ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 10 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 82



अब तक आपने देखा क अभी और भद्रा का मिलान हो गया है....

अभी को प्रेतशक्ति प्राप्त होगयी है.......

दोनों जब प्रेतमहल पहुंचे तोह वह प्रेतराज और रक्तासुर में कुस्ज विवाद चल रहा है....



अब आगे.....,...

अभी और भद्रा प्रेत महल पहुंचे , तोह वह Raktasur(RS) और प्रेतराज (पीजे) क बिच जोरोसे vàad विवाद चल रहा ....

पीजे - यह नहीं हो सकता ...हमारा राज्य तोह पहले hi ले चुके हो ...अब यह नहीं.....

मेरी बेटी यहाँ जन्म लेने क बाद भी ...तामसिक नहीं सात्विक गुणों वाली है.......

उसका विवाह तुम जैसे असुर से ....नहीं ...यह ..संभव नहीं......

रस - प्रेतराज मत भूलो क तुम्हारा राज्य हमारे कब्जे में hai......kahi ऐसा न हो की तुम्हारा यह पुत्री मोह तुम्हारे राज्य का समूलमश कर दे....

दोनों का ऐसा वोवाद कहल hi रहा tha...toh अभी ने पहले भद्रा को आगे भेजा और खुद छिपकर साड़ी बातें सुंनने लगा......

भद्रा को देखकर दोनों चुप हो जाते है.......

भद्रा - प्रणाम पिताश्री .......

भद्रा - की मांग में अभी को खून और उसके चेहरे का तेज़ देखकर प्रेतराज सब समाज गए.......

पीजे - सदा खुश रहो putri.....toh मिल hi गया तुम्हे तुम्हारा जीवन साथी.......

भद्रा आश्चर्य से अपने पिता को देखते हुए...

शरमाते हुए ....परन्तु पिताश्री आपको कैसे पता......

पीजे - पुत्री तुम्हारा पिता hu.........Aur तुम्हारी नियति को जानता हु......

रस - क्या बात कर रहे हो ....और किस नियति की बात कर रहे हो.......

पीजे - रक्त तुम विवाह करना चाहते थे न भद्रा से ....परन्तु नियति ने जिससे चुना है उसके लिए वह आगया है .....और अब भद्रा का विवाह भी हो गया है........

रस - नहीं .....हम असुर नियति को भी बदलने की शक्ति रखते है .......हमने जो थान लिया .....और वह जो भी हो ....जिसको इसने चुना है ........वहबक्या स्याम महादेव भी नहीं रोक sakte.....aur भद्रा क तरफ बढ़ते हुए.......

पीजे - रुक जाओ रक्त .....अगर तुमने मेरी बेटी का स्पर्श भी किया तोह अच्छा नहीं होगा....

और पीजे की आंखें एकदम सफ़ेद हो गयी और आकाश में भयंकर गर्जना होने लगी .......पीजे का रूप बढ़ने लगा .....मैंने स्वयं महाकाल hi प्रगट हो गया हो

......आकाश से भयंकर बिजली प्रगट हुई .....और वह एक त्रिशूल बनकर ....पीजे क हातो में aagayi.....Ab पीजे का शरीर विकराल रूप धारण कर लिया था और उनके माथे पर ..तीसरा नेत्र प्रगट हो गया था जो अभी बंद था......

यह था पीजे का क्षेत्रपाल रूप जो की महदेव का hi एक अंश था....

रस पीजे का ऐसा रूप देखकर थार थार कांपने लगा ......

लेकिन फिर भी हिम्मत करके बोलने लगा .......

रस - आप ऐसा नहीं कर सकते ....हमने आपको प्रासना करके आपसे वरदान प्राप्त किया hai......k आप हमारे अधीन रहेंगे ....यदि आपने यह वचन तोडा .....तोह आपका देवत्व और यह लोक दोनों नष्ट हो जाएंगे......

तभी अभी भी पीजे क सामने आता hai....Aur पीजे को प्रणाम करता है..... इस समय वह प्रेत रूप

में hi था....

अभी - शांत हो जाईये प्रेतराज इसके लिए आपके इस प्रलयंकारी रूप की आवश्यकता नहीं hai.......shant हो जाईये......

प्रेतराज एक प्रेत होते हुए भी एक देवता थे जो महादेव की प्रलयंकारी शक्ति से प्रगट हुए थे ......27 में से 10 नरक इनके अधिकार में थे जहा यह थे दंडनायक ......

और क्षेत्र पल क रूप में हर यज्ञ और हवन में पूजे जाते है.......

रक्तासुर ने इनकी घोर साधना करके पहले इन्हे प्रसन्ना किया ......फिर इनसे वचन लेकर इन्हे अपने अधिकार में ले लिया ......

अभी की बात सुनकर पीजे शांत हो गए .......और वह से चले गए......

अभी - रक्त ध्यान रहे अब भद्रा मेरी पत्नी hai....iski यरफ अपनी कुदृष्टि भी डाली toh.....wohi पल तुम्हारे मृतयु का कारण बनेगा....

रस - ओह्ह्ह तोह तू है वह .....तू रोकेगा मुज़हे .....रक्तासुर ko..........ha...ha...ha.......mrityu तोह अब ...तेरी होगी मेरे हाथो से ......और रस अपनी तलवार लेकर दौड़ पड़ा ...अभी क तरफ ....इसके पहले वह वार कर पाटा .....अभी ने उस्का वॉर ब्लॉक कर दिया और एक जोरदार किक उसके पेट में maari....jiske लगते hi वह दूर जा गिरा .......

लेकिन फिर संभलकर खड़ा हो गया........

रस - टीई यह मजाल की मुजहपर हुम्ला करे ....अब ...देख....

अभी - अरे वह ...हुम्ला तुमने खुद किया और मुज़हे कह रहे हो ....चलो अब और वार करके देखो देखु तोह तुम्हारी शक्ति .......

रस ने अपनी ऊर्जा का एक गोला बनाकर अभी पर छोड़ा ......लेकिन शालू से मिलान में मिले हुए कवच क कारण उससे कुछ नहीं हुआ ....वह गोला अभी से टकरा कर नष्ट हो गया .....

रस लगातार अभी पर वॉर कर रहा था और अभी आराम से अपनी जगह खड़ा था....

अपने सारे वॉर असफल होते देखकर रस हैरान हुआ ...क ...आखिर यह है कौन ....जो दिखने में तोह प्रेत लग रहा hai....lekin...iska वास्तविक रूप कुवह और है......

तभी अभी रस तक पहुँच जाता है और उसकी गर्दन पकड़कर .....उठा देता hai....aur उससे दूर फ़ेंक देता है......

भद्रा यह सब खड़े होकर देख रही थी...........

अभी - रस ाभु भी समय है अपने असुरो को लेकर वापस पटल चले जाओ .....नहीं तोह तुममें से एक भी जीवित नहीं बचेगा........

तभी रस एक पल में भद्रा क पास पहुँच जाता है और उससे लेकर गायब हो जाता है......

इस तरह अचानक रस क भादर को लेकर जाने से अभी का और क्रोध बढ़ने लगा.......

अभी ने शक्ति त्रिशूल का प्रयोग करके पहले तोह पेर्टलॉक से रस की बनायीं हुई शिवल्द ख़तम की जिस्सके अंदर सिर्फ प्रेत और असुर hi प्रवाह कर पाते थे.....

यह रस क इशारे पर उसके अदृश्य मायावी असुर वह क प्रेतों की साड़ी ऊर्जा सोखकर उन्हें ख़तम कर रहे थे ....नगर में जगह अजघ कोहराम मचा हुआ था .....

अब गक भी अपनी मायावी यक्षों की सेना को लेकर प्रेतलोक में प्रवेश कर चूका था ....और असुरो का नाश करने लगा था.......

अदृस्य असुरो का सामना करने क लिए गक की सेना भी अदृश्य होकर असुर को समाप्त कर रही थी.....

नगर मेंदिख तोह कुछ नहीं रहा था परन्तु भयंकर चीखो की आवाजे और युद्ध जा शोर जगह जगह से आरही थी......

अभी हाट में शक्ति त्रिशूल लिए ......अपनी प्रेतशक्ति से हर घर और हर देवर को पार करते हुए भद्रा को ढूंढ रहा था.........

रस की ऊर्जा का पीछा करते हुए वह एक भवन में पहुंचा ........

यहाँ रस भद्रा को एक भवन ले आया .......और उससे एक बीएड पर लाकर पटक दिया .....

रस - में तोह तुम्हे अपनी रानी बनाना चाहता था ....परतु अब लगता hai.....aur उस्सकी और बढ़ने laga.......tabhi भद्रा ने एक जोरदार किक उसके पेट में मारी....

भद्रा - दूर रहो मुज़हे यदि तूने मुज़हे चुने का भी प्रयत्न किया तोह तुम्हर वह दर्दनाक अंत होगा क फिर कोई असुर यहाँ प्रवेश करने का सहस नहीं करेगा....

तभी रस आगे आकर उसके बाल पदक लेता है और अपनी तरफ खींचने लगता है .....क भद्रा दोनों हाथो से रस का सर निचे करके ..अपने घुटने का जोरदार वॉर उसके नक् पर करती hai.....jise उसके नक् से खून बहने लगता है ........

अब रस का क्रोध बहुत बढ़ चूका था .....तभी वह भद्रा क बाल कसकर पकड़ लेता है.......

तूने यह अच्छा नहीं किया भद्रा

.....अब तक में तुमपर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं कर रहा था ...परन्तु अब तुमने मुज़हे विवश कर दिया.......

और उसके बाल जोरो से खींच कर अपनी talwar..utha li......Bhadra अपने हाथो से रस का मुँह नोचने लगी उसके नाखून रस क चेहरे पर अपने निशान छोड़ राहु थे.......

इससे पहले क रस की तलवार भद्रा को लगती उसकी कमर पर एक जोरदार किक पड़ी जिसे वह लुढ़क कर.....

दूर जा गिरा ......वह अभी अपने वास्तविक रूप में खड़ा था.....

रस - ओह्ह्ह तोह रक्षक तुम , ....वही में सोच रहा था एक प्रेत में इतनी शक्ति नहीं हो सकती क वह मेरा सामना करे ....अच्छा हुआ अब मैं पिताश्री को तुम्हारा मृत शरीर भेंट करूँगा......

जब भद्रा ने अभी को देखा तोह वह उससे लिपट गयी....

अभी उसके सर को सहलाते हुए .....बस करो जान ....बस karo.....kshama कार्डो ..मुज़हे क मेरे रहते हुए ..तुम्हे यह सब जीलना पड़ा.....

और फिर उससे छोड़कर ..रस की तरफ बढ़ते हुए ......

अभी - कायर इस तरह स्त्रियों पर क्या अपनी वेवेता दिखा रहा है ......चल उठ और मुकाबला कर मुजह्से ........

फिर रस भी अपनी तलवार संभलकर अभी क आगे आगया .....और अपनी तलवार से वॉर करने लगा ...अभी उसके हर वॉर को ब्लॉक कर देता .......इससे रस का ग़ुस्सा और तेज़ होने लगा.....

लड़ते लड़ते दोनों भवन क बहार आगये the.......Abhi ने अब अपनी तलवार छोड़ दी और वह निहत्ता रस क सामने खड़ा हो gaya........Rs ने मौका जानकार apni..talwar का भरपूर war....Abhi क सर पर किया ...

लेकिन यह क्या अभी क सर से टकराते hi वह तलवार टूट gayi........tab तक गक & टीम भीआसुरो का नाश करते हुए वह पहुँच गयी thi.......aur अभी क युद्ध को देख रही थी.......

अब रस ने अपना धनुष प्रगट क्या .....और दिव्यास्त्रों से अभी पर वार करे लगा ......अभी भी उन ास्त्रो को अपने वॉर से बखूबी काटे लगा.......

तभी रस ने धनुष आकाश में उठाया तोह आकाश का रंग बदलने laga.......Abhi समाज गया क यह त्रिदेव में से hi किसी देव क शास्त्र का आवाहन कर रहा है.......

तोह उसने अपनी गति का प्रयोग करके एक पल में उसके पास पहुँच गया और उससे धनुष छीनकर उस्सको बिच से तोड़ दिया ...और एक जोड़कर किक का प्रहार उसके सीने पर किया ......जिससे वह जमीं पर गिर गया.......

यह सब इतने जल्दी हुआ क रस को सँभालने का मौका भी नहीं मिला ........

अब अभी ने अपना एक पेअर उसके छाती पर रखकर अपने शक्ति तरलशूल को याद किया ........

अपनी मृत्यु को अपने सामने देहकर रस जोर से chilaya......Pretraaj......Aapne मेरी रक्षा का वचन दिया था ...आपको महादेव की सौगंध hai...hai क अपना वचन निभाए.......

