Update -7

उभरे हुए कंधो के बिच मे से निकलि हुईं मजबूत गर्दन, ढाल जैसी चौड़ी छाती, सीधा कसा हुवा पेट और कमर, तराशी हुईं मसल से भरपूर मोटी जाँघे और उनके बिच से निकल क़र डोलता हुवा जय का लंड उसपर लगी हुई काली चमड़ी को पीछे छोड़ क़र निकला हुवा लंड का लाल टोपा ये सब जय के personality को चार चाँद लगा देते थे, बिना कपडे जय उर्वशी के सामने Mexican सांड जैसा भीषण दिख रहा था जो उर्वशी पर चढ़ने के लिए तैयार खड़ा था,

उर्वशी भी कुछ कम नहीं थी, मटके जैसे गोल मटोल नितंब और मांस चरबि से भरे हुए नितंब के बिच मे उर्वशी की गुलाबी कली, ऊपर संतरे जैसे गोल, गोरे, उभरे हुए सूड़ोंल उन्नत स्तन, आकर्षक चेहरा, सीधी नाक, गुलाब जैसे होंठ, गोरा चिट्टा रंग, तनी हुईं त्वचा, और पतली कमर से सजी हुईं उर्वशी की जवानी किसी को भी कायल क़र देती थी. मदमस्त हिरणी जैसी दिखने वाली उर्वशी किसी परी से कम नहीं थी.
जय : भाभी कम से कम आप चूस तो सकते ही हो... जय ने लंड के तरफ इशारा करते हुए कहा.
उर्वशी : अब तुम मानोगे नहीं क्या जय...! उर्वशी नखरे करते हुए बोलि.
जय : भाभी आप को देख क़र तो कोई मानेगा भला...
उर्वशी : अच्छा...बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे...
दोनों की गर्म सांसे एक दूसरे को स्पर्श करती हुईं उनके जवानी की रजामंदी जाहिर क़र रही थी.

उर्वशी को प्यार से सहलाता हुवा जय उर्वशी को उसके निचे लेने के लिए तैयार क़र रहा था, हूक खोल क़र ब्लाउज और bra के चंगुल मे अटके हुए उर्वशी के दूध को बाहर निकाल क़र जय ने आझाद क़र दिया था.

अब उंगलियां उसने कमर पर फेरी और उर्वशी की साड़ी ऊपर सरका क़र उर्वशी की चिकनी कमर पर हाथ फेर रहा था, निचे घुटनो पर बैठ क़र जय ने उर्वशी की साड़ी उठा क़र उर्वशी की नाभि का चुम्बन आरम्भ क़र दिया था उर्वशी भी जय की जीभ से नाभि मे feel होती हुईं गुदगुदी का आनंद ले क़र मस्त होने लगी थी. खुले हुए ब्लाउज और bra के पर्दों को उर्वशी के दुध से दूर करते हुए जय के पंजे उर्वशी के दूध पकड़ क़र सहला रहे थे, उर्वशी ने भी उसकी साड़ी पेटीकोट ऊपर उठा क़र जय के जीभ को समर्थन दे दिया था, जय भी उर्वशी की कमर चुम रहा था उसकी खुर्दरी जबान कमर से नाभि तक और नाभि से योनि तक जाना चाहती थी, पर उर्वशी इसके लिए राजी नहीं दिख रही थी. जय बार बार उंगलिओ से उर्वशी की panty खोल क़र उसकी योनि दर्शन करना चाहता पर उसे वही रोक देती थी. गांड के गोलो को सहलाते हुए जय ने उर्वशी की panty को गांड के गोलो से सरका क़र gap मे फसा दिया, अब चिकनी चिकनी गांड को सहला क़र जय ने उर्वशी के निचे के सारे भाग चूमे, जय ने अब उर्वशी को चुम चुम क़र मदहोस क़र दिया था,,,,

