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अब तक आपने देखा क अभी और भद्रा का मिलान हो गया है....
अभी को प्रेतशक्ति प्राप्त होगयी है.......
दोनों जब प्रेतमहल पहुंचे तोह वह प्रेतराज और रक्तासुर में कुस्ज विवाद चल रहा है....
अब आगे.....,...
अभी और भद्रा प्रेत महल पहुंचे , तोह वह Raktasur(RS) और प्रेतराज (पीजे) क बिच जोरोसे vàad विवाद चल रहा ....
पीजे - यह नहीं हो सकता ...हमारा राज्य तोह पहले hi ले चुके हो ...अब यह नहीं.....
मेरी बेटी यहाँ जन्म लेने क बाद भी ...तामसिक नहीं सात्विक गुणों वाली है.......
उसका विवाह तुम जैसे असुर से ....नहीं ...यह ..संभव नहीं......
रस - प्रेतराज मत भूलो क तुम्हारा राज्य हमारे कब्जे में hai......kahi ऐसा न हो की तुम्हारा यह पुत्री मोह तुम्हारे राज्य का समूलमश कर दे....
दोनों का ऐसा वोवाद कहल hi रहा tha...toh अभी ने पहले भद्रा को आगे भेजा और खुद छिपकर साड़ी बातें सुंनने लगा......
भद्रा को देखकर दोनों चुप हो जाते है.......
भद्रा - प्रणाम पिताश्री .......
भद्रा - की मांग में अभी को खून और उसके चेहरे का तेज़ देखकर प्रेतराज सब समाज गए.......
पीजे - सदा खुश रहो putri.....toh मिल hi गया तुम्हे तुम्हारा जीवन साथी.......
भद्रा आश्चर्य से अपने पिता को देखते हुए...
शरमाते हुए ....परन्तु पिताश्री आपको कैसे पता......
पीजे - पुत्री तुम्हारा पिता hu.........Aur तुम्हारी नियति को जानता हु......
रस - क्या बात कर रहे हो ....और किस नियति की बात कर रहे हो.......
पीजे - रक्त तुम विवाह करना चाहते थे न भद्रा से ....परन्तु नियति ने जिससे चुना है उसके लिए वह आगया है .....और अब भद्रा का विवाह भी हो गया है........
रस - नहीं .....हम असुर नियति को भी बदलने की शक्ति रखते है .......हमने जो थान लिया .....और वह जो भी हो ....जिसको इसने चुना है ........वहबक्या स्याम महादेव भी नहीं रोक sakte.....aur भद्रा क तरफ बढ़ते हुए.......
पीजे - रुक जाओ रक्त .....अगर तुमने मेरी बेटी का स्पर्श भी किया तोह अच्छा नहीं होगा....
और पीजे की आंखें एकदम सफ़ेद हो गयी और आकाश में भयंकर गर्जना होने लगी .......पीजे का रूप बढ़ने लगा .....मैंने स्वयं महाकाल hi प्रगट हो गया हो
......आकाश से भयंकर बिजली प्रगट हुई .....और वह एक त्रिशूल बनकर ....पीजे क हातो में aagayi.....Ab पीजे का शरीर विकराल रूप धारण कर लिया था और उनके माथे पर ..तीसरा नेत्र प्रगट हो गया था जो अभी बंद था......
यह था पीजे का क्षेत्रपाल रूप जो की महदेव का hi एक अंश था....
रस पीजे का ऐसा रूप देखकर थार थार कांपने लगा ......
लेकिन फिर भी हिम्मत करके बोलने लगा .......
रस - आप ऐसा नहीं कर सकते ....हमने आपको प्रासना करके आपसे वरदान प्राप्त किया hai......k आप हमारे अधीन रहेंगे ....यदि आपने यह वचन तोडा .....तोह आपका देवत्व और यह लोक दोनों नष्ट हो जाएंगे......
तभी अभी भी पीजे क सामने आता hai....Aur पीजे को प्रणाम करता है..... इस समय वह प्रेत रूप
में hi था....
अभी - शांत हो जाईये प्रेतराज इसके लिए आपके इस प्रलयंकारी रूप की आवश्यकता नहीं hai.......shant हो जाईये......
प्रेतराज एक प्रेत होते हुए भी एक देवता थे जो महादेव की प्रलयंकारी शक्ति से प्रगट हुए थे ......27 में से 10 नरक इनके अधिकार में थे जहा यह थे दंडनायक ......
और क्षेत्र पल क रूप में हर यज्ञ और हवन में पूजे जाते है.......
रक्तासुर ने इनकी घोर साधना करके पहले इन्हे प्रसन्ना किया ......फिर इनसे वचन लेकर इन्हे अपने अधिकार में ले लिया ......
अभी की बात सुनकर पीजे शांत हो गए .......और वह से चले गए......
अभी - रक्त ध्यान रहे अब भद्रा मेरी पत्नी hai....iski यरफ अपनी कुदृष्टि भी डाली toh.....wohi पल तुम्हारे मृतयु का कारण बनेगा....
