Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 85 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

Going through some serious personal issues but the resolution is close and hoping to come back after Deepawali.
 
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ज्योति पर्व पर कोटिश दीप शिखाएं आपके, आपके परिजनों, मित्रजनों के जीवन पथ को आलोकित करें
 
भाग २२ -मस्ती संध्या भाभी संग -पृष्ठ २९१

मैंने अभी अभी पोस्ट कर दिया है, कोशिश करुँगी की बाकी दोनों रुकी हुयी कहानियों को मंथर ही सही थोड़ी गति दे सकूँ। हो सकेगा तो वहां भी अपडेट जल्द ही पोस्ट करुँगी

लेकिन शायद अभी भी हफ्ते दस दिन में एकाध चक्कर ही फोरम पर लग पाएं इसलिए कई बार कमेंट्स पर अपनी टिप्पणी हो सकता है न दे पाऊं या मित्र जनो की कहानियों पर हाजिरी देने में विलम्ब हो।

साथ देने के लिए आभार

Erotica - फागुन के दिन चार

फागुन के दिन चार भाग ५२ - गुड्डी और गुड्डी पृष्ठ ४९५ अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, मजे ले लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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जोरू का गुलाम और फागुन के दिन चार के अपडेट देने के बाद अब इस कहानी की पारी है। कोशिश करुँगी यहां भी अपडेट जल्द दूँ।
 
Erotica - फागुन के दिन चार

फागुन के दिन चार भाग ५२ - गुड्डी और गुड्डी पृष्ठ ४९५ अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, मजे ले लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७ मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में, मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें

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मित्रों से अनुरोध है की इन दो रुकी हुयी कहानियों पर जो अपडेट आये हैं कृपया उन्हें कमेंट का संबल देकर मेरा विश्वास बढ़ाएं। मैं कोशिश करुँगी की हफ्ते में एक दो बार फोरम ओर आ सकूँ और आप के कमेंट को स्वीकार कर सकूं

यहाँ पर भी अपडेट जल्द आएगा तब तक इस कहानी के आखिरी पोस्ट को एक बार पढ़ लें जिस से कहानी का तारतम्य बना रहे

भाग ९२ पृष्ठ ९५० ननद और आश्रम

एक बार फिर आभार मिलते हैं जल्द ही
 
भाग 93

नन्दोई, सलहज और सास -जबरदस्त ट्रिपलिंग

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लेकिन असली परेशानी अगले दिन थी जब शाम को ननदोई जी आये, मैं

ने अपनी ननद से वायदा किया था की पांच दिन उन्हें नन्दोई जी की परछाईं से भी बचाऊंगी और वो हर रात मेरे मरद के साथ, जबतक पांच दिन के बाद चेक में उनका गाभिन होना पक्का नहीं हो जाता।

पांच दिन में तीन दिन तो बीत चुके थे, मेरा तो मानना था की मेरे मरद ने पहले दिन ही अपनी सगी बहन को गाभिन कर दिया था, दूसरा दिन ननद अपनी सहेलियों के साथ रहीं, कल फिर भैया बहिनी ने जम कर रात भर कबड्डी खेली, गौने की रात झूठ, एक बार मैं पानी पीने के लिए उठी, तो ये कुतिया बना के रगड़ रगड़ के अपनी बहिनिया को पेल रहे थे, सर मेरी ननद का बिस्तर में धंसा, चूतड़ हवा में और बुर में गपागप, गपागप, ये तो नहीं देख पाए लेकिन मेरी ननद ने देख लिया और ऊँगली से इशारा किया तीन का यानी तीसरी बार वो अपने भाई से चुद रही थीं।

लेकिन आज मामला टेढ़ा था, नन्दोई जी से ननद को बचाने का,

होलिका माई का आर्शीवाद था पांच दिन के अंदर नन्द मेरी गाभिन हो जाएंगी, वो दिन पहला दिन भी हो सकता था और पांचवा भी। आज चौथा दिन था और मैं और मेरी ननद दोनों चाहती थीं की ननद के पेट के अंदर बच्चा मेरे मर्द के बीज का ही हो।

और इसलिए आज की रात भी उन्हें अपने भैया के साथ ही सोना था, लेकिन नन्दोई जी के रहते,….?