मदहोसी के हालत मे उर्वशी हूँ... उँ... आ करती हुईं खुद के ही ओठों पर दाट गाड़ रही थी...
जय ने उर्वशी के ये मदहोस हालत को भाप लिया अब जय को अच्छा अवसर मिल गया था, इसने धीरे धीरे उर्वशी की panty निचे सरका क़र पैरो तक निकाल दी, जय इस पल का भरपूर लाभ लेना चाह रहा था उसने उर्वशी को बाहो मे उठा क़र बेड पर लिटा दिया, अब उर्वशी ने भी मौन रजामंदी दे दी थी, जय ने उर्वशी की साड़ी कमर तक फिर से सरका क़र उर्वशी की गोरी चरबिदार जांघो को चुमने मसलने लगा.... उर्वशी भी मदहोसी मे पड़ी हुईं थी, ब्लाउज के कपड़ो से मुक्त हो चुके उर्वशी के गोरे गोरे दूध किसी कमल के फूल जैसे खिल उठे थे, दूध के ऊपर तने हुए ब्राउन निप्पल साफ बता रहे थे की उर्वशी कामातुर हो हो चुकी है, काम रोग की पीड़ा उर्वशी को बिन पानी के मछली जैसी तड़पा रही थी इसी तड़पन से उर्वशी कमर हिला हिला क़र काम की ज्वाला का इजहार क़र रही थी.....
उर्वशी को न तड़पाते हुए उर्वशी की योनि पर जय ने ओठ टिका दिए, उंगलिओ से योनि मुख(labia) खोल क़र जय ने उर्वशी के योनि के अंदर तक जीभ डाल क़र घूमाने लगा. आर्यन के मुसल से मसल क़र उर्वशी की योनि जख़्मी हो चुकी थी जिसे अब जय उसके थूक का मलहम लगा क़र इलाज क़र रहा था.
जय के जीभ प्यार भरे के पवित्र स्पर्श उर्वशी के योनि की जलन खतम हो हो रहा थी. जय के पवित्र ओठ उर्वशी के योनि के बाहरी ओठों(labia outer)से मिल क़र एक हो गए थे. उर्वशी की कमर, नाभि, जाँघो को चाटने चूमने से जय का थूक और लार से उर्वशी का निचला बदन गिला हो क़र चांदी जैसा चमकने लगा था. उर्वशी को अब बड़ा मजा आने लगा, उर्वशी भी अब कामज्वर से पीड़ित हो क़र तकिये को सीने से लगा क़र मसलने लगी.
उर्वशी के योनि ने जय का थूक और योनि रस एक दूसरे मे समाने लगें, जय के नाजुक प्यार भरे योनि चुम्बन से पाक साफ हो क़र उर्वशी की योनि थूक और योनि रस से खचाखच भर क़र झरने जैसी बहने लगी, अब न उसके योनि मे कोई जलन बची थी न आर्यन के मुसल के ठुकाई का कठोर अहसास, बस अब बचा था तो सिर्फ और सिर्फ ठंडि मस्तीभरी योनि चुम्बन से जन्मी जवानी की ऊर्जा जो अब जल्दी ही मुक्त होने वाली थी....


जय : भाभी... आप तो कह रही थी के आप के periods है, पर आप की योनि से तो फूल जैसी सुगंध महक रही है..
उर्वशी : उम्म्म... अच्छा वो मै आज तुमको जांचना चाहती थी के तुम सबर करते हो भी के नहीं... आह... उम्मम्म...
उर्वशी की जलन से मूरझाये हुए योनि को जय ने चुम चुम क़र खिलतीं हुईं कली बना दिया था, उर्वशी की उत्तेजना अब आसमान छूने लगी थी, दोनों हाथो से जय के बाल पकड़ क़र उर्वशी उसे उसके मुंह को योनि से दूर नहीं होने देना चाहती थी. जय भी उर्वशी के योनि की बगल वाली चमड़ी को खूब चाव से काट और चाट रहा था, जय के दांतो की नाजुक पकड़ उसके योनि के बाहरी आवरण(labia) पर गड़ क़र और ही मजा दे रही थी. जय उसके मुख मे उर्वशी की पूर्ण योनि समेटने की बार बार नाकाम कोशिश क़र रहा था. पूर्ण मुख खोल क़र भी जय के मुख मे उर्वशी के योनि का बस एक ही पल्ला समा सकता था, इस अजीबोगरीब टकराव से उर्वशी की योनि सुख प्राप्त क़र के relax हो क़र खुलने लगी जिस से उसके अंदर के दो गुलाबी पंखुड़ी जैसे परदे(inner labia) खुल क़र अंदर का लाल गुलाबी गाभा ऐसे दिखने लगा जैसे गुलाब का फूल खिला हुवा हो.

