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- Dec 5, 2013
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अब तक आपने देखा तलातल लोक में कनक और गोलू क द्वारा क षड़यंत्र पर काम हो रहा है ..
कस का कन्फूसिओं ...और अभी क घर पर हुम्ला .....
अब आगे ........
कनक अपने सिंघासन पर बैठा ...aane..wale सुनहरे दिनों क सपने संजो रहा था .......तभी उसका खास सेवक ....पहुंतरु .....दौड़ता हुआ आया .......
पहुंतरु - महाराज ...महाराज ......गज़ब हो गया महाराज .........
कनक - अपने खयालो से बहार आते हुए ......क्या हुआ क्यों शोर मचा रहा है .....कम्बख्त .......
पहुंतरु - महाराज .....वह ....वह ....असुरो ..की laashe......Ab .....
कनक - कौन सी लाशें ....क्या हुआ ैव्हे से बता ......
पहुंतरु - महाराज ....नगर क बीचो बिच ....20 असुरो की कटी हुई लाशें है .......
कनक - क्या .....लगता है ...नशा ..करके आपस में hi लड़ भीड़ मार्गए होंगे .....
यहाँ और किसकी हिम्मत जो हमारे विरुद्ध षड़यंत्र कर सके .....और कोई बाहरी यहाँ आनहि सकता ..और उन् असुरो की मौत पर तू क्यों घबराया हुआ है .......
पहुंतरु - महाराज घबराने की hi बात है ...क्यों क वह असुर ...सब ...KS....k ...गुप्तचर थे जो इस नगर की निगरानी करते थे .......
कनक - क्या फिर तोह गंभीर बात है इससे कस का दखल हमारे यहाँ और बढ़ जाएगा .....
और कनक उसके साथ नगर क उस जगह पहुँच जाते है ....जहा ..20 असुरो की कटी हुई लाशें पड़ी हुई थी .......
वह बहुत सारे जीव उस जगह को घेरे हुए थे ....उनको रोके हुए कनक क सिपाही भी वह खड़े थे .......कनक ने वह पहुँच कर देखा .....
कनक - सैनिक से - कुछ पता चला किसने किया है यह ..........
सैनिक - महाराज लगता है यह विमलाक्ष का काम है .......हमे खबर मिली है क उससे यहाँ देखा गया है .......कुछ दिनों से विमलाक्ष क पक्ष वालो में कुछ गतिविधिया तेज़ होगयी है ..
कनक - लेकिन विमलाक्ष अचानक उस्में इतनी हिम्मत कहा से आगयी .......भूल गया हमने उसका क्या हाल किया था.........
विमलाक्ष पहले इन् सभी जीवो का मुखिया था .....यहाँ क सभी जीवो का सञ्चालन उसके hi द्वारा होता था ......यह यमराज जी की सभा का सदस्य था........
विमलाक्ष की एक कन्या थी वैशाली .......कनक विमलाक्षा का सेवक था .....वह किसी भी तरह अपने मालिक की जगह लेना चाहता था ........
इसके लिए उस्सने गुप्त रूप से अपनी शक्ति बढ़ाने क लिए इब्लीस की उपासना शुरू कर दी ........और यमराज को प्रासना करने क लिए उनके मंत्र का भी जाप करने लगा ..........
यमराज ने प्रसन्ना होकरजब उससे उसकी इच्छा पूछी तोह उसने विमलाक्ष का शतं माँगा ....तुम यमराज जी ने कोई दूसरा वर मांगने को कहा ....
क्यों की उन्होने स्वयं विमलाक्ष को उन् जीवो का अधिपति चुना tha........toh वह कैसे उससे हटाकर किसी और को उसका स्थान दे सकते है .....
तोह कनक ने उन्हें कहा क इस्सके एक मार्ग है ...क ..उसके और विमलाक्ष में युद्ध होगा और उस्में आप हस्तक्षेप नहीं करेंगे .....जो विजयी होगा वही यहाँ जा आधी पति बनेगा ......
और दूसरी और उस्सने इब्लीस की पूजा करके कुछ काली शक्तिया भी हासिल कर ली थी .....अपनी विजय क लिए उसने कस से हाथ मिला लिया .......
और जब कनक का विमलाकक्ष (वः) क साथ युद्ध हुआ तोह उसने असुरो की और काली शक्तियों की सहयता से बंदी बना लिया और बहुत ज्यादा प्रताड़ना दी ..........