न चाहते हुए भी अपने वचन क लिए प्रेतराज को वह प्रगट होना pada.........aakash भयंकर गर्जना क साथ पूरा काला हो gaya.....aur उसमें .....बिजली चमकने लगी ....बिना बदलो के बिजली की चमक ....और चारो और पहला आंध्र........

तभी प्रेतराज वह प्रगट हो गए और प्रगट हुआ उनका त्रिशूल जो महादेव क द्वारा उन्हें प्राप्त हुआ tha.....jismein से भयंकर बिजली परगट हो रही थी.......

प्रेतराज ने अपने त्रिशूल की ऊर्जा का प्रहार अभी पर कर दिया जिसके लगते hi अभी एक जोरदार चीख क साथ जमीं पर गिर pada.......Aur उसकव गिरते hi पीजे क आँखों से दो बून्द आंसू क गिरे.......

भद्रा चीखती हुई दौड़ी .......nahhhiii.....aur अभी का सर अपने गोदी में लेकर उससे उठाने का प्रयत्न करने lagi......utho न ....जान ...तुम ...मुज़हे ऐसे ..अकेले छोड़कर नहीं जासकते....

फिर क्रोध ंविं भरकर अपने पिता की तरफ dekhkar.....Pitashri.....aapko अपना वचन निभाने क लिए मुज़हे दिया आशीर्वाद भूल गए........

यदि इन्हे कुछ हो गया तोह में भी अपने प्राण त्याग दूंगी...........

तभी आकाश फिर से गरजने लगा .....तेज़ हवाएं चलने लगाई और अभी का शरीर हवा में तैरने लगा ......और ....एक प्रचड़ ऊर्जा क साथ अभी क सुअरीर ने विकराल रूप धारण कर लिया .....यह रूप इतना बड़ा था क इस्सके सामने सब बौने नज़र आने लगे .....और अभी ने आंखें खोली उसकी आँखों से बिकलिया निकल रही थी ..........

क्रोध क आवेग में वह भयंकर गर्जना करने लगा जिसकी आवाज पोइरे ब्रह्माण्ड में फैलने लगी ......और प्रगट हुई अभी क हातो में एक अद्भुत त्रिशूल ......जिसमें से बिजली निकलकर सीधा रस पर पड़ी जिसके छूटे hi उसके श्री क हाराओं टुकड़े हो गए.........

अब अभी क्रोध में भरकर प्रेतराज की और बढ़ा ........और भयंकर गर्जना क साथ.......

अभी - प्रेतराज तुम्हे इस लोक का भर कमफल क अनुसार दंड देने क लिए दिया गया tha.....naaki .....ऐसे दुष्ट असुरो को वरदान देने क लिए ........और अपने त्रिशूल का वॉर करने क लिए आगे बढ़ा.....

पेरत राज भी अपने भयंकर रूप में aagaye.....Rakshak ...तुम शायद यह भूल रहे हो क तप क वसीभूत होकर त्रिदेव भी इन् असुरो को वरदान देते hai......meine भी धरम का hi पालन किया ...और अपना त्रिशूल प्रगट कर लिया ....

गक भद्रा और बाकी दोनों क इस भयंकर रूप को देखकर बयभीत हो गए थे .....यदि इन् दो महाशक्तियों का टकराव हुए तोह यह संपूर्ण लोक नस्थता हो जाएगा .....इस बात का अंदाजा सभी को था .........

अभी दोनों क त्रिशूल आपस में टकराते ....तभी समउ की गति रुक गयी और आकाश में एक प्रकाश क बिच महादेव की छवि प्रगट हुई....

महादेव - रुक जाओ तुम दोनों .....दोनों hi मेरे अंश हो ...इस प्रकार तुम्हरे टकराव से इस ब्रह्माण्ड को कितनी हानि होगी ....इस्सके विचार नहीं किया......

तुम्हे मैंने यह शक्तिया श्रिस्ति की रक्षा क लिए दी है ना की विनाश क लिए ....

जाते हुए महादेव सबकी स्मृतियों से अभी से रूद्र रूप की याद मिटा देते है

अब बस साबको केवल इतना hi पता था क रस अभी क हातो मारा गया.....

दोनों को अपनी भूल का अहसास होता है और दोनों महादेव को प्रणाम करके क्षमा मांगते है......

महादेव क जाते hi अभी का वह रूप चला जाता है और वह पहले की तरह होकर जमीं पर गिरकर बेहोश हो जाता है........

अब समय अपनी गति से चलने लगता है.......

गक और भद्रा अभी को बेहोश देखकर, ुसड़की और डॉट है क उसी समय अभी को होश आजाता hai.......aur वह सर पकड़ते हुए बैठ जाता है ........

बैठकर वह चारो तरफ देखते हुए वह रस को खोजने लगता है और खड़ा हो जाता है ......

उससे अब कुछ भी याद नहीं था .....क्युकी प्रेतराज क वार से उसके अंदर का रूद्र रूप जागृत हो गया था .....जिससे महादेव ने जाते हुए शांत कर दिया....

कई रीडर्स सोचेंगे क यदि अभी में इतनी सहक्ति पहले से hi है तोह क्यों नहीं वह सारे असुरो का नाश नहीं कर देता......

हम सभी में उसी परमात्मा का अंश है , अनंत शक्तियों का भंडार हम सब में होते हुए भी हम उससे अनजान है ...इसिलए हम उसका प्रयोग नहीं कर सकते....

परमात्मा चाहे तोह भी एक पल में hi सारे बुरे लोगो को समाप्त कर सकते hai...phir भी उन्हें अवतार लेकर कठिन परस्थितियों का सामना करना पड़ता है.....

यह सपूर्ण ब्रह्माण्ड परमात्मा की लीला स्थली है.......

यहाँ कर्म किये बिना किसी को कुछ प्राप्त नहीं होता .....फिर चाहे स्वयं भगवन hi क्यों न हो...

अभी ने गक को जब देखा .....मित्र कहा है वह रस आज में उससे जीवित नहीं chodunga......usne मेरे प्यार को हानि पहुंचनी चाही .....तभी उसके सामने भद्रा आजाती है ........

भद्रा - शांत हो जाईये ....जान ....देखो में बिलकुल ठीक हु आपके सामने .....और अभी क गले लगकर उससे शांत करने का प्रयत्न करने लगती है......

अभी भद्रा क प्रेम से शांत होने लगता hai.........aur उसकी आँखों में देखते हुए ......तुम ठीक तोह हो न jaan......aur वह असुर .....

भद्रा - में बिलकुल ठीक हु जान ....और वह असुर आपके hi हाथो मारा गया .....

क्रोध क आवेग में आपको यह ध्यान hi नहीं रहा......

अब प्रेतलोक असुरो से मुक्त हो गया tha........Aur कस का बीटा रक्तासुर मारा जाचुका था.....

अगले उपदाए में देखेंगे कस क्या करता है , और अभी कैसे अपनी अगली शक्ति प्राप्त करता है

अभी क लिए इतना hi ......

अगले अपडेट रात को .......

 
ठंकु सो मच ृतिमा जी फॉर अप्प्रेसिएटिंग थे स्टोरी & योर वंडरफुल कमैंट्स :थैंक्यू:

ृतिमा जी रिम्पी क साथ अब तक सिर्फ दो hi इंसिडेंट हुए है, जिसमे उसके पावर का उसे हुआ है, उसने अपनी पावर दी नहीं है.....

14 विवाह की बात ऐसी है यह 14 कन्याये अभी की hi शक्ति क अंश है ......जिससे अपनी शक्ति क साथ साथ उस लोक की भी ऊर्जा अभी को मिलेगी जहा वह प्रगट हुई है.....

प्लस कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग

योर अप्प्रेसिअशन इस माय रिवॉर्ड????

:thanks::thanks::thanks:

लेटेस्ट अपडेट 82 पोस्टेड......
 
बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी ,आपके इस प्रोत्साहन क liye.......bhai कई वर्षो से मेरे मैं में यह कैरक्टर घूम रहा ...था ....जब मैंने इस साइट पर बहुत सी फंतासी स्टोरीज अधूरी देखि .....तोह मैंने पहली बार कुछ लिखने का प्रत्यन kiya.....aur अपने मैं क पात्र को यहाँ उतर दिया....

आप सबका साथ और प्यार मिलता गया और कल्पना शक्ति बढ़ती गयी...

बस भाई ऐसे hi साथ बनाये रखे....

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:
 
अपडेट - 83



अब तक आपने देखा क रक्तासुर का अंत हो गया ....और प्रेत लोक असुरो से मुक्त हो गया .......



अब आगी....

अभी गक & टीम ..पीजे & भद्रा क साथ प्रेतलोक क महल में आगये

........प्रेत लोक से असुरो का आतंक तोह ख़तम हो गया था .........अभी को यह आभास हो रहा था क उसका आगे बढ़ने का मार्ग यही से होकर जाता है.....

यहाँ पटल लोक में ......

कस - Nahiiiiii...yeh नहीं हो सकता ......और जो सैनिक रक्तासुर की मृत्यु का समाचार लाया था उसकी गार्डन अपने खड़क क एक hi वार से अलग कर देता है.........

क्रोद्ध क कारण उसकी आंखें लाल हो जाती है जैसे जलते हुए लाल अंगारे हो.....

कस क सामने किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी........

कस - भयाक्ष क्या कहा था तुमने ......अवसर दो ......दिया अवसर ....तोह किया हुआ ......मैंने पहले hi कहा था क सावधान रहो ........

मैं अपनी साधना क वजह से बंधा हुआ हु ......अभी केवल 5 hi बलि हुई है 9 अभी बाकी है ......

नहीं तोह मैं hi अकेला काफी था रक्षक क लिए ........

अभी केवल अपनी शक्तिया बढ़ने का प्रयत्न karo.........Aur मारकेश तुम अपने गुप्तचरों को 14 भुवन में क्रिया शील कार्डो ......

कोई तोह कमजोरी होगी रक्षक की हमे वही hi पता करनी है ......जब तक मेरा आदेश नहीं मिलता ....तुम नज़र रखने क सिवा कुछ नहीं करोगे.......

सभा बर्खास्त हो जाती hai.........KS वह से अपने पूजा कक्ष में जाता है .....और हवन कुंड क आगे बैठ जाता है .......

कस - रक्षक बड़ा शौक है न तुम्हे शत्रुओ का सागर करने का ....अब ...देख मेरा इंद्रा जाल

और हवन में अपनी दाहिने हाथ को चीरा लगाकर कुछ मंत्र बोलता है .....तोह उसमें से ....सम्मोहक नाम का एक सप्त रंगी . ..Baccha..jiske शरीर से अलग अलग रंग प्रगट हो रहे थे.......

सम्मोहक (सक) - आज्ञा करे असुर सम्राट.......

कस - सम्मोहक तुम्हे पता है क्या करना है.....

लेकिन ध्यान रहे अपने आपको उसके सामने प्रगट मत करने ........बस

उसकी शक्ति को hi अस्त्र बनाकर उसके विरुद्ध प्रयोग करना है.......

यहाँ अभी अब अटल लोक को असुरो से मुक्त करने की योजना को आगे बढ़ने क लिए .......अभी अपने नए सफर की शुरुवात क लिए जाने लिए प्रेतराज की आज्ञा लेने गया...

उनसे उन्हें पता चला क अटल लोक जाने का मार्ग प्रेतलोक से hi जाता है.......

भद्रा भी साथ जाने की ज़िद करने लगी, .लेकिन अभी उससे ले जाने क पक्ष में नहीं था ....

..अभी - नहीं जान में तुम्हे नहीं ले जा सकता ...आगे पता नहीं और कितनी चुनौतियां आने वाली है, ..और तुम्हे अभी और अभ्यास की आवश्यकता है ..

.क्युकी अभी तुम्हारी शक्तिया नयी है ....तुम्हे उनके बारे में ज्ञात नहीं है..

.

पीजे - आप उसकी चिंता न करे रक्षक ....भद्रा को में स्वयं प्रशिक्षण dunga....jisse यह जल्दी hi साड़ी विद्याओ में पारंगत हो जाए.....

अभी - और वैसे भी विवाह क बाद तुम मेरे मैं से जुड़ चुकी हो ...अब जब भी तुम्हारा मैं करे तुम मुज़से बात कर सकती हो ....

अभी वह से विदा होकर गक और उसके सैनिको क साथ अटल लोक जाने वाले पोर्टल में प्रवाह कर जाता है..........

जैसे hi वह सब लोग उस पोर्टल से बहार निकले उनके सामने एक विशाल और घाना जंगल था ....लगता था कई वर्षो से यहाँ सूरज की रौशनी तक नहीं पहुंची.....

घने वन क उस रास्ते पर जाने का विचार त्याग कर पहले तोह उन्होंने आकाश मार्ग से जाने का विचार किया....

फिर सोचा क इससे शत्रु सतर्क हो सकता है.....

तोह अभी ने अपना पर्वत रूप धारण कर लिया और उस वन क पेड़ो से होया हुआ अपनी तेज़ गति का प्रयोग करते हुए वन को देखने लगा .....

