुड.

सुप्रिया - चलो कृति, ी विल सी यू टुमारो...

सुप्रिया ने कृति को bye किया और कार में बैठ कर वहां से चली गयी. कृति को कुछ तोह अटपटा सा लग रहा था पर उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या था. वह भी अपनी कार की तरफ चल पड़ी.

दूसरी और थोड़ी दूर जा कर सुप्रिया के चैन की सांस ली - गॉड, आज तोह फास hi गए थे.... मुझसे अब ये झूठ और नहीं खेला जायेगा...

राहुल भी इतने दिनों बाद कृति को देख कर उसके खयालो में खोया हुआ था. उसने सुप्रिया की बात सही से सुनी नहीं थी - हम्म्म... क्या...

सुप्रिया ने राहुल को घूर कर देखा - फास गए थे! देखा नहीं तुमने! थैंक यू, वैसे तुमने बात सही से संभल ली थी, पर फिर भी पता नहीं कृति क्या सोच रही होगी.

राहुल - कुछ नहीं सोच रही होगी वह... देखा नहीं वह अभी भी मुझसे hi गुस्सा थी...

सुप्रिया - क्या फरक पड़ता है?

राहुल - मुझे अभी तक समझ नहीं आया की वह मुझसे गुस्सा हुई क्यों?

सुप्रिया की आवाज़ थोड़ी बाद गयी थी - तुम उसके बारे में क्यों सोच रहे हो... मैं यहीं तुम्हारे साथ बैठी हु...

राहुल - सॉरी मेरा वह मतलब नहीं था... बस ऐसे hi कृति को देख कर फिर से वही सवाल मेरे दिमाग में चल रहा था.

सुप्रिया - क्या सवाल?

राहुल - एहि की वह मुझसे इतना गुस्सा क्यों है?

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा भड़क सा गयी - उसका गुस्सा दिखाई दे रहा है, और मेरा नहीं!!

राहुल - सॉरी यार... तुम क्यों गुस्सा हो रही हो अब...

सुप्रिया - क्यों न हु... मेरे सामने तुम एक दूसरी लड़की के बारे में जो बात कर रहे हो...

राहुल - ी ऍम सॉरी... पर तुम कब से इतना जेलस फील करने लगी.... तुम भी तोह अतुल के पीछे से मेरे साथ रह रही हो...

सुप्रिया राहुल की बात सुनते hi एकदम हैरान सी हो गयी. उसे समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या जवाब दे राहुल को. क्या राहुल उसके बारे में ऐसा सोचता था?

राहुल सुप्रिया की चुप्पी देखते हुए अपनी गलती समझ गया - सॉरी यार... मेरा वह मतलब नहीं था..

सुप्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया और गाडी चलती रही. घर पहुंच कर वह चेंज करके एक नार्मल साड़ी में आ गयी.

राहुल उसकी चुप्पी देख कर अपनी गलती समझ गया था - सॉरी मेरा वह मतलब नहीं था...

सुप्रिया ने बात का कोई जवाब नहीं दिया और बहार देखती रही. घर पहुंच कर वह जल्दी से अपने बैडरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद नार्मल से कपडे पेहेन कर बहार आयी.

राहुल - डार्लिंग क्या हुआ... वह सेक्सी ड्रेस नहीं पहनी जो मैंने बीएड पर राखी थी?

सुप्रिया - राहुल... मुझे तुमसे बात करनी थी....

राहुल ने सुप्रिया को पास खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया - हाँ बोलो न...

सुप्रिया - दो दिन बाद अतुल वापस आ जायेगा... मैं बस अब और ये झूठ की जिंदगी नहीं जीना चाहती... हमे अतुल को सब बता देना होगा... और फिर हम अपना नया जीवन साथ शुरू कर सकते है...

राहुल ने सुप्रिया की और देखा जैसे चेक कर रहा हो की क्या वह वकाईये में सीरियस थी - सुप्पु... कहाँ तुम इस सब के बारे में सोच रही हूँ... जो है... जैसा है... चलने देते है न...

सुप्रिया - क्या!! तोह तुम हमारे बारे में सीरियस नहीं हो... मैं बस एक खेलने की चीज़ हु तुम्हारे लिए...

राहुल - मैंने ऐसा कब कहा... पर के ों... समझा करो

सुप्रिया राहुल के ऊपर से हैट कर कड़ी हो गयी - राहुल... मुझे लगा था तुम मुझसे प्यार करते हो...

राहुल भी सोफे से उठा गया, उसके चेहरे पर हलकी सी हसी आ गयी - सुप्पु... सच तोह तुम भी जानती हो... कृति से जेलस हो कर तुम मेरे पास आयी थी... जब तुमने उस रात हमें सेक्स करते देखा था...

सुप्रिया हक्की बक्की रह गयी, राहुल को सब सच पता था.

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राहुल - माना की मैं अतुल से हर मटर में बेटर हु, पर इसका मतलब ये तोह नहीं की मैं तुमसे शादी कर लूंगा...

सुप्रिया - सो... मैं तुम्हारे लिए बस एक सेक्स तोय थी... तुम बस मेरा फायदा उठा रहे थे...

राहुल - जितना मज़ा मुझे आया, उतना hi तुम्हे आया, तोहकों किसका फायदा उठा रहा था...

सुप्रिया का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. राहुल की हकीकत उसके सामने आ रही थी. उसने राहुल की तरफ गुस्से से देखा - राहुल... तुम अभी की अभी यहाँ से चले जायो...

राहुल - ारी... अभी तोह 2 दिन बाकी है हमारे अस हस्बैंड एंड वाइफ...

सुप्रिया ज़ोर से बोली - कुछ बाकी नहीं है अब... गेट आउट... राइट नाउ...

राहुल - के ों सुप्रिया... ऐसा क्या हो गया है...

सुप्रिया का चेहरे बुरी तरह लाल हो चूका था - मुझे वॉचमन को बुलाने पर मजबूर मत करो.. जस्ट लीव..

राहुल - ठीक है... ठीक है... शांत हो जायो.. मैं जा रहा हूँ...

राहुल थोड़ी देर बाद अपना सामान समेत कर वहां से चला गया.

सुप्रिया की आँखों से आंसू बहने शुरू हो गए थे. पता नहीं राहुल पर इतना ट्रस्ट कैसे कर लिया था की उसे अपने साथ सब कुछ करने दिया था. उससे भी ज्यादा उसने अतुल जैसे अचे इंसान के साथ चीट किया था. पता नहीं वह अतुल से अब कैसे नज़रें मिला पायेगी.

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सुप्रिया पूरी रात एहि सोच कर रोटी रही की उसने क्या कर दिया था. वह चाहती तोह थी की वह अतुल को कॉल कर ले, पर उसे डर था की पता नहीं उसके मुँह से क्या निकल जाये, इसलिए उसने कॉल नहीं किया.

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अगली सुबह सुप्रिया का मैं तोह नहीं था ऑफिस जाने का पर आज विक्रम सर ने ऑफिस आना था तोह उसने किसी तरह से अपने आप को ऑफिस के लिए तैयार किया. उसने काफी सारा मेकअप लगा लिया था उसकी आँखों के नीचे के डार्क सर्कल्स न दिखे. ऑफिस पहुंचने में थोड़ा सा लेट हो गया था और ऑफिस में काफी चहल पहल थी आज. कृति भी काफी चहकी हुई सी थी.

थोड़ी देर बाद कृति उसके डेस्क पर आयी - सुप्रिया... ी वांटेड तो शेयर समथिंग...

सुप्रिया ने बुझी सी आवाज़ में कहा - हाँ बताया न...

पर कृति अपनी बात बताने में इतनी एक्ससिटेड थी की उसे सुप्रिया की हालत का अंदाज़ा hi नहीं हुआ - सो... राहुल कॉल्ड में लास्ट नाईट...

सुप्रिया - क्या??? उसने तुम्हे कॉल किया?

कृति - हाँ... सो मैं उसका कॉल उठा नहीं रही थी... पर कल उसने काफी सारे टेक्स्ट किये थे... एंड उसको कल तुम्हे पिक करते भी देखा था... सो ी पिचकेद हिज कॉल...

सुप्रिया को यकीं नहीं हो रहा था की राहुल उसके पास से जाते hi वापस कृति के पास चला गया था. कैसा इंसान था ये.

कृति - सो, हमने बात करि, एंड ी थिंक हमारे बीच कोई मिसुन्दरस्टण्डींग हो गयी थी... उसकी और कोई गर्लफ्रेंड नहीं है... एंड हे स्टिल लव्स में... एंड वांट्स तो मीट उप.

सुप्रिया - ाचा...

कृति - मैंने उसे कुछ कमिट नहीं किया... मैं तुमसे बात करना चाहती थी... तुमने hi कहा था की उसकी शायद और भी गिर्ल्फ्रेंड्स है...

सुप्रिया - उम्म्म्म.... तुम क्या चाहती हो...

कृति - ी थिंक ी स्टिल लव हिम...

कृति की आखों में साफ़ दिख रहा था की वह राहुल को बुरी तरह चाहती थी. सुप्रिया उसे क्या hi समझा सकती थी. पर अब शायद वह भी अपने आप को राहुल से अलग करना चाहती थी.

सुप्रिया - थॉट्स गुड यार.. ी थिंक तुम लोग आपस में बात करो एंड फिगर आउट िफ़ यू ट्रस्ट एच इतर...

कृति - थैंक्स यार... ी विल थिंक अबाउट आईटी सम मोरे...

तभी पेओन ने आकर बोलै की विक्रम सर ने सुप्रिया को बुलाया है. सुप्रिया जल्दी से मीटिंग रूम की तरफ गयी.

सुप्रिया रूम पर नॉक करती हुई - गुड मॉर्निंग सर... आपने बुलाया...

विक्रम - के के सुप्रिया... हाउ अरे यू?

सुप्रिया - गुड सर... एंड आप?

विक्रम सुप्रिया की और बारीकी से देखते हुए - इतना मेक उप लगा रखा है आज... कुछ हाईड कर रही हो...

सुप्रिया जल्दी से बोली - नहीं सर... ऐसा कुछ नहीं...

विक्रम - हम्म्म... नहीं बताना तोह ठीक है... एनीवे ी हैवे गुड न्यूज़... वह आपके उस वाले क्लाइंट्स से फिर से मीटिंग सेटअप कर दी है मैंने नेक्स्ट वीक की...

सुप्रिया - फिर से!! ओह ाचा...

विक्रम - हाँ.. और इस बार ी विल ज्वाइन थे मीटिंग और उनका सीईओ भी ज्वाइन करेगा...

सुप्रिया थोड़ा एक्ससिटेड हो कर बोली - ओह वाओ... ाचा...

विक्रम - एप... सो गेट रेडी... वे विल गेट थम थिस टाइम....

सुप्रिया - थैंक यू सर...

विक्रम - यू क्नोव... तुम मुझे सिर्फ विक्रम भी बुला सकती हो... सर की जरूरत नहीं है...

सुप्रिया - ठीक है सर... ी मैं विक्रम... आपने पहले भी बोलै है... मैं तरय करुँगी...

विक्रम - ग्रेट... चलो... हैवे ा ग्रेट वीकेंड....

सुप्रिया मीटिंग रूम से निकल कर आ गयी. अभी तोह उसके दिमाग में एक अलग hi उथल पुथल चल रही थी और वह काम के बारे में सोच hi नहीं पा रही थी. वह अपने डेस्क पर गयी तोह उसके फ़ोन पर राहुल के मैसेज आये हुए थे. मैसेज में वह उसे कॉल करने के लिए कह रहा था.

सुप्रिया उसको कॉल तोह नहीं करना चाहती थी, पर वह फिर भी उसे कल रात को किये कृति को कॉल के बारे में सुनना चाहती थी - Hello...

राहुल - कैसी हो जान... अब गुस्सा थोड़ा शांत हुआ...

सुप्रिया ताना मारते हुए - तुमने काम hi ऐसा किया न जिससे मेरे गुस्सा शांत हो जाये...

राहुल - ः... तोह कृति पहुंच गयी तुम्हारे पास... देखो, मैं बस ये कहना चाहता था की न तुम कृति को कुछ बोलोगी, न मैं अतुल को कुछ बोलूंगा... लेटस बे मातुरे अबाउट थिस...

सुप्रिया - सो मैं बस तुम्हारे लिए एक टाइम पास hi थी न...

राहुल - के ों यार... तुम एक मैरिड लेडी हो... एक बहुत hi सुन्दर मैरिड लेडी... पर कृति, वह सिंगल भी है और अमीर भी... सो कोई कपरिसों hi नहीं है... और वह भी काम हॉट नहीं है... तुमसे थोड़ा काम बूत फिर इतना कुछ तोह है उसके पास...

सुप्रिया की आँखों से राहुल के नाम का पर्दा उठता जा रहा था और उसकी असलियत अब उसके सामने थी - तुम इतने बड़े कमीने हो न...

राहुल - हे... इतना गुस्सा होने की जरूरत नहीं है.... फ्राइडे है... अतुल के वापस आने की तैयारी करो... कहो तोह मैं आकर तुम्हे रेडी करवा देता हूँ...

सुप्रिया ने फ़ोन काट दिया, वह बस अब राहुल की आवाज़ को और नहीं सुन्ना चाहती थी. सुप्रिया जल्दी से वापस अपनी सीट पर पहुंची, रास्ते में उसे ऐसे लगा जैसे मीटिंग रूम से उस पर कोई नज़र रखे हो, पर फिर लगा की शायद ये उसकी गलत फेहमी थी.

थकी हरी हुई सी वह शाम को अपने घर पहुंची. बस कल अतुल ने वापस आ जाना था, पर उसके पीछे से पता नहीं वह क्या से क्या बन गयी थी. हफ्ते के शुरू में उसे लगा था की शायद उसे अपने सपनो का प्यार इस हफ्ते में मिल जायेगा, पर हफ्ता ख़तम होते होते कुछ और hi अंजाम हुआ. शायद सारे मर्द होते hi ऐसे थे की उनका काम निकल जाने के बाद उन्हें औरत की फीलिंग की कोई कदर नहीं होती थी. मर्दो की इन दुनिया में शायद उन पर कण्ट्रोल लेना बहुत जरूरी था, और सुप्रिया फिर से एहि सबक भूल गयी थी. सुप्रिया नेगेटिव खयालो में उलझी हुई बीएड पर लेती रही, उसमें जैसे कोई हिम्मत hi नहीं थी और वह बस ऐसे hi लेते लेते सो गयी.

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अगले दिन, सुबह उसे दरवाज़े की घंटी ने जगाया. सुप्रिया आँखें मसलती हुई दरवाज़ा खोने गयी, उसे होश hi नहीं था की कितने बज गए थे. दरवाज़े पर करुणा थी.

सुप्रिया ने अंगड़ाई लेते हुए कहा - इतनी जल्दी कैसे आ गयी आज तुम...

करुणा - दीदी.... 10 बज गए है... मैं कबसे घंटी बजा रही थी...

सुप्रिया ने चौंकते हुए कहा - क्या!!! 10!!

करुणा ने अंदर झांकते हुए कहा - हाँ दीदी... मैं अंदर आयु या... अभी नहीं...

सुप्रिया - आ जायो... इसमें क्या इतना सोच रही हो...

करुणा - नहीं वह... भैया आ गए क्या?

सुप्रिया - आज आएंगे... शाम तक...

करुणा ने चहकते हुए कहा - ाचा... चलो फिर तोह मैं अचे से सफाई कर देती हूँ आज...

सुप्रिया - क्यों वैसे अचे से नहीं करती क्या?

करुणा - ऐसा नहीं है दीदी... बस भैया आ रहे हो तोह... घर साफ़ होना चाहिए न... मैं देख लुंगी कुछ ऐसा वैसा न हो...

सुप्रिया - ाचा ठीक है ठीक है... तुम ऐसा करो कुछ ाचा सा खाना भी बना देना आज...

सुप्रिया करुणा को काम समझा कर जल्दी से बाथरूम में घुस गयी. कल रात का डिप्रेशन जैसे सुबह के सूरज से दूर हो रहा था, बल्कि उसे कुछ ज्यादा hi एनर्जी सी मिल रही थी. अतुल भी तोह वापस आ रहे थे आज, वह उसके लिए अचे से सज्ज के तैयार होना चाहती थी. सुप्रिया अचे से नाहा कर तैयार हो गयी. उसके गले पर हिक्की का निशाँ अभी भी पूरी तरह नहीं गया था पर थोड़ा काम था. उसने एक साडी और स्लीवलेस ब्लाउज निकाल कर पेहेन लिया, और अपने बाल बांधते हुए तैयार होने लगी. अतुल भी तोह देखे की इतने दिनों से वह क्या मिस कर रहा था.

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थोड़ी देर बाद जब सुप्रिया कमरे से बहार आयी तोह करुणा भी उसे कुछ पल देखती रह गयी थी - दीदी... क्या बात है.. आज तोह बिलकुल पटाखा लग रही हो...

सुप्रिया मुस्कुराते हुए बोली - चुप्प.. कुछ भी बोलती है...

करुणा - सच दीदी... आप ऐसे hi बन के रहा करो... तभी तोह आपकी खूबसूरती बहार आएगी... और दुनिया आपको देख कर पागल होगी...

सुप्रिया - ाचा ठीक है... सुन ये पंखे भी साफ़ कर दियो...

करुणा - सब कर दूंगी दीदी... आप फ़िक्र मत करो...

करुणा टाइम लगा कर पूरे घर की सफाई करती रही, और सुप्रिया ने शाम के लिए हलवा बना के रख लिया. और फिर उसके बाद करुणा के साथ मिल कर अतुल का सारा फवौरीते खाना बना लिया. पर अभी भी अतुल के आने में टाइम था. सुप्रिया आईने के सामने कड़ी अपने आप को निहार रही थी. सच hi तोह कह रही थी करुणा, उसे ऐसे hi कपडे पेहेन्ने चाहिए जिससे उसका शरीर और उभर कर बहार आये. कब तक वह ऐसे hi दब्बू से बानी रहेगी, देख तोह लिया था उसने ऐसे बने रहना का अंजाम. राहुल से उसे उससे ज्यादा अमीर और स्टाइलिश लड़की के लिए छोड़ने में जरा सी भी हिचक नहीं दिखाई थी.

आईने में देखते देखते हुए उसका मैं कर रहा था की उसे कोई उसे अभी ऐसे बने ठाणे देखे और उसकी तारीफ करे. पर कौन था जो उसकी तारीफ कर सकता था.

सुप्रिया - सुन.. थैंक यू... इतना सब कुछ करवाने के लिए... तू ऐसा कर अभी यहीं खाना खा ले...

करुणा - ठीक है दीदी...

सुप्रिया - और सुन... इक़बाल भी है क्या नीचे... उसे भी बुला ले... वह भी खा लेगा...

करुणा - पर इक़बाल को क्यों...

सुप्रिया अपने आप को आईने में देख रही थी - ारी. वह नहीं खा सकता क्या...

सुप्रिया - रुक, मैं फ़ोन करती हु उसे...

करुणा के चेहरे पर थोड़ी सी शिकन सी आ गयी पर वह फिर भी अपने काम में लगी रही.

सुप्रिया ने कॉल लगायी - Hello इक़बाल... कैसे हो...

इक़बाल सुप्रिया का फ़ोन देख कर हैरान सा था - मैडमजी... बढ़िया.... कुछ काम था आपको...

सुप्रिया - हाँ काम था न... तुम अभी आ सकते हो क्या...

इक़बाल - अभी मैडमजी... हाँ आ जायूँगा न... बस 5 मिनट दो मुझे...

सुप्रिया ने फ़ोन रख दिया और उसके चेहरे पर हलकी सी स्माइल थी. करुणा ने सुप्रिया की और तिरछी निगाहों से देखा - दीदी... उसे बताया क्यों नहीं की खाने के लिए बुला रही हो...

सुप्रिया - वह आता नहीं न अगर खाने का बोलती तोह...

करुणा - हम्म्म्म.....

सुप्रिया सोफे पर बैठ कर एक किताब के पैन पलटने लगी. करुणा ने सुप्रिया की और देखा, उसके छोटे से ब्लाउज में उसकी गोरी छाती और गर्दन कितनी कामुक लग रही थी. वह चाहती की सुप्रिया इक़बाल के आने से पहले अपने आप को थोड़ा धक् ले, पर वह अब कैसे सुप्रिया को कुछ बोलती.

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कुछ hi देर बाद घर के दरवाज़े पर दस्तक हुई, और सुप्रिया ने करुणा को दरवाज़ा खोलने का इशारा किया. करुणा ने थोड़ा सा मुँह बनाते हुए दरवाज़े को खोला.

करुणा को देखते hi इक़बाल के चेहरे की बड़ी सी मुस्कान चली गयी. वह तोह सोच रहा था की उसकी मैडमजी दरवाज़ा खोलेंगी.

इक़बाल - तू... अभी तक यहीं है...

करुणा - हाँ...

इक़बाल - मैडमजी ने बुलाया था... कुछ काम था उन्हें...

करुणा ने रूखे पैन से कहा - वह बैठी... पूछ ले उनसे... क्या काम है उनको...

जैसे hi इक़बाल ने सुप्रिया की और देखा उसका मुँह खुला का खुला रह गया - मैडमजी...

सुप्रिया हलके से हसी - है है है... आयो न...

इक़बाल सुप्रिया को इस अवतार में देख कर कुछ बोलने लायक hi नहीं था. उसके छोटे से डोरी वाले ब्लाउज में से उसके बूब्स की गेहरिया और ुछैयाँ दोनों अचे से दिख रही थी.

सुप्रिया - आ जायो... कुछ काम नहीं था... बस खाने के लिए बुलाया था.... करुणा तुम भी आ जायो और साथ में बैठ जायो... मैं खाना परोस देती हूँ....

इक़बाल - मैडमजी खाना...

सुप्रिया - हाँ मैंने कहा था न उस दिन... तुमने उस दिन भी मन कर दिया था... अब मैं न नहीं सुनूंगी... आ जायो...

सुप्रिया ने इक़बाल का हाथ पकड़ कर उसे अंदर खींचा और सोफे पर बिठा दिया. और फिर से करुणा को आवाज़ लगते हुए उसे भी वहीँ सोफे पर साथ में बिठा दिया. करुणा एक पल के लिए hi सही पर इक़बाल से चिपक कर बैठ गयी, और इक़बाल एक डैम से थोड़ा सा अलग होते हुए दूर हो गया. करुणा ने गुस्से में पलट कर इक़बाल की और देखा.

पर इतने में सुप्रिया किचन में से 2 प्लेट ले आयी थी - ये लो... साथ बैठ कर खायो आज...

करुणा - दीदी आप क्यों परेशान हो रही हो इतना... मैं परोस दूंगी न...

सुप्रिया - ारी नहीं.. आज तुम बैठो... मैं परोसती हूँ...

सुप्रिया किचन में से रोटी और सब्जी ले आयी और उनकी प्लेट में लगा दी. वह ऊपर कड़ी हुई झुक कर प्लेट में खाना लगा रही थी और उसके बूब्स ब्लाउज से थोड़ा बहार लटके हुए एक बड़ी सी खायी बना रहे थे. इक़बाल कोशिश कर रहा था की वह उस और न देखे पर बार बार उसकी नज़र वहीँ जा रही थी. करुणा भी उसे वहां देखते हुए पकड़ चुकी थी.

सुप्रिया ने उन दोनों के चेहरे की और देखा - क्या हुआ... खाना शुरू करो न..

सुप्रिया वहीँ उनके सामने बैठ गयी.

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इक़बाल और करुणा ने खाना शुरू किया. सुप्रिया वहीँ सामने मुस्कुराती हुई बैठी उन्हें देख रही थी. उन दोनों की भी जोड़ी बुरी नहीं थी साथ में. करुणा का रंग थोड़ा सा दबा हुआ था पर वह थी तोह सुन्दर hi. और इक़बाल को तोह वह उस दिन अपने असली रंग में देख hi चुकी थी. जैसा वह लगता था वैसा था नहीं.

इक़बाल ने कुछ गस्से खाने के बाद कहा - खाना बोहोत ाचा बना है... मैडमजी सच में आपके हाथों में जादू है...

सुप्रिया - करुणा ने hi बनाया है सब... मैंने तोह बस थोड़ी सी हेल्प करि है...

इक़बाल - हाँ... ये भी ठीक hi बनती है... पर आपने hi समझाया होगा इसी..

करुणा का मुँह और बनता जा रहा था और वह सुप्रिया को भी दिख रहा था - ऐसे तोह मत बोलो करुणा के बारे में... मैं जानती हु कितना चाहती है वह तुम्हे...

ये सुन कर, इक़बाल को एक डैम धसका सा लग गया, और करुणा भागी हुई उसके लिए पानी ले कर आयी. पानी पी कर इक़बाल की खासी थोड़ी काम हुई.

सुप्रिया - और देखो कितना ख्याल भी रखती है तुम्हारा.... तुम भी इसका ख्याल रखा करो न...

इक़बाल - जी मैडमजी...

सुप्रिया - और मैंने जो तुम दोनों को अलग अलग बोलै था... आज तुम दोनों के सामने बोल देती हूँ... तुम कभी भी इस घर में....

इक़बाल - हांजी मैडमजी... आप और आगे न बोले....

करुणा के चेहरे की मुस्कान वापस आ गयी थी, और वह भीनी भीनी मुस्कराहट के साथ सुप्रिया की और देख रही थी, जैसे उसे थैंक यू बोल रही हो.

सुप्रिया - मैं चाहती हु तुम लोगो का साथ बना रहे....

करुणा - बिलकुल बना रहेगा दीदी...

इक़बाल - मैडमजी... मैं चलता हूँ अब... नीचे ड्यूटी पर जाना है...

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल...

करुणा - दीदी मैं बर्तन और बाकी सब काम करवा देती हूँ...

इक़बाल खड़ा हो कर बहार की और चलने लगा, उसने दरवाज़े के पास आ कर पीछे पलट कर देखा तोह सुप्रिया उससे पीठ करि कड़ी थी और ब्लाउज के अंदर उसकी नंगी पीठ उसे साफ़ दिखाई दे रही थी. वह झटपटा हुआ सा जल्दी से दरवाज़ा बंद करके वहां से चला गया.

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अपडेट 51

शाम होते होते सुप्रिया का मैं फिर से थोड़ा सा बेचैन और डाउन होना शुरू हो गया था. दिन में तोह उसने कितनी हिम्मत दिखाई थी करुणा और इक़बाल के सामने. वह तोह वैसी कभी थी hi नहीं. पता नहीं उसकी जिंदगी उसे क्या बनती जा रही थी. जैसे जैसे अतुल के आने का समय पास आ रहा था उसकी बेचैनी और बढ़ती जा रही थी. सुप्रिया परेशां बैठी हुई पता नहीं क्या क्या सोच रही थी.

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अतुल ने ग्वालियर से चलने से पहले कॉल किया था पर उसके बाद से न तोह उसका कोई कॉल आया था न मैसेज. सुप्रिया ड्राइंग में बैठी बैठी दरवाज़े पर नज़रे गड़ाए बैठी थी. और आखिर कार उसका इंतज़ार पूरा हो गया, घर की लॉक की खुलने की आवाज़ ने उसे उसकी गहरी सोच से जगा दिया. दरवाज़ा खुलते hi सुप्रिया उठ कर कड़ी हो गयी. सामने अपना बैग लिए अतुल था, सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे उसे बरसो बाद देख रही हो. क्या सच में ये hi उसका पति था, उसे यकीं सा नहीं हो रहा था.

अतुल दरवाज़ा बंद hi कर रहा था की सुप्रिया जल्दी से भाग कर अतुल के गले लग गयी.

अतुल - ारी... सामन तोह नीचे रखने दो...

सुप्रिया ने अतुल को जोर के पकड़ लिया, और उसकी हलकी सी आवाज़ निकली - नहीं...