रस - ओह्ह्ह तोह तू है वह .....तू रोकेगा मुज़हे .....रक्तासुर ko..........ha...ha...ha.......mrityu तोह अब ...तेरी होगी मेरे हाथो से ......और रस अपनी तलवार लेकर दौड़ पड़ा ...अभी क तरफ ....इसके पहले वह वार कर पाटा .....अभी ने उस्का वॉर ब्लॉक कर दिया और एक जोरदार किक उसके पेट में maari....jiske लगते hi वह दूर जा गिरा .......
लेकिन फिर संभलकर खड़ा हो गया........
रस - टीई यह मजाल की मुजहपर हुम्ला करे ....अब ...देख....
अभी - अरे वह ...हुम्ला तुमने खुद किया और मुज़हे कह रहे हो ....चलो अब और वार करके देखो देखु तोह तुम्हारी शक्ति .......
रस ने अपनी ऊर्जा का एक गोला बनाकर अभी पर छोड़ा ......लेकिन शालू से मिलान में मिले हुए कवच क कारण उससे कुछ नहीं हुआ ....वह गोला अभी से टकरा कर नष्ट हो गया .....
रस लगातार अभी पर वॉर कर रहा था और अभी आराम से अपनी जगह खड़ा था....
अपने सारे वॉर असफल होते देखकर रस हैरान हुआ ...क ...आखिर यह है कौन ....जो दिखने में तोह प्रेत लग रहा hai....lekin...iska वास्तविक रूप कुवह और है......
तभी अभी रस तक पहुँच जाता है और उसकी गर्दन पकड़कर .....उठा देता hai....aur उससे दूर फ़ेंक देता है......
भद्रा यह सब खड़े होकर देख रही थी...........
अभी - रस ाभु भी समय है अपने असुरो को लेकर वापस पटल चले जाओ .....नहीं तोह तुममें से एक भी जीवित नहीं बचेगा........
तभी रस एक पल में भद्रा क पास पहुँच जाता है और उससे लेकर गायब हो जाता है......
इस तरह अचानक रस क भादर को लेकर जाने से अभी का और क्रोध बढ़ने लगा.......
अभी ने शक्ति त्रिशूल का प्रयोग करके पहले तोह पेर्टलॉक से रस की बनायीं हुई शिवल्द ख़तम की जिस्सके अंदर सिर्फ प्रेत और असुर hi प्रवाह कर पाते थे.....
यह रस क इशारे पर उसके अदृश्य मायावी असुर वह क प्रेतों की साड़ी ऊर्जा सोखकर उन्हें ख़तम कर रहे थे ....नगर में जगह अजघ कोहराम मचा हुआ था .....
अब गक भी अपनी मायावी यक्षों की सेना को लेकर प्रेतलोक में प्रवेश कर चूका था ....और असुरो का नाश करने लगा था.......
अदृस्य असुरो का सामना करने क लिए गक की सेना भी अदृश्य होकर असुर को समाप्त कर रही थी.....
नगर मेंदिख तोह कुछ नहीं रहा था परन्तु भयंकर चीखो की आवाजे और युद्ध जा शोर जगह जगह से आरही थी......
अभी हाट में शक्ति त्रिशूल लिए ......अपनी प्रेतशक्ति से हर घर और हर देवर को पार करते हुए भद्रा को ढूंढ रहा था.........
रस की ऊर्जा का पीछा करते हुए वह एक भवन में पहुंचा ........
यहाँ रस भद्रा को एक भवन ले आया .......और उससे एक बीएड पर लाकर पटक दिया .....
रस - में तोह तुम्हे अपनी रानी बनाना चाहता था ....परतु अब लगता hai.....aur उस्सकी और बढ़ने laga.......tabhi भद्रा ने एक जोरदार किक उसके पेट में मारी....
भद्रा - दूर रहो मुज़हे यदि तूने मुज़हे चुने का भी प्रयत्न किया तोह तुम्हर वह दर्दनाक अंत होगा क फिर कोई असुर यहाँ प्रवेश करने का सहस नहीं करेगा....
तभी रस आगे आकर उसके बाल पदक लेता है और अपनी तरफ खींचने लगता है .....क भद्रा दोनों हाथो से रस का सर निचे करके ..अपने घुटने का जोरदार वॉर उसके नक् पर करती hai.....jise उसके नक् से खून बहने लगता है ........
अब रस का क्रोध बहुत बढ़ चूका था .....तभी वह भद्रा क बाल कसकर पकड़ लेता है.......
तूने यह अच्छा नहीं किया भद्रा
.....अब तक में तुमपर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं कर रहा था ...परन्तु अब तुमने मुज़हे विवश कर दिया.......
और उसके बाल जोरो से खींच कर अपनी talwar..utha li......Bhadra अपने हाथो से रस का मुँह नोचने लगी उसके नाखून रस क चेहरे पर अपने निशान छोड़ राहु थे.......
इससे पहले क रस की तलवार भद्रा को लगती उसकी कमर पर एक जोरदार किक पड़ी जिसे वह लुढ़क कर.....