लेकिन पूरे वन में सिवाय बड़े बड़े पेड़ो क कुछ नहीं था.........

अभी ने सोचा कही यह माया तोह नहीं .....तोह अपनी अंतर्मन की दृष्टि से देखा तोह वह को माया नहीं थी चारो तरफ घने जंगल से वह लोग घेरे हुए थे.......

अभी ने अब आकाश मार्ग से hi जाने का निर्णय लिया .......अभी और गक दोनों आकाश में उस जंगल क ऊपर पहुंचे .....तभी जंगल से किसी बच्चे की मदत क लिए पुकारने की आवाज आयी .....

जब दोनों ने निच्चे देखा तोह जंगल में काले अँधेरे क सिवा उन्हें नज़र नहीं आया

तब अभी ने अपनी अग्नि ऊर्जा से वह थोड़ा सा प्रकाश किया तोह उन्होंने देखा क एक बच्चा बुरी हालत में भाग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे कोह किसी से अपने प्राण बचने क लिए भाग रहा हो.......

जब अभी ने ध्यान से देखा तोह एक बड़ा सा काला भेड़िया उअस बछव क पीछे लगा हुआ था.....

अभी तुरंत निचे आगया और भेड़िया और उस बच्चे क बिच खड़ा हो गया.....

अपने शिकार क बिच में अभी को आया देखकर भेड़िया गुरया ..उसकी आखें अँधेरे में चमक रही थी......

उस बचे ने अभी को जब देखा तोह उसको एकदम पकड़ लिया ,

बच्चा - भैया मुज़हे बचा लो ...देखो न यह भेड़िया मुज़हे खा जाएगा........

अभी - चिंता मत करो बीटा , ...तुम अभी बिलकुल सुरक्षित हो .......

भेड़िया अभी की तरफ घुरए हुए देखने लगा ......उसके मुँह में बड़े पैने दांत और बहती हुई लार उससे और भयावह बना रही थी

तभी उस भेड़िया ने अभी पर छलांग लगा di......aur अभी ने एक जोर दर पंच उसके जबड़े पर मारा .....और वह भेड़िया सुर जाकर गिरा .....जिससे दुखकार बच्चा ख़ुशी से ताली बजने लगा

भेड़िया फिर अभी क तरफ आया ....तोह अभी ने अपने हाथ से जबड़ा पकड़ लिया ...और चिर दिया ......जिससे वह भेड़िया वही मर गया .....बच्चा ख़ुशी से उछलने लगा.....

बच्चा - आपका बहुत बहुत धन्यवाद भैया ...आज आपने मेरी रक्षा की है .......अगर मुज़हे कुछ होता तोह ...मेरी दादी का क्या होता.....

अभी - बीटा यहाँ तोह दूर दूर सिर्फ जंगल क अलावा और कुछ नहीं है ....न कोई बस्ती है तोह तुम कहा से आये

......और अभी इसकी आंखें पड़नेकी कोशिश करने लगा

लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था ....क्युकी की जब भी अभी उस बच्चे की आँखों में कुछ पता करने क लिए देखता ....तोह वह जाने क्यों अपना सा लगने लगा था .......

उस बच्चे को देखर अभी और गक दोनों को भी वह अपना सा लगा .....

बच्चा - भैया यह पास में hi हमारा गाओं है चलिए दिखता हु

....और वह बच्चा आगे आगे और दोनों पीछे पीछे तभी बच्चा एक बड़ी सी चट्टान क पीछे पहुँच जाता है और दोनों को बुलाता है ......

जब दोनों वह जाते है तोह देखते है उस पत्थर पीछे एक सुरंग hai....baccha उसमें चला जाता है......

अभी - अकहा बीटा आपका नाम क्या है....

बच्चा - मेरा नाम मोहक है

अभी - सच में तुम बड़े मोहक, और प्यारे भी .....में वक बहन भीहै बोलकुल तुम्हारी hi तरह.......

उस सुरंग से एक मैदानी इलाका तक पहुँचनहे ....जहा थोड़ी थोड़ी दूर पर छोटे छोटे घर बने हुए थे , ...

अभी पूरी तरह सतर्क था उसने फिर अंतर्मन की दृष्टि से उस गाओं को देखा क यवह माया तोह nahi....lekin वह सब घर असली थे.......

अभी - अच्छा मोहक ....तुम्हारे घर में कौन कौन है......

मोहक - सिर्फ में और मेरी दादी ,, दादी कहती है की जब मैं बहुत छोटा था तोह भेडियो ने मेरे माता पिता को मार दिया था ......

एक घर की तरफ इशारा करते hue.....lo आगया मेरा ghar......aap यही रुको ...में दादी को देखकर आता हु ......और मोहक अंदर गया........

लगता है दादी कही जरुरी काम से बहार गयी hogi....abhi जल्द hi आजायेगी........

अभी ने देखा क मोहक का मुँह कुछ उतरा हुआ है........

अभी क्या बात है बीटा ....ऐसे उदास क्यों होगया.....

मोहक - आपने मेरी जान बकहयि लेकिन में आपकी कोई सेवा नहीं कर saka.......dadi भी पता नहीं कहा है.........

अभी - कोई नहीं बीटा हमे कुछ नहीं चाहिए

तभी मोहक अपने आस पास देखता है उससे अपने घर क bahar.....kuch फूल खिले हुए दिखे .....

मोहक वह गया और उन् फूलों को लेकर आया ...यह फूल बड़े hi अलग थे ....यह सात तंग क थे और इनसे निकल ने वाली सुगंद बड़ी hi अच्छी थी .......

अभी और गक ने मुस्कुराते हुए उसके हाथो से फूल लेकर सूंघने laga.....uski सुगन्दा दोनों खो से गया......

तभी अभी और गक ने देखा क वह बड़ा hi भयानक असुर खड़ा उनकी तरफ hi बाद रहा ..दोनों को अलग असुर दिखाई दे रहे थे .....

दोनों अपने अपने सामने दिखाई देने वाले असुर से युद्ध क लिए तैयार हो गए .

......गक अपनी तलवार लेकर उस असुर की तरफ दौड़ा और जोरदार वॉर किया ..

तोह उस असुर ने बड़ी फुर्ती से उसके वॉर को ब्लॉक कर दिया ....और उसे किक मारने hi वाला था क गक पीछे हैट गया .....

वह असुर आगे बड़ा और एक मुक्का गक क पेट में maara......jissase गक निचे ज़्हुका तोह उस असुर ने अपने घुटने से गक क नाक पर प्रहार किया ......जिससे गक दूर जाकर गिरा ......

गक अपने आपको सुरक्षित करने क लिए खुद वही चिप गया और अपने दानवो को उस असुर से लड़ने भेजा

यहाँ अभी ने जब उस असुर को देखा जो दिखने में बड़ा भयंकर दिख रहा tha......toh देखा की वह अपनी तलवार लेकर अभी क तरफ दौड़ा ...जैसे hi उसका वॉर अभी पर पड़ता अभी ने उसकव वार को ब्लॉक किया , और एक किक उसके पेट में मारी लेकिन वह बच गया .....

अबकी बार फिर अभी ने ूस्पर्श पर वार किया तोह अभी ने एक जोरदार किक उसके पेट में मारी जिसे वह ज़्हुक गया तोह अभी ने जोरदार प्रहार उसके नाक पर किया जिससे वह असुर दूर जाकर गिरा .....

अभी उस और बढ़ने hi वाला था क .....अब उसके सामने दो असुर एक साथ aagaye.....Abhi उन्दोनो क साथ लड़ने लगा , ....वह दोनों विपरीत दिशा से अभी की तरफ अपना खड़क लेकर दौड़े .

..तोह अभी ने अपनी गदा से बिजली की गति से उनके सर पर वॉर किया ...जिससे उन दोनों क सर तरबूज क तरह खिल गया.....

अभी गक को ढूंढ़ने लगा तोह वह वह कही भी दिखा नहीं....

वह कुछ और करता क वह अब 4 असुर आगये .....उनको भी अभी ने अपने गदा क वॉर से धराशायी कर diya....k तभी वह 8 असुर आगये ......

जैसे जैसे अभी उनको मरता गया उनकी संख्या बढ़ती जा रही थी ....

.अभी अलग अलग शास्त्रों से उनपर वॉर कर दिया ....लेकिन फिर भी उनको संख्या बढ़ती जा रही थी.....

अभी को याद आया क ऐसी शक्ति उसके मित्र गक क पास भी है ........

हो न हो जिस असुर से पहले मुकाबला हुआ था वही इन सब लगातार बढ़ते हुए असुर का मूल है .....पहले उससे hi समाप्त कर न होगा.....

अभी अब उन असुर क प्राण ना लेकर बाद अपने प्रहार से बस उन्हें मूर्छित काने लगा ....जिससे असुरो का बढ़ना रुक गया तहा......

अब अभी प्रेत रूप धारण कर के, उस असुर को ढूंढ़ने लगा ....और पेड़ क भीतर समां गया.......

जब उस असुर ने देखा क अब वह कोई नहीं है ...अपने आपको सुरक्षित देखा बहार आगया....

जैसे hi अभी ने पेड़ क अंदर रहते हुवे उस असुर को देखा तोह अभी ने अपनी गदा से एक जोरदार प्रहार उस असुर क सर पर मारा ..जिसस्ने वह असुर निचे पड़ा तड़पने लगा.....

वह असुर जमीन पर पड़ा अपनी आखरी सांसे ले रहा tha.....Abhi ने उसका खेल एक जहटके में

ख़तम करने क लिए अपनी गदा uthayi.........ki तभी दूर से किसी की आवाज सुनाई देने lagai......nahhhiiii

आज क लिए इतना hi ......

अगला अपडेट कल.......

 
अपडेट - 84



अब तक आपने देखा क अभी अटल लोक में प्रवेश करता है ...वह किसी बच्चे की जान बचता hai....uske दिए हुए फूल को अभी और गक दोनों सूंघते है तोह उन्हें वह असुर डिहकहाई देने लग जाता है , और उनका उनसे युद्ध होता है.....



अब आगी.........

अभी क सामने जमीं पर वह असुर आखरी सांसे ले रहा था , और अभी ने

उसकी जीवन लीला एक जहटके में समाप्त करने क लिए जैसे hi आखिरी प्रहार करने वाला होता है क ,

उससे शिवली की दूर से आवाज आती हुई सुनाई देने लगी.....

अभी वह रुक गया ....अब उससे कुछ अनर्थ होने की आशंका होने लगी......

तब तक शिवली वह पहुँच चुकी thi......uske आँखों में आंसू थे

.......परन्तु अभी को इन् आंसुओ का कारण नज़र नहीं आरहा था...........

अभी - क्या बात है जान तुम ऐसे अचानक युद्ध क बिच में यहाँ , और तुम्हारी आँखों में यवह आंसू क्यों.......

तभी शिवली ने अपने पास से एक शीशी निकली और उससे 2 बून्द जमीं पर गिरा si.......uss तरल पदारयह की सुगंध वह फैलने lagi........uss खुशबू अभी क नाक में जाते hi उससे एक झटका लगा ....क्यों क सामने जमीं पर ...कोई असुर नहीं गक tha....jo तड़प रहा था.......

गक को ऐसी हालत में देखकर अभी को साड़ी बात समाज में aagayi........ki उससे कितनी बड़ी भूल होगयी....

अभी निचे बैठकर गक का हाथ पकड़ लेता hai......GK को ऐसी हालत में देखकर अभी की आँखों में आंसू और apne.liye क्रोध आजाता की .....क इतनी शक्तियों क होने क बाद भी वह इस माया को समझ hi नहीं पाया......

अभी क माया को न जान्ने का कारण है क यह कोई माया थी hi nahi.....woh भेड़िया ...जंगल ....घर सब असली थे ....और सम्मोहक का रूप भी बच्चे का था.....

और सम्मोहक ने उनपर माया का नहीं विद्वेषण विद्या का प्रयोग किया tha........jiske प्रयोग से शत्रु आपस में hi लड़ने लग जाते है......

शिवली भी निचे बैठ गयी .....गक की ऐसी हालत देखकर रोने लगी ....गक उसके पिता सामान hi था ....और वह उससे चाचा जी भी कहती थी.....

अभी - उठो मित्र ....मुज़हे क्षमा कर दो मित्र .......जाने कैसे में अपने hi मित्र को नहीं पेचान पाया .......में तुम्हे कुछ नहीं होने dunga......mitra .....अपनी आंखें खोलो.....

गक बड़ी मुश्किल से अपनी आंखें ख्पलोलते हुए.....

अह्ह्ह्हह .....miiii...trrrra......iss....mein चूमहारा कोई दुष नहीं ...hai...ahhhhh......mein भी तोह

...तुमपर असुर समझ कर hi प्रहार कार रहा था......

अभी - बस करो मित्र में तुम्हे कक्कुक नहीं होने दूंगा .....

