ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 17 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

सुपर ..फैंटास्टिक ...ब्रिलियंट ...जितनी तारीफ करू वह काम है ...जबरदस्त रिव्यु भाई....



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भाई आपके रिव्यु में तोह आगे आने वाली कहानी का पूरा निचोड़ है .....सच में भाई ...कमल है ....आपका ...हर पॉइंट ...कहे वह मदालसा क बारे में हो या ऋतू क बारे में सब बिलकुल एकदम सही है

बहुत बहुत धन्यवाद भाई क आपके इस वंडरफुल साथ और मंद ब्लोइंग कमेंट क लिए

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

ऐसे hi साथ बनाये रखे



लेटेस्ट अपडेट 123 पोस्टेड...
 
सुपर्ब शानदार जबरदस्त रिव्यु भाई .....

ठंकु सू मच

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

यही तोह सांसारिक बंधन है भाई ....यहाँ स्वयं भगवन भी आकर मोह में पद जाते है......

मायापति होते हुए भी भदवान राम माया क स्वर्ण हिरेन क मोह में उसका शिकार करने निकल पड़े ...और सीता हरण हो गया .....

परमात्मा होकर भी सीता की खोज में वन वन भटके

जब लक्छ्मण को शक्ति लगी थी तोह भावनाओ क आवेग में राम जी इस त्रिलोकी को hi समापत करने चले the......Jamavant जी क समज़हाने पर शांत हुए थे .....

भाई हम सब भी उसी परम पिता क अंश है

हमारा शरीर भी अनंत शक्तियों का भंडार है ...परन्तु जब तक हम इस सताया से अवगत नहीं होते तब तक हम मोह में पड़े रहते है .......और दुखी होते रहते है

अभी में सबके प्रति प्रेम और भावनाये अधिक है ....और यह hi उसके मोह का कारण बन जाता है .......

उन्ही बह्व्नाओ से उससे ऊपर उठना है ....

शिवली को सत्य ज्ञात है ....अभी ...सत्य से परिचित नहीं है ....जिस दिन भी वह सत्य से परिचित होगा ....वह अपने पूर्ण स्वरुप को पा लेगा ......


ऐसी hi साथ बनाये रखे...
 
अपडेट - 124



अब तक आपने देखा अभी को ध्यान में कुछ दृश्य और रवस और नैना की बातों से कुछ अनहोनी होने की आशंका होने लगी.....

रवस और नैना ने अपने परिवार क साथ पल बिताने क लिए पिकनिक का प्लान बनाया ...और सभी निकल पड़े ......

अब आगे .......

सब चारो तरफ हरी छोटी पहाड़िया .....साफ़ पानी का जहरना ...तालाब ......और वह खिलने वाले फूलों की महक लिए शीतल ठंडी hawa....mein मंत्र मुग्धा हो गए ......

अभी और रिम्पी ने तालाब क किनारे hi साफ़ जगह देखकर ...चटाई और चादर bichayi.....Naina ....और रेनू खाने पिने क सामन से भरी बास्केट ले आयी ......ऋतू दी भी उनकी मदत कर रही थी ....

ाद्दु तोह वह क नज़ारे अपने मोबाइल में कैद कर रही थी....

आज न कोई गॉर्डस थे ...न ...koi..servant.....aur न hi driver......RVS खुद ड्राइविंग करके यहाँ अपने परिवार क साथ वक्त बिताने आया था .....

सामन अर्रंगे करके Renu....Rimpy ...ऋतू ..ाद्दु ...अभी क साथ चटाई पर बैठ गए......

रवस - चलो चलो क्या सब बैठ गए हो ......अभी जरा गाड़ी की डिक्की तोह खोलो और वह जो है ले लाओ ......

अभी ने जब डिक्की खोली तोह वह क्रिकेट किट thi....Abhi उससे ले आया ....

नैना - यह क्या है जी ...अब इस उम्र में क्रिकेट खेलोगे ......

रवस - इस उम्र में matlab....kya में बुद्धा हो गया हु .....अभी भी बहुत दम है इन् बाजुओं में लगता है तुम कुछ बुध्दि हो गयी हो .....

नैना - मुँह फूलते हुए ....देखो जी मैं तोह आप क बारे में सोच रही थी .....मैं तोह बिलकुल फिट हु .....आप hi बुढ़िया गए हो ......

रवस - ूहू इसी ऐडा पर तोह में मर मिटा था ....दिल कर रहा है एक बार और प्रोपोज़ कर दू ...वाकई आज भी ...एक दम वैसी hi खूबसूरत लग रही हो ..जैसे तुम्हे पहली बार देखा था ...

नैना -शर्म से लाल हुए जा रही थी .... क्या आप भी बच्चे देख रहे है......

रवस - तोह देकने do.....bhai अब अपनी बीए से भी बात नहीं कर सकता .......

सभी माँ डैड क मीठी नोक ज़ौक़ को देख रहे थे और एन्जॉय कर रहे the....Lekin अभी कुछ सोच रहा था ....आज उससे डैड सभी चिंताओं से मुक्त और जिंदगी से भरे लग रहे थे ...लग रहे थे...

ाद्दु - वाओ डैड हमे तोह पता hi नहीं था क आप इतने रोमांटिक हो ......आज माँ को फिर प्रोपोज़ कर hi दो ...

नैना - ाद्दु की तरफ लपकी ....रोमांटिक की बाची अभी दिखती हु .....ाद्दु माँ से बचने क लिए डैड क पीछे चुप गयी .....माँ जब ाड़फू को पकड़ने आयी ...तोह डैड ने उन्हें पकड़ लिया ......

थोड़ी ऐसी hi मस्ती चली ......

ऋतू - बेतु आज डैड और माँ कितने खुश लग रहे hai....meine पहले उन्हें कभी ऐसी नहीं देखा .

रिम्पी - हां दी ...में भी बचपन से hi उन्हें देख रही हु ...लेकिन आज उनमें आया यह चेंज बहुत ाचा लग रहा है ....न कोई बिज़नेस की टेंशन और ....न ...hi गॉर्डस और नौकरो का जमावड़ा .....

रेनू - मैं तोह यह hi प्रार्थना करती हु दोनों ऐसे हो बने रहे .....

थोड़ी देर रवस और नैना की छेद चढ़ कुछ बातें चलती रही ...फिर दो टीम बनाकर एक अभी की और एक रवस की क्रिकेट मैच हुआ ......जिसमें रवस की जीत हुई .......सब खेल कर अब थक गए थे ....

अभी रिम्पी ..Renu...Ritu...Addu ....सब तालाब में उतर गए नहाने ......रवस और नैना उन्हें देखने लगे ....सब एक दूसरे पर पानी उदा रहे थे ....

अभी का मान नहीं था ...लेकिन वह फिर भी इन् सब में इन्वॉल्व होकर सब का दाथ दे रहा था

रवस - ऐसे क्या देख रही हो नैना ......

नैना - देख रही हु सब कितने खुश है .....काश हम हमेशा ऐसे hi साथ रह पाते ......

रवस - नैना ....जिंदगी लम्बी होना जरुरी नहीं .....अच्छी होना चाहिए ......तुम्हारा साथ मिला ....परियो जैसी बेटियां मिली .....अभी जैसे बेटे का पिता होने का सौभाग्य मिला ...जो स्वयं त्रिदेवो का अंश ...है ...इतनी प्यारी बहुए मिली .....धन संपत्ति ...powers....har ...चीज़ का आनंद उठाया .....अब और क्या चाहिए....

नैना - अभी भी कुछ कमी है .....अपने वंश को बढ़ता हुआ देखते...