दूर जा गिरा ......वह अभी अपने वास्तविक रूप में खड़ा था.....
रस - ओह्ह्ह तोह रक्षक तुम , ....वही में सोच रहा था एक प्रेत में इतनी शक्ति नहीं हो सकती क वह मेरा सामना करे ....अच्छा हुआ अब मैं पिताश्री को तुम्हारा मृत शरीर भेंट करूँगा......
जब भद्रा ने अभी को देखा तोह वह उससे लिपट गयी....
अभी उसके सर को सहलाते हुए .....बस करो जान ....बस karo.....kshama कार्डो ..मुज़हे क मेरे रहते हुए ..तुम्हे यह सब जीलना पड़ा.....
और फिर उससे छोड़कर ..रस की तरफ बढ़ते हुए ......
अभी - कायर इस तरह स्त्रियों पर क्या अपनी वेवेता दिखा रहा है ......चल उठ और मुकाबला कर मुजह्से ........
फिर रस भी अपनी तलवार संभलकर अभी क आगे आगया .....और अपनी तलवार से वॉर करने लगा ...अभी उसके हर वॉर को ब्लॉक कर देता .......इससे रस का ग़ुस्सा और तेज़ होने लगा.....
लड़ते लड़ते दोनों भवन क बहार आगये the.......Abhi ने अब अपनी तलवार छोड़ दी और वह निहत्ता रस क सामने खड़ा हो gaya........Rs ने मौका जानकार apni..talwar का भरपूर war....Abhi क सर पर किया ...
लेकिन यह क्या अभी क सर से टकराते hi वह तलवार टूट gayi........tab तक गक & टीम भीआसुरो का नाश करते हुए वह पहुँच गयी thi.......aur अभी क युद्ध को देख रही थी.......
अब रस ने अपना धनुष प्रगट क्या .....और दिव्यास्त्रों से अभी पर वार करे लगा ......अभी भी उन ास्त्रो को अपने वॉर से बखूबी काटे लगा.......
तभी रस ने धनुष आकाश में उठाया तोह आकाश का रंग बदलने laga.......Abhi समाज गया क यह त्रिदेव में से hi किसी देव क शास्त्र का आवाहन कर रहा है.......
तोह उसने अपनी गति का प्रयोग करके एक पल में उसके पास पहुँच गया और उससे धनुष छीनकर उस्सको बिच से तोड़ दिया ...और एक जोड़कर किक का प्रहार उसके सीने पर किया ......जिससे वह जमीं पर गिर गया.......
यह सब इतने जल्दी हुआ क रस को सँभालने का मौका भी नहीं मिला ........
अब अभी ने अपना एक पेअर उसके छाती पर रखकर अपने शक्ति तरलशूल को याद किया ........
अपनी मृत्यु को अपने सामने देहकर रस जोर से chilaya......Pretraaj......Aapne मेरी रक्षा का वचन दिया था ...आपको महादेव की सौगंध hai...hai क अपना वचन निभाए.......
न चाहते हुए भी अपने वचन क लिए प्रेतराज को वह प्रगट होना pada.........aakash भयंकर गर्जना क साथ पूरा काला हो gaya.....aur उसमें .....बिजली चमकने लगी ....बिना बदलो के बिजली की चमक ....और चारो और पहला आंध्र........
तभी प्रेतराज वह प्रगट हो गए और प्रगट हुआ उनका त्रिशूल जो महादेव क द्वारा उन्हें प्राप्त हुआ tha.....jismein से भयंकर बिजली परगट हो रही थी.......
प्रेतराज ने अपने त्रिशूल की ऊर्जा का प्रहार अभी पर कर दिया जिसके लगते hi अभी एक जोरदार चीख क साथ जमीं पर गिर pada.......Aur उसकव गिरते hi पीजे क आँखों से दो बून्द आंसू क गिरे.......
भद्रा चीखती हुई दौड़ी .......nahhhiii.....aur अभी का सर अपने गोदी में लेकर उससे उठाने का प्रयत्न करने lagi......utho न ....जान ...तुम ...मुज़हे ऐसे ..अकेले छोड़कर नहीं जासकते....
फिर क्रोध ंविं भरकर अपने पिता की तरफ dekhkar.....Pitashri.....aapko अपना वचन निभाने क लिए मुज़हे दिया आशीर्वाद भूल गए........
यदि इन्हे कुछ हो गया तोह में भी अपने प्राण त्याग दूंगी...........
तभी आकाश फिर से गरजने लगा .....तेज़ हवाएं चलने लगाई और अभी का शरीर हवा में तैरने लगा ......और ....एक प्रचड़ ऊर्जा क साथ अभी क सुअरीर ने विकराल रूप धारण कर लिया .....यह रूप इतना बड़ा था क इस्सके सामने सब बौने नज़र आने लगे .....और अभी ने आंखें खोली उसकी आँखों से बिकलिया निकल रही थी ..........