वह तोह उससे मार hi डालता .....परन्तु यमराज जी क कहने पर कनक ने विमलाक्ष को प्राणदान दे दिया .....अपने दिए हुए वचन क कारण वह और जयादा कुछ कर नहीं सकते थे ...
इसीलिए किसी को भी कोई वचन देना हो तोह सोच समक्ष कर देना चाहिए ....और वैसे भी आजकल वचन को पालन करता ...है ........
हर राजय में पक्ष और विपक्ष तोह होते hi थे ...... वः क पक्ष क जो थे वह अपने मुहैया की हार क कारण विद्रोह करने लगे थे जिनका दमन कनक ने कस क असुरो की सहयता से किया था ......
अब ऐसे अचानक वः का सामने आना और जगह जगह फिर विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होना ...कनक ..क लिए चिंता का कारण थी .....
उससे गोलार्क की साधना पूरी होने का इंतजार था ....जिसमें अभी 2 दिन और बाकी थे ........
यहाँ पटल लोक में जब कस को पता चला क उसके गुप्तचरों को किसी ने मार दिया है है ....तोह उस्सने वः क देखे जाने क बारे में बताया .....
इतने वर्षो क बाद वः का यु सामने आना .....कस क मैं में शंका उत्पन्न कर रहा tha.......Talatal लोक में कुछ तोह ऐसा चल रहा था जो उससे समज़ह नहीं आरहा था .....
कस ने कनक को गोलार्क क बारे में सतर्क रहने को कहा और शंका जताई क हो सकता है क वह असली गोलातक न हो ......और वह वह ऐसा कौन सा काम कर रहा है जो कनक ने उससे अपनी साधना स्थली दे दी ....ऐसे क्या करने वाले है दोनों मिलकर
कनक ने कहा क गोलरक ने खुद उससे मानसिक संपर्क करके अपने आने की सुचना दी थी .....हर व्यक्ति की मानसिक तरंगे अलग होती है .......गोलार्क ने जब कनक से संपर्क किया था ...तोह वह मानसिक तरंगे गोलार्क की hi थी .....
लेकिन उनसे अपनी और गोलार्क क बिच छुपी हुई बातें छिपा ली ....वह किसी भी हाल में अपनी योजना को कस तक नहीं पहुँचने देना चाहता था
कस ने उससे अपने बाकी असुरो की रक्षा का ध्यान रखने को कहा ......और सतर्क रहने को कहा ..
यहाँ तलातल लोक में hi एक गुप्त जगह वः अपने समर्थको की सेना एकत्रित करने लगा था ....वैशाली भी अपने पिता क कार्य में पूरी तरह सहयोग कर रही थी ......
वः - साथियो ...अब समय आगया है .....कनक से मुक्ति पाने का हमे और साथी एकत्रित करने होंगे ......अब और असुरो का और कनक क द्वारा अत्याचारों को हम सहन नहीं कर सकते .......
क्या आप सब तैयार हो .......
सब एक स्वर से ....हां ...haa...hum सब तैयार है.......
वः - तोह तैयार रहना साथियो ......दो दिन बाद हमे एक साथ हुम्ला करना होगा .......
अब वह दिन भी आगया जिसका कनक को इंतजार था ....कनक सही समय पर अपनी साधना स्थली तक पहुँच चूका था .........
थोड़ी hi देर में गोलार्क बहार आया ....और कनक को भीतर ले गया ...कनक ने वह का नज़ारा देखा तोह उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी ......
वही दूसरी तरफ वः ने अपने साथियो क द्वारा पूरे नगर को घेर लिया था ...और सब एक साथ आगे बढ़ रहे थे ......
आज वः की सेना क आगे कोई भी असुर टिक नहीं पा रहा था ......असुरो में चारो तरफ भगदड़ मच गयी थी ....वह जहा जगह मिली वह छुपने लगे .....
लेकिन वः क सातियो ने उन्हें ढूंढ ढूंढ कर निकला ...
कनक क जीवो ने वः की सेना क शरीरो को अपने कब्ज़े में लेना चाहा ....लेकिन किसी पावर फूल ऊर्जा क कारण सफल नहीं हुए ......
यहाँ गुफा में ....जब कनक पहुंचा तोह उससे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था ......
कनक ने देखा क अभी उदास आ धरती पर घुटनो क बल बैठा है .......और सामने hi अभी का परिवार गोलार्क की ऊर्जा में बंधा हुआ था .......गोलार्क का बंदन उनपर कास रहा था .....
