सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 14 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 98स

कृति को जाए के चेहरे पर एक आग सी हवस दिखाई दे रही थी, जैसे वह उसे बुरी तरह रौंदना चाहता हो. ये कृति के लिए कोई नयी चीज़ नहीं रही थी, उसे मर्दो की इस नज़र को पड़ना अछि तरह आता था. पर पता नहीं क्यों आज काफी दिनों बाद उसे थोड़ी घबराहट सी हो रही थी. आखिर उसका नशा भी उतर सा hi गया था और बहार हुई चुदाई से वह थक सी गयी थी.

कृति ने जाए से आँखें मिलते हुए कहा - कैन ी हैवे ा ड्रिंक...

जाए ने न में सर हिलाया - No... ी वांट यू तो बे फुल्ली इन योर सेंसेस... तो एक्सपीरियंस व्हाट ी ऍम अबाउट तो दो तो यू...

कृति थोड़ा सा काँप सी गयी पर उसने अपना डर ज़ाहिर नहीं होने दिया - Ok जाए...

जाए - न यह... यू अरे गोंना कॉल में डैडी टुनाइट... व्हाट विल यू कॉल में?

कृति उससे दरी नहीं - जाए...

जाए ने कृति के पास आते हुए उसका मुँह ज़ोर से दबाते हुए अपने हाथ में भर लिया - व्हाट दीद यू से...

कृति - उह्ह्ह... ममम... जोईएयय...

जाए ने अपने दुसरे हाथ से उसके बाल खींचे - यू लिखे गेटिंग पुनिशद... don't यू...

कृति - यस... यस... डैडी...

डैडी बोलते hi कृति के शरीर के सारे बाल खड़े से हो गए. शायद ये लड़की अपनी शर्तो पर सब कुछ करवाना चाहती थी.

जाए ने उस पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी - गुड.. गुड.. िफ़ यू अरे ा गुड सलूट टुनाइट... ी विल फ़क योर ब्रेन्स आउट... तेल्ल में, यू विल बे माय क्यूट लिटिल सलूट टुनाइट?

जाए ने अपने होंठ उसके गाल पर रगड़ दिए. कृति ने सलोत्तय अंदाज़ में कहा - यस डैडी... ी विल बे योर... सलूट टुनाइट...

जाए ने अपनी तीन उंगलियां उसके मुँह में घुसा दी - That's मोरे लिखे आईटी... हाउ ओल्ड अरे यू... माय लिटिल सलूट...

कृति ने उँगलियों को चूसते हुए कहा - 25.....

जाए ने उसका गाल हलके से थप तपाया और अपने लुंड की और इशारा किया - मममम... ग्रेट आगे तो स्टार्ट लर्निंग... नाउ स्टार्ट ऑफ बी लिकिंग माय शाफ़्ट...

जाए का लम्बा मोटा लुंड हवा नीचे झूल रहा था और कृति फिर से बिस्तर से नीचे अपने घुटनो पर बैठ गयी. उसने आज से पहले इतना बड़ा लुंड कभी देखा नहीं था. इतना मोटा, इतना लम्बा और अभी तोह पूरा तना हुआ भी नहीं था. लुंड के आगे की टोपी hi इतनी बड़ी और मोती थी.

कृति ने लुंड को एक हाथ से पकड़ा और अपने होंठ उस पर घिसने लगी. पीछे से आगे तक.

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जैसे जैसे वह लुंड पर अपने होंठ चला रही थी, लुंड और अकड़ता जा रहा था और उसकी नसे साफ़ दिखने लगी थी. लुंड के आगे का हिस्सा हल्का सा गीला हो गया और उसमे से धीरे धीरे बूँद बूँद करके प्रे छुम टपकने लगा.

जाए - बीच... can't यू सी माय छुम इस ड्रिप्पिंग ों थे फ्लोर... टेक आईटी आल इन योर माउथ... don't वास्ते ा ड्राप...

कृति ने ऊपर उसकी और देखा और उसके लहराते लुंड की टोपी को अपने मुँह में भर लिया. काफी देर बहार भी उसने इस लुंड को चूसा था, और अब फिर ये उसके मुँह में था. सब में से इसका छुम कुछ ज्यादा hi नमकीन सा था. जाए का छुम उसके मुँह में उसके थूक से मिलता हुआ उसके गले में अंदर जाने लगा.

जाए आराम से बैठ गया और अपने हाथों से कृति के गोर कंधो को कास के पकड़ लिया. कृति उसकी टांगो के बीच में बैठी बीच बीच में ऊपर उसकी आँखों में देख रही थी. काफी स्टैमिना था इस आदमी का की वह अब तक एक बार भी नहीं झाड़ा था.

जाए ने कृति के कंधो को और कास के जकड लिया - अह्ह्ह्हह.... मममम.... नीस वर्क सलूट... आफ्टर टुडे यू वोउल्ड नेवर वांट तो बे ा वाइट और ब्राउन मन अगेन...

कृति ने लुंड को चूसते हुए हलके से हाँ में सर हिलाया. जाए ने अपना लुंड बहार निकला और गीले लुंड को कृति के गालो पर हलके से मारा.

जाए - मममम... यू विल मेक ा फाइन व्होरे... अह्ह्ह.... ममम... टेक आईटी आल इन नाउ... didn't योर मां टीच यू हाउ तो सूचक ा कॉक...

कृति ने उसका आदेश सुनते hi अपने दोनों हाथों से उसका लुंड पकड़ लिया और उन्हें अपने हाथों से रगड़ते हुए अपने मुँह में अंदर धकेलने लगी. लुंड बोहोत मोटा था और अब तोह शायद अकेले में और भी बड़ा लग रहा था. उसके छोटे से मुँह में लुंड को जाने में काफी मुश्किल हो रही थी.

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पर कृति रुक नहीं रही थी - ममम... ममम... फहहहह... फहहहह... मममम... ह्ह्हह्ह.... गुहहह.... दो यू लिखे माय लिप्स व्राप्पेड अराउंड योर कॉक...

जाए ने ज़ोर से बोलते हुए कृति के बूब्स पर एक ज़ोर का हाथ मारा - डीपर.... टेक आईटी इन डीपर सलूट...

कृति ने दर्द में मुँह बनाया और फिर अपना मुँह थोड़ा सा बड़ा करते हुए लुंड को और अंदर लेने की कोशिश करि, पर लुंड आधे से ज्यादा अंदर नहीं जा रहा था. पता नहीं बहार कैसे इसने अपना पूरा लुंड उसके मुँह में ठूस दिया था.

जाए ने उसके मैं की बात पड़ते हुए कहा - माय डिक wasn't इवन हाफ उप आउटसाइड बीच... ी लिखे फूकिंग अलोन... नाउ बात उप थिस बिग गाए...

कृति ने ऊपर उसकी और देखा जैसे आँखों hi आँखों में कह रही हो की वह तरय तोह कर रही है.

जाए - लुक्स लिखे यू नीड सम हेल्प...

जाए ने अपना बड़ा सा हाथ उसके सर पर रखा और उसके सर को कास के दबा दिया. कृति उसके हाथ का भार अपने सर पर महसूस कर पा रही थी. और फिर जाए ने एक ज़ोर का झटका मारते हुए लुंड को उसे मुँह में धकेला. कृति को ऐसा लगा जैसे पूरा जबड़ा hi हिल गया हो.

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जाए ने कृति का बालो को पकड़ते हुए अपना लुंड उसके गले में अंदर तक उतारने लगा. हर झटके में लुंड और अंदर चला जाता. कृति के होंठों की साइड से थूक और जाए का सफ़ेद चिप छिपा पानी बहार टपक रहा था और उसकी आँखों से पानी भी. उसके जबड़े में बोहोत दर्द हो रहा था. उसकी हालत ख़राब हो चली थी अभी से.

जाए ने अपने दोनों हाथों से कृति के गले को पकड़ा और खड़े होते हुए एक ज़ोर का झटका मारते हुए लुंड को आखिर कार उसके गले में अंदर तक पंहुचा दिया.

कृति बुरी तरह गैग हो गयी - ह्ह्ह्हहगह्ह्हह्ह.... ुह्ह्हह्ह.....

जाए को हसी आ गयी - यू अरे सुच ा गुड कॉक सुकेर... नाउ यू क्नोव हु लिटिल जाए इस...

कृति को सांस hi नहीं आ रही थी, किसी का लुंड इतनी अंदर कैसे जा सकता था. उसे अपने गले में जाए का टपकता हुआ पानी महसूस हो रहा था.

जाए का लुंड पूरी तरह से उसके सफ़ेद माल से सं चूका था और कृति का मुँह भी. जाए कभी लुंड को टेड़ा करके अंदर से उसके गालों की और धक्का लगता और कभी फिर से गले में अंदर तक. पर इस सब ने उसे फिर से पूरी तरह जगा दिया था और वह नीचे से गीली होनी शुरू हो गयी थी.

जाए ने अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए उसके मुँह को छोड़ना शुरू कर दिया - येह बीच... टेक आईटी आल इन.... मममम.... टेक आईटी आल इन....

जाए को उसका मुँह को छोड़ते छोड़ते 10-15 मिनट तोह हो hi चुके थे और कृति के होंठ दर्द और फ्रिक्शन से बुरी तरह काँप रहे थे. जाए ने एक और ज़ोर का झटका मारा और कृति के मुँह में अपना सारा माल निकाल दिया. जाए ने जैसे hi अपना लुंड बहार निकाला, कृति ने मुँह नीचे करते हुए सब कुछ बहार ज़मीन पर निकाल दिया.

कृति - ऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह...

जाए ज़ोर से चिल्लाया - बितछठ्ठ... ी टोल्ड यू तो नॉट डर्टी थे फ्लोर... यू अरे गोंना बे पुनिशद फॉर थिस...

जाए ने कृति को बालों से पकड़ते हुए बिस्तर पर ऊपर खींचा और जल्दी से उसके ऊपर छड्ड गया. उसका लुंड अभी भी पूरी तरह तना हुआ था जैसे उसने अपनी ेजकुलाते न किया हो. वह कृति को पीछे से गर्दन से पकड़ते हुए उस डोग्गिस्टीले में उसके ऊपर छड्ड गया, और फिर सीधे लुंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

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कृति दर्द में चीख उठी, इस आदमी की हाइट छोटी थी पर डैम पूरा था - अह्ह्ह्हह..... ुह्ह्हह्ह.... आह्ह्ह्ह.... अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह... डैडी.... अह्ह्ह्ह.... एसससस..... उह्ह्ह....

कृति के मुँह से डैडी सुनते की जाए की रफ़्तार और भी तेज़ हो गयी और हर धक्के से कृति का शरीर बिस्तर पर और आगे सरकने लगा - अह्ह्ह.... हहहहहह.... अह्ह्ह्ह.... ी ऍम गोंना मेक यू ा प्रॉपर सलूट टुनाइट.... सो यू लर्न हाउ तो सर्वे योर डैडी...

कृति बुरी तरह काँप रही थी, लुंड अंदर जाते हुए उसकी गांड के छेड़ को और बड़ा कर रहा था. जाए ने उसे बिस्तर पर पिन किया हुआ था और उसका हाथ उसके कान के पीछे लगा हुआ वहां उसे बुरी तरह चुबभ रहा था. कृति ने चद्दर को अपनी उँगलियों से कास के पकड़ लिया - अह्ह्ह्ह.... अह्ह्ह.... डैडी... अह्ह्ह... एसससस... एस्सस.... फुकककक मेई... उह्ह्ह....

जाए - फुककक... अह्ह्ह्ह... योर ासशोले इस स्टिल सो टाइट.... अह्ह्ह्ह....

इस बार जाए होल में और अंदर चला गया था, कृति ने अपने हाथ पीछे करते हुए जाए को रोकना सा चाहा - उउउउउउ....... उउउउउ... अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह.... मम्मीयिययी..... नूवो......

जाए - ददददीययययय.... दादद्दीयय... कॉल में डैडी... माय लिटिल स्नो बन्नी....

जाए कृति के अंदर धक्के पर धक्का मारे जा रहा था. उसकी चीखो के बावजूद बहार से कोई नहीं आ रहा था उसे रोकने के लिए. थोड़ी देर बाद जाए की रफ़्तार थोड़ी काम हुई और उसने कृति पर से अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की.

जाए ने अपना लुंड निकाल कर कृति की छूट में घुसा दिया. उसका मोटा लुंड अपनी छूट में महसूस करते hi कृति को एक अजीब अस मज़ा सा आने लगा.

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कृति - ऊऊह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह..... उह्ह्ह... येह... यह... उह्ह्ह... फ़क में डैडी.... उह्ह्ह...

जाए का एक हाथ अभी भी कृति की गर्दन पर था और दुसरे हाथ से वह उसकी गांड पर थप्पड़ लगा रहा था. कृति की गोरी गांड उसे थप्पड़ो से लाल पद गयी - बिट्ठछठ.... थिंक यू कैन टेक थिस.....

कृति टूटी नहीं थी और शायद ये जाए को और भी भड़का रहा था - येअहहहह... ुह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह.... ममममम.... ददददीयययय.... थिस इस एक्साक्ट्ली व्हाट ी वांट... एक्साक्ट्ली व्हाट ी वांट..... एसससस...

कृति अपने उंगलियां नीचे लाते हुए अपनी छूट के ठीक नीचे मसलने लगी. उफ्फ्फ, कितना हॉट लग रहा था उसे, जैसे उसके अंदर की बंद ख्वाइश पूरी कर रहा हो कोई आज.

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कृति - ऊऊह्ह्ह्ह... मममम.... ममममम .... इस तहत आल यू गोत...

जाए - बित्तछहः.... यू अरे हॉटट... बूत यू गोत्ता लोट तो लर्न...

जाए ने एकदम से कृति के हाथों को पकड़ा और पीछे की और खींच लिया. वह उनका सहारा लेते हुए उसके अंदर अपना लुंड तेज़ी से घुसा रहा था.

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कृति - ैय्यिययी..... ममममममम..... फुककककककक..... ुह्ह्ह्ह.... इजी ों थे आर्म्स....

जाए - नाउ यू फील आईटी बितछःह...... ओह येह.... कॉल में डैडी एंड ी विल जो इजी....

कृति - उउउउउउउउउ.... दद्दीीीीीे... ममममम ...... उउउउउउउउ... प्लीज प्लीज प्लीज.... ुह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्ह.....

जाए उसके हाथ खींचे जा रहा था, उसे अब कृति की चीख सुन कर बोहोत ज्यादा मज़ा आ रहा था. कृति को ऐसा लग रहा था जैसे उसका हाथ hi पीछे से सरक कर बहार न आ जाये. बोहोत दर्द हो रहा था उसकी बाहों में.

कृति - फुसक्कककककक..... उउउउउउ...... आह्हः..... योर कॉक... अह्ह्ह....

कृति को इस तरह चीखता देख, जाए ने कृति के बालों को ज़ोर के खींचा और एक hi झटके में पोजीशन बदलते हुए उसे अपने ऊपर ले आया. उसने कृति को कास के दबोच लिया और उसकी गांड में ज़ोर ज़ोर से स्ट्रोक्स मारने लगा.

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कृति फिर से चीखने लगी थी, इस पोजीशन में उसका लुंड गांड की एक अलग hi जगह पर अंदर टकरा रहा था - ऊऊऊह्ह्ह्ह.... ुह्ह्हह्ह.... ऊऊह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह... उह्ह्ह.... इतस सो बिग्ग..... ुह्ह्ह्ह....

जाए बिस्तर से उछाल उछाल कर कृति के अंदर धक्के मार रहा था. कृति की गांड बुरी तरह दर्द करने लगी थी.

जाए - एहहहह.... ममममम.... यू लिखे तहत.... थिंक यू कैन टेक मोरे....

कृति - ऊऊह्ह्ह्ह... ुह्ह्ह्ह... अअअअअ.... उफ्फ्फ्फ़.... येअहहहह.... हर्डर.... हर्डर....

जाए ने अपना पूरा डैम लगा दिया - Uuuhhhhhhhhhhh.... बिस्तह.....

कृति - येअहहहहह... who's थे माँ नाउ..... who's थे माँ नाउ....

जाए ने गुस्से में कृति का चेहरा पकड़ लिया और उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया और ज़ोर ज़ोर से अपना लुंड उसकी छूट में अंदर बहार करने लगा. कृति की आँखें ऊपर को छड्ड आयी थी, वह शायद अब इस काले को और नहीं झेल सकती थी.

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तभी कमरे में शॉन और बाकी तीनो लोग भी घुसे. उन्हें आते देख जाए के चेहरे पर थोड़ा गुस्सा आ गया - हैययय.... ी ऍम स्टिल फूकिंग थिस बीच....

शॉन - के ों मंत्र... इतस बीन क्लोज तो 2 हॉर्स.... वे अरे रेडी तो ज्वाइन बैक इन....

जाए ने कृति के चेहरे को पकडे हुए चार पांच ज़ोर के धक्के लगाए और अपना सारा लोड उसके अंदर निकाल दिया. उसने कृति को एक बार फिर कास के अपनी बाहों में जकड़ा और उसे एक ज़ोर की हुग दी. कृति की हड्डियां भी दर्द करने लगी थी. वह अपनी गीली छूट में जाए के ढेर सारे माल को बेहटा हुआ महसूस कर पा रही थी.

जाए ने कुछ सेकंड बाद कृति को बीएड पर साइड धकेलते हुए अपने से अलग किया और गुस्से में कमरे से बहार चला गया. कृति अपने पेअर हवा में ऊपर किये मुस्कुरा रही थी, जैसे उसने इस बड़े से दानव को भी हरा दिया हो.

शॉन उसकी क्यूट सी मुस्कान देख कर मुस्कुराया - प्रिंसेस... यू रेडी फॉर राउंड तवो... और नीड ा फ्यू मिनट्स....

कृति - ी ऍम रेडी... व्हेन यू बॉयज अरे....

कुछ hi देर में वह लोग फिर से कृति के चेहरे पर अपना माल टपका रहे थे. और उसके बाद तीनो साथ में उसकी छूट, गांड और मुँह में बुरी तरह अपना लुंड घुसा रहे थे.

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कृति कब थकी हुई टूटी हुई उन मर्दो के ऊपर सो गयी उसे पता भी नहीं चला, शायद सोते सोते भी एक लुंड उसकी छूट में hi था. पर हर बार की तरह आज भी, उसकी आँखें बंद होने से पहले उसके दिमाग में आखरी ख्याल एहि था की आज अगर वह एक बीच बानी थी तोह उसमे भी साड़ी गलती सुप्रिया की hi थी.
 
अपडेट 99

कृति की आँख खुली तोह उसने अपने आप को एक बिस्तर पर एक काले मर्द के ऊपर सोये हुआ पाया. कृति उस के ऊपर लेती हुई उससे बिलकुल चिपकी हुई थी और उसने उस मर्द को कास के पकड़ा हुआ था. कृति का पेट उस काले मर्द की गांड के ऊपर था और उन दोनों के टाँगे एक दुसरे में समायी हुई. उसने पीछे मुद के देखा तोह एक और काला मर्द उसके ठीक पीछे लेता हुआ था. ऐसा लग रहा था वह किसी भी पल उठ सकता था.

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कृति ने अपना सर पकड़ा, उसका सर बुरी तरह झन्ना रहा था. कृति ने दर्द में अपनी आँखें मीचि तोह रात को हुए जबरदस्त गैंगबैंग के दृशय उसकी आँखों के सामने तैरने लगे.

कृति सावधानी से बीएड से कड़ी हुई ताकि वह उन दोनों को जगाये न. वह दबी आवाज़ में बुदबुदायी - शीट्ट्ट्ट! सहित! फुककक.... व्हाट ी वास् थिंकिंग...

उसे पता था की उसे जल्दी hi कपडे पेहेन कर यहाँ से निकलना होगा. उसे वहीँ कमरे की ज़मीन पर उसकी ब्रा पंतय पड़े हुए दिखे. पता नहीं उसके उन्देर्गर्मेन्ट्स बहार से यहाँ अंदर कब पहुंचे. पता नहीं और क्या क्या हुआ था कल रात जो उसे याद नहीं आ रहा था.

कृति ने जल्दी से अपनी ब्रा पहनो और अपने आप को शीशे में देखते हुए अपनी पंतय को ऊपर चढ़ाने लगी. उसने आईने में देखा उसकी पूरी हालत ख़राब हो राखी थी, बाल बिखरे हुए और कपडे पर जगह जगह सफ़ेद विरए के निशाँ.

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कपड़ो पर hi नहीं, उस की जिस्म पर उन लोगो का सफ़ेद पानी सूख कर जैम सा गया था. कृति को अपने कपड़ो और अपने आप में से बोहोत गन्दी बदबू आ रही थी, उन लोगो के बीज की स्मेल काफी तेज़ थी. पर फिलहाल ये सब सोचने का टाइम नहीं था, उसे यहाँ से जल्दी से निकलना था.

कृति ने कमरे में नज़र दौड़ाई, उसकी ड्रेस वहां नहीं थी. वह दबे पाँव से कमरे से बहार आयी और उसे वहीँ सोफे पर अपनी ड्रेस पड़ी दिखाई दी. थैंक गॉड, फिलहाल तोह बहार कोई नहीं था, पता नहीं बाकी दोनों कहाँ गायब थे. उसने अपने ड्रेस पहनी शुरू कर दी और पीछे से ड्रेस का ज़िप लगाया. काम से काम ड्रेस तोह इतनी गन्दी नहीं थी.

कृति लिविंग रूम में अपना छोटा सा पर्स और खासकर उसमे अपने फ़ोन को ढूंढ़ने लगी. पर्स वहीँ एंट्रेंस के पास hi था, शायद अंदर आते हुए उसने वहीँ छोड़ दिया होगा. उसने जल्दी से पर्स में से अपना फ़ोन निकाला और अपने लिए एक उबेर कैब राइड बुक करि. उबेर बस 5 मिनट hi दूर थी.

कृति ने घर का दरवाज़ा खोला पर बहार बोहोत ज्यादा सर्दी थी. उसने कांपते हुए दरवाज़ा बंद कर दिया. बस 5 मिनट की hi तोह बात थी, वह बेसब्री से अपने फ़ोन में देखते हुए उबेर के पहुंचने का इंतज़ार करने लगी.

तभी उसके कानो में शॉन की आवाज़ पड़ी - प्रिंसेस... गुड मॉर्निंग... यू फाइनली उप...

कृति एक डैम घबराते हुए जैम सी गयी, उसने शॉन की तरफ देखा भी नहीं.

शॉन ने चीरफुल अंदाज़ में कहा - हैवे ब्रेकफास्ट बिफोर यू लीव...

कृति - No... ी ऍम गुड... ी ऍम लेट फॉर माय क्लासेज...

शॉन - It's सैटरडे टुडे... व्हाट क्लासेज... वेयर दो यू स्टडी बी थे वे...

कृति के एक्सपीरियंस ने उसे इतना तोह सीखा दिया था की अपने बारे में कोई भी जानकारी देना सेफ नहीं था - हम्म्म... लुक... ी जस्ट वांट तो लीव... एंड अबाउट लास्ट नाईट... ी ऍम नॉट...

शॉन ने उसे बीच में टोक दिया - हे हे... no एक्सप्लनेशन्स नीडेड... आल तहत मैटर्स इस वे आल हद फन... यू सीमेड तो हैवे फन... didn't यू?

कृति ने हलकी आवाज़ में कहा - येह...

शॉन - Don't वोर्री... ी ain't जुड़गिंग यू... ी won't बोथेर यू िफ़ यू don't वांट तो बे बोथेरेद... ी ऍम प्रीटी सीरियस अबाउट तहत सहित विथ थे बॉयज...

कृति अभी भी उससे आँखें नहीं मिला पा रही थी, पर उसकी बातें उसकी घबराहट को काम कर रही थी - थैंक्स शॉन...

शॉन ने एक हूडि उठाते हुए कृति की और फेकि - हेरे... टेक थिस... इतस कोल्ड आउटसाइड...

कृति ने हूडि को कैच किया और जल्दी से घर से बहार की और निकल गयी, वह वहां एक पल भी रुकना नहीं चाहती थी. उसकी कार राइड भी आ hi गयी थी. उसने कार में बैठने से पहले हूडि को अपनी ड्रेस के ऊपर दाल लिया, और ठिठुरते हुए कार में बैठ गयी. कार ड्राइवर ने पीछे पलट कर उसे मुस्कुरा के देखा और कार चलनी शुरू कर दी.

कृति ने गाडी में आगे लगे जीपीएस की और देखा, यहाँ से 40-45 मिनट लगने वाले थे अपने अपार्टमेंट तक पहुंचने में. बहार नज़र दौड़ाई तोह उसे पता चला की वह एक काफी गंदे से नेबरहुड में पहुंच गयी थी कल रात. वह सोचते hi काँप गयी की उसके साथ क्या क्या नहीं हो सकता था कल रात. वह इतनी पागल कैसे हो सकती थी.

उसने जल्दी से इन खयालो को अपने दिमाग से निकालने की कोशिश करि, पर उनकी जगह फिर से वापिस वही कुछ पल उसके दिमाग को फ्लड करने लगे. वह दिन जिसने कुछ महीने पहले उसकी जिंदगी को बदल दिया . उसके बर्थडे वाली रात. कितनी एक्ससिटेड थी वह अपने ख़ास दोस्तों के साथ वह बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए. राहुल... आकाश... और सुप्रिया... वह... वह तोह उसकी बेहेन जैसी hi बन गयी थी... उसकी सिस्टर इन लॉ...

उसके बारे में सोचते hi कृति के दिल और दिमाग में फिर से एक गुस्से की लेहेर दौड़ गयी. फ़क... फ़क हेर... फ़क सुप्रिया... जो उसके साथ कल रात हुए था, काश वह सब सुप्रिया के साथ हुआ होता... काश वह काले लोग सुप्रिया को फ़क करते उसकी जगह... और भी बुरी तरीके से...

वह फिर से उस रात के बारे में सोचने लगी. कैसे उस रात सारे राज़ बहार आ गए थे, और कैसे उसने गुस्से में चिल्लाते हुए सुप्रिया को वहां से जाने के लिए कह दिया था. वह उसकी शकल भी नहीं देखना चाहती थी. वह आखरी बार थी जब उसने सुप्रिया को देखा था.

उसने तुरंत hi उसने विक्रम भैया को कॉल लगाया था. पर उन्होंने क्या किया! उसकी बात पूरी तरह से नज़र अंदाज़ hi तोह कर दी थी. कुछ पल जैसे भूले नहीं भूलते और दिमाग में एक वीडियो क्लिप की तरह चलते रहते है.

विक्रम - कृति... कलम डाउन...

कृति ज़ोर से बोली - हाउ कैन ी कॉमन डाउन! दीद यू हेअर व्हाट ी जस्ट टोल्ड यू... राहुल एंड सुप्रिया.... चीटी....

विक्रम - लुक मैंने तुम्हे पहले hi वारं किया था राहुल के बारे में...

कृति के दिमाग में जैसे लाइट बल्ब सा जगा - सो यू कनेव तू!!! तहत बीच वास् फूकिंग राहुल एंड यू वेरे टोटली फाइन विथ आईटी!!!! एंड तहत शामे मन वास् आल्सो फूकिंग योर सिस्टर! व्हाट काइंड ऑफ़ मन अरे यू!