जय अब समझ गया के उर्वशी अब समागम के लिए पूर्ण तैयार है. जय ने अब उठ क़र उर्वशी की टांगे फैलाई और उस पर अपना औजार रखने की कोशिश की पर जय का औजार ढीले पड़ जाने के कारण लटक रहा था. उर्वशी को गरम करने के क्रियाकलाप मे जुटा हुआ जय के लंड का तनाव कम हो गया था, इस लिए उर्वशी की योनि खुली हो क़र भी वो अंदर प्रवेश नहीं क़र पा रहा था. जय उसके लटके हुए land की पतली हालत देख सहम सा गया, बड़ी आस और भरी नजरो से अब वो उर्वशी के चेहरे को देख रहा था, उर्वशी भी उसकी हालत समझ रही थी...
जय और उर्वशी का सम्बंध केवल शरीर से नहीं जुडा था, एक अलग सा जुड़ाव था जो दोनों के आत्मा को जोड़े रखता था, कई दिनों से एक दूसरे को समझ रहे जय और उर्वशी का पहला मिलन 6 महीने पहले एक रात मे हुवा था. तभ से अब तक ऊन दोनों के बिच मे कई बार सहज समागम हो चूका था, दोनों एक दूसरे के केवल शरीर के हर भाग नहीं तो एक दूसरे के मन को भी जानते भलीभाती थे, जय के नरम पड़ चुके लटके हुवा लंड से शर्मिंदा feel कर रहे जय को अपनि परेशानी इजहार करने की कोई जरुरत नहीं थी, उनकी नजरें उर्वशी के आँखो से मन तक पोहोच क़र सब हाल बया क़र गई थी. सम्भोग के लिए उतावला जय नरम पड़ चुके लंड के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा उर्वशी अब ये जान गई थी.

जय : भाबी... भाबी... मु लटकाते हुए जय ने बस दो बार आवाज लगाई और आगे कुछ नहीं बोला...
बिन कुछ बोले उर्वशी ने उठ क़र बेड के किनारे निचे टांगे क़र गद्दे पर बैठ गई, जय भी उर्वशी के बगल मे बेड के निचे टांगे डाल क़र बैठ गया, जय का लटकता हुवा land उर्वशी ने एक हाथ मे पकड़ लिया, और उसे बड़े प्यार से साहलाने लगी. उर्वशी के कोमल स्पर्श से जय के मुरझाये हुए लंड मे जान आने लगी, उर्वशी के बदन को बदन सटा क़र जय ने उर्वशी के कंधो को पकड़ क़र उसके कान को दोनों ओठों मे ले क़र छेद मे जीभ डाल क़र चूमने लगा जिस से उर्वशी को गुदगुदी और अजीब मिलन का अहसास होने लगा था.जय उर्वशी के कान मे अंदर तक जीभ डाल डाल क़र ऱपाऱप कान का को जीभ से चोद रहा था. तो दूसरे एक हाथ से उर्वशी का एक दूध पकड़ उस से खेल रहा था.


उर्वशी ने जय के लिंग को सहला सहला क़र फिर से उठ खड़ा होने पर मजबूर क़र दिया, उर्वशी ने अब निचे झुक क़र जय के लिंग पर उसके सुरीले लाल ओठ लगा दिए लिंग पर लिपटी चमड़ी को पीछे क़र क़र जय का लाल सूपड़ा बाहर निकाल क़र उसे लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी, जय अब उठ खड़ा होने लगा और उर्वशी भी उसका लंड मुंह से बाहर न निकलते हुए सरक क़र घुटनो के बल निचे बैठ गई. जय के सुपडे से अंडकोष तक ओठों से उर्वशी ने उसको चुम चूक क़र वज्र समान सख्त क़र दिया. उर्वशी के ओठों की नरमी पा क़र जय ला लिंग धन्यधन्य होने लगा जिस से वो और भी तन क़र उग्र हो गया था. अब जय का लिंग फिर से ऐसे खड़ा हुवा था जैसे wrestling ring के अंदर कोई wrestler छाती ताने खड़ा हो. जय का लंड अब पूर्ण तनाव मे आ गया जो सूज क़र लाल लाल गरम तपते लोहे जैसा दिख रहा था. लगभग 8-9 इंच का एक साइड से टेढ़ा लंड उर्वशी ने चूस चूस क़र थूक से चिकना क़र दिया था.