और अपना हाथ गक क सर पर रखता है .....और अपनी ऊर्जा लगा देता है .....लेकिन कोई असर nahi.....ABHI बार बार प्रयत्न करता है लेकिन सब व्यर्थ....

शिवली अभी क कंधे पर हाथ रखती है......

अभी - देखो न jaan......tum कुछ कटी कई नहीं ....तुम तोह बहुत सी विद्या जानती हो......

गक - bas....mitra...yahi तक था हमारा साथ...

अब ..मेरे विदाई का वक्त आगया hai.....muzhe ख़ुशी है क मेरे आखरी समय में तुमरे साणे ho...mitra.....ek वचन दो ..

मरे पुत्र को .....अपनी शरण में ले लेना.....

अभी - शिवली में क्यों इससे ठीक नहीं कर पा रहा हु..

शिवली - क्यों की हम यक्ष सुक्ष्म शरीर धरी जीव होते hai.....sthool शशरीर क घाव तोह ठीक हो सकते है लेकिन सुक्ष्म शरीर क नहीं.....

तभी गक ने अपनी आखरी सांस ली ....और उसका शरीर धुआँ बनकर समाप्त हो गया...

अभी दोनों हाथ जमीं पर रखकर ronelaga........apne hi हाटों से अपने मित्र की मृत्यु का अपराध बोध उससे खाये जा रहा था....

शिवली - शांत हो जाओ जान .....इस आंसर में जीवन और मृत्यु का समय पहले से hi निर्धारित पहले से hi निर्धारित होती है ....अपने आपको सम्भालो जान.......

अभी - केसव सँभालु ....मैंने इसी हाथो से अपने उस मित्र की हत्या कर दी जिसने हमेशा मेरा साथ diya....mere मित्र से ज्यादा मेरा ....भाई था वह ......Ab...aur ....नहीं .......नहीं चाइये मुज़हे और शक्ति ......

जितनी मेरे पास है उसीसे में अब असुरो का नाश कर दूंगा.......

शिवली - आवेग में आकर कोई काम न करो .......योद्धा एक योगी क तरह होता hai.....jo....sabhi प्रकार क मोह से रहित होकर केवल अपना कर्म करता रहता है.......

तुम्हारा यह क्रोध यह उद्विग्नता उचित नहीं .....यह तुम्हारी शक्तिया सोख लेंगी........

अभी - मुह्जे और कुछ नहीं सुन्ना है ....में अब और किसी का जीवन संकट में नहीं दाल सकता .....तुम भी चली जाओ .....नहीं तोह ...क्या पता ....यह hatyara......tumpar भी वार कर दे.....

यही तोह कस चाहता tha......Acche लोगो की सबसे बड़ी कमजोरी होती है उसका भावना प्रधान hona....inhi भावनाओ भावनाये क अधीन होकर वह कमजोर पद जाता है.......

शिवली रोकते रहती है लेकिन अभी अब किसी की सुंनने को तैयार नहीं tha......usse इस बात का सबसे जायदा क्रोध था क उसके hi हाथो कस ने उसके मित्र की हत्या करवाई गयी......

फिर उस्सने अपना शक्ति त्रिशूल प्रगट कोय और पटल लोक जाने क लिए एक पोर्टल खोला...

यहाँ पटल लोक में कस अपने सिंघासन पर बैठा हुआ जोर जोर से है रहा था....

कस - ha...ha...ha.....Rakshak यह तोह अभी शुरुवात hai.....tune मेरे पुत्र की हत्या करके .......तुमने इस युद्ध की शुरुवात कर di......ha..ha...ha....

अपने hi हाथो अपनों hi हत्या ....है है हां .....अब क्या करोगे ......

भयाक्षा - वह पिताश्री ...wah....aap अप्रतिम हो .....

कस - अभी तोह यह मेरी शक्ति का एक छोटा अंश भी नहीं था ...तोह रक्षक इतना विचलित हो गया.......

चलो सब रक्षक क स्वागत की तैयारी करते है.......

दुरुक्ति - यह आप क्या कह रहे हो ....जिस ने मेरे पुत्र की हत्या की थी आप उसके स्वागत की बात कर रहे हो .......

मारकेश - हां पिताश्री ....हम उस रक्षक का स्वागत क्यों करेंगे.....

कस अपने सर पर हाथ मारता हुआ ........यह मेरे मालोक इब्लीस ऐसे मूरख मेरे hi साथ बांधने थे .....

कस - अरे मूर्खो ...यदि कुछ समाज न आये तोह चुप रहा karo.......aur पास रखे मदिरा क प्याले को एक घुट में खली करते hue.......saara मज़ा ख़राब कर दिया....

यहाँ अभी अटल लोक से टेलिपोर्ट होकर सीधा पटल लोक पहुँच गया tha........Aur कस कमहल क बहार शक्ति त्रिशूल हाथ में लेकर कस को युद्ध क लिए ललकारने लगा......

अभी - कस बहार आजा आज हिबिस्कस युद्ध का फैसला हो जाएगा ....अब और कोई निरपराध नहीं मारा जाए गए......

तभी सामने से कस आते हुए ......

कस - स्वागत है रक्षक तुम्हारा मेरे इस लोक में ......आओ जरा हमको भी अतिथि सत्कार का अवसर दो .....

अभी - अतिथि तोह अब तुम हो कस अब इस संसार में अब तुम्हारी विदाई का समय आगया ......और अपने शक्ति त्रिशूल से ऊर्जा का गोला बनाकर कस की तरफ छोड़ा .....जिससे कस ने बड़ी आसानी से किसी गेंद की तरह पकड़ लिया और दूर उछाल कर फ़ेंक दिया......

कस - शांत रक्षक shant....aise छोटे मोठे वार तोह मेरे लिए किसी से खिलोने से जायदा नहीं hai......muzhe तुमसे कुछ बात करनी hai........phir यदि युद्ध करना चाहो तोह वह भी कर लेना......

अभी ने अपने अग्नि शूल से उसपर गोले बरसते हुए ......बात और तुमसे ...कभी नहीं ......और अपनी 5 तत्त्व की सम्पूर्ण ऊर्जा एक करके कस पर वॉर किया ....लेकिन वह वॉर कस को छूटे hi चूर चूर हो गया......

क्रोध और दिख क आवेग क कारण अभी क सारे चक्र सुप्त हो गए थे ....जिससे अभी की सकती अब आधे से भी काम रह गयी थी .......साड़ी पत्नियों से संपर्क टूटने क कारण उनसे मिलान से मिलने वाली शक्तियां भी शिथिल हो गयी थी

कस - देखो तुम्हे चहु तोह अभी पल भर में मसल सकता हु लेकिन फिर भी एक अवसर दे रहा हु...

मेरी तरफ आजाओ .....हम दोनों मिलकर इस संपूर्ण ब्रह्माण्ड पर शासन करेंगे और बनजाएंगे इस श्रिस्ति क नए भगवन ....

अभी ने करोड़ में भरकर ....साड़ी बची हुई ऊर्जा को एकत्रित करके अपनी गदा में daldiya.....aur पूरी शक्ति लगाकर कस पर वार कर diya........KS ने अपनी शक्ति से उस वारा को वापस अभी क hi ररफ मोड़ दया .......जो अभी को लगते .....वह दूर जाकर गिरा...........

कस ने बहुत ढूंढा लेकिन अभी उससे कही नहीं मिला....

जैसे hi पटल लोक में अभी को वॉर लगा ...यहाँ घर पर छोड़ा हुआ अभी का रूप धुआँ बनकर उड़गया........

और अभी क चारो पत्नियों का संपर्क अभी से टूट गया .....सभी बड़ी परेशां हो गयी .....शिवली अभी स्व संपर्क स्थापित करने का बाद प्रयत्न कर रही थी .... लेकिन अभी का कोई पता नहीं ......

यहाँ घर पर भी ....अचानक अभी क ऐसे जाने से सब बहुत चिंता में the.....RVS ने बहुत खोज की अभी को ढूंढ ने की लेकिन कोई फायदा नहीं ..........

रिम्पी ...अपना दुःख अपनव भीतर छुपाये केवल अपने पिता क लिए जी रही थी...

सारे दोस्त भी अभी क ऐसे अचानक चले जाने से दुखी थे.......

सिर्फ रिन्कुश hi था जो जानता था कभी को कुछ नहीं हुआ है वह सुरक्षित hai.....Bas शरीर में दर्द होने की वह से इतना जानता था क अभी इस समय कही घायल अवस्था में है.....

अभी को गायब हुए 15 दिन हो गए थे .....कस ने भी वहुत ढूंढ़ने की कोशिश की लेकिन पता नहीं कर paaya......Aisi अवस्था में कहा जा सकतावहै उससे समाज नहीं आरहा था......

फिर सोचा सहायद किसी दानव या असुर का भोजन बन गया होगा....

यहाँ किसी महल क एक गुप्त अँधेरे कैकश जहा प्रकाश क लिए केवल एक मशाल थी .......और वही एक ऊँचे स्थान पर माँ दुर्गा की एक पिंडी थी ...जिसके आगे ..एक अखंड ज्योति प्रज्वलित हो रही thi.........ussi कक्ष क एक कोने में बिस्टेर पर... अभी ..बेहोश पड़ा था ...उसके सर ...और haath...pairo...par ..पट्टी बंदी हुई thi........wahi पास एक लड़की एक पानी क कटोरे में कपडा डालकर निचोड़ते हुए अभी क शरीर को पांच रही थी और एक तक अभी क चेहते को देखे जारही ..थी.....

उससे पूरा विश्वास था क यह युवक ठीक हो जाएगा.......

अभी को प्यार से देखते हुए .....अपने मैं में ....( हे माँ भगवती जिससे रोज़ मेरे सपनो में भेजकर आपने मेरे मैं में प्रेम की ज्योत जलाई आज , आज वही मेरे सामने इस अवस्था में , कृपा करो maa....inhe शीग्र hi स्वस्थ कर दो .....)

और फिर निचे होकर अभी क माथे को चूमती है...... और अभी क सीने पर एयर रखकर लेट जाती है उसकी आँखों से निकले कुछ आंसू अभी क छाती को भिगो रहे थे .........

तभी अभी क श्री में कुछ हलचल सी होने लगी ......उसके हाट पेअर हिलने लगे......

जब उस लड़की ने यह महसूस किये तोह वह बहुत खुश हो गयी जैसे उससे सबकुछ प्राप्त हो गया हो .......वह कन्या अभी को धीरे धीरे आवाज देने लगी.......

जैसे hi अभी चिल्लाकर उठने वाला होता है वह कन्या अभी क मुँह को अपने हातो से बंद करने लग जाती है जससे अभी चिल्ला न पाए.........

और ने ऐसे किसी क द्वारा अपना मुँह बंद करते हुए देखकर उससे खिसक liya...aur उसके ऊपर आगया ........

और जब अभी ने अपनी आंखें खोली तोह देखा दो बड़ी बड़ी खूबसूरत आंखें उससे घर रही है .. ...और उसके कोमल हाथ अभीबक मुँह पर थे .....

अभी ने उसका हाथ अपने मुँह से hataya...aur....jor से पूछा ....कौन हो तुम .....

लड़की ने उससे धीरे बोलने का ishara...kiya .......अरे कितना जोर से चिकटे हो ...धीरे बोलो न वर्ण पिताश्री या उनके गुप्तचर सुन लेंगे....

अभी - धीरे से---- ठीक है अब बताओ कौन है तुम्हारे पिताश्री और तुम कौन हो ....में यहाँ कैसे ....सब सच सच बताओ .......

अभी इस समय भी उसस्के ऊपर था ......

लड़की - पहले मेरे ऊपर से तोह उठो ....baapre.....kitne भरी हो तुम ...में तोह डाब hi गयी.....

अभी उतर जाता hai....thik है अब बोलो......

लड़की - मेरा नाम मदालसा है ...और ..मेंअसुराज कलासुर की सबसे छोटी पुत्री हु ......

जैसे hi कस का नाम सुना तोह अभी का क्रोध फिर बढ़ने लगा ...और उससे सब याद आने लगा ........

अभी - तुम मुज़हे यहाँ क्यों लेकर आयी हो .......हो तोह तुम भी उसीकी बेटी ......जरूर तुम्हारे मैं भी भी कुछ चल रहा होगा ......मैं तुम जैसे असुरो की नीच सोच को जान गया हु...

मदालसा को इस बात से बड़ा आघात लगा .....उस्सने सब कुछ अभी को बता दिया क घायल अवस्था में जब वह उससे मिला तोह तोह उसने अपने पिता से बचने क लिए महल में hi बने मदालसा क गुप्त पूजा कक्षा में ले aayi.....aur यहाँ उसका उपचार करने लगी ......

और यह भी बता दिया क कई वर्षॉब्स वह रोज़ अभी को स्वप्ना में देखती आयी है .....उस्सने ...Abhi..ki रक्षा स्वार्थ वश नहीं प्रेम वह में की है .....

