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अपडेट #08
Part #02
मंगलसूत्र.. ाआखिरी निशानी
ये अपडेट हमारे Danny69 भाई और अपने कमैंट्स से मेरी हिम्मत बढ़ाने वाले सभी मित्रो को समर्पित है
~°~
हीरा अपना हाथ आगे बड़ा क दूर बेल्ल
"प्रेमलता"
दूर बेल्ल क ठीक बगल एक नाम प्लेट भी लटक रही थी जिसपे लिखा था
'मनोहर निवास'
जल्दी hi दरवाजा खुलता है और सामने एक खूबसूरत भरे जिस्म की महिला का चेहरा नज़र आता है
"आप... ?"
वो खूबसूरत और भरे जिस्म की औरत जिसने इस समय एक मैक्सी पेहेन राखी थी और ऊपर से काफी खुली खुली थी.. जिस कारन उसके जिस्म की महिमा और भराव का काफी कुछ अंदाजा वही से लगाया जा सकता था
बल्कि पन्ना की नज़रें इस समय वही जैम चुकी थी.. और चेहरे की मुस्कान गहरी होती जा रही थी
Heera-Hum भानु भाई क आदमी है, मैं ही..
वो अपनी बात पूरी कर पता उससे पहले hi वो खूबसूरत भरे जिस्म की औरत जो यक़ीनन मालती क बड़े भाई की पत्नी 'प्रेमलता' थी.. जल्दी से दरवाजे क बहार आके चारो तरफ देखती है और तुरंत कहती है
"है.. है मुझे पता है, जल्दी से अंदर आओ"
दोनों तनिक भी देरी नहीं करते और जल्दी hi दोनों 'मनोहर निवास' क अंदर थे, प्रेमलता चारो तरफ देख क पक्का करती है और फिर संतुस होक जल्दी से दरवाजा बंद कर लेती है
यानि अब मालती क बड़े भाई क घर मैं उसकी खूबसूरत भरे जिस्म वाली भाभी और उसके साथ 2 हैवान.. भुजंग नाग जैसे दिखने वाले काले मर्द मौजूद थे
प्रेमलता दोनों को ऊपर से नीचे तक देखते हुए अंदर हॉल मैं hi पड़े सोफे क पास ले आती है और बैठने का इशारा करते हुए
"किया लेंगे आप दोनों.."
पन्ना- (प्रेमलता को ऊपर से नीचे तक देखते हुए.. पुरे कमीनेपन से मुस्कुरा पड़ता है) लूंगा तोह बस मैं.. हीरा भैया तोह बस देखना पसंद करते है
प्रेमलता पूरी तरह सेहम सी जाती है और उसका जिस्म पसीना चोर्ने लगता है
वो जल्दी से अपनी मैक्सी को सही करते हुए
"मैं चाय लेके आती हु"
हीरा- (प्रेमा की गदराई मोती गांड को निहारते हुए) भानु भाई ने कुछ पेपर्स क लिए भी कहा था ?
प्रेमा पीछे मुद क देखती है जहा वो पाती है की हीरा उसकी गांड क दीदार मैं खोया हुआ था.. वो इस बात को नज़रअंदाज़ कर देती है और है मैं सर हिला देती है
और बिना किसी विलम्ब क तुरंत किचन की तरफ चल पड़ती है.. प्रेमलता को जाते हुए देख क पन्ना अपनी पेंट क ऊपर से hi अपना लुंड मसल देता है
"भैया.. किया सच मैं ये.."
हीरा- (है क.. किचन की तरफ देखते हुए) जेक पक्का कर ले, भानु ने कहा है तोह सच hi होगा
पन्ना एक पल की भी देरी नहीं करता और तुरंत की अपनी जगह से उठ खड़ा होता है और अपने लुंड को सहलाते हुए किचन की तरफ चल पड़ता है
इधर प्रेमलता जल्दी से किचन मैं आके रैक पे दोनों हाथों को जमा लेती है.. उसकी साँसें उखड रही थी उसका गाला सुख रहा था
वो अपने हाथ से अपना पसीना पूछते हुए
"ये कमीना भानु.. आखिर मुझसे और किया किया करवाएगा, एक गलती को छुपाने क लिए और न जाने किया किया करना होगा मुझे.. और पता नहीं अब उन पेपर्स क साथ कोनसा सद्यन्त्र रचने वाला है"
प्रेमलता किचन मैं आके अपने दोनों हाथों को रैक पे जमाये हुए कड़ी थी वो अपनी hi सोच मैं इतनी डूबी हुई थी की उसे होश hi नहीं था की कब पन्ना ुस्तक आ चूका था
प्रेमलता पुरे भरे जिस्म की महिला है.. जिसके जिस्म का एक एक हिस्सा कैसा हुआ और भरा है
यौवन आज भी किसी नेयुवति से ज्यादा hi कैसा दिखेगा.. और उभरी हुई गांड की सोभा मैं कुछ कहने क लिए मेरे पास सब्द नहीं है
प्रेमलता को होश तोह तब आता है जब उसकी पीछे की तरफ निकली हुई गांड पे कोई गरम चीज़ चुभती है.. प्रेमलता जैसे उछाल hi पड़ती है
"आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......"
प्रेमलता जल्दी से खुद को संभालती है और जब पीछे देखती है तोह उसका जिस्म पसीना चोर देता है.. ककी उसकी मोती गांड की दर्द मैं चुभने वाली वो चीज़ पाना का काला हतियार था
एक पल क लिए तोह प्रेमलता यानि प्रेमा.. जैसे भूल hi गयी थी की वो किया कहने वाली है, पर जल्दी hi वो यथार्थ की धरा पे लौट आती है
"ये सब किया है... तुमने मुझे किया..... ये... तुम्हारे पास... ये"
प्रेमा ग़ुस्से से लाल होना सुरु hi हुई थी पर उसका ग़ुस्सा अचानक से ऐसा ख़तम हो गया मानो किसी ने गरम कोयले पे ठंडा पानी दाल दिया हो
और इसकी वजह पन्ना क हाथ मैं एक मंगलसूत्र था.. जो काफी पुराण सा था
पन्ना मन hi मन
'बहनचोद कुछ तोह बात है इस मंगलसूत्र की.. भानु भाई ने सही कहा ये काम करेगा'
पन्ना- (मुस्कुराते हुए) कुछ नहीं.. भानु भाई ने कहा था, ये तुम्हे दे दू इससे तुम्हे कुछ जरुरी याद आ जायेगा
प्रेमा जल्दी से लपक क पन्ना क हाथ से वो मंगलसूत्र चीन सी लेती है.. पर जैसे hi वो उसे अपने हाथ मैं लेती है उसे एहसास हो जाता है ये बस एक नक़ल है, असली नहीं
प्रेमा- (ग़ुस्से से) ये सब किया मज़ाक है.. ?
पन्ना मुस्कुराते हुए
"मुझे किया पता.. मुझे तोह भानु भाई ने दिया था, ताकि तुम कुछ भूलो नहीं
अब याद किया रखना है.. ये तोह तुम्ही को पता होगा"
किचन मैं कोई खास इतनी गर्मी थी नहीं.. पर प्रेमा क अंदर एक आग सी जल उठी थी
उसके अंतर्मन मैं एक ज्वाला सी प्रज्वलित होने लगी थी
'देख.. उस भानु क हाथ की कठपुतली बनने का नतीजा, लालच क यही अंजाम होता है'
पर प्रेमा अपने अंतर्मन को खुद पे हावी नहीं होने देती
प्रेमा- (खुद को शांत और ठंडा करते हुए) भानु से कह देना.. मैं कुछ भी नहीं भूली हु, तुम जेक हॉल मैं बैठे मैं चाय लेके आती हु, फिर तुम्हे जो पेपर्स चाहिए वो भी
प्रेमा इतना hi कहती है और उसे लगता है की पन्ना अब वापस हॉल मैं जेक बैठ जायेगा.. ककी वो पलट क अब वो गैस पे चाय चढ़ाने लगी थी
किचन मैं पूर्ण शांति हो चुकी थी.. पर प्रेमा क मन मैं एक अलग hi उथल पुथल मच चुकी थी
प्रेम मन hi मन
'एक जरा सी गलती क चक्कर मैं न जाने मुझे किया किया करना पड़ेगा'
प्रेमा अपने आप मैं इतनी खोयी हुई थी की उसे ये तक धियान नहीं था की पन्ना अब भी वही खड़ा है और उसका काला हतियार भी वैसे hi उसकी पेंट से बहार निकल क अपना आकर लिए हुए है
तभी प्रेमा को पन्ना क काले हतियार का धियान फिर से आता है.. और अनायास hi वो उसकी तुलना कुंदन से कर बैठती है
"कुंदन क मुकाबले 19 hi है"
ये वो सब्द थे.. जो प्रेमा क मन मैं नहीं, अपितु सब्दो क साथ बहार आये थे
प्रेमा अपनी बात पे धीरे से खुद hi मुस्कुरा उठती है और फिर चीनी का डिब्बा उठाने क लिए जैसे hi अपना एक हाथ ऊपर की तरफ उठती है
"Aaaaaaaaaahhhhh.... Kutteeeeeeeeeeeeeeeerrrr....."
