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छोटी मामी, सूरजु और सूरजु क माई
और छोटी मामी ने चिढ़ाया,
" अरे ननद रानी, जिस बुरिया से इतना जानदार तगड़ा लौंडा निकाल दी हो, उसका एक दो ऊँगली से का होगा, ऊंट के मुंह में जीरा।। फिर सूरजु के मामा, हमरे मरद बचपन में बहुत सेवा किये होंगे, हमरे जेठ देवर, तो भाई के साथ मौज मस्ती और भौजाई की बारी आने पे छिनरपन,..? ."
" सही तो कह रही है, नयको, ( छोटी मामी सबसे नई थीं घर में तो उनकी सास, जेठानियाँ उन्हें नयको ही कहती थीं ) बड़ी मामी बोली और सूरजु की माई को छेड़ा,
"और सूरजु क मामा तो हमसे खुदे क़बूले हैं की खाली थूक लगाए के तोहार मारते थे, ये तो भौजी लोग तोहार शरीफ हैं की की कडुआ तेल लगाय के, "
और मंझली मामी ने सूरजु की माई के बिल में से दो उंगलिया निकाल के दोनों निचले होंठ फैला दिए, छोटी मामी ने लालटेन की ओर इशारा किया तो एक गाँव की औरत ने लालटेन सीधे वहीँ सामने
और अब सूरजु अपनी माई के दोनों निचले होंठ साफ़ साफ़ देख रहे थे, खुले फैले
और छोटी मामी एक बार बस उनकी ओर मुड़ के मुस्करा दीं, जैसे कह रही हों देख ले मुन्ना, मन भर के
बेचारे सूरजु की हालत खराब और उससे ज्यादा, ' उसके उसकी ' टनटनाया, फनफनया और ऊपर से छुटकी मामी ने नेकर भी सरका के घुटने तक कर दिया था, जाड़े में हल्का पसीना आने लगा,
लेकिन फिर बड़की मामी ने तेल के बोतल की ढक्क्न खोली और फिर बूँद बूँद, टप टप, सूरजु की माई की खुली, फैली बिल में
और छोटी मामी ने भी सीधे बोतल से अपने हाथ पे तेल गिराया और पहले एक ऊँगली, फिर दो ऊँगली और जब उसके साथ जोड़ के उन्होंने तीसरी ऊँगली की, तो सूरजु की माई चीख पड़ीं,
" नहीं नहीं भौजी बस दो से ज्यादा नहीं "
और छोटी मामी ने मन ही मन सोचा, " तीन ऊँगली से मोट तो तोहरे लौंडा क अभी से है " लेकिन बोलीं
" अरे याद है हमार पहली रात, तोहार छोट भाई, ….बांस अस, हम ऐसे चीख रहे थे लेकिन पूरा पेले और अगले दिन केतना चिढायी थीं आप "
और फिर तीनो ऊँगली अंदर
और उसके बाद, वो छटपटाती रहीं, छोटी मामी पेलती रहीं, ठेलती रहीं, और चिढ़ाती रहीं,
" मुन्ना के पैदा होने के टाइम तो गदहवा से चुदवावे गयी थीं न "
दर्द के बावजूद सूरजु की मई के मुंह पे मुस्कान आगयी, अपनी भौजाई से बोलीं,
: “हम तो ना, लेकिन तोहरे ननदोई के टाइम हमार सास जरूर सांड़, गदहा, घोडा कुछ भी नहीं छोड़ी थीं "
और फिर छुटकी मामी ने मुट्ठी बना के,.....