रवस - नैना ...हर व्यक्ति क जीवन में कुछ तोह कमी होती hi है ...फिर भी भोलेनाथ न्र हमे आज तक जो भी दिया है वह काम नहीं है ......हां यदि अपने आनेवाले वंश की खबर भी मिल jaati...toh में पूरा हो जाता .....

यहाँ तालाब में नहाते हुए ...अचानक ..रिम्पी को चक्कर आने लगा .....सर बजरी होने लगा ....तोह अभी उससे पानी से बहार ले आया ......

तालाब से बहार आते hi रिम्पी को उल्टिया होने लगी .....रिम्पी को उल्टिया होते देखकर .....नैना उसके पास आयी और उसकी पीठ सहलाने लगी .....

अभी - क्या हुआ रिम्पी .....तुम भी अपना ध्यान नहीं रक्ति हो पता नहीं क्या उल्टा पुल्टा खा लिया .....

नैना - बेतु ..इस्स्में इससे डांटने की बात नहीं है ...यह ..तोह महषि की बात hain.......Bhagwan ने मेरी सुन ली ......

अभी - इस उल्टिया आरही है यह भी कोई ख़ुशी की बात है ......

नैना - तू भी नीरा नासमझ hi है ....अरे तू baap....bannewala है .....एक नया मेहमान आनेवाला है....

अभी - मेहमान कौन मेहमान ......फिर बात जब समाज आयी ....तोह रिम्पी की तरफ देखकर ...सच ..

तोह रिम्पी ने भी गार्डन हिलाकर सहमति जताई ........

तोह अभी ने उससे ख़ुशी से गोद में उठा लिया .....और ख़ुशी से एक गोल चाकर घुमा लिया ....

रिम्पी - क्या कर रहे हो ...सब देख रहे है ....आप भी बिलकुल बुद्धू हो....

अभी को अहसास हुए क सब उससे घूरे जा रहे है ....तोह उसने रिम्पी को निचे उतर दिया .......

नैना ने ख़ुशी से रिम्पी क सर पर हाथ फेरा ....मेरी बच्ची आज तुमने हमे पूरा कर दिया ...बस अब और जीवन में कोई कमी न रही ...

और गले लगा लिया ...रवस ने भी रिम्पी क सर पर हाथ फेरते हुए भगवन को धन्यवाद दिया .....

इस ख़ुशी से रवस और नैना की आंखें नाम थी .......

रेनू ..ाद्दु ...ऋतू सब रिम्पी को घेरे हुए थे .......

रिम्पी ने बताया क उसके सपने में दीपू आया था ....और उससे माँ कहकर पुकार रहा था .......

अभी समाज गया क दीपू hi उसका बीटा बनकर आनेवाला है .....

सबने मिलकर वह खाना खाया ....जो साथ लाये थे ......रिमी की खबर से सब खुश थे ....

मौज मस्ती और खुसियो भरा दिन परिवार क साथ वाला ख़तम होने को आया था .......सभी वापस घर आगये .....

घर आकर अभी ...टेलिपोर्ट होकर ताल्लुक में शालू क पास पहुंचा ......और उसने वह अपनी रक्षक सेना क सेनापति की सभा बुलाई ......

अभी - साथियो हमारा यह युद्ध अब अंतिम चरण तक पहुन्ह्ने वाला है ....सबको पहले से अधिक सावधानी बरतनी होगी .....

अभी ने अपनी सभी पत्नियों को भी सतर्क रहने क लिए कहा .....क्यों की अगली जिस यारा पर वह जारहा था ....वह उसको अपने संपूर्ण ऊर्जा क साथ जाना था ....

इसिलए उसकी अनपस्थिति में अब उसकी पत्नियों को hi रक्षा का भर उठाना था .......

अभी ने गोलू और रिंकू ...को अपने घर की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी ......रिम्पी को भी पूरी तरह सतर्क रहने को कहा .......

शिवली को सब लोको पर नज़र बनाये रखने क लिए कहा ......

सबको रणनीति समज़हाकार अभी घर आगया ......

रवस और नैना हॉल में बैठे हुए थे ...बाकी सब अपने अपने रूम में ...

रवस - आओ बीटा हम तुम्हारे बारे में hi बात कर रहे थे .....

वीएस एक बार और बहुत बहुत बधाई ...अपने वश का अगला संघारक जनम लेने वाला है ....

अभी - मुज़हे आपसे कुछ पूछना है ....

रवस - ऐसी क्या बात पूछनी है beta.....itni रात को ...

अभी - डैड सुबह आप और माँ क्या बात कर रहे थे .......ऐसा क्या होनेवाला है ....

रवस - बीटा कुछ बातें समय से पहले जाना ठीक नहीं है ......और ऐसा कुछ नहीं होगा जो विधि ने न लिखा हो ....यह सब बात छोड़ो आओ बैठो .....

अभी आकर दोनों क बिच बैठ जाता है ...

नैना - बेतु ... आज अपनी माँ की गोदी में नहीं सोयेगा ....आज बहुत मैं कर रहा है तुज़हे ऐसे सुलाने का ....

अभी - माँ ..में तोह रोज़ hi आपकी गोद में सोना चाहता हु ....जितना सुकून मुज़हे आपकी ममता भरी चाव में आता है उतना कही नहीं .......

और अभी नैना की गोदी में सर रखकर लेट जाता ...है नैना भी अभी क बालों में प्यार से हाथ फेरने लगती है .......अभी को पता hi नहीं चलता क कब उससे गहरी नींद आगयी .....

चैहरे पर कुछ गिला गिरने से आधी रात क लगभग उसकी नींद खुल जाती hai......k ननिअ तुरंत अपने आंसू पांच लेती है और अभी क चहरे को अपने पल्लू से पोंछती है ....

अभी समाज जाता है क यह गिला क्या था ....उसने देखा ...क माँ डैड अभी भी उसदे hi देखे जा रहे थे .....

अभी ने उन्हें आराम करने रूम में भेज दिया ......

और खुद अपने आपको संयत करके ...योग अभ्यास करने लगा .......उसने बार बार अपने शरीर से बहार निकलकर अंदर प्रवेश किया .....और इस विद्या में निपुण हो गया ......

दूसरे दिन अपने निया कर्म करने क बाद ...अभी क सामने सबसे बड़ा प्रश्न था क वह अपना शरीर कहा सुरक्षित रख सकता है ....

अभी को गंधमादन पर्वत को उसी गुफा का ध्यान आया जहा पहले भी सिवली क संरक्षण में शरीर को छोड़ क गया था .......

अभी अब अपनी यात्रा क लिए पूरी तरह तैयार था ...उसने अपने माँ डैड क चरण चुकार आशीर्वाद लिया .....

ाद्दु से मिला ...थोड़ी देर तक उससे बातें की और ....

ाद्दु - भाई आप कही जा रहे हो क्या ....में भी आपके साथ chalungi.....hamesha आप ऐसे hi करते हो

अभी - अरे नहीं गुड़िया ...में अपनी गुडइयको छोड़कर कहा जाऊँगा ......

ाद्दु - मुज़हे पता है भाई आप हमेशा अपना डुप्लीकेट छोड़कर जाते हो .....मुज़हे सब पता चलता है भाई .....लेकिन आप एक सुपर हीरो हो न और अस्प्को बहुत काम भी होता है इसीलिए मैं आपको कुछ नहीं बोलती ....लेकिन अब मेरे पास भी ियनि पावर्स है में भी आपके साथ चलूंगी ....

अभी ाद्दु को गले लगा लेता है और और सर पर हाथ फेरता है .....नहीं गुड़िया तुम तोह मेरे साथ hi हो हमेशा ....