मदालसा - आप अब यहाँ से चले jaaye...mein अपक्व यादो क सहारे रह लुंगी ....लेकिन आपको कोई हक़ नहीं है मेरे प्रेम को अपशब्द कहने का ....और रोने लगी ......

अभी को बहुत बुरा लगा ....क ...जिसस्ने अपने पिता की परवाह न करते हुए उअके प्राणो की रक्षा की ....उसने आवेग में उसपर hi क्रोध कर दिया .........

शिवली ठीक hi कहती है आवेग और क्रोध व्यक्ति को ाकंजौर बना देता है

अभी आगे जाकर मदालसा क आंसू पोछता है ...और हाथ जोड़कर क्षमा मांगता है........

अभी - मुज़हे क्षमा kardob...Rajkumari....jisska मुज़हे धन्यवाद देना चाहिए में ुसस्पर hi क्रोध कर बैठा ....क्षमा करे....

मदालसा - आपको मुजह्से क्षमा मांगने की कोई आवयश्यकता नहीं hai.....aapka मुजहपर पूरा हक़ है क्यों की ...मैं कितने बरसो से आपको hi अपने सर्वस्वा मान चुकी हु.....

अभी - देखो मदालसा मुज़हे अभी बहुत से काम करने hai......Abhi मेंतुमहारे प्रेम को स्वीकार नहीं कर sakta.....parantu में वचन सेठा हु क एक दिन में जरूर आऊंगा ....

मदालसा - में आपकी प्रतीक्षा करुँगी.........

अभी की शक्तिया अब लुप्त हो गयी थी ....इसीलिए ...अब वह टेलिपोर्ट नहीं हो पा रहा था.....

अभी - मदालसा ...क्या तुम मुज़हे पृथ्वी लोक छोड़ सकती हो ......

मदालसा माँ दुर्गा की मूर्ति क पास जाती है और मास का सिन्दूर एक कपडे में ताबीज जैसा बंदकर अभी की बाजू में बांड देती है.....

मदालसा - यह आ पको एक बार अपने गंतव्य तक पहुंचा देगा .......

और अभी मदालसा से विदा होकर वह से निकल जाता है.......

मदालसा की आँखों में विरह क आंसू भी थे ...और आगे होनेवाले .मिलान की आस...

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट रात को.......

 
अपडेट - 85

अब तक आपने देखा ...क गक की मृत्यु से आवेश में आकर अभी पटल लोक पहुँचता hai.....aur वह कस क साथ मुकाबले में बुरी तरह जख्मी हो जाता है....

वह मदालसा सका उपचार करती है .....

अब आगे - .........


पटल लोक से निकलकर अभी पहुँच जाता है पृत्वी लोक , अपने घर .......

जब अभी गेट पर पहुँचता है , तोह बेसमेंट क कण्ट्रोल रूम में बैठे रवस और नैना ....वह स्क्रीन पर अभी को देखते है.......

अभी को देखते hi ....दोनों तुरंत वह से निकलकर ....घर क अंदर पहुँचते hai....tab तक अभी हॉल में पहुँच चूका था .....

नैना दौड़कर अपने बेटे को गले लगा लेती है........

माँ क गले लगकर अभी क आंसू निकल ने लगे .......

फिर नैना अभी क मत्थे को चूमती है......

नैना - कहा था बीटा इतने दिन पता ...है ....मेरा दिल बहुत घबरा रहा tha......aisa लग रहा tha.k ...jaise...koi...tuzhe मुजह्से बहुत दूर le.jaa.raha.hai.......

और तू यह रो क्यों रहा है बीटा ...सब ठीक तोह hai...na....

अभी - माँ वह इतने दिन बाद आपको देखा न ...इसीलिए थोड़ा इमोशनल ho....gaya......thoda मुस्कुराते ...hue......bas..maa ..आप तोह जानती हो ...मेरे ..kaamo..k बारे में तोह में बस वही कुछ कामो में ुलाज़ गया था .........

रवस - बीटा जाने क्यों मुज़हे कुछ अलग बात लग रही hai.....sab कुछ ठीक है न ......इतने दिन से न कोई पता न कोई खबर ......

अभी - सबकुछ ठीक है डैड ....aap..chinta न करे .......

वैसे दी और ाद्दु .. कैसी है , और दीपू ...

माँ - बीटा तुम खुद hi जाकर दुख लो सोनो ने अपनी क्या हालत बना राखी है......

फिर मैं वह से ाद्दु क रूम में गया .....तोह देखा मेरी ाद्दु जो हमेशा खिली हुई रहती थी वह आज बड़ी hi कमजोर हालत में लेती हुई है और उसके hi बगल में दी एक हाथ ाद्दु क सर पर रखकर बैठे बैठे hi सो गयी hai..........dono बहुत कमजोर लग रही थी ....उनके खिले हुए चेहरे मुरजहए हुए थे .....

दोनों की ऐसी हालत देखकर मेरे दिल में एक हुक सी उठी......

तभी ाद्दु भाई ...bhai....kahkar एकदम से उठकर बैठ गयी ...और मुज़हे सामने देखकर मेरे पास आने क लिए कड़ी होने lagi...Adfu की आवाज सुकर दी की भी आंखें खुल गयी....

में दौड़कर ाद्दु क पास गया और उससे गले से लगा लिए ......

ाद्दु ...भाई ...आप आगये भाई .......कहा चले गए थे मुज़हे chodkar.....aur कास क मुज़हे पकड़ लिया.......

मैं उसके सर पर हाथ फेरते हुए .......गुड़िया यह क्या हालत बना ली है तुमने ...अपनी ...और सी आप ...भी ...आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी ......

बच्चा तुम्हे तोह पता है न ....मुज़हे कितने काम होते है ...मैं बहुत दूर गया था जहा नेटवर्क भी नहीं था तोह कैसे कांटेक्ट करता .....और इस बात क लिए दोनों ने खाना पीना छोड़ दिया .....

ाद्दु - वह भाई आप का इतने दिन स्व कुछ भी पता नहीं चला ....कर रिम्पी दी को भी नहीं पता था आप कहा hai......hamara दिल भी बहुत घबरा रहा था.......

भाई सपने में मैंने देखा था क आपको कोई मार रहा है ........

इसलिए भाई....

मैं -नहीं गुड़िया सपने तोह सपने hi होते है सच थोड़े hi होते है..

अब प्रॉमिस करो दुबारा कभी ऐसा नहीं करोगी ...हमेशा अपना ख्याल रखोगी ....

फिर मैंने उसके माथे पर किश की और ाद्दु ने भी मेरे गालो पर ......और फिर मरे गले लग गयी ...aise..k एसी छोड़ देगी तोह फिर मैं कही चला जाऊँगा......

ऋतू दी - बस सारा प्यार ाद्दु क लिए में तोह जयस्व कुछ हु hi नहीं .......

मैं - दी को भी गले लगते hue....di आप मेरे लिए पहली गुरु हो ....मुज़हे याद है कैसे एक माँ की तरह बचपन में मेरे ख्याल रहती thi.........aisa मत कहो दी क आप मेरे लिए कोई मायने नहीं रखती.....

दी -- अरे बेतु मैंतोह बस ऐसव हिबकाह रही थी .......

ऐसव hi कुछ देर हमारी बातें होने lagi........tabhi दीपू भी ागग्या था ..वह भी मुज़हे देखकर खुश होगया.........

उसके बाद हमने साथ में खन्ना खाया ........और मैंने आड़ू को रेस्ट करने का बोलकर ...अपने रूम में आगया .......

मोबाइल तोह पता नहीं कहा था तोह मैंने लैंड लाइन से ....रिम्पी को कॉल किया ........

पहले 2 बार में किसी ने कॉल नहीं उठायी ...फिर तीसरे रिंग में ..रिम्पी क डैड खेमराज जी ने कॉल उठाया......

खेमराज (कज) - Hello कौन ......

मैं - अंकल में ......अभी.....

कज - बीटा अभी कहा था इतने दिन से .... ....कहा चला गया tha......tu ठीक तोह है न......

मैं - वह अंकल कुछ काम से बहार गया था, रिम्पी कैसी है अंकल....

कज - अच्छा अब समज़ह क रिम्पी कुछ दिन से उदास क्यों रहने लगी hai......lagta है तुम दोनों में अनबन हो गयी है.........

में - नहीं अंकल ऐसी कोई बात नहीं है, ..क्या आप मेरी रिम्पी से बात करा सकते है.....

कज - हां एक मं होल्ड करना बीटा......

थोड़ी देर बाद ....मुज़हे ऐसा लगा क रिम्पी ने पह उठाया है ....लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी .....में उस्सकी ख़ामोशी भी सुन सकता था.........

में - जान नाराज़ हो ....कुछ बोलो गई नहीं .....तभी मुज़हे ऐसा लगा जैसे वह रो रही है....

में - देखो जान तुम्हे मेरी कसम है अगर रोई तोह .....

रिम्पी - पहले तोह दर्द खुद देते हो और कहते हो आंसू न bahao........aur कॉल कट हो जाती है....

में परेशां होकर सोचने लगा ...क्या करू कैसे जाओ रिम्पी क पास .........में तुरंत उसके पास पहुंचना चाहता था...

क्यों की सारे चक्र सुप्त होनर क कारण मेरी पावर्स भी सुप्त हो गयी थी....

तभी मेरे दूर पर नॉक हुआ ...जब मैंने दूर खोला तोह सामने रिंकू था ........

रिंकू - ऐसे क्या देख रहा है यार ....और मुज़हे कास कर ..गले लगते हुए.......

मैं - कैसे है तू यार .....

रिंकू - यह तोह मुज़हे पूछना चाहिए और तू पूछ रहा hai......jaanta हु इन् दिंनो में तुज़ह पर क्या बीती hogi......khair वह छोड़ चल ...तुज़हे कही ले जाना है.....

और वह मेरा हाथ पकड़कर टेलिपोर्ट हो गया किसी घर की चाट पर......

मैं - अबे यार तू अब टेलिपोर्ट होना भी सिख गया .....

रिंकू - भाई यह सब तेता हीबतोह कमल है बस उस्सको थोड़ा धार लगा रहा हु....

जब मैंने देखा यवह तोह रिम्पी क घर की चाट है तोह में रिंकू की तरफ देखने लगा क जहा मेरी पत्निया मुजह्से कोई कांटेक्ट नहीं कर पा रही है .वही यह है क मेरव सील का हाल सब जानता है.....

शायद इसीलिए क मेरी आत्मा का एक अंश इसमें है ....और सही कहते है क अपनी आत्मा क सिवा हमारा सच्चा साथी कोई और नहीं .....

फिर मैं निचे चला गया और रिम्पी क रूम क बहार पहुँच गया .....और ....अंदर ...देखा तोह रिम्पी बीएड पर बैठी सोच में गम थी ......

जैसे hi मैं उसके कमरे ंविं गया ...वह आकर मुजह्से लिपट गयी .....मैंने भी उससे कसकर बहून ंविं भर लिया इतने दिनों की जुदाई क दर्द को मिटने की कोशिश करने लगे.....

फिर मैंने एक हल्का सा किश उसके होंटो पर kiya....aur उससे अलग होते हुए .....

में - यह सब क्या है जान .....

रिम्पी - सवाल तोह मुज़हे करना चाहिए और तुम कर रहे हो

में - जीर्णे सवाल करना हो कर लेना ...लेकिन लगता है तुमने अपना ख्याल रखना hi छोड़ दिया है.....

रिम्पी - जब तुम हो दूर चले जाओगे तोह क्या करना है ख्याल rakhkar.........woh तोह डैड क लिए hi में अपने आपको संभाले हुए थी.....

कुछ देर शिकवा शिकायत चलती रही ....फिर मेंव रिम्पी को साड़ी बात बता दी.......

रिम्पी - ओह्ह्ह इतना कुछ हो गया .....आप ने ऐसा क्यों किया अगर आपको कुछ हो जाता तोह ...आपने यह नहीं सोचा की यदि कस को मारना इतना आसान होता तोह आपको इतनी शकतोय प्राप्त करने की जरुरत hi क्या थी .......

कोई भी काम समय से पहले करने में हानि hi होती है.............

कुछ देर रिम्पी से बात करने क बाद में रिंकू क साथ वापस घर आगया.......

रिंकू क जाने क बाद में .....कुछ देर चाट पर टहला ...... सूर्य आस्था हो रहा था ....... सब पंछी अपने घोसले ंविं लौट रहे थे.....

अब मैंने भी फैसला ले लिया अपने कर्मपथ पर वापस लौटने का ....फिर में फ्रेश होकर चाट पर एक आसान बिछाकर पद्मसा में ध्यान लगा कर बैट्ज गया .....पहले टोहड़ी कठिनाई हुई ...लेकिन फिर ॐ क नाद को भीतर सुनने का प्रयास करने लगा ......और ध्यान करने लगा .......धीरे धीरे चक्रो की ऊर्जा दिखाई देने लगी ......