नन्दोई जी के आते ही मैंने चाल चलनी शुरू कर दी थी, मेरी सास रसोई में जा रही थीं और ननदोई की निगाह उनके पिछवाड़े,

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गलती मेरे नन्दोई की कत्तई नहीं थी, मेरे सास के चूतड़ थे ही एकदम कसर मसर, जैसे दो तरबूज आधे आधे, खूब बड़े लेकिन उतने ही कड़े, किसी भी मरद का खड़ा हो जाता और मेरे नन्दोई तो पिछवाड़े के जबरदस्त रसिया।

और मैंने उन्हें अपनी सास का पिछवाड़ा देखते ललचाते पकड़ लिया । पीछे से मैंने जकड़ लिया, आँचल ढुलक गया था मेरे जोबन की नोक नन्दोई जी की पीठ में धंस रही थी और मैंने चिढ़ाया,

" क्यों नन्दोई जी, माल है न मस्त, खूब हचक के लेने लायक, ...क्या देख रहे हैं सास का पिछवाड़ा "

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बेचारे शर्मा गए, चोरी पकड़ी गयी। किसी तरह से बोले, नहीं नहीं अरे ऐसा कुछ नहीं है,

" अरे काहें लजा रहे हैं, आप की सास तो मेरी भी सास है , और आप ना ना कर रहे हैं और ये हाँ कर रहा है "

और मैंने उनके पाजामे के ऊपर से खूंटे को पकड़ लिया, फनफना रहा था। ऊपर से मैं रगड़ने लगी और उनसे हाँ बुलवाने की कोशिश करने लगी।

" साफ़ साफ़ बोलिये चाहिए की नहीं , सलहज से ससुराल में सरम करियेगा न तो घाटे में रहिएगा, अच्छा ये बताइये की इनकी बेटी की गांड मारी की नहीं "

" गौना करवा के काहें ले गए थे , इनकी बिटिया को , गौने के चार दिन के अंदर,… बहुत ना ना कर रही थी, लेकिन निहुरा के पटक के पेल दिए , हफ्ते भर के अंदर, आठ दस बार मरवाने के बाद,… आदत पड़ गयी। "ननदोई जी हंस के बोले। अपने साले की तरह वो भी पिछवाड़े के दीवाने थे।

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" और इनकी छोटी बहु की, "

अब मेरा हाथ पजामे के अंदर घुस गया था, एक झटके में मैंने सुपाड़ा खोल दिया था और अब कस के सुपाड़ा रगड़ रही थी, नन्दोई जी का सुपाड़ा था भी खूब मोटा, गांड में घुसते ही गांड फाड़ देता था,

" उह्ह्ह, उह्ह्ह सलहज जी, आप मानेंगी नहीं , मैंने सैकड़ों की गाँड़ मारी होंगे, लड़की लड़के, औरतें लेकिन मेरी सलहज ऐसी, अरे मेरी इस सलहज के आस पास भी किसी की नहीं होगी, "

नन्दोई जी ने कबूल किया और मैं पहले दिन से ही ये जान गयी थी की ये मेरे पिछवाड़े के जबरदस्त रसिया हैं तो मैं ललचाती भी थी, और ऐन होली के दिन ली भी थी उन्होंने,

" चाहिए छोटी सलहज की "

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कस के मुठियाते हुए मैंने उकसाया, और साथ में मेरे बड़े बड़े कड़े जोबन उनकी पीठ पीछे से रगड़ रहे थे,

बेचारे नन्दोई की हालत खराब, इस हालत मैं तो उनकी माँ बहन सब लिखवा लेती तो वो लिख देते, बड़ी मुश्किल से बोले

: सच्ची, अरे उसके लिए तो,...."