अभी को यह अंदेशा तोह था क कुछ तोह बुर्रा होनेवाला है ...लेकिन अब योग शक्ति क द्वारा बहुत हद तक उसने अपने आपको नियंत्रित कर लिया था ....उससे अपनी यात्रा पर जाना hi था.....

अभी ने चैताली और भद्रा को रिम्पी की देख रेख क लिए बुला लिया ....क्यों क दोनों क लोक की रक्षा करने वाला वह थे ....सुतल लोक में राजा बलि और वीके

और वाइटल लोक में प्रेतराज..

उसके बाद अभी ने रिंकू को बुलाया और उससे अपना रूप और शक्ति त्रिशूल भी दिया ...जिससे कस को लगे क अभी घर पर hi है .......

गोलू को भी अदृश्य रूप में घर पर hi रहने को कहा..

उसके बाद ऋतू से मिला ......ऋतू भी थोड़ी देर अभी की बाहों में रही .....दोनों ने एक दूसरे क प्यार को महसूस किया...

और अभी ...विभक्त ....और रेनू को लेकर पहुँच गया गंधमादन पर्वत की उसी गुफा में ...

वह पहुंचकर अभी ने दोनों को समज़ह दिया क क्या करना hai......Dono क पास मंत्रो की शक्ति थी .....

फिर अभी ने आसान जमाया और और अपनर पांच वायु .....को नियंत्रित किया ....

योग मुद्रा में बैठकर त्रिबंद ....यानि मूल band.....jalandar बढ़ ...और उड्डियान बंद....

जो योग या प्राणायाम करते होंगे वो इन् त्रिबंधो को जानते होंगे

अब अभी ने अपने सम्पूर्ण रूपों का आवाहन किया जो अलग अलग लोको में थे ...और अपने भीतर समां लिया ....

उसके बाद अपने प्राणो को शुष्मना नाड़ी में प्रवेश कराकर ...आज्ञा चक्र से बहार आया ....अब अभीअपने शरीर को देखसकता था....

अपनी संकल्प शक्ति से एक एक लोक को पार करते हुए ...वह पहुंचा सत्य लोक क द्वार पर ....

अभी इतना hi ....

अगला अपडेट जल्द hi ....
 
अपडेट - 125

अब तक आपने देखा ...अभी सत्य लोक क द्वार तक पहुँच चूका है....

अब आगी.....

सत्य लोक का वह द्वार एक माया था .....जो वाइट एनर्जी क एक पोर्टल की तरह था ...

इस लोक का सञ्चालन स्वयं ब्रह्मा जी करते थे ....

सत्य लोक सत्य क प्रकाश से पाईपूर्ण था ....इस लोक में बर्ह्मा जी देवताओ क साथ सभा करते थे ...और सृष्टि को सुचारु रूप से चलने क liye...mantrana करते थे ...यही से देव्यो को आदेश प्राप्त होता था .......जिस से वह बाकी लोको का सञ्चालन सुचारु रूप से कर सके ....

इसी लोक से ऊपर क तीन दिव्या लोक ब्रह्मा लोक ....Vaikunth.....Aur शिव लोक क लिए मार्ग जाता था .....

मृत्यु क बाद शुद्ध सात्विक ...पुण्य आत्माये इस लोक से अपने मुक्ति धाम जाते थे......

उनकी भक्ति ...पुण्य कर्म ....को ध्यान में रखते हुए ....उन्हें त्रिदेवो क किस लोक में जाना है इस्सके निर्णय यही लिया जाता था ......

इस सत्य लोक में श्रिस्ति क हर रहसयो का सत्य छिपा था .......

अभी ने जब देखा क सामे एक पोर्टल जैसा द्वार है तोह वह उसमें प्रवेश कर गया .....

भीतर जाकर उससे चारो तरफ ढूंढ और सफ़ेद प्रकाश क सिवा कुछ नहीं दिख रहा था .......वह उस प्रकाश में बस आएगी बढ़ता जा रहा था ......

यहाँ पटल लोक में कस को अपने गुप्त चारो से पता चला क रक्षक क सभी रूप जो ताल्लुक से लेकर रसातल में थे वह सभी अचानक अदृश्य हो गए है .....

इससे कस को अंदाजा हो गया क अभी अपनी शक्तियों को प्राप्त करने क बहुत निकट है ...उससे कुछ करना होगा ....जिससे वह अभी को अपने लक्स्य से रोक सके ........

तब उसने दुर्मुखासुर को बुलावा भेजा .......

डॉ - प्रणाम पिताश्री ....क्या आज्ञा है ....

कस - पुत्र तुम जानना चाहते थे न क तुम्हरे ...भाई ...Raktaksha...aur मारकेश कहा है ......

डॉ - हां पिताश्री ...परन्तु आपने तोह कहा था क उन्हें आपने hi कही भेजा है .......

कस - तोह में किस मुख से तुम्हे कहता क में अपने पुत्रो की रक्षा करने में असमर्थ रहा .

डॉ - आपके कहने का तात्पर्य क्या है पिता श्री...

कस - पुत्र ...वह दोनों अब नहीं रहे ...रक्षक क साथ सांगजारश करते हुए ..वीरगति को प्राप्त हो गए .......

दुर्मुख - आपने ने मुज़हे पहले क्यों नहीं बताया ....

कस - क्यों क अब में तुम्हे नहीं खोना कहता था ....

डॉ - पिताश्री ......खोया गए तोह अब रक्षक अपने जीवन को ....उसके पूरे वश का नाश ..होगा .....

रक्षक बचा ले अपने आपको बचा सकता है तोह .....आरहा हु में तेरा काल........

डॉ की बात सुनकर कस क चेहरे पर एक मुस्कराहट आगयी ........

कस - ध्यान रहे पुत्र तुम अपने साथ हमारे असुर वीरो को ले जाओ ...क्युकी वह अकेला नहीं होगा .और इस समय उसकी शक्तिया भी काफी बढ़ गयी है ......

डॉ - पिताश्री उसके लिए तोह अब में अकेला hi काफी हु ........

कस मुज़हे पता है पुत्र ...परन्तु युद्ध अकेले नहीं लड़ा जाता इस तरह आवेग में कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं है .....

कस क जोर देने पर डॉ अपने साथ चुने हुए बलशाली असुरो को लेकर अभी क घर की तरफ निकल पड़ता है .....

यहाँ जनलोक में एक सभा बैठी हुई थी ......उस सभा की अध्यक्षता ...एक वयोवृद्ध ...परन्तु दिव्या तेज़ से भर पुर ..सफ़ेद लम्बी दादी और ...सफेद baal....uss लोक का राजगुरु सत्यानंद जी कर रहे थे.....

सत्यानंद - अब उन्हें वापस लाने का समय आगया है ....isse..isse पहले क कोई क्षति पहुंचे.

यहाँ भी अब वह जाग गया है ...यदि वह सम्पूर्ण रूप से सक्रिय हो गया तोह वह नियंत्रण क बहार हो जाएगा ......

और यदि ऐसा हुआ तोह इस श्रिस्ति का संतुलन hi बिगड़ जाएगा ......उससे अब वह hi रोक सकते है ....पहले उनकी शक्ति यहाँ आएगी .....उसके बाद वह अपनी उस शक्ति को प्राप्त करने यहाँ आजायेंगे....

सभा साद - परन्तु राजगुरु क्या हमे उन लोगो रक्षा नहीं करनी चाहिए .....जिन्होंने ने अब तक उन्हें संभाला है .....

सत्यानंदा - यह सब विधि लिखित है हम उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते .....

उनकी नियति hi ऐसी है

.....

इसी घटना क कारण हमारे महाराज अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे .....

और सभा समाप्त हुई ....