विक्रम की आवाज़ थोड़ी सख्त हो गयी - कृति... यू नीड तो लिसेन... सुप्रिया और राहुल के बीच सब ख़तम हो चूका था... राहुल वास् थे ओने तहत त्रिकेड बोथ ऑफ़ यू...

पर कृति तोह जैसे कुछ सुन hi नहीं रही थी - एंड आप उस सलूट से शादी करने जा रहे है!!!?? ुंबलीवबले...

विक्रम ये सुन कर एक पल के लिए चुप सा हो गया, शायद उसे अंदाज़ा नहीं था की कृति को ये पता था - कृति... let's टॉक टुमारो... मैं ायूँगा तुमसे मिलने... जस्ट स्टे कलम टिल थें... प्रॉमिस?

कृति ने गुस्से में फ़ोन काट दिया. उसके खुद के भैया उसकी बात नहीं समझ रहे थे. क्यों करे वह उनसे कोई प्रॉमिस. वह उस बीच की शादी तोह भैया से कभी नहीं होने देगी!

कैसे उसने वह पूरी रात गुस्से में भड़कते हुए काटी थी और उसका दिमाग चलना hi बंद हो गया था. कैसे वह सुबह सुबह hi विक्रम भैया के घर पहुंच गयी थी. वह तोह वहां ईशा से मिलने भी नहीं गयी थी, बस भैया को रोकने के लिए गयी थी.

कृति निर्वसली विक्रम के घर के आलिशान ड्राइंग रूम में बेचैनी से बैठी हुई थी. बस उसे विक्रम भैया से अभी बात करनी थी, पता नहीं वह कहाँ थे. तभी ईशा वहां नीचे आयी और उसने कृति को ड्राइंग रूम में बैठे देखा.

ईशा उसे इग्नोर करते हुए घर के पीछे की साइड चली गयी. कुछ देर बाद वह वापिस आयी तोह उसने कृति को वहीँ बैठे देखा. कृति के चेहरे पर गुस्सा और बेचैनी साफ़ झलक रही थी. उन दोनों की आँखें मिली और कृति को भी ईशा की अर्रोगंट अननोएड लुक साफ़ दिखाई दी. वह दिन कृति की मेमोरी में इस तरह गदा हुआ था की उसे ये तक याद था की उस दिन ईशा ने क्या पहना हुआ था. एक टाइट ब्लैक ड्रेस जिस पर डिज़ाइनर स्टोन्स लगे हुए थे. हमेशा की तरह वह किसी डेविल से काम नहीं लग रही थी.

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ईशा ने अपनी अननोएड टोन में कहा - विक्रम के लिए वेट कर रही हो तोह वह यहाँ नहीं है...

कृति का चेहरा उतर सा गया - कब गए वह घर से?

ईशा - मॉर्निंग में hi... तुमने उससे चेक नहीं किया?

कृति के चेहरे पर परेशानी देख कर ईशा भी थोड़ी क्यूरियस सी हो गयी थी, और वह उसके सामने आकर बैठने लगी.

कृति कड़ी हुई - मैं चलती हूँ फिर...

ईशा ने एक कमांडिंग टोन में कहा - सीट डाउन... तेल्ल में... व्हाई सो वरीड...

कृति तुरंत hi नीचे बैठ गयी पर वह ईशा से आँखें नहीं मिला पा रही थी - नथिंग... जस्ट... ऐसे hi...

शायद ईशा उससे उसी टोन में बात करती रहती तोह कृति उसे कभी कुछ न बताती, पर ईशा ने एकदम से अपनी टोन सॉफ्ट कर दी - कृति... क्या हुआ... बताया... नेवर सीन यू सो वरीड डिअर...

कृति के दिमाग में एक उलझन सी चल रही थी, पर साथ hi सुप्रिये के लिए हद्द से ज्यादा आक्रोश भी - नथिंग... बस वह... वह...

ईशा आगे की और झुकी, वह उसके साथ बैठी होती तोह उसे प्यार से पुचकार hi लेती - बोलो बोलो... बेटर आउट थान इन...

कृति अब और चुप नहीं रह सकती थी, शायद भैया को रोकने के लिए उसे ईशा को यह बताना hi होगा - वह... भैया के एक्सपोर्ट वाले बिज़नेस में... एक एम्प्लोयी है... सुप्रिया...

सुप्रिया का नाम सुनते hi ईशा की आँखें में एक बिजली सी दौड़ गयी - कौन... सुप्रिया शर्मा?

कृति - हाँ.... वही...

ईशा - व्हाट अबाउट हेर? क्या किया उसने?

कृति हिचकिचा सी रही थी - ी थिंक... ी थिंक... भैया का उसके साथ अफेयर चल रहा है...

ईशा के लिए ये कोई नयी बात नहीं थी, पर बात शायद बस एहि नहीं थी - हम्म्म... अरे यू सूरे? Isn't शी योर क्लोज फ्रेंड?

कृति ने सर हिलाया - नहीं... नहीं... वे वेरे जस्ट कलगुएस… शी लेफ्ट थे कंपनी ा मंथ बैक...

ईशा सरकास्टिक तरीके से बोलने से रह नहीं पायी - ोहककक… सो... क्या न्यूज़ है तुम्हारी ex-colleague की...

कृति अभी भी बोल नहीं पा रही थी - ईशा... ी मैं ईशा भाभी वह... अफेयर... यू क्नोव भैया न... उनकी कोई गलती नहीं है इस सब में...

ईशा उसके साथ थोड़ा कासुअल हो गयी - अब भाभी बोलै hi है आज इतना सालो बाद तोह बता भी दो यार... wouldn't यू वांट की तुम्हारे भैया भाभी के बीच सब ठीक रहे...

ईशा की बात सुनकर कृति इमोशनल सी हो गयी थी - हाँ ऑब्वियस्ली... वह... ी मैं... ी जस्ट गोत तो क्नोव यस्टरडे.... भैया सुप्रिया से शादी करने जा रहे है... आज... ी ऍम रियली सॉरी... की आपको ऐसे मुझसे ये सब पता चल रहा है...

ईशा उसकी बात सुनकर एकदम चुप हो गयी और उसके होंठ सिकुड़ से गए थे. पर उसने बिलकुल आराम से कहा - Don't बे सॉरी... ी ऍम रियली थैंकफुल की तुमने यहाँ आकर मुझे ये बात बताई...

कृति को ईशा का रिएक्शन समझ नहीं आया, वह ये सुन कर इतनी कलम कंपोज्ड कैसे रह सकती थी - पर वह... वह अभी शायद शादी कर लेंगे... और फिर भैया सुप्रिया को लंदन भेज देंगे...

ईशा के लिप्स पर अब एक हलकी सी मुस्कान थी - Don't वोर्री... ऐसा कुछ नहीं होगा... न उनकी शादी होगी और न वह कभी लंदन जाएगी... ी विल सॉर्ट आउट एवरीथिंग...

ईशा का कॉन्फिडेंस देख कर कृति के विचलित से मैं को एक रहत सी मिली थी और साथ hi थोड़ी करिओउसीतय भी की ईशा ऐसा क्या करने वाली थी - आप कैसे रोकेंगी उन्हें...

ईशा - लीव तहत विथ में... यू तेल्ल में एवरीथिंग... जो भी तुम्हे उनके अफेयर के बारे में पता है...

कृति थोड़ा झिझकी, पता नहीं ईशा टाइम क्यों वास्ते कर रही थी. उसने धीरे धीरे ईशा को सब बताना शुरू किया, जो उसे पता था या फिर कभी सुप्रिया से पता चला था. वह डिनर वाली रात, वह दिल्ली वाली रात, वह पूजा वाला दिन, वह बैंकाक में उन दोनों का स्टीमी हनीमून, सब कुछ... उसने सब बता दिया ईशा को.

ईशा उसे बिना इंटरप्ट किये उसकी सारे बातें ध्यान से सुन रही थी. कृति के चुप होते hi उसने आराम से कहा - थैंक्स कृति.... यू हैवे बीन रियली हेल्पफुल...

कृति - No... ी मैं ी जस्ट वांट भैया... एक्चुअली आप दोनों... तो बे हैप्पी

ईशा - ट्रस्ट में, वे विल बे हैप्पी... एंड ी थिंक यू शुड बे हैप्पी तू... विक्रम हद मेंशनएड तहत यू वांटेड तो जो अब्रॉड फॉर स्टडीज....

कृति - हाँ... वह एक पर्टिकुलर कॉलेज है... ी हैवे एप्लाइड सेवेरल टाइम्स, बूत can't गेट आईटी...

ईशा - लीव तहत विथ में.... ी विल गेट यू इन.... वैरी क्विकली... एंड योर फुल ट्यूशन एंड आल एक्सपेंसेस ताकें केयर ऑफ़...

कृति संकोच में बोली - नहीं बूत... ये मैं कैसे...

ईशा खड़े होते हुए बोली - ारी... योर भाभी कैन दो थिस मच फॉर यू न... don't वोर्री... अभी तुम घर जायो और आराम करो... टेंशन मत लो... एंड स्विच ऑफ योर फ़ोन फॉर टुडे प्लीज...

कृति से धीरे से यस कहा और वह भी कड़ी हो गयी. ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी उसने ईशा के साथ बस कोई बिज़नेस ट्रांसक्शन की हो. पता नहीं उसने क्या बेचा था ईशा को, और क्या पाया था उसके बदले में.

_____

ड्राइवर की आवाज़ ने कृति को उसके खयालो से बहार निकला और वह जल्दी से अपना पर्स लेकर गाडी से नीचे उतर गयी. सामने hi उसकी अपार्टमेंट बिल्डिंग थी. वह लिफ्ट से ऊपर अपने अपार्टमेंट तक पहुंची और चाबी से दरवाज़ा खोला. उसकी इंडियन रूम मात हॉल में hi कड़ी थी, जैसे बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रही हो.

वह कृति को देखते hi उस पर बरस पड़ी - क्रीटीई... कहाँ थी यार तुम... मैसेज तोह दाल देती... यू क्नोव ी वास् सो वरीड... अगेन... एंड व्हाट इस तहत स्मेल... युक...

कृति उसे इग्नोर करते हुए अपार्टमेंट में अपने कमरे की और बाद गयी. उसने कमरे में घुसते हुए अपने ऊपर से हूडि को उतारते हुए ज़मीन पर फेका. उसे अभी एक हॉट बाथ लेना था. उसने पूरा जिस्म इस टाइम बुरी तरह दर्द कर रहा था. उसका अंग अंग सूजा हुआ था.

पर उसकी रूम मात उसके पीछे पीछे उसके कमरे में आ गयी, और उसकी और देखने लगी. कृति के बालों में भी वाइट वाइट स्टफ लगा हुआ था, और वह समझ गयी थी की कृति रात भर क्या कर रही थी - कृति यार... थिस इस रिडिक्युलॉस... तू मच... थिंक अबाउट योर सेफ्टी फॉर वन्स... तुम्हे एसटीडी हो गया न तोह फिर पता चलेगा...

कृति ने उसे घूरा, पता नहीं व्हाई दीद शी गेट ा रूम मात - यू अरे नॉट माय माँ.... एंड यू डेफिनिटेली नॉट माय फ्रेंड... सो कीप योर कंसर्न तो योरसेल्फ... नाउ गेट आउट माय रूम...

कृति उसकी तरफ आयी और उसे एक दो कदम पीछे लेने के लिए मजबूर कर किया, और फिर ज़ोर से दरवाज़ा उसके मुँह पर मारते हुए बंद कर दिया. शी didn't नीड एनीमोर बीच फ्रेंड्स... शी डिडन्ट नीड anyone's एडवाइस.

कृति ने एक एक करके अपने सारे कपडे उतार फेके, शायद वह उन्हें कभी दुबारा पेहेन्ने भी नहीं वाली थी. वैसे भी पैसे की क्या कमी थी, ईशा हर महीने उसे ाचा ख़ासा अलाउंस भेजती थी.

कृति ने हॉट टब में पानी भरना शुरू किया. उसकी छूट और गांड भी तरह दर्द कर रही थी और उन्हें सिकाई की जरूरत थी. ये पहली बार नहीं था की पिछले कुछ महीनो में उसने अजानने मर्दो के साथ फ़क किया हो, पर कल तोह चार चार काले मर्दो के साथ सो कर उसने अपनी भी सारे हाडे पार कर दी थी. शायद अब कोई हद्द बची भी नहीं थी.

कृति टब के गरम पानी में बैठ गयी. उसके दुखते हुए शरीर को एकदम से रहत सी मिली. उसने टब में पीछे तक लगायी और अपने पेअर फैला कर बैठ गयी. उसके शरीर पर जमा हुआ छुम धीरे धीरे खुद hi उसके शरीर से उतर कर पानी में तैरने लगा. कृति ने अपने बूब्स को हलके से सहलाया, कल इन्हे काफी बुरी तरह खींचा गया था. जब से उसने ये सब करना शुरू किया था उसके शरीर का आकर hi बदलने लगा था.

कृति ने टब के साइड में अपना सर लगाया और आँखें बंद कर ली. उसका दिमाग फिर से उसे उस मनहूस दिन पर वापिस ले आया.

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बिलकुल ऐसे hi तोह कृति घर आकर आराम से अपने बीएड पर सो रही थी. उसने अपना फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया था. पिछली रात वह जरा भी नहीं सो पायी थी और ईशा से हुई बात के बाद उसके मैं को एक अजीब सी शान्ति मिली थी. ईशा इतनी कॉंफिडेंट थी की उसे यकीं हो गया था की सुप्रिया को कुछ नहीं मिलेगा - न भैया और न hi लंदन. She'll गेट व्हाट शी डेसेर्वेस... उसका दो कौड़ी का हस्बैंड और एक मिडिल क्लास लाइफ...

अगले दिन जब कृति की आँख खुली तोह दिन के 12 बज चुके थे. वह काफी देर तक सो गयी थी, लगभग 18 घंटे. उठते hi सबसे पहले उसे सुप्रिया का ख्याल आया, अब तक तोह ईशा ने सब ठीक कर दिया होगा. ये आखरी बार नहीं होगा जब उसे उठते hi सबसे पहला ख्याल सुप्रिया का आएगा.

कृति ने जल्दी से अपना फ़ोन स्विच ों किया. हर एक सेकंड जैसे मिनट्स के बराबर था. नेटवर्क वापस आने में और कुछ सेकंड लग गए. मिस्ड कॉल्स... 36 मिस्ड कॉल्स... फ़क... ऐसा क्या हो गया... उसने रीसेंट कॉल्स को ऊपर से नीचे स्क्रॉल करना शुरू किया - आकाश, आकाश, आकाश, ऑफिस, आकाश, आकाश, गयम ट्रेनर, आकाश, आकाश, अननोन नंबर, अननोन नंबर..... और लास्ट में भैया की एक कॉल.

आकाश उसे क्यों कॉल कर रहा था इतनी बार. शायद बस उस रात के लिए सॉरी बोलने के लिए. कृति सोच hi रही थी की क्या वह भैया को कॉल करके पूछे या फिर ईशा को, की आखिर क्या हुआ सुप्रिया के साथ. दोनों को hi कॉल करना कितना ावक्वार्ड होगा. शायद उसे वेट करना चाहिए, अपने आप hi सब पता चल जायेगा.

कृति बीएड पर बैठी सोच hi रही थी की वह क्या करे तभी उसका फ़ोन फिर से बजने लगा, फिर से आकाश का कॉल. न चाहते हुए भी उसने फ़ोन कॉल उठा ली.

दूसरी साइड से आकाश की एक्ससिटेड सी आवाज़ आयी - कहाँ थी यार तू, तेरा फ़ोन स्वित्चेद ऑफ था कल से...

कृति ने अन्नोय होकर कॉल उठाया - बोल! क्या काम है... एंड राहुल की तरफदारी के लिए कॉल किया है तोह don't इवन बोथेर... तहत chapter इस बियॉन्ड क्लोज्ड नाउ...

आकाश - नहीं यार... मैं तोह सुप्रिया के बारे में कॉल कर रहा था...

उसका नाम सुनते hi कृति का मूड ख़राब हो गया - फ़क हेर... ok... एक्चुअली यस, यू शुड आल्सो फ़क हेर... एंड ऐड योर नाम इन थे लॉन्ग लिस्ट ऑफ़ पीपल फूकिंग हेर...

आकाश - ारी यार व्हाई वोउल्ड ी फ़क हेर... मैं तोह बस पूछने के लिए कॉल कर रहा था... वह मिली क्या?

कृति ने हैरान होते हुए पुछा - मतलब?

आकाश ने उसको मोचक किया - मतलब!!?? ारी यार जस्ट तेल्ल में थे इनसाइड स्कूप... कैसे किया ये सब...

कृति - हुआ क्या है? ट्रस्ट में... ी don't क्नोव व्हाट थे हेलल यू अरे टॉकिंग अबाउट...

आकाश - बीआरओ... वह गायब है न... she's अब्स्कोंडिंग विथ कंपनी मनी... बिग फ्रॉड एंड आल...

कृति बीएड से ऑलमोस्ट नीचे गिर hi पड़ी - व्हाटट!!!! व्हाट नॉनसेंस...

आकाश - बन मत अब, ी क्नोव यू हद समथिंग तो दो विथ आईटी...

कृति की आवाज़ एक डैम गम सी हो गयी थी, वह किसी तरह से सोफ़्त्ल्य बोली - नहीं..... मैं तोह पास्ड आउट थी... कल से... हुआ क्या है?

आकाश रुकते हुए बोलै - ओह्कककक.... ी थॉट.... तूने hi कुछ किया होगा... आफ्टर तहत बिग फाइट तहत नाईट... कल ऑफिस में कुछ गुंडे टाइप लोग आये हुए थे और आज सुबह कुछ ऑफिसर्स... सब सुप्रिया को ढून्ढ रहे थे.... और फिर आज ऑफिसर्स ने साहिल सर का स्टेटमेंट भी लिया...

कृति को साड़ी बातें नॉनसेंस सी लग रही थी, जैसे वह कोई सपना देख रही हो - ऑफिसर्स... गुंडे... अरे यू आउट ऑफ़ योर मंद? ..... साहिल सर ने क्या कहा?

आकाश - डायरेक्टली तोह किसी से भी कुछ नहीं... पर स्ट्रांग रमौर एहि है की... गलती से सुप्रिया के पास अभी भी ऑफिस के बैंक एकाउंट्स का एक्सेस था... और उसने तीन दिन पहले एक बड़ी ट्रांसक्शन में काफी पैसा अकाउंट से निकाल लिया... और अब वह गायब है...

कृति गहरी सांस लेते हुए आकाश की बात सुन रही थी. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या हुआ था. आकाश शायद और भी कुछ बोले जा रहा था पर कृति का ध्यान नहीं था उसकी बातों में. क्या ये सब ईशा ने करवाया था सुप्रिया को फसवणे के लिए? पर कैसे....

आकाश - यू तेरे... सुन रही है?

कृति - हाँ... सॉरी... ी ऍम किंग तो थे ऑफिस... इन ान ऑवर... कॉल में िफ़ यू फंड आउट एनीथिंग नई मैंवहीले...

कृति जल्दी से फ़ोन रखते हुए कपडे चेंज करके बहार की और भागी. बहार ड्राइंग रूम में उसके मम्मी एंड पापा बैठे हुए थे, जो थोड़ा वीयर्ड था, वह कभी घर पर होते hi नहीं थे. कृति उन्हें अनदेखा करते हुए बहार की और चल पड़ी पर पीछे से पापा की आवाज़ आयी.

पापा - कृति... कहाँ जा रही हो...

कृति - पापा... ऑफिस इमरजेंसी... मैं आती हु थोड़ी देर में...

पापा - नहीं ी थिंक बेटर होगा की तुम अभी कहीं नहीं जायो...

कृति ने हैरान होते हुए पूछा - क्यों? क्या हुआ?

पापा - ममममम.... विक्रम का कॉल आया था... उसने बोलै है की तुम घर पर रहो और इस सारे मामले से दूर रहो...

कृति को कुछ समझ नहीं आ रहा था - भैया ने? पर क्यों??? मैं उन्हें अभी कॉल करती हूँ... मामला है क्या?

पापा - अभी वह काफी बिजी है... वह बोलै तुम्हे कॉल करेगा... बैठो अभी यहीं...

पापा कृति को हाथ पकड़ कर वापिस अंदर ले आये. कृति को ऐसा लग रहा था जैसे वह सो कर एक अलग hi दुनिया में उठी हो. अगले कुछ घंटो में उसे ऑफिसर्स की पूछताछ के लिए तैयार कराया गया - उसकी और सुप्रिया की कोई लड़ाई नहीं हुई थी... वह बस उसके घर आयी थी बर्थडे पार्टी के लिए... कृति की सुप्रिया को लेकर किसी से कोई बात नहीं हुई... वह और सुप्रिया तोह बस कलगुएस थे...

कृति पुज़्ज़लेड आखों से सब कुछ सुन रही थी. शायद भैया का कॉल आएगा तोह सब क्लियर हो जायेगा. पर वह कॉल नहीं आया. न उस दिन, न अगले दिन, न अगले हफ्ते, न उससे अगले हफ्ते.

ईशा का कॉल ज़रूर आया था, ये बताने के लिए की उसका एडमिशन हो गया था और वह अब जाने की तैयारी करना शुरू करे. कृति को ये सुन कर ज़रा भी एक्ससिटेमेंट नहीं हुई थी. उसने ईशा से सुप्रिया के बारे में बात करने की कोशिश करि तोह ईशा ने उस बारे में कोई बात नहीं करनी चाही. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की हुआ क्या था.

बस ये खबर मिली की भैया की एक्सपोर्ट कंपनी फिलहाल बंद हो गयी थी. सुप्रिसिंगलय जब उसने आकाश को कॉल करके इस सब के बारे में बात करने की कोशिश करि, उसने भी इस बारे में कोई बात नहीं करनी चाही. कोई सुप्रिया के बारे में बात करने को तैयार hi नहीं था.

कुछ hi हफ्तों में वह उस के लिए रवाना हो गयी, ईशा ने सब कुछ इतनी जल्दी जल्दी अर्रंगे करवा दिया था - एडमिशन, वीसा, टिकट्स. जाते जाते भी विक्रम भैया उससे एक बार भी नहीं मिले. इतनी लम्बी फ्लाइट में भी बार उसका दिमाग इस पूरे घटनाक्रम पर hi आकर रुक जाता.

_____________

कृति ने बाथ टब में एक करवट ली. पानी अभी भी गरम था, और उसका बहार निकलने का बिलकुल मैं नहीं था. वह फिर से पिछले कुछ महीनो की यादों में खो गयी, इस बार उस में जो हुआ उसके बारे में सोचते हुए.

उस आकर एक बार तोह सब कुछ कितना ाचा सा लगा था. कितनी एक्ससिटेमेंट थिस उसे, एक नए शहर... एक नए देश में अकेले सब कुछ एक्स्प्लोर करने को मिलेगा, नए दोस्त बनेंगे, नयी यादें, कितना मज़ा आने वाला था. उसने अपने कॉलेज की hi एक लड़की के साथ अपार्टमेंट शेयरिंग में ले लिया. चाहती तोह शायद वह अकेले भी अपार्टमेंट रेंट पर ले सकती थी पर उसे लगा था की उसे अकेले देश में कंपनी मिल जाएगी.

उसकी लाइफ तोह सेट हो गयी थी अब, उसके लाइफ ड्रीम्स पूरे होने वाले थे. जिस लाइफ को उसने मूवीज में देखा था वह उसे जी सकती थी. पर पता नहीं क्यों दिन प्रति दिन उसके मैं में एक अजीब सी बेचैनी और खोखलापन बढ़ता जा रहा था.

कॉलेज के लेक्टर्स के दौरान वह लॉस्ट हो जाती. असाइनमेंट्स पूरे नहीं होते, सोशललय वह लोगो से दूर hi रहना पसंद करती, उसकी खुद की रूम मात उसे बोहोत अन्नोयिंग लगने लगी थी. इंडिया में फॅमिली से भी उसने बात करनी काम कर दी थी. विक्रम भैया ने उससे उस रात के बाद से दुबारा बात hi नहीं की थी.

फिर एक रात वह हुआ, जो वह कभी सोच भी नहीं सकती थी. कोई यकीन नहीं करेगा की वाइल्ड सेक्स एनॉउंटर्स की शुरुवात किसी नाईट क्लब या पार्टी में नहीं, बल्कि एक शांत सी रात को एक ग्रोसरी स्टोर के बहार हुई थी.

उस रात कृति ग्रोसरी स्टोर से कुछ चीज़े ले रही थी. आज उसे थोड़ा लेट हो गया था यहाँ आने में, स्टोर क्लोजिंग का टाइम नज़दीक था और स्टोर में लोग भी काम थे. जाने क्यों उसे ऐसा लग रहा था की कोई उसे गौर से चेक आउट कर रहा था. वह पेमेंट करके बहार आयी, पार्किंग लोट सुनसान था और वह अपनी कार की तरफ बस पहुंचने hi वाली थी.

तभी उसे फिर से वही एहसास हुआ, जैसे कोई उसके ठीक पीछे खड़ा हो. उसकी इंस्टिंक्टस बिलकुल ठीक थी, एक गोरा आदमी उससे थोड़ी पीछे खड़ा था. एक पालो के लिए तोह कृति घबरा hi गयी थी. उसके पर्स में शायद पीपर स्प्रे नहीं था, वह सोच रही थी की क्या उसे ज़ोर से चिल्लाना चाहिए उस आदमी को डरने के लिए.

आदमी ने एक कदम हुए कृति की और लिया, वह काम से काम 6 फुट का लम्बा और मस्कुलर आदमी था. कृति को तोह वह बोहोत आराम से काबू में कर सकता था. कृति ने अपने अंदर हिम्मत लाते हुए उसे घूर कर देखा.

आदमी - हे… सॉरी डिडन्ट मैं तो स्टार्टले यू…

कृति उसकी और देख रही थी जैसे उसकी अगली मूव का इंतज़ार कर रही हो.

आदमी - ी जस्ट सौगत ा ग्लिम्पसे ऑफ़ यू बैक तेरे इन ओने ऑफ़ थे ैसल्स… ी couldn’t रेसिस्ट किंग आउट हेरे तो हैवे ानोथेर लुक ात यू…

कृति - Ok… ेमममम… व्हाई इस तहत?

आदमी - ी ऍम सूरे यू गेट आईटी आल थे टाइम तहत यू अरे गॉर्जियस... बूत ी थिंक यू अरे मोरे थान गॉर्जियस... यू अरे ा टोटल स्टनर...

कृति जाने क्यों इस स्टाल्कर के आगे ब्लश करने लगी थी - थैंक्स…

आदमी - वाओ… क्यूट स्माइल तू… इतस सो एंजेलिस...

कृति उसको कोई जवाब नहीं दे पा रही थी - ी शुड गेट गोइंग...

आदमी ने उसकी और एक कदम और लिया - योर हेयर स्ट्रैंड्स... फॉलिंग ों योर फेस... थे लुक सो सॉफ्ट... don't तेल्ल यू अरे ान इंडियन मूवी स्टार...

कृति का दिल ज़ोर से धड़कने लगा था, क्या चाहता था ये आदमी उससे. वह मुस्कुराती हुई बोली - सडली no....

आदमी - इमम्म.... दो यू मंद में आस्किंग िफ़ यू हैवे ा बॉयफ्रेंड...

पता नहीं कृति के मुँह से क्यों निकल गया - No... ी don't हैवे ा बॉयफ्रेंड... ी ऍम किन्दा नई हेरे...