सूरजु देख रहे थे दर्द के साथ एक मजा भी था, चीख के साथ सिसकी भी,
और सारी रात ये मस्ती चली, लेकिन उसके बाद आज तक उन्होंने रतजगा नहीं देखा था,
उसके महीने दो महीने बाद ही वो अखाड़े में चले गए, लंगोट बाँध लिया,
लेकिन आज इमरती भौजी का जुगाड़, और अब तो वो खुद मजा ले लिए थे और अब उन्हें लग रहा था की क्या चीज वो मिस कर रहे थे,
सच में सब कहते थे, जिंदगी का असली मजा इसी में, माई भी तो दसो बार, यही बात समझाने की कोशिश करती थीं,।साफ़ साफ़ तो नहीं इशारा यही करती थीं की अब अखाडा बहुत लड़ लिए अब और सब,
और उन्हें मंजू भौजी की बात याद आगयी, अभी जाने के पहले, उनके कान में बोलीं, बुच्चि को दिखा के,
" इसका नेवान अभी किये हो की नहीं, चलो छोट देवर हो, २४ घंटे का मौका देती हूँ, कुँवारी का, झिल्ली फाड़ने का मजा लेना हो तो बस कल रात के पहले, वरना आज तो छोड़ दूंगी लेकिन कल रतजगे में जरूर अपनी इस ननद की ऊँगली करुँगी और नहीं फटी होगी तो फट जायेगी, तो बस कल रात के पहले ,"
और यही सोचते सोचते नींद आ गयी,
सूरजु न खाली बीस पचास गाँव में अखाड़े के लिए दंगल लूटने के लिए अपने दंड पेलने के लिए, ५-६०० दंड बैठक तो कभी भी, लेकिन उसके साथ साथ उनके गुरु ने उन्हें एक अपने साथ के गुरु के पास भेजा था तो योगासन, ध्यान, और भी बहुत कुछ और उसमे भी अपने गुरु का नाम कर के आये
तो उन्हें कंट्रोल बहुत था, अपने देह की एक एक चीज पर, नींद पर भी, अगर खेत रखाना हो, कोई काम काज, तो चार पांच रात नहीं सोयेंगे और दिन में वैसे ही ताजा और सोने का मन करे तो खड़े खड़े घोड़े की तरह नींद ले लें और पांच मिनट की नींद भी उनके लिए रात भर की नींद के बराबर
बस वो सो गए,
हाँ, छोटी मामी आज शाम को आ गयी थीं,
और सूरजु भी वहीँ उस समय नीचे थे, उनकी माई, कांती बूआ, मंजू भाभी, बुच्ची, चुनिया, गाँव की ढेर सारी औरतें, लेकिन आते ही अपनी ननद, से गले मिलने के बाद सूरजु को देख के सीधे दोनों ऊँगली से छेद बना के एक ऊँगली उसमे डाल के, सबके सामने चुदाई का इंटनेशनल सिंबल, हचक हचक के और सूरजु को छेड़ते बोलीं,
" तैयारी हो गयी, नए माल के साथ कुछ प्रैक्टिस हो रही है, रोज ? "
सूरजु की माई अब उन्हें फरक नहीं पड़ता था की जवान बेटा सामने खड़ा है, शादी बियाह का घर, अब हंसी मजाक नहीं होगा तो कब होगा, अपनी भौजाई, सूरजु की छोटी मामी को छेड़ते बोलीं,
" तोहरे इन्तजार था, ....तोहरे ऐस मायके क खेली खायी कहाँ मिलेगी, .... सिखाने वाली ,...८४ आसन "
सूरजु मामी के पास ही थे, उनका गाल सहलाते बोलीं, " अरे पहला हक़ तो बहिनिया का है, देखो एक माल तो मैं साथ ही लायी हूँ, आज ही कर दो नेवान "
उनके साथ बड़ी मामी की बेटी भी आयी थी, सूरजु की समौरिया, और वो बजाय लजाने के, खिलखिला के हंस दी,
तबतक इमरतिया पानी और मिठाई लेकर आयी मामी के पास, बस छोटी मामी ने उसे हड़का लिया,
" और बहन के पहले भौजाई का हक भी और जिम्मेदारी भी, अभी तक कितने बार कुश्ती कराई हो अपने देवर की, मुफ्त में देवरानी उतार लोगी, नहीं तो नाक कटाएगा ये "
" अरे एकदम नाक नहीं कटाएगा, मेरा देवर, देवरानी अइसन चीखेगी की ओकरे मायके में माई बहिन सब को मालूम पड़
जाएगा की कौन पहलवान के पास बिटिया भेजे हैं " इमरतिया हँसते बोली।
और छोटी मामी ने चिढ़ाया,
" अरे ननद रानी, जिस बुरिया से इतना जानदार तगड़ा लौंडा निकाल दी हो, उसका एक दो ऊँगली से का होगा, ऊंट के मुंह में जीरा।। फिर सूरजु के मामा, हमरे मरद बचपन में बहुत सेवा किये होंगे, हमरे जेठ देवर, तो भाई के साथ मौज मस्ती और भौजाई की बारी आने पे छिनरपन,..? ."