यहाँ पृथ्वी लोक में डॉ अभी को खोजता हुआ ...उसके घर तक पहुँच गया था .......

यह घर सिटी क आउटर एरिया में था .....डॉ जब वह पहुंचा तोह उससे बहुत अध्कि मात्रा में ऊर्जा महसूस हुई ......वह रिंकू... गोलू .ाद्दु ....नैना ...ऋतू ...रिम्पी इन् सभी ऊर्जा को महसूस करके उससे ऐसा लगा क सब ऊर्जा अभी की hi है .....उससे अभी क यहाँ न होने का अंदाजा hi नहीं था....

रिंकू इस समय अभी क रूप में लॉन में टहल रहा था.......

डॉ ने जब अभी को ऐसे लॉन में आराम से घूमते हुए देखा .....तोह और ज्यादा क्रोध भध गया ....और अपनी ऊर्जा का वार उसपर कर दिया ........

वह ऊर्जा अभी का रूप धरे हुए रिंकू तक पहुँचती ...उसके पहले hi लॉन क एक कोने से एक लाल रंग को ऊर्जा की बीम ुस्वार पर लगी जिससे डॉ का वह वार खली जो गया.....

यह था गोलू अदृश्य रूप में घर की सुरक्षा में लगा हुआ था ....वह दोनों वार आपस में टकराने से एक जोरदार आवाज हुई ....

रिंकू अब सतर्क हो चूका था .....तब उसने सामने देखा तोह करीब 100 महाबली ादुर योद्धाओ क साथ वह डॉ खड़ा है ....

बहार हुए धमाके की आवाज से घर क भीतर सभी सतर्क हो गए....

यहाँ डॉ अपना वार असफल होते हुए देखकर और क्रोध में आया ......अब वह तलवार लेकर बड़ी तेज़ी से रिंकू पर लपका .......

रिंकू ने भी अपनी तलवार से उसके वार को रोका ...लेकिन डॉ का वार इतना प्रचंड था क रिंकू की तलवार टूट गयी ......वह तोह रिंकू बड़ी फुर्ती से डॉ क पीछे आगया और एक जोरदार किक उसके पिछवाड़े पर मार दी ...नहीं तोह रिंकू का काम ख़तम था .....रिंकू की किक से वह आगे की और गिरते गिरते बचा .....

रिंकू क प्रहार ने उसस्के क्रोध को और बड़ा दिया .....अब वह तेज़ी से उसपर वार कर रहा था .....और रिंकू भी अपनी स्पीड से उससे बच रहा था .....

यहाँ डॉ क असुर घर की और आगे बड़े ....तोह गोलू जो अदृस्य रूप में था ......उसने भी अपने 8 दानव अपने भीतर से प्रगट किये ....यह सिद्धि गक की ऊर्जा से उससे प्राप्त हो गयी........

गोलू क दानव उन असुरो से भीड़ गए ....वह असुर भी काम बलवान नहीं थे ....वह सभी महा योद्धा थे ....और संख्या में भी अधिक थे ....

गोलू अपनी ऊर्जा क गोले से लगातार उनपर वार कर रहा था ......इतने देर में रवस ...नैना ...और ऋतू भी बहार आगये ........उन्होंने जब घर क बहार हो रहर युद्ध को देखा तोह वह भी असुरो से मुकाबला करने आगे बड़े ......

नैना ...ने अपनी सृजन ऊर्जा को विपरीत कर क विनाश ऊर्जा में बदल दिया .......

और ऋतू भी अपनी समृद्धि ऊर्जा को विपरीत करके उनसे लड़ने लगी ....

रवस क पास कोई पावर नहीं थी लेकिन उनमें ताकत बहुत थी .....और हर तरह की फाइटिंग स्किल्स भी जानते थे......

दो असुरो ने रवस को घेरा ....तोह उन्होंने बिजली की सी फुर्ती से ..जोर जोरदार किक असुर क हाथ में मारी जिससे उसकी तलवार हाथ से निकल गयी ......रवस ने ज़हत से तलवार को पकड़ कर दूसरे की गार्डन उदा दी ....

तब तक पीछे से एक असुर ने उनपर हुम्ला किया ...रवस ...जम्प लगाकर एक साइड हो गए लेकिन तब तक उनके हाथ में कट लग चूका था ......

यहाँ रिंकू ने अब शक्ति त्रिशूल को अपने हाथ में प्रगट किया .......

और डॉ क हर वार को त्रिशूल पर रोका .....बिच भींच में जब भी मौका मिलता ...वह डॉ क पीछे जाकर एक जोरदार वार लार देता .....

उसके भीतर महाअस्त्र की ऊर्जा होने क कारण उसस्के घाव तुरंत hi भर जाते थे ...

जब रिंकू ने देखा क त्रिशूल से लगे डॉ क घाव तुरंत भर जा रहे है ....तोह उसने त्रिशूल को वापस रख लिया .....

अब रिंकू ने लॉन में इधर उधर देखा तोह उससे एक लोहे की रोड मिलगई ......

रिंकू ऐसा दिखने लगा क जैसे वह बहुत थक गया है ...

डॉ ,- बस निकल गया सारा बल मैंने तोह सुना था ...क तुम्हें बहुत ताकत है .....

डॉ आगे बड़ा रिंकू पर वार करने ....तभी रिंकू ने बड़ी फुर्ती से रोड का वार डॉ क हाथो पर किया जिससे एक बार तोह डॉ की हलकी सी चीख निकल gayi...aur उसके हाथो से तलवार छूट गयी...

फिर रिंकू बड़ी ने बड़ी तेज़ी से उसके पिछवाड़े पर रोड से जोरदार वार किया .......

जिससे वह बस अपना पिछवाड़ा सहलाते रह गया ....

यहाँ ऋतू और नैना असुरो पर कहर बनकर टूट रहे थे....

इससे करीब 2 आधे असुर समाप्त हो गए ...असुरो ने भी उनका तोड़ निकल लिया था

उन्होंने ऋतू और नैना क वार को अपनी ढल पर रोकते हुए ...उनकी तरफ बढ़ने लगे ......

तोह गोलू ने अपनी ऊर्जा क प्रहार से उन्हें रोक दिया .....

नैना ने अपनी ऊर्जा से से हंटर सा बनाया और उससे उन् असुरो को रोकने की

कोशिश करने लगी और हंटर ....से निकल रही विद्युत् से उन्हें रोकरहि थी .....

बहार चल रहे शोर को सुनकर रिम्पी भी बहार आने को हुई तोह उसी समय शिवली उसके आगे आगयी .......

रिम्पी - हटो दी मुज़हे बहार जाना है ....में इस तरह नहीं बैठ सकती..

शिवली - रिम्पी तुम ऐसे नहीं जा सकती .

तुम्हे अपना और अपनी कोख में पल रही संतान की रक्षा क बारे में पहले सोचना होगा ...

रिम्पी - िस्तरः सबको खतरे में छोड़कर जाना नहीं चाहती थी ......तोह वह रिम्पी को लेकर टेलिपोर्ट होकर ...शल्लू क पास ताल्लुक में पहुंची और रिम्पी को वही छोड़कर ...

वापस आगयी .

यहाँ तलवार हाथ से छूटने क बाद रिंकू ने डॉ को तलवार उठाने का मौका भी नहीं दिया .....और लोहे की रोड से तेज़ी से उसपर हुम्ला जारी रखना

डॉ अब अपनी ऊर्जा क गोलों से लगातार रिंकू पर हुम्ला करने लगा...

बचते बचते हुए ...अब .रिंकू की हालत भी अब बहुत बुरी हो गयी थी ..