आदमी की मुस्कान और बड़ी हो गयी, शायद उसे अपने चान्सेस पर यकीन होने लगा था - व्हाट डस ा मन हैवे तो दो तो गेट लकी विथ ा गर्ल लिखे यू…

कृति अभी भी असहज थी - ी don't क्नोव... जस्ट नॉट बे ा साइको ी गेस...

आदमी हस्ते हुए बोलै - ी ऍम नॉट ा साइको... ी ऍम जॉन... एंड यू अरे... एक्चुअली टोटली आउट ऑफ़ माय लीग...

कृति का दिल और दिमाग दोनों उसका साथ नहीं दे रहे थे, वह भी है पड़ी - ी don't थिंक तहत वे... ी मैं यू लुक किन्दा नीस तू... ी गेस..

जॉन - सो यू अरे टेलिंग में ी हैवे ा चांस...

कृति ब्लश करते हुए नीचे देखने लगी - ी don't क्नोव...

जॉन - वाओ... योर रेड चीक्स व्हेन यू ब्लश... ी विश ी कुड सी थम इन प्रॉपर लाइटिंग... नॉट इन थिस दिंलय लिट् पार्किंग लोट... यू स्टिल haven't टोल्ड में योर नाम...

कृति - ी ऍम कृति...

जॉन ने अपने एक्सेंट में उसका नाम लिया - कृत्ति... व्हाट ा नाम...

जॉन उससे बस एक कदम दूर उसके पास पहुंच गया था और कृति उसके सामने कितनी छोटी सी लग रही थी. उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था और जॉन उसकी नर्वस्नेस को देख पा रहा था - व्हाई don't वे कंटिन्यू थिस टॉक समवेयर ेल्स... ओनली िफ़ यू वांट तो...

कृति ने ऊपर उसकी और देखा, उसके घुटने कमज़ोर से पद रहे थे - उम्म्म.... सूरे... येह वे कैन दो तहत...

जॉन ने तुरंत जवाब दिया - योर प्लेस और माइन?

कृति को लगा था वह कॉफ़ी शॉप या कहीं बहार बोलेगा - उम्म्म्म... ी हैवे ा रूम मात...

जॉन - येह... वे वोल्डनत वांट समवन डिस्टर्बिंग उस... वोउल्ड वे? माय प्लेस थें... लेटस जो...

उसने दूसरी साइड कड़ी एक कार की तरफ इशारा किया और उस और चलना शुरू किया. कृति वहीँ कड़ी और उसकी तरफ देख रही थी. वह इस आदमी को जानती भी नहीं थी और ये उसे अपने साथ आने के लिए कह रहा था. कृति के हाथ काँप रहे थे.

जॉन ने पलट कर कृति की और देखा, और हाथ से इशारा करते हुए अपने साथ आने के लिए. एक अजीब सा थ्रिल हो रहा था कृति के मैं में, उसने एक सांस भरी और चल पड़ी उसके पीछे पीछे.

जॉन ने कार पर पहुंच कर कृति के लिए आगे का पैसेंजर साइड का दूर खोला. और फिर ड्राइवर सीट पर बैठ गया. कृति निर्वसली गाडी में बैठ गयी. उसके हाथ में अभी भी उसका ग्रोसरी का बैग था जो उसने पीछे की और झुक कर रख दिया. कार ठीक hi लग रही थी, अब तक कोई ऐसे रेड फ्लैग्स तोह नहीं दिखे थे. जॉन ने गाडी चलनी शुरू कर दी, वह हलके से कोई गाना गुनगुना रहा था.

जॉन - यू लिखे थिस सांग कृत्ति...

कृति की शकल पर नर्वस्नेस साफ़ दिख रही थी - येह... येह... इतस नीस...

जॉन - रिलैक्स... we'll बे तेरे इन 10 मिनट्स... वेयर दो यू लाइव?

कृति - ेहठ... नॉट फार... नॉट फार...

जॉन - यू वर्क और स्टडी? और मय्बे ान इंस्टाग्राम मॉडल...

कृति - हहै... सडली no... ी स्टडी...

जॉन - येह... that's गुड... स्टडी... एंड थें गेट ा जॉब हेरे...

कृति ने अपने कंधे उचकाए - येह ी गेस that's थे प्लान...

जॉन ने अपना हाथ उसकी चेहरे के पास लेट हुए उसकी बाल की लत्त को उसके कान के पीछे कर दिया, और उसकी उंगलियां कृति के गालो को छू गयी - सॉरी couldn't सी योर सेरेने फेस... ी वांट तो कीप लुकिंग ात आईटी...

कृति मजाक करते हुए बोली - यू बेटर लुक ात थे रोड... ोथेरविसे ी don't क्नोव िफ़ यू विल एवर बे अबले तो लुक ात माय फेस...

जॉन थोड़ा सा सीरियस होते हुए सामने देखता हुआ बोलै - यू अरे राइट... यू अरे राइट... ी विल हैवे आल थे टाइम तो लुक ात योर फेस टुनाइट... राइट?

कृति - उम्म्म... मय्बे... फॉर ा बिट... ी don't क्नोव...

जॉन के चेहरे पर स्माइल आ गयी और उसने अपने एक हाथ से कृति के हाथ को पकड़ना चाहा - येह... वे don't क्नोव...

उनकी उंगलियां टच हुई पर कृति ने अपना हाथ पीछे खींच लिया. उफ्फ्फ... पागल थी क्या वह... इस तरह इस आदमी के साथ आ गयी - उम्म्म... एक्चुअली ी थिंक let's टॉक समवेयर आउटसाइड...

जॉन - It's प्रीटी लेट... एंड कोल्ड... ी थिंक वे विल बे मोरे कम्फर्टेबले ात माय प्लेस... यू लिखे योर कॉफ़ी विथ मिल्क?

कृति - येह... सूरे...

इस बार जॉन ने कृति का हाथ पकड़ hi लिया और अपनी उंगलियां उसकी उँगलियों में फसा ली. बस वह पहुंच hi गए थे. ये भी एक अपार्टमेंट बिल्डिंग hi थी, कृति वाली थी थोड़ी अछि. जॉन ने उतारते hi कृति की साइड का दूर खोला और उसका हाथ पकड़ते हुए उसे बहार निकाला. उसने उसका हाथ छोड़ा hi नहीं और हाथ पकडे पकडे उसे अपने साथ अंदर ले आया.

दोनों लिफ्ट से ऊपर 5तह फ्लोर पर जाने लगे. लिफ्ट में जॉन कृति का हाथ पकडे अपनी ऊँगली से हलके हलके उसके हाथ पर चला रहा था. उसकी नज़र कृति के चेहरे पर hi तिकी हुई थी. कृति थोड़ी टेंस, थोड़ी घबराई हुई इधर उधर देख रही थी. उसने जॉन की तरफ देखा, रौशनी में उसे पता चल रहा था की जॉन उससे उम्र में काफी बड़ा था.

क्या उसे पता था की आज रात उस कमरे में क्या होने वाला था... हाँ, शायद, वह गाडी और लिफ्ट में समझ गयी थी की वह क्या करने जा रही थी, पर शायद उसे इस बात का अंदाज़ा नहीं था की अंदर घुसते hi सब शुरू हो जायेगा.

जॉन ने दरवाज़ा खोला और कृति को पहले अंदर जाने के लिए हाथ आगे किया. कृति धीरे से अंदर घुसी hi थी की दूर जल्दी से बंद हुआ और जॉन ने कृति को पकड़ते हुए डीआर की तरफ तेज़ी से धकेल दिया. वह उसके होंठों पर बरस पड़ा. कृति ने अपने आप को सहारा देने के लिए उसके गर्दन पर हाथ रख लिया और वह भी उसे वापिस किश कर रही थी.

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जॉन - मममममम.... ममममम.... बेब... योर लिप्स..... मममममम.... मममम...

जॉन उसके होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूस रही था और उसने अपनी जीब कृति के मुँह में घुसा दी. उसके हाथ कृति के पीठ में उसकी टीशर्ट के अंदर घुस गए और उसकी ब्रा की स्ट्राप को खींचने लगे.

जॉन ने उसके होंठों को काटना शुरू कर दिया - ममममम.... ममममम.... थी सेंसुअल लिप्स..

कृति उसके तेज़ होते किस्सेस से अपना होंठ बचने के लिए अपना चेहरा इधर उधर करने लगी, उसकी सांसें बोहोत तेज़ हो चुकी थी - ममम... स्टॉप... जॉन... स्टॉप....

जॉन ने भी तेज़ सांसें भरी - No सतोप्पिंग नाउ... मममम....

कृति एक डैम से उससे बचने के लिए मुद गयी और अपनी पीठ उसकी तरफ कर दी. जॉन ने तुरंत hi अपने एक हाथ से कृति का गाला पकड़ लिया और पीछे से उसके गालों को चूसने लगा.

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कृति उसकी इस इंटेंसिटी से पूरी तरह शॉक में थी और उसकी आवाज़ hi नहीं निकल रही थी. जॉन ने अपना हाथ उसके मुँह पर लगते हुए आवाज़ लगाने का चांस भी ख़तम कर दिया.

वह पीछे से कृति की गांड पर अपने शरीर से दबाव डालने लगा और अपना अंगूठा उसके मुँह में घुसा दिया.

कृति के पास अंगूठे को चूसने के इलावा ऑप्शन hi क्या क्या - मममम... मममम... ममम....

जॉन ने अपनी बाकी उंगलियां भी कृति के मुँह में घुसा दी - येह... येह... लेटस सी हाउ बिग यू कैन टेक इन...

जॉन ने अपने दुसरे हाथ से पीछे से कृति की टीशर्ट ऊपर की और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. वह उसके मखमली बूब्स को पकड़ना चाहता था. जॉन ने ब्रा खुलते hi उसके मुँह से अपना हाथ निकाला और आगे से अपने दोनों हाथ उसकी टीशर्ट में घुसा दिया.

जॉन के ठन्डे और गीले हाथ अपने बूब्स पर लगते hi कृति सिहर उठी - ेयीईइ.... ोोोू... इतस कोल्ड... अह्ह्ह....

जॉन ने उसे अनसुना करते हुए उसके बूब्स को बुरी तरह दबाना शुरू कर दिया. वह उन्हें अपनी मुट्ठी में भर कर गोल गोल घुमा रहा था. कृति के बूब्स इतने बड़े नहीं थे तोह आराम से उसकी मुट्ठी में समां रहे थे. उसने उसकी निप्पल्स पर हलके से अपनी उंगलियां चलायी जिससे उसके निप्पल्स सख्त हो गए.

कृति भी बुरी तरह मोअन करने लगी थी, और उसके नीचे उसकी पंतय बुरी तरह गीली होनी शुरू हो गयी थी. क्या एहि फील होता था उस सुप्रिया को सलूट बन कर, इस समय में भी जाने क्यों वह उसके बारे में सोच रही थी.

कृति की साइड से रेजिस्टेंस नहीं देख कर जॉन ने उसे पलटा और दीवार पर उसको पीठ से तक लगा कर थोड़ा ऊपर किया. कृति ने अपना हाथ उसके कंधे पर टिकते हुए सहारा लिया. वह तेज़ तेज़ सांसें भर रही थी पर उसके फेस पर एक्ससिटेमेंट साफ़ झलक रही थी.

जॉन - गुड गर्ल.... ी वांनै लीक योर पुप्पीस... गिव आईटी तो में...

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जॉन उसकी निप्पल्स पर अपनी उंगलियां गोल गोल घुमा रहा था, जिससे कृति और भी एक्ससिटेड होती जा रही थी. उसकी शकल पर आलरेडी दिख रहा था की उसने काफी टाइम से ये सब नहीं किया था.

जॉन ने उसके निप्पल्स को अपने अंगूठे और ऊँगली के बीच में दबाते हुए हलके से खींचा.

कृति एक्ससिटेमेंट और दर्द में चिल्ला उठी - उउउउउउ... उफ्फ्फ... आह्ह्ह्ह..... जोहनननन.....

जॉन ने एक बार और निप्पल को खींचा और फिर से कृति की चीख निकल गयी. जॉन ने निप्पल्स को छोड़ते हुए उसके बूब्स को अपने मुँह में भर लिया. कृति अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रखे हुए हवा में ऊपर थी और जॉन उसके मम्मो को चूसे जा रहा था.

कृति ने हॉट होते हुए अपनी उंगलियां उसके बालों में घुसा दी - ुह्ह्ह्ह.... उह्ह्ह... मममम.... फुकककक....

जॉन - मेक यू हॉट doesn't आईटी... ी ऍम गोइंग तो प्रॉपरलय कोलोनीज़े यू टुडे...

जॉन ने कृति के बूब्स को काटा - उउउउउउ... फायआकककक... मममममम....

जॉन - यू don't स्मेल बाद फॉर ान इंडियन.... ममममम.... थॉट ी वास् बाइंग डिनर.... एहहहह... एंड हेरे ी गोत यू... ममममम..... मममम.... कृत्ति.... मोरे लिखे पुसी किटी...

कृति - ोुछःह.... ऊऊऊ.... ममममम.... उफ्फ्फ.....

जॉन ने कृति को नीचे उतारा और उसने घुटनो के बल नीचे बिठा दिया - Let's सी हाउ गुड ठोस लिप्स अरे नाउ...

कृति ने पहले ब्लोजॉब किया था पर इस तरह से एक अग्ग्रेसिवे आदमी आज उस पर चढ़ा हुआ था, उसके साथ आज से पहले ऐसा नहीं हुआ था. जॉन ने जल्दी से अपनी पंत और अंडरवियर नीचे सरकाया और अपना लुंड कृति के सर के ऊपर रख दिया.

जॉन - बिग्गेर थान यू हैवे एवर सीन राइट...

इतना भी बड़ा नहीं था उसका लुंड जितना वह समझता था पर कृति ने उसे जवाब देना ठीक नहीं समझा - येह... येह...

जॉन - येह.... नाउ सूचक आईटी बेब...

जॉन ने अपना लुंड कृति के होंठों के आगे लहराया और आगे पीछे होते हुए उसके होंठों पर उसे टकराने लगा. कृति के होंठों में दर्द हो रहा था और उसने अपना मुँह खोल दिया. लुंड जाकर सीधा उसके मुँह में घुसा और दांतो के बीच अटक गया.

जॉन - फुसक्कखकक... no टीथ... आह्हः....

कृति ने अपने दांत थोड़े ऊपर किये और लुंड आराम से उसके मुँह में चला गया. जॉन ने ऊपर से उसके बाल और सर पकड़ लिए और लुंड को उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा. लुंड उसके थूक और प्रे छुम से गीला होता जा रहा था. कृति ज़रा भी इधर उधर मुँह करने की कोशिश करती तोह जॉन वापिस उसका सर सीधा कर देता.

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काफी देर वह इसी पोजीशन में कृति को मुँह को छोड़ता रहा. कृति के घुटनो हार्ड फ्लोर पर बैठे बैठे दर्द करने लगे थे, और उसका जबड़ा भी खुले खुले अब अकड़ सा गया था. उसने ऊपर जॉन की तरफ इनोसेंट आईज बना कर देखा ताकि वह उस पर रेहम खा ले, पर जॉन तोह इससे और भी एक्ससिटेड हो गया और उसने अपनी स्पीड फिर से बड़ा ली.

जॉन ने कृति के जबड़े को कास के पकड़ लिया - यू के हेरे.... टेक आवर जॉब्स... ी विल टेक बैक ओने फॉर उस.... उह्ह्ह... उह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह....

कृति समझ गयी थी की वह गलत फास गयी थी इसके साथ. ये कोई सॉफ्ट रोमांटिक बाँदा नहीं था, बल्कि एक रेसिस्ट गोरा था जो बस अपनी भड़ास निकलने के लिए उसे जैम के छोड़ना चाहता था.

कुछ देर और कृति के मुँह में अपना लुंड ठूसने के बाद कृति ने देखा की जॉन की शकल पर एक अलग सा एक्सप्रेशन आने लगा था, जैसे वह अपना माल निकलने वाला हो. कृति ने जल्दी से अपना मुँह साइड करते हुए लुंड को अपने मुँह से निकाल दिया. सारा सफ़ेद पानी और छुम कृति के मुँह और कंधे पर आकर गिरा.

कृति - ेव्वव्व.... युकककक..... ुह्ह्ह्ह....

जॉन को इससे गुस्सा सा छड्ड गया - बित्तछहः... व्हाट दीद यू दो.... ी वांटेड तो छुम इन योर माउथ....

कृति जाने क्यों उसको अपोलॉगीज़े करने लगी - सॉरी... सॉरी... ी can't टेक आईटी इन माय माउथ....

जॉन - फुकक.... गेस ी विल हैवे तो पूत माय सीड इन यू... वेयर यू can't स्पिट आईटी आउट...

जॉन ने कृति के बाल पकडे और उसे घसीटता हुआ अंदर एक कमरे में ले गया और उसे बीएड पर धकेल दिया. जॉन नीचे से तोह पहले hi नंगा था उसने अपनी शर्ट उतारते हुए कृति के ऊपर छड्ड गया. उसने कृति को उसकी टांगो से अपनी और खींचा और उसकी स्कर्ट और पंतय को उतार फेका.

जॉन - वाओ... योर अस्स isn’t अस ब्राउन अस ी नोर्मल्ली सी विथ योर लोट… ममम... गेस योर माँ गोत फुकेद बी ा इंग्लिश मन हँ...

कृति भी अब तक पूरी तरह गरम हो चुकी थी और गीली पंतय उसकी हालत बता रही थी. जॉन की गन्दी बातें उसे और गरम कर रही थी.

जॉन ने उसकी गीली पंतय को सूंघा - ममममम... won't हैवे तो वेट अन्य लॉन्गर नाउ...

वह पीछे से कृति के ऊपर छड्ड गया, और कृति पूरी तरह इस बड़े से आदमी के बोझ टेल उसके नीचे कैद हो गयी. जॉन का लुंड कृति की गांड की दरार को छूटा हुआ उसकी छूट के बहार आ गया.

जॉन - फुककक... यू अरे हॉट.... मममम.... से आईटी... से आईटी...

कृति - उह्ह्ह.... से व्हाट... उह्ह्ह...

जॉन - आस्क में तो फ़क यू... फ़क यू हार्ड...

कृति तेज़ सांसें लेती हुई अपने आप को और कण्ट्रोल नहीं कर पा रही थी, उसे याद भी नहीं था की आखरी बार उसने सेक्स कब किया था. और वैसे भी उसे सुप्रिया बन के देखना था, जिसके पीछे सारे मर्द पागल थे - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.... येह यह.... फ़क में... फ़क में हार्ड...

जॉन को जैसे hi ग्रीन सिग्नल मिला उसने आगे झुक कर अपनी बाजू में कृति का गाला पकड़ लिया और अपना लुंड उसकी गीली छूट में घुसा दिया.

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कृति की आँखें एकदम से बड़ी हो गयी और उसने अपने होंठों को बाईट कर लिया - अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... उउउउउउ..... फुककककक....

जॉन - ओह्ह्ह्ह गॉड.... व्हाट ा टाइट पुसी....

कृति - उफ्फ्फ्फ़.... येअहहहह.... गिव आईटी तो में....

जॉन - ओह येह... ी ऍम गोंना गिव आईटी यू....

जॉन बेदर्दी से कृति को छोड़ने लगा. लुंड तेज़ी से अंदर बहार होने लगा. कृति ज़ोर ज़ोर से मोअन कर रही थी, पूरा कमरा उसकी आवाज़ से गूँज रहा था.

थोड़ी देर बाद जॉन ने कृति के हाथ ऊपर करके उसके टॉप को निकाल दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया. फिर पीछे से उसके बूब्स को पकड़ते हुए उसे फिर से छोड़ने लगा. वह कभी उसके बूब्स पर थप्पड़ मारता कभी उन्हें खींचता.

कृति पसीने में बुरी तरह भीग चुकी थी और उसकी आवाज़ तेज़ होती जा रही थी. उसके नंगे शरीर पर उसकी पतली कमर और उभरती हुई गांड उसे छोड़ते जाने पर मजबूर कर रहे थे.

जॉन ने अपना हाथ उसके मुँह पर रखते हुए उसकी गर्दन थोड़ी पीछे की और कर दी. वह रुक hi नहीं रहा था, आज वह अपना सारा माल इस कमाल की चीज़ के अंदर डालने वाला था.

उस रात जॉन पता नहीं कितनी बार कृति के अंदर झाड़ा था, और कितनी hi बार कृति झड़ी थी, अलग अलग पोसिशन्स में. पुरे ुनहिंगेड सेक्स. जैसे जैसे उस रात वक़्त बीतता जा रहा था, कृति अपने आप को hi भूलती जा रही थी, और उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह hi सुप्रिया हो, और सुप्रिया hi इस समय चुद रही हो.

_______________________

उसके रात के बाद कृति शुरू में तोह सेहम गयी थी, पर जाने क्यों उस एक्सपीरियंस के थ्रिल ने उसके अंदर कुछ भड़का सा दिया था. उसकी बोरिंग खाली लाइफ में शायद इसी की कमी थी.

उसने एक बार और हिम्मत करि और फिर उसके बाद तोह लड़को को रिझा कर उनके साथ सेक्स करने का जो खेल शुरू हुआ, वह अब अपने चरम पर पहुंच गया था. वह उन लड़को के सामने बिलकुल इनोसेंट क्यूट एक्ट करती और उन्हें अपने साथ कुछ भी करने देती. कुछ भी.... अब तोह शायद पूरा कॉलेज उसे एक सलूट या प्रोस्टीटुए की तरह देखता था. पिछले हफ्ते तोह एक इंडियन लड़के ने उसे सेक्स फॉर मनी का ऑफर भी दे डाला था. कितना भड़की थी कृति उस लड़के पर.

पर फिर रात होते hi वह फिर से निकल पड़ती, एक नया क्लब, एक नयी जगह, कुछ नए लोग, कुछ नया अंदाज़. इस सब से एक अलग hi थ्रिल मिलने लगा था.

पर इस सब के बावजूद, दिन में... रात में... हर समय... उसे बस सुप्रिया के ख्याल और सपने hi आते रहते. रात को वह अक्सर नींद से हाँफते हुए उठ जाती. उठ कर मैं में बस एक hi ख्याल दौड़ता रहता. क्या हुआ था सुप्रिया को... क्या वह... सच में कहीं भाग गयी थी... या फिर... मर गयी थी... या उसे किसी ने मार दिया था... ईशा ने... भैया ने... ओह गॉड क्या वह थी इस सब की जिम्मेदार.... नहीं नहीं... सुप्रिया hi तोह थी इस सब की खुद जिम्मेदार... सुप्रिया थी बीच सलूट व्होरे... वह नहीं...

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टब में लेती हुई कृति थोड़ा सा नीचे सरक गयी, पानी के अंदर... उसके मुँह और नाक में पानी घुसने लगा... डूबते हुए उसे सांस hi नहीं आ रही थी... वह बुरी तरह पैनिक में झटपटाने लगी, और किसी तरह से अपना मुँह पानी से बहार निकालते हुए सीधे बैठ गयी. वह बुरी तरह ख़ास नहीं थी और पानी उसकी नाक और मुँह से बहार निकल रहा था.

कृति ने ज़ोर की सांस ली.... क्या वह अभी मरने वाली थी... नहीं वह नहीं मर सकती थी. आखिर आज उसे समझ में आया की वह हमेशा से ईशा को डेविल क्यों समझती थी. शी मेड ा डील विथ थे डेविल... एक ऐसी डील जिसमे उसे कुछ मिला तोह नहीं... पर उसने अपनी आत्मा बेच दी. कृति बिलख बिलख कर रोने लगी. जिस लड़की की परछाई उसे पानी में दिख रही थी, वह उसे अब पहचानती भी नहीं थी...

रट रट कांपते हुए कृति धीरे से बुदबुदाने लगी - ी ब्रेक थिस डील... ी ब्रेक थिस डील विथ थे डेविल.... मैं वापिस जयुंगी... और सच जानकार रहूंगी. उस बीच सुप्रिया को ढून्ढ कर hi मानूंगी... चाहे जो जाये... और जब वह मिल जाएगी न... तब वह करुँगी जो उस रात नहीं कर पायी थी... उसके गाल पर खींच के do-chaar तमाचे मारूंगी... और पूछूँगी उससे... तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?!
 
ी जस्ट वांटेड तो मेंशन तहत टुडे एक्साक्ट्ली ओने ईयर एगो (11तह दिसंबर 2024), ी स्टार्टेड राइटिंग थिस स्टोरी. ी हैवे माय स्टोरी सेव्ड समवेयर इन ा वर्ड फाइल विथ में एंड आईटी टेल्स में ी हैवे 377,573 वर्ड्स इन थे स्टोरी. रोगलय 3,800 वर्ड्स पैर अपडेट. गूगल टेल्स में तहत ा लार्ज नावेल है अराउंड 70,000 एंड 120,000 वर्ड्स ों एवरेज. सो गिव और टेक 3 लार्ज नोवेल्स.

ात 99 पोस्ट्स इन थे ईयर, ी वास् गिविंग ओने नई पोस्ट रोगलय एव्री 3.5 डेज. सम स्मॉलर िनीतिकल्ली, बूत सम लार्जर लेटर, एंड तवो पोस्ट्स हद पार्ट्स ा, बी, स.

ी don't हैवे ा क्लियर काउंट ऑफ़ इमेजेज एंड गिफ्स, बूत ान एवरेज ऑफ़ 5 पैर पोस्ट गिव आईटी अराउंड 495 इमेजेज एंड गिफ्स. सीन्स ी ऍम वैरी स्पेसिफिक अबाउट थे पिक्स ी उसे फॉर माय स्टोरी, आईटी टूक कुंतलेस हॉर्स तो सर्च एंड आल्सो एडिट / मेक सम थ्रू ै.

ी don't क्नोव हाउ मच टाइम ी स्पेंट राइटिंग थे स्टोरी, बूत थे साइट टेल्स में ी स्पेंट अराउंड 3 वीक्स हेरे. इवन िफ़ ी रिमूव 30 मीन्स ऑफ़ ब्राउज़िंग टाइम इन थिस साइट ा डे (रीडिंग कमैंट्स, इतर स्टोरीज ेट्स.), थे टोटल राइटिंग टाइम इस अराउंड 320 हॉर्स. ान एवरेज जॉब ात 8 हॉर्स फॉर 250 डेज इस लिखे 2000 हॉर्स, सो थिस वास् 16% ऑफ़ ा फुल टाइम जॉब. एक्चुअल राइटिंग टाइम वास् लिकेल्य मोरे थान तहत बिकॉज़ फॉर किते ा बिट ी वास् राइटिंग इन वर्ड एंड थें पेस्टिंग आईटी हेरे.

आल्सो कुंतलेस हॉर्स स्पेंट थिंकिंग अबाउट थे प्लाट ऑफ़ थे स्टोरी एंड हाउ तो व्रिठे आईटी, उसुअल्ल्य बिफोर गोइंग तो स्लीप, और ों माय वे तो वर्क / होम और इन अन्य सॉर्ट ऑफ़ फ्री टाइम.
 