अतुल - क्या हुआ... काफी मिस किया क्या मुझे...

सुप्रिया की आँखों से कुछ बूँद ासु बह रहे थे, और वह अपनी कांपती हुई आवाज़ में बोली - हाआनंनं....

अतुल - तुम्ही ने तोह बोलै था मुझे जाने के लिए...

सुप्रिया - अब नहीं बोलूंगी...

अतुल ने भी सुप्रिया को हुग कर लिया. सुप्रिया अपना मुँह अतुल की छाती में छुपाये हुए थी, ताकि अतुल उसकी शकल न देख पाए. पिछली हफ्ते की साड़ी करतूते जैसे उसका पीछा कर रही थी.

अतुल - ाचा चलो बैठते है... अह्ह्ह... थक गया हूँ काफी...

अतुल सुप्रिया को पकडे सोफे की तरफ ले गया और उसे वहां बिठा के जल्दी से अंदर चेंज करने चला गया. सुप्रिया को जो कुछ समय अकेले मिला था उसमे उसके दिमाग में पता नहीं क्या क्या चल रहा था. तारीफ तोह दूर की बात, अतुल ने तोह अछि तरह उसकी और देखा भी नहीं था. फिर उसने अपने आप को समझाया की अभी तोह अतुल थके हुए वापस आये हैं.

थोड़ी देर में अतुल कपडे चेंज करके आ गया - सुप्रिया... तुमने खाना खा लिया या खाना है अभी...

सुप्रिया अपने ासु पोछते हुए - अभी नहीं खाया.. आपका hi वेट कर रही थी... मैं लगा देती हूँ खाना...

सुप्रिया किचन में घुस गयी और खाना लगा के ले आयी. दोनों साथ में बैठ कर खाना खाने लगे और अतुल उसे ग्वालियर की साड़ी खबर देने लगा. सुप्रिया चुप चाप सुन रही थी और बीच बीच में ek-do सवाल कर थोड़ा बहुत पूछ रही थी.

अतुल - बस ऐसा hi रहा कुछ... सब तुमको काफी याद कर रहे थे...

सुप्रिया - हम्म्म्म.....

अतुल - इतना चुप चुप कैसे हो आज...

सुप्रिया - बस ऐसे hi...

अतुल - ाचा... मैं तोह कबसे बोल रहा हूँ... तुम भी तोह कुछ बताया... क्या किया एक हफ्ता अकेले...

सुप्रिया - कुछ ख़ास नहीं... बस घर से ऑफिस... ऑफिस से घर... और क्या करुँगी...

अतुल - राहुल आया था क्या यहाँ?

सुप्रिया इस सवाल से एक डैम से चौंक सी गयी - राहुल!! मैं समझी नहीं कुछ....

अतुल - अरे राहुल आया था क्या यहाँ? या कॉल किया था उसने?

सुप्रिया किसी तरह से अपने आप को संभल रही थी - नहीं... वह क्यों कॉल करेगा....

अतुल - ाचा... मैंने उसे बोलै था की एक बार तुमसे चेक कर ले की सब ठीक है न...

सुप्रिया की जान में जान आयी - ओह अच्छा! नहीं, मेरी बात नहीं हुई, पर वैसे कुछ जरूरत भी नहीं पड़ी...

अतुल - अजीब है... मुझे तोह बोल रहा था की हाँ मैं जा के देख ायूँगा... चलो ऑफिस में पूछूंगा उससे...

सुप्रिया - उसकी बात छोडो न...

अतुल - हाँ.... ारी... ये तुम्हारे गले पर ये कैसा निशाँ है...

अतुल अपने अंगूठे से सुप्रिया के गले पर बने निशाँ को हलके से मसलने लगा. सुप्रिया ने फिर से बड़ी आराम से झूठ बोलै - ये... मच्छर ने काट लिया था...

अतुल - अच्छा... काफी बड़ा निशाँ लग रहा है...

सुप्रिया - हाँ... आजकल मच्छर काफी बड़े हो गए है... बारिश का सीजन है न...

अतुल - हम्म्म... वैसे एक बात बतायु... वहां सब पूछ रहे थे की हम लोगो का बेबी कब होगा...

सुप्रिया - ाचा.... आपने क्या कहा...

अतुल - मैंने कहा... अभी तोह नहीं शायद... सुप्रिया की नयी नयी जॉब लगी है... क्या जल्दी है...

सुप्रिया - हाँ... सही तो कहा आपने...

अतुल - पर सच में तुम्हे काफी मिस किया मैंने... मेरे जाने से पहले भी तोह तुम थोड़ा दूर दूर रह रही थी...

सुप्रिया - सॉरी उसके लिए... मैं अब साड़ी कमी पूरी कर दूंगी...

अतुल ने सुप्रिया का हाथ पकड़ लिया - मैं भी सॉरी हूँ... कोई प्रेशर नहीं है... जब तुम ठीक समझो... आज तोह मैं भी काफी थक गया हूँ...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाया. खाना खाने के बाद अतुल तोह बीएड पर लेटते hi सो गया. और सुप्रिया अपनी खयालो में उलझी हुई थोड़ी देर सोचती रही. शायद उसे hi फिर से अपने आप को बोल्ड बनाना पड़ेगा, जैसे उसने आज सुबह किया था. राहुल की कही हुई बातें उसे अभी तक चुभ सी रही थी. ऐसी सुंदरता क्या फायदा hi क्या जो उसके काम न आ सके. हो न हो, वह राहुल को एक दिन सबक सीखा के hi रहेगी. सोचते सोचते वह भी आखिर सो hi गयी.

अगले दिन दोनों देर से उठे और बाकी दिन अतुल को वापस अपनी नार्मल दिनचर्या में ढलने में लग गया. सुप्रिया भी पूरे दिन अतुल के hi काफी सारे कामो में बिजी सी रही. आज भी उसने अपनी साड़ी थोड़ी टाइट और सेक्सी तरीके से बाँधी ताकि उसका फिगर अचे से दिखे. साड़ी ज्यादा फैंसी तोह नहीं थी पर सुप्रिया की अदाओं से वह इसमें भी हद्द से ज्यादा कामुक दिख रही थी.

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अतुल भी आज उसके इस नए रूप को नज़र अंदाज़ नहीं कर पा रहा था. बार बार उसकी नज़र सुप्रिया की मटकती हुई गांड और कमर पर चली जाती. और उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस कितने कातिलाना लग रहे थे.

सुप्रिया ने उसे अपने आप को ऐसे देखते हुए पुछा - क्या देख रहे हो ऐसे मुझे… आपकी hi बीवी हूँ…

अतुल - जब से वापस आया हूँ कुछ अलग सी लग रही हो..

सुप्रिया अतुल के पास आ कर उसकी गॉड में बैठ गयी - अलग कैसे?

सुप्रिया का ऐसा अचानक आ कर उसकी गॉड में बैठ जाने से अतुल की तोह सिटी पित्ती गम हो गयी थी - उम्म्म्म… बस… क्या कहूं….

सुप्रिया ने हलके से अतुल के चेहरे पर अपनी ऊँगली फेरी - अछि नहीं लग रही क्या?

अतुल - बहुत hi अछि लग रही हो….

सुप्रिया - सच… मैं चाहती हूँ मैं हमेशा hi इतनी अछि लागु…

अतुल - हाँ बिलकुल….

सुप्रिया - तोह फिर चले शॉपिंग और कुछ अचे से कपडे ले आये?

अतुल - चलते है… अगले हफ्ते.. आज तोह थोड़ा टायर्ड हूँ…

सुप्रिया ने अतुल की आँखों में आखें दाल कर देखा - और उस चीज़ के लिए भी टायर्ड हो क्या…

अतुल ने सुप्रिया के होंठों को छूटे हुए उसके गालो पर हाथ फेरा. उसका लुंड बहार निकलने के लिए तड़प रहा था.

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अतुल ने सुप्रिया के चेहरे को अपनी और खींचते हुए उसे हल्का सा किश किया और फिर और तेज़, और फिर जैसे वह उन पर बरस hi पड़ा. जिस सोफे पर सुप्रिया और राहुल ने सेक्स किया था उसी पर वह दोनों एक दुसरे की बाहों में सामने लगे. वैसे सुप्रिया और राहुल ने तोह घर में कई जगह सेक्स किया था तोह उसमे क्या hi बात थी.

सुप्रिया जोर जोर से ाँहें भर रही थी और उसने अतुल का मुँह अपने बूब्स के बीच में घुसा दिया. अतुल भी कई दिनों से इस पल का इंतज़ार कर रहा था और उसने सुप्रिया के ब्लाउज के हुक खोल डेल. फिर उसकी ब्रा को उतारते हुए उसके बूब्स को आज़ाद किया. सुप्रिया के गोर गोर मुलायम बूब्स पर कुछ खरोंचे और निशाँ थे जो उसे पहले तोह याद नहीं थे. पर सुप्रिया काफी उत्तेजित हो कर उसे अपनी और खींच रही थी जिससे उसकी हिम्मत hi नहीं हुई कुछ पूछने की.

सुप्रिया - ओह अतुल… ममममम…. करो न… अचे से…

अतुल - अह्ह्ह्ह…

सुप्रिया का ये रूप देख कर अतुल काफी हैरान सा था पर सब कुछ इतनी जल्दी हो रहा था और वह खुद भी काफी जल्दी में था. जल्दी hi दोनों के कपडे उतर गए थे और वहीँ सोफे पर अतुल सुप्रिया का लुंड सुप्रिया के अंदर था.

सुप्रिया - ममममम…. अह्ह्ह्ह….. और ज़ोर से…. उफ्फफ्फ्फ़

अतुल अपनी पूरी ताकत लगा रहा था - हाँ… अह्ह्ह अह्ह्ह्ह

पर अतुल की पूरी ताकत भी सुप्रिया को वह रहत नहीं दे रही थी जो उसे चाहिए थी. वह अपने आप को अतुल के शरीर से और ज़ोर के चिपका कर अपना अंग अंग अतुल के अंगो से रगड़ने लगी.

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़….

अतुल - ममममम… मेरा होने वाला है…

अतुल सुप्रिया के अंदर अपनी पिछकारी निकल दी. सुप्रिया अभी भी अपने आपको अतुल से चिपकाये हुए थी.

अतुल - ववव...... इतने दिनों बाद... कितना अमेजिंग था न यार.... लगता है मुझे ग्वालियर और जल्दी जल्दी चले जाना चाहिए.

सुप्रिया हलके से बोली - हम्म्म..... हाँ....

अतुल खड़ा होता हुआ सुप्रिया को अकेले सोफे पर छोड़ गया. सुप्रिया कुछ देर सोचती हुई फिरसे बाकी के कामो में लग गयी. शायद एहि उसका जीवन था अब, उसने आप को समझाया. बाकी का दिन भी कुछ ऐसे hi निकल गया.

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अगले दिन से फिर से ऑफिस की भागम भाग शुरू हो गयी. अतुल भी धीरे धीरे अपने ऑफिस के रूटीन में वापस आ रहा था. सुप्रिया ने अपना ड्रेसिंग सेंस थोड़ा सा चेंज कर लिया था, और वह और अचे से सज्ज कर ऑफिस जाने लगी. वह अब कभी कभी शर्ट और पंत या ड्रेस पेहेन कर भी ऑफिस जाने लगी थी. लोगो ने भी नोटिस करना शुरू कर दिया था. सुप्रिया पहले भी काफी क्यूट सी लड़की लगती थी, पर अब इस बदलाव के बाद लोग उस दूसरी नज़रों से देखने लगे थे. सुप्रिया भी लोगो की नज़र पर गौर करती, की लोग उसे कहाँ कहाँ देख रहे थे.

सुप्रिया ने गौर किया की लोगो की नज़र अक्सर उसकी गांड, कमर या बूब्स पर होती. उस दिन तोह वह ऑफिस में आकाश के साथ बैठी थी जो वैसे तोह काफी सीधा सा hi लड़का था, पर उसकी नज़र भी बार बार सुप्रिया के शरीर के हर कोने पर जा रही थी, जैसे वह सुप्रिया का साइज माप रहा हो.

कृति भी अब पहले से खुश हो गयी थी और वह सुप्रिया को अपने और राहुल के बारे में बताती रहती, जिसे सुप्रिया इग्नोर करने की कोशिश करती. जो ख़ुशी शायद कृति के नसीब में थी वह उसके नहीं थी. बहार से तोह सुप्रिया मुस्कुरा रही थी, पर कहीं न कहीं अंदर उसे ये बात खाये जा रही थी.

आखिर कार थर्सडे भी आ गया, जिस दिन उस वाले क्लाइंट से दूसरी मीटिंग थी. आज सुप्रिया अपनी सबसे मेहेंगी ड्रेस पेहेन कर ऑफिस आयी थी. ड्रेस में आगे बटन थे, और स्लीवलेस थी, जिससे उसके गोर कंधे साफ़ दिख रहे थे. उसने अपनी ब्रा की स्ट्राप को ड्रेस की स्ट्राप से क्लिप कर लिया ताकि वह बहार न निकले.

ऑफिस में आज वह थोड़ा सा नर्वस थी, पिछली मीटिंग में माइक ने जिस तरह से उससे बात की थी उसे ाचा नहीं लगा था. पर आज तोह उसके साथ विक्रम होंगे. पर विक्रम सर के साथ इतनी बड़ी कॉल लेना भी काफी स्केरी सा hi लग रहा था. पर शाम होते होते विक्रम सर का अत पता hi नहीं था. सुप्रिया की नर्वस्नेस बढ़ती जा रही थी.

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तभी विक्रम सर की कड़क आवाज़ उसके कान में पड़ी - सुप्रिया... रेडी तो क्लोज थिस आउट...

सुप्रिया ने जैसे hi उन्हें देखा उसके चेहरे पर स्माइल वापस आ गयी, और मैं hi मैं सोचा - थैंक गॉड सर आ गए.

सुप्रिया - हांजी सर... बिलकुल... मैं तोह कबसे आपका वेट कर रही थी...

विक्रम - सॉरी... मैं पहले आ जाता पर ईशा की पेंटिंग्स का एक्सहिबिशन था...

सुप्रिया ने पहले बार विक्रम के मुँह से अपनी वाइफ का नाम सुना था, बल्कि अपनी वाइफ के बारे में कुछ भी कहते सुना था.

सुप्रिया - ओह वाओ.. मां पेंटिंग भी करती है... सो टैलेंटेड..

विक्रम - है है... टैलेंट का तोह पता नहीं बूत हाँ हेर होब्बीएस कीप चेंजिंग... काफी जल्दी बोर हो जाती है वह...

सुप्रिया - ओह ाचा....

विक्रम - मैं 5 मीन्स में आता हूँ... तुम मीटिंग रूम में प्रेजेंटेशन रेडी करो...

सुप्रिया - सूरे सर...

सुप्रिया मीटिंग रूम में पहुंच गयी और प्रेजेंटेशन के लिए अपना लैपटॉप कनेक्ट कर लिया. और फिर साइड वाली सीट पर बैठ गयी. अपनी नर्वस्नेस में वह अपनी हील्स को बार बार ऊपर नीचे कर रही थी. कुछ hi मिनट में विक्रम भी वहां आ गया.

विक्रम - रेडी? टाइम हो गया है... स्टार्ट करते है...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और मीटिंग ों कर दी. दूसरी तरफ स्क्रीन पर 3 लोग किस मीटिंग रूम में एकदम से दिखाई दिए. एक तोह माइक hi था, दूसरा डनण्य और तीसरा कोई और था जिसे सुप्रिया नहीं जानती थी. शायद उनका मैं बॉस होगा.

विक्रम - Hello... गुड मॉर्निंग एवरीवन...

वहां से भी सबने गुड मॉर्निंग की आवाज़ निकली, जबकि इंडिया में तोह शाम हो रही थी.

वह तीसरा आदमी बोलै - मर. विक्रम... नीस तो मीट यू..

विक्रम - नीस तो मीट यू तू मर. जेम्स...

मर. जेम्स - फर्स्ट ऑफ़ आल, ी वांटेड तो अपोलॉगीज़े ों बेहल्फ़ ऑफ़ माय टीम मर विक्रम. ी हद no आईडिया हु वे वेरे डीलिंग विथ. यू फादर इन लॉ...

विक्रम - मर. जेम्स लेट में स्टॉप यू राइट तेरे. ी इंटेंशनली दीद नॉट वांट एनीवन तो क्नोव अबाउट तहत, अस थिस कंपनी इस नॉट रिलेटेड तो माय फादर इन लॉ. सो ी वांट यू तो ट्रीट उस ों मेरिट जस्ट लिखे अन्य इतर कंपनी. ी जस्ट वांट तो मेक सूरे वे गेट ा फेयर चांस लिखे एनीवन ेल्स.

सुप्रिया ने देखा की विक्रम सर कितनी कॉन्फिडेंटली बोल रहे थे, और दूसरी और माइक का चेहरा कितना सदा हुआ था. शायद सुप्रिया को पूरी मीटिंग में कुछ बोलना hi न पड़े.

मर. जेम्स - ओफ़्कौर्से, ी अंडरस्टैंड. सो, ी स्पोक तो डनण्य एंड माइक, हु हैवे बीन वर्किंग विथ योर टीम ों थिस, एंड थे हैवे ा बिट ऑफ़ ा डीफ्रिंग व्यू. मय्बे िफ़ यू कैन टेक में थ्रू योर प्रपोजल, आईटी वोउल्ड हेल्प में मेक ा डिसिशन.

विक्रम - सूरे... ी विल लेट मस. सुप्रिया हेरे टॉक थ्रू थे डिटेल्स...

सुप्रिया ने हैरान होते हुए विक्रम सर की और देखा. उसे तोह लगा था वही सब बोल देंगे, आखिर इतनी बड़ी डील जो थी. पर विक्रम ने सुप्रिया को मुस्कुराते हुए देखा और बोलने का इशारा किया. सुप्रिया सारा प्रपोजल अचे से समझने लगी, प्रोडक्ट के बारे में, प्राइसिंग के बारे में, क्वालिटी के बारे में सब कुछ. मर. जेम्स भी ध्यान से सुप्रिया की बात सुन रहे थे. जैसे जैसे सुप्रिया बोल रही थी, उसका कॉन्फिडेंस और बढ़ता जा रहा था.

सुप्रिया - सो सर... थिस इस व्हाट आईटी आल इस...

मर. जेम्स - मस. सुप्रिया ी मस्ट से यू अरे वैरी थोरौघ इन योर प्रेजेंटेशन. थिस इस रियली एक्सीलेंट.

सुप्रिया - थैंक यू सर...

मर. जेम्स ने अपने दोनों और बैठे डनण्य और माइक से पुछा - यू गाइस हैवे अन्य क़ुएस्तिओन्स...

डनण्य - No, ी ऍम गुड. लिखे ी साइड बिफोर, ी थिंक थिस सिम्स गुड तो में...

माइक - यस, फाइन... ी थिंक ी ऍम नॉट एंटीरेलय कन्विंस्ड बूत...

मर. जेम्स - ी थिंक इतस गुड एनफ तहत वे कैन स्टार्ट समथिंग. मर. विक्रम, येह ी थिंक वे अरे रेडी तो सिग्न थे कॉन्ट्रैक्ट, बूत आईटी मिगहत बे ा स्मॉलर आर्डर टिल वे गेट माइक कम्फर्टेबले. ी होप यू अंडरस्टैंड.

विक्रम - अब्सोलुतेल्य. व्हाई डोंट वे दो ओने थिंग, लेटस प्लान फॉर माइक एंड डनण्य तो के ओवर तो इंडिया एंड वे कैन शो थम हाउ आवर प्रोडक्ट्स अरे मेड. एंड तहत मिगहत गेट थम मोरे कम्फर्टेबले.

मर. जेम्स - ग्रेट आईडिया! वे कैन वर्क आउट समथिंग तेरे. सेंड ओवर थे पेपरवर्क फॉर नाउ, एंड वे कैन प्रोसीड.

विक्रम - साउंड्स गुड. हैवे ा ग्रेट डे.

दूसरी और से भी सबने bye बोलै और कॉल ख़तम हो गयी. सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था की आखिर कार उन्हें वह आर्डर मिल गया था. छोटा hi सही अभी पर इसे बड़ा करना मुश्किल नहीं होगा. सुप्रिया ने विक्रम की और देखा और उनका चेहरा पद पाना मुश्किल था, पता नहीं लग रहा था वह खुश थे या नहीं.

विक्रम अपनी सीट से खड़ा हुआ और बहार की और देखने लगा. सुप्रिया भी कड़ी हो गयी. तभी विक्रम से ज़ोर से "एसससससस" बोलै, और ये सुन कर सुप्रिया के चेहरा पर बड़ी सी स्माइल आ गयी. आखिर कार आज उसे पता चल गया की विक्रम सर भी इंसान hi थे. विक्रम सुप्रिया की और मुदा और दोनों ने स्माइल करते हुए एक दुसरे को देखा. और फिर पता नहीं सुप्रिया को क्या हुआ उसने विक्रम की और तेज़ी से कदम लेते हुए उन्हें हुग कर लिया. सुप्रिया का शरीर काफी तेज़ी से विक्रम से टकराया और विक्रम ने उसे पकड़ते हुए संभाला.

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सुप्रिया ने अपने बाहें विक्रम की गले पर डाले हुए उसे पकड़ा हुआ था. फिर एक डैम से विक्रम ने सुप्रिया की कमर पर हाथ रखते हुए उसे उठाते हुए एक्ससिटेमेंट में पूरा घुमा दिया. सुप्रिया एक डैम से हक्की बक्की सी रह गयी. उसके चेहरा और बाल विक्रम की छाती पर थे, और उसके बूब्स भी विक्रम के शरीर से छू रहे थे. सुप्रिया ने अपने आप को सँभालने के लिए विक्रम को और ज़ोर से पकड़ लिया. और जैसे hi विक्रम ने उसे नीचे उतारा, उसने आप हाथ पीछे खींच लिए.

दोनों एक दुसरे के काफी पास खड़े थे, और सुप्रिया नीचे देखते हुए थोड़ा पीछे हुई. उसके गाल शर्म से लाल थे - सॉरी सर..... मैं कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड...

विक्रम - ी थिंक एक्ससिटेमेंट की बात hi है न... आल योर हार्ड वर्क ओवर थे लास्ट फ्यू मोनथस.... वेल दोने...

सुप्रिया हलके से बोली - थैंक यू सर...

विक्रम ने सुप्रिया को तैसे करते हुए कहा - वैसे तुम उतनी हलकी नहीं हो जितनी लगती हो...

सुप्रिया का मुँह हल्का सा बन गया - तोह आप कह रहे है मैं मोती हूँ?

विक्रम - मैंने ये कब कहा....

सुप्रिया - अभी तोह कहा...

विक्रम - ओह गॉड.. तुम साड़ी लडकियां... पता नहीं क्या सुनती हो...

सुप्रिया हस्ते हुए - और आप सारे मर्द, पता नहीं क्या बोलते हो...

दोनों हसने लगे. सुप्रिया थोड़ा सा झेपते हुए अपना लैपटॉप और बाकी सामन समेटने लगी.

विक्रम - सो... हाउ अरे यू गोइंग होम...

सुप्रिया - उम्... मैं अपने हस्बैंड से चेक करती हु...

विक्रम - ी विल ड्राप यू होम...

सुप्रिया - नहीं सर... इतस ok... मैं मैनेज कर लुंगी...

विक्रम - No सर... बोलै था न... चलो इतस लेट.... ी ऍम नॉट लिसनिंग तो एनीथिंग... गेट योर स्टफ एंड वे विल जो...

सुप्रिया विक्रम को किस तरह मन करती, तोह उसने हाँ में सर हिलाया और फिर बहार अपना बैग ले लिया. उसने देखा की साहिल सर अभी भी अपने केबिन में बैठे थे. इतने सुप्रिया अपने बैग में सामान रख रही थी, विक्रम साहिल के रूम में जाकर उससे बात करने लगा.

सुप्रिया बैग कंधे पर टांग कर रेडी थी और वह विक्रम के आने का इंतज़ार करने लगी. इस बीच उसने अतुल को भी मैसेज दाल दिया की उसे ऑफिस से कोई घर ड्राप कर देगा. विक्रम थोड़ी देर में बहार आया और सुप्रिया को चलने के लिए रेडी देखा.

विक्रम - चले?

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और विक्रम के साथ नीचे चल पड़ी. कुछ महीने पहले जब विक्रम सर ने उसे घर छोड़ा था, उसके इलावा वह कभी विक्रम सर के साथ कहीं घर नहीं गयी थी. उसे समझ भी नहीं आ रहा था वह क्या बोले. दोनों काफी चुप से hi थे. वह गाडी पर पहुंचे और सुप्रिया इस बार आगे की सीट पर बैठ गयी. अब तक सुप्रिया जितनी भी गाड़ियों में बैठी थी, ये गाडी सबसे ज्यादा शानदार थी अंदर से. विक्रम ने गाडी चलना शुरू किया और सुप्रिया चुप चाप निर्वसली बैठी रही.

आखिर कार उसने hi हिम्मत करके चुप्पी को तोडा - फाइनली डील क्लोज हो गयी...

विक्रम - हम्म्म.. हाँ... आल थैंक्स तो यू...

सुप्रिया - No सर... ी मैं विक्रम सर... ी मैं विक्रम...

विक्रम हस्ते हुए - रिलैक्स... तुम इतनी नर्वस क्यों रहती हो हमेशा...

सुप्रिया - बस वह आपसे थोड़ा डर सा लगता है...

ओह गॉड, पता नहीं वह अपनी नर्वस्नेस में क्या क्या बोले जा रही थी.

विक्रम - मुझसे क्यों डर लगता है? ऐसा क्या किया मैंने...

सुप्रिया हड़बड़ाते हुए - नहीं... आपने कुछ नहीं किया... सॉरी वह मेरी hi प्रॉब्लम है...

विक्रम - अभी तोह कुछ देर पहले काफी कॉन्फिडेंस था तुम में... जब वह प्रेजेंटेशन दे रही थी...

सुप्रिया - हम्म्म... पता नहीं क्या हो जाता है मुझे...

विक्रम - ी थिंक तुम्हारा ये डर निकलना hi पड़ेगा...

सुप्रिया - कैसे?

विक्रम - सो, अभी ये पेपरवर्क और आर्डर फ़िनलिज़तिओन में ी वांट तो बे इन्वोल्वेद इन एव्री स्टेप. सो, लेटस दो ओने थिंग. व्हाई डोंट यू के तो थे डल्फ सेण्टर ऑफिस 2 और 3 डेज ा वीक.

सुप्रिया - कौनसे ऑफिस सर?

विक्रम - अगेन सर! वो मेरी वाइफ के फॅमिली बिज़नेस का मैं ऑफिस है. सो, यू कैन सीट एंड वर्क तेरे एंड वे कैन जो थ्रू थिंग्स अस नीडेड.

सुप्रिया - Ok सर... पर साहिल सर...

विक्रम - साहिल को मैं बोल दूंगा...

सुप्रिया - वहां तोह काफी लोग होंगे न....

विक्रम - हाँ... क्लोज तो 1000 स्टाफ इन तहत ऑफिस...

सुप्रिया सुनते hi घबरा सी गयी थी - ओह... इतना बड़ा ऑफिस... विक्रम... मैं अपने वाले ऑफिस से hi काम कर लू क्या...

विक्रम उसकी घबराहट को समझ गया था - आईटी विल हेल्प यू सुप्रिया... और देखो मैं तोह हर हफ्ते आता नहीं न वहां... सो बस जब तक ये डील एक्सेक्यूटे नहीं हो जाती तब तक, से ा मंथ और सो...

सुप्रिया हलकी सी आवाज़ में बोली - सूरे सर... पर वहां तोह मैं किसी को जानती भी नहीं... यहाँ तोह कृति है, आकाश है, साहिल सर भी हैं hi, अब तोह उनसे भी डर नहीं लगता.