ऐसे hi में अपने डेली रूटीन करने क साथ साथ में सारा समय ध्यान hi करता था ....ऐसे hi 4 दिन और बाईट तब तक मेरे सारे चक्र जागृत होगये थे ,

और 5 वे दिन ध्यान में गहन उतरने क बाद शुष्मना नदी पर लिपटी हुई कुण्डलिनी शक्ति चमक उठी और सब चक्रो का भेदन कर क वापस अपने स्थान पर आगयी ....

तभी मेरे भीतर से 5 अभी अलग अलग रूप में बहार निकले

एक यक्ष रूप में था .....एक था A1........ek नाग रूप में था .......

एक प्रेत रूप में था , और एक राकेश क रूप mein....phir मेरे यह सारे रूप मेरे भीतर समां गए .....और मेरी साड़ी खोयी हुई शक्तिया वापस आगयी .....राकेश को अपने सामने देखकर मुज़हे बड़ी ख़ुशी हुई .....

कुछ रीडर्स सोचेंगे क इतना कुछ होगया और राकेश अब तक कहा गया था .....तोह रकह हीरो की मारक शक्ति है ...इसीलिए बिना आवाहन क वह प्रगट नहीं हो सकता ........

तभी रूम में शालू ...Shivali....Sulekha और भद्रा प्रगट हुई ......

और अभी को वापस पहले रूप में देखकर बड़ी खुश .thii.........kuch रूठना मानना चला ......शिवली लेकिन अभी भी ग़ुस्से में थी

अभी - क्या बात है जान अभी भी नाराज हो ....

शिवली - मैंने आपको पहले hi आगाह किया था ....लेकिन आपने तोह मेरी कोई बात सुनी hi नहीं थी...

फिर मैंने अपनी यात्रा जहा छोड़ी थी वही से शुरू करने का विचार बनाया .......और अपने दो रूप एक संघारक और एक घर पर छोड़कर ...अभी फिर निकल गया ....

इस सफर में अभी क साथ था Rinku.......Rakesh को घर और नगर की जिम्मेदारी देकर अभी चला गया .......

यहाँ अटल लोक में असुरो का आतंक बहुत बाद गया था ....असुरो की सहयता से काले भेडियो ने सफ़ेद भेड़िया को हराकर भगा दिया था ...जो जंगल में भेष बदलकर जीवन गुजरने पर विवश थे....

अभी जब पोर्टल खोल कर अटल लोक पहुंचा तोह फिर वह उसी जंगल पहुँच gaya......jaha उसने अपने परम मित्र गक को खोया था ....

अब अभी पूरी तरह सतर्क था ......उस वन को पार करके अभी अटल लोक क विशाल नगर क समीप पहुँच gaya...nagar से बहार एक ज़हादियो से भरा एक ऊँचा सा टीला था जहा खड़े होकर अभी नगर को देख रहा था .....

बड़े बड़े शिखर उस नगर क शोभा बड़ा रहे the.......Abhi उस नगर को गौर से देख hi रहा था क .

.......तभी अभी क सामने धड़ाम से एक बड़ा सा काला भेड़िया आकर गिरा .......

उससे कोई तीर लगा था ....जिससे खून बहा रह tha.....Abhi ने सामने देखा तोह....

आज क लिए इतना hi .......

अगला अपडेट कल .........
 
सुपर्ब फैंटास्टिक & ब्रिलियंट रिव्यु रितिका जी.. :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:....

आपके साथ और बेहतरीन कमैंट्स क लिए

:थैंक्स: :thanks::thanks:

हीरो को मदालसा क बारे में महसूस तोह हो गया इसीलिए उसने जल्द hi मिलने का वादा किया tha...aur कुछ अधूरे काम भी पूरे करने थे .....इसीसलिए उसने इस वक्त को उचित नहीं समज़ह....

ऐसे hi साथ बनाये रखे

लेटेस्ट अपडेट 85 पोस्टेड.....
 
अपडेट - 86

अब तक आपने देखा अभी ने अपना सफर वही से शुरू किया जहा से छोड़ा था.....

अभी वह क नगर को एक टाइल से देखा रहा था क एक भेड़िया उसके आगे आकर गिरा



अब आगे......

अभी ने देखा सामने कोई नकाब पहने सीकरी लड़की (सल) खड़ी है....

जो अभी को घर घुट कर देख रही थी......

सल - यह कौन हो तुम और यहाँ ज़हादियों में छुपकर क्या कर रहे ho..........kahi कोई चोर तोह नहीं जो नगर में प्रववेश करनेबकी सोच रहे हो........

अभी - हां में एक चोर hi हु ,...अब बोलो क्या कर लोगी ....

सल अपने तीर उस मरे हुए भेड़िये क शरीर से खिंच ते हुए....

सल - अच्छा चोर हो तभी यहाँ से चुप चुप कर नगर को देख रहे थे....... ....लेकिन ऐसा सोचना भी मत ......हां यदि मरने का शौक चढ़ा हो तोह जा सकते हो......

और वह पलटकर जाने लगी.........

अभी - यह लड़की रुको तोह .....और उसके पीछे पीछे चलने लगता hai...........waise तुम कहा रहती हो ......लगता है कोई शिकारी हो तभीतोह ुआ भेसिये को ऐसे hi मार दिया......

सल - तुम्हे उससे क्या .......वैसे अपने प्राण बचने का ाशिकार सबको है .......वह मुज़हे मारने वाला था तोह मैंने उससे मार दिया ......वैसे तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे हो ........

अभी - में कोई पीछा नहीं कर raha.......main यहाँ अजनबी हु .....मज़हव पता नहीं लग रहा है कहा jaau......kya तुम मेरी मदत कर सकती हो .....

सल - नहीं ........तुम जितने जल्दी हो सके yaha....se चले जाओ .....

अभी - तुम भी तोह कही रहती होगी ......वही कुछ आश्रय मिल जाता तोह .......

.

सल - मैं यहाँ पास hi कबीले में रहती हु .....लेकिन ...तुम वह नहीं जा सकते........

अभी - लेकिन क्यों .......

सल - क्यों की वह कोई भी इंसान प्रवेश नहीं कर सकता........

अभी - क्यों तुम इंसान नहीं हो ....

सल - घूरके उस्सकी तरफ देखते हुए आगे बढ़ जाती है........

और एक असाधारण स्पीड में वह से निकल जाती है......

और जब रूकती है तोह अभी को अपने सामने पाती है .....तुम इंसान होकर इतनी तेज़ी से कैसे दौड़ सकते है ........

अभी - वह सब छोड़ा ....में जानता हु क तुम कोई इंसान नहीं .

भेड़िया मानव हो ......मुज़हे बस अपने स्तन तक ले जाओ हो सकता है में तहरी कुछ मदत कर सकू..........

सल - मदत तोह बाद में करोगे ...पहले यह तोह बताओ क क्यों अपने प्राण ...संकट में डालकर हमारी मदत करना चाहते हो.....

मैं में ( जाने कौन है ...इससे देखकर क्यों ऐसा लग रहा है कोई जनम जनम का नाता है )

लेकिन ऐसे मेरे साथ कैसे चलोगे

.....किसी अनजान को वह प्रवेश मन है .....

अभी - अच्छा तोह यह बात hai....toh अभी अपने प्रेत रूप में आजाता है .........

अभी को ऐसे प्रेत रूप धारण करते हुए देखकर वह हैरान हो गयी....

सल - सच सच बताओ कौन हो तुम ......कही तुम वही तोह नहीं ...जिसके बारे मैं मैंने सुना है प्रेत लोक को किसी ने असुरो से मुक्त कर दिया hai.....Haa....Rakshak

अभी - हां में वही ...हु

अभी क मुँह से इतना सुनते hi यक्व चेहरे पर एक अलग hi चमक आगयी ......उससे एक आशा की किरण दिखाई देने लगी ......

और फिर वह थोड़ी hi देर में अभी को लेकर अपने कबीले पहुँच gayi........chalte चलते उसने अपना नाम दक्ष बताया .......

यह देखने में तोह कोई आदिवासीओ का कबीला लग रहा था लेकिन अभी जानता था .....यह कोई आदिवासी नहीं सब भेड़िया मानव है.....

अभी इस समय प्रेत रूप में था जो किसी साये की तरह थी.

सल - यह रहा हमारा कबीला ......और वह रही मेरे बाबा इस कबीले क सरदार की कुटिया ......

और चली जाती है.....

अभी उस कुटिया क अंदर जाता है तोह वह देखता है क लकड़ी क एक आसान पर कोई बैठा है जिसस्ने किसी कबीले क सरदार जैसे कपडे पहने हुए hai.......yeh था अटल लोक का राजा आहुक (एक)

अभी प्रेत रूप में था इसिलए केवल एक मशाल से प्रकाशित उस कुटिया में दिखाई नहीं दे रहा था......

अभी - अटल लोक क राजा को मेरा प्रणाम.....

एक - कौन हो तुम .......आउट कैसे मुज़हे जानते हो ........लगता है तुम दारुक क hi कोई भेजे हुए हो ....सामने आओ ......

अभी - छुपकर यह आप रह रहे हो ....अपने राज्य और अपने कर्तव्य को त्याग kar.......ek राजा को यह शोभा नहीं देता ..........और अभी अपने वास्तविक रूप को उसस्के आगे प्रगट कर देता है .......

जैसे hi एक अभी को अपने सामने देखता है ........तोह उस्सकी आँखों में एक अलग चमक आ जाती है .......रक्षक ...aap......lekin मैंने तोह सुना था आप कस क हाथो मारे गए........

लेकिन ंविं जानता था त्रिलोक की कोई शक्ति आपका अहित नहीं कर सकती है........

अभी - आप मुज़हे कैसे जानते है .......

एक - द्वापर युग क अंत में आप हमारे लोक में आये थे ........और आपने यहाँ अपना विशेष धनुष मेरे संगरक्षण में छोड़ा था ...

आईये बैठिये .......

और अभी उसस्के पास क एक आसान पर बैठ जाता है.........

अभी - मुज़हे तोह इस समय कुछ याद नहीं ......अच्छा वह धनुः अब कहा है......

एक - उससे मैंने महल क पश्चिमी भाग ंविं वक सरोवर में छिपाया है......

अभी - आप अपना राज्य छोड़कर यहाँ कैसे आये ......और इस तरह छुपकर क्यों रह रहे हो ......

एक - इसकी शुरुवात बहुत पहलव हो गयी थी .....

जब मुज़हे इस लोक का कार्य सौंपा गया था .....तोह मेरा छोटा भाई दारुक मेरे साथ hi था ....हम दोनों भाई में बहुत प्रेम था ......लेकिन हमारे विचारो ंविं बहुत मतभेद थे ......वह हमेशा हिंसा द्वारा अपना वर्चस्वा स्थापित करने क पाकः में था ......

उससे शक्तिया प्राप्त करने का एक जूनून से था ........इसिलए वह छुपकर काली शक्ति की उपासना करता था ........

जब इस बात का पता हमारे पिता को लगा तोह उन्होने उससे राज्य से बहार कर दिया ........लेकिन माँ क कहने पर इसी लोक में उससे एक अलग राज्य स्थापित कर दिया ....यही पुत्र मोह में किया गया उनके जीवन ...का सबसे गलत निर्णय था ......एक ..दिन उसने धोके से माता पिता को अपने राज्य में बुलाया और उनकी हत्या कर दी ......... ............

उसके बाद दारुक ने असुरो से संधि कर ली और उनकी सहयता स्व मुज़हे हराकर राज्य पर कब्ज़ा कर लिया .......वह हमारे लोगो की निर्मम हत्या करने लगा .......तोह उससे बचकर hi हम यहाँ उस जगह आगये ....यह इस लोक क बन देवता का शतं है ....यहाँ कोई भी काली शक्ति प्रवेश नहीं कर सकती .......

तभी वह दक्ष आजाती है .....

एक - यह है मेरी बेटी दक्ष .....

अभी - में इससे मिल चूका हु ....एहि तोह मुज़हे यहाँ तक लायी है.....

वैसे बड़ी बहादुर है ......मैंने देखा है कैसे एक hi तीर से एक विशाल काले भेड़िये को मार गिराया....

थोड़ी देर ऐसे hi बातें होती रही .....फिर किस तरह दारुक और असुरो से अटल लोक को मुक्त करना है इस पर विचार होने लगा......

एक द्वारा अभी को पता चला क इस लोक की साड़ी ऊर्जा अटल मणि में है उससे अपनी काली शकयो द्वारा दारुक नव अपने वश में कर रखा है......

जब तक वह मणि उसके पास है वह जब कहे इस ामपूर्ण लोक में विनाश फैला सकता है.....

और दारुक का वध उसी धनुष से हो सकता है जो ....वह क सरोवर में एक ने छुपाया है , उस्का मार्ग महल से hi होकर जाता है........

अटल मणि की शक्तियों से उसने अपने राज्य की सीमा बांध राखी है .....कोई भी बिना उस्सकी आज्ञा से वह प्रवेश नहीं कर सकता .......