प्रेमा क चिल्लाने की वजह थी वो दोनों हाथ जो उसकी कमर क दोनों तरफ लेपित गए थे.. जैसे मानो कोई अजगर उसे अपनी चपेट मैं लेने की कोशिश कर रहा हो.. पर प्रेमा क चिल्लाने की वजह सिर्फ इतनी नहीं थी बल्कि बात तोह ये थी की उसकी कमर पे लिपटे उन दोनों हाथों मैं से एक हाथ ने आगे बड़के नाभि वाले हिस्से को मुठी मैं जकड लिया था वो भी ऐसे की प्रेमा का पूरा जिस्म दर्द से तरप उठा था
ऐसी कारणवस प्रेमा की ऐसी कामुक ाः निकली जिसमें दर्द भी शामिल था
प्रेमा जल्दी से उन दोनों हाथों को खुद से अलग करती है और पलट क ग़ुस्से से पन्ना को देखती है.. ककी ये हरकत तोह उसी ने की थी
"दिमाग सही है.. किया है ये सब, अपनी हद मैं रहो"
"चल रहने दे पन्ना, इसके बड़े नकरें है.. वैसे भी हमे वो असली मंगलसूत्र पहले इसके पति क पास लेके जाना है और फिर 'सुंदरपुर गाओं' मैं किसी मालती को देना है.. पता नहीं कोण है ये औरत मालती और गाओं भी कितना दूर है न"
प्रेमा का पूरा जिस्म मानो सूखे पत्ते जैसे काँप उठा था, उसका चेहरा पीला पद गया था.. वो काँप सी उठी थी
अपने पति और मालती क नाम मैं कुछ तोह था ककी वो बुरी तरह दर से काँप गयी थी
"मैं.. मैं कुछ कहा कह रही हु, तुम्हे कही जाने की जरुरत नहीं है.. मेरी बात बात तोह सुनो"
दोनों भाइयों यानि Heera-Panna का चेहरे पे हसी खेल गयी थी, ककी दोनों hi समझ चुके थे की अब ये वही करेगी जो हम कहेंगे..
यानि वही मर्दों का अहंकार, औरत को हमेशा काम समझना
प्रेमा अब भी सोच रही थी की वो कैसे इस पुरे मामले को संभाले की तभी हीरा क फ़ोन बज उठता है, हीरा अपने फ़ोन को देखते हुए
"लो भाई.. भानु भाई का hi फ़ोन है"
प्रेमलता एक पल की भी देरी नहीं करती, वो लपक क आगे बढ़ती है और हीरा क हाथ से फ़ोन चीन लेती है, और फ़ोन रेसिवेद करके बोल पड़ती है
"तुम चाहते किया हो ?"
दूसरी तरफ दिन की तेज़ धुप मैं अपने खेत पे बानी झोपडी क अंदर चारपाई पे लेता हुआ भानु फ़ोन पे प्रेमलता की आवाज़ और उसमें मौजूद कंपकपी देख क काफी क्युच समझ लेता.. सायद इसीलिए उसके अधरों पे मुस्कान बिखर गयी थी
भानु- ाचा किया फ़ोन तुमने hi उठाया, ककी इन दोनों को सुंदरपुर मैं इस्थापित करने का काम सिर्फ तुम्ही कर सकती हो
प्रेमा को जैसे कुछ समझ नहीं आया, वो दोनों भाइयों की तरफ देखती है जिसमें से हीरा उसे hi देखा जा रहा था, वही पन्ना ने गैस पे छड़ी चाय मैं चीनी डालना सुरु कर दिया था..
वही चाय की लत
प्रेमा भानु को अचे से जानती थी.. उसे पता है की भानु बहुत आगे की सोचता है वो कभी भी जल्दबाजी मैं कोई काम नहीं करता
"गाओं मैं इस्थापित करना है, मैं कुछ समझी नहीं.. तुम्हारे दिमाग मैं चल किया रहा है ?"
भानु- मैं चाहता हु की ये दोनों सुंदरपुर आये, पर एक साधु क भैस मैं.. तुम तोह जानती हो की आज कल कोई जल्दी किसी पर भरोषा नहीं करते, पर अगर तुम खुद इनकी मदद करोगी तोह पुरे घर को इनपे भरोषा जरूर होगा
प्रेमलता दोनों को ऊपर से नीचे तक देखती हुई
"तुम्हे कहा से ये साधु जैसे लगते है"
दूसरी तरफ से भानु
"आज कल जो होता है वो लगता कहा है, उन दोनों मैं से हीरा ने अपने सुरुवाती दिनों मैं नाटक कंपनी मैं काम किया है.. और तुम लोगो का भेष बदलने मैं माहिर हो"
प्रेमलता- (जैसे उसे कुछ भी समझ नहीं आया था) मैं.. समझी नहीं ?
भानु- गाओं की रामायण मैं तुम लोगो का मेकअप किया करती थी, खास करके साधु और उन जैसे लोग का
प्रेमा को एक पल क लिए जैसे यकीं hi नहीं होता की ये बात भानु को कैसे पता है.. ककी वो खुद भी ये सब भूल चुकी थी, इस बात को आज 20 वर्षो से ज्यादा गुजर चुके थे
प्रेमलता- तुम्हे ये सब कैसे पता.. ये तोह बहुत पुराणी..
भानु- (दूसरी तरफ से फ़ोन पे हस्ते हुए) जितना तुम सोचती हो मुझे उससे ज्यादा पता है.. इसलिए जैसे कहता हु बस वही करती जाओ
प्रेमलता- तुम समझ नहीं रहे हो.. ये बहुत पुराणी बात है.. अब मुझे कुछ याद नहीं है, उस समय तोह मेरी शादी भी नहीं हुई थी
भानु ऐसे ठहाका मर क हस्ता है जैसे रावण हो
"ाचा.. जो औरत अपने ससुर क झूठे सिग्न करके गाओं की ज़मीन मैं झोल कर सकती है, वो मुझे सिखाएगी.. वैसे वो तुम्हारी सास का मंगलसूत्र उनकी आखिरी निशानी जो आज तक किसी को मिला नहीं.. अगर तुम्हारे पति को मिल गया तोह..."
भानु को अब अपनी बात भी पूरी करने की जरुरत नहीं ककी प्रेमा की साँसें उखाड़ने लगी थी.. भानु गाओं मैं चारपाई पे लेता हुआ हस्ता रहता है, मानो वही लेते लेते उसे प्रेमा का पीला पड़ता चेहरा नज़र आने लगा हो
प्रेमलता- (जोर से काँप रही थी) मैं.. मैं कर लुंगी, पर ये सब कभी भी..
भानु- ज़मीन क लिए अपनी सास को ज़हर दे दिया, ससुर क झूठे सिगनॉट करके खेती का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा अपने नाम करवा लिया.. मैंने तोह ये सब भी नहीं बताया आज तक किसी को.. क्यू है न ?
प्रेमा का पूरा जिस्म पसीने से भीगने लगा था.. वही पन्ना चाय को 3 कप मैं दाल चूका था वो एक अपने बड़े भाई की तरफ बढ़ाता है और दूसरे से खुद पीना लगता है.. उसने प्रेमा क चाय क कप को उसे देना भी जरुरी नहीं समझा ककी इस समय प्रेमा क चेहरे का पीला पैन दोनों भाइयों को बड़ा सुहाना लग रहा था, वैसे भानु और प्रेमा क बीच किया बात हो रही है इसकी उन्हें तनिक भी जानकारी नहीं थी
प्रेमा- तुम्हे ये सब याद दिलाने की जरुरत नहीं है.. मुझे.. मुझे सब याद है, आज तक तुमने जो भी कहा मैं वही किया है
भानु- (अपने जबड़ो को भीचते हुए उठ क बैठ जाता है.. और घुर्राटे हुए कहता है) कोई एहसान नहीं किया है, बदले मैं तुम्हारे काले राज़ आज तक बहार नहीं आये है.. और अगर चाहती हो की आगे भी ऐसा hi रहे, तोह तुम्हे पता है की वही करना होगा जो मैं कहता हु
प्रेमा- वही तोह कर रही हु.. तुम्हारे hi कहने पे मैंने कुंदन को फसाया, उससे झूट बोल क उसका और मालती का रिस्ता तोडा.. और अपने पति क झूठे सिग्नेचर करके उसके अकाउंट से 1 लाख रुपया निकल तुम्हे दिए.. आखिर कब तक मुझे तुम्हारी कठपुतली बन क रहना होगा
भानु- (सैतान जैसी हसी हस्ते हुए) सब कुछ बस जल्दी hi ख़तम होने वाला है.. और तुम्हे मेरा कहा इसलिए भी मन्ना होगा ताकि तुम्हारे परिवार सुरक्षित रहे.. याद है न
प्रेमा का पूरा जिस्म जैसे झुरझुरी खा जाता है..