क्रोध क आवेग में वह भयंकर गर्जना करने लगा जिसकी आवाज पोइरे ब्रह्माण्ड में फैलने लगी ......और प्रगट हुई अभी क हातो में एक अद्भुत त्रिशूल ......जिसमें से बिजली निकलकर सीधा रस पर पड़ी जिसके छूटे hi उसके श्री क हाराओं टुकड़े हो गए.........
अब अभी क्रोध में भरकर प्रेतराज की और बढ़ा ........और भयंकर गर्जना क साथ.......
अभी - प्रेतराज तुम्हे इस लोक का भर कमफल क अनुसार दंड देने क लिए दिया गया tha.....naaki .....ऐसे दुष्ट असुरो को वरदान देने क लिए ........और अपने त्रिशूल का वॉर करने क लिए आगे बढ़ा.....
पेरत राज भी अपने भयंकर रूप में aagaye.....Rakshak ...तुम शायद यह भूल रहे हो क तप क वसीभूत होकर त्रिदेव भी इन् असुरो को वरदान देते hai......meine भी धरम का hi पालन किया ...और अपना त्रिशूल प्रगट कर लिया ....
गक भद्रा और बाकी दोनों क इस भयंकर रूप को देखकर बयभीत हो गए थे .....यदि इन् दो महाशक्तियों का टकराव हुए तोह यह संपूर्ण लोक नस्थता हो जाएगा .....इस बात का अंदाजा सभी को था .........
अभी दोनों क त्रिशूल आपस में टकराते ....तभी समउ की गति रुक गयी और आकाश में एक प्रकाश क बिच महादेव की छवि प्रगट हुई....
महादेव - रुक जाओ तुम दोनों .....दोनों hi मेरे अंश हो ...इस प्रकार तुम्हरे टकराव से इस ब्रह्माण्ड को कितनी हानि होगी ....इस्सके विचार नहीं किया......
तुम्हे मैंने यह शक्तिया श्रिस्ति की रक्षा क लिए दी है ना की विनाश क लिए ....
जाते हुए महादेव सबकी स्मृतियों से अभी से रूद्र रूप की याद मिटा देते है
अब बस साबको केवल इतना hi पता था क रस अभी क हातो मारा गया.....
दोनों को अपनी भूल का अहसास होता है और दोनों महादेव को प्रणाम करके क्षमा मांगते है......
महादेव क जाते hi अभी का वह रूप चला जाता है और वह पहले की तरह होकर जमीं पर गिरकर बेहोश हो जाता है........
अब समय अपनी गति से चलने लगता है.......
गक और भद्रा अभी को बेहोश देखकर, ुसड़की और डॉट है क उसी समय अभी को होश आजाता hai.......aur वह सर पकड़ते हुए बैठ जाता है ........
बैठकर वह चारो तरफ देखते हुए वह रस को खोजने लगता है और खड़ा हो जाता है ......
उससे अब कुछ भी याद नहीं था .....क्युकी प्रेतराज क वार से उसके अंदर का रूद्र रूप जागृत हो गया था .....जिससे महादेव ने जाते हुए शांत कर दिया....
कई रीडर्स सोचेंगे क यदि अभी में इतनी सहक्ति पहले से hi है तोह क्यों नहीं वह सारे असुरो का नाश नहीं कर देता......
हम सभी में उसी परमात्मा का अंश है , अनंत शक्तियों का भंडार हम सब में होते हुए भी हम उससे अनजान है ...इसिलए हम उसका प्रयोग नहीं कर सकते....
परमात्मा चाहे तोह भी एक पल में hi सारे बुरे लोगो को समाप्त कर सकते hai...phir भी उन्हें अवतार लेकर कठिन परस्थितियों का सामना करना पड़ता है.....
यह सपूर्ण ब्रह्माण्ड परमात्मा की लीला स्थली है.......
यहाँ कर्म किये बिना किसी को कुछ प्राप्त नहीं होता .....फिर चाहे स्वयं भगवन hi क्यों न हो...
अभी ने गक को जब देखा .....मित्र कहा है वह रस आज में उससे जीवित नहीं chodunga......usne मेरे प्यार को हानि पहुंचनी चाही .....तभी उसके सामने भद्रा आजाती है ........
भद्रा - शांत हो जाईये ....जान ....देखो में बिलकुल ठीक हु आपके सामने .....और अभी क गले लगकर उससे शांत करने का प्रयत्न करने लगती है......
अभी भद्रा क प्रेम से शांत होने लगता hai.........aur उसकी आँखों में देखते हुए ......तुम ठीक तोह हो न jaan......aur वह असुर .....
भद्रा - में बिलकुल ठीक हु जान ....और वह असुर आपके hi हाथो मारा गया .....
क्रोध क आवेग में आपको यह ध्यान hi नहीं रहा......
अब प्रेतलोक असुरो से मुक्त हो गया tha........Aur कस का बीटा रक्तासुर मारा जाचुका था.....
अगले उपदाए में देखेंगे कस क्या करता है , और अभी कैसे अपनी अगली शक्ति प्राप्त करता है
अभी क लिए इतना hi ......
अगले अपडेट रात को .......