" सही तो कह रही है, नयको, ( छोटी मामी सबसे नई थीं घर में तो उनकी सास, जेठानियाँ उन्हें नयको ही कहती थीं ) बड़ी मामी बोली और सूरजु की माई को छेड़ा,
"और सूरजु क मामा तो हमसे खुदे क़बूले हैं की खाली थूक लगाए के तोहार मारते थे, ये तो भौजी लोग तोहार शरीफ हैं की की कडुआ तेल लगाय के, "
और मंझली मामी ने सूरजु की माई के बिल में से दो उंगलिया निकाल के दोनों निचले होंठ फैला दिए, छोटी मामी ने लालटेन की ओर इशारा किया तो एक गाँव की औरत ने लालटेन सीधे वहीँ सामने
और अब सूरजु अपनी माई के दोनों निचले होंठ साफ़ साफ़ देख रहे थे, खुले फैले
और छोटी मामी एक बार बस उनकी ओर मुड़ के मुस्करा दीं, जैसे कह रही हों देख ले मुन्ना, मन भर के
बेचारे सूरजु की हालत खराब और उससे ज्यादा, ' उसके उसकी ' टनटनाया, फनफनया और ऊपर से छुटकी मामी ने नेकर भी सरका के घुटने तक कर दिया था, जाड़े में हल्का पसीना आने लगा,
लेकिन फिर बड़की मामी ने तेल के बोतल की ढक्क्न खोली और फिर बूँद बूँद, टप टप, सूरजु की माई की खुली, फैली बिल में
और छोटी मामी ने भी सीधे बोतल से अपने हाथ पे तेल गिराया और पहले एक ऊँगली, फिर दो ऊँगली और जब उसके साथ जोड़ के उन्होंने तीसरी ऊँगली की, तो सूरजु की माई चीख पड़ीं,
" नहीं नहीं भौजी बस दो से ज्यादा नहीं "
और छोटी मामी ने मन ही मन सोचा, " तीन ऊँगली से मोट तो तोहरे लौंडा क अभी से है " लेकिन बोलीं
" अरे याद है हमार पहली रात, तोहार छोट भाई, ….बांस अस, हम ऐसे चीख रहे थे लेकिन पूरा पेले और अगले दिन केतना चिढायी थीं आप "
और फिर तीनो ऊँगली अंदर
और उसके बाद, वो छटपटाती रहीं, छोटी मामी पेलती रहीं, ठेलती रहीं, और चिढ़ाती रहीं,
" मुन्ना के पैदा होने के टाइम तो गदहवा से चुदवावे गयी थीं न "
दर्द के बावजूद सूरजु की मई के मुंह पे मुस्कान आगयी, अपनी भौजाई से बोलीं,
: “हम तो ना, लेकिन तोहरे ननदोई के टाइम हमार सास जरूर सांड़, गदहा, घोडा कुछ भी नहीं छोड़ी थीं "
और फिर छुटकी मामी ने मुट्ठी बना के,.....