फिर से पता नहीं क्यों वह अपने मैं की बात को इतना खुल कर बोल रही थी.

विक्रम भी उसकी मासूम सी बात सुन कर स्माइल कर रहा था - डोंट वोर्री... मैं हूँ न... ी विल मेक सूरे योर डेस्क इस क्लोज तो माय ऑफिस... ट्रस्ट में, यू विल लिखे आईटी...

सुप्रिया - Ok सर...

इन्ही बातों में सुप्रिया का घर भी आ गया, और सुप्रिया विक्रम को bye करते हुए उतर गयी. गेट पर इक़बाल नहीं था, जिससे सुप्रिया को थोड़ी सी निराशा सी हुई. उससे 2 मिनट बात करके भी उसे पता नहीं क्यों ाचा सा लगता था. वह भी बिलकुल उसकी तरह एक सीधा सा इंसान था इस दुनिया में. सुप्रिया धीमे कदमो से ऊपर पहुंची और अतुल पहले से hi घर पर था.

अतुल - आ गयी...

सुप्रिया ने हलकी आवाज़ में कहा - हाँ...

अतुल - क्या हुआ, इतना लौ क्यों साउंड कर रही हो.... तुम्हारी उस मीटिंग का क्या हुआ?

सुप्रिया - मीटिंग अछि गयी, हमें आर्डर मिल गया...

अतुल - ओह वाओ... कोंग्रटुलतिओन्स... फिर भी इतना लौ...

सुप्रिया अभी भी दुसरे ऑफिस जाने के बारे में सोच रही थी - हम्म्म... बस वह अब कभी कभी विक्रम सर के मैं ऑफिस जाना पड़ेगा...

अतुल - ओह ाचा... मैं गया हूँ वहां एक बार... बहुत ाचा ऑफिस है... और यहाँ से थोड़ा पास भी है...

सुप्रिया - ाचा...

अतुल - हाँ.... काफी बड़ी जगह है...

सुप्रिया - उम्म्म्म... फिर तोह मुझे प्लीज शॉपिंग करवा देना इस वीकेंड... मैं ऐसे पुराने कपड़ो में नहीं जयुंगी वहां...

अतुल - ाचा बाबा... इतनी टेंशन क्यों लेती हो...

दोनों ने और बातें करते हुए खाना खाया और फिर सो गए. अगले दिन ऑफिस में सुप्रिया ने कृति को डील के बारे में और दुसरे ऑफिस जाने के बारे में बताया. कृति से उसे पता चला की वह कई बार वहां जाती है, अगर विक्रम से कोई अर्जेंट काम होता है तोह. उससे वहां के लोगो के बारे में थोड़ा बहुत पता चला, जैसे विक्रम की नकचढ़ी सेक्रेटरी - दिशा. और बाकी लोग भी उस ऑफिस में थोड़े से अजीब से hi थे. उनका ऑफिस थोड़ा ज्यादा hi सीरियस सा था, जबकि यहाँ वाला फिर भी काफी रिलैक्स्ड था. ये सुन कर तोह सुप्रिया और भी टेंशन में आने लगी थी. पर अब विक्रम को हाँ बोल दिया था तोह वह पीछे कैसे हैट सकती थी.

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वीकेंड आते hi सुप्रिया अतुल को लेकर मॉल पहुंच गयी. वह पहले से hi कुछ अचे से नए कपडे खरीदना चाहती थी पर अब ये नए ऑफिस वाली बात से तोह ये बिलकुल रेक्विरेमेंट hi बन गयी थी. मॉल में सुप्रिया ने जीन्स और एक टॉप पहने हुआ था और हर आदमी की नज़र जैसे उस पर hi रुक रही थी. सुप्रिया का टॉप थोड़ा सा ऑफ शोल्डर था, तोह उसकी गोर गोर कंधे साफ़ दिख रहे थे. कई मर्द पलट पलट कर उसे देख रहे थे. ये बात अतुल को भी दिख रही थी, पर वह अब लोगो की नज़रों को कैसे रोकता. उसकी सुप्रिया लगी hi इतनी सेक्सी रही थी.

सुप्रिया आईने में ड्रेस लगा कर देख रही थी - अतुल... मैं थोड़ी मोती हो गयी हूँ क्या?

अतुल - नहीं... इतनी मोती तोह नहीं हुई हो...

सुप्रिया ने अतुल को पलट कर देखा - मतलब मैं थोड़ी तोह मोती हो गयी हु...

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अतुल - ारी नहीं बाबा... तुम्हारे चब्बी चीक्स वापस आ गए है बस.. और उनमे तुम काफी अछि लगती हो...

सुप्रिया को इस सब से विक्रम को की गयी हुग याद आ गयी और किस तरह से उसने उसे उठाया था. ये सोचते hi उसके गाल शर्म से लाल हो गए थे.

सुप्रिया ने कई ड्रेसेस तरय करि और 4-5 नयी ड्रेसेस खरीद ली. वह खुश थी की उसे जैसे कपडे चाहिए थे उसे मिल गए थे. पूरी तरह से तोह नहीं, पर जो भी था एहि था. अब वह कृति की तरह महंगे महंगे कपडे तोह खरीद नहीं सकती थी न.

दोनों ने वहीँ मॉल में फ़ूड कोर्ट में खाना खाया और बहार की और चले hi थे की अचानक उसके कंधे पर किसी का हाथ पड़ा, उसने चौंक कर पीछे पलट कर देखा तोह एक बूढ़ी सी औरत थी, उसने इसी कहीं तोह देखा था, पर कहाँ उसे याद नहीं था.

औरत - मैंने तुझे दूर से hi पहचान लिया था. आज तोह काफी अलग सी लग रही है...

सुप्रिया - जी.. आप.... मैंने पहचाना नहीं...

औरत - ारी मैं भूल गयी थी तेरा दिमाग कमज़ोर है इतना... तुझे याद कैसे रहेगा...

सुप्रिया को एक डैम से याद आया है की ये कौन थी, और उसकी आँखें शॉक में बड़ी हो गयी और मुँह खुला का खुला रह गया. ये तोह वही औरत थी जो उसे मस्जिद में मिली थी. ये क्या मुसीबत गले पद गयी. थैंक गॉड, अतुल थोड़ा आगे थे, और साथ नहीं खड़े थे.

औरत - क्या हुआ... ऐसी शकल क्यों बना ली... याद आयी मैं...

सुप्रिया - जी... वह...

औरत - और तेरा मर्द कहाँ है... वह तोह मुझे दिखा था एक बार और, पर तू नहीं दिखी थी..

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की वह क्या बोले. इतने में अतुल सुप्रिया को उस औरत से बात करते देख वहां आ गया.

औरत ने अतुल की और देखा - ये कौन है... तेरा भाई?

अतुल चौंकते हुए - मैं इसका हस्बैंड हूँ.... आप कौन हो...

औरत - क्या? ये तेरे शोहर कैसे हो सकता है... तेरा वाला तोह लम्बा छौड़ा है...

अतुल - क्या बोल रहे हो...

सुप्रिया - मेरे ख्याल से आपको कोई गलत फेहमी हुई है... मैं वह नहीं हु जो आप सोच रहे हो...

औरत - मैं कोई शकल कभी नहीं भूलती...

अतुल ने सुप्रिया की और मुँह बना कर देखा - कौन है ये? क्या है ये सब?

सुप्रिया ने अपने कंधे उचकाए - मुझे नहीं पता... मैं नहीं जानती...

औरत - या शोहर बदल लिया तूने... या खुदा... क्या ज़माना आ गया है... इससे तोह तेरा पहले वाला ाचा था...

सुप्रिया ने अतुल का हाथ पकड़ते हुए कहा - चलो यहाँ से, इनका दिमाग मुझे सही नहीं लग रहा...

औरत - तेरे जैसा दिमाग नहीं है मेरा... नाम याद करने मुझे तेरे शोहर का.... इक़बाल... हाँ इक़बाल नाम था उसका...

अतुल एक डैम रुक सा गया, इक़बाल तोह उनके वॉचमन का नाम था. उसने उझान भरी नज़र से सुप्रिया की और देखा.

सुप्रिया ने खीजते हुए कहा - चलो न यहाँ से...

दोनों उस औरत से दूर चलने लगे. वह औरत पीछे से उनको कुछ कुछ बोले जा रही थी. किसी तरह से वह अपनी कार पर पहुंचे. अतुल अभी भी काफी कन्फ्यूज्ड सा था की ये सब क्या था. दोनों कार में बैठे, सुप्रिया खिड़की से बहार देख रही थी.

अतुल - ये सब क्या था...

सुप्रिया - मुझे क्या पता, मुझसे क्या पूछ रहे हो...

अतुल - वह तुम्हे कैसे जानती थी....

सुप्रिया - मैं नहीं जानती उसे, कोई कन्फूसिओं होगा उसे...

अतुल - पर इक़बाल तोह हमारे वॉचमन का नाम है न...

सुप्रिया - दुनिया में बस एक वही इक़बाल है?? वह औरत मुझे पागल लग रही थी, क्या उसकी बातों के बारे में सोच रहे हो...

अतुल - हम्म्म... हाँ... शायद में कुछ ज्यादा hi सोच रहा हूँ...

सुप्रिया - हाँ इतनी कॉमन सी तोह शकल है मेरी... शायद कोई और होगी मेरी जैसी...

अतुल - इतनी कॉमन भी नहीं है तुम्हारी शकल, जो देखे वह भूल नहीं सकता...

सुप्रिया - ाचा अभी आप तोह रोड पर फोकस करो... मुझ पर नहीं...

अतुल कार चलता हुआ घर जाने लगा. सुप्रिया सोच में पद गयी थी की आज तोह शायद वह बाल बाल बची थी. उसे लग तोह नहीं रहा था की अतुल को कोई शक होगा. पर अतुल के दिमाग में कई साड़ी बातें बस दौड़ी जा रही थी.
 
अपडेट 52

सितम्बर का महीना ऑलमोस्ट निकल चूका था. सुप्रिया को विक्रम के नए ऑफिस जाते हुए 3-4 हफ्ते हो चुके थे.

पहले दिन तोह सुप्रिया वहां जाने में काफी ज्यादा नर्वस थी. वह सुबह सुबह hi वहां पहुंच गयी थी और रिसेप्शनिस्ट ने उसे विक्रम सर के केबिन के बहार पंहुचा दिया था, जहाँ उसे विक्रम सर की सेक्रेटरी दिशा मिल गयी थी.

जैसे कृति ने कहा था, सच में वह काफी ज्यादा खड़ूस सी थी. आगे में शायद वह सुप्रिया के बराबर hi होगी या फिर कुछ साल बड़ी, पर उसका ऐटिटूड तोह बाप रे बाप झेलना hi मुश्किल था. वह सुप्रिया को बिना देखे उससे बात कर रही थी, और उसकी टोन भी काफी चुभने वाली थी. उसने पहले दिन सुप्रिया को विक्रम सर के केबिन से बहुत दूर सीट दी, जहाँ उसकी पापा के उम्र के लोग बैठ कर काम रहे थे.

विक्रम सर की एक्सपोर्ट वाली कंपनी में तोह ज्यादातर सब यंग लोग hi थे, पर यहाँ मामला कुछ अलग hi था, ज्यादातर लोग काफी बड़ी आगे के थे और काफी सीरियसली काम कर रहे थे. कोई हसी मजाक नहीं. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे वह यहाँ आ कर फास गयी थी. विक्रम सर भी कहीं दिख नहीं रहे थे, सुप्रिया सोच रही थी की शायद उसे वापस अपने ऑफिस चले जाना चाहिए. पर उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही था वहां से उठे की.

जैसे hi विक्रम सर दिन में ऑफिस पहुंचे, उन्हें सबसे पहले सुप्रिया के बारे में पुछा और सीधे उसके डेस्क पर पहुंच गए. और फिर उसे अपने साथ लेते हुए अपने केबिन में ले गए. सुप्रिया केबिन में अंदर जाते हुए दिशा को घूर रही थी, और दिशा को देख ऐसा लग रहा था की जैसे वह सुप्रिया के अंदर जाने से खुश नहीं थी.

काफी बड़ा केबिन था उनका, बहार से कोई देख नहीं सकता था की अंदर क्या चल रहा है और एकदम साउंड प्रूफ. खिड़की के पास एक बड़ा सा डेस्क था, और सामने कुछ चेयर्स. कमरे के दूसरी और एक सोफे सेट था और साथ में एक कॉफ़ी टेबल. केबिन की डेकोरेशन भी काफी अचे से हो राखी थी. डेस्क पर कुछ फोटो फ्रेम्स थे, जिसमे सुप्रिया को पहली बार विक्रम सर की वाइफ दिखाई दी. काफी सुन्दर थी वह भी.

विक्रम - सॉरी सुप्रिया... मुझे आने में थोड़ी देर हो गयी... बैठो बैठो...

सुप्रिया - It's ok सर... यहाँ तोह सर बोल hi सकती हु न... काफी फॉर्मल सा एनवायरनमेंट लग रहा है...

विक्रम हस्ते हुए - नहीं, तुम मुझे यहाँ भी विक्रम बुला सकती हो.

सुप्रिया - आपकी वह सेक्रेटरी ने तोह मुझे दूर कहीं बिठा दिया था, मुझे नहीं लगता वह मुझे लिखे करती है...

विक्रम - कौन दिशा? अरे नहीं, तुम उसकी शकल पर मत जायो. और इसमें लिखे या दिस्लिके की कोई बात नहीं, उसका काम है मेरा टाइम मैनेज करना, जो वह काफी अचे से करती है...

सुप्रिया - विक्रम.... मैं यहाँ कम्फर्टेबले फील नहीं कर रही हूँ... मैं वापस अपने ऑफिस चली जायु क्या?

विक्रम - गिव आईटी ा डे और तवो, ठीक लगेगा... और वैसे भी हमेशा के लिए तोह नहीं आना... वेट ओने सेकंड...

विक्रम ने एक फ़ोन पर एक बटन दबाया और दिशा अंदर आ गयी.

दिशा ने काफी कॉन्फिडेंटली कहा - यस विक्रम, तेल्ल में...

विक्रम - दिशा... यू मेट सुप्रिया थिस मॉर्निंग, सो इनको मेरे ऑफिस के ठीक बहार सीट दे दो...

दिशा - वहां तोह सीट अवेलेबल नहीं है... तेरे इस आलरेडी...

विक्रम - दिशा... ी नेवर हेअर no फ्रॉम यू राइट... ी क्नोव यू विल मैनेज आईटी सोमेहो...

दिशा - Ok विक्रम...

दिशा ये बोल कर केबिन से बहार चली गयी.

विक्रम - शी विल टेक केयर ऑफ़ आईटी... तुम वहां से वर्क कर लो... एंड मैं हफ्ते में 2 दिन यहाँ नहीं होता सो ी विल लेट यू क्नोव एंड उन दिन तुम दुसरे वाले ऑफिस चली जाना... ठीक है?

सुप्रिया - ठीक है...

विक्रम - Ok, लेटस मीट उप ात लंच एंड वे कैन जो ओवर थे प्रोग्रेस एंड पेपर वर्क.

सुप्रिया ने ok बोलै, और केबिन से बहार आ गयी. दिशा वहीँ बहार अपने डेस्क पर बैठी थी और उसका चेहरे पर जरा सी भी स्माइल नहीं थी.

बिना अपना सर उठाये, दिशा ने कृति को पास में एक डेस्क की तरफ ईशार किया - वो वाला डेस्क तुम्हारा है... देख पर फ़ोन है एंड बाकी कुछ चाहिए तोह लेट में क्नोव.

सुप्रिया ने थैंक यू बोलै और पास के डेस्क पर बैठ कर काम करने लगी. आर्डर चाहे छोटा दिख रहा था पर काम तोह फिर भी काफी सारा था. सुप्रिया ने इतने महीनो में काम करके साड़ी चीज़े अचे से सीख ली थी पर अभी भी काफी कुछ था जो उसे सीखना बाकी था. सुप्रिया इस अनजान सी जगह पर बार बार इधर उधर देखती. सब लोग अपना सर नीचे झुकाये अपने काम में लगे थे. दिशा के पास हर कुछ मिनट में फ़ोन कॉल्स आ रहे थे, और वह उन्हें काफी सलीक़े से मैनेज कर रही थी. बीच बीच में लोग विक्रम के केबिन में जाते. जहाँ सुप्रिया बैठी थी वहां से दरवाज़ा खुलने पर उसे विक्रम सर हलके से दिख रहे थे. वह सच में काफी बिजी से लग रहे थे.

लंच टाइम भी बस आ hi गया था. सुप्रिया अपना लंच का डब्बा घर से लायी थी, पर उसे आदत थी कृति के साथ हसी मजाक करते हुए लंच करने की. यहाँ पता नहीं वह कैसे अकेले लंच करेगी. विक्रम सर ने शायद ऐसे hi बोल दिया की वह लंच पर मिलेंगे पर उनके साथ लंच करने से तोह ाचा वह अकेले अपने डेस्क पर hi कर ले. वह इस सब के बारे में सोच hi रही थी की विक्रम का केबिन का दरवाज़ा खुला.

विक्रम ने अपने दरवाज़े से आवाज़ दी - सुप्रिया के... लेटस हैवे लंच...

सुप्रिया झिझकते हुए कड़ी हुई और अपना लंच बॉक्स ले कर अंदर चली गयी. एक और लंच का डब्बा पहले से कॉफ़ी टेबल पर रखा हुआ था. सुप्रिया संकोच में कड़ी हुई थी, और विक्रम सोफे पर बैठा हुआ था.

विक्रम - के... सीट....

सुप्रिया हलके से सोफे पर बैठ गयी और अपना लंच बॉक्स वहां रख दिया. उसे अपना लंच बॉक्स खोलने में काफी अजीब सा लग रहा था. उफ्फ्फ.. वह यहाँ क्यों फास गयी थी.

विक्रम - स्टार्ट करो न...

सुप्रिया - एक्चुअली मैं बहार hi खा लू क्या लंच?

विक्रम - यहाँ क्या प्रॉब्लम है?

सुप्रिया - उम्म्म....

विक्रम - Ok लेट में चेक तुमने क्या बनाया है...

इससे पहले सुप्रिया कुछ बोलती या करती, विक्रम ने सुप्रिया का लंचबॉक्स जल्दी से उठाया और उसे खोला. अंदर रोटी और सब्जी थी, जो विक्रम के अचे से लंच के आगे काफी सिंपल सी थी.

विक्रम - वाओ... स्मेल्स डिलीशियस...

सुप्रिया - आपके खाने के आगे तोह ाचा नहीं होगा...

विक्रम ने अपना लंच सुप्रिया की और कर दिया - स्वैप कर लेते है लंच...

सुप्रिया जल्दी से बोली - नहीं नहीं.... मैं इतनी अछि कुक नहीं हु... ी ऍम सूरे आपकी वाइफ काफी बेटर कुक करती होगी...

विक्रम हस्ते हुए - ईशा कुक नहीं करती, उसके पास कहाँ टाइम है इस सब के लिए. ये सब तोह कुक बनाते है..

सुप्रिया - ओह ाचा... फिर तोह और भी ाचा होगा...

विक्रम - ी मिस होमली सिंपल थिंग्स.. लेट में तरय...

विक्रम ने रोटी का गुस्सा तोडा और सब्जी से लगते हुए अपने मुँह में रखा. सुप्रिया ने आखें मीचते हुए बंद सी कर ली, विक्रम सर उसका बनाया हुआ खाना खा रहे थे, पता नहीं कैसा बना होगा. अगर उसे पता होता की विक्रम सर उसका खाना खाएंगे तोह वह कुछ ाचा सा बना लेती.

विक्रम - वाओ... अमेजिंग.... बिलकुल अपनी माँ के खाने की याद आ गयी.

सुप्रिया - इतना भी ाचा नहीं होगा.... आप बस ऐसे hi बोल रहे है न...

विक्रम - No no.... सच में...

सुप्रिया तारीफ से ब्लश कर रही थी - थैंक यू...

विक्रम - ये लो... तुम आज मेरा खाना खायो... क्यूंकि तुम्हारा लंच तोह मैं hi खा रहा हूँ...

विक्रम ने अपना लंच सुप्रिया के ठीक सामने कर दिया. सुप्रिया ने हिम्मत करके उसे खोला और उसमे एक कुछ बीन्स जैसा कुछ tha...aur साथ में हलके हलके ब्राउन दाने.. जो उसने पहले नहीं देखे थे.

सुप्रिया - ये वेजीटेरियन है न... मैं वेजीटेरियन हूँ...

विक्रम - हाँ... ये पूरा वेजीटेरियन है... बीन्स एंड क्विनोआ का सलाद है... ी ऍम टोल्ड की ये हेल्थ के लिए ाचा है...

सुप्रिया मुस्कुराते हुए बोली - ओह अच्छा.... तोह आप फिर से कह रहे हो की मुझे अपनी डाइट पर कण्ट्रोल करना चाहिए...

विक्रम भी मुस्कुराया - बिलकुल करना चाहिए... पर तुम जैसी हो परफेक्ट हो...

सुप्रिया शर्मा के नीचे देखने लगी और हिम्मत करके लंच का एक बाईट लिया. उसने ये सब पहले तोह नहीं खाया था, पर टेस्टी था. धीरे धीरे उसने और बिट्स ली और वह विक्रम के साथ खाना खाने की झिझक दूर होती गयी. दोनों आपस में थोड़ा बहुत हसी मजाक भी करने लगे, जिससे सुप्रिया को अपने ऑफिस की कमी महसूस नहीं हुई.

सुप्रिया - आप काफी फनी हो... मुझे नहीं पता था...

विक्रम - ऐसा क्या? ी थॉट एवरीवन कनेव की मैं फनी हु.... और तुम... तुम मिस झाँसी की रानी... हमेशा इतना सीरियस hi क्यों रहती हो, जैसे जंग करने चली हो...

सुप्रिया के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी - पता नहीं क्यों.....

विक्रम - मेरी कंपनी तुम्हे भी फनी बना देगी...

सुप्रिया - वैसे आपको खाने में क्या क्या पसंद है? मैं अगली बार कुछ और ाचा बना कर ले आयूंगी...

विक्रम - ी ऍम सूरे तुम जो भी बनाओगी ाचा hi होगा...

सुप्रिया ने झेपते हुए नीचे देखा और वह अपना लंच फिनिश करने के बाद बहार चली गयी.

इस बात को चार हफ्ते हो चुके थे और सुप्रिया अब धीरे धीरे विक्रम के साथ और भी कम्फर्टेबले होती जा रही थी. अब तोह उसे इस ऑफिस में आने की एक्ससिटेमेंट सी रहती. वह रोज़ रात को सोचती की वह विक्रम के लिए क्या बना कर ले जाये. और फिर अचे से कपडे पेहेन कर तैयार हो कर वहां पहुंच जाती.

विक्रम सर पूरे दिन में उसे 2-3 बार तोह मिल hi जाते थे, और उनकी बातें बेहद hi इंटरेस्टिंग होती थी. उसका काम के प्रति पर्सपेक्टिव भी काफी यूनिक और नॉलेज भरा होता था. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की वह उनसे काफी कुछ सीख रही है. विक्रम सर उसकी बात भी बहुत ध्यान से सुनते, और वह दोनों काम और घर और इधर उधर की बातें करते रहते. सुप्रिया के चेहरे पर उसकी खोयी हुई स्माइल वापस आ गयी थी.

इस बात की तरफ अतुल का भी ध्यान गया था. बहरी रूप से तोह उन दोनों के बीच सब ठीक hi था. सुप्रिया और उसके बीच में हफ्ते में ek-do बार सेक्स हो जाता, पर खुद उसकी तरफ से hi उनके रिलेशनशिप में बहुत ज्यादा एफर्ट नहीं था. उनके बीच का सेक्स भी काफी जल्दी पूरा हो जाता जो सुप्रिया को अधूरा सा महसूस करता. अतुल के मैं मैं अभी भी कई साड़ी बातें चल रही थी और वह सुप्रिया की हर हरकत पर जैसा अब उसका ध्यान होता. जब उसे मौका लगता वह सुप्रिया का फ़ोन चेक कर लेता, पर उसमे उसे कुछ भी ऐसा वैसा नहीं मिलता.

दूसरी तरफ सुप्रिया इस बात से अनजान अपने काम में ध्यान लगाए हुई थी. विक्रम के साथ काम करते करते वह और भी कुछ ऑर्डर्स के काम में लग गयी थी और अब उसका इनपुट शुरू से लेकर एन्ड तक हर चीज़ में होता था. पर अभी मैं उसका मैं जिम्मा वह उस वाला आर्डर पूरा करना था.

आज ट्यूसडे का दिन था, और सुप्रिया विक्रम के केबिन में बैठी लंच कर रही और दोनों के बीच हसी मजाक चल रहा था.

सुप्रिया - विक्रम... आप एक चीज़ बताइये... साहिल सर क्या पहले इसी ऑफिस में काम करते थे..

विक्रम - नहीं, क्यों?

सुप्रिया - वह इतना सीरियस रहते है न... तोह मुझे लगा की आपने उन्हें यहीं से लिया होगा...

विक्रम हस्ते हुए - नहीं... इतना भी सीरियस नहीं है साहिल... मैं उसे सालो से जानता हूँ...

सुप्रिया - वैसे मुझे समझ नहीं आता की आप यहाँ इतनी बड़ी कंपनी चला रहे हो, और वहां वह छोटी सी कंपनी...

विक्रम - ये बड़ी सी कंपनी मेरी बीवी की है, जिसे मैं बस चला रहा हूँ. वह छोटी सी कंपनी मेरी है...

सुप्रिया - ओह ाचा... पर ये आपकी वाइफ की है तोह आपकी भी तोह है न..

विक्रम हलके से मुस्कुराया - फरक है... तुम अभी नहीं समझ पाओगी... वैसे आज का खाना तोह कमल है... युम्म्म...

सुप्रिया - वह तोह आप रोज़ hi बोलते हो... इतनी तारीफ तोह कोई भी नहीं करता खाने की... मेरे हस्बैंड भी नहीं...

विक्रम - मर. अतुल को शायद पता भी नहीं की वह क्या खो रहे है...

सुप्रिया के हाथ में मीठे का एक पीेछे था. वह उसे कहते कहते बोली - मैं समझी नहीं...

विक्रम - कुछ नहीं... उम्म्म... तुम्हारे होंठ के नीचे कुछ लगा है...

सुप्रिया ने अपनी ऊँगली अपने होंठ के नीचे लगायी - कहाँ... यहाँ?

विक्रम - नहीं... थोड़ा उधर...

सुप्रिया ने दूसरी साइड ऊँगली करि - यहाँ?

विक्रम ने अपनी ऊँगली सुप्रिया के होंठ की तरफ बड़ाई और सुप्रिया को छूने की परमिशन मांगी - मई ी?

सुप्रिया ने बिना सोचे समझे बोल दिया - सूरे..

विक्रम हल्का सा उठा और अपना अंगूठा सुप्रिया के होंठ के साइड पर लगते हुए वहां पर लगे हुए खाने को अपने अंगूठे पर ले लिया. वहां से अंगूठा हट ते hi सुप्रिया ने बिना सोचे समझे अपनी जीब बहार निकल कर वहां हलके से फेर दी.

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सुप्रिया को ऐसे करते देख विक्रम हलके से मुस्कुराया - लगता है काफी टेस्टी था तभी तोह वहां लीक कर रही ho...main भी तोह चख के देखु…

सुप्रिया की शकल बुरी तरह लाल पद गयी थी - नहीं... वह..

विक्रम ने अपने अंगूठे पर लगे हलके से मीठे को अपने मुँह में लिया, और सुप्रिया को देखते हुए बोलै - हम्म्म... सच में… किते स्वीट...