रवस ...नैना ...Addu...aur ...ऋतू ....पाश में बंधे रो तहे थे ....और बार बार ....बचने क लिए अभी को पुकार रहे थे .....
गोलार्क - तुम अपने आपको बड़ा रक्षक समजह्ते हो ...आज तुम नहीं बच पाओगे .......
यदि तुमने कुछ भी चालाकी करने की कोशिश की तोह मेरा यह पाश इन् पर कसता चला जाएगा और सब की एक साथ मृत्यु हो जायेगी .....
अभी - नहीं गोलू तुम आईएस नहीं कर सकते ...छोड़ दो सब को .....मैंने तुम्हे अपना भाई माना और तुमने मेरे साथ विश्वास घाट किया .....
गोलार्क - विश्वास घाट तोह तुमने किया था मेरे पिता क साथ ....उनकी हत्या करने पर ......अब या तोह तुम अपने प्राण दो ...या अपने परिवार की मौत देखो अपनी असंख्य क सामने .....
अभी - मुज़हे सब स्वीकार है ...तुम मुज़हे मारना चाहते hi न तोह ठीक है .....परन्तु मेरे परिवार को छोड़ दो ........
गोलार्क - मैं जानता हु मेरा कोई अस्त्र तुम पर कोई काम नहीं करेगा इसीलिए तुम्हे स्वयं अपने प्राण त्यागने होंगे......
अभी - ठीक है तुम यही व्हाहते हो तोह यही सही ......
और अभी अपने हाथ में तलवार ले लेता है और अपनी गार्डन पर रखता है ....
गोलार्क - कनक से ...तैयार हो जाइए महामहिम ...जैसे hi इस्सकी गार्डन इसके धड़ से अलग होगी इस्सकी ऊर्जा इसके शरीर क बंधन से मुक्त हो जायेगी उसी समय आपको वह शक्ति अपने भीतर सोख लेना है ...फिर आप बजाओ गए इस संसार में सर्व शक्तिशाली .....
लेकिन इसके लिए पहले आपको एक काम करना है ....अस्प्को अपनी साड़ी ऊर्जा ...मेरे इस कुंड में समर्पित करनी हो ....जब इसकी मृत्यु जो जायेगी तोह इस्सकी ऊर्जा भी कुंड में समां जायेगी ......
तब दोनों उर्जाये मिलकर एक महा शक्ति बनेगी ...और उससे आपको अपने भीतर देखना
कनक गोलार्क की साड़ी बात समाज गया ..........लेकिन यह उसके लिए एक बहुत बड़ा फैसला था कनक ने एक बार पूरी स्थिति का जायजा लिया ......
गोलार्क ,- जल्दी कीजिये महाराज हमारे पास जयादा समय नहीं है ........
कनक ने अपनी ऊर्जा निकालनी शुरू की, लगभग आदि ऊर्जा वह उस कूबड़ क हवाले कर चूका था ...क बहार शोर बढ़ने लगा ......
कनक को कस की बात याद आयी उससे कुछ षडयंत्र की आशंका होने लगी .......
उसने तुरंत अपनी ऊर्जा को रोकने का प्रयास किया लेखों तब तक आधी ऊर्जा कुंड में समां गयी थी गोलार्क ने कुंड को शील्ड से कवर कर दिया ....जिससे कनक की शक्ति अब आधी रह गयी थी .......
कनक ने तुरंत तलवार उठाकर घुटनो क बल बैठे हुए अभी क गार्डन पर वार किया .......लेकिन यह क्यों अभी और उसका सारा परिवार पल भर में hi धुआँ बनकर उड़ गया.......
कनक - इतना बड़ा षड़यंत्र .....अब में तुज़हे जीवित नहीं छोडूंगा गोलार्क .......और तलवार लेकर गोलार्क पर लपका .....जैसा hi उसने गोलू पर तलवार से गर्दन पर किया ........
गोलार्क ने एक हाथ से पहले तोह तलवार पकड़कर तोड़ दी ......और एक जोरदार किक कनक क पेट पर पड़ी जिससे वह पीछे की तरफ जोर से गिर पड़ा .......
जमीन पर पड़े पड़े कनक का मुँह और आश्चर्य से खुला रह गया जब उसने गोलार्क क जगह अभी को खड़े देखा .........
आज क लिए इतना hi .....
अगला अपडेट जल्द hi .....
