आश्रम का सच

तीसरे दिन सुबह जब उसकी सास लेने आने वाली थीं, और वो सिर्फ एक आश्रम की साडी में इन्तजार कर रही थीं, दोनों सखियाँ उसे छोड़ गयी थीं, उसे उन दोनों ने बोला की वो टीवी तब तक लगा के देखे, अभी उसकी सास को आने में एक दो घंटे का टाइम है,
टीवी खोलते ही उसे जोर का झटका, जोर से लगा।
टीवी में वो खुद थी, एकदम निर्वस्त्र उस तालाब में नहा रही थी , दर्जनों उसकी उसी तरह के चित्र, फिर सेक्स वाले, गुरु जी के साथ का नहीं था, लेकिन जितने गुरु शिष्यों के साथ था सब, हाँ मर्दों का चेहरा किसी में बहुत साफ़ नहीं था, लेकिन उसका चेहरा एकदम साफ़ साफ़ और उस से बढ़ कर उसकी आवाज,
'हाँ चोदो न, अरे पूरा लंड डाल के पेल, प्लीज चोदो, बहुत मजा आ रहा है चुदाने में' और बीच बीच में वो अपना नाम लेकर भी, 'अरे संजना को चोदो न ऐसी चुदवासी तुझे कहीं नहीं मिलेगी, 'करीब घंटे भर .कई में तो दो दो मरद एक साथ उसके ऊपर चढ़े है और वो सब को उकसा रही है,...
बेचारी संजना की ऐसी की तैसी हो गयी । गोरा चेहरा एकदम काला, उस समय तो एकम होश ही नहीं था, सास ने बोला था, जो जो गुरु जी कहें, उनके आश्रम में कहा जाए, तो वो, और फिर ऊपर से वो जो पेय पिलाया था, जानती तो वो भी थी की चोदी जायेगी, लेकिन इस तरह से फोटो बना के, और कहीं उसके मरद, गाँव में कोई, उसके मायके में, फिर तो बस पोखरा ताल भी नहीं मिलेगा,
संजना की बोलती बंद थी

तब तक दरवाजा खुला और एक मुख्य सेविका, थोड़ी भारी बदन की, दो दिन में ही संजना ने समझ लिया था इनसे सब डरते है, अगर वो घूर के भी देखती है तो गुरु शिष्यों के चेहरे पे पसीना आ जाता था।
संजना भी जैसे उसे सिखाया गया था घुटने के बल बैठ गयी। आँखे नीची।
" फिल्म अच्छी लगी न नंबरी चुदककड़ लग रही हो। मुंह में भी कितना मस्त चूसा है। फिल्म तो बहुत लम्बी है लेकिन एडिट कर के छोटा कर दिया है तुहारे देखने के लिए, चाहोगी तो पूरा मिल जाएग। और हाँ रोज रोज भी देखना चाहो तो ये तेरा मोबाइल हमने रखवा लिया था,...बस उसी में है,... संजना नाम का फोल्डर है खोल के देख लो,"

करीब डेढ़ सौ फोटुएं, उसकी हर हालत में चूसते हुए,

खुद मरद के ऊपर चढ़ के चोदते हुए,

कहीं गांड मरवाते,

लेकिन इस में मर्दो को भी चेहरा एकदम साफ़ था,
ज्यादातर में तो उसके मायके के मर्द थे, बीसों तो उसके अपने सगे छोटे भाई के साथ, भाई उससे चार पांच साल छोटा, अभी रेख आ ही रही थी, इंटर में गया था,
और कई उसके ससुराल के, कोई देवर , कोई घर में काम करने वाला, उनके साथ
संजना से न रोया जा रहा था, न आवाज निकल रही थी, बस चेहरा पथराया सा, अगर कहीं ये सब, बस सोच सोच के सर फटा जा रहा था, उसका तो जो होना था, लेकिन कहीं उसको भाई के साथ तो उसके मायके में उस बेचारे की भी ऐसी की तैसी,