अपडेट 100

(थिस इस आफ्टर अपडेट 97 िफ़ आईटी वास् नॉट क्लियर. अपडेट 99 एंड 97 एन्ड ात थे शामे पॉइंट ऑफ़ टाइम, जस्ट डिफरेंट प्लेसेस)

सुप्रिया सुबह उठी तोह वह रजाई में नंगी लेती हुई थी. उठते hi उसके टूटे हुए बदन ने उसे कल रात की चुदाई का एहसास कराया. कल रात जो कुछ हुआ वह कोई सपना नहीं था, बल्कि हकीकत थी. उसका पूरा बदन तप सा रहा था और कमर में बुरी तरह दर्द हो रहा था. दर्द तोह नीचे छूट में भी बेहद हो रहा था पर वह हिस्सा तोह मानो सुन्न सा hi पद गया हो.

सुप्रिया दर्द में मुँह बनाते हुए बिस्तर पर सीढ़ी बैठी, और रजाई जो पहले से hi आधी नीचे लटकी हुई थी पूरी नीचे गिर गयी. सुप्रिया आँखें बंद करके दर्द में करहाई - अह्ह्ह… उफ्फफ्फ्फ़…. ओह गॉड….

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कमरे में हो रही ठण्ड से वह बुरी तरह ठिठुर गयी. वह अपने आप को फिर से ढकने के लिए रजाई को नीचे से उठाने की कोशिश करते हुए हल्का सा झुकी. पर उसकी कमर में एक ज़ोर का दर्द उठा और वह दर्द में झात्पटती हुई बिस्तर पर लेट गयी - ोुछः... ahhhhhhh...oooooo....

उफ्फ्फ, इतना दर्द… ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी पीठ को बुरी तरह मरोड़ दिया हो... ठण्ड और दर्द दोनों से उसका बुरा हाल हो रहा था और उसकी कपकपी छूट रही थी.

दर्द में सिसकी लेते हुए सुप्रिया सोचने लगी, पता नहीं क्या हो गया था उसे पिछले 2-3 दिनों से, वह पूरी तरह बेकाबू से महसूस कर रही थी और इक़बाल के साथ ये सब कर बैठी. उफ्फ्फ… कितना मोटा लुंड था उसका… ुह्ह्ह्ह… वह उसके बारे में सोचते hi काँप उठी. पता नहीं उसकी छूट ने कैसे झेल लिया उस लुंड को, यकीं hi नहीं हो रहा था.

सुप्रिया ने अपने कपडे ढूढ़ने के लिए कमरे में नज़र दौड़ाई. उसे अपनी ब्रा और पंतय बिस्तर के पास hi फर्श पर पड़ी दिखाई दी, और कुर्ती और पजामी कमरे के दूसरी और. जाने कितनी देर चुदाई की थी उन लोगो ने कल रात. आखरी चीज़ उसे बस ये याद थी की इक़बाल पीछे से उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और उसे जैम के चोदे जा रहा था. वह कब थक हार कर सोई और उसके सोने के बाद इक़बाल उसके साथ क्या क्या करता रहा उसे कुछ याद नहीं था.

सुप्रिया ने झुक कर अपनी ब्रा को उठाने की कोशिश करि पर उसकी पीठ में फिर से बुरी तरह दर्द से तीस उठी. ाग्गघहहहह, ऐसा लग रहा था एक नहीं जैसे चार लोगो ने उसे एक साथ छोड़ दिया हो. पता नहीं क्यों एक अजीब सा सपना भी आया था उसे रात को इस बारे में. ुह्ह्ह्ह, एक hi रात में उसकी पूरे जिस्म की बंद बज गयी थी. उफ्फ्फफ्फ्फ़… अब तोह पूरी इक़बाल की हो गयी थी... कैसे मन करेगी वह उसे.

सुप्रिया ने बिस्तर के सिरहाने पर बैठते हुए अपने पेअर की उँगलियों से अपनी ब्रा को उठाया, वह आखिर उसके हाथ में आ गयी और वह ब्रा को पेहेन्ने लगी. पेहेनते पेहेनते उसका दिमाग जाने क्या क्या सोच रहा था. कितनी तेज़ आवाज़ें निकल रही थी उसकी रात को. घर में रात को hi सबको पता चल गया होगा की उसने और इक़बाल ने ये सब कर लिया. उफ्फ्फ्फ़ कैसे मुँह दिखाएगी वह नीचे.

सुप्रिया ने पंतय को भी उसी तरह से उठाया. पंतय पेहेन्ने के लिए जैसे hi पेअर खोलने चाहे उसकी टांगो के बीच में बुरी तरह दर्द होने लगा. अह्ह्ह्हह.... कमर में दर्द काम था क्या.... उफ्फ्फ.... उसका पेअर मानो उठ hi नहीं रहा था पंतय पेहेन्ने के लिए. किसी तरह से सुप्रिया ने पंतय को एक पेअर में फसाया और ऊपर खींचा, पर अब दूसरा पेअर डालने के लिए उसे उठाना hi पड़ता.

उसने दर्द में तेज़ सांसें लेते हुए अपने पेअर को थोड़ा सा उठाया... ahhhhh..hhahahha... और दुसरे पेअर को भी अंदर दाल दिया. पंतय को वह अपनी गोरी टांगो पर ऊपर खींचने लगी.

उसने गौर किया की उसकी जांघो के बीच और ऊपर छूट के पास कुछ सफ़ेद सफ़ेद जमा हुआ था. ुह्ह्ह्ह... ये इक़बाल का बीज होगा. उसे याद आने लगा की रात को काम से काम एक बार इक़बाल ने उसकी छूट में अपना सारा माल निकाल दिया था. ओह गॉड... अगर वह प्रेग्नेंट हो गयी तोह? नहीं नहीं... वह तोह गड़बड़ हो जाएगी... उफ्फ्फ...

कुर्ती और पजामी काफी दूर hi पड़ी थी. सुप्रिया अपनी पीठ पर हाथ रखते हुए अपनी कुर्ती और पजामी उठाने के लिए बिस्तर से कड़ी हुई.

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उसने एक कदम hi लिया की अचानक कमरे पर एक ज़ोर की दस्तक हुई - खाद खाद खाद... खाद खाद खाद. सुप्रिया का दिल एक डैम से धक् करके रह गया था. वह जल्दी से वापिस बिस्तर की तरफ भाफ़ी और भारी रजाई को ऊपर खींचने की कोशिश करने लगी. अह्ह्ह्हह.... उसकी पीठ... उसकी ज़ोर की आह्ह्ह्हह निकल गयी.

कमरा तेज़ी से खुला, सुप्रिया ने घबराते हुए बीएड पर उलटी लेट गयी, पर रजाई अभी भी उसके ऊपर नहीं था. पता नहीं कौन उसके कमरे में घुस आया था, इक़बाल तोह पहले hi सब कुछ देख चूका था अब उससे क्या इतना घबराना. पर कहीं उसने उसे इस हाल में देख कर फिर से अपना लुंड उसकी छूट में दाल दिया तोह?

पीछे से रुबीना भाभी की आवाज़ आयी - सुप्रियाआ... ठीक हो तुम...

सुप्रिया ने रहत की सांस ली पर साथ hi नंगे होने उसे फिर से एहसास हुआ, और पीठ दर्द भी उसे समय तेज़ी से उठा, शायद वह हड़बड़ा कर बीएड पर जो लेट गयी थी - हआ भाभी... पर आह्ह्ह्ह.... ठीक हूँ मैं..

रुबीना हलके से हस्ते हुए बोली - रात भर काम सिसकियाँ ली है क्या जो अभी भी लगी हुई हो अकेले...

सुप्रिया - उफ़... नहीं भाभी वह बात नहीं है... बोहोत दर्द हो रहा है... पीठ में... अह्ह्ह....

रुबीना ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और उसके बिस्तर के तरफ आ गयी. उसने रजाई उठायी और सुप्रिया को धक् दिया - मैं तोह ऊपर आयी तोह तुम्हारी सिसकियाँ सुनाई दी... इक़बाल तोह घर पर है नहीं... मैंने सोचा कहीं कोई अड़ोस पड़ोस से तोह तुम्हारे कमरे में नहीं घुस गया...

सुप्रिया - ौऊ... कैसी बात कर रहे हो आप... ऐसे कैसे कोई अड़ोस पड़ोस से.... छीटे....

रुबीना हस्ते हुए - तुम्हे क्या पता... सब तुम पर कैसे टाक लगाए लगते है... मुँह से लार टपक रही होती है लोगो की... पर चलो अब तोह मैं लाउडस्पीकर से बोल सकती हूँ की हमारी दुल्हन रानी की छूट भर गयी...

सुप्रिया शर्म के मारे रजाई में सिकुड़ी जा रही थी - भाभी.... आप भी न.... अह्ह्ह्हह.... ऊऊफफफ....

रुबीना की हसी नहीं रुक रही थी - ाचा दिखायो ज़रा... कहाँ दर्द हो रहा है...

रुबीना ने हलके से रजाई को उसकी पीठ से नीचे किया और उसकी नंगी पीठ पर ब्रा के थोड़े नीचे अपनी उँगलियों से छुआ - यहाँ....

सुप्रिया - उफ्फ्फ.. क्या बतायु... हर जगह hi हो रहा है...

रुबीना - लगता है रात भर खूब खेल चला है तभी ये हालत है...

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह.... मममम.....

रुबीना - रुको... मैं दर्द का बाम लेकर आती हूँ अपने कमरे से...

रुबीना बहार जाते हुए कमरे का दरवाज़ा खुला छोड़ गयी. सुप्रिया ने लेते लेते हलके से पीछे पलट कर देखा बहार की और. उसके कमरे से सामने वाली घर की छत साफ़ दिखाई देती थी. क्या सच में लोग वहां उसकी टाक लगाए बैठे रहते थे. उफ्फ्फ... फिर रुबीना भाभी... दरवाज़ा खुला क्यों छोड़ गयी थी.

रुबीना जल्दी से चलते हुए वापस आयी और दरवाज़ा फिर से ढाल दिया. वह सुप्रिया के बराबर में आकर बैठ गयी और उससे बिना पूछे उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. कटक करके हुक खुला और ब्रा उसकी पीठ से सरकती हुई नीचे बिस्तर पर गिर गयी.

रुबीना ने जैसे hi उसके बाम लगाना शुरू किया सुप्रिया ठन्डे ठन्डे बाम से सिहर उठी - उफ्फफ्फ्फ़ .... बोहोत ठंडा है....

रुबीना - हाँ ये ठंडा भी है और गरम भी.... शहर से लाये थे वह... लगाने दो अचे से...

रुबीना हलके हाथों से उसकी पीठ पर बाम मसलने लगी, ऊपर से लेकर नीचे तक - सच में... काफी मखमली पीठ है तुम्हारी... न कोई दाग न धब्बा... न ज्यादा बाल... किसी को भी बेहाल कर दे...

रुबीना के मसलने और बातों दोनों से सुप्रिया अपना दर्द भूलने सी लगी थी - मममम.... अह्ह्ह्ह...

रुबीना - और ये यहाँ नीचे दो छोटे छोटे गद्दे... इन में उंगलियां गदा के गांड को हिलने में मर्दो को जो मज़ा आता है.... कमायत हो तुम तोह...

सुप्रिया को तोह आज तक पता भी नहीं था अपने उन गड्डो के बारे में - मममम.... मममम...

रुबीना ने हलके से सुप्रिया की पीठ पर मारा - अब मेरे सामने hi मत झाड़ जाना यहाँ बिस्तर पर...

सुप्रिया उस हलके से थप्पड़ से जैसे जाएगी हो एक्ससिटेमेंट से - ोुछः... दर्द है अभी भी....

रुबीना - अब रात को घुड़सवारी करेगा कोई तोह दर्द तोह होगा hi...

सुप्रिया भी बेवक़ूफ़ थी - घुड़सवारी?

रुबीना हस्ते हुए - पगली..... रात भर घोड़ी बना के छोड़ा या कुटिया बना के...

आज तोह रुबीना कुछ ज्यादा hi खुल कर बोल रही थी उसके सामने, सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए कहा - छी.... कैसे बातें कर रहे हो आप...

रुबीना - अभी तोह तैयार रहियो अपनी भतीजी के लिए... वह तोह सुबह से मुझ से पूछ रही थी की रात को चची के चिल्लाने की आवाज़ क्यों आ रही थी...

सुप्रिया ने सर न में हिलाते हुए कहा - आप hi समझा देना उसे... आपकी बेटी है... मैं नहीं समझा पयूंगी इस सब के बारे में...

रुबीना ने हाथ मटकाया - वाह... ये सही है.... मजे करो तुम... समझायु मैं....

सुप्रिया के मुँह से भी निकल गया - उसे क्या पता की मैं थी या आप… आपकी भी तोह आवाज़ें आती होंगी कभी तोह?

पर जब से सुप्रिया इस घर में आयी थी, उसे बराबर वाले कमरे से कभी किसी ऐसी आवाज़ की याद नहीं थी.

रुबीना थोड़ा छुप होते हुए बोली - हमारी तोह अब जवानी निकल गयी... अब तोह तुझे चढ़ी है जवानी... पूरे मज़े ले इसके... जब ढल जाएगी न तब सोचेगी की ये क्यों नहीं किया वह क्यों नहीं किया...

सुप्रिया - मैं ऐसा कुछ नहीं सोचने वाली... वैसे भी आप तोह अभी भी जवान hi हो...

रुबीना - तीन बच्चियों की मान... जिनमे से दो की शादी और बचे भी हो गए... और अभी भी जवान हूँ... तेरे आगे मुझे कौन घास डालेगा...

जान क्यों रुबीना की बातें सुप्रिया को गरम कर रही थी, पर वह अपने आप को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी - अगर इतना दर्द सहना पड़ेगा रोज़... तोह मुझे नहीं डलवानी घास...

रुबीना - अच्छा... देख रही थी मैं तुझे दो तीन दिन से... कैसे गरम पड़ी थी बुरी तरह... बिलकुल छुरे पर काटने को तैयार... अब काट गयी तोह बातें बना रही है... ाचा ये बता... क्या क्या किया रात को...

सुप्रिया शरमाते हुए बोली - आप उनसे hi पूछ लेना न... मैं क्या बतायु...

रुबीना - मैं तोह बेशरम हूँ.... पूछ भी लुंगी... गांड मरवाई?

सुप्रिया एकदम से बोली - नहहह्हीईई..... मर जयुंगी मैं अगर वह गांड में गया तोह.... इतना बड़ा है न... आपको पता भी है...

रुबीना - मारेगी नहीं... ाचा लगेगा... और फिर मुँह में तोह लिया hi होगा... झाग जातक गयी या थूक दिया?

सुप्रिया - नहीं... मैंने मुँह में नहीं लिया.... जो उन्होंने किया वह कर लिया बस...

रुबीना - ए लो... मुँह में भी नहीं लिया... उसे तोह मुँह में डाले बिना चैन नहीं पड़ता...

सुप्रिया ने एक पल के लिए सोचा की रुबीना को इक़बाल के बारे में इतना कैसे पता था... फिर सोचा शायद सीमा से सुना होगा - बोहोत मोटा है... मुँह दर्द कर देगा...

रुबीना अभी भी उसकी पीठ मसल रही थी - अपनी मुट्ठी बंद करके मुँह में दाल कर देख... उससे थोड़ी तैयारी हो जाएगी...

सुप्रिया को अब काफी बेहतर महसूस होने लगा था - थैंक यू भाभी... शुक्रिया... अब बेहतर लग रहा है थोड़ा...

रुबीना - कोशिश कर अब पीठ ऊपर करने की...

सुप्रिया ने थोड़ा सा उचक कर अपनी पीठ ऊपर की, अब पहले से दर्द थोड़ा काम था. पर जैसे hi उसने खड़ा होना चाहे उसके पेअर लड़खड़ा से गए. रुबीना ने उसे पकड़ते हुए संभाला.

सुप्रिया - उफ्फ्फ्फ़.... टांगो के बीच.... बोहोत दर्द हो रहा है... चला नहीं जाए रहा....

रुबीना - आजा... मैं सहारा दू... पहली बार लोढ़ा अंदर गया है तोह दर्द तोह करेगा hi... कुछ दिन लग जायेंगे...

सुप्रिया - मुझे नहाना भी है... पर उसके लिए नीचे जाना पड़ेगा...

रुबीना - हाँ चल... कपडे पेहेन ले... मैं ले चलती हूँ.... तेरी हालत देख कर लग रहा है की ऊपर hi एक घुसल खाना बनवाना पड़ेगा... कल को पेट से भी होगी तोह क्या ऊपर नीचे करेगी....

सुप्रिया चुप चाप कपडे पेहेन रही थी, प्रेग्नेंट होने के बारे में सोचते hi उसे डर सा लग रहा था. उसने और भी मर्दो के साथ सेक्स किया था, काफी बार तोह बिना प्रोटेक्शन के, पर वह आज तक प्रेग्नेंट नहीं हुई थी. क्या वह बांज थी या उसे कोई मेडिकल प्रॉब्लम?

रुबीना ने सुप्रिया की टांगो में उसकी पजामी डलवाई और फिर नीचे उसको मोज़े भी पहना दिए. वह दोनों बहार आये तोह सुप्रिया ने इधर उधर के घरो पर नज़र डाली. छत पर इक्का दुक्का लोग थे, जो उसके बहार निकलते hi उसकी और hi देख रहे थे. सुप्रिया ने शर्म से अपनी आँखें झुका ली, क्या उन लोगो को भी पता था वह कल रात चूड़ी थी?

रुबीना सुप्रिया को सहारा देते हुए नीचे ले आयी और सुप्रिया घुसल खाने में जाकर नहाने लगी. सच में अगर ऊपर hi घुसल खाना बन जाये तोह कितना बेहतर होगा. सुप्रिया ने किसी तरह अपने आप को नीचे बिठाया और गरम पानी से नहाने लगी. हर जगह साबुन लगते हुए उसने अपने जिस्म से साड़ी जमी हुई चीज़ो को कुरेदते हुए निकाल दिया.

पर नहाने के बाद उससे उठा नहीं जा रहा था. उसने रुबीना को आवाज़ लगायी.

सुप्रिया - भाभी.... अह्ह्ह.... आप आओगे.... उफ्फ्फ......

रुबीना जल्दी से घुसल खाने के पास पहुंच गयी और सुप्रिया ने किसी तरह कुण्डी खोल कर उसे अंदर आने दिया. वह पूरी नंगी थी रुबीना के आगे, पर जाने क्यों उसको इतनी शर्म नहीं आ रही थी. दर्द के आगे इंसान शर्म भूल hi जाता है. रुबीना से उसे तौलिये से पोछा और कपडे पेहेन्ने में मदद करि.

रुबीना - बुरी हालत कर दी तेरी उसने एक hi रात में... और अभी तोह ऐसा लग रहा है कुछ हुआ भी नहीं... कुछ होगा तोह फिर कैसी हालत होगी... चल आजा...

रुबीना उसे अपने साथ लेते हुए बहार ले आयी और फिर सुप्रिया को तैयार होने में मदद की. सुप्रिया को नाहा के थोड़ा ठीक लग रहा था. उसने आईने में अपने आप को निहारा, काल रात से कुछ बदला था क्या उसके अंदर?

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सुप्रिया नाश्ता कर hi रही थी की अम्मी जी अपने कमरे से बहार निकल आयी.

अम्मी ने उसे टोंट मारते हुए कहा - आ गयी शहज़ादी नीचे...

सुप्रिया ने उन्हें कुछ बोलै नहीं और रुबीना की तरफ देखा. रुबीना ने उसे शांत रहने का इशारा किया.

अम्मी - ए क्या हुआ तुझे... बोलती क्यों नहीं...

रुबीना ने उसके जगह बोलै - अम्मी जी तबियत ठीक न है... थोड़ा आराम चाहिए उसे...

अम्मी ये सुन कर और भी भड़क गयी - आराम क्या चाहिए... काम पर लग अपना.. आज कल की ये लड़कियां... इनसे कुछ न होये... बस ुइ ुइ ुइ चिल्लाना आये...

रुबीना हस्ते हुए बोली - अम्मी जी इक़बाल ने बुरी तरह छोड़ दिया कल रात इसे....

अम्मी - हाँ बेहरी तोह मैं न हु.... सुना तोह मैंने भी... रांडपाना पूरा करवा लो इनसे... ऐसे बन के फिरेंगी जैसे मोहल्ले के लोदो को खड़े करने का ठेका लिया हो...

सुप्रिया को उनकी बातें अछि नहीं लग रहा था, ऐसा क्या रांडपाना कर दिया था उसने. कल रात उनके बेटे ने hi उसकी ये हालत की थी. वह गुस्से में अंदर हिना के कमरे में बैठ गयी. बहार रुबीना अम्मी को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

कुछ देर बाद उसने अंदर आकर सुप्रिया को आराम करने की हिदायत दी, और उसे परेशान न होने के लिए बोलै. सुप्रिया झिझकते हुए वहीँ हिना के पलंग पर लेट गयी और उसे थोड़ी देर नींद आ गयी. आखिर रात उसकी नींद पूरी कहाँ हुई थी.

दिन में सुप्रिया की आँख एकदम से किसी के पकड़ने से खुली, और वह जागते हुए एक पल के लिए सकपका सी गयी, उसे लगा इक़बाल ने उसे पकड़ा है.

सुप्रिया - ममममम…. इक़बाल जी…. छोड़िये न… क्या कर रहे है…

पर दुसरे hi पल हिना की आवाज़ आयी - चची… चची… क्या हुआ आपको…

सुप्रिया को रीलीज़ हुआ वह नीचे हिना के कमरे में सो रही थी - हिनाआ… कुछ नहीं… बस ऐसे hi सो गयी थी ज़रा सा…

रुबीना कमरे में अंदर आयी - ारी… तुझे बोलै था न की चची को परेशां मत करियो… उसकी तबियत ख़राब है…

हिना - वही तोह पूछ रही हु की हुआ क्या… रात को भी उनके चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी… चची… मैं बोहोत डर गयी थी रात को…

रुबीना की हसी छूट गयी - लो अब तुम hi समझायो इसको…

सुप्रिया आधी जगी सही से सोच नहीं पा रही थी - मममम…

हिना - बोलो न… चाचू ने आपको मारा?

सुप्रिया - नहीं… नहीं… बस वह… उफ्फ्फ्फ़… तुम्हे कैसे समझायु…

रुबीना दरवाज़े पर कड़ी है रही थी.

हिना को थोड़ी झुंझुलाहट होने लगी थी, वह अभी भी सुप्रिया को पकडे हुए थी - मैं पूरा दिन बस आपके बारे में hi सोच रही थी… और आप कुछ नहीं बोल रहे हो…

सुप्रिया ने प्यार से उसका गाल सहलाया - आप परेशान मत हो… जब आपकी शादी होगी न… आपको सब पता चल जायेगा…

हिना रूठते हुए बोली - ठीक है कोई मत बताया… वैसे नाज़ ने मुझे सब बता दिया की क्या हुआ होगा…

सुप्रिया से पूछे बिना रहा नहीं गया - क्या बोलै नाज़ ने???

हिना इतराते हुए बोली - अब मैं क्यों बतायु?

सुप्रिया - ठीक है… मत बताया…

हिना बोले बिना कहाँ रहने वाली थी - चलो बता hi देती हूँ… उसने बोलै…. मर्द लोग… रात को… अपनी… सुसु करने की चीज़…

सुप्रिया ने उसे तुरंत hi रोक दिया - बस बस… और नहीं बोल..

हिना - क्या वह सच में सुसु को औरत के अंदर दाल देते है… छ्हीी… कितना गन्दा लगता होगा…

रुबीना ने भी एक कदम अंदर ले लिया था - क्यों ये फालतू बातें करती है नाज़ से… वह तोह पूरी छिछोरी है hi… तुझे भी बना देगी…

हिना गुस्से में भड़की - बच्ची नहीं हु मैं… दीदी लोगो को भी सुना है मैंने बोलते हुए…

रुबीना - बच्ची नहीं रही तोह शादी करवा देती हु तेरी… तब पता कर लियो की कौन कहाँ कैसे क्या डालता है…

हिना गुस्से में पेअर पटकते हुए कमरे से बहार ऊपर की और भागी - जब देखो शादी शादी शादी…

सुप्रिया तोह उसकी बातों से अलग खयालो में डूबी हुई थी. पहले hi घर में काम ढिंढोरा पिता था उसके छोड़ने का जो हिना ने अपनी चांट दोस्त और उनकी पडोसी को भी बता दिया. अब तोह ये मानलो की पूरे गाँव में ये खबर आग की तरह फ़ैल गयी होगी.

तभी बहार इक़बाल की आवाज़ आयी, शायद वह हाथ मुँह धो कर खाना खाने आया होगा. सुप्रिया ने उठ कर सीधा बैठना चाहा पर उसके नीचे उसे अभी भी सूजन महसूस हो रही थी. बहार की आवाज़े उसके कान में साफ़ पद रही थी.

इक़बाल की आवाज़ आयी - भाभी… खाना लगा दो… वह सुप्रिया नहीं दिख रही… ऊपर भी नहीं थी…

रुबीना - वह अंदर हिना के कमरे में सो रही है…

इक़बाल - ाचा… क्या हुआ? सब ठीक?

रुबीना - वह तोह तुम बताया…

इक़बाल - मैं?!

सुप्रिया को रुबीना का चेहरा नहीं दिख रहा था पर आवाज़ में मजाक साफ़ था -

और क्या? तुमने hi तोह बेचारी की इतनी बुरी हालत कर दी…

इक़बाल कुछ पल छुप हो गया.

रुबीना - इतने महीने रुके… और फिर एक hi रात में उन सब महीनो का हिसाब ले लिया… थोड़ा तोह रेहम करते उस पर…

दूसरी तरफ से अम्मी की आवाज़ आयी - इसमें इसकी क्या गलती… छूट नरमी से न फाड़ी जाये… मज़ा तोह उसे भी आया होगा…

रुबीना - हाँ पर… एक रात में कमर hi तोड़ दी उसकी… रात के बाद दरी हुई बेचारी…

इक़बाल - उसने कहा आपसे?

रुबीना - और क्या? मैं कौनसा अपने से बना के बोल रही हु… कच्ची छूट है उसकी अभी… थोड़ा आराम से कर… आज रात न घोड़ी बनइयो उसे…

इक़बाल - हम्म्म्म…

रुबीना - ाचा सुनो… शाम को आते हुए एक दर्द की दवाई का पत्ता लेते आना बाजार से… ख़तम हो गया है…

इक़बाल - जी भाभी…

सुप्रिया बीच में कुछ बोलने की हालत में नहीं थी, पर इक़बाल की टोन से उसे समझ आ गया था की उसे रुबीना की ये बात अछि नहीं लगी थी. ऐसा लग रहा था की सारा इल्जाम उसके सर पर माध दिया गया था.

इक़बाल खाना खा के चला गया और सुप्रिया ने थोड़ी बाद धीरे धीरे उठ कर चलना शुरू कर दिया.

उसे लग रहा था जैसे उसकी पूरी चाल hi बदल गयी हो. ऐसा तोह उसके साथ कभी नहीं हुआ था. विक्रम ने जब एक दो बार उसके साथ थोड़ा रफ़ सेक्स किया था तोह उसे दर्द तोह हुआ था पर उसकी ये हालत कभी नहीं हुई थी. शायद उस लेप ने उसकी छूट इस तरह सील दी थी जैसे वह बिलकुल नयी हो.

शाम तक सुप्रिया किसी तरह से घर का थोड़ा बोहोत काम करने लगी थी. इक़बाल और अब्बास के आने के बाद रात का खाना बड़ी चुप चाप चल रहा था.