सूरजु देख रहे थे दर्द के साथ एक मजा भी था, चीख के साथ सिसकी भी,
और सारी रात ये मस्ती चली, लेकिन उसके बाद आज तक उन्होंने रतजगा नहीं देखा था,
उसके महीने दो महीने बाद ही वो अखाड़े में चले गए, लंगोट बाँध लिया,
लेकिन आज इमरती भौजी का जुगाड़, और अब तो वो खुद मजा ले लिए थे और अब उन्हें लग रहा था की क्या चीज वो मिस कर रहे थे,
सच में सब कहते थे, जिंदगी का असली मजा इसी में, माई भी तो दसो बार, यही बात समझाने की कोशिश करती थीं,।साफ़ साफ़ तो नहीं इशारा यही करती थीं की अब अखाडा बहुत लड़ लिए अब और सब,
और उन्हें मंजू भौजी की बात याद आगयी, अभी जाने के पहले, उनके कान में बोलीं, बुच्चि को दिखा के,
" इसका नेवान अभी किये हो की नहीं, चलो छोट देवर हो, २४ घंटे का मौका देती हूँ, कुँवारी का, झिल्ली फाड़ने का मजा लेना हो तो बस कल रात के पहले, वरना आज तो छोड़ दूंगी लेकिन कल रतजगे में जरूर अपनी इस ननद की ऊँगली करुँगी और नहीं फटी होगी तो फट जायेगी, तो बस कल रात के पहले ,"
और यही सोचते सोचते नींद आ गयी,
सूरजु न खाली बीस पचास गाँव में अखाड़े के लिए दंगल लूटने के लिए अपने दंड पेलने के लिए, ५-६०० दंड बैठक तो कभी भी, लेकिन उसके साथ साथ उनके गुरु ने उन्हें एक अपने साथ के गुरु के पास भेजा था तो योगासन, ध्यान, और भी बहुत कुछ और उसमे भी अपने गुरु का नाम कर के आये
तो उन्हें कंट्रोल बहुत था, अपने देह की एक एक चीज पर, नींद पर भी, अगर खेत रखाना हो, कोई काम काज, तो चार पांच रात नहीं सोयेंगे और दिन में वैसे ही ताजा और सोने का मन करे तो खड़े खड़े घोड़े की तरह नींद ले लें और पांच मिनट की नींद भी उनके लिए रात भर की नींद के बराबर
बस वो सो गए,
हाँ, छोटी मामी आज शाम को आ गयी थीं,
और सूरजु भी वहीँ उस समय नीचे थे, उनकी माई, कांती बूआ, मंजू भाभी, बुच्ची, चुनिया, गाँव की ढेर सारी औरतें, लेकिन आते ही अपनी ननद, से गले मिलने के बाद सूरजु को देख के सीधे दोनों ऊँगली से छेद बना के एक ऊँगली उसमे डाल के, सबके सामने चुदाई का इंटनेशनल सिंबल, हचक हचक के और सूरजु को छेड़ते बोलीं,
" तैयारी हो गयी, नए माल के साथ कुछ प्रैक्टिस हो रही है, रोज ? "
सूरजु की माई अब उन्हें फरक नहीं पड़ता था की जवान बेटा सामने खड़ा है, शादी बियाह का घर, अब हंसी मजाक नहीं होगा तो कब होगा, अपनी भौजाई, सूरजु की छोटी मामी को छेड़ते बोलीं,
" तोहरे इन्तजार था, ....तोहरे ऐस मायके क खेली खायी कहाँ मिलेगी, .... सिखाने वाली ,...८४ आसन "
सूरजु मामी के पास ही थे, उनका गाल सहलाते बोलीं, " अरे पहला हक़ तो बहिनिया का है, देखो एक माल तो मैं साथ ही लायी हूँ, आज ही कर दो नेवान "
उनके साथ बड़ी मामी की बेटी भी आयी थी, सूरजु की समौरिया, और वो बजाय लजाने के, खिलखिला के हंस दी,
तबतक इमरतिया पानी और मिठाई लेकर आयी मामी के पास, बस छोटी मामी ने उसे हड़का लिया,
" और बहन के पहले भौजाई का हक भी और जिम्मेदारी भी, अभी तक कितने बार कुश्ती कराई हो अपने देवर की, मुफ्त में देवरानी उतार लोगी, नहीं तो नाक कटाएगा ये "
" अरे एकदम नाक नहीं कटाएगा, मेरा देवर, देवरानी अइसन चीखेगी की ओकरे मायके में माई बहिन सब को मालूम पड़
जाएगा की कौन पहलवान के पास बिटिया भेजे हैं " इमरतिया हँसते बोली।