फिर वो मुख्य सेविका मुस्करायी, बोली,
' अरे इन मर्दो की फोटो तेरी मोबाइल में ही मिली, तेरे छोटे भाई की तो बहुत थीं, मुझे तो लगा की अभी छोटा है, लेकिन वो तेरी सखी बोली नहीं उसका चेहरा अच्छा जंचेगा, वो एक्सपर्ट है किसी का चेहरा कहीं का कहीं लगाने में, कोई माई का लाल पता नहीं कर सकता, वो तो जिद कर रही थी वो तेरी भाई के साथ वाली, उसके पास भेजने के लिए,... लेकिन मैंने मना किया। "
फिर रुक के वो मुख्य सेविका बोली,
" मैंने बोला, अरे ये माल बहुत मस्त है, हम लोगों की सब बात मानेगी, जब बुलाएँगे दौड़ी आएयेगी, कल एक रात में बारह बारह मरद चढ़े उसके ऊपर, कैसे मस्त होके सबसे चुदवाया, और स्साली जरा भी चूं चपड़ करने की सोचेगी भी तो उसका स्साला वो जो चिकना भाई है,... बुला लेंगे उसको भी पूजा के नाम पे, अभी तो सिर्फ चेहरा उसका है, फिर सच में इसके भाई से चुदवायेंगे, ...और वो स्साला नमकीन, लौण्डेबाज भी बहुत हैं, तो इसके सामने उसकी गाँड़ मरवाएँगे। क्यों अभी कोरा है न, फटेगी तो बहुत चिल्लायेगा, ....लेकिन जरूरत पड़ेगी नहीं "
और एक मोबाइल दिखाते बोलीं
तेरे मोबाइल का सिम और पूरा डाटा हमने क्लोन कर लिया है तो भेज तो अभी भी सकते है,... और जिसको भेजेंगे लगेगा तेरे मोबाइल से ही गया है। एक और वीडियों वाला भी है संजना २ के नाम से, तेरी आवाज बड़ी मस्त और एकदम साफ आयी है।"

संजना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, बस सुनाई पड़ रही थी उस मुख्य सेविका की आवाज, उस का चेहरा देख के ही उस आश्रम वालियों की मूत निकल जाती थी, तो संजना तो, कभी उसे अपने भाई का भोला भाला चेहरा दिखाई पड़ता तो कभी ताल पोखर,
संजना ने वो भी खोला, उसमे भी १८ गिफ और ६ चार मिनट के वीडियो थे।
मुख्य सेविका समझ रही थी, उसके बात का असर जैसा वो चाह रही थी वैसे ही हो रहा था। चिड़िया जाल में फंस गयी थी, थोड़ा तो फड़फड़ाएगी ही , और इसी फड़फड़ाने को देखने में ही तो बहेलिया को असली मजा मिलता है। वो बोली,
" हमने किसी को भेजा नहीं है, क्यों भेजेंगे,... हां अगर तेरा मन करे तो भेज भी सकते है तेरे ही नंबर से। दोनों तेरी सखियाँ रोज बात करेंगी तुझसे , तुझे ही उन्हें काल करना हो, अगर किसी दिन तेरी काल न आयी तो हम समझ जायेंगे की तो चाहती है की हम भेज दे। और वो फ़ार्म में हमने पहले ही तुझसे और तेरी सास से साइन करा लिया था, की हर पूर्णिमा और अमावस को दो दो के मेडिकल चेकअप के लिए आना होगा । तो बस पांच दिन बाद ही पूर्णिमा है आ जाना। अभी तेरी सास को भी बता दूंगी।
मेरी ननद का भी चेहरा एकदम बुझ गया था, बता वो अपनी सहेली संजना की बात रही थीं, लेकिन वो जानती थीं अगर वो आश्रम गयी तो उनके साथ भी यही सब, बड़ी मुश्किल से बोलीं
संजना बोली बस समझो रंडी बना के,
लेकिन संजना की सास बहुत खुश , जब उन्हें बताया गया की पूजा बहुत सफल रही, गुरु जी बहुत खुश थे उनकी बहू की भक्ति से। डिलीवरी का भी सारा खर्चा आश्रम उठाएगा, हाँ उस के गर्भ पर एक दुष्ट छाया थी जो अब करीब करीब हट गयी है लेकिन पूर्णिञा और अमावस्या को वो प्रबल हो उठती है, इसलिए बहू और उसके गर्भ की रक्षा के लिए बहू को अगले पांच महीने तक पूर्णिमा और अमावस्या को दो दो दिन के लिए, लेकिन ये पूरी तरह से बहू और सास की मर्जी है, हाँ उसके बाद बहू और होने वाले बच्चे को कुछ हुआ तो गरू जी की जिम्मेदारी नहीं होगी, क्योंकि आश्रम की पुण्य भूमि में तो बुरी शक्तियां नहीं घुस सकती लेकिन आश्रम के बाहर की वो जिम्मेदारी हम नहीं ले सकते।
संजना की सास तो उस प्रधान सेविका के आगे दंडवत हो गयी और गर्दन पकड़ के बहू को भी, और बोलीं
" गुरु जी के लिए जिंदगी हाजिर है। अरे दो दिन का जितना दिन चाहे,.... पांच दिन बाद पूर्णिमा है,... मैं खुद चौथे दिन उसको ला के छोड़ जाउंगी।