भानु आगे कहता है
"और है.. अभी क लिए एक और काम है ?"
प्रेमलता- किया ?
भानु फ़ोन क दूसरे तरफ से कामिनी हसी हस्ते हुए
"उन दोनों को किसी चीज़ क लिए मन मत करना.. किसी भी चीज़ क लिए, तुम्हारे लिए कोनसी बड़ी बात है
पहले ससुर, फिर कुंदन.. क्यू है न"
भानु इसके आगे कुछ नहीं कहता ककी वो फ़ोन काट देता है.. ककी सच ये था की अब उसे कुछ भी कहने की जरुरत नहीं थी
इधर प्रेमा क लिए पूरी दुनिया उसकी आँखों क आगे नाच रही थी, वो अपनी hi बुराई क जाल मैं बुरी तरह फास चुकी थी
हीरा आगे बड़के प्रेमलता क हाथ से फ़ोन ले लेता है
हीरा- तोह आगे किया करना है ?
प्रेमलता जैसे कुछ पलों तक कुछ समझ hi नहीं प् रही हो.. पर फिर खुद को सँभालते हुए खुद से कहती है
'इस भानु क दर से hi मैंने अपने दोनों बच्चों को यहाँ से इतनी दूर हॉस्टल मैं पड़ने भेजा है.. और अब.., कोई रास्ता तोह निकलना hi पड़ेगा... एक मं... रास्ता तोह सामने hi है'
प्रेमलता ने खुद को संभालना सुरु कर दिया था, वो एक लम्बी सांस लेते हुए हीरा पन्ना की तरफ देखती है और मैक्सी क ऊपर से अपने एक मोठे उरोज को छूटे हुए कहती है
"सुरुवात कोण करेगा"
ख़ुशी पन्ना क चेहरे पे दिखने लगती है, और वो वही बात दोहराता है जो उसने यहाँ आने पे कही थी
"लूंगा तोह बस मैं.. हीरा भैया तोह बस देखना पसंद करते है"
प्रेमलता समझ चुकी थी की आज एक बार फिर से अपने जिस्म का सहारा लेना hi पड़ेगा.. जो उसके लिए कोई नयी बात नहीं थी
प्रेमा मन hi मन
'किया किया करना पड़ेगा.. ऐसा लगता है ये भानु कुछ बड़ा सोच रहा है, और अगर मुझे इसका पता लगाना है तोह इन दोनों को अपनी उँगलियों पे नाचना hi पड़ेगा और ऐसे मर्दो को गुलाम बनाने का एक hi तरीका होता है'
प्रेमा जो अब तक दर से भरी हुई थी अब वो तय कर चुकी थी की उसे आगे किया करना है, और चीज़ों को कैसे अपने हिसाब से लेके चलना है.. प्रेमा एक लम्बी सी सांस भर्ती है और अपनी मैक्सी को हल्का सा ऊपर उठाये हुए पन्ना की तरफ देख क मुस्कुरा पड़ती है
"आओ लूट लो"
प्रेमलता अब दर नहीं रही थी, बल्कि उसने ये बात मुस्कुरा क कही थी और अपनी ऐडा दिखते हुए हीरा की तरफ आँख भी मार दी थी और पन्ना की तरफ एक फ्लाइंग किश भी उछाल डाली
दोनों भक एक पल क लिए तोह जैसे चक्र hi गए थे, ककी जो औरत अभी अभी उनके आगे लचर नज़र आ रही थी.. अचानक वो चीज़ों को अपने हाथ मैं लेने लगी हो
हीरा खुद से कहता है
"साली.. ज्यादा hi पहुंची हुई है"
इधर प्रेमा बिना किसी विलम्ब क खुद hi अपनी मैक्सी उतर क हीरा क ऊपर फैक देती है.. जो उसके चेहरे से धीरे धीरे सरकते हुए नीचे गिरती है, पर इन चाँद पलों मैं hi हीरा को उस मैक्सी मैं बसी प्रेमा क जिस्म खुसबू मिल चुकी थी और उसके छोटे महाराज ने उछलना सुरु कर दिया था
हीरा- आअह्ह्ह.. किया खुसबू है तेरे कपड़ों की.. सस्न्नन्नन्नन्नफ़्फ़फ़फ़फ़..
पर नज़ारा तोह अभी बस सुरु hi हुआ था, ककी जैसे hi मैक्सी हीरा क चेहरे से अलग होती है उसके सामने एक भरते गदराये जिस्म की प्रेमा सिर्फ एक ब्रा पेंटी मैं कड़ी नज़र आती है
प्रेम अपनी कमर पे दोनों हाथों को रख क पन्ना की तरफ देख क कहती है
"एक बार चाहिए.. या बार बार"
प्रेमा का सीधा इशारा अपनी कातिलाना जिस्म की तरफ था
प्रेमा मन hi मन
'बस तेरा जवाब भी मेरे ससुर वाला होना चाहिए'
पन्ना तुरंत से अपने लुंड को मुठी मैं जकड क मसलते हुए
"बार बार.. साली तू चाहती किया है, हम भानु भाई को देखा नहीं देंगे"
प्रेमा धीरे से अपने ब्रा क उठती है जिससे उसकी एक दूध से भरी हुई चुकी की हलकी झलक दोनों भाइयों को मिलती है पर प्रेमा वापस से अपनी ब्रा को सही कर लेती है
"किया तुम दोनों को पूरा यकीं है की.. भानु तुम्हे कभी देखा नहीं देगा, मैंने तोह इतना सब किया उसके लिए पर देखो"
प्रेमा ने दोनों भाइयों क अंदर संख्या का एक बीज बो दिया था, जिसे पन्ना ने नकारने की कोशिश जरूर की थी.. पर हीरा की सोच अलग थी जो उसकी बात से भी साबित हो गयी
"किया चाहिए तुम्हे"
प्रेमा क चेहरे पे विजेता वाली मुस्कान खिल उठी
"अभी तोह कुछ नहीं, पर समय आने पे मांग लुंगी.. ककी आज तुम दोनों का दिन है"
प्रेमा इतना कहते हुए इस बार एक hi झटके मैं अपनी ब्रा को उतर क हीरा क मुंह से फैक देती है
हीरा- (पसीने मैं भीगी उस ब्रा की खुसबू उसके रोम रोम मैं आग भर जाती है) आआअह्ह्ह्ह.. ठीक है मैं इस बारे मैं जरूर सोचूंगा, पर वडा नहीं करता
प्रेमा अपनी दोनों बड़ी और भरी चूचियों को जिन्हे कोई भी एक हाथ से जकड नहीं सकता था.. उन्हें पियर से मसलते हुए
"अभी क लिए इतना काफी है.. तोह पन्ना.."
प्रेमा, पन्ना की आँखों मैं देखते हुए घूम क कड़ी हो जाती है और किचन की रैक पे दोनों हाथों को रख क अपनी भरी मटके जैसी गांड को पीछे की तरफ निकल देती है
दोनों भाइयों ने बहुत सी छूट और गांड देखि है.. पर प्रेमा तोह बस प्रेमा है
पन्ना आगे बढ़ने hi वाला था की उससे पहले hi हीरा आगे बाद जाता है.. और बिना देरी क प्रेमा की कोमल उभरी हुई गांड को पियर से सहलाता है और फिर जोर से मरता है
'Chatttaaaaakkkkkkkkkkkkkkk"
प्रेमा- (दर्द से तिलमिला पड़ती है) आआआह्ह्ह्हह्ह... मादरचोद... कुत्त्तीये
दोनों भाई है पड़ते है, पर हीरा का अभी कहा हुआ था वो दोनों हाथों से प्रेमा की पेंटी को पकड़ क एक hi बार मैं उसके पैरों तक उतर देता है
प्रेमा भी अपने पैरों को उठा क अपनी गीली पेंटी को पूरी तरह आज़ाद कर देती है.. हीरा जल्दी से पेंटी को उठाया है तोह उसे गीलापन महसूस होता है
हीरा का पूरा जिस्म गंगना सा जाता है वो पेंटी को अपने मुंह पे रख क एक लम्बी सी सांस लेता है मानो उस पेंटी मैं बसी खुसबू को पूरी तरह अपने अंदर बसा लेगा
"आआह्ह्ह्ह.. किया खुसबू है... संनननफफ्फ्फ्फहहहह.."