अब तक आपने देखा क अभी और भद्रा का मिलान हो गया है....
अभी को प्रेतशक्ति प्राप्त होगयी है.......
दोनों जब प्रेतमहल पहुंचे तोह वह प्रेतराज और रक्तासुर में कुस्ज विवाद चल रहा है....
अब आगे.....,...
अभी और भद्रा प्रेत महल पहुंचे , तोह वह Raktasur(RS) और प्रेतराज (पीजे) क बिच जोरोसे vàad विवाद चल रहा ....
पीजे - यह नहीं हो सकता ...हमारा राज्य तोह पहले hi ले चुके हो ...अब यह नहीं.....
मेरी बेटी यहाँ जन्म लेने क बाद भी ...तामसिक नहीं सात्विक गुणों वाली है.......
उसका विवाह तुम जैसे असुर से ....नहीं ...यह ..संभव नहीं......
रस - प्रेतराज मत भूलो क तुम्हारा राज्य हमारे कब्जे में hai......kahi ऐसा न हो की तुम्हारा यह पुत्री मोह तुम्हारे राज्य का समूलमश कर दे....
दोनों का ऐसा वोवाद कहल hi रहा tha...toh अभी ने पहले भद्रा को आगे भेजा और खुद छिपकर साड़ी बातें सुंनने लगा......
भद्रा को देखकर दोनों चुप हो जाते है.......
भद्रा - प्रणाम पिताश्री .......
भद्रा - की मांग में अभी को खून और उसके चेहरे का तेज़ देखकर प्रेतराज सब समाज गए.......
पीजे - सदा खुश रहो putri.....toh मिल hi गया तुम्हे तुम्हारा जीवन साथी.......
भद्रा आश्चर्य से अपने पिता को देखते हुए...
शरमाते हुए ....परन्तु पिताश्री आपको कैसे पता......
पीजे - पुत्री तुम्हारा पिता hu.........Aur तुम्हारी नियति को जानता हु......
रस - क्या बात कर रहे हो ....और किस नियति की बात कर रहे हो.......
पीजे - रक्त तुम विवाह करना चाहते थे न भद्रा से ....परन्तु नियति ने जिससे चुना है उसके लिए वह आगया है .....और अब भद्रा का विवाह भी हो गया है........
रस - नहीं .....हम असुर नियति को भी बदलने की शक्ति रखते है .......हमने जो थान लिया .....और वह जो भी हो ....जिसको इसने चुना है ........वहबक्या स्याम महादेव भी नहीं रोक sakte.....aur भद्रा क तरफ बढ़ते हुए.......
पीजे - रुक जाओ रक्त .....अगर तुमने मेरी बेटी का स्पर्श भी किया तोह अच्छा नहीं होगा....
और पीजे की आंखें एकदम सफ़ेद हो गयी और आकाश में भयंकर गर्जना होने लगी .......पीजे का रूप बढ़ने लगा .....मैंने स्वयं महाकाल hi प्रगट हो गया हो
......आकाश से भयंकर बिजली प्रगट हुई .....और वह एक त्रिशूल बनकर ....पीजे क हातो में aagayi.....Ab पीजे का शरीर विकराल रूप धारण कर लिया था और उनके माथे पर ..तीसरा नेत्र प्रगट हो गया था जो अभी बंद था......
यह था पीजे का क्षेत्रपाल रूप जो की महदेव का hi एक अंश था....
रस पीजे का ऐसा रूप देखकर थार थार कांपने लगा ......
लेकिन फिर भी हिम्मत करके बोलने लगा .......
रस - आप ऐसा नहीं कर सकते ....हमने आपको प्रासना करके आपसे वरदान प्राप्त किया hai......k आप हमारे अधीन रहेंगे ....यदि आपने यह वचन तोडा .....तोह आपका देवत्व और यह लोक दोनों नष्ट हो जाएंगे......
तभी अभी भी पीजे क सामने आता hai....Aur पीजे को प्रणाम करता है..... इस समय वह प्रेत रूप
में hi था....
अभी - शांत हो जाईये प्रेतराज इसके लिए आपके इस प्रलयंकारी रूप की आवश्यकता नहीं hai.......shant हो जाईये......
प्रेतराज एक प्रेत होते हुए भी एक देवता थे जो महादेव की प्रलयंकारी शक्ति से प्रगट हुए थे ......27 में से 10 नरक इनके अधिकार में थे जहा यह थे दंडनायक ......
और क्षेत्र पल क रूप में हर यज्ञ और हवन में पूजे जाते है.......
रक्तासुर ने इनकी घोर साधना करके पहले इन्हे प्रसन्ना किया ......फिर इनसे वचन लेकर इन्हे अपने अधिकार में ले लिया ......
अभी की बात सुनकर पीजे शांत हो गए .......और वह से चले गए......
अभी - रक्त ध्यान रहे अब भद्रा मेरी पत्नी hai....iski यरफ अपनी कुदृष्टि भी डाली toh.....wohi पल तुम्हारे मृतयु का कारण बनेगा....