" तो क्या ब्लैकमेल का डर दिखा के वो लोग, संजना बीबी को,.... "

मेरी बात पूरी नहीं हुयी थी की मेरी ननद ने काट दी और बोली,
" अरे नहीं भौजी चार आने का खेल तो अभी बाकी था, असली जो परेशानी हुयी बेचारी को। "
हुआ ये की पूर्णिमा के दिन एक महा उत्सव होता था जिसमे बाहर के शहरों से भी गुरु जी के शिष्य आते थे,
और बस उन के साथ, वो जो सखियाँ थी वो ही संजना को बताती थी, किसके साथ,
और हर दिन चार पांच मरदों के साथ,

उसी तरह अमावस्या को भी दिन , लेकिन अगली पूर्णिमा को संजना के पाँव से ज़मीन खिसक गयी।
उस दिन सखी ने उसे जिस मर्द के साथ भेजा था उसके साथ उसे पूरे दिन और रात को रहना था, यंग लड़का था खूब पैसेवाला, पेलने में भी मस्त, बात करने में भी, कमरे के अलावा रात में आम की बाग़ में भी दो बार चुदवाया उससे संजना ने,

लेकिन जब उसने बोला की संजना को उसने कैसे पसंद किया तो,
वो कोई गुरु जी का शिष्य नहीं था, एक एन आर आयी था जो तीन महीने के लिए हिन्दुस्तान आया था, वहीँ महीने भर पहले उसने एक एस्कॉर्ट साइट पर संजना की फोटो देखी, लिखा था , पूर्णिमा की रात को इंडियन विलेज वोमेन इन इंडियन विलेज, बस उसने बुक कर लिया,
और हर बार पूर्णिमा और अमावस को भी आयी हुयी लड़कियों की पूरी रिकार्डिंग होती और वो उनके मोबाइल में, यहाँ तक की ब्ल्यू फिल्म भी कुछ बनाने वालों को, ऐसी लड़कियां जो खुल के हिंदी में देसी जुबान में बोल सके, ....और कोई देसी बैंग करके साइट है वहां पे चार फिल्मे भी,
हाँ संजना ने बोला, की शुरू में तो ताल पोखर सोचती थी, लेकिन उसकी सास छाया की तरह और जब महीना नहीं हुआ, उसके बाद एक बार वो गयी भी, पर उसे लगा अब वो एक नहीं दो जन है और बच्चे की जान लेने का, बस वो वापस आ गयी और उसकी सास खुश मरद खुश तो लेकिन उसके पति भी कुछ ख़ास नहीं थे और एक बार जब उसकी माहवारी रुक गयी तो वो भी काम पर सूरत चले गए,