उर्वशी के बालो का जुडा बना क़र जय ने उसकी एक छोटी बना ली और पकड़ क़र उसका सऱ ऊपर निचे आगे पीछे क़र रहा था. उर्वशी के झाग भरे लार से सराबोर गीली हुईं जय की छोटी छोटी झाटे light के reflection से चमक क़र सुनहरी घास जैसे दिखने लगी. जय का सूपड़ा मुंह मे ले क़र उस पर जीभ गोल गोल घूमती उसे अंदर चूसती जिस से उर्वशी का थूक की लार लंड के मांसल से फिसलती हुईं काले अंडकोष से बूंद बूंद ऐसे टपक रही थी जैसे किसी मधुमखी के छत्ते से शहद टपक रहा हो.... लंड चूसने से होने वाली गप गोप गपागप.. गोप... गोप... गोपागोप की आवाज से रात बीती जा रही थी.
जय का लोडा चढ़ाई के लिए तैयार क़र के उर्वशी अब उठ खड़ी हुईं. पर उर्वशी का मुख चोदन के सुख से जय जय अलग नहीं होना चाहता था,
उर्वशी : सुनो...! वो packet और lighter कहा रखा है...
जय : सामने dressing table पर रखा था भाबी...
उर्वशी झट से वहां से सिगरेट packet और lighter उठा लाई.
जय : भाबी बाद मे सिगरेट पी लीजिये अभी काम अधूरा क्यों छोड़ रही हो...जय ने चीड़ते हुए कहा.
उर्वशी : हूँ हूँ... क़र लो काम पूरा... उर्वशी बेड पर गांड उठा क़र घोड़ी बनते हुए बोल पड़ी....
जय : वाह भाबी... समझ गया....
उर्वशी को घोड़ी बनते देख जय ने उसकी साड़ी गांड से ऊपर क़रते हुए कमर से ऊपर सरका डाली, अब उर्वशी की नंगी गांड गुलाबी गुब्बारे जैसी चमक उठी थी,