और वो आगे बोलते उसके पहले कस के खूंटे को दबा के मैंने बात काट दी,

" उसके लिए मेरी और आपकी दोनों की सास की , ....सच में बोलिये सास की लेने का मन कर रहा है की नहीं , सोच लीजिये अगर झूठ बोला तो न सास मिलेगी न सलहज, अरे मैं बता रही हूँ, सालो से पीछे कुदाल नहीं चली है, एकदम टाइट कसी, और छिनरपना करेगी तो आपकी सलहज रहेगी न साथ में, देह की करेर हूँ, कस के दोनों हाथ पैर दबोच लूंगी और एक बार ये मोटू अंदर घुस गया न मेरे नन्दोई का , फिर तो हमारी आपकी सास लाख चूतड़ पटकें बिना गाँड़ मारे मेरा ननदोई निकलने वाला नहीं। नन्दोई जी मेरा भी मन कर रहा था की बहुत दिन से एक बार मेरी सास की मेरे सामने कोई कस के हचक के गाँड़ कूटे, और एक के साथ एक फ्री वाला ऑफर , सास भी सलहज भी। "

" मन तो मेरा कर रहा है लेकिन, लेकिन आपकी ननद कहीं उन्हें पता चल गया तो, "

बेचारे घबड़ा रहे थे। उन्हें क्या मालूम था सारा चक्कर इसी बात के लिए था की मेरी ननद उनके साले से रात भर कुटवाये,

" नन्दोई जी आप भी न ससुराल में है , सलहज आपके साथ फिर क्या, ननद का इंतजाम मैं कर लुंगी न। लेकिन मन करता है न सास का,…’

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" एकदम सही बोली आप, पिछवाड़े के साथ इतनी बड़ी बची चूँचियाँ और एकदम कड़ी, उनकी चूँची चोदने का भी जबरदस्त मन करता है :

नन्दोई जी ने मन की बात कबूल की

" अरे ननदोई जी आप एक बार कह के देखते,.... आप के लिए तो मैंने अपनी कच्ची कुँवारी दर्जा नौ वाली छुटकी की गाँड़, तो मेरी सास कौन चीज हैं…. तो हो जाय आज रात मेरी और आपकी सास की गाँड़ मरवाई, चूँची चुदवाने का काम, अब आप अगर पीछे हटे तो सलहज को भूल जाइये, अरे ननद की तो रोज लेते हैं आज उनकी भौजाई, महतारी पे नंबर लगाइये।

एक दो दिन में ननद ससुरे जाएंगी फिर तो दिन रात उन्ही के बिल में मूसल चलेगा, और आज आप ने मेरी सास की, ले ली मेरे सामने तो बस, सलहज साले के पहले नन्दोई की, "

कोई आ रहा था और उनको ये लाइफ टाइम ऑफर देकर मैं हट गयी,

हर बार मैं देख रही थी की अब वो सास को नयी नजर से देख रहे थे, और सास भी नजर पहचानती थीं, तो बस दामाद को देखकर उनका आँचल बिना बात के गिर पड़ता था, वो गहराई, उभार,

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छिनार ननद का छिनरपन

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लेकिन असली खेल किया ननद ने रात को खाते समय, खाना करीब खतम हो गया था, सास मेरी खीर लाने गयीं थीं

" उह, जबरदस्त सर दर्द हो रहा है " ननद ने जो चेहरा बनाया की एक बार मैं भी घबड़ा गयी, उनके भैया ने भी,

“क्या हुआ कैसा लग रहा”

बार कभी उनका माथा सहलाते कभी चेहरे को देखते,

" उफ़ लगता है माइग्रेन लौट आया, ओह्ह सर फटा जा रहा है " वो बड़ी मुश्किल से बोलीं।

साल डेढ़ साल पहले उन्हें माइग्रेन होता था लेकिन ठीक हो गया था, उनके भैया ने डाकटर को फोन लगाया और ब हाँ , अभी एकदम बोलते रहे, तबतक उनकी माँ भी खीर लेके लौट आयी थीं, वो भी परेशान, अपने बेटे की ओर देख रही थीं।

" डाक्टर ने बोला है , इन्हे अभी तुरंत लेट जाना चाहिए, रौशनी आवाज से एकदम बचें, एक दवा बताई है नींद की वो मेरे पास है, बस वो दे देनी है, कुछ भी कर के छह सात घंटे इसे तुरंत सो जाना चाहिए, और हाँ सुबह उठने पर एक दवा खानी है वो मैं अभी जा के ले आता हूँ ,