मनोहर की पत्नी का जिस्म भी गरमी से तरप उठता है, ककी वो अपना चेहरा पीछे घुमा क जब देखती है की हीरा उसकी पेंटी की खुसबू यु सुंग रहा है तोह उसकी योनि भी गीली होने लगती है
प्रेम मन hi मन
'ये दोनों बहुत काम आ सकते है'
प्रेमा ये सोच hi रही थी की सामने अब जो होता है उसे देख क वो अपने आप को रोक नहीं पाती और अपना एक हाथ अपनी गीली होती योनि पे रखने को मजबूर हो जाती है
ककी हीरा ने अब उस पेंटी को अपने मुंह मैं रख लिया था और ऐसे चूस रहा था जैसे उसमें सेहद लगा हो
प्रेमा का पूरा जिस्म कांपने लगता है उत्तेजना की आदिकता से.. उसके निप्पल्स तन चुके थे और छूट क अंदर भर भर क गर्मी का सैलाब उमड़ने लगा था
हीरा अपनी आँखों को बंद किये हुए कास कास क पेंटी को अपने पुरे मुंह मैं भर क चूसे जा रहा था, और ये नज़ारा देख क प्रेमा अपनी योनि की दरारों क बीच अपनी ऊँगली चलने लगी थी पर तभी उसकी आअह्हह्ह्ह्हह फुट पड़ती है
"aaaaaaahhhhhhhhhh... Maaaaaaaaaaaaa"
प्रेमा की इस कामुक ाः की वजह थी पन्ना क मजबूत हाथ को पीछे से आगे उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को डायबच चुके थे
पन्ना- आअह्ह्ह्ह.. किया मुलायम चूचिया है.. उफ्फ्फफ्फ्फ़.. आज तोह मज़ा hi आ जायेगा
प्रेमा रैक पे दोनों हाथों को अछेसे जमा लेती है जिससे उसकी गांड और ज्यादा बहार को निकल आती है और उसके पीछे खड़े पन्ना क बहार लटक रहे काले हैवान से चिपक जाती है
प्रेमा तोह नंगी थी hi.. और पन्ना का कला हैवान भी उसकी पेंट से बहार hi था, जिस वजह से वो अब प्रेमा की नंगी गांड की गहरी दरार क बीच पूरी तरह अपनी जगह बना चूका था
अपनी गांड और योनि पे एक साथ इतने गरम लुंड की छुवन से प्रेमा की जिस्म मचल पड़ा था
"आआअह्हह्ह्ह्हह.... उफ्फ्फफ्फ्फ़...."
प्रेमा पानी आँखों को बंद किये हुए अपने होंठों को काटने पे मजबूर हो गयी थी, पर उसे होश भी तुरंत आ जाता है ककी पन्ना क काले लुंड ने उछाल क सीधा प्रेमा की योनि पे वार कर दिया था
प्रेमा एक बार फिर से अपने होंठों को काटते हुए आआह्ह्ह भरने पे मजबूर हो जाती है
"ेस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह... माआआ..."
प्रेमा अपना चेहरा पीछे घुमाकर
"आप थोड़ा धीरे मसलो.. आज पूरा रास पीलूँगी अपने जिस्म का.. ेस्स्स्सह्ह्ह्ह"
प्रेमा का पूरा जिस्म गरम होने लगा था, भानु और अपने घर की समस्त परेशानियां वो इस समय भूल चुकी थी
पन्ना भी अपने दोनों हाथों की मजबूत उँगलियों क बीच प्रेमा क काले निप्पल्स को मरोड़ने लगा था.. जिससे रह रह कर आज इस भरे जिस्म मैं तरंग उठ रही थी
वही हीरा भी चालू हो चुके इस कार्यक्रम को देखने मैं मस्त हो चूका था.. ककी अब उसने पेंटी को चूस चूस क उसका सारा रास निचोड़ क उसे दूर फैक दिया था और जल्दी जल्दी अपनी पेंट की चैन खोलने मैं व्यस्त हो चूका था
वही हीरा का छोटा भाई अपने काम मैं पूरी म्हणत कर रहा था, उसका खड़ा हो चूका लुंड प्रेमा की गांड और योनि पे बार बार टकरा रहा था.. ऐसा लग रहा था जैसे वो बस मौका देख रहा था, इस कामुक रसीले बिल मैं घुसने क लिए
प्रेमा अपना एक हाथ पीछे ले जेक पन्ना क सर पे रखती है तोह उसका हाथ पकड़ क उसकी कोमल गोरी उँगलियों को एक साथ अपनी मुंह मैं रख क चूस लेता है
"सललललररररररपपपप....."
प्रेमा- (कामुकता क नसे से उसकी आँखें भोझिल होने लगी थी) आआअह्हह्ह्ह्हह.. माआआ....... कहा थे तुम आज से पहले
हीरा जो अब अपने लुंड को बहार निकल चूका था, वो अपने लुंड की गन्दी चमड़ी को पीछे करते हुए एक सवाल पूछ लेता है
"वैसे उस कुंदन का बड़ा है या मेरे भाई का"
कामुकता मैं डूबी हुई प्रेमा को ये सवाल सुनाई पड़ता है तोह ये याद अत है जब उसने पन्ना क लुंड को देख क किया कहा था
'ये तोह कुंदन क आगे 19 है'
एक पल क लिए तोह प्रेमा को लगता है की हीरा ने उसकी बात कैसे जान ली पर फिर वो है पड़ती है और जब जवाब देने क लिए पीछे मुड़ती है, जहा उसकी नज़रें सीधा हीरा क लुंड पे पड़ती है जिसे वो बहार निकल क मसलने लगा था
प्रेमा- (आश्चर्य से) हैईईई.. री ऐसे मुसल उफ्फ्फ, और तुम्हे बस देखना पसंद है ?
हीरा और पन्ना दोनों hi है पड़ते है तभी पन्ना अपना एक हाथ नीचे ले जेक प्रेमलता की योनि को मुठी मैं दबोच लेता है वो भी ऐसे hi प्रेमलता उछाल सी पड़ती है
प्रेमलता- (अपने पंजो पे कड़ी हो गयी थी) आआआहहह... कमीने... ेस्स्स्सह्ह
अपने छोटे भाई क हाथों यु किसी औरत को मसलते हुए देख हीरा क अंदर की गर्मी पुरे आश्मान को चुने लगती है वो जोर जोर से अपना लुंड मसलने लगता है.. जिससे उसका मोटा टोपा उसकी चमड़ी से बहार आकर पुरे किचन को अपनी कामुक सुगंध से भर देता है
हीरा- (अपने लुंड को जोर जोर से मसलते हुए) आअह्ह्ह्ह.. शाब्बाश छोटे, रगड़ दे साली को.. आह्ह्ह्हह
प्रेमलता कामुकता की आग मैं ताप्ती हुई
"आअह्ह्ह.. दोनों क दोनों पुरे कमीने हो"
प्रेमलता की इस्तिथि थोड़ी सही होती है और वो वापस से किचन की रैक पे अपने हाथ जमा लेती है, पर पन्ना अपना अंदाज़ नहीं बदलता.. ककी वो मनोहर की खूबसूरत पत्नी क दोनों कैसे हुए उरोजों को एक साथ जकड लेता है और पूरी बेहरहमी से मसलते लगता है
पन्ना, प्रेमा की चूचियों का मर्दन ऐसे कर रहा था मानो आता गूंध रहा हो.. प्रेमा भी अपनी गांड को पन्ना क काले लुंड पे दबाने लगती है, पर इस बीच वो कई बार हीरा क भयावह लुंड को ताड़ती जरूर है
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह....... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ असली चीज़ तोह वह है.. आअह्ह्ह
ये बात पन्ना और हीरा दोनों को सुनाई पड़ी थी, जिस वजह से उसके हाथ अपने लुंड पे और जोरो से चलना लगे थे.. वही पन्ना अपना लुंड प्रेमा की छूट की दरार मैं सत्ता देता है
प्रेमा को ऐसा लगता है मानो कोई गरम लोहे की रोड उसकी छूट की दरार को खोलने की कोशिश कर रही हो, और पन्ना भी पीछे नहीं रह जाता है वो प्रेमा को उसी रैक पे झुक क पूरा दबा देता है.. जिससे उसका लुंड सही जगह पे सेट हो जाता है
प्रेमा- ाः बड़ी जल्दी है.. आआह्ह्ह हैईईईई कुट्ट्टीीी.... इतनी जल्दी किया थी