डॉ क वार को रोकते 2 कई वार उसस्के लगे ......डॉ ने अब रिंकू को समाप्त करने क liye...ek जलता हुआ शूल छोड़ा.....

तोह नैना ने उससे अपनी ऊर्जा से रोक दिया

रिंकू की ऐसी हालत देखकर नैना डॉ क सामने आगयी ....और अपनी ऊर्जा से लगातार वार करने लगी .

शिवली ..और गोलू ..उन् महाबली असुरो से लड़ रहे थे ......

तभी घायल हुए रिंकू की तरफ कुछ असुर बढे ..ाद्दु गल्लारी में खड़े होकर यह सब देख रही थी ...वह अब तक रिंकू को hi अभी hi समाज रही थी ...

जब उसने अपने भाई को घायल देखा ..और असुरो को उसके तरफ बढ़ते देखा ...तोह वह अपने आपको नहीं रोक पायी ....और सीधा उनके सामने आगयी ...

अब ाद्दु की प्राणशक्ति की ऊर्जा उन् असुरो से उनकी प्राणशक्ति सोखने लगी जिससे दुर्मुख क असुर तेज़ी से समाप्त होने लगे लगी ....असुरो क बिच हाहाकार मच गया....

ाद्दु ने रिंकू को अपनी प्राणशक्ति से हील किया .....

यहाँ ऋतू और गोलू भी कहर बनकर असुरो पर मौत बनकर बरस रही थी .....सरे असुर मारे जा चुके थे ..अब बचा था सिर्फ डॉ .....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला उपदाए कल ....
 
बहुत बहुत खुसी हुई भाई जानकार क आपको कहानी पसंद आरही है ...और आप कहानी क पात्र से रेलाते कर रहे है

:थैंक्स: :thanks::thanks:

आपका यही प्यार , कमैंट्स और शानदार रिव्यु hi हम वरिटेरस क लिए प्रेरणादायक होते है



ऐसे hi साथ बनाये रखे......

 
अपडेट - 126



अब तक आपने देखा डॉ क साथ घर पर संग्राम शुरू हो गया है ..

अब आगे ....

डॉ क साथ आये लगभग सभी असुर मारे जा चुके थे ......

रिंकू ...और ..रवस ...बहुत घायल हो चुके थे .....कुछ थे जो चुप चुप कर वार कर रहे थे.....

शिवली और गोलू उनका मुकाबला कर रहे थे.....

नैना डॉ का डटकर मुकाबला कर रही थी ......तभी डॉ का एक असुर जो छुपा हुआ था ..वह एक दम से आकर नैना पर वार करने लगा जिससे निआना का ध्यान बाँट गया ....और डॉ का एनर्जी बॉल नैना को लगा .....और नैना जमीन पर गिरगयी ....

नैना की ऐसी हालत देखका ाद्दु और ऋतू ने एक साथ अपनी ऊर्जा का प्रहार उस असुर पर किया ...जिससे ......वह वही ख़तम होगया ........

रवस जो खुद जख्मी था वह अपनी ताकत जूता कर नैना क पास आया और उससे सँभालने लगा ......

रिंकू ने देखा क डॉ अपना अगला वार .....करने वाला है ....तोह वह अपनी पूरी शक्ति जुटाकर ...डॉ क सामने डट गया ..

उसने फिर शक्ति त्रिशूल को प्रगट किया .......और उससे आकाश में लहराया ......शक्ति त्रिशूल में आकाशीय ऊर्जा सामने ने लगी अब रिंकू से शक्ति त्रिशूल की संपूर्ण ऊर्जा का वार डॉ पर किया ....जिसके प्रहार से डॉ की जोरदार चीख गुंजी और वह दूर जाकर गिरा ........

उसकी हालत बहुत ख़राब हो गयी थी ....ऐसा लग रहा था क वह अपनी आखरी सांस ले रहा हो .......यहाँ छुपे हुए असुरो को शिवली और गोलू समाप्त कर चुके थे .....

अधिक ऊर्जा खर्च होने क कारण और बहुत जहकँइ होने क कारण रिंकू बेहोश हो गया था .....सभी एक दूसरे को संभल चुके थे.......

रिंकू को बेहोश होते हुए देखकर ाद्दु ऋतू और शिवली उसके पास आयी .....

ाद्दु को छोड़कर सभी को पता था यह अभी नहीं रिंकू ...है.....

शिवली ने देखा क रिंकू अधिक ऊर्जा ख़तम होने क कारण अपने असली रूप में आरहा है .....रवस और नैना भी आचुके थे ......

डॉ दूर किसी लाश की तरह पड़ा हुआ था ......रवस और नैना ने शिवली को रिंकू को यहाँ से ले जाने को कहा .....ाद्दु भी ज़िद्द करने लगी लेकिन उस नैना ने बहुत समज़हाए .....बार बार वह उससे हील करने क लिए आगे बढ़ने लगी ....लेकि रवस इस समय को जानता था .....वह अपने साथ रिंकू और शिवली की जान को खतरे में नहीं डालना चाहता था......

रवस और नैना चाहते तोह शिवली क साथ बचकर भी निकल सकते थे ....शिवली ने भी उन्हें बहुत समज़हाए लेकिन वह नहो माने क्यों की महा गुरु ने उन्हें यही बताया था ...क यह बलिदान बहुत आवश्यक है....

जैसे करना क अचूक अस्त्र से अर्जुन को बचने क लिए ...भीम पुत्र घटोत्कच को बलिदान देना पड़ा...

शिवली को रवस ने अभी की कसम देकर जाने क लिए विवश कर दिया था....

शिवली रिंकू को लेकर वह से चली गयी .....गोलू वह पड़ी असुरो की लाशो को ठिकाने लगाने में लग गया....

तभी रवस ने एक प्रचड़ शक्ति अपनी और आते हुए देखि ..........कोई कुछ समाज पते क जाता यह सब खड़े थे .....वह यह शक्ति आकर गिरी और बड़ी जोर का धमाका हुआ .....यह धमाका इतना जोरदार था .....क आस पास की साड़ी जमीन हिल गयी ....और अब उस घर की जगह था तोह बस एक गहरा गदा.......

गोलू जो घर से कुछ दुरी पर था जो असुरो को लाशें ठिकाने में लगा था .....वह भी उस धमाके क वाइब्रेशन से दूर छिटककर गिर गया .....

यहाँ अभी सत्य लोक में बस ढूंढ और प्रकाश में भटक रहा था ......जिसका कोई अंत नज़र नहीं आरहा था .......

इस समय अभी केवल 5 कोशो में से आनंदमय कोष में था जो की आत्मा का आवरण होता है....

हवा में तैरते हुए ......उसने देखा क एक जगह तीन पोर्टल खुल गए .......और उन् तीन पोर्टल क आगे ....प्रकाश रूप में प्रगट हुए रवस ...नैना ...और ाद्दु ......

अभी बस अपने सामने यह दृस्य देख रहा था ......आत्मा रूप और सत्य लोक में होने क कारण ...अब उसमें न तोह दुःख था और न hi सुख था तोह बस एक आनंद ....इस समय वह सभी प्रकार की भावनाओ से परे था ....

बस एक द्रष्टा क रूप में सामने घटित होने वाली घटना लो देख रहा था...

तीनो पोर्टल से एक ..ek...prakash पुंज ...निकल कर आकाश में स्थित हो गए ......

तभी वह उस प्रकाश पुंज से आवाज गुंजी ....हम तुम्हरे त्याग ....bhakti....Samarpan और जनकल्याण से बहुत प्रसन्ना हुए .....