बीच में रुबीना ने ऊपर एक घुसल खाना बनवाने की बात छेड़ दी थी और अब्बास ने ज्यादा कुछ न बोलते हुए हाँ में सर हिला दिया था. सुप्रिया तोह रसोई घर में बैठी रोटी बनती रही, वह शर्म के मारे अब्बास और इक़बाल के सामने भी नहीं आना चाहती थी.

खाने के बाद सुप्रिया किसी तरह से मुंडेर को पकडे एक एक सीडी चढ़ते हुए ऊपर अपने कमरे में पहुंची. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था, पता नहीं आज रात क्या होने वाला था.

अंदर आकर देखा तोह इक़बाल बिस्तर बना रहा था, चद्दर बदल रहा था. सुबह से सुप्रिया कमरे में कहाँ आ पायी थी बिस्तर को ठीक करने. शायद कल रात उन दोनों के पानी से चद्दर गन्दी हो गयी थी.

सुप्रिया ने पास आकर मदद करने की कोशिश करि पर काम लगभग हो गया था. उसे इक़बाल के चेहरे पर नाराज़गी साफ़ दिख रही थी. टेबल पर दवाई का पत्ता रखा हुआ था, पर सुप्रिया की उसे उठाने की हिम्मत नहीं हुई.

इक़बाल रजाई बिछा कर बिस्तर में लेट गया और सुप्रिया भी बत्ती बंद करके बिस्तर पर आ गयी. कमरे में आज फिर से एक सन्नाटा था.

सुप्रिया को दिन की बातें याद थी और समझ आ रहा थी की इक़बाल क्यों चुप था. उसने छुपी को तोड़ते हुए बोलै - इक़बाल जी… सुनिए…

इक़बाल की तुरंत आवाज़ आयी - जी मैडमजी…

ये तोह वापिस मैडमजी पर आ गया था - वह… उम्म्म… दिन में भाभी ने जो कहा…

इक़बाल - जी… माफ़ कीजिये मुझे अगर मैं कल रात थोड़ा बहक गया था तोह…

सुप्रिया - उम्म्म.. नहीं…

इक़बाल - पर ाचा होता अगर आप मुझसे ये बोलती… न की भाभी से… मैंने आपके साथ कोई जबरदस्ती की थी क्या…

सुप्रिया - नहीं नहीं… कोई जबरदस्ती नहीं थी…

इक़बाल - तोह फिर?

सुप्रिया - मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा उनको…

इक़बाल - आपने hi तोह शुरुवात की थी इस सब की… अगर आप नहीं चाहती तोह… मैं कहाँ कुछ करता..

अँधेरे में भी सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो रहे थे - हाँ… नहीं.. मतलब ऐसा कुछ नहीं… मैं करना चाहती हूँ…

इक़बाल - आप तोह रात भी जल्दी सो गयी थी… और वह सब करते हुए भी ज्यादा कुछ बोल नहीं रही थी…

सुप्रिया - क्या बोलती मैं…

इक़बाल - मैंने कहा था न मुझे ये सब करते हुए गन्दी बातें में बड़ा मज़ा आता है… कल रात सब हुआ पर जाने क्यों मज़ा सा नहीं आया…

उधर सुप्रिया की जान निकल गयी, उसका बुरा हाल हो गया था और इक़बाल को मज़ा नहीं आया था!!! सुप्रिया को उसकी ये बाटी नहीं लगी - मज़ा नहीं आया आपको कल रात मेरे साथ?

इक़बाल - नहीं… मेरा वह मतलब नहीं था… आप को छोड़ने की तोह कबसे तमन्ना थी… बस वह जैसा सोचा था वैसा नहीं था… कुछ अधूरा सा लगा… वह कहते है न… बेजान हिरन को छोड़ने में क्या hi मज़ा है… मज़ा तोह उड़ती चिड़िया की गांड मारने में आता है…

सुप्रिया शर्म से पानी पानी हो रही थी -

उम्म्म्म… बस वह मेरी पीठ में बोहोत दर्द हो गया था सुबह… आज रात तोह मैं शायद ज्यादा हिल न पयु..

इक़बाल - आप आराम करिये… मैं तोह कुछ भी बोलता हूँ… आप इतना मत सोचिये इस सब के बारे में…

पर सुप्रिया काफी देर उसकी बातों के बारे में hi सोचती रही. क्या मतलब था उसका उड़ती चिड़िया से… कैसे बने वह एक उड़ती चिड़िया… क्या इक़बाल उसकी गांड को फ़क करना चाहता था… सोचते hi उसकी गांड में एक दर्द भरी चुलभुलाहट उठ पड़ी और सुप्रिया का हाथ तुरंत hi अपनी गांड पर चला गया…. उफ्फ्फ्फ़…. कहाँ फसा लिया था उसने अपने आप को… एक पल लगता की वह इक़बाल से दूर रहे… और दुसरे hi पल जाने क्यों फिर से बुरी तरह छोड़ने का मैं करने लगता…

पर शायद आज रात तोह उसे आराम की सख्त ज़रुरत थी.
 
अपडेट 101

अगले दिन, सुप्रिया अभी अपने सवालो का सही से जवाब भी नहीं ढून्ढ पायी थी उसके पीरियड्स आ गए. घर में नीचे सबको पता चला तोह जैसे मातम का माहौल बन गया.

अम्मी जी कुछ न कुछ अंत शांत बड़बड़ाये जा रही थी पर रुबीना बीच में नहीं पद रही थी. सुप्रिया की तोह अपनी हालत पीरियड्स की वजह से और भी ख़राब लग रही थी, पर वह किस्से क्या hi कहती. सब जैसे मान hi बैठे थे की एक बार सेक्स करने से hi बच्चा हो जायेगा.

Ek-do दिन ऐसे hi बीत गए, और सुप्रिया छत की मुंडेर पर अकेले कड़ी अपनी सोच में खोयी हुई थी, अनजान की लोग उसे घूर रहे थे.

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रुबीना छत पर पीछे से आती हुई बोली - क्या हुआ मेरी बन्नो को जो यहाँ मुँह लटका के कड़ी है?

सुप्रिया ने मुँह के उनकी और देखा और हलके से मुस्कुरायी - कुछ नहीं... बस ऐसे hi... काम से काम अब कड़ी तोह हो पा रही हु...

रुबीना हस्ते हुए - अम्मी की बात का बुरा मत मन्ना, उन्हें एक पोते की बोहोत तमन्ना है... फिक्र मत करो... वह भी हो जायेगा... कोई आखरी बात थोड़ी न सब किया है...

सुप्रिया - पहली बार करने के बाद hi इतना डर लग रहा है... की दूसरी बार करने की हिम्मत नहीं है...

रुबीना - नहीं नहीं... ऐसे नहीं सोचते... दूसरी बार जल्दी कर लेना... नहीं तोह फिर से इतना hi दर्द होगा...

सुप्रिया - हम्म्म... अभी तोह कुछ दिन... वह सब... नीचे...

रुबीना - हाँ तोह क्या हुआ... इस बीच और भी कुछ कर सकती हो उसे खुश करने के लिए...

सुप्रिया - जैसे?

रुबीना ने बिना कुछ कहे उसके होंठों के पास हलके से हाथ फेरा.

सुप्रिया की आँखें बड़ी हो गयी - मुँह में ले लू?

रुबीना - शठ... थोड़ा धीरे बोल... इतना भी खुल के कौन बोलता है...

सुप्रिया ने आवाज़ धीरे करि - मुँह में?

रुबीना - हाँ... उसे बड़ा मज़ा आएगा... और तुम्हे भी... बेशरम तोह तू भी काम नहीं है... बस दिखती नहीं है...

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल हो गए और वह नाराज़ होते हुए बोली - आप भी मुझे बोल लो... अम्मी काम थी क्या?

रुबीना ने उसकी थोड़ी पर अपना हाथ रखा - ारी... प्यार से बोलै है... इसमें बुरा क्या मन्ना...

सुप्रिया के मैं में 2-3 दिन से दबा हुआ सवाल बहार आने लगा - एक बात पुछु आपसे?

रुबीना - हाँ... किसने रोका तुझे...

सुप्रिया - आप... और इक़बाल की पहली बीवी... सीमा... के बीच में ऐसी hi दोस्ती थी...

रुबीना उसका नाम सुनकर बुरी तरह चौंक गयी - तुझे किसने बताया उसका नाम?!!

सुप्रिया - ममममम.... इक़बाल जी ने... और एक पुराणी फोटो मिली थी...

सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे रुबीना की आँखें एक झलक के लिए उस ताला लगे कमरे की तरफ मुड़ी हो - हम्म्म.... कुछ बताया इक़बाल ने उसके बारे में?

सुप्रिया - नहीं... कुछ भी नहीं...

रुबीना हस्ते हुए - वह भी मुझसे थोड़ी छोटी hi थी... पर तेरे जितनी हसीं, प्यारी और मासूम नहीं थी... पर देख तोह ज़रा आज कैसा हुलिया बना रखा है अपना...

सुप्रिया - हाँ आज वह... बस थोड़ा मैं ख़राब था...

रुबीना उसके पास आते हुए धीरे से बोली - मैं ठीक करना है तोह आज रात उस मोठे खट्टे गन्ने को चूस लेना... अपने आप ठीक हो जायेगा...

सुप्रिया ने आँखें झुका ली - आप भी न...

रुबीना - क्यों कभी चूसा नहीं पहले?!... अगर सच में नहीं तोह एक मोटा सा खीरा ला कर दे देती हूँ... उस पर मश्क़ कर लेना...

सुप्रिया बुरी तरह झेप रही थी.

रुबीना - चल आज तुझे बाजार ले चलती हूँ... वहां कुछ चाट पकोड़े खा कर मैं ाचा हो जायेगा...

सुप्रिया - पर अम्मी?

रुबीना - अम्मी को मैं समझा दूंगी...

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शाम होते होते रुबीना और सुप्रिया साथ में बाजार चले गए. ज़िद्द तोह हिना ने भी बोहोत की जाने की पर अम्मी ने उसे दांत के घर में बिठा दिया.

सुप्रिया आज बोहोत दिनों बाद घर से निकली थी. उसने अपना सर ढाका हुआ था पर ऐसा लग रहा था लोग उसे जाते हुए मुद मुद कर देख रहे थे. कुछ लोग तोह बेहद hi गंदे तरीके से.

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सुप्रिया ने रुबीना की और देखा आँखों hi आँखों में पूछते हुए की लोग उसे क्यों घूर रहे थे. रुबीना मुस्कुराते हुए फुसफुसाई - तेरी कच्ची जवानी की खुशबू खींच रही है उन्हें...

सुप्रिया के एकदम से ऐसा लगा जैसे वह बाजार में नंगी घूम रही हो, और लोग उसका सब कुछ देख पा रहे हो - भाभी... वापिस चलते है न... कुछ ाचा नहीं लग रहा...

रुबीना - परेशान मत हो... देख hi तोह रहे है... कौनसा किसी ने कुछ कर लिया... देखने दे लोगो को...

सुप्रिया आगे कुछ बोल नहीं पायी और रुबीना और सुप्रिया चलते चलते बाजार तक पहुंच गए थे. रुबीना इधर उधर का कुछ सामान देख रही थी और सुप्रिया बस उसके पीछे पीछे चल रही थी. आखिर में वह एक चाट वाले की दूकान पर आये.

रुबीना - भैया... ज़रा दो पत्ते लगा दो... सुन सफीना... मैं आती हूँ अभी... तू तब तक चाट खा... गोल गप्पे खा...

सुप्रिया परेशान होते हुए बोली - नहीं नहीं भाभी... आप ऐसे मुझे अकेले छोड़ कर कहाँ जा रही हैं?

रुबीना - बस यहीं ज़रा रफ़ीक़ चाचा की दूकान तक... कुछ काम था... तुझे भी चलना है?

सुप्रिया को पिछली बार उस दूकान में हुआ हादसा याद आ गया, वह उस गंदे से बुड्ढे की शकल भी नहीं देखना चाहती थी - नहीं वहां नहीं जाना... पर मैं यहाँ अकेले... और लोग...

रुबीना - इतना क्यों डर रही है... हिना भी तोह अकेले आती जाती है... मैं आती हूँ अभी 5-10 मिनट में... तू तब आराम से खा....

सुप्रिया के देखते देखते रुबीना वहां से जल्दी से गायब हो गयी. इतने में चाट वाले ने सुप्रिया को गोल गप्पो के लिए एक पत्ता थमा दिया था. सुप्रिया को बोहोत दिन हो गए थे कुछ ाचा सा खाये हुए, और उसका मैं ललचा सा रहा था. वैसे भी पीरियड्स में उसका मैं इन चीज़ो के लिए और ज्यादा करता था.

सुप्रिया ने एक गोल गप्पा उठाया और अपने मुँह में दाल लिया. काफी बड़ा गप्पा था वह. और फिर एक और, और एक और. तभी एक आदमी उसके बराबर में आ कर खड़ा हो गया - भाई ज़रा हमारे लिए भी लगा दे...

सुप्रिया ने देखा ये तोह वह ब्रा पंतय शॉप वाला जुनैद था.

जुनैद ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - सफीना भाभी... कैसी है आप? खैरियत सब?

सुप्रिया ने धीरे से कहा - जी... आप...

जुनैद - बढ़िया सब... आज अकेले बाजार में? पहली बार आपको अकेले देखा है... नहीं तोह कोई न कोई होता hi है आपके साथ...

सुप्रिया - नहीं... वह रुबीना भाभी आयी थी... वह अभी किसी काम से...

जुनैद - ाचा... कोई नहीं... इस बहाने हमे मौका मिल गया आपसे बात करने का...

चाट वाले ने एक और गप्पा सुप्रिया के पत्ते पर रखा और सुप्रिया ने उसे उठाते हुए अपने मुँह में रख लिया.

वह उसे खा hi रही थी की जुनैद बोलै - काफी बड़े है न ये... बड़ा मुँह खोलना पड़ता है इनके लिए...

सुप्रिया ने उसकी और देखा, उसके चेहरे से सुप्रिया के लिए बुरी नियत साफ़ दिख रही थी - हम्म्म्म....

जुनैद ने अपना पत्ता सुप्रिया के आगे किया - लीजिये... आप मेरा भी ले लीजिये... ये और बड़ा है...

सुप्रिया - नहीं... आप खाइये...

जुनैद - घबराइए नहीं... दूसरो का खाने से और भी ज्यादा मज़ा आता है...

सुप्रिया बोहोत hi असहज सा महसूस कर रही थी और वह इधर उधर देखने लगी, जाने रुबीना भाभी कब वापिस आने वाली थी.

जुनैद - रुबीना भाभी को तोह अभी वक़्त लगेगा... तब तक चलिए... हमारी दूकान में बैठ जाइये... थोड़ा सामान देख लीजियेगा... पीछे एक कमरा भी है... अगर आपको कुछ पेहेन के देखना हो तोह... आराम से... अकेले में...

सुप्रिया ने उसे घूर के देखा, उसका मैं कर रहा था अभी उसे गालियां दे दे, पर बाजार में अकेली कड़ी उसे हिम्मत नहीं हो रही थी जवाब देने की - नहीं... मैं यहीं ठीक हूँ...

जुनैद - ाचा... कोई नहीं यहीं बात कर लेते है आपसे... वैसे एक बात कहु... आपको देख कर कह नहीं सकता कोई की आप... यहाँ आस पास से है... बिलकुल शहरी लगती है...

सुप्रिया - हाँ वह बस... मेरे अब्बू शहर में रहते थे...

जुनैद - ाचा... मैं भी काफी शहरी खयालो की हूँ... पता नहीं कैसे आपका निकाह आपसे काफी बड़े उम्र के मर्द से कर दिया... आपको तोह कोई जवान मर्द मिलना चाहिए था...

सुप्रिया के चेहरे पर गुस्सा झलकने लगा था - देखिये... आप जाइये यहाँ से... मुझे ऐसी बातें पसंद नहीं...

जुनैद - ारी आप गुस्सा क्यों हो रही है... मैं तोह बस आपके बारे में hi सोच रहा था... मैंने सुना है उस घर के सारे मर्द थोड़े... फुस्स्स पद चुके है...

सुप्रिया सोच रही थी की उसे क्या जवाब दे, की उसे दूर से रुबीना भाभी आती दिखी - रुबीना भाभी आ रही है... आप उनसे hi क्यों नहीं पूछ लेते...

जुनैद हस्ते हुए - आप उनसे पूछियेगा की वह कहाँ गयी थी... खैर... अभी मैं चलता हूँ...

रुबीना के पास आते आते जुनैद वहां से चला गया था. सुप्रिया की नज़र रुबीना पर गयी, उसकी सलवार पर पहले से ज्यादा सिलवाते पद गयी थी और बाल भी वैसे नहीं थे जैसे वह घर से बना कर आयी थी, थोड़े बिखरे हुए से.

उसके वहां पहुंचते hi सुप्रिया एक डैम बरस सी पड़ी - आप कहाँ चली गयी थी भाभी... मैं इतनी परेशान हो रही थी...

रुबीना - क्या हुआ? सब सही तोह लग रहा था... दूर से देखा था तोह जुनैद से है बोल रही थी...

सुप्रिया - है बोल कर?!! वह मुझे परेशान कर रहा था...

रुबीना के चेहरे पर मुस्कान आ गयी - जवान लड़का है... उसने अपनी अकेली जवान भाभी को देखा तोह.... मैं मचल गया होगा...

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए उन्हें घूरा - भाभी...

रुबीना ने आँख मारते हुए कहा - ले चालू उसकी दूकान पर.... अंदर जाकर तस्सली से ब्रा पंतय पेहेन के देख लियो... मैं इक़बाल को कुछ नहीं कहूँगी... अब भाबी भाभी मत करियो... मुझे पता है तुझे भी मज़ा आता है इन सब बातों में...

सुप्रिया के मैं में एक अजीब से बेचैनी हो रही थी, पता नहीं रुबीना उससे ऐसे क्यों बोल रही थी - ठीक है नहीं बोलती... पर आपके कपड़ो को क्या हुआ? ये कैसे मुस गए... और आपके बहाल?

रुबीना - कितना गौर से देखती है तू?! वह नाप लेते लेते थोड़ा मुस गए... चल आजा अब... देर नहीं करते ज्यादा... वैसे मैं तोह कहूँगी तू इक़बाल को कुछ न बताइयो आज जुनैद के बारे में...

रुबीना ek-do और काम निपटा कर सुप्रिया को वापिस घर ले आयी. रास्ते भर भी वह सुप्रिया से कुछ ऐसी वैसे बातें करती रही. सुप्रिया सोच रही थी की कैसे रुबीना धीरे धीरे उससे और खुल कर बातें करने लगी थी.

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रात को कमरे में काफी ठण्ड थी और सुप्रिया और इक़बाल बिस्तर में रजाई में लेते थे. दिन में जो हुआ उससे सुप्रिया के मैं में अभी भी हलचल सी चल रही थी, और सुप्रिया सोच रही थी की इक़बाल को कुछ बताये या नहीं. रुबीना की दिन की बात अभी भी उसके दिमाग में रह रह कर आ रही थी.

सुप्रिया ने इक़बाल की और देखा, वह आँखें बंद करके लेता था, उसने धीरे से कहा - इक़बाल जी... आप सो गए...

इक़बाल - नहीं मैडमजी... बस आँख बंद करके लेता था...

पता नहीं वह उसे अभी भी सुप्रिया की जगह मैडमजी क्यों बुला रहा था - वह... आपका दिन कैसा रहा आज?

इक़बाल - बस वही सब मैडमजी... आप बताइये... आपकी तबियत ठीक है अब? आप तोह बाजार गयी थी न आज?

सुप्रिया थोड़ा सुरप्रीसेड हो गयी, उसे नहीं पता था इक़बाल को ये बात कब पता चली - हाँ... वह भाभी ने बोलै था... तोह उनके साथ...

इक़बाल - कुछ खरीदा आपने?

सुप्रिया - हम्म्म... नहीं... मैंने तोह कुछ नहीं...

इक़बाल - आप बिना फिक्र के ले सकती है जो आपको लेना है...

सुप्रिया - हाँ... बस वहां कुछ हो गया था जो मुझे ाचा नहीं लगा...

इक़बाल ने सुप्रिया की और देखा - क्या हुआ? किसी ने कुछ कहा आपसे?

सुप्रिया - हम्म्म्म.... वह जुनैद है न... वहां बाजार में जिसकी दूकान है... वह मुझसे आकर बात करने लगा...

सुप्रिया ने देखा की इक़बाल के चेहरे पर गुस्सा आने लगा था - कुछ बदतमीज़ी की उसने आपसे?

उसे गुस्से में आते सुप्रिया को थोड़ी घबराहट सी होने लगी - नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं... बस वह थोड़ा अजीब लगा... मैं अकेली कड़ी थी और वह मुझसे आकर बात करने लगा...

इक़बाल - आप अकेली क्यों कड़ी थी बाजार में?

सुप्रिया - वह भाभी किसी काम से....

इक़बाल की आवाज़ में गुस्सा साफ़ सुनाई दे रहा था - पर उन्हें आपको यूँ अकेले छोड़ कर नहीं जाना चाहिए था! मैं उनसे बात करता हूँ...

सुप्रिया सरक कर इक़बाल के नज़दीक हुई और उसके हाथ पकड़ लिए - नहीं नहीं... आप उनसे कुछ मत कहना... मैं तोह बस ऐसे hi...

इक़बाल ने गुस्से से सुप्रिया की आँखों में देखा और भरे हुए लहजे में बोलै - जुनैद की इतनी हिम्मत कैसे हुई के वह भरे बाजार आपके पास आकर आपसे बात करे? लगता है अपनी औकात भूल गया है… उसको मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा के दोबारा आपके सामने नज़र उठाने लायक नहीं रहेगा.

सुप्रिया ने घबरा के कहा - आप गुस्सा मत करिये... सिर्फ बात की थी... और कुछ नहीं...

इक़बाल ने सुप्रिया को घूरा - और कुछ करने का ख्याल भी उसके दिमाग में आया न... तोह वह सोचने लायक नहीं रहेगा... मुझे ाचा नहीं लगता जब आपसे कोई और मर्द बात करता है... आप सिर्फ मेरी है... आप पर बस मेरा हक़ है...

इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया के हाथ पर रखते हुए उसे हलके से सहलाया. सुप्रिया के छोटे से हाथ इक़बाल की बड़ी सी हथेली में गम हो गए थे. इक़बाल सुप्रिया की और सरका और उसे अपनी बाहों में भर लिया, इस बार एक सवाल करते हुए - आप सिर्फ मेरी है न?

सुप्रिया थोड़ी घबराई हुई थी पर उसने हलके से कहा - जी... सिर्फ आपकी...

इक़बाल - मैं आपसे बोहोत प्यार करता हूँ मैडमजी...

इक़बाल सुप्रिया की गर्दन पर हलके से चूमने लगा. सुप्रिये ने अपने हाथ इक़बाल पर लपेटते हुए उसे हुग कर लिया. उसके नीचे भी एक गर्माहट सी होनी शुरू हो गयी थी.

सुप्रिया - इक़बाल जी... वह... मैं... नीचे... अभी भी... अभी तीसरा hi दिन है...

इक़बाल - जी... मैं समझता हूँ... आप डरिये नहीं... मैं आपको छोडूंगा नहीं...

उसके मुँह से ये सुनते hi सुप्रिया बिस्तर में जैसे गड्ड सी गयी थी और उसने अपना मुँह इक़बाल के सीने पर रख दिया.

इक़बाल ने हलके से सुप्रिया के बालों में हाथ फेरा - आपको उस दिन चुदाई में... मेरे साथ... मज़ा आया था...

सुप्रिया का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, इक़बाल ये उससे कैसा सवाल कर रहा था - हम्म्म... पता नहीं...

इक़बाल - क्यों!?? आपको ाचा नहीं लगा था? आपने कभी मेरे जितना बड़ा लुंड तोह नहीं लिया होगा?

सुप्रिया हलके से हसी - ये कैसा सवाल है...

इक़बाल - बताइये न... मुझे सुन्ना है....

सुप्रिया कुछ पल के लिए सोच रही थी वह क्या कैसे बोले - हम्म्म्म... बोहोत बड़ा था आपका... इतना बड़ा पहले कभी नहीं लिया.... पता नहीं कैसे जा पाया वह मेरे अंदर...

इक़बाल ने ख़ुशी में सुप्रिया को और कास के जकड लिया - बड़ा था... तभी तोह आपको मज़ा आया होगा...

सुप्रिया - और आपको... आपको मज़ा नहीं आया?

इक़बाल - बोहोत मज़ा आया मैडमजी... कबसे तमन्ना थी की आप पूरी तरह से मेरी हो जायो... आपकी छूट एक डैम बंद थी... उसे खोलने में पसीना निकल गया मेरा भी...

सुप्रिया की छूट में हलचल सी हो रही थी ये सुन कर, पता नहीं कबसे इक़बाल उसके साथ ये सब करना चाहता था.

इक़बाल - पर अभी भी... ऐसा लग रहा है... जैसे बोहोत कुछ बाकी है... आपके साथ सब कुछ करना चाहता हूँ मैं... और चाहता हूँ की आपको इस सब में बोहोत मज़ा आये... आप भी एहि चाहती है न?

सुप्रिया इक़बाल की बाहों में लिपटी हुई बुरी तरह शर्मा रही थी, पर उसे उस दिन की इक़बाल की बातें याद आ रही थी - हम्म्म्म.... भाभी ने बोलै था आपको.... लुंड मुँह में देना बोहोत ाचा लगता है...

इक़बाल उसके मुँह से ये सुनते hi उछाल सा पड़ा - और क्या बोलै था उन्होंने...

सुप्रिया - बस एहि की.... मुझे लुंड चूसने की आदत दाल लेनी चाहिए...

सुप्रिया को अपने पीछे इक़बाल का लुंड हरकत करता हुआ महसूस हुआ. उसकी बातें इक़बाल पर असर कर रही थी - सच... आप लेंगी मेरा मुँह में...

सुप्रिया धीरे से बोली - पता नहीं.... अजीब सा लगता है मुझे...

इक़बाल ने अपने लुंड को हलके से सुप्रिया की गांड पर फेरा - आज रात आपकी छूट नहीं मार सकता तोह क्या... आपके मुँह में तोह दे hi सकता हूँ न...

इक़बाल ने सुप्रिया को अपनी और मोड़ा, और उसका हाथ पकड़ते हुए उसे नीचे अपने पाजामे की और ले गया. सुप्रिया का हाथ बुरी तरह काँप रहा था, इक़बाल उसे पकडे हुए अपने पयजामे के ऊपर से अपने लुंड पर हलके से सहलाया. लुंड पहले से थोड़ा खड़ा था, और सुप्रिया के नरम उँगलियों से छोटे hi हलके से थिरकने लगा.

सुप्रिया - उम्म्म्म... बोहोत बड़ा है आपका... मुँह दर्द कर देगा...

इक़बाल - थोड़ा दर्द तोह सहना hi पड़ता है... मेरा लोढ़ा आपके मुँह में... सोच कर hi मैं बेकाबू सा हूँ रहा है... आप लेंगी न... मेरे लिए इतना कर लीजिये आज... मुझे बोहोत ाचा लगेगा...

सुप्रिया ने नीचे देखते हुए अपनी पलके झुका ली, इक़बाल के लिए इतना इशारा hi काफी था.

इक़बाल ने तुरंत hi अपने दुसरे हाथ से पाजामे का नाडा थोड़ा ढीला किया और सुप्रिया के पतले मुलायम से हाथ को अपने पाजामे और अंडरवियर के अंदर घुसा दिया. वहां इक़बाल का मोटा सा लुंड सुप्रिया की उँगलियों को छू रहा था, सुप्रिया ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली.