पन्ना का लुंड जैसे hi प्रेमा की छूट क गहराई को चूमता है, वो अपना काबू खो देता है और एक जोरदार दक्का उस रास बहती हुई छूट मैं लगता है.. जिस कारणवस प्रेमा की चीख फुट पड़ी थी
पन्ना अपना काबू खोते हुए प्रेमा को वही रैक पे कसके दबा देता है और अपना लुंड जो उस छूट मैं आधे से ज्यादा घुस चूका था उसे वापस बहार तक खींचता है.. पर पूरा नहीं, टोपा अब भी छूट की फाकों को चुम रहा था
पन्ना एक हाथ से प्रेमा को रैक पे दबा क रखता है और दूसरे हाथ से उसका हाथ जकड लेता है और उसी की पीठ से जमा देता.. और वापस अपने खेल मैं लग जाता है
वो अपना लुंड को रास चोरटी छूट मैं वापस उतर देता है, प्रेमा की छूट की गीली फाकों को रगड़ता हुआ उसका लुंड गहराई मैं जेक रुकता है और प्रेमा क जिस्म का रोम रोम दर्द और कामुकता की तरंगो से भर उठता है
प्रेमा- हीी कमीने.. अभी तोह सही से गीली भी नहीं हुई थी.. आह्ह्ह्ह कुत्त्ते मादरचोद.. भड़वे
प्रेमा क मुंह ऐसे संस्कारी सब्दो को सुनकर हीरा को सबसे ज्यादा मज़ा आता है, ककी वो अब जोर जोर से अपना लुंड मसल रहा तह
हीरा- (अपने लुंड को ऊपर से नीचे.. और नीचे से ऊपर की तरफ रगड़ते हुए) आअह्ह्ह्ह.. ये हुई न बात छोटे, पहाड़ दाल साली की छूट.. आआआआह
हीरा का जिस्म कैंप रहा था, ककी वो जोर जोर से अपना लुंड मसल रहा था.. वही पन्ना भी अपने बड़े भाई की बात सुनकर जोश से भर गया था
वो वापस अपना लुंड बहार क लिए खींचता है और फिर से अंदर उतर देता है.. जिससे प्रेमा का पूरा जिस्म थरथरा सा जाता है, ककी पन्ना ने उसकी सुखी छूट मैं hi लोढ़ा उतर दिया था
अपनी छूट की गहराई मैं लुंड लेना प्रेमा क लिए कोई नया नहीं था, पर पन्ना का लुंड कोई बच्चों का लुंड नहीं था, वो एक तगड़ा काला सांप था.. जो मनोहर की पत्नी की छूट को अंदर तक दर्द से भर रहा था
प्रेमा का पूरा चेहरा धीरे धीरे लाल पड़ने लगा था.. ककी पन्ना क दकके अब लगातार बढ़ते जा रहे थे.. वो अपनी गति पाने लगा था
पन्ना- आआह्ह्ह्ह.. हम भाइयों का साथ चाहिए तोह हमारी रखेल बनना होगा, फिर तू जो कहेगी हम वही करेंगे.. क्यू है न भैया
हीरा- (अपने लुंड क टोपे पे अपने खुद क नाख़ून लगते हुए) आआह्ह्ह.. सही कहा, तू कोई बची नहीं है, पहुंची हुई औरत है.. आअह्ह्ह तेरे लिए भानु भाई से देखा करेंगे तोह बदले मैं कुछ खास तोह मिलना hi चाहिए.. आअह्ह्ह
हीरा अपने लुंड को जोरो से मसलते हुए अपनी बात कहता है
प्रेमा जो पन्ना क जोरदार दक्कों से हिल रही थी और उसकी साँसे उखड रही थी
"आआह्ह्ह्ह... कमीने तेरे छोटे भाई का लुंड मेरी छूट मैं है और भला इससे ज्यादा किया चाहिए"
पन्ना एक जोर का थपड प्रेमलता क गाल पे लगते हुए
"चटक......."
पन्ना- आअह्ह्ह.. साली ये सब तोह तू वैसे hi करवाती, वर्ण भानु भाई तेरे राज़ सबके सामने ला देते.. तोह बता हम तेरे लिए भानु भाई क साथ गद्दारी क्यू करे
प्रेमा उसी प्रकार रैक पे झुकी हुई अपनी छूट मैं पन्ना क जोरदार दकके कहते हुए अपना हाथ आगे बड़ा क अपना फ़ोन उठती है और उसमें कुछ खोल क उसे हीरा की तरफ उछाल देती है
हीरा जो इसके लिए तैयार नहीं था.. पर जल्दी से अपना लुंड चोर को फ़ोन को बीच हवा मैं hi लपक लेता है
हीरा- (ग़ुस्से से) साली रंडी फ़ोन क्यू फेक रही...
हीरा इतना hi बोल पता है की उसके आगे क सब्द वही क वही जैम जाते है.. ककी उसकी नज़र फ़ोन मैं एक फोटो ने पद चुकी थी.. जिसे प्रेमलता ने खोल क दिया था
पन्ना- (प्रेमा की छूट मैं जोर जोर से दकके मरते हुए) आआआहहह.. किया हुआ भैया, आपके जबान को लकवा क्यू मार गया ?
हीरा ने जैसे अपने छोटे भाई की बात सुनी hi न हो
"किया माल है.. पर अपनी किस्मत मैं ऐसी जवानी.."
हीरा अपनी बात भी पूरी नहीं कर पाटा और प्रेमा अपनी छूट मैं मोटा लुंड लिए हुए बोल पड़ती है
प्रेमा- (चुदाई क जानदार दक्कों की वजह से पूरी तरह काँप रही थी.. ककी पन्ना क लुंड की ठोकर बार बार उसकी bache-dani तक लग रही थी) मेरी बेटी है.. मेरा साथ डोज तोह ये मिलेगी
प्रेमा की बात सुनते hi हीरा पन्ना दोनों का मुंह खुला का खुला रह जाता है.. हीरा कभी फ़ोन की उस फोटो को देखता तोह कभी प्रेमा को, उसकी तोह जैसे आवाज़ निकलना hi बंद हो गयी थी
पन्ना से भी सब्र नहीं हो पता वो गपक से प्रेमा की छूट से अपना लुंड निकलता है और दौर क अपने बड़े भाई क हाथ से फ़ोन ले लेता है
प्रेमा की छूट से निकला उसका काला लुंड छूट से सना हुआ पूरी तरह खड़ा था और बड़ा hi खतरनाक लग रहा था.. पर जब उसने उस फोटो को देखा तोह उसका लुंड से रास की हलकी सी धार बह उठी थी
वही पन्ना भी अपने भाई की तरह सकते मैं आके प्रेमा को देखने लगता है.. जबकि प्रेमा अपनी छूट से टपकते रास को अपने हाथ से पूछते हुए खुद hi सही से कड़ी होती है और दोनों भाइयों की हालत देख क हसने लगती है
"बताओ.. भानु का साथ देने पे ऐसा कुछ मिलेगा"
हीरा जैसे होश मैं लौटा
"तू झूट बोल रही है.. अगर ये सच मैं तेरी बेटी है तोह तू भला क्यू.. ?"
प्रेमा- (अपनी गन्दी सोच का साबुत देते हुए) घर बेटे से चलता है.. बेटी से नहीं, तोह बताओ.. वर्ण आओ अपना काम पूरा करो और निकलो
हीरा और पन्ना एक साथ
"हम वही करेंगे जो तू कहेगी"
हीरा अकेला आगे कहता है
"पर याद रहे. हमसे झूट बोलै या धोका दिया तोह ाचा नहीं होगा"
प्रेमा अपनी छूट मैं होते दर्द की वजह से अपनी योनि पे उंगलिया फिरते हुए
"मेरे लिए खतरा भानु है.. तुम दोनों नहीं, वैसे भी अगर तुम दोनों मेरा साथ डोज तोह मेरी जैसी रखेल भी तौफे मैं मिलेगी"
प्रेम अपनी बात कहते हुए मुस्कुरा पड़ती है और वही दोनों हाथों को जमीन मैं टिका क किसी कुटिया जैसे बन क पैन की तरफ आगे बढ़ने लगती है
प्रेमा का ये अवतार देख क दोनों भाइयों क लुंड उछाल मरने लगते है
पन्ना अपने लुंड को सहलाते हुए, उस फोटो को देख क कहता है
"ऐसी छूट छोड़ने क लिए तोह मैं भानु किया.. उसके जैसे 10 को देखा दे दू"
हीरा भी फोटो को देख क लार टपकते हुए
"सही कहा छोटे.. किया माल है साली"
प्रेमा अपने घुटनो पे चलती हु पन्ना क करीब आ चुकी थी और दोनों घुटनो पे बैत क अपनी जीभ को बहार निकलती है और जो लुंड अभी अभी उसकी छूट की गहराई को चुम रहा था उसे चुम लेती है
"उम्मम्मम्म...."