अभी तुम्हारा और समय पृथ्वी पर बाकी है ........तुम्हे अभी बहुत से कार्य करने है ...तुम्हारा यह बलिदान ....श्रिस्ति क लिए आवश्यक था .......हम तुम्हे वरदान देते है क तुम्हारा ...नष्ट हुआ शरीर तजे पिणः प्राप्त होगा......

और उन् तीन प्रकाश पुंज से किरणे निकल कर ...रवस ...निआना ...और ाद्दु ..की आत्माओ पर padi......jisse वह एक प्रकाश क रूप में अभी की आत्मा क साथ एक होगयी ......

इससे अभी का आनंदमय कोष का शरीर और प्रकाशित हो गया......

आउट वह तीन प्रकाश पुंज और तीनो पोर्टल वह से अदृश्य हो गए .......

उनके जाते hi अब अभी क सामने सत्य लोक का असली रूप आगया .......

सत्य लोक क मध्य भाग में एक विशाल सभा बानी हुई थी ....जिसका सञ्चालन स्वयं ब्रह्मा जी करते है .......

यहाँ चारो तरफ सुन्दर बाग़ बगीचों से पारी पूर्ण एक श्वेत नगरी थी ....जहा ...संसार से मुक्त हुई पुण्यआत्माये ....निवास करती थी ......

सत्य लोक क एक हिस्से में सनासर क सभी रहस्य छुपे हुए थे....

अभी को ऐसी लगा क उससे कोई ऊर्जा अपनी तरफ खिंच रही है .....और वह खींचता चला जा रहा है ....थोड़ी hi देर में वह ब्रह्मा सभा क मद्य में था ......

जहा एक ऊँचे आसान पर परमपिता ..ब्रह्मा जी विराजमान थे ......और सामने दोनों तरफ आसनो पर मुख्या देवता विराजमान थे ......

अभी ने ब्रह्मा जी को देखकर प्रणाम किया .......

ब्रह्मा जी - यशश्वी भाव पुत्र .......हमे बड़ी प्रसन्नता है क तुम अपने मार्ग पर बढ़ते हुए यहाँ तक पहुंचे ......अब तुम्हे अपनी अगली शक्ति और अंश प्राप्त करने क लिए ......इस लोक में अपने सत्य तक पहुंचना है .......

अभी - पितामह मैं आप त्रिदेवो क hi आशर्वाद से यहाँ तक पहुँच पाया हु ....आप सदैव इसीप्रकार अपने आशीर्वाद सदा बनाये रखे ....

.

ब्रह्मा जी - हमारा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है पुत्र ....

अभी ने फिर उनको प्रणाम किया ....अब ..अभी ने देखा क ...वह एक प्रकाश वन में है ....जहा भाटी भाटी क विरक्ष केवल अलग अलग रंग की उर्जाओ से बने है .......

और हर विरक्ष पर एक फूल है जो उसी वृक्ष की ऊर्जा क रंग का था ......

अभी उन अध्भुत वृक्षों को देख रहा था ........

क उससे आवाज सुनाई दी ...तुम्हारे पास केवल तीन अवसर है ....अपने सत्य क पुष्प तक पहुँचने का .......

एक फर्श क निकट गया तोह उससे कुछ महसूस नहीं हुआ ...ऐसी hi प्रायक पुष्प क पास जाकर वह देखता और सुंगता था .....

लेकिन एक पुष्प में उससे अपना बचपन दिखा .....तोह उसने उस पुष्प की और हाथ बढ़ाया .....लेकिन वह अदृश्य हो गया ......

अब बचे थे दो अवसर .......अभी ...अब ऐसे hi अनेक पुष्पों तक जाता इन् सब में उससे अपने जीवन की कई घटनाये दिखी .......

इन् सब में से उसके सत्य को दर्शाती हुई कौसो घटना है उससे समाज नहीं ारः था ........

उस्सने सभी घणो पर ध्यान दिया ...परन्तु एक घटना ऐसी थी जो अभी क द्वारा हुई थी लेकिन उससे इस्सकी कुछ भी याद नहीं थी .....वह थी वाइटल लोक की घटना ...जब प्रेत राज ने अपने परतदंद से अभी पर प्रहार किया था.......

और उसके बाद अभी अपने संपूर्ण रूप में जागृत होकर .....प्रेत राज का वध करने वाला था ..

जब अभी को यह घटना एक पुष्प में दिखी तोह ....उससे याद नहीं आया क उस्सने ऐसा रूप भी धरा tha....parantu .....उसके हाथ अपने आप उस पुष्प की और बढे .....

जैसे hi अभी ने उस पुष्प को छुआ ...वह एक दिव्या कन्या बनकर प्रगट हुई ........जिसका कोई नाम नहीं था ...लेकि सत्य लोक में प्रगट होने क कारण हम उससे सत्य कहेंगे.....

अभी ने जब उस कन्या को देखा जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी .....

अभी - कुआँ हो तुम और इस तरह पुष्प से कैसे प्रगट हुई .....

सत्य - मैं आपकी सत्य की शक्ति हु ......इसी कारण में आपकी पत्नी हु .....

जब महागुरु ने आपकी शक्तियों का विभाजन किया तोह आपकी सत्य की शक्ति इस लोक में छिपा दी .....

तब से में आपकी प्रतीक्षा कर रही थी ....

सत्य लोक एक दिव्या लोक है जो जनम और मृत्यु से पारे है ....इसिलए यहाँ कोई मानवीय भावनाये ...काम ...vasna...krodh ...lobh...moh....aadi...nahi है ...केवल सत्य का प्रकाश है.......

इसिलए हमारा मिलान केवल दो उर्जाओ का मिलान होगा ....यह मिलान आपकी बाकी पत्नियों की तरह नहीं होगा ... आपको एक आलिंगन करना होगा .....

और सत्य ने अपनी बाहें फैला दी अभी ने भी उसका आलिंगन किया .......जिस्सेक ऊर्जा ..प्रगट हुई और अभी में समां गयी ....सत्य भी अभी में प्रवेश कर गयी .......

और अभी को प्राप्त होगयी सत्य की शक्ति ...और ...सत्य लोक की ऊर्जा क अंश से बना हुआ एक और roop......jiske hi बल पर अभी ेबिल्स क फैलाये पाप क अंधकार को रोक पायेगा ....कैसे यह आगे पता चलेगा...

सत्य - अब में हंसः आपके भीतर निवास करुँगी जब भी आपको मेरी आवश्यकता होगी में आपके सामने प्रगट हो जाउंगी ....

सत्य क भीतर प्रवेश करने पर अभी को अपने वास्तविक रूप का ज्ञान हो गया......

उसका अपना लोक कौन सा है ...

14 पत्नियों का राशस्य क्या है ....

शिवली ..और विभक्त ..सब कुछ कैसे जानती है.....

और ऋतू क प्रति उसका आकर्षण क्यों है.....

रवस ..नैना ..और ाड़फू ..उसके भीतर है ...toh..Ritu कहा है...

और उसका वास्तविक रूप क्या है ......

त्रिदेवो ने रवस ..नैना ...aur..Addu ..को ...जीवन दान दिया है ...तोह ...कैसे वह अपने शरीर को पुनः प्राप्त करेंगे....

इन् सभी प्रश्नो क उत्तर मिलेंगे अगले अपडेट में .....

अभी क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट जल्द hi .....
 
बहुत बहुत धन्यवाद भाई आपके प्यार और फैंटास्टिक ..और शानदार रिव्यु क लिए



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ऐसे hi साथ बनाये रखे....


लेटेस्ट अपडेट 126 पोस्टेड....
 
बहुत बहुत धन्यवाद भाई आपके प्यार और सपोर्ट क लिए



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लेटेस्ट अपडेट 126 पोस्टेड....
 