अब तक आपने देखा तलातल लोक में कनक और गोलू क द्वारा क षड़यंत्र पर काम हो रहा है ..
कस का कन्फूसिओं ...और अभी क घर पर हुम्ला .....
अब आगे ........
कनक अपने सिंघासन पर बैठा ...aane..wale सुनहरे दिनों क सपने संजो रहा था .......तभी उसका खास सेवक ....पहुंतरु .....दौड़ता हुआ आया .......
पहुंतरु - महाराज ...महाराज ......गज़ब हो गया महाराज .........
कनक - अपने खयालो से बहार आते हुए ......क्या हुआ क्यों शोर मचा रहा है .....कम्बख्त .......
पहुंतरु - महाराज .....वह ....वह ....असुरो ..की laashe......Ab .....
कनक - कौन सी लाशें ....क्या हुआ ैव्हे से बता ......
पहुंतरु - महाराज ....नगर क बीचो बिच ....20 असुरो की कटी हुई लाशें है .......
कनक - क्या .....लगता है ...नशा ..करके आपस में hi लड़ भीड़ मार्गए होंगे .....
यहाँ और किसकी हिम्मत जो हमारे विरुद्ध षड़यंत्र कर सके .....और कोई बाहरी यहाँ आनहि सकता ..और उन् असुरो की मौत पर तू क्यों घबराया हुआ है .......
पहुंतरु - महाराज घबराने की hi बात है ...क्यों क वह असुर ...सब ...KS....k ...गुप्तचर थे जो इस नगर की निगरानी करते थे .......
कनक - क्या फिर तोह गंभीर बात है इससे कस का दखल हमारे यहाँ और बढ़ जाएगा .....
और कनक उसके साथ नगर क उस जगह पहुँच जाते है ....जहा ..20 असुरो की कटी हुई लाशें पड़ी हुई थी .......
वह बहुत सारे जीव उस जगह को घेरे हुए थे ....उनको रोके हुए कनक क सिपाही भी वह खड़े थे .......कनक ने वह पहुँच कर देखा .....
कनक - सैनिक से - कुछ पता चला किसने किया है यह ..........
सैनिक - महाराज लगता है यह विमलाक्ष का काम है .......हमे खबर मिली है क उससे यहाँ देखा गया है .......कुछ दिनों से विमलाक्ष क पक्ष वालो में कुछ गतिविधिया तेज़ होगयी है ..
कनक - लेकिन विमलाक्ष अचानक उस्में इतनी हिम्मत कहा से आगयी .......भूल गया हमने उसका क्या हाल किया था.........
विमलाक्ष पहले इन् सभी जीवो का मुखिया था .....यहाँ क सभी जीवो का सञ्चालन उसके hi द्वारा होता था ......यह यमराज जी की सभा का सदस्य था........
विमलाक्ष की एक कन्या थी वैशाली .......कनक विमलाक्षा का सेवक था .....वह किसी भी तरह अपने मालिक की जगह लेना चाहता था ........
इसके लिए उस्सने गुप्त रूप से अपनी शक्ति बढ़ाने क लिए इब्लीस की उपासना शुरू कर दी ........और यमराज को प्रासना करने क लिए उनके मंत्र का भी जाप करने लगा ..........
यमराज ने प्रसन्ना होकरजब उससे उसकी इच्छा पूछी तोह उसने विमलाक्ष का शतं माँगा ....तुम यमराज जी ने कोई दूसरा वर मांगने को कहा ....
क्यों की उन्होने स्वयं विमलाक्ष को उन् जीवो का अधिपति चुना tha........toh वह कैसे उससे हटाकर किसी और को उसका स्थान दे सकते है .....
तोह कनक ने उन्हें कहा क इस्सके एक मार्ग है ...क ..उसके और विमलाक्ष में युद्ध होगा और उस्में आप हस्तक्षेप नहीं करेंगे .....जो विजयी होगा वही यहाँ जा आधी पति बनेगा ......
और दूसरी और उस्सने इब्लीस की पूजा करके कुछ काली शक्तिया भी हासिल कर ली थी .....अपनी विजय क लिए उसने कस से हाथ मिला लिया .......
और जब कनक का विमलाकक्ष (वः) क साथ युद्ध हुआ तोह उसने असुरो की और काली शक्तियों की सहयता से बंदी बना लिया और बहुत ज्यादा प्रताड़ना दी ..........