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या बोले की एकदम से बिना नॉक किया विक्रम के केबिन का दरवाज़ा खुला. विक्रम भी एक डैम से थोड़ा चौंक सा गया, जैसे उसकी कोई छोरी पकड़ी गयी हो. सामने एक लम्बा सा पतला सा आदमी जीन्स और t-shirt पहने खड़ा था. अंदर घुसते hi उसकी नज़र सुप्रिया पर पड़ी और वह उसे ऊपर से नीचे तक देखने लगा.

विक्रम - जय!! नॉक करके तोह आया करो...

जय - ओह सॉरी! मुझे पता नहीं था बिजी हो... कहो तोह मैं थोड़ी देर में आयु?

सुप्रिया एक डैम से कड़ी हो गयी और हड़बड़ाते हुए बोली - No सर.... ी वास् जस्ट लीविंग...

जय अंदर आ कर विक्रम की कुर्सी पर बैठ गया - It's ok, यू गाइस कैन फिनिश थे लंच.

विक्रम की शकल पर हल्का सा गुस्सा था. उसने बहार झाँक कर बहार देखा तोह दिशा वहां नहीं थी. शायद इसलिए जय एकदम से अंदर आ पाया था - सुप्रिया थिस इस जय, ा बिज़नेस एसोसिएट. जय. एंड जय, थिस इस सुप्रिया.

जय - ओह hello सुप्रिया जी!! आज फाइनली आपके साक्षात दर्शन हो hi गए...

सुप्रिया थोड़ी पुज़्ज़लेड से हो गयी, इसका क्या मतलब था और जय उसे कैसे जानता था - मैं कुछ समझी नहीं??

विक्रम ने जय को घूर कर देखा - जय, स्टॉप किडिंग विथ हेर.

जय के हाथ में एक गिलास पपरवेइट था, जिससे वह खेल रहा था - Ok बॉस! जैसा आप कहो.

सुप्रिया को उन दोनों की बीच की कुछ उनकाही टेंशन में फसा होना काफी अजीब सा लग रहा था - विक्रम, मैं अभी चलती हूँ. मैं आपको बाद में उपदटेस देती हूँ.

विक्रम - सूरे...

जय - Ok मिस सुप्रिया, नीस तो मीट यू...

सुप्रिया बहार आ गयी, और उसने देखा की दिशा दौड़ी दौड़ी अपने डेस्क की तरफ आ रही थी. उसने सुप्रिया को बहार आते देख उससे पुछा - कौन गया था अंदर?

दिशा ने शायद पहली बात सुप्रिया की तरफ देख कर उससे कुछ बोलै था. सुप्रिया - कोई मर जय...

दिशा ने एक गहरी सी सांस ली - Ok... थैंक्स...

सुप्रिया वापस अपनी सीट पर जाकर बैठ गयी. पता नहीं ये जय कौन था जिसके आने से इतनी टेंशन सी बन गयी थी. और पता नहीं विक्रम सर ने उसके आने से ठीक पहले वह मीठे का तिनका क्यों खा लिया था. वह तोह सुप्रिया के होंठ से लगा हुआ था. सुप्रिया टेंशन में उलझी हुई किसी तरह अपने काम पर फोकस करने की कोशिश कर रही थी. करीब आधे घंटे बाद जय बहार निकला और दिशा के डेस्क पर तक लगा कर खड़ा हो गया. और हलकी हलकी आवाज़ में दिशा से बात करने लगा. सुप्रिया कोशिश कर रही थी की वह उनकी बात सुने पर उसे कुछ साफ़ सुनाई नहीं दे रहा था.

कुछ पल बाद वह वहां से सीधा हो कर चला गया. सुप्रिया ने खैर बनायीं की उसकी नज़र सुप्रिया पर नहीं पड़ी. सुप्रिया को लगा की हो सकता है विक्रम उसे वापस अंदर बुलाये पर ऐसा नहीं हुआ. शाम होते होते भी सुप्रिया बस विक्रम के दरवाज़े की और hi देख रही थी. एक दो बार तोह उसकी नज़र दिशा से मिल गयी थी, और नज़र मिलते hi उन्होंने जल्दी से दूसरी और देख लिया था.

शाम को सुप्रिया अपना बैग पैक करके निकल hi रही थी की दिशा ने उसे आवाज़ दी - सुप्रिया... विक्रम तुम्हे बुला रहे है...

सुप्रिया बैग समेत विक्रम के केबिन पर नॉक करके अंदर चली गयी.

विक्रम - सुप्रिया... सॉरी आज हम लोग प्रोजेक्ट पर ज्यादा डिसकस नहीं कर पाए.... तुम ये बाकी वीक और नेक्स्ट वीक अपने ऑफिस चली जाना, ी वोट बे हेरे...

सुप्रिया - विक्रम... पर वह आर्डर की डेडलाइन तोह आ hi गयी है..

विक्रम - ी क्नोव यू विल बे अबले तो मैनेज आईटी... मुझे किसी अर्जेंट काम से बहार जाना है...

सुप्रिया - Ok..

सुप्रिया बहार जाने के लिए मुड़ी पर वह फिर वहीँ रुक गयी. विक्रम उसे रुका हुआ देख बोलै - क्या हुआ? आल गुड?

सुप्रिया - उम्म्म यस... विक्रम वह आदमी कौन था जो आज आया था यहाँ...

विक्रम - जय? ओह उसको इग्नोर करो... no ओने इम्पोर्टेन्ट...

सुप्रिया - हाँ जय... वह आपकी चेयर पर भी जा कर बैठ गया था, मैंने किसी को ऐसा करते नहीं देखा...

विक्रम - वह ऐसा hi है.... तुम उसके बारे में इतना मत सोचो.... चलो ी विल सी यू इन 2 वीक्स... टेक केयर ok...

सुप्रिया अभी भी रुकी हुई थी.

विक्रम - एनीथिंग ेल्स?

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह क्यों रुकी हुई थी अभी भी विक्रम के ऑफिस में. पिछले एक महीने में लगभग रोज़ साथ लंच करके और घंटो बात करके एक अजीब सा बांड बन गया था उनसे. और फिर वह मीठे वाली बात. शायद फिर से वह कुछ ओवर थिंक कर रही थी.

सुप्रिया - कुछ नहीं... टेक केयर आप जहाँ भी जा रहे है...

विक्रम ने मुसकुरा के सुप्रिया की और देखा - थैंक्स... ी विल मिस योर फ़ूड... सी यू....

सुप्रिया एक मुस्कान लिए केबिन से बहार आ गयी. ऑफिस में ज्यादातर लोग जा चुके थे, पर दिशा अभी भी जैम कर बैठी हुई थी. उसे देख ऐसा लग नहीं रहा था की वह कहीं जाने वाली थी. चलो अगले 2 हफ्ते उसे इसकी शकल तोह नहीं देखनी पड़ेगी. सुप्रिया अपना सामान लिए नीचे अपनी कार की तरफ आ गयी और फिर घर के तरफ ड्राइव करने लगी. उसका घर इस ऑफिस से काफी पास था और ड्राइव भी इतनी मुश्किल नहीं थी. रह रह कर उसके मैं में विक्रम का hi ख्याल आ रहा था.

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अगले 1-2 दिन ऐसी hi ऑफिस और घर के बीच में बीत गए. जैसे जाइए आर्डर के डिलीवरी की डेट पास आ रही थी सुप्रिया का काम बढ़ता जा रहा था और टेंशन भी. घर पर अतुल पता नहीं क्यों सदा हुआ सा मुँह बनाकर रखता था.

एक शाम जब सुप्रिया घर पहुंची तोह अतुल थोड़ा सीरियस hi बैठा था. उसे ऐसे सीरियस देख कर सुप्रिया ने उससे पूच - क्या हुआ, आप इतने सीरियस हो कर क्यों बैठे हो....

अतुल - घर से कॉल आया था, अर्पिता दीदी हॉस्पिटल में एडमिट है... हमें कल hi घर जाना होगा...

सुप्रिया - कल hi?

अतुल - हाँ... उनकी डिलीवरी की डेट आ गयी है न बस...

सुप्रिया - पर मैं अभी कैसे... ऑफिस...

अतुल - के ों सुप्रिया... तुम फॅमिली से ज्यादा ऑफिस के बारे में सोच रही हो...

सुप्रिया - पर अतुल... मैं अभी नहीं जा सकती... मुझे ये प्रोजेक्ट पूरा करना hi होगा...

अतुल - तोह तुम्हारा कोई लेना देना नहीं है मेरे घर से घरवालों से...

सुप्रिया - अतुल प्लीज.... मैंने ऐसा नहीं कहा... आप हो आयो... मैं अभी नहीं जा सकती...

अतुल - फिर से तुम्हे यहाँ अकेला छोड़ जायु?

सुप्रिया - तोह इसमें क्या दिक्कत है... मैं मैनेज कर लुंगी...

अतुल - और हमारी एनिवर्सरी? वह भी तोह अगले हफ्ते hi है... उसका क्या.....

सुप्रिया - अगर दीदी हॉस्पिटल में है, तोह वह तोह हम वैसे भी नहीं बनाने वाले न...

दोनों के बीच काफी देर तक कहा सुनी चलती रही, पर सुप्रिया ने सोच रखा था की वह अपने प्रोजेक्ट को बीच में छोड़ कर तोह नहीं जाएगी. आखिर विक्रम उस पर ये जिम्मेवारी छोड़ कर गया था. अतुल भी बहस करके थक गया था और आखिर उसने भी अकेले घर जाने का मैं बना लिया. उसके लिए अपनी बहिन और फॅमिली से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं था. वह अगली सुबह की ट्रैन पकड़ कर घर चला गया और उन दोनों के बीच हुई लड़ाई से सुप्रिया रोटी हुई सी घर पर अकेले रह गयी.

पर जिस चीज़ के लिए उसने जाने से मन कर दिया था वह तोह उसे पूरा करना hi था न. और वह पूरा पूरा दिन और पूरी पूरी रात बस काम में hi लग गयी. कई बार तोह उसे होश hi नहीं होता था की टाइम क्या हुआ या दिन क्या है. और अगले हफ्ते डिलीवरी हो hi गयी, सामान की भी और अर्पिता दीदी की भी. अगले हफ्ते की वेडनेसडे को सुप्रिया के हाथ में कन्फर्मेशन थी की सारा सामन अमेरिका के लिए लोड हो गया था. आखिर कार उसकी म्हणत सफल हो गयी थी.

वह इतनी थक चुकी थी की वह ड्राइव करके घर जाने के भी हालत में नहीं थी. कृति ने उस रात सुप्रिया को घर ड्राप किया और सुप्रिया घर पहुंच कर बीएड पर बिना कपडे बदले गिर कर सो गयी थी. उसने अगले दिन की छुट्टी ले राखी थी और उसे होश hi नहीं था की वह कितने बज तक सोई थी.

अगले दिन उसकी आँख उसके कमरे के बहार की गैलरी से आती हुई आवाज़ों से खुली. कुछ जानी पहचानी सी hi आवाज़ें थी. सुप्रिया के अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं थी की वह अपने आप को खड़ा करती और वह बिलकुल चुप चाप लेती सुनने की कोशिश करने लगी की कौन बोल रहा था. ये तोह इक़बाल और करुणा की आवाज़ थी!

इक़बाल - देख तोह ले एक बार अचे से कोई घर पर है या नहीं...

करुणा - नहीं है न.... तुम्हारी मैडमजी तोह आजकल ऑफिस में hi बिजी रहती है... वह क्यों होंगी घर पर... और होती तोह उनकी गाडी नीचे कड़ी होती न...

इक़बाल - फिर भी... क्या पता वह सो रही हो अंदर.... मैंने उन्हें जाते नहीं देखा आज...

करुणा - इस समय कौन सोया पड़ा होगा... और तुम बड़ा ध्यान रखते हो कब आती है कब जाती है... भतेरे आशिक़ है उनके उन्हें लाने लेजाने के लिए...

इक़बाल - ऐसे क्यों बोलती है तू उनके बारे में... इतनी तोह सीढ़ी है वह...

करुणा - हाँ मुझे पता है कितनी सीढ़ी है... वैसे तुम्हे क्यों इतना प्यार आता है उन पर...

इक़बाल - क्या बोलती रहती है.... अंत शांत... कहाँ मैं और कहाँ वह...

करुणा - कोई जाने या न जाने, मैं जानती हु, तू भी कोई ैरे गैर तोह है नहीं… बस पता नहीं…

इक़बाल - छुप कर... मुझे याद मत दिलाया कर वह सब..

करुणा - ाचा सुन... तू कहे तोह.... उनकी ब्रा पंतय पेहेन लू.... तुझे ाचा लगेगा...

इक़बाल - नहीं... पागल है क्या... उनके किसी सामान को नहीं छूना...

करुणा - ाचा ठीक है... उनके बिस्तर पर फिर...

सुप्रिया ये सुनते hi हड़बड़ा सी गयी. अगर वह दोनों अभी अंदर कमरे में आ गए तोह वह उसे यहाँ देख लेंगे.

पर एकदम से इक़बाल ने बोलै - नहीं! यहीं कर ले... नहीं तोह मैं जा रहा हूँ...

करुणा - ाचा ाचा... ठीक है... ऐसे hi कर ले… मेरी hi मत मारी गयी है जो तेरे पीछे पागल हु..

सुप्रिया को थोड़ी देर में करुणा की ाँहों की आवाज़ आने लगी. उसे उसके बीएड से बहार का कुछ नहीं दिखने वाला था. तोह वह बिलकुल दबे पाँव चलते हुए कमरे के दरवाज़े पर पहुंची और बहार की और नज़र की. बहार का नज़ारे देखते hi उसके तोह होश hi उड़द गए. इक़बाल एक कुर्सी पर नंगा बैठा था और करुणा अपने घुटने पर नीचे पर बैठे उसका लुंड चूस रही थी. इक़बाल के लुंड का साइज देख कर सुप्रिया को अपनी आखों पर यकीं hi नहीं हुआ. किसी का इतना बड़ा लुंड कैसे हो सकता था.

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करुणा का मुँह तोह बस टोपे पर hi था, पर इक़बाल ने उसका सर पकड़ते हुए अपना लुंड और अंदर धकेल दिया. दोनों में से किसी ने सुप्रिया की और मुँह नहीं किया हुआ था और साइड व्यू से सुप्रिया को सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था.

सुप्रिया बीच बीच में झाकना बंद कर रही थी. पर वह अभी भी इक़बाल के लुंड को देख कर शॉक में थी. सुप्रिया ने अपने छोटे से हाथों की तरफ देखा. सुप्रिया के चार हथेलियों में भी न समाये उसका लुंड, इतना बड़ा था. जैसे hi उसने ये सोचा, उसकी मुँह पर शिकन सी आ गयी. ओह गॉड, वह इक़बाल के लुंड को पकड़ने के बारे में सोच भी कैसे सकती थी, चार हो या चालीस वह क्यों अपने हाथों से नाप रही थी.

उसने दुबारा देखा तोह इक़बाल कुर्सी से खड़ा हो गया था और करुणा के बाल पकडे हुए अपना लुंड उसके मुँह में ठूस रहा था. पता नहीं करुणा भी इतना लम्बा बड़ा लुंड अपने मुँह में पूरा कैसे ले पा रही थी.

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इक़बाल - अह्ह्ह्हह.... चूस न अचे से....

करुणा - ममममम.... चूस तोह रही हु...

इक़बाल - ले पूरा ले अंदर... अह्ह्ह्ह.... कामिनी है तू पूरी.... ये सब करती है मेरे साथ...

करुणा - मममममम.... तुम्हे नहीं करवाना होता क्या....

इक़बाल खड़ा खड़ा और तेज़ से अपना लुंड उसके मुँह में दाल रहा था. जितना तेज़ इक़बाल करुणा को हिला था ऐसा लग रहा था उतना मज़ा उसे आ रहा था. इक़बाल ने उसे बाल से पकडे हुए घुमाया और करुणा का पेटीकोट का नाडा खोल दिया जिससे करुणा सिर्फ पंतय पहने उसके आगे कड़ी थी. करुणा ने खुद hi अपनी पंतय जल्दी से उतार दी.

इक़बाल ने एक हाथ से करुणा के करुणा की गर्दन पकड़ी हुई थी, और दूसरा हाथ से उसकी ब्लाउज का स्ट्राप खींच रहा था.

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करुणा ने हॉलवे में राखी एक टेबल पर हाथ रखते हुए अपने आप को सहारा दिया और अपने पेअर छोड़े कर लिए. इक़बाल ने अपनी टांग से उसके पेअर थोड़े और छोड़े किये और फिर उसकी गांड को अपनी और किया. फिर वह अपना लुंड उसमे डाले उसे दबा डाब छोड़ने लगा. दोनों पीठ करे सुप्रिया की और खड़े थे तोह सुप्रिया को सब कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था, पर करुणा की चीखे पूरे घर में गूँज रही थी.

ओह गॉड तोह ऐसे इन दोनों के बीच का खेल चलता है, सुप्रिया ने मैं में सोचा. इक़बाल तोह रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था और बिलकुल जानवरो की तरह बुरी तरह करुणा एक अंदर धक्के मार रहा था. पता नहीं करुणा इतना मोटा लम्बा लुंड अपने अंदर कैसे ले पा रही थी.

करुणा - अह्ह्ह... मेरे raja.....ahhhhh... अह्ह्ह्ह

इक़बाल दांत बेचते हुए बोलै - इक़बाल नाम है मेरा.... अह्ह्ह... और कुछ नहीं...

करुणा - उउउउउउइइइइइ.... जो तू कहे.... अह्ह्ह्ह ....mmmmmm....aaahhhhh...

इक़बाल ताबड़ तोड़ करुणा को बजाये जा रहा था. उसके हाथ कभी करुणा की गांड पर थप्पड़ बजाते और कभी उसके बूब्स को नोचते. सुप्रिया ने देखा की करुणा के पेअर बुरी तरह काँप रहे थे. दोनों को काम से काम 10-15 मिनट तोह हो गए थे. इक़बाल कुछ पल के लिए रुकता और फिर दे दाना दान शुरू हो जाता.

पूरे हॉल में उसकी सिसकियाँ और उनके शरीर की थप थप गूँज रही थी. करुणा के चेहरे से पता चल रहा था की उसकी हालत बुरी थी. इतना बड़ा लुंड अंदर ले कर तोह किसी की भी हो जाये.

इक़बाल ने करुणा को एक आखिरी बार बुरी तरह दबोचा और ज़ोर के 5-6 धक्के मारे. सुप्रिया ने देखा की इक़बाल का सफ़ेद पानी करुणा की गांड से होता है, पैरो से बेहटा हुए नीचे ज़मीन पर आ रहा था. सुप्रिया ने अपना थूक अंदर गतका, उसे यकीं hi नहीं हो रहा था उसने अभी क्या देखा था.

जैसे hi इक़बाल ने करुणा को छोड़ा, करुणा बोली - अह्ह्ह्ह.... सुजा दिया तूने अचे से.... अह्ह्ह....

इक़बाल ने कपडे पेहेन्ने शुरू किये - तू hi तोह उकसाती है मुझे इस सब के लिए... फिर बोलती है सुजा दिया...

करुणा - वह तोह मेरा काम है तुझसे मजाक करना... बस तू इसी घर में तोह मुझे ऐसे छोड़ता है... कभी कभी सोचती हूँ की बराबर वाली मेघा दीदी ने सुन लिया तोह?

इक़बाल - वह छिनाल कहाँ रहती है घर पर इस टाइम... कहीं मुँह hi मार रही होगी..

करुणा - और तेरी वाली... वह भी तोह नहीं होती... वह कहाँ…

इक़बाल ने गुस्से में उसकी बात बीच में काटी - मैंने तुझे कई दफा बोलै है... मैडमजी के बारे में ये सब मत बोलै कर....

करुणा ने हलके से इक़बाल के गाल पर हाथ फेरा - चल ठीक है... गुस्सा मत कर… जा तू अब... अभी मुझे तेरी मैडमजी के घर की सफाई करनी है... नौकरानी हूँ न मैं उनकी…

सुप्रिया ये सुनते hi बुरी तरह घबरा गयी. अभी तोह करुणा की सफाई बाकी थी, और उसे अंदर कमरे में देख लिया तोह? उसे बहार के दरवाज़े की खुलने और बंद होने की आवाज़ आयी, और सुप्रिया जल्दी से बीएड में घुस गयी और सोने का नाटक करने लगी. अब इससे ज्यादा वह क्या hi कर सकती थी.

कुछ hi देर बाद उसे कमरे में करुणा के आने की आवाज़ आयी और वह सुप्रिया को बीएड पर सोया देख ज़ोर से चिल्ला उठी - Uuiiiiii,.....didi......

सुप्रिया ने आँख मीचते हुए नाटक सा किया जैसे वह अभी उठी हो - करुणा तू क्या कर रही है इस टाइम.... क्या बज गया....

करुणा - दीदी.... आप सो रहे थे अंदर.... 11 बज गए....

सुप्रिया ज़ोर से बोली - 11!!!! मुझे तोह पता hi नहीं चला....

करुणा ने सुप्रिया को घूरा - दीदी... आपने कुछ सुना नहीं....

सुप्रिया - क्या नहीं सुना....

करुणा को यकीं नहीं हो रहा था की सुप्रिया ने उसकी ज़ोर ज़ोर की चीखे नहीं सुनी होंगी, पर उसने भी बेशरम बनने का सोचा - दीदी... इक़बाल और मैं बहार सब कुछ कर रहे थे... और इतनी ज़ोर की आवाज़ें थी, मैं मान hi नहीं सकती की आपने कुछ सुना न हो. ऐसा करते है मैं इक़बाल को बुलाती हूँ एक बार...

सुप्रिया जल्दी से बीएड से उठी, जैसे सोई hi न हो - नहीं नहीं!! इक़बाल को क्यों बुलाना....

सुप्रिया ने अपना मुँह सिकोड़ा, वह करुणा की बातों में फास गयी थी - ाचा ठीक है... हाँ मैंने सब सुना था... तेरी आवाज़ hi इतनी तेज़ है... क्या करती मैं?

करुणा मुस्कुराती हुई बोली - बस सुना या कुछ देखा भी?

सुप्रिया सदा हुआ सा मुँह बना कर करुणा की और देखने लगी. आज तोह ये सुप्रिया को नहीं बक्शने वाली थी.
 
अपडेट 53

करुणा और सुप्रिया लगभग एक घंटे तक जो हुआ था उसके बारे में बात करते रहे. बात करते करते सुप्रिया की जिज्ञासा भी बढ़ती जा रही थी. उसे करुणा पर थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था क्यूंकि उसे अब पता चल गया था की वह उसके बारे में क्या सोचती थी.

करुणा - दीदी... आपने देखा था क्या इक़बाल का लुंड, जब वह मुझे छोड़ रहा था..

करुणा के मुँह से ऐसे अभद्र शब्द सुनकर सुप्रिया को काफी अजीब लग रहा था. पहले उससे किसी ने ऐसे खुल के ये सब नहीं बोलै था - की... मेरे सामने क्यों ऐसी बातें कर रही है... मैं क्यों देखूंगी उसका वह....

करुणा - आप देखोगी न, उसके जितना बड़ा और मोटा लुंड मैंने किसी न नहीं देखा है आज तक..

सुप्रिया ने उसे ताना मारते हुए कहा - ऐसे कितनो के देखा है तूने?

करुणा शरमाते हुए बोली - पांच.... और आपने भी तोह....

सुप्रिया ने उसे घूर कर देखा जिससे वह बीच में hi चुप हो गयी. करुणा अछि तरह से जानती थी की दीदी की कितना और कैसे किचाई करनी है.

करुणा - भैया का कितना बड़ा है...

सुप्रिया ने खीज के कहा - जाके अपने भैया से पूछ ले न... वही तेरे हाथ में दे देंगे, फिर नाप लियो..

करुणा - आप क्यों इतना गुस्सा होती हो...

सुप्रिया को लगा वह कुछ ज्यादा hi बोल गयी थी - हम्म्म... सॉरी...

करुणा - आप क्यों सॉरी बोल रहे हो... अह्ह्ह्ह (करुणा ने दर्द की सिसकी ली)

सुप्रिया - क्या हुआ... ठीक तोह है...

करुणा - हाँ वह बस थोड़ा दर्द रहता है... पर ठीक हो जायेगा...

सुप्रिया - इतना बड़ा तू अंदर ले कैसे लेती है... बहुत दर्द होता होगा...

करुणा ने सुप्रिया को आँख मारते हुए कहा - मज़ा भी पूरा आता है...

सुप्रिया ने असहमति में सर हिलाते हुए कहा - बहुत गन्दी है तू... और सुन मुझसे क्यों परेशान रहती है, मैंने क्या किया है?

करुणा ने अपनी नज़रें झुका ली - वह सब भी सुन लिया आपने....

सुप्रिया - हम्म्म....

करुणा - दीदी माफ़ कर दो... आप बहुत अचे हो वैसे... बहुत hi अचे.... आपकी शकल, आपका शरीर, आपकी खुशबू, आपका स्वाभाव...

सुप्रिया - चल चल माखन लगाना बंद कर...

करुणा - दीदी... आपने सब सुन hi लिया तोह एक बात बोलू...

सुप्रिया - आ गयी न लाइन पर... मुझे पता था कोई न कोई काम होगा...

करुणा - आप अपनी एक ब्रा दे डोज मुझे... (करुणा सुप्रिया के बूब्स की तरफ इशारा करते हुए) आपका मेरा साइज एक जैसा hi है...

सुप्रिया - मेरी ब्रा की क्या करेगी...

करुणा - आपकी अछि वाली है न... वही पेहेन कर दिखायूँगी उसे...

सुप्रिया ने गहरी सास भरी - ाचा मैं देखती हूँ, अभी कोई नयी वाली नहीं है मेरे पास...

करुणा - पुराणी भी चलेगी मुझे... उसमे आपकी खुशबू भी होगी... पैलेस दीदी पैलेस...

सुप्रिया - क्या है.... तू भी न... ाचा ठीक है, मैं निकल के रख जयुंगी एक दिन.... पर सुन तू इक़बाल को नहीं बताएगी की मैं कुछ सुना या देखा था आज, और ये ब्रा वृ के बारे में भी नहीं, समझी?

करुणा खुश होते हुए - पक्का दीदी… आज तक नहीं बताया उसे बोहोत कुछ…

करुणा उसके बाद काम में लग गयी, और सुप्रिया अपने रूम में बैठी अभी भी करुणा और इक़बाल के बीच हुए सेक्स के बारे में सोच रही थी. रह रह कर इक़बाल का बड़ा मोटा सा लुंड उसकी आँखों के सामने आ जाता था. वह कोशिश कर रही थी की वह उसके बारे में बिलकुल न सोचे.

उसने अपना दिमाग भटकने के लिए अतुल को फ़ोन करने का सोचा. जब से वह गया था उनके बीच ज्यादा बात नहीं हुई थी. कल शाम को उसका मैसेज आया था की अर्पिता दीदी के बेबी हो गया था, पर वह आर्डर पूरा करने में इतना बिजी थी की वह एक कॉल hi नहीं कर पायी थी. उसे थोड़ी घबराहट हो रही थी की पता नहीं अतुल उसे क्या बोलेगा. 2 दिन बाद उनकी फर्स्ट मैरिज एनिवर्सरी भी थी, पता नहीं वह तब तक वापस आएगा भी या नहीं.

सुप्रिया ने घबराते हुए फ़ोन लगाया - Hello अतुल...

अतुल ने रूखी आवाज़ में कहा - फुर्सत मिल गयी तुम्हे कॉल करने की...

सुप्रिया - सॉरी वह...

अतुल - हाँ पता है, एहि कहोगी न ऑफिस में बिजी थी... पता है यहाँ सब कितना गुस्सा है तुम पर...

सुप्रिया कुछ बोलने के लायक hi नहीं थी - ह्म्म्मम्म... और आप?