हीरा का लुंड वापस से मचल पड़ता है वो वापस उस फोटो को देखने की कोशिश करता है पर तब तक फ़ोन वापस लॉक हो चूका था.. ऐसा लगता है मानो फ़ोन भी लुकाछुपी खेल रहा हो
प्रेमा अपनी hi छूट क रास मैं साणे लुंड क टोपे को चूमते हुए बड़ी hi खूबसूरत लग रही थी, पन्ना अपना लुंड पकड़ता है और उसे ऊपर उठा देता है जिससे उसके बड़े बड़े गंदे ाँद जिनसे एक तेज़ पसीने की भभक सी निकलती है और प्रेमा क नाचने मैं भर लगती है
एक पल क लिए तोह प्रेमा को ऐसा लगता है जैसे उसे उलटी हो जाएगी, पर इस समय वो जिस रस्ते पे थी वह से लौटने का कोई सवाल नहीं था.. इसलिए न च क भी उसे पन्ना क उन गंदे और पसीने से भरे ाँद उसे अपने मुंह मैं भरना hi पड़ता है
"उम्मम्मम्म... सललललररररपपपप.... सरररलललललूउपपपपपप... उम्मम्मम्मम..."
प्रेमा अपनी साँसों को रोक क पन्ना क एक ाँद को पूरा मुंह मैं भर क ऐसे चुस्ती है मानो उसका रास निचोड़ लेगी..
हीरा ने भी सायद आज से पहले ऐसा नज़ारा नहीं देखा होगा ककी उसका लुंड तोह हिलोरे मरने कागता है, मनो अभी क अभी रास बहा देगा
प्रेमा खुद से पन्ना का लुंड पकड़ लेती है और उसे और अचे से उठा क एक साथ दोनों ाँद को अपनी आँखों क सामने ला क सोचती है
'चींईईई.. कितने घिनोने है'
पर इस समय उसके पास और कोई रास्ता भी नहीं था, इसलिए उसे वापस से ाँद को मुंह मैं भर क उसे चूसना hi पड़ता है
"सररररलललपपपप.... सलललललूउपपपपप.... उम्मम्मम्मम.... सररररररररपपपपपपपप....."
पन्ना- आअह्ह्ह्हह.. सालियी माँ ऐसी है तोह बेटी कैसी होगी... आआह्ह्ह्हह्ह चूस रैंड.. चूस
हीरा का हाल और बुरा होने लगता है, वो प्रेमा क सर पे अपना हाथ रख क उसे सहलाने लगता है.. और दूसरे हाथ से जोर जोर से अपना लुंड मथने लगता है
प्रेमा अब किसी आज्ञाकारी औरत जैसे पन्ना क मोठे ाँद चूसे जा रही थी.. बीच बीच मैं उसके मुंह मैं गंदे बाल भी आ जाते पर वो रूकती नहीं, बल्कि उसकी रफ़्तार बाद hi रही थी
प्रेमा कभी एक ाँद को मुंह मैं भर क चुस्ती तोह कभी दूसरे ाँद को.. वो पन्ना क लुंड को कसके ऊपर खींच क ुहाए हुए थी, जिससे पन्ना को हल्का दर्द भी हो रहा था पर मज़ा ऐसा मिल रहा था की वो मन भी नहीं कर रहा था
"सररररलललपपपप.... सलललललूउपपपपप.... उम्मम्मम्मम.... सररररररररपपपपपपपप....."
प्रेमा जी भर क पन्ना क ाँद को चूस चूस क अपने थूक से चिकना कर देती है.. जो ाँद कुछ समय पहले गंदगी और पसीने से भरे हुए था, वो अब मालती क बड़े भाई की पत्नी क थूक से चमकने लगे थे
"उम्मम्मम्मम.... आआह्ह्ह्हह्ह.... उम्मम्मम...... सररररलललपपपप.... सलललललूउपपपपप.... उम्मम्मम्मम.... सररररररररपपपपपपपप....."
प्रेमा क ाँद चूसने का अंदाज़ ऐसा था की बेचारा हीरा अपना काबू खो देता है और अपना एक हाथ नीच करके जैसे hi प्रेमा की मोती चुकी को पकड़ता है उसके लुंड से सफ़ेद बारिश होने लगती है.. जिसे वो बिना किसी देरी क प्रेमा क काले घने बालों पे बर्षा देता है
प्रेमा जब तक कुछ समझती उसके काले बालों पे सफेदी दिखने लगती है
प्रेमा- (जल्दी से उठते हुए) अरे ये किया कर दिया.. पता है कितनी मुश्किल से पार्लर जा जा क बाल सेट करवाए थे और तुम..
प्रेमा आगे कुछ नहीं कहती बस ग़ुस्से से हीरा को देखती रहती है
पन्ना हस्ते हुए अपने लुंड को मुठी मैं जकड क सहलाता रहता है और कहता है
"हमारी मदद चाहिए तोह ये सब की आदत दाल लो"
पन्ना की बात पे हीरा भी है पड़ता है
प्रेमा अपने बाल की परवा करना चोर देती है, ककी वो समझ गयी थी की ऐसे लोगो से और किया उम्मीद की जाये.. कुंदन की हरकतों क आगे तोह ये दोनों भी बचे hi है
कुंदन की हरकतों को सोच क एक पल क लिए प्रेमा क चेहरे पे मुस्कान खेल जाती है, पर दोनों भाइयों को ऐसा लगता है जैसे ये ख़ुशी उनकी वजह से है
इस बार आगे बढ़ने का काम पन्ना नहीं अपितु उसका बड़ा भाई हीरा करता है.. वो आगे बढ़ता है और प्रेमा की दोनों नंगी चूचियों को पियर से सेहला देता है.. जिसपे प्रेमा मुस्कुरा उठती है
"मुझे लगा तुम्हे सिर्फ देखना पसंद है"
हीरा सिर्फ मुस्कुराता रहता है कुछ बोलता नहीं.. ककी उसने दोनों चूचियों क काले जामुन को एक साथ उँगलियों क बीच लेके ऊपर से तरफ उठा दिया था, जिससे एक जोर का दर्द महसूस होता है प्रेमा को और न च क भी उसे अपने पंजो को उठा पड़ता है.. ककी हीरा लगातार उसे उसके निप्पल्स से दबोच क उठा रहा था
प्रेमा- (इतना जोर का दर्द होता है की उसकी आँखों मैं आंसू भर आते है) आअह्ह्ह्ह.. माआ..... कुत्तत्ते किया कर रहा है.. माआआआ
प्रेमा को यु तड़पते हुए देख क दोनों hi भाई हसने लगते है.. तभी छोटा भाई पन्ना आगे बढ़ता है और प्रेमा को अपने कंधे पे उठा लेता है, प्रेमा एक भरे जिस्म की औरत थी पर उसने इतनी आसानी से उठा लिया था मानो वो कोई नयुवति हो
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह.. कहा ले जा रहे हो
पन्ना जैसे hi उसे अपने कंधे पे उठा क आगे बढ़ने क लिए घूमता है हीरा पीछे से उसकी मटके जैसी नंगी गांड पे एक जोर का थप्पड़ जड़ देता है
"चटाक्क्क्क......"
प्रेमा एक बार फिर से तरप पड़ी थी
"आअह्ह्ह्हह... हरामजादे कुट्टी... कामिनी.. मारररर गयीईइ.. री"
दोनों भाई एक साथ सैतानो जैसी हसी है पड़ते है, और जल्दी hi पन्ना, प्रेमलता को अपने कंधे पे उठाये हुए हॉल मैं ले जाता है और वही पड़े सोफे पे पटक देता है
पर इससे पहले की प्रेमा खुद को संभालती हीरा उसे पकड़ क घुमा देता है.. यानी अब प्रेमा सोफे पे घूम क पड़ी हुई थी यानि उसकी कोमल गांड पन्ना की आँखों क आगे थी
पन्ना तुरंत आगे बड़के अपने दोनों हाथों को उसकी कमर क नीचे ले जेक उसे ऐसे कर देता है जैसे मानो अब प्रेमा सोफे क सहारे कुटिया बानी हो
प्रेमा- आअह्ह्ह किया कर रहे हो तुम दोनों भाई.. आअह्ह्ह्ह
प्रेमा जैसे hi मुंह खोलती है हीरा वापस से उसकी गांड पे थप्पक जड़ देता है, अब तक उसकी गांड पूरी लाल हो चुकी थी और उसपे हीरा की उँगलियों क निशान नज़र आने लगे थे
हीरा आगे बढ़ता है और प्रेमा की गांड की दरार पे अपनी ऊँगली को आगे पीछे.. ऊपर नीचे करने लगता है. प्रेमा क जिस्म मैं गुड़गुई सी होने लगती है
कामुकता क तूफान क बीच ऐसी छोटी छोटी हरकते ऐसे पलों का मज़ा कई गुना बड़ा देती है
प्रेमा- आअह्हह्ह्ह्हह.... ेस्स्स्सह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कूटटटटीईईई....