इक़बाल ने सुप्रिया के हाथ को अपने लुंड के पास आज़ाद कर दिया जहाँ वह उसकी उंगलियां उस मोठे से लुंड से टकराने लगी.

इक़बाल - अह्ह्ह्ह..... पकड़िए इसे... सिर्फ आपका है ये...

सुप्रिया अपनी ऊँगली को लुंड के आस पास घूमने लगी. उसके बड़े हुए नाख़ून इक़बाल की स्किन पर हलके हलके छू रहे थे.

सुप्रिया ने धीरे से लुंड को अपनी उँगलियों से जकड़ा और मुट्ठी में भर लिया और इक़बाल ने एक ज़ोर की आह्हः ली. जैसे उसकी जान कैद हो गयी इस चिड़िया के हाथ में. सुप्रिया के कोमल से हाथ hi काफी थे किसी को भी झड़ने के लिए, पर आज तोह वह कहीं और hi झड़ना चाहता था.

इक़बाल ने अपनी आँखें खोलते हुए सुप्रिया के गालों को पकड़ा और होंठों को दबाया - आपका इतना खूबसूरत चेहरा... इस पर मेरा लुंड लगेगा... मज़ा आ जायेगा आपको...

सुप्रिया ने अपने दबे हुए होंठों से बोलने की कोशिश की और उसका मुँह हल्का सा खुला और इक़बाल ने अपनी काली उंगलियां उसके मुँह में डालते हुए उसकी जीब से रगड़ दी. सुप्रिया सिहर गयी, उसका काला लुंड तोह उसकी उँगलियों से भी कहीं बड़ा होने वाला था. जैसे जैसे इक़बाल अपनी उंगलियां उसके मुँह में घुसता गया सुप्रिया का मुँह बड़ा होता गया.

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सुप्रिया के एक हाथ इक़बाल के लुंड पर था और इक़बाल का हाथ सुप्रिया के मुँह में. सुप्रिया का हाथ खुद hi इक़बाल के लुंड पर धीरे धीरे चलने लगा. सुप्रिया इक़बाल की उँगलियों को चूसते हुए बिस्तर पर सीढ़ी बैठी.

सुप्रिया ने इक़बाल के साइड में बैठते हुए उसके पयजामे पर हाथ रखा. उसका दिल फिर से उस बड़े से लुंड को देखने के लिए उत्सुक तोह था पर साथ hi घबरा भी रहा था. लुंड अपने आप hi पयजामे में हिल रहा था.

सुप्रिया को थोड़ी सी हसी आ गयी, उसने इक़बाल को छिड़ते हुए कहा - और मैं न लू मुँह में तोह?

इक़बाल की आँखों में एक आग भड़की हुई थी - बोहोत इंतज़ार किया है इसने... अगर इसे आपने चूसा नहीं तोह आज रात इसे आपकी गांड में दाल कर शांत करना पड़ेगा...

सुप्रिया को अपनी गांड एक डैम सिलती हुई सी महसूस हुई - न बाबा... वहां नहीं... मैं लेती हूँ मुँह में...

इक़बाल ने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर किया ताकि सुप्रिया आराम से उसके पयजामे को नीचे खींच पाए. इक़बाल के पयजामे को नीचे सरकाया और फिर उसके अंडरवियर को. लुंड एक डैम उछलता हुआ बहार आया और सीधा खड़ा हो गया. सुप्रिया उसे देख कर फिर से घबरा सी गयी थी, पर उसने आँखें बंद करते हुए लुंड को अपने मुट्ठी में भरा.

वह लुंड को हलके हलके अपने हाथ से हिलने लगी, अभी वह शायद पूरी तरह खड़ा भी नहीं था. इक़बाल अपना हाथ सुप्रिया के मम्मो पर लाते हुए उन्हें हलके से दबाने लगा. उसकी गोरी सी मैडमजी के मम्मी कितने बड़े और मस्त लग रहे थे.

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उसके मम्मो को छोटे hi सुप्रिया के अंदर गर्मी पैदा होने लगी थी, वह अभी भी अपने पीरियड्स पर थिस, इसलिए उसने इक़बाल के हाथ को रोकने की कोशिश की - उफ्फ्फ्फ़... इनसे न खेलिए... मैं कर रही हूँ न जो आप चाहते है...

इक़बाल - खेलने दो न... बोहोत मस्त लगते है आपके ये बब्बे... इन्हे देखते hi मैं करता है चूसने का...

इक़बाल ने थोड़ा तेज़ के दबाया. सुप्रिया की तेज़ की चीख निकल गयी और इक़बाल के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी. सुप्रिया उसकी भाषा बदलते देख समझ गयी थी की वह अब गरम होने लगा था. उसका लुंड भी अचानक hi पूरा खड़ा हो गया था.

इक़बाल - आपके हाथ जैसे जादू है... एक डैम कड़क हो गया है मेरा लुंड... अपना थूक रगड़ दीजिये इस पर...

सुप्रिया के गाल शर्म से लाल थे - थूक...

इक़बाल - शरमायो मत... आपका हाथ अचे से चलेगा...

सुप्रिया ने संकोच करते हुए अपने एक हाथ पर अपने से हल्का सा थूका और उसे लुंड पर रगड़ने लगी. कितना अजीब सा लग रहा था ये सब करना.

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सुप्रिया आज बोलने की कोशिश कर रही थी - मममम.... कैसा लग रहा है अभी...

इक़बाल की शकल देख कर सुप्रिया को लग रहा था जैसे उस पर कोई भूत सवार हो रहा हो - अह्ह्ह्ह.... उफ्फ्फ्फ़..... बोहोत बढ़िया... नीचे तक अचे से मसलो.... अह्ह्ह....

सुप्रिया - ममम... कर तोह रही हूँ...

इक़बाल - और डैम लगा के... अचे से.... अह्ह्ह्ह.... उफ्फ्फ.... कितना इंतज़ार किया है आपके हाथों का अपने लुंड पर...

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ को मासूम सी बना कर पुछा - कितना?

इक़बाल - बोहोत सारा.... बोहोत सारा... अपनी कुर्ती उतार दीजिये न...

सुप्रिया - पर मैं... वह नीचे....

इक़बाल - फ़िक्र मत करिये... मैंने कहा न... छूट नहीं मरूंगा आपकी... बस आपके गोर बब्बे देखने है...

सुप्रिया उसकी शकल देख कर उसे न नहीं कह पायी और उसने अपनी कुर्ती को ऊपर खींचते हुए उतार दिया. इक़बाल ने तुरंत hi ब्रा के ऊपर से उसके मम्मो को कास के दबाया. सुप्रिया की ज़ोर की सिसकी निकल गयी.

इक़बाल - आपको गरम रखने के लिए कर रहा हूँ ये सब... ताकि आप ठंडी न पड़े...

इक़बाल सुप्रिया के मम्मो को अपने दोनों हाथों से दबाने लगा और उसे अपनी टांगो के बीच में खींच लिया. उसका सीधा लम्बा तना हुआ लुंड सुप्रिया के कंधो को छू रहा था. इक़बाल ने अपने लुंड को पकड़ते हुए सुप्रिया के बूब्स पर ब्रा के ऊपर से दबाया. कुछ देर वह ऐसे hi उसकी ब्रा और छाती पर अपना लुंड लगते हुए खेलने लगा. सुप्रिया को उसके लुंड की तेज़ स्मेल अपनी नाक में घुसती हुई महसूस हो रही थी.

सुप्रिया - Uhhhh...mmmm.....

इक़बाल - शुरू करिये न इसे मुँह में लेना....

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया - जी....

सुप्रिया अपना मुँह उसके लुंड के पास लायी. लुंड की स्मेल और तेज़ हो गयी थी, ऐसी स्मेल जो उसने पहले कभी न सूंघी हो. बोहोत तेज़, बोहोत की अजीब सी. उसका मुँह लुंड के थोड़ा ऊपर आ कर रुक गया.

सुप्रिया ने सामने इक़बाल की आँखों में देखा जो इंतज़ार कर रहा था कब सुप्रिया का मुँह उसके लुंड पर हो, और वह हलकी हलकी आवाज़े निकाल रहा था. लुंड की नसे तानी हुई ऐसी लग रही थी जैसे फट hi न जाए.

सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद की और अपनी जीब बहार निकालते हुए उसकी लुंड की टोपी को हलके से छाता.

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इक़बाल का लुंड पूरी तरह काँप उठा. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की ये दिन आएगा - उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.... मदमजेईईई..... अह्हह्ह्ह्ह.....

इक़बाल की तेज़ रिएक्शन सुन कर सुप्रिया ने उसके लुंड को अपने हाथ से पकड़ा और अपने होंठों से उसकी टोपी को चूस डाला. आज इक़बाल की बारी थी अपनी हालत ख़राब होते देखने के लिए.

इक़बाल - ममममम..... मैडमजी.... इसका पानी निकाल देना आज पूरा... बोहोत दर्द हो रहा है...

उसके लुंड का हल्का हल्का पानी सुप्रिया के होंठों पर लग गया था और सुप्रिया की जीब ने बिना सोचे उसे अपने होंठों पर से चाट लिया. अब वह पूरी इक़बाल की हो गयी थी, उसकी छूट, उसका मुँह, उसका सब कुछ आज से बस इक़बाल का था. वह आज बस उसे पूरी तरह खुश करना चाहती थी, ताकि वह उसे मैडमजी कहना भूल जाये.

सुप्रिया ने मुस्कुराते हुए तेज़ी से लुंड को अपने होंठों पर घिसा और उसकी टोपी पर एक हलकी सी किश दी.

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सुप्रिया - अब कैसा लग रहा है इक़बाल जी....

इक़बाल - उफ्फफ्फ्फ़.... आप तोह कमल हो.... अब बस जल्दी से मुँह में ले लो इसे...

सुप्रिया ने उसकी तरफ देखते हुए उसे चिडया - आपने तोह कई लड़कियों के मुँह में डाला है... और मेरे सामने एक आदमी के मुँह में भी...

इक़बाल - उस दिन की याद न दिलवाइये मैडमजी.... आपके सामने उस हरामी के मुँह में मुझे लुंड नहीं डालना चाहिए था... मममम... और बात रही और औरतों की... आपका कोई मुक़ाबला नहीं कर सकता....

सुप्रिया इतराते हुए बोली - जब तक आप मुझे मैडमजी बोलते रहेंगे तब तक मुँह में नहीं लुंगी मैं...

इक़बाल ने अपनी कमर को ऊपर करते हुए लुंड उसके मुँह की तरफ किया- अह्ह्ह्हह ऐसा क्या... सुप्रिया..... तेरे होंठ.... पूरा ले ले न इसे अपने मुँह में... चूस दाल....

सुप्रिया ने उसके मोठे लुंड की टिप को फिर से छाता और इस बार थोड़ा और अंदर लिया - ममममम.... मममममम....

मुँह के अंदर उसकी जीब लुंड पर अचे से रगड़ रही थी जिससे इक़बाल को और भी मज़ा आ रहा था - अह्ह्ह्ह..... उफ्फ्फफ्फ्फ़.... सुप्रियाआ.... मज़ा आ गया....

इक़बाल ने थोड़ा ऊपर बैठते हुए सुप्रिया के बालो को पकड़ा और अपना लुंड उसके गालो पर लगते हुए फिर से उसके मुँह में घुसा दिया. उसका मासूम सा चेहरा, नशीली आँखें और गुलाबी होंठ उसके लुंड को बुरी तरह भड़का रहे थे. आज उसे इन होंठों के बीच अपना लुंड अचे से दबाना था.

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इक़बाल की टोन बदल चुकी थी, उसने सुप्रिया के बाल हलके से खींचे - तेरा मुँह छोडूंगा आज अचे से.... छुडवायेगी न अपना मुँह मुझसे....

सुप्रिया को भी उसका ऐसा करना बोहोत ज़्यादा मज़ा सा दे रहा था - अह्ह्ह्ह.... ोुछःह... आपकी हूँ... जो मर्ज़ी कर लो आप मेरे साथ....

इक़बाल उसके सर पथ हाथ रखते हुए अपने लुंड को ज़ोर ज़ोर से सुप्रिया के गले में घुसाने लगा. मुँह में जाता हुआ लुंड तेज़ी से सुप्रिया के गले में पीछे तक लग रहा था, और उसे अपने होंठ और फ़ैलाने पद रहे थे. पूरा मुँह बुरी तरह खींच चूका था.

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इक़बाल उस पर हक़ जताते हुए बोलै - ुह्ह्ह्हह्ह..... आज से तेरा ये मुँह बस मेरा है... समझी... रोज़ लेगी न मेरा लुंड अपने मुँह में....

सुप्रिया ने अपना मुँह में लुंड होते हुए भी हाँ में सर हिलाया. जाने उसे क्यों इक़बाल का यूं उस पर हक़ जाताना बोहोत ाचा लग रहा था. इक़बाल का ये कड़क अंदाज़ उसे अंदर से बोहोत गरम कर रहा था. जैसे hi इक़बाल की स्पीड थोड़ी काम होती वह तेज़ी से अपना मुँह हिलाते हुए उसके लुंड को चूसने लगती...

इक़बाल ने सुप्रिया के गाल को हलके से थप तपाया - अह्ह्ह्ह.... उफ्फ्फ.... मममम.....

सुप्रिया ने चूसते हुए इक़बाल की आँखों में देख - ममममम.... ममममम...... मममम....

इक़बाल ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह में धक्के मार रहा था - अह्ह्ह.... अह्ह्ह.... अह्ह्ह.... साआईईई.... बोहोत अचे से चूसती है तू.... उफ्फ्फ...

सुप्रिया के बाल बुरी तरह खींच रहे थे पर वह इक़बाल के लुंड को चूसे जा रही थी और अपनी जीब से रगड़े जा रही थी.

इक़बाल - अह्ह्ह्ह.... इतनी कमल की चीज़ है तू... गैर मर्दो से बात न किया कर.... सबकी नज़र खराब hi होती है... कौन क्या कर दे... किसी का भरोसा नहीं... और वह भोस्डिका जुनैद... उसे तोह मैं बतायूंगा...

इक़बाल की स्पीड एक डैम से तेज़ हो गयी और वह सुप्रिया के मुँह के हर कोने में अपने लुंड को तेज़ी से डालने लगा. लुंड की नसे और भी तन्न गयी थी और उसका पानी सुप्रिया के मुँह में निकलने लगा था.

इक़बाल ने सुप्रिया के बाल पकड़ते हुए लुंड को बहार निकाला और इक़बाल के छुम से बना एक लम्बा सा सफ़ेद धागा सुप्रिया के मुँह से उसका लुंड तक हवा में झूल गया.

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इक़बाल का तना हुआ लुंड से एक बड़ा सा विस्फोट होता हुआ हवा में बहार निकलने लगा. थोड़ा पानी बिस्तर पर गिरा, थोड़ा सुप्रिया के ऊपर और थोड़ा ज़मीन पर. सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद कर ली. इक़बाल का सफ़ेद माल उसके चेहरे और होंठों के पास लगा हुआ था, उसके कंधे पर भी आ गया था. आज इतने महीनो बाद ये सब करने के बाद भी जाने क्यों उसे गन्दा सा नहीं लग रहा था.

इक़बाल की तेज़ सांसें कमरे में गूँज रही थी, उसका लुंड अभी भी आधा खड़ा हुआ था. काश आज सुप्रिया के पीरियड न चल रहे होते. इक़बाल ने उसे अपने पास खींचते हुए फिर से कास के भींच लिया - पूरा पानी निकाल दिया आपने आज... मज़ा hi आ गया... एक बार आप ठीक हो जाये.... फिर आपकी गांड मारूंगा अचे से... मरवाएँगी न अपनी गांड मुझसे...

सुप्रिया ने कांपते हुए इक़बाल को कास के पकड़ लिया. उसके लुंड को अपनी गांड में सोचते hi उसके नीचे एक अलग सी सनसनी होने लगी थी.
 
सॉरी ी हैवे बीन ों हॉलीडेज एंड स्पेंडिंग टाइम विथ फॅमिली एंड वेरियस थिंग्स गोइंग ों. ी डिसागरी ों थे पॉइंट अबाउट Kriti’s स्टोरी बीइंग ा टाइम वस्टर फॉर में. ी लिकेड राइटिंग तहत ा लोट.

ी विल लुक तो पोस्ट उपदटेस आफ्टर थे नई ईयर. ी ऍम कर्रेंटली नॉट अबले तो व्रिठे थे स्टोरी बोथ फ्रॉम ा टाइम पर्सपेक्टिव एंड थॉट पर्सपेक्टिव.
 
अपडेट 102

अगली सुबह सुप्रिया ने रुबीना को नहीं बताया की पिछली रात को क्या हुआ था. उसे बोहोत ज्यादा शर्म आ रही थी. वह किस मुँह से बताती की वह अब इक़बाल का लुंड भी चूस चुकी थी. और अब तोह वह उसके सामने खुला होकर उसकी गांड लेने की बात कर रहा था. इस सब के बारे में सोचते hi वह काँप उठी.

दिन में अचानक से घर के बहार कुछ शोर सा हुआ और कोई ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा खटखटाने लगा. सुप्रिया उस वक़्त नीचे hi बैठी थी, और उसने रुबीना की और देखा. शायद गली की hi किसी औरत की आवाज़ आ रही थी.

रुबीना ने सुप्रिया को इशारा किया - रुको... मैं देखती हूँ...

रुबीना ने जैसे hi दरवाज़ा खोला, पड़ोस की ek-do औरते dan-danati हुई अंदर की और आ गयी - रुबीना भाभी... सुना आपने... सुना आपने...

रुबीना - क्या हुआ? क्या सुना मैंने?

औरत - बाजार में... मार पिटाई हो गयी...

रुबीना - किसकी?

औरत - इक़बाल भाई जान की... जुनैद से...

ये सुनते hi सुप्रिया भी एकदम से कड़ी हो गयी और उन दोनों के मुँह से निकला - क्या???

औरत - हाँ... आपने नहीं सुना अब तक? बुरा हाल कर दिया उसका पीट पीट कर...

वह औरत रुबीना और सुप्रिया को और डिटेल से सब बताने लगी - सुना है... इक़बाल भाई जान उसकी दूकान पर पहुंच गए थे... और फिर दोनों में खूब बहस हुई... और फिर इक़बाल भाई जान ने उसकी धाए धाए करके उसकी कनपट्टी पर तमाचे लगाने शुरू कर दिए... फिर वह भी वापिस हाथ पेअर चलने लगा पर इक़बाल भाई जान के सामने कहाँ टिकना था उसे.

अंदर से अम्मी जी भी निकल आयी थी - किस बात पे हो गया इतना फसाद...

औरत - पता न अम्मा जी... पर वह जुनैद है तोह बड़ा छिछोरा, आती जाती औरतो और लड़कियों को ऐसे देखे है... ाचा हुआ उसके साथ.

रुबीना ने सुप्रिया की और घूर कर देखा, और सुप्रिया ने डर के मारे आँखें झुका ली. औरतो के जाने के बाद वह उसे अकेले में लेकर गयी.

रुबीना की आवाज़ में आज एक अलग गुस्सा था - मैंने तुझे कल बोलै था न... इक़बाल को कुछ मत कहना... पर तुझे समझ नहीं आया लगता है...

सुप्रिया ने सफाई देने की कोशिश की - पर भाभी... सुनिए तोह... इसमें मेरी क्या गलती है...

रुबीना की आवाज़ कड़क थी - अपने शौहर को न जानती तू... पूरा गाँव सर पर उठा लेगा तेरे लिए... पर सहमत तोह हमारी hi आएगी न... और तेरी भी...

सुप्रिया ने अब तक रुबीना का ये रूप नहीं देखा था, और वह सेहम से गयी थी. वह जा कर ऊपर छत पर धुप में बैठ गयी. उसका मुँह उतरा हुआ, जैसे किसी ने उसकी पिटाई कर दी हो. हिना के घर आने पर भी उस पर कोई असर नहीं हुआ.

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पूरे दिन और शाम रुबीना ने भी उससे अच्छे से बात नहीं करि. जब रात को इक़बाल और अब्बास घर वापिस आये तोह सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धक् धक् कर रहा था. उसने रसोई से hi झाँक कर देखा. इक़बाल के चेहरे और माथे पर कुछ खरोचों के निशाँ लगे हुए थे. अब्बास का चेहरा भी गुस्से में तमतमाया हुआ सा था.

रुबीना ने उसे धीरे से कहा - तू बहार मत जइयो... मैं खाना परोस दूंगी... बस ये रोटी सेक ले...

सुप्रिया ने धीरे से हाँ में सर हिलाया.

दोनों भाई खाना खाने बैठे और अब्बास बीच में hi शुरू हो गया - क्या ज़रुरत थी बाजार में आज इतना तमाशा करने के... वही पहले वाले हाल हो गए तेरे...

इक़बाल कुछ नहीं बोलै और छुप चाप खाना खता रहा.

अब्बास - बोलोगे कुछ? जुनैद, उसके भाई, उसका पूरा खानदान छुप नहीं रहेंगे... अभी तोह मामला और बिगड़ेगा... पता है न तुझे की उसका बाप कैसा है?

इक़बाल धीमी पर भारी आवाज़ में बोलै - आप इतना ... मैं देख लूंगा..

अब्बास - हाँ... ये सही है... अभी भी बिलकुल वही रुख है... तू देख लेगा सब... बड़ा पहलवान है न...

इक़बाल - उसके जैसो तोह दस संभाल लूंगा मैं...

अब्बास - पर हम लोग... हम लोग तोह न संभाल सके न... कल सुबह उनके घर जाकर बात को ख़तम करियो... माफ़ी मांग लियो उनसे...

इक़बाल - मैं न कर पायु ये...

अब्बास ने गहरी सांस ली - ारी... हुआ क्या था? तरह तरह की बातें कर रहे है लोग. जवान लड़का hi तोह है वह... लड़के तोह ऐसे hi मजाक करे फायर...

इक़बाल - मजाक न था... और मेरी बीवी से कोई मजाक भी करे... तोह मैं बर्दाश्त न कर सकू... साले का लुंड काट कर हाथ में दे दूंगा.

अब्बास - हद्द हो गयी ....ऐसा क्या छेड़ दिया उसने तेरी बीवी को... मैं पूछू की तेरी वह शहरी दुल्हन कर क्या रही थी बाजार में उसके साथ कड़ी...

इक़बाल की आवाज़ एकदम भारी हो गयी थी - आप सुप्रिया को न लायो इस सब के बीच में...

अब्बास - क्यों न लायउ? उसी की वजह से तोह हुआ है ये सब. वापस आया भी तोह पता नहीं किसको अपने साथ भगा लाया. इसकी वजह से न तोह तेरा काम में मैं लगे. इतनी जवान बीवी को ले तोह आया पर उसे खुश भी रख पा रहा है? पता चले की उसकी जवानी में आग लगी है, और वह तेरी पीठ पीछे और मर्दो के साथ...

इक़बाल का चेहरा गुस्सा में लाल हो रहा था - आप रुबीना भाभी से पूछो न... वह क्या कर रही थी बाजार में... क्यों अकेली छोड़ कर गयी थी सुप्रिया को वहां...

ये सुनते hi अब्बास ने एकदम इक़बाल के एक ज़ोर का खींच के तमाचा लगाया. इक़बाल ने गुस्से में अब्बास को घूरा और फिर अपनी थाली आगे सरकता हुआ तेज़ सांसें छोड़ता हुआ तुरंत वहां से खड़ा हो कर ऊपर की और चल दिया.

उनके बीच जो अभी हुआ वह सुनकर और देखकर सुप्रिया बुरी तरह हिली हुई थी, उसके हाथ में पकड़ा हुआ चिंता काँप रहा था. रुबीना ने उसके हाथ से चिंता ले लिया और उसे छुप रहने का इशारा किया.

अब्बास भी उठ के अम्मी जी के कमरे में चला गया और उनकी आपस में बात हो रही थी. हिना भी सेहम कर रसोई में आ गयी थी और रुबीना से सत् कर कड़ी हो गयी. उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे थे.

रुबीना - शठ... छुप हो जा... अब्बू देखेंगे न तोह गुस्सा करेंगे... जा अंदर सो जा... आज मैं तेरे साथ hi सो जयुंगी...

हिना ने हाँ अपना सर रुबीना के कंधे पर रखे रखा और फिर सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए उसे भी अपने पास खींच लिया.

हिना ने हिम्मत करके पूछा - क्या हुआ था... चाचू ने जुनैद को पीटा क्यों? उस कमीने जुनैद ने आपसे कोई बदतमीज़ी की थी क्या? मुझे भी नहीं ाचा लगता वह...

रुबीना ने उसे छुप कराया - हिना... अपनी जबान काम चलाया कर. जा अंदर कमरे में जा और सोने की तैयारी कर.

हिना - आप मेरे साथ सो जायो न आज... और चची को भी साथ hi सुला लेंगे...

रुबीना - ठीक है... मैं आती हूँ... और आज तेरे साथ सो जयुंगी. पर चची को ऊपर जा कर तेरे चाचा को शांत करना है अभी. सुप्रिया... तुम जायो...

सुप्रिया का दिल में काफी घबराहट सी थी, और उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी अकेले ऊपर जाने की. पर रुबीना ने उस एक बार और बोलै, और वह तेज़ कदमो से रसोई से बहार निकलते हुए ऊपर की और सीढ़ियां चढ़ गयी. इक़बाल छत की दूसरी और इतनी ठण्ड में अकेले खड़ा था. इक़बाल जिस तरह से अभी भी तेज़ तेज़ सांसें ले रहा था, वह समझ गयी थी की वह अभी भी गुस्से में है.

सुप्रिया सोचने लगी, शायद उसकी hi गलती थी की इतना सब कुछ हो गया था. उसे रुबीना की बात माननी चाहिए थी और छुप रहना चाहिए था इस सब के बारे में. वह दबे पाँव इक़बाल के नज़दीक पहुंची.

थोड़ी दूर से उसने अपना गाला साफ़ किया - इक़बाल जी....

इक़बाल ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुप्रिया ने फिर आवाज़ लगायी - इक़बाल जी... सुनिए... काफी ठण्ड हो रही है... अंदर कमरे में बैठते है न...

इक़बाल की भर्रायी हुई सी आवाज़ निकली - आप चलिए... मैं आता हूँ...

सुप्रिया ने उलटे चलते हुए एक दो कदम लिए, अभी भी इक़बाल की और देखते हुए और फिर जल्दी से कमरे में घुस गयी. सच बहार बोहोत ज्यादा hi ठण्ड थी और उसकी कुल्फी बन गयी थी बहार.

उसने बिस्तर पर बैठते हुए रजाई ोड ली. अभी भी उसके पीरियड ख़तम नहीं हुए थे तोह पेट में थोड़ा बोहोत अभी भी दर्द था.

कुछ मिनट बाद इक़बाल कमरे में तेज़ी से घुसा और उसने दरवाज़ा बंद करते हुए कमरे की कुण्डी लगा ली. वह सुप्रिया से नज़रें नहीं मिला रहा था पर सुप्रिया उसके चेहरे पर लगे निशाँ साफ़ देख पा रही थी.

सुप्रिया धीरे से कड़ी हुई और इक़बाल के पास आयी. इक़बाल उससे दूर hi जा रहा था की सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया.