रस - ओह्ह्ह तोह तू है वह .....तू रोकेगा मुज़हे .....रक्तासुर ko..........ha...ha...ha.......mrityu तोह अब ...तेरी होगी मेरे हाथो से ......और रस अपनी तलवार लेकर दौड़ पड़ा ...अभी क तरफ ....इसके पहले वह वार कर पाटा .....अभी ने उस्का वॉर ब्लॉक कर दिया और एक जोरदार किक उसके पेट में maari....jiske लगते hi वह दूर जा गिरा .......
लेकिन फिर संभलकर खड़ा हो गया........
रस - टीई यह मजाल की मुजहपर हुम्ला करे ....अब ...देख....
अभी - अरे वह ...हुम्ला तुमने खुद किया और मुज़हे कह रहे हो ....चलो अब और वार करके देखो देखु तोह तुम्हारी शक्ति .......
रस ने अपनी ऊर्जा का एक गोला बनाकर अभी पर छोड़ा ......लेकिन शालू से मिलान में मिले हुए कवच क कारण उससे कुछ नहीं हुआ ....वह गोला अभी से टकरा कर नष्ट हो गया .....
रस लगातार अभी पर वॉर कर रहा था और अभी आराम से अपनी जगह खड़ा था....
अपने सारे वॉर असफल होते देखकर रस हैरान हुआ ...क ...आखिर यह है कौन ....जो दिखने में तोह प्रेत लग रहा hai....lekin...iska वास्तविक रूप कुवह और है......
तभी अभी रस तक पहुँच जाता है और उसकी गर्दन पकड़कर .....उठा देता hai....aur उससे दूर फ़ेंक देता है......
भद्रा यह सब खड़े होकर देख रही थी...........
अभी - रस ाभु भी समय है अपने असुरो को लेकर वापस पटल चले जाओ .....नहीं तोह तुममें से एक भी जीवित नहीं बचेगा........
तभी रस एक पल में भद्रा क पास पहुँच जाता है और उससे लेकर गायब हो जाता है......
इस तरह अचानक रस क भादर को लेकर जाने से अभी का और क्रोध बढ़ने लगा.......
अभी ने शक्ति त्रिशूल का प्रयोग करके पहले तोह पेर्टलॉक से रस की बनायीं हुई शिवल्द ख़तम की जिस्सके अंदर सिर्फ प्रेत और असुर hi प्रवाह कर पाते थे.....
यह रस क इशारे पर उसके अदृश्य मायावी असुर वह क प्रेतों की साड़ी ऊर्जा सोखकर उन्हें ख़तम कर रहे थे ....नगर में जगह अजघ कोहराम मचा हुआ था .....
अब गक भी अपनी मायावी यक्षों की सेना को लेकर प्रेतलोक में प्रवेश कर चूका था ....और असुरो का नाश करने लगा था.......
अदृस्य असुरो का सामना करने क लिए गक की सेना भी अदृश्य होकर असुर को समाप्त कर रही थी.....
नगर मेंदिख तोह कुछ नहीं रहा था परन्तु भयंकर चीखो की आवाजे और युद्ध जा शोर जगह जगह से आरही थी......
अभी हाट में शक्ति त्रिशूल लिए ......अपनी प्रेतशक्ति से हर घर और हर देवर को पार करते हुए भद्रा को ढूंढ रहा था.........
रस की ऊर्जा का पीछा करते हुए वह एक भवन में पहुंचा ........
यहाँ रस भद्रा को एक भवन ले आया .......और उससे एक बीएड पर लाकर पटक दिया .....
रस - में तोह तुम्हे अपनी रानी बनाना चाहता था ....परतु अब लगता hai.....aur उस्सकी और बढ़ने laga.......tabhi भद्रा ने एक जोरदार किक उसके पेट में मारी....
भद्रा - दूर रहो मुज़हे यदि तूने मुज़हे चुने का भी प्रयत्न किया तोह तुम्हर वह दर्दनाक अंत होगा क फिर कोई असुर यहाँ प्रवेश करने का सहस नहीं करेगा....
तभी रस आगे आकर उसके बाल पदक लेता है और अपनी तरफ खींचने लगता है .....क भद्रा दोनों हाथो से रस का सर निचे करके ..अपने घुटने का जोरदार वॉर उसके नक् पर करती hai.....jise उसके नक् से खून बहने लगता है ........
अब रस का क्रोध बहुत बढ़ चूका था .....तभी वह भद्रा क बाल कसकर पकड़ लेता है.......
तूने यह अच्छा नहीं किया भद्रा
.....अब तक में तुमपर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं कर रहा था ...परन्तु अब तुमने मुज़हे विवश कर दिया.......
और उसके बाल जोरो से खींच कर अपनी talwar..utha li......Bhadra अपने हाथो से रस का मुँह नोचने लगी उसके नाखून रस क चेहरे पर अपने निशान छोड़ राहु थे.......
इससे पहले क रस की तलवार भद्रा को लगती उसकी कमर पर एक जोरदार किक पड़ी जिसे वह लुढ़क कर.....