पर प्रेमा की सिसकारी जल्दी hi तेज़ दर्द भरी चीख मैं बदल जाती है, ककी हीरा ने मुस्कुराते हुए अपनी बीच वाली मोती ऊँगली को उसकी गांड मैं गपक से घुसा दिया था
हीरा हस्ते हुए
"बड़ी गरम गांड है तेरी... साली किया कहती है"
प्रेमा- (दर्द से बिलखती हुई) कुट्टी.. वो खाने की नहीं, निकलने की जगह है.. ेस्सह्ह्हह्ह.. निकर हरामी अपनी ऊँगली को.. आआह्ह्ह्हह
प्रेमा दर्द से तृप्ति हुई घूमने की कोशिश करती है, पर पन्ना जल्दी से उसे दबोच लेता है ताकि वो कुछ कर न सके
हीरा हस्ते हुए गपक गपक करके अपनी मोती ऊँगली से प्रेमा की गांड छोड़ने लगता है.. प्रेमा मचलते हुए अपनी गांड इधर उधर घूमने लगती है ये सोच क की सायद इससे हीरा की मोती ऊँगली उसकी गांड से बहार निकल जाएगी, पैर हीरा तोह था hi हरामी वो और ज्यादा अंदर तक अपनी ऊँगली को घुसा देता है
प्रेमा- (दर्द की वजह से चेहरे की नसे तक नज़र आने लगती थी) आअह्ह्ह्ह.. कुत्त्ते हरामी, छूट क साथ जो करना है कर न.. हीी माआ... रीई..... कुत्ते जिसे देखो मेरी गांड क पीछे hi पड़ा रहता है
हीरा, प्रेमा की गांड से अपनी ऊँगली निकलते हुए दूसरे हाथ से वापस उसकी गांड पे जोर से थप्पड़ जड़ देता है
"कुट्टी.. हरामी.. सब मेरी गांड क पीछे क्यू पड़े रहते है.. हीी री..."
हीरा ने जो ऊँगली अभी अभी प्रेमा की गांड से निकली थी उसे अपने मुंह मैं रख क चूसते हुए कहता है
"ककी तेरी गांड मैं बड़ा स्वाद है"
प्रेमा दर्द से तरप उठी थी पर हीरा की हरकत और बात पे उसे भी हसी आ जाती है, पर खेल तोह अब अपने अंतिम पड़ाव तक आ चूका था.. इसलिए पन्ना बिना देरी क प्रेमा को उसकी कमर से जकड क वापस कुटिया जैसे बना देता है और अपना गरम जलता हुआ लुंड गांड क होल से छुआ देता है
प्रेमा- (दर से काँप उठती है) नहीं.. नहीं.. गांड मैं नहीं.. नहीं.. पन्ना देखो.. हैईईई माआ कुटटी हरामी.. सुवर..... सबको मेरी गांड से क्यू दुश्मनी है.. हीी री..... कुट्टी... माअररर्र गयीईइ.. रईईईई
हीरा हस्ते हुए वापस अपना लुंड मसलने लगता है और प्रेमा को देखते हुए कहता है
"कहा न.. तेरी गांड मैं बड़ा स्वाद है"
प्रेमा दर्द से तरप रही थी, वो जोर जोर से सोफे पे मरते हुए
"Aaaaaaaaaahhhhh... Maaaaaaaaaaaa.... कुत्ते तोह आ खा ले मेरी गांड.. तेरे मुंह मैं हग देती हु.. हैई मा... कामिनियी...... माआररररररर गयीईइ.... रईईईई.... Maaaaaaaaaaaaaaaa.... हीी...... रईईईईई... Maaaaaaaaaaaa.... निकल कुत्ते.... आआअह्ह्ह्हह... बहुत जोरो से दर्द हो रहा है.. मायआ.... माअररर्र... गईइइइइइ.... मैं... आआअह्ह्ह"
पर पन्ना कहा रेहम करने वाला था, उसका जोश तोह जैसे और बाद गया था, तभी तोह उसने बिना लुंड पीछे खींचे अपना बचा हुआ लुंड भी गांड मैं अंदर उतर दिया
प्रेमा को ऐसा लगता है जैसे उसकी गांड को कोई दोनों हाथों से चीयर रहा हो.. उसकी आँखों क आगे दिन मैं hi चाँद टारे नज़र आने लगे थे
"आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..... Maaaaaaaaaa.... निकल हरामी कुत्त्तीये... मायआ...."
प्रेमा सूखे पत्ते जैसे काँप रही थी वही पन्ना अपना लुंड वापस खींचता है तोह उसके लुंड क साथ साथ प्रेमा की गांड की चमड़ी भी किचन लगती है, जिससे प्रेमा को आनंद और एक तीव्र दर्द एक साथ होता है
"नहीं.. आअह्ह्ह्हह कुटटी सुवर... मैं मर जाउंगी.. कुत्ते देख तोह तेरा कितना बड़ा है.. हीी रीई... मा... मुझसे सहा नहीं जा रहा.. हैई माआ.... हरामजादे.. सुवर..."
पर पन्ना को तोह सिर्फ मज़ा hi मिल रहा था, प्रेमा की गांड की गर्मी से भी और उसे तड़पते हुए देख क भी.. यानि दोनों तरह से
पन्ना- (अपना लुंड बहार खींच क वापस अंदर घुसते हुए) आअह्ह्ह्ह... साली की गांड बहुत कासी है भाई
ये सुनकर जहा प्रेमा को ग़ुस्सा आता है वही हीरा का जोश और ज्यादा बाद जाता है.. वो प्रेमा क चेहरे क सामने खड़ा होक अपने विकराल लुंड को मथने लगता है
प्रेमा- आअह्ह्ह्हह... कुत्त्तीये..... सुवर हीी री.... हरामी.. कैसे हरामियों क बीच फास गयी हु.. आअह्ह्ह पहले वो कुंदन और अब ये दोनों.. कुत्तों को मेरी गांड से न जाने कोनसी दुश्मनी है.. अह्ह्ह्हह
पन्ना हस्ते हुए अपना लुंड वापस खींचता है और जड़ तक वापस अंदर तक उतर देता है, प्रेमा बार बार कोशिश कर रही थी की वो किसी प्रकार बच सके
पर जैसे पन्ना क दक्कों मैं दम था वैसे hi उसकी पकड़ मैं भी, वो जोर जोर से प्रेमा की गांड का कचूमर बनाने मैं लगा हुअत है.. और उसकी हालत देखते हुए हीरा अपने लुंड की लस्सी निलने की पूरी कोशिश कर रहा था
इस समय मैं कामुकता का तूफान आया हुआ था.. तीनो hi पसीने मैं भीग चुके थे, पर कोई भी रुक नहीं रहा था.. माफ़ करे प्रेमा को चोर क ककी वो तोह लगातार अपनी गांड बचने मैं लगी हुई थी
पर आज उसका और उसकी गांड का बच पाना संभव नहीं था.. ये कामुक खेल अगले 20-25 मं तक यही जारी रहता है
"आआआआहहहहह.... कुत्ते और कितना छोड़ेगा.. आअह्ह्ह पहाड़ hi देगा किया मेरी गांड को.. आह्ह्ह्ह.. मा.. बस कर कुट्टी.. ऐसा लग रहा है जैसे गांड मैं लाल मिर्च भरी हो.. रुक जा कुत्ते.. हरामी मादरचोद"
प्रेमलता जितनी ज्यादा गालिया दे रही थी.. पन्ना उतनी hi जोर जोर से उसकी गांड का कचूमर निकल रहा था, कभी कभी तोह एशिया लगा था मानो वो जान क पन्ना को ग़ुस्सा दिला रही थी
प्रेमा को यु मचलते और तड़पते हुए देख क सबसे ज्यादा सुकून और मज़ा हीरा को hi आ रहा था ककी वो अपने लुंड को मसलने क साथ साथ अपनी बड़ी बड़ी लटकती ाँद से भी खेल रहा था.. उसका मुंह खुला हुआ था और कुत्ते सामान हाफ रहा था, पर उसका हाथ रुक नहीं रहा था
समय क साथ साथ पन्ना का लुंड आसानी से अंदर बहार होने लगा था.. सायद उसके लुंड ने अपने लिए रास्ता और जगह दोनों बना लिए थे
पर प्रेमा अब भी वैसे hi मचल रही थी, उसका पूरा जिस्म पसीने मैं भीगा हुआ था और कुटिया सामान हाफ रही थी.. पर कही न कही इस जुल्म मैं उसे मज़ा भी खूब आ रहा था, ककी उसके तने निप्पल्स का मतलब तोह यही निकल रहा था
अगले 10 मं और ये रेस यही चलती रहती है
"आआआआहहहहह.... अब तोह निकल ले कुत्ते... बहुत दर्द हो रहा है जी.... Maaaaaaaaaaa.... बस कर हरामी.. हैईईई मोरी मैयाआआआ.... आआआअह्ह्ह्ह... maaaaaaaaaaaaaaa..."