एक ने बताया क जब तक उसके पास वह मणि है तब तक सीधे ुसस्पर आक्रमण भी नहीं कर सकते.........

साड़ी बातों पर विचार करके अभी ने गुप्त रूप से hi अपने कार्य को अंजाम देने का सोचा ........

पहले तोह अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल से उस कबीले पर ऐसा कवच बना दिया जिससे कोई भी सकती भेद नहीं सकती .......फिर उसने ......अपनी चारो पत्नियों को राकेश और रिंकू को वह बुलाया.....

सब से मिलकर पूरी स्थिति क अनुसार युद्ध निति पर विचार होने लगा.....

भद्रा क मिलान से मिली शक्ति क कारण अभी को कोई काली शक्ति की दीवार प्रवेश करने से नहीं रोक सकती thi.....lekin अटल मणि क कारण दारुक सतर्क हो जाएगा इस कारण वह विचार छोड़ दिया ....

कस क साथ अभी क युद्ध क बाद उसके गायब होने क कारण सभी असुर रक्षक को मारा हुआ समजह्कर आस्वस्त थे ....इसीलिए अटल लोक में कोई विशेष असुर की नियुक्ति नहीं हुई थी.....

विचार क बाद यह तय हुआ क अभी और सुलेखा अपने नाग रूप से दह्रति क निचे से उस सरोवर तक पहुंचेंगे ...और धनुष प्राप्त करेंगे........

और किसी तरह मणि तक पहुंचकर उससे अपने अदिकार में ले लेंगे .......

तब तक एक ....Shivali....Shalu .....Bhadra....Rakesh ...और रिंकू अपनी अपनी टुकड़ियों क साथ नगर को कहारों तरफ से घेर लेंगे ......

और जैसे hi अभी का इशारा मिलेगा सब एक साथ आक्रमण कर देंगे.....

रात में काली शक्तियां अधिक चेतन और बलवान होती है इसीलिए ..सुबह से hi इस योजना पर कार्य आरम्भ करने का निर्णय हुआ .....

रात में विश्राम क लिए सबका अलग अलग कुटिया में प्रबंध कर दिया गया ....

यहाँ अभी की कुटिया में चारो पत्निया थी ........

रिंकू - अच्छा दोस्त बेस्ट ऑफ़ लक रात क लिए

अभी - अरे भाई रात क लिए बेस्ट ऑफ़ लक क्यों....

रिंकू मुस्कुराते हुए .....अच्छा मेरी भाबियों गुड़ night.....bole तोह शुभ रात्रि.....

और चला गया

अभी समाज गया क यह बफल किस लीये था....

अभी अंदर आकर बैठ जाता है ......

शिवली - हम्म्म्म तोह बड़ा नैन मटका चल रहा था क्या बात है....

अभी - नहीं तोह मैं तोह तुम सबको hi देख रहा था ......

शालू - अच्छा जी जैसे क हममे पता hi नहीं .....वह लड़की क्या नाम है उअसका....

सुलेखा - दक्ष यही नाम है न ..कैसे घर घर कर देख रही थी तुम्हे ......मैं कर तहा था क उसकी आँखों में hi दस लू.....

अभी - सुलेखा को अपनी बाहों में खींचते हुए ....दस तोह तुम मेरे दिल को चुकी हो मेरी naagin......mein तोह बस ऐसे hi .....

भद्रा - क्या ऐसे hi ....मिलान क समय बड़े बड़े वाडे हमसे ...और nain..mattaka ..किसी और से.....

अभी भद्रा को भी अपनी और खींचता है और पास बिठा लेता है ....

अब अभी क एक और सुलेखा और दूसरी और भद्रा ..और दोनों हाथ दोनों क गले में

तभी शालू शिवली से ..देखो न दीदी ....हम तोह जैसे कुछ है hi नहीं.....

अभी अरे मेरी जान तुम मेरी गॉड में बैठ जाओ......

शिवली - और में ....कहा baithu......baat को घुमाओ मत ......पहले बताओ यह दक्ष का क्या चक्कर है......

अभी - मैं में ( हे भगवन ...अब तू hi बच्चा ..)

शिवली - काम खुद करते हो और भगवन को बचने क लिए कहते हो....

अभी - तुम तोह सब कुछ जानती हो जान ...मेरी अगली शक्ति की स्रोत है दक्ष.....

और बुर्रा सा मुँह बनाकर चुप चाप बैठ जाता है....

शालू - अले ale....ale...dekho तोह हमारे भोले साजन रूठ gaye....aur सुलेखा और शालू जोर से अभी क दोनों गाल खींचते हुए ....अरे मेरा बाबू शोना ...परेशां हो गया......

और चारो पत्निया हसने लगती है ......अभी को पता था ..क यह सब उसकी खिचाई कर रही hai....aur अभी भी इस्सके मज़ा उठा रहा था....

शिवली - देखा जान तुम तोह इतने से परेशां हो गए ...कभी हमारा सोचा है क किते कितने दिनों तक हम तोह तुमसे मिल नहीं पाते.....

अभी खड़ा होकर शिवली क पास जाता है और उससे गले लगता hai......Muzhe अपनी गलती का अहसा है जान .....

फिर ऐसी hi वह रात चारो क साथ कुछ खट्टी मीठी बात और प्यार में बैठ गयी ......

सुबह 4 बजे सब अपनी अपनी योजना क अनुसार बढ़ चले अपनी मन्ज़ही की और.......

अभी और सुलेखा एक क बताई हुई एक सुरंग में नाग रूप में प्रवेश करते hai......thodi hi दूर जाकर........

अभी क लिए इतना hi ...

अगला अपडेट ...रात को.....

 
सुपर्ब शानदार अवेसमे रिव्यु रितिका जी :अप्प्लायसे: :applause::yes2::yes2:

थैंक यू सू मच फॉर योर फैंटास्टिक सपोर्ट & कमेंट

:थैंक्स: :thanks::thanks:

शिवली एक रहस्य है ...यह अभी क भविस्य क बारे में सबकुछ जानती hai.....aage कहानी में आपको इसकी जबरदस्त भूमिका देखने को मिलेगी ......

और रिम्पी भी आगे बहुत कमल दिखाएगी

अभी कहानी सिर्फ 25 % तक hi पहुंची है ...

ऐसे hi साथ बनाये रखे....???

लेटेस्ट अपडेट 86 पोस्टेड....??
 
अपडेट - 87

अब तक आपने देखा अभी ने अटल लोक क राजा आहुक से मिलकर लोक को असुरो से मुक्त करने की योजना बनायीं.........

अभी सुलेखा क साथ नाग बनकर अपने दिव्या धनुष को प्राप्त लड़ने निकल गया......


अब आगे .......

अभी और सुलेखा दोनों उस सुरंग से आगे बढ़ hi रहे थे ....क आगे दो रस्ते मिले ....जिस में से एक रास्ता उनके मंजिल क पास पहुँचता था.....

दोनों मेंसे किस मार्ग पर बढे ....तब अभी का ध्यान एक रास्ते क ी गीली मिट्ठी पर गया .....विचार आया क हो न हो यह रास्ता किसी जल स्रोत तक जाता है

.......जैसे जैसे वह आगे बड़े सुरंग और संकरी होती गयी एक समय ऐसा आया क आगे सुरंग बंद मिली ....सिर्फ एक छोटी सी जल की दर किसी स्रोत से आरही थी.....

दोनों अपना रूप छोटा करके उस जल स्रोत में प्रवेश कर गए और जाकर निकले नगर क पिछले भाग में बहने वाली नदी तक .......जहा से नगर में जल आपूर्ति क लिए जगह जगह नहर निकलती थी .....

अभी सूर्योदय होने hi वाला था ....और ...ब्रह्मा मुहूर्त यानि सुबह 4 से 6 तक कोई भी नेगेटिव एनर्जी का जोर बहुत काम होता है इसीलिए योगी उसी समय को ध्यान क लिए प्रयोग करते है....

अभी सुलेखा इसी अवसर का लाभ उठाकर उसी नहर क सहारे नगर क भीतर आगे बढ़ने lage.......ab दोनों नगर क भीतर प्रवाह कर गए थे .......अब बस उन्हें जानना था की सरोवर कहा है.......

नहर में बहते हुए दोनों महल क पहिचे बगीचे तक पहुँच gaye.......aakash में .सूर्य की लालिमा नज़र आने लगी थी.....

एक से उन्हें पता चला था .....महल क पिछले बगीचे से hi सरोवर तक रास्ता जाता है.......

यहाँ अभी किसी भी माया का प्रयोग नहीं कर सकता था.....

अभी उन्हें जल्द hi यहाँ से आगे बढ़ना tha....Abhi सुलेखा को लेकर सरोवर की दिशा में टेलिपोर्ट हो गया और

सरोवर क सामने एक बगीचे में प्रगट हो गया .....

यहाँ दारुक को अटल मणि ने संकेत दे दिया क कोई बाहरी 2 सर्प पश्चिम दिशा में स्थित सरोवर क निकट घुस आया है .....वह इस समय आदि नींद में था ...इसीलिए उसने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया ..... सोचा क सर्प hi तोह है .....उनसे उससे कैसा भय ... ...

दारुक को यहाँ छिपाये दिव्या धनुष क बारे में नहीं पता था ......इसीलिए उसने इस बात पर जयादा ध्यान नहीं दिया ........

यहाँ अभी और सुलेखा दोनों सरोवर क पास पहुंच gaye........Subah की किरण सरोवर पर पद रही थी ....और उसमें कमल खिल रहे थे........

जैसे hi अभी ने उअस सरोवर क जल का स्पर्श किया उसके जल में एक भूचाल आ आगया ......जिसके आवाज थोड़े hi दूर पर पहरा दे रहे सैनिको तक पहुँच गयी.......

और वह उस सरोवर क निकट आगये .......सरोवर का जल गोल गोल घूमने लगा यही संकेत था धनुष तक पहुँचने का ......अभी और सुलेखा दोनों अपने रूप में आगये थे....

अभी को शीघ्र धनुष प्राप्त करना था ...तोह वह उअस सरोवर में प्रवेश कर गया , जिससे देखकर सेंक आगे आये ...तोह सुलेखा भी अपनी तलवार लेकर उनका आगमन करने सज्ज हो गयी...

सुलेखा को चारो तरफ से सैनिको ने घेर लिया ....4 सैनिको ने एक साथ उसपर वार किया ...तोह सुलेखा फुर्ती दिखते गोल घूमते हुए हवा में उछाल गयी और चारो आपस में टकरा कर गिर गए .....इतने देर में सुलेखा ने .....पीछे खड़े सैनिको में से दो को ऊपर पहुंचा दिया .....तब तक चारो संभल gaye....aur आगे बड़े तोह सुलेखा ....ने दो क वॉर को ब्लॉक किया और बाकि दो उछलकर जोर दर किक जबड़े पर मारी ....जिससे उनका जबड़ा टूट गया .....अब वह तलवार सीधी कर्क चक्र क सामान गोल घूमने लगी जिससे पल भर में hi दो सैनिक धराशायी हो गए .....सुलेखा ने देखा की अब वह कोई सैनिक नहीं hai....toh वह सरोवर की तरफ मुद गयी .......

तभी उससे पीछे से घूरने की आवाज आयी ....वह फिर पलटी ...तोह देखा दो बड़े से काले भेडियो ने उसपर छलांग लगा दी .......अभी वह सुलेखा तक पहुँचते क दो तीर आकर उन्हें लगे ....जिससे दो क शरीर जलकर गिर गए......

जब सुलेखा ने पीछे देखा तोह वह अभी दिव्या धनुध क साथ खड़ा था......

अब तक दारुक को यहाँ होनेवाली स्थिति का पता चल चूका tha......Woh अटल मणि के द्वारा विनाह फाइने की क्रिया शुरू कर चूका था ......

अभी तुरंत सुलेकहा को लेकर महल क राजा क कक्ष में टेलिपोर्ट होगया........

उस काश में कोई नहीं था ......अभी को शीघ्र अटल मणि तक पहुंचना था तोह उसने प्रेत रूप धारण कर लिए जो हर तरह की काली शक्तियों पहचानकर को भेद सकता tha......pret रूप में अभी को उस कक्ष के निचे एक तहखाने का आभास हुआ ......

तोह अभी जमीं से प्रवेश करके सीधा वह पहुँवह गया ....यहाँ जब सैनिको को संकेत मिल चूका था तोह वह उस कक्ष तक पहुँचने लगे ......

और सुलेखा अकेली उनका मुकाबला करने लगी , जैसे साक्षात् रणचंडी hi दोस्तो का संघार कर रही हो ......

यहाँ दारुक की क्रिया पूरी हो चुकी थी इस्सके पहले वह मणि तक पहुँचता अभी ने वह मणि उठा लिया और एक जोरदार किक उसके सीने पर मारी ......

जिससे वह दूर जाकर गिरा ...अपने हातो से मणि निकल जाने क कारण वह बहुत क्रोध में आगया ......