दूर जा गिरा ......वह अभी अपने वास्तविक रूप में खड़ा था.....
रस - ओह्ह्ह तोह रक्षक तुम , ....वही में सोच रहा था एक प्रेत में इतनी शक्ति नहीं हो सकती क वह मेरा सामना करे ....अच्छा हुआ अब मैं पिताश्री को तुम्हारा मृत शरीर भेंट करूँगा......
जब भद्रा ने अभी को देखा तोह वह उससे लिपट गयी....
अभी उसके सर को सहलाते हुए .....बस करो जान ....बस karo.....kshama कार्डो ..मुज़हे क मेरे रहते हुए ..तुम्हे यह सब जीलना पड़ा.....
और फिर उससे छोड़कर ..रस की तरफ बढ़ते हुए ......
अभी - कायर इस तरह स्त्रियों पर क्या अपनी वेवेता दिखा रहा है ......चल उठ और मुकाबला कर मुजह्से ........
फिर रस भी अपनी तलवार संभलकर अभी क आगे आगया .....और अपनी तलवार से वॉर करने लगा ...अभी उसके हर वॉर को ब्लॉक कर देता .......इससे रस का ग़ुस्सा और तेज़ होने लगा.....
लड़ते लड़ते दोनों भवन क बहार आगये the.......Abhi ने अब अपनी तलवार छोड़ दी और वह निहत्ता रस क सामने खड़ा हो gaya........Rs ने मौका जानकार apni..talwar का भरपूर war....Abhi क सर पर किया ...
लेकिन यह क्या अभी क सर से टकराते hi वह तलवार टूट gayi........tab तक गक & टीम भीआसुरो का नाश करते हुए वह पहुँच गयी thi.......aur अभी क युद्ध को देख रही थी.......
अब रस ने अपना धनुष प्रगट क्या .....और दिव्यास्त्रों से अभी पर वार करे लगा ......अभी भी उन ास्त्रो को अपने वॉर से बखूबी काटे लगा.......
तभी रस ने धनुष आकाश में उठाया तोह आकाश का रंग बदलने laga.......Abhi समाज गया क यह त्रिदेव में से hi किसी देव क शास्त्र का आवाहन कर रहा है.......
तोह उसने अपनी गति का प्रयोग करके एक पल में उसके पास पहुँच गया और उससे धनुष छीनकर उस्सको बिच से तोड़ दिया ...और एक जोड़कर किक का प्रहार उसके सीने पर किया ......जिससे वह जमीं पर गिर गया.......
यह सब इतने जल्दी हुआ क रस को सँभालने का मौका भी नहीं मिला ........
अब अभी ने अपना एक पेअर उसके छाती पर रखकर अपने शक्ति तरलशूल को याद किया ........
अपनी मृत्यु को अपने सामने देहकर रस जोर से chilaya......Pretraaj......Aapne मेरी रक्षा का वचन दिया था ...आपको महादेव की सौगंध hai...hai क अपना वचन निभाए.......
न चाहते हुए भी अपने वचन क लिए प्रेतराज को वह प्रगट होना pada.........aakash भयंकर गर्जना क साथ पूरा काला हो gaya.....aur उसमें .....बिजली चमकने लगी ....बिना बदलो के बिजली की चमक ....और चारो और पहला आंध्र........
तभी प्रेतराज वह प्रगट हो गए और प्रगट हुआ उनका त्रिशूल जो महादेव क द्वारा उन्हें प्राप्त हुआ tha.....jismein से भयंकर बिजली परगट हो रही थी.......
प्रेतराज ने अपने त्रिशूल की ऊर्जा का प्रहार अभी पर कर दिया जिसके लगते hi अभी एक जोरदार चीख क साथ जमीं पर गिर pada.......Aur उसकव गिरते hi पीजे क आँखों से दो बून्द आंसू क गिरे.......
भद्रा चीखती हुई दौड़ी .......nahhhiii.....aur अभी का सर अपने गोदी में लेकर उससे उठाने का प्रयत्न करने lagi......utho न ....जान ...तुम ...मुज़हे ऐसे ..अकेले छोड़कर नहीं जासकते....
फिर क्रोध ंविं भरकर अपने पिता की तरफ dekhkar.....Pitashri.....aapko अपना वचन निभाने क लिए मुज़हे दिया आशीर्वाद भूल गए........
यदि इन्हे कुछ हो गया तोह में भी अपने प्राण त्याग दूंगी...........
तभी आकाश फिर से गरजने लगा .....तेज़ हवाएं चलने लगाई और अभी का शरीर हवा में तैरने लगा ......और ....एक प्रचड़ ऊर्जा क साथ अभी क सुअरीर ने विकराल रूप धारण कर लिया .....यह रूप इतना बड़ा था क इस्सके सामने सब बौने नज़र आने लगे .....और अभी ने आंखें खोली उसकी आँखों से बिकलिया निकल रही थी ..........