अपडेट - 127



अब तक आपने देखा अभी सत्य लोक में अपने सत्य से अवगत हो गया है .....

अब आगी .........

जिस समय पराशक्ति द्वारा त्रिदेवो का निर्माण हुआ ...तब उसी पराशक्ति की ऊर्जा और ब्रह्माण्ड में फैले हुए शुन्य क अंधकार से .....जन्म युअ इब्लीस ..का.......

पराशक्ति ने त्रिदेवो में ब्रह्मा जी को निर्माण शक्ति क साथ अपने hi अंश से सरवती जी क रूप में प्रदान किया ....

भगवन विष्णु जी को समृद्धि अर्थात पालन शक्ति और अपना एक अंश से लक्ष्मी जी का रूप में प्रदान किया

और महादेव को संघार शक्ति क साथ ..महाकाली क रूप में अपना अंश प्रदान किया ...

जब ब्रह्मा जी द्वारा 14 लोको का निर्माण हुआ ........तोह उस समय सब लोको में केवल सत्व गन की अधिकता थी......

इन 14 लोको में से जाना लोक में ब्रह्मा जी ने सभी लोको में संतुलन बनाये रखने क लिए .....14 लोको क प्रतिरूप 14 मनिया स्थापित की .......जब भी किसी लोक का पाप और पुण्य ...अच्छे ..और बुराई का संतुलन बिगड़ जाता ....तोह उससे सम्बंधित मणि अपना रंग और रूप बदलने लगती...

जिससे ...इस लोक का ...सञ्चालन करने क लिए जिससे त्रिदेवो ने नियुक्त किया हो ....... उस मणि क द्वारा उससे सम्बंधित लोक में होने वाले सभी घटना क्रम पर नज़र बनाये रखे और उस लोक में संतुलन बनाये.....

उन् मानियो की ऊर्जा से दो विशालकाय ड्रैगन उत्पन्न हुए ....जो उन् मानियो की रक्षा क लिए नियुक्त किये गए .....

इन् में एक सफ़ेद ड्रैगन था ...जो ..पिरथवी से ऊपर क साथ लोको की ऊर्जा से उत्पन हुआ था ......और उन 7 लोको की रक्षा क लिए नियुक्त किया गे .

दूसरा था काला ड्रैगन जो पृथ्वी से निचे क 7 लोको की ऊर्जा से प्रगट हुआ था और उनसे सम्बंधित उन 7 मानियो की रक्षा क लिए नियुक्त किया गया था ........

इन सब मानियो और ड्रैगन की देख्भाल क लिए ब्रह्मा जी ने अपने मानस पुत्र सत्यानंद जी को जनलोक में नियुक्त किया ......

इन् 14 लोको में से इब्लीस क लिए कोई स्थान नहीं था .......जब उसने जनलोक की शक्ति देखि तोह उसने इन 14 लोको पर राज करने क उद्देश्य से ....उस लोक में गुप्त रूप से प्रवेश किया .......

और 14 मान्यो तक पहुँच गया ....

इब्लीस का कोई शरीर नहीं था ....वह एक काली शक्ति क रूप में जनलोक में फैलने लगा ........

उसने सफ़ेद ड्रैगन को अपने वश में करने का प्रयत्न किया ....लेकिन उसमें निहित सत्य की ऊर्जा क कारण वह ऐसा नहीं कर सका .....

तब उसने काले ड्रैगन को अपने वश में किया .......

इब्लीस क ऐसे करते hi ....पृथ्वी से लेकर पटल लोक तक बुराई और पाप फैलने लगा ........

अच्छाई और पूजा यज्ञ समाप्त होने लगे जिससे देवता शक्तिहीन होने लगे ........

तब सभी देवता मिलकर ...त्रिदेवो की शरण में गए ....और उनसे प्रार्थना की ........

त्रिदेवो ने देवताओ की समस्या को दूर करने क लिए और सभी लोको में संतुलन बनाये रखने क लिए .....अपने अंश से अभिनव को उत्पन्न किया ...और जनम हुआ ..सृष्टि क रक्षक का ......जिस प्रकार त्रिदेवो की शक्तिया उनकी पत्नियों क रूप में उनके संग रहती hai.......ussi प्रकार त्रिदेवियों क अंश से प्रगट हुई रक्षक की तीन शक्तिया ....

सरस्वती जी क अंश से विभक्त

लख्मी जी क अंश से ऋतुजा ( ऋतू)

और महाकाली क अंश से शिवली

अभिनव और उसकी शक्तियों को जनलोक का भर सौंपा गया ...और वह का राजा नियुक्त किया गया ...

अभी अपनी शक्तियों क साथ जनलोक का अधिपति बना ...तब सबसे पहले उसने अपनी सात्विक शक्ति क द्वारा ....इब्लीस की समस्त ऊर्जा को कैद कर लिया ......

तब पराशक्ति कहने पर अभी ने इब्लीस को मुक्त कर दिया ......माँ पराशक्ति ने बताया क संसार में अच्छाई का महत्व तभी समझ आता है जब बुराई भी हो .....

यह संसार तीनो गुणों से बना है ...इब्लीस केवल तमोगुण और अँधेरे से बना है ......यदि उससे कैद कर लिए जाये या समाप्त कर दिया जाए ....तोह इस सृष्टि का संतुलन hi बिगड़ जाएगा ....इसीलिए ेबिल्स को कुछ सीमाओं में बंद दिया ......

इब्लीस की 6 शक्तिया थी ...काम .....क्रोध ..लोभ ...moh.....madh...matsar....

इन् 6 में से एक भी गन जिसमें होगा वह इब्लीस क प्रभाव में hoga......parantu जब भी इब्लीस अपनी सीमाओं को लांघकर ....सात्विक ऊर्जा का दमन करना चाहेगा और अच्छे लोगो को भी अपने प्रभाव में लाने लगेगा तब ....उससे रोकने का दायित्वा रक्षक को सौंपा गया .....

इब्लीस निचे क 7 लोको में निरंतर अपना प्रभाव बढ़ाने क लिए किसी न किसी को अपनी शक्तियों द्वारा प्रगट करता tha......Jana लोक से निकले जाने क बाद भी उसका कुछ अंश लाले ड्रैगन में समां गया था ...जिसके कारण उससे इन् सात लोको में बार बार पाप फैलाने में सफल होता था ..

इन् 14 मानियो क द्वारा और अभी और उसकी तीनो शक्तियों को 14 लोक में होने वाली बहुत भविष्य और वर्त्तमान की घटना का पता चल जाता था ....जसिससे वह सृष्टि में संतुलन बनाये रखते थे....

अनेक युगो में रक्षक और इब्लीस की ऊर्जा में सृष्टि में संतुलन बनाने क लिए युद्ध हुआ ......

जब अभी को काले ड्रैगन में स्थित इब्लीस क अंश क बारे में पता चला ...तोह उसने अपनी शक्तियों से उससे सुप्त कर दिया ......

इस कलियुग में जब ेबिल्स की ऊर्जा से कस का जन्म हुआ और वह अपना प्रभाव फैलाने लगा ....तोह रक्षक को फिर अपनी शक्तियों क साथ जन्म लेना पड़ा ......

जब अभिनव ने अपनी संपूर्ण ऊर्जा क साथ नैना क गर्भ में प्रवेश किया ....तब महागुरु ने उसकी शकियो को विभक्त करके .....14 लोको में भेज दिया था ....

जिसके अभी क तीन शक्तियों क 14 भाग हुए .........परन्तु उन् शक्तियों क तीन मूल रूप तीन जगह कन्या रूप में प्रगट हुए ......शिवली ....यक्ष लोक में..

विभक्त ....तपाओ लोक में और ऋतुजा जनलोक में .....