मुझे लौटने में घंटे दो घंटे लग जाएंगे, खाना मैंने खा लिया है आप लोग भी, "

और मुझसे बोले

" अपनी ननद को अपने कमरे में ले जाके सुला दो रौशनी आवाज कुछ भी नहीं , और वो दवा खिला देना,… सुबह तक पक्की नींद आ जायेगी , अगर नहीं सोयेगी तो बड़ी परेशानी हो सकती है "

" एकदम मैं अभी ले जाके सुला देती हूँ और बाहर से ताला भी बंद कर दूंगी , "

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ननदोई जी को देखते हुए कुछ चिढ़ाते हुए मैंने नन्द को ले के कमरे में गयी,

और कमरे में उस बिस्तर पर पहुँचते ही जहाँ दो दिन उनके भैया ने बड़ी जालिम चुदाई की थी, ननद मुस्कराने लगीं,

मैंने चुप रहने का इशारा किया, और उनकी साडी पकड़ के खिंच दी

फिर ब्लाउज, पेटीकोट उनके भाई के उतारने के लिए छोड़ दिया,

लेकिन ननद को फिर एक परेशानी याद आयी,

" भैया कैसे, ..."

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मैंने खिड़की दिखाई, बाहर की ओर खुलती थी और मुश्किल से दो ढाई फिट ऊँची, पांच दस मिनट ननद के साथ बैठ के समझा के अभी आधे घंटे तक एकदम चुप रहें, बत्ती बंद की, बाहर से ताला बंद किया,

और चाभी अपने उस बेटीचोद साजन को पकड़ा दी और कसम भी धरा दी की आज खूब हचक के ननद की लें,

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सास और दामाद

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ननदोई जी बेचारे उदास बैठे थे और साथ में उनकी सास खीर का कटोरा ले के,

" सुला के आ रहीं हूँ, सुबह तक एकदम ठीक हो जाएंगी, हाँ आप का उपवास हो गया " उन्हें चिढ़ाते मैं बोली,

लेकिन सास ने बात काट दी, " अरे उपवास क्यों, सास और सलहज के रहते दामाद जी का उपवास क्यों होगा, हाँ स्वाद बदल जाएगा , "

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अब ननदोई जी के चेहरे पर मुस्कान आयी , सुबह वाली बात उनको याद आ गयी , और मेरी सास ने एक लेवल बात और आगे बढ़ाई । और मैं नन्दोई जी का साथ दे रही थी।

पहले तो मैंने,जहाँ हम लोगो खाना खा रहे थे, वहां का दरवाजा मैंने बंद किया की ननद जी की नींद न उखड़ जाए हम लोगों की आवाज से ( असली बात ये थी की मैं नहीं चाहती थी की अभी थोड़ी देर में मेरा मरद जो मेरी ननद की रगड़ाई करेगा, तो उनकी सिसकी, चीख न सुनाई दे, हालंकि वो कमरा घर के एकदम दूसरे कोने में था और किसी भी हालत में उन लोगों की आवाज नहीं आ सकती थी) ।

फिर ननदोई जी के आलमोस्ट गोद में बैठ के उनका हाथ अपने उभार पर ( और नन्दोई जब बगल में हो तो किस सलहज का आँचल जोबन के ऊपर रहता है ) और सासू जी को छेड़ा,

" आप न हम दोनों को, अपने दामाद को और बहू को हरदम बाहर वाला समझती हैं और बेटा बेटी को अंदर वाला, क्योंकि वो दोनों आपके अंदर से निकले हैं, है ना। अपने बेटे बेटी को तो आपने हाथ से खिलाया होगा और हमारे ननदोई जी को कभी दिया है हाथ से ? "

मैं हम दोनों की ओर से उन्हें चिढ़ाते बोली ।

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" अरे मैं देने में पीछे नहीं हटने वाली, यही तोहार ननदोई ही अपने महतारी के भोंसडे में जाय के छिप जाते हैं, " मौका पा के अपनी समधन को गरियाते हुए मेरी सास ने अपने हाथ से खीर अपने दमाद को खिलाने के लिए उनके मुंह में डाला,