निचे लटके हुए उर्वशी के दोनों गोलाकार स्तन एक दूसरे से सट क़र मुक्त हो क़र झूम रहे थे. नर्म मुलायम उर्वशी के काले बाल उसके मोटे सुडोल उन्नत स्तन को ढकने की नाकाम कोशिश क़र रहे थे. कंधो से पहले ही निचा गिर चूका पल्लू और गले से निचे लटकता मंगलसूत्र उर्वशी को बताना चाहते थे की उसने किसी और ही लिंग के लिए योनि द्वार खोल रखा है..... पर काम ज्वर से पीड़ित उर्वशी सारे बंधनों से मु फेर चुकी थी, उसे ये आभास ही नहीं रहा के वो किसी की पत्नी, किसी की माँ है.....
उर्वशी के पिछे जय अब शॉट लगाने के लिए पोजीशन बना रहा था, एक हाथ से उर्वशी की कमर और पीठ को निचे दबाने लगा दूसरे हाथ से उर्वशी के बालो की छोटी को पकड़ क़र पीछे खींचने लगा जिस से के उर्वशी बिच मे टेड़ी हो क़र उर्वशी गांड ऊपर की ओर सलामी दे सके. अब जय ने उर्वशी की दोनों पिंडलीओ को खोल क़र उसके नीचे छुपी हुईं नर्म मुलायम मास से भरी गद्देदार योनि को उसके लिंग के सामने मु खोल क़र प्रकट क़र दिया था. वही उर्वशी भी कामआतुर हो क़र जय के इस लीला मे सहयोगी बन क़र साथ देने लगी... ओठों मे एक सिगरेट रख क़र सुलगाने लगी....
उर्वशी के लार से सना हुवा लिंग उर्वशी के योनि द्वार पर अब सट क़र उसे ही खोदने के लिए साजिश क़र रहा था, जय ने उर्वशी की कमर कस क़र पकड़ ली थी, उर्वशी भी उसके योनि द्वार पर जय के तोफ के होने वाले संभावित हमले से वाकिफ हो चुकी थी, उर्वशी ने उसने घुटने गद्दे पर ताकद से गडा रखे थे और आगे हाथ से बेड की बेडशीट पर नाख़ून गड़ा क़र सिगरेट फूकते हुए तैयार हो चुकी थी.....
जय : भाबी...! सुरु करे... जय ने उर्वशी को इशारा देते हुए कहा.
उर्वशी : हा... हा..... आँखे बंद करते हुए उर्वशी ने कहा...
इतना सुनते ही जय ने एक जोरदार धक्का दे दिया जिस से उर्वशी के योनि मे जय का भरा पड़ा हुवा थूक लार और योनि रस का मिश्रण फव्वारा बन क़र योनि के बाहर बरस पड़ा, उस फव्वारे की पिचकारी इतनी तेज थी के जय के चेहरे तक पर उसकी बुँदे बरस गई थी....रात के सन्नाटे मे एक "फच्च" आवाज गूंज उठी....एक ही वार मे उर्वशी के योनि के परदे खोलता हुवा जय का टेढ़ा मोटा 8-9इंच का लिंग बच्चेदानी को छू गया, जय के जोरदार हमले से बेड 2-4 इंच आगे सरक क़र दीवाल पर जा क़र सट गया. उर्वशी ने जय के कई हमले झेले हुए थे, जय बता क़र ही हमला करता है ये वो जानती थी पर हर बार जय का पहला हमला उर्वशी के योनि से होते हुए बच्चेदानी तक मे भूचाल लाता था, इस बार भी वही हुवा,........