पर पन्ना तोह उल्टा और खुश होता जा रहा था.. उसके मन में एक बात आती है
'एक दिन ऐसे hi इसकी बेटी का हाल करूँगा..'
सायद ऐसा hi कुछ हीरा भी सोच रहा था ककी वो भी मंद मंद मुस्कुरा रहा था
प्रेमा अपनी गांड मैं पन्ना का मोटा काला लुंड लेते हुए अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी
"आआह्ह्ह्हह्ह... माआआ..... कुटटटटी.... हैईईई... रईईई.... सुवर... मादरचोद... आआह्ह्ह्हह"
पन्ना, प्रेमलता की गांड को छोड़ते हुए उसकी गांड क पाटों पे जोर का थप्पड़ भी जड़ देता है
"Chataaakkkkkkkkkk"
प्रेमा एक बार फिर से बिलबिला सी जाती है
"Daiyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.... Maaaaarrrrrrrrrrrrrrrrr gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiii"
कामुकता का ये खेल धीरे धीरे अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचे लगा था.. पर अब भी कोई हार नहीं मान रहा था
"हैईईईई..... कैसे हरामी इन्शान है.... Maaaaaaaaaaa.... मरररररर जाउंगी... रईईईई..... निकल भोस्डिके क अपना लुंड"
पन्ना का जिस्म भी अब कांपने लगा था सायद वो भी अपनी दौड़ क अंत तक आ चूका था, पर ये कुत्ता अब भी रुक नहीं रहा था
ककी पन्ना लगातार गपागप गपागप गपागप करके प्रेमा की मोती गांड का मुरब्बा बना रहा था
पन्ना अपना एक पेअर उठा क प्रेमा क सर पे रख क उसे दबा क बेहरहमी से छोड़ना चालू रखता है.. और प्रेमा बस अपनी गांड मरवाते हुए तृप्ति रहती है
"आआआहहह... कुटटटटी... हरामी.... पेअर हटा... सुवर कही क.. मादरचोद"
पन्ना और हीरा दोनों hi है पड़ते है, पर पन्ना इस बार प्रेमा पे थोड़ी रेहम दिखा देता है वो अपना पेअर उसके सर से हटा देता लेता है.. पर गांड मरना एक पल क लिए भी बंद नहीं करता
पन्ना- (प्रेमा की गांड मरते हुए) मज़ा आ रहा है.. साली रैंड.. बता न
प्रेमा- हरामी.. कुत्ते एक बार अपनी गांड मैं ये मोटा लुंड लेके देख तब मैं पूछूँगी.... आआह्ह्ह्हह कुट्टी.. सुवर अब बस कर न.. 3 बार मेरी छूट रो चुकी है.. आआह्ह्ह
प्रेमा की हालत देख क हीरा भी अपना लुंड मसलते हुए है पड़ता है.. उसका चेहरे की नसे भी दिखने लगी थी, सायद उसका समय भी नजदीक था
"आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... और कितनी दिएर करेगा, बहुत दर्द हो रहा है पीछे... बस कर अब... आआआआहहहहह"
पन्ना जोर जोर से गांड का बजा बजाते हुए
"आआअह्ह्ह.. ये ले... साली रैंड.. कुटिया... ऐसे hi तेरी बेटी छोडूंगा... आआआहहहहह.. ये ले... आआह्ह्ह्ह.."
प्रेमा का पूरा जिस्म ऐसे हिलने लगता है जैसे कोई उसे पकड़ क झिंझोर रहा हो
"आआआआह्ह्ह्ह... माआआ.... बस कर मादरचोद... आआअह्ह्ह.. Maaaaaaaaaaaa... उफ्फफ्फ्फ़..... माआआआआ....."
पर पन्ना कहा रुकने वाला था.. वो तोह लगातार अपनी नयी रखेल की गांड का हवा महल बनाने पे तुला हुआ था
सटासट.. गपागप.. सटासट.. गपागप.. करके पन्ना का काला विकराल भुजंग नाग जैसा लुंड मनोहर की पत्नी की गांड का चीरहरण कर रहा था
प्रेमा का हाल ऐसा था की उसके मुंह से थूक और लार एक साथ बह रही थी.. आँखों जैसे खुल hi न प् रही हो, हाथ पैरों की जान किसी से चीन ली हो
"आआआह्ह्ह्ह... हरामी अब तोह रुक जा... आआअह्ह्ह.. मायआ.. सांस भी नहीं आ रही है.. रुक जा कुत्ते... मादरचोद"
पर पन्ना कहा रुकने वाला था.. वही प्रेमा की योनि न जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी, यु समझो उसका रास निकलना बंद hi नहीं हो रहा था
हवस का ये नंगा नाच निरंतर ऐसी प्रकार चलता रहता है.. इस बीच प्रेमा ने हर तरह से पन्ना से रुकने क लिए भीख मांग ली थी पर वो हरामी रुका नहीं
तभी पन्ना क जिस्म हिचकोले खाने लगता है.. वो अपना पूरा दम मालती की भाभी की गांड पे लगते हुए उसके ऊपर ढेर हो जाता है
"आआआहहहहह... मज़ा आ गया साला.."
और यही वो पल था जब हीरा भी अपने लुंड की गाडी सफ़ेद बारिश करने लगता है, जो एक बार फिर से प्रेम क खूबसूरत चेहरे और बालों का रंग बदल देता है
प्रेमा- आआआअह्हह्ह्ह्हह... Maaaaaaaaaaaaaa
प्रेमा हाफति हुई लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है
वही पन्ना क लुंड से निकलने वाला गाड़ा प्राधारत प्रेमा की गांड की गहराई मैं भरने लगता है
प्रेमा- (अपनी गांड मैं भर्ती मलाई क खूबसूरत एहसास से धन्य हो जाती है) aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh.....
जल्दी hi प्रेमा वही सोफे पे पूरी नंगी अवस्था मैं उलटी लेती हुई लम्बी लम्बी साँसें ले रही थी, और हीरा पन्ना भी एक एक सोफे पे बैठे हुए खुद की हालत सुधर रहे थे
हीरा- (अपना पसीने पोछते हुए) उफ्फ्फ्फ़.. मज़ा गया, वैसे भानु ने कुछ पेपर्स भी लाने क लिए कहे थे उसका किया करना है
जो हीरा अब तक 'भानु भाई' कह रहा था, वो सब सीधा भानु पे उतर आया था.. वही अब वो प्रेमा को हुकुम नहीं दे रहा था, अपितु उससे पूछ रहा था
औरत बाबू भैया.. औरत
प्रेमा मुश्किल से सोफे से उठती है और लड़खड़ाती हुई अंदर कमरे मैं जाती है और थोड़ी दिएर बाद जब वापस आती है तोह उसके हाथ मैं एक पेपर थमा हुआ था
प्रेमा की गांड से अब भी पन्ना का गाड़ा रास बह रहा था.. जो उसकी गांड से निकल क उसके पैरों को भिगो रहा था
प्रेमा- (सोफे पे बैठते हुए) इन पेपर्स की एक फोटोकॉपी बना लेना.. आगे काम आएंगे
हीरा ये सुनकर जिज्ञासा से भर उठता है वो पेपर्स देखता है तोह उसके कमीने चेहरे पे मुस्कान आ जाती है
हीरा- ये तोह डीएनए रिपोर्ट है.. है न मालती, मोनू और कुंदन की ?
प्रेमा बस मुस्कुरा पड़ती है
पन्ना- (प्रेमा की तरफ देखते हुए) तोह आगे किया करना है ?
प्रेमा एक बार फिर से मुस्कुरा पड़ती है.. ककी भानु क हतियार अब उसके काम आने वाले थे
वो फोटो जो प्रेमलता ने हीरा पन्ना को दिखाया था
प्रेमा की बेटी प्रीती
नोट- 17 अपडेट लेफ्ट (Part #02)