क्रोध क आवेग में वह भयंकर गर्जना करने लगा जिसकी आवाज पोइरे ब्रह्माण्ड में फैलने लगी ......और प्रगट हुई अभी क हातो में एक अद्भुत त्रिशूल ......जिसमें से बिजली निकलकर सीधा रस पर पड़ी जिसके छूटे hi उसके श्री क हाराओं टुकड़े हो गए.........
अब अभी क्रोध में भरकर प्रेतराज की और बढ़ा ........और भयंकर गर्जना क साथ.......
अभी - प्रेतराज तुम्हे इस लोक का भर कमफल क अनुसार दंड देने क लिए दिया गया tha.....naaki .....ऐसे दुष्ट असुरो को वरदान देने क लिए ........और अपने त्रिशूल का वॉर करने क लिए आगे बढ़ा.....
पेरत राज भी अपने भयंकर रूप में aagaye.....Rakshak ...तुम शायद यह भूल रहे हो क तप क वसीभूत होकर त्रिदेव भी इन् असुरो को वरदान देते hai......meine भी धरम का hi पालन किया ...और अपना त्रिशूल प्रगट कर लिया ....
गक भद्रा और बाकी दोनों क इस भयंकर रूप को देखकर बयभीत हो गए थे .....यदि इन् दो महाशक्तियों का टकराव हुए तोह यह संपूर्ण लोक नस्थता हो जाएगा .....इस बात का अंदाजा सभी को था .........
अभी दोनों क त्रिशूल आपस में टकराते ....तभी समउ की गति रुक गयी और आकाश में एक प्रकाश क बिच महादेव की छवि प्रगट हुई....
महादेव - रुक जाओ तुम दोनों .....दोनों hi मेरे अंश हो ...इस प्रकार तुम्हरे टकराव से इस ब्रह्माण्ड को कितनी हानि होगी ....इस्सके विचार नहीं किया......
तुम्हे मैंने यह शक्तिया श्रिस्ति की रक्षा क लिए दी है ना की विनाश क लिए ....
जाते हुए महादेव सबकी स्मृतियों से अभी से रूद्र रूप की याद मिटा देते है
अब बस साबको केवल इतना hi पता था क रस अभी क हातो मारा गया.....
दोनों को अपनी भूल का अहसास होता है और दोनों महादेव को प्रणाम करके क्षमा मांगते है......
महादेव क जाते hi अभी का वह रूप चला जाता है और वह पहले की तरह होकर जमीं पर गिरकर बेहोश हो जाता है........
अब समय अपनी गति से चलने लगता है.......
गक और भद्रा अभी को बेहोश देखकर, ुसड़की और डॉट है क उसी समय अभी को होश आजाता hai.......aur वह सर पकड़ते हुए बैठ जाता है ........
बैठकर वह चारो तरफ देखते हुए वह रस को खोजने लगता है और खड़ा हो जाता है ......
उससे अब कुछ भी याद नहीं था .....क्युकी प्रेतराज क वार से उसके अंदर का रूद्र रूप जागृत हो गया था .....जिससे महादेव ने जाते हुए शांत कर दिया....
कई रीडर्स सोचेंगे क यदि अभी में इतनी सहक्ति पहले से hi है तोह क्यों नहीं वह सारे असुरो का नाश नहीं कर देता......
हम सभी में उसी परमात्मा का अंश है , अनंत शक्तियों का भंडार हम सब में होते हुए भी हम उससे अनजान है ...इसिलए हम उसका प्रयोग नहीं कर सकते....
परमात्मा चाहे तोह भी एक पल में hi सारे बुरे लोगो को समाप्त कर सकते hai...phir भी उन्हें अवतार लेकर कठिन परस्थितियों का सामना करना पड़ता है.....
यह सपूर्ण ब्रह्माण्ड परमात्मा की लीला स्थली है.......
यहाँ कर्म किये बिना किसी को कुछ प्राप्त नहीं होता .....फिर चाहे स्वयं भगवन hi क्यों न हो...
अभी ने गक को जब देखा .....मित्र कहा है वह रस आज में उससे जीवित नहीं chodunga......usne मेरे प्यार को हानि पहुंचनी चाही .....तभी उसके सामने भद्रा आजाती है ........
भद्रा - शांत हो जाईये ....जान ....देखो में बिलकुल ठीक हु आपके सामने .....और अभी क गले लगकर उससे शांत करने का प्रयत्न करने लगती है......
अभी भद्रा क प्रेम से शांत होने लगता hai.........aur उसकी आँखों में देखते हुए ......तुम ठीक तोह हो न jaan......aur वह असुर .....
भद्रा - में बिलकुल ठीक हु जान ....और वह असुर आपके hi हाथो मारा गया .....
क्रोध क आवेग में आपको यह ध्यान hi नहीं रहा......
अब प्रेतलोक असुरो से मुक्त हो गया tha........Aur कस का बीटा रक्तासुर मारा जाचुका था.....
अगले उपदाए में देखेंगे कस क्या करता है , और अभी कैसे अपनी अगली शक्ति प्राप्त करता है
अभी क लिए इतना hi ......
अगले अपडेट रात को .......