अतुल - अभी नहीं बात सकता ज्यादा...

सुप्रिया - दीदी और बेबी ठीक है?

अतुल - हाँ... पर अभी कुछ दिन हॉस्पिटल में रहना पद सकता है..

सुप्रिया - आप कब वापस आ रहे हो...

अतुल - मैं शायद संडे तक वापस आयु...

सुप्रिया - हम्म्म्म....

अतुल - मुझे पता है हमारी मैरिज एनिवर्सरी है परसो... पर मैं नहीं आ सकता अभी....

सुप्रिया - मैं समझ सकती हूँ...

अतुल - मैं रखता हूँ अभी... एन्जॉय करो अकेले अपनी एनिवर्सरी...

अतुल ने फ़ोन रख दिया. सुप्रिया का गाला भर आया था, वह शायद न तोह एक अछि बीवी बन पायी थी और एक अछि बहु. पूरे परिवार से कटी हुई वह यहाँ अकेली थी. करुणा के जाने के बाद भी वह एहि सब सोचती रही. शाम होते होते उसका अकेलापन उसे जैसे खाने को था. तभी उसके फ़ोन की बेल्ल बजी, कृति का कॉल आ रहा था. जैसी hi सुप्रिया ने फ़ोन उठाया दूसरी और कृति की चहकती हुई आवाज़ आयी.

कृति - हे! कैसी हो अब, थोड़ी थकन काम हुई क्या...

सुप्रिया - हाँ... थोड़ा बेटर फील कर रही हूँ...

कृति - गुड.. यू लुक्ड सो टायर्ड लास्ट नाईट. मैंने किसी को बोलै है की तुम्हारी कार तुम्हारे घर तक छोड़ दे.

सुप्रिया - थैंक्स कृति...

कृति - पर मैंने इसलिए कॉल नहीं किया था. सुनो... ी नीड ा फवौर फ्रॉम यू...

सुप्रिया - हाँ बोलो न...

कृति - प्लीज डोंट से no ok, प्रॉमिस करो...

सुप्रिया - बताया तोह सही पहले... ाचा प्रॉमिस नहीं करुँगी मन.

कृति - तुम डे आफ्टर टुमारो, परसो रात को फ्री हो क्या...

सुप्रिया ने सोचा वह तोह उसकी एनिवर्सरी वाला दिन था, पर उसका कोई प्लान तोह था नहीं. घर पर अकेले डिप्रेस्ड रहने से ाचा था की वह बहार hi चली जाये.

सुप्रिया - हम्म्म.. कोई प्लान तोह नहीं था...

कृति - ग्रेट... ी ऍम हैविंग ा डिनर डेट विथ राहुल एंड इंट्रोडसिंग हिम तो विक्रम भैया तहत नाईट... ी वांट यू तो के विथ में...

सुप्रिया - कृति.... उम्म्म... मैं क्या करुँगी वहां.... ये तुम्हारा फॅमिली मटर है...

कृति - प्लीज प्लीज... यू क्नोव भैया न, वह कितने जुड़गमेंटल है... एंड तुम राहुल को भी जानती हो... सो अगर तुम भी साथ होगी तोह हे विल फील मोरे रासुरेद... आफ्टर आल लास्ट एक महीने से तुम उनके साथ इतना क्लोसेली वर्क कर रही हो...

सुप्रिया - ऐसा कुछ नहीं... मेरे होने या न होने से कोई फरक नहीं पड़ेगा... विक्रम सर तोह किसी को भी एक नज़र में hi भांप जायेंगे..

कृति - ी ऍम नॉट सूरे व्हाट तहत मीन्स, बूत प्लीज यार, मैं भी काफी ाचा फील करुँगी अगर तुम होगी तोह... प्लीज.... मैं बहुत ज्यादा नर्वस हु...

सुप्रिया - कुछ ज्यादा जल्दी नहीं कर रही तुम राहुल को विक्रम सर से मिलवाने में?

कृति - व्हेन यू क्नोव यू क्नोव... एंड ी थिंक ी क्नोव... तुम प्लीज मेरी हेल्प कर दो... अगर भैया का फर्स्ट इम्प्रैशन ख़राब गया तोह यू क्नोव आईटी विल बे थे एन्ड ऑफ़ तहत... एंड उन्हें लगता है मैं काफी िम्मातुरे हूँ अभी...

सुप्रिया - सही तोह कह रहे है वह...

कृति - प्लीज अब तुम भैया की साइड मत लो... जस्ट हेल्प में आउट... प्लीसीईए

सुप्रिया - ह्म्म्मम्म ठीक है... कहाँ आना है?

कृति - मैं एड्रेस टेक्स्ट कर दूंगी... थैंक्स बेब... लव यू..

कृति ने फ़ोन काट दिया. सुप्रिया सोच रही थी पता नहीं क्यों उसने कृति की बातों में आकर जाने के लिए हाँ कर दिया. एक तोह राहुल और दूसरा विक्रम सर भी, कितना अजीब सा लगेगा. सुप्रिया अपना सर तकिये में घुसते हुए बीएड पर लेट गयी. कुछ पल बाद जैसे hi कृति का मैसेज आया, कोई स्काई बार करके जगह थी. जैसे hi सुप्रिया ने गूगल किया उसने पाया की ये तोह काफी महंगी जगह थी. वह और टेंशन में आ गयी की उसके पास ऐसी जगह जाने के कपडे भी थे या नहीं.

सुप्रिया जल्दी से उठ कर अपने कपड़ो में देखने लगी की उसके पास कोई अछि ड्रेस थी भी या नहीं. उसने सारे कपड़ो में अछि तरह देख लिया, उसके पास कोई भी ऐसी ड्रेस नहीं थी जो उसने पहले पहनी न हो. और जो पहनी थी वह भी कोई इतनी ख़ास तोह नहीं थी.

तभी उसकी नज़र एक बंधी हुई राखी साड़ी पर गयी. उसे याद नहीं आ रहा था की उसे कहाँ से मिली थी पर उसने शायद ये कभी ये पहनी नहीं थी. फिर एकदम से याद आया, ये तोह निक्की की साड़ी थी, जो उसे शादी के फंक्शन्स के दौरान पेहेन्ने के ली दी थी. शायद वह जल्दबाज़ी में इसे अपने साथ ले आयी थी.

उसने उस साड़ी को खोला, एक उसके साथ एक पतले से स्ट्राप का ब्लाउज था, बिलकुल उसी टाइप का जैसे निक्की पहना करती थी. ब्लाउज और साड़ी दोनों की काफी स्टाइलिश थी पर सुप्रिया को पता नहीं था की वह सही से फिट भी आने वाली थी या नहीं. और कोई ऑप्शन नहीं था सिवाए इस साड़ी के. सुप्रिया ने साड़ी पेहेन कर तरय करि तोह उफ्फ्फ्फ़, वह तोह इसमें हद्द से ज्यादा कातिल लग रही थी. उसे पता था को जो उसे इसमें देखेगा उसके तोह होश hi उड़द जायेंगे.

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2 दिन बाद उस शाम को सुप्रिया जाने के लिए तैयार हो रही थी. वह बार बार अपनी साड़ी को एडजस्ट कर रही थी, और कभी अपने ब्लाउज को. ब्लाउज की डोरी इतनी पतली थी की स्ट्राप वाली ब्रा पेहेनना तोह नामुनकिन hi था. तोह उसने एक स्ट्रैपलेस ब्रा अंदर पेहेन ली, उसने ख़ास ये कुछ ऐसे hi ड्रेसेस के लिए खरीदी थी.

सुप्रिया ने अचे से मेकअप किया और अपनी शादी में मिली भारी बालियां कान में पेहेन ली. तैयार हो कर उसने अपने आप को आईने में देखा, ऐसा hi लग रहा था जैसे वह अपनी मैरिज एनिवर्सरी के लिए तैयार हुई हो.

वह इतनी भारी जेवेलरी और साड़ी में ड्राइव तोह नहीं कर सकती थी, और वैसे भी उसकी गाडी अभी तक वापस भी नहीं आयी थी.

सुप्रिया ने कृति को मैसेज किया - कृति.. मैं कैसे आयु वहां... मैं ऑटो से तोह नहीं आ सकती...

कृति का मैसेज आया - डोंट वोर्री बेब... मैं गाडी भेजती हु तुम्हे लेने के लिए...

सुप्रिया निर्वसली बैठी गाडी का वेट कर रही थी. उसके हाथ हलके हलके काँप से रहे थे. करीब आधे घंटे बाद उसे ड्राइवर का कॉल आया की वह नीचे आ गया था. सुप्रिया नीचे की और बड़ी. वह ये भी सोच रही थी की पता नहीं इक़बाल भी नीचे होगा या नहीं अभी. वैसे भी 2 दिन पहले के काण्ड के बाद वह उसकी और देखने में भी असहज महसूस कर रही थी. और जब सुप्रिया नीचे पहुंची तोह वह वहां था भी नहीं. पर जो भी था, सबकी नज़रें पास सुप्रिया पर hi तिकी हुई थी. वह लग hi इतनी खूबसूरत रही थी.

सुप्रिया गेट के बहार पहुंची जहाँ गाडी कड़ी थी. बहार ठेले वाले, ऑटो वाले, रह चलते लोग सब मुद मुद कर सुप्रिया की और देख रहे थे. उसने देखा कुछ लड़को ने तोह अपना फ़ोन निकल कर उसकी फोटो खींचनी भी शुरू कर दी थी. सुप्रिया जल्दी से गाडी में बैठी. ड्राइवर ने भी एक बार पलट कर सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक देखा, जैसे अपनी आँखों से उसके सारे कपडे उतार रहा हो.

ड्राइवर - जी मैडम बताइये, कहाँ जाना है...

सुप्रिया - आपको बताया होगा न कृति मैडम ने... आप उनके ड्राइवर है न?

ड्राइवर थोड़ा अकड़ के बोलै - जी मैं उनका फॅमिली ड्राइवर हूँ, उनका पर्सनल ड्राइवर नहीं. सालो से हूँ मैं उनके परिवार के साथ. मेरे पास तोह कॉल आया था की यहाँ से एक मैडम को पिक करना है... और कोई था नहीं, तोह मुझे आना पड़ा...

सुप्रिया - ाचा मैं देती हूँ एड्रेस..

सुप्रिया ने ड्राइवर को एड्रेस बताया और उसने गाडी चलना शुरू कर दिया. सुप्रिया ने देखा की वह बार बार शीशे से सुप्रिया को hi देख रहा था. सुप्रिया ने साड़ी से अपने ब्लाउज को ढकने की कोशिश करि, पर इससे उसकी नज़र नहीं रुकी.

ड्राइवर - किस्से मिलने जा रहे हो आप..

सुप्रिया सोच रही थी की पता नहीं ये ड्राइवर ये सब क्यों पूछ रहा था - कृति से hi मिलने जा रही हु...

ड्राइवर - ाचा... उनकी बात से तोह लगा था और भी लोग आ रहे है...

सुप्रिया - आप इतने सवाल क्यों कर रहे हो... और सड़क पर देख कर गाडी चलायो न...

ड्राइवर - आप ऐसे कैसे बात कर रहे हो... सब बहुत इज़्ज़त करते है मेरी... बड़े साब, बड़ी मैडम, विक्की बाबू, कृति बेबी...

सुप्रिया एकदम से चौंकी - विक्की बाबू... मतलब विक्रम सर क्या?

ड्राइवर - जी हाँ आपके विक्रम सर... इतने से थे... तब से मैं उनके यहाँ काम कर रहा हूँ...

सुप्रिया अब ड्राइवर से बात करने में थोड़ा एक्ससिटेड हो गयी - ाचा... उनके बारे में कुछ बता सकते है...

ड्राइवर भी सुप्रिया को इधर उधर की उनके परिवार की कहानियां बताने लगा, जिसे सुप्रिया बहुत hi ध्यान से उसकी बातें सुनने लगी. अगले 20-30 मिनट काफी इंटरेस्टिंग हो कर गुज़रे, सुप्रिया भूल hi गयी थी जैसे उसे कहीं जाना भी था.

ड्राइवर - ये लो मैडम, आ गया आपको होटल...

सुप्रिया थैंक यू बोल कर जल्दी से गाडी से उतर गयी. जल्द बाज़ी में वह ड्राइवर का नाम पूछना भी भूल गयी थी. उसने अपना फ़ोन देखा तोह कृति के 2-3 मैसेज आये हुए थे -

वेयर अरे यू बेब??

कार लेने आ गयी थी न?

हम लोग ऊपर रूफटॉप पर है...

सुप्रिया होटल के अंदर घुसते हुई, लोगो से पूछते हुए, लिफ्ट से ऊपर होटल के खुले रूफटॉप पर आ गयी. आधी छत कवर्ड और आधी ओपन, और सुप्रिया ने देखा की कृति, राहुल और विक्रम वहां बहार खुले वाले एरिया में बीच में एक टेबल पर थे. वह उनकी तरफ बड़ी. बहार थोड़ी हवा सी चल रही थी जिससे उसकी बाल हवा में लहरा रहे थे. सुप्रिया की नज़र कृति की नज़रों से मिली और वह उसके मुस्कुरा के देखने लगी.

विक्रम और राहुल जो सुप्रिया से पीठ करे बैठे थे, कृति को मुस्कुराता देख उन्होंने भी पीछे पलट कर देखा, और सुप्रिया को देखते hi दोनों के जैसे होश hi उड़द गए थे.

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सुप्रिया लहराती हुई उनकी और चलती हुई बड़ी. राहुल और विक्रम दोनों की गर्दन मुड़ी की मुड़ी रह गयी थी, और उन्हें अपने सामने ये स्वर्ग की अप्सरा जैसी एक लड़की चलती हुई आ रही थी. उसके छोटे से ब्लाउज से उसकी गोरी चिकनी छाती और कंधे चमक रहे थे. सुप्रिया ने भी अपने आँख के कोने से दोनों को अपनी और घूरते हुए देख लिया था पर उसने अपना ऑय कांटेक्ट कृति से बनाये रखा.

सुप्रिया - Hi... सॉरी मैं लेट हो गयी...

कृति - मैं सोच रही थी तुम्हे किसी ने किडनैप तोह नहीं कर लिया... और जैसे तुम बन कर आयी हो आज... वाओ... कोई कर लेता किडनैप... सही कह रही हु न भैया?

सुप्रिया विक्रम के ठीक सामने आ कर बैठ गयी, और उसके जवाब का इंतज़ार करने लगी, पर आज पहली बार विक्रम की तोह जैसे बोलती hi बंद थी. राहुल ने अपना सामने रखा पानी का गिलास उठाया और पानी पीने लगा. सब कुछ पल के लिए जैसे खामोश hi हो गए. रूफ पर चलता म्यूजिक भी कुछ पल के लिए जैसे बंद hi हो गया था. विक्रम की शकल पर एक अलग hi लुक था, और उसकी ये हालत देख कर सुप्रिया की स्माइल तोह रुक hi नहीं रही थी. जैसा उसने सोचा था, उससे भी कई ज्यादा केहर ढाया था उसकी एंट्री ने.

कृति ने इधर उधर देखा - क्या हुआ? इतना साइलेंस क्यों हो गया...

विक्रम के मुँह से फाइनली आवाज़ निकली - यू अरे लुकिंग वैरी प्रीटी टुडे सुप्रिया...

सुप्रिया ब्लश करके हलके से बोली - थैंक यू...

कृति ने सुप्रिया से थोड़ा सा जलते हुए कहा - अगर मुझे पता होता की साड़ी थीम है, तोह मैं भी वही पेहेन कर आती..

सुप्रिया - नहीं सॉरी, मुझे कुछ और मिला hi नहीं... तोह एहि पेहेनना पड़ा..

विक्रम - ी थिंक तुम ट्रेडिशनल क्लोथ्स में अमेजिंग लगती हो...

विक्रम की तारीफ तोह रुक hi नहीं रही थी. सुप्रिया ने सोचा नहीं था की विक्रम इतना खुल की कृति और राहुल के सामने उसकी तारीफ करेगा. वह ब्लश करने के इलावा और कर hi क्या सकती थी.

राहुल भी बीच में बोल पड़ा - हाँ... बहुत प्रीटी लग रही हो...

राहुल की आवाज़ सुनकर सुप्रिया की स्माइल थोड़ी सी फीकी हो गयी, और उसने बस उसकी और सर हिला दिया. उसकी नज़र कृति पर गयी, जो इस समय थोड़ा अपसेट सी हो रही थी. आखिर ये उसकी स्पेशल रात थी, सुप्रिया की नहीं, और वह उसका सारा प्लान चौपट सा कर रही थी.

सुप्रिया ने बात को सही जगह मोड़ने के लिए कहा- ेहमममम... सो... ी थिंक हम यहाँ मेरी तारीफ करने नहीं आये है... हम लोग, यहाँ कृति की रिक्वेस्ट पर आये है...

विक्रम - राइट... सो बताइये मस. कृति... हम सब आपकी कैसे हेल्प कर सकते है...

कृति की स्माइल वापस आ गयी थी - उम् भैया... यू क्नोव राहुल राइट...

विक्रम - सॉर्ट ऑफ़... ी गेस मैंने तुम्हे कहीं देखा है... याद नहीं आ रहा...

राहुल - बैंक में सर... बैंक में...

विक्रम - ओह यस, तुम उसी ब्रांच में काम करते हो न, जहाँ सुप्रिया के हस्बैंड..

राहुल - यस सर, वही वाली ब्रांच...

विक्रम - वाओ... व्हाट ा स्माल वर्ल्ड... सो मर राहुल, आप कृति के क्लोज फ्रेंड है...

राहुल - उम्म्म... यस सर...

विक्रम ने कृति और राहुल की और बारी बारी देखा - जस्ट फ्रेंड्स?

राहुल की तोह हिम्मत hi नहीं हो रही थी कुछ बोलने की - उम्म्म... यस सर...

कृति बीच में बोल पड़ी - No... नॉट जस्ट फ्रेंड्स...

विक्रम - ी सी... बूत राहुल तोह कह रहा है की....

कृति ने घूर कर राहुल को देखा. राहुल बोल पड़ा - सॉरी सर... मैं बस थोड़ा नर्वस हूँ... आपसे कभी बात नहीं हुई न पहले... यस, मोरे थान फ्रेंड्स...

सुप्रिया बैठी बैठी सोच रही थी की कितना कमीना इंसान था राहुल, उसके सामने उसे ये सब बोलने में कोई हिचक कैसे नहीं हो रही थी. जैसे hi सुप्रिया से उसका मतलब पूरा हुआ था उसने उसे अपनी जिंदगी से निकाल फेका था. सुप्रिया इन खयालो में खोयी हुई थी, और उन लोगो की आपस की बातें ध्यान से नहीं सुन रही थी, की तभी विक्रम की आवाज़ उसके कान में पड़ी.

विक्रम - सुप्रिया... व्हाट दो यू थिंक?

सुप्रिया अपने खयालो से जागते हुए - सॉरी... मैंने ध्यान से सुना नहीं...

विक्रम - ी वास् जस्ट सयिंग की थे जस्ट मेट एच इतर 2-3 मोनथस बैक, थोड़ा और टाइम देना चाहिए बिफोर मेकिंग अन्य लॉन्ग टर्म डिशन्स...

सुप्रिया ने बिना सोचे समझे एक डैम से बोल दिया - हाँ... बात तोह सही है...

कृति ने सुप्रिया के पेट पर हलके से कोहनी मारी जैसे उसे बता रही हो की वह कुछ गलत कह रही है.

सुप्रिया उसका इशारा समझ गयी, और उसने बात को संभाला - पर... थोड़ा टाइम स्पेंड करेंगे साथ में शायद तभी तोह एक दुसरे को जानेंगे...

विक्रम - हम्म्म....

कृति - यस भैया, ी ऍम नॉट आस्किंग फॉर मैरिज राइट नाउ... बस आपको मिलवाना था राहुल से...

विक्रम ने अपने कंधे उचकाए - Ok... ठीक है... जैसे आप सब ठीक समझो. लेटस आर्डर फ़ूड नाउ, ी ऍम गेटिंग हंगरी. यहाँ इतना कम्फर्टेबले नहीं है, वहां अंदर जा कर बैठे, बैठक लगते है नीचे ज़मीन पर..

सब ने हाँ भरी और सब लोग अंदर की और चलने लगे. कृति और राहुल आगे, उनके पीछे सुप्रिया और विक्रम. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की विक्रम जैसे बार बार उसे hi देख रहा था. बैकग्राउंड में काफी एप्रोप्रियेट गाना भी चल रहा था. गाना सुन कर सुप्रिया भी अपनी स्माइल को आने से नहीं रोक पा रही थी, बस उसने अपना चेहरा दूसरी और कर लिया.

जादू है नशा है, मदहोशियाँ है, तुझ को भुला के अब जायु कहाँ…. देखती है.. जिस तरह से… तेरी नज़रें… मुझे… मैं खुद को छिपायु कहाँ..

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सब लोग अंदर आ कर बैठ गए और जल्दी hi खाना भी आर्डर हो गया. सुप्रिया को तोह अब जैसे विक्रम के साथ खाना खाने की आदत सी पद गयी थी, तोह उसे तोह बिलकुल अजीब नहीं लग रहा था. इधर उधर की बातें होती रही. हमेशा की तरह विक्रम हसी मजाक hi कर रहे थे, और सुप्रिया को उनकी कंपनी काफी अछि लग रही थी. राहुल भी बीच बीच में बोलने की कोशिश करता, और जब वह बोलता तोह सुप्रिया को अंदर से जैसे गुस्सा आना शुरू हो जाता.

कहने के बाद सुप्रिया बाथरूम जाने के लिए कड़ी हुई. बाथरूम एक हॉलवे से होता हुआ थोड़ा सा दूर था. जैसे hi सुप्रिया बाथरूम से बहार आयी, उसने देखा की राहुल वहीँ लेडीज बाथरूम के बहार खड़ा था. उसे देखते hi सुप्रिया का मुँह बन गया.

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राहुल सुप्रिया को बहार आते देख उसके पास आ गया - कैसी हो सुप्रिया...

सुप्रिया ने इधर उधर देखते हुए कहा - ठीक हूँ...

राहुल सुप्रिया के बहुत पास आ कर खड़ा हो गया - बहुत hi अमेजिंग लग रही हो आज... सबके सामने खुल के तारीफ नहीं कर पाया..

सुप्रिया ने दांत भींच कर कहा - राहुल यहाँ क्या कर रहे हो तुम...

राहुल - मैंने सुना अतुल घर पर नहीं है... मैं तुम्हे ड्राप कर दूंगा रात को... और फिर हम लोग...

राहुल ने बोलते बोलते सुप्रिया की कलाई पकड़ ली. सुप्रिया को यकीं hi नहीं हो रहा था राहुल ऐसी हिम्मत कर सकता था. यहाँ वह अपनी गर्लफ्रेंड के भाई से मिलने आया था, और अब वह उससे ऐसी गन्दी बात कर रहा था. किस तरह का इंसान था ये.

सुप्रिया - राहुल मेरा हाथ छोडो... कोई आ गया तोह तुम मुसीबत में पद जाओगे...

राहुल - आज तुम्हे देख कर... बस मैं कर रहा है तुम्हे....

सुप्रिया ने अपने दुसरे हाथ के नाख़ून राहुल के हाथ पर गड़ाए, ताकि वह उसका हाथ छोड़ दे.

राहुल दर्द में - अह्ह्ह... ये क्या किया...

सुप्रिया - तुमने मेरे साथ कोई गलत बात की न तोह मैं अभी जाकर विक्रम और कृति को सब बता दूंगी...

राहुल - और क्या बोलोगी उन्हें... क्या था हमारे बीच... वैसे ये विक्रम तुम पर बड़ी लाइन मार रहा है... आजकल इसका बिस्तर गरम कर रही हो क्या....

सुप्रिया ने गुस्से में राहुल को देखा - शट उप! तुम जैसा घटिया इंसान मैंने नहीं देखा कभी...

सुप्रिया वहां से गुस्से में वापस टेबल पर चली गयी. कृति और विक्रम को दूर से देख कर उसने अपने चेहरे के भाव ठीक किये और चेहरे पर एक स्माइल वापस ले कर आयी.

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कृति - काफी टाइम लगा दिया तुमने...

सुप्रिया ने हलकी सी स्माइल दी - हाँ वह... इस साड़ी में थोड़ा... (और फिर रीलीज़ किया की विक्रम भी तोह वहीँ बैठा था, वह भी पागल थी, क्या बोलने वाली थी उसके सामने).

कृति - येह ी कैन अंडरस्टैंड... राहुल दिखा था क्या वहां?

सुप्रिया - नहीं तोह...

कृति - Ok, उसको भी काफी टाइम हो गया. एंड उसने तोह साड़ी भी नहीं पहनी...

कृति और सुप्रिया ने एक दुसरे को देखा और ज़ोर ज़ोर से हसने लगी. विक्रम भी उनके बीच के हसी मजाक को देख स्माइल कर रहा था. कुछ मिनट बाद राहुल भी आ गया था.

कृति - भैया... ी हैवे तो जो तो ानोथेर फ्रेंड्स पार्टी टुनाइट... सो सॉरी िफ़ राहुल एंड ी हैवे तो लीव नाउ...

विक्रम - ओह ाचा... पर मैंने तोह स्वीट्स आर्डर कर दी है...

कृति - उसमे टाइम लगेगा, प्लीज भैया...

विक्रम - इस टाइम कौनसी पार्टी स्टार्ट होती है... 11 बजने वाले है...

कृति - आप नहीं समझेंगे भैया... आपकी लाइफ तोह डिसिप्लिन पर चली है..

सुप्रिया ने कृति की और देखा, जैसे पूछ रही हो की वह क्या करे, वह कैसे घर जाएगी.

कृति - सुप्रिया मैं काका को कॉल करके तुम्हे घर ड्राप करवा देती हूँ. उन्ही ने पिक किया था न तुम्हे?

विक्रम हैरान होते हुए बोलै - ओह काका ने पिक किया था तुम्हे? नहीं नहीं उन्हें रहने दो, उन्हें अँधेरे में दिखाई नहीं देता अचे से. मैं ड्राप कर दूंगा सुप्रिया को.

कृति - Ok कूल, थैंक्स, ब्येई...

कृति राहुल का हाथ पकड़ कर वहां से जल्दी से जाने लगी. सुप्रिया कृति को बेबस निगाहों से घूर रही थी जैसे बोल रही हो की ये कहाँ फसा दिया मुझे. उधर राहुल ललचायी हुई नज़रों से सुप्रिया की और पलट कर देख रहा था. पर जल्द hi वह उसकी नज़रों से ओझल हो गए.

उनके जाते hi सुप्रिया छुप चाप उनकंफर्टबले हो कर विक्रम के सामने बैठी थी. अभी थोड़ी देर पहली जो उसकी खिलखिलाहट थी, वह गायब सी हो गयी थी.

विक्रम ने hi छुपी तोड़ी - सो, व्हाट दो यू थिंक?

सुप्रिया एक डैम जैसे बोलती hi चली गयी - उम्म्म... पता नहीं, ी गेस, वह लोग एडल्ट्स है, वह आपस में डीडे कर लेंगे, पर थोड़ा गाइडेंस भी देना जरूरी होता है न. बाकि ी थिंक टाइम बताएगा शायद.

विक्रम - तस्सकक.. ारी.... मैं पूछ रहा था की व्हाट दो यू थिंक चॉकलेट और वैनिला, व्हिच ice-cream इस बेटर?

विक्रम के ये बोलते hi सुप्रिया की ज़ोर की हसी छूट पड़ी और वह किसी तरह फाइनली बोली - मुझे ice-cream नहीं अछि लगती इतनी... पर गुलाब जामुन इस बेटर...

विक्रम भी हसने लगा, दोनों साथ हसने लगे. विक्रम - ी एग्री, ी थिंक गुलाब जामुन इस थे बेस्ट... और इसीलिए मैंने वही आर्डर किये है.