वह तोह उससे मार hi डालता .....परन्तु यमराज जी क कहने पर कनक ने विमलाक्ष को प्राणदान दे दिया .....अपने दिए हुए वचन क कारण वह और जयादा कुछ कर नहीं सकते थे ...
इसीलिए किसी को भी कोई वचन देना हो तोह सोच समक्ष कर देना चाहिए ....और वैसे भी आजकल वचन को पालन करता ...है ........
हर राजय में पक्ष और विपक्ष तोह होते hi थे ...... वः क पक्ष क जो थे वह अपने मुहैया की हार क कारण विद्रोह करने लगे थे जिनका दमन कनक ने कस क असुरो की सहयता से किया था ......
अब ऐसे अचानक वः का सामने आना और जगह जगह फिर विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होना ...कनक ..क लिए चिंता का कारण थी .....
उससे गोलार्क की साधना पूरी होने का इंतजार था ....जिसमें अभी 2 दिन और बाकी थे ........
यहाँ पटल लोक में जब कस को पता चला क उसके गुप्तचरों को किसी ने मार दिया है है ....तोह उस्सने वः क देखे जाने क बारे में बताया .....
इतने वर्षो क बाद वः का यु सामने आना .....कस क मैं में शंका उत्पन्न कर रहा tha.......Talatal लोक में कुछ तोह ऐसा चल रहा था जो उससे समज़ह नहीं आरहा था .....
कस ने कनक को गोलार्क क बारे में सतर्क रहने को कहा और शंका जताई क हो सकता है क वह असली गोलातक न हो ......और वह वह ऐसा कौन सा काम कर रहा है जो कनक ने उससे अपनी साधना स्थली दे दी ....ऐसे क्या करने वाले है दोनों मिलकर
कनक ने कहा क गोलरक ने खुद उससे मानसिक संपर्क करके अपने आने की सुचना दी थी .....हर व्यक्ति की मानसिक तरंगे अलग होती है .......गोलार्क ने जब कनक से संपर्क किया था ...तोह वह मानसिक तरंगे गोलार्क की hi थी .....
लेकिन उनसे अपनी और गोलार्क क बिच छुपी हुई बातें छिपा ली ....वह किसी भी हाल में अपनी योजना को कस तक नहीं पहुँचने देना चाहता था
कस ने उससे अपने बाकी असुरो की रक्षा का ध्यान रखने को कहा ......और सतर्क रहने को कहा ..
यहाँ तलातल लोक में hi एक गुप्त जगह वः अपने समर्थको की सेना एकत्रित करने लगा था ....वैशाली भी अपने पिता क कार्य में पूरी तरह सहयोग कर रही थी ......
वः - साथियो ...अब समय आगया है .....कनक से मुक्ति पाने का हमे और साथी एकत्रित करने होंगे ......अब और असुरो का और कनक क द्वारा अत्याचारों को हम सहन नहीं कर सकते .......
क्या आप सब तैयार हो .......
सब एक स्वर से ....हां ...haa...hum सब तैयार है.......
वः - तोह तैयार रहना साथियो ......दो दिन बाद हमे एक साथ हुम्ला करना होगा .......
अब वह दिन भी आगया जिसका कनक को इंतजार था ....कनक सही समय पर अपनी साधना स्थली तक पहुँच चूका था .........
थोड़ी hi देर में गोलार्क बहार आया ....और कनक को भीतर ले गया ...कनक ने वह का नज़ारा देखा तोह उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी ......
वही दूसरी तरफ वः ने अपने साथियो क द्वारा पूरे नगर को घेर लिया था ...और सब एक साथ आगे बढ़ रहे थे ......
आज वः की सेना क आगे कोई भी असुर टिक नहीं पा रहा था ......असुरो में चारो तरफ भगदड़ मच गयी थी ....वह जहा जगह मिली वह छुपने लगे .....
लेकिन वः क सातियो ने उन्हें ढूंढ ढूंढ कर निकला ...
कनक क जीवो ने वः की सेना क शरीरो को अपने कब्ज़े में लेना चाहा ....लेकिन किसी पावर फूल ऊर्जा क कारण सफल नहीं हुए ......
यहाँ गुफा में ....जब कनक पहुंचा तोह उससे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था ......
कनक ने देखा क अभी उदास आ धरती पर घुटनो क बल बैठा है .......और सामने hi अभी का परिवार गोलार्क की ऊर्जा में बंधा हुआ था .......गोलार्क का बंदन उनपर कास रहा था .....