सुप्रिया - आपने क्यों किया आज ये सब? क्या ज़रुरत थी उससे लड़ने के...

इक़बाल की मुट्ठी कास गयी और कुछ पल बाद गुस्से भरी आवाज़ निकली - मैं.... मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता कोई आपसे ज़रा सी भी बदतमीज़ी करे... चाहे वह कोई भी हो...

सुप्रिया ने शान्ति से कहा - यहाँ बैठेई... आपके चोट लगी है... मैं साफ़ कर देती हूँ...

सुप्रिया ने इक़बाल को बिस्तर पर बिठाया और एक तौलिये को पानी से हल्का सा गीला करके, उसके चेहरे को साफ़ करने लगी. वह इक़बाल के ठीक सामने कड़ी थी, उसका पतला सा शरीर इक़बाल के चौड़े बदन के आगे.

सुप्रिया साफ़ करते करते उसकी गर्दन तक पहुंची तोह देखा की उसकी गर्दन और कंधे पर भी चोट के निशाँ थे.

सुप्रिया ने उस पर ताना कस्ते हुए कहा - आप तोह इतने बड़े लडके है न. फिर इतनी कैसे लग गयी आपके?

इक़बाल ने सुप्रिया की शकल की और देखा, उसे शायद ये ताना अच्छा नहीं लगा था - कुछ ज़्यादा नहीं लगी है... उस भोस्डिके ने पीछे से ईंटें फैक मारी मेरे ऊपर. साले की सामने से तोह हिम्मत हुई नहीं लड़ने की... फट के हाथ में आ गयी थी... बहनचोद को अगली बार ज़मीन में hi गाड़ दूंगा...

इक़बाल के गाली देने से न जाने क्यों सुप्रिया के शरीर में एक हलचल सी हो चली थी. ऐसा लग रहा था उसका पूरा जिस्म और भी सख्त हो रहा हो.

सुप्रिया - पर लड़ना hi क्यों? शायद सही तोह कह रहे थे अब्बास भाई जान... आप तोह लड़ लोगे... पर बाकी लोग?

इक़बाल ने चौंकते हुए कहा - वह सही कह रहे थे!? आपके बारे में जो उन्होंने कहा... आपने सुना नहीं होगा... उनकी जगह कोई और होता तोह मैं उसे छोड़ता नहीं...

सुप्रिया ने इक़बाल के कंधे को साफ़ करने के लिए उसकी शर्ट के बटन खोले, वहां तोह जख्म और ज्यादा बड़ा लग रहा था. सुप्रिया इक़बाल के और पास आते हुए उसकी टांगो के बीच कड़ी हो गयी. सुप्रिया के मम्मी इक़बाल के चेहरे से बस एक इंच दूर.

जैसे hi गीला तौलिया ज़ख्म पर लगा इक़बाल ने दर्द में एक सिसकी ली और अपना हाथ सुप्रिया की गांड पर रख दिया. सुप्रिया थोड़ा सा हिलते हुए और आगे हो गयी और उसके मम्मी इक़बाल के चेहरे से टकराने लगे.

सुप्रिया ने अपने आप को हल्का सा पीछे करने की कोशिश करि पर इक़बाल के बड़े बड़े हाथ सलवार के बहार से उसकी गांड पर आ ठीके थे. वह उन्हें हलके हलके दबाने लगा.

सुप्रिया ने सिसकी ली - अह्ह्ह्ह.... उह्ह्ह.... रुकिया ना... साफ़ करने दीजिये...

इक़बाल ने सुप्रिया को कास के गांड से पकड़ते हुए अपना होंठ उसके मम्मो पर लगा लिए.

इक़बाल अपना मुँह खोल कर उन्हें कुर्ती के ऊपर से हल्का सा चूसने लगा - ममममम..... मैडमजी....

सुप्रिया - उफ्फ्फ्फ़... क्या कर रहे है आप... और मैंने कहा न... आप मुझे मैडमजी बुलाना बंद कीजिये... सुप्रिया... सुप्रिया नाम है मेरा...

इक़बाल - पता नहीं क्यों... पर एक अज़ाब सा मज़ा आता है आपको मैडमजी बुलाते हुए... वही मैडमजी जिन्हे मैंने पहले पहले लखनऊ में गाडी से उतारते देखा था... साड़ी पहने हुए...

इक़बाल ने सुप्रिया के मम्मो पर हलके से काटा, और सुप्रिया ने आखें बंद करते हुए ज़ोर की सिसकी ली - ममममम... ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...... आपको पता है न... मेरे पीरियड्स अभी भी चल रहे हैं....

इक़बाल - मैडमजी.... आप इतनी खूबसूरत और हसीं हो... जब से हम लोग और करीब आ गए है... अपने आप को रोकना बोहोत मुश्किल हो गया है.

सुप्रिया की सांसें तेज़ हो चुकी थी और उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था. इक़बाल के गरम होंठ फिर से उसके मम्मो को चूसने लगे और उसके हाथ सुप्रिया की गांड को आते की तरह गूंधने लगे. तौलिया अभी भी सुप्रिया के हाथ में था, लेकिन वह अब साफ़ करना भूल चुकी थी. उसका ध्यान सिर्फ इक़बाल के मुँह और हाथों पर था.

इक़बाल ने सुप्रिया के मम्मो से मुँह हटते हुए ऊपर की और सुप्रिया की आँखों में देखा. सुप्रिया को उसकी आँखों में एक जंगली आग जलती हुई दिखाई दे रही थी. उसने सुप्रिया की कमर को पकड़ते हुए अपनी जांघ पर बिठा लिया. सुप्रिया का पतला सा बदन इक़बाल के बड़े से शरीर के आगे छोटा सा लग रहा था.

सुप्रिया को उसका टाइट होता हुआ लुंड अपनी जांघ के निचले हिस्से पर महसूस होने लगा. सुप्रिया की छाती ऊपर नीचे हो रही थी.

इक़बाल ने अपना मुँह सुप्रिया के कान के पास लाते हुए कहा - मैडमजी... आपका जिस्म इतना गरम क्यों हो रखा है... पीरियड में भी आपका ये जिस्म मुझे पागल कर रहा है...

इक़बाल ने सुप्रिया को अपने और करीब खींचा और उसके मम्मी इक़बाल की सख्त छाती पर दबने लगे. सुप्रिया ने एक हलकी सी सिसकी ली. पीरियड में उसके निप्पल काफी सेंसिटिव हो जाते थे.

इक़बाल ने सुप्रिया के गालों पर अपने होंठ फेरते हुए कहा - आज पूरे दिन का गुस्सा निकालना है... आप मेरी मदद करेंगी न...

सुप्रिया ने शर्मा के अपनी आँखें नीचे कर ली. उसे डर तोह लग रहा था पर साथ hi एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट भी हो रही थी. उसने धीरे से हाँ में सर हिलाया - आपको मेरी वजह से इतनी चोट लगी है... जैसे आप कहे...

इक़बाल ने मुस्कुराते हुए अपने पयजामे का नाडा खोला और एक झटके में अपना पायजामा और अंडरवियर नीचे सरका दिया. इक़बाल अपनी उसकी नंगी जांघ पर बैठी हुई थी और इक़बाल का मोटा लुंड उसकी गोरी गोरी जाँघों से टकरा रहा था.

सुप्रिया ने लुंड पर नज़र मारी. वही लुंड जिसे उसने कल मुँह में पहली बार लिया था. मोटा, काला, बिलकुल सख्त, नसे पूरी तरह से तानी हुई. उसका सुपर बिलकुल लाल और चमकदार था. इक़बाल ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए अपने लुंड पर रखा.

इक़बाल - मसलिये इसे.... जैसे कल किया था...

सुप्रिया के छोटे से हाथ से उसका लुंड पूरी तरह पकड़ा भी नहीं जा रहा था. मुट्ठी में लुंड पकडे हुए उसकी उंगलियां आपस में नहीं मिल पा रही थी. सुप्रिया ने गहरी सांसें लेते हुए उसके लुंड को हलके से मसलना शुरू किया. शायद अब ये तोह उन दोनों की रोज़ की आदत बनने वाली थी.

इक़बाल की आँखों में भी एक अजीब सी चमक सी आ गयी थी, जैसे आज जो भी हुआ हो उसे सब भूल गया हो. नीचे खाये चांटे की ज़िल्लत भी. सुप्रिया का मुँह अब पूरी तरह इक़बाल का था, और वह जब चाहे उस में अपना लुंड दाल सकता था.

सुप्रिया ने अपनी पतली हलकी उँगलियों से लुंड को मस्सगे किया. लुंड पूरी तरह खड़ा था इस समय.

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इक़बाल ने सुप्रिया को गर्दन से पकड़ते हुए नीचे बिठाया और अपना लुंड उसके होंठों पर रगड़ना शुरू किया.

इक़बाल - उफ्फ्फ्फ़... आपके ये फूलो जैसे होंठ.... बोहोत मज़ा आता है जब मेरा लोढ़ा इन पर लगता है तोह...

सुप्रिया ने अपने होंठ बंद रखे, पर इक़बाल के लुंड की तेज़ स्मेल उसके दिमाग पर छा रही थी - मममममम...

इक़बाल - आज सब भुलाने के अगर मैं कुछ कह दू... तोह आप नाराज़ न होना मुझसे... बस वह सेक्स करते हुए... आपको बताया था न मैंने...

सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया और अपने होंठ खुद hi खोलते हुए उसके लुंड की टोपी को हलके से चूसा. उसने धीरे से अपनी जीब निकाली और सुपर पर गोल गोल घूमने लगी.

इक़बाल की तोह हालत खराब हो गयी इससे, आज तोह सुप्रिया कल से भी अचे से कर रही थी. वह हल्का सा ऊपर उठा और फिर बैठ गया - चूस लो इसे अचे से आज मैडमजी.... इस लुंड की इबादत करनी है आपको आज...

ठन्डे फर्श पर बैठी सुप्रिया ने उसके लुंड को अपने हाथ पर रखा और उसे हलके हलके चूमना शुरू किया... और फिर अपनी जीब उस पर फेरनी शुरू करि... ऊपर से नीचे तक. लुंड से हल्का हल्का पानी रिश्ते हुए उसकी टांगो पर गिर रहा था.

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इक़बाल - उफ्फफ्फ्फ़... ुह्ह्ह्ह.... बिलकुल रंडियों की तरह लुंड chaat-ti हो आप....

उसकी बात सुनकर सुप्रिया को एक पल के लिए ाचा नहीं लगा पर जाने क्यों उसकी छूट में गीलापन महसूस होना शुरू हो गया था. वह उसे रंडी बुला रहा था, तोह वह ऐसा क्यों महसूस कर रही थी!?

सुप्रिया ने अपना मुँह थोड़ा और खोला और आज जैसे उसका मुँह कल से अपने आप hi बड़ा हो गया हो. लुंड उसकी जीब के ऊपर आ गया और वह नीचे से लुंड को अपनी जीब से चाटने लगी. पता नहीं कैसे उसने ये सब करना सीख लिया था आज.

इक़बाल - अह्ह्ह्हह..... कितना गरम है आपका मुँह... और अंदर तक लीजिये न... गले तक...

इक़बाल ने धीरे से सुप्रिया का सर पकड़ा और उसके सर को अपने लुंड पर आगे पीछे करने लगा. हर धक्के से लुंड थोड़ा और अंदर चला जाता. और सुप्रिया की आँखें और मुँह और बुरी हालत में हो जाते. मुँह से थोड़ी बोहोत लार भी बहार ज़मीन पर टपकने लगी.

इक़बाल - ममममम.... कितना मज़ा आ रहा है मैडमजी.... सुप्रियाआ.... अह्ह्ह्हह....

लुंड बस गले तक hi पहुंच गया था और सुप्रिया गैग होने लगी थी. इक़बाल ने उसके सर पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करि. सुप्रिया ने लुंड को अपने मुँह से बहार निकाला और ज़ोर से सांस लेते हुए इक़बाल की और देखा. इक़बाल का चेहरे जो कुछ देर पहले मुरझाया हुआ सा था, अब उसमे एक अलग hi चमक थी.

सुप्रिया - ममममम.... दर्द हो रहा है मुँह में....

इक़बाल - बस थोड़ा सा और....

इक़बाल ने फिर से सुप्रिया का मुँह पकड़ा और इस बार तेज़ी से लुंड उसके गले में घुसा दिया. सुप्रिया पीछे की और उछाल hi पड़ी थी. इक़बाल ज़ोर ज़ोर से गले में धक्के मारने लगा. सुप्रिया की आँखों के साइड से आंसू निकल आये थे, लेकिन उसने अपने हाथ इक़बाल की जाँघों पर रखे हुए अपने आप को संभाले रखा.

इक़बाल ने अपने हाथ से उसके आंसू पोछे - बस बस... रो नहीं... आपको भी मज़ा आ रहा है... मुझे पता है...

सुप्रिया का मुँह अभी भी लुंड पर आगे पीछे खुद hi हिल रहा था और लुंड पूरी तरह गीला हो चूका था.

इक़बाल ने सुप्रिया की कुर्ती के सिरों को पकड़ते हुए ऊपर उठाना शुरू किया. उसने ज़ोर से खींचा और सुप्रिया की कुर्ती उसके चेहरे पर आ अटकी. सुप्रिया थोड़ा सा पीछे हुई तोह लुंड मुँह से बहार निकल गया और इक़बाल ने कुर्ती को पूरी उतर दिया.

पिंक कलर की टाइट ब्रा में कैद सुप्रिया के मम्मी बेहद सेक्सी लग रहे थे.

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इक़बाल - उफ्फ्फ.... आपका ये गोरा बदन....

सुप्रिया - इक़बाल जी... मैंने कहा न... आज...

इक़बाल - आप फिक्र मत कीजिये... आज कुछ अलग करेंगे... जो आपने पहले कभी नहीं किया होगा...

इक़बाल ने हाथ आगे करते हुए सुप्रिया को ब्रा को भी ऊपर की और खींच दिया और सुप्रिया ऊपर से पूरी तरह नंगी हो गयी. उसने सुप्रिया के कंधो को पकड़ते हुए उसे उठाया और बीएड पर धकेल दिया. सुप्रिया का पेट सांसें लेता हुआ ऊपर नीचे हो रहा था. उसकी छूट काफी गीली हो चुकी थी... मैं में बस एक hi ख्याल चल रहा था, काश वह इस समय अपने पीरियड्स पर न होती.

इक़बाल सुप्रिया के ऊपर छड्ड आया और उसके मम्मो और पेट को चाटने लगा.

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इक़बाल ने सुप्रिया की चूची को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा. इक़बाल उसके मम्मो पर हमला किये जा रहा था - मममम.... ममममम... कितने मुलायम है एई....

सुप्रिया की बेचैनी बढ़ती जा रही थी - उह्ह्ह... उह्ह्ह...

इक़बाल उसके मम्मो को चूसता रहा, और अपने एक हाथ से उन्हें दबाते हुए सुप्रिया के अंदर की आग को और भी भड़का रहा था.

सुप्रिया - ममममम.... ाप्प.... आआ.... क्या नया वाले थे.... करो न....

इक़बाल ने ज़ोर के सुप्रिया के निप्पल पर काटा - बेकरार लग रही हो लुंड के लिए... दर्द कर दूंगा बुरी तरह से.... बोलै न कुछ गन्दा....

सुप्रिया ज़ोर से दर्द में चिल्लाई - Uhhhhh.......aahhh...

इक़बाल - जब तक आप खुलेंगी नहीं... मज़ा कैसे आएगा... आज तोह तुम्हे खुलवा कर रहूँगा...

इक़बाल सुप्रिया के साइड में आ बैठा - हाथ ऊपर कर अपना...

सुप्रिया ने अपना दाया हाथ हवा में ऊपर किया. उसने मम्मी ठण्ड और डर दोनों से ऊपर नीचे काँप रहे थे.

इक़बाल ने अपना हाथ उसकी बगल पर लगाया - उफ्फ्फ... आपकी ये गोरी गोरी बगल....

सुप्रिया उसके ठन्डे हाथों से काँप उठी.

इक़बाल - इनके बालों को हटाना पड़ेगा...

इक़बाल एकदम से खड़ा हुआ और वहीँ कमरे में रखा एक साबुन और रेजर ले आया. सुप्रिया रेजर को देख कर और भी घबरा गयी थी. उसने अपना हाथ नीचे कर लिया था.

इक़बाल ने थोड़ा सा पानी साबुन पर डाला और सुप्रिया की कलाई पकड़ते हुए उसके हाथ को फिर से ऊपर किया. वह उसकी बगल के बालों के ऊपर साबुन को मलने लगा.

ठण्ड में गीले पानी और साबुन से सुप्रिया की कपकपी छोट गयी - ुह्ह्ह्ह... इक़बाल जी... क्या करे हो....

इक़बाल ने पूरी बागली पर अचे से साबुन मॉल दिया और ब्लेड को आगे किया - अब बिलकुल हिलना नहीं.... नहीं तोह काट सकता है...

सुप्रिया ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली, और अपना हाथ बिलकुल इक़बाल के हवाले छोड़ दिया. इक़बाल ने हलके से ब्लेड को उसकी बगल के बालों के थोड़ा ऊपर रखा और फिर उसे नीचे लाते हुए हटा दिया. बाल एक hi झटके में पिघले हुए माखन की तरह उतर कर नीचे गिर गए. उसने ek-do बार और किया बाकी सारे बाल हटाने के लिए.

बाल हटने से सुप्रिया की गोरी बगल का रंग और भी निखार कर दिखने लगा था. इसी तरह उसने दूसरा हाथ ऊपर करते हुए उसके बाल भी निकाल दिए.

सुप्रिया ने अपने दोनों बगलियों को महसूस किया, उन पर ज़रा भी खरोच नहीं आयी थी, बस थोड़े सा खुरदुरापन सा था, जो शायद कोई लोशन या क्रीम लगा कर और भी सॉफ्ट हो सकता था.

इक़बाल ने साबुन और ब्लेड को साइड रखा और फिर से सुप्रिया के साइड में आकर बैठ गया.

सुप्रिया - इक़बाल जी.... ये सब....

इक़बाल - फिक्र मत कर... चल ये वाला हाथ ऊपर कर...

इक़बाल बिस्तर पर खड़ा होता हुआ सुप्रिया के थोड़ा पीछे आ गया और उसकी कंधे पर अपना मोटा गीला लुंड रख दिया. सुप्रिया अपनी आँख के कोने से लुंड की और देख रही थी.

इक़बाल ने सुप्रिया के नाज़ुक से हाथ को पकड़ते हुए ऊपर खींचा और अपने लुंड की चोंच उसकी बगल के गद्दे से टकराने लगा.

सुप्रिया - इक़बाल जी... ये क्या...

इक़बाल ने सुप्रिया का हाथ नीचे किया और उसका लुंड बगल और हाथ के बीच में फास गया. उसकी गोरी बगल से पीछा हुआ लुंड फिर से अपने पूरे आकर में आने लगा था और गरम हो गया था.

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह.... उफ्फ्फ.... कितना गरम है... उफ्फ्फ... ऐसे भी होता है क्या?

इक़बाल - हाँ.... आपकी बगल छोडूंगा आज... मैंने कहा था... आपने कभी नहीं किया होगा ऐसे...

इक़बाल ने सुप्रिया के हाथ को कास को अपने पेअर से अंदर के और दबाया और अपने लुंड को आगे पीछे घिसने लगा. सुप्रिया की गोरी बाहों में कैद उसका मोटा सा लुंड, किसी छिड़िया की चोंच सा लग रहा था.

सुप्रिया को अपनी बगल में एक अजीब सी खुलजी और गर्माहट महसूस हो रही थी - उफ्फ्फ्फ़... कितनी टाइट और गरम है तेरी बगल.... मज़ा आ गया... जब भी तू पीरियड पर होंगी न... तब ऐसे hi छोडूंगा...

इक़बाल थोड़ा सा झुका हुआ सुप्रिया के कंधे पकडे हुए था और लुंड को तेज़ी से आगे पीछे धकेल रहा था. सुप्रिया को भी एक अजीब सा मज़ा आने लगा था. उसने अपना दूसरा हाथ अपनी ब्याह पर लगते हुए लुंड को और अचे से दबा लिया.

सुप्रिया सिसकियाँ लेने लगी - ुह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ... आह्ह्ह्ह....

उसकी छूट तोह नहीं चुद रही थी, पर ऐसा लग रहा था जैसे लुंड सीधे वहीँ असर कर रहा हो. इक़बाल ने थोड़ा और झुकते हुए पीछे से उसके मम्मो को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें ज़ोर से दबाने लगा.

इक़बाल - अह्ह्ह्ह.... बहनचोद.... ुह्ह्हह्ह....

सुप्रिया ने सिसकियाँ लेते हुए अपनी आँखें बंद कर ली - ुह्ह्ह्ह... और तेज़ी से करो न....

इक़बाल - साआईई... तुझे भी मज़ा आ रहा है अब.... अह्ह्ह्ह.... तेरी बगल फाड़ दूंगा आज....

सुप्रिया की बगल घिसने से जलने लगी थी - अह्हह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्हह्ह.... इक़बाल जी....

इक़बाल - आह्ह्हह्ह्ह्ह..... पागल बना दे आपका ये जिस्म किसी को भी... पर ये किसी और नहीं सिर्फ मेरा है अब.... है न...

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह.... ममममम... हाँ... सिर्फ आपका...

इक़बाल - मुझे आप पर पूरा भरोसा है... आप कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं हो... भाई जान ने जो कहा... आप मुझसे खुश हो न...

सुप्रिया का पूरा जिस्म इक़बाल के स्पर्श से पागल हो चूका था - ुह्ह्ह्ह.... मममममम.... आप बोहोत अचे हो इक़बाल जी... ुह्ह्ह्ह....

इक़बाल - आप किसी और के बारे में नहीं सोचती न... न अपने उस नामर्द पति के बारे में... न अपने उस कमीने आशिक़ के बारे में... और उस हरामज़ादे जुनैद के बारे में तोह बिलकुल भी नहीं...

अतुल और विक्रम के बारे में सुनकर सुप्रिया का मैं ज़रा सा विचलित हुई पर वह इस वक़्त पूरी तरह इक़बाल की होना चाहती थी. उसकी गन्दी बातें उसे बुरी तरह गरम कर रही थी, उसकी पंतय अछि तरह से गीली हो चुकी थी - अह्ह्ह्हह.... नननननाहठीई.... किसी के बारे में नहीं.... बस आपके बारे में....

इक़बाल ने सुरपिया के कंधो को ज़ोर से हिलाते हुए अपने झटको की स्पीड बड़ाई - अह्ह्ह... उग्गगग.... मुझे पूरा यकीन है तुझ पर... तू बस मेरी hi रहेगी...

सुप्रिया के मम्मी इतनी तेज़ उछाल रहे थे की उसे उन्हें पकड़ना पद गया था.

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पूरे कमरे में चाप चाप चाप चाप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी. सुप्रिया की कमर और ब्याह का हिस्सा जहाँ लुंड रगड़ रहा था पूरी तरह लाल हो चूका था, पर उसके अंदर की आग अभी भी जाली हुई थी.

बीच बीच में इक़बाल एक बगल से दूसरी बगल तक पहुंच जाता था.

सुप्रिया को छूट का पानी रिसने लगा था, उसका हाथ दुखने लगा था, उसके मुँह से निकला - ुह्ह्हह्ह.... बोहोत जल रहा है...

इक़बाल भी झुके झुके थक चूका था, उसने सुप्रिया को बीएड पर नीचे धकेला और ज़मीन पर उतर कर उसकी बगल पर फिर से ज़ोर से अपना लुंड हिलने लगा.

सुप्रिया - उम्मम्मम..... ुह्ह्हह्ह.... इक़बाल जी.... ुह्ह्ह्ह... बस कीजिये....

इक़बाल - कुछ बोल पहले.... फिर बस करूँगा.... कोई गाली निकल न...

सुप्रिया - ुह्ह्ह्ह.... आअह्ह्ह्ह... नहीं....

इक़बाल ने गुस्से में अपने दांत भींचे और ज़ोर से बोलै - बोल न.... नहीं तोह फाड़ दूंगी तेरी बागली आज.... बोल... तू मेरी रंडी है... मेरी रंडी है न...

सुप्रिया ने दर्द में सर हिलाते हुए कहा - ुह्ह्ह्ह.... हाआआआं.... मैं आपकी रनडीई हूँ.... उह्ह्ह....

इक़बाल का लुंड ज़ोर से फड़का और एक तेज़ धार से साथ उसके लुंड का सारा पानी बिस्तर को पार करता हुआ ज़मीन पर जा कर गिरा... बाद की बूंदे सुप्रिया के गोर चिकने मम्मो पर फिसलते हुए नीचे गिरने लगी, कुछ पानी उसकी चूचियों पर भी आ गया. इक़बाल अभी भी उसके हाथ को कास के पकडे हुए अपना लुंड उसकी बगल में दबाये हुए था.

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इक़बाल का पानी धीरे धीरे रिस्ता हुआ पूरा निकल चूका था. सुप्रिया ने नीचे उसकी छूट का पानी भी निकल चूका था. वह अभी भी काँप रही थी. इक़बाल ने उसके साथ let-te हुए उसे गले लगा लिया. उसका खुद का माल उसकी छाती पर चिपक रहा था.

सुप्रिया के नंगे मम्मी अंदर बहार फूलते हुए इक़बाल की छाती से टकरा रहे थे. दोनों सांसें लेते हुए एक दुसरे से चिपक गए. इक़बाल का गुस्सा धीरे धीरे शांत हो रहा था. सुप्रिया ने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया. बिना चूड़े hi उसे आज लग रहा था जैसे वह कितनी चुद गयी हो.

इक़बाल ने उसकी हालत समझते हुए कहा - आग कुछ काम हुई या और भड़क गयी...

सुप्रिया ने शर्म से इक़बाल की कास के पकड़ लिया.

इक़बाल ने धीरे से उसकी पीठ को मसलते हुए कहा - सुप्रिया... तू मेरी जान है... और अब तू सिर्फ मेरी रहेगी. कहीं नहीं जाएगी....

सुप्रिया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया - मैं कहीं नहीं जाने वाली...

इक़बाल - मैं करता है तुझे साथ लेकर यहाँ से भाग जायु... और हम अकेले कहीं रहे... जहाँ बस तू और मैं हो... और हम कभी भी कुछ भी कर सकते...

सुप्रिया चुप चाप लेती उसकी बात के बारे में सोच रही थी. क्या यहाँ से निकलना सही होगा, क्या खतरा अब ताल गया होगा, क्या वह लोग कहीं शहर में बेहतर जिंदगी जी पाएंगे. पर क्या एहि उसकी जिंदगी थी अब, इक़बाल की हो कर रह जाना?
 
Hi थोडानउघत्य... थैंक यू फॉर योर कमैंट्स... ी रियली लिखे रीडिंग एंड लिसनिंग तो फीडबैक. आईटी हेल्प्स में ा लोट.

तवो थिंग्स ी दीद वांट तो क्लैरिफी.