थोड़ी देर में एक फैंसी से बाउल में गुलाब जामुन भी आ गए थे. सुप्रिया धीरे धीरे बाईट ले रही थी.

विक्रम - क्या हुआ? नॉट गुड?

सुप्रिया - उम्म्म... नहीं ाचा है...

विक्रम - लेट में चेक..

विक्रम ने एक डैम से अपनी झूठी चम्मच सुप्रिया के बाउल में डालते हुए गुलाब जामुन का थोड़ा सा पीेछे तोड़ते हुए उठा लिया, और सुप्रिया के देखते देखते उसे खा भी लिया.

विक्रम - हम्म्म... थोड़ा डिफरेंट है मेरे वाले से...

सुप्रिया - क्या?

विक्रम - हाँ... ये लो... ये तरय करो..

विक्रम ने अपनी चम्मच से hi अपनी बाउल का गुलाब जामुन का पीेछे लेते हुए सुप्रिया के मुँह के सामने कर दिया. सुप्रिया इससे पहले न कर पाती वह चम्मच उसके मुँह में थी.

जैसे hi विक्रम ने चम्मच मुँह से निकली, सुप्रिया बोली - शामे hi लगा...

विक्रम - फिर हो सकता है वह तुमने जहाँ से टच किया था वह थोड़ा और स्वीट हो...

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो गए थे और उसने अपनी आँखें नीचे झुका ली, और फिर उसकी आँख से एक बूँद आंसू नीचे टपका.

विक्रम ने एकदम सॉफ्ट आवाज़ में कहा - हे... क्या हुआ... इतना ख़राब था क्या?

सुप्रिया - नहीं वह बात नहीं है... (फिर एक दो सेकंड के पॉज के बाद) आज मेरी फर्स्ट मैरिज एनिवर्सरी है...

विक्रम एकदम चुप सा हो गया, उसने कुछ नहीं पुछा की अतुल कहाँ था.

सुप्रिया की आँखों से कुछ बूँद और ासु टपके और विक्रम ने अपना रुमाल उसके आगे कर दिया. सुप्रिया ने रुमाल लेकर अपनी आँख पोछनि शुरू करि.

विक्रम ने थोड़ी देर बाद कुछ बोलना शुरू किया, ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत पुराणी प्यारी बात को याद कर रहा था - जब मैं जूनियर अफसर था और उत्तराँचल के पहाड़ो में स्ततिओनेड था, तोह एक दिन मुझे मेरे सुपीरियर का कॉल आया. उन्होंने कहा की आज उनकी मैरिज एनिवर्सरी है पर वह लैंडस्लैड की वजह से कहीं फसे हुए है. तोह उन्होंने मुझे एक लम्बी सी लिस्ट लिखवाई और बोलै की शाम तक इन सभी चीज़ो का इंतज़ाम हो जाना चाहिए. वह एक छोटी सी जगह थी, तोह सब ढूंढ़ना भी काफी मुश्किल था, पर मैंने किसी तरह से भाग दौड़ करके सब अर्रंगे कर लिया. मुझे किसी के बगीचे से फूल भी चुराने पड़े थे. शाम को जब सुपीरियर अपने घर पहुंचे तोह उन्होंने देखा की उनकी वाइफ और मैं हस्ते हुए साथ में डिनर कर रहे थे. उन्हें आता देख उनकी वाइफ भाग के गयी और उनके गले लग गयी, और फिर ज़ोर से बोली - डार्लिंग, 15 सालो में ये मेरी बेस्ट एनिवर्सरी थी.

सुप्रिया को कुछ समझ बही आ रहा था की विक्रम अभी ये सब क्या बोल गए थे और उसने हैरत से विक्रम की और देखा.

विक्रम के चेहरे पर हलकी सी स्माइल आयी - सो ी गेस अगर तुम कहोगी की ये तुम्हारी बेस्ट एनिवर्सरी थी तोह ये मेरी लाइफ में दूसरी बार होगा, थोड़ा स्ट्रेंज है ी गेस बूत इंटरेस्टिंग…

विक्रम की कहानी से सुप्रिया को हसी आ गयी और उसका रोटा हुआ चेहरा हसी और रोने के बीच में कहीं था - ी ऍम सूरे आपने वह उनकी बेस्ट एनिवर्सरी रही होगी… वैसे मुझे नहीं पता था की आप आर्मी में थे?

विक्रम - शायद मैं हर किसी को बताना ठीक नहीं समझता..

सुप्रिया ने शरारत भरी नज़र से विक्रम की और देखा - और क्या नहीं बताते आप विक्की बाबू…

विक्रम ने अपना सर पीछे करते हुए ऊपर देखा - उफ्फ्फ्फ़…. ये काका ने बोलै होगा? उनको बोले बिना रहता नहीं है…

एकदम से जैसे विक्रम की सोफिस्टिकेटेड बोली हैट के एक नार्मल सी आवाज़ निकली, जो सुप्रिया ने पहले कभी सुनी नहीं थी. पर इस बोली में एक मासूमियत सी थी जो आज तक सुप्रिया ने विक्रम में देखि नहीं थी…

सुप्रिया नार्मल सी होती जा रही थी. दोनों ने बैठे हुए थोड़ी देर और बात करि और फिर विक्रम घडी देखता हुआ खड़ा हो गया. लगभग 12 बज गए थे. विक्रम ने बिल पाय किया और वह दोनों नीचे आ गए जहाँ सामने hi कोई विक्रम की गाडी ले आया था.

सुप्रिया इस जानी पहचानी गाडी में बैठी और रात की खली सड़को पर विक्रम ने गाडी चलनी शुरू कर दी. दोनों की बातें अभी भी ख़तम होने का नाम नहीं ले रही थी. सुप्रिया सवाल पर सवाल दागे जा रही थी, पर तभी वह कुछ अलग सा पूछ बैठी.

सुप्रिया - आपकी वाइफ नहीं आयी आज…

विक्रम - इमम्म… हमारी लाइफ थोड़ी अलग है… उसका अलग सोशल सर्किल एंड पार्टीज है जो वह एन्जॉय करती है…

सुप्रिया - और आप? आप नहीं एन्जॉय करते वह पार्टीज?

विक्रम ने सुप्रिया की और देख कर कहा - वह पार्टीज आज की रात का मुकाबला कर hi नहीं सकती…

सुप्रिया - ऐसा क्यों? मैडम आपको मिस करती होंगी न वहां…

विक्रम हलके से हँसा - ईशा को लाइफ में ice-cream चाहिए और मुझे गुलाब जामुन, एंड वे अरे बोथ फाइन विथ आईटी.

सुप्रिया बहार की और देखने लगी, पता नहीं विक्रम क्या कहना चाहता था और वह क्या सुन्ना चाहती थी - हम्म्म्म… अब तोह वह आर्डर भी कम्पलीट हो गया, अब तोह मैं अपने वाले ऑफिस से काम कर सकती हु…

विक्रम - िफ़ तहत इस व्हाट यू विश…

सुप्रिया - नहीं, ऐसा नहीं है. मुझे नहीं पता…

विक्रम ने एकदम से गाडी रोकी. इतनी जल्दी सुप्रिया का घर भी आ गया था. रात के सन्नाटे में कुत्तो के भौकने की आवाज़ आ रही थी.

विक्रम - टाइम इस 12.15, सो आपकी एनिवर्सरी भी ओवर हो गयी है…

सुप्रिया - थैंक यू विक्रम… ी हद थे बेस्ट एनिवर्सरी एवर… अगर आज मैं वहां नहीं आती तोह पता नहीं घर पर कैसा फील करती..

विक्रम - मैडम, आईटी वास् योर फर्स्ट, सो कैसे कह सकती हो आईटी वास् योर बेस्ट! बूत स्टिल, थैंक यू फॉर सयिंग तहत.

सुप्रिया - आपने अपनी लाइफ में 2 लेडीज की मैरिज एनिवर्सरी तोह बेटर करि है, उसके लिए तोह एक ख़ास मैडल मिलना चाहिए..

विक्रम - ः… शायद उनके हस्बैंड्स से पूछोगी तोह वह कुछ और hi कहे..

सुप्रिया का दिल ज़ोर से धक् धक् कर रहा था, रात का नशा उसके दिमाग पर छड़ रहा था, एक भीनी भीनी खुशबू आ रही थी. वह हिचकिचाते हुए बोली - विक्रम… आप ऊपर मेरे घर चलना चाहेंगे क्या…

विक्रम - उम्म्म… मय्बे सम इतर टाइम… अभी काफी लेट हो गया है न..

सुप्रिया इस समय अपने आप को किसी पहाड़ से धक्का देना चाहती थी. कितनी बड़ी इडियट थी वह. क्या सोच कर उसने इतनी वाहियात बात बोली. उसने टाइम के बारे में सोचा भी नहीं. पता नहीं विक्रम सर उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे. ओह गॉड, उसे बोलने से पहले सोच तोह लेना चाहिए…

सुप्रिया ने किसी तरह से गुड नाईट बोली और गाडी से उतर गयी. विक्रम उसके अंदर जाने तक बहार वेट करता रहा. सुप्रिया को इस टाइम देख कर दूसरा वॉचमन भी हैरान रह गया था. उसने सुप्रिया के लिए गेट खोला और सुप्रिया अपने आप को कोसते हुए अपने घर चली गयी.
 
अपडेट 54

घर पहुंच कर सुप्रिया काफी देर तक परेशां रही. पता नहीं वह क्या hi सोच रही थी जब उसने विक्रम को रात के इस टाइम घर पर आने के लिए बोलै था. वह अपने आप को समझने में लग गयी की उसका कोई ऐसा वैसा मतलब नहीं था, वह तोह बस विक्रम सर उसे छोड़ने आये थे तोह उसने उनको पूछना सही समझा. उसका बिलकुल भी कोई गलत इरादा नहीं था.

पर दूसरी तरफ उसकी नेगेटिव थॉट्स उसे फील करवा रही थी की जो उसने किया वह काफी ज्यादा गलत था. विक्रम सर ने हमेशा उसके साथ बस ाचा hi किया था और पता नहीं वह उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे. क्या विक्रम सर के लिए उसके मैं में कोई फीलिंग्स पैदा होनी शुरू हो गयी थी. राहुल तोह चलो ुनमर्रिएद था और शायद वह उससे सच में प्यार भी करने लगी थी, वैसे कितनी बड़ी इडियट थिस वह जो राहुल जैसे इंसान पर भरोसा किया!! पर विक्रम सर? वह तोह मैरिड थे, और उम्र में भी उससे बड़े थे, और उस पर उसके बॉस भी थे.

शायद वह आज उनसे कुछ ज्यादा hi कम्फर्टेबले हो गयी थी. एनिवर्सरी के इमोशंस, रात का माहौल और उनके बीच की गयी बातें शायद इस सब की जिम्मेदार थी. सुप्रिया ने सोचा की वह विक्रम सर को मैसेज दाल कर सॉरी बोल दे, पर रात के 1 बजे थे और इस टाइम उन्हें मैसेज करना थोड़ा वीयर्ड होता. काफी देर इन्ही सब फीलिंग्स से झूझती हुई वह आखिर सोने के लिए लेट गयी. अगले दिन संडे था, और शायद अतुल कल घर वापस आ जाये.

सुबह सुबह सुप्रिया की नींद फ़ोन बजने से खुली. सुप्रिया ने बंद आँखों में हाथ इधर उधर मारते हुए अपना फ़ोन उठाया.

फिर नीड में फ़ोन उठाते हुए बोलै - हेल्ल्लूओ… कौन….

दूसरी तरफ से इक़बाल की आवाज़ आयी - मैडमजी… माफ़ करना मैंने आपको नींद से तोह नहीं जगा दिया...

इक़बाल की आवाज़ सुनते hi सुप्रिया की नींद एक डैम से उड़द गयी - नहीं नहीं… बोलो इक़बाल… क्या टाइम हुआ है?

इक़बाल - 10 बज गए मैडम जी, तोह मुझे लगा आप उठ hi गए होंगे…

सुप्रिया - हाँ वह… हम्म्म्म… बस लेती हुई थी? कुछ काम था क्या आपको?

इक़बाल - वह कोई आपकी गाडी देने आया है…

सुप्रिया - ओह ाचा…. आप एक बार कार को पार्किंग में लगा कर चाबी अपने पास रख लोगे? मैं थोड़ी देर में आती हूँ छाबी लेने..

इक़बाल - आप क्यों आएंगे, मैं आ जाता हूँ देने…

कल रात जो हुआ उसके बाद सुप्रिया इतनी शर्मिंदा थी की किसी को घर पर आने के लिए नहीं बोलना चाहती थी. और वैसे भी जो उसने उस दिन इक़बाल और करुणा को करते देखा था, तबसे उसे इक़बाल के बारे में सोचना hi थोड़ा अजीब सा लगता. वह जल्दी से बोली - नहीं नहीं… आप ड्यूटी पर हो.. मैं आकर ले जयुंगी… थोड़ा टाइम लग जायेगा पर, चलेगा?

इक़बाल - ठीक है मैडम जी.. मैं तोह एहि हूँ, आप जब मर्ज़ी आ जाना…

सुप्रिया फ़ोन रख कर फिर से बीएड पर लेती गयी, और थोड़ी देर बाद नाहा धो कर तैयार हो गयी. सुप्रिया काफी अछि लग रही थी. काफी दिनों से अब उसे अचे से make-up करके कहीं भी जाने की आदत पद गयी थी, तोह आज भी वह अचे से रेडी हो कर hi नीचे गयी.

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जब वह नीचे पहुंची तोह उसने देखा की गेट के पास दो गाड़ियां आपस में भिड़ी हुई थी और कुछ लोगो के बीच में बहस चल रही थी. थोड़ी सी भीड़ इखट्टा हो गयी थी और इक़बाल भी भीड़ के पास खड़ा था.

सुप्रिया इक़बाल के पास चलती हुई पहुंची - क्या हुआ यहाँ इक़बाल?

इक़बाल एक डैम से चौंका - मैडमजी!! आप कब आये, पता hi नहीं चला. कुछ नहीं, बस लोग देख कर नहीं चलते, तोह ऐसे hi होगा न… अब भड़क रहे है एक दुसरे पर.

सुप्रिया - हम्म्म…

इक़बाल - आप 5 मिनट रुकोगे मैं अभी देता हूँ छबि, आप वहां छाव में चले जायो… बहुत गर्मी है अभी तक, अक्टूबर ख़तम होने को आ गया जबकि…

सुप्रिया - ठीक है… कोई जल्दी नहीं है

सुप्रिया वहीँ पास में एक पेड़ के छाँव में कड़ी हो गयी. जहाँ वह कड़ी थी, वह गेट के ोास से पूरी तरह दिख नहीं रही थी. कुछ hi मिनट में इखट्टा हुई भीड़ हटने लगी. सुप्रिया इक़बाल का इंतज़ार करते हुए वहीँ कड़ी रही.

तभी एक दूसरा वॉचमन इक़बाल के पास आया - इक़बाल मिया… क्या हाल चाल…

इक़बाल - सब खैर.. तुम बताया…

वॉचमन - बस कुछ नहीं… रात को ड्यूटी की थी, अब वापस आ गए काम पर…

इक़बाल - हाँ वह तोह है… रात की ड्यूटी तोह बेकार hi होती है…

वॉचमन - पर कल रात तोह इतनी बेकार नहीं गयी... अह्ह्ह... आँखें सेकने को मिल गयी… सोचा नहीं था ये नज़ारा देखने को मिलेगा...

इक़बाल हस्ते हुए - ऐसा क्या देख लिया?

वॉचमन - वह 609 वाली मैडम है न…

अपने फ्लैट का नंबर सुनते hi सुप्रिया के कान एकदम से खड़े हो गए. ये तोह उसकी बात कर रहे थे. वह उनकी बातें और ध्यान से सुनने लगी.

सुप्रिया का फ्लैट का नंबर सुनते hi इक़बाल के चहेरे पर एक बड़ी सी शिकन आ गयी थी - 609? क्या हुआ रात को?

वॉचमन - रात को करीब 1 बजे एक गाडी आयी, और उसमे से 609 वाली मैडम उत्तरी, एक डैम मस्त साड़ी पहनी हुई थी, छोटा सा ब्लाउज... हाय...

इक़बाल - गलत देखा होगा तुमने? कहीं 608 की बात तोह नहीं कर रहे? और कौनसी गाडी थी, सफ़ेद इंडिका?

वॉचमन - मियाँ इतने सवाल पूछते हो… ारी नहीं इंडिका नहीं थी, कोई महंगी गाडी थी, टिप टॉप एकदम… और अंदर कोई अमीर सा आदमी बैठा था... उसका शीशा नीचे था तोह मुझे शकल दिखी थी...

इक़बाल - हम्म्म और…

वॉचमन - और क्या, 608 वाली रंडी को तोह मैं अचे से जानता हूँ… ये तोह 609 वाली hi थी, साली बहुत इत्र के चलती है… उसकी गांड इतनी मस्त लगती है न, और उसके मम्मी...

इक़बाल - तमीज से बात कर ले उनके बारे में… एक शब्द और फालतू मत बोलियों...

वॉचमन - तुम क्यों इतना भड़क रहे हो यार… रात को एक बजे ऐसे मटकते हुए आ रही है किसी गैर मर्द के साथ… खुद hi सोच लो न तुम क्या छिनालपन चल रहा होगा…

इक़बाल ने दुसरे वॉचमन का कालर कास के पकड़ लिया - तेरी गांड में न मोटा सा डंडा घुसा दूंगा अगर आइंदा कभी उनके बारे में कुछ बोलै तोह… चल भाग यहाँ से..

दूसरा वॉचमन एक डैम से सख्ते में आ गया और अपने आप को छुड़ाते हुए बड़बड़ाता हुआ वहां से चला गया. सुप्रिया ये सब सुन कर काफी शॉकेड सी थी, की लोग उसके बारे में क्या क्या बोल रहे थे. उसने थोड़ा सा पीछे होने की कोशिश करि ताकि इक़बाल को ये न लगे की उसने सब सुन लिया था. सुप्रिया को गुस्सा आना शुरू हो गया था, पता नहीं लोग उसे क्या समझने लगे थे.

इक़बाल इधर उधर देखने लगा सुप्रिया को ढूंढ़ने के लिए. और उसे आखिर खार सुप्रिया दूर कड़ी दिख hi गयी. वह चाबी देने के लिए उनकी और गया - मैडमजी… ये आपकी चाबी…

सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में कहा - ठीक है... थैंक यू…

इक़बाल सुप्रिया की और देख रहा था जैसे उससे कुछ पूछना चाहता हो. पर सुप्रिया उससे बिलकुल भी बात करने के मूड में नहीं थी.

सुप्रिया - मैं चलती हूँ फिर…

सुप्रिया ने एक दो कदम बढ़ाये hi थे की इक़बाल की आवाज़ निकली - मैडमजी छोटा मुँह बड़ी बात… पर मैं में है तोह पूछ रहा हूँ.. सब ठीक है न, साहब जी भी घर पर नहीं है?

सुप्रिया ने पलट कर इक़बाल की और देखा और गुस्से में बोली - हाँ सब ठीक है… और होगा क्यों नहीं? तुम्हे भी लगता है की मैं…

इक़बाल - नहीं मैडमजी… मेरा वह मतलब बिलकुल भी नहीं था, आप मेरी बात गलत मत ले… मुझे तोह बस हमेशा आपकी फिक्र hi रहती है…

सुप्रिया गुर्रा के बोली - फिक्र रहती है... या मेरे बारे में फालतू बातें करने का मौका चाहिए...

इक़बाल की तोह बोलती पूरी तरह बंद हो गयी थी. उसने आज तक सुप्रिया को इतने गुस्से में नहीं देखा था. इक़बाल की शकल पर भी थोड़ा सा गुस्सा आ गया, उसे ऐसी बदतमीज़ी की आदत नहीं थी - मैडमजी… सच कह रहे है… आप की जगह कोई और होता न तोह अभी उसे थपेड़ देते…

सुप्रिया ने इक़बाल की लाल होती शकल देखि, उसने भी आज तक इक़बाल को इतना गुस्सा नहीं देखा था. इससे पहले बात और बिगड़ जाये उसने आपको शांत किया और समझाया. आखिर इक़बाल को उसका hi पक्ष ले रहा था अपने साथी के सामने.

सुप्रिया - सॉरी इक़बाल… मैं कुछ ज्यादा बोल गयी… बस वह लोगो की बातों…

सुप्रिया को शांत होते देख इक़बाल का गुस्सा भी पल में उतर गया - मैडमजी… आप उस बावले की बात पर गुस्सा हो रहे हो! न न… दिमाग से पैदल है वह… आप वह सब मत सोचो… वह क्या जाने सच क्या है..

सुप्रिया - हाँ, मैं एक ऑफिस के डिनर के लिए

इक़बाल - मैडमजी आपको मुझे समझने की भी जरूरत नहीं है… मैं आपको अछि तरह से जानता हूँ… आप कभी कुछ गलत hi नहीं कर सकते.. पर आप ये जरूर समझना की दुनिया की नज़र तोह ख़राब है… कुछ ज्यादा बोल गया तोह माफ़ कर देना…

सुप्रिया - नहीं नहीं… आप क्यों माफ़ी मांग रहे हो…

इक़बाल - चलिए ठीक है… वैसे आप फिर कभी मेरे साथ मस्जिद चलना चाहोगे? आपने कहा था आपको ाचा लगा था..

सुप्रिया - अरे आपने मुझे ाचा याद दिलाया… उस दिन मुझे मॉल में वह मस्जिद वाली बुद्धि अम्मा मिल गयी थी और वह मेरे पीछे पद गयी थी.

इक़बाल - कौन बुद्धि अम्मा?

सुप्रिया - वही जो ये समझ रही थी की मैं आपकी… हम दोनों…

ये बोलते बोलते सुप्रिया के गाल लाल हो गए और वह शर्म से नीचे देखने लगी, और उसकी नज़र इक़बाल की पंत पर जाकर रुकी जहाँ एक हल्का सा उभर था. एक डैम से उसके दिमाग में फिर से उसके बड़े मोठे लैंड की तस्वीर सामने आयी और उसने झट से अपनी आखें दूसरी और कर ली.

इक़बाल - ओह ाचा… वह अम्मा… हाँ मुझे भी मिली थी वह… आपको कुछ कह रही थी क्या?

सुप्रिया - हाँ.. उस दिन तोह मैं फास hi गयी थी… मैं अतुल के साथ थी और वह मेरे पीछे पद गयी थी की ये तोह तुम्हारा शोहर नहीं है.. वह तोह दूसरा वाला है जो काफी लम्बा छौड़ा..

सुप्रिया फिर से बिना सोचे समझे सब कुछ बोल गयी थी. उसे अपनी गलती रीलीज़ हुई और वह बीच में चुप हो गयी.

इक़बाल - ओह्ह्ह्ह… आप तोह काफी मुसीबत में फास गए होंगे…

सुप्रिया - हाँ पर मैंने अतुल के सामने किसी तरह बात को संभल लिया. पर भगवन करे फिर से वह अम्मा न मिले मुझे कभी…

इक़बाल - हाँ शायद एहि बेहतर रहेगा… अब उनको सब सच बताना भी तोह काफी अजीब लगेगा.

सुप्रिया - हम्म्म्म… हाँ शायद… ाचा मैं चलती हूँ… काफी काम है घर पर… अतुल भी वापस आ रहे है आज..

सुप्रिया इक़बाल को bye बोलकर वापस अपने घर आ गयी. उसके दिमाग में वैसे तोह बहुत कुछ चल रहा था पर अभी ये सब सोचने का टाइम नहीं था, अभी तोह अतुल के वापस आने की तैयारी करनी थी.

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अतुल वापस आ गया पर उनके बीच कुछ दूरी सी बाद गयी थी. दोनों के बीच कोई झगड़ा तोह नहीं हुआ पर वैसे कोई प्यार भरी बात भी नहीं हुई. दोनों एक छत के नीचे जैसे बस साथ रह रहे थे.

सुप्रिया भी फिर से बस अपने वाले ऑफिस जाने लगी और अब कोई जरूरत भी तोह नहीं थी विक्रम सर के ऑफिस जाने की. वैसे भी वह उनका सामना करना भी नहीं चाहती थी, उसे अभी भी उस रात के लिए काफी शर्मिंदगी थी. विक्रम सर यहाँ वाले ऑफिस आये भी नहीं थे. बस घर से ऑफिस और ऑफिस से घर का रूटीन सा बन गया था पिछले दो हफ्तों से.

इस बीच सुप्रिया ने गौर किया की उसकी बिल्डिंग सोसाइटी के लोग उसे अभी कुछ ज्यादा hi खुले आम घूर कर देखा करते थे. और उसके सामने आते hi खुसर फुसर सी शुरू हो जाती थी. ऐसा लग रहा था की जैसे उसके बारे में कुछ अफवाहें फैलनी शुरू हो गयी थी. सुप्रिया कोशिश करती की वह इस सब के बारे में न सोचा, आखिर वह इस सोसाइटी में जानती hi कितने लोगो को थी.

दिवाली भी बस कुछ hi दिन दूर थी तोह उसकी तैयारी भी चल रही थी. सुप्रिया चाहती थी की वह दिवाली पर अतुल के साथ सब कुछ ठीक कर ले. आखिर कब तोह वह दोनों ऐसे मुँह फुलाए बैठे रहेंगे. शायद गलती उसकी hi थी तोह पहल भी उसी को करनी पड़ेगी.

दिवाली से 2 दिन पहले ऑफिस में दिवाली का माहौल खूब जोश में था. सब लोग उस दिन अचे से सज्ज धज के ऑफिस में एथनिक वियर में आये थे. सुप्रिया ऑफिस में एक लाल रंग की ड्रेस पेहेन कर आयी थी जिसमे वह काफी ज्यादा हॉट लग रही थी. ऑफिस में साड़ी लड़कियां अपनी फोटो खिचवा रही थी. कृति और सुप्रिया ने भी आकाश को पकड़ा हुआ था अपनी ढेर साड़ी फोटोज क्लिक करवाने के लिए.

वह फोटो सेशन के बीच में hi थे की सुप्रिया को दूसरी और से विक्रम सर आते दिखे. उन्होंने एक कुरता पहना हुआ था जिसमे वह काफी ज्यादा स्मार्ट लग रहे थे. विक्रम वहां आकाश के पास आकर खड़ा हो गया और सुप्रिया और कृति को पोज़ बनाते हुए देखने लगा. सुप्रिया कोशिश कर रही थी वह विक्रम से ऑय कांटेक्ट न बनाये.

कृति विक्रम को देखते hi एक्ससिटेमेंट में चिल्लाई - भैया!!! वाओ, लुकिंग अमेजिंग टुडे! आप भी आ जायो… साथ में फोटोज लेते है…

विक्रम - नहीं नहीं… तुम लोग करो ये सब… इतस नॉट फॉर में…

कृति - प्लीज भैया! It’s दिवाली, no एक्सक्यूसेस टुडे. के के…

कृति ने विक्रम का हाथ पकड़ कर उसे सुप्रिया और अपने बीच में खड़ा कर दिया. विक्रम अटेंशन में उन दोनों के बीच खड़ा था और कोशिश कर रहा था की उसका शरीर सुप्रिया को न छुए.

आकाश - सर… आप थोड़ा स्माइल करिये न और पोज़ चेंज करिये…

कृति - हाँ भैया.. थिस इस गोइंग ों इंस्टा.. सो बेटर बे गुड…

विक्रम - ारी.. मैं क्या करू.. मुझे ये सब समझ नहीं आता…

कृति ने विक्रम का हाथ पकड़ते हुए अपनी कमर पर रख दिया. पर दूसरी साइड का हाथ अभी भी नीचे था.

आकाश - सर.. दूसरी साइड… सिमिट्री नहीं बन रही..