रवस ...नैना ...Addu...aur ...ऋतू ....पाश में बंधे रो तहे थे ....और बार बार ....बचने क लिए अभी को पुकार रहे थे .....
गोलार्क - तुम अपने आपको बड़ा रक्षक समजह्ते हो ...आज तुम नहीं बच पाओगे .......
यदि तुमने कुछ भी चालाकी करने की कोशिश की तोह मेरा यह पाश इन् पर कसता चला जाएगा और सब की एक साथ मृत्यु हो जायेगी .....
अभी - नहीं गोलू तुम आईएस नहीं कर सकते ...छोड़ दो सब को .....मैंने तुम्हे अपना भाई माना और तुमने मेरे साथ विश्वास घाट किया .....
गोलार्क - विश्वास घाट तोह तुमने किया था मेरे पिता क साथ ....उनकी हत्या करने पर ......अब या तोह तुम अपने प्राण दो ...या अपने परिवार की मौत देखो अपनी असंख्य क सामने .....
अभी - मुज़हे सब स्वीकार है ...तुम मुज़हे मारना चाहते hi न तोह ठीक है .....परन्तु मेरे परिवार को छोड़ दो ........
गोलार्क - मैं जानता हु मेरा कोई अस्त्र तुम पर कोई काम नहीं करेगा इसीलिए तुम्हे स्वयं अपने प्राण त्यागने होंगे......
अभी - ठीक है तुम यही व्हाहते हो तोह यही सही ......
और अभी अपने हाथ में तलवार ले लेता है और अपनी गार्डन पर रखता है ....
गोलार्क - कनक से ...तैयार हो जाइए महामहिम ...जैसे hi इस्सकी गार्डन इसके धड़ से अलग होगी इस्सकी ऊर्जा इसके शरीर क बंधन से मुक्त हो जायेगी उसी समय आपको वह शक्ति अपने भीतर सोख लेना है ...फिर आप बजाओ गए इस संसार में सर्व शक्तिशाली .....
लेकिन इसके लिए पहले आपको एक काम करना है ....अस्प्को अपनी साड़ी ऊर्जा ...मेरे इस कुंड में समर्पित करनी हो ....जब इसकी मृत्यु जो जायेगी तोह इस्सकी ऊर्जा भी कुंड में समां जायेगी ......
तब दोनों उर्जाये मिलकर एक महा शक्ति बनेगी ...और उससे आपको अपने भीतर देखना
कनक गोलार्क की साड़ी बात समाज गया ..........लेकिन यह उसके लिए एक बहुत बड़ा फैसला था कनक ने एक बार पूरी स्थिति का जायजा लिया ......
गोलार्क ,- जल्दी कीजिये महाराज हमारे पास जयादा समय नहीं है ........
कनक ने अपनी ऊर्जा निकालनी शुरू की, लगभग आदि ऊर्जा वह उस कूबड़ क हवाले कर चूका था ...क बहार शोर बढ़ने लगा ......
कनक को कस की बात याद आयी उससे कुछ षडयंत्र की आशंका होने लगी .......
उसने तुरंत अपनी ऊर्जा को रोकने का प्रयास किया लेखों तब तक आधी ऊर्जा कुंड में समां गयी थी गोलार्क ने कुंड को शील्ड से कवर कर दिया ....जिससे कनक की शक्ति अब आधी रह गयी थी .......
कनक ने तुरंत तलवार उठाकर घुटनो क बल बैठे हुए अभी क गार्डन पर वार किया .......लेकिन यह क्यों अभी और उसका सारा परिवार पल भर में hi धुआँ बनकर उड़ गया.......
कनक - इतना बड़ा षड़यंत्र .....अब में तुज़हे जीवित नहीं छोडूंगा गोलार्क .......और तलवार लेकर गोलार्क पर लपका .....जैसा hi उसने गोलू पर तलवार से गर्दन पर किया ........
गोलार्क ने एक हाथ से पहले तोह तलवार पकड़कर तोड़ दी ......और एक जोरदार किक कनक क पेट पर पड़ी जिससे वह पीछे की तरफ जोर से गिर पड़ा .......
जमीन पर पड़े पड़े कनक का मुँह और आश्चर्य से खुला रह गया जब उसने गोलार्क क जगह अभी को खड़े देखा .........
आज क लिए इतना hi .....
अगला अपडेट जल्द hi .....