दारुक - कुआँ हो तुम ....और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ तक पहुँचने की .....भले hi मणि तुमने ले लिया हो ....लेकिन अब तुम मेरा हाथो से नहीं बच सकते ......

और वह भयंकर भेड़िया मानव क रूप में आगया.........

और उस्सने अपनी स्पीड क प्रयोग कर के अभी पर अपने पंजो स्व वॉर करने लगा ......लेकिन अभी क दिव्या कवच क कारण उस्का एक भी वार अभी का कुछ नहीं बिगड़ पाया ....

इससे उसका क्रोध और बढ़ने लगा ...और वह ऊर्जा गोले से उसपर प्रहार करने लगा ......अभी ने अपने अग्नि शूल से वार किया लेकिन वह दारुक का कुछ भी नहीं बिगड़ पाया.....

दोनों एक दूसरे पर वार कर रहे थे लेकिन दोनों क वार क असर एक दूसरे पर नहीं हो रहा था.....

यहाँ सुलेखा अकेली आरहे सैनिको का सामना कर रही थी .....उन् भेड़िया मानवो क रक्त से वह जगह ला हो गयी थी ....... सैनिक भी अब अपने भेड़िया रूप में आगये थे ......

इस समय 100 क लगभग भेड़िया मानव सुलेखा को घेरे थे......

अभी सुलेखा सामने वालो पर वार करने बड़ी hi थी क पीछे से एक भेड़िये ने उसकी तरफ छलांग लगा दी........

और एक जोरदार पंजा सुलेखा क पीठ पर लगा ......इससे सुलेखा का क्रोध चरम पर बढ़ गया .....और वह अब विशाल नागिन क रूप में आगयी.....

नागलोक की रानी होने क कारण उसके अंदर नागमणि की ऊर्जा सक्रिय हो gayi.....aur वह अब एक ..एक करके भेडियो को निगलने lagi.......bhediyo में बाग्दाद् मच गयी....

यहाँ अभी को एक की बात याद आयी क दिव्या धनुष से hi दारुक का वध हो सकता है .....तोह उस्सने दिव्या धनुष को प्रगट किया और उसकी प्रत्यंचा खींची ...तोह उसपर एक जलता हुआ तीर प्रगट हुआ ....

अभी ने दारुक पर वह तीर छोड़ा ...जिसके लगते hi .....वह वही ...जलकर रख हो गया ....उसके जलते hi अटल मणि काली शातियो से मुक्त होगया .....अभी ने ागि बन आकाश में छोड़कर संकेत दिया .....जिससे शिवली और बाकियो ने एक साथ हुम्ला कर दिया ....

दारुक तोह मर चूका था ....लेकिन अभी उसके सैनिक और असुर बाकी थे .......

अभी तहखाने से निकल कर जब बाहर आया तोह सुलेखा क विशाल नागिन रूप को देखा .......वह मानव भेडियो में बदले हुए सैनको का काल बन गयी थी .......

उससे दर क वह से सारे सैनिक नगर की और भागे वह उनका स्वागत ...एक और उसकी सेना ने किया .......सुलेखा ने पहली बार यह रूप धरा था .....इसीलिए वह अपने आप से बाहर हो गयी .....

इस रूप में सुलेखा क्रोध और विष की अधिकता क कारण अपने होश में नहीं थी .....वह अपने सामने जो भी आये बस उससे निगल लेना चाहती थी.....

अभी उससे वापस लाने क लिए पुकार ने लगा ....लेकिन जैसे वह सुन hi नहीं रही thi........Abhi उसके सामने जाकर उससे शांत करने लगा .......

सुलेखा ने जब अभी को देखा तोह वह उससे भी निगलने को आगे बड़ी ........अभी ने उसकी आँखों में देखकर पूरे प्यार से और दिल की गहराई से पुकारा ......शांत हो जाओ सुलेखा ........तब सुलेखा अपने वास्तविक रूप में आगयी.......

अधिक ऊर्जा क प्रयोग क कारण वह बेहोश हो गयी ....अभी ने उससे अपनी बाहों में थम लिया ....

अभी सुलेखा को लेकर महल से बहार आने लगा ....तभी शिवली अपनी टुकड़ी क साथ महल पहुँच गयी......

शिवली - सुलेखा .....आप चिंता न करो ठीक हो जायेगी यह ....में इससे देखती हु आप बहार सम्भालो ......

यहाँ नगर में दानवो एक बहुत बड़ा भवन था जब उन्हें हमले का पता चल तोह वह भी मैदान में आगये .....रिंकू सहलु की तुड़की दानव महल तक पहुँच चुकी थी .......

शालू दोनों हाथो में तलवार लेकर लड़ रही थी उआकी तलवार से सप्तरंगी ऊर्जा निकल रही थी ......

जो जिस भी दानव को लगती वह वही ढेर हो जाता .......इस बात को दानव भी जान गए तोह वह आगे ढल करके शालू से लड़ने लगे ....अब शालू नुन्जा तकनीक ...फिल्प ...बैक फिल्प जम्प आदि का प्रयोग करके पहले तोह उनके हाथो पर वॉर करे ढल गिरती फिर तलवार की वॉर से उन्हें यमलोक पहुंचा रही थी ......

रिंकू तोह बस इस अद्भुत तलवार बाजी को देख रहा tha.....tabhi उसने देखा क एक दीवार क पीछे कोई 4 क लग भाग दानव शालू पर छिपकर वॉर करने वाले थे .........

तोह रिंकू भी छुपते हुए उनके पीछे पहुंचा .....और जोर से एक क पीठ पर मारते हुए .....बोलै .....Dhaapa......aur वह दानव मुँह क बल गिर gaya....baki तीन रिंकू को घर क देखने लगे .....

रिंकू भी दांत दिखाकर हस्ते हुए .....अरे बही छुपन छुपाई खेल रहे थे ......यह भाई तोह आउट हो gaya....ab में छुपूँगा ...तुम ढूंढो......

इस समउ ऐसी बे सिरपैर की बाते सुनकर दानव अपना सर खुजाने लगे .

....तभी रिंकू ने एक क कसकर गाल पर चांटा मारा ....साला में यहाँ बोर हो रहा हु और तुम सर खुजा रहे हो ....और भगा .....दानव भी उसके पीछे भागे .......

3 दानव पीछे लगे थे क तभी 6 दानव आहे भी aagaye.....aur रिंकी धड़ाम से टकराया जिससे दो निचे गिर गए .....

रिंकू - सॉरी भाइयो लगी तोह नहीं .....(अब उसके सामने 9 दानव थे ) अच्छा चलो छुपन छुपाई सांक्ले अब कबड्डी खेलते है ......

और वह उनके साथ सच में कब्बडी खेलने लगा .....लेकिन साथ में उनकी गार्डन भी तोड़ने लगा.......

यहाँ अभी अपने धनुष से काले भेड़िया मानवो का संघार कर रहा था........

दक्ष अपने पिता का साथ दे रही थी और बड़े बहादुरी क साथ मुकाबला कर रही थी .....

भद्रा प्रेत रूप में दानवो क भीतर प्रवेश कर क उन्हें फाड़कर निकल रही थी.....

राकेश अपने शेर रूप में भेडियो और दानवो का कॉल बना हुआ था ....जो भी उसके सामने आता वह उसके पंजे या जबड़े का शिकार हो जाता......

उसी समय दानवो क लिए बनाया बावन भरभरा कर गिर जाट है और उस्में से पराजय होता है एक विशालकाय दानव और काले भेड़िया मानव की ऊर्जा को मिलकर बनाया हुआ एक दैत्य.....

जो प्रगहत होते hi भयंकर गर्जना करने लगा ........

रक्सेह उसके सामने aagaya.........iss समय राकेश उस दैत्य क सामने ऐसा लगरहा था जैसे ...विशालकाय हाथी क आगे एक छोटा सा हिरन का बच्चा......

राकेश उस्सकी और बड़ा तोह उस्सने राकेश को उठाकर जोर से दूर फ़ेंक दिया ........जिससे उससे कुछ छोटे आयी ........

तब तक सुलेखा नार्मल हो गयी थी .....इसीलिए शिवली अब बहार आगयी थी ...तभी उसने देखा क एक विशाल दैत्य एक घर को उठाकर घायल राकेश पर वार करने वाला है तोह शिवली ने अपनी ऊर्जा का जोरदार प्रहार उसस्के हाथ पर किया जिससे उसके हाट सर वह घर टूटकर निचे गिर गया ...अब दैत्य का ध्यान शिवली पर gaya......aur शिवली अपनी ऊर्जा क प्रहार से उससे लड़ने लगी.....

और साथ साथ hi अपनी विद्या का प्रयोग करके राकेश को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया.......

अब तक उस नगर क सारे काले भेड़िये मारे जा चुके थे और दानव भी मारे जा चुके थे ....जो थोड़े बहुत बच गए थे वह छिपकर उस दैत्य की लड़ाई देख रहे थे और उस्सकी जीत का इंतजार कर रहे थे....

उसी समय Abhi...AK....Rinku .....Shalu....Bhadra....Daksha.....sabhi वह पहुंचे ...जहा शिवली उस महा दैत्य क साथ लड़ रही थी ......

अभी अब उस दैत्य क सामने आया .....और शिवली को पीछे किया ........

अभी हाथ में गदा लेकर ुस्सपट वार करने laga......Tabhi एक ने अभी को अटल मणि का प्रवोग करने को कहा ......

तोह अभी ने तुरंत वह मणि निकलकर इस तरह पकड़ा को सूर्य की रौशनी उससे टकराकर उस महा दैत्य पर pade......Jaise hi इस तरह सूर्य की रौशनी उस महा दैत्य को लगाई वह वही जलकर समाप्त हो गया......

अब युद्ध ख़तम हो गया tha...aur अटल लोक का राज्य वापस आहुक क पास आगया था........

राकेश को शिवली ने हील कर दिया.......

शालू को कुछ खरोंचे तोह आयी थी लेकिन उसस्के अंदर विष होने क कारण भेड़िये का विष उसका कुछ नहीं कर सका ......

अभी ने सबके साथ मिलकर .....एक का राज्याभिषेक किया .....

एक - आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद् ....आज आपके hi कारण इस राज्य की खुशिया लौट आयी है.......

अभी - महाराज इस्स्में धन्यवाद की क्या बात है यह तोह हमारा कर्त्तव्य था.......

एक - फिर भी रक्षक हम आपको कुछ देना चाहते है ....यदि इस्स्में अस्प्की पत्नियों की मर्ज़ी हो तोह.......

अपने पिता क मुँह से यह बात सुनकर दक्ष समाज गयी .....पहले तोह वह शर्मा गयी ....फिर कही अभी की पत्निया मन न कर दे इसी आशंका क साथ उनकी तरफ देखने लगी ........जिससे दरख शिवली समाज गयी......

शिवली उसस्के पास गयी और अपने हाथ से उस्का चेहरा उतहकर ....वैसे दिखती तोह ठीक थक hi है हमे मंज़ूर है.......

दक्ष बड़ी मासूमियत क साथ शिवली क तरफ देखती है ...और शिवली उसको अपने गले कागा लेती है.........

अटल लोक की रीती रिवाजो से अभी का विवाह दक्ष क साथ हुआ .......

सुहागरात की रात .....

अभी - तुम खुश तोह हो न .........

दक्ष - हम्म्म

अभी - लेकिन मुज़हे तोह ऐसा नहीं lagta.....tumne एक बार भी अपना प्रेम प्रगट नहीं किया .....लगता है .....तुम मुजह्से प्रेम नहीं करती.....

दक्ष अब भी चुप बैठी बस अभी को देखती है......

अभी - ठीक है तोह फिर जब प्रेम hi नहीं है तोह मिलान कैसे होगा तुम सू जाओ में चला बहार ...और बीएड से उठ gaya......k दक्ष ने अभी का हाथ पकड़ लिया जब अभी ने मुड़कर देखा तोह जैसे दक्ष क आसंसू निकलने वाले थे ......

अभी तुरंत बैठ जाता है और उसस्के आंसू पोंछता है ...

अभी- अरे अरे में तोह बस टोहड़ा मज़ाक कर रहा था .....और कान पकड़ते हुए माफ़ कर दो मुज़हे.......

दक्ष - आपने तोह मेरी जान hi निकल दी thi...aur कहते हो की माज़क था......

अभी बे उससे बहो में भर लिया और उसस्के होंठों का चुम्बन लिया .....दोनों एक दूसरे क प्यार में गहरा उतारते चले गए ......और प्यार और मिलान की आस उन्हें अपने चरम पर ले आयी ...और दोनों एक दूसरे में खो गए.......

अभी को इस मिलान से प्राप्त हुई हीलिंग पावर..... दूर shravan.....Aur ताकत ...जिससे अभी की रकत अब दुगनी हो gayi.....aur घ्राण शक्ति .....

आज क लिए इतना hi ..........


अगला अपडेट कल........
 
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