विक्रम - क्या?

कृति - ओफ्फो भैया… जस्ट पूत योर एआरएम अराउंड सुप्रिया, जैसे मुझे पकड़ा है…

विक्रम ने सुप्रिया की और देखा और आँखों आँखों में उससे परमिशन मांगी वहां हाथ रखने की. सुप्रिया ने हल्का सा सर हिला कर विक्रम को इज़ाज़त दे दी, और फिर विक्रम से अपना हाथ सुप्रिया की कमर पर रख दिया. सुप्रिया की कमर पर जैसे hi विक्रम का हाथ लगा उसके पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया, और उसके मुँह से बहुत हलकी सी सिसकी निकल गयी, जो सर विक्रम को सुनाई दी थी.

आकाश - वैरी गुड.. नाउ इतस लुकिंग गुड... स्माइल एवरीवन..

आकाश फोटो पर फोटो खींचे जा रहा था, और विक्रम की उंगलियां बिलकुल स्थिर सुप्रिया की कमर पर तिकी हुई थी. सुप्रिया की सांसें थोड़ी सी भरी हो गयी थी, और उसकी छाती सांसें लेते हुए ऊपर नीचे हो रही थी.

विक्रम - दोने?

कृति वहां से थोड़ा दूर हैट गयी - येह ी ऍम दोने...

विक्रम - एक पिक्चर बस मेरी और सुप्रिया की भी ले लो..

सुप्रिया अभी भी विक्रम के पास कड़ी थी, और उसने पलट कर विक्रम की और देखा. उसके चेहरे पर एक बहुत हलकी सी स्माइल थी, जैसे उसे इस सब में काफी मज़ा आ रहा हो. आकाश ने हाँ में सर हिलाया और उन दोनों की फोटोज खींचने लगा. सुप्रिया के चेहरे पर भी स्माइल आ गयी थी और वह आस पास के सब लोगो को भूलने सी लगी थी.

आकाश भी मजे लेता हुआ सुप्रिया को अलग अलग पोज़ बनाने के लिए बोल रहा था - गुड सुप्रिया, सर के कंधे पर साइड से हाथ रखो.

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सुप्रिया ने आकाश की डिरेक्शंस फॉलो करते हुए विक्रम के कंधे पर हलके से हाथ रख दिया.

कृति दूर से है के बोली - वाओ... यू गाइस लुक रियली गुड टुगेदर... बिलकुल लोवी देवी types...shakal तोह देखो इनकी आकाश...

सुप्रिया के गाल टमाटर जैसे लाल हो गए थे, और उसने एक बड़ी सी स्माइल के साथ कृति की और घूर कर देखा, उसकी बड़ी बड़ी आँखें कृति को छुप होने का इशारा कर रही थी. विक्रम भी मुस्कुरा के कृति को देख रहा था.

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सुप्रिया ने झट से अपने हाथ विक्रम से दूर कर लिए और थोड़ा सा दूर हो कर कड़ी हो गयी. उसने आकाश को इशारा किया की फोटो सेशन पूरा हो गया था. सुप्रिया कृति के पास चली गयी.

सुप्रिया ने कृति को मुस्कुरा कर पर मुँह बना कर बोलै - क्या बोलती रहती हो तुम...

कृति - जोके था यार... इतनी सीरियसली क्यों ले रही हो...

सुप्रिया - मैं कहाँ सीरियसली ले रही हु...

कृति - लग तोह रहा है, अपनी शकल तोह देखो... मन भैया हैंडसम है... पर मैरिड है..

सुप्रिया - शट उप ok! बस भी करो...

सुप्रिया कृति के पास से हैट कर साइड में अकेले हो गयी. उसे अपने इमोशंस पर काबू लाने के लिए अकेले होना जरूरी था. सुप्रिया वाटरकूलर के पास अकेली कड़ी पानी hi पी रही थी की विक्रम उस साइड आने लगा. विक्रम को आता देख सुप्रिया को जोर का धसका लग गया और वह खांसने लगी.

विक्रम ने पास आते हुए कहा - ठीक हो न सुप्रिया?

सुप्रिया कुछ सेकंड बाद अपनी खासी रोकते हुए बोली - हाँ... ठीक हु...

विक्रम - मैं बस ये बोलने आया था की सॉरी अगर तुम्हे मेरे साथ फोटोज लेना उनकंफर्टबले लगा तोह... कृति कह रही थी तुम थोड़ा अपसेट हो गयी थी...

सुप्रिया - नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं... कृति तोह बस कुछ भी बोलती है...

विक्रम - सो उनकंफर्टबले नहीं हुई थी?

सुप्रिया ने सर हिलाया - नहीं.. मैं उनकंफर्टबले नहीं थी...

विक्रम - हम्म्म... तोह फिर कम्फर्टेबले थी?

सुप्रिया ने ब्लश करते हुए आँखें नीचे कर ली - नहीं पता...

विक्रम - उनकंफर्टबले और कम्फर्टेबले के बीच में कहीं?

सुप्रिया ने सोफ़्त्ल्य कहा - हाँ शायद...

विक्रम - और अब तुमने मैं ऑफिस भी आना बंद कर दिया है...

सुप्रिया की आँखें एक डैम से उठ गयी - आपने hi तोह बोलै था नहीं आने के लिए...

विक्रम - मैंने ऐसा कब कहा...

सुप्रिया - उस raat....jab आप मुझे घर ड्राप कर रहे थे...

विक्रम - मैंने तोह शायद ये कहा था की इतस योर विश...

सुप्रिया - हाँ तोह इसका मतलब तोह एहि होता है न... की आप नहीं चाहते मैं वहां आयु...

विक्रम - ओह गॉड... फिर से ट्रांसलेशन का प्रॉब्लम... पता नहीं मैं कब लड़कियों की लैंग्वेज सीख पायूँगा..

सुप्रिया को विक्रम की बात पर हसी आ गयी - आपको अभी काफी वर्क करना पड़ेगा उस पर...

विक्रम - जरूर करुणा.. नहीं पर सीरियसली तुम जब चाहो वहां आ सकती हो... तुम्हारा लंच काफी मिस करता हूँ मैं...

अब बारे सुप्रिया की छिड़ने की थी - सिर्फ लंच की बात है? वह तोह मैं रोज़ ड्राप करते हुए जा सकती हु...

विक्रम हलके से मुस्कुराया - सूरे, अस यू विश...

सुप्रिया - फिर से... अस यू विश...

सुप्रिया को वाटर कूलर के पास कोई और आता दिखा, और वह जल्दी से अपना पानी का गिलास ले कर वहां से हट गयी. सुबह की फोटोज के बाद वह लोगो को बातें बनाने का मौका नहीं देना चाहती थी. वैसे hi उसकी अपार्टमेंट बिल्डिंग में क्या काम बातें चल रही थी की वह ऑफिस में भी शुरू हो जाये.

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दिन किसी तरह पूरा हुआ, अगले कुछ दिन दिवाली की छुट्टी थी. सुप्रिया की शादी के बाद की पहली दिवाली थी, और अतुल को घर सजाते देख, वह उसकी मदद करने लगी और उन दोनों के बीच का तनाव थोड़ा सा काम हो गया. दोनों ने अचे से मिल कर दिवाली बनायीं. सुप्रिया इक़बाल को एक मिठाई का डब्बा भी देने गयी, जिससे इक़बाल खुश हो गया था. दिवाली काफी अछि गयी सुप्रिया की बिना किसी ख़ास टेंशन के. अतुल भी फिर से खुश होने लगा था.

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दिवाली के दो दिन बाद, अतुल ऑफिस गया हुआ था. सुप्रिया ने आज की भी छुट्टी ली हुई थी पर वह विक्रम को दिवाली की मिठाई देने के लिए उसके ऑफिस निकल पड़ी. उसने खुद अपने हाथों से विक्रम के लिए मीठा बनाया था. उसे थोड़ा अजीब तोह लग रहा था की वह ऐसे बिना किसी काम के विक्रम के ऑफिस जा रही है पर वह उनकी पिछली बातचीत के बाद उनको ये सरप्राइज देने में काफी एक्ससिटेड भी थी.

मैं ऑफिस में पहुंच कर सुप्रिया को विक्रम के केबिन के बहार दिशा दिखाई दी, जो हमेशा की तरह सीरियस हो कर बैठी थी.

सुप्रिया ने उसे पास जाकर कहा - Hi दिशा... हैप्पी दिवाली...

दिशा ने ऊपर मुँह करके देखा - Hi, तुम आज यहाँ? तुम्हारी सीट तोह मैंने किसी और को दे दी है...

सुप्रिया ने सोचा की पता नहीं ये लड़की इतना सीरियस क्यों रहती है, न hi इसने मेरी हैप्पी दिवाली का जवाब दिया - नहीं, मैं यहाँ वर्क करने नहीं, विक्रम से मिलने आयी हु...

दिशा - हम्म्म... विक्रम तोह अभी मीटिंग में है...

सुप्रिया - Ok, no प्रॉब्लम... मैं वेट कर लुंगी...

तभी विक्रम के केबिन का दूर खुला और कुछ लोग बहार निकले, और दूर पर विक्रम भी खड़ा था. विक्रम ने सुप्रिया को देखते hi स्माइल दी.

विक्रम - सुप्रिया... व्हाट ा सरप्राइज... के इनसाइड..

दिशा बीच में बोली - विक्रम, अभी आपकी एक और मीटिंग है..

विक्रम - दिशा, उस मीटिंग को मूव कर दो प्लीज.

सुप्रिया विक्रम के केबिन में अंदर चली गयी और वह दोनों आपस में बातें करने लगे. विक्रम ने सुप्रिया का बनाया हुआ मीठा भी खाया जो उसे बहुत ाचा लगा.

विक्रम - वाओ.. थिस इस अमेजिंग... थैंक यू सो मच, इसे लाने के लिए..

सुप्रिया - थैंक यू! आपने कहा था न की आपको इंडियन स्वीट्स पसंद है पर आप बहार की स्वीट्स ज्यादा खाते नहीं है.. सो मैंने खुद बनायीं ये..

विक्रम - ट्रूली अमेजिंग...

वह दोनों बात hi कर रहे थे की विक्रम के डेस्क के फ़ोन पर बीप की आवाज़ आयी और दूसरी तरफ से दिशा की आवाज़ - विक्रम... बड़े सर आ रहे है...

विक्रम एक डैम से हड़बड़ा के खड़ा हो गया - सुप्रिया... तुम इस डब्बे को अभी पैक कर लो.. एंड जस्ट प्रिटेंड की तुम यहाँ किसी ऑफिस के काम से आयी हो...

सुप्रिया - सूरे, पर हुआ क्या है...

विक्रम - I'll एक्सप्लेन लेटर...

विक्रम जल्दी से जाकर अपनी सीट पर बैठ गया, और कुछ hi पल बाद ऑफिस का दूर बिना किसी नॉक के खुल गया, और अंदर एक बड़ी उम्र का आदमी घुसा. वह काम से काम 65-70 साल का तोह होगा, और काफी ज्यादा मोटा इंसान था.

उन्हें देखते hi विक्रम ने बोलै - पापा आप... आज यहाँ...

पापा - हाँ विक्रम, किसी काम से पास में आया था सोचा आज यहाँ भी आ जायु.. भूल सा गया हूँ ये जगह अब तोह...

विक्रम - आप ऐसे क्यों कह रहे है... आपका hi ऑफिस तोह है ये...

पापा - था... है न... अब तोह ये तुम्हारे कपबले हैंड्स में है... (तभी उस आदमी की नज़र सुप्रिया पर पड़ी)... Hello, आपको पहले कभी नहीं देखा...

विक्रम - ये, मेरे एक्सपोर्ट बिज़नेस की एम्प्लोयी hain..Supriya शर्मा..

पापा - ाचा... तभी कहूं मैंने कैसे नहीं पहचाना... नहीं तोह अभी भी हर हायरिंग पर मेरी फाइनल मोहर तोह लगती hi है... अभी भी तुम उस बिज़नेस पर अपना टाइम वास्ते कर रहे हो...

विक्रम - लेट तहत बे पापा, मेरी हॉबी समझ लो आप उसे... सुप्रिया, यू मई जो, ी थिंक थे प्लान नीड्स ा बिट ऑफ़ रेवॉर्क.

सुप्रिया ने सर हिलाया और बहार की और जाने लगी. दरवाज़ा बंद होते होते उस आदमी की आवाज़ सुप्रिया के कान में पड़ी - अपने आस पास काफी खूबसूरत लड़कियां रखते हो तुम, बहार तुम्हारी सेक्रेटरी, और ये.....

बहार आते hi सुप्रिया सोचने लगी की ये कौन था. विक्रम उसे पापा बुला रहे थे, पर वह ऐसे एक्ट कर रहे थे की जैसे वह इस कंपनी के असली मालिक हो. हो न हो वह विक्रम की वाइफ के पापा होंगे, जिनका ये बिज़नेस था. सुप्रिया को समझ नहीं आया की विक्रम एकदम से इतने पैनिक में क्यों आ गया था. सुप्रिया घर चली गयी और उसने इस सब के बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोचा.

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दिसंबर का एन्ड आ चला था, और पिछले कुछ हफ्ते काफी नार्मल से hi बीते थे. सुप्रिया और अतुल की लाइफ भी थोड़ी नार्मल सी लगने लगी थी. अतुल के मैं का गुस्सा थोड़ा काम होता चला था और सुप्रिया भी कोशिश कर रही की वह घर पर ज्यादा ध्यान दे, ऑफिस का काम भी काफी स्लो था. विक्रम सर भी कुछ हफ्तों से गायब से थे.

2-3 दिन बाद वह दोनों विक्रम सर की पार्टी में इन्वितेद थे. पार्टी नई ईयर से थोड़ा पहले थी, एक बड़े से फार्महाउस में. पार्टी का ड्रेस कोड ब्लैक था, और उसके लिए सुप्रिया ने एक नयी ब्लैक पार्टी साड़ी खरीदी थी, जिसमे वह काफी अमेजिंग लग रही थी. साड़ी काफी ट्रांसपेरेंट थी, जिससे सुप्रिया का ब्लाउज और गोरा शरीर साफ़ दिख रहा था.

जब वह दोनों शाम को उस पार्टी में पहुंचे तोह काफी साड़ी निगाहें बस सुप्रिया पर hi तिकी हुई थी. ज्यादातर औरतो ने वहां वेस्टर्न ड्रेसेस पहनी थी, तोह सुप्रिया साड़ी में अलग hi सिंपल बूत हॉट लग रही थी.

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पार्टी में पहुंच कर सुप्रिया को कृति और अपने ऑफिस वाले मिल गए और वह उनके साथ हो ली. अतुल के बैंक के भी कुछ लोग पार्टी में इन्वितेद थे जैसे उसका बॉस, राहुल और बाकी कुछ और लोग. अतुल भी उनकी कंपनी में जाकर खड़ा हो गया.

सुप्रिया और कृति तोह साथ hi चिपके हुए थे, और कृति सुप्रिया को काफी लोगो से इंट्रोडस करवा रही थी. लोग भी जैसे जानबूझ कर सुप्रिया की और खींचे जा रहे थे, और उससे हाथ मिलाने और बात करने के लिए बेताब थे. अतुल दूर कहीं खड़ा ये सब देख रहा था की कैसे सुप्रिया को इतनी अटेंशन मिल रही थी. अपने बॉस के कहने पर उसने भी जल्द hi व्हिस्की का एक गिलास उठा लिया था.

कृति धीरे से इशारे करके सुप्रिया को लोगो के नाम बता रही थी और उनके बारे में उसकी ख़ुफ़िया जानकारी भी.

कृति - ी हेट थिस पार्टी... कितनी लेम है...

सुप्रिया - इतनी तोह अछि पार्टी है... मैं तोह कभी ऐसी पार्टी में पहले नहीं आयी...

कृति - ुघठ... सुप्रिया... तुम्हे पार्टी में चलना है तोह मेरे साथ चलना, थे अरे ा 100 टाइम्स बेटर थान थिस.

सुप्रिया - पर ये तोह विक्रम सर की पार्टी है न... उसको कैसे ख़राब बोल सकती हो..

कृति - नहीं बाबा.. ये उनकी वाइफ ईशा की पार्टी समझ लो... भैया का तोह बस नाम है.. ुघठ, शैतान का नाम लो शैतान हाज़िर.. वह आ गयी... मरस. ईशा सिंह...

कृति के ये बोलते hi सुप्रिया जल्दी से इधर उधर देखने लगी, वह काफी एक्ससिटेड थी ईशा को रियल में देखने के लिए. सुप्रिया को अंदर से आती हुई एक स्टाइलिश सी औरत दिखी जिसने काफी हैवी मेकअप किया हुआ था, और काफी साड़ी जेवेलरी पहनी थी. उसकी आँखें ऐसी बहकी हुई सी लग रही थी जैसे वह नशे में हो. सुप्रिया ने विक्रम सर के डेस्क पर जो फोटोज देखि थी ये उससे काफी अलग लग रही थी, जैसे पहचान में hi न आ रही हो. शायद वह फोटोज काफी पहले की होंगी.

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कृति - ओह गॉड! पता नहीं डिज़ाइनर क्लोथ्स के नाम पर बाथ रोबे लपेट कर क्यों आ रही है ये... इतना ावफुल है न इसका ड्रेसिंग सेंस.. युक...

सुप्रिया को भी उसके कपडे बहुत अचे नहीं लगे, पर उसको कपड़ो की इतनी समझ नहीं थी - ठीक hi तोह है...

कृति - के ों बेब... तुम उसकी साइड मत लो.. शी इस लिखे थे devil...ok..

कुछ hi पल बाद ईशा उनके सामने से निकलती हुई आगे चली गयी, उसने एक बार भी कृति और सुप्रिया की और मुद के भी नहीं देखा. सुप्रिया ने सोचा की थोड़ा अजीब था, क्यूंकि कृति को तोह वह जानती hi होगी. सुप्रिया की निगाहें बस ईशा पर hi तिकी हुई थी, जैसे उसके हर इंटरेक्शन को काफी बारीकी से देख रही हो. वह ईशा को देखने में इतना खो गयी थी की उसे पता भी नहीं चला की कृति उसके साथ नहीं कड़ी थी. तभी सुप्रिया के कंधे पर किसी ने हलके से तप किया.

विक्रम - Hello मैडम... उस दिन तुम डब्बा भी अपने साथ ले गयी...

सुप्रिया एक डैम से चौंक गयी - सर आप!... ी मैं विक्रम... सॉरी क्या कह रहे थे आप...

विक्रम - कुछ नहीं... किसे देख रही हो तुम इतने गौर से...

सुप्रिया हल्का सा ब्लश करते हुए - किसी को नहीं... एक्चुअली, आपकी वाइफ को!

विक्रम - ईशा को? मिलना है तुम्हे उससे?

सुप्रिया - नहीं नहीं! मैं तोह बस ऐसे hi...

विक्रम - थैंक गॉड... उससे मिलने से आसान तोह प्राइम मिनिस्टर से मिलना होगा...

सुप्रिया - क्या?

विक्रम - कुछ नहीं.. ऐसे hi जोके था..

विक्रम और सुप्रिया आपस में बातें करने लगे, इतना दिनों से मिले भी तोह नहीं थे. सुप्रिया उसको पार्टी में भी काम के उपदटेस दिए बिना नहीं रह पायी. और विक्रम बस हलके से मुस्कुरा के उसकी non-stop बातें सुन रहा था.

उनके बात करते करते किसी ने मिछ से अनाउंसमेंट की - एंड नाउ... लेटस हैवे थे फर्स्ट डांस ऑफ़ थे पार्टी... ईशा एंड विक्रम सिंह...

सुप्रिया ने देखा की ईशा डांस फ्लोर के बीच में कड़ी थी, और लोगो ने उसकी चारो और घेरा सा बना दिया था.

सुप्रिया - विक्रम... आपको बुला रहे है...

विक्रम - चलो... तुम भी...

इससे पहले सुप्रिया कुछ कहती विक्रम सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उसे घेरे की और ले गया और फिर वहां घेरे के पास आ कर उसका हाथ छोड़ कर डांस फ्लोर पर चला गया. विक्रम ने आगे बाद कर ईशा की कमर को पकड़ लिया और एक रोमांटिक गाना शुरू होते hi दोनों डांस करने लगे. सब लोग खूब सीटियां और तालियां बजा रहे थे, सुप्रिया भी उन में शामिल थी.

थोड़ी देर डांस के बाद, ईशा रुक गयी और ज़ोर से चिल्लाई - Let's चेंज थे सांग... समथिंग मोरे हप्पेनिंग... नॉट थिस बोरिंग थिंग तहत विक्रम लाइक्स...

कुछ लोग ज़ोर से एक्ससिटेमेंट में चिल्लाये और गाना रोमांटिक से थोड़ा फ़ास्ट बीट में चेंज हो गया. ईशा ने कुछ और लोगो को डांस फ्लोर पर खींचा और वह किसी और आदमी के गले में अपनी बाहें दाल डांस करने लगी. और भी कपल्स डांस फ्लोर पर उतर आये थे, पर विक्रम अकेला सा खड़ा ये तमाशा देख रहा था. उसने एक डैम से अपनी नज़रें भीड़ में दौड़ाई और जैसी hi उसकी नज़र सुप्रिया पर पड़ी, वह उसके पास आया और उसका हाथ पकड़ कर उसे डांस फ्लोर पर खींच लिया.

सुप्रिया इससे पहले समझ पाती की क्या हुआ है, वह डांस फ्लोर पर थी, विक्रम का हाथ उसकी कमर और कंधे पर था, और वह दोनों डांस कर रहे थे. विक्रम की ठंडी उंगलियां सुप्रिया के शरीर के नंगे हिस्से पर छू रही थी, जिससे सुप्रिया का पूरा जिस्म काँप उठ रहा था. दोनों एक दुसरे के काफी पास हो कर डांस कर रहे थे, और फोटोग्राफर उनकी फोटोज खींच रहा था, जिसका फ़्लैश उसकी आँखों पर पद रहा था.

सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे काफी साड़ी नज़रे इस समय बस उन दोनों पर hi तिकी हो. आँखों के कोने से एक पल के लिए ऐसे भी लगा जैसे ईशा ने उन दोनों को डांस करते देख गौर किया हो. गाना ख़तम होते hi सुप्रिया जल्दी से डांस फ्लोर से हट गयी और दूर एक कोने में जाकर कड़ी हो गयी. उसकी दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो राखी थी. उसे इतनी लाइमलाइट में आने की आदत नहीं थी, अभी बस वह यहाँ अकेले खड़ा होना चाहती थी. पर उसे पार्टी में अपनी और आती एक जानी पहचानी शकल दिखी, अतुल के बॉस की वाइफ - रेनू. वह रेनू से कई महीनो से नहीं मिली थी, बल्कि तभी से नहीं जबसे उसकी बेटी निक्की की शादी हुई थी.

रेनू के चेहरे पर एक कुटिल सी मुस्कान थी - सुप्रिया... बड़े दिनों बाद दिखी हो...

सुप्रिया ने उसे हलकी सी स्माइल दी - रेनू जी... कैसी है आप...

रेनू - मैं तोह बढ़िया हूँ... तुम बताया... वैसे दिख तोह रहा hi है...

सुप्रिया - क्या मतलब?

रेनू - ाजी वह... क्या बात है... इतनी भी नासमझ तोह नहीं हो...

सुप्रिया - रेनू जी मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी...

रेनू - हाँ अब बड़े घर की रखैल बन गयी हो तोह मुझसे क्यों बात करोगी... तुम्हारे पति को पता है क्या की तुम क्या करती हो?

सुप्रिया ने गुस्से में घूर कर देखा - क्या बकवास कर रही हो आप... ऐसा कुछ नहीं है. और आप ये सब बोल रही हो? आप भूल गयी कैसे आपने मुझे....

रेनू के चेहरे की हसी गायब हो गयी - प्रताप की बात कर रही हो न... जिसे तुमने विक्रम से पिटवाया था..

सुप्रिया हड़बड़ा के बोली - नहीं मैंने नहीं...

रेनू - मुझे सब पता चल गया था... और तुम्हे भी आज एक सच आज बता hi देती हूँ. प्रताप ने मुझ पर शादी तोड़ने का कोई प्रेशर नहीं डाला था. मैंने जानबूझ कर तुम्हे उसके पास भेजा था.. मैं तभी समझ गयी थी की तुम कितनी बढ़िया रांड बनोगी... और लो आज बन भी गयी हो..

ये सुन कर सुप्रिया की आँखों से आंसू बहने शुरू हो गए थे और वह जल्दी से वहां से दूर अंदर फार्महाउस की बिल्डिंग में घुस गयी. उसकी आँखों में आंसू भरे होने से उसे कुछ भी अचे से दिखाई नहीं दे रहा था. वह चलते चलते काफी अंदर पहुंच गयी थी और वह एकदम से किसी आदमी से टकराई.

सुप्रिया ने भरी हुई आवाज़ में कहा - सॉरी... ी ऍम सॉरी...

वह आदमी विक्रम hi था - सुप्रिया... क्या हुआ... तुम रो क्यों रही हो...

सुप्रिया - कुछ नहीं सर... आप प्लीज मुझे अकेला छोड़ दे...

विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया के कंधे पर रखा - कलम डाउन प्लीज...

सुप्रिया - नहीं सर... पता नहीं पूरी दुनिया क्या सोचती है मेरे बारे में...

विक्रम - सुप्रिया... ी क्नोव नाउ इस नॉट थे राइट टाइम तो से आईटी... बूत लोगो की परवाह करना बंद करो... लोगो को जो कहना है वह कहेंगे hi... और शायद मुझे भी ये परवाह करनी बंद करनी पड़ेगी...

विक्रम ने एक डैम से अपने हाथों से सुप्रिया का चेहरा पकड़ा और अपना चेहरा उसके चेहरे से लगते हुए उसके होंठों पर एक लम्बा सा किश कर दिया. सुप्रिया एक डैम शॉकेड सी रह गयी, पर वह विक्रम को पीछे नहीं धकेलना चाहती थी.

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जैसे hi किश टूटी वह एक दूसरी की आँखों में देख रहे थे जैसे विक्रम सुप्रिया से और भी कुछ चाहता हो. पर बहार अचानक म्यूजिक रुक गया था और लोगो के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी. विक्रम ने बहार की और देखा और न चाहते हुए भी सुप्रिया का चेहरा छोड़ते हुए वह जल्दी से बहार की तरफ गया. सुप्रिया भी उसके पीछे पीछे बहार आ गयी.

बहार एक अमीर सी औरत एक आदमी पर चिल्ला रही थी, और उनके आस पास काफी भीड़ इखट्टा थी - इसने मेरी अस्स को टच किया है... कहाँ से आते है ऐसे चीप लोग इन पार्टीज में...

सुप्रिया ने पास जाकर देखा तोह उसके होश hi उड़द गए. जिस आदमी पर वह औरत चिल्ला रही थी वह कोई और नहीं, बल्कि अतुल था. सुप्रिया वहां स्तब्ध सी कड़ी रह गयी.
 
मैंने इस अपडेट में काफी स्टोरी आगे बढ़ाने की कोशिश करि है. ी क्नोव ये अपडेट सेक्सुअल नहीं है बूत थिंग्स विल चेंज वैरी सून. एंड इक़बाल इस डेफिनिटेली इन थे पिक्चर, यू विल फंड आउट सून.

ी क्नोव थोड़ी अलग टाइप की स्लो स्टोरी है.. पर बी थे टाइम थिस इस फिनिश्ड, ी होप एवरीवन विल लिखे आईटी.

तेरे इस ा रीज़न थे स्टोरी इस गोइंग थिस वे अस ी ऍम ुनाबले तो व्रिठे थे कम्प्लीटली ऊंरेअलिस्टिक वे. ी अप्प्रेसियते everyone’s फीडबैक, मय्बे फॉर नाउ जस्ट थिंक तहत यू अरे रीडिंग समथिंग डिफरेंट, अस तेरे अरे ा लोट ऑफ़ स्टोरीज तहत गेट तो थे सेक्स part रियली क्विकली.