" काट लीजिये, ऐसी मीठी ऊँगली काटने का मौका नहीं मिलेगा, " मैंने नन्दोई जी को चढ़ाया, लेकिन मेरी सास तो मेरी भी सास थीं, बोलीं

" अरे कइसन सलहज हो, काटे क होई तो खाली सास क ऊँगली मिली है, बहुत चीज है काटे, चाटे और चूसे वाली, “

अपने बड़े बड़े उभारो की और देखती जिस तरह से वो बोलीं, साफ़ था की वो किस चीज के काटने चूसने और चाटने की दावत अपने दामाद को दे रही है

और ऊँगली में लगी खीर उन्होंने दामाद के गाल में लपेट दी और छेड़ा

“जाय के अपनी बहिन महतारी से चटवा के साफ़ करवा लेना, वैसे गाल तो खूब नमकीन काटने चूसने लायक है, “

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लेकिन मैं थी न अपने ननदोई के साथ, मैं बोली,

" अरे ससुरार में सलहज है सास है, बहिन मंहतारी पे तो अपने मायके में जाके चढ़ेंगे उनसे चटवाएंगे अभी तो मेरा हक़ पहले है, "

और मैंने गाल खूब प्यार से चुम्मा लेते हुए चाट लिया। नन्दोई जी अब खूब कस के खुल के जोबन मेरा दबा रहे थे और खूंटा पजामे में तम्बू बना रहा था, उसे सहलाते हुए, सास को मैंने दिखा के कहा,

" और सासू जी ये भी नन्दोई जी का खूब चूसने लायक है "

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सासू जी भी खूब ललचायी निगाह से देख रही थी अपने दामाद का गरमाया खूंटा। लेकिन मुझे चिढ़ाते बोलीं,

" तो चुसो न, ननदोई का सलहज नहीं चूसेगी तो का ननदोई क महतारी चूसेगी "

" मैं तो बहुत बार चूस चुकी हूँ लेकिन अबकी नन्दोई की सास का नंबर है, बोलिये चूसने का मन कर रहा है न "

" मेरा प्यारा दामाद है, मेरी जो मर्जी करूँ उसके साथ, " सास लिबराते हुए बोलीं और अपने हाथ से दुबारा खीर ननदोई जी के मुंह में और अबकी गलती से या जानबूझ के थोड़ी सी खीर उनके कुर्ते पर,

" अरे या आप ने का कर दिया, बाहर गिरा दिया, मेरे नन्दोई तो एक एक बूँद एकदम अंदर गिराते है, न बिस्वास तो अपने समधन को फोन लगा के पूछ लीजिये, और नन्दोई जी मैं ये कुरता उतार देती हूँ , नहीं तो दाग पड़ जाएगा " मैं सास का अपने इशारा समझ गयी थी और जब तक नन्दोई जी रोकते मैंने कुर्ते के साथ बनयाइंन भी उतार दी और अब वो सिर्फ पाजामे में।

" अरे छिनार मेरे दामाद क कुरता उतारेगी तो मैं छोडूंगी "

और सास ने खींच के मेरी साडी और फिर मैंने भी सास की साडी अब ननदोई जी सिर्फ पाजामे में और हम सास बहु चोली, ब्लाउज में , दोनों की चोली एकदम टाइट और खूब लो कट, पेटीकोट भी बस कूल्हे पर टिका,

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" तुम कह रही थी न बेटी बेटे में अंतर की बात तो जो मेरे बेटी बेटे छोटे थे तो मेरे पास सोते थे, चलो तुम दोनों मेरे पास मेरे कमरे में सोऔ " सास बोली और उनके दामाद तो यही चाहते थे उन्होंने तुरंत हामी भर दी , खुश होके बोले

" एकदम "

लेकिन मेरा इरादा कुछ और था, " अरे सासु जी आपके दामाद सोने के पहले एक दवाई पीते हैं, उसके बिना, "

मेरी सास भी ये बात जानती थीं की बिना दारु पिए, और एक बार दारु पी लिए तो झिझक ख़त्म, वो मुझे हड़का के बोलीं

" तो जाके लाती काहें नहीं मैं तोहरे नन्दोई को अपने कमरे में ले चल रही हूँ "
 
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