आह आअह्ह्ह.... आह्हः.... करती हुईं उर्वशी के अंदर एक दर्द का अनुभव हो रहा था, पर ये दर्द सुकून भरा था, विश्वास और अपनापण लिए हुए था,....
28 वर्ष के नवजवान जय को भोगने लिए विवाहित उर्वशी ने उसका आकर्षक मदमस्त गोरा शरीर कई नंगा क़र दिया, सेव्वेदनशील जय उर्वशी के इस बलिदान का बडा सम्मान करता था. पति मिलन से कई कई महीने विरह मे साध्वी जैसी बिताने वाली उर्वशी को पटाने मे जय को बड़ी कठिन तपस्या करनी पड़ी थी. मदमस्त हथनि जैसी उर्वशी की जवानी को शांत करना भी कोई बच्चो का खेल नहीं था. व्यवस्थित एक एक पड़ाव पार क़र के सारे कामसूत्र की कलाये उपयोग करने से ही उर्वशी की बदन की ज्वाला ठंडी हो सकती थी. सौभाग्य से जय उसके सूखे हुए रेगिस्तान जैसे जीवन मे बरसात की उम्मीद बन आया जो उसके टांगो के बिच के जमीन पर उसके हल से बारी बारी जोथ क़र सुफल, शीतल क़र रहा था. जय हर कामकला से परिपूर्ण था उर्वशी के मन, बदन से परिचित हो चूका था, उसे ये पता था के उर्वशी को कब, कैसे, कितना डोज देना है. कब दूध दोहना है, कब हल जोथना है, और कितने समय बाद उसे सिंचिना है. ये सब वो बड़ी कुशलता पूर्वक आराम से मन लगा क़र करता था, इस से उर्वशी जय पर प्रसन्न हो क़र वरदान रूप मे उसका दिल दे बैठी थी....
जय : भाबी.... सब ठीक है न.... (तेज झटके से सहमी हुईं उर्वशी को टटोलते हुए जय बोला)
उर्वशी : हूँ हूँ..... (उर्वशी ने एक नजर जय के नजरों से मिलाई और हामी भर दी)
जय ने उर्वशी का ok सिग्नल पकड़ क़र अब कमर हिलानी सुरु क़र दी. आगे पीछे दाये बाये कमर घूमाने से जय का टेड़ा लंड उर्वशी के अंदर हर एंगल मे जगह बना क़र मचल रहा था. उर्वशी भी उसको योनि के अंदर के खालीपण को भारी लंड से भरे जाने से स्वर्गसुख प्राप्त क़र रही थी.
योनि के अंदर धीमे धीमे आवागमन के कारण योनि के अंदर की झिल्लीया लिंग के ऊपर पकड़ बना क़र अच्छे सिकुड़ चुकी थी, जय ने अब गति बढ़ा दी और अच्छे दे योनि को मथने लगा, रपारप लिंग के आवागमन से मथी जा रही उर्वशी की फुदी योनि रस ऐसे बाहर छोड़ रही थी जैसे के मक्खन को मथे जाने से घी बाहर निकलता हो....जय के तेज धक्को से उर्वशी चरम सीमा तक पोहोचने लगी थी, जैसे जैसे जय पीछे से शॉट लगता वैसे वैसे उर्वशी हाप हाप क़र सांसे छोड़ती जिस से हूँ... हूँ... हूँ....की गूंज निकलती थी.....उसका बदन अजीब एकडन से तन गया, उंगलियां मुट्ठी बन क़र बंद हुईं, आँखे भींच गई, और.... हाह्ह्ह.... आहहह.... आह्ह.... की आवाज करती हुईं उर्वशी के खदान ने पानी छोड़ दिया, और घोड़ी बनी उर्वशी बेड पर सट क़र लेट गई.
जय : भाबी.... क्या हुवा... बस थोड़ी देर करने दो... बस एक मिनिट....
उर्वशी : बस हो गया...! बस हो गया... अब नहीं...
उर्वशी ऐसे नहीं मानेगी ये जान क़र जय ने उसे ताकद लगा क़र पलटा दिया, उसकी टांगे खोल क़र मोड़ दी, उर्वशी के एक टांग के ऊपर जय ने उसकी टांग से उसे दबा क़र अच्छे से खोल दिया.आखिर जय के मर्दाना ताकद के आगे उर्वशी की एक न चली, जय ने उर्वशी को लिंग योनि मे प्रवेश करने के लिए मजबूर क़र के अपना ऊपरी शरीर से उर्वशी के ऊपर दबा क़र फिर से कमर हिलाने लगा.. दोनों पंजो से उर्वशी के दूध पकड़ दोहने लगा, जय के भारी भरकम भार से उर्वशी जय के पसीने से भीगी जा रही थी. उसके ओठों से बस सिसकियाँ निकल रही थी....

.......भाबी....भाबी.... बोलता हुवा उसके अंदर तेज आनंद विस्फोट हो लगा और थोड़ी ही देर मे जय के लिंग ने तेज फव्वारा छोड़ क़र उर्वशी की पवित्र योनि को भीगी क़र ठंडी क़र दिया . जय का गाढ़े बीज से खचाखच भर क़र उर्वशी के नरम योनि सिंचित हो उठी,.....
जय उर्वशी को पूर्ण भोग क़र संतुष्ट क़र चूका था. उसके लिंग से उर्वशी के योनि रस, ठुक और वीर्य की मिश्रित तार बूंद बूंद टपक रही थी. जय तौलिया लपेट क़र बाहरी बाथरूम की ओर जाने लगा, बेडरूम का locked दरवाजा धीरे से खोल क़र दबे पाव बाथरूम मे जाने लगा. वहा उसने लिंग को साफ क़र के पेशाब की गर्म धारा छोड़ दी और वापस आ क़र उर्वशी को बाहो मे भर क़र सो गया.... इस बार आते आते उसने दरवाजा locked ना क़र के जो भारी गलती क़र दी थी उसका मुआवजा सब को भुगतान पड़ने वाला था.... वासना की आग से मुक्ति पा क़र दोनों एक दूसरे के बगल ने नंगे ही लेते लेते ही कब सो गए इसका आभास भी नहीं हुवा....