थे वेट विल बे वर्थ आईटी, इन माय ओपिनियन. ी चैंट वेट फॉर आईटी तो एन्ड सून सो ी कैन स्टॉप राइटिंग हेरे.
 
अपडेट 55

नया साल आ गया था पर सुप्रिया के लिए तोह टेंशन बानी hi हुई थी. पिछले do-teen हफ्ते सुप्रिया के लिए काफी स्ट्रेस्फुल रहे थे. पार्टी में जो हुआ उसके बाद अतुल को उसकी नौकरी से निकाल दिया गया था. सुप्रिया और अतुल के बीच इस पूरे वकाईये को लेकर बहुत ज्यादा बहस हुई थी. अतुल के हिसाब से एहि सब तोह चल रहा था इस पार्टी में, कोई किसी की भी बीवी को कहीं भी छू ले. उसका इशारा सुप्रिया और विक्रम की और था. उसने उन दोनों को किश करते नहीं देखा था पर बहुत hi करीब हो कर डांस करते तोह देखा hi था.

सुप्रिया लड़ झगड़ के इतना थक चुकी थी की वह अब अतुल को कोई सफाई नहीं देना चाहती थी. उसके हिसाब से जो अतुल ने किया वह काफी गलत था, जबकि वह अतुल से कहीं ज्यादा गलत चीज़े कर चुकी थी. अब अतुल बेरोज़गार घर में बैठा था और सुप्रिया ऑफिस जा रही थी. ये बात तोह अतुल को और भी ज्यादा चुबभ सी रही थी, पर वह अब क्या hi करता, सुप्रिया को तोह नौकरी करनी hi पड़ेगी न.

सुप्रिया को विक्रम के साथ की गयी किश भी रह रह कर सताती रहती. शायद उस दिन उसे गुलाब जामुन और ice-cream वाली बात आखिर समझ आ hi गयी थी. पर वह अपने आप को समझती की वह विक्रम के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. एक तोह वह उससे उम्र में कई साल बड़े थे और शादी शुदा भी. दूसरा वह उसके बॉस थे और उनका कोई भी जोड़ नहीं था. पर जो भी हो विक्रम सर ने एक बात तोह सच hi कही थी सुप्रिया को अब दुनिया क्या सोचती है ये सोचना तोह बंद करना पड़ेगा. क्यूंकि अतुल ने जो किया उसके बाद तोह दुनिया की नज़रे उसे और भी पैनी लगने लगी थी.

सुप्रिया ऑफिस पहुंची और सीधे अपने काम में लग गयी. आजकल वह लोगो से ज्यादा बात करना नहीं पसंद करती थी. वह अपने काम में लगी hi थी की पेओन ने आकर उसको बताया की साहिल सर ने उसे मीटिंग रूम में बुलाया है. सुप्रिया ने गहरी सांस भरी और मीटिंग रूम की तरफ चल पड़ी. मीटिंग रूम में सिर्फ साहिल सर थे और उनके फेस पर थोड़ी सी परेशानी दिख रही थी.

साहिल - सुप्रिया के के...

सुप्रिया - Hello सर.. आल गुड?

साहिल - तुम वह कैटेलॉग पर काम कर रही थी न… तुम वह काम आकाश को हैंडओवर कर दो.

सुप्रिया हैरानी से बोली - क्यों सर?

साहिल - उम्म्म्म… ी थिंक वही बेटर रहेगा..

सुप्रिया - पर सर.. कोई रीज़न तोह होगा…

साहिल - मेरे पास फोटोशूट वाली कंपनी का कॉल आया था, तुमने मॉडल को डेट्स सही से कम्यूनिकेट नहीं करि.. एंड अब वहां पूरा मेस हो रखा है… वह बोल रहे है की थे चैंट वर्क विथ समवन सो उनप्रोफेशनल.

सुप्रिया - सॉरी सर… मैंने तोह सब अचे से hi कम्यूनिकेट किया था…

साहिल - ी डोंट क्नोव… पर तुम आकाश को ये मेस सॉर्ट आउट करने दो.. कृति अभी हॉलीडेज पर है नहीं तोह उसे बोल देता…

सुप्रिया को ये सुन कर थोड़ा गुस्सा सा आ गया, पर उसने किसी तरह अपने आप को कण्ट्रोल किया - आपने विक्रम सर से बात की क्या इस बारे में?

साहिल - इसमें विक्रम से क्या बात करनी? ये उसका हेडाचे नहीं है… लुक ी क्नोव तुम काफी स्ट्रेस्ड आउट हो पर्सनल लेवल पर, सो थिस इस ओने लेस्स थिंग तो वोर्री अबाउट.

सुप्रिया - नहीं सर… मैं सॉर्ट आउट कर दूंगी ये.. मैं अभी वहां जाती हु…

साहिल - सुप्रिया, ी डोंट थिंक कोई फायदा…

सुप्रिया - प्लीज सर… मैं जा रही हु…

सुप्रिया बिना कोई बात सुने जल्दी से कड़ी हो कर अपने डेस्क पर गयी और फोटोशूट वाली कंपनी का एड्रेस निकला. ये एड्रेस उसे नहीं पता था की कहाँ पड़ेगा और वह सोच में पद गयी की वह अब क्या करे. पर अब उसने साहिल सर के सामने इतनी बड़ी बातें कर दी थी तोह पीछे हटने का तोह सवाल hi नहीं होता था. शायद वह ऑटो भी कर लेती पर फिलहाल तोह वह एक एक पैसा सोच समझ कर खर्च कर रही थी. उसने दिमाग के घोड़े दौड़ाये और बस एक hi नाम उसके दिमाग में आया.

सुप्रिया ने इक़बाल को कॉल लगाया - Hello… इक़बाल… कैसे हो…

इक़बाल - मैडमजी… मैं बढ़िया… आप कैसे हो….

सुप्रिया - मैं ठीक हु… एक्चुअली आपकी एक हेल्प चाहिए थी…

इक़बाल - हाँ बोलिये न…

सुप्रिया - मुझे ऑफिस के काम से जानकीपुरम जाना है… आप ले जा सकते है क्या…

इक़बाल - मैडमजी आज तोह मेरे पास गाडी नहीं है…

सुप्रिया - ओह ाचा… चलो कोई नहीं मैं ऑटो कर लुंगी…

इक़बाल - नहीं… अकेली अनजान जगह आप ऑटो से मत जायो… मैं कुछ इंतज़ाम करता हूँ.

सुप्रिया - ठीक है, पर आप जल्दी कर लेना…

कॉल ख़तम हुई और सुप्रिया बेसब्री से इक़बाल का इंतज़ार करने लगी. थोड़ी देर बाद इक़बाल का कॉल आया की वह उसके ऑफिस के नीचे आ गया था. सुप्रिया नीचे पहुंची तोह इक़बाल एक मोटरसाइकिल पर था.

इक़बाल - मैडमजी… बैठेई… मैं ये दोस्त से मांग कर लाया हूँ.

सुप्रिया 1-2 पल के लिए रुकी और फिर इक़बाल के कंधे पर हाथ रखते हुए बाइक पर बैठ गयी.

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सुप्रिया को किसी भी हालत में वहां जल्दी से जल्दी पहुंचना था, और उसने इक़बाल को बाइक तेज चलने के लिए बोलै. इक़बाल फर्राटे से बाइक चला रहा था और सुप्रिया ने इक़बाल के मजबूत कंधो को कास के पकड़ा हुआ था. इक़बाल तोह जैसे इस समय जन्नत में थी की उसकी मैडमजी ने उसे ऐसे पकड़ा हुआ था.

इतनी तेज़ स्पीड में होने के कारन जैसे hi इक़बाल ने सिग्नल पर ब्रेक लगाए, सुप्रिया की नरम गोलियां इक़बाल की सख्त पीठ पर ठप्प्प से जाकर लगी. सुप्रिया इतनी ज़ोर से टकराई की उसके बूब्स में दर्द सा हो गया. सुप्रिया की नरमी अपनी पीठ पर इक़बाल भी महसूस कर पाया था.

सुप्रिया - अह्ह्ह्हह….

इक़बाल - क्या हुआ मैडमजी…

सुप्रिया - थोड़ा आराम से चलायो….

सुप्रिया अपने एक हाथ से अपने बूब को हलके से मसल रही थी. बाइक के शीशे में इक़बाल को ये साफ़ दिख रहा था. तभी सुप्रिया की नज़र शीशे में अपनी और देखते हुए इक़बाल से मिली और उसने अपना हाथ झट से नीचे कर लिया.

इक़बाल - आपने बोलै था मैडमजी… की आपको जल्दी पहुंचना है वहां…

सुप्रिया - हाँ ठीक है पर आपने एकदम से ब्रेक मारे न…

इक़बाल - आप ऐसा करो, मुझे कास के पकड़ लो, तोह मैं और तेज़ चला पायूँगा…

सुप्रिया जरा सा हिचकिचाई और फिर उसने अपने हाथ आगे करके इक़बाल के कंधो को कास के पकड़ लिया. वह इक़बाल से बिलकुल चिपकी हुई थी, उसका पूरा बदन इक़बाल के बदन से आलिंगित. इतनी ढांड भी हो रही थी तोह दोनों के चिपके हुए शरीर से दोनों को अछि खासी गर्मी मिल रही थी. इक़बाल की हालत बस देखने वाली थी, और वह किस तरह से फोकस करके बाइक चला रहा था. अब तोह बाइक तो तेज़ चलने का भी मैं नहीं था उसका, वह चाहता था ये सफर बस चलता जाये.

पर मैडमजी को तोह वहां पहुंचना hi था, और वहां पहुंच कर सुप्रिया ने इक़बाल पर अपनी पकड़ ढीली करि.

सुप्रिया - शुर्किया इक़बाल… आप बस यहीं वेट करो.. मैं थोड़ी देर में आती हूँ..

इक़बाल - आप आराम से आयो मैडमजी… मुझे कोई जल्दी नहीं है.

सुप्रिया ने देखा की ये काफी पॉश सा एरिया लग रहा था. उसके सामने एक बिल्डिंग थी, जिसमे वह जल्दी से घुस गयी. ग्राउंड फ्लोर पर hi छोटा सा रिसेप्शन था और अंदर एक खुली जगह में एक फोटो स्टूडियो जहाँ बहुत सारे कैमरा लगे हुए थे. सुप्रिया ने रिसेप्शन से फोटो स्टूडियो के डायरेक्टर कौशल के बारे में पुछा और रिसेप्शनिस्ट ने उसे अंदर स्टूडियो में जाने दिए. सुप्रिया को सामने एक आदमी दिखा जिसने अचे से कपडे पहने थे और इन चार्ज लग रहा था.

सुप्रिया ने उसके पास जाकर पुछा - Hello... आप कौशल है...

कौशल - यस... आपको किसने अंदर आने दिया?

सुप्रिया - सर... मैं सुप्रिया... हमारी बात हुई थी आज के फोटोशूट के लिए...

कौशल - विक्रम सर के यहाँ से? ओह गॉड... तोह तुम हो वह जिसने सारा मेस क्रिएट किया है... no वंडर... (उसने सुप्रिया को ऊपर से नीचे देखा जैसे उसके कपड़ो का मजाक उदा रहा हो).

सुप्रिया - सॉरी सर... वह शायद कन्फूसिओं हो गया था, एंड मॉडल और आपकी डेट्स अलाइन नहीं हुई...

कौशल - It's तू लेट... अब दूसरी डेट ढूढ़ना जो काम से काम थ्री मोनथस से पहले नहीं मिलेगी...

सुप्रिया - सॉरी सर... बूत 3 मोनथस तोह बोहोत ज्यादा है... प्लीज...

कौशल - बूत वेयर इस योर मॉडल न? ी ऍम हेरे... वह कहाँ है...

सुप्रिया - ओह... आपके पास कोई और मॉडल नहीं है शूट के लिए?

कौशल - ये लखनऊ है... मुंबई नहीं... की यहाँ बहार मॉडल्स की लाइन लगी हो... सो उनलेस यू हैवे ा मॉडल हम शूट नहीं कर सकते न...

सुप्रिया बहुत ज्यादा परेशान हो रही थी. इतनी बड़ी गड़बड़ तोह काफी कॉस्टली रहेगी - उम्म्म... आप मेरी फोटोज खींच लो... मैं ओउत्फिट्स पेहेन लेती हु...

कौशल - ऐसे थोड़ी न होता है... कोई भी आएगा और वह मॉडल बन जायेगा..

सुप्रिया - बूत आपका स्टूडियो तोह आज के लिए बूकेड है न हमारी कंपनी के लिए... तोह फिर आपको क्या प्रॉब्लम है...

कौशल गुस्से में बोलै - मैं विक्रम सर को कॉल करता हूँ... ये काफी उनप्रोफेशनल है... अगर उनकी कंपनी नहीं होती तोह मैं कब का...

सुप्रिया उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी - प्लीज विक्रम सर को मत कॉल करिये... ट्रस्ट में... ी कैन दो आईटी... आप मुझे बस 30 मिनट्स दे दीजिये... िफ़ आईटी डोएसेंट वर्क मैं विक्रम सर को खुद कॉल करके बता दूंगी...

कौशल - तुम्हे न नहीं समझ आता न... ok... जो चेंज राइट नाउ... और जब नहीं होगा न तब मैं एन्जॉय करूँगा जब तुम विक्रम को कॉल करोगी..

कौशल ने एक लड़की को इशारा किया सुप्रिया को ड्रेस और साथ की एक्सेसरीज देने के लिए. वह लड़की सुप्रिया को एक चेंज रूम ले गयी जहाँ उसे एक भरी सा लेंघा पेहेनना था. सुप्रिया ने जल्दी से अपनी कुर्ती और पजामी उतारी और वह लेंघा पेहेन लिया. उस लड़की ने भी सुप्रिया की काफी हेल्प करि. एक दूसरी लड़की आयी सुप्रिया का मेकअप और हेयर थोड़े से स्टाइल करने के लिए. जल्दी जल्दी करने के बाद भी 20 मिनट लग गए.

कौशल - हुर्री उप... ओनली 10 मीन्स लेफ्ट फॉर यू...

सुप्रिया भारी लेंगे में जल्दी से बहार आयी और फोटो स्टूडियो के सेट में कड़ी हो गयी. उसे नहीं पता नहीं था की अब क्या करना है. पहली वाली लड़की ने कौशल के कान में कुछ कहा, और कौशल ने सर हिलाया.

सुप्रिया - ठीक है सर... ऐसे hi कड़ी राहु...

कौशल - नहीं नीचे बैठ जायो.

सुप्रिया सेट के फ्लोर पर नीचे बैठ गयी. कौशल उसके पास आया और उसका चेहरा अपने हाथ से पकड़ लिया.

कौशल - कैमरा की तरफ नहीं देखना है.. दूसरी और देखा है.. और अपने हाथ इस पर रख लो, पेअर पीछे फैला लो..

सुप्रिया ने अपने पेअर थोड़े से पीछे किये, और फिर कौशल ने लेंगे में हाथ डालते हुए उसका पेअर पकड़ा और साइड कर दिया. वह वापस कैमरा पर गया और फोटो खींचते हुए और इंस्ट्रक्शंस ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा. सुप्रिया किसी तरह से अपने आप को कलम रखते हुए ज़मीन की तरफ देखने लगी.

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कौशल की फाइनली आवाज़ आयी - Ok, परफेक्ट... ये ठीक था.. अब अपना सर अपने हाथों पर रख दो...

कुछ त्रिएस के बाद सुप्रिया को ये करना आ गया था, काफी जल्दी सीख गयी थी वह. उसे ख़ुशी हो रही थी की आखिर उसने इस इम्पॉसिबल से दिखने वाले काम को कर hi दिया था. कौशल ने सुप्रिया के अलग अलग पोज़ में फोटोज खींचे. वह हर पोज़ बनाने में सुप्रिया के पास आकर उसकी बॉडी को सही पोजीशन में करता. सुप्रिया कौशल के कहीं भी ऐसे छूने से खुश नहीं थी, पर उसके पास अभी ऑप्शन क्या था.

कौशल - Ok गुड.

सुप्रिया ने रहत की सांस ली - मैंने कहा था न की मैं कर लुंगी... सी ी दीद आईटी...

कौशल - हम्म्म... फ्लूक था ये... एनीवे...

सुप्रिया - वैसे मैं पूछ सकती हु की आपकी असिस्टेंट ने क्या कहा था आपके कान में...

कौशल - हम्म्म... उसने कहा था प्रीटी फेस है... मॉडल फेस...

सुप्रिया ये सुन कर खुश सी हो गयी.

कौशल - अब यहाँ क्यों कड़ी हो... जायो दूसरी ऑउटफिट में चेंज करके आयो...

सुप्रिया - अभी और भी हैं?

कौशल - हाँ तोह तुम्हे लगता है मैं एक ऑउटफिट के लिए इतना चार्ज करता हूँ... क्विक...

सुप्रिया जल्दी से अंदर की और गयी और कौशल की असिस्टेंट ने वहां दूसरी ड्रेस टांगी हुई थी. पर उसे देखते hi सुप्रिया के तोह होश hi उड़द गए. एक छोटी सी वाइट ड्रेस थी, ये तोह उसके घुटने से भी ऊपर आने वाली थी. वह ये कैसे पेहेन सकती थी. उसने असिस्टेंट को बुलाया पूछने के लिए की कहीं कोई जल्दी तोह नहीं हो गयी, पर उसने कन्फर्म किया की ड्रेस एहि थी. सुप्रिया ने किसी तरह हिम्मत करके वह ड्रेस पहनी. वह ड्रेस इतनी छोटी थी की अगर सुप्रिया जरा सा झुकती तोह उसकी पंतय दिख जाती. सुप्रिया घबराते हुए बहार आयी.

कौशल ने उसे देखते hi अपनी आखें बड़ी की और फिर उसके पास आया - लुक्स गुड ों यू, बूत टर्न अराउंड एक बार.

सुप्रिया उसके लिए पूरा घूम गयी, तभी कौशल ने उसकी गांड की दरार में हाथ डालते हुए ड्रेस को खींचा.

सुप्रिया एक डैम से डर के उछाल पड़ी - आउच... ये क्या किया...

कौशल के फेस पर एक गन्दी सी स्माइल थी - तुम्हारी ड्रेस स्टक थी... उसे बहार निकाला है...

सुप्रिया ने कौशल को घूर कर देखा - आप मुझे बोल dete...main निकाल लेती..

कौशल - चलो... टाइम नहीं है...

कौशल फिर से कैमरा पर चला गया और सुप्रिया को नीचे अपनी खीस पर बैठने के लिए बोलै. ऊपर से असिस्टेंट फ्लावर बरसा रही थी और कौशल फोटो क्लिक कर रहा था. पर सुप्रिया का फेस सीरियस था.

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कौशल - फेस को रिलैक्स करो... स्माइल करो थोड़ा...

कौशल फ़्रस्ट्राटे हो कर फिर से सुप्रिया के पास आया और सुप्रिया के ड्रेस के स्ट्रैप्स ठीक करने लगा. सुप्रिया अपने घुटनो पर बैठी थी और कौशल ऊपर खड़ा हुआ. उसकी पंत सुप्रिया के मुँह के काफी नज़दीक थी और सुप्रिया दूसरी और देखने की कोशिश कर रही थी. तभी उसने एक डैम से अपने हाथ सुप्रिया के बूब्स के पास लाकर ड्रेस को थोड़ा नीचे खींचा और उसके हाथ सुप्रिया के बूब्स के ऊपरी हिस्से पर जाकर लगे. सुप्रिया ने उसकी और ऊपर देखा और वह मुस्कुरा रहा था.

कौशल - कुछ ख़ास दिख नहीं रहा था... दिखाना भी जरूरी होता है न... इस बार स्माइल के साथ करना.

सुप्रिया चाहती थी ये शूट जल्दी से ख़तम हो जाये और कौशल उसे ऐसे न छुए. इसलिए वह जैसे कौशल बोल रहा था वैसा फटाफट से करने लगी. कौशल ने उसे बोलै की वह अपना एक हाथ ऊपर करके थोड़ा सा पीछे बेंड हो. सुप्रिया को पता था इससे उसकी नंगी जाँघे और भी दिखेंगी पर उसने वैसे hi किया. ड्रेस बस उतनी hi ऊपर हुई की उसकी पंतय न दिखे, पर उसकी गोर मसले पेअर साफ़ दिख रहे थे. और साथ hi उसकी साफ़ चिकनी बगल.

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कौशल सुप्रिया की और फोटोज खींचने लगा. उसकी असिस्टेंट फिर से उसके पास आयी. इस बार उनकी खुसर फुसर सुप्रिया के कानो तक पहुंची. कौशल असिस्टेंट को बोल रहा था - बिकिनी सेट रूम में टांग दो...

सुप्रिया ये सुनते hi घबरा सी गयी. इस ड्रेस ने भी हद्द सी कर दी थी, पर बिकिनी सेट तोह कुछ ज्यादा hi हो जायेगा. वह सोचने लगी की वह क्या करे, क्या वह बहार से इक़बाल को बुलाये? नहीं फिर तोह बड़ा सा तमाशा हो जायेगा यहाँ.

तभी बहार से आते हुए उसे विक्रम सर दिखे, उसे अपनी आखों पर यकीं hi नहीं हो रहा था की वह यहाँ क्या कर रहे थे. विक्रम सर सीधे अंदर चले आये, और उनकी एक नज़र सुप्रिया पर पड़ी.

विक्रम थोड़ी सख्त आवाज़ में - कौशल!! What's थिस?

कौशल - सर... इसने बोलै था की ये आपकी कंपनी से है... मैं सूरे नहीं था इसलिए आपको मैसेज किया.

विक्रम ने सुप्रिया की और देखा - सुप्रिया... जो चेंज प्लीज...

सुप्रिया सर हिलाते हुए जल्दी से चेंज करने अंदर चली गयी. वह अपना सलवार सूट पेहेन कर बहार आयी तोह देखा की विक्रम कौशल पर भड़क रहा था.

कौशल - सर... ट्रस्ट में... उसने बहुत ज़िद्द की thi...aap तोह मुझे जानते हो...

विक्रम - अछि तरह से जानता हूँ इसीलिए बोल रहा हूँ..

कौशल - सर लुक ात थिस... आपकी कंपनी के कैटेलॉग के लिए सोल्लगे भी बना दिया. इतनी फ़ास्ट है मेरी टीम.

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विक्रम ने एक नज़र फोटो पर डाली और फिर कौशल की और सख्ती से देखा - थिस इस नॉट गोइंग एनीवेयर. ये सब अभी डिलीट कर देना. नेगटिवेस भी. मैं जय को बोल दूंगा की ी ऍम नॉट वर्किंग विथ यू एनीमोर.

कौशल - नहीं... प्लीज सर... जय सर को मत बोलना... रीशूट कर लेंगे, कोई प्रॉब्लम नहीं. वैसे जय सर वाला फोटोशूट भी रेडी है, वह आपको...

विक्रम - नॉट नाउ!! सुप्रिया, लेटस लीव.

विक्रम सुप्रिया के साथ बहार रिसेप्शन एरिया में आ गया.

विक्रम थोड़ा डिसअप्पोइंटेड होते हुए बोलै - सुप्रिया... यू शुड हैवे कॉल्ड में... ऐसा यहाँ पर अकेले नहीं आना चाहिए था...

सुप्रिया - सॉरी सर... मुझे लगा मैंने मेस क्रिएट किया है तोह मुझे hi सोल्वे करना चाहिए...

विक्रम ने गहरी सांस ली - तुम ये क्यों सोचती हु की वर्ल्ड की साड़ी प्रोब्लेम्स तुम्हे अकेले hi सोल्वे करनी है....

सुप्रिया नीचे देख रही थी - सर... आपको पता hi है... पार्टी में जो अतुल ने किया उसके बाद...

विक्रम - बूत that's नॉट योर प्रॉब्लम... तुमने तोह कुछ गलत नहीं किया न...

सुप्रिया - पर सर... अतुल और मैं... हम लोग.... एंड फिर अब उनकी जॉब भी नहीं है...

विक्रम - मय्बे that's व्हाट हे डेसेर्वेस...

सुप्रिया का चेहरा बुरी तरह उतर गया था. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या बोले. अतुल ने जो किया था वह गलत था पर वह एक दूसरा चांस जरूर डेसेर्वे करता था.

विक्रम ने उसका चेहरा पद लिया - Ok, ी विल सी व्हाट ी कैन दो. बूत no प्रॉमिसेस. चलो, लेट में ड्राप यू होम.

वह दोनों बहार निकले थे की सुप्रिया को थोड़ी दूर इक़बाल बाइक पर बैठा दिख गया. उसने इक़बाल को वेट करने के लिए बोलै था, तब से 3 घंटे हो चुके थे और वह अभी भी वहां उसका इंतज़ार कर रहा था. वह तोह अंदर फोटोशूट में इक़बाल को भूल hi गयी थी. अब ऐसे इक़बाल को छोड़ कर विक्रम के साथ चले जाना तोह काफी गलत होगा.

विक्रम सर पता नहीं क्या सोचेंगे अगर वह देखेंगे की वह एक वॉचमन के साथ जा रही है. पर उस दिन पार्टी में उनकी किश के बाद वह अब तक कभी भी अकेले में साथ में नहीं हुए थे, और शायद एहि बेहतर था. फिलहाल तोह वह इक़बाल के बहाने से विक्रम के साथ जाने से बच सकती थी.

सुप्रिया ने हिम्मत करके बोल hi दिया - विक्रम... मैं आपके साथ नहीं जा सकती... किसी ने मुझे यहाँ ड्राप किया था और वह मेरे लिए वेट कर रहा है... सो ी थिंक मुझे उसके साथ hi जाना चाहिए..

विक्रम - ओह ok... कहाँ है कार... लेट में वाक यू तो आईटी..

सुप्रिया ने इक़बाल की और इशारा किया - वह बाइक.. वहां...

बाइक और इक़बाल को देख कर विक्रम ने कोई ख़ास रिएक्शन नहीं दिया, और वह दोनों इक़बाल की तरफ चल पड़े. जैसे hi वह उसके नज़दीक पहुंचे, इक़बाल बाइक से उठ खड़ा हुआ और अपनी शर्ट ठीक करने लगा.

इक़बाल ने विक्रम को नज़र अंदाज़ करते हुए सुप्रिया से कहा - मैडमजी आ गए आप... मैं बस अंदर आने hi वाला था... मैंने आपके फ़ोन पर मैसेज भी किये थे... मुझे लगा आप किसी परेशानी में तोह नहीं फास गए...

सुप्रिया - हाँ सॉरी इक़बाल... थोड़ा ज्यादा टाइम लग गया... ये विक्रम है, मेरे बॉस...

विक्रम - Hello इक़बाल... आप यहाँ सुप्रिया के लिए रुके हुए थे इतनी देर से...

इक़बाल - हांजी सर... मैडमजी को लेकर आया था, तोह वापस भी लेकर hi जायूँगा.. ऐसे कैसे चला जाता...

विक्रम - हाँ, ये तोह है. वैसे, कहाँ से है आप?

इक़बाल - अभी तोह यहीं ठिकाना है.. पर वैसे मैं सलीमपुर के पास से हूँ...

विक्रम - ाचा... ठीक है आप ले जाइये इन्हे... ाचा लगा ये देख कर की आज के ज़माने में भी कोई किसी पर भरोसा कर सकता है...

इक़बाल - जी सर... चलिए मैडमजी...

सुप्रिया इक़बाल की बाइक के पीछे बैठ गयी और उसे विक्रम को bye वेव किया. विक्रम उन दोनों को जाते हुए देख रहा था.
 
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