ओने, व्हेन ी फर्स्ट स्टार्टेड राइटिंग थिस स्टोरी, ी वास् स्टिल एक्सपेरिमेंटिंग एंड लर्निंग हाउ तो व्रिठे ा गुड स्टोरी. ी मेड ा लोट ऑफ़ मिस्टेक्स एंड लर्न्ट, एंड िफ़ ी कुड re-write थे स्टोरी नाउ, ी वोउल्ड चेंज सम थिंग्स, ेस्पेशलय थे फर्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी एंड कटाई आउट सम पीसेज और चेंजिंग सर्टेन थिंग्स. ी हैवे आल्सो मेड सम मोरे मिस्टेक्स मोरे रिसेंटली तहत अरे त्रौब्लिंग में, बूत ी विल तरय तो फिगर ठोस आउट. तहत इस प्रॉबब्ली थे ड्राबैक ऑफ़ राइटिंग एंड पोस्टिंग ा स्टोरी इन एपिसोडिक फॉर्मेट, वेयर यू कन्नोत जो बैक एंड फिक्स थिंग्स िफ़ समथिंग केस तो योर मंद लेटर.

सेकंड, सॉरी िफ़ ी वास् ुनाबले तो कवी थिस प्रॉपरलय, बूत तेरे डेफिनिटेली है बीन सम टाइम तहत पास्ड इन थे विलेज बिफोर सुप्रिया एंड इक़बाल गोत क्लोज. एटलीस्ट 6 मोनथस इन मंद, मय्बे स्लिंगटली लॉन्गर. ी शुड हैवे बेटर एक्सप्रेस्ड थिस इन थे स्टोरी, एंड तहत विल फॉल ईंटो ठोस टाइप ऑफ़ थिंग्स तहत ी विश ी कुड जो बैक एंड चेंज.

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विथ तहत साइड, ी थिंक वे अरे गेटिंग टुवर्ड्स थे एन्ड ऑफ़ थिस पर्टिकुलर स्टोरी, नॉट इम्मेडिएटली, बूत डेफिनिटेली इतस नरेर तहत पीपल मई थिंक. लिखे इन थे लास्ट ऑवर ऑफ़ ा 3 ऑवर मूवी.

ी वोउल्ड लिखे तो कंटिन्यू तो व्रिठे मोरे स्टोरीज अबाउट सम ऑफ़ थे चरक्टेर्स तहत वे मेट दूरिंग थे जर्नी एंड तेरे अरे एटलीस्ट 2 डिस्टिंक्ट स्टोरीज तहत हैवे आलरेडी फोर्मेड इन माय हेड विथ लैसर ुसेड चरक्टेर्स (थे अरे नॉट हु यू वोउल्ड थिंक थे अरे). इवन थौघ ी कॉन्ससियसली स्टार्टेड राइटिंग थिस स्टोरी अस ा सेक्स स्टोरी, ी दिस्कोवेरेड व्हिले राइटिंग थिस स्टोरी तहत ी एंजोयेड राइटिंग थे स्टोरी एलिमेंट साइड ऑफ़ आईटी मोरे थान थे सेक्स सीन्स. ी ऍम स्टिल नॉट ग्रेट ात सेक्स सीन्स.

ी वोउल्ड लिखे तो व्रिठे ठोस इतर स्टोरीज अस स्टोरीज फर्स्ट वेयर सेक्स हप्पेंस नैचुरली अस part ऑफ़ ठोस स्टोरीज, राथेर थान सेक्स बीइंग थे के थिंग तहत ड्राइव्स थे स्टोरी. ी थिंक थे मिगहत नॉट बे वेल रेसिवेद हेरे (तू बोरिंग), बूत ी विल सी वेयर तो पोस्ट थम वन्स ी गेट अलोंग विथ ठोस.
 
अपडेट 103

अगली रात भी सुप्रिया और इक़बाल के बीच ऐसा hi कुछ खेल चलता रहा. पहले सुप्रिया इक़बाल का लुंड अपने मुँह में दबे हुए काफी देर तक उसे चूसती रही. उसके बाद इक़बाल ने अपना लुंड सुप्रिया के चिकने तलवो पर घिसते हुए अपना सारा छुम उसके गोर पैरो पर निकाल दिया. वह सुप्रिया के जिस्म के हर हिस्से पर अपना निशाँ छोड़ना चाहता था.

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सब करने के बाद दोनों साथ में लेते हुए थे. इक़बाल पूरा नंगा और सुप्रिया ने कपडे पहने हुए थे. इक़बाल की उंगलियां सुप्रिया के मम्मो पर हलके हलके घूम रही थी. सुप्रिया की चूचियां उसके छूने से पूरी तरह कड़ी हुई उसके कपड़ो के अंदर से उभर रही थी.

इक़बाल ने अभी भी अपना लुंड सुप्रिया के हाथों में दिया हुआ था और वह उसे हलके हलके मसल रही थी.

इक़बाल ने उसकी चूचियों को सहलाते हुए कहा - अब तोह तुम्हारे पीरियड ख़तम हो गए होंगे…

सुप्रिया - हाँ… बस शायद कल से नहीं आएंगे…

इक़बाल की आँखों में चमक आ गयी - फिर तोह कल रात… तुम्हे जैम के खुश करूँगा…

ये सुनते hi सुप्रिया की छूट फड़फड़ाने सी लगी, एक अलग hi बिजली सी दौड़ गयी थी उसके जिस्म में. इक़बाल के लुंड को लेने का सोचते hi जाने उसे क्या हो जाता था. पर उसने बनावटी गुस्से से कहा - यानी… दर्द कर डोज अचे से…

इक़बाल ने उसके मम्मो को मुट्ठी में भर लिया - दर्द नहीं… प्यार… प्यार करूँगा तुम्हे... अचे से…

सुप्रिया ने अपनी कुर्ती को ज़रा सा ऊपर करते हुए अपनी कमर पर लगा निशाँ दिखाया - ऐसा वाला प्यार… जो निशाँ दाल दे…

उसकी बाहों, छाती और बगल के बीच एक गहरी सी लाइन बन गयी थी पिछली रात लुंड के घिसने से. इक़बाल ने वहां हलके से छुआ तोह सुप्रिया ने दर्द में सिसकी भरी.

सुप्रिया - ऊऊऊह्ह्ह.... मत छुओ.... दर्द हो रहा है...

इक़बाल ने वहां हलके से सहलाया - ये सब भी प्यार का हिस्सा hi होता है… मुझसे पहले कभी ऐसा प्यार महसूस किया था.

सुप्रिया के मैं में ख्याल सा उठा, हर मर्द जाने क्यों ऐसा सोचता है की उससे बेहतर किसी और में कभी किया hi नहीं होगा. पर हाँ शायद इक़बाल के लिए ये बात सच थी. उसके साथ रहते रहते उसे महसूस हो रहा था की जैसे वह खुद बदल सी गयी हो. यहाँ रहते रहते उसे 6-7 महीने हुए थे, पर ये 6 महीने 6 साल के बराबर लग रहे थे. जैसे वह हमेशा से यहाँ रहती आयी हो और एहि उसकी जिंदगी हो.

इक़बाल को भी शायद सुप्रिया के साथ अब कोई झिझक नहीं रही थी. उसने अपनी ऊँगली सुप्रिया के मम्मो के बीच में घुसाई और उसे अंदर बहार करने लगा, जैसे माप रहा हो की उसको लुंड को कैसे लगेगा.

इक़बाल - बोलो न… मुझे ाचा लगता है जब तुम बोलती हो इस सब के बारे में…

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए कहा - मुझे नहीं अच्छा लगता जब आप मुझसे ये गंदे शब्द बुलवाते हो तोह...

इक़बाल ने सुप्रिया के होंठों को हलके से दबाया - क्यों? अच्छा तोह लगा था कितना उस दिन. तुम्हारे मुँह से सुनते hi मेरा माल तोह एकदम से hi निकल गया था. बस कल रात तक का इंतज़ार करो... ऐसे ऐसे शब्द निकलवायुंगा तुम्हारे मुँह से...

ये सुनते hi सुप्रिया को अपनी पंतय हलकी सी गीली होनी महसूस हो गयी थी और उसका पूरा जिस्म काँप उठा. अब तोह इक़बाल के मुँह से आप काम और तू और तुम ज्यादा आराम से निकल रहा था.

सुप्रिया इक़बाल के नंगे बदन से चिपक कर उसके गले लग गयी, और शिकायत भरी आवाज़ में कहा - क्यों मुझे बिगाड़ना चाहते हो...

इक़बाल ने उसे - तुम्हे तोह तबसे बिगाड़ने का मैं था जब तुम्हे पहली बार देखा था...

सुप्रिया - आप कई बार कह चुके हो - जब पहली बार देखा था... कब देखा था मुझे पहली बार... मुझे तोह याद भी नहीं...

इक़बाल ने सोचते हुए सुप्रिया के गाल पर प्यार से हाथ फेरा - पहली बार... अचे से याद है मुझे... उस दिन एक गाडी बिल्डिंग में अंदर घुस रही थी और उसका शीशा नीचे था. उसमे एक बेहद हसीं... दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की बहार की और देख रही थी... गोरा मासूम चेहरा... बड़ी बड़ी आँखें... गुलाब जैसे होंठ... चेहरे पर आते हुए बाल. वह आप थी... बहार मेरी तरफ देखती हुई... हमारी नज़रे मिली थी.

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सुप्रिया हलके से हसी - उफ्फ्फ... आप तोह बिलकुल शायरों की तरह बात कर रहे है...

इक़बाल - मैडमजी... आप ये तोह नहीं सोचती की मैं अनपढ़ ज़ाहिल हु? मैं बताया था आपको... मैंने पड़े की है...

सुप्रिया - नहीं नहीं मैंने ऐसा नहीं सोचा... और फिर से मैडमजी?

इक़बाल - बस उस दिन की याद आ गयी... शायद आप पहली बार वहां आयी थी कहीं बहार से...

सुप्रिया - मुझे तोह अब वह दिन याद भी नहीं... पर हाँ शायद...

इक़बाल ने दांत भीचते हुए कहा - तुम्हारे साथ वह हरामज़ादा लड़का और आपका पहला शौहर भी था...

सुप्रिया समझ गयी वह राहुल की बात कर रहा था... हाँ शायद वह hi तोह उसे और अतुल को घर ले गया था स्टेशन से उस दिन. उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा, क्या तब पहली बार से hi इक़बाल की नज़रें उस पर थी.

सुप्रिया ने हिचकिचाते हुए पुछा - टोह्हह्ह.... तब... जब मैं वहां रह रही थी... तब भी आप मेरे साथ ये सब करना चाहते थे? मुझे कभी ऐसा लगा नहीं...

इक़बाल - मैं ऐसे कैसे तेरे साथ बिना तेरी मर्ज़ी के कुछ भी करने का सोच लेता... मैंने कभी तुझे कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं समझा था... की उसके शौहर के होते हुए उसके साथ वह सब कर लू...

सुप्रिया की आँखें शर्म से झुक गयी. इक़बाल जानता था की वह अपने पति के इलावा और मर्दो के साथ भी सेक्स किया था. उसके मुँह से किसी तरह निकला - और बाकी साड़ी औरते... आपने उस रात कहा था न... की आपने उस बिल्डिंग में और औरतो के साथ भी ये सब किया था...

इक़बाल - आप उन लुंड की भूकी रंडियां की बात कर रहे हो मैडमजी?? वह मुझे अपने घर बुलवाती थी छोड़ने के लिए... उन्हें मेरे मोठे लुंड से छोड़ना जो पसंद था. आपके बराबर वाले घर में रहती थी न वह छिनाल मैडमजी...

सुप्रिया कुछ पल सोचते हुए उसका नाम hi ढूंढ़ती रह गयी थी - कौन, मेघना!??

इक़बाल - हाँ शायद एहि नाम था उसका... उसे अपनी गांड छुड़वाने में बड़ा मज़ा आता था...

सुप्रिया एक पाल के लिए काँप सी गयी और उसे शुरू में उस फ्लैट में रहते हुए बराबर वाले फ्लैट से आती हुई सेक्स की आवाज़ें याद आने लगी. क्या जब वह आवाज़ें आती थी, तब मेघना और इक़बाल सेक्स कर रहे होते थे? अगर इक़बाल उस सब को रंडियां कह रहा था, तोह उसने उसके मुँह से भी तोह ये शब्द निकलवाया था. और सच में क्या वह भी उसकी नज़र में रंडी hi थी जो इतने मर्दो के साथ.

ये सोचते hi सुप्रिया की सांसें तेज़ हो गयी और उसकी आँखें और गाला भर आया.

इक़बाल ने तुरंत उसका बदलता हुआ चेहरा पड़ लिया - क्या हुआ... एकदम से परेशान क्यों हो गयी? मैं तुझे यकीन दिलाता हूँ... बस तू hi मेरे लिए अब सब कुछ है... मैं किसी और के बारे में कभी सोच भी नहीं सकता.

सुप्रिया ने हलकी सी सिसकी ली. वह समझ नहीं पा रही थी वह कैसे बोले की वह क्या सोच रही थी.

इक़बाल - बोलिये न... क्या हुआ...

सुप्रिया भरे हुए गले से बोली - आपने.... आपने कल रात... मुझे रंडी बुलाया था... क्या आप मेरे बारे भी में... ऐसा सोचते हैं...

इक़बाल ने सुप्रिया को कास के जकड लिया उसे शांत करने लिए - नहीं नहीं... कभी भी नहीं... वह तोह बस हमारे बीच की प्यार की बात है... एक दुसरे के साथ पूरी तरह खुल जाने के लिए... और वैसे भी मैंने तुझसे बस एहि तोह कहने को कहा था की तू मेरी रंडी है... सिर्फ मेरी... और किसी की नहीं...

सुप्रिया - पर भी भी... मुझे अजीब सा लगता है सुन्न कर... ऐसा लगता है जैसे आप मुझे गलत समझ रहे हो…

इक़बाल ने उसकी मैं को पड़ते हुए कहा - पुराणी बातों के बारे में मत सोचो... और उस जिस दिन से तुम मेरी बीवी बानी हो... बस ये जान लो की हम दोनों एक दुसरे के लिए बने थे... और जो कुछ हुआ वह हमें यहाँ तक ले आया...

सुप्रिया इक़बाल से चिपकी रही, उसने धीरे से पूछा - सीमा... आपकी पहली बीवी... उससे भी ये सब बुलवाते थे क्या?

इक़बाल हस्ते हुए बोलै - वह... उसे बुलवाने की ज़रुरत hi नहीं पड़ती थी... वह खुद hi अपने आप मुझे गालियां देने लग जाती थी ये सब करते हुए... मैं तेरे मुँह से भी वही सब सुन्ना चाहता हूँ...

इक़बाल ने अपने होंठ सुप्रिया के होंठों पर लगा दिए और उन्हें ज़ोर से चूसने लगा. सुप्रिया भी अपने होंठ खोलते हुए उसे चूम रही थी.

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________________________________________

अगली सुबह इतवार था, और हिना को भी कॉलेज नहीं जाना था, सो सब लोग थोड़ा आराम से hi सारे काम करते थे. इक़बाल और अब्बास के बीच अभी भी बोल चाल बंद थी, और अब्बास नीचे बैठा खाना खा रहा था और इक़बाल सीढ़ियों के पास बैठा अपने जूते ठीक करने में लगा था.

तभी दरवाज़े पर एक ज़ोर की खत खत की आवाज़ हुई. रुबीना दरवाज़े के पास कड़ी थी, और वह दरवाज़ा खोलने लगी. रुबीना ने देखा की बहार तीन आदमी खड़े थे, उनमे से एक तो जुनैद hi था. दूसरा उसका बड़ा भाई, और तीसरे उन दोनों के अब्बू. उन्हें देखते hi रुबीना के चेहरे पर परेशानी साफ़ झलकने लगी. पता नहीं ये लोग यहाँ क्या करने आये थे?

रुबीना सोच hi रही थी की अब्बू ने मुस्कुरा के कहा - आदाब रुबीना बेटी... अब्बास मियाँ घर पर है?

रुबीना दरवाज़ा पकडे कड़ी रही - जी... हैं...

अब्बू - अंदर आने के लिए नहीं कहोगी रुबीना बेटी...

रुबीना थोड़ा साइड हुई और अंदर आने का इशारा किया - आइये... अंदर आइये...

रुबीना कुछ कदम अंदर आयी और उन तीनो के देख कर इक़बाल झट से खड़ा हो गया और उसकी मुट्ठियां बंद हो गयी. अगर वह यहाँ बदला लेने आये थे तोह वह उनके लिए पूरी तरह तैयार था. उसने जुनैद की आँखों में देखते हुए उसे घूरा.

पर अब्बू इक़बाल को नज़र अंदाज़ करते हुए अंदर बैठक की तरफ चल दिए. अब्बास उन्हें देख कर खाने की प्लेट को साइड में सरकने लगा.

अब्बू - अब्बास मियाँ... ारी... हमारी वजह से अपना खाना बीच में मत छोडो... मेरे लिए गुनाह का सबब न बन जाये...

अब्बास - खान साब... आप ऐसा क्यों बोल रहे है... आइये बैठिये...

खान साब - बैठने से पहले आपसे एक शिकायत है...

जुनैद के अब्बू ने इक़बाल की और देखा, और अब्बास को शायद समझ आ गया वह यहाँ क्यों आये थे.

अब्बास - माफ़ कीजिये खान साब... इक़बाल ने जो किया...

खान साब ने उसकी बात kaat-te हुए कहा - बिलकुल सही किया इक़बाल ने... अपनी इज़्ज़त सबको प्यारी होती है... और होनी भी चाहिए...

उनके ऐसा कहते है वहां का सारा माहौल hi एक डैम से हल्का हो गया. इक़बाल की बंद मुट्ठिया थोड़ी ढीली हो गयी.

खान - इस नालायक ने जो किया... मुझे सब पता चला... तुम मुझे आकर बताते अगर तुम्हारी बहु को कुछ अच्छा नहीं लगा था तोह. मैं खुद इसे चौक पर ले जा कर नंगा करके इसकी खाल उधेड़ देता...

अब्बास ने हाथ से इशारा किया - नहीं नहीं... लड़का है... गलती हो जाती है... जवानी में तोह जोश में लड़के पता नहीं क्या क्या कर लेते है... इसने तोह ऐसा कुछ नहीं किया... हमारा इक़बाल तोह... खैर... रुबीना... ज़रा शरबत या चाय बना लो...

रुबीना जल्दी से रसोई घर में घुस गयी. सुप्रिया इस वक़्त अंदर के कमरे में हिना के साथ बैठी थी. उनका दरवाज़ा खुला था तोह वह बहार से आ रही आवाज़ें साफ़ सुन पा रहे थे, बस उन्हें देख नहीं पा रहे थे.

कुछ hi देर में हालत थोड़े ठीक से हो गए थे. वह तीनो और अब्बास बैठ कर बात कर रहे थे और इक़बाल वहीँ पास में खड़ा था. उसके चेहरे पर अभी भी थोड़ा सा गुस्सा झलक रहा था, जैसे वह खुश न हो उन्हें यहाँ देख कर.

खान साब - अब्बास बीटा... तुमने बात रफा दफा कर दी... मैं बोहोत खुश हूँ...

अब्बास - आप बड़े हो कर यहाँ आये हमारे यहाँ... वही काफी है... माफ़ी की तोह बात hi नहीं है... इक़बाल की भी गलती थी इस सब में...

खान साब - पर लोग तोह कैसी कैसी बातें बना रहे है न... जैसे पता नहीं क्या hi कर दिया हो इसने...

अब्बास - हम्म्म.... हाँ ये तोह है... बदनामी तोह काफी हुई है...

खान साब - मैं चाहता है की साड़ी बात डाब जाये और गाँव में दिख जाये की हम लोग सब साथ है... कोई लड़ाई मरई की बात न है...

अब्बास - हाँ बिलकुल... जैसे आप कहे...

खान साब - उसके लिए... मैं चाहता हूँ... की जुनैद का रिश्ता तुम्हारी हिना से हो जाये...

रुबीना और इक़बाल ने तुरंत एक दुसरे की और देखा, और अंदर बैठी हिना बुरी तरह गुस्से में आते हुए सुप्रिया से चिपक गयी.

अब्बास - जी... ये तोह बड़ी अच्छी बात है...

रुबीना ने पीछे से बोलै - हिना तोह अभी छोटी है... पड़े कर रही है कॉलेज में...

अम्मी भी काम नहीं रही बोलने में - पड़े लिखे तोह होती रहेगी... गाँव की गाँव में रिश्ता हो जाये तोह इससे क्या बढ़िया होगा...

रुबीना ने बोलने की कोशिश की - पर अम्मी जी...

खान साब - देख लीजिये आप लोग... कोई ज़बरदस्ती नहीं है... जुनैद अभी 27 का hi हुआ है... अकेले दूकान संभालता है... कोई कमी नहीं है... हिना के लिए बिलकुल सही रहेगा...

इक़बाल बीच में बोलै - हिना अभी सिर्फ 19 की हुई है... उम्र में बोहोत फासला है...

खान साब ने मुस्कुराते हुए इक़बाल की और देखा - फासला तोह है... पर जो मैंने सुना है... तेरी बीवी और तेरी उम्र के फासले से तोह काम hi है...

इक़बाल को उसका ये कहना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा पर वह अब्बास को देखते हुए कुछ बोल नहीं पाया.

खान साब ने अब्बास की और देखते हुए कहा - पर हाँ भाई... इक़बाल मियाँ को भी तोह रिश्ता क़बूल होना चाहिए... अब वह वापस आ गया है तोह, उसकी हाँ के बिना कैसी बात पक्की होगी...

अब्बास ने गुस्से में इक़बाल को घूरा, और फिर खान साब की और देखते हुए कहा - हिना मेरी बेटी है... तोह मैं hi तय करूँगा की उसकी शादी कहाँ होगी. आप बात पक्की समझिये... मुझे एक बार मौलवी साब से बात करने दीजिये... हमारे यहाँ रमजान के बाद hi निकाह होता है...

खान साब - बोहोत अच्छे अब्बास मियाँ... हिना बड़ी प्यारी बच्ची है... बोहोत अचे से रहेगी हमारे घर में...

अब्बास - जी...

खान साब - अब जब सारा मामला सुलट hi गया है... तोह एक आखरी फरमाईश थी आपसे...

अब्बास - जी कहिये न...

खान साब - ज़रा अपनी बहु... इक़बाल की घरवाली को आप बुलवा दीजिये... जुनैद अभी की अभी माफ़ी मांगेगा उनसे...

इक़बाल के हाथ फिर से तन्न गए थे, शायद वह नहीं चाहता था की सुप्रिया उन लोगो के सामने आये. पर वह छह कर भी कुछ नहीं बोल पाया. अब्बास ने रुबीना को इशारा किया की वह सुप्रिया को अंदर से लेकर आये.

रुबीना कमरे में आयी. सुप्रिया थोड़ी घबराई हुई बैठी थी, वह बहार नहीं जाना चाहती थी. हिना भी उससे चिपक कर बैठी थी. रुबीना ने पास आते हुए उसका सर उसके दुपट्टे से ढाका, और उसका हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर से उठा दिया. न उसकी आवाज़ निकल रही थी न हिना की.

रुबीना सुप्रिया को पकडे हुए बहार ले आयी और उसे दरवाज़े के पास hi खड़ा करके साइड हो गयी.

खान साब की तेज़ आवाज़ आयी - माशा… बोहोत hi प्यारी लड़की है... लाखों में एक… किस्मत है इक़बाल मियाँ की.

सुप्रिया ने आखें उठाते हुए उनकी और देखा. ऐसा लग रहा था जैसे तीनो मर्द उसे hi घूर रहे हो.

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खान साब ने जुनैद को इशारा किया - चल नीचे ज़मीन पर बैठ कर माफ़ी मांग इनसे... तेरी चची सास होंगी ये... और तू इनसे hi बदतमीज़ी कर रहा था.

जुनैद ज़मीन पर उतरता हुआ सुप्रिया के कदमो के पास अपने घुटनो पर बैठ गया. सुप्रिया ने जल्दी से 2-3 कदम पीछे लिए.

जुनैद - जी माफ़ कीजियेगा... अगर उस दिन आपको मेरा मजाक बुरा लगा हो तोह... छोटा समझ कर माफ़ कर दीजियेगा...

अब्बास - ारी नहीं... रहने दो... इस सब की क्या ज़रुरत है...

जुनैद - नहीं इनकी माफ़ी सुने बिना मैं नहीं उठूंगा...

अब्बास ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - चलो अब माफ़ कर दो इसे...

सुप्रिया ने हलके से सर हिलाया और धीरे से बोलै - कोई नहीं... ठीक है... आप खड़े हो जायो...

जुनैद धीरे से सुप्रिया के सामने खड़ा हो गया और फिर आँखें झुकता हुआ जा कर फिर से बैठ गया.

खान साब - चलो अब ये मसला भी हल हुआ... अब्बास मियाँ अब हम लोग चलते हैं... अब तोह बस जुनैद और हिना का निकाह हो जाये जल्दी से... तभी तस्सली मिलेगी...

अब्बास - जी खान साब...

वह तीनो मर्द खड़े हुए जाने के लिए. सुप्रिया अभी भी वहीँ कड़ी थी. उसकी नज़र इक़बाल के चेहरे पर गयी तोह साफ़ पता चल रहा था की वह इस वक़्त बेहद गुस्से में था. जैसे hi उन दोनों की नज़रें मिली, सुप्रिया की सांसें थोड़ी भारी हो गयी. रात को शायद वह जिस तरह से अपना गुस्सा ज़ाहिर कर सकता था, ये सोच कर hi उसके पूरे शरीर में एक सनसनी सी होने लगी थी.
 
थैंक्स रोहन. ी टोटली अंडरस्टैंड तहत नॉट मान्य पीपल लिखे माय स्टोरी ों थिस साइट. लिखे ी साइड यस्टरडे, ी फील ी ऍम नॉट तहत गुड ात राइटिंग सेक्स सीन्स एंड तो बे ऑनेस्ट तहत इस माय लीस्ट एन्जॉयबले part ऑफ़ राइटिंग. ी वोउल्ड राथेर एन्जॉय मेकिंग उप थ्रिलिंग इमोशनल ह्यूमन स्टोरीज इन थे फ्यूचर.

ी विल तरय तो फिनिश थिस स्टोरी सून (और गेट तो ा पॉइंट वेयर थे पॉसिबिलिटीज अरे मोरे ओपन फॉर फ्यूचर). एंड थें तरय तो फंड ा डिफरेंट मध्यम ऑफ़ शेयरिंग माय स्टोरीज, मय्बे अलोंग्सीदे हेरे. तहत वोउल्ड मैं स्केलिंग बैक थे सेक्स write-up इवन फुरदर, व्हिच विल ऑब्वियस्ली नॉट बे वेल रेसिवेद हेरे. एंड रइटली सो, पीपल के हेरे तो रीड सेक्स स्टोरीज, नॉट नोवेल्स.

एंड रेस्ट असुरेद, no, यू दीद नॉट ऑफेंड में ात आल, यू अरे जस्ट शेयरिंग what’s ों योर मंद एंड ी ऍम बीइंग ट्रांसपेरेंट एंड शेयरिंग what’s ों माय मंद. थिस है बीन गोइंग ों इन माय मंद फॉर ा व्हिले एंड इतस आल्सो ड्राईनिंग फॉर में तो तरय तो कीप राइटिंग वेयर ी don’t एन्जॉय आईटी एंड थे रीडर्स don’t ऐथेर (ी अप्प्रेसियते लॉट्स ऑफ़ पीपल हु दो लव रीडिंग थिस अस वेल). ी वोउल्ड राथेर व्रिठे समथिंग तहत ी वोउल्ड एन्जॉय फॉर पीपल तहत मिगहत आल्सो एन्जॉय रीडिंग आईटी.

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