शिवली .. विभक्त और ऋतू तीनो hi प्रकाश पुंज क रूप में प्रगट हुई थी जिस कारण उन्हें अपनी शक्तियों और अपने वास्तविक रूप का पूर्ण ज्ञान था ......

समृद्धि शक्ति की ऊर्जा को धारण करने का सामर्थ्य केवल ऋतू में था .....और उसके लिए उस्सकी 5 वर्ष की ावषा में होना अवह्स्याक था ....

ऋतू का मानव रूप में अभी क साथ रहना आवश्यक था और मानव शरीर का मास्टिसिक ...5 वर्ष की अवस्था तक पूर्ण विक्सित होता है ....और समृद्धि शक्ति धारण करने क लिए विक्सित मस्तिष्क का होना जरुरी है .....

इसीलिए जनलोक में पहुंची अभी की ऊर्जा क अंश को .......5 वर्ष पहले का समय चक्र पार करके ...कन्या रूप में रवस क द्वार तक पहुँचाया गया......

रवस और नैना ने जब किसी बच्चे क रोने की आवाज सुनी ..तोह देखा एक कन्या कोई उसके द्वार पर छोड़ गया है ......

नैना ने जब उस कन्या को गोद में उठाया ..तोह उसका रोना बंद हो gaya.......toh दोनों ने उससे भगवन का आशीर्वाद मानकर अपने कन्या क रूप में स्वीकार लिए ......

इस प्रकार अभी की शक्ति का अंश होते हुए भी ..ऋतू अभी क जन्म से5 वर्ष पहले hi राणा क पास पहुँच गयी थी .....लेकिन मानव शरीर क कारण अपनी पूर्व की स्मृतिया भूल गयी थी ...

अभी की तीन शसक्तिया hi अलग ..अलग रूपों में विभक्त होकर 14 लोको में पहुँच गयी थी ...

आइये देखते है अभी की कौनसी पत्नी किस मूल शक्ति का रूप है

विभक्त - रेनू , ..Shamli....Vibhakta ...और सत्य....

ऋतुजा - Ritu....Shalu...Rimpy

शिवली - शिवली , भद्रा, दक्ष , चैताली , मदालसा, सुलेखा , वैशाली..

इस प्रकार अभी की यह तीनो शक्तिया 14 रूप में विभक्त हुई ........

सत्य लोक में अभी को अपने वास्तविक रूप का ...अपनी 14 पत्नियों क रहस्य का ..और अपने लोक का पता चला ....अब उसके मैं में न कोई द्वन्द था और न hi कोई प्रश्न ......

सत्य लोक में सत्य की शक्ति प्राप्त कटे hi अभी गंधमादन पर्वत की उस गुफा में पहुँच चूका था जहा उसका शरीर रखा हुआ था ......

सत्य लोक में अभी ने 1 दिन hi बिताया था जो पृथ्वी क 1 महीने क बराबर था .......

यहाँ आते hi अभी अपने शरीर में प्रवेश कर गया था .......

रवस ..Naina...aur ाद्दु .....की आत्माये भी उसके भीतर hi थी ....जिसके कारण अब उससे नैना में स्थित निर्माण शक्ति और ाद्दु में स्थित प्राणशक्ति प्राप्त हो गयी थी ......

पृथ्वी और बक्की लोक में इस 1 महीने में बहुत कुछ बदल गया था ........

डॉ जब रवस क घर तबाही मचा कर लौटा तोह कस ने उस्का बड़ा भव्य स्वागत किया ......

कस को लगा क रक्षक और उसका परिवार ...दुर्मुख क अमोघ शक्ति क वार से समाप्त हो गया है .....लेकिन शंका क समाधान क लिए उसने अपने कुछ गुप्तचर पृथ्वी पर लगा दिए ......

यहाँ चारो तरफ रवस क परिवार क धमाके में मौत की खबर फैल चुकी थी .....उनका सारा परिवार दुखी था .......

गाओं में भी राणा महल में मातम का hi माहौल था ......

रवस और नैना क सभी रिश्तेदार ... इस समाचार से बहुत दुखी थे ........अभी क चाचा विनय सिंह और दोनों बुआ वापस इंडिया में आगये थे ...और राणा महल में hi रह रहे थे ......

अभी क बूढ़े दादा ..दादी ...इस अचानक आये दुःख क कारण सदमें में थे ......

पारी और सोना को तोह विश्वास hi नहीं हो रहा था क अब उनके अभी भैया नहीं आएंगे ....

रिम्पी क डैड कज भी यही समाज रहे थे क उनकी बेटी नहीं रही ......

कस क गुप्तचरों से मिली सुचना से अब कस को विश्वास हो गया था क रक्षक नहीं रहा ......

अब वह अपने लक्स्य को प्राप्त कर सकता है ....

कस को इब्लीस क द्वारा काले ड्रैगन क बारे में पता चला ......तोह उसने उस ड्रैगन की ऊर्जा को जगाने क लिए उसी पुराने रूपनगर क नदी किनारे ड्रैगन वाले मंदिर जो असुरो डरा hi स्थापित था ......और पृथ्वी लोक को जनलोक से जोड़ता था... में दुर्मुखासुर से द्वारा अनुष्ठान कराया जिसके कारण वह काला ड्रैगन जाग गया था.......

अब वह रोज इस गाओं क 5 लोगो की बलि लेने लगा .....उस ड्रैगन क जागने क कारण ...पृथ्वी से लेका पटल लोक तक बुराई अपराध ....पाप बढ़ने लगा ....लोगो में पाप करने की भावनाये प्रबल होने लगी .....

अभी क पत्निया बड़ी कठिनाई से इन् लोको को संभल ने में लगी हुई थी ....लेकिन कोई बाहरी शत्रु हो तोह कोई उसका सामना भी कर सकता है ....लेकिन यहाँ लोगो की hi प्रवृति असुरो जैसी हो रही थी तोह वह भी उहने कैसे रोकती .....

बस अभी क आने तक अपनी और अपने साथयों की सुरक्षा में लगी हुई थी ......

रिंकू और गोलू ....रक्षक सेना क साथ मिलकर इन् लोको की बाहरी रक्षा का दायित्व संभल रहे थे.....

अभी को गए हुए ...अब 1 महीना होने को आया ..कस की अब 13 बलिया हो चुकी थी ...बस एक और बाकी थी ....जो उससे अपनी सबसे प्रिय जिससे वह बिना किसी स्वार्थ क प्रेम करता हो उसकी बलि देनी थी .

और उससे इस बात का इशारा भी मिल चूका था क ाहृ बलि उससे उसकी प्यारी बेटी मदालसा की देनी gai.....aur इसी कारण उसके मैं में द्वन्द चल रहा था....

इतने दूर आकर अब वह पीछे नहीं हैट सकता tha....isiliye उसने दृढ निश्चय कर लिया था....

यहाँ अभी ने रेनू और विभक्त को रसातल में शिवली और सुलेखा क पास में भेज दिया और खुद चल दिया आरएसएस क गाओं में स्थित राणा महल में अपने दादा जी क रूम में पहुँच ...

अभी क लिए इतना hi ...


अगला अपडेट कल....
 
@ शाहरुख़ भाई अपडेट 126 में ..जब तीनो क आत्माए सत्य लोक गयी थी ...तब त्रिदेवो ने उन्हें जीवनदान का वरदान दिया था....

इसिलए रवस ...नैना ...और ..Addu...ko उनका शरीर और जीवन दोनों वापस प्राप्त हो जाएगा ...यह कैसे और कब होगा आपको आज क अपडेट में देखने को मिलेगा.....



साथ बनाये रखे ....थैंक्स....
 
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